Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION .... - Page 15 - SexBaba
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Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION ....

नवाज़ का लौड़ा अब पीछे से आरती की गांड पर साड़ी के ऊपर से दस्तक दे रहा था जैसे कह रहा हो जल्दी दरवाज़ा खोल मुझे अंदर आना है.... नवाज़ के दोनों हाथ आरती की कमर के इर्द गिर्द से आगे होक उसके हाथ को वो पकड़ लेता hai..uske बदन को चिपक के ..





और फिर मन में कहता है

अस्स्सस्स्स्स क्या बदन है आरती रन्नीई teraaaa....ab जाकर हाथ लगी है तू mere....kabse तेरे जवान जिस्म पर मेरी नज़र थी और मेरे लौड़े को बोहत तड़पाया है तेरी छूट ने.... लगता है उसका बदला लेने का वक़्त आ गया है

….

इधर नवाज़ से चिपक के खड़े होने से आरती बेचैन होने लगी थी … वो बहुत असमंजश में फांसी थी की वो आगे क्या करे .. यहाँ से चले जाये या नवाज़ को पीछे धकेल दे .. वो जानती थी उसने ऐसा नहीं किया तो नवाज़ गलत मतलब ज़रूर niklega...jo वो नहीं चाहती थी ..... वो सोचने लगी ये भी हो सकता था की नवाज़ ये बात जान जाये की मई उसे विरोद नहीं कर रही हु .. अगर वो ये जान गया तो वो मेरा गलत फायदा उठा सकता है .....

वो सोचने लगे .. ये भी हो सकता हैं की वो मेरा हाथ पदक le....aur मुझे इधर उधर छुए ....... मेरे बदन पर अपना हाथ भी लगाए........ और नवाज़ ने ऐसा किया तो मई क्या करू .. नवाज़ ने अगर ऐसा मेरे साथ किया तो मुझे उसे ओपपोसे करना चाहिए.. मैं नहीं चाहती की नवाज़ मेरे बदन को छुए .... मेरे बदन पर सिर्फ और सिर्फ अधिकार मेरे हस्बैंड का हैं ...... और किसी का नहीं .....

पर ये तो मुझसे चिपक के खड़ा है .. ये गलत हैं ...... मैं अपना ये हसीं बदन किसी और को ऐसे चुने नहीं दे सकती ..... ये पाप हैं .....

और ऐसे hi हुआ जैसे आरती ने सोचा था .. उसके हाट को पकड़ के नवाज़ उसको जोरसे कास लेता है....





नवाज़ ने अचानक यूँ कास के पकड़ने से वो नवाज़ के जिस्म को खुद पर महसूस करने लगती है … उसका कलेजा ज़ोरो से धड़कने लगा . .......साथ में वो लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगी … एक अजीब सी बेचैनी उसके अंदर उठ रही थी … लुम्बी लुम्बी साँसे लेने के बाद वो थोड़ी नार्मल हुई तभी उसके कान के पास आपने मू ले जेक नवाज़ कान मई धीरे से कहता है..





मेमसाब .... एक बात बोलू … आप सच में बहुत खूबसूरत है ...... मैंने आपके जैसी खूबसूरत औरत इससे पहले कभी नहीं देखि ....

और इतना कहकर नवाज़ धीरे से मुस्कुरा देता हैं वही आरती बिना कुछ बोले वही खामोश सी कड़ी रहती हैं .. बिना नवाज़ की तरफ देखे..

आरती के साथ वो इतना कुछ कह रहा था पर आरती उसे एक भी बार न रोक रही थी......... और न hi उसे मन कर रही thi...isi वजह से उसकी हिम्मत अब बढ़ने लगी थी ....

अब वो आरती के हाथ को पकड़ के उसके हाथ पाई आपने उंगली फेरने लगता है.... आरती की मुलायम गोरी स्किन पर उसको

खुरदुरे हाथ फेरने में उसे मज़ा आ रहा tha….thodi देर वहां हाथ फेरने के बाद आरती वो हाट नवाज़ के हाथ से चुरा लेती है और वो हाथ उप्पर उठा के वो पैकेट नवाज़ को देती है पर अब नवाज़ को वो पैकेट नहीं चाहिए था .. अब नवाज़ उसका वो हाट फिर से पकड़ लेता है





दूसरा हाट उसके कमर पर रख लेता है अब अपने कला चेहरा उसके चहरे के पास ले जाता है वैसे hi

तब नवाज़ के मू से एक तेज़्ज़ दुर्गन्ध .. शयद टोबाको की .. निकल के आरती के सांसों में घुलने लगती hain........jisse उसकी सांसे तेज़्ज़ हो जाती है ..... उसपर मदहोशी चने लगती है .... न जाने उस स्मेल में ऐसा क्या था जिससे वो पूरी तरह से मदहोश होने लगी थी ...........

वो एक लुम्बी सी साँस लेती हुई उस स्मेल को अपने बदन के अंदर उतरने लगती hai.........jis से उसकी आँखे बंद हो जाती हैं ...... वहीँ नवाज़ बड़े गौर से आरती के तरफ देखे जा रहा था........

उसको देखते हुई नवाज़ आपने होंठ उसके गोर गोर गाल पर रखता है..





और कहता है..

वैसे मेमसाब आप हर कपड़ों में बहुत सुन्दर लगती हो पर इस साड़ी मई कातिल लग रही हो

नवाज़ की इस बात से उसके तन बदन में आग लग जाती है .... वो सोचती है अब उसका यहाँ एक पल भी रुकना रिस्की है ....

ऐसा सोचते हुई वो झट से उसके हाट को झटका देके उसकी तरफ बिना देखे किचन से बहार चली जाती है .. नवाज़ कुछ कर नहीं पाया सिर्फ आरती को ऐसे जाते हुई देखते रहा ..
 
ऐसा सोचते हुई वो झट से उसके हाट को झटका देके उसकी तरफ बिना देखे किचन से बहार चली जाती है .. नवाज़ कुछ कर नहीं पाया सिर्फ आरती को ऐसे जाते हुई देखते रहा ..

अब श्याम के टाइम हाल मई शेठ जी और आरती टीवी देख रहे थे तब नवाज़ बहार से हाल मई आया

अरे नवाज़ आज क्या क्या काम किया..

शेठ जी ने नवाज़ को कहा ...

हाँ साब एक रूम साफ़ हो गया..

वो कामचोर कहा है..

तब नवाज़ आरती की तरफ इशारा करते हुई पूछता है..

कोण कामचोर..

तब नवाज़ की तरफ देखते हुई आरती कहते है..





नीता

तब तक उसका ससुर कहता है

हाँ वो कामचोर नीता कहा है..

तब नीता वह आते है..

क्या बाबूजी.. मुझे कामचोर कहते हो.. देखो आज मैंने कितना काम किया है..

कितना काम किया है कामचोर तुमने

बाबूजी मैंने आज एक रूम टोटल क्लीन करवा दी..

वो तो नवाज़ ने की होंगे

मैंने हेल्प कर दी उसकी इसलिए हो गए वो

इसलिए तो मई तुजे कामचोर कहता हु.. तेरा काम इधर किचन मई था और तू नवाज़ ने जो काम किया है वो आपने किया है ऐसे बता रही है और तेरे वजह से अकेले आरती को काम करना पड़ता है..

हाँ पापा आप की बात सही है पर क्या करू ये नीता कामचोर सुनती कहा है ..

क्या दीदी आप भी.. आप तो अब शेठ जी जैसे बाते कर रही हो

सही तो बोल रही है बेटी वो तेरे बारे मई

दीदी आप ने तो कहा था नवाज़ के साथ जाने को

हाँ जाने को कहा था वह रुकने को नहीं

तब नवाज़ कहता है

शेठ जी वो मई यहाँ नया हु na..yaha का ज्यादा कुछ पता नहीं इसलिए रुख गए थे वो मेरे साथ..

नवाज़ नीता की साइड लेके बात कर रहा है ये जानकार नीता निचे देख के स्माइल करती है..





और मैं मई कहती है..

कमीना उसकी साइड लगे hi न.. उसके साथ मज़े करने को जो मिल रहे है...

तभी शेठ जी बोलते है..

शेठ - अच्छा.. वैसे आरती बीटा ये खेत का काम बहुत जल्दी सिख गया .. इतनी जल्दी ये सिख जायेगा ऐसे उम्मीद तो मुझे भी नहीं थी .. चलो घर का काम भी बहुत जल्दी सिख जाये यही उम्मीद है..

तब आरती आश्रय से नवाज़ की तरफ देखने लगी..





उसे ये आईडिया नहीं थी की नवाज़ के काम पाई पापा इतने ज्यादा फ़िदा है.. वो नवाज़ को देखते हुई कहने लगी..

इस काळा लोफर मई पापा को क्या दिख गया जो इसकी इतने तारीफ करने लग गए है ..

नीता - लगता है यहाँ का काम भी जल्दी hi सिख जायेगा ये शेठ जी ..

शेठ - हाँ जल्द hi सिख जायेगा

हाँ साहब जल्द से जल्द सीखने की कोशिश कर रहा हु

आरती की तरफ देखते हुई कहता है.. आरती उसकी और देख रही थी ..

स - वैसे नवाज़ अब इस वक़्त घर मई आये हो .. कुछ चाहिए क्या तुम .

तब नवाज़ कुछ बोले उससे पहले आरती झट से बोलती है..

वो पापा उनोने सुबह से खाना नहीं खाया ..श्यादा इसलिए आये होंगे

आरती ने आपने बारे मई ये कहा ये सुन के नवाज़ कुश हो जाता है.. पर आरती सोचती है ये मैंने क्या कह दिया .. और अपनी उंगली चबाने लगी..





उंगली चबाते हुई सोचने लगी.. ये बाँदा मुझे पागल बना देगा... अब मई क्या करू.. मैंने इसे उनोने कैसे कहा.. पापा ने सुना होगा तो मई मर गयी.. फिर वो अपनी गलती पर सफाई देने लगी.. और वो फिर से कहते है..

वो नीता और नवाज़ दोनों ने सुबह से खाना नहीं खाया इसलिए वो दोनों खाना खाये आगये होंगे

तब शेठ जी कहते है

कामचोर तुजे तो भूख नहीं लगी होंगे पर नवाज़ ने तो काम किया है उसे तो भूख लगे होंगे.. सुबह से बुखा क्यों रखा उसे

तब आरती मैं मई कहते है

उसको भी कहा भूख लगी होंगे..

नीता कहते है..

वो मैंने बोलै था पर उसने कहा बाद मई कहते है

क्यों तुजे भूख नहीं लगे क्या नवाज़

ऐसा शेठ जी ने कहा तब नवाज़ ने कहा

भूख तो सुबह hi लगी थी पर तब मेमसाब ने खाना नहीं बनाया था..

तब आरती गुस्से से उसकी और देखती है





और इशारे से उसे पूछते है..

मैंने कब खाना देने से मन किया था तुम..

तब इशारे से वो कहता है..

दिया तो नहीं न आपने

तब बुरा सा मू बनके आरती उसे सॉरी कहती है..





तब शेठ जी कहते है

मतलब सुबह जब तुम यहाँ किचन मई थे तब खाना नहीं खाया था क्या

नहीं न शेठ जी

तब आरती की तरफ देखते हुई शेठ जी कहते है

बीटा ऐसे कैसे तुमने दिनभर इसको भूका कैसे रखा . .

तब बुरा सा मू करते हुई कहते है..





सॉरी पापा जी.. वो काम मई भूल गए.. उस टाइम खाना नहीं बना था पर मैंने इन् लोंगो को बाद मई आने को बोलै था पर ये लोग बाद मई नहीं आये..

हम काम मई लग गए थे.. तो नहीं आ पाए मेमसाब

ऐसा नवाज़ आरती की तरफ देखते हुई कहता है और दूसरी तरफ आरती गुस्से से नवाज़ को देख रही थी..





काम मई नहीं पर बाटे करते बैत गए होंगे

तुम सच कह रही हो बहु.. ये नीता बात बहुत करते है.. नवाज़ से बाते करते बैत गए होंगे ..

तब आरती मैं मई कहती है ..

इस नवाज़ ने क्या जादू किया है पापा जी पर पता नहीं पर पापा जी इसको बहुत अच्छा मानते है..

नीता - शेठ जी.. मैंने ऐसा कुछ नहीं किया वो हम लोंगो को भूख नहीं लगी इसलिए हम नहीं आये ..

आरती - ठीक है अभी किचन मई जाओ तुम दोनों ..

शेठ जी.. हाँ अभी जाओ.. बहु इन् दोनों को खाना दे दो.. पेट भर के खाओ तुम लोग..

नवाज़ - ठीक है शेठ जी..

ऐसा कह के वो किचन मई चला गया खाना खाने.. और किचन मई निचे बैठ गया .. उसके बगल मई नीता बैठ गयी.. तब आरती उन्दोनो को खाना देने लगी.. अब वो दोनों निचे बैठे थे और आरती खड़े थे उनके सामने.. खाने की प्लेट नवाज़ के सामने रखने के लिए उसे जुकना पड़ा.. जिस वजह से उसकी आधे से ज्यादा चूचिया नवाज़ के आँखों के सामने आ गयी.. जिन मई एक तक नवाज़ देखे जा रहा था.. और आरती पराठा हाथ मई लेके उसकी आँखों मई देख रही थी.. जुख के.. जब उसे पता चला की नवाज़ कहा देख रहा है तब वो धीरे से बोली..

कमीना..

और दूसरे हाथ से आपने चुकी को देख लिया और पराठा उसके प्लेट मई रख के खड़े हो गए.. और नवाज़ स्माइल करके उसे देखने लगी.. और नीता गुस्से से उसे देख रही थी.. तब नीता नवाज़ की तरफ देखते हुई कहते है..

नीता - नवाज़ पराठा लो न खा खो गए.. दीदी बहुत अच्छा पराठा बनती है..

तब बहुत धीरे से नवाज़ बोलता है..

नीता तेरे दीदी का सबकुछ बहुत अच्छा है.. तू नहीं जानती ..

ये नीता सुन नहीं पाए.. क्यों की उसने बहुत धीरे से बोलै था.. आरती ने भी नहीं सुना था पर उसे भी पता चल गया था इसने कुछ न कुछ गन्दा hi बोलै होगा

आरती - कमीना नहीं सुदरेगा..

न- कही नहीं ( और आरती की चूचियों को देखते हुए पराठा ले लिया और आरती को देखते हुए खाने लगा)..

और इधर नीता पराठा कहते हुई उसे बाते करने लगी.. नवाज़ भी आरती को देखते हुई उसे बाते करने लगा.. और आरती सामने कड़ी थी.. किचन सिंक को सत् के.. उन्दोनो को घूरे जा रही थी.. उनको वो कुछ बोल नहीं रही थी .. उसके चहरे पर गुस्सा नहीं था अब.. पर ख़ुशी भी नहीं थी.. शयद नवाज़ नीता से बात कर रहा है ये देखकर वो जेलस हो गयी थी..

वो जब ज्यादा बाते करने लगे तब शेठ जी बोल पड़े

शेठ जी - बाते मत करो.. तुम दोनों पहले चुप चाप खाना खाओ उसके बाद जितनी मर्ज़ी बात कर लेना..

न - क्या शेठ जी.. खाना कहते हुई भी आप हमें आपने मान की नहीं करने दे रहे हो..

स - खाओ जैसे मैं करे पर बिना बाते करते हुई..

शेठ जी के ऐसे कहने से आरती के चहरे पर स्माइल आ जाती है..

न - क्या शेठ जी.. मई इतने दिन बाद तो मिली हु नवाज़ से और आप बात भी नहीं करने दे रहे हो ..

तब स्माइल करते हुई आरती कहते है





अरे पापा जी करने दो न उससे अपनी नवाज़ से बातें ….अब्ब रोज-2 थोड़ा नवाज़ यहाँ ऐनी वाला है….. इससे बाते करने ..

स- वो भी सही बात है तुम्हारे बीटा पर सुबह से तो नवाज़ के साथ है ये ..बाते तो बहुत की होंगे इसने ..

तब नीता कहते है

नहीं न.. बात कुछ नहीं हो पाए.. अब बात कुछ करना चाहा रहे है तो शेठ जी आप मन कर रहे हो… आप को नहीं लगता की आप कुछ ज्यादा स्ट्रिक्ट हो रहे हो..

तब आरती कहते है..

ा - मालिक ने टाइम तो टाइम स्ट्रिक्ट होना चाहिए.. नहीं तो नौकर बिगड़ जाते है .. ( नवाज़ की तरफ देखते हुए वो कहते है..)





तब नवाज़ कहता है..

हम कहा बिगड़ गए है मेमसाब.. हम तो अच्छे नौकर है.. है न शेठ जी

तब शेठ जी कहते है ..

तुम तो अच्छे हो

शेठ जी आगे कुछ बोले इस से पहले नीता कहती है..

मेमसाब आपके नौकर अच्छे hi है.. बैगडे हुई नहीं है.. नवाज़ को देख लो कितनी जल्दी सब कुछ सिख गया.. खेती का और अब घर का.. बहुत जिम्मेदार इंसान है नवाज़..

तब आरती नखरा करते हुई कहते है

मुझे पता है कितना जिम्मेदार इंसान है तुम्हारा नवाज़..

तब शेठ जी कहते है..

बहु एक एक और पराठा दो दोनों को

तब आरती नीता को और नवाज़ को पराठा देती है.. इस बार भी आरती के झुकने के टाइम उसके चूचिया देखने लगा और आरती गुस्से से उसे देखने लगी.. तब शेठ जी कहते है..

तुम लोग खाना खाओ आराम से मई बहार बैठा हु

हाँ शेठ जी ऐसा कह के नवाज़ पहले शेठ जी को देखता है.. वो बहार जाते hi आरती को देखता है . .. और उसको आँख मरता है.. और कहता है..

आप बहार आराम करो शेठ जी ..

आरती को आँख मरते hi वो और ज्यादा गुस्सा हो जाती है. ...





पर नीता यहाँ और आपने ससुर बहार हॉल मई बैठे था इस वजह से कुछ कर नहीं पाए..

और इधर नवाज़ स्माइल करते हुई आरती की तरफ देखते हुई खाना खाने लगता है.. अब नीता निचे गर्दन करके थोड़ा जुख के खा रही थी.. इस वजह से उसकी चूचिया थोड़े बहार आ गयी थी.. उसकी चूचिया वो देखने लगा.. नवाज़ को यु नीता की चूचियों देखते हुए आरती उसे गुस्से से देखते हुई अचानक से मुस्कुरा दी..





और नवाज़ ने ये तिरछी नज़र से देखा. .. शयद आरती को ये पता नहीं था की नवाज़ ने ये देख लिया है..

नीता आराम से बैठ कर अपना खाना खाने लगी थी ..उसके ऐसे झुक के खाने की वजह से उसकी चूचिया भी कपडे से बहार आने को तड़प उठी थी.. नवाज़ उसकी चूचिया देख रहा है और आरती नवाज़ को देख रही है इस बात से बेखबर नीता खाना खाने मई लगी हुई थी.. और इधर आरती नवाज़ नीता की चूचियों को घूरते हुए देख रहा है वो बड़े गौर से देख रही थी.. ये देख के उसके फेस पैर अलग hi कातिल मुस्कान आगयी थी..





अब नवाज़ कुछ पल नीता की चूचिया देखता और फिर आरती को देखता.. नीता के चूचिया को खाना कहते हुए नवाज़ देखता और बिच बिच में आरती को देखता.. दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा जाते..





ऐसे hi 3-4 बार हुआ तो आरती को एक दूसरे को देखते हुए एक शरारत सूजी और उसने खुजाने के बहाने से अपने साड़ी अपनी चेस्ट पर से हलकी सी बाजु की और अपनी गोर चुके के क्लीवेज नवाज़ को दिखने लगी..





अब ये उसने क्यों किया ये वो भी नहीं जानती थी.. नवाज़ का अपनी तरफ ध्यान आकर्षित करना चाहती थी.. या वो जो नीता की चूचिया देख रहा था वो आरती नहीं चाहती थी की नवाज़ देखे. .. पता नहीं उसने ऐसा क्यों किया वो नहीं जानती थी..

पर इधर आरती की गोर चूचिया या यु कहे उसके क्लीवेज देखते hi नवाज़ की आँखों में चमक आ गयी पैर ये चमक जल्द hi चली गयी क्युकी नीता ने जल्द hi उन्हें फिर से आपने साड़ी से धक् लिया और खड़े हो कर उसको देख कर हँसाने लगी..





वो खुल कर नहीं है रही थी.. उसे थोड़ा दर था नवाज़ का.. उसे पता था नवाज़ किस किसम का बाँदा है.. वो उसे ज्यादा उकसा नहीं चाहती थी.. वो जानती थी उसे अगर ज्यादा उकसाया तो वो आपने आप खो सकता है.. उसने अब जो हरकत की थी वो डरते हुई की थी.. उसने क्यों की उसे पता नहीं पर अब उसे नवाज़ से डर लगाने लगा..

तब नवाज़ उसे एक उंगली कर कर एक बार और दिखाओ ऐसे कहता है तब वो उसे गुस्से से देखते है





और नकहरा करते हुई वो कहती है...

क्या है???

तब नवाज़ इशारे से कहता है..

एक बार दिखाओ न

तब वो इशारे से न मई गर्दन हिलाते है . ..





तब नवाज़ ऐसे hi उसे 2-3 बार रिक्वेस्ट करता है तब वो उसे बड़ी आँखे दिखते हुई इशारे से कहते है. .

उसके देखो . ..





नवाज़ भी नाराज़ होते हुई नीता की चूचिया को देखने लगा.. और आरती उसको देखते रही.. और मैं मई कहने लगी.. कमीना साला.. कभी मेरे बूब्स को देखता है और कब नीता को.. साला बहुत हरामी है.. कुछ देर ऐसा hi चला.. आरती फिर सामने के नज़ारे मई खो से गयी..

तभी बहार से शेठ जी आते है और कहते है

अरे तुम दोनों ने खाना खा लिया क्या.. मई तो तुम दोनों को पूछने आया था की और कुछ चाहिए क्या.. बहु तुमने पूछा न इन् दोनों को की उन और कुछ चाहिए क्या

तब आरती आपने तंदरी से बहार आ जाती है..

हाँ पापा

अब दोनों का खाना ख़तम हो गया था.. नवाज़ हाट धोने के लिए उठ खड़ा हो गया.. आरती वाश बेसिन के पास की कड़ी थी.. जैसे hi वो जान गयी की नवाज़ यही उसके पास आने वाला है तब वो बाजु हैट गयी..

नवाज़ हैंड वाश करता है और घूम के आरती के सामने खड़ा हो जाता है .. आरती भी उसको डरते हुई देखते है.. तब नवाज़ कहता है..

पानी मिलेगा क्या मेमसाब

तब आरती गर्दन से हाँ बोलती है उसकी आँखों मई देखते हुई..





आरती उसे पानी देती hai..dono एक दूसरे को देख रहे थे और इधर शेठ नीता को कुछ समजा रहे थे.. नवाज़ लगातार आरती को देखे जा रहा था.. तब कुछ सोचकर आरती अब किचन से बहार के रूम के लिए चल दी .. जब आरती मटकते हुए वह से निकली तो नवाज़ की नज़र उसकी गांड पैर चली गयी जिसे मुड़कर आरती ने भी देख लिया और दिल में खुश होते हुए बहार चली गयी.. आरती के जाने के बाद नवाज़ भी जल्दी से बहार निकल गया क्युकी वो आरती से कुछ बाते करना च रहा था.. किचन से निकल के नवाज़ ने पहले हाल मई देखा वो वह नहीं थी.. फिर उसने 2-3 रूम थे वह आरती को देखा.. वह भी उसने देखा तब वह भी आरती नहीं थी तब उसे आरती की आवाज़ उप्पर छत्त पर आ जाती है.. वो शयद किसी से बात कर रही थी.. मोबाइल पाई .. तब नवाज़ हॉल से चल के सीधा छत्त पैर पहुंच गया जहा आरती कड़ी थी एक डीप गले की ब्लाउज पहन कर और मोबाइल पाई किसी से बात कर रही थी..





नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता

उधर से - अरे मेरे मीटिंग है.. मई नहीं आ सकता

वो कुछ हो मई अकेले नहीं जा सकती

अकेले कहा हो पापा जी है न

पापा जी तो सीनियर लोंगो के साथ बीजी हो जायेंगे मई अकेले हो jaunge..aur फिर मई बोर हो जाउंगी

तब वो आगे वाला बाँदा हँसाने लगता है

आप को हसी आ रही है क्या मेरे हालत पर

तब नवाज़ समाज जाता है आरती मेमसाब अरविन्द साहब से बाते कर रही है

ा - एक काम करो तुम बोर हो जाओगे न वह तब नीता को साथ मई लेके जाओ

तब आरती हँसाने लगी..

मतलब रस्ते मई और यहाँ आने तक मुझे वो पका देंगे.. दिन भर वो बक बक करती है..

अब दोनों हसने लगे..

ा- तुम बोर भी नहीं होना चाहते और तुम कोई पकाये भी नहीं

हाँ ऐसा hi कुछ समाजो पति महाराज

तो हम इस चीज़ का हम सलूशन कैसे लाये

वो आप की प्रॉब्लम है मेरे नहीं

प्रॉब्लम तो तुम्हारे है

पत्नी के प्रॉब्लम का सलूशन करना पति का धर्म होता है

हम्म्म

सिर्फ हम्म्म्म से काम नहीं चलेगा ..

सलूशन सोचता हु

सोचो सोचो ... बी थे वे और एक प्रॉब्लम है

अब कोनसा प्रॉब्लम है

आप ड्राइवर तो आपने साथ लेके गए होंगे और ड्राइवर तो आप के साथ hi आएगा.. फिर हम कैसे जाये..

इसका सलूशन है

क्या

पापा ने कहा है नवाज़ अच्छा ड्राइविंग करता है..

आप दोनों बाप बेटे को क्या हो गया है... मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा है.. उस नवाज़ ने आप दोनों पर क्या जादू किया है पता नहीं चल रहा है.. उसपे जो इतना भरोसा कर रहे हो..

ये सुनकर नवाज़ मैं मई कहता है..

अब इसको क्या हो गया है.. मेरे खिलाफ ये लौंडे क्यों छोटे मालिक को उकसा रही है..

अरविन्द - क्यों क्या हो गया है

कुछ नहीं

उसकी कुछ नेगेटिव बात तुम पता लगी है तो बता दो

वो भी बता दूंगी वक़्त आने पर

नवाज़ की तरफ देखते हुई कहते है..

ठीक है.. अब मुझे काम है.. रखता हु.. पापा के साथ जाओ तुम..

ठीक है जाउंगी..

ऐसा कह के वो कॉल रख लेते है.. और थोड़ा सामने आके कहते है...





ये है तुम्हारे साहब.. मुझे अकेले जाने को कह रहे है एक प्रोग्राम मई.. और खुद नहीं आ रहे है..

बिजी होंगे.. बड़े आदमी है...

हाँ वो तो है.. पर आदमी ने इतना भी बिजी नहीं रहना नहीं चाहिए की अपनी धर्मपत्नी को किया वडा पूरा कर न सके

बात तो आप सही कह रहे हो.. वैसे मेमसाब आप कब जा रहे हो और कहा..

तब नखरा करते हुई कहते है..





तुम पता नहीं है क्या

नहीं तो

तुम्हारे साहब तो कह रहे तुम hi लेके जाओगे मुझे

मुझे नहीं पता मेमसाब

सुन्ना है तुम बहुत अच्छी ड्राइविंग करते हो

हाँ वो तो करता हु

वो भी देख लेंगे

देख लीजियेगा... पर कब जाना है..

तब उसकी और देखते बड़े अड्डा के साथ कहते है..

आरती - तू खाना कहते वक़्त क्या देख रहा था .. तुझे शर्म नहीं आती..

नवाज़ कुछ कहता उससे पहले hi खुद hi आरती कहती है..

शर्म कैसे आएंगे.. तू तो 1 नंबर का बेशर्म है.. काम से पापा को तो डरता न.. उनोने देखा होता तो तेरे खैर नहीं थी..

न - वो मैंने जानबूझ कर नहीं देखा था.. बस नज़र पद गयी

ा- नज़र पद गयी थी तो हैट भी तो सकती थी न

न- वो देखने में इतनी सॉफ्ट लग रही थी की मैं hi नहीं कर रहा था नज़र हटाने का

तब मुस्कुराते हुई आरती कहते है ..

लगता है तेरे घर एक बार आना पड़ेगा

नवाज़ आश्रय से पूछता है

मेरे घर

हाँ तेरे घर .. लगता है तेरे घर आके तेरे अब्बू और अम्मी को बताना पड़ेगा की नवाज़ जवान हो गया है.. अब उसका निकाह कर दो

क्या आरती मेमसाब.. आप भी न. आप क्यों ऐसे बाते कर रही हो.. थोड़े दिन मुझे ऐसे फ्री की जिंदगी जीने दो.. बाद मई वो सब तो है hi न..

हाहाहा..
 
तुम पता नहीं है क्या

नहीं तो

तुम्हारे साहब तो कह रहे तुम hi लेके जाओगे मुझे

मुझे नहीं पता मेमसाब

सुन्ना है तुम बहुत अच्छी ड्राइविंग करते हो

हाँ वो तो करता हु

वो भी देख लेंगे

देख लीजियेगा... पर कब जाना है..

तब उसकी और देखते बड़े अड्डा के साथ कहते है..

आरती - तू खाना कहते वक़्त क्या देख रहा था .. तुझे शर्म नहीं आती..

नवाज़ कुछ कहता उससे पहले hi खुद hi आरती कहती है..

शर्म कैसे आएंगे.. तू तो 1 नंबर का बेशर्म है.. काम से पापा को तो डरता न.. उनोने देखा होता तो तेरे खैर नहीं थी..

न - वो मैंने जानबूझ कर नहीं देखा था.. बस नज़र पद गयी

ा- नज़र पद गयी थी तो हैट भी तो सकती थी न

न- वो देखने में इतनी सॉफ्ट लग रही थी की मैं hi नहीं कर रहा था नज़र हटाने का

तब मुस्कुराते हुई आरती कहते है ..

लगता है तेरे घर एक बार आना पड़ेगा

नवाज़ आश्रय से पूछता है

मेरे घर

हाँ तेरे घर .. लगता है तेरे घर आके तेरे अब्बू और अम्मी को बताना पड़ेगा की नवाज़ जवान हो गया है.. अब उसका निकाह कर दो

क्या आरती मेमसाब.. आप भी न. आप क्यों ऐसे बाते कर रही हो.. थोड़े दिन मुझे ऐसे फ्री की जिंदगी जीने दो.. बाद मई वो सब तो है hi न..

हाहाहा..

और हँसाने लगी..

अब उस वक़्त दोनों उप्पर चाट पर खड़े the..ek दूसरे को देखते हुई.. फिर अचानक आरती निचे जाने के लिए चाट के दूर तरफ जाने लगे. . तब नवाज़ कहता है..

बिना बताई जा रहे हो मेमसाब आप मेरे घर कब आ रहे हो

तब आरती कहती है.. हस्ते हुई.. उसकी और देख कर..





बताने से क्या होगा..

हम्म.. आपने गेस्ट का बड़ा अच्छा ध्यान रखते है..

तब आश्चर्य से उसकी और गर्दन करके देख के स्माइल करते है..

अच्छा जी.. मई और तुम्हारी गेस्ट..

अरे गेस्ट के लिए तो हम तन -मन - धन सब हाज़िर किये रहते है.. बस गेस्ट खुश होना चाहिए..

नवाज़ के इस बात को सुन कर आरती मुस्कुराये बिना नहीं रह सकीय.. और फिर आगे की और सीढ़ियों की तरफ जाते हुई कहते है..

और तुम क्यों लगता है मई तुम्हारे गेस्ट बनूँगी..

हां आपकी बात भी सही है.. आप इतने आमिर.. इतनी होशियार.. इतने सुन्दर.. अग्रवाल फॅमिली की बहु भला मेरे जैसे गरीब की गेस्ट क्यों बनेगे..

आरती ज़ोर से हंसी और सीढ़ियां के और जाते हुए रुकी और उसकी और घूमते हुई बोलती है ..

“तुम नाह नवाज़ इमोशनल ब्लैकमेल करने में बहोत माहिर हो.. "

ये कोई इमोशनल ब्लैकमेल नहीं है

तो क्या है

आपने hi तो कहा की आप मेरे घर आओगे.. अब घर आने वाला गेस्ट hi तो होता है न मेमसाब..

ारे वो तो मैंने ऐसे hi कहा था

आप बड़े लोंगो की बात मुझे कुछ समाज नहीं आता.. कोनसी बात ऐसे बोलते हो.. कोनसे बात मज़ाक मई बोलते हो और कोनसे बात आप की सीरियस होती है..

तब आरती हँसाने लगी उसको सुनकर और कहने लगी..

क्यों दुखी हो गए क्या मेरे मज़ाक से.. मैंने तो मज़ाक मई कहा तो वो

आप मज़ाक हो गया पर मेरा दिल टूट गया.. मुझे लगा आप मेरे घर आओगे.. मेरे बस्ती मई आप आओगे तो मेरा रुतबा बढ़ेगा.. मई आप की अच्छे से सेवा करूँगा.. आप मेरे अम्मी अब्बू को अपनी शादी.. मतलब निकाह की बात करोगे..

तब झट से आरती कहती है..

अपनी शादी.. ी मैं निकाह.. क्या बोल रहे हो तुम..

थोड़ा गुस्सा था आरती के बोलने मई..

अपनी मतलब मेरे.. जल्दबाजी मई बोल गया.

अच्छा ऐसा क्या..

मुझे लगा आप मेरे अब्बू और अम्मी से मेरे निकाह के बारे मई बात करोगे और आप के कहने से मेरा निकाह हो जायेगा.. मई कितना खुश था.. आप ने सब सत्यानाश कर दिया..

ारे बापरे इतना सारा सोच लिया तुमने मेरे एक छोटी से बात पर..

आप के लिए चौथी बात होंगे मेरे लिए नहीं..

ठीक है बाबा आ जाउंगी तेरे घर और तेरे अम्मी अब्बू से बात कर लुंगी..

ऐसे उसके और देखते हुई.. हाँ मई गार्डन हिलाते हुई कहने लगी..





धन्यवाद मेमसाब

अब मई जाऊ निचे.. मुझे किचन मई बहुत सारा काम है

ठीक है मेमसाब.. मई भी आ जाता हु निचे आपके साथ

तब आरती स्माइल करते हुई कहते है

तुम क्यों और मेरे साथ

क्या आप चाहते हो क्या मई रात भर यही अँधेरे मई मरू .. मेरे घर मई नहीं जाऊ

तब हस्ते हुई कहते है





अरे बाबा मई वो नहीं कह रही थी

तो

अभी यहाँ थोड़े देर थहलो और थोड़े देर बाद निचे आ जाना

अभी क्यों नहीं

शर्माकर निचे देखते हुई कहते है





तुम पता है

मुझे कुछ नहीं पता मेमसाब

मेरे पीछे आते हुई तुम ठीक से नहीं आओगे

मतलब

मतलब निचे आते हुई मेरे बैक को देखते हुई आओगे और उससे मुझे शर्म आती है

नहीं मेमसाब हमने कब आपके पिछवाड़े को देखा





बेशरम!! पिछवाड़ा नहीं बैक.. अश्लील बाते मत करो मुझसे

वही वही मैंने कब देखा

रोज hi देखते हो.. मुझे पता नहीं क्या..

वो जूथ है

ऐसा कह के उसके पास वो आता है..

सच है.. मई जूथ नहीं बोलती

ऐसे कहते हुई वो सिडिया उतरने लगे.. अब पहले सीडी पाई नवाज़ था और उसके निचे पांचवे सीडी पर आरती कड़ी थी.. नवाज़ वही खड़े होक अपने जीब को होंठों पर फ़ेरेट हुई आरती को सीडिया उतरते हुई देख रहा था. उसकी गांड का मटकाना नवाज़ को मदहोश करता जा रहा था.. उस साटन वाले साड़ी में कितना खूबसूरत और आकर्षित करती जा रही थी आरती.. उप्पर से निचे उतरराते हुई एक दो बार उसने मुड़कर नवाज़ को देखा भी था.. जब वो निचे उतरी हॉल मई तब उसने फिर से एक बार देखा जैसे की वो नवाज़ को इशारा कर रही हो उसके पीछे आने को..

अब उसके पीछे नवाज़ भी जाता है निचे .. वो सोचता है अगर ये किचन मई जायेगे तो मई भी इसके पीछे जायेगा.. और हुआ भी ऐसा hi कुछ.. निचे आकर आरती किचन मई चली गयी और नवाज़ भी उसके पीछे जाने लगा.. तभी शेठजी नवाज़ को आवाज़ देने लगते है..

नवाज़ बीटा जरा इधर तो आना

आरती जान गयी थी नवाज़ उसके पीछे आ रहा है.. अब वो कोई न कोई बात करेगा उसे लगता है.. कुछ तो बहाना बनके मेरे पीछे आएगा ऐसा उसे लग रहा था और वो चाहा भी कुछ ऐसा hi रही थी.. पर जब उसके ससुर ने नवाज़ को आवाज़ दी तो वो जान गयी की पापा जी अब नवाज़ को कुछ न कुछ काम बताएँगे ..

आवाज़ आते hi पीछे मुद के नवाज़ की और देखने लगी.. और नवाज़ को स्माइल दी और इधर नवाज़ का चेहरा पूरा उतर चूका था.. वो मान मई कहता है..

इस लौड़े ने मुझे क्यों बुलाया अब.. अच्छा खासा आरती के पास जा रहा था.. और कामिनी नीता भी नहीं थी.. ऐसा मौका कब मिलने वाला था पर इस बूढ़े से मेरे ख़ुशी देखि नहीं जा रही है..
 
आरती जान गयी थी नवाज़ उसके पीछे आ रहा है.. अब वो कोई न कोई बात करेगा उसे लगता है.. कुछ तो बहाना बनके मेरे पीछे आएगा ऐसा उसे लग रहा था और वो चाहा भी कुछ ऐसा hi रही थी.. पर जब उसके ससुर ने नवाज़ को आवाज़ दी तो वो जान गयी की पापा जी अब नवाज़ को कुछ न कुछ काम बताएँगे .. आवाज़ आते hi पीछे मुद के नवाज़ की और देखने लगी..





और नवाज़ को स्माइल दी और इधर नवाज़ का चेहरा पूरा उतर चूका था.. वो मान मई कहता है..

इस लौड़े ने मुझे क्यों बुलाया अब.. अच्छा खासा आरती के पास जा रहा था.. और कामिनी नीता भी नहीं थी.. ऐसा मौका कब मिलने वाला था पर इस बूढ़े से मेरे ख़ुशी देखि नहीं जा रही है..

तब शेठजी कहते है

नवाज़ इधर आना जरा

जी शेठजी

कहके एक बार आरती को देखता है तब वो स्माइल कर रही थी .. उसे हसी आ रही थी नवाज़ के हालत पर ..





नवाज़ अब बुरा सा मू बनके शेठजी के पास जाता है..

हाँ बोलिये शेठजी

तू अब क्या कर रहा है

कुछ नहीं.. वो मेमसाब का कुछ काम है किचन मई.. वो करना है..

किचन मई क्या काम करना है..

तब शेठजी आरती की और देखते हुई कहते है

आरती beta..kitchen मई तुम नवाज़ की जरुरत है क्या??

नहीं तो पापाजी

नवाज़ की तरफ स्माइल करते हुई कहते है तब नवाज़ ने तिरछी नजरों से आरती को देखा तो वो उसके तरफ देख रही थी ....





तब नवाज़ मैं मई कहता है..

लौंडे हाँ बोलने मई तेरा क्या जाता ..

नवाज़ ये तो नहीं बोल रही है..

तब आरती की और देखते हुई शेठजी फिर से पूछते है

बीटा तुमने कुछ काम बोलै है क्या नवाज़ को

आरती ऐसा बोलकर मुस्कुरा दी ...

नहीं पापाजी

नवाज़ ये तो नहीं बोल रही है

अब नवाज़ को बोलने की लिए कुछ नहीं बचा था तो वो बात बदल देता है..

यहाँ कुछ करना है क्या

हाँ उसके लिए hi बुलाया था तुजे

बोलिये क्या करना है

यहाँ इस हॉल मई बहुत सरे वार्डरॉब है.. और उसमे बहुत साडी फाइल्स है.. सब वार्डरॉब से फाइल निकालनी है.. वार्डरॉब ठीक से साफ़ करनी है और फाइल भी साफ़ करनी है और अच्छे से फाइल वार्डरॉब मई रखनी है ….

ठीक है शेठजी कहके अब नवाज़ एक वार्डरॉब के पास गया.. और फाइल निकालने लगा.. और फिर शेठजी सोफे पाई बैठके नवाज़ को बताने लगे क्या क्या करना है और कैसे कैसे करना है.. ाअब नवाज़ वार्डरॉब से फाइल निकल के वार्डरॉब साफ़ करने लगा और फिर फाइल पाई जो धूल मिटटी जमी हुई थी वो साफ़ करने laga..aur फिर फाइल अन्दर रखने लगा..

अब शेठजी ने सोफे पाई बैठ कर टीवी ों किया और टीवी देखने लगे. अन्दर किचन मई बर्तनों को आरती धोने लगी.. सोफे के पीछे के वार्डरॉब की फाइल निकलते हुई नवाज़ आरती को देखने लगा.. क्यों की वो किचन दूर के एक्साक्ट्ली सामने खड़ा था.. . आरती की साडी साटन की मटेरियल की थी.. और आरती बर्तन धोते हुई जब किचन सिंक पर जुख जाती थी तब उसस्के नितम्बों का आकर उस साटन मटेरियल में अच्छी तरह से दिख जाता था और आरती के कमर का झुकने से बिल्कुल नज़र आ जाती थी नवाज़ ko….aarti को इस तरह से देख कर नवाज़ आरती के ननगे जिस्म को इमेजिन करने लगा और सोचने लगा बिना कपडे के आरती का का जिस्म कैसा होगा … क्या वैसे hi गोरा होगा जैसे अभी उसकी कमर दिख रही है? फिर वो सोचने लगा.. आरती कुंवारी नहीं है… शाधिशुद्धा है पर माँ भी नहीं बानी है अभी तक .. क्या उसके साथ एक कुंवारे लड़की इतना मज़ा आएगा क्या muje..iska फिगर बिल्कुल एक कुंवारी लड़की जैसे hi दिख रहा है….. जब से नवाज़ यहाँ आया है तब से वो आरती के आम और उसके क्लीवेज को अक्सर देखा करता था.. उसके नवल और उसके नंगे कमर को देखा करता था… पर अब इस वक़्त वो उसके जिस्म मई इंटरेस्टेड हो रहा था …. वो सोच रहा था क्या इस्सकी जांघें भी इतनी गोर होंगे या इससे ज्यादा गोर होंगे.. और इसकी छूट… कैसे होंगे.. एक कुंवारे लड़की जैसे या शाधिशुद्धा औरत जैसे.. अब नवाज़ को आरती की छूट को देखने का मैं हो रहा tha…wo सोचने लगा.. आरती मेमसाब के ज़्यादा करीब मई कैसे जा सकता हु और अपने हरकतों को और मज़बूत कर सकता हु…. यही वो सिकहने लगा..

फिर वो आरती की तरफ देखते हुई आपने चेस्ट पर अपना हाथ फेरर रहा था धीरे धीरे..
 
अब शेठजी ने सोफे पाई बैठ कर टीवी ों किया और टीवी देखने लगे. अन्दर किचन मई बर्तनों को धोने लगी.. सोफे के पीछे के वार्डरॉब की फाइल निकलते हुई नवाज़ आरती को देखने लगा.. क्यों की वो किचन दूर के एक्साक्ट्ली सामने खड़ा था.. . आरती की साड़ी साटन की मटेरियल की थी.. और आरती बर्तन धोते हुई जब किचन सिंक पर जुख जाती थी तब उसस्के नितम्बों का आकर उस साटन मटेरियल में अच्छी तरह से दिख जाता था और आरती के कमर का झुकने से बिल्कुल नज़र आ जाती थी नवाज़ ko….aarti को इस तरह से देख कर नवाज़ आरती के ननगे जिस्म को इमेजिन करने लगा और सोचने लगा बिना कपडे के आरती का का जिस्म कैसा होगा … क्या वैसे hi गोरा होगा जैसे अभी उसकी कमर दिख रही है? फिर वो सोचने लगा.. आरती कुंवारी नहीं है … शाधिशुद्धा है पर माँ भी नहीं बानी है अभी तक .. क्या उसके साथ एक कुंवारे लड़की इतना मज़ा आएगा क्या muje..iska फिगर बिल्कुल एक कुंवारी लड़की जैसे hi दिख रहा है….. जब से नवाज़ यहाँ आया है तब से वो आरती के आम और उसके क्लीवेज को अक्सर देखा करता था.. उसके नवल और उसके नंगे कमर को देखा करता था… पर अब इस वक़्त वो उसके जिस्म मई इंटरेस्टेड हो रहा था …. वो सोच रहा था क्या इस्सकी जांघें भी इतनी गोर होंगे या इससे ज्यादा गोर होंगे.. और इसकी छूट… कैसे होंगे.. एक कुंवारे लड़की जैसे या शाधिशुद्धा औरत जैसे.. अब नवाज़ को आरती की छूट को देखने का मैं हो रहा tha…wo सोचने लगा.. आरती मेमसाब के ज़्यादा करीब मई कैसे जा सकता हु और अपने हरकतों को और मज़बूत कर सकता हु…. यही वो सोचने लगा..

फिर वो आरती की तरफ देखते हुई आपने चेस्ट पर अपना हाथ फेरर रहा था धीरे धीरे..

अब नवाज़ आरती को देखती हुई काम कर रहा था पर आरती पीछे मुद के नहीं देख रही थी.. ऐसे hi 10-15 मिनट हो गये थे.. अब शेठजी किचन मई देखते है.. वह आरती चुपचाप काम कर रही थी.. तब शेठजी नवाज़ को धीरे से आवाज देते है.. इधर आओ

हाँ शेठजी

धीरे से बोल.. अन्दर बहु सुन लगे

हाँ बोलिये

नवाज धीरे से बोलता है

दारू है क्या.. कुछ जुगाड़ हो सकता है क्या

घर मई तो इतना सारा स्टॉक है

है नहीं था

मतलब

तेरे मेमसाब ने सब फेक दिया

इतना सारा.. और इतने महंगे दारू

हाँ बाबा.. अब कहा मिल सकते है क्या

हां

कहा

गाँव मई एक जगह

ब्रांड

आप का मिल जायेगा

तो लेके आओ.. चुप चाप से और आरती को पता नहीं चलेगा

नहीं पता चलेगा मेमसाब को

तब शेठजी नवाज को पैसे देते है.. नवाज़ किचन की तरफ देखता है तब आरती किचन मई काम कर रही थी उसका इधर ध्यान नहीं था.. तब नवाज़ चुपचाप बहार जाता है और कुछ समय मई वापिस दारू लेके आ जाता है..

नवाज़ ने कुछ देर बाद एक ड्रिंक्स बनाये शेठजी के लिए और उनके पास निचे बैठ गया सोफासेट के पास.. और शेठजी से बात करने लगा . शेठजी ने पहला ड्रिंक ख़तम किया और एक और बनाने को कहा जो नवाज़ ने बना के दिया उनको….. फिर तीसरा भी बना के दिया.. अब शेठजी तीसरा ड्रिंक पिने लगे और इधर नवाज़ चौथा ड्रिंक बनाने लगा तो आरती ने कहा,

यह आखरी है okay? इस से ज़्यादा नहीं पीना ठीक है पापा जी ?

आरती बहार आयी हुई थी और वाल से सत् के कड़ी हुई थी .. और नवाज़ और आपने ससुर क्या कर रहे है ये देख रही थी..

तब शेठजी ने स्माइल करते हुई देखा और कहा

तुजे पता चला बेटी

तब नखरा करते हुई कहती है..





हाँ मई तो ाँधे और बहरी हु.. मुझे कहा से पता चलता.. आप दोनों.. मालिक और नौकर की छलखि..

तब नवाज़ जोरोसे हसने लगा..

तब आरती गुस्से से नवाज़ को देखने लगी..





तब थोड़ा डरते हुई शेठजी कहते है

तुम गुस्सा होंगे इसलिए तुमसे छुपा के नवाज़ को बोलै.. और कोई बात नहीं

हाँ.. और कोई बात नहीं.. अआप्को शुगर है.. बप है.. तो मई आप को ड्रिंक कैसे करने दू..

गुस्सा करते हुई आरती कहती है





थोड़े hi ले रहा हु

थोड़े hi है क्या ये पापाजी.. ये आप का छोटा पेग है

अब बस करूँगा

पक्का

हाँ पक्का बेटी.. मई तुमसे जूथ क्यों बोलूंगा

सेठजी ने चौथी पेग ख़तम किया तो नशा सा चा गया था और हिमत भी बढ़ गयी थी और सोचा के अब और थोड़ा पिता हु.. इसलिए उसने नवाज़ से कहा

एक और पेग बना लो

तब नवाज़ आरती की तरफ देखने लगा

तब शेठजी उससे कहते है

उधार क्या देख रहा है तेरे मेमसाब की तरफ.. एक और पग बना ले

तब आरती ने कहा

पापाजी आपने ये लास्ट बोलै था

एक और सिर्फ

तब नवाज़ आरती की और देखते हुई कहता है

बना लू क्या

तब शेठजी कहते है गुस्से मई

उसे क्या पूछ रहा है.. मई मालिक हु या वो.. तेरे टंका कोण देता है

आप

तब एक और पेग बना ले

तब नवाज़ एक पेग बनता है

तब शेठजी आरती की तरफ देखते हुई पूछता है

अरविन्द नहीं आया क्या अभी तक

तब आरती गुस्से कहती है

नहीं

आज कल अरविन्द कितने बजे ारः है फैक्ट्री से वापस?

आरती ने शेठजी को देखा और पूछा,

“क्यों?”

तो शेठजी ने आश्रय से आरती को देखा और कहा,

“अरे भाई किआ अब यह भी पूछना मन है किआ?”

तब आरती ने चहरे पर स्माइल लेट हुए कहा,





“रोज तो 11-12 बजे तक आते है पर आज नहीं आने वाले.. कुछ देर पहले फ़ोन किया था उनोने एक प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है और काफी वर्कर ओवरटाइम कर रहे हैं कहा उनोने इसलिए आज नहीं आने वाले !”

शेठजी ने एक सिप लेते हुए कहा,

“हम्म गुड गुड अच्छा संभाल रहा है काम वो; मेरे जाने के बाद बिल्कुल कंपनी को चला पाएगा, मुझे अब कोई फ़िक्र नहीं कंपनी की!”

तब नवाज़ कहता है..

हाँ शेठजी.. छोटे मालिक अच्छे से कंपनी हैंडल कर रहे है

आरती को कुछ समाज नहीं आया.. तब उसने कहा,

“क्यों? आप कहाँ जा रहे हो जो आप के जाने के बाद कहा आप ने?”

शेठजी ने कहा, “बूढ़ा हो रहा हूँ अब मर गया तो उसी को संभालना होगा नाह कंपनी को!”

तब नवाज़ ने उनके बाज़ू को पकड़ते हुए कहा,

“आप बूढ़े थोड़े hi हो? आप तो बहोत मज़बूत सॉलिड स्टड हो जी!! आप क्यों मरने लगे अभी?

शेठजी ने अपने व्हिस्की का एकांत सिप लेते हुए कहा,

“पता नहीं .. आदमी का क्या भरोसा.. कब क्या हो जय.. वैसे मेरे बप काम ज्यादा होती रहती है.. लास्ट मंथ मई एक बार जब बप लौ हुई थी तो एक डर सा लगा, के पता नहीं कब ऐसे hi एक दिन टपक जाऊं हहहहए!”

तब नवाज़ ने अचानक पूछा, “किआ आप किसी बात या चीज़ से घबराये थे? घबराने से भी बप लौ या हाई होता है, स्ट्रेस लेने से भी होता है, तो उस वक़्त जब बप लौ हुई थी किआ आप किसी चीज़ से घबराये या स्ट्रेस लिए थे?”

तब आरती कहती है





ऐसा कुछ नहीं हुआ था.. पापाजी को कोई स्ट्रेस नहीं था या वो घबराये भी नहीं थे

फिर बप लौ क्यों हुआ था

उसदिन पापाजी का एक्ससरसिओं ज्यादा हुआ था इस वजह से बप लौ हुआ था

एक्स.. ेररर.. क्या लौ हुआ था

तब आरती हस्ती है





मेरे उनपद नौकर.. उसदिन पापा जरा ज्यादा वाकिंग किये हुई थे इस वजह से बप लौ हुआ था

अच्छा अच्छा समाज आया

मेरे उनपद नौकर कहने से नवाज़ खुश हुआ था

तब शेठजी कहते है

बीटा तुम लगता है क्या मुझे दारू ज्यादा हुई है

तब चेहरे पर स्माइल लेट हुई आरती कहती है

आप को छड़ी है

तुम क्या लगता है मई नशे मई हु इसलिए ऐसा बोल रहा हु

हाँ ..

पर क्यों लगा तुम ऐसा

तब आरती ने हँस्ते हुए कहा,





“मुझे लगता है के आप को जब से इस नवाज़ का साथ मिला है तब से आप ज्यादा दारू पि रहे हो.. इस नवाज़ ने आप की आदतें बिगाड़ दिए है .. कहीं आप इस्सके जैसे पक्कड़ तो बने नहीं न.. बताइये मुझे?!”

न - मेमसाब मई पिता नहीं हु और शेठजी मेरे मालिक है.. िंनोने बोलै तो मुझे वो करना पड़ेगा..

तब आरती नखरा दिखते हुई कहती है..

हाँ मुझे पता है तुम मालिक के कितनी सुनते हो और अगर मालिक ने गलत काम करने को कहा तो करना नहीं चाहिए.. मालिक का नहीं सुनना चाहिए..

ये बात आपने गलत बोल दी मेमसाब

कोनसी बात

यही की मालिक का नहीं सुनना चाहिए

मैंने ऐसा नहीं कहा की मालिक का नहीं सुनना चाहिए

अभी तो कहा

मैंने ये नहीं कहा जो तुम बोल रहे हो मैंने कहा अगर मालिक गलत बोलते है तो मालिक की नहीं सुनना चाहिए और गलत काम नहीं करना चाहिए

फिर ये भी गलत है

भला इसमे क्या गलत है

हम मालिक को गलत कैसे बोल सकते है

तब आपने सर पर हाथ मार्के आरती कहते है.

हे भगवान्.. ये लड़का मेरा दीमक ख़राब कर रहा है

अब मैंने क्या किया मेमसाब

तब गुस्से से आरती उसको देखते है

अब आप गलत हो तो मई आप को गलत कैसे बोल सकता हु

हाँ बोल सकते हो

पर शेठजी को कैसे बोल सकता हु.. उनके वजह से हमारी दाल रोटी चल रही है

फिर क्या शेठजी को दारू पिलाओगे

तब शेठजी कहते है

यार तुम लोग मिया बीवी के जैसे जगदे मत करो

शेठजी ने मिया बीवी उन्दोनो को कहा इस वजह से नवाज़ खुश होता है और आरती आश्रय से आपने ससुर को देखती है.. वो तो नशे मई था तो उसे आपने बात पर ध्यान नहीं था तब वो नवाज़ को देखते है तो वो स्माइल करते हुई देखता है और इधर नवाज़ के ऐसे देखने से आरती शर्मा जाती है..





तब शेठजी कहते है..

ारे आरती बीटा.. वो हमारा नौकर है.. जो हम कहेंगे वो वही करेगा.. और मेरे कही बात को वो कैसे नहीं बोल सकता है..

आप सही कह रहे हो पापाजी

मुझे छड़ी है इसलिए मई ऐसा नहीं बोल रहा हु

आरती ने नवाज़ को देखते हुई डेंटन में अपने होठ को दबाते हुए कहा..

“पापा जी आप को चढ़ गयी है .. आप नशे में हैं इसलिए ऐसे बातें कर रहे है ? "

शेठजी ने आरती की और देखते हुई कहा,

“अरे बहु सुनो तो, इधर आओ मेरे पास”

आरती उसी जगह रुकी .. कुछ देर कुछ सोचा और एक दो कदम चलके उनके करीब आयी तो शेठजी ने कहा,

“कौन कहता है के जब मैं नशे में होता हूँ तब ऐसे बाते करता हूँ? "

तब आरती नवाज़ की तरफ देखते है.. तब शेठजी कहते है..

इस ने कहा क्या

तब आरती झट से कहती है..

नहीं नहीं पापा जी ये क्यों कहेगा

स- क्या तुम लगता है मुझे चढ़ गयी है..

तब आरती हाँ मई गर्दन हिलाते है.. तब शेठजी कहते है..

नहीं बहु मुझे नहीं छड़ी hai..tume याद है 4-5 दिन पहले हम किचन मई थे तब मैंने तुम कहा था.. अरविन्द अब ाचे से फैक्ट्री चला रहा है.. अब मई आराम से मर सकता हु..

मरे आपके दुसमन

यही कहा था तुमने उसी वक़्त भी

ठीक है.. आप सही मई गलत.. चलो अब सोने.. नवाज़ तुम शिदे से पकड़ो.. मई इस साइड से पकड़ते हु.. पापाजी को बैडरूम तक लेके जाते है..

मुझे क्या इतने ज्यादा हुई है क्या जो मई खुद चल के बैडरूम तक नहीं जा सकता

न - नहीं आप को ज्यादा नहीं हुई है

तब आरती गुस्से से नवाज़ को देखने लगी..

स- ये हुई न बात.. देखो बहु नवाज़ की बात सुनो.. मुझे ज्यादा नहीं हुई है.. 1-2 पैक मई और लगा सकता हु न नवाज़

न - हाँ शेठजी

तब आरती बहुत गऊसे से नवाज़ को देखती है

न - पर यहाँ नहीं बैडरूम मई बैठके पि लो आप.. सही रहेगा

आरती को अब समाज आया की नवाज़ ने ऐसा क्यों कहा

स- ऐसा क्या..

न - हाँ शेठजी

तब झटके से आरती कहते है

ा - अब मेरे नहीं तो आपने प्यारे चहिते नवाज़ की बात सुनो

स - हाँ वो मेरा प्यारा और चाहता है hi

ा- तो ठीक है उसकी बात सुनो

स- क्या बात सुननी है नवाज़ तेरे

तब आरती इशारे से नवाज़ को कहते है.. बैडरूम मई चलने का बोलो

न - हाँ शेठजी.. यहाँ नहीं हम बैडरूम मई जाते है.. वह जेक आप आराम से और 2-4 पेग पीओ

तब आरती फुसफुसाती है

तुम भी कमाल हो नवाज़.. पापा 1-2 पेग की बात कर रहे हो और तुम उन 2-4 पेग पिलाने पाई तुले हुई हो

नाराज़ी दिखते हुई आरती कहते है..

आप टेंशन न लो.. पाई कुछ नहीं पिलाऊंगा उन और आराम से उन बैडरूम मई भी लेके जाऊंगा

तब शेठजी कहते है..

नवाज़ बीटा क्या तुम लगता है क्या मई और 2-4 पेग ले पाउँगा

हाँ शेठजी.. आप तो इस गाँव के बब्बर शेर है.. आप को इतने दारू से क्या होगा..

तब आरती मैं मई कहते है..

ये तो मेरे ससुर को चने के पेड़ पर चढ़ा रहा है.. तारीफ कर कर के और दारू पीला पीला कर मार hi डालेगा ये कमीना

स - तो फिर चलो बैडरूम मई

हाँ शेठजी

तब आरती उसे इशारा करती है उनका हाट पकड़ो

तब नवाज़ हाँ मई गर्दन हिलता है

शेठजी आप उठिये

हाँ उठता हु.. जरा हाट तो देना मुझे

इस बात पर आरती हस्ती है.. नवाज़ शेठजी को हाथ देता है और धीरे धीरे शेठजी नवाज़ का हाथ पकड़ के आपने बैडरूम मई जाते है.. और उन्दोनो के पीछे आरती चल रही थी.. और नवाज़ उनको छोत पाई बिठा देता है.. तब नवाज़ विजयी मुद्रा से आरती की और देखता है.. और धीरे से बोलता है ताकि नशे मई दूत शेठजी न सुने

कर दिखाया न.. शेठजी को लाया न बैडरूम मई..

तब आरती कहते है

ज्यादा ऊधो मत.. उनको बीएड पाई सुला दो

तब नवाज़ उनके पेअर बीएड पाई रखता है और उन थोड़ा निचे खिसकने बोलता है और खुद की उनको थोड़ा निचे खिसका देता है और गर्दन पीछे कर के उन सुला देता है..

तब नवाज़ आरती की और घूम के कहता है..

अब तो खुश

तब आरती स्माइल करते हुई कहते है..

हाँ.. धन्यवाद नवाज़.. बहुत अच्छा काम किया तुमने..

धन्यवाद मेमसाब

तभी शेठजी बीएड पाई पड़े पड़े hi कहते है.. उनकी आँखे बंद थी..

नवाज़

हाँ शेठजी

मुझे एक बात बताओ

हाँ पूछिए

तुम्हारा और नीता का कुछ है क्या..

शेठजी की इस बात से नवाज़ को बहुत आचार्य होता है .. तब वो कुछ सोच के वो घूम के आरती की और देखता है.. अब आरती का चेहरा खुल उठा था.. वो चहरे पाई अलग hi रिएक्शन देती है...





नवाज़ के देखने से वो उसे देखते हुई न मई गर्दन हिलाते है और धीरे से बोलती है..

मैंने नहीं बताया.. मेरे और ऐसा देखो मत जैसा पिताजी को मैंने बताया हो

तब शेठजी फिर से कहते है..

बताओ न

आप क्या पूछ रहे है मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा है

ज्यादा शहाणा मत बनो.. तुम्हारा और नीता का कुछ चक्कर है क्या

नहीं न शेठजी.. आप को किसीने बताया

बताने की क्या जरुरत है.. मई क्या ऐसे hi इतने प्रॉपर्टी का मालिक हु क्या.. और इतने लोंगो को हैंडल करता हु क्या

आरती हँसाने लगी और नवाज़ की हालत पतली हो जा रही थी

तुम वो कामचोर पसंद है क्या

तब आरती जोर से हस्ती है

तब आँख खोल के शेठजी आरती को देखता है..

बहु तुम ऐसा कुछ लगा क्या

आरती को ये समझ नहीं आ रहा था की वो आपने ससुर की बाटिओं का जवाब दे या नहीं ..... मगर कहीं न कहीं शेठजी ने उसे पूछने के बाद आरती के होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान ज़रूर तैर गयी थी ...... कहीं न कहीं उसे नवाज़ और नीता के बारे पूछने वाली बात उसके दिल को भा गयी thi..........ek तरफ तो वो ससुर की बात से खुश हो गयी थी .. खुश होने के बाद भी अब वो एक शब्द कुछ न बोल पायी...............

आरती अब चुप चाप ख़ामोशी से कड़ी थी ....... वो कुछ डीडे नहीं पा रही thi..wo बस यु खड़े खड़े होकर निचे देखते कुछ सोच रही पर डीडे कुछ कर नहीं पा रही थी. कुछ समय तक वो इसी उलझन में डूबी रहती हैं .. जैसे hi शेरहजी फिर से पूछते है..

बेटे मई तुमसे कुछ रहा हु

तब अगले hi पल गर्दन उठा के पहले आपने ससुर को देखती है और फिर नवाज़ को देखती है. .. तब नवाज़ उसको देखता है और मैं मई कहता है. .

क्या कहेगे ये लौंडे अब

ऐसा सोचकर वो आरती को देखने लगा.. आज आरती ने साड़ी पहनी हुई thi...jo उसके अंगो के उभार को saaf-saaf दिखा रहे रहे ....और साथ में उसके खुले हुए baal...uski जवानी को और ज्यादा दिलकश बना रहे थे..

तब वो नवाज़ को देखते हुई कहते है.. इशारे से.. धीरे से..

अब मई क्या कहु इनने

तब वो देख लेती है नवाज़ क्या देख रहा है.. उस्सको पता चल गया की नवाज़ की नज़रें उस्सकी छाती और काँधे पर है.. नवाज़ उस्सकी ब्लाउज के अंदर लटके उस्सकी गोआल गोआल मम्मी और निघ्त्य के स्ट्रैप्स को hi देख रहा था.. तब आरती ने गुस्से से उसकी और देखा और धीरे से कहा..

“हो गया ? देख लिया जो देखना था दिल खुश हुआ तुम्हारा ?”

तुरंत नवाज़ दूसरे तरफ देखने लगा और ऐसे दिखने लगा मैंने कुछ देखा hi नहीं.. … तब आरती ने मुस्कुराते हुए अपने साड़ी को ठीक किया ……. तभी उसके ससुर ने फिर से पूछा ...





तब आरती हड़बड़ी मई हाँ मई गर्दन हिलाते है..
 
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