- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 31,779
ऐसा कह के बीएड के पास गया और हाट मई का प्लेट बीएड पाई रख दिया और वह पड़ा उस लड़की का फोटो उठा लिया..
मेमसाब ये मेरा पहला प्यार.. यही मेरा सबसे बड़ा दर्द है.. दारू तो बहाना है ये दर्द बुलाने का..
तब आरती उसके पास जेक उसके हाट से फोटो लेते है और फोटो देखते है..
काफी खूबसूरत लड़की थी वो ..
उस लड़की को देखते हुई कहती है ..

कोण है ये
तन्वी
और उठ खड़ा hua..tab आरती उसे देखने लगी..

“मेमसाब .…मुझे उसकी यद् आती है…..”
कुछ होश और कुछ बेहोशी के आलम में नवाज़ ने कहा और आरती के गले से लगकर बेतहाशा रोने laga…use तो ये भी खबर नहीं थी की आरती को तन्वी के बारे में पता है भी या नहीं ……
नवाज़ के गले लगने से आरती के शरीर में जैसे झुरझुरी सी दौड़ gyi…….wo मनो बहुत बन गयी… फिर भी उसने कहा..
“क्या कर रहे हो तुम ”
आरती ने धीरे से बोलै पर मनो नवाज़ ने सुना hi nahi..usne आरती को नहीं छोरा..
आरती को समझ में नहीं आ रहा था की वो नवाज़ से क्या बोले …….वो उससे दूर हेट या वैसे hi कड़ी रहे उसे कुछ समाज मई नहीं आ रहा tha..uske छथि पर नवाज़ के छथि का प्रेशर बाद रहा था..
नवाज़ प्ल्ज़ …रुको
आरती अब कुछ नहीं कर पा रही थी…..
नवाज़ प्ल्ज़ .. रुको..
पर नवाज़ ने रोना नहीं छोरा.. तब उसने नवाज़ को रोने diya…..wo चाहती थी की वो रो ले और इस वजह से उसके दिल का दर्द शायद कुछ काम हो जाये,………..
कुछ पल वो वैसे hi कड़ी रही और फिर चुप चाप उसे अपने कंधे पर टिकाये हुई hi उसके सर पर हाथ रखती है …..
“नवाज़ चुप हो जाओ तुम …plz…..tumko बहुत मजबूत बनाना hai….bahut आगे बढ़ना है …..और वैसे भी तुम बहुत मज़बूत हो ”
“नहीं हु मई मजबूत …….. मुझे कुछ नहीं चाहिए …………मुझे नहीं बढ़ाना है आगे.. …मुझे बस मेरी तन्वी chaiye…mujhe मेरी तन्वी ला दो memsaab…plz…..bolo न उसे की वो आ जाये ….. मेरे पास.. प्ल्ज़….”
आरती के कंधो से चिपक के वो किसी बच्चे की तरह बिलख रहा था…..
तब हस्ते हुई आरती कहते है
मई भला तुम्हारी आरती.. सॉरी सॉरी.. तन्वी को कैसे ला सकती हु
क्यों
मई तो उसे जानती भी नहीं वो कहा रहते है वो तो मुझे पता भी नहीं
मई एड्रेस दे देता हु उसका
तब नवाज़ के चहरे को उप्पर उतके उसे कहते है.. थोड़ा स्माइल करते हुई
एड्रेस देने से क्या होगा नवाज़.. अगर मई उससे मिलाने गयी और मैंने उससे कहा की तुम तुम्हारा नवाज़ याद कर रहा hai..tum चलो उसके पास तो क्या वो आएगी क्या
हाँ
क्यों
क्यों की वो आप जैसे hi सुन्दर है..
तब हस्ते हुई आरती कहती है
इसमे मेरे या उसके सुंदरता कहा आ गयी..
ये सुन्दर लड़की दूसरे सुन्दर लड़की की बात कैसे ताल सकती है
तब जरा शर्माके कहती है

कुछ भी नवाज़.. ऐसा भी कब होता है क्या..
तब फिर से बुरा मू करके नवाज़ कहता है
फिर कैसे होगा
एक बात मुझे बताओ
पूछिए
तुम उसे प्यार करते हो वो तो पता है पर क्या वो भी करती है क्या प्यार तुमसे
हाँ पर लगता है अब नहीं लगता
और वो भला तुम क्यों लगता है
जबसे उसकी शादी हो गयी है तब से उसे क्या हो गया है पता नहीं मेमसाब.. वो पूरी बदल गयी है.. अब न वो मुझसे मिलते है और न hi कॉल करती है और न मैसेज.. और मई करता हु तो रिप्लाई भी नहीं देती
नवाज़ तुम मर्द लोग समजते नहीं पर औरत की जिंदगी बदल जाते है शादी के बाद
वो मई जनता हु पर
तब उसको देखते हुई कहते है

पर भीड़ कुछ नहीं तुम उसे भूलना पड़ेगा जैसे उसने तुम भुलाया
पर मेमसाब मई उसे भूल नहीं सकता न मेमसाब
मई समाज सकती हु पर तुम उसे भूलना होगा
कोशिश कर रहा हु .. सिर्फ यही सहारा है बोल के दारू के बोतल को हाथ मई लेता है.. जो वह नीचे राखी थी
कोशिश करो नवाज़ पर इसका मतलब ये तो नहीं की आपने प्यार भुलाने के लिए तुम रोज दारू पिओगे..
तो क्या करू मेमसाब
तब थोड़ा स्माइल करते हुई उसके पास गयी और उसको कहने लगी..
नवाज़ दुनिया बहुत खूबसूरत है और ज़िनदगी उस से भी ख़ूबसूरत ………ज़िन्दगी में हर रंग होना चाहिए और तुम्हारे ज़िन्दगी में अब काळा रंगो का वक़्त ख़त्म हो gya…….nawaz तुम बहुत अच्छे हो और तुम्हारे लिए खुदा ने कुछ बहुत अच्छा सोचा होगा ……….. तुम्हारी ज़िन्दगी में कोई ऐसा आएगा जो इतनी खुसी देगा की तुम अपने सरे ग़म भूल jaoge…dekh लेना….
ये आरती ने कहा.. ….और आखिरी बात पर न चाहते हुए भी वो शर्मा गयी और उसके लाल गाल गुलाबी हो गए.
आप बहुत अच्छी हो.. इसलिए आप ऐसा सोच रही हो.. सब लोग ऐसा नहीं सोचते..
तब नखरे से कहती है..

फिर तुम भी ऐसे लोंगो के बारे मई मत सोचो
ऐसा कहके उसके हाट से दारू की बोतल लेते है..
अब दारू नहीं खाना खाओ
थोड़ा पिने दो न
ऐसा कह के उसके हाथ से दारू की बोतल छीनने की कोशिश करता है
अभी दारू नहीं खाना खाओ
मेरा मैं नहीं है
मन नहीं हुआ तो भी खाना पड़ेगा
ऐसा बोल के दारू की बोतल साइड मई रख के बीएड पाई प्लेट जो थी खाने की वो आपने हाट मई लेते है और पलट के उसके और देखती हुई स्माइल करते हुई कहती है..

अब खिलाना भी पड़ेगा क्या मुझे तुमको
ऐसा कहते हुई आरती ने अपने हाथ में एक निवाला उठाया और उसके होठो की और बढ़ा दिया …….. नवाज़ ने मुँह नहीं खोला….
“plzzzzzzzzzzz”
आरती ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा. तब नवाज़ ने चुपचाप मू खोला और उसके हाथ से निवाला खा लिया .तब बुरा सा मू करता है..
तब आरती कहती है
क्या हुआ ...सब्जी तीखी बानी है क्या ..
नहीं तो
तो फिर बुरा मू क्यों बनाया
नहीं वो तो ऐसे hi हुआ
तब दूसरा निवाला उसको खिलते है.. तब वो इस बार पहले से बुरा मू बनता है..
क्या हुआ मेरा खाना पसंद नहीं आया क्या तुम
नहीं न मेमसाब.. आप का खाना तो आप के जैसे hi मस्त होता है.
अच्छा फिर मू थेड़ा क्यों कर रहे हो
वो न इस बार लगता है नमक ज्यादा हो गया है
अच्छा नमक ज्यादा हुआ.. अरविन्द ने तो कुछ नहीं खाया
क्या साहब ने यही खाना खाया क्या
हाँ.. नहीं तो क्या मई क्या तुम्हारे लिए अलग थोड़ा hi बनाउंगी.. मुझे क्या ऐसा समझ रखा है क्या
नहीं न मेमसाब.. मुझे पता है आप मालिक और नौकर मई फरक नहीं करते हो
पता है तो बोलै क्यों
आप ने कहा न साहब ने कुछ नहीं कहा
हाँ उनोने कुछ नहीं कहा पर तुम कह रहे हो नमक ज्यादा हुआ है
तो क्या साहब जी को आपने आपने हटो से खिलाया क्या
नहीं तो
कभी भी
कभी भी नहीं ..
तब नवाज़ खुश होता है
क्यों
लगता है ये मौका मुझे hi मिला है
हाँ
साहब जी को नमक नहीं लगा और मुझे लगा तो लग रहा है फरक आपके हटो मई है
तब उसके सर पाई मरते है और बड़े अड्डा के साथ कहते है

चल हटो बदमाश
आप को जूथ लग रहा है
नहीं तो
फिर मुज पर विश्वास नहीं है क्या
नहीं ये बात नहीं है
तो टेस्ट कर लो
नहीं कर सकती
क्यों
मेरा फ़ास्ट है
तो क्या आपने खाना नहीं खाया क्या आज
नहीं
अब तो 12 बज गए है.. दिन ख़तम हुआ.. अब दूसरा दिन सुरु हुआ है..
तो
फ़ास्ट चोर दो
ऐसा कह के एक निवाला उसके मू के पास नवाज़ ले जाने लगता है.. तब घूम के कहती है..

नहीं नवाज़ मई ये नहीं कर सकती
फिर मुझे तो खिलाओ
तब घूम के कहती है

क्या तुम नमक का खाना खाओगे
तो वो बोलै
अब हमारी प्यारी मेमसाब ने बनाया है तो हमें खाना पड़ेगा hi न ..
आरती ब्लश करने लगी "प्यारी मेमसाब" सुनकर और फिर कहती है
सॉरी..
किस बात के लिए…………
वो नमक के लिए
कुछ नहीं होगा खिलाओ मुझे .. आप के लिए हम ज़हर hi खा लेंगे नमक क्या चीज़ है
तब उसे आरती खाना खिलने लगी.. कुछ निवाले hi खाये थे उसने की उसे जोर की हिचकी आयी और आरती ने पानी का गिलास उठाकर उसके होठो से लगा दिया ………….
नवाज़ ने दो घूँट पानी पिया और उतने hi आंसू उसकी आँखों से निकल गया………
तब आरती कहती है
अब क्या हुआ
मुझे तन्वी की यद् आ गयी …इतनी केयर तो केवल तन्वी hi करती थी मेरी …………….
तब स्माइल करते हुई कहते है

वैसे ये तन्वी तुम मिली कहा
शहर मई
शहर मई तुम क्या कर रहे थे..
उसको खाना खिलते हुई कहा
दोस्तों के साथ शादी मई गया था
वैसे कितने दिनों तक चला ये तुम्हारा
2-2. 5 साल
फिर तो सब कुछ किया होगा उसके साथ
हाँ वो भी क्या पूछने की बात है क्या मेमसाब
फिर उसके बाद नीता या वंदना
वंदना
और फिर नीता न
हाँ ..
तुम्हारे तो मज़े है
हाँ
नीता के बाद और कोई है
नीता के बाद न
कह के चुप हो गया..
आरती ने भी कुछ नहीं कहा और प्लेट ली और दरवाज़े की और बढ़ी …
मेमसाब
नवाज़ की आवाज़ उसके कानो में padi..wo फिर पीछे मुड़ी नवाज़ की और देखने लगी ………….

फिर नवाज़ उसके पास जाते है.. उसके गले लग के कहती है
मेमसाब आप बहुत अच्छी हो
आरती मुस्कुरा देते है.. पर कहते कुछ नहीं
थैंक यू मेरी प्यारी मेमसाब
तब स्माइल करते हुई कहती है
“सुबह बात करेंगे””
उस ने ये कहा और बहार निकल गयी………
मेमसाब ये मेरा पहला प्यार.. यही मेरा सबसे बड़ा दर्द है.. दारू तो बहाना है ये दर्द बुलाने का..
तब आरती उसके पास जेक उसके हाट से फोटो लेते है और फोटो देखते है..
काफी खूबसूरत लड़की थी वो ..
उस लड़की को देखते हुई कहती है ..

कोण है ये
तन्वी
और उठ खड़ा hua..tab आरती उसे देखने लगी..

“मेमसाब .…मुझे उसकी यद् आती है…..”
कुछ होश और कुछ बेहोशी के आलम में नवाज़ ने कहा और आरती के गले से लगकर बेतहाशा रोने laga…use तो ये भी खबर नहीं थी की आरती को तन्वी के बारे में पता है भी या नहीं ……
नवाज़ के गले लगने से आरती के शरीर में जैसे झुरझुरी सी दौड़ gyi…….wo मनो बहुत बन गयी… फिर भी उसने कहा..
“क्या कर रहे हो तुम ”
आरती ने धीरे से बोलै पर मनो नवाज़ ने सुना hi nahi..usne आरती को नहीं छोरा..
आरती को समझ में नहीं आ रहा था की वो नवाज़ से क्या बोले …….वो उससे दूर हेट या वैसे hi कड़ी रहे उसे कुछ समाज मई नहीं आ रहा tha..uske छथि पर नवाज़ के छथि का प्रेशर बाद रहा था..
नवाज़ प्ल्ज़ …रुको
आरती अब कुछ नहीं कर पा रही थी…..
नवाज़ प्ल्ज़ .. रुको..
पर नवाज़ ने रोना नहीं छोरा.. तब उसने नवाज़ को रोने diya…..wo चाहती थी की वो रो ले और इस वजह से उसके दिल का दर्द शायद कुछ काम हो जाये,………..
कुछ पल वो वैसे hi कड़ी रही और फिर चुप चाप उसे अपने कंधे पर टिकाये हुई hi उसके सर पर हाथ रखती है …..
“नवाज़ चुप हो जाओ तुम …plz…..tumko बहुत मजबूत बनाना hai….bahut आगे बढ़ना है …..और वैसे भी तुम बहुत मज़बूत हो ”
“नहीं हु मई मजबूत …….. मुझे कुछ नहीं चाहिए …………मुझे नहीं बढ़ाना है आगे.. …मुझे बस मेरी तन्वी chaiye…mujhe मेरी तन्वी ला दो memsaab…plz…..bolo न उसे की वो आ जाये ….. मेरे पास.. प्ल्ज़….”
आरती के कंधो से चिपक के वो किसी बच्चे की तरह बिलख रहा था…..
तब हस्ते हुई आरती कहते है
मई भला तुम्हारी आरती.. सॉरी सॉरी.. तन्वी को कैसे ला सकती हु
क्यों
मई तो उसे जानती भी नहीं वो कहा रहते है वो तो मुझे पता भी नहीं
मई एड्रेस दे देता हु उसका
तब नवाज़ के चहरे को उप्पर उतके उसे कहते है.. थोड़ा स्माइल करते हुई
एड्रेस देने से क्या होगा नवाज़.. अगर मई उससे मिलाने गयी और मैंने उससे कहा की तुम तुम्हारा नवाज़ याद कर रहा hai..tum चलो उसके पास तो क्या वो आएगी क्या
हाँ
क्यों
क्यों की वो आप जैसे hi सुन्दर है..
तब हस्ते हुई आरती कहती है
इसमे मेरे या उसके सुंदरता कहा आ गयी..
ये सुन्दर लड़की दूसरे सुन्दर लड़की की बात कैसे ताल सकती है
तब जरा शर्माके कहती है

कुछ भी नवाज़.. ऐसा भी कब होता है क्या..
तब फिर से बुरा मू करके नवाज़ कहता है
फिर कैसे होगा
एक बात मुझे बताओ
पूछिए
तुम उसे प्यार करते हो वो तो पता है पर क्या वो भी करती है क्या प्यार तुमसे
हाँ पर लगता है अब नहीं लगता
और वो भला तुम क्यों लगता है
जबसे उसकी शादी हो गयी है तब से उसे क्या हो गया है पता नहीं मेमसाब.. वो पूरी बदल गयी है.. अब न वो मुझसे मिलते है और न hi कॉल करती है और न मैसेज.. और मई करता हु तो रिप्लाई भी नहीं देती
नवाज़ तुम मर्द लोग समजते नहीं पर औरत की जिंदगी बदल जाते है शादी के बाद
वो मई जनता हु पर
तब उसको देखते हुई कहते है

पर भीड़ कुछ नहीं तुम उसे भूलना पड़ेगा जैसे उसने तुम भुलाया
पर मेमसाब मई उसे भूल नहीं सकता न मेमसाब
मई समाज सकती हु पर तुम उसे भूलना होगा
कोशिश कर रहा हु .. सिर्फ यही सहारा है बोल के दारू के बोतल को हाथ मई लेता है.. जो वह नीचे राखी थी
कोशिश करो नवाज़ पर इसका मतलब ये तो नहीं की आपने प्यार भुलाने के लिए तुम रोज दारू पिओगे..
तो क्या करू मेमसाब
तब थोड़ा स्माइल करते हुई उसके पास गयी और उसको कहने लगी..
नवाज़ दुनिया बहुत खूबसूरत है और ज़िनदगी उस से भी ख़ूबसूरत ………ज़िन्दगी में हर रंग होना चाहिए और तुम्हारे ज़िन्दगी में अब काळा रंगो का वक़्त ख़त्म हो gya…….nawaz तुम बहुत अच्छे हो और तुम्हारे लिए खुदा ने कुछ बहुत अच्छा सोचा होगा ……….. तुम्हारी ज़िन्दगी में कोई ऐसा आएगा जो इतनी खुसी देगा की तुम अपने सरे ग़म भूल jaoge…dekh लेना….
ये आरती ने कहा.. ….और आखिरी बात पर न चाहते हुए भी वो शर्मा गयी और उसके लाल गाल गुलाबी हो गए.
आप बहुत अच्छी हो.. इसलिए आप ऐसा सोच रही हो.. सब लोग ऐसा नहीं सोचते..
तब नखरे से कहती है..

फिर तुम भी ऐसे लोंगो के बारे मई मत सोचो
ऐसा कहके उसके हाट से दारू की बोतल लेते है..
अब दारू नहीं खाना खाओ
थोड़ा पिने दो न
ऐसा कह के उसके हाथ से दारू की बोतल छीनने की कोशिश करता है
अभी दारू नहीं खाना खाओ
मेरा मैं नहीं है
मन नहीं हुआ तो भी खाना पड़ेगा
ऐसा बोल के दारू की बोतल साइड मई रख के बीएड पाई प्लेट जो थी खाने की वो आपने हाट मई लेते है और पलट के उसके और देखती हुई स्माइल करते हुई कहती है..

अब खिलाना भी पड़ेगा क्या मुझे तुमको
ऐसा कहते हुई आरती ने अपने हाथ में एक निवाला उठाया और उसके होठो की और बढ़ा दिया …….. नवाज़ ने मुँह नहीं खोला….
“plzzzzzzzzzzz”
आरती ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा. तब नवाज़ ने चुपचाप मू खोला और उसके हाथ से निवाला खा लिया .तब बुरा सा मू करता है..
तब आरती कहती है
क्या हुआ ...सब्जी तीखी बानी है क्या ..
नहीं तो
तो फिर बुरा मू क्यों बनाया
नहीं वो तो ऐसे hi हुआ
तब दूसरा निवाला उसको खिलते है.. तब वो इस बार पहले से बुरा मू बनता है..
क्या हुआ मेरा खाना पसंद नहीं आया क्या तुम
नहीं न मेमसाब.. आप का खाना तो आप के जैसे hi मस्त होता है.
अच्छा फिर मू थेड़ा क्यों कर रहे हो
वो न इस बार लगता है नमक ज्यादा हो गया है
अच्छा नमक ज्यादा हुआ.. अरविन्द ने तो कुछ नहीं खाया
क्या साहब ने यही खाना खाया क्या
हाँ.. नहीं तो क्या मई क्या तुम्हारे लिए अलग थोड़ा hi बनाउंगी.. मुझे क्या ऐसा समझ रखा है क्या
नहीं न मेमसाब.. मुझे पता है आप मालिक और नौकर मई फरक नहीं करते हो
पता है तो बोलै क्यों
आप ने कहा न साहब ने कुछ नहीं कहा
हाँ उनोने कुछ नहीं कहा पर तुम कह रहे हो नमक ज्यादा हुआ है
तो क्या साहब जी को आपने आपने हटो से खिलाया क्या
नहीं तो
कभी भी
कभी भी नहीं ..
तब नवाज़ खुश होता है
क्यों
लगता है ये मौका मुझे hi मिला है
हाँ
साहब जी को नमक नहीं लगा और मुझे लगा तो लग रहा है फरक आपके हटो मई है
तब उसके सर पाई मरते है और बड़े अड्डा के साथ कहते है

चल हटो बदमाश
आप को जूथ लग रहा है
नहीं तो
फिर मुज पर विश्वास नहीं है क्या
नहीं ये बात नहीं है
तो टेस्ट कर लो
नहीं कर सकती
क्यों
मेरा फ़ास्ट है
तो क्या आपने खाना नहीं खाया क्या आज
नहीं
अब तो 12 बज गए है.. दिन ख़तम हुआ.. अब दूसरा दिन सुरु हुआ है..
तो
फ़ास्ट चोर दो
ऐसा कह के एक निवाला उसके मू के पास नवाज़ ले जाने लगता है.. तब घूम के कहती है..

नहीं नवाज़ मई ये नहीं कर सकती
फिर मुझे तो खिलाओ
तब घूम के कहती है

क्या तुम नमक का खाना खाओगे
तो वो बोलै
अब हमारी प्यारी मेमसाब ने बनाया है तो हमें खाना पड़ेगा hi न ..
आरती ब्लश करने लगी "प्यारी मेमसाब" सुनकर और फिर कहती है
सॉरी..
किस बात के लिए…………
वो नमक के लिए
कुछ नहीं होगा खिलाओ मुझे .. आप के लिए हम ज़हर hi खा लेंगे नमक क्या चीज़ है
तब उसे आरती खाना खिलने लगी.. कुछ निवाले hi खाये थे उसने की उसे जोर की हिचकी आयी और आरती ने पानी का गिलास उठाकर उसके होठो से लगा दिया ………….
नवाज़ ने दो घूँट पानी पिया और उतने hi आंसू उसकी आँखों से निकल गया………
तब आरती कहती है
अब क्या हुआ
मुझे तन्वी की यद् आ गयी …इतनी केयर तो केवल तन्वी hi करती थी मेरी …………….
तब स्माइल करते हुई कहते है

वैसे ये तन्वी तुम मिली कहा
शहर मई
शहर मई तुम क्या कर रहे थे..
उसको खाना खिलते हुई कहा
दोस्तों के साथ शादी मई गया था
वैसे कितने दिनों तक चला ये तुम्हारा
2-2. 5 साल
फिर तो सब कुछ किया होगा उसके साथ
हाँ वो भी क्या पूछने की बात है क्या मेमसाब
फिर उसके बाद नीता या वंदना
वंदना
और फिर नीता न
हाँ ..
तुम्हारे तो मज़े है
हाँ
नीता के बाद और कोई है
नीता के बाद न
कह के चुप हो गया..
आरती ने भी कुछ नहीं कहा और प्लेट ली और दरवाज़े की और बढ़ी …
मेमसाब
नवाज़ की आवाज़ उसके कानो में padi..wo फिर पीछे मुड़ी नवाज़ की और देखने लगी ………….

फिर नवाज़ उसके पास जाते है.. उसके गले लग के कहती है
मेमसाब आप बहुत अच्छी हो
आरती मुस्कुरा देते है.. पर कहते कुछ नहीं
थैंक यू मेरी प्यारी मेमसाब
तब स्माइल करते हुई कहती है
“सुबह बात करेंगे””
उस ने ये कहा और बहार निकल गयी………




















































