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- Dec 5, 2013
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बुच्ची
और तबतक बुच्ची आ गयी,
वही सूरजु की बूआ की लड़की, कच्चे टिकोरे वाली, जो जरा सा चिढ़ाने पे मुंह बना लेती थी और पैर पटकने लगती थी और ऐसी नंदों की तो भौजाइयां ऐसी की तैसी कर के रख देती थीं और शादी ब्याह का मौका हो तो और, लेकिन अभी कोई भौजाई बोलती बेचारी बुच्ची, खुद बोल पड़ी, बिना समझे
" शीरा तो मुझे बहुत अच्छा लगता है, एक एक बूँद चाट जाउंगी "
अब सब भौजाइयां मुस्कराने लगीं और इमरतिया की एक सहेली, कहारिन,मुन्ना बहू जो उससे भी ज्यादा मुंहफट थी हंस के बोली
" ननद हो तो ऐसी, ….इमरतिया अब तोहार बारी,... आज ही शीरा पीयाय देना "
सबसे ज्यादा सुरजू सिंह की माँ मुस्करा रही थीं, अब लग रहा था शादी बियाह का घर।
और इमरतिया क्यों पीछे रहती वो बुच्ची से बोली
" अरे ये भी एक रस्म है, दूल्हे की बहन को रोज जो दूल्हा मिठाई खायेगा, .खाना होता है ..तो तो तोहार भैया क रसगुल्ला क शीरा "
बड़ी मुश्किल से औरतें अपनी मुस्कान रोक पा रही थीं, और ऊपर से सूरज सिंह की महतारी वो भी मैदान में आ गयीं
" और क्या बिना रस्म रिवाज के, इतनी आसानी से भौजाई मिले और बुच्ची तू और शीला दुनो जनी यहीं रात में कोहबर रखावे, और साथ में तोहार भौजाई लोग "
( उन्होंने इमरतिया और मुन्ना बहू, वही इमरतिया की सहेली कहारिन को इशारा किया, कोहबर में पांच औरतें रात में रहती थीं, जिसमे कुछ सुहागिन और कुछ कुँवारी लड़कियां रहती थीं। वो रात में कोहबर वाले कमरे में ही जबतक दुल्हन घर में नहीं आ जाती थी वहीं सोती थी। वो कमरा जिस कमरे में दुलहा रहता था उसके बगल में ही )
और पांचवीं औरत को वो ढूंढ ही रही थी की सूरज सिंह के ननिहाल की, रिश्ते की एक भौजाई, मंजू भाभी बोलीं, मैं रहूंगी ऐसी मस्त कच्ची कलियाँ साथ में रहेगी और बुच्ची का गाल नोच लिया।
अब तो सब भौजाइयां एकदम ननदों के पीछे,
" लेकिन ठंड, " बुच्ची ने बचने की कोशिश की तो गाँव की कोई नयी ब्याहता लड़की, दुलारी उसे चिढ़ाते बोली,
" अरे ठंड क इलाज,... लंड है :"
और फिर भौजाइयां, सब एक साथ चालू हो गयीं। मुन्ना बहू सीधे बुच्ची से बोली
" और शादी बियाह के घर में तोहरे अस मस्त माल के लंड क कौन कमी, सब तो तोहरे भाई लगेंगे, करवा ला घपाघप, घपाघप ।
दूसरी बोली, ' जितना गर्मी चुदाई में है उतना रजाई में नहीं , एक बार करवाय के देख लो, फिर खुदे खोल के टहरोगी। "
बुच्ची से ज्यादा हालत सरजू सिंह कीखराब हो रही थी, उनकी माँ ठीक सामने बैठीं थी, और ये सब बात सुन के खूब रस ले ले के मुस्करा रही थीं पर वो सुरजू की हालत समझ रही थीं, इमरतिया से बोलीं
" ले जा आपने देवर के उनकी कोठरी में, "
और इमरतिया ने उनका हाथ पकड़ के उठाया और कमरे की ओर लेकिन वो लोग कमरे में घुसे ही थे की सूरज सिंह की माँ ने अपने पूत को आवाज लगा के रोक लिया
" और सुनो, अपने भौजाई क कुल बात माना, अब तू उनके हवाले, ....सोच लो तभी मिठाई खाने को मिलेगी जो जो वो कहें " मुस्करा के वो बोलीं
और तबतक बुच्ची आ गयी,
वही सूरजु की बूआ की लड़की, कच्चे टिकोरे वाली, जो जरा सा चिढ़ाने पे मुंह बना लेती थी और पैर पटकने लगती थी और ऐसी नंदों की तो भौजाइयां ऐसी की तैसी कर के रख देती थीं और शादी ब्याह का मौका हो तो और, लेकिन अभी कोई भौजाई बोलती बेचारी बुच्ची, खुद बोल पड़ी, बिना समझे
" शीरा तो मुझे बहुत अच्छा लगता है, एक एक बूँद चाट जाउंगी "
अब सब भौजाइयां मुस्कराने लगीं और इमरतिया की एक सहेली, कहारिन,मुन्ना बहू जो उससे भी ज्यादा मुंहफट थी हंस के बोली
" ननद हो तो ऐसी, ….इमरतिया अब तोहार बारी,... आज ही शीरा पीयाय देना "
सबसे ज्यादा सुरजू सिंह की माँ मुस्करा रही थीं, अब लग रहा था शादी बियाह का घर।
और इमरतिया क्यों पीछे रहती वो बुच्ची से बोली
" अरे ये भी एक रस्म है, दूल्हे की बहन को रोज जो दूल्हा मिठाई खायेगा, .खाना होता है ..तो तो तोहार भैया क रसगुल्ला क शीरा "
बड़ी मुश्किल से औरतें अपनी मुस्कान रोक पा रही थीं, और ऊपर से सूरज सिंह की महतारी वो भी मैदान में आ गयीं
" और क्या बिना रस्म रिवाज के, इतनी आसानी से भौजाई मिले और बुच्ची तू और शीला दुनो जनी यहीं रात में कोहबर रखावे, और साथ में तोहार भौजाई लोग "
( उन्होंने इमरतिया और मुन्ना बहू, वही इमरतिया की सहेली कहारिन को इशारा किया, कोहबर में पांच औरतें रात में रहती थीं, जिसमे कुछ सुहागिन और कुछ कुँवारी लड़कियां रहती थीं। वो रात में कोहबर वाले कमरे में ही जबतक दुल्हन घर में नहीं आ जाती थी वहीं सोती थी। वो कमरा जिस कमरे में दुलहा रहता था उसके बगल में ही )
और पांचवीं औरत को वो ढूंढ ही रही थी की सूरज सिंह के ननिहाल की, रिश्ते की एक भौजाई, मंजू भाभी बोलीं, मैं रहूंगी ऐसी मस्त कच्ची कलियाँ साथ में रहेगी और बुच्ची का गाल नोच लिया।
अब तो सब भौजाइयां एकदम ननदों के पीछे,
" लेकिन ठंड, " बुच्ची ने बचने की कोशिश की तो गाँव की कोई नयी ब्याहता लड़की, दुलारी उसे चिढ़ाते बोली,
" अरे ठंड क इलाज,... लंड है :"
और फिर भौजाइयां, सब एक साथ चालू हो गयीं। मुन्ना बहू सीधे बुच्ची से बोली
" और शादी बियाह के घर में तोहरे अस मस्त माल के लंड क कौन कमी, सब तो तोहरे भाई लगेंगे, करवा ला घपाघप, घपाघप ।
दूसरी बोली, ' जितना गर्मी चुदाई में है उतना रजाई में नहीं , एक बार करवाय के देख लो, फिर खुदे खोल के टहरोगी। "
बुच्ची से ज्यादा हालत सरजू सिंह कीखराब हो रही थी, उनकी माँ ठीक सामने बैठीं थी, और ये सब बात सुन के खूब रस ले ले के मुस्करा रही थीं पर वो सुरजू की हालत समझ रही थीं, इमरतिया से बोलीं
" ले जा आपने देवर के उनकी कोठरी में, "
और इमरतिया ने उनका हाथ पकड़ के उठाया और कमरे की ओर लेकिन वो लोग कमरे में घुसे ही थे की सूरज सिंह की माँ ने अपने पूत को आवाज लगा के रोक लिया
" और सुनो, अपने भौजाई क कुल बात माना, अब तू उनके हवाले, ....सोच लो तभी मिठाई खाने को मिलेगी जो जो वो कहें " मुस्करा के वो बोलीं