ऐसा सोचते हुई वो झट से उसके हाट को झटका देके उसकी तरफ बिना देखे किचन से बहार चली जाती है .. नवाज़ कुछ कर नहीं पाया सिर्फ आरती को ऐसे जाते हुई देखते रहा ..
अब श्याम के टाइम हाल मई शेठ जी और आरती टीवी देख रहे थे तब नवाज़ बहार से हाल मई आया
अरे नवाज़ आज क्या क्या काम किया..
शेठ जी ने नवाज़ को कहा ...
हाँ साब एक रूम साफ़ हो गया..
वो कामचोर कहा है..
तब नवाज़ आरती की तरफ इशारा करते हुई पूछता है..
कोण कामचोर..
तब नवाज़ की तरफ देखते हुई आरती कहते है..

नीता
तब तक उसका ससुर कहता है
हाँ वो कामचोर नीता कहा है..
तब नीता वह आते है..
क्या बाबूजी.. मुझे कामचोर कहते हो.. देखो आज मैंने कितना काम किया है..
कितना काम किया है कामचोर तुमने
बाबूजी मैंने आज एक रूम टोटल क्लीन करवा दी..
वो तो नवाज़ ने की होंगे
मैंने हेल्प कर दी उसकी इसलिए हो गए वो
इसलिए तो मई तुजे कामचोर कहता हु.. तेरा काम इधर किचन मई था और तू नवाज़ ने जो काम किया है वो आपने किया है ऐसे बता रही है और तेरे वजह से अकेले आरती को काम करना पड़ता है..
हाँ पापा आप की बात सही है पर क्या करू ये नीता कामचोर सुनती कहा है ..
क्या दीदी आप भी.. आप तो अब शेठ जी जैसे बाते कर रही हो
सही तो बोल रही है बेटी वो तेरे बारे मई
दीदी आप ने तो कहा था नवाज़ के साथ जाने को
हाँ जाने को कहा था वह रुकने को नहीं
तब नवाज़ कहता है
शेठ जी वो मई यहाँ नया हु na..yaha का ज्यादा कुछ पता नहीं इसलिए रुख गए थे वो मेरे साथ..
नवाज़ नीता की साइड लेके बात कर रहा है ये जानकार नीता निचे देख के स्माइल करती है..

और मैं मई कहती है..
कमीना उसकी साइड लगे hi न.. उसके साथ मज़े करने को जो मिल रहे है...
तभी शेठ जी बोलते है..
शेठ - अच्छा.. वैसे आरती बीटा ये खेत का काम बहुत जल्दी सिख गया .. इतनी जल्दी ये सिख जायेगा ऐसे उम्मीद तो मुझे भी नहीं थी .. चलो घर का काम भी बहुत जल्दी सिख जाये यही उम्मीद है..
तब आरती आश्रय से नवाज़ की तरफ देखने लगी..

उसे ये आईडिया नहीं थी की नवाज़ के काम पाई पापा इतने ज्यादा फ़िदा है.. वो नवाज़ को देखते हुई कहने लगी..
इस काळा लोफर मई पापा को क्या दिख गया जो इसकी इतने तारीफ करने लग गए है ..
नीता - लगता है यहाँ का काम भी जल्दी hi सिख जायेगा ये शेठ जी ..
शेठ - हाँ जल्द hi सिख जायेगा
हाँ साहब जल्द से जल्द सीखने की कोशिश कर रहा हु
आरती की तरफ देखते हुई कहता है.. आरती उसकी और देख रही थी ..
स - वैसे नवाज़ अब इस वक़्त घर मई आये हो .. कुछ चाहिए क्या तुम .
तब नवाज़ कुछ बोले उससे पहले आरती झट से बोलती है..
वो पापा उनोने सुबह से खाना नहीं खाया ..श्यादा इसलिए आये होंगे
आरती ने आपने बारे मई ये कहा ये सुन के नवाज़ कुश हो जाता है.. पर आरती सोचती है ये मैंने क्या कह दिया .. और अपनी उंगली चबाने लगी..

उंगली चबाते हुई सोचने लगी.. ये बाँदा मुझे पागल बना देगा... अब मई क्या करू.. मैंने इसे उनोने कैसे कहा.. पापा ने सुना होगा तो मई मर गयी.. फिर वो अपनी गलती पर सफाई देने लगी.. और वो फिर से कहते है..
वो नीता और नवाज़ दोनों ने सुबह से खाना नहीं खाया इसलिए वो दोनों खाना खाये आगये होंगे
तब शेठ जी कहते है
कामचोर तुजे तो भूख नहीं लगी होंगे पर नवाज़ ने तो काम किया है उसे तो भूख लगे होंगे.. सुबह से बुखा क्यों रखा उसे
तब आरती मैं मई कहते है
उसको भी कहा भूख लगी होंगे..
नीता कहते है..
वो मैंने बोलै था पर उसने कहा बाद मई कहते है
क्यों तुजे भूख नहीं लगे क्या नवाज़
ऐसा शेठ जी ने कहा तब नवाज़ ने कहा
भूख तो सुबह hi लगी थी पर तब मेमसाब ने खाना नहीं बनाया था..
तब आरती गुस्से से उसकी और देखती है

और इशारे से उसे पूछते है..
मैंने कब खाना देने से मन किया था तुम..
तब इशारे से वो कहता है..
दिया तो नहीं न आपने
तब बुरा सा मू बनके आरती उसे सॉरी कहती है..

तब शेठ जी कहते है
मतलब सुबह जब तुम यहाँ किचन मई थे तब खाना नहीं खाया था क्या
नहीं न शेठ जी
तब आरती की तरफ देखते हुई शेठ जी कहते है
बीटा ऐसे कैसे तुमने दिनभर इसको भूका कैसे रखा . .
तब बुरा सा मू करते हुई कहते है..

सॉरी पापा जी.. वो काम मई भूल गए.. उस टाइम खाना नहीं बना था पर मैंने इन् लोंगो को बाद मई आने को बोलै था पर ये लोग बाद मई नहीं आये..
हम काम मई लग गए थे.. तो नहीं आ पाए मेमसाब
ऐसा नवाज़ आरती की तरफ देखते हुई कहता है और दूसरी तरफ आरती गुस्से से नवाज़ को देख रही थी..

काम मई नहीं पर बाटे करते बैत गए होंगे
तुम सच कह रही हो बहु.. ये नीता बात बहुत करते है.. नवाज़ से बाते करते बैत गए होंगे ..
तब आरती मैं मई कहती है ..
इस नवाज़ ने क्या जादू किया है पापा जी पर पता नहीं पर पापा जी इसको बहुत अच्छा मानते है..
नीता - शेठ जी.. मैंने ऐसा कुछ नहीं किया वो हम लोंगो को भूख नहीं लगी इसलिए हम नहीं आये ..
आरती - ठीक है अभी किचन मई जाओ तुम दोनों ..
शेठ जी.. हाँ अभी जाओ.. बहु इन् दोनों को खाना दे दो.. पेट भर के खाओ तुम लोग..
नवाज़ - ठीक है शेठ जी..
ऐसा कह के वो किचन मई चला गया खाना खाने.. और किचन मई निचे बैठ गया .. उसके बगल मई नीता बैठ गयी.. तब आरती उन्दोनो को खाना देने लगी.. अब वो दोनों निचे बैठे थे और आरती खड़े थे उनके सामने.. खाने की प्लेट नवाज़ के सामने रखने के लिए उसे जुकना पड़ा.. जिस वजह से उसकी आधे से ज्यादा चूचिया नवाज़ के आँखों के सामने आ गयी.. जिन मई एक तक नवाज़ देखे जा रहा था.. और आरती पराठा हाथ मई लेके उसकी आँखों मई देख रही थी.. जुख के.. जब उसे पता चला की नवाज़ कहा देख रहा है तब वो धीरे से बोली..
कमीना..
और दूसरे हाथ से आपने चुकी को देख लिया और पराठा उसके प्लेट मई रख के खड़े हो गए.. और नवाज़ स्माइल करके उसे देखने लगी.. और नीता गुस्से से उसे देख रही थी.. तब नीता नवाज़ की तरफ देखते हुई कहते है..
नीता - नवाज़ पराठा लो न खा खो गए.. दीदी बहुत अच्छा पराठा बनती है..
तब बहुत धीरे से नवाज़ बोलता है..
नीता तेरे दीदी का सबकुछ बहुत अच्छा है.. तू नहीं जानती ..
ये नीता सुन नहीं पाए.. क्यों की उसने बहुत धीरे से बोलै था.. आरती ने भी नहीं सुना था पर उसे भी पता चल गया था इसने कुछ न कुछ गन्दा hi बोलै होगा
आरती - कमीना नहीं सुदरेगा..
न- कही नहीं ( और आरती की चूचियों को देखते हुए पराठा ले लिया और आरती को देखते हुए खाने लगा)..
और इधर नीता पराठा कहते हुई उसे बाते करने लगी.. नवाज़ भी आरती को देखते हुई उसे बाते करने लगा.. और आरती सामने कड़ी थी.. किचन सिंक को सत् के.. उन्दोनो को घूरे जा रही थी.. उनको वो कुछ बोल नहीं रही थी .. उसके चहरे पर गुस्सा नहीं था अब.. पर ख़ुशी भी नहीं थी.. शयद नवाज़ नीता से बात कर रहा है ये देखकर वो जेलस हो गयी थी..
वो जब ज्यादा बाते करने लगे तब शेठ जी बोल पड़े
शेठ जी - बाते मत करो.. तुम दोनों पहले चुप चाप खाना खाओ उसके बाद जितनी मर्ज़ी बात कर लेना..
न - क्या शेठ जी.. खाना कहते हुई भी आप हमें आपने मान की नहीं करने दे रहे हो..
स - खाओ जैसे मैं करे पर बिना बाते करते हुई..
शेठ जी के ऐसे कहने से आरती के चहरे पर स्माइल आ जाती है..
न - क्या शेठ जी.. मई इतने दिन बाद तो मिली हु नवाज़ से और आप बात भी नहीं करने दे रहे हो ..
तब स्माइल करते हुई आरती कहते है

अरे पापा जी करने दो न उससे अपनी नवाज़ से बातें ….अब्ब रोज-2 थोड़ा नवाज़ यहाँ ऐनी वाला है….. इससे बाते करने ..
स- वो भी सही बात है तुम्हारे बीटा पर सुबह से तो नवाज़ के साथ है ये ..बाते तो बहुत की होंगे इसने ..
तब नीता कहते है
नहीं न.. बात कुछ नहीं हो पाए.. अब बात कुछ करना चाहा रहे है तो शेठ जी आप मन कर रहे हो… आप को नहीं लगता की आप कुछ ज्यादा स्ट्रिक्ट हो रहे हो..
तब आरती कहते है..
ा - मालिक ने टाइम तो टाइम स्ट्रिक्ट होना चाहिए.. नहीं तो नौकर बिगड़ जाते है .. ( नवाज़ की तरफ देखते हुए वो कहते है..)

तब नवाज़ कहता है..
हम कहा बिगड़ गए है मेमसाब.. हम तो अच्छे नौकर है.. है न शेठ जी
तब शेठ जी कहते है ..
तुम तो अच्छे हो
शेठ जी आगे कुछ बोले इस से पहले नीता कहती है..
मेमसाब आपके नौकर अच्छे hi है.. बैगडे हुई नहीं है.. नवाज़ को देख लो कितनी जल्दी सब कुछ सिख गया.. खेती का और अब घर का.. बहुत जिम्मेदार इंसान है नवाज़..
तब आरती नखरा करते हुई कहते है
मुझे पता है कितना जिम्मेदार इंसान है तुम्हारा नवाज़..
तब शेठ जी कहते है..
बहु एक एक और पराठा दो दोनों को
तब आरती नीता को और नवाज़ को पराठा देती है.. इस बार भी आरती के झुकने के टाइम उसके चूचिया देखने लगा और आरती गुस्से से उसे देखने लगी.. तब शेठ जी कहते है..
तुम लोग खाना खाओ आराम से मई बहार बैठा हु
हाँ शेठ जी ऐसा कह के नवाज़ पहले शेठ जी को देखता है.. वो बहार जाते hi आरती को देखता है . .. और उसको आँख मरता है.. और कहता है..
आप बहार आराम करो शेठ जी ..
आरती को आँख मरते hi वो और ज्यादा गुस्सा हो जाती है. ...

पर नीता यहाँ और आपने ससुर बहार हॉल मई बैठे था इस वजह से कुछ कर नहीं पाए..
और इधर नवाज़ स्माइल करते हुई आरती की तरफ देखते हुई खाना खाने लगता है.. अब नीता निचे गर्दन करके थोड़ा जुख के खा रही थी.. इस वजह से उसकी चूचिया थोड़े बहार आ गयी थी.. उसकी चूचिया वो देखने लगा.. नवाज़ को यु नीता की चूचियों देखते हुए आरती उसे गुस्से से देखते हुई अचानक से मुस्कुरा दी..

और नवाज़ ने ये तिरछी नज़र से देखा. .. शयद आरती को ये पता नहीं था की नवाज़ ने ये देख लिया है..
नीता आराम से बैठ कर अपना खाना खाने लगी थी ..उसके ऐसे झुक के खाने की वजह से उसकी चूचिया भी कपडे से बहार आने को तड़प उठी थी.. नवाज़ उसकी चूचिया देख रहा है और आरती नवाज़ को देख रही है इस बात से बेखबर नीता खाना खाने मई लगी हुई थी.. और इधर आरती नवाज़ नीता की चूचियों को घूरते हुए देख रहा है वो बड़े गौर से देख रही थी.. ये देख के उसके फेस पैर अलग hi कातिल मुस्कान आगयी थी..

अब नवाज़ कुछ पल नीता की चूचिया देखता और फिर आरती को देखता.. नीता के चूचिया को खाना कहते हुए नवाज़ देखता और बिच बिच में आरती को देखता.. दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा जाते..

ऐसे hi 3-4 बार हुआ तो आरती को एक दूसरे को देखते हुए एक शरारत सूजी और उसने खुजाने के बहाने से अपने साड़ी अपनी चेस्ट पर से हलकी सी बाजु की और अपनी गोर चुके के क्लीवेज नवाज़ को दिखने लगी..

अब ये उसने क्यों किया ये वो भी नहीं जानती थी.. नवाज़ का अपनी तरफ ध्यान आकर्षित करना चाहती थी.. या वो जो नीता की चूचिया देख रहा था वो आरती नहीं चाहती थी की नवाज़ देखे. .. पता नहीं उसने ऐसा क्यों किया वो नहीं जानती थी..
पर इधर आरती की गोर चूचिया या यु कहे उसके क्लीवेज देखते hi नवाज़ की आँखों में चमक आ गयी पैर ये चमक जल्द hi चली गयी क्युकी नीता ने जल्द hi उन्हें फिर से आपने साड़ी से धक् लिया और खड़े हो कर उसको देख कर हँसाने लगी..

वो खुल कर नहीं है रही थी.. उसे थोड़ा दर था नवाज़ का.. उसे पता था नवाज़ किस किसम का बाँदा है.. वो उसे ज्यादा उकसा नहीं चाहती थी.. वो जानती थी उसे अगर ज्यादा उकसाया तो वो आपने आप खो सकता है.. उसने अब जो हरकत की थी वो डरते हुई की थी.. उसने क्यों की उसे पता नहीं पर अब उसे नवाज़ से डर लगाने लगा..
तब नवाज़ उसे एक उंगली कर कर एक बार और दिखाओ ऐसे कहता है तब वो उसे गुस्से से देखते है

और नकहरा करते हुई वो कहती है...
क्या है???
तब नवाज़ इशारे से कहता है..
एक बार दिखाओ न
तब वो इशारे से न मई गर्दन हिलाते है . ..

तब नवाज़ ऐसे hi उसे 2-3 बार रिक्वेस्ट करता है तब वो उसे बड़ी आँखे दिखते हुई इशारे से कहते है. .
उसके देखो . ..

नवाज़ भी नाराज़ होते हुई नीता की चूचिया को देखने लगा.. और आरती उसको देखते रही.. और मैं मई कहने लगी.. कमीना साला.. कभी मेरे बूब्स को देखता है और कब नीता को.. साला बहुत हरामी है.. कुछ देर ऐसा hi चला.. आरती फिर सामने के नज़ारे मई खो से गयी..
तभी बहार से शेठ जी आते है और कहते है
अरे तुम दोनों ने खाना खा लिया क्या.. मई तो तुम दोनों को पूछने आया था की और कुछ चाहिए क्या.. बहु तुमने पूछा न इन् दोनों को की उन और कुछ चाहिए क्या
तब आरती आपने तंदरी से बहार आ जाती है..
हाँ पापा
अब दोनों का खाना ख़तम हो गया था.. नवाज़ हाट धोने के लिए उठ खड़ा हो गया.. आरती वाश बेसिन के पास की कड़ी थी.. जैसे hi वो जान गयी की नवाज़ यही उसके पास आने वाला है तब वो बाजु हैट गयी..
नवाज़ हैंड वाश करता है और घूम के आरती के सामने खड़ा हो जाता है .. आरती भी उसको डरते हुई देखते है.. तब नवाज़ कहता है..
पानी मिलेगा क्या मेमसाब
तब आरती गर्दन से हाँ बोलती है उसकी आँखों मई देखते हुई..

आरती उसे पानी देती hai..dono एक दूसरे को देख रहे थे और इधर शेठ नीता को कुछ समजा रहे थे.. नवाज़ लगातार आरती को देखे जा रहा था.. तब कुछ सोचकर आरती अब किचन से बहार के रूम के लिए चल दी .. जब आरती मटकते हुए वह से निकली तो नवाज़ की नज़र उसकी गांड पैर चली गयी जिसे मुड़कर आरती ने भी देख लिया और दिल में खुश होते हुए बहार चली गयी.. आरती के जाने के बाद नवाज़ भी जल्दी से बहार निकल गया क्युकी वो आरती से कुछ बाते करना च रहा था.. किचन से निकल के नवाज़ ने पहले हाल मई देखा वो वह नहीं थी.. फिर उसने 2-3 रूम थे वह आरती को देखा.. वह भी उसने देखा तब वह भी आरती नहीं थी तब उसे आरती की आवाज़ उप्पर छत्त पर आ जाती है.. वो शयद किसी से बात कर रही थी.. मोबाइल पाई .. तब नवाज़ हॉल से चल के सीधा छत्त पैर पहुंच गया जहा आरती कड़ी थी एक डीप गले की ब्लाउज पहन कर और मोबाइल पाई किसी से बात कर रही थी..

नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता
उधर से - अरे मेरे मीटिंग है.. मई नहीं आ सकता
वो कुछ हो मई अकेले नहीं जा सकती
अकेले कहा हो पापा जी है न
पापा जी तो सीनियर लोंगो के साथ बीजी हो जायेंगे मई अकेले हो jaunge..aur फिर मई बोर हो जाउंगी
तब वो आगे वाला बाँदा हँसाने लगता है
आप को हसी आ रही है क्या मेरे हालत पर
तब नवाज़ समाज जाता है आरती मेमसाब अरविन्द साहब से बाते कर रही है
ा - एक काम करो तुम बोर हो जाओगे न वह तब नीता को साथ मई लेके जाओ
तब आरती हँसाने लगी..
मतलब रस्ते मई और यहाँ आने तक मुझे वो पका देंगे.. दिन भर वो बक बक करती है..
अब दोनों हसने लगे..
ा- तुम बोर भी नहीं होना चाहते और तुम कोई पकाये भी नहीं
हाँ ऐसा hi कुछ समाजो पति महाराज
तो हम इस चीज़ का हम सलूशन कैसे लाये
वो आप की प्रॉब्लम है मेरे नहीं
प्रॉब्लम तो तुम्हारे है
पत्नी के प्रॉब्लम का सलूशन करना पति का धर्म होता है
हम्म्म
सिर्फ हम्म्म्म से काम नहीं चलेगा ..
सलूशन सोचता हु
सोचो सोचो ... बी थे वे और एक प्रॉब्लम है
अब कोनसा प्रॉब्लम है
आप ड्राइवर तो आपने साथ लेके गए होंगे और ड्राइवर तो आप के साथ hi आएगा.. फिर हम कैसे जाये..
इसका सलूशन है
क्या
पापा ने कहा है नवाज़ अच्छा ड्राइविंग करता है..
आप दोनों बाप बेटे को क्या हो गया है... मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा है.. उस नवाज़ ने आप दोनों पर क्या जादू किया है पता नहीं चल रहा है.. उसपे जो इतना भरोसा कर रहे हो..
ये सुनकर नवाज़ मैं मई कहता है..
अब इसको क्या हो गया है.. मेरे खिलाफ ये लौंडे क्यों छोटे मालिक को उकसा रही है..
अरविन्द - क्यों क्या हो गया है
कुछ नहीं
उसकी कुछ नेगेटिव बात तुम पता लगी है तो बता दो
वो भी बता दूंगी वक़्त आने पर
नवाज़ की तरफ देखते हुई कहते है..
ठीक है.. अब मुझे काम है.. रखता हु.. पापा के साथ जाओ तुम..
ठीक है जाउंगी..
ऐसा कह के वो कॉल रख लेते है.. और थोड़ा सामने आके कहते है...

ये है तुम्हारे साहब.. मुझे अकेले जाने को कह रहे है एक प्रोग्राम मई.. और खुद नहीं आ रहे है..
बिजी होंगे.. बड़े आदमी है...
हाँ वो तो है.. पर आदमी ने इतना भी बिजी नहीं रहना नहीं चाहिए की अपनी धर्मपत्नी को किया वडा पूरा कर न सके
बात तो आप सही कह रहे हो.. वैसे मेमसाब आप कब जा रहे हो और कहा..
तब नखरा करते हुई कहते है..

तुम पता नहीं है क्या
नहीं तो
तुम्हारे साहब तो कह रहे तुम hi लेके जाओगे मुझे
मुझे नहीं पता मेमसाब
सुन्ना है तुम बहुत अच्छी ड्राइविंग करते हो
हाँ वो तो करता हु
वो भी देख लेंगे
देख लीजियेगा... पर कब जाना है..
तब उसकी और देखते बड़े अड्डा के साथ कहते है..
आरती - तू खाना कहते वक़्त क्या देख रहा था .. तुझे शर्म नहीं आती..
नवाज़ कुछ कहता उससे पहले hi खुद hi आरती कहती है..
शर्म कैसे आएंगे.. तू तो 1 नंबर का बेशर्म है.. काम से पापा को तो डरता न.. उनोने देखा होता तो तेरे खैर नहीं थी..
न - वो मैंने जानबूझ कर नहीं देखा था.. बस नज़र पद गयी
ा- नज़र पद गयी थी तो हैट भी तो सकती थी न
न- वो देखने में इतनी सॉफ्ट लग रही थी की मैं hi नहीं कर रहा था नज़र हटाने का
तब मुस्कुराते हुई आरती कहते है ..
लगता है तेरे घर एक बार आना पड़ेगा
नवाज़ आश्रय से पूछता है
मेरे घर
हाँ तेरे घर .. लगता है तेरे घर आके तेरे अब्बू और अम्मी को बताना पड़ेगा की नवाज़ जवान हो गया है.. अब उसका निकाह कर दो
क्या आरती मेमसाब.. आप भी न. आप क्यों ऐसे बाते कर रही हो.. थोड़े दिन मुझे ऐसे फ्री की जिंदगी जीने दो.. बाद मई वो सब तो है hi न..
हाहाहा..