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- Dec 5, 2013
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सुबह हॉल में नाश्ता चल रहा था. अम्मी ने garam-garam पराठे, आलू की सब्ज़ी और अदरक वाली चाय बना राखी थी. अब्बू टेबल के सिरहाने बैठे थे, उनका चेहरा आज भी कल के 20,000 रुपये के वजह से खिला हुआ था. नूर अपनी टाइट पिंक कुर्ती और ब्लैक लेग्गिंग्स में बैठी थी, उसकी उभरी हुई गांड चेयर पे डाब रही थी. ज़ैनब आपि मेरे बिलकुल बगल में बैठी थी – sky-blue सलवार सूट में उनका निप्पल का हल्का उभार साफ़ दिख रहा था.
और फिर… दरवाज़े से मेरी बड़ी आपि अनाम अंदर आयी.
उफ्फ्फ्फ़ … जैसे hi वो अंदर आयी, मेरा लुंड पायजामा के अंदर एक ज़ोर का झटका मार बैठा. वो बिलकुल फ्रेश थी – लाइट पिंक सलवार सूट पहना था. सूट के ऊपर वाला कुरता थोड़ा टाइट था, इसलिए उनके bade-bade दूध बिलकुल उभरे हुए थे… हर सांस के साथ halke-halke हिल रहे थे. गांड पे सलवार इतनी चुस्ती से चिपकी हुई थी की दोनों मोती गांड के हिस्से alag-alag दीखते थे और चलते वक़्त एकदम lachak-lachak कर हिल रहे थे. चेहरा थोड़ा लाल था, आँखें नीचे, जैसे abhi-abhi किसी ने उनकी गुलाबी छूट फाड़ दी हो.
वो टेबल पे मेरे सामने बैठने के लिए झुकी… कुरता आगे की तरफ लटक गया और gehra-gehra क्लीवेज साफ़ दिख गया. रात वाला सन आँखों के सामने आ गया – मैं टेबल के नीचे अपना लुंड चुपके से दबाने लगा.
नाश्ता शुरू होते hi मैंने बहाना बनाया.
**“अब्बू… आपि… वो ऑनलाइन काम जो अनाम आपि ने शुरू किया था न… जिससे कल 20,000 एडवांस मिले थे… आज क्लाइंट ने अर्जेंट मीटिंग मांगी है. वह पर्सनली एक्सप्लेन करना चाहता है की आगे का प्रोजेक्ट कैसे होगा. मैं साथ चलता हूँ, आपको कोई टेंशन नहीं होगी.”**
अनाम आपि ने झट से मेरी तरफ देखा. उनकी आँखें फैल गयी. चेहरा एक सेकंड में लाल हो गया. उसने तुरंत मन कर दिया,
**“नहीं असीम… मैं नहीं जाउंगी. घर में बहुत काम है… अम्मी को हेल्प करनी है… और मैं अकेली बहार नहीं जाती.”**
अब्बू ने भी तुरंत मन कर दिया. उनका स्ट्रिक्ट चेहरा वापस आ गया,
**“बिल्कु नहीं! बहार किसी के पास जाने की क्या ज़रूरत है? पैसे आलरेडी मिल गए हैं… बाकी काम घर बैठे हो सकता है. ये घर से बहार नहीं जाएगी.”**
मैं तुरंत बोल पड़ा,
**“अब्बू… क्लाइंट बहुत बड़ा है. अगर आज पर्सनली नहीं गए तोह प्रोजेक्ट कैंसिल कर सकता है. 20,000 तोह सिर्फ एडवांस था… आगे और भी ज़्यादा पैसे आने वाले हैं. आप hi सोचो… मैं साथ रहूँगा… बाइक पे ले जाऊंगा… कोई प्रॉब्लम नहीं होगी.”**
अम्मी ने भी सपोर्ट किया,
**“हाँ जी… बेटी थोड़ी बहार निकल लेगी तोह क्या हो जायेगा? असीम साथ है… सेफ रहेगी.”**
ज़ैनब आपि बिलकुल चुप थी… पर उसकी नज़रें हम दोनों पे अटक गयी थी. वो baar-baar अनाम आपि के लाल गालों को और मेरी तरफ देखती जा रही थी. उसकी आँखों में शक और गहरा हो चूका था…
अनाम आपि ने बहुत देर तक मन किया… “नहीं पापा… मुझे नहीं जाना… मैं घर पे hi काम कर लुंगी…” लेकिन जब अब्बू ने पैसे वाली बात सुनी और अम्मी ने भी ज़ोर दिया, तोह वो मजबूर हो गयी. उसने धीरे से सर हिला दिया और हलकी सी आवाज़ में बोली,
**“ठीक है… लेकिन जल्दी वापस आएंगे… और पापा, आप टेंशन मत लीजिये.”**
अब्बू ने थोड़ा सोच कर हाँ कर दिया… पर उनका चेहरा अभी भी थोड़ा सख्त था.
मैं अंदर से पागल हो गया था. उफ्फ्फ्फ़… मेरी शरीफ बड़ी आपि…
नाश्ता ख़तम होते hi मैं बाइक निकाल कर बहार खड़ा हो गया. अनाम आपि दुपट्टा मुँह तक टाइट बांध कर बहार आयी. वो पीछे बैठ गयी. जैसे hi उसने मुझे पकड़ा… उनके bade-bade दूध मेरी पीठ से बिलकुल चिपक गए.
बाइक स्टार्ट करते hi मैंने धीरे से बोलै,
**“आपि… अब तोह बहाना भी बन गया… अब असली मज़ा शुरू होगा.”**
बाइक चलते hi अनाम आपि के bade-bade दूध मेरी पीठ पर zor-zor से रगड़ने लगे. हर स्पीड ब्रेकर पे वो मुझसे और चिपक जाती… उफ्फ्फ्फ़… कितनी गरम… कितनी सॉफ्ट… ब्रा के अंदर से भी निप्पल के टाइट उभार फील हो रहे थे. मैं बाइक को थोड़ा तेज़ चलने लगा ताकि उसके दूध और ज़ोर से रगड़ें.
रस्ते में मैंने धीरे से उनके कान में बोलै
**“आपि… ये 20,000 रुपये जो आपने पापा को दिए… वो तो अर्जुन के थे… उसने आपकी छूट छोड़ने के बदले दिए थे… और आपने उनको पापा को दे दिए… वह… कितनी बड़ी रंडी बन गयी हो आप… घर का खर्चा अपनी छूट से चला रही हो…”**
अनाम आपि सिसक उठी. उसने मुझे पीछे से और टाइट पकड़ लिया… उनके दूध मेरी पीठ में और गहरे डाब गए.
**“अह्ह्ह… असीम… मत बोलो ऐसी बातें… बहुत शर्म आ रही है… लोग देख लेंगे… अह्ह्ह…”**
मैं हंस के बोलै,
**“शर्म क्यों आ रही है आपि… कल तोह अर्जुन के सामने नंगी हो कर घोड़ी बानी थी… ‘फाड़ दो मेरी छूट’ बोल रही थी… और अब पापा के पैसे देकर शरीफ बन रही हो… उफ्फ्फ्फ़… मेरी बड़ी आपि… अब घर की इज़्ज़त नहीं… सिर्फ एक छोड़ने वाली माल हो… जिसकी छूट से घर चलता है…”**
**“आपि… ज़ैनब आपि को शायद शक हो गया है… उसने कल रात हम दोनों को देख लिया था… आज नाश्ते में भी घर रही थी… अगर उसने सब बता दिया तोह क्या होगा? या फिर… हम उसको भी इस खेल में शामिल कर लें… दोनों बहनें साथ… एक साथ अर्जुन के लुंड पे उछलती हुई… उफ्फ्फ्फ़… सोचो आपि…”**
अनाम आपि अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी. उसने अपनी गांड मेरे पीठ पर दबायी… दूध ज़ोर से रगड़ती हुई… सिसकती हुई बोली,
**“अह्ह्ह्ह… असीम… तुम… तुम मुझे पागल कर डोज… मेरी छूट गीली हो रही है… उफ्फ्फ्फ़… ज़ैनब… अगर उसको पता चल गया… तोह… तोह क्या होगा… अह्ह्ह… लेकिन… लेकिन तुम्हारी बातें सुन कर… बहुत गरम लग रही है… आअह्ह्ह…”**
अर्जुन के घर के बहार बाइक रोकते hi अनाम आपि ने मुझे पीछे से और टाइट पकड़ लिया. उनकी साँसे मेरी गर्दन पे garam-garam पद रही थी. मैं बाइक बंद करके धीरे से बोलै,
**“आपि… अंदर चलो. डरो मत. मैं यहीं बैठूंगा सोफे पे… ”**
अनाम आपि का पूरा बदन काँप रहा था. दुपट्टा मुँह तक टाइट बंधा हुआ था, सिर्फ उसकी badi-badi आँखें दिख रही थी — आँखों में दर, शर्म और एक अजीब सी तड़प मिल रही थी. वो बाइक से उत्तरी तोह उसकी टाँगे thar-thar काँप रही थी. मैं उनका हाथ पकड़ कर अंदर ले गया.
अर्जुन दरवाज़ा खोलते hi मुस्कुराया. उसकी आँखें अनाम आपि को ऊपर से नीचे तक घर रही थी. उसने सीधा अनाम आपि का दुपट्टा खेंच लिया और हंस के बोलै,
**“अरे वह… आज तोह असली माल आ गयी है. असीम भाई, आ जाओ अंदर.”**
मैं कुछ नहीं बोलै. सीधा हॉल के बड़े सोफे पे जाकर बैठ गया. दिल zor-zor से धक् धक् कर रहा था. मेरा लुंड पायजामा के अंदर पूरा तन चूका था.
अर्जुन ने अनाम आपि को एक झटके से अपने से चिपका लिया. आपि ने दोनों हाथों से उसको धकेलने की कोशिश की,
**“अर्जुन… नहीं… प्लीज… धीरे… ”**
लेकिन अर्जुन ने उनकी कमर को और ज़ोर से पकड़ लिया. उसकी badi-badi काली उँगलियाँ आपि के पिंक सलवार सूट के ऊपर से hi उसकी कमर में घुस गयी. उसने एक हाथ से आपि के बाल पकड़े और उसके गुलाबी होंठ पे अपने bade-bade काले होंठ रख दिए. Zor-zor से किश करने लगा… जीभ अंदर दाल दी… आपि के होंठ चूसने लगा.
आपि पहले चटपटा रही थी… “मममहह… नहीं… उफ्फ्फ्फ़…” पर dheere-dheere उनकी जीभ भी अर्जुन की जीभ से टकराने लगी. लार की धार दोनों के मुँह से टपकने लगी.
अर्जुन ने किश छोड़ते hi आपि के दोनों bade-bade दूध पकड़ लिए… सलवार सूट के ऊपर से hi. उफ्फ्फ्फ़… उसने बेदर्दी से दोनों हाथों से zor-zor से मसलने शुरू कर दिया. दबा रहा था… ऊपर से नीचे… gol-gol घुमा रहा था… निप्पल को उँगलियों से पकड़ के ज़ोर से पिंच कर रहा था.
**“अह्ह्ह्हह… दर्द हो रहा है… उफ्फ्फ्फ़… अर्जुन… धीरे… बहुत ज़ोर से मत… अह्ह्ह…”**
आपि की चीख निकल गयी. उनकी आँखें badi-badi हो गयी… चेहरा एकदम लाल… पर उसकी बॉडी अर्जुन के हाथों में हिल रही थी. दूध इतने ज़ोर से मसले जा रहे थे की सलवार सूट के कपडे भी अंदर तक घुस रहे थे.
अर्जुन हंस पड़ा,
**“दर्द हो रहा है रंडी? कल तोह इसके लिए तड़प रही थी… अब दर्द में hi मज़ा आ रहा है न?”**
उसने आपि के दूध को और ज़ोर से मसला… एक हाथ से पूरा दूध पकड़ के ऊपर की तरफ खींचा… दूसरे हाथ से निप्पल को पकड़ के घुमाया. आपि की सिसकारी तेज़ हो गयी,
**“ाआईई… बहुत दर्द… उफ्फ्फ्फ़… पर… पर रुक मत… अह्ह्ह… और… और ज़ोर से… हहैयय…”**
मेरी आँखें फैल गयी. असीम… मैं सोफे पे बैठा था… सिर्फ 4-5 फुट दूर… और मेरे सामने मेरी सगी बड़ी आपि… जो talak-shuda होने के बावजूद हमेशा शरीफ बानी रहती थी… अब अर्जुन के हाथों में तड़प रही थी. दर्द से चीख रही थी… पर उसकी गांड खुद halke-halke हिल रही थी… उसकी छूट गीली होने लगी थी… मैं देख सकता था सलवार के ऊपर हल्का सा गीला धब्बा.
अर्जुन ने आपि को घुमा दिया… अब आपि का पीठ मेरे तरफ था. उसने आपि की कमर पकड़ के उसको अपने से चिपका लिया… और पीछे से उसकी गांड पे अपना खड़ा लुंड रगड़ने लगा. एक हाथ आगे बढाकर आपि के दूध को फिर से मसलने लगा… दूसरे हाथ से उसकी गांड पे zor-zor से थप्पड़ मारता जा रहा था.
**चटक्क… चटक्क… चटक्क…**
हर थप्पड़ पे आपि की मोती गांड हिलती… लाल निशान पद जाता… और आपि चीखती,
**“आआह्ह्ह… बहुत ज़ोर से… उफ्फ्फ्फ़… मेरी गांड… जल रही है… अह्ह्ह… पर… पर मज़ा भी आ रहा है… हहैयय… और मारो… अह्ह्ह्ह…”**
अर्जुन ने उसकी गांड पे 8-10 थप्पड़ मारे… फिर उसको घुमा कर मेरे बिलकुल सामने खड़ा कर दिया. आपि की आँखें मेरी आँखों से मिली… उसकी आँखों में शर्म, दर्द, हवस… सब कुछ था. वो शर्मा कर नज़र झुका ली… पर उसकी साँसे तेज़ हो चुकी थी… दूध zor-zor से upar-neeche हिल रहे थे.
अर्जुन ने पीछे से आपि की सलवार का नाडा खोल दिया… सलवार धीरे से नीचे खिसक गयी. अब आपि सिर्फ पंतय में थी… उसकी moti-moti जांघें और पहली हुई गुलाबी छूट का शेप पंतय के ऊपर से साफ़ दिख रहा था.
अर्जुन ने पंतय को भी नीचे खेंच दिया… और आपि को मेरे सामने बिलकुल नंगी कर दिया.
उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मेरी बड़ी आपि… पूरी नंगी… मेरे सामने कड़ी थी. Bade-bade दूध लटक रहे थे… निप्पल लाल और सख्त… मोती गांड… और बीच में वही गुलाबी छूट.... अब भी थोड़ी लाल और पहली हुई थी… हल्का पानी टपक रहा था.
अर्जुन ने पीछे से आपि की कमर पकड़ी और उसको थोड़ा झुका दिया… अब आपि मेरे सामने झुकी हुई थी… उसके bade-bade दूध लटक रहे थे… गांड ऊपर उठी हुई थी.
अर्जुन ने अपना मोटा काला लुंड पकड़ा और आपि की छूट के मुँह पे रगड़ने लगा… टोपा अंदर बहार करने लगा… बेदर्दी से.
आपि तड़प उठी,
**“अह्ह्ह्हह… अर्जुन… धीरे… बहुत मोटा है… दर्द हो रहा है… उफ्फ्फ्फ़… पर… पर अंदर दाल दो… अह्ह्ह… मुझे मज़ा आ रहा है… आअह्ह्ह…”**
अर्जुन ने एक ज़ोर का धक्का मारा… आधा लुंड अंदर चला गया.
**“अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह… पहात गयी… उफ्फ्फ्फ़… बहुत दर्द… पर… और दाल दो… प्लीज… अह्ह्ह्ह…”**
मैं सोफे पे बैठा… सिर्फ 3 फुट दूर… देख रहा था… मेरा लुंड पायजामा में झटके मार रहा था… और मेरी शरीफ बड़ी आपि… दर्द से चीख रही थी… पर उसकी गांड खुद पीछे की तरफ हिल रही थी… मज़ा ले रही थी…
अर्जुन dheere-dheere पूरा लुंड अंदर पेलने लगा… बेदर्दी से… zor-zor से… और आपि के मुँह से सिर्फ सिसकारियां और चीखें निकल रही थी… दर्द के साथ मज़ा भी…
उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… ये सन देख कर मेरा दिल और लुंड दोनों पागल हो रहे थे…
अर्जुन ने उसके लम्बे बाल पकड़ लिए और ज़ोर से खींचा. आपि की गर्दन पीछे मुद गयी. उसकी साँसे तेज़ हो गयी थी.
**“घुटनो पे बैठ जा रंडी… अब मेरा लुंड चूस… अच्छी तरह चूस…”**
आपि ने मेरी तरफ देखा. उसकी आँखों में दर्द, शर्म और बेबस तड़प थी. उसने धीरे से घुटनो पे बैठ गयी. कारपेट पे उनकी मोती जांघें डाब गयी. अर्जुन ने अपना मोटा काला 8 इंच का लुंड पकड़ा और उसके गुलाबी होंठ पे रगड़ने लगा. टोपा उसके होंठों को गीला कर रहा था.
आपि ने आँखें बंद कर ली… शर्म से… और बहुत धीरे से मुँह खोला.
अर्जुन ने एक सेकंड भी वास्ते नहीं किया. उसने उसके बाल और ज़ोर से पकड़े और अपना लुंड उसके मुँह में धकेल दिया.
पहले सिर्फ आधा… फिर और अंदर… जब तक लुंड उसके हलक तक नहीं पहुँच गया.
**“ग्लुक… ग्लुक… ुघठ… ग्लुक…”**
आपि के मुँह से आवाज़ आने लगी. उसकी आँखें फैल गयी, आंसू निकल आये. लार उसके होंठों से टपकने लगी और बहने लगी. अर्जुन ने उसके बाल को और टाइट पकड़ा और dheere-dheere धक्के मरने शुरू कर दिए.
**“चूस साली… पूरा मुँह में ले… हलक तक… अह्ह्ह… कितनी अच्छी चूसती है तू… ले… और अंदर…… कुटिया…”**
हर धक्के पे आपि का सर पीछे झटका खता… उसका चब्बी बदन हिलता… दूध ज़ोर से upar-neeche लटकते… लार उसके मुँह से बहार nikal-nikal कर टपक रही थी. वो हाथों से अर्जुन की जाँघों को पकडे हुए थी… कभी धकेलने की कोशिश करती… कभी खुद अंदर ले लेती.
मैं सोफे पे बैठा था…… सब कुछ साफ़ देख रहा था. मेरी बड़ी आपि… जिसको मैं बचपन से शरीफ समझता था… अब घुटनो पे बैठी… किसी गैर मर्द का मोटा लुंड मुँह में ले रही थी. उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे… लार टपक रही थी… पर उसकी छूट से पानी टपक रहा था… मैं देख सकता था.
अर्जुन ने 4-5 मिनट तक उसका मुँह छोड़ता रहा… कभी ज़ोर से अंदर तक… कभी बहार निकाल कर उसके चेहरे पे थप्पड़ मारता… कभी गालियां देता…
**“ले मादरचोद… चूस… मेरी पर्सनल रंडी… अह्ह्ह… तू अब मेरी चूसने वाली कुटिया बन गयी… ले… और अंदर ले…”**
फिर अर्जुन ने उसके बाल पकड़ के उसको उठाया और सोफे पे घोड़ी बना दिया.
आपि के दोनों हाथ और घुटने सोफे पे थे. उसकी moti-moti गांड पूरी तरह ऊपर उठी हुई थी. उसका चब्बी शरीर हिल रहा था – दूध नीचे लटक रहे थे, मोती जांघें फैली हुई थी, गांड के दोनों हिस्से alag-alag उभरे हुए थे.
अर्जुन ने पीछे से उसकी कमर पकड़ी… अपना मोटा लुंड उसकी छूट के मुँह पे सेट किया… और एक hi ज़ोर का धक्का मारा.
**धायआपपप!!!**
**“AHHHHHHHHHH… बहुत मोटा… पहात गयी… आअह्ह्ह… दर्द हो रहा है… उफ्फ्फ्फ़… बहुत ज़ोर से…”**
आपि की चीख निकल गयी. उसका पूरा चब्बी बदन एक झटके से आगे की तरफ हिला. दूध ज़ोर से लटक कर हिल गए… गांड की मात्य फलेश हिल गयी… तइस काँप उठी.
अर्जुन रुकने वाला नहीं था. उसने दोनों हाथों से आपि की कमर पकड़ी और बेदर्दी से धक्के मरने लगा… तेज़… गहरे… zor-zor से.
**धप… धप… धप… धप…**
हर धक्के पे आपि का चब्बी शरीर पूरा हिल रहा था. उसकी मोती गांड पीछे से ज़ोर से टकराती… दूध latak-latak कर aage-peeche हिल रहे थे… तइस हिल रही थी… पूरा बदन पसीने से चमकने लगा था.
**“अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… अर्जुन… बहुत ज़ोर से… अह्ह्ह… मेरी छूट पहात रही है… पर… पर मज़ा आ रहा है… आअह्ह्ह… और ज़ोर से… फाड़ दो… उफ्फ्फ्फ़…”**
आपि दर्द में चीख रही थी… पर उसकी गांड खुद पीछे उठ रही थी… छूट अर्जुन के लुंड को अंदर खींच रही थी.
मैं सोफे पे बैठा… हाथ में अपना लुंड पकड़ के dheere-dheere हिला रहा था… आँखें फैली हुई… दिल में एक अजीब नशा…
**“उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मेरी बड़ी आपि… मेरी सगी बड़ी आपि… अब मेरे सामने कुटिया बन कर चुद रही है… उसका चब्बी बदन हर धक्के पे हिल रहा है…… और वो दर्द के साथ मज़ा ले रही है… मैं देख रहा हूँ… और ये देख कर मुझे इतना मज़ा आ रहा है की मैं पागल हो रहा हूँ…”**
अर्जुन और तेज़ हो गया… गांड पे थप्पड़ मारता… गालियां देता…
**“ले रंडी… ले कुटिया… तेरी छूट अब मेरी… अह्ह्ह… कितनी गीली है मादरचोद… ले… और ले…”**
अर्जुन ने अनाम आपि को घोड़ी बनाये हुए hi 4-5 मिनट और zor-zor से पेला. हर धक्के पे आपि का चब्बी बदन पूरा हिल रहा था. उसकी मोती गांड पीछे से टकराती, दूध latak-latak कर aage-peeche झूल रहे थे, तइस काँप रही थी. आपि के मुँह से अब सिर्फ धीमी सिसकारियां निकल रही थी — दर्द और मज़ा दोनों मिल कर.
फिर अर्जुन ने उसको उठाया और बीएड पे सीधा लिट्टे दिया. आपि की टाँगे khud-ba-khud फ़ैल गयी. उसकी छूट अब बिलकुल गीली और पहली हुई थी, अंदर से अर्जुन का माल और उसका अपना पानी मिक्स होकर बहार टपक रहा था.
अर्जुन उसके ऊपर चढ़ा. उसने आपि की एक टांग अपने कंधे पर रख ली और दूसरी टांग को फैला दिया. फिर अपना मोटा काला लुंड उसकी छूट के मुँह पे सेट किया और धीरे से अंदर धकेल दिया.
**“आआह्ह्ह्हह…”**
आपि की गर्दन पीछे मुद गयी. उसकी आँखें बंद हो गयी. अर्जुन ने dheere-dheere पूरा लुंड अंदर किया… फिर बहार… फिर अंदर. इस बार थोड़ा स्लो था, लेकिन गहरा और ज़ोर का. हर धक्के पे आपि का चब्बी पेट हल्का सा ऊपर उठ जाता, दूध ज़ोर से हिलते, और उसके मुँह से एक लम्बी सिसकारी निकलती.
**थप… थप… थप… थप…**
अर्जुन उसके ऊपर झुका हुआ था. उसकी साँसे आपि के चेहरे पे पद रही थी. वो dheere-dheere छोड़ रहा था, लेकिन हर धक्का गहरा था. आपि की छूट अब उसके लुंड को पूरी तरह अंदर ले रही थी.
**“अह्ह्ह… अर्जुन… बहुत अंदर जा रहा है… उफ्फ्फ्फ़… दर्द भी हो रहा है… पर… पर बहुत मज़ा आ रहा है… अह्ह्ह… और धीरे… और अंदर तक...”**
अर्जुन ने उसके होंठ पे किश किया और धीरे से बोलै,
**“ले मेरी रांड… अब पूरी तरह मेरी हो गयी है तेरी छूट……”**
आपि ने मेरी तरफ देखा. उसकी आँखें मेरी आँखों से मिली. उसमे शर्म थी, बेबस पैन था… और एक गहरा नशा भी. वो शर्मा कर आँखें बंद कर लेती… पर हर धक्के पे उसकी गांड खुद हलके से उठ जाती.
मैं सोफे पे बैठा था… हाथ में लुंड पकड़ के dheere-dheere हिला रहा था. देख रहा था की मेरी सगी बड़ी आपि… जो बचपन से मुझे “बीटा” कहती थी… अब किसी और मर्द के नीचे लेती हुई चुद रही थी. उसका चब्बी बदन हर धक्के पे हिल रहा था. दूध लटक रहे थे. छूट से “puch-puch” की आवाज़ आ रही थी.
अर्जुन की स्पीड dheere-dheere बढ़ने लगी. अब वो तेज़ धक्के मरने लगा. आपि की सिसकारियां तेज़ हो गयी.
**“अह्ह्ह… अर्जुन… और ज़ोर से… फाड़ दो… अह्ह्ह्हह… मैं झड़ने वाली हूँ… उफ्फ्फ्फ़…”**
अर्जुन ने आपि की दोनों टाँगे अपने कन्धों पर रख ली और फुल स्पीड में छोड़ने लगा. उसके मोठे लुंड की हर धक्के पे आपि की छूट फैल रही थी. आपि की आँखें बंद, मुँह खुला, लार टपक रही थी.
फिर अर्जुन ने झट से लुंड बहार निकला और आपि के मुँह के ऊपर आ गया.
**“मुँह खोल रंडी… ले मेरा माल…”**
आपि ने आँखें खोली… शर्मा कर… पर मुँह खोल दिया. अर्जुन ने उसके बाल पकड़े और अपना लुंड उसके मुँह में दाल दिया. Zor-zor से धक्के मारे… और फिर ज़ोर से झाड़ गया.
**“अह्ह्ह्हह… ले साली… पि ले… पूरा पि ले… अह्ह्ह्हह…”**
अर्जुन का सारा गरम माल आपि के मुँह में भर गया. कितना ज़्यादा था… आपि के होंठ से बहार भी टपक रहा था. आपि ने आँखें बंद करके सब कुछ पि लिया… थोड़ा बहार टपका तोह उसने ऊँगली से उठा के मुँह में दाल दिया.
अर्जुन थक कर उसके बगल में लेट गया. कुछ देर साँसे चलती रही.
फिर वो उठा… नंगा hi मेरे पास आया और सोफे पे मेरे बगल में बैठ गया. उसका लुंड अभी भी थोड़ा खड़ा था और चमक रहा था.
अर्जुन ने सिगरेट सुलगा ली, एक काश लिया और मुस्कुराते हुए मुझसे बोलै,
**“भाई… ये रंडी कौन है यार? सच बता… इतनी ज़बरदस्त माल मैंने ज़िन्दगी में पहली बार छोड़ी है. टाइट छूट… मोती गांड… और चूचियां देख… कितनी बड़ी और भरी हुई हैं. किश करने में भी कितनी सॉफ्ट लिप्स हैं… और चूसने में तोह जैसे प्रोफेशनल रंडी हो. उफ्फ्फ्फ़… ऐसी रांड पहले कभी नहीं मिली. पूरी फॅमिली टाइप लगती है… शरीफ सी… पर अंदर से कितनी गरम है बस. आज के बाद इसको रोज़ लाना… मैं इसको अपनी पर्सनल रंडी बना लूंगा.”**
मैं मुस्कुराया… अंदर से बहुत मज़ा आ रहा था. अर्जुन को यह नहीं पता था की ये मेरी सगी बड़ी बहन है.
मैंने धीरे से बोलै,
**“भाई… बस एक जान्ने वाली लड़की है… बहुत क्लोज है…. और हाँ… वो भी तुझे पसंद कर चुकी है.”**
अर्जुन हंस पड़ा. उसने फिर से अनाम आपि की तरफ देखा जो अभी भी बीएड पे नंगी लेती हुई थी, साँसे तेज़ चल रही थी, चेहरा लाल, दूध upar-neeche हो रहे थे.
अर्जुन ने वॉलेट निकला… उसमे से 50,000 रुपये निकाले और मेरे तरफ बढ़ाते हुए बोलै,
**“ले भाई… आज इस रंडी ने बहुत मज़ा दिया. ये 50,000 इसके लिए… बोल देना… अगली बार और ज़्यादा दूंगा. ऐसी टाइट और गरम छूट वाली रंडी बहुत काम मिलती है.”**
मैं पैसे ले लिए. अर्जुन उठा और अनाम आपि के पास गया. उसने पैसे उसके हाथ में रख दिए और उसके गाल पे किश करके बोलै,
**“ले मेरी जान… ये तेरे लिए. बहुत मस्त चूड़ी तू आज. अगली बार कब आएगी मादरचोद..”**
अनाम आपि ने पैसे देखे… उसका चेहरा शर्म से और लाल हो गया. उसने पैसे हाथ में पकडे… आँखें नीचे कर ली… पर उसकी उँगलियाँ thar-thar काँप रही थी. वो कुछ नहीं बोली… बस शर्मा कर लेती रही.
मैं सोफे पे बैठा ये सब देख रहा था… अंदर से एक अलग hi नशा हो रहा था.
मेरी बड़ी आपि… मेरी सगी बड़ी आपि… अब किसी और मर्द के पैसे ले रही थी… उसके लुंड छुड़वाने के बदले… और मैं देख रहा था… और ये देख कर मुझे इतना मज़ा आ रहा था की मैं पागल हो रहा था.
और फिर… दरवाज़े से मेरी बड़ी आपि अनाम अंदर आयी.
उफ्फ्फ्फ़ … जैसे hi वो अंदर आयी, मेरा लुंड पायजामा के अंदर एक ज़ोर का झटका मार बैठा. वो बिलकुल फ्रेश थी – लाइट पिंक सलवार सूट पहना था. सूट के ऊपर वाला कुरता थोड़ा टाइट था, इसलिए उनके bade-bade दूध बिलकुल उभरे हुए थे… हर सांस के साथ halke-halke हिल रहे थे. गांड पे सलवार इतनी चुस्ती से चिपकी हुई थी की दोनों मोती गांड के हिस्से alag-alag दीखते थे और चलते वक़्त एकदम lachak-lachak कर हिल रहे थे. चेहरा थोड़ा लाल था, आँखें नीचे, जैसे abhi-abhi किसी ने उनकी गुलाबी छूट फाड़ दी हो.
वो टेबल पे मेरे सामने बैठने के लिए झुकी… कुरता आगे की तरफ लटक गया और gehra-gehra क्लीवेज साफ़ दिख गया. रात वाला सन आँखों के सामने आ गया – मैं टेबल के नीचे अपना लुंड चुपके से दबाने लगा.
नाश्ता शुरू होते hi मैंने बहाना बनाया.
**“अब्बू… आपि… वो ऑनलाइन काम जो अनाम आपि ने शुरू किया था न… जिससे कल 20,000 एडवांस मिले थे… आज क्लाइंट ने अर्जेंट मीटिंग मांगी है. वह पर्सनली एक्सप्लेन करना चाहता है की आगे का प्रोजेक्ट कैसे होगा. मैं साथ चलता हूँ, आपको कोई टेंशन नहीं होगी.”**
अनाम आपि ने झट से मेरी तरफ देखा. उनकी आँखें फैल गयी. चेहरा एक सेकंड में लाल हो गया. उसने तुरंत मन कर दिया,
**“नहीं असीम… मैं नहीं जाउंगी. घर में बहुत काम है… अम्मी को हेल्प करनी है… और मैं अकेली बहार नहीं जाती.”**
अब्बू ने भी तुरंत मन कर दिया. उनका स्ट्रिक्ट चेहरा वापस आ गया,
**“बिल्कु नहीं! बहार किसी के पास जाने की क्या ज़रूरत है? पैसे आलरेडी मिल गए हैं… बाकी काम घर बैठे हो सकता है. ये घर से बहार नहीं जाएगी.”**
मैं तुरंत बोल पड़ा,
**“अब्बू… क्लाइंट बहुत बड़ा है. अगर आज पर्सनली नहीं गए तोह प्रोजेक्ट कैंसिल कर सकता है. 20,000 तोह सिर्फ एडवांस था… आगे और भी ज़्यादा पैसे आने वाले हैं. आप hi सोचो… मैं साथ रहूँगा… बाइक पे ले जाऊंगा… कोई प्रॉब्लम नहीं होगी.”**
अम्मी ने भी सपोर्ट किया,
**“हाँ जी… बेटी थोड़ी बहार निकल लेगी तोह क्या हो जायेगा? असीम साथ है… सेफ रहेगी.”**
ज़ैनब आपि बिलकुल चुप थी… पर उसकी नज़रें हम दोनों पे अटक गयी थी. वो baar-baar अनाम आपि के लाल गालों को और मेरी तरफ देखती जा रही थी. उसकी आँखों में शक और गहरा हो चूका था…
अनाम आपि ने बहुत देर तक मन किया… “नहीं पापा… मुझे नहीं जाना… मैं घर पे hi काम कर लुंगी…” लेकिन जब अब्बू ने पैसे वाली बात सुनी और अम्मी ने भी ज़ोर दिया, तोह वो मजबूर हो गयी. उसने धीरे से सर हिला दिया और हलकी सी आवाज़ में बोली,
**“ठीक है… लेकिन जल्दी वापस आएंगे… और पापा, आप टेंशन मत लीजिये.”**
अब्बू ने थोड़ा सोच कर हाँ कर दिया… पर उनका चेहरा अभी भी थोड़ा सख्त था.
मैं अंदर से पागल हो गया था. उफ्फ्फ्फ़… मेरी शरीफ बड़ी आपि…
नाश्ता ख़तम होते hi मैं बाइक निकाल कर बहार खड़ा हो गया. अनाम आपि दुपट्टा मुँह तक टाइट बांध कर बहार आयी. वो पीछे बैठ गयी. जैसे hi उसने मुझे पकड़ा… उनके bade-bade दूध मेरी पीठ से बिलकुल चिपक गए.
बाइक स्टार्ट करते hi मैंने धीरे से बोलै,
**“आपि… अब तोह बहाना भी बन गया… अब असली मज़ा शुरू होगा.”**
बाइक चलते hi अनाम आपि के bade-bade दूध मेरी पीठ पर zor-zor से रगड़ने लगे. हर स्पीड ब्रेकर पे वो मुझसे और चिपक जाती… उफ्फ्फ्फ़… कितनी गरम… कितनी सॉफ्ट… ब्रा के अंदर से भी निप्पल के टाइट उभार फील हो रहे थे. मैं बाइक को थोड़ा तेज़ चलने लगा ताकि उसके दूध और ज़ोर से रगड़ें.
रस्ते में मैंने धीरे से उनके कान में बोलै
**“आपि… ये 20,000 रुपये जो आपने पापा को दिए… वो तो अर्जुन के थे… उसने आपकी छूट छोड़ने के बदले दिए थे… और आपने उनको पापा को दे दिए… वह… कितनी बड़ी रंडी बन गयी हो आप… घर का खर्चा अपनी छूट से चला रही हो…”**
अनाम आपि सिसक उठी. उसने मुझे पीछे से और टाइट पकड़ लिया… उनके दूध मेरी पीठ में और गहरे डाब गए.
**“अह्ह्ह… असीम… मत बोलो ऐसी बातें… बहुत शर्म आ रही है… लोग देख लेंगे… अह्ह्ह…”**
मैं हंस के बोलै,
**“शर्म क्यों आ रही है आपि… कल तोह अर्जुन के सामने नंगी हो कर घोड़ी बानी थी… ‘फाड़ दो मेरी छूट’ बोल रही थी… और अब पापा के पैसे देकर शरीफ बन रही हो… उफ्फ्फ्फ़… मेरी बड़ी आपि… अब घर की इज़्ज़त नहीं… सिर्फ एक छोड़ने वाली माल हो… जिसकी छूट से घर चलता है…”**
**“आपि… ज़ैनब आपि को शायद शक हो गया है… उसने कल रात हम दोनों को देख लिया था… आज नाश्ते में भी घर रही थी… अगर उसने सब बता दिया तोह क्या होगा? या फिर… हम उसको भी इस खेल में शामिल कर लें… दोनों बहनें साथ… एक साथ अर्जुन के लुंड पे उछलती हुई… उफ्फ्फ्फ़… सोचो आपि…”**
अनाम आपि अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी. उसने अपनी गांड मेरे पीठ पर दबायी… दूध ज़ोर से रगड़ती हुई… सिसकती हुई बोली,
**“अह्ह्ह्ह… असीम… तुम… तुम मुझे पागल कर डोज… मेरी छूट गीली हो रही है… उफ्फ्फ्फ़… ज़ैनब… अगर उसको पता चल गया… तोह… तोह क्या होगा… अह्ह्ह… लेकिन… लेकिन तुम्हारी बातें सुन कर… बहुत गरम लग रही है… आअह्ह्ह…”**
अर्जुन के घर के बहार बाइक रोकते hi अनाम आपि ने मुझे पीछे से और टाइट पकड़ लिया. उनकी साँसे मेरी गर्दन पे garam-garam पद रही थी. मैं बाइक बंद करके धीरे से बोलै,
**“आपि… अंदर चलो. डरो मत. मैं यहीं बैठूंगा सोफे पे… ”**
अनाम आपि का पूरा बदन काँप रहा था. दुपट्टा मुँह तक टाइट बंधा हुआ था, सिर्फ उसकी badi-badi आँखें दिख रही थी — आँखों में दर, शर्म और एक अजीब सी तड़प मिल रही थी. वो बाइक से उत्तरी तोह उसकी टाँगे thar-thar काँप रही थी. मैं उनका हाथ पकड़ कर अंदर ले गया.
अर्जुन दरवाज़ा खोलते hi मुस्कुराया. उसकी आँखें अनाम आपि को ऊपर से नीचे तक घर रही थी. उसने सीधा अनाम आपि का दुपट्टा खेंच लिया और हंस के बोलै,
**“अरे वह… आज तोह असली माल आ गयी है. असीम भाई, आ जाओ अंदर.”**
मैं कुछ नहीं बोलै. सीधा हॉल के बड़े सोफे पे जाकर बैठ गया. दिल zor-zor से धक् धक् कर रहा था. मेरा लुंड पायजामा के अंदर पूरा तन चूका था.
अर्जुन ने अनाम आपि को एक झटके से अपने से चिपका लिया. आपि ने दोनों हाथों से उसको धकेलने की कोशिश की,
**“अर्जुन… नहीं… प्लीज… धीरे… ”**
लेकिन अर्जुन ने उनकी कमर को और ज़ोर से पकड़ लिया. उसकी badi-badi काली उँगलियाँ आपि के पिंक सलवार सूट के ऊपर से hi उसकी कमर में घुस गयी. उसने एक हाथ से आपि के बाल पकड़े और उसके गुलाबी होंठ पे अपने bade-bade काले होंठ रख दिए. Zor-zor से किश करने लगा… जीभ अंदर दाल दी… आपि के होंठ चूसने लगा.
आपि पहले चटपटा रही थी… “मममहह… नहीं… उफ्फ्फ्फ़…” पर dheere-dheere उनकी जीभ भी अर्जुन की जीभ से टकराने लगी. लार की धार दोनों के मुँह से टपकने लगी.
अर्जुन ने किश छोड़ते hi आपि के दोनों bade-bade दूध पकड़ लिए… सलवार सूट के ऊपर से hi. उफ्फ्फ्फ़… उसने बेदर्दी से दोनों हाथों से zor-zor से मसलने शुरू कर दिया. दबा रहा था… ऊपर से नीचे… gol-gol घुमा रहा था… निप्पल को उँगलियों से पकड़ के ज़ोर से पिंच कर रहा था.
**“अह्ह्ह्हह… दर्द हो रहा है… उफ्फ्फ्फ़… अर्जुन… धीरे… बहुत ज़ोर से मत… अह्ह्ह…”**
आपि की चीख निकल गयी. उनकी आँखें badi-badi हो गयी… चेहरा एकदम लाल… पर उसकी बॉडी अर्जुन के हाथों में हिल रही थी. दूध इतने ज़ोर से मसले जा रहे थे की सलवार सूट के कपडे भी अंदर तक घुस रहे थे.
अर्जुन हंस पड़ा,
**“दर्द हो रहा है रंडी? कल तोह इसके लिए तड़प रही थी… अब दर्द में hi मज़ा आ रहा है न?”**
उसने आपि के दूध को और ज़ोर से मसला… एक हाथ से पूरा दूध पकड़ के ऊपर की तरफ खींचा… दूसरे हाथ से निप्पल को पकड़ के घुमाया. आपि की सिसकारी तेज़ हो गयी,
**“ाआईई… बहुत दर्द… उफ्फ्फ्फ़… पर… पर रुक मत… अह्ह्ह… और… और ज़ोर से… हहैयय…”**
मेरी आँखें फैल गयी. असीम… मैं सोफे पे बैठा था… सिर्फ 4-5 फुट दूर… और मेरे सामने मेरी सगी बड़ी आपि… जो talak-shuda होने के बावजूद हमेशा शरीफ बानी रहती थी… अब अर्जुन के हाथों में तड़प रही थी. दर्द से चीख रही थी… पर उसकी गांड खुद halke-halke हिल रही थी… उसकी छूट गीली होने लगी थी… मैं देख सकता था सलवार के ऊपर हल्का सा गीला धब्बा.
अर्जुन ने आपि को घुमा दिया… अब आपि का पीठ मेरे तरफ था. उसने आपि की कमर पकड़ के उसको अपने से चिपका लिया… और पीछे से उसकी गांड पे अपना खड़ा लुंड रगड़ने लगा. एक हाथ आगे बढाकर आपि के दूध को फिर से मसलने लगा… दूसरे हाथ से उसकी गांड पे zor-zor से थप्पड़ मारता जा रहा था.
**चटक्क… चटक्क… चटक्क…**
हर थप्पड़ पे आपि की मोती गांड हिलती… लाल निशान पद जाता… और आपि चीखती,
**“आआह्ह्ह… बहुत ज़ोर से… उफ्फ्फ्फ़… मेरी गांड… जल रही है… अह्ह्ह… पर… पर मज़ा भी आ रहा है… हहैयय… और मारो… अह्ह्ह्ह…”**
अर्जुन ने उसकी गांड पे 8-10 थप्पड़ मारे… फिर उसको घुमा कर मेरे बिलकुल सामने खड़ा कर दिया. आपि की आँखें मेरी आँखों से मिली… उसकी आँखों में शर्म, दर्द, हवस… सब कुछ था. वो शर्मा कर नज़र झुका ली… पर उसकी साँसे तेज़ हो चुकी थी… दूध zor-zor से upar-neeche हिल रहे थे.
अर्जुन ने पीछे से आपि की सलवार का नाडा खोल दिया… सलवार धीरे से नीचे खिसक गयी. अब आपि सिर्फ पंतय में थी… उसकी moti-moti जांघें और पहली हुई गुलाबी छूट का शेप पंतय के ऊपर से साफ़ दिख रहा था.
अर्जुन ने पंतय को भी नीचे खेंच दिया… और आपि को मेरे सामने बिलकुल नंगी कर दिया.
उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मेरी बड़ी आपि… पूरी नंगी… मेरे सामने कड़ी थी. Bade-bade दूध लटक रहे थे… निप्पल लाल और सख्त… मोती गांड… और बीच में वही गुलाबी छूट.... अब भी थोड़ी लाल और पहली हुई थी… हल्का पानी टपक रहा था.
अर्जुन ने पीछे से आपि की कमर पकड़ी और उसको थोड़ा झुका दिया… अब आपि मेरे सामने झुकी हुई थी… उसके bade-bade दूध लटक रहे थे… गांड ऊपर उठी हुई थी.
अर्जुन ने अपना मोटा काला लुंड पकड़ा और आपि की छूट के मुँह पे रगड़ने लगा… टोपा अंदर बहार करने लगा… बेदर्दी से.
आपि तड़प उठी,
**“अह्ह्ह्हह… अर्जुन… धीरे… बहुत मोटा है… दर्द हो रहा है… उफ्फ्फ्फ़… पर… पर अंदर दाल दो… अह्ह्ह… मुझे मज़ा आ रहा है… आअह्ह्ह…”**
अर्जुन ने एक ज़ोर का धक्का मारा… आधा लुंड अंदर चला गया.
**“अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह… पहात गयी… उफ्फ्फ्फ़… बहुत दर्द… पर… और दाल दो… प्लीज… अह्ह्ह्ह…”**
मैं सोफे पे बैठा… सिर्फ 3 फुट दूर… देख रहा था… मेरा लुंड पायजामा में झटके मार रहा था… और मेरी शरीफ बड़ी आपि… दर्द से चीख रही थी… पर उसकी गांड खुद पीछे की तरफ हिल रही थी… मज़ा ले रही थी…
अर्जुन dheere-dheere पूरा लुंड अंदर पेलने लगा… बेदर्दी से… zor-zor से… और आपि के मुँह से सिर्फ सिसकारियां और चीखें निकल रही थी… दर्द के साथ मज़ा भी…
उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… ये सन देख कर मेरा दिल और लुंड दोनों पागल हो रहे थे…
अर्जुन ने उसके लम्बे बाल पकड़ लिए और ज़ोर से खींचा. आपि की गर्दन पीछे मुद गयी. उसकी साँसे तेज़ हो गयी थी.
**“घुटनो पे बैठ जा रंडी… अब मेरा लुंड चूस… अच्छी तरह चूस…”**
आपि ने मेरी तरफ देखा. उसकी आँखों में दर्द, शर्म और बेबस तड़प थी. उसने धीरे से घुटनो पे बैठ गयी. कारपेट पे उनकी मोती जांघें डाब गयी. अर्जुन ने अपना मोटा काला 8 इंच का लुंड पकड़ा और उसके गुलाबी होंठ पे रगड़ने लगा. टोपा उसके होंठों को गीला कर रहा था.
आपि ने आँखें बंद कर ली… शर्म से… और बहुत धीरे से मुँह खोला.
अर्जुन ने एक सेकंड भी वास्ते नहीं किया. उसने उसके बाल और ज़ोर से पकड़े और अपना लुंड उसके मुँह में धकेल दिया.
पहले सिर्फ आधा… फिर और अंदर… जब तक लुंड उसके हलक तक नहीं पहुँच गया.
**“ग्लुक… ग्लुक… ुघठ… ग्लुक…”**
आपि के मुँह से आवाज़ आने लगी. उसकी आँखें फैल गयी, आंसू निकल आये. लार उसके होंठों से टपकने लगी और बहने लगी. अर्जुन ने उसके बाल को और टाइट पकड़ा और dheere-dheere धक्के मरने शुरू कर दिए.
**“चूस साली… पूरा मुँह में ले… हलक तक… अह्ह्ह… कितनी अच्छी चूसती है तू… ले… और अंदर…… कुटिया…”**
हर धक्के पे आपि का सर पीछे झटका खता… उसका चब्बी बदन हिलता… दूध ज़ोर से upar-neeche लटकते… लार उसके मुँह से बहार nikal-nikal कर टपक रही थी. वो हाथों से अर्जुन की जाँघों को पकडे हुए थी… कभी धकेलने की कोशिश करती… कभी खुद अंदर ले लेती.
मैं सोफे पे बैठा था…… सब कुछ साफ़ देख रहा था. मेरी बड़ी आपि… जिसको मैं बचपन से शरीफ समझता था… अब घुटनो पे बैठी… किसी गैर मर्द का मोटा लुंड मुँह में ले रही थी. उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे… लार टपक रही थी… पर उसकी छूट से पानी टपक रहा था… मैं देख सकता था.
अर्जुन ने 4-5 मिनट तक उसका मुँह छोड़ता रहा… कभी ज़ोर से अंदर तक… कभी बहार निकाल कर उसके चेहरे पे थप्पड़ मारता… कभी गालियां देता…
**“ले मादरचोद… चूस… मेरी पर्सनल रंडी… अह्ह्ह… तू अब मेरी चूसने वाली कुटिया बन गयी… ले… और अंदर ले…”**
फिर अर्जुन ने उसके बाल पकड़ के उसको उठाया और सोफे पे घोड़ी बना दिया.
आपि के दोनों हाथ और घुटने सोफे पे थे. उसकी moti-moti गांड पूरी तरह ऊपर उठी हुई थी. उसका चब्बी शरीर हिल रहा था – दूध नीचे लटक रहे थे, मोती जांघें फैली हुई थी, गांड के दोनों हिस्से alag-alag उभरे हुए थे.
अर्जुन ने पीछे से उसकी कमर पकड़ी… अपना मोटा लुंड उसकी छूट के मुँह पे सेट किया… और एक hi ज़ोर का धक्का मारा.
**धायआपपप!!!**
**“AHHHHHHHHHH… बहुत मोटा… पहात गयी… आअह्ह्ह… दर्द हो रहा है… उफ्फ्फ्फ़… बहुत ज़ोर से…”**
आपि की चीख निकल गयी. उसका पूरा चब्बी बदन एक झटके से आगे की तरफ हिला. दूध ज़ोर से लटक कर हिल गए… गांड की मात्य फलेश हिल गयी… तइस काँप उठी.
अर्जुन रुकने वाला नहीं था. उसने दोनों हाथों से आपि की कमर पकड़ी और बेदर्दी से धक्के मरने लगा… तेज़… गहरे… zor-zor से.
**धप… धप… धप… धप…**
हर धक्के पे आपि का चब्बी शरीर पूरा हिल रहा था. उसकी मोती गांड पीछे से ज़ोर से टकराती… दूध latak-latak कर aage-peeche हिल रहे थे… तइस हिल रही थी… पूरा बदन पसीने से चमकने लगा था.
**“अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… अर्जुन… बहुत ज़ोर से… अह्ह्ह… मेरी छूट पहात रही है… पर… पर मज़ा आ रहा है… आअह्ह्ह… और ज़ोर से… फाड़ दो… उफ्फ्फ्फ़…”**
आपि दर्द में चीख रही थी… पर उसकी गांड खुद पीछे उठ रही थी… छूट अर्जुन के लुंड को अंदर खींच रही थी.
मैं सोफे पे बैठा… हाथ में अपना लुंड पकड़ के dheere-dheere हिला रहा था… आँखें फैली हुई… दिल में एक अजीब नशा…
**“उफ्फ्फ्फ़ दोस्तों… मेरी बड़ी आपि… मेरी सगी बड़ी आपि… अब मेरे सामने कुटिया बन कर चुद रही है… उसका चब्बी बदन हर धक्के पे हिल रहा है…… और वो दर्द के साथ मज़ा ले रही है… मैं देख रहा हूँ… और ये देख कर मुझे इतना मज़ा आ रहा है की मैं पागल हो रहा हूँ…”**
अर्जुन और तेज़ हो गया… गांड पे थप्पड़ मारता… गालियां देता…
**“ले रंडी… ले कुटिया… तेरी छूट अब मेरी… अह्ह्ह… कितनी गीली है मादरचोद… ले… और ले…”**
अर्जुन ने अनाम आपि को घोड़ी बनाये हुए hi 4-5 मिनट और zor-zor से पेला. हर धक्के पे आपि का चब्बी बदन पूरा हिल रहा था. उसकी मोती गांड पीछे से टकराती, दूध latak-latak कर aage-peeche झूल रहे थे, तइस काँप रही थी. आपि के मुँह से अब सिर्फ धीमी सिसकारियां निकल रही थी — दर्द और मज़ा दोनों मिल कर.
फिर अर्जुन ने उसको उठाया और बीएड पे सीधा लिट्टे दिया. आपि की टाँगे khud-ba-khud फ़ैल गयी. उसकी छूट अब बिलकुल गीली और पहली हुई थी, अंदर से अर्जुन का माल और उसका अपना पानी मिक्स होकर बहार टपक रहा था.
अर्जुन उसके ऊपर चढ़ा. उसने आपि की एक टांग अपने कंधे पर रख ली और दूसरी टांग को फैला दिया. फिर अपना मोटा काला लुंड उसकी छूट के मुँह पे सेट किया और धीरे से अंदर धकेल दिया.
**“आआह्ह्ह्हह…”**
आपि की गर्दन पीछे मुद गयी. उसकी आँखें बंद हो गयी. अर्जुन ने dheere-dheere पूरा लुंड अंदर किया… फिर बहार… फिर अंदर. इस बार थोड़ा स्लो था, लेकिन गहरा और ज़ोर का. हर धक्के पे आपि का चब्बी पेट हल्का सा ऊपर उठ जाता, दूध ज़ोर से हिलते, और उसके मुँह से एक लम्बी सिसकारी निकलती.
**थप… थप… थप… थप…**
अर्जुन उसके ऊपर झुका हुआ था. उसकी साँसे आपि के चेहरे पे पद रही थी. वो dheere-dheere छोड़ रहा था, लेकिन हर धक्का गहरा था. आपि की छूट अब उसके लुंड को पूरी तरह अंदर ले रही थी.
**“अह्ह्ह… अर्जुन… बहुत अंदर जा रहा है… उफ्फ्फ्फ़… दर्द भी हो रहा है… पर… पर बहुत मज़ा आ रहा है… अह्ह्ह… और धीरे… और अंदर तक...”**
अर्जुन ने उसके होंठ पे किश किया और धीरे से बोलै,
**“ले मेरी रांड… अब पूरी तरह मेरी हो गयी है तेरी छूट……”**
आपि ने मेरी तरफ देखा. उसकी आँखें मेरी आँखों से मिली. उसमे शर्म थी, बेबस पैन था… और एक गहरा नशा भी. वो शर्मा कर आँखें बंद कर लेती… पर हर धक्के पे उसकी गांड खुद हलके से उठ जाती.
मैं सोफे पे बैठा था… हाथ में लुंड पकड़ के dheere-dheere हिला रहा था. देख रहा था की मेरी सगी बड़ी आपि… जो बचपन से मुझे “बीटा” कहती थी… अब किसी और मर्द के नीचे लेती हुई चुद रही थी. उसका चब्बी बदन हर धक्के पे हिल रहा था. दूध लटक रहे थे. छूट से “puch-puch” की आवाज़ आ रही थी.
अर्जुन की स्पीड dheere-dheere बढ़ने लगी. अब वो तेज़ धक्के मरने लगा. आपि की सिसकारियां तेज़ हो गयी.
**“अह्ह्ह… अर्जुन… और ज़ोर से… फाड़ दो… अह्ह्ह्हह… मैं झड़ने वाली हूँ… उफ्फ्फ्फ़…”**
अर्जुन ने आपि की दोनों टाँगे अपने कन्धों पर रख ली और फुल स्पीड में छोड़ने लगा. उसके मोठे लुंड की हर धक्के पे आपि की छूट फैल रही थी. आपि की आँखें बंद, मुँह खुला, लार टपक रही थी.
फिर अर्जुन ने झट से लुंड बहार निकला और आपि के मुँह के ऊपर आ गया.
**“मुँह खोल रंडी… ले मेरा माल…”**
आपि ने आँखें खोली… शर्मा कर… पर मुँह खोल दिया. अर्जुन ने उसके बाल पकड़े और अपना लुंड उसके मुँह में दाल दिया. Zor-zor से धक्के मारे… और फिर ज़ोर से झाड़ गया.
**“अह्ह्ह्हह… ले साली… पि ले… पूरा पि ले… अह्ह्ह्हह…”**
अर्जुन का सारा गरम माल आपि के मुँह में भर गया. कितना ज़्यादा था… आपि के होंठ से बहार भी टपक रहा था. आपि ने आँखें बंद करके सब कुछ पि लिया… थोड़ा बहार टपका तोह उसने ऊँगली से उठा के मुँह में दाल दिया.
अर्जुन थक कर उसके बगल में लेट गया. कुछ देर साँसे चलती रही.
फिर वो उठा… नंगा hi मेरे पास आया और सोफे पे मेरे बगल में बैठ गया. उसका लुंड अभी भी थोड़ा खड़ा था और चमक रहा था.
अर्जुन ने सिगरेट सुलगा ली, एक काश लिया और मुस्कुराते हुए मुझसे बोलै,
**“भाई… ये रंडी कौन है यार? सच बता… इतनी ज़बरदस्त माल मैंने ज़िन्दगी में पहली बार छोड़ी है. टाइट छूट… मोती गांड… और चूचियां देख… कितनी बड़ी और भरी हुई हैं. किश करने में भी कितनी सॉफ्ट लिप्स हैं… और चूसने में तोह जैसे प्रोफेशनल रंडी हो. उफ्फ्फ्फ़… ऐसी रांड पहले कभी नहीं मिली. पूरी फॅमिली टाइप लगती है… शरीफ सी… पर अंदर से कितनी गरम है बस. आज के बाद इसको रोज़ लाना… मैं इसको अपनी पर्सनल रंडी बना लूंगा.”**
मैं मुस्कुराया… अंदर से बहुत मज़ा आ रहा था. अर्जुन को यह नहीं पता था की ये मेरी सगी बड़ी बहन है.
मैंने धीरे से बोलै,
**“भाई… बस एक जान्ने वाली लड़की है… बहुत क्लोज है…. और हाँ… वो भी तुझे पसंद कर चुकी है.”**
अर्जुन हंस पड़ा. उसने फिर से अनाम आपि की तरफ देखा जो अभी भी बीएड पे नंगी लेती हुई थी, साँसे तेज़ चल रही थी, चेहरा लाल, दूध upar-neeche हो रहे थे.
अर्जुन ने वॉलेट निकला… उसमे से 50,000 रुपये निकाले और मेरे तरफ बढ़ाते हुए बोलै,
**“ले भाई… आज इस रंडी ने बहुत मज़ा दिया. ये 50,000 इसके लिए… बोल देना… अगली बार और ज़्यादा दूंगा. ऐसी टाइट और गरम छूट वाली रंडी बहुत काम मिलती है.”**
मैं पैसे ले लिए. अर्जुन उठा और अनाम आपि के पास गया. उसने पैसे उसके हाथ में रख दिए और उसके गाल पे किश करके बोलै,
**“ले मेरी जान… ये तेरे लिए. बहुत मस्त चूड़ी तू आज. अगली बार कब आएगी मादरचोद..”**
अनाम आपि ने पैसे देखे… उसका चेहरा शर्म से और लाल हो गया. उसने पैसे हाथ में पकडे… आँखें नीचे कर ली… पर उसकी उँगलियाँ thar-thar काँप रही थी. वो कुछ नहीं बोली… बस शर्मा कर लेती रही.
मैं सोफे पे बैठा ये सब देख रहा था… अंदर से एक अलग hi नशा हो रहा था.
मेरी बड़ी आपि… मेरी सगी बड़ी आपि… अब किसी और मर्द के पैसे ले रही थी… उसके लुंड छुड़वाने के बदले… और मैं देख रहा था… और ये देख कर मुझे इतना मज़ा आ रहा था की मैं पागल हो रहा था.