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तब अचनाक उसने माहि को घुमा दिया और माहि के गर्दन को किश करने लगा..

माहि अब उसको कुछ कह नहीं रही थी और उसके किश का मज़ा ले रही थी..
तभी अचानक बहार भैय्या और मनीष का आवाज आ gaya.us वजह से माहि एक डैम से होश में आयी और अपने आप को करीम के चंगुल से पूरी तरह छुड़ाते हुए कहा..
देख लेना बूढ़े मैं ये साड़ी बाते मनीष और भैय्या को बताउंगी तब देखना वो तुम्हारा क्या हाल करते है ..
तेरे मनीष और भैय्या को क्या कहेगी..
माहि ने हाँ मई कहा.. लेकिन बाद मई उसे पता चला की करीम ने क्या कहा.. माहि ने उसको देखते हुई है कर देखा और फ़ौरन आपने कपडे ठीक किये और किचन से बहार आ गयी..
कमरे के अंदर आते hi माहि बीएड पर जा कर गिर पड़ी. उसकी आँखों में आंसू आ गए थे.. उसे बोहोत बुरा लग रहा था की मनीष की बीवी होने के बाद भी उसने अपने शरीर को उसे छूने दिया. बीएड पर उसका बदन बुरी तरह से thar-thar काँप रहा था. माहि को अभी भी अपने दोनों नितम्बो के बीच में उस करीम की ऊँगली अपने गुदा छिद्र पर महसूस हो रही थी.
माहि को यकीन करना मुश्किल हो रहा था की उसके साथ उसके hi घर में ( भैय्या का घर था wo..)Karim ने ये सब कुछ किया और तो और माहि भी उसकी हरकत से अपने आप पर काबू नहीं रख पायी. माहि मन hi मन करीम को गाली देती जा रही थी.
इधर करीम किचन से चुपके से बहार गर्दन मई आ जाता है और घर जाने का सोचता है तभी उसे पद्मा देखती है.. पद्मा उसे देखते hi आवाज देते है..
करीम जरा रुकना
तब करीम पद्मा की तरफ देख के कहता है
बोल क्या hai..muje घर जाना है..
तुजे मुझे कुछ पूछा न था
हाँ पूछ
मुझे ये यकीं करना मुश्किल हो रहा है की तूने अभी तक 2-3 बार hi पूर्वी मालकिन को छोड़ा है
करीम हँसाने लगता है
है मत सच बता.. 2-3 बार की चुदाई मई कोई औरत प्रेग्नेंट नहीं बन सकती..
2-3 नहीं 4-5 बार
ठीक है 4-5 बार मई कैसे पॉसिबल है .. अरुण शेठ ने उससे ज्यादा छोड़ा होगा उन 1 साल पाई
हाँ छोड़ा होगा
फिर वो तब प्रेग्नेंट नहीं हुई और अब कैसे हुई
मुझे क्या पता
तुजे नहीं पता तो किसे पता होगा
तूने अभी थोड़े देर पहले hi कहा न
क्या
तू छोड़ता hi ऐसे की 2-3 चुदाई मई किसी को भी प्रेग्नेंट बना देगा
वो कहने की बात thi..tu सच बता
तब करीम हसने लगा
बता न
तुजे सच सुनना है
हाँ माय डार्लिंग
सच ये है की हम 4-5 दिन सात मई थे
मतलब
साथ मई थे मतलब साथ मई थे अब इसका मतलब क्या बताऊ
साथ मई थे मतलब यहाँ
यहाँ नहीं
फिर कहा
आपने घर
क्या?? करीम नगर मई
हाँ
क्या बाख रहा है.. पूर्वी मेमसाब और आपने बस्ती मई.. और वो भी तेरे घर मई
हाँ
और
वो भी 4-5 दिन
पद्मा हस्ते हुई कहते है
हाँ
कुछ भी मत फेक
यकीं नहीं है
हाँ.. वो तो कितने क्लीन है.. और अपनी बस्ती कितने गन्दी है.. गन्दगी से वो बहुत नफरत करती है
करीम से वो बहुत ज्यादा प्यार करती है..
वो पता है
फिर भी तू शक कर रही है
यकीं नहीं होता
हाँ
रानी को पूछ
मतलब उसको पता है
हाँ वो तो हमारी सेवा कर रही थी..
मुझे नहीं बताया और उसे बताया
वो अचानक हुआ
गुस्से से पद्मा कहती है
तेरा सब अचानक hi होता है..
नाराज़ मत हो.. वो पूर्वी वह आयी और वह सुनीता ने देख लिया इसलिए उसे बताना पड़ा
अच्छा!! और तेरे घरवाले
वो शादी के लिए गए थे न
ये सब कब हुआ
जब वो मुंबई गयी थी
हाँ.. मालिक के साथ..
उसके बाद
उसके बाद कब
दूसरे दिन hi
कैसे हुआ ये
क्या हुआ वो मुंबई से आयी रात को
हाँ रात को लेट आये और दूसरे दिन मायके चली गयी.. किसी फ्रेंड के घर शादी है बोलके
वो कही नहीं गयी थी मेरे पास थी
क्या??
कैसे तैयार किया तूने उसे और उसको ये शादी वाला आईडिया तूने दिया ताकि वो दोनों मालिक को चुटिया बनाये..
शादी वाला आईडिया मेरा नहीं उसका था..
मतलब
क्या हुआ मुंबई से आने के दूसरे दिन मई नहीं आया ये जानकर उसने मुझे कॉल किया.. तो मैंने कहा मई बीमार हु आ नहीं पाउँगा.. उसने पूछा क्या हुआ तब मैंने सब बता दिया..
क्या बताया तूने
एक्चुअली रात मई मैंने थोड़े ज्यादा दारू पि थी और शायद दारू ख़राब थी.. सर बहुत दुःख रहा था.. मुझे ॉमिटिंग भी हुई.. बदन दुःख रहा था..
तूने ये सब बताया
पागल हो गयी है क्या ये बताने को
तो
उसने कॉल किया तब मैंने कहा सरदर्द कर रहा है तब उसने कहा क्या हुआ तब मैंने कहा शयद फ़ूड पोइज़निंग हुई.. कल बहार का खाया था.. उसने कहा बहार का क्यों कोई पार्टी थी क्या तब मैंने कहा घर वाले शादी मई गए है तब उसने कहा ओह्ह ी सी.. मई ी जाते हु तुम्हारे सेवा करने..
और वो आ गए..
हाँ साथ मई एक डॉक्टर भी ले आयी थी .. वो डॉक्टर भी चूतिया था मैंने जो बोलै उसने मन.. उसने गोलिया और बूटले लिख के दी.. पूर्वी ने बहार जेक वो दवाइया लायी..
और तुमने उसकी जैम क लिए
फिर क्या था अगले 5 दिन दिन रात chudaye..wo खाना बनती निचे किचन मई.. हेल्प के लिए रानी थी मई उप्पर सोता खाना खता दारू पिता उसको छोड़ता
उसके होते हुई दारू पि
मई डरता हु क्या उससे
तो क्या किया
दारू को उसने पहले तो विरोध किया गुस्सा करने लगी.. तुम तो जानती हो वो कितने ग़ज़ल है..
हाँ जानती हु फिर कैसे कण्ट्रोल किया
संब्जा बजा के..
कैसे
वो गुस्सा करती तो मई उससे प्यार से पेश आता.. उससे उसके तरीके से छोड़ता..
फिर मान जाती वो
हाँ थोड़ा पीओ बोलती
अच्छा कण्ट्रोल किया तूने उस करमजली को
एक दो बार उसको पिलाये भी
क्या उसने दारू पि
नहीं तुक दी
अच्छा दारू पाइक उसे छोड़ता था क्या
एक दो बार छोड़ा
नहीं नहीं करती पर मान जाती
फिर
फिर क्या था बाद मई मेरा पैक वो खुद hi बनाने लगी
ये तो बहुत बड़ी बात हो गयी
उससे और एक बड़ी बात हो गयी
क्या
रानी ने उसे नॉन वेग बनाना सीखा दिया
उसने सिख ली
हाँ
नॉन वेग से तो वो बहुत नफरत करती थी
करीम को जो पसंद उसे वो पसंद करेगी अब
खाया क्या उसने
खाने के लिए मैंने फाॅर्स किया पर उसने ये बोल के ताल दिया की मई तुम आपने हाट से बनके खिलाऊंगी पर खाउंगी नहीं
तुमने तो उसे पूरा बदल दिया
हाँ फिर क्या
मतलब इस घर का वारिस आपने करीमनगर मई बना है
हाँ ऐसे hi..
करके हस्ते हुई वह से चला जाता है..
श्याम का वक़्त …
हॉल मई कान्तिशीथ , मनीष और पूर्वी का हस्बैंड अरुण बैठे थे ..बाते कर रहे थे… तब माहि को मनीष आवाज देता है..
माहि घर जाना नहीं है क्या…
तब माहि ऊपर से hi.. कहती है..
हाँ जाना है न…
कान्तिशीथ - माहि और मनीष अब तुम खाना खा के hi जाओ न
माहि- नहीं रुकना है .. अब मेरा यहाँ रुकना किसी को पसंद नहीं है
कान्तिशीथ- किस को पसंद नहीं है..
किचन मई से पूर्वी और लता को आवाज देके काँटी शेठ बुला लेता है..
कान्तिशीथ- आप दोनों ने माहि को कुछ कहा..
लता – नहीं तो
पूर्वी- नहीं पापाजी.. क्या हुआ..
मनीष- भैय्या .. इस की बात को सीरियस मत लो आप.. मैंने hi इसे मजाक किया था..
लता- क्या मजाक किया था आपने..
माहि- मई यहाँ हमेशा पड़ी रहती है.. ये कहा था..
इस बात पर अरुण और कान्तिशीथ हँसाने लगते है..
अरुण - सच तो कहा है अंकल ने..
माहि- इसी लिए तो मई आज से यहाँ रुकोगी नहीं..
कान्तिशीथ- आपने बुआ से ऐसे बात कोई करता है क्या अरुण..
अरुण- सॉरी पापा…
कान्तिशीथ- नहीं नहीं.. माहि ये तो तमारा hi घर है .. अरुण ने मज़ाक मई कहा है.. इसका बुरा क्यों मानती हो…
माहि- मनीष ..चलो… मुझे घर मई जेक और भी कुछ काम है..
कान्तिशीथ- गुस्सा मत हो माहि … रुक जाओ आज की रात..
माहि कुछ नहीं बोलती और चलने लगाती है..
अरुण- ी ऍम सॉरी.. बुआ.. काम से काम खाना खाके जाओ..
माहि- मनीष तुम आना है की नहीं…
वो पीछे मुद के मनीष की तरफ देखकर कहने लगाती है .. और वैसे hi पीछे दरवाजे की तरफ चलने लगाती है.. दरवाजे मई से करीम अन्दर आ रहा था.. माहि पीछे देखकर चल रही थी इस आज से वो और करीम एक दूसरे को टकरा जाते है....
कान्तिशीथ- ारे ..अरे माहि पीछे देखो..
माहि को लगा कोण बत्तमीज नौकर है जिसने मुझे धक्का दिया है.. वो गुस्से मई hi घूम कर उसपर हाथ उठनेवाली थी की सामने करीम को देखकर आपने हाथ निचे कर लेती है.. और गुस्से मई कहती है..
सामने देखकर चल नहीं सकते क्या..
मैडम.. आप hi सामने देखकर नहीं चल रही थी.. पीछे देख रही थी और आगे चल रही थी..
मई पीछे देख रही थी.. मुझे क्या पता था तुम सामने से आ रहे हो.. तुम तो सामने देख रहे थे न.. तुम पता नहीं था क्या की मई सामने से आ रही हु.. तुम वही खड़े नहीं रह सकते क्या..
मई वही खड़ा था मैडम.. आप hi आकर मुझे तकार गयी ..
बत्तमीज आदमी.. मुज पे hi ब्लामे लगा रहे हो..
कान्तिशीथ- जाने दो अक्रम.. माफ़ी मांग लो मैडम से..
माहि पीछे घूम के कान्तिशीथ को देखते है..
जाने दो का क्या मतलब है भैय्या..
कान्तिशीथ- कुछ नहीं मई.. करीम को कह रहा था.. माफी मांग लो..
जैसे hi माहि करीम को देखने लगाती है… तब कान्तिशीथ करीम को इशारे से कहती है.. गुस्से मई है वो.. माफ़ी मनंग लो उससे..
माहि- भैय्या मैंने पहले hi कहा था आप से ये इंसान कितना कमीना hai..lekin आप मानते hi नहीं हो… ये बहुत चालू चीज़ है..
करीम- सॉरी.. मैडम.. माफ़ कर दो.
करीम मैं मई सोचता है… साली बहुत ग़ुस्सेवाली है.. गुस्से मई कही इसने सबकुछ या आधा अधूरा कुछ बता दिया तो आफत हो जायेंगे…
लता- उसने अब माफ़ी मांग ली है न.. चोर दो उसे..
माहि मैं मई कहती है.. साली हरामी हमेशा आपने यार की साइड लेते है..
माहि- भाभी हमेशा आप इस बूढ़े की साइड लेते हो.. क्या मांजरा है..
मनीष- ारे कुछ मांजरा नहीं है.. आदमी सीनियर है.. उम्र से.. और तजुरबा भी काफी है.. इसलिए भाभी ने कहा होगा..
माहि - हाँ.. तजुरबा काफी है इसको .. बहुत सरे चीज़ो का.. एक नंबर का कमीना इंसान है..
कन्तिष्ठ – जाने दो माहि.. अब उसने माफ़ी मांग ली है..
माहि- भैय्या.. आप नहीं जानते .. आप के पिट पीछे इस घर मई क्या क्या चल रहा है..
कान्तिशीथ- क्या क्या चल रहा है ..
लता अब बहुत डर जाती है.. उसे अब पूरा यकीं हो गया था की माहि ने दोपहर मई मुझे और करीम को एक साथ देख लिया है और अब ये सबकुछ बता देगी.. उधर पूर्वी को दर लगाने लगा की माहि बुआ ने मुझे और करीम को एक साथ देख तो लिया नहीं न.. और इधर करीम को लग रहा था की साली ये सब सच न बता दे कान्तिशीथ को.. साला ये तो मुझे मार hi डालेगा… इस बात पर करीम की फटने लगी थी की अब आगे क्या होगा.. उधर कान्तिशीथ को लग रहा था की .. शयद करीम ने घर से कुछ चुरा लिया होगा.. इसकी बात hi माहि कर रही थी .. और वह खड़े अरुण और मनीष को कुछ पता नहीं चल रहा था की माहि किस के बारे मई बात कर रही है..
माहि लता और पूर्वी की तरफ देख रही थी.. बीच बीच मई कान्तिशीथ और करीम की और देख रही थी.. करीम आँखों से चुपके से माहि को ईशार कर रहा था …
चुप करो तुम..
KantiSheth.—kya चल रहा माहि.. मेरे पेटपीचे यहाँ इस घर मई..
काँटी शेठ के ऐसे कहने से लता और पूर्वी और डर जाते है…
माहि- पूर्वी ..तुम पता है..
पूर्वी और ज्यादा डर जाती है…
कान्तिशीथ- पूर्वी बीटा तुम पता है.. तुम बता दो..
पूर्वी को तो अब पसीना आने लगत है..
कान्तिशीथ- बीटा .. तुम पता है..
पूर्वी डरते हुई..
पूर्वी- बुआ .. किस बारे मई बात कर रही है .. मुझे पता नहीं है..
कान्तिशीथ- माहि बता दो तुम..
माहि- लता भाभी को पूछ लो न आप..
डर के मारे लता की हालत अब बहुत ज्यादा ख़राब हो रही थी..
कान्तिशीथ लता के तरफ देखने लगता है..
माहि - भाभी आप को पता hi होगा न..
लता डरते हुई..
लता- मुझे कैसे पता होगा
आप किस बारे मई बात कर रहे हो..
करीम को लगा अब ये साली लता की जान ले लेगी..
अरुण- बुआ बता दो न.. क्या चल रहा है..
माहि चहरे पर अपनी कातिल हसी लेट हुई बड़े अड्डा के साथ कहती है..

माहि- बताती हु..
लता और पूर्वी अब बहुत ज्यादा डरने लगाती है.. वो दोनों भगवन को याद करने लगाती है..
माहि करीम को एक बार देखते है..
माहि- इस घर मई बहुत कुछ चल रहा है.. आप के पीटपीचे भैय्या..
कान्तिशीथ- क्या क्या चल रहा है .. माहि सीधा सीधा बता दो न..
माहि गुस्से मई बोल पड़ती है..
माहि- मुझे क्यों पूछ रहे हो.. लता भाभी को पूछ लो न.. की वो दोपहर को क्या कर रही थी..
कान्तिशर्त अब बहुत ज्यादा कन्फूस हो जाता है.. उसे अब लग रहा था की लता का क्या कोई चक्कर है.. वो गुस्से मई बोल पड़ता है..
कान्तिशीथ- माहि … अब मुजसे रहा नहीं जा रहा है.. लता दोपहर को क्या कर रही थी.. इससे तुम क्या कहना चाहती हो..
लता को अब बहुत ज्यादा डर लगाने लगता है.. जब कान्तिशीथ का चेहरा माहि की तरफ होता है तब लता माहि को धीरे से माफ़ी मांगने का इशारा करती है..
कान्तिशीथ- बताओ माहि.. तुम कहना क्या चाहती हो.. सीधा सीधा बता दो.. ऐसे पहलेया मत बजाओ..
माहि आपने भैय्या की तरफ देखते हुई कहती है..
माहि- लता भाभी नहीं बता पा रही है वो दोपहर को कहा थी तो इस बूढ़े टेलर को आप पूछ लो..
बूढ़े टेलर का नाम लेते hi लता और ज्यादा डरने लगाती hai..aab उसका रोना hi बाकि था.. सब बाते छोटे माँ पर चल रही है ये सुनकर पूर्वी को एक पल अच्छा लगा.. वो सोचने लगाती है माहि बुआ को मेरे और करीम के बारे मई कुछ भी पता नहीं है.. लेकिन अगले hi पल वो सोचने लगाती hai..bua ने ऐसा क्यों कहा की लता माँ कहा थी वो ककरीम को पूछ लो .. मतलब करीम और लता माँ का कुछ है.. साला कमीना ..इसका एक से मैं नहीं बरता .. मई.. शालिनी भाभी और अब लता माँ.. हरामी कही का… उधर करीम सोचने लगता है.. साली ये आज मेरे जान लेके रहेंगे.. कामिंणी.. कही की.. अब कान्तिशीथ मुझे जान से मार hi डालेगा….
तीसरी तरफ कान्तिशीथ सोचने लगता है.. लता दोपहर को कहा थी ये करीम को कैसे पता होगा.. मतलब लता और करीम … सेल इस कमीने को मई अब गोली hi मार दूंगा..
कान्तिशीथ- तुम्हारे कहने का क्या मतलब है माहि.. लता दोपहर मई कहा थी वो इस हरामी को कैसे पता होगा…
करीम पीछे से धीरे से बोलता है.. करीम माहि के पीछे था पर बहुत क्लोज खड़ा था..
करीम- जाने दे न माहि..
माहि भी धीरे से बोल पड़ती है.. मू पाई हाथ रख कर..
माहि- फैट गयी क्या..
उदार लता माहि को बार बार माफ़ी मांगने का इशारा कर रही थी..
कान्तिशीथ अब जोरसे चिलता है..
कान्तिशीथ – बता दो माहि..
माहि चहरे पद थोड़ी हसी आ जाती है ..
माहि- आप भी न भैय्या.. घर मई दोपहर को अकेले मई और लता भाभी थी.. मई थो उप्पर सो रही थी.. और ये बुद्धा हॉल मई परेड का मेज़रमेंट ले रहा था.. तो इस बूढ़े को hi पता होगा न की भाभी दोपहर को क्या कर रही थी..
माहि की बात सुनकर लता और पूर्वी की जान मई जान आ गयी..
और उदार करीम की भी ..
करीम मैं मई कहता है ..साली हरामी ..डरा दिया मुझको.. साली को सबक सीखना पड़ेगा …
कान्तिशीथ की भी जान मई जान आ गयी.. .. फिर भी कान्तिशीथ को थोड़ा शक था..
कान्तिशीथ – फिर भी तूने कैसे कहा की मेरे पीछे घर मई कुछ गलत हो रहा है…
माहि- गलत कब कहा मैंने.. भैय्या..
ऐसा कह के वो चलते हुई लता के पास जाकर कड़ी हो जाती है.. लता अब भी दर रही थी.. निचे गर्दन करके देख रही thi..uske उप्पर गर्दन उतने की हिम्मत नहीं हो रही थी..
कान्तिशीथ – तो क्या कहा था तूने..
माहि- मैंने कहा था आप के पीटपीचे इस घर मई बहुत कुछ चल रहा है..
कान्तिशीथ का शक अब तक ख़तम नहीं हुआ था..
काँटी शेठ- ये बहुत कुछ क्या है..
माहि हस्ते हुई कहती है..
माहि- देखो न भैय्या.. मैंने कल hi मेरे नई वाच यहाँ राखी थी.. अब वह नहीं hai..chori हो गयी .. घर की मालकिन होने के नाते लता भाभी का घर के चीज़ो पाई ध्यान होना चाहिए न.. मैंने इस नाते बहुत कुछ कहा..
मनीष- कोण कर रहा है चोरी..
माहि हस्ते है… और थोड़ा आगे हो जाती है.. करीम उसके पीछे था..
माहि- मुझे क्या पता
माहि के ऐसे कहते hi करीम माहि के पिट पर धीरे से चिमटे काट देता है.. माहि और आगे हो जाती है…
कान्तिशीथ- ऐसा क्या…
ऐसा कहके कान्तिशीथ की जान मई जान आ गयी..
माहि- आप को क्या लगा..
कान्तिशीथ कुछ नहीं कहता…
माहि लता के गर्दन पाई अपनी बहे डालता हुई कहती है..
माहि- क्या आपको अपनी बीवी पाई शक तो हुआ नहीं न.. भैय्या…
तब कान्तिशीथ जल्दी मई कहता है..
कान्तिशीथ- नहीं.. नहीं.. मई कैसे लता पाई शक कर सकता हु..
माहि- हाँ.. मई भी वही कह रही हु.. भाभी आप को कैसा धोका दे सकती है.. भाभी थोड़ा hi एक्सट्रॉमार्टिकल अफेयर रख सकती है..
लता माहि को देखने लगाती है..
माहि- और वो भी इस बूढ़े के साथ .. नहीं नहीं.. ऐसा कैसे भाभी कर सकती है…
मनीष- माहि तुम क्या बोल रही हो.. कुछ तो शर्म करो..
तभी करीम धीरे से बोल पड़ता है..
करीम- कामिनी कही की.. आज तो इसने मेरे वाट hi लगा दी.. इसको तो सबक सीखना hi पड़ेगा..
करीम की आवाज कान्तिशीथ सुन लेता है..
काँटी शेठ- क्या कहा तूने..
Manish-Mahi को कहा की तुम क्या बोल रही हो ..
कान्तिशीथ- मनीष तुम नहीं इस करीम को बोल रहा हु..
करीम अब डर जाता है.. सेल इस हरामी ने सुन तो नहीं लिया न…
करीम- कुछ नहीं .. शेठ…
शेठ- कुछ तो कहा तूने..
करीम- यही की मई ऐसे पाप के बारे मई सोच भी कैसे सकता हु..
मनीष- वही तो ..करीम और लता भाभी के बारे मई ऐसा कैसा सोच सकती हो माहि तुम..
अरुण- हाँ .. बुआ…
माहि- मैंने क्या गलत किया.. मैं तो यही कह रही हु की भाभी ऐसा नहीं कर सकती ..
अरुण- बुआ .. आप ने ऐसा कैसे सोच लिया.. ये यहाँ कुछ हो सकता है.. छोटी माँ ऐसे नहीं है..
सब की ऐसे बात सुनकर लता रोने लगाती है.. और भागते हुई उप्पर आपने कमरे मई जाती है..
शेठ- जाने दो.. इस विषय को यही चोर दो.. करीम तुम यहाँ क्यों आये थे..
करीम- थोड़े पैसे मिल जाते तो ..
शेठ- हाँ.. हाँ.. फिर वो पूर्वी की तरफ देखता है और कहता है..
शेठ- बहु.. इसको तोड़े पैसे दे दो..
करीम पूर्वी के आगे आकर खड़ा हो जाता है..
करीम उसको अदब कह के सलाम करता है.. पूर्वी भी उसको नमस्कार करती है.. अब कान्तिशीथ भी वह से चला जाता है.. करीम पूर्वी के पास चला जाता है… मनीष बाथरूम मई जाता है… अरुण को किसी का कॉल आता है तो वो उनसे बात करने लगता है.. माहि वह सोफासेट पाई बैठ जाती है..
अब पूर्वी करीम को देखकर धीरे से आपने पैठ पाई हाथ घूमने लगती hai…aur धीरे से कहते है..
बच्चा है...
करीम- किसका है..
पूर्वी गुस्से से कहती है..
किस का है क्या पूछ रहे हो.. मई क्या तुम्हारे जैसे हु.. यहाँ वह मू मरते .. ये तुम्हारा बच्चा है..
ऐसा कहके पूर्वी उसको स्माइल करती है..
करीम- मैडम जी आपने खुशखबरी की कोई तोफा नहीं दिया ..इस गरीब को..
करीम थोड़ा जोर से बोलता है.. माहि आपने मोबाइल में कुछ पद रही thi..Karim के ऐसे कहने से माहि करीम के तरफ देखने लगाती है.. पूर्वी एक बार माहि की तरफ देखने लगते है.. माहि उन्दोनो की तरफ hi देख रही है ये जानकर पूर्वी कुछ नहीं बोलती है.. माहि फिर से मोबाइल मई कुछ देख रही है ये जानकर पूर्वी धीरे से बोल पड़ती है..
पूर्वी- ये तोफा तो आप की वजह से मुझे मिला है.. मांगिये आप को क्या तोफा चाहिए.. आपको हमसे..
माहि को कुछ खुसुर फुसुर की आवाज आती है.. इसलिए वो उनके तरफ देखने लगती hai…Purvi माहि को आपने तरफ देख रही है ये देखकर कहती है..
पूर्वी- सब नौकरो के साथ आप को भी तोफा मिलेगा.. अरुण शेठ की तरफ से..
माहि अब फिर से आपने मोबाइल मई बिजी हो जाती है..
करीम धीरे से बोल पड़ता है..
मुझे तो स्पेशल तोफा चाहिए
मई तो पूरी आप की हु.. जब चाहिए ले लो.. जो चाहिए वो..
फिर आज रात आता हु..
आ जाओ ..लेकिन मेरे पास .. लता माँ के पास मत जाओ..
और पूर्वी थोड़े हँसाने लगाती है..
ऐसा कुछ भी नहीं है ..
मई तुम अच्छे से जानती हु.. बुआ ने कुछ न कुछ देखा hi होगा..
नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है..
तब तक वह अरुण आ जाता है..
अरुण- करीम को पैसे दिए क्या..
पूर्वी- हाँ दे दिए..
करीम- थैंक्स अरुणशेठ और पूर्वी बहुरानी जी..
माहि अब तक वही सोफे पाई बैठे हुई थी..
करीम- चलता हु..
ऐसा कहके करीम एक बार माहि को देखता है .. माहि उसको गुस्से से देखती है.. नखरे से चेहरा घुमा लेती है.. और वह से उठ कर दूसरी और चली जाती है..

करीम वह से जाता है.. दूर मई जेक पीछे पलट के पूर्वी को देखता है.. पूर्वी उसको देख के स्माइल करता है और आपने पैठ पाई हाथ रख कर घुमा रही थी और उधर पूर्वी को देख कर करीम आपने लुंड पाई हाथ घुमा रही थी.. ये सब माहि देखती है.. माहि को कुछ समाज मई नहीं आ रहा था.. वो सोचने लगाती है.. क्या इस बूढ़े के साथ पूर्वी का भी है kya…Mahi को लग रहा था की ये तो पूर्वी के साथ भी होगा तो.. वो सोचने लगी… सिमरन मैडम.. उनके बाद लता भाभी… पूर्वी और मई… मई कैसे .. मैंने तो उसको सिर्फ.. सिर्फ ..आपने पास आने दिया था.. और कुछ नहीं.. कुछ करने hi नहीं दिया न.. usko..fir .. मई कैसे .. तू भी है माहि.. उसने तुझको किश किया.. तेरे आम दबा दिए.. तू भी है.. अगर मई शामिल भी नहीं हु.. तो भी 3 लेडीज.. मेरे सामने.. और पीछे कितने होंगे.. ये आदमी है क्या घोडा.. यही सोचते हुई माहि हॉल से बहार आ गयी… सामने करीम अभी भी खड़ा था.. वो अब तक आपने घर नहीं गया था.. वो गेट पाई वॉचमैन से बाते कर रहा था.. माहि की नज़र उसपर पड़ते है.. माहि दूर पाई खड़े रहकर करीम को hi देखने लगाती है.. करीम गेट के वॉचमन को कुछ समाज रहा था.. वॉचमन न न मई गर्दन हिला रहा था.. माहि को कुछ समाज नहीं आ रहा था की करीम वॉचमन को क्या समाज रहा है.. फिर करीम वॉचमन को कुछ पैसे देता है.. 500 - 500 के कुछ नोट .. वॉचमन न न कहते हुई वो नोट आपने जेब मई दाल देता है.. करीम उसके शोल्डर पर हाथ रखकर जैसे उसे धनवाद कहता है.. तब माहि को बात समाज आ जाती है.. इस सेल ने कुछ काम दिया होगा उस वॉचमन को.. पैसे देके वो उनसे काम निकल रहा है.. बहुत चालू है ये बुद्धा.. ऐसा माहि सोचते है..
करीम अब घर जाने के लिए गेट से जैसे hi आगे बढ़ाता है वैसे hi वो पीछे मुद के एक बार देखता है तब उसे माहि दिख जाती hai..Mahi को देखते hi वो माहि के तरफ आ जाता है..
करीम- कैसे हो मैडम..
माहि- हरामी.. अभी तक नहीं गया तू..
करीम- जाने का तो मैं hi नहीं कर रहा है माहि..
अपनी गन्दी जुबान पाई मेरा नाम मत ले हरामी..
करीम हँसाने लगता है..
अब है रहा है.. थोड़े देर पहले तू रोने की हालत मई था..
वो तो सही बात है.. तूने मुझे डरा hi दिया था… लता की हालत तो रोने जैसे बनाये दी तूने आज..
माहि की ऐसे तारीफ करीम ने करते hi माहि का चेहरा खिल उठता है..
वो उसकी तरफ hi देखने लगाती है आपने बाल संवारते हुई.. ऐसा क्यों किया तूने.. माहि..
तेरे को सबक सीखने के लिए..
सबक सीखा दिया क्या फिर..
आगे से मेरे नज़दीक आया तो इससे बुरा हाल कर दूंगी तेरा..
अच्छा बाबा.. तेरे पास नहीं आऊंगा..
उस वॉचमन को क्या कह रहा था तू..
करीम सोचता है.. साली ने देख लिया शयद..
कुछ तो नहीं..
ज्यादा स्मार्ट मत बन .. मैंने सब देख लिया है.. तू उसे कुछ बता रहा था जो वो सुन नहीं रहा था.. बाद मई तूने पैसे देने के बाद उसने सुन लिया..
वो मर्दोंवाली बात है माहि.. तू क्यों ध्यान दे रही है..
मुझे उल्लू मत बना... सीधा सीधा बता .. उसको किस काम के लिए पता रहा था..
कुछ भी तो नहीं..
बता नहीं तो उस वॉचमैन को बुला लू क्या..
ारे कुछ नहीं.. रात को दारू की व्यवस्था कर रहा था.. बस और कुछ नहीं..
सही बोल रहा है या झूठ..
अब तुज से झूठ बोल के क्या होगा.. तू तो मेरे बारे मई सब कुछ जानती है न.. वैसे तेरे नज़र किसी लोमड़ी से काम थोड़ी hi है..
करीम थोड़ी उसके तारीफ करता है..
एक बात बता…
हैं ..पता है मुझे..
क्या पता है तुजे..
यहाँ आके बैठ ..फिर तुजे बताता हु..
फिर करीम और माहि वह एक कार्नर मई जेक बैठ गए.. एक बेंच पर..
अब बता ..क्या पता है तुजे…
यही की तू मुजसे क्या पूछने वाली है..
क्या पूछनेवाली हु मई..
पूर्वी के बारे मई…
तुजे कैसे पता..
मई लेडीज की आँखों मई देख के बता सकता हु की वो क्या सोच रही है..
ज्यादा होशियारी मत कर.. और सच सच बता.. विथाउट अन्य फ्लेर्टिंग..
तू जो सोच रही है ऐसा कुछ भी नहीं है..
मतलब पूर्वी का और तेरा कुछ भी नहीं है….
फिर वो तुजे देख कर है क्यों रही थी.. और तुम दोनों धीरे से हाल मई क्या खुसुरफुसुर कर रहे थे..
तेरे वजह से..
मेरे वजह से.. मतलब..
तूने मेरे और लता के बारे मई जो कुछ अदा अधूरा बता दिया था इस वजह से उसे शक हो गया था की लता और मेरे बारे मई कुछ चल रहा है..
क्या तू पूर्वी से फ्लेर्टिंग कर रहा था..
नहीं तो..
माहि कुछ सोचने लगाती है..
जलन हो रहे है क्या तुजे..
नहीं तो…
फिर..
शक हो रहा है तुज पर..
अभी सब सच तो बता दिया तुजे माहि मैंने .. अब शक की क्या बात है..
शक की ये वजह है की वो तुजे देखकर आपने पैठ पर हाथ घुमा रही थी और तू आपने उसपर हाथ घुमाकर उसे hi देखे जा रहा था..
तू क्या हम पर hi ध्यान दे रही थी..
मैंने जो कहा वो सच है न…
नहीं..
मैंने देखा था..
क्या कहा तूने.. मई पूर्वी को देखकर वह हाथ घुमा रहा था..
हाँ..
कहा पर..
माहि निचे देखने लगाती है.. शर्माकर कहती है..
पंत पर..
पंत पर कहा..
मुझे नहीं पता..
करीम माहि का हाथ पकड़ लेता है और कहता है..
बता न..
मुझे नहीं पता..
माहि ऐसा कहके झट से करीम के हाथ को जतका देते है.. और वह से उठकर दूर पाई कड़ी रहती है.. अब दोनों एक दूसरे को देख रहे थे..
तुजे क्या लगता है की .....वो बच्चा मेरा है..
माहि हाँ मई गर्दन हिलती है..
करीम माहि के पास आने लगता है .. वैसे hi माहि अन्दर हाल मई चली जाती है.. और अन्दर से हाल का दूर लॉक कर लेते है..
थोड़े देर बाद करीम आपने घर चला जाता है.. दूर लॉक करते hi माहि के चहरे पर हलकी से स्माइल आ जाती है ..और आपने आप को कहती है..
कमीना .. कही का..
बहार करीम आपने घर जाते वक़्त यही सोच रहा होता है की ये फटका कब हाथ मई आ जय.. वो आपने आप को समजनाए लगता है की .. आ जाएगी करीम .. माहि भी तेरे लुंड की घुलम हो जायेगे.. पहले तो तुजसे बात भी नहीं कराती थी अब बाते तो करने लगी है .. जल्द से जल्द तुजे अब ये सोचना है आगे कैसे बड़ा जय.. अब इसके चहरे पर उतना गुस्सा नहीं होता है तेरे को देख कर .. कभी कभी तेरे बात सुनकर है भी पड़ती है.. करीम जाने दे चोर दे.. अब थोड़ी दारू लगा le..aur सो जा.. रात को तुजे तेरे पूर्वी के पास जो जाना है…
उदार रूम मई आते hi मनीष माहि को कहता है..
चलो माहि .. घर चलते है..
माहि मनीष की बात को सुनते hi नहीं है.. उसके दिमाग मई करीम hi चल रहा था.. करीम के बारे मई सोचकर आपने आप hi उसके चहरे पर स्माइल आ जाती है.. आपने पति के तरफ न देखकर और उसके बात न सुनकर माहि बाथरूम मई चली जाती है… मनीष को आचार्य होता है के माहि ऐसा क्यों कर रही है.. वो क्या सोच रही होंगे…
बाथरूम से माहि बहार आने के बाद मनीष उसे फिर से कहता है..
चले
माहि उसे देखते है..
कहा
आप घर..
माहि कुछ देर सोचते है..
नहीं …
क्यों.. थोड़ी देर पहले तो तुम hi कह रही थी न..
हाँ .. कह रही थी.. पर भैय्या और अरुण ने इतना रिक्वेस्ट किया तो आज रुकते है यहाँ..
खाना खाके जाते है फिर..
नहीं.. नहीं.. आज रात यही रुकते है और सुबह hi चले जाते है..
मनीष कुछ नहीं कहता है..
तुम कुछ काम है क्या घर पाई अब
नहीं नहीं .. अब जेक सोना hi है घर पाई
तो यही सोते है मनीष ..ा ुर सुबह चलते है..
ठीक है.. माहि..
थोड़े देर बाद माहि घर के सभी लोगो के साथ खाना खाने लगाती है… वो बड़ी प्यार से पूर्वी की तरफ देखने लगाती है.. पूर्वी के चहरे पर एक अजीब से स्माइल उसे दिख जाती है.. वो सोचने लगाती है पूर्वी का चेहरा इतना खिला क्यों है आज.. बच्चे की वजह से या जो मई सोच रही हु वो.. उस वजह से.. पूर्वी को भी आचार्य होता है की माहि बुआ उसे क्यों ऐसा देख रही है आज.. पूर्वी आँखों से इशारा करते हुई माहि को पूछते है की क्या बात है तो माहि कुछ नहीं कहती है ..
खाना ख़तम होने के बाद सब लोग आपने आपने रूम मई चले जाते है..
मनीष का अब एक हाथ माहि के कुर्ते के ऊपर से hi उसके बूब्स पर चल रहा था.. अपने बूब्स पर मनीष का हाथ पड़ते hi माहि और भी ज्यादा मदहोश होने लग गयी..
क्या कर रहे हो.. छोड़ू भी..
माहि ने मनीष को मदहोशी भरे अंदाज में कहा..
मनीष माहि को किस करने के लिए आगे बड़ा और कहने लगा...
कोई भला छुट्टिया hi होगा जो अपनी इतनी हसीं बीवी को यूँ छोर दे..
मनीष ने माहि के बाए बूब्स को छोर कर उसके दाए बूब्स को मसलना शुरू कर दिया..
आअह्ह्ह्हह्ह्ह.. manishhhhhhhhhhhhhhh.. ऐसे hi दबाऊऊऊऊ ..ना.. रुको.. मत्तत्ततत्तत्त……
माहि को अब लग रहा था की अब मनीष ने रुकना नहीं चाहिए....
अब माहि मनीष के उप्पर आ गयी. नीचे मनीष का एक हाथ बारी बारी से माहि के अस्स के गुम्बदों को मसल रहा था.. न जाने क्यों आज मनीष से आपने अस्स के दोनों गुम्बदों के साथ खेलने में माहि को बड़ा मजा आ रहा था..
अब जल्दी से मेरे कपडे उतर दो manish..aur मेरे दोनों बूब्स को चूमो....
मनीष ने माहि का टी शर्ट उतर दिया..
उतर दो इस छोटी सी ब्रा को.. अब इसका हमारे बीच में क्या काम..
माहि की बात सुन कर मनीष को हलकी सी हंसी आ गयी..
आज क्या हो गया है माहि तुम..
कुछ नहीं मेरे राजा.. मुझे प्यार करो.. बहुत प्यार करो.. ताकि मई किसी भी तरह प्यासी न राहु…. मनीष..
मनीष उसकी ब्रा उतर रहा था तब तक माहि ने अपनी निघ्त्य को हल्का सा नीचे सरका कर अपने पैरो से पूरा नीचे कर दिया.. फिर मनीष ने उसके पंतय निकला फेक दी..
ब्रा के हटते hi मनीष ने छोटे बच्चे की तरह अपना मुंह माहि के एक बूब्स पर जमा दिया.. माहि बिस्तर पर एक डैम सीढ़ी लेती हुई थी.. मनीष एक हाथ से माहि के दूसरे बूब्स को दबा रहा था और उसका एक हाथ माहि के छूट के अंदर बहार चल रहा tha..Mahi ने अब अपने कोमल हाँथ मई मनीष का लुंड ले लिया और उसे आगे पीछे करने लगी .. मनीष के लुंड को आगे पीछे करते हुई वो सोचने लगी.. करीम का लुंड मेरे हाथ मई बैठ पायेगा क्या.. माहि यह सोचकर फिर से गरम हो गयी और अपनी छूट मनीष के उंगली से सहलाने लगी.
फिर खुद को समजने लगी.. माहि तू क्या सोच रही है.. ये सोचन पाप है..
माहि ने आपने नरम बूब्स मनीष के मू मई दे दिए.. और आपने टांगें मनीषी के कन्धों पर रख ली..
मनीष के साथ आज माहि पूरी तरह से खुल कर आवाज करते हुए सेक्स का मजा लेना चाहती थी पर आज वो आपने भैय्या के घर पर थी.. और उसी फ्लोर पर अरुण और पूर्वी का कमरा भी था.... इस वजह से माहि खुल कर आवाज नहीं निकल प् रही थी जिस कारन माहि के उत्तेजना और भी ज्यादा भड़ती जा रही hi.. और इसी उत्तेजना के कारन माहि एक बार झाड़ चुकी थी.. मनीष की उंगलिया बराबर माहि के छूट में अंदर बहार हो रही थी..
माहि ने मनीष का लुंड आपने छूट पर रगड़ने lagi..aur वो बुहत तेज़ सिसक रही थी और अपने गोर और मोठे हिप्स उछाल रही थी.
मनीष अब दाल भी दो अब बर्दाश्त नहीं होता.
फिर मनीष ने माहि के दोनों टांगो को घुटने से मोड़ कर दोनों टाँगे हवा में कर दी जिस से उसकी छूट खुल कर उसके सामने आ गयी थी.. मनीष ने अपना लिंग उसकी छूट की लकीर पर ऊपर से नीचे, नीचे से ऊपर फिरना शुरू कर दिया.. अब माहि अपना आप पूरी तरह से खो चुकी थी और उसके मुंह से जोर जोर से सिसकारियां निकलने लग गयी थी.. पूरा बदन पसीने में तर बदर हो गया था..
वैसे माहि मनीष का लिंग देखते hi माहि को करीम का लुंड याद आने लगा.. वो सोचने लगी करीम के सामने मनीष का कितना छोटा है.. वो अब करीम के लुंड को भूल जाना चाहती थी..
aaaaaaaaaaaaahhhhhhh……. आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह… के ों मनीष के ों…
माहि के मुंह से तेज तेज आवाज सुन कर मनीष ने उसके मुंह पर हाथ लगा लिया …
कोई सुन लेगा माहि.. इस फ्लोर पर अरुण का कमरा भी है..
ऐसा कहके मनीष ने आपने लिंग को माहि के छूट के छेद प् टिका कर धीरे धीरे पूरा लिंग अंदर कर दिया.. और आगे पीछे करने लगा..
आईईईई ऐसे hi मेरे राजा बुहत मज़ा आरहा है.
थोड़ी देर यही सिलसिला चलता रहा..
अब छुड़ाते हुई माहि आपने हाथ से बूब्स को दबा रही थी ..

ज़ोर से ढके lagao.manish और जोर se..I लव यू मनिष्ठ्हहहहहह…
और फिर थोड़ी hi देर मई मनीष ने आपने पानी माहि के छूट के उप्पर गिरा diya..aur हफ्ते हुई मनीष माहि के उप्पर गिर पड़ा.. फिर वो दोनों एक साथ एक दूसरे से चिपक कर नंगे hi सो gaye..kuch देर बादमाही नींद से जग गयी .. तब कपडे उसके यहाँ वह पड़े उसे दिख जाते है.. न जाने उसे क्या हो जाता है.. वो कुछ सोचने लगाती है और वो सदी पहने लगाती है..
सदी पहनने के बाद आपने बाल जो मनीष के साथ सेक्स करने के वक़्त बिखरे हुई थे उसको ठीक थक कर लेते है..

फिर कुछ देर सोचते है... और आपने आप को सजाने संवारने लगते hi.. वो भी इतने रात.. आपने हस्बैंड सोने के बाद.. फिर वो मनीष को देखते है.. वो गहरी नींद मई था.. उसे वो देखते है .. और उसके चहरे पर स्माइल आ जाती है.. वो मेकअप करने लगाती है..
फिर माहि तैयार होकर बहार पोर्च मई आ जाती है ..पोर्च मई अभी कोई नहीं था… . रात के 11 बजे thee….isslye घर के सभी लोग सो गए थी…. कोई जग नहीं रहा था.. घर मई कैसे भी आवाज नहीं thi..pehale तोह माहि पोर्च मई थोड़ा टहलती है .. इधर उधर चल रही थी……. अचानक से माहि का धयान सामने gaya..Tabhi उसकी नज़र करीम पर पढ़ी… सामने से स्टेप्स चढ़ाते हुई करीम उप्पर आ रहा था.. जो के करीम सामने नहीं निचे देख के चलते हुई उप्पर आ रहा tha..…jaise ही करीम ने सामने देखा तोह माहि साइड मई हो गयी .. एक कार्नर मई जेक चुप gayi..taki करीम उसको देख न पाए... करीम सामने देखकर ऊपर के तरफ चलने लगा…
पोर्च मई जेक करीम थोड़ी देर खड़ा रह गया.. माहि ने अब सोच लिया की करीम से जेक वो बात कर ले की वो इस वक़्त यहाँ क्यों आया है.. तभी करीम किसी को कॉल लगाने के लिए आपने मोबाइल जेब से निकल लेता है.. तब माहि समाज जाती है की .. करीम क्यों आया है इस वक़्त.. वो सोचने लगाती है.. आज आफ्टरनून मई hi इसने लता भाभी के साथ सेक्स किया है और ये फिर से आ gaya..aur वो भी भैय्या घर मई होते हुई.. अब ये दोनों तो भैय्या को भी दर नहीं रहे है.. इस ठरकी को जाने दो भाभी को भी अपनी लाइफ के बारे मई कुछ दर नहीं है क्या.. हरामी कही की..
तभी करीम आपने कान पे लगा हुआ फ़ोन निचे करता है.. माहि एक कार्नर मई कड़ी होकर देख रही थी.. वो सोचती है सेल ने कॉल क्यों नहीं किया.. तब करीम के चहरे पर पहेली हुई कमीनी मुस्कान देख कर माहि को गुस्सा आ जाता है..
वो आपने आप को कहती है.. लगता है साली लता भाभी आ गयी है इस वजह से कमीना मुस्कुराहा hai..fir माहि करीम जिस तरफ देख कर मुस्कुराहा है उस तरफ मुद कर गुस्से से माहि देखने lagi……samane का नज़ारा देखकर माहि के दिल के धड़कने एक दम से बढ़ gaye….usne सामने देखते hi माहि अंदर तक सुलग गए. सामने लता नहीं तो पूर्वी thi..usne आपने दरवाजा खोला...

और वो करीम को देख कर स्माइल करते हुई उसकी और आ रही थी..
पूर्वी संज संवारकर आयी थी..

माहि सोचने लगाती है... पूर्वी ने इतने रात को इतना अच्छा मेक उप क्यों किया hai..fir कुछ सोचकर और
पूर्वी को देखकर माहि हकीबाकि वही दांग कड़ी रह गए… वो सोचने लगाती है ..मई अब्ब काया kArun…aur काया ना करूँ.. अब इसने पूर्वी को आपने जाल मई फांस लिया है .. पूर्वी के जिंदगी ख़राब कर देगा ये ठरकी.. इसकी जिंदगी ख़राब होने से उसे बचा ले जाना चाहिए …
पूर्वी करीम के पास आते hi करीम कुछ कहना चाहता था पर पूर्वी उसे चुप रहने का इशारा करती है.. करीम भी चुप हो जाता hai..Aur फिर पूर्वी सामने वाले रूम मई चली गयी ….पीछे से करीम भी उसी रूम मई गया..
फिर माहि सोचने लगते है ...पर पूर्वी का और इस बूढ़े का चक्कर पहले से होगा तो.. तो मई क्या करू फिर…… पूर्वी hi उसे उस रूम मई ले गयी .. मतलब साफ़ hai…par फिर भी पूर्वी जो कर रही hai…wo ठीक नहीं hai…jo वो दोनों अब करने वाले है वो कही से भी सही नहीं है…. वो चाहते थी की वो जोर से छिलके पूर्वी को bole…apne आप को रोको पूर्वी… माहि पूर्वी को अपनी जिंदगी बर्बाद करते हुए भी नहीं देख सकती थी……. माहि का मान बेचैन था… पूर्वी के लिए.. उसे लगा की, आज तोह पूर्वी लौट ही jayege.wo आपने आप को कहने लगी.. मुझे पूर्वी को किसी भी हाल मई ये सब करने से रोकना होगा…. वो अभी न समाज है… बची है….
माहि सोचने लगाती है और आपने आप को कहती है …जिंदगी मई इतने शॉक मुझे एक साथ कभी नहीं लगे thee…pahale सिमरन मैडम.. फिर लता भाभी और अब पूर्वी.. उसके टाँगे कनाप रही the….Mahi सोचती है किसी तरह चल कर उस रूम तक पहुंचना पड़ेगा ... ….…… माहि एक दम से पेरशान हो gaye….aur उस तरफ बढ़ने lagee….jiss तरफ पूर्वी और करीम गए thee…charo तरफ एक दम सुनसान tha….naa कोई इंसान नज़र आ रहा tha….aur ना ही कोई आवाज़….
jaise-jaise माहि उस दूर के करीब पहुंच गए ….दर के मरे उसके हाथ पेअर कंपनी शुरू हो गए thee…..uss रूम के दूर के पास जाकर माहि ने थोड़ा सा झुक कर उसके अंदर जखने की कोशिश की …
माहि ने अंदर झांकने के कोशिश की तो अंदर भोत अँधेरा था… तोह इस वजह से वो दोनों माहि को नज़र नहीं आये…
अब्ब माहि का दिल इतनी जोरो से धड़क रहा था की, वो अपने दिल के धड़कने भी साफ़ सुन पा रही thee…uska दिल बैठा जा रहा tha….par ऐसा लग रहा tha….jaise अंदर कोई ना हो. पर तभी उसे अंदर से कुछ आहत सुनाई दी…
माहि ने सोचा झुक कर उस दूर से अंदर जाते है .. और देखते है.. फिर आपने आपको hi कहने लगी.. नहीं.. वो कमीना मुझे देख lega..…aur फिर माहि को सामने एक विंडो दिख जाती है . जो थोड़ी सी खुली हुई थी… माहि दबे पौन अग्गे बढ़ी….. विंडो की तरफ …
तोह उसे फिर से कुछ आहत सुनाई dee….Mahi उस तरफ देखने लगी …
माहि ने वो विंडो को खोला ….
पर अग्गे जो माहि ने dekha…wo देख कर तोह उसके पैरो टेल से जमीन ही खिसक गए…

माहि अब उसको कुछ कह नहीं रही थी और उसके किश का मज़ा ले रही थी..
तभी अचानक बहार भैय्या और मनीष का आवाज आ gaya.us वजह से माहि एक डैम से होश में आयी और अपने आप को करीम के चंगुल से पूरी तरह छुड़ाते हुए कहा..
देख लेना बूढ़े मैं ये साड़ी बाते मनीष और भैय्या को बताउंगी तब देखना वो तुम्हारा क्या हाल करते है ..
तेरे मनीष और भैय्या को क्या कहेगी..
माहि ने हाँ मई कहा.. लेकिन बाद मई उसे पता चला की करीम ने क्या कहा.. माहि ने उसको देखते हुई है कर देखा और फ़ौरन आपने कपडे ठीक किये और किचन से बहार आ गयी..
कमरे के अंदर आते hi माहि बीएड पर जा कर गिर पड़ी. उसकी आँखों में आंसू आ गए थे.. उसे बोहोत बुरा लग रहा था की मनीष की बीवी होने के बाद भी उसने अपने शरीर को उसे छूने दिया. बीएड पर उसका बदन बुरी तरह से thar-thar काँप रहा था. माहि को अभी भी अपने दोनों नितम्बो के बीच में उस करीम की ऊँगली अपने गुदा छिद्र पर महसूस हो रही थी.
माहि को यकीन करना मुश्किल हो रहा था की उसके साथ उसके hi घर में ( भैय्या का घर था wo..)Karim ने ये सब कुछ किया और तो और माहि भी उसकी हरकत से अपने आप पर काबू नहीं रख पायी. माहि मन hi मन करीम को गाली देती जा रही थी.
इधर करीम किचन से चुपके से बहार गर्दन मई आ जाता है और घर जाने का सोचता है तभी उसे पद्मा देखती है.. पद्मा उसे देखते hi आवाज देते है..
करीम जरा रुकना
तब करीम पद्मा की तरफ देख के कहता है
बोल क्या hai..muje घर जाना है..
तुजे मुझे कुछ पूछा न था
हाँ पूछ
मुझे ये यकीं करना मुश्किल हो रहा है की तूने अभी तक 2-3 बार hi पूर्वी मालकिन को छोड़ा है
करीम हँसाने लगता है
है मत सच बता.. 2-3 बार की चुदाई मई कोई औरत प्रेग्नेंट नहीं बन सकती..
2-3 नहीं 4-5 बार
ठीक है 4-5 बार मई कैसे पॉसिबल है .. अरुण शेठ ने उससे ज्यादा छोड़ा होगा उन 1 साल पाई
हाँ छोड़ा होगा
फिर वो तब प्रेग्नेंट नहीं हुई और अब कैसे हुई
मुझे क्या पता
तुजे नहीं पता तो किसे पता होगा
तूने अभी थोड़े देर पहले hi कहा न
क्या
तू छोड़ता hi ऐसे की 2-3 चुदाई मई किसी को भी प्रेग्नेंट बना देगा
वो कहने की बात thi..tu सच बता
तब करीम हसने लगा
बता न
तुजे सच सुनना है
हाँ माय डार्लिंग
सच ये है की हम 4-5 दिन सात मई थे
मतलब
साथ मई थे मतलब साथ मई थे अब इसका मतलब क्या बताऊ
साथ मई थे मतलब यहाँ
यहाँ नहीं
फिर कहा
आपने घर
क्या?? करीम नगर मई
हाँ
क्या बाख रहा है.. पूर्वी मेमसाब और आपने बस्ती मई.. और वो भी तेरे घर मई
हाँ
और
पद्मा हस्ते हुई कहते है
हाँ
कुछ भी मत फेक
यकीं नहीं है
हाँ.. वो तो कितने क्लीन है.. और अपनी बस्ती कितने गन्दी है.. गन्दगी से वो बहुत नफरत करती है
करीम से वो बहुत ज्यादा प्यार करती है..
वो पता है
फिर भी तू शक कर रही है
यकीं नहीं होता
हाँ
रानी को पूछ
मतलब उसको पता है
हाँ वो तो हमारी सेवा कर रही थी..
मुझे नहीं बताया और उसे बताया
वो अचानक हुआ
गुस्से से पद्मा कहती है
तेरा सब अचानक hi होता है..
नाराज़ मत हो.. वो पूर्वी वह आयी और वह सुनीता ने देख लिया इसलिए उसे बताना पड़ा
अच्छा!! और तेरे घरवाले
वो शादी के लिए गए थे न
ये सब कब हुआ
जब वो मुंबई गयी थी
हाँ.. मालिक के साथ..
उसके बाद
उसके बाद कब
दूसरे दिन hi
कैसे हुआ ये
क्या हुआ वो मुंबई से आयी रात को
हाँ रात को लेट आये और दूसरे दिन मायके चली गयी.. किसी फ्रेंड के घर शादी है बोलके
वो कही नहीं गयी थी मेरे पास थी
क्या??
कैसे तैयार किया तूने उसे और उसको ये शादी वाला आईडिया तूने दिया ताकि वो दोनों मालिक को चुटिया बनाये..
शादी वाला आईडिया मेरा नहीं उसका था..
मतलब
क्या हुआ मुंबई से आने के दूसरे दिन मई नहीं आया ये जानकर उसने मुझे कॉल किया.. तो मैंने कहा मई बीमार हु आ नहीं पाउँगा.. उसने पूछा क्या हुआ तब मैंने सब बता दिया..
क्या बताया तूने
एक्चुअली रात मई मैंने थोड़े ज्यादा दारू पि थी और शायद दारू ख़राब थी.. सर बहुत दुःख रहा था.. मुझे ॉमिटिंग भी हुई.. बदन दुःख रहा था..
तूने ये सब बताया
पागल हो गयी है क्या ये बताने को
तो
उसने कॉल किया तब मैंने कहा सरदर्द कर रहा है तब उसने कहा क्या हुआ तब मैंने कहा शयद फ़ूड पोइज़निंग हुई.. कल बहार का खाया था.. उसने कहा बहार का क्यों कोई पार्टी थी क्या तब मैंने कहा घर वाले शादी मई गए है तब उसने कहा ओह्ह ी सी.. मई ी जाते हु तुम्हारे सेवा करने..
और वो आ गए..
हाँ साथ मई एक डॉक्टर भी ले आयी थी .. वो डॉक्टर भी चूतिया था मैंने जो बोलै उसने मन.. उसने गोलिया और बूटले लिख के दी.. पूर्वी ने बहार जेक वो दवाइया लायी..
और तुमने उसकी जैम क लिए
फिर क्या था अगले 5 दिन दिन रात chudaye..wo खाना बनती निचे किचन मई.. हेल्प के लिए रानी थी मई उप्पर सोता खाना खता दारू पिता उसको छोड़ता
उसके होते हुई दारू पि
मई डरता हु क्या उससे
तो क्या किया
दारू को उसने पहले तो विरोध किया गुस्सा करने लगी.. तुम तो जानती हो वो कितने ग़ज़ल है..
हाँ जानती हु फिर कैसे कण्ट्रोल किया
संब्जा बजा के..
कैसे
वो गुस्सा करती तो मई उससे प्यार से पेश आता.. उससे उसके तरीके से छोड़ता..
फिर मान जाती वो
हाँ थोड़ा पीओ बोलती
अच्छा कण्ट्रोल किया तूने उस करमजली को
एक दो बार उसको पिलाये भी
क्या उसने दारू पि
नहीं तुक दी
अच्छा दारू पाइक उसे छोड़ता था क्या
एक दो बार छोड़ा
नहीं नहीं करती पर मान जाती
फिर
फिर क्या था बाद मई मेरा पैक वो खुद hi बनाने लगी
ये तो बहुत बड़ी बात हो गयी
उससे और एक बड़ी बात हो गयी
क्या
रानी ने उसे नॉन वेग बनाना सीखा दिया
उसने सिख ली
हाँ
नॉन वेग से तो वो बहुत नफरत करती थी
करीम को जो पसंद उसे वो पसंद करेगी अब
खाया क्या उसने
खाने के लिए मैंने फाॅर्स किया पर उसने ये बोल के ताल दिया की मई तुम आपने हाट से बनके खिलाऊंगी पर खाउंगी नहीं
तुमने तो उसे पूरा बदल दिया
हाँ फिर क्या
मतलब इस घर का वारिस आपने करीमनगर मई बना है
हाँ ऐसे hi..
करके हस्ते हुई वह से चला जाता है..
श्याम का वक़्त …
हॉल मई कान्तिशीथ , मनीष और पूर्वी का हस्बैंड अरुण बैठे थे ..बाते कर रहे थे… तब माहि को मनीष आवाज देता है..
माहि घर जाना नहीं है क्या…
तब माहि ऊपर से hi.. कहती है..
हाँ जाना है न…
कान्तिशीथ - माहि और मनीष अब तुम खाना खा के hi जाओ न
माहि- नहीं रुकना है .. अब मेरा यहाँ रुकना किसी को पसंद नहीं है
कान्तिशीथ- किस को पसंद नहीं है..
किचन मई से पूर्वी और लता को आवाज देके काँटी शेठ बुला लेता है..
कान्तिशीथ- आप दोनों ने माहि को कुछ कहा..
लता – नहीं तो
पूर्वी- नहीं पापाजी.. क्या हुआ..
मनीष- भैय्या .. इस की बात को सीरियस मत लो आप.. मैंने hi इसे मजाक किया था..
लता- क्या मजाक किया था आपने..
माहि- मई यहाँ हमेशा पड़ी रहती है.. ये कहा था..
इस बात पर अरुण और कान्तिशीथ हँसाने लगते है..
अरुण - सच तो कहा है अंकल ने..
माहि- इसी लिए तो मई आज से यहाँ रुकोगी नहीं..
कान्तिशीथ- आपने बुआ से ऐसे बात कोई करता है क्या अरुण..
अरुण- सॉरी पापा…
कान्तिशीथ- नहीं नहीं.. माहि ये तो तमारा hi घर है .. अरुण ने मज़ाक मई कहा है.. इसका बुरा क्यों मानती हो…
माहि- मनीष ..चलो… मुझे घर मई जेक और भी कुछ काम है..
कान्तिशीथ- गुस्सा मत हो माहि … रुक जाओ आज की रात..
माहि कुछ नहीं बोलती और चलने लगाती है..
अरुण- ी ऍम सॉरी.. बुआ.. काम से काम खाना खाके जाओ..
माहि- मनीष तुम आना है की नहीं…
वो पीछे मुद के मनीष की तरफ देखकर कहने लगाती है .. और वैसे hi पीछे दरवाजे की तरफ चलने लगाती है.. दरवाजे मई से करीम अन्दर आ रहा था.. माहि पीछे देखकर चल रही थी इस आज से वो और करीम एक दूसरे को टकरा जाते है....
कान्तिशीथ- ारे ..अरे माहि पीछे देखो..
माहि को लगा कोण बत्तमीज नौकर है जिसने मुझे धक्का दिया है.. वो गुस्से मई hi घूम कर उसपर हाथ उठनेवाली थी की सामने करीम को देखकर आपने हाथ निचे कर लेती है.. और गुस्से मई कहती है..
सामने देखकर चल नहीं सकते क्या..
मैडम.. आप hi सामने देखकर नहीं चल रही थी.. पीछे देख रही थी और आगे चल रही थी..
मई पीछे देख रही थी.. मुझे क्या पता था तुम सामने से आ रहे हो.. तुम तो सामने देख रहे थे न.. तुम पता नहीं था क्या की मई सामने से आ रही हु.. तुम वही खड़े नहीं रह सकते क्या..
मई वही खड़ा था मैडम.. आप hi आकर मुझे तकार गयी ..
बत्तमीज आदमी.. मुज पे hi ब्लामे लगा रहे हो..
कान्तिशीथ- जाने दो अक्रम.. माफ़ी मांग लो मैडम से..
माहि पीछे घूम के कान्तिशीथ को देखते है..
जाने दो का क्या मतलब है भैय्या..
कान्तिशीथ- कुछ नहीं मई.. करीम को कह रहा था.. माफी मांग लो..
जैसे hi माहि करीम को देखने लगाती है… तब कान्तिशीथ करीम को इशारे से कहती है.. गुस्से मई है वो.. माफ़ी मनंग लो उससे..
माहि- भैय्या मैंने पहले hi कहा था आप से ये इंसान कितना कमीना hai..lekin आप मानते hi नहीं हो… ये बहुत चालू चीज़ है..
करीम- सॉरी.. मैडम.. माफ़ कर दो.
करीम मैं मई सोचता है… साली बहुत ग़ुस्सेवाली है.. गुस्से मई कही इसने सबकुछ या आधा अधूरा कुछ बता दिया तो आफत हो जायेंगे…
लता- उसने अब माफ़ी मांग ली है न.. चोर दो उसे..
माहि मैं मई कहती है.. साली हरामी हमेशा आपने यार की साइड लेते है..
माहि- भाभी हमेशा आप इस बूढ़े की साइड लेते हो.. क्या मांजरा है..
मनीष- ारे कुछ मांजरा नहीं है.. आदमी सीनियर है.. उम्र से.. और तजुरबा भी काफी है.. इसलिए भाभी ने कहा होगा..
माहि - हाँ.. तजुरबा काफी है इसको .. बहुत सरे चीज़ो का.. एक नंबर का कमीना इंसान है..
कन्तिष्ठ – जाने दो माहि.. अब उसने माफ़ी मांग ली है..
माहि- भैय्या.. आप नहीं जानते .. आप के पिट पीछे इस घर मई क्या क्या चल रहा है..
कान्तिशीथ- क्या क्या चल रहा है ..
लता अब बहुत डर जाती है.. उसे अब पूरा यकीं हो गया था की माहि ने दोपहर मई मुझे और करीम को एक साथ देख लिया है और अब ये सबकुछ बता देगी.. उधर पूर्वी को दर लगाने लगा की माहि बुआ ने मुझे और करीम को एक साथ देख तो लिया नहीं न.. और इधर करीम को लग रहा था की साली ये सब सच न बता दे कान्तिशीथ को.. साला ये तो मुझे मार hi डालेगा… इस बात पर करीम की फटने लगी थी की अब आगे क्या होगा.. उधर कान्तिशीथ को लग रहा था की .. शयद करीम ने घर से कुछ चुरा लिया होगा.. इसकी बात hi माहि कर रही थी .. और वह खड़े अरुण और मनीष को कुछ पता नहीं चल रहा था की माहि किस के बारे मई बात कर रही है..
माहि लता और पूर्वी की तरफ देख रही थी.. बीच बीच मई कान्तिशीथ और करीम की और देख रही थी.. करीम आँखों से चुपके से माहि को ईशार कर रहा था …
चुप करो तुम..
KantiSheth.—kya चल रहा माहि.. मेरे पेटपीचे यहाँ इस घर मई..
काँटी शेठ के ऐसे कहने से लता और पूर्वी और डर जाते है…
माहि- पूर्वी ..तुम पता है..
पूर्वी और ज्यादा डर जाती है…
कान्तिशीथ- पूर्वी बीटा तुम पता है.. तुम बता दो..
पूर्वी को तो अब पसीना आने लगत है..
कान्तिशीथ- बीटा .. तुम पता है..
पूर्वी डरते हुई..
पूर्वी- बुआ .. किस बारे मई बात कर रही है .. मुझे पता नहीं है..
कान्तिशीथ- माहि बता दो तुम..
माहि- लता भाभी को पूछ लो न आप..
डर के मारे लता की हालत अब बहुत ज्यादा ख़राब हो रही थी..
कान्तिशीथ लता के तरफ देखने लगता है..
माहि - भाभी आप को पता hi होगा न..
लता डरते हुई..
लता- मुझे कैसे पता होगा
आप किस बारे मई बात कर रहे हो..
करीम को लगा अब ये साली लता की जान ले लेगी..
अरुण- बुआ बता दो न.. क्या चल रहा है..
माहि चहरे पर अपनी कातिल हसी लेट हुई बड़े अड्डा के साथ कहती है..

माहि- बताती हु..
लता और पूर्वी अब बहुत ज्यादा डरने लगाती है.. वो दोनों भगवन को याद करने लगाती है..
माहि करीम को एक बार देखते है..
माहि- इस घर मई बहुत कुछ चल रहा है.. आप के पीटपीचे भैय्या..
कान्तिशीथ- क्या क्या चल रहा है .. माहि सीधा सीधा बता दो न..
माहि गुस्से मई बोल पड़ती है..
माहि- मुझे क्यों पूछ रहे हो.. लता भाभी को पूछ लो न.. की वो दोपहर को क्या कर रही थी..
कान्तिशर्त अब बहुत ज्यादा कन्फूस हो जाता है.. उसे अब लग रहा था की लता का क्या कोई चक्कर है.. वो गुस्से मई बोल पड़ता है..
कान्तिशीथ- माहि … अब मुजसे रहा नहीं जा रहा है.. लता दोपहर को क्या कर रही थी.. इससे तुम क्या कहना चाहती हो..
लता को अब बहुत ज्यादा डर लगाने लगता है.. जब कान्तिशीथ का चेहरा माहि की तरफ होता है तब लता माहि को धीरे से माफ़ी मांगने का इशारा करती है..
कान्तिशीथ- बताओ माहि.. तुम कहना क्या चाहती हो.. सीधा सीधा बता दो.. ऐसे पहलेया मत बजाओ..
माहि आपने भैय्या की तरफ देखते हुई कहती है..
माहि- लता भाभी नहीं बता पा रही है वो दोपहर को कहा थी तो इस बूढ़े टेलर को आप पूछ लो..
बूढ़े टेलर का नाम लेते hi लता और ज्यादा डरने लगाती hai..aab उसका रोना hi बाकि था.. सब बाते छोटे माँ पर चल रही है ये सुनकर पूर्वी को एक पल अच्छा लगा.. वो सोचने लगाती है माहि बुआ को मेरे और करीम के बारे मई कुछ भी पता नहीं है.. लेकिन अगले hi पल वो सोचने लगाती hai..bua ने ऐसा क्यों कहा की लता माँ कहा थी वो ककरीम को पूछ लो .. मतलब करीम और लता माँ का कुछ है.. साला कमीना ..इसका एक से मैं नहीं बरता .. मई.. शालिनी भाभी और अब लता माँ.. हरामी कही का… उधर करीम सोचने लगता है.. साली ये आज मेरे जान लेके रहेंगे.. कामिंणी.. कही की.. अब कान्तिशीथ मुझे जान से मार hi डालेगा….
तीसरी तरफ कान्तिशीथ सोचने लगता है.. लता दोपहर को कहा थी ये करीम को कैसे पता होगा.. मतलब लता और करीम … सेल इस कमीने को मई अब गोली hi मार दूंगा..
कान्तिशीथ- तुम्हारे कहने का क्या मतलब है माहि.. लता दोपहर मई कहा थी वो इस हरामी को कैसे पता होगा…
करीम पीछे से धीरे से बोलता है.. करीम माहि के पीछे था पर बहुत क्लोज खड़ा था..
करीम- जाने दे न माहि..
माहि भी धीरे से बोल पड़ती है.. मू पाई हाथ रख कर..
माहि- फैट गयी क्या..
उदार लता माहि को बार बार माफ़ी मांगने का इशारा कर रही थी..
कान्तिशीथ अब जोरसे चिलता है..
कान्तिशीथ – बता दो माहि..
माहि चहरे पद थोड़ी हसी आ जाती है ..
माहि- आप भी न भैय्या.. घर मई दोपहर को अकेले मई और लता भाभी थी.. मई थो उप्पर सो रही थी.. और ये बुद्धा हॉल मई परेड का मेज़रमेंट ले रहा था.. तो इस बूढ़े को hi पता होगा न की भाभी दोपहर को क्या कर रही थी..
माहि की बात सुनकर लता और पूर्वी की जान मई जान आ गयी..
और उदार करीम की भी ..
करीम मैं मई कहता है ..साली हरामी ..डरा दिया मुझको.. साली को सबक सीखना पड़ेगा …
कान्तिशीथ की भी जान मई जान आ गयी.. .. फिर भी कान्तिशीथ को थोड़ा शक था..
कान्तिशीथ – फिर भी तूने कैसे कहा की मेरे पीछे घर मई कुछ गलत हो रहा है…
माहि- गलत कब कहा मैंने.. भैय्या..
ऐसा कह के वो चलते हुई लता के पास जाकर कड़ी हो जाती है.. लता अब भी दर रही थी.. निचे गर्दन करके देख रही thi..uske उप्पर गर्दन उतने की हिम्मत नहीं हो रही थी..
कान्तिशीथ – तो क्या कहा था तूने..
माहि- मैंने कहा था आप के पीटपीचे इस घर मई बहुत कुछ चल रहा है..
कान्तिशीथ का शक अब तक ख़तम नहीं हुआ था..
काँटी शेठ- ये बहुत कुछ क्या है..
माहि हस्ते हुई कहती है..
माहि- देखो न भैय्या.. मैंने कल hi मेरे नई वाच यहाँ राखी थी.. अब वह नहीं hai..chori हो गयी .. घर की मालकिन होने के नाते लता भाभी का घर के चीज़ो पाई ध्यान होना चाहिए न.. मैंने इस नाते बहुत कुछ कहा..
मनीष- कोण कर रहा है चोरी..
माहि हस्ते है… और थोड़ा आगे हो जाती है.. करीम उसके पीछे था..
माहि- मुझे क्या पता
माहि के ऐसे कहते hi करीम माहि के पिट पर धीरे से चिमटे काट देता है.. माहि और आगे हो जाती है…
कान्तिशीथ- ऐसा क्या…
ऐसा कहके कान्तिशीथ की जान मई जान आ गयी..
माहि- आप को क्या लगा..
कान्तिशीथ कुछ नहीं कहता…
माहि लता के गर्दन पाई अपनी बहे डालता हुई कहती है..
माहि- क्या आपको अपनी बीवी पाई शक तो हुआ नहीं न.. भैय्या…
तब कान्तिशीथ जल्दी मई कहता है..
कान्तिशीथ- नहीं.. नहीं.. मई कैसे लता पाई शक कर सकता हु..
माहि- हाँ.. मई भी वही कह रही हु.. भाभी आप को कैसा धोका दे सकती है.. भाभी थोड़ा hi एक्सट्रॉमार्टिकल अफेयर रख सकती है..
लता माहि को देखने लगाती है..
माहि- और वो भी इस बूढ़े के साथ .. नहीं नहीं.. ऐसा कैसे भाभी कर सकती है…
मनीष- माहि तुम क्या बोल रही हो.. कुछ तो शर्म करो..
तभी करीम धीरे से बोल पड़ता है..
करीम- कामिनी कही की.. आज तो इसने मेरे वाट hi लगा दी.. इसको तो सबक सीखना hi पड़ेगा..
करीम की आवाज कान्तिशीथ सुन लेता है..
काँटी शेठ- क्या कहा तूने..
Manish-Mahi को कहा की तुम क्या बोल रही हो ..
कान्तिशीथ- मनीष तुम नहीं इस करीम को बोल रहा हु..
करीम अब डर जाता है.. सेल इस हरामी ने सुन तो नहीं लिया न…
करीम- कुछ नहीं .. शेठ…
शेठ- कुछ तो कहा तूने..
करीम- यही की मई ऐसे पाप के बारे मई सोच भी कैसे सकता हु..
मनीष- वही तो ..करीम और लता भाभी के बारे मई ऐसा कैसा सोच सकती हो माहि तुम..
अरुण- हाँ .. बुआ…
माहि- मैंने क्या गलत किया.. मैं तो यही कह रही हु की भाभी ऐसा नहीं कर सकती ..
अरुण- बुआ .. आप ने ऐसा कैसे सोच लिया.. ये यहाँ कुछ हो सकता है.. छोटी माँ ऐसे नहीं है..
सब की ऐसे बात सुनकर लता रोने लगाती है.. और भागते हुई उप्पर आपने कमरे मई जाती है..
शेठ- जाने दो.. इस विषय को यही चोर दो.. करीम तुम यहाँ क्यों आये थे..
करीम- थोड़े पैसे मिल जाते तो ..
शेठ- हाँ.. हाँ.. फिर वो पूर्वी की तरफ देखता है और कहता है..
शेठ- बहु.. इसको तोड़े पैसे दे दो..
करीम पूर्वी के आगे आकर खड़ा हो जाता है..
करीम उसको अदब कह के सलाम करता है.. पूर्वी भी उसको नमस्कार करती है.. अब कान्तिशीथ भी वह से चला जाता है.. करीम पूर्वी के पास चला जाता है… मनीष बाथरूम मई जाता है… अरुण को किसी का कॉल आता है तो वो उनसे बात करने लगता है.. माहि वह सोफासेट पाई बैठ जाती है..
अब पूर्वी करीम को देखकर धीरे से आपने पैठ पाई हाथ घूमने लगती hai…aur धीरे से कहते है..
बच्चा है...
करीम- किसका है..
पूर्वी गुस्से से कहती है..
किस का है क्या पूछ रहे हो.. मई क्या तुम्हारे जैसे हु.. यहाँ वह मू मरते .. ये तुम्हारा बच्चा है..
ऐसा कहके पूर्वी उसको स्माइल करती है..
करीम- मैडम जी आपने खुशखबरी की कोई तोफा नहीं दिया ..इस गरीब को..
करीम थोड़ा जोर से बोलता है.. माहि आपने मोबाइल में कुछ पद रही thi..Karim के ऐसे कहने से माहि करीम के तरफ देखने लगाती है.. पूर्वी एक बार माहि की तरफ देखने लगते है.. माहि उन्दोनो की तरफ hi देख रही है ये जानकर पूर्वी कुछ नहीं बोलती है.. माहि फिर से मोबाइल मई कुछ देख रही है ये जानकर पूर्वी धीरे से बोल पड़ती है..
पूर्वी- ये तोफा तो आप की वजह से मुझे मिला है.. मांगिये आप को क्या तोफा चाहिए.. आपको हमसे..
माहि को कुछ खुसुर फुसुर की आवाज आती है.. इसलिए वो उनके तरफ देखने लगती hai…Purvi माहि को आपने तरफ देख रही है ये देखकर कहती है..
पूर्वी- सब नौकरो के साथ आप को भी तोफा मिलेगा.. अरुण शेठ की तरफ से..
माहि अब फिर से आपने मोबाइल मई बिजी हो जाती है..
करीम धीरे से बोल पड़ता है..
मुझे तो स्पेशल तोफा चाहिए
मई तो पूरी आप की हु.. जब चाहिए ले लो.. जो चाहिए वो..
फिर आज रात आता हु..
आ जाओ ..लेकिन मेरे पास .. लता माँ के पास मत जाओ..
और पूर्वी थोड़े हँसाने लगाती है..
ऐसा कुछ भी नहीं है ..
मई तुम अच्छे से जानती हु.. बुआ ने कुछ न कुछ देखा hi होगा..
नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है..
तब तक वह अरुण आ जाता है..
अरुण- करीम को पैसे दिए क्या..
पूर्वी- हाँ दे दिए..
करीम- थैंक्स अरुणशेठ और पूर्वी बहुरानी जी..
माहि अब तक वही सोफे पाई बैठे हुई थी..
करीम- चलता हु..
ऐसा कहके करीम एक बार माहि को देखता है .. माहि उसको गुस्से से देखती है.. नखरे से चेहरा घुमा लेती है.. और वह से उठ कर दूसरी और चली जाती है..

करीम वह से जाता है.. दूर मई जेक पीछे पलट के पूर्वी को देखता है.. पूर्वी उसको देख के स्माइल करता है और आपने पैठ पाई हाथ रख कर घुमा रही थी और उधर पूर्वी को देख कर करीम आपने लुंड पाई हाथ घुमा रही थी.. ये सब माहि देखती है.. माहि को कुछ समाज मई नहीं आ रहा था.. वो सोचने लगाती है.. क्या इस बूढ़े के साथ पूर्वी का भी है kya…Mahi को लग रहा था की ये तो पूर्वी के साथ भी होगा तो.. वो सोचने लगी… सिमरन मैडम.. उनके बाद लता भाभी… पूर्वी और मई… मई कैसे .. मैंने तो उसको सिर्फ.. सिर्फ ..आपने पास आने दिया था.. और कुछ नहीं.. कुछ करने hi नहीं दिया न.. usko..fir .. मई कैसे .. तू भी है माहि.. उसने तुझको किश किया.. तेरे आम दबा दिए.. तू भी है.. अगर मई शामिल भी नहीं हु.. तो भी 3 लेडीज.. मेरे सामने.. और पीछे कितने होंगे.. ये आदमी है क्या घोडा.. यही सोचते हुई माहि हॉल से बहार आ गयी… सामने करीम अभी भी खड़ा था.. वो अब तक आपने घर नहीं गया था.. वो गेट पाई वॉचमैन से बाते कर रहा था.. माहि की नज़र उसपर पड़ते है.. माहि दूर पाई खड़े रहकर करीम को hi देखने लगाती है.. करीम गेट के वॉचमन को कुछ समाज रहा था.. वॉचमन न न मई गर्दन हिला रहा था.. माहि को कुछ समाज नहीं आ रहा था की करीम वॉचमन को क्या समाज रहा है.. फिर करीम वॉचमन को कुछ पैसे देता है.. 500 - 500 के कुछ नोट .. वॉचमन न न कहते हुई वो नोट आपने जेब मई दाल देता है.. करीम उसके शोल्डर पर हाथ रखकर जैसे उसे धनवाद कहता है.. तब माहि को बात समाज आ जाती है.. इस सेल ने कुछ काम दिया होगा उस वॉचमन को.. पैसे देके वो उनसे काम निकल रहा है.. बहुत चालू है ये बुद्धा.. ऐसा माहि सोचते है..
करीम अब घर जाने के लिए गेट से जैसे hi आगे बढ़ाता है वैसे hi वो पीछे मुद के एक बार देखता है तब उसे माहि दिख जाती hai..Mahi को देखते hi वो माहि के तरफ आ जाता है..
करीम- कैसे हो मैडम..
माहि- हरामी.. अभी तक नहीं गया तू..
करीम- जाने का तो मैं hi नहीं कर रहा है माहि..
अपनी गन्दी जुबान पाई मेरा नाम मत ले हरामी..
करीम हँसाने लगता है..
अब है रहा है.. थोड़े देर पहले तू रोने की हालत मई था..
वो तो सही बात है.. तूने मुझे डरा hi दिया था… लता की हालत तो रोने जैसे बनाये दी तूने आज..
माहि की ऐसे तारीफ करीम ने करते hi माहि का चेहरा खिल उठता है..
वो उसकी तरफ hi देखने लगाती है आपने बाल संवारते हुई.. ऐसा क्यों किया तूने.. माहि..
तेरे को सबक सीखने के लिए..
सबक सीखा दिया क्या फिर..
आगे से मेरे नज़दीक आया तो इससे बुरा हाल कर दूंगी तेरा..
अच्छा बाबा.. तेरे पास नहीं आऊंगा..
उस वॉचमन को क्या कह रहा था तू..
करीम सोचता है.. साली ने देख लिया शयद..
कुछ तो नहीं..
ज्यादा स्मार्ट मत बन .. मैंने सब देख लिया है.. तू उसे कुछ बता रहा था जो वो सुन नहीं रहा था.. बाद मई तूने पैसे देने के बाद उसने सुन लिया..
वो मर्दोंवाली बात है माहि.. तू क्यों ध्यान दे रही है..
मुझे उल्लू मत बना... सीधा सीधा बता .. उसको किस काम के लिए पता रहा था..
कुछ भी तो नहीं..
बता नहीं तो उस वॉचमैन को बुला लू क्या..
ारे कुछ नहीं.. रात को दारू की व्यवस्था कर रहा था.. बस और कुछ नहीं..
सही बोल रहा है या झूठ..
अब तुज से झूठ बोल के क्या होगा.. तू तो मेरे बारे मई सब कुछ जानती है न.. वैसे तेरे नज़र किसी लोमड़ी से काम थोड़ी hi है..
करीम थोड़ी उसके तारीफ करता है..
एक बात बता…
हैं ..पता है मुझे..
क्या पता है तुजे..
यहाँ आके बैठ ..फिर तुजे बताता हु..
फिर करीम और माहि वह एक कार्नर मई जेक बैठ गए.. एक बेंच पर..
अब बता ..क्या पता है तुजे…
यही की तू मुजसे क्या पूछने वाली है..
क्या पूछनेवाली हु मई..
पूर्वी के बारे मई…
तुजे कैसे पता..
मई लेडीज की आँखों मई देख के बता सकता हु की वो क्या सोच रही है..
ज्यादा होशियारी मत कर.. और सच सच बता.. विथाउट अन्य फ्लेर्टिंग..
तू जो सोच रही है ऐसा कुछ भी नहीं है..
मतलब पूर्वी का और तेरा कुछ भी नहीं है….
फिर वो तुजे देख कर है क्यों रही थी.. और तुम दोनों धीरे से हाल मई क्या खुसुरफुसुर कर रहे थे..
तेरे वजह से..
मेरे वजह से.. मतलब..
तूने मेरे और लता के बारे मई जो कुछ अदा अधूरा बता दिया था इस वजह से उसे शक हो गया था की लता और मेरे बारे मई कुछ चल रहा है..
क्या तू पूर्वी से फ्लेर्टिंग कर रहा था..
नहीं तो..
माहि कुछ सोचने लगाती है..
जलन हो रहे है क्या तुजे..
नहीं तो…
फिर..
शक हो रहा है तुज पर..
अभी सब सच तो बता दिया तुजे माहि मैंने .. अब शक की क्या बात है..
शक की ये वजह है की वो तुजे देखकर आपने पैठ पर हाथ घुमा रही थी और तू आपने उसपर हाथ घुमाकर उसे hi देखे जा रहा था..
तू क्या हम पर hi ध्यान दे रही थी..
मैंने जो कहा वो सच है न…
नहीं..
मैंने देखा था..
क्या कहा तूने.. मई पूर्वी को देखकर वह हाथ घुमा रहा था..
हाँ..
कहा पर..
माहि निचे देखने लगाती है.. शर्माकर कहती है..
पंत पर..
पंत पर कहा..
मुझे नहीं पता..
करीम माहि का हाथ पकड़ लेता है और कहता है..
बता न..
मुझे नहीं पता..
माहि ऐसा कहके झट से करीम के हाथ को जतका देते है.. और वह से उठकर दूर पाई कड़ी रहती है.. अब दोनों एक दूसरे को देख रहे थे..
तुजे क्या लगता है की .....वो बच्चा मेरा है..
माहि हाँ मई गर्दन हिलती है..
करीम माहि के पास आने लगता है .. वैसे hi माहि अन्दर हाल मई चली जाती है.. और अन्दर से हाल का दूर लॉक कर लेते है..
थोड़े देर बाद करीम आपने घर चला जाता है.. दूर लॉक करते hi माहि के चहरे पर हलकी से स्माइल आ जाती है ..और आपने आप को कहती है..
कमीना .. कही का..
बहार करीम आपने घर जाते वक़्त यही सोच रहा होता है की ये फटका कब हाथ मई आ जय.. वो आपने आप को समजनाए लगता है की .. आ जाएगी करीम .. माहि भी तेरे लुंड की घुलम हो जायेगे.. पहले तो तुजसे बात भी नहीं कराती थी अब बाते तो करने लगी है .. जल्द से जल्द तुजे अब ये सोचना है आगे कैसे बड़ा जय.. अब इसके चहरे पर उतना गुस्सा नहीं होता है तेरे को देख कर .. कभी कभी तेरे बात सुनकर है भी पड़ती है.. करीम जाने दे चोर दे.. अब थोड़ी दारू लगा le..aur सो जा.. रात को तुजे तेरे पूर्वी के पास जो जाना है…
उदार रूम मई आते hi मनीष माहि को कहता है..
चलो माहि .. घर चलते है..
माहि मनीष की बात को सुनते hi नहीं है.. उसके दिमाग मई करीम hi चल रहा था.. करीम के बारे मई सोचकर आपने आप hi उसके चहरे पर स्माइल आ जाती है.. आपने पति के तरफ न देखकर और उसके बात न सुनकर माहि बाथरूम मई चली जाती है… मनीष को आचार्य होता है के माहि ऐसा क्यों कर रही है.. वो क्या सोच रही होंगे…
बाथरूम से माहि बहार आने के बाद मनीष उसे फिर से कहता है..
चले
माहि उसे देखते है..
कहा
आप घर..
माहि कुछ देर सोचते है..
नहीं …
क्यों.. थोड़ी देर पहले तो तुम hi कह रही थी न..
हाँ .. कह रही थी.. पर भैय्या और अरुण ने इतना रिक्वेस्ट किया तो आज रुकते है यहाँ..
खाना खाके जाते है फिर..
नहीं.. नहीं.. आज रात यही रुकते है और सुबह hi चले जाते है..
मनीष कुछ नहीं कहता है..
तुम कुछ काम है क्या घर पाई अब
नहीं नहीं .. अब जेक सोना hi है घर पाई
तो यही सोते है मनीष ..ा ुर सुबह चलते है..
ठीक है.. माहि..
थोड़े देर बाद माहि घर के सभी लोगो के साथ खाना खाने लगाती है… वो बड़ी प्यार से पूर्वी की तरफ देखने लगाती है.. पूर्वी के चहरे पर एक अजीब से स्माइल उसे दिख जाती है.. वो सोचने लगाती है पूर्वी का चेहरा इतना खिला क्यों है आज.. बच्चे की वजह से या जो मई सोच रही हु वो.. उस वजह से.. पूर्वी को भी आचार्य होता है की माहि बुआ उसे क्यों ऐसा देख रही है आज.. पूर्वी आँखों से इशारा करते हुई माहि को पूछते है की क्या बात है तो माहि कुछ नहीं कहती है ..
खाना ख़तम होने के बाद सब लोग आपने आपने रूम मई चले जाते है..
मनीष का अब एक हाथ माहि के कुर्ते के ऊपर से hi उसके बूब्स पर चल रहा था.. अपने बूब्स पर मनीष का हाथ पड़ते hi माहि और भी ज्यादा मदहोश होने लग गयी..
क्या कर रहे हो.. छोड़ू भी..
माहि ने मनीष को मदहोशी भरे अंदाज में कहा..
मनीष माहि को किस करने के लिए आगे बड़ा और कहने लगा...
कोई भला छुट्टिया hi होगा जो अपनी इतनी हसीं बीवी को यूँ छोर दे..
मनीष ने माहि के बाए बूब्स को छोर कर उसके दाए बूब्स को मसलना शुरू कर दिया..
आअह्ह्ह्हह्ह्ह.. manishhhhhhhhhhhhhhh.. ऐसे hi दबाऊऊऊऊ ..ना.. रुको.. मत्तत्ततत्तत्त……
माहि को अब लग रहा था की अब मनीष ने रुकना नहीं चाहिए....
अब माहि मनीष के उप्पर आ गयी. नीचे मनीष का एक हाथ बारी बारी से माहि के अस्स के गुम्बदों को मसल रहा था.. न जाने क्यों आज मनीष से आपने अस्स के दोनों गुम्बदों के साथ खेलने में माहि को बड़ा मजा आ रहा था..
अब जल्दी से मेरे कपडे उतर दो manish..aur मेरे दोनों बूब्स को चूमो....
मनीष ने माहि का टी शर्ट उतर दिया..
उतर दो इस छोटी सी ब्रा को.. अब इसका हमारे बीच में क्या काम..
माहि की बात सुन कर मनीष को हलकी सी हंसी आ गयी..
आज क्या हो गया है माहि तुम..
कुछ नहीं मेरे राजा.. मुझे प्यार करो.. बहुत प्यार करो.. ताकि मई किसी भी तरह प्यासी न राहु…. मनीष..
मनीष उसकी ब्रा उतर रहा था तब तक माहि ने अपनी निघ्त्य को हल्का सा नीचे सरका कर अपने पैरो से पूरा नीचे कर दिया.. फिर मनीष ने उसके पंतय निकला फेक दी..
ब्रा के हटते hi मनीष ने छोटे बच्चे की तरह अपना मुंह माहि के एक बूब्स पर जमा दिया.. माहि बिस्तर पर एक डैम सीढ़ी लेती हुई थी.. मनीष एक हाथ से माहि के दूसरे बूब्स को दबा रहा था और उसका एक हाथ माहि के छूट के अंदर बहार चल रहा tha..Mahi ने अब अपने कोमल हाँथ मई मनीष का लुंड ले लिया और उसे आगे पीछे करने लगी .. मनीष के लुंड को आगे पीछे करते हुई वो सोचने लगी.. करीम का लुंड मेरे हाथ मई बैठ पायेगा क्या.. माहि यह सोचकर फिर से गरम हो गयी और अपनी छूट मनीष के उंगली से सहलाने लगी.
फिर खुद को समजने लगी.. माहि तू क्या सोच रही है.. ये सोचन पाप है..
माहि ने आपने नरम बूब्स मनीष के मू मई दे दिए.. और आपने टांगें मनीषी के कन्धों पर रख ली..
मनीष के साथ आज माहि पूरी तरह से खुल कर आवाज करते हुए सेक्स का मजा लेना चाहती थी पर आज वो आपने भैय्या के घर पर थी.. और उसी फ्लोर पर अरुण और पूर्वी का कमरा भी था.... इस वजह से माहि खुल कर आवाज नहीं निकल प् रही थी जिस कारन माहि के उत्तेजना और भी ज्यादा भड़ती जा रही hi.. और इसी उत्तेजना के कारन माहि एक बार झाड़ चुकी थी.. मनीष की उंगलिया बराबर माहि के छूट में अंदर बहार हो रही थी..
माहि ने मनीष का लुंड आपने छूट पर रगड़ने lagi..aur वो बुहत तेज़ सिसक रही थी और अपने गोर और मोठे हिप्स उछाल रही थी.
मनीष अब दाल भी दो अब बर्दाश्त नहीं होता.
फिर मनीष ने माहि के दोनों टांगो को घुटने से मोड़ कर दोनों टाँगे हवा में कर दी जिस से उसकी छूट खुल कर उसके सामने आ गयी थी.. मनीष ने अपना लिंग उसकी छूट की लकीर पर ऊपर से नीचे, नीचे से ऊपर फिरना शुरू कर दिया.. अब माहि अपना आप पूरी तरह से खो चुकी थी और उसके मुंह से जोर जोर से सिसकारियां निकलने लग गयी थी.. पूरा बदन पसीने में तर बदर हो गया था..
वैसे माहि मनीष का लिंग देखते hi माहि को करीम का लुंड याद आने लगा.. वो सोचने लगी करीम के सामने मनीष का कितना छोटा है.. वो अब करीम के लुंड को भूल जाना चाहती थी..
aaaaaaaaaaaaahhhhhhh……. आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह… के ों मनीष के ों…
माहि के मुंह से तेज तेज आवाज सुन कर मनीष ने उसके मुंह पर हाथ लगा लिया …
कोई सुन लेगा माहि.. इस फ्लोर पर अरुण का कमरा भी है..
ऐसा कहके मनीष ने आपने लिंग को माहि के छूट के छेद प् टिका कर धीरे धीरे पूरा लिंग अंदर कर दिया.. और आगे पीछे करने लगा..
आईईईई ऐसे hi मेरे राजा बुहत मज़ा आरहा है.
थोड़ी देर यही सिलसिला चलता रहा..
अब छुड़ाते हुई माहि आपने हाथ से बूब्स को दबा रही थी ..

ज़ोर से ढके lagao.manish और जोर se..I लव यू मनिष्ठ्हहहहहह…
और फिर थोड़ी hi देर मई मनीष ने आपने पानी माहि के छूट के उप्पर गिरा diya..aur हफ्ते हुई मनीष माहि के उप्पर गिर पड़ा.. फिर वो दोनों एक साथ एक दूसरे से चिपक कर नंगे hi सो gaye..kuch देर बादमाही नींद से जग गयी .. तब कपडे उसके यहाँ वह पड़े उसे दिख जाते है.. न जाने उसे क्या हो जाता है.. वो कुछ सोचने लगाती है और वो सदी पहने लगाती है..
सदी पहनने के बाद आपने बाल जो मनीष के साथ सेक्स करने के वक़्त बिखरे हुई थे उसको ठीक थक कर लेते है..

फिर कुछ देर सोचते है... और आपने आप को सजाने संवारने लगते hi.. वो भी इतने रात.. आपने हस्बैंड सोने के बाद.. फिर वो मनीष को देखते है.. वो गहरी नींद मई था.. उसे वो देखते है .. और उसके चहरे पर स्माइल आ जाती है.. वो मेकअप करने लगाती है..
फिर माहि तैयार होकर बहार पोर्च मई आ जाती है ..पोर्च मई अभी कोई नहीं था… . रात के 11 बजे thee….isslye घर के सभी लोग सो गए थी…. कोई जग नहीं रहा था.. घर मई कैसे भी आवाज नहीं thi..pehale तोह माहि पोर्च मई थोड़ा टहलती है .. इधर उधर चल रही थी……. अचानक से माहि का धयान सामने gaya..Tabhi उसकी नज़र करीम पर पढ़ी… सामने से स्टेप्स चढ़ाते हुई करीम उप्पर आ रहा था.. जो के करीम सामने नहीं निचे देख के चलते हुई उप्पर आ रहा tha..…jaise ही करीम ने सामने देखा तोह माहि साइड मई हो गयी .. एक कार्नर मई जेक चुप gayi..taki करीम उसको देख न पाए... करीम सामने देखकर ऊपर के तरफ चलने लगा…
पोर्च मई जेक करीम थोड़ी देर खड़ा रह गया.. माहि ने अब सोच लिया की करीम से जेक वो बात कर ले की वो इस वक़्त यहाँ क्यों आया है.. तभी करीम किसी को कॉल लगाने के लिए आपने मोबाइल जेब से निकल लेता है.. तब माहि समाज जाती है की .. करीम क्यों आया है इस वक़्त.. वो सोचने लगाती है.. आज आफ्टरनून मई hi इसने लता भाभी के साथ सेक्स किया है और ये फिर से आ gaya..aur वो भी भैय्या घर मई होते हुई.. अब ये दोनों तो भैय्या को भी दर नहीं रहे है.. इस ठरकी को जाने दो भाभी को भी अपनी लाइफ के बारे मई कुछ दर नहीं है क्या.. हरामी कही की..
तभी करीम आपने कान पे लगा हुआ फ़ोन निचे करता है.. माहि एक कार्नर मई कड़ी होकर देख रही थी.. वो सोचती है सेल ने कॉल क्यों नहीं किया.. तब करीम के चहरे पर पहेली हुई कमीनी मुस्कान देख कर माहि को गुस्सा आ जाता है..
वो आपने आप को कहती है.. लगता है साली लता भाभी आ गयी है इस वजह से कमीना मुस्कुराहा hai..fir माहि करीम जिस तरफ देख कर मुस्कुराहा है उस तरफ मुद कर गुस्से से माहि देखने lagi……samane का नज़ारा देखकर माहि के दिल के धड़कने एक दम से बढ़ gaye….usne सामने देखते hi माहि अंदर तक सुलग गए. सामने लता नहीं तो पूर्वी thi..usne आपने दरवाजा खोला...

और वो करीम को देख कर स्माइल करते हुई उसकी और आ रही थी..
पूर्वी संज संवारकर आयी थी..

माहि सोचने लगाती है... पूर्वी ने इतने रात को इतना अच्छा मेक उप क्यों किया hai..fir कुछ सोचकर और
पूर्वी को देखकर माहि हकीबाकि वही दांग कड़ी रह गए… वो सोचने लगाती है ..मई अब्ब काया kArun…aur काया ना करूँ.. अब इसने पूर्वी को आपने जाल मई फांस लिया है .. पूर्वी के जिंदगी ख़राब कर देगा ये ठरकी.. इसकी जिंदगी ख़राब होने से उसे बचा ले जाना चाहिए …
पूर्वी करीम के पास आते hi करीम कुछ कहना चाहता था पर पूर्वी उसे चुप रहने का इशारा करती है.. करीम भी चुप हो जाता hai..Aur फिर पूर्वी सामने वाले रूम मई चली गयी ….पीछे से करीम भी उसी रूम मई गया..
फिर माहि सोचने लगते है ...पर पूर्वी का और इस बूढ़े का चक्कर पहले से होगा तो.. तो मई क्या करू फिर…… पूर्वी hi उसे उस रूम मई ले गयी .. मतलब साफ़ hai…par फिर भी पूर्वी जो कर रही hai…wo ठीक नहीं hai…jo वो दोनों अब करने वाले है वो कही से भी सही नहीं है…. वो चाहते थी की वो जोर से छिलके पूर्वी को bole…apne आप को रोको पूर्वी… माहि पूर्वी को अपनी जिंदगी बर्बाद करते हुए भी नहीं देख सकती थी……. माहि का मान बेचैन था… पूर्वी के लिए.. उसे लगा की, आज तोह पूर्वी लौट ही jayege.wo आपने आप को कहने लगी.. मुझे पूर्वी को किसी भी हाल मई ये सब करने से रोकना होगा…. वो अभी न समाज है… बची है….
माहि सोचने लगाती है और आपने आप को कहती है …जिंदगी मई इतने शॉक मुझे एक साथ कभी नहीं लगे thee…pahale सिमरन मैडम.. फिर लता भाभी और अब पूर्वी.. उसके टाँगे कनाप रही the….Mahi सोचती है किसी तरह चल कर उस रूम तक पहुंचना पड़ेगा ... ….…… माहि एक दम से पेरशान हो gaye….aur उस तरफ बढ़ने lagee….jiss तरफ पूर्वी और करीम गए thee…charo तरफ एक दम सुनसान tha….naa कोई इंसान नज़र आ रहा tha….aur ना ही कोई आवाज़….
jaise-jaise माहि उस दूर के करीब पहुंच गए ….दर के मरे उसके हाथ पेअर कंपनी शुरू हो गए thee…..uss रूम के दूर के पास जाकर माहि ने थोड़ा सा झुक कर उसके अंदर जखने की कोशिश की …
माहि ने अंदर झांकने के कोशिश की तो अंदर भोत अँधेरा था… तोह इस वजह से वो दोनों माहि को नज़र नहीं आये…
अब्ब माहि का दिल इतनी जोरो से धड़क रहा था की, वो अपने दिल के धड़कने भी साफ़ सुन पा रही thee…uska दिल बैठा जा रहा tha….par ऐसा लग रहा tha….jaise अंदर कोई ना हो. पर तभी उसे अंदर से कुछ आहत सुनाई दी…
माहि ने सोचा झुक कर उस दूर से अंदर जाते है .. और देखते है.. फिर आपने आपको hi कहने लगी.. नहीं.. वो कमीना मुझे देख lega..…aur फिर माहि को सामने एक विंडो दिख जाती है . जो थोड़ी सी खुली हुई थी… माहि दबे पौन अग्गे बढ़ी….. विंडो की तरफ …
तोह उसे फिर से कुछ आहत सुनाई dee….Mahi उस तरफ देखने लगी …
माहि ने वो विंडो को खोला ….
पर अग्गे जो माहि ने dekha…wo देख कर तोह उसके पैरो टेल से जमीन ही खिसक गए…


















































