Adultery Meri Shareef Family Ki Hawas - Page 2 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery Meri Shareef Family Ki Hawas

सुबह हॉल में नाश्ता चल रहा था. अम्मी ने garam-garam पराठे, आलू की सब्ज़ी और अदरक वाली चाय बना राखी थी. अब्बू टेबल के सिरहाने बैठे थे, उनका चेहरा आज भी कल के 20,000 रुपये के वजह से खिला हुआ था. नूर अपनी टाइट पिंक कुर्ती और ब्लैक लेग्गिंग्स में बैठी थी, उसकी उभरी हुई गांड चेयर पे डाब रही थी. ज़ैनब आपि मेरे बिलकुल बगल में बैठी थी – sky-blue सलवार सूट में उनका निप्पल का हल्का उभार साफ़ दिख रहा था.



और फिर… दरवाज़े से मेरी बड़ी आपि अनाम अंदर आयी.

उफ्फ्फ्फ़ … जैसे hi वो अंदर आयी, मेरा लुंड पायजामा के अंदर एक ज़ोर का झटका मार बैठा. वो बिलकुल फ्रेश थी – लाइट पिंक सलवार सूट पहना था. सूट के ऊपर वाला कुरता थोड़ा टाइट था, इसलिए उनके bade-bade दूध बिलकुल उभरे हुए थे… हर सांस के साथ halke-halke हिल रहे थे. गांड पे सलवार इतनी चुस्ती से चिपकी हुई थी की दोनों मोती गांड के हिस्से alag-alag दीखते थे और चलते वक़्त एकदम lachak-lachak कर हिल रहे थे. चेहरा थोड़ा लाल था, आँखें नीचे, जैसे abhi-abhi किसी ने उनकी गुलाबी छूट फाड़ दी हो.

वो टेबल पे मेरे सामने बैठने के लिए झुकी… कुरता आगे की तरफ लटक गया और gehra-gehra क्लीवेज साफ़ दिख गया. रात वाला सन आँखों के सामने आ गया – मैं टेबल के नीचे अपना लुंड चुपके से दबाने लगा.

नाश्ता शुरू होते hi मैंने बहाना बनाया.

**“अब्बू… आपि… वो ऑनलाइन काम जो अनाम आपि ने शुरू किया था न… जिससे कल 20,000 एडवांस मिले थे… आज क्लाइंट ने अर्जेंट मीटिंग मांगी है. वह पर्सनली एक्सप्लेन करना चाहता है की आगे का प्रोजेक्ट कैसे होगा. मैं साथ चलता हूँ, आपको कोई टेंशन नहीं होगी.”**

अनाम आपि ने झट से मेरी तरफ देखा. उनकी आँखें फैल गयी. चेहरा एक सेकंड में लाल हो गया. उसने तुरंत मन कर दिया,

**“नहीं असीम… मैं नहीं जाउंगी. घर में बहुत काम है… अम्मी को हेल्प करनी है… और मैं अकेली बहार नहीं जाती.”**

अब्बू ने भी तुरंत मन कर दिया. उनका स्ट्रिक्ट चेहरा वापस आ गया,

**“बिल्कु नहीं! बहार किसी के पास जाने की क्या ज़रूरत है? पैसे आलरेडी मिल गए हैं… बाकी काम घर बैठे हो सकता है. ये घर से बहार नहीं जाएगी.”**

मैं तुरंत बोल पड़ा,

**“अब्बू… क्लाइंट बहुत बड़ा है. अगर आज पर्सनली नहीं गए तोह प्रोजेक्ट कैंसिल कर सकता है. 20,000 तोह सिर्फ एडवांस था… आगे और भी ज़्यादा पैसे आने वाले हैं. आप hi सोचो… मैं साथ रहूँगा… बाइक पे ले जाऊंगा… कोई प्रॉब्लम नहीं होगी.”**

अम्मी ने भी सपोर्ट किया,

**“हाँ जी… बेटी थोड़ी बहार निकल लेगी तोह क्या हो जायेगा? असीम साथ है… सेफ रहेगी.”**

ज़ैनब आपि बिलकुल चुप थी… पर उसकी नज़रें हम दोनों पे अटक गयी थी. वो baar-baar अनाम आपि के लाल गालों को और मेरी तरफ देखती जा रही थी. उसकी आँखों में शक और गहरा हो चूका था…

अनाम आपि ने बहुत देर तक मन किया… “नहीं पापा… मुझे नहीं जाना… मैं घर पे hi काम कर लुंगी…” लेकिन जब अब्बू ने पैसे वाली बात सुनी और अम्मी ने भी ज़ोर दिया, तोह वो मजबूर हो गयी. उसने धीरे से सर हिला दिया और हलकी सी आवाज़ में बोली,

**“ठीक है… लेकिन जल्दी वापस आएंगे… और पापा, आप टेंशन मत लीजिये.”**

अब्बू ने थोड़ा सोच कर हाँ कर दिया… पर उनका चेहरा अभी भी थोड़ा सख्त था.

मैं अंदर से पागल हो गया था. उफ्फ्फ्फ़… मेरी शरीफ बड़ी आपि…

नाश्ता ख़तम होते hi मैं बाइक निकाल कर बहार खड़ा हो गया. अनाम आपि दुपट्टा मुँह तक टाइट बांध कर बहार आयी. वो पीछे बैठ गयी. जैसे hi उसने मुझे पकड़ा… उनके bade-bade दूध मेरी पीठ से बिलकुल चिपक गए.

बाइक स्टार्ट करते hi मैंने धीरे से बोलै,

**“आपि… अब तोह बहाना भी बन गया… अब असली मज़ा शुरू होगा.”**

बाइक चलते hi अनाम आपि के bade-bade दूध मेरी पीठ पर zor-zor से रगड़ने लगे. हर स्पीड ब्रेकर पे वो मुझसे और चिपक जाती… उफ्फ्फ्फ़… कितनी गरम… कितनी सॉफ्ट… ब्रा के अंदर से भी निप्पल के टाइट उभार फील हो रहे थे. मैं बाइक को थोड़ा तेज़ चलने लगा ताकि उसके दूध और ज़ोर से रगड़ें.

रस्ते में मैंने धीरे से उनके कान में बोलै

**“आपि… ये 20,000 रुपये जो आपने पापा को दिए… वो तो अर्जुन के थे… उसने आपकी छूट छोड़ने के बदले दिए थे… और आपने उनको पापा को दे दिए… वह… कितनी बड़ी रंडी बन गयी हो आप… घर का खर्चा अपनी छूट से चला रही हो…”**

अनाम आपि सिसक उठी. उसने मुझे पीछे से और टाइट पकड़ लिया… उनके दूध मेरी पीठ में और गहरे डाब गए.

**“अह्ह्ह… असीम… मत बोलो ऐसी बातें… बहुत शर्म आ रही है… लोग देख लेंगे… अह्ह्ह…”**

मैं हंस के बोलै,

**“शर्म क्यों आ रही है आपि… कल तोह अर्जुन के सामने नंगी हो कर घोड़ी बानी थी… ‘फाड़ दो मेरी छूट’ बोल रही थी… और अब पापा के पैसे देकर शरीफ बन रही हो… उफ्फ्फ्फ़… मेरी बड़ी आपि… अब घर की इज़्ज़त नहीं… सिर्फ एक छोड़ने वाली माल हो… जिसकी छूट से घर चलता है…”**

**“आपि… ज़ैनब आपि को शायद शक हो गया है… उसने कल रात हम दोनों को देख लिया था… आज नाश्ते में भी घर रही थी… अगर उसने सब बता दिया तोह क्या होगा? या फिर… हम उसको भी इस खेल में शामिल कर लें… दोनों बहनें साथ… एक साथ अर्जुन के लुंड पे उछलती हुई… उफ्फ्फ्फ़… सोचो आपि…”**

अनाम आपि अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी. उसने अपनी गांड मेरे पीठ पर दबायी… दूध ज़ोर से रगड़ती हुई… सिसकती हुई बोली,

**“अह्ह्ह्ह… असीम… तुम… तुम मुझे पागल कर डोज… मेरी छूट गीली हो रही है… उफ्फ्फ्फ़… ज़ैनब… अगर उसको पता चल गया… तोह… तोह क्या होगा… अह्ह्ह… लेकिन… लेकिन तुम्हारी बातें सुन कर… बहुत गरम लग रही है… आअह्ह्ह…”**

अर्जुन के घर के बहार बाइक रोकते hi अनाम आपि ने मुझे पीछे से और टाइट पकड़ लिया. उनकी साँसे मेरी गर्दन पे garam-garam पद रही थी. मैं बाइक बंद करके धीरे से बोलै,

**“आपि… अंदर चलो. डरो मत. मैं यहीं बैठूंगा सोफे पे… ”**

अनाम आपि का पूरा बदन काँप रहा था. दुपट्टा मुँह तक टाइट बंधा हुआ था, सिर्फ उसकी badi-badi आँखें दिख रही थी — आँखों में दर, शर्म और एक अजीब सी तड़प मिल रही थी. वो बाइक से उत्तरी तोह उसकी टाँगे thar-thar काँप रही थी. मैं उनका हाथ पकड़ कर अंदर ले गया.

अर्जुन दरवाज़ा खोलते hi मुस्कुराया. उसकी आँखें अनाम आपि को ऊपर से नीचे तक घर रही थी. उसने सीधा अनाम आपि का दुपट्टा खेंच लिया और हंस के बोलै,

**“अरे वह… आज तोह असली माल आ गयी है. असीम भाई, आ जाओ अंदर.”**

मैं कुछ नहीं बोलै. सीधा हॉल के बड़े सोफे पे जाकर बैठ गया. दिल zor-zor से धक् धक् कर रहा था. मेरा लुंड पायजामा के अंदर पूरा तन चूका था.

अर्जुन ने अनाम आपि को एक झटके से अपने से चिपका लिया. आपि ने दोनों हाथों से उसको धकेलने की कोशिश की,

**“अर्जुन… नहीं… प्लीज… धीरे… ”**

लेकिन अर्जुन ने उनकी कमर को और ज़ोर से पकड़ लिया. उसकी badi-badi काली उँगलियाँ आपि के पिंक सलवार सूट के ऊपर से hi उसकी कमर में घुस गयी. उसने एक हाथ से आपि के बाल पकड़े और उसके गुलाबी होंठ पे अपने bade-bade काले होंठ रख दिए. Zor-zor से किश करने लगा… जीभ अंदर दाल दी… आपि के होंठ चूसने लगा.

आपि पहले चटपटा रही थी… “मममहह… नहीं… उफ्फ्फ्फ़…” पर dheere-dheere उनकी जीभ भी अर्जुन की जीभ से टकराने लगी. लार की धार दोनों के मुँह से टपकने लगी.

अर्जुन ने किश छोड़ते hi आपि के दोनों bade-bade दूध पकड़ लिए… सलवार सूट के ऊपर से hi. उफ्फ्फ्फ़… उसने बेदर्दी से दोनों हाथों से zor-zor से मसलने शुरू कर दिया. दबा रहा था… ऊपर से नीचे… gol-gol घुमा रहा था… निप्पल को उँगलियों से पकड़ के ज़ोर से पिंच कर रहा था.

**“अह्ह्ह्हह… दर्द हो रहा है… उफ्फ्फ्फ़… अर्जुन… धीरे… बहुत ज़ोर से मत… अह्ह्ह…”**

आपि की चीख निकल गयी. उनकी आँखें badi-badi हो गयी… चेहरा एकदम लाल… पर उसकी बॉडी अर्जुन के हाथों में हिल रही थी. दूध इतने ज़ोर से मसले जा रहे थे की सलवार सूट के कपडे भी अंदर तक घुस रहे थे.

अर्जुन हंस पड़ा,

**“दर्द हो रहा है रंडी? कल तोह इसके लिए तड़प रही थी… अब दर्द में hi मज़ा आ रहा है न?”**

उसने आपि के दूध को और ज़ोर से मसला… एक हाथ से पूरा दूध पकड़ के ऊपर की तरफ खींचा… दूसरे हाथ से निप्पल को पकड़ के घुमाया. आपि की सिसकारी तेज़ हो गयी,

**“ाआईई… बहुत दर्द… उफ्फ्फ्फ़… पर… पर रुक मत… अह्ह्ह… और… और ज़ोर से… हहैयय…”**

मेरी आँखें फैल गयी. असीम… मैं सोफे पे बैठा था… सिर्फ 4-5 फुट दूर… और मेरे सामने मेरी सगी बड़ी आपि… जो talak-shuda होने के बावजूद हमेशा शरीफ बानी रहती थी… अब अर्जुन के हाथों में तड़प रही थी. दर्द से चीख रही थी… पर उसकी गांड खुद halke-halke हिल रही थी… उसकी छूट गीली होने लगी थी… मैं देख सकता था सलवार के ऊपर हल्का सा गीला धब्बा.

अर्जुन ने आपि को घुमा दिया… अब आपि का पीठ मेरे तरफ था. उसने आपि की कमर पकड़ के उसको अपने से चिपका लिया… और पीछे से उसकी गांड पे अपना खड़ा लुंड रगड़ने लगा. एक हाथ आगे बढाकर आपि के दूध को फिर से मसलने लगा… दूसरे हाथ से उसकी गांड पे zor-zor से थप्पड़ मारता जा रहा था.

**चटक्क… चटक्क… चटक्क…**

हर थप्पड़ पे आपि की मोती गांड हिलती… लाल निशान पद जाता… और आपि चीखती,

**“आआह्ह्ह… बहुत ज़ोर से… उफ्फ्फ्फ़… मेरी गांड… जल रही है… अह्ह्ह… पर… पर मज़ा भी आ रहा है… हहैयय… और मारो… अह्ह्ह्ह…”**

अर्जुन ने उसकी गांड पे 8-10 थप्पड़ मारे… फिर उसको घुमा कर मेरे बिलकुल सामने खड़ा कर दिया. आपि की आँखें मेरी आँखों से मिली… उसकी आँखों में शर्म, दर्द, हवस… सब कुछ था. वो शर्मा कर नज़र झुका ली… पर उसकी साँसे तेज़ हो चुकी थी… दूध zor-zor से upar-neeche हिल रहे थे.

अर्जुन ने पीछे से आपि की सलवार का नाडा खोल दिया… सलवार धीरे से नीचे खिसक गयी. अब आपि सिर्फ पंतय में थी… उसकी moti-moti जांघें और पहली हुई गुलाबी छूट का शेप पंतय के ऊपर से साफ़ दिख रहा था.

अर्जुन ने पंतय को भी नीचे खेंच दिया… और आपि को मेरे सामने बिलकुल नंगी कर दिया.

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मेरी बड़ी आपि… पूरी नंगी… मेरे सामने कड़ी थी. Bade-bade दूध लटक रहे थे… निप्पल लाल और सख्त… मोती गांड… और बीच में वही गुलाबी छूट.... अब भी थोड़ी लाल और पहली हुई थी… हल्का पानी टपक रहा था.

अर्जुन ने पीछे से आपि की कमर पकड़ी और उसको थोड़ा झुका दिया… अब आपि मेरे सामने झुकी हुई थी… उसके bade-bade दूध लटक रहे थे… गांड ऊपर उठी हुई थी.

अर्जुन ने अपना मोटा काला लुंड पकड़ा और आपि की छूट के मुँह पे रगड़ने लगा… टोपा अंदर बहार करने लगा… बेदर्दी से.

आपि तड़प उठी,

**“अह्ह्ह्हह… अर्जुन… धीरे… बहुत मोटा है… दर्द हो रहा है… उफ्फ्फ्फ़… पर… पर अंदर दाल दो… अह्ह्ह… मुझे मज़ा आ रहा है… आअह्ह्ह…”**

अर्जुन ने एक ज़ोर का धक्का मारा… आधा लुंड अंदर चला गया.

**“अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह… पहात गयी… उफ्फ्फ्फ़… बहुत दर्द… पर… और दाल दो… प्लीज… अह्ह्ह्ह…”**

मैं सोफे पे बैठा… सिर्फ 3 फुट दूर… देख रहा था… मेरा लुंड पायजामा में झटके मार रहा था… और मेरी शरीफ बड़ी आपि… दर्द से चीख रही थी… पर उसकी गांड खुद पीछे की तरफ हिल रही थी… मज़ा ले रही थी…

अर्जुन dheere-dheere पूरा लुंड अंदर पेलने लगा… बेदर्दी से… zor-zor से… और आपि के मुँह से सिर्फ सिसकारियां और चीखें निकल रही थी… दर्द के साथ मज़ा भी…

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… ये सन देख कर मेरा दिल और लुंड दोनों पागल हो रहे थे…

अर्जुन ने उसके लम्बे बाल पकड़ लिए और ज़ोर से खींचा. आपि की गर्दन पीछे मुद गयी. उसकी साँसे तेज़ हो गयी थी.

**“घुटनो पे बैठ जा रंडी… अब मेरा लुंड चूस… अच्छी तरह चूस…”**

आपि ने मेरी तरफ देखा. उसकी आँखों में दर्द, शर्म और बेबस तड़प थी. उसने धीरे से घुटनो पे बैठ गयी. कारपेट पे उनकी मोती जांघें डाब गयी. अर्जुन ने अपना मोटा काला 8 इंच का लुंड पकड़ा और उसके गुलाबी होंठ पे रगड़ने लगा. टोपा उसके होंठों को गीला कर रहा था.

आपि ने आँखें बंद कर ली… शर्म से… और बहुत धीरे से मुँह खोला.

अर्जुन ने एक सेकंड भी वास्ते नहीं किया. उसने उसके बाल और ज़ोर से पकड़े और अपना लुंड उसके मुँह में धकेल दिया.

पहले सिर्फ आधा… फिर और अंदर… जब तक लुंड उसके हलक तक नहीं पहुँच गया.

**“ग्लुक… ग्लुक… ुघठ… ग्लुक…”**

आपि के मुँह से आवाज़ आने लगी. उसकी आँखें फैल गयी, आंसू निकल आये. लार उसके होंठों से टपकने लगी और बहने लगी. अर्जुन ने उसके बाल को और टाइट पकड़ा और dheere-dheere धक्के मरने शुरू कर दिए.

**“चूस साली… पूरा मुँह में ले… हलक तक… अह्ह्ह… कितनी अच्छी चूसती है तू… ले… और अंदर…… कुटिया…”**

हर धक्के पे आपि का सर पीछे झटका खता… उसका चब्बी बदन हिलता… दूध ज़ोर से upar-neeche लटकते… लार उसके मुँह से बहार nikal-nikal कर टपक रही थी. वो हाथों से अर्जुन की जाँघों को पकडे हुए थी… कभी धकेलने की कोशिश करती… कभी खुद अंदर ले लेती.

मैं सोफे पे बैठा था…… सब कुछ साफ़ देख रहा था. मेरी बड़ी आपि… जिसको मैं बचपन से शरीफ समझता था… अब घुटनो पे बैठी… किसी गैर मर्द का मोटा लुंड मुँह में ले रही थी. उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे… लार टपक रही थी… पर उसकी छूट से पानी टपक रहा था… मैं देख सकता था.

अर्जुन ने 4-5 मिनट तक उसका मुँह छोड़ता रहा… कभी ज़ोर से अंदर तक… कभी बहार निकाल कर उसके चेहरे पे थप्पड़ मारता… कभी गालियां देता…

**“ले मादरचोद… चूस… मेरी पर्सनल रंडी… अह्ह्ह… तू अब मेरी चूसने वाली कुटिया बन गयी… ले… और अंदर ले…”**

फिर अर्जुन ने उसके बाल पकड़ के उसको उठाया और सोफे पे घोड़ी बना दिया.

आपि के दोनों हाथ और घुटने सोफे पे थे. उसकी moti-moti गांड पूरी तरह ऊपर उठी हुई थी. उसका चब्बी शरीर हिल रहा था – दूध नीचे लटक रहे थे, मोती जांघें फैली हुई थी, गांड के दोनों हिस्से alag-alag उभरे हुए थे.

अर्जुन ने पीछे से उसकी कमर पकड़ी… अपना मोटा लुंड उसकी छूट के मुँह पे सेट किया… और एक hi ज़ोर का धक्का मारा.

**धायआपपप!!!**

**“AHHHHHHHHHH… बहुत मोटा… पहात गयी… आअह्ह्ह… दर्द हो रहा है… उफ्फ्फ्फ़… बहुत ज़ोर से…”**

आपि की चीख निकल गयी. उसका पूरा चब्बी बदन एक झटके से आगे की तरफ हिला. दूध ज़ोर से लटक कर हिल गए… गांड की मात्य फलेश हिल गयी… तइस काँप उठी.

अर्जुन रुकने वाला नहीं था. उसने दोनों हाथों से आपि की कमर पकड़ी और बेदर्दी से धक्के मरने लगा… तेज़… गहरे… zor-zor से.

**धप… धप… धप… धप…**

हर धक्के पे आपि का चब्बी शरीर पूरा हिल रहा था. उसकी मोती गांड पीछे से ज़ोर से टकराती… दूध latak-latak कर aage-peeche हिल रहे थे… तइस हिल रही थी… पूरा बदन पसीने से चमकने लगा था.

**“अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… अर्जुन… बहुत ज़ोर से… अह्ह्ह… मेरी छूट पहात रही है… पर… पर मज़ा आ रहा है… आअह्ह्ह… और ज़ोर से… फाड़ दो… उफ्फ्फ्फ़…”**

आपि दर्द में चीख रही थी… पर उसकी गांड खुद पीछे उठ रही थी… छूट अर्जुन के लुंड को अंदर खींच रही थी.

मैं सोफे पे बैठा… हाथ में अपना लुंड पकड़ के dheere-dheere हिला रहा था… आँखें फैली हुई… दिल में एक अजीब नशा…

**“उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मेरी बड़ी आपि… मेरी सगी बड़ी आपि… अब मेरे सामने कुटिया बन कर चुद रही है… उसका चब्बी बदन हर धक्के पे हिल रहा है…… और वो दर्द के साथ मज़ा ले रही है… मैं देख रहा हूँ… और ये देख कर मुझे इतना मज़ा आ रहा है की मैं पागल हो रहा हूँ…”**

अर्जुन और तेज़ हो गया… गांड पे थप्पड़ मारता… गालियां देता…

**“ले रंडी… ले कुटिया… तेरी छूट अब मेरी… अह्ह्ह… कितनी गीली है मादरचोद… ले… और ले…”**

अर्जुन ने अनाम आपि को घोड़ी बनाये हुए hi 4-5 मिनट और zor-zor से पेला. हर धक्के पे आपि का चब्बी बदन पूरा हिल रहा था. उसकी मोती गांड पीछे से टकराती, दूध latak-latak कर aage-peeche झूल रहे थे, तइस काँप रही थी. आपि के मुँह से अब सिर्फ धीमी सिसकारियां निकल रही थी — दर्द और मज़ा दोनों मिल कर.

फिर अर्जुन ने उसको उठाया और बीएड पे सीधा लिट्टे दिया. आपि की टाँगे khud-ba-khud फ़ैल गयी. उसकी छूट अब बिलकुल गीली और पहली हुई थी, अंदर से अर्जुन का माल और उसका अपना पानी मिक्स होकर बहार टपक रहा था.

अर्जुन उसके ऊपर चढ़ा. उसने आपि की एक टांग अपने कंधे पर रख ली और दूसरी टांग को फैला दिया. फिर अपना मोटा काला लुंड उसकी छूट के मुँह पे सेट किया और धीरे से अंदर धकेल दिया.

**“आआह्ह्ह्हह…”**

आपि की गर्दन पीछे मुद गयी. उसकी आँखें बंद हो गयी. अर्जुन ने dheere-dheere पूरा लुंड अंदर किया… फिर बहार… फिर अंदर. इस बार थोड़ा स्लो था, लेकिन गहरा और ज़ोर का. हर धक्के पे आपि का चब्बी पेट हल्का सा ऊपर उठ जाता, दूध ज़ोर से हिलते, और उसके मुँह से एक लम्बी सिसकारी निकलती.

**थप… थप… थप… थप…**

अर्जुन उसके ऊपर झुका हुआ था. उसकी साँसे आपि के चेहरे पे पद रही थी. वो dheere-dheere छोड़ रहा था, लेकिन हर धक्का गहरा था. आपि की छूट अब उसके लुंड को पूरी तरह अंदर ले रही थी.

**“अह्ह्ह… अर्जुन… बहुत अंदर जा रहा है… उफ्फ्फ्फ़… दर्द भी हो रहा है… पर… पर बहुत मज़ा आ रहा है… अह्ह्ह… और धीरे… और अंदर तक...”**

अर्जुन ने उसके होंठ पे किश किया और धीरे से बोलै,

**“ले मेरी रांड… अब पूरी तरह मेरी हो गयी है तेरी छूट……”**

आपि ने मेरी तरफ देखा. उसकी आँखें मेरी आँखों से मिली. उसमे शर्म थी, बेबस पैन था… और एक गहरा नशा भी. वो शर्मा कर आँखें बंद कर लेती… पर हर धक्के पे उसकी गांड खुद हलके से उठ जाती.

मैं सोफे पे बैठा था… हाथ में लुंड पकड़ के dheere-dheere हिला रहा था. देख रहा था की मेरी सगी बड़ी आपि… जो बचपन से मुझे “बीटा” कहती थी… अब किसी और मर्द के नीचे लेती हुई चुद रही थी. उसका चब्बी बदन हर धक्के पे हिल रहा था. दूध लटक रहे थे. छूट से “puch-puch” की आवाज़ आ रही थी.

अर्जुन की स्पीड dheere-dheere बढ़ने लगी. अब वो तेज़ धक्के मरने लगा. आपि की सिसकारियां तेज़ हो गयी.

**“अह्ह्ह… अर्जुन… और ज़ोर से… फाड़ दो… अह्ह्ह्हह… मैं झड़ने वाली हूँ… उफ्फ्फ्फ़…”**

अर्जुन ने आपि की दोनों टाँगे अपने कन्धों पर रख ली और फुल स्पीड में छोड़ने लगा. उसके मोठे लुंड की हर धक्के पे आपि की छूट फैल रही थी. आपि की आँखें बंद, मुँह खुला, लार टपक रही थी.

फिर अर्जुन ने झट से लुंड बहार निकला और आपि के मुँह के ऊपर आ गया.

**“मुँह खोल रंडी… ले मेरा माल…”**

आपि ने आँखें खोली… शर्मा कर… पर मुँह खोल दिया. अर्जुन ने उसके बाल पकड़े और अपना लुंड उसके मुँह में दाल दिया. Zor-zor से धक्के मारे… और फिर ज़ोर से झाड़ गया.

**“अह्ह्ह्हह… ले साली… पि ले… पूरा पि ले… अह्ह्ह्हह…”**

अर्जुन का सारा गरम माल आपि के मुँह में भर गया. कितना ज़्यादा था… आपि के होंठ से बहार भी टपक रहा था. आपि ने आँखें बंद करके सब कुछ पि लिया… थोड़ा बहार टपका तोह उसने ऊँगली से उठा के मुँह में दाल दिया.

अर्जुन थक कर उसके बगल में लेट गया. कुछ देर साँसे चलती रही.

फिर वो उठा… नंगा hi मेरे पास आया और सोफे पे मेरे बगल में बैठ गया. उसका लुंड अभी भी थोड़ा खड़ा था और चमक रहा था.

अर्जुन ने सिगरेट सुलगा ली, एक काश लिया और मुस्कुराते हुए मुझसे बोलै,

**“भाई… ये रंडी कौन है यार? सच बता… इतनी ज़बरदस्त माल मैंने ज़िन्दगी में पहली बार छोड़ी है. टाइट छूट… मोती गांड… और चूचियां देख… कितनी बड़ी और भरी हुई हैं. किश करने में भी कितनी सॉफ्ट लिप्स हैं… और चूसने में तोह जैसे प्रोफेशनल रंडी हो. उफ्फ्फ्फ़… ऐसी रांड पहले कभी नहीं मिली. पूरी फॅमिली टाइप लगती है… शरीफ सी… पर अंदर से कितनी गरम है बस. आज के बाद इसको रोज़ लाना… मैं इसको अपनी पर्सनल रंडी बना लूंगा.”**

मैं मुस्कुराया… अंदर से बहुत मज़ा आ रहा था. अर्जुन को यह नहीं पता था की ये मेरी सगी बड़ी बहन है.

मैंने धीरे से बोलै,

**“भाई… बस एक जान्ने वाली लड़की है… बहुत क्लोज है…. और हाँ… वो भी तुझे पसंद कर चुकी है.”**

अर्जुन हंस पड़ा. उसने फिर से अनाम आपि की तरफ देखा जो अभी भी बीएड पे नंगी लेती हुई थी, साँसे तेज़ चल रही थी, चेहरा लाल, दूध upar-neeche हो रहे थे.

अर्जुन ने वॉलेट निकला… उसमे से 50,000 रुपये निकाले और मेरे तरफ बढ़ाते हुए बोलै,

**“ले भाई… आज इस रंडी ने बहुत मज़ा दिया. ये 50,000 इसके लिए… बोल देना… अगली बार और ज़्यादा दूंगा. ऐसी टाइट और गरम छूट वाली रंडी बहुत काम मिलती है.”**

मैं पैसे ले लिए. अर्जुन उठा और अनाम आपि के पास गया. उसने पैसे उसके हाथ में रख दिए और उसके गाल पे किश करके बोलै,

**“ले मेरी जान… ये तेरे लिए. बहुत मस्त चूड़ी तू आज. अगली बार कब आएगी मादरचोद..”**

अनाम आपि ने पैसे देखे… उसका चेहरा शर्म से और लाल हो गया. उसने पैसे हाथ में पकडे… आँखें नीचे कर ली… पर उसकी उँगलियाँ thar-thar काँप रही थी. वो कुछ नहीं बोली… बस शर्मा कर लेती रही.

मैं सोफे पे बैठा ये सब देख रहा था… अंदर से एक अलग hi नशा हो रहा था.

मेरी बड़ी आपि… मेरी सगी बड़ी आपि… अब किसी और मर्द के पैसे ले रही थी… उसके लुंड छुड़वाने के बदले… और मैं देख रहा था… और ये देख कर मुझे इतना मज़ा आ रहा था की मैं पागल हो रहा था.

 
अर्जुन के घर से सीधा घर पहुंचा hi था की दिल में एक आग सी लग रही थी. आपि का वह चेहरा, उनके लिप्स पे अभी भी अर्जुन का थिक, वाइट पानी चिपका हुआ था – वह थोड़ा सा ड्राई हो चूका था लेकिन शाइन कर रहा था. मैं दरवाज़ा बंद करके सीधा उनके बैडरूम में घुसा. आपि मिरर के सामने कड़ी थी, सलवार सूट में, अभी भी थोड़ी सी सांस फूली हुई…



मैं पीछे से उनको पकड़ लिया. एक हाथ उनकी कमर पे, दूसरा उनके गले पे. “आपि…” मैं बस इतना बोलै और उनके लिप्स पे अपना मुँह रख diya.Unke सॉफ्ट, गरम लिप्स पे अर्जुन का पानी लगा था – थोड़ा चिपचिपा. मैं ने अपनी जीभ से उनके लोअर लिप को छाता, पूरा पानी अपनी जीभ पे ले लिया और उसको अंदर खींच लिया. आपि पहले थोड़ी सी शॉक में थी, आँखें बड़ी बड़ी, फिर एक सेकंड में उनका मूड बदल गया.

“उम्मंहहह…” आपि ने ज़ोर से ओह्ह्ह किया और अपनी जीभ मेरी जीभ से लड़ने लगी. बहुत पैशनेट! जैसे उन्हें भी मज़ा आ रहा हो अपने hi छोड़ू का पानी मुझे खिलते हुए. हमारी जीभें एक दूसरे के मुँह में घुस रही थी, लापद लापद आवाज़ आ रही थी. अर्जुन का पानी हम दोनों के मुँह में मिक्स हो रहा था – मैं उसको चाट चाट के उनके मुँह में दाल रहा था, वह भी जीभ घुमा घुमा के मुझे पीला रही थी. उनके हाथ मेरे बालों में, खिंच रही थी, और मैं उनकी कमर को और टाइट पकड़ के उनको अपने से चिपका लिया. किश इतना वाइल्ड हो गया की उनके लिप्स पे लार और अर्जुन का पानी दोनों मिलके ड्रिप करने लगे.

फिर मैं ने उनको घुमा के चेयर की तरफ धक्का दिया. आपि चेयर के पीछे हाथ रख के झुक गयी, गांड ऊपर. मैं ने झट से उनकी सलवार का नाडा खोला और एक hi झटके में नीचे कर दिया. पैंतीस भी साथ में. उनकी चूड़ी हुई छूट बिलकुल सामने थी – लाल, फूली हुई, और अंदर से अर्जुन का थिक क्रीमी पानी बहार आ रहा था. छूट के मुँह पे एक बड़ा सा ड्राप लटक रहा था.

मैं ने नीज पे बैठ के उनकी दोनों गांड के चीक्स फैला दी और मुँह लगा दिया. सीधा छूट पे. “आआह्ह्ह ाआसिम…” आपि ने ज़ोर से चिल्लाया. मेरी जीभ ने पहले उस लटकते ड्राप को चाट लिया. फिर मैं ने पूरा मुँह उनकी चुदाई की हुई छूट पे रख दिया. जेभह अंदर दाल के अंदर तक घुमा रहा था, उनकी छूट को चाट चाट के साफ़ कर रहा था. हर चाटने पे “स्लुर्प स्लुर्प” आवाज़ आ रही थी. आपि की टाँगे काँप रही थी, उनकी गांड मेरे मुँह पे डाब रही थी.

“हाय्यय… बीटा… और ज़ोर से… अर्जुन ने आज बहुत ज़ोर से छोड़ा था……” आपि उफ्फ्फ उफ्फ्फ कर रही थी, एक हाथ पीछे करके मेरे सर को छूट पे दबा रही थी.

मैं ने जीभ और अंदर दाल दी, नोज उनकी क्लीट पे रगड़ रहा था, और दोनों हाथों से उनकी गांड को मसल रहा था. उनकी छूट से अर्जुन का पानी और उनका अपना रास मिक्स हो के मेरे मुँह में भर रहा था. मैं सब पि रहा था जैसे कोई भूखा हूँ. आपि अब गांड हिला हिला के मेरी जीभ पे छूट रगड़ रही थी. फिर आपि झड़ने लगी सारा पानी मैं किसी कुत्ते की तरह चाटने लगा.

आपि के रूम से बहार निकला तोह सांस भी ठीक से नहीं ले पा रहा था. मूह अभी भी उनकी छूट के रास और अर्जुन के पानी के मिक्स से गीला था. जैसे hi मैं हॉल में कदम रखा… वहाँ ज़ैनब आपि कड़ी थी. सीढ़ी मेरी तरफ घर रही थी. उनकी आँखें टाइट, एक एएब्रो ऊपर, जैसे कुछ समझ चुकी हो. वह क्रीम कलर का सलवार सूट पहने थी, दुपट्टा अभी भी शोल्डर्स पे था, लेकिन उनके बड़े बड़े दूध उसके नीचे से भी उभर के दिखाई दे रहे थे.

“असीम… इधर आ.” उन्होंने हलकी सी आवाज़ में बोलै और मेरा हाथ पकड़ लिया. उनकी उंगलियां गरम थी, थोड़ी सी टाइट गृप. मैं कुछ बोलता उससे पहले hi वह मुझे अपने रूम में खींच के ले गयी और दरवाज़ा धीरे से बंद कर दिया.

अंदर पहुँचते hi उन्होंने मुझे चेयर पे बैठा दिया और खुद मेरे सामने कड़ी हो गयी. हाथ कमर पे रख के पुछा, “बताओ… यह सब क्या हो रहा है? आपि के रूम से इतनी आवाज़ें आ रही थी… और तुम्हारा चेहरा… बिलकुल अलग लग रहा है. कुछ छुपा रहे हो क्या?”

मैं ने थोड़ा सा स्माइल किया और सीधा नज़र मिलायी. “कुछ नहीं ज़ैनब आपि… बस आपि को थोड़ा सा… हेल्प कर रहा था. उनका… बैक पैन हो रहा था न, तोह मैंने मस्सगे कर दिया .”

वह थोड़ी सी हसी, पर आँखें अभी भी मुझे घूर रही थी. “मस्सगे? हम्म… इतनी ज़ोर ज़ोर की आवाज़ें मस्सगे से आती हैं क्या?” फिर बात करते करते उन्होंने अपना दुपट्टा धीरे से उतार दिया. जैसे ये नार्मल हो, लेकिन मैं जानता था यह नार्मल नहीं था. दुपट्टा निकलते hi उनके बड़े बड़े, हैवी दूध बिलकुल साफ़ दिखने लगे. सूट के ऊपर से भी उनकी शेप इतनी परफेक्ट थी – गोल, टाइट, और दोनों तरफ से एकदम उभरे हुए. ब्रा का हुक भी हल्का सा दिखाई दे रहा था. मेरी आँखें वही अटक गयी. दिल में एक करंट सा दौड़ गया. पागल हो गया मैं उनके उस डीप क्लीवेज को देख के.

ज़ैनब आपि ने नोटिस किया. पर कुछ बोली नहीं. बस एक हलकी सी स्माइल दी और हाथ ऊपर करके बाल ठीक करने लगी – जैसे जान बुझ के अपने दूध और उभार रही हो. मैं ने आँखें हटाने की कोशिश की, पर नहीं हटा पाया.

“असीम बीटा… तुम्हारी नज़रें तोह कहीं और अटक रही हैं,” उन्होंने धीरे से कहा, आवाज़ में एक तैसिंग टोन था.

मैं ने हिम्मत करके बोलै, “आपि… आपके… ‘बैक’ इतना… हैवी है न, इसलिए नज़र नहीं हैट रही. लगता है बहुत… लोड लिया हुआ है आपने आज.”

उन्होंने एक एएब्रो ऊपर किया, लेकिन स्माइल नहीं गयी. “हैवी लोड? हाँ… कभी कभी बहुत सारा लोड पद जाता है… और फिर… खुद hi संभालना पड़ता है. तुम… हेल्प कर सकते हो क्या इसमें?”

मैं ने चेयर पे पीछे तक बैठ के उनके दूध को और घूरा. “आपि… हेल्प तोह मैं बहुत अच्छे से कर सकता हूँ. पर आपको… थोड़ा सा… अंदर तक जाना पड़ेगा. बहार से तोह सिर्फ ऊपर ऊपर का hi होता है न?”

ज़ैनब आपि ने एक कदम मेरे पास आये, अब उनके दूध मेरे मुँह के बिलकुल सामने थे. उनकी सांस तेज़ हो रही थी. “अंदर तक? हम्म… देखते हैं… तुम कितना अंदर तक जा सकते हो… और कितना… गहराई तक पहुंचा सकते हो.”

उनकी आँखें अब मेरी आँखों में थी, पर मैं जानता था – यह सिर्फ शुरुआत है. उनके बड़े बड़े दूध अभी भी मेरे सामने हिल रहे थे… जैसे बोल रहे हो – “पकड़ ले असीम… अभी नहीं तोह कभी नहीं.”

वह से ज़ैनब आपि के रूम से निकलते hi मैं पागल सा हो गया . उनकी वह लास्ट स्माइल… वह बड़े बड़े दूध मेरे मुँह के बिलकुल सामने हिलते हुए… और वह double-meaning वाली बातें – “कितना अंदर तक जा सकते हो” – सब कुछ दिमाग में घूम रहा था. मैं ने दरवाज़ा धीरे से बंद किया और सीधा अपने रूम की तरफ चल पड़ा. हाथ ठन्डे हो रहे थे, लेकिन अंदर से आग लग रही थी.

अपने रूम में घुसते hi मैं बीएड पे लेट गया. सीलिंग की तरफ देखते हुए सांस लेने की कोशिश कर रहा था. दिमाग में बस एक hi सवाल बार बार घूम रहा था – **पिछले 3-4 दिनों में मेरी लाइफ कैसे इतनी बदल गयी?**

पहले तोह सब नार्मल था. सुबह उठो, कॉलेज, घर आओ, आपि अनाम को देखो और बस… दूर से hi उनकी स्माइल पे खुश हो जाता था. वह क्रीम कलर का निघ्त्य पेहेन के किचन में काम करती, मैं चुपके से उनकी गांड और दूध की तरफ देखता… बस इतना hi. कभी सोचा भी नहीं था की एक दिन उनके मुँह में अपनी जीभ डालूंगा, उनकी चुदाई की हुई छूट चाटूँगा और अर्जुन का पानी भी पि जाऊंगा. पर यह सब हो गया. सिर्फ 3 दिन पहले अर्जुन के घर से जब मैं वापस आया था न… तब से आपि अनाम का रवैय्या hi बदल गया. और मैं… मैं तोह पागल हो गया हूँ उनके लिए. आज भी उनकी छूट चाटने के बाद उनकी वह सिसकी – “बीटा… और ज़ोर से…” – अभी भी मेरे कानो में गूँज रहा था.

और अब… अब यह ज़ैनब aapi.Jab उन्होंने दुपट्टा उतरा और वह हैवी, टाइट दूध मेरे सामने उभर आये… मैं तोह सच में पागल हो गया था. इतने बड़े, इतने सॉफ्ट दीखते थे… ब्रा के ऊपर से भी उनकी शेप इतनी क्लियर थी की मैं सोच रहा था – एक बार हाथ लगाऊं तोह क्या होगा? और वह बातें… “हैवी लोड” और “अंदर तक जाना पड़ेगा” – यह सब सुनके मेरा लुंड आलरेडी खड़ा हो चूका था. ज़ैनब आपि को पता था मैं उनके दूध को क्या नज़र से देख रहा हूँ, फिर भी उन्होंने और एक कदम आगे बढ़ा दिया था. जैसे बोल रही हो – “देख लो बीटा… और कितना देखना है तोह देख लो.”

मैं बीएड पे करवट लेके सोचने लगा… दोनों आपियों का रवैय्या अब बिलकुल अलग था. आपि अनाम तोह अब ओपनली रंडी जैसी हरकते कर रही थी... पर ज़ैनब आपि… वह स्लो थी, नज़रों से hi छोड़ रही थी. जैसे जान बुझ के अपने बड़े बड़े दूध को हाईलाइट कर रही हो. लग रहा था दोनों तरफ से मुझे ट्रैप किया जा रहा है… और मैं ख़ुशी ख़ुशी इन सब में फंसना चाहता हूँ.

सांस तेज़ हो रही थी. मैं ने आँखें बंद की और सोचा – कल सुबह क्या होगा?

पर अंदर से एक आवाज़ आ रही थी – असीम… अब कण्ट्रोल मत रख. दोनों आपियों को एक साथ फील करने का टाइम आ गया है.”

मैं मुस्कुराया और लेट गया. कल देखेंगे… अभी तोह बस यह सोच सोच के मज़ा ले रहा था की मेरी लाइफ कितनी मस्त हो चुकी है.

सुबह जब मैं उठा तोह लुंड पहले से hi half-khada था. पायजामा के अंदर टोपा गीला हो चूका था.

हॉल में नाश्ता लगा था. अम्मी गरम पराठे बना रही थी. अब्बू टेबल पे बैठे थे. नूर कॉलेज बैग पैक कर रही थी. और… दोनों आपियाँ आलरेडी बैठी थी.

पहले अनाम आपि. लाइट पिंक सलवार सूट में… ऊपर वाला कुरता थोड़ा टाइट, दोनों bade-bade दूध उभरे हुए… हर सांस के साथ halke-halke हिल रहे थे. जब उन्होंने मुझे देखा… उनकी आँखें एक सेकंड के लिए चमक उठी. वह नीचे देखते हुए मुस्कुरायी…

फिर मेरी नज़र ज़ैनब आपि पे गयी. उफ्फ्फ्फ़… sky-blue टाइट सलवार सूट. दुपट्टा अभी भी शोल्डर्स पे था. उनके bade-bade दूध बिलकुल उभर कर दिखाई दे रहे थे. ब्रा का वाइट लास हल्का सा झाँक रहा था. जब मैं बैठा… उन्होंने धीरे से अपना पेअर टेबल के नीचे मेरे पेअर से टच किया. एक हल्का सा प्रेस. मैं शॉक में था… पर अंदर से करंट दौड़ गया.

नाश्ता शुरू हुआ. अब्बू खुश थे – “अनाम बीटा… तेरे ऑनलाइन काम से घर की हालत सुधर रही है… बहुत अच्छा.” अनाम आपि ने सर हिला दिया और मुझे देखा. उनकी आँखें बोल रही थी – “वह 50,000 तोह अर्जुन ने मेरी छूट छोड़ने के बदले दिए थे…”

मैं रोटी तोड़ रहा था जब ज़ैनब आपि ने अपना हाथ टेबल पे आगे बढ़ाया… और उनका हैवी दूध सीधा मेरे ब्याह पर रगड़ गया. यह गलती नहीं थी. उन्होंने jaan-bujh कर किया. फिर दूसरी बार… और तीसरी बार. हर बार उनके दूध मेरे ब्याह पे ज़ोर से डाब रहे थे. उफ्फ्फ्फ़… कितने गरम… कितने भरे हुए…

नूर कुछ बोल रही थी कॉलेज की… अम्मी चाय दाल रही थी… पर मेरी नज़र ज़ैनब आपि के डीप क्लीवेज पे अटक गयी थी. वह jaan-bujh कर झुक रही थी… दूध और उभर रही थी. उनकी आँखें मेरी आँखों में थी… एक स्माइल… जैसे बोल रही हो – “देख लो बीटा… कितना देखना है… और कितना अंदर तक जाना है…”

अनाम आपि ने भी नोटिस किया. उन्होंने टेबल के नीचे अपना पेअर मेरे पेअर से रगड़ दिया. दोनों तरफ से दोनों आपियाँ मुझे पागल कर रही थी.

मैं अंदर से पागल हो चूका था. लुंड पायजामा में पूरा तन गया था.

नाश्ता ख़तम होते hi ज़ैनब आपि उठी. जाते वक़्त उन्होंने मेरे कान के पास झुक कर बहुत हलकी सी आवाज़ में बोलै…

**“शाम को मेरा रूम में आ जाना**

उनकी गरम सांस मेरे कान पे पड़ी… और वह मुस्कुराते हुए चली गयी. उनकी मोती गांड हिलती हुई… सलवार टाइट चिपकी हुई.

अनाम आपि ने भी मुझे देखा…… और किचन की तरफ चली गयी.

दोस्तों… अब दोनों आपियाँ… दोनों तरफ से मुझे पागल कर रही थी…

खैर शाम मैं ज़ैनब आपि के रूम में घुसा. वह बीएड के पास कड़ी थी, क्रीम कलर की सिल्की निघ्त्य में. निघ्त्य इतनी पतली थी की उनके bade-bade दूध बिलकुल उभरे हुए थे… निप्पल का टाइट उभार साफ़ दिख रहा था. उन्होंने धीरे से स्माइल दी और बीएड पे लेट गयी… पीठ मेरी तरफ करके.

**ज़ैनब आपि (हलकी आवाज़ में):** “बीटा… आ जा. मेरा बैक बहुत दर्द हो रहा है आज. थोड़ा मस्सगे कर दे… ऊपर से शुरू कर… धीरे धीरे अंदर तक जाना… समझे?”

मैं बीएड पे उनके पास बैठ गया. हाथ काँप रहे थे. उनकी निघ्त्य के ऊपर से hi उनके bade-bade दूध साइड में लटक रहे थे… gol-gol, भरे हुए, गोरी स्किन चमक रही थी. मैंने पहले उनकी कमर पे हाथ रखा… धीरे से सहलाने लगा.

**मैं:** “आपि… आपका बैक तोह बहुत… टाइट और भरा हुआ लग रहा है. ऊपर वाला हिस्सा कितना… हैवी है… लगता है अंदर तक जाना पड़ेगा… वर्ण रिलीफ नहीं मिलेगा.”

उन्होंने हलके से सिसकी ली… गांड थोड़ी ऊपर उठा दी.

**ज़ैनब आपि:** “हाँ बीटा… ऊपर वाला हिस्सा बहुत हैवी है… तू हाथ से चेक कर… … धीरे से… ऊपर की तरफ जा… और देखो… कितना गहरा तक जा सकता है तेरा हाथ.”

मैंने हाथ ऊपर किया… उनकी कमर से धीरे से ऊपर… और बहाने से उनके दूध के साइड से टच कर दिया. उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… जैसे गरम सिल्क का तकिया हो. एक हाथ से उनके लेफ्ट दूध को बहाने से सहलाने लगा… जैसे मस्सगे कर रहा हूँ.

**मैं:** “आपि… यह वाला हिस्सा बहुत… टाइट है… अंदर से कितना भरा हुआ लग रहा है… थोड़ा सा प्रेस करूँ क्या?”

**ज़ैनब आपि (सांस तेज़ करते हुए):** “हाँ बीटा… प्रेस कर… धीरे धीरे… ऊपर से नीचे… gol-gol घुमा… देख… कितना सॉफ्ट और हैवी है… अगर अंदर तक जाना है तोह हाथ अंदर दाल… निघ्त्य के अंदर… टेंशन दूर कर दे…”

मैंने हिम्मत करके निघ्त्य का पल्ला थोड़ा सा साइड किया… अब उनका लेफ्ट दूध बिलकुल नंगा हो गया. मैंने दोनों हाथों से उसको पकड़ लिया… बहाने से मस्सगे कर रहा था … पर असल में zor-zor से मसल रहा था. दूध इतने गरम, इतने भरे हुए… मेरे हाथों में पिघल रहे थे. निप्पल को ऊँगली से हलके से घुमाया.

**मैं:** “आपि… यह वाला part बहुत… गहरा है… अंदर से कितना गरम और टाइट है… मैं पूरा हाथ अंदर दाल कर… मस्सगे करूँ?”

**ज़ैनब आपि (सीसकरते हुए):** “दाल दे बीटा… पूरा हाथ… अंदर तक… ऊपर नीचे… गोल गोल… देख… कितना लोड है अंदर… निकाल दे थोड़ा… रिलीफ मिल जायेगा मुझे… अह्ह्ह… और ज़ोर से… उफ्फ्फ्फ़… तू बहुत अच्छा… मस्सगे कर रहा है…”

उनकी गांड खुद हलके से ऊपर उठ रही थी… निघ्त्य और ऊपर चढ़ गयी थी… मैं अब दोनों हाथों से उनके दोनों दूध को बहाने से मस्सगे कर रहा था… दबाता, घूमता, निप्पल को पिंच करता… और वह सिसकती जा रही थी.

**ज़ैनब आपि:** “बीटा… और अंदर तक… हाथ घुसा… देख… कितना गहराई है… अगर और गहरा जाना है तोह… निघ्त्य पूरी ऊपर कर दे… ताकि मैं… फुल रिलीफ ले सकू…”

मैंने निघ्त्य को ऊपर किया… अब दोनों दूध बिलकुल नंगे हो गए… मैं उनको zor-zor से मसल रहा था… बहाने से मस्सगे… असल में उनकी चूचियों को एन्जॉय कर रहा था.

ज़ैनब आपि अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी… और मैं उनके दूध को बहाने से छूटे जा रहा था…

ज़ैनब आपि की निघ्त्य अब पूरी ऊपर थी. मेरे दोनों हाथ उनके नंगे bade-bade दूध पे थे. मैं बहाने से मस्सगे कर रहा था – ऊपर से नीचे, gol-gol घूमता, निप्पल को उँगलियों के बीच में पकड़ के हलके से मरोड़ता. उफ्फ्फ्फ़… कितने गरम, कितने भरे हुए थे… जैसे दो बड़े गरम गुब्बारे मेरे हाथों में पिघल रहे हों. हर दबाव पे उनकी बॉडी काँप रही थी.

**ज़ैनब आपि (सांस तेज़ करते हुए, आँखें बंद किये):** “अह्ह्ह… बीटा… और ज़ोर से… ऊपर वाला हिस्सा बहुत टाइट हो गया है… हाथ अंदर तक घुसा… धीरे धीरे… देख… कितना गहरा लोड है अंदर…”

मैं और हिम्मत करके उनके दूध को ज़ोर से मसलने लगा. एक हाथ से लेफ्ट दूध को ऊपर उठा के निप्पल को मुँह के पास ले आया… पर अभी चूसा नहीं… सिर्फ गरम सांस छोड़ दी उसपे. ज़ैनब आपि की सिसकारी तेज़ हो गयी.

तभी… उन्होंने आँखें खोली… थोड़ी सी साइड हुई… और मेरा हाथ पकड़ के अपने दूध पे hi रख दिया. उनकी आवाज़ अब बिलकुल हलकी और मधुर थी…

**ज़ैनब आपि:** “असीम बीटा… कल सुबह मुझे नानी के घर जाना है… मैंने अब्बू से परमिशन ले ली है… तू भी मेरे साथ चलेगा.”

मैं हाथ रोक कर उनकी तरफ देखा. मेरा दिमाग एक सेकंड के लिए ब्लेंक हो गया.

**मैं:** “नानी के घर? कल? और… मैं भी?”

ज़ैनब आपि ने हलके से मुस्कुराते हुए मेरा हाथ और ज़ोर से अपने दूध पे दबा दिया… जैसे मस्सगे जारी रखने का इशारा कर रही हो.

**ज़ैनब आपि:** “हाँ बीटा… नानी ने फ़ोन किया था… उनकी तबियत थोड़ी ख़राब है… अम्मी और अनाम आपि को तोह घर संभालना है… नूर कॉलेज जा रही है… तोह मैंने सोचा तू hi मेरे साथ चल… 2-3 दिन की बात है… अब्बू ने भी हाँ कर दी… बोल… चलेगा न?”

मैं अभी भी उनके दूध को हाथों में पकडे हुए था… पर अब मस्सगे नहीं… सिर्फ पकडे हुए था. दिमाग में एक सवाल घूम रहा था – **क्यों?** नानी ने तो कुछ बताया नहीं मुझे और वो भी जाना चाहती है मेरे साथ?

**मैं (थोड़ा कंफ्यूज होकर):** “लेकिन आपि… आप अब्बू के साथ क्यों नहीं जा रही? …”

ज़ैनब आपि ने मेरी आँखों में देखा… उनके गाल थोड़े लाल हो गए थे… पर स्माइल अभी भी थी. उन्होंने मेरा हाथ धीरे से नीचे की तरफ ले जाते हुए बोलै…

**ज़ैनब आपि:** “बीटा… अब्बू का काम है तुझे नहीं मालुम … तू तोह मेरा छोटा भाई है न? तू साथ रहेगा तोह मुझे भी सुकून रहेगा… समझे?”

उनकी उँगलियाँ अब मेरे हाथ को धीरे से नीचे ले जा रही थी… निघ्त्य के अंदर… उनकी पतली कमर पे… फिर और नीचे… जैसे कुछ और हिंट दे रही हो. मैं समझ नहीं प् रहा था – यह सच में नानी के लिए जा रही है… या कोई और वजह है? क्या वहां कोई बॉयफ्रेंड टाइप का कोई है? या फिर… मुझे वहां ले जा कर कुछ और प्लान है?

मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धक् धक् कर रहा था. लुंड पायजामा में पूरा तन गया था. मैं उनके दूध को अभी भी पकडे हुए था… पर अब हाथ थोड़ा काँप रहा था.

**मैं (अंदर से कंफ्यूज होकर):** “ठीक है आपि… मैं चलूँगा… लेकिन… वहां क्या काम है एक्साक्ट्ली?”

ज़ैनब आपि ने हलके से हसी… मेरी तरफ घूमी… अब उनके दोनों दूध मेरे चेहरे के बिलकुल सामने थे… उन्होंने एक दूध को हाथ से ऊपर उठाया और निप्पल को मेरे होंठ के पास ले आयी…

**ज़ैनब आपि (बहुत धीरे से, मधुर आवाज़ में):** “वहां काम तोह बहुत है बीटा… पर तू टेंशन मत ले… मैं सब बता दूंगी… धीरे धीरे… जैसे अभी मस्सगे कर रहा है… वैसे hi… वहां भी… अंदर तक… हेल्प कर देना… समझे?”

उनकी बात सुन कर मेरा दिमाग और उलझ गया. नानी के घर… सिर्फ हम दोनों… 2-3 दिन… और यह double-meaning बातें… क्या मतलब है इसका? क्या उनका वहां कोई पुराण बॉयफ्रेंड है? या फिर… मुझे वहां ले जा कर कुछ और करना चाहती हैं?

मैं कुछ बोल नहीं पाया… बस उनके निप्पल को देखता रहा… और उन्होंने धीरे से मेरा सर पकड़ के अपने दूध पे दबा दिया…

**ज़ैनब आपि:** “अब मस्सगे जारी रख बीटा… कल निकलना भी है…

दोस्तों… अब समझ नहीं आ रहा था – यह जाना सिर्फ नानी के लिए है… या ज़ैनब आपि का कोई बड़ा प्लान है? और मैं… मैं तोह बस उनके दूध को पकडे हुए सोच रहा था… की कल क्या होने वाला है…
 
सुबह जब मेरी आँख खुली तोह पहला ख्याल ज़ैनब आपि का था. उफ्फ्फ्फ़… कल रात उनके रूम में जो हुआ था… उनके bade-bade दूध मेरे हाथों में… उनकी मधुर आवाज़ “अंदर तक जाना पड़ेगा बीटा”… अह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़… मेरा लुंड subah-subah hi पूरा तन गया था.. मैं उठा, मुँह धोया और सीधा ज़ैनब आपि के रूम की तरफ बढ़ गया.



रूम का दरवाज़ा थोड़ा खुला था. अंदर से बाथरूम की पानी की हलकी “chhar-chhar” आवाज़ आ रही थी. मैं धीरे से अंदर घुस गया और दरवाज़ा बंद कर दिया.

**“आपि…”** मैंने हलकी सी आवाज़ में कहा.

बाथरूम से तुरंत उनकी आवाज़ आयी…

**ज़ैनब आपि:** “कौन है?”

**मैं:** “मैं हूँ आपि… असीम.”

कुछ पल चुप्पी रही. फिर उनकी आवाज़ आयी…

**ज़ैनब आपि:** “असीम बीटा… मेरा सलवार सूट और ब्रा बीएड पे पड़ा है… मुझे दे दो… मैं नाहा रही हूँ.”

मेरा लुंड और सख्त हो गया. बीएड पे उनका क्रीम कलर का सलवार सूट और वाइट ब्रा पड़ा था. मैं ने कपडे उठाये और बाथरूम के दरवाज़े के पास पहुँच गया. दरवाज़ा थोड़ा खुला था… मैं झाँकने से खुद को रोक नहीं पाया.

**उफ्फफ्फ्फ़ दोस्तों…**

जो नज़ारा दिखा उसने मेरे होश उड़ा दिए.

ज़ैनब आपि नाहा कर बहार आ रही थी. उनके शरीर पे सिर्फ गीला सलवार और ब्रा था. ब्रा इतना गीला था की पूरा ट्रांसपेरेंट हो चूका था. उनके bade-bade दूध बिलकुल उभरे हुए थे… ब्रा के अंदर से निप्पल पूरे टाइट और लाल दिखाई दे रहे थे. पानी की बूँदें उनके दूध पे से टपक रही थी… गोरी स्किन चमक रही थी. नीचे वाला सलवार भी गीला था और उनकी moti-moti जाँघों और उभरी हुई गांड पे बिलकुल चिपका हुआ था. दोनों गांड के हिस्से alag-alag साफ़ दिख रहे थे… सलवार के अंदर से उनकी गांड की गर्मी फील हो रही थी.

मेरा लुंड पायजामा में एक ज़ोर का झटका मार बैठा. ज़िन्दगी में पहली बार मैंने ज़ैनब आपि को इतना क्लोज और इतना गीला देखा था. उनका फिगर… उफ्फ्फ्फ़… अम्मी से भी ज़्यादा भरा हुआ लग रहा था. दूध इतने बड़े और भरे हुए की ब्रा फटने को हो रहा था. गांड इतनी मोती और लचकती हुई की देख कर hi मेरा मुँह खुला रह गया.

ज़ैनब आपि ने मुझे दरवाज़े पे देखा और हलके से मुस्कुरायी. उन्होंने एक हाथ से अपने दूध को ढकने की कोशिश की पर दूध इतने बड़े थे की हाथ में नहीं आ रहे थे.

**ज़ैनब आपि (हलकी मधुर आवाज़ में):** “बीटा… कपडे दे दो न… वर्ण मैं यहीं गीली hi कड़ी रहूंगी. देखो कितनी गीली हो गयी हूँ मैं… अंदर तक गीली… तुम्हारा हाथ तोह कल रात बहुत अच्छा मस्सगे कर रहा था…”

मैं कपडे उनकी तरफ बढ़ाते हुए बोलै, “आपि… आप बहुत… हैवी हो… लोड बहुत है आपके अंदर… मैं तोह चाहता हूँ पूरा अंदर तक जाऊं और… आपकी साड़ी परेशानी दूर कर दूँ.”

ज़ैनब आपि ने कपडे लेते हुए मेरी आँखों में देखा. उनके गाल लाल हो गए थे पर स्माइल अभी भी थी.

**ज़ैनब आपि:** “हाँ बीटा… टेंशन बहुत है… नानी के घर जाते वक़्त देखते हैं… वहां तोह पूरा टाइम मिलेगा… अंदर तक जाने का… समझे?”

उफ्फ्फ्फ़… उनकी बात सुन कर मेरा लुंड फटने को हो रहा था. ज़ैनब आपि jaan-bujh कर डबल मीनिंग बातें कर रही थी… और मैं उनके गीले फिगर को देख कर पागल हो चूका था. उनके गीले दूध… चिपकी हुई सलवार में मोती गांड… और वह हलकी सी स्माइल… सब देख कर मेरा दिमाग उड़ चूका था.

मैं वहां खड़ा था… कपडे उनके हाथ में… और सोच रहा था – **यह नानी के घर का सफर सिर्फ सफर नहीं… कुछ और होने वाला है…**

ज़ैनब आपि ने धीरे से मेरी तरफ पीठ करके कपडे पहनने लगी. उनकी वह मोती गांड… वह गोरी पीठ… और ब्रा पहनते वक़्त उनके bade-bade दूध साइड से लटकते हुए… उफ्फ्फ्फ़… मैं और बर्दाश्त नहीं कर पाया.

**“आपि…”** मैंने सिर्फ इतना बोलै और पीछे से उनके बिलकुल पास चिपक गया. दोनों हाथों से मैंने उनके bade-bade दूध पकड़ लिए… ब्रा के ऊपर से hi… और zor-zor से मसलने लगा.

उनके दूध मेरे हाथों में आते hi जैसे करंट दौड़ गया. कितने गरम… कितने भरे हुए… कितने हैवी थे. ब्रा के ऊपर से भी उनकी सॉफ्टनेस इतनी थी की मेरे हाथ अंदर तक धंस रहे थे. मैं दोनों हाथों से zor-zor से दबा रहा था… ऊपर से नीचे… gol-gol घूमता… निप्पल को उँगलियों से पकड़ के हलके से मरोड़ता.

ज़ैनब आपि एकदम से सीसीएनए लगी…

**“अह्ह्ह्हह… असीम… बीटा… क्या… क्या कर रहे हो… उफ्फ्फ्फ़… अह्ह्ह… dheere…ahhh… बहुत ज़ोर से मत… हहैयय…”**

उनकी आवाज़ कांपती हुई थी… पर उन्होंने मेरा हाथ नहीं हटाया. उनकी बॉडी थोड़ी सी काँप रही थी. मैं पीछे से उनके सीने से चिपका हुआ था… मेरा खड़ा लुंड उनकी मोती गांड के बीच में रगड़ खा रहा था… और मैं उनके दूध को और ज़ोर से मसल रहा था.

**मैं (अंदर से पागल होते हुए):** उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… ज़ैनब आपि के bade-bade दूध… इतने गरम… इतने भरे हुए… मेरा लुंड तोह उनकी गांड में घुसने को तड़प रहा था. उनकी सिसकियाँ सुन कर मेरा दिमाग उड़ चूका था.

मैं उनके कान के पास मुँह ले गया और गरम सांस छोड़ते हुए बोलै,

**“आपि… आपका बैक तोह बहुत टाइट है… ऊपर वाला हिस्सा बहुत हैवी हो गया है… मैं मस्सगे कर रहा हूँ न… धीरे धीरे… अंदर तक… देखिये… कितना रिलीफ मिल रहा है आपको…”**

और मैं उनके दूध को और ज़ोर से मसलने लगा… दोनों हाथों से एक साथ… ऊपर उठा के… नीचे दबा के… gol-gol घूमते हुए. उनके निप्पल अब ब्रा के अंदर से भी सख्त हो चुके थे… मैं उनको ऊँगली से पिंच करता जा रहा था.

ज़ैनब आपि और सीसीएनए लगी…

**“अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… असीम… बीटा… बहुत… बहुत ज़ोर से… हहैयय… मेरे दूध… जल रही हैं… अह्ह्ह्ह… पर… पर रुक मत… उफ्फ्फ्फ़… और… और मस्सगे करो… अंदर तक…”**

उनकी गांड अब खुद halke-halke मेरे लुंड पे रगड़ रही थी. उनकी साँसे बिलकुल तेज़ हो चुकी थी. चेहरा लाल… आँखें बंद… और वह मस्सगे के नाम पर अपने hi bade-bade दूध मुझसे मसलवा रही थी.

मेरा लुंड उनकी गांड के बीच में और ज़ोर से रगड़ खा रहा था. मैं सोच रहा था… **नानी के घर जाने से पहले hi ज़ैनब आपि इतनी गरम हो गयी है… वहां क्या होगा…**

मैं उनके दूध को और जोश से मसलता रहा… और उनके कान में धीरे से बोलै,

**“आपि… आपका यह हिस्सा बहुत गहरा है**

ज़ैनब आपि सिर्फ सिसकती रही… पर उनकी गांड अब और ज़ोर से मेरे लुंड पे डाब रही थी…

फिर अचानक आपि मुड़ी और मुझे बहार धकेल दिया . मैं भी चुपचाप बहार निकल गया..

अब्बू आज शॉप नहीं गए थे. हॉल में सोफे पे बैठे थे, नेवसपपेर हाथ में था.

दोपहर का खाना लगा. अम्मी ने garam-garam पराठे और आलू की सब्ज़ी बनायीं थी. सब लोग टेबल पे बैठे – मैं, अब्बू, अम्मी, नूर, ज़ैनब आपि… और सामने मेरी बड़ी आपि अनाम.

जैसे hi सबने खाना शुरू किया, अब्बू ने नेवसपपेर साइड किया और बोलै,

**अब्बू:** “Asim…tumhe ज़ैनब को लेकर नानी के घर जाना है. बस की टिकट मैंने करा दी है. रात 10 बजे निकलना है. समझ गए?”

मैं सर हिला दिया… पर मेरी नज़र सीढ़ी ज़ैनब आपि पे चली गयी. वो अपनी प्लेट में सब्ज़ी दाल रही थी… लेकिन जैसे hi अब्बू ने बात ख़तम की, उन्होंने धीरे से मेरी तरफ देखा और… बहुत धीरे से… एक छोटी सी, मधुर सी मुस्कराहट दी. उफ्फ्फ्फ़ … उस मुस्कराहट में कुछ अलग था. जैसे कह रही हों – “बीटा… अब असली खेल शुरू होने वाला है…”

मेरा लुंड टेबल के नीचे एक झटका मार बैठा. उफ्फ्फ्फ़… ये आपि का प्लान क्या है? सिर्फ नानी के घर जाना… या वहां कोई बड़ा सन सेट करने वाली हैं?

खाना कहते वक़्त मैंने हिम्मत जूता के अब्बू से बोलै,

**मैं:** “अब्बू… एक बात पूछूं? आपि अनाम को 2-3 घंटे के लिए बहार ले जाना है… कुछ ज़रूरी काम है.?”

अब्बू ने मुझे घूरा. उसी वक़्त ज़ैनब आपि का चेहरा बदल गया. वो मुझे गुस्से से देखने लगी – आँखें सिकुड़ी हुई, होंठ दबाये हुए, गाल थोड़े लाल. जैसे कह रही हों – “सेल… अभी भी अनाम के पीछे पड़ा है? मैं यहाँ बैठी हूँ… और तू उसके साथ जा रहा है?”

अब्बू ने थोड़ी देर सोचा… फिर हाँ कर दिया,

**अब्बू:** “ठीक है… लेकिन जल्दी वापस आ जाना. रात को 10 बजे बस है… देर मत करना.”

जैसे hi अब्बू उठ के अपने कमरे की तरफ गए… अनाम आपि भी उठी. उसने अपना दुपट्टा सीने पे लपेटा… फिर jaan-bujh कर… बहुत dheere-dheere… अपनी moti-moti गांड हिलाते हुए रूम की तरफ चली गयी. सलवार के दोनों हिस्से alag-alag हिल रहे थे… गांड के gol-gol नितम्ब upar-neeche हो रहे थे… मेरा लुंड पायजामा में पूरा तन गया. मैं भी उठा और सीधा अनाम आपि के रूम की तरफ बढ़ गया.

रूम में घुसते hi दरवाज़ा बंद किया. अनाम आपि मिरर के सामने कड़ी थी. दुपट्टा नीचे गिरा हुआ था. सलवार सूट का ऊपर का कुरता उतरने लगी थी. जैसे hi कुरता उतरा… उसके bade-bade दूध ब्रा में उभर आये… ब्रा के स्ट्रैप्स कमर पे टाइट थे… दूध इतने भरे हुए की ब्रा के कप फटने को थे.

**अनाम आपि (शरमाते हुए, हलकी सी मुस्कराहट के साथ):** “कहा जाना है असीम?”

मैं उनके पास पहुंचा… पीछे से उनको पकड़ लिया… दोनों हाथों से उनके bade-bade दूध पकड़ के ज़ोर से मसलने लगा.

**मैं (गरम सांस छोड़ते हुए):** “हाँ आपि… 2-3 घंटे पुरे हैं… आज तोह सिर्फ आपकी… अर्जुन के पास ले जा रहा हूँ आपको… उसका मोटा लुंड आपकी छूट में "

अनाम आपि सिसक उठी… उसने अपनी गांड मेरे लुंड पे दबायी… और धीरे से बोली,

**अनाम आपि:** “तोह जल्दी तैयार हो जाओ बीटा… … अह्ह्ह्ह…”

मैं उनके दूध को और ज़ोर से मसलता रहा…

अनाम आपि ने मिरर में मेरी तरफ देखा… शर्मा कर आँखें नीचे कर ली… पर उसकी गांड अभी भी मेरे लुंड पे dheere-dheere रगड़ रही थी…

**अनाम आपि (हलकी सी सिसकी के साथ):** “बीटा… चेंज कर लूँ… अर्जुन के पास जाने के लिए टाइट सलवार सूट पहनूं क्या? …”

मैं उनके दूध को एक बार और ज़ोर से दबाया और बोलै,

**मैं:** “हाँ आपि… वही टाइट वाला… जिसमे आपकी चूचियां फटने को होती हैं… अर्जुन देख कर पागल हो जायेगा…”

फिर मैं सीधा बहार निकल आया. बाइक स्टार्ट की और अनाम आपि को बुला लिया. वो रूम से निकल कर आयी… लाइट पिंक सलवार सूट में… दुपट्टा सीने पे लपेटा हुआ… पर अंदर से उसके bade-bade दूध इतने उभरे हुए थे की दुपट्टा भी कण्ट्रोल नहीं कर प् रहा था. गांड हिलती हुई चल रही थी… हर कदम पे दोनों मोती गांड alag-alag हिल रही थी.

**अनाम आपि (शरमाते हुए, हलकी सी मुस्कराहट के साथ):** “बीटा… रेडी हो?”

मैं बाइक पे बैठ गया और पीछे मुद कर बोलै,

**मैं:** “हाँ आपि… आ जाओ… अर्जुन वेट कर रहा होगा.”

आपि पीछे बैठ गयी. जैसे hi उसकी मोती गांड मेरे पीछे डाब गयी… उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… करंट दौड़ गया. उसने दोनों हाथों से मेरी कमर पकड़ ली… और अपने bade-bade दूध सीधा मेरी पीठ पर लगा दिए. ब्रा के ऊपर से भी उनकी गरम सॉफ्टनेस फील हो रही थी.

बाइक स्टार्ट की और मोहल्ले से बहार निकलते hi मैं धीरे से बोलै,

**मैं:** “आपि… आज अर्जुन बहुत एक्ससिटेड है… कल रात से बोल रहा था – ‘वह रंडी कितनी टाइट थी… उसकी मोती गांड… उसकी गुलाबी छूट…’ उफ्फ्फ्फ़… सोच रहा था आज उसका मोटा काला लुंड आपकी छूट में कितना अंदर तक जायेगा…”

आपि पीछे से थोड़ी सी सिसक उठी. उसने अपनी कमर मेरी पीठ से और टाइट चिपका ली… और अपने bade-bade दूध को मेरी पीठ पर ज़ोर से रगड़ने लगी. हर बाइक के झटके पे उनके दूध upar-neeche हिल रहे थे… ब्रा के अंदर से निप्पल सख्त हो चुके थे… मैं फील कर सकता था.

**अनाम आपि (सांस तेज़ करते हुए, सिसकती हुई):** “अह्ह्ह… बीटा… ऐसी बातें मत करो… उफ्फ्फ्फ़… शर्म आ रही है… अह्ह्ह…"

मैं स्पीड बढ़ाते हुए और गन्दी बात करने लगा,

**मैं:** “हाँ आपि… अर्जुन बोल रहा था – ‘आज उस रंडी की गांड भी फाड़ूंगा… उसके bade-bade दूध को मुँह में लेके चूसूंगा… निप्पल काटूंगा… और फिर उसकी छूट में अपना गरम माल भर दूंगा…’ देखो आपि लग रहा है आपकी छूट भी अभी गीली हो चुकी है…”

आपि अब कण्ट्रोल नहीं कर प् रही थी. उसने अपने दोनों हाथों से मेरी कमर को और टाइट पकड़ लिया… और अपने bade-bade दूध को मेरी पीठ पर zor-zor से रगड़ने लगी. हर झटके पे उसके दूध ऊपर से नीचे तक रगड़ खा रहे थे… ब्रा के अंदर से निप्पल मेरे पीठ पे सख्त फील हो रहे थे.

**अनाम आपि (सिसकती हुई, सांस फूलते हुए):** “अह्ह्ह्ह… असीम… उफ्फ्फ्फ़… मत बोलो ऐसी बातें… मेरी छूट… तड़प रही है बीटा… अह्ह्ह… अर्जुन का लुंड सोच कर… हहैयय…”

मैं बाइक को थोड़ा स्लो किया… ताकि उसके दूध और अच्छे से रगड़ सके… और धीरे से बोलै,

**मैं:** “आपि… अर्जुन आपको घोड़ी बनके छोड़ने वाला है आज… आपकी मोती गांड पे थप्पड़ मारेगा… लाल कर देगा… और आप खुद गांड utha-utha कर उसका लुंड अंदर मांगोगी… बोलिये आपि… आप भी चाहती हैं न अर्जुन आपकी छूट फाड़े?”

आपि अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी. उसने अपनी गांड मेरी पीठ से और ज़ोर से दबायी… दूध को बिलकुल चिपका के रगड़ने लगी… साँसे बिलकुल तेज़… और halki-halki सिसकारियां निकल रही थी…

**अनाम आपि (कांपते हुए):** “अह्ह्ह्ह… हाँ बीटा… चाहती हूँ… अर्जुन मेरी छूट फाड़े… मेरी गांड फाड़े… उफ्फ्फ्फ़… आपकी बातों से मेरी छूट गीली हो गयी है… अह्ह्ह… अह्ह्ह्हह…”

उफ्फ्फ्फ़ … बाइक चलते हुए मेरी पीठ पर मेरी सगी बड़ी आपि के bade-bade दूध zor-zor से रगड़ रहे थे… उसकी सिसकारियां मेरे कान में पद रही थी… और मैं सोच रहा था – अर्जुन के घर पहुँचते hi इस रंडी की छूट फिर से फाड़ दी जाएगी…

बाइक अर्जुन के घर के बहार रुकते hi मेरा दिल पागल सा होने लगा. अनाम आपि पीछे से उत्तरी… उसकी साँसे अभी भी तेज़ थी. बाइक के झटकों से उसके bade-bade दूध मेरी पीठ पर इतना ज़ोर से रगड़ चुके थे की उसका चेहरा पूरा लाल हो चूका था. दुपट्टा सीने पे लपेटा हुआ था… पर अंदर से चूचियां इतनी उभरी हुई थी की दुपट्टा भी कण्ट्रोल नहीं कर प् रहा था.

मैं दरवाज़ा खोला और अंदर घुस गया. हॉल में अर्जुन सोफे पे बैठा था… लेकिन उसके बगल में एक और लड़का बैठा था. 30 साल का… पलवान जैसा… चौड़ा सीना, मोती बाहें, काला रंग, टाइट वेस्ट में मसल्स उभरे हुए…

जैसे hi हम दोनों अंदर घुसे… राहुल की नज़र सीढ़ी अनाम आपि पे पद गयी. उफ्फ्फ्फ़ … उसकी आँखें एक सेकंड के लिए रुक गयी. ऊपर से नीचे तक घूर रहा था – आपि के bade-bade दूध… मोती लचकती गांड… गुलाबी होंठ… सब कुछ नाप रहा था .

अर्जुन उठा… मेरे पास आया… गले लगा लिया और ज़ोर से हंस के बोलै,

**अर्जुन:** “अरे असीम भाई आ गया! और यह… तेरी वो मस्त रंडी अनाम!”

फिर सीधा अनाम आपि की तरफ बढ़ा… बिना किसी बात के उसके दोनों bade-bade दूध पकड़ लिए और zor-zor से मसलने लगा. सलवार सूट के ऊपर से hi दोनों हाथों से दबा रहा था… ऊपर से नीचे… gol-gol घुमा रहा था.

**अर्जुन (गन्दी स्माइल के साथ):** “उफ्फ्फ्फ़ साली… कितने बड़े चूचे हैं तेरे… कल रात भी इनको soch-soch के मुठ मारी थी… आज तोह इनको मुँह में लेके चूसूंगा… निप्पल काटूंगा… और तेरी छूट फाड़ दूंगा रंडी!”

अनाम आपि एकदम से शर्मा गयी. उसने दोनों हाथों से अर्जुन के हाथ पकड़ने की कोशिश की… आँखें राहुल की तरफ गयी… और जैसे hi राहुल को देखा… उसका पूरा चेहरा लाल पद गया. वो शर्म से ज़मीन में घुसने लगी… गाल इतने लाल की जैसे कोई लाल गुलाब हो.

**अनाम आपि (कांपते हुए):** “अर्जुन… यह… यह कौन है… प्लीज… कोई और है यहाँ…”

अर्जुन ज़ोर से हंस पड़ा. उसने अनाम आपि के दूध को और ज़ोर से मसलते हुए बोलै,

**अर्जुन:** “अरे रंडी… शर्मा क्यों रही है? ये मेरा दोस्त है… राहुल! आज हम दोनों मिलके तेरी छूट और गांड फाड़ेंगे… तू बस मज़े ले… पैसे जो भी तेरा रेट है… ले लेना… 50 हज़ार… 1 लाख… बोल… कितना लेगा इस रंडी के लिए?”

राहुल अब उठा… उसकी आँखें अनाम आपि के bade-bade दूध पे टिक गयी थी. वो धीरे से आगे बढ़ा… और बिना एक शब्द बोले… सीधा अनाम आपि के गुलाबी होंठ पे टूट पड़ा!

**राहुल** ने एक हाथ से आपि की गर्दन पकड़ी और zor-zor से चूसने लगा. उसके मोठे होंठ आपि के छोटे गुलाबी होंठ को पूरा निगल रहे थे… जीभ अंदर दाल दी… jor-jor से चूस रहा था… लार टपकने लगी दोनों के मुँह से.

अनाम आपि पहले तोह शॉक में थी… दोनों हाथों से राहुल को धकेलने की कोशिश कर रही थी… पर 10-15 सेकंड बाद… उसकी बॉडी गरम होने लगी. उसने dheere-dheere अपनी जीभ राहुल के मुँह में दाल दी… दोनों जीभें एक दूसरे से लड़ने लगी… किश इतना वाइल्ड हो गया की “chup-chup… सलूरररप” की आवाज़ हॉल में गूँज रही थी.

अर्जुन अभी भी आपि के दूध मसल रहा था… और मुझे देख कर हंस के बोलै,

**अर्जुन:** “देख असीम भाई… तेरी रंडी कितनी गरम है… … आज तोह इसकी दोनों होल्स फाड़ देंगे… तू देख… और मज़ा ले!”

अनाम आपि अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी. राहुल के मुँह में जीभ daal-daalke चूस रही थी… साँसे तेज़… दूध अर्जुन के हाथों में हिल रहे थे… और उसकी गांड halke-halke हिल रही थी.

मैं सोफे के पास बैठ गया… लुंड पायजामा में झटके मार रहा था… और सोच रहा था…

**उफ्फ्फ्फ़ … मेरी सगी बड़ी आपि… अब दो मर्दों के बीच में…… कितना मज़ा आ रहा

अर्जुन ने अनाम आपि को एक झटके से उठाया और सोफे के बिलकुल निचे बिठा दिया… घुटनो पे. आपि अब दोनों के बीच में घुटनो पे बैठी थी… बिलकुल सड़क की रंडी जैसी पोजीशन में.

राहुल ने आपि को ऊपर से नीचे तक घूरा और ज़ोर से बोलै,

**राहुल:** “उफ्फ्फ्फ़ भाई… यह क्या माल लाया है तू! देख इस रंडी का फिगर… दूध देख… इतने बड़े और भरे हुए… कपडे फटने को हो रहे हैं! गांड देख… मोती साली… एक हाथ से भी नहीं पकड़ पाउँगा… चेहरा देख… गुलाबी होंठ… बिलकुल सड़क की कुटिया जैसा लुक है… आज इसको दोनों मिलके छोड़ेंगे… पूरी रात इसकी छूट और गांड फाड़ देंगे!”

अनाम आपि का चेहरा शर्म से लाल पद गया. वो नज़र नीचे करने लगी… पर राहुल और अर्जुन दोनों ने झट से अपनी पंत नीचे कर दी… और अपने मोठे काले लुंड बहार निकाल लिए.

दोनों के लुंड बिलकुल मोठे, काले, नसें उभरी हुई… 8-8 इंच के… टोपा चमक रहा था पानी से. दोनों ने अपना लुंड आपि के चेहरे पर रगड़ना शुरू कर दिया… एक तरफ अर्जुन का… दूसरी तरफ राहुल का… दोनों आपि के गुलाबी होंठ, गाल, नाक, आँखों पे रगड़ रहे थे… टोपा से पानी टपक रहा था उसके चेहरे पर.

**अर्जुन:** “ले साली रंडी… दोनों लुंड देख… आज तेरा मुँह भर देंगे… चूस कुटिया… तेरी छूट फाड़ के रख देंगे आज!”

**राहुल:** “हाँ मादरचोद… यह देख… कितनी शरीफ बन के बैठी थी… अब देखो… दोनों मोठे काले लुंड चेहरे पर रगड़ रहे हैं… ले साली… मुँह खोल… दोनों को चूस… सड़क की कुटिया बन जा आज!”

अनाम आपि शर्म से काँप रही थी… आँखें बंद… पर dheere-dheere उसने मुँह खोला. पहले अर्जुन का लुंड मुँह में लिया… फिर राहुल का… दोनों हाथों से दोनों लुंड पकड़ के dheere-dheere चूसने लगी.

**“ग्लुक… ग्लुक… सलूरररप… पूछ पूछ…”**

आपि अब बिलकुल एक सड़कछाप कुटिया बन चुकी थी. दोनों मोठे काले लुंड को मुँह में लेकर zor-zor से चूस रही थी… कभी एक को पूरा अंदर ले लेती… कभी दूसरे को… लार टपक रही थी उसके होंठों से… दोनों तरफ से… आँखों में आंसू आ गए थे पर मुँह नहीं छोड़ रही थी.

**अर्जुन:** “अह्ह्ह… ले मादरचोद… कितनी अच्छी चूसती है… पूरा मुँह में ले… कुटिया… रंडी… दोनों लुंड एक साथ चूस… अह्ह्ह…”

**राहुल:** “हाँ साली… और ज़ोर से… तेरी गुलाबी होंठ कितने सॉफ्ट हैं… ले… दोनों लुंड चूस… आज तेरी छूट और गांड दोनों फाड़ देंगे… अह्ह्ह… चूस मादरचोद… और अंदर ले…”

आपि अब गरम हो चुकी थी. उसने दोनों हाथों से दोनों लुंड को टाइट पकड़ लिया… zor-zor से मुँह में andar-bahar करने लगी… जीभ से टोपा chat-ti… बॉल्स को चूसती… लार tapak-tapak के दोनों लुंड चमक रहे थे.

मैं सोफे पे बैठा था… बिलकुल गरम हो गया था. देख रहा था… मेरी सगी बड़ी आपि… जो घर में हमेशा शरीफ बानी रहती थी… अब घुटनो पे बैठी… दोनों मोठे काले लुंड मुँह में लेकर चूस रही थी… जैसे खा जाएगी… बिलकुल सड़कछाप कुटिया जैसी… लार टपक रही थी… आँखें बंद… पर मुँह नहीं छोड़ रही thi.Uffff अनाम आपि… कितनी गरम है अंदर से… दोनों लुंड चूस रही है… जैसे ज़िन्दगी भर की भूख निकाल रही हो… और इनको यह भी नहीं पता की यह मेरी सगी बड़ी बेहेन है… मैं देख रहा हूँ… और मेरा लुंड झटके मार रहा है… अह्ह्ह… कितना मज़ा आ रहा है…**

अर्जुन और राहुल दोनों मज़े से गालियां देते हुए आपि का मुँह छोड़ रहे थे… आपि अब पूरी तरह उनकी सड़क की रंडी बन चुकी थी…

राहुल ने अनाम आपि के बाल पकड़ के उसको उठाया और सीधा सोफे पे घोड़ी बना दिया. आपि के दोनों हाथ और घुटने सोफे पे थे… उसकी moti-moti गांड पूरी तरह ऊपर उठी हुई थी. उफ्फ्फ्फ़… दोनों नितम्ब alag-alag हिल रहे थे… चब्बी बदन बिलकुल टाइट हो चूका था… गांड के बीच में वही गुलाबी छूट अभी भी गीली और थोड़ी पहली हुई थी.

राहुल ने पीछे से आपि की कमर पकड़ी… अपना मोटा काला 8 इंच का लुंड उसकी छूट के मुँह पे रगड़ने लगा… टोपा andar-bahar कर रहा था. फिर एक ज़ोर का थप्पड़ मारा गांड पर!

**चटककक!!!**

**राहुल:** “ले साली रंडी… अब असली चुदाई शुरू !”

अर्जुन आपि के सामने बैठ गया… उसने अपना मोटा काला लुंड पकड़ा और आपि के गुलाबी होंठ पे रगड़ने लगा….

**अर्जुन:** “चूस कुटिया… जैसे चॉकलेट चूस रही है… पूरा मुँह में ले… अह्ह्ह…”

राहुल ने अब लुंड सेट किया… और एक hi zor-daar धक्के में पूरा मोटा लुंड आपि की छूट में घुसा दिया!

**धायआपपप!!!**

**अनाम आपि:** “आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… बहुत मोटा… पहात गयी मेरी छूट… उफ्फ्फ्फ़… दर्द हो रहा है… अह्ह्ह्ह…”

आपि का पूरा चब्बी बदन एक झटके से आगे की तरफ हिला. उसकी मोती गांड हिल गयी… दोनों नितम्ब ज़ोर से उभर आये… bade-bade दूध नीचे latak-latak के हिलने लगे… तइस काँप उठी.

लेकिन राहुल रुकने वाला नहीं था. उसने दोनों हाथों से आपि की कमर पकड़ी और दनादन धक्के मरने लगा… तेज़… गहरे… zor-zor से…

**धप… धप… धप… धप…**

हर धक्के पे आपि का पूरा चब्बी बदन jor-jor से हिल रहा था! उसकी मोती गांड पीछे से ज़ोर से टकराती… दूध latak-latak कर aage-peeche झूल रहे थे… पूरा शरीर पसीने से चमकने लगा… गांड के घोस्ट हर धक्के पे उभर रही थी..

**राहुल:** “ले मादरचोद… तेरी छूट कितनी टाइट है साली… अह्ह्ह… ले… और ले… गांड उठा कुटिया… और ज़ोर से उठा… मैं आज इसको फाड़ दूंगा… अह्ह्ह…”

अर्जुन ने आपि के बाल पकड़े और उसका लुंड उसके मुँह में पेल दिया… जैसे चॉकलेट हो… zor-zor से मुँह में धक्के मरने लगा.

**अर्जुन:** “चूस रंडी… अह्ह्ह… कितनी अच्छी चूसती है… ले… पूरा हलक तक ले… सड़क की कुटिया…… अह्ह्ह…”

आपि अब पूरी तरह पागल हो चुकी थी. उसने अर्जुन का लुंड zor-zor से चूसना शुरू कर दिया… जैसे सच में चॉकलेट हो… जीभ से टोपा chat-ti… पूरा अंदर ले लेती… लार टपक रही थी उसके होंठों से… दोनों तरफ से… आँखें बंद… पर गांड खुद पीछे utha-utha कर राहुल के धक्कों का जवाब दे रही थी.

**अनाम आपि (मुँह में लुंड के साथ सिसकती हुई):** “मममहह… ग्लुक… ग्लुक… अह्ह्ह… फाड़ दो… दोनों फाड़ दो… उफ्फ्फ्फ़… मेरी छूट… मेरी गांड… अह्ह्ह्ह… और ज़ोर से… मैं तेरी रंडी हूँ… कुटिया हूँ… अह्ह्ह्हह…”

राहुल की स्पीड और तेज़ हो गयी… अब वह बेदर्दी से छोड़ रहा था… हर धक्के पे आपि का चब्बी बदन पूरा हिल रहा था… पूरा शरीर झटके खा रहा था…

मैं सोफे पे बैठा था…… मैं मज़े से पागल हो रहा था… मेरी अनाम आपि… दोनों मोठे काले लुंड के बीच में... बिलकुल सड़कछाप कुटिया जैसी… अह्ह्ह… कितना मज़ा आ रहा है…**

राहुल अब और तेज़ धक्के मरने लगा… आपि की सिसकारियां अब रुक नहीं रही थी…

राहुल ने आपि की कमर को और ज़ोर से पकड़ा… उसकी मोती गांड को दोनों हाथों से फैलाया… और अपना मोटा काला लुंड zor-zor से andar-bahar करने लगा. आपि का पूरा शरीर पसीने से चमक रहा था.

**राहुल (गालियां देते हुए, तेज़ धक्के मारते हुए):** “ले साली रंडी… ले मादरचोद… तेरी छूट कितनी गीली है… अह्ह्ह… ले कुटिया… मैं आ गया… ले… ले… ऊपर hi निकाल रहा हूँ… अह्ह्ह्हह्हह!!!”

राहुल ने झट से लुंड बहार निकला… और ज़ोर से हाथ से हिलाते हुए आपि के पीठ, गांड और पूरी कमर पर अपना garam-garam माल निकाल दिया! Dhaar-dhaar… थिक वाइट पानी आपि के चब्बी बदन पे गिर रहा था… पीठ से गांड तक… मोती गांड के दोनों हिस्से चमक रहे थे… कुछ बूँदें उसकी मोती जाँघों पे भी टपक गयी.

**राहुल** “… उफ्फ्फ्फ़ कितनी गरम रैंड है यह!”

अनाम आपि का बदन काँप रहा था… उसकी साँसे तेज़… पर अभी उसका असली इंतज़ार अर्जुन कर रहा था.

अर्जुन ने तुरंत आपि को उठाया… सोफे पर सीधा लिट्टे दिया… उसकी दोनों टाँगे कन्धों पर रख ली… और अपना मोटा काला लुंड जो अभी भी पूरा खड़ा था… सीधा आपि की गीली छूट में एक hi झटके में घुसा दिया!

**धायआपपप!!!**

**अनाम आपि:** “आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… अर्जुन… बहुत ज़ोर से… पहात गयी… उफ्फ्फ्फ़… दर्द हो रहा है… अह्ह्ह्ह… नाहीईई… अह्ह्ह्हह…”

अर्जुन अब बिलकुल जानूं में आ चूका था. उसने आपि की कमर को दोनों हाथों से पकड़ा और बेदर्दी से धक्के मरने लगा… बहुत जोर से… बहुत तेज़… सोफे हिलने लगा… पूरा हॉल में “dhap-dhap-dhap” की तेज़ आवाज़ गूँज रही थी.

**धप… धप… धप… धप… धप…**

हर धक्के पे आपि का पूरा चब्बी बदन jor-jor से ऊपर उठ रहा था… bade-bade दूध ज़ोर से latak-latak के हिल रहे थे… गांड सोफे पे रगड़ रही थी… चेहरा पूरा लाल… आँखें बंद… मुँह खुला… लार टपक रहा था आपि के मुँह से… उसका पूरा बदन लाल पद गया था… पसीने से चमक रहा tha…aapi बिलकुल रोने जैसे हो गयी थी.

**अनाम आपि (रोने जैसे सिसकती हुई):** “अह्ह्ह्हह… अर्जुन… बहुत ज़ोर से… मेरी छूट… पहात रही है… उफ्फ्फ्फ़… … अह्ह्ह… पर… मत रुकना… और ज़ोर से… मैं मर जाउंगी… अह्ह्ह्हह… फाड़ दो… पूरी फाड़ दो… उफ्फ्फ्फ़…”

अर्जुन gandi-gandi गालियां देते हुए और तेज़ धक्के मर रहा था…

**अर्जुन:** “ले रंडी… ले कुटिया… … ले मादरचोद… तेरी छूट अब मेरी… अह्ह्ह… कितनी टाइट है साली… ले… और ले… पूरा अंदर तक… अह्ह्ह्हह…”

कुछ और जोरदार धक्कों के बाद अर्जुन की साँसे और तेज़ हो गयी. उसने आपि की टाँगे और ऊपर उठायी… और zor-zor से धक्के मरते हुए बोलै,

**अर्जुन:** “ले साली… आ गया… बहार निकाल रहा हूँ… ले… तेरी छूट से भीगा हुआ लुंड… अह्ह्ह्हह्हह!!!”

अर्जुन ने झट से लुंड बहार निकला… जो अभी भी आपि की छूट के पानी से चमक रहा था… और सीधा आपि के चेहरे, पेट और bade-bade दूध पर अपना गरम माल निकाल दिया!

Dhaar-dhaar… थिक वाइट पानी आपि के चेहरे पे गिर रहा था… होंठ पे… गाल पे… पेट पे… दोनों bade-bade दूध पे… निप्पल पे… पूरा बदन अब दोनों के माल से नहाया हुआ था… लाल… चमकता हुआ… बिलकुल रंडी जैसा लुक था आपि का!

अनाम आपि बिलकुल थक कर लेती रही… साँसे तेज़… चेहरा, पेट, दूध… सब कुछ दोनों के गरम माल से भरा हुआ… वो halki-halki हांफ रही थी… आँखें बंद… पर होंठ पे एक थका हुआ सा स्माइल था… जैसे अभी भी तड़प रही हो.

मैं सोफे पे बैठा था… पूरा पागल हो चूका था… देख रहा था… मेरी सगी बड़ी आपि… दोनों के माल से नहायी हुई… हांफ रही थी… चेहरा लाल… बदन लाल… दूध चमक रहे थे… उफ्फ्फ्फ़… कितनी बड़ी रंडी बन गयी है……



**उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मेरा लुंड अभी भी झटके मार रहा था… ये सन देख कर मैं भी पागल हो गया था…**
 
अर्जुन और राहुल दोनों सोफे पे धम्म से बैठ गए. दोनों की सांसें tez-tez चल रही थी, पसीने से उनका बदन चमक रहा था. उनके मोठे काले लुंड अभी भी थोड़े खड़े थे, लार और पानी से चमक रहे थे.



और मेरे सामने… मेरी सगी बड़ी आपि अनाम वैसे hi नंगी पड़ी थी.

उफ्फ्फ्फ़… क्या नज़ारा था! उसकी moti-moti गांड और bade-bade दूध दोनों के गरम माल से बिलकुल नहाये हुए थे. दूध पे थिक वाइट पानी लटक रहा था… निप्पल laal-laal और चिपचिपा… पेट पे भी धार गिरी हुई थी… गांड के दोनों हिस्से बिलकुल चमक रहे थे… छूट से अभी भी दोनों का माल मिक्स होकर बहार टपक रहा था. उसकी आँखें बंद थी, सांसें तेज़, चेहरा पूरा लाल… बिलकुल एक चूड़ी हुई, थकी हुई, रंडी जैसा लुक था.

अर्जुन ने सिगरेट सुलगाई और एक लम्बा काश लेते हुए ज़ोर से हंस पड़ा,

**अर्जुन:** “सेल राहुल… देख इस मादरचोद रंडी को! उफ्फ्फ्फ़ कितनी ज़बरदस्त माल है बस! दूध देख… इतने बड़े और भरे हुए… कल रात भी इनको soch-soch के मुठ मारी थी… देख… दोनों के माल से नहायी हुई पड़ी है! गांड देख… मोती साली… कितनी लचकती है… और छूट… उफ्फ्फ्फ़ बिलकुल पहली हुई गुलाबी छूट… आज तोह मज़ा आ गया दोनों को!”

राहुल भी हंस के बोलै, अपना लुंड हाथ में पकड़ के हलके से हिलाते हुए,

**राहुल:** “हाँ भाई… यह तोह पूरी सड़क की कुटिया निकली! देख इसका चेहरा… कितना शरीफ बन के आयी थी… और अब देख… दोनों मोठे काले लुंड मुँह में लेकर चूस रही थी…… गांड utha-utha के छुड़वा रही थी… वह मादरचोद… इतनी टाइट और गरम छूट पहले कभी नहीं मारी! असली माल है यह असीम भाई बिलकुल गरम रांड!”

दोनों की यह गालियां और तारीफ सुन कर मेरा लुंड पायजामा में झटके मारने लगा. उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मेरी सगी बड़ी आपि… जो घर में हमेशा परदे में रहती थी… अब नंगी पड़ी है और दोनों उसको “रंडी… कुटिया… मादरचोद… सड़क की रांड” बोल रहे हैं… और मुझे इसमें इतना ज़बरदस्त मज़ा आ रहा था की मैं पागल हो रहा था. मेरा लुंड फटने को हो रहा था.

अर्जुन उठा… अपने वॉलेट से 50,000 का बंडल निकाला और सीधा आपि के नंगे बदन पे फ़ेंक दिया. नोट उसके bade-bade दूध पे, पेट पे, गांड पे और छूट के ऊपर बिखर गए.

**अर्जुन (ज़ोर से हंस के):** “ले… रख 50,000 कुटिया! तू बहुत hi मस्त रांड है… ऐसी टाइट छूट और मोती गांड वाली रंडी बहुत काम मिलती है… ले… ये तेरा आज का माल है… फिर कब आएगी!”

आपि की आँखें खुल गयी. वो शर्मा कर बिलकुल लाल हो गयी. उसने झट से हाथ से अपने दूध ढकने की कोशिश की… पर नोट उसके नंगे जिस्म पे बिखरे हुए थे. उसकी आँखें पानी से भर गयी… गाल बिलकुल लाल हो गए . थोड़ी सी नाखुश और शर्म से उसने नज़र नीचे कर ली.

राहुल भी हंस पड़ा. उसने अपने वॉलेट से 10,000 निकाले और आपि के चेहरे के बिलकुल पास फ़ेंक दिए,

**राहुल:** “और ले… 10,000 टिप के तौर पर… ले कुटिया… बहुत अच्छा चूसी तूने… अगली बार तेरी गांड भी फाड़ूंगा… ले मादरचोद… रख ले!”

आपि के गाल और भी गुलाबी हो गए. वो शर्म से काँप रही थी… पर नोट उठाने के लिए हाथ बढ़ाया नहीं… सिर्फ आँखें बंद करके लेती रही. उसकी सांसें अभी भी तेज़ चल रही थी.

अर्जुन ने सिगरेट सुलगाते हुए मुझसे बोलै,

**अर्जुन:** “भाई… आज रात यहीं रुख जा… दोनों मिलके इस रंडी को पूरी रात छोड़ेंगे… सुबह तक इसकी छूट और गांड लाल कर देंगे…”

मैं तुरंत मन कर दिया,

**मैं:** “नहीं भाई… आज नहीं… इसके घर वालों को कुछ पता नहीं चलना चाहिए… अगर रात भर यहीं रुकी तोह शक हो जायेगा… फिर ले आऊंगा इसको…”

अर्जुन और राहुल दोनों है पड़े. फिर आपि धीरे से उठी… कपडे उठाये और बाथरूम में चली गयी. शाम हो चुकी थी… हल्का अँधेरा होने लगा था.

कुछ देर बाद आपि बहार आयी… सलवार सूट पेहेन चुकी थी… पर चेहरा अभी भी लाल था… गांड हिलती हुई चल रही थी. हम दोनों ने उनसे विदा लिया… मैं बाइक स्टार्ट की… आपि पीछे बैठ गयी.

बाइक चलते हुए आपि ने धीरे से मेरी कमर पकड़ ली… उसके bade-bade दूध मेरी पीठ से रगड़ खा रहे थे.

बाइक तेज़ रफ़्तार से चल रही थी. रात का अँधेरा पूरा हो चूका था. पीछे बैठ कर आपि ने मेरी कमर को दोनों हाथों से पकड़ रखा था… और उसके गरम दूध मेरी पीठ से zor-zor से रगड़ खा रहे थे. हर स्पीड ब्रेकर पे उसकी गांड मेरी पीठ पे डाब जाती थी… उफ्फ्फ्फ़… मज़ा आ रहा था.

मैं धीरे से बोलै,

**मैं:** “आपि… आज बहुत मज़ा आया न… दोनों ने मिलके आपकी छूट फाड़ दी… और आप भी मज़े से चीख रही थी… उफ्फ्फ्फ़… कितनी गरम हो गयी थी आप…”

आपि ने पीछे से मेरा पीठ पे ज़ोर का मुक्का मारा… हल्का सा दर्द हुआ पर मज़ा भी आया.

**अनाम आपि (गुस्से और शर्म से):** “असीम तू कितना कमीना है… do-do को बुलाया था… … हरामी कहीं का!”

मैं हंस पड़ा… बाइक थोड़ी तेज़ की और बोलै,

**मैं:** “आपि… मुझे मालुम नहीं था की वह दोनों आएंगे… मैंने तो सिर्फ अर्जुन को बोलै था… लेकिन आप तो मज़े से दोनों से छुड़वा रही थी न… दोनों के लुंड मुँह में लेके… गांड utha-utha के… ‘और ज़ोर से… फाड़ दो’ बोल रही थी… उफ्फ्फ्फ़… कितनी रंडी बन गयी हो आप…”

आपि चुप हो गयी… फिर धीरे से पीछे से मुझसे लिपट गयी. उसके दोनों हाथ मेरी कमर के आगे आ गए… और उसने अपने bade-bade दूध मेरी पीठ पे ज़ोर से दबाने शुरू कर दिए. सूट के ऊपर से hi दूध मेरे पीठ पे रगड़ रहे थे… गरम… भरे हुए… उफ्फ्फ्फ़…

**अनाम आपि (सिसकते हुए, मधुर आवाज़ में):** “तुम… तुम दुनिया के सबसे अच्छे भाई हो असीम…… दोनों ने मुझे इतना मज़ा दिया… अह्ह्ह… पहले कभी इतना नहीं हुआ… उफ्फ्फ्फ़…”

मैं मुस्कुराया… बाइक थोड़ी धीरे की

**मैं:** “और आप दुनिया की सबसे मस्त रांड बेहेन हो आपि… दोनों के माल से नहायी हुई पड़ी थी… नोट बिखर गए थे दूध पे… और आप शर्मा रही थी… कितनी हॉट लग रही थी…”

आपि ने अपने दूध और ज़ोर से मेरी पीठ पे रगड़ने शुरू कर दिए…… निप्पल सूट के ऊपर से hi सख्त फील हो रहे थे.

**अनाम आपि (कानों में सांस छोड़ते हुए):** “तू कितना हरामी है असीम… इन सब के लिए पैसे लेता है उनसे… 50,000… 10,000 टिप… उफ्फ्फ्फ़… मैं तेरी सगी बेहेन हूँ… फिर भी… पैसे ले रहा है…”

मैं हंस के बोलै,

**मैं:** “तो क्या करूँ आपि… उन्हें बता दूँ की आप मेरी सगी आपि हो? उन्हें तो बस यही मालुम है की आप कोई सड़क की रंडी हो… माल हो… छोड़ने वाली माल… और वह मज़े से पैसे फ़ेंक रहे थे… आप भी तो नोट उठाने के बजाये शर्मा रही थी… कितनी सेक्सी लग रही थी…”

आपि ने पीछे से मुझे और टाइट पकड़ लिया… उसके हाथ मेरी कमर के आगे आ गए… और धीरे से मेरी जीन्स के ऊपर से मेरा लुंड दबाने लगी. लुंड पहले से hi खड़ा था… अब उसके हाथों में और तन गया.

**अनाम आपि (sisak-sisak के):** “अह्ह्ह… असीम… तू सच में हरामी है… लेकिन… लेकिन मुझे मज़ा आ रहा था … उफ्फ्फ्फ़… फिर ले चलना मुझे… पर इस बार सिर्फ एक को… या… या दोनों को भी… अह्ह्ह… जो तू चाहे…”

मैं बाइक को थोड़ा और तेज़ किया… रात का ठंडा हवा चल रहा था… पर हम दोनों के बीच garam-garam माहौल था. आपि के दूध मेरी पीठ पे रगड़ रहे थे… उसके हाथ मेरा लुंड सेहला रहे थे… और मैं सोच रहा था —

**उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मेरी शरीफ सी बड़ी आपि अब पूरी तरह रंडी बन चुकी है… अह्ह्ह…**

आपि अपने bade-bade चूचिया मेरी पीठ पे zor-zor से रगड़ने शुरू कर दिए थे. हर स्पीड ब्रेकर पे उसके गरम, भरे हुए चूचे ऊपर से नीचे तक रगड़ खा रहे थे… ब्रा के अंदर से निप्पल सख्त हो चुके थे और मेरी पीठ पे चुभ रहे थे. … उफ्फ्फ्फ़… मैं कण्ट्रोल नहीं कर प् रहा था.

मेरा लुंड पायजामा में पूरा तन चूका था… . आपि की सांसें मेरे कान पे पद रही थी… halki-halki सिसकारियां… “अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़…”

मैं इतना गरम हो गया की मैंने बाइक साइड में रोक दी. अँधेरा था… बिलकुल सन्नाटा… कोई aata-jaata नहीं था इस रोड पर.

आपि ने पीछे से धीरे से पुछा, “बीटा… क्या हुआ? क्यों रोका?”

मैं कुछ नहीं बोलै. बाइक से उतरा, उसका हाथ पकड़ा और उसको साइड वाली जगह ले गया. अँधेरा इतना गहरा था की सिर्फ उसका चेहरा हल्का सा दिख रहा था. मैं ने उसको अपने से चिपका लिया और सीधा उसके गुलाबी होंठ पे अपना मुँह रख दिया.

पहले तोह आपि हटने लगी… दोनों हाथों से मेरा सीना धकेलने लगी… “असीम… नहीं बीटा… यहाँ मत… कोई देख लेगा… अह्ह्ह…”

लेकिन मैं ने उसके होंठ को ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया. मेरी जीभ उसके मुँह में घुसा दी… zor-zor से अंदर बहार करने लगा. आपि के मुँह में अभी भी अर्जुन और राहुल का थिक माल का टास्ते था…… गरम… चिपचिपा. मैं उसको और अंदर तक चूसने लगा… जीभ उसके जीभ से लड़ने लगा… लार और उनका माल मिक्स होकर हमारे मुँह से टपकने लगा.

कुछ सेकण्ड्स बाद आपि का विरोध टूट गया. वो पागलो की तरह मुझसे लिपट गयी… अपनी जीभ मेरी जीभ से लड़ने लगी… zor-zor से चूसने लगी. उसकी सांसें तेज़ हो गयी… “मममहह… उफ्फ्फ्फ़… असीम… अह्ह्ह…”

मैं उसके मुँह को चूस रहा था और सोच रहा था — **उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मेरी सगी बड़ी आपि… अभी अभी दो मर्दों से चुद कर आयी है… उनका माल अभी भी उसके मुँह में है… और यह अभी भी इतनी गरम है की मेरी जीभ चूस रही है… कितनी बड़ी रांड बन गयी है यह…**

मैं ने उसको रोड के साइड में निचे बिठा दिया. अँधेरा इतना था की कोई देख भी नहीं सकता था. मैंने झट से अपनी पंत और अंडरवियर नीचे कर दी… मेरा खड़ा मोटा लुंड बहार आ गया… टोपा से पानी टपक रहा था.

मैं ने उसके बाल पकड़े और लुंड उसके गुलाबी होंठ पे रगड़ने लगा,

**मैं (गन्दी आवाज़ में):** “ले साली रंडी… मुँह खोल… अब मेरा लुंड चूस… अभी अभी दो मर्दों का माल पिया है न… अब अपने भाई का भी पि ले… ले कुटिया… पूरा मुँह में ले…”

आपि ने आँखें बंद करके मुँह खोल दिया. मैं ने एक झटके में अपना लुंड उसके गरम मुँह में घुसा दिया… हलक तक…

**“ग्लुक… ग्लुक… सलूरररप… पूछ पूछ…”**

मैं उसके बाल पकड़ के zor-zor से मुँह छोड़ने लगा… हर धक्के पे उसके होंठ मेरे लुंड को जकड रहे थे.

**मैं (गालियां देते हुए):** “अह्ह्ह… ले मादरचोद… चूस… पूरा मुँह में ले… साली अभी अभी दो लुंड चूस चुकी है… अब तेरे भाई का भी चूस… ले कुटिया… … अह्ह्ह… और अंदर ले… हलक तक… रंडी की बच्ची…”

आपि बिलकुल रांड की तरह चूसने लगी. उसने दोनों हाथों से मेरे लुंड के नीचे वाले हिस्से को पकड़ लिया… zor-zor से मुँह में andar-bahar करने लगी… जीभ से टोपा chat-ti… कभी बॉल्स को चूसती… लार tapak-tapak के मेरे लुंड पे बह रही थी.

कुछ देर बाद मैं झड़ने वाला हो गया. मैंने उसके बाल और ज़ोर से पकड़े और zor-zor से धक्के मारे…

**मैं:** “ले साली… आ गया… ले… तेरे मुँह में भर रहा हूँ… अह्ह्ह्हह्हह!!!”

मैंने ज़ोर से अपना सारा गरम माल आपि के मुँह में छोड़ दिया… dhaar-dhaar… कितना ज़्यादा था… उसके होंठ से बहार भी टपक रहा था… गाल पे… नाक पे… आँखों के नीचे…

आपि ने आँखें बंद करके सब कुछ पि लिया… थोड़ा बहार टपका तोह उसने ऊँगली से उठा के मुँह में दाल दिया.

मैं थक कर उसके सामने बैठ गया. फिर मैंने उसके चेहरे पे गिरा माल ऊँगली से उठाया… उसके गाल पे मॉल दिया… फिर उसकी ऊँगली पकड़ के उसके मुँह में दाल दिया. आपि मेरी ऊँगली को बिलकुल चैनल की तरह चूसने लगी… जीभ से chaat-ti… आँखें ऊपर करके मुझे देखती…

मैं उसके इस छिनालपन देख कर पागल हो गया…

**मैं (गाली देते हुए):** साली चैनल… कितनी बड़ी रांड बन गयी है तू… …”

आपि शर्मा कर आँखें नीचे कर ली… पर मेरी ऊँगली अभी भी चूस रही थी.

मैं ने उसको उठाया… कपडे ठीक किये… और बोलै,

**मैं:** “चल… बाइक पर बैठ… घर चलते हैं… वर्ण यहीं फाड़ दूंगा तेरी गांड…”

आपि चुपचाप बाइक पे बैठ गयी… मैंने बाइक स्टार्ट की और घर की तरफ चल पड़ा…

बाइक घर के बहार रुकते hi मेरा दिल zor-zor से धक् धक् करने लगा. रात के 8 बज गए थे. अँधेरा गहरा हो चूका था. मैं दर रहा था… अब्बू का गुस्सा… अगर उन्हें थोड़ा भी शक हुआ तोह गेम ओवर. आपि पीछे से उत्तरी… उसके कपडे अभी भी थोड़े ast-vyast थे. सलवार सूट में दूध के उभार अभी भी ज़ोर से दिखाई दे रहे थे… दुपट्टा थोड़ा idhar-udhar… गांड पे सलवार चिपकी हुई थी… चुदाई के बाद का वह नशा अभी भी उसके चेहरे पे चमक रहा था.

मैं ने दरवाज़ा खोला और अंदर घुस गया. हॉल में अब्बू सोफे पे बैठे. अम्मी किचन में कड़ी थी… ज़ैनब आपि और नूर शायद अपने कमरे में थी.

जैसे hi हम दोनों अंदर घुसे… अब्बू ने हमें देखा और घूरने लगे.

**अब्बू (थोड़े गुस्से में):** “इतना लेट क्यों हो गए? 10 बजे तुम्हारी बस है ज़ैनब के साथ… और यह क्या हालत है अनाम की?”

अब्बू की नज़र सीढ़ी अनाम आपि पे अटक गयी. उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… उनकी आँखें ऊपर से नीचे तक घूर रही थी. आपि के सलवार सूट में दूध के उभार अभी भी ज़ोर से दिखाई दे रहे थे… ब्रा के निशाँ बहार… गांड पे सलवार थोड़ी सी idhar-udhar… चेहरा लाल… आँखें नीचे… बिलकुल चूड़ी हुई औरत जैसा लुक था. अब्बू की नज़र उसके bade-bade दूध पे रुक गयी… फिर गांड पे… फिर चेहरे पे.

मेरा लुंड पायजामा में एक ज़ोर का झटका मार बैठा. उफ्फ्फ्फ़… अब्बू मेरी सगी बड़ी आपि को घूर रहे थे… जिसकी छूट अभी अभी दो मर्दों के लुंड से फाड़ दी गयी थी… जिसके मुँह में अभी भी उनका माल का टास्ते होगा… और अब्बू को कुछ पता भी नहीं.

मैं झट से आगे बढ़ा… अपने पॉकेट से 60,000 का बंडल निकाला और अब्बू के हाथ में थमा दिया.

**मैं (जल्दी से बहाना बनाते हुए):** “अब्बू… यह आपि के उस काम का एडवांस है… क्लाइंट ने आज hi भेजा… इसलिए थोड़ा लेट हो गया… अभी बहुत टाइम है… बस के लिए तैयार हो जायेंगे.”

अब्बू पैसे देख कर एक सेकंड के लिए रुक गए… फिर उनका चेहरा खिल गया. 60,000 नोट हाथ में लेके वह खुश हो गए… गुस्सा थोड़ा काम हुआ.

**अब्बू:** “अच्छा… बहुत अच्छा… अनाम बीटा… तू बहुत म्हणत कर रही है… घर की हालत सुधर रही है.”

आपि ने सिर्फ हाँ में सर हिला दिया… आँखें नीचे… गाल लाल… और झट से अपने रूम की तरफ चल दी. उसकी गांड हिलती हुई जा रही थी… सलवार पे अभी भी चुदाई के हलके निशाँ थे… मैं देख रहा था… और अंदर से पागल हो रहा था.

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… अब्बू को 60,000 दे diye…Jo अर्जुन और राहुल ने मेरी सगी बड़ी आपि की छूट और मुँह छोड़ने के बदले दिए थे… और अब्बू खुश हो रहे हैं… सोच रहे हैं की बेटी म्हणत कर रही है… जबकि यह पैसे उसकी चुदाई के हैं… कितना मज़ा आ रहा था… मेरा लुंड अभी भी खड़ा था.

आपि अपने रूम में चली गयी… मैं भी अपने रूम की तरफ बढ़ गया…

**उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… अगला part रिहान स्टाइल में, बिलकुल रॉ और गरम 🔥**

रात के 9 बजे मैं और ज़ैनब आपि दोनों रेडी होकर निचे आ गए. ज़ैनब आपि ने एक लाइट ब्लू सलवार सूट पहना था – बिलकुल टाइट, जिसमे उसके bade-bade दूध ज़ोर से उभरे हुए थे. दुपट्टा थोड़ा सा सीने पे लपेटा था, पर अंदर से ब्रा का शेप साफ़ दिख रहा था. गांड पे सलवार इतनी चिपकी हुई थी की दोनों मोती गांड के हिस्से alag-alag हिल रहे थे. उसकी आँखों में एक अलग सी चमक थी – जैसे कुछ सोच रही हो.

टेबल पे खाना लगा था. अब्बू आलरेडी बैठे थे, चेहरा आज खिला हुआ था. अनाम आपि भी बिलकुल फ्रेश लग रही थी – लाइट पिंक सलवार सूट में, चेहरा थोड़ा लाल, आँखें नीचे… आज की जबरदस्त डबल चुदाई के बाद भी वह इतनी शरीफ बन के बैठी थी की देख कर hi मेरा लुंड हल्का सा हिल गया.

अब्बू ने पहला पराठा तोड़ते hi मुस्कुराते हुए सबको बताया,

**अब्बू:** “आज एक बहुत अच्छी खबर है… अनाम बीटा को ऑनलाइन काम से 60,000 रुपये एडवांस मिल गए हैं! देखो बेटी कितनी मेहनती है… घर की हालत सुधर रही है.”

मैं मुस्कुराया… अंदर से पागल हो रहा था. उफ्फ्फ्फ़ अब्बू खुश हो रहे थे, सोच रहे थे बेटी म्हणत कर रही है!

अनाम आपि का चेहरा एक सेकंड में गुलाबी हो गया. उसने नज़र नीचे कर ली… गाल इतने लाल की जैसे कोई लाल गुलाब हो. उसकी उँगलियाँ thar-thar काँप रही थी. मैं उसको देखता रहा…

खाना ख़तम होते hi निकलने का टाइम हो गया. अब्बू बहार ऑटो रिक्शा वाले से बात करने लग गए – “भैया… स्टेशन तक छोड़ देना… देर मत करना.”

मैं झट से अनाम आपि को इशारे से बाथरूम की तरफ बुलाया. वह थोड़ी सी घबरा कर उठी और मेरे peeche-peeche अंदर चली आयी. जैसे hi दरवाज़ा बंद किया, मैंने उसको दीवार से सत्ता दिया और सीधा उसके गुलाबी होंठ पे अपना मुँह रख दिया.

Zor-zor से चूसने लगा… जीभ उसके मुँह में दाल दी… उसके सॉफ्ट होंठ को चूसने लगा. आपि पहले तोह चटपटा रही थी, पर 10 सेकंड में hi गरम हो गयी. उसने अपनी जीभ मेरी जीभ से लड़ाई शुरू कर दी.

मैं उसके कान में गरम सांस छोड़ते हुए बोलै,

**मैं:** “आ जाऊंगा आपि… 2-3 दिन में… बिलकुल आ जाऊंगा… तेरी छूट और गांड दोनों को फाड़ने…”

अनाम आपि उदास हो गयी. उसकी आँखें भर आयी. उसने हलकी सी सिसकी ली और मेरा सीना धकेलने लगी,

**अनाम आपि (उदास आवाज़ में):** “बीटा… मुझे अकेला छोड़ के जा रहे हो… 2-3 दिन… उफ्फ्फ्फ़… क्या करुँगी मैं…?”

मैं मुस्कुराया… नीचे हाथ ले गया… उसकी सलवार के ऊपर से hi उसकी छूट पे हाथ रख दिया और dheere-dheere मसलने लगा. उसकी छूट अभी भी थोड़ी गीली थी… चुदाई का नशा अभी भी अंदर था.

**मैं (उसकी छूट मसलते हुए, कान में धीरे से):** “एक आईडिया है आपि… आप अब्बू को फंसा लो… देखना… घर में भी और बहार भी दोनों जगह एन्जॉय करोगी… अब्बू को भी मज़ा आएगा… और तुम भी खुश रहोगी…”

जैसे hi मैंने यह बात बोली… अनाम आपि का चेहरा गुस्से से लाल हो गया. उसने एक ज़ोर का मुक्का मेरे सीने पे मारा और गुस्से में बोली,

**अनाम आपि:** “हरामी कहीं का… अपनी बड़ी आपि को अब्बू के साथ भी…? तू सच में पागल हो गया है असीम!”

लेकिन उसकी छूट मेरे हाथ में अभी भी halki-halki गीली हो रही थी… मैं समझ गया – अंदर से यह बात उसको भी गरम कर रही थी.

मैं जल्दी से बहार आ गया. अब्बू ऑटो वाले से बात कर रहे थे. मैं और ज़ैनब आपि ने सबसे विदा ली. अनाम आपि ने मुझे देखा… आँखें उदास… पर उसके गाल अभी भी लाल थे.

मैं और ज़ैनब आपि ऑटो में बैठ गए. ऑटो चल पड़ा… बस स्टैंड की तरफ.

बस स्टैंड पहुँचते hi हमने देखा – बस वाला ड्राइवर आलरेडी दरवाज़े पे खड़ा था, सिगरेट फूक रहा था. जैसे hi उसकी नज़र ज़ैनब आपि पे पड़ी… उसके bade-bade चूचियों पर अटक गयी. आपि का लाइट ब्लू सलवार सूट इतना टाइट था की उसके moti-moti चूचियों का फुल शेप साफ़ दिखाई दे रहा था – ब्रा के ऊपर से भी निप्पल का हल्का उभार दिख रहा था. ड्राइवर की आँखें फैल गयी, उसका मुँह खुला रह गया… लुंड ने उसके पैन्ट्स में एक ज़ोर की हरकत की होगी पक्का. पर जैसे hi उसने मुझे मेरे साथ देखा, तुरंत नज़र हटा ली और मुस्कुराते हुए बोलै, “चलो भाई… टिकट रेडी है.”

हम दोनों बस में चढ़ गए. हमारा 2-सीटर सीट लास्ट के पास था. ज़ैनब आपि सीधा विंडो सीट पे बैठ गयी. मैं उसके बिलकुल साथ. जैसे hi बैठी… उसकी moti-moti, नरम जांघें मेरी जाँघों से टकरा गयी. उफ्फ्फ्फ़… कितनी सॉफ्ट और गरम थी यार! सलवार के कपडे के ऊपर से भी महसूस हो रहा था जैसे सिल्क की जांघें हों. आपि ने अपना दुपट्टा थोड़ा सा साइड में किया और अपनी बड़ी गांड सीट पे एडजस्ट करते हुए मेरी तरफ देखा… आँखों में एक अलग सी चमक.

बस चल पड़ी. लाइट्स डिम थी, रात का अँधेरा… सिर्फ रोड की रौशनी अंदर आ रही थी.

बस खुलते hi मैंने अपना हाथ धीरे से नीचे किया और ज़ैनब आपि की राइट जांघ पे रख दिया. पलंग जैसी नरम… मैं dheere-dheere मसलने लगा. उँगलियाँ ऊपर की तरफ बढ़ रही थी… सलवार के अंदर उसकी गरम जांघ को फील कर रहा था. आपि ने मेरी तरफ देखा… उसकी आँखें मेरी आँखों में गड्ड गयी. उसने हलकी सी मुस्कान दी और धीरे से बोली,

**ज़ैनब आपि (कानों में गरम सांस छोड़ते हुए):** “हाँ तोह असीम… अब बताओ… तुम्हारा और अनाम आपि का क्या चल रहा है बीटा? मुझे सब पता है… छुपाओ मत.”

मैं चौंक गया. हाथ रुक गया उसकी जांघ पे. दिल ज़ोर से dhak-dhak करने लगा.

**मैं (घबराते हुए):** “कुछ भी तोह नहीं आपि… सच में…”

ज़ैनब आपि ने मेरी आँखों में देखा… उसकी जीभ ने अपने होंठ को छाता. फिर उसने मेरा हाथ पकड़ के अपनी जांघ पे और ज़ोर से दबा दिया और बोली,

**ज़ैनब आपि (थोड़ी गुस्से में, पर आवाज़ में गरमीपन):** “अरे मत सिखाओ मुझे! मैं उस कुट्टी को बहुत अच्छे से जानती हूँ… वह बिना ठुकाई के एक दिन भी नहीं रह सकती. बताओ sahi-sahi… तुम दोनों ने क्या क्या किया? कितनी बार ठोका उस रंडी को? बताओ न… मुझे सब सुन्ना है.”

मैं चुप चाप हो गया.

फिर वो बोली, “और… किसके पास ले गया था वो सारे पैसे मज़े लेकर लाये तुम लोगो ने घर? मुझे उस चैनल का तोह मालुम है… लेकिन तू भी खुद भी उसके साथ मज़े ले रहा है और दूसरों के पास भी ले जा रहा है… कैसा भाई है तू…?”

आपि की बात सुनके मेरा चेहरा शर्म से झुक गया और मैंने आँखें बंद कर ली.

थोड़ी देर के बाद मैंने आँखें खोली… बस की डिम येलो लाइट में सब कुछ हल्का सा धुंधला लग रहा था. बाकी पैसेंजर्स सोये हुए थे. मैं नीचे देखा तो ज़ैनब आपि की आँखें बंद थी… उसका सर थोड़ा पीछे सीट पे टिका हुआ था, होंठ हलके से खुले हुए, सांस dheere-dheere चल रही थी. उसकी badi-badi चूचियां हर सांस के साथ upar-neeche हो रही थी… लाइट ब्लू सलवार सूट के ऊपर से भी निप्पल का शेप साफ़ दिख रहा था. उफ्फ्फ्फ़… कितनी सेक्सी लग रही थी मेरी ज़ैनब आपि….

मैंने उसको घूरने लगा… उसके चेहरे को, उसके बड़े चूचियों को, उसकी मोती जाँघों को… नज़र हटा hi नहीं पा रहा था. इतना घूर रहा था की जैसे उसको खा जाऊंगा. थोड़ी देर बाद आपि ने महसूस कर लिया. उसने धीरे से आँखें खोली… मेरी तरफ देखा और एक नॉटी सी मुस्कान के साथ धीरे से बोली,

**ज़ैनब आपि (गरम आवाज़ में):** “ऐसे क्या देख रहे हो बीटा…? एक बहन से दिल नहीं भरा क्या…? अनाम कुट्टी के बाद अब मुझे भी खाने का मैं कर रहा है…?”

बोलते hi उसने अपना दुपट्टा एक झटके में हटा दिया और अपने कंधे पे दाल दिया. उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… अब उसका फुल क्लीवेज साफ़ दिख रहा था. सूट का गाला थोड़ा डीप था… दोनों bade-bade दूध एक दूसरे से चिपके हुए थे, बीच में गहरी लाइन… ब्रा का वाइट लास भी हल्का सा दिखाई दे रहा था. मेरा लुंड सलवार के अंदर एकदम खड़ा हो गया.

मैं समझ गया उसका इशारा. तुरंत अपना लेफ्ट हाथ उसके गर्दन के पीछे दाल दिया… उसकी नरम गर्दन को पकड़ के अपनी तरफ थोड़ा खींच लिया और सीधा उसके राइट दूध पे हाथ रख दिया. उफ्फ्फ्फ़… कितने सॉफ्ट थे यार! सूट के ऊपर से भी महसूस हो रहा था – जैसे कोई गरम दूध का बैलून हो. मैंने dheere-dheere मसलने लगा… पूरा हाथ घुमा के, उँगलियों से निप्पल को पकड़ के हलके से मरोड़ दिया. आपि की सांस एकदम तेज़ी से चलने लगी.

साथ hi मेरा राइट हाथ नीचे गया… उसकी मोती जाँघों के बीच में. सलवार के नाडा को थोड़ा सा ढीला किया और हाथ अंदर दाल दिया. उफ्फ्फ्फ़… आपि की छूट बिलकुल नंगी थी अंदर! कोई पंतय नहीं पहनी थी रंडी ने. मेरी उँगलियाँ सीधा उसकी गरम, गीली छूट पे लग गयी. कितनी सॉफ्ट थी… बिलकुल वेलवेट जैसी… और कितनी गीली! पूरा हाथ paani-paani हो गया एक सेकंड में. मैंने दो उँगलियाँ उसकी छूट के ऊपर रख के dheere-dheere upar-neeche करने लगा… क्लीट को घुमाया… फिर एक ऊँगली अंदर दाल दी.

**ज़ैनब आपि (हलकी सी सिसकी लेते हुए):** “उफ्फ्फ्फ़… असीम…… धीरे… बस में है… आअह्ह्ह…”

लेकिन उसकी छूट तो और गीली हो रही थी. मैंने ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया… एक हाथ से उसके बड़े दूध को zor-zor से दबाता, निप्पल को मरोड़ता… दूसरा हाथ उसकी छूट में ऊँगली andar-bahar कर रहा था. हर बार जब बस झटके लेती… मेरी ऊँगली और अंदर चली जाती. आपि की जांघें thar-thar काँप रही थी… वह अपने होंठ को काट रही थी ताकि आवाज़ न निकले.

कुछ देर तक ऐसे hi चलता रहा… आपि के दूध अब और टाइट हो गए थे… निप्पल खड़े हो चुके थे. उसकी छूट से “puch-puch” की हलकी सी आवाज़ आ रही थी. फिर अचानक आपि ने अपना मुँह मेरे कंधे पे रख दिया… उसकी सांस बहुत तेज़ी से चल रही थी.

**ज़ैनब आपि (बिलकुल हलकी, कांपती आवाज़ में):** “असीम…… आ रही हूँ… उफ्फ्फ्फ़… झड़ने वाली हूँ… आआह्ह्ह…”

और फिर… आपि मेरे हाथों में झाड़ गयी! उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… कितना गरम पानी! उसके छूट का सारा गरम रास मेरे हाथ पे निकल आया… पूरी उँगलियाँ भीग गयी…. आपि का पूरा बदन एक बार ज़ोर से काँप गया… उसने मेरे कंधे को ज़ोर से काट लिया ताकि चीख न निकले.

मैंने धीरे से हाथ बहार निकला… दोनों उँगलियाँ उसके गरम पानी से चमक रही थी. आपि ने आँखें खोली… हवस भरी नज़रों से मुझे देखा… उसकी आँखें बिलकुल नंगी थी. मैंने उसके सामने hi अपना हाथ मुँह के पास लाया और उसके गरम पानी को चाटने लगा… जीभ से उँगलियाँ chaat-chaat के साफ़ करने लगा… उसका नमकीन, गरम रास पूरा पि गया.

ज़ैनब आपि हवस भरी नज़रों से मुझे देखती रही… अपना पानी छत्ते हुए… उसके होंठ खुले हुए थे… सांस फूल रही थी… और आँखों में एक ऐसी भूक थी जैसे अभी मुझे खा जाएगी.
 
अपडेट कल आएगा...

सॉरी फॉर लेट
 
ज़ैनब आपि मेरे हाथों में hi झाड़ चुकी थी. उसकी छूट से garam-garam पानी की धार निकल कर मेरी उँगलियों को पूरा भीग दिया था. उफ्फ्फ्फ़… कितना गरम और नमकीन रास था उसका! आपि का पूरा बदन एक बार ज़ोर से काँप गया, उसने मेरे कंधे को दांत से पकड़ लिया ताकि चीख न निकल जाए. उसके bade-bade दूध मेरी पीठ पे zor-zor से रगड़ खा रहे थे, निप्पल सख्त हो चुके थे.



मैंने धीरे से हाथ बहार निकला. दोनों उँगलियाँ उसके रास से चमक रही थी. आपि की सांसें tez-tez चल रही थी, आँखें बंद, होंठ खुले हुए… बिलकुल थकी हुई रैंड जैसी लग रही थी मेरी ज़ैनब आपि.

**ज़ैनब आपि (तेज़ सांस लेते हुए, हलकी सी सिसक के):** “उफ्फ्फ्फ़… असीम…… क्या कर दिया तूने… मेरी… पूरी गीली हो गयी… अह्ह्ह…”

मैं मुस्कुराया और अपनी उँगलियाँ मुँह में दाल कर उसका रास चाटने लगा. उसकी आँखें खुल गयी और हवस से मुझे देखती रही.

तभी बस एक ढाबे पे रुक गयी. ड्राइवर ने बोलै, “भाई लोग… 20 मिनट का ब्रेक है… किसी को कुछ khana-piina हो तो खा लो… बाकी सब लोग जल्दी वापस आ जाना.”

सब पैसेंजर्स ek-ek करके उतरने लगे. आपि ने मुझे धीरे से कहा, “असीम… मुझे बाथरूम जाना है… बहुत प्रेशर है.”

मैं तुरंत उठा और उसका हाथ पकड़ के बस से नीचे उतर दिया. ढाबे के पास वाला पब्लिक वाशरूम देखा तोह आपि का चेहरा hi बन गया. गन्दा, बदबू, पानी भर्रा हुआ… बिलकुल घिन आने लगा.

**ज़ैनब आपि (नाक पकड़ के):** “ुघ्घ… यह तोह बहुत गन्दा है… मैं यहाँ नहीं जाउंगी…”

मैं ने उसका हाथ पकड़ा और ढाबे से थोड़ा आगे, रोड के साइड में अँधेरे में ले गया. बिलकुल सन्नाटा था…… सिर्फ ढाबे की रौशनी हलकी सी आ रही थी. अँधेरा इतना गहरा था की हम दोनों के चेहरे भी मुश्किल से दिख रहे थे.

**मैं:** “यहाँ ठीक है आपि… कोई नहीं देख रहा… जाओ पेशाब कर लो.”

ज़ैनब आपि ने idhar-udhar देखा… फिर मुझे देखा… और धीरे से बोली,

**ज़ैनब आपि (शरमाते हुए पर गरम आवाज़ में):** “बीटा… तू… तू यहीं खड़ा रह… मैं… मैं यहीं कर लेती हूँ…”

और फिर… उसने अपना दुपट्टा एक तरफ कर दिया. दोनों हाथों से सलवार का नाडा खोला… सलवार और पंतय दोनों एक साथ नीचे सरक गए. उफ्फ्फ्फ़ … मेरी ज़ैनब आपि मेरे सामने बिलकुल नंगी कड़ी थी!

उसकी moti-moti गोरी जांघें चमक रही थी… बीच में बिलकुल साफ़, गीली छूट… ऊपर bade-bade दूध सूट के ऊपर वाले हिस्से में उभरे हुए थे… निप्पल अभी भी सख्त थे. गांड इतनी मोती और गोल थी की देख कर hi मेरा लुंड पायजामा में फटने को हो गया.

आपि ने टाँगे थोड़ी सी फैलाई… एक हाथ से अपनी छूट के ऊपर वाला हिस्सा फैलाया… और पेशाब करने लगी.

**फुर्रररररर…**

पहली धार ज़ोर से निकल गयी… garam-garam पेशाब की आवाज़ अँधेरे में गूँज रही थी. आपि की आँखें बंद थी, होंठ हलके से खुले… चेहरा लाल… बिलकुल एक रंडी जैसी पोजीशन में पेशाब कर रही थी मेरी सगी आपि.

मैं वही खड़ा था… लुंड पायजामा में तन कर खड़ा… और देखता जा रहा था. उसकी मोती गांड थोड़ी सी हिल रही थी… छूट से पेशाब की धार निकल रही थी… गीली छूट चमक रही थी… उफ्फ्फ्फ़… कितना गन्दा और मज़ा वाला नज़ारा था!

पेशाब ruk-ruk के आ रहा था… कभी ज़ोर से… कभी धीरे… आपि की सांसें तेज़ हो रही थी.

मैं और कण्ट्रोल नहीं कर पाया. धीरे से उसके पास चला गया… पीछे से उसकी कमर पकड़ी… और अपना हाथ नीचे ले जाकर उसकी गीली छूट पे रख दिया.

जैसे hi मेरी उँगलियाँ उसकी छूट पे लगी… पेशाब रुक गया… फिर ruk-ruk के निकलने लगा.

**ज़ैनब आपि (सीसियते हुए, कांपती आवाज़ में):** “अह्ह्ह्ह… असीम…… क्या… क्या कर रहे हो… उफ्फ्फ्फ़… पेशाब… करने दो… अह्ह्ह… हाथ हटाओ… हहैयय…”

लेकिन मैंने हाथ नहीं हटाया. दोनों उँगलियों से उसकी छूट के मुँह को फैलाया… और बीच में ऊँगली अंदर दाल दी. पेशाब अब बिलकुल ruk-ruk के आ रहा था… कभी मेरी ऊँगली पे ज़ोर से पड़ता… कभी रुक जाता… और हर बार आपि ज़ोर से सीसियति.

**ज़ैनब आपि (sisak-sisak के):** “उफ्फ्फ्फ़… असीम… हाथ मत चला… अह्ह्ह… पेशाब निकल रहा है… तेरी ऊँगली पे… उफ्फ्फ्फ़… कितनी गन्दी बात है… अह्ह्ह… रुक मत… और अंदर कर… हहैयय…”

मेरा लुंड पायजामा में झटके मार रहा था. मैं पीछे से उसके bade-bade दूध को दूसरे हाथ से पकड़ के ज़ोर से मसलने लगा… और नीचे वाली ऊँगली उसकी छूट में andar-bahar करने लगा… जबकि पेशाब अभी भी ruk-ruk के निकल रहा था.

अँधेरा… सन्नाटा… और मेरी सगी आपि मेरे सामने नंगी कड़ी… पेशाब करते हुए मेरी ऊँगली पे सीसिया रही थी…

ज़ैनब आपि पेशाब कर चुकी थी… लेकिन उसकी छूट से अभी भी ek-ek बूँद टपक रही थी. उसकी मोती गोरी जांघें thar-thar काँप रही थी. अँधेरा गहरा था, सिर्फ ढाबे की हलकी रौशनी आ रही थी. आपि ने सांस भरी और धीरे से बोली,

**ज़ैनब आपि (शर्म से कांपती आवाज़ में):** “हो… हो गया बीटा… अब उठ जॉन?”

मैं ने जवाब नहीं दिया. सीधा वही ज़मीन पे बैठ गया… उसके नंगे पैरों के बीच… उसकी moti-moti जाँघों के सामने. मेरा मुँह बिलकुल उसकी गीली छूट के सामने था. उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मेरी सगी आपि की छूट पे अभी अभी गरम पेशाब की बूँदें चमक रही थी… छूट के मुँह से हल्का सा पेशाब और छूट का रास मिक्स हो कर टपक रहा था.

मैंने दोनों हाथों से उसकी मोती गांड पकड़ी… ज़ोर से फैलाया… और सीधा मुँह लगा दिया!

**स्लुर्र्र्रॉप…**

पहली जीभ से hi मैंने उसकी छूट को चाट लिया. उफ्फ्फ्फ़… गरम पेशाब का नमकीन स्वाद… उसके छूट के रास के साथ मिक्स हो कर मेरे मुँह में भर गया. मैं पागलो की तरह चाटने लगा… zor-zor से… जीभ को पूरी तरह फैला के… ऊपर से नीचे तक… क्लीट को जीभ से घूमता… छूट के अंदर तक जीभ दाल के अंदर का सारा पेशाब और रास चूसने लगा.

**ज़ैनब आपि (एकदम से सिसक उठी):** “आआह्ह्ह्हह… असीम…… क्या… क्या कर रहे हो… उफ्फ्फ्फ़… मेरा पेशाब लगा है… अह्ह्ह…… मत चाटो… हहैयय… गन्दी है… उफ्फ्फ्फ़…”

लेकिन मैंने उसकी गांड और ज़ोर से पकड़ ली… उसको अपने मुँह पे और टाइट चिपका दिया. मेरी नाक उसकी क्लीट पे रगड़ रही थी… जीभ andar-bahar कर रहा था… हर चाटने पे “सलूरररप… पूछ… सलूरररप” की आवाज़ अँधेरे में गूँज रही थी. पेशाब की लास्ट बूँदें मेरे मुँह में आ रही थी… मैं सब पि रहा था… जैसे कोई भूखा कुत्ता हूँ.

**मैं (अंदर से पागल होते हुए सोच रहा था):** उफ्फ्फ्फ़ … मेरी सगी ज़ैनब आपि… जिनको मैं बहुत hi शरीफ समझता था… अब मैं अपनी जुबां पे उसकी पेशाब वाली छूट चाट रहा हूँ… कितनी गन्दी… कितनी नमकीन… कितनी गरम है मेरी आपि की छूट… अह्ह्ह… मैं तोह इसके पेशाब को भी पि जाऊंगा…

आपि की टाँगे काँप रही थी. उसने दोनों हाथों से मेरा सर पकड़ लिया… पहले तोह धकेलने की कोशिश की… फिर dheere-dheere मेरा सर अपनी छूट पे दबाने लगी.

**ज़ैनब आपि (sisak-sisak के, आवाज़ मधुर हो गयी):** “उफ्फ्फ्फ़… असीम…… तू… तू पागल है… अह्ह्ह… मेरी पेशाब को चाट रहा है… सलूरररप… उफ्फ्फ्फ़… और ज़ोर से… जीभ अंदर दाल… हहैयय… कितना मज़ा आ रहा है… अह्ह्ह…… और चूस… पूरी चाट ले… उफ्फ्फ्फ़…”

मैं और जोश में आ गया. अब मैं उसकी छूट को पूरा मुँह में लेके चूसने लगा… जीभ अंदर दाल के अंदर तक घुमा रहा था… क्लीट को जीभ से पकड़ के चूस रहा था… कभी ज़ोर से… कभी धीरे… उसके छूट के रास और पेशाब का मिक्स मेरा मुँह भर रहा था… मैं सब पि रहा था बिना एक बूँद वास्ते किये.

आपि की गांड अब खुद हिलने लगी थी… वह मेरे मुँह पे अपनी छूट रगड़ रही थी… दूध ऊपर से zor-zor से हिल रहे थे… उसने अपना एक हाथ ऊपर करके अपना दूध खुद मसलने लगी.

**ज़ैनब आपि (पागलो की तरह सिसकती हुई):** “अह्ह्ह्ह… असीम… … तू मेरी छूट का दीवाना है… उफ्फ्फ्फ़… पेशाब पे भी मुँह लगा दिया… कितना हरामी है तू… अह्ह्ह… और अंदर… जीभ और अंदर… मैं फिर से झड़ने वाली हूँ… हहैयय… चूस कुत्ते… पूरी चाट ले अपनी आपि की गन्दी छूट… अह्ह्ह्हह…”

मैं ने उसकी गांड के दोनों हिस्से फैला के एक ऊँगली उसकी गांड के होल पे भी रख दी… हलके से दबाया… और जीभ से उसकी छूट को और तेज़ चाटने लगा. आपि का पूरा बदन काँप रहा था… उसकी सांसें रुकने लगी थी… छूट से अब सिर्फ छूट का गरम रास निकल रहा था… पेशाब ख़तम हो चूका था… लेकिन मैं अब भी उसकी छूट को पागलो की तरह चाट रहा था.

**ज़ैनब आपि (चीखते हुए, झड़ते हुए):** “आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… असीम… … आ गयी… फिर आ गयी… उफ्फ्फ्फ़… तेरी जीभ पे… मेरी छूट का पानी… अह्ह्ह्हह… पि ले सब…… पि ले अपनी आपि का रास… हहैयय… मैं मर जाउंगी… अह्ह्ह्हह्हह!!!”

आपि का पूरा बदन एक ज़ोर से झटका लगा… उसकी छूट से गरम रास की एक बड़ी धार निकल कर मेरे मुँह में भर गयी. मैं ने मुँह नहीं हटाया… सब कुछ पि गया… जीभ से चूसता रहा… हर बूँद तक.

आपि थक कर मेरे सर पे हाथ रख के झुक गयी… सांसें तेज़ हो गयी उनकी..

मैं ने उसकी छूट से मुँह हटाया… होंठ उसके रास से चमक रहे थे… और ऊपर देखा. आपि मेरी तरफ देखती हुई थी… आँखों में एक ऐसी हवस थी जैसे अभी मुझे खा जाएगी.

**ज़ैनब आपि (सांस फूलते हुए, हलकी सी मुस्कराहट के साथ):** “उफ्फ्फ्फ़… असीम… तू सच में हरामी है … मेरी पेशाब वाली छूट चाट ली तूने… अब… अब बस में वापस चलते हैं… वर्ण मैं यहीं पागल हो जाउंगी…”

मैं उठा… उसकी सलवार ऊपर किया… और उसके होंठ पे एक छोटी सी किश करके बोलै,

**मैं:** “चलो आपि… बस में बैठते हैं……”

बस के चलने का टाइम हो गया था. ड्राइवर ने हॉर्न बजा दिया और इंजन की ज़ोर की आवाज़ के साथ बस dheere-dheere हिलने लगी. लाइट्स डिम हो चुकी थी, बाकी पैसेंजर्स apni-apni सीट्स पे लेटने लगे थे. हमारा लास्ट वाला 2-सीटर सीट बिलकुल अँधेरे में था…

जैसे hi बस तेज़ हुई, मैंने तुरंत अपना लेफ्ट हाथ ज़ैनब आपि के सूट के ऊपर से उनके bade-bade चुचो पे रख दिया. उफ्फ्फ्फ़… कितने गरम और भरे हुए थे! सूट के कपडे के ऊपर से भी महसूस हो रहा था जैसे दो बड़े गरम दूध के उभरे हुए बैलून्स हों. मैंने धीरे से मसलना शुरू कर दिया… पूरा हाथ घुमा के… उँगलियों से निप्पल को पकड़ के halke-halke मरोड़ने लगा.

आपि ने एक हलकी सी सिसकी ली… “उफ्फ्फ्फ़… असीम… … अह्ह्ह…” पर उसने मेरा हाथ नहीं हटाया. उल्टा अपनी कमर थोड़ी सी मेरे तरफ झुका दी ताकि मैं और अच्छे से दबा सकू.

मेरा लुंड पायजामा में पूरा तन चूका था. मैंने उसके कान के पास मुँह ले जाकर गरम सांस छोड़ते हुए धीरे से पुछा,

**मैं:** “आपि… एक बात बताओ न… आप अनाम आपि को हमेशा ‘रंडी’ और ‘कुटिया’ क्यों बोलती हो? घर में भी kabhi-kabhi आप उनको ऐसे hi देखती हो जैसे… जैसे उनके बारे में कुछ पता हो…”

ज़ैनब आपि ने पहले तोह कुछ नहीं बोलै. सिर्फ अपने बड़े चुचो को मेरे हाथ में और ज़ोर से दबा दिया. फिर बस के एक झटके में उसने धीरे से मेरी तरफ देखा… आँखों में एक अलग सी चमक थी. उसने अपना दुपट्टा साइड में किया और बिलकुल हलकी आवाज़ में बोली,

**ज़ैनब आपि (गरम सांस लेते हुए):** “बीटा… तू सच में नहीं जानता? घर में सबको पता है… सिर्फ अब्बू और तू hi अनजान हो. अनाम… वह रंडी पहले से hi थी. शादी के 2 साल बाद hi पकड़ी गयी थी… किसी और मर्द के साथ… होटल में… पूरी नंगी… उसके ऊपर वह हरामी चढ़ा हुआ था…”

मैंने सुनते hi एक करंट सा महसूस किया. मेरा हाथ उसके चुचो पे रुक गया. उफ्फ्फ्फ़ मेरी सगी बड़ी आपि… जो घर में हमेशा शरीफ बानी रहती थी… उसका तलाक़ इसी वजह से हुआ था? वह किसी और के साथ चुद रही थी? और यह बात घर में सबको पता है?

ज़ैनब आपि ने मेरा हाथ पकड़ के अपने चुचो पे और ज़ोर से दबाया और बोली,

**ज़ैनब आपि (गरम आवाज़ में):** “हाँ बीटा… उस दिन उसके पति ने उसको पकड़ लिया था… पूरा वीडियो भी बन गया था… अनाम बिलकुल नंगी… घोड़ी बानी हुई… उस हरामी के साथ… उसके पति ने सब देख लिया… घर आके सबको बता दिया… अब्बू को छोड़ कर बाकी सब जानते हैं… इसी वजह से तलाक़ हो गया… लेकिन वह रंडी अब भी अंदर से वही है… तू तो जानता है सब…”

मैं हैरान था… पूरा दिमाग घूम रहा था. मेरी बड़ी आपि… वह पहले से hi चुड़क्कड़ निकली? होटल में किसी और के साथ पकड़ी गयी… और अब Arjun-Rahul के साथ मज़े ले रही थी… और मैं… मैं उसको खुद ले जा रहा था… पैसे लेकर…

मेरा लुंड अब फटने को हो रहा था. मैंने ज़ैनब आपि के बड़े चुचो को दोनों हाथों से zor-zor से मसलने लगा… निप्पल को सूट के ऊपर से hi पकड़ के मरोड़ दिया… और उसके कान में बोलै,

**मैं (हवस में):** “उफ्फ्फ्फ़ आपि… सच में? मेरी बड़ी आपि… पहले से hi रंडी थी? होटल में किसी और के लुंड पे चुद रही थी… और अब… अब मैं उसको अर्जुन के पास ले जा रहा था… उफ्फ्फ्फ़… कितनी गन्दी बात है… मेरा लुंड खड़ा हो गया आपि… अह्ह्ह…”

ज़ैनब आपि ने मेरी कमर पे हाथ रख के मुझे और टाइट चिपका लिया… उसकी मोती जांघें मेरी जांघ से रगड़ रही थी… और धीरे से मेरी ऊँगली को पकड़ के अपनी छूट के ऊपर ले गयी… सलवार के अंदर…

**ज़ैनब आपि (सिसकती हुई):** “हाँ बीटा… वह रंडी है… लेकिन अब तू भी उसका भाई बन के उसको छुड़वा रहा है… पैसे लेकर… उफ्फ्फ्फ़… कितना हरामी है तू… मेरी भी छूट मसल रहा है… अह्ह्ह… और अंदर कर ऊँगली… जैसे अनाम की छूट फाड़वा रहा था… वैसे hi मेरी भी फाड़ दे… अह्ह्ह…”

बस तेज़ चल रही थी… अँधेरा… और मैं अपनी दूसरी आपि ज़ैनब के बड़े चुचो मसलता हुआ… उसकी गीली छूट में ऊँगली andar-bahar कर रहा था… और दिमाग में सिर्फ अनाम आपि का पुराण सन घूम रहा था –

तभी… आपि के फ़ोन की हलकी सी वाइब्रेशन हुई. उसने झट से फ़ोन उठाया… स्क्रीन देखा… और एक सेकंड के लिए मेरी तरफ देखा. फिर उसने फ़ोन कान से लगाया और बिलकुल फुसफुसाती आवाज़ में बात करने लगी… इतनी धीमी की सिर्फ मैं hi सुन प् रहा था.

**ज़ैनब आपि (फुसफुसाते हुए, सांस तेज़):** “हाँ… मैं सुबह 5 बजे पहुँच जाउंगी… हाँ हाँ… ठीक है… असीम भी साथ है… उसकी टेंशन मत लो… वो कुछ नहीं बोलेगा… लेकिन बहार नहीं… हाँ… … समझ गए न… अभी बस में हूँ… बाद में बात करते हैं… हाँ… बिलकुल… सब रेडी रखना…”

मैं बिलकुल चुप था… लेकिन अंदर से परेशां हो गया था. कौन है यह? किस से बात कर रही है मेरी ज़ैनब आपि? सुबह 5 बजे पहुँचने की बात… असीम साथ है… टेंशन मत लो… बहार नहीं… … ये सब सुन कर मेरा दिल zor-zor से धक् धक् करने लगा. और उसकी फुसफुसाती आवाज़… जैसे किसी सीक्रेट प्लान की बात हो रही हो… किसी के साथ मिलने की… किसी के साथ… कुछ करने की…

मुझे उधर की आवाज़ बिलकुल सुनाई नहीं दे रही थी… सिर्फ आपि की halki-halki सिसकी और “हाँ… ठीक है… अंदर hi” वाली बातें. मैं हैरान था… आँखें उसके चेहरे पे टिक गयी थी. उसकी सांसें थोड़ी तेज़ हो गयी थी… गाल हलके से लाल… और उसके bade-bade चुचो मेरे हाथ में और टाइट हो गए थे. हर बार जब वह “हाँ” बोलती… उसके चुचो मेरे हाथ में ज़ोर से उभर जाते.

कुछ देर बाद उन्होंने कॉल कट किया… फ़ोन साइड में रख दिया… और धीरे से मेरी तरफ देखा. उसकी आँखों में एक नॉटी सी मुस्कराहट थी… जैसे मुझे परेशां देख कर मज़ा आ रहा हो.

मैं हैरानी से उसको देखते हुए धीरे से पुछा,

**मैं:** “आपि… कौन था? किस से बात कर रही थी इतनी रात को… और यह सुबह 5 बजे वाली बात… क्या चल रहा है?”

ज़ैनब आपि ने सिर्फ मुस्कुरा कर मेरी आँखों में देखा… एक हलकी सी हसी… फिर बिलकुल मधुर और गरम आवाज़ में बोली,

**ज़ैनब आपि:** “क्यों बीटा… तुम्हे बुरा लग रहा है क्या? इतनी परेशां क्यों हो रहे हो…?”

और उसने अपना हाथ मेरे हाथ पे रख दिया… और मेरा हाथ अपने bade-bade चुचो पे और ज़ोर से दबा दिया… जैसे बोल रही हो – “अब बात मत करो… बस मसलते रहो…”

मैं कुछ बोल नहीं पाया. चुपचाप उसके bade-bade चुचो को दोनों हाथों से मसलने लगा… सूट के ऊपर से hi… zor-zor से… ऊपर से नीचे… gol-gol घूमता… निप्पल को उँगलियों के बीच में पकड़ के हलके से मरोड़ता. हर बार जब बस झटका लेती… उसके चुचो मेरे हाथों में ज़ोर से हिलते… और मैं और जोश में मसलता.

आपि की सांसें तेज़ हो गयी… उसने अपनी कमर मेरे तरफ झुका दी… और अपने बड़े चुचो को मेरे हाथों में और टाइट चिपका दिया. उसकी आँखें थोड़ी सी बंद हो गयी… होंठ हलके से खुले… और वह धीरे से सिसकती रही…

**ज़ैनब आपि (sisak-sisak के):** “उफ्फ्फ्फ़… असीम… और ज़ोर से… हाथ अंदर तक ले जा… अह्ह्ह… बस चुपचाप मसलते रहो बीटा…… अह्ह्ह… और ज़ोर से… उफ्फ्फ्फ़…”

मेरा लुंड पायजामा में पूरा तन गया था… दिमाग में सिर्फ एक hi सवाल घूम रहा था – **कौन था वह… जिस से आपि इतनी रात को फुसफुसाते हुए बात कर रही थी… और सुबह 5 बजे क्या होने वाला है… और मैं… मैं यहाँ उसके चुचो मसलता हुआ… परेशां भी हो रहा था और मज़ा भी आ रहा था…**

बस तेज़ चल रही थी… अँधेरा… और मैं अपनी ज़ैनब आपि के bade-bade चुचो को चुपचाप मसलता रहा…

आपि थक कर सो गयी. उसकी सर मेरी शोल्डर पे टिका हुआ था… सांसें dheere-dheere चल रही थी. उसकी moti-moti जांघें अभी भी मेरी जांघ से चिपकी हुई थी और उसके bade-bade चुचो हर सांस के साथ halke-halke हिल रहे थे. मैं आँखें बंद किये सोच रहा था… **… यह सुबह 5 बजे वाली बात… “अंदर hi”… “टेंशन मत लो”… कौन था वह? शायद ज़ैनब आपि का कोई पुराण यार है… कोई ऐसा लड़का जिसके साथ वह नानी के घर में मिलने वाली है… और मैं… मैं यहाँ उसके चुचो मसलता हुआ… और सोच रहा हूँ की मेरी सगी आपि किसी और के लुंड पे छोड़ने वाली है… मेरा लुंड पायजामा में फिर से तन गया… अह्ह्ह… कितना गन्दा मज़ा आ रहा था…**

बस सुबह 5 बजे नानी के घर के पास पहुँच गयी. रोड बिलकुल खली था… halka-halka अँधेरा अभी भी था. गांव 5 कम दूर था… यहाँ सिर्फ नानी का पुराण बड़ा मकान था जो गाओं से थोड़ा अलग था. हम दोनों उतरे… ठंडी सुबह की हवा में आपि ने अपना दुपट्टा सीने पे लपेटा… पर उसके bade-bade चुचो का उभार अभी भी साफ़ दिख रहा था.

अब मैं आपको नानी के घर के बारे में बता देता हूँ…

नानी… आगे 70+… बहुत बीमार रहती हैं… कमज़ोर… सिर्फ बिस्तर पे लेती रहती हैं…

बड़े मां अब्बास… आगे 50… mota-sa… शॉप चलते हैं… शख्त नेचर है… पर औरतों के मामले में बिलकुल रंगीनमिजाज.

बड़ी ममी सलमा… आगे 48… … यह माल है! फिगर अभी भी ज़बरदस्त… … सलवार सूट में उसके bade-bade दूध उभरे हुए… gol-gol… भरे हुए… चलते वक़्त zor-zor से हिलते हैं… गांड मोती और लचकती हुई… गोरी स्किन… होंठ गुलाबी… घर में टाइट सलवार पहनती हैं जिससे गांड के दोनों हिस्से alag-alag दीखते हैं.

उनकी बड़ी बेटी यास्मीन… आगे 28… मैरिड… पर पति बहार रहता है… … दूध बड़े और टाइट… गांड राउंड और मोती… जब चलती है तोह पूरी गांड हिलती है… चेहरा बहुत खूबसूरत… आँखें तेज़… बिलकुल मातुरे रंडी लुक.

उनकी छोटी बेटी बुशरा… आगे 20… कॉलेज जाती है… स्लिम पर जवान…… दूध मध्यम पर बहुत टाइट और उभरे हुए… गांड पतली पर उभरी हुई… लेग्गिंग्स में बहुत मस्त दिखती है… चेहरा मासूम पर आँखों में शैतानी.

छोटे मां ज़ुबैर… आगे 44… पतले… काम बोलते हैं.

छोटी ममी सना… आगे 42… यह भी कमल की माल है… … दूध बड़े और भरे हुए… गांड मोती और सॉफ्ट… गोरी… हमेशा टाइट सलवार सूट पहनती है… निप्पल का शेप भी kabhi-kabhi दिख जाता है.

उनकी बेटी इफ़्फ़त… आगे 20… बहुत शरीफ दिखती है पर फिगर ज़बरदस्त… … दूध gol-gol… गांड छोटी पर टाइट और उभरी हुई… घर में सलवार सूट में बहुत हॉट लगती है.

उनका बीटा अहम… आगे 18… नार्मल लड़का.

हम दोनों रोड पे खड़े थे जब आपि ने फ़ोन निकाला… रात वाले नंबर पे कॉल किया… फुसफुसाते हुए बोली…

**ज़ैनब आपि:** “हाँ… पहुँच गए… आ जाओ… जल्दी…”

कुछ 10 मिनट बाद… रोड के एन्ड से एक बाइक की लाइट आती दिख गयी. बाइक हमारे पास आकर रुकी… राइडर ने हेलमेट उतरा…



उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मैं देखते hi हैरान रह गया… **तो ये है ज़ैनब आपि का यार…???**
 
बाइक की लाइट dheere-dheere पास आती गयी… और जैसे hi राइडर ने हेलमेट उतरा… मेरा दिल एक सेकंड के लिए रुक गया.

**वो और कोई नहीं… हमारे बड़े मां अब्बास थे!**

आगे 50… mota-sa बदन… शख्त चेहरा… पर आज उनकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जो मैंने पहले कभी नहीं देखि. मां बाइक से उतरे… और सीधा मेरी तरफ देखा. मैं हैरानी से उनको घूर रहा था… दिमाग में सिर्फ एक hi बात घूम रही थी – **यह… यह बड़े मां… ज़ैनब आपि के रात वाले कॉल्स… सुबह 5 बजे मिलने वाली बात…… मतलब मेरी ज़ैनब आपि… बड़े मां से फँसी हुई है???**

मां ने पहले मुझे गले लगा लिया… ज़ोर से… “अरे असीम बीटा… कैसा है तू?” फिर उन्होंने ज़ैनब आपि की तरफ देखा… और एक गन्दी सी स्माइल के साथ उनको भी गले लगा लिया.

उफ्फ्फ्फ़… मैं बिलकुल पास खड़ा था… और saaf-saaf देख रहा था. मां ने आपि को गले लगते वक़्त अपना बड़ा हाथ धीरे से उनकी moti-moti गांड पे रख दिया… और चुपके से… zor-zor से सहलाने लगे. आपि की गांड इतनी मोती थी की मां का पूरा हाथ उसमें दुब गया… उन्होंने एक बार ज़ोर से दबाया भी. आपि ने हलकी सी सिसकी ली… पर हटाई नहीं… मां के सीने से और चिपक गयी.

मेरा लुंड पायजामा में एक ज़ोर का झटका मार बैठा. **पागल हो गया मैं… मतलब मेरी ज़ैनब आपि बड़े मां की रखेल है??? उनकी मोती गांड… जो मैं अभी अभी बस में मसल रहा था… अब बड़े मां के हाथों में… उफ्फ्फ्फ़… कितना गन्दा… कितना ज़बरदस्त मज़ा आ रहा था…**

मां ने गले से हटते वक़्त भी आपि की गांड पे एक और छुपा सा दबाव दिया… फिर मुस्कुराते हुए बोले,

**मां:** “चलो… घर का haal-chal तोह बताओ… नानी की तबियत अभी भी ख़राब है… लेकिन अब तुम दोनों आ गए हो तोह उनको थोड़ा आराम मिलेगा.”

आपि ने सिर्फ हाँ में सर हिला दिया… गाल लाल… आँखें नीचे… पर उसकी सांसें अभी भी तेज़ थी. मां ने बाइक स्टार्ट की और बोलै,

**मां:** “चलो… घर चलते हैं… रात भर सफर किया है… थक गए होंगे.”

पहले मां बैठे… फिर ज़ैनब आपि उनके पीछे… और सबसे पीछे मैं. जैसे hi आपि बैठी… उसके bade-bade चुके सीधा मां की पीठ पे ज़ोर से डाब गए. सूट के ऊपर से भी उनकी गरम सॉफ्टनेस फील हो रही थी… हर बाइक के झटके पे आपि के चुके मां की पीठ पे upar-neeche रगड़ रहे थे.

मैं पीछे बैठा था… मेरा लुंड अभी भी खड़ा था. मैंने धीरे से अपना हाथ आपि की राइट जांघ पे रख दिया… और उँगलियों से halke-halke सहलाने लगा… जैसे बस में कर रहा था. पर जैसे hi मेरा हाथ उनकी जांघ पे पड़ा… आपि ने झटके से मेरा हाथ हटा दिया… और पीछे मुद कर मुझे गुस्से भरी नज़रों से देखा…… पर उसकी आँखों में एक वार्निंग थी – “अभी नहीं… मां के सामने नहीं…”

उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मैं और पागल हो गया. आपि के bade-bade चुचो मां की पीठ पे डाब रहे थे… मां की गांड पे उनकी छूट बिलकुल चिपकी हुई थी… और मैं पीछे बैठा… सिर्फ देख रहा था… हाथ हटा दिया गया… पर मेरा लुंड अभी भी झटके मार रहा था… सोच रहा था की **मेरी ज़ैनब आपि… बड़े मां की रखे है

मेरा दिमाग पूरा गरम हो चूका था…


सुबह होने को था… बिलकुल halka-halka अँधेरा अभी भी छाया हुआ था. नानी के पुराने बड़े मकान में सन्नाटा था. सब लोग अभी सोये हुए थे – नानी अपने कमरे में, ममी और दूसरे लोग apne-apne रूम्स में. मां ने बाइक पार्क की और धीरे से बोलै,

**मां:** “असीम बीटा… तू थक गया होगा… यह वाला कमरा ले ले, आराम कर. मैं ज़ैनब को उसका कमरा दिखा देता हूँ… थोड़ी देर बाद नाश्ता कर लेंगे.”

मैं सर हिला दिया और अपने दिए गए कमरे में चला गया. बहुत थक गया था… बस की रात भर की सफर ने पूरा बदन तोड़ दिया था. लेटते hi आँख लग गयी.

लेकिन सिर्फ 20 मिनट बाद hi मेरी आँख खुल गयी.. मैं उठा, मुँह धोया और बहार निकल आया. घर में अभी भी ख़ामोशी थी… सब सोये हुए थे.

तभी… किचन की तरफ से halki-halki फुफुसाने की आवाज़ आयी.

**“शठ… धीरे… कोई उठ गया तोह…”**

मेरी साँसे तेज़ हो गयी. मैं चुपके से किचन के दरवाज़े के पास पहुंचा… दरवाज़ा थोड़ा खुला था. अंदर झाँक कर देखा तोह… **उफ्फ्फ्फ़… मेरा होश उड़ गया!**

अंदर बड़े मां और मेरी ज़ैनब आपि खड़े थे… बिलकुल चिपके हुए.

मां ने आपि को दीवार से सत्ता रखा था. उनका मोटा बदन आपि के चब्बी फिगर पे बिलकुल दबा हुआ था. मां का एक हाथ आपि के bade-bade दूध पे था… सूट के ऊपर से hi zor-zor से मसल रहा था. दूध इतने भरे हुए थे की मां के मोठे हाथों में भी उभर रहे थे… निप्पल का शेप सूट के कपडे पे साफ़ दिख रहा था. दूसरा हाथ मां ने आपि की moti-moti गांड पे रख रखा था… सूट के ऊपर से hi दोनों गोल हिस्से को ज़ोर से सहला रहा था… कभी दबा रहा था… कभी ऊँगली से बीच की लाइन पे रगड़ रहा था.

आपि की सांसें तेज़ हो चुकी थी. उसकी आँखें बंद थी… होंठ हलके से खुले हुए… चेहरा पूरा लाल. उसने अपनी कमर थोड़ी सी पीछे करके मां के हाथ में अपनी गांड और ज़ोर से दबा दी थी. मां का मुँह आपि के गले पे था… dheere-dheere चूस रहा था… कभी जीभ से चाट रहा था… कभी हलके से काट रहा था.

**मां (फुफुसाते हुए, गरम आवाज़ में):** “उफ्फ्फ्फ़ ज़ैनब… कितने दिन से तड़प रहा था तेरी इस मोती गांड को… अह्ह्ह… देख कितनी सॉफ्ट है… सूट के ऊपर से भी महसूस हो रहा है… कितनी लचकती है… मैं तोह रोज़ सोचता था तेरे बारे में… लेकिन अब तोह तुझे सीधा अपने नीचे लिटा के… अह्ह्ह…”

आपि ने हलकी सी सिसकी ली… उसने अपना हाथ मां के सीने पे रख दिया… और धीरे से उसके कान में बोली,

**ज़ैनब आपि (सिसकती हुई):** “मां… धीरे… कोई उठ गया तोह… उफ्फ्फ्फ़… तुम्हारा हाथ… मेरी गांड पे… अह्ह्ह… बहुत ज़ोर से मत… हहैयय… पर… पर मत हटाओ… कितने दिन हो गए… मेरी छूट तड़प रही थी… अह्ह्ह…”

मां ने मुस्कुराते हुए आपि के दोनों bade-bade दूध को दोनों हाथों से पकड़ लिया… सूट के ऊपर से hi zor-zor से मसलने लगा… ऊपर से नीचे… gol-gol घूमता… निप्पल को उँगलियों के बीच में पकड़ के हलके से मरोड़ता. आपि की सांस रुकने लगी… उसने अपनी गांड मां के लुंड पे रगड़ने शुरू कर दी… बिलकुल dheere-dheere… जैसे मज़ा ले रही हो.

**मां (गरम होते हुए):** “देख तेरी चूचियां… कितनी टाइट हो गयी हैं… ब्रा के ऊपर से भी उभर रही हैं… मैं इनको मुँह में लेके चूसना चाहता हूँ… निप्पल को काटना चाहता हूँ… अह्ह्ह… और तेरी मोती गांड… इसको घोड़ी बना के… अह्ह्ह… बस अब रुक नहीं प् रहा…”

आपि ने आँखें खोली… हवस भरी नज़रों से मां को देखा… फिर धीरे से उसके होंठ पे अपना ऊँगली रख दी और मुस्कुराते हुए बोली,

**ज़ैनब आपि:** “बस अभी नहीं… सब यहीं है… लेकिन… हाथ मत हटाओ… मसलते रहो… मेरी चूचियां… मेरी गांड… उफ्फ्फ्फ़… बहुत मज़ा आ रहा है मां… अह्ह्ह…”

मां ने और ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया… दोनों हाथों से आपि के bade-bade दूध को daba-daba के… कभी एक को ऊपर उठा के… कभी दोनों को एक साथ जकड के… और नीचे हाथ से गांड को zor-zor से सहलाते हुए. आपि अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी… उसकी गांड मां के हाथ में हिल रही थी… सांसें तेज़… होंठ खुले… बिलकुल एक तड़पती हुई औरत जैसी लग रही थी.

मैं दरवाज़े के बहार खड़ा था… अपना लुंड पायजामा के ऊपर से पकड़ लिया था… dheere-dheere हिलने लगा था. **उफ्फ्फ्फ़ … मेरी ज़ैनब आपि बड़े मां के हाथों में अपनी चूचियां और गांड मसलवा रही है…… garam-garam बातें कर रही है… और मैं… मैं यहाँ चुपके देख रहा हूँ… मेरा लुंड खड़ा हो गया…

किचन में वह दोनों अभी भी dheere-dheere रोमांस कर रहे थे… हाथों से एक दूसरे को फील कर रहे थे…

फिर मैं चुपके से अपने कमरे में वापस आ गया. दिल में अभी भी वह किचन का नज़ारा घूम रहा था… बड़े मां का मोटा हाथ मेरी ज़ैनब आपि की मोती गांड पे… उनके bade-bade दूध को zor-zor से मसलता हुआ… और आपि की सिसकियाँ… “मां… मत हटाओ…” उफ्फ्फ्फ़… सोचते hi मेरा लुंड फिर से तन गया. मैंने दरवाज़ा बंद किया, बिस्तर पे लेट गया और आँखें बंद कर ली.*

फिर मुझे नींद आ गयी…


सुबह 9 बजे जब मेरी आँख खुली तोह घर में खुशियों की gun-gun सुनाई दे रही थी. मैं जल्दी से उठा, मुँह धोया और हॉल की तरफ बढ़ गया.

हॉल में पूरी फॅमिली इकट्ठी थी… बिलकुल खुसी जैसा माहौल था. सब लोग khushi-khushi बातें कर रहे थे, हंस रहे थे, गले मिल रहे थे. नानी भी थोड़ी सी ठीक फील कर रही थी हमें देख कर, सोफे पे बैठी मुस्कुराती हुई सबको देख रही थी.

सबसे पहले मेरी नज़र पड़ी **बड़ी ममी सलमा** पे… आगे 48… उफ्फ्फ्फ़ क्या माल थी! टाइट सलवार सूट में उनके bade-bade दूध इतने उभरे हुए थे की सूट के कपडे टाइट पद रहे थे. दूध gol-gol, भरे हुए, हर सांस के साथ halke-halke हिल रहे थे. गांड मोती और लचकती हुई… जब वह उठ कर चाय लेने गयी तोह दोनों मोती गांड alag-alag हिलने लगी. चेहरा गोरा, होंठ गुलाबी… बिलकुल मातुरे औरत का असली माल.

उनके साथ **बड़े मां अब्बास** बैठ थे… उन्होंने मुझे देखा और मुस्कुराते हुए बोले, “अरे असीम बीटा… उठ गया? आ बैठ.”

फिर **छोटे मां ज़ुबैर** और **छोटी ममी सना**… सना ममी भी कमल की थी… आगे 42… उनके दूध बड़े और टाइट, सूट के ऊपर से भी निप्पल का हल्का उभार दिख रहा था. गांड सॉफ्ट और मोती… जब वह हंसी तोह उनकी पूरी गांड हिल गयी.

उनके साथ उनकी बेटी **इफ़्फ़त**… आगे 20… बहुत शरीफ दिखती थी पर फिगर ज़बरदस्त. टाइट सलवार में उसके gol-gol दूध उभरे हुए थे… गांड छोटी पर टाइट और उभरी हुई… जब वह बैठी तोह मेरी नज़र उसकी जाँघों पे अटक गयी.

बड़ी ममी के पास उनकी दोनों बेटियां बैठी थी – **यास्मीन** (28, मैरिड) और **बुशरा** (20). यास्मीन का फिगर तोह बिलकुल आग था… bade-bade दूध, मोती लचकती गांड… सलवार सूट में इतनी टाइट की दूध फटने को हो रहे थे. बुशरा थोड़ी स्लिम थी पर जवानी पूरी उभरी हुई… लेग्गिंग्स में उसकी पतली कमर और उभरी गांड देख कर मेरा लुंड हल्का सा हिल गया.

सब लोग एक दूसरे से बातें कर रहे थे, पुराने दिनों की यादें ताज़ा कर रहे थे. हॉल में ख़ुशी का माहौल था… सब है रहे थे, मस्ती कर रहे थे.

मैं वहां बैठा था… सबको देख रहा था… पर अंदर से सोच रहा था – **उफ्फ्फ… यह बड़ी ममी… यह यास्मीन… यह बुशरा… सबके फिगर्स देख कर लुंड खड़ा हो रहा है… और मेरी ज़ैनब आपि… जो अभी रात में मेरे हाथ पे झाड़ चुकी थी… वह बड़े मां की रखेल निकली… अभी भी उनकी आँखों में वही गन्दी चमक है… जैसे अभी भी आपि की गांड को याद कर रहे हों… अह्ह्ह… कितना गन्दा मज़ा आ रहा है……**

ज़ैनब आपि मेरे बिलकुल सामने बैठी थी… लाइट ब्लू सलवार सूट में… दूध उभरे हुए… गांड सीट पे डाब रही थी. उसने मुझे देखा… आँखों में एक गन्दी स्माइल थी…

बड़े मां ने चाय का कप उठाया और आपि की तरफ देखते हुए धीरे से मुस्कुराये… और मैं… मैं सब देख रहा था… चुपके से… अपना लुंड पायजामा के अंदर दबा दिया..

बड़े मां ने चाय का कप टेबल पे रख दिया और ज़ोर से बोले,

**बड़े मां:** “अरे क्या बैठ गए सब? मैं ज़ैनब को खेत घुमा कर ले आता हूँ. बहुत दिन बाद आयी है… गांव की यादें ताज़ा कर आएगी. असीम बीटा तू आराम कर, हम जल्दी वापस आ जायेंगे.”

सब ने हाँ में सर हिला दिया. ममी लोग किचन में बिजी हो गए. मैं चुपचाप बैठा था, पर सब समझ गया था — यह “खेत घूमना” सिर्फ बहाना है. मां की आँखों में वही रात वाली हवस थी… और ज़ैनब आपि ने मुझे एक छोटी सी स्माइल दी..

लेकिन मैं कौन था जो छोड़ देता? मैं तुरंत उठा और छोटे मां के बेटे **अहम** (18 साल का मेरा कजिन भाई) को पकड़ लिया. वह हॉल में फ़ोन देख रहा था.

**मैं (अहम के कान में धीरे से):** “अहम चल बहार घूम कर आते हैं… यहाँ baith-baith बोर हो रहा हूँ.”

अहम ने मुस्कुराते हुए हाँ कर दी. हम दोनों बहार निकल गए और सीधा खेतों की तरफ बढ़ गए. मैं जानता था मां और आपि किस तरफ गए हैं — पुराने खेतों की तरफ… वही उनका पुराण अड्डा है.

हम दोनों dheere-dheere खेतों में घुस गए. धुप तेज़ थी, लेकिन मेरा दिल और तेज़ धड़क रहा था. थोड़ी दूर जाते hi… एक बड़ी झाडी के पीछे से halki-halki आवाज़ें आने लगी.

**“सलूरररप… ग्लुक… ग्लुक… अह्ह्ह… अब्बास… और अंदर…”**

मेरा लुंड पायजामा में एक ज़ोर का झटका मार बैठा. मैं अहम को इशारे से चुप रहने को बोलै और दोनों झाडी के बिलकुल पास चुपके से बैठ गए. वहां से पूरा नज़ारा साफ़ दिख रहा था.

**उफ्फफ्फ्फ़ दोस्तों… जो नज़ारा दिखा… मेरे होश उड़ गए!**

बड़े मां लुंगी ऊपर करके खड़े थे… उनका mota-kaala 9 इंच का लुंड बहार निकला हुआ था… नसें उभरी हुई… टोपा चमक रहा था पानी से. और मेरी सगी ज़ैनब आपि… पागलो की तरह घुटनो पे बैठी थी… दोनों हाथों से मां का लुंड पकडे हुए… zor-zor से चूस रही थी!

उसकी गुलाबी होंठ पूरे लुंड को निगल रहे थे… कभी टोपा को जीभ से चाट रही थी… कभी पूरा हलक तक अंदर ले लेती थी… लार tapak-tapak के मां के लुंड और बॉल्स पे बह रहा था. आपि की आँखें बंद थी… चेहरा लाल… सांसें तेज़… बिलकुल एक भूखी रंडी जैसी लग रही थी मेरी सगी आपि.

**ज़ैनब आपि (लुंड मुँह से निकालते हुए, सिसकती हुई):** “उफ्फ्फ्फ़ अब्बास मां… कितना मोटा… कितना गरम है तेरा लुंड… अह्ह्ह… कितने दिन से तड़प रही थी इसके लिए… सलूरररप… … अह्ह्ह…”

मां ने उसके बाल पकड़ लिए और ज़ोर से धक्के मरने लगे… लुंड आपि के हलक तक घुसेड़ रहे थे.

**बड़े मां (गन्दी आवाज़ में):** “ले रंडी… चूस अपने मां का लुंड… तेरी सगी बेहेन अनाम भी इतना अच्छा नहीं चुस्ती… तू असली चैनल है… अह्ह्ह… थूक निकाल… और ज़ोर से… उफ्फ्फ्फ़… रंडी बन गयी है तू…”

अहम मेरे बिलकुल पास बैठा था… उसने पूरा सन देख लिया… उसका मुँह खुला रह गया… लेकिन उसके होंठ पे एक मुस्कराहट आ गयी. वह शर्मा रहा था क्युकी मैं उससे बड़ा था… पर उसकी नज़र भी नहीं हैट रही थी.

फिर मां ने आपि को उठाया… झाडी के सामने घोड़ी बना दिया. आपि ने अपना सलवार और पंतय नीचे कर दिया… moti-moti गोरी गांड ऊपर उठा दी… छूट बिलकुल गीली और पहली हुई… bade-bade दूध नीचे लटक रहे थे.

मां ने पीछे से लुंड सेट किया… और एक hi ज़ोर का धक्का मारा!

**धायआपपप!!!**

**ज़ैनब आपि:** “आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… मां… फाड़ दिया… उफ्फ्फ्फ़… बहुत मोटा है… अह्ह्ह… और ज़ोर से… फाड़ दो मेरी छूट… मैं तेरी रंडी हूँ अब्बास मां… अह्ह्ह्हह…”

मां बेदर्दी से धक्के मरने लगे… हर धक्के पे आपि की मोती गांड ज़ोर से टकरा रही थी… उसके bade-bade दूध latak-latak के हिल रहे थे… पूरा खेत “dhap-dhap-dhap” की आवाज़ से गूँज रहा था.

हम दोनों दूर से सब देख रहे थे. अहम शर्मा रहा था… आँखें नीचे कर रहा था… पर उसका हाथ अपनी पंत पे चला गया था… dheere-dheere सहलाने लगा.

मैं धीरे से अहम के कान में बोलै… बिलकुल गन्दी आवाज़ में,

**मैं:** “अहम… देख… ज़ैनब आपि… अपने hi मां का लुंड ले रही है… उफ्फ्फ्फ़… कितनी रंडी है साली… देखो उसकी गांड कैसे हिल रही है… अह्ह्ह… उसके bade-bade दूध लटक रहे hain…Mama का मोटा लुंड निगल रही है… कितनी गन्दी लग रही है ज़ैनब आपि?”

अहम पहले तोह हैरान हो गया… उसने मुझे शॉकेड नज़रों से देखा… पर फिर उसकी नज़र वापस आपि की गांड पे चली गयी. उसका हाथ और तेज़ हो गया… पंत के ऊपर से लुंड सहलाने लगा.

**अहम (शरमाते हुए, फिर गरम होते हुए):** “भाई… यह… यह सच में है? उफ्फ्फ्फ़… कितनी मस्त गांड है… अह्ह्ह… मैं तोह पहले कभी सोचा भी नहीं था…”

मैं और गन्दी बातें करने लगा…





अहम अब पूरा गरम हो चूका था… उसने पंत का नाडा खोल दिया… अपना लुंड बहार निकाल लिया और tez-tez हिलने लगा. हम दोनों दूर से देख रहे थे… मां आपि को zor-zor से छोड़ रहा था… आपि सिसक रही थी… “और ज़ोर से मां… फाड़ दो… अह्ह्ह्हह…”

मैं अहम के सामने hi और गन्दी बातें कर रहा था…

**मैं:** “अहम… देख ज़ैनब आपि कितनी बड़ी चुड़क्कड़ है… देखो मां उसकी गांड पे थप्पड़ मार रहे हैं… लाल हो गयी है… अह्ह्ह… यह रंडी पहले से hi मां की रखेल है… बोल… तू भी चाहता है न इस रंडी आपि को छोड़ना?”

अहम अब शर्मा नहीं रहा था… पागलो की तरह लुंड हिला रहा था और धीरे से बोलै, “भाई… बहुत मस्त है… उफ्फ्फ्फ़…”

मां जोर जोर से गाली देते हुए आपि के छूट में झाड़ gaye....“ahhh… फाड़ दिया मां". मां ने ज़ोर से एक फाइनल धक्का मारा और अपना गरम माल आपि की छूट में hi छोड़ दिया. आपि का पूरा बदन काँप उठा… उसने अपनी गांड पीछे करके मां के लुंड को और अंदर तक निगल लिया… फिर थक कर झाडी के सामने hi लेट गयी.

मां ने अपना लुंड बहार निकला… जो अभी भी चमक रहा था आपि के रास और अपने माल से. उन्होंने लुंगी नीचे की, आपि के गाल पे एक थप्पड़ मारा और हंस के बोलै,

**बड़े मां:** “ले रंडी… अब उठ… कपडे पेहेन ले… घर चलते हैं… वर्ण किसी को शक हो जायेगा.”

आपि ने थक कर उठी… सलवार ऊपर की… दूध को सूट में ठीक किया… गांड पे लगे हुए माल को हाथ से साफ़ किया… और दोनों धीरे से वहां से निकल गए. मां आगे… आपि पीछे… दोनों की चल में अभी भी थकान और मस्ती दिखाई दे रही थी.

जैसे hi वह दूर गए… मैं अहम के कंधे पे हाथ रख के खड़ा हो गया. अहम अभी भी शॉक में था… उसका लुंड पंत से बहार निकला हुआ… हाथ से पकड़ा हुआ… सांस तेज़.

मैं मुस्कुराते हुए उसके कान में बोलै,

**मैं:** “अहम… देख लिया न? आपि ज़ैनब… अपने hi मां का लुंड निगल रही थी… उफ्फ्फ्फ़… कितनी बड़ी रंडी है साली… अब बोल… तेरा लुंड अभी भी खड़ा है न इस रंडी आपि को देख कर?”

अहम शर्मा गया… उसने झट से अपना लुंड पंत में छुपाया… आँखें नीचे कर ली और हिचकिचाते हुए बोलै,

**अहम:** “भाई… यह… यह गलत है… वह हमारी आपि है… मैं… मैं नहीं देखना चाहता था…”

मैं हंस पड़ा… उसके बिलकुल पास बैठ गया और उसके कंधे पे हाथ रख के ज़ोर से दबाया,

**मैं:** “अरे हरामी… शर्मा क्यों रहा है? देख… मैं भी देख रहा था… और मेरा लुंड भी खड़ा था… बोल सच… तेरा लुंड अभी भी तन रहा है न? आपि की मोती गांड देख कर… उसके bade-bade दूध लटकते हुए… मां का लुंड उसकी छूट में घुसता हुआ… उफ्फ्फ्फ़… बोल न… कितना मज़ा आ रहा था देखने में?”

अहम और शर्मा गया… उसने आँखें बंद कर ली… पर मैंने उसके हाथ को पकड़ के उसकी पंत पे रख दिया और ज़ोर से बोलै,

**मैं:** “अहम… अब छुपाना बंद कर… मैं तेरा बड़ा भाई हूँ… सच बोल… वर्ण मैं सबको बता दूंगा की तू क्या देख रहा था… बोल… घर की औरतों के बारे में क्या सोचता है? ”

अहम पहले तोह बिलकुल चुप हो गया… उसका चेहरा लाल पद गया… हाथ काँप रहे थे. मैंने उसको और फाॅर्स किया… उसके कान में गन्दी बातें करने लगा,

**मैं:** “बोल मादरचोद… तेरी अम्मी सना… उसके bade-bade दूध… मोती गांड… तू कभी देखा है क्या उसको नंगा? बोल… वर्ण मैं अभी मां को बुला के बता दूंगा की तू क्या कर रहा था यहाँ…”

अहम दर गया… उसने धीरे से आँखें खोली… सांस तेज़ करते हुए darte-darte बोलै,

**अहम:** “भाई… प्लीज किसी को मत बताना… एक दिन… एक दिन मैंने अपनी अम्मी को नहाते हुए देख लिया था…”

मैं और पास आ गया… उसके कान में गरम सांस छोड़ते हुए बोलै,

**मैं:** “बोल मादरचोद… पूरा बता… कैसे देखा? कहाँ? क्या क्या देखा? तेरी अम्मी सना…… उसके नंगे बदन का पूरा सन बता……”

अहम अब रुक नहीं प् रहा था… दर और हवस के बीच में फँस गया था… उसने dheere-dheere बताना शुरू किया…

**अहम (डरते हुए, आवाज़ कांपती हुई):** “भाई… वह… गर्मी के दिन थे… मैं स्कूल से जल्दी आ गया था… घर में कोई नहीं था… मैं बाथरूम के पास गया तोह दरवाज़ा थोड़ा खुला था… मैंने झाँक कर देखा… अम्मी नहाने के लिए कड़ी थी… सलवार सूट उतर चुकी थी… सिर्फ ब्रा और पंतय में… फिर उन्होंने ब्रा भी खोल दिया… उफ्फ्फ्फ़ भाई… अम्मी के bade-bade दूध… बिलकुल गोल… भरे हुए… निप्पल laal-laal और टाइट… पानी उनके दूध पे से टपक रहा था… फिर उन्होंने पंतय भी नीचे कर दी… moti-moti गोरी गांड… बीच में छूट का हल्का सा उभार… पानी से चमक रही थी… मैं वहां खड़ा… अपना लुंड पकड़ के देख रहा था… अम्मी ने शैम्पू लगाया… दूध हिल रहे थे… गांड हिल रही थी… मैं… मैं वहां खड़ा मुठ मरने लगा था भाई… फिर अम्मी ने मुँह धोया… पानी उनके मुँह से… दूध पे… गांड पे बह रहा था… मैं झाड़ गया था वहां khade-khade…”

मैं सुन कर पागल हो गया… मेरा लुंड पायजामा में फटने को हो रहा था. मैंने अहम के कंधे को ज़ोर से पकड़ा और बोलै,

**मैं:** “उफ्फ्फ्फ़ मादरचोद… तेरी अम्मी सना… तू देख रहा था और मुठ मार रहा था? बोल… अब भी याद करके लुंड खड़ा होता है न? बोल… और क्या देखा था? क्या सोचता है अब तेरी अम्मी के बारे में?”

अहम अब रुक नहीं प् रहा था… उसने अपना लुंड फिर से बहार निकाल लिया… dheere-dheere हिलाते हुए बोलै,

**अहम (शर्म और हवस में):** “भाई… रोज़ याद आता है… अम्मी के वह बड़े दूध… वह मोती गांड… मैं सोचता हूँ… अगर कभी मौका मिला तोह… उफ्फ्फ्फ़…”

मैं हंस पड़ा… उसके कान में और गन्दी बातें करने लगा…

**मैं:** “मादरचोद… तेरी अम्मी भी रंडी है… जैसे अपनी आपि ज़ैनब है… देख… एक दिन हम दोनों मिलके तेरी अम्मी को भी छोड़ेंगे… उसके bade-bade दूध मसालेंगे… मोती गांड पे थप्पड़ मरेंगे… बोल… तेरा लुंड और तेज़ हिल रहा है न अब?”

अहम अब पूरा पागल हो चूका था… tez-tez लुंड हिला रहा था… आँखें बंद… और धीरे से “हाँ भाई…” बोल रहा था.

**उफ्फ्फ्फ़ … खेतों में आपि की चुदाई देखने के बाद अब अहम के मुँह से उसकी अपनी अम्मी की नंगी बाते सुन रहा था… दोनों लुंड हिला रहे थे…
 
मैं खेत से वापस आया तोह दिल में एक आग सी लग रही थी. मां ने ज़ैनब आपि की छूट में अपना माल भर दिया था… और मैं और अहम दूर से सब देख रहे थे. मेरा लुंड अभी भी पायजामा में तन कर खड़ा था.



घर पहुँचते hi मैं सीधा ज़ैनब आपि के रूम की तरफ बढ़ गया. दरवाज़ा थोड़ा खुला था. अंदर से halki-halki बातें की आवाज़ आ रही थी.

मैं धीरे से अंदर झाँका…… वहां ज़ैनब आपि बीएड पे बैठी थी और उसके सामने **बुशरा** और **इफ़्फ़त** बैठी थी – दोनों मां की बेटियां. बुशरा की टाइट सलवार में उसके gol-gol दूध उभरे हुए थे, इफ़्फ़त की लेग्गिंग्स में उसकी उभरी गांड साफ़ दिखाई दे रही थी. तीनो कुछ बातें कर रही थी.

जैसे hi उन्होंने मुझे दरवाज़े पे देखा… दोनों लड़कियां एक सेकंड में शॉक हो गयी. बुशरा का चेहरा लाल पद गया, इफ़्फ़त ने झट से अपना दुपट्टा सीने पे लपेटा और दोनों उठ कर भाग गयी… “आपि हम बाद में आएंगे!” बोलते हुए.

रूम में सिर्फ मैं और ज़ैनब आपि रह गए.

मैं अंदर घुस गया और दरवाज़ा धीरे से बंद कर दिया. आपि बीएड पे बैठी थी… लाइट ब्लू सलवार सूट अभी भी थोड़ा ast-vyast था. दूध के उभार अभी भी ज़ोर से दिख रहे थे. मैं उसके बिलकुल सामने खड़ा हो गया और सीधा पुछा,

**मैं:** “आपि… अब सच बताओ. मां से कब से चल रहा ये सब? और अभी खेत में जो हुआ… वह सब कैसे शुरू हुआ? मैं सब जानना चाहता हूँ….”

ज़ैनब आपि ने मेरी आँखों में देखा… एक गन्दी सी मुस्कराहट आयी उसके होंठ पे. उसने उठ कर दरवाज़ा पूरा लॉक कर दिया… फिर वह धीरे से मेरे पास आयी… दोनों हाथों से मेरा कालर पकड़ा और मुझे ज़ोर से धकेल कर बीएड पे लिटा दिया.

और आपि सीधा मेरे ऊपर चढ़ गयी. उसकी moti-moti गांड मेरे लुंड पे ज़ोर से डाब गयी. सलवार के ऊपर से भी उसकी गरम छूट फील हो रही थी. उसने दोनों हाथों से मेरा चेहरा पकड़ा… और सीधा मेरे होंठ पे अपने गुलाबी होंठ रख दिए.

**चुस्स्सस्स… सलूरररप…**

ज़ैनब आपि पागलो की तरह किश करने लगी. उसकी जीभ मेरे मुँह में घुसा दी… zor-zor से andar-bahar करने लगी. लार टपक रही थी दोनों के मुँह से. मैं भी उसके होंठ चूसने लगा… जीभ से उसकी जीभ लड़ने लगा.

**ज़ैनब आपि (सिसकती हुई):** “उफ्फ्फ्फ़ असीम… तू मेरा छोटा भाई है… पर अब तू मेरा सबसे बड़ा हरामी बन गया है… अह्ह्ह…

आपि ने अपनी कमर ऊपर की… सलवार का नाडा खोल दिया… और पंतय के साथ सलवार नीचे सरक दी. उसकी गीली छूट बिलकुल मेरे मुँह के ऊपर आ गयी. मां का माल अभी भी उसकी छूट के मुँह पे लगा हुआ था… कुछ बूँदें टपक रही थी… छूट के अंदर से भी निकल रहा था.

**ज़ैनब आपि (गांड मेरे मुँह पे रगड़ते हुए):** “चाटो … अपनी आपि की छूट… उफ्फ्फ्फ़… जीभ अंदर दाल… पूरी चाट ले मेरी गन्दी छूट…”

मैंने दोनों हाथों से उसकी मोती गांड पकड़ी… ज़ोर से फैलाया… और मुँह लगा दिया!

**स्लुर्र्र्रॉप… पूछ पूछ… ग्लुक ग्लुक…**

मां का garam-garam माल मेरे मुँह में आ रहा था… नमकीन… चिपचिपा… उसके छूट के रास के साथ मिक्स. मैं पागलो की तरह चाटने लगा… जीभ पूरी अंदर दाल के अंदर तक घुमा रहा था… क्लीट को जीभ से पकड़ के चूस रहा था… हर बूँद तक पि रहा था.

**ज़ैनब आपि (पागलो की तरह सिसकती हुई, गांड मेरे मुँह पे रगड़ते हुए):** “अह्ह्ह्हह… असीम… बीटा… कितना अच्छा चाट रहा है… उफ्फ्फ्फ़… … अह्ह्ह… और ज़ोर से… जीभ अंदर… हहैयय… मैं तेरी रंडी हूँ… चाटो कुत्ते… पूरी गन्दी छूट चाट ले… अह्ह्ह्हह…”

आपि अब upar-neeche हिल रही थी… उसकी मोती गांड मेरे मुँह पे zor-zor से रगड़ रही थी… दूध सूट के ऊपर से hi उभर रहे थे. उसने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर मेरा लुंड पकड़ लिया… पायजामा के ऊपर से hi zor-zor से हिलने लगी.

**ज़ैनब आपि (सिसकते हुए):** “देख… तेरा लुंड कितना खड़ा है… मां ने मेरी छूट फाड़ी… … और तेरा लुंड फूल रहा है… अह्ह्ह… हरामी… अब बता… पूरा देख लिया था न खेतो में? बोल… कितना मज़ा आया देखने में… अह्ह्ह… चाटो और ज़ोर से…”

मैं जीभ और तेज़ घुमा रहा tha…aapi का गरम रास निकल रहा था. आपि का पूरा बदन काँप रहा था… उसकी गांड मेरे मुँह पे ज़ोर से डाब रही थी…

**ज़ैनब आपि:** “अह्ह्ह्ह… असीम… आ रही हूँ… मेरा रास पि ले… अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… ले बीटा… ले अपनी आपि का गरम पानी… uffffffffff…”

और आपि मेरे मुँह पे ज़ोर से झाड़ गयी… उसकी छूट से गरम रास की धार निकल कर मेरे मुँह में भर गयी. मैं ने कुछ भी वास्ते नहीं किया… सब पि लिया… जीभ से चूसता रहा.

आपि थक कर मेरे ऊपर hi लेट गयी… उसकी चूचियां मेरे सीने पे डाब रही थी… सांसें तेज़… होंठ मेरे गले पे…

ज़ैनब आपि मेरे ऊपर लेती हुई थी… उसकी moti-moti गांड मेरे लुंड पे डाब रही थी.…”

उसने झट से मेरे पायजामा का नाडा खोला… पंत और अंडरवियर दोनों एक साथ नीचे सरका दिए. मेरा लुंड एक झटके से बहार आ गया… पूरा तन कर खड़ा… टोपा से पानी टपक रहा था.

आपि ने उसको देखा और आँखें बड़ी कर ली…

उसने दोनों हाथों से मेरा लुंड पकड़ा… जीभ निकाली… और सीधा टोपा पे लगा दी. **स्लुर्र्र्रॉप…** पहली जीभ से hi पूरा टोपा चाट लिया. फिर मुँह खोल कर… dheere-dheere… पूरा लुंड अंदर ले लिया… हलक तक…

**ग्लुक… ग्लुक… सलूरररप… पूछ पूछ…**

आपि पागलो की तरह चूसने लगी. उसकी गुलाबी होंठ मेरे लुंड को जकड रहे थे… जीभ नीचे से बॉल्स तक चाट रही थी… कभी पूरा अंदर ले लेती… कभी बहार निकाल के टोपा को चूसती… लार tapak-tapak के मेरे बॉल्स पे बह रही थी. उसकी आँखें ऊपर करके मुझे देख रही थी… बिलकुल रंडी जैसी नज़र से.

**ज़ैनब आपि (लुंड मुँह से निकालते हुए, लार से भरे होंठ से):** “अह्ह्ह… बीटा… तेरा लुंड कितना स्वाद है……”

मैं उसके बाल पकड़ के ज़ोर से धक्के मरने लगा… लुंड उसके मुँह में पेल रहा था.

कुछ देर बाद आपि ने लुंड मुँह से बहार निकला… लार के तार बन रहे थे उसके होंठ से मेरे लुंड तक. उसने झट से अपनी सलवार और पंतय पूरी उतार दी… नंगी हो गयी… moti-moti गांड… गीली छूट… bade-bade दूध सब मेरे सामने.

फिर सीधा मेरे ऊपर चढ़ गयी… दोनों टाँगे मेरे कमर के दोनों तरफ… और अपनी गीली छूट मेरे लुंड के टोपा पे सेट की.

**ज़ैनब आपि (गांड हलकी सी नीचे करके):** “अब… अब असली मज़ा आएगा…”

एक hi धक्के में… पूरा लुंड उसकी छूट में उतर गया!

**धायआपपप!!!**

**ज़ैनब आपि:** “आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… फाड़ दिया… उफ्फ्फ्फ़… … अह्ह्ह… पूरा अंदर तक… मेरी छूट पहात गयी… हहैयय…”

आपि upar-neeche होने लगी… jor-jor से… उसकी मोती गांड मेरे तइस पे टकरा रही थी… bade-bade दूध zor-zor से upar-neeche हिल रहे थे… निप्पल सख्त हो चुके थे.

मैं नीचे से धक्के मरने लगा… zor-zor से… और गालियां देने लगा…

**मैं (धक्के मारते हुए, गरम आवाज़ में):** “ले साली रंडी… ले कुटिया…… और ज़ोर से उछाल… अह्ह्ह… मैंने खेत में सब देख लिया… मां ने तेरी छूट फाड़ दी थी… तू उसके लुंड पे उछाल रही थी… गांड hila-hila के… उफ्फ्फ्फ़… मुझे बहुत मज़ा आया देखने में… तेरी सगी आपि… अपने मां से चुद रही थी… और मैं देख रहा था… अह्ह्ह… और मज़ा आता है जब तू दुसरो से चुदती है… ले मादरचोद… और तेज़ उछाल… तेरी छूट अब मेरी भी है… ले… ले… अह्ह्ह्ह…”

आपि ये सुनते hi पागल हो गयी!

**ज़ैनब आपि (jor-jor से उछलते हुए, आँखें बंद करके):** “अह्ह्ह्हह… असीम… तू… तू सच में हरामी है… उफ्फ्फ्फ़… मुझे दुसरो से छुड़वाते देख के मज़ा आता है तुझे? … अह्ह्ह… मैं तेरी रंडी हूँ… मां ने फाड़ी… अब तू फाड़… जोर से… अह्ह्ह्हह… अह्ह्ह… और बोल… और बोल… कितना मज़ा आता है देखने में… अह्ह्ह्हह…”

आपि अब बिलकुल जानूं में आ चुकी थी. उसकी स्पीड और तेज़ हो गयी… गांड zor-zor से upar-neeche… हर धक्के पे “dhap-dhap-dhap” की आवाज़… उसके bade-bade दूध मेरे मुँह के पास लटक रहे थे. उसने झुक कर मेरे सीने पे… गले पे… निप्पल्स पे… पूरी बॉडी चाटने शुरू कर दी… जीभ से chaat-ti… kaat-ti… लार छोड़ती.

**ज़ैनब आपि (सिसकती हुई):** “अह्ह्ह… कितनी गन्दी रंडी हूँ मैं… चाटो… और ज़ोर से धक्का मार… फाड़ दे मेरी छूट… अह्ह्ह्हह…”

मैं नीचे से और तेज़ धक्के मरने लगा… दोनों हाथों से उसकी मोती गांड पकड़ के… ज़ोर से थप्पड़ मारता…

**मैं (गाली देते हुए, मज़े से):** “ले कुटिया… ले मादरचोद… तेरी छूट अब मेरी… अह्ह्ह… मैं तुझे रोज़ दुसरो से छुडवाउंगा… मां से… अर्जुन से… राहुल से… सब से… और देखूंगा… उफ्फ्फ्फ़… तू रंडी बनेगी… ले… ले… मैं आ रहा हूँ… तेरी छूट में भर रहा हूँ… अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह!!!”

मेरा लुंड पहाड़ गया… zor-zor से… गरम माल की धार आपि की छूट में भरने लगी. आपि भी साथ में झाड़ गयी… उसकी छूट ने मेरा लुंड जकड लिया… पूरा रास निकल गया… दोनों के माल मिक्स हो कर उसकी छूट से बहार टपकने लगे.

आपि थक कर मेरे ऊपर hi लेट गयी… उसके दूध मेरे सीने पे डाब रहे थे… सांसें तेज़ हो गयी उनकी…

ज़ैनब आपि मेरे ऊपर लेती हुई थी… उसकी गीली छूट अभी भी मेरे लुंड पे चिपकी हुई थी… दोनों का माल मिक्स हो कर उसकी जाँघों पे टपक रहा था. उसने धीरे से उठी… सलवार ठीक की… और मेरे गाल पे एक छोटी सी किश करके मुस्कुरायी,

ज़ैनब आपि (गरम सांस में): “अब उठ … बहार सब वेट कर रहे होंगे… बाद में बात करेंगे…”

मैं पायजामा ठीक करके बहार निकला. लुंड अभी भी half-khada था… अंदर से आग लग रही थी. हॉल में पहुंचा तोह वहां दोनों लड़कियां बैठी थी – बुशरा और इफ़्फ़त.

उफ्फ्फ्फ़ … बिलकुल जवान माल.

बुशरा ने टाइट सलवार सूट पहना था… उसके gol-gol मध्यम दूध सूट के ऊपर से उभर रहे थे… ब्रा के शेप साफ़ दिख रहा था… गांड पतली पर उभरी हुई… जब वह बैठी थी तोह दोनों नितम्ब alag-alag डाब रहे थे. इफ़्फ़त ने लाइट पिंक सलवार पहनी थी… उसके छोटे पर टाइट दूध बिलकुल उभरे हुए… निप्पल का हल्का उभार भी दिखाई दे रहा था… गांड छोटी पर बहुत गोल और लचकती हुई.

मैं सीधा उनके सामने सोफे पे बैठ गया… और गन्दी नज़रों से घूरने लगा.

पहले बुशरा की तरफ… उसके उभरे दूध को ऊपर से नीचे तक घूरा… फिर उसकी पतली कमर और उभरी गांड पे नज़र टिकाई. बुशरा ने नोटिस किया… उसका चेहरा एक सेकंड में लाल हो गया… उसने झट से दुपट्टा सीने पे लपेटा पर मैंने उसके दूध को और ज़ोर से घूरना शुरू कर दिया…

इफ़्फ़त को भी घूरने लगा… उसके टाइट दूध… उसकी छोटी पर गोल गांड… आँखें उसकी जाँघों के बीच में घुसा दी… जैसे उसकी छूट को देख रहा हूँ.

दोनों लड़कियां शर्मा गयी. बुशरा ने आँखें नीचे कर ली… इफ़्फ़त का चेहरा पूरा गुलाबी हो गया… दोनों एक दूसरे को देखा… फिर झट से उठी और भाग गयी…

बुशरा (शरमाते हुए): “आपि… हम… हम अंदर जा रहे हैं…”

इफ़्फ़त (कांपते हुए): “हाँ… बहुत काम है…”

दोनों तेज़ी से अपने रूम की तरफ भाग गयी… उनकी गांड हिलती हुई… मैं उनकी पीठ तक घूरता रहा… अंदर से सोच रहा था – उफ्फ्फ्फ़… दोनों रंडियां हैं… एक दिन इन दोनों की छूट भी फाड़ूंगा… अह्ह्ह… मज़ा आएगा…

मैं हॉल से किचन की तरफ बढ़ गया. बुशरा और इफ़्फ़त दोनों भाग चुकी थी…

किचन में **छोटी ममी सना** कड़ी थी. लाइट ग्रीन सलवार सूट में… उफ्फ्फ्फ़… कितनी खूबसूरत लग रही थी. ऊपर वाला कुरता थोड़ा टाइट था, इसलिए उनके bade-bade दूध बहुत उभरे हुए दीखते थे… हर सांस के साथ halke-halke हिल रहे थे. गांड मोती और सॉफ्ट… जब वह पराठे पलट रही थी तोह दोनों नितम्ब alag-alag lachak-lachak कर हिल रहे थे. चेहरा गोरा, होंठ हलके गुलाबी… बिलकुल मातुरे औरत का प्यारा लुक.

मैं धीरे से अंदर घुस गया और काउंटर के पास बैठ गया.

**मैं (मुस्कुराते हुए):** “ममी… क्या बना रही हो? बहुत अच्छी खुशबू आ रही है… लगता है आज खाना बहुत स्पेशल है.”

ममी ने मुद कर देखा… एक प्यारी सी स्माइल आयी उसके चेहरे पे.

**छोटी ममी सना:** “अरे असीम बीटा… आ गया? पराठे बना रही हूँ… garam-garam खा लेना. बहुत थक गए होंगे सफर से.”

मैं उनके बिलकुल पास बैठ गया और धीरे से बोलै,

**मैं:** “ममी… आपके हाथों में तोह सच में जादू है. पराठे इतने सॉफ्ट और गरम हैं… जैसे आप खुद… बहुत सॉफ्ट और गरम हो..”

ममी का चेहरा एक सेकंड के लिए लाल हो गया. उसने पराठे पलटने का बहाना किया… पर मैंने देखा उसके गाल पे हलकी सी शर्माती हुई मुस्कराहट थी.

**छोटी ममी सना (jhoot-moot गुस्सा दिखते हुए):** “असीम… तू बड़ा हो गया है बीटा… ऐसी बातें मत कर. मैं तेरी ममी हूँ… शर्म नहीं आती तुझे? नज़र हटा ले यहाँ से…”

लेकिन उसकी आवाज़ में गुस्सा नहीं… थोड़ी सी शर्म और मस्ती थी. उसने पराठे को प्लेट में रखते हुए मुझे साइड से देखा… आँखों में एक छुपी हुई चमक थी.

**मैं (और थोड़ा पास आते हुए, हलके से):** “ममी… सच बोल रहा हूँ. आप जब पराठे पलट रही हो… आपका… ऊपर वाला हिस्सा… बहुत… बहुत अच्छे से उभर रहा है. लग रहा है आप बहुत म्हणत करती हो… .”

ममी ने झट से मुझे घूरा… पर उसकी आँखें शर्मा रही थी. उसने एक पराठा मेरे प्लेट में रख दिया और धीरे से बोली,

**छोटी ममी सना :** “बस कर असीम… वर्ण अभी मां को बुला लुंगी. तू सच में ब्बड़ा कमीना ान गया है… आँखें हटा ले… मेरी तरफ ऐसी नज़र से मत देख. पर… (हलकी सी हसी के साथ) … खाना तोह खा ले पहले.”

मैं मुस्कुराया… पर अंदर से सोच रहा था – **उफ्फ्फ्फ़… ममी को बुरा नहीं लग रहा… सिर्फ jhooth-moot गुस्सा दिखा रही है… उसके दूध और गांड देख कर मेरा दिल और तेज़ धड़क रहा है… एक दिन यह भी…**

ममी ने चाय की कप मेरे सामने रख दी… और धीरे से मेरी तरफ देखती रही… जैसे खुद भी कुछ सोच रही हो.

खाना खा कर मैं रूम में चला गया सोने .शाम के 5 बजे तक मैं सोया रहा. नींद में भी baar-baar ज़ैनब आपि की सिसकियाँ घूम रही थी. तभी दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ आयी.

**अहम** अंदर आया…… चेहरा थोड़ा लाल… आँखें नीचे.

**अहम (हलकी आवाज़ में):** “भाई… उठो… शाम हो गयी है… सब निचे वेट कर रहे हैं.”

मैं आँखें खोली… मुस्कुराया… और सीधा उसको बीएड पे बिठा दिया. उसके बिलकुल पास बैठ गया और धीरे से बोलै,

**मैं:** “अहम… मज़ा आया आज सब देखकर?”

अहम का चेहरा पूरा लाल पद गया… उसने आँखें नीचे कर ली… हाथ कांपने लगे… शर्म से बोल भी नहीं प् रहा था. मैं हंस पड़ा और उसके कंधे पे हाथ रख के बोलै,

**मैं:** “शर्मा मत मादरचोद… मैं तेरा भाई हूँ… जो देखा है वो मैंने भी देखा है… अब तू यहीं बैठ… मैं निचे जा रहा हूँ… बाद में तेरे लिए सरप्राइज है.”

उससे वहीँ बिठा दिया और मैं निचे हॉल की तरफ चला गया.

वहां ज़ैनब आपि नानी के पास बैठी थी… दोनों बातें कर रही थी. मैं कुछ देर सोफे पे बैठ गया… आँखें आपि पे टिकाई हुई थी. उसने मेरी तरफ देखा… मैंने उसको आँखों से इशारा किया – “ऊपर आ जाओ”.

आपि समझ गयी… नानी से कुछ बहाना बना कर उठी और मेरे peeche-peeche ऊपर रूम में आ गयी.

जैसे hi रूम में घुसी… उसकी नज़र अहम पे पड़ी… जो बीएड पे बैठा था… चेहरा लाल… . आपि कंफ्यूज हो गयी… आँखें बड़ी कर ली.

**ज़ैनब आपि:** “अहम… तू यहाँ? असीम… यह क्या…”

मैं मुस्कुराया… दरवाज़ा बंद किया और सीधा बोलै,

**मैं:** “आपि… ये अहम आपको ठोकना चाहता है.”

दोनों एक सेकंड के लिए हैरान रह गए. आपि की आँखें फैल गयी… अहम का मुँह खुला रह गया… दोनों मुझे देखते रह गए.

मैं धीरे से आपि के पास गया और उसके कान में बोलै,

**मैं:** “आपि… इसने सब कुछ देखा hai…aur ये अपनी अम्मी और बहनो को भी छोड़ना चाहता है और रोज़ मुठ मरता है… अब इसका लुंड आपके लिए तड़प रहा है.”

आपि पहले तोह शॉक में थी… फिर उसके होंठ पे एक गन्दी सी मुस्कराहट आयी. उसने अहम को ऊपर से नीचे तक घूरा… फिर धीरे से निचे बैठ गयी… उसके पैरों के बीच.

**ज़ैनब आपि (गरम आवाज़ में):** “अहम बीटा… सच में??”

अहम दर गया… शर्मा गया… हाथ से पंत पकड़ ली और बोलने लगा,

**अहम (कांपते हुए):** “आपि… नहीं… मैं… मैं नहीं… प्लीज…”

लेकिन आपि रुकी नहीं. उसने अहम के हाथ हटा दिए… पंत का नाडा खोला… और धीरे से पंत अंडरवियर नीचे सरका दिया.

अहम का लुंड बहार आ गया… टोपा से पानी टपक रहा था… बिलकुल खड़ा.

आपि ने उसको देखा… आँखों में हवस भर आयी… उसने अपने गुलाबी होंठ खोले… जीभ निकाली… और सीधा अहम के लुंड के टोपा पे लगा दी.

**स्लुर्र्र्रॉप…**

पहली जीभ से hi पूरा टोपा चाट लिया. अहम की सांस रुक गयी… उसने ज़ोर से सिसकी ली…

**अहम:** “आआह्ह्ह्ह… आपि… उफ्फ्फ्फ़…”

आपि अब jor-jor से चूसने लगी. दोनों हाथों से अहम का लुंड पकड़ लिया… मुँह में andar-bahar करने लगी… जीभ से नीचे से बॉल्स तक चाट रही थी… कभी पूरा अंदर ले लेती… कभी बहार निकाल के टोपा को चूसती… लार tapak-tapak के अहम के लुंड पे बह रही थी.

**ज़ैनब आपि (लुंड मुँह से निकालते हुए, लार से भरे होंठ से):** “उफ्फ्फ्फ़ अहम… कितना टेस्टी है तेरा लुंड… … अह्ह्ह… ग्लुक ग्लुक…”

अहम अब कण्ट्रोल नहीं कर प् रहा था… उसकी सांसें तेज़… हाथ काँप रहे थे… सिसकियाँ निकल रही थी…

**अहम (सिसकते हुए):** “आपि… अह्ह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है… उफ्फ्फ्फ़… और अंदर लो… अह्ह्ह…”

मैं बीएड के पास खड़ा था… अपना लुंड पायजामा के ऊपर से पकड़ के हिलने लगा… देख रहा था… मेरी ज़ैनब आपि… अहम का लुंड jor-jor से चूस रही थी… आँखें ऊपर करके अहम को देख रही थी…

कितना गन्दा… कितना ज़बरदस्त मज़ा आ रहा है देखने में… अह्ह्ह…

आपि अब और तेज़ चूसने लगी पूरा मुँह में लेकर… “ग्लुक ग्लुक ग्लुक” की आवाज़ रूम में गूँज रही थी…

ज़ैनब आपि ने अहम का लुंड chuste-chuste hi अपना सलवार सूट उतार दिया. पहले दुपट्टा फिर कुरता ऊपर किया… उफ्फ्फ्फ़ … उसके bade-bade दूध बिलकुल नंगे हो गए – गोल, भरे हुए, निप्पल laal-laal और सख्त. फिर सलवार का नाडा खोला… सलवार और पंतय दोनों एक साथ नीचे सरक गए.

अब मेरी ज़ैनब आपि पूरी नंगी थी… moti-moti गोरी गांड… गीली छूट बिलकुल चमक रहा था… bade-bade दूध लटक रहे थे.

अहम की आँखें फटी रह गयी… मुँह खुला… सांस रुक गयी…

**अहम (आँखें पहाड़ कर देखते हुए):** “आपि… उफ्फ्फ्फ़… आप… आप इतनी… इतनी सुन्दर… मैं मर जाऊंगा…”

आपि ने मुस्कुराते हुए अहम के चेहरे को अपनी तरफ खींच लिया… और सीधा उसके मुँह पे अपनी गीली छूट रख दी.

**ज़ैनब आपि (गरम आवाज़ में):** “चाटो बीटा… अपनी आपि की छूट…… जीभ अंदर दाल… पूरी चाट ले… अह्ह्ह…”

अहम पागलो की तरह छूट चाटने लगा. उसने दोनों हाथों से आपि की मोती गांड पकड़ी… जीभ पूरी फैला के andar-bahar करने लगा… “सलूरररप… पूछ पूछ… ग्लुक ग्लुक” की आवाज़ रूम में गूँज रही थी. मां का माल और आपि का रास दोनों उसके मुँह में मिक्स हो रहे थे… वो सब पि रहा था बिना एक बूँद वास्ते किये.

मैं यह सब देख कर पागल हो गया. मेरा लुंड पायजामा में फाड़ने को हो रहा था. मैंने पायजामा नीचे किया… अपना मोटा लुंड बहार निकाला और हाथ से हिलने लगा.

फिर अहम उठा… आपि को बीएड पे लिटाया… उसकी टाँगे कन्धों पर रख ली… और अपना लुंड आपि की छूट के मुँह पे सेट किया. एक जोरदार धक्के में पूरा लुंड अंदर चला गया.

**धायआपपप!!!**

**ज़ैनब आपि:** “आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… अहम… बहुत बड़ा है… उफ्फ्फ्फ़… फाड़ दिया… अह्ह्ह… और लम्बे धक्के मार… धीरे धीरे… पूरा अंदर तक… हहैयय…”

अहम चुपचाप ताबड़तोड़ धक्के मरने लगा… हर धक्के पे आपि का पूरा बदन हिल रहा था… bade-bade दूध upar-neeche लटक रहे थे… गांड बीएड पे ज़ोर से डाब रही थी. आपि मज़े से गालियां देने लगी…

**ज़ैनब आपि (सिसकती हुई, मज़े से):** अहम… फाड़ दे तेरी आपि की छूट… अह्ह्ह… और ज़ोर से… कुत्ते…… उफ्फ्फ्फ़… और तेज़… रंडी बना दे मुझे… अह्ह्ह्हह…”

अहम अब जानवर बन गया था. उसकी स्पीड बढ़ गयी… zor-zor से धक्के मरने लगा… “धप… धप… धप…” की तेज़ आवाज़… आपि की मोती गांड लाल पद गयी… दूध hilte-hilte लाल हो गए… आपि चीख रही थी पर मज़े से…

**अहम (जानवरो की तरह छोड़ते हुए):** “ले आपि… ले रंडी… हूँ… ले… ले… पूरी फाड़ दूंगा… अह्ह्ह्हह…”

मैं और बर्दाश्त नहीं कर पाया. आगे बढ़ा… आपि के ऊपर झुक गया… उसके गुलाबी होंठ पे अपना मुँह रख दिया और ज़ोर से किश करने लगा. जीभें लड़ने लगी… फिर मैंने उसके मुँह में अपना थूक दाल दिया.

**ज़ैनब आपि (थूक निगलते हुए):** “उफ्फ्फ्फ़ असीम… थूक दिया मेरे मुँह में… अह्ह्ह… कितनी गन्दी बात… … ले… और थूक… अह्ह्ह्हह…”

मैं ने अपना लुंड उसके मुँह में दाल दिया… और मुँह छोड़ने लगा… zor-zor से धक्को के साथ… हलक तक…

**मैं (गाली देते हुए, लुंड मुँह में पेलते हुए):** “ले कुटिया… ले मादरचोद… दोनों लुंड ले रही है… … अह्ह्ह… चूस रंडी… पूरा अंदर ले… मेरी रैंड आपि… दोनों से चुद रही है… उफ्फ्फ्फ़… कितनी बड़ी रांड है तू… ले… ले… अह्ह्ह्हह…”

अहम नीचे से तेज़ धक्के मार रहा था… मैं ऊपर से मुँह छोड़ रहा था… आपि बीच में दोनों लुंड ले कर सिसक रही थी… पूरा रूम “धप धप… ग्लुक ग्लुक” की आवाज़ों से गूँज रहा था…

अहम नीचे से और तेज़ धक्के मरने लगा… उसका पूरा बदन काँप रहा था… आँखें बंद… मुँह से सिर्फ सिसकारियां निकल रही थी.

आपि बीच में दोनों तरफ से तड़प रही थी… उसकी मोती गांड अहम के धक्कों से हिल रही थी… bade-bade दूध upar-neeche लटक रहे थे… मुँह मेरा लुंड निगल रहा था… आँखें पानी से भर गयी थी पर मज़े से सिसक रही थी.

फिर अहम ज़ोर से चीखा…

**अहम:** “आआह्ह्ह्हह आपि… आ गया… le…ahhhhhh... ले…… अह्ह्ह्हह्हह!!!”

उसने झट से लुंड बहार निकला… और zor-zor से हाथ हिलाते हुए आपि के चेहरे, दूध, पेट और मोती गांड पे अपना माल छोड़ दिया. Dhaar-dhaar… गरम पानी उसके चेहरे पे गिर रहा था… होंठ पे… गाल पे… दोनों bade-bade दूध चमक रहे थे… कुछ बूँदें उसकी छूट के ऊपर भी टपक गयी.

मैं भी उसी वक़्त झड़ने वाला था. मैंने लुंड बहार निकला… आपि के चेहरे के बिलकुल ऊपर सेट किया और ज़ोर से हिलाते हुए बोलै,

**मैं:** “ले साली रंडी… ले मेरी प्यारी आपि… मेरा माल ले… अह्ह्ह्हह्हह!!!”

मेरा भी गरम माल की धार निकल गयी… सीधा आपि के चेहरे पे… आँखों पे… नाक पे… होंठ पे… दूध पे… पूरा बदन नहाया हुआ… दोनों का माल मिक्स हो कर उसके जिस्म पे चमक रहा था.

आपि बिलकुल नंगी लेती रही… सांसें तेज़… चेहरा, दूध, पेट, गांड… सब कुछ हमारे गरम पानी से नहाया हुआ. उसकी आँखें बंद थी… होंठ हलके से खुले… लार और माल से चिपचिपा… बिलकुल एक सड़कछाप रंडी जैसी लग रही थी.

मैं उसको देख कर पागल हो गया… अंदर से बहुत मज़ा आ रहा था.

**मैं (अंदर से सोच रहा था):** उफ्फ्फ मेरी सगी ज़ैनब आपि… अभी अभी दोनों लुंड ले कर चूड़ी… चेहरा और पूरा बदन हमारे माल से नहाया हुआ… बिलकुल रांड लग रही है… मेरी आपि… दुसरो के सामने ऐसी रंडी बन गयी…… और मेरा लुंड फिर se…ufff"

अहम अभी भी शर्मा रहा था… आँखें नीचे… हाथ से अपना लुंड छुपाने की कोशिश कर रहा था… चेहरा पूरा लाल.

मैं उसके पास बैठ गया… उसके कंधे पे हाथ रखा

**मैं :** “अहम… देख… आपि अभी भी कितनी गरम है… बिलकुल रंडी लग रही है न? बोल… तेरा लुंड फिर से खड़ा हो रहा है न? बोल मादरचोद… कितना मज़ा आया आपि की छूट फाड़ने में?”

अहम और शर्मा गया… कुछ बोल नहीं प् रहा था… सिर्फ आँखें नीचे किये बैठा था.

तभी आपि धीरे से उठी… माल से नहायी हुई… मुस्कुराते हुए बाथरूम की तरफ चली गयी… उसकी मोती गांड हिलती हुई… चेहरे पे हमारा माल अभी भी चिपका हुआ था.



मैं और अहम जल्दी से कपडे पहन लिए… पंत ऊपर की… और दोनों बहार निकल गए… हॉल की तरफ…
 
घर से निकल कर हूँ दोनों मार्किट से थोड़ा दूर, गाँव के पुराने खेतों की तरफ निकल गए. शाम हो गयी थी और अंदर से मेरा लुंड अभी भी half-khada था. अहम मेरे साथ chup-chaap चल रहा था, आँखें नीचे, चेहरा पूरा लाल. जैसे अभी भी ज़ैनब आपि की नंगी गांड और उसके चेहरे पे हमारा माल याद आ रहा हो.



मैं धीरे से उसके कंधे पे हाथ रख के बोलै,

“अहम… बोल न भाई… सच सच बता… ज़ैनब आपि की छूट फाड़ने में कैसा लगा? उफ्फ्फ्फ़… उसकी मोती गांड कितनी गरम थी न… जब तू नीचे से धक्के मार रहा था… उसके bade-bade दूध latak-latak के हिल रहे थे…… बोल… तेरा लुंड अभी भी तन रहा है न उस रंडी को सोच कर?”

अहम और शर्मा गया. उसने आँखें नीचे करके सिर्फ “भाई… प्लीज…” बोलै. पर मैं रुकने वाला नहीं था. मैं उसके बिलकुल करीब आ गया और उसके कान में धीरे से बोलै,

“सेल हरामी… शर्मा मत. मैं तेरा बड़ा भाई हूँ. जो कर लिया वो कर लिया. बता… जब तू ने उसकी छूट में लुंड डाला था… उसकी गुलाबी छूट कितनी टाइट थी? उफ्फ्फ्फ़… मां ने फाड़ दी थी फिर भी कितनी गीली थी न? और जब उसने तेरा लुंड मुँह में लिया… उसके होंठ कितने गरम थे…… बोल न मादरचोद… मज़ा आया न आपि को छोड़ने में?”

अहम की सांस तेज़ हो गयी. उसने पहले तोह कुछ नहीं बोलै, फिर धीरे से सर हिलाया और कांपते हुए बोलै,

“भाई… बहुत… बहुत मज़ा आया… उफ्फ्फ्फ़… आपि की छूट इतनी गरम थी… जैसे अंदर आग लग रही हो… जब मैं धक्के मार रहा था… उसकी गांड मेरे तइस पे टकरा रही थी… और उसके दूध… वह… कितने बड़े थे… हिल रहे थे… मैं कण्ट्रोल hi नहीं कर प् रहा था…”

मैं हंस पड़ा. मेरा लुंड पायजामा के अंदर एक झटका मार बैठा. मैं उसके कान में और गरम आवाज़ में बोलै,

“वह मादरचोद… . और बता… जब आपि ने तेरा माल चेहरे पे लिया… उसके bade-bade दूध पे… उसकी गुलाबी होंठ पे… कितना मज़ा आया ? और मैंने भी उसके मुँह में अपना माल भरा…? बोल… तेरा लुंड और खड़ा हो गया था न तब?”

अहम अब रुक नहीं प् रहा था. उसने धीरे से अपना हाथ पायजामा पे रख लिया और शरमाते हुए बोलै,

“हाँ भाई… बहुत… बहुत खड़ा हो गया था… आपि बिलकुल रंडी लग रही थी… दोनों तरफ से पेली जा रही थी… और उसका चेहरा… उफ्फ्फ्फ़… पूरा माल से नाहा हुआ था… मैं सोच रहा था… अगर मेरी अम्मी… ऐसी hi…”

जैसे hi उसने अपनी अम्मी का नाम लिया, मेरा लुंड पूरा तन गया. मैं उसको रोक के बोलै,

“बोल… बोल मादरचोद… तेरी अम्मी सना के बारे में क्या सोच रहा था? उसकी badi-badi चूचियां… मोती गांड… बोल न… तू कब से अपनी अम्मी को छोड़ने का सपना देख रहा है?”

अहम अब पूरा गरम हो चूका था. उसने धीरे से बोलै,

“भाई… जब से मैंने अम्मी को नहाते हुए देखा है… उफ्फ्फ्फ़… उसके दूध… इतने बड़े… पानी उनपे टपक रहा था… गांड… moti-moti… मैं वहां खड़ा मुठ मारने लगा था… रोज़ याद आता है… सोचता हूँ… अगर कभी मौका मिला तोह… उसकी छूट में…”

मैं उसके कंधे को ज़ोर से पकड़ के हंस पड़ा और बोलै,

“वह सेल… तेरी अम्मी सना… वह भी बिलकुल ज़ैनब आपि जैसी रंडी है अंदर से. उसकी मोती गांड देखि… चलते वक़्त कितनी हिलती है… और बुशरा और तेरी बेहेन इफ़्फ़त… उनकी टाइट लेग्गिंग्स वाली गांड…… उनके टाइट दूध… बोल… तू सबको एक साथ छोड़ना चाहता है न? अपनी अम्मी, बेहेन, सबको नंगा करके… घोड़ी बनके… फाड़ना चाहता है न उनकी छूट?”

अहम अब कण्ट्रोल खोने लगा था. उसने पायजामा के ऊपर से लुंड को दबाया और धीरे से बोलै,

“हाँ भाई… बहुत… बहुत चाहता हूँ… अम्मी की chut…Iffat के छोटे टाइट दूध मसल के… उफ्फ्फ्फ़… सोच कर hi लुंड फटने को हो रहा है…”

हम दोनों खेतों की पतली सी पगडण्डी पे चल रहे थे. अँधेरा होने लगा था, लेकिन अंदर से दोनों के लुंड अभी भी तड़प रहे थे. अहम अब थोड़ा खुल गया था. पहले तोह सिर्फ haan-mein सर हिला रहा था, पर अब उसके मुँह से बातें निकलने लगी थी.

मैं उसके साथ कदम मिला कर बोलै,

“अहम… अब सच बता… तेरी अम्मी सना के बारे में तोह बता दिया… पर बुशरा… तू कब से उसपे नज़र रख रहा है? बोल न सेल… क्या सोचता है उसके बारे में?”

अहम एक सेकंड के लिए रुक गया. उसने idhar-udhar देखा, फिर धीरे से मेरी तरफ देखा. उसके गाल लाल हो गए थे, पर आँखों में एक अलग चमक थी. उसने अपना पायजामा के ऊपर से लुंड को हल्का सा दबाया और sharmate-sharmate बोलै,

“भाई… बुशरा… मैं उससे प्यार करता हूँ… सच में… सिर्फ उसको देखता हूँ तोह दिल में कुछ और hi होता है. उसकी वह पतली कमर… … जब कॉलेज से आती है न… उफ्फ्फ्फ़… मैं चुपके से उसके peeche-peechhe जाता हूँ…”

मैं हैरान रह गया. यह बात सुन कर मेरा लुंड पायजामा में एक ज़ोर का झटका मार बैठा. मैं उसको रोक के बोलै,

“मादरचोद… प्यार? और छोड़ भी चूका है क्या उसको? बोल न… कब? कैसे? बुशरा की छूट… तू ने फाड़ दी?”

अहम ने सर हिलाया. उसके होंठ काँप रहे थे, पर हवस उसके चेहरे पे साफ़ दिख रही थी. उसने धीरे से बताया,

“हाँ भाई… 2 महीने पहले… जब घर में कोई नहीं था… अम्मी बाजार गयी थी… बुशरा रूम में कपडे बदल रही थी… मैं दरवाज़े पे खड़ा देख रहा था… उसने सलवार उतरी… सिर्फ bra-panty में… उफ्फ्फ्फ़… उसके दूध… इतने टाइट… मैं कण्ट्रोल नहीं कर पाया… अंदर घुस गया… पहले उसने मन किया… पर मैंने उसके होंठ चूस लिए… फिर उसकी पंतय नीचे की… और… और उसकी छूट में… अपना लुंड दाल दिया… वो रो रही थी… पर बाद में खुद गांड हिलाने लगी… मैंने उस दिन उसकी छूट में दो बार माल भरा… अब जब भी मौका मिलता है… वो खुद मुझे बुलाती है…”

मैं सुन कर पूरा सुन्न हो गया. मेरा मुँह खुला रह गया. बुशरा… वह छोटी सी ladki…hamesha शरीफ बन के रहती है साली… अहम ने उसकी छूट फाड़ दी? उफ्फ्फ्फ़… मेरा लुंड अब फटने को हो रहा था.

मैं उसको रोक के उसके कंधे पकड़ कर बोलै,

“अहम… सुन… मैं भी उस बुशरा की छूट चाहता हूँ… बस एक बार… अर्रंगे कर दे भाई… तू उसको पता ले… मैं उसके साथ… उफ्फ्फ्फ़… उसकी टाइट छूट में लुंड डालूंगा… तू देखना कितना मज़ा आएगा…”

अहम तुरंत सर हिला दिया. उसके चेहरे पे गुस्सा आ गया. उसने मेरा हाथ हटा दिया और तेज़ आवाज़ में बोलै,

“नहीं भाई… बिलकुल नहीं… बुशरा सिर्फ मेरी है… मैं उससे प्यार करता हूँ… उसको किसी और से नहीं छुड़वा सकता… तू जो चाहे कर ले… पर बुशरा नहीं…”

मैं उसको समझाने लगा. उसके साथ चलते हुए उसके कान में धीरे से बोलै,

“अहम… सुन तोह सही… मैंने भी तेरी मदद की न? मैंने ज़ैनब आपि को तेरे लुंड के नीचे खुद hi लाया… उसकी मोती गांड तेरे मुँह पे रख दी… उसकी छूट में तेरा लुंड डलवाया… तू ने उस रंडी आपि को फायदा… अब तू मेरा साथ दे… मैं भी तेरा साथ दूंगा… तेरी अम्मी सना को… उसकी badi-badi चूचियां… मोती गांड… तू छोड़ सकेगा… मैं अर्रंगे कर दूंगा… बस बुशरा की छूट एक बार मेरे लिए दिलवा दे…”

अहम फिर भी मन करता रहा. उसने सर हिला दिया और बोलै,

“नहीं भाई… बुशरा अलग है… मैं उससे सच्चा प्यार करता हूँ… उसको शेयर नहीं कर सकता… अम्मी के बारे में सोच सकता हूँ… पर बुशरा… नहीं…”

“अहम… सोच… अगर तू मेरा साथ देगा… तोह एक दिन तेरी अम्मी सना भी तेरे लुंड के नीचे आएगी… उसके बड़े दूध तू मसल सकेगा… उसकी मोती गांड पे थप्पड़ मार सकेगा… और बुशरा के बाद इफ़्फ़त भी… बस एक बार मेरा काम कर दे… मैं तुझे तेरी पूरी फॅमिली की औरतों का राजा बना दूंगा…”

अहम चुप हो गया. उसके कदम धीरे पड़ने लगे. वह अंदर से लड़ रहा था… प्यार और हवस के बीच… पर मैं जान गया था – अब यह लड़का टूटने वाला है.

हम घर की तरफ चलते रहे… अहम अभी भी सोच रहा था… और मेरा दिमाग बुशरा की टाइट छूट में लुंड डालने के सपने देख रहा था.

घर पहुँचते hi रात के 9 बज चुके थे. किचन से खाने की खुशबू आ रही थी. सब लोग हॉल के बड़े टेबल पे बैठे थे – बड़े मां बड़ी ममी छोटे मां छोटी ममी सना, यास्मीन आपि, ज़ैनब आपि, बुशरा, इफ़्फ़त और मैं. अहम भी मेरे बगल में बैठा था, पर उसका चेहरा अभी भी लाल था.

मैं खाना खा रहा था, पर मेरी नज़र baar-baar बुशरा और इफ़्फ़त पे अटक रही थी.

बुशरा ने लाइट पिंक टाइट सलवार सूट पहना था – उसके मध्यम दूध सूट के ऊपर से उभरे हुए थे, ब्रा का शेप साफ़ दिख रहा था. जब वो रोटी तोड़ती, दूध halke-halke हिलते थे. इफ़्फ़त ने ब्लू लेग्गिंग्स और शार्ट कुर्ती पहनी थी – उसकी पतली कमर और उभरी हुई गोल गांड चेयर पे डाब रही थी. हर बार जब वो झुक कर सब्ज़ी लेती, उसकी गांड का चउरवे और ज़्यादा उभर आता.

मैंने उन दोनों को घूरना शुरू कर दिया – . बुशरा ने पहले नोटिस किया. उसने एक बार मेरी तरफ देखा, आँखें बड़ी की, फिर झट से नज़र झुका ली. गाल लाल हो गए. इफ़्फ़त ने भी देखा – उसकी नज़र मेरी तरफ गयी, वो शर्मा कर कुर्ती सीने पे लपेटने लगी.

दोनों समझ गयी थी मेरी गन्दी नज़र. बुशरा ने धीरे से इफ़्फ़त के कान में कुछ कहा और दोनों उठ कर बहार चली गयी – “अम्मी, हम ऊपर जा रहे हैं” बोलते हुए. वो दोनों गांड हिलती हुई चली गयी… उफ्फ्फ्फ़…

मैं थका हुआ था. मार्किट की गर्मी और अहम के साथ गन्दी बातें… सब से दिमाग और शरीर थक गया था. खाना ख़तम करके मैं सीधा अपने रूम में चला गया और बिस्तर पे लेट गया. नींद तुरंत आ गयी मुझे.

रात के 2 बजे मेरी आँख खुली. मुँह में खराश सी हो रही थी. पानी पिने के लिए मैं बहार निकला. घर बिलकुल सन्नाटा था – सिर्फ छत की तरफ से हलकी सी हवा आ रही थी.

जैसे hi मैं सीढ़ियों के पास पहुंचा… देखा – **यास्मीन आपि** चुपके से छत की तरफ जा रही थी.

उफ्फ्फ्फ़… उनकी मोती गांड… सलवार सूट में इतनी टाइट चिपकी हुई थी की दोनों नितम्ब alag-alag उभर रहे थे. हर कदम पे गांड zor-zor से हिल रही थी – जैसे दो bade-bade गोल मटोल पिलो एक साथ हिल रहे हों. दुपट्टा एक तरफ लटक रहा था, ऊपर वाला कुरता थोड़ा ऊपर चढ़ा हुआ था जिससे उनकी पतली कमर और मोती गांड का फुल चउरवे साफ़ दिख रहा था.

मेरा लुंड तुरंत पायजामा में तन गया. यह आपि इतनी रात के 2 बजे छत पे क्यों जा रही है? मैं चुपके से उनके peeche-peeche चला गया. सीढ़ियां dheere-dheere चढ़ा… आँखें उनकी हिलती हुई मोती गांड पे टिकाई हुई थी.

मैं चुपके से सीढ़ियों से ऊपर चढ़ा. यास्मीन आपि छत के दरवाज़े के पास कड़ी थी और झाँक कर छत के कोने की तरफ देख रही थी. उनकी मोती गांड सलवार सूट के अंदर से इतनी उभरी हुई थी की हर सांस के साथ हिल रही थी. दुपट्टा एक तरफ लटक रहा था, कुरता थोड़ा ऊपर चढ़ा हुआ था.

मेरा दिल zor-zor से धड़क रहा था. मैं और पास गया… बिलकुल उनके पीछे… और धीरे से झाँका.

उफ्फ्फ्फ़ … जो नज़ारा दिखा… मेरा लुंड पायजामा में एक सेकंड में पूरा तन गया.

कोने में **ज़ैनब आपि** सिर्फ सलवार में कड़ी थी – ऊपर से बिलकुल नंगी. उनके bade-bade चूचियां खुले आसमान के नीचे लटक रहे थे… गोल, भरे हुए, निप्पल laal-laal और सख्त. बड़े मां उनके पीछे खड़े थे… उनके दोनों हाथों में ज़ैनब आपि के चूचियां… zor-zor से दबा रहे थे और थप्पड़ मार रहे थे.

**चटक्क… चटक्क… चटक्क…**

**बड़े मां :** “साली कुटिया… कितने टाइट चूचियां हैं तेरी… अह्ह्ह… कितने दिन से तड़प रहा था इनको दबाने के लिए…”

**ज़ैनब आपि (सिसकती हुई, गांड पीछे दबाते हुए):** “आपकी बेटी यास्मीन की तोह ज्यादा बड़ी है न मां… उफ्फ्फ्फ़… और ज़ोर से दबाओ…”

**बड़े मां (और ज़ोर से थप्पड़ मारते हुए):** “हाँ सही बोलै रांड तूने… उसके बड़े हैं… उसको मेरे लिए इंतिज़ाम कर दे… बहुत गरम माल है वो… मैं उसकी छूट फाड़ना चाहता हूँ…”

**ज़ैनब आपि (थोड़ा हसी के साथ):** “क्यों… मेरे से दिल भर गया क्या मां?”

बड़े मां ने गुस्से में ज़ैनब आपि के गाल पर एक ज़ोर का थप्पड़ मारा… और उसके एक चुकी को मुँह में ले लिया… zor-zor से चूसने लगे.

**बड़े मां (चुकी मुँह में लेते हुए, गाली देते हुए):** “तू तोह चली जाएगी साली… मुझे कोई तोह चाहिए… यास्मीन की badi-badi चूचियां… मोती गांड… मैं उसको रोज़ छोडूंगा…”

यास्मीन आपि यह सब देख रही थी… उनकी सांस तेज़ हो गयी… पूरा बदन काँप रहा था ये सुनकर.

मैं और नहीं रुक सका.

मैं पीछे से बिलकुल चिपक गया… एक हाथ से उनका मुँह तिघ्टलय पकड़ लिया… दूसरा हाथ सीधा उनके कुर्ते के अंदर दाल कर उनके bade-bade चूचियां पकड़ लिए और zor-zor से दबाने लगा.

**उफ्फ्फ्फ़… कितने गरम… कितने भरे हुए थे उनके चूचियां…**

मेरा खड़ा लुंड उनकी मोती गांड पे ज़ोर से रगड़ने लगा.

यास्मीन आपि दर के मारे काँप उठी… उनकी आँखें फैल गयी… वो चीखने वाली थी पर मेरा हाथ उनके मुँह पे तिघ्टलय दबा था.

मैं उनके कान में धीरे से गरम सांस छोड़ते हुए बोलै,

“आपि… मैं हूँ… असीम… चुप… चुप… क्या देख रही हो आप…”

यास्मीन आपि मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी… पर मैंने उनके चूचियां और ज़ोर से मसल दिए… निप्पल को उँगलियों से पकड़ के मरोड़ने लगा…

मैं यास्मीन आपि के पीछे से बिलकुल चिपक गया था. मेरा खड़ा लुंड उनकी moti-moti गांड पे ज़ोर से रगड़ रहा था. पायजामा के ऊपर से भी उनकी गरम गांड की सॉफ्टनेस फील हो रही थी. मेरा एक हाथ उनके कुर्ते के अंदर घुसा हुआ था और मैं उनके bade-bade, भरे हुए चूचियां पागलो की तरह मसल रहा था. निप्पल को उँगलियों से पकड़ के halke-halke मरोड़ रहा था. उसकी चूचियां इतनी गरम और मुलायम थी की मेरे हाथ में जैसे दो bade-bade गरम दूध के गुब्बारे हो.

यास्मीन आपि का पूरा जिस्म काँप रहा था. उन्होंने अपना मुँह खोलने की कोशिश की पर मैंने उनके मुँह पे हाथ और टाइट दबा दिया. उनकी सांसें tez-tez चल रही थी, आँखें फैली हुई थी और चेहरा पूरा लाल हो चूका था.

मैं उनके कान में गरम सांस छोड़ते हुए धीरे से बोलै,

**“देखो आपि… देखो… आपके अब्बू मेरी बहन के साथ क्या कर रहे हैं…”**

यास्मीन आपि ने darte-darte आँखें उधर घुमाई. जैसे hi उनकी नज़र कोने पे पड़ी… उनका पूरा बदन एक ज़ोर के झटके से काँप उठा.

वहां बड़े मां ज़ैनब आपि के खूबसूरत चेहरे पे अपना मोटा लुंड रगड़ रहे थे. उनका लुंड पूरा चमक रहा था लार और पानी से. फिर उन्होंने ज़ैनब आपि के मुँह को ज़ोर से पकड़ा और एक hi धक्के में अपना मोटा लुंड उनके गुलाबी होंठों के अंदर पेल दिया.

**ग्लुक… ग्लुक… ग्लुक…**

ज़ैनब आपि के मुँह में मां का लुंड andar-bahar हो रहा था. उनकी आँखें पानी से भर गयी थी, लार टपक रही थी उनके होंठों से, पर वो खुद अपना मुँह आगे बढ़ा रही थी. मां zor-zor से धक्के मार रहे थे और गालियां दे रहे थे,

**“ले साली रंडी… पूरा ले… हलक तक ले… अह्ह्ह… कितनी अच्छी चूसती है तू… यास्मीन को भी ऐसे hi चुसवाऊँगा…”**

यास्मीन आपि यह सब देख रही थी. उनकी सांसें और तेज़ हो गयी. उनकी मोती गांड मेरे लुंड पे khud-ba-khud हिलने लगी. मैं उनके चूचियों को और ज़ोर से मसलने लगा. उनके निप्पल अब बिलकुल सख्त और लाल हो चुके थे.

**मैं (उनके कान में धीरे से, हवस भरी आवाज़ में):**

“आपि… देखो… आपका अब्बू मेरी बड़ी बहन ज़ैनब की मुँह छोड़ रहा है… उसके bade-bade चूचियां दबा रहा है… उफ्फ्फ्फ़… आपकी छूट से पानी टपक रहा है आपि… बोलिये… आपको भी ऐसा hi छोड़ना है न?”

यास्मीन आपि कुछ नहीं बोली. सिर्फ उनकी सांसें तेज़ हो रही थी. उन्होंने अपनी गांड पीछे करके मेरे लुंड पे और ज़ोर से रगड़ना शुरू कर दिया. उनकी चूचियां मेरे हाथों में zor-zor से उभर रही थी.

**मैं:**

“आपि… ज़ैनब आपि अब पूरी रंडी बन चुकी है… मां उसकी छूट फाड़ चुके हैं… अब उसका मुँह भी छोड़ रहे हैं… और आप… आप भी तड़प रही हो न? बोलिये… मैं आपकी छूट में लुंड दाल दूँ? या पहले आपकी मोती गांड चातुन?”

मैं उनकी चूचियों को और ज़ोर से मसलता हुआ उनकी गांड पे लुंड रगड़ते हुए बोलै,

**मैं:**

“आपि… देखो… मां ने ज़ैनब आपि के मुँह में अपना माल भर दिया… अब आप भी देख लो… और सोचो… अगर मैं आपको ऐसे hi छोडूं… तोह कैसा लगेगा… उफ्फ्फ्फ़… आपि… आपके अब्बू के सामने… मेरे लुंड पे उछलती हुई…”

यास्मीन आपि अब सिर्फ सिसकारियां ले रही थी. उनकी गांड मेरे लुंड पे zor-zor से हिल रही थी. उनकी छूट से पानी टपक रहा था उनकी सलवार पे. मैं उनके चूचियों को पागलो की तरह मसल रहा था.

मैं यास्मीन आपि का हाथ पकड़ कर सीधा अपने रूम की तरफ ले आया. उनकी उँगलियाँ काँप रही थी, पर वो कुछ बोल नहीं प् रही थी. जैसे hi हम अंदर पहुंचे, मैंने दरवाज़ा बंद किया और चिट्टी लगा दी. रूम में सिर्फ टेबल लैंप की हलकी रौशनी थी.

आपि दरवाज़े से सिर्फ एक कदम दूर कड़ी थी. उनकी मोती गांड सलवार सूट के अंदर से उभरी हुई थी, चूचियां upar-neeche हो रही थी. मैं पीछे से उनके बिलकुल करीब आ गया. दोनों हाथों से उनकी मोती गांड पकड़ ली और zor-zor से मसलने लगा. फिर हाथ ऊपर करके उनके bade-bade चूचियों को कुर्ते के ऊपर से hi पकड़ लिया और दबाने लगा.

**उफ्फ्फ्फ़…** कितने भरे हुए थे उनके चूचियां… मैं पागलो की तरह मसल रहा था – कभी ऊपर से नीचे, कभी gol-gol घूमता, निप्पल को उँगलियों से पकड़ के हलके से मरोड़ता.

यास्मीन आपि एक झटके से काँप उठी. उन्होंने मुझे ज़ोर से धक्का दिया और पीछे हैट गयी. उनका चेहरा पूरा लाल था, आँखें पानी से भर गयी थी.

**यास्मीन आपि (कांपते हुए, रोटी सी आवाज़ में):**

“नहीं असीम… ये गलत है बीटा… प्लीज… मत करो… अब्बू ऐसे होंगे… मुझे बिलीव नहीं हो रहा… ज़ैनब भी उनके साथ लगी हुई है…… उफ्फ्फ्फ़… ये सब गलत है…”

मैं उनकी बात सुन कर रुक गया. पर अंदर से मेरा लुंड और सख्त हो गया था. उनकी ये बात सुन कर भी मुझे मज़ा आ रहा था. मैं धीरे से उनके पास बढ़ा और सीधा अपना हाथ उनकी छूट पर रख दिया – सलवार के ऊपर से hi. उनकी छूट की गर्मी मेरे हाथ तक आ रही थी.

**मैं (धीरे से, गरम आवाज़ में):**

“आपि… वो लोग मज़े कर रहे हैं… आप भी मज़े करो… मुझे मालुम है आप भी बहुत प्यासी हो… इतने दिन से तड़प रही हो… देखो… आपकी छूट कितनी गीली हो चुकी है… कपड़ो के ऊपर से hi फील हो रही है…”

यास्मीन आपि का पूरा जिस्म काँप उठा. उन्होंने मेरा हाथ हटाने की कोशिश की, पर मैंने और ज़ोर से दबाया. फिर मैंने अपना पंत और पायजामा एक साथ नीचे कर दिया. मेरा मोटा, खड़ा लुंड बहार आ गया – टोपा से पानी टपक रहा था, नसें उभरी हुई थी.

आपि हैरानी से उसको देखने लगी. उनकी आँखें फैल गयी, मुँह थोड़ा खुला रह गया. वो एक पल के लिए बिलकुल सुन्न हो गयी.

मैं उनका हाथ पकड़ लिया और धीरे से अपने लुंड पर रख दिया. उनकी मुलायम उँगलियाँ मेरे लुंड पे लगी. मैं उनके हाथ को अपने लुंड पे हिलने लगा – dheere-dheere upar-neeche.

**मैं (उनके कान में सांस छोड़ते हुए):**

“आपि… फील करो… कितना गरम और सख्त है… आपके लिए hi खड़ा हुआ है… देखो… आपि ज़ैनब अभी मां के लुंड पे उछाल रही होगी… ”

यास्मीन आपि मेरी आँखों में देखने लगी. उसकी नज़रों में अब सिर्फ हवस थी – शर्म, दर और तड़प सब मिक्स हो चुके थे. उनकी उँगलियाँ मेरे लुंड पे थोड़ी टाइट हो गयी. वो हिला नहीं रही थी, पर हाथ हटा भी नहीं हटा रही थी.

उफ्फ्फ्फ़ आपि यास्मीन… जो हमेशा पर्दा करती थी, शरीफ बन के रहती थी… आज रात मेरे रूम में कड़ी है… मेरा लुंड हाथ में पकडे हुए… और मेरी आँखों में हवस भरी नज़रों से देख रही है…

अचानक आपि को मालुम नहीं क्या हुआ… उन्होंने मुझे ज़ोर से धक्का दे दिया. मैं बीएड पर गिर गया. पहले मैं समझ भी नहीं पाया क्या हो रहा है… और अगले hi पल यास्मीन आपि मेरे ऊपर चढ़ गयी.

उफ्फ्फ्फ़… उनका bhari-bhara, गरम बदन पूरा मेरे ऊपर आ गया. उनके bade-bade चूचियां मेरे सीने पे ज़ोर से डाब गए. उनकी मोती गांड मेरे लुंड के ऊपर बैठ गयी… सलवार के ऊपर से भी उनकी गर्मी मेरे लुंड तक पहुँच रही थी.

और फिर… आपि पागलो की तरह चूमने लगी.

पहले मेरे होंठ पे… zor-zor से… जीभ मेरे मुँह में घुसा दी…. फिर गले पे… चूसने लगी… काटने लगी… फिर सीने पे… मेरे निप्पल्स को जीभ से चाटने लगी. उनकी सांसें बहुत तेज़ हो गयी थी… uffff…aapi इतनी गरम है अंदर से..

मेरा दिमाग उड़ गया. अंदर से मैं पागल हो गया.

यास्मीन आपि…… इतनी भरी हुई है… और इतनी हवस भरी… मैं सोच भी नहीं सकता था.

मैं नीचे से उनको पकड़ लिया… उनकी कमर को दोनों हाथों से… और एक झटके से उनको निचे पलट दिया. अब आपि बीएड पे लेट गयी… मैं उनके ऊपर चढ़ गया.

मैंने झट से उनकी सलवार का नाडा पकड़ा… और एक hi झटके में सलवार और पंतय दोनों नीचे सरक दी. उनकी moti-moti, gori-gori जांघें फ़ैल गयी… और बीच में… उनकी गुलाबी छूट… बिलकुल गीली… चमक रही थी.

मैं झट से उनकी टांगो के बीच बैठ गया… दोनों हाथों से उनकी मोती गांड फैलाई… और मुँह लगा दिया.

**स्लुर्र्र्रॉप… पूछ पूछ… चूऊउस…**

मैं पागलो की तरह उनकी छूट चाटने लगा. पहली जीभ से hi उनकी गीली छूट को पूरा चाट लिया… ऊपर से नीचे… क्लीट को मुँह में लेकर ज़ोर से चूसने लगा… जीभ अंदर daal-daalke अंदर तक घुमा रहा था.

यास्मीन आपि का पूरा बदन काँप उठा.

उन्होंने दोनों हाथों से मेरा सर पकड़ लिया… और ज़ोर से अपनी छूट पे दबा दिया.

**यास्मीन आपि (तेज़ सिसकारियों के साथ):**

“अह्ह्ह्हह… असीम… बीटा… और ज़ोर से… उफ्फ्फ्फ़… जीभ अंदर दाल… अह्ह्ह… बहुत तड़प रही थी… हहैयय… और तेज़… पि लो मेरा पानी… अह्ह्ह्हह…”

उनकी सिसकारियां बहुत तेज़ हो गयी थी. रूम में सिर्फ “सलूरररप… पूछ पूछ… अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़…” की आवाज़ें गूँज रही थी.

मैं और जोश में आ गया. उनकी मोती गांड को दोनों हाथों से मसलता हुआ… छूट के छेद में जीभ andar-bahar करने लगा… कभी क्लीट को जीभ से तेज़ रगड़ता… कभी पूरी छूट मुँह में भर के चूसता.

आपि की टाँगे काँप रही थी… उनकी गांड मेरे मुँह पे ज़ोर से डाब रही थी… चूचियां upar-neeche हिल रहे थे.

**यास्मीन आपि (पागलो की तरह सिसकती हुई):**

“अह्ह्ह्हह… असीम… मर जाउंगी… उफ्फ्फ्फ़… और ज़ोर से चाट… अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह…”

उनकी छूट से garam-garam पानी निकलने लगा… मैं मुँह नहीं हटाया… पूरा पि रहा था… जीभ से chaat-chaat के… उनकी सिसकारियां अब और तेज़ और लम्बी हो गयी थी.

अचानक ऊपर से एक तेज़ आहात हुई – जैसे दरवाज़ा ज़ोर से बंद हुआ हो. हम दोनों एक सेकंड के लिए फ्रीज हो गए. यास्मीन आपि की आँखें फैल गयी. वो समझ गयी के मां और ज़ैनब आपि निचे आ रहे हैं.

**यास्मीन आपि (दर के मारे कांपती हुई):**

“असीम… छोड़… वो आ रहे हैं… उफ्फ्फ्फ़…”

उन्होंने झट से मुझे धक्का दिया, अपना कुरता ठीक किया, सलवार ऊपर की और पागलो की तरह दरवाज़े की तरफ भागने लगी. मैं उनके पीछे भगा, हाथ पकड़ने की कोशिश की,

**मैं:** “आपि… रुक… मत जाओ… अभी तोह मज़ा शुरू हुआ था…”

पर वो नहीं रुकी. वो मोती गांड हिलती हुई बहार निकल गयी. मैं दरवाज़े तक पहुंचा भी नहीं था के वो सीढ़ियों से नीचे उतर चुकी थी.

मैं वही खड़ा था, लुंड पायजामा में तन कर खड़ा, सांसें तेज़. थोड़ी देर बाद मैंने अपना पंत ऊपर किया और बिस्तर पे बैठ गया. दिल में एक आग सी लग रही थी.

कुछ देर बाद… मेरा गेट धीरे से खुला.

मैं ने आँख उठायी… और देखा…

**ज़ैनब आपि अंदर आयी.**

उफ्फ्फ्फ़… क्या हालत थी उनकी…

उनके बाल पूरे बिखरे हुए थे, कुछ लटके हुए थे चेहरे पे. होंठ बिलकुल सूजे हुए थे – लाल और पहले हुए. सूट अभी भी पहने हुए था पर बिलकुल ast-vyast… कुरता एक तरफ खिसका हुआ था. गाल पर थप्पड़ों के लाल निशाँ साफ़ दिख रहे थे. आँखों में पानी था, पर चेहरे पे एक अजीब सी गरम चमक भी थी.

जैसे hi वो अंदर आयी और दरवाज़ा बंद किया… मेरा लुंड पायजामा में एक ज़ोर का झटका मार बैठा.

मैं गरम हो चूका था. ऐसी हालत में मेरी सगी आपि ज़ैनब को देख कर अंदर से जानवर जग उठा.

मैं उठा… सीधा उनके पास गया… और बिना एक शब्द बोले… ज़ोर से दो थप्पड़ मारे उनके लाल गाल पर.

**चटक्क… चटक्क…**

**मैं (गाली देते हुए, गुस्से और हवस में):**

“साली रंडी… कुटिया… मामू के साथ छुड़वा रही थी… गाल लाल करवाके आ रही है… उफ्फ्फ्फ़… मेरी बेहेन… कितनी बड़ी रांड बन गयी है तू…”

ज़ैनब आपि सिसक उठी. पर उसकी आँखों में और हवस आ गयी. मैं उनके बाल पकड़ लिया… उनका चेहरा ऊपर किया… और पागलो की तरह उनके सूजे हुए होंठ पे मुँह रख दिया.

**चुस्स्सस्स… सलूरररप…**

मैं उनके होंठ चूसने लगा… जीभ उनके मुँह में घुसा दी… उनकी जीभ को अपनी जीभ से लड़ने लगा. उनके सूजे हुए होंठ मेरे मुँह में पूरा निगल रहा था. लार टपक रही थी दोनों के मुँह से. मैं उनके गले को चूस रहा था… काट रहा था… और zor-zor से गालियां दे रहा था,

**मैं:** “मादरचोद… kutiya…randi… अह्ह्ह…”

ज़ैनब आपि अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी. वो मेरे सीने से चिपक गयी.

फिर वो धीरे से नीचे बैठ गयी… घुटनो पे… मेरी टांगो के बीच.

मैंने झट से अपना पायजामा नीचे कर दिया. मेरा मोटा, खड़ा लुंड बहार आ गया… टोपा से पानी टपक रहा था.

ज़ैनब आपि ने उसको देखा… आँखों में हवस भरी नज़र डाली… और अपना मुँह खोल कर… धीरे से मेरा लुंड अपने सूजे हुए होंठों में ले लिया…

**ग्लुक… सलूरररप… पूछ पूछ…**

ज़ैनब आपि पागलो की तरह मेरा लुंड चूस रही थी.

उसके सूजे हुए गुलाबी होंठ मेरे मोठे लुंड को पूरा निगल रहे थे. कभी पूरा लुंड हलक तक अंदर ले लेती… कभी बहार निकाल कर टोपा को जीभ से चाटने लगती… लार के तार बन रहे थे उसके होंठों से मेरे लुंड तक. उसकी आँखें ऊपर करके मेरी आँखों में देख रही थी… बिलकुल एक भूखी रंडी की तरह.

**ग्लुक… ग्लुक… सलूरररप… पूछ पूछ…**

**ज़ैनब आपि (लुंड मुँह में लेते हुए, लार टपकते हुए):**

“अह्ह्ह… बीटा… तेरा लुंड कितना स्वाद है… उफ्फ्फ्फ़… मां का लुंड अभी भी मेरे मुँह में था… और अब तेरा… अह्ह्ह… दोनों के लुंड का मज़ा अलग है…… ग्लुक ग्लुक…”

मैं उसके बाल पकड़ के zor-zor से धक्के मार रहा था. हर धक्के पे उसका सर पीछे हिलता… लार उसके चीन पे टपक रही थी… उसके bade-bade चूचियां सूट के अंदर से zor-zor से हिल रहे थे.

तभी…

**खत… खत… खत…**

दरवाज़े पर तेज़ आवाज़ हुई.

आपि तुरंत दर गयी. उसने मेरा लुंड मुँह से बहार निकाला… लार के तार टूट रहे थे… और झट से बीएड के पीछे चुप गयी. मैं भी दर गया. लुंड अभी भी खड़ा था… पायजामा ऊपर किया.

मैं डरते हुए दरवाज़ा की तरफ बढ़ा… और धीरे से खोला.

सामने **अहम** खड़ा था.

मैं उसको देखते hi गुस्से में बोल पड़ा,

**मैं (गाली देते हुए):**

“सेल हरामी… इतनी रात अपनी अम्मी की याद आ गयी क्या? क्या चाहिए तुझे?”

अहम शर्मा गया. उसने अंदर आने की कोशिश की. मैं साइड हटा… और वो अंदर आ गया.

जैसे hi वो अंदर आया… उसकी नज़र बीएड के पीछे छुपी ज़ैनब आपि पर पड़ी.

आपि अभी भी घुटनो पे थी… बाल बिखरे हुए… होंठ सूजे हुए… गाल पर थप्पड़ों के लाल निशाँ… सूट ast-vyast… और मुँह अभी भी लार से चमक रहा था.

अहम सुन्न हो गया. उसके मुँह से आवाज़ hi नहीं निकली. सिर्फ आँखें फैली रही थी.

फिर… वो धीरे से आगे बढ़ा.

ज़ैनब आपि को देख कर उसके अंदर भी हवस जग गयी. उसने आपि के बाल पकडे… उसका चेहरा ऊपर किया… और सीधा उसके होंठों पे मुँह रख दिया.

**चुस्स्सस्स… सलूरररप…**

अहम पागलो की तरह आपि के होंठ चूसने लगा. आपि भी अब कण्ट्रोल नहीं कर प् रही थी. उसने अहम के गले में बाहें दाल दी… और दोनों ने एक दूसरे के मुँह में जीभ घुसा दी.

मैं वही खड़ा देख रहा था.

फिर आपि ने धीरे से दोनों हाथों से हम दोनों के लुंड पकड़ लिए.

मेरा लुंड और अहम का लुंड… दोनों एक साथ उसके हाथों में.

आपि ने पहले मेरा लुंड मुँह में लिया… ज़ोर से चूसा… फिर अहम का लुंड मुँह में लिया… फिर दोनों को एक साथ पकड़ के… अपने होंठों पे रगड़ने लगी.

**सलूरररप… ग्लुक ग्लुक… पूछ पूछ…**

ज़ैनब आपि अब दोनों लुंड एक साथ चूस रही थी. कभी मेरा टोपा चूसती… कभी अहम का… कभी दोनों के तोपों को एक साथ जीभ से चाट रही थी. लार टपक रही थी… दोनों लुंड उसके मुँह के aas-paas चमक रहे थे.

मेरी सगी आपि ज़ैनब… अब पूरी तरह हवस में डूब चुकी थी. एक तरफ मां ने उसको छोड़ा… दूसरी तरफ मैं और अहम… और वो अब हम दोनों के लुंड एक साथ चूस रही है… बिलकुल एक सड़क की रंडी जैसी.

मैं अंदर से पागल सा हो रहा था.

देख रहा था… मेरी बेहेन… मेरी आपि… दोनों लुंड मुँह में लेकर… आँखों में सिर्फ हवस… और मैं सोच रहा था – **अब यह रंडी पूरी तरह हमारी हो गयी है…**

अहम अब कण्ट्रोल में नहीं था.

उसने ज़ैनब आपि को बीएड पे सीधा लिटाया, उसकी टाँगे कन्धों पर उठायी और अपना खड़ा लुंड उसकी गीली छूट के मुँह पे सेट किया. एक hi ज़ोर का धक्का मारा…

**धायआपपप!!!**

**ज़ैनब आपि:** “आआह्ह्हह्ह्ह्ह… अहम… बहुत मोटा है… उफ्फ्फ्फ़… फाड़ दिया मेरी छूट… अह्ह्ह… और ज़ोर से… फाड़ दो… मैं तेरी रंडी हूँ… अह्ह्ह्हह…”

अहम जानवर बन गया. वह jor-jor से धक्के मरने लगा – **धप… धप… धप…** हर धक्के पे आपि की मोती गांड बीएड पे ज़ोर से टकरा रही थी. उनके bade-bade चूचियां upar-neeche लटक रहे थे, निप्पल बिलकुल सख्त और लाल.

मैं पीछे चला गया. आपि की moti-moti गोरी गांड मेरे मुँह के सामने थी. मैं दोनों हाथों से उसकी गांड के दोनों हिस्से फैलाये और मुँह लगा दिया.

**स्लुर्र्र्रॉप… चूऊउस… पूछ पूछ…**

मैं पागलो की तरह आपि की गांड चाटने लगा – गांड के छेद को जीभ से ghuma-ghuma कर चूस रहा था, कभी अंदर जीभ दाल रहा था, कभी उसकी छूट के पास से निकलने वाले पानी को पि रहा था.

**मैं (गांड छत्ते हुए):**

“ कुटिया… मादरचोद… तेरी गांड … उफ्फ्फ्फ़… कितनी गरम और टाइट है… अह्ह्ह… मेरी बेहेन… कितनी बड़ी रांड बन गयी है तू…”

ज़ैनब आपि बीच में तड़प रही थी. अहम नीचे से तेज़ धक्के मार रहा था, मैं पीछे से गांड चाट रहा था. आपि की सिसकारियां अब रुक नहीं रही थी.

**ज़ैनब आपि (सिसकती हुई):**

“अह्ह्ह्हह… दोनों… दोनों तरफ से… उफ्फ्फ्फ़… अहम ज़ोर से… असीम और अंदर जीभ दाल… मेरी गांड चाट… अह्ह्ह… मैं मर जाउंगी… कितनी बड़ी रंडी हूँ मैं… अह्ह्ह्हह…”

अहम की स्पीड और तेज़ हो गयी. उसने आपि की टाँगे और फैलाई और jor-jor से छोड़ने लगा. हर धक्के पे “धप धप धप” की आवाज़ रूम में गूँज रही थी. आपि की छूट से पानी निकल रहा था… बीएड गीला हो चूका था.

कुछ देर बाद अहम ज़ोर से चीखा…

**अहम:** “आआह्ह्ह्हह आपि… आ गया… ले… ले रंडी… अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह!!!”

उसने झट से लुंड बहार निकला और ज़ोर से हाथ हिलाते हुए आपि के चूचियों, पेट और चेहरे पे अपना गरम माल छोड़ दिया. Dhaar-dhaar… laal-laal पानी आपि के बदन पे टपक रहा था.

जैसे hi अहम हैट गया, मैं तुरंत आगे बढ़ा. आपि को घोड़ी बनाया… उसकी मोती गांड ऊपर उठायी… और अपना मोटा लुंड उसकी छूट में एक hi धक्के में पेल दिया.

**धायआपपप!!!**

**ज़ैनब आपि:** “आआह्ह्ह्हह… असीम…… पूरा अंदर… उफ्फ्फ्फ़… फाड़ दिया… अह्ह्ह… और ज़ोर से… छोड़… मेरी छूट फाड़ दे… अह्ह्ह्हह…”

मैं पीछे से jor-jor से धक्के मरने लगा. हर धक्के पे आपि की गांड मेरे पेट से टकरा रही थी. अहम आगे बैठ गया और अपना अभी भी थोड़ा खड़ा लुंड आपि के मुँह में दाल दिया.

अब आपि बीच में थी – मैं पीछे से उसकी छूट छोड़ रहा था, अहम आगे से उसका मुँह छोड़ रहा था.

**मैं (zor-zor से धक्के मारते हुए):**

“ले साली रंडी… ले कुटिया… haramzadi...teri छूट अब मेरी… अह्ह्ह…… मां ने फाड़ी… अब मैं फाड़ रहा हूँ… उफ्फ्फ्फ़… कितनी टाइट है तेरी छूट… ले… ले मादरचोद… और ज़ोर से उछाल… अह्ह्ह… मेरी बेहेन… मेरी पर्सनल रांड… ले मेरा लुंड… पूरा अंदर ले… अह्ह्ह्हह…”

आपि सिर्फ सिसक रही थी. उसकी आँखें पानी से भर गयी थी, पर गांड खुद पीछे utha-utha कर मेरा लुंड निगल रही थी. अहम उसके मुँह में धक्के मार रहा था.

मैं अब झड़ने वाला था. स्पीड बहुत तेज़ कर दी.…

**मैं (तेज़ धक्के मारते हुए):**

“रंडी… मादरचोद… मैं आ रहा हूँ… तेरी छूट में माल भर रहा हूँ… अह्ह्ह… ले… ले कुटिया… मेरी बेहेन… अह्ह्ह्हह्हह…”

तभी…

मेरी नज़र दरवाज़े पर पड़ी.

गेट खुला था. और सामने वाले को देखकर मैं सुन्न हो गया . मेरी नज़र पड़ते hi उसके कदम वापस हो गए.

मैं दर के मारे सुन्न हो गया. मेरा मुँह सुख गया. लुंड अभी भी आपि की छूट में था… झड़ने वाला tha…darwaza खुला छोड़ा था मैंने.

इतनी बड़ी गलती कैसे कर सकता था मैं..
 
गेट पर कोई और नहीं tha…**Choti ममी सना** कड़ी थी.



जैसे hi मेरी नज़र उनपे पड़ी, उनका चेहरा बिलकुल सुन्न हो गया. उनकी आँखें फैल गयी, मुँह थोड़ा खुला रह गया. उन्होंने सिर्फ एक सेकंड में अंदर का पूरा नज़ारा देख लिया – ज़ैनब आपि बीएड पे नंगी, गांड ऊपर, अहम का लुंड उसकी मुँह में धक्के मार रहा था और मैं पीछे से उसकी छूट मार रहा था. ममी का पूरा जिस्म काँप उठा. उन्होंने झट से मुँह पे हाथ रख लिया और बिना एक शब्द बोले वापस मुद गयी. उनकी मोती गांड सलवार में हिलती हुई सीढ़ियों की तरफ चली गयी.

मैं दर के मारे पागल हो गया. मेरा दिल zor-zor से धक् धक् कर रहा था. लुंड तोह पहले से hi फटने को था… और ये दर ने ऐसा झटका मारा की मैं कण्ट्रोल hi नहीं कर पाया.

**“आआह्ह्हह्ह्ह्ह… आपि… ले… ले मादरचोद… आ गया… अह्ह्ह्हह्हह!!!”**

मैं ज़ोर से चीखा और आपि की छूट के अंदर hi अपना सारा गरम माल छोड़ दिया. एक एक बूँद तक अंदर तक भर दिया. आपि भी उसी वक़्त काँप उठी, उसकी छूट ने मेरा लुंड और ज़ोर से जकड लिया. अहम भी थक चूका था, उसने अपना लुंड बहार निकाला और बीएड पे लेट गया.

ज़ैनब आपि बिलकुल नंगी, पसीने और माल से नाहा हुई लेती रही. उसकी सांसें तेज़ चल रही थी. उसने आँखें बंद करके सिर्फ इतना बोलै,

**“असीम… Arham…ab नहीं होगा मुझसे…”**

हम दोनों कपडे पहन कर बहार निकल गए. मैं अपने रूम में आया और बिस्तर पे गिर गया. दिमाग में सिर्फ एक hi चीज़ घूम रही थी – **छोटी ममी सना का चेहरा**. उफ्फ्फ्फ़… वो देख चुकी थी. उन्होंने देख लिया था की मैं अपनी बड़ी बहन की छूट में लुंड पेल रहा हूँ. कल सुबह मैं उन्हें कैसे फेस करूँगा? मुझे डाँटेगी? अब्बू को बता देगी? या… या कुछ और?

नींद नाम की चीज़ नहीं आयी. Baar-baar आँखों के सामने ममी का वह शॉकेड चेहरा आ रहा था.

सुबह मैं darte-darte बहार निकला. हॉल में नाश्ता लगा था. सब लोग टेबल पे बैठे थे.

यास्मीन आपि मुझे बिलकुल इग्नोर कर रही थी. नज़र भी नहीं उठा रही थी. जैसे रात वाला सब भूल गयी हो. पर मैं जानता था – वो भूली नहीं है.

इफ़्फ़त और बुशरा दोनों मुझे अजीब नज़रों से देख रही थी. बुशरा ने अपनी टाइट कुर्ती में दूध उभर के बैठ के मुझे एक बार ऊपर से नीचे तक घूरा. इफ़्फ़त ने लेग्गिंग्स में अपनी पतली कमर और उभरी गांड चेयर पे दबाते हुए हलके से स्माइल की. दोनों के चेहरे पे एक अलग सी चमक थी.

ज़ैनब आपि और बड़े मां की नज़रबाज़ी चल रही थी. मां कभी उनके bade-bade दूध को घूर रहे थे, कभी ज़ैनब आपि उनकी तरफ देखती और शर्मा कर दुपट्टा सीने पे लपेट लेती.

और फिर… **छोटी ममी सना** जो खाना सर्वे कर रही थी.

जैसे hi उन्होंने मुझे प्लेट में पराठा रखा, उनकी आँखें मेरी आँखों से मिली. एक सेकंड के लिए वो रुक गयी. उनके गाल थोड़े लाल हो गए. पर उन्होंने कुछ नहीं बोलै. सिर्फ धीरे से बोली,

**“असीम… खाना खा कर मेरे रूम में आ जाओ. कुछ सामान मंगवाना है मार्किट से.”**

बस इतना बोलै और वापस किचन की तरफ चली गयी. उनकी मोती गांड सलवार में हिलती हुई जा रही थी.

मेरी पहात गयी.

उफ्फ्फ्फ़… ममी मुझे अपने रूम में बुला रही है. अकेला. रात का सब देख चुकी है. अब वो मुझे बहुत डाँटेगी. अब्बू को बता देगी.

मेरा लुंड पायजामा में फिर से तन गया था. दर के साथ साथ एक अजीब सी हवस भी जग रही थी. छोटी ममी सना… जो हमेशा पर्दा करती थी, शरीफ बानी रहती थी… आज मुझे अपने रूम में बुला रही है.

मैं खाना खा रहा था पर मुँह में कुछ नहीं जा रहा था. दिमाग में सिर्फ एक hi सवाल घूम रहा था –

**“कल रात ममी ने सब देख लिया… अब मेरे साथ क्या करेगी वो?”**

नाश्ता ख़तम होते hi मैं उठा. यास्मीन आपि ने भी मुझे एक नज़र डाली… पर कुछ नहीं बोली. बुशरा और इफ़्फ़त दोनों मुस्कुराते हुए मुझे देखते रहे.

मैं dheere-dheere छोटी ममी सना के रूम की तरफ बढ़ गया. दरवाज़ा थोड़ा खुला था. अंदर से उनकी आवाज़ आयी,

**“असीम… अंदर आ जाओ.”**

मेरा दिल ज़ोर से धड़क रहा था. मैं अंदर घुस गया और दरवाज़ा बंद कर दिया.

छोटी ममी सना रूम के एक्सएक्ट बीच में कड़ी थी. उनका चेहरा बिलकुल लाल हो चूका था. आँखें गुस्से और शॉक से फूली हुई थी. दुपट्टा अभी भी शोल्डर्स पे लटका हुआ था, लेकिन उनके bade-bade दूध हर सांस के साथ zor-zor से upar-neeche हो रहे थे. लाइट पिंक सलवार सूट इतना टाइट था की उनकी चूचियों का पूरा शेप साफ़ दिख रहा था – ब्रा के ऊपर से भी gol-gol उभार और निप्पल का हल्का सा निशान. सलवार की नाडा थोड़ी ढीली हो गयी थी और उनकी moti-moti गांड बीएड की तरफ घूमते hi दोनों नितम्ब alag-alag उभर आये थे.

जैसे hi मैं अंदर आया, ममी ने झट से मुझे देखा और ज़ोर से चिल्लाई –

**“कब से चल रहा है ये सब असीम?!! कब से?!”**

उनकी आवाज़ इतनी तेज़ और कांपती हुई थी की मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा. मैं कुछ नहीं बोलै. सिर्फ चुपचाप खड़ा रहा, नज़र नीचे.

ममी आगे बढ़ी. हर कदम के साथ उनके bade-bade दूध ज़ोर से हिल रहे थे. सलवार के कपडे उनकी चूचियों पे इतने टाइट पद रहे थे की हर सांस के साथ उनका उभार और गहरा होता जा रहा था. उन्होंने एक हाथ कमर पे रख लिया और दूसरा हाथ सीधा मेरी तरफ किया,

**“तुम कैसे हो गए हो असीम?! ये सब… ये सब तुम कर रहे हो?! और वो भी अपनी बहन के साथ?! ज़ैनब…… उसके साथ?! उफ्फ्फ्फ़… मैंने सब देख लिया…… दोनों… अहम और तू… उसके साथ… उफ्फ्फ्फ़… मैं मर जाउंगी असीम… ये क्या हो रहा है?!”**

ममी का गाला भर आया. उनकी आँखें पानी से भर गयी, पर गुस्सा इतना था की आंसू रुक गए. उन्होंने अपनी मोती गांड बीएड की तरफ घुमाई और ज़ोर से बैठ गयी. जैसे hi वो बैठी, उनकी सलवार और टाइट हो गयी. दोनों गांड के हिस्से बिलकुल alag-alag दीखते थे और बीएड पे डाब कर और उभर आये. उनके bade-bade दूध अब भी upar-neeche हो रहे थे – गुस्से के साथ साथ उनकी सांसें तेज़ चल रही थी.

मैं अभी भी चुपचाप खड़ा था. नज़र झुकाये हुए. पर अंदर से… उफ्फ्फ्फ़… ममी का ये रूप देख कर मेरा लुंड पायजामा के अंदर एक ज़ोर का झटका मार बैठा. उनके लाल चेहरे पे पसीना, उनके उभरे हुए दूध का हिलना, मोती गांड का बीएड पे दबना… सब कुछ मुझे और गरम कर रहा था.

ममी ने गहरी सांस ली और फिर से तेज़ आवाज़ में बोली,

**“मेरे बेटे को… अहम को… तू इन सब में शामिल कर लिया?! वो अभी बच्चा है असीम… और तू उसको अपनी बहन की… उसकी… उफ्फ्फ्फ़… मैं बोल भी नहीं प् रही… ज़ैनब के साथ?! तू ने उसको भी इस गन्दगी में घसीट लिया?! कितने दिन से चल रहा है ये सब?! बोल न असीम… कितने दिन से तू अपनी बहन को… और अब मेरा बीटा भी… उफ्फ्फ्फ़… मैं क्या करूँ अब?!”**

ममी का गाला फिर से रुक गया. उन्होंने दोनों हाथों से अपना चेहरा पकड़ लिया. उनके bade-bade दूध zor-zor से upar-neeche हो रहे थे. सलवार के ऊपर से उनकी चूचियों का टाइट शेप बिलकुल साफ़ दिख रहा था. उनकी मोती गांड बीएड पे डाब रही थी और थोड़ी सी हिल भी रही थी गुस्से के साथ.

मैं अभी भी बिलकुल चुप था. सिर्फ सुन रहा था. नज़र नीचे. पर मेरा लुंड पायजामा में पूरा तन चूका था

ममी ने हाथ नीचे किया, आँखें उठायी और फिर से कांपती आवाज़ में बोली,

**“मेरे बेटे को इन सब में शामिल कर लिया… अहम को… उसको भी तू ने इस रास्ते पे दाल दिया असीम… उफ्फ्फ्फ़… मैंने सोचा था तू घर का बीटा है… शरीफ है… पर तू तोह… तू तोह पूरा… उफ्फ्फ्फ़… मैं बोल भी नहीं प् रही… अब बता… मैं क्या करूँ? अब्बू को बताऊँ? या… या तू मुझे भी इसमें घसीटना चाहता है?!”**

उनकी आवाज़ में अब गुस्से के साथ बेबस सी तड़प भी आ गयी थी. उन्होंने अपनी सलवार की नाडा को थोड़ा टाइट किया, पर उनकी मोती गांड अभी भी बीएड पे डाब रही थी और हिल रही थी. उनके bade-bade दूध हर सांस के साथ उभर रहे थे.

मैं अभी भी चुपचाप खड़ा था… पर अंदर से बहुत गरम हो चूका था.

ममी ने एक गहरी सांस ली और धीरे से आँखें उठा कर मेरी तरफ देखा. उनकी नज़र में गुस्सा था…

.मैं ने गहरी सांस ली और धीरे से बोलै,

**“ममी… सच बताऊँ तोह… अहम… वो ये सब आपके साथ करना चाहता था… लेकिन मैंने उसे ज़ैनब आपि के पास ले गया… मैंने सोचा… आपको ये सब पता नहीं चलना चाहिए…”**

जैसे hi ये बात मेरे मुँह से निकली, ममी का पूरा चेहरा एक सेकंड में बदल गया. उनकी आँखें फैल गयी. उनका मुँह थोड़ा खुला रह गया. उन्होंने दोनों हाथों से अपना चेहरा पकड़ लिया और धीरे से बोली,

**“क्या…?! अहम… मेरा बीटा… मुझे… ऐसा सोचता है?!”**

ममी का चेहरा पूरा लाल हो गया था. उनके गाल इतने लाल हो गए जैसे कोई लाल गुलाब हो. उनकी आँखें पानी से भर आयी thi.unke bade-bade दूध अब भी zor-zor से upar-neeche हो रहे थे. उनकी मोती गांड बीएड पे और ज़ोर से डाब गयी थी.

मैं चुपचाप खड़ा था. नज़र नीचे. पर मैंने देखा… ममी का चेहरा सिर्फ लाल नहीं हुआ था, उनके दूध और भी उभर आये थे. उनकी सांसें और तेज़ हो गयी थी. उन्होंने अपने सीने पर दुपट्टा लपेट लिया और मुझे देखते हुए कांपती आवाज़ में बोली,

**“असीम… बहार जाओ… अभी बहार जाओ… मुझे अकेला छोड़ दो…”**

उन्होंने दुपट्टा को और टाइट सीने पर लपेट लिया, जैसे अपने bade-bade दूध को छुपाने की कोशिश कर रही हों. पर दुपट्टा के ऊपर से भी उनकी चूचियों का उभार साफ़ दिख रहा था. मैं ने सर हिला दिया और धीरे से बहार निकल गया.

दरवाज़ा बंद करते वक़्त मैंने पीछे मुद कर एक बार और देखा – ममी अभी भी बीएड पे बैठी थी, दुपट्टा सीने पर तिघ्टलय लपेटे हुए, चेहरा लाल, सांसें तेज़… और उनकी आँखें बंद.

मैं अपने रूम की तरफ जाते हुए सोचने लगा…

**उफ्फ्फ्फ़ … ममी का चेहरा लाल देख कर मेरा लुंड और तन गया. शायद अंदर से ममी को भी गरम लग रहा होगा… अपने बेटे अहम के बारे में सुन कर… वो शरीफ ममी… अंदर से कितनी गरम हो रही होगी… शायद वो भी एक छुपी हुई रंडी है… जो अब तक सबको दिखती नहीं थी…**

मैं रूम में आकर बिस्तर पे लेट गया.

गर्मी बहुत तेज़ थी. सुबह से hi धुप इतनी कड़क थी की घर के अंदर भी पसीना निकल रहा था. मैं हॉल में आया तोह वहां कोई नहीं था. सोफे खली, टीवी ऑफ. मैं समझ गया – ज़ैनब आपि मां के साथ बहार चली गयी होगी मां का लुंड लेने.

मैं किचन की तरफ गया. वहां बड़ी ममी और यास्मीन आपि खाना बना रही थी. दोनों पसीने से बिलकुल भीगी हुई थी. बड़ी ममी का सलवार सूट गीला हो चूका था, उनके bade-bade दूध कपडे से चिपके हुए थे. यास्मीन आपि की हालत और भी ख़राब थी – उनका लाइट पिंक सलवार सूट पसीने से इतना गीला था की ब्रा का शेप साफ़ दिख रहा था. उनके bade-bade दूध zor-zor से upar-neeche हो रहे थे. हर सांस के साथ उनकी चूचियां उभर रही थी और पसीने की बूँदें उनके गले से नीचे टपक रही थी. उनकी मोती गांड सलवार में इतनी टाइट चिपकी हुई थी की दोनों नितम्ब alag-alag दीखते थे.

मैंने यास्मीन आपि को इशारा किया – आँख से आँख मिला कर छत पर चलने का. उन्होंने मुझे गुस्से से आँखें दिखाई. उनका चेहरा और लाल हो गया. पर मैंने फिर से इशारा किया और वहां से निकल गया.

मैं सीधा छत पर चला गया. धुप इतनी तेज़ थी की पेअर जल रहे थे. मैं टंकी के पीछे वाले कोने में चला गया. मुझे पता था – यास्मीन आपि ज़रूर आएगी. वो चाहे जितना गुस्सा दिखा ले, अंदर से तड़प रही होगी.

लगभग 10 मिनट बाद मैंने सीढ़ियों की तरफ आवाज़ सुनी. यास्मीन आपि छत पर आयी. उनका चेहरा गुस्से से लाल था. पसीने से उनका पूरा बदन चमक रहा था. सलवार सूट पसीने से इतना गीला था की उनके bade-bade दूध बिलकुल उभरे हुए दिख रहे थे. ब्रा के अंदर से निप्पल का शेप भी हल्का सा दिख रहा था. उनकी मोती गांड हर कदम पे हिल रही थी.

वो मेरे पास आयी और गुस्से में बोली,

**“क्या हुआ असीम? इतनी गर्मी में मुझे यहाँ क्यों बुलाया?”**

मैं कुछ नहीं बोलै. सीधा उनका हाथ पकड़ लिया और टंकी के पीछे वाले कोने में ले गया. वहां धुप काम थी, थोड़ी सी छाया थी. जैसे hi हम वहां पहुंचे, मैंने उनको अपनी बाँहों में भर लिया और ज़ोर से चूमने लगा.

यास्मीन आपि का पूरा बदन पसीने से भीगा हुआ था. उनके मुलायम, गरम होंठ मेरे मुँह में आ गए. मैं उनके होंठ चूसने लगा. उनकी जीभ मेरे मुँह में घुसा दी. उनका पसीना मेरे होंठ पे लग रहा था – नमकीन और गरम. मैं उनके गले को चाटने लगा. उनकी गर्दन पे पसीने की बूँदें टपक रही थी. मैं उनको chaat-chaat के साफ़ कर रहा था.

यास्मीन आपि अपने आप को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी. उन्होंने मुझे धकेलने की कोशिश की,

**“असीम… छोड़… यहाँ कोई आ जायेगा… उफ्फ्फ्फ़… मत करो…”**

पर मैंने उनको और टाइट पकड़ लिया. मेरा एक हाथ उनकी कमर पे था, दूसरा उनके bade-bade दूध पे. उनके चूचियां पसीने से इतने गीले थे की सलवार सूट के ऊपर से भी उनकी सॉफ्टनेस मेरे हाथ में आ रही थी. मैं उनके गले को और ज़ोर से चाटने लगा. उनकी गर्दन, कान, और गले के निचे… सब जगह पसीना था. मैं उनको चाट रहा था जैसे कोई प्यासा हो.

यास्मीन आपि का बदन काँप रहा था. उनकी सांसें बहुत तेज़ हो गयी थी. उन्होंने मुझे रोकने की कोशिश की पर उनकी टाँगे thar-thar काँप रही थी. उनके bade-bade दूध मेरे सीने से रगड़ खा रहे थे. पसीने की बूँदें उनके दूध से मेरे शर्ट पे टपक रही थी.

**उफ्फ्फ्फ़…** कितनी गरम और नमकीन थी वो. उनकी मोती गांड मेरे हाथों में थी. मैं उनकी गांड को धीरे से मसलने लगा. सलवार के ऊपर से भी उनकी गांड की सॉफ्टनेस फील हो रही थी.

यास्मीन आपि अब सिर्फ सिसकारियां ले रही थी. उनकी आवाज़ काँप रही थी,

**“असीम… बहुत गर्मी है… उफ्फ्फ्फ़… छोड़ दो… कोई देख लेगा…”**

पर उनकी बॉडी खुद मेरे सीने से चिपक रही थी. उनके होंठ अभी भी मेरे मुँह के पास थे. मैं उनके गले को छत्ते हुए उनके कान में धीरे से बोलै,

**“आपि… आप इतनी पसीने से भीगी हुई हो… उफ्फ्फ्फ़… कितनी गरम लग रही हो…”**

धुप बहार तेज़ थी, पर टंकी के पीछे छाया में सिर्फ हम दोनों थे. यास्मीन आपि अभी भी मेरे बाँहों में थी… बिलकुल पसीने से नाहा हुई…

मैं यास्मीन आपि को और टाइट पकड़ लिया. उनका पूरा बदन पसीने से भीगा हुआ था. मैं ने उनको धीरे से पीछे की तरफ झुका दिया. उनकी कमर टंकी के दीवार से लग गयी. उनकी moti-moti गांड अब मेरे मुँह के बिलकुल सामने थी. सलवार इतनी टाइट चिपकी हुई थी की दोनों गांड के हिस्से alag-alag उभर रहे थे और पसीने से चमक रही थी.

मैंने झट से उनकी सलवार का नाडा पकड़ा और एक hi झटके में नीचे कर दिया. पंतय भी साथ में खिसक गयी. उफ्फ्फ्फ़… यास्मीन आपि की पसीने से भरी मोती गांड बिलकुल नंगी हो गयी. दोनों गांड के हिस्से इतने भरे हुए और गरम थे की उनके बीच पसीने की बूँदें टपक रही थी. गांड का छेद और नीचे वाली गुलाबी छूट दोनों पसीने से चमक रहे थे.

मैं घुटनो पे बैठ गया और दोनों हाथों से उनकी मोती गांड के हिस्से फैला दिए. और मुँह लगा दिया.

**स्लुर्र्र्रॉप… चूऊउस… पूछ पूछ…**

मैं पागलो की तरह उनकी पसीने से भरी गांड चाटने लगा. पहले दोनों गांड के हिस्से को जीभ से chaat-chaat के साफ़ कर रहा था. पसीना नमकीन और गरम था. मैं हर बूँद को पि रहा था. फिर मैंने जीभ उनके गांड के छेद पे रख दी और अंदर घुमाने लगा.

यास्मीन आपि बिलकुल पागल हो गयी. उनकी टाँगे काँप रही थी. उन्होंने टंकी के दीवार को ज़ोर से पकड़ लिया और सिसकारियां लेने लगी,

**“अह्ह्ह्हह… असीम… उफ्फ्फ्फ़… कहा से सीखा ये सब तू… अह्ह्ह… मेरी गांड… उफ्फ्फ्फ़… बहुत गर्मी है… अह्ह्ह्हह… और ज़ोर से… छत्ते रहो… हहैयय…”**

उनकी आवाज़ काँप रही थी. वो मज़े से पागल सी हो रही थी. उनकी मोती गांड खुद मेरे मुँह पे डाब रही थी. मैं जीभ अंदर बहार कर रहा था. गांड का छेद गीला हो चूका था मेरे लार और उनके पसीने से.

मैं नीचे की तरफ गया. उनकी गुलाबी छूट अब बिलकुल गीली और पसीने से भीगी हुई थी. मैं ने मुँह लगा दिया और ज़ोर से चाटने लगा. जीभ अंदर दाल के अंदर तक घुमा रहा था. “पूछ पूछ पूछ” की आवाज़ हो रही थी. उनकी छूट से garam-garam रास और पसीना मेरे मुँह में आ रहा था. मैं सब पि रहा था.

यास्मीन आपि अब कण्ट्रोल hi नहीं कर प् रही थी. उन्होंने एक हाथ पीछे करके मेरा सर पकड़ लिया और अपनी गांड और छूट को मेरे मुँह पे ज़ोर से दबा दिया.

**“अह्ह्ह्हह… असीम… … उफ्फ्फ्फ़… कहा से सीखा इतना… ahhh…hhhayyy… मैं पागल हो जाउंगी… और ज़ोर से… जीभ अंदर दाल… अह्ह्ह्हह… मज़े आ रहा है… बहुत मज़े आ रहा है…”**

उनकी टाँगे thar-thar काँप रही थी. उनकी मोती गांड मेरे मुँह पे ज़ोर से रगड़ रही थी. उनके bade-bade दूध दीवार से रगड़ खा रहे थे. पसीने की बूँदें उनके दूध से टपक रही थी. वो बिलकुल पागल सी हो गयी थी मज़े से. हर चाटने पे उनकी सिसकारी तेज़ हो रही थी.

मैं जीभ से उनकी गांड का छेद और छूट दोनों को एक साथ चाट रहा था. कभी ऊपर गांड के छेद में जीभ घुमा रहा था, कभी नीचे उनकी छूट के अंदर तक दाल रहा था. उनका पूरा पसीना मेरा मुँह गीला कर रहा था.

यास्मीन आपि अब सिर्फ सिसकारियां ले रही थी,

**“अह्ह्ह… असीम… और… और ज़ोर से… उफ्फ्फ्फ़… मैं तड़प रही थी इतने दिन से… अह्ह्ह्हह… तू ने मुझे पागल कर दिया बीटा… छत्ते रहो… दोनों छेद छत्ते रहो… हहैयय…”**

धुप बहार तेज़ थी, पर टंकी के पीछे सिर्फ हम दोनों थे. यास्मीन आपि अब पूरी तरह मज़े में डूब चुकी थी. उनकी मोती गांड मेरे मुँह पे रगड़ रही थी और वो सिसकारियां ले रही थी जैसे कोई भूखी

मैं यास्मीन आपि को धीरे से सीधा किया. उनका पसीना से भीगा बदन अब मेरे सामने खड़ा था. उन्होंने अपने गुलाबी होंठ को ज़ोर से काट लिया. उफ्फ्फ्फ़ … उनकी आँखें बिलकुल हवस से भरी हुई थी. जैसे कोई प्यासी हो, आँखों में आग सी लग रही थी. उनके bade-bade दूध पसीने से चमक रहे थे, ब्रा के ऊपर से भी निप्पल के टाइट उभार साफ़ दिख रहे थे. उनकी मोती गांड अभी भी थोड़ी सी हिल रही थी.

मैंने झट से अपना पंत और पायजामा दोनों नीचे कर दिया. मेरा मोटा, पसीने से भरा लुंड बहार आ गया – टोपा से पानी और पसीना टपक रहा था, नसें उभरी हुई थी, पूरा लुंड चमक रहा था.

यास्मीन आपि ने उसको देखा. उनकी आँखें फैल गयी. वो सिर्फ घूरती रही – हवस भरी नज़रों से. उनके होंठ और भी गीले हो गए थे.

मैं नीचे की तरफ इशारा किया और धीरे से बोलै,

**“बैठ जाओ आपि… मुँह में लो इसको… रंडी… हरामज़ादी कुटिया…”**

यास्मीन आपि ने एक पल के लिए मेरी आँखों में देखा. फिर वो धीरे से घुटनो पे बैठ गयी. उनकी moti-moti जांघें ज़मीन पे डाब गयी. उनके पसीने से भरे bade-bade दूध अब मेरे लुंड के बिलकुल सामने लटक रहे थे. वो सिर्फ घूर रही थी… जैसे सोच रही हो की ये लुंड कहा से आ गया.

मैं ने अपना मुँह का थूक लिया और सीधा अपने लुंड पर गिरा दिया. गीला थूक लुंड के ऊपर से नीचे तक बहने लगा. मैंने उसको देखते हुए बोलै,

**“चूस न मादरचोद… पूरा मुँह में ले… भोसड़ी के…”**

यास्मीन आपि ने मेरी आँखों में देखा… फिर आगे बढ़ी. उनके गुलाबी गीले होंठ मेरे लुंड के टोपा पे लग गए. और वो चूसने लगी.

**स्लुर्र्र्रॉप… ग्लुक… ग्लुक… पूछ पूछ…**

उफ्फ्फ्फ़ … यास्मीन आपि पूरी तरह दीवानी हो गयी. उन्होंने पहले टोपा को मुँह में ले लिया, जीभ से चाटने लगी. फिर dheere-dheere पूरा लुंड अंदर लेने लगी. उनके पसीने से भरे होंठ मेरे लुंड पे स्लाइड हो रहे थे. लार और पसीना मिक्स हो कर टपक रहा था उनके चीन पे. वो zor-zor से चूस रही थी – कभी ऊपर से नीचे, कभी नीचे से ऊपर. हर चूसने पे “ग्लुक ग्लुक” की आवाज़ आ रही थी.

मैं अंदर से पागल हो रहा था. मैंने उसके बाल पकड़ लिए और धीरे से धक्के मरने लगा. और gandi-gandi गालियां देने लगा,

**“ले भोसड़ी के रंडी… पूरा अंदर ले… अह्ह्ह… कितनी बड़ी रैंड है तू… हरामी की बेटी… लुंड की भूखी… ग्लुक ग्लुक… और ज़ोर से चूस… तेरी माँ की छूट… अह्ह्ह… कितनी गरम मुँह है तेरा मादरचोद… ले… ले और अंदर… गांड मरूंगा तेरी आज… उफ्फ्फ्फ़… साली… लुंड की रानी बन गयी है तू…”**

यास्मीन आपि और तेज़ चूसने लगी. उनके bade-bade दूध मेरे टांगो से रगड़ खा रहे थे. उनकी आँखें ऊपर करके मेरी आँखों में देख रही थी. लार के तार बन रहे थे उनके होंठ से मेरे लुंड तक. वो पूरा लुंड हलक तक ले रही थी और बहार निकाल कर टोपा को जीभ से चाट रही थी.

मैं और गालियां देने लगा,

**“चूस साली… चूस और ज़ोर से… तेरी छूट फाड़ दूंगा आज… भेनचोद रंडी… लुंड के लिए तड़प रही थी न इतने दिन से… ले… ले पूरा… अह्ह्ह… कितनी टाइट मुँह है तेरा… हरामज़ादी… गांड मारूंगा तेरी… उफ्फ्फ्फ़… चूस मादरचोद… मेरा माल पि जा आज…”**

यास्मीन आपि अब बिलकुल पागल सी हो गयी थी. वो zor-zor से सर हिला रही थी, लुंड को andar-bahar कर रही थी. उनके पसीने से भरे दूध हिल रहे थे. उनकी सांसें बहुत तेज़ हो गयी थी. वो सिर्फ चूस रही थी… जैसे दुनिया भूल गयी हो.

मैं उसके बाल पकड़ के और तेज़ धक्के मरने लगा

पबीर मैं यास्मीन आपि को वही छत के कोने में निचे लिटा दिया. उनका पसीने से बिलकुल भीगा बदन उस जमीन पे लग गया. उनकी moti-moti जांघें khud-ba-khud फ़ैल गयी. मैं उनके ऊपर चढ़ गया, अपना मोटा लुंड पकड़ के उनकी गीली छूट के मुँह पे सेट किया और…

**धायआपपप!!!**

एक hi ज़ोर का धक्का मारा और पूरा लुंड एक hi झटके में अंदर तक पेल दिया.

**“अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… असीम… … बहुत मोटा… उफ्फ्फ्फ़… पहात गयी मेरी छूट… अह्ह्ह… पूरा अंदर… बहुत गहरा… हहैयय…”**

आपि ज़ोर से चीख उठी. उनकी आँखें फैल गयी, मुँह खुला रह गया. पर अंदर से उनकी छूट इतनी गरम और गीली थी की मेरा लुंड जैसे आग में घुसा हो. उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मुझे मालुम hi नहीं था की मेरी शरीफ यास्मीन आपि अंदर से इतनी गरम होगी. उनकी छूट ने मेरे लुंड को जैसे निगल लिया – टाइट, गरम, पसीने और रास से भरी हुई.

मैं रुकने वाला नहीं था. मैंने दोनों हाथों से उनकी कमर पकड़ी और zor-zor से धक्के मरने लगा…

**धप… धप… धप… धप…**

हर धक्के पे आपि की मोती गांड ज़मीन पे ज़ोर से टकरा रही थी. उनके bade-bade चूचियां upar-neeche उछलने लगे – पसीने से चमक रहे थे, ब्रा के अंदर से भी निप्पल सख्त हो कर उभर आये थे. दोनों का पूरा बदन पसीने से भीग चूका था. मेरी छाती उनके चूचियों से रगड़ खा रही थी, उनकी जांघें मेरे कमर से लिपट गयी थी.

मैं छोड़ते हुए gandi-gandi गालियां देने लगा…

**“ले साली रंडी… ले मादरचोद… तेरी छूट फाड़ दूंगा हरामज़ादी… अह्ह्ह… कितनी गरम है तेरी छूट कुटिया… उफ्फ्फ्फ़… शरीफ बानी फिरती थी न… अब ले मेरा लुंड… पूरा अंदर ले… भोसड़ी के… अह्ह्ह…”**

आपि हवस में पागल सी हो गयी थी. उसने अपनी टाँगे और फैला दी और अपनी गांड ऊपर utha-utha कर मेरा लुंड अंदर ले रही थी. उनकी सिसकारियां तेज़ हो गयी…

**“अह्ह्ह्हह… असीम… और ज़ोर से… फाड़ दो मेरी … उफ्फ्फ्फ़… बहुत मज़ा आ रहा है बीटा… अह्ह्ह… कुटिया बना दो मुझे… हहैयय…”**

मैं और तेज़ धक्के मरने लगा. मैंने उसके कान में गरम सांस छोड़ते हुए पुछा,

**“बोल रंडी… क्या तू अपने अब्बू से भी छुडवायेगी? बोल… मां का लुंड तेरी छूट में डालवाऊं क्या? उफ्फ्फ्फ़… बोल मादरचोद… हाँ बोल… तेरी छूट मां के लुंड के लिए तड़प रही है न?”**

आपि हवस में बिलकुल पागल हो गयी. उसने आँखें बंद करके ज़ोर से सिसकारी ली और बोली,

**“हाँ… हाँ… chudwaungi…abbu से भी छुडवाउंगी… अह्ह्ह्ह… जो चाहे करो… मेरी छूट… मेरी गांड… सब कुछ तुम्हारी… uffff......hayyyy… अह्ह्ह्हह… और ज़ोर से छोड़… फाड़ दो… उफ्फ्फ्फ़…”**

जैसे hi उसने “हाँ” बोलै, मैं और जोश में आ गया. मैंने स्पीड बढ़ा दी. Zor-zor से धक्के मरने लगा. आपि के bade-bade चूचियां अब बिलकुल उछाल रहे थे – पसीने से चमक रहे थे, upar-neeche लटक रहे थे. दोनों का पूरा बदन पसीने से नाहा हुआ था. हम दोनों एक दूसरे से चिपके हुए थे.

मैं नीचे झुक गया और उसके bade-bade चूचियों को मुँह में ले लिया. एक चुकी को ज़ोर से चूसने लगा, दूसरे को हाथ से दबा रहा था. आपि ने मेरा सर पकड़ लिया और अपने चूचियों पे और ज़ोर से दबा दिया.

**“अह्ह्ह… चुसो बीटा… चुसो मेरी चूचियां… उफ्फ्फ्फ़… काटो… और ज़ोर से… अह्ह्ह्हह…”**

हम दोनों अब एक दूसरे को छोड़ते हुए चूस रहे थे. मैं उसके चूचियों को चूस रहा था, वो मेरा गले और सीना चूस रही थी. दोनों के मुँह से लार और पसीना टपक रहा था. मेरी छाती उसके चूचियों से रगड़ खा रही थी. आपि की छूट मेरे लुंड को ज़ोर से जकड रही थी.

**धप… धप… धप…**

मैं और तेज़ छोड़ने लगा. आपि अब सिर्फ चीख रही थी…

**“अह्ह्ह्हह… असीम… और ज़ोर से… अब्बू से भी छुडवाउंगी… उफ्फ्फ्फ़… तेरी रंडी बन गयी हूँ मैं… अह्ह्ह… छोड़… फाड़ दो मेरी छूट… हहैयय…”**

दोनों पसीने से बिलकुल भीग गए थे. छत की गर्मी और हवस ने हम दोनों को जानवर बना दिया था. आपि के bade-bade चूचियां मेरे मुँह में थे, मेरा लुंड उसकी छूट में zor-zor से andar-bahar हो रहा था… और हम दोनों एक दूसरे को चूस रहे थे जैसे कोई प्यासे हो.

उफ्फ्फ्फ़ मेरी शरीफ यास्मीन आपि अब पूरी तरह रंडी बन चुकी थी… फिर मैं आपि के छूट में झड़ने लगा जोर जोर से..

चुदाई के बाद हम दोनों पसीने से बिलकुल tar-b-tar हो चुके थे. यास्मीन आपि की सांसें अभी भी तेज़ चल रही थी. उनका चेहरा लाल, बाल बिखरे हुए, सलवार सूट पूरा ast-vyast. मैं ने झट से अपना पंत ऊपर किया और आपि को धीरे से उठाया. उनकी टाँगे अभी भी thar-thar काँप रही थी. हम दोनों चुपके से सीढ़ियों की तरफ बढे.

जैसे hi हम हॉल के पास पहुंचे… … वहां **छोटी ममी सना** कड़ी थी.

उनका चेहरा देख कर मेरा दिल एक सेकंड के लिए रुक गया. ममी सीधे हम दोनों को घूर रही थी. उनकी आँखें फैली हुई, गाल थोड़े लाल. उन्होंने सिर्फ एक नज़र में सब देख लिया – आपि के कपडे ast-vyast, दुपट्टा एक तरफ लटका हुआ, सलवार थोड़ी ढीली, पसीने से उनका पूरा बदन चमक रहा था. और मैं… मेरा चेहरा भी पसीने से भीगा, सांसें तेज़.

आपि ने ममी को देखते hi एक झटका सा खाया. उनका चेहरा एक सेकंड में उतर गया. वो दर के मारे थोड़ा सा काँप उठी. बिना कुछ बोले उसने अपना दुपट्टा सीने पे तिघ्टलय लपेटा और झट से अपने रूम की तरफ चल पड़ी.

ममी अब सिर्फ मुझे घूर रही थी. उनकी आँखों में गुस्सा साफ़ दिखाई दे रहा था. उन्होंने धीरे से, लेकिन सख्त आवाज़ में कहा,

**“असीम… मेरे कमरे में आओ.”**

मैं कुछ नहीं बोलै. सिर्फ सर झुकाये उनके peeche-peeche चल पड़ा. ममी के रूम का दरवाज़ा खुला था. जैसे hi मैं अंदर घुसा, ममी ने दरवाज़ा बंद किया और सीधे मेरी तरफ घूम गयी.

ममी का चेहरा अभी भी लाल था. उनके bade-bade दूध हर सांस के साथ upar-neeche हो रहे थे. सलवार सूट पसीने से थोड़ा गीला था. उन्होंने गहरी सांस ली और गुस्से भरी आवाज़ में बोली,

**“असीम… तू क्या कर रहा है? यास्मीन बेटी को भी… तेरे से मुझे घिन आने लगी है बीटा. आज hi मैं तेरी अम्मी को कॉल करके सब बताती हूँ… सब कुछ.”**

उनकी आवाज़ काँप रही थी. आँखों में गुस्सा था, बेबस पैन था और शायद थोड़ी सी तड़प भी. मैं तुरंत उनके पैरों के पास गिर गया. दोनों हाथों से उनके पेअर पकड़ लिए और माफ़ी मांगने लगा.

**“ममी… प्लीज… माफ़ कर दो… गलती हो गयी… मैं… मैं ऐसा नहीं हूँ… प्लीज अम्मी को मत बताओ… मैं कभी नहीं करूँगा ऐसा… माफ़ी… माफ़ी दे दो ममी…”**

मैं उनके पैरों को पकडे हुए रोने लगा. ममी कुछ देर चुप रही. उनके पेअर thar-thar काँप रहे थे. उन्होंने धीरे से मेरा सर उठाया और आँखों में देखा. उनकी आँखें अभी भी गुस्से से भरी थी, पर आवाज़ थोड़ी नरम हो गयी.

**“अभी जाओ यहाँ से असीम… मैं बाद में बात करती हूँ.”**

मैं उनके पेअर छोड़ कर उठा. नज़र नीचे किये हुए बहार निकल आया. दरवाज़ा बंद होते hi मेरा दिल zor-zor से धड़क रहा था. ममी का वह गुस्सा भरा चेहरा, उनके bade-bade दूध का हिलना, उनकी मोती गांड… सब आँखों के सामने घूम रहा था.
 
Back
Top