Adultery उर्वशी🧚.... माँ-बेटे की अनोखी प्रेम कहानी - Page 10 - SexBaba
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Adultery उर्वशी🧚.... माँ-बेटे की अनोखी प्रेम कहानी

Update - 20

जय उर्वशी और शुभम को घर ले कर आ चूका था. घर आते ही उसने अधिकार सहित घरेलु व्यवहार करने सुरु कर दिए. अब तक चोरी छिपे उर्वशी को शुभम की mom को चोदने वाला जय शुभम के डर से सहमा हुवा था. पर अब जय खुल कर शुभम और उर्वशी के साथ रहना चाहता था. आर्यन एक निच निहायती छपरी और मर्यादाहीन लड़का था इस बात का अंदाजा तीनो को हो चूका था आर्यन आगे जो कारनामे करने वाला था उससे बचने के लिए जय का खुल कर रहना शुभम और उर्वशी की जरुरत भी थी.

जय : शुभम अगर तुम्हे कोई ऐतराज़ नही हो तो मै यहि निचे रुक जाता हु...! तुम्हारी exams भी आने वाली है. अब तुम fresh हो जाओ और सारी tension मुझ पर छोड़ दो, आराम से पढ़ाई करो बेटा.

शुभम : जी हा आप रुक सकते है. मुझे भी felp मिल जाएगी uncle....!

जय : सुनो उर्वशी...! Dr. Mercy ने तुम्हे bed rest लेने के लिए कहा है. तुम बस आराम करो... घर मै संभाल लूंगा.

उर्वशी : हा पर सुनिये ना...! शुभम के पापा आने वाले है तब तक सब सही हो जायेगा ना... ( उर्वशी अपने बदन पर बने निशान को देख कर चिंता जताने लगी.)

जय : तुम परेशान ना हो....! सब सही हो जायेगा... मै हु ना...!

भाबी कह कर उर्वशी को पुकारने वाला जय अब उर्वशी को नाम ले के हक से बोलने लगा. उर्वशी के लिए जय के मुंह से निकलने वाले "आप" शब्द तु और तुम मे बदल गए. छूप छुप कर उर्वशी के गोरे गदराये हुए बदन को निहारने वाली जय की नजर बिनधास्त तेज तर्रार बन गई. अब शुभम के सामने ही उर्वशी के आँखो मे आँख डाल कर जय सव्वाद करने लगा

जय अब बदल चूका था घर के अंदर के एक जिम्मेदार मुखिया मर्द जैसे किसी alfa समान behave कर रहा था. जय अब उर्वशी पर पूर्ण अधिकार जमाने लगा था. आखिर उसने खुद को शुभम का पापा बता कर उर्वशी की आबरू बचा ली थी. नादान शुभम भी जय ने दिए हुए बलिदान का अहसानमंद हो गया था. जय के हर कदम को शुभम किसी अज्ञाधारक बालक की तरह मान रहा था. बेचारे शुभम के जीवन मे आखिर था ही कौन. ना बाप का सर पर हाथ था न कोई भाई या बहन थी. ऊपर से दोस्ती मे धोका मिला. एक उर्वशी ही शुभम की "जान और प्राण" थी. जय ने उर्वशी और शुभम को जिस प्रकार संभाल लिया था उस से जय ने शुभम की वो "जान और प्राण" भी जीत लिया था. अब आगे शुभम को इस अहसान का बड़ा भारी कर्ज चुकाना पड़ने वाला था.

जय : चलो शुभम जाओ... Fresh हो कर study कर लो... Mumma को rest करने दो...मै कुछ खाने का इंतजाम करता हु...चलो भागो...!

शुभम : जी...!

उर्वशी सब देख रही थी के कैसे जय शुभम को अधिकार से पढ़ाई के लिए space दे रहा है. शुभम भी जय के आगे उसकी हर एक बात को मानता हुवा किसी बैल की तरह मुंडी हिला कर सहमति दे रहा था. शुभम और जय के इस अंदाज से उर्वशी के अंदर काफी सुकून था. जय शुभम का बोझ कम कर रहा था और शुभम भी जय को स्वीकार कर चूका था. ये एक बेटे और आशिक की अजीब जुगलबंदी बन रही थी. उर्वशी ने ऊन दोनों की बढ़ती नजदीकी अच्छे से भाप ली थी.

शुभम के जाते ही जय ने पिछला दरवाजा खोल कर ऊपर उसके flate मे जाने लगा. अदनान अभी interview से आया नही था. Flate मे जा कर उसने एक bag निकाल ली. उसमे underwear, vest, shorts, t shirt, और जरूरत का समान भर लिया. उसने उसकी बाइक बुलेट(Royal Enfield) की चाबी साथ मे ले ली. उसने flat मे जो समान बिखरा हुवा था वो सब सवार लिया. Lights off कर दिए, दरवाजा lock कर के निचे आने लगा. निचे आ कर उर्वशी के घर का पिछला दरवाजा बंद कर ऊपर lock लगा दिया. घर मे प्रवेश कर के उसने सारे खिड़कीओ के पर्दे गिरा दिए. Wall compound का gate बंद कर दिया. फिर घर मे लौट आया दरवाजा बंद करते हुए एक पल रुका, उसके मर्दाना चेहरे पर एक जिम्मेदार मर्द की चमक थी. सोच विचार कर के उसने उर्वशी के room की और कदम बढ़ाये. और उर्वशी के room मे जय पोहोच गया.

जय : सुनो उर्वशी.... मै तुम दोनों के साथ यहि कुछ दिन यहि रुकने वाला हु...! पर सामान कहा रखू...? और सोउ कहा...?

उर्वशी : store room मे रुक सकते हो आप. पर वहा न ac है न कूलर है....! शुभम के room मे रुक जाइये...! उसकी bedroom बड़ी है. double bed है और extra bed भी लगा हुवा है. वहा रुक जाइये...!

जय : ठीक है...!

जय ने उर्वशी का माथा चुम लिया. उसे अधिकार भरी नजरो से निहारा और वहा से निकल पड़ा. शुभम के room मे पोहोच कर उसने एक single bed के निचे अपनी bag सरका दी. शुभम नहा कर अपने study table पर study करने बैठा हुवा था.

जय : शुभम मै यहां बस सोने ही रुकूंगा...! परेशान ना हो... तुम्हारे study मे कोई खलल नही पड़ने दूंगा. ज़ब तक तुम पढोगे तब तक मै hall मे रुकूंगा...!

शुभम : परेशानी की कोई बात नही है unckle... आप tv यहाँ रुक सकते हो. मुझे अच्छा लगेगा... वैसे मै study करते हुए study पर ही focus रहता हु...!

जय : अच्छा... पर तुम्हे लगें के disturb हो रहे हो तो बता देना मै hall मे चला जाउंगा...ok...

शुभम : ठीक है unckle...!

जय : अच्छा शुभम हम दोनों के लिए कुछ खाने के लिए आर्डर कर दो, और तुम्हारी mom के लिए coconut और juse भी बुला लेना... ये लो मेरा मोबइल... Pasword मे मेरा मोबइल नंबर डाल देना. तब तक मै नहा लेता हु.

अब मै नहा लेता हु.

शुभम : ठीक है unckle...!

जय ने pant और t shirt उतार जर bed पर रख दी. Bag से साबुन निकाल ली और bathroom मे चला गया. Underwear निकाल ली और Shower on कर के जय ठंडे पानी से पूर्ण नंगा हो कर नहाने लगा. नहा लेने के बाद उसे याद आता है के उसने साथ मे rowel लाया ही नही. बातो बातो मे भूल गया towel तो Bag मे ही रह गया.

जय : शुभम... मेरी एक help कर दो... मेरी bag मे मेरा towel है जरा ला दो तो.

शुभम : रुकिए एक मिनिट...देखता हु...!

एक हाथ मे book और एक हाथ मे towel ले कर शुभम पढता हुवा बाथरूम की और बढ़ा. जय को लगा के शुभम bathroom के दरवाजे से अंदर हाथ डाल कर बस towel आगे सरकायेगा पर ऐसा हुवा नही. शुभम ने बाथरूम का दरवाजा खोल दिया कर जय को towel देने लगा. अभी भी उसका ध्यान book मे ही था. पर जय शुभम को देखते ही दचक गया....

जय : अरे अरे अरे.... रुको...!

जय की हड़बड़ाहट ने शुभम का focus disturb कर दिया, अब शुभम का focus book से हट कर जय की और जा टिका. जय का नग्न शरीर शुभम देख कर देखता ही रह गया. Shower से भीगा हुवा नंगा जय उसका क्रूर पर हसमुख चेहरा. हलकी हलकी groom की हुईं दाडी. लाल चमक लिए हुए काला सावला 6 फिट का ऊंचा तगड़ा जय का कसा हुवा शरीर जो पानी की बूंदो से ताज़ा हो कर तपते लोहे जैसा दमक रहा था. उसपर कसी हुईं musculs, ढाल जैसी छाती, उभरे हुए कंधे, तराशे हुए बाजु, पतली कमर, भारी भरकम कसी हुईं जांघे, और लटकता हुवा काले सरिये जैसा ताकतवर लंड देख कर शुभम भौचकित सा हो गया.

शुभम : जय unckle.... अरे यार...!

जय : अरे अरे... Sorry...!





जय के कसे हुए नंगे शरीर की image शुभम के अब मन मे बचपन मे रटे हुए poem की तरह बस गई. जय दिखने मे किसी porn star से कम नही था. नंगे बदन जय ठीक Troy francisco की देसी copy ही था. भले भी शुभम ने जय को देख कर नजरअंदाजी दिखाई पर जीस अंदाज से उसने जय को ऊपर से निचे तक निहारा जय समझ गया के शुभम जय से hypnotize हो चूका है. अक्सर नवजवान लडके imaginary sex करते है और जिस नवजवान age मे शुभम था उस से जय समझ गया के शुभम भी अब जय को ले कर अजीब imagination करेगा. अब जय शुभम का मन टटोलना चाह रहा था. आगे के लिए शुभम को जय set करना चाहता था ता के उर्वशी और जय के घनघोर चुदाई के लिए शुभम खुद जय को permission दे दे.

जय : क्या हुवा शुभम...! क्या मै इतना बुरा दीखता हु 😌

शुभम : नहीं unckle... आप तो बहोत handsome है... सच मे...!

जय : फिर तुमने मुंह क्यों बनाया...?

शुभम : वो आप nude खड़े थे ना...!

जय : क्या मै nude होउ तो गन्दा दीखता हु...?

शुभम : आप तो nude मे भी cool लगते हो... Infact आप nude ज्यादा cool लगते हो...!

जय : अच्छा... ऐसा है तो मै तुम्हारे घर मे nude ही रह जाता हु 😉

शुभम : अरे.... 🫣 ही ही ही ही...😁

जय : ऐसे ही हसते रहा करो... हसते हुए बड़े अच्छे लगते हो यार...!

तभी door की बेल बजने लगी...!

शुभम : delivery boy होगा... रुकिए मै देखता हु.

शुभम door खोलता है.

Delivery boy : sir आप का आर्डर...!

शुभम : thank you...!

शुभम food parcel ले कर dining table पर रख देता है. अभी भी उसके मन मे जय के नंगे शरीर की image किसी film की तरह घूम रही थी. जय ने जो बाते शुभम को बोलि "मै तुम्हारे घर मे nude ही रह जाता हु" ये शब्द शुभम के मन मे गूंज कर कल्पना मे उतर रहे थे. जय घर मे नंगा हो कर घूमेगा तब कैसा लगेगा ईसी कल्पना मे शुभम खोया हुवा था. गुम सा लग रहा था. तभी जय वहा आता है. पर शुभम का मन कही और ही गायब था, जय के आने शुभम को कोई फरक ही नही पड़ा मानो के उसे पता भी न लगा हो के जय वहा उपस्थित है.

जय : किस खयालो मे गुम हो शुभम. (जय ने शुभम के पीठ पर प्यार से सहलाते हुए पूछा)

शुभम : hmmm... नहीं तो कुछ नही...!

जय : यहि सोच रहे हो ना के मै काला हु, गंदा दीखता हु, और nude ज्यादा गंदा हु...!

शुभम : अरे unckle... ऐसा नही है... चलिए ठीक है गर्मी भी बहोत है आप मेरे room मे जैसे चाहो वैसे रहिए... Nude भी चलेगा...!

जय : अरे नहीं यार... पर तुम कहो तो रह लूंगा...! चलो अब कुछ खा लेते है...! उर्वशी के room मे ही चले वही better रहेगा...?

शुभम : okk...

जय और शुभम मुस्कुराते हुए उर्वशी के room मे चले आते है. जय वही bed के पास एक खुर्सी लगा कर बैठ जाता है. उर्वशी के bed पर सोइ हुईं होती है. शुभम उर्वशी को जगाने लगता है.

शुभम : मम्मी... उठो कुछ juse पी लो आप...!

उर्वशी उठ कर bed पर बैठ जाती है. तीनो मिल कर अब पेट पूजा करते हुए बाते करने लगते है.

उर्वशी : जय... तुमने जो मेरे लिए इतना सब किया और अब भी कर रहे हो तुम्हारा कैसे शुक्रिया अदा करूं कुछ समझ नही आ रहा...!

शुभम : हा unckle... मै भी आप का बहोत शुक्रियाअदा करना चाहता हु...!

जय : कैसी बाते करते हो आप दोनों... Kya मै आप को आप का अपना नही लगता...!

उर्वशी : हा अब तो तुम हम मे से ही हो गए हो... पर मेरे ये जख्म और इनसे बनने वाले दाग़ जायेंगे कैसे... उसकी चिंता हो रही है...!

जय : dr. Mercy ने तो कहा है के वो दिए हुए lotions टाइम पर लगाए तो आप जल्दी ठीक हो जाओगी...! शुभम के हाथो लगा लीजिये...! क्यों शुभम...! उर्वशी को लोशन लगा दोगे ना...?

जय की ये बात सुन कर शुभम सुन्न सा रह गया. जय के शब्द सुन कर शुभम के आँखो के सामने एक कल्पना film सी चलने लगी. के कैसे वो खुद की mom के बदन को नंगा कर रहा है. खुद के mom के नंगे बदन पर धीरे धीरे लोशन लगा रहा है. इस कल्पना ने शुभम का जमीर एक पल के लिए हिला दिया पर उसने होश संभाल कर सोचा भले भी उसने उर्वशी को कई बार नंगी देखि हो, जय के साथ सोते देखा हो या आर्यन के निचे भी देखा हो पर वो ये काम नही कर पायेगा इतना वो जान गया. जय के खड़े किये हुए question mark का answer शुभम के लिए ना ही था. अब इस कारण उसके चेहरे का रंग भी उड गया. उर्वशी ने एक टुक शुभम की और देखा, शुभम का सूखा मुंह देख कर बेटे की दुविधा माँ जान गई और बोल पडी.

उर्वशी : नही नही... मै खुद लगा लुंगी....!

जय उर्वशी की हालत जानता था, उर्वशी उसके शरीर पर खुद के बेटे का हाथ नही चाहेगी यह वो जानता था, शुभम भी उसके mom के अछूते भाग को छू ना पाता, ना ही शुभम ये कर सकता था. इसलिए जय खुद शुभम के मुंह से जय और उर्वशी का नाजायज स्पर्श कबूलना चाहता था. तीनो अब शांत हो चुके थे. कोई कुछ बोलना ही नही चाहता था उर्वशी इस चिंता मे थी के नंदकिशोर घर वापस आने से पहले कैसे भी कर के ज़ख्म सुख जाए और दाग भी मीट जाये. पर शुभम की exams भी है इसलिए खुद के देखभाल का भार शुभम pr लाद कर शुभम को disturb भी ना हो इसकी चिंता भी उसे सता रही थी. जय इस फिराक मे था के उर्वशी के मदमस्त बदन पर लोशान मलहम लगाने के बहाने उसके नर्म मुलायम बदन की मालिश करने का मौका मिल जाए. और खुद शुभम मजबूरन उसको इस काम की permission दे दे. पर बेचारा शुभम सबसे बड़ी दुविधा मे फसा हुवा था. वो ये चाहता था के उर्वशी के जख्म भर जाए पर इस काम मे वो खुद उर्वशी की कोई मदत नही कर सकता था. ना वो इतनी सहजता से जय को उर्वशी के इतना नजदीक आने देना चाहता था. कुछ सोच विचार कर के शुभम बोल पड़ा.

शुभम : मम्मी जहाँ मै लगा सकता हु वहा लगा दूंगा... बाकि आप ही लगा लेना...!

जय : हा उर्वशी... इतना क्या सोचना... बेटा ही तो है...!

उर्वशी : hmmm... ठीक है...!

जय : शुभम देखो उर्वशी को टाइम पर दवाई देना है और टाइम पर ही लोशन लगाना है. उर्वशी के खाना खाने के बाद के तीन time याद रखना मॉर्निंग मे 10 am. Afternoon 4 pm और night मे 10 pm, ऐसा करोगे तो तुम्हारी mom जल्दी ठीक हो जाएगी. और हा कुछ भी जरुरत पड़े तो मुझे याद करना.

शुभम : ठीक है unckle...!

जय : देखो अभी 9.30 pm हो रहे है. थोड़ी देर मे लगा सकते हो. Ok...! मै चला सोने...!
 
Update 21

मुस्कुराते हुए जय झट से उठ कर उर्वशी के room से चला गया. उर्वशी का आकर्षक शरीर का जादू ऐसा था के कोई मर्द उस के मायाजाल मे फ़स कर उत्तेजित होये बिना बच नही सकता थ. जय ये बखूबी जानता था के उर्वशी के सुडोल बदन मे कुछ ऐसा खिचाव था के जो कोई उस बदन को देखता मन मे उसे भोगने की ही कामना करता. उर्वशी के बदन पर लोशन लगाते हुए शुभम बेटा हो कर भी उत्तेजित होये बिना बच नही पायेगा, या तो शुभम को सभी माया वासना त्याग कर उर्वशी की मदत करना पड़ेगा, या तो उत्तेजित हो कर उसे निर्लज्ज बेटे की तरह खुद की mom को छूना पड़ेगा, नंगा देखना पड़ेगा, या तो लोशन लगाते हुए शर्म आ गई तो वहा से भागना पड़ेगा. जय जहाँ तक उर्वशी को समझता था उस से जय ये भी जानता था के उर्वशी भी शुभम के हाथो खुद को नंगा करवा कर लोशन नहीं लगाएगी.

जय अब उसके मन मे कुछ अजीब खिचड़ी पका रहा था. शुभम अब जय को स्वीकार कर चूका है इस बात को जय भी समझ चूका था, अब इस सब का जय फायदा उठाना चाहता था. जय मन ही मन शुभम को और impress करने की योजना बना रहा था. शुभम के room मे पोहोच कर उसने ac on कर दी. T shirt और night pant निकाल कर bed मे underwear पर हो कर लेट गया. उसने जो ultra soft ice silk lycra undrerwear पहनी हुईं थी उसका material इतना soft and thin था के जय के अंडकोष से ले कर लंड पर उभरी हुईं वकुलरिटी भी साफ साफ नजर आ रही थी. लंड फुला कर ऐसे अंजान बनता हुवा जय bed पर सोने का नाटक कर रहा था के सब कुछ नार्मल ही है. उसके तड़गे शरीर को को बार बार शुभम के नजरों के सामने कैसे लाया जाए, उसके असामान्य आकार के लंड को अंजान बनते हुए बार बार कैसे शुभम के आँखो के सामने पेश किया जाए इस सोच विचार मे जय मस्त हो रहा था और आँखे बंद कर मजबूत शरीर को ढीला छोड़ कर, दोनों बाहे फैला कर, दोनों जांघे खोल कर आराम से सोने का नाटक कर रहा था. अब जय wait कर रहा था के कब शुभम room मे आये.

दूसरी तरफ उर्वशी के room मे बैठा शुभम अजीब कशमकश मे गोते लगा रहा था, उसके गोरे कमसिन चेहरे पर दुविधा की लकीर साफ दिखाई दे रही थी. मन ही मन शुभम सोचने लगा "मै ज़ब mom के कपडे उतरूंगा और उसके निशान बदन पर लोशन लगाउगा तब कैसा लगेगा, mom का मादक शरीर को एक मर्द की जरुरत है, क्यों न मै ही mom की जरुरत पूरी करने वाला मर्द बन जाऊ. Mom उनकी जरुरत पूरा करने के लिए ही तो जय को चुपके से बुलाया करती थी और मजे किया करती थी, ज़ब की जय तो पराया बाहरी मर्द है, जय ने भी तो mom को कई बार नंगी की हुईं है. जय तो पराया बाहरी मर्द है पर मै तो उनका ही अपना हु, आखिर लोशन ही तो लगाने के बहाने पहल तो कर ही सकता हु. जय के इतने मजबूत शरीर को mom सह सकती है तो मुझे क्यों नही".

उर्वशी : क्या हुवा बेटा...! ठीक तो हो ना...! (उर्वशी ने हलकी आवाज मे पूछा)

शुभम : हा मम्मी ठीक हु...!

कल्पना मे खोया हुवा शुभम उर्वशी के आवाज से विचारों के बवंडर से बाहर निकल आया. कुछ सोच कर शुभम ने उर्वशी का चेहरा एक टक देखा उर्वशी के चेहरे पर जो मज़बूरी और ठीक होने की जो आशा थी उसे शुभम भाप गया. अकेली Mom की मज़बूरी शुभम समझ रहा था पर उसके मन मे जो गंदे विचार छागए थे उस से शुभम झूलस सा जाने लगा. और फिर सोचने लगा "नहीं नही मै ऐसा निच काम नही करूंगा, अब मेरी नजर गंदी हो चुकी है अब तो मै ये काम बिलकुल भी नही कर पाउँगा, मै आर्यन के जैसा नही बन सकता" शुभम ने मन को मजबूत किया, मन मे घूमते हुए गंदे वासना भरे विचारों पर लगाम लगा दी, मन को पाक साफ करता हुवा शुभम ने आखिर फैसला ले लिया के वो ये काम नही कर सकता है. "ना मै खुद के हाथो अपने mom के कपड़े उतार पाउगा न खुद के हाथों mom को नंगी कर के देख पाउँगा . आखिर वो मेरी प्यारी mumma है, मै ऐसा करूंगा तो खुद के नजरो मे गिर जाउंगा, जय और mom ने जो कुछ भी किया हो वो सब mom की desire और जरुरत होंगी. जय mom की choice है. इसलिए जय ही mom को लोशन लगा दे वो बात अलग है पर मै खुद ऐसा कुछ नही कर पाउँगा. जिस से मेरे और mom के पवित्र रिश्ते पर डाग लग जाए". ये सोच कर शुभम ने आखिर जय के हाथो ही ही इस काम करवाना ठीक समझा. अब शुभम इस विचार को उर्वशी के साथ साझा कर ना चाहता था.

शुभम : mumma... एक बात कहु...!

उर्वशी : हा बोलो

शुभम : mumma... आप ने जय unckle को ही लोशन लगा देने के लिए क्यों नही कहा...?

शुभम की ये बात सुन कर उर्वशी अजीब सुन्न पड़ गई, अपने बेटे के मुंह से ये बात सुन कर उर्वशी लज्जा से भर कर सहमा गई. आखिर इस प्रश्न का उत्तर आखिर क्या दे उसे सूझ ही नही रहा था. आर्यन ने जो कांड कर दिया था, उस कांड को शुभम ने विवशतापूर्ण नजरो से देखा था, जय ने उस कांड पर पर्दा कर के सवारा था इस सब से शर्मिंदा उर्वशी अब असहज महसूस कर रही थी. अब ज़ब की उर्वशी की आबरू लूट चुकी थी और जिस अनियंत्रित वासना के दुष्परिणाम भी उर्वशी भुगत रही थी इस से वो कुछ डरी हुईं थी. दूध का जला छाछ भी फुक कर पिए ऐसी अवस्था उर्वशी की थी. उर्वशी के मायूसी और लज्जा भरे चेहरे को निहार कर शुभम उसकी चुप्पी के पीछे का राज समझ रहा था. शुभम भी उर्वशी को फिर से हसती हुईं देखना चाहता था, शुभम चाहता था के फिर से घर का माहौल नार्मल हो और ये तभी हो सकता था ज़ब उर्वशी की हालत फिर से ठीक हो जाए. उर्वशी की ख़ामोशी को शुभम समझना चाहता था, उर्वशी का सहज स्वभाव शुभम फिर से वापस लाना चाहता था. शुभम फिर से बोला....

शुभम : mumma... आप परेशान ना हो... आप मुझे हर बात बता सकती हो... मै आप को समझने की कोशिश करूंगा...!

उर्वशी : बेटा... मेरे हाथो पहले भी बहोत सारी गलतियां हुईं है...! अब मै फिर से गलत काम नही करूंगी...! मेरे वज़ह से तुम्हे ये दिन देखना पड़ रहा है...! जय आखिर है तो पराया ही, और अब उसके मन मे क्या सोच है मै और तुम जान नही पाएंगे आखिर वो एक जवान मर्द है. (उर्वशी ने मायूसी भरी आवाज मे कहा)

शुभम : पर mom...! जय एक अच्छा इंसान भी है...! वो न होता तो सोचिये आज हमारा क्या होता...! मुझे उसपर trust है...! मेरी मानिये तो आप भी जय पर trust कीजिए...!

उर्वशी : humm...! पर उसे मै कैसे बोलू...! अब मुझसे ये सब नही होगा बेटा...!

शुभम : अच्छा Mom...! एक बात बोलू...? आप बुरा न मान लेना...!

उर्वशी : हा बोलो..!

शुभम : mom... जय और आप के रिश्ते से मुझे कोई प्रॉब्लम नही है...! वैसे जय आप को चाहता भी है, और वो मेरा कैसे खयाल रखता है आप सब देख रही हो ना...!

उर्वशी : तुम एक बेटा हो कर ऐसे कैसे बोल रहे हो...?

शुभम : mom आप मुझे आप का friend क्यों नही मानती हो...? क्या बेटा friend नही बन सकता...?

उर्वशी : बेटा सच मे तु बहोत समझदार हो चूका है... लेकिन...!

शुभम : लेकिन वेकीन कुछ नही mom...मेरा भी मेरे friends से भरोसा उड चूका है. आप ही मेरी friend बन जाओ. मै जय को भी friend बनाऊंगा. आज से हम दोनों best friend है... बोलिए हा...!

उर्वशी : हा बाबा... हम दोनों best Friend है...!

शुभम : mom... अब से आप हर बात हर feelings मुझसे share करो...! मै आप का best friend बन कर आप के साथ खड़ा रहूँगा...! Promiss.

उर्वशी : हा हा मेरे नये best friend बेटा...!

शुभम : mom जय की बात मुझपर छोड़ दो मै उसे समझा दूंगा...! आप बस जल्दी ठीक हो जाओ यहि मै चाहता हु...!

उर्वशी : पर जय को तुम क्या समझाना चाहते हो..?

शुभम : यहि के जय और आप girlfriend boyfriend है और मै आप दोनों का best friend हु. और जय को आप का और मेरा भी खयाल रखना पड़ेगा.

उर्वशी : अरे बदमाश... कैसा बेटा है मेरा... दूसरे को अपनी mom का boyfriend बना रहा है ...!

शुभम : mumma के ख़ुशी के लिए...! इतना तो बनता ही है... क्यों my best friend उर्वशी... 😉

उर्वशी : धत... पागल कहिका...!

शुभम : ही😁 ही😁 ही😁...ओ hello my friend...आप के medicine लेने का वक़्त हो चूका है चलिए उठिये...!

उर्वशी मुस्कुराते हुए bed पर उठ कर बैठ गई, शुभम की हरकते बड़ी ममता भरी नजरो से निहारती हुईं उर्वशी शांति का अनुभव कर रही थी.

शुभम ने झट से पानी का ग्लास उठा ले आया और उर्वशी के हाथ मे थमा दिया. बड़े प्यार से शुभम Strip से एक एक table निकाल कर उर्वशी को दे रहा था. उर्वशी खुश थी के उसका बेटा इतना समझदार है और उसका खयाल रखता है. उर्वशी ने सारी tables ले ली.

उर्वशी : ओ hello... New best friend... शुभम जी... अब मै सो जाऊ के नही...! अब मेरे लिए क्या हुकुम है...?

शुभम : अरे ऐसे कैसे... Hmmm.... Body पर लोशन भी लगाना है...! थोड़ा रुको... जय को भेज देता हु... बाद मे सो जाना...!

उर्वशी : अरे... नहीं... 😥

शुभम : अरे हा... लोशन तो लगाना ही पड़ेगा...! याद है Dr. Mercy ने क्या कहा था...?

उर्वशी : hmmm 😥

शुभम : hmmm...मेरी सारी बात याद रखना... ठीक है... मै जय को भी समझा दूंगा और अभी भेज दूंगा... Ok good night...!

उर्वशी : good night...!

शुभम ने अपनी सूझ बुझ से उर्वशी के सामने सहजतापूर्वक अपने विचार रख दिए. उसके बेटे को जय और उसके नाजायज रिश्ते से कोई आपत्ति नही यह जान कर उर्वशी चकित हो चुकी थी, पर उर्वशी भी कही न कही उसके विचारों पर सहमत भी थी. शुभम अपनी mom को एक friend देख रहा था इस बात से उर्वशी के अकेले पड़ चुके मन को सुकून मिल रहा था. Mom और बेटे के बिच उभरते हुए इस अजीब रिश्ते की शुरुवात आज हो चुकी थी, और जय इस नए रिश्ते को बाँधने वाला रेशम डोर बनने जा रहा था. आखिर जय को उर्वशी भी चाहती थी पर चु की अब उर्वशी के सारे राज खुल चुके थे इसलिए शर्मिंदा भी थी. इसी कारण अब उर्वशी और लज्जित नही होना चाहती थी.

अब शुभम ने उर्वशी के bedroom से बाहर निकल कर अपने bedroom मे कदम बढ़ाये. Room मे पोहोचते ही देखा के single bed पर white underwear लगा कर मस्त हो कर सो चूका है. उसके ultra soft ice silk lycra undrerwear से उसके तोफ से तने लंड का उभार और आकार साफ नजर आ रहा था. Zero wat balb के उजाले मे जय की muscular कसी हुईं सावली body लालिमा ले कर चमक रही थी. शुभम ने जय की और कदम बढ़ाये और जय को उठाने की कोशिश करता हुवा उसके कंधे पकड़ कर हिलाने लगा.

शुभम : जय unckle... उठो...जय unckle... उठो...!

जय : क्या हुवा...!

शुभम : आप से कुछ बात करनी है...! उठीये...!

जय : हा बोलो...!

जय तो मानो तैयार ही था के शुभम वापस आएगा और उस से बात करेगा. जय उठ कर bed पर बैठ गया. उसकी भारी भरकम मर्दाना आवाज. कसा हुवा शरीर और underwear मे तना हुवा लंड देख कर दुबले पतले शुभम की हिम्मत जवाब देने लगी. जय के साथ बात करते करते उसके पैर लड़खड़ाने लगें. और आवाज धीमी होने लगी. मन ही मन शुभम सोचने लगा "जय इतना ताकतवर है, शरीर भी कसा हुवा है, और इसका लंड भी तैयार दिख रहा है, इसकी नियत बिगड गई और ये mom पर चढ गया तो इस से बचाएगा कौन".

जय : शुभम, कुछ परेशान नजर आ रहे हो...! क्या बात है...! बोलो... क्या तुम्हे मुझपर अब भी trust नही है...! बोलो...!

जय शुभम के room मे जिस प्रकार underwear पर बैठा था उस से शुभम एक लड़का हो कर जय के भी जय के आकर्षक शरीर और मजबूत लंड से प्रभावित हो चूका था. इतना ही नही शुभम ने कई बार उर्वशी को नंगी देखा था, शुभम भी कही न कही मादक उर्वशी को मजबूत जय के संग समागम करते हुए देखना चाहता था. उसकी खूबसूरत mom एक perfect मादा है उसके लिए जय एक perfect नर है, खुद के mom के साथ जय के सभोंग की विचित्र विचित्र काल्पनिक विचारों ने शुभम के चाँद जैसे शुद्ध मन को वासना का ग्रहण लगा दिया था. इन सब से उस कमसिन लडके के मन मे उसके mom और जय को ले कर अश्लील विचार पनपना स्वाभाविक था. उसी काल्पनिक विचारों को अब शुभम reality मे उतारने की जद्दोजहद मे जुटा हुवा था. पर फिर भी उसकी हिम्मत नही हो रही थी के पहले आखिर की कैसे जाये. जय के अपनेपण भरे अंदाज से और उसकी मीठी बातो से शुभम के मन की घबराहट कुछ दूर हुईं. उसने एक गहरी सास भरी, हिम्मत बांधी और बोल पड़ा.

शुभम : वो मै कह रहा था के mom को आप लोशन लगा देते तो अच्छा होता.

जय : अरे पर तुम भी तो लगा सकते हो ना...!

शुभम : हा पर मुझसे ये काम नही होगा...! आप ने कहा था के कुछ help चाहिए तो आप को याद करू... So ये भी help कर दो...! Plz

जय : अरे पर उर्वशी मानेगी नही. अभी वो थोड़ी सदमे मे है. उसे बुरा लग जायेगा...!

शुभम : hmmm... पर आप उनका tension ना लो...! मैंने ही उनको बोला है के आप ही लोशन लगा देने वाले हो...!

जय : पर मुझे बड़ी तेज नींद आ रही थी यार...! पर ठीक है...! वो मेरा towel दो तो...!

शुभम : unckle... एक बात पुछू...!

जय : हा हा... बिलकुल बे झिझक बोला करो यार...!

शुभम : क्या हम दोनों best friends बन सकते है...!

जय : अरे.... बिलकुल मेरे लाल....! मुझे ख़ुशी होंगी. हम दोनों मे friends जैसा ही रिश्ता होना चाहिए.

शुभम : ठीक है. तब आप को आज से unckle नही बोलूंगा... 🫣

जय : ohk... My dear friend...😉और कुछ...!

शुभम : बस इतना ही जय...!

जय bed के निचे उतर कर खड़ा हो गया. शुभम ने जय को towel दे दिया. कमर पर Towel बांध कर जय उर्वशी के room मे जाने लगा. उसके पीछे पीछे शुभम निकल पड़ा. जय को शुभम का पीछे आना भाया नही. और जय बोल पड़ा.

जय : अब तुम क्यों पीछे आ रहे हो...! क्यों मुझपर trust नही है क्या ?🤔

शुभम : वो बात नही है जय...!

जय : तो फिर...?

शुभम : वो बस मै देखना चाहता था...!

जय : क्या देखोगे भला...!

शुभम : hmmm😥 ठीक है मै जाता हु...!

जय : तुम्हारे सामने उर्वशी ठीक से लोशन नही लगाने देगी...! अरे मेरे दोस्त...!क्या बात है खुल कर बोला करो...!

शुभम : वो मै सोच रहा था के परदे के पीछे रुक जाउंगा वही से देख लूंगा... But कोई बात नही... मै सोने जाता हु..!

जय : अच्छा अच्छा...मै समझ गया...! तुम तुम्हारी mom के साथ मुझे देखना चाहते हो...? यहि ना...? 🤔

शुभम : hmmm...!

जय : देखो शुभम अब तुम्हारी mom sick है. तुम जो देखना पसंद करोगे वो आज तो थोड़ा मुश्किल है. पर फिर कभी तुम्हे वो देखने का pleasure जरुर दूंगा...!

शुभम : hmmm... मुझे आप दोनों के रिश्ते से कोई ऐतराज़ भी नही है 😌 मै बस मेरी mom को जल्दी ठीक होते देखना चाहता हु. happy देखना चाहता हु. वो आप के साथ काफ़ी खुश दिखती है. इसलिए बस.

जय : hmmm... तुम एक सुलझे हुए लड़के हो. तुम एक अच्छे बेटा भी हो. तुम्हारी age मे अक्सर लड़को मे गंदी नियत पनपटती है पर तुमने खुद को उस गंदी नियत को बदल कर बस cuckson वाली feelings और fantacy बना ली. अक्सर तुम्हारे age के लड़को मे ऐसी feelings जागती रहती है, मै समझ सकता हु.

शुभम : जय... तुम भी बहोत अच्छे इंसान हो...! But देखो मेरी mom का दिल कभी ना दुखाना...!

जय : ऐसा कभी सोचूंगा भी नही...! अब हम friends है ना...! तुम बे झिझक मुझे तुम्हारी feelings बताया करो. कोई fantacy भी होंगी उसे भी मत छुपाया करो...! मै तुम्हारी feelings जरूर समझूंगा. तुम्हारी fantacy भी पूरा करूंगा.

शुभम : hmmm...

जय : अच्छा अब के लिए कुछ special देखना चाहते हो तो बता दो...!

शुभम : नहीं...बस मै mom के room के बाहर परदे के पीछे रहूँगा, वही से देखूंगा.

जय : चलो कोई नई..., बस तुम मुझे खुल के अच्छे से बताया करना के कैसे देखना चाहते हो, तुम जैसा चाहो वैसा नजारा मै तुम्हे दिखाया करूंगा. तुम भी देख कर Enjoy कर लिया करो...! और तुम्हारी mom भी मजे कर लेगी...! बोलो क्या कहते हो...?

शुभम : हा... ये ठीक है, But mom को पता न लगें के मै ये सब देखता हु, इतना आप care रखना.

जय : वो तुम मुझपर छोड़ दो... उसे इतना मस्त करदूंगा के वो एकदम स्वस्थ हो जाएगी, सब भूल जाएगी.

शुभम : सच मे मै ऐसा ही कुछ देखना चाहूंगा...!🤤

जय : तुम बस कुछ दिन सबर रखो मेरे दोस्त, तुम्हारी mom जल्दी ही ठीक हो जाएगी... फिर बाद मे तुम्हारी mom और तुम्हे दोनों को हर तरीके से खुश कर दूंगा...! तुम अब यहि रुको... उर्वशी के bedroom मे मै ज़ब ग्लास गिराऊंगा वो ssignal होगा उसके बाद तुम परदे के पीछे आ कर नजारा देखना सुरु कर देना. ठीक है.

शुभम : हा 🤤 समझ गया...!
 
Update 22

शुभम ने पहली बार ज़ब जय को उर्वशी के साथ नंगा देखा था तब उसकी जो निर्दोष नादान आँखे फुट फुट कर रोइ थी अब वही आखे जय और उर्वशी को एक साथ देखने के लिए बेचैन हो रही थी. उसकी आँखे अब निर्दोष नही बची थी, ना ही उसके अंदर अब नादानी का कोई कतरा बचा था. अब उस नादान आँखो मे अजीब रंगीन इश्किया चमक भर चुकी थी. मन मे पाप भर चूका था. और विचारों मे अश्लीलतापूर्ण कल्पनाये सजी जा रही थी. खुद की mom के साथ जय को नंगा देखने के लिए शुभम लालाहित हो रहा था. उसका गोरा चेहरा रंगत बदल कर गुलाबी हो चूका था. ओठों पर अजीब मुस्कुराहट छाई हुईं थी. और उसका उतावलापण उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था. शुभम के जीवन मे जो अघटित घटनाओ का नॉनस्टॉप सिलसिला सुरु हुवा था उस सब को देख समझ कर आखिर शुभम अब सामान्य कैसे भला रह पाता. कभी उसकी नियत बिगड कर उसके मन मे incist खयालात घूमने लगते तो कभी वो एक cuckson जैसा behavior करने लगता था.

जय : अब कैसे feel कर रही हो...!

उर्वशी : अब काफ़ी आराम है.

जय : hmmm...तुम्हे पता है की शुभम को बहोत फ़िक्र है. बोल रहा था के मेरे mom को खूश रखा करो...!

उर्वशी : हा मै जानती हु... मेरा ही तो बेटा है.

जय : अब तो तुम्हारा लाडला और मै दोनों best friend बन चुके है. पता है उसी ने मुझे यहां भेजा है.

उर्वशी : हा उसने मुझे बताया था. वो तुम्हे बहोत मानने लगा है. वो तो तुम्हारा fan बन गया है.

जय : हा... शुभम बड़ा सुलझा हुवा लड़का है. तुम खुशनसीब हो के शुभम तुम्हारा बेटा है. उसकी जगह कोई और होता तो पता नहीं आज तुम्हे क्या दिन देखना पड़ता.

उर्वशी : हा जय...मेरा बेटा मुझे कभी बुरे दिनो मे नही देख पायेगा ये मै भी जानती हु.

जय : पता है...शुभम मुझे क्या बोल रहा था...!

उर्वशी : क्या बोल रहा था बताओ तो जरा...!

जय : कह रहा था के तुम्हारे और मेरे रिश्ते से उसे कोई ऐतराज़ नही है. मतलब अब हम दोनों को छुप छुप के मिलन करने की कोई जरुरत नही... उसकी permission है तो क्यों ना खुल कर किया जाये...!

उर्वशी : hmmm... वो अभी छोटा है. नासमझ भी है. उस के मन पर बुरा असर ना हो बस यहि मै चाहती हु.

जय : अरे baby....मै हु ना... ज़ब तक यहां हु उसे मै सम्हाल लूंगा... उसका खयाल भी रखा करूंगा...! अब तो तुम खुश हो ना...?

उर्वशी : hmmm...!

जय : चलो अब तुम्हारे body पर लोशन लगा देता हु...! तुम कपड़े निकाल पाओगी या मै help कर दू...!

उर्वशी : नही मै निकाल लुंगी... पर शुभम सो गया क्या...? उसने कही देख लिया तो मेरे बारे मे क्या सोचेगा...?

जय : अरे baby उसी ने मुझे यहां भेजा है...! मै तो सोया हुवा था, उसने उठा कर मुझे convinc कर के यहां भेजा है, सच बताऊ तो मै आना भी नही चाहता था. पर शुभम के खातिर ही यहां आया हु. उसी की ही wish है के मै तुम्हे लोशन लगा दू, और उसकी ये भी wish है के हम दोनों साथ मे time spend करें. इतना है तो तुम क्यों उसके बारे मे सोच रही हो...? उसने देख भी लिया तो तुम्हारी फ़िक्र है इसलिए देखना चाहेगा, बुरा थोड़े न मानेगा.

उर्वशी : hmmm... ठीक है... पर उसका ये सब देखना ठीक नही होगा.

जय : अरे baby... वो बहोत समझदार है. वो यहां नही आएगा... ये भी तो सोचो के Door लगाना भी तो ठीक नही है. मै बस तुम्हे लोशन लगा रहा हु. और कुछ नही.

जय के अपनेपण भरे अंदाज और उसकी समझदारी भरी बातो से उर्वशी अब तनावमुक्त हो गई थी. उर्वशी ने अपने कपड़े उतार लिए थे. अब उर्वशी बस bra और panty पर हो चुकी थी. जय उर्वशी के bedroom मे जब से गया था तब से ही शुभम बाहर इंतजार करने लगा था के जय कब glass गिरा के सिग्नल देगा और कब शुभम परदे के पीछे जा कर अंदर का नजारा निहारेगा. पर काफ़ी देर हो जाने के बाद भी जय ने कोई सिग्नल दिया नही, ना ही अंदर कुछ हलचल हो रही थी. जय उर्वशी के room मे जा कर उर्वशी को मनाने और उसके संग बाते करने मे दंग हो गया था. शुभम की जो मंशा जय जान गया था और जान बुझ कर जय काम मे देरी कर शुभम को तड़पा रहा था.

उर्वशी : जय मुझे बाथरूम जाना है...! ले चलो...!

जय : ठीक है...! चलो...

जय ने उर्वशी को बाहो मे उठा लिया, और बाथरूम की और चल पड़ा. रास्ते मे जो खुर्सी थी उस खुर्सी पर जो steel का ग्लास था उसे जय ने अनजान बनते हुए धक्का दे दिया. निचे गिरते ही ग्लास की जो तेज आवाज आई उसका सिग्नल शुभम ने पकड़ लिया. अब शुभम ने दबे पाव कदम आगे बढ़ाये. उर्वशी के दरवाजे के बाहर आ कर परदे के पीछे अपने आप को छुपाने लगा. और अंदर झाखने लगा.





जय उर्वशी को बाथरूम ले आया बाथरूम का दरवाजा खुला ही छोड़ दिया ता के शुभम सब देख पाए, और उसने उर्वशी को बाथरूम के दरवाजे की और पीठ कर के खड़ा कर दिया. निचे बैठ कर जय ने उर्वशी की panty उतरना सुरु कर दिया. उर्वशी की panty उतारते हुए जय ने एक बार उस परदे के और देखा जहाँ से शुभम झाख कर देख रहा था. जय के देखते ही शुभम ने 👍thamb दिखाते हुए all right का single दे दिया. उस signal को जबाब देते हुए जय ने उर्वशी के मटकेनुमा गोल कूल्हे बड़ी प्यार से सहला कर उर्वशी को सुकून दे रहा था. जय अब उर्वशी की panty निकाल कर किसी झंडे जैसे फहराने लगा, शुभम को दिखाने लगा, और उसकी panty अपने चेहरे पर लगा कर सुंगने लगा, फिर उसने उर्वशी की panty बाथरूम से बाहर फेक दी.

उर्वशी अब धीरे धीरे पिछवाडा झुका कर pee करने के लिए बैठने लगी. टांगे फैला कर कमर झुकाते हुए उर्वशी जिस अंदाज मे बैठ रही थी उस से जांघो के बिच से उर्वशी की फूली हुईं साफ दिखाई दे रही थी. जय बार बार अपने ओठों पर जीभ फेर कर शुभम की और देख रहा था. शुभम भी अंदर का नजारा देख कर lusty smile किये जा रहा था.

उर्वशी pee करने लगी. अचानक बाथरूम से होते हुए शुभम के कानो तक एक कुकर की सिटी बजने जैसी आवाज सी गूंजने लगी, ये sity की आवाज कुछ और नही बल्कि जोरदार pee करने के कारण उर्वशी के योनि से आ रही थी.

उर्वशी pee कर के फिर उठ खड़ी हुईं, जय ने फिर उसे बाहो मे उठा कर bed पर लिटा दिया. उर्वशी की panty जय बाथरूम मे ही उतार चूका था. अब उस के ऊपरी बदन पर बस एक bra ही थी जो उर्वशी के खचाखच भरे हुए स्तनों को बाहर आने से रोके हुए थी. उस मखमली मुलायम golden bra को खोल कर जय ने उर्वशी के दोनों स्तन आझाद कर दिए, bra खुलते ही उर्वशी के स्तन किसी जेली जैसे हिलते हुए झूम रहे थे. जिनपर आर्यन के love bite के गहरे निशान साफ दिखाई दे रहे थे. जिनमे खून जम कर लाल हरे निशान बन चुके थे. उस निशानो से घिरे उर्वशी के गोरे गुलाबी स्तन ऐसे दिख रहे थे मानो पूनम के चाँद पर लगें हुए दाग़ हो.

Dressing table पर जो दवाइयां रखी हुईं थी उसमे से जय ने लोशन की बोतल उठा ली. और उर्वशी के इर्द गिर्द घूम कर उर्वशी के सारे बदन पर स्तनों से ले कर उसके जांघो तक उस बोतल से पिचकारी मारते हुए लोशन की पतली धारा छोड़ने लगा.





जय ने उर्वशी के और देखा, उर्वशी आँखे बंद कर के लेटी हुईं थी. उर्वशी बिंदास हो कर लेटी है अब शुभम को इस नज़ारे का लुफ्त उठा देने मे कोई हर्ज नही यह सोच कर जय ने वहा पडी हुईं खुर्ची खींच ली जिस से एक खर्रर्रsss खर्रर्रssss आवाज आने लगी. ये आवाज शुभम के लिए एक signal थी. अब इस signal को शुभम समझ गया. उसने परदे के पीछे से अपना चेहरा निकाल कर ऐसे कर दिया के सारा शरीर बाहर रह जाये और बस चेहरा ही अंदर रह पाये. अंदर जय जो खेला कर रहा था वो सब देख कर शुभम कामविभोर हो कर मचल रहा था. उसके लिंग मे आज अजीब ठंनक थी और अजीब अकड़न से उसका लिंग सख हो कर pant के अंदर फडफड़ा रहा था. इस फडफड़ाते हुए लिंग को शुभम ने बाहर निकाल कर अपने हथेली मे ले कर सहलाने लगा.





जय ने अब उसके कमर पर लिपटा rowel निकाल कर रख दिया और उर्वशी कमर पर चढ़ कर बैठ गया. और उर्वशी के लोशन से लिपटे नर्म नंगे बदन पर हलके हाथो मालिश करना सुरु कर दीया. उर्वशी के स्तनों से काफ़ी देर तक खेल कर जय अब उर्वशी के निचे हाथ डालने लगा. कमर से होते हुए जांघो तक उर्वशी को अच्छे से सहलाने लगा. उर्वशी भी अब कुछ mood मे आने लगी थी, जय के हरकतो को उर्वशी full enjoy कर रही थी. उर्वशी का mood बनते देख जय बिच बिच मे उर्वशी के जांघो के बिच हाथ डाल कर उसकी फूली हुईं कचोरी जैसी योनि पर उंगलियां घुमाने लगा. अब उसने उर्वशी के घुटने मोड टांगे खोली और खुद bed के निचे बैठ गया, जय ने शुभम की और देखा, उर्वशी की दोनों टांगे खोलता हुवा जय ने एक अश्लील अंदाज मे शुभम को देख कर एक आँख मारी😉. और उसके जवाब मे शुभम ने भी जय को एक lustful smile🤤 दे दी.

जय उर्वशी की योनि के परदे(labia) बार बार छेड रहा था उसे खोल रहा था उसमे ऊँगली कर रहा था अंदर के कामरस से भरी हुईं उंगलियां चख रहा था और जय ये सारा नजारा शुभम को दिखा रहा था. के तभी उर्वशी बोल पडी.

उर्वशी : अरे कर क्या रहे हो जय...!

जय : बस इस खूबसूरत गुलाबी कमल को निहार रहा था...!

उर्वशी : hmmm... निहारना होगया हो तो पीठ पर भी लोशन लगा दो...!

जय : hmmm... चलो पलट जाओ आप...!

अब जय ने उर्वशी के पीठ पर भी लोशन लगाने लगा पीठ से होते हुए कमर और गांड तक हलके हाथो मालिश भी करने लगा. परदे के पीछे से सारा नजारा देखता हुवा शुभम मस्त होने लगा था.

जय : जरा कुल्हे ऊपर उठाओ baby...?

उर्वशी : अरे नही वहा दर्द है...

जय : अरे वहा मलहम लगाना पड़ेगा... नही तो दर्द कम कैसे होगा...?

उर्वशी ने हामी भरी और उसने गांड ऊपर कर दी.

जय : अरे ऐसे नही, मेंढक जैसी pose बनाओ, तब मै ठीक से मलहम कर पाउँगा...





उर्वशी ने जय के guidance पर उतरते हुए मेंढक जैसी लेट कर गांड पीछे की और खोल दी. उर्वशी के pose बनाते ही जय ने उर्वशी के दोनों कुल्ले अपने हाथो से फैलाये, उर्वशी के कुल्ले फ़ैल जाने से उस बिच मे उर्वशी की गोरी गुलाबी खिली हुईं योनि और गांड का सुजा हुवा छेद साफ दिखने लगा. हसते हुए शुभम की और इशारा करने लगा. और बार बार कुल्ले फैला कर शुभम को दिखाने लगा. जय और शुभम के इस खेल से उर्वशी अनजान पडी हुईं थी. इस सब से उर्वशी झल्ला उठी और बोलने लगी.

उर्वशी : हो गया हो तो अब खेलना बंद कर दो...!

जय : अरे baby मै तो बस लोशन लगा रहा था...!

उर्वशी : मै सब समझती हु...! नींद आ रही है...

अब जय bed से उतर कर dressing table की और चला गया, और table पर रखी हुईं tube -(ANO-metrogyl Cream) उठा लाया. उस creem को उंगलि पर लगा कर जय ने उर्वशी के गांड के छेद पर रगड़ना सुरु कर दिया. उर्वशी के गांड के hole पर हलके हाथो ऊँगली से creem लगा कर जय उर्वशी को relax कर रहा था. उर्वशी को relax देखकर जय ने फिर एक बार उसकी ऊँगली पर लबालब creem लगा डाली और उर्वशी के गांड के छेद मे प्यार से घुसा कर घुमाने लगा. इस सब से उर्वशी को तेज दर्द महसूस हुवा. गुदा के अंदर लगें हुए जख्म पर घूमती हुईं ऊँगली से उर्वशी कहर्रा उठी.... आह्हः आह्हः आह्हः...

इस तेज जलन से बितर कर उर्वशी ने जय को एक जोर की लात मार डाली.

पर जय ने फिर ऊँगली पर creem लगा कर फिर उर्वशी को जबरन पकड़ने लगा, उर्वशी जय के पकड़ से छूटने के लिए झटपटा रही थी, पर छूट नही पाई जय उर्वशी के गुदा मे जबरन ऊँगली घुसा कर फेरने लगा...

उर्वशी : अरे बस करो... बड़ा तेज दर्द हो रहा है...!

जय : अच्छा beby बस हो गया... अब सो जाओ...! Love you 🫶Good night...💐

रात के 11.20 बज रहे थे. जय हाथ धो कर उर्वशी के room से बाहर निकलने के लिए तैयार हो गया था. तभी उर्वशी का मोबाइल पर ring बजने लगी और अचानक बंद हो गई, जय ने उर्वशी का मोबाइल हाथ मे उठा कर देखने लगा, फिर एक बार ring बजी और बंद हो गई, बार बार कोई उर्वशी के मोबाइल पर कॉल कर के cut भी कर रहा था, एक ही मिनिट मे उर्वशी के मोबाइल पर लगभग 50 से ज्यादा miss call दिखने लगें ये सब अजीब हो रहा था, कोई unknown नंबर से उर्वशी के मोबाइल पर miss call किये जा रहा था.

उर्वशी : मोबाइल मुझे दो तो... कौन है...?

जय : कोई unknown no. है...!

उर्वशी का मोबाइल बार बार बजे जा रहा था, अलग अलग नंबर से nonstop आते miss call और बजती हुईं ring से bedroom का sexy माहौल गंभीर बनने लगा. बस 5-10 मिनिट के दरमियान उर्वशी का मोबाइल 500 missed call से भर चूका था. कुछ देर बाद ring आना बंद हो गया. जय ने उर्वशी ला मोबाइल अपने हाथो लिया और true caller पर जांचने लगा, पर एक भी नंबर का नाम पता नही कर पाया.

फिर एक बार ring बजी, इस बार call missed नही हुवा, जय ने call receive किया और गंभीर आवाज से बोलने लगा.

जय : hello... कौन...?

Unknown : दरवाजे के बाहर surprise gift रखा है, उठा लो...!

इतना बोल कर उस unknown ने call cut कर दिया

जय ने की हुईं मालिश से मस्त हो चुकी उर्वशी के भाव अब बदल चुके थे, इस सब वारदात से डर रही थी, और उर्वशी के मुलायम बदन संग खेल कर जय के चेहरे पर जो हवस के भाव थे वो सब चिंता की एक गंभीर लकीर मे बदलने लगें.

उर्वशी : कौन था...? क्या बोल रहा था...?

जय : यहि रुको एक मिनिट...!

खुर्सी पर पड़ा towel उठा कर जय कमर पर लपेटने लगा, और उर्वशी के room से बाहर निकलने लगा, बाहर शुभम भी था, जो अब जय के पीछे पीछे चलने लगा. हॉल मे आ कर जय ने सावधानी से main door खोला, दरवाजा खोल कर जय ने बाहर चारो तरफ नजर घुमाई, बाहर सब नजारा सुनसान था, कही कही बाइक चलने की आवाजे आ रही थी. जय ने आगे कदम बढ़ाये, चलते चलते उसजे पैर को एक ठोकर लगी, उस ठोकर से सभल कर जय ने निचे देखा, दरवाजे के बाहर जमीन पर एक छोटा box पड़ा था. उस box को देखते ही शुभम आगे बढ़ा और उस box को उठाने लगा.

जय : अरे अरे... रुको रुको... उसे हाथ मत लगाना...!

शुभम जय की बात सुन कर वही रुक गया, उस निचे पड़े box को जय ने फिर पैरो से ठोकर मारी जय अंदाजा ले रहा था के आखिर box है किस चीज से भरा, पर जय के ठोकर से box easily सरक रहा था. जय ने उस box को हाथो मे उठा लिया और उसे हिला कर जांचने लगा के अंदर क्या हो सकता है. पर box के अंदर से कुछ भी आवाजे आ ही नही रही थी. उस box को जय घर मे ले आया, और उर्वशी के कमरे की और चलने लगा.

जय : शुभम... दरवाजा बंद कर दो...!

शुभम ने दरवाजा बंद कर दिया और जय के कदमो पे कदम रख कर उसके पीछे पीछे चलने लगा. उर्वशी bed पर नंगी ही पडी हुईं थी, परदे के पीछे से जय और जय के पीछे चलते हुवा शुभम को देख कर उर्वशी सतर्क हो कर सम्भले लगी, उर्वशी ने उसके लोशन से भीगे हुए नंगे बदन पर चादर ओढ़ ली.

उर्वशी के bed के निचे लगभग आधी हो चुकी लोशन की बोतल, खुर्सी पर पडी उर्वशी की गोल्डन designer bra जिसपर खूबसूरत जालीदार rectangular छेद थे, और बाथरूम के पास उर्वशी की golden designer panty जिसपर भी जालीदार गोल गोल छेद साफ दिख रहे थे. उर्वशी के room का सारा नजारा शुभम निहार रहा था. उर्वशी के room मे घूम कर शुभम उर्वशी की panty और bra बड़ी सहजता और बेबाकी से उठा रहा था, उर्वशी की bra उठा कर शुभम उसकी जालीदार गोल cups पर बार बार हथेली गोल घुमा रहा था. उसकी panty की जाली पर उंगलियां फेर रहा था. आज शुभम की नजरों मे अजीब सी बेशर्मी थी, चेहरे पर अश्लील चमक थी. और ओठों पर अजीब creepy स्माइल थी. शुभम ने कदम आगे बढ़ाये, बड़ी बेशर्मी से अपनी mom के नजरो मे नजर डाल कर एक टक देखने लगा, और निर्लज्जता से हसते हुए उर्वशी की panty और bra उर्वशी को देते हुए बोलने लगा.

शुभम : ये लो mom...बाद मे पहन लेना...!

अपने बेटे की बदली हुईं नजाकत और बेबाक अंदाज उर्वशी गौर से भाप रही थी, शुभम का बदला हुवा ये रूप आज उर्वशी पहली बार देख रही थी. शुभम के बदले हुए ढंग से उर्वशी आश्चर्यचकित हो चुकी थी. उसके चेहरे का कामवासना से भरा रंग उड कर बेरंग हो गया था. और सांसे धीमी हो कर उर्वशी सुन्न सी हो गई थी. शुभम और उर्वशी के बिच हुए इस घटना को देख कर जय उर्वशी का हाल समझ गया, दोनों को इस अजीब चक्कर से निकालने के लिए जय ने पहल की और बोलने लगा...

जय : बाहर ये box मिला...!

उर्वशी : बाहर कौन था...? क्या हुवा...? इस box मे क्या है...?

जय : बाहर कोई नही था... कोई बाहर ये box रख कर चला गया...!

शुभम : जय unckle इसे खोल कर देखना चाहिए...!

शुभम ने Dressing table पर पड़े हुए कटर को उठा कर जय को सौंप दिया. जय ने देरी ना करते हुए उस box का rapper फाड़ दिया. Box खोल कर देखने लगा. Box के ऊपर ही एक hand written letter मिला, उस letter के निचे खूब सारी रंगबिरंगी panty भी पडी हुईं थी. जय उस letter को उठा कर पढ़ने लगा.

"खूबसूरत उर्वशी को मेरे लंड की सलामी....उस दिन तुम्हे खूब चोदना चाहता था, पर तुम्हारे कमजोर लडके ने मेरा और तुम्हारा अच्छा खासा चलता हुवा game ख़राब कर दिया, तुम चाहो तो हम दोनों वही खेल फिर से सुरु कर सकते है. सोच कर जरुर बताना. उस दिन तुम्हारी panty मेरे जेब मे ही रह गई थी उसे वापस भेज रहा हु. साथ मे मेरे पसंद की दूसरी panty भी भेज दी है उसे भी पहना करो और sexy दिखोगी...

तुम्हे चोदने की चाहत रखने वाला... आर्यन"
 
Update 23

आखिर कार जय ने अपना रंग दिखा ही दिया. जैसे किसी शेर के मुंह इंसानि खून लगने के बाद वो आदमखोर नरभक्षी बन जाता है वैसे ही आर्यन का हाल था, उर्वशी का नर्म ग़दराराये हुए बदन की गर्मी, गोरी रंगत, खूबसूरत और उसके आकर्षक उभार को भला वो अब कैसे भूलता. उर्वशी की जवानी के मजे पाने के लिए लिए आर्यन किसी भी हद तक जाने को तैयार था अब ये Prof हो गया. उसने जो designer panty भर कर box भेजा था और साथ मे जो letter था उस से साफ हो गया के आर्यन उर्वशी को फिर से अपनी आगोश मे लेना चाहता था, चाहे छल से हो या बल से हो. इतना ही नहीं शुभम से बेखौफ आर्यन अकेली उर्वशी को indirectly धमका भी रहा था. परिस्थिति का मारा बेचारे शुभम बस यहि सोच रहा था के अब इस का क्या अंजाम होगा, कैसे इस से निपटा जाए, क्या किया जाए.

आर्यन के उस letter को जय ने खड़ी आवाज मे पढ़ लिया, आर्यन के लिखें शब्द जय के आवाज मे गूथ कर उर्वशी के कानो से होते हुए उसके कलेजे मे मानो बारूद दाग रहे थे. वो 3-5 lines का letter मे लिखें शब्दों को सुन कर उर्वशी डर से कापने लगी. उसके ओठ थरथराने लगें, चेहरा रंगत बदल कर लाल पीला हो गया, और अचानक उसके बदन मे ठंड भर गई. डर के मारे उसकी आत्मा ठिठुरने लगी. उसने अपने घुटने पेट पर खींच लिए, बदन सिकुड़ लिया और चादर लपेट कर ठीठुरने लगी. गर्मी से भरे मई के महीने के इस रात मे उर्वशी डर के मारे ठंड से कापने लगी. जिस प्रकार एक 21 साल के लड़के ने 39 उमर की महिला की दयनीय दशा कर दी उस से डर पनापना लाजमी था.

जय और शुभम उर्वशी के इस डर को भाप चुके थे, एक दूसरे के तरफ देखते हुए सोचने लगें के अब क्या किया जाए, आर्यन नाम का तूफान फिर एक बार उनके बिच तबाही लाने मंडरा रहा था, अब इस को कैसे रोका जाए.

जय : उर्वशी, डरो नहीं...! मै इसका इलाज कल ही कर दूंगा...! ये आर्यन है क्या चीज, ऐसे कई बिगड़े हुए लड़को को सीधा कर चूका हु....!

पर उर्वशी पर जय के शब्दों का कोई असर नही पड़ा, अपने बेटे की आने वाली exam के बेटे के सामने उस खुद उर्वशी के एक गलती के वजह से आने वाले परिणाम से उर्वशी अंदर से तूट रही थी. उसके मन मे अलग ही भय का दानव घूम रहा था, असामान्य ताकत का मालिक आर्यन ने उर्वशी की जिस बेरहमी से लि थी, जिस तरीके से आधी रात तक उर्वशी को आर्यन ने बजाया था, थका कर पसीना पसीना कर दिया था वो मंजर फिर उसके मन बदन पर आघात करने लगा. आर्यन का मूसलाकार मजबूत लंड के वार से उर्वशी के अंदर तक बने जख्म फिर ठनक उठे. उसके गुदाद्वार मे अजीब सी टिस ऐसे जाग उठी मानो के आर्यन का लंड अब भी उर्वशी के गांड मे कस कर फसा पड़ा हो. उसके स्तनों के निशाने-घाव सनसना कर ऐसे दुखने लगें मानो के अब भी उर्वशी के स्तन आर्यन के दांतो की पकड़ मे हो. उसकी अजीब हसीं की गूंज उर्वशी के कानो से मन मे बसें यादो को कुरेद कर सनसना रही थी, उसके पसीने की उग्र बू उर्वशी के नाक मे अभी भी ताज़ा थी, जो उसके वही होने का आभास करा रही थी.

शुभम : mom...! आप डरो नहीं...! सब ठीक हो जायेगा...! मै आप के साथ हु...! आप परेशान ना हो...!

उर्वशी का मनोबल नस्ट हो चूका था, उसकी मनोदशा जय भाप रहा था, कही ना कही जय उर्वशी को चाहता भी था, दोनों का एक दूसरे से लगाव भी था. जय किसी भी तरह उर्वशी को इस डर से बाहर निकलना चाह रहा था. उसने कदम आगे बढ़ाये और उर्वशी के माथे पर हाथ घुमाते हुए एक मर्दानगी भरे आवाज मे बोलने लगा.

जय : इस आर्यन को ऐसा सबक सिखाऊंगा के कभी खड़ा नही हो पायेगा...! इसे किसी को छेड़ने लायक नहीं छोडूंगा.

शुभम : इस आर्यन ने मुझे धोका दिया, मेरी mom के साथ इतना बड़ा जुलम किया है, मै भी कसम खाता हु के इसे मै छोडूंगा नही. इसको बहोत तड़पा कर पीटूंगा.

एक नवजावान आशिक अपनी 39 age की माशूका के इस हालत को देख कर तड़प रहा था. उसी के सामने उसकी माशूका को कोई बाहरी नर निचे लेने की बात कर रहा था इस से एक आशिक आगबबूला हो रहा था. और एक बेटा अपनी mom की दुर्दशा देख कर तड़प रहा था, उसी के दोस्त ने उसी के mom k साथ जो कांड किया था उस से शुभम के अंदर बदले का ज्वालामुखी उबलने लगा, हलाकि वो जानता था के आर्यन के आगे वो खुद तिक नही पायेगा पर फिर भी उसके अंदर बनती हुईं बदले की आग उसे बदल रही थी. उसे अपने कमजोरी का आभास दे रही थी अब यहि बदले की आग उसके नेक मन मस्तिक्ष को पाप करने के लिए आमादा करने के लिए उकसा रही थी. जय और शुभम उर्वशी को धीरज बंधा रहे थे. इस सब का बदला भी लिया जायेगा इसका कसमे भी खा रहे थे. उर्वशी के bed पर बैठ कर दोनों नर एक जिद पर आ गए थे. दो जवान नरो के सुरक्षा मे रह रही उर्वशी मादा के लिए भेजा हुवा वो letter और उसमे लिखें हुए शब्द बाहरी नर की घर के अंदर के नरो के लिए खुली चुनौती थी. वो चुनौती किसी रंजिश मे बदलने वाली थी. इतिहास गवाह है जब भी दुनिया मे रंजिशे हुईं है उसके पीछे तीन ही वजह होती है. "जमीन, जोरू और जायदाद" ये तीनो ऐसी चीज है जिसे हासिल करने के लिए मर्द किसी भी हद को पार जाते है. इन तीनो को पाने के लिए ही मर्द मेहनत करते है. इसी के बटवारे के लिए परिवार के लोग एक दूसरे के खिलाफ खड़े होते है, जोर आजमाइश होती है, मर्द लड़ते है, इसी ख्वाहिश मे जीते है, मारते है. और जमीन, जोरू और जायदाद इसी के लिए दुनिया मे छिना झपटी होती है.

खैर शुभम और जय की बात सुन कर उर्वशी थोड़ी संभलने लगी. अब उसके साथ उसका समझदार बेटा हिम्मत बांध कर खड़ा था. उसका ताकतवर आशिक भी था. जय की ताकत उसकी सूजबुझ और उसकी हिम्मत के बल पर दोनों माँ बेटे मे नई उम्मीद जाग रही थी.

उर्वशी : जय कुछ भी करो पर इस नालायक आर्यन से मेरा पीछा छुड़ा दो...!

जय : baby तुम परेशान ना हो... इस चूजे को ज्यादा फ़डफडाने नही दूंगा, कल ही इसके पर कुतरने का इंतज़ाम करता हु...!

उर्वशी : तुम चाहे जो भी करो, उसकी कीमत मै दे दूंगी पर इस निच का साया मेरे घर से हटा दो...!

जय : ऐसी बात है तो कल के बाद वो यहां गलती से भी भटकेगा नही, but कीमत तो देनी पड़ेगी...! क्या कहते हो शुभम..?

शुभम : हा...! पर मै खुद उसे अपने हाथो से कूटना चाहता हु...! वो जहाँ दिखेगा वहा उस को पीटना चाहता हु...!

पर आर्यन के मामा की ऊपर पोहोच है, उसके मामा पूर्व विधायक के खास है.

जय : होंगे...तुम अब उतना ना सोचो...! कल उसे मै देख लूंगा.

उर्वशी : शुभम तुम इस सब से दूर रहो... पढ़ाई पर focus करो..,

शुभम : नही mom...! मै उस एहसान फरामोश को तड़पता हुवा देखना चाहता हु. बस यहि मेरी एक जिद है.

जय : वो सब तो ठीक है. पर planning मेरी होंगी, वक्त भी मै decide करूँगा. तुम्हे भी उसे तड़पते देखने का मौका मिलेगा.

उर्वशी कल का दिन उस आर्यन के मस्ती का आखरी दिन होगा. अब तुम सो जाओ, मै भी जा रहा सोने, चलो शुभम.

उर्वशी : जो लड़का आधी रात घर के बाहर box रखवा सकता है वो और भी कुछ कर सकता है जय. मुझे उसका बड़ा डर लग रहा है. क्या आज के दिन यहि सो सकते हो.?

जय : मेरे होते हुए तुम्हे डरने की बात नही. पर ठीक है, शुभम तुम उर्वशी के bed पर हो लो मै यहां निचे गद्दी बिछा देता हु.

शुभम : ठीक है जय unckle...! Mom अब आप बेफिक्र हो कर सो जाओ...!

रात के 12.50 बज रहे होते है. जय और शुभम की बातो से उर्वशी के जान मे जान आजाती है. Bed पर पडी उर्वशी अब सोचने लगती है. "अरे अब ये क्या परेशानी है, मैंने तो panty और bra पहनी हुईं है ही नही. अब मेरा बेटा मेरे ही bed पर सोने वाला है. कब तक चादर ओढ़ कर सोऊंगी, नींद मे कही चादर फिसल कर खिसक गई तो क्या होगा. मेरा बेटा क्या सोचेगा. एक ही bed पर सोते हुए वो मुझसे दुरी भी बना पायेगा भी या नही. आज तो बुरी फस गई. पर अब क्या कर सकती हु. शुभम ने खुद ज़ब मुझे panty पहनने को कहा था तब उसे इतना तो पता था के मै bed मे चादर के अंदर nude ही हु. वैसे भी वो अपने room मे सोने जा रहा था. मेरे लिए ही तो यहां रुका है. कोई बात नहीं वो मुझे समझता है. मेरी हालात भी उसे पता है. वो बुरा नही मानेगा. " ये सब सोचते सोचते उर्वशी कब सो गई पता भी ना चला.

उर्वशी के bed के निचे जो drover था उसे खींच कर जय उसमे से एक चाबी का गुच्छा उठा लेटा है, उसमे से एक चाबी निकाल कर एक अलमारी खोलने लगता है, शुभम अंदर का नजारा देख ना पाए इस लिए जय अलमारी का बस एक पल्ला इतना ही खोलता है के जिस से उसे उसकी जरुरत का सामान उठाने मे आसानी हो. उस अलमारी मे से जय एक cigarette packet उठा लेता है, और अलमारी बंद कर के चाबीया अपने स्थान पर रख देता है. दबे पाव बाथरूम की और बढ़ते हुए जय dressing table पर पडी माचिस उठा कर बाथरूम मे घुस जाता है. शुभम ये सब देखता है फिर भी नजरअंदाज कर देता है. पर उसके मन मे अब ये इच्छा जाग जाती है के उस अलमारी मे आखिर ऐसा क्या है जिसे उर्वशी हमेशा locked ही रखती है, जय आखिर क्यों अलमारी के अंदर का नजारा शुभम की नजरों से दूर रखना चाह रहा है, अब ज़ब के शुभम ने चाबया रखने का drower देख लिया था उसके मन मे अब अलमारी के अंदर क्या है ये देखने की इच्छा भी हो रही थी.

जय आखिर बाथरूम मे क्या चीज ले गया यह देखने का कीड़ा शुभम के अंदर जागने लगता है. पानी पिने के बहाने शुभम उठ कर बाथरूम मे झाँकने लगता है. बाथरूम के दरवाजे के पास जाते ही उसे cigarette की धुएँदार बू आने लगती है. और अंदर झाँकते ही शुभम देखता है के जय बाथरूम मे खड़ा है उसके हाथ मे एक जलती हुईं cigarette है और जय उस cigarette के कश ले रहा है. शुभम वहा से हट कर उर्वशी के bedroom की lights off कर देता है. पर उसके मन मे कुछ अलग ही नये ख़यालात rise हो रहे थे. Bed पर पड़ा पड़ा शुभम सोचने लगा. "आज mom बहोत डरी हुईं है, मुझे उसे संभालना पड़ेगा, उसका डर दूर करना पड़ेगा. मेरे प्यार और सहारे की उसे सख्त जरुरत है. Mom bed मे चादर ओढ़ कर अंदर nude है तो क्या हुवा है तो mom ही. जब जय उसे nude छू सकता है, beby बोल सकता है, उसके संग मस्ती कर सकता है, तो मै दुलार क्यों नहीं सकता, मै तो उसी का बेटा हु. Mom मेरे प्यार और दुलार से better feel करेंगी, उसे बुरा थोड़े न लगेगा." Bed पर पड़े पड़े शुभम ये सब सोचते सोचते इंतजार करता है के कब जय बाथरूम से निकल कर बाहर आएगा और सो जायेगा. तभी बाथरूम के दरवाजे की आवाज आती है... खट खट..

जय बाथरूम से निकल कर बाहर आने लगता है. शुभम और उर्वशी की और देखता है, दोनों शांति से bed पर लेटे देख कर जय अब अपने सोने का इंतजाम करने लगता है. जय शुभम के room के दूसरे bed की एक गद्दी उठा लाता है और उर्वशी के bed के बगल मे बिछा देता है. उसपर तकिया रख देता है और आराम से सो जाता है.





जय को सोते हुए शुभम देखता है. अब वो बेफिक्र होजाता है. उसके मन मे एक film सी चलने लगती है, कल्पना के परदे पर उसे bed पर सोइ खूबसूरत उर्वशी दिखने लगती है. उर्वशी जो उसी की mom है, जिसने उसे जना है उसी के संग romans के अश्लील ख्वाब शुभम देखने लगता है. अपनी mom को बाहो मेरे पकड़ कर kiss करने और उसके बदन के उभरो को छेड़ने की कल्पना मे डूबता शुभम कामवासना से के झूले मे झूलने लगता है. इस सब कल्पना से उसके लिंग मे तनाव आ कर नसे अकड़ने लगती है. अब उसके मन मे mom के करीब जाने की इच्छा होने लगती है. धीरे धीरे आगे बढ़ता हुवा शुभम उर्वशी के चादर मे अपने बदन को घुसाना सुरु करता है. शुभम के हरकतो से बेखबर उर्वशी सो चुकी होती है, इसी बात का शुभम फायदा उठाना चाहता है. इंच by इंच आगे सरकता हुवा शुभम उर्वशी के पास जा पोहोचता है. दाहिने करवट ले कर उर्वशी सो रही होती है और उसी के सामने शुभम बाई करवट ले कर बड़ी बेबाकी से आगेकूच कर रहा होता है. उर्वशी का खूबसूरत चेहरा नीहारते हुए शुभम के ओठों पर एक रंगीन सी मुस्कुराहट और आँखो मे प्यार की चमक भरने लगती है. उसके बदन पर अजीब इश्किया अंदाज छाने लगता है. उस के सासो की गर्म मादक गंध शुभम को और पास जाने के लिए प्रेरित करने लगती है. अब ac की ठंड हवा मे बिखरती दोनों मा बेटे की सांसे एक दूसरे से टकराने लगती है.

शुभम के अंदर अजीब बदलाव था, अनोखी प्यार भरी नजरों से अपनी mom को निहार रहा था. उसके सासो की गंध शुभम को जबरन खींच रही थी. उर्वशी के बदन की मादक खुशबु शुभम को कामुक कर रही थी. दिल की धडकने तेज हो गई थी. मन मे हलकी सी चुभन मीठी सी जलन से विभोर हो रहा था. उसके दोनों मासूम आँखो से आंसू की धारा निकल कर न जाने क्यों बह रही थी. उसके चेहरे पर सुकून छाया हुवा था और सासो मे अजीब गहराई थी. शुभम आज पहली बार love की गुलाबी feelings अनुभूव कर रहा था. शुभम जो feelings अनुभव कर रहा था वो feelings बस सिर्फ वासना नही थी, ना ही बस सिर्फ हवस थी, उस feelings मे शुभम के अंदर का पहला प्यार बसा था, उसके सीने मे पहली गुलाबी धड़कन धड़क रही थी.

अचानक उर्वशी की आँख खुली. उर्वशी देखती है के उसके बेड मे चादर के अंदर उसका बेटा उस के सामने है. रो रहा है, आंसू बहा रहा है. शुभम को निहारे हुए उर्वशी समझ रही थी के उसका बेटा किसी कारण emotional हो रहा है. शुभम के गिरते आंसू देख कर उर्वशी के मन मे ममता का झरना फुट पड़ा.

उर्वशी : क्यों रो रहा है... मेरा बेटा...?

शुभम : mom🥹 I LOVE YOU💓... MOM🥹 I REALLY LOVE YOU💓... 🫶

उर्वशी : ओले ओले मेरा बच्चा...!

उर्वशी की कुर्बत भरी आवाज से शुभम को सुकून सा लगने लगा, उसने बड़े प्यार से उर्वशी के घने मुलायम बालो की लटाये चेहरे से सरकाई, अपने दोनों कोमल हाथो से उर्वशी का खूबसूरत चेहरा पकड़ा और उर्वशी का माथा चुम लिया. शुभम के गिरते आंसू, फुटते emotions और उसके बोले हुए बोल से उर्वशी के ममताभरे कलेजे मे कश्मीर सी ठंडक छाने लगी. उर्वशी के चेहरे पर वात्सल्य का नूर चमकने लगा. राफत भरी नजरों से अपने सुपुत को निहारने लगी.

उर्वशी : आजा.. आजा मेरे बाबू... मेरे पास आजा...!

उर्वशी ने अपने बेटे को और पास बुला लिया, अपनी दोनों बाहे खोल कर गले लगने का इशारा करने लगी. उर्वशी की बाहे खुलते देख शुभम ने झट से उसके बाहो मे अपनी दोनों बाहे गूथ डाली, उर्वशी की एक टांग ऊपर कर उर्वशी के दो टांगो k बिच मे अपनी टांग set कर डाली, और उर्वशी को लिपट कर रोने लगा. आज की रात बड़ी अजीब थी, थोड़े ही देर पहले जय को अपनी mom के संग enjoy करते देख शुभम खुश हो रहा था, उसके बाद आर्यन की धमकी सुन कर गुस्से मे जल रहा था, और अब उर्वशी को सामने देख कर मोहोब्बत भरी नजरों से रो भी रहा था. एक ही साथ आज उसमे एक cuckson और एक incist दो चरित्र पनप रहे थे. आगे उसका चरित्र क्या मोड़ लेगा इसका अंदाजा उसे भी नही था.

शुभम के गुरते आँसू उर्वशी के मोटे मुलायम स्तनों का भीगो कर मानो अभिषेक कर रहे थे. उसकी छाती उर्वशी के स्तनों को रगड़ रही थी. उसकी गर्म सांसे मानो उर्वशी के अंदर की मादा को पिघला रही थी, उसकी मजबूत पकड़ उर्वशी के बदन को दबोच रही थी. और उसकी बालो भरी जांघ उर्वशी के योनि पर घर्शन कर रही थी. पर इसके आगे शुभम गया नही, भले भी उर्वशी और जय को nude देख कर उसमे वासना का का ज्वार उमडा हुवा था पर उसे अपनी मर्यादा पता थी. सभ्यता और संस्कारो से गुथे हुए शुभम के चरित्र ने उसे इसके आगे बढ़ने से रोक लिया.

वात्सल्य से भरी उर्वशी ने भी अपने बेटे की ये हरकत को उसका प्यार मान कर पचा लिया, बल्कि उसके कलेजे मे अपने बेटे संग लिपट कर सोने से सुकून छा रहा था, उसके दर्द से सनसनाते जख्म अब ठंडे हो कर शांत होने लगें, उसके स्तनों मे मानता का उभार फूलने लगा, बदन की गर्मी शांत होने लगी और मन के सारे डर भी राहत की शांति मे बदलने लगें. बेटे के बेबाक पकड़ से उसके अंदर एक ममता उमड़ पडी थी. शुभम के age का ही वो लड़का आर्यन, जिसकी जकड़न ने उर्वशी को जख्मी कर दिया था, अब उसी age के उसी के बेटे की पकड़न ने उर्वशी के जख्म जी जलन पर ठंडक का वसंत बिखेर दिया था. अब उसे अहसास हो रहा था के वासना की नंगी जकड़न से ममता की शीतल पकड़ बड़ी मुलायम होती है. ना उसने ऐतराज़ जताया ना उसने शुभम के बाहो की पकड़ से खुद को छूडाने की कोशिश करि. और इतना ही नहीं उसके हर हरकत को बड़े दिल से स्वीकार करने लगी. वात्सल्य से भर कर उर्वशी के स्तन और फूल कर ऐसे सख्त होने लगें जैसे के अब उनसे दूध का झरना फूटने वाला हो, शुभम के आंसू से चमक रहे थे. उर्वशी के मन मे अब एक अजीब भावना जाग रही थी, ये भावना सभी भावनाओं से अलग थी, ना इसमें हवस थी ना इसमें किसी प्रकार की वासना थी, इस भावना मे शुद्ध प्रेम और वात्सल्य था, जो उसके स्तनों से मुक्त हो कर उसके बेटे के ओठों मे पोषण बन कर समाना चाहती थी. उर्वशी इसी भावना के भार से मचल रही थी, अपने बेटे के मुख मे अपने मुलायम स्तन दे कर उर्वशी फिर वही सुकून पाना चाहती थी जो सुकून बचपन मे शुभम उसके स्तन चूस कर दिया करता था.





ममता मे भर कर उर्वशी ने शुभम का चेहरा पकड़ा उसे अपने से थोड़ा दूर किया, उर्वशी के इस हरकत से शुभम उर्वशी की आँखो मे ऐसे देखने लगा मानो बोल रहा हो के "mom मै वही तुम्हारा शुभम हु जिसे तुम घंटो दूध पिलाया करती थी". उर्वशी ने एक पल शुभम का चेहरा निहारा, उसके गाल पकड़ कर सहलाये, उसके बालो मे ऊँगलीया घुमाने लगी. एक ही पल मे उर्वशी ने अपना एक स्तन पकड़ कर शुभम के आगे कर दिया, मानो उर्वशी बोल रही हो लो पी लो इसपर पहला हक तुम्हारा ही है और तुम्हारे लिए ही ये बने हुए है. फिर शुभम ने एक बार अपनी mom के चेहरे को निहारा, उसकी आँखो मे झांक कर देखने लगा, उर्वशी ने एक लंबी सास भरते हुए धीमे से आँखे बंद कर दी. और शुभम के बाल पकड़ कर उसका चेहरा अपने स्तनों पर लगाने लगी. शुभम ने भी बडे प्यार से ऊन स्तनों के निप्पल के स्वागत के लिए अपने ओठ खोल दिए. धीरे धीरे निप्पल को अंदर समाते हुए areola तक स्तनों को अंदर भर कर ऐसे चूसने लगा. जिस प्रकार शुभम उर्वशी के स्तनों को चूस रहा था उस से उर्वशी को ऐसा अहसास हो रहा था के मानो शुभम उर्वशी के प्राण ही चूस रहा हो. शुभम मुंह मे vacuum बना कर बारी बारी दोनों स्तनों को इज्जत से पी रहा था. उर्वशी की कमर मे हाथ डाल कर उर्वशी को पकड़े हुवा उसका बेटा उसके स्तन अंदर तक लेना चाहता पर उर्वशी उसके बाल पकड़ कर रोक देती उसके चुभते हुए दांत और ओठों की पकड़ मे फसे स्तनों के areola पर मजबूती से गोल घूमने वाली शुभम की जीभ उर्वशी को अलग ही आयाम मे पोहोचने लगी... धीरे धीरे उर्वशी के स्तनों के निप्पल को शुभम की नुकीली जीभ कुरेदने लगें. उसी बचपन वाले अंदाज मे आज बरसो बाद शुभम उर्वशी के स्तनों को पी रहा था, उसके निप्पल अंदर खींचे जा रहा था, शुभम के इस अंदाज से उर्वशी फिर सुकून की सांसे भरने लगी, मीठी आहे भरने लगी.





भावनाओं के बाड मे बहते दो मा बेटे एक दूसरे से लिपट कर अपना प्यार जाहिर कर रहे थे, इतना ही नहीं इस के आगे बढ़कर उर्वशी ने अपने बेटे का उसका हक फिर से वापिस कर दिया था. एक दूसरे से लिपटे लिपटे दोनों मा बेटे नींद के आगोश मे सो गए....!
 
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