Adultery BUDHHA TAILOR - Page 6 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery BUDHHA TAILOR

तब अचनाक उसने माहि को घुमा दिया और माहि के गर्दन को किश करने लगा..





माहि अब उसको कुछ कह नहीं रही थी और उसके किश का मज़ा ले रही थी..

तभी अचानक बहार भैय्या और मनीष का आवाज आ gaya.us वजह से माहि एक डैम से होश में आयी और अपने आप को करीम के चंगुल से पूरी तरह छुड़ाते हुए कहा..

देख लेना बूढ़े मैं ये साड़ी बाते मनीष और भैय्या को बताउंगी तब देखना वो तुम्हारा क्या हाल करते है ..

तेरे मनीष और भैय्या को क्या कहेगी..

माहि ने हाँ मई कहा.. लेकिन बाद मई उसे पता चला की करीम ने क्या कहा.. माहि ने उसको देखते हुई है कर देखा और फ़ौरन आपने कपडे ठीक किये और किचन से बहार आ गयी..

कमरे के अंदर आते hi माहि बीएड पर जा कर गिर पड़ी. उसकी आँखों में आंसू आ गए थे.. उसे बोहोत बुरा लग रहा था की मनीष की बीवी होने के बाद भी उसने अपने शरीर को उसे छूने दिया. बीएड पर उसका बदन बुरी तरह से thar-thar काँप रहा था. माहि को अभी भी अपने दोनों नितम्बो के बीच में उस करीम की ऊँगली अपने गुदा छिद्र पर महसूस हो रही थी.

माहि को यकीन करना मुश्किल हो रहा था की उसके साथ उसके hi घर में ( भैय्या का घर था wo..)Karim ने ये सब कुछ किया और तो और माहि भी उसकी हरकत से अपने आप पर काबू नहीं रख पायी. माहि मन hi मन करीम को गाली देती जा रही थी.

इधर करीम किचन से चुपके से बहार गर्दन मई आ जाता है और घर जाने का सोचता है तभी उसे पद्मा देखती है.. पद्मा उसे देखते hi आवाज देते है..

करीम जरा रुकना

तब करीम पद्मा की तरफ देख के कहता है

बोल क्या hai..muje घर जाना है..

तुजे मुझे कुछ पूछा न था

हाँ पूछ

मुझे ये यकीं करना मुश्किल हो रहा है की तूने अभी तक 2-3 बार hi पूर्वी मालकिन को छोड़ा है

करीम हँसाने लगता है

है मत सच बता.. 2-3 बार की चुदाई मई कोई औरत प्रेग्नेंट नहीं बन सकती..

2-3 नहीं 4-5 बार

ठीक है 4-5 बार मई कैसे पॉसिबल है .. अरुण शेठ ने उससे ज्यादा छोड़ा होगा उन 1 साल पाई

हाँ छोड़ा होगा

फिर वो तब प्रेग्नेंट नहीं हुई और अब कैसे हुई

मुझे क्या पता

तुजे नहीं पता तो किसे पता होगा

तूने अभी थोड़े देर पहले hi कहा न

क्या

तू छोड़ता hi ऐसे की 2-3 चुदाई मई किसी को भी प्रेग्नेंट बना देगा

वो कहने की बात thi..tu सच बता

तब करीम हसने लगा

बता न

तुजे सच सुनना है

हाँ माय डार्लिंग

सच ये है की हम 4-5 दिन सात मई थे

मतलब

साथ मई थे मतलब साथ मई थे अब इसका मतलब क्या बताऊ

साथ मई थे मतलब यहाँ

यहाँ नहीं

फिर कहा

आपने घर

क्या?? करीम नगर मई

हाँ

क्या बाख रहा है.. पूर्वी मेमसाब और आपने बस्ती मई.. और वो भी तेरे घर मई

हाँ

और 😅 वो भी 4-5 दिन

पद्मा हस्ते हुई कहते है

हाँ

कुछ भी मत फेक

यकीं नहीं है

हाँ.. वो तो कितने क्लीन है.. और अपनी बस्ती कितने गन्दी है.. गन्दगी से वो बहुत नफरत करती है

करीम से वो बहुत ज्यादा प्यार करती है..

वो पता है

फिर भी तू शक कर रही है

यकीं नहीं होता

हाँ

रानी को पूछ

मतलब उसको पता है

हाँ वो तो हमारी सेवा कर रही थी..

मुझे नहीं बताया और उसे बताया

वो अचानक हुआ

गुस्से से पद्मा कहती है

तेरा सब अचानक hi होता है..

नाराज़ मत हो.. वो पूर्वी वह आयी और वह सुनीता ने देख लिया इसलिए उसे बताना पड़ा

अच्छा!! और तेरे घरवाले

वो शादी के लिए गए थे न

ये सब कब हुआ

जब वो मुंबई गयी थी

हाँ.. मालिक के साथ..

उसके बाद

उसके बाद कब

दूसरे दिन hi

कैसे हुआ ये

क्या हुआ वो मुंबई से आयी रात को

हाँ रात को लेट आये और दूसरे दिन मायके चली गयी.. किसी फ्रेंड के घर शादी है बोलके

वो कही नहीं गयी थी मेरे पास थी

क्या??

कैसे तैयार किया तूने उसे और उसको ये शादी वाला आईडिया तूने दिया ताकि वो दोनों मालिक को चुटिया बनाये..

शादी वाला आईडिया मेरा नहीं उसका था..

मतलब

क्या हुआ मुंबई से आने के दूसरे दिन मई नहीं आया ये जानकर उसने मुझे कॉल किया.. तो मैंने कहा मई बीमार हु आ नहीं पाउँगा.. उसने पूछा क्या हुआ तब मैंने सब बता दिया..

क्या बताया तूने

एक्चुअली रात मई मैंने थोड़े ज्यादा दारू पि थी और शायद दारू ख़राब थी.. सर बहुत दुःख रहा था.. मुझे ॉमिटिंग भी हुई.. बदन दुःख रहा था..

तूने ये सब बताया

पागल हो गयी है क्या ये बताने को

तो

उसने कॉल किया तब मैंने कहा सरदर्द कर रहा है तब उसने कहा क्या हुआ तब मैंने कहा शयद फ़ूड पोइज़निंग हुई.. कल बहार का खाया था.. उसने कहा बहार का क्यों कोई पार्टी थी क्या तब मैंने कहा घर वाले शादी मई गए है तब उसने कहा ओह्ह ी सी.. मई ी जाते हु तुम्हारे सेवा करने..

और वो आ गए..

हाँ साथ मई एक डॉक्टर भी ले आयी थी .. वो डॉक्टर भी चूतिया था मैंने जो बोलै उसने मन.. उसने गोलिया और बूटले लिख के दी.. पूर्वी ने बहार जेक वो दवाइया लायी..

और तुमने उसकी जैम क लिए

फिर क्या था अगले 5 दिन दिन रात chudaye..wo खाना बनती निचे किचन मई.. हेल्प के लिए रानी थी मई उप्पर सोता खाना खता दारू पिता उसको छोड़ता

उसके होते हुई दारू पि

मई डरता हु क्या उससे

तो क्या किया

दारू को उसने पहले तो विरोध किया गुस्सा करने लगी.. तुम तो जानती हो वो कितने ग़ज़ल है..

हाँ जानती हु फिर कैसे कण्ट्रोल किया

संब्जा बजा के..

कैसे

वो गुस्सा करती तो मई उससे प्यार से पेश आता.. उससे उसके तरीके से छोड़ता..

फिर मान जाती वो

हाँ थोड़ा पीओ बोलती

अच्छा कण्ट्रोल किया तूने उस करमजली को

एक दो बार उसको पिलाये भी

क्या उसने दारू पि

नहीं तुक दी

अच्छा दारू पाइक उसे छोड़ता था क्या

एक दो बार छोड़ा

नहीं नहीं करती पर मान जाती

फिर

फिर क्या था बाद मई मेरा पैक वो खुद hi बनाने लगी

ये तो बहुत बड़ी बात हो गयी

उससे और एक बड़ी बात हो गयी

क्या

रानी ने उसे नॉन वेग बनाना सीखा दिया

उसने सिख ली

हाँ

नॉन वेग से तो वो बहुत नफरत करती थी

करीम को जो पसंद उसे वो पसंद करेगी अब

खाया क्या उसने

खाने के लिए मैंने फाॅर्स किया पर उसने ये बोल के ताल दिया की मई तुम आपने हाट से बनके खिलाऊंगी पर खाउंगी नहीं

तुमने तो उसे पूरा बदल दिया

हाँ फिर क्या

मतलब इस घर का वारिस आपने करीमनगर मई बना है

हाँ ऐसे hi..

करके हस्ते हुई वह से चला जाता है..

श्याम का वक़्त …

हॉल मई कान्तिशीथ , मनीष और पूर्वी का हस्बैंड अरुण बैठे थे ..बाते कर रहे थे… तब माहि को मनीष आवाज देता है..

माहि घर जाना नहीं है क्या…

तब माहि ऊपर से hi.. कहती है..

हाँ जाना है न…

कान्तिशीथ - माहि और मनीष अब तुम खाना खा के hi जाओ न

माहि- नहीं रुकना है .. अब मेरा यहाँ रुकना किसी को पसंद नहीं है

कान्तिशीथ- किस को पसंद नहीं है..

किचन मई से पूर्वी और लता को आवाज देके काँटी शेठ बुला लेता है..

कान्तिशीथ- आप दोनों ने माहि को कुछ कहा..

लता – नहीं तो

पूर्वी- नहीं पापाजी.. क्या हुआ..

मनीष- भैय्या .. इस की बात को सीरियस मत लो आप.. मैंने hi इसे मजाक किया था..

लता- क्या मजाक किया था आपने..

माहि- मई यहाँ हमेशा पड़ी रहती है.. ये कहा था..

इस बात पर अरुण और कान्तिशीथ हँसाने लगते है..

अरुण - सच तो कहा है अंकल ने..

माहि- इसी लिए तो मई आज से यहाँ रुकोगी नहीं..

कान्तिशीथ- आपने बुआ से ऐसे बात कोई करता है क्या अरुण..

अरुण- सॉरी पापा…

कान्तिशीथ- नहीं नहीं.. माहि ये तो तमारा hi घर है .. अरुण ने मज़ाक मई कहा है.. इसका बुरा क्यों मानती हो…

माहि- मनीष ..चलो… मुझे घर मई जेक और भी कुछ काम है..

कान्तिशीथ- गुस्सा मत हो माहि … रुक जाओ आज की रात..

माहि कुछ नहीं बोलती और चलने लगाती है..

अरुण- ी ऍम सॉरी.. बुआ.. काम से काम खाना खाके जाओ..

माहि- मनीष तुम आना है की नहीं…

वो पीछे मुद के मनीष की तरफ देखकर कहने लगाती है .. और वैसे hi पीछे दरवाजे की तरफ चलने लगाती है.. दरवाजे मई से करीम अन्दर आ रहा था.. माहि पीछे देखकर चल रही थी इस आज से वो और करीम एक दूसरे को टकरा जाते है....

कान्तिशीथ- ारे ..अरे माहि पीछे देखो..

माहि को लगा कोण बत्तमीज नौकर है जिसने मुझे धक्का दिया है.. वो गुस्से मई hi घूम कर उसपर हाथ उठनेवाली थी की सामने करीम को देखकर आपने हाथ निचे कर लेती है.. और गुस्से मई कहती है..

सामने देखकर चल नहीं सकते क्या..

मैडम.. आप hi सामने देखकर नहीं चल रही थी.. पीछे देख रही थी और आगे चल रही थी..

मई पीछे देख रही थी.. मुझे क्या पता था तुम सामने से आ रहे हो.. तुम तो सामने देख रहे थे न.. तुम पता नहीं था क्या की मई सामने से आ रही हु.. तुम वही खड़े नहीं रह सकते क्या..

मई वही खड़ा था मैडम.. आप hi आकर मुझे तकार गयी ..

बत्तमीज आदमी.. मुज पे hi ब्लामे लगा रहे हो..

कान्तिशीथ- जाने दो अक्रम.. माफ़ी मांग लो मैडम से..

माहि पीछे घूम के कान्तिशीथ को देखते है..

जाने दो का क्या मतलब है भैय्या..

कान्तिशीथ- कुछ नहीं मई.. करीम को कह रहा था.. माफी मांग लो..

जैसे hi माहि करीम को देखने लगाती है… तब कान्तिशीथ करीम को इशारे से कहती है.. गुस्से मई है वो.. माफ़ी मनंग लो उससे..

माहि- भैय्या मैंने पहले hi कहा था आप से ये इंसान कितना कमीना hai..lekin आप मानते hi नहीं हो… ये बहुत चालू चीज़ है..

करीम- सॉरी.. मैडम.. माफ़ कर दो.

करीम मैं मई सोचता है… साली बहुत ग़ुस्सेवाली है.. गुस्से मई कही इसने सबकुछ या आधा अधूरा कुछ बता दिया तो आफत हो जायेंगे…

लता- उसने अब माफ़ी मांग ली है न.. चोर दो उसे..

माहि मैं मई कहती है.. साली हरामी हमेशा आपने यार की साइड लेते है..

माहि- भाभी हमेशा आप इस बूढ़े की साइड लेते हो.. क्या मांजरा है..

मनीष- ारे कुछ मांजरा नहीं है.. आदमी सीनियर है.. उम्र से.. और तजुरबा भी काफी है.. इसलिए भाभी ने कहा होगा..

माहि - हाँ.. तजुरबा काफी है इसको .. बहुत सरे चीज़ो का.. एक नंबर का कमीना इंसान है..

कन्तिष्ठ – जाने दो माहि.. अब उसने माफ़ी मांग ली है..

माहि- भैय्या.. आप नहीं जानते .. आप के पिट पीछे इस घर मई क्या क्या चल रहा है..

कान्तिशीथ- क्या क्या चल रहा है ..

लता अब बहुत डर जाती है.. उसे अब पूरा यकीं हो गया था की माहि ने दोपहर मई मुझे और करीम को एक साथ देख लिया है और अब ये सबकुछ बता देगी.. उधर पूर्वी को दर लगाने लगा की माहि बुआ ने मुझे और करीम को एक साथ देख तो लिया नहीं न.. और इधर करीम को लग रहा था की साली ये सब सच न बता दे कान्तिशीथ को.. साला ये तो मुझे मार hi डालेगा… इस बात पर करीम की फटने लगी थी की अब आगे क्या होगा.. उधर कान्तिशीथ को लग रहा था की .. शयद करीम ने घर से कुछ चुरा लिया होगा.. इसकी बात hi माहि कर रही थी .. और वह खड़े अरुण और मनीष को कुछ पता नहीं चल रहा था की माहि किस के बारे मई बात कर रही है..

माहि लता और पूर्वी की तरफ देख रही थी.. बीच बीच मई कान्तिशीथ और करीम की और देख रही थी.. करीम आँखों से चुपके से माहि को ईशार कर रहा था …

चुप करो तुम..

KantiSheth.—kya चल रहा माहि.. मेरे पेटपीचे यहाँ इस घर मई..

काँटी शेठ के ऐसे कहने से लता और पूर्वी और डर जाते है…

माहि- पूर्वी ..तुम पता है..

पूर्वी और ज्यादा डर जाती है…

कान्तिशीथ- पूर्वी बीटा तुम पता है.. तुम बता दो..

पूर्वी को तो अब पसीना आने लगत है..

कान्तिशीथ- बीटा .. तुम पता है..

पूर्वी डरते हुई..

पूर्वी- बुआ .. किस बारे मई बात कर रही है .. मुझे पता नहीं है..

कान्तिशीथ- माहि बता दो तुम..

माहि- लता भाभी को पूछ लो न आप..

डर के मारे लता की हालत अब बहुत ज्यादा ख़राब हो रही थी..

कान्तिशीथ लता के तरफ देखने लगता है..

माहि - भाभी आप को पता hi होगा न..

लता डरते हुई..

लता- मुझे कैसे पता होगा

आप किस बारे मई बात कर रहे हो..

करीम को लगा अब ये साली लता की जान ले लेगी..

अरुण- बुआ बता दो न.. क्या चल रहा है..

माहि चहरे पर अपनी कातिल हसी लेट हुई बड़े अड्डा के साथ कहती है..





माहि- बताती हु..

लता और पूर्वी अब बहुत ज्यादा डरने लगाती है.. वो दोनों भगवन को याद करने लगाती है..

माहि करीम को एक बार देखते है..

माहि- इस घर मई बहुत कुछ चल रहा है.. आप के पीटपीचे भैय्या..

कान्तिशीथ- क्या क्या चल रहा है .. माहि सीधा सीधा बता दो न..

माहि गुस्से मई बोल पड़ती है..

माहि- मुझे क्यों पूछ रहे हो.. लता भाभी को पूछ लो न.. की वो दोपहर को क्या कर रही थी..

कान्तिशर्त अब बहुत ज्यादा कन्फूस हो जाता है.. उसे अब लग रहा था की लता का क्या कोई चक्कर है.. वो गुस्से मई बोल पड़ता है..

कान्तिशीथ- माहि … अब मुजसे रहा नहीं जा रहा है.. लता दोपहर को क्या कर रही थी.. इससे तुम क्या कहना चाहती हो..

लता को अब बहुत ज्यादा डर लगाने लगता है.. जब कान्तिशीथ का चेहरा माहि की तरफ होता है तब लता माहि को धीरे से माफ़ी मांगने का इशारा करती है..

कान्तिशीथ- बताओ माहि.. तुम कहना क्या चाहती हो.. सीधा सीधा बता दो.. ऐसे पहलेया मत बजाओ..

माहि आपने भैय्या की तरफ देखते हुई कहती है..

माहि- लता भाभी नहीं बता पा रही है वो दोपहर को कहा थी तो इस बूढ़े टेलर को आप पूछ लो..

बूढ़े टेलर का नाम लेते hi लता और ज्यादा डरने लगाती hai..aab उसका रोना hi बाकि था.. सब बाते छोटे माँ पर चल रही है ये सुनकर पूर्वी को एक पल अच्छा लगा.. वो सोचने लगाती है माहि बुआ को मेरे और करीम के बारे मई कुछ भी पता नहीं है.. लेकिन अगले hi पल वो सोचने लगाती hai..bua ने ऐसा क्यों कहा की लता माँ कहा थी वो ककरीम को पूछ लो .. मतलब करीम और लता माँ का कुछ है.. साला कमीना ..इसका एक से मैं नहीं बरता .. मई.. शालिनी भाभी और अब लता माँ.. हरामी कही का… उधर करीम सोचने लगता है.. साली ये आज मेरे जान लेके रहेंगे.. कामिंणी.. कही की.. अब कान्तिशीथ मुझे जान से मार hi डालेगा….

तीसरी तरफ कान्तिशीथ सोचने लगता है.. लता दोपहर को कहा थी ये करीम को कैसे पता होगा.. मतलब लता और करीम … सेल इस कमीने को मई अब गोली hi मार दूंगा..

कान्तिशीथ- तुम्हारे कहने का क्या मतलब है माहि.. लता दोपहर मई कहा थी वो इस हरामी को कैसे पता होगा…

करीम पीछे से धीरे से बोलता है.. करीम माहि के पीछे था पर बहुत क्लोज खड़ा था..

करीम- जाने दे न माहि..

माहि भी धीरे से बोल पड़ती है.. मू पाई हाथ रख कर..

माहि- फैट गयी क्या..

उदार लता माहि को बार बार माफ़ी मांगने का इशारा कर रही थी..

कान्तिशीथ अब जोरसे चिलता है..

कान्तिशीथ – बता दो माहि..

माहि चहरे पद थोड़ी हसी आ जाती है ..

माहि- आप भी न भैय्या.. घर मई दोपहर को अकेले मई और लता भाभी थी.. मई थो उप्पर सो रही थी.. और ये बुद्धा हॉल मई परेड का मेज़रमेंट ले रहा था.. तो इस बूढ़े को hi पता होगा न की भाभी दोपहर को क्या कर रही थी..

माहि की बात सुनकर लता और पूर्वी की जान मई जान आ गयी..

और उदार करीम की भी ..

करीम मैं मई कहता है ..साली हरामी ..डरा दिया मुझको.. साली को सबक सीखना पड़ेगा …

कान्तिशीथ की भी जान मई जान आ गयी.. .. फिर भी कान्तिशीथ को थोड़ा शक था..

कान्तिशीथ – फिर भी तूने कैसे कहा की मेरे पीछे घर मई कुछ गलत हो रहा है…

माहि- गलत कब कहा मैंने.. भैय्या..

ऐसा कह के वो चलते हुई लता के पास जाकर कड़ी हो जाती है.. लता अब भी दर रही थी.. निचे गर्दन करके देख रही thi..uske उप्पर गर्दन उतने की हिम्मत नहीं हो रही थी..

कान्तिशीथ – तो क्या कहा था तूने..

माहि- मैंने कहा था आप के पीटपीचे इस घर मई बहुत कुछ चल रहा है..

कान्तिशीथ का शक अब तक ख़तम नहीं हुआ था..

काँटी शेठ- ये बहुत कुछ क्या है..

माहि हस्ते हुई कहती है..

माहि- देखो न भैय्या.. मैंने कल hi मेरे नई वाच यहाँ राखी थी.. अब वह नहीं hai..chori हो गयी .. घर की मालकिन होने के नाते लता भाभी का घर के चीज़ो पाई ध्यान होना चाहिए न.. मैंने इस नाते बहुत कुछ कहा..

मनीष- कोण कर रहा है चोरी..

माहि हस्ते है… और थोड़ा आगे हो जाती है.. करीम उसके पीछे था..

माहि- मुझे क्या पता

माहि के ऐसे कहते hi करीम माहि के पिट पर धीरे से चिमटे काट देता है.. माहि और आगे हो जाती है…

कान्तिशीथ- ऐसा क्या…

ऐसा कहके कान्तिशीथ की जान मई जान आ गयी..

माहि- आप को क्या लगा..

कान्तिशीथ कुछ नहीं कहता…

माहि लता के गर्दन पाई अपनी बहे डालता हुई कहती है..

माहि- क्या आपको अपनी बीवी पाई शक तो हुआ नहीं न.. भैय्या…

तब कान्तिशीथ जल्दी मई कहता है..

कान्तिशीथ- नहीं.. नहीं.. मई कैसे लता पाई शक कर सकता हु..

माहि- हाँ.. मई भी वही कह रही हु.. भाभी आप को कैसा धोका दे सकती है.. भाभी थोड़ा hi एक्सट्रॉमार्टिकल अफेयर रख सकती है..

लता माहि को देखने लगाती है..

माहि- और वो भी इस बूढ़े के साथ .. नहीं नहीं.. ऐसा कैसे भाभी कर सकती है…

मनीष- माहि तुम क्या बोल रही हो.. कुछ तो शर्म करो..

तभी करीम धीरे से बोल पड़ता है..

करीम- कामिनी कही की.. आज तो इसने मेरे वाट hi लगा दी.. इसको तो सबक सीखना hi पड़ेगा..

करीम की आवाज कान्तिशीथ सुन लेता है..

काँटी शेठ- क्या कहा तूने..

Manish-Mahi को कहा की तुम क्या बोल रही हो ..

कान्तिशीथ- मनीष तुम नहीं इस करीम को बोल रहा हु..

करीम अब डर जाता है.. सेल इस हरामी ने सुन तो नहीं लिया न…

करीम- कुछ नहीं .. शेठ…

शेठ- कुछ तो कहा तूने..

करीम- यही की मई ऐसे पाप के बारे मई सोच भी कैसे सकता हु..

मनीष- वही तो ..करीम और लता भाभी के बारे मई ऐसा कैसा सोच सकती हो माहि तुम..

अरुण- हाँ .. बुआ…

माहि- मैंने क्या गलत किया.. मैं तो यही कह रही हु की भाभी ऐसा नहीं कर सकती ..

अरुण- बुआ .. आप ने ऐसा कैसे सोच लिया.. ये यहाँ कुछ हो सकता है.. छोटी माँ ऐसे नहीं है..

सब की ऐसे बात सुनकर लता रोने लगाती है.. और भागते हुई उप्पर आपने कमरे मई जाती है..

शेठ- जाने दो.. इस विषय को यही चोर दो.. करीम तुम यहाँ क्यों आये थे..

करीम- थोड़े पैसे मिल जाते तो ..

शेठ- हाँ.. हाँ.. फिर वो पूर्वी की तरफ देखता है और कहता है..

शेठ- बहु.. इसको तोड़े पैसे दे दो..

करीम पूर्वी के आगे आकर खड़ा हो जाता है..

करीम उसको अदब कह के सलाम करता है.. पूर्वी भी उसको नमस्कार करती है.. अब कान्तिशीथ भी वह से चला जाता है.. करीम पूर्वी के पास चला जाता है… मनीष बाथरूम मई जाता है… अरुण को किसी का कॉल आता है तो वो उनसे बात करने लगता है.. माहि वह सोफासेट पाई बैठ जाती है..

अब पूर्वी करीम को देखकर धीरे से आपने पैठ पाई हाथ घूमने लगती hai…aur धीरे से कहते है..

बच्चा है...

करीम- किसका है..

पूर्वी गुस्से से कहती है..

किस का है क्या पूछ रहे हो.. मई क्या तुम्हारे जैसे हु.. यहाँ वह मू मरते .. ये तुम्हारा बच्चा है..

ऐसा कहके पूर्वी उसको स्माइल करती है..

करीम- मैडम जी आपने खुशखबरी की कोई तोफा नहीं दिया ..इस गरीब को..

करीम थोड़ा जोर से बोलता है.. माहि आपने मोबाइल में कुछ पद रही thi..Karim के ऐसे कहने से माहि करीम के तरफ देखने लगाती है.. पूर्वी एक बार माहि की तरफ देखने लगते है.. माहि उन्दोनो की तरफ hi देख रही है ये जानकर पूर्वी कुछ नहीं बोलती है.. माहि फिर से मोबाइल मई कुछ देख रही है ये जानकर पूर्वी धीरे से बोल पड़ती है..

पूर्वी- ये तोफा तो आप की वजह से मुझे मिला है.. मांगिये आप को क्या तोफा चाहिए.. आपको हमसे..

माहि को कुछ खुसुर फुसुर की आवाज आती है.. इसलिए वो उनके तरफ देखने लगती hai…Purvi माहि को आपने तरफ देख रही है ये देखकर कहती है..

पूर्वी- सब नौकरो के साथ आप को भी तोफा मिलेगा.. अरुण शेठ की तरफ से..

माहि अब फिर से आपने मोबाइल मई बिजी हो जाती है..

करीम धीरे से बोल पड़ता है..

मुझे तो स्पेशल तोफा चाहिए

मई तो पूरी आप की हु.. जब चाहिए ले लो.. जो चाहिए वो..

फिर आज रात आता हु..

आ जाओ ..लेकिन मेरे पास .. लता माँ के पास मत जाओ..

और पूर्वी थोड़े हँसाने लगाती है..

ऐसा कुछ भी नहीं है ..

मई तुम अच्छे से जानती हु.. बुआ ने कुछ न कुछ देखा hi होगा..

नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है..

तब तक वह अरुण आ जाता है..

अरुण- करीम को पैसे दिए क्या..

पूर्वी- हाँ दे दिए..

करीम- थैंक्स अरुणशेठ और पूर्वी बहुरानी जी..

माहि अब तक वही सोफे पाई बैठे हुई थी..

करीम- चलता हु..

ऐसा कहके करीम एक बार माहि को देखता है .. माहि उसको गुस्से से देखती है.. नखरे से चेहरा घुमा लेती है.. और वह से उठ कर दूसरी और चली जाती है..





करीम वह से जाता है.. दूर मई जेक पीछे पलट के पूर्वी को देखता है.. पूर्वी उसको देख के स्माइल करता है और आपने पैठ पाई हाथ रख कर घुमा रही थी और उधर पूर्वी को देख कर करीम आपने लुंड पाई हाथ घुमा रही थी.. ये सब माहि देखती है.. माहि को कुछ समाज मई नहीं आ रहा था.. वो सोचने लगाती है.. क्या इस बूढ़े के साथ पूर्वी का भी है kya…Mahi को लग रहा था की ये तो पूर्वी के साथ भी होगा तो.. वो सोचने लगी… सिमरन मैडम.. उनके बाद लता भाभी… पूर्वी और मई… मई कैसे .. मैंने तो उसको सिर्फ.. सिर्फ ..आपने पास आने दिया था.. और कुछ नहीं.. कुछ करने hi नहीं दिया न.. usko..fir .. मई कैसे .. तू भी है माहि.. उसने तुझको किश किया.. तेरे आम दबा दिए.. तू भी है.. अगर मई शामिल भी नहीं हु.. तो भी 3 लेडीज.. मेरे सामने.. और पीछे कितने होंगे.. ये आदमी है क्या घोडा.. यही सोचते हुई माहि हॉल से बहार आ गयी… सामने करीम अभी भी खड़ा था.. वो अब तक आपने घर नहीं गया था.. वो गेट पाई वॉचमैन से बाते कर रहा था.. माहि की नज़र उसपर पड़ते है.. माहि दूर पाई खड़े रहकर करीम को hi देखने लगाती है.. करीम गेट के वॉचमन को कुछ समाज रहा था.. वॉचमन न न मई गर्दन हिला रहा था.. माहि को कुछ समाज नहीं आ रहा था की करीम वॉचमन को क्या समाज रहा है.. फिर करीम वॉचमन को कुछ पैसे देता है.. 500 - 500 के कुछ नोट .. वॉचमन न न कहते हुई वो नोट आपने जेब मई दाल देता है.. करीम उसके शोल्डर पर हाथ रखकर जैसे उसे धनवाद कहता है.. तब माहि को बात समाज आ जाती है.. इस सेल ने कुछ काम दिया होगा उस वॉचमन को.. पैसे देके वो उनसे काम निकल रहा है.. बहुत चालू है ये बुद्धा.. ऐसा माहि सोचते है..

करीम अब घर जाने के लिए गेट से जैसे hi आगे बढ़ाता है वैसे hi वो पीछे मुद के एक बार देखता है तब उसे माहि दिख जाती hai..Mahi को देखते hi वो माहि के तरफ आ जाता है..

करीम- कैसे हो मैडम..

माहि- हरामी.. अभी तक नहीं गया तू..

करीम- जाने का तो मैं hi नहीं कर रहा है माहि..

अपनी गन्दी जुबान पाई मेरा नाम मत ले हरामी..

करीम हँसाने लगता है..

अब है रहा है.. थोड़े देर पहले तू रोने की हालत मई था..

वो तो सही बात है.. तूने मुझे डरा hi दिया था… लता की हालत तो रोने जैसे बनाये दी तूने आज..

माहि की ऐसे तारीफ करीम ने करते hi माहि का चेहरा खिल उठता है..

वो उसकी तरफ hi देखने लगाती है आपने बाल संवारते हुई.. ऐसा क्यों किया तूने.. माहि..

तेरे को सबक सीखने के लिए..

सबक सीखा दिया क्या फिर..

आगे से मेरे नज़दीक आया तो इससे बुरा हाल कर दूंगी तेरा..

अच्छा बाबा.. तेरे पास नहीं आऊंगा..

उस वॉचमन को क्या कह रहा था तू..

करीम सोचता है.. साली ने देख लिया शयद..

कुछ तो नहीं..

ज्यादा स्मार्ट मत बन .. मैंने सब देख लिया है.. तू उसे कुछ बता रहा था जो वो सुन नहीं रहा था.. बाद मई तूने पैसे देने के बाद उसने सुन लिया..

वो मर्दोंवाली बात है माहि.. तू क्यों ध्यान दे रही है..

मुझे उल्लू मत बना... सीधा सीधा बता .. उसको किस काम के लिए पता रहा था..

कुछ भी तो नहीं..

बता नहीं तो उस वॉचमैन को बुला लू क्या..

ारे कुछ नहीं.. रात को दारू की व्यवस्था कर रहा था.. बस और कुछ नहीं..

सही बोल रहा है या झूठ..

अब तुज से झूठ बोल के क्या होगा.. तू तो मेरे बारे मई सब कुछ जानती है न.. वैसे तेरे नज़र किसी लोमड़ी से काम थोड़ी hi है..

करीम थोड़ी उसके तारीफ करता है..

एक बात बता…

हैं ..पता है मुझे..

क्या पता है तुजे..

यहाँ आके बैठ ..फिर तुजे बताता हु..

फिर करीम और माहि वह एक कार्नर मई जेक बैठ गए.. एक बेंच पर..

अब बता ..क्या पता है तुजे…

यही की तू मुजसे क्या पूछने वाली है..

क्या पूछनेवाली हु मई..

पूर्वी के बारे मई…

तुजे कैसे पता..

मई लेडीज की आँखों मई देख के बता सकता हु की वो क्या सोच रही है..

ज्यादा होशियारी मत कर.. और सच सच बता.. विथाउट अन्य फ्लेर्टिंग..

तू जो सोच रही है ऐसा कुछ भी नहीं है..

मतलब पूर्वी का और तेरा कुछ भी नहीं है….

फिर वो तुजे देख कर है क्यों रही थी.. और तुम दोनों धीरे से हाल मई क्या खुसुरफुसुर कर रहे थे..

तेरे वजह से..

मेरे वजह से.. मतलब..

तूने मेरे और लता के बारे मई जो कुछ अदा अधूरा बता दिया था इस वजह से उसे शक हो गया था की लता और मेरे बारे मई कुछ चल रहा है..

क्या तू पूर्वी से फ्लेर्टिंग कर रहा था..

नहीं तो..

माहि कुछ सोचने लगाती है..

जलन हो रहे है क्या तुजे..

नहीं तो…

फिर..

शक हो रहा है तुज पर..

अभी सब सच तो बता दिया तुजे माहि मैंने .. अब शक की क्या बात है..

शक की ये वजह है की वो तुजे देखकर आपने पैठ पर हाथ घुमा रही थी और तू आपने उसपर हाथ घुमाकर उसे hi देखे जा रहा था..

तू क्या हम पर hi ध्यान दे रही थी..

मैंने जो कहा वो सच है न…

नहीं..

मैंने देखा था..

क्या कहा तूने.. मई पूर्वी को देखकर वह हाथ घुमा रहा था..

हाँ..

कहा पर..

माहि निचे देखने लगाती है.. शर्माकर कहती है..

पंत पर..

पंत पर कहा..

मुझे नहीं पता..

करीम माहि का हाथ पकड़ लेता है और कहता है..

बता न..

मुझे नहीं पता..

माहि ऐसा कहके झट से करीम के हाथ को जतका देते है.. और वह से उठकर दूर पाई कड़ी रहती है.. अब दोनों एक दूसरे को देख रहे थे..

तुजे क्या लगता है की .....वो बच्चा मेरा है..

माहि हाँ मई गर्दन हिलती है..

करीम माहि के पास आने लगता है .. वैसे hi माहि अन्दर हाल मई चली जाती है.. और अन्दर से हाल का दूर लॉक कर लेते है..

थोड़े देर बाद करीम आपने घर चला जाता है.. दूर लॉक करते hi माहि के चहरे पर हलकी से स्माइल आ जाती है ..और आपने आप को कहती है..

कमीना .. कही का..

बहार करीम आपने घर जाते वक़्त यही सोच रहा होता है की ये फटका कब हाथ मई आ जय.. वो आपने आप को समजनाए लगता है की .. आ जाएगी करीम .. माहि भी तेरे लुंड की घुलम हो जायेगे.. पहले तो तुजसे बात भी नहीं कराती थी अब बाते तो करने लगी है .. जल्द से जल्द तुजे अब ये सोचना है आगे कैसे बड़ा जय.. अब इसके चहरे पर उतना गुस्सा नहीं होता है तेरे को देख कर .. कभी कभी तेरे बात सुनकर है भी पड़ती है.. करीम जाने दे चोर दे.. अब थोड़ी दारू लगा le..aur सो जा.. रात को तुजे तेरे पूर्वी के पास जो जाना है…

उदार रूम मई आते hi मनीष माहि को कहता है..

चलो माहि .. घर चलते है..

माहि मनीष की बात को सुनते hi नहीं है.. उसके दिमाग मई करीम hi चल रहा था.. करीम के बारे मई सोचकर आपने आप hi उसके चहरे पर स्माइल आ जाती है.. आपने पति के तरफ न देखकर और उसके बात न सुनकर माहि बाथरूम मई चली जाती है… मनीष को आचार्य होता है के माहि ऐसा क्यों कर रही है.. वो क्या सोच रही होंगे…

बाथरूम से माहि बहार आने के बाद मनीष उसे फिर से कहता है..

चले

माहि उसे देखते है..

कहा

आप घर..

माहि कुछ देर सोचते है..

नहीं …

क्यों.. थोड़ी देर पहले तो तुम hi कह रही थी न..

हाँ .. कह रही थी.. पर भैय्या और अरुण ने इतना रिक्वेस्ट किया तो आज रुकते है यहाँ..

खाना खाके जाते है फिर..

नहीं.. नहीं.. आज रात यही रुकते है और सुबह hi चले जाते है..

मनीष कुछ नहीं कहता है..

तुम कुछ काम है क्या घर पाई अब

नहीं नहीं .. अब जेक सोना hi है घर पाई

तो यही सोते है मनीष ..ा ुर सुबह चलते है..

ठीक है.. माहि..

थोड़े देर बाद माहि घर के सभी लोगो के साथ खाना खाने लगाती है… वो बड़ी प्यार से पूर्वी की तरफ देखने लगाती है.. पूर्वी के चहरे पर एक अजीब से स्माइल उसे दिख जाती है.. वो सोचने लगाती है पूर्वी का चेहरा इतना खिला क्यों है आज.. बच्चे की वजह से या जो मई सोच रही हु वो.. उस वजह से.. पूर्वी को भी आचार्य होता है की माहि बुआ उसे क्यों ऐसा देख रही है आज.. पूर्वी आँखों से इशारा करते हुई माहि को पूछते है की क्या बात है तो माहि कुछ नहीं कहती है ..

खाना ख़तम होने के बाद सब लोग आपने आपने रूम मई चले जाते है..

मनीष का अब एक हाथ माहि के कुर्ते के ऊपर से hi उसके बूब्स पर चल रहा था.. अपने बूब्स पर मनीष का हाथ पड़ते hi माहि और भी ज्यादा मदहोश होने लग गयी..

क्या कर रहे हो.. छोड़ू भी..

माहि ने मनीष को मदहोशी भरे अंदाज में कहा..

मनीष माहि को किस करने के लिए आगे बड़ा और कहने लगा...

कोई भला छुट्टिया hi होगा जो अपनी इतनी हसीं बीवी को यूँ छोर दे..

मनीष ने माहि के बाए बूब्स को छोर कर उसके दाए बूब्स को मसलना शुरू कर दिया..

आअह्ह्ह्हह्ह्ह.. manishhhhhhhhhhhhhhh.. ऐसे hi दबाऊऊऊऊ ..ना.. रुको.. मत्तत्ततत्तत्त……

माहि को अब लग रहा था की अब मनीष ने रुकना नहीं चाहिए....

अब माहि मनीष के उप्पर आ गयी. नीचे मनीष का एक हाथ बारी बारी से माहि के अस्स के गुम्बदों को मसल रहा था.. न जाने क्यों आज मनीष से आपने अस्स के दोनों गुम्बदों के साथ खेलने में माहि को बड़ा मजा आ रहा था..

अब जल्दी से मेरे कपडे उतर दो manish..aur मेरे दोनों बूब्स को चूमो....

मनीष ने माहि का टी शर्ट उतर दिया..

उतर दो इस छोटी सी ब्रा को.. अब इसका हमारे बीच में क्या काम..

माहि की बात सुन कर मनीष को हलकी सी हंसी आ गयी..

आज क्या हो गया है माहि तुम..

कुछ नहीं मेरे राजा.. मुझे प्यार करो.. बहुत प्यार करो.. ताकि मई किसी भी तरह प्यासी न राहु…. मनीष..

मनीष उसकी ब्रा उतर रहा था तब तक माहि ने अपनी निघ्त्य को हल्का सा नीचे सरका कर अपने पैरो से पूरा नीचे कर दिया.. फिर मनीष ने उसके पंतय निकला फेक दी..

ब्रा के हटते hi मनीष ने छोटे बच्चे की तरह अपना मुंह माहि के एक बूब्स पर जमा दिया.. माहि बिस्तर पर एक डैम सीढ़ी लेती हुई थी.. मनीष एक हाथ से माहि के दूसरे बूब्स को दबा रहा था और उसका एक हाथ माहि के छूट के अंदर बहार चल रहा tha..Mahi ने अब अपने कोमल हाँथ मई मनीष का लुंड ले लिया और उसे आगे पीछे करने लगी .. मनीष के लुंड को आगे पीछे करते हुई वो सोचने लगी.. करीम का लुंड मेरे हाथ मई बैठ पायेगा क्या.. माहि यह सोचकर फिर से गरम हो गयी और अपनी छूट मनीष के उंगली से सहलाने लगी.

फिर खुद को समजने लगी.. माहि तू क्या सोच रही है.. ये सोचन पाप है..

माहि ने आपने नरम बूब्स मनीष के मू मई दे दिए.. और आपने टांगें मनीषी के कन्धों पर रख ली..

मनीष के साथ आज माहि पूरी तरह से खुल कर आवाज करते हुए सेक्स का मजा लेना चाहती थी पर आज वो आपने भैय्या के घर पर थी.. और उसी फ्लोर पर अरुण और पूर्वी का कमरा भी था.... इस वजह से माहि खुल कर आवाज नहीं निकल प् रही थी जिस कारन माहि के उत्तेजना और भी ज्यादा भड़ती जा रही hi.. और इसी उत्तेजना के कारन माहि एक बार झाड़ चुकी थी.. मनीष की उंगलिया बराबर माहि के छूट में अंदर बहार हो रही थी..

माहि ने मनीष का लुंड आपने छूट पर रगड़ने lagi..aur वो बुहत तेज़ सिसक रही थी और अपने गोर और मोठे हिप्स उछाल रही थी.

मनीष अब दाल भी दो अब बर्दाश्त नहीं होता.

फिर मनीष ने माहि के दोनों टांगो को घुटने से मोड़ कर दोनों टाँगे हवा में कर दी जिस से उसकी छूट खुल कर उसके सामने आ गयी थी.. मनीष ने अपना लिंग उसकी छूट की लकीर पर ऊपर से नीचे, नीचे से ऊपर फिरना शुरू कर दिया.. अब माहि अपना आप पूरी तरह से खो चुकी थी और उसके मुंह से जोर जोर से सिसकारियां निकलने लग गयी थी.. पूरा बदन पसीने में तर बदर हो गया था..

वैसे माहि मनीष का लिंग देखते hi माहि को करीम का लुंड याद आने लगा.. वो सोचने लगी करीम के सामने मनीष का कितना छोटा है.. वो अब करीम के लुंड को भूल जाना चाहती थी..

aaaaaaaaaaaaahhhhhhh……. आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह… के ों मनीष के ों…

माहि के मुंह से तेज तेज आवाज सुन कर मनीष ने उसके मुंह पर हाथ लगा लिया …

कोई सुन लेगा माहि.. इस फ्लोर पर अरुण का कमरा भी है..

ऐसा कहके मनीष ने आपने लिंग को माहि के छूट के छेद प् टिका कर धीरे धीरे पूरा लिंग अंदर कर दिया.. और आगे पीछे करने लगा..

आईईईई ऐसे hi मेरे राजा बुहत मज़ा आरहा है.

थोड़ी देर यही सिलसिला चलता रहा..

अब छुड़ाते हुई माहि आपने हाथ से बूब्स को दबा रही थी ..





ज़ोर से ढके lagao.manish और जोर se..I लव यू मनिष्ठ्हहहहहह…

और फिर थोड़ी hi देर मई मनीष ने आपने पानी माहि के छूट के उप्पर गिरा diya..aur हफ्ते हुई मनीष माहि के उप्पर गिर पड़ा.. फिर वो दोनों एक साथ एक दूसरे से चिपक कर नंगे hi सो gaye..kuch देर बादमाही नींद से जग गयी .. तब कपडे उसके यहाँ वह पड़े उसे दिख जाते है.. न जाने उसे क्या हो जाता है.. वो कुछ सोचने लगाती है और वो सदी पहने लगाती है..

सदी पहनने के बाद आपने बाल जो मनीष के साथ सेक्स करने के वक़्त बिखरे हुई थे उसको ठीक थक कर लेते है..





फिर कुछ देर सोचते है... और आपने आप को सजाने संवारने लगते hi.. वो भी इतने रात.. आपने हस्बैंड सोने के बाद.. फिर वो मनीष को देखते है.. वो गहरी नींद मई था.. उसे वो देखते है .. और उसके चहरे पर स्माइल आ जाती है.. वो मेकअप करने लगाती है..

फिर माहि तैयार होकर बहार पोर्च मई आ जाती है ..पोर्च मई अभी कोई नहीं था… . रात के 11 बजे thee….isslye घर के सभी लोग सो गए थी…. कोई जग नहीं रहा था.. घर मई कैसे भी आवाज नहीं thi..pehale तोह माहि पोर्च मई थोड़ा टहलती है .. इधर उधर चल रही थी……. अचानक से माहि का धयान सामने gaya..Tabhi उसकी नज़र करीम पर पढ़ी… सामने से स्टेप्स चढ़ाते हुई करीम उप्पर आ रहा था.. जो के करीम सामने नहीं निचे देख के चलते हुई उप्पर आ रहा tha..…jaise ही करीम ने सामने देखा तोह माहि साइड मई हो गयी .. एक कार्नर मई जेक चुप gayi..taki करीम उसको देख न पाए... करीम सामने देखकर ऊपर के तरफ चलने लगा…

पोर्च मई जेक करीम थोड़ी देर खड़ा रह गया.. माहि ने अब सोच लिया की करीम से जेक वो बात कर ले की वो इस वक़्त यहाँ क्यों आया है.. तभी करीम किसी को कॉल लगाने के लिए आपने मोबाइल जेब से निकल लेता है.. तब माहि समाज जाती है की .. करीम क्यों आया है इस वक़्त.. वो सोचने लगाती है.. आज आफ्टरनून मई hi इसने लता भाभी के साथ सेक्स किया है और ये फिर से आ gaya..aur वो भी भैय्या घर मई होते हुई.. अब ये दोनों तो भैय्या को भी दर नहीं रहे है.. इस ठरकी को जाने दो भाभी को भी अपनी लाइफ के बारे मई कुछ दर नहीं है क्या.. हरामी कही की..

तभी करीम आपने कान पे लगा हुआ फ़ोन निचे करता है.. माहि एक कार्नर मई कड़ी होकर देख रही थी.. वो सोचती है सेल ने कॉल क्यों नहीं किया.. तब करीम के चहरे पर पहेली हुई कमीनी मुस्कान देख कर माहि को गुस्सा आ जाता है..

वो आपने आप को कहती है.. लगता है साली लता भाभी आ गयी है इस वजह से कमीना मुस्कुराहा hai..fir माहि करीम जिस तरफ देख कर मुस्कुराहा है उस तरफ मुद कर गुस्से से माहि देखने lagi……samane का नज़ारा देखकर माहि के दिल के धड़कने एक दम से बढ़ gaye….usne सामने देखते hi माहि अंदर तक सुलग गए. सामने लता नहीं तो पूर्वी thi..usne आपने दरवाजा खोला...





और वो करीम को देख कर स्माइल करते हुई उसकी और आ रही थी..

पूर्वी संज संवारकर आयी थी..





माहि सोचने लगाती है... पूर्वी ने इतने रात को इतना अच्छा मेक उप क्यों किया hai..fir कुछ सोचकर और

पूर्वी को देखकर माहि हकीबाकि वही दांग कड़ी रह गए… वो सोचने लगाती है ..मई अब्ब काया kArun…aur काया ना करूँ.. अब इसने पूर्वी को आपने जाल मई फांस लिया है .. पूर्वी के जिंदगी ख़राब कर देगा ये ठरकी.. इसकी जिंदगी ख़राब होने से उसे बचा ले जाना चाहिए …

पूर्वी करीम के पास आते hi करीम कुछ कहना चाहता था पर पूर्वी उसे चुप रहने का इशारा करती है.. करीम भी चुप हो जाता hai..Aur फिर पूर्वी सामने वाले रूम मई चली गयी ….पीछे से करीम भी उसी रूम मई गया..

फिर माहि सोचने लगते है ...पर पूर्वी का और इस बूढ़े का चक्कर पहले से होगा तो.. तो मई क्या करू फिर…… पूर्वी hi उसे उस रूम मई ले गयी .. मतलब साफ़ hai…par फिर भी पूर्वी जो कर रही hai…wo ठीक नहीं hai…jo वो दोनों अब करने वाले है वो कही से भी सही नहीं है…. वो चाहते थी की वो जोर से छिलके पूर्वी को bole…apne आप को रोको पूर्वी… माहि पूर्वी को अपनी जिंदगी बर्बाद करते हुए भी नहीं देख सकती थी……. माहि का मान बेचैन था… पूर्वी के लिए.. उसे लगा की, आज तोह पूर्वी लौट ही jayege.wo आपने आप को कहने लगी.. मुझे पूर्वी को किसी भी हाल मई ये सब करने से रोकना होगा…. वो अभी न समाज है… बची है….

माहि सोचने लगाती है और आपने आप को कहती है …जिंदगी मई इतने शॉक मुझे एक साथ कभी नहीं लगे thee…pahale सिमरन मैडम.. फिर लता भाभी और अब पूर्वी.. उसके टाँगे कनाप रही the….Mahi सोचती है किसी तरह चल कर उस रूम तक पहुंचना पड़ेगा ... ….…… माहि एक दम से पेरशान हो gaye….aur उस तरफ बढ़ने lagee….jiss तरफ पूर्वी और करीम गए thee…charo तरफ एक दम सुनसान tha….naa कोई इंसान नज़र आ रहा tha….aur ना ही कोई आवाज़….

jaise-jaise माहि उस दूर के करीब पहुंच गए ….दर के मरे उसके हाथ पेअर कंपनी शुरू हो गए thee…..uss रूम के दूर के पास जाकर माहि ने थोड़ा सा झुक कर उसके अंदर जखने की कोशिश की …

माहि ने अंदर झांकने के कोशिश की तो अंदर भोत अँधेरा था… तोह इस वजह से वो दोनों माहि को नज़र नहीं आये…

अब्ब माहि का दिल इतनी जोरो से धड़क रहा था की, वो अपने दिल के धड़कने भी साफ़ सुन पा रही thee…uska दिल बैठा जा रहा tha….par ऐसा लग रहा tha….jaise अंदर कोई ना हो. पर तभी उसे अंदर से कुछ आहत सुनाई दी…

माहि ने सोचा झुक कर उस दूर से अंदर जाते है .. और देखते है.. फिर आपने आपको hi कहने लगी.. नहीं.. वो कमीना मुझे देख lega..…aur फिर माहि को सामने एक विंडो दिख जाती है . जो थोड़ी सी खुली हुई थी… माहि दबे पौन अग्गे बढ़ी….. विंडो की तरफ …

तोह उसे फिर से कुछ आहत सुनाई dee….Mahi उस तरफ देखने लगी …

माहि ने वो विंडो को खोला ….

पर अग्गे जो माहि ने dekha…wo देख कर तोह उसके पैरो टेल से जमीन ही खिसक गए…
 
माहि के दिल के धड़कने एक दम से बढ़ गए….

माहि फिर उन्दोनो ने के पीछे जाने lagee….……jab माहि दूर पर पहुंची तोह वो दोनों माहि को नज़र नहीं aaye…mahi थोड़ा और अग्गे बढ़ी.. विंडो की तरफ तोह उसे करीम और पूर्वी नज़र आ gaye….par अग्गे जो माहि ने dekha…wo देख कर तोह उसके पैरो टेल से जमीन ही खिसक गए…

उससे 15-20 कदमो के अग्गे पूर्वी कड़ी thee….…ksrim पूर्वी के तरफ बढ़ा और पूर्वी के पास जाकर रुक gaya…tab पूर्वी के नज़र निचे ज़मीं की तरफ थी .. और जैसे जैसे करीम उसके पास आ रहा था वैसे वैसे पूर्वी घबरा रही thi..….usne अपने फेस को झुका लिया tha…aur करीम को धीरे से कुछ कहा.





पूर्वी- धीरे से करना.. जबरदस्ती मत करना.. अब मई पेट से हु.. इसका ख्याल रखना..

इसपर करीम पूर्वी को स्माइल देता hai..Mahi को वह से पूर्वी के होंठ हिलाते हुए नज़र aye….par माहि उन दोनों से 15-20 कदमो के फैसले पर कड़ी thee…isslye उसे कुछ सुनाई नहीं diya…karim अब्ब भी माहि के और पीठ कए हुए खड़ा tha…usne पूर्वी का हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खेंचा तोह, पूर्वी के बूब्स करीम के चेस्ट मई डाब gaye…ye देखकर बहार माहि घबरये हुए सी उन्दोनो की तरफ देख रही थी..

फिर करीम पूर्वी के ब्लाउज को ओपन करने लग गया..

पूर्वी- इतने भी क्या जकड़ी है..

करीम- अब साबरा नहीं होता..

पूर्वी- पूर्वी रात पड़ी है न.. ये सब करने को.. अब मुझे सिर्फ प्यार करो..

वो भी तो प्यार hi है

नहीं वो तो सिर्फ हवस है .. सेक्स है..

ऐसा कहके पूर्वी थोड़ा पीछे हैट गयी और निचे देखने lagi..Phir करीम ने पूर्वी के फेस को नीचे से पकड़ा और ऊपर उठाते हुए, उसके गर्दन को चूमने लगा.. फिर उसके होंटो को अपने होंटो मई भर liya…aur उसके होंटो को चूसने laga…mahi को तोह ये देखलकार ऐसा लग रहा था की, जैसे जमीन अभी पहात jaeyge…aur वो उसमे समां jayngi…par अगले ही पल माहि को उससे भी बढ़ा शॉक तब laga..jab पूर्वी ने अपनी बाँहों को करीम के गले मई दाल diya…aur करीम के बालो मई अपनी उंगलयों को घूमते हुए अपने होंटो को चुसवाना शुरू कर दिया. पूर्वी अपने पंजो के बल कड़ी थी….

उसके ेधया ऊपर उठी हुई thee….jo कुछ माहि के सामने हो रहा tha…mahi उसे देख कर भी यकीन नहीं कर पा रही thee….tabhi करीम ने पूर्वी के पीठ घुमा कर माहि की तरफ कर dee…aur उसके पिट पे हाथ फेरने लगा .. और पूर्वी के चूतड़ों को उसके सदी के ऊपर से जो के उसके चूतड़ों पर एक दम कासी हुई thee….ooper से दबाना और मसलना शुरू कर daya…ye देख कर माहि का मुँह हरिआनी से और खुल gaya….mahii वह से हटाना छथि thee….par पता नहीं जैसे जमीन ने उसके पैरो को वह जकड लाया tha…mahi हिल भी नहीं पा रही थी…

फिर करीम ने पूर्वी के गांड को मसलते हुए थोड़ा सा घुमा दिया ..और उसको चूमने laga..abb दोनों के साइड माहि के तरफ thee…aur करीम ने पूर्वी के होंटो से अपने होंठ अलग कर daye….purvi थोड़ा सा पीछे होकर कड़ी हो gaye….wo सर झुकाये चोर नज़रों से करीम की तरफ देख रही थी…

फिर पूर्वी ने करीम से कुछ कहा…

पूर्वी- कमीने… धीरे से दबा नहीं सकता क्या…

फिर करीम ने उसको कहा..

करीम- क्या…

ये सुन कर पूर्वी थोड़ा सी शर्मा जाती है..

पूर्वी- तुजे पता है मई क्या कह रही हु..

ये जो वो दोनों बात कर रहे थे वो माहि सुन नहीं पा रही thi..wo सोचते है मई क्या करू .. जो इनकी बात सुन लू.. वो सोचते सोचते आपने आप को कहती है.. क्या मई रूम के अन्दर जाऊ क्या.. नहीं नहीं .. ये कमीना मुझे देख लेगा तो आफत आ जायेंगे.. और पूर्वी ने मुझे देख लिया तो वो क्या सोचेंगे मेरे बारे.. इससे अच्छा यही है की मई यही खड़े रहकर देखती हु.. वो क्या क्या कर रहे है.. क्या हुआ मई सुन नहीं पाई ततो..

करीम- यही की मई तुम्हारी गांड अच्छे से नहीं दबा रहा हु.

ऐसा कह के करीम माहि को बीएड पे गिरा देता है और खुद बीएड पाई जेक पूर्वी को आपने और खींचने लगता hai..Purvi शरमाते हुई न न मई गर्दन हिलती है.. और बीएड से निचे उतर जाती है..

ये इससे शर्माकर क्या कह रही होगी ये माहि सोचने लगाती है..

तो क्या कह रही है तू..

यही की.. की..

अब मुज से क्यों श्रमरहि है.. अब तो मेरा बच्चा तेरे पेट मई है.. अब बता क्या कहना चाहती है तू..

करीम पूर्वी के पास जाता है और उसके चहरे को उप्पर उठा लेता है..

यही की तुम मेरे गांड को बहोत जोरसे दबा रहे थे.. इस वजह से मुझे दर्द हो रहा था..

दर्द हो रहा था या तेरे गांड मई खुजली हो रही थी..

पूर्वी करीम को धीरे से प्यार से चांटा मरती है..

कमीना कही का..

आज तो तुजे मई बहोत जोर से छोड़ने वाला हु..

ये सुनकर पूर्वी घबरा गए…

माहि सोचने लगी .. ये पूर्वी किस तरह की औरत है.. एक पल तो उसे शर्मा जाती है और दूसरे पल उसको घबरा जा रही है..

पर अगले ही पल पूर्वी ने वो kiya..jiske उम्मीद माहि को बिलकुल भी ना थी….

पूर्वी थोड़ा पीछे हैट गयी और एक हाथ से आपने सदी का पल्लू निचे गिरा दिया … माहि सोचने लगी अब ये क्या कर रही है.. मुझे तो लगा करीम इसकी सदी उतरेगा लेकिन यहाँ तो पूर्वी खुद hi.. तभी आपने दूसरे हाथ से अपनी सदी पूर्वी ने उतरकर आपने साडी निचे गिरा दी..

फिर करीम ने अग्गे बढ़ कर पूर्वी के ब्लाउज को पीछे हाथ दाल कर झटके से निकल फेक diya…tab पूर्वी के चुच्यां उछाल कर बहार आ गए…..
 
फिर करीम ने अग्गे बढ़ कर पूर्वी के ब्लाउज को पीछे हाथ दाल कर झटके से निकल फेक diya…purvi के चुच्यां उछाल कर बहार आ गए…..

उसके आम जितनी बड़ी बड़ी चुच्यां. जो के ब्रा से बहार आने को बेताब thi..…unko करीम ने अपने दोनों हाथों मई भर कर मसलना शुरू कर daya….aur फिर नीचे झुक के लेफ्ट वाले चुकी को मुँह मई भर कर चूसने लगा…. ब्रा के उप्पर से hi..

माहि आपने आप को कहने लगी..

पता नहीं क्या हो गया है मुझे जो बहुत के तरह कड़ी यहाँ ये सब गन्दा देख रही हु ….….

जैसे ही करीम ने पूर्वी के चुकी को मुँह मई bhara….purvi ने अपने सर को पीछे के और लुढ़का daya….karim ने लगभग पूर्वी के आम जितनी बड़ी चुकी को पूरा मुँह मई भर लाया tha…aur उससे जोर जोर से चूस रहा tha…ye सब देखते हुए माहि को अपनी पेंटी के अंदर अजीब से सरसहरात महसूस होने लगी thee…phir करीम ने पूर्वी के एक चुकी को मुँह से बहार निकला और दूसरी चुकी को मुँह मई भर कर चूसने लगा. पूर्वी के हाथ लगतार करीम के पीठ पर थिरक रहे thee…aur वो आंखे बंद हुए कड़ी thee…phir कुछ देर बाद करीम ने पूर्वी के चुकी को मुँह से बहार निकला और पूर्वी के कंधे पर हाथ रख कर उससे नीचे बैठने के लये दबाने लगा….

पूर्वी ने चोर नज़रो से करीम की और देखा और नीचे घुटनो के बल बेथ gaye…karim ने पूर्वी की और देखा और कमीनी मुस्कान के साथ मुस्कारते हुए, अपनी पेण्ट के ज़िप को खोलने laga…ye देख माहि का कलेजा मुँह को आ gaya…aur अगले ही पल करीम का कला लुंड बहार हवा मई आकर झटके खाने laga…karim ने पूर्वी को फिर से कुछ कहा, जो माहि सुन नहीं पाई..

करीम- चल खोल आपने मू..

तोह पूर्वी ने अपना हाथ ऊपर उठा कर करीम के लुंड को पकड़ laya…aur फिर कुछ पल रुकने के बाद अपने होंटो को करीम के लुंड के उप्पर रख दिया और उसको चाटने लगी.. फिर पूर्वी करीम के लुंड के सुपड के तरफ बढ़ने lagee….aur अब पूर्वी ने करीम के लुंड के सुपडे को चाट liya..Ye सब देख के माहि के कान saye-saye करने लगी थी.. और माहि ने झट से आपने चहरे पर हाथ लगा दिए.. और आँख बंद कर ली.. और वो घूम gayi..aur आपने आप को कहने लगी..

पूर्वी तुम ये क्या कर रही हो .. ये सब तुम शोभा नहीं देता..

फिर थोड़े देर बाद हाथ चहरे से हटा कर आँखे खोल दिए.. अब उसके चहरे पर शर्म आ गयी thi..aab माहि को यकीन नहीं हो रहा था की, आपने खुद के घर मई पूर्वी मेरे सामने ये सब कर रहे hai….aur वो भी एक थर्ड क्लास आदमी के साथ.. आदमी क्या एक बूढ़े के साथ… ऐसा कह के वो फिर से घूम जाती है..

माहि के देखते ही देखते पूर्वी ने करीम के लुंड के सुपडे को मुँह मई भर लाया, और अपना सर अग्गे पीछे करते हुए उसके लुंड को सूचक करने लगी …करीम पूर्वी के और देख कर अपने दांत निकल रहा tha….usne पूर्वी के सर को दोनों हाथों से पकड़ कर तेजी से अपनी कमर को हिलना शुरू कर daya…ye देख माहि एक दम से हरिजन रह गए…

करीम का आधे से जायदा लुंड पूर्वी के मुँह के अंदर बहार हो रहा tha…ek मिनट दो मिनट माहि पता नहीं कब से कड़ी वह ये सब देख रही thee…ye सब देख के उसके जिस्म मई जान ही नहीं बची thi…tabhi सामने वाला नज़ारा देखकर माहि एक दम से चौंक uthi…karim ने अपना लुंड पूर्वी के हलक मई उतर दया tha…aur पूर्वी उसको पीछे के और देखेलने के कोशिश कर रही थी… फिर करीम dhere-dhere शानत हुआ, और अपना लुंड पूर्वी के मुँह से बहार nikala…purvi एक दम से अग्गे तरफ लुढ़क gaye…usne अपने दोनों हाथों को जमीन पर टिका लाया…

माहि भट्ट से बानी अभी भी वही कड़ी thee…..purvi नीचे मुँह कए हुए खांस रही thee….aur उसके मुँह से लार थूक और करीम के लुंड का वीर्ये बहार निकल रहा था… करीम ने एक बार पूर्वी के तरफ देखा.. और फिर धीरे से और अग्गे बढ़ gaya….aur अपने लुंड को हिलाया और फिर लुंड को आगे पीछे करने लगा… उसके थोड़े hi देर ऐसे करने से बहुत ज्यादा वीर्य पूर्वी के चहरे और बाल पे गिर gaya..karim के ऐसे करने से बहार माहि को बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था.. वो धीरे से बड़बड़ाई..

कितना गन्दा इंसान है ये.. ये चीज़ भी क्या मू और बालो मई डाला जाता है क्या.. कितना गन्दा लगा होगा पूर्वी को..

इधर करीम ने ऐसे करने से पूर्वी एक बार उसके तरफ गुस्से से देखते है.. और फिर आपने चेहरा और बाल आपने सदी से साफ़ करने लगाती है..

फिर निचे देख कर खांसने लगाती हैं.. पूर्वी नीचे मुँह लाटकए हुए अभी भी खांस रही thee….mahi को लग रहा था वो जल्दी से भाग कर अन्दर जाये और पूर्वी को पकड़े और उससे ऊपर उठाये….

माहि वही खड़े रहकर आपने आप को कहने लगी ..

पूर्वी देखो जो तुम कर रही ho…wo ठीक नहीं hai…jo तुम दोनों ने अब यहाँ किया है ... वो कही से भी सही नहीं hai….apne आप को रोको पूर्वी…

माहि करीम ने अब तक पूर्वी के साथ जो हरकत की थी वो देखकर हकीबाकि वही दांग कड़ी रह गए थे… और आपने आप को कहने लगी ..

मई अब्ब काया karun…aur काया ना करूँ की, पूर्वी के जिंदगी ख़राब होने से बच जाये …. मुझे अब जल्दी से पूर्वी के पास जाना चाहिए ….

माहि का मैं कर रहा था की अन्दर जेक पूर्वी की हालत को सम्बल पर उसकी डेरिंग नहीं हो रही थी अन्दर जाने ki..aab माहि का सारा धयान करीम और पूर्वी की तरफ hi था..

दूसरे तरफ अन्दर पूर्वी निचे झुख के बैठे हुई थी.. वो अभी भी हांफ रही थी.. करीम ब्रा मई से झांक रही पूर्वी की कासी हुई चुच्यों को घूर रहा है…. माहि ने जब ध्यान से देखा तो पाया की करीम कहा देख रहा था..

माहि मान मई…

कमीना कही का.. बिचारे ने इतना सारा किया इसके साथ फिर भी इसका मैं नहीं बार रहा है.. अरुण के साथ तो मुझे लगता नहीं पूर्वी ने ये सब कुछ किया होगा कभी..

करीम ने एक बार पूर्वी की तरफ देखा. वो घुटनो के बल नीचे बैठी हुई thee….phir करीम ने अपना हाथ अपने लुंड से हटा laya…aur अगले ही पल माहि एक दम से कनाप gaye….karim का लुंड उस समय साढ़े 8 यान 9 इंच के करीब था… एक दम हार्ड tha…ek तना हुआ… वो आपने आँखों मई करीम का लुंड उतरने लगी.. वो उसे बड़े hi प्यार से देखने लगी..

तभी करीम के लुंड ने एक जोर का झटका khaya….jisse देख कर माहि कनाप गए….

थकन की वजह से पूर्वी बीएड पे जेक लेत गयी.. …करीम भी वह जकए लेत गया.. अब उन दोनों के चहरे एक दूसरे के तरफ thee…wo दोनों करवट के बल लेते हुए thee….purvi की आँखे बांध थी.. करीम थोड़े देर शांत पड़ा raha..aur थोड़े देर बाद करीम का एक हाथ पूर्वी के ब्रा के ऊपर से नीचे वाली चुकी पर दबा हुआ महसूस हो रहा tha…purvi को… वो जगह भोत तंग thee…isslye पूर्वी ने उस तरफ जायदा धयान नहीं दया…

करीम- काया हुआ दर्द हो रहा है….

पूर्वी: नहीं भोत अजीब सा लग रहा hai….aisa पहले कभी नहीं हुआ…

माहि मैं मई…

करीम के हार्ड और तने हुए लुंड को देख कर मेरा दिल मचलने लगा है.. मई उससे हाथ मई पकड़ कर देखु kya….ek दम कला लुंड है …और बड़ा सा है …जबकि मेरे पति का लुंड एक दम गोरा है …

अब पूर्वी ने अपने कांपते हुए हाथ को dhere-dhere करीम के लुंड के तरफ badhya…aur धड़कते हुए दिल के साथ उसके लुंड पर रख daya….jaise ही पूर्वी ने उसके लुंड को chua..udhar माहि के बदन से अजीब से लहर दौड़ gaye…aur माहि के बदन ने झटका khaya…aur वो धीरे से बोल पड़ी..

सीई… अह्ह्ह्ह… पूर्वी… …..क्या कर रही हो…

माहि ने आपने एक बूब्स के ऊपर हाथ रखते हुए सिसकते हुई कहा.. …

अब करीम पूर्वी का उप्पर वाला आम हाथ मई लेके उसे मसलने लगा.. ….पूर्वी के आंखे बंद हो रही थी….

करीम- कैसा लग रहा है..

पूर्वी : भोत अच्छा फील हो रहा hai….aab दर्द नहीं हो रहा है…..

उधर माहि का दिल भी बहकाने लगा tha….udhar पूर्वी ने करीम के लुंड को धीरे- 2 सहलाना शुरू कर daya…karim और सिसकने लगा….

पूर्वी- अब्ब कैसे लग रहा है करीम…. तुम..

पूर्वी ने करीम के और देखते हुए कहा…

करीम- भोत अच्छा फील हो रहा hai….siiiii ऐसे ही करते रहो….

करीम का लुंड और तन गया tha….ye देख के माहि को अपनी छूट पर तेज सरसाहट से महसूस हो रही थी. और उसे आपने छूट मई गीला पैन महसूस होने लगा tha….karim का इतना बड़ा लुंड को देख कर माहि बहकाने लगी थी…. पर अगले ही पल माहि को अहसास हुआ की, वो काया करने जा रही है…. फिर वो नार्मल हो गयी…
 
फिर वो नार्मल हो गयी…

पूर्वी: मई नहीं रोक पति आपने अप्प ko…karim.. पता नहीं मुझे काया हो जाता है… जब तुम सामने होते हो.. पता नहीं क्यों मई तुम रोक नहीं pati….mai अब सचमुच मई तुम से प्यार करने लगी hun…karim.. तुम्हारे प्यार की निशानी अब मेरे पेट मई है..

माहि पूर्वी की बात तो सुन नहीं पायी पर वो समाज चुकी की पूर्वी क्या कह रही है.. जब उसने आपने हाथ आपने पेट पे घुमाया तब माहि को सब समाज आ गया.. वो आपने आप को कहती है..

यानी.. पूर्वी के पेट मई करीम का बच्चा है.. अरुण का नहीं…

अब करीम खड़ा हो गया …और आपने लुंड को पूर्वी के हूंतो के पास ले गया..

माहि आपने मैं मई :

नहीं नहीं ये मत करो आप दोनों फिरसे.. आप लोग क्यों समाज नहीं रहे hai….ye पाप hai….…..please मुझे भोत बेचैनी से महसूस हो रही है….…. ये मत करो तुम दोनों..

माहि ने जब नीचे देखा.. करीम के लुंड की तरफ तोह उसके दिल के धड़कने फिर से तेज हो gaye….karim का लुंड झटके खा रहा tha…aur उसके हर झटके के साथ माहि का दिल उछाल जा रहा था….

करीम का लुंड पूर्वी के गाल को मार रहा था.. माहि ने एक बार फिर से करीम के लुंड पर नज़र daali…wo आपने आप को कहने lagi..kitna हार्ड है ये .. कोई भी औरत उससे भोत मज़ा ली सकती है ….

अब्ब वासना का नशा माहि पर हावी होने लगा tha….uske दिल के किसी कोने से एक आवाज़ जरूर आ रही थी की, जो वो कर रही है …वो सरसर गलत hai….par कई दिनों से उसकी पयासी छूट के आवाज़ के सामने दिल और दिमाग ने काम करना बंद कर दया था….

करीम का लुंड पूर्वी के गाल को मार रहा था.. माहि ने एक बार फिर से करीम के लुंड पर नज़र daali…wo आपने आप को कहने lagi..kitna हार्ड है ये की, कोई भी औरत उससे भोत मज़ा ली सकती है ….

पूर्वी ने करीम के लुंड को हाथ मई पकड़ कर दबाया तोह करीम एक दम से सिसक उठा…..

..सीई पूर्वीय रांड……. क्या .. कर रही है…….

इसपर माहि है पड़ती है.. माहि की हसी की आवाज शयद पूर्वी ने सुन ली.. इसलिए वो झट से करीम का लुंड को छोड़कर दूर की तरफ देखने लगी.. वैसे hi माहि वाल के सहारे चुप जाती है..

पूर्वी ने करीम के लुंड को छोरा और उठ कर कड़ी हो gaye….karim पूर्वी की तरफ सवालों नज़रों से देख रहा था….

करीम- काया हुआ ?

करीम ने अपने लुंड के अग्गे हाथ रखते हुए कहा….

पूर्वी- कुछ नहीं मई अभी आती हूँ…

ये कह कर पूर्वी रूम के दूर पर आये.. और सोचने लगी.. दूर खोल के देखु क्या.. बहार कोण है.. अगर सचमुच मई कोई होगा तोह.. प्रॉब्लम हो जाएगी..

पूर्वी दूर के तरफ आ गयी है ये जानकर माहि के दिल की धड़कने जोर से चलने lagi..use डर लगाने लगा था.. पूर्वी अब करीम की तरफ आने लगी..

करीम- क्या हुआ

पूर्वी- करीम .. तुमने किसी की आवाज सुनी क्या..

करीम – नहीं..

ऐसा कहके वो विंडो की तरफ देखने लगता है..

करीम- इस वक़्त यहाँ कोण आएगा.. रांड..

ऐसा कहके करीम पूर्वी के पास जाता है और उसको आपने बहो मई उठा लेता hai..aur बीएड पे पटक देता है..

बीएड पे पूर्वी को पटकने की आवाज सुनकर माहि फिर से विंडो के सामने आ जाती है..

वो अब सोचने लाहगति है.. मई यहाँ से वापिस जाऊ या यहाँ खड़े रहकर देख लू.. फिर कुछ देर सोचने के बाद वो डीडे करती है की वो चोरी चुपके देखेंगे की ये दोनों और क्या क्या करेंगे ..

फिर करीम पूर्वी के पास जाता है और उसको किश करने के लिए उसका चेहरा आपने और खींचता है..

और उसे किश करने लगता है.. पूर्वी भी उसे किश करने लगाती hai..thode देर किश करने के बाद करीम पूर्वी के पैरो के पास जाकर खड़ा हो gaya..…aur आपने तने हुए लुंड को अपने हाथ मई कसके पकड़ लेता है …और लुंड को हिलाते हुए, दूसरे हाथ से पूर्वी के पेटीकोट को dhere-dhere ऊपर खिसका कर कमर तक ऊपर उठा लेता है ….

फिर पूर्वी ने करीम के कान मई उससे अपने ऊपर ऐनी को kaha…aur उससे अपने ऊपर खेंचने lagee…jaise ही करीम पूर्वी के ऊपर आया, वैसे hi उसने पूर्वी के पेंटी को खिसका कर उसकी टैंगो से निचे सरका दिया….. और पंतय को उसके टैंगो से निकल diya..aur पूर्वी की टैंगो को पहला दिया और उसके टैंगो के बीच मई बैठ गया ….

करीम का तना हुआ लुंड पूर्वी के छूट के थोड़ा सा ऊपर उसके पेट पर रगड़ खाने laga…purvi उसके तने हुए लुंड को अपने नंगे जिस्म पर महसूस करके एक दम से मस्त हो गए. वासना के खुमारी उसके सर चढ़ कर बोलने लगी thee….purvi ने अपना एक हाथ नीचे लेजाकर करीम के लुंड को पकड़ा और अपनी टैंगो को घुटनो से मोड़ कर ऊपर फैलते हुए, करीम के लुंड के सुपड को अपनी छूट के छेद पर रख daya….karim के लुंड के सुपड को अपनी छूट पर महसूस करते ही पूर्वी का पूरा बदन थरथरा उठा. छूट के फंखे करीम के लुंड को अपने अंदर लेने के लये कुलबुलाने लगी…

पूर्वी ने करीम के आँखों मई झाँका तोह उसके आँखों मई अजीब से चमक thee….aur कांपती हुई आवाज़ मई वो बोली

पूर्वी- करीम इससे अंदर करो….

ये सब देख के माहि को बहुत अच्छा लगाने लगा.. वो बहुत प्यार से उन्दोनो को देखने लगे..

माहि के छूट मई यही सोच कर हलचल होने लगी थी की, करीम का लुंड अब पूर्वी के छूट मई जाने वाला hai….aab माहि उन दोनों के नज़रो से बचा कर वो खेल देखने लगी थी..

पूर्वी ने एक हाथ से करीम के लुंड को पकड़ कर अपने छूट के छेद पर सेट kaya…aur दूसरे हाथ से बीएड को पकड़ लिया ..… और अपनी गांड को ऊपर के और उछाल कर करीम के लुंड को अपनी छूट के गेहरों मई लेने के कोशिश करने लगी …

जैसे hi पूर्वी ने अपनी गांड ऊपर उठायी वैसे hi करीम के लुंड का सुपड उसके छूट के छेद को फैलता हुआ अंदर जा ग़ुस्सा….

आह्ह्हह्ह्ह्हह्हआआआ…..
 
पूर्वी ने सिसकते हुए करीम के लुंड को चोर कर अपनी दोनों हाथो से बीएड को कास के पकड़ liya….aur अपनी टैंगो को उठा कर उसके कमर पर कस्ते हुए, उसे अपनी और दबाना शुरू कर दया…..

करीम का लुंड पूर्वी के पनाये हुए छूट मई फिसलता हुआ अंदर जा ghusaa….aab पूर्वी ने सिसकते हुए करीम के चहरे को अपने हाथो मई भर लाया और उससे पागलो के तरह चूमने lagee….par अगले ही पल पूर्वी को तो नहीं पर माहि को जोरदार धक्का लगा.. जब करीम ने आपने पूरा लुंड बहार निकला ..और उतने hi फुर्ती के साथ पूरा लुंड पूर्वी के छूट मई जोर से दाल दिया…

पूर्वी- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह…. मररररररर…. Gayiiiiiiiiiii…

ये देख के माहि आपने जगह पे उछाल पड़ी..

माहि- आअह्हह्ह्ह्ह… करिमममममम.. जरा धीरे से ना… वो मर्डर जायेंगे..

ऐसे कहते हुई उसका हाथ आटोमेटिक आपने छूट तक चला gaya..aur वो सदी के उप्पर से hi न चाहते हुई आपने छूट को धीरे से दबाने लगी..

फिर से करीम ने अपने लुंड को बहार निकल कर फिर से अंदर के तरफ pela…purvi के rom-rom मई मस्ती के लहर दौड़ गए….

पूर्वी- आआह्ह्ह्हहआ..

माहि हरिअत से करीम के और देख रही थी…

माहि- धीरीईए न बबआ…. उसके पेट मई बच्चा है… धीरे करो न..

और उधर पूर्वी को सच मई भोत मज़ा आ रहा था….

पूर्वी- आआआह्ह्ह्हह्हआआ…

ऐसे hi करिमममममम.. बहोत मज़ा आ रहा है…

फिर काया tha….karim ने अपना लुंड बहार निकल -निकल कर पूर्वी के छूट मई पेलना शुरू कर daya…purvi बदहवास से उनके साथ लेपटाते जा रही थी….

बेशरम कही की..

माहि ने धीरे से पूर्वी के बारे मई कहा…

वो कितने जोर से कर रहा है और ये मज़े ले रही है..

माहि ने फिर धीरे से कहा.. .. मई कल पूर्वी को मिलूंगी और उसे साफ़ साफ़ शब्दों मई कहूँगी.

क्या kahoge..mahi...

यही कहूँगी…

सुनो पूर्वी.. अब्ब तक तुमने जो करना था कर laya….aur उसके लये मई तुम्हे माफ़ भी कर देती hun….par एक बात ाछसे समाज lo…tum अरुण की बीवी हो.. महरा खंडन की बहु ho…aur तुम इसतरह महरा खानदान की इज़्ज़त की धज़ीया उड़ा नहीं सकती..…. तुम्हे करीम के साथ अपने इस नाजायज रिश्ते को ख़तम करना hoga….nahi तोह मई भैय्या को सब कुछ बता दूंगी…

फिर वो आपने आप को कहने लगी..

पूर्वी और करीम जो कर रहे है वो देख कर आज मेरा मान पहली बार बहकाने लगा है …मान मई अजीब से हलचल हो रही है…..

वो आपने आप को ये सब जो देखा उस वजह से कसूरवार तेहरा रही थी.. वो कहने लगी..

मई क्यों आयी यहाँ..

माहि कुछ देर वही कड़ी रही .. कुछ सोचते hui..Karim ने पूर्वी को उठा दिया और पलट के बैठने को kaha..use घुटन के बल बैठने को कहा ….वो वैसे बैठ gaye..aur फिर उसके कंधे को पकड़ कर अग्गे के तरफ झुकाने laga…purvi पीछे करीम के आँखों मई देखते हुए अग्गे के तरफ झुक gaye….aab करीम की काली से गांड माहि के चहरे के सामने थे.. वो देखकर माहि मैं hi मैं मई कहने लगी..

कितने काली है..

फिर वो आपने आप को कहने लगी..

माहि तू भी न अब बिगड़ गयी है.. ऐसे कैसे तू सोच सकते है..

….और अगले ही पल करीम ने पूर्वी का पेटकोट जो पूर्वी के गांड पर आय था उस को पकड़ कर उसकी कमर के ऊपर चढ़ा दिया…. और फिर उसे क्या हुआ वो पूर्वी के पीछे जो खड़ा था वो बाजु हो गया..

और अगले ही पल पूर्वी के चिकनी बिना बाल वाली छूट ठीक माहि के चहरे के सामने आ gaye…mahi आंखे फाड़े पूर्वी के छूट को देख रही thee…aur तभी उसकी नज़र करीम के तने हुई लुंड पर padi….uska लुंड अब एक दम तना हुआ tha….jisse देखते ही माहि ने अपने आंखे बंद कर lee…par उसके लुंड के चाप माहि के आँखों मई समां चुकी thee…uska कला लुंड देहक रहा था…

तब करीम बोल पड़ा..

करीम- चल साली मेरे पर्सनल रंडी मेरे लुंड को अपनी छूट मई लेने के लये टॉयर हो जा ….चल खोल अपनी छूट…

ये कहते हुई करीम ने पूर्वी के गांड पर जोर से थपड मरी …

aaaaaaaaaaaaahhhhhhhaaaa... धीरीईए से नाहा..

माहि ने आँखे बंद करते हुई अपना फेस दूसरी तरफ घुमाया .

फिर करीम ने अपने लुंड को हाथ से पकड़ कर पूर्वी के छूट के छेद पर रगड़ना शुरू कर दया…

सीईई अह्ह्ह्हह करिममममममममम.. ….

पूर्वी के सिसकी सुनते ही माहि का जेहन कनाप gaya…aur उसकी आँखे खुल गयी..

अब्ब माहि को पूर्वी की छूट अऊर करीम का लुंड दिख नहीं रहा था पर करीम की काली गांड दिख रही थी..

करीम अब्ब तेजी से अपने लुंड को पकड़े हुए, पूर्वी के छूट के छेद पर रगड़ रहा tha..aur पूर्वी के मस्ती भरी सिसकार्यं पूरे रूम मई गूंज रही थी……

पूर्वी: अह्ह्ह करीम डालो ना अंदर isse…ohhh सीईई मर्डर गयी रीई…..

करीम: बोल साली काया दालु….

पूर्वी: सीई ओह्ह्ह अपना लुंड दालयी ना…

करीम: कहा ?

पूर्वी: अहह सीई मेरे छूट मई ओह्ह्ह हैए मई मर jaungi…..jaladi दलए ना…

करीम: तुन मेरे लुंड के बिना रह सकती है काया….?

पूर्वी: नहीं …मई तोह मर jaungi….mere छूट आपके लुंड के बिना अधूरी hai..abb जल्दी करो न बूढ़े.. पहाड़ दो ना अपनी रांड के छूट को पेल दो ना अपना लौड़ा.

माहि पूर्वी के मुँह से ऐसे बातें सुन कर एक दम हरिजन thee…use यकीन नहीं हो रहा था की, ये सब बाते पूर्वी कर सकते है.. ये बाते पहले तो माहि सुन नहीं प् रही थी पर पूर्वी जोश मई जोर से बोल रही थी इसलिए माहि को सुनाये दे रहा था..

तभी मनो जैसे वक़्त थम सा गया ho…karim ने अपने लुंड के सुपड को पूर्वी के छूट के छेद पर टिकते हुए जोरदार देखा मारा और अगले ही पल करीम का आधे से जयादा लुंड पूर्वी के छूट के गेहरों मई समां गया….

सीईई ओह्ह्ह्हह ोोू बुढीीीी ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह ममममम…..

गुस्से मई करीम ने फिर से एक और देखा मारा और करीम का लुंड पूर्वी के छूट के गेहरों मई समां गया…..

पूर्वी एक दम से सिसक uthi….aur उसने सिसकते हुए अपनी चूतड़ों को इधर उधर हिलने लगी..

माहि एक दम हरिजन से ये सब देख रही थी….

तभी करीम ने पूर्वी के कमर को दोनों तरफ से पकड़ कर उससे पलट कर आपने बहो मई उठाकर खुद बीएड पर बैठ गया.. और आपने उप्पर पूर्वी को ले liya..fir उसके पुरे बदन को किश करने लगा.. चाटने लगा.. फिर थोड़े देर बाद पूर्वी को बीएड पे दाल दिया.. .. . अब्ब पूर्वी का चेहरा माहि देख सकते thi..…purvi का फेस एक दम लाल हो चूका tha….uski आंखे बंद thee…aur वो अपने होंटो को अपने होंटो मई दबाये हुए गहरी साँसे ली रही थी….

सीई अह्ह्ह्हह..

इस सिसकै के साथ पूर्वी का पूरा बदन हिल गया…. क्योंकि करीम ने अपने लुंड को बहार निकल कर फिर से उसकी छूट मई घुसाया था…

और अगले ही पल पूर्वी होंटो पर संतुस्ती भरी मुस्कान फेल गए….

जैसे उसकी छूट को करीम के लुंड के रगड़ दुनिया का सबसे बड़ा सुख दी रही ho…aur फिर एक के बाद एक करीम ने अपने लुंड को अंदर बहार करते हुए शॉट लगाने शुरू कर daye….purvi एक दम मस्त होकर सिसकारियां भर रही थी….

उधर माहि भी मस्त हो गयी थी.. ये सब देखते हुई उसके हाथ नापने चुत पर चल रहे the..tabhi उसके बदन मई एक दम से बिजली से कोंध gaye…use अपनी झंगो के बीच मई तेज सरसराहट महसूस हुई, और उसका बदन बुरी तरह से थरथरा gaya…..udhar करीम पूर्वी के छूट मई अपना लुंड अंदर बहार कर रहा था ..ये देखते हुई माहि अपना एक हाथ उप्पर ले जाकर सदी के अन्दर दाल देती है पेंटी के ऊपर .. वह छूट पर आपने हाथ रख देती है …

माहि को जैसे hi अहसास होता है वो झट से आपने हाथ बहार निकल लेते है..

उधर करीम के झंगे अब्ब पूर्वी के झाँगो पर jor-jor से टकरा रही thee…aur पूरे रूम मई थप-2 के आवाज़ें गूंज रही थी…

अह्ह्ह्ह करीम बूढ़े ओह्ह्ह्ह अप्पकी पूर्वी रांड के छूट ओह्ह्ह्हह मई gayeee…haye बूढ़े यी लो यी लो मेरे छूट का पानी आए आपके लुंड पर कुर्बान….

माहि बदहवास से पूर्वी के गरम बातें सुन रही thee….aur उसे अब्ब कुछ अजीब से महसूस होने लगा tha….wo जो उसे अपनी लाइफ मई पहले कभी महसूस नहीं काया tha….purvi कांपते हुए झड़ने लगी थी. तभी करीम ने अपना लुंड पूर्वी के छूट से बहार निकल laya….aur पूर्वी अब्ब पूरी तरह से झाड़ चुकी थी….. करीम भी झाड़ चूका था.. वो पूर्वी के उप्पर पड़ा हुआ था..

और उधर माहि भी वह इतने देर से खड़े रहने की वजह से उसके पेअर दर्द करने लगे थे.. ये सब शांत हो गए है ये जानकर माहि आप्पने रूम मई चली जाती है..

रूम मई जाने के बाद वो वह पड़ी रहते है.. सोने का तरय करती है पर उसे नींद नहीं आते hai…uske आँखों के सामने करीम का मुसल लुंड hi आता रहता है.. उसने बहुत तरय करने के बाद hi उसे नींद आ जाती है.. 2-3 घंटे सोने के बाद उसके नींद अचानक टूथ जाती है.. .. जैसे वो कोई सपना देख रही thi..fir कुछ देर वो सोचती है … आपने हस्बैंड की तरफ देखने लगाती है.. वो अभी भी गहरी नींद मई था.. कुछ देर आपने हस्बैंड की तरफ ऐसे hi वो देखने लगाती है.. और आपने आप को कहती है..

मनीष कितना गोरा hai..aur वो बुद्धा कितना कला है..

फिर वो थोड़ा हसती hai..aur कहती है..





पूर्वी भी न.. कितनी कामिनी हो गयी है.. आपने हस्बैंड को छोड़कर करीम के साथ सेक्स कर रही है और सेक्स करते टाइम उसे बुद्धा बुद्धा कह रही थी.. क्या करीम को बुद्धा कहने से गुस्सा नहीं आता होगा क्या.. पूर्वी उसके साथ सेक्स कर रही थी और उसे बुद्धा कह रही थी.. वैसे करीम मई बूढ़े जैसे कोई बात नहीं थी.. कितने जोरदार पूर्वी के साथ वो सेक्स कर रहा tha..shyad अरुण ने भी कभी पूर्वी के साथ ऐसा फ़क नहीं किया होगा.. मनीष ने तो कभी मेरे को ऐसा फ़क नहीं किया है. पूर्वी को दर्द नहीं होता होगा क्या.. शयद होता नहीं होगा.. ऐसा उसके बेहेवियर से लग रहा था.. कितने मजे के साथ वो करीम का साथ एन्जॉय कर रही थी.. और उसका वो भी कितना बड़ा है.. अन्दर जाते hi बहुत तकलीफ हुई होगी.. वो जोरसे चिलए तो थी.. अब इतने चिलए थी तो पहली बार तो रोये hi होगी.. शयद बहुत तदपि होगी पूर्वी जब पहली बार उसका वो मुसल पूर्वी के अन्दर गया होगा तब.. चिलायी तो बहोत होगी…

लेकिन मुझे क्या करना है.. मई क्यों सोच रही हु पूर्वी के बारे मई..

फिर वो मनीष के तरफ देखते हुई वो कहती है.. मनीष तुम कब मेरे साथ ऐसा ताबडतोब फ़क करोगे..

फिर कुछ सोचने के बाद माहि आपने आप को कहती है..

चले जेक देख लेते है ..वो कमीना अभी भी वह है या आपने घर चला गया है..

फिर वो बीएड से उठ के मिरर के सामने कड़ी हो जाती hai..aapne बाल ठीक थक कर लेते hai..fir उसके चहरे पर हलकी सी स्माइल आ जाती है.. और वो बोल पड़ती है..

माहि- …माहि.. वैसे तुम पूर्वी से काम नहीं हो.. और तुम्हारी उम्र भी लगभग पूर्वी इतनी hi है… फिर…

तब उसके चहरे पर कातिल स्माइल आ जाती है..

माहि- फिर… फिर क्या माहि .. तुम भी ..

नहीं नहीं…..

धत्त्त… माहि तुम ऐसा सोच कैसे सकते हो..

फिर आपने फेस को पॉवडर लगाती है और वह उसे कमरे की तरफ चले जाते है वो क्या कर रहे है ये देखने के लिए..

थोड़ा सा डर था माहि के मान मई .. फिर भी वो वह चली जाती है और दूर के सामने जेक खड़े हो जाती है.. दूर पर जैसे hi जाती है तभी अचानक दूर खुल जाता है.. ..

करीम दूर ओपन करता है .. वो नंगा hi था.. वो ननगा hi खड़ा था माहि के सामने… उसको नांगा देखते hi माहि आपने हातो से आपने चेहरा धक् लेती है..





उसकी आँखे भी बंद हो जाती है..
 
करीम दूर ओपन करता है .. वो नंगा hi था.. वो ननगा hi खड़ा था माहि के सामने… उसको नांगा देखते hi माहि आपने हातो से आपने चेहरा धक् लेती है.. उसकी आँखे भी बंद हो जाती है..

करीम ने जब माहि को बिलकुल आपने सामने कड़ी देखा तो उसको बहुत ख़ुशी हुई …

जब माहि ने शरमाते हुई आपने हाथो से आपने चेहरा देख लिया थो करीम उसके नजदीक गया.. वैसे hi माहि ने आपने आँखे kholi..aapne हाथो के फिंगर्स के बीच से माहि करीम को देखने लगी.. एक पल के लिए करीम ने माहि के आँखों में देखा और फिर माहि के गल्ले लग गया.. और उसे टाइट पकड़ने लगा.. नार्मल वाला नहीं एक दम टाइट वाला..





ये अचानक क्या हुआ ? ऐसा माहि सोचने lagi..khud से पूछने लगी पर ऐसे hi करीम के गल्ले लगी रही.. जब करीम नहीं हैट रहा ये देखा तो माहि ने करीम को कहा..

ये काया कर रहे हो तुम चोरो मुझे अह्ह्ह karim…please चोरो मुझे…..

पर करीम तोह जैसे माहि के कोई बात सुनाने को तैयार ही नहीं था

साली भोत शनि बनती है ना tun….saali बहिन के लौड़ी एक बार तुजे चोर दिया था की शायद तू सुधर जाएगी… पर लगता है तुन सीढ़ी तरह नहीं सुधेरगे…. तू मेरा पीछा नहीं छोड़ेगी.. मई क्या कर रहा हु.. किस को छोड़ रहा हु … यही देखेंगे…

करीम ..चोर दो .. मुझे.. मई यहाँ से चली जाउंगी…

करीम: साली अब ऐसे कैसे तुजे जाने dunga…khud तोह तू मज़े नहीं लेती है... और दुसरो को भी मज़े नहीं लेने देती .. दुसरो के लाइफ मई टांग अड़ाने के आदत पाल राखी hai….dekh आज तेरे साथ काया करता हूँ… आज के बाद किसी के लाइफ मई इंटरफेरे नहीं करेंगे……

चोर दो न करीम..

क्या… छोड़ ..दू…

मुझे पता है तुम्हारा इरादा... सिमरन लता पूर्वी हो गयी अब मई hi बची हु..

और 1 है न

कोण

पूजा

वो बच्ची है

उसको छोड़ने के बाद hi पता चलेगा वो बच्ची है या जवान हो गयी है..

पूजा के तरफ बुरी नज़र से देखा तो मुजसे बुरा कोई नहीं होगा करीम.. मई बता दे रही हु..

साली मेरे लाइफ मई तुजसे बुरा और कोई हो भी नहीं sakta…jab देखो मेरे लाइफ मई अपनी टांग ादती रहती hai…abb हटा आपने हाथ और खोल अपनी आंखे….

माहि: नहीं मई नहीं खोलूंगी…

करीम: साली तुन अपनी आंखे भी खोलेंगे और तुन आपने छूट मई मेरा लुंड जाते हुए भी देखेंगे…..

तभी माहि का बदन उस पल थरथरा utha…jab उसे अपने तइस पर कुछ गरम सा अहसास हुआ, और ये सोच कर उसका दिल के धड़कने बंद हो गए, की ये करीम का लुंड है…

फिर वो सोचने लगी .. पेनिस ... सदी के उप्पर से इतना हॉट कैसे हो सकता है .. और वह कुछ चिपचिपा सा लग रहा है.. ऊऊऊ.. सहित ..ोूहू.. तो वो वो है..

फिर माहि ने अपने बॉडी को इधर उधर करना शुरू कर दया….

ाहहए करीम स्टॉप आईटी प्लीज इससे पीछे करो….

माहि ने अब करीम के सामने बिअंति भरे लहजे मई कहा.

चल फिर अपनी आंखे खोल नहीं तोह मई अपना लुंड तेरे तइस होते हुई तेरे छूट तक लेके जाऊंगा..

माहि करीम के बात सुन कर एक दम से दर गए….

और ना छठे हुए भी माहि ने अपने चहरे पर से हाथ हटा कर आंखे खोल कर निचे के तरफ dekha…uska दिल जोरो से धड़क रहा tha….karim का मुंसल जैसा लुंड जो शायद 9 इंच लम्बा और काफी मोटा था. उसके चहरे के थोड़ा सा आगे हवा मई झटके खा रहा था….

साली देख अब्ब ये तेरे छूट के लिए कैसे उछाल रहा है..

माहि एक दम हरिजन से करीम के लुंड को देख रही थी…. वो देखते हुई माहि के चहरे पर स्माइल आ जाती है..





पूर्वी से मैं नहीं भरा क्या

तेरा जैसे वो कड़क माल नहीं है

तभी करीम ने माहि के कमर को दोनों तरफ से पकड़ कर उससे आगे के और खेंचा. अब्ब माहि का चेहरा करीम के फेस के सामने उसके आँखों के सामने था…





माहि का फेस एक दम लाल हो चूका tha….uski आंखे बंद हो गए थी… उसने फिर से आपने चहरे को हाथो से धक् लिया tha...aur वो अपने होंटो को अपने होंटो मई दबाये हुए गहरी साँसे ली रही थी….

सीई अह्ह्ह्हह..

इस सिसकै के साथ माहि का पूरा बदन हिल गया…. क्योंकि करीम ने अपने लुंड को माहि के छूट पर रख कर रगड़ा..

…और अगले ही पल माहि के होंटो पर संतुस्ती भरी मुस्कान फेल गए….

1 मिनट तक तो वो दोनों ऐसे hi खड़े रहे .. मय्बे माहि को काम या ज्यादा कह नहीं सकते लेकिन मज़ा बहुत आ रहा था और वो मज़ा तब बड़ा जब करीम ने अपना सर थोड़ा आगे किया और माहि के शोल्डर को चूमा..





माहि- aaaaaaaaaahhhhhhhhaa……

Kkkk..aaaa..rrr..iiii..mmmm….

Nnnnnnnn..oooooooooooo….

फिर करीम ने माहि के चहरे पर से उसके दोनों हाथ हटा दिए… माहि की आँखे अभी भी बंद थी.. और वो शर्म से मरी जा रही thi..mahi के चेहरे के आगे अपना चेहरा कर लिया...

बिलकुल सट्टे हुए चेहरे थे उन दोनों के, सांसें एक दूसरे के उप्पर hi गिर रही थी, नाम मात्र हवा निकलने की जगह थी. सही में करीम ने कुछ न करते हुई hi बेहद इरोटिक, खतरनाक ेरोटिकनेस्स सेंसेशन पैदा कर दी थी माहि में.

अब बहुत hi इरोटिक सेंसेशन माहि के अन्दर पैदा हो चुकी थी पर वो आपने आप को समबलाने की कोशिश कर रही थी..

अभी भी माहि के आँखे बंद thi..mahi जान चुकी थी की करीम उसके बहोत क्लोज खड़ा है ..अब माहि के हूंतो पे करीम आपने हूंठ रखने वाला hi था की माहि ने आपने चेहरा दूसरे तरफ घुमा दिया…

न्यूऊऊऊ………. थिस इस नॉट फैररररररर….. ये ठीक नहीं है…..

जैसे hi माहि ने आपने गर्दन घुमा ली तो करीम के होंठो के सामने से माहि के हूंठ हटकर उसका गाला आ गे..

फिर उसके गल्ले को करीम ने चूमा…

आआह्ह्ह्हह्ह….. …. ये सब ठीक नहीं है..

लेकिन करीम उसके गल्ले को चूमने laga..chumta चाटते हुई वो उसके गर्दन तक आया और वहां चाटने लगा... हाथ से उसकी सदी का पल्लू उसके छतियूं की तरफ से निचे करने लगा .. वैसे hi माहि ने आपने सदी का पल्लू आपने एक हाथ से छाती पे दबा दिया और दूसरे हाथ से दूर को पकड़ा ताकि वो गिर न जाये..

अब जहा माहि ने आपने छथि पर अपनी सदी का पल्लू दबा दिया था उसके थोड़ा उप्पर मतलब छथि के उप्पर वहां करीम ने अपने होंठ रख दिए ..

माहि- आआआह्ह्ह्हह्हआआ…. कॅरियम्मम्म… ये क्या कर रहे हो…

अब वह पे करीम आपने जीभ से चाटने लगा था... करीम की गरम सांसे माहि के कानो में गूंज रही थी.. और उसका सेंसेशन बड़ा रही थी.. करीम अब उसकी छाती के उप्पर से चाटते हुई गर्दन तक आ गया .. और फिर चाटते हुए छतियूं तक आ पहुंचा

जैसे hi माहि के आम को साड़ी के उप्पर से करीम ने चूमा था की वो एक दम बोल पड़ी.

" no.. "

और उसने फ़ौरन करीम का सर पीछे कर दिए, उसका ऐसा करते hi करीम सीधा खड़ा हो गया.

माहि- नॉट मोरे...

माहि ने तेज़ चलती सांसों से कहा, करीम उसके चेहरे को देख रहा था, उसकी आवाज़ जो कह रही थी वो उसके चेहरे पर बिलकुल नहीं था. करीम ने अपने होंठ आगे बढ़ाये ताकि फिर से उसे मूड में ला जाये सके .. पर उसने अपनी गर्दन फेर दी, जब करीम ने उसकी नज़रों का पीछा किया तो पाया की वो करीम के लौड़े की तरफ देख रही थी.

करीम - बहनचोद... सल्ली हस्ती कहीं की... कसम से तू तो एक नंबर की रंडी निकली ...

करीम ने ऐसे कहते hi माहि उसे गुस्से से देखने लगी.. करीम की बात सुन कर माहि एक दम से बाधक गयी …उसने करीम को थप्पड़ मरने के लिए हाथ उठाया और उसे जोर से थप्पड़ मरने के लिए करीम के गालो तक आपने हाथ लाया तो करीम ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसका हाथ पकड़ के उसे आपने और जोर से khincha…aur फिर उसका हाथ पकड़ कर खेंचते हुए आपने बॉडी से उसका बदन सत्ता लिया …और फिर तेजी से उसके गर्दन को किश करने लगा.. करीम के इस हरकत से माहि एक दम से घबरा गए…

करीम- तुम औरऑटो का मूड बेहेनकि लोदियाँ.. इतनी जल्दी बदलती हो जितनी जल्दी तो उप्पर वाला एक मिटी का पुतला नहीं बना पता होगा.. पता नहीं कौन से केमिकल से तुम्हारा मूड बना है हर बार नया hi रिजल्ट अत है.. साला मूड बनाते बनाते hi लूप हो जाता है.. जितनी बार चलेगा कुछ अलग hi आउटपुट देगा माँ का लौड़ा....

गुस्से में करीम ने कहा

करीम- मेरा जी कर रहा है थपड hi दूँ तुजे.. साली.. नखरा बहुत करती है.. तू..

तब नखरा करते हुई माहि कहते है..





मुझे क्या पूर्वी समाज रखा है क्या .. जो ऐसे बाते कर रहा है…

नहीं … तू तो माहि रांड है..

चलो हटो.. मुझे नहीं करने तुमसे कोई बाते…

ऐसा कहके वो रूम जाने के लिए पीछे मूड जाती है…

ठीक है तुम मुजसे बात नहीं करने है तो मई पूर्वी को उठा देता हु.. वो मुजसे बात कर लगे..

और वो पूर्वी को आवाज देने लगता है..

पूर्वी.. पूर्वी...

तब माहि घूम जाती है .. और करीम को देखने लगती है ..





मैंने थोड़ा hi उसे उठा ने के लिए कहा है..

तो..

तुम ऐसे गन्दी भाषा मुजसे कर रहे थे इस लिए कहा तुमसे मुझे कोई बात नहीं करनी है..

पूर्वी तो ऐसे कोई कंडीशन नहीं रखती है..

नहीं रखती होगी … वो पूर्वी है .. और मई माहि.. समजे…

और वो सेक्सी अड्डा के साथ करीम को देखने लगी..

करीम माहि की तरफ hi देखते रहता hai..mahi भी उसे देख रही थी.. दोनों एक दूसरे को देख रहे थे पर कुछ बोल नहीं रहे थे.. कुछ देर बाद करीम बोल पड़ा..

तो अब क्या करने का इरादा है

कुछ नहीं..

सिर्फ मेरे लौड़े की तरफ देखते रहने का इरादा है क्या..

मई नहीं देख रही हु..

तो क्या देख रही हो

कुछ नहीं..

इतने बड़े घर की बेटी हो और उतने hi बड़े घर की बहु हो.. तेरा पति इतना फेमस आदमी है.. समाज में उसकी कितनी इज़्ज़त है.. उसे वह अकेले रूम मई चोर कर यहाँ एक गैर मर्द का लुंड देखे जा रही हो.. तुम ये सब करते हुई शर्म नहीं आती क्या.. कितनी गयी गुजारी हो... इतना तो कोई बाजारू रंडी भी नहीं करती...

करीम ने ऐसे कहते hi माहि जोर से पैरो को फर्श पर मारते हुई आपने रूम मई चली गयी....

फिर माहि रूम मई चली जाती है .. गुस्से मई hi बड़बड़ाने लगी… साला बुद्धा कमीना.. आपने आप को क्या समजता है… मई क्यों उसके पेनिस की तरफ देखने लगी..

ऐसा कहते हुई वो गुस्से में hi फर्श पर बैठ गयी..

ऐसा क्या स्पेशल है उसके पेनिस मई.. सब जैसे hi है… थोड़ा बड़ा है तो क्या हुआ.. उससे क्या होगा.. थोड़ी तकलीफ hi होगी… मुझे क्यों होने लगी.. उसकी रांड है न.. पूर्वी.. लता.. और सिमरन ..उन लोगो को होगी.. उसके बड़े पेनिस से मुझे क्या अट्रैक्शन होगा.. कितना कला है.. मेरे मनीष का तो कितना गोरा hai..manish उसे कितना क्लीन रखता है.. एक भी हेयर नहीं रखता है मनीष.. और वो कला बुद्धा.. उसका पेनिस भी उसके जैसा hi कला है… कला नहीं तो क्या गोरा होगा mahi..tu भी अजीब लॉजिक लगाती है.. और कितना गन्दा hai..baal तो कितने बड़े है वह… ऐसा लग रहा था जैसे सालो से वह के बाल उस बूढ़े ने नहीं निकले है.. और वो कितना गन्दा भी रखता है आपने पेनिस को.. कभी क्लेन भी करता होगा या नहीं.. पता नहीं.. और पूर्वी उस गन्दी पेनिस को आपने मू मई ले रही थी.. सीईई… कितनी डर्टी है पूर्वी..

अब मई उस को कल से बात भी नहीं करुँगी… मेरे लिए मेरा मनीष hi अच्छा है… चलो माहि अब सो जाते है.. कल सुबह मनीष के साथ जाना है..

और वो सोने के लिए बीएड पे लेट गयी.. उसे नींद नहीं आ रही थी.. उसके आँखों के सामने करीम का नंगा बदन का पिक्चर hi आ रहा tha..uska वो कला बदन... छाती पे घने बाल.. फिर निचे जब उसकी नज़र गयी तो सामने उसका वो रोड जैसे तना हुआ उसका कला लम्बा और मोठा लुंड.. लुंड क्या वो तो अजगर था..

तभी माहि ने अहसास किया की अपनी छूट और पेंटी के बीच मई अजीब सा चिपचिपा महसूस होने लगा है .. इस वजह से उसे अपने आप पर और करीम पर भोत घिन आने लगी thee…usne आपने हस्बैंड की तरफ देखा तो वो सो रहा tha..fir उसने अपनी सदी और पेटीकोट को उप्पर उठाया .. झंगो तक और फिर अपनी पेंटी पर नीचे छूट के पास हाथ लगा कर देखा तोह माहि एक दम से हरिजन रह गए….

उसकी पंतय नीचे से पूरी भीगी हुई थी…. ये क्यों भीग गए .. उस कमीने के हरकत से या मैंने जो थोड़ी देर पहले जो देखा था उस वजह se..aur हाथ लगाने से उसके उंगलयां भी उस पानी से चिपचिपाने लगी thee…usne अपनी पेंटी को नीचे सरका कर अपने हाथ को अपनी छूट के फैंको पर फेरा तोह हाथों के उंगलया उसके छूट से निकले पानी से एक दम सं gaye…use उस चीज़ से अब भोत गईं हो रही thee…usne जल्दी से बीएड पे पड़ा अपना रुमाल को निकला और अपनी छूट और फैंको को साफ़ kiya….aur फिर अपनी पेंटी को भी साफ़ किया जितना हो सकता tha…aur फिर पेंटी को पहन के सदी और पेटीकोट को निचे कर दिया..

माहि रांड … छूट को रुमाल से नहीं लुंड से साफ़ करते है..

ये आवाज आते hi माहि की नज़र दूर की तरफ गयी… जल्दबाज़ी में और गुस्से में वो दूर लॉक करना भूल hi गयी थी.. दूर पे खड़ा रह के करीम माहि क्या कर रही है ये देख रहा था.. जैसे hi माहि ने साड़ी निचे की तो करीम बोल पड़ा.. करीम को देख के माहि डर गयी..

अब करीम रूम के अन्दर आने लगा था.. माहि करीम को रूम में आते हुई देखते है और वो भी ननगा .. और उसका हस्बैंड रूम में होते हुई.. चाहहए वो सो क्यों नहीं रहा हो.. वो कभी भी जग सकता है .. ये सोच कर एक दम से घबरा गए…

वो अपनी साड़ी और ब्लाउज को ठीक करने लगी..

अभी कपडे ठीक करने से क्या होगा .. रांड.. मैंने तो अब तक तेरा सब कुछ देख लिया है..

माहि बीएड से निचे उतर कर बाजु में जेक खड़े हो gaye..aur करीम की तरफ गुस्से से देखने लगी..

बकवास बंद करो .. और दफा हो जाओ यहाँ से..

मई क्या यहाँ जाने के लिए hi थोड़ा आया हु..

तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई.. मेरे बैडरूम मई आने की.. और वो भी ऐसे हालत में..

माहि.. मेरे हिमायत तुमने देखि कहा है अभी..

मुझे देखने भी नहीं है..

और इस हालत से क्या मतलब …

आपने आप को देखा है क्या तुमने ..

मतलब..

तुम ऐसे hi नंगे आ गए हो मेरे बैडरूम में..

माहि को लगा करीम गलती से ऐसे hi आ गया है.. बिना कपडे पहने हुई..

चैनल… तू तो ऐसे नखरा कर रही है जैसे मुझे पहली बार नंगा देख रही है .. साली इतने देर तक मेरे लुंड को देख रही थी.. न जाने क्या हो गया है मेरे लुंड को.. लगता है तूने इससे नज़र लगाए है.. ये खड़ा hi नहीं हो रहा है..

ऐसा कहके वो आपने लुंड आपने हाथ में लेके माहि को दिखने लगा..

माहि करीम के ब्बते सुन रही थी और उसके हरकत की तरफ गौर कर रही थी.. जैसे hi उसने आपने लुंड हाथ में लिया तो माहि उसको गुस्से से देखने लगी.. आँखे फाड़ कर..

जैसे hi करीम उसके तरफ आने लगा आपने लुंड हिलाते हुई वैसे hi माहि ने झट से अपनी आँखे बंद कर ली.. और आपने मू दूसरे तरफ मोड़ लिया..

चैनल.. नखरा मत कर… आ बहार आ.. और इसको खड़ा कर दे..

माहि आँखे बंद कर के hi कहती है..

पागल हो गए हो क्या.. मेरे हस्बैंड है यहाँ.. वो उठ गए तो आफत आ जायेगे..

इसलिए बहार चलने को बोल रहा हु..

मई नहीं आने वाली.. आपने उस रांड के पास जाओ..

चल न चैनल..

चैनल किस को बोल रहे हो..

तुम .. और किस को…

बत्तमीज़.. दफा हो जाओ यहाँ से..

करीम फिर माहि के पास जाता है और उसे रूम के अंदर से बहार को खेंचने लगता है…

चोर दो मुझे..

ऐसा कह के माहि करीम को धक्का देते है.. वैसे hi करीम जोर से माहि के गलो पर तमाशा मरता है..

माहि गुस्से में आग बबूला हो जाती है..

मैं तो कर रहा है तुजे कच्चा जबा जाऊ..

तो चबा जाओ न..

तुम्हारी हिमायत कैसे हुई मुझे मरने की..

मेरे हिम्मत तो तेरे गांड में लुंड डालने की भी है.. चैनल…

वह जेक पूर्वी के जहा भी डालना वह दाल दो..

करीम फिर उसके पास आता है और उसके हाट को खींचने की कोशिश करता है.. माहि उसको no no कह के थोड़ा जोर से छिलने लगी..

चिल्लाओ मैट नहीं तो मनीष बाबू उठ जायेंगे..

इसपर माहि के चहरे पर हल की सी हसी आ जाती है …





ऐसे जाता रहे हो जैसे मनीष बाबू की तुम बहुत ज्यादा फिकिर है..

वो तो है hi.. वो मेरे फ्रेंड जो है..

फिर ये कोनसा तरीका है.. आपने प्यारे फ्रेंड के बैडरूम में रात के 2 बजे नांगे आते हो और आपने दोस्त नींद में ये देखकर उसकी प्यारी हसीं बीवी को खिंच कर बहार जबरदस्ती ले जा रहे हो.. ऐसे hi है तुम्हारे दोस्ती.. तुम्हारे फ्रेंडशिप..

नहीं मेरे दोस्ती ऐसे नहीं है …

तो कैसे है..

हुआ यु की.. मेरे दोस्त मनीष की प्यारे सूंदर बीवी मेरे लुंड के पीछे पागल हो गयी है..

माहि के चहरे पर हल की सी स्माइल आ जाती है..





और वो न न मई गर्दन हिलाते है..

जब से उसने मेरा कला मोठा लुंड देखा है तब से वो उसके पीछे पड़ी है.. और तब से वो मनीष बाबू की गोरी नुनी को भूल जाना चाहती है.. और आपने नवाब साहब का मोठा लुंड आपने छूट में लेने के लिए तड़प रही है..

वो आपने चहरे पर गुस्सा दिखते हुई कहती है..





कभी नहीं.. कुछ भी बोलो मत तुम..

ऐसे कहते hi करीम उसको बहार की तरफ ले जाने लगा.. उसके हाथो को पकड़ कर.. तब माहि ने घबराते हुए कहा ….

करीम तुम ये ठीक नहीं कर रहे ho….bhot हो gaya….aab तक मेने तुम्हारी सब गन्दी हरकतों को बर्दास्त काया है पर अब्ब और nahi….choro मेरे हाथ को….

तब माहि उसके हाथ को जतका देते है..

दफा हो जाओ.. यहाँ से..

नहीं जाऊंगा..

मैंने कहा है मेरे रूम से निकल जाओ..

मैंने कहा न नहीं जाऊंगा.. जाऊंगा तो तुम साथ में लेके जाऊंगा… वर्ण आज रात यही गुजरूंगा.. तेरे रूम में.. तेरे पति के saath…yahi बिस्टेर पे पड़ा रहूँगा….

फिर माहि ने कुछ नहीं कहा.. और करीम को देखने लगी.. आपने सेक्सी ादाओ के साथ..





करीम ने अपनी नजर को तिरछा करके माहि की और देखा तो पाया की वो उसी की और देख रही है.. करीम को उसकी ादाओ में अब सेक्स दिखने लगा था.. करीम को अपनी तरफ ऐसे देखने की वजह से माहि अपनी सदी ठीक करने लगी.. वो अपनी नवल को भी सदी से ढकने की कोशिश करने लगी.. पर फिर भी सदी के ऊपर से भी करीम के आँखे हैट नहीं रही थी... करीम मैं मई कहने लगा… आह! मैंने पहले कभी इन् पारर उतना ज्यादा ध्यान क्यों नहीं दिया. काश इससे पूर्वी से पहले छोड़ा होता तो बड़ा मज़ा आता.. सदी के उप्पर से भी कितना मस्त बदन है इस रांड का..

और उन्हें साड़ी के ऊपर से hi बार बार घूरता raha...mann में कहने लगा..

कैसे इनको अपने हाथों में ठाम कर सहलाऊँ? सीधा अटैक करू क्या.. सिद्ध अटैक.. पर कैसे ...

ऐसा नहीं था की माहि को अपनी चूचियों पर चुभती करीम की नजरें महसूस न हो रही हों... पर वो भी क्या karti..uska हाल भी करीम जैसा hi था... उसके काळा लुंड ने उसे पिछले 2-3 घंटो से पागल बना रखा था..

उधर करीम सोचने लगा.. सीधा अटैक कैसे करू.. उससे बात बिगड़ सकती है..

दोनों की आँखों में चमक बराबर थी...

माहि के लिए हर पल मुश्किल हो रहा था .. अब उसका शरीर करीम जैसे असली मर्द के हाथों का स्पर्श मांग रहा था ..माहि भी तड़प रही thi..par उसकी झिझक भी दूर होने का नाम नहीं ले रही थी..

दोनों की आँखों में अब वासना हावी होती जा रही थी.... पर माहि में शुरुआत करने का दम नहीं था. धाम था तो वो करीम में hi..

उसको ऐसे देखने की वजह से करीम उसके पास आने लगा

पास मत आओ

क्या कर लोगी..

माहि वैसे hi कड़ी थी... करीम माहि के मज़े तो पुरे लेना चाहता था अचे से खोल कर लेकिन जरा माहि को तडपके .. वो माहि के थोड़ा करीब आता है..

मई आपने हस्बैंड को उठाउंगी

उठा दो..

सच मई उठाउंगी

धमकी क्यों दे रही हो उठाओ

करीम अपने कदम बढ़ाते हुए जैसे hi माहि के पास जाता हैं वो फ़ौरन माहि को अपनी बाँहों में कसकर जकड लेता हैं...... .. कमर में दोनों हाथ दाल के..





करीम ने तो उसे कहा.. ये उप्पेर से उसका रिएक्शन था .. पर वो अन्दर से डर गया था.. वो जनता था अगर सही में माहि ने आपने हस्बैंड को आवाज दी और अगर वो जग गया तो उसका क्या होने वाला था.. वैसे ऐसे सिचुएशन करीम के जिंदगी में पहली बार हुई थी..

किसी औरत के बीएड रूम में नंगा आना.. उसके हस्बैंड के होते हुई .. ... ये करीम ने पहली बार किया tha..bina सोचे उसने माहि को कह दिया था आवाज दो आपने हस्बैंड को .... इस सिचुएशन में माहि की जितनी फटी थी उतनी करीम की भी फटी थी.... लेकिन वो आपने डर के हावभाव आपने चहरे पर आने देना नहीं चाहता tha..karim उसकी पतली कमर, उसकी कमर से निचे के उठान और कमर का मछली जैसा आकर आपने बहो में आते hi पागल सा हो गया था.

अब उसका लुंड माहि के सदी के उप्पर दस्तक दे रहा tha.....wahin माहि एक बार फिर से दुर्र से सेहम सी जाती हैं और करीम को अपने से दूर धकेलने की कोशिश करती hain......magar करीम भला कैसे उससे इतनी आसानी से चोर देता .....

माहि – aaaaaaaaaaaaaa .. सससस .............. प्लीज करीम ......अब बस भी करो .........na…agar मनीष ने उठ कर देख लिया तो ........

करीम- नहीं raand........aab वो नहीं उठेगा..

और ऐसा कहके करीम आपने एक हाथ में लुंड लेके माहि के छूट के उप्पर सदी के उप्पर से घूमने लगा..

करीम के ऐसे करने से माहि के नज़र निचे जुख जाती है ..उसे शर्म बहुत आ रही थी इस सिचुएशन में.. आपने hi बैडरूम मई किसी नांगे पराये मर्द के बहो में वो भी आपने हस्बैंड के होते हुई.. और वो मर्द ऐसे गन्दी हरकत कर रहा tha..issliye उसने आपने गर्दन निचे जुका ली thi..niche देखते हुई hi वो उसके चहरे को मरती है..

चोर दो मुझे..

नहीं छोड़ूंगा..

पलज़्ज़ज़…. रहम करो मुझपर करीम…

क्यों..

मेरे हस्बैंड ने ऐसे मुझे देख लिया तो वो मुझे चोर देंगे.. मेरे शादी टूट जायेंगे.. मुझे आपने घर से निकल देंगे..

वैसे तू कब उसके घर में रहती है.. आपने भाई के घर में पड़ी रहती है..

ऐसे होने से भैय्या क्या मुझे यहाँ रहने denge..unne अगर मेरे बारे में ऐसा वैसा कुछ पता चल गया तो वो मुझे मार hi डालेंगे या आपने घर से निकल denge..mere जिंदगी बर्बाद हो जायेंगे..

तू डर्टी क्यों हो.. अगर ऐसा कुछ हुआ तो में तुजे आपने घर में रखूँगा.. अपनी चौथी बीवी के रूप में..

बस करो बेशरम.. कुछ भी बाके जा रहे हो..

तभी करीम लुंड वाला हाथ चोर देता है और माहि के नवल पे रखता है… वैसे hi माहि के बदन में बिजली दौंड जाती hai..mahi का दिल जोरो से धड़क रहा था.. वो नंगे करीम से नज़ारे मिला नहीं पा रही थी.. उसका सारा बदन वासना की ज्वाला में तप कर कांप रहा था.. उसका सारा बदन जैसे एक सुडौल ढाँचे में ढला हुए करीम के बहो में मचल रहा था.

फिर करीम उसके आँखों में देखने लगता है… माहि भी देखने लगाती है .. करीम जैसे hi आपने चेहरा उसके चहरे के करीब लता है वैसे hi माहि कहती है..

न्यूऊऊओ… किस्स्स्सस्स…..

क्या????????

चूमो मत… मुझे…

मैंने कब चूमा तुजे..

मुझे पता है तुम अब मुझे चूमने वाले हो..

तुजे कैसे पता अब में तेरे साथ क्या करने वाला हु..

उतना तो पता चल hi जाता है..

वैसे मई तेरे को इतने जल्दी चूमने वाला नहीं था पर अगर तू कह रही है तो वही सही..

ऐसा कहके आपने हूंठ माहि के हूंतो के पास लता hai..mahi गर्दन से no..no.. कहके इधर उधर हिलती है.. .. उसके चहरे पर थोड़ी स्माइल थी.. जैसे hi करीम आपने हूंठ और नज़दीक लता है वैसे hi माहि आपने एक हैं आपने हूंतो पर रखती है...

करीम की हरकत की वजह से माहि की चूचियों इतनी सख्त हो चुकी थी की निप्पल मुंह उठाने लगे थे... बहार निकलने के लिए..

प्लीज मेरी हालत पर तरस खावो ....... क्यों मुझे परेशां कर रहे हो..

मई कहा तुम परेशां कर रहा हु..

तो ये क्या है.. जो तुम मेरे साथ कर रहे हो..

जब से मैं यहाँ आया हूँ सिर्फ तुम्हारे लिए hi बेचैन hoon.....tum इस बात को ाचे से जानती हो फिर भी तुम मेरे साथ ऐसा बर्ताव कर रही हो........

करीम ने उसकी गोल मटोल चूचियों में अपनी नजरें गड़ाए हुए कहा.

करीम के मुंह में कुत्ते की तरह बार बार लार आ रही थी... भहूखे कुत्ते की तरह...
 
माहि करीम की बाटिओं को सुनकर धीरे से मुस्कुरा पड़ती हैं......





सब को यही कहते होंगे तुम..

तुम क्या लगता है..

मुझे कुछ नहीं लगता.. मुझे जाने दो..

तेरा लम्बा पतला और नाजुक बदन और उसके ऊपर तने कड़ी ये दोनों रसभरे चूचियां .. सब कुछ जैसे ठोस ठूस के बारे हुआ हो.. सबकुछ मुझे पागल बना रहा hai..meri रांड..

नहीं झूठ है ये..

माहि हस्ते हुई कहते है..





क्या झूठ है..

मेरे तारीफ..

तारीफ है ये तुजे पता है तुजे तो झूठ कैसे होंगे..

पता है.. ऐसे झूंठे तारीफ करके सब को आपने जाल में फसते होंगे तुम..

आपने लुंड को एक हाथ में लेके कहता है..

कब से में आपने लुंड को काबू में करने की कोशिश कर रहा हु.. पर ये लुंड महाराज शांत होने का नाम hi नहीं ले रहे hai..ye बेचारा तो कब से कह रहा hai…aabhi तक में बहार क्यों hoon..mere माहि रांड के छूट के अन्दर क्यों नयी गया हु.. मेरा नंबर कब आएगा..

कभी नहीं आएगा… आपने इस बेचारे महाराज को कहो यहाँ पूर्वी या लता या सिमरन नहीं है.. ये माहि है.. यहाँ आपके महाराज का नंबर कभी नहीं लगेगा..

इसीलिए तो वो इतना देर शांत है.. नहीं तो..

नहीं तो क्या..

नहीं तो ये महाराज कब का तेरे छूट के अन्दर गया होता..

तब अड्डा के साथ कहती है





चुप करो तुम .. बेशरम..

ऐसा कहके माहि करीम के खंडो को दोनों हाथो से पीछे धकेल देते है.. और बीएड पे जेक बैठ जाती है.. आपने हस्बैंड मनीष के पास.. बैठे क्या वो मनीष के बदन को वो लिपट जाती है..

अब माहि मनीष के बगल में सोने का नाटक करने लगाती है.. मनीष को लिपट कर के.. वो अभी करीम की तरफ ध्यान भी नहीं दे रही थी.. करीब 4-5 मं करीम वो नज़ारा देखते रहता है.. माहि को पता था मनीष एक बार सो जाये तो सुबह तो ुआतता है.. उसकी नींद बहुत गहरी होती है.. करीम को जलने के लिए माहि मनीष के गाल को चुम लेते hai..ek बार.. और करीम के तरफ गांड कर के सो जाती है..

एक्चुअली वो सोई नहीं थी तो करीम को जलने के लिए सोने का नाटक कर रही thi..Mahi का मुंह दूसरी तरफ था.. (वो मनीष की तरफ देख कर उसको लिपट कर के सोई थी ) पर उसे यकीन था की करीम उसके बदन की कामुक बनावट का hi लुत्फ़ उठा रहा होगा!

अब करीम के बर्दास्त के बहार हो गया था.. वो कुछ डियर तक सोचता hai..fir वो बीएड के सामने आ gaya..ek बार करीम ने मनीष पर नजर मार कर देखा वो सो रहा है या जाग गया है और फिर माहि के नितम्बों को घूरने लगा.. माहि मनीष को लिपट कर सोई हुई थी .. इस वजह से उसके नितम्ब ऊपर उठ गए थे....

जैसे hi करीम उसके पास आया उसने माहि की तरफ देखा

महियी

ह्म्मम्म्म्म

चल न बहार

माहि ने न में गर्दन हिलायी..

माहि सोई हुई थी ..और करीम बीएड के बगल में खड़ा था ..जब करीम ने थोड़ा जुख के उसके गांड को छुआ तो माहि मैं मई बबदै

हाय राम! ये कमीना तो अपनी औकात पर आ गया. सीधा अस्स पर हाथ लगा रहा है.. ऐसा भी कोई इतने जल्दी करता है क्या.. सेल के इस हरकत ने तोह मेरे अन्दर फिर से आग लगा di..ye क्या हो रहा है .. इसके हाथ का अहसास पते hi मेरे अस्स सिकुड़ ने लगी है . पूरा बदन इसके छूने से थिरक उठा है . में तो जानती थी ये कमीना है पर ये तो कमीने से hi बड़ा हरामी निकला..

चल न…

उसके नितम्ब पर हाथ वैसे hi रखते हुई करीम ने कहा..

माहि ने आपने नितम्ब पर करीम का हाथ हटते हुई कहा..

नहीं बोलै न.. समाज में नहीं आता क्या..

करीम फिर माहि के पैरो के पास बीएड पे बैठ गया और फिर से करीम ने कहा..

चल न..

इस बार थोड़ी तेज बोलते हुए करीम ने माहि के घुटनों तक के साड़ी से नीचे उसकी नंगी गुदाज पिंडलियों पर हाथ रखकर उसे हिलाया और सरकते हुए अपना हाथ उसके घुटनो तक ले गया. अब उसका हाथ नीचे और साड़ी ऊपर थी.

माहि को अब सहन करना मुश्किल हो रहा था. माहि चुप्पी साढ़े रही और हवस के आग में जलाते हुई दूसरी टांग को घुटनो से मोड़ लिया और अपने पते से चिपका लिया. इसके साथ hi साड़ी ऊपर सरकती गयी और उसकी एक जांघ काफी ऊपर तक नंगी हो गयी. माहि ने देखा नहीं की करीम उधर देख रहा है या नहीं पर उसकी पंतय तक आ रही बहार की ठंडी हवा से उसे लग रहा था की करीम को उसके पंतय का रंग दिखने लगा होगा.

mmm…aahiiii…..

माहि ने आँखे बंद करते हुई कहा

हम्म्म….

चल न बहार… नाटक क्यों कर रही है..

Kkkkk..aaa…riiii..mmmmm… नायहीइ.. अअअअअ.. सकतीई….

इस बार माहि की आवाज में कंपकपाहट सी थी.. सिसक उठी थी वो शायद!

करीम अब माहि के पैरो के पास बैठ गया..

क्योनंन्नं..

मीरे हस्बैंड कभी भी उठ सकते है… वो उठ गए और उनोने मुझे यहाँ नहीं पाया थो गड़बड़ हो जायेगे..

वो अब नहीं उठेगा.. और तब तक तू जल्दी से वापस आ जाना..

तब करीम की तरफ वो देखने लगी..





माहि के चहरे पर हल की सी स्माइल thi..bade अड्डा के साथ वो कहती है..

तुम क्या मुझे जल्दी से छोड़ेगे क्या ???

हाँ .. आधे घंटे के अन्दर तुम वापस आ जाना

नहीं.. मुझे पता है तुम मुझे जल्दी से नहीं छोड़ोगे.. आधे घंटे के अन्दर में तो पॉसिबल hi नहीं है..

करीम एक बार खड़ा हुआ और फिर बैठ गया.. शायद माहि की साड़ी उसके नीचे फांसी हुई थी.. उसने वो आपने निचे से निकल दी और माहि के और करीब जेक बैठ gaya..Waise hi माहि ने आँख बंद कर ली..

माहि ..

ऐसा पुकारते hi माहि ने आँख खोली.. उसका नाम पुकारते हुए उसने अपना हाथ साड़ी के नीचे सरकते हुए नीचे से माहि के नितम्बों पर ले गया....

अगले hi पल उसकी इस हरकत से माहि बौखला उठी. माहि झट से थोड़ा पीछे हो गए.. और उठ के बैठ गयी .. इस वजह से उसका हाथ माहि के नितम्बो से निकल गया .. और फिर साड़ी नीचे सरका दी. घुटनो से निचे.. करीम का हाथ अभी भी साड़ी के अन्दर था पर घुटनो के काफी नीचे था.. नहीं के बराबर..

माहि सोचने lagi..Kambakht तोह मेरी उम्मीद से भी ज्यादा शातिर निकला . बहुत कमीना है ये..

इसको जरा निचे करो

किसको

तेरे साड़ी के पल्लू को

नहीं .. कभी नहीं..

जरा मुझे तेरे मम्मी देखने दे

तब नखरा दिखते हुई कहती है





पहले दिन से तो देखते आ रहे हो

हटा न इसको

ऐसा कहके करीम माहि के साडी का पल्लू उसके बूब्स से हटा देता है

नहीं

ऐसा कह के माहि आपने दोनों हाथ आपने चूचियों पर रख देती hai…aur हवस भरी आँखों से करीम को देखने लगी..

क्या मदमस्त है तेरे ये चूचिया ..

ऐसा कह ते hi माहि करीम के हाथो से आपने साड़ी का पल्लू खिंच लेती है और आपने चूचियों पर दाल देती है.. और करीम से छिपाने के लिए वो अपनी चूचिया बीएड के तरफ दबा लेती hai..iss वजह से उसकी गांड उप्पर हो जाती है… माहि ने सोचा नहीं था अगर उसकी चाटिया नीचे डाब जायेंगे तो उसकी गांड ऊपर हो jayenge..aur करीम उसके गांड के साथ क्या करेगा..

जैसे hi उसके नितम्ब उप्पर होते है वैसे hi करीम वह आपने हाथ रख देता है.. अब माहि के नितम्बो पर करीम के हाथ चलने लगे the..nitambo के ऊपर थिरकते हुयी उसके हाथो ने तोह माहि की जान hi निकल दी थी . कैसे हुए उसके चिकने चूतड़ों पर धीरे धीरे मंडराता हुआ उसका हाथ कभी 'इसको' कभी उसको दबा कर देखता था. माहि की छातियां बीएड में दबकर छटपटाने लगी थी. माहि ने बड़ी मुश्किल से खुद पर काबू पाया हुआ था..

करीम ने धीरे धीरे आपने उंगलिया माहि के नितम्बो के गुड़हड़वार के पास ले गया और अचानक से अपनी एक उंगली सरकती हुयी नितम्बों की दरार में घुसा दी ….

Aaaaaaaaahhhhhhhhhhaaaaa…… karrrrriiiiiiimmmmmmmmmm…

चोर से चिल्ला मत मनीषा उठ जाएगी....

इसपर माहि हस्ती है..





कमीने… वो मेरे हस्बैंड है.. मनीषा नहीं.. मनीष है..

क्या फरक पड़ता है.. वैसे आज से मेरे लिए तो मनीष नहीं मनीषा है..

इस पर माहि कुछ नहीं कहती है..

माहि अभी भी वैसे hi पड़े रही..

अब करीम वही माहि के नितम्बो के द्वार में उंगली घूमता रहा.. सदी बीच में थी इस वजह से वो ज्यादा अन्दर अपनी उंगली दल नहीं सकता था.. अब वह उंगली कुछ देर घूमते हुई करीम ने अपनी उंगली नीचे ले जाने लगा....

माहि रांड कैसे लग रहा है...

माहि कुछ नहीं बोलती..

मनीषा ने कभी ऐसा मज़ा दिया था क्या तुजे..

तब हस्ते हुई माहि कहती है..

चुप कर हरामखोर





चुप कर हरामखोर. . वो मेरे पति है.. मनीषा मत कह उन..

तो क्या कहु.. मनीषभाई

तब माहि भी हसने लगी..

अब तक माहि ने कैसे तो आपने आप को कण्ट्रोल किया था.. .. अब करीम की उंगली माहि के छूट तक आ गयी.. जैसे hi माहि के छूट को करीम के उंगली ने चुवा माहि सिसक पड़ी..

आआआह्ह्ह्हआआआ........

देख साड़ी के उप्पर से तुजे इतना मज़ा आ रहा...

तब माहि झट से बोल पड़ी

मुझे कोई मज़ा नहीं आ रहा है

तू नखरे बहुत करती है.. और जो औरत नखरे बहुत करती है उसे छोड़ने में बहुत मज़ा आता है..

चुप कर हरामी

देख साड़ी के उप्पर से इतना मज़ा आ रहा तो सोच साड़ी निकलने के बाद कितना मज़ा आएगा

मैंने कहा न मुझे कोई मज़ा नहीं आ रहा है..

ऐसा कहते हुई वो आपने हस्बैंड मनीष को लिपटने लगी..

तुजे नहीं तो तेरे छूट को तो मज़ा आ रहा होगा...

उसे भी नहीं आ रहा है कोई मज़ा

साला ये तू ठीक नहीं कर रहे है माहि

मैंने अब क्या किया..

मई मेहनत कर रहा हु.. और तू मज़े मनीषा को दे रही है.. ये तो सरासर न इंसाफ़ी है..

माहि एक हाथ पीछे कर के करीम के गालो को चांटा मारती है..

ऐसे hi.. तू भी मज़े ले और मुझे भी मज़े दे..

तब माहि झट से मनीष से दूर हो जाती है..

मई कोई मज़े नहीं कर रही हु..

ारे तू मज़े मत कर पर तेरे छूट को तो मज़े लेने दे..

उसके भी कोई मज़े नहीं हो रहे..

नहीं हो रहे है तो साड़ी निकलने दे तेरे छूट के असली मज़े करवाऊंगा..

कभी नहीं..

तब करीम ने अचानक hi माहि के छूट के फांको के बीच अन्दर थोड़ी उंगली गुस्सा दी.. पर जैसे hi उंगली माहि के छूट के फांकों के बीच आयी तो वो उछाल पड़ी..

आआहाआआआ… mumyyyyyyyyyyyiii…

माहि के छूट की मछली तड़प uthi..aur उसी पल करीम का हाथ माहि ने वहां से हटा दिया और घूम कर करीम को बीएड से निचे धकेल दिया..

हरामी कही का…

अपनी सिसकियों को माहि ने काबू मई करते हुई कहा.. वो करीम को आँखे फाड़कर देखने लगी..

क्या हो गया मेरी रांड..

माहि कुछ नहीं बोलती है.. करीम को लगा मौका हाथ से गया.. पर इतनी आसानी से करीम भी हार मानने वालों में से नहीं था...

आपने आप को मैं में कोशते हुई माहि सीढ़ी बैठ गयी और आँखें बंद किये हुए hi माहि अपनी जांघें घुटनों से पूरी तरह मोड़ कर बैठ गयी.. उसे करीम के हाथ का अहसास अच्छा लगाने लगा था पर क्यों उससे भी पता नहीं था की उसके इस बर्ताव पर खुद पर hi गुस्सा अब आने लगा था..

थोड़ी देर यूँही सोचते हुए माहि चुप हो कर बैठ गयी ... अचानक उसे बीएड पे किसे के बैठने की आवाज आयी..

उसने आँखे खोल कर देखा तो पाया की करीम वापस बीएड पर आकर बैठ गया.. माहि उसको देखने लगी thi..dheere धीरे फिर से रेंगता हुआ करीम का हाथ माहि के तरफ पहुँचाने लगा था.. जैसे hi करीम का हाथ उसके पैरो पर आता है वैसे hi माहि बीएड पे से उठ कर दूर के पास जाकर कड़ी हो जाती hai..door के तरफ आपने चेहरा कर के

क्या हो गया बहार जाना है क्या..

माहि कुछ नहीं बोलती

मैंने तो तुजसे पहले hi कहा था.. ठीक है चल बहार चलते है..

ऐसा कह के करीम माहि की तरफ आने लगता है

तभी माहि घूम जाती है..





अब माहि करीम के तरफ hi देखने लगी थी.. उसके आँखों में अब किसी चीज़ की आस दिख रही थी.. माहि साड़ी में लिप्त थी और करीम नंगा था..

करीम धीरे धीरे माहि के तरफ देखते हुई माहि के पास आ जाता है .. करीम माहि के आँखों में आँखे डालते हुई उससे पूछता है..

क्या हुआ..

माहि सिर्फ करीम की तरफ देखने लगाती है लेकिन कुछ नहीं बोलती.. करीम फिर से पूछता है

क्या हुआ .. मेरी रांड..

माहि गर्दन न में हिलाते है.. जैसे कह रही हो कुछ नहीं हुआ है..

बहार जाना है या यही करना है..

माहि शर्म से आपने गर्दन निचे जुखा लेती है ..

तभी करीम आपने एक हाथ माहि के नवल पे रखता है… वैसे hi माहि के बदन में बिजली दौंड जाती hai..aur माहि घूम जाती है..





अब करीम को माहि को आपने वश में करना था … पर… थोड़ा जलील करके ..थोड़ा प्यार से बाते कर ke..filal तो उसे इस बोतल को खोलना जरुरी था.. ..एक बार बुटेल खोलने के बाद गिलास में तो बाद में कैसे उतरना है ये करीम अच्छे से जनता था.

करीम ने बिना देर किये उसके कंधे को पकड़ा और उससे सात कर खड़ा हो गया .

बोल न

क्या

तुजे बहार छोड़ू या यही तेरे बैडरूम में तेरे पति के बगल में दाल कर छोड़ू..

माहि शर्माकर आपने दोनों हाथो से आपने चेहरा धक् लेते है …

बता न…

मुझे नहीं पता

माहि ने ऐसे कहते hi करीम उसके शोल्डर को चूमता है वैसे hi माहि के बदन में एक लहार दौंड जाती है..

मेरा तो मैं कर रहा यही मनीषा के बगल में दाल कर तेरे को छोड़ू..

फिर वो दोनों हाथ उसके कमर से होते हुई आगे उसके पेट के पास ले जाता है.. और उसके साड़ी खोलने लगता है .. तभी माहि उसके हाथो को पकड़ लेती है

क्या हो गया मेरे रांड

ऐसा कह के उसके गर्दन को चाटने लगता है

डर लग रहा है

क्यों

पता नहीं

तू बता न तुजे कहा छोड़ू .. यहाँ या बहार

मई कैसे बताऊ

तुजे छुड़ाना है तो तू hi बता

तुम्हारी मर्ज़ी

तू ज्यादा चिल्लायेगी तो नहीं न.. नहीं तो मनीषा उठ जाएँगी.. फिर मामला सब गड़बड़ हो जायेगा..

इसपर माहि हस्ती है..





माहि ने ऐसे करते hi करीम उसके सामने आ जाता है और दूर बंद करने लगता है.. वो श्रम जाती है..





करीम दूर बंद कर रहा है ये जानकर.. और निचे देखने लगाती है

वो कुछ समझ पति इसे पहले hi करीम उसके पीछे आ जाता है और सुरु हो जाता है .. अपने शरीर को उसके शरीर से रगड़ने लगा, बॉडी तो बॉडी मस्सगे...

aaa….aahaaa.. करीम... no..

माहि ने आंखें बंद कर ली थी. पर फाॅर्स रति भर भी नहीं था, मतलब रति भर भी.. यही उसका सिग्नल था.. काम से काम करीम को तो ऐसे hi लग रहा था इस वक़्त.. करीम तो नंगा hi खड़ा था वह माहि के बैडरूम मई माहि के पीछे… जब की माहि का पति मनीष अभी भी सो रहा tha..karim माहि के पीछे खड़ा था.. सट्टे हुई.. फिर भी वो डायरेक्ट अपना लुंड माहि के गांड पे छेद पर नहीं रखना चाहता था.. वो उसे थोड़ा गरम करना चाहता था.. और उसका सोचना सही सभीत हो रहा था.. माहि बेहद उलझी हुई थी इस वक़्त .. वो चाहती तो बहुत कुछ थी लेकिन रुक रही थी और करीम को बस इसी सोच के बिच में अपना काम कर देना था इसे पहले की माहि के विचार बदले और उसपर एक नयी सोच हावी हो जय… या उसमे की पतिव्रता जग जाये..

करीम ने उसके नंगे शोल्डर पर किश करना शुरू कर dia..vo no no करती रही, पर ये करीम का एक तरीका था जिसे कुछ टाइम के अंदर में माहि को वो और ज्यादा गरम कर सके और फिर आपने असली गेम खेल सके..

करीम ने आपने हाथ थोड़ा आगे किया और उसके सदी का पल्लू निचे गिरा diya..iss बार करीम को उसके पल्लू निचे गिराने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी.. जैसे hi उसका सदी का पल्लू उसके छाती से निचे गिर गया वैसे hi माहि ने आपने दोनों हाथ आपने बूब्स पर रख दिए… तभी करीम ने अपना लुंड उसकी कमर का जो पिछले वाला नंगा part था उसपर रख दिया.. उसकी गरमाहट से माहि पागल होने वाली थी …और वो सिसक पड़ी..

aaaaaahhhhhhhhhhh…….. करिममममम…….. nahiiiiiiiiiiiii……plzzzzzzzzzzzzzzzz……. ैसाअअअअअ… मत करो मेरे साथ… जाओ न तुम्हारे पूर्वी के पास.. उसके साथ जो चाहो वो कर लो… वो तुम्हारी रहा देख रही होगी…

करीम कुछ नहीं बोलै ..पर आपने हाथ से आपने लुंड उसके कमर पर इधर उधर घूमता रहा..

... करीम के इस हमले से माहि के अन्दर से आग निकल रही थी.. .. उसके छूट के अन्दर से और वो आग बहुत गरम थी.. ऐसे गर्मी तो माहि ने आज तक महसूस नहीं की थी... उसकी विटनेस तो अब बढ़ती जा रही थी..

kkkk….aaa..r….iii…mmm..

उसने अपने दोनों हाथ पीछे किये और करीम के चेहरे को पकड़ लिया, अब बस यही मौका था करीम के पास.. जैसे hi माहि ने आपने दोनों हाथ पीछे किये वैसे hi करीम ने आपने दोनों हाट माहि के आम पर रख दिए और उसे जोर से दबाया..

aaaaaaaaaahhhhhhhhhhaaaaaaaaa…. Mummmmmmmmmiiiiiiiiiiiiiiii…

ऐसे सिसक के आपने दोनों हाथ माहि आगे ले जाती है और करीम का आपने चूचियों पर से निकल देते है.. वैसे hi करीम उसको घूमता है.. अब करीम के सामने माहि की चूचिया थी .. बिना पल्लू के ...

उसने माहि के चहरे की और देखा.. करीम के ऐसे देखने से उसका चेहरा शर्म से लाल हो जाता है ..





उसने बड़े प्यार से बड़ी नाजुकता से माहि के बाये चूचियों के निप्पल को चुवा.. चुवा क्या सिर्फ निप्पल पर अपनी उंगली राखी.. तो माहि कसमसा उठी…

Kkkkk..aaaaaa… rriiii..mmmm…

और करीम का हाथ वह से तुरंत हटा लिया..

तेरे हूंठ और गाल कितने प्यारे है..

ऐसा कह के करीम ने माहि के होंठो को चुवा..

तेरे हूंठ तो मक्खन जैसे मुलायम है..

उसकी और देखते हुई माहि कहते है..





ज्यादा तारीफ मत करो..

फिर करीम ने आहिस्ता से उसके पेट पर हाट रख लिया..

इतना चिकना और सेक्सी पते आज तक मैंने चुवा नहीं है..

अब बहुत हो गया करीम..

करीम माहि की मोठे मोठे चूचियों की और देखते हुए अपने होंठों पर जीभ फेर रहा था.... करीम की नज़ारे माहि के सीने पर जैम गयी थी.. करीम माहि के साँसों के साथ ऊपर नीचे हो रही उसकी छातियों को घूरता जा रहा था .माहि अपने गालों पर आये गुलाबीपन को छुपा नहीं प् रही थी ..

मुझे ऐसे क्या घर रहे हो किसी सराय मशीन की तरह

रांड तू चीज़ hi ऐसे है … जो तुजसे नज़र hi नहीं हैट पा रही है..

फिर करीम ने हाथ थोड़ा और उप्पर किया और उसकी गोलाईयों की जड़ तक पहुँच गया.. वैसे hi माहि ने आँखे बंद की..





माहि के दिल के धड़कने और तेज चलने लगी.. करीम ने माहि के आम पर आपने मू रख दिया और एक आम आपने मू में ले लिया वैसे hi माहि चीला उठी..

आआआअह्ह्ह्ह... ये क्या कर रहे हो करीम... मारने का इरादा है क्या?.....

क्या करून मैं? मुंह में तोह आ नहीं रहे है तेरे ये आम... बहार से hi खा लून थोड़ा सा!

ऐसा कहके करीम भद्दे से तरीके से हंसा.....

अरे तोह बाईट क्यों कर रहे हो...

ठीक है जीभ निकल कर चाट लेता हु ........

ऐसा कहके वो चाटने laga..aur चाटते हुई hi माहि के आम को फिर से एक बार काटता है..

Aahhhhhhhhhhhhhaaaaaaa..

Mumiiiiiiiiiiiiii…

हटो मुजसे दूर…

ऐसा कह के माहि करीम को पीछे धकेल देते है और विंडो के पास जेक कड़ी हो जाती है.. करीम उसके पास जाता है और उसके गर्दन को चूमने लगता है..

फिर उसको घूमता hai..aur उससे पीछे से दबोच लेता है.. माहि विंडो के रेलिंग पकड़ लेती है

माहि और कुछ कह पति या कर पति इस से पहले करीम ने एक जोरदार धक्का मारा. जैसे वो उसकी गांड मार रहा हो.. वैसे hi माहि विंडो पे ज़ोर से गिर पड़ी..

maaaaaaaaaaaarrrrrrrrrrr…… गईइइइइइइइ….. kamineeeeeeeeeeee नीबी.. मरररररर hi दलाआआआ mujeeeeeeeeee……..

तू तो ऐसा चिल्ला रही है जैसे मैंने तेरे गांड मई लौड़ा डाला है..

इसपर माहि हसती है..





..

और नखरा करते हुई कहते है..

कमीने … मई वो कभी नहीं करुँगी..

तो क्या सिर्फ छूट देगी क्या मुझे..

माहि प्यार से करीम के गालो पे चपत मरती है..





बदमाश कही के.. तुमने जो मुझे आगे विंडो पे गिरा दिया इस वजह से मुझे विंडो के कार्नर लग गयी.. और मेरा मू विंडो के रेलिंग पे जा गिरा .. इस वजह से मुझे दर्द हुआ.. समजेईईईई……. Nawabbbbbbbbbbb…

सिर्फ … नवाब……

माहि फिर से हसती है.. और उसके गाल पे चपत लगाती है..





मेरे नवाब…. अब तो बस है न..

हाँ.. ये हुई न बात.. अब कैसे मेरे रंडी की तरह बात कर रही है..

ज्यादा बात करने की जरूरत नहीं है.. मई नहीं हु वो जो तुम समाज रहे हो..

तो क्या हो

मुझे नहीं पता..

पता तो होना hi चाहिए… अगर कोई औरत आपने बैडरूम मई ..पति के होते हुई दूसरे मर्द के बहो में हो.. पति को सुलाके दूसरे मर्द का लौड़ा अपनी गांड में लेती हो तो उसे रंडी नहीं तो क्या कहेंगे..

माहि पीछे घूम जाती है .. और करीम को पीछे धकेल देते है..

अगर तुम मुजसे ऐसे hi बात करने है.. मुझे ऐसे hi जलील करना है तो जाओ यह ा से.. मुझे तुमसे कोई बात नहीं करने है .. जाओ तुम्हारे पूर्वी के पास..

इसपर करीम उसके कमर के पीछे से आपने हाथ डालके उसे आपने और खिंच लेता hai…aur उसके गालो को चूमता है..

मेरे रांड तो बुरा मान गयी मेरे बातो का..

माहि नखरा करते हुई कहती है..

बुरा नहीं मानूंगी तो क्या कुश हो जाऊ.. जो हमेशा मुझे जलील करते रहते हो..

बरसा मू बनके कहते है..





ऐसा कहके उसके बहो से आज़ाद हो जाती है और बाज़ू मई जेक खड़े हो जाती hai..aur करीम को गुस्से से देखने लगाती है..

करीम उसके पास जाने लगता है तो वो दूसरी तरफ जाने लगाती है. वैसे में करीम उसकी सदी का पल्लू पकैड़ लेता है.

साडी चोर दो मेरे..

नहीं चिरुंगा..

करीम सरे निकल जायेंगे.. चोर दो पल्लू..

रांड तेरे साडी तो निकलना चाहता हु..

मुझे नहीं निकलवाने तुमसे..

क्यों..

इतना hi साड़ी निकलने का शौक है तो जेक पूर्वी की निकल दो..

वो तो नंगी पड़ी है.. उसकी साड़ी तो पहले से hi मैंने निकल दी है..

जेक फिर से निकल दो..

स्माइल लेट हुई कहती hai..aur फिर शर्मा जाती है..





तब करीम उसकी साड़ी खींचने लगता है..

वो तो नंगी है.. साड़ी उतरने के लिए फिर से उसे सदी पहनने के लिए बोलना पड़ेगा..

तो बोल दो न.. तुम्हारी रांड तो है वो.. तुम्हारा कहना तो मानेगे hi वो ..

रांड तो है वो मेरी… और अब मेरे बचे की अम्मी बनाने वाली है वो..

अम्मी…

हाँ अम्मी … … अब बचे के बाप को इतना तो अधिकार है न की आपने बच्चे के अम्मी को बच्चे की ामी कह के बुला सके..

इसपर माहि हस्ती है..

हाँ … जर्रोर .. उतना तो अधिकार है आप को .. नवाब साहब…

सिर्फ नवाब साहब..

ठीक है बाबा… मेरे नवाब साहब…

ये हुई न बात..

लेकिन..

लेकिन क्या मेरे रांड…

माहि अपनी कातिल अड्डा के साथ करीम के और देखती है..





करीम की नज़र माहि के आम की तरफ hi थी..

इतना क्या देख रहे हो..

तेरे पक्के हुई आम..

वैसे hi शर्माकर माहि आपने एक हाथ सदी के वह से हटा के आपने बूब्स पर रख देते है..





बोल मेरे रांड.. लेकिन.. क्या..

यही की तुम hi पूर्वी के बच्चे के अब्बू हो इसकी क्या गुरंटी है…

गुरंटी क्या दे दू.. चाहे तो तुजे भी अम्मी बना देता हु.. तेरे बच्चे का अब्बू बन जाता हु.. फिर तुजे यकीं हो जायेगा..

वैसे नहीं… मई क्यों बरवासा कर लू की तुम सच बोल रहे हो..

फिर जेक पूर्वी से पूछ लो..

वो कैसे मुझे बताएगी की तुम उसके बच्चे के अब्बू हो..

वो भी सही बात है…

फिर तुम मुझे यकीं कैसे दिलवाओगे..

मई कल उसको पूछूंगा.. तुम चुप के सुन लेना ..

हाँ .. ये ठीक रहेगा..

माहि ने ऐसे कहते hi करीम उसके साडी जोर से खींचता है वैसे hi माहि करीम की और खींची आ जाती है.. करीम के बहो में आते hi करीम उसकी साड़ी निकल फेक देता है..

ये तुमने क्या किया..





तुम अब मेरे बच्चे की अम्मी जो बनाना है..

धत्त्त… बेशरम..

ऐसा कह के आपने हाथो में आपने चेहरा छुपा लेती है… वैसे hi उसको आपने बहो मई करीम उठा लेता है और उससे बीएड पे दाल देता है.. मनीष के बगल में … माहि करीम को कहती है..

मनीष उठ जायेगा..

नहीं उठेगी .. तुम्हारी manisha..itane देर तक नहीं उठी .. तो अब कैसे उठेगी… घोड़े बेचकर सोये हुई है..

माहि इसपर हँसाने लगाती है..





अब करीम बीएड के करीब जाकर खड़ा हो गया ..और बीएड पर ब्लाउज और पेटीकोट में पड़ी माहि के मदमस्त जिस्म को देखकर आपने नंगा कला लुंड माहि के तरफ देखकर हिला रहा था.. करीम और माहि की नज़र एक दूसरे के आँखों में थी..

जैसे hi वो बीएड पर आता है तो झट से माहि के ऊपर गिर जाता है ..और आपने मू माहि के मू के पास लता है..

करीम ने झुक कर एक बार माहि के होंठों को चूस लिया और वापस आपने फेस ऊपर कर लिया ...





माहि को अपने जाल में फंसा हुआ देख कर उसका लुंड रह रह कर झटके खा रहा था.. माहि के रसीले गुलाबी होंठों की मिठास का शयद ये परिणाम था .. फिर से करीम ने माहि के हूंठ आपने हूंठ में ले लिए..

पहले तो dhire-dhire शुरुवात हुई, एक दो बार होंठ जुड़े फिर hat-te.. फिर जुड़े फिर hat-te.. फिर जुड़े .. इस बार लम्बे टाइम के लिए, फिर अलग हुई…

करीम- कसम से माहि रांड .. बहुत मज़ा आ रहा hai..muje लग रहा है ये खेल में ज़िन्दगी भर ऐसे hi तेरे साथ खेलता राहु..

माहि स्माइल देते है..





कमीने कही के.. हर किसी को ऐसे hi कहते होंगे…

ऐसा कह के माहि ने उसके गार्डन में आपने बहे डेल और उसे किश करने के लिए अपनी और खिंचा.. माहि ने भी अब रिस्पांस देना सुरु किया tha.aur आपने दोनों हूंतो के बीच मई करीम का कला हूंठ दबा दिया…





और उसने जैसे hi उसके होंठ को आपने होंठ मई दबा दिया तो उसे काट दिया.. उसमें से खून बहार आ गया.. वैसे hi करीम चिल्ला उठा…

आआआआअह्ह्हह्ह्ह्हह्हआआ….. बिल्लीइइइइइ….

जंगली बिल्लीइ.. कही की…..

इसपर माहि हँसाने लगी..

दर गए नवाब साहब जंगली बिल्ली से…

इसपर करीम माहि के आँखों में देखते हुई कहता है..

एक बार जंगली बिल्ली के कटाने की वजह से डरेगा तो उसे नवाब कोण कहेगा..

ारे रे.. मैंने आपने नवाब साहब का खून निकल दिया… थोड़ा आगे आओ .. मई साफ़ कर देते हु..

ऐसा कह के माहि करीम के चहरे को आपने पास खींचते है और उसके हूंतो पर आपने जीभ रखती है और उसके खून को चाटने लगाती है..

जंगली बिल्ली चाटती भी अच्छा है

ऐसा कह के माहि के हूंतो पे आपने हूंठ रख दिए और उसे चूसने लगा..

उसके हाथ अब करीम के शोल्डर के पीछे थे, वो बिलकुल बीएड पर पड़ी थी.. और बस आपने होंठों का उसे कर रही थी.. अलग हुए होंठ जब इस बार जुड़े तो जबर जुड़े.. वो दोनों एक दूसरे को होंठों में हारने की जुंग में लग गए, होंठ चूसते चूसते माहि उसकी पीठ को सहलाता हुआ उसकी गांड तक आ गयी और वहां सहलाने लगी..

अब माहि का एक हाथ करीम के सर के बालो में घूम रहा था और दूसरा हाथ करीम के गन्दी गांड पे चल रहा था.. उसके गंदे बालो के बीच में.. जिस को थोड़े देर पहले माहि गन्दा समाजथि थी उस गंदे काळा गांड पर माहि के गोर हाथ घूम रहे थे..

अब करीम का सर कभी माहि के हूंतो को लेके उसके दायी तरफ घूमता तो कभी बाये तरफ..

.. यानि की वो दोनों ताकत लगाने में कमी नहीं दिखा रहे थे, किसिंग बहुत उप्पर स्तर पर पहुँच चुकी थी..

अब किश करते हुई माहि के दोनों हाथ करीम के पिट पर नागिन डांस कर रहे थे बस.. किश के रफ़्तार अब बढ़ाने लगी थी.. और माहि के हाथो की रफतार भी बढ़ाने लगी थी.. वैसे अब माहि सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में hi थी.. करीम ने कब की hi उसकी सदी जबरदस्ती करके निकल फेक दी थी..

अब किश करते करते hi करीम आपने दोनों हाथ उसके पेटीकोट के एन्ड तक ले गया.. थोड़ा निचे जुख के और उसे धीरे धीरे उप्पर करने लगा..

इस बार जो होंठ जुड़े वो हटने का नाम नहीं ले रहे थे लेकिन करीम का मूड अब होठों के आगे आ चूका था.. उसने अपने होंठ माहि के होंटो से हटाए ….

क्या करने का इरादा है

माहि के छूट से तप तप पानी टपक रहा था.... वैसे hi उसने पूछ लिया..

करीम ने माहि के चहरे के पास आपने चेहरा ले जाते हुई hi अपना हाथ नीचे करके उसके मस्त नवल पर रख कर वह पर फेरने लगा.....

माहि के छूट में थोड़ी और कसमसाहट सी महसूस होने लगी.. उत्तेजना में माहि ने आपने हाथ को कसकर बीएड को पकड़ लिया ..

.. बता दू!

करीम ने हौले से कहा....

हाँ

तेरे छूट मरने है!

करीम माहि के कान में फुसफुसाया था.. पर हवा जाकर माहि के छूट में लगी..

ाएहा.. माहि मचल उठी.....

नाहीई...

माहि ने बड़बड़ाते हुए कहा....

हाँ.. सच ..... माहि ! आज तो तेरे छूट अच्छे से ले लूंगा….

अचानक से करीम ने माहि का हाथ पकड़ लिया और आपने लुंड पर रख दिया..

इसको पता है क्या कहते हैं रांड ?

माहि ने शर्माकर कहा

हाँ...

क्या..

पेनिस..

हिंदी में

इसपर माहि हंसने लगी...

बोल न

माहि आँखे बंद कर के न में गर्दन हिलती है..

पता नहीं

इसको लौड़ा बोलते है ..!

माहि हस्ती है..

कमीने कही के... किसी औरत को आपने जाल में कैसे ले जाता है ये तुमसे कोई सीखे.. अच्छी भली शडिशुद्धा औरत को अपनी जाल में फसा दिया तुमने.. बूढ़े..

पता नहीं रांड …. तेरे पास आते hi मेरे लौड़े को क्या हो जाता है … ये बैठने का नाम hi नहीं लेता..

इसपर माहि हँसाने लगाती है..

बेशरम!!!

मई तेरे पास आता हु तो तेरे छूट को कुछ होता है क्या..

कुछ नहीं होता

गीली नहीं होती..

माहि शरमाते हुई कहती है

हमेशा का पता नहीं है पर अब गीली हो गयी है मेरी चोऊ....

Arey..raand.. शर्मा क्यों रही है… मेरी जान.. शर्माने से थोड़े hi काम चलेगा... इसका पूरा नाम लो...

उसने माहि के आम पे हाथ रख के उसको दबाते हुए कहा.. माहि की सिसकी निकल गयी..

आह.. चुत..

माहि ने नाम ले दिया.. पर थोड़ा शरमाते हुए....

शाब्बास.. रांड ... अब इसका नाम ले..

करीम ने माहि के आम को उसके ब्लॉउस इ के ऊपर से मसलते हुई कहा .. माहि मदहोश होती जा रही थी...

माहि ने उसका लिंग पकड़ कर नीचे दबा दिया

.. लौड़ा.. ाः!

यही तड़प तोह हमें एक दूसरे के करीब लती है रांड.. .. अब सुन.. मेरा लौड़ा और तेरी छूट.. एक दुसरे के लिए hi बने हैं... इसीलिए एक दुसरे को पास पास पाकर मचल जाते है ... .. मेरा लौड़ा तेरी छूट में घुसेगा तोह hi इनका मिलान होगा... और तभी तू मेरे बच्चे की अम्मी बन पायेगी.. .... अब बोल.. बनेगी मेरे बच्चे की अम्मी .. पूर्वी की tarah…manisha तो तुजे मम्मी बना नहीं पाया .. अब मई तुजे अम्मी बना देता हु..

उसने ऐसा कहते हुए अपना दूसरा हाथ निचे ले जाकर पेटीकोट के ऊपर से hi माहि के मस्त नितम्बों की दरार में घुसा दिया.. माहि पागल सी हो गयी..

Aaaaaaaaahhhhhhhhhhhaaaaa….. mumiiiiiiiiiiiiiiiii…….

पर.. तुम्हारा इतना मोटा लौड़ा मेरी छोटी सी छूट में कैसे घुसेगा.. ये तोह घुस hi नहीं सकता...

माहि ने मचलते हुए शरारत से उसको थोड़ा और तड़पाया...

अरे.. तू डर क्यों रही है..... सबके छूट में तो घुसाया तो है न ... .. तुम्हारे भाभी लता की छूट भी छोटी hi थी उसमें तो घुसाया था न .. पूर्वी के छूट में भी घुसाया है न..... पहले उन दोनों की भी छूट छोटी hi थी न ....

तुम हमेशा हम दोनों के बीच पूर्वी को क्यों लेट हो

करीम ने अब उँगलियों को पेटीकोट के ऊपर से hi माहि के छूट के ऊपर ले आया था और धीरे धीरे सहलाकर माहि को तड़पने लगा..

अचानक उसने माहि के बालों को पकड़ा और उसको अपनी और खींच कर उसके होंठों में अपनी जीभ घुसा दी... और अगले hi पल झटके से कांटा और उससे दूर हैट गया... और वो पीछे हो गया..
 
अचानक उसने माहि के बालों को पकड़ा और उसको अपनी और खींच कर उसके होंठों में अपनी जीभ घुसा दी... और अगले hi पल झटके से कांटा और उससे दूर हैट गया... और वो पीछे हो गया..

अब करीम माहि को उठा लेता है बैठे बैठे hi आपने बहो में...

करीम ने माहि को आपने गॉड में बिठा कर उसके चूचियों को आपने मूम में लेके चूसने लगा ..

चूसते चूसते उसे बीच बीच में कटाने भी लगा....

Ummmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmm……………kamineeeeeeee……

budhhhhhheeeeeeeeeeeeeee…………. Dheeeeeereeeeeeeeeeeee .. से e…………chussssssssssssssssssss..reeeeeeeeeeeeeee..iisseeeeeeeeeeeeeeee… bahhhhutttttttttttttttttttttt……….darddddddddddddddddd……..hooooooooooo..rahaaaaaaaaaaaaa..haiiiiiiiiiiiiiiiii..maiiiiiiiiiiii kyaaaaaaaaaaa tumareeeeeeeeeeeeee… dusareeeeeeeeeeeee राँडिईओओओओओ की तरह नाहीईईई हु rrrrrreeeeeeeeeeeee………. Dhireeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee..bola naaaaaaaaaaaaaaaaaaa..

अब माहि भी जोर जोर से सिसकने लगी.. करीम के सर पर आपने हाथ रख कर अपनी छाती में दबाने लगी … तभी करीम माहि के पीछे हाथ दाल के माहि का ब्लाउज निकल फेक देता है… रात का सोने का समय था इस वजह से आज माहि ने ब्रा नहीं पहनी थी..

अब करीम माहि के बूब्स के एक नीपल को आपने मू में लेके जोरसे खींचता है .. तभी माहि जोरसे छीलते है…

Bhadveeeeeeeeeeee..haramiiiiiiiiiiiii…….budheeeeeeeeeeee..chor मुजीई… मुझे क्या मार डालेगा क्या..

वो इससबार जोर से छीलते है… तब करीम आपने मू उसके बूब्स से हटाता है..

साली ज्यादा मत chilla..nahi तो मनीषा उठ जायेंगे..

हरामी फिर काट क्यों रहा है..

ज्यादा नाटक मत कर और आपने चुदाई का अब असली मज़ा ले…

करीम ने बिस्टेर पर कमर लगाकर माहि को लिटा दिया

करीम अब माहि को आपने सामने बिठा देता है और उसके नरम गुलाभी हूंतो को अपनी जीभ से चाटने लगा..

जब से तुजे देखा था पहली बार .. ालः कसम रांड.. तेरी याद में तड़पता रहता हु.. तब से सोचता हु .. कब तेरे छूट मरूंगा..

इतनी की तो मार चुके हो.. वो भी मेरे जैसे hi सुन्दर थी.. फिर मेरे में और उसमे क्या फरक है.. जो इतने मेरे पीछे पड़े हो..

हर छूट अलग होती है रांड.. हर छूट का स्वाद अलग होता है..

बेशरम..

आज तो तेरे अच्छे से मरूंगा… मरने देंगे न..

मुझे पूछ के मरोगे क्या..

हाँ..

अगर मैंने मरने से मन किया तो नहीं मरोगे न

नहीं.. तभी भी मरूंगा..

इसपर माहि हस्ती है..

फिर मेरे मर्जी क्यों पूछ रहे हो

पूछना पड़ता है.. नहीं तो तुम रंडिया बुरा मान जाती हो..

कमीने कही के..

आपने काळा भद्दे हूंतो में माहि के नरम गुलाभी हूंतो को लेकर करीम उसको चूसने लगा.. उसके गर्दन को भी वो चूसता था...

चूसते चूसते hi करीम पीछे बीएड पे गिर जाता है ..अब करीम पिट के बल गिरा था और उसके उप्पर माहि थी..

करीम ने अपना एक हाथ पीछे लेजाकर माहि के पेटीकोट और पेंटी के ऊपर से उसके गांड पर रख दिया …

aaaaahhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaa……..

aaaaaaaaaaaaaahhhhhhaa…

तभी माहि के बदन मई एक दम से बिजली से कोंध gaye…use अपनी झंगो के बीच मई तेज सरसराहट महसूस हुई, और उसका बदन बुरी तरह से थरथरा गया…..

वह अपने हाथ को बिलकुल माहि के नितम्बों की दरार के नजदीक ले गया और वह पे माहि के गांड पर सहलाने लगा.. दूसरे तरफ उसके लुंड की चुभन माहि के पते के पास लगातार बढ़ती जा रही थी.... माहि बेकरार होती जा रही थी.. ...

अचानक उसका हाथ धीरे धीरे नीचे सरकता हुआ माहि के छूट के उप्पर आ गया ..… तभी माहि के बदन मई एक दम से बिजली से कोंध gaye…use अपनी झंगो के बीच मई तेज सरसराहट महसूस हुई, और उसका बदन बुरी तरह से थरथरा gaya…..peticot और पंतय के ऊपर से माहि के छूट की फांकों को ढूंढ कर उन्हें थपथपाने लगा... माहि को इतना मजा आ रहा था की वो पागल सी हो गयी.. हूंठ से हूंठ जुड़े होने की वजह से माहि अपने मनोभाव प्रकट कर नहीं प् रही थी.. ..पर उसे अब लग रहा था की अचानक hi जैसे वी किसी दूसरे hi दुनिया में पहुँच गयी हो.. उसकी आँखें अधखुली सी हो गयी... कसमसाकर माहि ने अपनी टांगें चौड़ी करके जाँघों के बीच 'और' जगह बना ली... ताकि करीम को उसकी chut-sewa करने में किसी तरह की कोई दिक्कत न हो... अब करीम ने माहि का पेटीकोट पीछे से उप्पर कर लिया और पंतय के उप्पर आपने हाथ रख लिया..

अब जैसे hi करीम ने माहि के पंतय के उप्पर से अपनी उंगली से माहि के छूट का छेड़ ढूंढने की कोशिश की.. माहि तोह पागल hi हो गयी... उसकी सिसकी करीम और खुद के मू से बहार न आ सकीय..

Ummmmmmmm….aaaaaahhaa..

पर करीम को अपने भावनाओं से अवगत करने के लिए माहि ने अपना हाथ भी उसके हाथ के साथ साथ अपनी पेटीकोट के उप्पर आपने छूट के उप्पर रख दिया ..... वैसे hi करीम ने आपने हूंठ माहि के हूंतो से अलग कर दिए..

करीम के हाथ के नीचे दबे उसके हाथ की एक उंगली कुछ देर तक माहि के छूट की दरार में ऊपर नीचे होती रही.. अपने हाथ और एक मर्द का हाथ में जमीन आसमान का अंतर होने का माहि को आज पहली बार पता चला.. आनंद तोह उसे अपने हाथ से भी काफी आता था.. पर इस वक़्त करीम के हाथ की तोह बात hi अलग थी.. मजे में माहि एक दम मस्त होकर सिसकारियां भर रही थी….

aaaahhhhhhhhaaaaaaaaaa.. करिममममम..... ये क्या कर रहे हो... मेरे ..साथ..

करीम ने उसको चूमते हुई उसके पंतय के उपपरसे उसके छूट को मसलवटे हुई hi अपनी एकक उंगली पंतय के साइड से उसके छूट में गुसा di..jaise hi करीम की काली मोठी उंगली उसके छूट में गुशी तो दर्द के एक तेज लहार माहि के बदन में उठ गयी..

aaaaahhhhhhhhhhaaaaaaaaaaa……………kamineeeeeeeeeeeeeeee………. बता कर दाल नहीं सकता क्या……

माहि को करीम के हाथ से आपने छूट मसलवटे बहुत मज़ा आ रहा था… अब करीम ने माहि के छूट में आपने उंगली गुमानी शुरू कर दी… करीम के इस हरकत से माहि के बदन में कोहराम माछा हुआ था.. वो मचल उठी..

अब करीम अपनी उंगली जोर से घूमना शुरू किया था.. तड़पते हुई माहि ने करीम का हाथ पपकड लिया…

aaaaahhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaaa….. kkkkk…..aaaaa..rrrr…iiiiiiiiii………. mmmmmmmmmmmmmmmmmmmm… रुखह naaaaaaaaaaaaa… jaraaaaaaa….mai पागल हो जाउंगी….

लेकिन करीम रुकता नहीं है.. माहि के चिकनी छूट की फांकों के बीच थिरकती हुयी उसकी उंगली जैसे hi माहि के छूट के दाने को छूती.. तो माहि का बदन झनझना उठता.. और जैसे hi चिकनाहट से लबालब छूट के छेड़ पर आकर उसकी उंगली ठहरती.. माहि के दिल की धड़कन बढ़ जाती.. उसका दिमाग सुन्न हो जाता और उसकी सिसकी गले में hi घुट कर रह जाती....

अपनी आवाज में थोड़ी नरमी लेट हुई माहि कहती है..

करीम … रहने दे न अभी… अब बहोत हो gaya..manish उठ जायेगा ..

करीम माहि को अब पलट देता है … अब वो निचे और करीम उप्पर था..

तू डर्टी क्यों है मनीषा से.. वो उठ भी जायेंगे तो क्या कर लेंगे तेरा..

करीम ने माहि का एक हाथ पकड़ लिया और आपने लुंड पर वो हाथ रख दिया.. तो माहि मचल उठी… ..

आआह्ह्हह्ह्ह्हह्हआआ..... करिमममममम... बहोत गरम hai....re.. तेरा...

करीम ने माहि के छूट से निकली उंगली सीधा माहि के मू में धौंस le..jabardasti..aapni hi छूट के रास में बहेंगी उंगलिया अब माहि के मू में thi..mahi बेचारी सकपका रह gayi..aapne hi छूट का रास उसे निगलना पड़ा

रांड.. अपनी hi छूट का रास का स्वाद जरा चख के देख .. कितना रसीला और मीठा होता है ये देख ले जरा..

उसकी नज़र अब माहि के कमर पर गयी .. उसकी कमर गोरी और बहुत hi कमसिन थी.. चर्बी तोह जैसे वहां थी hi नहीं..

अचानक करीम उस पर झुक गया और उसकी नाभि पर अपने होंठ रख diye...aur अपनी जीभ निकल कर माहि के पेट को यहाँ वहां चाटने लगा...

ोुह्ह्ह.. उम्म्म.. आआह...

माहि रह रह कर होने वाली गुदगुदी से उछलती रही और ाँहें भर्ती रही... ...और रह रह कर वो उचक रही thi..Achanak करीम ने माहि के पेटीकोट का नाडा पकड़ कर खींच लिया और उसके पेटीकोट को निकलने लगा…

पर माहि ने अपनी टांगों को मोड़ने की कोशिश की.. और वो पेटीकोट को न निकलने की कोशिश करने lagi..par ज्यादा कुछ वह कर नहीं पायी.. करीम के दोनों हाथ अब पेटीकोट को निकलने लगे थे.... माहि मचल कर रह गयी…

प्ल्ज़.. इससे मत निकालो न .. मुझे बहुत शर्म आ रही है...

करीम ने उसकी बातों पर कोई ध्यान नहीं diya..aur एक जातक में hi उसका पेटीकोट ऊपर से नीचे सरकने लगा ..

थोड़ी ऊपर उठो!

ऐसा कहकर करीम ने माहि के नितम्बों के नीचे हाथ दिए और माहि ने भी आपने नितमाब ऊपर उठाये ..तब करीम ने उसकी पेटीकोट को नीचे खींच लिया....

पेटीकोट नीचे होते hi करीम को माहि के लाल पंतय और उसके नीचे उसकी गौरी गुदाज जांघें नंगी दिखाई देने लगी...

करीम उसकी जाँघों के बीच इस तरह ललचाया हुआ देख रहा था जैसे उसने पहली बार किसी औरत को इस तरह देखा हो.. उसकी आँखें कामुकता के मारे फ़ैल सी गयी... तभी एक बार फिर माहि की तड़पती हुयी आवाज आयी..

अब ऐसे लालजी नज़रो से न देखो न मुझे.. मुझे बहुत शर्म आ रही है…

माहि कुछ कहती या करती इस से पहले hi अचानक वो माहि के पंतय भी निकलने लगा.. करीम कुछ कहता या करता उससे पहले hi माहि ने आपने गांड उप्पर उठा li..aur माहि की तरफ हसते हुई देखकर करीम उसकी पंतय को नीचे खींच लिया....

... और इसके साथ hi उसकी चिकने छूट भी नंगे हो गए.. उसने एक अपना हाथ माहि एक जांग पर रखा और उसके छूट को लालची नज़रो से देखने लगा… उसके छूट को देखते हुई करीम माहि के एक जांग को दबाने laga..mahi के छूट को देखकर वो पगा हो गया था ..

ऊपर टांगें करो.. इसकी गहराई मुझे अच्छी तरीके से देखने है

और क्या गहराई देखने है तुम..

माहि शर्म से मरी जा रही थी ..करीम ने उसकी जांघें ऊपर उठायी..

माहि की जांघें ऊपर होते hi उसकी छूट की सुंदरता देख कर करीम के मुंह से लाल टपकने लगी.. और उसके लुंड से भी..!

माहि की छूट बहुत hi प्यारी प्यारी थी... एक दम गोर... उसपे हलके हलके काले बाल थे .. शयद अभी अभी उसने वह पे के बाल निकले the..aur उस बालून में भी उसका रसीलापन और नजाकत उसको और हसीं बना रहा था.. ... पतली पतली फांकों के बीच लम्बी सी दरार ऐसे लग रही थी जैसे पहले कभी खुली hi न हो.. छुड़ाने के लिए.. ऐसा नहीं लग रहा था की ये छूट एक शदीशुद्दा औरत की है.... दोनों फांकें आपस में चिपकी हुयी सी थी...

रांड.. मुझे नहीं पता था की तेरे छूट इतनी प्यारी है .. देख न.. कैसे फुदक रही है.. मेरे लौड़े के लिए .. किसी मछली की तरह.. सच रांड.. तूने मेरे साथ बहुत बुरा किया है .. अपने सबसे कीमती अंग को मुजसे इतनी दिन दूर रख कर... जी करता है की....

मुझे पता है तुम्हारा जी क्या चाहता है..

करीम माहि के पेरो के पास आ गया और जुक कर उसने माहि के दोनों पेरो को चूमा … और फिर करीम माहि के पैरो को चाटने लगा…

2 मिनट भी नहीं हुए honge..achanak माहि को अपने तलवों के पास करीम की जीभ मंडराते हुई महसूस हुई.. माहि ने नजरें उठाकर करीम को देखा.. वह मुस्कुराने लगा.. उसी पल करीम का ध्यान माहि के छूट पर गया.. माहि करीम को hi देखे जा रही थी.. पर करीम माहि के और देखने पर माहि ने अपना चेहरा झुका लिया..

करीम की आँखें चमक उठी.. पर शर्म के मारे माहि अपनी नजरें नहीं उठा प् रही thi....usne अपनी आँखे बंद कर ली..

माहि की आँखे बंद थी पर उसका ध्यान करीम के तरफ hi था.. वो क्या कर रहा है इसपर hi था.. .. अब वह लगातार माहि के पैरो को चाट रहा था.. बीच में माहि के पैरो की उंगली और अंगूठे को मू में लेकर चूस भी रहा था..

अब चाटते चाटते करीम उसकी जीभ माहि के जाँघों पर आकर टिक गयी थी...

ये देखकर और अहसास कर माहि की छूट फुदकने लगी.. उस पर सुरूर सा छाने लगा और माहि ने भी अपनी टाँगे सीढ़ी कर ली ... मिल रहे इस आनंद में पागल सी होकर माहि ने उसके सर को अपनी जाँघों में कसकर भींच लिया...

निकलने से पहले hi उसे पूरी तरह गरम कर लेना चाहता होगा.. उसने अपना मू सीधा किया और छूट के द्वार के पास वाले हिस्से को अपनी काली बड़ी मोती सी जीभ से कुरेदने लगा.. आपने छूट के इतने करीब 'घुसपैठिये' जीभ को महसूस करके माहि की सांसें तेज हो गयी.. बस 2 इंच का फासला hi तोह बचा होगा मुश्किल से... माहि के छूट और उसके जीभ में...

आपने हस्बैंड के पास होते हुई करीम की ऐसे छेड़ छड़ से hi मिल रहा आनंद में दोगुनी कसक thi...Mahi की आँखे शर्म से बांध थी.. अब करीम ने माहि के टंगे एक दूसरी से विपरीत दिशा में फैला दी. अब माहि की 'छम्मक छल्लो' ठीक करीम के आँखों के सामने थे… अब माहि की छूट बेपर्दा थी..

माहि ने हल्की सी आँखें खोलकर देखा. करीम आँखें फाड़े हुए माहि की फड़कती हुयी छूट को hi देख रहा था. माहि के चेहरे पर उत्तेजना के भाव अलग hi नजर आ रहे थे..

अचानक उसने अपना चेहरा माहि के छूट के पास लाया तो माहि ने अपनी आँखें पूरी तरह बंद कर ली. उसके बाद तोह उसने माहि को हवा में hi उठा दिया. छूट के दोनों फांकों पर माहि को उसके दोनों हाथ महसूस हुए. बहुत hi आराम से उसने अपने अंगूठे और उँगलियों से पकड़ कर मोती मोती फांकों को एक दूसरी से अलग कर दिया. माहि सोचने lage..aankhe बंद करते हुई hi..Jane क्या कर रहा था वो वह . पर जो कुछ भी कर रहा था, उससे मुझे बाउट मज़ा आ रहा है..

आपने हस्बैंड के पास होते हुई करीम की ऐसे छेड़ छड़ से hi मिल रहा आनंद में दोगुनी कसक थी...

अचानक करीम ने जीभ सीधा माहि के छूट के ऊपर रख di..Mahi हड़बड़ा सी गयी...

आआआह्ह्ह्हह्हआआआ…… kkk….aaa.. rrrrrr..iiii..mmmm…

वो धीरे से सिसक पड़ी.. वो चिल्ला भी नहीं पा रही थी.. पास में हस्बैंड जो सोया हुआ था.. छूट की फांकों के ठीक बीचों बीच करीम की जीभ थी और धीरे धीरे वो उसको ऊपर नीचे कर रहा था....

माहि ने तुरंत अपना चेहरा ऊपर किया और आँखें बंद करते हुई अचानक से करीम के सर को उप्पर करती है.. और आपने छूट के द्वार पर आपने एक हाथ रकती hai..aur उसकी और देखते हुई कहते है..





अच्छा.. मैं कैसे लगती हूँ तुम्हे.. पहले बताओ!!!

माहि ने करीम जो उसके छूट चाट रहा था उसके सर को उप्पर उतके कहा

करीम ने माहि के जाएंगे को चूमा .. माहि के बदन में गुदगुदी सी हुयी.. उसे बहुत बहुत अच्छा लगाने लगा....

बहुत अच्छे!

Aaaaaaahhhhhhhhhhhaaaaaaaa…

माहि ने सिसक कर कहा और उसके और देखकर कहा

पर तुम कह रहे थे न.. की पूर्वी मुझसे तोह सूंदर hi है..

करीम ने माहि के नवल को किश करके सीढ़ी होते हुई कहा

नहीं.. तुम्हारे सामने वो कुछ भी नहीं है..

अच्छे मतलब? क्या दिल करता है मुझे देख कर?

माहि ने प्यार से पूछा

करीम ने माहि के पेट पर हाथ रखा और धीरे धीरे अपना हाथ नीचे ले जाने लगा...

दिल करता है की यूँही तुमसे दिन बार प्यार करता राहू ….

बस! प्यार करने का hi दिल करता है न या कुछ और भी..

माहि ने कहा और हंसने लगी...

हाँ … ऐसा दिन भर तेरे को छोड़ने का दिल करता है …

बेशरम !!! कही के

माहि तड़प उठी... इतना मजा तोह उसे जिंदगी में उस दिन से पहले कभी आया hi नहीं था..

2 चार बार जीभ को छूट के फांको के ऊपर नीचे होने से hi उसकी छूट छलक उठी...... उसे अपनी साँसों पर काबू पाना मुश्किल हो रहा था.. अब माहि को सहन नहीं हुआ और माहि ने कांपते हुए जांघें भींच कर अपना पानी छोड़ दिया..

aaaaaahhhhhhhhhhhaaaaaaa.......... करिममममममममम......

सेल kamineeeeeeeeeeeee....

चुतरस बहाने लगा…

माहि के साडी से hi उसने छूट को साफ़ किया और फिर से माहि के छूट को चौड़ा कर लिया. पर अब झाड़ जाने की वजह से माहि को नार्मल रहने में कोई खास दिक्कत नहीं हो रही थी. हाँ, मजा अब भी आ रहा था और माहि पूरा मजा लेना चाहती थी.

करीम ने थोड़ा आगे सरक कर माहि को अपनी तरफ खींच लिया... करीम ने आगे झुक कर माहि की छूट पर अपना फेस जुका दिया ..

अगले hi पल माहि को गरम सांसें उसके छूट में घुसती हुयी महसूस हुयी और पागल सी होकर माहि ने अपने आपको उठा लिया.. माहि ने अपनी आँखें खोल कर देखा. करीम का चेहरा माहि के छूट पर झुका हुआ था.. माहि अंदाजा लगा hi रही थी की उसे पता चल गया की वो क्या करना चाहता है. अचानक वो माहि के छूट को अपनी जीभ से चाटने लगा..

माहि के सरे बदन में झुरझुरी सी उठ gayi..iss आनंद को सहन न कर पाने के कारन उसकी सिसकी निकल गयी

Aaaahhhhhhhhhhhhaaaaaaaaa….

Mumiiiiiiiiiiiiiiiiiii….

और वो अपने नितम्बों को उठा उठा कर पटकने lagi...par अब वो डर नहीं रहा था... माहि के जाँघों को उसने कसकर एक जगह दबोच लिया और उसके छूट के अंदर जीभ घुसा दी..

बहुत देर से दबाये राखी हुई सिसकी निकल hi पड़ी .. ..

मजा इतना आ रहा था की माहि को क्या बताऊँ... सहन न कर पाने के कारन माहि ने अपना हाथ करीम के सर के उप्पर ले जाकर उसको वहां से हटाने की कोशिश की तोह उसने माहि का हाथ पकड़ लिया

बस दो मिनट और!

माहि ने झट से अपनी कोहनी बीएड पर टेक कर ऊपर उठ गयी और सिसकते हुए बोली

aaaah...jaldi करो न.. मनीषा उठ जाएगी नहीं तोह!

वो अब आपने पति को मनीष नहीं मनीषा कह रही थी..

फिर क्या था.. करीम ने चेहरा ऊपर करके मुस्कुराते हुए माहि की और देखा.. उसकी नाक पर अपनी छूट का गधा पानी लगा देखा तोह माहि की हंसी छूट गयी..

माहि के मचल रही छूट करीम के चहरे से थोड़ी hi दूर थी ..उसके छूट में से आ रही महक करीम को काफी उत्तेजित कर रही थी..

करीम ने माहि के छूट पर आपने मू रख कर जोर से दबा दिया.. तभी माहि चीला उठी

mumiiiiiiiiiiiiiiiiiiii…………….aaaaaaaahhhhaaaaaaaaaaaa…………. धीरीई.. naaaa…budheee….

माहि का दिल जोरो से धड़कने लगा.. आज से पहले उसने कभी नयी सोचा था की उसकी छूट भी कोई चाटेगा और उसमे इतना मज़ा भी आएगा.. अब करीम माहि की छूट आपने जीभ से चाटने laga..use आपने छूट चटवाने में बहुत मज़ा आ रहा था..

करीम ने माहि के छूट के अन्दर अपनी बुद्धि जीभ दाल दी और अन्दर कुरेदना शुरू कर दिया .. कुरेद कुरेदकर माहि के छूट का रास निकलने लगा…

और आपने एक हाथ उप्पर लेके माहि के एक बूब्स पर रख दिया और आपने दो उंगलियों में निप्पल को पकड़ के जोर से उप्पर के और खींचा… तब माहि जोर से चिलायी..

uuuuuuuffffffffffffffffff……….maaarrrrrrrr… gaaaaayyyyyiiiiiiiiiiiii……reeeeeeeeeeeee…….. कममममिनीईईई…… meeeeerreeeeee…..koooooooo………maarrrrrrrrr…hiiiiiii…..dallllllogeeeee…..aaaaaaabbbbbbbbb….tummmmm………. ऐसे hi करते हो क्या सिमरन और पूर्वी के साथ..

हनननन मेरे रांड..

ऐसे कहते hi करीम उसके छूट में जीभ से कुरेदते हुई अपनी एक उंगली दाल देता हैई…

kamineeeeeeeeeeeeee…………. Dhireeeeeeeee.naaaaaa..

ऐसा कह के जरा जुख के करीम के सर्र को अपनी छूट पे दबा देती है.. करीम अब आपने दोनों हाथ उप्पर ले जेक आपने दोनों हाथो में माहि के चूचिया पकड़ के जोर से दबाने लगता है..

aaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhaaaaa….. uffffffffffffffff…………. Karimmmmm…jara धीरे दबाओ न मेरे बूब्स को… बहुत दर्द हो रहा है…

और तेरे छूट को मज़ा नहीं आ रहा है क्या

और उसके छूट को आपने मू में लेके चूसने लगता है..

aaaaaaaaaooooohoooo…….oooo..mumiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii… बहुत मज़ा आ रहा है… तुम तो बहुत कमल के चूसते हो.

करीम ने कभी किसी को शालीनता से चूसा नहीं था … उसे तो ताबडतोब चूसै पसंद थी.. पर करीम ने सोचा जोर से इससे चूसा तो मनीषा उठ जाएगी और सब मज़ा किकिरा हो जायेगा.. इसलिए उसने धीरे से चूसने का मूड बनाया.. और फिर माहि की गांड की तरफ देखने लगा.. उसकी एक टांग उठकर उसके कूल्हे पर एक जोरदार तमाचा जड़ दिया.. ये बहुत था माहि की अन्दर की आग भड़काने के लिए..

ohooooooooooooooo करीम .. आज क्या कर दिया है तुमने मेरे बदन को.. ये आएग बढ़ाते hi जा रही है.. ummmmmmmmmmmmmm… इस आग को शांत करो न..

छोड़ू क्या तुजे..

हाँ.. मेरे nawab..sahab..

तू मुझे मज़ा देंगे क्या ऐसे hi नाटक करेंगे..

हाँ मई आज आपको असली मज़ा दूंगी.. जैसा आप चाहते हो वैसा मज़ा दूंगी..

छूट के ऊपर उसका लिसलिसपन करीम को महसूस होने लगा.. कुछ देर वह अपने जीभ से उसके छूट के फांकों को अलग अलग करने की कोशिश करता रहा.. माहि की हालत ख़राब होती जा रही थी.. आवेश में माहि कभी अपनी जाँघों को खोल देती और कभी भींच लेती... अचानक उसने माहि के छूट पर जीभ का दबाव एक डैम बढ़ा दिया....

इसके साथ hi माहि हड़बड़ा कर उछाल सी पड़ी... और माहि अब जोर जोर से सिसकिया देने लगी..

Aaaaaaahhhhhhhhhhhhhh.ooooohoooooooooooo………. kamineeeeeeeeee… budheeeeeeeeeee……..ummmmmmmmmmmmmmmm.. आआआअह्हह्हआ… कीटनाआआ मज़ा दे रहाआआ हैई saleeee….sssuckkkkkkkkk मिइइइइइइइ…. उम्मम्मम्मम … suckkkkkkkkkkkkkkkkk…meeeeeeeeee..aise होई…. जो मज़ा पूर्वीइइइइइइइ को देताआआआ haii..jo मज़ा सिमरनननन को देता है…. जो माज़ लता भाभी को देता और जो माज़ उस माइड को देता है उस से अच्छा मज़ा मुझे दे रईईए.. कमीने..

उस सिसकियों से अंदाजा लगा सकता था की उसको इस वक़्त कितना मजा आ रहा है..

अब माहि के थांगे उसने हवा में उठा दी और आपने बड़ा सा कला लुंड माहि के नाज़ुक से छूट पर ठिका दिया..

धीरे से कर… नहीं तो मनीषा उठ जायेंगे…

इसपर करीम हसता है..

मनीषा को उठ जाने दे.. वो भी देखेंगी मई कैसे उसके बीवी को छोड़ता हु..

माहि इसपर स्माइल करते है..

करीम उसकी जाँघों को छोड़ कर ऊपर आ गया और माहि के होंठों को चूम लिया

कसम से रांड .. तू चीज़ बड़ी कातिल है.. तेरा बदन देख के ऐसा लगता है रांड..

कैसा लगता है आपने इस रांड के बारे में ..जान..

माहि ने उसके आँखों में देखते हुई कहा

तेरा ये बदन देख के तुमसे दूर होने को मन नहीं करता ...

माहि ने अपने हूंठ उसके हूंतो पे रख दिए.. और उसकी कमर में हाथ दाल लिया.. और उसके बालों में प्यार से हाथ फेरने लगी.... करीम से मिल रही गर्मी के मारे माहि पागल सी हुयी जा रही थी.....

करीम ने आपने चेहरा ऊपर उठा लिया.. फिर करीम ने झुक कर माहि के नरम होंठों पर अपने गरम गरम होंठ रख दिए..

माहि के शरीर में अचानक अकड़न सी शुरू हो गयी.. .. ... उसने माहि के ऊपर वाले होंठ को अपने होंठों के बीच दबा लिया और चूसने लगा.. माहि भी वैसा hi करने lagi..uske नीचे वाले होंठ के sath....usko करीम के होंठ बहुत प्यारे लग रहे थे ..

अँधेरे में माहि को आपने बंद आँखों के सामने तारे से toot'te नजर आ रहे थे... कुछ hi देर में बदहवासी में माहि पागल सी हो गयी और तेज तेज साँसे लेने लगी.. करीम का भी कुछ ऐसा hi हाल था.. उसका लुंड एक बार फिर अकड़ कर माहि के पते में घुसने की कोशिश करने लगा था.. थोड़ी देर बाद माहि को आपने छूट गीली होने का अहसास हुआ.... उसकी छातियां मचलने सी लगी थी... उनका मचलना शांत करने के लिए माहि ने अपनी छातियां करीम के सीने में गदा दी..

माहि को अब रहा न गया.... उसने अपने पते में गदा हुआ उसका कला सा बड़ा लुंड आपने कोमल हाथों में पकड़ लिया और अपने होंठ से करीम के हूंतो को जोर जोर से चूसने लगी..

जैसे ही माहि का हाथ करीम के लुंड पर लगा तोह माहि एक दम से कनाप gaye…karim ने माहि के हूंतो से से मुँह हटते हुए उसके तरफ मुस्कारते हुए देखा…

रांड यी आज से तुम्हारा है…..

उसकी बात सुनकर माहि शर्मा गयी .. आपने हाथ में लुंड पकड़ कर लुंड पर सहलाते हुए माहि ने कहा…

वैसे इससे पहले और कितनो का था ये महाशय…

तेरे को उससे क्या करना है रांड..

माहि है पड़ी और उसने फिर से करीम के हूंठ आपने हूंतो में ले liye..uppar वो करीम के हूंतो को चूस रही थी और निचे करीम का लुंड आपने हाथ में लेकर उसको हिलने लगी.. इस वजह से अब इस वक़्त वो दोनों जोर जोर से सांसे लेने लगे थे..

माहि को बहुत मजा आ रहा था पर उसे आपने छूट की तड़प उसे अब सहन नहीं हो रही थी.. आपने तड़प काम करने के इरादे से माहि अपना दूसरा हाथ नीचे ले गयी और छूट के फांकों पर हाथ रख कर धीरे धीरे उन्हें मसलने लगी..

माहि के ऐसा करने से शायद करीम को बहुत मजा आने लगा.. वो अब जोर जोर से माहि के हूंतो को चूसने लगा .. और आपने दोनों हाथ माहि के आम पे चलने लगा..... माहि के आम और हूंतो से कुछ देर और खेलने के बाद वो रुक गया और उसके हूंतो से आपने हूंठ अलग करके माहि को देखने लगा...

माहि के मुंह से लम्बी लम्बी साँसे और सिसकियाँ निकलते देखा तो करीम के चहरे पे एक अलग से भाव आ गए और उसने माहि का हाथ आपने लुंड से हटा लिया....

माहि ने अपनी छूट को सहलाना छोर धीरे से उससे कहा

करो न.. मुजसे अब रहा नहीं जा रहा है...

क्या करू

फिर माहि ने कुछ नहीं कहा पर आपने हाथ में करीम का लुंड पकड़ लिया और आपने छूट के द्वार पर उसे टिका दिया.. और करीम को देखने लगी ..

करीम- क्या

माहि- करो न

करीम- कैसे

फिर माहि करीम के कमर के पीछे से आपने दोनों हाथ डालती है और आपने कमर थोड़ी उप्पर की और कराती है.. पर उससे करीम का लुंड माहि के छूट में आगे जाये उससे पहले करीम थोड़ा उप्पर हो जाता है..

प्ल्ज़…… करो na…aisa तड़पाओ मत न.. मुझे…

करीम हस्ता है.. माहि पागल सी हुयी जा रही थी.. अब वह करीम के लुंड को आपने छूट में डालने के लिए अपने नितम्बों को ऊपर नीचे हिलने लगी थी..

आखिरकार तड़प सहन करने की हद पार होने पर माहि ने एक बार और उस से सिसकते हुए निवेदन किया......

अब तोह कर दो न! कर दो न प्लस!

क्या कर दू

माहि तड़प कर बोली....

आआअह्ह्ह्हह्हआ.. .. .. आज के बाद मैं तुमसे कभी भी लड़ाई नहीं करूंगी.. न hi तुम पर चिल्लाऊंगी.. तुम्हारी कसम! न तुम पर हाथ उठाउंगी..

माहि एक पल को सब कुछ भूल कर तकिये को अप्पने हाथ में लेके दबा के कहा ..

क्यों .. हमेशा की तरह मेरे साथ जगदा कर न .. रांड..

नहीं करुँगी…

क्यों

तुम मुझे ऐसे hi तड़पाओगे फिर

तो .. छूट मरू या गांड

C.................hhhhhhhuuuuuu......

बोल न रांड....

नहीं बोल पाऊँगी...

क्यों..

में तुम्हारे इतनी बेशरम नहीं हु

आपने पति के बाजु में होते हुई एक गैर मर्द से छुड़वा रही है और मुझे बेशरम कह रही है..

तुम करना है या नहीं

माहि गुस्से में बोली

गांड या छूट

माहि ने छूट के तरफ इशारा किया

नहीं.. मुझे तो गांड मारनी है..

प्ल्ज़.. इस बार मेरी बात मान लो… नेक्स्ट टाइम आपकी बात मान लेती हु..

पक्का…

पक्का.. ये आपके माहि रांड का आपने नवाब साहब को वडा है..

नाटक तो नहीं करेंगे फिर

नहीं.. कभी नहीं..

ठीक है..

ऐसा कहते hi करीम ने अपने लुंड को पकड़ कर माहि के छूट के छेद पर सेट करने laga….…karim ने अपने दूसरे हाथ से माहि के छूट को फैंको को फैलाया और अपने लुंड के सुपड को जैसे ही माहि के छूट के छेद पर लगाया तोह माही एक दम सिसक से उठी…

Aaaaaaahhhhhhhhhhaaaaaaa…….. जाआनंनंन्न….

उसे लुंड के सुपड के गरमी अपनी छूट पर महसूस हो रही थी…..

जैसे hi माहि सिसक उठी वैसे hi करीम ने आपने लुंड का मुंह माहि के छूट के बीच घुसा दिया ..

माहि कसमसा उठी..

अह्ह्ह्हह्हह्हआआआ…

Mumiiiiiiiiiiiiiiiiiiii…..

ममी नहीं अम्मी बोलो

इसपर माहि हस्ती है

कमीने … बूढ़े…

माहि को इतना आनंद आ रहा था की वो बयां नहीं कर प् रही थी .. माहि ने अपनी जाँघों को और खोला और आपने इस बूढ़े आशिक की राहें आसान कर दी..

फिर करीम ने कुछ अंदर और आपने लुंड पेल दिया .. आनंद के मारे माहि छटपटा उठी.

आअह्हह्ह्ह्हह्हआआआआ…..

भादवीीीीे….

करीम ने आपने लुंड बहार निकला और वैसे जल्दी से अन्दर पेल दिया

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह…. कामिनीईईई….

Dhireeeee….naaaa…

सिसकियाँ और आहें भरते हुए उसने खुद hi अपनी जांघों को पकड़ लिया और करीम का काम आसान कर दिया... माहि बदहवास हो gayi…mahi का बुरा हाल हो चूका था…

माहि की सिसकियाँ जोर से आने लगी थी… उसकी तेज हो रही साँसों की आवाज भी शयद अब मनीष को सुनाई दे रही थी.. पर वो तो सो रहा था…

ज्यादा मत चिल्ला नहीं तो मनीषा उठ जायेंगे…

उठ जाने do…manisha को

और अगले ही पल माहि के mote-mote आम को अपने हाथों मई कास कर पकड़ते हुए जोर से दबा दिया…..

अहहहआ……. बुढीीीी… क्या कर रहे हो….

माहि एक दम से मचल उठी…..

आपने माहि रांड का दूध निकल रहा हु

करीम ने माहि के चुच्यों को मसलते हुए कहा…….

सीईई ुम्हह चोरो इस तरह से कोई दूध निकालता है क्या … ऐसा मत karo…dard होता है न

करीम ने फिर से उसकी आम को दबा दिया.. करीम माहि के चुच्यों को मसलते हुए कहता है

मुझे तोह इसी तरह से दूध निकलना आता है …तुम्हे कोई इतराज है….

मुझे क्या बच्चे हुई है जो वह से दूध निकल आ जय

इसलिए तो तुजे अम्मी बनाना है मेरे बच्चे की..

धत्तत्ततत्तत्त…. बेशरम…

फिर करीम ने माहि के गांड को पकड़ कर उसे मसलना शुरू कर दया

Aaaahhhhhhhhhhhaaaa…shiiiiii हैए बूढ़ी.. एई काया कर रहा hai….ahhh ुंहःहःहःहः… dhire..seeeeee…dard हो रहा है…

माहि ने अपनी गांड को उप्पर के और देखेलते हुए कहा. जैसे ही माहि के इस हरकत से करीम का लुंड और अन्दर गया तो करीम का दिल ख़ुशी से उछाल पड़ा और इससे कृषि में करीम ने आपने आधा लुंड बहार निकला और उसे जोर से और अन्दर पेल दिया…

वैसे hi माहि और जोर से चिल्ला उठी..

ओह्ह्हूऊओ अह्हह्ह्ह्ह करीम अह्हह्ह्ह्ह ुंहःहःह एई यी द्द्द्दिरी अह्ह्ह उन्घ्ठ्ह ना करीम ओह्ह्ह मई पागल हो जाउंगी अह्ह्ह्ह हईये करीम मेरे कक्कछहहहहयऊ…..

और उसकी आंखे मस्ती मई बंद होती चली gaye….mahi को सहन करना मुश्किल हो गया tha….usne अपने दोनों हाथ पीछे ले जेक बीएड को जोर से पकड़ लिया …….माहि के पुरे बॉडी में तेज कंपन होने laga…jab माहि से बर्दास्त ना हुआ, तोह वो सिसकते हुए चिल्ला उठी….

Dhireeeeeeeeee………..reeeeeeeeeeeeee… haramiiiiiiiiiiii…….. कही मेरे आवाज से मेरी manishaaaaaaaaaaaaaaaa…. न उठ जाये…

तूने तो कहा न मनीषा उठ जय तो कोई प्रॉब्लम नहीं..

क्या पहले hi दिन मेरे शादी तुड़वाने का इरादा है क्या

दर क्यों रही है… मई तुजे अपनी रखेल बनके रखूँगा..

हरामी कही keeeeeeeeeeeee……. सलेटी…. भदेवीएएए…

माहि मस्ती और वासना के रंग मई एक दम बेहाल हो चुकी thee….uske साँसे भोत तेज चल रही thee…ankhe अभी भी बंद thee….mahi बीएड को पकड़ के अपनी साँसों को काबू मई लेन के कोशिश करते हुए बोली….

ओह्ह्ह्हहोओओओओओओ… गुडडडडडड… करिमममम.. तुम तो मेरे जान hi लोगे… प्ल्ज़ धीरे करो na..…hayeee……aise भी कोई करता है क्या …..

मई तो हमेशा ऐसे hi करता हु..

सच में.. कमीने.. इसी वजह से सब तेरे दीवानी hai…purvi .. लता. simran..wo माइड... सब.. ऐसा hi करता होगा सबके साथ इस वजह से वो अपनी पति को छोड़कर तेरे साथ आती है..

माहि तड़प रही थी पर उसे ऐसा मजा करीम दे रहा था जिसकी माहि ने कल्पना भी कभी नहीं की थी.. माहि करीम की दीवानी होती जा रही thi....karim ने माहि के होंटो को अपने होंटो मई भर कर चूसना फिर से शुरू कर daya….aur माहि भी उसका खुल कर साथ दी रही थी……

जब से पूर्वी और करीम का खेल माहि ने देखा था तब से उसके छूट मई आग जो लगी हुई थी उसके …….. करीम ने माहि के होंटो को कुछ देर चूसने के बाद अपने होंटो को अलग काया और फिर झुक कर माहि के लेफ्ट आम को मुँह मई भर कर चूसना शुरू कर दया…..

आहहहा हैइए बूढ़े चुसस्स लिए मेरी बूब्स .. मेरे नवाब साहब ओह्हू ुम्हह आठ और जोर से चूस अह्ह्ह्हह ुंहःहःह….

माहि के हाथों के उंगलयां करीम के बालो मई घूम रही thee….aur करीम माहि के चुच्यों को मसलते हुए उनकी चुच्यों को चूस रहा tha….beech मई वो माहि के आम के निप्पल्स को अपने उंगलयों मई लेकर मसलता तोह माहि एक दम से सिसक uthati….madhosh होकर माहि ने अपनी टंगे उठा कर करीम के कमर पर कास ली, और अपनी गांड को ऊपर के और उठा ली..

अब करीम ने माहि के दोनों टैंगो को घुटनो से मोड़ कर ऊपर उठाते हुए अपने कंधो पर रख laya….aur dhere-dhere माहि को छोड़ने लगा.. जैसे ही करीम का बड़ा लुंड और माहि के छूट आपस मई भीड़ जाते तोह माहि के आंखे मस्ती मई बंद हो जाती…

अह्ह्ह्ह क्यों मेरे रांड कैसा लग रहा है मेरा लुंड अपनी छूट मई लेकर….

करीम ने अपनी रफ़्तार बढ़ाते हुए कहा….

ओह्ह्ह्होऊ शीइइइइइ ुंहःहःह बूढ़े अह्ह्ह पूछ मात कितना मज़ा आ रहा है….

अह्ह्ह रांड अभी तोह शुरवात hai….aaj से तेरे छूट रोज मरूंगा….. यही तेरे hi बैडरूम में ..मनीषा के सामने ……..बोल मरने दे गई ना मुझे रोज….

अह्ह्ह्ह बूढ़े …. मेरे जान… अब में आज से तेरे रखेल हु… रोज मरना मेरे …….मई अभी कभी नहीं मन करूंगी ….
 
जैसे ही करीम का मोटा लुंड माहि के छूट मई घुसता तोह माहि मस्ती मई एक दम से सिसक utathi….apni छूट के अंदर उस मोठे काळा लुंड को महसूस करके माहि का बदन अंदर तक कनाप jata…aur उसके आंखे फिर से बंद हो जाते….

अब करीम ने आपने लुंड उसके छूट से पूरा बहार निकला और अपनी पूरी ताकत इकठा की और फिर एक जोर दर देखा mara…iss बार पूरा लुंड माहि के छूट के दीवारों को चीरता हुआ अंदर घुसता चला gaya….tab तक जब उसस्के लुंड का मोटा सुपड माहि के बच्चेदानी से जाकर ना तकार्य….

hiiiiiiii…..marrrrrrrrrr… गयीईइ… मार डाला … इस बुधीइ नीबीए…

इस बार वो बहुत जोर से चिल्लाये… उसके इस आवाज से शयद कुम्ब्करण भी उठ जाये

क्या हुआ माहि … किसने मार डाला…

माहि का का पूरा बदन मस्ती मई कनाप गया…. जब माहि से बर्दास्त नहीं हुआ तोह उसने अपनी गांड को बीएड पर इधर उधर घिसते हुए सरकने लगी..

उसने करीम के फेस को पकड़ कर अपने होंटो के तरफ उसके होंटो को झुका liya….aur पागलो के तरह उसके होंटो को चूसने लगी….

माहि .. माहि … क्या हुआ…

माहि के शोल्डर को पकड़ के कोई उसे हिल्ला रहा था… उसको कुछ देर तक हिलने के बाद माहि ने अपनी आँखे खोल दी.. देखा तो सामने मनीष था.. उसका हस्बैंड… वो उसको जगा रहा था.. माहि इधर उधर देखने लगी.. लेकिन करीम कही नहीं था…

माहि क्या हो गया था तुम… कोण मरने वाला है तुम…

ओह्हो… तुम .. मनीषा…

मनीषा .. कोण मनीषा..

कोई नहीं…

क्या तुमने कोई सपना देखा क्या..

नहीं तो

तो क्या बड़बड़ा रही थी..

कुछ तो नहीं

तुम बोल रही थी..

मार डाला इस बूढ़े ने… कोण बुद्धा … माहि..

कोण budhha..Koi भी तो नहीं ..

सपना देखा क्या

शयद… तुम सो जाओ मनीष और मुझे भी सोने दो..

मॉर्निंग हो गयी है.. आलरेडी 7 बज गए है..

ओह्ह no..

उठ जाओ..

हाँ..

और ये नुदे सोई थी क्या..

माहि आपने बदन को देखने लगी थी तो वो पूरी नुदे थी.. उसके बदन पर एक भी कपडा नहीं था..

फिर वो मनीष को देख के कहने लगी..





वो गर्मी हो रही थी..

एक होते हुई..

मेरी मर्ज़ी.. अन्य प्रॉब्लम

No प्रॉब्लम ..

ऐसा कहते हुई मनीष बीएड से निचे उतर गया..

अगर पहले बताते तो मई भी नुदे सोता न..

माहि मनीष को गुस्से से देखते है..

जाओ बाथरूम mein..mera दिमाग मत खाओ.. पहले से मेरा दीमक ख़राब हो चूका है…

फिर मनीष बाथ्ररोम में चला जाता है.. माहि आपने सर को पकड़ के बैठ गए…
और सोचने लगे… मतलब ये सब मेरा सपना था.. पूर्वी का और उसके बीच जो हुआ वो देखने की वजह से .. तब से लेकर अब तक सब सपना था.. माय गॉड ..

फिर वो ड्रेसिंग टेबल के सामने कड़ी हो गयी नंगी हे.. आपने चहरे की लाली देखते हुई वो आपने आप को कहती है..

ही भगवन………… ये मैंने कैसा सपना देखा..

फिर वो आपने चेहरा आपने हाथ में लेके उसे धक् देते…

माय गॉड … ये बुद्धा मुझे पागल बना देगा…

फिर वो बीएड पे जेक नांगे hi सो गयी.. कुछ सोचते हुई..

फिर माहि उठ गयी और ब्रा पंतय पहन कर बीएड पर फिर से लेट गयी… वो सोचने lagi…Kya ये सपना tha....ye आदमी तो मुझे नींद मई भी नहीं चोर रहा है.. मेरे पीछे hi पड़ा है.. और मई भी इस काळा घटिया आदमी को आपने सपने मई कैसे देख सकती हु.. और उस को कैसे फील कर सकती hu..sapane मई भी कितना घटिया तरीके से गन्दी बात कर रहा था .. वो क्या कह रहा था.. मुझे एक बार करने दो.. तुम्हारे एक बार ….. ????? मरने दो .. कितना गन्दा वर्ड बोल रहा था... मुझे आपने आप से बोलने मई भी कितनी शर्म आती है.. क्या था वो वर्ड कक्कक्स... हहहहह... उउउउ...

कितना गन्दा वर्ड है ... छी छी...

माहि ची ची नहीं छू छू बोल ... और क्या बोल रहा था.. मुझे आपने रखेल बना के रखेगा…. चीई.. कमीना… उसकी हिम्मत कैसे हुई मुझे ऐसे बोलने की.. माहि वो सपने में बोलै था .. सपने में hi सही लेकिन उसने हिम्मत कैसे की.. फिर भी वो कैसे कह सकता है की मुझे आपने रखेल.. अपनी रांड… मई एक इज़्ज़तदार घर की औरत हु .. मई कोई उसकी रंडी थोड़ी हु..

क्या सिमरन मैडम इज़्ज़तदार घर की नहीं है क्या.. वो तो एक द्क्प है.. उनका खंडन भी इज़्ज़तदार है.. उनके हस्बैंड का कितना बड़ा बिज़नेस एम्पायर है.. तो वो इज़्ज़तदार घर की कैसे नहीं हुई.. लता भाभी और पूर्वी भी इज़्ज़तदार घर की है.. उनको भी इस कमीने अपनी रंडी बनाया hi है न माहि..

क्या आदमी है ये एक द्क्प को रंडी बना सकता है तो किसी को भी रंडी बना सकता है.. तुजे भी माहि.. तुजे भी अपनी रंडी बना सकता है.. क्या.. ये नहीं हो सकता ..मई कभी भी उसके नहीं हो सकती.. मई कभी भी उसकी रंडी नहीं बन सकती… माहि ..तू ये क्या सोच रही है.. तू ऐसा सोचना hi पाप है माहि..

माहि ने थोड़े देर सोचना बंद किया.. फिर जब फिरसे सोचना सुरु किया तब फिर से उसके दिमाग में वही आ रहा tha..Ye बुद्धा तुजे नहीं छोड़ेगा माहि.... ये अब तेरे लेके hi रहेगा... नहीं नहीं ऐसे नहीं hoga..agar ये एक्चुअल हुआ तो.. माहि तू ये क्या सोच रही है.. ये कैसे तू सोच सकती है.. तू मनीषा की वाइफ है.. फिर माहि हस्ती है…






मनीष की वाइफ है.. तू एक इज़्ज़तदार घर की बेटी और दूसरे इज़्ज़तदार घर की बहु है.. ये तू सोच भी कैसे सकती है.. ये कभी नहीं हो सकता .. ये मई कभी होने नहीं दूंगी .. ऐसे आपने आप को माहि कहती है..

सपने में hi सही पर माहि के बदन में जो आग लगी थी उसकी दाहक से अगले कुछ गान्तो तक माहि को नींद नहीं आयी .. उसका अंग - अंग सुलग रहा था. उसके जवानी की तड़प सुनती तोह सुनती किसको! पति था पर कुछ काम का नहीं था.. मनीष ने बाथ करने के बाद माहि को घर चलने को कहा पर वो गुस्से में बोली …

तुम जाओ में बाद में आती हु..

फिर मनीष वह से चला gaya..Fir कुछ देर तक उसने सोने का प्रयास किया पर सो नहीं पायी..





सुबह उठी तोह घर पर कोई नहीं था..

माहि उठी तोह देखा मनीष चला गया है .. ... खली रूम में खुद को अकेली पाकर माहि की जाँघों के बीच में सुरसुरी सी मचने लगी.. माहि ने दरवाजा अंदर से बंद किया और बीएड पर आकर अपनी जाँघों को फैलाकर पेअर पूरी तरह फैला कर लेत गयी … सोने का प्रयास करने लगी.. फिर अंगड़िया लेने लगी..

डर तोह किसी बात का था hi नहीं उसे अब... माहि लेती हुई नितम्बों को उकसाते हुए जाँघों को दूर दूर कर दिया...

हयईईई!

अपनी hi छूट के रसीलेपन और जाँघों तक पसर गयी चिकनाहट को देखते hi उसके मू से निकल gaya..aur माहि मदहोश सी हो गयी..


माहि देखकर हैरत मैं पद गयी.. छोटी सी उसकी छूट किसी बड़े पाँव की तरह फूल कर उसके पंतय से बहार निकलने को उतावली हो रही थी... मोती मोती छूट की पत्तियां संतरे की फांकों की तरह उभर कर पंतय के बहार से hi दिखाई दे रही थी... उनके बीच की झिर्री में पंतय इस तरह अंदर घुसी हुयी थी जैसे छूट का दिल पंतय पर hi आ गया हो...

माहि ने अपना हाथ नीचे ले जाकर पंतय को साइड में कर के अपनी उँगलियों से छूट की फांकों को सहला कर देखा..


फांकों पर उगे हुए काळा काळा रंग के छोटे छोटे बाल उत्तेजना के मारे खड़े हो गए.. उननपर हाथ फेरने से माहि को छूट के अंदर तक गुदगुदी और आनंद का अहसास हो गया .... छूट पर ऊपर नीचे उँगलियों को फिरते हुए माहि बदहवास सी होती जा रही थी.. फांकों को फैलाकर माहि ने अंदर झाँकने की कोशिश की.. चिकनी चिकनी लाल तव्चा के अलावा उसे और कुछ दिखाई न दिया... पर उसे अन्दर जांख कर देखना जो था...... इसलिए उसने पंतय को निकल फेक दिया..

माहि जाकर ड्रेसिंग टेबल के सामने बीएड पे hi बैठ गयी..





हाँ.. अब उसे ठीक ठीक अपनी जन्नत का द्वार दिखाई दे रहा था.. गहरे गुलाबी रंग में रंगा … .. वहां पर एक छोटा सा दाना उभरा हुआ था.. ठीक उसकी चूचियों के दाने की तरह.. उत्तेजना के मरे पागल सी होकर माहि ने उसको .. ..उंगली से छेड़ने लगी..

aaaaaaahhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaa…

हलकी सी सिसक उसके मू से निकल गयी. वहां स्पर्श करते hi माहि की आँखें बंद होने लगी.. जाँघों में हल्का हल्का कम्पन सा शुरू हो गया... वैसे ये सब माहि पहले बार महसूस कर रही थी.. सामने शीशे में देखते हुए ऐसा करने में अलग hi रोमांच और आनंद आ रहा था माहि को ..

माहि अब्ब पूरी तर्हां गरम हो चुकी thee..uski छूट के छेद कभी सिकुड़ता और कभी पेहलता…. अब्ब और बर्दास्त के बहार tha…..usne आपने ब्रा निकल के फेंक diya..kaamvihal होकर माहि ने अचानक से आपने गांड को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर उठा diya……uske एक निप्पल को आपने एक हाथ में पकड़ के खेंचने लगी … मस्ती के मीठे लहर उसके बदन मैं दौड़ गए……….

ahhhhhhhhhhaaaaaaaa……….. करिमममम……………

उसने अपनी झांगों को पूरा खोल कर पहला laya……..aur अपना एक हाथ नीचे लेजाकर आपने छूट पर रख दिया .. ….आपने नरम हांथों का सपरह अपने छूट पर पते ही माहि ने अपनी कमर हिलना बंद कर dya….aur अपने गर्दन थोड़े आगे कर के आपने hi छूट की तरफ देखने lagi….mahi बड़ी मुश्किल से अपनी छूट को आंखे खोल कर देख रही थी …..और फिर आपने आप से hi कहती है .. थरथरती आवाज मैं..

टूजी पता ही माहि तुन काया करने जा रही है…..

माहि को यकीन नहीं हो रहा था की वो क्या कर रही है .. वो आपने चहरे पर स्माइल लेट hai..…..aur आपने एक उंगली अपनी छूट के छेद पर रख दी ….

गरम गरम अपनी ृस्टि छूट के छेद पर अपनी उंगली महसूस करते ही माहि के बदन मैं बिजली कोंध गए…..

आआह्ह्हह्हह्हआआआआ… करिमममममम……………… बूढ़ी.. सेल…. तूने … मुझे ये क्या कर दिया… अछि खासी औरत को अपनी रंडी बना दिया…. मेरा क्या हाल कर दिया .. बुद्धि..

ये कहते हुए माहि ने अपनी झांगों को पहला कर घुटनो से मोड़ कर ऊपर उठा laya…..aur झाड़ से आपने उंगली को पकड़ कर अपनी छूट को ऊपर के तरफ करने लगी… और फिर आपने छूट के द्वार पर अपनी उंगली रख दी..

आपने उंगली को अपने छूट के दीवारों पर महसूस करके वो बेहाल होने लगी…… अपनी ऑंखें बंद कए हुए उखड़ी आवाज़ मैं माहि कहती है…


करिमममममममम…. मेरे राजा…. तुम यही करना चाहते हो न….

माहि बुरी तर्हां हांफ रही thee…uski चुच्यां सांस लेने से ऊपर नीचे हो रही thee….phir अचानक से जैसे एक तूफ़ान आ गया ho…..usne पालक झपकते ही, आपने एक उंगली आपने hi छूट के अन्दर दाल दी .…. माहि की उंगली उसके के गीली छूट के फैंको को फैलता हुआ ाड़नेर घुसने lagi….Dhere धीरे उंगली माहि के छूट मैं चली gayi….aur फिर माहि ने जोश मैं आकर अपनी उंगली बहार निकली और जोरदार अन्दर फिर से दाल दी

अह्ह्ह्हहए……. बुधीइये…. …… fffuckkkkkkkkk…meeeeeee… अपनी इस रांड को ुंहःहःह siiiiiiiiiiii


माहि ने सीसैट हुए कहा…..

और फिर पागलो के तर्हां उसको आगे पीछे करने लगी …… माहि को इस खेल मैं मनो एक नए चीज़ मिल गए हो……

अह्ह्ह रुक जा न karim………main ईई पाप नहीं कर sakti……….ohhhhh करीम मैं पागल हो जौन्जी रुक जाए अह्ह्ह्ह रुक जाए maaaamiiiiiiiiii… मर जाउंगी…

माहि ने dhere-dhere से अपने उंगली को बहार निकली और फिर से अंदर करने लगी….

ओह्ह्ह्हहो करीम मैं पागल हो जाउंगी फ़क ना मुजीब फ़क अपनी रखेल की …… तू क्या कहता hai…ccccchuuuu… को ओह्ह्ह्हह्हह भोत सुकून मिलाआ है ाजजज तेरे इस रखेल को …. उस की छूटत को….

हाँ… यही वर्ड था जो मेरे करीम को पसंद है..


ये कहते हुए माहि ने अपनी पैरो को मोड़ कर और उप्पर उठा लिए हवा में ……

और फिर माहि ने आपने एक बूब्स को आपने हाथ में पकड़ के उसको मसलने lagi….….neeche से वो लगतार गांड को ऊपर के और उछलते हुए अपनी उंगली को अपनी छूट के अंदर ली रही thee…..choot गीली होने के कारन उंगली आसानी से उसकी छूट के अंदर बहार हो रही थी….. …..कामवासना के अग्ग मैं जल रही माहि पहले से भोत जायदा गरम thee……wo खुद ही अपने हाथों से अपने चुच्यों के निप्पल्स को मसल रही थी…… इतने दिनों बाद ऐसा मज़ा उसे मिल रहा था ….


धीरे धीरे उसकी उंगली की गति बढ़ती गयी.. और उस वजह से उसकी सिसक बढ़ती जा रही थी

आआअह्हह्ह्ह्हह्हआआआ….

और माहि निढाल होकर बिस्टेर पर गिरी हुई थी ... उंगलियां अब उसको सहला नहीं रही थी... बल्कि बुरी तरह से पूरी छूट की फांकों समेत मसल रही थी... अचानक अजीब सी सिकियों से उसके कानों में मीठी सी धुन गूंजने लगी और न जाने कब ऐसा करते हुए माहि सब कुछ भुला कर दूसरे hi लोक में जा पहुंची....


गहरी सांसें लेते हुए माहि अपने सारे शरीर को ढीला छोड़ बाहों को बिस्टेर पर फैलाये होश में आने hi लगी थी की दरवाजे पर दस्तक सुनकर उसके होश hi उड़द गए.... वो बड़े आचार्य से दूर की तरफ देखने लगी..





वह अचानक चौंक पड़ी… वो सोचने लगी .. अब कोण आ गया सुबह सुबह…. शयद… वो … कमीना… नहीं.. नहीं.. सुबह सुबह वो क्यों .. आएगा… वो तो पूर्वी के साथ रात भर मस्ती करने के बाद अब गहरी नींद में होगा..

तभी दरवाजे की बेल्ल फिर से बज गयी…

माहि अपने खयालो की दुनिया से बहार आ गयी. माहि की छूट बुरी तरह से गीली हो गयी थी पर इस वक़्त कोई दरवाजे पर आ गया था. माहि फौरन अपनी जगह से उठती hain..Mahi ने जल्दी से कपडा ढूंढना शुरू किया .. और वह पड़ा एक ड्रेस पहन लेती है.. उसे लगा था माइड होगी.. ब्रेकफास्ट के लिए बुलाने आयी होगी.. और दरवाज़े के तरफ बिना वक़्त गंवाए चल पड़ती hain......jab दरवाजा खोल कर देखा तो सामने पूर्वी कड़ी हुई थी.





पूर्वी को देखकर माहि एक पल के चौंक जाती है.. थोड़े देर के बाद पूर्वी को देख कर माहि को टाइम का एहसास हुआ की वो सुबह से कितने देर तक अपने खयालो खो गयी थी की कब इतना टाइम हुआ उसे पता hi नहीं चला.

पूर्वी शायद अभी अभी नहायी थी.. वो बॉल पौंछते हुई वह आती है.. उसको देख के ऐसा लग रहा था माहि को की कल hi पूर्वी की सुहागरात हुई है … वही ख़ुशी पूर्वी के चहरे पर माहि को दिख रही थी.. माहि मैं में कहती है.. बात तो सही hi है.. करीम ने कल उसके साथ सुहागरात जो की है.. सुहागरात नहीं पर मजा उतना hi दिया है..

पूर्वी जब अन्दर आयी और माहि की तरफ देखने लगी तब माहि की नजर उसके उभारो पर गयी. उसके दोनों उरोज अब भी कल रात की तरह एक डैम सख्त हो रहे थे. पूर्वी को देख कर माहि को उसकी कल रात वाली सूरत याद आने लग गयी जब वो अपने चेहरे पर alag-alag तरह के भाव ला रही थी. जैसे जैसे करीम उसे धक्के लगता उसके मुंह से सिसकारियां निकलने लग जाती. उसने सिसकारियां लेते हुए अपने दोनों होंठो को एक दूसरे के साथ कास कर जकड लिया था ताकि मुंह से ज्यादा तेज आवाज न निकल सके.. हर धक्के के साथ उसके चेहरे के भाव बदल से जाते थे.

बुआ जी अभी तक रेडी नहीं हुई आप..

कल रात नींद नहीं हुई इसवजह से लेत उठी

क्या मनीष जी ने सोने नहीं दिया क्या

चुप कर बेशरम!!! कुछ भी बोलती है..

माहि का ध्यान अब भी पूर्वी की छाती पर hi था उसने हाफ कट बाजू वाला ब्लाउज पहने हुआ था. औरर ब्लाउज में से उसके क्लीवेज साफ़ नजर आ रहे थे. उसके दोनों उरोज ऐसा लग रहा था जैसे ब्लाउज कूद कर अभी बहार आ जायेगे. उसका रंग ब्लैक था.. कब उसने उसको अपनी छाती घूरते हुए देख लिया .. माहि को पता hi नहीं चला..

ऐसे क्या देख रहे हो आप बुआ जी ? आप से ज्यादा बड़े नहीं hai..hehehe

C:\Users\Admin\AppData\Local\Temp\msohtmlclip1\01\clip_image001.gif


C:\Users\Admin\AppData\Local\Temp\msohtmlclip1\01\clip_image001.gif


उसकी बात सुन कर माहि बुरी तरह से चौंक गयी.

क्या क्या क्या देख रही हु कुछ भी तो नहीं. और क्या मुझसे ज्यादा सुन्दर नहीं है.?

माहि ने लगभग बुरी तरह से had-badate हुए कहा.

बुआ जी वही जो अभी आप देख रही थी

ऐसा कहते हुए उसने अपना एक हाथ अपने उरोज पर रख दिया.

माहि के दोनों आँखे शर्म से नीचे हो गयी.

कुछ भी मत कहो पूर्वी ? ऐसा कुछ नहीं है मैं तो वो बस तुम्हारे ब्लाउज की डिज़ाइन देख रही थी.

मैंने बनाया है तो अच्छा hi होगा न ..

पूर्वी पीछे मूड के देखते है तो सामने करीम खड़ा था..





माहि आवाज सुन के आपने गर्दन ऊपर उतके देखते है…





करीम को देख के वो चौंक जाती है… उसको लगा था सुबह दरवाजे पे माइड है इस लिए उसने अच्छा ड्रेस नहीं पहना था.. पूर्वी है ये जान कर उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया था .. पर अब करीम को देख कर वो दर गयी.. माहि ने एक नाईट वाला ड्रेस पहना हुआ था.. और दुपटा भी नहीं लिया था.. करीम सर से लेकर पवन तक माहि को घूर रहा tha.....mano वो अपनी आँखों से माहि के कपडे उतर रहा ho.......mahi वहीँ खामोश कड़ी रहती हैं और नज़रें उसकी नीचे की तरफ झुकी हुई थी.......





शर्म से उसका बुरा हाल tha.......dil और भी ज़ोरों से धड़कने लगा था......

हाँ .. बुआ जी.. ये ब्लाउज िंनोने hi बनाया है..

माहि वहीँ अपनी नज़रें झुकाये चुप चाप कड़ी thi........sharam और हाय साफ़ उसके चेहरे से झलक रही thi.....karim माहि को देखकर हौले से मुस्कुरा पड़ता हैं …

माहि एक नज़र ऊपर उतके करीम के तरफ देखती हैं और वो भी धीरे से मुस्कुरा देती हैं.......





करीम सर से लेकर पवन तक माहि को घूर रहा tha.....mano वो अपनी आँखों से माहि के कपड़े उतर रहा ho.......mahi वहीँ खामोश कड़ी रहती हैं और नज़रें उसकी नीचे की तरफ झुकी हुई thi.......sharam से उसका बुरा हाल tha.......dil और भी ज़ोरों से धड़कने लगा था......

वहीँ करीम का भी बुरा हाल tha..........uska भी हाथ बार बार माहि को देख के अपने लुंड पर जा रहा था...... ये देख के माहि और शर्मा रही तह

वैसे hi पूर्वी बोल पड़ी ..

बुआ जी जल्दी निचे आ जाओ .. सब आपका ब्रेकफास्ट पे वेट कर रहे है..

मई थोड़े देर बाद ब्रेकफास्ट कर लुंगी.. आफ्टर बाथ.. आप कर लो..

ठीक है..

ऐसा कह के पूर्वी वह से चली गयी.. साथ में करीम भी..

जैसे hi वो दोनों बाहर पोर्च में आते है तब करीम पूर्वी का हाथ धीरे से पकड़कर उसे आपने और खींच लेता हैं..... और वाल से सत्ता देता है.. पूर्वी की हलकी सी सिसक निकल जाती है…


आआआह्ह्हह्हह्हआआआ…
 
Back
Top