Adultery Kundali Bhagya - Page 23 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 157

वैस्वी बेथ के पढ़ रही थी, तभी उसके मोबाइल की टोन बजी, उसने फ़ौरन मोबाइल देखा तो शिव का मश्ग था, वो खुस हो गयी,

वैस्वी : टाइम मिल गया (टॉन्ट मरते हुए)

शिव : सॉरी वो देखा नहीं था, वैसे सूरज आज किस और निकला था वो देखना भूल गया था, पूरब में hi निकला था न?

वैस्वी : (मुस्कुरा uthi)Nahi पश्चिम में.

शिव : तभी सोचु की आज तुमने कैसे याद कर लिया.

वैस्वी : बड़े आये, क्या में याद नहीं करती?

शिव : मुझे कैसे पता चलेगा?

वैस्वी : मेने सुना है की जब कोई किसी को याद करता है तो उसको पता चल जाता है?

शिव : वो कैसे?

वैस्वी : उसको हीचिकि आती है.

शिव : पर मुझे तो कोई हिचकी नहीं आयी.

वैस्वी : कोई और भी याद कर रहा होगा न, इस लिए क्रॉस कनेक्शन हो जा रहा होगा.

शिव : मुझे तो कोई याद नहीं करता.

वैस्वी : जूते कही के, मुझे पता है कोण याद करता होगा?

शिव : (उसको भी मज़ा आ रहा tha)Kon?

वैस्वी : वही जिसके घर मिलने गए थे तुम.

शिव : (में सोच में पद गया की इसको कैसे पता चला की में संयम के घर गया था, तो मेने अनजान बनते हुए puchha)Me किसके घर गया था?

वैस्वी : कल गए थे न तुम, भूल गए.

शिव : (मेने रहत की साँस ली, ये कल की बात कर रही थी, तो में फिर मज़ाक के मूड में आ गया )में तो किसी के घर नहीं गया था.

वैस्वी : जूते, एक नंबर के जूते हो तुम.

शिव : अच्छा चलो मान लिया की गया था तो क्या हुआ, काम था तो गया था.

वैस्वी : ऐसा क्या काम था?

शिव : वो कल मुझे उनके साथ जाना है न इस्सलिये?

वैस्वी : कहा जाना है?

शिव : इतना क्यों टाइप करवा रही हो, बात करनी है तो सीधे सीधे कॉल करो न.

वैस्वी : नहीं, ऐसे hi ठीक है, ऐसे किसी को आवाज नहीं जाती.

शिव : क्यों दर लगता है?

वैस्वी : दर तो नहीं लगता पर क्या जरुरत है, और तुम बात मात बदलो, बताओ कहा जा रहे हो?

शिव : नाज़िआदिदी के ससुराल.

वैस्वी : वह क्यों?

शिव : है कुछ काम.

वैस्वी : स्कूल नहीं आनेवाले हो?

शिव : नहीं, स्कूल तो आऊंगा, दोपहर को जाना है शायद.

वैस्वी : अच्छा ठीक है, बाद में बात करती हु, कोई बुला रहा है muje.Bye.

शिव : Bye.

में सोचने लगा की इसको क्या हो गया, तभी फिर मश्ग की टोन बजी, मेने देखा तो ये जहान्वी का मश्ग था.

जहान्वी : Hi

शिव : Hi

जहान्वी : क्या कर रहे हो?

शिव : कुछ नहीं, कहिये?

जहान्वी : कुछ नहीं, बस ऐसे hi.

शिव : हम्म्म.

जहान्वी : एक बात कहु?

शिव : कहिये, इसमें पूछनेवाली क्या बात है?

जहान्वी : अभी जब में सोच रही थी तो मुझे लगा की मेने कुछ ज्यादा hi कर दिया, ेम्बरके फील कर रही हु.

शिव : किस बात के लिए?

जहान्वी : वो गाड़ी सिखाते हुए में जैसे बेथ गयी थी, मुझे वैसा नहीं करना चाहिए था, तुम क्या सोच रहे होंगे मेरे बारेमे, की कैसी लड़की है.

शिव : (मान में, बेथ गयी तब नहीं सोचा अब सोच रही ho)Aap तो सीखा hi रही थी न, में क्यों और कुछ सोचु.

जहान्वी : नहीं, फिर भी, में ऐसे कैसे बेथ सकती थी, तुम क्या सोच रहे होंगे मेरे बारे में.

शिव : (Juth)Me कुछ नहीं सोच रहा हु, मेने तो यही सोचा की आप मुझे गाड़ी सीखा रही थी, और कुछ नहीं.

जहान्वी : थैंक्स यार, पता नहीं में क्या क्या सोच रही थी, मुझे बहोत गिलटी फील हो रहा था.

शिव : आप ऐसा वैसा कुछ मात सोचिये, मुझे तो खुसी है की मुझे आपने गाड़ी सिखाई, आपने वैसा किआ तभी तो मुझसे गाड़ी चली, वर्ण बंद hi हो जा रही थी.

जहान्वी : (जहान्वी को बहोत अच्छा laga)Thik है तो फिर कल मिलते है.

शिव : सॉरी, में कल नहीं आ रहा.

जहान्वी : क्यों?

शिव : भर जाना है, एक सोशल काम है.

जहान्वी : (दुखी हो kar)Ohhhh!

शिव : परसो, आ जाऊंगा.

जहान्वी : (दुखी हो गयी thi)Hmmm.

शिव : थकी है, तो मिलते है फिर, bye.

जहान्वी : Bye.

उसे शिव से बात करके अच्छा लगा, वर्ण वो जब से आयी थी तब से सोच रही थी की उसने कुछ ज्यादा hi कर दिया, हलाकि उसको बहोत अच्छा लगा था पर फिर उसे लगा की शायद उसने जल्द बजी कर दी, ऐसे कैसे वो किसी की भी गॉड में जा के बेथ गयी, वो उसे चालू लड़की समाज रहा होगा, ये सोच सोच कर hi वो बेचैन थी. आखिर कर उसने मश्ग कर hi दिया tha,call करने की तो उसकी हिम्मत hi नहीं हुई थी.

रंजन : यहाँ अकेले अकेले क्या कर रहा है, चल निचे दीदी बुला रही है.

शिव : है चल.

रंजन : क्या कर रहा था?

शिव : कुछ नहीं, तू दिमाग मात ख़राब कर, चल.

रंजन : है है, में hi तो दिमाग ख़राब करती हु, तू तो बहोत सीधा है न.

शिव : चल अब.

आज में अकेले hi सोया था, मेने सोचा की लता को बुला लू पर फिर सोचा की सोने दो. सुबह उठ कर में स्कूल चला गया. आज दोपहर को जाना था. नाज़िआ दीदी ने भी याद दिलाया, तो मेने कहा की फ़ोन पर बात कर लेंगे और सीधा में बस स्टेशन hi चला आऊंगा. संयम मेरे पीछे बेथ गयी और वैस्वी उसके पीछे. हम स्कूल चले गए, बिना मैडम का क्लास सुरु हुआ, वो कभी कभी मुझे देख रही थी, पर जैसे hi में देखता वो अपनी नज़ारे घुमा लेती थी. खरी और तो कुछ खास हुआ नहीं, हम लोग स्कूल से घर चले गए, वैस्वी मुझे छोड़ने आना चाहती थी पर मेने मन कर दिया, और में घर चला गया. मेने पहले hi बता दिया था की आज में बहार जा रहा हु, तो फटाफट खाना खाया और तैयार हो कर कुछ कपडे ले कर में निकल गया. विस्व भी हमारे वह से कोई रिक्शा तो जल्दी मिलती नहीं थी में चलने लगा, थोड़ी दूर पंहुचा hi था की सामने से मुझे पुलिस जीप में भार्गवी मैडम जाती दिखाई दी, उनकी भी मेरे ऊपर नजर पड़ी तो उन्होंने गाड़ी रोक दी. में उनके पास चला गया.

भार्गवी : सवारी किस और चली?

शिव : (मुस्कुराते हुए) बस स्टेशन जा रहा था.

भार्गवी : आ जाओ, छोड़ देती हु. (में भी उनके बाजु में बेथ गया, उन्होंने गाड़ी चला di)To कहा जा रहे हो?

शिव : क्सक्सक्स सहर.

भार्गवी : क्यों? (मेने उन्हें बता दिया) ओह! कब वापस आओगे?

शिव : कल.

भार्गवी : मेरी याद नहीं आती क्या? (उन्होंने हलकी नाराजगी से कहा)

शिव : ऐसा क्यों कह रही हो?

भार्गवी : तो और क्या कहु, न फ़ोन, न मिलने आये.

शिव : (उनका हाथ जो स्टेयरिंग पर था मेने उस पर हाथ रख diya)Aisa कुछ नहीं है, थोड़ा बिजी था और वैसे भी आप भी तो बिजी hi रहती हो.

भार्गवी : (मुस्कुराते हुए शिव को dekha)Ab काम hi ऐसा है तो क्या करू, पर फ़ोन तो कर शक्ति हो न, या कमसे काम मश्ग hi कर दो.

शिव : सॉरी, आ कर मिलता हु.

भार्गवी : मिलने को नहीं कह रही, में जानती हु तुम कितने बिजी रहते हो, पर कभी कभी मेरे भी ख्याल आना चाहिए न.

शिव : सॉरी यार, आ कर पक्का मिलता हु.

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Yaar???

शिव : क्यों कुछ गलत कहा क्या?

भार्गवी : नहीं ! तुम्ही तो हो जो मुझसे ऐसे बात कर शक्ति हो, इसीलिए तो मिस करती हु तुम्हे. जल्दी आना. (हम बस अड्डे पहुंच गए थे तो उन्होंने मुझे बहार ड्राप करते हुए कहा, अगर पब्लिक प्लेस न होता तो पक्का हम दोनों किश कर लेते, हम दोनों ने hi ये महसूस किआ था, वो हल्का शर्मा gayi)Bye, जल्दी आना.

शिव : Bye, मिलते है. (वो मुस्कुराते हुए चली गयी)

में बस स्टेशन में चला गया. बुस्तातिओं बड़ा था, और चारो और लोग और बसे थी, में प्लेटफार्म पर नाम पढ़ते हुए उस सिटी जानेवाले प्लेटफार्म को ढूंढने लगा, जैसे hi मुझे वो मिला में उन तीनो को ढूंढने लगा, मेने देखा की एक जगह तीन लड़कीअ बुर्के में कड़ी थी, मेने ये भी देखा की वो थोड़ी उनकंफर्टबले लग रही थी. तभी मेरा ध्यान गया की दो लड़के उनके आस पास घूम रहे थे, वैसे तो ये पब्लिक प्लेस था तो वो और तो कुछ कर नहीं रहे थे, बस यहाँ से वह और वह से यहाँ घूम रहे थे, पर नज़र उन तीनो पर hi थी. में समाज गया की क्या चल रहा है, में फ़ौरन उस और गया, वैसे भी मुझे पता नहीं था की ये संयम लोग hi है की नहीं, पर बुर्के में थी तो अंदाजा लगाया. में उनके नजदीक पंहुचा.





शिव : संयम?? (संयम ने अपना बुरका हटाया, उसके चेहरे पर हलकी गब्रहत थी, जो मुझे देख कर जाने लगी)

संयम : कहा रह गए थे? (उसने हलकी शिकायत की)

शिव : टाइम से तो आ गया (कहते हुए मेने उन लड़को की और देखा तो वो मुझे खा जानेवाली नजरो से देख रहे थे) एक मिनट. (कहते हुए में उन दोनों की और बढ़ा तो वो थोड़े घबराने लगे, वो दोनों मुझे hi देख रहे थे, में उनके नजदीक pahucha)Excuse में. (मुझे देखते हुए वो दोनों हैट गए, उनके पीछे वाले स्टाल से मेने दो पानी की बोतल ली और पैसे दिया, वो दोनों मुझे hi देख रहे थे, वैसे भी इतने लम्बे लड़के को देख उनकी सिटी पित्ती गम थी, मेने पानी की बोतल का ढक्कन खोला और पानी का एक घूंट piya)Kya हुआ? (वो दोनों मेरी और देख रहे थे तो मेने पूछा)

एक लड़का : क क कुछ नहीं भाई, (दूसरे लड़के ko)E चल, अपनी बस दूसरे प्लेटफार्म पर होगी, यहाँ नहीं है.

दूसरा लड़का : ह हह हां, मुझे भी ऐसा hi लग रहा है. (वो दोनों भागे, किसी से टकरा भी गए, पर जैसे तैसे भागे वह से, में वापस आया उन तीनो के पास और एक बोतल उनको दी)





नाज़िआ ने मुस्कुराते हुए अपना पर्दा हटाया और बोतल ले ली. संयम भी खुस लग रही थी, मेने आंटी की और देखा तो सिर्फ उनकी आंखे दिख रही थी, जैसे hi हमारी नजर मिली उन्होंने नज़ारे झुका ली.





शिव : बस कबतक आनेवाली है?

नाज़िआ : आती hi होगी. (उसने पानी पि कर बोतल अपनी ामी की और बधाई तो उन्होंने गर्दन हिला कर न कहा, तो उन्होंने संयम को दे दी, उसने एक दो घूंट पिए)

शिव : कैसे आये आप लोग?

नाज़िआ : रिक्शा से आ गए थे. (तभी बस आती दिखाई दी) लो बस भी आ गयी, तुम जल्दी से ऊपर जा कर सीट रोको.

शिव : (मेने आंटी की और देख kar)Aunty अपना बैग दीजिये. (उन्होंने शिर झुका कर मुझे बैग दे दी, और में बस की और लपका, भीड़ ज्यादा थी, जैसे तैसे में अंदर घुसा, मेने एक डबल सीट पर एक बैग रक्खा, पीछे वाली सीट पर एक आदमी आलरेडी बेथ गया था तो मेने उसके पीछेवाली सीट पर दूसरा मेरा बैग रख दिया, लोग अंदर चढ़ने लगे तो में उन सीटों पे बैठने से मन करने लगा, थोड़ी देर बाद वो तीनो भी अंदर आयी, मेने सीट दिखते हुए kaha)Wo सीट है. (नाज़िआ को शिव के साथ बैठना था, पर उसे पता था की ऐसे वो नहीं बेथ सकती तो वो उस सीट पर बेथ गयी, पीछे hi संयम थी, वो कड़ी रही)

नाज़िआ : बेथ न, पीछे सब खड़े है (वो शिव की और देखते हुए मायूस हो कर बेथ गयी)

ज़ोया : (जब उसने देखा की उसकी दोनों बेतिया बेथ गयी है और उसको शिव के साथ बैठना है तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, वैसे भी वो अपनी बेटिओ को तो नहीं कह सकती थी की शिव के साथ बेथ जाये, भले hi उसे पता था की शिव और नाज़िआ में क्या सम्बन्ध है, पर बहार की दुनिया के लिए तो वो अनजान hi थे, और वैसे भी अगर किसी पहचानवाले ने देखा तो भी ये सही नहीं लगेगा, उसका बैठना hi सही था, शिव पीछे खिसक गया तो वो अपनी नज़ारे झुकाये, उस सीट पर चली गयी और खिडक़ीवाली सीट पर बेथ गयी, शिव ने बैग ऊपर रक्खी और वो भी बेथ गया, उसके शरीर में भी टारे हिल रही थी, वैसे भी सीट इतनी बड़ी नहीं होती, दो लोगो को सात कर hi बैठना पड़ता है. जैसे hi उसे आंटी की बाजु टच हुई वो भी हिल गया, पर अपने आपको संभाला, खैर हम सब बेथ गए, नाज़िआ ने पीछे मुद कर देखा और मुस्कुरायी, ज़ोया ने अपनी नज़ारे झुका ली. थोड़ी देर ऐसे hi गुजरा, गर्मी लग रही थी, पर क्या कर शक्ति थे, थोड़ी देर में कंडक्टर और ड्राइवर आ गए, और बस डेपो से बहार निकली. हवा चलने लगी तो थोड़ी रहत हुई, मेने फिर पानी पिया)

शिव : आप पानी पीयेगी (अचानक मेरे मान में ख्याल आया) सॉरी, ये जूठी है, में वो बोतल मँगवाडु? (वो कुछ नहीं बोली, बस ना में गर्दन हिला दी, मेने ढक्कन बंद कर दिया, बस अब सिटी से बहार निकलने लगी थी, हवा चलने से अच्छा लग रहा था, रस्ते भी अच्छे थे तो बस स्पीड में चलने लगी.)

ज़ोया : (शिव के साथ ऐसे बैठने से उसको अजीब लग रहा था, भले hi उसने पेअर दूसरी और कर लिए थे पर कमर और हाथ आपस में टच हो hi जाते थे, जब भी उसका हाथ टच होता तो ज़ोया को रोम रोम खड़ा हो जाता था, वो चुप थी पर उसके दिमाग में बहोत कुछ चल रहा था, शिव ने उसके साथ जो चुदाई की थी वो बार बार उसको याद आ रही थी, उसे इतनी शर्म आ रही थी की वो शिव की और देखने से भी कटरा रही थी.)

शिव : आपको गर्मी नहीं लग रही (उनके बुर्के की और देख कर कहा, जोया ने एक पल शिव को देखा, दोनों की आंखे आपस में मिली, उसने फिर नज़ारे झुका ली और न में गर्दन हिलायी, फिर हम दोनों चुप हो गए, बस पूरी भरी हुई थी, पर कोई खड़ा नहीं था, सबको जगह मिल गयी थी, करीब आधा घंटा गुजर गया)

ज़ोया : (उसको पानी पीना था, पर वो कैसे कहे वो समाज में नहीं आ रहा था, थोड़ी देर वो बैठी रही पर फिर सोचा की इसमें क्या है, तो उसने आहिस्ता से kaha)wo, पानी...

शिव : (आवाज में उसे बारे बार सुनाई नहीं दिया, पर इतना पता चला की आंटी ने कुछ कहा) क्या? कुछ कहा क्या आपने.? (ज़ोया कुछ न बोली फिर खामोस हो गयी, शिव ने आस पास देखा तो सब अपने अपने में बिजी थे, ज़ोया का हाथ उसके पास hi था तो उसने हलके से उनके हाथ को पकड़ liya)(Zoya घबरा गयी, और शिव को देखने लगी, शिव मुस्कुराया, उसने आस पास देखा तो कोई देख नहीं रहा था तो उसको रहत हुई, शिव के ऐसे हाथ पकड़ ने से उसके दिल की धड़कन बढ़ गयी थी, वो अपना हाथ छुड़ाने लगी, शिव ने भी हाथ छोड़ दिया, और उनके नज़दीक जा कर आहिस्ता से kaha)Kya हुआ, आप इतना क्यों शर्मा रही है? (ज़ोया से कुछ बोलै नहीं गया, वो बस अपनी नज़ारे झुकाये बैठी rahi)Apna चेहरा दिखाइए न, देखो संयम और नाज़िआ ने भी अपना पर्दा हटा दिया है. (ज़ोया ये जानती थी, पर उसने जान बुज कर नहीं हटाया था, शिव ने फिर उसके हाथ को पकड़ा तो वो कैंप गयी पर इस बार उसने अपना हाथ नहीं छुड़ाया) आप उनकंफर्टबले हो रही हो तो में आगे चला जाऊ? (वो क्या बोलती, पर जवाब तो देना hi था, तो उसने सिर्फ न में गर्दन hilayi)Aapne कुछ कहा था अभी? क्या कहा था?

ज़ोया : पानी. (बस इतना hi बोल पायी)

शिव : आगे से बोतल मँगवाडु?

ज़ोया : (उसने ना में गर्दन हिलायी)

शिव : मेरी जूठी है, चलेगी? (शिव ने मुस्कुराते हुए कहा तो ज़ोया शर्मा गयी, पर बोली कुछ नहीं, शिव ने हाथ छोड़ा और ढक्कन खोल कर बोतल badhayi)Lijiye. (ज़ोया ने ले ली, वैसे भी पानी पिने के लिए उसे पर्दा हटाना hi था, वो चाहती तो पर्दा ऊपर कर के भी पि सकती थी, पर उसने वैसा नहीं किआ, उसने पर्दा खोल दिया, वो जानती थी की शिव उसको hi देख रहा है, वैसे भी आज वो अपनी बेटी के ससुराल जा रही थी तो हल्का मेकअप किआ हुआ था, बड़ी आँखों पर काजल भी लगाया था) (मेने उनके चेहरे को देखा तो देखते hi रह गया, काजल लगी आंखे बहोत सुन्दर लग रही थी, और चेहरे पर हल्का मेकअप था और साथ में हलकी लिपस्टिक भी लगी हुई थी, मुझे सही में लगा की चेहरे को छुपाना लाज़मी hi था, वर्ण हर कोई देखता rehta)(Zoya जानती थी की शिव उसे hi घर रहा है, उसको पानी भी गले से उतरना मुश्किल हो रहा था, पर जैसे तैसे उसने पानी पिया और बोतल वापस दे दी, शिव ने बोतल बंद की, वो खिड़की से बहार की और देख रही थी) अपना चेहरा वापस छुपा लीजिये. (शिव ने आहिस्ता से कहा) (ज़ोया को समाज नहीं आया, अभी तो वो चेहरा खोलने के लिए कह रहा था, उसने शिव को देखा) सॉरी पर आप इतनी खूबसूरत लग रही हो की लोग आपको hi घूरेंगे, आप वापस चेहरा धक् लो. (ज़ोया शर्मा गयी और अपना मुँह पर हाथ की बंद मुट्ठी रखते हुए बहार देखने लगी और मुस्कुराने lagi)Sach कह रहा हु (मेने मुस्कुराते हुए कहा, फिर कुछ सोच कर मेने kaha)Aap मुझसे क्यों गभरा रही हो? आपको अच्छा नहीं लगा क्या? (ज़ोया की हसी गायब हो गयी, वो बहार को देख रही thi)Agar आपको पसंद नहीं तो में आपसे बात नहीं करूँगा, आप फ़िक्र मात कीजिये, पर सच कहु तो मुझे तो बहोत अच्छा लगा था. (पता नहीं में ये कैसे बोल गया, मेने उनके चेहरे को देखा तो वो अपना चेहरा बहार देखते हुए छुपा रही थी, वो कुछ नहीं बोली, और वैसे भी में कोई जोर जबरदस्ती तो करता नहीं था, पर उस दिन सचमे मुझे बहोत मज़ा आया था, उनका शरीर सबके मुकाबले भरा हुआ था, सब नाजुक कलिओ जैसी थी जबकि ये मुझे अपने मुकाबले की लग रही थी) कुछ तो जवाब दीजिये.

ज़ोया : (उसने आहिस्ता से फुसफुसाते हुए kaha)Koi सुनलेगा शिव, ये जगह नहीं है ऐसी बात करने के लिए.

शिव : (उनकी बात सही थी, पर आज hi तो मुझे ऐसे अकेले मिली थी तो मेने पूछ लिया था) सॉरी, बस एक बात का जवाब दे दीजिये, आप नाराज़ हो मुझसे? (उन्होंने एक बार मेरी और देखा, फिर नज़ारे झुका कर ना में गर्दन हिलायी, मुझे सुकून मिल गया, में भी शांति से बेथ गया, बस अपनी रफ़्तार से चल रही थी)

मेने आगे देखा तो नाज़िआदिदी और संयम आपस में बात कर रहे थे, आगे एक कपल बैठा था, जो शांति से बैठे हुए थे, मेरी बाजूवाली सीट पर एक छोटी लड़की और उसकी मम्मी बैठे हुए थे, पीछे की और एक दो औरते बैठी हुई थी. पाना नहीं में ये सब क्यों देख रहा था, शायद मेरे दिमाग में कुछ चल रहा था जो में भी समाज नहीं प् रहा था, मेने आंटी को देखा तो वो बहार की तरफ देख रही थी और शायद किसी सोच में डूबी हुई थी. मुझसे रहा नहीं जा रहा था, तो मेने अपने पैर के पंजी को उनकी और खिकया, थोड़ी hi देर में मेरा पेअर उनके पेअर के पास पहुंच गया, बूट पहना था तो और कुछ न कर पाया पर मेने पेअर उनसे सत्ता दिया, मेने उनके चेहरे को देखा तो चिहरे पर हलकी परेशानी दिखी मुझे पर वो बहार hi देख रही थी. मेने आपने पेअर वापस खिंच लिया, में सीधा हुआ और हल्का सा उनकी और झुका, में उनके बाजु से सात गया था, उन्होंने आस पास नज़र दौड़ाई, फिर शांत हो गयी, देख वो बहार hi रही थी. (ज़ोया उसकी हरकते समाज रही थी, पर ऐसे बर्ताव कर रही थी जैसे उसे पता hi न हो) मेरे मान में जो चल रहा था उसकी वजह से मेरे लिंग में तनाव आने लगा था, मेने सोचा की ये जगह सही नहीं है, पर दिल मान hi नहीं रहा था, मुझे एक युक्ति सूजी, मेने अपना बैग ऊपर से उतरा और अपनी गॉड में रख दिया, अब अगर बाजु से कोई देखता तो भी उसे कुछ दिखाई नहीं देता. (ज़ोया चुप चाप ये सब देख रही थी, उसकी भी धड़कने तेज तेज चल रही थी, पतानहीं पर उसके अंदर भी रोमांच था, वो बस दर रही थी, पर अंदर उथल पुथल मची हुई थी. इतने दिनों से उसने सोच लिया था की वो शिव के साथ और कुछ नहीं करेगी, और वो अपने आपको सँभालने की कोशिस में लगी हुई थी, वो बस यही दिखा रही थी जैसे उसे कुछ पता न हो, थोड़ी देर बाद शिव ने उसके हाथ पर हाथ रख दिया, उसका शरीर कैंप रहा था, पर उसने कोई हरकत नहीं की, उसने अपनी बेटिओ की और देखा जो आपस में बाते कर रही थी, वो फिर बहार देखने लगी, शिव हलके हलके उसके हाथ को सेहला रहा था, वो उसकी ऊँगली ो से खेल रहा था, उसको बहोत अच्छा लग रहा था, ये सब रोमांच तो वो जैसे भूल hi गयी thi.)(Unka हाथ सहलाते हुए मेरी नजर उनके चेहरे पर hi थी, वो शांत बैठी थी या दिखावा कर रही थी, जो भी हो वो विरोध नहीं कर रही थी तो मेरी हिम्मत बढ़ रही थी, मेने अपना हाथ उठाया और उनकी झंघ पर रख दिया, उनकी आंखे बंद हुई पर फिर वो बहार को देखने लगी, मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, मेने कभी इस तरह की हरकत नहीं की थी तो दिल दर भी रहा था, पर कुछ था जो मुझे रोमांचित कर रहा था, में थोड़ी देर ऐसे hi बैठा रहा, फिर हलके से मेने अपनी उंगलिओ पर दबाव बढ़ाया और छोड़ दिया, मेरी नजर आंटी पर hi थी, वो ऐसे बेहवे कर रही थी जैसे उन्हें कुछ पता hi न हो, अपने बाये हाथ को में उनकी झांघो के बिच ले गया तो उनकी झंगे आपस में सटने लगी, मेरा हाथ उनकी छुटवाले भाग से थोड़ी hi दुरी पर था, पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी की में ऐसा वैसा कुछ करू. मेरी धड़कने बढ़ चुकी थी, मेरी और ज्यादा हिम्मत नहीं हुई तो मेने अपना हाथ हटा लिया. उन्होंने हलके से मुझे देखा फिर वापस बहार देखने लगी. (ज़ोया को दर लग रहा था पर जब शिव ने हाथ वापस खिंच लिया तो उसको अच्छा नहीं लगा और उसकी नजर अपने आप उसकी और चली गयी जैसे कह रही हो की हाथ क्यों हटा लिया, उसको भी अच्छा लग रहा था, उसे शर्म भी आ रही थी की कैसे वो एक नौजवान लड़के को अपने शरीर के साथ खेलने दे रही थी, पर उसको अपने आपमें इस तरह से देखते हुए देख उसे भी अच्छा लग रहा था, उसे लग रहा था की अभी भी उसमे कोई तो बात है जो ये नौजवान लड़का उसकी और आकर्षित हो रहा है, वर्ण अब वो समझने लगी थी की वो बुजुर्ग होने लगी है)

फिर शिव ने ऐसी कोई हरकत नहीं की, एक और तो उसे बुरा लग रहा था पर फिर उसे अच्छा भी लग रहा था की शिव उसके साथ सेक्स कर चूका है फिर भी वो अपने जज्बातो को काबू किये हुए है, वो चाहता तो बहोत कुछ कर सकता था, शायद वो उसे रोकती भी नहीं, पर उसने ऐसी वैसी कोई हरकत नहीं की, थोड़ी देर बाद शिव ने जब उसका हाथ पकड़ा और उसकी उंगलिओ में अपनी उंगलिअ फसायी तो उसने भी उसका हाथ थम लिया, जैसे अपनी सहमति जाता रही हो, वो देख बहार रही थी पर उसका सारा ध्यान शिव की हरकतों पर था. (जब आंटी ने मेरा हाथ पकड़ा तो मुझे सुकून महसूस हुआ, मेने उनकी और देखा तो वो हलके हलके मुस्कुरा रही थी, पर मेरी और देख नहीं रही थी, एक्सप्रेस बस थी तो वो सीधे हमारे स्टेशन पर hi रुकी. मेने उनका हाथ छोड़ दिया, जब बुस्रुकि तो में उठा और आगे चला गया, हम सब उतर गए थे, जब ुम बहार आये तो एक आदमी भाग के आया, करीब 27-28 साल का था, दिखने में अच्छा भी था, उसके चेहरे पर खुसी जैसे सामना नहीं रही थी. ये करीम था, नाज़िआ का शोहर.

करीम : अस्सलाम अलैकुम.

नाज़िआ, आंटी, संयम : व आलेकुम s-salam. (करीम मेरी और देखने लगा)

शिव : नमस्ते.

करीम : नमस्ते.

ज़ोया : ये शिव है, इसके आबू आ नहीं सके तो उन्होंने इससे भेज दिया.

करीम : आइये आइये, लाइए में बैग ले लेता हु (उसने वो बैग ले लिया जो नाज़िआ ने उठाया हुआ था, हम को वो एक और ले जाने लगा, वो अच्छा था, दिखने में और स्वाभाव में भी पर नाज़िआदिदी के सामने थोड़ा फीका था, वो अपनी कार ले कर आया था, वो तीनो पीछे बेथ गए ,इ आगे उनके साथ बेथ गया, वो गाड़ी चलने लगे) और, कोई दिक्कत तो नहीं हुई न?

आंटी : नहीं बीटा, शिव ने सीट ले ली थी, सब आराम से हो गया.

करीम : चलो अच्छा है, वैसे अब्बू आ नहीं पाए तो मुझे कह देते, में लेने आ जाता.

आंटी : उसकी जरुरत नहीं थी, हम ाही गए न.

करीम : वैसे ये शिव, यही नाम बताया न, है कोण?

आंटी : वैसे तो ये संयम के साथ पढता है, पर इसके अब्बू इसको बहोत मानते है, हमें भी इसीपर भरोसा है, तो इसीको ले आये, क्यों आपको अच्छा नहीं लगा?

करीम : नहीं नहीं अम्मी, ये क्या बोल रही है, में तो बस ऐसे hi कह रहा था. और सुनाई ये आपकी तबियत कैसी है? और संयम कैसी चल रही है पढ़ाई?

ऐसे hi बाते करते करते हम उनके घर पहुंच गए, सोसाइटी में घर था इनका, दो मंजिला घर था, सब मुस्लिम परिवार hi रह रहे थे ऐसा लग रहा था, जब हम वह पहुंचे तो नाज़िआदिदी की सास और नानन्द बहार hi कड़ी थी, गाड़ी की आवाज सुन कर अभी अभी बहार आयी थी. वैसे तो उनका और नाज़िआ का कई बार झगड़ा हो चूका था, घर के कामो को ले कर और उसके बच्चे न होने पर, पर अब बात अलग थी, अब वो माँ बन ने वाली थी तो दोनों ने उसका मुस्कुराते हुए स्वागत किआ.

Hafiza(Saas) : (नाज़िआ ने झुक कर अदब kia)Jiti रहो बेटी, खुस कर दिया तुमने, आओ आओ अंदर आओ, कैसी है संयम, (ज़ोया ko)Aaiye आइये. (वह कड़ी इनायत जो नाज़िआ की ननद थी वो गाड़ी से निकले लम्बे से नौजवान को देख रही थी, वो सबको सलाम कर रही थी पर निगाहे शिव पर थी.)





में सबको देख रहा था, मुझे ावक्वार्ड लग रहा था, ऐसे भी कद की वजह से सब मुझे देखते रहते है और ऊपर से मेरा नाम सुन कर नाज़िआ के पति ने भी मुझे आश्चर्य से देखा था, मुझे भी लगने लगा की मेने गलती कर दी, अंकल को मुझे नहीं भेजना चाहिए था, पर वो भी क्या करते, उन्हें थोड़ी न पता था की मेरे और सबके क्या सम्बन्ध है, संयम, नाज़िआ और आंटी को तो कोई प्रॉब्लम नहीं थी क्यों की वो मुझसे इतना परिचित थी, पर सबको संजना थोड़ा मुश्किल था, में महसूस कर रहा था की आस पास के घर के लोग भी बहार निकल आये थे और वो हमें hi देख रहे थे. करीम मेरे साथ hi था, तो सब औरते अंदर चली गयी, करीम और में आखिर में अंदर गए, आगे हॉल में करीम के पापा बैठे हुए थे, मुझे दिखा कर करीम बोले.

करीम : ये शिव है, इनका फॅमिली फ्रेंड है, आबू आ नहीं पाए तो हिफाजत के लिए इन्हे भेज diya.(Waise तो उसको ये सही नहीं लग रहा था पर वो अपनी ससुराल की बेइज्जती नहीं करना चाहता था तो अपने आबू को जैसे समजा रहा था, वही अंदर भी यही हालत थे, नाज़िआ की सास पूछ रही थी)

हाफ़िज़ा : ये लड़का कोण है, पहले कभी देखा नहीं (ज़ोया समझती थी की ये मामला कितना नाज़ुक है, वैसे भी वो शिव को इसलिए hi साथ में लायी थी क्यों की वो किसी और पर भरोसा नहीं कर शक्ति थे, वो असंजस में थी की क्या कहे, नाज़िआ थोड़ी कॉंफिडेंट थी तो उसने hi जवाब दिया)

नाज़िआ : अम्मी, ये शिव है, वैसे तो ये संयम के साथ स्कूल में पढता है, पर बहोत hi नेक है, संयम को कुछ लड़के स्कूल के रस्ते में परेशान करते थे, एक दिन उन्होंने संयम का रास्ता रोका था,

शिव उसी वक़्त वह से गुजर रहा था, उसने उन लड़को की न सिर्फ धुलाई की बल्कि रोज़ इसको और इसकी सहेली को हिफाज़त से स्कूल पहुँचता है, आबू और ामी तो इसे अपना बीटा hi मानते है. (ज़ोया ने जब ये सुना की ‘बीटा’ तो उसकी नजर झुक गयी, पर नाज़िआ जो कह रही थी वो सही hi tha)(Uski नानन्द इनायत वही कड़ी थी, वैसे भी उसको शिव पसंद आया था, वो एक तलाक सुदा थी, किसी कारन से उसका तलाक हो गया था और वो अपने मायके में hi थी, शिव के बारेमे जान कर उसकी उत्सुकता बढ़ी)

इनायत : मतलब, उसने उस लड़के को मारा था?

नाज़िआ : वो अकेला नहीं था, उस लड़के के साथ में उसके दो दोस्त और भी थे, उसके बाद भी वो दोबारा गुंडों को लेकर भी आया था, चार पांच गुंडे थे, उन सबको इसने मारा था, उसके बाद कभी वो लोग दिखाई नहीं दिए.

हाफ़िज़ा : (वो समाज रही थी की ये लोग उस पर बहोत भरोसा कर रहे है, पर सोसाइटी की दूसरी औरते भी वह कड़ी थी, तो जान बुज कर उसने puchha)Par बेटी वो गैर जाट का है, आप उसे क्यों लाये?

नाज़िआ : आप खुद hi मिल लो आपको पता चल जायेगा (वैसे भी वो जानती थी की शिव उसको दीदी कह कर hi बुलाता है तो उसको कॉन्फिडेंस था, उसने शिव को आवाज लगायी) शीइइइइइइव, शीइइइइइव.

शिव : (जो बहार बैठा था और करीम और उसके अब्बू की आँखों का सामना कर रहा था, उसने नाज़िआ की आवाज़ सुनी, तो अपनी आदत के मुताबित hi वो bola)Ha डीडीईई. (जब उसने दीदी बोलै तो आगे बैठे मर्दो ने और अंदर बैठी औरतो ने भी ये सुना, सबके चेहरे पर संतोष था)

नाज़िआ : जरा अंदर तो आना. (शिव ने करीम और उसके अब्बू की और देखा)

अकरम (नाज़िआ का ससुर): है है, जाओ बीटा, तुम तो घर के hi हो. (शिव भी उठ कर अंदर गया, अंदर सब औरते उसे hi देख रही थी, वैसे भी वो लम्बा चौड़ा और मासूम दिखनेवाला hi था तो औरतो को तो पसंद आना hi था)

शिव : है दीदी??? (उसने जिस सरलता और नर्माहट से कहा था, सब औरतो के दिल में वो बस चूका था)

नाज़िआ : अम्मी तुमसे मिलना चाहती थी, इस लिए बुलाया (अपनी सास की और इस्सर करके वो बोली, इतनी औरतो के बिच अपने आपको प् कर वो शर्माने लगा, उसकी इस शर्म से सबके चेहरे पर मुस्कान आ गयी)

हाफ़िज़ा : (मुस्कुराते hue)Aao आओ, शर्मा क्यों रहे हो, सब घर के hi है, में तो बस पूछ रही थी की तुम कोण हो, तुम तो बड़े शर्मीले हो. शर्मा क्यों रहे हो, अपना hi घर संजो.

शिव : जी आंटी. (उसने नज़ारे झुका के जवाब दिया)

इनायत : (वो तो जैसे दीवानी हुई जा रही थी, उसने शिव की खिंचाई करने का मौका लपक liya)Bhabhi आप जूथ बोल रही हो, इन्हे देख कर लगता नहीं की इन्होने गुंडों को मारा भी होगा. (शिव ने इनायत की और देखा, उसे पता नहीं था की यहाँ क्या बात हुई, उसने फिर से शर्मा के अपनी नज़ारे झुका ली)

नाज़िआ : शिव एक एथलीट भी है, देश के लिए दौड़ने की प्रैक्टिस कर रहा है, बीचेमे न्यूज़ चैनेलो में भी आया था जब इसने बहोत बड़े बाइक चोरो के गिरोह को पकड़वाया था. पुलिस अफसर से ले कर पॉलिटिशंस तक पहचान है इसकी)

करीम : (बहार से वो सब सुन रहा tha)Ha याद आया, कुछ समय पहले आपके सहर की न्यूज़ आयी थी, उस टाइम बस ऐसे hi न्यूज़ देखि थी तो याद नहीं रहा. है मेने इससे देखा था, वैसे भी इनकी हिघ्त की वजह से ये सब में अलग दिख जाते है, मेरा भी ध्यान गया था, पर मुझे क्या मालूम था की ये आपकी पहचान के है.

नाज़िआ : (उसके दिल का सारा बोझ उतर गया था, वैसे भी शिव से कोई इम्प्रेस न हो वो हो नहीं सकता था) जी, ये वही है. (सबकी बाटे सुन कर शिव शर्मा रहा था और नज़ारे झुकाये खड़ा था)

इनायत : भाभी, आपके भाई को देख कर लगता नहीं की ये इतने कारनामे कर चुके है, देख कर तो लगता है की कोई डांटेगा तो भी ये रोने लगेंगे.

नाज़िआ : (मान में : अगर ये ऊपर चढ़ गया न तो पता चलेगा की कोण रोटा hai)Ye ऐसा hi है, दीखता बहोत सरल है और ये है भी, बिना वजह ये किसी को परेशान नहीं करता.

अकरम : (जैसे बड़े लोगो का इंट्रेस्ट होता है वैसे hi puchha)Iske वालिद क्या करते है?

नाज़िआ : (हलके दुःख के sath)Iske वालिद नहीं है अब्बू, ये यतीम है, यतीम खाने में रहता है. (शिव के चेहरे पर कोई फर्क नहीं पड़ा, अब उसको इन बातो से कोई फर्क नहीं पड़ता था, वो बस नज़ारे झुकाये हलके से मुस्कुरा रहा था क्यों की सब उसकी बाते कर रहे थे)

हाफ़िज़ा : या खुदा, ये क्या जुल्म किआ है, ऐसा बीटा तो चिराग ले कर ढूंढने से भी न मिले, अल्लाह के आगे घुटने घिस जाये तब जेक ऐसी औलाद मिलती है. (करीम भी काफी इम्प्रेस था, वो उठा और शिव के बाजु में खड़ा हो गया, उसके कंधे पर हाथ रख के)

करीम : सो साद बरोथेर, यकीं नहीं होता. (उसने दिलासा दिया)

शिव : नहीं जीजाजी, मुझे कोई शिकायत नहीं है, में खुस हु अपनी जिंदगी से, इतने लोग मेरे साथ है, कैसे में अन्यथा हुआ.

अकरम : सही कह रहे हो बीटा, तुम बाटे करो, करीम बीटा, शाम की तयारी के लिए हमे बाजार भी जाना है. (उन्होंने याद दिलाया)

करीम : है आबू, (शिव की पीठ थप तपते hue)Tum बाते करो, हमे थोड़ा काम है. (अपनी ामी ko)Hum जा रहे है अम्मी.

हाफ़िज़ा : ठीक है बीटा. (शिव ko)Ander आ जाओ बीटा, ये लोग हमारे लिए तौफे लाये है वही दिखा रहे थे.

शिव : आप लोग देखिये, में बहार बैठा हु.

नाज़िआ : बहार अकेले अकेले क्यों बैठोगे, यही खड़े रहो, या बैठना है? पानी पिया की नहीं?

इनायत : सॉरी भाभी, मेरे दिमाग से hi निकल गया, में अभी लती हु, आप सबको मिलने की खुसी में सब भूल गयी.

नाज़िआ सबके बिहेवियर नोट कर रही थी, ये सब ऐसे नहीं थे जैसे अभी दिख रहे थे, कितना फर्क आ गया था सब में, सिर्फ इसीलिए की अब वो माँ बन ने वाली है, और ये सब मुमकिन हुआ था शिव की वजह से, उसने प्यार से शिव की और देखा, शिव ने भी उसे देखा, वो मसुकुराई तो शिव भी मुस्कुराया. तभी इनायत सबके लिए पानी ले आयी, ट्रे में रक्खे गिलास वो सबको देने लगी, उसने शिव को भी दिया, उसे देखने के लिए उसे अपनी गर्दन ऊपर करनी पड़ती थी, वो भोत प्यार से मुस्कुरा रही थी. (मेने देखा की वो कुछ ज्यादा hi प्यार से देख रही है, वैसे भी वो खूबसूरत थी, काजल लगी बड़ी बड़ी आँखों से वो मुझे देख रही थी, लिपस्टिक लगे होठ मुस्कुरा रहे थे, रंग भी गोरा hi था. वो ऐसे देख रही थी तो मेने अपनी नज़ारे झुका ली)

शिव का ऐसे शर्माना, इनायत को बहोत अच्छा लग रहा था, उलटे सुलटे कोई विचार नहीं थे बस उसको शिव अच्छा लगा था, वो उसको शरमाते हुए देख कर और मुस्कुरा रही थी. उसने फिर से सबसे खली गिलास लिए और अंदर रख आयी. अंदर सब बिस्तर पर बैठे थे और कुछ खड़े थे, वैसे भी नाज़िआ अच्छी थी तो सब उसको पसंद करते थे तो, काफी लोग आये हुए थे. रूम तक़रीबन भरा हुआ था, शिव को अजीब लग रहा था पर वैसे भी बहार वो अकेला क्या करता तो वही खड़ा रहा.

इनायत सब रख कर वापस आयी और शिव के नजदीक hi कड़ी हो गयी. वो शिव पर जैसे लट्टू हो रही थी, अंदर क्या चल रहा है उसे उस से कोई मतलब नहीं था, वो बस शिव के नजदीक कड़ी थी, शिव तो लम्बा था तो उसे अंदर देखने में कोई दिक्कत नहीं थी. इनायत की एक सहेली भी वह थी तो वो उसके साथ कड़ी हो गयी, पीछे hi शिव खड़ा था तो उसने एक बार मुस्कुरा के शिव को देखा. सबके लिए लाये हुए कपडे और दूसरी गिफ्ट दिखाई जा रही थी. इनायत और शिव के बिछ कुछ कम का hi डिस्टेंस था, अचानक इनायत पीछे हुई तो वो शिव से टकरा गयी, उसने ये जानबुज कर नहीं किआ था, बा अंदर देखने के लिए थोड़ी हिली तो ये हो गया था, उसने शर्मा के शिव को देखा और मुस्कुरायी.

शिव को उस गद्देदार मसल अंग का एहसास हुआ पर वो शांत रहा, उसकी नजर एक बार भरे हुए कूल्हों पर गयी भी पर उसने नजर हटा ली. सब लोग देखने में hi बिजी थे. इनायत से ये अनजाने में हो गया था पर अब उसका दिल धक् धक् करने लगा था, बात वो वो अपनी दोस्त से कर रही थी, और अंदर देख भी रही थी पर अभी हुआ स्पर्श उसके मान मस्तिक में छाप चूका था. उसका मान किआ की फिर वो करे, पर उसको दार लग रहा था. थोड़ी देर बाद उसका दिल नहीं माना, और इस बार वो जान बुज कर थोड़ी पीछे हुई, उसके गद्दे दर कूल्हे शिव से टकराये, वो फिर आगे हो गयी. उसने शिव की और देखा और ऐसा मुँह बनाया जैसे कह रही हो की सॉरी गलती से हो गया.

मेने सोचा की थोड़ा पीछे हो जाता हु, पर फिर दिलने कहा की क्या जरुरत है, में थोड़ी न कुछ कर रहा हु. में वही खड़ा रहा, थोड़ी देर बाद फिर से वो हल्का सा पीछे हुई, अब मुझे लगने लगा की ये जान बुज कर कर रही है, मेरा क्या जाता था, में वही खड़ा रहा, थोड़ी देर बाद फिर से उसके नरम कूल्हे मुझसे टकराये, मेने सबकी और देखा तो सब बिजी hi थे. मेरे लुंड में हलकी अकड़न आणि सुरु हो गयी थी.
 
अपडेट 158

इनायत देख तो आगे रही थी और अपनी सहेली से बात भी कर रही थी पर उसका पूरा ध्यान पीछे खड़े शिव पर hi था. वो शर्मा भी रही थी और दर भी रही थी, अभी कुछ देर पहले तो उस से मिली है और उसके साथ ऐसी हरकत कर रही है, वो क्या सोचेगा उसके बारे में. उसने अपनी और से तो इस्सर दे hi दिया था, अब वो लड़का था तो वो hi आगे बढ़ेगा, ये सोच कर वो थोड़ी देर ऐसे hi खड़े रही.

मेरी नजर बार बार आगे कड़ी इनायत के कूल्हों पर जा रही थी, बस कुछ hi जगह थी हम दोनों के बिच, आगे सब बिजी थे, एक दो बार मेरी और उसने ऐसे देखा था की वो जो चाहे वो कर शक्ति है, पर आज वो पहलीबार hi यहाँ आया था और ऊपर से नाज़िआदिदी का ससुराल था, कुछ भी गड़बड़ हुई तो बाते बिगड़ सकती थी. मेने अपने आप पर सयम रक्खा और वैसे hi खड़ा रहा.

इनायत ने देखा की वो कुछ नहीं कर रहा है तो उसको थोड़ी निराशा हुई, वैसे भी वो तलाक सुदा थी, काफी टाइम भी हो गया था उसने सेक्स किये हुए, घर की इज्जत को देख कर वो ऐसा वैसा कोई कदम उठाना नहीं चाहती थी. उसके तलाक का कारन भी उसके पति के दूसरी औरत के साथ के रिलेशन थे, उसने अपने पति को उसी की चचेरी बहन के साथ रेंज हाथो पकड़ा था, अक्सर उनमे बहेश चलती रहती थी, आखिर कर तंग आ कर उसने hi तलाक ले लिया था. अपने साथ हुए इस हादसे की वजह से वो थोड़ी चीड़ छिड़ी भी हो गयी थी, उसी वजह से उसने अपनी भाभी को भी नहीं बक्शा था, और वैसे भी उसको बच्चा नहीं हो रहा था तो उसकी माँ भी चिंतित थी, तो अक्सर बहस हो hi जाती थी. पर जबसे उसने सुना था की वो माँ बन ने वाली है तो फिर ज्यादा बोलने का कुछ बचा नहीं था. उसने अपनी ामी से भी कहा था की भाईजान तो यहाँ है फिर वो कैसे माँ बन रही है. तो उसकी अम्मिणे बताया था की करीम गया था वह, उसने कोई दवाई सुरु की थी ताकि वो माँ बन सके. इसके बात तो कुछ बचा hi नहीं था पूछने को. भाई और अब्बू के अलावा तो घर में कोई मर्द ज्यादा आता जाता नहीं था, तो वो ऐसे hi थी. शिव को देख कर उसके अंदर उमंगें जाग गयी थी, वैसे भी शिव था hi ऐसा. वो चाहती थी की शिव भी थोड़ा आगे बढे, उसके अंदर जवानी हिलोरे मार रही थी, उसकी छूट में भी गिला पैन आने लगा था, पर वो कोई बेगैरत तो थी नहीं की ऐसे hi खोल कर बेथ जाये. जब थोड़ी देर तक शिव ने कुछ नहीं किआ तो उसने फिर अपना कुल्हा पीछे किआ, इस बार उसने वापस नहीं खींचा, और वो ऐसे बर्ताव कर रही थी जैसे उसे पता hi न हो, वो बात भी कर रही थी, पर उसका पूरा ध्यान अपने पिछवाड़े पर था, उसकी सांसे भी भरी होने लगी थी.

शिव भी वैसे hi खड़ा रहा, उसके नरम नरम कूल्हों का एहसास होते hi उसका लुंड खड़ा होने लगा था, वो चाहता तो पीछे हैट सकता था पर आंटी के साथ बस में बैठने से वो भी गरम था. लुंड अपनी औकात में आने लगा था. इनायत का भरी कुल्हा उसके साथ सत्ता हुआ था, उसे समाज नहीं आ रहा था की ये क्यों इतना सब कर रही है वो भी पहली hi मुलाकात में. वो सोचने लगा,

शिव : मुझे क्या, में थोड़ी न कुछ कर रहा हु, वो कूद अपने कूल्हे दे रही है.

इनायत को अपने कूल्हे पर वो कड़क अंग महसूस हुआ, उसकी हालत पतली होने लगी, आज कितने समय बात वो उस को महसूस कर रही थी, उसकी धड़कने तेज चलने लगी, उसे शर्म भी आ रही थी की शिव क्या सोच रहा होगा, पर उस से ज्यादा उसे अपनी गर्मी बर्दास्त नहीं हो रही थी, उसने जब महसूस किआ की शिव का वो खड़ा अंग उसकी दरार में अपना दबाव बढ़ा रहा है तो वो पागल होने लगी, उसकी हिम्मत hi नहीं हो रही थी की वो पीछे मुद कर देखे. वो बस आगे हलके झुके हुए वैसे hi कड़ी रही.

शिव का कोई इरादा नहीं था पर फिर भी जब छूट सामने चल कर लुंड से चिपक रही थी तो वो भी क्या करता, उसने लुंड को कूल्हों के बिच एडजस्ट किआ और हलके हलके दबाने लगा, उसने महसूस किआ की इनायत भी थोड़ा थोड़ा पीछे हो रही है, उसका मान किआ की यही उसको छोड़ दे, पर क्या करता, वो वैसे hi खड़ा रहा.

हाफ़िज़ा : इनायत, तुजे पसंद आया ये (इनायत के लिए लाया हुआ लेहंगा चोली उसे दिखते हुए)

इनायत : (हड़बड़ा गयी, और सीधी हो gayi)H ह है ामी. (वो बस अपनी उखड़ी हुई सांसो से इतना hi बोल पायी)

में भी होश में आ गया और बहार आ कर सोफे में बेथ गया. इनायत को अपनी ामी पर गुस्सा आने लगा, उसने पीछे मुद कर देखा तो शिव जा चूका था, उसका चेहरा उदास हो गया. थोड़ी देर वो सब चलता रहा. अभी टाइम था फंक्शन में और सबको तैयार भी होना था.

हाफ़िज़ा : बीटा, इनके लिए वो ऊपरवाला कमरा ठीक कर दे, इन्हे चेंज करना हो तो वो hi ठीक रहे गए.

इनायत : जी ामी. आइये (ज़ोया और संयम को देख कर कहा, नाज़िआ भी कड़ी हो गयी, सब बहार आये)

नाज़िआ : चलो शिव, बैग ले लो. (में कुछ नहीं बोलै और बैग ले लिए) (इनायत शिव से नज़ारे चुरा रही थी, पर अंदर hi अंदर मुस्कुरा रही थी, पर जाहिर नहीं होने दिया, सब ऊपर की और आ गए) (ज़ोया का भी दिल धड़क रहा था, वैसे भी शिव के रहते उसकी हालत ख़राब hi थी, वो अपने आपको नार्मल दिखने की कोशिस कर रही थी पर अंदर तो जैसे युद्ध चल रहा था.)

नाज़िआ : सामान यही रख दो शिव. अम्मी यहाँ ऊपर भी बाथरूम और टॉयलेट बना हुआ है, अगर आपको फ्रेश होना है तो. (नाज़िआ ने ये नॉर्मली hi बोलै था पर ज़ोया, शिव के सामने ऐसी बात होने से शर्मा रही थी पर क्या बोलती) तुम बोर हो रहे होंगे न शिव (शिव को देख कर)

शिव : नहीं दीदी, ऐसी कोई बात नहीं है. (इनायत शिव को hi देख रही थी, पर नज़ारे चुरा कर)

नाज़िआ : निचे सब ताम जैम में लगे हुए है तो आज यही ठीक रहेगा. (शिव मान में सोच रहा था की वो सोयेगा कहा, क्या आंटी और संयम के साथ सोना है?, पर वो बोलै कुछ nahi.)Aap लोग आराम कीजिये, में निचे देखती हु (इनायत ko)Chalo, निचे का देखते है.

इनायत : (उसका तो दिल नहीं था निचे जाने ka)Chaliye भाभी. (वो दोनों चली गयी, मुझे थोड़ा ावक्वार्ड लग रहा था, और आंटी के चेहरे पर भी परेशानी थी तो में बहार निकल गया, तरस आगे से खुला था, में आस पास देख रहा था, तभी मुझे पीछे आहात हुई तो मेने पीछे देखा तो आंटी थी, हमारी नज़ारे मिली, पर उन्होंने नज़ारे ज़ुका ली और कोने में बने बाथरूम की और निकल गयी, में उन्हें उनकंफर्टबले नहीं करना चाहता था तो फिर मेने उस और नहीं देखा, में आस पास देख रहा था, शाम ढलनेवाली थी. सूरज अब गायब नोने hi वाला था. में बस ऐसे hi निचे देख रहा था, कुछ लोग कुछ सजावट का सामान अंदर ले जा रहे थे, करीमभाई उनको हिदायते दे रहे थे. मेने सोचा निचे hi चला जाता हु. तो में निचे चला गया.

शिव : (करीम के पास जाते hue)Koi हेल्प करू?

करीम : (शिव की और देख कर muskuraya)Are नहीं भाई, आप से काम करवाऊंगा, आप मेहमान हो हमारे.

शिव : प्लीज आप मुझे आप मात कहिये, में छोटा हु आपसे.

करीम : अच्छी बात है, बैठो तुम, ये सब कर लेंगे. वैसे यार लम्बे बहोत हो तुम, जलन होती है देख कर (मुस्कुराते हुए कहा, में क्या कहता, बस muskuraya)Samim के साथ पढ़ते हो न?

शिव : जी.

करीम : आगे क्या सोचा है?

शिव: अभी तो पता नहीं, 12 के मार्क के हिसाब से देखूंगा.

करीम : एथलीट भी कर रहे हो, पढ़ाई में कैसे हो?

शिव : जी बस चल जाता है. (संयम भी वह आ गयी थी, वो शिव को बुलाने आयी थी, चाय पिने, उसने ये सुन लिए था)

संयम : जीजू, ये जूठा है, स्कूल में फर्स्ट आता है, और दसवीं में पुरे डिस्ट्रिक्ट में फर्स्ट था.

करीम : ये तो बहोत अच्छी बात है, रेयर कॉम्बिनेशन है ये, अक्सर खेल से जुड़े लोग ज्यादा पढ़ नहीं पते.

शिव : अभी अभी ज्वाइन किआ हु न, देखते है आगे क्या होता है.

संयम : आप बुला रही है, चाय नास्ता करने के लिए.

करीम : आप लोग जाइये, में देखता हु. (में और संयम चले गए, निचे सब चल रहा था तो चाय और नास्ता ऊपर hi ले कर आये थे, हमने चाय नास्ता किआ फिर सब तैयार होने में लग गए, में तो वैसे hi था, मुझे क्या तैयार होना था अँधेरा हो चूका था, में बस टेरेस पर ऐसे hi टहल रहा था की नाज़िआ दीदी आयी, वो पूरी तरह से तैयार थी, उनको ऐसे देख कर में देखता hi रह गया, मुझे ऐसे देखते देख वो शर्मा गयी)





नाज़िआ : (शिव के पास जाते hue)Kaisi लग रही हु में? (उन्होंने शरमाते हुए मुझे पूछा, में तो बस देख hi रहा था, शिर पर पल्लू लिए ब्राइडल लुक में वो बहोत प्यारी लग रही थी, माथे पर टिका और चेहरे पर शर्म का गहना था, में तो बस कही खो सा गया tha)Shiiiv, (में हड़बड़ाया, वो मुस्कुरा रही thi)Kaisi लग रही हु? (में कुछ बोलै नहीं पर चेहरे के एक्सप्रेशन से बताया, की मिंडब्लोइंग, और मेने अपनी सांस जोरो से छोड़ी, वो एकदम से शर्मा गयी) तुम तैयार क्यों नहीं हुए, मेने कहा था न, कपडे ले aana.(Halke से शिकायत से कहा)

शिव : लाया हु, पर मेरा क्या काम है.

नाज़िआ : ज्यादा भाव मात खाओ, तैयार हो जाओ, में देखती हु ामी और संयम तैयार हुए की नहीं. (वो रूम की और चली गयी, में इसलिए hi बहार खड़ा था क्यों की वो लोग अंदर तैयार हो रही thi)(Nazia ने दरवाजा खत खतया और आवाज दी तो दरवाजा खुला और वो अंदर चली गयी, में अभी खड़ा hi था की पीछे से संयम की आवाज आयी, मेने मुद कर पीछे देखा तो वो लाल रंग के कपडे पहने हुए थी, मेरा तो हैरतफाइल होते होते बचा, मेने कभी सोचा नहीं था की संयम ऐसी भी लग सकती है, मेरी हालत देख कर वो भी मंद मंद मुस्कुरा रही थी, में उसे ऊपर से निचे तक देख रहा था, थोड़ी देर ऐसे hi खड़े रहने के बाद वो बोली)

संयम : कैसी लग रही हु में?





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शिव : कोण हो तुम?

संयम : (नखरा करते hue)Shiiiiiv.

शिव : (में muskuraya)Yaar, सच कह रहा हु, पहचान में hi नहीं आ रही हो, तुम कितनी खूबसूरत हो यार.

संयम : (बहोत शर्मा रही थी, उसे लग रहा था जैसे उसका सज न सवर्ण सफल हो gaya)Achchhi लग रही हु न? (वो शिव से और तारीफ सुन न चाहती थी)

शिव : Achchhi.....tum तो किसी अप्सरा के जैसी लग रही हो, बच के रहना.

संयम : (अदा से उसने मुस्कुरा कर kaha)Muje किसी का दर नहीं, अपना बॉडीगॉर्ड में साथ में ले कर घूमती हु, समजे. मेरे लंबेचौड़े बॉडीगॉर्ड को देख कर hi लोगो की हवा टाइट हो जाती है.

शिव : (मुस्कुराते hue)Achchha, कोण है वो, मुझे तो नहीं दिख रहा.

संयम : वो तुम्हे नहीं दिखेगा, लोगो को दिख जाता है, कोई हाथ तो लगा के देखे मुझे, वो कही से भी आ जाता है. (वो इतनी खुस लग रही थी की मुझे लगा की मेरी hi नज़र लग जाएगी, तभी नाज़िआदिदी और आंटी आयी, आंटी को देख कर तो मेने दिल hi थम लिया, आज ये तीनो मिल कर मेरा कतल hi कर degi)(Shiv को ऐसे देखते देख ज़ोया ने नज़ारे फेर ली, उसको इतनी शर्म आ रही थी, वो मान में सोच रही थी, देखो तो कैसा बेशर्म है, यहाँ मेरी बेतिया कड़ी है और मुझे कैसे देख रहा है, वो क्या सोचेगी)

नाज़िआ : (वो शिव की नजर को पहचानती थी और अपनी ामी की शर्म को भी, उसने मुस्कुराते हुए kaha)Tumhe क्या लगता है शिव, कोई कहेगा की ये मेरी ामी है (में तो जैसे खोया हुआ hi था, मेने ना में गर्दन हिलायी)





(ज़ोया और शर्मा गयी, और अपने पेअर आपसमे रगड़ने lagi)Aise नहीं शिव, कहो न ामी कैसी लग रही है? (अपनी अम्मी को पीछे से हुग करते हुए)

शिव : (में ऐसे बोलै जैसे समोहन में बोल रहा ho)Bahot खूबसूरत. (ज़ोया बहोत शर्मा रही थी)

नाज़िआ : तैयार हो कर निचे आ जाओ, थोड़ी देर में फंक्शन सुरु होगा.

शिव : में ऐसे कपडे नहीं लाया हु.

नाज़िआ : कोई बात नहीं, बस तुम कपडे बदल का आ जाओ, जल्दी आना, चलो अम्मी. (वो लोग निचे चले गए, में कमरे में गया, आस पास कपडे पड़े हुए थे, में अपनी बैग ढूंढने लगा, मेने बैग से वाइट शर्ट और क्रीम कलर की पंत निकली. वैसे भी मुझे कोनसा तैयार होना था. में कपडे पहन कर निचे चला गया)

सब लोग निचे िकटतः हो गए थे, सोसिटी में hi एक छोटा स्टेज जैसा बना दिया था और आस पास रौशनी की हुई थी, करीम और नाज़िआ स्टेज पर बैठे हुए थे और सब आपस में बात कर रहे थे. संयम और इनायत की नजर बार बार किसी को धुंध रही थी. इनायत भी गोल्डन कपड़ो में सजी हुई थी.





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वो शिव को अपने जलवे दिखाना चाहती थी. फंक्शन उसके घर में hi था तो काम तो था hi और लोगो से बात भी चल रही थी. तभी शिव सिंपल से कपड़ो में अंदर दाखिल हुआ, भले hi वो सिंपल कपड़ो में था पर वह कड़ी हर लड़की की नजर उस पर चिपक गयी थी, सबको ऐसे घूरते देख शिव शर्मा रहा था और अपनी नज़ारे झुकाये आगे बढ़ रहा था.





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एक के बाद हर एक की नजर उस पर जा रही थी, अपने पास कड़ी औरत को बातो को छोड़ कर किसी और देखते देख हाफ़िज़ा ने भी उस और नजर दौड़ाई, ज़ोया भी वही कड़ी थी, ऐसे अचानक बात रुक जाने से उसने भी देखा की सब किस और देख रहे है तो उसकी भी नज़र शिव पर चली गयी, उसको देख कर उसकी भी धड़कन चूक गयी. पर वो सबके सामने ऐसा दिखाना नहीं चाहती थी, तो अपने आपको सँभालने लगी. वही कड़ी एक औरत,

औरत : हाफ़िज़ा, ये कोण है?

हाफ़िज़ा : (मुस्कुराते hue)Nazia का मुँह बोलै भाई है.

औरत : क्या लड़का है? (एक ठंडी सी आह भरते हुए) सबने की बात चला na(Apani बेटी के बारे में बोलते हुए)

हाफ़िज़ा : वो हमारी बिरादरी का नहीं है.

औरत : क्या? (फिर ठंडी आह भर ke)Kassh होता तो में सबने की शादी इस से hi करवा देती.

हाफ़िज़ा : वो छोटा है यही, स्कूल में पढता है.

औरत : क्या? सच में, लगता नहीं है. (ज़ोया ये सब सुन रही थी, उसकी भी आंखे शिव पर hi लगी हुई थी)

इनायत का दिल तो जैसे बहार hi आने लगा था, मान कर रहा था की खास वो इसके जितनी hi होती तो अभी सबके सामने उसका हाथ पकड़ लेती. संयम का भी यही हल था, अगर वो अभी अकेलेमें होती तो शिव से लिपट गयी होती. वही नाज़िआ और करीम भी उसे hi देख रहे थे.

करीम : सेल से जलन होती है यार.

नाज़िआ : (हलके गुस्से se)Use क्यों गली दे रहे हो?

करीम : मेने कहा गली दी, तुम्हारा भाई है तो मेरा साला hi हुआ न.

नाज़िआ : बात को घुमाओ मात, में सब समझती हु, रिस्ते के नाते उसे सुना रहे थे.

करीम : (मुस्कुराते hue)Kuchh भी कहो यार, पर सलेसाहब में बात तो है. देखो तो, सबकी निगाहो का केंद्र बना हुआ है. (नाज़िआ ने भी देखा की सब उसे hi देख रहे है)

नाज़िआ : वो है hi ऐसा?

करीम : यार मेरा ध्यान रखना, कही मेरा hi पत्ता न काट देना.

नाज़िआ : क्या आप भी (मान में: अब क्या बताऊ, वो तो पहले hi काट चूका है)

करीम : (शिव की और आने का इस्सर कर ke)Bhai. (शिव ने भी देखा और वह चला गया) क्या यार, हम यहाँ सजे सवेरे है तू तुम बिना सजे सवेरे hi सबको अपनी और खिंच रहे हो. (शिव कुछ नहीं बोलै, बस मुस्कुराया, उसने नाज़िआ को देखा तो वो बहोत खुस लग रही थी, संयम और इनायत भी वह आ गयी)

इनायत : भाई जान, हमारी फोटो तो निकलवाइये, सबके साथ. (इनायत ये मौका गवाना नहीं चाहती थी)

करीम : है है क्यों नहीं. (उसने फोटो ग्राफर को आवाज दी) भाई एक फोटो तो लो. (शिव करीम के बाजु में जाने लगा तो इनायत जल्दी से वह चली गयी और अपने भाई के साथ कड़ी हो गयी, उसे पता था की शिव भी वही खड़े रहे गए, संयम भी जाने hi वाली थी पर नाज़िआ ने उसे रोक दिया, उसे भी इनायत का ऐसा करना अजीब लगा पर वो बोली कुछ नहीं. इनायत के चेरे पर तो ख़ुशी मनो टपक रही थी, और जब फोटो ग्राफरने दोनों और से थोड़ा अंदर की और खिसकने को कहा तो शिव उस से सात गया था, इस स्पर्श से तो उसकी खुसी का ठिकाना hi नहीं था, वही संयम थोड़ी उदास हो गयी थी, खैर सबने फोटो खिंचवाई, ऐसे hi दूसरे लोग भी आने लगे तो वो तीनो निचे उतर गए )

अब शिव, संयम और इनायत खड़े थे. इनायत तो शिव के कंधे तक भी नहीं पहुंच रही थी पर उसे इस से कोई फर्क नहीं पद रहा था. इनायत को देख कर दूसरी लड़कीअ भी ये मौका नहीं गवाना चाहती थी और वह इनायत से बात करने चली आ रही थी. इनायत को लग रहा था जैसे अचानक उसके भाव बढ़ गए थे. इनायत शिव को सब से मिलवा रही थी. और लड़कीअ भी इधर उधर की बाटे कर रही थी, पर नजर शिव पर hi थी. थोड़ी देर बाद वह मौलवीजी आये. उनके लिए बैठने की जगह बनायीं गयी थी, नाज़िआ और करीम भी वह आके बेथ गए. मौलवीजी के सामने एक माइक रखदिया गया. वो कुछ उर्दू में बोले जो मेरी समाज में नहीं आया. संयम मेरी बाजु में कड़ी थी तो मेने पूछा की ये क्या हो रहा है. तो उसने बताया की आप और उनके होनेवाले बच्चे के लिए दुवै पढ़ी जा रही है. मेरी तो कुछ समाज में नहीं आ रहा था. ये सब कार्यक्रम के बाद खाना वन होनेवाला था. में आस पास सबको देखने लगा. थोड़ी देर बाद मेने संयम से कहा की में आता हु, ये कह कर वह से निकला और ऊपर चला गया. इनायत की नज़र उस पर hi थी की ये कहा जा रहा है. उसने देखा की वो ऊपर की और गया, तो थोड़ी देर बाद वो भी बहाने से घर में गयी और पिछले रस्ते से घूम कर ऊपर की और चली गयी. इनायत का दिल धड़क रहा था, सबके होते वो ऐसे चली आयी थी, पर उसको बस शिव के साथ रहना था, जब वो ऊपर आयी तो उसने देखा की शिव मोबाइल में कुछ कर रहा है, ऊपर अँधेरा था पर निचे इतनी रौशनी होनेकी वजह से ऊपर भी हल्का उजाला था. कपड़ो और गहनों की वजह से आवाज हुई तो शिव ने उस और देखा तो इनायत आती हुई नजर आयी, उसे समाज नहीं आया की ये यहाँ क्या कर रही है, उसने मोबाइल जेब में रख दिया.

इनायत : (हलकी गब्रहत और शर्म के साथ वो उसके पास आयी, और धीमी आवाज में boli)Yaha क्यों आ गए? बोर हो रहे थे?

शिव : वो कुछ समाज नहीं आ रहा था. आप यहाँ क्या कर रही है?

इनायत : (अब क्या जवाब दे उसे समाज नहीं आ रहा था, फिर कुछ सोच kar)Bhukh लगी है?

शिव : नहीं, ऐसी तो कोई बात नहीं है.

इनायत : अभी इन सब में थोड़ी देर लगेगी, मेने सोचा सायद भूख लगी हो, आप मेहमान हो हमारे तो में पूछ ने चली आयी.

शिव : नहीं, अभी नहीं लगी, आप जाइये, में थोड़ी देर में आता हु.

इनायत : (हलकी नाराजगी se)Kyu, मेरा आना अच्छा नहीं लगा?

शिव : अरे नहीं, ऐसी बात नहीं है, ये आपके घर का फंक्शन है, तो आपको वह पूछेंगे इस लिए कह रहा था.

इनायत : नहीं, अभी कोई नहीं पूछेगा, अगर आपको मेरा रहना पसंद नहीं तो चली जाती हु.

शिव : (में मान में सोचने लगा, मुझे क्या प्रॉब्लम है, में रेलिंग के पास खड़ा था तो मुझे निचे सब दिख रहा था, घर के ऊपर हेलोजन लगी हुई थी तो में निचे देख सकता था पर शायद लोगो को में नहीं दीखता होऊंगा, कुछ सोच कर मेने kaha)Waise जैसा सुना था आप वैसी नहीं हो.

इनायत : (वो भी रेलिंग के पास आ गयी और निचे देखने लगी) ऐसा क्या सुना था? भाभी ने कुछ बताया था क्या?

शिव : छोड़िये न.

इनायत : बताइयेना, क्या कहा था?

शिव : में क्या कहु, आप खुद समझदार है, वर्ण उन्हें अपने मायके वापस नहीं आना पड़ता.

इनायत : (हलकी उदासी se)Manti हु की मेने उनसे अच्छा व्यव्हार नहीं किआ था, पर ऐसा हो जाता है, ऐसी में अकेली नहीं हु जो अपने घर के बारेमे सोचती हो, दुनिया में कही औरते है जो ऐसा सोचती है.

शिव : पर मुझे लगा की शायद आप बदला ले रही थी.

इनायत : बदला, कैसा बदला?

शिव : वही, जो दुनियाने आपको दिए, आप भी वही दे रही थी. पर मुझे लगता है की आप गलत थी, अगर आपके साथ कुछ गलत हुआ है तो इसका मतलब ये नहीं की आप दुसरो के साथ भी गलत करो.

इनायत : सच कह रहे हो (वो निचे hi देख रही थी पर उनके चेहरेपर में मायूसी देख सकता था)

शिव : जहा तक मेने सुना है, आपकी तो कोई गलती नहीं थी, फिर क्यों मायूस होती है, आगे बहोत जिंदगी है.

इनायत : (हलकी मायूसी se)Ye सब इतना आसान भी नहीं है, पहली शादी की बात अलग होती है और दूसरी सदी की अलग. दूसरी शादी में आपको ज्यादा कोम्प्रोमाईज़ करना पड़ता है, छोडो इन बातो को, में चलती हु. (वो जाने लगी, मेने उनका हाथ पकड़लिया, वो आश्चर्य से मुझे देखने लगी, वैसे भी में उनकी आँखों में ये पढ़ चूका था की वो मेरे हाथ पकड़ने का बुरा नहीं मानेगी)

शिव : रुकिए न, अभी तो आपने कहा की फ़िलहाल कोई नहीं पूछेगा. (मेने हाथ छोड़ दिया)

इनायत : (मायूसी se)Ab रुक के क्या करू, वैसे भी तुम मेरे बारेमे रे बना चुके हो की में एक बुरी औरत हु.

शिव : मेने ऐसा तो नहीं कहा, मेने तो ये कहा की जो मेने सोचा था आप वैसी नहीं हो.

इनायत : ऐसा क्या देखा की तुम्हे लगा की में वैसी नहीं हु, भाभी ने तो सब बताया होगा.

शिव : उसमे गलत भी नहीं है, उन्होंने वही बताया जो उनके साथ हुआ, और रही बात आपको देखने की तो इतने घंटो से आपका व्यव्हार देख रहा हु, या तो आप अच्छा बन ने का नाटक कर रही हो या तो फिर आप बदल गए हो.

इनायत : न में नाटक कर रही हु न में बदल गयी हु, परिस्थितिया बदल गयी है, मेरी नाराज़गी बस इतनी थी की वो वारिस नहीं दे प् रही थी, अब वो मसाला तो रहा नहीं, मुझे पता है की वो अच्छी है.

शिव : मतलब की आपको पता है की वो अच्छी है, तो सिर्फ बच्चा न दे पाने की वजह से आप उनसे ऐसा व्यव्हार करोगे?

इनायत : सच कह रहे हो, में गलत थी, ऐसे देखा जाये तो औरते hi औरतो की दुसमन होती है, पर क्या करे, हम औरते ऐसी hi हो गयी है, मेने उनके साथ वैसा किआ, कोई मेरे साथ वैसा करेगा, पर में अब ऐसा कुछ भी नहीं करुँगी.

शिव : अच्छी बात है. (बात बदलने के liye)Waise आप बहोत खूबसूरत लग रही है.

इनायत : (अचानक ऐसे कहने से उसने एक बार शिव की और देखा फिर शर्मा gayi)Ab आप खिंचाई कर रहे है.

शिव : में क्यों खिंचाई करूँगा, और ऐसा कर के मुझे नाज़िआदिदी की मुकिले थोड़ी न बढ़ानी hai.(Mene मुस्कुराते हुए कहा) मेने तो वही कहा जो सच है.

इनायत : में जाती हु (शरमाते हुए, वो जाने लगी)

शिव : अभी ये कितनी देर चलेगा? (वो रुक गयी)

इनायत : अभी थोड़ी देर लगेगी. (उसने पीछे देखते हुए कहा)

शिव : तो रुकिए न, में अकेले अकेले बोर हो जाऊंगा. (वो सोच में पड़ी thi)Please. (वो वापस कड़ी हो गयी, हम दोनों निचे देखने लगे, हम दोनों में थोड़ा अंतर tha)Waise काफी रिस्तेदार है आपके.

इनायत : है.

शिव : वो आंटी जो आपकी मम्मी के बाजुमें कड़ी है वो कोण है? (मेने तो ऐसे hi बात करने के इरादे से hi पूछा था)

इनायत : वो मेरी चची है (वो उनका इंट्रो देने लगी, फिर वो अपनी ऊँगली के इससरए से सब को दिखते हुए सबके बारे में बताने लगी, में बस सुन रहा tha)Wo है न (एक लड़के की और इस्सर करते हुए)

शिव : (मुझे समाज नहीं aaya)Kon? (वो जिस और ऊँगली कर रही थी उस और देखते हुए)

इनायत : वो जो शेरवानी पहने है (मुझे समाज नहीं आया तो में उनके नजदीक गया और उनका हाथ जिस और था वह देखने लगा, ऐसा करने से में उनसे हल्का सात गया था, जिस का मुझे पहले एहसास नहीं हुआ, पर इनायत हिल गयी)

शिव : अच्छा वो. कोण है वो?

इनायत : वो wo....(Unki जबान लड़खड़ा रही थी तो मेरा ध्यान गया की में उनसे सात गया हु, पर पता नहीं क्यों, में वैसे hi रहा, मेरे नथुनों में उनके शरीर से आती इतर की खुसबू भर रही थी, उनकी आँखों से मुझे लगा था की अगर में कुछ भी करू तो वो मन नहीं करेगी, अब इतना तो में समझने लगा था)

शिव : (मेरा शिर उनके कंधे के पास था तो मेने वैसे hi रहने diya)Kon है वो?

इनायत : (शिव का चेहरा उसके चेहरे के नज़दीक hi था, उसकी सांसे तेज होनेलगी थी, वो क्या दिखा रही है क्या बोल रही थी कुछ याद नहीं raha)wo वो... (मुझे उनकी हालत समाज आ रही थी, मेने भी चांस लिया, और पीछे से उनकी कमर पकड़ी) (इनायत तो कैंप गयी और जोर जोर से सांसे लेने लगी, उसका सीना जोरो से ऊपर निचे हो रहा था, उसने सोचा नहीं था की ये लड़का इतना फ़ास्ट निकलेगा, उसको कोई आपत्ति नहीं थी पर ऐसे अचानक होने से उसे भी समाज नहीं आ रहा था की क्या करे, उसने हाथ निचे कर लिया और रेलिंग को थम ली, उसकी नजर तो निचे थी पर पूरा ध्यान शिव पर था)

शिव : (में उनकी हालत से समाज गया की वो गरम हो रही है, में भी इस सिचुएशन का फायदा उठलना चाहता था, दोपहर से hi मेरी हालत वैसी thi)Kya हुआ, (मेने आहिस्ता से कान में kaha)Aapko बुरा लगा? (मेने कन्फर्म करने के लिए पूछा, उन्होंने नज़ारे झुकाये ना में गर्दन हिलायी, मेरा भी मूड बन ने लगा था, लुंड में अकड़न आने लगी थी, मेने कमर से हाथ के पंजी को कूल्हों की और मोड़ कर रुक गया, में देखना चाहता था की वो क्या करती hai)(Inayat क्या करती, बेचारी इतने दिनों से प्यासी थी, वो मूर्ति बानी hi कड़ी थी, शिव का हाथ उसके कूल्हों की और जा रहा था, उसकी सांसे उखाड़ने लगी thi)(Mene देखा की वो मन नहीं कर रही है तो अब में कॉंफिडेंट था, मेने खिसकते हुए हाथ निचे ले गया और बायीं और के गुंडाज कूल्हे को हलके से सहलाया,





उसकी गोलाई मेरे हाथ में महसूस होने लगी, मेरा लुंड अकड़ चूका था और पंत में एडजस्ट नहीं हो रहा था तो मेने दाहिने हाथ से उसे एडजस्ट kia)(Inayat ने ये देखा की शिव अपने पंत में कुछ कर रहा है, उसे समझते देर न लगी की वो क्या कर रहा है, उसकी हालत बहोत ख़राब हो चुकी थी, यहाँ खुले में थी वो, अगर किसीने देखलिया तो क्या करेगी वो, वो सब और देख रही थी की कही से कोई देखेगा तो नहीं, शिव का हाथ उसके कूल्हे को अब मसल रहा था, उसने रेलिंग को कास के पकड़ लिया था, उसकी आंखे भी बंद हो रही थी पर वो जबरदस्ती फिर खोल देती और निचे देखने lagti)(Muje पता था की अब ये मन नहीं करनेवाली तो मेने उनकी कमर को पकड़ कर पीछे खींचते हुए उन्हें कंधे पर दबाव दाल कर झुकाने को कहा तो वो झुक गयी, मेने कूल्हों की दरार में हाथ फिराया)

इनायत :(उसने एक हाथ से अपना मुँह दबा दिया, वर्ण सिसकी निकलने लगती, उसे इतनी शर्म आ रही थी की वो शिव की और देख hi नहीं रही थी, वो बस उसे जो करना है करने दे रही थी, उसकी धड़कने तो इतनी तेज चल रही थी की लग रहा था की अभी दिल बहार आ जायेगा, उसने महसूस किआ की वो उसके कूल्हों की दरार को रगडते हुए आगे छूट की और बढ़ रहा था पर कपडे की वजह से दिक्कत हो रही थी, उसने अपने पेअर खुद hi थोड़े फैला diye)(Ye देख कर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी, में इसलिए भी ये करना चाहता था की अगर ये मेरे काबूमें रहेगी तो दीदी को कोई तकलीफ नहीं होगी, मेने उनके स्कर्ट को निचे से पकड़ा और उठाने लगा)





(इनायत घबरा गयी, उसने शिव का हाथ पकड़ लिया और उसकी और देखा)

शिव : सिर्फ हाथ दाल रहा हु (पहली बार मेने बोलै tha)(Inayat ने अपना हाथ हातलिया और शर्मा के फिर से निचे देखने लगी, निचे क्या हो रहा था उसे कुछ पता नहीं था बस अपने निचे क्या हो रहा है उस पर hi ध्यान था, शिव का हाथ उसके डिज़ाइनर स्कर्ट के अंदर पहुंच चूका था और उसकी झांघो को सेहला रहा था, वो बिना आवाज किये सिर्फ सांसो से सिस्किअ ले रही थी, इतना सब अचानक हो जायेगा इसका अनुमान नहीं था उसे, पर उसकी आग पूरी भड़क चुकी थी, वो सब करने को तैयार थी )(मेरा हाथ भरी हुई झांघो के जोड़ तक पंहुचा तो मुझे गीली चड्डी का स्पर्श हुआ, वैसे भी टाइम नहीं था तो मेने सीधे छूट को सेहला दिया, चड्डी पूरी भीग चुकी थी,

और चड्डी को दबाने से रास टपक रहा tha)(Inayat की आंखे बंद हो गयी थी, वो आंखे बंद किये हुए बिना आवाज किया आहे भर रही थी, उसको बिच बिच में दर भी लग जाता और उसे जबरदस्ती अपनी आँख खोलनी padti.)(Me फूल गर्म था, और में ये भी महसूस कर रहा था की वो भी पूरी गर्म है, मेने दाहिने हाथ से अपनी ज़िप खोली और अपने कड़क लुंड को बहार nikala.)Inayat. (मेने हलके से पुकारा पर वो कही खोयी हुई thi)Inayat (मेने उसके कान के पास जेक बोलै, वो मेरी और न देख रही थी न कुछ बोल रही थी,) इससे हिलाओ, (मेने उसका हाथ पकड़ कर अपने लुंड पर rakkha)(Inayat एक दम से दर गयी, उसने सोचा नहीं था की शिव का लुंड बहार है, अचानक गरम अंग को छूने से एक दम से वो चौंक gayi)Please पकड़ो न इससे. (मेरी भी हालत ख़राब thi,mene फिर उसका हाथ पकड़ा और अपने लुंड पर रक्खा, उसने हटाया नहीं तो मेने हाथ छोड़ दिया और उसकी छूट को मसलने लगा, चड्डी थोड़ी साइड में खिसका कर एक ऊँगली छूट के छेड़ में दाल दी, छूट पूरी पनियाई थी, गर्म गर्म छेड़ के एहसास से मेरा लुंड ठुमके मरने लगा) (इनायत तो पागल सी हो गयी थी, उसको यकीं नहीं हो रहा था जो उसने अपने हाथ में पकड़ा हुआ है, उसे शर्म आ रही थी, पर वो सब कर गुजरने को तैयार थी,





उसने उस मोठे लुंड को पकड़ा तो उसे यकीं नहीं हुआ की सचमे उसने लुंड hi पकड़ा है न, एक और शिव की ऊँगली उसकी छूट में अंदर बहार हो रही थी, उसे तो लग रहा था जैसे लुंड hi डाला हुआ है, और दूसरी और उसके हाथ में जो था वो क्या था वो समाज नै आ रहा था, उसने दबा कर छैक किआ तो ऊपर की खाल नरम लगी पर निचे जैसे लोहा था, वो अपनी जिज्ञासा रोक नहीं पायी और उसने पीछे देखा, उसके हाथ में सच में लुंड hi था, वो मोटा लम्बा लुंड देख कर उसकी हालत ख़राब होने लगी, ऐसा तो उसकी कल्पनामे भी नहीं था, उसने अपने पति का देखा था जिसका सूपड़ा बहार hi रहता था, उसका दिल तो जैसे बहार होने को था, उसने अपने हाथ से लुंड हिलाया तो लाल लाल सूपड़ा बहार आने लगा, उसने लुंड पीछे किया, फिर आगे किया, ऊँगली उसकी छूट में अंदर बहार हो रही थी तो जैसे वो चुद hi रही थी, उसकी आंखे बंद हो गयी और वो लुंड को जोरो से पकड़ते हुए हिलने लगी, वो इतनी गरम हो गयी थी की उसकी छूटने पानी छोड़ दिया, उसने लुंड भी छोड़ दिया और रेलिंग को पकड़लिया वर्ण वो गिर जाती. तभी निचे से माइक में आवाज आयी की अब खाना सुरु होनेवाला है. (इनायत इतनी शर्मा गयी थी की वो बिना देखे वह से भागी और निचे जाने लगी) (में उसे जाते देख रहा था, मेरा लुंड अभी भी बहार था, में भी वह से बाथरूम में घुस गया, थोड़ी देर खड़ा रहा और लुंड पर ठंडा पानी डाला तब वो हल्का ढीला हुआ तो मेने उसे पंत में डाला, तभी मुझे बहार से आवाज आयी. “सीईव, शिव, कहा हो” ये ाआवाज संयम की थी.

शिव : एक मिनट आया. (शिव बाथरूम से आवाज दे रहा था ये सुन कर संयम शर्मा गयी, वो मुस्कुराते हुए उसका वही इंतजार करने लगी, थोड़ी देर बाद वो बहार आया)

संयम : क्या कर रहे थे? (थोड़ी देर हुई थी इस्सलिये उसने बस नारजगीसे पूछ लिया था)

शिव : नाच रहा था (झुंझलाते हुए जवाब दिया)

संयम : (एकदम से है पड़ी, थोड़ी देर हसने के बाद )मेरा वो मतलब नहीं था, चलो, दीदी बुला रही है, ऊपर क्यों आ गए थे. (उसने शिकायत की)

शिव : (निचे की और जाते hue)Muje कुछ समाज नहीं आ रहा था, तो में बोर हो रहा था.

संयम : (सीढ़ियों पर उसका हाथ पकड़ kar)Waise आज बहोत हैंडसम लग रहे हो. (में रुक गया और उसकी और देखा, वो पीछे उतर रही थी तो हमारा चेहरा एक लाइन में था)

शिव : तुम भी बहोत खूबसूरत लग रही हो. तुम्हे हमेशा स्कूल यूनिफार्म में देखा था न तो बिलकुल अलग लग रही हो.

संयम : (उसको ये सुन कर बहोत अच्छा लगा, उसने शिव की आंखोमे देख कर kaha)Girlfriend बनानेलायक हु न? (उसने नखरे से कहा)

शिव : चल अब. (में आगे चलने लगा तो उसने मेरा कन्धा पकड़ लिया)

संयम : बताना? (रिक्वेस्ट करते हुए)

शिव : (अब जो सच था वो था hi, तो मेने kaha)Ha है, उस से भी आगे लग रही है तू.

संयम : (खुस हो गयी और शिव के गले में हाथ डालते हुए पीछे झूल गयी)

शिव : क्या कर रही है, कोई देख लेगा. (वो भी समाज रही थी और मुझे छोड़ दिया, हम दोनों आगे आ गए)

करीम : कहा रह गए थे भाई?

संयम : ऊपर अकेले अकेले टहल रहा था, समाज नहीं आ रहा था तो बोर हो रहा था.

करीम : चलो कोई नहीं, खाना खा लो.

शिव : आप लोग?

करीम : हमे अभी टाइम लगेगा. तुमको भूख लगी होगी, खा लो.

शिव : नहीं, में रुकता हु, साथ में खाएंगे. (उन्होंने बोलै पर में मन नहीं, में वही एक चेयर पर बेथ गया, सबके सामने तो संयम बेथ नहीं सकती थी तो वो इधर उधर घूमने लगी, में सबको देख रहा था, इनायत नजर नहीं आ रही थी, थोड़ी देर बाद भीड़ काम हुई और कई लोग चले भी गए थे, तो संयम मुझे बुलाने आ गयी, हम सब ने साथ में खाना खाया, इनायत भी थी पर वो मुझसे नज़ारे नहीं मिला रही थी, पर देख मुझे hi रही थी, जैसे hi हमारी नजर मिलती वो शर्मा के नज़ारे झुका लेती, नाज़िआ ने भी ये नोटिस किआ. खाना खा लिया गया, सब अपने अपने घर लौट गए थे. हम सब अभी भी वह कुर्सिओं पर बैठे थे, और करीम सब ठीक कर रहा था, मौका देख कर वो नाज़िआ के पास गया और बोलै, आज मेरे साथ hi सोना )

नाज़िआ : (गभराते hue)Ye क्या कह रहे हो, सब आये हुए है, आप शिव के साथ सो जाना, में अम्मी और संयम के साथ सो जाउंगी.

करीम : रोज उनके साथ hi तो सोती हो यार, प्लीज.

नाज़िआ : (वो उसका सौहार था, वो उसको तो मन नहीं कर शक्ति thi)Thik है देखती हु.
 
अपडेट 159

नाज़िआ काम निपटा रही थी, वैसे भी ये उसकाही घर था, निचे एक हॉल था, किचन था और तीन कमरे थे, एक नाज़िआ का था, एक उसके सास ससुर का था और के गेस्ट रूम जैसा बनाया था जिस में फिलहाल इनायत रहती थी. ऊपर दो कमरे बने हुए थे जिसमे से एक स्टोर तुम था, और एक कमरा ऐसे hi बनाया था ताकि कभी कोई गुज़स्त आ जाये तो काम लगे. उसके दिमाग में यही प्लानिंग चल रही थी की किस को कहा सुलाए. निचे के कमरों में दुबले बीएड थे, पर ऊपर एक सिंगल बीएड था. उसने सोचा था की आज की रात शिव और उसके सौहार साथमे सो जायेंगे, ऊपर के कमरे में तीनो maa-beti साथमे सो जायेंगे. पर उसका सौहार उसके साथ सोना चाहता था, इतने टाइम बाद वो आयी थी तो ये लाज़मी भी था. वैसे भी उसके माँ बन ने के कारन सब कुछ बदल सा गया था, उसकी सास, उसकी नानन्द का व्यव्हार उसके प्रति पूरा बदल गया था, जिसकी वजह से उसके सौहार के चेहरे पर भी ख़ुशी थी. यही उसका संसार था तो इससे संभालना उसका फर्ज था. काम करते हुए उसने एक बार फिर से अपने सौहार से बात की.

नाज़िआ : सुनो न, में क्या कह रही थी, आप शिव के साथ सो जाइये न.

करीम : ऐसा क्यों कह रही हो यार, कितने समय बाद सब सही हो रहा है, और आज तो तुम क़यामत लग रही हो, मुझसे तो नहीं रहा जायेगा.

नाज़िआ : (मुस्कुराते hue)Issiliye मुझे छोड़ आये थे, क्यों? (नाज़िआ ने तना मारा)

करीम : भूल जाओ बीती बातो को, जो गुजर गया वो गुजर गया, उन बातो को याद कर के आने वाले समय को क्यों ख़राब करना.

नाज़िआ : (उसने भी बात को नहीं khincha)Par फिर शिव कहा सोयेगा?

करीम : उसमे क्या प्रॉब्लम है, वो तीनो ऊपर सो जायेंगे न.

नाज़िआ : (मान में : आप सोच रहे हो की हम दोनों भाई बहन है और वो अम्मी का बीटा है क्यों, आपको क्या पता की क्या है wo)Are पर संयम है वह, उसके साथ थोड़ी न सोयेगा वो.

करीम : अम्मी भी तो रहेगी न साथ में, वैसे भी अगर भरोसा न होता तो तुम उसे ऐसे साथ में थोड़ी न लती.

नाज़िआ : तुम भी न बेसबरे हो रहे हो, कही भागी जा रही हु में? (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

करीम : अब तो में तुम्हे जाने भी नहीं दूंगा, वैसे भी कभी तुम्हे मेरी तरफ से पहले भी कभी ऐसा लगा था क्या, वो तो ामी और इनायत की वजह से मेने वैसा किआ था. (उसने उदास चेहरे से कहा)

नाज़िआ : ठीक है, में देखती हु. (कह के वो ऊपर चली गयी, शिव बहार खड़ा tha)Yaha क्यों खड़े हो?

शिव : वो लोग अंदर कपडे चेंज कर रहे है.

नाज़िआ : ओह ! (फिर मुस्कुराते हुए शिव को देखा, एक नजर आस पास डाली, और सरक के शिव के नजदीक आ गयी और उसके होठो पर हलके से किश कर लिया)

शिव : (में हड़बड़ा gaya)Kya कर रही हो आप, कोई देख लेगा.

नाज़िआ : पागल थोड़ी न हु में, मेने देख लिया था सब.

शिव : है फिर भी, आप की ससुराल है, में नहीं चाहता की मेरी वजह से आप किसी मुसीबत में फासो.

नाज़िआ : तुम्हारी वजह से तो इतनी खुशिया आयी है, और वैसे भी आज बहोत ज्यादा हैंडसम लग रहे थे, मान तो कर रहा था की मंडप में पकड़ लू. (उसने मुस्कुराते हुए kaha)Me देख रही थी की साडी लड़कीअ कैसे लट्टू हो रही थी. इनायत का क्या चक्कर है?

शिव : (हल्का सा हड़बड़ाते hue)Kaisa चक्कर?

नाज़िआ : में देख रही थी सब, वो तो जैसे पूरी लट्टू हो गयी है तुम पर, कुछ किआ था क्या तुमने?

शिव : मेने कुछ नहीं किआ, और मुझे क्या मतलब है उनसे.

नाज़िआ : में जानती हु की तुमने कुछ नहीं किआ, इनायत क्या कई लड़कीओ का ये हल था. (तभी दरवाजा खुला तो उनकी बात बिच में रुक गयी, ज़ोया बहार निकल रही थी, उसकी नज़र इन दोनों पर पड़ी, उसे थोड़ी टेंशन हुई की ये दोनों ऐसे अकेले में क्या कर रहे है, पर नाज़िआ उसकी और चली आयी)

नाज़िआ : हो गया चेंज? (ज़ोया बस मुस्कुरायी) वो अम्मी के बात केहनी thi(Thoda हिचकिचाते हुए)

ज़ोया : क्या हुआ? (थोड़ी चिंता में)

नाज़िआ : अरे वैसा कुछ नहीं है, वो में कह रही थी ki...(Kuchh पल रुक kar)Aap लोग शिव के साथ सो जाओगे?

ज़ोया : (ज़ोया ने शिव की और देखा, वो बस खड़ा था, नाज़िआ ने इतना धीरे से कहा था की उसे कुछ सुनाई नहीं दे रहा tha)Ye क्या कह रही है तू?

नाज़िआ : वो क्या है न ामी, वो मुझे उनके sath...mene कहा भी किआप और शिव साथ में सो जाओ पर वो मान नहीं रहे है. अब इनायत के कमरे में दुबले बीएड है, उसके साथ कोई एक सो सकता है, या फिर उसे hi आपके साथ सोने को बोल सकती हु, पर...

ज़ोया : (वो समाज रही थी की उसकी बेटी किसी और को परेशान नहीं करना चाहती थी, और उसका सौहार उसके साथ रहना छह रहा है तो ये तो अच्छी बात है, वैसे भी उसकी बेटी के जीवन में आयी मुसीबते ताल गयी थी. उसने सोच कर kaha)Koi बात नहीं. (हलाकि शिव के साथ एक कमरे में सोने के ख्याल से hi उसकी धड़कने बढ़ गयी थी)

नाज़िआ : (अपनी ामी का नाथ पकड़ kar)Thank यू अम्मी. में बिस्तर लगवाती हु. (जाते hue)Chalo शिव, मेरे साथ चलो, गद्दे लेन है. (शिव निचे चला गया, नाज़िआ गद्दे निकलने लगी, शिव वही खड़ा था, तभी इनायत बाल बांधते हुए कमरे से बहार निकली तो शिव को खड़ा पाया तो वो झिझक गयी, शिव की भी नजर उस पर पड़ी तो वो शर्मा गयी, भी अभी वो बाथरूम से hi आ रही थी, अपनी पंतय की हालत देख कर वो अभी शिव को hi याद कर रही थी, पर उसके सामने आने से उसे शर्म आ रही थी, वो नज़ारे झुकाये मुस्कुराने लगी, उसकी भाभी गद्दे निकल रही थी तो वो उस और गयी)

इनायत : क्या हुआ भाभी? क्या कर रही हो?

नाज़िआ : दो गद्दे निकल रही हु, ऊपर इनलोगो के लिए.

इनायत : लाओ में निकल देती हु (नाज़िआ को भी इसके व्यव्हार से आश्चर्य था पर बोली कुछ नहीं)

नाज़िआ : नहीं, हो गया बस, शिव इससे ऊपर ले जाओ.

इनायत : इनसे क्यों कह रही है, में ले जाती हु.

शिव : में उठलुँगा. (इनायत संकुचाते हुए साइड हो गयी, शिव ने दोनों गद्दे और ओढ़ने के लिए कम्बल और तकिया सब एक साथ उठा लिया, इनायत हैरत से देख रही थी, जहा उसे एक गद्दा उठाने में हालत ख़राब हो जाती थी इसने सब एक साथ उठालिया था, करीम भी आवाज सुन कर बहार आ गया था)

करीम : अरे सब क्यों उठालिया, लाओ मुझे दो, में भी उठता हु.

शिव : नहीं आप रहने दीजिये, सब ठीक है, (कहते हुए वो बहार जाने लगा)

करीम : (नाज़िआ ko)Are ये आदमी है की क्या है? एक साथ सब उठालिया. (नाज़िआ बस मुस्कुरा दी, और शिव के पीछे पीछे चल दी, संयम भी कपडे बदल चुकी थी, शिव को गद्दे लेट हुए देख रही थी, शिव ने गद्दे निचे रक्खे hi थे की पीछे पीछे नाज़िआ आ गयी, वो गद्दे बिछने लगी)

ज़ोया : तू रहने दे में कर लुंगी, जा तू थक गयी होगी.

नाज़िआ : शिव तू बीएड पर सो जनम चलेगा न.

शिव : (बीएड की और देखा, जिसकी दोनों और का भाग उठा हुआ था, बीएड तक़रीबन 6 फिट का था जो की नॉर्मली होता है, पर शिव कहा उसमे फिट aata)Wo छोटा है दीदी.

नाज़िआ : तू लेट के तो देख पहले. (शिव बिस्तर पर लेता पर वो कहा फिट होता, उसने ड़ेढे हो कर लेटने का भी प्रयास किआ पर वो फिर भी फिट नहीं आया) एक काम कर बाद से गद्दा ले ले और बीएड साइड में खड़ा कर दे, एक तू है इतना लम्बा की में भी क्या करू. तीनो गद्दे निचे hi बिछा दो, या फिर संयम तू बीएड में सो जा.

संयम : है में सो जाउंगी, में आ जाउंगी उसमे. (ज़ोया चुप चाप सुन रही थी, वो कर भी क्या सकती थी)

संयम बीएड में लेट गयी, नाज़िआ चली गयी, ज़ोया बिस्तर लगाने लगी, उसने दो बिस्तर के बिच थोड़ी दुरी भी रक्खी. वो नज़ारे झुकाये बस काम कर रही थी, सुका दिल पहले से hi जोरो से धड़क रहा था, एक और तो शिव के साथ सोने से वो खुस भी थी पर उसे पता था की ऐसा वैसे कुछ होना नहीं है, संयम थी वह. संयम बैठे बैठे शिव को देख रही थी और मुस्कुरा रही थी, वो आज शिव के साथ एक hi कमरे में सोनेवाली थी तो बहोत खुस लग रही थी. शिव भी कभी संयम को तो कभी ज़ोया को देख रहा था, जब वो बिस्तर बिछा रही थी तो उनके कूल्हों पर भी उसकी नजर चली गयी थी, पर संयम के होते हुए वो संभल कर था. ज़ोया ने देखा की शिव अभी भी शाम वाले कपड़ो में hi है तो उसने आहिस्ता से कहा.

ज़ोया : इन्ही कपड़ो में सोनेवाले हो?

शिव : नहीं, चेंज करता हु. (शिव ने बैग से कपडे निकले, वो शार्ट लाया था, वो बहार गया और बाथरूम में जा कर शार्ट पहना, ऊपर सिर्फ बनयान थी. वो उतरे हुए कपडे ले कर रूम में चला गया. रूम में मैं लाइट बंद हो चुकी थी एक छोटा सा जीरो का बल्ब जल रहा था, लाल बल्ब की रौशनी में हल्का हल्का दिख रहा था, उसने देखा की बीएड पर संयम लेती है और उसके साथ में लगे गद्दे पर आंटी लेती है. वो एक कोने में गया और अपने बैग के ऊपर अपने कपडे रक्खे.

संयम और ज़ोया की नजर उस पर hi थी, रौशनी काम थी तो शिव को पता नहीं चला. संयम बहोत एक्सीटेंड थी, वो पहली बार शिव को ऐसे देख रही थी, उसके कुंवारे शरीर में कुछ कुछ हो रहा था, वो बस शरमाते हुए शिव को देख रही थी. शिव जा कर अपने बिस्तर पर लेट गया. वो बस करवट लिए उसको देख रही थी. नज़दीक hi उसकी ामी थी पर वो बीएड की वजह से उसे नहीं देख प् रही थी.

शिव की नज़ारे अब अँधेरे से अभ्यस्त हो गयी थी, उसने संयम की चमकती हुई आंखे देखि जो उस पर hi लगी हुई थी, उसने थोड़ी देर उसको देखा तो वो मुस्कुराते हुए उसे देख रही थी, उसने अपने साइड में लेती आंटी को देखा जो उसकी और पीठ किये हुए सो रही थी, सो रही थी की जग रही थी ये उसे नहीं पता था. उसने संयम से नज़ारे हटाई और सीधा लेट कर आंखे बंद कर दी. करीब आधा घंटा गुजरा होगा, शिव को नींद नहीं आ रही थी. उसने देखा की संयम की आंखे बंद हो गयी है, उसने आंटी को देखा पर वो दुअरी और मुँह किये हुए थी तो पता नहीं चला. उसका बहोत मान कर रहा था, इनायत के साथ भी अधूरा रहा था और बस में भी आंटी के साथ कुछ नहीं हुआ था. वो दुविधामें था की क्या करे. उसने संयम को फिर देखा, वो उसकी दोस्त थी, अगर उसको पता चल गया तो क्या होगा, यही उसके दिमाग में चल रहा था. वो करवाते बदल रहा था.

दूसरी और ज़ोया भी आंख बंद किये हुए सोने का प्रयत्न कर रही थी पर उसको भी नींद नहीं आ रही थी. शिव उसके साथ एक hi कमरे में था तो बार बार उसको शिव के साथ हुआ वो संसर्ग याद आ रहा था, वो जानती थी की अभी तो ये संभव नहीं है पर फिर भी उसकी आँखों में नींद नहीं थी.

वह इनायत की भी हालत ख़राब थी. उसका पानी तो निकला था पर जबसे उसने शिव का वो बड़ा लुंड देखा था उसके सामने बार बार वो hi तस्वीर आ रही थी. वो बिस्तर में लेती हुई थी. उसको भी नींद नहीं आ रही थी, वो कमरे से बहार आयी, उसको प्यास लगी थी, वो जैसे hi अपने भाई के कमरे के पास से गजरी तो उसको अंदर से आती आवाजे सुनाई दी, उसे समाज आ गया की अंदर क्या चल रहा है, इन आवाजों ने उसके अंदर जल रही आग में घी का काम किआ. वो जल्दी से किचन में गयी और एक hi साँस में पूरा गिलास पानी पि गयी पर उसकी प्यास नहीं बुजी. उसने छत की और देखा जहा शिव सोया हुआ था. ऐसा कुछ उसने पहले कभी नहीं किआ था, वो थोड़ी देर कड़ी रही पर उसका दिल नहीं माना तो वो दबे पाव दरवाजे के पास गयी, आवाज न हो ऐसे उसने दरवाजा खोला, कही कही बल्ब जल रहे थे तो बहार थोड़ा उजाला था, तो कही अँधेरा था, वो दबे पाव सीडीओ के पास आयी, और ऊपर जाने लगी, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, पर आज जैसे उसका दिल अपने काबू में नहीं था, वो ऊपर आयी, तो पूरा सन्नाटा था, वो दरवाजे के पास गयी जहा शिव सोया हुआ था, उसे खुद पता नहीं था की वो यहाँ क्यों आयी है, क्यों की शिव अंदर अकेला तो था नहीं. वो थोड़ी देर वह कड़ी रही, हर तरफ शांति थी, कही कही कुत्तो के भोकने की आवाजे आ रही थी. उसने ध्यानसे अंदर का हाल सुना तो अंदर शांति थी. वो मायूसी से वापस जाने लगी.

अंदर शिव और ज़ोया दोनों जाग रहे थे, जैसे hi दरवाजे के बहार आहात हुई तो ज़ोया और शिव दोनों ने अपना शिर ऊपर कर के दरवाजे की और देखा, बहार की रौशनी में उन्हें कोई साया दिखा, फिर वो साया गायब भी हो गया, अभी दोनों सोच hi रहे थे की दोनों की नजर आपस में टकराई, एक दो पल वो दोनों एक दूसरे को देखते रहे, फिर ज़ोया वापस लेट गयी, वो शिव की और पीठ किये हुए hi थी. उसे पता था की शिव जग रहा है. उसकी धड़कने फिर से तेज होने लगी.

मेने देखा की आंटी अभी भी जाग रही है, मेने शिर ऊपर कर के संयम को देखा तो वो भी मेरी और पीठ किये हुए सो रही थी. मेरी नजर फिर आंटी पर गयी, में उनके उतर चढाव देखने लगा. मेरा मान कर रहा था की में उनके पास चला जाऊ, पर गब्रहत भी थी. में भी उनकी और करवट ले कर थोड़ी देर लेता रहा. मुझसे सबर नहीं हो रहा था, में थोड़ा आंटी की और खिसका. (ज़ोया ने आवाज सुनी, उसको समाज नहीं आया, पर फिर आवाज हुई, उसको समाज आ गया की शिव के खिसक ने की आवाज है, और वो ये भी जानती थी की वो किस और खिसक रहा होगा, उसकी धड़कने तेज तेज चलने लगी, उसको दर भी लग रहा था, उसे महसूस हुआ की शिव खिसक कर उसके पीछे आ चूका है, वो उसकी सांसो को भी सुन प् रही थी. उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी की वो पीछे मुद कर देखे, वो अपने आपको संभाले लेते rahi)(Me उनके इतने करीब आ गया था, मेने फिर संयम को देखा, वो दूसरी और मुँह किये सो रही थी. मुझसे रहा नहीं गया तो मेने आंटी के कंधे पर हाथ रक्खा, मेने महसूस किआ की उनका शरीर कैंप गया, में जनता था की वो जग रही है, पर उन्होंने कोई भी रिएक्शन नहीं दिया, मेने उनके कंधे से हाथ सरकते हुए उनकी कोहनी तक ले गया, वो कैंप रही थी, में हाथ को कोहनी से ले कर उनके हाथ तक ले गया जो आगे की और पेट के पास था और उनके हाथ को दबा दिया, और साथ में पीछे से उनके शरीर से चिपक गया)

ज़ोया का शरीर कैंप रहा था, दर भी लग रहा था क्यों की बेटी वही पर थी, उसकी हिम्मत भी नहीं हो रही थी की वो शिव से कुछ कहे, वो बस लेती रही. शिव ने भी कुछ नहीं किआ, वो भी बस वैसे hi उसपे हाथ डेल लेता हुआ था. करीब पांच मिनट तक शिव ने कोई हरकत नहीं की तो उसकी साँस नार्मल होने लगी, अब दर भी काम हो रहा था. अब दर के साथ साथ उसके सरीर में गर्माहट भी बढ़ने लगी थी, शिव पीछे से पूरा चिपक गया था, वो हलके हलके उसके हाथ को मसल रहा था, उसकी सांसे तेज चल रही थी, वो क्या करे क्या न करे कुछ समाज में नहीं आरहा था.

शिव : (कान के pass)So गयी क्या? (वैसे तो में जनता ता की नहीं सोई है, बस बात करने के इरादे से बोलै था, पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, उनके शरीर की गर्माहट मुझे महसूस हो रही थी. में बस हाथ सेहला रहा था पर मेरा लुंड अकड़ना सुरु हो गया था, में उनके भरी कूल्हे से सत्ता हुआ था तो लुंड को जगह नहीं मिल रही थी तो मुझे दर्द होने लगा, मेने कमर थोड़ी पीछे की, लुंड को जगह मिली तो सो सीधा हो गया, मेने फिर कमर आगे कर दी और उनके कूल्हों की दरार में लगा दिया)

लुंड को महसूस कर के ज़ोया का बदन कैंप गया, ये कम्पन दर का नहीं था पर उत्तेजना का था, उसकी सांसे तेज चल रही थी, अभी भी वो आंखे बंद किये हुए hi थी. शिव उसके हाथ को सेहला रहा था और निचे कमर को दबा रहा था जिस से उसको वो कड़क लुंड महसूस हो रहा था, वैसे भी वो लुंड के कड़क पैन के लिए तो तरस रही थी, जब भी वो अपने पति के साथ होती, या उसने अपना सरीर रगड़ती तो वो अंग कड़क हो hi नहीं रहा था. उसकी सांसे अटक रही थी, वो उस अंग की चुभन को महसूस कर रही थी, साथ में उसकी छूट में गिला पैन आने लगा था. पर अभी वो कुछ नहीं कर शक्ति थी, कैसे करती, अगर संयम को पता चल गया तो उसका क्या हल होगा. वो कोई विरोध भी नहीं कर रही थी पर अपनी सहमति भी नहीं जाता रही थी, वो बस ऐसे hi लेती रही.

में काफी गरम हो रहा था, मेने एक बार फिर संयम को देखा जो खरते ले रही थी, जोर से तो नहीं पर वो गहरी नींद में थी ये पता चल रहा था. मेने आगे बढ़ने का सोचा और, उनके हाथ से हाथ को ऊपर की और ले गया जहा उनके उन्नत उरोज थे, उन गोलाई को महसूस करते हुए मेने उन पर हाथ रख दिया. (ज़ोया ने फ़ौरन शिव के हाथ को पकड़ लिया)

शिव : (आंटी ने मुझे रोकने के लिए मेरा हाथ पकड़ा था, पर में बहोत गरम हो गया था, मेने धीरे से उनके गले में अपने होठ चलते हुए लम्बी लम्बी सांसे लेते हुए kaha)Please आंटी, मात रोकिये. (मेरा हाथ उनके स्तन को सेहला रहा था और वो मेरे हाथ के ऊपर हाथ रख कर उसे रोकने का प्रयास कर रही थी, उनके गले को चूमते हुए मेने लम्बी साँस छोड़ते हुए kaha)Please आंटी. (वो मेरा हाथ रोकने का प्रयास कर रही थी, और ना में गर्दन हिला रही थी) (ज़ोया भी गरम थी पर उसको संयम का दर tha)(Me थोड़ा पीछे खिसका और आंटी को कंधे से पकड़ कर सीधा लेता दिया, उन्होंने आंखे बंद कर रक्खी थी, में उनके चेहरे को देख रहा था, वो जोरो से सांसे ले रही थी तो उनका सीना ऊपर नीचे हो रहा था, उन्होंने सलवार, कमीज़ पहना हुआ था, उनके चेरे पर पसीना छलक रहा था. मेने धीरे से kaha)Ankhe खोलिये न. (उन्होंने कोई रिएक्शन नहीं diya)Auntiii, आंखे खोलिये न..

(वो फिर भी वैसे hi लेती रही, में सिर्फ फुसफुसाते हुए बोल रहा tha)Please, एक बार. (मेने बहोत मिन्नत से कहा, तो उन्होंने आंख खोली, हलकी सी रौशनी में हम दोनों डेक दूसरे को देख रहे थे, उनकी भी सांसे तेज चल रही थी, मेने उनके होठो को देखा तो वो मेरे इरादे जान गयी, वो मेरी छाती पर हाथ रख कर न में गर्दन हिलने lagi)Please आंटी, एक किश... (वो शांत हो गयी और मुझे देखने lagi)(Zoya बस अपनी बेटी की वजह से दर रही थी वर्ण उसका पूरा मान था, शिव ने सिर्फ किश के लिए बोलै तो वो मान गयी, वैसे भी संयम सोई हुई थी, इतना तो वो कर hi सकती थी, शिव उसके चेहरे को देख रहा था, उसके चेहरे के भाव देख कर वो शर्माने लगी, वो उसकी और झुका तो उसने आंखे बंद कर ली, शिव उसके होठो को चूमने लगा फिर चूसने लगा, हलके हलके चुम्बनों से वो बहकने लगी, शिव आधा उसके ऊपर आगया था, उसके दोनों हाथो को ऊपर पकड़ कर वो उसके होठो को चूस रहा था, चाट रहा था, साथ साथ में आस पास भी चाट रहा था, उसकी हालत ख़राब होती जा रही थी, कामाग्नि की चिंगारी उसके अंदर सोला बन ने लगी थी, वो हांफ रही थी, शिव ने उसके हाथ छोड़े और अपने एक हाथ पर कोहनी के बल लेते हुए उसको चूस रहा था और साथ में उसके भरे हुए स्तन को सहलाने लगा, ज़ोया की सांसे उखड रही थी, उसके हाथ शिव की बाह पर चलने लगे थे, थोड़ी देर ऐसा चलता raha.)(Shiv ने किश तोड़ी और ज़ोया की आँखों में देखा, उसकी आँखों में कामना साफ़ झलक रही थी, वो उसके स्तन को सहलाने लगा तो ज़ोया न में गर्दन हिलने लगी, पर उसकी न में भी हां लग रही थी, शिव जैसे जैसे उसके स्तन को सेहला रहा था वो मचल रही थी, थोड़ी देर बाद शिव ने उसके कमीज़ को निचे से पदक और ऊपर उठाने लगा तो ज़ोया ने फिर ना में शिर हिलाया और उसका हाथ पकड़ लिया)

शिव : (फुसफुसाते hue)Please आंटी, थोड़ा सा. (ज़ोया ने संयम की और देखा, वो उसे दिख नहीं रही thi)Wo सो रही है.

ज़ोया : (धीमे se)Wo जग जाएगी. (उसने बेबसी से कहा)

शिव : (उनके ऊपर झुक कर गर्दन को चूमते hue)Nahi जागेगी, आप आवाज मात करना.

ज़ोया भी क्या कहती, वो लेती रही, शिव ने उसके कमीज को ऊपर उठाया और उसके पेट को सहलाने लगा, वो आंखे बंद किये लेट गयी, शिव का हाथ थोड़ी देर बाद आगे बढ़ा और उसके कमीज़ के अंदर से hi उसके स्तन की और बढ़ता गया, वो उत्तेजित तो थी hi, उसने रोका नाही, शिव के हाथ उसके ब्रा के ऊपर से उसके उरोजों को सेहला रहे थे, थोड़ी देर बाद शिव ने हाथ बहार निकला और कुर्ते को ऊपर करने लगा, ज़ोया ने फिर उसका हाथ पकड़ लिया.

शिव : ऊपर कर रहा हु, निकल नहीं रहा. (उसने शिव को देखा फिर वापस लेट गयी, शिव ने उसके ूरोज़ो के ऊपर तक कुर्ते को चढ़ा दिया, उसे शर्म आ रही थी तो उसने अपना चेरा दूसरी और कर liya.)(Me काफी गरम हो चूका था, में उनके ऊपर आने लगा तो वो मुझे देखने लगी, कपडे तो पहने हुए थे तो उन्होंने कोई विरोध नहीं किआ, में ऊपर आ गया और अपनी कोहनी को आस पास टिकते हुए उनके ऊपर हो गया, वो दूसरी और देख रही थी तो में उनके गले को चाटने लगा और साथ में ब्रा के ऊपर से hi स्तन दबाने लगा, मेरा लुंड तो पहले से hi कड़क हो चूका था तो मेने छूट पर धक्के लगाने लगा, अपनी छूट पर पड़ते धक्को से ज़ोया के चेहरे पर अजीब सा भाव आने लगा, चेहरा रोने जैसा लग रहा था पर उत्तेजना में लाल हो रहा था, में उरोजों की घाटी को चूमते हुए चाट ते हुए हलके हलके धक्के लगा रहा था, वैसे भी मेरा शार्ट ढीला था तो लुंड अच्छे से आगे हो रहा था, मेने एक हाथ से एक ब्रा की साइड को निचे किया और उनके मोठे निप्पल को बहार निकला, वो कुछ करती उस से पहले hi मेने उसे मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगा, मेने नज़र उठा के देखा तो वो अपना हाथ दन्त से दबा कर सिसकी रोकने का प्रयास कर रही थी. शिव ने दूसरे को भी बहार किआ और उसे चूसने लगा, ज़ोया पूरी तहा से काम की अग्नि में तप रही थी, पर क्या करती बेचारी, वो बस तड़प रही थी, वो सहयोग दे की विरोध करे ये hi समाज में नहीं आ रहा था. एक और बेटी के होने से दर था तो दूसरी और अपनी छूट पर पद रहे धक्को से उसकी छूट से चिप छिपा रास बह रहा था, उसकी छूट पूरी तयारी कर रही थी की कोई मेहमान आनेवाला है.

वह संयम गहरी नींद में सोई हुई थी पर कमरे में हो रही आवाजों के कारन ऊके दिमाग में उथलपुथल मची हुई थी, एक तरफ नींद थी तो दूसरी और वो घुटी हुई आवाजे उसको डिस्टर्ब कर रही थी.

शिव से अब बर्दास्त नहीं हो रहा था, उसने ऊपर लेते हुए hi अपने शार्ट को अंडरवियर समेत उतर दिया, और अपनी बनियान भी उतर दी, वो पूरा नंगा हो गया था, ज़ोया ने भी ये देखा, उसके चेहरे पर बेबसी साफ़ दिख रही थी, वो अपने आपसे लड़ रही थी. एक तरफ दार और दूसरी और परम आनंद. वो शिव की और देख कर ना में इस्सर करने लगी, पर वो उसकी कहा सुन रहा था, वो उसके ऊपर से साइड में हो गया, वो पलटने लगी तो उसने मजबूती से उसका कन्धा पकड़ लिया और उसे पलटने नहीं दिया. अब वो एक हाथ निचे ले गया और सलवार के ऊपर से hi उसकी योनि को दबोचने लगा, उसने उसका हाथ पकड़ लिया और छटपटाने लगी, वो उसे मन कर रही थी, पर उसके योनि को मसलने से उसकी हालत ख़राब हो रही थी, उसका चेहरा लाल हो चूका था, वो लड़ रही थी अपने आप से.

इस छिना जप्ती में संयम की आंख खुल गयी, पहले तो उसे कुछ समाज नहीं आया की क्या हो रहा है, तभी उसकी नजर शिव पर पड़ी जिसका ऊपर का भाग दिख रहा था जो नंगा था, वो आंखे खोले देख रही थी, शिव निचे कुछ कर रहा था, उसकी आंखे उसकी और नहीं थी, उसने थोड़ा ऊपर हो कर देखा तो उसकी आजमी ना में शिर हिला रही थी, और शिव उनकी झंघ के बिच में हाथ डेल हुआ था, संयम के तो होश उड़ गए, ये क्या हो रहा है ये देख कर hi वो गभरने लगी, उसके चेहरे पर पसीना छलक आया, उसे समाज नहीं आया की वो क्या करे, उसे लग रहा था की शिव उसकी अम्मी के साथ जबरदस्ती कर रहा है, वो लेते लेते शिव को देख रही थी, हलके अँधेरे में उसे शिव का चेहरा दिख रहा था.

शिव के छूट मसलने से ज़ोया गरम हो गयी थी, उसने हथियार दाल दिए और वो शांत हो गयी. जब शिव ने ये देखा तो उसने सलवार के नदी पर हाथ ले गया, और ज़ोया को देखने लगा, ज़ोया दूसरी और देख रही थी, वो कोई विरोध नहीं कर रही थी, तो शिव ने नाडा खोल दिया, और अपना हाथ सरका के सलवार में दाल दिया, वह चड्डी पूरी भीगी हुई थी, वो समाज गया की वो पूरी तरह से गरम है. तो उठा और उसके पैरो की और चला गया और सलवार को निकलने लगा, ज़ोया ने कोई विरोध नहीं किआ और अपने कूल्हे उठा कर उसकी मदद की. शिव ने पूरी सलवार निकल दी, उसने ज़ोया को देखा तो वो दूसरी और देख रही थी, शिव ने उनकी भरी हुई झंघे सेहलायी, वो गोरी झंघे हलकी रौशनी में भी चमक रही थी, उनको सहलाने से शिव में रक्त संचार बढ़ने लगा, वो अच्छे से बैठा और निचे झुका, पैरो को फैलते हुए ऊपर उठा दिए, ज़ोया आंखे बंद किये हुए बस शिव के आगे बढ़ने का इंतजार कर रही थी. शिव निचे झुका और गीली पंतय को चाटने लगा, ज़ोया ने सिसकी को रोकने का प्रयास किआ पर फिर भी हलकी हलकी आवाजे आ रही थी.

संयम, पसीना पसीना हो गयी थी, अब उसे अपनी अम्मी और शिव दिखाई नहीं दे रहे थे, बस अम्मी के ऊपर को उठे पेअर और शिव के ऊपर का हिस्सा दिख रहा था, उसने आहिस्ता से गर्दन उठायी तो उसे नजर आया की उसकी आजमी पेअर फैलाये हुए है, और शिव उनकी योनि वाले भाग को चड्डी के ऊपर से चाट रहा है, ये देख कर उसके शरीर में एक अजीब सी हलचल हुई. उसकी अम्मी शांति से लेती हुई थी, उसे नहीं लग रहा था की शिव कोई जबरदस्ती कर रहा है. उसे अपनी ामी की हलकी हलकी सिस्किअ भी सुनाई दे रही थी.

ज़ोया : उम्म्म्म, शहहह शह्ह्हह्ह्ह्ह.

उसका बदन कंपनी लगा था, उसने शिव के ऐसे रूप की कल्पना भी नहीं की थी, उसने देखा की शिव पूरा नंगा है, उसके कूल्हे भी दिख रहे थे, संयम के शरीर में खून तेजी से दौड़ने लगा था, पंखा चालू था फिर भी उसको पसीना आ रहा था. थोड़ी देर बाद शिव उठने लगा तो वो वापस लेट गयी और आंखे बंद कर दी. थोड़ी सी आवाज हुई फिर ामी की सिस्किअ सुनाई दी, उसने धीरे से आंख खोली तो फिर वही दृश्य था, शिव की पीठ और अम्मी के पेअर दिख रहे थे, उसने फिर गर्दन उठायी तो देखा की अब अम्मी की चड्डी नहीं है, और शिव उनकी योनि को चाट रहा है, ये उसके लिए बहोत बड़ा झटका था, वो देख रही थी की शिव कितनी आसानी से उसकी ामी की बुर को चाट रहा था, ये दृस्य देख कर hi उसकी कुवारी योनि में पानी आने लगा, उसका हाथ जो निचे hi था वो अपनी योनि पर चला गया. अभी थोड़ी देर पहले वो गभरायी हुई थी पर अब गभरहट नहीं थी, वो गुस्से में शिव को देखने लगी, गुस्सा किस बात का था वो भी उसे पता नहीं था. उसने देखा की शिव ने ामी के पेअर छोड़ दिए और अम्मी की छूट के बालो को हटते हुए उनकी योनि को फैला कर अपनी जीभ से चाट रहा है, उसकी ऊँगली अपनी छूट पर दबाव बनाने लगी, उसे लग रहा था की वो भी सिसक न उठे तो उसने अपने होठो को दन्त से दबा दिया. उसको आश्चर्य तब हुआ जब उआकी आजमी ने खुद अपने पेअर पकड़ लिए, उसने ामी का चेहरा देखा तो वो दूसरी और था, थोड़ा सा साइड फेस दिख रहा था, वो आंखे बंद किये हुए थी पर चेहरे से लग रहा था की उन्हें बहोत मज़ा आ रहा था.

ज़ोया : शहहह आईई शह्ह्ह्ह शिईयिव शह्ह्ह्ह (शिव की जीभ अंदर तक जा रही थी, उसकी योनि में सरसराहट हो रही थी, वो इस सुख से काफी टाइम वंचित थी, ऐसे उसे शर्म भी आ रही थी पर वो इस आनंद को खोना नहीं चाहती thi)Thodi देर बाद फिर शिव उठा तो फिर वो लेट गयी और आंखे बंद कर दी.

शिव उठा और ज़ोया की और हाथ बाध्य तो उसने भी शर्मा के अपना हाथ दिया, शिव ने उसे बैठा दिया, तुरंत उसने संयम की और देखा तो वो आंखे बंद किये हुए सो रही थी. उसने बेबसी से शिव की और देखा, शिव उनकी बेबसी समाज रहा था.

शिव : (में घुटनो के बल था, मेने देखा की आंटी अभी भी घरबा रही है, तो मेने उनका चेहरा थमा और आहिस्ता से bola)Aap को नहीं करना है.

ज़ोया : (उसने संयम की और देखा, और बेबसी से kaha)Ye उठजाएगी.

शिव : वो सो रही है, मेरे बिस्तर में चलते है, दूर होंगे तो आवाज काम जाएगी. (ज़ोया ने फिर एक बार अपनी बेटी को देखा, इतना सब होने के बाद अब वो भी नहीं रुक सकती थी, उसने शिव को देखा और है में इस्सर किआ) (में उठा और उनको हाथ दिया, अब वो शर्मा रही थी, मेने उन्हें खड़ा किआ और मेरे बिस्तर की और ले गया, मेने उनके कूल्हे को दबाया तो उन्होंने मेरी और देखा और शर्मा के मुस्कुराने लगी, अपने बिस्तर पर पहुंच कर में उनके कमीज़ को उतरने लगा तो उन्होंने भी हाथ उठा कर कमीज़ उतरने में मदद की, मेने ब्रा भी निकल दी, अब वो भी पूरी नंगी थी, हम दोनों खड़े थे, मेने उन्हें बहो में भरा और उनके होठो को किश करने लगा और साथ में उनके कूल्हों को मसलने लगा) (ज़ोया भी अब पुरे मूड में आ चुकी थी, उसकी योनि पर शिव का लुंड दस्तक दे रहा था, उसने भी शिव के गले में हाथ डाला और उसको किश में साथ देने लगी, कमरे में उम्म्म उम्म्म की आवाजे आ रही थी)

संयम ने आहिस्ता से आंख खोली तो देखा की दोनों थोड़ी दूर चले गए है और पुरे नंगे है और एक दूसरे को किश कर रहे है, अब उसे अपनी अम्मी पर भी गुस्सा आ रहा था, उसे लग रहा था जैसे वो उसके माल पर हाथ दाल रही है. उसे यकीं hi नहीं हो रहा था की उसकी अम्मी का भी ये रूप हो सकता है. (हलाकि दुनिया की हर स्त्री का ये रूप होता hi है, पर हम उसे देखते नहीं है, न सोचते है, पर हर स्त्री अपने प्रेमी अपने पति के साथ इसी अवस्था में होती hi है, संयम के लिए ये पहली बार था तो वो हजम नहीं कर प् रही थी) संयम देख रही थी की दोनों नंगे है, पर भी भी उसे शिव का नाग दिखा नहीं था, उसे अपनी ामी के भरे हुए कूल्हे दिख रहे थे जिसे शिव अपने हाथ से मसल रहा था, उसकी अम्मी कोई विरोध नहीं कर रही थी, बल्कि वो उसको किश कर रही थी और उसको बाहोंमे भर रही थी, शिव उनके कूल्हों को दबाता, फैलता क्या कुछ नहीं कर रहा था. संयम की योनि से लगातार पानी बह रहा था. वो खुद नहीं समाज प् रही थी की ऐसा क्यों हो रहा है. उसको अपनी योनि में सरसराहट महसूस हो रही थी, उसकी कमर भी झटके खा रही थी, वो एक तक अपनी अम्मी को देख रही थी. शिव उनसे अलग हुआ और उन्हें घुमा दिया, तभी उसकी नजर उस लम्बे से अंग पर पड़ी जो शिव के पैरो के बिच में था, उसकी सांसे अटकने लगी, वो सीधा खड़ा था, इतनी रौशनी में भी वो उसे स्पस्ट देख प् रही थी, शिव ने ामी को उल्टा कर दिया और अपने उस लम्बे अंग को उनके कूल्हों के बिच लगा कर उनके बड़े बड़े स्तन को मसल रहा था, अम्मी के चेहरे पर दर्द था पर वो उसको रोक नहीं रही थी, (ज़ोया मचल रही थी, कड़क लुंड उसके कूल्हों की दरार में घुसा हुआ था, उसने महसूस किआ की वो उसके गुदा द्वार पर लगा हुआ है, अगर शिव ज्यादा जोर देता तो वो अंदर चला जाता, वो मदहोश हो रही थी, शिव उसके मोठे मोठे स्तन को निचोड़ रहा था, उसके निप्पल को मरोड़ रहा था, वो अपनी गांड हिला कर लुंड को सेहला रही थी) संयम देख रही थी की शिव ने उन्हें दीवाल के पास ले गया और उसके सहारे खड़ा कर दिया, और बेथ के उनके कूल्हों के बिच अपना मुँह डालने लगा,





ामी भी बेशर्मी करते हुए और झुक गयी, शिव उनके कूल्हे फैलते हुए अंदर मुँह डेल पता नहीं क्या कर रहा था, उसे गन्दा नहीं लग रहा होगा, ये सोच रही थी वो, पर शिव तो मज़े से उसे चाट रहा था, और अम्मी दीवाल के सहारे खड़े खड़े हलकी हलकी सिस्किअ ले रही थी,





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(ज़ोया पागल हुए जा रही थी, शिव उसकी योनि और उसके गांड के छेड़ को चाट रहा था, सो अपना मुँह दबाये सिसक रही थी )(संयम देख रही थी की शिव उनके बड़े बड़े कूल्हों में मुँह अंदर तक ले जा रहा था, अम्मी मुँह दबा कर अपनी आवाज रोक रही थी.





थोड़ी देर तक वो उनके कूल्हों को चाट ता और चूमता रहा, फिर शिव उठा तो उसका वो लम्बा अंग ऊपर निचे हो रहा था, उसने ामी को अपनी और घुमाया और उनके स्तन को मसलते हुए उनके होठो को चूसने लगा, अम्मी ने उसका वो लम्बा अंग पकड़ लिया और उसे हिलने लगी, ामी को कोई शर्म नहीं थी वो बड़े प्यार से उसके अंग को पकड़े हुए थी . उम्म्म उम्म्म की हलकी हलकी आवाजे आ रही थी, वो लोग अपने में लगे हुए थे, किसी का धुआं उसकी और नहीं था. उसका दिल भी मचल रहा था, आज तक जिसे उसने पंत के अंदर महसूस किआ था वो उसकी आँखों के सामने था, और उसकी अम्मी बिना किसी संकोच के उसको हिला रही थी. थोड़ी देर बाद शिव ने उनसे कुछ कहा पर संयम वो सुन नहीं पायी, उसकी ामी ने शिव की आँखों में देखा और शर्मा गयी, पर फिर वही दीवाल के सहारे hi बेथ गयी, शिव अपना आंग उनके मुँह के पास ले गया और उनके चेरे पर रगड़ने लगा, संयम की हालत ख़राब हो रही, उसे थोड़ा अजीब भी लग रहा था की अम्मी उसे रोक क्यों नहीं रही है, वो अपना मुटनेवाला अंग उनके चेहरे पर रगड़ रहा है उसको रोकने की बजाये उसकी आजमी अपनी जीभ निकल कर उसे चाटने की कोशिस कर रही थी, पर शिव उनके होठो के आस पास अपने उस अंग को गगड़ रहा था, आखिर कर उसने उसे अम्मी के होठो पर लगा दिया तो आजमी ने भी अपना मुँह खोल दिया और वो बड़ा सा अंग अम्मी के मुँह के अंदर जाने लगा, वो जानती थी की लड़को का ये अंग मूतने के काम आता है पर उसकी आजमी उसे चूस रही थी, ये देख कर उसके मुँह में भी कुछ होने लगा, वो अपनी जीभ से अपने होठो को चाटने लगी. अम्मी उस अंग को ऐसे चूस रही थी जैसे वो कोई मज़ेदार चीज़ हो, शिव भी अपनी कमर हिला रहा था. संयम के कोमल मान के लिए ये सरे दृश्य अचंबित करनेवाले थे.

मेरा लुंड आंटी के गरम गरम मुँह में था, वो बड़ी लज़्ज़त से चूस रही थी. मेने अपना लुंड बहार निकला तो उनके मुँह से मेरे लुंड तक थूक की एक तार खिंच गयी. मेने आंटी को खड़ा किआ और फिर से बिस्तर में ले आया, उन्हें वह बिठाया और हल्का सा धक्का दिया, वो समाज गयी की अब क्या होना है, उसने पास में पड़े अपने कुर्ते को उठाया और अपने निचे बिछाते हुए सीधे लेट गयी, उनके पेअर घुटनो से मुड़े हुए थे, में उनके पैरो के बिच में बेथ गया और अपना लुंड पहले से रास टपकती छूट के होठो पर रगड़ने लगा, आंटी मेरी आँखों में देख रही थी.

संयम आंखे फाडे देख रही थी की क्या हो रहा है. वो देख प् रही थी की उसकी अम्मी की छूट पर शिव अपना वो अंग रगड़ रहा है, उसकी योनि में भी सरसराहट होने लगी थी.

ज़ोया बहोत गरम हो चुकी थी, वो शिव को hi देख रही थी, वो इंतजार कर रही थी की कब शिव अपना बड़ा लुंड उसकी छूट में डेल, वो बस रगड़ रहा था, उसको हल्का गुस्सा भी आ रहा था, वो कहना चाहती थी की दाल दो पर शर्म के कारन वो बोल नहीं प् रही थी.

शिव : दाल du....(Mene लुंड रगडते हुए पूछा, में जनता था की वो तैयार है, पर में उनकी सहमति चाहता था, वो बोली नहीं बस मेरी आँखों में देख रही थी, मेने फिर puchha)Dal दू???? (ज़ोया जानती थी की डालेगा hi, पर वो उसकी सहमति मांग रहा था, उसे बहोत शर्म आ रही थी, कैसे केहड़े की है दाल दो, वो उसे देख रही थी, पर वो दाल नहीं रहा था बस छूट पर अपना लुंड रगड़ रहा था, ज़ोया से बर्दास्त नहीं हो रहा था, पर वो बोलने में हिचकिचा रही थी, शिव ने फिर puchha)Bolo न, दाल दू???





(ज़ोया ने हिचकिचाते हुए है में सर हिलाया, और शर्मा के अपनी गर्दन दूसरी और कर ली, शिव अपनी पोजीशन लेने लगा, वो जानती थी की क्या होगा, वो आनेवाले पल के लिए अपने आप को तैयार कर रही थी, शिव ने अपने लुंड को छेड़ पर लगाया और उसके ऊपर झुकने लगा, लुंड उसकी योनि को फैलते हुए उसके अंदर घुसने लगा, उसकी योनि फ़ैल गयी उसे हल्का दर्द भी हुआ)





ज़ोया : शह्ह्ह्ह शीइइइइइव (उसने शिव की बाह पकड़ ली, अगर वो कुवारी होती तो चीख निकल जाती पर वो एक मातुरे औरत थी और दो बच्चो की माँ थी, तो उसकी योनि ने लुंड को रास्ता दे दिया, और लुंड उसकी योनि को फैलते हुए अंदर उतरने लगा, उसने अपना मुँह दबा लिया, शिव का लुंड उसके आखरी छोर तक पहुंच गया, वो अपनी कमर को हिलाते हुए अपनी योनि को उस बड़े से मेहमान के लिए एडजस्ट करती गयी, आखिर कर वो उसके अंदर समां hi गया, अपनी योनि में घुसे इस बड़े मेहसमाँ से वो गैन गण गयी उसने उसको बहो में भर लिया, और एक आनंद की हलकी सी सिसकारी भरी. उसके पेअर हवा में उठे हुए थे जिसको उसने शिव की पीठ पर रख दिया.

उस गरम गरम गुफा में मेरे लिए पर्याप्त जगह थी, वो गुफा मेरे लुंड को चुम रही थी, उसके मसल्स मुझे महसूस हो रहे थे, में कुछ पल रुका और मेने आंटी का चेहरा देखा, वो बदहवास सी दिख रही थी, उनकी आंखे नशे में डूबी हुई थी. में उनके होठो को चूसने लगा तो वो मुझसे लिपट ते हुए मेरे होठो को चूसने लगी. उम्म्म उम्म्म की हलकी हलकी आवाजे आने लगी.

शिव : अच्छा लग रहा है? (उन्होंने रोनी सूरत से हां kaha)Kya हुआ?

ज़ोया : बहोत बड़ा है. (उसने रोनी सूरत से कहा)

संयम के लिए ये किसी अजूबे से काम नहीं था, शिव का अंग उसकी अम्मी के योनि में घुस गया था, अम्मी जैसे इसका इनाम दे रही थी और उसे चुम रही थी और उसकी पीठ सेहला रही थी. संयम अपनी योनि को जानती थी, वह इतनी जगह hi नहीं थी की इतना बड़ा अंग अंदर समां जाये. वो बड़े गौर से देख रही थी. शिव ने अपनी कमर उठायी और वापस निचे की, उसकी अम्मी के चेहरे पर दर्द की लकीरे आ गयी, पर वो अभी भी उसको चुम रही थी, शिव बार बार अपनी कमर ऊपर निचे कर रहा था, और उसकी आयम्मी के मुँह से उम्म्म उम्म्म की आवाजे आ रही थी, संयम ने अपनी पजामी और पंतय के अंदर अपना हाथ दाल दिया, उसके वह भी बहोत चिप छिपा हुआ पड़ा था, उसको अपने नाजुक बल पुरे भीगे हुए लगे, वह शिव अपनी कमर बार बार ऊपर नीचे कर रहा था, उसने ध्यान से देखा तो उसका वो अंग अम्मी की योनि में अंदर बहार हो रहा था.





ज़ोया : (ज़ोया बदहवास होती जा रही थी, कितने दिनों से वो तड़प रही थी, वो हाली हलकी आवाजे निकलने lagi)Shhhhh आईईईई शहहह आईईईई शह्ह्हह्ह्ह्ह (लुंड उसकी योनि में अंदर बहार हो रहा था और उसके घरसँ से उसकी योनि लगातार पानी छोड़ रही thi)Shhhhh शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह (वो बड़े प्यार से शिव को देखने लगी, उसकी आंखे बंद हो जा रही थी, वो सिसक रही thi)Shhhh शह्ह्ह्ह शहहहहह. (थोड़ी देर बाद शिव उसके ऊपर से थोड़ा उठा और दोनों और हाथ टिकते हुए धक्के लगाने लगा, हर धक्के के साथ वो हिल रही थी और उसके बड़े बड़े स्तन ऊपर निचे हो रहे थे)





अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह शह्ह्ह्ह (योनि में सब और घरसँ हो रहा था, लगातार शिव के धक्के चल रहे थे, वो अपना मुँह दबाये सिसकीओ की आवाज को काम कर ररहि थी. शिव ने फिर अपनी पोसिटिव सही की और लम्बे लम्बे धक्के लगाने लगा,





वो लुंड को पूरा बहार कर रहा था और अंदर तक चोट दे रहा tha,)Aiiiii शह्ह्ह्ह सीईव शहहहहह धीरे शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह धीरे सीईव शहहहहह आईईईई शहहहहह (लुंड के धक्के उस से बर्दास्त नहीं हो रहे थे पर ऐसा अनुभव तो वो जीवन में पहली बार hi महसूस कर रही थी, इतनी उम्र बिताने के बाद उसे ऐसा अनुभव मिल रहा था, वो ज्यादा जोर से नहीं कर रहा था फिर भी हलके हलके थप थप की आवाजे कमरे में गूंज रही थी, वो अपनी बेटी को तो भूल hi गयी थी. शिव के असीसे लम्बे धक्को के सामने उसकी छूट पानी की बौछार कर रही थी, वो इतनी गरम हो चुकी थी की ज्यादा देर टिक नहीं पायी और अपनी आवाज दबाते हुए आइइइइइइइ शह्ह्हह्हींईईईई करती हुए अकड़ गयी, शिव ने दो तीन और धक्के मरे तो वो मछली की भांति तड़प गयी. उसने शिव की बाह को जोरो से पकड़ लिया, शिव रुक गया. वो आंख बंद किये हुए अपने स्खलन का मज़ा लेने लगी. वो जोर जोर से सांसे ले रही थी, और अपनी कमर हिला रही थी. थोड़ी देर बाद फिर शिव के धक्के चालू हो गए, वो बस एक हाथ से चद्दर पकड़े थी और दूसरे हाथ से अपने मुँह को दबा रही थी. लगातार शिव के धक्के पद रहे थे, वो रोनी सकल बना कर शिव को भी देख रही थी, तभी शिव ने उसके पैरो को अपने हाथ से पकड़ लिया और आगे की और दबाया तो उसके कूल्हे हवा में ऊपर हो गए, अब शिव के धक्के बहोत गहराई तक लग रहे थे, अंदर जगह तो बची नहीं थी तो उसकी गरब की दीवाल पर दकके लग रहे the)Ahhhh अम्मीी शह्ह्ह्ह आईई शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह धीरे शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह धीरे शह्ह्ह्हह्ह (उसको दर्द महसूस हो रहा था पर मजा और बढ़ रहा था.)





शिव : (दकके लगते hue)Hmm हम्म्म दर्द हो रहा है? हम्म हम्म.

ज़ोया : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह (उसने रोनी सकल से न में इस्सर kia)Aiiiii शहीईई आईईईई.

शिव : (मुस्कुराते hue)Rok दू???? (ज़ोया रोनी सूरत से मुस्कुरायी और ना में इस्सर किआ) और जोर से करू???? (शिव मुस्कुराया, ज़ोया शर्मा gayi)Bolo न, जोर से करू????? (ज़ोया ने शरमाते हुए हां में इस्सर किआ) (में उनकी बड़ी झांघो को पकड़ कर स्पीड से धक्के लगाने लगा, उनकी छूट मेरे सामने थी, लुंड अंदर बहार हो रहा मुझे दिख रहा था, उनके कराहने की आवाज मुझे और भड़का रही थी, मेरी स्पीड थोड़ी बढ़ गयी थी, में जोर जोर से धक्के मर रहा tha.)Aapki बहोत गरम है. हम्म हम्म हम्म.

ज़ोया : शह्ह्ह्ह आईईईई शहहहहह आहिस्ता शहहहहह दर्द हो रहा है शहहहहह ामीईईई शह्ह्ह्हह्ह.

संयम को समाज नहीं आ रहा था की उसकी अम्मी को दर्द हो रहा है की मज़ा आ रहा है, चेहरा तो रोने जैसे हो रहा था, वो हर धक्के के साथ तड़प रही थी, पर शिव को रोक नहीं रही थी, और शिव कैसे अपने उस बड़े अंग को अम्मी की योनि में अंदर तक दाल रहा था, थप थप की आवाज गूंज रही थी, थोड़ी देर फिर ऐसा hi चला और अम्मी फिर अकड़ गयी और ढीली पद गयी. शिव फिर रुक गया. उसने अपना वो अंग बहार निकला तो वो रौशनी में चमक रहा था. (ज़ोया ने थोड़ी रहत की साँस ली वही संयम उस अंग के समोहन में खो गयी थी. शिव उसकी अम्मी को कमर से पकड़ कर पलट रहा था, ुकि अम्मी भी पलट गयी और घुटनो के बल हो गयी, उनकी बड़ी बड़ी गांड शिव की और थी, उसकी आयम्मी इतनी बेशरम होगी वो सोच भी नहीं सकती थी, शिव फिर उनके कूल्हों को चूमने और चाटने लगा और साथ में उन्हें फैला कर अपनी जीभ डेल चाट रहा था,

ज़ोया : (ज़ोया अपनी छूट और गार्डन पर गरम गरम जीभ को केंसूस कर रही थी, वो अपना मुँह दबा ke)Ummmm शह्ह्ह्ह सीईई (संयम को ये सब अजीब लग रहा था, वो समाज नहीं प् रही थी की शिव को आखिर क्या मज़ा आ रहा है. उसकी अम्मी अपनी गांड उठाये ऐसे hi रही, फिर शिव वापस अपने घुटने के बल खड़ा हुआ और अपने अंग को उनके कूल्हों के बिच रखने लगा. उसने एक धक्का दिया तो आजमी कमान की तरह हो गयी,

ज़ोया : आईईईई माआआआ. (उनके मुँह से कराह भी निकल गयी, संयम को शिव पर बहोत गुस्सा आ रहा था की वो उसकी अम्मी को दर्द दे रहा है, वो फिर से अपनी कमर आगे पीछे करते हुए अम्मी के अंदर अपना डंडे जैसा अंग दाल रहा था, ामी तकिये में अपना मुँह दबाये आवाज रोक रही थी. अम्मी भी अजीब थी, उनको दर्द हो रहा था तो फिर क्यों ऐसा करने दे रही थी. शिव उनकी कमर पकड़ कर धक्के मार रहा था. कमरे में थप थप की आवाजे आ रही थी.





शिव : आंटी, मज़ा आ रहा है??? (संयम अपनी अम्मी को देखने लगी, उसकी अम्मी ने तकिये से शिर बहार निकला और शिव की और देखा और है में शिर हिलाया, संयम अचंबित हो कर अपनी अम्मी को देख रही थी, (शिव लगातार उनको पीछे से धक्के मर रहा था, थप थप की आवाज कमरे में गूंज रही थी.)

शिव : आंटी आपकी छूट मस्त है (धक्के इतने तेज हो चले थे की ज़ोया के पेअर कंपनी लगे और वो आगे की और लुढ़क गयी पर शिव नहीं रुका वो वैसे hi उसे छोड़ रहा था) (संयम को झटका लगा जब शिव ने छूट सब्द का प्रयोग किआ)





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ज़ोया की हालत ख़राब हो गयी थी उसके बाल बिखर गए थे और मुँह से लार भी टपक रही थी, वो बदहवास सी अपनी कुटाई करवा रही थी, अपनी योनि के अंदर सर सरता वो लुंड अंदर तक चोट कर रहा था, उसके बड़े कूल्हे भी उसको नहीं बचा रहे थे, मज़े से वो बेहाल हो चुकी थी. बहोत देर तक उनका ये खेल चलता रहा, अब शिव जोर जोर से धक्के मार रहा था और ामी को अपने निचे दबोचे हुए था,





ामी की सकल रोने जैसी थी और एआई एआईई कर रही थी, पर वो शिव को रोक नहीं रही थी, वो फिर अकड़ गयी.

शिव : मेरा होनेवाला है. (ज़ोया ने हां में शिर हिलाया और तभी शिव ने भी जोर जोर से दो तीन दकके मरते हुए रुक गया और हफ्ते हुए उनके ऊपर hi लुढ़क गया, दोनों ऐसे hi लेते थे. थोड़ी देर बाद शिव उनके ऊपर से हटा, उसने देखा की शिव का वो अंग अब खड़ा नहीं था, निचे की और झुक गया था. वो साइड में लेट गया, थोड़ी देर कोई नहीं हिल रहा था, सिर्फ सांसो का शोर था. संयम अचम्बे से देख रही थी, शिव का अंग और उसके आसपास के बल भी उसे दिख रहे थे, वो अंग साइड में लुढ़क गया था)





में थोड़ा रिलैक्स हुआ तो मेने बाजुमें लेती आंटी को देखा, अभी भी वो ऐसे hi नंगी लेती हुई थी, में उनके पीठ को सहलाते हुए उनके कूल्हों को सहलाने लगा, उन्होंने मेरी और शिव किआ और मुझे देख ने लगी.

शिव : (धीमी आवाज me)Maza आया? (ज़ोया सिर्फ मुस्कुरायी और शर्मा गयी) आपको देख कर कण्ट्रोल नहीं हुआ (शिव ने अपनी सफाई दी, फिर संयम की और देखा (संयम ने फ़ौरन अपनी आंखे बंद कर ली), उसे लगा की वो सो रही है, उसे नहीं पता था की वो अपनी आँखों की दरार से देख रही hai)Wo अभी भी सो रही है. (ज़ोया को अचानक अपनी बेटी याद आयी, उसने घबराते हुए थोड़ा ऊपर उठ के उस और देखा, उसे भी लगा की वो सो रही है, तो फिर से शिव की और मुँह कर ली, अभी भी उसकी योनि से शिव का वीर्य निकल रहा था. वो उसी खुमार में thi.)Aapko बुरा तो नहीं लगा न? (ज़ोया ने मुस्कुराते हुए ना में इस्सर किआ, शिव फिर से उनके कूल्हों को मसलने लगा तो उसके चेहरे पर शर्मीली मुस्कान आ गयी, शिव ने उसे सीधा किआ और फिर से साइड से उसके ऊपर आधा आ गया और उसके होठो को चूसने लगा, ज़ोया ने भी उसके गले में बहे दाल दी, वो उसके पेट को सेहला रहा था, उसके स्तन को सेहला रहा था, जब वो हाथ निचे ले जाने लगा तो उसने हाथ पकड़ लिया तो शिव ने puchha)Kya हुआ?

ज़ोया : (शरमाते hue)Waha सब गिला है. (वो उठी, उसे बहोत शर्म आ रही थी, वो अपनी चड्डी ढूंढने लगी, हाथ बढ़ा कर उसे लिया और अपनी छूट को साफ़ करने लगी, अच्छे से अंदर तक साफ़ किआ और फिर उसे साइड में रख दिया, और फिर सीधी लेट गयी और शिव को देखने लगी जैसे कह रही हो की में अब तैयार हु)

शिव : यू अरे सो बूटीफुल आंटी.

ज़ोया : (शर्मा गयी, शरमाते हुए kaha)Aunty मात कहो न.

शिव : तो फिर और क्या कहु? (शिव ने मुस्कुराते हुए कहा)

ज़ोया : मेरा नाम ज़ोया है, तुम्हे पता है?

शिव : है, अंकल आपको ऐसे hi तो बुलाते है. (अंकल की बात पर ज़ोया के चेहरे पर दर्द उभर आया, वो दूसरी और देखने lagi)Kya हुआ? (वो कुछ नहीं बोली, बस दूसरी और देख रही थी, शिव ने उनका चेहरा अपनी और किआ और फिर puchha)Kya हुआ?

ज़ोया : (हलकी मायूसी se)Muje ये सब नहीं करना चाहिए शिव.

शिव : क्यों? आपको अच्छा नहीं लगा?

ज़ोया : ऐसी बात नहीं है, तुम मेरी छोटी बेटी के आगे के हो, कितना बेहूदा लगता है न की में इतने छोटे लड़के के साथ ये सब कर रही हु.

शिव : एक आगे के बाद कोई छोटा बड़ा नहीं रहता, मेने कही पढ़ा था की एक एक्टर है जो पहले किसी लड़की से मिला था जब वो छोटी थी तब वो उसे बेटी कह के बुला रहा था पर बाद में उसी से शादी कर ली. एक आगे के बाद कोई छोटा बड़ा नहीं रहता.

ज़ोया : है, पर सोचो, अगर मेरी बेटी को पता चला तो वो मेरे बारे में क्या सोचेगी. की कैसी है उसकी आजमी.

शिव : उसे क्यों पता चलेगा? हम ध्यान रक्खेंगे न. में कभी किसी को आपके बारे में नहीं बताऊंगा, मुझे आपकी इज्जत की परवाह है, आप भरोसा करिये.

ज़ोया : इतना तो में समझती हु, ऐसे hi सब नहीं करने दे रही हु (हलकी मुस्कराहट के साथ उसने कहा) पर फिर भी दर लगता है.

शिव : अगर वो समझदार है तो जरूर समझेगी.

ज़ोया : वो अभी छोटी है, उसे थोड़ी न पता है ये सब, अभी उसने दुनिया देखि hi कहा है.

शिव : कोई सिख कर नहीं आता, अनुभव hi सबसे अच्छा टीचर होता है.

संयम : (मान में: में कोई छोटी नहीं हु, और आपको शिव hi मिला था, अब्बू को पता चल जायेगा तब देखना क्या होता है)

शिव : (उनसे स्तन को दबाते हुए, उनकी आँखों में देखने लगा, ज़ोया भी उसके इरादे समाज रही थी, वो शर्माने लगी, शिव झुका और निप्पल को अपने मुँह में ले कर चूस ने लगा, ज़ोया भी हलके हलके सिसकने लगी, संयम फिर से ध्यान से देखने लगाई, उसे गुस्सा भी था और ये सब देखने की लालसा भी थी, उसे गुस्सा तो इतना आ रहा था की अभी खड़े हो कर इन दोनों पर बरस पड़े, पर फिर भी वो शांत रही, शिव को ऐसे देखना उसे अच्छा भी लग रहा था और गुस्सा भी आ रहा था, उसने खुद उसे प्यार का इजहार किआ था, अगर वो ये सब करना चाहता था तो उसके साथ करता, वो क्या मन करती, तभी उसको ये भी ख्याल आया की क्या वो ये करपयेगी, उसकी योनि तो बहोत छोटी है, वो समाज नहीं प् रही थी, वह उसकी अम्मी फिर से शिव के उस अंग को पकड़ कर हिलने लगी थी, शिव उनके निप्पल को चाट रहा था और चूस रहा था, उसकी भी हालत ख़राब होने लगी थी, वो अपने निप्पल मसलने लगी, एक अजीब सी सरसराहट उसके बदन में हो रही थी, बेचारी को ज्यादा पता नहीं था तो वो अभी तक छूती नहीं थी. वो बस तड़प रही थी.)

शिव : फिर से करे? (उसने ज़ोया से पूछा, ज़ोया ने शर्म के है में इस्सर किआ, शिव भी muskuraya)Use थोड़ा चूस दो. (ज़ोया मुस्कुराते हुए कड़ी हुई और घुटनो के बल हो कर शिव के लुंड को पकड़ ली, वैसे भी वो इस बड़े अंग की दीवानी हो गयी थी, ये उसे कितना मज़ा देता है वो जानती थी, तो वो उसे चाट कर और चूस कर अपना प्यार जताने लगी)





संयम देख रही थी की उसकी अम्मी क्या कर रही है, उनके बड़े बड़े कूल्हे संयम की और hi थे, उसने देखा की उसकी अम्मी की छूट के होठो थोड़े फैले हुए है और अंदर का गुलाबी हिस्सा भी नजर आ रहा है, तभी शिव ने हाथ वह लगाया और वो छूट को सहलाते हुए निचे से ऊँगली अंदर डालने लगा. उसकी ऊँगली अंदर बहार हो रही थी. थोड़ी देर वो ये देखती रही फिर उसने अपना हाथ अपनी चड्डी के अंदर डाला और अपनी छूट का मूयेना करने लगी, उसने भी अपना छेड़ धुंध लिया और उसके अंदर हलके से ऊँगली डाली तो उसे दर्द होने लगा, उसने अपनी ऊँगली पीछे खिंच ली.





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संयम : मान में: अम्मी की वो ऐसी कैसी है, उन्होंने तो इतना बड़ा अपने अंदर ले लिया फिर भी उन्हें दर्द नहीं हुआ, वो तो बड़े मज़े से उसे अंदर ले रही थी, और यहाँ तो ऊँगली भी अंदर जाती है तो दर्द हो रहा है, पता नहीं क्या चक्कर hai.(Abhi वो सोच hi रही थी की शिव उनके पैरो के निचे घुसने लगा, वो ध्यानसे देख रही थी, शिव ने साइड से हाथ निकले और कूल्हों को फैलाया और अपना शिर ऊपर कर के छूट को चाटने लगा, संयम का हैट फिर से अपनी छूट पर चला गया, और उसे सहलाने लगी, वो अपने होठ दबा के अपनी सिसकी रोक रही थी, शिव अपनी जीभ दाल कर उनके छेड़ को चाट रहा था, उसकी अम्मी का चेहरा दूसरी और था, तो वो क्या कर रही है दिख नहीं रहा था पर उनका शिर ऊपर निचे हो रहा था, तो वो समाज गयी की वो क्या कर रही है, वही शिव छूट चाटने में व्यस्त था, और उसकी अम्मी अपनी कट शिव के चेहरे पर रगड़ रही थी, संयम आंखे फाडे ये सब देख रही थी. शिव कैसे उसकी अम्मी के वह चाट रहा है ये सोच सोच कर hi उसकी छूट से पानी बह रहा था. तोड़ी देर बाद शिव निचे hi घूमने लगा, उसकी ामी वैसे hi रही बस अपने पेअर और हाथ बरी बरी उठा कर शिव की मदद कर रही थी, अब शिव निचे था और उसकी अम्मी ऊपर थी, शिव का लुंड उसकी और था जिसे वो स्पस्ट देख प् रही थी.

शिव : बेथ जाओ (ज़ोया समाज गयी और अपना एक हाथ निचे ले गयी और शिव के लुंड को पकड़ कर अपनी योनि के छेड़ पर टिका दिया और अपने भरी कूल्हों को निचे दबाने lagi.)(Samim स्पस्ट रूप से लुंड को अंदर जाते हुए देख प् रही थी, उसकी सांसे hi थमी हुई थी, उसकी अम्मी खुद अपने हाथ से उस अंग को अपने अंदर दाल रही थी, धीरे धीरे वो पूरा अंग उनके अंदर गायब हो गया, थोड़ी देर बाद उसकी अम्मी अपने कूल्हे ऊपर निचे करते हुए उस अंग को अंदर बहार करने लगी. फिर से वही दौर सुरु हो गया,





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शिव : अच्छा लग रहा है?

ज़ोया : (सिसकते hue)Haaaa शह्ह्ह्ह शहहह उम्मम्मम उम्म्म्म. (आवाज बिलकुल धीमी थी, बहार अगर कोई होता तो भी नहीं सुन सकता था, बस संयम सुन रही थी, वो भी कभी कभी, काफी देर तक वो लोग ऐसा करते rahe),fir शिव नेजोया को घोड़ी बना दिया और अपना लुंड अंदर दाल दिया,





और फिर लगा धक्के लगाने, ज़ोया फिर सिसकने lagi)Aiiiii शहहह अह्ह्ह्हह उम्मम्मम शह्ह्ह्ह सीईव शह्ह्ह्हह्ह आईई शह्ह्ह्ह धीरीई शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह शिईयिव शहहहहह. (उसके बाद फिर शिव उनके ऊपर था और उन दोनों के पेअर संयम की और थे, संयम देख रही थी की शिव उसकी अम्मी को निचे दबोचे जोर जोर से अपनी कमर हिला रहा है, उसकी अम्मी बस सिसक रही थी.





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शिव : मज़ा आ रहा है हम्म हम्म हम्म्म hmmm(Dhakke मरते हुए)

ज़ोया : हआ शहहह आए शहहह हम्म्म हम्म्म अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह. आईई शहहह धीरीई शहहह (संयम को अम्मी की सकल तो नहीं दिख रही थी पर उनके रोने जैसे आवाज आ रही थी, एक और वो रोने जैसी आवाजे निकल रही थी और दूसरी और मज़ा आ रहा है ये भी कह रही थी, शिव जोर जोर से धक्के मर रहा था)

संयम : (मान में: अगर शिव मेरे साथ ऐसा करेगा तो शायद में मार hi जाऊ, न बाबा मुझे नहीं करवाना कुछ, कितना गन्दा है ये, मेरी hi ामी के साथ ये सब कर रहा है, ऐसे तो बड़ा सरीफ बनता है, इस से दूर hi रहना पड़ेगा, तभी उसे अपनी अम्मी की आवाज आयी)





ज़ोया : में झाड़नेवाली हु शिव, शहहह जोर से करो शह्ह्ह्ह और जोर सी आईईईई आईई हआ ऐसे hi शहहह अम्मीी शहहह आईईईई ूओमाआ शहहह मर गयी में शह्ह्ह्ह आईईईई शिईयिव शह्ह्ह्ह मरजाऊँगी शहहहहह अह्ह्ह्हह (ये सब संयम की समाज के बहार था, उन्हें दर्द हो रहा था की मज़ा आ रहा था वो ये समाज नहीं प् रही thi)Me गयी शठ में गईइइइइइइ aiiiiiiiiii. (शिव भी धक्के लगते हुए छूट गया, और दोनों निचे से सख्ती से चिपक गए)

संयम बस देख रही थी, थोड़ी देर बाद जब शिव ने वो अंग बहार निकला तो उसकी अम्मी के बड़े हो चुके छेड़ से सफ़ेद गधा तरल बहार निकलने लगा.





वो बड़े गौर से देख रही थी. रात बहोत हो चुकी थी, उसे नींद भी आने लगी थी तो वो सो गयी. शिव और ज़ोया भी ऐसे hi सो गए.

सुबह जब दरवाजे पर दस्तक हुई तो ज़ोया की नींद खुली.

नाज़िआ: अमिई... अम्मीईई.

ज़ोया : (उसकी हालत hi ख़राब हो गयी, वो क्या करे क्या न करे समाज hi नहीं आ रहा था, वो वैसे hi नंगी उठी और दरवाजे के पास गयी, हफ्ते hue)Haaaa.

नाज़िआ : अम्मी 8 बज गए, उठे नहीं आप, दरवाजा खोलिये.

ज़ोया : (उसका गाला सुख गया, वो पूरी नंगी थी, सिर्फ हाथ में कपडा लिए कड़ी thi)Tuuuu तू जा में आती हु.

नाज़िआ : (उसे अजीब लगा, पर उसने kaha)Thik है, में निचे जा रही हु. (जाते हुए वो सोचने लगी की संयम के रहते कुछ किआ होगा इन्होने? पर अम्मी की गभरहट तो उसी और इस्सर कर रही थी, वो मुस्कुराते हुए निचे चली गयी)

ज़ोया ने फटा फैट कपडे पहने और शिव को उठाया. शिव नींद में hi था, उसने ज़ोया को देखा. ज़ोया घबराये हुई थी. उसने संयम को देखा जो दूसरी और मुँह किये सो रही थी.

ज़ोया : कपडे पहनो. (वो बस इतना hi बोली, कपडे पहन कर वो संयम के पास गयी तो देखा वो गहरी नींद में है, शिव ने कपडे पहन लिए)

शिव : क्या हुआ?

ज़ोया: नाज़िआ बुलाने आयी थी, पता नहीं कैसे में इतनी देर सोती रही, बेटी के ससुराल में हु, इतना भी ख्याल नहीं रहा मुझे.

शिव : (खड़ा हो गया और ज़ोया का हाथ पकड़ liya)Shant हो जाइये, कुछ नहीं हुआ है, आप शांत रही ये.

ज़ोया : में नहाने जा रही हु. (कहते हुए वो बाथरूम की और भागी, उसकी छूट में हल्का सा दर्द था पर वो फटाफट नहायी, जब वो वापस आयी तो उसने देखा की शिव बहार कसरत कर रहा है, उसका पूरा शरीर पशीने से भीगा हुआ है, एक पल वो उसे निहारती रही, जैसे hi शिव ने उसे देखा वो मुस्कुराते हुए कमरे में चली गयी. संयम को उठाते hue)Samim उठ बीटा, देख कितना टाइम हो गया है.

संयम : (नींद में hi)sone दो न आजमी, नहीं उठना मुझे.

ज़ोया : उठजा बीटा, घर भी जाना है. नाज़िआ बुला रही है तुजे.

संयम : (नींद में गुस्स्सा करते hue)Kya अम्मी, सोने भी नहीं देते. (वो आधी नींद में hi बहार निकली, उसने शिव को देखा जो पुषप कर रहा था. अब वो थोड़ी जागृत हो गयी थी, उसे कल रात वाली घटना याद आ गयी)

शिव : (उसकी नजर संयम के ऊपर padi)Hi.

संयम : (हड़बड़ाते hue)Hi, कहते हुए वो बाथरूम की और भाग गयी. (शिव को समाज नहीं आया पर वो अपनी कसरत में लगा हुआ था)

थोड़ी देर बाद जब इनायत बुलाने आयी तो उसने देखा की शिव क्रुञ्ची कर रहा है, वो वही रुक गयी,





शिव दूसरी और देख रहा था. वो उसके मसल गठीले बदन को देख रही थी, और अंदर hi अंदर गरम हो रही थी.

संयम बाथरूम से बहार निकली तो उसने देखा की िनायतबाजी वह कड़ी है और शिव को देख रही है, वो उन्हें देखते हुए कमरे की और बढ़ने लगी. इनायत ने जब संयम को देखा तो वो हड़बड़ा गयी, और संयम की और बढ़ी.

इनायत : वो वो भाभी आपलोगो को नास्ते के लिए बुला रही है, (संयम बिना बोले अंदर कमरे में चली गयी, उसकी ामी सब सामान ठीक कर रही thi)Aapko भाभी बुला रही है.

ज़ोया : (मुस्कुराते hue)Ha आ रहे है. (इनायत बहार निकली और शिव से नज़ारे मिली तो शरमाते हुए वह से चली gayi)(Ander संयम se)Jaldi नाहा ले, और निचे आ जा. (शिव ko)Shiiiiv, नाज़िआ बुला रही है.

(संयम कुछ बोल नहीं रही थी बस अपनी अम्मी को देख रही थी, तभी शिव अंदर आया)

शिव :है आंटी, कुछ कहा क्या आपने?

ज़ोया : है बीटा, वो नाज़िआ चाय नास्ते के लिए बुला रही है. (संयम मान ने: आंटी, बीटा huuuu)(Samim को )चल बीटा, जल्दी कर, नाज़िआ का ससुराल है.

संयम : (मान में: रात को ख्याल नहीं था, हहहह, बड़ी सरीफ बन रही है, सब देखा मेने क्या कर रही थी रात को)

ज़ोया : क्या सोच रही है, चल जल्दी तैयार हो.

संयम : (अपना मुँह बना kar)Ho रही हु. (कहते हुए अपने कपडे लिए और बहार चली गयी)

जैसे hi संयम गयी शिव ने ज़ोया को पकड़ लिया तो ज़ोया दर गयी. शिव ने ज़ोया को अपनी बहो में पकड़ लिया तो ज़ोया छूटने का प्रयास करने लगी, हलाकि इतना जोर नहीं था.

शिव : गुस्सा हो?

ज़ोया : नहीं शिव, प्लीज छोडो मुझे, कोई आ जायेगा (उसने डरते हुए कहा)

शिव : आपके घर औ? (ज़ोया शर्मा गयी) बोलो न आपके घर औ फिर?

ज़ोया : (शरमाते हुए muskurayi)Hmmmm. (नज़ारे झुकाये बस इतना hi कहा)

शिव : एक किश कर लू?

ज़ोया : (डरते hue)Nahi शिव, कोई आ जायेगा.

शिव : छोटी सी. (ज़ोया जानती थी की एक छोटी सी किस ने कल इतना सारा कांड करवा दिया था)

ज़ोया : कोई आ जायेगा शिव.

शिव : (उसको कस्ते hue)Bas छोटी सी, कर लू? (ज़ोया शर्मा गयी और नज़ारे झुका ली, शिव मुस्कुराया और उनके होठो को अच्छे से निचोड़ने लगा,





ज़ोया, फिर रंग में आने लगी, वो शिव की पीठ सहलाते हुए उसको अपनी और खींचने लगी, पर फिर अचानक होश आया और अपने आपको छुड़ाने लगी, शिव ने भी छोड़ दिया)

ज़ोया : जल्दी निचे आओ, (कहते हुए वो बहार निकल गयी)

शिव कपडे पहन रहा था की संयम आ गयी, वो नाहा कर आयी थी तो फ्रेस फ्रेस लग रही थी, शिव ने उसे देखा पर संयम उसकी और नहीं देख रही थी.

शिव : अच्छी लग रही हो. (संयम ने कोई जवाब नहीं दिया, बस अपने बाल सही करने लगी) क्या हुआ? (संयम कुछ नहीं बोली, में उसके नजदीक गया, और उसके कंडे को पकड़ा तो उसने झटक दिया)

संयम : (हलके गुस्से se)Dur रहो मुज से.





शिव : क्या हुआ?

संयम : कुछ नहीं, (कहते हुए वो बहार चली गयी, में बस उसे जाते हुए देख रहा था, थोड़ी देर बाद में भी निचे चला गया)
 
भाग्यश्री का भाग्य.

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अपडेट 160

शिव भी निचे आ गया, आगे हॉल में hi आ कर बेथ गया, करीम और उसके पापा वह बैठे पेपर पढ़ रहे थे. शिव को देख कर करीम ने पेपर रक्खा.

करीम : आओ बैठो, नींद आयी? (शिव बस मुस्कुराया और बेथ गया, तभी अंदर से नाज़िआ की आवाज आयी वो अंदर बुला रही thi)aao नास्ता करते है. (हम दोनों अंदर जाने लगे, अंकल वही बैठे रहे, शायद उन्होंने पहले hi नास्ता करलिया था, अंदर किचन में hi एक दिंनिंग टेबल था, तो हम दोनों वही बेथ गए, संयम और आंटी पहले से वह बैठे थे, दोनों नास्ता कर रहे थे, दोनों में सी किसी ने भी मेरी और नहीं देखा)

नाज़िआ : (करीम को चाय और नास्ता दिया, और शिव को दूध का गिलास और नास्ता diya)Pohe है, चलेगना? (मने बस मुस्कुरा कर है कहा)

करीम : चाय नहीं पिटे क्या? (शिव को)

नाज़िआ : नहीं वो चाय नहीं पिता. (सब नास्ता करने लगे, नाज़िआ ने अपनी ामी को kaha)Ammi, ये मुझे एक दो दिन रुकने को बोल रहे है. (इनायत जो थोड़ी उदास दिख रही थी, क्यों की ये सब आज जानेवाले थे, उसके चेहरे पर थोड़ी खुसी नजर आयी, वो ध्यान से देखने लगी की भाभी की अम्मी क्या कहती है)

ज़ोया : पर हमें तो आज जाना पड़ेगा, इनके स्कूल भी है.

हाफ़िज़ा : है पर नाज़िआ तो रुक सकती है न, वैसे भी इतने दिनों बाद आयी है, हमारा भी मान नहीं कर रहा की उसको जाने दे.

ज़ोया : (नाज़िआ की और देख kar)Tuje भी तो चेक उप के लिए अस्पताल जाना है न?

नाज़िआ : चार दिन बाद जाना है.

करीम : में तुम्हे छोड़ने आ जाऊंगा. (नाज़िआ की और देख कर उसने कहा, नाज़िआ ने अपनी अम्मी की और देखा)

ज़ोया : ठीक है, तू रुक जा पर हमें तो जाना होगा, (हाफ़िज़ा की और देख kar)waha इनके अब्बू थी अकेले है, उन्हें भी दिक्कत हो रही होगी. (संयम ने अपनी आजमी को देखा और मान में सोचने लगी, कल रात बहोत ख्याल था न हमारे अब्बू का.. हूउउउउ)

हाफिआ : हम समझते है, आप भी रूकती तो हमें खुसी होती, पर बहु को तो रहने hi दीजिये, ये बोल रहा है न की ये छोड़ने आ जायेगा. (संयम ने नास्ता किआ और बहार चली गयी, वो कुछ बोल नहीं रही थी, नाज़िआ को भी अजीब लगा था पर बोली कुछ नहीं, सब ने नास्ता किआ, में भी बहार आ के बेथ गया, संयम वह नहीं थी, शायद ऊपर गयी thi)(Samim ऊपर जेक कड़ी थी, वो अपने विचारो में थी)

संयम : अभी देखो कितने सरीफ बन रहे है, जैसे कुछ हुआ hi न हो, मुझे तो अम्मी पर भी गुस्सा आ रहा है, उन्हें शर्म नहीं आयी, शिव को भी क्या कहु, वो भी कितना गन्दा है, छियई. मुझे पता है की उसका वैस्वी के साथ भी कुछ न कुछ है, पर वो चलता है, आज कल के लड़के ऐसा करते है, पर ये तो मेरी अम्मी थी, कितनी बड़ी है वो, (दोनों का स्कीन याद कर ke)kitne मज़े से कर रहे थे दोनों, अम्मी भी कितनी गन्दी है. (ज़ोया और नाज़िआ ऊपर आये तो उन्होंने संयम को अकेले खड़े देखा)

नाज़िआ : यहाँ क्यों अकेले अकेले कड़ी है?

संयम : (एक नज़र अपनी अम्मी की और डाली, फिर नाराजगी से boli)Kuchh नहीं.

ज़ोया : (बड़े प्यार se)Kya हुआ बीटा, कोई दिक्कत है तुजे?

संयम : (मान तो कर रहा था की बोल दे सब पर शांत rahi)Nahi, कुछ नहीं (उसने अपना मुँह दूसरी और कर लिया)

नाज़िआ : क्या हुआ है तुजे, कल तो अच्छी भली थी, किसी ने कुछ कहा क्या तुजे? (वो कुछ नहीं बोली) अरे बताना, बताएगी नहीं तो कैसे पता चलेगा. (अभी भी वो कुछ नहीं बोल रही thi)Chhodo अम्मी, चलो सब पैक कर लेते है, मेरे कपडे भी अलग करने है (अंदर जाते हुए कहा, ज़ोया ने भी संयम को देखा और वो भी अंदर चली गयी)

संयम : (मान में: आप आपको पता नहीं है, वर्ण आप भी मेरी तरह गुस्सा हो गयी hoti)(Tabhi अंदर से आवाज आयी)

नाज़िआ : स्मीम, सुन to...(Wo अंदर चली gayi)Dekh तुजे कोनसे कपडे ले जाने है, बाकि में ले आउंगी.

ज़ोया : ऐसा क्यों कह रही है, हम ले जायेंगे, शिव भी तो है, तू सिर्फ अपने कपडे अलग कर ले.

नाज़िआ : पर अम्मी, हम बैग भी तो ज्यादा नहीं लाये है, अगर में एक बैग रखलूँगी तो फिर कपडे कैसे आएंगे?

ज़ोया : (कुछ सोच kar)Ke काम कर, तू एक नया बैग ले लेना. (नाज़िआ ने भी सोचा)

नाज़िआ : ठीक है, यही सही रहेगा. (फिर वो दोनों बैग पैक करने लगे, शिव भी ऊपर आ गया, वो सिंगल बाद में बेथ गया, थोड़ी दुरी पर संयम भी बैठी हुई थी, उसने उसकी और देखा पर वो इधर उधर hi देख रही थी, फिर थोड़ी देर बाद सब तैयार हो कर बैग ले कर निचे आ गए)

हाफ़िज़ा : (बैग देख kar)Abhi से ये सब निचे क्यों ले आये, नाज़िआ, ऐसे hi भेजेगी सबको, खाना वन खा कर जायेंगे.

ज़ोया : नहीं नहीं, जल्दी निकालेंगे तो टाइम पर पहुंच जायेंगे, (शिव की और देख kar)Isse भी काम पर जाना होता है, हमारी वजह से इसको परेशानी होगी.

करीम : क्या काम करते हो? (शिव को देख कर)

शिव : जी, एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में सुपरवाइजर हु.

करीम : पढ़ते हो, एथलीट की प्रैक्टिस भी करते हो और नौकरी भी, भाई इंसान hi हो न? (उसने मुस्कुरा कर कहा)

शिव : जी, अपना सब कुछ मुझे hi देखना पड़ता है न.

करीम : (हलके दुःख के sath)Koi नहीं भाई, कोई मदद की जरुरत हो तो बताना.

शिव : नहीं, ऐसी कोई जरुरत नहीं है, अगर कुछ होगा तो जरूर बताऊंगा. मेरी जरूरते काम है तो गुजरा हो जाता है, रहने को अनाथालय है, ट्रस्ट से पैसे भी आते है, कोई कोई डोनेशन भी दे देता है, चल जाता है.

नाज़िआ : इसने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी डाला हुआ है.

करीम : मुझे भी लिंक भेजना, में भी डोनेशन दूंगा और अपने दोस्तों से भी शेयर कर दूंगा.

शिव : थैंक यू.

हम लोगोने इजाजत ली, इनायत मायूस थी, पर क्या कर सकती थी, करीमभाई hi हमें छोड़ने आये, फिर से हम बस में बेथ गए, जाते टाइम जगह मिल गयी थी, आंटी और संयम एक सीट पर बेथ गए, में उनके पीछेवाली सीट पर बेथ गया. पुरे रस्ते लगभग सब खामोस hi रहे. ऐसे hi हम दोपहर तक वह पहुंच गए. उन्होंने मुझे घर आने को बोलै पर में नहीं गया और अपने घर चला गया. खाना खाया और साइट की और निकल गया. मेने देखा की आज जहान्वी का कोई मश्ग नहीं था. वो आयी भी नहीं थी. खैर में अपने काम में लग गया. पिंकेशभाई मेरे साथ hi थे तो और कुछ तो वह भी हुआ नहीं. शाम को में जूही के घर चला गया. रोज़ की तरह हम गले मिले, फिर दूध पिया और स्टेडियम चले गए. दौड़ के बाद जब हम सुस्ता रहे थे तो उसने बताया,

जूही : सुनो, अगले हफ्ते हमे क्वालिफिकेशन दौड़ के लिए जाना है. स्टेट का सिलेक्शन होना है.

शिव : हम्म्म, कब जाना है?

जूही : क्सक्स तारीख को, हम अगले दिन hi चले जायेंगे, कोअक्सीर भी वही मिलनेवाले है. तो अभी सरे काम साइड में रख कर इसी पर फोकस करो, समजे.

शिव : (मुस्कुराते hue)Ji मैडम.

जूही : मैडम के बच्चे, चल दौड़ लगते है, आज तेरा और मेरा कॉम्पिटिशन है, देखते है किस्मे कितना दम है?

शिव : जो हुकुम मेरे आका. (फिर हमने एक लड़के को एक स्टॉपवॉच दी और उसे ेंडलीने पर खड़ा कर दिया, एक लड़का स्टार्टिंग लाइन पर स्टॉप वाच लिए खड़ा रहा और एक क्लैप बोर्ड के साथ, हमने पहली दौड़ लगायी, जब हमने ख़तम की तब मेरे और जूही के बिच में तक़रीबन एक से डेढ़ मीटर का फैसला था, हम हांफ रहे the)Dekha, हरा दिया न.

जूही : (मुस्कुराते hue)Me हरी नहीं हु, मेरा टाइम भी देख लो, लड़कीओ के मुकाबले बेस्ट टाइम है मेरा, और तुम्हारा कॉम्पिटिओं लड़कीओ से नहीं है, लड़को से है तो अभी और जोर लगाओ. (हमने दोबारा रेस लगायी, फिर नतीजा शामे tha)Aur ज़ोर लगाओ, इस हफ्ते तुम्हे मुझसे कमसे काम ढाई से तीन मीटर आगे ख़तम करना है समजे. अभी तुम्हारा टाइम 10 से ऊपर जा रहा है, उसे 10 से काम में ख़तम करना है. और ये तुम्हे इन तीन दिनों में करना है, बाद में ज्यादा स्ट्रेस नहीं ले सकते वर्ण मुस्कले प्रॉब्लम हो सकती है., हम लोग लगातार प्रयत्न कर रहे थे, श्री भी थक गया था, अँधेरा होने पर हम दोनों वह से निकले. जब हम उसके घर पहुंचे तो उसने मुझे अंदर बुलाया, में भी चला गया. वो सीधे वाशरूम चली गयी, में सोफे में बेथ गया.)

जूही : (बहार आते hue)Tumhe जाना है? (में मुस्कुराया और वाशरूम चला गया, जब बहार आया तो वो किचन में थी, में भी वही चला गया, वो दूध बना रही थी)

शिव : (मेने उसे पीछे से कमर में हाथ डालते हुए पकड़ा, और उसके गाल पर किश की, वो muskurayi)Abhi दूध क्यों बना रही हो, शाम को तो पिया था. (वो कुछ नहीं बोली, उसने दो गिलास बना रही थी, मेने उसको ऐसे पकड़ा था तो मेरे लुंड में तनाव आने लगा, उसको महसूस हुआ तो उसने मेरी और देखा और शर्माने लगी, पर फिर अपना काम करती रही, दूध में उसने दो अंडे dale)Ye क्या कर रही हो.

जूही : अंडे है, नेचुरल प्रोटीन, जरुरत है तुम्हे, सुबह भी खा लेना, घर पर न हो तो यही आ जाना. (मुझे उस पर बहोत प्यार आ रहा था, में उसके पेट को मसलतने laga)Kya कर रहे हो, मरूंगी tumhe(Usne जूठा गुस्सा dikhaya)Shhhh मात करो न shiv.(Usne रिक्वेस्ट की)

शिव : क्यों तुम्हे अच्छा नहीं लग रहा?

जूही : अच्छा तो लग रहा है पर और कुछ तो करोगे नहीं, सिर्फ में परेशान होती रहूंगी.

शिव : तो धुन्द्लो न कोई. (उसने जोर से मेरे पेट में कोहनी मरी, उसने सच में मरी थी तो मुझे lagi)Ouchhh, क्या कर रही हो (मेने उसको छोड़ दिया और अपने पेट को सहलाने लगा)

जूही : मार दूंगी जो ऐसा दोबारा कहा तो. (उसने गुस्से से kaha)Sharam नहीं आती ऐसा बोलते हुए. (वो सचमे गुस्सा थी)

शिव : सॉरी यार, में तो मज़ाक कर रहा था.

जूही : मुझे ऐसा मज़ाक पसन् नहीं है. और में पागल नहीं हु, सब समझती हु, मुझसे दूर दूर रहते हो, ताकि मुझे आगे जिंदगी में कोई दिक्कत न हो और में किसी और से जुड़ सकू.

शिव : तो इसमें गलत क्या है, तुम तो जानती हो मेरे बारे me(Me अभी भी अपना पेट सेहला रहा था, उसने जोर से मारा था)

जूही : (उसकी आँखों में ासु आ गए the)Agar दूर जाना चाहते हो तो चले जाओ, रोकूंगी नहीं तुम्हे. है सब जानती हु तुम्हारे बारे में, मुझे कोई दिक्कत नहीं है, तुम्हे जो करना है करो, मेने रोका है तुम्हे. (वो रोने लगी, मुझे भी बुरा लगा की मेने ये क्या कह दिया)

शिव : सॉरी यार, मेरा वो मतलब नहीं था (मेने उसे गले लगा लिया)

जूही : तुम्हे जो करना है करो, पर मुझसे ये आसा मत रक्खो की में किसी और के पास जाउंगी, तुमसे नहीं होता तो मत रहो मेरे साथ, में जी लुंगी अपनी जिंदगी, वैसे भी में शादी नहीं करना चाहती थी.

शिव : अरे चुप हो जा यार, में कही नहीं जा रहा, सच कह रहा हु, तेरी कसम. सच कह रहा हु. पहले मुझे लगता था की अगर तू मेरी जिंदगी से चली जाएगी तो मेरे करियर पर असर पड़ेगा, पर अब करियर के लिए नहीं कह रहा हु, पता नहीं कैसे करूँगा पर तू हमेसा मेरे साथ रहेगी. ी रॉय लव यू बेबी, प्लीज रो मात. (मेने उसको थोड़ा दूर किआ और उसके आंसू पोछे)

जूही : (रट हुए मुस्कुरा रही thi)Kaise रक्खेगा मुझे, दूसरी बीवी बांयेगा?

शिव : वो पता नहीं मुझे (मेने भी मुस्कुरा कर कहा, वो फिर गले लग गयी)

जूही : तू दूसरी बना या दसवीं बना मुझे कोई एतराज नहीं है, संभालना तो तुजे hi है.

शिव : ऐसा थोड़ी न होता है, इंसान बीबी तो एक hi रख सकता है, पर मुझे रोटी हुई बीवी पसंद नहीं है (मेने मुस्कुरा कर कहा)

जूही : (मेरे शाइन में घुसा मरते hue)Tune hi तो रुलाया, में थोड़ी न रो रही थी. (मेने फिर उसे थोड़ा अलग किआ और उसकी आँखों में देखा तो वो रोटी आँखों से मुस्कुरा रही थी, में झुका और उसके होठो को चूसने लगा, वो भी मुझसे लिपट ते हुए मेरे होठो को चूसने लगी, काफी लम्बा चला हम दोनों का ये किश, जब मेने उसे छोड़ा और उसकी आँखों में देखा तो वो शर्मा गयी और मेरे गले लग gayi.)Tum आगे बैठो, में दूध लती हु.

शिव : यही पि लेते है. (वो कुछ नहीं बोली, चम्मच से हिला कर उसने मुझे दूध diya,me पि गया, अज्जेब लगा पर बुरा नहीं था, वो भी पि गयी, उसके मुँह पर दूध लगा हुआ था तो वो साफ़ करने लगी तो मेने उसका हाथ पकड़ लिया और फिर से उसके होठो को चूसने लगा, वो फिर मुझसे लिपट गयी, में उसके कूल्हों को मसलने लगा तो वो कसमसा गयी)

जूही : (उसने होठ छुड़ाए और मेरे गले को चाटने lagi)Shhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह. ी लव यू बबीईई शह्ह्ह्हह्ह लव यू सो मुछ्ह. (मेने हाथ आगे किआ और उसकी छूट को ट्रॉउज़र के ऊपर से hi पकड़ liya)Shhhhhhh nahiiiiiiii(Usne मेरा हाथ पकड़ लिया)

शिव : क्या हुआ जान, क्यों रोक रही हो.

जूही : अभी नहीं शहहह (वो मेरा हाथ धकेलने लगी, में उसके गले को किश करने लगा तो उसने मेरे बल खिंच कर मुझे दूर किआ)

शिव : (बल खींचने से मुझे दर्द hua)Ahhhhhh.

जूही : (मुस्कुराते हुए पर सख्ती se)Abhi नहीं बोलै न. (मेने उसकी आँखों में देखा और शांत होने लगा, मेने उसके कूल्हे से हाथ हटा लिए और उसको कमर से पकड़ लिया, वो मुस्कुरा रही थी)

शिव : क्या हुआ?

जूही : (मुस्कुराते hue)Kuchh नहीं. (उसने सपाट लफ्जो में कहा)

शिव : (मेरी सम्ज्मे नहीं आ रहा tha)To रोक क्यों रही हो, जब नहीं करता तो भी दंति हो, और करता हु तो भी.

जूही : (वो मुस्कुरा रही thi)Meri मर्जी.

शिव : क्या मतलब???

जूही : (मेरे चेहरे पर अपनी ऊँगली घूमते hue)Meri मर्जी मतलब मेरी मर्जी, तुम जब चाहे मेरे साथ ये करने लगो और में करने दूंगी ऐसा तुम्हे लगता है, बहोत ज्यादा छूट दे दी है ऐसा तुम्हे लगता है, तुम्हे लगता है की ये तो मेरी है है, जब चाहे जो चाहे कर सकता हु, ऐसा hi लग रहा है न?

शिव : मेने ऐसा कब कहा?

जूही : कहा नहीं पर लगता तो वैसा hi है, जब तुम्हारी मर्जी होती है तब मुझे कुछ भी करो गए और में बस इंतजार करती राहु, सही कहा न मेने? (में उसे देख रहा था, उसने मेरी आँखों में देखते हुए kaha)Ab में जब तक न कहु, मुझसे ऐसी वैसी कोई भी हरकत मात करना, समजे? (मेरी समाज में नहीं आ रहा था, मेने उसकी कमर से हाथ हटा दिए, वो muskurayi)Thats लिखे ा गुड बॉय. पर इसका मतलब ये नहीं की में नहीं चुंगी, (मेरे लुंड पर हाथ रखते हुए हलके हलके सहलाने lagi)Meri जो मर्जी होगी में करुँगी, पर तुम्हे इजाजत नहीं है समजे.

शिव : (मुस्कुराते hue)Aur अगर कर दिया तो क्या करोगी?

जूही : (सपाट लहजे me)Kuchh नहीं करुँगी, पर ये तुम्हारी हार होगी, ये तुम्हारी हर होगी की तुम मेरी एक इच्छा भी पूरी नहीं कर पाए. (उसने नखरे से कहा)

शिव : (वो मेरे लुंड को सेहला रही थी तो वो अकड़ने लगा tha)Thik है, मुझे मंजूर है.

जूही : ये इतना भी आसान नहीं है बेबी, में पूरा फायदा उठाउंगी (वो मेरे लुंड को अच्छे से दबाने लगी, मेरी आंखे बंद होने लगी, और सिसकी भी निकल गयी, तो उसने लुंड छोड़ दिया, मेने आंखे खोल कर उसे देखा तो वो muskurayi)Ha ये तुम्हे छूट है की तुम किसी के साथ कुछ भी कर सकते हो, पर मेरे साथ कुछ भी नहीं कर सकते.

शिव : तुम खुद तड़पोगी और कुछ नहीं.

जूही : शायद में यही चाहती हु. ठीक है, कल मिलते है.

शिव : (मुस्कुराते हुए, उसके गले लगने लगा तो उसने मुझे roka)Ab इतना तो में कर शक्ति हु न, में सेक्स की दृस्टि से नहीं बस अपनी प्यारी जूही से गले भी न लागु.

जूही : (मुस्कुराते hue)Thik है, दी इजाजत. (में उसके गले लगा और उसके गाल पर किश किआ तो उसने मुस्कुराते हुए मुझे dekha)Ab ये क्या है?

शिव : तुम देखती जाओ, तुम ऐसे hi मुझे इजाजत देती जाओगी, तुम्हे पता भी नहीं चलेगा. Bye, मिलते है कल.

जूही : (मुस्कुराते hue)Bye, लव यू. (में मुस्कुराया और निकल गया, मुझे याद आया की भार्गविजई से भी मिलना था तो मेने फ़ोन लगाया)

भार्गवी : (उनकी आवाज में प्यार tha)Aa गए?

शिव : है आगया, कहा हो आप?

भार्गवी : एक काम के लिए बहार निकली हु. (थोड़ी मायूसी से)

शिव : कोई बात नहीं, कल मिलते है.

भार्गवी : थकी है, bye.

शिव : Bye, टेक केयर. (शिव ने फ़ोन रख दिया, भार्गवी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी, फिर वो अपने काम में लग गयी)

में घर चला आया. दोपहर को ज्या बात नहीं हुई थी तो खाना कहते हुए मेने सबको बताया की वह क्या क्या हुआ था, मतलब की फंक्शन के बारे में.

शाम को खाना कहते वक़्त संयम अपने अम्मी और अब्बू के साथ बैठी थी, वो दोनों फंक्शन की बाटे कर रहे थे. संयम बस सुन रही थी, कभी कभी, हु, है में जवाब दे रही थी. उसका मान किआ की अब्बू को बता दे, पर कैसे बता सकती थी, ऐसी बात कैसे कह सकती थी, तो वो चुप रही. वैसे भी उसकी अम्मी बहोत अच्छी थी, हमेशा उन्हें प्यार करती थी, उनका ख्याल भी अच्छे से रखती थी, अभी भी वो उसे प्यार से खाना खिला रही थी, वो समाज नहीं प् रही थी की क्या करे. वो बस चुप रही, और खाना खा कर अपने कमरे में चली गयी.

ज़ोया ने भी नाज़िआ को फ़ोन किआ और उस से बात की, हसन ने भी बात की, सबसे न आने की माफ़ी भी मांगी. सब खाना खाने बैठे तब भी ज़ोया, संयम के बदले व्यव्हार के बारे में सोच रही थी, तभी उसके मान में एक विचार आया और उसका हार्ट फ़ैल होते होते बचा.

ज़ोया : (मान में) हाय! कही इसने देख तो नहीं लिया कुछ? सुबह से hi उसका व्यव्हार बदल गया है, कल तक तो ठीक hi थी, हो न हो उसने देखा है रात को, (उसे अपने आप पर गुस्स्सा आने लगा, वो कहते हुए संयम को देखने लगी जो शिर झुकाये खाना खा रही थी)

हसनजी : शिव को तो कोई परेशानी नहीं हुई न? तुमने देखभाल की थी न?

ज़ोया : हम्म्म्म (तभी संयम ने उसकी और देखा, वो उसकी आँखों के भाव को सेहन नहीं कर पायी और नज़ारे झुका ली) अब उसको पूरा यकीं होने लगा था की उसने देखा है, वो अपने आप को गालिया देने लगी की आखिर क्यों वो बहक गयी.

खाना खाने के बाद संयम जल्दी ऊपर चली गयी थी, थोड़ी देर वो पढ़ने बेथ गयी.

में भी खाना खाने के बाद बढ़ने बेथ गया, पढ़ते पढ़ते क्या टाइम हो गया पता नहीं चला. लता ने भी शिव को पढ़ते देखा तो वो बच्चोंवाले रूम में चालीगयी. में पढ़ रहा था की मेरे मोबाइल पर मश्ग आया, मेने देखा तो किसी अननोन नंबर से था सिर्फ ‘Hi’ लिखा था.

शिव : कोण? (थोड़ी देर तक कोई मश्ग नहीं आया, में पढ़ने लगा, थोड़ी देर बाद फि मश्ग आया)

मश्ग : इतना जल्दी भूल गए? (मेने मश्ग पढ़ा, पर मेरी समाजमे नहीं आया की किसका नंबर है)

शिव : वैसे में कुछ नहीं भूलता, पर सिर्फ अननोन नंबर से hi पढ़ के कैसे पहचान सकता हु, है तुम अगर फ़ोन करोगे तो पता चलेगा, शायद आवाज से पहचान लू. (मुझे नहीं पता था की लड़की है की लड़का)

मश्ग : अच्छा जी, आवाज पहचान पाओगे? किसी के साथ अकेले छत पर थे?

शिव : ओह आप है.

मश्ग : अच्छा जी पहचान गए, तो बताओ कोण हु में?

शिव : (मश्ग से तो लग रहा था की इनायत hi है पर सूरे नहीं था, अगर वो न हुई और कोई और होगा तो प्रॉब्लम हो सकती है, तो मेने खुल कर बोलना सही नहीं samja)App वही हो न जो दर कर भाग गयी थी.

इनायत : (उसके चेहरे पर मुस्कान आगयी) वो अचानक किसीने बुलाया तो दर गयी थी.

शिव : मश्ग क्यों कर रहे हो, कॉल करू?

इनायत : नहीं, कोई सुन लेगा, अपने कमरे में हु अभी. चले क्यों गए तुम, रुक जाते. (दरवाल वो सोने लगी थी पर जब वो पानी पिने बहार निकली तो उसे अपनी भाभी और भाई के कमरे से आवाजे आ रही थी, वो फ़ौरन वह से चली गयी, फिर उसे शिव की याद आने लगी तो उसने मश्ग किआ था)

शिव : रुक के क्या फायदा था, आप थोड़ी न मिलने आती.

इनायत : (इनायत मुस्कुराने lagi)Shayad....

शिव : मुझे लगा था की आप दर गयी, तो नहीं आओगी.

इनायत : नहीं, वो किसी ने आवाज दी तो में अचानक दर गयी थी मुझे लगा कोई आ जायेगा.

शिव : किसी के बुलाने से दर गयी थी की कुछ देख कर दर गयी थी? (इनायत उसके लुंड को याद कर के शर्मा गयी, सच तो यही था की वो इतना बड़ा लुंड देख कर दर गयी थी, पर वो क्या बोलती, उसने कोई मश्ग नहीं likha)Kya हुआ, सच कहा न मेने? (फिर कोई जवाब नहीं आया तो मेने सोचा की शायद बात नहीं करना chahti)Thik है, bye.

इनायत : क्यों, bye?

शिव : आप बोल नहीं रही हो तो मुझे लगा आप बात नहीं करना चाहती.

इनायत : (वो तकिये को अपनी झांघो के बिच दबा कर लेती हुई thi)Sharm आ रही है. (उसकी बातो से मेरा लुंड अकड़ने लगा था, इनायत की छूट भी गीली हो रही थी, थोड़ी देर कोई जवाब नहीं आया तो उसने likha)Meri याद आ रही है?

शिव : (मुस्कुराते hue)Ha.

इनायत : (मुस्कुराते hue)Kya याद कर रहे हो?

शिव : आप फिर शर्माजाओगी, रहने दो. (शिव ने जान बुज कर लिखा, वो उसके मान की जान न चाहता था)

इनायत : (उसे बहोत शर्म आ रही थी पर अच्छा भी लग रहा था, वो जानती थी की क्या याद कर रहा होगा, पर वो जान न चाहती thi)Kaho न...

शिव : (उसने भी खुल कर लिख diya)Aap की रास टपकती.... (पढ़ के तो इनायत बहोत शर्मा गयी, उसकी छूट से पानी रिसने लगा था, उसने जोर से तकिया दबा लिया, और हलकी सिसकी भी निकल गयी, जब सामने से कोई नवाब नहीं आया तो शिव ने likha)Mene कहा था न शर्मा जाएगी, ठीक है bye.

इनायत : (उसको गुस्सा aaya)Kya bye, bye कर रहे हो, बात करो. (वो पहली बार किसी से इस तरह की बाटे कर रही थी, उसे भी बहोत मज़ा आ रहा था)

शिव : (उसे टटोलते hue)Baat कर के भी क्या करू, अगर मिलना हुआ तो आप फिर भाग जाओगी, दर कर.

इनायत : (उसकी सांसे तेज हो गयी thi)Nahi भागुंगी. (उसने बड़ी मुश्किल से likha)(Ye पढ़ कर शिव की भी हालत ख़राब होने लगी, वो अपना लुंड मसलने लगा)

शिव : क्यों, अब दर नहीं लगेगा?

इनायत : अगर दर लग रहा होता तो रात को फिर न आयी होती, तुम hi सो गए थे.

शिव : (उसे वो परछाई याद aayi)Achchh तो आप थी, मेने परछाई देखि थी, मुझे क्या पता की आप होगी, वर्ण...

इनायत : (उसकी सांसे उखाड़ने lagi)Warna...

शिव : में कॉल कर रहा हु, बात करनी है. (इनायत अभी ये पढ़ hi रही थी की कॉल आ गयी, उसने हड़बड़ाते हुए उठा ली, शिव को ुस्लि सांसे सुनाई दे रही थी जो जोर जोर से चल रही थी, जो बता रही थी की वो बहोत गरम हो चुकी hai)Hello, (वह से कोई आवाज नहीं आ रही थी सिर्फ तेज सांसो की आवाज आ रही थी, उसने अपनी बात आगे badhayi)Agar पता होता की आप आयी है तो जजों अधूरा रह गया था वो पूरा कर लेता. (उसने अपने लुंड को मसलते हुए)

इनायत : (उसका हाथ अपनी छूट पर चला गया, उसने उसे दबोच लिया, उसकी सलवार भी गीली लग रही थी, और उसके मुहसे सिसकी भी निकल रही थी, जिसे वो अपने होठो को दांतो से दबोचे रोकने का प्रयास कर रही thi)Kyaaaa? (वो जानती थी फिर भी वो जान न चाहती थी, उसे बहोत मज़ा आ रहा था)

शिव : (वो भी गरम हो चूका था, ऐसी बाटे करने का उसका भी पहला अनुभव tha)Abhi आ जाऊ? बता दूंगा की क्या बाकि था.

इनायत : (वो तो बदहवास हो चुकी थी, उसने नाडा खोल दिया और अपनी छूट पर डायरेक्ट हाथ रख दिया, और उसे मसलते हुए सहलाने लगी, सिसकी निकल रही thi)Haaaaaa, आआ जाओ.

शिव : फिर भागो गई तो नहीं?

इनायत : (वो बहोत गरम हो चुकी thi)Nahi भागुंगी, प्लीज आ जाओ.

शिव : बहोत कुछ कर लूंगा में, सोच लो.

इनायत : (वो बहोत गरम हो चुकी thi)Shhhh जो करना हो कर लेना, बस आ जउओ.

शिव : मेने ऊँगली दाल के देखा था, वो बहोत छोटी है, फैट जाएगी (इनायत ने भी अपनी ऊँगली अंदर दाल दी, उसे वो याद आ रहा था जब शिव ऊँगली दाल के अंदर बहार कर रहा था, उसकी सांसे hi सुनाई दे रही थी, वो समाज गया की क्या चल रहा hai)Abhi मेरी ऊँगली अंदर है? (इनायत को लगा की शिव hi ऊँगली कर रहा है)

इनायत : हआ.

शिव : दर्द हो रहा है?

इनायत : शहहहहह हाआआआ.

शिव : मेरा ले लोगी????? (इनायत की हालत ख़राब हो गयी, शिव के लुंड को याद करते हुए hi वो झड़ने लगी)

इनायत : शहहहहह हाआआ ले lungiiiiiiiiiii , ामीइइइइइइ shhhhhhhhhhhh. (थोड़ी देर तक उस और से सिर्फ सांसो की आवाज hi सुनाई दे रही थी, थोड़ी देर बाद होश आया तो इनायत को शर्मिंदगी महसूस होने लगी की शिव सामने फ़ोन पर है और उसने क्या क्या बोल दिया है, उसने फ़ोन लिया और हड़बड़ी में bola)Me बाद में बात करती हु. (कह कर उसने कॉल काट दिया)

में काफी गरम हो गया था, मेने किताब बंद की और बहार आ गया, सब शांत था, मेने रंजन के कमरे में देखा तो वो दोनों सो रहे थे, में बच्छोवाले कमरे में आया तो वह भी सब सो रहे थे, में अपने कमरे में जाने लगा तभी मुझे बाथरूम से सरितादिदी आती दिखाई दी, में रुक गया, उन्होंने भी मुझे देखा, पर अनदेखा करते हुए मेरी बगल से गुजरने लगी, मेने उनकी बाह पकड़ ली, वो अपनी बाह छुड़ाने लगी. पर वो नाजुक सी बाला कैसे छूट पति.

सरिता : (गुस्से से शिव की और देख kar)Kya है?

शिव : (मुस्कुराते hue)Kyu गुस्सा हो?

सरिता : (चेहरे पर गुस्सा liye)Kuchh नहीं.

शिव : बताओ तो.

सरिता : बोलै न कुछ नहीं.

शिव : मेरे कमरे में चलो.

सरिता : (वो गुस्से में hi boli)Nahi आना मुझे.

शिव : हुआ क्या है वो तो बताओ.

सरिता : में तो दिखती hi नहीं न तुम्हे, जाओ सो जाओ, मुझे भी नींद आ रही है.

शिव : अच्छा, नींद आ रही है, अभी भागता हु आपकी नींद. (कहते हुए मेने उन्हें गॉड में उठा लिया, वो छूटने का प्रयास करने लगी)

सरिता : छोडो मुझे, नहीं आना मुझे. (में उन्हें उठाये अपने कमरे की और बढ़ने laga)Me चिल्लाऊंगी शिव.

शिव : मेने रोका है क्या, या मुँह दबाया हुआ है.

सरिता : में सच कह रही हु में चिल्लाऊंगी.

शिव : (झुक कर उनके गाल पर किश karli)Jara जोर से चिल्लाना, वर्ण सब उठेंगे नहीं.

सरिता : (उसने शिव की आँखों में देखा, उसे गुस्सा तो आ रहा था पर चिल्ला के भी क्या karti)Me काट खाउंगी tuje.(Shiv अपने कमरे में पहच गया था, कमर के निचे की हाथ को हटाया, क्यों की सरिता गले में हाथ डेल लटकी हुई थी, उसने दरवाजा बंद kia)Me सच में काट खाउंगी तुजे.

शिव : मेने रोका है क्या. (सरिता ने गुस्से से उसकी बाह पर दन्त गधा दिए, सच में जोर से, शिव मुस्कुरा रहा था, उसने शिव को dekha)Bas इतना hi, और जोर से काटो. (शिव ने उन्हें बिस्तर में लेटाया तो वो कड़ी होने लगी)

सरिता : मुझे जाने दो (उन्होंने बे रूखी से कहा, में उन्हें अपने निचे दबाते हुए उनके ऊपर आ गया, वो मुझे धकेलने के लिए अपने हाथ लायी तो मेने उनके हाथ पकड़ लिए और ऊपर कर दिए, वो मेरे निचे दबी हुई थी और चटपटा रही थी, में उनके चेरे को देखने लगा, वो अभी भी मुझे गुस्से में hi देख रही थी, धीरे se)Choodo मुझे.

शिव : अभी नहीं, थोड़ी देर बाद (में उनके होठो की और बढ़ने लगा तो उन्होंने अपना मुँह दूसरी और कर लिया, में उस और गया तो दूसरी और, में उस और जातो तो वो दूसरी और कर रही थी, मेने एक हाथ से उनके दोनों हाथ पकड़े और उनके मुँह को पकड़ लिया, वो मेरे सामने गुस्से से देखने lagi)Kyu गुस्सा कर रही हो इतना.

सरिता : छोडो मुझे, तुम्हे तो सिर्फ लता hi दिखाई देती है न.

शिव : है दिखाई देती है, तो?

सरिता : तो फिर जाओ न उसी के पास. (उन्होंने हलके गुस्से से खा)

शिव : (मुस्कुराते hue)Chala जाऊंगा, अभी इस बिगड़ैल घोड़ी को तो ठीक कर लू. (में उनके होठो को चूसने लगा, वो अपना मुँह इधर उधर करने का प्रयास कर रही थी पर मेरी पकड़ के आगे वो नाकामियाब रही)

सरिता : उम्म्म्म उम्मम्मम उम्मम्मम्मम्म (अपने आपको छुड़ाने का प्रयास करने लगी, थोड़ी देर में उन्हें किश करता रहा तो वो शांत होने लगी, वो किश तो नहीं कर रही थी पर शिर भी नहीं हिला रहीथी, मेने किश तोड़ी और उन्हें देखा तो फिर उन्होंने अपना चेहरा दूसरी और घुमा लिया, में मुस्कुराया आउट उनके स्तन को ब्लाउज के ऊपर से ची काटने लगा, और अपना चेहरा रगड़ने लगा) (सरिता अपने आपको छुड़ाने का प्रयास करने लगी पर उसके शरीर में विरोध काम होता गया, आखिर कार वो शांत हो गयी, शिर ने एक नजर डाली, वो दूसरी और देखे शांति से लेती थी, शिव ने हाथ छोड़ दिया और घुटनो के बल हुआ, और अपनी बनियान उतरने लगा, सरिता ने अपनी कनखीओं से देखा, उसके बाद शिव उसके ऊपर आ गया और उसके स्तन को मसलने लगा, और उसके निप्पल को ब्लाउज के ऊपर से hi चूसने लगा तो उसकी सिसकी निकलने वाली थी, उसने अपने मुँह में हाथ रख दिया और दांतो से अपने hi हाथ को काट लिया, )(मेने अपना लुंड उनकी छूट पर दबाया तो मुझे वह कुछ महसूस हुआ, मेने थोड़ा ऊपर उठ कर उनको देखा तो उन्होंने नजर घुमा ली, में उनके ऊपर से उठ गया और साइड में बेथ गया)

शिव : पहले नहीं बोल सकती थी. (मेने प्यार से hi कहा, वो अपने आप को ठीक करते हुए बैठने लगी, उनके वह पद लगा हुआ था)

सरिता : (वो शर्मा रही thi)Abhi थोड़ी देर पहले hi सुरु हुआ है.

शिव : तभी इतनी चीड़ छिड़ी हो रही हो.

सरिता : (हलके गुस्से se)Jab सब ठीक था तो आये नहीं मेरे पास, आज ए जब में...

शिव : (उनको साइड से बहो में भरते hue)To क्या हुआ, चार दिन बाद सही. (उसने जब बहो में भरा तो सरिता का हाथ उसके खड़े लुंड से टकरा गया, उसने शिव को देखा, उसने शरमाते हुए कहा)

सरिता : पीछे कर शक्ति हो.

शिव : कोई जरुरत नहीं है.

सरिता : (उसे बहोत शर्म आ रही थी फिर भी kaha)Chus दू.

शिव : (उनके गाल पर किश कर ke)Nahi, आप आराम करो. (वो उठने lagi)Yahi सो जाओ.

सरिता : (थोड़ी मायूसी se)Par में काम की नहीं अभी, किसी को भेजती हु. (उसका हाथ खींच कर अपने साथ में सुलाते हुए)

शिव : कोई जरुरत नहीं है, तुम बस सो जाओ, और किसने कहा की वो नहीं कर शक्ति तो काम की नहीं, सिर्फ उसी काम के लिए हो kya(Shiv ने उसे बहो में भर लिया तो उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी, वो अपनी आंखे बंद किये हुए उस से लिपट कर सोने lagi)Update 160

शिव भी निचे आ गया, आगे हॉल में hi आ कर बेथ गया, करीम और उसके पापा वह बैठे पेपर पढ़ रहे थे. शिव को देख कर करीम ने पेपर रक्खा.

करीम : आओ बैठो, नींद आयी? (शिव बस मुस्कुराया और बेथ गया, तभी अंदर से नाज़िआ की आवाज आयी वो अंदर बुला रही thi)aao नास्ता करते है. (हम दोनों अंदर जाने लगे, अंकल वही बैठे रहे, शायद उन्होंने पहले hi नास्ता करलिया था, अंदर किचन में hi एक दिंनिंग टेबल था, तो हम दोनों वही बेथ गए, संयम और आंटी पहले से वह बैठे थे, दोनों नास्ता कर रहे थे, दोनों में सी किसी ने भी मेरी और नहीं देखा)

नाज़िआ : (करीम को चाय और नास्ता दिया, और शिव को दूध का गिलास और नास्ता diya)Pohe है, चलेगना? (मने बस मुस्कुरा कर है कहा)

करीम : चाय नहीं पिटे क्या? (शिव को)

नाज़िआ : नहीं वो चाय नहीं पिता. (सब नास्ता करने लगे, नाज़िआ ने अपनी ामी को kaha)Ammi, ये मुझे एक दो दिन रुकने को बोल रहे है. (इनायत जो थोड़ी उदास दिख रही थी, क्यों की ये सब आज जानेवाले थे, उसके चेहरे पर थोड़ी खुसी नजर आयी, वो ध्यान से देखने लगी की भाभी की अम्मी क्या कहती है)

ज़ोया : पर हमें तो आज जाना पड़ेगा, इनके स्कूल भी है.

हाफ़िज़ा : है पर नाज़िआ तो रुक सकती है न, वैसे भी इतने दिनों बाद आयी है, हमारा भी मान नहीं कर रहा की उसको जाने दे.

ज़ोया : (नाज़िआ की और देख kar)Tuje भी तो चेक उप के लिए अस्पताल जाना है न?

नाज़िआ : चार दिन बाद जाना है.

करीम : में तुम्हे छोड़ने आ जाऊंगा. (नाज़िआ की और देख कर उसने कहा, नाज़िआ ने अपनी अम्मी की और देखा)

ज़ोया : ठीक है, तू रुक जा पर हमें तो जाना होगा, (हाफ़िज़ा की और देख kar)waha इनके अब्बू थी अकेले है, उन्हें भी दिक्कत हो रही होगी. (संयम ने अपनी आजमी को देखा और मान में सोचने लगी, कल रात बहोत ख्याल था न हमारे अब्बू का.. हूउउउउ)

हाफिआ : हम समझते है, आप भी रूकती तो हमें खुसी होती, पर बहु को तो रहने hi दीजिये, ये बोल रहा है न की ये छोड़ने आ जायेगा. (संयम ने नास्ता किआ और बहार चली गयी, वो कुछ बोल नहीं रही थी, नाज़िआ को भी अजीब लगा था पर बोली कुछ नहीं, सब ने नास्ता किआ, में भी बहार आ के बेथ गया, संयम वह नहीं थी, शायद ऊपर गयी thi)(Samim ऊपर जेक कड़ी थी, वो अपने विचारो में थी)

संयम : अभी देखो कितने सरीफ बन रहे है, जैसे कुछ हुआ hi न हो, मुझे तो अम्मी पर भी गुस्सा आ रहा है, उन्हें शर्म नहीं आयी, शिव को भी क्या कहु, वो भी कितना गन्दा है, छियई. मुझे पता है की उसका वैस्वी के साथ भी कुछ न कुछ है, पर वो चलता है, आज कल के लड़के ऐसा करते है, पर ये तो मेरी अम्मी थी, कितनी बड़ी है वो, (दोनों का स्कीन याद कर ke)kitne मज़े से कर रहे थे दोनों, अम्मी भी कितनी गन्दी है. (ज़ोया और नाज़िआ ऊपर आये तो उन्होंने संयम को अकेले खड़े देखा)

नाज़िआ : यहाँ क्यों अकेले अकेले कड़ी है?

संयम : (एक नज़र अपनी अम्मी की और डाली, फिर नाराजगी से boli)Kuchh नहीं.

ज़ोया : (बड़े प्यार se)Kya हुआ बीटा, कोई दिक्कत है तुजे?

संयम : (मान तो कर रहा था की बोल दे सब पर शांत rahi)Nahi, कुछ नहीं (उसने अपना मुँह दूसरी और कर लिया)

नाज़िआ : क्या हुआ है तुजे, कल तो अच्छी भली थी, किसी ने कुछ कहा क्या तुजे? (वो कुछ नहीं बोली) अरे बताना, बताएगी नहीं तो कैसे पता चलेगा. (अभी भी वो कुछ नहीं बोल रही thi)Chhodo अम्मी, चलो सब पैक कर लेते है, मेरे कपडे भी अलग करने है (अंदर जाते हुए कहा, ज़ोया ने भी संयम को देखा और वो भी अंदर चली गयी)

संयम : (मान में: आप आपको पता नहीं है, वर्ण आप भी मेरी तरह गुस्सा हो गयी hoti)(Tabhi अंदर से आवाज आयी)

नाज़िआ : स्मीम, सुन to...(Wo अंदर चली gayi)Dekh तुजे कोनसे कपडे ले जाने है, बाकि में ले आउंगी.

ज़ोया : ऐसा क्यों कह रही है, हम ले जायेंगे, शिव भी तो है, तू सिर्फ अपने कपडे अलग कर ले.

नाज़िआ : पर अम्मी, हम बैग भी तो ज्यादा नहीं लाये है, अगर में एक बैग रखलूँगी तो फिर कपडे कैसे आएंगे?

ज़ोया : (कुछ सोच kar)Ke काम कर, तू एक नया बैग ले लेना. (नाज़िआ ने भी सोचा)

नाज़िआ : ठीक है, यही सही रहेगा. (फिर वो दोनों बैग पैक करने लगे, शिव भी ऊपर आ गया, वो सिंगल बाद में बेथ गया, थोड़ी दुरी पर संयम भी बैठी हुई थी, उसने उसकी और देखा पर वो इधर उधर hi देख रही थी, फिर थोड़ी देर बाद सब तैयार हो कर बैग ले कर निचे आ गए)

हाफ़िज़ा : (बैग देख kar)Abhi से ये सब निचे क्यों ले आये, नाज़िआ, ऐसे hi भेजेगी सबको, खाना वन खा कर जायेंगे.

ज़ोया : नहीं नहीं, जल्दी निकालेंगे तो टाइम पर पहुंच जायेंगे, (शिव की और देख kar)Isse भी काम पर जाना होता है, हमारी वजह से इसको परेशानी होगी.

करीम : क्या काम करते हो? (शिव को देख कर)

शिव : जी, एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में सुपरवाइजर हु.

करीम : पढ़ते हो, एथलीट की प्रैक्टिस भी करते हो और नौकरी भी, भाई इंसान hi हो न? (उसने मुस्कुरा कर कहा)

शिव : जी, अपना सब कुछ मुझे hi देखना पड़ता है न.

करीम : (हलके दुःख के sath)Koi नहीं भाई, कोई मदद की जरुरत हो तो बताना.

शिव : नहीं, ऐसी कोई जरुरत नहीं है, अगर कुछ होगा तो जरूर बताऊंगा. मेरी जरूरते काम है तो गुजरा हो जाता है, रहने को अनाथालय है, ट्रस्ट से पैसे भी आते है, कोई कोई डोनेशन भी दे देता है, चल जाता है.

नाज़िआ : इसने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी डाला हुआ है.

करीम : मुझे भी लिंक भेजना, में भी डोनेशन दूंगा और अपने दोस्तों से भी शेयर कर दूंगा.

शिव : थैंक यू.

हम लोगोने इजाजत ली, इनायत मायूस थी, पर क्या कर सकती थी, करीमभाई hi हमें छोड़ने आये, फिर से हम बस में बेथ गए, जाते टाइम जगह मिल गयी थी, आंटी और संयम एक सीट पर बेथ गए, में उनके पीछेवाली सीट पर बेथ गया. पुरे रस्ते लगभग सब खामोस hi रहे. ऐसे hi हम दोपहर तक वह पहुंच गए. उन्होंने मुझे घर आने को बोलै पर में नहीं गया और अपने घर चला गया. खाना खाया और साइट की और निकल गया. मेने देखा की आज जहान्वी का कोई मश्ग नहीं था. वो आयी भी नहीं थी. खैर में अपने काम में लग गया. पिंकेशभाई मेरे साथ hi थे तो और कुछ तो वह भी हुआ नहीं. शाम को में जूही के घर चला गया. रोज़ की तरह हम गले मिले, फिर दूध पिया और स्टेडियम चले गए. दौड़ के बाद जब हम सुस्ता रहे थे तो उसने बताया,

जूही : सुनो, अगले हफ्ते हमे क्वालिफिकेशन दौड़ के लिए जाना है. स्टेट का सिलेक्शन होना है.

शिव : हम्म्म, कब जाना है?

जूही : क्सक्स तारीख को, हम अगले दिन hi चले जायेंगे, कोअक्सीर भी वही मिलनेवाले है. तो अभी सरे काम साइड में रख कर इसी पर फोकस करो, समजे.

शिव : (मुस्कुराते hue)Ji मैडम.

जूही : मैडम के बच्चे, चल दौड़ लगते है, आज तेरा और मेरा कॉम्पिटिशन है, देखते है किस्मे कितना दम है?

शिव : जो हुकुम मेरे आका. (फिर हमने एक लड़के को एक स्टॉपवॉच दी और उसे ेंडलीने पर खड़ा कर दिया, एक लड़का स्टार्टिंग लाइन पर स्टॉप वाच लिए खड़ा रहा और एक क्लैप बोर्ड के साथ, हमने पहली दौड़ लगायी, जब हमने ख़तम की तब मेरे और जूही के बिच में तक़रीबन एक से डेढ़ मीटर का फैसला था, हम हांफ रहे the)Dekha, हरा दिया न.

जूही : (मुस्कुराते hue)Me हरी नहीं हु, मेरा टाइम भी देख लो, लड़कीओ के मुकाबले बेस्ट टाइम है मेरा, और तुम्हारा कॉम्पिटिओं लड़कीओ से नहीं है, लड़को से है तो अभी और जोर लगाओ. (हमने दोबारा रेस लगायी, फिर नतीजा शामे tha)Aur ज़ोर लगाओ, इस हफ्ते तुम्हे मुझसे कमसे काम ढाई से तीन मीटर आगे ख़तम करना है समजे. अभी तुम्हारा टाइम 10 से ऊपर जा रहा है, उसे 10 से काम में ख़तम करना है. और ये तुम्हे इन तीन दिनों में करना है, बाद में ज्यादा स्ट्रेस नहीं ले सकते वर्ण मुस्कले प्रॉब्लम हो सकती है., हम लोग लगातार प्रयत्न कर रहे थे, श्री भी थक गया था, अँधेरा होने पर हम दोनों वह से निकले. जब हम उसके घर पहुंचे तो उसने मुझे अंदर बुलाया, में भी चला गया. वो सीधे वाशरूम चली गयी, में सोफे में बेथ गया.)

जूही : (बहार आते hue)Tumhe जाना है? (में मुस्कुराया और वाशरूम चला गया, जब बहार आया तो वो किचन में थी, में भी वही चला गया, वो दूध बना रही थी)

शिव : (मेने उसे पीछे से कमर में हाथ डालते हुए पकड़ा, और उसके गाल पर किश की, वो muskurayi)Abhi दूध क्यों बना रही हो, शाम को तो पिया था. (वो कुछ नहीं बोली, उसने दो गिलास बना रही थी, मेने उसको ऐसे पकड़ा था तो मेरे लुंड में तनाव आने लगा, उसको महसूस हुआ तो उसने मेरी और देखा और शर्माने लगी, पर फिर अपना काम करती रही, दूध में उसने दो अंडे dale)Ye क्या कर रही हो.

जूही : अंडे है, नेचुरल प्रोटीन, जरुरत है तुम्हे, सुबह भी खा लेना, घर पर न हो तो यही आ जाना. (मुझे उस पर बहोत प्यार आ रहा था, में उसके पेट को मसलतने laga)Kya कर रहे हो, मरूंगी tumhe(Usne जूठा गुस्सा dikhaya)Shhhh मात करो न shiv.(Usne रिक्वेस्ट की)

शिव : क्यों तुम्हे अच्छा नहीं लग रहा?

जूही : अच्छा तो लग रहा है पर और कुछ तो करोगे नहीं, सिर्फ में परेशान होती रहूंगी.

शिव : तो धुन्द्लो न कोई. (उसने जोर से मेरे पेट में कोहनी मरी, उसने सच में मरी थी तो मुझे lagi)Ouchhh, क्या कर रही हो (मेने उसको छोड़ दिया और अपने पेट को सहलाने लगा)

जूही : मार दूंगी जो ऐसा दोबारा कहा तो. (उसने गुस्से से kaha)Sharam नहीं आती ऐसा बोलते हुए. (वो सचमे गुस्सा थी)

शिव : सॉरी यार, में तो मज़ाक कर रहा था.

जूही : मुझे ऐसा मज़ाक पसन् नहीं है. और में पागल नहीं हु, सब समझती हु, मुझसे दूर दूर रहते हो, ताकि मुझे आगे जिंदगी में कोई दिक्कत न हो और में किसी और से जुड़ सकू.

शिव : तो इसमें गलत क्या है, तुम तो जानती हो मेरे बारे me(Me अभी भी अपना पेट सेहला रहा था, उसने जोर से मारा था)

जूही : (उसकी आँखों में ासु आ गए the)Agar दूर जाना चाहते हो तो चले जाओ, रोकूंगी नहीं तुम्हे. है सब जानती हु तुम्हारे बारे में, मुझे कोई दिक्कत नहीं है, तुम्हे जो करना है करो, मेने रोका है तुम्हे. (वो रोने लगी, मुझे भी बुरा लगा की मेने ये क्या कह दिया)

शिव : सॉरी यार, मेरा वो मतलब नहीं था (मेने उसे गले लगा लिया)

जूही : तुम्हे जो करना है करो, पर मुझसे ये आसा मत रक्खो की में किसी और के पास जाउंगी, तुमसे नहीं होता तो मत रहो मेरे साथ, में जी लुंगी अपनी जिंदगी, वैसे भी में शादी नहीं करना चाहती थी.

शिव : अरे चुप हो जा यार, में कही नहीं जा रहा, सच कह रहा हु, तेरी कसम. सच कह रहा हु. पहले मुझे लगता था की अगर तू मेरी जिंदगी से चली जाएगी तो मेरे करियर पर असर पड़ेगा, पर अब करियर के लिए नहीं कह रहा हु, पता नहीं कैसे करूँगा पर तू हमेसा मेरे साथ रहेगी. ी रॉय लव यू बेबी, प्लीज रो मात. (मेने उसको थोड़ा दूर किआ और उसके आंसू पोछे)

जूही : (रट हुए मुस्कुरा रही thi)Kaise रक्खेगा मुझे, दूसरी बीवी बांयेगा?

शिव : वो पता नहीं मुझे (मेने भी मुस्कुरा कर कहा, वो फिर गले लग गयी)

जूही : तू दूसरी बना या दसवीं बना मुझे कोई एतराज नहीं है, संभालना तो तुजे hi है.

शिव : ऐसा थोड़ी न होता है, इंसान बीबी तो एक hi रख सकता है, पर मुझे रोटी हुई बीवी पसंद नहीं है (मेने मुस्कुरा कर कहा)

जूही : (मेरे शाइन में घुसा मरते hue)Tune hi तो रुलाया, में थोड़ी न रो रही थी. (मेने फिर उसे थोड़ा अलग किआ और उसकी आँखों में देखा तो वो रोटी आँखों से मुस्कुरा रही थी, में झुका और उसके होठो को चूसने लगा, वो भी मुझसे लिपट ते हुए मेरे होठो को चूसने लगी, काफी लम्बा चला हम दोनों का ये किश, जब मेने उसे छोड़ा और उसकी आँखों में देखा तो वो शर्मा गयी और मेरे गले लग gayi.)Tum आगे बैठो, में दूध लती हु.

शिव : यही पि लेते है. (वो कुछ नहीं बोली, चम्मच से हिला कर उसने मुझे दूध diya,me पि गया, अज्जेब लगा पर बुरा नहीं था, वो भी पि गयी, उसके मुँह पर दूध लगा हुआ था तो वो साफ़ करने लगी तो मेने उसका हाथ पकड़ लिया और फिर से उसके होठो को चूसने लगा, वो फिर मुझसे लिपट गयी, में उसके कूल्हों को मसलने लगा तो वो कसमसा गयी)

जूही : (उसने होठ छुड़ाए और मेरे गले को चाटने lagi)Shhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह. ी लव यू बबीईई शह्ह्ह्हह्ह लव यू सो मुछ्ह. (मेने हाथ आगे किआ और उसकी छूट को ट्रॉउज़र के ऊपर से hi पकड़ liya)Shhhhhhh nahiiiiiiii(Usne मेरा हाथ पकड़ लिया)

शिव : क्या हुआ जान, क्यों रोक रही हो.

जूही : अभी नहीं शहहह (वो मेरा हाथ धकेलने लगी, में उसके गले को किश करने लगा तो उसने मेरे बल खिंच कर मुझे दूर किआ)

शिव : (बल खींचने से मुझे दर्द hua)Ahhhhhh.

जूही : (मुस्कुराते हुए पर सख्ती se)Abhi नहीं बोलै न. (मेने उसकी आँखों में देखा और शांत होने लगा, मेने उसके कूल्हे से हाथ हटा लिए और उसको कमर से पकड़ लिया, वो मुस्कुरा रही थी)

शिव : क्या हुआ?

जूही : (मुस्कुराते hue)Kuchh नहीं. (उसने सपाट लफ्जो में कहा)

शिव : (मेरी सम्ज्मे नहीं आ रहा tha)To रोक क्यों रही हो, जब नहीं करता तो भी दंति हो, और करता हु तो भी.

जूही : (वो मुस्कुरा रही thi)Meri मर्जी.

शिव : क्या मतलब???

जूही : (मेरे चेहरे पर अपनी ऊँगली घूमते hue)Meri मर्जी मतलब मेरी मर्जी, तुम जब चाहे मेरे साथ ये करने लगो और में करने दूंगी ऐसा तुम्हे लगता है, बहोत ज्यादा छूट दे दी है ऐसा तुम्हे लगता है, तुम्हे लगता है की ये तो मेरी है है, जब चाहे जो चाहे कर सकता हु, ऐसा hi लग रहा है न?

शिव : मेने ऐसा कब कहा?

जूही : कहा नहीं पर लगता तो वैसा hi है, जब तुम्हारी मर्जी होती है तब मुझे कुछ भी करो गए और में बस इंतजार करती राहु, सही कहा न मेने? (में उसे देख रहा था, उसने मेरी आँखों में देखते हुए kaha)Ab में जब तक न कहु, मुझसे ऐसी वैसी कोई भी हरकत मात करना, समजे? (मेरी समाज में नहीं आ रहा था, मेने उसकी कमर से हाथ हटा दिए, वो muskurayi)Thats लिखे ा गुड बॉय. पर इसका मतलब ये नहीं की में नहीं चुंगी, (मेरे लुंड पर हाथ रखते हुए हलके हलके सहलाने lagi)Meri जो मर्जी होगी में करुँगी, पर तुम्हे इजाजत नहीं है समजे.

शिव : (मुस्कुराते hue)Aur अगर कर दिया तो क्या करोगी?

जूही : (सपाट लहजे me)Kuchh नहीं करुँगी, पर ये तुम्हारी हार होगी, ये तुम्हारी हर होगी की तुम मेरी एक इच्छा भी पूरी नहीं कर पाए. (उसने नखरे से कहा)

शिव : (वो मेरे लुंड को सेहला रही थी तो वो अकड़ने लगा tha)Thik है, मुझे मंजूर है.

जूही : ये इतना भी आसान नहीं है बेबी, में पूरा फायदा उठाउंगी (वो मेरे लुंड को अच्छे से दबाने लगी, मेरी आंखे बंद होने लगी, और सिसकी भी निकल गयी, तो उसने लुंड छोड़ दिया, मेने आंखे खोल कर उसे देखा तो वो muskurayi)Ha ये तुम्हे छूट है की तुम किसी के साथ कुछ भी कर सकते हो, पर मेरे साथ कुछ भी नहीं कर सकते.

शिव : तुम खुद तड़पोगी और कुछ नहीं.

जूही : शायद में यही चाहती हु. ठीक है, कल मिलते है.

शिव : (मुस्कुराते हुए, उसके गले लगने लगा तो उसने मुझे roka)Ab इतना तो में कर शक्ति हु न, में सेक्स की दृस्टि से नहीं बस अपनी प्यारी जूही से गले भी न लागु.

जूही : (मुस्कुराते hue)Thik है, दी इजाजत. (में उसके गले लगा और उसके गाल पर किश किआ तो उसने मुस्कुराते हुए मुझे dekha)Ab ये क्या है?

शिव : तुम देखती जाओ, तुम ऐसे hi मुझे इजाजत देती जाओगी, तुम्हे पता भी नहीं चलेगा. Bye, मिलते है कल.

जूही : (मुस्कुराते hue)Bye, लव यू. (में मुस्कुराया और निकल गया, मुझे याद आया की भार्गविजई से भी मिलना था तो मेने फ़ोन लगाया)

भार्गवी : (उनकी आवाज में प्यार tha)Aa गए?

शिव : है आगया, कहा हो आप?

भार्गवी : एक काम के लिए बहार निकली हु. (थोड़ी मायूसी से)

शिव : कोई बात नहीं, कल मिलते है.

भार्गवी : थकी है, bye.

शिव : Bye, टेक केयर. (शिव ने फ़ोन रख दिया, भार्गवी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी, फिर वो अपने काम में लग गयी)

में घर चला आया. दोपहर को ज्या बात नहीं हुई थी तो खाना कहते हुए मेने सबको बताया की वह क्या क्या हुआ था, मतलब की फंक्शन के बारे में.

शाम को खाना कहते वक़्त संयम अपने अम्मी और अब्बू के साथ बैठी थी, वो दोनों फंक्शन की बाटे कर रहे थे. संयम बस सुन रही थी, कभी कभी, हु, है में जवाब दे रही थी. उसका मान किआ की अब्बू को बता दे, पर कैसे बता सकती थी, ऐसी बात कैसे कह सकती थी, तो वो चुप रही. वैसे भी उसकी अम्मी बहोत अच्छी थी, हमेशा उन्हें प्यार करती थी, उनका ख्याल भी अच्छे से रखती थी, अभी भी वो उसे प्यार से खाना खिला रही थी, वो समाज नहीं प् रही थी की क्या करे. वो बस चुप रही, और खाना खा कर अपने कमरे में चली गयी.

ज़ोया ने भी नाज़िआ को फ़ोन किआ और उस से बात की, हसन ने भी बात की, सबसे न आने की माफ़ी भी मांगी. सब खाना खाने बैठे तब भी ज़ोया, संयम के बदले व्यव्हार के बारे में सोच रही थी, तभी उसके मान में एक विचार आया और उसका हार्ट फ़ैल होते होते बचा.

ज़ोया : (मान me)Ya क्सक्सक्सक्सः! कही इसने देख तो नहीं लिया कुछ? सुबह से hi उसका व्यव्हार बदल गया है, कल तक तो ठीक hi थी, हो न हो उसने देखा है रात को, (उसे अपने आप पर गुस्स्सा आने लगा, वो कहते हुए संयम को देखने लगी जो शिर झुकाये खाना खा रही थी)

हसनजी : शिव को तो कोई परेशानी नहीं हुई न? तुमने देखभाल की थी न?

ज़ोया : हम्म्म्म (तभी संयम ने उसकी और देखा, वो उसकी आँखों के भाव को सेहन नहीं कर पायी और नज़ारे झुका ली) अब उसको पूरा यकीं होने लगा था की उसने देखा है, वो अपने आप को गालिया देने लगी की आखिर क्यों वो बहक गयी.

खाना खाने के बाद संयम जल्दी ऊपर चली गयी थी, थोड़ी देर वो पढ़ने बेथ गयी.

में भी खाना खाने के बाद बढ़ने बेथ गया, पढ़ते पढ़ते क्या टाइम हो गया पता नहीं चला. लता ने भी शिव को पढ़ते देखा तो वो बच्चोंवाले रूम में चालीगयी. में पढ़ रहा था की मेरे मोबाइल पर मश्ग आया, मेने देखा तो किसी अननोन नंबर से था सिर्फ ‘Hi’ लिखा था.

शिव : कोण? (थोड़ी देर तक कोई मश्ग नहीं आया, में पढ़ने लगा, थोड़ी देर बाद फि मश्ग आया)

मश्ग : इतना जल्दी भूल गए? (मेने मश्ग पढ़ा, पर मेरी समाजमे नहीं आया की किसका नंबर है)

शिव : वैसे में कुछ नहीं भूलता, पर सिर्फ अननोन नंबर से hi पढ़ के कैसे पहचान सकता हु, है तुम अगर फ़ोन करोगे तो पता चलेगा, शायद आवाज से पहचान लू. (मुझे नहीं पता था की लड़की है की लड़का)

मश्ग : अच्छा जी, आवाज पहचान पाओगे? किसी के साथ अकेले छत पर थे?

शिव : ओह आप है.

मश्ग : अच्छा जी पहचान गए, तो बताओ कोण हु में?

शिव : (मश्ग से तो लग रहा था की इनायत hi है पर सूरे नहीं था, अगर वो न हुई और कोई और होगा तो प्रॉब्लम हो सकती है, तो मेने खुल कर बोलना सही नहीं samja)App वही हो न जो दर कर भाग गयी थी.

इनायत : (उसके चेहरे पर मुस्कान आगयी) वो अचानक किसीने बुलाया तो दर गयी थी.

शिव : मश्ग क्यों कर रहे हो, कॉल करू?

इनायत : नहीं, कोई सुन लेगा, अपने कमरे में हु अभी. चले क्यों गए तुम, रुक जाते. (दरवाल वो सोने लगी थी पर जब वो पानी पिने बहार निकली तो उसे अपनी भाभी और भाई के कमरे से आवाजे आ रही थी, वो फ़ौरन वह से चली गयी, फिर उसे शिव की याद आने लगी तो उसने मश्ग किआ था)

शिव : रुक के क्या फायदा था, आप थोड़ी न मिलने आती.

इनायत : (इनायत मुस्कुराने lagi)Shayad....

शिव : मुझे लगा था की आप दर गयी, तो नहीं आओगी.

इनायत : नहीं, वो किसी ने आवाज दी तो में अचानक दर गयी थी मुझे लगा कोई आ जायेगा.

शिव : किसी के बुलाने से दर गयी थी की कुछ देख कर दर गयी थी? (इनायत उसके लुंड को याद कर के शर्मा गयी, सच तो यही था की वो इतना बड़ा लुंड देख कर दर गयी थी, पर वो क्या बोलती, उसने कोई मश्ग नहीं likha)Kya हुआ, सच कहा न मेने? (फिर कोई जवाब नहीं आया तो मेने सोचा की शायद बात नहीं करना chahti)Thik है, bye.

इनायत : क्यों, bye?

शिव : आप बोल नहीं रही हो तो मुझे लगा आप बात नहीं करना चाहती.

इनायत : (वो तकिये को अपनी झांघो के बिच दबा कर लेती हुई thi)Sharm आ रही है. (उसकी बातो से मेरा लुंड अकड़ने लगा था, इनायत की छूट भी गीली हो रही थी, थोड़ी देर कोई जवाब नहीं आया तो उसने likha)Meri याद आ रही है?

शिव : (मुस्कुराते hue)Ha.

इनायत : (मुस्कुराते hue)Kya याद कर रहे हो?

शिव : आप फिर शर्माजाओगी, रहने दो. (शिव ने जान बुज कर लिखा, वो उसके मान की जान न चाहता था)

इनायत : (उसे बहोत शर्म आ रही थी पर अच्छा भी लग रहा था, वो जानती थी की क्या याद कर रहा होगा, पर वो जान न चाहती thi)Kaho न...

शिव : (उसने भी खुल कर लिख diya)Aap की रास टपकती.... (पढ़ के तो इनायत बहोत शर्मा गयी, उसकी छूट से पानी रिसने लगा था, उसने जोर से तकिया दबा लिया, और हलकी सिसकी भी निकल गयी, जब सामने से कोई नवाब नहीं आया तो शिव ने likha)Mene कहा था न शर्मा जाएगी, ठीक है bye.

इनायत : (उसको गुस्सा aaya)Kya bye, bye कर रहे हो, बात करो. (वो पहली बार किसी से इस तरह की बाटे कर रही थी, उसे भी बहोत मज़ा आ रहा था)

शिव : (उसे टटोलते hue)Baat कर के भी क्या करू, अगर मिलना हुआ तो आप फिर भाग जाओगी, दर कर.

इनायत : (उसकी सांसे तेज हो गयी thi)Nahi भागुंगी. (उसने बड़ी मुश्किल से likha)(Ye पढ़ कर शिव की भी हालत ख़राब होने लगी, वो अपना लुंड मसलने लगा)

शिव : क्यों, अब दर नहीं लगेगा?

इनायत : अगर दर लग रहा होता तो रात को फिर न आयी होती, तुम hi सो गए थे.

शिव : (उसे वो परछाई याद aayi)Achchh तो आप थी, मेने परछाई देखि थी, मुझे क्या पता की आप होगी, वर्ण...

इनायत : (उसकी सांसे उखाड़ने lagi)Warna...

शिव : में कॉल कर रहा हु, बात करनी है. (इनायत अभी ये पढ़ hi रही थी की कॉल आ गयी, उसने हड़बड़ाते हुए उठा ली, शिव को ुस्लि सांसे सुनाई दे रही थी जो जोर जोर से चल रही थी, जो बता रही थी की वो बहोत गरम हो चुकी hai)Hello, (वह से कोई आवाज नहीं आ रही थी सिर्फ तेज सांसो की आवाज आ रही थी, उसने अपनी बात आगे badhayi)Agar पता होता की आप आयी है तो जजों अधूरा रह गया था वो पूरा कर लेता. (उसने अपने लुंड को मसलते हुए)

इनायत : (उसका हाथ अपनी छूट पर चला गया, उसने उसे दबोच लिया, उसकी सलवार भी गीली लग रही थी, और उसके मुहसे सिसकी भी निकल रही थी, जिसे वो अपने होठो को दांतो से दबोचे रोकने का प्रयास कर रही thi)Kyaaaa? (वो जानती थी फिर भी वो जान न चाहती थी, उसे बहोत मज़ा आ रहा था)

शिव : (वो भी गरम हो चूका था, ऐसी बाटे करने का उसका भी पहला अनुभव tha)Abhi आ जाऊ? बता दूंगा की क्या बाकि था.

इनायत : (वो तो बदहवास हो चुकी थी, उसने नाडा खोल दिया और अपनी छूट पर डायरेक्ट हाथ रख दिया, और उसे मसलते हुए सहलाने लगी, सिसकी निकल रही thi)Haaaaaa, आआ जाओ.





शिव : फिर भागो गई तो नहीं?

इनायत : (वो बहोत गरम हो चुकी thi)Nahi भागुंगी, प्लीज आ जाओ.

शिव : बहोत कुछ कर लूंगा में, सोच लो.

इनायत : (वो बहोत गरम हो चुकी thi)Shhhh जो करना हो कर लेना, बस आ जउओ.

शिव : मेने ऊँगली दाल के देखा था, वो बहोत छोटी है, फैट जाएगी (इनायत ने भी अपनी ऊँगली अंदर दाल दी, उसे वो याद आ रहा था जब शिव ऊँगली दाल के अंदर बहार कर रहा था, उसकी सांसे hi सुनाई दे रही थी, वो समाज गया की क्या चल रहा hai)Abhi मेरी ऊँगली अंदर है? (इनायत को लगा की शिव hi ऊँगली कर रहा है)

इनायत : हआ.

शिव : दर्द हो रहा है?

इनायत : शहहहहह हाआआआ.

शिव : मेरा ले लोगी????? (इनायत की हालत ख़राब हो गयी, शिव के लुंड को याद करते हुए hi वो झड़ने लगी)

इनायत : शहहहहह हाआआ ले lungiiiiiiiiiii , ामीइइइइइइ shhhhhhhhhhhh. (थोड़ी देर तक उस और से सिर्फ सांसो की आवाज hi सुनाई दे रही थी, थोड़ी देर बाद होश आया तो इनायत को शर्मिंदगी महसूस होने लगी की शिव सामने फ़ोन पर है और उसने क्या क्या बोल दिया है, उसने फ़ोन लिया और हड़बड़ी में bola)Me बाद में बात करती हु. (कह कर उसने कॉल काट दिया)

में काफी गरम हो गया था, मेने किताब बंद की और बहार आ गया, सब शांत था, मेने रंजन के कमरे में देखा तो वो दोनों सो रहे थे, में बच्छोवाले कमरे में आया तो वह भी सब सो रहे थे, में अपने कमरे में जाने लगा तभी मुझे बाथरूम से सरितादिदी आती दिखाई दी, में रुक गया, उन्होंने भी मुझे देखा, पर अनदेखा करते हुए मेरी बगल से गुजरने लगी, मेने उनकी बाह पकड़ ली, वो अपनी बाह छुड़ाने लगी. पर वो नाजुक सी बाला कैसे छूट पति.

सरिता : (गुस्से से शिव की और देख kar)Kya है?

शिव : (मुस्कुराते hue)Kyu गुस्सा हो?

सरिता : (चेहरे पर गुस्सा liye)Kuchh नहीं.

शिव : बताओ तो.

सरिता : बोलै न कुछ नहीं.

शिव : मेरे कमरे में चलो.

सरिता : (वो गुस्से में hi boli)Nahi आना मुझे.

शिव : हुआ क्या है वो तो बताओ.

सरिता : में तो दिखती hi नहीं न तुम्हे, जाओ सो जाओ, मुझे भी नींद आ रही है.

शिव : अच्छा, नींद आ रही है, अभी भागता हु आपकी नींद. (कहते हुए मेने उन्हें गॉड में उठा लिया, वो छूटने का प्रयास करने लगी)

सरिता : छोडो मुझे, नहीं आना मुझे. (में उन्हें उठाये अपने कमरे की और बढ़ने laga)Me चिल्लाऊंगी शिव.

शिव : मेने रोका है क्या, या मुँह दबाया हुआ है.

सरिता : में सच कह रही हु में चिल्लाऊंगी.

शिव : (झुक कर उनके गाल पर किश karli)Jara जोर से चिल्लाना, वर्ण सब उठेंगे नहीं.

सरिता : (उसने शिव की आँखों में देखा, उसे गुस्सा तो आ रहा था पर चिल्ला के भी क्या karti)Me काट खाउंगी tuje.(Shiv अपने कमरे में पहच गया था, कमर के निचे की हाथ को हटाया, क्यों की सरिता गले में हाथ डेल लटकी हुई थी, उसने दरवाजा बंद kia)Me सच में काट खाउंगी तुजे.

शिव : मेने रोका है क्या. (सरिता ने गुस्से से उसकी बाह पर दन्त गधा दिए, सच में जोर से, शिव मुस्कुरा रहा था, उसने शिव को dekha)Bas इतना hi, और जोर से काटो. (शिव ने उन्हें बिस्तर में लेटाया तो वो कड़ी होने लगी)

सरिता : मुझे जाने दो (उन्होंने बे रूखी से कहा, में उन्हें अपने निचे दबाते हुए उनके ऊपर आ गया, वो मुझे धकेलने के लिए अपने हाथ लायी तो मेने उनके हाथ पकड़ लिए और ऊपर कर दिए, वो मेरे निचे दबी हुई थी और चटपटा रही थी, में उनके चेरे को देखने लगा, वो अभी भी मुझे गुस्से में hi देख रही थी, धीरे se)Choodo मुझे.

शिव : अभी नहीं, थोड़ी देर बाद (में उनके होठो की और बढ़ने लगा तो उन्होंने अपना मुँह दूसरी और कर लिया, में उस और गया तो दूसरी और, में उस और जातो तो वो दूसरी और कर रही थी, मेने एक हाथ से उनके दोनों हाथ पकड़े और उनके मुँह को पकड़ लिया, वो मेरे सामने गुस्से से देखने lagi)Kyu गुस्सा कर रही हो इतना.

सरिता : छोडो मुझे, तुम्हे तो सिर्फ लता hi दिखाई देती है न.

शिव : है दिखाई देती है, तो?

सरिता : तो फिर जाओ न उसी के पास. (उन्होंने हलके गुस्से से खा)

शिव : (मुस्कुराते hue)Chala जाऊंगा, अभी इस बिगड़ैल घोड़ी को तो ठीक कर लू. (में उनके होठो को चूसने लगा, वो अपना मुँह इधर उधर करने का प्रयास कर रही थी पर मेरी पकड़ के आगे वो नाकामियाब रही)

सरिता : उम्म्म्म उम्मम्मम उम्मम्मम्मम्म (अपने आपको छुड़ाने का प्रयास करने लगी, थोड़ी देर में उन्हें किश करता रहा तो वो शांत होने लगी, वो किश तो नहीं कर रही थी पर शिर भी नहीं हिला रहीथी, मेने किश तोड़ी और उन्हें देखा तो फिर उन्होंने अपना चेहरा दूसरी और घुमा लिया, में मुस्कुराया आउट उनके स्तन को ब्लाउज के ऊपर से ची काटने लगा, और अपना चेहरा रगड़ने लगा) (सरिता अपने आपको छुड़ाने का प्रयास करने लगी पर उसके शरीर में विरोध काम होता गया, आखिर कार वो शांत हो गयी, शिर ने एक नजर डाली, वो दूसरी और देखे शांति से लेती थी, शिव ने हाथ छोड़ दिया और घुटनो के बल हुआ, और अपनी बनियान उतरने लगा, सरिता ने अपनी कनखीओं से देखा, उसके बाद शिव उसके ऊपर आ गया और उसके स्तन को मसलने लगा, और उसके निप्पल को ब्लाउज के ऊपर से hi चूसने लगा तो उसकी सिसकी निकलने वाली थी, उसने अपने मुँह में हाथ रख दिया और दांतो से अपने hi हाथ को काट लिया, )(मेने अपना लुंड उनकी छूट पर दबाया तो मुझे वह कुछ महसूस हुआ, मेने थोड़ा ऊपर उठ कर उनको देखा तो उन्होंने नजर घुमा ली, में उनके ऊपर से उठ गया और साइड में बेथ गया)

शिव : पहले नहीं बोल सकती थी. (मेने प्यार से hi कहा, वो अपने आप को ठीक करते हुए बैठने लगी, उनके वह पद लगा हुआ था)

सरिता : (वो शर्मा रही thi)Abhi थोड़ी देर पहले hi सुरु हुआ है.

शिव : तभी इतनी चीड़ छिड़ी हो रही हो.

सरिता : (हलके गुस्से se)Jab सब ठीक था तो आये नहीं मेरे पास, आज ए जब में...

शिव : (उनको साइड से बहो में भरते hue)To क्या हुआ, चार दिन बाद सही. (उसने जब बहो में भरा तो सरिता का हाथ उसके खड़े लुंड से टकरा गया, उसने शिव को देखा, उसने शरमाते हुए कहा)

सरिता : पीछे कर शक्ति हो.

शिव : कोई जरुरत नहीं है.

सरिता : (उसे बहोत शर्म आ रही थी फिर भी kaha)Chus दू.

शिव : (उनके गाल पर किश कर ke)Nahi, आप आराम करो. (वो उठने lagi)Yahi सो जाओ.

सरिता : (थोड़ी मायूसी se)Par में काम की नहीं अभी, किसी को भेजती हु. (उसका हाथ खींच कर अपने साथ में सुलाते हुए)

शिव : कोई जरुरत नहीं है, तुम बस सो जाओ, और किसने कहा की वो नहीं कर शक्ति तो काम की नहीं, सिर्फ उसी काम के लिए हो kya(Shiv ने उसे बहो में भर लिया तो उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी, वो अपनी आंखे बंद किये हुए उस से लिपट कर सोने लगी)
 
अपडेट 161

आज शिव नहीं आनेवाला था तो जहान्वी नहीं गयी थी, पर उसे क्या मालूम था की शिव आज आया था. वो कल आएगा की नहीं ये भी उसे पता नहीं था. वो मान में सोच रही थी,

जहान्वी : ऐसा क्या हो गया जो एक दिन नहीं मिला और मुझे चैन नहीं हहि, ऐसा क्या है उसमे जो इतनी पागल हो रही है तू, वैसे भी वो छोटा है मुज से, और कुछ तो होना नहीं है फिर क्यों इतनी खींची जा रही है. (दिल : तो क्या हुआ, कुछ हो तभी क्या तू उसके पास जाएगी, ऐसे hi नहीं मिल सकती क्या? ) मुझे पता है तुजे क्यों मिलना है उस से? (क्यों मिलना है?) तुजे सेक्स करना है उसके साथ और कुछ नहीं (है करना है तो?) तो वो कुछ नहीं, तेरे अंदर आग लगी है जो तू खींची चली जा रही है (है लगी है, और करुँगी भी, क्या करलेगी तू) मुझे कुछ नहीं करना, वैसे भी तुतो उसकी गॉड में बेथ hi गयी थी, अब उसके लुंड पर भी बेथ जा, कितना बड़ा लग रहा था न (मरूंगी में तुजे (शरमाते हुए) कितना गांड सोचती है तू) चल चल, मुझे मात समजा, में तेरा मान हु, मुझसे क्या छुपा है, में जानती हु तेरे मान में क्या चल रहा है. (तो गलत क्या है यार, मुझे पसंद है वो, उसके साथ न अंदर कुछ कुछ होने लगता है) ये सेक्स की भूख है और कुछ नहीं (अगर सिर्फ सेक्स hi करना होता तो कितने hi लड़के है जो मेरे पीछे लार टपकाये फिरते है, वो करुणा का बॉयफ्रेंड भी मुझे किस तरह घूरता है, अगर जरा सा सिग्नल दे दू तो दौड़ा चला आएगा, पर मुझे नहीं करना वो सब, किसी को देख कर अंदर कुछ होना भी तो चाहिए, मुझे शिव पसंद है, उसके साथ कुछ कर लू तो तेरा क्या जाता है?) तो मेने कब रोका है, कल चढ़ जाना, में तो हर डैम तैयार हु. ((मुस्कुराते hue)Tu न मार खायेगी और कुछ नहीं, ऐसे कैसे चढ़ जाउंगी, शर्म नहीं आती क्या मुझे, है वो कुछ करेगा तो रोकूंगी नहीं में)

ऐसे hi सोच ते सोचते न जाने कब नींद आ गयी उसको. सुबह जब उठी तो उसको रात की बाते याद आने लगी, पहला सवाल मान में उठा की शिव आया है की नहीं. सुबह सुबह hi उसने शिव को मश्ग भेज diya,’Good मॉर्निंग, आये की नहीं?’. थोड़ी देर तक वो अपने मोबाइल को बार बार देखती रही पर जवाब नहीं आया.

यहाँ सुबह शिव उठा, बाजु में सरितादिदी उसके ऊपर हाथ और पेअर दाल के सोई हुई थी, जैसे hi वो हिला तो वो जाग गयी.

शिव : सॉरी, आपको जगा दिया, आप सो जाओ.

सरिता : नहीं, मुझे भी उठना hi था (अपने बाल बांधते हुए)

शिव : गुस्सा ठंडा हुआ की नहीं?

सरिता : में गुस्सा नहीं थी, वो तो बस ऐसे hi.

शिव : होता है, ऐसे वक़्त में हॉर्मोन्स इंबैलेंस हो जाता है तो चीड़ चिड़ापन आ जाता है. (वो खड़ा हुआ और हाथ दे कर सरिता को भी खड़ा किआ, उसकी पतली कमर में हाथ दाल कर अपनी और khincha)Char दिन बाद पूरी गमी निकल दूंगा, ठीक है. (सरिता शर्मा गयी, और नज़ारे झुका के मुस्कुराने लगी)

सरिता : मुझे बाथरूम जाना है (उसने शर्मा कर कहा तो मेने छोड़ दिया, वो बहार चली गयी)

वह सुबह वैस्वी, संयम के घर की और जा रही थी, कल वो अकेले अकेले गयी थी तो बोर हो गयी थी, शिरदर्द का बहाना कर के वो आधे दिन की छुट्टी ले कर वो वापस घर चली गयी थी. जब वो पहुंची तो संयम अकेली कड़ी थी, नाज़िआ दीदी नहीं थी. वह पहुंच कर उसने स्कूटर बंद किआ.

वैस्वी : Hi, दीदी नहीं आयी?

संयम : नहीं, वो अपने ससुराल hi रुक गयी है, दो तीन दिन बाद आएँगी.

वैस्वी : (उसने शिव के रस्ते की और देखा तो वो अभी दिख नहीं रहा था तो वो अपने स्कूटर की तक लगाए कड़ी रही और बात करने lagi)Aur बता, कैसा रहा सब?

संयम : सब ठीक था, तू ऐसे क्यों बैठी है, चल चलते है.

वैस्वी : अरे शिव को तो आ जाने दे.

संयम : तुजे रुकना है तो रुक, में जाती हु. (उसने बे रूखी से कहा)

वैस्वी : ऐसा क्यों कह रही है, कुछ हुआ है क्या? (वैस्वी ने चिंतित हो कर कहा)

संयम : मेने कहा न, तुजे रुकना है तो रुक, में अपने आप चली जाती हु.

वैस्वी : अरे पर हुआ क्या है वो तो बता.

संयम : मुझे कुछ नहीं बताना, मुझे उसके साथ नहीं जाना बस.

वैस्वी : जगहदा हो गया क्या?

संयम : नहीं, कोई जगहदा नहीं हुआ है, और मुझे तेरे सवालो के जवाब भी नहीं देने है, मुझे उस से बात नहीं करनी है न मिलना है, और में तो कहती हु तू भी दूर hi रहना उस से, वो ठीक नहीं है.

वैस्वी : (वो बेहद गभरा रही thi)Kya ठीक नहीं है?

संयम : में कुछ नहीं बता सकती, तेरी दोस्त हु इसलिए कह रही हु, दूर रह उस से, वो जैसा दीखता है वैसा है नहीं. चल अब.

वैस्वी : (उसने शिव के रस्ते पर देखा तो वो उसे आता हुआ नजर aaya)Wo आ रहा है.

संयम : (उसने भी dekha)Me जा रही हु (कहते हुए वो आगे बढ़ने लगी)

वैस्वी : (वो जल्दी से स्कूटर पर बेथ गयी और स्कूटर चालू kia)Are रुक तो, कुछ समाज में आये ऐसा तो बोल यार. (उसने स्कूटर उसके पास जा कर खड़ा किआ, संयम स्कूटर पर बेथ गयी)

संयम : चल. (वैस्वी को कुछ समाज में नहीं आ रहा था, पर वो अभी कुछ नहीं बोली, उसने स्कूटर आगे बढ़ा दिया, शिव ने ये देखा, उसको समाज नहीं आया, पर वो लोग निकल गए थे तो उसने भी दौड़ लगा दी, जब वो स्कूल पंहुचा तो वो दोनों क्लास में चली गयी थी, महेश और हर्ष खड़े थे, जब तीनो क्लास में गए तो शिव ने उन्दोनो की और देखा, वैस्वी उसकी और देख रही थी पर संयम नहीं देख रही थी, अभी सबके सामने तो कुछ पूछ नहीं सकता था तो वो अपनी जगह पर चला गया, बिना मैडम आयी और क्लास सुरु हो गया)

छोटी रेसस्स में जब वो दोनों बहार निकली तो शिव भी बहार निकला, उसने बात करने की कोशिस की तो संयम, वैस्वी को खिंच कर अपने साथ ले गयी, वो दोनों वाशरूम की और जा रहे थे तो शिव पीछे नहीं गया. रेसस्स ख़तम हो गयी थी तो फिर से वो क्लास में आ गया. बड़ी रेसस्स में वो दोनों बहार निकली तो शिव तुरंत उनके पीछे गया.

शिव : रुको तो. (वैस्वी रुक गयी पर संयम ने उसका हाथ पकड़ा और उसको खींचते हुए ले जाने लगी, शिव उनके आगे चला gaya)Hua क्या है, बताओ तो समाज में आये (उसने संयम और वैस्वी दोनों को कहा था, क्यों की उसको तो कुछ पता hi नहीं था, संयम तो उसकी और देख hi नहीं रही थी तो उसने वैस्वी को देखा, उसने अपना मुँह बना कर कहा की उसे कुछ पता नहीं है, तो उसने संयम को puchha)Kya हुआ है संयम.

संयम : (हलके गुस्से me)Kuchh नहीं, चल वैस्वी.

शिव: अरे बता तो सही, हुआ क्या है. (आते जाते लड़के लड़कीअ उनको hi देख रही थी)

संयम : तमसा मात करो, सब देख रहे है, मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी, में जा रही हु. (वो उन दोनों को छोड़ कर आगे चली गयी)

शिव : (वैस्वी ko)Hua क्या है?

वैस्वी : पता नहीं, कुछ बताया नहीं, बस कह रही थी की तुम से दूर राहु, तुम ठीक नहीं हो.

शिव : (उसको कुछ समाज नहीं aaya)Par क्यों?

वैस्वी : पता नहीं, पर कुछ तो हुआ है, वो बहोत नाराज है तुमसे, क्या हुआ था, तुम्हे तो पता होगा hi न.

शिव : नहीं यार, मुझे तो कुछ भी पता नहीं है, हमारा तो कोई जगहदा भी नहीं हुआ.

वैस्वी : (जाते hue)Me जाती हु, सोचो तुम, कुछ तो हुआ होगा, वर्ण वो इतना नहीं भड़कती. (कहते हुए वो चली गयी, में वही खड़ा हुआ सोच रहा था पर मेरी समाज में नहीं आ रहा था, तभी महेश और हर्ष आ गए और मुझे संयम और वैस्वी के साथ जाने को कहने लगे तो मेने मन करदिया, उन्हें भी कुछ समाज नहीं आया क्यों की रोज़ तो वो पांचो साथ में बेथ ते थे. दो पहर में भी छूटे तो वो दोनों अकेले hi चली गयी, में भी अकेले hi निकल गया, में बहार निकला hi था की पीछे से बिना मैडम आयी और मेरे पास स्कूटर रोकते हुए.

बिना : चल कर क्यों जा रहे हो?

शिव : (उन्हें देखते hue)Bas ऐसे hi.

बिना : चलो में छोड़ देती हु.

शिव : नहीं, में चला जाऊंगा. (पर वो नहीं मणि, वो स्कूटर बंद कर के निचे उतर गयी)

बिना : लो, तुम चला लो. (में कुछ नहीं बोलै और स्कूटर पर बेथ गया, वो एक साइड पेअर कर के बेथ गयी, मेने स्कूटर आगे बढ़ा दिया, दोनों चुप बैठे थे, वैसे भी बिना को अब शर्म आती थी, उसके मान में अभी भी दुविधा थी तो वो बात करने से कटरा रही थी, पर बात तो करनी hi थी तो उसने नॉर्मली hi बात ki)Aur कैसी चल रही है पढ़ाई?

शिव : ठीक hi है, ओपन स्टेट केलिए जानेवाला हु.

बिना : कब?

शिव : क्सक्स तारीख को. आपको छुट्टी के लिए बोलना भी था.

बिना : उसकी कोई चिंता नहीं है, वैसे भी स्पोर्ट्स कोटा में तुम्हारी छुट्टी सेंक्शन होनी hi है. (फिर दोनों चुप हो गए, उसका बहोत मान था की शिव उसके घर आये, पर वो बोल नहीं प् रही थी, आगे चौराहे पर शिव ने स्कूटर रोक दिया तो वो boli)Yaha क्यों रोका?

शिव : आपका घर उस और है, आप जाओ, में चला जाऊंगा.

बिना : ऐसा क्यों कह रहे हो, चलो न, में तुम्हे घर छोड़ देती हु.

शिव : आपको वह से वापस आना पड़ेगा, में चला जाऊंगा.

बिना : कोई बात नहीं, में आ जाउंगी, तुम चलो. (मेने स्कूटर बढ़ा diya)(Beena फिर सोच में पद गयी, एक और तो वो शिव से दूर hi रहना चाहती थी वही दिल का दूसरा कोना उसे आने देना चाहता था तो हिचकिचाते हुए वो boli)Ghar क्यों नहीं आये फिर?

शिव : बहार गया था, आऊंगा फिर.

बिना : हम्म्म्म. (वो सीधी hi बैठी थी पर शिव को इतना पास देख के उसका कण्ट्रोल नहीं हुआ और उसने शिव के कंधे पर हाथ रख hi दिया, शिव ने पलट कर देखा तो वो शर्मा गयी, और नज़ारे झुका ली, पर हाथ नहीं हटाया, दोनों चुप चाप चल रहे थे, शिव का घर भी आ गया तो शिव स्कूटर अंदर ले जाने laga)Ander कहा ले जा रहे हो, में यही से चली जाती हु.

शिव : खाना तो बनाया नहीं होगा, यही खा लो.

बिना : पर...

शिव : चलना यार. (शिव ने उसे यार कहा तो वो शर्मा गयी, और कुछ नहीं बोली, शिव ने स्कूटर रोका तो वो उतर गयी, वो दोनों अंदर चले गए, अंदर जा kar)Sunooooo. (उसने लता को आवाज दी, लता जो काम कर रही थी उसने देखा, वो वह आ gayi)Madam यही खाएंगी.

लता : (मुस्कुराते hue)Aiye मैडम, अचानक?

बिना : (हल्का शरमाते hue)Ye ले आया.

लता : अच्छा hi किआ, आ जाइये, आप हाथमुँह दो लीजिये, में खाना लगवाती हु. (शिव ने उनको बाथरूम का रास्ता दिखाया, वो अंदर चली गयी. शिव भी बाजु के बाथरूम में घुस गया, अंदर जा कर पहले वो पेशाब करने लगा, तो पेहसाब गिरने की आवाज आने लगी जो बिना ने सुनी, वो शर्मा गयी, उसे भी पेशाब लगी थी, तो उसने पहले नल खोल दिया ताकि उसकी आवाज में उसके पेशाब की सिटी डाब जाये. अपने बड़े कूल्हे से अपनी चड्डी निकलते हुए वो वही बेथ गयी और पेशाब करने लगी, उसके मान में शिव का पेहसाब करते हुए दृश्य आने लगा, वो शर्मा गयी, उसका मान शिव से मिलान को तड़पने लगा, पर उसने अपने आपको संभाला.)

उन्होंने खाना खाया, खाना खा कर शिव कपडे बदलने के लिए अंदर चला गया, प्रैक्टिस भी करनी थी तो वो ट्रॉउज़र hi पहन लिया, ताकि साइट से सीधे प्रैक्टिस के लिए चला जाये. वो कपडे बदल कर बल स्वररहा था की उसके दरवाजे पर दस्तक हुई, तो उसने दरवाजा खोला, सामने बिना मैडम थी.

बिना : में चलती हु.

शिव: में भी तैयार hi हु, आप मुझे रस्ते में छोड़ देना, मुझे भी साइट पर जाना है.

बिना : तुम्हारी कोई बचपन की फोटो नहीं है?

शिव : (उनको देख kar)Abhi भी आपके मान में वही चल रहा है क्या? आपने hi कहा था की वो मार गया है, तो में वो कैसे हो सकता हु?

बिना : नहीं , वो बस ऐसे hi पूछ रही थी. (उसने शिर झुका कर कहा, शिव ने पीछे नजर दौड़ाई तो सब अपने काम में लगे हुए थे तो बिना का हाथ पकड़ कर उसे कमरे के अंदर खिंच लिया और दरवाजे की पीछे खड़ा कर दिया, बिना का तो हार्ट फ़ैल होते होते बचा, वो दर गयी थी की कोई देख न ले, शिव ने उसकी बाह पकड़ कर उसे दीवाल के सहारे खड़ा कर दिया था और उसे देख रहा था, वो दरी हुई उसे देख रही थी)

शिव : अपने दिमाग से वो सब निकल दीजिये (कहते हुए वो झुका और उनके होठो को चूसने लगा, बिना बेचारी तड़प कर रह गयी, वो बस कड़ी रही और शिव उसके होठो को चुस्त रहा, वो आंखे बंद किये हुए उसकी बाह पकड़ कर रह गयी, जब शिव दूर हुआ तो बिना की आंखे बोजिल हो गयी थी) क्यों इतना सोचती हो आप, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता की में कोण हु, अब यही मेरी जिंदगी है.

बिना : पर....

शिव : है मेरी एक फोटो, शायद काव्यमादाम के पास है, सरे डॉक्यूमेंट उनके वह hi है. में ले आऊंगा बस. आप इत्मीनान कर लेना, पर अभी भी कह रहा हु, उस से कोई फर्क पड़नेवाला नहीं है. समाज रही हो? (उसने गाल पर हाथ रख कर कहा, तो बिना ने सिर्फ है में गर्दन hilayi.)Chalo अब, मुझे रस्ते में छोड़ देना.

बिना : रस्ते में क्यों, जहा जाना है वही छोड़ दूंगी, में भी तो देखु की कहा काम करते हो.

शिव : (मुस्कुराते hue)Thik है chalo(Uska हाथ पकड़ कर ले जाने लगा तो बिना वही रुक gayi)Kya हुआ?

बिना : (शर्मा kar)Sab है बहार (उसने अपने पकड़े हाथ की और इस्सर किआ, शिव ने मुस्कुरा कर हाथ छोड़ दिया, दोनों बहार आये, और लता को बोल कर निकल गए, बिना थोड़ी खुस थी, वो भी सोचने लगी की गधे मुर्दे उखाड़ने से क्या हासिल होगा, पर अभी भी उसका दिल नहीं मान रहा था, उसने शिव को उसकी साइट पर chhoda)To यहाँ काम करते हो? (पहले बिना उतररि फिर शिव स्कूटर से निचे उतरा, और स्टैंड कर दिया)

शिव : है, आइये देख लीजिये.

बिना : (मुस्कुराते hue)Nahi, फिर कभी, अच्छा चलती हु (फिर थोड़ा शर्मा kar)Ghar आना.

शिव : (मुस्कुराते hue)Aunga. (वो bye बोल कर निकल गयी, जाते हुए भी मुद मुद कर पीछे देख रही थी, ये सब बालकनी में कड़ी जहान्वी देख रही थी, उसे हल्का हल्का गुस्सा आ रहा tha)(Me अंदर आने लगा तो मेरी नजर भी जहान्वी पर पड़ी,





वो वाइट टॉप और ब्लैक स्कर्ट में थी, मेने हाथ हिलाते hue)Hi. (जहान्वी ने सिर्फ सर हिलाया पर चेहरे पर कोई मुस्कान नहीं थी, शिव को अजीब लगा पर वो कुछ नहीं बोलै, वो सोच रहा था की ऊपर जाये पर जहान्वी थोड़ा सीरियस हो कर देख रही थी तो उसने अपना इरादा बदल दिया और वो आगे बढ़ गया, थोड़ी देर वो काम देखता रहा)

जहान्वी, हलके गुस्से से इधर उधर घूम रही थी.

जहान्वी : समझता क्या है, कोण थी वो, बड़ी है है के बात कर रही थी, साड़ी पहने हुए थी, वो बोल रहा था की उसकी गर्लफ्रेंड है तो ये तो नहीं है. पर वो तो कोई औरत थी. पता नहीं कोण थी, कोई तो thi,dono के बात करने से तरीके से hi पता चल रहा था की वो दोनों कितने क्लोज है, और उसे यहाँ तक छोड़ने भी आयी थी, और ये भी सीधा चला गया, ऊपर क्यों नहीं आया? (मान: तो बुला ले) में क्यों बुलाऊ, ये नहीं की hi hello hi कर ले, में क्यों जाऊ, आना होगा तो आएगा अपने आप hi.

थोड़ी देर बाद सब खाना खाने बैठे, वो देर से आता था तो उसे खाना नहीं खाना होता था, वही हल जहान्वी का था, पिंकेश जल्दी आ जाता था और सब मजदूर भी तो वो लोग कहाँ काने बैठे, पिंकेश ऑफिस की और जाने लगा और शिव को भी बोलै तो दोनों उसी और चल दिए. जब दोनों अंदर दाखिल हुए तो जहान्वी ने देख ाकि दोनों साथ में आये है, उसने शिव को घर कर देखा. पिंकेश को लगा की किसी बात पर मैडम गुस्सा है तो वो बोलै

पिंकेश : में नीचे खा लेता हु. (जहान्वी कुछ नहीं बोली तो वो अपने आप hi निचे की और चला गया, शिव मुस्कुराते हुए वही बेथ गया)

शिव : (मुस्कुराते hue)Kyu डरा रही हो बेचारे को, गुस्सा हो?

जहान्वी : (गुस्से se)Kab आये?

शिव : आपके सामने तो आया था?

जहान्वी : वो नहीं, बहार गए थे तो कब आये?

शिव : कल आया था, साइट पर भी आया था.

जहान्वी : मुझे फ़ोन नहीं कर सकते थे, या मश्ग hi कर देते.

शिव : में क्यों करने लगा, आप अपने काम में बिजी हो सकती थी, में क्यों आपको डिस्टर्ब करता.

जहान्वी : खुद तो बताते नहीं हो और में पुछु तो भी जवाब नहीं दे रहे हो.

शिव : आपने कब पूछा?

जहान्वी : अपना व्हाट्सप मश्ग चेक करो? (उसने नारजगीसे कहा, तो मेने अपना मोबाइल निकला और देखा तो मेरे स्कूल निकलने के बाद मश्ग आया था, तो में देख नहीं पाया था)

शिव : सॉरी वो देखा नहीं था मोबाइल.

जहान्वी : है है, क्यों देखोगे मेरा मश्ग, अपनी उस गफ से फुर्सत मिले तब न. (उसने चिढ़ते हुए कहा)

शिव : (मुस्कुराते hue)Aisi बात नहीं है, वो तो रोज़ मिलती है मुझे, फ़ोन की जरुरत hi नहीं पड़ती. स्कूल में फ़ोन बंद रखता हु, और फिर घर जाते वक़्त भी ध्यान नहीं रहा, और सीधा यहाँ आ गया तो देखा नहीं. कोई काम था मैडम. (शिव ने ऐसे hi चिढ़ाने के लिया कहा)

जहान्वी : है था (उसने गुस्से से कहा)

शिव : क्या काम tha(Bhola सा चेहरा बना कर शिव बोलै तो वो और भड़क गयी)

जहान्वी : भूल गयी (उसने अपना चेहरे घुमा लिया, थोड़ी देर दोनों खामोश rahe)Waise बड़ी नहीं है तुम्हारी गफ. (पहले तो शिव को समाज नहीं आया पर फिर उसे ध्यान आया की ये बिना मैडम की बात कर रही है, वैसे भी वो उसकी गफ hi थी)

शिव : तो क्या हुआ, मुझे पसंद है वो.

जहान्वी : तुम्हारी चॉइस hi बेकार है, पहले वो मजदूर अभी वो औरत, सिर्फ उसी काम के लिए गफ बनाते हो क्या? (चिढ़ते हुए)

शिव : पर आप क्यों इतना भड़क रही है, ये मेरी पर्सनल लाइफ है, में जो चाहे करू. (मेने मुस्कुराते हुए कहा)

जहान्वी : ज्यादा न स्मार्ट मात बनो, हो नहीं कह देती हु.

शिव : मेने तो कभी नहीं कहा की में स्मार्ट हु. आप hi कह रही हो.

जहान्वी : में कुछ नहीं कह रही समजे.

शिव : छोड़िये न उन बातो को, आप ये बताइये की मश्ग क्यों किआ था?

जहान्वी : (क्या बोले उसे समाज नहीं आया तो वो boli)Wo तुम गाड़ी चलना सिख रहे थे तो इसीलिए बोल रही थी, काम के टाइम पर तो सिख नहीं सकते, तो मेने सोचा की सुबह बुला लू. बस वही था, और कुछ नहीं.

शिव : अरे मेने कब कहा की और कुछ था, और वैसे भी सुबह मेरी स्कूल होती है, शाम को प्रैक्टिस, उसके बाद में फ्री होता हु.

जहान्वी : कितने बजे फ्री होते हो?

शिव : ऐसा कुछ फिक्स नहीं है, जब तक मैडम चाहती है मुझे प्रैक्टिस करनी पड़ती है, लगभग अँधेरा हो hi जाता है.

जहान्वी : ओह, मतलब यही समय है तुम्हारे पास.

शिव : अब क्या करू में भी, कोई बात नहीं, छोड़िये, फिर कभी सिखलऊँगा.

जहान्वी : खाने के वक़्त तो जा hi सकते है. (उसे खुद जाना था पर वो शिव को ऐसे बोल रही थी जैसे एहसान कर रही हो)

शिव : है जाते सकते है, पर...

जहान्वी : हमें कोनसा ज्यादा दिन जाना है, कुछ दिनों में hi सिख जाओगे.

शिव : आप मालकिन हो, जैसा आप कहो? (शिव ने भोली सूरत बना कर कहा)

जहान्वी : (घूरते हुए muskuyi)Bade आये मालकींवाले, एक बात तो मानते नहीं और मालकिन कह रहे हो. चलो उठो, देर हो रही है.

शिव : (खड़े होते hue)Jo हुकुम. (जहान्वी ने अपना बैग लिया था वो उसकी बाह पर मारा)

जहान्वी : नौटंकी नहीं, चलो अब. (निचे पिंकेश बैठा था तो उसे बोल दिया की थोड़ी देर में आते है, वो दोनों बहार चले gaye)(Mene जहान्वी को देखा, वैसे भी वो खूबसूरत और हॉट लड़की hi थी, आज भी वो स्कर्ट hi पहनी हुई थी, मुझे लग रहा था की उनके दिमाग में कुछ न कुछ तो खिचड़ी पाक hi रही है वर्ण वो ऐसे कपडे पहन कर मुझे ड्राइविंग के लिए नहीं बोलती, उन्होंने मुझे ऐसे देखते हुए देखा, तो वो मुस्कुरायी और हवामे उड़ते उनके बल को कण के पीछे करते हुए)

जहान्वी : क्या देख रहे हो? (उसने हलकी शर्म के साथ पूछा)

शिव : (अपनी नजर आगे करते hue)Nahi, कुछ नहीं.

जहान्वी : (वो भी जानती थी की वो उसे hi देख रहा था, उसके चेहरे पर मुस्कान थी, थोड़ी देर बाद उसने फिर puchha)Wo कोण थी? (उसके चेहरे पर जैसे जलन थी)

शिव : (उनकी और देख kar)Kon?

जहान्वी : वो hi जो तुम्हे छोड़ने आयी थी, सच में क्या वो तुम्हारी गफ थी?

शिव : (मुस्कुराते hue)Aisa नहीं पूछना चाहिए, वो कोई भी हो सकती है, अगर कोई आपके बारे में मुझे पूछे तो क्या बताना चाहिए?

जहान्वी : मुझे क्या प्रॉब्लम है, तुम बता सकते हो.

शिव : अगर कोई आपको मेरी गॉड में बैठा हुआ देखे, फिर मुझे पूछे तो? (जहान्वी एकदम झेप गयी और आगे देखने लगी, ुस्ख़ा चेहरा लाल हो गया था, पर हलकी सी मुस्कान भी थी)

जहान्वी : वो तो में तुम्हे गाड़ी सीखा रही थी. (उसने अपनी सफाई दी)

शिव : देखनेवाले को क्या ये सही लगेगा? (वो कुछ नहीं बोली, बस आगे देख कर मुस्कुरा रही thi)(Mene भी सोचा की मुझे बात को नहीं खींचना चाहिए, क्यों की थी तो वो मेरी टीचर, उनके बारे में कोई गलत सोचे में ये नहीं चाहता था, तो में कहा) वो मेरी टीचर थी, स्कूल में पद्धति है मुझे, अच्छी बनती है मेरी तो छोड़ने आयी थी. आप मिली भी तो थी उस वक़्त जब सब इकठ्ठा हुए थे.

जहान्वी : अरे है, मुझे लगा था की में जानती हु, पर वो दूर थी तो शायद पहचान नहीं पायी. (फिर मुस्कुरा kar)Matlab वो तुम्हारी गफ नहीं है, तो फिर कोण है तुम्हारी गफ?

शिव : मेने कहा न की किसी के बारे में ऐसा नहीं पूछना चाहिए, में किसी को बदनाम नहीं करता.

जहान्वी : बड़े सरीफ बन रहे हो, एक साथ कितनो को घुमा रहे हो वो सही है?

शिव : आपने कब देखा की बहोतो को घूमता हु.

जहान्वी : तुम्ही बता रहे हो, तुमने कहा की तुम्हारी गफ है, और जहा तक मुझे लग रहा है वो लड़की जो हमारे वह काम करती है, वो तो नहीं हो सकती, तो उसके साथ भी और अपनी गफ के साथ भी...

शिव: आपको नहीं लगता की आप मुजमे कुछ ज्यादा hi दिलचस्पी ले रहे हो, और अगर में उनको घुमा भी रहा हु तो भी में उनकी इज्जत नहीं उछलता, अगर में आपके बारे में किसी को बताऊ तो क्या अच्छा लगेगा आपको?

जहान्वी : ऐसा तो कुछ नहीं हमारे बिच जो बताना हो. (मेने कोई जवाब नहीं दिया, जानवी ने एक दो बार मुझे dekha)Kyu चुप हो गए, है क्या कुछ बताने को? (में फिर भी कुछ नहीं बोलै, हम दोनों ग्राउंड में आ गए थे, वो गाड़ी से उतरी, में भी उतरा और ड्राइवर साइड चला गया, दो दूसरी और चली aayi)Jawab नहीं दे रहे हो तुम.

शिव : (ड्राइविंग सीट पर बेथ गयाथा me)Kya जवाब दू, आप hi कह रहे हो न की कुछ बताने को नहीं है. (मेने उनकी और देख कर कहा)

जहान्वी : (अपनी नज़ारे झुकाये, हलकी मायूसी se)Kya है बताने को? (में कुछ नहीं बोलै, और गाड़ी को गियर में डाला और चलाया तो जतका खा कर गाड़ी रुक गयी, जहान्वी ने देखा, मेने फिर गाड़ी स्टार्ट की, फिर रुक gayi)Kya हुआ? उस दिन तो सही चला रहे थे. (शायद उनकी बातो से मेरा कंसंट्रेशन भांग हुआ था, में चाहता तो कर सकता था पर मेरे मान में कुछ और चलने लगा, में ये देखना चाहता था की आखिर वो चाहती क्या है)

शिव : लगता है फिर भूल गया. (जहान्वी की धड़कने तेज होने लगी थी, वो जानती थी की पिछली बार उसको सीखने के लिए उसकी गॉड में बेथ गयी थी, पर इस बार उसे शर्म आ रही थी, उस दिन तो पता नहीं कैसे हिम्मत कर गयी थी, पर अभी शर्म भी आ रही थी और झिझक भी थी, उसका दिल तो था पर फिर भी वो नहीं करना चाहती थी)

जहान्वी : (उसने झिझकते हुए kaha)Dhyan से करो हो जायेगा. (मेने फिर से तरय किआ, पर अब में जानबुज कर गलत hi कर रहा था, थोड़ी देर बाद मेने मायूसी से उनको देखा, उसने शर्म से नज़ारे झुका ली, थोड़ी देर वो खामोश रही, फिर आस पास देखने लगी, में उनकी नजरो को समाज गया)

शिव : कोई नहीं है. (मेने हलके से kaha)(Jhanvi झेप गयी, वो निचे उतरी और ड्राइवर सीट की और आ गयी, मेने दरवाजा खोल दिया, उसने फिर आसपास नजर दौड़ाई, दोपहर का टाइम था तो वैसे भी कोई नहीं था, उसने अपने जुटे निकले और अपनी सीट की और फेंक दिए)

जहान्वी : (हलकी कनपटी आवाज me)Apane शूज उतर दो.

शिव : क्यों?

जहान्वी : ताकि कितना परेसुरे देना है, कहा रुकना है वो अच्छे से समाज आ जाये. (मेने भी अपने शूज उतर दिए और सिडेवाली सीट के सामने जगह में रख दिए, फिर मेने उसकी और देखा और सीट को थोड़ा पीछे सरका दिया, दिल की धड़कने तो मेरी भी बढ़ रही थी, और उसकी शर्म और हिचकिचाहट न चाहते हुए भी मेरी उत्तेजना बढ़ा रही थी, मेरा लुंड सिर्फ सोच कर hi खड़ा होने लगा था, और ऊपर से आज में ट्रैकपांत पहने था जो जीन्स की तरह टाइट भी नहीं था, वो अंदर आयी और मेरी गॉड में बैठने लगी, उसके शरीर से आती परफ्यूम की खुसबू मेरी सांसो में घुलने लगी, जब वो मेरी झांघो पर बैठी तो उसके कूल्हों की नर्माहट और गर्माहट दोनों मुझे महसूस हुई, मेरी आंख बंद हो गयी)

(जहान्वी जैसे hi उसकी गोदमे बैठी तो उसको उसके पैरो के बिच वो कहता महसूस हुआ, वो बिलकुल उसके पैरो के बिच छूट के पास में था, उसकी भी आंखे बंद हो गयी और शरीर कैंप सा गया, उसका शरीर पर कण्ट्रोल नहीं रहा और वो धाम से उसकी गॉड में बेथ गयी, दोनों hi चुप थे, कुछ पल ऐसे hi बाईट तो दोनों को होश आया और दोनों हिचकिचाने lage.)(Mene दरवाजा बंद किआ, और नार्मल होने का प्रयास किआ, पर वो संभव नहीं था, में जनता था की मेरा लुंड खड़ा हो चूका है और मुझे महसूस भी हो रहा था की वो उनके निचे दबा हुआ है, उन्हें भी पता चल गया होगा, पर में कुछ नहीं कर सकता था, जब थोड़ी देर तक उन्होंने कुछ नहीं किआ तो मेने धीमे से कहा)

शिव : क्या हुआ?

जहान्वी : (हड़बड़ाते hue)K क क कुछ नहीं. (थोड़ी सीधे बैठने का प्रयास करने लगी पर वो लुंड उसकी छूट पर चूब रहा था, उसकी हालत ख़राब थी पर वो अपने आपको नार्मल दिखने का प्रयास करने लगी और boli)Apane पेअर क्लुछ पर रख दो (मेने रख दिया, उन्होंने भी अपना पेअर मेरे पेअर के ऊपर रख दिया, वो ठंडा ठंडा पाव मुज में गर्मी बढ़ने लगा, वो बहुत hi कोमल एहसास tha)Dusara पेअर एक्सेलरेटर पर रक्खो. (वो जिस तरह से बोल रही थी में महसूस कर रहा था की उनकी सांसे तेज चल रही है. मेने दूसरा पेअर भी रख दिया, उन्होंने भी अपना पेअर मेरे पेअर पर रख diya)(Jhanvi अपनी सांसो को कण्ट्रोल करते hue)Ab ध्यानसे महसूस करना (वो मेरी छाती पर अपनी पीठ टिकाये थे, मेरा चेहरा उनके चेहरे के साइड में hi था, मेरी सांसे भी तेज तेज चल रही thi)(Apane कंधे पर महसूस हो रही उन गरम गरम सांसो को महसूस कर के जहान्वी विचलित हो रही thi)(Unhone अपना पैर दबाया और क्लुछ को दबाया, गाड़ी गियर में डाली और फिर से अपने दूसरे पेअर को अक्सेलरेटर पर हल्का दबाया, और साथमे क्लोच्वाले पेअर को छोड़ने लगी, वैसे भी अब में जनता था, तो वो सब जान ने की बजाये में उनके शरीर को महसूस कर रहा था, मुझे सब पता था की मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए पर फिर भी इतनी हॉट लड़की अगर तुम्हारी गॉड में बैठी हो तो दिमाग कहा काम करता है, मेरा दिल कर रहा था की उसकी कमर में हाथ दाल के पकड़ लू, वैसे भी स्टेयरिंग तो उन्होंने hi पकड़ा था, मेरे दोनों हाथ खली hi थे., पर मेने अपने आपको संभाला, वो मुझे सीखने लगी, दो तीन बार करके भी दिखाया, फिर वैसे hi बैठे बैठे boli)Samaj में आया न?

शिव : हआ. (मेरी भी सांसे हलकी तेज thi)(Jhanvi उसकी तेज सांसो को महसूस कर रही थी और उसकी तेज सांसे बता रही थी की शिव के मान में भी कुछ चल रहा है, उसके गॉड में बैठने से वो गरम है, और उसका प्रमाण उसकी छूट के पास ुडहल कूद करता अंग था.)

जहान्वी : (बड़ी मुश्किल से अपने आपको संभल रही थी, अपनी सांसो को कण्ट्रोल करते hue)Ab तुम करो. (में थोड़ा सही बैठने लगा, और उसकी वजह से में हिला दुला तो मेरा लुंड और रगड़ खाने laga)(Jhanvi की आंखे बंद हो गयी, उसकी छूट से पानी रिस न सुरु हो गया था, अभी लुंड और छूट के बिच में स्कर्ट और पंतय थी, पर फिर भी उसको वो अंग महसूस हो रहा था., शिव ने उसकी बगल से हाथ निकलते हुए स्टेयरिंग को पकड़ा तो उसके स्तन को साइड से छू गए, उसका मान मचल रहा था, पर वो ऐसे तो आगे नहीं बढ़ सकती थी, उसे शर्म भी थी और झिझक भी, शिव ने अच्छे से गाड़ी को उठालिया, गाड़ी बंद नहीं हुई, उसे आश्चर्य hua)Fir से करो. (दोबारा भी शिव ने अच्छे से गाड़ी को उठा लिया, वो समाज गयी की शिव नाटक कर रहा था, उसने जान बुज कर उसको अपनी गॉड में बिठाया है, वो शर्मा ने लगी, तभी वह बारिश सुरु हो गयी, बदल तो कब के hi घिरे हुए थे, थोड़ी hi देर में बारिश तेज हो गयी, शीशे बंद थे तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं थी, बहार देखते hue)Y अचानक कैसे सुरु हो गयी?

शिव : अब मौसम है तो होगी hi. (बारिश का मौसम, तेज बारिश, दूर दूर तक कोई देखनेवाला नहीं और मेरी गॉड में बैठी हसीना, मेरा बहकना तो तय था, मेने अपने दोनों हाथ को अंदर की और दबाया, मेने जहान्वी को हलके से जकड़ा. उसने कोई रियेक्ट नहीं किआ बस बहार देख रही थी जैसे उसे पता hi न हो की में क्या कर रहा hu.)Bahot बारिश हो रही है न? (मेने बहार देखने का नाटक करते हुए उनसे और सात ते हुए कहा)

जहान्वी : (वो सब समाज रही थी पर अनजान बन रही thi)Hmmmmm, कुछ दिख भी नहीं रहा. (उसकी सांसे भरी हो रही thi)Tumhe मेरा वजन तो नहीं लग रहा? (वो बहार देखने का नाटक hi कर रही थी, उसका पूरा ध्यान तो अपने निचे चुभते उस अंग पर था, उसका मान कर रहा था की वो अच्छे से बेथ जाये और उस अंग को महसूस करे, पर वही शर्म और झिझक.)

शिव : (मुस्कुराते hue)Tumhara वजन तो फूल से काम है, कहती आती नहीं हो क्या?

जहान्वी : अच्छा इतना काम है, (कहते हुए वो शिव को परेशान करने के इरादे से अपने आपको निचे की और दबाने लगी ताकि वजन बढे, पर हुआ उल्टा, लुंड उसके अंदर और चुभ gaya)Shhhh. (हलकी सी सिसकी निकल गयी जो शिव ने भी सुनी)

शिव : क्या हुआ?

जहान्वी : कक कक कुछ नहीं. (उसने हड़बड़ाते हुए कहा)

शिव : (मेरी भी हालत ख़राब थी, पर में भी कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था, मुझे पता था की वो क्या सोच रही है, पर फिर भी में जल्दबाजी नहीं करना चाहता tha)Seat थोड़ी पीछे कर दू, लगता है बारिस इतनीजल्दी बंद नहीं होगी, पीछे भी झुका देता हु. (जहान्वी ने कोई जवाब नहीं दिया, मेने सीट और पीछे की और पीछे का हिस्सा थोड़ा झुका भी दिया, अब में पीछे हल्का लेट गया, पर वो सीधे hi बैठी रही, में उसकी पीठ को देख रहा था, सफ़ेद शर्ट में मुझे सफ़ेद ब्रा भी नजर आ रही थी, मेरी उत्तेजना बढ़ रही थी, मेरा लुंड कड़क हो गया था पर उसके ऊपर बैठने से मुझे दर्द भी महसूस हो रहा था, पर में कैसे कहता की मुझे दर्द हो रहा है, पर थोड़ी देर बाद मुझसे बर्दास्त नहीं हुआ तो मेने उनकी कमर पकड़ी और उन्हें थोड़ा ऊपर खिंच लिया ताकि मेरा लुंड उनकी झंघ के बिछ हो जाये, में ये करना नहीं चाहता था पर दर्द बरदास से बहार हो गया था, वो भी थोड़ी असहज हो गयी, में कोई सफाई तो दे नहीं सकता था की मेने ऐसा क्यों किआ, तो मेने धीमी आवाज में kaha)sorry. (जहान्वी बहोत शर्मा गयी थी पर क्या बोलती, उसने ऐसे दिखाया जैसे उसे कुछ पता hi न हो, पर अब लुंड उसकी झांघो के बिच था और शिव ने जब उसे थोड़ा उठाया था तो लुंड अब स्कर्ट को अंदर घुसेड़ता हुआ उसकी झंघ के बिछ आ गया था, उसने हलके से पेअर फैला दिए, ताकि वो अच्छे से एडजस्ट हो जाये. (दोनों चुप थे) एक बात पुछु?

जहान्वी : हम्म्म्म. (उसने जिस तरह से कहा ये साफ़ था की वो गर्म है)

शिव : आप गुस्सा क्यों थी? (में सीट से आगे हुआ, मेरी छाती फिर से उनकी पीठ से सात गयी)

जहान्वी : (जूठबोलते hue)Me कहा गुस्सा थी.

शिव : जूथ मात बोलिये, में जब आया तो उनको मेरे साथ में देख कर आप गुस्सा हुई थी, है न? (जहान्वी ने कोई जवाब नहीं diya)Me सच बोल रहा हु न (शिव ने अपना एक हाथ निचे लाया और उनके पेट पर दिया, जहान्वी कसमसा गयी पर बोली कुछ नहीं) बोलो न, गुस्सा क्यों थी?

जहान्वी : (उखड़ी सांसो se)Muje नहीं पता.

शिव : मुझेपता है (वो कुछ नहीं बोल रही थी बस लम्बी लम्बी सांसे ले रही thi)aapko जलन हो रही थी न? (जहान्वी ने एक बार पीछे देखा, फिर बहार देखने लगी, पर बोली कुछ nahi)Kyu जलन हो रही थी?

जहान्वी : (अपने आपको नार्मल दिखने का भरचक प्रयास कर रही थी) मुझे कोई जलन नहीं हो रही थी.

शिव : (मेने दूसरा हाथ भी निचे किआ और उनकी झंघ पर रख दिया, जहान्वी की आंखे बंद हो गयी, और सांसे tej)Juth बोल रही हो, बताओ माँ, क्यों जलन हो रही थी?

जहान्वी : मुझे नहीं पता (उसकी सांसे उखड रही thi)(Mene उनको अपने से चिपकाये हुए hi वापस पीछे हो गया और साथ में उन्हें भी अपने ऊपर लेता लिया, वो मेरे ऊपर लेट गयी, थोड़ी देर बाद मेने उनके टॉप के अंदर हाथ दाल कर उनके सपाट पेट पर हाथ rakkha)Shiiiiiiiv, शहहहहह.

शिव : हो रही थी न जलन?

जहान्वी : हाआआआ. (में हलके हलके उनके पेट को सहलाने लगा और साथ में उनकी झंघ को भी, मेने स्कर्ट को थोड़ा ऊपर किआ और उनकी नंगी झंघ पर अपना हाथ dabaya)Shhhhhh शीइइइइइव.

शिव : क्या हुआ?

जहान्वी : कोई आ जायेगा? (मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी, वो रोक नहीं रही थी बस दर रही थी की कोई आ न जय, उनकी झंघ को सहलाते हुए में हाथ ऊपर उनकी छूट की और ले जाने लगा, झंघे एकदम चिकनी मक्खन जैसी थी) शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह, कोई आ जायेगा, प्लीज मात करो.

शिव : अगर वो मेरी गफ होती तो? (वो कुछ नहीं बोली, में सहलाते रहा और मेरा हाथ निचे उनकी झंघ की जोड़ तक पहुंच गया था, उन्होंने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया, पर रोक नहीं रही thi)Jalan क्यों हो रही थी?

जहान्वी : शहहह, पता नहीं, शहहह मुझे नहीं अच्छा लग रहा था, मुझे नहीं बर्दास्त हो रहा था, शहहहहह.

शिव : (में फिर हाथ छूट से दूर ले जाने लगा तो उसने मेरा हाथ रोक लिया और वापस छूट की और ले जाने lagi)Aapko पता है की मेरी गफ है फिर भी मेरे साथ क्यों कर रही ho?(Mene हलके से झंघ को मसाला)

जहान्वी : शह्ह्ह्हह्ह , पता नहीं.

शिव : अगर मेने कुछ कर दिया तो?

जहान्वी : कर तो दिया थाहा.

शिव : क्या, कब?

जहान्वी : दो बार तुमने मुझे किश की थीईई.

शिव : पर वो तो सिर्फ किश थी. (में अपने हाथ को पेट पर भी ऊपर ले जाने लगा और मेरे हाथ बोओब्से खींचे पहुंच गए थे, मुझे उनकी गोलाई भी महसूस हो रही थी)

जहान्वी : शहहह क्या किश सिर्फ होती है, कितना जोर से की थीई. (उसकी सांसे चढ़ रही थी, आंखे भी ऊपर हो रही थी)

शिव : आपको अच्छा नहीं लगा था न?

जहान्वी : में पागल हो गयी थी शिव, मेने पहले कभी वैसा महसूस नहीं किआ था, पूरी रात सो नहीं पायी थी, बार बार वही महसूस हो रहा था. (मेरे हाथ पर अपना हाथ मसलते हुए, और अब उनकी कमर में भी हलचल हो रही थी, मुझे लग रहा था की वो अपनी कमर हिला कर अपनी छूट को मेरे लुंड पर रगड़ने की कोशिस कर रही थी, में अपने हाथ को आगे बढ़ाते हुए उनकी पंतय के ऊपर से hi छूट पर ले गया, वो पूरी गीली थी तो मेने उसे दबा diya)(Jhanvi एक दम से होश में आयी, और वो कड़ी होने लगी, और मेरा हाथ भी छूट से हटड़िया, और मेरा हाथ जो टॉप के अंदर था उसे भी बहार निकलने लगी तो मेने भी बहार निकल दिया, मेरी समाज में नहीं आया)

शिव : क्या हुआ?

जहान्वी : क क कुछ नहीं. (बहार बारिश काम हो चुकी थी पर बंद नहीं हुई थी, उसने दरवाजा खोला और बहार चली गयी, मेरा लुंड अभी भी खड़ा hi था)

शिव : क्या हुआ, कुछ बोलो तो.

जहान्वी : तुम उस और बेथ जाओ, हम बाद में आ जायेंगे. (वो बारिश में हलकी भीग रही थी तो में बहार निकला और दूसरी और अंदर चला गया, वो भी वापस बेथ गयी)

शिव : क्या हुआ, कुछ तो बताओ.

जहान्वी : (झिझकते hue)meri सांडले देना. (मेने उसका हाथ पकड़ लिया, उसने एक बार मेरी और देखा फिर नज़ारे झुका ली)

शिव : तुम्हे मेरा छूना अच्छा नहीं लगा (वो कुछ नहीं boli)Kuchh तो बोलो yaar.(Me हल्का गुस्सा होने लगा)

जहान्वी : प्लीज हम बाद में बात करेंगे.

शिव : (हलके गुस्से se)Nahi अभी बताओ, सॉरी अगर मेरे छूने से प्रॉब्लम हुई हो तो, पर मुझे लगा शायद तुम भी यही चाहती थी. (में आप से तू पर आ गया था)

जहान्वी : प्लीज शिव, हम बाद में बात करंगे, मेरे जुटे दो. (मुझे इतना गुस्सा आ रहा था की क्या कहु, पर मेने उसके जुटे दिए, वो पहन ने लगी तो मेने भी अपने शूज पहने, उसने गाड़ी चला दी, न वो कुछ बोली न में, में उसे बार बार देख रहा था पर वो मुझे इग्नोर कर रही थी, हम साइट पर वापस चले गए, बारिस बंद हो गयी थी, उसने गाड़ी बहार hi रोक दी, में समाज गया और गाड़ी से उतर गया, में अभी भी उसे hi देख रहा था, उसने मुझे देखा और kaha)Soryyy. (और वो गाड़ी ले कर चली गयी, मेरी कुछ समाज में नहीं आ रहा था)

शिव : क्या हुआ इससे, समाज में नहीं आया, पहले तो बोल रही थी की अच्छा लगा था, गरम भी हो गयी थी, अचानक क्या हो गया, वो खुद मेरा हाथ अपनी छूट की और ले जा रही थी, मेने क्या गलत किआ, वो hi तो छह रही थी, इन लड़कीओ का भी पता नहीं चलता.

में अंदर चला गया, बारिश की वजह से काम रुक, गया था, थोड़ी देर में वह रुका और फिर चला गया. मेरे दिमाग में बस जहान्वी का व्यव्हार hi घूम रहा था, आखिर ऐसी क्या बात हो गयी जो वो ऐसे चली गयी. में जूही के घर चला गया, मुझे सोच में देख कर उसने भी पूछा पर में क्या बताता. फिर हम दोनों स्टेडियम चले गए. हम दोनों पुरे मान से प्रैक्टिस करने लगे.

वह इनायत गुमसुम hi रहती थी, वो ज्यादा बात भी नहीं कर रही थी. शाम को जब नाज़िआ और दोनों काम कर रहे थे तो उसने पूछा.

नाज़िआ : क्या बात है, बड़ी खोयी खोयी रहती हो?

इनायत : (झेपते hue)K क कुछ नहीं भाभी, सही तो हु में.

नाज़िआ : पहले की इनायत और अभी की इनायत में बहोत फर्क आ गया है, कुछ तो हुआ है, बताना नहीं चाहती तो कोई बात नहीं.

इनायत : ऐसी बात नहीं है भाभी, वैसे में आपको सॉरी कहना चाहती थी.

नाज़िआ : (आश्चर्य से देखते hue)Sorry क्यों?

इनायत : मुझे आपके साथ ऐसा व्यव्हार नहीं करना चाहिए था, सॉरी भाभी.

नाज़िआ : (उसको समाज में नहीं aaya)Konse व्यव्हार की बात कर रही हो?

इनायत : वो hi, मेने आपको परेशान किआ न बहोत, वो बच्चा न होने के लिए. (नाज़िआ उसको देखने लगी, उसके चेहरे पर वाक़ई में दर्द था, नाज़िआ ने मुस्कुरा कर जवाब दिया)

नाज़िआ : भूल जाओ सब, जो गुजर गया वो गुजर गया.

इनायत : नहीं भाभी, शायद मेरे जीवन में जो भी हुआ था उसकी भड़ास में आप पर निकल रही थी, मुझे माफ़ कर दीजिये, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था (उसकी आंखे भी भर आयी, नाज़िआ अपना काम छोड़ कर फ़ौरन उसके पास गयी)

नाज़िआ : अरे क्या कर रही है, मेरी बहन जैसी है तू, कोई बात नहीं, मेरे दिल में कोई गिला नहीं है, भूल जाओ सब.

इनायत : (उनके गले लग kar)Sorry भाभी, एक औरत हो कर भी में आपका दर्द नहीं समाज पायी, मेरे साथ भले hi गलत हुआ ho,par में कैसे आपके साथ गलत कर गयी, मुझे माफ़ कर देना, में जानती हु, ऊपरवाला कभी मुझे माफ़ी नहीं बख्शेंगे, मेने गुनाह hi ऐसा किआ है.

नाज़िआ : पागल हो क्या, भूल जाओ सब, जब मेने तुम्हे माफ़ कर दिया तो ऊपरवाला भी माफ़ कर hi dega,kya बच्चो के जैसे रो रही हो.

इनायत : मुझे ये भी दर लग रहा था भाभी, की अभी तो अम्मी अब्बू है, फिर बाद में तो घर आपके हाथ में hi आ जाना है, कही आप मुझे निकल न दो, सॉरी.

नाज़िआ : (उसको बहो में भर ke)Kya क्या सोच रही हो तुम, में पागल हु जो ऐसा करुँगी, है पर ऐसा जरूर करुँगी की तुम इस घर से चली जाओ. (इनायत उनसे अलग हुई और उनकी आँखों में देखने लगी, वो मुस्कुरा रही थी) में अपनी प्यारी बहन को ऐसे थोड़ी न रहने दूंगी, कोई अच्छा सा दूल्हा धुंध के फिर से निकाह करवा के घर से निकल दूंगी.

इनायत : (उसकी आँखों से आंसू फिर छलक aaye)Bhabhiiiiii. आप बहोत अच्छी हो, सररययीय, प्लीज मुझे माफ़ कर देना. (नाज़िआ की आँखों में भी आंसू आ gaye)Sorry भाभी, सॉरी.

नाज़िआ : कितना सॉरी बोलोगी, में हु न, तू क्यों फ़िक्र करती है.

इनायत : भाभी, आप रुक जाओ न, क्यों वापस जा रही हो.

नाज़िआ : में हमेसा के लिए थोड़ी न जा रही हु, मेरी दवाइया चल रही है, अभी शुरुआती दिन है तो में कोई रिस्क नहीं लेना चाहती, फिर आ जाउंगी. (वो दोनों ऐसे hi बात कर रही थी की करीम भी काम से आ गया)

करीम : क्या बाते हो रही है, बड़ी खुस लग रही हो दोनों.

इनायत : आपको क्या, में अपनी प्यारी भाभी से बात कर रही हु.

करीम : (वो भी खुस था की आखिर घर में सब ठीक हो गया hai)Are सुनो, तुम अपना जाना थोड़े दिनों के लिए ताल सकती हो क्या?

इनायत : क्यों भाई जान, भाभी छूट नहीं रही है क्या, पहले भी नहीं जाने दिया, अभी भी रोक रहे हो. (उसने अपने भाई का मज़ाक उदय)

करीम : (मुस्कुराते hue)Nahi ऐसी बात नहीं है, मुझे ऑफिस में काम आगया है, मुझे बहार जाना पड़ेगा, तो पूछ रहा था, दो तीन दिन बाद जा सकते है.

नाज़िआ : पर मेरी दवाई भी ख़तम हो रही है और मुझे चेकउप के लिए भी जाना है.

करीम : में समझता हु, यहाँ चेकउप करवा लो.

नाज़िआ : नहीं, अभी में कोई रिस्क नहीं लेना चाहती, में उसी डॉक्टर के पास जाउंगी, एक दो महीने बाद भले डॉक्टर बदल दे.

करीम : (वो भी कोई रिस्क नहीं लेना चाहता tha)Ye तो मसाला हो गया यार.

इनायत : अरे इसमें क्या प्रॉब्लम है, इनके भाई को बुला लो, वो ले जायेगा न (इनायत ने भी मौके पे चौका मर दिया)

करीम : ये सही है.

नाज़िआ : अरे पर, वो बहोत बिजी रहता है, अगर ऐसा है तो में अकेले चली जाउंगी.

करीम : एक बार बात तो करो, फिर देखते है, वर्ण इनायत आ जाएगी, को इनायत.

इनायत : (उसकी तो खुसी का कोई ठिकाना नहीं था, चित भी मेरी और पैट भी meri)Ha है, मुझे कोई दिक्कत नहीं.

नाज़िआ : अरे पर फिर ammi(Uski सास) अकेले हो जाएगी, आज कल उनसे भी तो ज्यादा काम नहीं होता.

करीम : तुम एक बार बात तो करो, ऐसा हो तो में बात कर लू, या अब्बूसे बोल दू (अपने ससुर के बारे में)

नाज़िआ : में फिर बात करती हु.
 
अपडेट 162

स्टेडियम से हम घर जा रहे थे तो मुझे याद आया की मेरी फोटो लेनी है, तो मेने काव्य जी को फ़ोन किआ, वो घर पहुंच गयी थी तो मेने जूही को वही ले लेने के लिए कहा. वो ऑफिस में hi थी, किसी क्लाइंट के साथ बिजी थी, हम बहार बैठे, थोड़ी देर बाद वो लोग बहार निकले तो में और जूही अंदर गए.

काव्य : अरे शिव, आओ, कैसी हो जूही?

जूही : में ठीक हु, आप कैसी है?

काव्य : (मुस्कुराते hue)Ao बैठो (अपने टेबल के सामने की चेयर की और इस्सर करते hue)Aaj कैसे रास्ता भूल गए (शिव को देख कर)

शिव : ऐसा क्यों कह रही हो आप, आता तो हु.

काव्य : है बड़े आते हो, जब काम होता है तभी दीखते हो. (जूही मुस्कुरा रही thi)Juhi, क्या लोगी?





जूही : कुछ नहीं मैडम, पहले घर जाउंगी, नहाउंगी, उसके बाद, प्रैक्टिस से थके हुए है न, तो बाद में.

काव्य : कैसा चल रहा है इसका, कोई उम्मीद है की नहीं. (वो मुस्कुराते हुए शिव की और इस्सर कर के बोली, जूही ने भी शिव को देखा)

जूही : नहीं मैडम, अच्छा है, सिलेक्शन हो hi जायेगा, उम्मीद तो है.

काव्य : वैसे तुमसे बहोत डरता है ये (जूही शर्मा gayi)Sach कह रही हु में, कभी प्रैक्टिस मिस नहीं करता, कोई काम हो और बुलाओ तो कहता है की मैडम डाँटेंगी. क्यों दन्त टी हो इतना? (वो बस ऐसे hi बात कर रही थी, जूही ने फिर शिव को देखा, उसे शर्म आ रही थी)

जूही : नहीं मैडम, ऐसी कोई बात नहीं है.

काव्य : नहीं नहीं, बहोत अच्छा कर रही हो तुम, इसकी तंग खींचते रहना जरुरी है.

शिव : (मुस्कुराते hue)Itni लम्बी तो है, ज्यादा खींचनेगे तो और लम्बी हो jayegi.(Sab हसने लगे)

काव्य : कहो, कैसे आना हुआ?

शिव : वो आपके पास सब कागजात है न, उसमे मेरे बचपन की फोटो है, बस वो चाहिए थी.

काव्य : बचपन की फोटो, उसकी क्या जरुरत पद गयी?

शिव : कोई खास नहीं, वो किसी को देनी थी.

काव्य : किसको देनी थी, वो भी बचपन की फोटो?

शिव : वो बिना मैडम को. (जूही भी ध्यान से देखने लगी, उसे भी समाज नहीं आ रहा था)

काव्य : वो क्या करेंगी तुम्हारी बचपन की फोटो का?

शिव : (मुस्कुरा kar)Madam आप घर पर आ चुकी है, वकील की तरह क्यों तहकीकात कर रही है?

काव्य : (वो है padi)Nahi नहीं, ऐसी बात नहीं है, (फिर थोड़ी नाराजगी se)kyu मुझे जान न भी नहीं चाहिए, नहीं बताना चाहते हो तो कोई बात नहीं, में दे देती हु. (वो उठने लगी तो अचानक शिव ने उनके हाथ को पकड़ लिया जो टेबल पर था, शिव से भी ये अचानक hi हो गया था, वो थोड़ी नाराज लगी तो उस से हो गया, उसको फ़ौरन जूही का ख्याल आया पर अब हो गया था तो हो गया, काव्य वापस बेथ गयी, शिव ने हाथ छोड़ दिया)

शिव : ऐसी कोई खास बात नहीं है, आपको अजीब लगेगा. (वो कुछ नहीं बोली बस शिव को देख रही thi)Unko ऐसा लगता है की में उनका कोई रिस्तेदार hu.(Juhi और काव्य ने हैरानी से शिव को देखा)

काव्य : क्या कह रहे हो तुम, और ये तुम्हे छोटी बात लग रही है.

शिव : अरे पूरी बात तो सुनिए, वो खुद कह रही है की वो, जिसकी वो बात कर रही है वो, मर चूका है.

काव्य : तो फिर उन्हें ऐसा क्यों लग रहा है?

शिव : पता नहीं.

जूही : (कुछ याद करते hue)Bhabhi भी तो बोल रही थी की उन्हें ऐसा लगता है की वो तुम्हे जानती है.

काव्य : भाभी मतलब.

जूही : मेरी भाभी, ममता भाभी.

काव्य : उन्हें भी ऐसा लगता है, उन्हें ये कोण लगता hai?(Kavya को नहीं पता था की बिना और ममता रिलेशन में है) उनका भी कोई मर गया है क्या?

जूही : बिना मैडम और मेरी भाभी, दोनों आपस में नानन्द भाभी है.

काव्य : (चौंकते hue)Kya, क्या कह रही हो तुम, मतलब दोनों एक hi लड़के की बात कर रहे है.

जूही : वो मुझे नहीं पता. (काव्य ने शिव को देखा)

शिव : है, शायद. जब में इसकी भाभी से पहली बार मिला था तो वो मेरे बारे में पूछ रही थी, वो मुझे अजीब तरह से देख रही थी, जैसे पहचान ने की कोशिस कर रही हो, पर फिर उनको hi लगा था की ये उनका वहम होगा.

काव्य : पागल हो क्या तुम, वो दोनों आपस में रिलेटेड है, भाभी और ननद, मतलब एक hi घर से, और वो दोनों hi यही कह रही है, तुम्हे समाज भी है की ये कितनी बड़ी बात hai(Shiv को हल्का दांते हुए).

शिव : अरे, पर वो मर चूका है, और में जिन्दा हु.

काव्य : वो दोनों पागल थोड़ी न होगी जो ऐसा सोच रही होंगी, कोई तो बात होगी, और एक बार मन भी लिया जाये की उनको गलतफैमी है, फिर भी देखना तो चाहिए की सच्चाई क्या है.

शिव : वो कैसे?

काव्य : मुझे क्या पता, में भगवन थोड़ी न हु, मुझे उनसे बात करनी होगी.

शिव : फ़ोन करू?

काव्य : नहीं, फ़ोन पर नहीं, रूबरू मिलना होगा, मुझे नंबर दो उनका, हम मिल लेंगे. (शिव ने नंबर diya)Ruko, में फोटो देती हु (उन्होंने, पास की तिजोरी से एक फाइल निकली, और पेज पलट ते हुए एक पेपर निकला जिस पर उसकी फोटो लगी हुई thi.)Iski फोटो खिंच लो, एक hi तो फोटो है, और जरुआत हो तो कॉपी निकलवालेना.

शिव : (वो भी सोच में पद गया था, पर बोलै कुछ नहीं, उसने फोटो ले li)Thik है, हम निकलते है.

काव्य : अरे रुको तो, बस काम हुआ और चल दिए. (उसने नाराजगी से कहा)

शिव : में बाद में आ जाऊंगा, हमारी मैडम को लेट हो रहा होगा (जूही को देखते हुए उसने मुस्कुरा के कहा, तो काव्य भी मुस्कुरायी, जूही शर्मा गयी, और शिव की बाह पर मारा, सब फिर है diye).Thik hai,madam, चलते है. (काव्य ने शिर हिला कर हां कहा, हम दोनों बहार निकल गए, मेने स्कूटर चला लिया, जूही पीछे बेथ गयी, जैसे hi हम निकले उसने मेरी कमर में अपने नाख़ून गधा दिए)

शिव : आउच! क्या कर रही हो? (मेने दर्द से कहा, उसने बहोत जोर से नाख़ून गढ़ाए थे)

जूही : मेरे सामने hi हाथ पकड़ लिया, और पूछो तो कहते हो की हमारे बिच कुछ नहीं है. (उसने गुस्से से कहा)

शिव : अरे बनती है हमारी, अच्छी जानते है एक दूसरे को.

जूही : है है, बड़े जानते हो न, और वो भी, कितनी बड़ी है, तुम्ही मिलते उसको? लड़कीअ नहीं मिलती क्या तुमको, एक वो मैडम, एक ये मैडम.

शिव : (मुस्कुराते hue)Ladkia तुम्हारी तरह गले पड़ती है, तो में दूर hi रहता हु. (मेने मुस्कुरा के कहा)

जूही : है बड़े हैंडसम हो न, (उसने देखा की शिव दूसरे रस्ते जा रहा hai)Ab ये किस और जा रहे हो?

शिव : वो दूसरी मैडम के पास. (शिव ने भी मज़े ले कर कहा, पर फिर उसको अपनी गलती भुगतनी पड़ी, उसके कमर में फिर बड़े बड़े नाख़ून घुस gaye)Ouchhhhh! क्या कर रही हो, बिल्ली की तरह नाख़ून मर रही हो.

जूही : बिल्ली नहीं हु में, शेरनी हु, खा जाउंगी पूरा समजे. (में मुस्कुराया, हम दोनों बिना मैडम के घर पहुंच गए, मेने स्कूटर पार्क किआ, बाजु के घर के लोग हमें देख रहे थे, कोई आया था तो वो लोग उन्हें सीऑफ कर रहे थे, मेने बेल्ल बजायी, थोड़ी देर में मैडम ने दरवाजा खोला, उनके हाथ में अंता लगा हुआ था, शायद वो आता गुंड रही थी)

बिना : (शिव को देख कर एकदम खुस हो gayi)Shiiiiiv (तभी उसकी नजर जूही पर पड़ी, वो थोड़ी संभल gayi)Juhiii, आओ, व्हाट ा प्लेसंट सरप्राइज.

जूही : (अंदर जाते hue)Aaj ये सबको सरप्राइज करने hi निकला है.

बिना : (मुस्कुराते hue)Aisa क्यों कह रही हो, कहा गए थे पहले.

शिव : अरे कुछ नहीं, ये तो बस ऐसे hi बोलती रहती है.

जूही : तुम्हे क्या, में जो भी कहु, में अपनी भाभी की भाभी से बात कर रही हु समजे. (उसने थोड़ा नखरे से कहा)

बिना : (मुस्कुराते hue)Tum दोनों बैठो, में हाथ धो कर आती हु.

शिव : आप काम कर रही थी, आप काम करो, हम अंदर hi आते है.

बिना : (बिना किसी फॉर्मेलिटी ke)Thik है, आ जाओ, आता गुंड रही थी, तुम दोनों भी यही खा लेना, बना देती हु.

जूही : अरे नहीं भाभी, हम तो बस ऐसे hi मिलने आये थे, इसको कोई काम था, में भी घर जा कर बनलूँगी.

बिना : तुम्हे भी बना न hi है न, यहाँ खा लेना. (वो सब किचन में आ गए, शिव ने खुद पानी लिया और जूही को भी दिया, जूही ने आंखे दिखाई और पानी ले लिया)

जूही : नहीं, अभी तो नहाना भी है, पशीने से कपडे सरे चिप छिपे हो रहे है.





बिना : (हल्का मुँह बनाते hue)Aisa भी नहीं कह सकती की मेरे कपडे पहन लेना, कितनी लम्बी हो तुम. (जूही बस muskurayi)Par खाना आज तुम मेरे साथ hi खाओगे.

शिव : आप दोनों खा लेना, मेरा तो घर पर सब इंतजार करेंगे, अच्छा वो में फोटो देने आया था. वैसे में आपको व्हाट्सप कर देता हु.

जूही : जब व्हाट्सप hi करना था तो यहाँ तक लम्बे क्यों हुए?

शिव : तुम्हे क्या प्रॉब्लम है, इस बहाने से में मैडम से मिल भी लिया, और दूसरी भी बात करनी थी. (जूही ने फिर मुँह बनाया, बिना हसने lagi)Wo छुट्टी की बात हो गयी?

बिना : है हो गयी, प्रिंसिपल ने हामी भी भर दी. (उसने आता साइड में रखदिया और सब्जी uthayi)Chalo बहार बैठते है. (हम सब बहार आ गए)

शिव : और एक बात, वो काव्य मैडम, वकील है न वो, वो आपसे मिलना चाहती है. फ़ोन करेगी आपको.

बिना : मुझसे क्यों मिलना है उन्हें?

शिव : वो में फोटो लेने गया तो उन्होंने मुझसे पूछा तो मेने वजह बताई, उसी बारे में बात करना चाहती है.

बिना : (थोड़े टेंशन me)Kya बताया? (जूही की नजर में भी ये बात आयी)

शिव : यही की आपको वो आपके रिस्तेदार लड़के के बारेमे शक है, बस.

बिना : तो उनको क्यों मिलना है?

शिव : वो बस मिलना चाहती है. आप बस मिल लेना.

बिना : (थोड़ा टेंशन me)Par तुमने बता तो दिया, अब क्यों मिलना चाहती है?

शिव : आपको कोई परेशानी है, अगर आप को नहीं मिलना तो में बोल देता हु उन्हें, वो बस मेरी फ़िक्र कर रही थी, इस लिए उन्हें मिलना था, मेरी बात सुन कर उन्हें ये मटर बहोत बड़ा लगा, मेरी जिंदगी से जुड़ा है न. मेने तो कहा की ये बस वहम है, पर वो बोली की आप लोग ऐसे hi थोड़ी न सोच रहे होंगे, वो वकील है न, ऐसे देखने की उन्हें आदत हो गयी है, मिल लेना आप, डरनेवाली कोई बात नहीं है.

बिना : में क्यों दारू, बस अजीब लग रहा है, और कुछ नहीं (में ऐसा क्यों सोच रही हु उसके पीछे मेरे पर्सनल रीज़न है, उन्हें में थोड़ी न बता सकती हु की तुम्हारी वजह से हम सब माँ बन रही है)

शिव :फिर भी आपको लगता है की आप नहीं मिलना चाहती तो फ़ोन पर बात कर लेना और बता देना.

बिना : हम्म्म्म.

शिव : अच्छा चलते है हम.

बिना : ऐसे कैसे, बैठो तो, दूध बनती हु में.

शिव : नहीं, वो तो जूही मैडम का स्पेशल दूध पीना पड़ता है.

जूही : (उसकी बाह पर मरते hue)Pagal, कुछ भी बोलता है (बिना की और देख kar)Wo इस वक़्त दूध और अंडे साथमे देती हु न इस लिए कह रहा है.

बिना : वो तो मेरे पास भी है, अंदर hi है, जाओ तुम खुद बना लो. (जूही कड़ी हुई और किचन में अंदर चली गयी)

शिव : ((मैडम के हाथ पर हाथ रख kar)Kyu परेशान है, नहीं मिलना तो में मन कर देता hu(Usne धीमी आवाज में कहा)

बिना : (किचन की और देखा फिर boli)Are पर में ये थोड़ी न बोल सकती हु की हम सब तुम्हारी वजह से माँ बन रही है, पागल हो तुम भी.

शिव : आप को ये थोड़ी न बोलना है, बस जनरल बात कर लेना.

बिना : वो वकील है, और उन्हें क्यों इतनी दिलचस्पी है (उन्होंने घर कर शिव को देखा, शिव ने नज़ारे झुका ली, बिना ने उसकी बाह पर mara)Sudhar जाओ. (किचन से आती जूही ने ये देख लिया)

जूही : एक दो मेरी और से भी मारो. (बिना झेप गयी)

शिव : (चिढ़ाते hue)Meri और से भी मारो वाली, तुम्हे पता भी है की इन्होने क्यों मारा?

जूही : मुझे जान न भी नहीं है, इतना तो जानती hi हु की तुम मार खाने लायक hi हो.

बिना : तुम दोनों का यही चलता रहता है क्या?

शिव : पहले ये ऐसी नहीं थी, पता नहीं अभी अभी थोड़े टाइम से ऐसी हो गयी है.

जूही : तुम हो hi ऐसे, सुधरोगे नहीं तो मार खाओगे hi. (बिना फिर झेप गयी, उसने भी तो यही कह कर मारा था, वो नज़ारे झुकाये, सब्जी काटने लगी, जूही ने गिलास दिया और दोनों ने दूध पि लिया) अच्छा भाभी, में इसको छोड़ कर कपडे चंग कर के वापस आती हु.

बिना : ठीक है, और यही सो जाना.

जूही : ठीक है. (हम दोनों बहार निकले, मैडम बहार आयी, उन्हें हम bye कह के निकल गए, रस्ते भर वो मुझे सुना रही थी, हम उसके घर पहुंच गए, मेने बहार hi स्कूटर रोका और उतरने laga)Yaha क्यों रोका, अंदर चलो.

शिव : नहीं में चलता हु.

जूही : चलो बोलै न (हुकुम देते hue)sab का ख्याल है, बस में नहीं दिखती, चलो अंदर. (मेने मुस्कुराते हुए स्कूटर अंदर लिया, जैसे hi घर के अंदर दाखिल हुए उसने मुझे दीवाल के सहारे खड़ा कर दिया और मेरे होठो पर टूट पड़ी,





मेने उसकी कमर पकड़ तो उसने किश करते हुए hi मेरे हाथ पर मारा जैसे कह रही हो की छूना मात, पर में कहा मानता, मेने उसको अपनी बहो में भर लिया, वो मेरे हाथ छुड़ाने का प्रयास कर रही थी पर किश किये जा रही थी, मेरे हाथ छुड़ाने के प्रयास में उसकी सांसे भी फूल गयी तो उसने होठ छुड़ाए और जोर जोर से सांसे लेने लगी, हम दोनों थोड़ी देर वैसे hi खड़े रहे, उसने मेरी आँखों में dekha)Mene मन किआ था न. (उसने घर कर मुझे देखते हुए कहा)

शिव : अगर तू शेरनी है तो में भी शेर हु, अपनी मर्जी का मालिक, जब जो दिल चाहेगा में करूँगा सामजी, ज्यादा उड़ मात, वर्ण ऐसे दबोच लूंगा न तो हिल भी नहीं पायेगी. (वो मुस्कुरायी)

जूही : चल साथ में नहाते है (उसने नटखट सा मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : वो भी करूँगा (उसके गाल से बल हटा कर पीछे करते hue)Abhi मुझे जाना है, घर बोलै भी नहीं है, सब रह देख रहे होंगे.

जूही : (मेरे शाइन पर अपना सर रखते hue)I लव यू.

शिव : लव यू तो बेबी. (हम दोनों थोड़ी देर वैसे hi रहे, फिर मेने kaha)Ab इजाजत हो तो में जाऊ? (उसने मेरी और देखा और हलके से मेरे होठ पर किश करते हुए)

जूही : Bye.

शिव : (मेने भी उसके होठो पर किश ki)Bye.

में वह से बहार निकला, वो दरवाजे पर कड़ी थी, मेने आगे जा कर मुद कर देखा तो उसने मुझे फ्लाइंग किश दी, मेने भी मुस्कुराते हुए दी और दौड़ लगा दी. में घर पंहुचा, सब काम में लगे हुए थे, खाने की तयारी चल रही थी. में नहाने चला गया, बाथरूम में था तो मुझे जूही की साथमे नहाने वाली बात याद आयी, में मुस्कुराया और नहाने लगा. सब खाने के लिए मेरा hi वेट कर रहे थे तो में सीधे खाने चला गया. हम खा hi रहे थे की मेरे फ़ोन की रिंग बजी, मेने देखा तो नाज़िआ दीदी का फ़ोन था.

शिव : Hello.

नाज़िआ: Hello (बहोत प्यार से)

शिव : (मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ gayi)Kahiye.

नाज़िआ : क्या कर रहे हो?

शिव : खाना खा रहा हु.

नाज़िआ : ओह! सॉरी डिस्टर्ब कर दिया, में बाद में फ़ोन करती हु.

शिव : नहीं नहीं, बोलिये.

नाज़िआ : में पूछ रही थी, की परसो फ्री हो?

शिव : क्यों, क्या हुआ?

नाज़िआ : मुझे वह आना था, क्या तुम लेने आ शक्ति हो? वो उनको एक काम आगया है तो वो आ नहीं पाएंगे.

शिव : परसो (सोचते hue),parso मुझे शाम को निकलना है.

नाज़िआ : कहा?

शिव : एक कॉम्पिटिओं के लिए जाना है.

नाज़िआ : ओह! कोई बात nahi(Wo उदास हो गयी थी, उनकी आवाज से hi पता लग रहा था)

शिव : क्या हुआ?

नाज़िआ : अब्बू से भी बात की थी, वो कल बहार जा रहे है, दो दिन के लिए, कोई बात नहीं, करती हु कुछ. (उदास हो कर बोली)

शिव : (सोच kar)Kal रात को आ जाऊ और परसो सुबह जल्दी निकल जाये तो चलेगा?

नाज़िआ : (खुस हो kar)Ha है चलेगा.

शिव : ठीक है, तो में रात को बस से आ जाऊंगा, परसो, सुबह निकल आएंगे.

नाज़िआ : ठीक है, (बहोत प्यार se)Thank यू.

शिव : इसमें थैंक यू क्या, मिलते है फिर.

नाज़िआ : Ok bye.

शिव : हम्म्म, bye. (सब मुझे hi देख रहे थे, तो मेने उन्हें बता दिया, वह नाज़िआ ने भी अपने घर में बताया, सब साथ में hi बैठे थे, इनायत खुस हो गयी, उसके चेहरे पर खुसी चालक रही थी, थोड़ी देर बाद दोनों साथ में बर्तन कर रही थी तोभी इनायत मुस्कुरा रही थी)

नाज़िआ : क्या बात है, बहोत खुस हो?

इनायत : (झेपते hue)Nahi तो, नार्मल hi तो हु.

नाज़िआ : तुम्हारे चेहरे से hi लग रहा है, क्या बात है? (नाज़िआ ने नॉर्मली hi पूछा था)

इनायत : क कोई बात नहीं है भाभी. (वो निचे देखते हुए बर्तन साफ़ करने लगी, नाज़िआ ने भी ज्यादा नहीं पूछा, उसे कहा पता था की शिव की वजह से चेहरे पर खुसी है)

मेने खाना खाया, मोबाइल देख रहा था की वैस्वी का मश्ग आया.

वैस्वी : hi.

शिव : Hi.

वैस्वी : मोबाइल हाथ में hi था क्या?

शिव : है, अभी खाना खाया, पढ़ने बेथ रहा था तो सोचा मोबाइल चेक कर लू. कैसे याद किआ?

वैस्वी : अकेले हो?

शिव : है, रूम में hi हु, कहो. (तभी सामने से कॉल आने लगी, वैस्वी hi thi)Hello.

वैस्वी : (प्यार se)Kaise हो?





शिव : अच्छा हु, आज अचानक कॉल? क्या बात है?

वैस्वी : में अपने रूम में hi थी, मम्मी पापा बहार गए है, सोचा तुमसे बात कर लू.

शिव : हम्म्म, बोलो.

वैस्वी : ये संयम के साथ क्या हुआ है तुम्हारा?

शिव : क्यों, क्या हुआ?

वैस्वी : वो बहोत गुस्सा है तुमसे, मुझे भी कह रही थी की उस से दूर रहो, वो अच्छा नहीं है.

शिव : ऐसा क्यों कह रही थी, कुछ बताया?

वैस्वी : बताया तो कुछ नहीं. मेने पूछ तो बस इतना hi बोलती है की दूर रहो उस से.

शिव : वैसे कह तो ठीक hi रही है वो, में तो पहले से कह रहा था तुमको, में अच्छा नहीं हु.

वैस्वी : मजाक मात करो, वो मेरी बेस्ट फ्रेंड है, वो मन करेंगे तो में तुमसे बात नहीं कर पाऊँगी.

शिव : अभी तो कर रही हो. (मेने मुस्कुरा कर कहा)

वैस्वी : वैसे नहीं, वह स्कूल में. क्या प्रॉब्लम है उसकी, क्या किआ तुमने उसके साथ?

शिव : मेने उसको पकड़ कर किश कर लिया. (मेने मुस्कुरा कर कहा)

वैस्वी : मज़ाक मात करो, में सीरियस हु.

शिव : में भी सेरिओस hi हु, मेने सच में उसको किश कर दी थी. तुम्हे क्यों यकीं नहीं हो रहा?

वैस्वी : अगर ऐसा होता तो वो मुझे वैसा नहीं कहती, अगर तुमने उसे किश की होती तो वो खुस होती, न की naraz.(Usne रूठे हुए स्वर में कहा) बतावा क्या हुआ है?

शिव : मुझे नहीं पता यार, अचानक उसने बात करना बंद कर दिया.

वैस्वी : कुछ तो हुआ होगा न, वो पागल थोड़ी न है.

शिव : एक बात बताओ, मेने इतनी बड़ी बात कह दी की मेने उसको किश कर दिया और तुम्हे फर्क hi नहीं पड़ा.

वैस्वी : (सीरियस हो kar)Fark क्यों नहीं पड़ेगा, पर मुझे पता था की वैसा कुछ नहीं हुआ है, इसलिए मेने कहा.

शिव : अगर मेने सच में किश कर दी तो?

वैस्वी : तुम बहोत गंदे हो, में फ़ोन रखती हु. तुम सब एक जैसे hi होते हो.

शिव : कोण सब?

वैस्वी : सब लड़के, और कोण?

शिव : कैसे?

वैस्वी : जो पास में है, उसकी कदर नहीं, बस दुसरो के पीछे लगे रहना है.

शिव : मेरे पास में कोण है? (मेने मुस्कुरा कर कहा)

वैस्वी : मरूंगी में तुम्हे (उसने जूते गुस्से से कहा)

शिव : में तो बस पूछ रहा हु, गुस्सा क्यों हो रही हो?

वैस्वी : में नहीं हु क्या? (उसने शर्मा के कहा)

शिव : तुम कहा और में कहा, तुम इतने बड़े बाप की बेटी और में...

वैस्वी : ऐसी बाटे मात करो यार, में बड़े बाप की बेटी हु तो क्या मेरी गलती है, वो सब छोडो तुम वो में देख लुंगी, तुम ये संयम का कुछ करो, उसको क्या प्रॉब्लम है वो सोल्वे करो.

शिव : मुझे क्या पता यार. तुम पूछ लो.

वैस्वी : प्रॉब्लम तुम्हारी वजह से है तो तुम पता करो, में क्यों करू?

शिव : अभी वैसे भी मेरे पास टाइम नहीं है, बाद में देखता हु.

वैस्वी : क्यों टाइम नहीं है?

शिव : कल में बहार जा रहा हु, परसो भी स्कूल नहीं आऊंगा और उसके दो तीन दिन भी नहीं आ पाउँगा.

वैस्वी : क्यूँउउ???? (उसने घबरा के कहा)

शिव : कल में संयम की बहन को लेने जा रहा हु, परसो मुझे कॉम्पिटिओं के लिए निकलना है.

वैस्वी : तुम्हारा कुछ समाज में नहीं आता, एक और संयम तुमसे नाराज है, तुम उसकी hi बहिन को लेने जा रहे हो, मेरी तो कुछ समाज में नहीं आ रहा.

शिव : में बाद में देख लूंगा वो, कल मिलते है.

वैस्वी : वो कहा मिलने degi(Mayus हो कर कहा)

शिव : मेने जस्ट ऐसे hi कहा, bye बोलने से तो अच्छा है न की कहे की मिलते है.

वैस्वी : अच्छा, मिलते है, अरे सुनो. (उसने अचानक कहा)

शिव : है बोलो?

वैस्वी : ी लव यू. (उसने प्यार से कहा, आवाज से hi पता चल रहा था की वो मुस्कुरा रही है)





शिव : तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड तुम्हे मुझसे दूर रहने को कह रही है और तुम ी लव यू.

वैस्वी : वो तुम्हारा मटर है, मुझे क्या, मेरा उस से क्या लेना देना. मुझे जो लगता है वो मेने कह दिया, कल मिलते है (उसे उम्मीद थी की शिव भी सामने कहेगा, पर शिव ने कुछ और कहा तो वो थोड़ी मायूस हो गयी)

शिव : ठीक है मिलते है, और है लव यू तू.





वैस्वी : (एक दम खुस हो gayi)Ummmmmmmaaa.(phone को चुम कर कॉल काट दी और हाथ फैलाये गोल गोल घूमने लगी)

मेने भी मुस्कुरा कर फ़ोन रखदिया, और संयम के बारे में सोचने लगा, पता नहीं क्या हुआ है उसे. फिर में पढ़ने लगा.

वह लता, सरिता और गायत्री काम करने के बाद रूम में बेथ कर ऐसे hi बाटे कर रहे थे, लता का मान था शिव के पास जाने का पर ऐसे तो उठके नहीं जा सकती थी तो, बाते कर रही थी, फिर वही तीनो साथ में सो भी गयी. में भी सो गया. सुबह में तैयार हुआ और स्कूल के लिए निकल गया. वैसे भी मुझे पता था की दौड़ कर hi जाना है तो में थोड़ा जल्दी निकल गया, जब में संयम के वह पंहुचा तो वो स्कूटर पर बेथ hi रही थी, मेने एक नजर उनकी और डाली पर रुका नहीं और आगे दौड़ गया, संयम ने भी देखा और वैस्वी ने भी, वैस्वी का मान किआ की वो शिव को बैठा ले, पर संयम की वजह से वो कुछ नहीं बोली और स्कूटर बढ़ा दी. जब स्कूटर शिव से आगे निकला तो वैस्वी ने साइड से उसे देखा भी, थोड़ा आगे जा कर उसने संयम से पूछा

वैस्वी : हुआ क्या है तुम दोनों के बिच?

संयम : कुछ नहीं हुआ है. (उसने सपाट सा उत्तर दिया).

वैस्वी : कुछ बताएगी तभी तो समाज में आएगा. उसे भी कुछ नहीं पता है.

संयम : तुजे कैसे पता की उसे पता नहीं है?

वैस्वी : (झेपते hue)Wo वो मेरी बात हुई थी कल उस से. (संयम कुछ नहीं बोली) कुछ तो बोल, कुछ तो पता चले.

संयम : वो में नहीं बता सकती.

वैस्वी : ऐसी क्या बात है जो तू नहीं बता सकती.

संयम : में नहीं बता सकती, बस में इतना कहूँगी की वो अच्छा नहीं है, आगे तेरी मर्जी, कल से अगर तुजे नहीं लेने आना है तो मात आना. में अपने आप आ जाउंगी.

वैस्वी : और वो लड़का जो तुजे परेशान करता था, अगर फिर आ गया तो?

संयम : तो क्या, इस से तो अच्छा hi होगा.

वैस्वी : तू पागल हो गयी है क्या? क्या बोल रही है पता है तुजे?

संयम : सब पता है, में देखलूँगी अपना, मुझे किसी की जरुरत नहीं है, अगर तुजे उस से बात करनी है तो कर, पर इतना जरूर कहूँगी, एक दिन पछ्तायेगी.

स्कूल आ गया था तो दोनों की बात अटक गयी, वह महेश और हर्ष भी खड़े थे, दोनों ने उनसे hi भी कहा, और क्लास की और चली गयी. थोड़ी देर में शिव भी आ गया, उसने बैग रक्खा और एक नैपकिन से अपना चेहरा साफ़ किआ जिस पर पसीना था, थोड़ी देर वो धुप में भी खड़ा हो गया ताकि कपडे सुख जाये.

हर्ष : तू अकेले क्यों आया?

शिव : तो किसके साथ आता?

हर्ष : तू रोज़ तो उन दोनों के साथ hi आता था न, कोई झगड़ा हुआ है क्या?

शिव : ऐसी कोई बात नहीं, मेने hi मन कर दिया था, मुझे अपने गेम पर भी फोकस करना है. चलो क्लास में चलते है.

फिर क्लास चालू हो गयी, अटेंडेंस के बाद मैडम पढ़ने लगी, थोड़ी देर बाद उन्होंने सबको एक काम दिया, सब अपना काम कर रहे थे, उसने शिव को देखा जो अपने काम में लगा हुआ था.

बिना : (मान में सोचने lagi)Aisa क्यों हो रहा है मेरे साथ, एक तरफ तो में चाहती हु की शिव से अकेले न मिलु, पर जब कल वो जूही के साथ आया तब भी मुझे अच्छा नहीं लगा था, वो अकेले आता तो बेहतर होता ऐसा महसूस हो रहा था, क्या हो रहा hi मुझे. किस दुविधा में फंस गयी हु में.

वो ये सब सोच रही थी की पीरियड ख़तम हो गया और वो अपनी बुक्स ले कर चले गयी. रेसस्स में भी संयम और वैस्वी बात कर रहे थे.

वैस्वी : तुजे पता है, शिव आज नाज़िआ दीदी को लेने जा रहा है.

संयम : है पता है.

वैस्वी : मेरी कुछ समाज में नहीं आ रहा, एक और तो तू उस से मुझे दूर रहने को कह रही है और वो तेरी hi दीदी को लेने जा रहा है.

संयम : वो आप ने बोलै था, अब्बू भी नहीं है तो कोण लता.

वैस्वी : वो अगर इतना hi बुरा है तो बोल देती घर पे, की मन करदे उसको.

संयम : में नहीं कर सकती कुछ, आप को आने दो, में उनसे बात करुँगी.

वैस्वी : तेरा कुछ समाज में नहीं आ रहा.

उस दिन और ज्यादा बात नहीं हुई. दो पहर को में घर आ गया, मेने भी सोचा की जल्दी चला जाता हु ताकि जल्दी लौट सकू. मेने जूही को फ़ोन कर के बता दिया, और पवनसीर को भी की में आज साइट पर नहीं जा रहा, और दो तीन दिन भी नहीं जा पाउँगा. कारन जान कर उन्होंने भी कुछ नहीं कहा.

वह दोपहर में इनायत अपने कमरे में थी, उसे पता था की आज शिव आनेवाला है, एक और तो वो बहोत खुस थी, पर दूसरी और दर भी रही थी.

इनायत : कैसे मिलूंगी में उस से, घर पर सब है, अगर किसी को पता चल गया तो? (इसमें डरनेवाली क्या बात है, अकेले में थोड़ी न मिलना है) मिलना तो चाहती हु, सबके सामने तो क्या hi बात होगी (तुजे क्या बात करनी है जो अकेले मिलना है) पता नहीं. (अगर अकेले मिलने गयी और उस दिन जैसा कुछ हुआ तो) (इनायत का गाला सूखने लगा, उस रत जो हुआ था वो सोच कर hi, उसको याद आया की कैसे शिव ने उसकी योनि में ऊँगली की थी और उसने शिव का लुंड पकड़ा था, वो सोच कर hi उसके पशीने छूट गए, वैसे भी वो 21-22 सालकी एक कमसिन सी दिखनेवाली लड़की hi तो थी, काम उम्र में शादी हो गयी थी, वह भी उसे ज्यादा सुख नशीब नहीं हुआ था, वो कभी कभी hi उसके साथ वो सब करता था, उसको शिव का साइज देख कर भी दर लग रहा था, उसने इतना बड़ा पहली बार देखा था, वो अपने हाथ मसल रही थी, उसको बेचैनी हो रही थी, एक और मिलना भी था और दूसरी और दर भी था, लोगो का भी और उस बड़े अंग का भी) शायद वैसे तो मिल भी नहीं पाऊँगी (वो अपने आप को समजने लगी) वैसे भी घर पर सब है तो ऐसे कहा मिल पाऊँगी, उस दिन तो सब व्यस्त थे तो मिल ली थी. (वो अपनी उधेड़ बन में लगी हुई थी, नाज़िआ दरवाजा खोल कर अंदर आयी उसका भी उसे पता न चला)

नाज़िआ : किस सोच में डूबी हो? (अचानक हुई आवाज से वो चौंक गयी और दर के नाज़िआ को देखा, वो बिस्तर पर बेथ gayi)Are क्या हुआ, दर क्यों रही है?

इनायत : क कुछ नहीं भाभी, वो अचानक अपने बोलै न तो दर गयी.

नाज़िआ : इतना कहा खोयी हो तुम की मेरे आने का भी पता नहीं चला.

इनायत : नहीं कही नहीं, बस ऐसे hi.

नाज़िआ : कुछ हुआ है क्या?

इनायत : नहीं भाभी कुछ नहीं हुआ है, (बात को बदलते hue)Aap जा रही हो न, वो hi सोच रही थी. (उनका हाथ पकड़ ke)Ek वक़्त था जब आपको निकलने के लिए सब करती थी, और आज आप जा रही हो तो अच्छा नहीं लग रहा, बस यही सोच रही थी, और कुछ नहीं.

नाज़िआ : (उसके गाल पर हाथ रख kar)Pagal, जल्दी आ जाउंगी.

इनायत : वो कब आ रहे है, आपके भाई?

नाज़िआ : अभी थोड़ी देर पहले बात हुई थी, वो निकल गया है, दो तीन घंटे में आ जायेगा. (छेड़ते hue)Tu क्यों इंतजार कर रही है उसका?

इनायत : (एकदम से झेप gayi)M म में कहा इंतजार कर रही हु, में तो बस पूछ रही थी, ऐसे hi.

नाज़िआ : में भी तो ऐसे hi कह रही थी, दर क्यों रही है इतना. (वो जानती थी की कुछ तो है, तो उसने खिंचाई करने के इरादे से kaha)Tu तो ऐसे दर रही है जैसे चोरी पकड़ी गयी हो, सच में तो उसका इंतजार नहीं कर रही? (उसने मुस्कुरा कर कहा)

इनायत : (शर्मा gayi)Kya भाभी आप भी, छोटे है वो मुझसे.

नाज़िआ : (उसको एक और मौका मिल gaya)Matlab अगर छोटा न होता तो... (उसने जान बुज कर बात अधूरी छोड़ दी)

इनायत :(वो बहोत शर्मा गयी, और अपना मुँह छुपाने lagi)Kya भाभी आप भी.

नाज़िआ : (मुस्कुराते hue)Itna भी छोटा नहीं है वो, चाहो तो मिल लेना. (वो बस खिंचाई कर रही थी)

इनायत : (अपना मुँह अपने हाथ से छुपाते hue)Jao आप, मुझे बात नहीं करनी.

नाज़िआ : अरे बाप रे, तू तो ऐसे शर्मा रही है जैसे सच में मिलना चाहती है.

इनायत : भाभीईई. (इनायत की हालत ख़राब हो रही थी)

नाज़िआ : कहो तो में मदद करू??? (उसने और खिंचाई करते हुए कहा)

इनायत :आप जाओ, मुझे बात नहीं करनी.

नाज़िआ : (कड़ी होते hue)Thik है, जा रही हु, फिर कहना मात की भाभी ने मदद नहीं की.

इनायत : जाओ आप (उसने शरमाते हुए थोड़ी ऊँची आवाज में कहा)

नाज़िआ : जा रही हु. (जाते jate)Fir एक बार सोच लेना.

इनायत : जाओ आप. (नाज़िआ मुस्कुराते हुए बहार चली गयी, इनायत उठी और दरवाजा बंद कर दिया और चिटकनी लगा दी, और वही खड़े खड़े शर्मा के मुस्कुराने लगी, बिस्तर पर आकर उलटी लेट गयी और तकिये को दबोच liya)Jaldi आ जाओ याआर.





वह जहान्वी, शिव का इंतजार कर रही थी पर शिव नहीं आया, आज उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी की मश्ग कर के पूछे, वो बेचैनी में यहाँ वह घूम रही थी, जब काफी देर हो गयी तो उसे पता चल गया की वो नहीं आएगा, वो उदास हो गयी.





जहान्वी : क्यों नहीं आया वो, कल की वजह से तो गुस्सा नहीं है. (गुस्सा तो होगा hi, क्या जरुरत थी तुजे, क्या तू नहीं चाहती थी वो सब) है चाहती थी, पर में वैसी नहीं हु जैसी उसे चाहिए. (क्या मतलब है तेरा की वैसी नहीं हु) उस दिन वो बता रहा था न , उस लड़की के बारे में (भोली की बात कर रही थी) वो वर्जिन है, और जिस तरह से वो बोल रहा था मतलब उसको वैसी पसंद है, अगर वो आगे बढ़ता और उसे पता चलता की में विगिं नहीं हु तो वो क्या सोचता मेरे बारे में. (तुजे क्या फर्क पड़ता है की वो क्या सोचता है, तुजे कहा उस से शादी करनी है, और न तू कर भी शक्ति है, वैसे भी उसकी गफ है, वो बस तेरे साथ फिजिकल होना चाहता था, हो जाने देती, उस को भी क्या फर्क पड़ता) नहीं यार, पर वो क्या सोचेगा, में कैसी लड़की हु जो पहले hi ये सब कर चुकी है. (वो तेरा पति नहीं बन ने वाला जो ये सब सोच रही है, तू तो ये सोच की जो सही में तेरा पति बनेगा वो क्या कहेगा) उसकी टेंशन नहीं है मुझे, में पहले से hi बोल दूंगी, करनी है तो करे वर्ण भाड़ में जाये. (तो शिव को भी बोल दे, करना है तो करे वर्ण भाड़ में जाये) नहीं यार, वो बहोत अच्छा लगता है मुझे, वो मेरे बारे में ऐसा सोचे में बर्दास्त नहीं कर शक्ति. (ऐसा क्या हो गया है जो तू उसे इतना महत्व दे रही है) पता नहीं, पर जब भी सोचती हु कुछ बेचैनी होती है. (वैसे भी वो तुजपे गुस्सा हो गया होगा, तभी तो नहीं आया) ऐसा नहीं है, कोई काम होगा उसको (सोचती रह तू फालतू के बाते, जब जो करना है तब करती नहीं और फालतू में मेरा दिमाग ख़राब करती है.

वो थोड़ी देर ऐसे hi टहलती रही, निचे भी गयी, पिंकेश को भी पूछ की कोई मश्ग है क्या, उसे भी नहीं पता था, वो भी निकल गयी. उसकी फ्रेंड करुणा को फ़ोन किआ तो वो कैफ़े में बैठी थी तो वही चली गयी. वह और भी दोस्त थे.

करुणा : आज कहा से टाइम मिल गया मैडम को?





जहान्वी : कुछ नहीं यार, बस बोर हो रही थी तो आ गयी.

ध्रुव : (करुणा का बॉयफ्रेंड) तुम hi इस उम्र में काम में लग गयी, अभी तो एन्जॉय करने के दिन है यार. (जहान्वी जानती थी की वो उसके लिए लार टपकता है)

जहान्वी : (रूखी आवाज me)Tum करो एन्जॉय, वैसे भी उड़ने के लिए पापा कमाते hi है.

ध्रुव : तो गलत क्या है उसमे, क्या करेंगे वो इतने पैसो का, जवानी बार बार नहीं मिलती, बाद में अफ़सोस करने से तो अच्छा है अभी मोज़ कर ली जाये.

जहान्वी : पका मत यार, (करुणा की और देख ke)kaise झेलती है यार तू इसको.

ध्रुव : (दुबले meaning)Bade मज़े से झेलती है, क्या कहती हो (करुणा ko)(Baki सब हसने लगे)

करुणा : (जूते गुस्से se)Badtamiz, ऐसा बोलता है कोई. (सबके सामने ऐसा बोलना उसे अच्छा नहीं लगा था)

ध्रुव : जो है सो है, उसमे क्या शर्माना, सब दोस्त hi तो है, क्या कहती हो जहान्वी.

जहान्वी : है है है (जूठा हस्ते हुए), वैरी फनी, (एक वेटर को देख kar)Bhaiya, एक कैपेचीनो प्लीज, और है थोड़ी कड़क.

ध्रुव : लगता है, कड़क ज्यादा पसंद है tumhe(Kutil मुस्कान से दुबले मीनिंग में बोलते हुए)





जहान्वी : दन्त तोड़ दूंगी तेरे, (करुणा ko)samja इसको लिमिट में रहे अपनी. (करुणा उसको आंख दिखने लगी)

ध्रुव : अरे में तो कफ की बात कर रहा था यार. (कुटिल मुस्कान के साथ)

जहान्वी : ज्यादा स्मार्ट मात बन, वर्ण तेरा काट के तेरे hi पिछवाड़े में घुसेड़ दूंगी, समजा. (उसने ऊँगली से ऐसे इस्सर किआ की सब हसने लगे तो वो झेप गया) ये मात सोच की में बोल नहीं सकती, अगर बोन पर आयी न तो यही नंगा कर दूंगी.

ध्रुव : (वो अंदर से तो अपनी बेइज्जती से तिलमिला उठा था पर वो भी समझता था की वो कुछ नहीं कर सकता, वो मला की लड़की थी और वो खुद भी कितनी खतरनाक थी )सॉरी यार, में तो मज़ाक कर रहा था, दोस्तों में तो ये सब चलता है.





captivated

जहान्वी : (उसकी कॉफी आ गयी, उसने एक चुस्की ली और उसको घूरते हुए सोचने lagi)Ye है सेल फत्तू, खुद को बड़ा मर्द कहते है, और wo(Shiv) बेख़ौफ़, पकड़ कर कैसे निचोड़ दिया था मुझे, एक बार नहीं दो दो बार, क्या करू यार समाज में नहीं आ रहा, कस में वर्जिन होती. (उसके दोस्त सब अपने में लगे हुए थे और जहान्वी कॉफी पिटे हुए शिव के खयालो में hi डूबी थी)

में नाज़िआ के ससुराल वाले सहर पहुंच चूका था, शाम ढल रही थी, मेने पहले hi फ़ोन कर दिया था तो करीमभाई आनेवाले थे, मुझे लेने. मेने उन्हें फ़ोन किआ तो उन्होंने मुझे पार्किंग की और आने को कहा, वो एक बाइक लिए हुए थे, हम दोनों घर की और निकल गए. जब में घर पंहुचा तो आज थोड़ा अलग अलग लग रहा था, उस दिन सब सजा हुआ था और आज सब खली खली. हम दोनों अंदर गए तो उनके पिताजी मिल गए, मेने उनके पैर छुए, तो वो खुस हो गए.

अकर्मभाई : आओ आओ. (तभी उनकी बीवी भी बहार आयी तो मेने उनके भी पेअर छुए)

हाफ़िज़ा : जीते रहो, ालः हमेसा अपना करम बनाये रक्खे. बैठो बीटा. (आवाज लगा kar)Naziaaaa, शिव आ गया है, पानी तो ला बीटा.

नाज़िआ : (जो आता गुंड रही थी, तो इनायत को boli)Ja तो जरा. (इनायत का दिल धड़क उठा, अपने आपको कण्ट्रोल करते हुए उसने पानी का गिलास भरा और बहार आ गयी, जब उसकी नजर शिव से मिली तो उसने मुस्लिम तहजीब में आदाब का इस्सर किआ,





शिव ने सिर्फ सर हिलाया, वो हाथ में पानी का गिलास ले कर आयी थी, जब शिव गिलास लेने लगा तो दोनों की उंगलिअ आपस में छू गयी, दोनों के शरीर में हलचल हो गयी, दोनों ने एक दूसरे को पल भर देखा, इनायत ने शर्म से नज़ारे झुका ली. शिव ने पानी पिया और गिलास वापस दिया तो फिर उनकी उंगलिअ टकराई, इनायत उस छुअन को महसूस करते हुए शरमाते हुए अंदर भाग गयी. वो तेज तेज सांसे ले रही थी.

नाज़िआ : (उसकी ऐसी हालत देख कर सामान्य से hi puchha)Kya हुआ?

इनायत : (घबरा kar)K क कुछ नहीं भाभी. (वो अपने आप को काम में लगा कर व्यस्त दिखने का ढोंग करने लगी)

करीम : (किचन में झाकते हुए, नाज़िआ ko)Suno, में तैयार हो रहा हु, मुझे निकलना होगा.

नाज़िआ : खा कर नहीं जायेंगे?

करीम : नहीं, वह सब इंतजाम है, दो घंटे में तो पहुंच जाऊंगा, अच्छा सुनो, (नाज़िआ देखने lagi)Kaam है, जरा आना तो.

नाज़िआ : (आता गुंड चूका था to)Bas हाथ धो कर आयी. (करीम चला गया, नाज़िआ भी हाथ धो कर कमरे में चली gayi)Ji कहिये. (करीम ने दरवाजा हल्का सा बंद करते हुए उसको बहो में भर liya)Kya कर रहे हो, सब है.

करीम : (उसने हलके से नाज़िआ के होठो पर किश kia)Ja रही हो तुम भी, न जाने कब मिलना होगा फिर.

नाज़िआ : (मुस्कुराते हुए, हलके नखरे se)Itni अच्छी लगती होती तो छोड़ने को न सोचते.

करीम : भूल जाओ यार उस बात को, अब क्यों सुनती रहती हो. (हलकी नाराजगी से)

नाज़िआ : सुनाऊँगी, पूरी जिंदगी सुनाऊँगी, गलती की है तो सुन न तो पड़ेगा hi. (उसने प्यार वाले नखरे से कहा)

करीम : ठीक है, (उस से अलग होते हुए अलमारी से पैसे निकल कर उसके हाथ में देते हुए, जो 500 के नोट the)Ye रख लो (और अपने पर्स से एक डेबिट कार्ड भी निकल के diya)Jarurat पड़े तो इसमें से निकल लेना, पिन है 7877.

नाज़िआ : (प्यार से उसे देखते hue)Ye क्यों दे रहे हो?

करीम : हॉस्पिटल वगैरह में जरूर पडेगीना तुमको.

नाज़िआ : अब्बू है न.

करीम : अब तुम मेरी जिम्मेदारी हो, न की अब्बू की, रख लो. (वो कपडे पहन ने लगा, नाज़िआ ने पैसे और कार्ड वापस अलमारी में रख दिए, वो सोच रही थी की कितना फर्क आ गया है, सिर्फ उसकेमा बन ने से कैसे पूरा माहौल hi बदल गया है, उसे अपने अपनाये रस्ते पर अब कोई भी अफ़सोस नहीं रहा था, वो मुस्कुराते हुए बहार निकल गयी, थोड़ी देर बाद करीम भी बहार आ gaya)Achchha अब्बू में चलता हु. (शिव ko)Tumhe बाइक आती है?

शिव : है . (नाज़िआ भी बहार चली आयी, पीछे पीछे इनायत भी)

करीम : मुझे स्टेशन छोड़ डोज?

शिव : (खड़े होते hue)Ha है, क्यों नहीं.

करीम : (अम्मी अब्बू को देख कर) में चलता हु (नाज़िआ की और देख kar)Apana ख्याल रखना. (नाज़िआ बस मुस्कुरायी और है में गर्दन हिलायी)

शिव और करीम दोनों चले गए, शिव उसे स्टेशन छोड़ कर वापस आ गया. अकर्मभाई कही बहार निकले थे, नाज़िआ, इनायत और हाफ़िज़ा तीनो किचन में थी. बहार आहात हुई तो नाज़िआ समाज गयी की शिव वापस आया है.

नाज़िआ : सीईव.

शिव : (बहार से hi)Ha डीडीईई.

नाज़िआ : ऊपर जा कर फ्रेस होना हो तो हो जाओ, खाने में थोड़ी देर है.

शिव : ठीक है दीदी.

नाज़िआ : (इनायत ko)Ja तो जरा ऊपर का रूम खोल दे, वैसे तो रूम ठीक hi है पर जरा देख लेना. (इनायत का दिल तो जैसे धड़कन hi चूक गया)

इनायत : जी भाभी.

नाज़िआ ने तो सब नार्मल तरीके से hi कहा था, और हाफ़िज़ा को भी इसमें कुछ बुरा नहीं लगा था, पर जिसके मान में चोर हो उसको तो पता चलता hi है, इनायत धड़कते दिल से चाबी ली और बहार चली गयी, जब वो सीडीओ के पास पहुंची तो उसने देखा की शिव ऊपर पहुंच चुका है, वो धड़कते दिल से सीढिया चढ़ने लगी.
 
अपडेट 163

शिव पूरी सीढिया चढ़ चूका था जब इनायत वह पहुंची थी, उसे शिव की बैक दिखाई दी थी और वो रूम की और बच गया, इनायत की निगाहे अभी hi ऊपर hi थी, जहा से शिव अभी अभी उसकी आँखों से ोजल हुआ था, वो अपनी कमर को लचकते हुए धीमे कदमो से ऊपर चढ़ रही थी, जैसे जैसे वो ऊपर जा रही थी उसकी धड़कने तेज होती जा रही थी, उसको याद आ रहा था की कैसे उस दिन फ़ोन पर उसने बाटे की थी, वो याद करके उसके शरीर में अजीब सी तरंगे उठ रही थी, आखिर कर वो ऊपर पहुंच गयी, उसने देखा की शिव बंद दरवाजे के पास खड़ा है और जैसे hi उसके आने की आहत हुई उसने उसकी और देखा, पर उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी नज़ारे मिलाने की, वो शिर झुकाये आगे बढ़ी, एक पल शिव से नजर मिली तो उसकी हालत ख़राब हो गयी, वो नज़ारे न मिला पायी और फिर शर्म से शिर झुका लिया, है उसके चेहरे पर हलकी हलकी मुस्कान जरूर थी, वो जानती थी की शिव उसे hi देख रहा है, और ये बात उसे और विचलित कर रही थी. वो नज़ारे झुकाये hi वह पहुंची, शिव दरवाजे के सामने hi खड़ा था, और उसके सामने hi घूम कर खड़ा था, उसने बहोत धीमी और मधुर आवाज में कहा,

इनायत : जरा हटिये.

शिव : (वो बहोत शर्मा रही थी, वो नाजुक सी काली जैसी खूबसूरत लड़की थी, शिर पर कपड़ा लपेटे हुए थी जिस की वजह से वो और खूबसूरत लग रही थी, उसने मुझे हटने को कहा पर में उसको देखने में hi मसगुल था तो वैसे hi खड़ा रहा, उसने शर्मा के मेरी और देखा तो जैसे पल वही रुक गया)

इनायत : हटियेना, टाला खोलना है. (उसने शरमाते हुए धीमी आवाज में कहा तो में हड़बड़ा के हैट गया, वो मुस्कुराते हुए आगे बढ़ी और टाला खोलने लगी, पर टाला खुल नहीं रहा था, मेने देखा की उसके हाथ कैंप तहे है और चाबी टेल में जा hi नहीं रही थी, चाबी भी उसके हाथ से छूट गयी और निचे गिर गयी, में चाबी उठाने के लिए झुका और वो भी तो हम दोनों के हाथ एक दूसरे से टकरा गए, उसने शर्मा के हाथ खिंच लिए)

शिव : (मुस्कुराते hue)Me खोलता हु. (वो कुछ नहीं बोली और साइड में कड़ी हो गयी, मेने टाला खोला, और दरवाजा भी खोल diya)Aao. (वो बहोत शर्मा रही थी और गब्रहत भी साफ़ दिख रही थी, वो वही कड़ी rahi)Kya हुआ? (उसने फ़ौरन ना में शिर हिलाया और अंदर दाखिल हो गयी, में भी पीछे पीछे दाखिल हो गया) (वो सब और नजर घूमने लगी, उसकी धड़कने तेज तेज चल रही थी, वो जल्दी से यहाँ से निकल जाना चाहती thi)(Hamare बिछ हुई पिच्छली घटना औरलास्ट में फ़ोन पर हुई बात से मुझसे रहा नहीं गया और मेने उसे पीछे से अपनी बहो में भर लिया, वो पूरी कैंप गयी थी, और में महसूस कर प् रहा tha)Kya हुआ, इतना क्यों घभ्रा रही ho(Uski सांसे इतनी तेज चल रही थी की मुझे आवाज भी सुनाई दे रही thi)Us दिन फ़ोन पे तो बहोत कुछ कह रही थी, और अभी इतना घबरा रही है.

इनायत : (उखड़ी सांसो se)Muje जाना है.

शिव : चली जाना, बस थोड़ी देर रुको. (दिल तो इनायत का भी छह रहा था पर शर्म और दर से उसकी हालत ख़राब थी, जिस तरह से शिव ने उसे पकड़ा था वो छोटे से खरगोश के जैसे उसकी आगोस में गम हो गयी थी, उसको पता था की आज उसका शिकार होना तय है)

इनायत : (गभराते hue)Muje जाना है.

शिव : (उसको छोड़ते hue)Mene तो सोचा था की आप भी मुझसे मिलना चाहती है.

इनायत : (भले hi वो बोल रही थी की जाना है, जाना है, पर शिव ने उसे छोड़ दिया तो भी वो गयी नहीं वही कड़ी थी, उसने गभराते हुए kaha)Muje दर लग रहा है.

शिव : किस बात का दर लग रहा है?

इनायत : कोई आ जायेगा. (उसने घबराते हुए कहा)

शिव : क्यों कोई ऊपर आनेवाला है? (इनायत ने न में शिर hilaya)To फिर (कहते हुए मेने उसे अपनी और पलट दिया, वो सच में खूबसूरत thi)(Inayat ने एक पल देखा पर उसकी आँखों का सामना करने की जैसे हिम्मत hi नहीं थी, उसने नज़ारे झुका li)Apko पता है, आप बहोत खूबसूरत हो (इनायत सच में शर्मा गयी, वो मंद मंद मुस्कुराने लगी, वो उसके चेहरे की और झुकने लगा तो उसकी धड़कने तेज हो गयी, उसने घबरा के कहा)

इनायत : कोई आ जायेगा (वो मन नहीं कर रही थी, बस दर रही थी, और उसकी इस बात से मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी, में उसको साइड में ले गया और दरवाजे के पीछे दीवाल से सत्ता दिया, उसकी सांसे तेज हो गयी थी)

शिव : सच में कोई आ जायेगा (उसने घभराते चेहरे से ना में गर्दन हिलायी, तो मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी, उसने ये देखा तो शर्मा के अपना चेहरा घुमा लिया, मेने चेहरा अपनी और घुमाया और kaha)In होठो को चुम लू? (मुझे पता था की वो मन नहीं करेगी पर फिर भी मेने puchha)(Inayat की हाथ मुट्ठी बंद हो गयी, और अपने पैरो के अंगूठो को आपस में रगड़ने lagi)Bolo न, इन रास भरे होठो को चूस लू? (उसके होठो के नजदीक जाते हुए)

इनायत : (हफ्ते hue)M म मुझे नहीं पता, हआ हआ haaaa(Wo हांफ रही थी)

शिव : (वो तैयार hi थी पर उसकी तड़प मुझे और उत्तेजित कर रही थी, मेरा लुंड भी खड़ा हो गया tha)Kaho न, पि लू इन होठो को? (वो कुछ नहीं बोली बस मेरी आँखों में देख रही थी, उसको साँस लेने भी तकलीफ हो रही थी, बोलती क्या बेचारी, मुझे उस पर तरस आ गया और में झुकने लगा तो उसने आंखे बंद कर ली, ये सम्मति थी उसकी, में झुका और उसके नरम नरम होठो को हलके हलके चूसने laga)(Inayat ने जोर से अपनी मुट्ठी बंद कर ली और शरीर अकड़ गया, पर जैसे जैसे शिव उसके होठो को चूस रहा था उसकी मुट्ठी ढीली पड़ती गयी, और उसका शरीर शांत होता गया, उसके हाथ खुलने लग गए, वो शिव को बहो में भरने को तड़पने लगी पर शर्म उसको करने नहीं दे रही थी, थोड़ी देर बाद उसके भी होठ चलने लगे और वो शिव का साथ देने lagi)Ummmm उम्म्म स्लुर्प सलूयर्प उम्म्म्म. (थोड़ी देर बाद शिव ने किश तोड़ी और उसको देखा तो उसके होठ भीग चुके थे, चेहरे लाल टमाटर जैसा हो गया था, आंखे बंद hi thi)Ankhe खोलिये. (इनायत ने बड़ी मुश्किल से आंखे kholi)Fir मिलने आओगी? (उसने नशे में hi हां kaha)Thik है, जाइये. (इनायत को जाना नहीं था, पर वो ज्यादा रुक भी नहीं सकती थी, वो नज़ारे झुकाये वह से भाग गयी, जाते जाते वो अपने होठो को पोछ रही थी और अभी अभी जो हुआ उसे सोच कर शर्मा रही थी, जब वो निचे पहुंची तो उसकी भाभी और अम्मी दोनों काम में लगी हुई थी, वो भी उनसे नज़ारे चुराए काम करने लगी)

नाज़िआ : सब ठीक है?

इनायत : (घबरा गयी, वो सोचने लगी की भाभी ने उसकी हालत पकड़ ली)

इनायत : क क क्या भाभी?

नाज़िआ : अरे ऊपर रूम ठीक है?

इनायत : ह ह है भाभी, सब ठीक है (नाज़िआ को अजीब लगा पर वो बोली nahi)(Inayat मान me)Kaise मिलूंगी में, और कब? सब तो घर पर hi है, (वो उपरवाले से दुआ करने lagi)please कुछ कीजिये. (उसको कुछ भी समाज नहीं आ रहा था, वो यही सब सोचते हुए काम करने लगी)

इनायत के जाने के बाद में उसको याद कर के सोच रहा था, मान में भले hi ये था की अगर इनके साथ जुड़ने से नाज़िआ दीदी को आसानी हो जाएगी, पर कही न कही उसकी खूबसूरती और उसका वो प्यारा चेहरा भी आकर्षित करता था. थोड़ी देर में लेता रहा फिर निचे चला गया. अंकल समाचार देख रहे थे तो में भी बेथ गया. थोड़ी देर बाद नाज़िआदिदी खाने के लिए बुलाने आयी. में, अंकल और आंटी खाने बेथ गए. मेने देखा की इनायत चुपके से मुझे देखती थी, पर वो दूर hi थी. मेरी भी समाज में नहीं आ रहा था की वो कैसे आएगी. में खाने लगा.

नाज़िआ : कैसा है खाना, चलेगा न?

शिव : क्या दीदी, बहोत अच्छा है. (नाज़िआ भी मुस्कुरा दी)

नाज़िआ : मेने सोचा की हमारा खाना तुम्हे अच्छा लगे गए की नहीं.

शिव : खाना खाना होता है, और जब आप सब इतने प्यार से बनाओगे तो अच्छा तो होना hi है, सचमे स्वादिस्ट है खाना.

हम सब ऐसे hi खाने लगे. थोड़ी देर में आगे बैठा, अंकल समाचार देख रहे थे, तो में ऊपर चला गया. मुझे घर की याद आयी तो मेने भार्गवी को फ़ोन लगाया. भार्गवी भी टीवी देख रही थी, शिव का फ़ोन देख कर खुस हो गयी.

भार्गवी : Hello (बहोत प्यार से)

शिव : Hello मैडम, कैसी हो?

भार्गवी : मैडम के बच्चे, कहा हो?

शिव : क्या हुआ?

भार्गवी : आये नहीं fir.(Halki नाराजगी से)

शिव : जब में फ्री होता हु तो आप बिजी होती है, और आप फ्री होती है तो में बिजी होता हु.

भार्गवी : अभी फ्री हु, आ जाओ.

शिव: में बहार हु, ष्ष्सहेर.

भार्गवी : (मायूसी se)Oh!, वह क्यों गए?

शिव : काम से आया था, और दो तीन दिन भी नहीं हु, कॉम्पिटिओं के लिए जाना है.

भार्गवी : ओह!

शिव : मायूस क्यों हो रही है, जल्दी मिलूंगा.

भार्गवी: हम्म्म्म, ठीक है.

शिव: अच्छा सुनिए न, मेने फ़ोन इस लिए किआ था की घर पर जरा ध्यान रखियेगा, वह लड़कीअ अकेली है.

भार्गवी : (कुछ सोच kar)Thik है, में इंतजाम कर देती हु. और कुछ?

शिव : और कुछ नहीं, बस ी लव यू.

भार्गवी : (एक दम से शर्मा gayi)Marungi.

शिव : (मुस्कुराते hue)Kyu क्या हुआ?

भार्गवी : और नहीं तो क्या, दूर दूर से प्यार जाता रहे हो. (हलकी नाराजगी से)

शिव : दिल तो मेरा भी है, की आपसे मिलु.

भार्गवी : (मंद मंद मुस्कुराते हुए, उसने सोफे पर पारी मोड़ दिए और बेथ gayi)Kyu?

शिव : प्यारे से चेहरे पर सजे उस मखमली होठो को चूमना है.

भार्गवी : (शर्मा gayi)Marungiiii.

शिव : आप क्यों कास्ट कर रही है, वो में मर लूंगा. (शिव ने भी बिंदास बोल दिया)

भार्गवी : (बुरी तरह से शर्मा gayi)Gande कही के, मार खाओगे मेरे हाथ से.

शिव : जी भर के मार लेना, बंद आ जायेगा. ी मिस यू स्वीटी.

भार्गवी : (उसे बहोत अच्छा लग रहा था, उसने भी प्यार से kaha)I मिस यू तू डिअर, जल्दी आना, प्लीज.

शिव : जल्दी मिलता हु, bye, टेक केयर, एंड लव यू.

भार्गवी : ी लव यू तो स्वीटहार्ट, रियली लव यू. Bye.

शिव : Bye.

भार्गवी ने फ़ोन रख दिया और थोड़ी देर फ़ोन को hi देखती रही, शिव के साथ वो कितनी जुड़ चुकी है ये सोचने लगी, कही से भी उनका ये सम्बन्ध संतुलित नहीं है फिर भी उसे शिव से प्यार हो गया था. थोड़ी देर बाद उसने अपने पेट्रोलिंग यूनिट को इत्तेला दे दी और वह ज्यादा ध्यान रखने को बोल दिया. वो लोग भी अब समाज गए थे की ये अनाथालय मैडम के लिए बातो इम्पोर्टेन्ट है तो वो भी अच्छे से ध्यान रखने का सोच लिए.

इनायत और नाज़िआ खाना खा रहे थे, पर इनायत कही खोयी हुई hi थी, वो नाज़िआ की बातो का बस हु .. है में hi जवाब दे रही थी. क्या करे कुछ समाज में नहीं आ रहा था, खाने के बाद दोनों बर्तन साफ़ करने बैठे तो भी इनायत गम hi दिखी.

नाज़िआ : क्या बात है इनायत? क्या सोच रही है?

इनायत : (हड़बड़ाते hue)N नहीं तो भाभी, कुछ नहीं सोच रही. (उसने नज़ारे चुराते हुए कहा)

नाज़िआ : कोई बात हो तो बता दे.

इनायत : कोई बात नहीं है भाभी. (वो क्या बोलती की शिव से मिलने जाना है, प्लीज कुछ कीजिये. जैसे जैसे टाइम जा रहा था उसकी उम्मीदे टूट रही थी, कोई रास्ता उसे समाज नहीं आ रहा था, सब काम ख़तम कर के)

नाज़िआ : चल, ऊपर चलते है, वो अकेले अकेले बोर हो रहा होगा.

इनायत : जी भाभी. (निचे, उसके सास ससुर, टिव में कोई सेरिएल देख रहे थे, वो दोनों ऊपर आ गयी, दरवाजा खुला hi था और शिव शार्ट तरस पर टहल रहा था, उसने टीशर्ट और शार्ट पहना हुआ था)

नाज़िआ : (ऊपर आते hue)Kya कर रहा है?

शिव : अरे दीदी आप? कुछ नहीं बस टहल रहा था.

नाज़िआ : अकेले अकेले बोर हो रहा है न?

शिव : नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है.

नाज़िआ : निचे बेथ ता, टीवी देख लेता.

शिव : मुझे टीवी देखने की आदत नहीं है. इस से अच्छा तो यहाँ टहलना था.

नाज़िआ : तुजे बुला कर मेने भी तुजे परेशान कर दिया, नहीं?

शिव : क्या दीदी आप भी, ऐसी कोई बात नहीं है.

नाज़िआ : कोनसी कॉम्पिटिओं पर जा रहा है?

शिव : स्टेट लेवल सिलेक्शन है दीदी. में किसी इंस्टिट्यूट से जुड़ा नहीं हु तो मुझे अपने आप को वह प्रोवे करना है, ओपन चैलेंज कॉम्पिटिओं है.

नाज़िआ : तुम तो कर hi लोगे. (उसने मुस्कुरा के कहा, इनायत और दोनों तररके की बॉर्डर पर तक लगा के खड़े हो गए थे, शिव सामने खड़ा था)

शिव : इतना भी आसान नहीं है दीदी, बरसो से म्हणत कर रहे लड़के आएंगे वह, मुझे तो अभी थोड़ा सा hi समय हुआ है.

नाज़िआ : तू कर लेगा, मुझे पता है, कभी देखा नहीं तुजे पर जैसा संयम बता रही थी की कैसे सब से अव्वल आया था तू, तो मुझे यकीं है की तुम कर लोगे.

हम सब ऐसे hi इधर उधर की बाते कर रहे थे, इनायत ज्यादा बोल नहीं रही थी, वो बस मुझे hi देख रही थी, पर नाज़िआदिदी की वजह से में ज्यादा नहीं देख रहा था. करीब आधे घंटे बाद निचे से उनकी सास ने आवाज दी.

हाफ़िज़ा : नजिआआआ.

नाज़िआ : (निचे देखते hue)Ha अम्मीी.

हाफ़िज़ा : बीटा, हम सो रहे है.

नाज़िआ : है अम्मीईई, हम थोड़ी देर में आते है, आप सो जाइये. (फिर हम थोड़ी देर बात करेने लगे, नाज़िआ दीदी को भी ुबसिअ आने lagi)Kaam कर के थक गयी हु न तो...

शिव : आप सो जाइये.

नाज़िआ : अरे पानी लाना तो भूल गयी, इनायत जा तो जरा पानी ले आ.

इनायत : जी भाभी. (वो पानी लेने निचे गयी, नाज़िआ ने आस पास देखा, कोई नहीं था तो उसने शिव को अपनी और खिंचा और उसको झुका कर उसके होठो पर किश कर दी)

नाज़िआ : मेरा मान कर रहा है की ऊपर hi आ जाऊ, पर निचे सब है तो नहीं आ shakti(Usne मायूसी से कहा)

शिव : आप कोई रिस्क मात लेना, में नहीं चाहता की मेरी वजह से आपको कोई दिक्कत हो.

नाज़िआ : तेरी वजह से तो इतना सुख नसीब हुआ है, सब कितने बदल गए है. (तभी इनायत के कदमो की आहत हु, तो में दूर हो गया. इनायत ने मुझे पानी diya)Achchha तुम सो जाओ, और तो कुछ नहीं चाहिए न?

शिव : नहीं दीदी. (वो दोनों जाने लगे, इनायत ने मायूसी से देखा, उसके चेहरे को देख कर में समाज गया की वो नहीं आएगी, मेने मुस्कुरा कर बस हां में गर्दन हिलायी जैसे कह रहा हु की कोई बात नहीं) वो दोनों चले गए. में फिर थोड़ी देर टहलने लगा. निचे जा कर नाज़िआ अपने कमरे में चली गयी और इनायत अपने कमरे में. शिव इतना नजदीक था तो नाज़िआ का दिल भी बेचैन था, भले hi उसके पति ने रोज़ उसके साथ सेक्स किआ था पर फिर भी जो मज़ा उसे शिव के साथ आता था वो देने में उसका पति न काम रहा था, पर अपने ससुराल में वो कोई रिस्क लेना नहीं चाहती थी, तो मान मर कर सोने की कोशिस करने लगी, वही इनायत की आँखों से नींद गायब थी, उसने शिर से हिजाब का कपड़ा निकल दिया था, रात के कपडे पहन ने की कोई इच्छा नहीं थी, अभी भी उसको लग रहा था की वो शिव के पास जाएगी, वो बस करवाते बदल रही थी. ऐसे hi अधघंता गुजर गया, उसके दिल को चैन hi नहीं आ रहा था, वो आहिस्ता से बिस्तर से उठी, उसने तकिये को रक्खा और उसको चद्दर से धक् दिया, जैसे कोई सो रहा हो, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, उसने दरवाजा खोला और बहार आयी, दरवाजा खोलते वक़्त सावधानी राखी, पर बंद करते हुए हलकी सी आवाज हुई, वो आहिस्ता से किचन की और गयी जहा पीछे एक रास्ता खुलता था, वो हांफ रही थी, और सोच रही थी की जाये की न जाये, उसने पानी का गिलास भरा और एक hi साँस में पि गयी. गिलास रख कर वो थोड़ी देर वही कड़ी रही, वापस अंदर गयी, उसने अपने अम्मी अब्बू का दरवाजा देखा, बिना आहात किये वो दरवाजे के पास आगयी और अंदर की आवाजे सुन ने लगी, अब्बू के खर्राटे की आवाज आ रही थी, उसको इत्मीनान हो गया, उसने भाभी वाले दरवाजे से भी सुन ने की कोशिस की पर अंदर से कोई आवाज नहीं आ रही थी, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, पर शिव को मिलने की इतनी तड़प थी की उसने रिस्क लिया और वापस किचन में चली गयी. दरवाजा अंदर से बंद किया हुआ था, वो सावधानी से दरवाजा खोलने लगी, दरवाजा खोलने में भी ज्यादा टाइम लग रहा था, पर आवाज न हो ये भी जरुरी था. आखिर कर दरवाजा खुल गया, उसने दरवाजा हल्का खोला, थोड़ी सी आवाज हुई, वो दर गयी, थोड़ी देर वही कड़ी रही, बहार से हलकी रौशनी अंदर आ रही थी, वो जैसे तैसे बहार निकली, रात की ठंडी हवा उसको चुने लगी. उसने आस पास देखा तो सब शांत था, उसने हलके से दरवाजे को बहार से बंद किआ, अगर कोई आता और उस से सवाल पूछ ता की क्यों दरवाजा बंद है तो उसकी हालत ख़राब हो जाती, पर शिव को मिलने के लिए रिस्क ले रही थी, वो दबे पाव बहार निकली और सीढिया चढ़ने लगी, बहार से झींगुरो की आवाज आ रही थी.

अंदर नाज़िआ की आंख लग गयी थी, वो कोई रिस्क लेना नहीं चाहती थी. नाज़िआ ऊपर पहुंच गयी, वो धड़कते दिल से दरवाजे के पास पहुंची और रुक गयी, सब और सन्नाटा था, उसका दिल भी जोरो से धड़क रहा था, उसको दर के साथ शर्म भी आ रही थी की वो कैसे शिव से मिलने आ गयी है. पर वो अपने आपको मजबूर महसूस कर रही थी, थोड़ी देर बाद उसने दरवाजे पर हलकी दस्तक दी और कड़ी रही, अंदर से कोई आवाज नहीं आयी, उसका दिल बैठने लगा, शिव भी शायद सो गया था. उसने फिर से दस्तक दी, इस बार थोड़े जोर से, एक और तो उसको दर लग रहा था, तभी अंदर हलचल हुई, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, तभी दरवाजा खुला, अंदर नाईट बल्ब जल रहा था, उसने देखा की शिव सिर्फ शार्ट पहने हुआ है, ऊपर से नंगा है, उसने फिर नज़ारे झुका ली.

शिव ने इनायत को देखा, वो दरी सेहमी सी नज़ारे झुकाये कड़ी थी, शिव ने आस पास देखा, सब शांत था, वो साइड हैट गया ताकि वो अंदर आ जाये, पर वो वही कड़ी थी, अंदर आ नहीं रही थी. (इनायत अभी भी असमंजस में थी की जाये की न जाये, अगर निचे कोई जग गया तो बहोत प्रॉब्लम हो जनि थी) में उसे देख रहा था, वो अभी भी सोच रही थी, मेने उसकी बाह पकड़ी और अंदर खिंच लिया, वो जैसे बेजान पुतले के जैसे अंदर खिंच आयी. मेने दरवाजा बंद कर दिया, वो नज़ारे झुकाये कड़ी थी, में उसे देख रहा था, हलके उजाले में भी उसका चेहरा दमक रहा था, सोने के टाइम भी वो हलकी तैयार हुई थी, जो संकेत था की वो किस लिए यहाँ आयी है, बस दर रही थी.

शिव : सब सो गए? (मेने आहिस्ता से पूछा तो उसने सिर्फ है में शिर हिलाया) दर लग रहा है? (उसने अपनी उखड़ी सांसो से मुझे देखा, फिर नज़ारे झुका ली और हां में शिर hilaya)To फिर क्यों आयी? (वो कुछ नहीं बोली, बस वैसे hi कड़ी रही, में उसकी हालत समाज सकता था, में उसके पास गया और उसको गले लगा liya)(Inayat इस सख्त नंगी छाती से चिपक गयी, उसकी आंखे बंद हो gayi)(Usko दर लग रहा था तो मेने kaha)Agar दर लग रहा है तो लोट जाओ. (इनायत ने एक गहरी साँस ली, दर तो था पर शिव को पाने की तड़प भी थी, उसने अपने नाजुक हाथो से शिव को बहो में भर लिया और ना में गर्दन हिला दी,





the georgetown project

एक और दर था पर फिर भी वो लौटना नहीं चाहती थी, शिव के गले लगे hi उसकी नजर बिस्तर पर पड़ी जो जमीं पर बिछा हुआ था, उसे पता था की आज इस बिस्तर पर क्या होनेवाला है, एक और उसे दर लग रहा था तो दूसरी और वो बहोत उत्तेजित भी हो रही थी, आज उसे बहोत समय बाद किसी मर्द के पहलु में सोने का मौका मिला था, ऐसा भी नहीं था की वो किसी मर्द के पहलु में जाने के लिए तड़प रही थी, पर शिव को देख कर वो अपना सब कुछ हर चुकी थी, उसे पाने के लिए वो किसी भी हद को पर कर जाना चाहती थी, उसकी सख्त बहो में वो अपने आपको बहोत ज्यादा महफूज महसूस कर रही थी, उस लम्बे चौड़े जिस्म को वो सेहला कर महसूस करने लगी, वो उसकी नंगी पीठ को सेहला रही थी , उसे दर भी लग रहा था की वो उसकी क्या हालत करेगा, क्यों की वो उसके हथियार को पहले hi देख चुकी थी, जो उसके पिछले पति के मुकाबले करीब दो गुना था, वो दर भी रही थी की वो उसे सेह पायेगी की नहीं, पर फिर भी उसे सब करना था, शिव उस से ऊपर से दूर हुआ और उसे देखने की कोशिस करने लगा पर उसे इतनी शर्म आ रही थी की वो उसके शाइन से दूर hi नहीं हो रही thi)Kya हुआ? (उसने न में गर्दन हिलायी, क्या कहती की दर लग रहा hai)Meri और देखिये न, मुझे देखना है आपको.

इनायत : (बहोत प्यार se)Muje तुम कह कर बुलाओ, आप मात कहो.

शिव : (अब में आप आप के चक्कर में नहीं पड़ना चाहता था, में ये नहीं बताना चाहता था की आप बड़ी है तो में आपको आप कहूंगा, वैसे भी लड़कीओ को यही अच्छा लगता है तो यही सही, वैसे भी वो किसी कमसिन लड़की जैसी hi तो thi)Thik है, पर मेरी और देखो तो सही.

इनायत : (शरमाते हुए muskurayi)Muje शर्म आ रही है. (उसने अपना मुँह छुपाते हुए मुस्कुरा कर कहा).

शिव : पर मुझे देखना है तुम को. देखो न प्लीज. (इनायत ने शरमाते हुए थोड़ी दूर हुई, पर चेहरा झुकाये रही, शिव ने उसका चेहरा ऊपर उठाया पर उसने आंखे बंद hi rakkhi)(Me उसको देखने लगा, एक दम मासूम सी गुड़िया जैसे चेहरा था, सब कुछ सही नाप में था, प्यारे और गुलाबी होठ जिस पर हलकी सी मुस्कान थी, चेहरे पर ढेर श्री शर्म उतर आयी थी, रंग भी बहोत गोरा था, तीखी सी नक् थी, बड़ी बड़ी आँखों में काजल लगा हुआ था, पतली लम्बी गर्दन thi.)Tum बहोत सुन्दर हो इनायत.

इनायत : (वो और शर्मा गयी और मुस्कराहट बढ़ gayi)Aap भी.

शिव : (मुस्कुराते hue)Muje तुम कहने के लिए बोल रही हो और मुझे आप कह रही हो.

इनायत : मुझे अच्छा लग रहा है, आपको आप कहना.

शिव : आंखे खोलो न.

इनायत : मुझे शर्म आ रही है शिव.

शिव : प्लीीासे. (उसने आंखे आधी खोल di)Puri खोलो. (उसने पूरी खोली पर अपनी नज़ारे दूसरी और कर ली, उसकी ये शर्म मेरी उत्तेजना बढ़ा रही thi)Meri और देखो (वो मेरी छाती कोअपने नाख़ून से हल्का सा दबायी) देखो न इनायत, मुझे इन खूबसूरत आँखों को देखना है. (उसने शरमाते और मुस्कुराकर आहिस्ता से मेरी आँखों में देखा, में उन काली गहरी आँखों के देखता hi रह गया, वो बहोत प्यार से मुझे देख रही थी, थोड़ी देर ऐसे hi हम दोनों एक दूसरे को देखते rahe)Abhi तो दर नहीं लग रहा है न? (इनायत जानती थी की कितना खतरा है, पर फिर भी उसने ना में गर्दन hilayi)Tum जानती हो मेरे साथ कितना खतरा है? (इनायत को कुछ समाज नहीं आया की ये किस खतरे की बात कर रहा है, उसकी आँखों में उल्जन उभर aayi)Tum बहोत नाज़ुक हो इनायत, टूट जाओगी. (इनायत को अब समाज में आया, वो शर्मा gayi)(Uski शर्म ने मेरा बांध तोड़ दिया, में रुक नहीं सका और उसके होठो पर टूट पड़ा, होठो को अच्छे से निचोड़ने laga)Ummm उम्म्म्म स्लुर्र्प सलूरररप उम्मम्मम्म. (इनायत आंखे बंद किये हुए उसको सब करने दे रही थी, वो उसकी गर्दन को चाट रहा था, उसके गाल को चाट रहा था, उसे लग रहा था की आज वो उसे पूरा खा जायेगा)

इनायत : उन्ह उन्ह शह्ह्ह्ह उन्न्नध्ह उन्न्नध्ह (उसके पेअर के पंजो की उंगलिअ मुड़ने लगी, जब शिव के मजबूत पंजो ने उसके कूल्हों को masala)Shhhhh ूंणन्ह हा शह्ह्ह्ह (वो एक हाथ उसके शिर को लपेट ते हुए उसको कास ली, फिर अपने हाथ के पंजो को बालो में ले गयी और उसके बाल को मुट्ठीसे हलके से खिंच ने और छोड़ने lagi.)Shhhhh ौऊणह्ह्ह शिव, शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (में उसे किश करते करते hi बिस्तर के ऊपर ले आया, और निचे बैठने लगा तो वो भी मेरा साथ बेथ गयी, मेने ऊपर आते हुए उसे निचे लेटाया तो वो लेट गयी, अभी भी हमारे होठ जुड़े हुए थे, उसका शिर मेरे बाये हाथ पर था, मेने दये हाथ को उसके कठोर बाये स्तन पर ले गया और उसे मसल diya)Ummmm (एक घुटी घुटी से आवाज मेरे मुँह में दफ़न हो गयी, में उसकी कमीज ऊपर करने लगा, और हाथ उसकी कमीज में दाल दिया, उसका मखमली गर्म बदन मुझे महसूस होने लगा, पेट को सहलाते हुए में अपने हाथ को ऊपर ले गया और उसके स्तन तक पंहुचा दिया, ब्रा में कैद स्तन को मेने मसल दिया, उसने किश तोड़ दी क्यों की उसको साँस लेना मुश्किल हो रहा था, उसका शरीर धनुस की तरह तन गया तो मेरा हाथ कमीज में फंस गया. जब वो वापस नार्मल हुई तो मेने हाथ वह से निकल लिया और उसका कमीज़ उतरने लगा, उसने मेरी और देखा, वो असहाय सी दिख रही थी.

शिव : क्या हुआ?

इनायत : (डरते hue)Koi जग गया तो?

शिव : (दर तो मुझे भी था, पर बात बहोत आगे बढ़ गयी thi)Koi नहीं जागेगा. (मेने बस ऐसे hi कह दिया, उसकी कमीज़ को ऊपर की और उठाने का प्रयास करने लगा पर वो टाइट थी, निकल नहीं रही थी तो मेने उसे hi kaha)Nikalo न इससे. (वो शर्मा गयी और मुस्कुराते हुए पीछे घूम गयी, मेने देखा की वह चैन थी तो मेने उसे खोल दी, और कमीज़ ढीली हो गयी, मेने फिर उसे ऊपर की तो वो निकलने लगी, उसने अपने शरीर को हिला कर निकलने में मदद की जब वो गले तक पहुंची तो उसने अपने हाथ ऊपर कर दिए, मेने उसे पूरा निकल दिया, वो नाजुक सा गोरा बदन सिर्फ ब्रा स्ट्राप में मेरे सामने था, मेने अपने हाथ से उसे sehlaya)Tum बहोत हॉट हो. (इनायत मुस्कुराते हुए शर्मा गयी, में अपने पेअर फैला कर उसके पीछे बेथ गया और उसे अपनी और खिंच लिया, वो मेरे शाइन से पीठ चिपकाये बेथ गयी पर अपने स्तन को अपने हाथो से छुपा रही थी. उसके हाथ पकड़ते हुए में उसे हटाने laga)Isse क्यों छुपा रही हो? (वो कुछ नहीं बोली बस शर्माती रही, हलके विरोध के बाद उसने अपने हाथ हटा दिए तो मेने उसके दोनों संतरो से थोड़े बड़े स्तन को अपने हाथ से मसल दिया, वो चाप्तता गयी)

इनायत : शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह. (शिव ने उसके स्तन दबाये जरूर थे पर इतने भी नहीं की उसको ज्यादा दर्द हो, उसका पति कभी कभी करता था पर जानवर जैसा बर्ताव करता था, शिव उसको समाज रहा था और उसकी केयर भी थी उसको, वो मान hi मान बहोत खुस हो रही थी और साथ में स्तन मसलने से उत्तजित भी हो रही थी, उसने शिव के हाथ पर एक हाथ रख दिया था पर उसे रोक नहीं रही थी, बस उसके हाथ को सेहला रही थी जैसे अपनी रजामंदी दे रही थी, वो उसके स्तन को सेहला रहा था, वो बस मज़े और उत्तेजना से सिसक रही थी, शिव ने ब्रा में हाथ दाल दिया और उसके बाये स्तन को अपने दाहिने हाथ से दबा दिया, इनायत ने अपने होठो को दन्त से काट liya)Shhhhhhh शिईयिव shhhhhhh(Ab शिव उसके निप्पल को अंगूठे की मदद से मसल रहा था, उसके शरीर में तरंगे उठ रही थी जो सीधा उसकी योनि पर असर कर रही थी, उसने अपनी झंघे आपस में सत्ता दी, उसको वह कुछ कुछ होने लगा tha)Shhhh शीइइइइइव, शिव का बया हाथ जो उसके पेट पर था वो निचे चला गया और उसकी योनि को कपड़ो के ऊपर से hi ढूंढने लगा, उसको इतनी शर्म आ रही थी की उसने अपने पेअर सख्ती से आपस में चिपका दिए)

शिव : (मेरा लुंड लोहे जैसा कड़क हो गया था, उसके बदन की गर्मी महसूस हो रही थी मुझे, छोटे से चूचक को मसलने से मेरी उत्त्जना बढ़ गयी थी, मेरा हाथ योनि को धुंध रहा था पर वो अपने पेअर खोल hi नहीं रही थी, मेने उसके गले को पीछे से छाता और kaha)Apane पर खोलो. (वो कुछ नहीं बोली, पर पेअर नहीं खोले, उसके गले को चाट ते hue)Kya हुआ बेबी, खोलो न.

इनायत : शर्म आ रही है शिव. (अपनी उखड़ी सांसो को संभलके वो बोली)

शिव : करना नहीं है?

इनायत : मुझे बहोत शर्म आ रही है, वह हाथ मत डालो, पलीयासे.

शिव : कुछ नहीं होगा, मुझे उसे छूना है (मेने उसकी झंघ को अंदर की और से sehlaya)Kholo प्लीीासे. (हिचकिचाते हुए उसने अपने पेअर ढीले किए, और हलके से khole)Aur खोलो.

इनायत : मुझे शर्म आ रही है शिव (उसने पीछे से अपने गाल को मेरे गाल के साथ रगड़ा)

शिव : कुछ नहीं होगा, खोलो अपने पेअर (मेने प्यार से कहा तो उसने और पेअर फैलाये, मेरे लिए जगह मिल गयी तो मेने उसकी जड़ो में हाथ दाल दिया और उसकी छूट को दबोच लिया, उसने फिर अपने पेअर चिपका दिए, जिस से मेरा हाथ हिल नहीं प् रहा था, मेने सिर्फ ऊँगली को हिलाया जो उसकी छूट की दरार वाले भाग पर थी) खोली पेअर इनायत.

इनायत : (उस ऊँगली की चुभन को अपनी छूट पर महसूस करते हुए पिघल रही thi)Pleeease सीईव शहहहहह .

शिव : कुछ नहीं होगा, मुझे करने दो प्लीज. (आखिर कर इनायत ने हथियार दाल दिए और अपने पारी को हलके से फैलाया, मेने दाहिने हाथ को स्तन से बहार निकला और उसके दाहिने पेअर को पकड़ कर फैला दिया, उसने अपने पेअर चिपकने की कोशिस की पर मेने होने नहीं दिया और उसकी छूट को दबोचते हुए मसलने लगा)

इनायत : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शहहहहह (उसने हथियार दाल दिए और अपने पेअर को पूरी तरह से फैला दिया)

शिव : (मेने फिर दाहिना हाथ हातलिया और फिर से उसके बाये स्तन को ब्रा के अंदर से पकड़ लिया और बाये हाथ से उसकी छूट को सहलाने लगा, छूट का आकर मुझे महसूस हो रहा था, छूट के होठ भी में मुश्शू कर प् रहा था, वह इतना गिला हो गया था की सलवार भी गीली होने लगी थी. में छूट को सहलाता गया वो सिसकती रही, मेने हाथ हटाया और सलवार के अंदर डालने लगा, पर वो बंधी हुई थी, मेने नदी को ढूंढा और उसे खोल दिया, उसने मेरा हाथ पकड़ ने की कोशिस की पर मेने उसका हाथ झटक दिया तो उसने भी विरोध छोड़ दिया, नाडा खोल कर मेने हाथ अंदर दाल दिया और सीधा पंतय के अंदर से उसकी नंगी छूट को पकड़ लिया, वो पूरी चिकनी थी, वह बाल का नमो नीसाण नहीं था. छूट पूरी चिप छिपी हो गयी थी, में उसे मसलने लगा, इनायत ने मेरे बाये हाथ की बाह पकड़ ली और अपने दांतो से उसे हलके हलके काटने लगी)

इनायत : शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह (उस से बर्दास्त नहीं हो रहा था, वो बस पेअर फैलाये लेती हुई थी, शिव उसकी छूट की दरार को सेहला रहा tha)Shhhhh शीइइइइव (उसकी मादक सिस्किअ निकल रही थी, मुझे छूट रास की वो अज्जेब सी गंध आने लगी, मेने अपना हाथ बहार निकला और उसे नाक के पास ले जा कर sungha)(Inayat उसकी इस हरकत से एकदम से शर्मा गयी और उसका हाथ पकड़ कर उसकी नाक से दूर करने lagi)Ganda है.

शिव : मुझे तो बहोत अच्छी खुसबू आ रही है, (इनायत शर्मा gayi)Waha बाल क्यों नहीं है? (इनायत बहोत ज्यादा शर्मा gayi)Bolo न, बाल क्यों नहीं है? (इनायत बहोत शर्मा रही थी, क्या बोलती वो, ऊपर से ऐसी बात से उसकी उत्तेजना बढ़ रही thi)Bolo न इनायत, मुझसे बात करो.

इनायत : मुझे शर्म आ रही है शिव, ऐसी बाते मात करो प्लीज.

शिव : इसमें क्या शर्माना, बताओ न, मुझे जान न है.

इनायत : आज साफ़ किये है (उसको बहोत शर्म आ रही थी, पर ऐसी बात करने से उसकी उत्तेजना से हालत ख़राब हो रही थी, उस से साँस लेना भी मुश्किल हो रहा था)

शिव : (मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी, मुझे मजा आ रहा था तो मेने puchha)Kyu? (वो बेहद शर्मा गयी, कुछ नहीं boli)Bataona.

इनायत : (उसको इतनी शर्म आ रही थी की मान किआ की वो शिव की ब्याह में अपने आपको छुपा ले, पर उसको भी मज़ा आ रहा था, उसने हकलाते हुए kaha)Wo वो तुम...

शिव : (मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी, मेने वाकया पूर्ण kia)Me आनेवाला था इस लिए? (इनायत को इतनी शर्म आ रही थी की क्या कहे, उसने बस हां में गर्दन hilayi)To अपना पूरा मान बना चुकी हो, है न? (इनायत को लग रहा था की जमीं फैट जाये और वो उसमे समां जाये, उसको इतनी शर्म आ रही थी की वो कही छुप जाना चाहती thi)(Mene मुस्कुरा कर kaha)Mere लिए तयारी कर के बैठी हो और मुझसे hi उसे छुपा रही हो, अब तो में उसे पूरी तरह से अच्छे से देखूंगा.

इनायत : (हड़बड़ाते hue)Nahi शिव, प्लीज.

शिव : अब में एक बात नहीं मानूंगा, मुझे देखना है मतलब देखना है.

इनायत : फिर कभी देख लेना, आज नहीं. (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : सब कुछ आज hi होगा, आज भागने नहीं दूंगा. (मेने मुस्कुराते हुए कहा और उसको थोड़ा दूर कर के उसकी ब्रा को पीछे से खोलने लगा, उसने अपने स्तन को छुपाने के लिए अपने हाथ रख दिए)

इनायत : (चाहती तो वो भी थी, पर शर्म के कारन उसकी हालत ख़राब thi)Nahi शिव, प्लीज लाइट बंद कर दो.

शिव : इतनी काम रौशनी तो है, मुझे लग रहा है मुझे लाइट चालू कर देनी चाहिए.

इनायत : (एकदम से घबरा gayi)Nahi प्लीज ऐसा मात करो. में मर जाउंगी.

शिव : (उसके कंधे से ब्रा के स्ट्राप निकलते hue)Nahi कर रहा बस, पर ये लाइट तो चालू hi रहे गई. (मेने उसको बिस्तर पर लेटाया, उसने अपने स्तन पर ब्रा अभी भी पकड़ी हुई थी, मेने उसे देखा और उसके सलवार को नीचे खींचने लगा तो उसने अपने दोनों हाथ से सलवार को पकड़ लिया, मेने मुस्कुरा कर उसकी ब्रा को साइड में फेंक दिया, उसके स्तन पूर्ण नग्न हो चुके थे, उसने फिर अपने स्तन को दोनों हाथो से छुपा लिया, तो में उसकी सलवार पकड़ कर निचे खींचने laga)(Inayat फंस गयी थी, उसने एक हाथ से अपने स्तन को ढकने का असफल प्रयास किया और दूसरे हाथ से सलवार को पकड़ liya)Kitna बचाओगी अपने आपको, और क्यों बचाना है तुमको, क्या तुम नहीं चाहती (मेने अपने हाथ हटते हुए कहा, वो मुझे देख रही थी, मेने फिर puchha)Agar नहीं चाहती तो में यही रुक जाऊंगा.

इनायत : (उसकी सकल रोने जैसी हो गयी, रोनी आवाज me)Muje शर्म आ रही है. (मुझे उसकी हालत पर तरस आ रहा था, में उसकी बगल में लेट गया)

शिव : इसमें रोनेवाली कोनसी बात है, नहीं करना तो मात करो.

इनायत : (मेरी और देखते hue)Aisi बात नहीं है शिव, मुझे बहोत शर्म आ रही है (उसने असहाय नजरो से मुझे देखा)

शिव : (उसके चेहरे पर आये बाल हटते hue)Agar तुम अभी कम्फर्टेबले नहीं हो तो नहीं करते है.

इनायत : (अपने स्तन से हाथ हटते hue)Nahi, ऐसी बात नहीं है, बस मुझे बहोत शर्म आ रही है शिव, प्लीज आप नाराज मात हो, में अब नहीं रोकूंगी, आपको जो करना है वो कर लीजिये. (उसने बहोत मासूमियत से कहा)

शिव : ये सब ऐसे नहीं होता इनायत, तुम्हारी खुसी भी महत्व रखती है.

इनायत : (उसकी आँखों से आंसू टपक pade)Wo (उसका एक्स हस्बैंड) तो बस ऐसे hi कर देते थे, जब उनकी मर्जी हो.

शिव : ऐसा क्यों?

इनायत : उन्हें मुझसे कोई मतलब नहीं था, उनका किसी और के साथ था, पहले मुझे पता नहीं था, पहली बार भी उन्होंने जिस तरह से किआ था में बता नहीं सकती शिव. एक साल बाद मुझे पता चला था की वो किसी और को अपनी बीवी बनाना चाहता है, इसीलिए उसने ये भी ख्याल रक्खा की में माँ न बन जाऊ. कैसे मेने तीन साल निकले है में hi जानती हु.

शिव : तीन साल, पर तुमतो अभी छोटी लगती हो.

इनायत : 18 की हुई थी तभी शादी कर दी थी मेरी. में पढ़ना चाहती थी पर कोई नहीं मन. मुझे इसीलिए दर लगता है इन सब में.

शिव : तो फिर मेरे साथ क्यों किआ वो सब?

इनायत : (शर्मा kar)Muje तुम बहोत अच्छे लगे शिव, तुम जिस तरह से सबसे बात करते हो, अच्छे से बेहवे करते हो, मुझे बहोत अच्छे लगे तुम. वैसे भी अब खोने को कुछ नहीं है, तो मेने सोचा की एक बार तो अपने मान की कर लू.

शिव : कोई बात नहीं, अभी तुम दर भी रही हो और शर्मा भी रही हो, हम बाद में करेंगे.

इनायत : (अपने दाहिने हाथ को उसकी छाती पर रख कर सहलाते hue)Tum फिर आओगे मुझसे मिलने?

शिव : आऊंगा. (उसने अपना बया हाथ आगे बढ़ाया और मेरे दाहिने हाथ को पकड़ा और अपने स्तन पर रखते हुए)

इनायत : आओगे तब आओगे, आज तो हम साथ है न, में अब पूरा साथ दूंगी आपका, बस मुझे जी भर जाये इतना प्यार करो. (मेने उसकी आँखों में देखा, वो बस मुस्कुरा रही थी, अब में देर नहीं करना चाहता था तो मेने लेते लेते hi अपना शार्ट, अंडरवियर के साथ निकल दिया, और उसका सलवार भी निकल ने लगा तो उसने अपने कूल्हे उचक कर निकलने दिया, वो सिर्फ पंतय पहने हुए थे, उस खूबसूरत बाला के देख कर किसी का भी इमां दोल सकता था, मुझे ऐसे देखते देख वो शर्मा गयी और दूसरी और देखने लगी)

शिव : तुम तो फिर शर्मा गयी.

इनायत : (मुस्कुराते hue)Aise देखोगे तो शर्म नहीं आएगी क्या.

शिव : तुम बहोत प्यारी हो इनायत. (उसने मेरी और देखा)

इनायत : आपको अच्छी लगी, मेरी खुशकिस्मती है. (उसने बड़े प्यार से कहा)

शिव : अब तो में वह छू सकता हु न?

इनायत : (शर्माते hue)Hmmm, जहा मर्जी हो. (मेने देखा की वो पूरा समर्पण कर चुकी है, में खड़ा हुआ और उसके पैरो के बिच चला गया, मेने उसे देखा तो शरमाते हुए मुस्कुरा रही थी, मेने उसकी गुलाबी पंतय को देखा जो पूरी तरह से आगे से गीली हो चुकी थी, मुझसे रहा नहीं गया और में झुक गया और उसकी पंतय के ऊपर से hi छूट को चाटने लगा)





(इनायत ने झटका खाया और चद्दर को मुट्ठी में पकड़ liya)Shhhhhhh ummmmm(Uske मुँह से सिसकी निकल रही थी पर वो आवाज नहीं करना चाहती थी, जैसे जैसे शिव उसकी छूट को पंतय के ऊपर से चाट रहा था वो मचल रही थी, उसने ये सब सुना था पर कभी महसूस नहीं किआ था, उसके पति को उसे खुस करने में कोई इंट्रेस्ट नहीं था, वो बस उसको चुसवाते था, कभी उसकी चूसी नहीं थी, इस नए अनुभव से इनायत मदहोश सी होने लगी, उसकी कमर अपने आप उठ रही थी और वो शिव के मुँह की और उछाल रही थी, वो अपनी सीस्कीओ को अपने मुँह में हाथ दबा कर रोकने का प्रयास करने लगी पर फिर भी उसके मुँह से आवाजे आ रही thi)Ummmmm उम्मम्मम उम्म्म्म. (शिव ने उसकी पंतय को साइड में खिसका दिया,





उसे बहोत शर्म आ रही थी पर वो शिव को रोकना नहीं चाहती थी, वो बहोत गरम भी हो चुकी थी पर साथ में इस अध्भुत मज़े के नशे में दुब चुकी थी, वो उसे सब कुछ कर लेने देना चाहती थी, बस शर्म की वजह से अभी भी वो इतना नहीं खुल पायी थी. जैसे hi शिव ने उसकी नंगी छूट को अपने होठो से चूसा तो वो ऊपर की और धनुस बन गयी, उसके हाथ शिव के बालो पर पहुंच gaye)Shhhhhhhh शीइइइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह में पागल हो जौंगीीी शह्ह्ह्हह्ह (शिव लगातार उसकी छूट को प्यार कर रहा था, ऐसे अध्भुत मज़े से वो बेखबर थी, वो लगातार सिस्किअ ले रही थी पर आवाज ज्यादा न हो उसका भी ध्यान रख रही थी, उसकी बॉडी में अजीब सी हलचल होने लगी थी, उस से बर्दास्त होना मुश्किल हो रहा था, वो शिव के शिर को पीछे धकेलने lagi)Bassssss शह्ह्ह्हह्ह और नाहीईईई शह्ह्ह्हह्ह में पागल हो जाउंगी शह्ह्ह्हह्ह मात करूऊओ शह्ह्ह्हह्ह बस्सस shhhhhhhhhh. (में भी रुक गया और उसके बाजु में लेट गया, वो मुझसे लिपट गयी और मुझे चूमने lagi)ummhh उम्मंहहहह ुम्मःहहह.

शिव : मज़ा आया? (उसको बहोत शर्म आ रही थी, नज़ारे भी नहीं मिला रही थी, बस हआ में शिर हिला कर उस से लिपट गयी, शिव muskuraya)Abhi तो बहोत मज़ा आनेवाला hai(Mene उसकी पंतय में हाथ दाल दिया, वो फिर से मचलने लगी)

इनायत : शह्ह्ह्ह मात करो शिव, मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा. (मेने पेअर की मदद से उसकी पंतय को निचे खिसका दिया और निकल दिया, वो बस शर्मा रही थी मेने उसको अपनी और घुमाया और उसको पीछे से पकड़ लिया और कूल्हे दबाने लगा, और अपनी ऊँगली को उसकी गीली छूट में डालने laga)Shhhhhh शीइइइइइव माअत करो शह्ह्ह्ह में नहीं रह पाऊँगी शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव: सिर्फ मज़े लेती रहो गई की डौगी भी. (वो मुझे देखने लगी, मेने उसका हाथ पकड़ा और अपने लुंड को उसके हाथ में पकड़ा दिया, वो शर्मा गयी पर हाथ नहीं hataya)Us को सेहलाओ. (वो और शर्मा गयी, में फिर से उसकी छूट में ऊँगली करने लगा उसकी पकड़ मेरे लुंड पर सख्त हो gayi)(Us बड़े लुंड को पकड़ कर इनायत की हालत ख़राब हो रही थी, फिर एक बार उसके मान में दर सामने लगा था, पर वो शिव को नाराज नहीं करना चाहती थी तो उसने लुंड हिलना सुरु कर दिया,





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शिव उसके होठो को चूसने लगा तो वो भी उसके होठो को चूसने लगी, दोनों ऐसे hi एक दूसरे के साथ खेल रहे थे, थोड़ी देर बाद शिव ने उसको अपने ऊपर कर दिया और उसको घुमा दिया, इनायत के चेहरे से लुंड टकराया तो वो घबरा गयी, और शिव के ऊपर से निचे उतरने लगी, पर शिव ने उसे पकड़ के रक्खा था, उसके पेअर फैला कर शिव उसकी छूट को चाटने लगा, उसकी आंखे बंद हो गयी और उसने लुंड के साइड में अपना शिर रख दिया, लुंड से आती मादक गंध से वो उत्तजित होने लगी और फिर उसने लुंड को देखा, वो उसके एकदम करीब था, उसके चेहरे से भी बड़ा था वो, आंखे फाडे वो उसको देख रही थी, बड़ी बड़ी नशे उभरी हुई थी, उसकी सांसे फूलने लगी थी, तभी शिव उस से bola)Agar अच्छा लगे तो चूस लो. (इतना बोल के वो फिर उसकी छूट चूसने लगा, उसने एक बार फिर लुंड को देखा, भले hi वो खतरनाक दिख रहा था पर वो उसके मान को भ रहा था, उसने कांपते हाथो से फिर एक बार उसे पकड़ा और उसको साइड से चाटने लगी, फिर से दोनों एक दूसरे को खुस करने लगे, शिव उसकी छूट चाट रहा था और वो उसके सुपडे को अपने मुँह में भर ली और उसे चूसने लगी,





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उसका मुँह पूरी तरह से फ़ैल गया था, फिर भी वो उसे चूस रही थी. उसे भी वो अच्छा लगने लगा, अब दोनों बहोत ज्यादा गरम हो चुके थे.)





शिव : (मेने उसे निचे उतर दिया और उसके ऊपर आ गया, मेरा लुंड उसकी छूट से सात गया, में उसके निप्पल को मुँह में भर के चूसने लगा, और लुंड को उसकी छूट पर घिसने laga)Taiyar हो? (मेने उसकी आँखों में देखा, वो बस मुझे देख रही thi)Kya हुआ? (उसने ना में शिर हिलाया, जैसे कह रही हो कुछ nahi)Dar लग रहा है? (उसने कोई जवाब नहीं दिया, बस मुझे देख रही थी, मेने उसके होठो को किश किआ फिर ऊपर हो कर puchha)Dar लग रहा है? (उसने हां में गर्दन hilayi)Me ध्यान रखूँगा तुम्हारा, भरोसा करती हो न (उसने फिर से हां में गर्दन हिलायी, में सीधे बेथ गया और छूट को देखा, छूट बंद जैसी hi दिख रही थी, मेने लुंड को छूट पर रक्खा और उसके होठो पर लुंड रगड़ने लगा ताकि वो थोड़ी रिलैक्स हो जाये,





वो मुझे देख रही थी, उसे भी पता था की जो होना है वो होना hi है. वो शादी सुदा रही थी तो ज्यादा तो दिक्कत होनी नहीं थी, पर फिर भी में आराम से hi करना चाहता था, मेने लुंड छेड़ पर लगाया, और उसकी और देखा, वो मुझे hi देख रही थी, मेने थोड़ा जोर लगाया तो लुंड छूट के अंदर जाने लगा, उसके चेहरे पर दर्द उभर आया, पहली बार उसकी छूट इतना फ़ैल रही थी, सूपड़ा अंदर घुस चूका था, में रुक गया, सुपडे को अंदर फसाये hi में उसके ऊपर झुक गया और उसके होठो को किश kiya)Dard हो रहा है? (उसकी आँखों में देख कर पूछा मेने, उसने ना में गर्दन हिल्यै, हलाकि मुझे पता था की उसको दर्द हुआ) तुम बहोत प्यारी हो इनायत, मेरा थोड़ा मोटा है तो थोड़ा दर्द hoga(Mene निसाहह हो कर कहा, उसने हां में शिर हिलाया, मेने फिर लुंड

पर दबाव डाला तो वो अंदर उतरने लगा, उसके चेहरे पर दर्द उभर आया, उसकी सांसे बहोत तेज चल रही थी और उसका गोरा चेहरा लाल हो चूका था, मेने आधा लुंड अंदर दाल दिया, अब आगे जगह नहीं थी, में रुक गया और उसको किश करने लगा, उसके चेहरे पर दर्द था पर फिर भी वो कुछ नहीं बोली थी, बस दर्द बर्दास्त कर रही थी, में थोड़ी देर उसको किश करते रहा, वो भी मुझे किश कर रही थी, मेने लुंड वापस खिंचा, और फिर अंदर किआ, ऐसे hi थोड़ी देर में करता रहा जिस से छूट में फिर से पानी आने लगा, में आहिस्ता आहिस्ता उसको चूमते हुए चाट ते हुए हलके हलके धक्के लगा रहा था, छूट बहोत ज्यादा गर्म थी, और छोटी भी थी. उसकी सिस्किअ भी निकालनी सुरु हो गयी थी.

इनायत : (पहली बार कोई इतने बड़ी चीज उसके अंदर गयी थी, उसकी छूट पूरी तरह फ़ैल गयी थी, वो बड़ा सा सूपड़ा उसकी छूट की नरम दिवलो को रगड़ रहा था, दर्द था पर अब काम था, उसको बहोत अच्छा लग रहा था, शिव पूरी तरह से उसका ध्यान रख रहा था, वो भी जानती थी की दर्द तो होगा hi पर वो बहोत प्यार से उसके साथ कर रहा था, उसको शिव पर बहोत प्यार आने लगा, वो उसका गाला चाटने लगी और उसे बताने लगी की उसे बहोत मज़ा आ रहा है,





लुंड लगातार उसकी छूट को फैला ते हुए अंदर जा रहा था, वो महसूस भी कर रही थी, पर वो पूरी तरह से उसे पाना चाहती थी, लगातार चुदाई से उसके शरीर में बहोत कुछ हो रहा था, उसकी छूट लगातार पानी छोड़ रही थी, वो भी पागल हो रही थी और वो शिव को अपनी और खींचने लगी और निचे से धक्के लगाने लगी थी, वो झड़ने के करीब पहुंच चुकी थी, वो अपना मुँह खोले साँस लेने की कोश्शि करने lagi,)Shhhhhh जल्दी करो शिईयिव शह्ह्ह्ह मेरा होनेवाला है, शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : इतना जल्दी स्वीटी.

इनायत : मुझे बहोत अच्छा लग रहा है शिव शहहहहह बहोत अच्छा शह्ह्हह्ह्ह्ह वो बहोत बड़ा है शह्ह्ह्हह्ह पता नहीं कैसे अंदर चला गया शह्ह्हह्ह्ह्ह जल्दी shhhhhhhh(Me उसे जल्दी जल्दी छोड़ने लगा, में उसके झड़ने का वेट कर रहा tha)Me गयी शिईयिव शह्ह्ह्ह में गईइइइइइइइइ. (मेने उसे झड़ने दिया और लगातार हलके हलके धक्के मरने लगा, उसकी छूट ने मेरे लुंड को पूरी तरह से जकड लिया था, अगर मेरा लुंड इतना कड़क न होता तो अंदर बहार भी न हो पता, पर में लगातार धक्के लगा रहा tha)Shhhh बस्स्स शीइइइइव शह्ह्ह्ह रुक जाओ शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा shhhhhhh(Muje यही सही मौका लगा और मेने जोर से दो तीन धक्के मर दिए, उसने मेरे कंधे पर अपने दन्त gadhadiye)Ummmmmmmmmm. (मेरा लुंड उसकी छूट को खोलता हुआ अंदर घुस चूका था, में रुक गया, वो चाट पता रही थी, पर मेने उसे अपने निचे दबोचे रक्खा, थोड़ी देर बाद वो थोड़ी शांत हुई और बिस्तर पर लेट गयी, मेने उसको देखा तो उसकी आँखों से आंसू नीलकल आये थे. मेने उसका चेहरा सहलाया)

शिव : सॉरी बाबू. (मुझे दुःख हो रहा था पर ये तो होना hi था, आँखों में आंसू लिए वो मुझे देख रही थी) सॉरी, ज्यादा दर्द हुआ (उसने रोटी सकल से हां में शिर hilaya)Nikal लू? (उसने ना में शिर हिलाया, में मुस्कुराया तो वो शर्मा gayi)Sorry बाबू, तुम नाजुक सी हो न तो ज्यादा दर्द हुआ तुम्हे.

इनायत : (शिव की छाती को सहलाते hue)Tumhara ज्यादा बड़ा है, इस लिए. (में मुस्कुराया तो वो शर्मा गयी)

शिव : क्यों अच्छा नहीं लगा? (वो बस शर्मा गयी, में झुका और उसके स्तन को चूसने लगा, वो भी मेरे बालो को सहलाने लगी, थोड़ी hi देर बाद वो फिर से गरम हो गयी थी, में फिर से कमर हिलने लगा, अब उसकी छूट खुल चुकी थी तो मुझे भी मज़ा आ रहा था, मेरे धक्के भी लम्बे होने लगे. लगातार में उसे छोड़ रहा था, अब उसकी सिस्किअ भी बढ़ गयी थी, वो अपने आपको कण्ट्रोल कर रही थी पर सिस्किअ निकल hi जाती thi)Maza आ रहा है?





इनायत : हआ, शहहहहह बहोत मज़ा आ रहा है शह्ह्ह्हह्ह इतना मज़ा तो मुझे कभी नहीं मिला था शह्ह्ह्हह्ह (वो चुदती रही में लगातार उसे छोड़ रहा था. आहिस्ता शिव शह्ह्ह्ह तुम्हारा बहोत बड़ा है शह्ह्ह्ह आराम से शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अम्मीईई शह्ह्ह्ह आईईईई आईईईई (लुंड उसकी बच्चे दानी को छू रहा था, ऐसा अनुभव उसे पहली बार हो रहा tha)Shhhhh मा शह्ह्ह्ह बहोत लम्बा है शहहहहह आईईईई आराम से शह्ह्ह्ह मर गयी शहहहहह आईईईई आरामसे शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : क्या हुआ?

इनायत : अंदर वो टकरा रहा है शहहहहह.

शिव : अभी अंदर भी चला जायेगा.

इनायत : (घबरा kar)Abhi पपुरा अंदर नहीं गया.

शिव : (मुस्कुराते hue)Nahi, अभी नहीं गया.

इनायत : (लगरत उसकी गर्भाशय की दीवाल पर धक्के लगने से वो पागल हो रही thi)Shhhh ामीईई शहहहहह एआरएम से अह्ह्ह्हह मर जाउंगी आज में शहहहहह.( दोनों पशीने पशीने हो चुके थे, में रुक गया और उसको kaha)Ghodi बनोगी (वो शर्मा गयी, मेने फिर puchha)Kaho न (उसने है में शिर हिलाया, मेने लुंड बहा निकला और उसको घोड़ी बना दिया, वो बहोत शर्मा रही थी, मेने उसकी छूट को देखा और सहलाया, इनायत ने मुझे देखा तो में मुस्कुराया, वो शर्मा गयी, मेने उसकी चुटको फिर से थोड़ी देर छठा तो वो सिस्किअ लेती रही, मेने फिर लुंड छूट पर रगड़ा, वो मुझे देखने लगी)

शिव : दाल दू? (उसने शर्मा के हां में इस्सर किआ, मेने भी मुस्कुराते हुए लुंड को छेड़ पर लगाया और अंदर दबा दिया)

इनायत : शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह maaaaaaa(Ronewali सकल se)(Fir शिव धक्के लगाने लगा, उसकी चूचिया आगे पीछे हो रही थी, बच्चेदानी की दीवाल पर लगने से उसकी हालत ख़राब thi)shhhhh आईई शह्ह्ह्ह धीयिरी शहहह ामीईई शहहहहह.

शिव : ामी अम्मीय करोगी तो वो ऊपर न आजाये. (मेने मुस्कुरा कर कहा तो वो भी पीछे देख कर muskurayi)Bahot टाइट हो तुम, ऐसा लग रहा है जैसे कुवारी हो तुम.

इनायत : (रोनेवाली सकल से उसने पीछे देखा और msukurayi)Shhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, तुम्हे अच्छी लगी में शह्ह्ह्ह. (में कुछ नहीं बोलै, धक्के कहते hue)Bolo न, कासी लगी में?

शिव : बहोत गर्म हो तुम, और खूबसूरत भी, वो पागल है जिसने तुम्हे छोड़ दिया. बेवकूफ hi होगा वो. (मेरे धक्के लगातार लग रहे थे, वो फिर से झनेवाली हो गयी, उसके पेअर कैंप गए और वो उलटी बिस्तर पर लेट गयी, में फिर रुक गया, मेने उसको पलट दिया और सीधा लेता दिया, और फिर से टंगे फैला कर लुंड अंदर दाल दिया)

इनायत : ोुछःह, धीरीईए. (में फिर से करने laga)Shhhhh अमिई शहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह आहिस्ता शह्ह्ह्ह आहिस्ता शह्ह्ह्हह्ह मर जाउंगी यार शहहहहह धीरे शह्ह्हह्ह्ह्ह आहिस्ता करो न शह्ह्ह्हह्ह मर जाउंगी मई shhhhhhhhhhhh, कितना करते हो तुम शह्ह्ह्हह्ह, मर गईइइइइइ शह्ह्हह्ह्ह्ह (उसके चेहरे पर हल्का दर्द था)





शिव : क्या हुआ बाबू? मज़ा नहीं आ रहा?

इनायत : बहोत आ रहा है, शहहहहह. पर दर्द भी हो रहा है, shhhhhhhhhh पहली बार इतनी देर तक कर रही हु शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माआ मरगयीईइ शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : मेरे पास होगी तो यही हॉल होगा, ज्यादा दर्द होता है तो दूर hi रहना मुझसे.

इनायत : (उसको अपनी बहो में जकड़ते हुए अपने पेअर कमर में लपेट liye)Me क्यों दूर राहु, में नहीं रहनेवाली.

शिव : तो फिर ऐसी hi हालत होगी तुम्हारी.

इनायत : मर जाउंगी बस इतना hi न, मार देना मुझे, बस, (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : वैसे नहीं मरूंगा (उसको छोड़ते hue)Aise मरूंगा.

इनायत : (फिर चटपटा gayi)Aiiiiii शह्ह्ह्हह्ह बहोत बेदर्दी हो तुम शह्ह्ह्हह्ह मेरा फिर होनेवाला है यार शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ये क्या हो रहा है shhhhhhhhhhhhh.

शिव : (अंदर तक लुंड थोड़कते hue)Mera भी होनेवाला है, कहा करू?

इनायत : अंदर hi कर न.

शिव : क्यों प्रेग्नेंट होना चाहती हो?

इनायत : नहीं, अभी नहीं, पर मुझे महसूस करना है सब, में कल गोली खा लुंगी, पर अभी मेरे अंदर hi करना. (उसकी बातो से मेरे अंदर जोश बढ़ गया और में धक्के लगाने लगा, मेने पूरा लुंड अंदर थोक दिया जिस से उसकी बच्चेदानी का मुँह खुल गया और लुंड अंदर चला जा रहा tha)Maaaa शह्ह्ह्ह मरजाऊँगी यार सच में शहहहहह बहोत अंदर जा रहा है शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आईईईई आराम से शहहहहह सच में मर जाउंगी शह्ह्ह्हह्ह आईईईई शीइइइइइव आआह मुझे बचा लो शहहहहह मर जाउंगी सस्शह्ह्ह्ह आईईईई वो अंदर कही घुस गया है शह्ह्ह्हह्ह आईईईई शह्ह्ह्हह्ह फैट गयी यही शह्ह्हह्ह्ह्ह जलन हो रही है शह्ह्ह्हह्ह. (वो बाद बड़ा रही थी पर अब में नहीं रुक सकता था,





में लगातार धक्के लगा रहा tha)Me गयीईइ शहहहहह में गईइइइइइइइ aiiiiiiiiiii (उसने फिर पानी बहा दिया, पर में नहीं रुका और उसे छोड़ता रहा, वो पशीने से नाहा गयी थी, बिस्तर भी गिला हो चूका था, में धक्के लगाए जा रहा tha)Bassss शहहहहह बस्स्स करो शह्ह्ह्ह मर जाउंगी में शह्ह्हह्ह्ह्ह आईइइइइइइइ नहीं होगा मुझसे शहहहहह बस्स्स शह्ह्ह्ह रुक जाओ शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ामीईईई शहहहहह मर जाउंगी शह्ह्हह्ह्ह्ह आईईईई बस्स्स शिईयिव शहहहहह में नहीं ले पाऊँगी अब शहहहहह बस्सस माआ दर्द हो रहा है शहहहहह छोड़ दो मुझे सशह्ह्हह्ह बस शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह आईइइइइइइइ (मेरा भी छूटने वाला था तो मेने आखरी धक्को के साथ पूरा लुंड बच्चेदानी में घुसा दिया और अपना लावा छोड़ दिया और उस से पूरा चिपक gaya)OOOO मायआ मर gayiiiiiiiiiiiiiii(Kehte हुए वो फिर से झड़ने लगी)

दोनों बस जोर जोर से सांसे ले रहे थे और एक दुआरे को बहो में लिए थे. इनायत पहली बार ऐसा कुछ महसूस कर रही थी, उसको भले दर्द हुआ था पर अपने अंदर भर रहे उस गरम तरल ने जैसे मलहम का काम किआ था, वो अपनी पूरी ताकत लगा कर शिव से चिपक गयी थी और अपनी छूट को पूरी तरह से लुंड पर दबा दिया था, एक कम भी बाकि नहीं छोड़ा था, ऐसे अद्भुत मिलान की तो उसने कल्पना भी नहीं की थी, वो आंखे बंद किये हुए बस शिव से चिपकी रही, जैसे कभी वो उसे नहीं छोड़ेगी.
 
अपडेट 164

संयम की आँखों से नींद गायब थी, वो बिस्तर पर अकेले लेती हुई सोच रही थी, अभी थोड़ी देर पहले जब उसको पेशाब लगी थी तो वो निचे गयी थी, अपने अम्मी और अब्बू के कमरे से लड़ने की आवाजे आ रही थी, उसे लगा की अब्बू को शायद पता चल गया है इस लिए वो गुस्सा कर रहे है तो वो ध्यान से सुन ने लगी. अम्मी के रोने की आवाज आ रही थी,

अब्बू : अब ये रोना धोना बंद करो, ये तुम्हे सोभा देता है क्या, पुरे दिन काम करो और रात को तुम्हारे नाटक सुरु हो जाते है.

अम्मी : (सुबकते hue)Mene क्या गलत किआ बताओ मुझे, अपने शोहर के साथ नहीं सोऊंगी तो किसके साथ सोऊंगी?

अब्बू : इस उम्र में तुम्हे ये कैसा शौक चढ़ा है है?

अम्मी : क्या हर बार उम्र उम्र कर रहे हो, क्या में बुद्धि हो गयी हु? छोटी उम्र में शादी कर दी मेरी, और दो बच्चिया है, तो क्या में बुद्धि हो गयी, लोग जितना जीते है उस से आधी उम्र भी नहीं हुई है abhi.(Ammi ने सुबकते हुए कहा)

अब्बू : तुम ख़म खा hi बहस कर रही हो, अब नहीं होता सब, तुम्हे तो सब रोज़ रोज़ hi चाहिए होता है.

अम्मी : में रोज़ रोज़ कहती हु क्या, महीने में एकड़ दिन hi आपके करीब आती हु, कभी कभी तो दो तीन महीने गुजर जाते है, अपने शौहर के साथ हमबिस्तर भी नहीं हो सकती क्या?

अब्बू : देखो ज़ोया, ये फालतू की बहस मात करो यार, सुबह मुझे जाना भी है, अब ये सेक्स वेक्स मुझसे नहीं होता, अपने मान पर काबू रक्खो, घर में जवान बेटी है, उसका तो लिहाज करो. अगर उन्होंने देखा या सुना तो क्या सोचेगी.

अम्मी : उन्ही का तो ख्याल है मुझे, इसीलिए तो चुप रहती हु, पर कभी तो मेरा मान करेगा, थोड़ा भी आपके नजदीक आती हु तो कहते हो की नींद आ रही है सो जाओ, में भी पूरा दिन काम करती हु, में भी थक जाती हु, कभी तो आपके पहलु में औ की नहीं.

अब्बू : तुम सो जाओ अब और मुझे भी सोने दो.

फिर आवाजे आणि बंद हो गयी, बस अम्मी के सुबकने की आवाजे आ रही थी, वो चुपके से वह से बाथरूम गयी और पानी पि कर ऊपर चली गयी.

वो बस अपनी सोच में डूबी थी, उसके लिए ये सब नया था, उसको समाज नहीं आ रहा था की आखिर हो क्या रहा है. उसको अपनी अम्मी पर गुस्सा भी आ रहा था की वो अब्बू को परेशान कर रही है.

संयम :(मान me)Kya हो गया है अम्मी को, उम्र तो देखती नहीं, शर्म भी नहीं आती ऐसा सब कहते हुए, शिव के साथ सब कर ली, ये hi गयी होगी उसके पास, वो ऐसा नहीं है, अम्मी को तो लिहाज करना चाहिए था, कैसे सेक्स के लिए पागल हुई जा रही है, न अपनी उम्र दिखी उनको न शिव की, मेरी उम्र का है वो और उसके साथ hi सब कर रही थी, कैसे बेशर्मो की तरह और करो, और करो कह रही थी, ऐसे तो कितनी सीधी बनती है. (उसके जहँ में उस रात वाली घटना तजा हो गयी थी, उसको शिव का वो बड़ा लुंड दिख रहा था, हलके गुस्से se)Wo भी बेशरम, इतनी बड़ी औरत के साथ सब कर रहा था, कैसे अम्मी के वह वो दाल रहा था (याद करते हुए उसका हाथ फिर अपनी योनि पर चला गया) अम्मी भी पूरी बेशरम हो गयी थी, कैसे कह रही थी की बहोत मज़ा आ रहा है, क्या सच में बहोत मज़ा आता होगा, (उसने अपनी योनि को dabocha)Shhhhhh, ये कैसा एहसास है (शिव और अपनी अम्मी की चुदाई याद करते हुए वो अपनी छूट को सेहला रही thi)Shhhhh (उसे लग रहा था की शिव उसके साथ कर रहा hai)Shhhhh शिईयिव शह्ह्ह्ह, में हु सीईव शह्ह्ह्ह मेरे साथ करो शहहहहह मेने कब मन किआ है, (उसने अपनी चड्डी में हाथ दाल दिया और अपनी कुवारी काली जैसी छूट को सहलाया, जाया बहोत सारा चिप छिपा पानी निकल रहा था, वो इमेजिन कर रही थी की शिव उसके ऊपर hai)Shhhhh हआ शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह ऐसे hi शह्ह्ह्हह्ह (वो अपनी छूट को सेहला रही थी, और अपने छोटे से छेड़ पर ऊँगली फिर रही thi)Shhhhhh शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह (उसका हाथ अपने भगनाङ्कुर को छूने लगा तो उसके शरीर में अजीब सी तरंगे दौड़ने lagi)Shhhhh ओह शीइइइइइव शहहहहह करो अऊर करो शह्ह्ह्हह्ह प्लीज ऐसे hi शह्ह्हह्ह्ह्ह (वो ज्यादा देर टिक न पायी और उसने पानी छोड़ diya)Shhhhhh आईईईई ष्ठीीीीव शह्ह्ह्हह्ह. (उसका बदन ढीला पद गया, उसकी आँखों के सामने अँधेरा छ गया, वो जोर जोर से सांसे ले रही थी, उसकी छोटी सी पंतय पूरी गीली हो चुकी थी, थोड़ी देर बाद वो होश में aayi)Chhhi, ये क्या कर दिया मेने, (उसने अपने हाथ को देखा जिस पर पानी लगा हुआ था, वो अपने नाक के पास ले gayi)Yuuaakkkk, छियईईई. (वो उठी और अपनी लेंगी निकली और पंतय भी, पंतय से अपनी छूट को साफ़ किआ और दूसरी पंतय पहन ली, लेंगी भी पहन ली और फिर बिस्तर में लेट gayi)Ammi की वजह से hi ये सब हो रहा है, में भी कैसी कैसी हाकते कर रही हु.

मान : अपनी अम्मी को क्यों दोष दे रही है, क्या उस से पहले तूने कभी शिव को नहीं छुआ था, कैसे तू उसके वह हाथ लगाती थी, तब क्या तेरी अम्मी ने सिखाया था tuje.Abhi थोड़ी देर पहले तो शिव को अपने ऊपर िमागिन कर रही थी और अब सारा दोष अम्मी का??? तुजे पता है की शिव और वैस्वी का कुछ है, फिर भी तू क्यों उसके पीछे पड़ी है बोल?

संयम : उनके बिछ कुछ नहीं है, मुझे पता है.

मान : दिल बहलाने के लिए ख्याल अच्छा है, अंधी बानी रह, सब सामने है, पहले वो उसके नाम से चिढ़ती थी और अब उसके साथ रहती है, शिव भी तो रहता है उसके साथ, ऐसे hi वो साथ रहने लगे, कुछ तो हुआ होगा उनके बिच, ऐसे hi दोस्ती हो गयी, सचतो ये है की ये दोस्ती नहीं कुछ और hi है, वर्ण तेरे मन करने के बाद वो उसके साथ बात न करती.

संयम : ऐसा कुछ नहीं है.

मान : है है है, तू मुझे समजा रही है की अपने आपको, अंधी.

संयम : ऐसा कुछ नहीं है.

मान : वो पहले से hi उसको पसंद करता है, क्या तुजे पता नहीं है?

संयम : बकवास मात कर, उसने उसे देखा नहीं था इस्सलिये hi वो देखता था, पसंद वसंद नहीं थी वो.

मान : चलो मान लिया, पर अब, अब तो वो उसके पीछे पीछे है न, और वैस्वी क्यों बार बार उसको छोड़ने जाती है, क्यों की वो उसके साथ अकेले रहना चाहती है, सामजी.

संयम : तो रहे, वैसे भी वो है hi गन्दा, उसके साथ भी जब वो वैसा करेगा न तब उसे पता चलेगा.

मान : अंगूर खट्टे है, है न, और वो क्यों मन करेगी वो सब करने से, अभी अभी तू भी तो उसके साथ सब करने की इमेजिनेशन कर रही थी, जब की तुजे तो पता है की उसने तेरी अम्मी के साथ सब किआ है.

संयम : झुंझलाते हुए, मेरा दिमाग ख़राब मात कर, सोने दे मुझे. (उसने गुस्से से अपना मुँह धक् लिया, फिर भी ख्याल आते रहे, बड़ी मुश्किल से वो सोई)





में और इनायत नंगे hi आंखे बंद किये हुए लेते थे, वो मेरे ऊपर पेअर दाल कर लेती थी, मेने उसके कूल्हों को सहलाया तो उसने अपनी बोझिल आँखों से मुझे देखा, बल बिखर कर चेहरे पर आ चुके थे, वो बस मुझे देख रही थी.

शिव : क्या देख रही हो? (वो बस मुस्कुरायी और ना में गर्दन हिलायी) मज़ा आया? (वो शर्मा गयी और नज़ारे झुका ली, उसके चेहरे से बाल हटते hue)batao न, मज़ा आया की सिर्फ दर्द hi hua?(Usko बहोत शर्म आ रही थी, वो उसकी छाती पर शिर रख कर उसके निप्पल के इर्दगिर्द ऊँगली घुमा रही thi)(wo कुछ बोल नहीं रही थी तो मेने उसे अपने ऊपर खिंच liya)Kya हुआ, कुछ तो बोलो?





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इनायत : (शरमाते hue)Kya बोलू?

शिव : यही की मज़ा आया की नहीं?

इनायत : बहोत मज़ा आया, ऐसा लगा पहली बार कर रही हु. (उसने मेरी छाती पर अपना शिर रख कर कहा)

शिव : ऐसा क्यों?

इनायत : वो न सिर्फ जबरदस्ती करता था, अपना काम निपटाया और फिर तू कोण और में कोण, और इतनी देर तक का तो मेने कभी सोचा भी नहीं था, वो एक महीना करने में जितना टाइम लेता था उतना आपने एक बार में hi कर दिया, आप इंसान hi हो न? (वो मेरे निप्पल के साथ खेल रही थी)

शिव : उसके बारे में क्यों सोचती हो अब, भूल जाओ उसको.

इनायत : हम भूलने का ढोंग कर सकते है, भूल थोड़ी न सकते है, और वैसे भी दुःख अगर याद हो तो hi सुख का महत्व पता चलता है, में उसको वैसे नहीं याद कर रही, वो जिए या मरे मुझे उस से क्या, पर आज जब आपके साथ रही तब पता चल रहा है की एक मर्द क्या होता है.

शिव : मेरा बड़ा है इसलिए ऐसा कह रही ho?(Mene मुस्कुरा कर कहा)

इनायत : नहीं, वो बड़ा हो या chhota,us से क्या फर्क पड़ता है, कोई तुम्हे धुत्कार के पकवान दे और कोई प्यार से सुखी रोटी भी किलाये तो वो सुखी रोटी hi अच्छी लगती है, आप जिस तरहसे मेरे साथ पेश आये वो मायने रखता है, लड़कीअ प्यार की बुखी होती है, सेक्स की नहीं, अगर मुझे खुद को ठंडा hi करना है तो और भी तरीके है, पर किसी की चाहत, किसी का प्यार hi सब कुछ है.

शिव : पर में थोड़ी न तुमसे प्यार करता हु, तुम और में तो जानते भी नहीं एक दूसरे को.

इनायत : प्यार का मतलब वो लैला मजनू वाला प्यार hi नहीं होता, जब हम पहली बार hi किसी बच्चे को मिलते हे तो भी हम उसको प्यार से उसे सहलाते हे, न उसने ऐसा कुछ किआ है न उसने कुछ कहा है, फिर भी हमे उस पर प्यार आता है, और ये तब होता है जब आप खुद अच्छे होते हो, आपके व्यव्हार से आपके अंदर की अच्छाई झलकती है, मन की आप बहोत हैंडसम हो, कोई भी लड़की आपको देख कर hi आपकी और आकर्षित हो जाएगी, पर जब वो आपके नजदीक आएगी तब आपका व्यव्हार hi है जो ये तय करता है की आगे वो आपके साथ रहे या न रहे.

शिव : पर कोई अच्छा बन ने का नाटक भी तो कर शक्ति है.

इनायत : है, कर शक्ति है, तभी तो लोग अक्सर धोका कहते है.

शिव : अगर में भी धोखा दे रहा हु तब, सिर्फ इन सबके लिए hi तुम्हारे करीब आया हु तो?

इनायत : वैसे भी आप हमेशा के लिए तो मेरी जिंदगी में रह नहीं सकते, बस इतना कहूँगी की दूर भले चले जाना पर दूर मात होना, अगर अच्छे बन ने का नाटक भी किआ है तो जब भी मिलो करते रहना, में नहीं चाहती की में आपको कभी नफ़रत या दर्द से याद करू.

शिव : तुम लड़कीअ सच में पागल होती हो, (उसको अपने ऊपर से हटते hue)Me बाथरूम जा कर आता हु. (में बाथरूम चला गया और उसकी बाटे hi सोच रहा था, वो सच में अच्छी है, जब वापस आया तो अभी तो सीधी लेती हुई थी, वो पूरी नंगी hi थी, उसकी छूट से अभी भी वीर्य निकल रहा था)





(इनायत का जब ध्यान गया की शिव उसे देख रहा है तो वो शर्मा गयी, वो बस सोच में डूबी थी तो वो ऐसे लेती थी, उसे अपनी स्थिति का भी बहन नहीं रहा था, जब शिव को ऐसे देखते पाया तो अपनी स्थिति का बहन हुआ, और वो चादर अपने ऊपर डालने लगी, शिव नंगा hi था और उसको देख कर उसके लिंग में तनाव भी आ गया था, उसको बहोत शर्म आ रही थी, पर उसको देख कर शिव उत्तेजित हो रहा था ये देख कर उसको अच्छा भी बहोत लगा)

शिव : तुम्हे बाथरूम नहीं जाना?

इनायत : (चद्दर लपेटे बेथ गयी, जैसे hi बैठी उसे अपनी योनि में हल्का दर्द महसूस हुआ जो उसके चेहरे पर उभर aaya)Jana hai(Usne शर्मा के कहा, फिर वो उठी और चद्दर लपेटे hi बहार चली गयी, उसको चलने में भी तकलीफ हो रही थी, जब वो मूतने बैठी तब भी उसकी योनि से वीर्य टपक रहा था, ये देख कर उसे बहोत शर्म आ रही थी पर साथ में अजीब सी खुसी भी मिल रही थी, जब उसने अपनी योनि को पानी से धोया तो उसको वह जलन मेहसु होने लगी, उसकी अहह निकल गयी, अपने आपको साफ़ कर के वो वापस आयी, शिव तक लगाए बैठा था, वो अभी भी पूरा नंगा था, उसने देखा की शिव का लुंड वापस सोया हुआ है, पर फिर भी वो बहोत बड़ा लग रहा था, वो नज़ारे झुकाये अंदर दाखिल हुई और अपने कपडे समेटने लगी)

शिव : कपडे क्यों ले रही हो, जाना है क्या?

इनायत : (शर्मा के मुस्कुराते hue)Koi जग गया तो दिक्कत होगी.

शिव : (उसको ऐसे देख मेरा लुंड हरकत करने लगा tha)Koi नहीं जागेगा, आओ न यहाँ. (इनायत ने शिव की और देखा, वो उसे जिस तरह से देख रहा था वो शर्मा गयी, उसकी नजर उसके अंग पर भी गयी जो तनाव में आने लगा था, उसकी छूट में दर्द था पर मान नहीं मान रहा था, खतरा था पर उसके आगे जो मिलनेवाला था उसकी अहमियत कही ज्यादा थी, वो शरमाते हुए उसके पास जा कर कड़ी हो गयी तो शिव ने उसका हाथ पकड़ कर उसको नीचे खिंच लिया, वो उसके साइड में बेथ गयी, शिव ने उसको साइड से बहो में bharlia)Thodi देर तो रुक शक्ति हो न? (इनायत का दिल जोरो से धड़कने लगा, उसने गर्दन हिला कर हां kaha)(Mene ज्यादा देर करना सही नहीं समजा और उसका हाथ पकड़ कर अपने लुंड को थमा दिया, उसने एक बार मेरी और देखा और लुंड को देखते हुए उसे पकड़ कर आहिस्ता आहिस्ता ऊपर निचे हिलने लगी, उसके छूने से लुंड कड़क होने लगा, मेने उसकी चद्दर हटा दी, वो फिर नंगी हो गयी, में उसकी नंगी पीठ सेहला रहा था, वो शरमाते हुए अपने नाजुक हाथो से मेरा लुंड हिला रही थी, में एक हाथ उसकी चुकी पर ले गया और उसे सहलाने लगा, वो शर्माने लगी पर कुछ न बोली) चुसोगी? (मेने उसकी और देख कर कहा तो एक पल उसने नज़ारे उठायी, फिर शर्मा के झुका दी, उसने कोई जवाब नहीं दिया पर वो मेरे लुंड की और झुकने लगी, में थोड़ा और निचे हो गया, और अधलेटा हो गया, उसने बड़े प्यार से मेरे लुंड को अपने गरम मुँह में भर लिया,





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मेरी भी आह निकल गयी, वो बड़े प्यार से मेरा लुंड चूस रही थी,





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मेने उसे puchha)Tumhe अच्छा तो लग रहा है न इनायत, अपनी मर्जी हो तो hi करना. (उसने लुंड अपने मुँह से बहार निकला और ऊपर हुई और मेरी और देखा, वो अभी भी मेरा लुंड हिला रही थी)

इनायत : मुझे आपका सब अच्छा लगता है शिव, आपको मेरा करना अच्छा लग रहा है? (उसने मासूमियत से पूछा)

शिव : है इनायत, तुम बहोत अच्छा कर रही हो. (वो फिर से झुक गयी और मेरे लुंड को मुँह में भर लिया, में उसके कूल्हों को सहलाने लगा तो वो घोड़ी बन गयी, ताकि में अच्छे से उसके कूल्हों के साथ खेल सकू, वो मेरा लुंड चूस रही थी और में उसके कूल्हों के साथ खेलने लगा, उसे दबोचने लगा, थोड़ी देर बाद मेने एक ऊँगली उसकी गीली हो चुकी छूट में दाल दी, उसने झटका खाया और उन्ह्ह kaha.)Dard हो रहा है? (इनायत उसे रोकना नहीं चाहती थी तो उसने लुंड को मुँह में लिए hi ना में गर्दन हिलायी)

टाइम बिगड़ना नहीं चाहता था में तो मेने उसको उठने का इस्सर किआ तो वो उठ गयी और मेरी और देखने लगी, तो मेने उसके होठो को अपने होठो से पकड़ लिया और चूमने लगा, उसका हाथ अभी भी मेरे लुंड पर hi था, में उसको बिस्तर में लेटने लगा तो वो मेरा लुंड छोड़ते हुए लेट गयी, में उसकी साइड से उठा और उसके दो पैरो के बिछ आज्ञा, छूट से पानी रिस रहा था, में झुका और छूट को अपने होठो से चूसने लगा.





इनायत : (रोनी सूरत se)Shhhhhhhhhh aiiiiiiiiiiii (उसको हल्का दर्द hua)(Mene उसकी और देखा, वो बस muskurayi)(Inayat अपना दर्द दिखाना नहीं चाहती थी, और वैसे भी दर्द इतना ज्यादा भी नहीं था की वो बर्दास्त न कर सके, शिव उसकी योनि को प्यार कर रहा था और ये उसे बहोत अच्छा लग रहा था, वो अपने घुटने मोड़ कर लेती हुई थी और शिव के शिव को सेहला रही थी, थोड़ी देर बाद वो उसके ऊपर आगया, और उसके होठो को चूसने लगा तो वो उस से लिपट गयी और उसको अपनी बहो में भर कर उसका साथ देने लगी, लुंड उसकी छूट के पास hi था.)

शिव : (उसका नाजुक सा गरम बदन मुझे पागल कर रहा था, मेने उसके होठ छोड़े और उसके दोनों हाथ को ऊपर कर दिया और उसके गले को चाटने लगा, वो मचल रही थी, में निचे आया और उसकी बगल से आती गंध मुझे अपनी और खींचने लगी, में अपनी नाक रगड़ते हुए उसको जोर से सूंघने लगा, मेरे लुंड में और तनाव आने लगा., में और निचे आया और उसके छोटे निप्पल को जोरो से चूसने लगा)





इनायत : शह्ह्ह्ह अम्म्मीईई शह्ह्ह्ह डीईडीए शहहहहह. (शिव उसके हुस्न को जैसे निचोड़ रहा था, उसके नाजुक स्तन को वो बेरहमी से चूस रहा था, दर्द काम मज़ा ज्यादा tha)Shhhhhh आहिस्ता शहहहहह आराम से सीईव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है यार शह्ह्ह्हह्ह यही हु में शह्ह्ह्हह्ह नहीं जा रही हु बससससस एआरएम से करो प्लीज shhhhhhhh(wo अपने पर पटक रही थी, उत्तेजना उसके ऊपर पूरी तरह से हावी हो चुकी thi)Shhhhhh शीइइइइव शहहहहह अंदर दाल दो शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मुझसे नहीं रहा जा रहा शहहहहह माआ (शिव ने उसके निप्पल को काट लिया tha)maat करो ऐसा shhhhhhhhhh, एक बार दाल दो पहले, शहहहहह फिर उसे चूसना शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : क्या दाल दू स्वीटी? (इनायत कुछ न बोली, वो क्या बोलती, भले hi उसको पता था पर फिर भी वो कभी ऐसा नहीं बोली thi)Kya हुआ बाबू, चुप क्यों हो गयी, नहीं डलवाना क्या?

इनायत : शह्ह्ह्ह ऐसा मात करो यार , मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा है, शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : तो बता दो क्या दाल दू?

इनायत : (उसे बहोत शर्म आ रही थी पर ये आग भी उस से बर्दास्त नहीं हो रही thi)Luuuu.....

शिव : (उसके गले को और बगल को चाट ते hue)Kya बोली, सुना नहीं मेने.

इनायत : (जोर जोर से सांसे ले रही thi)Pleaase शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह वो शह्ह्ह्ह वोऊ लल्लूऊऊऊण्ड.

शिव : तो बोलो न की लुंड दाल दो.

इनायत : है शिईयिव प्लीज दाल दो. (मेने बात को ज्यादा नहीं खिंचा और लुंड को योनि के छेड़ पर सेट किआ और दबा दिया, गीली छूट में लुंड अंदर उतरने laaga)(Inayat ने दन्त भींच liye)Maaaaaaa शह्ह्हह्ह्ह्ह margaiiiiiiiiiiiiiii. (में रुका नहीं और आहिस्ता आहिस्ता लुंड अंदर डालता रहा, जब तक की आगे बच्चेदानी की दीवाल न आ gayi)Fuuuuu फूऊऊऊ हा haaaaa(Wo बस सांसे ले रही थी, में उसके गले और गाल को चाट रहा था, मेने उसके हाथ छोड़ दिए, पर वो ऐसे hi अपने हाथ ऊपर किये hi लेती रही, थोड़ी देर बाद उसने अपने हाथ मेरे गले में लगा diye)Ohhhhh शिईयिव, शह्ह्ह्ह आपके चक्कर में मार जाउंगी एक दिन.





शिव : ऐसा क्यों कह रही हो?

इनायत : बहोत मोटा है यार, जान निकलने को हो जाती है.

शिव : क्या मोटा है?

इनायत : (शर्मा गयी, और मंद मंद मुस्कुरायी, फिर मुझे चिढ़ाते हुए अपनी जीभ निकली, जैसे कह रही हो की अब नहीं बोलूंगी, में मुस्कुराया और अपनी कमर हिलने लगा, फिर उसके चेरे पर दर्द उभर आया, पर छूट पानी छोड़ रही thi)Shhhhhhhh अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (में अंदर बहार करने लगा, उसने मुझे अपनी बहो में ले लिया और अपने पेअर मेरी कमर में लगा दिए) शह्ह्ह्हह्ह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : कैसा लग रहा है?

इनायत : (मदहोशी me)Bahot अचछह शह्ह्ह्ह आअह्हह्ह्बाहोत अछ्हा शहहहहह सीईव शह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhh.

शिव : तुम्हे छोड़ना पसंद है? (लुंड अंदर तक थोड़कते हुए)

इनायत : आईई शह्ह्ह्ह हआ शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह पर आपके साथ शहहहहह बस आपके साथ सीईव शह्ह्ह्ह.

शिव: तुम्हारी छूट मस्त टाइट है, और बहोत गर्म भी. हम्म्म हम्म्म हम्म्म (धक्के मरते हुए मेने कहा)

इनायत : (वो शर्मा गयी, पर कुछ नहीं बोली, उसको ये सब सुन कर बहोत अच्छा लग रहा था, कुछ पल baad)Aapko मेरे साथ अच्छा लग रहा है?

शिव : हा हम्म हम्म हम्म.

इनायत : क्या अच्छा लगता है?

शिव : तुम्हारा सब कुछ, आगे बोलूंगा तो शर्मा जाओगी.

इनायत : (प्यार से देखते hue)Nahi शर्माउंगी, आप कहो.

शिव: तुम्हारा प्यारा chehra(Gaal को चूमा), तुम्हारी मस्त प्यारी आंखे (आँखों को चूमा), तुम्हारे नाजुक से hoth(Hotho को चूमा), तुम्हारे ये बड़े बड़े चुके (उस पर चेहरा रगड़ते हुए) और ये छोटे छोटे निप्पल (जोर से चूस दिया)

इनायत : शह्ह्ह्हह्ह माआआ. (थोड़ी देर बाद मेने उसे उठाते हुए मेरी गॉड में ले लिया, उसके कूल्हे पकड़ कर में उसको ऊपर नीचे करने लगा, उसने मेरे शिर को पकड़ लिया और अपने स्तन पर दबा दिया तो में उसके निप्पल को चूसने लगा)

शिव : और ये गद्देदार कूल्हे (उन्हें मसलते हुए उसे ऊपर निचे कर रहा था) और ये छोटी सी तुम्हारी छूट.

इनायत : शहहहहह शीइइइइइइइव शहहहहह. सच में, में पसंद हु न तुम्हे, में अच्छी लगी न?

शिव :है बहोत (मेने उसे पकड़ कर जोर से लुंड को थोड़ दिया, उसके चेहरे पर उभर आये भाव को देख kar)Kya हुआ, हम्म्म?

इनायत : शहहहहह आपका वो बहोत बड़ा है शह्ह्ह्हह्ह मुझे वह बटोह कुछ हो रहा है शह्ह्ह्हह्ह, में नहीं सेह सकती शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : खुल कर बोलो, इनायत, मेरे लिए.

इनायत : (उसने शिव के शिर को अपने चुचो के बिच दबा दिया, अभी वो उसको नहीं देख रहा था तो उसको आसानी थी, तो शिव को खुस करने के लिए बोल पड़ी, पर जबान लड़खड़ा रही thi)Shhhhhhh आपका वोऊ शठ ल ल लुंड शहहह बहोत बड़ा है शहहहहह मुझे बहोत अच्छा लग रहा है वहा.... शह्ह्ह्ह.

शिव : कहा (उसको ऊपर निचे करते हुए अपने लुंड पर खुदवाते हुए)

इनायत : आईईईई शह्ह्ह्ह (छूट से बहोत सारा रास निकल कर लुंड से होते हुए निचे गद्दे पर गिर रहा था) वह अंदर शहहह.

शिव : किस के अंदर हम्म्म.

इनायत : (शिव के बालो को नोच ने लगी, उसकी हालत ख़राब हो रही थी, ऐसी बातो से उसकी उत्तेजना और बढ़ रही थी, ऊपर से लुंड पर उसका भगनाङ्कुर पीस रहा था, जिस से छूट में बहोत सरसराहट हो रही thi)Shhhhhh मर जाउंगी शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह शह्ह्ह्हह्ह आपका बहोत बड़ा है शहहहहह अंदर शहहहहह वहा शह्ह्ह्ह मेरी चूऊऊऊत मेई शहहहहह बहोत अच्छाआआ शह्ह्ह्हह्ह ामीईई शहहहहह (में उसको ऐसे hi अपनी गॉड में लिए खड़ा होने लगा तो मुझसे चिपक gayi)Gir जाउंगी. (में बस मुस्कुराया, उसको अपनी गॉड में लिए खड़ा हो गया, उसको गॉड में लिए hi उसकी छूट में लम्बे लम्बे धक्के लगाने laga)(Inayat पहली बार इस तरह से चुद रही थी, उसको यकीं नहीं हो रहा था की शिव उसको एक छोटी गुड़िया की तरह उठाये हुए है, वो उसके गले में बहे डेल झूल रही थी,





लम्बे धक्को से उसकी हालत ख़राब होने लगी, लुंड पूरी गहराई तक जा रहा tha)Shhhhhhhh आईईईई शह्ह्ह्ह अम्मीईई शहहहहह में पागल हो जाउंगी शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, (इस तरह से छोड़ने से वो बहोत उत्तेजित हो गयी thi)bahot लम्बा है आपका शह्ह्हह्ह्ह्ह पूरा अंदर चला गया है वो शह्ह्ह्हह्ह में छूटनेवाली हु शह्ह्हह्ह्ह्ह शीइइइइइइइव आईईईई shhhhhhhh(thodi hi देर में वो झेल नहीं पायी और झटके कहते हुए झड़ने लगी, में रुक गया, थोड़ी देर वो झटके कहती रही और अपने गरम गरम रास से मेरे लुंड को नहलाती रही. छूट का रास लुंड से होते हुए निचे टपक रहा था, मेने उसको निचे उतरा, वो सही से कड़ी भी नहीं रह प् रही थी, मेने उसको पकड़ा और बीएड के पास ले गया तो उसने अपने हाथ वह टिका दिए और घोड़ी बन गयी, में निचे बैठा और उसके गोल मसल कूल्हों को फैला कर देखा तो वह पूरा गिला हो चूका था, गांड का छेड़ भी रास से भीगा हुआ था, मेने कूल्हे फैला कर गांड के छेड़ को देखा जो छोटा सा था, आस पास गहरे रंग का गोलाकार बना हुआ था, मेने अपनी जीभ वह लगा दी और उसे चाटने laga)(Inayat मदहोशी में थी, अपने गुदा द्वार पर कहते जाने पर उसके शरीर ने जतका खाया और वो आगे को होने लगी तो शिव ने उसको पकड़ liya)Wahhhha नहीं शहहहहह वो गन्दी जगह है. (वो मेरे शिर को पीछे धकेलने लगी, में उसको पकड़े रहा तो वो दूर न हो payi)Shiiiiv वह नहीं, वो गन्दा है, आप वह क्यों मुँह से कर रहे हो.

शिव : कुछः नहीं कर रहा, बस प्यार कर रहा हु.

इनायत : (उसको अजीब सा लग रहा था, शरीर में कम्पन हो रहा tha)Wo गन्दा होता है.

शिव : तुम्हारा कुछ गन्दा नहीं है, मुझे करने दो.

इनायत : (वो क्या बोलती, पर उसे दर भी लग रहा था, उसने सुना था की मर्द वह भी करते है, उसने डरते हुए kaha)Mene वह कभी नहीं किआ है. (वो शिव को मन तो नहीं कर शक्ति थी, बस अपना दर बता रही थी)

शिव : में यहाँ नहीं कर रहा अभी, बस प्यार कर रहा हु, है पर कभी न कभी तो करूँगा hi, नहीं करने डौगी मुझे?

इनायत : (वो रिलैक्स हो गयी की अभी वो नहीं कर रहा है, वो थोड़ी जुक गयी और अपनी गांड को और फैला दिया, उसको भी अच्छा लग रहा था, उसके पति ने एक दो बार कोशिस की थी वह करने की पर उसने मन कर दिया था जिसकी वजह से झगड़ा भी हुआ था दोनों का, पर वो शिव को मन नहीं कर शक्ति थी, उसने सहमति jatayi)Aapko जो करना है मेरे साथ कर शक्ति हो, में आपको किसी भी बात के लिए मन नहीं करुँगी शिव.

शिव : (उसकी और देखते hue)Achchha, अगर अभी करना चाहते?

इनायत : (उसको दर लगने लगा, क्यों की आलरेडी उसकी छूट की हालत ख़राब थी, ऊपर से वह पहलीबार कर रही थी, उसको पता था की वो चल भी नहीं पायेगी, पर वो पीछे नहीं हटना चाहती थी, उसने डरे और सहमे हुए kaha)A ा आप जैसा चाहे. (वो बस इतना hi बोली, शिव उसके गांड के छेड़ को चाटने लगा, जीभ को नुकीला बना कर छीन को कुरेद रहा था, उसे भी अच्छा लग रहा था, तो वो अपने आपको सँभालने लगी, उसको दर लग रहा था पर जो होना है वो हो कर रहे गए)

शिव : (मेने इनायत को देखा, वो बस आंखे बंद किये हुए झुकी हुई थी, मेने अपनी ऊँगली छूट में डाली ताकि वो गीली हो जाये, और साथ में गांड के छेड़ पर थूक लगायी, ऊँगली को गुदा द्वार पर गोल गोल घुमाया तो उसने उसे सिकुड़ liya)(Inayat बहोत दर रही थी, वो सोच रही थी की क्या होगा uska)Inayat.(Shiv ने कहा)

इनायत : (बिना पीछे dekhe)Hmmmm.

शिव : उसको सिकुड़ा मत, रिलैक्स करो उसको. (इनायत कुछ नहीं बोली बस अपने आपको रिलैक्स करने लगी और गांड के छल्ले को ढीला छोड़ diya)(Mene फिर छूट में ऊँगली डाली और उसे अच्छे से गिला किआ, वापस गांड के छेड़ पर ऊँगली रक्खी तो उसने वापस सिकुड़ लिया, में उसके कूल्हों को चूमने लगा, कुछ पल बाद फिर से उसने छेड़ को ढीला छोड़ दिया, मेने तुरंत ऊँगली अंदर दबा दी, ऊँगली छल्ले के अंदर चली गयी, उसने फिर अपने छेड़ को सिकुड़ने का प्रयास किआ पर ऊँगली अंदर जा चुकी थी, अंदर गरम गरम भाठी थी, में ऊँगली हलके हलके अंदर बहार करने लगा तो उसके मुस्कले ढीले होने लगा, मेने वह और थूक लगायी, अब ऊँगली अंदर बहार हो रही थी)

इनायत : (अपनी गांड में पहली बार किसी और की ऊँगली महसूस कर रही थी, उसके शरीर में अजीब सी तरंगे उठने लगी, ऊँगली की वजह से उसको कोई दर्द नहीं हो रहा था, वो रिलैक्स होती चली गयी, शिव की ऊँगली काफी लम्बी थी वो अंदर बहार होने लगी तो उसको वह भी अच्छा लग रहा था, वो मान में सोचने lagi)Kham खा दर रही थी में, वैसे भी वो छेड़ खुला हुआ hi तो होता है, वर्ण वह से पॉटी थोड़ी न बहार आती, लोग जूठी बाते सुना कर डरते रहते है. (वह शिव उसकी छूट को चाट रहा था और उसकी गांड में ऊँगली कर रहा था, दोनों और के मज़े के कारन वो पूरी तरह से रिलैक्स हो गयी, आंखे बंद किये हुए वो दोनों छेड़ का मज़ा लेने लगी और हलकी हलकी सिस्किअ लेने लगी, थोड़ी देर बाद शिव खड़ा हुआ और अपने लुंड को कूल्हों की दरार में घिसने लगा. वो आंखे बंद किये हुए आनेवाले पल का इंतजार करने लगी, हलाकि लुंड मोटा था तो उसे दर लग रहा था, पर वो अब पीछे नहीं हटना चाहती थी, वो शिव को जो पसंद है वो करने देना चाहती थी. शिव ने लुंड को गांड के छेड़ पर लगाया, तो उसकी सांसे तेज तेज चलने लगी, शिव ने लुंड को हल्का सा छेड़ पर दबाया तो उसने जोर से आंखे बंद कर ली और अपने आपको पूरी तरह से आने वाले पल के लिए तैयार कर ली. लुंड का दबाव बढ़ रहा था और उसकी धड़कने भी, पर फिर अचानक दबाव काम होता गया, और शिव ने लुंड गुदाद्वार से हटा लिया, लुंड निचे उसकी छूट के छेड़ पर रगड़ खाने लगा, उसको समाज नहीं आ रहा था, उसने सोचा शायद शिव उसे गिला कर रहा होगा, पर शिव उसकी छूट में लुंड उतरने लगा, उसने पीछे मुद कर देखा तो शिव मुस्कुरा रहा था, उसको समाज नहीं आया)

शिव : क्या हुआ?

इनायत : वो वो वह... (वो पूछ रही थी की वह क्यों नहीं कर रहे)

शिव : (मुस्कुराते hue)Waha अभी नहीं कर रहा, बस में तुम्हे जाँच रहा था, क्यों मेरे पीछे इतनी पागल हो रही हो इनायत, कुछ भी करने डौगी क्या? (ये सुन कर उस से रहा नहीं गया, वो आगे हुई जिस से लुंड बहार निकल गया, वो सीधी हो गयी और शिव के गले लग गयी)

इनायत : है, शिव, आप जो कहोगे वो में करुँगी, मुझे आप पर पूरा भरोसा है, और अभी वह न कर के अपने मेरे भरोसे को और पक्का कर दिया, आपको मेरी परवाह है, मेरी फ़िक्र है ये अपने साबित किया, अगर आप सिर्फ जिस्म के भूखे होते तो सब करते, बिना मेरी परवाह किये (वो उसकी छाती को चूमने lagi)aap वैसे नहीं हो, में जानती थी. (इनायत सच में बहोत खुस थी, उसको अपने बिच फसा कड़क लुंड महसूस हुआ तो उसको अपने नाजुक हाथो से थम लिया और उसे सहलाने लगी, शिव को देखते हुए उसे हलके धक्के से बीएड पर बैठने का इस्सर किआ तो शिव वह बेथ गया, वो घुटनो के बल हो गयी और उस लुंड को चूसने और चाटने लगी, उसको वो गरम लुंड बहोत अच्छा लग रहा था, अपना मुँह पूरा खोल कर उस सख्त लुंड को वो मुँह में ले कर चूस रही थी, वो बिच बिच में शिव की आँखों में देख रही थी, वो उसको बड़े प्यार से देख रहा था और उसका शिर सेहला रहा था, अब शिव उसको अजनबी नहीं लग रहा था, वो जैसे उसका अपना था, वो उसके लुंड को अच्छे से चूस रही थी, वो पुरे मान से लुंड पर अपना प्यार लुटा रही थी. लुंड के चूस ने से वो खुद बेहद गरम और कामुक हो रही थी, लुंड चूसते हुए वो अपनी योनि को सहलाने लगी, थोड़ी hi देर में उस से बर्दास्त होना मुश्किल हो रहा था, वो उठी और अपने पेअर उसके आस पास फैलते हुए उसकी गॉड में चढ़ गयी, और खुद hi लुंड को अपनी योनि पर सेट करते हुए बेथ गयी. जैसे hi लुंड अंदर ghusa)Shhhhhhh शिव शहहहहह मेरे सीईव शह्ह्ह्ह. (वो उस से लिपट गयी और उसके चेहरे को चाट ते हुए खुद hi ऊपर निचे होने lagi)Shhhhhh, पागल कर दिया है तुमने मुझे, शह्ह्ह्हह्ह, मुझसे मिलने फिर आओगे न शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (मुस्कुराते hue)Kyu?

इनायत : (पूरी मदहोश हो चुकी thi)Shhhhh मुझे छोड़ने (उसने शिव के चेहरे को अपने नरम स्तनों पर दबा diya)Shhhhhhh मेरे शिईयिव शह्ह्ह्ह आओगे न मेरे लिए. (वो बहोत कामुकता से बोल रही thi)Bolo न आओगे मुझे छोड़ने, शहहहहह अब तो में सब बोल भी रही हु न, शह्ह्ह्ह बोलो न आओजीए.





शिव : है आऊंगा मेरी स्वीटी.

इनायत : (गहरी सांसे लेते hue)Muje ये बहोत अच्छा लग गया है शिव, (वो अपने कूल्हे ऊपर निचे कर रही थी, और अपनी छूट को लुंड पर दबा भी दे रही thi)Me पागल हो गयी हु शह्ह्हह्ह्ह्ह, आपने मुझे ऐसा बनाया है शह्ह्ह्हह्ह अब मुझे जी भर के छोडो शह्ह्ह्हह्ह, आआह में फिर झाड़नेवाली हु यार शह्ह्ह्ह मायआ शह्ह्ह्हह्ह, इतनी बार कैसे हो रहा है ये. (थोड़ी hi देर में वो फिर झाड़ गयी, और अपनी छूट को लुंड पर दबा दी और शिव से चिपक गयी, थोड़ी देर ऐसे hi रही वो, थोड़ी देर बाद वो boli)Muje अपने निचे लेता के करो पलीयासे. (में उसको उठाते हुए बिस्तर पर ले गया और उसे लेता दिया, उसने अपने पेअर पुरे खोल दिए, में फिर उसे छोड़ने लगा)





शह्ह्ह्ह है ऐसे hi शह्ह्हह्ह्ह्ह (वो मुझे चूमने lagi)Ummm उम्म्म्म शह्ह्ह्ह उम्म्म्म उम्मम्मम्म. (मेने पूरा लुंड दबा दिया तो लुंड बच्चे दानी में घुस gaya)Aiiiiii शह्ह्हह्ह्ह्ह मर जाउंगी यार शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बहोत लम्बा है shhhhhhhhhh(Me धक्का लगता raha)Aiiiii आईईईई आईईईई शहहहहह मरगयीईइ शह्ह्ह्हह्ह और करो शहहहहह आअह्ह्ह्ह और करो शह्ह्हह्ह्ह्ह, उम्म्म उम्म्म्म उम्म्म्म शह्ह्ह्हह्ह, ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ था मुझे शह्ह्ह्हह्ह उम्म्म उम्म्म्म. (आधे पोन घंटे तक फिर धुआँ धार चुदाई चली, उसको हर तरह से छोड़ा मेने,

















आखिर में वो उलटी लेती हुई थी और में उसके ऊपर पीछे से छोड़ रहा था)





आईई शहहहहह मायआ (इनायत कराह रही थी, उसकी हालत बहोत ख़राब हो चुकी थी, बल पुरे भीग चुके थे, बिकार कर चिपक रहे थे, मेने उसके हाथ पकड़ कर उसे अपने निचे दबोचे रक्खा tha)Shhhhhh आईईईई शह्ह्ह्हह्ह मर जाउंगी मेआज शहहहहह aiiiiiiiiiii बॉस करो शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह मर जाउंगी शह्ह्हह्ह्ह्ह कितना करोगे शह्ह्ह्हह्ह मेरे अंदर ताकत नहीं बची है शह्ह्हह्ह्ह्ह आईईईई आहिस्ता शहहहहह ोोू माआ शहहहहह बससससस.

शिव : थोड़ी देर जान, बस थोड़ी देर, हम्म्म हम्म्म्म हम्म्म्म. (जोर जोर से ठोकते हुए)





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इनायत : आईई आईईईई शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बॉस शहहह बस्स्स सीईव शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह.

शिव : थोड़ी देर बस होनेवाला है.

इनायत : आईई शहहहहह आईईईई (तभी उसकी बच्चेदानी में फिर से वीर्य भरने लगा, उसने रहत की साँस ली, वो बस हांफ रही थी, बेसुध सी लेती हुई थी, उसने झटके कहते हुए फिर पानी छोड़ दिया था, वो पूरी तरह से संतुस्ट हो गयी थी और थक के चूर, दर्द से बेहाल थी पर फिर भी वो खुस थी, थोड़ी देर बाद शिव उसके ऊपर से उतर गया पर वो ऐसे hi वो नंगी लेती रही. थोड़ी देर बाद वो सीधी hui.Uski नजर घडी पर गयी जो सादे तीन दिखा रही थी. कुछ घंटो में सवेरा होनेवाला था, वो जैसे तैसे उठी , पूरा बदन टूट रहा था, उसको अपनी योनि में दर्द भी हो गया था, उसने अपनी योनि से बहते वीर्य को पंतय से पोछा, और जैसे तैसे अपनी गीली पंतय hi पहन ली, फिर और कपडे पहन ने लगी. (में उसे देख रहा था, मेने भी घडी देखि थी, तो मेने भी शार्ट पहन लिया, उसने मेरी और देखा, शर्मा कर मुस्कुरायी, वो कड़ी होने लगी तो मेने उसे सहारा दिया, वो एक बार फिर मेरे गले लग गयी.

शिव : सॉरी यार.

इनायत : आप क्यों सॉरी बोल रहे हो, में खुस हु.

शिव : तुम्हे दर्द हो गया न.

इनायत : तो क्या हुआ, में ठीक हु, दिल तो नहीं कर रहा पर अब मुझे जाना होगा. (वो बहार जाने लगी, वो लड़खड़ा रही थी, मेने उसको पकड़ लिया.

शिव : में नीचे छोड़ देता हु.

इनायत : (शरमाते hue)Muje पहले बाथ रूम जाना है. (मेने उसको गॉड में उठाया और बाथरूम ले गया और अंदर खड़ा कर दिया, थोड़ी देर बाद मुझे उसकी मूतने की सिटी सुनाई दी, फिर कपडे पहन ने की हल चल, फिर उसने दरवाजा खोला. वो बहोत शर्मा रही थी, मेने उसे उठाया और निचे ले जाने लगा, निचे जा कर दरवाजे के पास खड़ा कर दिया, जाने से पहले फिर वो मेरे गले लग गयी, दोनों ने कोई बात नहीं की, उसने बस मेरे गाल को और गले को चूमा. फिर वो अंदर चली गयी, में भी ऊपर निकल गया.)

इनायत ने देखा की अंदर सब सही है, उसने रहत की साँस ली और दीवाल के सहारे अपने कमरे में चली गयी, पूरा बदन टूट रहा था, ऐसा अनुभव तो उसे पहली बार hi हुआ था, इतने सालो सेक्स के बावजूद उसे ऐसा लग रहा था की आज hi वो पहली बार चूड़ी है. वो शिव को याद करते हुए नींद की आगोश में चली गयी.

सुबह नाज़िआ जल्दी से उठी, अलार्म बार बार बज रहा था पर नीं hi नहीं खुल रही थी, वो जैसे तैसे उठी, बहार निकली और सबसे पहले इनायत के दरवाजे को देखा, वो नजदीक गयी और दरवाजे को खोलने का प्रयास किआ दरवाजा खुला hi था, उसने देखा की इनायत गहरी नींद में सो रही है, उसने रहत की साँस ली और बाथरूम में चली गयी. जल्दी से तैयार हुई, एक बार फिर वो इनायत के कमरे में गयी, उसने इनायत को देखा तो उसके चेहरे पर मुस्कान थी, उसने उसका माथा सहलाया तो वो गर्म थी, उसने घबरा के गाल और गाला चेक किआ तो वो भी गरम था. वो बहार आयी और अपने सास ससुर के कमरे को देखा, जो अभी बंद hi था, वो पीछे का दरवाजा खोल कर ऊपर चली गयी, उसने दरवाजा खोला तो वो भी खुला hi था, वो अंदर गयी तो शिव बेसुध हो कर सोया हुआ था, निचे सिर्फ सॉर्ट था, पुरे कमरे में चुदाई की मादक गंध आ रही थी, उसकी अंडरवियर भी साइड में पड़ी हुई थी, उसने देखा तो उसके शरीर पर कटे जाने के निशान थे जो तजा hi लग रहे थे. उसका लोअर अभी भी उभर लिए हुए था, वो बेथ गयी और उसे देखने लगी, वो जानती थी की कल रात क्या हुआ था, क्यों की वो कल रात ऊपर आयी थी, पानी पिने उठी तो दरवाजे को खुला देख वो घबरा गयी थी, फिर उसे इनायत याद आयी की वो कैसे शिव को देखती थी, जब उसने उसका रूम चेक किआ तो वो वह नहीं थी. ये उसकी ससुराल थी तो वो दर गयी थी तो ऊपर आयी थी, पर अंदर की आवाजे सुन कर वो वापस लौट गयी थी. उसको हल्का गुस्सा भी आ रहा था की शिव को क्या जरुरत थी उसके साथ करने की.

उसने शिव को हिलाया, वो बेसुध सोया हुआ था, थोड़ी देर हिलने पर वो हड़बड़ा के जाग गया. सामने नाज़िआ को देख कर वो बेथ गया.

शिव : क क क्या हुआ? (अद्धी नींद में hi वो बोलै)

नाज़िआ : कुछ नहीं, बस उठाने आयी थी, तैयार हो जाओ, सुबह की बस है तो निकल जायेंगे. (शिव ने हड़बड़ा के आस पास देखा) किसे धुंध रहे हो?

शिव : क क किसी को नहीं. (शिव ने हड़बड़ा के जवाब दिया)

नाज़िआ : उसे बुखार है (उसने हलकी नाराजगी से कहा)

शिव : (में इतना तो समाज गया था की उन्हें पता hai)Sorry.

नाज़िआ : वो सब बादमे बात करेंगे, बहार hi किआ था न?

शिव : उसने बोलै अंदर करने को तो...

नाज़िआ : पागल हो गए हो क्या, वो पेट से हो गयी तो, समाज नहीं आता तुम्हे.

शिव : वो बोली की गोली खा लेगी. (मेने सफाई दी)

नाज़िआ : वो बुखार से तप रही है, कैसे जाएगी वो. (कुछ सोच kar)Tum तैयार हो और वो चौबीस घंटे मेडिकल खुली होती है न वह से बुखार की और उसकी गोली ले आओ. (वो उठ कर जाने लगी, शिव ने हाथ पकड़ लिया)

शिव : नाराज हो?

नाज़िआ : में थी न, घर जा के जितनी मर्ज़ी कर लेते, मेने रोका है कभी. (उसने नाराजगी से कहा)

शिव : आप कहती थी न की वो अच्छी नहीं है, मेने सोचा की मेरी वजह से वो आपके साथ अच्छे से रहेगी.

नाज़िआ : (उसने शिव को देखा, उसके चेहरे पर ग्लानि थी, वो भी जानती थी की ये सच भी है, शायद उसकी वजह से hi उसका व्यव्हार पूरा बदल गया hai)Thik है हम बाद में बात करेंगे, अभी तैयार हो जाओ और बाजार जा आओ. (वो हाथ छुडाके जाने लगी तो मेने नहीं छोड़ा और खड़ा हो गया)

शिव : आप नाराज़ हो? (वो कुछ नहीं boli)sorry. (उन्होंने एक गहरी साँस ली)

नाज़िआ : तैयार हो जाओ, में निचे जा रही हु. (मेने हाथ छोड़ दिया, वो निचे चली गयी, में जल्दी से तैयार हुआ और निचे चला गया, जब अंदर गया तो नाज़िआदिदी और उनकी साँस किचन में थी, उन्होंने मुझे दूध और नास्ता diya)Achchha सुनो शिव, एक काम करोगे?

शिव : है बोलिये.

नाज़िआ : वो इनायत को बुखार है, घर में गोली है पर वो पुराणी है, तुम बाजार से दवाई ले aaoge?(Usne जान बुज कर ऐसा कहा था ताकि उसकी साँस को लगे की वो अभी अभी कह रही है)

हाफ़िज़ा : अरे उसे क्यों परेशान करती है, अभी वो उठेंगे तो वो ले आएंगे. अभी कहा दुकाने खुली होगी.

नाज़िआ : अब्बू देर से उठेंगे, तब तक वो बेचारी तड़पती रहेगी, ये ले आएगा, और कुछ दुकाने पूरी रात खुली रहती है, इंटरनेट से पता चल jayega.(Uski सास कुछ नहीं बोली, मेने नास्ता किआ और बाइक ले कर निकल गया, नेट पर सर्च किआ तो लोकेशन भी मिल गया, मेने बुखार की गोली और गर्भनिरोधक गोली भी मांगी तो वो मुझे अजीब नजरो से देखने लगा, पर बोलै कुछ नहीं, में गोलीअ ले कर वापस आ गया, उनकी सास नहाने गयी thi)Tum hi दे आओ ताकि उसे पता न चले की में जानती हु. वो शर्मिंदगी महसूस करेगी. (मुझे उनकी बात सही लगी, में उसके रूम में चला गया, वो सो रही थी, मेने उसको हिलाया तो वो उठ गयी, मुझे अपने रूम में देख कर घबरा गयी और बेथ कर दरवाजे को देखने लगी, मेने चुप रहने का इस्सर किआ)

शिव : दीदी ने मुझे तुम्हारे बुखार के लिए दवाई लेने भेजा था, (गर्भनिरोधक दवाई दिखा kar)Me ये भी ले आया. (वो शर्मा गयी, वही पर पानी की बोतल पड़ी थी तो मेने दोनों गोली उसे दे दी, उसने भी खा ली, गरबनीरोधक का खली पैकेट मेने वापस अपनी जीब में रख diya)Tum आराम करो, हम निकल जायेंगे.

इनायत : (मेरा हाथ पकड़ कर रोनी सूरत se)Fir आओगे न?

शिव : है आऊंगा, अपना ख्याल रखना, (बुखार की गोलीअ साइड में रखते hue)Do पहर को वापस खा लेना. (उसने हां में गर्दन हिलायी, मेने उसके माथे पर चुम्बन दे kar)Bye. (वो कुछ नहीं बोली, उसकी आंख में ासु आ gaye)Pagal, में आऊंगा सच्ची. (उसने रट हुए हां में गर्दन hilayi)Tum आराम करो. (अचानक जैसे उसे याद आया हो)

इनायत : भाभी को पता चल गया क्या? (गभारते हुए)

शिव : नहीं (मेने जूथ bola)Wo काम कर रही थी और तुम्हारी मम्मी बाथरूम में थी तो में बुखार की दवाई के बहाने अंदर आ गया, तुम चिंता मात करो और आराम करो. (वो लेट गयी)

इनायत : जल्दी आना.

शिव : (मुस्कुराते hue)Kyu?

इनायत : (शरमाते hue)Waise नहीं बोलै, बस मिलने आना, और कुछ नहीं.

शिव : सच में, बस मिलने? (वो शर्मा gayi)apana ख्याल रखना, (उसने फिर हां कहा, में बहार निकल गया और सोफे पर बेथ gaya)(Inayat बस दरवाजे को hi देखती रही, तभी उसकी भाभी अंदर आयी, वो थोड़ी दर गयी)

नाज़िआ : (वो जानती थी फिर भी नार्मल तरीके से hi boli)Achanak बुखार कैसे आ गया तुजे?

इनायत : (हड़बड़ाते hue)M म मुझे क्या पता? (उसने बहोत धीमे से कहा)

नाज़िआ : चल कोई बात नहीं, दवाई टाइम से खा लेना, तुजे ऐसे देख कर मेरा भी जाने का मान नहीं कर रहा, पर चेकउप के लिए जाना है न. (उसकी सास अंदर आते हुए).

हाफ़िज़ा: तू चिंता मात कर, अभी बूढी नहीं हुई में.

नाज़िआ : (मुस्कुराते hue)Aisa नहीं कहा मेने अम्मी, पर आप अकेली कैसे करोगी, बस यही चिंता थी.

हाफ़िज़ा: (बिस्तर पर बेथ कर, नाज़िआ को देखते hue)Muje माफ़ करदे बीटा, पता नहीं कैसे में ये नहीं देख पायी, पत्थर पद गए थे अकाल पर, जो तुज जैसे प्यारी बच्ची को दुखी किआ, ऊपरवाला जहनुम में भी माहि जगह देगा.

नाज़िआ : भूल जाइये अम्मी, मेरे दिल में कोई गिला सिकवा नहीं है, और ऐसी बाते मुँह से मात निकालिये, अभी तो आपको इसी दुनिया में जन्नत का सुख बोगना है.

हाफ़िज़ा : सदा खुस रह मेरी बच्ची, और घर की चिंता मात करना, में हु अभी, अपना और बच्चे का ख्याल रखना, सब अच्छा हो गया है, बस इसका (इनायत को देख kar)kuchh हो जाये तो सब ठीक हो जाये.

नाज़िआ : आप चिंता मात करो अम्मी, में हु, में ख्याल रक्खूंगी इसका, और कोई नेक लड़का ढूंढती हु, आप जरा भी चिंता मात करना.

हाफिआ : (नाज़िआ के शिर पर हाथ रख kar)Sada खुस रह मेरी बच्ची, किसी की बुरी नज़र न लगतुजको.

नाज़िआ : अब हमें निकलना होगा अम्मी, सुबह की बस है वो मिल जाएगी.

हाफ़िज़ा : में तेरे अब्बू को उठा देती हु.

नाज़िआ : नहीं उन्हें सोने दीजिये.

हाफ़िज़ा : अरे नहीं बीटा, वो फिर मेरी जान खाएंगे, तू सामान बहार निकल में उन्हें उठती हु.

वह सबसे मिल कर हम लोग रिक्शा से निकल गए, दीदी कुछ बोल नहीं रही थी, हम बस स्टेशन पहुंच गए, सुबह का टाइम था तो जगह भी मिल गयी, बस भी लक्ज़री थी, दो सीटों वाली तो कोई दिक्कत नहीं हुई. बस सिटी से बहार निकल गयी, वो खिड़की के बहार देख रही थी, मेने उनके हाथ पर हाथ रक्खा, उन्होंने मेरी और देखा.
 
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