Adultery Meri Shareef Family Ki Hawas - SexBaba
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Adultery Meri Shareef Family Ki Hawas

hotaks

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Dec 5, 2013
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दोस्तों ये मेरी नई स्टोरी ह

ये स्टोरी इक ककोल्ड स्टोरी ह जिन लोंगो को ककोल्ड स्टोरी नहीं पसंद वो लोग ये स्टोरी न पड़े क्यू की इसमें घर की औरतों को गैर मर्दों से छुड़वाने का एंगल बहुत स्ट्रांग है

दोस्तों में असीम अपनी फॅमिली के रियल हिस्से पर ये स्टोरी लिख रहा हु

मेरे घर की औरतें आज तक किसी गैर मर्द के सामने मुँह भी नहीं दिखती

पर मेरी हवस ने सब बदल दिया है

तो सबसे पहले मेरी शरीफ फॅमिली के बारे में जान लेते ह

(1) अब्बू... असलम खान आगे 55 साल

बहुत स्ट्रिक्ट और गुस्से वाले हैं

गांव में कपड़ो की शॉप चलते हैं

घर की औरतों पे बहुत सख्ती करते हैं

कहीं आने जाने नहीं देते

पूरा दिन उनका गुस्सा और हुकुम hi चलता है

(2) अम्मी.... सोफ़िया खान आगे 48 साल

उफ्फ्फ दोस्तों अम्मी का फिगर लाजवाब है

सलवार सूट में उनके बड़े बड़े दूध इतने उभरे हुए होते हैं की ऊपर से hi देख कर लुंड खड़ा हो जाये

दूध इतने भरे हुए और गोल गोल हैं की सलवार के कपडे भी टाइट पद जाते हैं

गांड भी मोती मोती है जो चलते वक़्त हिलती है

घर में भी सिर्फ सलवार सूट hi पहनती हैं

चेहरा बहुत गोरा और होंठ गुलाबी

अम्मी को देख कर कोई भी पागल हो जाये पर अब्बू ने आज तक उनके फिगर का असली मज़ा नहीं लिया होगा शायद

(3) मेरी बड़ी आपि अनाम खान आगे 28

तलाक़शुदा है

उसका फिगर अम्मी से भी ज़्यादा बड़ा और मस्त है

सलवार सूट में उसके दूध इतने बड़े और भरे हुए हैं की कपडे फटने को होते हैं

गांड एकदम राउंड और टाइट

जब चलती है तो पूरी गांड हिलती है

शादी के बाद उसकी ज़िन्दगी ख़राब हो गयी थी इसलिए अब घर पे hi रहती है

बहुत काम बोलती है पर जब देखती है तो आँखों में आग सी लगती है

(4) मेरी दूसरी आपि ज़ैनब खान आगे 26

पढाई पूरी कर चुकी है

शादी की बात चल रही है

ऊके बड़े बड़े दूध सलवार सूट के ऊपर से hi बहार निकलने को होते हैं

दूध इतने तने हुए और भरे हुए हैं की ब्रा के बिना भी खड़े दीखते हैं

फिगर एकदम भरा हुआ

गांड भी बहुत मोती और लचकती है

पर्दा करती है पर जब घर में होती है तो सलवार सूट थोड़ा टाइट पहनती है जिससे दूध और गांड का शेप साफ़ दीखता है

(5) मेरी छोटी बहन नूर खान आगे 22

गांव के कॉलेज में जाती है

स्लिम फिगर है पर बहुत तेज़ जवानी चढ़ी हुई है

कुर्ती लेग्गिंग्स पहनती है जिसमे उसकी पतली कमर और उभरी हुई गांड बहुत मस्त दिखती है

दूध मध्यम साइज के हैं पर बहुत टाइट और गोल

जब कॉलेज से आती है तो लेग्गिंग्स में उसकी टैंगो की शेप और गांड का हिलना देख कर मेरा लुंड खड़ा हो जाता है

बहुत शरीफ है पर थोड़ी नटखट भी

(6) फिर में यानि असीम खान आगे 24

कॉलेज ख़तम करके सिर्फ 4 दिन पहले घर आया हूँ

अब्बू की सख्ती की वजह से पहले बहुत डाब के रहता था

अब जब घर आया हूँ तो अम्मी और आपियों के फिगर्स देख कर मेरा लुंड परेशां होने लगा है

पहले कॉलेज में भी कुछ नहीं किया था पर अब दिल में हवस जग रही है

(7) मेरा दोस्त अर्जुन आगे 25

मेरा कॉलेज का साथ hi था गांव का hi लड़का

उसका लुंड 8 इंच का मोटा है

बहुत साड़ी लड़कियों को छोड़ चूका है

वो hi मेरा सहारा है चुदाई के लिए

उसकी बातें सुन कर मेरा लुंड तन जाता है

अब वो hi मुझे मदद करेगा घर की औरतों को छोड़ने में

दोस्तों ये है मेरी शरीफ फॅमिली

घर की औरतें

अब्बू सख्त हैं

पर मेरी नज़र अब इनके बड़े बड़े दूध और मोती गांड पे अटक गयी है

पिछली रात की बात है…

मुझे बहुत प्यास लगी थी. कॉलेज के ऐनी के बाद घर आने की वजह से नींद भी ठीक से नहीं आ रही थी. 2ंद फ्लोर पे मेरा कमरा है. रात के 2 बजे के आसपास आँख खुल गयी. पानी पिने के लिए मैं सीधा निचे किचन की तरफ गया.

जैसे hi मैं सीढ़ी के लास्ट स्टेप पे पहुंचा, मुझे किचन से हलकी सी आवाज़ आने लगी…

अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… हाय्यय…

पहले तो लगा कोई सपना देख रहा हूँ. फिर से आवाज़ आयी…

अह्ह्ह… और अंदर… …

मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धक् धक् करने लगा. मैं चुपके से किचन के दरवाज़े के पास गया और थोड़ा सा झाँक कर अंदर देखा…

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… जो नज़ारा दिखा उसने मेरा लुंड एक सेकंड में खड़ा कर दिया.

अंदर मेरी बड़ी आपि अनाम कड़ी नहीं थी… बल्कि किचन के रक् पे बैठी थी.

उसकी सलवार पूरी तरह घुटनो तक उतर राखी थी. टाँगे फैला राखी थी. एक हाथ से अपनी छूट को मसल रही थी और दूसरे हाथ से अपने बड़े बड़े दूध को दबा रही थी.

उसकी छूट… उफ्फ्फ्फ़ बिलकुल गुलाबी और भरी हुई थी.

2-3 उँगलियाँ अंदर बहार कर रही थी और हर बार जब ऊँगली अंदर जाती थी तो एक “पूछ पूछ” की आवाज़ आ रही थी. छूट इतनी गीली हो चुकी थी की उँगलियाँ चमक रही थी.

आपि की सांस तेज़ तेज़ चल रही थी.

आँखें बंद, होंठ खुले, और मुँह से सिर्फ सिसकियाँ निकल रही थी…

“अह्ह्ह… हाय्यय… और ज़ोर से… अह्ह्ह… मेरी छूट तड़प रही है… उफ्फ्फ्फ़…”

उनके बड़े बड़े दूध सलवार के ऊपर से hi बहार निकलने को हो रहे थे.

सलवार का दुपट्टा एक तरफ गिरा हुआ था. दूध इतने उभरे हुए और भरे हुए थे की ब्रा के ऊपर से भी शेप साफ़ दिखाई दे रहा था. वह अपने दूध को ज़ोर ज़ोर से दबा रही थी, निप्पल को ऊँगली से घूमती हुई…

गांड रक् पे डाब रही थी और जब जब ऊँगली अंदर जाती थी तो गांड भी हिलती थी.

पूरी बॉडी पसीने से चमक रही थी.

मैं वही दरवाज़े पे खड़ा था, अपना लुंड पायजामा के ऊपर से पकड़ लिया था.

ज़िन्दगी में पहली बार मैंने किसी औरत की छूट देखि थी… और वो भी मेरी सगी बड़ी आपि की.

उसकी गुलाबी छूट, उँगलियों के अंदर बहार होने का नज़ारा, दूध का हिलना, सिसकियाँ… सब देख कर मेरा लुंड पायजामा फाड़ने को हो रहा था.

आपि और तेज़ तेज़ ऊँगली करने लगी…

“अह्ह्ह… हाय्यय… और अंदर… पूरा अंदर… अह्ह्ह… कोई तो मेरी छूट छोड़ दे… उफ्फ्फ्फ़… इतने दिन से तड़प रही हूँ…”

उनकी टाँगे और फ़ैल गयी. अब उनकी पूरी छूट साफ़ दिखाई दे रही थी.

छूट के ऊपर हलके हलके बाल थे, और अंदर वाला गुलाबी हिस्सा चमक रहा था. हर ऊँगली के साथ पानी निकल रहा था और रक् पे गिर रहा था.

मैंने अपना पायजामा नीचे कर दिया और अपना खड़ा लुंड बहार निकाल लिया.

पहली बार अपनी बड़ी आपि को ऐसे देख कर मैं पागल हो गया था.

मैंने अपना लुंड हिलना शुरू कर दिया…

आपि अब ज़ोर ज़ोर से सिसक रही थी…

“अह्ह्ह… हाय्यय… मेरी छूट पहाड़ दो कोई… अह्ह्ह… बड़ा मोटा लुंड… अह्ह्ह… अंदर दाल दो…”

उनकी उँगलियाँ अब 3 की जगह 4 हो गयी थी. पूरी टाँगे काँप रही थी.

दूध को इतना ज़ोर से दबा रही थी की उनके दूध लाल पद गए थे.

मैं भी तेज़ तेज़ मुठ मरने लगा…

दिमाग में सिर्फ एक hi बात थी – अगर मेरी आपि की जगह कोई और होता लुंड इस गुलाबी छूट में घुसेड़ देता… और आपि चीखती हुई मज़े ले रही होती.

अचानक आपि ने ज़ोर से एक चीख मारी…

“अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… आ गयी… आ गयी… उफ्फ्फ्फ़…”

उनकी छूट से पानी की एक बड़ी सी धार निकल गयी. पूरा रक् गीला हो गया.

उनकी बॉडी काँप रही थी, आँखें बंद, मुँह खुला… बिलकुल थक कर प्लेटफार्म पे लेट गयी.

मैं भी उसी वक़्त झाड़ गया… मेरा सारा माल दरवाज़े के पास hi गिर गया.

झट से मैंने पायजामा ऊपर किया और चुपके से सीढ़ियों की तरफ भाग गया.

मेरी साँसे तेज़ तेज़ चलने लगी.

ऊपर जाकर मैं बिस्तर पे लेट गया पर नींद नहीं आ रही थी.

बार बार आँखों के सामने आती थी मेरी बड़ी आपि अनाम… सलवार उतरे हुए, टाँगे फैलाये, छूट मसलते हुए, और चीखती हुई…

दोस्तों अब से मेरी नज़र सिर्फ उनके बड़े बड़े दूध और उस गुलाबी छूट पे hi अटकती है.

सुबह 8 बजे हॉल में नाश्ता चल रहा था.

मैं टेबल पे बैठा था, पर मेरा दिमाग पूरा रात वाले किचन के सन पे अटका हुआ था. अम्मी ने गरम गरम पराठे और चाय बना राखी थी. अब्बू सबसे पहले आये, उनका गुस्सा वाला चेहरा देख कर मैंने नज़र झुका ली. फिर छोटी बहन नूर आयी, उसकी टाइट कुर्ती में दूध थोड़े से उभरे हुए थे, पर मेरा मैं तो सिर्फ बड़ी आपि पे था.

और फिर… दरवाज़े से मेरी बड़ी आपि अनाम अंदर आयी.

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… उसको देख कर मेरा लुंड पायजामा के अंदर hi एक झटका मार बैठा.

आपि आज भी अपने नार्मल सलवार सूट में थी. ऊपर वाला कुरता थोड़ा टाइट था, इसलिए दोनों बड़े बड़े दूध बिलकुल उभरे हुए और हलके हलके हिलते हुए दीखते थे. हर कदम के साथ दूध इतना ज़ोर से हिल रहे थे की ब्रा के शेप भी साफ़ दिख रहा था. गांड पे सलवार इतनी चुस्ती से चिपकी हुई थी की दोनों मोती गांड के हिस्से alag-alag दीखते थे और चलते वक़्त एकदम lachak-lachak कर हिल रहे थे.

मैं नाश्ता करते हुए उनको गन्दी नज़रो से घर रहा था.

जब आपि मेरे सामने बैठने के लिए झुकी तो कुरता आगे को लटक गया और दूध का गहरा गहरा क्लीवेज साफ़ दिख गया. रात वाला नज़ारा आँखों के सामने आ गया – एहि दूध लटकते हुए थे जब आपि अपनी छूट मसल रही थी. मैं सोच रहा था – रात में ये दूध कितने ज़ोर से दबा रही थी… निप्पल कितने टाइट हो गए होंगे…

आपि ने मुझे देखा और मुस्कुराते हुए बोली,

“असीम बीटा, पराठा ठंडा हो रहा है, गरम गरम खा लो न.”

मैं सिर्फ हाँ में सर हिला दिया, पर नज़र उनके दूध पे hi टिक गयी थी. चाय पीते हुए भी बार बार उनकी गांड की तरफ देख रहा था. जब आपि उठ कर किचन से पराठा लेने गयी तो उनकी गांड इतनी ज़ोर से हिल रही थी की मेरा लुंड पायजामा के अंदर पूरा खड़ा हो गया. मैं नीचे हाथ दाल कर चुपके से लुंड को दबाने लगा.

अब्बू कुछ बोल रहे थे शॉप के बारे में, नूर कॉलेज की बात कर रही थी, पर मेरा दिमाग तो सिर्फ आपि की छूट पे था – वही गुलाबी छूट जो रात में उँगलियों से गीली हो रही थी और पानी छोड़ रही थी. नाश्ता ख़तम होते होते मैं और ज़्यादा परेशां हो गया था.

नाश्ता ख़तम होते hi मैं झट से उठा.

अम्मी ने पुछा, “बीटा कहाँ जा रहे हो इतनी जल्दी?”

मैं बोलै, “अर्जुन के यहाँ… कॉलेज के कुछ काम की बातें करनी हैं.”

सीधा अर्जुन के घर पहुँच गया. 10 मिनट की दूरी थी पर मुझे 10 घंटे लग गए लग रहे थे. अर्जुन ने दरवाज़ा खोला और हंस के अंदर बिठा लिया. बिस्तर पे लेट गए हम दोनों.

अर्जुन ने पहले hi अपना मोबाइल निकला और एक नंगी लड़की की फोटो दिखते हुए बोलै,

“यार असीम, कल रात एक नयी माल मिली थी… 28 साल की shaadi-shuda औरत… उसका पति बहार गया हुआ था. मैं उसको अपने बाइक पे बैठा कर घर ले आया. उसकी छूट देखि तो पूरी गीली थी पहले से. मैंने उसको सीधा घोड़ी बनाया… पीछे से उसकी मोती गांड पकड़ी और अपना 8 इंच का मोटा लुंड धीरे धीरे अंदर पेलने लगा. वो पहले तो ‘अर्जुन धीरे… बहुत मोटा है…’ बोल रही थी, पर 5-6 धक्के के बाद खुद hi गांड पीछे करने लगी. पूरी रात उसकी छूट में 3 बार माल भरा… जब जा रहा था तो वो खुद बोल रही थी ‘कल फिर आ जाना……’”

अर्जुन हंस रहा था और अपना लुंड पायजामा के ऊपर से हलके हलके सहलाने लगा.

“यार तुझे पता है… बहुत सी औरतें अपने पति के छोटे लुंड से परेशां रहती हैं. एक बार मैंने एक 30 साल की भाभी को छोड़ा था… उसके दूध इतने बड़े थे की मैंने उसको चित लिटाया और दोनों दूध को मुँह में लेकर धीरे धीरे चूसा… निप्पल को हलके से काटा… वो पागलो की तरह सिसकती रही. फिर उसकी गांड में भी धीरे से दाल दिया था… पूरी गांड लाल हो गयी थी थप्पड़ों से, पर वो खुद बोल रही थी ‘और मारो… और ज़ोर से…’”

मेरा दिमाग तो पूरा आपि पे था.

अर्जुन की हर बात सुनते hi रात वाला सन रीप्ले हो रहा था – आपि रक् पे बैठी, टाँगे फैलाये, ऊँगली अंदर बहार… “अह्ह्ह… मेरी छूट तड़प रही है… और अंदर…”

मैं बहार से सर हिला रहा था पर अंदर से सोच रहा था – अगर कोई ऐसी hi औरत मेरी आपि जैसी हो… उसके बड़े बड़े दूध… मोती गांड… गुलाबी छूट…

अर्जुन ने मुझे ठोकर मारी और बोलै,

“यार असीम, तेरा चेहरा इतना लाल क्यों है? बोल न… तुझे भी कोई नया माल मिला क्या? या अभी तक सिर्फ मुठ hi मार रहा है? देख मेरा लुंड… इतना मोटा है की लड़कियां पहले तो दर जाती हैं, फिर खुद बोलती हैं ‘और ज़ोर से पेलो… पूरा अंदर दाल दो…’”

मैं मुस्कुराया और बोलै,

“है यार… अब तो मेरा लुंड भी बहुत परेशां होने लगा है…”



पर सच ये था की मेरा लुंड सिर्फ मेरी बड़ी आपि अनाम की उस गुलाबी छूट और बड़े बड़े दूध के लिए तड़प रहा था. अर्जुन की बातें सुन कर मेरा दिमाग और गरम हो गया था, पर मैं अभी कुछ नहीं बोलै.
 
अर्जुन के घर से निकलते hi मेरा लुंड अभी भी खड़ा था. उसने jo-jo स्टोरीज सुनाई थी, सब में मैं सिर्फ अपनी बड़ी आपि अनाम को hi इमेजिन कर रहा था. उसकी मोती गांड, बड़े बड़े दूध, और रात वाली गुलाबी छूट… सब बार बार आँखों के सामने आ रहा था.



घर पहुंचा तो हॉल खली था. अब्बू शॉप पे गए थे, अम्मी और ज़ैनब ऊपर कमरे में थी. नूर कॉलेज चली गयी थी. सिर्फ मेरी बड़ी आपि अनाम किचन में कड़ी थी – दोपहर के खाने की तयारी कर रही थी.

मैं सीधा किचन की तरफ गया. जैसे hi अंदर घुसा, नज़र उनकी गांड पे पद गयी. सलवार इतनी टाइट थी की दोनों मोती गांड के हिस्से बिलकुल alag-alag दीखते थे. जब वो चावल धोने के लिए झुकी तो गांड और ऊपर उठ गयी – पूरी शेप साफ़ दिखाई दे रही थी. मेरा लुंड एक सेकंड में फिर से तन गया.

आपि ने पीछे मुद कर देखा और मुस्कुराते हुए बोली,

“असीम बीटा, आ गए? अर्जुन से मिल के आये हो? कितनी देर लगा दिया … मैं तो सोच रही थी तुम दोनों फिर से पुराणी कॉलेज की बातें करने लग गए होंगे.”

मैं फ्रिज की तरफ बढ़ा और बोलै,

“हाँ आपि… थोड़ी देर बातें हो गयी. बहार तो बहुत गर्मी है आज, पसीना निकल रहा आज”

आपि ने चावल धोते हुए कहा,

“अरे हाँ, दोपहर में तो धुप इतनी तेज़ है की बहार निकलना भी मुश्किल है. तुम कॉलेज में भी ऐसे hi बहार घूमते थे क्या? वहां एक था न कमरे में?”

मैं पानी का गिलास निकालते हुए बोलै,

“हाँ आपि, वहां तो एक था लेकिन यहाँ घर आके लग रहा है पूरा बदल गया है मौसम. आप कैसे मैनेज करती हो इतनी गर्मी में? रोज़ खाना बनाना, कपडे धोना…”

आपि हंस के बोली,

“अरे बीटा, आदत पद गयी है. सुबह जल्दी उठ के सब काम निकाल लेती हूँ. अब्बू तो सुबह 7 बजे hi शॉप चले जाते हैं, उनको नाश्ता रेडी करना पड़ता है. तुम्हारे लिए भी तोह स्पेशल पराठे बनाये थे आज सुबह, कैसे लगे?”

मैं सर हिला के बोलै,

“हाँ आपि, बहुत टेस्टी थे… आपका हाथ hi अलग है.”

आपि ने एक बाउल उठाया और मुझे देते हुए कहा,

“लो बीटा, ये नमक दाल दो इसमें. और हाँ, कल से तुम भी थोड़ा हेल्प कर लिया करो. अब घर आये हो तोह सिर्फ let-te मत रहो.”

जैसे hi मैं बाउल लेने के लिए हाथ बढ़ाया, आपि का हाथ भी साथ में आ गया. हमारा हाथ एक दूसरे से टकराया. उसकी मुलायम उँगलियाँ मेरे हाथ पे लगी और 2-3 सेकंड तक रुक गयी. उसकी बॉडी थोड़ी आगे आयी और उसके बड़े बड़े दूध मेरे बाइसेप्स से बिलकुल टच हो गए – कपडे के ऊपर से, लेकिन सॉफ्टनेस इतनी थी की करंट सा लगा.

आपि ने नार्मल hi बोलै,

“ओहो… सॉरी बीटा, हाथ टकरा गया.”

मैंने गिलास रखते हुए कहा,

“कोई बात नहीं आपि… आप चलो मैं ये बाउल रख देता हूँ.”

आपि ने फिर से चावल धोते हुए बात जारी राखी,

“अर्जुन कैसा है? और तुम… अब 4 दिन हो गए घर आये हुए, कोई प्लान है आगे का? अब्बू से बात की शॉप में हेल्प करने की?”

मैं उसके दूध की तरफ देखता हुआ बोलै,

“अभी सोच रहा हूँ आपि… पहले थोड़ा रेस्ट कर लूँ. आपका रूटीन तो बहुत बिजी है, दिन भर यहीं रहती हो घर में?”

आपि ने मुस्कुराते हुए कहा,

“हाँ बीटा, बहार तो जाना hi नहीं होता. अब्बू को पसंद नहीं. बस घर और थोड़ी सी शॉपिंग kabhi-kabhi. चल, तू जा ऊपर रेस्ट कर ले… मैं खाना लगा देती हूँ 10 मिनट में.”

मैं किचन से निकलते वक़्त पीछे मुद कर देखा – आपि झुकी हुई थी, गांड हिल रही थी उनकी…

सीधा अपने कमरे में आया. दरवाज़ा बंद किया और पायजामा नीचे कर दिया. मेरा लुंड पूरा खड़ा था, टोपा से पानी निकल रहा था. मैंने आँखें बंद की और रात वाला सन याद किया – आपि रक् पे टाँगे फैलाये, ऊँगली अंदर बहार, चीखती हुई…

और अब किचन वाला टच – उसके दूध मेरे बाइसेप्स पे…

मैंने तेज़ तेज़ मुठ मरना शुरू कर दिया. दिमाग में सिर्फ एक hi आवाज़ थी – “अह्ह्ह… मेरी छूट तड़प रही है… और अंदर…”

5 मिनट में hi मेरा सारा माल निकल गया. पूरा बिस्तर गीला हो गया.

लेकिन अब मैं समझ गया था – आपि से बात करने में मज़ा आ रहा है.

शाम का टाइम था… गर्मी थोड़ी काम हो गयी थी. मैं और अर्जुन गाओं के बहार वाली नदी के किनारे पहुँच गए. वहां बिलकुल सुनसान था, सिर्फ पानी की हलकी आवाज़ और ठंडी हवा. हम दोनों एक बड़े पत्थर पे बैठ गए. अर्जुन ने सिगरेट सुलगा ली और गन्दी बात शुरू कर दी.

अर्जुन: “यार असीम, आज सुबह वाली भाभी याद आ रही है… उसकी गांड इतनी मोती थी न, बाइक पे बैठते hi पूरी मेरी गॉड में आ गयी थी. सोच रहा था की थोड़ा टाइम मिलता तो नदी किनारे hi घोड़ी बना देता… सलवार नीचे करके सीधा पीछे से 8 इंच पेल देता.”

मैं हंस के बोलै: “सेल तू हर रोज़ नया माल ले आता है. बता न… ऐसी लड़कियां कहाँ से पकड़ता है?”

अर्जुन ने काश लिया और बोलै: “सिंपल है यार… आँख मार, स्माइल दे, बात शुरू कर. 2-3 दिन में छूट खुद गीली होने लगती है. तेरा लुंड तो अभी भी तड़प रहा है न? कब तक सिर्फ मुठ मरेगा?”

हम 15-20 मिनट तक ऐसी hi गन्दी गन्दी बातें करते रहे. अर्जुन अपनी पुराणी चूड़ियों की स्टोरीज सुना रहा था – किस भाभी को कैसे चित लिटाया, किस की दूध चूसे, किस की गांड पे थप्पड़ मारे. हर बात सुनते hi मेरा लुंड पायजामा के अंदर और सख्त होता जा रहा था.

फिर अचानक मुझे क्या सूझा… मैंने मोबाइल निकाला. अनाम आपि की वो फोटो जो मैंने चुपके से ली थी – सलवार सूट में कड़ी, फेस पूरा क्रॉप कर दिया. सिर्फ ऊपर का हिस्सा… बड़े बड़े दूध टाइट कुरता में उभरे हुए, नीचे मोती गांड का चउरवे साफ़ दीखता था.

मैंने फ़ोन अर्जुन को थमा दिया और बोलै: “यार… ये देख. कोई है जिसको मैं पता रहा हूँ. बता कैसी लग रही है?”

अर्जुन फ़ोन लेते hi पहले देखा… फिर उसकी आँखें फैल गयी. वो फोटो ज़ूम करने लगा और एकदम पागल हो गया.

अर्जुन: “साली… ये कौन है यार?! फ़क… ये रंडी तोह पूरी ज़बरदस्त है! दूध देख… इतने बड़े और भरे हुए… कपडे फटने को हो रहे हैं! गांड देखो… एकदम राउंड, टाइट और मोती… चलते वक़्त कितनी हिलती होगी ये!”

मैं चुप चाप उसको देखता रहा… लेकिन अंदर से मेरा लुंड झटके मारने लगा. ये मेरी बड़ी आपि अनाम की फोटो थी… और अर्जुन उसको रंडी बोल रहा था. मेरी साँसे तेज़ हो गयी, पूरा बॉडी गरम हो रहा था.

अर्जुन फोटो को और ज़ूम करके देखने लगा और गन्दी बातें करने लगा:

“यार… ये तोह पूरी चुदाई की माल है! दूध इतने बड़े हैं की मैं दोनों हाथों से पकड़ के zor-zor से दबाऊंगा… निप्पल को मुँह में लेके चूसूंगा, काटूंगा… ये औरत चीखेगी ‘अह्ह्ह… और ज़ोर से…’ गांड देख… इतनी मोती है की एक हाथ से पकड़ भी नहीं पाउँगा. मैं इसको घोड़ी बनाऊंगा… पीछे से 8 इंच का मोटा लुंड एक hi धक्के में पूरा अंदर पेल दूंगा… छूट फाड़ दूंगा… ये तड़पेगी, रोये गई, पर मैं नहीं रुकूंगा. जब ये पानी छोड़ेगी न… तब मैं उसकी छूट में अपना गरम माल भर दूंगा और बोलूंगा ‘ले रंडी… अब तेरी छूट मेरी हो गयी’.”

मैंने सुनते hi और गरम हो गया. मेरा लुंड पायजामा के अंदर पूरा तन गया था, टोपा से पानी निकलने लगा था. सोच रहा था – ये मेरी सगी बड़ी आपि है… जिसकी छूट मैंने रात में देखि थी… … और अर्जुन अब उसको छोड़ने की प्लानिंग कर रहा है. ये सुन कर मुझे इतना मज़ा आ रहा था की मैं खुद को रोक नहीं प् रहा था.

अर्जुन और तेज़ हो गया, फोटो पे ऊँगली फेरते हुए बोलै:

“ज़ूम कर के देख… क्लीवेज कितना गहरा है. ब्रा के अंदर निप्पल टाइट होंगे. मैं इसको चित लटके दोनों दूध मुँह में ले लूंगा… नीचे ऊँगली से छूट मसालुंगा. ये औरत पागलो की तरह तड़पेगी… बोलेंगी ‘और ज़ोर से… और अंदर दाल दो…’ और जब मैं इसकी गांड पे 4-5 ज़ोर के थप्पड़ मरूंगा न… पूरी गांड लाल हो जाएगी और ये खुद गांड पीछे करेगी. फ़क… अगर ये मेरी होती तोह रोज़ छोड़ता – कभी किचन में , कभी नदी किनारे घोड़ी बना के, कभी घर के छत पे. पूरी रात उसकी चीखें सुनता और उसकी छूट में माल भर देता.”

हर लाइन सुनते hi मेरा लुंड और झटके मार रहा था. पूरा बदन गरम हो रहा था, सांस तेज़ हो गयी थी. मैं बहार से नार्मल बैठ रहा था पर अंदर से बहुत मज़ा आ रहा था. सोच रहा था – मेरी बड़ी आपि अनाम… जिसको सब शरीफ समझते हैं… अर्जुन उसको रंडी बोल रहा है, उसकी छूट फाड़ने की बात कर रहा है… और मुझे ये सुन कर इतना गरम हो रहा था की मैं झड़ने वाला था.

अर्जुन ने फ़ोन वापस देते हुए बोलै: “यार असीम… ये माल जल्दी अर्रंगे कर. मैं तेरे साथ आऊंगा. पहले मैं इसको छोडूंगा… तू देखना कितना मज़ा आएगा. तेरी ये ‘कोई’ लड़की… एक बार मेरी गॉड में आ गयी न… पूरी रात नहीं छोडूंगा.”

मैं सर हिला के मुस्कुराया और बोलै: “हाँ यार… सोचता हूँ.”

लेकिन मेरा लुंड अभी भी झटके मार रहा था. नदी से लौटते वक़्त हर कदम पे अर्जुन की बातें रिपीट हो रही थी… और हर बार मेरा लुंड और सख्त होता जा रहा था.

घर पहुँच के मैं सीधा अपने कमरे में गया. दरवाज़ा बंद किया, पायजामा नीचे किया… और तेज़ तेज़ मुठ मरने लगा. अर्जुन की साड़ी गन्दी बातें याद करते हुए… सोचते हुए की मेरी बड़ी आपि अनाम को अर्जुन छोड़ रहा है… और मुझे ये सोच कर इतना मज़ा आ रहा था की 2 मिनट में hi मेरा सारा माल निकल गया.

रात के खाने के बाद… पूरा घर सन्नाटा था. अब्बू ने 10 बजे hi अपना कमरा बंद कर लिया था, अम्मी और ज़ैनब भी सो चुकी थी. नूर अपने कमरे में मोबाइल पे थी. मैं बिस्तर पे लेट के बार बार पलट रहा था, नींद नाम की चीज़ नहीं आ रही थी. दिमाग में सिर्फ दो चीज़ें घूम रही थी – रात वाली किचन की गुलाबी छूट और आज दोपहर किचन में आपि के दूध का टच.

अचानक मुझे क्या sujha..Main धीरे से उठा, पायजामा ठीक किया और सीधा आपि के कमरे की तरफ बढ़ गया. दरवाज़ा थोड़ा खुला था. अंदर लाइट डिम थी – सिर्फ बीएड के पास वाली टेबल लैंप जल रही थी.

आपि बीएड पे लेती हुई थी. ऊपर वाला सलवार सूट का कुरता थोड़ा ऊपर चढ़ा हुआ था, नीचे सलवार का नाडा ढीला था. टाँगे थोड़ी सी फैली हुई थी और वो मोबाइल स्क्रॉल कर रही थी. जैसे hi मैं अंदर गया, उन्होंने नज़र उठायी और मुस्कुराते हुए बोली,

“असीम? इतनी रात को… क्या हुआ बीटा? नींद नहीं आ रही क्या?”

मैं दरवाज़े से अंदर आया और बीएड के बिलकुल बगल वाली चेयर पे बैठ गया. अपना एक पेअर बीएड पे सीधा रख दिया .

“हाँ आपि… नींद नहीं आ रही. आप भी अभी तक जग रही हो?”

आपि ने मोबाइल साइड पे रख दिया और थोड़ा साइड हो कर लेट गयी. उनका कुरता और ऊपर चढ़ा तो उनके बड़े बड़े दूध का गहरा क्लीवेज साफ़ दिखने लगा. ब्रा का वाइट लास भी हल्का सा झाँक रहा था.

“अरे हाँ… दिन भर काम में इतना थक जाती हूँ फिर भी नींद नहीं आती. तू बता… कॉलेज की पढाई कैसी चल रही है? घर आये 4-5 दिन हो गए, कोई प्लान है आगे का?”

हम दोनों बात करने लगे. मैं चेयर पे बैठा था, पेअर बीएड पे रख के. आपि लेती हुई थी. बात धीरे धीरे पढाई पे आ गयी.

मैं: “आपि… सच बताऊँ? कॉलेज में मन hi नहीं लग रहा था. रोज़ असाइनमेंट, प्रैक्टिकल… सब बोरिंग लगता था. अब्बू तोह कहते हैं ‘पढ़ लो बीटा, जॉब लग जाएगी’ लेकिन मेरा दिमाग कुछ और hi सोचता रहता है.”

आपि हंस के बोली,

“अरे बीटा, यह तोह हर लड़के के साथ होता है. मैं भी जब पढ़ती थी न… मन नहीं लगता था. अब्बू की सख्ती की वजह से तोह और भी ज़्यादा परेशां रहती थी. अब तू घर आया है तोह थोड़ा रिलैक्स कर. पर हाँ… पैसो की बहुत कमी है घर में. अब्बू की शॉप पे सेल्स काम हो गयी है पिछले 2-3 महीने से. किराया, बिजली बिल, तेरा कॉलेज फी… सब का प्रेशर है. मैं तोह सोचती हूँ की कहीं जॉब कर लूँ, लेकिन अब्बू सुनते hi गुस्सा हो जाते हैं.”

मैं सुन रहा था, पर मेरी नज़र बार बार उनके दूध पे जा रही थी. लेती हुई होने की वजह से दोनों बड़े बड़े दूध एक दूसरे से चिपके हुए थे और हर सांस के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे. कुरता का कपडा इतना पतला था की ब्रा के अंदर निप्पल का हल्का सा शेप भी दिख रहा था.

फिर achanak....Main धीरे से अपना पेअर आगे बढ़ाया और बहुत डरते हुए अपना राइट फुट आपि के **मोठे मोठे, गरम जांघो** पर रख दिया.

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… जैसे hi मेरा पेअर उनकी जांघ पे पड़ा… करंट सा दौड़ गया पूरे शरीर में.

उनकी जांघें इतनी गरम थी… इतनी मुलायम और भरी हुई थी की मेरा पेअर उनमें धीरे से धंस गया. सलवार का कपडा भी पतला था, अंदर से उनकी गर्मी सीधा मेरे पेअर तक आ रही थी. जैसे कोई गरम सिल्क का तकिया हो.

मैं रुक गया… डर लगा की आपि रियेक्ट करेंगी.

लेकिन… आपि ने **कुछ नहीं बोलै**.

न पेअर हटाया, न चेहरा बदला. बस बाते करने लगी जैसे कुछ हुआ hi नहीं.

“और हाँ असीम… पैसो की कमी तोह बहुत है. अब्बू रोज़ कहते हैं ‘बस 2-3 महीने और… सेल्स बढ़ जाएगी’ लेकिन मैं जानती हूँ… अब तोह हमें कुछ सोचना पड़ेगा. तू भी सोच लेना… कोई part टाइम काम धुंध ले तोह थोड़ा सहारा मिल जायेगा.”

उनकी आवाज़ नार्मल थी… लेकिन मैं अब बात सुन नहीं रहा था.

मेरा पेअर धीरे धीरे उनकी जांघ पे घूमने लगा. पहले सिर्फ रख के फील कर रहा था… फिर हलके से प्रेस करने लगा. उफ्फ्फ्फ़ कितनी मोती जांघें थी… एक हाथ से भी पूरी नहीं पकड़ सकता था कोई. अंदर से गरम… बिलकुल जैसे रात वाली छूट की गर्मी अभी भी उनके शरीर में बाकि हो.

मैंने बात करते हुए उनके बड़े बड़े दूध को घूरते हुए बोलै,

“हाँ आपि… मैं भी सोच रहा हूँ. पर अभी तोह… घर आके सब ठीक लग रहा है. आप लोगों को देख कर… मैं खुश हो जाता है.”

आपि ने सिर्फ “हम्म्म” किया और थोड़ी सी साइड हुई. जैसे hi उन्होंने पोजीशन बदली, उनके दूध और ज़्यादा उभर आये. एक दूध थोड़ा और ऊपर आ गया और दूसरा नीचे… क्लीवेज इतना गहरा हो गया की अंदर तक झाँक सकता था. ब्रा का वाइट लास और दूध की गोरी स्किन साफ़ दिखाई दे रही थी.

अब मेरा लुंड पायजामा के अंदर पूरा खड़ा हो चूका था. टोपा से पानी निकल रहा था.

मैंने पेअर को और अंदर धकेल दिया… अब मेरा पेअर उनकी दोनों जाँघों के बीच थोड़ा सा प्रेस कर रहा था. उनकी गरम छूट के बिलकुल करीब… सिर्फ सलवार का पतला कपडा बीच में था. मैं फील कर सकता था उनकी जाँघों की हलकी सी काँप गयी. फिर भी आपि ने कोई रिएक्शन नहीं दिया. बस आँखें बंद करके बात कर रही थी.

मैं और हिम्मत करके पेअर को हलके से ऊपर नीचे करने लगा… जैसे मस्सगे कर रहा हूँ.

उफ्फ्फ्फ़… कितनी सॉफ्ट थी उनकी जांघें… कितनी मोती… कितनी गरम…

मेरा दिमाग पूरा उड़ चूका था. सोच रहा था – यह वही जांघें हैं जो रात में प्लेटफार्म पे फैली हुई थी… यह वही जिस्म है जिसकी गुलाबी छूट मैंने देखि थी… और अब मेरा पेअर उनपे है… और वो कुछ नहीं बोल रही.

मैंने धीरे से उनके दूध की तरफ देखा और बोलै,

“आपि… आप बहुत थक जाती हो न रोज़?… मतलब… आपका रूटीन बहुत हैवी है.”

(अंदर से सोच रहा था – उफ्फ्फ्फ़ ये दूध… कितने बड़े है… कितने भरे हुए… अगर मैं हाथ बढ़ा दूँ तोह?)

आपि ने आँखें खोल कर मुझे देखा… थोड़ी देर चुप रही… फिर हलके से मुस्कुरायी और बोली,

“हाँ बीटा… बहुत थक जाती हूँ. पर क्या करें… घर संभालना पड़ता है.”

उनकी आवाज़ में एक हलकी सी मादकता थी… या शायद मेरा दिमाग hi ऐसा सोच रहा था.

मेरा पेअर अब उनकी जाँघों पे धीरे धीरे घूम रहा था… टच फील कर रहा था… और आँखें उनके उभरे हुए दूध पे टिक गयी थी.

लुंड पायजामा में झटके मार रहा था.

अब सिर्फ 2-3 इंच दूर थी उनकी छूट से मेरा पेअर…
 
मेरा पेअर आपि की मोती गरम जाँघों के बीच धीरे धीरे घूम रहा था. सिर्फ 2-3 इंच और दूर था… उनकी छूट तक. मैं फील कर सकता था सलवार के पतले कपडे के अंदर से उनकी गर्मी. छूट की वही गरम, गीली वाली गर्मी जो मैंने रात में किचन में देखि थी. मेरा लुंड पायजामा के अंदर पूरा तन गया था, टोपा से पानी निकल रहा था. दिमाग में सिर्फ एक hi ख्याल था – एक और हल्का सा धक्का… और मेरा पेअर उनकी गुलाबी छूट पे प्रेस हो जायेगा.



आपि अभी भी बात कर रही थी…

“हाँ बीटा… पैसो की बहुत टेंशन है… अब्ब ु रोज़ कहते हैं कम् बढ़ेगा पर…”

उनकी आवाज़ नार्मल थी, लेकिन सांस थोड़ी तेज़ हो गयी थी. दूध ऊपर नीचे हो रहे थे. मैं और हिम्मत करके पेअर को 1 इंच और अंदर धकेल दिया… अब बिलकुल करीब था… छूट के मुँह के पास… सिर्फ सलवार का एक पतला लेयर बीच में.

और तभी…

अचानक आपि ने ज़ोर से सांस ली और एक सेकंड में उठ कर बैठ गयी.

जैसे करंट लग गया हो.

उन्होंने झट से मेरा पेअर अपनी जाँघों से हटा दिया और बीएड से उठते hi बोल पड़ी,

“असीम… मुझे… बाथरूम जाना है……”

उनकी आवाज़ में दर और शर्म दोनों था. नज़र मुझसे मिलायी नहीं. सीधा बाथरूम की तरफ भाग गयी. दरवाज़ा बंद कर दिया.

मैं वही चेयर पे बैठा रह गया…

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… शायद आपि बुरा मान गयी.

शायद गुस्सा हो गयी.

शायद अब्बू को बता देगी.

मेरा लुंड अभी भी खड़ा था पर डर से ढीला होने लगा.

मैं झट से उठा, चेयर वापस राखी और चुपके से अपने कमरे की तरफ भाग गया.

अपने कमरे में दरवाज़ा बंद किया और बिस्तर पे लेट गया.

पूरा शरीर पसीने से तर था.

रात भर नींद नहीं आयी.

बार बार आँखों के सामने वह पल आ रहा था – मेरा पेअर उनकी जाँघों के बीच… सिर्फ 1 इंच दूर उनकी छूट से… और आपि का उठ कर भागना.

मैं सोच रहा था – अगर आपि ने बुरा मान लिया तोह क्या होगा? पर अंदर से एक अजीब सी मज़ा भी आ रहा था.

वो भागी ज़रूर… पर पहले 10-15 मिनट तक कुछ नहीं बोली थी.

क्या वो भी फील कर रही थी?

क्या उनकी छूट भी गरम हो गयी थी?

यह सोचते सोचते सुबह के 6 बजे तक मैं पलट ता रहा.

सुबह हॉल में सब लोग नाश्ते पे बैठे थे.

अम्मी ने गरम गरम पराठे, आलू की सब्ज़ी और चाय बना राखी थी.

अब्बू सबसे पहले आये, अपना गुस्सा वाला चेहरा लिए.

“काम कल भी काम था… 3-4 कस्टमर hi आये. इस महीने किराया कैसे देंगे?”

अम्मी ने चाय डालते हुए कहा,

“अरे चिंता मत करो… थोड़ा सा और इंतज़ार करो. मौसम ठीक हो जायेगा तोह लोग खरीदने आएंगे.”

ज़ैनब आपि ने पराठा तोड़ते हुए बोली,

“पापा, मैंने कल ऑनलाइन देखा था… आप कुछ नई डिज़ाइन कपडे ले आइये. यंग लड़कियां आज कल कुछ और पसंद करती हैं. तभी काम बढ़ेगा.”

नूर ने मुस्कुराते हुए कहा,

“हाँ पापा… कॉलेज में भी सब कहते हैं आपकी शॉप पे वैरायटी काम है. मैं तोह आपके लिए फ्री मार्केटिंग कर दूंगी.”

सब बातो में लगे हुए थे… हसी मज़ाक चल रहा था.

लेकिन मेरी नज़र सिर्फ मेरी बड़ी आपि अनाम पे थी.

आपि आज भी नार्मल सलवार सूट में थी – ऊपर वाला कुरता थोड़ा टाइट, दूध इतने उभरे हुए की हर सांस के साथ हिल रहे थे. गांड चेयर पे डाब रही थी और जब वो पराठा उठा रही थी तोह मोती गांड का शेप साफ़ दीखता था.

लेकिन… आपि मुझसे नज़रे चुरा रही थी.

एक बार भी मेरी तरफ नहीं देखा.

जब मैंने उनको पराठा माँगा तोह उन्होंने सिर्फ हाथ से प्लेट बढ़ा दी, आँखें नीचे.

जब मैंने चाय मांगी तोह चुप चाप कप रख दिया और तुरंत अम्मी से बात करने लगी.

मैं चुपके से उनको घर रहा था.

नाश्ता करते हुए भी मेरी आँखें उनके बड़े बड़े दूध पे टिक गयी थी – कुरता के ऊपर से शेप बिलकुल साफ़, ब्रा के अंदर निप्पल का हल्का सा उभार.

जब वो झुक कर सब्ज़ी लेने लगी तोह क्लीवेज इतना गहरा दिख गया की रात वाला सन याद आ गया – वही दूध जो लेती हुई बीएड पे लटक रहे थे.

उनकी गांड चेयर से थोड़ी ऊपर उठी तोह सलवार में दोनों मोती गांड के हिस्से अलग अलग हिलते हुए दिखे.

मेरा लुंड टेबल के नीचे पायजामा में फिर से खड़ा होने लगा.

अब्बू मुझसे पूछ रहे थे,

“असीम, तू शॉप पे आएगा आज? थोड़ा हाथ बता दे.”

मैं सर हिला के बोलै,

“हाँ अब्बू… ज़रूर.”

लेकिन मेरी नज़र तोह आपि के चेहरे पे थी – वो अभी भी नज़रे चुरा रही थी.

गाल थोड़े लाल थे.

जब नूर ने कोई मज़ाक किया तोह सब है पड़े… आपि भी मुस्कुरायी पर मेरी तरफ एक बार भी नहीं देखा.

नाश्ता ख़तम होते hi आपि झट से उठी और किचन की तरफ चली गयी.

उनकी गांड हिलती हुई जाते हुए देख कर मैं सोच रहा था – रात में मेरा पेअर सिर्फ 1 इंच दूर था उनकी छूट से… और आज वो मुझसे आँख भी नहीं मिला रही.

पर इस बार डर की जगह एक नया मज़ा आ रहा था.

मुझे लग रहा था… आपि कुछ छुपा रही है.

मैंने जल्दी से मुँह धोया, shirt-pant डाला और अब्बू के साथ निकल गया. रस्ते में अब्बू लगे हुए थे – "काम बिलकुल ख़तम हो गया है… ऑनलाइन वाले लूट रहे हैं… तू भी कुछ दिमाग लगा…” मैं सर हिला रहा था पर दिमाग पूरा कहीं और था. आँखों के सामने बस रात वाली अनाम आपि……

शॉप पहुँचते hi गर्मी ने घेर लिया. पंखा भी धीरे चल रहा था. मैंने काउंटर पे बैठ गया. पहले 40-45 मिनट 2-3 लड़कियां आयी, सलवार सूट देखा, पूछा, लेकिन कुछ नहीं लिया. अब्बू बहार खड़े कस्टमर्स को बुला रहे थे.

मेरा मैं बिलकुल नहीं लग रहा था. लुंड अंदर hi धीरे धीरे खड़ा होने लगा था. 11 बजे तक सिर्फ एक सूट बेचा. अब्बू का चेहरा लाल होने लगा.

मैंने बोल दिया,

“अब्बू… सर बहुत दर्द कर रहा है. कल रात नींद नहीं आयी. अर्जुन के यहाँ जा के 10 मिनट में आता हूँ… वो दवाई दे देगा.”

अब्बू ने गुस्से में हाथ हिला दिया, “जा… जल्दी आ जा. यहाँ बैठ के टाइम मत बर्बाद कर.”

मैं तुरंत निकल गया. सीधा अर्जुन के घर. 10 मिनट की सड़क थी. रस्ते में hi लुंड पूरा तन गया था.

अर्जुन का दरवाज़ा खुला था. मैं अंदर घुस गया. वो बिस्तर पे लेट के मोबाइल चला रहा था. मुझे देख के मुस्कुराया,

“अरे सेल असीम! आज इतनी जल्दी? शॉप से भाग आया क्या?”

मैं उसके पास बिस्तर पे लेट गया. एक की ठंडक अच्छी लग रही थी.

“हाँ यार… अब्बू का गुस्सा देख के निकल आया. सेल्स जीरो है… बैठ के बोर हो रहा था. तू बता… क्या चल रहा है आज कल?”

अर्जुन ने सिगरेट सुलगा ली, एक काश लिया और बोलै,

“अरे यार… सुबह से गर्मी ने मार रखा है. तू बता… घर पे सब ठीक? अम्मी ने आज भी पराठे बनाये थे क्या?”

मैं हंस के बोलै,

“हाँ यार… पराठे तोह बनाये थे. पर हमारा काम सही नहीं चल रहा.. घर में किराया, बिजली बिल… सब पर प्रेशर है. मैं सोच रहा हूँ कोई chhota-mota काम ढूंढूं.”

अर्जुन: “हाँ बस… पैसो की तोह सबको टेंशन है. पर सेल तेरा चेहरा देख के लग रहा है कुछ छुपा रहा है. कल वाली लड़की याद आ रही है क्या? जो फोटो दिखाई थी… बड़े वाले दूध वाली?”

मैं थोड़ा मुस्कुराया, “हाँ यार… वो hi. दिमाग में घूम रही है.”

अर्जुन ने सिगरेट राखी और सीधा बैठ गया,

“बस दिखा न और फोटो… कल रात उसको याद कर के मैंने दो बार मुठ मारी थी सेल! कितनी उम्र है वो? कहाँ रहती है?”

अब मेरी साँसे तेज़ हो गयी. मैंने मोबाइल निकाला. पहले से 3 फोटो क्रॉप करके रेडी राखी थी – बिलकुल नेचुरल एंगल से.

पहली फोटो – टाइट कुरता में दोनों उभरे हुए दूध, क्लीवेज गहरा, ब्रा का लास हल्का झाँक रहा.

दूसरी – साइड से गांड का फुल चउरवे, सलवार चिपकी हुई, मोती नितम्ब alag-alag.

तीसरी – झुक कर सब्ज़ी उठाते वक़्त, दूध लटकते हुए, गहरा क्लीवेज.

मैंने फ़ोन उसके हाथ में थमा दिया और बोलै,

“ले देख….”

अर्जुन फ़ोन लेते hi पहली फोटो ज़ूम करके देखने लगा. उसकी आँखें फैल गयी.

“सलेटी असीम… ये क्या माल है बस! देख इन चूचियों को… उफ्फ्फ्फ़ कितने बड़े और भरे हुए हैं! कपडे फटने को हो रहे हैं यार! मैं इन दोनों को पकड़ के ज़ोर ज़ोर से दबाऊंगा… निप्पल को मुँह में लेके चूसूंगा… काटूंगा… ये रंडी चीखेगी ‘अह्ह्ह अर्जुन और ज़ोर से…’

बस गांड देख… इतनी मोती और लचकती हुई… एक हाथ से पकड़ भी नहीं पाउँगा! मैं इसको घोड़ी बना के पीछे से अपना 8 इंच का लुंड एक hi धक्के में घुसेड़ दूंगा… इसकी छूट फाड़ दूंगा… तड़पेगी, रोये गई, पर मैं नहीं रुकूंगा बस!

ये तोह पूरी चुदाई की रंडी है सेल… मैं इसकी गांड पे 8-10 ज़ोर के थप्पड़ मरूंगा… पूरी लाल हो जाएगी… फिर इसकी बुर में अपना गरम माल भर दूंगा और बोलूंगा ‘ले मादरचोद… अब तेरी छूट मेरी हो गयी… रोज़ आऊंगा छोड़ने!’”

अर्जुन फोटो पे ऊँगली फेरते हुए और गालिया देने लगा

“फ़क… क्लीवेज देख रंडी के… अंदर तक गोरी स्किन… मैं इसको चित लटके दोनों चूचियों को मुँह में भर लूंगा… नीचे ऊँगली से बुर मसालुंगा… ये पागलो की तरह तड़पेगी… बोलेंगी ‘और अंदर दाल दो अर्जुन… फाड़ दो मेरी छूट…’

सेल असीम… तू इसको जल्दी फिक्स कर बस! मैं तेरे साथ आऊंगा… पहले मैं इस रंडी को छोडूंगा… तू देखना कितना मज़ा आएगा! रोज़ … हर जगह पेलुँगा इसको!”

मैं बहार से chup-chaap बैठा था… पर अंदर से पूरा जन्नत में था.

मेरा लुंड पायजामा के अंदर झटके मार रहा था. टोपा से पानी निकल रहा था.

हर गाली, हर लाइन सुन कर मज़ा आ रहा था…

ये मेरी सगी बड़ी आपि अनाम है… … और अर्जुन उसको “रंडी… छूट फाड़ दूंगा… गांड पे थप्पड़” बोल रहा था.

मुझे इतना ज़बरदस्त मज़ा आ रहा था की मैं खुद को रोक नहीं प् रहा था.

अर्जुन ने फ़ोन वापस देते हुए बोलै,

“यार… सच बता… ये माल कहाँ की है? कल तक फिक्स कर दे… वर्ण मैं पागल हो जाऊंगा इसके लिए!”

मैं मुस्कुराते हुए बोलै, “हाँ यार… सोचता हूँ.”

घर लौटते वक़्त हर कदम पे अर्जुन की गालियां रिपीट हो रही थी… और हर बार मेरा लुंड और सख्त होता जा रहा था.

रस्ते भर उसकी गालियां और अनाम आपि की फोटोज वाली बातें रिपीट हो रही थी. मेरा लुंड अभी भी half-khada था पायजामा के अंदर. घर के दरवाज़े पे पहुंचा तोह अंदर से हलकी सी टीवी की आवाज़ आ रही थी. मैं चुपके से अंदर घुस गया.

पहले नज़र बड़ी आपि अनाम के कमरे पे गयी… दरवाज़ा बंद था. लाइट भी अंदर से नहीं आ रही थी. शायद वो रेस्ट कर रही हो या सो रही हो. दिल में थोड़ी सी उदासी भी हुई… आज उसको देखना बहुत मैं था. पर फिर सोचा – कोई बात नहीं, शाम अभी बाकी है.

हॉल में मुड़ते hi नज़र अम्मी और ज़ैनब आपि पे पद गयी.

दोनों हॉल के बड़े सोफे पे बैठी थी. टीवी पे कोई सीरियल चल रहा था, लेकिन उनका ध्यान baat-cheet पे ज़्यादा था. अम्मी के पास एक बड़ा सा बास्केट था – कपडे फोल्ड कर रही थी. ज़ैनब आपि उसके बगल में बैठी थी, मोबाइल पे कुछ देख रही थी.

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… जैसे hi मैं उनको देखा, मेरा लुंड एक झटका मार के पूरा खड़ा हो गया.

अम्मी 48 साल की उम्र में भी फिगर ऐसा की कोई भी जवान लड़का पागल हो जाये. आज लाइट पिंक सलवार सूट पहना था. ऊपर वाला कुरता थोड़ा टाइट था, इसलिए दोनों बड़े बड़े दूध बिलकुल उभरे हुए थे. हर सांस के साथ दूध ऊपर नीचे हो रहे थे और कुरता के कपडे में डीप क्लीवेज साफ़ दिख रहा था. दूध इतने भरे हुए और गोल थे की ब्रा के अंदर से भी शेप बहार आ रहा था. जब वो कपडे फोल्ड करने के लिए झुकती थी तोह दूध आगे की तरफ लटक जाते थे… उफ्फ्फ्फ़ कितना गहरा क्लीवेज था!

गांड तोह पूरी मोती थी – सोफे पे डाब रही थी और जब वो थोड़ा साइड होती थी तोह दोनों गांड के हिस्से alag-alag दीखते थे. सलवार का कपडा उनकी गांड पे इतना टाइट चिपका हुआ था की पूरी शेप साफ़ थी.

ज़ैनब आपि उनके बगल में बैठी थी – बिलकुल अलग विबे. उसका टाइट sky-blue सलवार सूट… दूध इतने तने हुए और बड़े थे की ब्रा के बिना भी खड़े दीखते थे. कुरता के ऊपर से निप्पल का हल्का सा उभार दिख रहा था. फिगर एकदम भरा हुआ – कमर पतली, गांड मोती और लचकती हुई. जब वो मोबाइल पे झुक कर कुछ देख रही थी तोह उसकी गांड सोफे से थोड़ी ऊपर उठ गयी और सलवार में दोनों मोती गांड के हिस्से बिलकुल alag-alag हिल रहे थे.

मैं धीरे से हॉल में घुस गया और उनके सामने वाले सिंगल सोफे पे बैठ गया.

अम्मी ने नज़र उठायी और मुस्कुराते हुए बोली,

“अरे असीम बीटा आ गए? शॉप से इतनी जल्दी? अब्बू ने छोड़ दिया क्या?”

मैं मुस्कुराया,

“हाँ अम्मी… सर दर्द कर रहा था थोड़ा. अब्बू ने बोल दिया घर आ जा.”

ज़ैनब आपि ने मोबाइल साइड पे रख दिया और हंस के बोली,

“अरे भाई, अब घर आये हो तोह थोड़ा काम भी कर लिया करो. रोज़ शॉप से भाग आते हो क्या?”

उनकी आवाज़ में थोड़ी सी मस्ती थी. जब वो बोली तोह उसके बड़े बड़े दूध हलके से हिल गए. मैं नज़र नीचे करके बोलै,

“हाँ आपि… अब से तरय करूँगा.”

लेकिन अंदर से मेरा दिमाग पूरा उनके फिगर्स पे अटक गया था.

मैं बैठ के उनको घर रहा था.

अम्मी जब कपडे utha-utha कर फोल्ड कर रही थी, उनके दूध इतने ज़ोर से लटक रहे थे की मैं सोच रहा था – रात में अनाम आपि ने अपने दूध को कितना ज़ोर से दबा रहा था… अम्मी के दूध तोह उससे भी बड़े हैं… अगर मैं हाथ बढ़ा दूँ तोह कितने गरम होंगे?

ज़ैनब आपि थोड़ी साइड हुई और अपनी टांग ऊपर चढ़ा ली. सलवार का पतला कपडा उसकी जांघ पे टाइट पद गया. उसकी पतली कमर और उभरी हुई गांड का चउरवे बिलकुल साफ़ दिख रहा था. जब वो मोबाइल उठाने के लिए झुकी तोह उसके दूध आगे की तरफ लटक गए… ब्रा के अंदर से निप्पल का शेप पूरा दिखाई दे रहा था.

मेरा लुंड पायजामा के अंदर पूरा तन गया था. टोपा से पानी निकल रहा था. मैं नीचे हाथ दाल कर चुपके से लुंड को दबाने लगा.

दिमाग में एक hi ख्याल था – यह दोनों… मेरी अम्मी और मेरी आपि… घर में इतने शरीफ बन के बैठी हैं, पर्दा करती हैं… और मैं यहाँ बैठा उनके बड़े बड़े दूध और मोती गांड को ताड़ रहा हूँ. अनाम आपि रूम में है… शायद अभी भी रात वाले पेअर वाले टच को सोच रही हो…

अम्मी ने एक कुरता उठाया और ज़ैनब से बोली,

“ज़ैनु, ये वाला सूट देखो… कितना सुन्दर है. तुम पे अच्छा लगेगा.”

ज़ैनब ने लेके अपने ऊपर किया और हंस के बोली,

“अम्मी आप भी न… मैं तोह अभी शादी के लिए देख रही हूँ. ये टाइट वाले सुइट्स पहनूंगी तोह सब लोग क्या सोचेंगे.”

उनकी बात सुनते hi मेरा लुंड और झटका मारा. मैं सोच रहा था – हाँ आपि… … तुम्हारे दूध इतने टाइट हैं की ब्रा के बिना भी खड़े हैं… गांड इतनी मोती है की एक बार पकड़ लूँ तोह हाथ में आ hi नहीं सकती.

अम्मी ने मुझे देखा और बोली,

“बीटा चाय पियोगे? मैं बना देती हूँ.”

मैं सर हिला दिया, पर नज़र उनके उभरे हुए दूध पे hi टिक गयी थी. जब वो उठी और किचन की तरफ गयी… उफ्फ्फ्फ़ उनकी मोती गांड हिलती हुई जा रही थी. हर कदम पे दोनों गांड alag-alag हिल रही थी.

ज़ैनब आपि अब सिर्फ मेरे सामने बैठी थी. उसने टांग क्रॉस की और मोबाइल पे स्क्रॉल करने लगी. सलवार उसकी जाँघों पे और टाइट हो गयी. मैं चुपके से उसके दूध, कमर और गांड को घूरता रहा… और अंदर से तड़प रहा था.

रात के खाने में अम्मी ने आज चिकन करी, रोटी, सलाद और दही बनाया था. हॉल के बड़े टेबल पे सब लोग एक साथ बैठ गए. अब्बू सबसे पहले, मैं उनके बगल में, फिर ज़ैनब आपि, नूर और अम्मी. अनाम आपि सबसे कार्नर वाली सीट पे बैठी थी, बिलकुल chup-chaap.

जैसे hi मैं बैठा, मेरी नज़र सीधा अनाम आपि पे पद गयी.

उफ्फ्फ्फ़… आज लाइट ग्रीन सलवार सूट में थी. कुरता थोड़ा टाइट था, दोनों बड़े बड़े दूध टेबल के ऊपर से hi उभरे हुए दीखते थे. दुपट्टा सिर्फ एक तरफ लटका हुआ था… हर सांस के साथ दूध halke-halke हिल रहे थे और दुपट्टा धीरे से स्लाइड हो रहा था.

अब्बू ने रोटी तोड़ते हुए शुरू किया,

“आज काम बहुत काम था .. सिर्फ 5-6 कस्टमर आये. मौसम गरम है इसलिए लोग बहार नहीं निकल रहे.”

अम्मी ने करी सर्वे करते हुए बोली,

“अरे चिंता मत करो… आज मैंने थोड़ा एक्स्ट्रा मसाला डाला है… सब को पसंद आएगा.”

ज़ैनब आपि ने रोटी लेते हुए मुस्कुराते हुए कहा,

“पापा… और आपने जो नए डिज़ाइन मंगवाए थे उनमे से एक सूट तोह मैंने आज फोल्ड करके रख दिया. बहुत सुन्दर है… गर्मी में भी कम्फर्टेबले लगेगा.”

नूर ने सलाद डालते हुए हंस के बोली,

“अम्मी आपका चिकन करी तोह हर बार ज़बरदस्त बनता है. कॉलेज से आते hi भूख लग जाती है… आज तोह मैंने टिफ़िन भी ख़तम नहीं किया था.”

सब हलके से है पड़े..

लेकिन मैं… मैं सिर्फ अनाम आपि को देख रहा था.

वो एक बार भी मेरी तरफ नज़र नहीं उठा रही थी. नज़र सिर्फ प्लेट पे थी. रोटी तोड़ रही थी, करी में डुबो रही थी, chup-chaap खा रही थी. गाल थोड़े लाल थे. जब वो रोटी मुँह में दाल रही थी तोह उसके होंठ और दूध का हल्का हिलना… मेरा लुंड टेबल के नीचे पायजामा में dheere-dheere खड़ा होने लगा.

मैं परेशां भी था… रात वाले पेअर वाले सन के बाद वो ऐसे नज़रे चुरा रही है जैसे मुझसे बात भी नहीं करना चाहती. क्या गुस्सा हो गयी? क्या अब्बू को बता देगी? यह soch-soch कर मेरा दिल धड़क रहा था.

फिर मैं हिम्मत करके उसके दूध को घूरने लगा.

टेबल के ऊपर से परफेक्ट व्यू था. दुपट्टा धीरे से स्लाइड हुआ और एक बड़ा दूध और ज़्यादा उभर आया. ब्रा का वाइट लास और गोरी स्किन साफ़ दिख रही थी. जब वो करी के लिए थोड़ा झुकी तोह दोनों दूध आगे लटक गए… क्लीवेज इतना गहरा की अंदर तक नज़र जा रही थी.

अनाम आपि ने शायद फील कर लिया.

उसने एक सेकंड में नज़र उठायी और मेरी आँखें उसके दूध पे पकड़ी गयी.

उसकी आँखें थोड़ी फैल गयी. चेहरा और लाल हो गया. तुरंत उसने दोनों हाथों से दुपट्टा उठाया और दूध पे तिघ्टलय लपेट दिया. अब दुपट्टा बिलकुल टाइट हो गया था… पर दूध इतने बड़े थे की शेप अब भी हल्का सा दिख रहा था.

वो फिर से नज़र झुका ली. एक शब्द भी नहीं बोलै. सिर्फ रोटी खा रही थी.

अम्मी ने मुझसे पुछा,

“असीम बीटा, शॉप में आज क्या क्या किया??”

मैं नीचे देखते हुए बोलै,

“हाँ अम्मी… थोड़ा हिसाब देखा बस.”

ज़ैनब आपि

“पापा, कल मैं भी शॉप पे आ जाउंगी… थोड़ा हेल्प कर दूंगी. घर का काम भी हो जायेगा और आपको भी सहारा मिलेगा.”

नूर ने दही लेते हुए कहा,

“हाँ और मैं कॉलेज से आते hi घर के सब काम में हाथ बताउंगी. एग्जाम के बाद फ्री हूँ.”

सब बातें कर रहे थे… हसी ठिठोली भी हो रही थी सबकी.

लेकिन अनाम आपि अभी भी चुप थी. दुपट्टा को baar-baar ठीक करती जा रही थी… जैसे मुझे रोकना चाहती हो.

अब्बू ने खाना ख़तम किया और उठ गए,

“मैं सो रहा हूँ. सब जल्दी सो जाओ… कल सुबह जल्दी उठना है.”

जैसे hi अब्बू ऊपर गए, अनाम आपि भी झट से उठी. दुपट्टा अब भी टाइट पकडे हुए. जब वो टेबल से उठी तोह उसकी मोती गांड सलवार में हिलती हुई… एक पल के लिए मेरी तरफ देखा… फिर तुरंत नज़र घुमा ली और अपने कमरे की तरफ चली गयी.

मैं वही बैठा था… लुंड खड़ा, दिल परेशां.

वो मुझसे नज़रे चुरा रही है… दुपट्टा ठीक कर रही है… मतलब वो समझ गयी है की मैं उसके दूध को कैसे घर रहा हूँ.

अंदर से तड़प भी हो रही थी और एक अजीब सा मज़ा भी आ रहा था.

आधी रात को पूरा घर सन्नाटा था. अब्बू का कमरा बंद, अम्मी और ज़ैनब सो चुकी थी, नूर के कमरे की लाइट भी ऑफ थी. मैं अपने बिस्तर पे 2 घंटे से पलट रहा था. नींद नाम की चीज़ नहीं आ रही थी. दिमाग में सिर्फ अनाम आपि… डिनर टेबल पे नज़रे चुराती हुई, दुपट्टा ठीक करती हुई, और रात वाला सन जब मेरा पेअर उसकी जाँघों के बीच सिर्फ 1 इंच दूर था उनकी गुलाबी छूट से.

मेरी साँसे तेज़ चल रही थी… पर पेअर khud-ba-khud उठ गए.

मैं धीरे से उठा, पायजामा ठीक किया और चुपके से अनाम आपि के कमरे की तरफ बढ़ गया. दरवाज़ा थोड़ा सा खुला था… अंदर टेबल लैंप की हलकी सी येलो लाइट जल रही थी.

मैं धीरे से अंदर घुस गया.

आपि बीएड पे लेती हुई थी. ऊपर वाला लाइट ग्रीन कुरता थोड़ा ऊपर चढ़ा हुआ था, नीचे सलवार का नाडा ढीला पड़ा था. टाँगे थोड़ी सी फैली हुई थी. एक टांग सीढ़ी, दूसरी थोड़ी मोड़ कर के… उसकी मोती मोती जांघें सलवार के पतले कपडे में साफ़ दिखाई दे रही थी. दूध दोनों तरफ फ़ैल कर के बीएड पे लटक रहे थे… हर सांस के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे. दुपट्टा एक तरफ गिरा हुआ था. चेहरा साइड की तरफ था, आँखें बंद.

सो रही थी… या सोने का नाटक कर रही थी… मालुम नहीं था.

मैं बीएड के पास वाली चेयर पे बैठ गया. दिल के धड़कने की आवाज़ खुद को सुनाई दे रही थी.

धीरे से आवाज़ लगायी,

“आपि…”

कोई जवाब नहीं आयी.

थोड़ी देर रुक कर फिर बोलै,

“आपि… सो गयी क्या?”

फिर भी कोई रिस्पांस नहीं. सिर्फ उसकी सांस चल रही थी… थोड़ी tez-thodi.

मैं और हिम्मत करके बीएड पे बैठ गया. उसके पैरों के पास. उसके दोनों पेअर मेरे गॉड में रख दिए… बिलकुल धीरे से.

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… जैसे hi मेरा हाथ उसके पेअर पे पड़ा… करंट दौड़ गया. उसकी पाऊँ की उँगलियाँ थोड़ी सी गरम और मुलायम थी. मैंने धीरे से उँगलियों को सहलाया… फिर पेअर के तलवे को दबाने लगा.

अचानक… उसके शरीर में एक हलकी सी कपन हुई.

पूरा जिस्म एक सेकंड के लिए काँप गया. टाँगे थोड़ी सी टाइट हो गयी… फिर रिलैक्स हो गयी. सांस एक पल के लिए रुक गयी… फिर तेज़ हो गयी.

मैं समझ गया…

आपि जग रही है.

सोने का नाटक कर रही है.

लेकिन मैं रुका नहीं.

धीरे धीरे उनके पेअर को मसलने लगा… तलवे से शुरू करके ऊपर की तरफ. उनकी जांघें इतनी मोती और गरम थी की हाथ अंदर धंस जा रहा था. सलवार का पतला कपडा उनकी स्किन से बिलकुल चिपका हुआ था. जब मैं उँगलियों से दबाता था तोह उनकी जांघ की गरम नरम फलेश मेरे हाथों में हिल रही थी.

मेरा लुंड पायजामा के अंदर पूरा खड़ा हो चूका था. टोपा से पानी निकल रहा था.

मैं सोच रहा था – यह वही जांघें हैं जो उस रात में रक् पे फैली हुई थी… ऊँगली अंदर बहार कर रही थी… गुलाबी छूट से पानी टपक रहा था. और अब मेरे हाथ इनपे हैं… इतनी गरम… इतनी मोती… एक हाथ से पूरी नहीं पकड़ सकता.

मैंने पेअर को और ऊपर मसलने लगा… घुटनो के पास तक. हर दबाव के साथ आपि के शरीर में halki-khali कपन होती थी. उसके दूध ऊपर नीचे तेज़ हो गए थे. कुरता और ऊपर चढ़ा हुआ था… नीचे से पेट की गोरी स्किन दिख रही थी. सलवार का नाडा और ढीला हो गया था… जाँघों के बीच का हिस्सा थोड़ा सा खुला हुआ दिखाई दे रहा था.

मैं धीरे से बोलै (बिलकुल हलकी आवाज़ में),

“आपि… आप थक गयी होगी न रोज़ काम से… … ाचा लग रहा है”

कोई जवाब नहीं दिया आपि ने… बस उनकी सांस और तेज़ हो गयी.

उसने आँखें नहीं खोली… पर उनकी जांघें थोड़ी सी और फ़ैल गयी… जैसे खुद hi परमिशन दे रही हो.

मैंने और हिम्मत करके दोनों हाथों से उसकी मोती गरम जाँघों को पकड़ लिया.

उफ्फ्फ्फ़… कितनी गर्मी थी अंदर से… कितनी नरम… कितनी भरी हुई. हाथों में जैसे गरम मैदा का दूघ हो. मैं धीरे धीरे मसलता जा रहा था… ऊपर की तरफ… घुटनो से थोड़ा और ऊपर… सिर्फ 3-4 इंच दूर उनकी छूट से.

आपि का शरीर अब baar-baar काँप रहा था. दूध ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे हो रहे थे. होंठ थोड़े खुले थे… सांस में हलकी सी “हहममम” जैसी आवाज़ निकल रही थी.

मेरा लुंड अब पायजामा फाड़ने को हो रहा था.

दिमाग में सिर्फ एक hi बात – अगर मैं और ऊपर चला जॉन तोह… उसकी गुलाबी छूट मेरे हाथों में… और वो अभी भी नाटक कर रही है.
 
आपि अभी भी आँखें बंद किये लेती हुई थी, सोने का नाटक करती हुई. उनकी moti-moti जांघें मेरे दोनों हाथों में थी. मैंने धीरे धीरे उनको मसलते हुए ऊपर की तरफ बढ़ाया था… घुटनो से थोड़ा ऊपर… और अब सिर्फ 2-3 इंच दूर थी उनकी छूट से मेरा हाथ.



मैं पागल सा हो गया था अंदर से. लुंड पायजामा के अंदर पूरा तन गया था. दिमाग में सिर्फ एक hi ख्याल था – अब… अभी… बस एक और हल्का सा धक्का.

मैंने सांस रोक ली और अपना राइट हाथ धीरे से उनकी जाँघों के बीच ले गया.

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… जैसे hi मेरा हाथ उनकी सलवार के ऊपर से उनकी छूट पे पड़ा… पूरा जिस्म करंट सा लग गया.

उनकी छूट… बिलकुल गरम थी. सलवार का पतला कपडा भी गीला हो चूका था. मैंने हलके से प्रेस किया… और फील किया – उनकी पहली हुई छूट की शेप, दोनों मोती लिप्स alag-alag, और बीच में एक छोटी सी लाइन जहाँ से गर्मी निकल रही थी.

आपि का पूरा शरीर एक सेकंड में हिल गया.

जैसे करंट लग गया हो.

उनकी टाँगे एक पल के लिए टाइट हो गयी, दूध ज़ोर से ऊपर उठ गए, सांस रुक गयी… फिर tez-tez होने लगी. पर उन्होंने आँखें नहीं खोली. सिर्फ होंठ थोड़े से खुले और एक हलकी सी “ह्ह्हम्म्म…” जैसी आवाज़ निकली.

मैं रुका नहीं नलकी मैंने हाथ और ज़ोर से प्रेस किया… ऊपर नीचे सहलाने लगा. सलवार के ऊपर से hi उनकी छूट को मसलने लगा. हर छुअन के साथ उनकी छूट और गीली होती जा रही थी. कपडा अब पूरा गीला हो चूका था… मेरे उँगलियों पे उनकी छूट की गर्मी सीधा फील हो रही थी.

आपि ने एक हाथ नीचे किया और मेरा हाथ पकड़ लिया.

उनकी उँगलियाँ thar-thar काँप रही थी.

उन्होंने धीरे से मेरा हाथ हटाने की कोशिश की… पर उनके हातो में ज़ोर नहीं था. जैसे मैं नहीं था.

लेकिन मैं… मैं तोह पागल हो चूका था.

मैंने झट से उनका हाथ हटा दिया और फिर से अपना हाथ उनकी छूट पे रख दिया. इस बार और ज़ोर से सहलाने लगा – ऊपर से नीचे, नीचे से ऊपर, बीच में ऊँगली से उनकी छूट की लाइन को दबाते हुए.

आपि की सांस अब बिलकुल तेज़ हो गयी थी.

दूध zor-zor से upar-neeche हो रहे थे. होंठ काँप रहे थे. चेहरा लाल पद गया था. पर आँखें अभी भी बंद थी… बिलकुल बंद.

अब मेरा हाथ रुक नहीं रहा था.

मैंने उनकी सलवार का नाडा पकड़ा… धीरे से खिंच दिया. नाडा और ढीला हो गया.

फिर मैंने अपना हाथ अंदर घुसाने की कोशिश की.

जैसे hi मेरा हाथ सलवार के अंदर गया…

आपि एक झटके से उठ कर बैठ गयी!

उनकी आँखें अभी भी बंद थी, पर चेहरा पूरा लाल, सांस tez-tez.

उन्होंने झट से मेरा हाथ पकड़ लिया (अंदर hi अंदर) और अजीब सी, कांपती हुई आवाज़ में बोली,

“न… नहीं… असीम… नहीं बीटा…”

उसकी आवाज़ में दर भी था… शर्म भी थी… और कुछ और भी… जैसे तड़प.

लेकिन मैं अब रुकने वाला नहीं था.

मैंने झट से उनका हाथ पकड़ के हटा दिया और अपना हाथ पूरा अंदर घुसा दिया.

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… जैसे hi मेरा हाथ उनकी नंगी छूट पे पड़ा… मेरा लुंड पायजामा में झटका मार के पानी छोड़ने लगा.

उनकी छूट… पूरी गीली थी.

बिलकुल तड़पती हुई, गरम, पहली हुई.

दोनों मोती लिप्स मेरे हाथों में. बीच में छोटी सी छूट का मुँह खुला हुआ, अंदर से गरम पानी टपक रहा था. मैंने पहले तोह सिर्फ फील करता रहा – उँगलियों से दोनों लिप्स को सहलाता, बीच की लाइन पे ऊँगली घूमता, ऊपर वाले छोटे से नुब (क्लीट) को हलके से दबाता.

आपि अब बैठ के hi लेट गयी थी… पीठ तकिया पे, आँखें बंद, होंठ को zor-zor से काट रही थी.

उनके दूध अब बिलकुल मेरे मुँह के सामने थे… कुरता ऊपर चढ़ा हुआ, ब्रा का वाइट लास साफ़ दिख रहा था. हर सांस के साथ दूध इतने ज़ोर से हिल रहे थे की लग रहा था बहार निकल आएंगे.

मैंने और हिम्मत करके अपनी दो उँगलियाँ उनकी छूट के मुँह पे राखी… और धीरे से अंदर धकेल दी.

“उफ्फ्फ्फ़…”

आपि के मुँह से पहली सिसकारी निकली.

“आअह्ह्ह… ह्ह्हम्म्म…”

मैंने उँगलियाँ पूरी अंदर दाल दी… गरम, गीला, टाइट….

फिर dheere-dheere andar-bahar करने लगा.

पहले स्लो… फिर तेज़… फिर और तेज़.

“पूछ… पूछ… पूछ…” की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी.

उनकी छूट इतनी गीली हो चुकी थी की हर बार ऊँगली निकलते hi पानी की छींटे मेरे हाथ पे गिर रही थी.

आपि अब कण्ट्रोल नहीं कर प् रही थी.

आँखें अभी भी बंद थी, पर होंठ zor-zor से काट रही थी. चेहरा पूरा लाल, पसीने से चमक रहा था. दूध इतने ज़ोर से हिल रहे थे की ब्रा के अंदर निप्पल पूरे टाइट और खड़े हो गए थे – शेप साफ़ दिख रहा था.

मैंने उँगलियाँ और जोर से andar-bahar करने लगा.

कभी सीधा, कभी घूमते हुए, कभी ऊपर वाले नुब को ऊँगली से रगड़ते हुए.

आपि की सिसकारियां अब रुक नहीं रही थी…

“अह्ह्ह… हहैयय… असीम… अह्ह्ह… धीरे… उफ्फ्फ्फ़… आअह्ह्ह…”

उनकी आवाज़ में अब तड़प थी… मज़ा था… शर्म थी…

उनकी टाँगे khud-ba-khud फ़ैल गयी थी. सलवार अब घुटनो तक नीचे खिसक चुकी थी. उनकी पूरी नंगी छूट मेरे हाथों में थी – गुलाबी, गीली, पहली हुई, और हर ऊँगली के धक्के के साथ पानी निकल रहा था.

मेरा लुंड अब पायजामा में बिलकुल कण्ट्रोल से बहार था. मैं baar-baar सोच रहा था – ये मेरी सगी बड़ी आपि है…… और वो आँखें बंद किये मज़े ले रही है.

आपि का चेहरा… उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… कितना सेक्सी लग रहा था.

आँखें बंद, होंठ kaat-te हुए, गाल लाल, पसीना, साँसे तेज़… बिलकुल जैसे कोई पोर्न स्टार हो, पर मेरी शरीफ, पर्दानशीं करती बड़ी आपि.

मैंने स्पीड और बढ़ा दी… अब zor-zor से ऊँगली कर रहा था.

उनकी छूट अब पूरी तरह से मेरे हाथ को गीला कर चुकी थी. हर धक्के के साथ “पूछ पूछ पूछ” की आवाज़ तेज़ हो रही थी.

आपि अब और नहीं रोक प् रही थी…

उन्होंने दोनों हाथों से बीएड शीट पकड़ ली, दूध ज़ोर से हिल रहे थे, टाँगे काँप रही थी…

“अह्ह्ह्हह… असीम… आअह्ह्ह… हहैयय… और… उफ्फ्फ्फ़…”

मेरी 3 उँगलियाँ उनकी गरम, गीली, पहली हुई छूट में andar-bahar हो रही थी… बहुत तेज़… बहुत ज़ोर से.

“पूछ… पूछ… पूछ… पूछ…”

हर धक्के के साथ उनकी छूट से पानी की छींटे मेरे हाथ पे गिर रही थी. उनकी छूट इतनी टाइट और गरम थी की उँगलियाँ अंदर जाते hi पूरी गीली हो जाती थी. मैंने स्पीड और बढ़ा दी… अब 3 उँगलियाँ पूरी अंदर तक घुसा के बहार निकालता और फिर एक hi झटके में अंदर पेल देता.

आपि की सिसकारियां अब रुक नहीं रही थी…

“अह्ह्ह… हहैयय… असीम… आअह्ह्ह… बहुत तेज़… उफ्फ्फ्फ़… अह्ह्ह्हह…”

उनकी आवाज़ अब बिलकुल पागल सी हो गयी थी. चेहरा पूरा लाल, पसीने से चमक रहा था. दूध zor-zor से upar-neeche हिल रहे थे. अचानक उन्होंने दोनों हाथों से अपने बड़े बड़े दूध पकड़ लिए… कपडे के ऊपर से hi zor-zor से मसलने लगी. दूध को दोनों तरफ से दबती, निप्पल को उँगलियों से पकड़ के घूमती….

मैं ये देख कर खुश हो गया…

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मेरी शरीफ बड़ी आपि… … अब अपने दूध खुद मसल रही थी… मेरी उँगलियों के धक्कों के साथ साथ. मेरा लुंड पायजामा में झटके मार रहा था. मैं और तेज़ ऊँगली करने लगा… पूरी ताकत से.

फिर मैंने और नहीं रोक पाया…

मैंने झट से अपना मुँह नीचे किया और सीधा उनकी नंगी, गीली छूट पे रख दिया!

आपि चौंक कर बिलकुल पागल हो गयी…

“अह्हह्ह्ह्ह… असीम… नहीं… बीटा… मत… उफ्फ्फ्फ़… हटाओ… हटाओ मुँह… आअह्ह्ह…”

उन्होंने दोनों हाथों से मेरा सर पकड़ के हटाने की कोशिश की… ज़ोर से धकेलने लगी… लेकिन मैं बिलकुल नहीं हत्ता.

मैंने अपनी जीभ बहार निकाली और उनकी पहली हुई गुलाबी छूट पे zor-zor से चाटने लगा… ऊपर से नीचे… नीचे से ऊपर… बीच की लाइन पे जीभ घूमता… क्लीट को मुँह में लेके चूसने लगा… और फिर पूरी छूट को मुँह में भर के ज़ोर से चूसने लगा.

“सलूरररप… सलूरररप… चुऊस… पूछ… पूछ…”

आपि अब पूरी तरह पागल हो चुकी थी…

“अह्ह्ह्हह… असीम… हैयय… नहीं… उफ्फ्फ्फ़… क्या कर रहे हो… आअह्ह्ह… मेरी छूट… उफ्फ्फ्फ़…”

उन्होंने पहले तोह मेरा सर हटाने की कोशिश की… पर 10-15 सेकंड बाद उनका हाथ रुक गया… और फिर… उन्होंने मेरा सर दोनों हाथों से पकड़ के अपनी छूट में और ज़ोर से दबाने लगी!

“छतो… और छतो… अह्ह्ह्हह… और ज़ोर से… उफ्फ्फ्फ़… जीभ अंदर दाल दो… आअह्ह्ह…”

अब आपि खुद मेरा मुँह अपनी छूट पे दबा रही थी. उनकी टाँगे मेरे कन्धों पे रख दी थी… पूरी छूट मेरे मुँह में थी. मैं जीभ अंदर daal-daalke अंदर बहार कर रहा था… उनकी छूट का गीला पानी मेरे मुँह में भर रहा था… मैं choos-choos के पीटा जा रहा था.

आपि अब बिलकुल कण्ट्रोल खो चुकी थी…

“अह्ह्ह… असीम… बीटा… और… और ज़ोर से… मेरी छूट चाट… उफ्फ्फ्फ़… मैं मर जाउंगी… आअह्ह्ह्हह…”

उनकी बॉडी काँप रही थी… दूध अब khud-ba-khud ज़ोर से हिल रहे थे… निप्पल इतने टाइट हो गए थे की कपडे के ऊपर से भी साफ़ उभर रहे थे. उन्होंने अपने दूध को और ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया… जैसे पहाड़ देना चाहती हो.

और फिर…

आपि का पूरा जिस्म एक ज़ोर के झटके से काँप उठा…

“Ahhhhhhhhhhhhh… असीम… आ गयी… आअह्ह्ह… मैं झाड़ रही हूँ… उफ्फ्फ्फ़… … पि लो मेरा पानी… अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह…”

उनकी छूट से garam-garam पानी की बड़ी सी धार निकल गयी… सीधा मेरे मुँह में!

मैं मुँह नहीं हटाया… पूरा पानी choos-choos के पीटा गया… कितना गरम था… कितना नमकीन… कितना ज़्यादा था… मेरा मुँह भर गया… थोड़ा थोड़ा मेरे होंठों से बहार भी टपक रहा था.

आपि पूरी तरह थक कर लेट गयी… सांस tez-tez… बॉडी हिल रही थी… आँखें अभी भी बंद… चेहरा बिलकुल लाल.

लेकिन मैं… मैं अभी भी नहीं रुका.

आपि के शांत होने के बाद भी मैं उनकी छूट छत्ता रहा… dheere-dheere… जीभ से उनकी गीली लिप्स को सहलाता… क्लीट को हलके से चुस्त… अंदर से निकलते हर बूँद को छत्ता.

आपि धीरे से कांपती हुई बोली,

“असीम… बीटा… बस… अब बस… उफ्फ्फ्फ़… बहुत हो गया…”

लेकिन मैं सिर्फ हंस के उनकी छूट पे और एक चुम्मा लगा दिया… और जीभ से एक बार और अंदर घुसा दिया.

आपि अभी भी थोड़ी thar-thar काँप रही थी. उनकी सांस dheere-dheere नार्मल होने लगी थी. उन्होंने धीरे से अपनी टाँगे बंद की, सलवार को घुटनो से ऊपर खींच कर ठीक से पेहेन लिया और नाडा भी बांध दिया. दुपट्टा को भी सीने पे लपेट लिया. फिर उन्होंने धीरे से आँखें खोली… और सीधा मेरी आँखों में देखने लगी.

मैं भी उनकी आँखों में देखता रहा… प्यार से…

मेरी आँखें उनके चेहरे पे थी – लाल गाल, पसीने से चमकती स्किन, थोड़े खुले होंठ… और उनकी आँखों में वह शर्म, वह तड़प, वह प्यार उफ्फ्फ.

आपि ने 10-15 सेकंड तक मेरी आँखों में देखा… फिर शर्मा कर नज़र नीचे कर ली. उनके गाल और लाल हो गए. उन्होंने बहुत हलकी, कांपती हुई आवाज़ में बोलै,

“असीम… ये सब… गलत है बीटा… बहुत गलत…”

मैं कुछ नहीं बोलै.

सिर्फ धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और उनके बड़े बड़े दूध पे रख दिया… कपडे के ऊपर से hi. उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… कितने गरम, कितने भरे हुए, कितने सॉफ्ट थे. मैंने दोनों हाथों से dheere-dheere उनको सहलाने लगा… हलके से दबाया… फिर छोड़ा… फिर फिर से सहलाया.

आपि ने एक हलकी सी सांस ली पर नज़र नहीं उठायी.

मैं धीरे से उनके पास और खींच गया और प्यार से बोलै,

“आपि… आप इतनी सुन्दर हो… इतनी प्यारी हो… मैं आपको देखता हूँ तोह दिल नहीं मानता… आप हमेशा सबके लिए इतना करती हो… घर संभालती हो… हम सबको खुश रखती हो… पर आप खुद कभी कुछ नहीं मांगती… आज पहली बार… मैं आपको थोड़ा सा सुकून दे रहा था न… आपको भी तोह ाचा लग रहा था… मैंने फील किया था…”

मैंने बात करते हुए उनके दूध को और धीरे से मसला… दोनों हाथों से एक साथ… ऊपर से नीचे… फिर gol-gol घूमते हुए… उनकी सॉफ्टनेस को पूरी तरह फील करते हुए. उनके दूध इतने बड़े थे की मेरे दोनों हाथ भर गए थे. मैंने हलके से उनको ऊपर उठाया… फिर धीरे से दबाया… जैसे उनको प्यार से सेहला रहा हूँ.

आपि ने हलकी सी सिसकारी ली… पर नज़र अभी भी नीचे थी.

मैं और प्यार से बोलै,

“आपि… आपको पता है… जब मैं कॉलेज से वापस आया था… आपको देख कर मेरा दिल कितना खुश हुआ था… आपकी मुस्कान… आपकी बातें… … सब कुछ इतना प्यारा लगता है… मैं सोचता था की आप हमेशा इतनी स्ट्रांग रहती हो… पर अंदर से आप भी तड़पती होगी न… थोड़ी सी प्यार चाहिए होगा… मैं आपका बीटा हूँ… आपका सबसे छोटा भाई … मैं आपको कभी तकलीफ नहीं पहुंचाऊंगा… बस आपको थोड़ा सा अपना प्यार देना चाहता हूँ… आपको सुकून देना चाहता हूँ…”

मैंने उनके दूध को अब दोनों हाथों से और अच्छे से पकड़ लिया… halke-halke दबाते हुए… उनकी गरम सॉफ्टनेस को महसूस करते हुए… उनकी सांस तेज़ हो रही थी… दूध मेरे हाथों में हिल रहे थे. मैंने उनके निप्पल के ऊपर वाले हिस्से को उँगलियों से धीरे से सहलाया… बिलकुल प्यार से… बिना जोर किये.

आपि अभी भी शर्मा कर नीचे देख रही थी… पर उनका शरीर अब रिलैक्स होने लगा था. उन्होंने बहुत हलके से बोलै,

“असीम… हम दोनों… रिश्ता… ये सब… घर… सब गलत समझेंगे…”

मैं तुरंत उनके दूध को और प्यार से सहलाते हुए बोलै,

“आपि… लोग और घर को अभी छोड़ दो… सिर्फ हम दोनों के बीच की बात है… आप मेरी बड़ी आपि हो… मैं आपका असीम हूँ… जो आपको हमेशा से प्यार करता है… आज जो हुआ… वो सिर्फ प्यार था… आपकी थकान दूर करने के लिए… आपकी तड़प दूर करने के लिए… देखो आपकी आँखें… आपकी सांस… आपका शरीर… सब कुछ बोल रहा है की आपको भी ाचा लगा… मैं आपको कभी मजबूर नहीं करूँगा… बस आप मुझे अपना प्यार थोड़ा सा दे दो… मैं आपके लिए कुछ भी कर सकता हूँ… आपको खुश देखना चाहता हूँ… आपको सुकून देना चाहता हूँ…”

मैंने बात करते हुए उनके दूध को और dheere-dheere मसलता रहा… कभी ऊपर उठा के… कभी हलके से दबाके… कभी उनको सेहलाके… उनकी मुलायम गरम सॉफ्टनेस मेरे हाथों में जैसे पिघल रही थी. उनके दूध अब और भी उभर गए थे… कपडे के ऊपर से भी उनकी शेप पूरी तरह फील हो रही थी.

आपि ने धीरे से अपना हाथ मेरे हाथ पे रख दिया… पर हटाया नहीं… सिर्फ रख दिया. उनकी उँगलियाँ thar-thar काँप रही थी. नज़र अभी भी नीचे… पर चेहरा थोड़ा सा रिलैक्स हो गया था.

मैं और प्यार से बोलै,

“आपि… बस एक बार… आँखें उठा के देखो… मेरी आँखों में… मैं आपको कितना प्यार करता हूँ… आप मेरी दुनिया हो… आपको देख कर hi मेरा दिल खुश हो जाता है… आज जो हुआ… वो सिर्फ हम दोनों के बीच का प्यार था… कोई गलत नहीं… बस आप थोड़ा सा मान लो… मैं आपको हमेशा खुश रखूँगा… हमेशा आपके पास रहूँगा…”

आपि ने धीरे से आँखें बंद कर ली. उन्होंने एक हलकी सी सांस ली और बीएड पे लेट गयी… पीठ तकिये पे, दोनों हाथ ऊपर की तरफ. उनकी सांस अभी भी थोड़ी तेज़ थी… गाल लाल… चेहरा शर्मा के लाल. सलवार अब ठीक से पहनी हुई थी, पर दुपट्टा अब सिर्फ सीने पे लटका हुआ था.

मैं उनके बगल में लेट गया… बिलकुल करीब… मेरा शरीर उनके शरीर से टच हो रहा था. मेरा एक हाथ तुरंत उनके बड़े बड़े दूध पे चला गया… कपडे के ऊपर से hi. उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… कितने गरम, कितने भरे हुए… मेरे हाथ में जैसे दो bade-bade गरम गुब्बारे हो. मैंने dheere-dheere मसलने शुरू कर दिया… हलके से दबाया… फिर छोड़ा… फिर ज़ोर से पकड़ के मसला.

आपि की आँखें बंद hi रही… पर उनकी सांस और तेज़ हो गयी.

मैं और करीब हो गया… उनके कान में हलकी सी सांस छोड़ते हुए उनके दूध को दोनों हाथों से और अच्छे से पकड़ लिया. फिर मैंने धीरे से उनकी कुर्ती का पल्ला उठाया… ऊपर की तरफ खींचा… और पूरा ऊपर कर दिया. ब्रा भी साथ में ऊपर कर दिया…

उफ्फफ्फ्फ़ दोस्तों…

आपि के दोनों बड़े बड़े दूध एकदम से बहार आ गए!

कितने बड़े… कितने गोल… कितने भरे हुए… बिलकुल दूध से भरे गुब्बारे जैसे… gori-gori स्किन चमक रही थी… बीच में दोनों निप्पल टाइट और खड़े हो गए थे… laal-laal… बिलकुल चेरी जैसे.

मैं पागल सा हो गया…

“आपि… उफ्फ्फ्फ़… आपके दूध… कितने ज़बरदस्त हैं… इतने बड़े… इतने भरे हुए… मैं ज़िन्दगी में ऐसे दूध पहले कभी नहीं देखे… उफ्फ्फ्फ़… देखो कितने टाइट हैं… कितने गोल… ”

मैंने झट से दोनों हाथों से उनके नंगे दूध पकड़ लिए और zor-zor से दबाने लगा…

दबाया… छोड़ा… फिर और ज़ोर से दबाया… दूध मेरे हाथों में हिल रहे थे…… जब मैं ज़ोर से दबाता था तोह दूध ऊपर की तरफ उभर जाते थे… निप्पल और टाइट हो जाते थे.

आपि की सिसकारी निकल गयी…

“अह्ह्ह… असीम… उफ्फ्फ्फ़…”

मैं और पागल हो गया…

“आपि… आपके दूध. उफ्फ्फ्फ़… इतने सॉफ्ट… इतने गरम… इतने हैवी… मैं इनको पकड़ के hi पागल हो रहा हूँ… उफ्फ्फ्फ़… देखो कितना दूध है अंदर… अगर मैं इनको चूसूं तोह कितना मज़ा आएगा… आपके दूध को मैं रोज़ मसालुंगा आपि… रोज़ इनको प्यार दूंगा…”

मैंने अब निप्पल पकड़ लिया… दोनों निप्पल को उँगलियों के बीच में लेके zor-zor से मरोड़ने लगा… घुमाया… हलके से खिंच लिया… फिर फिर से मरोड़ दिया.

आपि की सिसकारी तेज़ हो गयी…

“अह्ह्ह्हह… असीम… हैयय… निप्पल… अह्ह्ह… धीरे… उफ्फ्फ्फ़… आअह्ह्ह…”

उनकी बॉडी काँप रही थी… टाँगे थोड़ी सी फ़ैल गयी… सलवार के अंदर से फिर से गर्मी निकलने लगी थी. उनके दूध लाल पद गए थे मेरे दबाव से… निप्पल पूरे खड़े और laal-laal हो गए थे.

मैं उनके दूध की और तारीफ करते हुए zor-zor से मसलता रहा…

“आपि… आपका पूरा जिस्म hi इतना परफेक्ट है… देखो जांघें कितनी भरी हुई है… और ये दूध… उफ्फ्फ्फ़… ये तोह खज़ाना हैं… मैं आपकी बॉडी को देख के hi पागल हो जाता हूँ… आप इतनी सेक्सी हो आपि… इतनी हॉट… आपको देख कर कोई भी पागल हो जायेगा… पर ये सब सिर्फ मेरा है… सिर्फ मेरा…”

मैंने एक दूध को दोनों हाथों से पकड़ के ज़ोर से मसला… ऊपर की तरफ उठाया और निप्पल को मुँह के बिलकुल करीब ले आया… पर अभी चूसा नहीं… सिर्फ सांस छोड़ दी उसपे… गरम सांस.

आपि अब और नहीं रोक प् रही थी…

उनकी सांस बिलकुल तेज़ हो गयी… बॉडी पसीने से चमक रही थी… आँखें अभी भी बंद… पर होंठ खुले थे और halki-halki सिसकारियां निकल रही थी…

“अह्ह्ह… असीम… … आअह्ह्ह…”

मैं अब दोनों दूध को एक साथ पकड़ के zor-zor से दबाने लगा… मरोड़ने लगा… उनकी बॉडी को अपने से चिपकाये हुए… मेरा खड़ा लुंड उनकी जांघ से रगड़ खा रहा था.
 
मेरा लुंड बिलकुल तैयार था… टोपा से पानी टपक रहा था. मैंने आपि की दोनों टाँगे थोड़ी और फैला दी और लुंड को उनकी नंगी गुलाबी छूट के मुँह पे रखा… धीरे से रगड़ने लगा…



जैसे hi लुंड उनकी छूट के मुँह पे टच हुआ, आपि ने झट से आँखें खोली और मेरा हाथ पकड़ लिया. उनकी आवाज़ काँप रही थी,

“असीम… नहीं बीटा… रुक जाओ… ये… ये मैं तुम्हारे साथ नहीं कर सकती… तुम मेरे भाई हो… मेरा बीटा जैसा… प्लीज… बहुत गलत है ये सब…”

उनकी आँखों में शर्म और दर था… पर उनकी छूट अभी भी मेरे लुंड के मुँह पे halke-halke रगड़ खा रही थी… जैसे उनकी छूट लुंड मांग रही हो.

मैं रुक गया… लुंड हटाया नहीं… बस उनकी छूट पे hi रगड़ता हुआ धीरे से बोलै,

“आपि… मैं सिर्फ आपको खुश देखना चाहता हूँ… आप इतने दिन से अंदर hi तड़प रही हो… मैं सब जानता हूँ… रात को किचन में… आज यहाँ बीएड पे… मैं देख चूका हूँ… "

"नहीं असीम ये गलत है , मैं तुम्हारे साथ ये सब नहीं कर सकती "

"अगर मेरी जगह कोई और हो तो… कोई भरोसे वाला… जो आपको सच में खुश कर सके… तोह क्या आप मान जाओगी?”

जैसे hi मैंने ये बात बोली… आपि का पूरा जिस्म एक झटके से काँप उठा. उनकी आँखें फैल गयी… गाल एक सेकंड में लाल पद गए… उन्होंने ज़ोर से मेरा हाथ धकेल दिया और गुस्से में बोली,

“असीम!!! क्या बकवास कर रहे हो तुम??? मैं तुम्हारी बड़ी आपि हूँ… और तुम मुझे किसी और के साथ…? तुम्हे शर्म नहीं आती??? निकल जाओ यहाँ से अभी!!!”

उनकी आवाज़ में गुस्सा था… पर जब उन्होंने मुझे धकेला… उनकी टाँगे थोड़ी और फ़ैल गयी… और उनकी छूट से एक हल्का सा पानी का झटका निकल गया… उनके बड़े बड़े दूध zor-zor से ऊपर नीचे हो रहे थे… सांस तेज़ हो चुकी थी.

मैं मुस्कुराया… और उनकी moti-moti जाँघों को दोनों हाथों से पकड़ लिया. धीरे धीरे उनको मसलते हुए बोलै,

“आपि… गुस्सा मत करो… मैं आपको तकलीफ नहीं पहुंचाऊंगा… मैं तोह सिर्फ आपकी ख़ुशी चाहता हूँ… देखो आपकी बॉडी कितनी तड़प रही है… मैं एक बहुत भरोसे वाला आदमी ला सकता हूँ… जो आपको प्यार से… धीरे धीरे… आपकी हर तड़प दूर कर दे… मैं बस आपको खुस देखना चाहता हूँ… बस इतना hi…”

मैंने बात करते हुए उनकी जाँघों को और अच्छे से मसलना शुरू कर दिया… दोनों हाथों से उनकी मोती गरम जांघें सहलाता… हलके से दबाता… ऊपर की तरफ घुटनो तक… फिर नीचे की तरफ… उनकी छूट के बिलकुल करीब तक हाथ ले जाता… पर अंदर नहीं डालता.

आपि ने मुँह से बोलै,

“नहीं असीम… बिलकुल नहीं… मैं ऐसी नहीं हूँ… मैं शरीफ औरत हूँ… घर की इज़्ज़त हूँ… ये सब सोचना भी गलत है…”

पर उनकी आवाज़ अब पहले जैसी तेज़ नहीं थी… सांस और तेज़ हो रही थी… आँखें धीरे धीरे बंद होने लगी थी… जब मैं उनकी जाँघों को मसलता… उनकी बॉडी हलके से काँप जाती.

मैं और करीब हो गया… उनके बड़े बड़े दूध पे एक हाथ रख दिया धीरे धीरे सहलाते हुए बोलै,

“आपि… मैं आपको फाॅर्स नहीं करूँगा… बस सोचो… अगर कोई ऐसा आदमी हो… जो आपको रात भर प्यार दे सके… आपके इन बड़े बड़े दूध को प्यार से सहलाये… आपकी थकान दूर करे… आप खुश हो जाओगी न? मैं सिर्फ आपको खुस देखना चाहता हूँ… मुस्कुराते हुए… खुश होते हुए…”

मैंने बात करते हुए उनके दूध को दोनों हाथों से halke-halke मसलना शुरू कर दिया… ऊपर से नीचे… gol-gol घूमते हुए… बिलकुल प्यार से… बिना जोर किये. उनके दूध इतने गरम और सॉफ्ट थे की मेरे हाथ में जैसे पिघल रहे थे. हर दबाव के साथ आपि की सांस तेज़ हो जाती.

आपि अब upar-upar से ना बोल रही थी…

“नहीं बीटा… प्लीज… मत बोलो ऐसी बातें… मैं… मैं नहीं कर सकती…”

पर उनकी बॉडी बिलकुल अलग जवाब दे रही थी… दूध मेरे हाथों में और उभर रहे थे… निप्पल अंदर से टाइट हो गए थे… उनकी छूट से अब halke-halke पानी निकल रहा था… जांघें khud-ba-khud थोड़ी और फ़ैल रही थी… सांस में हलकी सी “उफ्फ्फ…” जैसी आवाज़ आ रही थी.

मैं उनके कान के पास मुँह ले गया… धीरे से सांस छोड़ते हुए उनके दूध को और प्यार से मसलते हुए बोलै,

“आपि… बस एक बार सोचो… मैं आपके लिए सब कुछ कर सकता हूँ… आपको खुश देखना चाहता हूँ… वो आदमी आपको कभी तकलीफ नहीं पहुंचाएगा… सिर्फ प्यार देगा… और मैं… मैं बस आपको खुश देखूंगा… बस इतना hi…”

आपि की आँखें अब पूरी बंद थी… होंठ थोड़े खुले थे… चेहरा लाल… दूध मेरे हाथों में zor-zor से हिल रहे थे… उनकी छूट अब बहुत गीली हो चुकी थी… पर वो ऊपर से अभी भी धीरे से बोल रही थी,

“असीम… ये… ये सब गलत है बीटा… मैं… मैं सोच भी नहीं सकती…”

लेकिन अंदर से… दोस्तों… आपि पूरी गरम हो चुकी थी… उनकी बॉडी खुद बोल रही थी की वो अंदर से तड़प रही है… सिर्फ वो बात सुनकर की कोई और उसको प्यार से छोड़ सकता है.

मैं अभी भी उनके दूध और जाँघों को dheere-dheere मसल रहा था… उनको गरम करता जा रहा था…

आपि ऊपर से ना बोल रही थी पर उनकी बॉडी खुद बोल रही थी. मैंने धीरे से उनकी दोनों टाँगे और फैला दी और झट से नीचे झुक गया. मुँह उनकी नंगी छूट पे रख दिया.

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… जैसे hi मेरी जीभ उनकी पहली हुई गुलाबी छूट पे लगी… आपि का पूरा जिस्म एक झटके से काँप उठा.

“अह्ह्ह… असीम… नहीं बीटा… उफ्फ्फ्फ़… मत… अह्ह्ह…”

पर मैं रुकने वाला नहीं था. मैंने दोनों हाथों से उनकी मोती गरम जांघें पकड़ ली और जीभ से zor-zor से चाटने लगा. ऊपर से नीचे… नीचे से ऊपर… बीच की लाइन पे जीभ घूमता… क्लीट को मुँह में लेके हलके से चूसने लगा. उनकी छूट का गीला पानी मेरे मुँह में भर रहा था… बिलकुल गरम… नमकीन…

आपि सिसकती रही…

“अह्ह्ह… हैयय… असीम… उफ्फ्फ्फ़… क्या कर रहे हो… अह्ह्ह… मेरी छूट… उफ्फ्फ्फ़… आअह्ह्ह…”

उनकी टाँगे मेरे कन्धों पे रख गयी… khud-ba-khud फ़ैल गयी… दूध zor-zor से ऊपर नीचे हिल रहे थे. वो बीएड शीट को दोनों हाथों से पकडे हुए थी… होंठ काट रही थी… आँखें बंद… चेहरा पूरा लाल…

मैं और तेज़ चाटने लगा… जीभ अंदर दाल दाल के अंदर बहार करने लगा… “सलूरररप… सलूरररप… चुऊस…” की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी. उनकी छूट से पानी की छींटे मेरे मुँह पे गिर रही थी. मैंने क्लीट को मुँह में लेके ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया.

आपि अब कण्ट्रोल खो चुकी थी…

“अह्ह्ह्हह… असीम… बीटा… उफ्फ्फ्फ़… और… और ज़ोर से… अह्ह्ह… मैं… मैं मर जाउंगी… उफ्फ्फ्फ़… आअह्ह्ह…”

उनकी बॉडी काँप रही थी… दूध लाल पद गए थे… निप्पल पूरे टाइट हो गए थे. मैंने जीभ और अंदर दाल दी… tez-tez अंदर बहार करने लगा… और साथ में ऊँगली से क्लीट को रगड़ने लगा.

बस 2 मिनट में hi आपि का पूरा जिस्म एक ज़ोर के झटके से काँप उठा…

“अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… असीम… आ गयी… आअह्ह्ह… मैं… मैं झाड़ रही हूँ… उफ्फ्फ्फ़… पि लो… पि लो मेरा पानी… अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह…”

उनकी छूट से गरम गरम पानी की बड़ी सी धार निकल गयी… सीधा मेरे मुँह में! मैं मुँह नहीं हटाया… पूरा पानी चूस चूस के पीटा गया… कितना ज़्यादा था… कितना गरम था… मेरा मुँह भर गया… थोड़ा थोड़ा मेरे होंठों से बहार भी टपक रहा था.

आपि पूरी तरह थक कर लेट गयी… सांस तेज़ तेज़… बॉडी हिल रही थी… आँखें बंद… चेहरा बिलकुल लाल… होंठ थार थार काँप रहे थे.

मैं उनकी छूट पे एक चुम्मा लगा के ऊपर आया… उनके पास लेट गया और धीरे से उनके कान में बोलै,

“आपि… सुबह बता देना… मैं आपके लिए वो भरोसे वाला आदमी लाऊँ या नहीं… मैं सिर्फ आपको खुश देखना चाहता हूँ…”

आपि ने कुछ नहीं बोलै… बस आँखें बंद किये हुए लेती रही… पर उनकी सांस अभी भी तेज़ थी… और उनकी छूट से अब भी हल्का हल्का पानी टपक रहा tha.Phir मैं अपने कमरे में जाकर सो गया आपि के बारे में सोचते हुए.

सुबह 8 बजे हॉल में नाश्ता चल रहा था.

अम्मी ने गरम गरम पराठे और चाय बना राखी थी. अब्बू सबसे पहले आये… फिर नूर… ज़ैनब आपि… और लास्ट में मेरी बड़ी आपि अनाम अंदर आयी.

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… जैसे hi आपि अंदर आयी… मेरा लुंड पायजामा के अंदर एक झटका मार बैठा.

आपि आज भी नार्मल सलवार सूट में थी… पर चेहरा थोड़ा लाल था… नज़र नीचे… मुझे देख कर एक सेकंड के लिए रुक गयी… फिर तुरंत नज़र घुमा ली. जब वो टेबल पे बैठने के लिए झुकी तोह उनके बड़े बड़े दूध हलके से हिल गए… पर वो मुझसे आँख भी नहीं मिला रही थी.

मैं उनको घर रहा था… रात वाला सन आँखों के सामने आ रहा था – उनकी छूट मेरे मुँह में… पानी निकलते हुए… सिसकती हुई…

आपि ने पराठा लिया… पर हाथ थोड़ा काँप रहा था. जब मैंने उनको चाय मांगी तोह उन्होंने कप रख दिया बिना मेरी तरफ देखे. गाल और लाल हो गए. नूर ने कोई मज़ाक किया तोह सब है पड़े… आपि भी मुस्कुरायी… पर मेरी तरफ एक बार भी नहीं देखा.

नाश्ता ख़तम होते hi मैं झट से उठा.

“अम्मी… मैं अर्जुन के यहाँ जा रहा हूँ… थोड़ी देर में आता हूँ.”

अम्मी ने हाँ कर दी. आपि ने कुछ नहीं बोलै… सिर्फ नीचे देखती रही.

मैं सीधा अर्जुन के घर पहुँच गया.

अर्जुन बिस्तर पे लेट के मोबाइल चला रहा था. मुझे देख के मुस्कुराया,

“अरे सेल असीम! आज इतनी जल्दी? शॉप से भाग आया क्या?”

हम दोनों नार्मल बातें करने लगे… कॉलेज की… गयम की… गाओं की… थोड़ी देर ऐसे hi बातें हुई.

फिर मैंने मोबाइल निकाला. पहले से 2-3 गरम फोटो रेडी राखी थी – आपि की… टाइट सलवार सूट में… दूध उभरे हुए… गांड का चउरवे साफ़… क्लीवेज गहरा… एक में वो झुकी हुई थी… दूध लटकते हुए…

मैंने फ़ोन अर्जुन को थमा दिया और बोलै,

“यार… ये देख… कैसी लग रही है?”

अर्जुन फ़ोन लेते hi पहली फोटो ज़ूम करके देखने लगा. उसकी आँखें फैल गयी… लुंड पायजामा के ऊपर से hi खड़ा होने लगा.

“साली… ये तो वही है बस?! फ़क… ये तोह पूरी माल है! दूध देख… इतने बड़े और भरे हुए… गांड देखो… कितनी मोती और लचकती हुई… ये तोह छोड़ने वाली चीज़ है यार!”

मैं चुप चाप बैठा था… अंदर से मज़ा आ रहा था.

अर्जुन फोटो पे ऊँगली फेरते हुए बोलै,

“यार… ये अर्रंगे कर… मैं इसको छोड़ना चाहता हूँ… कितना लेना है तुझे? बोल… मैं दे दूंगा.”

मैं धीरे से मुस्कुराया और बोलै,

“यार… अगर मैं इसको तेरे निचे ला दूँ… तोह कितना देगा?”

अर्जुन बिना सच्चे बोलै,

“जितना तू बोले… बोल न!”

मैं नीचे देखते हुए बोलै,

“10000 पैर शॉट…”

अर्जुन हंस के बोलै,

“डील बस! 10000 पैर शॉट… तू बस इसको ला… मैं पूरी रात छोडूंगा इस रंडी को!”

दोस्तों… मैं अंदर से पागल हो गया था… मेरी बड़ी आपि अनाम… अब अर्जुन उसको 10000 देकर छोड़ने वाला था…

अर्जुन के घर से बहार निकलते hi ख़ुशी से पागल हो रहा था. 10000 पैर शॉट… वो भी khushi-khushi मान गया! मेरा लुंड अभी भी half-khada था पायजामा में. सीधा घर की तरफ भगा.

घर पहुंचा तो हॉल बिलकुल खली था. अब्बू शॉप पे, अम्मी और ज़ैनब ऊपर, नूर कॉलेज. सिर्फ किचन से हलकी सी आवाज़ आ रही थी – बर्तन की.

मैं धीरे से किचन के दरवाज़े पे गया. आपि वहां कड़ी थी… पीठ मेरी तरफ किये… सलवार सूट टाइट… मोती गांड हिल रही थी जब वो बर्तन धोने के लिए झुक रही थी. उफ्फ्फ्फ़… रात वाला सन आँखों के सामने आ गया – उनकी गुलाबी छूट मेरे मुँह में पानी छोड़ रही थी.

मैंने उनको इशारे से बुलाया… पहले एक ऊँगली से अपने कमरे की तरफ इशारा किया… फिर हाथ से “ऊपर आ जाओ” सिग्न दिया.

आपि ने पीछे मुद कर देखा… उनका चेहरा एक सेकंड के लिए लाल हो गया… आँखें नीचे… पर उन्होंने हाँ में सर हिला दिया. मैं सीधा अपने कमरे में चला गया… दरवाज़ा खुला छोड़ दिया.

2 मिनट बाद… हलके क़दमों की आवाज़ आयी. आपि अंदर आयी… दरवाज़ा बंद किया… और कड़ी हो गयी. नज़र नीचे… हाथ सामने बंधे हुए… सांस तेज़.

मैं पीछे से एक झटके में उनको पकड़ लिया. दोनों हाथों से उनकी कमर पकड़ी… उनको अपने से चिपका लिया… और सीधा उनकी गर्दन पे लिप्स रख दिए.

चुम्मा… चूसने लगा… गर्दन को चाटने लगा…

साथ hi दोनों हाथों से आगे बढ़ कर उनके बड़े बड़े दूध पकड़ लिए… कपडे के ऊपर से hi ज़ोर से मसलने लगा.

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… कितने गरम… कितने भरे हुए थे… मेरे हाथों में जैसे दो बड़े गरम गुब्बारे हो.

आपि सीसियते हुए बोली,

“अह्ह्ह… असीम… उफ्फ्फ्फ़… क्या कर रहे हो बीटा… छोडो… अह्ह्ह…”

मैं उनकी गर्दन चूसते हुए… दूध zor-zor से दबाते हुए… कान में धीरे से बोलै,

“आपि… बताओ न… आपका जवाब क्या है… मैं आपके लिए वो आदमी लाऊँ… जो आपको खुश कर दे…?”

आपि सीसियते हुए… कांपते हुए पूछी,

“कौन… कौन है वो आदमी… असीम… बताओ… अह्ह्ह…”

मैं उनके दूध को और ज़ोर से मसलते हुए… गर्दन पे चुम्मा लेते हुए बोलै,

“अर्जुन… मेरा दोस्त अर्जुन… उसका लुंड बहुत बड़ा और मोटा है… वो आपको प्यार से… धीरे धीरे… पूरी तरह खुश कर देगा…”

जैसे hi मैंने “अर्जुन” नाम लिया… आपि पूरी तरह शॉक हो गयी!

उन्होंने झट से मेरा हाथ धकेल दिया… घूम कर मेरी तरफ देखा… आँखें फैली हुई… चेहरा लाल… गुस्से में बोली,

“अर्जुन??? वो कला लड़का तेरा दोस्त??? असीम तुम पागल हो गए हो क्या??? मैं तुम्हारी बड़ी आपि हूँ… और तुम मुझे उसके साथ…? तुम्हे शर्म नहीं आती??? मैं शरीफ औरत हूँ… घर की इज़्ज़त हूँ… तुम मुझे किसी गैर मर्द के saath…wo भी अपने दोस्त के साथ??? भग्ग जाओ यहाँ से अभी!!!”

उनकी आवाज़ तेज़ थी… पर जब वो मुझे धकेल रही थी… उनकी टाँगे थोड़ी फैली हुई थी… दूध zor-zor से ऊपर नीचे हो रहे थे… सांस बहुत तेज़ हो चुकी थी.

मैं उनको फिर से पीछे से पकड़ लिया… उनकी कमर से चिपक गया… दूध पे हाथ रख दिया… धीरे धीरे मसलते हुए समझाना शुरू किया,

“आपि… गुस्सा मत करो… सुनो तोह… आप को आज तक घर के बहार किसी मर्द को देखा भी नहीं है… सिर्फ मुझे और अब्बू को छोड़कर… अर्जुन बहुत भरोसे वाला है… वो कभी किसी को नहीं बताएगा… बिलकुल सेफ रहेगा… अगर कुछ भी हुआ तोह मैं सब संभल लूंगा… आपको कोई तकलीफ नहीं होने दूंगा… बस आप खुश हो जाओ… आपकी ये तड़प… ये हवस… दूर हो जाये…”

मैंने बात करते हुए उनके दूध को और प्यार से मसलना शुरू कर दिया… ऊपर से नीचे… गोल गोल घूमते हुए… निप्पल के ऊपर ऊँगली से हलके से सहलाता… गर्दन पे चुम्मा लेते हुए… कान में सांस छोड़ते हुए…

आपि अब ऊपर से ना बोल रही थी… पर उनकी बॉडी गरम होने लगी थी…

“अह्ह्ह… असीम… उफ्फ्फ्फ़… नहीं बीटा… ये… ये गलत है… अह्ह्ह… मत मसलो… उफ्फ्फ्फ़…”

पर उनकी गर्दन खुद मेरी तरफ झुक गयी… दूध मेरे हाथों में और उभर रहे थे… छूट से हल्का सा गीला पैन निकलने लगा था… सलवार के ऊपर से धब्बा दिखने लगा.

मैं और करीब हो गया… लुंड उनकी मोती गांड पे रगड़ते हुए… दूध ज़ोर से दबाते हुए बोलै,

“आपि… बस एक बार सोचो… अर्जुन आपको रात भर प्यार देगा… आपके इन बड़े बड़े दूध को प्यार से सहलायेगा… आपकी थकान दूर करेगा… मैं बस आपको खुस देखना चाहता हूँ… प्लीज आपि… आप खुश हो जाओ…”

आपि अब सिसक रही थी… आँखें बंद… सांस तेज़… दूध लाल पद गए थे मेरे दबाव से…

“अह्ह्ह… असीम… उफ्फ्फ्फ़… तुम… तुम मुझे पागल कर डोज… अह्ह्ह… धीरे… उफ्फ्फ्फ़…”

मैं उनको गरम करता जा रहा था… दूध मसलता… गर्दन चुस्त… गांड पे लुंड रगड़ता…

दोस्तों… आपि अंदर से पूरी गरम हो चुकी थी…



अगला अपडेट जल्द hi…
 
रात का खाना चल रहा था… पूरी फॅमिली टेबल पे बैठी थी… अब्बू सामने बैठे थे…… अम्मी खाना सर्वे कर रही थी… ज़ैनब आपि और नूर बातें कर रही थी… और मेरी आपि अनाम… उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… बिलकुल कार्नर पे बैठी थी… नज़र नीचे… रात की वजह से शर्मा रही थी… उसके बड़े बड़े दूध कुर्ते के अंदर हलके हलके हिल रहे थे… सलवार में मोती गांड चेयर पे डाब रही थी…



मैं नीचे हाथ दाल कर अपना लुंड दबाते हुए… धीरे से अब्बू से बोलै…

“अब्बू… कल मैं अनाम आपि को बहार मार्किट ले जाना चाहता हूँ… आपि को कुछ सामान लेना है… कपडे… वगैरह… और थोड़ी सी शॉपिंग करनी है… वैसे भी कभी बहार नहीं जाती… तोह कल मैं उनके साथ चला जाऊंगा… बस 2-3 घंटे का काम है…”

जैसे hi मैंने ये बात बोली… पूरा टेबल सन्नाटा हो गया…

अब्बू ने रोटी तोड़ते हुए मेरी तरफ देखा…

“अरे बेवक़ूफ़… बहार क्यों ले जाना है? तुम ले कर आ जाओ… अनाम को क्या ज़रुरत है बहार जाने की? बिलकुल नहीं जा सकती वो …”

मैं फिर से बोलै…

“अब्बू प्लीज… आपि दिन भर घर के अंदर hi साद रही है… थोड़ी सी तोह सांस लेने दो… मैं उसके साथ रहूँगा… … बस शॉपिंग करनी है… प्लीज अब्बू… मान जाओ…”

अम्मी ने भी साइड से बोलै…

“हाँ जी… बच्ची को थोड़ा बहार घूमने दो… बिलकुल क़ैद में hi रहती है…”

ज़ैनब और नूर भी हाँ में सर हिलने लगी…

अब्बू ने बहुत देर तक सोचा… फिर हाथ हिला दिया… अब्बू ने थोड़ा नरम होते हुए बोलै…

“ठीक है… ले जा… लेकिन रात 7 बजे से पहले वापस आ जाना … और सीधा मार्किट से… कही और मत चले जाना……”

जैसे hi अब्बू ने हाँ कहा… आपि अनाम का चेहरा पूरा लाल हो गया… शर्म से… आँखें नीचे… गाल टमाटर जैसे लाल हो गए… हाथ में रोटी का टुकड़ा काँप रहा था… वो समझ गयी थी के मैं क्यों ले जा रहा हूँ… उनके दिमाग में रात वाला सन घूम रहा होगा… उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मेरी शरीफ बड़ी आपि… कल अर्जुन के सामने कड़ी होगी… और मैं देखूंगा…

खाना ख़तम होते hi सब अपने कमरे में चले गए… अब्बू 10 बजे तक hi सो गए… अम्मी और छोटी बहने भी… पूरा घर सन्नाटा पद गया था…

मैं 11:45 बजे धीरे से उठा… पायजामा ठीक किया… मेरा लुंड आलरेडी हाफ खड़ा था… और सीधा आपि के कमरे की तरफ बढ़ गया…

दरवाज़ा थोड़ा खुला था… मैं अंदर घुस गया… दरवाज़ा धीरे से बंद किया… लॉक लगा दिया…

आपि बीएड पे लेती हुई थी… सलवार सूट में… दुपट्टा साइड पे गिरा हुआ… ऊपर वाला कुरता थोड़ा ऊपर चढ़ा… मोती मोती जांघें थोड़ी फैली हुई… जैसे hi उन्होंने मुझे देखा… उनकी साँसे तेज़ हो गयी…

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… उसकी आँखें फैल गयी… सांस ऊपर नीचे… दूध ज़ोर ज़ोर से हिलने लगे… गाल एक सेकंड में और लाल पद गए… हाथों से दुपट्टा सीने पे लपेट लिया… पर आँखें मेरी तरफ hi लगी रही थी…

आपि… हलकी सी आवाज़ में…

“असीम… तू… तू यहाँ क्या कर रहा है बीटा… जा… जा अभी… सब जग गए तोह… बहुत बड़ी मुसीबत हो जाएगी…”

मैं मुस्कुराते हुए बीएड के पास आया… उसके बिलकुल करीब बैठ गया… एक हाथ उनकी मोती गरम जांघ पे रख दिया… हलके से सहलाने लगा…

“आपि… कल के लिए रेडी हो… अर्जुन से मिलने के लिए… वो आपको देखना चाहता है कबसे… आपके ये बड़े बड़े दूध… मोती गांड… गुलाबी छूट… सब देखना चाहता है…”

जैसे hi मैंने “अर्जुन” नाम लिया… आपि का पूरा जिस्म काँप उठा… साँसे और तेज़ हो गयी… आँखें बंद हो गयी… पर उन्होंने मेरा हाथ नहीं हटाया…

मैं और करीब हो गया… उनके चेहरे के बिलकुल पास… उसके गुलाबी गुलाबी होंठ पे अपने होंठ रख दिए…

उनकी होंठ चूसने लगा… जीभ अंदर दाल दी… उसकी जीभ से टकराई… दोनों के जीभ एक दूसरे को चाटने लगी… लार टपकने लगी…

आपि सिसक उठी…

“अह्ह्ह… मममहह… असीम… उफ्फ्फ्फ़… नहीं बीटा… अह्ह्ह… मत करो… उफ्फ्फ्फ़…”

पर उसकी जीभ खुद मेरी जीभ को चूस रही थी… किश इतना गहरा था … इतना गरम था… की दोनों के मुँह से लार की धार टपक रही थी…

मैं किश करते हुए उसके नैक पे आ गया… गर्दन चाटने लगा… चुम्मा लेने लगा… उसकी गर्दन को चूसने लगा… आपि काँप रही थी… हाथों से मेरा सर पकड़ रही थी…

मैं नीचे आया… उनके कुर्ते का पल्ला ऊपर किया… ब्रा भी ऊपर कर दी… उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… उनके दोनों बड़े बड़े दूध बहार आ गए… गोल गोल… भरे हुए… निप्पल टाइट और लाल लाल…

मैंने दोनों हाथों से पकड़ लिए… ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा… मसलने लगा… ऊपर से नीचे… गोल गोल घूमते हुए…

“अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… असीम… धीरे… अह्ह्ह… मेरी चूचियां… उफ्फ्फ्फ़… बहुत ज़ोर से मत दबाओ… अह्ह्ह…”

मैं एक निप्पल मुँह में ले लिया… ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा… काटने लगा… दूसरे को ऊँगली से घूमने लगा… दूध को दोनों हाथों से मसलता जा रहा था…

आपि पागलो की तरह सिसक रही थी…

“अह्ह्ह्हह… हैयय… असीम… उफ्फ्फ्फ़… … नहीं… अह्ह्ह… पर… उफ्फ्फ्फ़… मज़ा… आ रहा है… अह्ह्ह…”

मैं निप्पल चूसते हुए बोलै…

“आपि… अर्जुन कल आपकी ये बड़ी बड़ी चूचियां देख कर पागल हो जायेगा… अर्जुन आपके निप्पल को काटेगा… चूसेगा… दबाएगा…”

आपि और गरम हो गयी… दूध मेरे मुँह में ज़ोर से दबाने लगी…

“अह्ह्ह… नहीं… असीम… उफ्फ्फ्फ़… अर्जुन… अह्ह्ह… वो… वो ऐसा करेगा क्या… अह्ह्ह… और ज़ोर से चुसो… उफ्फ्फ्फ़…”

मैं दूध चूसते हुए नीचे हाथ ले गया… उनकी सलवार का नाडा खोल दिया… सलवार और पंतय घुटनो तक नीचे कर दी… उफ्फ्फ्फ़… उनकी गुलाबी छूट… बिलकुल गीली थी… पहली हुई… पानी टपक रहा था… हलके हलके बाल ऊपर…

मैंने दोनों टाँगे फैला दी… मुँह नीचे किया… जीभ से चाटने लगा… ऊपर से नीचे… नीचे से ऊपर… क्लीट को मुँह में लेके चूसने लगा… अंदर जीभ दाल दाल के अंदर बहार करने लगा…

“सलूरररप… सलूरररप… चुऊस… पूछ पूछ…”

आपि पूरी तरह पागल हो गयी…

“अह्ह्ह्हह… असीम… मेरी छूट… उफ्फ्फ्फ़… अर्जुन… अह्ह्ह… वो… वो भी ऐसे चाटेगा न… अह्ह्ह… और ज़ोर से चाट… उफ्फ्फ्फ़… मैं मर जाउंगी… अह्ह्ह्हह…”

मैं चूसते हुए बोलै…

“हाँ आपि… अर्जुन आपकी छूट को ऐसे hi चाटेगा… फिर अपना मोटा लुंड आपकी गुलाबी छूट में घुसेड़ देगा… बोलिये… आपको अर्जुन का लुंड चाहिए न… बोलिये आपि… अर्जुन आपको रंडी बनाएगा…”

आपि सिसकती रही… हाथों से मेरा सर पकड़ के अपनी छूट पे दबा रही थी…

“अह्ह्ह… हाँ… अर्जुन… अह्ह्ह… मुझे… मुझे चाहिए… उफ्फ्फ्फ़… असीम… और चाट… अह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ… अह्ह्ह्हह…”

मैं तेज़ तेज़ चाटने लगा… जीभ अंदर बहार… क्लीट चूस चूस के… 2 ऊँगली अंदर दाल दी… तेज़ तेज़ अंदर बहार करने लगा… पूछ पूछ पूछ आवाज़ कमरे में गूँज रही थी…

आपि की बॉडी काँप उठी… दूध ज़ोर ज़ोर से हिल रहे थे… आँखें बंद… मुँह खुला… पसीने से चमक रही थी…

“अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… असीम… आ गयी… अर्जुन… अह्ह्ह… मैं झाड़ रही हूँ… उफ्फ्फ्फ़… पि लो… पि लो मेरा पानी… अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह…”

उनकी छूट से गरम गरम पानी की धार निकल गयी… मैं मुँह से चूस चूस के पि गया… कितना ज़्यादा था… कितना गरम… नमकीन… मेरा मुँह भर गया… थोड़ा थोड़ा मेरे होंठों से बहार भी टपक रहा था…

आपि थक कर लेट गयी… साँसे तेज़… बॉडी हिल रही थी… आँखें बंद… चेहरा बिलकुल लाल…

लेकिन मैं नहीं रुका… उनकी छूट छत्ता रहा… धीरे धीरे… जीभ से सहलाता… क्लीट को हलके से चुस्त…

फिर मैं ऊपर आया… पायजामा नीचे किया… मेरा खड़ा लुंड बहार आ गया… टोपा से पानी टपक रहा था…

आपि ने देखा… आँखें फैल गयी उनकी… शर्मा कर नज़र नीचे कर ली…

मैं उसके मुँह के पास लुंड ले गया… उनके होंठ पे रगड़ने लगा…

“आपि… चूसिये न… जैसे अर्जुन को चूसेगी कल…”

आपि शर्मा गयी… पर हाथ आगे बढ़ाया… लुंड पकड़ा… मुँह खोल के टोपा चूसने लगी… फिर धीरे धीरे अंदर लेने लगी…

“ग्लुक… ग्लुक… सलूरररप…”

मैं उनके बाल पकड़ के मुँह में धक्के मरने लगा…

“अह्ह्ह… आपि… बहुत अच्छा चूस रही हो… अर्जुन को भी ऐसे hi चूसना… उफ्फ्फ्फ़… पूरा अंदर ले लो… अर्जुन का लुंड आपके मुँह में कितना मज़ा देगा…”

आपि ज़ोर ज़ोर से चूस रही थी… आँखें ऊपर करके मुझे देख रही थी… लार टपक रही थी उनके मुँह से… …

“अह्ह्ह… मममहह… अर्जुन… अह्ह्ह… मोटा… उफ्फ्फ्फ़…”

मेरा सारा पानी आपि के मुँह में निकल गया जिसके बाद मई भाग कर अपने रूम में चला गया.......

सुबह नाश्ता ख़तम होते hi मैं झट से उठा… अम्मी ने पुछा “बीटा कहाँ जा रहा है?” मैंने बोलै “ऊपर… आपि को देखने जा रहा हूँ ”… लेकिन सीधा आपि के कमरे की तरफ बढ़ गया…

दरवाज़ा थोड़ा खुला था… मैं धीरे से अंदर घुस गया… और जैसे hi नज़र पड़ी… मेरा लुंड पायजामा के अंदर एक ज़ोर का झटका मार बैठा…

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… जो नज़ारा था… मेरी शरीफ सी आपि अनाम… बिलकुल फुल मेकअप और टाइट सलवार सूट में कड़ी थी… मिरर के सामने कड़ी हो कर अपने आप को देख रही थी…

आपि ने आज स्काई ब्लू कलर का बहुत टाइट सलवार सूट पहना था… ऊपर वाला कुरता इतना टाइट था की उसके 38 साइज के बड़े बड़े दूध बिलकुल उभरे हुए थे… कुर्ते का नैक डीप था… गहरा गहरा क्लीवेज साफ़ दिख रहा था… ब्रा के वाइट लास भी हल्का सा झाँक रहा था… दूध इतने भरे हुए और गोल गोल थे की कपडे फटने को हो रहे थे… हर सांस के साथ दूध ऊपर नीचे हिल रहे थे… निप्पल का टाइट उभार भी कुर्ते के ऊपर से दिखाई दे रहा था…

नीचे वाली सलवार… उफ्फ्फ्फ़… इतनी टाइट थी की उसकी मोती मोती जांघें और भरी हुई गांड का हर हिस्सा साफ़ दीखता था… सलवार दोनों मोती गांड के हिस्से में बिलकुल चिपकी हुई थी… जब वो मिरर के सामने थोड़ा घूमी तोह गांड इतनी ज़ोर से हिल रही थी की मैं सोच रहा था… अर्जुन इसको देख कर पागल हो जायेगा… एक हाथ से भी पूरी गांड पकड़ नहीं पायेगा…

बाल खुले हुए थे… लम्बी सी सिल्की … काजल लगा हुआ… आँखें इतनी गहरी और चमकती हुई की कोई भी देख ले तोह पागल हो जाये… होंठ पर डीप रेड लिपस्टिक… गुलाबी होंठ और लाल लिपस्टिक का कॉम्बिनेशन देख कर मेरा लुंड झटके मारने लगा… गालों पर हल्का सा ब्लश… और हल्का सा परफ्यूम की खुशबू कमरे में फैली हुई थी…

आपि अपने आप को मिरर में देख रही थी… कुर्ते को थोड़ा एडजस्ट कर रही थी… दूध को ऊपर उठा रही थी… गांड पे हाथ फेर रही थी… जैसे चेक कर रही हो की कितनी हॉट लग रही है…

मैं अंदर अंदर hi पागल हो गया…

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मेरी शरीफ बड़ी आपि… जो आज तक घर के बहार कदम भी नहीं रखती थी… जो परदे में hi बहार जाती थी… आज खुद फुल मेकअप करके… टाइट टाइट सलवार सूट पहन कर… दूसरे मर्द के लिए तैयार हो रही है… अंदर से कितनी गरम है… कितनी हवस भरी हुई है… अर्जुन से छोड़ने के लिए मरी जा रही है… कल रात जब मैंने अर्जुन का नाम लिया था… उनकी छूट से पानी की धार निकल गयी थी… अब सुबह से तैयार हो रही है… अर्जुन के सामने जाने के लिए… अपने बड़े बड़े दूध… मोती गांड… गुलाबी छूट… सब दिखाने के लिए…

मेरा लुंड पायजामा में पूरा तन गया था… टोपा से पानी निकल रहा था…

आपि ने मुझे देखा… उनका चेहरा एक सेकंड में लाल हो गया… आँखें नीचे… हाथों से दुपट्टा सीने पे लपेट लिया… लेकिन मैं देख चूका था… वो कितनी खूबसूरत… कितनी सेक्सी… कितनी रंडी बन रही थी…

आपि कांपती हुई आवाज़ में बोली…

“असीम… तू… तू यहाँ क्या कर रहा है बीटा… मैं… मैं बस… शॉपिंग के लिए तैयार हो रही थी…”

मैं मुस्कुराते हुए अंदर आया… दरवाज़ा बंद किया… और उसके बिलकुल पास आ गया…

“दोस्तों… आपि की यह तयारी देख कर मैं समझ गया था… अंदर से मेरी शरीफ बड़ी आपि कितनी तड़प रही है… कितनी गरम है… अर्जुन के लुंड के लिए मरी जा रही है…”

मैं धीरे से बोलै…

“आपि… बहुत सुन्दर लग रही हो आज… अर्जुन देख कर पागल हो जायेगा… आपके ये बड़े बड़े दूध… ये मोती गांड… ये लाल होंठ… सब देख कर उसका लुंड खड़ा हो जायेगा…”

आपि शर्मा कर नज़र नीचे कर ली… गाल और लाल हो गए… पर उसने कुछ नहीं बोलै… सिर्फ साँसे तेज़ हो गयी थी… दूध ज़ोर ज़ोर से हिल रहे थे…

मैं और करीब हो गया… उनकी कमर पे हाथ रख दिया… हलके से सहलाने लगा…

“कल रात जब मैंने अर्जुन का नाम लिया था… आपकी छूट कितनी गीली हो गयी थी आपि… आज सुबह से तैयार हो रही हो… अंदर से कितनी हवस भरी हुई है आपमें… बोलिये… अर्जुन से छोड़ने के लिए तड़प रही हो न…”

आपि सिसक उठी… पर हाथ हटाया नहीं...

मैं उनके कान के पास मुँह ले जा कर धीरे से बोलै…

“आपि… सुनो… अर्जुन को यह बिलकुल नहीं पता के आप मेरी बड़ी बहन हो… वो समझेगा के आप कोई बहार की लड़की हो… मेरी कोई दोस्त… वो लड़कियों से बहुत गन्दी गन्दी बातें करता है… बहुत गालियां बकता है ... तोह आप बुरा मत मन्ना… थोड़ा सह लेना… वो ऐसे hi है…”

जैसे hi मैंने ये बात बोली… आपि का पूरा चेहरा एक सेकंड में लाल पद गया… गाल इतने लाल हो गए जैसे कोई लाल गुलाब हो… आँखें नीचे… हाथों से दुपट्टा और टाइट सीने पे लपेट लिया… साँसे तेज़ तेज़ होने लगी… दूध ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे हिलने लगे…

आपि शरमाते हुए… कांपती हुई हलकी सी आवाज़ में बोली…

“असीम… उफ्फ्फ्फ़… वो… गालियां… बोलता है क्या… मैं… मैं कैसे सुनूंगी… बहुत शर्म आएगी मुझे…”

मैं मुस्कुराते हुए उसकी कमर को और खींच कर अपने से चिपका लिया… उनकी मोती गांड पे मेरा खड़ा लुंड रगड़ दिया… और धीरे से बोलै…

“हाँ आपि… वो बहुत गन्दी बातें करता है… लेकिन आपको मज़ा भी आएगा… देखना……”

आपि और शर्मा गयी… उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया पर हटाया नहीं… सिर्फ काँप रही थी…

फिर आपि ने बहुत शरमाते हुए… आँखें नीचे करके पूछा…

“असीम… तुम… तुम कहाँ रहोगे… जब मैं… अर्जुन से मिलूंगी…”

मैं उनके कान में गरम सांस छोड़ते हुए बोलै…

“मैं वही रहूँगा आपि… बिलकुल पास… सोफे पे बैठ कर… सब देखूंगा……”

जैसे hi मैंने ये बोलै… आपि का पूरा जिस्म काँप उठा… उन्होंने झट से मेरा हाथ पकड़ लिया… शर्मा कर बोली…

“नहीं असीम… प्लीज… मुझे बहुत शर्म आएगी… तुम वहां मत बैठना… कहीं और चले जाओ… मैं अकेली मिल लुंगी उससे...”

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मेरी शरीफ बड़ी आपि… अंदर से कितनी तड़प रही थी… बहार से ना बोल रही थी पर उसकी छूट तोह पहले से गीली होने लगी थी… मैं देख चूका था उसकी सलवार के ऊपर हल्का सा धब्बा…

मैं मुस्कुराया… और बिना कुछ कहे दोनों हाथों से उसके बड़े बड़े दूध पकड़ लिए… कुर्ते के ऊपर से hi ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा… दूध को ऊपर उठाया… नीचे दबाया… गोल गोल घुमाया…

“अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… असीम… नहीं बीटा… अह्ह्ह… मत मसलो… उफ्फ्फ्फ़… अह्ह्ह…”

मैं दूध ज़ोर से दबाते हुए… उनके निप्पल को ऊँगली से घूमते हुए बोलै…

“मैं वही रहूँगा आपि… बिलकुल पास… देखूंगा जब अर्जुन आपके साथ रहेगा… मैं वही बैठ कर मज़ा लूंगा… समझी?”

आपि सिसक उठी… दूध मेरे हाथों में और उभर गए… साँसे बिलकुल तेज़… आँखें बंद……

“अह्ह्ह… असीम… उफ्फ्फ्फ़… तुम… तुम पागल हो… अह्ह्ह… बहुत शर्म आएगी मुझे… अर्जुन के सामने… तुम देखोगे तोह… उफ्फ्फ्फ़… मैं मर जाउंगी शर्म से…”

मैं दूध और ज़ोर से मसलते हुए… उनकी गर्दन पे चुम्मा लेते हुए बोलै…

“शर्म मत करो आपि… मैं तोह बस आपको खुश देखना चाहता हूँ… अर्जुन आपको खुश करेगा… और मैं देखूंगा……”

आपि और काँप गयी… उनकी छूट से और पानी निकल गया… पर वो ऊपर से सिर्फ शर्मा रही थी… गाल लाल… होंठ काट रही थी…

मैं दूध एक हाथ से मसलता रहा… दूसरे हाथ से उसकी गांड पे थप्पड़ मार दिया… हल्का सा…

“चलो आपि… अब निकलते हैं… अर्जुन वेट कर रहा होगा… और हाँ… जब वो आपको गाली दे… तो आप बुरा नहीं मन्ना…”

आपि ने सिर्फ हाँ में सर हिला दिया… आँखें नीचे… पर उनकी साँसे अभी भी तेज़ थी… दूध हिल रहे थे… गांड हिल रही थी जब वो चल रही थी…

मैं आपि को बाइक पर बैठा कर सीधा अर्जुन के घर की तरफ निकल पड़ा. आपि ने मुँह पर दुपट्टा बहुत टाइट बांध रखा था, सिर्फ उनकी बड़ी बड़ी आँखें दिख रही थी. बाइक चलते वक़्त उनकी मोती मोती दूध मेरे पीठ पे ज़ोर ज़ोर से रगड़ खा रही थी. सलवार इतनी टाइट थी की दोनों मोती गांड के हिस्से अलग अलग फील हो रहे थे.

आपि बहुत दर रही थी. उसने मुझे पीछे से पकड़ रखा था, हाथों में ज़ोर था. मैं बाइक तेज़ चलता जा रहा था और अंदर hi अंदर पागल हो रहा था – मेरी शरीफ बड़ी आप आज तक घर के बहार कदम भी नहीं रखती थी… आज मेरे दोस्त के घर जा रही है…

अर्जुन के घर पहुँचते hi मैंने बाइक रोकी. आपि डरते हुए बाइक से उत्तरी, दुपट्टा मुँह पर टाइट बंधा हुआ था. वो धीरे धीरे अंदर की तरफ बढ़ने लगी जैसे कोई क़ैद खाने में जा रही हो. मैं पीछे पीछे था. दरवाज़ा खुला था… अंदर अर्जुन सोफे पे बैठा था, सिगरेट फूक रहा था.

जैसे hi हम अंदर घुसे… अर्जुन ने नज़र उठायी और आपि को ऊपर से नीचे तक घूरने लगा. उसकी आँखें फैल गयी. वो एक सेकंड तक देखता रहा… फिर अचानक उठा और सीधा आपि के पास आया. आपि दर के मारे पीछे हटने लगी पर अर्जुन ने झट से आगे बढ़ कर उसके चेहरे से दुपट्टा एक झटके में खेंच लिया.

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… जैसे hi दुपट्टा हटा… आपि का खूबसूरत चेहरा साफ़ दिखाई दिया – लाल लाल गाल, गहरा काजल, लाल लिपस्टिक में गुलाबी होंठ… और उसके बड़े बड़े दूध टाइट कुर्ते में उभरे हुए… मोती मोती गांड सलवार में लचक रही थी.

अर्जुन पागल सा हो गया. उसने आपि को ऊपर से नीचे तक देखा और ज़ोर से बोलै…

“सेल असीम!!! कहाँ से लाया ये माल बस!!! ऐसी माल तो मैंने ज़िन्दगी में नहीं चखा!!! कितने बड़े दूध है दूध इस रांड के… कितने तने हुए हैं… कपडे फटने को हो रहे हैं!!! गांड देख… मोती मोती लचकती हुई… उफ्फ्फ्फ़ ये तो पूरी रंडी है सेल!!!”

अर्जुन की बात सुनते hi मेरा लुंड पायजामा में पूरा तन गया. अह्ह्ह … मेरा दोस्त मेरी सगी बड़ी आपि को “माल… रंडी” बोल रहा था…

अर्जुन ने एक सेकंड भी वास्ते नहीं किया. उसने आपि का हाथ पकड़ा, उसको अपनी तरफ खींचा और सीधा उसके लाल होंठ पे अपने बड़े बड़े होंठ रख दिए. ज़ोर ज़ोर से किश करने लगा… उसके होंठ चूसने लगा… जीभ अंदर दाल दी… आपि छटपटाने लगी…

“अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… छोडो… नहीं…… अह्ह्ह…”

आपि दोनों हाथों से अर्जुन को धकेल रही थी… पर अर्जुन ने उसको और टाइट पकड़ लिया… किश और … आपि के होंठ लाल हो गए… उनकी साँसे तेज़ तेज़ चल रही थी… दूध ज़ोर ज़ोर से हिल रहे थे…

मैं देखता रहा… मेरा लुंड पूरा खड़ा… टोपा से पानी निकल रहा था…

मैं धीरे से मुस्कुराते हुए बोलै…

“भाई आराम से… अभी ये यही है…”

अर्जुन किश छोड़ कर हंस पड़ा… आपि को पकडे हुए बोलै…

“सेल असीम… ये माल तूने कहाँ से पकड़ा बस!!!”
 
अर्जुन ने आपि अनाम को एक झटके से अपनी गॉड में बिठा लिया. आपि की moti-moti गांड उसके गौड़ पे डाब गयी. उनकी दोनों टाँगे अर्जुन के दोनों तरफ फ़ैल गयी थी. जैसे hi आपि बैठी, अर्जुन ने दोनों हाथों से उनके bade-bade दूध पकड़ लिए और zor-zor से मसलने लगा.



उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… अर्जुन के हाथों में आपि के तने हुए दूध बिलकुल उभर आये. कुर्ते के ऊपर से hi दूध इतने भरे हुए और गोल थे की अर्जुन के हाथ भर गए. वो zor-zor से दबा रहा था… ऊपर से नीचे… gol-gol घुमा रहा था… निप्पल को उँगलियों से पकड़ के मरोड़ रहा था.

आपि सिसक उठी…

“अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… नहीं… अर्जुन… धीरे… अह्ह्ह…”

उनकी आवाज़ में शर्म और तड़प दोनों थी. चेहरा पूरा लाल… आँखें मेरी तरफ एक तक देख रही थी. मेरी वजह से… क्यूंकि मैं वही सोफे के पास चेयर पे बैठा था. मेरी शरीफ सी आपि… जो आज तक किसी गैर मर्द के सामने मुँह भी नहीं दिखती थी… अब अर्जुन की गॉड में बैठी अपने दूध मसलवा रही थी… और मुझे देख रही थी.

अर्जुन ने आपि के होंठ पे अपने bade-bade काले होंठ रख दिए. Zor-zor से किश करने लगा. जीभ अंदर दाल दी… आपि के gulabi-gulabi होंठ चूसने लगा. लार की धार टपकने लगी दोनों के मुँह से. आपि पहले तोह चटपटा रही थी… दोनों हाथों से अर्जुन के सीने को धकेल रही थी… पर dheere-dheere उनकी जीभ भी अर्जुन की जीभ से टकराने लगी.

“अह्ह्ह… मममहह… उफ्फ्फ्फ़…”

आपि सिसकती रही… शर्मा रही थी… मेरी तरफ देखती थी… पर अर्जुन ने किश नहीं छोड़ा. दूध को और ज़ोर से मसलता जा रहा था.

फिर अर्जुन ने आपि को गॉड से उतरा और सोफे के बिलकुल निचे बिठा दिया… अपने दोनों टांगो के बीच में. आपि घुटनो पे बैठ गयी. अर्जुन ने झट से अपनी पंत और अंडरवियर नीचे कर दी.

उफ्फफ्फ्फ़ दोस्तों…

बहुत मोटा… बिलकुल काला… 8 इंच का लुंड एक झटके से बहार आ गया. टोपा इतना बड़ा और चमकदार था की आपि की आँखें फैल गयी. वो गौर से… बिलकुल खुली आँखों से देखने लगी. लुंड के ऊपर नसें उभरी हुई थी… मोटाई देख कर आपि का मुँह खुला रह गया.

अर्जुन ने हाथ से लुंड पकड़ा और आपि के मुँह के पास ले जा कर ज़ोर से बोलै,

“चूस साली… इसको मुँह में ले… चूस इनको!”

आपि ने झट से मेरी तरफ देखा… आँखों में शर्म, दर और हवस का मिलान था. मैं चेयर पे बैठा था… मेरा लुंड पायजामा में पूरा तन गया था. मैंने धीरे से हाथ से इशारा किया… “चूस लो आपि… चूस लो…”

आपि ने आँखें बंद कर ली… शर्म के मारे… पर dheere-dheere अपना गुलाबी होंठ आगे बढ़ाया. पहले सिर्फ जीभ निकाली… और अर्जुन के काले लुंड के टोपा को चाटने लगी.

“सलूरररप… सलूरररप…”

अर्जुन मज़े से सिसकिया,

“अह्ह्ह… हाँ साली… और चाट… पूरा चाट… उफ्फ्फ्फ़ कितनी गरम जीभ है तेरी रंडी…”

आपि अब dheere-dheere लुंड को चाटने लगी… ऊपर से नीचे… नीचे से ऊपर… फिर टोपा को मुँह में ले लिया. अर्जुन ने उसके बाल पकड़ लिए और धीरे से मुँह में धक्का दिया.

“अह्ह्ह… ले साली… पूरा मुँह में ले… चूस कुटिया… बहुत अच्छा चूस रही है तू… उफ्फ्फ्फ़ मेरी रंडी…”

आपि अब zor-zor से चूसने लगी… “ग्लुक… ग्लुक… सलूरररप… पूछ पूछ…” की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी. लार उनके होंठों से टपक रही थी… अर्जुन के लुंड पे चमक रही थी. आपि की आँखें कभी बंद… कभी मेरी तरफ देखती… और हर बार शर्म से और गहरी हो जाती.

मैं चेयर पे बैठा… अपना लुंड पायजामा के अंदर पकड़ के हिलने लगा था.

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मेरी शरीफ आपि … जो talak-shuda होने के बावजूद आज तक घर की इज़्ज़त थी… अब अर्जुन के काले मोठे लुंड को मुँह में लेकर चूस रही थी… और मैं देख रहा था. मेरा दिमाग पूरा उड़ चूका था. लुंड झटके मार रहा था.

अर्जुन अब मज़े में और गालियां दे रहा था…

“अह्ह्ह… चूस साली… और ज़ोर से… तेरी badi-badi चूचियां हिल रही हैं… उफ्फ्फ्फ़ कितनी रंडी बन गयी है तू… ले… पूरा अंदर ले… … हाँ कुटिया… ऐसे hi… अर्जुन का लुंड चूस… तेरी छूट फाड़ूंगा……”

आपि अब और तेज़ चूस रही थी… हाथों से अर्जुन के लुंड के नीचे वाले हिस्से को सेहला रही थी… आँखें मेरी तरफ देखती… और मैं इशारा करता… और वो और अंदर ले लेती.

मैं पागल हो चूका था… दोस्तों… बिलकुल पागल…

अर्जुन का सारा गरम माल आपि के मुँह में भर गया था. कितना ज़्यादा था… उनके गुलाबी होंठ से बहार भी टपक रहा था. आपि ने आँखें बंद करके सब कुछ पि लिया… थोड़ा बहार टपका तोह उसने ऊँगली से उठा के मुँह में दाल दिया. उनकी साँसे तेज़ तेज़ चल रही थी… गाल पूरे लाल… आँखों में शर्म और हवस का मिलान था.

अर्जुन थक कर सोफे पे लेट गया. लुंड अभी भी थोड़ा खड़ा था… आपि की लार से चमक रहा था. कुछ पल तक सिर्फ साँसों की आवाज़ थी कमरे में. फिर अर्जुन ने आँखें खोली और आपि को देखा जो अभी भी घुटनो पे बैठी थी. उसने ज़ोर से बोलै –

“उठ… सारे कपडे उतार… पूरी नंगी हो जा… मुझे तेरी असली जवानी देखनी है.”

आपि का चेहरा और लाल हो गया. उसने मेरी तरफ एक झलक देखा… आँखों में दर और शर्म थी. पर अर्जुन ने गांड पे एक हल्का थप्पड़ मारा और गुस्से में बोलै –

“जल्दी कर रंडी… नहीं तोह मैं खुद पहाड़ दूंगा कपडे.”

आपि ने धीरे से उठ कर पहले दुपट्टा उतरा… फिर कुर्ते का पल्ला ऊपर किया और पूरा कुरता उतर दिया. वाइट ब्रा बहार आ गया… उसके बड़े बड़े दूध ब्रा के अंदर से उभर रहे थे. उसने ब्रा का हुक खोला… ब्रा नीचे गिर गया. उफ्फ्फ्फ़… दोनों दूध एक साथ बहार आ गए… बिलकुल नंगे… gol-gol… भरे हुए… गोरी स्किन चमक रही थी… निप्पल टाइट और लाल हो चुके थे.

फिर उसने सलवार का नाडा खोला… सलवार धीरे से नीचे खिसक गयी… पंतय के साथ. जब वो पंतय उतरने लगी तोह उनकी moti-moti जांघें और पहली हुई गुलाबी छूट साफ़ दिख गयी… हलके बाल ऊपर… दोनों लिप्स गीले और चमकते हुए. पूरी नंगी हो कर वो कड़ी हो गयी… हाथों से सीने को ढकने की कोशिश कर रही थी… पर दूध इतने बड़े थे की हाथ में नहीं आ रहे थे.

अर्जुन ने उनको खींच लिया… दोनों हाथों से उनके नंगे दूध पकड़ लिए और zor-zor से मसलने लगा. दबा रहा था… ऊपर से नीचे… गोल गोल घुमा रहा था… निप्पल को उँगलियों के बीच में लेके मरोड़ रहा था.

“अह्ह्ह… साली… कितने ज़बरदस्त दूध हैं तेरे… कितने भरे हुए… कितने गरम… मैं इनको रोज़ मसालुंगा… रोज़ चूसूंगा… हाँ रंडी… और हिल… अपनी गांड हिला…”

आपि सिसकती रही…

“अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… अर्जुन… धीरे… बहुत दर्द हो रहा है…”

अर्जुन ने दूध को और ज़ोर से मसलते हुए बोलै –

“अब जा किचन में… नंगी hi जा… जो भी खाना है ले आ… … सब कुछ… और जल्दी आ… नहीं तोह गांड लाल कर दूंगा.”

आपि ने मेरी तरफ देखा… आँखें पानी से भरी… पर कुछ नहीं बोली. हाथों से दूध ढकने की कोशिश करती हुई वो नंगी hi किचन की तरफ चली गयी. हर कदम पे उनकी मोती गांड हिल रही थी… दूध upar-neeche… छूट के दोनों लिप्स हलके से दीखते हुए… मैं देख रहा था… मेरा लुंड फिर से खड़ा हो गया था.

कुछ देर बाद आपि नंगी hi वापस आयी… दोनों हाथों में प्लेट्स… और खाना लेके. उनके दूध हिल रहे थे… गांड हिल रही थी… छूट से हल्का पानी टपक रहा था… चेहरा पूरा लाल… आँखें नीचे.

अर्जुन और मैं टेबल पे बैठ गए… खाना खाने लगे. आपि नंगी hi हमारे सामने कड़ी थी… हाथों से अपने दूध छुपाने की कोसिस कर रही थी.

अर्जुन ने एक पराठा तोड़ते हुए मुझसे पूछा –

“बता न यार… ये कौन है? ये रंडी बहुत गरम और खूबसूरत है… इतने परफेक्ट दूध… इतनी मोती लचकती गांड… इतनी प्यारी टाइट छूट… कहाँ से पकड़ी तूने?”

मैं मुस्कुराते हुए बोलै –

“ये मेरी जाने वाली है भाई… बहुत क्लोज है.”

अर्जुन ने आपि के नंगे जिस्म को ऊपर से नीचे तक देखा और तारीफ करने लगा –

“उफ्फ्फ्फ़… तेरी जाने वाली? सेल… ये तोह पूरी माल है बस… देख इन दूधों को… इतने बड़े… इतने भरे हुए… निप्पल देख… कितने टाइट और लाल हैं… मैं इनको रोज़ मुँह में लेकर चूसूंगा… गांड देख… मोती साली… एक हाथ से भी नहीं पकड़ पाउँगा… … छूट देखो… बिलकुल गुलाबी और पहली हुई… पानी टपक रहा है… उफ्फ्फ्फ़ ये तोह छोड़ने वाली चीज़ है… मैं इसकी छूट फाड़ दूंगा… रोज़ पेलुँगा इसको…”

हर बात पे अर्जुन गालियां दे रहा था…

“ उफ्फ्फ्फ़ तेरी बॉडी देख कर लुंड फिर से खड़ा हो रहा है… तेरी जाने वाली इतनी गरम है की देख के hi झड़ने का मन करता है…”

आपि का चेहरा पूरा लाल हो गया था… आँखें नीचे…… वो शर्म से काँप रही थी… पर अंदर से तड़प भी दिख रही थी.

हम दोनों खाना कहते रहे… अर्जुन baar-baar आपि की तारीफ और गालियां देता जा रहा था… उनके दूध… गांड… छूट… हर चीज़ की तारीफ… और हर तारीफ के साथ एक गाली… आपि का चेहरा लाल से लाल होता जा रहा था… पर वो कड़ी रही……

खाना ख़तम होते hi अर्जुन ने प्लेट साइड की… आपि को देखा और मुस्कुराते हुए बोलै –

“अब आ यहाँ रंडी… अब असली खेल शुरू करते हैं…”

उसने आपि अनाम को एक झटके से उठाया और सोफे पे सीधा लिट्टे दिया. आपि पूरी तरह नंगी थी… उनकी moti-moti जांघें फैली हुई थी… गुलाबी छूट बिलकुल चमक रही थी… bade-bade दूध दोनों तरफ लटक रहे थे. जैसे hi उसकी पीठ सोफे से लगी, अर्जुन झट से उसकी दोनों टाँगे पकड़ कर और फैला दी और सीधा मुँह नीचे करके उसकी नंगी छूट पे लग गया.

उफ्फ्फ्फ़ … अर्जुन zor-zor से आपि की गुलाबी छूट चाटने लगा… जीभ ऊपर से नीचे… नीचे से ऊपर… बीच की लाइन पे घूमता… क्लीट को मुँह में लेकर चूसने लगा… “सलूरररप… सलूरररप… चुऊस… पूछ पूछ…” की आवाज़ पूरे हॉल में गूँज रही थी.

आपि तोह पागल हो गयी…

“अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… अर्जुन… अह्ह्ह… हैयय… धीरे… मेरी छूट… उफ्फ्फ्फ़… आअह्ह्ह…”

उनकी tez-tez सिसकारियां निकल रही थी… आँखें बंद… होंठ खुले… दोनों हाथों से सोफे की शीट पकडे हुए… मोती गांड सोफे पे zor-zor से डाब रही थी… bade-bade दूध upar-neeche हिल रहे थे… निप्पल पूरे टाइट और लाल हो गए थे.

अर्जुन और जोश में आ गया… जीभ अंदर daal-daalke andar-bahar करने लगा… कभी जीभ से छूट के मुँह को chaat-ta… कभी क्लीट को ज़ोर से chus-ta… कभी पूरा मुँह लगा कर छूट को चूसने लगता. आपि की छूट से पानी nikal-nikal कर अर्जुन के मुँह में जा रहा था… उसकी जीभ चमक रही थी… आपि की सिसकारियां अब और तेज़ हो गयी थी…

“अह्ह्ह्हह… उफ्फ्फ्फ़… अर्जुन… बहुत मज़ा आ रहा है… अह्ह्ह… और चाट… मेरी छूट चाट… उफ्फ्फ्फ़… मैं मर जाउंगी… आअह्ह्ह…”

मेरा लुंड पायजामा के अंदर पूरा तन गया था… … मैं चेयर पे बैठा देख रहा था….

अर्जुन ने अब मुँह उठाया… होंठ आपि के छूट के पानी से चमक रहे थे… उसने अपना मोटा काला 8 इंच का लुंड पकड़ा… जो पूरा खड़ा था… और सीधा आपि की नंगी गुलाबी छूट के मुँह पे रगड़ने लगा.

आपि तड़प उठी…

“अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… अर्जुन… वो… वो बहुत मोटा है… अह्ह्ह… रगड़ मत… तड़प रही हूँ… उफ्फ्फ्फ़…”

अर्जुन हंस के बोलै,

“ले साली रंडी… अभी तोह सिर्फ रगड़ रहा हूँ… पूरा लुंड तोह अभी डालूंगा… तेरी टाइट छूट फाड़ दूंगा आज…”

वो अपना मोटा काला लुंड आपि की छूट के मुँह पे upar-neeche रगड़ रहा था… टोपा छूट के छेद पे दबाता… फिर नीचे गांड के छेद तक ले जाता… आपि की टाँगे काँप रही थी… दूध zor-zor से हिल रहे थे… वो अपनी गांड ऊपर utha-utha कर तड़प रही थी…

फिर अर्जुन ने लुंड सेट किया… टोपा छूट के मुँह पे रखा… और एक hi zor-daar धक्के में पूरा लुंड आपि की छूट में घुसा दिया!

“AHHHHHHHHHH… उफ्फफ्फ्फ़… अर्जुन… निकालो… बहुत मोटाआ… आह्ह्ह्ह… मेरी छूट पहात गयी… अह्ह्ह्ह…”

आपि की आँखें badi-badi हो गयी… मुँह खुला रह गया… पूरा चेहरा लाल… दोनों हाथों से अर्जुन के कंधे पकड़ लिए… उनकी बॉडी एक झटके से काँप उठी… छूट इतनी टाइट थी की अर्जुन का पूरा मोटा लुंड अंदर तक घुसा हुआ था… सिर्फ do-teen इंच बहार था.

अर्जुन रुकने वाला नहीं था… उसने दोनों हाथों से आपि की मोती गांड पकड़ी और दनादन धक्के मरने लगा… तेज़… और तेज़…

**धप… धप… धप… धप…**

पुरे हॉल में dhap-dhap की आवाज़ गूँज रही थी… सोफे हिलने लगा… आपि की मोती गांड हर धक्के के साथ ऊपर उठ रही थी… दूध zor-zor से upar-neeche लटक रहे थे… आपि मज़े से अपनी गांड और ऊपर को utha-utha कर छुड़वा रही थी…

“अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… अर्जुन… और ज़ोर से… अह्ह्ह… फाड़ दो मेरी छूट… उफ्फ्फ्फ़… बहुत मज़ा आ रहा है… आअह्ह्ह… और अंदर… पूरा अंदर… अह्ह्ह्हह…”

अर्जुन gandi-gandi गालियां देते हुए ताबड़तोड़ चुदाई कर रहा था…

“ले साली रंडी… ले कुटिया… तेरी टाइट छूट फाड़ दूंगा आज … अह्ह्ह… कितनी गीली है तेरी छूट… उफ्फ्फ्फ़… मेरी रैंड… अब तेरी छूट मेरी हो गयी… धप… धप… ले… और ले… गांड उठा साली… और ज़ोर से उठा… मैं तुझे रोज़ छोडूंगा… तेरी badi-badi चूचियां रोज़ मसालुंगा… अह्ह्ह… ले मादरचोद… तेरी छूट अब अर्जुन की हो गयी…”

आपि मज़े से अपनी गांड ऊपर utha-utha कर छुड़वा रही थी… सिसकारियां निकल रही थी…

“अह्ह्ह… हाँ अर्जुन… और ज़ोर से… फाड़ दो… उफ्फ्फ्फ़… मेरी छूट तेरी है… अह्ह्ह… छोड़ मुझे… और छोड़… मैं तेरी रंडी हूँ… आअह्ह्ह…”

मैं चेयर पे बैठा ये सब देख रहा था… मेरा लुंड पायजामा के अंदर झटके मार रहा था…… मैं अपना लुंड पकड़ के हिलने लगा था… मेरी शरीफ बड़ी आपि… मेरी सगी बड़ी आपि… अब अर्जुन के मोठे काले लुंड पे तड़प रही थी… मज़े ले रही थी… और मैं देख कर और गरम होता जा रहा था…

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… क्या सन था… हॉल में सिर्फ dhap-dhap… आपि की सिसकारियां और… अर्जुन की गालियां सुनाई दे रही थी...

उसने आपि को 10 मिनट तक लगातार ताबड़तोड़ पेला… एक भी पल रुकने का नाम नहीं लिया. हर धक्के में उसका मोटा काला 8 इंच का लुंड पूरा अंदर तक घुसता… और बहार निकलते hi फिर एक ज़ोर का धक्का… **धप… धप… धप…** पुरे हॉल में आवाज़ गूँज रही थी. आपि का पूरा जिस्म हर धक्के के साथ हिल रहा था… bade-bade दूध upar-neeche हिल रहे थे…… टाँगे काँप रही थी… चेहरा लाल… आँखें बंद… मुँह से सिर्फ सिसकारियां निकल रही थी.

“अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… अर्जुन… और ज़ोर से… अह्ह्ह… फाड़ दो मेरी छूट… बहुत दिनों बाद… उफ्फ्फ्फ़… मज़े आ रहे हैं… आअह्ह्ह…”

शायद बहुत दिनों से आपि की छूट तड़प रही थी… तलाक के बाद आज पहली बार किसी मोठे लुंड ने उसकी छूट को भर दिया था… इसलिए वो पागल सी हो रही थी. अपनी गांड खुद ऊपर utha-utha कर धक्कों का जवाब दे रही थी… जैसे और अंदर मांग रही हो. दूध इतने ज़ोर से हिल रहे थे की निप्पल लाल पद गए थे… पसीने से पूरा जिस्म चमक रहा था.

अर्जुन gandi-gandi गालियां बकते हुए चुदाई कर रहा था…

“ले साली रंडी… ले कुटिया… तेरी टाइट छूट… अह्ह्ह… कितनी गीली है मादरचोद… उफ्फ्फ्फ़… मेरी रांड… अब तेरी छूट सिर्फ अर्जुन की… धप… धप… ले… और ले… गांड उठा साली… और ज़ोर से उठा… मैं तुझे रोज़ छोडूंगा… तेरी badi-badi चूचियां रोज़ मसालुंगा… अह्ह्ह… ले मादरचोद… तेरी छूट अब मेरी हो गयी…”

आपि मज़े से पागल हो रही थी…

“अह्ह्ह… हाँ अर्जुन… और ज़ोर से… फाड़ दो… उफ्फ्फ्फ़… तेरी हो गयी हूँ… छोड़ मुझे… और छोड़… आअह्ह्ह… मैं तेरी रंडी हूँ… अह्ह्ह्हह…”

फिर अर्जुन की साँसे तेज़ हो गयी… उसने आपि की गांड को और ज़ोर से पकड़ा… धक्के और तेज़ कर दिए…

“ले रंडी… आ गया… तेरी छूट में hi भर रहा हूँ… ले… ले मादरचोद… अह्ह्ह्हह्हह…”

अर्जुन ने ज़ोर से एक धक्का मारा और अपना सारा गरम माल आपि की छूट के अंदर छोड़ दिया… आपि भी उसी वक़्त झाड़ गयी…

“अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… अर्जुन… आ गया… उफ्फ्फ्फ़… भर दो… मेरी छूट भर दो… आअह्ह्ह…”

दोनों का जिस्म एक साथ काँप रहा था… आपि की छूट से अर्जुन का माल और उसका अपना पानी मिक्स होकर बहार टपकने लगा… अर्जुन थक कर आपि के ऊपर hi लेट गया… कुछ देर दोनों ऐसे hi साँसे लेते रहे.

फिर अर्जुन उठा… नंगा hi मेरे बगल वाली चेयर पे बैठ गया… उसका लुंड अभी भी थोड़ा खड़ा था… आपि वैसे hi मज़े में सोफे पे लेती रही… आँखें बंद… चेहरा लाल… दूध upar-neeche हिल रहे थे… छूट से माल टपक रहा था…

अर्जुन हंस के मुझसे बोलै,

“भाई कहाँ से लाया इतनी गरम माल… मज़ा आ गया बस… अंदर से कितनी गरम और टाइट छूट है इस रैंड की… पहले कभी ऐसा माल नहीं मिला…”

मैं मुस्कुराते हुए बोलै,

“जाने वाली है भाई… मज़े लो बस…”

अर्जुन ने सिगरेट सुलगा ली और एक काश लेते हुए बोलै,

“जो भी बोलो भाई… ऐसा गरम माल पहले कभी नहीं मिला… कितनी गरम है अंदर से… और कितनी टाइट छूट है इस रैंड की… उफ्फ्फ्फ़ मज़ा आ गया…”

फिर वो उठा… आपि के पास गया… उसके बाल पकडे… एक ज़ोर का थप्पड़ उनकी गांड पे मारा और बोलै,

“उठ कुटिया… अब मेरा लुंड मुँह में ले…”

आपि ने आँखें खोली… थोड़ी सी शर्म से… पर जैसे किसी रंडी की तरह उठी… घुटनो पे बैठ गयी… अर्जुन का लुंड पकड़ा और मुँह में ले लिया… zor-zor से चूसने लगी… कभी टोपा चुस्ती… कभी पूरा अंदर ले लेती… कभी नीचे बॉल्स को जीभ से chat-ti… लार टपक रही थी उनके होंठ से…

अर्जुन उनके बाल पकड़ के मुँह में धक्के मरने लगा और gandi-gandi गालियां बकने लगा,

“अह्ह्ह… चूस साली… और ज़ोर से… ले कुटिया… पूरा मुँह में ले… तेरी badi-badi चूचियां… उफ्फ्फ्फ़… मेरी रंडी… अब तू मेरी पर्सनल रांड बन गयी… रोज़ आएगी यहाँ… रोज़ मुँह और छूट दोनों खुलेगी… अह्ह्ह… चूस मादरचोद… और अच्छे से चूस…”

आपि भी किसी रंडी की तरह चूस रही थी… आँखें ऊपर करके अर्जुन को देखती… और zor-zor से चूसती… बॉल्स को chat-ti… लुंड को जीभ से सहलाती… उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मेरी शरीफ बड़ी आपि अब बिलकुल बदल चुकी थी…



मैं चेयर पे बैठा देख रहा था… मेरा लुंड फिर से खड़ा हो चूका था… और मैं सोच रहा था – अगला राउंड अब शुरू होने वाला है…
 
उफ्फ्फ्फ़… जो सन मेरे सामने था, उससे मेरा लुंड पायजामे में झटके मारने लगा. मेरी शरीफ बड़ी आपि अनाम… बिलकुल कुटिया बन चुकी थी.



अर्जुन ने उसको झटके से घोड़ी बना दिया था. आपि के दोनों हाथ और घुटने सोफे पे थे. उनकी moti-moti गांड पूरी तरह ऊपर उठी हुई थी… दोनों नितम्ब alag-alag हिल रहे थे. गुलाबी छूट अभी भी अर्जुन के माल से टपक रही थी. उनकी badi-badi चूचियां नीचे लटक रही थी… निप्पल laal-laal और टाइट.

अर्जुन ने पीछे से उनकी कमर पकड़ी और अपना मोटा काला 8 इंच का लुंड उनकी छूट के मुँह पे रगड़ने लगा. फिर एक ज़ोर का थप्पड़ मारा गांड पर!

**चटककक!!!**

“आअह्ह्ह्हह…!” आपि की चीख निकल गयी. उसकी मोती गांड पे लाल लाल हाथ का निशान पद गया.

अर्जुन हंस पड़ा, “ले साली रंडी… अब असली चुदाई शुरू होगी!” और दूसरा थप्पड़ मारा ज़ोर से!

**चटककक!!!**

“आअह्ह्ह… बहुत ज़ोर से… उफ्फ्फ्फ़… दर्द हो रहा है… अह्ह्ह…”

लेकिन अर्जुन ने सुनी नहीं. उसने अपना लुंड सेट किया और एक hi धक्के में पूरा लुंड आपि की छूट में घुसा दिया!

**धायआपपप!!!**

“अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… मेरी छूट… पहात गयी… उफ्फ्फ्फ़… बहुत मोटा है… आअह्ह्ह…”

आपि की पूरी बॉडी काँप उठी. उनकी मोती गांड हिल गयी. अर्जुन ने उनकी कमर पकड़ी और दनादन धक्के मरने लगा… zor-zor से… tez-tez…

**धप… धप… धप… धप…**

हर धक्के के साथ आपि की मोती गांड ज़ोर से हिलती… चूचियां नीचे latak-latak के हिलती… और आपि maze-dard में सिसकती…

“अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… और ज़ोर से… अह्ह्ह… फाड़ दो मेरी छूट… बहुत मज़ा आ रहा है… आअह्ह्ह… हाँ… और अंदर… पूरा अंदर… उफ्फ्फ्फ़…”

अर्जुन ने उनकी गांड पे और 4-5 ज़ोर के थप्पड़ मारे… गांड लाल हो गयी थी पूरी… हर थप्पड़ पे आपि चीखती…

**चटक्क… चटक्क… चटक्क…**

“ले कुटिया मादरचोद… तेरी टाइट छूट अब मेरी हो गयी है… अह्ह्ह… कितनी गीली है साली… उफ्फ्फ्फ़… गांड उठा… और उठा… मैं तुझे रोज़ ऐसे hi पेलुँगा…”

आपि अब पूरी तरह पागल हो चुकी थी. उनकी गांड खुद ऊपर uth-uth कर धक्कों का जवाब दे रही थी. आँखें बंद, मुँह खुला, लार टपक रही थी उनके मुँह से… सिसकियाँ निकल रही थी…

“अह्ह्ह… हाँ… और ज़ोर से… फाड़ दो… उफ्फ्फ्फ़… मैं तेरी रंडी हूँ… आअह्ह्ह…”

अर्जुन थोड़ी देर और धक्के मारता रहा, फिर उसने मेरी तरफ देखा और हंस के बोलै,

“अरे असीम भाई… आ जा… इस रंडी का मुँह खली है… अपना लुंड इसके मुँह में दाल दे… दोनों तरफ से पेलते हैं इसको आज!”

मैंने झट से उठा… पायजामा नीचे किया… मेरा लुंड झटके से बहार आ गया… टोपा से पानी टपक रहा था.

आपि ने आँखें खोली… हवस भरी नज़रों से मेरे लुंड को देखा… उनकी आँखों में शर्म भी थी… लेकिन हवस ज़्यादा थी. उनकी जीभ khud-ba-khud होंठों पे फिर गयी.

मैं उनके मुँह के बिलकुल सामने खड़ा हो गया. पहले अपना लुंड उसके चेहरे पे रगड़ने लगा… उनके laal-laal होंठों पे… गालों पे… आँखों पे… फिर उनके लाल लिपस्टिक वाले होंठों पे टोपा रगड़ दिया.

आपि ने मुँह खोल दिया… मैंने एक हाथ से उनके बाल पकडे और धीरे से अपना लुंड उनके मुँह में दाल दिया…

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… जैसे hi मेरा लुंड उनके garam-garam मुँह में गया… मेरा सर घूम गया. आपि ने आँखें बंद कर ली और zor-zor से चूसने लगी… “ग्लुक… ग्लुक… सलूरररप…”

मैं और अंदर धकेल दिया… पूरा लुंड उनके गले तक… उनकी गर्दन फूल गयी… आँखें बड़ी हो गयी… पर वो चूसती रही.

अर्जुन पीछे से धक्के मार रहा था… मैं आगे से मुँह छोड़ रहा था…

हम दोनों एक साथ गालियां देने लगे…

मैं: “ले साली रंडी… कितनी गरम मुँह है तेरा… अह्ह्ह… चूस कुटिया… पूरा गले तक ले… उफ्फ्फ्फ़……”

अर्जुन: “हाँ मादरचोद… ले रंडी…… तेरी छूट और मुँह दोनों अब हमारे है… अह्ह्ह… गांड हिला साली… और ज़ोर से चूस… उफ्फ्फ्फ़……”

आपि अब बिलकुल पागल हो चुकी थी… दोनों तरफ से धक्के खा रही थी… मुँह से लार टपक टपक के उनके गर्दन और चूचियों पर बहने लगा था… छूट से पानी टपक रहा था… …

“मममहह… ग्लुक… अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… … आअह्ह्ह… मैं मर जाउंगी… उफ्फ्फ्फ़… और ज़ोर से… … अह्ह्ह्हह…”

हम दोनों और तेज़ धक्के मरने लगे… अर्जुन पीछे से उसकी गांड पे थप्पड़ मारता… मैं आगे से उसके गले तक लुंड पेलता… दोनों तरफ से dhap-dhap की आवाज़… आपि की सिसकारियां… और हमारी गालियां…

दोस्तों… मेरी शरीफ सी आपि… अब दोनों तरफ से पेली जा रही थी… और अर्जुन को अभी भी यह नहीं पता था के ये मेरी सगी बड़ी आपि है… वो सिर्फ एक गरम माल समझ रहा था… और मैं अंदर से पागल हो रहा था इस बात से…

अर्जुन ज़ोर से हंस के बोलै, “भाई इस रंडी को आज रात भर छोड़ेंगे… ये बहुत टाइट और गरम है… कल भी बुलाना इसको!”

मैं सिर्फ मुस्कुराया… और अपना लुंड उनके गले तक और अंदर धकेल दिया.

मेरा लुंड फूल चूका था… अर्जुन का भी… हम दोनों झड़ने वाले थे…

अर्जुन ने ज़ोर से चीख मारी, “ले साली रंडी… आ गया… ले अपना माल… अह्ह्ह्हह्हह!!!”

उसने अपना मोटा काला लुंड झटके से बहार निकला और आपि को घुटनो पे बैठा दिया… मैंने भी अपना लुंड बहार किया…

हम दोनों खड़े हो गए… आपि कुटिया की तरह घुटनो पे बैठ गयी… आँखें ऊपर करके हम दोनों के लुंड को देख रही थी… उनका चेहरा लाल… होंठ खुले… चूचियां हिल रही थी… गांड ऊपर उठी हुई…

पहले अर्जुन… उसने अपना लुंड पकड़ा और zor-zor से हिलाया…

“ले कुटिया… ले मेरा माल… अह्ह्ह्हह!!!”

उसका garam-garam माल आपि के चेहरे पे, आँखों पे, होंठों पे, चूचियों पे… फिर उनकी मोती गांड पे भी निकल गया… badi-badi धार… कितना ज़्यादा था… आपि की पूरी बॉडी चमक उठी… माल उनके लाल होंठों से टपक रहा था… दूध पे भी भर गया…

मैं भी रुक नहीं पाया…

“ले मेरी रंडी … ले… अह्ह्ह्हह्हह!!!”

मेरा भी सारा माल उनके चेहरे पे… आँखों पे… गले पे… bade-bade दूध पे… और उनकी पहली हुई छूट पे भी निकल गया… दोनों के माल मिक्स हो कर उनके पुरे बदन पे टपक रहे थे… चेहरा, चूचियां, पेट, गांड… सब जगह… आपि बिलकुल किसी कुटिया की तरह वही बैठी रही… घुटनो पे… हाथों पे… पूरा बदन हमारे पानी से भरा हुआ… माल टपक रहा था उसके होंठों से… आँखों से… दूध से…

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… वो नज़ारा देख कर मेरा दिल गार्डन गार्डन हो गया… मेरी शरीफ बड़ी आपि… जिसने आज तक किसी गैर मर्द को चेहरा भी नहीं दिखाया था… अब दोनों लड़को के माल से नाहा रही थी… कुटिया बन कर बैठी थी…

हम दोनों थक कर सोफे पे बैठ गए…… अर्जुन ने सिगरेट सुलगा ली और एक काश लेते हुए बोलै,

“भाई मज़ा आ गया इस रांड को छोड़कर… उफ्फ्फ्फ़ कितनी टाइट और गरम छूट है इसकी… फिर कब लाएगा इसको?”

मैं मुस्कुराते हुए बोलै,

“मौका निकलकर… ये एक अच्छे घर से है…”

अर्जुन ने आँखें चढ़ाई और पुछा,

“लेकिन है कौन यार? तूने बताया नहीं…”

मैं धीरे से बोलै,

“यार तू छोड़ने से मतलब रख…”

अर्जुन हंस पड़ा और आपि की तरफ देखते हुए बोलै,

“लगती तो वैसे शरीफ घर की है… लेकिन अंदर से बिलकुल रंडी है ये कुटिया… उफ्फ्फ्फ़ देख इसकी हालत… पूरा बदन हमारे माल से नाहा रही है… और अभी भी घुटनो पे बैठी है जैसे और चाहिए इसको…”

मैं सिर्फ मुस्कुरा दिया… अंदर से बहुत मज़ा आ रहा था… अर्जुन को अभी भी यह नहीं पता था के ये मेरी सगी बड़ी आपि है…

अर्जुन उठा… अंदर गया… और कुछ पैसे लेकर आया… मुझे पकड़ा दिए… शायद 20000 थे…

वो आपि की तरफ देखते हुए बोलै,

“20000 भी काम है इस रैंड के… लेकिन अगली बार 25000 दूंगा… बस इसको लाते रहना भाई…”

आपि शॉक से मेरी तरफ देखने लगी… उसकी आँखें फैल गयी… माल से भरा चेहरा… फिर तुरंत अपनी नज़रे नीचे झुका ली… शर्म से उनका पूरा बदन काँप उठा…

मैं अर्जुन से विदा लिया… उसने मुझे गले लगाया और बोलै,

“कल या परसो… जल्दी लाना इस माल को…”

फिर मैंने आपि की तरफ इशारा किया… कपडे पेहेन्ने का… क्यूंकि शाम हो चुकी थी और घर वापस जाना था…

आपि ने वैसे hi… बदन पे हमारा माल टपकते हुए… कपडे पेहेन लिए… सलवार सूट पहना… लेकिन माल अंदर तक घुस गया था… चूचियों पे… छूट पे… गांड पे… सब जगह चिपक गया था… फिर उसने मुँह पर अपना दुपट्टा बहुत टाइट बांध लिया… सिर्फ आँखें दिख रही थी…

जाते वक़्त अर्जुन ने पीछे से आपि की मोती गांड पकड़ ली… ज़ोर से मसल दिया और हंस के बोलै,

“मेरी रंडी… याद रखना… अगली बार और ज़ोर से पेलुँगा…”

मैं और अर्जुन दोनों हंस पड़े… आपि शर्म से और सर झुका ली… पर अंदर से उनकी साँसे तेज़ हो रही थी…

हम दोनों बाइक पे बैठ कर घर की तरफ निकल गए… आपि पीछे बैठी… उनकी चूचियां मेरी पीठ से रगड़ खा रही थी… गांड मेरे पीछे डाब रही थी… पूरा बदन हमारे माल से भरा हुआ…

दोस्तों… घर pahunchte-pahunchte मेरा लुंड फिर से खड़ा हो चूका था…

घर पहुँचते hi मेरा दिल zor-zor से धक् धक् करने लगा. बाइक से उतारते वक़्त भी मेरी नज़र आपि अनाम की तरफ लगी हुई थी. उनकी सलवार सूट अभी भी थोड़ी गीली सी थी… अंदर तक हमारा माल चिपका हुआ था. दुपट्टा मुँह पर बहुत टाइट बंधा हुआ था, सिर्फ उनकी badi-badi आँखें दिख रही थी… लेकिन उन आँखों में अब वह पुराणी शरीफ शर्म नहीं थी… एक नया नशा था… हवस का नशा.

हम दोनों अंदर घुसे. अम्मी किचन में कड़ी थी… उनके हाथों में चावल धोते हुए… उनकी मोती गांड सलवार के अंदर हिल रही थी. ज़ैनब आपि और छोटी बेहेन नूर हॉल के सोफे पे बैठी थी… दोनों मोबाइल पे कुछ देख रही थी.

जैसे hi हम अंदर घुसे… आपि अनाम ने एक सेकंड भी वास्ते नहीं किया. उन्होंने सिर्फ हलकी सी आवाज़ में बोलै,

“असीम… मैं ऊपर जा रही हूँ…”

और सीधा सीढ़ियों की तरफ बढ़ गयी. उनकी मोती गांड हर कदम पे हिल रही थी… सलवार के अंदर अभी भी अर्जुन और मेरा माल टपक रहा होगा.

लेकिन… दोस्तों… मेरी नज़र ज़ैनब आपि पे पद गयी.

ज़ैनब आपि ने अनाम आपि को ऊपर जाते हुए देखा… और उनकी आँखें थोड़ी सी बड़ी हो गयी. वो एक पल तक अनाम आपि की गांड को घूरती रही… फिर मेरी तरफ देखा. उनकी नज़र में कुछ अलग था… शक… या जैसे कुछ गलत लग रहा हो. मैं अंदर से थोड़ा घबरा गया… लेकिन बहार से मुस्कुराता हुआ hi बैठ गया.

मैं वही हॉल के सोफे पे बैठ गया… ज़ैनब आपि और नूर के बिलकुल पास. नूर ने मुस्कुराते हुए पूछा,

“भाई… कहाँ गए थे इतनी देर? अम्मी तोह बहुत परेशां हो रही थी.”

मैं idhar-udhar की बात करने लगा,

“अरे… दोस्त के यहाँ चला गया था… थोड़ी बातें हो गयी… टाइम का पता hi नहीं चला.”

ज़ैनब आपि ने मोबाइल साइड पे रख दिया… और मुझे सीधा देखते हुए पूछा,

“कौन दोस्त? अर्जुन? और क्या बातें हुई? इतनी देर क्यों लगा दी? अनाम आपि तो शॉपिंग के लिए गयी थी? वो क्यों इतनी जल्दी ऊपर चली गयी?”

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… ज़ैनब आपि की आवाज़ में वह पुराणी बेहेन वाली प्यार नहीं था… बिलकुल इन्वेस्टीगेशन वाली आवाज़ थी. वो baar-baar डिटेल में पूछ रही थी… कहाँ गए थे… क्या किया… कितने बजे निकले… अनाम आपि कहा कहा गयी… सब कुछ.

मैं idhar-udhar की बातें करता रहा…

“अरे आपि…… अर्जुन ने कुछ हेल्प मांगी थी… अनाम आपि को शॉपिंग करके उधर चला गया…”

ज़ैनब आपि ने आँखें चढ़ाई…

“अच्छा? अनाम आपि तोह बिलकुल खली हाथ आयी है उनका शॉपिंग बैग वगैरह कहा है…”

मैं दिल में घबरा रहा था… लेकिन बहार से हंस के बोलै,

“आपि आप भी न… वो उधर hi भूल गया मैं अर्जुन के घर ....कल ले आऊंगा उसको किसी टाइम…”

ज़ैनब आपि कुछ नहीं बोली… बस मुझे और अनाम आपि के रूम की तरफ देखती रही. उनकी नज़र में शक और गहरा हो गया था .

कुछ देर बाद अब्बू आ गए….

“काम बिलकुल ख़तम hi हो गया है… आज सिर्फ 2 सूट बीके…”

अम्मी ने जल्दी से खाना लगाया. हम सब हॉल के बड़े टेबल पे बैठ गए… अब्बू, अम्मी, ज़ैनब आपि, नूर… और थोड़ी देर बाद अनाम आपि भी नीचे आयी.

उफ्फ्फ्फ़… जैसे hi अनाम आपि अंदर आयी… मेरा लुंड पायजामा में एक झटका मार बैठा.

वो नाहा कर आयी थी… बाल geele-geele… लाइट पिंक सलवार सूट पहना था… लेकिन चेहरा बिलकुल खिला हुआ था… आँखें चमक रही थी… गाल थोड़े लाल… जैसे किसी ने abhi-abhi प्यार किया हो. उनकी चूचियां सलवार के अंदर उभरी हुई थी… गांड हिलती हुई चल रही थी… बिलकुल फ्रेश… बिलकुल नै सी लग रही थी.

मैं उसको हवस भरी निगाहों से घर रहा था… उनके bade-bade दूध… मोती गांड… और उस गुलाबी छूट जो अभी भी अर्जुन के लुंड से पहली हुई होगी… सब याद आ रहा था.

जब मैंने ज़ैनब आपि की तरफ देखा… तोह वो हम दोनों को नोटिस कर रही थी. उनकी आँखें बड़ी हो गयी… पहले अनाम आपि के खिले चेहरे को देखा… फिर मेरी तरफ देखा… फिर से अनाम आपि को… जैसे कुछ समझ रही हो… या समझने की कोशिश कर रही हो.

खाने के दौरान ज़ैनब आपि ने फिर से सवाल किया,

“अनाम आपि… आज मार्किट क्या लिया? कुछ दिखाओ न…”

अनाम आपि ने सिर्फ हलकी सी मुस्कराहट दी… आँखें नीचे करके बोली,

“बस… कुछ chhoti-chhoti चीज़ें…”

ज़ैनब आपि ने और कुछ नहीं पूछा… लेकिन उसकी नज़र अब हम दोनों पे अटक गयी थी. मैं अंदर से मज़ा ले रहा था… बहार से नार्मल बात कर रहा था… लेकिन दिल में सोच रहा था – अगर ज़ैनब आपि को पता चल गया तोह क्या होगा? पर ये सोच कर मेरा लुंड और खड़ा हो गया… की मेरी दूसरी आपि भी शक कर रही है… और शायद जल्द hi वो भी इस हवस में शामिल हो जाएगी.

खाना ख़तम होते hi सब apne-apne कमरे में चले गए.

रात को सब के सोने के बाद मैं चुपके से आपि के रूम में घुसा. अँधेरा था पर चाँद की हलकी रौशनी से सब कुछ साफ़ दिख रहा था. आपि करवट लेकर लेती हुई थी, पिंक सलवार सूट में... उफ्फ्फ्फ़ ... आपि की मोती मोती गांड बहार की तरफ उभरी हुई थी. सलवार इतनी टाइट थी की गांड के दोनों हिस्से बिलकुल alag-alag साफ़ दिखाई दे रहे थे, जैसे दो बड़े बड़े गोल गोल मटोल पिलो एक साथ रखे हुए हों. मेरा लुंड पायजामा में hi तन गया. आज दिन भर अर्जुन के साथ जो हुआ था वो सब आँखों के सामने आ रहा था – आपि की सिसकारियां, उनकी छूट में अर्जुन का मोटा लुंड, आपि की गांड पे थप्पड़... अह्ह्ह्ह, मेरा लुंड और ज़ोर से झटका मारने लगा.

मैं धीरे से बीएड पे चढ़ा और पीछे से आपि से पूरा चिपक कर लेट गया. मेरा सीना आपि की पीठ से सत्ता, और मेरा खड़ा लुंड पायजामा के ऊपर से hi आपि की मोती गांड में रगड़ने लगा. उफ्फ्फ्फ़... कितनी सॉफ्ट और गरम थी आपि की गांड... जैसे माखन पे लुंड रगड़ रहा हूँ. मैं अपना हाथ आगे बढ़ाया और आपि के बड़े बड़े दूध को कपडे के ऊपर से hi दवाने लगा. दूध इतने भरे हुए और तने हुए थे की हाथ भर गए, निप्पल सलवार के अंदर से hi टाइट फील हो रहे थे. मैं गर्दन पे जीभ फेरते हुए, उनको chat-te हुए धीरे से बोलै,

“आपि... कैसा लगा आज? अर्जुन के साथ मज़ा आया न? उफ्फ्फ्फ़... आपि आपकी छूट में उसका मोटा लुंड कितना अंदर तक घुस गया था... आप चीख रही थी अह्ह्ह्ह... धीरे अर्जुन... बहुत मोटा है... पर फिर खुद गांड हिलने लगी थी आप अह्ह्ह्ह.”

आपि ने सिसकी ली, उनकी बॉडी काँप गयी. वो थोड़ी सी मछली, पर पीछे नहीं हटी. उनकी साँसे तेज़ हो गयी, और वो सिसकते हुए बोली,

“अह्ह्ह्ह... असीम तू कितना कुत्ता है... तूने इन सब के लिए उससे पैसे भी लिए...”

मैं आपि के दूध को और ज़ोर से दावते हुए बोलै,

“तो क्या उसको क्या बताता की आप मेरी आपि हो... मैं तो ये बताया था की एक रंडी ले कर आ रहा हूँ...”

आपि “रंडी” वर्ड सुन कर शर्मा गयी, उनका चेहरा लाल हो गया. वो सिसकते हुए बोली,

“अह्ह्ह्हह... क्या मैं रंडी हूँ...”

मैं उनके दूध जोर से दबाते हुए बोलै,

“पर आपकी हरकते तो वैसे hi है...”

और अपना पंत निचे कर के नंगा लुंड आपि के गांड पर रगड़ने लगा...

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों... अब आपि की नंगी गांड पे मेरा खड़ा नंगा लुंड रगड़ खा रहा था... कितनी गरम और सॉफ्ट थी... गांड के बीच की दरार में टोपा घुसने की कोशिश कर रहा था... आपि की साँसे और तेज़ हो गयी थी...

मैं नीचे हाथ ले गया और आपि की सलवार का नाडा धीरे से खोल दिया. सलवार ढीली हो गयी. मैंने उसे घुटनो तक नीचे खेंच दिया... उफ्फ्फ्फ़... आपि की नंगी मोती गांड और उसके नीचे गुलाबी छूट बिलकुल साफ़ दिख गयी. छूट के दोनों लिप्स थोड़े पहले हुए थे, हलके बाल ऊपर, और अंदर से चमक रहा था पानी... अर्जुन के माल का थोड़ा सा निशाँ अभी भी था.

मैंने अपना मोटा लुंड पकड़ा और पीछे से hi आपि की छूट पर रगड़ने लगा. टोपा को छूट के मुँह पे upar-neeche रगड़ रहा था... उफ्फ्फ्फ़... कितनी गरम और गीली थी आपि की छूट... हर रगड़ने पे लुंड पे पानी लग रहा था.

आपि झट से मचल गयी और सिसकते हुए बोली,

“अह्ह्ह्ह... असीम... नहीं बीटा... मत डालना... अह्ह्ह्ह... गलत है ये... प्लीज... रुक जाओ... अह्ह्ह्ह...”

मैं मुस्कुराते हुए बोलै,

“आपि... आप उतनी भी शरीफ नहीं हो जितनी दिखती हो... देखो आज अर्जुन के साथ क्या क्या किया आप... अब शर्म क्यों आ रही है... उफ्फ्फ्फ़... आपकी छूट तोह खुद गीली हो रही है...”

और मैंने अपना टोपा आपि की गुलाबी छूट के मुँह पे रखा और धीरे से अंदर धकेल दिया...

“अह्हह्ह्ह्ह...” आपि की एक लम्बी सिसकी निकली. उनकी बॉडी काँप उठी. सिर्फ टोपा अंदर गया था पर आपि की टाइट छूट ने उसे जकड लिया... उफ्फ्फ्फ़... कितनी गरम और टाइट थी...

मैं पीछे से हलके हलके धक्के मारने लगा... धीरे धीरे... सिर्फ 2-3 इंच अंदर बहार... गर्दन को chat-ta हुआ... दूध को दोनों हाथों से masal-ta हुआ... और गन्दी गन्दी बातें करने लगा...

“अह्ह्ह्ह आपि... कितनी टाइट छूट है आपकी... अर्जुन ने फाड़ दी थी न आज... फिर भी अभी भी टाइट फील हो रही है... उफ्फ्फ्फ़... आपकी छूट मेरा लुंड जकड रही है... अह्ह्ह्ह... देखो कितना पानी निकल रहा है... आप अंदर से कितनी गरम हो...”

आपि सिर्फ सिसकारियां ले रही थी... आँखें बंद... होंठ kaat-ti हुई... बॉडी थोड़ी थोड़ी काँप रही थी...

“अह्ह्ह... ह्ह्हम्म्म... उफ्फ्फ्फ़... अह्ह्ह्ह...”

मैं गर्दन को choos-ta हुआ... दूध को ज़ोर ज़ोर से masal-ta हुआ... हलके हलके धक्के maar-ta हुआ बोलै,

“अह्ह्ह्ह आपि... आप अर्जुन के लुंड पे कैसे उछाल रही थी... अब मेरा लुंड आपकी छूट में है... कितना मज़ा आ रहा है न... उफ्फ्फ्फ़... आपकी मोती गांड मेरे पेट से टकरा रही है... अह्ह्ह्ह... आपकी छूट कितनी गीली है... पानी मेरे लुंड पे टपक रहा है... अह्ह्ह्ह... आप शरीफ बन के रहती हो पर अंदर से बिलकुल रंडी हो...”

आपि अभी भी सिर्फ सिसकारियां ले रही थी... साँसे तेज़ तेज़... बॉडी हलके हलके हिल रही थी मेरे धक्कों के साथ...

“अह्ह्ह... उफ्फ्फ्फ़... ह्ह्हम्म्म... अह्ह्ह्ह...”

मैं दूध को और ज़ोर से दबाते हुए... गर्दन पे चुम्मा लेते हुए... हलके हलके धक्के बढ़ाते हुए बोलै,

“अह्ह्ह्ह आपि... अर्जुन ने आपको कितना ज़ोर से पेला था... आपकी गांड लाल हो गयी thi...ufff... आपकी छूट खुद मेरा लुंड अंदर खींच रही है... उफ्फ्फ्फ़... कितनी प्यारी टाइट छूट है आपकी... अह्ह्ह्ह... आपकी चूचियां मेरे हाथों में कितनी गरम और भरी हुई हैं... निप्पल कितने टाइट हो गए हैं... अह्ह्ह्ह... आप मज़े ले रही हो न आपि... बोलिये न... अह्ह्ह्ह...”

आपि सिर्फ सिसकारियां लेती रही... उनकी गांड हलके हलके पीछे की तरफ हिल रही थी... छूट और गीली हो रही थी... दूध मेरे हाथों में ज़ोर ज़ोर से हिल रहे थे...

“अह्ह्ह... हहैयय... उफ्फ्फ्फ़... अह्ह्ह्हह...”

मैं गर्दन chat-ta हुआ... दूध masal-ta हुआ... हलके हलके धक्के maar-ta हुआ... और गन्दी बातें करता हुआ आपि को छोड़ता रहा... उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों... आपि अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी...

मैं आपि की नंगी गुलाबी छूट में अपना मोटा लुंड dheere-dheere andar-bahar कर रहा था. हर हलके धक्के के साथ आपि की टाइट छूट मेरे लुंड को जकड लेती, जैसे कभी छोड़ना hi न चाहती हो.... हर बार जब मैं अपना लुंड निकलता तो लुंड पूरा चमक रहा होता था उसके पानी से. मैं गर्दन को जीभ से chat-ta हुआ, kaat-ta हुआ... दूध को दोनों हाथों से zor-zor से masal-ta हुआ... halke-halke धक्के मार रहा था.

**थप... थप... थप...**

हर धक्के पे आपि की मोती गांड मेरे पेट से टकराती, दोनों नितम्ब हिलते हुए. उनकी बड़े बड़े दूध मेरे हाथों में zor-zor से उभर रहे थे, निप्पल बिलकुल सख्त और लाल हो चुके थे. मैं गर्दन पे चुम्मा लेते हुए उसके कान में गरम सांस छोड़ता.

आपि सिर्फ सिसकारियां ले रही थी... आँखें बंद, होंठ kaat-ti हुई, चेहरा पूरा लाल... उसकी साँसे बहुत तेज़ और गरम हो गयी थी...

“अह्ह्ह... उफ्फ्फ्फ़... ह्ह्हम्म्म... असीम... अह्ह्ह्ह... और अंदर बीटा... उफ्फ्फ्फ़... धीरे... अह्ह्ह्हह...”

मैं अब थोड़ा और अंदर धकेलने लगा... halke-halke धक्के बढ़ाते हुए... गर्दन को choos-ta... दूध को ऊपर से नीचे masal-ta...

“अह्ह्ह... उफ्फ्फ्फ़... हहैयय... असीम... अह्ह्ह्ह... बहुत मज़ा... आ रहा है... उफ्फ्फ्फ़... अह्ह्ह्हह...”

मैं अब और तेज़ धक्के मारने लगा था... धीरे से पूरा लुंड अंदर... फिर धीरे से बहार... गर्दन को जीभ से chat-ta... दूध को ज़ोर से masal-ta... आपि की सिसकारियां अब और लम्बी और कामुक हो रही थी...

तभी अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे कोई हमें देख रहा है... दरवाज़े की तरफ से हलकी सी आवाज़ या नज़र... मेरा दिल ज़ोर से धक् धक् करने लगा. मैं झट से पीछे मुद कर देखा... दरवाज़ा पूरा बंद था... कोई नहीं था... पर वो फीलिंग अभी भी थी... जैसे कोई चुपके से देख रहा हो...

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों... उस दर और एक्ससिटेमेंट से मेरा लुंड और सख्त हो गया... पूरा तन गया... टोपा फूल गया... मैंने ज्यादा न सोचते हुए अपनी गरम रंडी आपि को और ज़ोर से पकड़ लिया... गर्दन को choos-te हुए... दूध को zor-zor से masal-te हुए... ज़ोर ज़ोर से छोड़ने लगा...

**थप... थप... थप... थप...**

“अह्ह्ह्ह आपि... मेरी kutiya....saali कितनी गरम है तेरी छूट ... अह्ह्ह्ह... आप मेरी रंडी हो आपि... मेरी और अर्जुन की रंडी... अह्ह्ह्ह... ले लो मेरा माल... आपकी गरम छूट में भर रहा हूँ...”

आपि सिर्फ सिसकारियां ले रही थी... उनकी छूट मेरे लुंड को और ज़ोर से जकड रही थी... गांड खुद पीछे डाब रही थी... दूध मेरे हाथों में zor-zor से हिल रहे थे...

मैं और तेज़ धक्के मारने लगा... पूरा लुंड andar-bahar... गर्दन choos-ta... दूध masal-ta... और झड़ने वाला था...

“अह्ह्ह्हह आपि... आ गया... ले लो... मेरी गरम रंडी आपि... अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह...”

मैंने ज़ोर से एक गहरा धक्का मारा और अपना सारा गरम माल आपि की गरम छूट के अंदर छोड़ दिया... dhaar-dhaar निकल रहा था... कितना ज़्यादा था... आपि की छूट भर गयी... thoda-thoda बहार भी टपकने लगा...

आपि भी सिसकते हुए काँप उठी... उसकी छूट मेरे लुंड को और जकड लिया... पूरी बॉडी हिल रही थी...

“अह्ह्ह्हह... उफ्फ्फ्फ़... असीम... बहुत गरम... अह्ह्ह्ह... भर दिया... उफ्फ्फ्फ़...”

मैं थक कर आपि की पीठ पे लेट गया... लुंड अभी भी उसकी छूट में hi था... दोनों की साँसे तेज़ चल रही थी... आपि की गरम छूट अब मेरे माल से भर चुकी थी...

दोस्तों... आपि अब पूरी तरह से रंडी बन चुकी थी...

 
सुबह जब मेरी आँख खुली तोह पहला ख्याल कल रात का था — अनाम आपि कैसे मुझसे चुद रही थी. उफ्फ्फ्फ़… मेरा लुंड subah-subah hi तन गया. पायजामा के अंदर से एक झटका मारा. मैं उठा, मुँह धोया और सीधा हॉल की तरफ बढ़ा.

हॉल में पहुँचते hi नज़र किचन पे पड़ी. अम्मी और ज़ैनब आपि दोनों किचन में कड़ी थी. अम्मी लाइट येलो सलवार सूट में… उफ्फ्फ्फ़ उनके bade-bade दूध सूट के ऊपर से उभरे हुए थे. गांड इतनी मोती और भरी हुई थी की सलवार के दोनों हिस्से alag-alag दीखते थे. ज़ैनब आपि टाइट sky-blue सलवार सूट में… उनके दूध ब्रा के बिना भी खड़े दीखते थे, निप्पल का हल्का उभार साफ़ दिख रहा था.

मेरी नज़र फिर सोफे पे गयी… वहां मेरी छोटी बेहेन नूर बिलकुल सेक्सी पिंक कुर्ती और ब्लैक टाइट लेग्गिंग्स में लेती हुई थी. कुर्ती इतनी टाइट थी की उसके मध्यम साइज के टाइट दूध उभर कर दीखते थे. लेग्गिंग्स में उसकी पतली कमर और उभरी हुई गोल गोल गांड इतनी मस्त लग रही थी की देख कर hi मेरा लुंड पूरा खड़ा हो गया.

इतने में मुझे पापा के कमरे से अनाम आपि की आवाज़ आयी.

**“पापा… ये पैसे रख लो… आपके काम आएंगे.”**

मेरी धड़कन तेज़ हो गयी. मैं चुपके से पापा के कमरे के दरवाज़े के पास गया और थोड़ा सा झाँक कर अंदर देखा…

अनाम आपि पापा के सामने कड़ी थी. पापा बीएड पे बैठे थे और उनके हाथ में वो सारे पैसे थे जो मैंने कल रात अनाम आपि को दिए थे… अर्जुन के 20000 रुपये!

आपि ने धीरे से बोलै,

**“पापा ये पैसे रख लो… आपके काम आएंगे.”**

पापा पैसे देख कर हैरान हो गए,

**“बीटा… ऐसा कौन सा काम स्टार्ट किया है जो एडवांस में इतना पैसा मिल गया है?”**

अनाम आपि मुस्कुराते हुए बोली,

**“पापा ऑनलाइन काम है… आप असीम से पूछ लेना… अगर काम अच्छा चला तोह और भी पैसे मिलेंगे.”**

पापा कुछ देर सोचते रहे… फिर बोले,

**“फिर भी बेटी… ये पैसे तुम्हारे हैं… मैं कैसे ले सकता हूँ…”**

जैसे hi पापा ने ये बोलै… अनाम आपि पापा के गले लग गयी. पापा ने प्यार से अपना हाथ आपि के सर पर फेरना शुरू कर दिया… dheere-dheere… बिलकुल प्यार भरे हाथ से.

ये पैसे अर्जुन के थे… जो उसने मेरी बड़ी आपि की छूट छोड़ने के बदले दिए थे… और अब अनाम आपि उन्ही पैसे को पापा को दे रही है… गले लगी हुई… पापा प्यार से सर पर हाथ भी फेर रहे हैं…

मेरा दिमाग पूरा उड़ चूका था. शॉक था… पर अंदर से एक अजीब सा मज़ा भी आ रहा था. मेरी शरीफ बड़ी आपि…… अब ये ड्रामा कर रही थी. मैं चुपके से वहां खड़ा था…… आँखें फैली हुई… सोच रहा था — अब क्या होगा… क्या पापा को कुछ पता चल गया… या अनाम आपि अब और गहरे खेल खेलने वाली है…

मैं हॉल में टेबल पे बैठ गया. अम्मी ने garam-garam नाश्ता लगा राखी थी. अब्बू सबसे पहले आये, उनका चेहरा आज पहली बार इतना खिला हुआ था. फिर ज़ैनब आपि और नूर आयी. नूर आज भी टाइट पिंक कुर्ती और ब्लैक लेग्गिंग्स में थी — उफ्फ्फ्फ़… उसकी गांड लेग्गिंग्स में इतनी उभरी हुई थी की देख कर hi मेरा लुंड पायजामा के अंदर हल्का सा हिल गया. ज़ैनब आपि टाइट sky-blue सलवार सूट में.

और फिर… अनाम आपि अंदर आयी.

उफ्फ्फ्फ़ … जैसे hi वो टेबल पे आयी, मेरा लुंड एक ज़ोर का झटका मार बैठा. वो बिलकुल फ्रेश थी, लाइट पिंक सलवार सूट पहना था जो कल रात अर्जुन ने उतरा था. दूध अब भी उभरे हुए थे, गांड हिलती हुई चल रही थी. चेहरा थोड़ा लाल था, आँखें नीचे. जैसे abhi-abhi किसी ने उसकी छूट फाड़ दी हो… और वो अब घर में शरीफ बन के बैठी थी.

सब बैठ गए. अब्बू ने पहला पराठा तोड़ते hi मुस्कुराते हुए बोलै,

**“आज सबको एक ख़ुशी की खबर है…”**

सबकी नज़रें अब्बू पे गयी. अब्बू ने अनाम आपि की तरफ देखा और हंस के बोले,

**“अनाम ने ऑनलाइन काम शुरू किया है… कल hi एडवांस में 20,000 रुपये मिल गए हैं! देखो बेटी कितनी मेहनती है… घर की हालत सुधरने के लिए raat-din सोचती रहती है.”**

अब्बू ने वो नोट का बंडल टेबल पे रख दिया. अम्मी की आँखें चमक उठी, नूर ने ताली बजा दी, ज़ैनब आपि भी मुस्कुरायी. सब खुश हो गए.

अम्मी ने अनाम आपि के सर पर हाथ फेरते हुए बोली,

**“मेरी बेटी… बहुत अच्छा किया. अब घर का बोझल हल्का होगा.”**

नूर ने हंस के कहा,

**“वह आपि… आप तोह हीरो हो गयी!”**

मैं अनाम आपि की तरफ देखा और मुस्कुरा दिया. उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मेरी नज़र उसके bade-bade दूध पे थी जो टेबल पे झुकने से और उभर आये थे. मैं अंदर hi अंदर सोच रहा था…

**“साली… कितनी बड़ी रांड है तू… कल रात तक अर्जुन के मोठे लुंड पे उछाल रही थी… छूट में माल भरवा रही थी… और अब यहाँ शरीफ बन के बैठी है… पापा को 20,000 रुपये दे रही है जो उसने छूट छोड़ने के बदले दिए थे… उफ्फ्फ्फ़… कितनी बड़ी रंडी है मेरी बड़ी आपि…”**

अनाम आपि ने मेरी तरफ देखा… जैसे hi उसकी आँख मेरी आँख से मिली… वो शर्मा कर नज़र झुका ली. उसका चेहरा एक सेकंड में लाल हो गया. गाल इतने लाल की जैसे कोई लाल गुलाब हो. वो नीचे देखते हुए पराठा तोड़ने लगी… पर मैं देख रहा था… उसकी साँसे थोड़ी तेज़ हो गयी थी.

लेकिन… ज़ैनब आपि का शक अभी भी था.

ज़ैनब आपि ने धीरे से पूछा,

**“अनाम आपि… ये ऑनलाइन काम क्या है एक्साक्ट्ली? कहाँ अप्लाई किया था? कितने घंटे काम करना पड़ता है?”**

अब्बू भी इंटरेस्टेड हो गए,

**“हाँ बेटी… बता तोह सही… क्या काम है? कोई रिस्क तोह नहीं है न?”**

अनाम आपि थोड़ी सी घबरा गयी… उन्होंने मेरी तरफ देखा….

मैं तुरंत बोल पड़ा… ut-patang झूठ… बिलकुल कॉंफिडेंट बन कर,

**“अरे अब्बू… ये कंटेंट राइटिंग का काम है… फॉरेन क्लाइंट्स के लिए आर्टिकल्स लिखती है… मैंने hi इंट्रोडस किया था उसको… रोज़ सिर्फ 2-3 घंटे काम है… घर बैठे पैसे आ रहे हैं… बिलकुल सेफ है… मैं खुद चेक कर लिया हूँ.”**

ज़ैनब आपि ने फिर भी शक से पूछा,

**“लेकिन इतना एडवांस कैसे मिल गया?”**

मैं हंस के बोलै,

**“पहला प्रोजेक्ट था… क्लाइंट इम्प्रेस्सेड हो गया… इसलिए एडवांस दे दिया… अब शायद और ज़्यादा मिलेंगे.”**

अब्बू ने विश्वास कर लिया… khushi-khushi बोले,

**“अच्छा… बहुत अच्छा… असीम बीटा… तू भी ध्यान रखना इसका.”**

अम्मी ने भी सर हिला दिया. नूर ने तोह ताली hi बजा दी.

सब विश्वास कर गए… लेकिन ज़ैनब आपि अभी भी मुझे और अनाम आपि को शक भरी नज़रो से देख रही थी… जैसे कुछ समझ रही हो… पर बोल नहीं रही थी.

मैं अंदर hi अंदर पागल हो रहा था… सोच रहा था — **“साली ज़ैनब… तू भी जल्द hi इस फॅमिली की रंडी बनेगी……”**

नाश्ता ख़तम होते hi अनाम आपि झट से उठी और किचन की तरफ चली गयी… उनकी गांड हिलती हुई… मैं उनको घूरता रहा… और सोच रहा था… अब असली खेल शुरू होने वाला है…

उसके बाद मैं सीधा अर्जुन के घर की तरफ निकल पड़ा. रस्ते भर मेरा दिमाग अनाम आपि के बारे में सोच रहा था. बाइक चलते हुए भी मैं baar-baar अनाम आपि के bade-bade दूध और उसकी गुलाबी छूट को याद कर रहा था.

अर्जुन के घर पहुंचा तोह दरवाज़ा खुला था. मैं अंदर घुस गया. अर्जुन बिस्तर पे लेट के सिगरेट फूक रहा था. मुझे देख कर उसने मुस्कुराते हुए पुछा,

**“अरे सेल असीम! आ गया? बोल… वो रंडी कहाँ है? कल की बात याद आ रही है… उसकी टाइट छूट और मोती गांड… उफ्फ्फ्फ़… आज लाया है क्या उसको?”**

मैं मुस्कुराया और बिस्तर पे बैठ गया. धीरे से बोलै,

**“भाई… आज नहीं ला सका… उसके घर में कुछ प्रॉब्लम है… फॅमिली वाले परेशां हैं… मैं किसी दिन ले आऊंगा… टेंशन मत ले… वो तेरी hi रांड बन चुकी है… बस टाइम दे दे.”**

अर्जुन ने सिगरेट सुलगाते हुए हंस दिया,

**“ठीक है सेल… जल्दी लाना… उसकी छूट फाड़ने का मन कर रहा है फिर से… लेकिन आज मूड बना हुआ है… एक नया माल बुला लिया है… 24 साल की मस्त बम है…… बोल… छोड़ेंगे दोनों मिलके?”**

मैंने सर हिला दिया. अर्जुन ने तुरंत फ़ोन उठाया और कॉल कर दिया. सिर्फ 15 मिनट में दरवाज़ा khat-khatane की आवाज़ आयी.

जैसे hi दरवाज़ा खुला… मेरा लुंड पायजामा में एक ज़ोर का झटका मार बैठा.

वो लड़की अंदर आयी… 24 साल की, पतली कमर, bade-bade 36 साइज के दूध, मोती लचकती गांड… टाइट ब्लैक टॉप और ब्लू जीन्स में थी. टॉप इतना टाइट था की दूध उभर कर बहार निकलने को हो रहे थे… जीन्स में गांड इतनी भरी हुई थी की दोनों नितम्ब alag-alag दीखते थे. चेहरा गोरा, होंठ लाल, आँखें चमकती हुई… बिलकुल माल थी.

अर्जुन ने उसको अंदर खींच लिया और सीधा किश करने लगा. वो भी गरम थी… उसने अर्जुन के गले में बाहें दाल दी. अर्जुन उसके दूध को टॉप के ऊपर से hi zor-zor से दबाने लगा.

मैं वही बिस्तर पे बैठ गया और देखने लगा. अर्जुन ने मुझे इशारा किया… मैं भी उठा और पीछे से उसको पकड़ लिया. उसकी गर्दन पे किश करने लगा… हाथ आगे बढाकर उसके bade-bade दूध पकड़ लिए… उफ्फ्फ्फ़… कितने गरम और भरे हुए थे… मैं zor-zor से मसलने लगा.

वो सिसक उठी…

**“अह्ह्ह… दोनों… धीरे… उफ्फ्फ्फ़… बहुत ज़ोर से मत दबाओ…”**

लेकिन हम दोनों को क्या सुन्ना था… अर्जुन ने उसका टॉप ऊपर किया और ब्रा भी उतार दी. उफ्फ्फ्फ़… दोनों bade-bade gol-gol दूध बहार आ गए… निप्पल टाइट और लाल… अर्जुन ने एक निप्पल मुँह में ले लिया और ज़ोर से चूसने लगा. मैं पीछे से दूसरे दूध को मसलता रहा… कभी निप्पल को ऊँगली से मरोड़ता… कभी ज़ोर से दबाता.

फिर हमने उसको नंगा कर दिया. उस की छूट बिलकुल क्लीन थी… हल्का सा गीला पैन दिखाई दे रहा था. अर्जुन ने उसको बीएड पे घोड़ी बनाया… मैं उसके मुँह के पास बैठ गया. अर्जुन ने पीछे से अपना मोटा 8 इंच का लुंड उसकी छूट में एक hi धक्के में घुसा दिया…

**“अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह… बहुत मोटा है… धीरे… अह्ह्ह…”**

वो चीख उठी… पर अर्जुन ने उसकी गांड पकड़ के zor-zor से धक्के मरने शुरू कर दिए… **धप… धप… धप…**

मैं उसके मुँह में अपना लुंड दाल दिया… उसके बाल पकड़ के ज़ोर से मुँह में धक्के मरने लगा…

लेकिन दोस्तों… मैं जब उस की छूट में अर्जुन का लुंड घुसते देख रहा था… तब मेरा दिमाग बिलकुल अलग जगह था…

**मैं सोच रहा था… ये लड़की मेरी आपि ज़ैनब है…**

उफ्फ्फ्फ़… मेरी नज़र में उस लड़की की जगह ज़ैनब आपि घोड़ी बानी हुई थी… उसका टाइट sky-blue सलवार सूट उतरा हुआ… moti-moti जांघें फैली हुई… उसकी पतली कमर… उभरी हुई गांड… और उसकी छूट जो मैंने कभी नहीं देखि थी… पर सोच रहा था की कितनी टाइट और गुलाबी होगी…

मैं उस के मुँह में लुंड पेलते हुए सोच रहा था — **“ज़ैनब आपि… आज अर्जुन तेरी छूट फाड़ रहा है… ले साली… मेरा लुंड मुँह में ले… अह्ह्ह… तेरी badi-badi चूचियां हिल रही हैं… उफ्फ्फ्फ़… कितनी शरीफ बन के बैठी रहती है… और अंदर से कितनी गरम है तू…”**

अर्जुन ने उस की गांड पे ज़ोर के थप्पड़ मारे… **चटक… चटक…**

**“ले रंडी… गांड उठा… और ज़ोर से उठा… अह्ह्ह… तेरी छूट कितनी टाइट है मादरचोद…”**

मैं भी जोश में आ गया… उस के मुँह में और तेज़ धक्के मरने लगा… उसके बाल पकड़ के… और सोच रहा था — **ज़ैनब आपि… तू भी ऐसे hi चीखेगी… जब अर्जुन तुझे घोड़ी बना के छोड़ रहा होगा… मैं देखूंगा… तू मेरी तरफ देखेगी… शर्माएगी… पर गांड हिलायेगी… अह्ह्ह्ह…”**

हम दोनों ने उस को रोगलय छोड़ना शुरू कर दिया. अर्जुन ने उसको उठा कर वाल से सत्ता दिया… उसकी एक टांग पकड़ कर ऊपर उठायी और khade-khade उसकी छूट में लुंड पेलने लगा… **धप… धप… धप…** उस की चीखें निकल रही थी… “अह्ह्ह… मर जाउंगी… बहुत ज़ोर से… अह्ह्ह्ह…”

मैं पीछे से उसके दूध पकड़ के ज़ोर से मसल रहा था… निप्पल को काट रहा था… और सोच रहा था — **ज़ैनब आपि… तेरी चूचियां इतनी बड़ी हैं… मैं इनको ऐसे hi मसालुंगा… अर्जुन तेरी छूट में लुंड डालेगा… तू बीच में फास जाएगी… अह्ह्ह्ह…”**

फिर हमने उसको बीएड पे लिटाया… अर्जुन ने उसकी छूट में लुंड डाला… मैं उसके मुँह में… दोनों तरफ से zor-zor से धक्के मर रहे थे… वो पूरी तरह से तड़प रही थी… उसकी बॉडी पसीने से चमक रही थी… दूध हिल रहे थे… गांड ऊपर उठ रही थी…

मैं जब झड़ने वाला था… तब भी सोच रहा था — **ज़ैनब आपि… आज नहीं तोह कल… तेरी बरी आएगी… तू भी ऐसे hi नंगी हो कर हम दोनों के बीच में चीखेगी… अह्ह्ह्हह…”**

मैंने ज़ोर से उस के मुँह में सारा माल निकाल दिया… अर्जुन ने उसकी छूट में भर दिया…

वो थक कर लेट गयी… हम दोनों उसके दोनों तरफ लेट गए… उसके दूध सहलाते हुए…

अर्जुन हंस के बोलै,

**“सेल… आज तोह बहुत मज़ा आया… लेकिन वो तेरी रंडी जल्दी ला… उसकी छूट और गांड का अलग hi मज़ा होगा…”**

मैं मुस्कुराया… पर अंदर से सोच रहा था… **“हाँ भाई… जल्दी लाऊंगा… लेकिन पहले ज़ैनब आपि को… उसकी टाइट सलवार सूट में चुप्पी हुई हवस को बहार निकालूंगा…”**


अगला अपडेट जल्द hi....
 
अर्जुन के घर से वापस आते hi मेरा लुंड अभी भी half-khada था. बाइक पे बैठते वक़्त भी baar-baar अनाम आपि की वह चीखें याद आ रही थी – “अह्ह्ह… अर्जुन… और ज़ोर से… फाड़ दो मेरी छूट… उफ्फ्फ्फ़…” घर पहुँचते hi मैंने बाइक पार्क की और सीधा अंदर घुस गया.



हॉल खली था. अम्मी और ज़ैनब आपि ऊपर थी, नूर कॉलेज से नहीं आयी थी. अब्बू भी शॉप पे थे. बस किचन से हलकी सी आवाज़ आ रही थी. मैं धीरे से किचन के दरवाज़े पे गया… और वहां मेरी बड़ी आपि अनाम अकेली कड़ी थी. वो अभी भी उसी लाइट पिंक सलवार सूट में थी जो कल अर्जुन ने उतरा था. सूट के ऊपर से hi उनके bade-bade दूध उभरे हुए थे, गांड इतनी टाइट चिपकी हुई थी की दोनों नितम्ब alag-alag दिख रहे थे.

जैसे hi उन्होंने मुझे देखा, उनका चेहरा एक सेकंड में लाल हो गया. नज़र नीचे कर ली. मैं मुस्कुराया और अंदर चला गया. दरवाज़ा बंद किया और सीधा उनके पास पहुँच गया.

“आपि…” मैंने धीरे से कहा और उनका हाथ पकड़ लिया.

“बीटा… क्या… क्या कर रहे हो… सब घर पे हैं…” उनकी आवाज़ काँप रही थी.

पर मैंने उनको सुना नहीं. उनके हाथ को पकड़ कर मैं चेयर पे बैठ गया और एक झटके से उनको अपनी गॉड में बिठा लिया. उसकी मोती गांड सीधा मेरे खड़े लुंड पे आ गयी. उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… कितनी गरम और सॉफ्ट थी… जैसे माखन का तकिया हो. उन्होंने थोड़ी सी मचलने की कोशिश की पर मैंने उनको टाइट पकड़ लिया.

मैंने उनके दोनों हाथों को पीछे किया और उसके सलवार सूट के ऊपर वाले कुर्ते के बटन्स खोलने लगा. वो सिसक उठी,

“अह्ह्ह… असीम… नहीं बीटा… मत… कोई आ जायेगा…”

लेकिन मैं रुकने वाला नहीं था. कुरता खोलते hi उसके bade-bade दूध बहार आ गए – बिलकुल नंगे, gol-gol, भरे हुए, गोरी स्किन चमक रही थी. दोनों निप्पल अभी भी थोड़े लाल और टाइट थे… कल अर्जुन ने कितना चूसा होगा इनको. मैंने दोनों हाथों से उनके दूध पकड़ लिए और zor-zor से मसलने लगा.

उफ्फ्फ्फ़… कितने गरम… कितने भरे हुए थे… जैसे दो bade-bade गरम दूध के गुब्बारे. मैं उनको ऊपर से नीचे दबाता, gol-gol घूमता, निप्पल को उँगलियों से पकड़ के हलके से मरोड़ता.

आपि सिसक उठी… उनकी साँसे तेज़ हो गयी,

“अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… असीम… धीरे… बहुत ज़ोर से मत… अह्ह्ह… मेरी चूचियां… उफ्फ्फ्फ़…”

मैं उसकी गर्दन पे मुँह रख कर चूसने लगा… गर्दन chat-ta हुआ… उनके कान में धीरे से बोलै,

“आपि… अर्जुन आपको बहुत याद कर रहा था… बोल रहा था… ‘वह रंडी कितनी टाइट थी… उसकी मोती गांड… उसकी गुलाबी छूट…’ उफ्फ्फ्फ़ आपि… उन्होंने आपकी चुदाई के 20,000 रुपये दिए थे… और आपने वो पैसे अब्बू को दे दिए… शरीफ बन के… हाहाहा… कितनी बड़ी रंडी हो आप… अपनी छूट छुड़वा के घर का खर्चा चला रही हो…”

जैसे hi मैंने ये बात बोली… आपि का पूरा जिस्म काँप उठा. उसने शर्म से आँखें बंद कर ली… गाल पूरे लाल हो गए… पर उनकी छूट मेरे लुंड पे और गीली होने लगी. मैं उसके दूध को और ज़ोर से मसलने लगा… एक हाथ से निप्पल को पिंच करता… दूसरे हाथ से पूरा दूध मसलता…

“अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… असीम… मत बोलो ऐसी बातें… बहुत शर्म आ रही है… अह्ह्ह… मेरी चूचियां… उफ्फ्फ्फ़… और मत मसलो… आअह्ह्ह…”

मैं उसकी गर्दन को choos-te हुए… उसके कान में गरम सांस छोड़ते हुए टॉन्ट मारता रहा,

“शर्म क्यों आ रही है आपि… कल तोह अर्जुन के लुंड पे उछाल रही थी… ‘फाड़ दो मेरी छूट… और ज़ोर से…’ बोल रही थी… और आज पैसे देकर अब्बू को खुश कर रही हो… वह… कितनी बड़ी रांड बन गयी हो आप… मेरी शरीफ बड़ी आपि… अब घर की इज़्ज़त नहीं… सिर्फ एक छोड़ने वाली माल हो…”

आपि अब कण्ट्रोल नहीं कर प् रही थी. उसने अपनी गांड मेरे लुंड पे halke-halke हिलनी शुरू कर दी… दूध मेरे हाथों में zor-zor से उभर रहे थे… निप्पल बिलकुल सख्त हो गए थे. उनके मुँह से सिर्फ सिसकारियां निकल रही थी…

“अह्ह्ह… हहैयय… असीम… उफ्फ्फ्फ़… बहुत गरम हो गया है… अह्ह्ह… मत बोलो ऐसे… आअह्ह्ह… मेरी छूट… तड़प रही है… उफ्फ्फ्फ़…”

मैं उसके दूध को और ज़ोर से मसलता हुआ… गर्दन को kaat-ta हुआ… उनकी गांड पे अपना खड़ा लुंड रगड़ता हुआ बोलै,

“अर्जुन बोल रहा था… अगली बार आपकी गांड भी फाड़ूंगा… आपकी moti-moti गांड पे थप्पड़ मार्के लाल कर दूंगा… और आप खुद गांड utha-utha कर मांगोगी… ‘अर्जुन… मेरी गांड में दाल दो…’ बोलोगी… उफ्फ्फ्फ़ आपि… सोचो… आपकी गांड… अर्जुन के मोठे लुंड से पहात जाएगी…”

आपि अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी. उसने अपनी गांड ज़ोर से मेरे लुंड पे दबायी… दूध मेरे हाथों में हिल रहे थे… साँसे बिलकुल तेज़… आँखें बंद… होंठ kaat-ti हुई सिसक रही थी…

“अह्ह्ह्हह… असीम… उफ्फ्फ्फ़… मत बोलो… बहुत शर्म आ रही है… पर… अह्ह्ह… मेरी छूट… गीली हो रही है… उफ्फ्फ्फ़… आप भी कितने कमीने हो… अपनी बड़ी आपि को ऐसे बोल रहे हो… आअह्ह्ह…”

मैं उसके दूध को और ज़ोर से मसलता हुआ… निप्पल को पिंच करता हुआ… उसकी गर्दन को चूसता हुआ… और धीरे से उसके कान में बोलै,

“आपि… अब बताओ… अगली बार अर्जुन के साथ कब जाओगी? या फिर… मैं hi आपकी छूट फाड़ दूँ आज रात…?”

आपि सिर्फ सिसकती रही… उसकी गांड मेरे लुंड पे zor-zor से रगड़ रही थी… दूध मेरे हाथों में लाल पद गए थे… और उसकी छूट से पानी टपक रहा था मेरे पायजामा पे…

उफ्फ्फ्फ़ … मेरी शरीफ बड़ी आपि अब पूरी तरह हवस में डूब चुकी थी…

रात के खाने का टाइम में… पूरा घर में सन्नाटा था. अब्बू टेबल के सामने पे बैठे थे, अम्मी उनके बगल में, नूर और ज़ैनब आपि दोनों मेरे बिलकुल पास. मैं ज़ैनब आपि के लेफ्ट साइड पे बैठा था और अनाम आपि सीधा मेरे सामने.

जैसे hi खाना शुरू हुआ… मेरी और अनाम आपि की नज़रें एक दूसरे से टकरा गयी. उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… उनकी आँखों में अब वह पुराणी शर्म नहीं थी. एक नया नशा tha…Woh मेरे सामने बैठी थी… शरीफ बन के… पर उनकी आँखें मुझे बता रही थी की अंदर से वो अभी भी तड़प रही है.

मैं धीरे से उनको देखता… वो भी नज़र उठा कर देखती… फिर झट से नज़र झुका लेती. उनके bade-bade दूध टेबल पे थोड़ा झुकने से और उभर आये थे… पिंक सलवार सूट के ऊपर से शेप बिलकुल साफ़ दिख रहा था. जब वो रोटी तोड़ती… उनके दूध halke-halke हिलते… और मेरी नज़र वही अटक जाती.

ज़ैनब आपि बिलकुल मेरे बगल में बैठी थी. उनकी टाइट sky-blue सलवार सूट में उनके bade-bade दूध और भी उभरे हुए थे. वो खाना khate-khate baar-baar हम दोनों की तरफ देख रही थी… जैसे कुछ समझ रही हो… पर कुछ बोल नहीं रही थी.

अचानक… जब मैं अनाम आपि को देख रहा था… ज़ैनब आपि ने अपना हाथ टेबल पे रखने के लिए आगे बढ़ाया… और उनके bade-bade दूध… सीधा मेरे ब्याह पर रगड़ गए.

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… जैसे करंट दौड़ गया पूरे शरीर में. उनकी चूचियां इतनी गरम… इतनी सॉफ्ट और भरी हुई थी की मेरे ब्याह के ऊपर से भी सॉफ्टनेस फील हो रही थी. मैं सोचा… शायद गलती से लग गया होगा.

लेकिन… कुछ देर बाद… फिर से… जब वो सलाद लेने के लिए थोड़ा झुकी… उनके दूध फिर से मेरे ब्याह पर ज़ोर से रगड़ गए… इस बार और देर तक.

अब मेरा दिल zor-zor से धक् धक् करने लगा. मैं शॉक हो गया… क्युकी ये गलती नहीं थी. ज़ैनब आपि jaan-bujh कर अपने bade-bade दूध मेरे ब्याह पर रगड़ रही थी… अनजान बन कर… पर baar-baar.

तीसरी बार… वो थोड़ा और झुक गयी… और उनके दूध पूरी तरह मेरे ब्याह पर डाब गए… उफ्फ्फ्फ़… कितने गरम थे… कितने भरे हुए थे… ब्रा के अंदर से भी उनकी गर्मी मेरे ब्याह तक आ रही थी.

मैं अंदर से पागल हो गया. मेरा लुंड पायजामा के अंदर एकदम से खड़ा हो गया… टोपा से पानी निकलने लगा. मैं सोच रहा था… **“ज़ैनब आपि… jaan-bujh कर अपनी चूचियां मेरे ब्याह पर रगड़ रही है… उफ्फ्फ्फ़… क्या मतलब है इसका… क्या वो कल रात की बात नोटिस कर चुकी है…?”**

ज़ैनब आपि अभी भी अनजान बन रही थी… पर उनके गाल थोड़े लाल हो गए थे… साँसे थोड़ी तेज़… और वो baar-baar मेरे ब्याह पर अपने दूध रगड़ रही थी… जैसे चेक कर रही हो की मैं रियेक्ट क्या करता हूँ.

मैं शॉक में था… पर अंदर से एक ज़बरदस्त मज़ा आ रहा था. मेरी बड़ी आपि अनाम मेरे सामने बैठी थी…

उफ्फ्फ्फ़ … घर की दोनों आपियाँ… एक दिन में… दोनों तरफ से मुझे पागल कर रही थी…

मैं नीचे हाथ दाल कर अपना लुंड चुपके से दबाने लगा… और सोचने लगा… **“अब क्या होगा… ज़ैनब आपि को भी पता चल गया है… या वो खुद भी इस हवस में आ चुकी है…?”**

रात के 1 बजे के बाद पूरा घर सन्नाटा था. अब्बू का कमरा बंद, अम्मी और नूर भी सो चुकी थी. मैं अपने बिस्तर पे लेता हुआ था, आँखें बंद, पर नींद नाम की चीज़ नहीं आ रही थी.

अचानक मेरे कमरे का दरवाज़ा धीरे से खुला. मैं झट से आँखें खोल कर देखा…

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… दरवाज़े पे मेरी दूसरी आपि ज़ैनब कड़ी थी.

वो बिलकुल हलके पिंक निघ्त्य में थी — वो वाली जो घर में सिर्फ सोते वक़्त पहनती है. निघ्त्य इतनी पतली और टाइट थी की उसके bade-bade दूध बिलकुल उभरे हुए थे. ब्रा नहीं पहनी थी, इसलिए निप्पल का टाइट उभार साफ़ दिख रहा था. निघ्त्य के नीचे उनकी मोती जांघें और उभरी हुई गांड का शेप बिलकुल क्लियर था. बाल खुले हुए, आँखों में काजल अभी भी थोड़ा बाकि था… चेहरा सीरियस, पर आँखें एक अजीब सी चमक लेके मुझे घर रही थी.

वो धीरे से अंदर आयी और दरवाज़ा बंद कर दिया. फिर सीधा मेरे बिस्तर के पास आकर कड़ी हो गयी. मैं उठ कर बैठ गया..

ज़ैनब आपि ने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा… फिर धीरे से, बिलकुल हलकी पर तेज़ आवाज़ में बोली,

**“असीम… ये सब जो तुम और अनाम आपि कर रहे हो… मुझे सब मालुम है.”**

जैसे बिजली गिर गयी. मेरा मुँह सुख गया. मैं दर के मारे तुरंत बहाना बनाने लगा,

**“आपि… क्या… क्या बोल रही हो? हम… हम कुछ नहीं… … मैंने कुछ नहीं किया…”**

ज़ैनब आपि ने एक कदम और आगे बढ़ाया. अब वो बिलकुल मेरे सामने कड़ी थी. निघ्त्य के अंदर से उसके bade-bade दूध upar-neeche हो रहे थे. उसने धीरे से मुस्कुराते हुए बोलै,

**“मेरे से चालाकी नहीं चलेगी असीम… मैंने सब देखा है. कल रात जब तुम अनाम आपि के कमरे में गए थे… मैं भी जाग रही थी. और आज नाश्ते में भी तुम दोनों की nazar-baziya… और वो पैसे… … सब समझ आ गया है मुझे.”**

मेरा चेहरा पूरा लाल पद गया. लुंड दर और मज़ा दोनों से एक साथ खड़ा हो गया था. मैं फिर भी बहाना बनाने लगा,

**“आपि… सच में… ऐसा कुछ नहीं… आप गलत समझ रही हो…”**

ज़ैनब आपि ने अब बीएड पे बैठ गयी… मेरे बिलकुल पास. उनकी निघ्त्य ऊपर चढ़ गयी थी, मोती जांघें साफ़ दिख रही थी. उसने मेरी आँखों में देखते हुए, बिलकुल धीरे और सेक्सी आवाज़ में बोलै,

**“असीम… मैंने कहा न… मेरे से चालाकी नहीं. जो कुछ भी तुम दोनों कर रहे हो… मुझे सब पता है.”**

मैं घबरा कर बोलै,

**“आपि… तोह… मैं क्या करूँ? आप बताओ…”**

ज़ैनब आपि ने एक सेक्सी स्माइल दिया. उनकी आँखें चमक उठी. उसने धीरे से अपना हाथ मेरे ब्याह पर रखा… और हलके से सहलाने लगी. फिर मेरी आँखों में देखते हुए, बिलकुल मधुर और हवस भरी आवाज़ में बोली,

**“जैसा मैं बोलती हूँ… वैसा करना पड़ेगा असीम. और क्या करना है… वो मैं कल बताउंगी.”**

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… उनकी स्माइल देख कर मेरा लुंड पायजामा में झटके मारने लगा. ज़ैनब आपि… मेरी शरीफ आपि… जो हमेशा पर्दा करती थी… आज रात मेरे बिस्तर पे बैठी थी… सेक्सी स्माइल देते हुए… और बोल रही थी की मैं उसके हिसाब से चलना पड़ेगा…

वो उठी… निघ्त्य को थोड़ा नीचे खींचती हुई… दरवाज़े की तरफ बढ़ी… फिर पीछे मुद कर एक बार फिर मुझे देखा और हलके से बोली,

**“कल … मेरा इंतज़ार करना… और किसी को कुछ मत बताना.”**

दरवाज़ा बंद होते hi मैं बिस्तर पे लेट गया… दिल zor-zor से धक् धक् कर रहा था… लुंड पूरा तन गया था…

अब ज़ैनब आपि को भी सब पता चल गया था… और वो खुद इस खेल में शामिल होने वाली थी…

आधी रात के 2 बजे थे… पूरा घर सन्नाटा था. मैं बिस्तर पे पलट रहा था, नींद नाम की चीज़ नहीं आ रही थी.

मुझसे रहा नहीं गया. मैं धीरे से उठा, पायजामा ठीक किया और चुपके से अनाम आपि के कमरे की तरफ बढ़ गया. दरवाज़ा थोड़ा खुला था. मैं अंदर घुस गया और धीरे से दरवाज़ा बंद कर दिया.

अंदर सिर्फ टेबल लैंप की हलकी रौशनी थी. आपि बीएड पे करवट लेकर सोइ हुई थी. ऊपर वाला कुरता थोड़ा ऊपर चढ़ा हुआ था, नीचे सलवार का नाडा ढीला था. उसकी moti-moti गांड बहार की तरफ उभरी हुई थी… सलवार इतनी टाइट चिपकी हुई थी की दोनों नितम्ब alag-alag साफ़ दिख रहे थे.

मैं बीएड पे चढ़ा और पीछे से उनके बिलकुल पास लेट गया. धीरे से उनकी सलवार का नाडा खोला… और बहुत आराम से सलवार को घुटनो तक नीचे खेंच दिया. उनकी नंगी मोती गांड बिलकुल साफ़ मेरे सामने थी — गोरी, भरी हुई, लचकती हुई. गांड के बीच की दरार में हलकी सी गुलाबी छूट की झलक दिख रही थी… कल अर्जुन ने कितनी ज़ोर से फाड़ी थी… अब भी थोड़ी सी लाल थी.

मैंने दोनों हाथों से उनकी मोती गांड के दोनों हिस्से फैलाये और मुँह नीचे किया. पहली जीभ उसकी गांड के छेद पे राखी… और धीरे से चाटने लगा.

“सलूरररप…”

जैसे hi मेरी गरम जीभ उसकी गांड के छेद पे लगी… आपि सिसक उठी. उनकी बॉडी एक झटके से काँप गयी.

“अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़…”

वो सिसकते हुए उठने लगी, पर मैंने उनकी कमर पकड़ ली और मुँह और अंदर दबा दिया. अब मैं उसकी पूरी गांड चाट रहा था — ऊपर से नीचे, नीचे से ऊपर, गांड के छेद को जीभ से ghuma-ghuma कर चूस रहा था.

आपि पलट गयी… अब लेती हुई सीढ़ी हो गयी. उनकी आँखें खुल गयी थी, चेहरा पूरा लाल, साँसे तेज़.

“असीम… अह्ह्ह… बीटा… क्या कर रहे हो… उफ्फ्फ्फ़… रात के 2 बज रहे हैं … अह्ह्ह…”

मैं कुछ नहीं बोलै. उनकी टाँगे फैला दी और सीधा उसकी नंगी गुलाबी छूट पे मुँह रख दिया. Zor-zor से चाटने लगा — ऊपर से नीचे, क्लीट को मुँह में लेकर चूसने लगा, जीभ अंदर daal-daalke andar-bahar करने लगा.

“सलूरररप… सलूरररप… चुऊस… पूछ पूछ…”

आपि की सिसकारियां तेज़ हो गयी. उसने दोनों हाथों से मेरा सर पकड़ लिया… कभी धकेलती… कभी और अंदर दबा लेती.

“अह्ह्ह्हह… असीम… उफ्फ्फ्फ़… मेरी छूट… हैयय… और ज़ोर से चाट… अह्ह्ह… जीभ अंदर दाल… उफ्फ्फ्फ़… मैं मर जाउंगी… आअह्ह्ह…”

मैं और जोश में आ गया. पूरी छूट को मुँह में भर के चूसने लगा… क्लीट को जीभ से tez-tez रगड़ने लगा… 2 ऊँगली अंदर दाल कर andar-bahar करने लगा. आपि की छूट से पानी nikal-nikal कर मेरे मुँह में भर रहा था… कितना गरम… कितना नमकीन…

आपि अब पागल हो चुकी थी. उसने अपनी गांड ऊपर utha-utha कर मेरी जीभ से छुड़वा रही थी.

“अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… असीम… और तेज़… मेरी छूट चाट… अह्ह्ह्हह… आ रही है… आ रही है… उफ्फ्फ्फ़…”

बस 2 मिनट और… आपि का पूरा जिस्म एक ज़ोर के झटके से काँप उठा. उसने मेरा सर दोनों हाथों से पकड़ के अपनी छूट पे ज़ोर से दबा दिया और चीख उठी,

“Ahhhhhhhhhhhhh… असीम… आ गयी… उफ्फ्फ्फ़… मेरा पानी… पि लो… पि लो मेरा पानी… अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह…”

उसकी छूट से garam-garam पानी की बड़ी सी धार निकल गयी… सीधा मेरे मुँह में! मैं मुँह नहीं हटाया… पूरा पानी choos-choos के पि गया… कितना ज़्यादा था… मेरा मुँह भर गया… thoda-thoda मेरे होंठों से बहार भी टपक रहा था.

आपि थक कर लेट गयी… साँसे तेज़… बॉडी हिल रही थी… आँखें बंद… चेहरा बिलकुल लाल.

लेकिन मैं अभी नहीं रुका. मैं उठा… पायजामा नीचे किया… मेरा खड़ा मोटा लुंड बहार आ गया.. मैंने आपि के मुँह के पास बैठ कर लुंड उसके गुलाबी होंठ पे रगड़ना शुरू कर दिया.

“आपि… मुँह खोलो… मेरा लुंड चूसो…”

आपि ने आँखें खोली… शर्मा कर… पर मुँह खोल दिया. मैंने अपना मोटा लुंड उनके गरम मुँह में दाल दिया और ज़ोर से धक्के मरने लगा.

“ग्लुक… ग्लुक… सलूरररप… पूछ पूछ…”

“अह्ह्ह… ले साली रंडी… चूस… पूरा मुँह में ले… उफ्फ्फ्फ़… कितनी अच्छी चूसती है तू… कल अर्जुन के लुंड को ऐसे hi चूस रही थी… आज मेरा चूस… अह्ह्ह… मेरी पर्सनल रंडी… कुटिया… मादरचोद… अह्ह्ह… और अंदर ले… हलक तक ले…”

मैं उनके बाल पकड़ के zor-zor से मुँह में धक्के मर रहा था. कभी पूरा लुंड हलक तक… कभी बहार निकाल कर टोपा पे जीभ फेरवता… कभी गालियां देता…

“ले कुटिया… अर्जुन के पैसे लेके अब्बू को दे रही थी… वह मेरी बड़ी आपि… कितनी बड़ी रांड है तू… अह्ह्ह… चूस… और ज़ोर से चूस…”

आपि भी अब मज़े में आ चुकी थी. वो अपना मुँह आगे badha-badha कर लुंड चूस रही थी… कभी बॉल्स को जीभ से chat-ti… कभी लार टपकती हुई चूसती…

मैं बहुत देर तक उसका मुँह छोड़ता रहा… गालियां देता रहा… उसके बाल पकड़ के… जब तक मेरा लुंड फिर से झड़ने वाला नहीं हो गया.

फिर मैंने ज़ोर से उसके मुँह में सारा माल निकाल दिया… “अह्ह्ह्हह… ले साली… पि ले मेरा माल… मेरी रंडी आपि…”

आपि ने सब कुछ पि लिया… थोड़ा बहार टपका तोह उसने ऊँगली से उठा के मुँह में दाल दिया.

मैं थक कर उसके बगल में लेट गया… उसके bade-bade दूध को एक हाथ से सहलाता हुआ… और धीरे से बोलै,

“अब सो जाओ आपि……”

आपि ने आँखें बंद कर ली… पर उनके होंठ पे एक हलकी सी मुस्कराहट थी…
 
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