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आंख बंद करके इस सिचुएशन का लुफ्त उठा हे रही थी की करीम ने उसके हाथ को चोरते हुए उसकी निघ्त्य को नीचे से ऊपर की और उठाते हुए उसको निकल कर किचन में एक कोने पे फेक देता है और फिर सिमरन की ब्रा निकल कर दूसरे कोने में फेक देता है फिर पंतय को निकल कर उसको एक बार शुंग कर उसको नीचे फ्लोर पे फेक कर अपने लेग से दूर फेक देता है.
सिमरन को कुछ समझ में नहीं आ रहा था .. सिमरन इस तरह के सेक्स के लिए बिलकुल त्यार नहीं थी. करीम जान जान बोल बोल कर सिमरन को चूमे जा रहा था. जैसे की कह रहा हो की आज तेरी छूट को छोड़ के भोसड़ा बना दूंगा. वो मस्ती में चूमे जा रहा था. तभी करीम सिमरन को अपने दोनों हाथो से उठा कर उसको किचन से गेस्ट रूम में ले आता है. गेस्ट रूम किचन के बाजू मई थी.. गेस्ट रूम घर का सबसे आगे का कमरा था… आज पहली बार सिमरन पूरी नंगी आपने गेस्ट रूम में थी .
सिमरन - ये क्या करने जा रहे हो जान प्लीज चोरो मुझे बहुत गिल्टी मह्शूश हो रहा है .. प्लीज यहाँ कुछ मत करो कभी भी कोई आ सकता है. बैडरूम में चलते है न वहा कर लो जो करना है लेकिन यहाँ नहीं प्लीज...
करीम- बैडरूम मई तेरा हस्बैंड होगा न..
सिमरन- करीम … प्ल्ज़्ज़.. करीम अभी नहीं.. मेरे हस्बैंड घर पर है.. वो आ जायेंगे…
आज करीम कहा किस का सुनाने वाला था. कल उसकी प्यास को माहि ने बढ़ावा जो दिया था.. उसका बदला वो सिमरन के साथ ले रहा था..
करीम- चुप कर रंडी आज तुझे यही छोडूंगा गेस्ट रूम में ... तेरी आज गाड़ भी मरूंगा रंडी.. और अगर तेरा हस्बैंड आएगा तो तेरे हस्बैंड के सामने तुजे छोडूंगा…
सिमरन को घुमा कर मतलब सिमरन की गाड़ करीम के लुंड की तरफ और करीम का हाथ पीछे से सिमरन के बूब्स को मसलने लगता है. और तभी बहार से सिमरन का हस्बैंड आवाज देता है.. वो आवाज सुनकर करीम गुस्से मई बोल पड़ता है…
करीम – साले इस बहनचोद को इस टाइम hi आना था क्या..
सिमरन का हस्बैंड फिर से आवाज देता है..
सिमरन- आ… रही.. हु..
सिमरन गुस्से से करीम को कहती है..
सिमरन- कपडे नहीं है बॉडी पे… अब बहार कैसे जाऊ..
करीम हास्के वह छोत पे लेट जाता है..
सिमरन- तुम है क्या रहे हो.. जाओ.. किचन मई जाकर मेरे कपड़े लाओ..
करीम- मई क्यों जाओ..
सिमरन- तुमने निकले थे न.. जल्दी जाओ न… मेरे हस्बैंड इधर आ जायेंगे…
करीम- नहीं जा सकता..
सिमरन- तुम जो बोलोगे वो कर lungi..plz जाओ न..
करीम- ठीक है.. वो डिलडो आपने छूट मई दाल के ले लो..
सिमरन- ओह्ह्ह्हह्ह… शीट्ट्ट्ट्ट.. वो तो किचन मई hi रह गया.. मेरे हस्बैंड ने उसको देख लिया तो बहोत बड़ी प्रॉब्लम होगी.. प्ल्ज़ जल्दी जाओ… तुम जो बोलोगे वो सबकुछ कर लुंगी..
करीम- ठीक है.. एक किश दे दो..
सिमरन करीम को किश देती है और रूम से बहार निकलती है.. करीम किचन से सिमरन के कपडे लता है.. साथ मई डिलडो भी.. कपडे लेन के बाद सिमरन कपडे पहन कर करीम को वह से बहार जाने को कहती है.. गाड़ी के पास.. ताकि उसके हस्बैंड को कोई शक न हो..
करीम के जाने के बाद सिमरन डिलडो को लेकर अपने कमरे में चल पड़ती हैं ........... वहीँ करीम के चेहरे पर एक बार फिर से शरारती मुस्कान थी.......
करीम बहार जाकर कुछ देर तक वहीँ खड़ा रहता हैं और अपने ख्यालों में खोया रहता हैं… वो आपने आप से कहता है… तू आज देखती जा सिमरन आज मैं तेरे साथ क्या क्या करता हूँ ......... आज तू इतना तड़पेगी की तुझे अपनी छूट की आग के सिवा और कुछ नज़र नहीं aayega........tune अभी मेरे खुरापाती दिमाग को ाचे से जाना hi कहा हैं....... आज तुझे पता चल जायेगा की करीम आखिर क्या चीज़ हैं.......
थोड़े डियर बाद सिमरन बाथरूम में चल पड़ती hain.......uske अंदर भी एक्ससिटेमेंट धीरे धीरे बढ़ती जा रही thi........wo करीम को खुश देखना चाहती thi..........uske ख़ुशी के लिए वो आज कुछ भी करने को तैयार thi.........fir ये डिलडो अपनी छूट में रखना कौन सी बड़ी बात thi.........kareeb 30 मिनट बाद सिमरन नहाकर बाथरूम से बहार निकलती hain.........fir वो अपने कमरे में जाती हैं और एक वाइट रंग की साड़ी निकल कर पहने लगती हैं ........ साड़ी नेट वाली थी ...... और काफी महंगी भी .......
अगर नीचे पेटीकोट नहीं होता तो उस साडी में उसका सारा जिस्म दिखाई देता ........ कुछ देर की तैयारी के बाद सिमरन फाइनल टच देकर अपने किचन में दुबारा चल पड़ती हैं.......... थोड़ी देर बाद सिमरन डाइनिंग टेबल पर नास्ता लेकर आती हैं..... आपने हस्बैंड को वो आवाज देती है.. उसका हस्बैंड आता है.. नास्ता करते वक़्त वो उसे घूर घूर कर देख रहा था........ सिमरन इन् कपड़ों में आज क़यामत लग रही थी ........ सिमरन को देखकर उसके लुंड में एक हलचल सी होने लगी थी ......... सिमरन ने आज कुछ वैसे hi कपडे सेलेक्ट किये थे जैसे करीम उसे देखना चाहता था......
सिमरन का हस्बैंड- आज तो तू बहोत हॉट लग रही हो…
सिमरन- थैंक्स..
सिमरन का हस्बैंड- किश पे बिजली गिराने का इरादा है..
सिमरन – किसी पे नहीं..
सिमरन आपने हस्बैंड के किसी भी रिएक्शन को आज इम्पोर्टेंस नहीं दे रही थी.. उसे तो जल्द से जल्द ये सदी.. ये मेक उप करीम को जो दिखाना चाहती थी..
नास्ता करने के बाद सिमरन बहार आ जाती है.. वहीँ करीम और सिमरन का हस्बैंड बहार खड़े होकर कार के पास उसके आने का इंतज़ार कर रहे थे......... सिमरन के छूट में रखा डिलडो उसे बहुत परेशां कर रहा tha........wo बार बार उनकंफर्टबले सी फील कर रही थी ...... करीम एक नज़र सिमरन के चेहरे की ओरे देखता हैं फिर वो उसे देखकर धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं..... सिमरन भी जवाब में हलकी सी स्माइल कर देती हैं .......

उसके हस्बैंड का ध्यान किसी और है ये देखके करीम हाथ से सिमरन के सदी और मेक की टैरिफ करता है … और सिमरन के थोड़े पास जाकर कहता है …
करीम- masha allah... aaj aap bahut hi khoobsurat lagh rahi ho..
सिमरन भी राइट हैंड उठा कर करीम को आदाब करती है... जैसे मुस्लिम लोग करते है… करीम स्माइल देता है.. और सिमरन धीरे से कहते है… बहुत बहुत शुक्रिया ….
अगले hi पल करीम अपने जेब में हाथ डालता हैं और अपने पेण्ट के जेब में रखा रिमोट का बटन जोर से पुश कर देता hain.......wahin सिमरन जगह पे उछाल पड़ती है… और उसके मू से अह्ह्ह्हह्हआआ.. निकल पड़ती है.. वो आवाज सुनकर सिमरन का पति सिमरन की तरफ घूम जाता है.. जैसे hi सिमरन आवाज करती है वैसे hi करीम पीछे हैट जाता है… सिमरन गुस्से से करीम को देखते है…

सिमरन का पति- क्या हुआ सिमरन…
सिमरन आपने आप को संभालती है…
सिमरन- कुछ नहीं… जस्ट ये संदेल थोड़ी क्रॉस हो गयी इस वजह से आवाज निकल गयी..
सिमरन का हस्बैंड- हेल्प करू क्या ..
सिमरन- no.. नू.. ी कैन मैनेज..
सिमरन का हस्बैंड- टेक केयर सिमरन… ड्राइवर चलो…
करीम आपने ड्राइवर वाले सीट के बाजु मई खड़ा हो जाता है.. ..सिमरन का हस्बैंड कार के अन्दर बैठ जाता है.. सिमरन और करीम कार के दोनों साइड मई एक दूसरे को देखते हुई खड़े थे… सिमरन गुस्से से करीम को देखती है और आँखों से hi इशारा करते हुई पूछती है.. क्या है ये… करीम भी इशारे से कहता है… वाइब्रेटर.. जैसे hi करीम कहता है वैसे hi सिमरन आपने हाथ आपने माथे पे मारती है और धीरे से कहते है…. ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह… माय गूदड़…. सिमरन के इस एक्सप्रेशन पर करीम स्माइल देता है…
सिमरन जैसे hi कार के नज़दीक पहुँचती हैं … जैसे hi वो कार का दूर ओपन करने वाली होते है वैसे करीम वाइब्रेटर का रिमोट फिर से जोर से दबाता है.. सिमरन के छूट में रखा वाइब्रेटर तुरंत ों हो जाता हैं और उसके बढ़ते कदम तुरंत डगमगा से जाते हैं ...... वो वहीँ गिरते गिरते बचती hain.........aur फ़ौरन अपने हाथों से कार का दरवाज़ा झट से थम लेती hain.....uske मुँह से एक ज़ोरों की सिसकारी फुट पड़ती hain........agle hi पल सिमरन के चेहरे का रंग पूरा फीका सा पढ़ जाता हैं .........

अब सिमरन को ाचे से समझ में आ गया था की करीम की आज उसने बात मानकर बहुत बड़ी गलती की hain........wo तो बस उसे एक डिलडो hi समझ रही थी मगर वो तो एक तरह का वाइब्रेटर tha........aab वो आने वाले उस तकलीफ को सोच सोचकर उसका गाला अब सूखने लगा tha......aabhi भी वो बेबसी भरी नज़रियों से करीम के चेहरे की तरफ देख रही थी.....

वहीँ उसका हस्बैंड उसे अजीब सी नज़रियों से घूर रहा tha.....agar इस वक़्त उसका हस्बैंड वह नहीं होता तो वो फ़ौरन अपने छूट में रखा डिलडो निकल फेंकती .......मगर अब कुछ नहीं हो सकता था ........
उसका हस्बैंड दोबारा सिमरन की आवाज सुनकर फ़ौरन गाड़ी से उतारकर सिमरन के पास जाता हैं और उसके एक दम करीब जाकर खड़ा हो जाता हैं और सिमरन के चेहरे की तरफ बड़े गौर से देखने लगता hain.......Simran की आँखें कभी बंद हो रही थी तो कभी खुल रही thi.......laajat की वजह से......
सिमरन का हस्बैंड - Simran....aap ठीक तो हैं naa.......kya हुआ आपको अचानक .......
सिमरन एक नज़र करीम के चेहरे की तरफ देखती हैं करीम उसे देखकर अभी भी मंद मंद मुस्कुरा रहा tha.........wo विबरटोर की स्पीड थोड़ी सी और बढ़ा देता हैं वहीँ सिमरन की हालत एक बार फिर से धीरे धीरे ख़राब होने लगती hain.....ek बार फिर से वो पूरी तरह तड़प सी जाती hain......uske छूट में गुदगुदी सी हो रही थी ........ और साथ में गीलापन भी बढ़ता जा रहा tha.......ek अजीब से सेंसेशन बार बार उसके छूट में उठ रही थी ....... धीरे धीरे उसके अंदर हवस अब फिर से बढ़ने लगी thi......aankhon में लाल डोरे भी साफ़ नज़र आने लगे थे.....
सिमरन –वव्वव्वव्व ..... उउउउउ ..... ंन्न ... ह्ह्हह्ह्ह्ह ....... वो ....बस ऐसे hi........thoda चाकर आ गया था........ मैं ठीक हूँ........
सिमरन अपना एक हाथ अपने छूट पर ले जाना चाहती थी मगर वो अब ऐसा आपने हस्बैंड के सामने नहीं कर सकती थी........ धीरे धीरे उसकी बेचैनी अब बढ़ने लगी thi........Karim सिमरन के करीब आता हैं और आकर कहता है…
करीम- मैडम जीई… कुछ हेल्प करू…
सिमरन गुस्से से उसको देखती है..

सिमरन का हस्बैंड भी करीम को देखते हुई कहता है…
सिमरन का हस्बैंड- मई हु न हेल्प करने के लिए… मई हु इनका हस्बैंड.. मई आपने वाइफ का ख्याल अचे से रखना जनता हु..
करीम हस्ते हुई फिर एक बार वाइब्रेटर ों करता है.. वैसे hi सिमरन उछाल पड़ती है.. और डगमगाते हुई थोड़ी बाजु के और झुक जाती है... झुकने की वजह से उसके आम करीम के सामने आ जाते है.. करीम उसको hi देख रहा था.. सिमरन का हस्बैंड ये देख लेता है की ड्राइवर मेरे वाइफ के बूब्स देख रहा है.. वो गुस्से मई कहता है.. ड्राइवर आपने सीट पे जेक बैठ जाओ..
करीम फिर ड्राइविंग सीट पर बैठ जाता हैं....
सिमरन का हस्बैंड - चले सिमरन ........
सिमरन एक नज़र करीम को देखती है फिर आपने हस्बैंड को देख कर फिर वो उससे बिना कुछ कहे कार के अंदर आकर चुप चाप बैठ जाती hain.....wahin उसका हस्बैंड भी उसके बाजु में आकर बैठ जाता हैं....
सिमरन का हस्बैंड -
अगर आपकी तबियत ठीक नहीं है तो सिमरनजी आप अभी घर वापस चली जाओ.... मई अकेला चला जाऊंगा और काव्य जी को बोल दूंगा की आप की तबियत ठीक नहीं है इसलिए आप नहीं आ payee…waise वो आप की ाची फ्रेंड है वो समाज जायेंगे…
सिमरन फ़ौरन आपने हस्बैंड का हाथ थम लेती हैं और ना में अपनी गार्डन धीरे से हिला देती हैं .....
सिमरन का हस्बैंड- नहीं .. नहीं.. आप घर पर hi रुकर आराम करो… लगता है आप बहोत वीकनेस फील कर रही हो.. आप रेस्ट कर लो…
इस पर सिमरन कुछ बोलना चाहती थी की तभी करीम रिमोट से वाइब्रेटर की स्पीड फुल कर देता है…. सिमरन एक बार फिर से तड़प उठाती है….
सिमरन- आआआआअह्हह्ह्ह्ह…..
और अपनी आँखे बंद कर लेते hai…Simran का हस्बैंड- देखिये… आप कितनी वीकनेस फील कर रही है… आप ठीक से बोल भी नहीं पा रही है..
सिमरन - aaaaaa......hhhhhh.....main ठीक हूँ जीईई .......बस थोड़ी वीकनेस की वजह से ....... ऐसा हो रहा है शयद…
सिमरन का हस्बैंड- लगता है आप बहोत परेशां है…. हम अभी डॉक्टर के पास चलते है…
डॉक्टर का नाम सुनते hi झट्ट से सिमरन चिल्ला पड़ती है…
सिमरन- nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii….
तभी करीम एक बार फिर वाइब्रेटर का रिमोट पहले से ज्यादा जोर से दबाता है और उसके स्पीड बढ़ाता है.. इस वजह से सिमरन आपने जगह पे उछाल पड़ती है..
सिमरन- uuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii….. mmmmmmaaaaaaaaaaaaaaa…… मर्डरर… gayiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii…..
सिमरन का हस्बैंड- क्या हुआ सिमरन जी…
अब सिमरन आपने हस्बैंड को क्या कहातीय… वो क्या ये कहती आपने हस्बैंड से की वो इस वक़्त अपने छूट में डिलडो लिए बैठी हैं ...... और सामने बैठा हुआ बड़ा उस डिलडो को चला रहा है रिमोट से… लेकिन थोड़े hi देर मई सिमरन ने आपने आप को सम्बल….
सिमरन- कुछ नाहीइ…. वो पौन को जो थोड़े देर पहले मोच आयी थी उस पेअर पे परिसर पद गया था.. उतने की वजह से.. उसकी वजह से दर्द कर रहा है…
सिमरन की ऐसी हालत देखकर करीम वहीँ मंद मंद मुस्कुरा रहा tha......use सिमरन की बेबसी देखकर बड़ा मज़ा आ रहा था ....... अब करीम बार बार उस रिमोट से कभी वाइब्रेटर की स्पीड फुल कर देता तो कभी उसे बहुत स्लो कर deta......Simran बार बार तड़प uthathi......aur सिमरन कभी अपने होंठों को कटती तो कभी अपने हाथों को कसकर सीट पर रखकर मसल देती......... अब उसे बर्दास्त नहीं हो रहा tha.......Simran की आँखें सुर्ख लाल हो चुकी thi......aab उसका साबरा धीरे धीरे टूटता सा जा रहा tha.......kabhi तो उसे ये ख्याल आता है की वो फ़ौरन आपने हस्बैंड से लिपट जाये और अपने अंदर की आग को बुझा lein......magar शायद सिमरन और उसके हस्बैंड के बीच मई रिलेशन फॉर्मल hi था.. और किसी तीसरे आदमी के सामने उसके हस्बैंड के साथ ये वो नहीं कर सकती थी… उनका बीच मई का सेक्स नार्मल सेक्स hi था.. करीम और सिमरन के बीच मई जैसे था वैसे नहीं था.. अभी भी मर्यादा की लक्समन रेखा कहीं न कहीं बची थी ....... सिमरन और उसके हस्बैंड के बीच मई..
उसे करीम की हरकतों पर अब बहोत गुस्सा आ रहा था ....... मगर वो कराती तो क्या कराती… वो एक द्क्प होकर करीम के आगे बेबस थी.. वो न hi करीम से कुछ कह सकती थी और न hi उसे मन कर सकती थी ...... उसकी छूट में गीलापन अब और भी बढ़ता जा रहा था ...... मगर ये तो सिर्फ शुरुवात thi.......pata नहीं करीम उसके साथ ये सब खेल और कितनी देर तक खेलने वाला था .......
सिमरन का हस्बैंड – सिमरनजीई… आप ठीक हो…
सिमरन है मई गार्डन हिलती है…
सिमरन का हस्बैंड- तो चले…
सिमरन आँखे बंद किये हुई hi हां मई गार्डन हिलती है…
सिमरन का हस्बैंड – ड्राइवर चलो…
जैसे hi सिमरन का हस्बैंड चलो बोलता है वैसे hi करीम कार स्टार्ट करता hai..aur रिमोट जेब मई से निकल के आगे रखता hai..dono पैरो के बीच मई आगे की और… जैसे जैसे गाड़ी की स्पीड बढ़ती है वैसे की करीम रिमोट से वाइब्रेटर की स्पीड बढ़ाता था.. और जैसे कार की स्पीड काम करता वैसे hi वाइब्रेटर की स्पीड काम करता.. कार को जैसे hi ब्रेक मरना पड़ता वैसे hi रिमोट से वाइब्रेटर स्टॉप करता … वाइब्रेटर की स्पीड काम ज्यादा करने की वजह से सिमरन की हालत बहोत ज्यादा ख़राब हो गयी थी…
लेकिन सिमरन कुछ नहीं कह पति और चुप चाप आपने सीट पर बैठी रहती hai..........Karim के हरकत की वजह से अभी वो लुम्बी लुम्बी सांसें ले रही thi.......jis से उसके बड़े बड़े बूब्स और भी क़यामत धा रहे the......uska हस्बैंड बड़े गुजर से सिमरन को देख रहा था.....
सिमरन का हस्बैंड - अरे यू ऑलराइट सिमरन जी......
सिमरन एक नज़र आपने हस्बैंड के चेहरे की तरफ देखती हैं .. फिर वो अपनी निगाहें उसके चेहरे से फ़ौरन हटा लेती हैं.......
सिमरन- हआ.. ी ऍम ऑलराइट…
कुछ देर बाद सिमरन के हस्बैंड को किसी का फ़ोन आटा है.. वो फ़ोन पे बाते करने मई बिजी है ये देख के सिमरन करीम को एक हाथ आगे बड़के उसके हाथ को टच करती है.. करीम पीछे देखता है.. सिमरन आँखों से इशारा करके कहती है.. प्ल्ज़ ..स्टॉप आईटी.. करीम धीरे से कहता है.. कार… सिमरन धीर से कहती है… नहीं बाबा.. वाइब्रेटर … करीम हसता है.. और नहीं बोलता है.. सिमरन का हस्बैंड फ़ोन रखने के बाद पूछता है.. क्या पूछ रही थी आप ड्राइवर से.. सिमरन कहती है.. पार्टी प्लेस आने मई कितना टाइम लगेगा ये पूछ रही थी.. वो कहता है .. अब जल्द hi आ जाएगा..
करीब 15 मिनट बाद उनको जहा पार्टी के लिए पहुँचाना था उस फार्महाउस पर वो पहुँच जाते है..
वह पहुंचते हुई hi सिमरन के हस्बैंड को एक फ्रेंड मिलता है .. वो सिमरन के हस्बैंड के साइड का कार का दूर ओपन करता है.. वो निचे उतरता है.. .. उसको वो बात करते हुई आगे निकलता है और कहता है.. चलो सिमरन..
सिमरन – हां..
आपने हस्बैंड को आगे गया हुई देखके सिमरन गुस्से से करीम की और देख के कहती है..

सिमरन - तुम ये सब मेरे साथ करने में क्या मज़ा आता हैं करीम ....... तुम एहि चाहते हो न की मैं बस ऐसे hi तड़पती रहूं...... शायद तुम मेरी इस बेबसी पर मज़ा आता hain......hain ना .......
करीम - नहीं मेरी जान .......
सिमरन- यहाँ मुझे जान मत कहो.. कोई सुन लेगा..
करीम- तुम मुझे गलत समझ रही ho......main तो बस तुम्हारे साथ खुलकर एन्जॉय करना चाहता hoon.....tumhein वो सरे खुशियां देना चाहता हूँ जो तुम तेरे नामर्द पति ने कभी नहीं दिए हैं.......
सिमरन - ऐसे tadpaakar........tum नहीं जानते इस वक़्त की मैंने कैसे आपने आपको संभाले राखी हूँ ......... मगर तुम्हारी एहि ज़िद्द हैं तो फिर मुझे तुम्हारी खुशियों के लिए आज सब मंज़ूर hain.......kar लीजिये जो तुम करना चाहते ho.........chahe तो सरे आम मेरी इज़्ज़त उछलिये या फिर इसे बचाकर rakhiye......faisla अब तुम्हारे हाथ में हैं........
करीम - तुम उसकी चिंता मुट्ठ करो सिमरन........ मेरी.. जान.. तुम्हारी इज़्ज़त मेरी इज़्ज़त hain......bus लाइफ को खुलकर जियो.........
करीम इतना कहकर फिर से हौले से मुस्कुरा पड़ता हैं वहीँ सिमरन न चाहते हुए भी धीरे से मुस्कुरा पड़ती हैं....
सिमरन – करीम तुम सच में बहुत गंदे ho.....aab यहीं रहना है या फिर अन्दर भी चलना हैं......
करीम- सिमरन तू आज बहोत कड़क माल लग रही है इस सदी मई… मैं तो कर रहा है.. यहाँ hi तुजे चूड दू..
सिमरन अपनी अदा चहरे पर लेट हुई कहती है…

सिमरन- पागल हो गए हो क्या.. यहाँ कोई आ जायेगा .. हम ज्यादा देर तक यहाँ ऐसे बैत नहीं सकते …
करीम- काम से काम एक किश तो दे दो.. मेरे जान…
सिमरन- सिर्फ.. किश.. और कुछ नहीं.. पहले दूर की कांच उप्पर कर लो…
करीम वैसे hi करता है. और सिमरन को किश करता है..

किश करते हुई करीम वाइब्रेटर की स्पीड बहुत स्लो कर देता हैं.. इस वजह से सिमरन अपनी आँखें बंद कर लेते है … किश टूटने के बाअद सिमरन लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगती hain.......aab उसे कुछ सुकून सा महसूस हो रहा tha.......kuch डियर बाद सिमरन और करीम कार से नीचे उतरने लगते है.. ......जैसे hi सिमरन कार से बहार उतरती हैं करीम एक बार फिर से वाइब्रेटर की स्पीड बढ़ा देता hain.....ek बार फिर से सिमरन गिरते गिरते बचती हैं.......
अब उसके छूट में धीरे धीरे आग शोला का रूप लेती जा रही थी ......... करीम गलत जगह पर वाइब्रेटर की स्पीड बढ़ा देता था ...... जिस से सिमरन चाह कर भी कुछ न कर pati.........jaise तैसे वो धीरे धीरे चलते हुए फार्महाउस के अंदर जाती हैं........ वाइब्रेटर की स्पीड ज़्यादा होने की वजह से उसकी कमर धीरे धीरे हिल रही thi.........wo नहीं चाहती थी की इस बात का किसी को कोई आभास हो...... करीम उसके पीछे पीछे चल रहा था...... वहीँ सिमरन बार बार अपने होंठों को अपने डेंटन से काट भी रही thi.....baar बार उसकी आँखें बंद सी होती जा रही thi........choot में सेंसेशन अब फिर से बढ़ता hi जा रहा था .........
जैसे hi पार्टी हाल मई ये दोनों एंट्री करते है वैसे hi सिमरन को सामने अपनी फ्रेंड काव्य दिख जाती है..

काव्य भी सिमरन को देख के सिमरन के तरफ चलने लगाती है… काव्य सिमरन से थोड़ी दूरी पर थी.. उसको देख के करीम देखता hi रहता है… और उसके मू से काव्य के लिए शब्द निकल पड़ते है…
करीम- क्या.. माल है…
सिमरन ये सुन के पीछे आपने चेहरा घुमा के गुस्से से बोलती है..

सिमरन- तुम अपनी कमीनापन नहीं छोड़ोगे… नयी औरत देखि की उसके पीछे पड़ते हो..
जैसे hi काव्य उन दोनों के पास आती है करीम काव्य को सर से लेकर पवन तक घूरने लगता हैं.......

वहीँ जब काव्य और सिमरन की नज़र एक दूसरे पर पड़ती हैं अगले hi पल वो दोनों एक दूसरे के सीने से लिपट जाती hain.......wahin अभी भी करीम की नज़र काव्य पर hi थी.. अब सिमरन की पीठ करीम के सामने थी और काव्य का फेस करीम के सामने tha..itane देर से करीम काव्य को जो घर के देख रहा था वो काव्य जान जाती है.. वो सिमरन को गले लगते हुई पूछते है..
काव्य- कोण है ये..
सिमरन- मेरा ड्राइवर..
काव्य- बहोत घर रहा है..
सिमरन- ऐसा hi है वो..
अब वो एक दूसरे से अलग होती है.. करीम काव्य को hi घर रहा था.. काव्य करीम को तिरछी नज़ए से देखती है…

काव्य- बड़ी देर कर दी सिमरन आने mein......main कब से राह देख रही थी .......
सिमरन - वो थोड़ा निकलने मई लेत हो गया था.. इस सब को छोड़ो और ये बताओ की भाई साब कैसे है..
तभी वह काव्य का पति आ जाता है..
काव्य का हस्बैंड- मैं ठीक हूँ बहाना.. .........बस आप लोगों के आने का hi मुझे इंतज़ार था.........
अभी भी करीम वहीँ काव्य को तिरछी नज़रो से देखता है.. जवाब मई काव्य भी सिमरन की नज़र चुराके बीच बीच मई करीम को देख रही थी..

उसके आँखों का पीछा कर रही thi..ek बार फिर से करीम की नज़रें काव्य के जिस्म को स्कैन कर रही थी....... बार बार उसकी नज़रें काव्य के क्लेवराज पर जाकर रुक jati......kavya भी करीम की नज़रियों को ाचे से पहचान थी है और आपने आम पर का सदी का पालू ठीक कर लेती है..
सिमरन काव्य के पति के पास जाती हैं और वहीँ उसके पास जाकर कड़ी हो जाती hain......idher करीम धीरे से वाइब्रेटर की स्पीड फुल कर देता हैं अगले hi पल सिमरन एक बार फिर से उछाल सी पड़ती hain..........aab उसका साबरा टूटा जा रहा tha......wo अपने दोनों हाथों से वह कड़ी रहते hi निचे देख कर रेलिंग के एक बार को कसकर पड़की हुई थी और साथ hi साथ अपने होंठों को काट भी रही thi........baar बार उसकी आँखें लाजत से बंद होती जा रही थी.......
अब उसके छूट में रखा वाइब्रेटर उसकी मुश्किलें बढ़ता जा रहा tha......wo इन सब के सामने चाह कर भी अपने छूट पर हाथ नहीं रख सकती thi.......jaise तैसे वो अपने आपको संभालती हैं और एक नज़र इंकार में करीम के चहरे की तरफ बड़े गौर से देखने लगती हैं ........ वो उसे इशारों में ये सब के लिए मन कर रही thi...magar करीम को इन सब में मज़ा आ रहा tha.....wo भला ऐसे मौके क्यों जाने देता .... लेकिन जब सिमरन को ये इशारा करती है तब काव्य सिमरन को देखती है.. और थोड़े देर मई वो करीम को गर्दन घुमाके देखते है..

करीम भी सिमरन को देख रहा था.. काव्य को कुछ समाज मई नहीं आ रहा था.. वैसे काव्य एक चालू लेडी थी..
काव्य का पति - आप ठीक तो हो न बहाना ......जब से आप यहाँ आयी हो कुछ परशान सी दिखाई दे रही ho........aap की तबियत तो ठीक हैं ना......
सिमरन - jee........bhaisahab.....main ठीक hoon......wo थोड़ी तबियत आज कुछ ठीक नहीं लग रही......
काव्य का पति एक नज़र काव्य के चेहरे की ओरे घूर कर देखता हैं
काव्य का पति – काव्य जब तुम्हें मालूम था की सिमरन जी की तबियत ठीक नहीं थी तो फिर तुमने इन यहाँ क्यों बुलाया .... घर पर रहती तो थोड़ी आराम कर लेती न ये ..... तुमने क्यों बेवजह इनको परेशां किया.......
सिमरन - नहीं भाईसाहब ........इसमें काव्य की कोई गलती नहीं......
काव्य- आप परेशां मत हो.. आप के सिस्टर को कुछ नहीं हुआ है..
ताभ्ही वह सिमरन का पति आता है.. काव्य का पति उसके साथ जाता है.. तभी काव्य सिमरन के पास जाती है और उसके कानो मई धीरे से बोलती है..
काव्य- सिमरन वैसे तुजे कुछ नहीं होना चाहिए..
सिमरन आचर्य से काव्य को देखती है..
सिमरन – क्यों…
काव्य- तेरे पास इतना हत्ता कट्टा ड्राइवर जो है तो तुजे क्या होगा..
सिमरन- क्या मतलब
काव्य हसती है..
काव्य- कुछ नही..
ऐसा कहती हुई काव्य दूसरी तरफ चेहरा करके कड़ी हो जाती है… तभी करीम को सामने से माहि आते हुई दिख जाती है..

मगर माहि ने अब तक करीम को देखा नहीं था.. माहि तो काव्य को देख के उस से मिलाने आ रही थी.. जैसे hi माहि काव्य के पास आती है तब उसकी नज़र करीम पे पड़ती है.. .. काव्य उसको वह देख कर आचार्यचकित हो जाती hai..usko समाज मई नहीं आता की एक बहार का आदमी इस पार्टी मई कैसे आ गया …
करीम को देखते hi माहि का चेहरा उतर जाता है.. और वो धीरे से बोल पड़ती है..
माहि- ये कमीना यहाँ क्या कर रहा है..
कव्य- कोण..
माहि- ये कला सांड..
काव्य पीछे घूम के देखती है..
काव्य- इसको तुम जानती हो… माहि..
माहि- है.. इस कमीने को मई अचे तरह से जानती हु..
काव्य- ारे माहि .. तुम इसको देख कर ये गंदे वर्ड क्यों उसे कर रही हो..
माहि- ये आदमी hi इतना गन्दा और घटिया है की इस्सके लिए मेरे पास कोई अचे वर्ड है hi नहीं..
काव्य- क्या..
माहि- है .. काव्य.. बहोत hi कमीना इंसान hai..tum इससे दूर रहो..
काव्य- लग तो रहा है… लेकिन तुम इस को कैसे जानती हो…
माहि- मई अब ये सब यहाँ बता नहीं सकती ..लेकिन इतना बता देती हु की यहाँ इस घटिया आदमी से बच के रहो.. और हो सके तो इस्को यहाँ से जल्द से जल्द निकल दो..
काव्य- क्यों… िस्सने ऐसा क्या किया है
माहि- वो बाद मई बताती हु..
तभी माहि को कोई लेडी आवाज देते है इस वजह से माहि वह से चली जाती है..
माहि और काव्य की बाते करीम वह खड़ा रहकर सुनाता है.. उसको लग रहा था की माहि उसके प्लान की वात लगा degii..aab माहि का कुछ न कुछ करना पड़ेगा.. नहीं तो मुझे यहाँ से ये पागल औरत निकल देगी.. इसके छूट के चक्कर मई जो बाकि की छूट मिल रही है वो भी हाट से जाएगी.. इस औरत से माफ़ी मागणी hi पड़ेगी…
फिर करीम ये सोच कर माहि के पीछे जाता है.. माहि उस लेडी से बात कर रही थी.. करीम सोचते है की इस माहि रांड का क्या करे.. ये सोचते हुई वो एक कार्नर मई चला जाता hai..tabhi करीम को मिलाने के लिए सिमरन आती है.. .. वो उसको हाट जोड़ के विनती करती है
सिमरन - यहाँ किसी के साथ फ़्लर्ट मात करना… मेरे इज़्ज़त का सवाल है… उसके हाथ को करीम पकड़ता है और बोलता है..
करीम - डर मत..
ये माहि देख लेती hai...Ye देख कर माहि को कुछ समाज नहीं आ रहा था की ये माजरा क्या… वो जानती थी की सिमरन को करीम ने छोड़ा है.. लेकिन वो समाज नहीं पा रही थी की द्क्प सिमरन कौर इस को हाट क्यों जोड़ रही है.. सिमरन इस घटिया आदमी के सामने इतना बेबस क्यों हो गयी है.. मुझे तो लगा था की उस दिन इनका सेक्स ऐसे hi कुछ हुआ होगा.. कभी कभी हमसे अनजाने मई गलती हो जाती है वैसे सिमरन मैडम से गलती हुई होगी.. लेकिन अब मुझे ऐसा नहीं लग रहा hai..aise माहि सोच रही थी.. उसे लग रहा था की यहाँ कुछ गड़बड़ है.. अब सिमरन करीम से दूर चली गयी थी..
माहि करीम के पास गुस्से मई चली जाती hai..usko गुस्से से बोलती है..

माहि- तुम यहाँ कैसे…
करीम- मई यहाँ स्पेशल गेस्ट हु…
माहि- तू द्क्प सिमरन मैडम को क्यों धमका रहा था..
करीम- मई कब धमका रहा था..
Mahi-wo तुजे हाट जोड़ के क्या कह रही थी…
Karim-use तेरे को क्या करना है..
माहि- तू जनता है मई कोण हु.. माहि हु.. काँटी शेठ की बहन..
करीम- हां.. पता है…
माहि- तू भूल गया है शयद.. मेरे वजह से कल कैसे मार खाया था तूने..
करीम कुछ नहीं बोलता है..
माहि- मई देख रही हु तू मुझे हमेशा गुर था है.. इतना मार खाने के बाद भी तुजे अक्कल नहीं आयी.. कल भाई के हाट से इस वजह से hi मार खाया.. और आज भी.. अभी भी मुझे घर रहा है..
करीम गुस्से मई माहि को हाट जोड़ता है..
करीम- मैडम जी .. मुझे बक्श दो.. मई आप को आज से नहीं गुरुंगा… आप भी मेरा रास्ता मत काटिये..
माहि- ज्यादा शहाणा मत बन…
करीम- अब मैंने क्या किया .. माहि जी..
ऐसे कहते हुई माहि के बूब्स को.. उसके क्लीवेज को देखता है.. माहि का एक बूब्स और नवल ओपन थे उसको hi करीम देख रहा था.. माहि वो जैसे जान तेति वैसे hi पालू से उसको धक् लेती है.. और गुस्से मई कहती है..
माहि- अपनी गन्दी जबान पे मेरा प्यारा नाम मत ले..
करीम- आप के जैसे hi आपका नाम प्यारा है इसलिए जुबान पाई आ गया..
माहि- ज्यादा होशियारी मत कर मेरे saath..nahi तो मई तुजे भाईसाहब के पास ले जेक ऐसा मार खिलाऊंगी की किसी औरत की तरफ देखने के लिए लायक नहीं रहेगा… समाज न… क्या नाम है तेरा..
करीम- करीम…
माहि- टेलर है न..
करीम- हां…
टैलोरकी hi कर ज्यादा शहाणा मत बन…
करीम कुछ नहीं बोलता है…
माहि- ज्यादा गुर मत मुझे…
करीम गुस्से मई बोलता है..
करीम- मैडम जी.. बोलै न.. अब से नहीं गुरुंगा…
माहि- मतलब अब तक घूरता था..
करीम- हां..
माहि- क्यों..
करीम- आप दिखने मई अचे है इस लिए..
माहि- तुजे दिखने मई जो भी औरत अच्छी लगेगी उस हर औरत को घूरेगा..
करीम- हां..
माहि- कमीना .. कही का..
करीम- मैडम अब से नहीं गुरुंगा..
माहि- क्यों..
करीम- आप ने जो मन किया है..
माहि आपने बालो मई हाट घूमते हुई.. आपने सेक्सी अड्डा के साथ कहती है..

माहि- मैंने मन किया है.. अच्छी बात hai..aab से मई जैसे बोलूंगी वैसे hi करेगा न..
माहि अब थोड़ा क्रॉस हो के कड़ी थी.. इस वजह उसका एक आम थोड़ा आगे की तरफ आया हुआ है ऐसे लगता था.. ऐसे दिखता था..

करीम- है मैडमजी.. खूबसूरत औरत की हार बात माननी hi पड़ेगी न..
माहि- मेरे साथ फ्लेर्टिंग मत कर.. वह सिमरन मैडम के साथ.. मेरे साथ नहीं..
करीम- जी मैडम जी..
करीम माहि को जी मैडम जी ऐसे कहते हुई उसके उस आम को देख रहा था..
माहि आपने चहरे पर सेक्सी अदा लेट हुई कहती है..

माहि- गुरुंगा नहीं.. ऐसे कहता है.. और हमेशा घूरता है..
करीम- सॉरी मैडम अब से नहीं..
माहि- क्या .. अब से नहीं..
करीम- घूरना..
माहि- तो अब क्या कर रहा है..
करीम- वो क्या करे मैडम.. आदत से मजबूर हु.. आप जैसे कोई कड़क माल सामने आ जाता है तो देखने का मैं करता है..
माहि- माल.. मुझे क्या समाज के रखा है..
करीम- सॉरी... खूबसूरत औरत..
माहि- मुजसे बाते करते वक़्त वर्ड गंदे उसे मत करना..
करीम- हां.. मैडम जी.. आप जैसे ब्यूटीफुल एंड सेक्सी औरत अगर सामने आ जाती है तो मैं आपने बस मई नहीं रहता..
माहि आँखे बड़ी करके करीम को गुस्सा दिखती है..
माहि- फिर से गंदे वर्ड
करीम - सॉरी... माहि जी.
माहि- only..madam..jiii.. no माहि.. जी.
करीम- ok मैडम जी..
अब माहि वह से चली जाने लगाती है..
करीम- मैडमजी..
माहि पीछे घूम के देखते है..

माहि- अब… क्या है…
करीम- वो मेरे बारे मई किसी को उलटा सीधा मत बोलिये न..
माहि- क्यों
करीम- मई आप के रस्ते नहीं आऊंगा.. आप भी प्ल्ज़ मेरे रस्ते मई मत आइये न..
माहि स्माइल देते है..

और चेहरा घुमा के वह से चली जाती hai..Karim उसके पीछे चला जाता है..
करीम- मदमजीए.. प्ल्ज़्ज़… कुछ कहियेना
माहि फिर घूम जाती है..
माहि- मेरा पीछा क्यों कर रहे हो.. अब तो कह रहे थे न मेरे पीछे नहीं आओगे..
करीम - नहीं आऊंगा..
माहि- फिर अब क्या कर रहे हो..
करीम- एक बार मेरे हेल्प कीजिये ना..
माहि- कैसे हेल्प
करीम- वो मेरे बारे मई कुछ भी किसी को मत कहिये न..
माहि- तुम अपनी बात मुजसे मानवके hi रहोगे न...
करीम- हां..
माहि – देखुंगीय.. मेरा पीछा मत कर..
करीम- नहीं... नही.. ऐसा नही.. प्ल्ज़.. प्रॉमिस कीजिये..
माहि- प्रॉमिस और तुमसे..
करीम- हां...
माहि- क्यों करू..
करीम- एक आपने मुलाज़िम समाज के..
माहि- मई क्यों समाजु..
करीम- आपको एक अच्छा सा ब्लाउज सिलवा दूंगा..
माहि- मुझे नहीं चाहिए..
करीम- क्यों..
माहि- मई जानती हु तुम जैसे लेडीज टेलर को अच्छे तरीके से..
करीम- कैसे
ऐसे कहके करीम थोड़ा सा माहि के पास आता hai..aabhi भी वो दोनों एक कार्नर मई खड़े थे... वैसे hi करीम माहि की तरफ देख कर आँख मार देता है.. … माहि गुस्से मई बोलती है…

माहि- तुम आपने आप को समजते क्या हो…. सिमरन मैडम के साथ फ़्लर्ट कर लिया इसका मतलब तुम कुछ भी करोगे..
करीम उसके आँखों मई hi देख रहा था…
माहि- तेरे ये डेरिंग की तूने मुझे आँख मरी …
करीम उसके आँखों मई hi देखता है..

माहि- ऐसे क्या आँखे फाड़ के देख रहा है… हरामखोर… ज्यादा देखा तो कच्चा चबा जाउंगी…
करीम- तो चभा जा न…
माहि- मुजसे उलझ रहा है.. हरामी..
ऐसे कहकर माहि उसके कालर को पकड़ के एक कार्नर मई ले जाती है… और पीछे ले जाती hai..uske फेस को एक हाथ मई पकड़ थी है और बोलती है…
माहि- मेरे से मत उलझ.. समाज न… और रेज आँखे फाड़ कर मेरे को देख भी मत..
करीम- क्या करेगी…
करीम ने ऐसे बोलते hi…Mahi आपने घुटने से उसके पथ मई जोरदार मारती है.. करीम कराह रहा था…
माहि- समाज मई आ गया न… मई क्या कर सकती हु… सुधर ja..bachooo…. मई बहोत तीखी चीज़ हु…
ऐसे कहते हुई वो वह से चली जाती है… करीम उसको hi देख रहा था..

उसके गांड और कमर को देख रहा था..
करीम… तू चीज़ तो तीखी है… तुजे छोड़ने मई तो बहोत मज़्ज़ा आएगा… तूने बहुत बड़ी गलती की है मुजसे ुलाज़ के माहि… तुजे तो ऐसे चौडूँगा की तू साड़ी जिंदगी मेरे याद करेगी…. माहि…
थोड़ी देर तक ऐसे hi चहल पहल वह चल रही थी.. करीम भी वह की करीमली देख रहा था.. सिमरन कुछ मेहमान से बात कर रही थी साथ मई वो करीम को देख रही थी… करीम का ध्यान अब सिमरन पे उतना ज्यादा नहीं था.. इस वजह से सिमरन को वाइब्रेटर से रहत मिली हुई थी.. सिमरन को लग रहा था की करीम मई कुछ फरक पड़ा है … सिमरन सोच रही थी की यहाँ इतने सारे लोग है इस वजह से शयद करीम डरकर वाइब्रेटर ों नहीं कर रहा है.. लेकिन असली वजह करीम hi जनता था..
इधर करीम आपने आप पर अब बहोत ज्यादा गुस्सा था.. वो आपने आप को कह रहा था साला.. मई तो इस माहि को माफी मांगने गया था .. थकी वो मेरे काम के बीच मई न आ जाये.. लेकिन मैंने ये क्या कर दिया.. उसने थोड़ा अच्छा क्या बोलै .. थोड़ी लाइन क्या दी मई उस से इस तरह से पेश आया और उसको आँख मर दी.. साला ये रंडी अब मुझे नहीं छोड़ेगी.. अगर ये बात उसने अपने भाई को बता दी तो साला वो कमीना थो मुझे जान से मार देगा.. नहीं तो काम से काम आपने घर से मार्के निकल देगा.. साला इस माहि के चक्कर मई जो अब तक छूट मिल रही थी वो भी हाट से चली जाएँगी… अब क्या करू मई.. साली इसने अब यहाँ किसी और को बता दिया तो इस पार्टी से भी जाना पड़ेगा.. यहाँ जो हहरयलि का मज़ा मिल रहा है वो भी अब नहीं मिल पायेगा.. अगर मई उसके पास अब माफ़ी मांगने गया तो वो बहोत भाव खायेगी.. अब क्या करू .. वो तो अब मुझे आपने पास आने भी नहीं देंगे… मैंने ये क्या किया.. मेरा दिमाग नहीं चल रहा है.. अब दारू पिनेही पड़ेगी.. वर्ण मेरा दिमाग नहीं चलेगा.. मई कुछ सोच नहीं पाउँगा..
ये सोच कर करीम पार्टी हॉल से बहार जाता है.. कार जहा पार्क की हुई थी वह.. वो सोचता है साला किसी ड्राइवर के पास दारू मिल जाये पिने को.. यहाँ पार्टी मई अब तक दारू सर्वे करना स्टार्ट नहीं किया है.. बहार कुछ ड्राइवर आपस मई बात कर रहे थे… उनसे जान पाचन करीम कर लेता है.. वो 3-4 लोग the..aapas मई आपने मालिक और मालकिन के बारे मई बैठे कर रहे थे.. उस मई एक बोलता है .. साला यहाँ दारू अगर मिल जय तो मज़ा आ जायेगा.. उसमे से दूसरा बोलता है मई जुगाड़ करके आता हु.. थोड़े देर बाद वो कहा से तो दारू के 2 बड़ी बोतल लेके आता है.. वो माहि का ड्राइवर था.. रघु.. करीम को जब पता चलता है की रघु माहि का ड्राइवर है तो उसके दिमाग मई एक प्लान आ जाता है.. वो रघु से ज्यादा बातचीत करने लगता है.. ड्राइवर आपने मालकिन के बारे मई बात कर रहे थे तब करीम बोल पड़ता है..
करीम- साला.. ये माहि मैडम तो बहोत गुस्सैल है..
दूसरा ड्राइवर बोलता है… क्या हुआ भाई .. उसने तुजे कुछ कहा क्या.. करीम कहता है ..है भाई.. तभी वो ड्राइवर कहता है.. है भाई .. वो जरा ज्यादा hi गुस्सा करती hai..tabhi रघु बोल पड़ता है..
रघु- ारे हमारी मैडम वैसे नहीं है जैसे तुम कह रहे हो.. आज कल वो ज्यादा hi गुस्सा कर रही है लेकिन पहले वैसे नहीं थी.. वो बहोत अचे स्वाभाव की लेडी है..
करीम- लगता है तुजे कुछ ज्यादा hi पता है आपने मैडम के बारे मई..
रघु- है ..करीम भाई.. पिछले 5-6 सालो से उनके साथ काम कर रहा हु..
करीम- तो कुछ बता न आपने मैडम के बारे मई..
और दूसरे ड्राइवर को बोलता है..
करीम- रघु भाई का एक गिलास और भर दो..
दूसरा ड्राइवर बोलता है .. हां.. क्यों नहीं…
रघु- वैसे हमारी माहि मैडम जितने दिखने मई अच्छी है उतनी hi स्वाभाव से अच्छी है… लेकिन अब शादी को7-8 साल हो चुके है.. अब तक बच्चा नहीं है.. शयद इस वजह से थोड़ी गुस्सैल हो गयी है.. और साहिब भी बहोत ज्यादा बिजी रहते है… वैसे माहि मैडम को पैसे की कोई कमी नहीं hai…muje जो लगा मैंने बोल दिया ..उस मई सच भी हो सकता है और झूट भी...
फिर करीम थोड़ी इधर उधर की बाते करता है… और थोड़े देर बाद सब लोगो के साथ वह से चला जाता है.. अन्दर पार्टी हाल मई आजाता है.. उसको सामने सिमरन दिख जाती है.. सिमरन दिखते hi उसको सिमरन के छूट मई जो वाइब्रेटर की याद आ जाती है… फिर करीम वाइब्रेटर ों करते हुई उसकी स्पीड बढ़ाता है.. वैसे hi सिमरन आपने जगह पाई उछाल पड़ती है.. और आपने आप को कहती है.. आ गया कमीना.. अब तक कहा था पता नाह.. कितना सुकून था अब tak..ye अब कहा से आ गया .. फिर वो इधर उधर देखते hai..piche घूम के जैसे उसको करीम दिखता है वो करीम के पास आ जाती है..
सिमरन- कहा गए थे..
करीम- यही.. बहार था..
सिमरन- इतने देर तक कितना सुकून था मुझे.. तुम आते hi मुझे दर लगता है.. कब क्या करोगे कुछ कहा नहीं जा सकता है.. तुम देखते hi मई डर जाती हु..
करीम- दर मत मेरी जान..
ऐसे कहते हुई जोरसे रिमोट का बटन दबाता हुई स्पीड बढ़ाता है… सिमरन आपने जगह पे उछाल पड़ती है..
सिमरन- ोोोोोुछहहहहहहह….. इससे मुझे छुटकारा कब मिलेगा…
करीम- मिलेगा ..मिलेगा… वह.. जा ..तेरा पति हमारे तरफ hi देख रहा है..
फिर सिमरन आपने पति के तरफ जाती है .. इधर माहि बहोत ज्यादा गुस्से मई थी.. वो सोचती है इस हरामी से थोड़ी प्यार से बात कर क्या ली इस ने मुझे डायरेक्ट आँख hi मार ली.. साला खुद को क्या समजता है… मई भी कैसे लेडी हु.. इस हरामी के बारे सब कुछ जानते हुई भी उसे बाटे करने लगी .. अब इस को मई आपने पास आने नहीं दूंगी… इस से बाते नहीं करुँगी… लेकिन इस पर वाच रखना पड़ेगा.. ये आदमी क्या करेगा इसका कुछ भरोसा नहीं hai..is लिए सिमरन और करीम जब बाते कर रहे थे तब माहि दूर से देख लेती है.. जैसे hi करीम देखता है वैसे hi माहि आपने मू दूसरे और घुमा लेते है..
करीम इधर उधर घूम रहा था… वो जनता था की माहि उस पर नज़र रख रही है… इस वजह से करीम सोचता है थोड़ा सिमरन और काव्य के और करीब जाते है.. और इस माहि को जरा दिखते है.. जरा इसको जलाते hai..Sali दूर से मुज पर नज़र रख रही है.. उन दोनों के और करीब जाने के कोशिश करीम करता है… एक बार वो सिमरन के पास जाता है.. उसके बाजु मई खड़ा रहता है… करीम के पीछे माहि कड़ी थी… दूरी बनाये रखते हुई… करीम वो जनता था इसलिए वो सिमरन के कमर पाई हाथ रखता है… सिमरन उसे कुछ नहीं बोलती… माहि वो देख रही थी.. माहि पहले से जानती थी की करीम और सिमरन के रिश्ते के बारे मई.. पर उसको ये सब देख के आचर्य होता है की करीम सरे आम सिमरन के कमर पर हाथ रखता है.. वो सोचती है ..ये आदमी बहोत घटिया hai..issko जरा भी शर्म नहीं है.. ये सरे आम एक शादीशुदा औरत के कमर मई हाथ दाल रहा है.. वो भी सिमरन मैडम का हस्बैंड इस पार्टी मई रहते हुई.. और सिमरन मैडम भी कुछ नहीं बोल रही है.. इस टेलर को थो पहले से hi कोई इज़्ज़त की पर्व नहीं है लेकिन मैडम को तो होनी चाहिए… माहि अभी भी करीम और सिमरन को देख रही थी.. करीम घूम के माहि की तरफ देखता है.. और चहरे पर हसी लेट हुई सिमरन के कमर पर आपने हाथ वैसे hi रखता है..
बाद मई थोड़ी देर बाद वो काव्य को मिलाने के उसके पास पहुंचता है..

काव्य बहोत मस्त लग रही थी.. और उस से बात करने लगता है.. … काव्य को बात करने के पीछे उसका कोई और hi मकसद था.. उसके दिमाग मई एक प्लान tha..wo काव्य से बाते कर रहा था और काव्य को हँसा रहा था.. काव्य के हाथ पाई हाथ एक बार वो मरता hai..Mahi वो देख रही थी.. करीम वो जनता था.. इस बार वो माहि को देखता भी नहीं है.. वो ऐसे दिखा रहा था की माहि के तरफ अब वो ध्यान नहीं देगा.. वो काव्य से है के बाते कर रहा था.. माहि को समाज मई नहीं आ रहा था की मैंने काव्य को इतना कुछ बताया इस आदमी के बारे मई फिर भी काव्य उसे बात कर रही है.. ये कितने देर से काव्य से बाते कर रहा है.. इतने देर से क्या बाते कर रहा होगा ये आदमी.. और काव्य भी इसके बातो मई इतना क्यों इंटरेस्ट ले रही है.. कितने देर से बाते कर रहा है और मेरे तरफ देख भी नहीं रहा है.. जाने दो मुझे क्या करना है .. वो मुझे देखेगा या nahi..aab काव्य है नहीं रही थी पर करीम की बात प्यार से सुन रही थी..

काव्य के सामने hi खड़ा रहके वो बार बार काव्य के आम को देख रहा होता है.. स्टार्ट मई तो काव्य उसके ऐसे देखने पे ध्यान नहीं देती.. पर माहि का पूरा ध्यान था.. करीम कहा देख रहा है… माहि सोच रही थी की काव्य को कैसे पता नहीं चल रहा है की ये आदमी कहा देख रहा है.. मई काव्य को जेक बता दू क्या.. नहीं.. नहीं.. अब नहीं बाद मई बता देते हु.. नहीं तो ये घटिया आदमी कुछ दूसरा hi samajega..Karim जब ज्यादा hi काव्य के आम को देखने लगता है तभी काव्य को समाज मई आता है की करीम कहा देख रहा hai..aab काव्य शर्माकर दूसरी तरफ चली जाती है…

लेकिन करीम को कुछ नहीं बोलती है…
अब काव्य के पास माहि चली जाती है..
माहि- क्या काव्य.. मैंने बताया था न तुम..
काव्य- क्या..
माहि- उस घटिया आदमी से ज्यादा बाते न करने का..
काव्य- वो कोई ऐसे वैसे बाते नहीं कर रहा था.. वो तो सिर्फ जोके सुना रहा था..
माहि- इसलिए तू है रही थी..
काव्य- हां..
माहि- मई तो सोच रही थी की तू उसे क्या बात कर रही है..
काव्य- डर मत… मई ऐसा वैसा कुछ नहीं करूंगी.. उसके साथ..
माहि- तूने देखा वो तेरे बूब्स को कैसे गुर रहा था ..
काव्य- हां.. देखा.. तू उसे जो घटिया बोलती है.. वो बिलकुल सही है..
माहि को अब क्यूरोसिटी थी की करीम ने काव्य को मेरे बारे कुछ बताया तो नहीं.. ऐसा वैसा..
माहि- उसने मेरे बारे मई कुछ कहा..
काव्य- नही.. क्यों कुछ कहने वाला था क्या…
माहि- नही.. मुझे कैसे पता होगा..
काव्य- वैसे वो बहुत चालू बाँदा है.. तू
भी उसे बच के रहना..
माहि- क्यों… मई क्यों बच के राहु उसे..
काव्य- तू जिस तरह से मुजसे पूछ रही है उस से मुझे लग रहा है …
माहि- nahii..nahii..iss मई ऐसा क्यों लगेगा …
काव्य हसती है..
माहि- काव्य .. तू कुछ छुपा रही है.. क्या कहा उस कमीने ने मेरे बारे मई..
काव्य- कुछ स्पेशल नहीं.. ऐसा hi नार्मल है…
माहि- नार्मल है.. तो तू बता क्यों नहीं रही है…
काव्य- वो कह रहा था.. माहि मैडम बहोत अच्छी है.. लेकिन उनको मेरे बारे कुछ गलत फैमि हुई है…
माहि- और क्या कहा..
काव्य- यही की मई ऐसा नहीं हु… मई एक सीधा साधा आदमी हु…
माहि – और क्या कहा..
माहि का फेस देखने लायक हो गया था..

माहि को और क्यूरोसिटी हो रही थी की करीम ने उस के बारे मई काव्य को क्या कहा..
काव्य- लगता है तुम बहोत जल्दी है जानने की… तेरे उस घटिया आदमी ने तेरे बारे मई क्या कहा है..
ऐसे कह के काव्य हस्ती है..
माहि- वो मेरा नहीं है.. मई तो सिर्फ जानना चाहती हु की उसने क्या कहा तुम मेरे बारे मई..
काव्य- मई जानती हु.. तुम क्या लगा रहा है.. तो सुन.. बहोत ध्यान लगा के सुन.. शयद आज तक तेरे इस तरह की टैरिफ किसी ने भी नहीं की होगी.. शयद तेरे हस्बैंड ने भी…
माहि- बता..
काव्य- माहि मैडम बहुत खूबसूरत है.. इतनी सुन्दर औरत मैंने आज तक नहीं देखि.. उपरवाले ने बहुत फुर्सत से बनाया है उन.. मैं तो माहि मैडम की सूरत देखते hi उस पर फ़िदा हो गया था. इतना सुन्दर चेहसरा हर किसी को नहीं मिलता. उसकी आँखों की चंचलता उनके मटकने का अंदाज उफ्फ्फ..
काव्य थोड़ी देर रुकते है और माहि की तरफ देखती है.. और फिर से कहने लगाती है..
kavya-Uske होंठ तो बस.. एक डैम गुलाब गुलाबी.. जब दोनों पंखुडिया खिलती है तो देख कर ऐसा लगता है की हर वक्त कामुक रास टपकता रहता है उनके होंटो से.. खुसनसीब है मनीष भैया जो की उन इतने रसीले होंठ चूसने को मिलते हैं..
माहि- और क्या कहा ..उसने..
काव्य- बहोत मज़ा आ रहा है अपनी टैरिफ सुनकर..

माहि- नहीं.. ऐसे बात नहीं है.. उसने जो कहा बस वो तुम्हारे मू से सुनना चाहती हु..
काव्य- इतने hi इच्छा हो रही आपने खूबसूरती की टैरिफ सुनाने की तो जा न आपने घटिया इंसान के पास तेरे अछि से टैरिफ करेगा.. और..
माहि- और क्या..
काव्य- और…. तेरे अच्छी से लेगा भी..
तब शरमाते हुई माहि कहते है..

माहि- मई कभी नहीं जाउंगी उस घटिया आदमी के paas..aur अपनी कभी लेने भी नहीं दूंगी..
काव्य- तो उस ने जो कहा है वो क्यों सुनना चाहती है..
Mahi-tu सिर्फ बता न.. और क्या कहा usne..mere बारे मई..
काव्य- तेरे उस घटिया इंसान ने कहा..
माहि मैडम के दोनों उरोज.. उनकी तो बात hi निराली है.. दोनों उरोज हिमालय पर्वत के जैसे तने हुए उसकी छाती से चिपके हुए है.. जब वो चलती है तो दोनों उरोज उसके चलने से कामुक अंदाज़ में ऊपर नीचे हिलते हुए हायई.. दिल बैठ जाता है मेरा उन्हें यु हिलते देख कर. दोनों उरोजों की मोटाई और गोलाई एक डैम गजब की है.. ऊपर वाले ने एक डैम अलग hi साँचा तैयार करा होगा उनके उरोजों को ढलने के लिए.. जो भी उन्हें देखता होगा उसके मुँह में पानी आ जाता होगा.. जैसे मेरे मुँह में आ जाता hai..aur बाकियो के भी आता होगा..
माहि- इतना गन्दा कहा..
काव्य- ये गन्दा है क्या..
माहि शरमाते हुई नीचे देखने लगाती है…

काव्य- हीईई… मई मर जवायआ.. मेरे माहि के अड्डा वो पे.. क्या शर्मा रही हो.. शयद मनीष भैय्या ने पहली बार देखा होगा तभी इतना शर्माए नहीं होगी.. और अब एक बूढ़े के टैरिफ ने.. वो भी मेरे सामने की.. तेरे सामने भी नहीं की ..इतना शर्मा रही है..
तब नखरा करते हुई माहि कहते है..

माहि- आगे बता न.. क्या कहा उसने..
काव्य- आगे कहने laga...Itni सब खुबिया होने के बाद भी माहि मैडम में जो सबसे ज्यादा आकर्षक चीज है उनका पिछवाड़ा… ( उसने कहा आप लोग इंग्लिश मई अस्स कहते हो न… मैंने हां मई गार्डन हिला दी.. फिर उसने कहा हम लोग उसको क्या कहते है पता है आपको काव्यजी.. मैंने कहा नहीं.. वो बोलै.. गांड.. मई शर्मा के आपने गार्डन निचे कर ली और उसको बोली कितने गंदे हो तुम.. उसने कहा गांड को गांड hi कहेंगे न.. मैंने कहा मत कहो..)
माहि- तो तुम इस वजह से शर्मा रही थी..
काव्य- हां..
माहि- मुझे लगा… वो तुम्हारे बूब्स देख रहा था न इस वजह से तुम शर्म आ रही थी…
काव्य- मैंने वो तो देखा hi नहीं .. मई तो उसके बातो मई डूब गयी थी..
माहि- आगे क्या कहा उसने..
काव्य- आगे कहने लगा.. माहि मैडम की gaand..sorry सॉरी अस्स.. ऐसे कहने लगा.. ..माहि मैडम के अस्स के बारे में क्या कहु कुछ समझ नहीं आ रहा.. कातिल गांड .. सॉरी .. सॉरी.. अस्स है माहि मैडम की.. मेरे दिल का कतल कर दिया माहि मैडम की अस्स ने.. इतनी मस्त अस्स मैंने आज तक नहीं देखि.. जब वो चलती है तो अस्स के दोनों गोल गोल तरबूज बहुत कामुक अंदाज में हिलते हैं.. उनका फुला हुआ पैन उसके दोनों भागो को और भी ज्यादा आकर्षित बनता है.. नपुंसक का लुंड भी खड़ा हो कर झटके मरते हुए सलामी देने लग जाये..
माहि- क्या.. ऐसा कहा तुम उसने.. इतना गन्दा…
काव्य- हां.. बहोत गन्दा कहा उसने.. मैंने भी गुस्से मई उसको कहा.. क्या गन्दा बोल रहे हो.. इस लिए वो थोड़ा देर शांनत हो गया..
फिर काव्य भी थोड़ी डियर शांत हो गयी.. वो जानना चाहती थी की माहि की अब क्या रिएक्शन आएगी.. माहि भी थोड़ी देर शांत रहती है.. जब वो देखती है की अब काव्य आगे कुछ नहीं कह रही है.. तब उसने कहा ..
माहि- आगे उसने कुछ कहा.. या चला गया.
काव्य- थोड़ी देर हम दोनों hi शांनत थे.. मुझे भी कुछ समाज नहीं आ रहा tha..ki आगे क्या करू.. इस की टैरिफ सुनु ..जो तेरे बारे मई है या यहाँ से चली जाऊ.. फिर मैंने थोड़ी देर सोचा .. मई ये जानना चाहती थी की वो तुम्हारे बारे किस हद तक गन्दा सोचता है..
फिर काव्य माहि को पूछती है..
काव्य- माहि.. मैंने ठीक किया न..
माहि- हां.. ठीक kiya..aage कुछ कहा उसने..
काव्य- थोड़े देर बाद मैंने कहा.. और कुछ बचा है क्या माहि के बारे मई कहना.. तो उसने कहा.. अगर मैंने कुछ कहा तो आप उसको गन्दा कहोगे.. मैंने कहा.. अब इतना गन्दा कह hi चुके हो तो आगे और क्या गन्दा कहोगे. बोलो और क्या कहना है..
माहि काव्य को देखते hi रहती है..

काव्य- वो कहने लगा.. पक्का न.. मैंने कहा हां.. तो वो बोल pada..Mera तो माहि की गांड के बारे में सोच कर hi बुरा हाल हो जाता है.. लुंड बिठाये नहीं बैठता.. बार बार खड़ा हो कर उसकी गांड को सलामी देना शुरू कर देता है..
माहि- इतना गन्दा… मई सोचती थी उससे ज्यादा गन्दा और घटिया आदमी है ये.. और तुमने ये नोटिस किया काव्य..
काव्य- क्या..
माहि- अब तक वो मुझे माहि मैडम कह के बुलाता था अब माहि कह रहा है..
काव्य- haa..ye सच है.. आगे बता दू..
माहि- हां..
अब दोनों को भी सुनाने और सुनाने मई इंटरेस्ट आ रहा था..
काव्य- वो कहने laga..mujhe पूरा यकीं है की इस अप्सरा की छूट भी काम कातिल नहीं होगी..
माहि- क्या.. छूट .. वर्ड.. उसे किया उसने..
काव्य- हां..
माहि- और तुमने कुछ कहा नहीं..
काव्य- मेरी hi गलती thi..maine hi उसको छूठ दी थी… कुछ भी कहने की .. इस लिए उसने उसका अचे से फायदा उठा लिया…
माहि- काव्य.. एक बात पुछु..
काव्य- हां…
माहि- उसने तुजे कही टच नहीं किया न..
काव्य- तू पागल हो गयी है क्या.. तू शयद भूल गयी hai..ye बोर्डिंग सब तेरे लिए थी.. मेरे लिए नहीं थी… मेरे लिए होती तो उसको कब का मजा सिखाती ..
माहि कुछ नहीं bolati..aab काव्य माहि को न पूछते हुई आगे कहने लगते है..
काव्य- वो बोलने लगा.. बल्कि उनकी छूट तो सबसे ज्यादा क़यामत ढाती होगी.. कैसी दिखती होगी माहि की छूट.. झाते होगी उस पर या एक चिकनी होगी.. जैसी भी होगी.. कमाल होगी..
माहि- माय goddddddddddddddddd… कितना गन्दा इंसान है ये…
काव्य- आगे तो इससे ज्यादा है..
माहि- आगे और क्या कहा इस हरामी ने..
काव्य- आगे उसने.. कहा.. उसननी.. कहहआ…
माहि- इतनी क्यों डर रही है…
काव्य- वो कहने लगा…
ऐसा कहके काव्य शांत हो जाती है.. माहि अब आगे करीम ने और क्या कहा ये जानना चाहती थी.. उसको अब साबरा नहीं हो रहा था…
माहि- कहो न.. अब.. इतना कुछ गन्दा कहा है मेरे बारे मई अब तक .. और क्या गन्दा कहेगा मेरे बारे मई..
काव्य अपनी आँखे बंद करके कहती है..
काव्य- माहि तुम जो कहती हो न वो घटिया है.. उस से भी ज्यादा ये घटिया है.. बहोत नीच है वो कला बुद्धा..
माहि- बाते मत बनाओ.. बताओ उसने क्या कहा..
काव्य अभी भी आँखे बंद की हुई thi..wo बहोत धीरे से बोलती है..
काव्य- माहि बहोत शर्म आ रही है.. उसने जो कहा वो बताने मई…
माहि- सुनाने मई नहीं आयी शर्म .. अब कहने मई आरही है शर्म तुजे kavyaa..jo भी है बात दो काव्य..
काव्य- वो कहने लगा.. एक बार माहि को जी भर कर छोड़ना चाहता हु.. हर उस तरह से जैसा उसे देख कर मन में ख्याल आता है.. कभी तो मन करता है की उसे घोड़ी बना कर उसकी छूट मरू कभी गांड मरू.. कभी ख्याल आता है उसकी दोनों चिकनी चिकनी टाँगे अपने कंधे पर रख कर उसकी छूट मरू.. लेकिन जानता हूँ की ये मुमकिन नहीं है.. ये मेरे दिल का केवल ख्याल है एक सपना है.. माहि मनीष भैया की बीवी है और मेरी मालकिन है.. इसलिए उसको छोड़ने का ख्वाब हमेशा ख्वाब hi रहेगा.. पर मुझे खुसी है की ऐसी सूंदर अप्सरा के साथ मुझे एक hi घर की छत्त के नीचे रहने का मौका मिला है.. अगर माहि को छू नहीं सकता काम से काम देख तो सकता हु.. मैं उस ऊपर वाले का शुक्र गुजर हु जिसने मुझे इतनी हसीं खूबसूरत अप्सरा को देखने का सौभाग्य दिया.. आगे कहने लगा.. मई वैसे गन्दा इंसान नहीं हु.. सिर्फ आप माहि मैडम को बोल दो.. मई अब उनके रस्ते मई नहीं आऊंगा और वो भी मेरे रस्ते मई न आये..
इतना कुछ सुनने के बाद माहि को बहोत गुस्सा आ रहा था करीम का और काव्य का.. जो उसके इतनी गन्दी भाषा उसने सुन ले थी..
माहि- इतना कुछ कहा उसने मेरे बारे मई और तुम ने सुन लिया
काव्य- तो क्या करती..
माहि- तू मेरे अच्छी फ्रेंड है न.. फिर सुन के कैसे लिया..
काव्य - क्या kahati..mere सहेली .. खूबसूरत नहीं है.. माहि तुम hi पागल हो.. वो आदमी घटिया है.. लेकिन उसकी टैरिफ.. जो तुम्हारे की थी.. मेरे सामने की थी.. वो तो झूट नहीं थी… और उसने बड़े छलखि से ये सब कहा.. मैंने भी उसको कहा जो भी कहना है कह दो.. मुझे क्या पता था वो इतना गन्दा बोलेगा.. कोई आपने वाइफ के साथ या गर्लफ्रेंड के साथ भी इतना गन्दा बोलता नहीं है..
माहि सोचने लगाती है..
काव्य- और एक बात hai…Tumari इतनी टैरिफ शयद मनीष भैय्या ने भी कभी नहीं की होगी ..
माहि- तो क्या मई अब उस को जा के थैंक्स बोलू
माहि गुस्से मई बोलते है..
काव्य- मई वो नहीं कह रही हु..
Mahi-To तुम्हारा क्या कहना है..
काव्य- यही.. की.. इस आदमी को मानना पड़ेगा.. न जाने सिमरन ने इस को कहा से उतके ले आयी
Mahi-Bhaiyya के घर से
काव्य- क्या.. तुम कैसे पता..
माहि- भैय्या के घर से तो मेरे पीछे पड़ा है..
काव्य- तो क्या तूने भैयासाहब को नहीं बताया..
Mahi-Bataya .. मेरी जान.. कल hi भैय्या ने उस को बहोत मारा है..
काव्य- फिर भी नहीं सुधारा वो..
माहि- हां..
काव्य- मानना पड़ेगा उसको
Mahi-Kya ..मानना पड़ेगा उसको
गुस्से से बोलती है..
काव्य- उसके डेरिंग को…
माहि- दिन बा दिन उसकी डेरिंग बढ़ती hi जा रही है.. अब थोड़े देर पहले तो उसने हद hi कर दी..
Kavya-Kab..
Mahi-Aab तुजसे बाते करने से पहले
Kavya-Kya किया
Mahi-Aankh मारी.. मुझे ..
काव्य- क्या???????????? … ऑर्डर… कहा
माहि- यहाँ पार्टी मई..
काव्य- माय गॉड.. ये आदमी तो बहोत पहुंचा हुआ लगता है..
Mahi-Haa..
Kavya-Mahi..kuch भी कहो डेरिंग बहोत है इस बन्दे मई.. मई उसको जानती नहीं हु.. फिर भी मेरे सामने तुम्हारे टैरिफ की.. वो भी इस kadar…iss गंदे तरीके से.. तू बच के रहना इस से .. तुजे कब उदा ले जायेगा तुजे पता hi नहीं चलेगा..
Mahi-Mai क्या कोई ऐसे वैसे हु क्या.. जो कोई भी मुझे उदा लेजायेगा..
काव्य- माहि.. ये कोई भी नहीं है.. स्पेशल है.. मई सच बोल रही हु.. सम्बल के रहना इस से नहीं तो हम आज तक माहि को मनीष भैय्या की बीवी कहते थे .. अब न जाने करीम काका की बेगम न कहना पड़े..
माहि- काव्य तू क्या पागल हो गयी हो क्या.. वो काका मुझे क्या करेगा.. ऐसा कभी नहीं होगा.. मई ऐसे कभी नहीं होने dungi..mai मेरे मनीष की अमानत हु.. है और रहूंगी.. मई कभी भी ऐसे ैरे गैर लाफहंगे करीम की कभी नहीं हो सकती.
Kavya-That’s स्पिरिट माहि.. कीप आईटी उप..
तब काव्य को कोई आवाज देता है.. इसलिए काव्य माहि के पास से चली जाती है.. आपने बाजरे मई इतना कुछ सुनने के बाद माहि को समझ में नहीं आ रहा था की कैसे रियेक्ट करूँ इस par.wo सोचने लगाती है मेरे बारे में बहुत गन्दी गन्दी बाते कही है इस घटिया आदमी ने काव्य को.. वो सोचने लगाती hai..iska मतलब वो हर वक़्त मुझे घूरता रहता था. कितना बेशरम था शुरू से hi.. तभी उसकी निगाहें मुझे अपने ऊपर हमेशा महसूस होती रहती थी..
अपने बारे में इतना गन्दा सुनने के बाद माहि शर्म से पानी पानी हो gayi..us को एक तरफ तो गुस्सा आ रहा था और दूसरी तरफ शर्म भी आ रही थी.. लेकिन गुस्से से ज्यादा शर्म आ रही थी.. वो सोचती है मनीष ने आज तक कभी मेरे से ऐसे वर्ड उसे नहीं करे थे.. लेकिन ये आदमी ने मेरे बारे मई ऐसे वर्ड क्यों उसे किये.. क्या वजह है.. मुझे विश्वास नहीं हो रहा है की करीम ने मेरे बारे मई ऐसे वर्ड उसे किये लेकिन काव्य ने कहा तो सच hi होगा..
बाद मई कुछ देर बाद करीम सिमरन के पास चला जाता है.. उसकी गांड दबाता है…. और बाद मई माहि के तरफ देख कर हास्के चला जाता है दूसरी तरफ…. माहि को अब बहोड़ ज्यादा गुस्सा आ रहा था.. वो माहि के तरफ देख कर सिमरन के साथ छेद चढ़ कर रहा था अब.. माहि सोच रही थी की इसको सिमरन मैडम के साथ अगर फ्लेर्टिंग करने है तो kare..lekin मुझे क्यों दिखा रहा है.. वो मुझे दिखा कर क्या जाताना चाहता है.. मुझे कुछ समाज मई नहीं आ रहा है ये आदमी..
थोड़ी देर के बाद करीम सिमरन को इशारा करता है .कुछ पिने को लेन के liye..wo माहि देख रही थी… सिमरन पानी लती है.. सिमरन जब आ रही थी तब करीम वाइब्रेटर की स्पीड बढ़ाता था.. जैसे hi स्पीड बढ़ती सिमरन के छूट को जतका लगता है ..इस वजह से वो कमर को जहतका देते है.. और अपनी गांड हिलाते हुई आती है.. माहि को कुछ समाज मई नहीं आ रहा था की सिमरन को क्या हो गया है.. माहि जानती थी की नोर्मल्ली सिमरन ऐसे लचक के नहीं चलती थी..
सिमरन पानी लेके करीम के पास आती है.. लेकिन करीम को जूस चाहिए होता है.. करीम सिमरन पर गुस्सा हो जाता है.. सिमरन जल्दी hi भाग कर जूस और ice-cream लती है…… बीच बीच मई करीम वाइब्रेटर की स्पीड बढ़ाता था इस वजह से वो आपने कमर को जातक देके चल रही thi..Karim जूस पिता है और आइस- क्रीम कहते कहते hi सिमरन की कमर मई हाथ दाल देता hai..Simran दर कर एक कार्नर मई करीम को लेके चली जाती है… एक वाल के पीछे.. माहि भी उनके पीछे चली जाती hai..waha वो दोनों एक दूसरे को ice-cream खिलते hai..phir करीम उसको किश करता है…

उसके होंटो को.. उसके गाल को और उसके नवल को.. माहि वो देख लेती hai..wo देख कर माहि को कुछ सूज नहीं रहा था… की ये आदमी कैसा है… मेरे इतनी गन्दी टैरिफ की ..वो भी मेरे एक फ्रेंड के पास .. और इधर सिमरन मैडम को किश कर रहा है.. लगता है ये आदमी एक टाइम पे बहोत सरे औरत से खेलता hai..tabhi सिमरन को कॉल आता है तो वो वह से चली जाती है… करीम जैसे hi पीछे घूम जाता है और वाल से होते हुई आगे आता है तो उसे माहि दिख जाती है … माहि उसको hi दिख रही थी..

करीम चलते चलते माहि के पास आता है.. माहि वही कड़ी रहती है और वो भी करीम के तरफ देखने लगाती है.. माहि आपने बालो से खेलते हुई करीम को देख रही थी.. माहि की सेक्सी ऐडा देखए हुई करीम उसके तरफ आ रहा था.. करीम आते आते माहि के आँखों मई देखते हुई आपने हूंतो पाई लगी हुई आइसक्रीम को अपनी जीभ से चाट रहा होता है.. माहि के पास आते हुई उसको गुरते हुई कहता है…
करीम- देखा मई किस्स्स्स( इस वर्ड पे जोर देते हुई) टाइप का स्पेशल गेस्ट हु…
ऐसे कहके वो माहि के पास से जाता है.. माहि के बदन की खुशबू लेते हुई…… और कहता है…..
करीम- aaaaaaaaaaaaahhhhaaa….. मज़ा आ गया……
अब करीम काव्य की तरफ जाता है.. उस से पूछता है
Karim-koi हेल्प चाहिए क्या…
काव्य - थैंक्स… पर हम लोग कर लगे..
ऐसे बोलते है… करीम फिर से बोलता है… तब काव्य बोलती है
काव्य- यहाँ का ये सामान उधर रखना है.. इस लड़के से वो उठा नहीं जा रहा है…
करीम वो सामान उठा के दूसरी जगह रख देता है… जाते जाते वो काव्य के कमर को टच करता है …
काव्य के मू से हलकी सी सिसकारी निकलती है..
काव्य- आआआआहहहहह..
और काव्य करीम की तरफ देखते हुई उसे स्माइल देते है … थोड़े देर करीम और काव्य एक दूसरे को देख रहते है.. और बाद मई वो दोनों वह से चले जाते है..
अब थोड़े देर तक करीम एक कार्नर मई बैठ जाता है.. उसको माहि कही नज़र नहीं आती.. अब वो सिमरन को ढूडने लगता है.. सिमरन उसको सामने कड़ी हुई नज़र आते hai..Simran , काव्य ,सिमरन और काव्य के हस्बैंड आपस मई बात कर रहे थे.. फिर करीम अपने जेब में रखा रिमोट से वाइब्रेटर की स्पीड धीरे से बढ़ा देता hain....agle hi पल सिमरन एक बार फिर से तड़प उठती हैं......... करीम एक वाल के पीछे चुप जाता है .. और वह से वाइब्रेटर की स्पीड काम ज्यादा कर रहा था.. सिमरन करीम को देखने लगाती है.. लेकिन उसको करीम कही नज़र नहीं आता hai..wo इस वक़्त पूरी तरह से बेबस हो चुकी थी....... उसको करीम कही दिख नहीं रहा था लेकिन वो वाइब्रेटर की स्पीड काम ज्यादा कर रहा tha..dheere धीरे अब उसका दिमाग काम करना बंद सा हो गया tha.......badan की आग धीरे धीरे उसपर हावी होती जा रही thi........aab उसे अपनी छूट की प्यास बुझाने के सिवा और कुछ नज़र नहीं आ रहा tha......magar यहाँ इन सब के beech.....ye सिमरन के लिए बिलकुल मुमकिन नहीं था......
करीम अब एक चेयर पाई बैठ जाता है.. सिमरन के samane..us वजह से सिमरन को करीम दिखाई देता है.. वो एक नज़र करीम के चेहरे की ओरे देखती हैं …फिर ना में धीरे से अपनी गार्डन हिला देती hain......uski आँखों में फर्याद साफ़ झलक रही thi........wahin करीम सिमरन की बेबसी देखकर हंस पड़ता हैं......
फिर परेशां होकर सिमरन आपने हस्बैंड को बोल देती है..
Simran-mere ख्याल से अब हमें चलना चाइये.........
जैसे तैसे ये बात सिमरन आपने हस्बैंड से कह पति हैं....... तब काव्य एक नज़र सिमरन के चेहरे की ओरे देखती हैं..
काव्य सिमरन के उस बदले हुए रूप को देखकर बहुत हैरान थी........ उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की आज सिमरन को हो क्या गया हैं....... वो सिमरन को थोड़ा बाजु मई ले जाती hai..aur उससे कहती है..
काव्य – सिमरन .. तुम ठीक तो हो न ...... तबियत ठीक नहीं हुई kya..aur अभी तो तुम यहाँ आयी ho........fir इतनी जल्दी जाने का क्या मतलब........
सिमरन अपने चेहरे पर झूटी मुस्कान लेन की कोशिश करती हैं..
सिमरन - मैं ठीक हूँ kavya........bus .......ऐसे hi......
काव्य – लगता है तुम बिलकुल ठीक नहीं हो ............. लगता है डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा..
सिमरन कुछ पल तक खामोश रहती हैं ......... उसके अंदर ज़रा भी हिम्मत नहीं थी की वो डिलडो वाली बात काव्य से कह sake.......wo आगे कुछ कहती तभी वहां करीम आ जाता हैं...... वो उन दोनों के पीछे खड़ा हो जाता hai..aur सिमरन और काव्य को देखकर हौले से मुस्कुरा पड़ता हैं..... वो दोनों भी करीम को देखकर मुस्करा पड़ती hai..fir वो फ़ौरन अपने एक हाथ को धीरे से सरकते हुए काव्य के कंधे से होते हुए उसकी कमर तक ले जाता हैं ......

और अगले hi पल वो फ़ौरन अपना हाथ उसकी गांड पर फेरते हुए अपना हाथ झट से हटा लेता हैं.....
काव्य के जिस्म में एक आग सी लग जाती है .....उसका चेहरा लाल पढ़ जाता है.. ........ करीम की इन् हरकत से...... ये सब बहुत जल्दी में हुआ tha......magar काव्य के अंदर उस आग को भड़काने के लिए काफी tha.......kavya करीम के हरकत की वजह से लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगती hain......aur अपने बेकाबू सांसिओन को फिर से सँभालने लगती हैं.......
सिमरन करीम की हरकत देख चुकी थी..
उसकी नज़रियों से करीम की हरकत छुपी नहीं थी...... सिमरन जैस एही गुस्से से करीम को देखते hi वैसे hi करीम वाइब्रेटर की स्पीड बड़ा देता hai..iss वजह उसके जिस्म में आग और भी बढ़ जाती है ...........अब उसका साबरा पूरी तरह से टूट गया tha....Simran की आँखें सुर्ख लाल हो चुकी थी ........ वाइब्रेटर की स्पीड की वजह से उसकी आँखें बार बार बंद सी हो रही thi......jaise तैसे वो अपने होश संभाले हुई thi.....magar अब ये होश भी बहुत जल्द उसके कण्ट्रोल से बहार होने वाला था......
काव्य अब कुछ दूर जाती हैं और एक अजीब सी नज़रियों से करीम को पलटकर देखने लगती हैं

और फिर वो उसे देखकर मुस्कुराते हुए अपनी हस्बैंड की तरफ जाने लगाती है.. वहीँ बगल मई कड़ी सिमरन ये नज़ारा देख लेती है और गुस्से से करीम की और देखने लगाती है.. और आँखों से करीम को इशारा करती है.. बाजु मई आने को.. करीम बाजु मई आ जाता hai..Simran करीम के हातो को पकड़ के दिवार के पीछे ले जाती है.. अब वह उन्दोनो के अलावा वह कोई और नहीं था..
सिमरन एक नज़र करीम के चेहरे की तरफ देखती हैं ..
गुस्से se..Karim उसे देखकर हौले से मुस्कुरा पड़ता हैं...
सिमरन- करीम तुमने काव्य के साथ ये सब क्यों kiya.....kisi ने ये सब देख लिया होता तो..
करीम- कोण देकहता..
सिमरन- वह मेरे और काव्य के पति थे.. उन्दोनो मई से कोई भी देख सकता था..
करीम- कुछ नहीं होता .. देखा तो नहीं न..
सिमरन- उसने आपने पति को बता दिया तो..
करीम- मैं अचे से जनता हूँ की वो ये बात अपने पति को कभी नहीं कहेगी........
सिमरन- तुम कैसे पता..
करीम- तुमने आपने पति को बताया kya..maine तुजे छोड़ा तो …
सिमरन हसती है..

सिमरन- फिर भी बताये तो..
करीम- नहीं बताएगी.. तुमने देखा होगा न उसे भी मेरा चूना ाचा लगा ......अगर उसे ये सब पसंद नहीं होता तो वो मुझे इंकार ज़रूर करती...... या वही पाई कुछ kahati..magar उसने कभी इस बारे में मुझसे कुछ नहीं kaha........iska मतलब उसे मेरी हरकतें पसंद hain........zaroor उसके छूट में भी सेंसेशन हुआ होगा मेरे इस तरह छूने se.....uski आँखें देखि tumne.......poori लाल हो गयी thi......hawas दिखाई दिया मुझे आज उसकी आँखों में.......
सिमरन करीम की बाटिओं को सुनकर धीरे से हंस पड़ती हैं…
सिमरन- तुम तो बहुत जानकारी हैं इन सब के बारे mein......aur मेरी आँखों में तुम क्या नज़र आ रहा hain...........main कब से इस आग में जल रही हूँ उसका kya........kya मेरी आँखों में हवस नहीं दिखाई देती...... करीम तुम्हे तो मेरी ज़रा भी परवाह नहीं हैं........
करीम- ऐसे बात नहीं है..
सिमरन- अब बातें मुट्ठ बनाइये और चुप चाप कही चलते hai.........aab मेरा साबरा टूटता जा रहा हैं......
करीम - इतनी भी क्या जल्दी हैं सिमरन....... अभी तो पार्टी शुरू हुई है..
अगले hi पल सिमरन फ़ौरन करीम के और करीब आती हैं और उसके सीने से फ़ौरन लिपट जाती हैं........ और करीम के होंठों को बड़े प्यार से चूम लेती हैं.....

सिमरन – पार्टी गयी भाड़ में ........ मुझे नहीं करनी कोई पार्टी ...... इधर मेरे छूट मई आग लगी हुई है और तुम पार्टी की पड़ी हुई है..
करीम हस्ता है..
सिमरन- करीम .. तुम्हे.. मुझपर ज़रा भी तरस नहीं aata........kya हालत कर दी हैं तुमने मेरी इस waqt.......main तुम्हे बता नहीं sakti.......meri पंतय पूरी भीग चुकी hain........aab और नहीं बर्दास्त होता mujhe.......please.......main तुम्हारे सामने हाथ जोड़ती hoon............meri प्यास अभी बुझा दीजिये......
करीम - यहाँ ....इस waqt...........tumhara दिमाग ख़राब हो गया हैं क्या Simran......ye कोई तुम्हारा घर नहीं hain.......ye पब्लिक प्लेस हैं..... यहाँ पार्टी चल रही hai..yaha इतने सरे लोग है.. तुम्हारा पति भी hai..aur इस वक़्त यहाँ ये सब करना पॉसिबल नहीं........ पार्टी के बाद हम घर चलकर ये सब आराम से कर लेंगे.......
सिमरन- मेरा पति कुछ नहीं करेगा.. उसको दारू पिने से फुर्सत मिले तो मुज पर ध्यान दे..
करीम- कुछ भी हो जय.. अब इस वक़्त पॉसिबल नहीं है.. थोड़े देर बाद तेरे पति को दारू ज्यादा होने के बाद hi मैं तुम्हारे छूट की आग बुझा पाउँगा ......बस तब तक साबरा करती रहो......
सिमरन- promise..na..
करीम- हां...
सिमरन के पास से आने के बाद करीम थोड़े देर यहाँ वह घूमता रहता है.. थोड़ी ड्रिंक करता है.. फिर वो माहि को ढूंढने लगता hai..lekin उसको माहि कही नज़र नहीं आती.. फिर वो काव्य के पास जाता है.. माहि को ढूढते hui..waha काव्य और उसके हस्बैंड खड़े थे.. काव्य को माहि मैडम कहा है ये करीम पूछता है.. काव्य हसती है.. अब काव्य ज्यादा कुछ नहीं बोल pati..uska हस्बैंड वह होने की वजह से… तभी काव्य का पति पूछता है क्या काम है.. तो करीम बोलता है… काँटी शेठ का एक मैसेज देना है.. काव्य जान चुकी थी की करीम झूठ बोल रहा है.. इस वजह से काव्य करीम की तरफ देख कर मंद मंद है रही थी.. करीम भी काव्य के तरफ देख कर hi कहता hai..Sheth बोल रहे थे उनका फ़ोन नहीं लग रहा है.. तब काव्य का पति बोलता है.. पीछे गार्डन मई बैठे hai..us फार्महाउस मई पिछले बाजु मई एक छोटा सा गार्डन था.. वह माहि गार्डन मई अकेली घूम रही थी.. काव्य आपने हस्बैंड को एक काम है बोल के वह से चली जाती है… और करीम का पीछा करती hai..Karim अब माहि के पास उस गार्डन मई चला जाता है..
माहि करीम के सामने इधर उधर टहल रही thee……aur करीम माहि के बदन से अपनी अंकेछण सेंक रहा tha…..thalate हुए अचानक माहि के कदम थम gaye….wo कुछ पलों के लिए एक जगह पाई रुख जाती है.. वो घूम कर करीम की तरफ गुस्से से देखती hai..kamar पर हाथ रख kar…Karim भी उसी के तरफ देख रहता है….. तभी वह गार्डन के पीछे एक छोटा सा स्टोर रूम था वह काव्य आ जाती है.. और विंडो से उन्दोनो को चुपचाप देखने लगते है.. अब दोनों ..माहि और करीम एक दूसरे को देख रहे थे.. माहि के चहरे और आँखों मई गुस्सा था तो करीम के आँखों मई हवस और चहरे पर हसी थी..
दोनों एक दूसरे को कुछ नहीं बोल रहे थे.. बस देखते जा रहे थे.. कुछ 2-3 मिनट ऐसे hi सिचुएशन थी.. पीछे छोटे से रूम मई कड़ी काव्य आपने आप को कह रही थी..
काव्य- कुछ तो बोलो.. कोई तो स्टार्ट करो..
शायद काव्य के मैं की बात उसकी बेस्ट फ्रेंड माहि ने सुन ली थी..
माहि- यहाँ.. क्यों आये हो…
काव्य- माही.. ु अरे माय बेस्ट फ्रेंड .. तुमने मेरे दिल की बात सुन ली.. स्टार्ट तो हुआ..
करीम- माफ़ी मांगने आया हु..
माहि- किस बात की माफ़ी..
करीम- मैंने जो थोड़े देर पहले आप के साथ बतमीज़ी के थी उसकी..
माहि- अच्छा.. कोण सी बतमीज़ी..
करीम- जो मैंने आप को ऐसी आँख मरी थी.. वो..
ऐसे कहते हुई करीम माहि को आँख मरता है..
माहि गुस्से से बोलती है
माहि- बतमीज़ इंसान.. माफ़ी मांग रहे हो और फिर से आँख मार रहे हो..
काव्य को इन दोनों के बातो से बहुत अच्छा लग रहा था..
करीम- मैडम जी.. मई आँख नहीं मार रहा हु तो… आप को बता रहा हु की मैंने आप को ऐसी आँख मर्री थी इस वजह से मई आपकी माफ़ी मांग रहा हु ..
सिमरन को कुछ समझ में नहीं आ रहा था .. सिमरन इस तरह के सेक्स के लिए बिलकुल त्यार नहीं थी. करीम जान जान बोल बोल कर सिमरन को चूमे जा रहा था. जैसे की कह रहा हो की आज तेरी छूट को छोड़ के भोसड़ा बना दूंगा. वो मस्ती में चूमे जा रहा था. तभी करीम सिमरन को अपने दोनों हाथो से उठा कर उसको किचन से गेस्ट रूम में ले आता है. गेस्ट रूम किचन के बाजू मई थी.. गेस्ट रूम घर का सबसे आगे का कमरा था… आज पहली बार सिमरन पूरी नंगी आपने गेस्ट रूम में थी .
सिमरन - ये क्या करने जा रहे हो जान प्लीज चोरो मुझे बहुत गिल्टी मह्शूश हो रहा है .. प्लीज यहाँ कुछ मत करो कभी भी कोई आ सकता है. बैडरूम में चलते है न वहा कर लो जो करना है लेकिन यहाँ नहीं प्लीज...
करीम- बैडरूम मई तेरा हस्बैंड होगा न..
सिमरन- करीम … प्ल्ज़्ज़.. करीम अभी नहीं.. मेरे हस्बैंड घर पर है.. वो आ जायेंगे…
आज करीम कहा किस का सुनाने वाला था. कल उसकी प्यास को माहि ने बढ़ावा जो दिया था.. उसका बदला वो सिमरन के साथ ले रहा था..
करीम- चुप कर रंडी आज तुझे यही छोडूंगा गेस्ट रूम में ... तेरी आज गाड़ भी मरूंगा रंडी.. और अगर तेरा हस्बैंड आएगा तो तेरे हस्बैंड के सामने तुजे छोडूंगा…
सिमरन को घुमा कर मतलब सिमरन की गाड़ करीम के लुंड की तरफ और करीम का हाथ पीछे से सिमरन के बूब्स को मसलने लगता है. और तभी बहार से सिमरन का हस्बैंड आवाज देता है.. वो आवाज सुनकर करीम गुस्से मई बोल पड़ता है…
करीम – साले इस बहनचोद को इस टाइम hi आना था क्या..
सिमरन का हस्बैंड फिर से आवाज देता है..
सिमरन- आ… रही.. हु..
सिमरन गुस्से से करीम को कहती है..
सिमरन- कपडे नहीं है बॉडी पे… अब बहार कैसे जाऊ..
करीम हास्के वह छोत पे लेट जाता है..
सिमरन- तुम है क्या रहे हो.. जाओ.. किचन मई जाकर मेरे कपड़े लाओ..
करीम- मई क्यों जाओ..
सिमरन- तुमने निकले थे न.. जल्दी जाओ न… मेरे हस्बैंड इधर आ जायेंगे…
करीम- नहीं जा सकता..
सिमरन- तुम जो बोलोगे वो कर lungi..plz जाओ न..
करीम- ठीक है.. वो डिलडो आपने छूट मई दाल के ले लो..
सिमरन- ओह्ह्ह्हह्ह… शीट्ट्ट्ट्ट.. वो तो किचन मई hi रह गया.. मेरे हस्बैंड ने उसको देख लिया तो बहोत बड़ी प्रॉब्लम होगी.. प्ल्ज़ जल्दी जाओ… तुम जो बोलोगे वो सबकुछ कर लुंगी..
करीम- ठीक है.. एक किश दे दो..
सिमरन करीम को किश देती है और रूम से बहार निकलती है.. करीम किचन से सिमरन के कपडे लता है.. साथ मई डिलडो भी.. कपडे लेन के बाद सिमरन कपडे पहन कर करीम को वह से बहार जाने को कहती है.. गाड़ी के पास.. ताकि उसके हस्बैंड को कोई शक न हो..
करीम के जाने के बाद सिमरन डिलडो को लेकर अपने कमरे में चल पड़ती हैं ........... वहीँ करीम के चेहरे पर एक बार फिर से शरारती मुस्कान थी.......
करीम बहार जाकर कुछ देर तक वहीँ खड़ा रहता हैं और अपने ख्यालों में खोया रहता हैं… वो आपने आप से कहता है… तू आज देखती जा सिमरन आज मैं तेरे साथ क्या क्या करता हूँ ......... आज तू इतना तड़पेगी की तुझे अपनी छूट की आग के सिवा और कुछ नज़र नहीं aayega........tune अभी मेरे खुरापाती दिमाग को ाचे से जाना hi कहा हैं....... आज तुझे पता चल जायेगा की करीम आखिर क्या चीज़ हैं.......
थोड़े डियर बाद सिमरन बाथरूम में चल पड़ती hain.......uske अंदर भी एक्ससिटेमेंट धीरे धीरे बढ़ती जा रही thi........wo करीम को खुश देखना चाहती thi..........uske ख़ुशी के लिए वो आज कुछ भी करने को तैयार thi.........fir ये डिलडो अपनी छूट में रखना कौन सी बड़ी बात thi.........kareeb 30 मिनट बाद सिमरन नहाकर बाथरूम से बहार निकलती hain.........fir वो अपने कमरे में जाती हैं और एक वाइट रंग की साड़ी निकल कर पहने लगती हैं ........ साड़ी नेट वाली थी ...... और काफी महंगी भी .......
अगर नीचे पेटीकोट नहीं होता तो उस साडी में उसका सारा जिस्म दिखाई देता ........ कुछ देर की तैयारी के बाद सिमरन फाइनल टच देकर अपने किचन में दुबारा चल पड़ती हैं.......... थोड़ी देर बाद सिमरन डाइनिंग टेबल पर नास्ता लेकर आती हैं..... आपने हस्बैंड को वो आवाज देती है.. उसका हस्बैंड आता है.. नास्ता करते वक़्त वो उसे घूर घूर कर देख रहा था........ सिमरन इन् कपड़ों में आज क़यामत लग रही थी ........ सिमरन को देखकर उसके लुंड में एक हलचल सी होने लगी थी ......... सिमरन ने आज कुछ वैसे hi कपडे सेलेक्ट किये थे जैसे करीम उसे देखना चाहता था......
सिमरन का हस्बैंड- आज तो तू बहोत हॉट लग रही हो…
सिमरन- थैंक्स..
सिमरन का हस्बैंड- किश पे बिजली गिराने का इरादा है..
सिमरन – किसी पे नहीं..
सिमरन आपने हस्बैंड के किसी भी रिएक्शन को आज इम्पोर्टेंस नहीं दे रही थी.. उसे तो जल्द से जल्द ये सदी.. ये मेक उप करीम को जो दिखाना चाहती थी..
नास्ता करने के बाद सिमरन बहार आ जाती है.. वहीँ करीम और सिमरन का हस्बैंड बहार खड़े होकर कार के पास उसके आने का इंतज़ार कर रहे थे......... सिमरन के छूट में रखा डिलडो उसे बहुत परेशां कर रहा tha........wo बार बार उनकंफर्टबले सी फील कर रही थी ...... करीम एक नज़र सिमरन के चेहरे की ओरे देखता हैं फिर वो उसे देखकर धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं..... सिमरन भी जवाब में हलकी सी स्माइल कर देती हैं .......

उसके हस्बैंड का ध्यान किसी और है ये देखके करीम हाथ से सिमरन के सदी और मेक की टैरिफ करता है … और सिमरन के थोड़े पास जाकर कहता है …
करीम- masha allah... aaj aap bahut hi khoobsurat lagh rahi ho..
सिमरन भी राइट हैंड उठा कर करीम को आदाब करती है... जैसे मुस्लिम लोग करते है… करीम स्माइल देता है.. और सिमरन धीरे से कहते है… बहुत बहुत शुक्रिया ….
अगले hi पल करीम अपने जेब में हाथ डालता हैं और अपने पेण्ट के जेब में रखा रिमोट का बटन जोर से पुश कर देता hain.......wahin सिमरन जगह पे उछाल पड़ती है… और उसके मू से अह्ह्ह्हह्हआआ.. निकल पड़ती है.. वो आवाज सुनकर सिमरन का पति सिमरन की तरफ घूम जाता है.. जैसे hi सिमरन आवाज करती है वैसे hi करीम पीछे हैट जाता है… सिमरन गुस्से से करीम को देखते है…

सिमरन का पति- क्या हुआ सिमरन…
सिमरन आपने आप को संभालती है…
सिमरन- कुछ नहीं… जस्ट ये संदेल थोड़ी क्रॉस हो गयी इस वजह से आवाज निकल गयी..
सिमरन का हस्बैंड- हेल्प करू क्या ..
सिमरन- no.. नू.. ी कैन मैनेज..
सिमरन का हस्बैंड- टेक केयर सिमरन… ड्राइवर चलो…
करीम आपने ड्राइवर वाले सीट के बाजु मई खड़ा हो जाता है.. ..सिमरन का हस्बैंड कार के अन्दर बैठ जाता है.. सिमरन और करीम कार के दोनों साइड मई एक दूसरे को देखते हुई खड़े थे… सिमरन गुस्से से करीम को देखती है और आँखों से hi इशारा करते हुई पूछती है.. क्या है ये… करीम भी इशारे से कहता है… वाइब्रेटर.. जैसे hi करीम कहता है वैसे hi सिमरन आपने हाथ आपने माथे पे मारती है और धीरे से कहते है…. ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह… माय गूदड़…. सिमरन के इस एक्सप्रेशन पर करीम स्माइल देता है…
सिमरन जैसे hi कार के नज़दीक पहुँचती हैं … जैसे hi वो कार का दूर ओपन करने वाली होते है वैसे करीम वाइब्रेटर का रिमोट फिर से जोर से दबाता है.. सिमरन के छूट में रखा वाइब्रेटर तुरंत ों हो जाता हैं और उसके बढ़ते कदम तुरंत डगमगा से जाते हैं ...... वो वहीँ गिरते गिरते बचती hain.........aur फ़ौरन अपने हाथों से कार का दरवाज़ा झट से थम लेती hain.....uske मुँह से एक ज़ोरों की सिसकारी फुट पड़ती hain........agle hi पल सिमरन के चेहरे का रंग पूरा फीका सा पढ़ जाता हैं .........

अब सिमरन को ाचे से समझ में आ गया था की करीम की आज उसने बात मानकर बहुत बड़ी गलती की hain........wo तो बस उसे एक डिलडो hi समझ रही थी मगर वो तो एक तरह का वाइब्रेटर tha........aab वो आने वाले उस तकलीफ को सोच सोचकर उसका गाला अब सूखने लगा tha......aabhi भी वो बेबसी भरी नज़रियों से करीम के चेहरे की तरफ देख रही थी.....

वहीँ उसका हस्बैंड उसे अजीब सी नज़रियों से घूर रहा tha.....agar इस वक़्त उसका हस्बैंड वह नहीं होता तो वो फ़ौरन अपने छूट में रखा डिलडो निकल फेंकती .......मगर अब कुछ नहीं हो सकता था ........
उसका हस्बैंड दोबारा सिमरन की आवाज सुनकर फ़ौरन गाड़ी से उतारकर सिमरन के पास जाता हैं और उसके एक दम करीब जाकर खड़ा हो जाता हैं और सिमरन के चेहरे की तरफ बड़े गौर से देखने लगता hain.......Simran की आँखें कभी बंद हो रही थी तो कभी खुल रही thi.......laajat की वजह से......
सिमरन का हस्बैंड - Simran....aap ठीक तो हैं naa.......kya हुआ आपको अचानक .......
सिमरन एक नज़र करीम के चेहरे की तरफ देखती हैं करीम उसे देखकर अभी भी मंद मंद मुस्कुरा रहा tha.........wo विबरटोर की स्पीड थोड़ी सी और बढ़ा देता हैं वहीँ सिमरन की हालत एक बार फिर से धीरे धीरे ख़राब होने लगती hain.....ek बार फिर से वो पूरी तरह तड़प सी जाती hain......uske छूट में गुदगुदी सी हो रही थी ........ और साथ में गीलापन भी बढ़ता जा रहा tha.......ek अजीब से सेंसेशन बार बार उसके छूट में उठ रही थी ....... धीरे धीरे उसके अंदर हवस अब फिर से बढ़ने लगी thi......aankhon में लाल डोरे भी साफ़ नज़र आने लगे थे.....
सिमरन –वव्वव्वव्व ..... उउउउउ ..... ंन्न ... ह्ह्हह्ह्ह्ह ....... वो ....बस ऐसे hi........thoda चाकर आ गया था........ मैं ठीक हूँ........
सिमरन अपना एक हाथ अपने छूट पर ले जाना चाहती थी मगर वो अब ऐसा आपने हस्बैंड के सामने नहीं कर सकती थी........ धीरे धीरे उसकी बेचैनी अब बढ़ने लगी thi........Karim सिमरन के करीब आता हैं और आकर कहता है…
करीम- मैडम जीई… कुछ हेल्प करू…
सिमरन गुस्से से उसको देखती है..

सिमरन का हस्बैंड भी करीम को देखते हुई कहता है…
सिमरन का हस्बैंड- मई हु न हेल्प करने के लिए… मई हु इनका हस्बैंड.. मई आपने वाइफ का ख्याल अचे से रखना जनता हु..
करीम हस्ते हुई फिर एक बार वाइब्रेटर ों करता है.. वैसे hi सिमरन उछाल पड़ती है.. और डगमगाते हुई थोड़ी बाजु के और झुक जाती है... झुकने की वजह से उसके आम करीम के सामने आ जाते है.. करीम उसको hi देख रहा था.. सिमरन का हस्बैंड ये देख लेता है की ड्राइवर मेरे वाइफ के बूब्स देख रहा है.. वो गुस्से मई कहता है.. ड्राइवर आपने सीट पे जेक बैठ जाओ..
करीम फिर ड्राइविंग सीट पर बैठ जाता हैं....
सिमरन का हस्बैंड - चले सिमरन ........
सिमरन एक नज़र करीम को देखती है फिर आपने हस्बैंड को देख कर फिर वो उससे बिना कुछ कहे कार के अंदर आकर चुप चाप बैठ जाती hain.....wahin उसका हस्बैंड भी उसके बाजु में आकर बैठ जाता हैं....
सिमरन का हस्बैंड -
अगर आपकी तबियत ठीक नहीं है तो सिमरनजी आप अभी घर वापस चली जाओ.... मई अकेला चला जाऊंगा और काव्य जी को बोल दूंगा की आप की तबियत ठीक नहीं है इसलिए आप नहीं आ payee…waise वो आप की ाची फ्रेंड है वो समाज जायेंगे…
सिमरन फ़ौरन आपने हस्बैंड का हाथ थम लेती हैं और ना में अपनी गार्डन धीरे से हिला देती हैं .....
सिमरन का हस्बैंड- नहीं .. नहीं.. आप घर पर hi रुकर आराम करो… लगता है आप बहोत वीकनेस फील कर रही हो.. आप रेस्ट कर लो…
इस पर सिमरन कुछ बोलना चाहती थी की तभी करीम रिमोट से वाइब्रेटर की स्पीड फुल कर देता है…. सिमरन एक बार फिर से तड़प उठाती है….
सिमरन- आआआआअह्हह्ह्ह्ह…..
और अपनी आँखे बंद कर लेते hai…Simran का हस्बैंड- देखिये… आप कितनी वीकनेस फील कर रही है… आप ठीक से बोल भी नहीं पा रही है..
सिमरन - aaaaaa......hhhhhh.....main ठीक हूँ जीईई .......बस थोड़ी वीकनेस की वजह से ....... ऐसा हो रहा है शयद…
सिमरन का हस्बैंड- लगता है आप बहोत परेशां है…. हम अभी डॉक्टर के पास चलते है…
डॉक्टर का नाम सुनते hi झट्ट से सिमरन चिल्ला पड़ती है…
सिमरन- nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii….
तभी करीम एक बार फिर वाइब्रेटर का रिमोट पहले से ज्यादा जोर से दबाता है और उसके स्पीड बढ़ाता है.. इस वजह से सिमरन आपने जगह पे उछाल पड़ती है..
सिमरन- uuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii….. mmmmmmaaaaaaaaaaaaaaa…… मर्डरर… gayiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii…..
सिमरन का हस्बैंड- क्या हुआ सिमरन जी…
अब सिमरन आपने हस्बैंड को क्या कहातीय… वो क्या ये कहती आपने हस्बैंड से की वो इस वक़्त अपने छूट में डिलडो लिए बैठी हैं ...... और सामने बैठा हुआ बड़ा उस डिलडो को चला रहा है रिमोट से… लेकिन थोड़े hi देर मई सिमरन ने आपने आप को सम्बल….
सिमरन- कुछ नाहीइ…. वो पौन को जो थोड़े देर पहले मोच आयी थी उस पेअर पे परिसर पद गया था.. उतने की वजह से.. उसकी वजह से दर्द कर रहा है…
सिमरन की ऐसी हालत देखकर करीम वहीँ मंद मंद मुस्कुरा रहा tha......use सिमरन की बेबसी देखकर बड़ा मज़ा आ रहा था ....... अब करीम बार बार उस रिमोट से कभी वाइब्रेटर की स्पीड फुल कर देता तो कभी उसे बहुत स्लो कर deta......Simran बार बार तड़प uthathi......aur सिमरन कभी अपने होंठों को कटती तो कभी अपने हाथों को कसकर सीट पर रखकर मसल देती......... अब उसे बर्दास्त नहीं हो रहा tha.......Simran की आँखें सुर्ख लाल हो चुकी thi......aab उसका साबरा धीरे धीरे टूटता सा जा रहा tha.......kabhi तो उसे ये ख्याल आता है की वो फ़ौरन आपने हस्बैंड से लिपट जाये और अपने अंदर की आग को बुझा lein......magar शायद सिमरन और उसके हस्बैंड के बीच मई रिलेशन फॉर्मल hi था.. और किसी तीसरे आदमी के सामने उसके हस्बैंड के साथ ये वो नहीं कर सकती थी… उनका बीच मई का सेक्स नार्मल सेक्स hi था.. करीम और सिमरन के बीच मई जैसे था वैसे नहीं था.. अभी भी मर्यादा की लक्समन रेखा कहीं न कहीं बची थी ....... सिमरन और उसके हस्बैंड के बीच मई..
उसे करीम की हरकतों पर अब बहोत गुस्सा आ रहा था ....... मगर वो कराती तो क्या कराती… वो एक द्क्प होकर करीम के आगे बेबस थी.. वो न hi करीम से कुछ कह सकती थी और न hi उसे मन कर सकती थी ...... उसकी छूट में गीलापन अब और भी बढ़ता जा रहा था ...... मगर ये तो सिर्फ शुरुवात thi.......pata नहीं करीम उसके साथ ये सब खेल और कितनी देर तक खेलने वाला था .......
सिमरन का हस्बैंड – सिमरनजीई… आप ठीक हो…
सिमरन है मई गार्डन हिलती है…
सिमरन का हस्बैंड- तो चले…
सिमरन आँखे बंद किये हुई hi हां मई गार्डन हिलती है…
सिमरन का हस्बैंड – ड्राइवर चलो…
जैसे hi सिमरन का हस्बैंड चलो बोलता है वैसे hi करीम कार स्टार्ट करता hai..aur रिमोट जेब मई से निकल के आगे रखता hai..dono पैरो के बीच मई आगे की और… जैसे जैसे गाड़ी की स्पीड बढ़ती है वैसे की करीम रिमोट से वाइब्रेटर की स्पीड बढ़ाता था.. और जैसे कार की स्पीड काम करता वैसे hi वाइब्रेटर की स्पीड काम करता.. कार को जैसे hi ब्रेक मरना पड़ता वैसे hi रिमोट से वाइब्रेटर स्टॉप करता … वाइब्रेटर की स्पीड काम ज्यादा करने की वजह से सिमरन की हालत बहोत ज्यादा ख़राब हो गयी थी…
लेकिन सिमरन कुछ नहीं कह पति और चुप चाप आपने सीट पर बैठी रहती hai..........Karim के हरकत की वजह से अभी वो लुम्बी लुम्बी सांसें ले रही thi.......jis से उसके बड़े बड़े बूब्स और भी क़यामत धा रहे the......uska हस्बैंड बड़े गुजर से सिमरन को देख रहा था.....
सिमरन का हस्बैंड - अरे यू ऑलराइट सिमरन जी......
सिमरन एक नज़र आपने हस्बैंड के चेहरे की तरफ देखती हैं .. फिर वो अपनी निगाहें उसके चेहरे से फ़ौरन हटा लेती हैं.......
सिमरन- हआ.. ी ऍम ऑलराइट…
कुछ देर बाद सिमरन के हस्बैंड को किसी का फ़ोन आटा है.. वो फ़ोन पे बाते करने मई बिजी है ये देख के सिमरन करीम को एक हाथ आगे बड़के उसके हाथ को टच करती है.. करीम पीछे देखता है.. सिमरन आँखों से इशारा करके कहती है.. प्ल्ज़ ..स्टॉप आईटी.. करीम धीरे से कहता है.. कार… सिमरन धीर से कहती है… नहीं बाबा.. वाइब्रेटर … करीम हसता है.. और नहीं बोलता है.. सिमरन का हस्बैंड फ़ोन रखने के बाद पूछता है.. क्या पूछ रही थी आप ड्राइवर से.. सिमरन कहती है.. पार्टी प्लेस आने मई कितना टाइम लगेगा ये पूछ रही थी.. वो कहता है .. अब जल्द hi आ जाएगा..
करीब 15 मिनट बाद उनको जहा पार्टी के लिए पहुँचाना था उस फार्महाउस पर वो पहुँच जाते है..
वह पहुंचते हुई hi सिमरन के हस्बैंड को एक फ्रेंड मिलता है .. वो सिमरन के हस्बैंड के साइड का कार का दूर ओपन करता है.. वो निचे उतरता है.. .. उसको वो बात करते हुई आगे निकलता है और कहता है.. चलो सिमरन..
सिमरन – हां..
आपने हस्बैंड को आगे गया हुई देखके सिमरन गुस्से से करीम की और देख के कहती है..

सिमरन - तुम ये सब मेरे साथ करने में क्या मज़ा आता हैं करीम ....... तुम एहि चाहते हो न की मैं बस ऐसे hi तड़पती रहूं...... शायद तुम मेरी इस बेबसी पर मज़ा आता hain......hain ना .......
करीम - नहीं मेरी जान .......
सिमरन- यहाँ मुझे जान मत कहो.. कोई सुन लेगा..
करीम- तुम मुझे गलत समझ रही ho......main तो बस तुम्हारे साथ खुलकर एन्जॉय करना चाहता hoon.....tumhein वो सरे खुशियां देना चाहता हूँ जो तुम तेरे नामर्द पति ने कभी नहीं दिए हैं.......
सिमरन - ऐसे tadpaakar........tum नहीं जानते इस वक़्त की मैंने कैसे आपने आपको संभाले राखी हूँ ......... मगर तुम्हारी एहि ज़िद्द हैं तो फिर मुझे तुम्हारी खुशियों के लिए आज सब मंज़ूर hain.......kar लीजिये जो तुम करना चाहते ho.........chahe तो सरे आम मेरी इज़्ज़त उछलिये या फिर इसे बचाकर rakhiye......faisla अब तुम्हारे हाथ में हैं........
करीम - तुम उसकी चिंता मुट्ठ करो सिमरन........ मेरी.. जान.. तुम्हारी इज़्ज़त मेरी इज़्ज़त hain......bus लाइफ को खुलकर जियो.........
करीम इतना कहकर फिर से हौले से मुस्कुरा पड़ता हैं वहीँ सिमरन न चाहते हुए भी धीरे से मुस्कुरा पड़ती हैं....
सिमरन – करीम तुम सच में बहुत गंदे ho.....aab यहीं रहना है या फिर अन्दर भी चलना हैं......
करीम- सिमरन तू आज बहोत कड़क माल लग रही है इस सदी मई… मैं तो कर रहा है.. यहाँ hi तुजे चूड दू..
सिमरन अपनी अदा चहरे पर लेट हुई कहती है…

सिमरन- पागल हो गए हो क्या.. यहाँ कोई आ जायेगा .. हम ज्यादा देर तक यहाँ ऐसे बैत नहीं सकते …
करीम- काम से काम एक किश तो दे दो.. मेरे जान…
सिमरन- सिर्फ.. किश.. और कुछ नहीं.. पहले दूर की कांच उप्पर कर लो…
करीम वैसे hi करता है. और सिमरन को किश करता है..

किश करते हुई करीम वाइब्रेटर की स्पीड बहुत स्लो कर देता हैं.. इस वजह से सिमरन अपनी आँखें बंद कर लेते है … किश टूटने के बाअद सिमरन लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगती hain.......aab उसे कुछ सुकून सा महसूस हो रहा tha.......kuch डियर बाद सिमरन और करीम कार से नीचे उतरने लगते है.. ......जैसे hi सिमरन कार से बहार उतरती हैं करीम एक बार फिर से वाइब्रेटर की स्पीड बढ़ा देता hain.....ek बार फिर से सिमरन गिरते गिरते बचती हैं.......
अब उसके छूट में धीरे धीरे आग शोला का रूप लेती जा रही थी ......... करीम गलत जगह पर वाइब्रेटर की स्पीड बढ़ा देता था ...... जिस से सिमरन चाह कर भी कुछ न कर pati.........jaise तैसे वो धीरे धीरे चलते हुए फार्महाउस के अंदर जाती हैं........ वाइब्रेटर की स्पीड ज़्यादा होने की वजह से उसकी कमर धीरे धीरे हिल रही thi.........wo नहीं चाहती थी की इस बात का किसी को कोई आभास हो...... करीम उसके पीछे पीछे चल रहा था...... वहीँ सिमरन बार बार अपने होंठों को अपने डेंटन से काट भी रही thi.....baar बार उसकी आँखें बंद सी होती जा रही thi........choot में सेंसेशन अब फिर से बढ़ता hi जा रहा था .........
जैसे hi पार्टी हाल मई ये दोनों एंट्री करते है वैसे hi सिमरन को सामने अपनी फ्रेंड काव्य दिख जाती है..

काव्य भी सिमरन को देख के सिमरन के तरफ चलने लगाती है… काव्य सिमरन से थोड़ी दूरी पर थी.. उसको देख के करीम देखता hi रहता है… और उसके मू से काव्य के लिए शब्द निकल पड़ते है…
करीम- क्या.. माल है…
सिमरन ये सुन के पीछे आपने चेहरा घुमा के गुस्से से बोलती है..

सिमरन- तुम अपनी कमीनापन नहीं छोड़ोगे… नयी औरत देखि की उसके पीछे पड़ते हो..
जैसे hi काव्य उन दोनों के पास आती है करीम काव्य को सर से लेकर पवन तक घूरने लगता हैं.......

वहीँ जब काव्य और सिमरन की नज़र एक दूसरे पर पड़ती हैं अगले hi पल वो दोनों एक दूसरे के सीने से लिपट जाती hain.......wahin अभी भी करीम की नज़र काव्य पर hi थी.. अब सिमरन की पीठ करीम के सामने थी और काव्य का फेस करीम के सामने tha..itane देर से करीम काव्य को जो घर के देख रहा था वो काव्य जान जाती है.. वो सिमरन को गले लगते हुई पूछते है..
काव्य- कोण है ये..
सिमरन- मेरा ड्राइवर..
काव्य- बहोत घर रहा है..
सिमरन- ऐसा hi है वो..
अब वो एक दूसरे से अलग होती है.. करीम काव्य को hi घर रहा था.. काव्य करीम को तिरछी नज़ए से देखती है…

काव्य- बड़ी देर कर दी सिमरन आने mein......main कब से राह देख रही थी .......
सिमरन - वो थोड़ा निकलने मई लेत हो गया था.. इस सब को छोड़ो और ये बताओ की भाई साब कैसे है..
तभी वह काव्य का पति आ जाता है..
काव्य का हस्बैंड- मैं ठीक हूँ बहाना.. .........बस आप लोगों के आने का hi मुझे इंतज़ार था.........
अभी भी करीम वहीँ काव्य को तिरछी नज़रो से देखता है.. जवाब मई काव्य भी सिमरन की नज़र चुराके बीच बीच मई करीम को देख रही थी..

उसके आँखों का पीछा कर रही thi..ek बार फिर से करीम की नज़रें काव्य के जिस्म को स्कैन कर रही थी....... बार बार उसकी नज़रें काव्य के क्लेवराज पर जाकर रुक jati......kavya भी करीम की नज़रियों को ाचे से पहचान थी है और आपने आम पर का सदी का पालू ठीक कर लेती है..
सिमरन काव्य के पति के पास जाती हैं और वहीँ उसके पास जाकर कड़ी हो जाती hain......idher करीम धीरे से वाइब्रेटर की स्पीड फुल कर देता हैं अगले hi पल सिमरन एक बार फिर से उछाल सी पड़ती hain..........aab उसका साबरा टूटा जा रहा tha......wo अपने दोनों हाथों से वह कड़ी रहते hi निचे देख कर रेलिंग के एक बार को कसकर पड़की हुई थी और साथ hi साथ अपने होंठों को काट भी रही thi........baar बार उसकी आँखें लाजत से बंद होती जा रही थी.......
अब उसके छूट में रखा वाइब्रेटर उसकी मुश्किलें बढ़ता जा रहा tha......wo इन सब के सामने चाह कर भी अपने छूट पर हाथ नहीं रख सकती thi.......jaise तैसे वो अपने आपको संभालती हैं और एक नज़र इंकार में करीम के चहरे की तरफ बड़े गौर से देखने लगती हैं ........ वो उसे इशारों में ये सब के लिए मन कर रही thi...magar करीम को इन सब में मज़ा आ रहा tha.....wo भला ऐसे मौके क्यों जाने देता .... लेकिन जब सिमरन को ये इशारा करती है तब काव्य सिमरन को देखती है.. और थोड़े देर मई वो करीम को गर्दन घुमाके देखते है..

करीम भी सिमरन को देख रहा था.. काव्य को कुछ समाज मई नहीं आ रहा था.. वैसे काव्य एक चालू लेडी थी..
काव्य का पति - आप ठीक तो हो न बहाना ......जब से आप यहाँ आयी हो कुछ परशान सी दिखाई दे रही ho........aap की तबियत तो ठीक हैं ना......
सिमरन - jee........bhaisahab.....main ठीक hoon......wo थोड़ी तबियत आज कुछ ठीक नहीं लग रही......
काव्य का पति एक नज़र काव्य के चेहरे की ओरे घूर कर देखता हैं
काव्य का पति – काव्य जब तुम्हें मालूम था की सिमरन जी की तबियत ठीक नहीं थी तो फिर तुमने इन यहाँ क्यों बुलाया .... घर पर रहती तो थोड़ी आराम कर लेती न ये ..... तुमने क्यों बेवजह इनको परेशां किया.......
सिमरन - नहीं भाईसाहब ........इसमें काव्य की कोई गलती नहीं......
काव्य- आप परेशां मत हो.. आप के सिस्टर को कुछ नहीं हुआ है..
ताभ्ही वह सिमरन का पति आता है.. काव्य का पति उसके साथ जाता है.. तभी काव्य सिमरन के पास जाती है और उसके कानो मई धीरे से बोलती है..
काव्य- सिमरन वैसे तुजे कुछ नहीं होना चाहिए..
सिमरन आचर्य से काव्य को देखती है..
सिमरन – क्यों…
काव्य- तेरे पास इतना हत्ता कट्टा ड्राइवर जो है तो तुजे क्या होगा..
सिमरन- क्या मतलब
काव्य हसती है..
काव्य- कुछ नही..
ऐसा कहती हुई काव्य दूसरी तरफ चेहरा करके कड़ी हो जाती है… तभी करीम को सामने से माहि आते हुई दिख जाती है..

मगर माहि ने अब तक करीम को देखा नहीं था.. माहि तो काव्य को देख के उस से मिलाने आ रही थी.. जैसे hi माहि काव्य के पास आती है तब उसकी नज़र करीम पे पड़ती है.. .. काव्य उसको वह देख कर आचार्यचकित हो जाती hai..usko समाज मई नहीं आता की एक बहार का आदमी इस पार्टी मई कैसे आ गया …
करीम को देखते hi माहि का चेहरा उतर जाता है.. और वो धीरे से बोल पड़ती है..
माहि- ये कमीना यहाँ क्या कर रहा है..
कव्य- कोण..
माहि- ये कला सांड..
काव्य पीछे घूम के देखती है..
काव्य- इसको तुम जानती हो… माहि..
माहि- है.. इस कमीने को मई अचे तरह से जानती हु..
काव्य- ारे माहि .. तुम इसको देख कर ये गंदे वर्ड क्यों उसे कर रही हो..
माहि- ये आदमी hi इतना गन्दा और घटिया है की इस्सके लिए मेरे पास कोई अचे वर्ड है hi नहीं..
काव्य- क्या..
माहि- है .. काव्य.. बहोत hi कमीना इंसान hai..tum इससे दूर रहो..
काव्य- लग तो रहा है… लेकिन तुम इस को कैसे जानती हो…
माहि- मई अब ये सब यहाँ बता नहीं सकती ..लेकिन इतना बता देती हु की यहाँ इस घटिया आदमी से बच के रहो.. और हो सके तो इस्को यहाँ से जल्द से जल्द निकल दो..
काव्य- क्यों… िस्सने ऐसा क्या किया है
माहि- वो बाद मई बताती हु..
तभी माहि को कोई लेडी आवाज देते है इस वजह से माहि वह से चली जाती है..
माहि और काव्य की बाते करीम वह खड़ा रहकर सुनाता है.. उसको लग रहा था की माहि उसके प्लान की वात लगा degii..aab माहि का कुछ न कुछ करना पड़ेगा.. नहीं तो मुझे यहाँ से ये पागल औरत निकल देगी.. इसके छूट के चक्कर मई जो बाकि की छूट मिल रही है वो भी हाट से जाएगी.. इस औरत से माफ़ी मागणी hi पड़ेगी…
फिर करीम ये सोच कर माहि के पीछे जाता है.. माहि उस लेडी से बात कर रही थी.. करीम सोचते है की इस माहि रांड का क्या करे.. ये सोचते हुई वो एक कार्नर मई चला जाता hai..tabhi करीम को मिलाने के लिए सिमरन आती है.. .. वो उसको हाट जोड़ के विनती करती है
सिमरन - यहाँ किसी के साथ फ़्लर्ट मात करना… मेरे इज़्ज़त का सवाल है… उसके हाथ को करीम पकड़ता है और बोलता है..
करीम - डर मत..
ये माहि देख लेती hai...Ye देख कर माहि को कुछ समाज नहीं आ रहा था की ये माजरा क्या… वो जानती थी की सिमरन को करीम ने छोड़ा है.. लेकिन वो समाज नहीं पा रही थी की द्क्प सिमरन कौर इस को हाट क्यों जोड़ रही है.. सिमरन इस घटिया आदमी के सामने इतना बेबस क्यों हो गयी है.. मुझे तो लगा था की उस दिन इनका सेक्स ऐसे hi कुछ हुआ होगा.. कभी कभी हमसे अनजाने मई गलती हो जाती है वैसे सिमरन मैडम से गलती हुई होगी.. लेकिन अब मुझे ऐसा नहीं लग रहा hai..aise माहि सोच रही थी.. उसे लग रहा था की यहाँ कुछ गड़बड़ है.. अब सिमरन करीम से दूर चली गयी थी..
माहि करीम के पास गुस्से मई चली जाती hai..usko गुस्से से बोलती है..

माहि- तुम यहाँ कैसे…
करीम- मई यहाँ स्पेशल गेस्ट हु…
माहि- तू द्क्प सिमरन मैडम को क्यों धमका रहा था..
करीम- मई कब धमका रहा था..
Mahi-wo तुजे हाट जोड़ के क्या कह रही थी…
Karim-use तेरे को क्या करना है..
माहि- तू जनता है मई कोण हु.. माहि हु.. काँटी शेठ की बहन..
करीम- हां.. पता है…
माहि- तू भूल गया है शयद.. मेरे वजह से कल कैसे मार खाया था तूने..
करीम कुछ नहीं बोलता है..
माहि- मई देख रही हु तू मुझे हमेशा गुर था है.. इतना मार खाने के बाद भी तुजे अक्कल नहीं आयी.. कल भाई के हाट से इस वजह से hi मार खाया.. और आज भी.. अभी भी मुझे घर रहा है..
करीम गुस्से मई माहि को हाट जोड़ता है..
करीम- मैडम जी .. मुझे बक्श दो.. मई आप को आज से नहीं गुरुंगा… आप भी मेरा रास्ता मत काटिये..
माहि- ज्यादा शहाणा मत बन…
करीम- अब मैंने क्या किया .. माहि जी..
ऐसे कहते हुई माहि के बूब्स को.. उसके क्लीवेज को देखता है.. माहि का एक बूब्स और नवल ओपन थे उसको hi करीम देख रहा था.. माहि वो जैसे जान तेति वैसे hi पालू से उसको धक् लेती है.. और गुस्से मई कहती है..
माहि- अपनी गन्दी जबान पे मेरा प्यारा नाम मत ले..
करीम- आप के जैसे hi आपका नाम प्यारा है इसलिए जुबान पाई आ गया..
माहि- ज्यादा होशियारी मत कर मेरे saath..nahi तो मई तुजे भाईसाहब के पास ले जेक ऐसा मार खिलाऊंगी की किसी औरत की तरफ देखने के लिए लायक नहीं रहेगा… समाज न… क्या नाम है तेरा..
करीम- करीम…
माहि- टेलर है न..
करीम- हां…
टैलोरकी hi कर ज्यादा शहाणा मत बन…
करीम कुछ नहीं बोलता है…
माहि- ज्यादा गुर मत मुझे…
करीम गुस्से मई बोलता है..
करीम- मैडम जी.. बोलै न.. अब से नहीं गुरुंगा…
माहि- मतलब अब तक घूरता था..
करीम- हां..
माहि- क्यों..
करीम- आप दिखने मई अचे है इस लिए..
माहि- तुजे दिखने मई जो भी औरत अच्छी लगेगी उस हर औरत को घूरेगा..
करीम- हां..
माहि- कमीना .. कही का..
करीम- मैडम अब से नहीं गुरुंगा..
माहि- क्यों..
करीम- आप ने जो मन किया है..
माहि आपने बालो मई हाट घूमते हुई.. आपने सेक्सी अड्डा के साथ कहती है..

माहि- मैंने मन किया है.. अच्छी बात hai..aab से मई जैसे बोलूंगी वैसे hi करेगा न..
माहि अब थोड़ा क्रॉस हो के कड़ी थी.. इस वजह उसका एक आम थोड़ा आगे की तरफ आया हुआ है ऐसे लगता था.. ऐसे दिखता था..

करीम- है मैडमजी.. खूबसूरत औरत की हार बात माननी hi पड़ेगी न..
माहि- मेरे साथ फ्लेर्टिंग मत कर.. वह सिमरन मैडम के साथ.. मेरे साथ नहीं..
करीम- जी मैडम जी..
करीम माहि को जी मैडम जी ऐसे कहते हुई उसके उस आम को देख रहा था..
माहि आपने चहरे पर सेक्सी अदा लेट हुई कहती है..

माहि- गुरुंगा नहीं.. ऐसे कहता है.. और हमेशा घूरता है..
करीम- सॉरी मैडम अब से नहीं..
माहि- क्या .. अब से नहीं..
करीम- घूरना..
माहि- तो अब क्या कर रहा है..
करीम- वो क्या करे मैडम.. आदत से मजबूर हु.. आप जैसे कोई कड़क माल सामने आ जाता है तो देखने का मैं करता है..
माहि- माल.. मुझे क्या समाज के रखा है..
करीम- सॉरी... खूबसूरत औरत..
माहि- मुजसे बाते करते वक़्त वर्ड गंदे उसे मत करना..
करीम- हां.. मैडम जी.. आप जैसे ब्यूटीफुल एंड सेक्सी औरत अगर सामने आ जाती है तो मैं आपने बस मई नहीं रहता..
माहि आँखे बड़ी करके करीम को गुस्सा दिखती है..
माहि- फिर से गंदे वर्ड
करीम - सॉरी... माहि जी.
माहि- only..madam..jiii.. no माहि.. जी.
करीम- ok मैडम जी..
अब माहि वह से चली जाने लगाती है..
करीम- मैडमजी..
माहि पीछे घूम के देखते है..

माहि- अब… क्या है…
करीम- वो मेरे बारे मई किसी को उलटा सीधा मत बोलिये न..
माहि- क्यों
करीम- मई आप के रस्ते नहीं आऊंगा.. आप भी प्ल्ज़ मेरे रस्ते मई मत आइये न..
माहि स्माइल देते है..

और चेहरा घुमा के वह से चली जाती hai..Karim उसके पीछे चला जाता है..
करीम- मदमजीए.. प्ल्ज़्ज़… कुछ कहियेना
माहि फिर घूम जाती है..
माहि- मेरा पीछा क्यों कर रहे हो.. अब तो कह रहे थे न मेरे पीछे नहीं आओगे..
करीम - नहीं आऊंगा..
माहि- फिर अब क्या कर रहे हो..
करीम- एक बार मेरे हेल्प कीजिये ना..
माहि- कैसे हेल्प
करीम- वो मेरे बारे मई कुछ भी किसी को मत कहिये न..
माहि- तुम अपनी बात मुजसे मानवके hi रहोगे न...
करीम- हां..
माहि – देखुंगीय.. मेरा पीछा मत कर..
करीम- नहीं... नही.. ऐसा नही.. प्ल्ज़.. प्रॉमिस कीजिये..
माहि- प्रॉमिस और तुमसे..
करीम- हां...
माहि- क्यों करू..
करीम- एक आपने मुलाज़िम समाज के..
माहि- मई क्यों समाजु..
करीम- आपको एक अच्छा सा ब्लाउज सिलवा दूंगा..
माहि- मुझे नहीं चाहिए..
करीम- क्यों..
माहि- मई जानती हु तुम जैसे लेडीज टेलर को अच्छे तरीके से..
करीम- कैसे
ऐसे कहके करीम थोड़ा सा माहि के पास आता hai..aabhi भी वो दोनों एक कार्नर मई खड़े थे... वैसे hi करीम माहि की तरफ देख कर आँख मार देता है.. … माहि गुस्से मई बोलती है…

माहि- तुम आपने आप को समजते क्या हो…. सिमरन मैडम के साथ फ़्लर्ट कर लिया इसका मतलब तुम कुछ भी करोगे..
करीम उसके आँखों मई hi देख रहा था…
माहि- तेरे ये डेरिंग की तूने मुझे आँख मरी …
करीम उसके आँखों मई hi देखता है..

माहि- ऐसे क्या आँखे फाड़ के देख रहा है… हरामखोर… ज्यादा देखा तो कच्चा चबा जाउंगी…
करीम- तो चभा जा न…
माहि- मुजसे उलझ रहा है.. हरामी..
ऐसे कहकर माहि उसके कालर को पकड़ के एक कार्नर मई ले जाती है… और पीछे ले जाती hai..uske फेस को एक हाथ मई पकड़ थी है और बोलती है…
माहि- मेरे से मत उलझ.. समाज न… और रेज आँखे फाड़ कर मेरे को देख भी मत..
करीम- क्या करेगी…
करीम ने ऐसे बोलते hi…Mahi आपने घुटने से उसके पथ मई जोरदार मारती है.. करीम कराह रहा था…
माहि- समाज मई आ गया न… मई क्या कर सकती हु… सुधर ja..bachooo…. मई बहोत तीखी चीज़ हु…
ऐसे कहते हुई वो वह से चली जाती है… करीम उसको hi देख रहा था..

उसके गांड और कमर को देख रहा था..
करीम… तू चीज़ तो तीखी है… तुजे छोड़ने मई तो बहोत मज़्ज़ा आएगा… तूने बहुत बड़ी गलती की है मुजसे ुलाज़ के माहि… तुजे तो ऐसे चौडूँगा की तू साड़ी जिंदगी मेरे याद करेगी…. माहि…
थोड़ी देर तक ऐसे hi चहल पहल वह चल रही थी.. करीम भी वह की करीमली देख रहा था.. सिमरन कुछ मेहमान से बात कर रही थी साथ मई वो करीम को देख रही थी… करीम का ध्यान अब सिमरन पे उतना ज्यादा नहीं था.. इस वजह से सिमरन को वाइब्रेटर से रहत मिली हुई थी.. सिमरन को लग रहा था की करीम मई कुछ फरक पड़ा है … सिमरन सोच रही थी की यहाँ इतने सारे लोग है इस वजह से शयद करीम डरकर वाइब्रेटर ों नहीं कर रहा है.. लेकिन असली वजह करीम hi जनता था..
इधर करीम आपने आप पर अब बहोत ज्यादा गुस्सा था.. वो आपने आप को कह रहा था साला.. मई तो इस माहि को माफी मांगने गया था .. थकी वो मेरे काम के बीच मई न आ जाये.. लेकिन मैंने ये क्या कर दिया.. उसने थोड़ा अच्छा क्या बोलै .. थोड़ी लाइन क्या दी मई उस से इस तरह से पेश आया और उसको आँख मर दी.. साला ये रंडी अब मुझे नहीं छोड़ेगी.. अगर ये बात उसने अपने भाई को बता दी तो साला वो कमीना थो मुझे जान से मार देगा.. नहीं तो काम से काम आपने घर से मार्के निकल देगा.. साला इस माहि के चक्कर मई जो अब तक छूट मिल रही थी वो भी हाट से चली जाएँगी… अब क्या करू मई.. साली इसने अब यहाँ किसी और को बता दिया तो इस पार्टी से भी जाना पड़ेगा.. यहाँ जो हहरयलि का मज़ा मिल रहा है वो भी अब नहीं मिल पायेगा.. अगर मई उसके पास अब माफ़ी मांगने गया तो वो बहोत भाव खायेगी.. अब क्या करू .. वो तो अब मुझे आपने पास आने भी नहीं देंगे… मैंने ये क्या किया.. मेरा दिमाग नहीं चल रहा है.. अब दारू पिनेही पड़ेगी.. वर्ण मेरा दिमाग नहीं चलेगा.. मई कुछ सोच नहीं पाउँगा..
ये सोच कर करीम पार्टी हॉल से बहार जाता है.. कार जहा पार्क की हुई थी वह.. वो सोचता है साला किसी ड्राइवर के पास दारू मिल जाये पिने को.. यहाँ पार्टी मई अब तक दारू सर्वे करना स्टार्ट नहीं किया है.. बहार कुछ ड्राइवर आपस मई बात कर रहे थे… उनसे जान पाचन करीम कर लेता है.. वो 3-4 लोग the..aapas मई आपने मालिक और मालकिन के बारे मई बैठे कर रहे थे.. उस मई एक बोलता है .. साला यहाँ दारू अगर मिल जय तो मज़ा आ जायेगा.. उसमे से दूसरा बोलता है मई जुगाड़ करके आता हु.. थोड़े देर बाद वो कहा से तो दारू के 2 बड़ी बोतल लेके आता है.. वो माहि का ड्राइवर था.. रघु.. करीम को जब पता चलता है की रघु माहि का ड्राइवर है तो उसके दिमाग मई एक प्लान आ जाता है.. वो रघु से ज्यादा बातचीत करने लगता है.. ड्राइवर आपने मालकिन के बारे मई बात कर रहे थे तब करीम बोल पड़ता है..
करीम- साला.. ये माहि मैडम तो बहोत गुस्सैल है..
दूसरा ड्राइवर बोलता है… क्या हुआ भाई .. उसने तुजे कुछ कहा क्या.. करीम कहता है ..है भाई.. तभी वो ड्राइवर कहता है.. है भाई .. वो जरा ज्यादा hi गुस्सा करती hai..tabhi रघु बोल पड़ता है..
रघु- ारे हमारी मैडम वैसे नहीं है जैसे तुम कह रहे हो.. आज कल वो ज्यादा hi गुस्सा कर रही है लेकिन पहले वैसे नहीं थी.. वो बहोत अचे स्वाभाव की लेडी है..
करीम- लगता है तुजे कुछ ज्यादा hi पता है आपने मैडम के बारे मई..
रघु- है ..करीम भाई.. पिछले 5-6 सालो से उनके साथ काम कर रहा हु..
करीम- तो कुछ बता न आपने मैडम के बारे मई..
और दूसरे ड्राइवर को बोलता है..
करीम- रघु भाई का एक गिलास और भर दो..
दूसरा ड्राइवर बोलता है .. हां.. क्यों नहीं…
रघु- वैसे हमारी माहि मैडम जितने दिखने मई अच्छी है उतनी hi स्वाभाव से अच्छी है… लेकिन अब शादी को7-8 साल हो चुके है.. अब तक बच्चा नहीं है.. शयद इस वजह से थोड़ी गुस्सैल हो गयी है.. और साहिब भी बहोत ज्यादा बिजी रहते है… वैसे माहि मैडम को पैसे की कोई कमी नहीं hai…muje जो लगा मैंने बोल दिया ..उस मई सच भी हो सकता है और झूट भी...
फिर करीम थोड़ी इधर उधर की बाते करता है… और थोड़े देर बाद सब लोगो के साथ वह से चला जाता है.. अन्दर पार्टी हाल मई आजाता है.. उसको सामने सिमरन दिख जाती है.. सिमरन दिखते hi उसको सिमरन के छूट मई जो वाइब्रेटर की याद आ जाती है… फिर करीम वाइब्रेटर ों करते हुई उसकी स्पीड बढ़ाता है.. वैसे hi सिमरन आपने जगह पाई उछाल पड़ती है.. और आपने आप को कहती है.. आ गया कमीना.. अब तक कहा था पता नाह.. कितना सुकून था अब tak..ye अब कहा से आ गया .. फिर वो इधर उधर देखते hai..piche घूम के जैसे उसको करीम दिखता है वो करीम के पास आ जाती है..
सिमरन- कहा गए थे..
करीम- यही.. बहार था..
सिमरन- इतने देर तक कितना सुकून था मुझे.. तुम आते hi मुझे दर लगता है.. कब क्या करोगे कुछ कहा नहीं जा सकता है.. तुम देखते hi मई डर जाती हु..
करीम- दर मत मेरी जान..
ऐसे कहते हुई जोरसे रिमोट का बटन दबाता हुई स्पीड बढ़ाता है… सिमरन आपने जगह पे उछाल पड़ती है..
सिमरन- ोोोोोुछहहहहहहह….. इससे मुझे छुटकारा कब मिलेगा…
करीम- मिलेगा ..मिलेगा… वह.. जा ..तेरा पति हमारे तरफ hi देख रहा है..
फिर सिमरन आपने पति के तरफ जाती है .. इधर माहि बहोत ज्यादा गुस्से मई थी.. वो सोचती है इस हरामी से थोड़ी प्यार से बात कर क्या ली इस ने मुझे डायरेक्ट आँख hi मार ली.. साला खुद को क्या समजता है… मई भी कैसे लेडी हु.. इस हरामी के बारे सब कुछ जानते हुई भी उसे बाटे करने लगी .. अब इस को मई आपने पास आने नहीं दूंगी… इस से बाते नहीं करुँगी… लेकिन इस पर वाच रखना पड़ेगा.. ये आदमी क्या करेगा इसका कुछ भरोसा नहीं hai..is लिए सिमरन और करीम जब बाते कर रहे थे तब माहि दूर से देख लेती है.. जैसे hi करीम देखता है वैसे hi माहि आपने मू दूसरे और घुमा लेते है..
करीम इधर उधर घूम रहा था… वो जनता था की माहि उस पर नज़र रख रही है… इस वजह से करीम सोचता है थोड़ा सिमरन और काव्य के और करीब जाते है.. और इस माहि को जरा दिखते है.. जरा इसको जलाते hai..Sali दूर से मुज पर नज़र रख रही है.. उन दोनों के और करीब जाने के कोशिश करीम करता है… एक बार वो सिमरन के पास जाता है.. उसके बाजु मई खड़ा रहता है… करीम के पीछे माहि कड़ी थी… दूरी बनाये रखते हुई… करीम वो जनता था इसलिए वो सिमरन के कमर पाई हाथ रखता है… सिमरन उसे कुछ नहीं बोलती… माहि वो देख रही थी.. माहि पहले से जानती थी की करीम और सिमरन के रिश्ते के बारे मई.. पर उसको ये सब देख के आचर्य होता है की करीम सरे आम सिमरन के कमर पर हाथ रखता है.. वो सोचती है ..ये आदमी बहोत घटिया hai..issko जरा भी शर्म नहीं है.. ये सरे आम एक शादीशुदा औरत के कमर मई हाथ दाल रहा है.. वो भी सिमरन मैडम का हस्बैंड इस पार्टी मई रहते हुई.. और सिमरन मैडम भी कुछ नहीं बोल रही है.. इस टेलर को थो पहले से hi कोई इज़्ज़त की पर्व नहीं है लेकिन मैडम को तो होनी चाहिए… माहि अभी भी करीम और सिमरन को देख रही थी.. करीम घूम के माहि की तरफ देखता है.. और चहरे पर हसी लेट हुई सिमरन के कमर पर आपने हाथ वैसे hi रखता है..
बाद मई थोड़ी देर बाद वो काव्य को मिलाने के उसके पास पहुंचता है..

काव्य बहोत मस्त लग रही थी.. और उस से बात करने लगता है.. … काव्य को बात करने के पीछे उसका कोई और hi मकसद था.. उसके दिमाग मई एक प्लान tha..wo काव्य से बाते कर रहा था और काव्य को हँसा रहा था.. काव्य के हाथ पाई हाथ एक बार वो मरता hai..Mahi वो देख रही थी.. करीम वो जनता था.. इस बार वो माहि को देखता भी नहीं है.. वो ऐसे दिखा रहा था की माहि के तरफ अब वो ध्यान नहीं देगा.. वो काव्य से है के बाते कर रहा था.. माहि को समाज मई नहीं आ रहा था की मैंने काव्य को इतना कुछ बताया इस आदमी के बारे मई फिर भी काव्य उसे बात कर रही है.. ये कितने देर से काव्य से बाते कर रहा है.. इतने देर से क्या बाते कर रहा होगा ये आदमी.. और काव्य भी इसके बातो मई इतना क्यों इंटरेस्ट ले रही है.. कितने देर से बाते कर रहा है और मेरे तरफ देख भी नहीं रहा है.. जाने दो मुझे क्या करना है .. वो मुझे देखेगा या nahi..aab काव्य है नहीं रही थी पर करीम की बात प्यार से सुन रही थी..

काव्य के सामने hi खड़ा रहके वो बार बार काव्य के आम को देख रहा होता है.. स्टार्ट मई तो काव्य उसके ऐसे देखने पे ध्यान नहीं देती.. पर माहि का पूरा ध्यान था.. करीम कहा देख रहा है… माहि सोच रही थी की काव्य को कैसे पता नहीं चल रहा है की ये आदमी कहा देख रहा है.. मई काव्य को जेक बता दू क्या.. नहीं.. नहीं.. अब नहीं बाद मई बता देते हु.. नहीं तो ये घटिया आदमी कुछ दूसरा hi samajega..Karim जब ज्यादा hi काव्य के आम को देखने लगता है तभी काव्य को समाज मई आता है की करीम कहा देख रहा hai..aab काव्य शर्माकर दूसरी तरफ चली जाती है…

लेकिन करीम को कुछ नहीं बोलती है…
अब काव्य के पास माहि चली जाती है..
माहि- क्या काव्य.. मैंने बताया था न तुम..
काव्य- क्या..
माहि- उस घटिया आदमी से ज्यादा बाते न करने का..
काव्य- वो कोई ऐसे वैसे बाते नहीं कर रहा था.. वो तो सिर्फ जोके सुना रहा था..
माहि- इसलिए तू है रही थी..
काव्य- हां..
माहि- मई तो सोच रही थी की तू उसे क्या बात कर रही है..
काव्य- डर मत… मई ऐसा वैसा कुछ नहीं करूंगी.. उसके साथ..
माहि- तूने देखा वो तेरे बूब्स को कैसे गुर रहा था ..
काव्य- हां.. देखा.. तू उसे जो घटिया बोलती है.. वो बिलकुल सही है..
माहि को अब क्यूरोसिटी थी की करीम ने काव्य को मेरे बारे कुछ बताया तो नहीं.. ऐसा वैसा..
माहि- उसने मेरे बारे मई कुछ कहा..
काव्य- नही.. क्यों कुछ कहने वाला था क्या…
माहि- नही.. मुझे कैसे पता होगा..
काव्य- वैसे वो बहुत चालू बाँदा है.. तू
भी उसे बच के रहना..
माहि- क्यों… मई क्यों बच के राहु उसे..
काव्य- तू जिस तरह से मुजसे पूछ रही है उस से मुझे लग रहा है …
माहि- nahii..nahii..iss मई ऐसा क्यों लगेगा …
काव्य हसती है..
माहि- काव्य .. तू कुछ छुपा रही है.. क्या कहा उस कमीने ने मेरे बारे मई..
काव्य- कुछ स्पेशल नहीं.. ऐसा hi नार्मल है…
माहि- नार्मल है.. तो तू बता क्यों नहीं रही है…
काव्य- वो कह रहा था.. माहि मैडम बहोत अच्छी है.. लेकिन उनको मेरे बारे कुछ गलत फैमि हुई है…
माहि- और क्या कहा..
काव्य- यही की मई ऐसा नहीं हु… मई एक सीधा साधा आदमी हु…
माहि – और क्या कहा..
माहि का फेस देखने लायक हो गया था..

माहि को और क्यूरोसिटी हो रही थी की करीम ने उस के बारे मई काव्य को क्या कहा..
काव्य- लगता है तुम बहोत जल्दी है जानने की… तेरे उस घटिया आदमी ने तेरे बारे मई क्या कहा है..
ऐसे कह के काव्य हस्ती है..
माहि- वो मेरा नहीं है.. मई तो सिर्फ जानना चाहती हु की उसने क्या कहा तुम मेरे बारे मई..
काव्य- मई जानती हु.. तुम क्या लगा रहा है.. तो सुन.. बहोत ध्यान लगा के सुन.. शयद आज तक तेरे इस तरह की टैरिफ किसी ने भी नहीं की होगी.. शयद तेरे हस्बैंड ने भी…
माहि- बता..
काव्य- माहि मैडम बहुत खूबसूरत है.. इतनी सुन्दर औरत मैंने आज तक नहीं देखि.. उपरवाले ने बहुत फुर्सत से बनाया है उन.. मैं तो माहि मैडम की सूरत देखते hi उस पर फ़िदा हो गया था. इतना सुन्दर चेहसरा हर किसी को नहीं मिलता. उसकी आँखों की चंचलता उनके मटकने का अंदाज उफ्फ्फ..
काव्य थोड़ी देर रुकते है और माहि की तरफ देखती है.. और फिर से कहने लगाती है..
kavya-Uske होंठ तो बस.. एक डैम गुलाब गुलाबी.. जब दोनों पंखुडिया खिलती है तो देख कर ऐसा लगता है की हर वक्त कामुक रास टपकता रहता है उनके होंटो से.. खुसनसीब है मनीष भैया जो की उन इतने रसीले होंठ चूसने को मिलते हैं..
माहि- और क्या कहा ..उसने..
काव्य- बहोत मज़ा आ रहा है अपनी टैरिफ सुनकर..

माहि- नहीं.. ऐसे बात नहीं है.. उसने जो कहा बस वो तुम्हारे मू से सुनना चाहती हु..
काव्य- इतने hi इच्छा हो रही आपने खूबसूरती की टैरिफ सुनाने की तो जा न आपने घटिया इंसान के पास तेरे अछि से टैरिफ करेगा.. और..
माहि- और क्या..
काव्य- और…. तेरे अच्छी से लेगा भी..
तब शरमाते हुई माहि कहते है..

माहि- मई कभी नहीं जाउंगी उस घटिया आदमी के paas..aur अपनी कभी लेने भी नहीं दूंगी..
काव्य- तो उस ने जो कहा है वो क्यों सुनना चाहती है..
Mahi-tu सिर्फ बता न.. और क्या कहा usne..mere बारे मई..
काव्य- तेरे उस घटिया इंसान ने कहा..
माहि मैडम के दोनों उरोज.. उनकी तो बात hi निराली है.. दोनों उरोज हिमालय पर्वत के जैसे तने हुए उसकी छाती से चिपके हुए है.. जब वो चलती है तो दोनों उरोज उसके चलने से कामुक अंदाज़ में ऊपर नीचे हिलते हुए हायई.. दिल बैठ जाता है मेरा उन्हें यु हिलते देख कर. दोनों उरोजों की मोटाई और गोलाई एक डैम गजब की है.. ऊपर वाले ने एक डैम अलग hi साँचा तैयार करा होगा उनके उरोजों को ढलने के लिए.. जो भी उन्हें देखता होगा उसके मुँह में पानी आ जाता होगा.. जैसे मेरे मुँह में आ जाता hai..aur बाकियो के भी आता होगा..
माहि- इतना गन्दा कहा..
काव्य- ये गन्दा है क्या..
माहि शरमाते हुई नीचे देखने लगाती है…

काव्य- हीईई… मई मर जवायआ.. मेरे माहि के अड्डा वो पे.. क्या शर्मा रही हो.. शयद मनीष भैय्या ने पहली बार देखा होगा तभी इतना शर्माए नहीं होगी.. और अब एक बूढ़े के टैरिफ ने.. वो भी मेरे सामने की.. तेरे सामने भी नहीं की ..इतना शर्मा रही है..
तब नखरा करते हुई माहि कहते है..

माहि- आगे बता न.. क्या कहा उसने..
काव्य- आगे कहने laga...Itni सब खुबिया होने के बाद भी माहि मैडम में जो सबसे ज्यादा आकर्षक चीज है उनका पिछवाड़ा… ( उसने कहा आप लोग इंग्लिश मई अस्स कहते हो न… मैंने हां मई गार्डन हिला दी.. फिर उसने कहा हम लोग उसको क्या कहते है पता है आपको काव्यजी.. मैंने कहा नहीं.. वो बोलै.. गांड.. मई शर्मा के आपने गार्डन निचे कर ली और उसको बोली कितने गंदे हो तुम.. उसने कहा गांड को गांड hi कहेंगे न.. मैंने कहा मत कहो..)
माहि- तो तुम इस वजह से शर्मा रही थी..
काव्य- हां..
माहि- मुझे लगा… वो तुम्हारे बूब्स देख रहा था न इस वजह से तुम शर्म आ रही थी…
काव्य- मैंने वो तो देखा hi नहीं .. मई तो उसके बातो मई डूब गयी थी..
माहि- आगे क्या कहा उसने..
काव्य- आगे कहने लगा.. माहि मैडम की gaand..sorry सॉरी अस्स.. ऐसे कहने लगा.. ..माहि मैडम के अस्स के बारे में क्या कहु कुछ समझ नहीं आ रहा.. कातिल गांड .. सॉरी .. सॉरी.. अस्स है माहि मैडम की.. मेरे दिल का कतल कर दिया माहि मैडम की अस्स ने.. इतनी मस्त अस्स मैंने आज तक नहीं देखि.. जब वो चलती है तो अस्स के दोनों गोल गोल तरबूज बहुत कामुक अंदाज में हिलते हैं.. उनका फुला हुआ पैन उसके दोनों भागो को और भी ज्यादा आकर्षित बनता है.. नपुंसक का लुंड भी खड़ा हो कर झटके मरते हुए सलामी देने लग जाये..
माहि- क्या.. ऐसा कहा तुम उसने.. इतना गन्दा…
काव्य- हां.. बहोत गन्दा कहा उसने.. मैंने भी गुस्से मई उसको कहा.. क्या गन्दा बोल रहे हो.. इस लिए वो थोड़ा देर शांनत हो गया..
फिर काव्य भी थोड़ी डियर शांत हो गयी.. वो जानना चाहती थी की माहि की अब क्या रिएक्शन आएगी.. माहि भी थोड़ी देर शांत रहती है.. जब वो देखती है की अब काव्य आगे कुछ नहीं कह रही है.. तब उसने कहा ..
माहि- आगे उसने कुछ कहा.. या चला गया.
काव्य- थोड़ी देर हम दोनों hi शांनत थे.. मुझे भी कुछ समाज नहीं आ रहा tha..ki आगे क्या करू.. इस की टैरिफ सुनु ..जो तेरे बारे मई है या यहाँ से चली जाऊ.. फिर मैंने थोड़ी देर सोचा .. मई ये जानना चाहती थी की वो तुम्हारे बारे किस हद तक गन्दा सोचता है..
फिर काव्य माहि को पूछती है..
काव्य- माहि.. मैंने ठीक किया न..
माहि- हां.. ठीक kiya..aage कुछ कहा उसने..
काव्य- थोड़े देर बाद मैंने कहा.. और कुछ बचा है क्या माहि के बारे मई कहना.. तो उसने कहा.. अगर मैंने कुछ कहा तो आप उसको गन्दा कहोगे.. मैंने कहा.. अब इतना गन्दा कह hi चुके हो तो आगे और क्या गन्दा कहोगे. बोलो और क्या कहना है..
माहि काव्य को देखते hi रहती है..

काव्य- वो कहने लगा.. पक्का न.. मैंने कहा हां.. तो वो बोल pada..Mera तो माहि की गांड के बारे में सोच कर hi बुरा हाल हो जाता है.. लुंड बिठाये नहीं बैठता.. बार बार खड़ा हो कर उसकी गांड को सलामी देना शुरू कर देता है..
माहि- इतना गन्दा… मई सोचती थी उससे ज्यादा गन्दा और घटिया आदमी है ये.. और तुमने ये नोटिस किया काव्य..
काव्य- क्या..
माहि- अब तक वो मुझे माहि मैडम कह के बुलाता था अब माहि कह रहा है..
काव्य- haa..ye सच है.. आगे बता दू..
माहि- हां..
अब दोनों को भी सुनाने और सुनाने मई इंटरेस्ट आ रहा था..
काव्य- वो कहने laga..mujhe पूरा यकीं है की इस अप्सरा की छूट भी काम कातिल नहीं होगी..
माहि- क्या.. छूट .. वर्ड.. उसे किया उसने..
काव्य- हां..
माहि- और तुमने कुछ कहा नहीं..
काव्य- मेरी hi गलती thi..maine hi उसको छूठ दी थी… कुछ भी कहने की .. इस लिए उसने उसका अचे से फायदा उठा लिया…
माहि- काव्य.. एक बात पुछु..
काव्य- हां…
माहि- उसने तुजे कही टच नहीं किया न..
काव्य- तू पागल हो गयी है क्या.. तू शयद भूल गयी hai..ye बोर्डिंग सब तेरे लिए थी.. मेरे लिए नहीं थी… मेरे लिए होती तो उसको कब का मजा सिखाती ..
माहि कुछ नहीं bolati..aab काव्य माहि को न पूछते हुई आगे कहने लगते है..
काव्य- वो बोलने लगा.. बल्कि उनकी छूट तो सबसे ज्यादा क़यामत ढाती होगी.. कैसी दिखती होगी माहि की छूट.. झाते होगी उस पर या एक चिकनी होगी.. जैसी भी होगी.. कमाल होगी..
माहि- माय goddddddddddddddddd… कितना गन्दा इंसान है ये…
काव्य- आगे तो इससे ज्यादा है..
माहि- आगे और क्या कहा इस हरामी ने..
काव्य- आगे उसने.. कहा.. उसननी.. कहहआ…
माहि- इतनी क्यों डर रही है…
काव्य- वो कहने लगा…
ऐसा कहके काव्य शांत हो जाती है.. माहि अब आगे करीम ने और क्या कहा ये जानना चाहती थी.. उसको अब साबरा नहीं हो रहा था…
माहि- कहो न.. अब.. इतना कुछ गन्दा कहा है मेरे बारे मई अब तक .. और क्या गन्दा कहेगा मेरे बारे मई..
काव्य अपनी आँखे बंद करके कहती है..
काव्य- माहि तुम जो कहती हो न वो घटिया है.. उस से भी ज्यादा ये घटिया है.. बहोत नीच है वो कला बुद्धा..
माहि- बाते मत बनाओ.. बताओ उसने क्या कहा..
काव्य अभी भी आँखे बंद की हुई thi..wo बहोत धीरे से बोलती है..
काव्य- माहि बहोत शर्म आ रही है.. उसने जो कहा वो बताने मई…
माहि- सुनाने मई नहीं आयी शर्म .. अब कहने मई आरही है शर्म तुजे kavyaa..jo भी है बात दो काव्य..
काव्य- वो कहने लगा.. एक बार माहि को जी भर कर छोड़ना चाहता हु.. हर उस तरह से जैसा उसे देख कर मन में ख्याल आता है.. कभी तो मन करता है की उसे घोड़ी बना कर उसकी छूट मरू कभी गांड मरू.. कभी ख्याल आता है उसकी दोनों चिकनी चिकनी टाँगे अपने कंधे पर रख कर उसकी छूट मरू.. लेकिन जानता हूँ की ये मुमकिन नहीं है.. ये मेरे दिल का केवल ख्याल है एक सपना है.. माहि मनीष भैया की बीवी है और मेरी मालकिन है.. इसलिए उसको छोड़ने का ख्वाब हमेशा ख्वाब hi रहेगा.. पर मुझे खुसी है की ऐसी सूंदर अप्सरा के साथ मुझे एक hi घर की छत्त के नीचे रहने का मौका मिला है.. अगर माहि को छू नहीं सकता काम से काम देख तो सकता हु.. मैं उस ऊपर वाले का शुक्र गुजर हु जिसने मुझे इतनी हसीं खूबसूरत अप्सरा को देखने का सौभाग्य दिया.. आगे कहने लगा.. मई वैसे गन्दा इंसान नहीं हु.. सिर्फ आप माहि मैडम को बोल दो.. मई अब उनके रस्ते मई नहीं आऊंगा और वो भी मेरे रस्ते मई न आये..
इतना कुछ सुनने के बाद माहि को बहोत गुस्सा आ रहा था करीम का और काव्य का.. जो उसके इतनी गन्दी भाषा उसने सुन ले थी..
माहि- इतना कुछ कहा उसने मेरे बारे मई और तुम ने सुन लिया
काव्य- तो क्या करती..
माहि- तू मेरे अच्छी फ्रेंड है न.. फिर सुन के कैसे लिया..
काव्य - क्या kahati..mere सहेली .. खूबसूरत नहीं है.. माहि तुम hi पागल हो.. वो आदमी घटिया है.. लेकिन उसकी टैरिफ.. जो तुम्हारे की थी.. मेरे सामने की थी.. वो तो झूट नहीं थी… और उसने बड़े छलखि से ये सब कहा.. मैंने भी उसको कहा जो भी कहना है कह दो.. मुझे क्या पता था वो इतना गन्दा बोलेगा.. कोई आपने वाइफ के साथ या गर्लफ्रेंड के साथ भी इतना गन्दा बोलता नहीं है..
माहि सोचने लगाती है..
काव्य- और एक बात hai…Tumari इतनी टैरिफ शयद मनीष भैय्या ने भी कभी नहीं की होगी ..
माहि- तो क्या मई अब उस को जा के थैंक्स बोलू
माहि गुस्से मई बोलते है..
काव्य- मई वो नहीं कह रही हु..
Mahi-To तुम्हारा क्या कहना है..
काव्य- यही.. की.. इस आदमी को मानना पड़ेगा.. न जाने सिमरन ने इस को कहा से उतके ले आयी
Mahi-Bhaiyya के घर से
काव्य- क्या.. तुम कैसे पता..
माहि- भैय्या के घर से तो मेरे पीछे पड़ा है..
काव्य- तो क्या तूने भैयासाहब को नहीं बताया..
Mahi-Bataya .. मेरी जान.. कल hi भैय्या ने उस को बहोत मारा है..
काव्य- फिर भी नहीं सुधारा वो..
माहि- हां..
काव्य- मानना पड़ेगा उसको
Mahi-Kya ..मानना पड़ेगा उसको
गुस्से से बोलती है..
काव्य- उसके डेरिंग को…
माहि- दिन बा दिन उसकी डेरिंग बढ़ती hi जा रही है.. अब थोड़े देर पहले तो उसने हद hi कर दी..
Kavya-Kab..
Mahi-Aab तुजसे बाते करने से पहले
Kavya-Kya किया
Mahi-Aankh मारी.. मुझे ..
काव्य- क्या???????????? … ऑर्डर… कहा
माहि- यहाँ पार्टी मई..
काव्य- माय गॉड.. ये आदमी तो बहोत पहुंचा हुआ लगता है..
Mahi-Haa..
Kavya-Mahi..kuch भी कहो डेरिंग बहोत है इस बन्दे मई.. मई उसको जानती नहीं हु.. फिर भी मेरे सामने तुम्हारे टैरिफ की.. वो भी इस kadar…iss गंदे तरीके से.. तू बच के रहना इस से .. तुजे कब उदा ले जायेगा तुजे पता hi नहीं चलेगा..
Mahi-Mai क्या कोई ऐसे वैसे हु क्या.. जो कोई भी मुझे उदा लेजायेगा..
काव्य- माहि.. ये कोई भी नहीं है.. स्पेशल है.. मई सच बोल रही हु.. सम्बल के रहना इस से नहीं तो हम आज तक माहि को मनीष भैय्या की बीवी कहते थे .. अब न जाने करीम काका की बेगम न कहना पड़े..
माहि- काव्य तू क्या पागल हो गयी हो क्या.. वो काका मुझे क्या करेगा.. ऐसा कभी नहीं होगा.. मई ऐसे कभी नहीं होने dungi..mai मेरे मनीष की अमानत हु.. है और रहूंगी.. मई कभी भी ऐसे ैरे गैर लाफहंगे करीम की कभी नहीं हो सकती.
Kavya-That’s स्पिरिट माहि.. कीप आईटी उप..
तब काव्य को कोई आवाज देता है.. इसलिए काव्य माहि के पास से चली जाती है.. आपने बाजरे मई इतना कुछ सुनने के बाद माहि को समझ में नहीं आ रहा था की कैसे रियेक्ट करूँ इस par.wo सोचने लगाती है मेरे बारे में बहुत गन्दी गन्दी बाते कही है इस घटिया आदमी ने काव्य को.. वो सोचने लगाती hai..iska मतलब वो हर वक़्त मुझे घूरता रहता था. कितना बेशरम था शुरू से hi.. तभी उसकी निगाहें मुझे अपने ऊपर हमेशा महसूस होती रहती थी..
अपने बारे में इतना गन्दा सुनने के बाद माहि शर्म से पानी पानी हो gayi..us को एक तरफ तो गुस्सा आ रहा था और दूसरी तरफ शर्म भी आ रही थी.. लेकिन गुस्से से ज्यादा शर्म आ रही थी.. वो सोचती है मनीष ने आज तक कभी मेरे से ऐसे वर्ड उसे नहीं करे थे.. लेकिन ये आदमी ने मेरे बारे मई ऐसे वर्ड क्यों उसे किये.. क्या वजह है.. मुझे विश्वास नहीं हो रहा है की करीम ने मेरे बारे मई ऐसे वर्ड उसे किये लेकिन काव्य ने कहा तो सच hi होगा..
बाद मई कुछ देर बाद करीम सिमरन के पास चला जाता है.. उसकी गांड दबाता है…. और बाद मई माहि के तरफ देख कर हास्के चला जाता है दूसरी तरफ…. माहि को अब बहोड़ ज्यादा गुस्सा आ रहा था.. वो माहि के तरफ देख कर सिमरन के साथ छेद चढ़ कर रहा था अब.. माहि सोच रही थी की इसको सिमरन मैडम के साथ अगर फ्लेर्टिंग करने है तो kare..lekin मुझे क्यों दिखा रहा है.. वो मुझे दिखा कर क्या जाताना चाहता है.. मुझे कुछ समाज मई नहीं आ रहा है ये आदमी..
थोड़ी देर के बाद करीम सिमरन को इशारा करता है .कुछ पिने को लेन के liye..wo माहि देख रही थी… सिमरन पानी लती है.. सिमरन जब आ रही थी तब करीम वाइब्रेटर की स्पीड बढ़ाता था.. जैसे hi स्पीड बढ़ती सिमरन के छूट को जतका लगता है ..इस वजह से वो कमर को जहतका देते है.. और अपनी गांड हिलाते हुई आती है.. माहि को कुछ समाज मई नहीं आ रहा था की सिमरन को क्या हो गया है.. माहि जानती थी की नोर्मल्ली सिमरन ऐसे लचक के नहीं चलती थी..
सिमरन पानी लेके करीम के पास आती है.. लेकिन करीम को जूस चाहिए होता है.. करीम सिमरन पर गुस्सा हो जाता है.. सिमरन जल्दी hi भाग कर जूस और ice-cream लती है…… बीच बीच मई करीम वाइब्रेटर की स्पीड बढ़ाता था इस वजह से वो आपने कमर को जातक देके चल रही thi..Karim जूस पिता है और आइस- क्रीम कहते कहते hi सिमरन की कमर मई हाथ दाल देता hai..Simran दर कर एक कार्नर मई करीम को लेके चली जाती है… एक वाल के पीछे.. माहि भी उनके पीछे चली जाती hai..waha वो दोनों एक दूसरे को ice-cream खिलते hai..phir करीम उसको किश करता है…

उसके होंटो को.. उसके गाल को और उसके नवल को.. माहि वो देख लेती hai..wo देख कर माहि को कुछ सूज नहीं रहा था… की ये आदमी कैसा है… मेरे इतनी गन्दी टैरिफ की ..वो भी मेरे एक फ्रेंड के पास .. और इधर सिमरन मैडम को किश कर रहा है.. लगता है ये आदमी एक टाइम पे बहोत सरे औरत से खेलता hai..tabhi सिमरन को कॉल आता है तो वो वह से चली जाती है… करीम जैसे hi पीछे घूम जाता है और वाल से होते हुई आगे आता है तो उसे माहि दिख जाती है … माहि उसको hi दिख रही थी..

करीम चलते चलते माहि के पास आता है.. माहि वही कड़ी रहती है और वो भी करीम के तरफ देखने लगाती है.. माहि आपने बालो से खेलते हुई करीम को देख रही थी.. माहि की सेक्सी ऐडा देखए हुई करीम उसके तरफ आ रहा था.. करीम आते आते माहि के आँखों मई देखते हुई आपने हूंतो पाई लगी हुई आइसक्रीम को अपनी जीभ से चाट रहा होता है.. माहि के पास आते हुई उसको गुरते हुई कहता है…
करीम- देखा मई किस्स्स्स( इस वर्ड पे जोर देते हुई) टाइप का स्पेशल गेस्ट हु…
ऐसे कहके वो माहि के पास से जाता है.. माहि के बदन की खुशबू लेते हुई…… और कहता है…..
करीम- aaaaaaaaaaaaahhhhaaa….. मज़ा आ गया……
अब करीम काव्य की तरफ जाता है.. उस से पूछता है
Karim-koi हेल्प चाहिए क्या…
काव्य - थैंक्स… पर हम लोग कर लगे..
ऐसे बोलते है… करीम फिर से बोलता है… तब काव्य बोलती है
काव्य- यहाँ का ये सामान उधर रखना है.. इस लड़के से वो उठा नहीं जा रहा है…
करीम वो सामान उठा के दूसरी जगह रख देता है… जाते जाते वो काव्य के कमर को टच करता है …
काव्य के मू से हलकी सी सिसकारी निकलती है..
काव्य- आआआआहहहहह..
और काव्य करीम की तरफ देखते हुई उसे स्माइल देते है … थोड़े देर करीम और काव्य एक दूसरे को देख रहते है.. और बाद मई वो दोनों वह से चले जाते है..
अब थोड़े देर तक करीम एक कार्नर मई बैठ जाता है.. उसको माहि कही नज़र नहीं आती.. अब वो सिमरन को ढूडने लगता है.. सिमरन उसको सामने कड़ी हुई नज़र आते hai..Simran , काव्य ,सिमरन और काव्य के हस्बैंड आपस मई बात कर रहे थे.. फिर करीम अपने जेब में रखा रिमोट से वाइब्रेटर की स्पीड धीरे से बढ़ा देता hain....agle hi पल सिमरन एक बार फिर से तड़प उठती हैं......... करीम एक वाल के पीछे चुप जाता है .. और वह से वाइब्रेटर की स्पीड काम ज्यादा कर रहा था.. सिमरन करीम को देखने लगाती है.. लेकिन उसको करीम कही नज़र नहीं आता hai..wo इस वक़्त पूरी तरह से बेबस हो चुकी थी....... उसको करीम कही दिख नहीं रहा था लेकिन वो वाइब्रेटर की स्पीड काम ज्यादा कर रहा tha..dheere धीरे अब उसका दिमाग काम करना बंद सा हो गया tha.......badan की आग धीरे धीरे उसपर हावी होती जा रही thi........aab उसे अपनी छूट की प्यास बुझाने के सिवा और कुछ नज़र नहीं आ रहा tha......magar यहाँ इन सब के beech.....ye सिमरन के लिए बिलकुल मुमकिन नहीं था......
करीम अब एक चेयर पाई बैठ जाता है.. सिमरन के samane..us वजह से सिमरन को करीम दिखाई देता है.. वो एक नज़र करीम के चेहरे की ओरे देखती हैं …फिर ना में धीरे से अपनी गार्डन हिला देती hain......uski आँखों में फर्याद साफ़ झलक रही thi........wahin करीम सिमरन की बेबसी देखकर हंस पड़ता हैं......
फिर परेशां होकर सिमरन आपने हस्बैंड को बोल देती है..
Simran-mere ख्याल से अब हमें चलना चाइये.........
जैसे तैसे ये बात सिमरन आपने हस्बैंड से कह पति हैं....... तब काव्य एक नज़र सिमरन के चेहरे की ओरे देखती हैं..
काव्य सिमरन के उस बदले हुए रूप को देखकर बहुत हैरान थी........ उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की आज सिमरन को हो क्या गया हैं....... वो सिमरन को थोड़ा बाजु मई ले जाती hai..aur उससे कहती है..
काव्य – सिमरन .. तुम ठीक तो हो न ...... तबियत ठीक नहीं हुई kya..aur अभी तो तुम यहाँ आयी ho........fir इतनी जल्दी जाने का क्या मतलब........
सिमरन अपने चेहरे पर झूटी मुस्कान लेन की कोशिश करती हैं..
सिमरन - मैं ठीक हूँ kavya........bus .......ऐसे hi......
काव्य – लगता है तुम बिलकुल ठीक नहीं हो ............. लगता है डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा..
सिमरन कुछ पल तक खामोश रहती हैं ......... उसके अंदर ज़रा भी हिम्मत नहीं थी की वो डिलडो वाली बात काव्य से कह sake.......wo आगे कुछ कहती तभी वहां करीम आ जाता हैं...... वो उन दोनों के पीछे खड़ा हो जाता hai..aur सिमरन और काव्य को देखकर हौले से मुस्कुरा पड़ता हैं..... वो दोनों भी करीम को देखकर मुस्करा पड़ती hai..fir वो फ़ौरन अपने एक हाथ को धीरे से सरकते हुए काव्य के कंधे से होते हुए उसकी कमर तक ले जाता हैं ......

और अगले hi पल वो फ़ौरन अपना हाथ उसकी गांड पर फेरते हुए अपना हाथ झट से हटा लेता हैं.....
काव्य के जिस्म में एक आग सी लग जाती है .....उसका चेहरा लाल पढ़ जाता है.. ........ करीम की इन् हरकत से...... ये सब बहुत जल्दी में हुआ tha......magar काव्य के अंदर उस आग को भड़काने के लिए काफी tha.......kavya करीम के हरकत की वजह से लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगती hain......aur अपने बेकाबू सांसिओन को फिर से सँभालने लगती हैं.......
सिमरन करीम की हरकत देख चुकी थी..
उसकी नज़रियों से करीम की हरकत छुपी नहीं थी...... सिमरन जैस एही गुस्से से करीम को देखते hi वैसे hi करीम वाइब्रेटर की स्पीड बड़ा देता hai..iss वजह उसके जिस्म में आग और भी बढ़ जाती है ...........अब उसका साबरा पूरी तरह से टूट गया tha....Simran की आँखें सुर्ख लाल हो चुकी थी ........ वाइब्रेटर की स्पीड की वजह से उसकी आँखें बार बार बंद सी हो रही thi......jaise तैसे वो अपने होश संभाले हुई thi.....magar अब ये होश भी बहुत जल्द उसके कण्ट्रोल से बहार होने वाला था......
काव्य अब कुछ दूर जाती हैं और एक अजीब सी नज़रियों से करीम को पलटकर देखने लगती हैं

और फिर वो उसे देखकर मुस्कुराते हुए अपनी हस्बैंड की तरफ जाने लगाती है.. वहीँ बगल मई कड़ी सिमरन ये नज़ारा देख लेती है और गुस्से से करीम की और देखने लगाती है.. और आँखों से करीम को इशारा करती है.. बाजु मई आने को.. करीम बाजु मई आ जाता hai..Simran करीम के हातो को पकड़ के दिवार के पीछे ले जाती है.. अब वह उन्दोनो के अलावा वह कोई और नहीं था..
सिमरन एक नज़र करीम के चेहरे की तरफ देखती हैं ..
गुस्से se..Karim उसे देखकर हौले से मुस्कुरा पड़ता हैं...
सिमरन- करीम तुमने काव्य के साथ ये सब क्यों kiya.....kisi ने ये सब देख लिया होता तो..
करीम- कोण देकहता..
सिमरन- वह मेरे और काव्य के पति थे.. उन्दोनो मई से कोई भी देख सकता था..
करीम- कुछ नहीं होता .. देखा तो नहीं न..
सिमरन- उसने आपने पति को बता दिया तो..
करीम- मैं अचे से जनता हूँ की वो ये बात अपने पति को कभी नहीं कहेगी........
सिमरन- तुम कैसे पता..
करीम- तुमने आपने पति को बताया kya..maine तुजे छोड़ा तो …
सिमरन हसती है..

सिमरन- फिर भी बताये तो..
करीम- नहीं बताएगी.. तुमने देखा होगा न उसे भी मेरा चूना ाचा लगा ......अगर उसे ये सब पसंद नहीं होता तो वो मुझे इंकार ज़रूर करती...... या वही पाई कुछ kahati..magar उसने कभी इस बारे में मुझसे कुछ नहीं kaha........iska मतलब उसे मेरी हरकतें पसंद hain........zaroor उसके छूट में भी सेंसेशन हुआ होगा मेरे इस तरह छूने se.....uski आँखें देखि tumne.......poori लाल हो गयी thi......hawas दिखाई दिया मुझे आज उसकी आँखों में.......
सिमरन करीम की बाटिओं को सुनकर धीरे से हंस पड़ती हैं…
सिमरन- तुम तो बहुत जानकारी हैं इन सब के बारे mein......aur मेरी आँखों में तुम क्या नज़र आ रहा hain...........main कब से इस आग में जल रही हूँ उसका kya........kya मेरी आँखों में हवस नहीं दिखाई देती...... करीम तुम्हे तो मेरी ज़रा भी परवाह नहीं हैं........
करीम- ऐसे बात नहीं है..
सिमरन- अब बातें मुट्ठ बनाइये और चुप चाप कही चलते hai.........aab मेरा साबरा टूटता जा रहा हैं......
करीम - इतनी भी क्या जल्दी हैं सिमरन....... अभी तो पार्टी शुरू हुई है..
अगले hi पल सिमरन फ़ौरन करीम के और करीब आती हैं और उसके सीने से फ़ौरन लिपट जाती हैं........ और करीम के होंठों को बड़े प्यार से चूम लेती हैं.....

सिमरन – पार्टी गयी भाड़ में ........ मुझे नहीं करनी कोई पार्टी ...... इधर मेरे छूट मई आग लगी हुई है और तुम पार्टी की पड़ी हुई है..
करीम हस्ता है..
सिमरन- करीम .. तुम्हे.. मुझपर ज़रा भी तरस नहीं aata........kya हालत कर दी हैं तुमने मेरी इस waqt.......main तुम्हे बता नहीं sakti.......meri पंतय पूरी भीग चुकी hain........aab और नहीं बर्दास्त होता mujhe.......please.......main तुम्हारे सामने हाथ जोड़ती hoon............meri प्यास अभी बुझा दीजिये......
करीम - यहाँ ....इस waqt...........tumhara दिमाग ख़राब हो गया हैं क्या Simran......ye कोई तुम्हारा घर नहीं hain.......ye पब्लिक प्लेस हैं..... यहाँ पार्टी चल रही hai..yaha इतने सरे लोग है.. तुम्हारा पति भी hai..aur इस वक़्त यहाँ ये सब करना पॉसिबल नहीं........ पार्टी के बाद हम घर चलकर ये सब आराम से कर लेंगे.......
सिमरन- मेरा पति कुछ नहीं करेगा.. उसको दारू पिने से फुर्सत मिले तो मुज पर ध्यान दे..
करीम- कुछ भी हो जय.. अब इस वक़्त पॉसिबल नहीं है.. थोड़े देर बाद तेरे पति को दारू ज्यादा होने के बाद hi मैं तुम्हारे छूट की आग बुझा पाउँगा ......बस तब तक साबरा करती रहो......
सिमरन- promise..na..
करीम- हां...
सिमरन के पास से आने के बाद करीम थोड़े देर यहाँ वह घूमता रहता है.. थोड़ी ड्रिंक करता है.. फिर वो माहि को ढूंढने लगता hai..lekin उसको माहि कही नज़र नहीं आती.. फिर वो काव्य के पास जाता है.. माहि को ढूढते hui..waha काव्य और उसके हस्बैंड खड़े थे.. काव्य को माहि मैडम कहा है ये करीम पूछता है.. काव्य हसती है.. अब काव्य ज्यादा कुछ नहीं बोल pati..uska हस्बैंड वह होने की वजह से… तभी काव्य का पति पूछता है क्या काम है.. तो करीम बोलता है… काँटी शेठ का एक मैसेज देना है.. काव्य जान चुकी थी की करीम झूठ बोल रहा है.. इस वजह से काव्य करीम की तरफ देख कर मंद मंद है रही थी.. करीम भी काव्य के तरफ देख कर hi कहता hai..Sheth बोल रहे थे उनका फ़ोन नहीं लग रहा है.. तब काव्य का पति बोलता है.. पीछे गार्डन मई बैठे hai..us फार्महाउस मई पिछले बाजु मई एक छोटा सा गार्डन था.. वह माहि गार्डन मई अकेली घूम रही थी.. काव्य आपने हस्बैंड को एक काम है बोल के वह से चली जाती है… और करीम का पीछा करती hai..Karim अब माहि के पास उस गार्डन मई चला जाता है..
माहि करीम के सामने इधर उधर टहल रही thee……aur करीम माहि के बदन से अपनी अंकेछण सेंक रहा tha…..thalate हुए अचानक माहि के कदम थम gaye….wo कुछ पलों के लिए एक जगह पाई रुख जाती है.. वो घूम कर करीम की तरफ गुस्से से देखती hai..kamar पर हाथ रख kar…Karim भी उसी के तरफ देख रहता है….. तभी वह गार्डन के पीछे एक छोटा सा स्टोर रूम था वह काव्य आ जाती है.. और विंडो से उन्दोनो को चुपचाप देखने लगते है.. अब दोनों ..माहि और करीम एक दूसरे को देख रहे थे.. माहि के चहरे और आँखों मई गुस्सा था तो करीम के आँखों मई हवस और चहरे पर हसी थी..
दोनों एक दूसरे को कुछ नहीं बोल रहे थे.. बस देखते जा रहे थे.. कुछ 2-3 मिनट ऐसे hi सिचुएशन थी.. पीछे छोटे से रूम मई कड़ी काव्य आपने आप को कह रही थी..
काव्य- कुछ तो बोलो.. कोई तो स्टार्ट करो..
शायद काव्य के मैं की बात उसकी बेस्ट फ्रेंड माहि ने सुन ली थी..
माहि- यहाँ.. क्यों आये हो…
काव्य- माही.. ु अरे माय बेस्ट फ्रेंड .. तुमने मेरे दिल की बात सुन ली.. स्टार्ट तो हुआ..
करीम- माफ़ी मांगने आया हु..
माहि- किस बात की माफ़ी..
करीम- मैंने जो थोड़े देर पहले आप के साथ बतमीज़ी के थी उसकी..
माहि- अच्छा.. कोण सी बतमीज़ी..
करीम- जो मैंने आप को ऐसी आँख मरी थी.. वो..
ऐसे कहते हुई करीम माहि को आँख मरता है..
माहि गुस्से से बोलती है
माहि- बतमीज़ इंसान.. माफ़ी मांग रहे हो और फिर से आँख मार रहे हो..
काव्य को इन दोनों के बातो से बहुत अच्छा लग रहा था..
करीम- मैडम जी.. मई आँख नहीं मार रहा हु तो… आप को बता रहा हु की मैंने आप को ऐसी आँख मर्री थी इस वजह से मई आपकी माफ़ी मांग रहा हु ..

































































































































































