Adultery शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी) - Page 43 - SexBaba
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Adultery शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)

पिछले अपडेट में आपने पढ़ा की..

बिना चुदाई के तड़प रही शीला मदन के साथ एक भरपूर संभोग चाहती थी.. पिछले कुछ दिनों से मदन की तबीयत नासाज होने के कारण वह सेक्स से अलिप्त थी.. पर मदन तो राजेश के साथ पीयूष से मिलने चला गया..

तड़फड़ा रही शीला ने शराब पीकर अपनी चूत को मसलते हुए उसे ठंडा करना चाहा.. लेकिन उससे तो आग और बढ़ गई.. मदन चला गया था.. रसिक भी शहर से बाहर था.. ऐसे में शीला को जीवा की याद आया..

शीला ने जीवा को फोन कर बुला लिया और उसका इंतज़ार कर रही थी

अब आगे..

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नंगी लेटी हुई शीला अपनी चूत को उंगलियों से कुरेद रही थी





तभी दरवाजे पर दस्तक पड़ी.. निर्वस्त्र अवस्था में पड़ी शीला उठ खड़ी हुई.. अपने नंगे बदन पर उसने गाउन डाल लिया.. और लड़खड़ाते कदम से चलते हुए बाहर गई.. दरवाजा खोलते ही जीवा नजर आया.. शीला ने इशारे से उसे अंदर आ जाने के लिए कहा और उसके अंदर घुसते ही शीला ने.. अगल बगल नजर डालकर, दरवाजा बंद कर दिया..

"कहाँ मर गया था तू..??? कितनी देर लगा दी?" शीला ने थोड़े गुस्से से कहा.. इस वक्त शीला की जबान नहीं पर उसकी हवस बोल रही थी.. कामवासना से वह अत्याधिक व्याकुल हो चली थी

"भाभी जी, क्या बताऊँ.. आपने एन वक्त पर फोन किया.. अब नौकरी से दो घंटे पहले निकल पाना मुश्किल था.. मेरा शेठ बड़ा ही कमीना है.. छोड़ ही नहीं रहा था.. फिर आखिर तबीयत खराब होने का नाटक करके निकला.. तीन बस बदलकर पहुंचा यहाँ.. टाइम तो लगेगा ही ना" जीवा ने सफाई देते हुए कहा.. वैसे शीला को यह सब सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं थी.. वह तो बस अपने जिस्म की आग बुझाना चाहती थी

उसने जीवा का गिरहबान पकड़कर अपने करीब खींचते हुए कहा "वो सब छोड़.. आज मुझे रगड़ रगड़कर चोद.. ऐसे चोद जैसे मुझसे जबरदस्ती कर रहा हो.. गालियां देते हुए.. समझ गया" शराब और वासना के कारण लाल हुई आँखों से घूरते हुए शीला ने कहा.. उसके मुंह से शराब की गंध जीवा ने परख ली थी..!! शीला कितनी गरम औरत थी, यह तो उसे पहले से मालूम था.. काफी समय पहले वह अपने दोस्त रघु के साथ आया था रात बिताने, तब दोनों ने जमकर चोदा था शीला को

जीवा ने सहमति में अपना सिर हिलाया

शीला को जीवा की पैंट में उसके लंड का उभार साफ नज़र आ रहा था.. उसकी पैंट मे उसके हलब्बी लंड का उभार इतना बड़ा था कि उसका कठोर लंड जैसे पैंट के कपड़े को चीर कर बाहर निकलने की धमकी दे रहा था..






शीला मुस्कुराती हुई उसकी तरफ बढ़ी.. उसकी चाल नशे के कारण डगमगा रही थी.. जीवा ने देखा कि शीला ऊँची हील की सैंडल में थोड़ी लड़खड़ा रही थी और आँखें भी मदहोश लग रही थी.. एक बार जीवा को लगा कि कहीं शीला उन सैंडलों में नशे के कारण अपना संतुलन न खो दे लेकिन वो अपनी जगह ही खड़ा रहा क्योंकि वो किसी प्रकार की पहल कर के शीला को गुस्सा नहीं दिलाना चाहता था.. इस वक़्त शीला के रंग-ढंग देख कर उसकी उम्मीद विश्वास में बदलने लगी थी..

"क्यों साले! ये अपनी पैंट कब उतारेगा?" शीला कुटिल मुस्कान के साथ उसके उभार को घुरती हुई उसी बेशर्मी से बोली जैसे की वो हमेशा चुदाई के वक्त होती थी..

फिर शीला ने उसके सामने आ कर उसके गले में एक बाँह डाली और दूसरे हाथ से उसके पैंट की ज़िप नीचे करने लगी लेकिन लंड के उभार के ऊपर से ज़िप खींचने में उसे थोड़ी दिक्कत हुई.. ज़िप नीचे होते ही जीवा की पैंट का आगे से चौड़ा मुँह खुल गया और उसका लंड ऐसे लपक कर बाहर निकला जैसे किसी राक्षस ने गुस्से में भाला फेंका हो.. शीला की आँखें चौड़ी हो गयीं.. इस लंड से उसने कितनी ही बार चुदाई की थी लेकिन शीला ने कभी भी इसे इतना फूला हुआ और इतना सख्त नहीं देखा था.. शायद शराब के नशे का असर हो.. उसे देख कर शीला की चूत थरथराने लगी..






शीला ने अंदर हाथ डाल कर जीवा के टट्टे भी बाहर खींच लिए और अपनी चमकती आँखों के सामने उसके हलब्बी चुदाई-हथियार को पूरा नंगा कर दिया.. यकीनन जबरदस्त नज़ारा था.. जीवा के लंड का बड़ा सुपाड़ा फूल कर जामुनी रंग के मशरूम के आकार का लग रहा था.. उसके लंड की धड़कती हुई काली नसें उभरी हुई थीं.. उस मोटी-ताज़ी मांसल मिनार की जड़ में गुब्बारों की तरह फूले हुए उसके टट्टे थे..





"ऊऊऊऊहहहह" शीला ने रोमाँच में गहरी साँस ली..

शीला बेइंतेहा चुदक्कड़ थी.. उसकी चूत चाहे कितनी भी बार चुद ले, चुदास हमेशा बरकरार रहती ही रहती थी.. हालांकि वो अभी हस्तमैथुन करते हुए जम कर झड़ी थी, लेकिन अब वो फिर जीवा के मांसल लंड से अपनी चूत भरने को बेक़रार हो रही थी..

उसने अपने गाऊन में हाथ डाल कर एक बार फिर अपनी चूत ओर जाँघों पर फिराया.. फिर उसने अपना गाऊन ज़मीन पर गिरा दिया और अपना एक हाथ अपने पेट पर फिराती हुई दूसरे हाथ से अपनी अंदरूनी जाँघों को सहलाने लगी.. उसकी चूत का रस उसके जिस्म पर चमक रहा था जो उसके उंगली डालकर झड़ने के कारण निकला था.. उस चूत रस में छिपी हुई थी शीला बिस्तर पर अपनी कुहनियों के सहारे पीछे को झुक कर अपनी टाँगें फैला कर बैठ गयी..

जीवा भी शीला के पास आ गया और अपनी मुट्ठी अपने लंड की जड़ में कस दी जिससे उसके लंड का सुपाड़ा दमकने लगा.. शीला के लिए यह मुँह में पानी ला देने वाला नज़ारा था.. वो आगे झुकी तो उसके लंबे बाल जीवा के पेट और जाँघों पर गिर गये.. शीला ने अपनी ज़ुबान लंड के सुपाड़े पर फिरायी..






"उम्म्म... वाह", शीला मजे से घुरगुरायी..

"हाँ... चूसो भाभी... उम्म... मेरा मतलब.. चूस बहेनचोद कुत्तिया", जीवा सिसका.. शीला उसका पूरा सुपाड़ा मुँह में ले कर चूसने लगी.. शीला की चुस्त और फुर्तीली ज़ुबान जीवा के फूले हुए सुपाड़े पर फिसलने और सुड़कने लगी.. उसकी ज़ुबान बीच में कभी सुपाड़े की नोक पर फिरती और कभी उसके मूतने वाले छेद को टटोलती.. अपने मुँह में वीर्य की बूंदों का ज़ायका महसूस होते ही शीला की भूख और बढ़ गयी.. जब वो उसके सुपाड़े के इर्द-गिर्द बहुत सारी लार निकालने लगी तो उसका थूक लंड की छड़ पे नीचे को बहने लगा.. शीला का सिर किसी लट्टू की तरह जीवा के लंड पर घूम रहा था..






जीवा की गाँड अकड़ गयी और धक्के लगाती हुई लंड को शीला के मुँह में भोंकने लगी.. शीला जब चूसती तो उसके गाल अंदर को पिचक जाते और जब वो उसके लंड पर फूँकती तो गाल फूल जाते.. शीला लंड के सुपाड़े पर पर बहुत ज़्यादा माता में लार निकाल रही थी और जीवा के लोड़े से बहुत सारा थूक नीचे बह रहा था..

जीवा के लंड को चूसते हुए शीला के काले बालों का पर्दा जीवा के लंड और टट्टों पर पड़ा हुआ था.. लंड के ज़ायके का मज़ा लेते वक्त शीला के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी.. जीवा के दाँत आपस में रगड़ रहे थे और उसका चेहरा उत्तेजना से ऐंठा हुआ था.. शीला का सिर तेजी से लंड पर ऊपर-नीचे डोलने लगा और वो और ज़्यादा लंड के हिस्से को अपने मुँह में लेने लगी.. उस मोटे और रसीले लंड पर ऊपर नीचे होती हुई शीला लंड पर अपने होंठ जकड़ कर चूस रही थी.. जब वो अपना सिर ऊपर लेती तो उस लंड पर अपना मुँह लपेट कर अपने होंठ कस कर पेंचकस की तरह मरोड़ती..

जीवा जंगली सुअर की तरह घुरघुराता हुआ और अपना लंड ऊपर को ठेलता हुआ शीला के मुँह को ऐसे चोदने लगा जैसे कि कोई चूत हो..

"ऊम्मफ्फ", जब लंड का फूला हुआ सुपाड़ा शीला के गले में अटका तो वो गोंगियाने लगी.. शीला ने जीवा का लंबा लंड तक़रीबन पूरा अपने मुँह में भर लिया था.. जीवा के टट्टे शीला की ठुड्डी पर रगड़ रहे थे और शीला की नाक जीवा की झाँटों में घुसी हुई थी.. शीला की साँस घुट रही थी लेकिन फिर भी उसने कुछ लम्हों के लिए लंड के सुपाड़े को अपने गले में अटकाये रखा और फिर उसने लंड को चुसते हुए बाहर को निकाला..






"ऊँम्म्म", शीला कराही और फिर से उस लंड पे अपने होंठ लपेट कर चूसने लगी..

जीवा ने अपना लंड शीला के मुँह में लगातार चोदते हुए अपना वजन एक टाँग से दूसरी टाँग पर लिया.. जीवा ने अपना एक हाथ शीला की गर्दन के पीछे रखा और उसका मुँह अपने लंड पर थाम कर अंदर-बाहर चोदने लगा.. उसके टट्टे ऊपर उछल-उछल कर शीला की ठुड्डी के नीचे थपेड़े मार रहे थे..

जीवा के मूत वाले छेद से और भी ज़ायकेदार प्री-कम चूने लगी और शीला की ज़ुबान पर बह कर शीला की प्यास और भड़काने लगी.. शीला और भी जोर से लंड चूसने लगी और अपने मुँह में जीवा को अपने टट्टे खाली करने को आमादा करने लगी.. वो उसके गरम वीर्य को पीने के लिए बेक़रार हो रही थी..

चुदक्कड़ शीला की ज़ुबान भी उसकी क्लिट की तरह ही गर्म थी.. सिसकती हुई वो अपना मुँह जीवा के लंबे-मोटे लंड पर ऊपर-नीचे डोलने लगी..

लेकिन तभी जीवा ने अपना लंड शीला के होंठों से बाहर खींच लिया.. उसका सुपाड़ा बाहर निकला.. शीला के होंठ चपत कर बंद हो गये पर वो फिर से अपने होंठ खोल कर अपनी ज़ुबान बाहर निकाले, पीछे हटते लंड पर फिराने लगी..

जीवा को शीला से लंड चुसवाना अच्छा लग रहा था पर अब वो शीला का भोसड़ा चोदने के मूड में था.. शीला ने नज़रें उठा कर अपनी नशे में डूबी आँखों से जीवा के चेहरे को देखा.. वह हैरान थी कि उसने अपना स्वादिष्ट तगड़ा लंड उसके मुँह से खींच लिया था.. ऐसा कभी नहीं हुआ था कि किसी आदमी ने शीला के मुँह में झड़ने से पहले लंड बाहर निकाला हो.. उसने अपने होंठ अण्डे की तरह गोल खोल कर उन्हें चूत की शक़ल में फैला दिया और अपनी ज़ुबान कामुक्ता से फड़फड़ाती हुई उसे फिर उसके लंड को फिर अपने मुंह में डालने के लिए आमंत्रित करने लगी..

नशे में चूर शीला को जीवा ने उसके कंधे से पकड़ कर धीरे से बिस्तर पर पीछे ढकेल दिया.. अगर वो उसके मुँह की जगह उसकी चूत चोदना चाहता था तो शीला को कोई ऐतराज़ नहीं था क्योंकि उसे तो दोनों ही जगह से चुदवाने में बराबर मज़ा आता था.. जब तक उसे भरपूर चुदाई मिल रही थी उसे इसकी कोई परवाह नहीं थी कि किस छेद से मिल रही थी..

अपने घुटने मोड़ कर और अपनी जाँघें फैला कर शीला पसर गयी.. उसने अपनी कमर उचका कर अपनी रसीली चूत चुदाई के एंगल में मोड़ दी.. जीवा उसकी टाँगों के बीच में झुक गया.. वो शीला के कामुक जिस्म से परिचित था.. अपने हाथों और घुटनों पर वजन डाल कर जीवा ने अपने चूत्तड़ अंदर ढकेले और उसके लंड का फूला हुआ सुपाड़ा शीला की चूत के अंदर फिसल गया..






शीला मस्ती से कलकलाने लगी.. अपने लंड का सिर्फ सुपाड़ा शीला की चूत में रोक कर जीवा लंड कि मांस-पेशियों को धड़काने लगा.. उसका सूजा हुआ सुपाड़ा चूत में धड़कता हुआ हिलकोरे मार रहा था..

पहले शीला का मुँह, चूत की तरह था और अब उसकी चूत, मुँह की तरह थी.. उसकी चूत के होंठ लंड के सुपाड़े को चूसने लगे और उसकी कड़क क्लिट उसकी जुबान की तरह लंड पर रगड़ने लगी.. जीवा घुरघुराते हुए स्थिर हो गया.. शीला की चूत उसके लंड को सक्शन पंप की तरह अपनी गहराइयों में खींच रही थी.. जीवा ठेल नहीं रहा था लेकिन शीला की चूत खुद से उसके लंड को अंदर घसीट रही थी..

जीवा उत्तेजना से गुर्राया.. उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उसका लंड उसके शरीर से खींच कर उखाड़ा जा रहा था और शीला की चूत के शिकंजे में अंदर खिंचा जा रहा है.. अपनी चूत में आखिर तक उस विकराल लौड़े की ठोकर महसूस करती हुई शीला सिसकने लगी.. उसकी चूत फड़कते लंड से कोर तक भरी हुई थी.. जीवा का लंड शीला की चूत को उन गहराइयों तक भरे हुए था जहाँ शीला के अन्य किसी भी पुरुष साथी का लंड नहीं पहुँच सकता था..

जीवा का लंड शीला की चूत में धड़कने लगा तो उसकी चूत की दीवारें भी उसके लंड की रॉड पर हिलोरे मारने लगी.. शीला की चूत के होंठ लंड की जड़ पे चिपके हुए थे और लंड को ऐसे खींच रहे थे जैसे कि उस कड़क लंड को जीवा के जिस्म से उखाड़ कर सोंखते हुए चूत की गहराइयों में और अंदर समा लेने की कोशिश कर रहे हों..






जीवा के लंड का गर्म सुपाड़ा शीला को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कि उसकी चूत में गरमागरम लोहे का ढेला ठूँसा हो.. उसके फड़कते लंड की रॉड ऐसे महसूस हो रही थी जैसे लोहे की गरम छड़ चूत की दीवारों को खोद रही हो.. उसका लंड इतना ज़्यादा गरम था कि शीला को लगा कि वो जरूर उसकी चूत को अंदर से जला रहा होगा पर उसकी खुद की चूत भी कम गरम नहीं थी.. शीला की चूत भी भट्टी की तरह उस लंड पर जल रही थी जैसे कि जीवा का लंड तंदूर में सिक रहा हो..

शीला ने पहले हिलना शुरू किया.. जीवा तो स्थिर था और शीला ने अपनी चूत उसके लंड पर दो-तीन इंच पीछे खींची और फिर वापिस लंड की जड़ तक ठाँस दी.. "चोद मुझे... चोद मुझे!" शीला मतवाली हो कर कराहने लगी..

जीवा ने अपने घुटनों पर जोर दे कर अपना लंड इतना बाहर खींचा कि सिर्फ उसका सुपाड़ा चूत के अंदर था.. शीला की क्लिट उसके लंड पर धड़कने लगी.. जीवा ऐसे ही कुछ पल रुका तो शीला की चूत के होंठ फिर से उसके लंड को अंदर खींचने के लिए जकड़ने लगे.. शीला के भरे-भरे चूत्तड़ पिस्टन की तरह हिल रहे थे उसकी ठोस गाँड बिस्तर पे मथ रही थी..

"पेल इसे मेरे अंदर... जीवा!" शीला चिल्लायी.. वो अपनी चूत को लंड से भरने को बेक़रार हो रही थी.. उसे अपनी चूत अचानक खोखली लग रही थी.. "ठेल दे अपना पूरा मूसल अंदर तक!"

जीवा ने हुँकार कर अपनी गाँड खिसकायी और शीला को एक धीरे पर लंबा सा झटका खिलाया.. उसका लंड चीरता हुआ उसकी धधकती चूत में अंदर तक धंस गया.. चूत के अंदर धंसी उसके लंड की रॉड ने शीला की गाँड को बिस्तर से ऊपर उठा दिया.. जीवा ने एक बार फिर बाहर खींच कर इस तरह अपना लंड अंदर पेल दिया कि शीला की गाँड और ऊपर उठ गयी और उसका लंड इस तरह नीचे की तरफ चूत पेल रहा था कि अंदर-बाहर होते हुए गरम लंड का हर हिस्सा शीला की चूत पर रगड़ खा रहा था..






शीला भी उतने ही जोश और ताकत से अपनी आगबबुला चूत ऊपर-नीचे चलाती हुई जीवा के जंगली झटकों का जवाब दे रही थी.. उसकी चूत इतनी शिद्दत से लंड पर चिपक रही थी कि जीवा को लंड बाहर खींचने के लिए हकीकत में जोर लगाना पड़ रहा था..

जीवा का लंड शीला के चूत-रस से भीगा और चिपचिपाता और दहकता हुआ बाहर निकलता और फिर चूत में अंदर चोट मारता हुआ घुस जाता जिससे शीला के चूत-रस का फुव्वारा बाहर छूट जाता.. जीवा के टट्टे भी चूत-रस से तरबतर थे.. शीला का पेट भी चूत के झाग से भर गया था और गरम चूत-रस उसकी जाँघों के नीचे और उसकी गाँड की दरार में बह रहा था.. जब भी उसकी चूत से रस का फव्वारा फूटता तो मोतियों जैसी बड़ी-बड़ी बूँदें उसकी चूत और दोनों टाँगों के बीच के तिकोण पर छपाक से गिरतीं..







चुदाई की लज़्ज़त और शराब के नशे से शीला मतवाली हुई जा रही थी.. उसने जीवा से चिपकते हुए अपनी जाँघें जीवा के चूत्तड़ों पर कस दीं.. शीला के ऐड़ियाँ जीवा की गाँड पर ढोल सा बजाने लगीं..

जीवा लगातार चोद रहा था और जब भी उसका लंड चूत में ठँसता तो उसके टट्टे झूलते हुए शीला की झटकती गाँड पे टकराते.. साथ ही शीला की चूत से और रस बाहर चू जाता.. "आआआईईईऽऽऽ आँआँहहह मैं... मेरा छूटने वाला है!" शीला हाँफी, "ओह... चूतिये... मैं झड़ने वाली हूँ... तू भी झड़ जाऽऽऽ मादरचोदऽऽऽ भर दे मेरी चूत अपने गरम, चोदू-रस सेऽऽऽ!"

फिर जीवा ने एक हैरत अंगेज़ काम किया.. उसने अपना लंड चूत से बाहर निकाल लिया!

शीला बेहद तड़पते हुए ज़ोर से चिल्लायी और यह सोच कर कि शायद गलती से निकल गया होगा, उसने अपना हाथ बढ़ा कर लंड पकड़ लिया और फिर से अपनी चूत में डालने की कोशिश करने लगी.. वो गरम चुदक्कड़ औरत झड़ने के कगार पर थी और उसे डर था कि लंड के वापस चूत में घुसने के पहले ही वो कहीं झड़ ना जाये..

जीवा कुटिलता से मुस्कुराया.. उसने शीला के चूत्तड़ पकड़ कर उसे धीरे से पलट दिया.. जब वो शीला को बिस्तर पर पेट के बल पलट रहा था तो वो उसके हाथों में मछली की तरह फड़फड़ा रही थी.. फिर उसने शीला को जाँघों से पकड़ कर पीछे की ओर ऊपर खींचा जिससे शीला अपने घुटनों पे उठ कर झुक गयी और उसकी गाँड जीवा के लंड की ऊँचाई तक आ गयी.. जीवा भी ठीक शीला के पीछे झुका हुआ था.. जीवा का लंड शीला की गाँड के घुमाव के ऊपर मिनार की तरह उठा हुआ था.. उसका लंड शीला के पिघले हुए घी जैसे चूत-रस से भीगकर चिपचिपा रहा था और उसके लंड का सुपाड़ा ऐसे दमक रहा था जैसे कि २०० वॉट का बल्ब हो और नीचे अपने टट्टों में छिपी पथरीली गोलियों से खबरदार कर रहा हो..

शीला का सिर नीचे था और गाँड ऊपर हवा में थी.. उसका एक गाल बिस्तर पे सटा हुआ था और उसके लंबे काले बाल बिस्तर पर फैले हुए थे.. शीला की ठोस, झटकती गाँड उसकी इस पोज़िशन की अधिकतम ऊँचाई तक उठी हुई थी.. यह पोज़िशन शीला के लिए नई नहीं थी.. उसकी भारी चूचियाँ बिस्तर पर सपाट दबी हुई थीं और जब वो अपनी गाँड हिलाने लगी तो उसकी तराशी हुई जाँघें कसने और ढीली पड़ने लगीं और उसकी प्यारी गाँड कामुक्ता से ऊपर-नीचे होने लगी..

एक क्षण के लिए तो शीला को लगा कि जीवा उसकी गाँड मारने वाला है और शीला को इसमें कोई ऐतराज़ भी नहीं था.. वह पहले भी जीवा से अपनी गांड मरवा चुकी थी.. पर जीवा का एक हाथ उसकी चूत पर फिसल कर चूत की फाँकों को फैलाते हुए उसकी फड़कती क्लिट को रगड़ने लगा..

"हाँआँआँ... हाँआँआँ... ऐसे ही कुत्तिया बना कर चोद मुझे!" अपनी चूत में जीवा का खूंखार लौड़ा पिलवाने की तड़प में शीला गिड़गिड़ाने लगी.. जीवा के चोदू-झटके की उम्मीद में शीला पीछे को झटकी..

"तुझे कुत्तिया बन कर चुदवाने में बहुत मज़ा आता है ना, राँड?" जीवा उसके कुल्हों को हाथों में पकड़ते हुए फुसफुसाया.. उसका लहज़ा व्यंगात्मक लग रहा था..

"हाँआँआँ! मुझे कुत्तिया बना कर चोद!" शीला कराही..

जीवा ने मुस्कुरा कर अपने लंड की नोक से उसकी दहकती चूत को छुआ और उसे शीला की क्लिट पर रगड़ने लगा.. शीला दोगुनी मस्ती से कराहने लगी और उसने अपने चूत्तड़ जीवा के लंड पर पीछे धकेल दिये..

जीवा ने अपना भीमकाय, फड़कता हुआ लंड पूरी ताकत से एक ही झटके में शीला की गाँड के नीचे उसकी पिघलती हुई चूत में ठाँस दिया.. उसका लंड अंदर फिसल गया और उसका सपाट पेट शीला के चूत्तड़ों से टकराया.. अपनी झुकी हुई जाँघों के बीच में से अपना हाथ पीछे ले जाकर शीला उसके टट्टे सहलाने लगी.. जीवा अपना लंड शीला की चूत में अंदर तक पेल कर उसे घुमाता हुआ उसकी चूत को पीस रहा था..







फिर जीवा ने पूरे जोश में अपना लंड शीला की चूत में आगे-पीछे पेलना शुरू कर दिया.. शीला कसमसाती हुई अपने चूत्तड़ पीछे ठेल रही थी और उसकी चूचियाँ भी जोर-जोर से झूल रही थी.. जीवा कुत्ते की तरह वहशियाना जोश से शीला की चूत चोद रहा था और कुत्ते की तरह ही हाँफ रहा था.. शीला भी मस्ती और बेखुदी में ज़ोर-ज़ोर से सिसक रही थी, "आँहह... ओहह मर गई.. आँआँहहह...!"

जीवा ने थोड़ा झुक कर जोर से अपना लंड ऊपर की तरफ चूत में पेला जिससे शीला की गाँड हवा में ऊँची उठ गयी और उसके घुटने भी बिस्तर उठ गये.. फिर अगला झटका जीवा ने ऊपर से नीचे की तरफ दिया और फिर से शीला के घुटने और गाँड पहले वाली पोज़िशन में वापिस आ गये.. शीला का जिस्म स्प्रिंग की तरह जीवा के नीचे कूद रहा था..

"ऊँऊँम्म्म आह्ह.. उहह!" शीला चिल्लाई..

जीवा भी पीछे नहीं था.. उसका लंड फूल कर इतना बड़ा हो गया था कि शीला को लगा जैसे कुल्हों की हड्डियाँ अपने सॉकेट में से निकल जायेंगी.. शीला ने अपनी झूलती चूचियों के कटाव में से पीछे जीवा के बड़े लंड को अपनी चूत में अंदर-बाहर होते हुए देखने की कोशिश की..

जीवा जोर-जोर से चोदते हुए शीला की चूत को अपने लंड से भर रहा था और शीला को शहूत और लज़्ज़त से.. शीला की चूत जीवा के लंड पे पिघलती हुई इतना ज़्यादा रस बहा रही थी कि वो फुला हुआ लंड जब चूत की गहराइयों में धंसता तो छपाक-छपाक की आवाज़ आती थी..

"ले... साली कुत्तिया... मेरा भी अब छूट रहा है!" जीवा हाँफते हुए बोला..

"हाँऽऽऽ हाँऽऽऽ डुबा दे मुझे अपने लंड की मलाई में!" शीला कराही..

जब जीवा ने अपना लंड जड़ तक ठाँस दिया तो उसकी कमर आगे मुड़ गयी और उसका सिर और कंधे पीछे झुक गये.. शीला को जब उबलता हुआ वीर्य अपनी चूत मे छूटता महसूस हुआ तो वो और भी जोर से कराहने लगी.. जीवा का गाढ़ा वीर्य तेज सैलाब की तरह शीला की चूत में बह रहा था..







जीवा के टट्टों को फिर से हाथ में पकड़ कर शीला निचोड़ने लगी जैसे कि उसके निचोड़ने से ज्यादा वीर्य निकलने की उम्मीद हो.. जैसे ही जीवा अपना लंड उसकी चूत में अंदर पेलता तो शीला उसके टट्टे नीचे खींच देती और जब वो अपना लंड बाहर को खींचता तो शीला उसके टट्टे सहलाने लगती.. जीवा की वीर्य किसी ज्वार-भाटे की तरह हिलोरे मारती हुई शीला की चूत में बह रहा था..

हर बार जब भी शीला को अपने अंदर, और वीर्य छूटता महसूस होता तो उसकी चुदक्कड़ चूत भी फिर से अपना रस छोड़ देती..

हाँफते हुए, जीवा की रफ़्तार कम होने लगी..

शीला ने उसके लंड पे अपनी चूत आगे-पीछे चोदनी जारी रखी और उसके लंड को दुहती हुई वो अपने ओर्गैज़म के बाकी बचे लम्हों की लज़्ज़त लेने लगी.. शीला को लग रहा था जैसे कि उसकी चूत लंड पर पिघल रही हो.. खाली होने के बाद जीवा ने कुछ पल अपना लंड चूत में ही रखा.. उसके गाढ़े मलाईदार वीर्य और शीला के घी जैसे चूत-रस का गाढ़ा और झागदार दूधिया सफ़ेद मिश्रण जीवा के धंसे हुए लंड की जड़ के आसपास बाहर चूने लगा.. शीला की चूत के बाहर का हिस्सा और उसकी जाँघें चुदाई के लिसलिसे दलदल से सनी हुई थी..






जब आखिर में जीवा ने अपना लंड शीला की चूत में से बाहर निकाला तो उसके लंड की छड़ इस तरह बाहर निकली जैसे तोप में गोला दागा हो.. शीला की चूत के होंठ फैल गये और उसकी चूत बाहर सरकते लंड पर सिकुड़ने लगी.. जब उसके लंड का सुपाड़ा चूत में से बाहर निकला तो शीला कि चूत में से वीर्य और चूत-रस का मिश्रण झागदर बाढ़ की तरह बह निकला..

पूर्णतः संतुष्ट शीला मुस्कुराती हुई पेट के बल नीचे बिस्तर पर फिसल गयी.. वह थककर चूर हो चुकी थी पर फिर भी उसने अपनी जाँघें फैला रखी थीं कि शायद जीवा एक बार फिर चोदना चाहे.. परन्तु जीवा बिस्तर से पीछे हट गया.. शीला ने पीछे मुड़ कर देखा कि जीवा ने अपना मुर्झाया हुआ चोदू लंड अपनी पैंट में भर लिया था और उसे लंड के उभार के ऊपर ज़िप चढ़ाने में मुश्किल हो रही थी.. शीला अपना हाथ नीचे ले जाकर अपनी तरबतर चूत को सहलाने लगी.. पूरी चूत स्खलन के झागदार प्रवाही से भरी हुई थी..

"मज़ा आया चोदने में?" शीला ने अपनी मदहोश आँखें नचाते हुए पूछा..


जीवा ने दाँत निकाल कर मुस्कुराते हुए रज़ामंदी में अपनी गर्दन हिलायी..

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