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- Dec 5, 2013
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बताओ न नीता ..कभी किसी ने दबाया है क्या…
नहिई re...kisi ने नहीं दबाया ..तेरे आल्वा किसी ने नहीं छुआ
नीता इसमें क्या होता है ?
नवाज़ समझ चूका था की अब बाज़ी उसके हाथ मई है .
...ohh...achchhha लग रहा है ..और दबा ना .... दूध होता है इसमें ..
"नीता किसी पिलाओगी आपने दूध ?"
तेरे बच्चे को
नीता के इतना कहने के बाद नवाज़ उसके लबो को चूसने लगा..

अब नवाज़ नीता के लबो को बुरी तरह से चूस रहा था … नीता के हाथ अब उसके कंधे और बालो को सहला रहे थे ...ढीरे धीरे नीता भी नवाज़ के होठो को चूसने लगती है ... 10 मं तक एक दूसरे को चूसने के बाद जब दोनों अलग होते है तब दोनों की सांसे उखड़ी सी होती है .. नवाज़ जहा बेहद खुस था वही नीता शर्म से गाड़ी जा रही थी..
"अच्छा लगा ??? "
नवाज़ ने पूछा ..नीता कुछ नहीं बोली बस सर झुकाये शर्मा रही थी.. नवाज़ ने फिर उसे गले से लगा लिया ..उसके बालो को क्लच से खोल दिया और उसके कानो के पास चूमने लगा ...
"नीता ????"..
""हुऊँ"
"क्या कहती है तू जो तेरे होंठ इतने मीठे है "
वो नीता को चूमते चूमते हुई उसके कानो मई सरगोशी करता है .
"dhatt...badmash..."
"सच में ....तेरे होंठो ने तो मेरे फवौरीते रसगुल्लों के रास को भी फ़ैल कर दिया ..."
नवाज़ न कर ऐसी बाटीएननननन
नीता अब अपने आप में नहीं थी ..जवानी की आग को भड़का दिया था नवाज़ ने .
"मई तेरे को इतनी देर से प्यार कर रहा हु … तू भी कर न ?"
नवाज़ के हाथ नीता के पेट को सहला रहे थे और होंठ उसके गलो को चूस रहे थे..

वो नीता के गले से लेकर आम के ऊपर तक का हर हिस्सा चाट रहा था .. नीता के मुँह से सिसकारी निकल रही थी ...उसके हाथ नवाज़ के बालो में फिर रहे थे .
"मुझे नहीं आता कोई प्यार व्यार करना ..."
"ठीक है ...मई तेरे को सीखा दूंगा."
"नवाज़ मुझे जाने दे .. दीदी या शेठजी कभी भी आ सकते है "
अचानक नीता नवाज़ से दूर हो जाती है ..जाने का मन तो था नहीं उसका लेकिन आखिर लड़की थी थोड़े तो नखरे दिखाएगी अपने हुस्न का ..पर नवाज़ भी कोई कच्छा खिलाडी नहीं था वो जनता था की हसिनायो के न का मतलब है होता है .....
वो भी जल्दी से उसके पीछे से अपनी बहो में भर लेता है ... और अपने होंठ उसके गले पर रख देता है ..
"क्यों इतना तड़पा रही हो जान ..प्ल्ज़ कर लेने दो न "
"क्या कर लेने दो है?? "
"वही जो प्रेमी बंद कमरे में करते है.. "
"मुझे क्या पता क्या करते है "
"है तभी तो मई कर के बता रहा हु ..और ह्यूमेन पहले भी तो किया है न "
यहाँ नहीं नवाज़
फिर कहा
ऐसा कहकर नवाज़ नीता को दबोच लेता है ..वो नीता को इतनी गरम कर देना चाहता था की वो खुद अपनी कमसिन जवानी उसको एक बार फिर से सौप दे … नीता ने कॉटन का सूट और सलवार पहन रखा था ...दुपटा हैट जाने के वजह से उन्नत उरोजों के बिच की घाटी से छलकते रास के प्याले नवाज़ के होंठो को मनो न्योता दे रहे थे..
"मुझे माफ़ कर दो नीता ................मैंने तुम पर सही से ध्यान hi नहीं दिया… तुम वक़्त hi नहीं दे पाया.. इतने दिनों से.. ............ मगर अब मई तुम पूरा वक़्त दूंगा.. ........ अब मैं वही करूँगा जो तुम्हें ठीक लगेगा............."
ऐसे कहते हुई नवाज़ नीता के पीठ को और गलों को पागलों की तरह चूमने लगा ....... वहीँ नीता भी अब विरोध करना बंद कर चुकी thi................aab वो भी नवाज़ के साथ उस हसीं पल पर जाने को बेताब थी जहाँ वे दोनों एक दूसरे की बाँहों में सब कुछ भूलकर एक दूसरे में समां जाना चाहते थे..........
उसने आपने एक हाथ आगे करके सलवार के अन्दर डाला.. अपनी उंगुली से उसकी योनि की फैंको को रगड़ने लगा ...अपने नाख़ून से हलके हलके कुरेदते हुए उसने दोनों फैंको को अलग किया ...और जोर से अपनी उंगली अन्दर दाल दी.....
"aaahh....ummmm." ..
नीता सिसक उठी ..वो अपने पेअर पटक रही थी, अपने सर को इधर उधर घुमा रही थी और उसके हाट नवाज़ के बालो को बुरी तरह नोच रहे थे . ..उत्तेजना के मरे उसका बुरा हल था ..
नवाज़ को नीता की हालत का अंदाज़ा था और अब वो उसे और तड़पना चाहता tha..dono फैंको के खुल जाने से नवाज़ को उसकी छूट को छोटा सा होल दिख गया .... तब उसने अपनी एक उंगली बहार निकली और 2 बड़ी बड़ी उंगली एक साथ अन्दर दाल दी..
"aah...nawaz...ummm...uff..mar जाउंगी mai...ye कियाआ कर रहे हो ...."
नवाज़ तो मनो आज उसकी छूट को गन्दी तरीके से मरना चाहता tha....ek जंगली से वो दोनों फैंको के बिच की लाल घाटी को कुरेद रहा था और अपने नाख़ून धंसा रहा था उसमे.. ..नीता का मरे उत्तेजन के सांसे चढ़ गयी थी ..उसने नवाज़ के लुंड को पंत के ऊपर से hi पकड़ लिया और तेजी से मरोड़ने लगी.. नवाज़ को तेज दर्द हुआ और उसके नाख़ून नीता की छोट के फैंको पर गड गए .......
"एआईई maaa..kutte .. क्यों चुबा रहा है नाख़ून ..होई. maaaaaa...katega क्या .????..haiii..uff..chhod मुझे ...आह्हः"
अब नीता से बर्दाश नहीं हो रहा था ..उसने भी फैसल कर लिया था अब सबकुछ भूलकर बस नवाज़ को मुँह तोड़ जवाब देने का ..उसने जोर से उसका लुंड दबोच लिया.. तन वो दर्द से करा उठा ...इसकी भी उत्तेजना और बढ़ जाती है ..और वो एक साथ अपनी दो उंगलिया नीता की छूट की गहराई में पेल देता है ...
"आठ...".
नीता बुरी तरह तड़प उठी थी ..
"नवाज़ प्ल्ज़्ज़ ...बहुत दर्द कर रही है ..मेरे उसमे कुछ मत karo...aah...aah...ohhhh.maaaaaaa ...पलज़्ज़ज़ छोड़ दो ..हीईई"
नीता की आंख से आंसू बाह रहे थे ..बेचारी खुल कर चीला भी नहीं सकती थी की बहार कोई सुन न ले .नवाज़ अब रुकने वाला कहा था ..वो तेजी से उसकी चोट को पेलने लगता है ..बहुत तेज उसकी उंगलिया नीता की छोट का मर्दन कर रही थी ...नीता को अब कोई मजा नहीं आ रहा था ...उसे असहनीय पीड़ा हो रही थी ...वो अपनी कमर छूटने के लिए बुरी तरह हिला रही थी किन्तु नवाज़ ने उसे बुरी तरह दबोच रखा था ..और तेजी से उसकी छोट पेले जा रहा था ..
नीता लगातार रो रही थी ..
मुझे नहीं कुछ karwana...tum जालिम हो ..कोई दया नहीं है तुम में ...ahhh....nawaz प्ल्ज़्ज़ छोड़ दो ...aah...fir कभी कर लेना ...aah...plz...chhod दो ....हे भगवन ..बर्दाश नहीं हो रहा नवाज़ ...... प्ल्ज़्ज़ … छोड़ दो.
नीता की आवाज़ ऊपर वाले ने पता नहीं सुनी या नहीं लेकिन बहार मोटर बाइक रुकने की आवाज़ आयी और फिर कुछ दोनों के बाते करने की आवाज़े आने लगी .
ये आवाज़ सुनकर नीता कहती है..
बहार कोई आया है.. रुको नवाज़..
ये सुनकर नवाज़ का मूड ख़राब हो चूका था ...
"इन सालो को भी अभी आना था ...सेल.. हरामी कोण आ गए अब ."
नवाज़ अभी भी नीता की बुर में अंगुली पेल रहा था और उसे मुँह से उनलोगो आरती लिए भद्दी सी गली निकल जाती है .
तब नीता कहती है
लगता है तुम्हारे बहन और जीजाजी है.. उन जैसे hi आवाज़ है..
ये सुनकर आरती कहते है आपने आप से..
नवाज़ की बहन और जीजाजी.. ये लोग फैक्ट्री मई और खेत मई काम करते है.. यहाँ क्यों आ गए..
फिर खुद से hi कहते है
शयद पापाजी ने बुलाया होंगे इन् को.. हाँ ऐसा hi होगा..
तभी नीता कहती है
"नवाज़ हटो ...plzzzzz...mai मर जाउंगी अगर वो लोग अन्दर आये और उनोने ऐसे हालत मई मुझे देख लिया तो ..पलज़्ज़ज़"
नीता ने सिसकते हुए कहा .
नवाज़ ने नीता की छूट मई जोरदार 2 उंगली डाली और झट से बहार निकली ..तभी दरवाजे पे दस्तक हुई …
" नवाज़ plzzz..chhodo मुझे " ..
नीता का पूरा सरीर मनो आकद गया और वो नवाज़ ने चोरते hi नीता जल्दी से दूर जाकर कड़ी हो गए और उधर आरती किचन के दूर से भाग कर किचन मई घुस गए… …नवाज़ का मूड बुरी तरह से ख़राब हो चूका था ..और दरवाज़े पर लगातार दस्तक हो रही थी ...तभी नवाज़ दरवाज़े पाई जेक दरवाजा खोलता है..
"क्या हीरो इतनी देर क्यों लगी दरवाज़ा खोलने में "
दरवाज़ा खुलते hi नवाज़ के जीजाजी ने पूछा.
थोड़ा काम मई था.. इसलिए थोड़े देर लग गयी..
नाराज़ होते हुई नवाज़ ने कहा..
"और तू ऐसा कोनसा काम कर रहा था "
नवाज़ की बहन नफीसा ने पूछा…
"तुझसे मतलब ??? कुछ भी करू "
नवाज़ ने गुस्से से कहा , आखिर उन दोनों ने उसका खेल बिगड़ दिया था . तभी उसकी नज़र नीता पर गयी.. तब नवाज़ को वो धीरे से कहती है..
शयद यही काम कर रहा था..
नीता के तरफ इशारा करते हुई कहते है.. तब नीता शर्मा जाती है..
क्यों भाभी.. सही न..
नफीसा के ऐसे कहने से उसका हस्बैंड कहता है..
क्यों बिचारे को चिड़ा रही है..
तब वो दोनों हस्बैंड वाइफ हँसाने लगे..
इधर किचन मई घुसी आरती के मन में विचारो का तूफान उमड़ रहा था..
" मैंने जो किया वो पाप है .... वो दोनों प्रेमी है.. और मैंने एक प्रेमी जोड़े का रोमांस देखा… ...lekin....wo तो मुझे लिखे करता है ...पर आरती तुजे कैसे पता वो तुजे लिखे करता है.. उसने खुद कहा क्या तुजे ...नहीं तो.. फिर तू कैसे कह रही hai..aur तू… मई.. मई भी तो शायद.... नहीं नहीं मई नहीं.. मई क्यों उसे लिखे करूंगी.. उस कमीने को.. उसका तो कितने औरत के साथ है ये शायद भगवान् को भी पता नहीं होगा.. फिर मतलब वो लव बर्ड्स नहीं है.. मई क्या सच मई उसे लिखे करने लगी हु क्या.. नहीं नहीं ये पाप है.. मई शाधिशुद्धा हु.. ये सही नहीं है.. प्यार मई कुछ गलत सही नहीं होता.. प्यार तो बस प्यार होता है.. क्या आरती तू पागल है क्या.. प्यार और उस कमीने से.. "
आरती खुद को hi समझा रही थी ...उसके मन में नवाज़ के लिए प्यार की कालिया फुट रही थी और उसका दिमाग ये मान नहीं रहा था.. उसी यही रति रटाई लाइन्स यद् आयी …. एवरीथिंग इस फेयर इन लव न वॉर … और एक प्यारी सी मुस्कराहट आ गयी उसके भोले मुखड़े पर …
नहिई re...kisi ने नहीं दबाया ..तेरे आल्वा किसी ने नहीं छुआ
नीता इसमें क्या होता है ?
नवाज़ समझ चूका था की अब बाज़ी उसके हाथ मई है .
...ohh...achchhha लग रहा है ..और दबा ना .... दूध होता है इसमें ..
"नीता किसी पिलाओगी आपने दूध ?"
तेरे बच्चे को
नीता के इतना कहने के बाद नवाज़ उसके लबो को चूसने लगा..

अब नवाज़ नीता के लबो को बुरी तरह से चूस रहा था … नीता के हाथ अब उसके कंधे और बालो को सहला रहे थे ...ढीरे धीरे नीता भी नवाज़ के होठो को चूसने लगती है ... 10 मं तक एक दूसरे को चूसने के बाद जब दोनों अलग होते है तब दोनों की सांसे उखड़ी सी होती है .. नवाज़ जहा बेहद खुस था वही नीता शर्म से गाड़ी जा रही थी..
"अच्छा लगा ??? "
नवाज़ ने पूछा ..नीता कुछ नहीं बोली बस सर झुकाये शर्मा रही थी.. नवाज़ ने फिर उसे गले से लगा लिया ..उसके बालो को क्लच से खोल दिया और उसके कानो के पास चूमने लगा ...
"नीता ????"..
""हुऊँ"
"क्या कहती है तू जो तेरे होंठ इतने मीठे है "
वो नीता को चूमते चूमते हुई उसके कानो मई सरगोशी करता है .
"dhatt...badmash..."
"सच में ....तेरे होंठो ने तो मेरे फवौरीते रसगुल्लों के रास को भी फ़ैल कर दिया ..."
नवाज़ न कर ऐसी बाटीएननननन
नीता अब अपने आप में नहीं थी ..जवानी की आग को भड़का दिया था नवाज़ ने .
"मई तेरे को इतनी देर से प्यार कर रहा हु … तू भी कर न ?"
नवाज़ के हाथ नीता के पेट को सहला रहे थे और होंठ उसके गलो को चूस रहे थे..

वो नीता के गले से लेकर आम के ऊपर तक का हर हिस्सा चाट रहा था .. नीता के मुँह से सिसकारी निकल रही थी ...उसके हाथ नवाज़ के बालो में फिर रहे थे .
"मुझे नहीं आता कोई प्यार व्यार करना ..."
"ठीक है ...मई तेरे को सीखा दूंगा."
"नवाज़ मुझे जाने दे .. दीदी या शेठजी कभी भी आ सकते है "
अचानक नीता नवाज़ से दूर हो जाती है ..जाने का मन तो था नहीं उसका लेकिन आखिर लड़की थी थोड़े तो नखरे दिखाएगी अपने हुस्न का ..पर नवाज़ भी कोई कच्छा खिलाडी नहीं था वो जनता था की हसिनायो के न का मतलब है होता है .....
वो भी जल्दी से उसके पीछे से अपनी बहो में भर लेता है ... और अपने होंठ उसके गले पर रख देता है ..
"क्यों इतना तड़पा रही हो जान ..प्ल्ज़ कर लेने दो न "
"क्या कर लेने दो है?? "
"वही जो प्रेमी बंद कमरे में करते है.. "
"मुझे क्या पता क्या करते है "
"है तभी तो मई कर के बता रहा हु ..और ह्यूमेन पहले भी तो किया है न "
यहाँ नहीं नवाज़
फिर कहा
ऐसा कहकर नवाज़ नीता को दबोच लेता है ..वो नीता को इतनी गरम कर देना चाहता था की वो खुद अपनी कमसिन जवानी उसको एक बार फिर से सौप दे … नीता ने कॉटन का सूट और सलवार पहन रखा था ...दुपटा हैट जाने के वजह से उन्नत उरोजों के बिच की घाटी से छलकते रास के प्याले नवाज़ के होंठो को मनो न्योता दे रहे थे..
"मुझे माफ़ कर दो नीता ................मैंने तुम पर सही से ध्यान hi नहीं दिया… तुम वक़्त hi नहीं दे पाया.. इतने दिनों से.. ............ मगर अब मई तुम पूरा वक़्त दूंगा.. ........ अब मैं वही करूँगा जो तुम्हें ठीक लगेगा............."
ऐसे कहते हुई नवाज़ नीता के पीठ को और गलों को पागलों की तरह चूमने लगा ....... वहीँ नीता भी अब विरोध करना बंद कर चुकी thi................aab वो भी नवाज़ के साथ उस हसीं पल पर जाने को बेताब थी जहाँ वे दोनों एक दूसरे की बाँहों में सब कुछ भूलकर एक दूसरे में समां जाना चाहते थे..........
उसने आपने एक हाथ आगे करके सलवार के अन्दर डाला.. अपनी उंगुली से उसकी योनि की फैंको को रगड़ने लगा ...अपने नाख़ून से हलके हलके कुरेदते हुए उसने दोनों फैंको को अलग किया ...और जोर से अपनी उंगली अन्दर दाल दी.....
"aaahh....ummmm." ..
नीता सिसक उठी ..वो अपने पेअर पटक रही थी, अपने सर को इधर उधर घुमा रही थी और उसके हाट नवाज़ के बालो को बुरी तरह नोच रहे थे . ..उत्तेजना के मरे उसका बुरा हल था ..
नवाज़ को नीता की हालत का अंदाज़ा था और अब वो उसे और तड़पना चाहता tha..dono फैंको के खुल जाने से नवाज़ को उसकी छूट को छोटा सा होल दिख गया .... तब उसने अपनी एक उंगली बहार निकली और 2 बड़ी बड़ी उंगली एक साथ अन्दर दाल दी..
"aah...nawaz...ummm...uff..mar जाउंगी mai...ye कियाआ कर रहे हो ...."
नवाज़ तो मनो आज उसकी छूट को गन्दी तरीके से मरना चाहता tha....ek जंगली से वो दोनों फैंको के बिच की लाल घाटी को कुरेद रहा था और अपने नाख़ून धंसा रहा था उसमे.. ..नीता का मरे उत्तेजन के सांसे चढ़ गयी थी ..उसने नवाज़ के लुंड को पंत के ऊपर से hi पकड़ लिया और तेजी से मरोड़ने लगी.. नवाज़ को तेज दर्द हुआ और उसके नाख़ून नीता की छोट के फैंको पर गड गए .......
"एआईई maaa..kutte .. क्यों चुबा रहा है नाख़ून ..होई. maaaaaa...katega क्या .????..haiii..uff..chhod मुझे ...आह्हः"
अब नीता से बर्दाश नहीं हो रहा था ..उसने भी फैसल कर लिया था अब सबकुछ भूलकर बस नवाज़ को मुँह तोड़ जवाब देने का ..उसने जोर से उसका लुंड दबोच लिया.. तन वो दर्द से करा उठा ...इसकी भी उत्तेजना और बढ़ जाती है ..और वो एक साथ अपनी दो उंगलिया नीता की छूट की गहराई में पेल देता है ...
"आठ...".
नीता बुरी तरह तड़प उठी थी ..
"नवाज़ प्ल्ज़्ज़ ...बहुत दर्द कर रही है ..मेरे उसमे कुछ मत karo...aah...aah...ohhhh.maaaaaaa ...पलज़्ज़ज़ छोड़ दो ..हीईई"
नीता की आंख से आंसू बाह रहे थे ..बेचारी खुल कर चीला भी नहीं सकती थी की बहार कोई सुन न ले .नवाज़ अब रुकने वाला कहा था ..वो तेजी से उसकी चोट को पेलने लगता है ..बहुत तेज उसकी उंगलिया नीता की छोट का मर्दन कर रही थी ...नीता को अब कोई मजा नहीं आ रहा था ...उसे असहनीय पीड़ा हो रही थी ...वो अपनी कमर छूटने के लिए बुरी तरह हिला रही थी किन्तु नवाज़ ने उसे बुरी तरह दबोच रखा था ..और तेजी से उसकी छोट पेले जा रहा था ..
नीता लगातार रो रही थी ..
मुझे नहीं कुछ karwana...tum जालिम हो ..कोई दया नहीं है तुम में ...ahhh....nawaz प्ल्ज़्ज़ छोड़ दो ...aah...fir कभी कर लेना ...aah...plz...chhod दो ....हे भगवन ..बर्दाश नहीं हो रहा नवाज़ ...... प्ल्ज़्ज़ … छोड़ दो.
नीता की आवाज़ ऊपर वाले ने पता नहीं सुनी या नहीं लेकिन बहार मोटर बाइक रुकने की आवाज़ आयी और फिर कुछ दोनों के बाते करने की आवाज़े आने लगी .
ये आवाज़ सुनकर नीता कहती है..
बहार कोई आया है.. रुको नवाज़..
ये सुनकर नवाज़ का मूड ख़राब हो चूका था ...
"इन सालो को भी अभी आना था ...सेल.. हरामी कोण आ गए अब ."
नवाज़ अभी भी नीता की बुर में अंगुली पेल रहा था और उसे मुँह से उनलोगो आरती लिए भद्दी सी गली निकल जाती है .
तब नीता कहती है
लगता है तुम्हारे बहन और जीजाजी है.. उन जैसे hi आवाज़ है..
ये सुनकर आरती कहते है आपने आप से..
नवाज़ की बहन और जीजाजी.. ये लोग फैक्ट्री मई और खेत मई काम करते है.. यहाँ क्यों आ गए..
फिर खुद से hi कहते है
शयद पापाजी ने बुलाया होंगे इन् को.. हाँ ऐसा hi होगा..
तभी नीता कहती है
"नवाज़ हटो ...plzzzzz...mai मर जाउंगी अगर वो लोग अन्दर आये और उनोने ऐसे हालत मई मुझे देख लिया तो ..पलज़्ज़ज़"
नीता ने सिसकते हुए कहा .
नवाज़ ने नीता की छूट मई जोरदार 2 उंगली डाली और झट से बहार निकली ..तभी दरवाजे पे दस्तक हुई …
" नवाज़ plzzz..chhodo मुझे " ..
नीता का पूरा सरीर मनो आकद गया और वो नवाज़ ने चोरते hi नीता जल्दी से दूर जाकर कड़ी हो गए और उधर आरती किचन के दूर से भाग कर किचन मई घुस गए… …नवाज़ का मूड बुरी तरह से ख़राब हो चूका था ..और दरवाज़े पर लगातार दस्तक हो रही थी ...तभी नवाज़ दरवाज़े पाई जेक दरवाजा खोलता है..
"क्या हीरो इतनी देर क्यों लगी दरवाज़ा खोलने में "
दरवाज़ा खुलते hi नवाज़ के जीजाजी ने पूछा.
थोड़ा काम मई था.. इसलिए थोड़े देर लग गयी..
नाराज़ होते हुई नवाज़ ने कहा..
"और तू ऐसा कोनसा काम कर रहा था "
नवाज़ की बहन नफीसा ने पूछा…
"तुझसे मतलब ??? कुछ भी करू "
नवाज़ ने गुस्से से कहा , आखिर उन दोनों ने उसका खेल बिगड़ दिया था . तभी उसकी नज़र नीता पर गयी.. तब नवाज़ को वो धीरे से कहती है..
शयद यही काम कर रहा था..
नीता के तरफ इशारा करते हुई कहते है.. तब नीता शर्मा जाती है..
क्यों भाभी.. सही न..
नफीसा के ऐसे कहने से उसका हस्बैंड कहता है..
क्यों बिचारे को चिड़ा रही है..
तब वो दोनों हस्बैंड वाइफ हँसाने लगे..
इधर किचन मई घुसी आरती के मन में विचारो का तूफान उमड़ रहा था..
" मैंने जो किया वो पाप है .... वो दोनों प्रेमी है.. और मैंने एक प्रेमी जोड़े का रोमांस देखा… ...lekin....wo तो मुझे लिखे करता है ...पर आरती तुजे कैसे पता वो तुजे लिखे करता है.. उसने खुद कहा क्या तुजे ...नहीं तो.. फिर तू कैसे कह रही hai..aur तू… मई.. मई भी तो शायद.... नहीं नहीं मई नहीं.. मई क्यों उसे लिखे करूंगी.. उस कमीने को.. उसका तो कितने औरत के साथ है ये शायद भगवान् को भी पता नहीं होगा.. फिर मतलब वो लव बर्ड्स नहीं है.. मई क्या सच मई उसे लिखे करने लगी हु क्या.. नहीं नहीं ये पाप है.. मई शाधिशुद्धा हु.. ये सही नहीं है.. प्यार मई कुछ गलत सही नहीं होता.. प्यार तो बस प्यार होता है.. क्या आरती तू पागल है क्या.. प्यार और उस कमीने से.. "
आरती खुद को hi समझा रही थी ...उसके मन में नवाज़ के लिए प्यार की कालिया फुट रही थी और उसका दिमाग ये मान नहीं रहा था.. उसी यही रति रटाई लाइन्स यद् आयी …. एवरीथिंग इस फेयर इन लव न वॉर … और एक प्यारी सी मुस्कराहट आ गयी उसके भोले मुखड़े पर …

























