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- Dec 5, 2013
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Update - 20
जय उर्वशी और शुभम को घर ले कर आ चूका था. घर आते ही उसने अधिकार सहित घरेलु व्यवहार करने सुरु कर दिए. अब तक चोरी छिपे उर्वशी को शुभम की mom को चोदने वाला जय शुभम के डर से सहमा हुवा था. पर अब जय खुल कर शुभम और उर्वशी के साथ रहना चाहता था. आर्यन एक निच निहायती छपरी और मर्यादाहीन लड़का था इस बात का अंदाजा तीनो को हो चूका था आर्यन आगे जो कारनामे करने वाला था उससे बचने के लिए जय का खुल कर रहना शुभम और उर्वशी की जरुरत भी थी.
जय : शुभम अगर तुम्हे कोई ऐतराज़ नही हो तो मै यहि निचे रुक जाता हु...! तुम्हारी exams भी आने वाली है. अब तुम fresh हो जाओ और सारी tension मुझ पर छोड़ दो, आराम से पढ़ाई करो बेटा.
शुभम : जी हा आप रुक सकते है. मुझे भी felp मिल जाएगी uncle....!
जय : सुनो उर्वशी...! Dr. Mercy ने तुम्हे bed rest लेने के लिए कहा है. तुम बस आराम करो... घर मै संभाल लूंगा.
उर्वशी : हा पर सुनिये ना...! शुभम के पापा आने वाले है तब तक सब सही हो जायेगा ना... ( उर्वशी अपने बदन पर बने निशान को देख कर चिंता जताने लगी.)
जय : तुम परेशान ना हो....! सब सही हो जायेगा... मै हु ना...!
भाबी कह कर उर्वशी को पुकारने वाला जय अब उर्वशी को नाम ले के हक से बोलने लगा. उर्वशी के लिए जय के मुंह से निकलने वाले "आप" शब्द तु और तुम मे बदल गए. छूप छुप कर उर्वशी के गोरे गदराये हुए बदन को निहारने वाली जय की नजर बिनधास्त तेज तर्रार बन गई. अब शुभम के सामने ही उर्वशी के आँखो मे आँख डाल कर जय सव्वाद करने लगा
जय अब बदल चूका था घर के अंदर के एक जिम्मेदार मुखिया मर्द जैसे किसी alfa समान behave कर रहा था. जय अब उर्वशी पर पूर्ण अधिकार जमाने लगा था. आखिर उसने खुद को शुभम का पापा बता कर उर्वशी की आबरू बचा ली थी. नादान शुभम भी जय ने दिए हुए बलिदान का अहसानमंद हो गया था. जय के हर कदम को शुभम किसी अज्ञाधारक बालक की तरह मान रहा था. बेचारे शुभम के जीवन मे आखिर था ही कौन. ना बाप का सर पर हाथ था न कोई भाई या बहन थी. ऊपर से दोस्ती मे धोका मिला. एक उर्वशी ही शुभम की "जान और प्राण" थी. जय ने उर्वशी और शुभम को जिस प्रकार संभाल लिया था उस से जय ने शुभम की वो "जान और प्राण" भी जीत लिया था. अब आगे शुभम को इस अहसान का बड़ा भारी कर्ज चुकाना पड़ने वाला था.
जय : चलो शुभम जाओ... Fresh हो कर study कर लो... Mumma को rest करने दो...मै कुछ खाने का इंतजाम करता हु...चलो भागो...!
शुभम : जी...!
उर्वशी सब देख रही थी के कैसे जय शुभम को अधिकार से पढ़ाई के लिए space दे रहा है. शुभम भी जय के आगे उसकी हर एक बात को मानता हुवा किसी बैल की तरह मुंडी हिला कर सहमति दे रहा था. शुभम और जय के इस अंदाज से उर्वशी के अंदर काफी सुकून था. जय शुभम का बोझ कम कर रहा था और शुभम भी जय को स्वीकार कर चूका था. ये एक बेटे और आशिक की अजीब जुगलबंदी बन रही थी. उर्वशी ने ऊन दोनों की बढ़ती नजदीकी अच्छे से भाप ली थी.
शुभम के जाते ही जय ने पिछला दरवाजा खोल कर ऊपर उसके flate मे जाने लगा. अदनान अभी interview से आया नही था. Flate मे जा कर उसने एक bag निकाल ली. उसमे underwear, vest, shorts, t shirt, और जरूरत का समान भर लिया. उसने उसकी बाइक बुलेट(Royal Enfield) की चाबी साथ मे ले ली. उसने flat मे जो समान बिखरा हुवा था वो सब सवार लिया. Lights off कर दिए, दरवाजा lock कर के निचे आने लगा. निचे आ कर उर्वशी के घर का पिछला दरवाजा बंद कर ऊपर lock लगा दिया. घर मे प्रवेश कर के उसने सारे खिड़कीओ के पर्दे गिरा दिए. Wall compound का gate बंद कर दिया. फिर घर मे लौट आया दरवाजा बंद करते हुए एक पल रुका, उसके मर्दाना चेहरे पर एक जिम्मेदार मर्द की चमक थी. सोच विचार कर के उसने उर्वशी के room की और कदम बढ़ाये. और उर्वशी के room मे जय पोहोच गया.
जय : सुनो उर्वशी.... मै तुम दोनों के साथ यहि कुछ दिन यहि रुकने वाला हु...! पर सामान कहा रखू...? और सोउ कहा...?
उर्वशी : store room मे रुक सकते हो आप. पर वहा न ac है न कूलर है....! शुभम के room मे रुक जाइये...! उसकी bedroom बड़ी है. double bed है और extra bed भी लगा हुवा है. वहा रुक जाइये...!
जय : ठीक है...!
जय ने उर्वशी का माथा चुम लिया. उसे अधिकार भरी नजरो से निहारा और वहा से निकल पड़ा. शुभम के room मे पोहोच कर उसने एक single bed के निचे अपनी bag सरका दी. शुभम नहा कर अपने study table पर study करने बैठा हुवा था.
जय : शुभम मै यहां बस सोने ही रुकूंगा...! परेशान ना हो... तुम्हारे study मे कोई खलल नही पड़ने दूंगा. ज़ब तक तुम पढोगे तब तक मै hall मे रुकूंगा...!
शुभम : परेशानी की कोई बात नही है unckle... आप tv यहाँ रुक सकते हो. मुझे अच्छा लगेगा... वैसे मै study करते हुए study पर ही focus रहता हु...!
जय : अच्छा... पर तुम्हे लगें के disturb हो रहे हो तो बता देना मै hall मे चला जाउंगा...ok...
शुभम : ठीक है unckle...!
जय : अच्छा शुभम हम दोनों के लिए कुछ खाने के लिए आर्डर कर दो, और तुम्हारी mom के लिए coconut और juse भी बुला लेना... ये लो मेरा मोबइल... Pasword मे मेरा मोबइल नंबर डाल देना. तब तक मै नहा लेता हु.
अब मै नहा लेता हु.
शुभम : ठीक है unckle...!
जय ने pant और t shirt उतार जर bed पर रख दी. Bag से साबुन निकाल ली और bathroom मे चला गया. Underwear निकाल ली और Shower on कर के जय ठंडे पानी से पूर्ण नंगा हो कर नहाने लगा. नहा लेने के बाद उसे याद आता है के उसने साथ मे rowel लाया ही नही. बातो बातो मे भूल गया towel तो Bag मे ही रह गया.
जय : शुभम... मेरी एक help कर दो... मेरी bag मे मेरा towel है जरा ला दो तो.
शुभम : रुकिए एक मिनिट...देखता हु...!
एक हाथ मे book और एक हाथ मे towel ले कर शुभम पढता हुवा बाथरूम की और बढ़ा. जय को लगा के शुभम bathroom के दरवाजे से अंदर हाथ डाल कर बस towel आगे सरकायेगा पर ऐसा हुवा नही. शुभम ने बाथरूम का दरवाजा खोल दिया कर जय को towel देने लगा. अभी भी उसका ध्यान book मे ही था. पर जय शुभम को देखते ही दचक गया....
जय : अरे अरे अरे.... रुको...!
जय की हड़बड़ाहट ने शुभम का focus disturb कर दिया, अब शुभम का focus book से हट कर जय की और जा टिका. जय का नग्न शरीर शुभम देख कर देखता ही रह गया. Shower से भीगा हुवा नंगा जय उसका क्रूर पर हसमुख चेहरा. हलकी हलकी groom की हुईं दाडी. लाल चमक लिए हुए काला सावला 6 फिट का ऊंचा तगड़ा जय का कसा हुवा शरीर जो पानी की बूंदो से ताज़ा हो कर तपते लोहे जैसा दमक रहा था. उसपर कसी हुईं musculs, ढाल जैसी छाती, उभरे हुए कंधे, तराशे हुए बाजु, पतली कमर, भारी भरकम कसी हुईं जांघे, और लटकता हुवा काले सरिये जैसा ताकतवर लंड देख कर शुभम भौचकित सा हो गया.
शुभम : जय unckle.... अरे यार...!
जय : अरे अरे... Sorry...!

जय के कसे हुए नंगे शरीर की image शुभम के अब मन मे बचपन मे रटे हुए poem की तरह बस गई. जय दिखने मे किसी porn star से कम नही था. नंगे बदन जय ठीक Troy francisco की देसी copy ही था. भले भी शुभम ने जय को देख कर नजरअंदाजी दिखाई पर जीस अंदाज से उसने जय को ऊपर से निचे तक निहारा जय समझ गया के शुभम जय से hypnotize हो चूका है. अक्सर नवजवान लडके imaginary sex करते है और जिस नवजवान age मे शुभम था उस से जय समझ गया के शुभम भी अब जय को ले कर अजीब imagination करेगा. अब जय शुभम का मन टटोलना चाह रहा था. आगे के लिए शुभम को जय set करना चाहता था ता के उर्वशी और जय के घनघोर चुदाई के लिए शुभम खुद जय को permission दे दे.
जय : क्या हुवा शुभम...! क्या मै इतना बुरा दीखता हु
शुभम : नहीं unckle... आप तो बहोत handsome है... सच मे...!
जय : फिर तुमने मुंह क्यों बनाया...?
शुभम : वो आप nude खड़े थे ना...!
जय : क्या मै nude होउ तो गन्दा दीखता हु...?
शुभम : आप तो nude मे भी cool लगते हो... Infact आप nude ज्यादा cool लगते हो...!
जय : अच्छा... ऐसा है तो मै तुम्हारे घर मे nude ही रह जाता हु
शुभम : अरे....
ही ही ही ही...
जय : ऐसे ही हसते रहा करो... हसते हुए बड़े अच्छे लगते हो यार...!
तभी door की बेल बजने लगी...!
शुभम : delivery boy होगा... रुकिए मै देखता हु.
शुभम door खोलता है.
Delivery boy : sir आप का आर्डर...!
शुभम : thank you...!
शुभम food parcel ले कर dining table पर रख देता है. अभी भी उसके मन मे जय के नंगे शरीर की image किसी film की तरह घूम रही थी. जय ने जो बाते शुभम को बोलि "मै तुम्हारे घर मे nude ही रह जाता हु" ये शब्द शुभम के मन मे गूंज कर कल्पना मे उतर रहे थे. जय घर मे नंगा हो कर घूमेगा तब कैसा लगेगा ईसी कल्पना मे शुभम खोया हुवा था. गुम सा लग रहा था. तभी जय वहा आता है. पर शुभम का मन कही और ही गायब था, जय के आने शुभम को कोई फरक ही नही पड़ा मानो के उसे पता भी न लगा हो के जय वहा उपस्थित है.
जय : किस खयालो मे गुम हो शुभम. (जय ने शुभम के पीठ पर प्यार से सहलाते हुए पूछा)
शुभम : hmmm... नहीं तो कुछ नही...!
जय : यहि सोच रहे हो ना के मै काला हु, गंदा दीखता हु, और nude ज्यादा गंदा हु...!
शुभम : अरे unckle... ऐसा नही है... चलिए ठीक है गर्मी भी बहोत है आप मेरे room मे जैसे चाहो वैसे रहिए... Nude भी चलेगा...!
जय : अरे नहीं यार... पर तुम कहो तो रह लूंगा...! चलो अब कुछ खा लेते है...! उर्वशी के room मे ही चले वही better रहेगा...?
शुभम : okk...
जय और शुभम मुस्कुराते हुए उर्वशी के room मे चले आते है. जय वही bed के पास एक खुर्सी लगा कर बैठ जाता है. उर्वशी के bed पर सोइ हुईं होती है. शुभम उर्वशी को जगाने लगता है.
शुभम : मम्मी... उठो कुछ juse पी लो आप...!
उर्वशी उठ कर bed पर बैठ जाती है. तीनो मिल कर अब पेट पूजा करते हुए बाते करने लगते है.
उर्वशी : जय... तुमने जो मेरे लिए इतना सब किया और अब भी कर रहे हो तुम्हारा कैसे शुक्रिया अदा करूं कुछ समझ नही आ रहा...!
शुभम : हा unckle... मै भी आप का बहोत शुक्रियाअदा करना चाहता हु...!
जय : कैसी बाते करते हो आप दोनों... Kya मै आप को आप का अपना नही लगता...!
उर्वशी : हा अब तो तुम हम मे से ही हो गए हो... पर मेरे ये जख्म और इनसे बनने वाले दाग़ जायेंगे कैसे... उसकी चिंता हो रही है...!
जय : dr. Mercy ने तो कहा है के वो दिए हुए lotions टाइम पर लगाए तो आप जल्दी ठीक हो जाओगी...! शुभम के हाथो लगा लीजिये...! क्यों शुभम...! उर्वशी को लोशन लगा दोगे ना...?
जय की ये बात सुन कर शुभम सुन्न सा रह गया. जय के शब्द सुन कर शुभम के आँखो के सामने एक कल्पना film सी चलने लगी. के कैसे वो खुद की mom के बदन को नंगा कर रहा है. खुद के mom के नंगे बदन पर धीरे धीरे लोशन लगा रहा है. इस कल्पना ने शुभम का जमीर एक पल के लिए हिला दिया पर उसने होश संभाल कर सोचा भले भी उसने उर्वशी को कई बार नंगी देखि हो, जय के साथ सोते देखा हो या आर्यन के निचे भी देखा हो पर वो ये काम नही कर पायेगा इतना वो जान गया. जय के खड़े किये हुए question mark का answer शुभम के लिए ना ही था. अब इस कारण उसके चेहरे का रंग भी उड गया. उर्वशी ने एक टुक शुभम की और देखा, शुभम का सूखा मुंह देख कर बेटे की दुविधा माँ जान गई और बोल पडी.
उर्वशी : नही नही... मै खुद लगा लुंगी....!
जय उर्वशी की हालत जानता था, उर्वशी उसके शरीर पर खुद के बेटे का हाथ नही चाहेगी यह वो जानता था, शुभम भी उसके mom के अछूते भाग को छू ना पाता, ना ही शुभम ये कर सकता था. इसलिए जय खुद शुभम के मुंह से जय और उर्वशी का नाजायज स्पर्श कबूलना चाहता था. तीनो अब शांत हो चुके थे. कोई कुछ बोलना ही नही चाहता था उर्वशी इस चिंता मे थी के नंदकिशोर घर वापस आने से पहले कैसे भी कर के ज़ख्म सुख जाए और दाग भी मीट जाये. पर शुभम की exams भी है इसलिए खुद के देखभाल का भार शुभम pr लाद कर शुभम को disturb भी ना हो इसकी चिंता भी उसे सता रही थी. जय इस फिराक मे था के उर्वशी के मदमस्त बदन पर लोशान मलहम लगाने के बहाने उसके नर्म मुलायम बदन की मालिश करने का मौका मिल जाए. और खुद शुभम मजबूरन उसको इस काम की permission दे दे. पर बेचारा शुभम सबसे बड़ी दुविधा मे फसा हुवा था. वो ये चाहता था के उर्वशी के जख्म भर जाए पर इस काम मे वो खुद उर्वशी की कोई मदत नही कर सकता था. ना वो इतनी सहजता से जय को उर्वशी के इतना नजदीक आने देना चाहता था. कुछ सोच विचार कर के शुभम बोल पड़ा.
शुभम : मम्मी जहाँ मै लगा सकता हु वहा लगा दूंगा... बाकि आप ही लगा लेना...!
जय : हा उर्वशी... इतना क्या सोचना... बेटा ही तो है...!
उर्वशी : hmmm... ठीक है...!
जय : शुभम देखो उर्वशी को टाइम पर दवाई देना है और टाइम पर ही लोशन लगाना है. उर्वशी के खाना खाने के बाद के तीन time याद रखना मॉर्निंग मे 10 am. Afternoon 4 pm और night मे 10 pm, ऐसा करोगे तो तुम्हारी mom जल्दी ठीक हो जाएगी. और हा कुछ भी जरुरत पड़े तो मुझे याद करना.
शुभम : ठीक है unckle...!
जय : देखो अभी 9.30 pm हो रहे है. थोड़ी देर मे लगा सकते हो. Ok...! मै चला सोने...!
जय उर्वशी और शुभम को घर ले कर आ चूका था. घर आते ही उसने अधिकार सहित घरेलु व्यवहार करने सुरु कर दिए. अब तक चोरी छिपे उर्वशी को शुभम की mom को चोदने वाला जय शुभम के डर से सहमा हुवा था. पर अब जय खुल कर शुभम और उर्वशी के साथ रहना चाहता था. आर्यन एक निच निहायती छपरी और मर्यादाहीन लड़का था इस बात का अंदाजा तीनो को हो चूका था आर्यन आगे जो कारनामे करने वाला था उससे बचने के लिए जय का खुल कर रहना शुभम और उर्वशी की जरुरत भी थी.
जय : शुभम अगर तुम्हे कोई ऐतराज़ नही हो तो मै यहि निचे रुक जाता हु...! तुम्हारी exams भी आने वाली है. अब तुम fresh हो जाओ और सारी tension मुझ पर छोड़ दो, आराम से पढ़ाई करो बेटा.
शुभम : जी हा आप रुक सकते है. मुझे भी felp मिल जाएगी uncle....!
जय : सुनो उर्वशी...! Dr. Mercy ने तुम्हे bed rest लेने के लिए कहा है. तुम बस आराम करो... घर मै संभाल लूंगा.
उर्वशी : हा पर सुनिये ना...! शुभम के पापा आने वाले है तब तक सब सही हो जायेगा ना... ( उर्वशी अपने बदन पर बने निशान को देख कर चिंता जताने लगी.)
जय : तुम परेशान ना हो....! सब सही हो जायेगा... मै हु ना...!
भाबी कह कर उर्वशी को पुकारने वाला जय अब उर्वशी को नाम ले के हक से बोलने लगा. उर्वशी के लिए जय के मुंह से निकलने वाले "आप" शब्द तु और तुम मे बदल गए. छूप छुप कर उर्वशी के गोरे गदराये हुए बदन को निहारने वाली जय की नजर बिनधास्त तेज तर्रार बन गई. अब शुभम के सामने ही उर्वशी के आँखो मे आँख डाल कर जय सव्वाद करने लगा
जय अब बदल चूका था घर के अंदर के एक जिम्मेदार मुखिया मर्द जैसे किसी alfa समान behave कर रहा था. जय अब उर्वशी पर पूर्ण अधिकार जमाने लगा था. आखिर उसने खुद को शुभम का पापा बता कर उर्वशी की आबरू बचा ली थी. नादान शुभम भी जय ने दिए हुए बलिदान का अहसानमंद हो गया था. जय के हर कदम को शुभम किसी अज्ञाधारक बालक की तरह मान रहा था. बेचारे शुभम के जीवन मे आखिर था ही कौन. ना बाप का सर पर हाथ था न कोई भाई या बहन थी. ऊपर से दोस्ती मे धोका मिला. एक उर्वशी ही शुभम की "जान और प्राण" थी. जय ने उर्वशी और शुभम को जिस प्रकार संभाल लिया था उस से जय ने शुभम की वो "जान और प्राण" भी जीत लिया था. अब आगे शुभम को इस अहसान का बड़ा भारी कर्ज चुकाना पड़ने वाला था.
जय : चलो शुभम जाओ... Fresh हो कर study कर लो... Mumma को rest करने दो...मै कुछ खाने का इंतजाम करता हु...चलो भागो...!
शुभम : जी...!
उर्वशी सब देख रही थी के कैसे जय शुभम को अधिकार से पढ़ाई के लिए space दे रहा है. शुभम भी जय के आगे उसकी हर एक बात को मानता हुवा किसी बैल की तरह मुंडी हिला कर सहमति दे रहा था. शुभम और जय के इस अंदाज से उर्वशी के अंदर काफी सुकून था. जय शुभम का बोझ कम कर रहा था और शुभम भी जय को स्वीकार कर चूका था. ये एक बेटे और आशिक की अजीब जुगलबंदी बन रही थी. उर्वशी ने ऊन दोनों की बढ़ती नजदीकी अच्छे से भाप ली थी.
शुभम के जाते ही जय ने पिछला दरवाजा खोल कर ऊपर उसके flate मे जाने लगा. अदनान अभी interview से आया नही था. Flate मे जा कर उसने एक bag निकाल ली. उसमे underwear, vest, shorts, t shirt, और जरूरत का समान भर लिया. उसने उसकी बाइक बुलेट(Royal Enfield) की चाबी साथ मे ले ली. उसने flat मे जो समान बिखरा हुवा था वो सब सवार लिया. Lights off कर दिए, दरवाजा lock कर के निचे आने लगा. निचे आ कर उर्वशी के घर का पिछला दरवाजा बंद कर ऊपर lock लगा दिया. घर मे प्रवेश कर के उसने सारे खिड़कीओ के पर्दे गिरा दिए. Wall compound का gate बंद कर दिया. फिर घर मे लौट आया दरवाजा बंद करते हुए एक पल रुका, उसके मर्दाना चेहरे पर एक जिम्मेदार मर्द की चमक थी. सोच विचार कर के उसने उर्वशी के room की और कदम बढ़ाये. और उर्वशी के room मे जय पोहोच गया.
जय : सुनो उर्वशी.... मै तुम दोनों के साथ यहि कुछ दिन यहि रुकने वाला हु...! पर सामान कहा रखू...? और सोउ कहा...?
उर्वशी : store room मे रुक सकते हो आप. पर वहा न ac है न कूलर है....! शुभम के room मे रुक जाइये...! उसकी bedroom बड़ी है. double bed है और extra bed भी लगा हुवा है. वहा रुक जाइये...!
जय : ठीक है...!
जय ने उर्वशी का माथा चुम लिया. उसे अधिकार भरी नजरो से निहारा और वहा से निकल पड़ा. शुभम के room मे पोहोच कर उसने एक single bed के निचे अपनी bag सरका दी. शुभम नहा कर अपने study table पर study करने बैठा हुवा था.
जय : शुभम मै यहां बस सोने ही रुकूंगा...! परेशान ना हो... तुम्हारे study मे कोई खलल नही पड़ने दूंगा. ज़ब तक तुम पढोगे तब तक मै hall मे रुकूंगा...!
शुभम : परेशानी की कोई बात नही है unckle... आप tv यहाँ रुक सकते हो. मुझे अच्छा लगेगा... वैसे मै study करते हुए study पर ही focus रहता हु...!
जय : अच्छा... पर तुम्हे लगें के disturb हो रहे हो तो बता देना मै hall मे चला जाउंगा...ok...
शुभम : ठीक है unckle...!
जय : अच्छा शुभम हम दोनों के लिए कुछ खाने के लिए आर्डर कर दो, और तुम्हारी mom के लिए coconut और juse भी बुला लेना... ये लो मेरा मोबइल... Pasword मे मेरा मोबइल नंबर डाल देना. तब तक मै नहा लेता हु.
अब मै नहा लेता हु.
शुभम : ठीक है unckle...!
जय ने pant और t shirt उतार जर bed पर रख दी. Bag से साबुन निकाल ली और bathroom मे चला गया. Underwear निकाल ली और Shower on कर के जय ठंडे पानी से पूर्ण नंगा हो कर नहाने लगा. नहा लेने के बाद उसे याद आता है के उसने साथ मे rowel लाया ही नही. बातो बातो मे भूल गया towel तो Bag मे ही रह गया.
जय : शुभम... मेरी एक help कर दो... मेरी bag मे मेरा towel है जरा ला दो तो.
शुभम : रुकिए एक मिनिट...देखता हु...!
एक हाथ मे book और एक हाथ मे towel ले कर शुभम पढता हुवा बाथरूम की और बढ़ा. जय को लगा के शुभम bathroom के दरवाजे से अंदर हाथ डाल कर बस towel आगे सरकायेगा पर ऐसा हुवा नही. शुभम ने बाथरूम का दरवाजा खोल दिया कर जय को towel देने लगा. अभी भी उसका ध्यान book मे ही था. पर जय शुभम को देखते ही दचक गया....
जय : अरे अरे अरे.... रुको...!
जय की हड़बड़ाहट ने शुभम का focus disturb कर दिया, अब शुभम का focus book से हट कर जय की और जा टिका. जय का नग्न शरीर शुभम देख कर देखता ही रह गया. Shower से भीगा हुवा नंगा जय उसका क्रूर पर हसमुख चेहरा. हलकी हलकी groom की हुईं दाडी. लाल चमक लिए हुए काला सावला 6 फिट का ऊंचा तगड़ा जय का कसा हुवा शरीर जो पानी की बूंदो से ताज़ा हो कर तपते लोहे जैसा दमक रहा था. उसपर कसी हुईं musculs, ढाल जैसी छाती, उभरे हुए कंधे, तराशे हुए बाजु, पतली कमर, भारी भरकम कसी हुईं जांघे, और लटकता हुवा काले सरिये जैसा ताकतवर लंड देख कर शुभम भौचकित सा हो गया.
शुभम : जय unckle.... अरे यार...!
जय : अरे अरे... Sorry...!

जय के कसे हुए नंगे शरीर की image शुभम के अब मन मे बचपन मे रटे हुए poem की तरह बस गई. जय दिखने मे किसी porn star से कम नही था. नंगे बदन जय ठीक Troy francisco की देसी copy ही था. भले भी शुभम ने जय को देख कर नजरअंदाजी दिखाई पर जीस अंदाज से उसने जय को ऊपर से निचे तक निहारा जय समझ गया के शुभम जय से hypnotize हो चूका है. अक्सर नवजवान लडके imaginary sex करते है और जिस नवजवान age मे शुभम था उस से जय समझ गया के शुभम भी अब जय को ले कर अजीब imagination करेगा. अब जय शुभम का मन टटोलना चाह रहा था. आगे के लिए शुभम को जय set करना चाहता था ता के उर्वशी और जय के घनघोर चुदाई के लिए शुभम खुद जय को permission दे दे.
जय : क्या हुवा शुभम...! क्या मै इतना बुरा दीखता हु
शुभम : नहीं unckle... आप तो बहोत handsome है... सच मे...!
जय : फिर तुमने मुंह क्यों बनाया...?
शुभम : वो आप nude खड़े थे ना...!
जय : क्या मै nude होउ तो गन्दा दीखता हु...?
शुभम : आप तो nude मे भी cool लगते हो... Infact आप nude ज्यादा cool लगते हो...!
जय : अच्छा... ऐसा है तो मै तुम्हारे घर मे nude ही रह जाता हु
शुभम : अरे....
जय : ऐसे ही हसते रहा करो... हसते हुए बड़े अच्छे लगते हो यार...!
तभी door की बेल बजने लगी...!
शुभम : delivery boy होगा... रुकिए मै देखता हु.
शुभम door खोलता है.
Delivery boy : sir आप का आर्डर...!
शुभम : thank you...!
शुभम food parcel ले कर dining table पर रख देता है. अभी भी उसके मन मे जय के नंगे शरीर की image किसी film की तरह घूम रही थी. जय ने जो बाते शुभम को बोलि "मै तुम्हारे घर मे nude ही रह जाता हु" ये शब्द शुभम के मन मे गूंज कर कल्पना मे उतर रहे थे. जय घर मे नंगा हो कर घूमेगा तब कैसा लगेगा ईसी कल्पना मे शुभम खोया हुवा था. गुम सा लग रहा था. तभी जय वहा आता है. पर शुभम का मन कही और ही गायब था, जय के आने शुभम को कोई फरक ही नही पड़ा मानो के उसे पता भी न लगा हो के जय वहा उपस्थित है.
जय : किस खयालो मे गुम हो शुभम. (जय ने शुभम के पीठ पर प्यार से सहलाते हुए पूछा)
शुभम : hmmm... नहीं तो कुछ नही...!
जय : यहि सोच रहे हो ना के मै काला हु, गंदा दीखता हु, और nude ज्यादा गंदा हु...!
शुभम : अरे unckle... ऐसा नही है... चलिए ठीक है गर्मी भी बहोत है आप मेरे room मे जैसे चाहो वैसे रहिए... Nude भी चलेगा...!
जय : अरे नहीं यार... पर तुम कहो तो रह लूंगा...! चलो अब कुछ खा लेते है...! उर्वशी के room मे ही चले वही better रहेगा...?
शुभम : okk...
जय और शुभम मुस्कुराते हुए उर्वशी के room मे चले आते है. जय वही bed के पास एक खुर्सी लगा कर बैठ जाता है. उर्वशी के bed पर सोइ हुईं होती है. शुभम उर्वशी को जगाने लगता है.
शुभम : मम्मी... उठो कुछ juse पी लो आप...!
उर्वशी उठ कर bed पर बैठ जाती है. तीनो मिल कर अब पेट पूजा करते हुए बाते करने लगते है.
उर्वशी : जय... तुमने जो मेरे लिए इतना सब किया और अब भी कर रहे हो तुम्हारा कैसे शुक्रिया अदा करूं कुछ समझ नही आ रहा...!
शुभम : हा unckle... मै भी आप का बहोत शुक्रियाअदा करना चाहता हु...!
जय : कैसी बाते करते हो आप दोनों... Kya मै आप को आप का अपना नही लगता...!
उर्वशी : हा अब तो तुम हम मे से ही हो गए हो... पर मेरे ये जख्म और इनसे बनने वाले दाग़ जायेंगे कैसे... उसकी चिंता हो रही है...!
जय : dr. Mercy ने तो कहा है के वो दिए हुए lotions टाइम पर लगाए तो आप जल्दी ठीक हो जाओगी...! शुभम के हाथो लगा लीजिये...! क्यों शुभम...! उर्वशी को लोशन लगा दोगे ना...?
जय की ये बात सुन कर शुभम सुन्न सा रह गया. जय के शब्द सुन कर शुभम के आँखो के सामने एक कल्पना film सी चलने लगी. के कैसे वो खुद की mom के बदन को नंगा कर रहा है. खुद के mom के नंगे बदन पर धीरे धीरे लोशन लगा रहा है. इस कल्पना ने शुभम का जमीर एक पल के लिए हिला दिया पर उसने होश संभाल कर सोचा भले भी उसने उर्वशी को कई बार नंगी देखि हो, जय के साथ सोते देखा हो या आर्यन के निचे भी देखा हो पर वो ये काम नही कर पायेगा इतना वो जान गया. जय के खड़े किये हुए question mark का answer शुभम के लिए ना ही था. अब इस कारण उसके चेहरे का रंग भी उड गया. उर्वशी ने एक टुक शुभम की और देखा, शुभम का सूखा मुंह देख कर बेटे की दुविधा माँ जान गई और बोल पडी.
उर्वशी : नही नही... मै खुद लगा लुंगी....!
जय उर्वशी की हालत जानता था, उर्वशी उसके शरीर पर खुद के बेटे का हाथ नही चाहेगी यह वो जानता था, शुभम भी उसके mom के अछूते भाग को छू ना पाता, ना ही शुभम ये कर सकता था. इसलिए जय खुद शुभम के मुंह से जय और उर्वशी का नाजायज स्पर्श कबूलना चाहता था. तीनो अब शांत हो चुके थे. कोई कुछ बोलना ही नही चाहता था उर्वशी इस चिंता मे थी के नंदकिशोर घर वापस आने से पहले कैसे भी कर के ज़ख्म सुख जाए और दाग भी मीट जाये. पर शुभम की exams भी है इसलिए खुद के देखभाल का भार शुभम pr लाद कर शुभम को disturb भी ना हो इसकी चिंता भी उसे सता रही थी. जय इस फिराक मे था के उर्वशी के मदमस्त बदन पर लोशान मलहम लगाने के बहाने उसके नर्म मुलायम बदन की मालिश करने का मौका मिल जाए. और खुद शुभम मजबूरन उसको इस काम की permission दे दे. पर बेचारा शुभम सबसे बड़ी दुविधा मे फसा हुवा था. वो ये चाहता था के उर्वशी के जख्म भर जाए पर इस काम मे वो खुद उर्वशी की कोई मदत नही कर सकता था. ना वो इतनी सहजता से जय को उर्वशी के इतना नजदीक आने देना चाहता था. कुछ सोच विचार कर के शुभम बोल पड़ा.
शुभम : मम्मी जहाँ मै लगा सकता हु वहा लगा दूंगा... बाकि आप ही लगा लेना...!
जय : हा उर्वशी... इतना क्या सोचना... बेटा ही तो है...!
उर्वशी : hmmm... ठीक है...!
जय : शुभम देखो उर्वशी को टाइम पर दवाई देना है और टाइम पर ही लोशन लगाना है. उर्वशी के खाना खाने के बाद के तीन time याद रखना मॉर्निंग मे 10 am. Afternoon 4 pm और night मे 10 pm, ऐसा करोगे तो तुम्हारी mom जल्दी ठीक हो जाएगी. और हा कुछ भी जरुरत पड़े तो मुझे याद करना.
शुभम : ठीक है unckle...!
जय : देखो अभी 9.30 pm हो रहे है. थोड़ी देर मे लगा सकते हो. Ok...! मै चला सोने...!






