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मेगा अपडेट - १०,०००+ शब्दों का
पिछले अपडेट में आपने पढ़ा की..
वैशाली को सब कुछ सच-सच बताकर शीला पीयूष से मिलने निकल गई.. शीला के साथ रंगीन रात गुजारने के लिए पीयूष ने अपने दोस्त के खाली पड़े बंगले का इंतेजाम किया था.. उतावले पीयूष के साथ शीला उस बंगले पर पहुंची.. वहाँ पहुंचते ही दोनों ने शराब पीने से शुरुआत की और फिर दोनों के बीच शुरू हुआ हवस का नंगा नाच..!!
शुरुआत में आक्रामक रहे पीयूष को धीरे धीरे शीला अपने गिरफ्त में लेती जा रही थी.. एक के बाद एक चल रहे संभोग-सत्र से पीयूष थकता जा रहा था वहीं शीला के चेहरे पर अब भी ताजगी छाई हुई थी.. उसकी भूख मिट ही नहीं रही थी.. यह सब शीला की महत्वाकांक्षी योजना का ही हिस्सा था.. वो पीयूष के शरीर और मन को इस कदर थका थकाकर तृप्त करना चाहती थी की वो पूर्णतः उसके काबू में आ जाए और उसे अपनी चाल चलने का मौका मिले..
अब आगे..
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शीला ने अचानक पियूष को धक्का देकर उलट दिया और खुद उसके ऊपर सवार हो गई.. "मैं चाहती हूँ कि तुम मेरे अंदर झड़ो..." वह गुर्राई और अपनी चूत को पियूष के लंड पर तेजी से घुमाने लगी.. पियूष के हाथ शीला के कूल्हों पर चिपक गए जब उसने एक आखिरी जोरदार धक्का दिया.. शीला की आँखें फटी की फटी रह गईं जब उसने पियूष के गर्म वीर्य को अपनी चूत की गहराइयों में महसूस किया..

"ओह... इतना... इतना गर्म..." शीला हांफते हुए बोली, अपने शरीर को झटकते हुए जब पियूष का लंड अभी भी उसकी चूत में धड़क रहा था.. वह आगे झुकी और पियूष के होंठों को चूसने लगी, उसके वीर्य की गंध उनके चुंबनों में मिल रही थी..
थोड़ी देर बाद जब पियूष का लंड नर्म हो गया तो शीला उससे अलग हो गई.. उसने अपनी चूत से निकलते पियूष के वीर्य को अपनी उंगलियों से चखा और मुस्कुराई.. "तुम्हारा स्वाद बिल्कुल वैसा ही है जैसा मुझे याद था..." उसने कहा और पियूष की छाती पर लेट गई..

बारिश अब हल्की हो चुकी थी लेकिन दोनों के शरीर अभी भी पसीने और बारिश से लथपथ थे.. पियूष ने शीला के गीले बालों को सहलाया और पूछा, "आपकी आग अब शांत हुई?"
शीला ने पियूष की छाती पर अपनी ठुड्डी टिकाते हुए मुस्कुराई, उसकी उंगलियाँ उसके सीने के बालों में खेल रही थीं.. "शांत? अभी तो शुरुआत भी नहीं हुई है..." उसने धीमे से कहा, अपनी जाँघ को पियूष के अभी भी नम लंड पर रगड़ते हुए.. पियूष की साँस फिर से तेज हो गई जब शीला ने अपने नाखूनों से उसके निप्पलों को चुटकी से दबोचा..
"वैसे..." शीला अचानक उठ बैठी, उसके भारी स्तन बारिश की बूंदों से चमक रहे थे, "इस बंगले में बाथटब है ना?" पियूष ने हाँ में सर हिलाया तो शीला उठ खड़ी हुई और उसका हाथ पकड़कर खींचने लगी.. "चलो फिर, अब गरम पानी में नहाने का मन कर रहा है.."
बाथरूम में प्रवेश करते ही शीला ने नल खोल दिया, गरम पानी की भाप जल्दी ही कमरे में फैलने लगा.. पियूष ने उसकी कमर से हाथ लपेटा और उसके गीले बालों को सूंघा.. "आपकी खुशबू आज भी वही है..." उसने कहा तो शीला पलटी और उसके होंठों पर काटने वाला चुंबन दिया..
टब भरते ही शीला ने पियूष को पानी में बैठा दिया और खुद उसकी गोद में बैठ गई.. गरम पानी ने उनकी थकी हुए मांसपेशियों को सुकून दिया.. पियूष के हाथ शीला के स्तनों पर तैरने लगे, जबकि शीला ने पीछे की ओर झुककर अपनी गर्दन को उसके चुंबनों के लिए प्रस्तुत किया.. "मुझे लगता है हमारी रात का दूसरा दौर शुरू हो रहा है," उसने धीमे से कहा, जब पियूष का लंड उसकी गांड के नीचे फिर से सख्त होने लगा..
शीला ने अपने हाथों से पानी को उठाकर अपने स्तनों पर बहाया, फिर पियूष के चेहरे को अपने ओर खींचा.. उसने उसके मुँह में अपनी जीभ घुसा दी, जबकि उसका एक हाथ पानी के नीचे पियूष के लंड को मसलने लगा.. पियूष ने शीला के कान में कुछ फुसफुसाया जिससे वह ठंडा होकर मुस्कुराई, फिर अचानक उठ खड़ी हुई..
"ठहरो," उसने कहा और टब से बाहर कदम रखा, उसका डूबा हुआ शरीर पानी की धाराओं से चमक रहा था.. उसने बाथरूम के कोने में पड़े टॉवल को उठाया और धीरे-धीरे अपने शरीर को पोंछना शुरू किया, जानबूझकर पियूष को अपनी हर हरकत का मजा लेने दिया.. जब वह अपने स्तनों को पोंछ रही थी, तो पियूष टब से बाहर कूदा और उसके पीछे आकर खड़ा हो गया..
"भाभी, आपका शरीर आज भी बिल्कुल वैसा ही है जैसा पहली बार देखा था," पियूष ने कहा, अपने हाथों से शीला के नितंबों को मसलते हुए.. शीला ने पलटकर उसे देखा, टॉवल को फर्श पर गिरा दिया और अपने दोनों हाथों से उसके लंड को पकड़ लिया.. "और तुम्हारा यह आज भी वैसा ही स्वाद देता है," उसने कहा और झुककर उसके लंड के शीर्ष को चूस लिया..
पियूष ने आँखें बंद कर लीं जब शीला ने धीरे-धीरे उसके लंड को अपने मुँह में लेना शुरू किया.. उसकी जीभ नीचे से ऊपर तक लंड को चाट रही थी, जबकि एक हाथ से उसके अंडकोष को दबा रही थी.. अचानक शीला रुकी और पियूष को शावर क्यूबिकल में धकेल दिया.. "अब मेरी बारी," उसने कहा और ठंडे पानी का नॉब खोल दिया..
पियूष चिल्लाया जब बर्फ़ जैसा पानी उसके शरीर पर पड़ा, लेकिन शीला ने उसे वहीं रोके रखा, अपने शरीर से उसके सीने को दबाए हुए.. "तुम्हारे लंड को फिर से तैयार करने का यह सबसे अच्छा तरीका है," वह हँसी और अपने स्तनों को उसके सीने पर रगड़ने लगी.. ठंडे पानी में भी पियूष का लंड फिर से सख्त होने लगा, जिसे देखकर शीला ने गरम पानी चालू कर दिया..
भाप फिर से क्यूबिकल में भरने लगी जब शीला ने पियूष को घुमाया और उसकी पीठ को दीवार से सटा दिया.. उसने अपने घुटनों के बल बैठकर पियूष के लंड को फिर से अपने मुँह में ले लिया, इस बार और गहराई तक.. पियूष के हाथ शीला के गीले बालों में फँस गए जब वह उसके लंड को निगलने की कोशिश कर रही थी.. "ओह भाभी... कमाल का चूसती हो आप," उसने कराहते हुए कहा..
शीला ने अचानक उठकर पियूष को चूमा, उसकी जीभ उसके मुँह में घुस गई.. फिर वह पलटी और उसने पियूष के हाथों को अपने नितंबों पर रखवाया और खुद उसके लंड को अपनी चूत के बाहर रगड़ने लगी.. "अब डाल अंदर," उसने फुसफुसाया और धीरे-धीरे आगे पीछे होते हुए उसके लंड को अपने अंदर लेने लगी..
पियूष ने आँखें बंद कर लीं जब शीला की गर्म चूत उसे पूरी तरह निगल गई.. वह धीरे-धीरे हिलने लगी, अपने हाथों से बबले मसलते हुए.. शावर का गर्म पानी उनके शरीरों पर बह रहा था, जिससे उनकी त्वचा चमक रही थी.. शीला ने अपनी गति बढ़ा दी, उसके स्तन तेजी से हिल रहे थे..

"ओह पियूष... बहोत मज़ा आ रहा है" शीला ने कराहते हुए कहा.. उसने अपने हाथों से अपने स्तनों को मसलना शुरू किया, निप्पल्स को चुटकी लेते हुए.. पियूष ने शीला के हिप्स को पकड़ा और उसे और तेजी से ऊपर-नीचे करने लगा..
शीला ने अपना सिर पीछे झुकाया और जोर से कराह उठी जब पियूष ने उसे एक तेज धक्का दिया.. "हाँ! ऐसे ही! और जोर से!" उसने चिल्लाते हुए कहा.. वह अपने ऊपर होने वाले हर धक्के का मजा ले रही थी, उसकी चूत से पानी की तरह रस बह रहा था..
पियूष ने शीला को उठाकर शावर से बाहर धकेल दिया.. उसे बाथरूम के काउंटर पर बैठा दिया और उसके बड़े स्तनों को चूसने लगा.. शीला ने पियूष के सिर को अपनी छाती पर दबाया और उसके बालों को जकड़ लिया..
"अब मेरी पीठ फेरो," शीला ने आदेश देते हुए कहा.. पियूष ने उसे घुमा दिया और शीला ने खुद को काउंटर पर झुका लिया, अपनी गोल गाँड को उसकी तरफ उछालते हुए.. पियूष ने थूक लेकर उसकी चूत और गाँड के बीच में लगाया और अपना लंड फिर से उसके अंदर डाल दिया..
"ओह.. फाड़ देगा मेरी..!!" शीला चिल्लाई लेकिन उसने अपनी गाँड को और पीछे धकेला.. पियूष ने उसके कूल्हों को जकड़ लिया और तेजी से धक्के मारने लगा.. शीला की चीखें बाथरूम की दीवारों से टकरा रही थीं..

उसने अपनी उँगलियों से काउंटर को पकड़ लिया जब पियूष ने उसकी चूत में एक जबरदस्त धक्का दिया.. "येस! ठीक वहाँ! और अंदर!" शीला के शरीर से पसीना और पानी की बूँदें टपक रही थीं..
पियूष ने अपना लंड बाहर निकाला और शीला को घुमा दिया.. उसने उसे काउंटर पर बैठा दिया और अपना मुँह उसकी चूत पर लगा दिया.. शीला ने पियूष के बाल पकड़ लिए जब उसकी जीभ ने उसके चूत के छेद को चाटना शुरू किया.. "ओह्ह...तुम्हारी जीभ...ओह मर गई!"
वह तेजी से उसकी चूत को चाट रहा था, अपनी जीभ को अंदर तक घुसा रहा था.. शीला का सर पीछे झुक गया और उसने अपने स्तनों को मसलना शुरू कर दिया.. "मैं...मैं झड़ने वाली हूँ...ओह्ह!"
पियूष की जीभ शीला की चूत के अंदर तक पहुँच गई, उसके गीले छेद को चीरती हुई.. शीला के शरीर में एक जबरदस्त झटका लहराया और उसकी चूत से गर्म पानी की धारा निकल पड़ी.. "ओह्ह माँ! मैं गई!" उसने चिल्लाते हुए पियूष के बालों को जकड़ लिया..
पियूष ने अपना मुँह उठाया, उसकी ठोड़ी शीला के रस से चमक रही थी.. "अब तुम्हारी बारी," शीला ने हांफते हुए कहा और काउंटर से नीचे उतर कर घुटनों के बल बैठ गई.. उसने पियूष के मुरझाए हुए लंड को अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे मसलना शुरू किया.. "इसे फिर से खड़ा करने में मुझे ज्यादा वक्त नहीं लगेगा," उसने मुस्कुराते हुए कहा और अपने मुँह में ले लिया..
शीला की गर्म सांसों ने पियूष के लंड को फिर से जीवित कर दिया.. वह उसे गहराई तक ले जा रही थी, अपनी जीभ से सुपाड़े को चाटते हुए.. पियूष की आँखें झपक गईं जब शीला ने अचानक उसके अंडों को चूसना शुरू कर दिया.. "ओह बाप रे!" उसकी सांस तेज हो गई..
थोड़ी देर में ही पियूष का लंड फिर से पत्थर की तरह खड़ा हो चुका था.. शीला ने उसे छोड़ा और खड़ी हो गई.. "अब बिस्तर पर चलते हैं," उसने कहा और पियूष का हाथ पकड़ कर बाथरूम से बाहर खींच लिया..
बेडरूम में जाते ही शीला ने पियूष को बिस्तर पर गिरा दिया और पियूष के ऊपर सवार हो गई.. पियूष के लंड को अपनी चूत के छेद पर रगड़ते हुए शीला ने धीरे से अपना वजन नीचे डाला.. "ओह्ह येस...येस..." वह धीरे-धीरे उस पर नीचे-ऊपर होने लगी..
पियूष के हाथ शीला के भारी स्तनों पर चले गए, उन्हें मसलते हुए.. शीला ने अपनी गति बढ़ा दी, अपनी चूत को उसके लंड पर जोर-जोर से पटकना शुरू किया.. "ओह तुम्हारा लंड...आह्ह!" वह चिल्ला रही थी..
अचानक शीला रुकी और पियूष से कहा, "मुझे पीछे से चोद.." वह तुरंत उसके ऊपर से उतरी और बिस्तर पर हाथ-घुटनों के बल लेट गई, अपनी गोल गांड को उसकी तरफ उठाते हुए.. पियूष तुरंत खड़ा हुआ और उसके पीछे आकर खड़ा हो गया.. उसने अपने हाथों से शीला के चूतड़ों को फैलाया और अपना लंड उसकी चूत के छेद पर रगड़ने लगा..

"ओह हां...ऐसे ही," शीला ने सिसकते हुए कहा जब पियूष का गर्म लंड उसकी गीली चूत को छू रहा था.. अचानक पियूष ने जोर से धक्का दिया और उसका पूरा लंड शीला की चूत के अंदर घुस गया.. "आहह!" शीला चिल्लाई, उसकी उंगलियाँ चादर को जकड़ गईं..
पियूष ने एक लयबद्ध गति शुरू की, हर धक्के के साथ शीला के चूतड़ों पर ताली बजाते हुए.. शीला की चूत से गर्म पानी की धारा निकल रही थी जो पियूष के जांघों को गीला कर रही थी.. "ओह तुम मुझे मार डालोगे!" शीला चिल्लाई जब पियूष ने विशेष रूप से जोरदार धक्का दिया..
अचानक पियूष ने अपना लंड बाहर निकाला और शीला को घुमा दिया.. "क्या हुआ?" शीला ने हांफते हुए पूछा.. पियूष ने जवाब नहीं दिया, बस उसे बिस्तर पर पीठ के बल लेटा दिया और उसकी टांगों को कंधों पर रख लिया.. शीला की चूत पूरी तरह से खुली हुई थी, उसका गुलाबी छेद स्पष्ट दिख रहा था.. पियूष ने अपना लंड फिर से अंदर डाला, इस बार और भी गहराई तक.. "ओह्ह मेरी चूत फट जाएगी!" शीला चिल्लाई.. वैसे ये सारे शीला के नखरे ही थे.. घोड़े का लंड भी शीला के भोसड़े को फाड़ नहीं सकता था..
पियूष ने उसके स्तनों को जोर से दबाते हुए तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए.. शीला के शरीर से पसीने की बूंदें टपक रही थीं, उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी.. वह अपने हाथों से अपने स्तनों को मसलने लगी, निप्पलों को घुमाते हुए.. "ओह्ह और जोर से... मेरी फाड़ दे आज!" वह चिल्ला रही थी..

पियूष ने अपनी गति और तेज कर दी.. कमरे में सिर्फ उनकी हांफने और शरीरों के टकराने की आवाजें गूंज रही थीं.. शीला ने अचानक अपनी आंखें बंद कर लीं और उसका शरीर कांपने लगा.. "निकल रहा है.. ओह्ह मैं झड़ रही हूँ!" उसने चीखते हुए कहा.. उसकी चूत से गर्म पानी की धार फूट पड़ी, जो पियूष के लंड और जांघों को भिगो रही थी..
पियूष ने भी अपनी गति तेज कर दी.. उसने शीला की टांगों को और जोर से पकड़ा और अपने लंड को पूरी तरह से अंदर धकेल दिया.. "ओह भाभी.. मेरा भी..." उसने हांफते हुए कहा और फिर उसका गर्म वीर्य शीला की चूत के अंदर फट पड़ा.. शीला ने अपनी आंखें खोलीं और पियूष की तरफ देखते हुए मुस्कुरा दी.. "तुम्हारा लंड अभी भी खड़ा है," उसने कहा, अपनी चूत में उसके लंड को महसूस करते हुए..
पियूष ने धीरे-धीरे अपना लंड बाहर निकाला और शीला के बगल में लेट गया.. वे दोनों हांफ रहे थे, उनके शरीर पसीने से लथपथ थे.. शीला ने अपना हाथ पियूष के जांघों पर रखा और धीरे से उसके लंड को सहलाने लगी.. "तुम्हारा लंड मुझे पागल कर देता है," उसने कहा, उसके कानों में फुसफुसाते हुए..

पियूष ने शीला की तरफ देखा और उसके होंठों को चूम लिया.. "आपकी चूत भी कुछ कम नहीं है भाभी.. और खासकर आपके ये बड़े बड़े बबले" उसने जवाब दिया.. उनका चुंबन धीरे-धीरे गहरा होने लगा, उनकी जीभें एक-दूसरे से लड़ने लगीं.. शीला ने पियूष को अपने ऊपर घुमा दिया और उसके लंड को फिर से अपनी चूत के छेद पर रख लिया.. "एक और बार," उसने कहा, उसकी आंखों में वासना भरी हुई थी..
पियूष ने कोई जवाब नहीं दिया, बस अपना लंड अंदर धकेल दिया.. शीला ने आंखें बंद कर लीं और एक लंबी सांस ली.. उसकी चूत अभी भी गीली थी, और पियूष का लंड आसानी से अंदर चला गया.. उन्होंने धीमी गति से संभोग करना शुरू किया, इस बार जल्दबाजी नहीं थी.. शीला ने अपने हाथों से पियूष के कंधों को पकड़ लिया और उसकी हर गति का आनंद लिया..
कमरे में सिर्फ उनकी हांफने की आवाजें और बिस्तर के क्रेक की आवाजें गूंज रही थीं.. बाहर बारिश अभी भी जारी थी, और बिजली की चमक कभी-कभी कमरे को रोशन कर देती थी.. शीला ने पियूष की पीठ पर अपने नाखूनों के निशान बना दिए, जब उसने अपनी गति तेज कर दी.. "ओह्ह येस... ऐसे ही..." उसने चिल्लाते हुए कहा..
पियूष ने उसकी टांगों को और जोर से फैला दिया और गहरे धक्के मारने शुरू कर दिए.. शीला का शरीर हर धक्के के साथ बिस्तर पर हिल रहा था.. उसने अपने हाथों से अपने भारी स्तनों को मसलना शुरू कर दिया, निप्पलों को घुमाते हुए.. "और जोर से लगा... और गहरा..." वह चिल्लाई..
अचानक पियूष ने उसे पलट दिया और उसकी पीठ के बल लेटा दिया.. उसने शीला की एक टांग को अपने कंधे पर रख लिया और दूसरी को बिस्तर पर फैला दिया.. इस नई पोजीशन में उसका लंड शीला की चूत में और गहराई तक जा रहा था.. "ओह गॉड... ऐसे नहीं..." शीला चिल्लाई, लेकिन उसकी आवाज में दर्द नहीं, बल्कि आनंद था..
पियूष ने उसके स्तनों को जोर से दबाया और तेजी से धक्के मारने लगा.. शीला के मुंह से लगातार आहें निकल रही थीं.. वह अपने हाथों से बिस्तर की चादर को जोर से पकड़े हुए थी, जैसे वह किसी चीज को थामने की कोशिश कर रही हो.. "ओहह कितनी बार झड़ूँगी मैं..." उसने हांफते हुए कहा..
उसी पल बाहर बिजली कड़की और तेज रोशनी ने पूरे कमरे को भर दिया.. शीला का चेहरा आनंद से विकृत हो गया था.. उसकी चूत में एक तेज झटका महसूस हुआ और फिर उसके पूरे शरीर में कंपन फैल गया.. उसके स्तन जोर-जोर से हिल रहे थे जबकि पियूष ने उस पर जमकर हमला किया हुआ था..
"ओह्ह... ओह्ह... ओह्ह..." शीला की आवाज़ बिखर गई.. उसकी आँखें लुढ़क गईं और मुंह से लार की धारा बह निकली.. पियूष ने अपनी गति और तेज कर दी, उसका लंड शीला की चूत की गहराइयों तक जा पहुंचा था.. शीला के शरीर में एक और झटका लगा और उसकी चूत से गर्म पानी की धारा निकल पड़ी..
पियूष ने अब अपना संयम खो दिया.. उसने शीला के कूल्हों को जोर से पकड़ा और अपने लंड को पूरी ताकत से अंदर धकेल दिया.. "ओहह आह्ह आह्ह.." वह चिल्लाया.. शीला ने अपने हाथों से अपने स्तनों को मसलते हुए उसे और उत्तेजित किया.. "अंदर... अंदर निकाल दे..." वह चीखी..
पियूष का शरीर अकड़ गया और उसने एक लंबी आह भरी.. गर्म वीर्य की कुछ बूंदें शीला की चूत की गहराइयों में जाकर गिरी.. वह कुछ पलों तक स्थिर रहा, फिर धीरे-धीरे अपना लंड बाहर निकाला.. शीला ने अपनी टांगें फैला दीं और गहरी सांस ली.. उसकी चूत अभी भी धड़क रही थी..
"कितनी बार चढ़ा मुझ पर आज?" शीला ने थकी हुई मुस्कान के साथ पूछा.. उसने अपनी उंगलियों से अपनी चूत को छुआ और फिर पियूष के सीने पर उसका रस मल दिया.. "चार बार? पांच?"
पियूष ने अपनी आँखें बंद कर लीं और मुस्कुराया.. "गिनती ही भूल गया.. आपकी चूत का नशा ही कुछ अलग है भाभी.." उसने शीला की तरफ देखा और उसके भीगे हुए बालों को संवारा.. बाहर बारिश अब हल्की हो गई थी, लेकिन हवा अभी भी गर्म थी..
शीला ने अपने हाथों से अपने भारी स्तनों को उठाया और उन्हें दबाया.. "अब तो इनमें दर्द हो रहा है.. तूने कितनी बार चूसा इन्हें?"
पियूष ने शीला के निप्पल्स को अपनी उंगलियों से दबाते हुए कहा, "मैं तो अभी और चूसना चाहता हूँ.." उसकी आँखों में वही पुरानी चिंगारी फिर से जगमगा उठी.. शीला ने अपनी आँखें झपकाईं और फिर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.. उनका चुंबन धीरे-धीरे आगे बढ़ा, फिर जैसे-जैसे पियूष का हाथ उसकी जांघों पर फिसला, शीला की सांसें तेज हो गईं..
"थोड़ा रुक जा," शीला ने अचानक चुंबन तोड़ते हुए कहा.. उसने बिस्तर से उठकर कमरे के बीचोंबीच खड़ी हो गई.. बारिश की हल्की फुहार खिड़की से अंदर आ रही थी, जो उसके गीले शरीर पर गिरकर और भी आकर्षक बना रही थी.. "इस बार मैं चाहती हूँ कि तू मुझे खड़े-खड़े चोदे.."
पियूष ने एक भावशून्य मुस्कान के साथ सर हिलाया और बिस्तर से उठकर उसके पास आ गया.. शीला ने अपनी पीठ उसकी तरफ कर ली और अपने चूतड़ों को हिलाते हुए कहा, "पहले इन्हें चाट.." पियूष ने घुटनों के बल बैठकर उसके गोल नितंबों को अपने हाथों से फैला लिया और जीभ से उसकी गांड के छेद को चाटना शुरू कर दिया.. शीला की आँखें ऊपर को लुढ़क गईं और उसने अपने हाथों से अपने स्तनों को मसलते हुए एक लंबी आह भरी..

अचानक शीला ने पीछे मुड़कर पियूष के बाल पकड़े और उसे खींचकर खड़ा किया.. "अब अपना लंड अंदर डाल," उसने कर्कश आवाज में कहा.. पियूष ने अपना कड़ा हुआ लंड उसकी गीली चूत के छेद पर रखा और धीरे से धकेलना शुरू किया.. शीला ने अपने सिर को पीछे की ओर झुकाया और उसके कंधे पर दांत गड़ा दिए जब उसका लंड पूरी तरह से अंदर समा गया..
खिड़की से आती हुई ठंडी हवा उनके गर्म शरीरों से टकरा रही थी.. शीला ने अपने हाथों से खिड़की की चौखट पकड़ ली जबकि पियूष उसकी पीठ से चिपका हुआ उसे जोर-जोर से धकेल रहा था.. उसकी चूत के भीतर लंड की गर्मी और बाहर की ठंडी हवा के संयोग ने शीला को एक अजीब सी सनसनी से भर दिया..
"ओह्ह... ठंडी हवा... और तेरा गरम लंड... आह्ह!" शीला के शरीर में एक झटका सा दौड़ गया.. पियूष ने उसकी प्रतिक्रिया देखकर और तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए.. उसने एक हाथ से उसके बाल पकड़े और दूसरे से उसके भारी स्तन को मसलना शुरू किया..
शीला ने अपनी आँखें बंद कर लीं और खिड़की के शीशे पर अपनी सांस से धुंध बनाते हुए कहा, "और तेज... और गहरे... ओह भगवान!" उसकी चीखें कमरे में गूंजने लगीं जब पियूष ने उसे दीवार से टकरा दिया और उसके कूल्हों को जोर से पकड़कर और भी ज़ोरदार धक्के देना शुरू कर दिया..
अब पियूष ने शीला को पलट दिया और उसकी एक टांग को उठाकर अपने कंधे पर रख लिया.. शीला की पीठ दीवार से सटी हुई थी जबकि पियूष ने उसे इस नई स्थिति में चोदना जारी रखा.. "आपकी चूत... इतनी गर्म... आह्ह..." पियूष ने अपने दांतों से अपना निचला होंठ दबाते हुए कहा.. शीला की आंखें लुढ़क गईं जब उसने अपनी दूसरी टांग को भी उठा लिया और उसे पूरी तरह हवा में उठाकर धकेलना शुरू कर दिया..
बारिश की बूंदें अब खिड़की से अंदर आकर उनके शरीरों पर गिर रही थीं.. शीला के स्तनों पर पानी की बूंदें लुढ़क रही थीं जो पियूष के लिए और भी उत्तेजक दृश्य था.. उसने अपना मुंह आगे बढ़ाया और शीला के एक निप्पल को अपने मुंह में ले लिया.. शीला चीख पड़ी जब उसने जोर से काटा और साथ ही उसने अपने लंड को और भी जोर से अंदर धकेला..
"ऊईईई माँ.. ओह्ह..." शीला ने अपने हाथों से अपने ही स्तनों को मसलते हुए कहा.. उसकी चूत की मांसपेशियां तेजी से सिकुड़ने लगीं जैसे वह एक और बड़े ऑर्गेज्म की कगार पर हो.. पियूष ने उसके इस संकेत को समझ लिया और अपनी गति और तीव्र कर दी.. उसके लंड के हर धक्के से शीला का शरीर दीवार से टकराता और वापस उसके लंड पर गिरता..
तभी शीला के मुंह से एक ऐसी चीख निकली जिसे सुनकर पियूष ने भी अपनी आंखें बंद कर लीं.. उसकी चूत से गर्म पानी की धारा बह निकली और उसका पूरा शरीर ऐंठ गया.. पियूष ने अपने लंड को और भी गहराई तक धकेला और खुद भी एक जोरदार आह भरते हुए ठंडा हो गया..
"आह्ह... ओह्ह मर गई..." शीला ने थककर अपने हाथ पियूष के कंधों पर डाल दिए.. उसकी सांसें तेज थीं और शरीर पसीने से लथपथ.. पियूष ने धीरे से उसकी टांगों को नीचे किया और उसे अपनी बाहों में समेट लिया.. बारिश की ठंडी बूंदें अब उनके गर्म शरीरों पर गिरकर भाप बन रही थीं..
"कितनी बार हो चुका है आज?" शीला ने थकी हुई मुस्कुराहट के साथ पूछा, अपनी उंगलियों से पियूष के सीने पर बिखरे अपने ही रस को फैलाते हुए..
पियूष ने अपनी आंखें घुमाईं, "शायद पांचवीं या छठी बार? पता नहीं.. आज तो मेरा मन भर ही नहीं रहा है.." पीयूष को भी ताज्जुब हो रहा था की बार बार भाभी चुदाई की गिनती क्यों रख रही थी..!!
शीला की आँखों में एक शैतानी चमक आ गई जब उसने पियूष के जवाब सुना.. "छठी बार?" उसने अपनी उंगलियों को उसके सीने पर घुमाते हुए कहा, "और अभी तो हमारी रात बस शुरू हुई है.." पियूष ने उसकी कमर को थपथपाया जब शीला अचानक उठ खड़ी हुई, उसका शरीर अभी भी उत्तेजना से कांप रहा था..
खिड़की से आ रही बारिश की बूंदें अब शीला के गोरे बदन पर नाच रही थीं.. उसने अपने भारी स्तनों को थामा और धीरे से मसलते हुए कराह उठी, "मेरे बूब्स दर्द कर रहे हैं...तुम्हारे ज्यादा काटने से.." पियूष उसकी तरफ लपका और उसके निप्पलों को अपने होंठों से सहलाने लगा.. शीला ने अपनी उंगलियों से उसके बालों में घुसकर उसका सिर अपनी छाती से दबा लिया..
"इंतज़ार करो," शीला ने अचानक उसे धक्का देते हुए कहा और ड्रॉइंगरूम की तरफ लड़खड़ाते हुए चली गई.. वहाँ से टेबल पर रखी शराब की बोतल लेकर वापिस लौटी.. "व्हिस्की का एक घूंट," उसने मुस्कुराते हुए कहा और बोतल को अपने होठों से लगा लिया.. पियूष ने देखा कि कैसे शराब की बूंदें उसके ठुड्डी से होकर उसके स्तनों तक लुढ़क गईं..
वह तेजी से उठा और शीला को अपनी बाहों में उठा लिया..
"तू पिएगा नहीं?" शीला ने पूछा
"आप पिलाओगी तो जरूर पीऊँगा" पीयूष ने कहा
"रुक.. मैं पिलाती हूँ तुझे.." कहते हुए शीला ने धक्का देकर पीयूष को बेड पर लेटा दिया.. शराब की बोतल हाथ में लेकर वो पीयूष के मुंह पर सवार हो गई.. अपने विराट बबलों पर उसने व्हिस्की की धार की.. शराब उसके स्तनों से बहते हुए.. नाभि से होकर.. जंघाओं के मूल से उसके भोसड़े के होंठों पर गुजरते हुए पीयूष के मुंह पर गिरने लगी.. पीयूष प्यासे कुत्ते की तरह शीला का भोसड़ा चाटने लगा.. शराब पीने का इससे अनोखा तरीका और क्या हो सकता है..!!
बारिश की आवाज अब तेज हो चुकी थी, खिड़की से टकराती हुई.. शीला ने अपने पैरों को पियूष की कमर पर लपेट लिया जब वह उस पर झुका.. "क्या तुम्हें पता है," उसने उसके कान में फुसफुसाया, "मैंने सोचा था कि तुम इतने सालों में कमजोर हो गए होगे.. लेकिन तुम तो..." उसकी बात अधूरी रह गई जब पियूष ने अचानक उसकी गर्दन पर दांत गड़ा दिए..
"क्या तो?" पियूष ने उसके कान के पास गुर्राते हुए पूछा, अपने लंड को उसकी चूत के बाहर रगड़ते हुए.. शीला की आंखें बंद हो गईं जब उसने अपनी एड़ियों से उसकी पीठ को दबाया.. "तुम तो...पहले से भी ज्यादा ताकतवर हो," वह कराह उठी जब पियूष ने एक झटके में अपने लंड को उसकी गीली चूत में धंसा दिया..
उनकी गति शुरू में धीमी थी, लेकिन जैसे-जैसे शीला की सांसें तेज होती गईं, पियूष ने अपने धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी.. शीला ने अपने हाथों से बिस्तर की चादरें मुट्ठी में भींच लीं जब पियूष ने उसकी एक टांग को अपने कंधे पर रख लिया और और भी गहराई से घुसने लगा.. "ओह्ह... ये कोण... आह्ह वही वाला...!" शीला का सिर पीछे की तरफ झटका जब पियूष ने उसके G-स्पॉट पर सीधा प्रहार किया..

बारिश की बूंदें खिड़की से टकरा रही थीं, लेकिन कमरे के अंदर का तापमान बढ़ता जा रहा था.. पियूष के माथे से पसीने की बूंदें शीला के स्तनों पर गिर रही थीं जब वह उस पर झुका हुआ था.. उसने अपने दांतों से शीला के निप्पल को दबोच लिया, जिससे वह चीख उठी.. "हां... काटो मुझे... ओह्ह तुम्हारे दांत... आह्ह!"
पियूष ने अचानक उसे पलट दिया और कुत्ते की मुद्रा में ले आया.. शीला ने अपने चूतड़ों को हवा में उठा लिया, पियूष के लंड का स्वागत करने के लिए तैयार.. पहले धक्के ने उसे आगे की तरफ झटका दिया, लेकिन उसने अपनी कोहनियों से बिस्तर पर जमकर पकड़ बना ली.. "और... और जोर से...!" उसकी आवाज़ लड़खड़ा रही थी जब पियूष ने अपने दोनों हाथों से उसकी कमर को पकड़कर उस पर जमकर प्रहार किया..
शीला का शरीर अब फिर से गर्म हो चुका था.. उसकी चूत से निकलने वाला रस पियूष के जांघों पर बह रहा था.. वह अपने हाथों से बिस्तर पर टिकी हुई थी, लेकिन जब पियूष ने अचानक उसके बाल पकड़कर खींचे, तो उसका सिर पीछे की तरफ झटका और उसकी पीठ एक धनुष की तरह मुड़ गई.. "ओह्ह मेरे बाल... आह्ह येस्स...!"

पियूष ने शीला के बालों को ज़ोर से खींचते हुए उसकी गर्दन पीछे की ओर झुका दी.. बारिश की बूंदें खिड़की से टकरा रही थीं मानो उनके जुनून को और भड़का रही हों.. "आपकी चूत... भट्ठी जैसी गर्म है..." पियूष ने गुर्राते हुए कहा, अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ाते हुए..
शीला के नाखून बिस्तर की चादरों में घुस गए जब पियूष ने अचानक उसकी कमर को ऊपर उठा दिया और अपने लंड को पूरी तरह से अंदर धकेल दिया.. उसकी चीख कमरे में गूंज उठी, "ओह्ह मेरी गांड... आह्ह तुम तो... उह्ह...!" उसकी आवाज़ टूट रही थी जैसे ही पियूष ने उसकी एड़ियों को पकड़कर उसके पैरों को और फैला दिया..
बाहर बिजली चमकी और उसकी रोशनी में शीला का पसीने से तरबतर बदन चमक उठा.. पियूष ने एक हाथ से उसके बाल पकड़े और दूसरे से उसके भारी स्तनों को मसलना शुरू कर दिया.. "ओह्ह वो जगह... फिर से...!" शीला की आँखें पलकों के पीछे छिप गईं जब पियूष का लंड उसके अंदर उस स्थान पर टकराया जिससे उसका पूरा शरीर झटकों से भर गया..
अब पियूष ने उसे पलट दिया और उसके ऊपर आ गया.. शीला ने अपनी टाँगें उसकी कमर पर लपेट लीं जैसे ही वह फिर से उसके अंदर घुसा.. उनके शरीरों के टकराने की आवाज़ बारिश की आवाज़ में घुल मिल गई.. पियूष ने उसके होंठों को जकड़ लिया, उसकी सांसें चुराते हुए जबकि उसकी हिप्स लगातार उससे टकरा रही थीं..
"ओह्ह...इस तरह नहीं..." शीला ने हांफते हुए कहा जब पियूष ने अचानक उसकी टाँगों को कंधों पर रख दिया.. उसकी चूत पहले से कहीं ज्यादा गहराई तक खुल गई थी.. पियूष के हर धक्के से अब उसके गर्भ तक कंपन हो रहा था.. शीला ने चादरें मुट्ठियों में भींच लीं जैसे ही वह उसके अंदर और गहरे धँस गया..
उसकी आँखें लुढ़क गईं जब पियूष ने एक हाथ से उसके गले को थाम लिया और दूसरे से उसके स्तनों को मसलना शुरू कर दिया.. "ओह्ह...वो वाली जगह...फिर से..." शीला के शब्द टूट रहे थे जब पियूष का लंड उसके अंदर उस स्पॉट पर टकराया जहाँ से उसका पूरा शरीर अकड़ जाता था..
बाहर बिजली चमकी और उसकी रोशनी में शीला का चेहरा एक अजीब सी मुस्कान से भर गया.. "क्या हुआ?" पियूष ने हांफते हुए पूछा, अपने धक्कों की रफ़्तार धीमी करते हुए.. शीला ने अपनी उंगलियों से उसकी छाती पर खरोंचें खींचीं, "कुछ नहीं... बस सोच रही थी कि तुम्हारा ये लंड मेरी चूत में कितनी बार फट चुका है आज रात.."
पियूष ने गर्दन झटक दी और तेज़ी से फिर से धक्का मारा.. शीला की आँखें पलकों के पीछे छिप गईं जैसे ही उसका शरीर एक बार फिर से झटके से भर गया.. "उसके कूल्हों को अपनी हथेलियों से पकड़कर और तेज़ी से धकेलना शुरू कर दिया..
शीला ने अपनी टाँगें उसकी कमर से और ज्यादा कसकर लपेट लीं, अपनी एड़ियों से उसके नितंबों को दबाते हुए.. "हाँ... ऐसे ही... ओह्ह और तेज़!" उसकी आवाज़ बिजली की गड़गड़ाहट में डूब गई.. बारिश की बूंदें खिड़की से टकरा रही थीं, जैसे वो भी उनके इस जंगली नृत्य में शामिल होना चाहती हों..
शीला का शरीर एक बार फिर से अकड़ गया.. उसकी चूत की दीवारें पियूष के लंड को और ज्यादा कसकर दबा रही थीं, जैसे कोई जानवर अपने शिकार को निगल रहा हो.. वो अपनी सारी ताकत से पीछे की तरफ धकेल रही थी, ताकि पियूष का लंड उसकी चूत की सबसे गहरी जगह तक पहुँच जाए..
"ओह्ह.. ओह मार डाला तूने.." शीला ने हांफते हुए कहा, जब पियूष ने अपने आखिरी धक्के के साथ उसकी चूत में झड़ने का प्रयास किया.. पर वीर्य अब उसके अंडकोशों में बचा ही नहीं था निकलने के लिए.. ये तो दवाई का असर था जो उसके लंड को खड़ा रख पा रहा था
पियूष का शरीर शीला के ऊपर सुस्ता गया.. उसके कंधों पर शीला के नाखूनों के गहरे निशान थे.. बारिश की बूंदें खिड़की से अन्दर आकर उनके पसीने से तर बदन पर गिर रही थीं..
शीला ने धीरे से पियूष को अपने ऊपर से हटाया और बिस्तर पर लेट गई.. उसकी चूत से पियूष का माल धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था.. उसने अपने उँगलियों से उसे सहलाते हुए पियूष की तरफ देखा, जो अभी भी हांफ रहा था.. "अब तो तेरा लंड फिर से खड़ा हो जाएगा ना?" शीला ने मुस्कुराते हुए कहा..
पियूष ने हंसते हुए कहा, "भाभी.. आज रात को ही मार डालोगी क्या मुझे..!! अभी अभी तो मेरा निकला है और वो भी पता नहीं कितनी बार..!!" पर शीला ने उसके मुरझाए हुए लंड को अपने हाथ में ले लिया और धीरे-धीरे सहलाना शुरू कर दिया.. "ओह.. नहीं.. शीला भाभी.. अब नहीं.." पियूष ने कराहते हुए कहा.. उसका लंड दर्द कर रहा था.. शरीर थकान से चूर हो चुका था.. शीला के हाथों की गर्मी से उसका लंड फिर से जवाब देने लगा..
शीला ने अपने रसीले होंठों को पियूष के कान के पास ले जाकर फुसफुसाया, "चल, इस बार मैं तुझे चोदूँगी.." ये कहकर उसने पियूष को बिस्तर पर पीठ के बल लिटा दिया और उसके ऊपर सवार हो गई.. पियूष का लंड अब भी आधा मुरझाया हुआ था.. शीला ने उसे अपनी चूत के छेद पर रगड़ते हुए कहा, "देख, कैसे तेरा लंड मेरी गीली चूत को ढूंढ रहा है.."
चुद-चुदकर शीला का भोसड़ा गरम गुफा में तब्दील हो गया था.. इसलिए उस मुरझाए लंड को अंदर डालने में ज्यादा तकलीफ नहीं हुई.. पियूष ने शीला के चूतड़ों को दबोच लिया और अपने लंड को उसकी चूत के अंदर धकेल दिया.. शीला ने सिर पीछे की तरफ झुकाते हुए एक लंबी आह भरी.. वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी, अपने स्तनों को पियूष के चेहरे के पास ले जाती हुई.. पियूष ने उसके निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर से चूसना शुरू कर दिया..

"ओह्ह... ठीक वैसे ही..." शीला ने हांफते हुए कहा, जैसे वो अपनी सारी ताकत इकट्ठी कर रही हो.. अचानक वो पियूष के ऊपर से उतर गई और उसके पैरों के बीच घुसकर उसके लंड को मुँह में ले लिया.. पियूष ने चीखते हुए बिस्तर की चादरें पकड़ लीं.. शीला की जीभ उसके सुपाड़े के नीचे घूम रही थी, जैसे कोई बच्चा आइसक्रीम चाट रहा हो..
बारिश की आवाज़ के बीच पियूष की सिसकियाँ और ज़ोरदार हो गईं जब शीला ने अपने दाँतों से हल्का सा काटा.. "ओहह भाभी.. मत करिए..." वो बुदबुदाया, पर शीला ने उसकी बात अनसुनी कर दी.. उसने अपनी एक उँगली पियूष की गाँड के छेद में घुसा दी, जिससे वो एकदम से अकड़ गया..

"क्या हुआ? डर गया?" शीला ने मुस्कुराते हुए पूछा, जबकि उसकी उँगली धीरे-धीरे अंदर-बाहर हो रही थी.. पियूष ने कोई जवाब नहीं दिया, बस अपनी आँखें बंद कर लीं.. शीला ने फिर से उसके लंड को चूसना शुरू कर दिया, इस बार और ज़ोर से.. उसकी दूसरी हाथ से पियूष के अंडकोष को दबाते हुए, वो उसके शरीर को हिला रही थी जैसे कोई खिलौना हो..
अचानक शीला रुक गई.. "उठो," उसने कहा.. पियूष ने आँखें खोलीं तो देखा कि शीला खिड़की के पास खड़ी है, अपने भारी स्तनों को बारिश के पानी से गीला कर रही है.. "यहाँ आओ," उसने पुकारा.. पियूष उठकर उसके पास गया.. शीला ने उसका हाथ पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया.. "अंदर डालो," उसने कहा.. पियूष ने बिना किसी हिचकिचाहट के उसकी गीली चूत में अपनी दो उँगलियाँ घुसा दीं.. लंड तो अब उसका हार चुका था.. शीला ने सिर पीछे झुकाते हुए एक लंबी आह भरी.. बारिश की ठंडी बूंदें उसके स्तनों से टकरा रही थीं, जबकि पियूष की गर्म उँगलियाँ उसके अंदर घूम रही थीं..

पीयूष शीला की इस भूख को देखकर अचंभित था.. क्या औरत है ये..!! इसकी भूख शांत ही नहीं होती..!! एक मर्द के बस की बात ही नहीं है ये भाभी.. एक साथ पाँच मर्द को भी थका सकती है..!!
"और तेज कर," शीला ने हांफते हुए कहा.. पियूष ने तीसरी उँगली जोड़ दी.. शीला की चूत पहले से ही फैल चुकी थी, पर अब वो और ज़्यादा खुलने लगी.. पियूष ने अपनी उँगलियों को तेज़ी से हिलाना शुरू कर दिया.. शीला ने अपने स्तनों को दबाते हुए चीख मारी.. "अभी मत रुकना," उसने कहा.. पियूष ने उसकी चूत के अंदर अपनी उँगलियाँ घुमाईं, उस स्पंजी दीवार को ढूंढते हुए जो उसके आने वाले ओर्गास्म की चेतावनी दे रही थी..

शीला ने अचानक पियूष का हाथ पकड़ लिया और उसे रोक दिया.. "मैं उंगलियों से झड़वाना नहीं चाहती.. मुझे लंड चाहिए.. इसे कैसे भी करके खड़ा कर"
पीयूष की शक्ल रोने जैसी हो गई.. हे भगवान.. आज ये मेरी जान ले लेगी..!!
शीला ने पियूष को बिस्तर की तरफ खींचा.. उसने पियूष को बिस्तर पर बैठाया और फिर उसके ऊपर सवार हो गई.. पियूष का अधमरा से लंड पर शीला अपनी बुर की फांक रगड़ने लगी..

फिर धीरे-धीरे नीचे बैठते हुए उसे अंदर लेने की कोशिश करने लगी.. लंड बीच रास्ते ही पिचक गया.. शीला ने पीयूष की आँखों में घिन से देखा.. पीयूष की आँखें झूक गई.. पर शीला ऐसे हार मानने वाली नहीं थी.. उसने वो पिचका हुआ लंड अपनी दोनों उंगलियों से पकड़ा और अपना भोसड़ा फैलाकर अंदर डाल दिया और ऊपर नीचे उछलने लगी..
"ओह माँ..." शीला ने सिर पीछे झुकाते हुए कहा.. वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी.. पियूष ने उसके भारी स्तनों को पकड़ लिया और उन्हें मसलना शुरू कर दिया.. इस आशा में की उसका लंड अंदर खड़ा हो जाए और उसकी इज्जत बच जाए.. शीला की चूत की गर्मी और उसके स्तनों का नरम मांस पियूष के हाथों को जैसे जलाने लगा था..
"तेज़... और तेज़..." शीला ने हांफते हुए कहा.. पियूष ने उसकी कमर पकड़कर उसे नीचे की ओर दबाया.. शीला की चीख बारिश की आवाज़ में दब गई..

शीला ने अपने नाखून पियूष के कंधों में गड़ा दिए.. वो अब पूरी तरह से उसके ऊपर झूल रही थी.. पियूष ने उसे उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया.. पीयूष के लंड में अब हल्के हल्के सख्ती आने लगी थी.. उसने शीला के पैरों को अपने कंधों पर रखा और फिर से अंदर घुस गया..
"हाँ... ऐसे ही... ओह मेरे राजा..." शीला ने अपनी आँखें बंद कर लीं.. पियूष के हर धक्के से उसका पूरा शरीर हिल रहा था.. उसके स्तन इतने तेज़ी से हिल रहे थे कि लग रहा था कोई दो गोल पत्थर उछल रहे हों.. पियूष ने अपना दाहिना हाथ उसके बाएँ स्तन पर मारा.. शीला की आँखें खुल गईं..
"और मार... ओह्ह... हाँ..." शीला ने उसकी कमर को अपनी टांगों से जकड़ लिया.. पियूष ने उसके दोनों स्तनों को पकड़कर जोर से मसलना शुरू कर दिया, उसके गुलाबी निप्पल उसकी उंगलियों के बीच से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे.. बारिश की बूंदें खिड़की से टकरा रही थीं, मानो उनके जंगी राग में शामिल होना चाहती हों..
"उह्ह... ऐसे ही... पूरा अंदर डाल..." शीला ने बिस्तर की चादर को मुट्ठी में भींच लिया.. बारिश की बूंदों की आवाज़ उनकी हांफती सांसों में डूब रही थी.. पियूष ने उसके कान के पास गरम सांस छोड़ते हुए कहा, "भाभी, आज तो आप किसी जिन्न की तरह मेरा सारा रस चूस रही है..."
शीला ने अपनी गीली पीठ उसके सीने से रगड़ते हुए जवाब दिया, "मेरी आग उसे ही भड़काने का हक है जिसके लंड में उसे बुझाने की ताकत हो" वो अचानक चीख उठी जब पियूष ने उसकी गांड पर एक तेज थप्पड़ मारा.. "हाँ... फिर मार..." उसने पलट कर पियूष के होंठों को अपने दांतों से दबा लिया..
वो उठकर बैठ गई और पियूष को धक्का देकर पीठ के बल लिटा दिया.. "अब मेरी बारी," उसने कहा और उसके लंड पर बैठ गई, धीरे-धीरे नीचे जाते हुए.. पियूष की आँखें फटी की फटी रह गईं जब शीला ने अपने भारी स्तनों को उसके चेहरे पर रख दिया.. "चूस," उसने आदेश दिया, और पियूष ने उसके निप्पल को मुँह में ले लिया..
बाहर बारिश की आवाज़ तेज़ हो रही थी, पर उनके कमरे में सिर्फ गीलेपन और गरमाहट की आवाज़ें गूँज रही थीं.. शीला ऊपर-नीचे होते हुए अपने हाथों से अपने स्तनों को दबा रही थी.. पियूष का लंड उसकी चूत में पूरी तरह समा चुका था, हर बार जब वो नीचे जाती तो उसका पेट उभर आता..
"ओह्ह... ये मज़ा... उह्ह... कभी खत्म न हो," शीला ने हांफते हुए कहा.. पियूष ने उसकी कमर पकड़ ली और जोर से ऊपर की ओर धक्का दिया.. शीला चिल्लाई, "हाँ! ऐसे ही! और जोर से!"
शीला की चिल्लाहट बारिश की आवाज़ में डूब गई जब पियूष ने उसे बिस्तर से उठाकर खिड़की की तरफ धकेल दिया.. ठंडी हवा ने उसके गीले शरीर पर चुभती हुई ठंडक फैला दी, पर अगले ही पल पियूष का गरम शरीर उसकी पीठ से चिपक गया.. "ओह्ह... साला कितनी ठंड है..." शीला ने अपने निप्पलों को खिड़की के शीशे से रगड़ते हुए कहा..
पियूष ने उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ा और एक झटके में अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया.. शीला का मुँह खुला का खुला रह गया, उसकी सांसें रुक सी गईं.. पियूष ने उसके कान में फुसफुसाया, "अब बोलिए... कैसा लग रहा है?" शीला ने हांफते हुए जवाब दिया, "ओह... ओह... बस... थोड़ा... रुक..." अब जब लंड खड़ा हो ही गया था तो पियूष का रुकने का कोई इरादा नहीं था.. उसने शीला को खिड़की के शीशे से चिपका दिया और जोर-जोर से धकेलना शुरू कर दिया..
खिड़की के शीशे पर शीला के भारी स्तन दबकर चपटे हो रहे थे.. उसकी साँसें गरम होकर शीशे पर धुंधली परत जमा रही थीं.. पियूष ने एक हाथ से उसके बाल खींचे और दूसरे हाथ से उसकी गांड के गड्ढे में अंगूठा घुसा दिया.. शीला चीख पड़ी, "आहह! नहीं... वहाँ मत... ओह्ह!" पर पियूष ने उसकी चीख को नज़रअंदाज करते हुए अपनी गति और तेज़ कर दी.. बारिश की बूंदें खिड़की पर टकरा रही थीं, मानो उनके जंगम प्रेम को देखने के लिए बेताब हों..
अचानक शीला ने पीछे हाथ बढ़ाकर पियूष की जांघों को पकड़ लिया.. "रुक... मैं... ओह्ह... मैं गिरने वाली हूँ..." वह हांफ रही थी.. पियूष ने उसे खींचकर बिस्तर की तरफ धकेला जहाँ शीला गिरते ही पलट गई और पियूष को ऊपर खींच लिया.. "अब धीरे... पूरा अंदर... ऐसे..." उसने निर्देश दिए जबकि उसके हाथ पियूष के कूल्हों पर थे, उसे नियंत्रित कर रहे थे.. पियूष ने आज्ञाकारी होकर धीरे-धीरे अपना लंड उसकी चूत में उतारा, हर इंच का आनंद लेते हुए..
शीला की आँखें बंद थीं, उसके होंठ काँप रहे थे.. "हाँ... ठीक वहाँ... ओह्ह..." वह मुस्कुराई जब पियूष ने उसके जी-स्पॉट को ढूंढ लिया.. उसने अपनी एड़ियों से पियूष की पीठ को दबाया, उसे और गहराई तक ले जाने के लिए.. कमरे में सिर्फ उनकी हांफने की आवाज़ें और बारिश की आवाज़ मिल रही थी.. पियूष ने झुककर उसके निप्पल को चूसा, शीला ने उसके बालों में अपनी उंगलियाँ फंसा दीं.. "और... और जोर से..." वह फुसफुसाई..
पियूष ने अपने घुटनों को मोड़ा और जोर से ऊपर धकेला.. शीला चिल्लाई, "ओह्ह! हाँ! ऐसे ही!" उसकी चूत पियूष के लंड को कसकर जकड़ रही थी, हर धक्के के साथ गरम पानी की धार बह रही थी.. पियूष ने उसकी टांगों को और फैलाया, अपने हाथों से उसके चूतड़ों को पकड़कर उसे अपनी तरफ खींचा.. शीला ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके होठों से लार की धारा बह रही थी.. "मुझे चोद... मुझे मार... ओह्ह!"
शीला ने अपनी आँखें खोलीं और पियूष के कंधों पर जोर से नाखून गड़ा दिए.. "रुक! मैं... मैं झड़ रही हूँ!" उसका पूरा बदन अकड़ गया, उसकी चूत में ऐंठन शुरू हो गई.. पियूष ने अपनी गति धीमी कर दी, पर रुका नहीं.. वह शीला को देख रहा था, उसके चेहरे पर आनंद के भाव, उसके स्तनों का तेजी से उठना-गिरना.. "

शीला ने उसकी गर्दन पकड़ ली और उसे अपनी तरफ खींचकर एक जबरदस्त चुंबन दिया.. उनके होंठों के बीच लार की डोर बन गई.. बाहर बारिश की आवाज़ और तेज़ हो गई, मानो आसमान भी उनके जुनून से प्रभावित हो गया हो.. शीला ने चुंबन तोड़ते हुए कहा, "अब तेरी बारी... मैं चाहती हूँ कि तू मेरे अंदर झड़े.."
पियूष को पता था की अब उसके टट्टो में वीर्य का एक कतरा भी शेष नहीं बचा था.. वो अब जैसे बिना कारतूस की बंदूक चला रहा था.. फिर भी उसने शीला की टांगों को अपने कंधों पर रख लिया और जोर से धकेलना शुरू कर दिया.. शीला की चीखें कमरे में गूँजने लगीं.. उसकी चूत पियूष के लंड को निचोड़ रही थी, हर धक्के के साथ स्राव की धार बह रही थी.. पियूष का साँस लेना मुश्किल हो रहा था, उसकी पीठ पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं.. "बस अब और नहीं हो पाएगा मुझसे..." उसने हाँफते हुए कहा..
शीला ने अपनी आँखें खोलीं और उसके होठों पर मुस्कान तैर गई.. "ठीक है फिर.. झड़ जा मेरे अंदर... पूरा... ओह्ह!" उसने उसकी कमर को अपनी एड़ियों से खींचा.. पियूष का सिर पीछे की तरफ झटका और उसने एक जोरदार धक्का लगाकर लंड को गहराइयों में उतार दिया.. "ओह्ह... हाँ... ऐसे ही..." वह मुस्कुराई जब पियूष का शरीर उस पर भारी हो गया..
कुछ देर बाद जब पियूष ने अपना सिर उठाया तो शीला उसे देखकर हँस पड़ी.. उसके बाल पसीने से चिपके हुए थे, आँखें थकान से धुंधली हो रही थीं.. अस्पताल से निकले मरीज जैसा हाल था पीयूष का
"अभी से थक गया?" शीला ने उसकी ठुड्डी पकड़कर कहा.. सुनकर पीयूष के तो होश उड़ गए.. फिर भी उसने मुस्कुराते हुए उसके निप्पल को दाँतों से काटा.. "अब थोड़ा आराम तो करने दीजिए.."
"मुझे अभी और करना है पीयूष.. ऐसे मझधार में मत छोड़ मुझे" शीला ने सिसकते हुए कहा... पीयूष को तो समझ नहीं आ रहा था की अब इसके तूफान को आखिर शांत कैसे करें..
पीयूष ने अपना एक हाथ शीला के पेट पर होते हुए उसके भोसड़े तक पहुंचा दिया.. शीला ने अपनी गर्दन को पीछे की तरफ झुकाया, उसके कंधे पर दाँत गड़ा दिए जब पीयूष की उंगलियाँ उसके जामुन जैसी क्लिट को ढूँढ़ने लगीं.. "ओह्ह! आह्ह.. उफ्फ़.." शीला की साँसें उखड़ने लगी थीं.. पीयूष को लगा की अब शीला की आग उसे उंगलियों से ही बुझानी होगी..

पियूष ने उसके कान में गर्म साँस छोड़ते हुए कहा, "अब मेरी उंगलियों का मज़ा लीजिए भाभी..." उसकी उंगलियों ने एक जटिल लय बनाई.. कभी क्लिट पर गोलाई में घूमते हुए, कभी चूत के भीतर से गुजरते हुए.. शीला का शरीर तार-तार हो रहा था, उसके नाखून पियूष की जाँघों में घुस गए.. बाहर बारिश की बूँदों ने खिड़की पर एक तेज़ ताल बजा दिया, जैसे उनकी हाँफने की आवाज़ को डुबोना चाहती हों..
"बस बहुत हुआ.. अब तेरे लंड को फिर से तैयार कर.. मुझे अंदर डलवाना है" शीला ने पलटने की कोशिश की, लेकिन पियूष ने उसकी कमर को जकड़ लिया.. उसने अपनी ठुड्डी उसके कंधे पर टिका दी, उसकी उंगलियों का दबाव बढ़ा दिया.. शीला की चीख कमरे में गूँजी जब उसका शरीर एकाएक अकड़ गया.. वह जैसे हवा में लटक गई थी, उसकी चूत से पानी की धारा बह निकली..

जब पियूष को महसूस हुआ की शीला सिर्फ उंगलियों से शांत नहीं होती तब वह अपने घुटनों के बल बैठ गया.. उसने शीला के पैरों को अपने कंधों पर टिकाया, उसकी चूत को अपने सामने खींच लिया.. उसकी जीभ ने एक लंबी, धीमी रेखा खींची.. गाँड से लेकर क्लिट तक.. शीला ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके हाथों ने चादर को जकड़ लिया.. पियूष ने उसकी चूत को अपने होंठों से चूसा, जैसे कोई प्यासा आदमी ओस की बूँदें चाट रहा हो..
शीला ने अपने घुटनों को मोड़ा, अपनी चूत को उसके मुँह की तरफ धकेला.. "और.. और गहरा," वह हाँफती हुई बोली.. पियूष ने अपनी जीभ को उसकी चूत के अंदर घुसा दिया, गोल-गोल घुमाते हुए.. उसकी नाक शीला के क्लिट से रगड़ खा रही थी, हर साँस के साथ उसकी गंध उसे और उत्तेजित कर रही थी..
अचानक शीला ने उसके बालों को जकड़ लिया, उसके मुँह को अपनी चूत पर दबाया.. "ऐसे नहीं.. ऐसे," उसने उसके सिर को हिलाते हुए कहा.. पियूष ने अपनी उँगलियों को उसकी चूत में घुसा दिया, जीभ से क्लिट को चाटते हुए.. शीला का शरीर झटके खाने लगा, उसकी साँसें तेज हो गईं..

"हाँ.. हाँ.. ठीक वहाँ.. ओह्ह!" उसकी आवाज़ काँप रही थी.. पियूष ने उसकी चूत से अपना मुँह हटाया और उसकी गहरी साँसों को सुनकर मुस्कुराया.. उसने अपने लंड को उसकी चूत के छेद पर रगड़ा, फिर धीरे से अंदर घुसा.. शीला ने अपनी आँखें खोलीं, उसकी तरफ देखा.. उसकी पुतलियाँ फैली हुई थीं, उसके होंठ गीले थे.. पियूष ने उसके स्तनों को अपने हाथों से भर लिया, उन्हें दबाते हुए आगे बढ़ा.. शीला ने अपने पैरों को उसकी पीठ पर लपेट लिया, उसे और अंदर खींचा.. थरथराते हुए शीला पीयूष के मुंह के अंदर झड़ गई.. उसके योनि-रस से पीयूष का पूरा मुंह पूत गया..
बाहर बारिश की आवाज़ तेज़ हो गई थी, लेकिन कमरे में केवल उनकी हाँफने की आवाज़ें गूँज रही थीं.. पियूष निढाल होकर शीला के आगोश में लेट गया.. उसकी हालत ऐसी थी जैसे हवा निकला हुआ गुब्बारा.. शीला उसकी सारी ऊर्जा चूसकर हवस की महारानी की तरह लेटी हुई थी.. अब जरा सी भी ताकत नहीं बची थी पीयूष में.. वो सोच रहा था की अब शीला भाभी की भूख शांत हो जाए तो गनीमत है वरना आज उसके प्राण शरीर से निकल जाएंगे..!!
पर ये तो शीला थी..!! एक ऐसी आग जिसे आप भड़का तो सकते हो पर बुझाना हर किसी के बस की बात नहीं..!! चुदाई की भूख की पीछे पनप रहे उसके मनसूबे को भांप सके उतनी बुद्धि थी नहीं पीयूष में..!! शीला का उद्देश्य पीयूष को संतुष्ट करना नहीं था.. वो उसे शारीरिक और मानसिक रूप से उस हद तक थकाना और तोड़ना करना चाहती थी की उसके पास ज्यादा सोचने की शक्ति ही न बचें..
अपने दोनों चर्बी भरे विराट स्तनों को खुद के हाथों से ही मसलने के बाद, शीला ने अपने भोसड़े में तीन उँगलियाँ डालकर अंदर बाहर की.. उँगलियाँ ऐसे बाहर निकली जैसे शहद में डुबोकर निकाली हो.. उन उंगलियों को अपने नथुनों तक लाकर शीला ने गहरी सांस ली.. और फिर उन्हें मुंह में ठुँसकर चाटने लगी..
शीला के बगल में ही लाश की तरह पड़ा हुआ पीयूष.. अधखुली आँखों से शीला की इस हरकत को देखता रहा.. इस औरत की बेहिसाब हवस देखकर उसे ताज्जुब हो रहा था.. सेक्स के मामले में शीला आक्रामक है यह तो पीयूष पहले से जानता था पर उसकी भूख इतनी तीव्र और उग्र होगी उसका अंदाजा आज ही हुआ..!! उसे एहसास हो गया की शीला को बिस्तर पर शांत करना किसी एक मर्द के बस की बात ही नहीं थी.. कम से कम चार-पाँच मर्द को एक ही रात में थका देने की ताकत थी उसमें.. मन ही मन पीयूष को शीला के पति मदन के प्रति आदर की भावना महसूस हुई.. जिन्होंने उतने सालों तक इस चुदक्कड़ तूफान को संभालकर रखा हुआ था..!
पीयूष शीला के बगल में पेट के बल लेटा हुआ था.. इसका कारण यह था की वो अपने लंड को शीला की नज़रों से छुपाकर रखना चाहता था.. शीला लंड देखते ही झपट पड़ती थी और अब उसमें या उसके लंड में जरा सी भी शक्ति शेष नहीं बची थी..
पर शीला आखिर शीला थी.. आखिरी संभोग के बाद जब करीब दस मिनट तक शीला बेड पर पड़ी रही.. अपने बबले खुद दबोचते हुए.. चूत रस से लिप्त उंगलियों को चाटते हुए.. तब कुछ पलों के लिए पीयूष को ऐसा लगा जैसे अब वो शांत ही पड़ी रहेगी.. थककर सो जाएगी.. और उसे भी सोने देगी.. पीयूष के जिस्म का हर कतरा थक चुका था और अब आराम मांग रहा था..
शीला अचानक से खड़ी हो गई.. "चल बाहर," आँखें बंद कर सुस्ता रहे पियूष का हाथ पकड़कर बेड से उठाते हुए कहा, "बारिश में भीगने का मज़ा लेते है.." पियूष ने आँखें खोलीं तो देखा कि शीला उसकी तरफ मुस्कुरा रही है, उसके भीगे हुए बाल उसके भारी स्तनों से चिपक रहे थे.. पीयूष ने ऐसी आँखों से शीला की तरफ देखा जैसे शेरनी के पंजे तले दबा हुआ हिरन का बच्चा खुद को छोड़ देने की विनती कर रहा हो..!!
शीला बेड से खड़ी हुई और पीयूष को लगभग घसीटते हुए छत की सीढ़ियों की तरफ ले गई.. वे दोनों बिना कपड़ों के ही छत की तरफ बढ़े, जहाँ बारिश की ठंडी बूंदें उनके गर्म शरीरों से टकरा रही थीं.. शीला ने अपने हाथों से चेहरे के बाल पीछे किए और पियूष के सामने खड़ी हो गई.. "मुझे पकड़ो," वो फुसफुसाई, और पियूष ने उसकी कमर को जकड़ लिया.. बारिश की ठंडी बूंदों से भीगकर शीला की निप्पल सख्त हो चुकी थी.. शीला की नजर पीयूष के पिचके हुए लंड पर गई.. और बिना वक्त गँवाएँ उसने अपनी हथेली से लंड को मसलना शुरू कर दिया..
ठंडे पानी से भीगकर पीयूष का बदन तरोताजा हो रहा था.. शीला का गदराया बदन बारिश में भीगकर कुछ अधिक ही सुंदर लगने लगा था.. शीला की जादुई उंगलियों ने भी अपना कमाल दिखाया.. पीयूष का मरा हुआ लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा.. जैसे उसे अमृत पिलाया गया हो..!!
अब शीला ने अपनी बाँहें पियूष के गले में डाल दीं और उसके होंठों को चूम लिया.. उनका चुंबन धीरे-धीरे जुनूनी होता गया, उनकी जीभें एक-दूसरे से लड़ने लगीं.. पियूष ने अपने हाथों से शीला के नितंबों को मसलना शुरू कर दिया, उसे अपने शरीर के करीब खींचते हुए.. शीला की चूत तो पहले से ही गीली थी, और अब बारिश का पानी उसके और पियूष के बीच से फिसल रहा था..
शीला ने पियूष को धक्का दिया और वह छत की दीवार से टकरा गया.. उसने मुस्कुराते हुए पियूष के लंड को पकड़ा और धीरे-धीरे उसे सहलाने लगी.. "कर दिया ना इसे फिर से तैयार..!!" मुस्कुराते हुए उसने कहा, और फिर झुककर उसे चूम लिया.. पियूष ने सिर पीछे झुकाया और आँखें बंद कर लीं, शीला के होंठों का गर्म स्पर्श उसे पागल कर रहा था..
घुटनों के बल बैठकर शीला ने अपनी जीभ से उसके लंड के सिरे को चाटना शुरू कर दिया, फिर धीरे-धीरे उसे पूरा निगल लिया.. पियूष ने अपनी उँगलियों से उसके बाल पकड़े और उसे अपने मुंह में और गहराई तक ले जाने दिया.. बारिश की बूंदें उन दोनों के शरीरों पर गिर रही थीं, लेकिन उनकी गर्मी उसे महसूस नहीं होने दे रही थी..

शीला ने उसका लंड मुंह से निकाला और खड़ी हो गई.. उसने पियूष को घूरते हुए कहा, "अब मेरी बारी.." वह दीवार की तरफ मुड़ी और अपने हाथों से दीवार पर टिक गई, अपने मोटे नितंबों को पियूष की तरफ उछालते हुए.. पियूष ने उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ा और अपने लंड को उसकी चूत के छेद पर रख दिया..
"आह्ह.. ओह्ह.. धीरे से," शीला ने मुंह बंद करते हुए कहा, लेकिन पियूष ने एक झटके में अपना पूरा लंड अंदर धकेल दिया.. शीला मदहोशी से झूम उठी.. और उसके मुंह से एक दबी हुई चीख निकल गई.. पियूष ने उसकी कमर को कसकर पकड़ा और तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए.. बारिश की बूंदें उनके शरीरों पर गिर रही थीं, लेकिन उनके बीच की गर्मी कहीं ज्यादा तेज थी..
"ओह्ह.. ऐसे ही.. और जोर से!" शीला ने पीछे मुड़कर उसकी तरफ देखते हुए कहा.. उसकी चूत पियूष के लंड को चूस रही थी, हर धक्के के साथ उसके भीतर जलन बढ़ती जा रही थी.. पियूष ने एक हाथ से उसके बाल पकड़े और दूसरे हाथ से उसके नितंबों को मसलते हुए उसे और पीछे की तरफ खींच लिया.. शीला की गांड उसकी जांघों से टकराई और वह आगे की तरफ झुक गई..
"तू मुझे मार डालेगा आज," शीला हांफती हुई बोली, लेकिन उसकी चूत पियूष के लंड को छोड़ने को तैयार नहीं थी.. पीयूष ने मन में सोचा "जान तो आज मेरी निकलने वाली है अगर आप नहीं रुकी तो.."
शीला ने अपने पैरों को और फैला लिया, जिससे पियूष को और गहराई तक जाने की जगह मिल गई.. पियूष ने अब उसे दीवार से दबा लिया और उसकी गर्दन पर गीले चुंबन लगाते हुए चोदना शुरू कर दिया.. शीला के मुंह से लगातार गंदी गालियां निकल रही थीं, उसकी आवाज़ बारिश में डूब जाती थी और फिर उभर आती थी..
"मैं.. मैं झड़ने वाली हूँ!" शीला ने अचानक चिल्लाते हुए कहा और उसका पूरा शरीर अकड़ गया.. पियूष ने भी अपनी गति को और तेज कर दिया, उसकी चूत के अंदरूनी हिस्से को चीरते हुए.. शीला की आँखें लुढ़क गईं और उसके होंठ कांपने लगे.. उसकी चूत से गर्म पानी बह निकला, जो बारिश के साथ मिलकर उनके पैरों के नीचे टपक रहा था..
पियूष ने अंतिम धक्का देते हुए वीर्य की कुछ बूंदें भीतर उड़ेल दी.. शीला ने अपनी पीठ को उसके सीने से दबाया और हांफते हुए कहा, "मज़ा आ गया यार.." उसके बाल बारिश से चिपक चुके थे और चेहरे पर एक संतुष्ट मुस्कान थी..
वे दोनों छत के नीचे खिसक कर बैठ गए, एक दूसरे के शरीर से चिपके हुए.. पियूष ने अपना हाथ उसके पेट पर रखा और धीरे से सहलाया.. "गजब की हो आप तो भाभी.. मुझे पूरा निचोड़ लिया" उसने कहा.. शीला ने उसकी ओर देखा और हंस दी,
अंदर जाने से पहले उन्होंने एक बार फिर से एक दूसरे को चूमा, इस बार धीरे से, प्यार भरे चुंबन.. बारिश अब हल्की हो चुकी थी और हवा में सर्दी बढ़ गई थी.. शीला ने अपने आप को पियूष के शरीर से और चिपका लिया, उसकी गर्माहट महसूस करते हुए.. "चलो अंदर चलते हैं, नहीं तो सर्दी लग जाएगी," वह मुस्कुराते हुए बोली.. पियूष ने उसका हाथ पकड़ा और दोनों बेडरूम की तरफ चल पड़े..
कमरे में प्रवेश करते ही शीला ने बिस्तर के पास खड़े होकर अपने गीले बालों को पीछे सरका दिया.. पियूष बाथरूम से तौलिया लाया और धीरे से उसके शरीर को सुखाने लगा.. तौलिया उसके निचले हिस्से पर पहुंचा तो शीला ने उसका हाथ रोक लिया और आंखों में चमक लिए बोली, "ये क्या कर रहे हो? अभी तो हमारा काम खत्म नहीं हुआ है.." शीला की बात सुनकर पियूष को चक्कर आने लगे..!!
शीला पियूष के कान के पास अपने होंठ ले गई और फुसफुसाई, "तुम भी दूसरे मर्दों की तरह मत करो, मुझे गीला छोड़ दो और फिर सुखाने आ जाओ.." यह कहते हुए उसने अपना एक हाथ उसकी जांघों के बीच सरकाया और उसके मरे हुए लंड को महसूस किया.. पियूष ने एक गहरी सांस ली और उसके कंधे पर अपना माथा टिका दिया.. "अब मुझसे और नहीं होगा भाभी.. मैं पूरी तरह थक चुका हूँ" अपनी हार मानते हुए पीयूष ने कहा..
शीला मुस्कुराई और उसने पीयूष को धीरे से बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर सवार हो गई.. अपने भीगे हुए बालों को पीछे फेंका और उसके सीने पर बैठकर अपनी उंगलियों से उसके निपल्स को मसलना शुरू कर दिया.. पियूष की सांसें तेज हो गईं जब शीला ने धीरे से अपने नाखूनों से उसके सीने पर नीचे की ओर खरोंचे बनाईं.. "आज रात तुम मेरे हैं, पूरी तरह से," वह गुर्राई और फिर उसके निचले होंठ को अपने दांतों से काट लिया..
अपने शरीर पर सवार होकर उछल रही शीला को देखकर पीयूष को अब ऐसा लग रहा था जैसे कोई चुड़ैल उसका खून चूसने ऊपर चढ़ी हो.. दिमाग से चुदाई का सारा भूत उतर चुका था.. शरीर का कतरा कतरा दर्द कर रहा था.. और उसका लोडा तो ऐसे सुन्न पड़ गया था जैसे शरीर का हिस्सा ही न हो..!! पर शीला को रोक पाना उसके बस की बात नहीं थी
बेडरूम की हल्की रोशनी में शीला की गीली त्वचा चमक रही थी.. उसने पियूष की जांघों के बीच अपना हाथ सरकाया और उसके मरे हुए लंड को मजबूती से पकड़ लिया "तुम्हारा ये दोस्त थक गया लगता है" वह हंसी, "थोड़ी देर आराम करते ही फिर से तैयार हो जाएगा है.." कहते हुए शीला ने पिचके हुए लंड को मुठ्ठी में पकड़कर अपने गीले भोसड़े के होंठों पर रगड़ दिया..
पीयूष अब अपने सारे हथियार डाल चुका था.. उसने अपना शरीर और आत्मा शीला को सौंप दी थी.. और खुद को उसे समर्पित कर दिया था.. उसका जैसा मन चाहे करें.. क्योंकि अब तो विरोध करने जितनी ताकत भी नहीं बची थी पीयूष में..
शीला ने अपने वजन को थोड़ा आगे बढ़ाया और उसके मुरझाए लंड के ऊपर अपना भोसड़ा रगड़ने लगी, अपनी आंखें बंद करके उस पल का आनंद लेते हुए.. "हम्म... इस तरह भी मज़ा आ रहा है मुझे तो," वह धीरे से बुदबुदाई, वह धीरे-धीरे आगे-पीछे हिलने लगी, अपने हाथों से अपने भारी स्तनों को मसलते हुए.. पियूष लाश की तरह पड़ा रहा..
कमरे में सिर्फ शीला की सांसों और बिस्तर की टांगें हिलने की कीचुड़ कीचुड़ आवाजें ही सुनाई दे रही थीं.. शीला ने अपनी गति बढ़ा दी, अपने कूल्हों को जोर से घुमाते हुए लंड पर भोसड़ा रगड़ रही थी..
"उफ्फ़.. आहह.. ओहह..!!" शीला एक और ऑर्गेज़्म की तरफ बढ़ रही थी.. अपने गदराए बदन को पीयूष के लंड पर मथनी की तरह मथते हुए उसने दो उंगलियों से अपनी जामुन जैसी क्लिटोरिस को रगड़ना शुरू कर दिया.. बिना लंड-प्रवेश के झड़ने का यही उसका तरीका था..
एक हाथ से स्तन की निप्पल को मरोड़ रही शीला के दूसरे हाथ की उँगलियाँ उसकी क्लीट को मसल रही थी और साथ ही वो अपनी कमर को आगे पीछे घिस रही थी.. उसका शरीर खींचने लगा.. वो सीलिंग की तरफ देखते हुए कराहने लगी... एक हल्की चीख मारकर उसके भोसड़े ने ढेर सारा चिपचिपा रस पीयूष के मृत लंड पर गिरा दिया.. कुछ पलों के लिए उसी अवस्था में रहकर शीला ने इस ऑर्गेज़्म का पूरा लुत्फ उठाया.. फिर धीरे से सरककर वो पीयूष के बगल में लेट गई.. एक संतुष्टि भरी नजर से उसने खर्राटे मार रहे पीयूष की तरफ देखा और मुस्कुराकर करवट बदलकर सो गई..!!!
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वैशाली को सब कुछ सच-सच बताकर शीला पीयूष से मिलने निकल गई.. शीला के साथ रंगीन रात गुजारने के लिए पीयूष ने अपने दोस्त के खाली पड़े बंगले का इंतेजाम किया था.. उतावले पीयूष के साथ शीला उस बंगले पर पहुंची.. वहाँ पहुंचते ही दोनों ने शराब पीने से शुरुआत की और फिर दोनों के बीच शुरू हुआ हवस का नंगा नाच..!!
शुरुआत में आक्रामक रहे पीयूष को धीरे धीरे शीला अपने गिरफ्त में लेती जा रही थी.. एक के बाद एक चल रहे संभोग-सत्र से पीयूष थकता जा रहा था वहीं शीला के चेहरे पर अब भी ताजगी छाई हुई थी.. उसकी भूख मिट ही नहीं रही थी.. यह सब शीला की महत्वाकांक्षी योजना का ही हिस्सा था.. वो पीयूष के शरीर और मन को इस कदर थका थकाकर तृप्त करना चाहती थी की वो पूर्णतः उसके काबू में आ जाए और उसे अपनी चाल चलने का मौका मिले..
अब आगे..
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शीला ने अचानक पियूष को धक्का देकर उलट दिया और खुद उसके ऊपर सवार हो गई.. "मैं चाहती हूँ कि तुम मेरे अंदर झड़ो..." वह गुर्राई और अपनी चूत को पियूष के लंड पर तेजी से घुमाने लगी.. पियूष के हाथ शीला के कूल्हों पर चिपक गए जब उसने एक आखिरी जोरदार धक्का दिया.. शीला की आँखें फटी की फटी रह गईं जब उसने पियूष के गर्म वीर्य को अपनी चूत की गहराइयों में महसूस किया..

"ओह... इतना... इतना गर्म..." शीला हांफते हुए बोली, अपने शरीर को झटकते हुए जब पियूष का लंड अभी भी उसकी चूत में धड़क रहा था.. वह आगे झुकी और पियूष के होंठों को चूसने लगी, उसके वीर्य की गंध उनके चुंबनों में मिल रही थी..
थोड़ी देर बाद जब पियूष का लंड नर्म हो गया तो शीला उससे अलग हो गई.. उसने अपनी चूत से निकलते पियूष के वीर्य को अपनी उंगलियों से चखा और मुस्कुराई.. "तुम्हारा स्वाद बिल्कुल वैसा ही है जैसा मुझे याद था..." उसने कहा और पियूष की छाती पर लेट गई..

बारिश अब हल्की हो चुकी थी लेकिन दोनों के शरीर अभी भी पसीने और बारिश से लथपथ थे.. पियूष ने शीला के गीले बालों को सहलाया और पूछा, "आपकी आग अब शांत हुई?"
शीला ने पियूष की छाती पर अपनी ठुड्डी टिकाते हुए मुस्कुराई, उसकी उंगलियाँ उसके सीने के बालों में खेल रही थीं.. "शांत? अभी तो शुरुआत भी नहीं हुई है..." उसने धीमे से कहा, अपनी जाँघ को पियूष के अभी भी नम लंड पर रगड़ते हुए.. पियूष की साँस फिर से तेज हो गई जब शीला ने अपने नाखूनों से उसके निप्पलों को चुटकी से दबोचा..
"वैसे..." शीला अचानक उठ बैठी, उसके भारी स्तन बारिश की बूंदों से चमक रहे थे, "इस बंगले में बाथटब है ना?" पियूष ने हाँ में सर हिलाया तो शीला उठ खड़ी हुई और उसका हाथ पकड़कर खींचने लगी.. "चलो फिर, अब गरम पानी में नहाने का मन कर रहा है.."
बाथरूम में प्रवेश करते ही शीला ने नल खोल दिया, गरम पानी की भाप जल्दी ही कमरे में फैलने लगा.. पियूष ने उसकी कमर से हाथ लपेटा और उसके गीले बालों को सूंघा.. "आपकी खुशबू आज भी वही है..." उसने कहा तो शीला पलटी और उसके होंठों पर काटने वाला चुंबन दिया..
टब भरते ही शीला ने पियूष को पानी में बैठा दिया और खुद उसकी गोद में बैठ गई.. गरम पानी ने उनकी थकी हुए मांसपेशियों को सुकून दिया.. पियूष के हाथ शीला के स्तनों पर तैरने लगे, जबकि शीला ने पीछे की ओर झुककर अपनी गर्दन को उसके चुंबनों के लिए प्रस्तुत किया.. "मुझे लगता है हमारी रात का दूसरा दौर शुरू हो रहा है," उसने धीमे से कहा, जब पियूष का लंड उसकी गांड के नीचे फिर से सख्त होने लगा..
शीला ने अपने हाथों से पानी को उठाकर अपने स्तनों पर बहाया, फिर पियूष के चेहरे को अपने ओर खींचा.. उसने उसके मुँह में अपनी जीभ घुसा दी, जबकि उसका एक हाथ पानी के नीचे पियूष के लंड को मसलने लगा.. पियूष ने शीला के कान में कुछ फुसफुसाया जिससे वह ठंडा होकर मुस्कुराई, फिर अचानक उठ खड़ी हुई..
"ठहरो," उसने कहा और टब से बाहर कदम रखा, उसका डूबा हुआ शरीर पानी की धाराओं से चमक रहा था.. उसने बाथरूम के कोने में पड़े टॉवल को उठाया और धीरे-धीरे अपने शरीर को पोंछना शुरू किया, जानबूझकर पियूष को अपनी हर हरकत का मजा लेने दिया.. जब वह अपने स्तनों को पोंछ रही थी, तो पियूष टब से बाहर कूदा और उसके पीछे आकर खड़ा हो गया..
"भाभी, आपका शरीर आज भी बिल्कुल वैसा ही है जैसा पहली बार देखा था," पियूष ने कहा, अपने हाथों से शीला के नितंबों को मसलते हुए.. शीला ने पलटकर उसे देखा, टॉवल को फर्श पर गिरा दिया और अपने दोनों हाथों से उसके लंड को पकड़ लिया.. "और तुम्हारा यह आज भी वैसा ही स्वाद देता है," उसने कहा और झुककर उसके लंड के शीर्ष को चूस लिया..
पियूष ने आँखें बंद कर लीं जब शीला ने धीरे-धीरे उसके लंड को अपने मुँह में लेना शुरू किया.. उसकी जीभ नीचे से ऊपर तक लंड को चाट रही थी, जबकि एक हाथ से उसके अंडकोष को दबा रही थी.. अचानक शीला रुकी और पियूष को शावर क्यूबिकल में धकेल दिया.. "अब मेरी बारी," उसने कहा और ठंडे पानी का नॉब खोल दिया..
पियूष चिल्लाया जब बर्फ़ जैसा पानी उसके शरीर पर पड़ा, लेकिन शीला ने उसे वहीं रोके रखा, अपने शरीर से उसके सीने को दबाए हुए.. "तुम्हारे लंड को फिर से तैयार करने का यह सबसे अच्छा तरीका है," वह हँसी और अपने स्तनों को उसके सीने पर रगड़ने लगी.. ठंडे पानी में भी पियूष का लंड फिर से सख्त होने लगा, जिसे देखकर शीला ने गरम पानी चालू कर दिया..
भाप फिर से क्यूबिकल में भरने लगी जब शीला ने पियूष को घुमाया और उसकी पीठ को दीवार से सटा दिया.. उसने अपने घुटनों के बल बैठकर पियूष के लंड को फिर से अपने मुँह में ले लिया, इस बार और गहराई तक.. पियूष के हाथ शीला के गीले बालों में फँस गए जब वह उसके लंड को निगलने की कोशिश कर रही थी.. "ओह भाभी... कमाल का चूसती हो आप," उसने कराहते हुए कहा..
शीला ने अचानक उठकर पियूष को चूमा, उसकी जीभ उसके मुँह में घुस गई.. फिर वह पलटी और उसने पियूष के हाथों को अपने नितंबों पर रखवाया और खुद उसके लंड को अपनी चूत के बाहर रगड़ने लगी.. "अब डाल अंदर," उसने फुसफुसाया और धीरे-धीरे आगे पीछे होते हुए उसके लंड को अपने अंदर लेने लगी..
पियूष ने आँखें बंद कर लीं जब शीला की गर्म चूत उसे पूरी तरह निगल गई.. वह धीरे-धीरे हिलने लगी, अपने हाथों से बबले मसलते हुए.. शावर का गर्म पानी उनके शरीरों पर बह रहा था, जिससे उनकी त्वचा चमक रही थी.. शीला ने अपनी गति बढ़ा दी, उसके स्तन तेजी से हिल रहे थे..

"ओह पियूष... बहोत मज़ा आ रहा है" शीला ने कराहते हुए कहा.. उसने अपने हाथों से अपने स्तनों को मसलना शुरू किया, निप्पल्स को चुटकी लेते हुए.. पियूष ने शीला के हिप्स को पकड़ा और उसे और तेजी से ऊपर-नीचे करने लगा..
शीला ने अपना सिर पीछे झुकाया और जोर से कराह उठी जब पियूष ने उसे एक तेज धक्का दिया.. "हाँ! ऐसे ही! और जोर से!" उसने चिल्लाते हुए कहा.. वह अपने ऊपर होने वाले हर धक्के का मजा ले रही थी, उसकी चूत से पानी की तरह रस बह रहा था..
पियूष ने शीला को उठाकर शावर से बाहर धकेल दिया.. उसे बाथरूम के काउंटर पर बैठा दिया और उसके बड़े स्तनों को चूसने लगा.. शीला ने पियूष के सिर को अपनी छाती पर दबाया और उसके बालों को जकड़ लिया..
"अब मेरी पीठ फेरो," शीला ने आदेश देते हुए कहा.. पियूष ने उसे घुमा दिया और शीला ने खुद को काउंटर पर झुका लिया, अपनी गोल गाँड को उसकी तरफ उछालते हुए.. पियूष ने थूक लेकर उसकी चूत और गाँड के बीच में लगाया और अपना लंड फिर से उसके अंदर डाल दिया..
"ओह.. फाड़ देगा मेरी..!!" शीला चिल्लाई लेकिन उसने अपनी गाँड को और पीछे धकेला.. पियूष ने उसके कूल्हों को जकड़ लिया और तेजी से धक्के मारने लगा.. शीला की चीखें बाथरूम की दीवारों से टकरा रही थीं..

उसने अपनी उँगलियों से काउंटर को पकड़ लिया जब पियूष ने उसकी चूत में एक जबरदस्त धक्का दिया.. "येस! ठीक वहाँ! और अंदर!" शीला के शरीर से पसीना और पानी की बूँदें टपक रही थीं..
पियूष ने अपना लंड बाहर निकाला और शीला को घुमा दिया.. उसने उसे काउंटर पर बैठा दिया और अपना मुँह उसकी चूत पर लगा दिया.. शीला ने पियूष के बाल पकड़ लिए जब उसकी जीभ ने उसके चूत के छेद को चाटना शुरू किया.. "ओह्ह...तुम्हारी जीभ...ओह मर गई!"
वह तेजी से उसकी चूत को चाट रहा था, अपनी जीभ को अंदर तक घुसा रहा था.. शीला का सर पीछे झुक गया और उसने अपने स्तनों को मसलना शुरू कर दिया.. "मैं...मैं झड़ने वाली हूँ...ओह्ह!"
पियूष की जीभ शीला की चूत के अंदर तक पहुँच गई, उसके गीले छेद को चीरती हुई.. शीला के शरीर में एक जबरदस्त झटका लहराया और उसकी चूत से गर्म पानी की धारा निकल पड़ी.. "ओह्ह माँ! मैं गई!" उसने चिल्लाते हुए पियूष के बालों को जकड़ लिया..
पियूष ने अपना मुँह उठाया, उसकी ठोड़ी शीला के रस से चमक रही थी.. "अब तुम्हारी बारी," शीला ने हांफते हुए कहा और काउंटर से नीचे उतर कर घुटनों के बल बैठ गई.. उसने पियूष के मुरझाए हुए लंड को अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे मसलना शुरू किया.. "इसे फिर से खड़ा करने में मुझे ज्यादा वक्त नहीं लगेगा," उसने मुस्कुराते हुए कहा और अपने मुँह में ले लिया..
शीला की गर्म सांसों ने पियूष के लंड को फिर से जीवित कर दिया.. वह उसे गहराई तक ले जा रही थी, अपनी जीभ से सुपाड़े को चाटते हुए.. पियूष की आँखें झपक गईं जब शीला ने अचानक उसके अंडों को चूसना शुरू कर दिया.. "ओह बाप रे!" उसकी सांस तेज हो गई..
थोड़ी देर में ही पियूष का लंड फिर से पत्थर की तरह खड़ा हो चुका था.. शीला ने उसे छोड़ा और खड़ी हो गई.. "अब बिस्तर पर चलते हैं," उसने कहा और पियूष का हाथ पकड़ कर बाथरूम से बाहर खींच लिया..
बेडरूम में जाते ही शीला ने पियूष को बिस्तर पर गिरा दिया और पियूष के ऊपर सवार हो गई.. पियूष के लंड को अपनी चूत के छेद पर रगड़ते हुए शीला ने धीरे से अपना वजन नीचे डाला.. "ओह्ह येस...येस..." वह धीरे-धीरे उस पर नीचे-ऊपर होने लगी..
पियूष के हाथ शीला के भारी स्तनों पर चले गए, उन्हें मसलते हुए.. शीला ने अपनी गति बढ़ा दी, अपनी चूत को उसके लंड पर जोर-जोर से पटकना शुरू किया.. "ओह तुम्हारा लंड...आह्ह!" वह चिल्ला रही थी..
अचानक शीला रुकी और पियूष से कहा, "मुझे पीछे से चोद.." वह तुरंत उसके ऊपर से उतरी और बिस्तर पर हाथ-घुटनों के बल लेट गई, अपनी गोल गांड को उसकी तरफ उठाते हुए.. पियूष तुरंत खड़ा हुआ और उसके पीछे आकर खड़ा हो गया.. उसने अपने हाथों से शीला के चूतड़ों को फैलाया और अपना लंड उसकी चूत के छेद पर रगड़ने लगा..

"ओह हां...ऐसे ही," शीला ने सिसकते हुए कहा जब पियूष का गर्म लंड उसकी गीली चूत को छू रहा था.. अचानक पियूष ने जोर से धक्का दिया और उसका पूरा लंड शीला की चूत के अंदर घुस गया.. "आहह!" शीला चिल्लाई, उसकी उंगलियाँ चादर को जकड़ गईं..
पियूष ने एक लयबद्ध गति शुरू की, हर धक्के के साथ शीला के चूतड़ों पर ताली बजाते हुए.. शीला की चूत से गर्म पानी की धारा निकल रही थी जो पियूष के जांघों को गीला कर रही थी.. "ओह तुम मुझे मार डालोगे!" शीला चिल्लाई जब पियूष ने विशेष रूप से जोरदार धक्का दिया..
अचानक पियूष ने अपना लंड बाहर निकाला और शीला को घुमा दिया.. "क्या हुआ?" शीला ने हांफते हुए पूछा.. पियूष ने जवाब नहीं दिया, बस उसे बिस्तर पर पीठ के बल लेटा दिया और उसकी टांगों को कंधों पर रख लिया.. शीला की चूत पूरी तरह से खुली हुई थी, उसका गुलाबी छेद स्पष्ट दिख रहा था.. पियूष ने अपना लंड फिर से अंदर डाला, इस बार और भी गहराई तक.. "ओह्ह मेरी चूत फट जाएगी!" शीला चिल्लाई.. वैसे ये सारे शीला के नखरे ही थे.. घोड़े का लंड भी शीला के भोसड़े को फाड़ नहीं सकता था..
पियूष ने उसके स्तनों को जोर से दबाते हुए तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए.. शीला के शरीर से पसीने की बूंदें टपक रही थीं, उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी.. वह अपने हाथों से अपने स्तनों को मसलने लगी, निप्पलों को घुमाते हुए.. "ओह्ह और जोर से... मेरी फाड़ दे आज!" वह चिल्ला रही थी..

पियूष ने अपनी गति और तेज कर दी.. कमरे में सिर्फ उनकी हांफने और शरीरों के टकराने की आवाजें गूंज रही थीं.. शीला ने अचानक अपनी आंखें बंद कर लीं और उसका शरीर कांपने लगा.. "निकल रहा है.. ओह्ह मैं झड़ रही हूँ!" उसने चीखते हुए कहा.. उसकी चूत से गर्म पानी की धार फूट पड़ी, जो पियूष के लंड और जांघों को भिगो रही थी..
पियूष ने भी अपनी गति तेज कर दी.. उसने शीला की टांगों को और जोर से पकड़ा और अपने लंड को पूरी तरह से अंदर धकेल दिया.. "ओह भाभी.. मेरा भी..." उसने हांफते हुए कहा और फिर उसका गर्म वीर्य शीला की चूत के अंदर फट पड़ा.. शीला ने अपनी आंखें खोलीं और पियूष की तरफ देखते हुए मुस्कुरा दी.. "तुम्हारा लंड अभी भी खड़ा है," उसने कहा, अपनी चूत में उसके लंड को महसूस करते हुए..
पियूष ने धीरे-धीरे अपना लंड बाहर निकाला और शीला के बगल में लेट गया.. वे दोनों हांफ रहे थे, उनके शरीर पसीने से लथपथ थे.. शीला ने अपना हाथ पियूष के जांघों पर रखा और धीरे से उसके लंड को सहलाने लगी.. "तुम्हारा लंड मुझे पागल कर देता है," उसने कहा, उसके कानों में फुसफुसाते हुए..

पियूष ने शीला की तरफ देखा और उसके होंठों को चूम लिया.. "आपकी चूत भी कुछ कम नहीं है भाभी.. और खासकर आपके ये बड़े बड़े बबले" उसने जवाब दिया.. उनका चुंबन धीरे-धीरे गहरा होने लगा, उनकी जीभें एक-दूसरे से लड़ने लगीं.. शीला ने पियूष को अपने ऊपर घुमा दिया और उसके लंड को फिर से अपनी चूत के छेद पर रख लिया.. "एक और बार," उसने कहा, उसकी आंखों में वासना भरी हुई थी..
पियूष ने कोई जवाब नहीं दिया, बस अपना लंड अंदर धकेल दिया.. शीला ने आंखें बंद कर लीं और एक लंबी सांस ली.. उसकी चूत अभी भी गीली थी, और पियूष का लंड आसानी से अंदर चला गया.. उन्होंने धीमी गति से संभोग करना शुरू किया, इस बार जल्दबाजी नहीं थी.. शीला ने अपने हाथों से पियूष के कंधों को पकड़ लिया और उसकी हर गति का आनंद लिया..
कमरे में सिर्फ उनकी हांफने की आवाजें और बिस्तर के क्रेक की आवाजें गूंज रही थीं.. बाहर बारिश अभी भी जारी थी, और बिजली की चमक कभी-कभी कमरे को रोशन कर देती थी.. शीला ने पियूष की पीठ पर अपने नाखूनों के निशान बना दिए, जब उसने अपनी गति तेज कर दी.. "ओह्ह येस... ऐसे ही..." उसने चिल्लाते हुए कहा..
पियूष ने उसकी टांगों को और जोर से फैला दिया और गहरे धक्के मारने शुरू कर दिए.. शीला का शरीर हर धक्के के साथ बिस्तर पर हिल रहा था.. उसने अपने हाथों से अपने भारी स्तनों को मसलना शुरू कर दिया, निप्पलों को घुमाते हुए.. "और जोर से लगा... और गहरा..." वह चिल्लाई..
अचानक पियूष ने उसे पलट दिया और उसकी पीठ के बल लेटा दिया.. उसने शीला की एक टांग को अपने कंधे पर रख लिया और दूसरी को बिस्तर पर फैला दिया.. इस नई पोजीशन में उसका लंड शीला की चूत में और गहराई तक जा रहा था.. "ओह गॉड... ऐसे नहीं..." शीला चिल्लाई, लेकिन उसकी आवाज में दर्द नहीं, बल्कि आनंद था..
पियूष ने उसके स्तनों को जोर से दबाया और तेजी से धक्के मारने लगा.. शीला के मुंह से लगातार आहें निकल रही थीं.. वह अपने हाथों से बिस्तर की चादर को जोर से पकड़े हुए थी, जैसे वह किसी चीज को थामने की कोशिश कर रही हो.. "ओहह कितनी बार झड़ूँगी मैं..." उसने हांफते हुए कहा..
उसी पल बाहर बिजली कड़की और तेज रोशनी ने पूरे कमरे को भर दिया.. शीला का चेहरा आनंद से विकृत हो गया था.. उसकी चूत में एक तेज झटका महसूस हुआ और फिर उसके पूरे शरीर में कंपन फैल गया.. उसके स्तन जोर-जोर से हिल रहे थे जबकि पियूष ने उस पर जमकर हमला किया हुआ था..
"ओह्ह... ओह्ह... ओह्ह..." शीला की आवाज़ बिखर गई.. उसकी आँखें लुढ़क गईं और मुंह से लार की धारा बह निकली.. पियूष ने अपनी गति और तेज कर दी, उसका लंड शीला की चूत की गहराइयों तक जा पहुंचा था.. शीला के शरीर में एक और झटका लगा और उसकी चूत से गर्म पानी की धारा निकल पड़ी..
पियूष ने अब अपना संयम खो दिया.. उसने शीला के कूल्हों को जोर से पकड़ा और अपने लंड को पूरी ताकत से अंदर धकेल दिया.. "ओहह आह्ह आह्ह.." वह चिल्लाया.. शीला ने अपने हाथों से अपने स्तनों को मसलते हुए उसे और उत्तेजित किया.. "अंदर... अंदर निकाल दे..." वह चीखी..
पियूष का शरीर अकड़ गया और उसने एक लंबी आह भरी.. गर्म वीर्य की कुछ बूंदें शीला की चूत की गहराइयों में जाकर गिरी.. वह कुछ पलों तक स्थिर रहा, फिर धीरे-धीरे अपना लंड बाहर निकाला.. शीला ने अपनी टांगें फैला दीं और गहरी सांस ली.. उसकी चूत अभी भी धड़क रही थी..
"कितनी बार चढ़ा मुझ पर आज?" शीला ने थकी हुई मुस्कान के साथ पूछा.. उसने अपनी उंगलियों से अपनी चूत को छुआ और फिर पियूष के सीने पर उसका रस मल दिया.. "चार बार? पांच?"
पियूष ने अपनी आँखें बंद कर लीं और मुस्कुराया.. "गिनती ही भूल गया.. आपकी चूत का नशा ही कुछ अलग है भाभी.." उसने शीला की तरफ देखा और उसके भीगे हुए बालों को संवारा.. बाहर बारिश अब हल्की हो गई थी, लेकिन हवा अभी भी गर्म थी..
शीला ने अपने हाथों से अपने भारी स्तनों को उठाया और उन्हें दबाया.. "अब तो इनमें दर्द हो रहा है.. तूने कितनी बार चूसा इन्हें?"
पियूष ने शीला के निप्पल्स को अपनी उंगलियों से दबाते हुए कहा, "मैं तो अभी और चूसना चाहता हूँ.." उसकी आँखों में वही पुरानी चिंगारी फिर से जगमगा उठी.. शीला ने अपनी आँखें झपकाईं और फिर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.. उनका चुंबन धीरे-धीरे आगे बढ़ा, फिर जैसे-जैसे पियूष का हाथ उसकी जांघों पर फिसला, शीला की सांसें तेज हो गईं..
"थोड़ा रुक जा," शीला ने अचानक चुंबन तोड़ते हुए कहा.. उसने बिस्तर से उठकर कमरे के बीचोंबीच खड़ी हो गई.. बारिश की हल्की फुहार खिड़की से अंदर आ रही थी, जो उसके गीले शरीर पर गिरकर और भी आकर्षक बना रही थी.. "इस बार मैं चाहती हूँ कि तू मुझे खड़े-खड़े चोदे.."
पियूष ने एक भावशून्य मुस्कान के साथ सर हिलाया और बिस्तर से उठकर उसके पास आ गया.. शीला ने अपनी पीठ उसकी तरफ कर ली और अपने चूतड़ों को हिलाते हुए कहा, "पहले इन्हें चाट.." पियूष ने घुटनों के बल बैठकर उसके गोल नितंबों को अपने हाथों से फैला लिया और जीभ से उसकी गांड के छेद को चाटना शुरू कर दिया.. शीला की आँखें ऊपर को लुढ़क गईं और उसने अपने हाथों से अपने स्तनों को मसलते हुए एक लंबी आह भरी..

अचानक शीला ने पीछे मुड़कर पियूष के बाल पकड़े और उसे खींचकर खड़ा किया.. "अब अपना लंड अंदर डाल," उसने कर्कश आवाज में कहा.. पियूष ने अपना कड़ा हुआ लंड उसकी गीली चूत के छेद पर रखा और धीरे से धकेलना शुरू किया.. शीला ने अपने सिर को पीछे की ओर झुकाया और उसके कंधे पर दांत गड़ा दिए जब उसका लंड पूरी तरह से अंदर समा गया..
खिड़की से आती हुई ठंडी हवा उनके गर्म शरीरों से टकरा रही थी.. शीला ने अपने हाथों से खिड़की की चौखट पकड़ ली जबकि पियूष उसकी पीठ से चिपका हुआ उसे जोर-जोर से धकेल रहा था.. उसकी चूत के भीतर लंड की गर्मी और बाहर की ठंडी हवा के संयोग ने शीला को एक अजीब सी सनसनी से भर दिया..
"ओह्ह... ठंडी हवा... और तेरा गरम लंड... आह्ह!" शीला के शरीर में एक झटका सा दौड़ गया.. पियूष ने उसकी प्रतिक्रिया देखकर और तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए.. उसने एक हाथ से उसके बाल पकड़े और दूसरे से उसके भारी स्तन को मसलना शुरू किया..
शीला ने अपनी आँखें बंद कर लीं और खिड़की के शीशे पर अपनी सांस से धुंध बनाते हुए कहा, "और तेज... और गहरे... ओह भगवान!" उसकी चीखें कमरे में गूंजने लगीं जब पियूष ने उसे दीवार से टकरा दिया और उसके कूल्हों को जोर से पकड़कर और भी ज़ोरदार धक्के देना शुरू कर दिया..
अब पियूष ने शीला को पलट दिया और उसकी एक टांग को उठाकर अपने कंधे पर रख लिया.. शीला की पीठ दीवार से सटी हुई थी जबकि पियूष ने उसे इस नई स्थिति में चोदना जारी रखा.. "आपकी चूत... इतनी गर्म... आह्ह..." पियूष ने अपने दांतों से अपना निचला होंठ दबाते हुए कहा.. शीला की आंखें लुढ़क गईं जब उसने अपनी दूसरी टांग को भी उठा लिया और उसे पूरी तरह हवा में उठाकर धकेलना शुरू कर दिया..
बारिश की बूंदें अब खिड़की से अंदर आकर उनके शरीरों पर गिर रही थीं.. शीला के स्तनों पर पानी की बूंदें लुढ़क रही थीं जो पियूष के लिए और भी उत्तेजक दृश्य था.. उसने अपना मुंह आगे बढ़ाया और शीला के एक निप्पल को अपने मुंह में ले लिया.. शीला चीख पड़ी जब उसने जोर से काटा और साथ ही उसने अपने लंड को और भी जोर से अंदर धकेला..
"ऊईईई माँ.. ओह्ह..." शीला ने अपने हाथों से अपने ही स्तनों को मसलते हुए कहा.. उसकी चूत की मांसपेशियां तेजी से सिकुड़ने लगीं जैसे वह एक और बड़े ऑर्गेज्म की कगार पर हो.. पियूष ने उसके इस संकेत को समझ लिया और अपनी गति और तीव्र कर दी.. उसके लंड के हर धक्के से शीला का शरीर दीवार से टकराता और वापस उसके लंड पर गिरता..
तभी शीला के मुंह से एक ऐसी चीख निकली जिसे सुनकर पियूष ने भी अपनी आंखें बंद कर लीं.. उसकी चूत से गर्म पानी की धारा बह निकली और उसका पूरा शरीर ऐंठ गया.. पियूष ने अपने लंड को और भी गहराई तक धकेला और खुद भी एक जोरदार आह भरते हुए ठंडा हो गया..
"आह्ह... ओह्ह मर गई..." शीला ने थककर अपने हाथ पियूष के कंधों पर डाल दिए.. उसकी सांसें तेज थीं और शरीर पसीने से लथपथ.. पियूष ने धीरे से उसकी टांगों को नीचे किया और उसे अपनी बाहों में समेट लिया.. बारिश की ठंडी बूंदें अब उनके गर्म शरीरों पर गिरकर भाप बन रही थीं..
"कितनी बार हो चुका है आज?" शीला ने थकी हुई मुस्कुराहट के साथ पूछा, अपनी उंगलियों से पियूष के सीने पर बिखरे अपने ही रस को फैलाते हुए..
पियूष ने अपनी आंखें घुमाईं, "शायद पांचवीं या छठी बार? पता नहीं.. आज तो मेरा मन भर ही नहीं रहा है.." पीयूष को भी ताज्जुब हो रहा था की बार बार भाभी चुदाई की गिनती क्यों रख रही थी..!!
शीला की आँखों में एक शैतानी चमक आ गई जब उसने पियूष के जवाब सुना.. "छठी बार?" उसने अपनी उंगलियों को उसके सीने पर घुमाते हुए कहा, "और अभी तो हमारी रात बस शुरू हुई है.." पियूष ने उसकी कमर को थपथपाया जब शीला अचानक उठ खड़ी हुई, उसका शरीर अभी भी उत्तेजना से कांप रहा था..
खिड़की से आ रही बारिश की बूंदें अब शीला के गोरे बदन पर नाच रही थीं.. उसने अपने भारी स्तनों को थामा और धीरे से मसलते हुए कराह उठी, "मेरे बूब्स दर्द कर रहे हैं...तुम्हारे ज्यादा काटने से.." पियूष उसकी तरफ लपका और उसके निप्पलों को अपने होंठों से सहलाने लगा.. शीला ने अपनी उंगलियों से उसके बालों में घुसकर उसका सिर अपनी छाती से दबा लिया..
"इंतज़ार करो," शीला ने अचानक उसे धक्का देते हुए कहा और ड्रॉइंगरूम की तरफ लड़खड़ाते हुए चली गई.. वहाँ से टेबल पर रखी शराब की बोतल लेकर वापिस लौटी.. "व्हिस्की का एक घूंट," उसने मुस्कुराते हुए कहा और बोतल को अपने होठों से लगा लिया.. पियूष ने देखा कि कैसे शराब की बूंदें उसके ठुड्डी से होकर उसके स्तनों तक लुढ़क गईं..
वह तेजी से उठा और शीला को अपनी बाहों में उठा लिया..
"तू पिएगा नहीं?" शीला ने पूछा
"आप पिलाओगी तो जरूर पीऊँगा" पीयूष ने कहा
"रुक.. मैं पिलाती हूँ तुझे.." कहते हुए शीला ने धक्का देकर पीयूष को बेड पर लेटा दिया.. शराब की बोतल हाथ में लेकर वो पीयूष के मुंह पर सवार हो गई.. अपने विराट बबलों पर उसने व्हिस्की की धार की.. शराब उसके स्तनों से बहते हुए.. नाभि से होकर.. जंघाओं के मूल से उसके भोसड़े के होंठों पर गुजरते हुए पीयूष के मुंह पर गिरने लगी.. पीयूष प्यासे कुत्ते की तरह शीला का भोसड़ा चाटने लगा.. शराब पीने का इससे अनोखा तरीका और क्या हो सकता है..!!
बारिश की आवाज अब तेज हो चुकी थी, खिड़की से टकराती हुई.. शीला ने अपने पैरों को पियूष की कमर पर लपेट लिया जब वह उस पर झुका.. "क्या तुम्हें पता है," उसने उसके कान में फुसफुसाया, "मैंने सोचा था कि तुम इतने सालों में कमजोर हो गए होगे.. लेकिन तुम तो..." उसकी बात अधूरी रह गई जब पियूष ने अचानक उसकी गर्दन पर दांत गड़ा दिए..
"क्या तो?" पियूष ने उसके कान के पास गुर्राते हुए पूछा, अपने लंड को उसकी चूत के बाहर रगड़ते हुए.. शीला की आंखें बंद हो गईं जब उसने अपनी एड़ियों से उसकी पीठ को दबाया.. "तुम तो...पहले से भी ज्यादा ताकतवर हो," वह कराह उठी जब पियूष ने एक झटके में अपने लंड को उसकी गीली चूत में धंसा दिया..
उनकी गति शुरू में धीमी थी, लेकिन जैसे-जैसे शीला की सांसें तेज होती गईं, पियूष ने अपने धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी.. शीला ने अपने हाथों से बिस्तर की चादरें मुट्ठी में भींच लीं जब पियूष ने उसकी एक टांग को अपने कंधे पर रख लिया और और भी गहराई से घुसने लगा.. "ओह्ह... ये कोण... आह्ह वही वाला...!" शीला का सिर पीछे की तरफ झटका जब पियूष ने उसके G-स्पॉट पर सीधा प्रहार किया..

बारिश की बूंदें खिड़की से टकरा रही थीं, लेकिन कमरे के अंदर का तापमान बढ़ता जा रहा था.. पियूष के माथे से पसीने की बूंदें शीला के स्तनों पर गिर रही थीं जब वह उस पर झुका हुआ था.. उसने अपने दांतों से शीला के निप्पल को दबोच लिया, जिससे वह चीख उठी.. "हां... काटो मुझे... ओह्ह तुम्हारे दांत... आह्ह!"
पियूष ने अचानक उसे पलट दिया और कुत्ते की मुद्रा में ले आया.. शीला ने अपने चूतड़ों को हवा में उठा लिया, पियूष के लंड का स्वागत करने के लिए तैयार.. पहले धक्के ने उसे आगे की तरफ झटका दिया, लेकिन उसने अपनी कोहनियों से बिस्तर पर जमकर पकड़ बना ली.. "और... और जोर से...!" उसकी आवाज़ लड़खड़ा रही थी जब पियूष ने अपने दोनों हाथों से उसकी कमर को पकड़कर उस पर जमकर प्रहार किया..
शीला का शरीर अब फिर से गर्म हो चुका था.. उसकी चूत से निकलने वाला रस पियूष के जांघों पर बह रहा था.. वह अपने हाथों से बिस्तर पर टिकी हुई थी, लेकिन जब पियूष ने अचानक उसके बाल पकड़कर खींचे, तो उसका सिर पीछे की तरफ झटका और उसकी पीठ एक धनुष की तरह मुड़ गई.. "ओह्ह मेरे बाल... आह्ह येस्स...!"

पियूष ने शीला के बालों को ज़ोर से खींचते हुए उसकी गर्दन पीछे की ओर झुका दी.. बारिश की बूंदें खिड़की से टकरा रही थीं मानो उनके जुनून को और भड़का रही हों.. "आपकी चूत... भट्ठी जैसी गर्म है..." पियूष ने गुर्राते हुए कहा, अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ाते हुए..
शीला के नाखून बिस्तर की चादरों में घुस गए जब पियूष ने अचानक उसकी कमर को ऊपर उठा दिया और अपने लंड को पूरी तरह से अंदर धकेल दिया.. उसकी चीख कमरे में गूंज उठी, "ओह्ह मेरी गांड... आह्ह तुम तो... उह्ह...!" उसकी आवाज़ टूट रही थी जैसे ही पियूष ने उसकी एड़ियों को पकड़कर उसके पैरों को और फैला दिया..
बाहर बिजली चमकी और उसकी रोशनी में शीला का पसीने से तरबतर बदन चमक उठा.. पियूष ने एक हाथ से उसके बाल पकड़े और दूसरे से उसके भारी स्तनों को मसलना शुरू कर दिया.. "ओह्ह वो जगह... फिर से...!" शीला की आँखें पलकों के पीछे छिप गईं जब पियूष का लंड उसके अंदर उस स्थान पर टकराया जिससे उसका पूरा शरीर झटकों से भर गया..
अब पियूष ने उसे पलट दिया और उसके ऊपर आ गया.. शीला ने अपनी टाँगें उसकी कमर पर लपेट लीं जैसे ही वह फिर से उसके अंदर घुसा.. उनके शरीरों के टकराने की आवाज़ बारिश की आवाज़ में घुल मिल गई.. पियूष ने उसके होंठों को जकड़ लिया, उसकी सांसें चुराते हुए जबकि उसकी हिप्स लगातार उससे टकरा रही थीं..
"ओह्ह...इस तरह नहीं..." शीला ने हांफते हुए कहा जब पियूष ने अचानक उसकी टाँगों को कंधों पर रख दिया.. उसकी चूत पहले से कहीं ज्यादा गहराई तक खुल गई थी.. पियूष के हर धक्के से अब उसके गर्भ तक कंपन हो रहा था.. शीला ने चादरें मुट्ठियों में भींच लीं जैसे ही वह उसके अंदर और गहरे धँस गया..
उसकी आँखें लुढ़क गईं जब पियूष ने एक हाथ से उसके गले को थाम लिया और दूसरे से उसके स्तनों को मसलना शुरू कर दिया.. "ओह्ह...वो वाली जगह...फिर से..." शीला के शब्द टूट रहे थे जब पियूष का लंड उसके अंदर उस स्पॉट पर टकराया जहाँ से उसका पूरा शरीर अकड़ जाता था..
बाहर बिजली चमकी और उसकी रोशनी में शीला का चेहरा एक अजीब सी मुस्कान से भर गया.. "क्या हुआ?" पियूष ने हांफते हुए पूछा, अपने धक्कों की रफ़्तार धीमी करते हुए.. शीला ने अपनी उंगलियों से उसकी छाती पर खरोंचें खींचीं, "कुछ नहीं... बस सोच रही थी कि तुम्हारा ये लंड मेरी चूत में कितनी बार फट चुका है आज रात.."
पियूष ने गर्दन झटक दी और तेज़ी से फिर से धक्का मारा.. शीला की आँखें पलकों के पीछे छिप गईं जैसे ही उसका शरीर एक बार फिर से झटके से भर गया.. "उसके कूल्हों को अपनी हथेलियों से पकड़कर और तेज़ी से धकेलना शुरू कर दिया..
शीला ने अपनी टाँगें उसकी कमर से और ज्यादा कसकर लपेट लीं, अपनी एड़ियों से उसके नितंबों को दबाते हुए.. "हाँ... ऐसे ही... ओह्ह और तेज़!" उसकी आवाज़ बिजली की गड़गड़ाहट में डूब गई.. बारिश की बूंदें खिड़की से टकरा रही थीं, जैसे वो भी उनके इस जंगली नृत्य में शामिल होना चाहती हों..
शीला का शरीर एक बार फिर से अकड़ गया.. उसकी चूत की दीवारें पियूष के लंड को और ज्यादा कसकर दबा रही थीं, जैसे कोई जानवर अपने शिकार को निगल रहा हो.. वो अपनी सारी ताकत से पीछे की तरफ धकेल रही थी, ताकि पियूष का लंड उसकी चूत की सबसे गहरी जगह तक पहुँच जाए..
"ओह्ह.. ओह मार डाला तूने.." शीला ने हांफते हुए कहा, जब पियूष ने अपने आखिरी धक्के के साथ उसकी चूत में झड़ने का प्रयास किया.. पर वीर्य अब उसके अंडकोशों में बचा ही नहीं था निकलने के लिए.. ये तो दवाई का असर था जो उसके लंड को खड़ा रख पा रहा था
पियूष का शरीर शीला के ऊपर सुस्ता गया.. उसके कंधों पर शीला के नाखूनों के गहरे निशान थे.. बारिश की बूंदें खिड़की से अन्दर आकर उनके पसीने से तर बदन पर गिर रही थीं..
शीला ने धीरे से पियूष को अपने ऊपर से हटाया और बिस्तर पर लेट गई.. उसकी चूत से पियूष का माल धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था.. उसने अपने उँगलियों से उसे सहलाते हुए पियूष की तरफ देखा, जो अभी भी हांफ रहा था.. "अब तो तेरा लंड फिर से खड़ा हो जाएगा ना?" शीला ने मुस्कुराते हुए कहा..
पियूष ने हंसते हुए कहा, "भाभी.. आज रात को ही मार डालोगी क्या मुझे..!! अभी अभी तो मेरा निकला है और वो भी पता नहीं कितनी बार..!!" पर शीला ने उसके मुरझाए हुए लंड को अपने हाथ में ले लिया और धीरे-धीरे सहलाना शुरू कर दिया.. "ओह.. नहीं.. शीला भाभी.. अब नहीं.." पियूष ने कराहते हुए कहा.. उसका लंड दर्द कर रहा था.. शरीर थकान से चूर हो चुका था.. शीला के हाथों की गर्मी से उसका लंड फिर से जवाब देने लगा..
शीला ने अपने रसीले होंठों को पियूष के कान के पास ले जाकर फुसफुसाया, "चल, इस बार मैं तुझे चोदूँगी.." ये कहकर उसने पियूष को बिस्तर पर पीठ के बल लिटा दिया और उसके ऊपर सवार हो गई.. पियूष का लंड अब भी आधा मुरझाया हुआ था.. शीला ने उसे अपनी चूत के छेद पर रगड़ते हुए कहा, "देख, कैसे तेरा लंड मेरी गीली चूत को ढूंढ रहा है.."
चुद-चुदकर शीला का भोसड़ा गरम गुफा में तब्दील हो गया था.. इसलिए उस मुरझाए लंड को अंदर डालने में ज्यादा तकलीफ नहीं हुई.. पियूष ने शीला के चूतड़ों को दबोच लिया और अपने लंड को उसकी चूत के अंदर धकेल दिया.. शीला ने सिर पीछे की तरफ झुकाते हुए एक लंबी आह भरी.. वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी, अपने स्तनों को पियूष के चेहरे के पास ले जाती हुई.. पियूष ने उसके निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर से चूसना शुरू कर दिया..

"ओह्ह... ठीक वैसे ही..." शीला ने हांफते हुए कहा, जैसे वो अपनी सारी ताकत इकट्ठी कर रही हो.. अचानक वो पियूष के ऊपर से उतर गई और उसके पैरों के बीच घुसकर उसके लंड को मुँह में ले लिया.. पियूष ने चीखते हुए बिस्तर की चादरें पकड़ लीं.. शीला की जीभ उसके सुपाड़े के नीचे घूम रही थी, जैसे कोई बच्चा आइसक्रीम चाट रहा हो..
बारिश की आवाज़ के बीच पियूष की सिसकियाँ और ज़ोरदार हो गईं जब शीला ने अपने दाँतों से हल्का सा काटा.. "ओहह भाभी.. मत करिए..." वो बुदबुदाया, पर शीला ने उसकी बात अनसुनी कर दी.. उसने अपनी एक उँगली पियूष की गाँड के छेद में घुसा दी, जिससे वो एकदम से अकड़ गया..

"क्या हुआ? डर गया?" शीला ने मुस्कुराते हुए पूछा, जबकि उसकी उँगली धीरे-धीरे अंदर-बाहर हो रही थी.. पियूष ने कोई जवाब नहीं दिया, बस अपनी आँखें बंद कर लीं.. शीला ने फिर से उसके लंड को चूसना शुरू कर दिया, इस बार और ज़ोर से.. उसकी दूसरी हाथ से पियूष के अंडकोष को दबाते हुए, वो उसके शरीर को हिला रही थी जैसे कोई खिलौना हो..
अचानक शीला रुक गई.. "उठो," उसने कहा.. पियूष ने आँखें खोलीं तो देखा कि शीला खिड़की के पास खड़ी है, अपने भारी स्तनों को बारिश के पानी से गीला कर रही है.. "यहाँ आओ," उसने पुकारा.. पियूष उठकर उसके पास गया.. शीला ने उसका हाथ पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया.. "अंदर डालो," उसने कहा.. पियूष ने बिना किसी हिचकिचाहट के उसकी गीली चूत में अपनी दो उँगलियाँ घुसा दीं.. लंड तो अब उसका हार चुका था.. शीला ने सिर पीछे झुकाते हुए एक लंबी आह भरी.. बारिश की ठंडी बूंदें उसके स्तनों से टकरा रही थीं, जबकि पियूष की गर्म उँगलियाँ उसके अंदर घूम रही थीं..

पीयूष शीला की इस भूख को देखकर अचंभित था.. क्या औरत है ये..!! इसकी भूख शांत ही नहीं होती..!! एक मर्द के बस की बात ही नहीं है ये भाभी.. एक साथ पाँच मर्द को भी थका सकती है..!!
"और तेज कर," शीला ने हांफते हुए कहा.. पियूष ने तीसरी उँगली जोड़ दी.. शीला की चूत पहले से ही फैल चुकी थी, पर अब वो और ज़्यादा खुलने लगी.. पियूष ने अपनी उँगलियों को तेज़ी से हिलाना शुरू कर दिया.. शीला ने अपने स्तनों को दबाते हुए चीख मारी.. "अभी मत रुकना," उसने कहा.. पियूष ने उसकी चूत के अंदर अपनी उँगलियाँ घुमाईं, उस स्पंजी दीवार को ढूंढते हुए जो उसके आने वाले ओर्गास्म की चेतावनी दे रही थी..

शीला ने अचानक पियूष का हाथ पकड़ लिया और उसे रोक दिया.. "मैं उंगलियों से झड़वाना नहीं चाहती.. मुझे लंड चाहिए.. इसे कैसे भी करके खड़ा कर"
पीयूष की शक्ल रोने जैसी हो गई.. हे भगवान.. आज ये मेरी जान ले लेगी..!!
शीला ने पियूष को बिस्तर की तरफ खींचा.. उसने पियूष को बिस्तर पर बैठाया और फिर उसके ऊपर सवार हो गई.. पियूष का अधमरा से लंड पर शीला अपनी बुर की फांक रगड़ने लगी..

फिर धीरे-धीरे नीचे बैठते हुए उसे अंदर लेने की कोशिश करने लगी.. लंड बीच रास्ते ही पिचक गया.. शीला ने पीयूष की आँखों में घिन से देखा.. पीयूष की आँखें झूक गई.. पर शीला ऐसे हार मानने वाली नहीं थी.. उसने वो पिचका हुआ लंड अपनी दोनों उंगलियों से पकड़ा और अपना भोसड़ा फैलाकर अंदर डाल दिया और ऊपर नीचे उछलने लगी..
"ओह माँ..." शीला ने सिर पीछे झुकाते हुए कहा.. वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी.. पियूष ने उसके भारी स्तनों को पकड़ लिया और उन्हें मसलना शुरू कर दिया.. इस आशा में की उसका लंड अंदर खड़ा हो जाए और उसकी इज्जत बच जाए.. शीला की चूत की गर्मी और उसके स्तनों का नरम मांस पियूष के हाथों को जैसे जलाने लगा था..
"तेज़... और तेज़..." शीला ने हांफते हुए कहा.. पियूष ने उसकी कमर पकड़कर उसे नीचे की ओर दबाया.. शीला की चीख बारिश की आवाज़ में दब गई..

शीला ने अपने नाखून पियूष के कंधों में गड़ा दिए.. वो अब पूरी तरह से उसके ऊपर झूल रही थी.. पियूष ने उसे उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया.. पीयूष के लंड में अब हल्के हल्के सख्ती आने लगी थी.. उसने शीला के पैरों को अपने कंधों पर रखा और फिर से अंदर घुस गया..
"हाँ... ऐसे ही... ओह मेरे राजा..." शीला ने अपनी आँखें बंद कर लीं.. पियूष के हर धक्के से उसका पूरा शरीर हिल रहा था.. उसके स्तन इतने तेज़ी से हिल रहे थे कि लग रहा था कोई दो गोल पत्थर उछल रहे हों.. पियूष ने अपना दाहिना हाथ उसके बाएँ स्तन पर मारा.. शीला की आँखें खुल गईं..
"और मार... ओह्ह... हाँ..." शीला ने उसकी कमर को अपनी टांगों से जकड़ लिया.. पियूष ने उसके दोनों स्तनों को पकड़कर जोर से मसलना शुरू कर दिया, उसके गुलाबी निप्पल उसकी उंगलियों के बीच से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे.. बारिश की बूंदें खिड़की से टकरा रही थीं, मानो उनके जंगी राग में शामिल होना चाहती हों..
"उह्ह... ऐसे ही... पूरा अंदर डाल..." शीला ने बिस्तर की चादर को मुट्ठी में भींच लिया.. बारिश की बूंदों की आवाज़ उनकी हांफती सांसों में डूब रही थी.. पियूष ने उसके कान के पास गरम सांस छोड़ते हुए कहा, "भाभी, आज तो आप किसी जिन्न की तरह मेरा सारा रस चूस रही है..."
शीला ने अपनी गीली पीठ उसके सीने से रगड़ते हुए जवाब दिया, "मेरी आग उसे ही भड़काने का हक है जिसके लंड में उसे बुझाने की ताकत हो" वो अचानक चीख उठी जब पियूष ने उसकी गांड पर एक तेज थप्पड़ मारा.. "हाँ... फिर मार..." उसने पलट कर पियूष के होंठों को अपने दांतों से दबा लिया..
वो उठकर बैठ गई और पियूष को धक्का देकर पीठ के बल लिटा दिया.. "अब मेरी बारी," उसने कहा और उसके लंड पर बैठ गई, धीरे-धीरे नीचे जाते हुए.. पियूष की आँखें फटी की फटी रह गईं जब शीला ने अपने भारी स्तनों को उसके चेहरे पर रख दिया.. "चूस," उसने आदेश दिया, और पियूष ने उसके निप्पल को मुँह में ले लिया..
बाहर बारिश की आवाज़ तेज़ हो रही थी, पर उनके कमरे में सिर्फ गीलेपन और गरमाहट की आवाज़ें गूँज रही थीं.. शीला ऊपर-नीचे होते हुए अपने हाथों से अपने स्तनों को दबा रही थी.. पियूष का लंड उसकी चूत में पूरी तरह समा चुका था, हर बार जब वो नीचे जाती तो उसका पेट उभर आता..
"ओह्ह... ये मज़ा... उह्ह... कभी खत्म न हो," शीला ने हांफते हुए कहा.. पियूष ने उसकी कमर पकड़ ली और जोर से ऊपर की ओर धक्का दिया.. शीला चिल्लाई, "हाँ! ऐसे ही! और जोर से!"
शीला की चिल्लाहट बारिश की आवाज़ में डूब गई जब पियूष ने उसे बिस्तर से उठाकर खिड़की की तरफ धकेल दिया.. ठंडी हवा ने उसके गीले शरीर पर चुभती हुई ठंडक फैला दी, पर अगले ही पल पियूष का गरम शरीर उसकी पीठ से चिपक गया.. "ओह्ह... साला कितनी ठंड है..." शीला ने अपने निप्पलों को खिड़की के शीशे से रगड़ते हुए कहा..
पियूष ने उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ा और एक झटके में अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया.. शीला का मुँह खुला का खुला रह गया, उसकी सांसें रुक सी गईं.. पियूष ने उसके कान में फुसफुसाया, "अब बोलिए... कैसा लग रहा है?" शीला ने हांफते हुए जवाब दिया, "ओह... ओह... बस... थोड़ा... रुक..." अब जब लंड खड़ा हो ही गया था तो पियूष का रुकने का कोई इरादा नहीं था.. उसने शीला को खिड़की के शीशे से चिपका दिया और जोर-जोर से धकेलना शुरू कर दिया..
खिड़की के शीशे पर शीला के भारी स्तन दबकर चपटे हो रहे थे.. उसकी साँसें गरम होकर शीशे पर धुंधली परत जमा रही थीं.. पियूष ने एक हाथ से उसके बाल खींचे और दूसरे हाथ से उसकी गांड के गड्ढे में अंगूठा घुसा दिया.. शीला चीख पड़ी, "आहह! नहीं... वहाँ मत... ओह्ह!" पर पियूष ने उसकी चीख को नज़रअंदाज करते हुए अपनी गति और तेज़ कर दी.. बारिश की बूंदें खिड़की पर टकरा रही थीं, मानो उनके जंगम प्रेम को देखने के लिए बेताब हों..
अचानक शीला ने पीछे हाथ बढ़ाकर पियूष की जांघों को पकड़ लिया.. "रुक... मैं... ओह्ह... मैं गिरने वाली हूँ..." वह हांफ रही थी.. पियूष ने उसे खींचकर बिस्तर की तरफ धकेला जहाँ शीला गिरते ही पलट गई और पियूष को ऊपर खींच लिया.. "अब धीरे... पूरा अंदर... ऐसे..." उसने निर्देश दिए जबकि उसके हाथ पियूष के कूल्हों पर थे, उसे नियंत्रित कर रहे थे.. पियूष ने आज्ञाकारी होकर धीरे-धीरे अपना लंड उसकी चूत में उतारा, हर इंच का आनंद लेते हुए..
शीला की आँखें बंद थीं, उसके होंठ काँप रहे थे.. "हाँ... ठीक वहाँ... ओह्ह..." वह मुस्कुराई जब पियूष ने उसके जी-स्पॉट को ढूंढ लिया.. उसने अपनी एड़ियों से पियूष की पीठ को दबाया, उसे और गहराई तक ले जाने के लिए.. कमरे में सिर्फ उनकी हांफने की आवाज़ें और बारिश की आवाज़ मिल रही थी.. पियूष ने झुककर उसके निप्पल को चूसा, शीला ने उसके बालों में अपनी उंगलियाँ फंसा दीं.. "और... और जोर से..." वह फुसफुसाई..
पियूष ने अपने घुटनों को मोड़ा और जोर से ऊपर धकेला.. शीला चिल्लाई, "ओह्ह! हाँ! ऐसे ही!" उसकी चूत पियूष के लंड को कसकर जकड़ रही थी, हर धक्के के साथ गरम पानी की धार बह रही थी.. पियूष ने उसकी टांगों को और फैलाया, अपने हाथों से उसके चूतड़ों को पकड़कर उसे अपनी तरफ खींचा.. शीला ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके होठों से लार की धारा बह रही थी.. "मुझे चोद... मुझे मार... ओह्ह!"
शीला ने अपनी आँखें खोलीं और पियूष के कंधों पर जोर से नाखून गड़ा दिए.. "रुक! मैं... मैं झड़ रही हूँ!" उसका पूरा बदन अकड़ गया, उसकी चूत में ऐंठन शुरू हो गई.. पियूष ने अपनी गति धीमी कर दी, पर रुका नहीं.. वह शीला को देख रहा था, उसके चेहरे पर आनंद के भाव, उसके स्तनों का तेजी से उठना-गिरना.. "

शीला ने उसकी गर्दन पकड़ ली और उसे अपनी तरफ खींचकर एक जबरदस्त चुंबन दिया.. उनके होंठों के बीच लार की डोर बन गई.. बाहर बारिश की आवाज़ और तेज़ हो गई, मानो आसमान भी उनके जुनून से प्रभावित हो गया हो.. शीला ने चुंबन तोड़ते हुए कहा, "अब तेरी बारी... मैं चाहती हूँ कि तू मेरे अंदर झड़े.."
पियूष को पता था की अब उसके टट्टो में वीर्य का एक कतरा भी शेष नहीं बचा था.. वो अब जैसे बिना कारतूस की बंदूक चला रहा था.. फिर भी उसने शीला की टांगों को अपने कंधों पर रख लिया और जोर से धकेलना शुरू कर दिया.. शीला की चीखें कमरे में गूँजने लगीं.. उसकी चूत पियूष के लंड को निचोड़ रही थी, हर धक्के के साथ स्राव की धार बह रही थी.. पियूष का साँस लेना मुश्किल हो रहा था, उसकी पीठ पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं.. "बस अब और नहीं हो पाएगा मुझसे..." उसने हाँफते हुए कहा..
शीला ने अपनी आँखें खोलीं और उसके होठों पर मुस्कान तैर गई.. "ठीक है फिर.. झड़ जा मेरे अंदर... पूरा... ओह्ह!" उसने उसकी कमर को अपनी एड़ियों से खींचा.. पियूष का सिर पीछे की तरफ झटका और उसने एक जोरदार धक्का लगाकर लंड को गहराइयों में उतार दिया.. "ओह्ह... हाँ... ऐसे ही..." वह मुस्कुराई जब पियूष का शरीर उस पर भारी हो गया..
कुछ देर बाद जब पियूष ने अपना सिर उठाया तो शीला उसे देखकर हँस पड़ी.. उसके बाल पसीने से चिपके हुए थे, आँखें थकान से धुंधली हो रही थीं.. अस्पताल से निकले मरीज जैसा हाल था पीयूष का
"अभी से थक गया?" शीला ने उसकी ठुड्डी पकड़कर कहा.. सुनकर पीयूष के तो होश उड़ गए.. फिर भी उसने मुस्कुराते हुए उसके निप्पल को दाँतों से काटा.. "अब थोड़ा आराम तो करने दीजिए.."
"मुझे अभी और करना है पीयूष.. ऐसे मझधार में मत छोड़ मुझे" शीला ने सिसकते हुए कहा... पीयूष को तो समझ नहीं आ रहा था की अब इसके तूफान को आखिर शांत कैसे करें..
पीयूष ने अपना एक हाथ शीला के पेट पर होते हुए उसके भोसड़े तक पहुंचा दिया.. शीला ने अपनी गर्दन को पीछे की तरफ झुकाया, उसके कंधे पर दाँत गड़ा दिए जब पीयूष की उंगलियाँ उसके जामुन जैसी क्लिट को ढूँढ़ने लगीं.. "ओह्ह! आह्ह.. उफ्फ़.." शीला की साँसें उखड़ने लगी थीं.. पीयूष को लगा की अब शीला की आग उसे उंगलियों से ही बुझानी होगी..

पियूष ने उसके कान में गर्म साँस छोड़ते हुए कहा, "अब मेरी उंगलियों का मज़ा लीजिए भाभी..." उसकी उंगलियों ने एक जटिल लय बनाई.. कभी क्लिट पर गोलाई में घूमते हुए, कभी चूत के भीतर से गुजरते हुए.. शीला का शरीर तार-तार हो रहा था, उसके नाखून पियूष की जाँघों में घुस गए.. बाहर बारिश की बूँदों ने खिड़की पर एक तेज़ ताल बजा दिया, जैसे उनकी हाँफने की आवाज़ को डुबोना चाहती हों..
"बस बहुत हुआ.. अब तेरे लंड को फिर से तैयार कर.. मुझे अंदर डलवाना है" शीला ने पलटने की कोशिश की, लेकिन पियूष ने उसकी कमर को जकड़ लिया.. उसने अपनी ठुड्डी उसके कंधे पर टिका दी, उसकी उंगलियों का दबाव बढ़ा दिया.. शीला की चीख कमरे में गूँजी जब उसका शरीर एकाएक अकड़ गया.. वह जैसे हवा में लटक गई थी, उसकी चूत से पानी की धारा बह निकली..

जब पियूष को महसूस हुआ की शीला सिर्फ उंगलियों से शांत नहीं होती तब वह अपने घुटनों के बल बैठ गया.. उसने शीला के पैरों को अपने कंधों पर टिकाया, उसकी चूत को अपने सामने खींच लिया.. उसकी जीभ ने एक लंबी, धीमी रेखा खींची.. गाँड से लेकर क्लिट तक.. शीला ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके हाथों ने चादर को जकड़ लिया.. पियूष ने उसकी चूत को अपने होंठों से चूसा, जैसे कोई प्यासा आदमी ओस की बूँदें चाट रहा हो..
शीला ने अपने घुटनों को मोड़ा, अपनी चूत को उसके मुँह की तरफ धकेला.. "और.. और गहरा," वह हाँफती हुई बोली.. पियूष ने अपनी जीभ को उसकी चूत के अंदर घुसा दिया, गोल-गोल घुमाते हुए.. उसकी नाक शीला के क्लिट से रगड़ खा रही थी, हर साँस के साथ उसकी गंध उसे और उत्तेजित कर रही थी..
अचानक शीला ने उसके बालों को जकड़ लिया, उसके मुँह को अपनी चूत पर दबाया.. "ऐसे नहीं.. ऐसे," उसने उसके सिर को हिलाते हुए कहा.. पियूष ने अपनी उँगलियों को उसकी चूत में घुसा दिया, जीभ से क्लिट को चाटते हुए.. शीला का शरीर झटके खाने लगा, उसकी साँसें तेज हो गईं..

"हाँ.. हाँ.. ठीक वहाँ.. ओह्ह!" उसकी आवाज़ काँप रही थी.. पियूष ने उसकी चूत से अपना मुँह हटाया और उसकी गहरी साँसों को सुनकर मुस्कुराया.. उसने अपने लंड को उसकी चूत के छेद पर रगड़ा, फिर धीरे से अंदर घुसा.. शीला ने अपनी आँखें खोलीं, उसकी तरफ देखा.. उसकी पुतलियाँ फैली हुई थीं, उसके होंठ गीले थे.. पियूष ने उसके स्तनों को अपने हाथों से भर लिया, उन्हें दबाते हुए आगे बढ़ा.. शीला ने अपने पैरों को उसकी पीठ पर लपेट लिया, उसे और अंदर खींचा.. थरथराते हुए शीला पीयूष के मुंह के अंदर झड़ गई.. उसके योनि-रस से पीयूष का पूरा मुंह पूत गया..
बाहर बारिश की आवाज़ तेज़ हो गई थी, लेकिन कमरे में केवल उनकी हाँफने की आवाज़ें गूँज रही थीं.. पियूष निढाल होकर शीला के आगोश में लेट गया.. उसकी हालत ऐसी थी जैसे हवा निकला हुआ गुब्बारा.. शीला उसकी सारी ऊर्जा चूसकर हवस की महारानी की तरह लेटी हुई थी.. अब जरा सी भी ताकत नहीं बची थी पीयूष में.. वो सोच रहा था की अब शीला भाभी की भूख शांत हो जाए तो गनीमत है वरना आज उसके प्राण शरीर से निकल जाएंगे..!!
पर ये तो शीला थी..!! एक ऐसी आग जिसे आप भड़का तो सकते हो पर बुझाना हर किसी के बस की बात नहीं..!! चुदाई की भूख की पीछे पनप रहे उसके मनसूबे को भांप सके उतनी बुद्धि थी नहीं पीयूष में..!! शीला का उद्देश्य पीयूष को संतुष्ट करना नहीं था.. वो उसे शारीरिक और मानसिक रूप से उस हद तक थकाना और तोड़ना करना चाहती थी की उसके पास ज्यादा सोचने की शक्ति ही न बचें..
अपने दोनों चर्बी भरे विराट स्तनों को खुद के हाथों से ही मसलने के बाद, शीला ने अपने भोसड़े में तीन उँगलियाँ डालकर अंदर बाहर की.. उँगलियाँ ऐसे बाहर निकली जैसे शहद में डुबोकर निकाली हो.. उन उंगलियों को अपने नथुनों तक लाकर शीला ने गहरी सांस ली.. और फिर उन्हें मुंह में ठुँसकर चाटने लगी..
शीला के बगल में ही लाश की तरह पड़ा हुआ पीयूष.. अधखुली आँखों से शीला की इस हरकत को देखता रहा.. इस औरत की बेहिसाब हवस देखकर उसे ताज्जुब हो रहा था.. सेक्स के मामले में शीला आक्रामक है यह तो पीयूष पहले से जानता था पर उसकी भूख इतनी तीव्र और उग्र होगी उसका अंदाजा आज ही हुआ..!! उसे एहसास हो गया की शीला को बिस्तर पर शांत करना किसी एक मर्द के बस की बात ही नहीं थी.. कम से कम चार-पाँच मर्द को एक ही रात में थका देने की ताकत थी उसमें.. मन ही मन पीयूष को शीला के पति मदन के प्रति आदर की भावना महसूस हुई.. जिन्होंने उतने सालों तक इस चुदक्कड़ तूफान को संभालकर रखा हुआ था..!
पीयूष शीला के बगल में पेट के बल लेटा हुआ था.. इसका कारण यह था की वो अपने लंड को शीला की नज़रों से छुपाकर रखना चाहता था.. शीला लंड देखते ही झपट पड़ती थी और अब उसमें या उसके लंड में जरा सी भी शक्ति शेष नहीं बची थी..
पर शीला आखिर शीला थी.. आखिरी संभोग के बाद जब करीब दस मिनट तक शीला बेड पर पड़ी रही.. अपने बबले खुद दबोचते हुए.. चूत रस से लिप्त उंगलियों को चाटते हुए.. तब कुछ पलों के लिए पीयूष को ऐसा लगा जैसे अब वो शांत ही पड़ी रहेगी.. थककर सो जाएगी.. और उसे भी सोने देगी.. पीयूष के जिस्म का हर कतरा थक चुका था और अब आराम मांग रहा था..
शीला अचानक से खड़ी हो गई.. "चल बाहर," आँखें बंद कर सुस्ता रहे पियूष का हाथ पकड़कर बेड से उठाते हुए कहा, "बारिश में भीगने का मज़ा लेते है.." पियूष ने आँखें खोलीं तो देखा कि शीला उसकी तरफ मुस्कुरा रही है, उसके भीगे हुए बाल उसके भारी स्तनों से चिपक रहे थे.. पीयूष ने ऐसी आँखों से शीला की तरफ देखा जैसे शेरनी के पंजे तले दबा हुआ हिरन का बच्चा खुद को छोड़ देने की विनती कर रहा हो..!!
शीला बेड से खड़ी हुई और पीयूष को लगभग घसीटते हुए छत की सीढ़ियों की तरफ ले गई.. वे दोनों बिना कपड़ों के ही छत की तरफ बढ़े, जहाँ बारिश की ठंडी बूंदें उनके गर्म शरीरों से टकरा रही थीं.. शीला ने अपने हाथों से चेहरे के बाल पीछे किए और पियूष के सामने खड़ी हो गई.. "मुझे पकड़ो," वो फुसफुसाई, और पियूष ने उसकी कमर को जकड़ लिया.. बारिश की ठंडी बूंदों से भीगकर शीला की निप्पल सख्त हो चुकी थी.. शीला की नजर पीयूष के पिचके हुए लंड पर गई.. और बिना वक्त गँवाएँ उसने अपनी हथेली से लंड को मसलना शुरू कर दिया..
ठंडे पानी से भीगकर पीयूष का बदन तरोताजा हो रहा था.. शीला का गदराया बदन बारिश में भीगकर कुछ अधिक ही सुंदर लगने लगा था.. शीला की जादुई उंगलियों ने भी अपना कमाल दिखाया.. पीयूष का मरा हुआ लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा.. जैसे उसे अमृत पिलाया गया हो..!!
अब शीला ने अपनी बाँहें पियूष के गले में डाल दीं और उसके होंठों को चूम लिया.. उनका चुंबन धीरे-धीरे जुनूनी होता गया, उनकी जीभें एक-दूसरे से लड़ने लगीं.. पियूष ने अपने हाथों से शीला के नितंबों को मसलना शुरू कर दिया, उसे अपने शरीर के करीब खींचते हुए.. शीला की चूत तो पहले से ही गीली थी, और अब बारिश का पानी उसके और पियूष के बीच से फिसल रहा था..
शीला ने पियूष को धक्का दिया और वह छत की दीवार से टकरा गया.. उसने मुस्कुराते हुए पियूष के लंड को पकड़ा और धीरे-धीरे उसे सहलाने लगी.. "कर दिया ना इसे फिर से तैयार..!!" मुस्कुराते हुए उसने कहा, और फिर झुककर उसे चूम लिया.. पियूष ने सिर पीछे झुकाया और आँखें बंद कर लीं, शीला के होंठों का गर्म स्पर्श उसे पागल कर रहा था..
घुटनों के बल बैठकर शीला ने अपनी जीभ से उसके लंड के सिरे को चाटना शुरू कर दिया, फिर धीरे-धीरे उसे पूरा निगल लिया.. पियूष ने अपनी उँगलियों से उसके बाल पकड़े और उसे अपने मुंह में और गहराई तक ले जाने दिया.. बारिश की बूंदें उन दोनों के शरीरों पर गिर रही थीं, लेकिन उनकी गर्मी उसे महसूस नहीं होने दे रही थी..

शीला ने उसका लंड मुंह से निकाला और खड़ी हो गई.. उसने पियूष को घूरते हुए कहा, "अब मेरी बारी.." वह दीवार की तरफ मुड़ी और अपने हाथों से दीवार पर टिक गई, अपने मोटे नितंबों को पियूष की तरफ उछालते हुए.. पियूष ने उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ा और अपने लंड को उसकी चूत के छेद पर रख दिया..
"आह्ह.. ओह्ह.. धीरे से," शीला ने मुंह बंद करते हुए कहा, लेकिन पियूष ने एक झटके में अपना पूरा लंड अंदर धकेल दिया.. शीला मदहोशी से झूम उठी.. और उसके मुंह से एक दबी हुई चीख निकल गई.. पियूष ने उसकी कमर को कसकर पकड़ा और तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए.. बारिश की बूंदें उनके शरीरों पर गिर रही थीं, लेकिन उनके बीच की गर्मी कहीं ज्यादा तेज थी..
"ओह्ह.. ऐसे ही.. और जोर से!" शीला ने पीछे मुड़कर उसकी तरफ देखते हुए कहा.. उसकी चूत पियूष के लंड को चूस रही थी, हर धक्के के साथ उसके भीतर जलन बढ़ती जा रही थी.. पियूष ने एक हाथ से उसके बाल पकड़े और दूसरे हाथ से उसके नितंबों को मसलते हुए उसे और पीछे की तरफ खींच लिया.. शीला की गांड उसकी जांघों से टकराई और वह आगे की तरफ झुक गई..
"तू मुझे मार डालेगा आज," शीला हांफती हुई बोली, लेकिन उसकी चूत पियूष के लंड को छोड़ने को तैयार नहीं थी.. पीयूष ने मन में सोचा "जान तो आज मेरी निकलने वाली है अगर आप नहीं रुकी तो.."
शीला ने अपने पैरों को और फैला लिया, जिससे पियूष को और गहराई तक जाने की जगह मिल गई.. पियूष ने अब उसे दीवार से दबा लिया और उसकी गर्दन पर गीले चुंबन लगाते हुए चोदना शुरू कर दिया.. शीला के मुंह से लगातार गंदी गालियां निकल रही थीं, उसकी आवाज़ बारिश में डूब जाती थी और फिर उभर आती थी..
"मैं.. मैं झड़ने वाली हूँ!" शीला ने अचानक चिल्लाते हुए कहा और उसका पूरा शरीर अकड़ गया.. पियूष ने भी अपनी गति को और तेज कर दिया, उसकी चूत के अंदरूनी हिस्से को चीरते हुए.. शीला की आँखें लुढ़क गईं और उसके होंठ कांपने लगे.. उसकी चूत से गर्म पानी बह निकला, जो बारिश के साथ मिलकर उनके पैरों के नीचे टपक रहा था..
पियूष ने अंतिम धक्का देते हुए वीर्य की कुछ बूंदें भीतर उड़ेल दी.. शीला ने अपनी पीठ को उसके सीने से दबाया और हांफते हुए कहा, "मज़ा आ गया यार.." उसके बाल बारिश से चिपक चुके थे और चेहरे पर एक संतुष्ट मुस्कान थी..
वे दोनों छत के नीचे खिसक कर बैठ गए, एक दूसरे के शरीर से चिपके हुए.. पियूष ने अपना हाथ उसके पेट पर रखा और धीरे से सहलाया.. "गजब की हो आप तो भाभी.. मुझे पूरा निचोड़ लिया" उसने कहा.. शीला ने उसकी ओर देखा और हंस दी,
अंदर जाने से पहले उन्होंने एक बार फिर से एक दूसरे को चूमा, इस बार धीरे से, प्यार भरे चुंबन.. बारिश अब हल्की हो चुकी थी और हवा में सर्दी बढ़ गई थी.. शीला ने अपने आप को पियूष के शरीर से और चिपका लिया, उसकी गर्माहट महसूस करते हुए.. "चलो अंदर चलते हैं, नहीं तो सर्दी लग जाएगी," वह मुस्कुराते हुए बोली.. पियूष ने उसका हाथ पकड़ा और दोनों बेडरूम की तरफ चल पड़े..
कमरे में प्रवेश करते ही शीला ने बिस्तर के पास खड़े होकर अपने गीले बालों को पीछे सरका दिया.. पियूष बाथरूम से तौलिया लाया और धीरे से उसके शरीर को सुखाने लगा.. तौलिया उसके निचले हिस्से पर पहुंचा तो शीला ने उसका हाथ रोक लिया और आंखों में चमक लिए बोली, "ये क्या कर रहे हो? अभी तो हमारा काम खत्म नहीं हुआ है.." शीला की बात सुनकर पियूष को चक्कर आने लगे..!!
शीला पियूष के कान के पास अपने होंठ ले गई और फुसफुसाई, "तुम भी दूसरे मर्दों की तरह मत करो, मुझे गीला छोड़ दो और फिर सुखाने आ जाओ.." यह कहते हुए उसने अपना एक हाथ उसकी जांघों के बीच सरकाया और उसके मरे हुए लंड को महसूस किया.. पियूष ने एक गहरी सांस ली और उसके कंधे पर अपना माथा टिका दिया.. "अब मुझसे और नहीं होगा भाभी.. मैं पूरी तरह थक चुका हूँ" अपनी हार मानते हुए पीयूष ने कहा..
शीला मुस्कुराई और उसने पीयूष को धीरे से बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर सवार हो गई.. अपने भीगे हुए बालों को पीछे फेंका और उसके सीने पर बैठकर अपनी उंगलियों से उसके निपल्स को मसलना शुरू कर दिया.. पियूष की सांसें तेज हो गईं जब शीला ने धीरे से अपने नाखूनों से उसके सीने पर नीचे की ओर खरोंचे बनाईं.. "आज रात तुम मेरे हैं, पूरी तरह से," वह गुर्राई और फिर उसके निचले होंठ को अपने दांतों से काट लिया..
अपने शरीर पर सवार होकर उछल रही शीला को देखकर पीयूष को अब ऐसा लग रहा था जैसे कोई चुड़ैल उसका खून चूसने ऊपर चढ़ी हो.. दिमाग से चुदाई का सारा भूत उतर चुका था.. शरीर का कतरा कतरा दर्द कर रहा था.. और उसका लोडा तो ऐसे सुन्न पड़ गया था जैसे शरीर का हिस्सा ही न हो..!! पर शीला को रोक पाना उसके बस की बात नहीं थी
बेडरूम की हल्की रोशनी में शीला की गीली त्वचा चमक रही थी.. उसने पियूष की जांघों के बीच अपना हाथ सरकाया और उसके मरे हुए लंड को मजबूती से पकड़ लिया "तुम्हारा ये दोस्त थक गया लगता है" वह हंसी, "थोड़ी देर आराम करते ही फिर से तैयार हो जाएगा है.." कहते हुए शीला ने पिचके हुए लंड को मुठ्ठी में पकड़कर अपने गीले भोसड़े के होंठों पर रगड़ दिया..
पीयूष अब अपने सारे हथियार डाल चुका था.. उसने अपना शरीर और आत्मा शीला को सौंप दी थी.. और खुद को उसे समर्पित कर दिया था.. उसका जैसा मन चाहे करें.. क्योंकि अब तो विरोध करने जितनी ताकत भी नहीं बची थी पीयूष में..
शीला ने अपने वजन को थोड़ा आगे बढ़ाया और उसके मुरझाए लंड के ऊपर अपना भोसड़ा रगड़ने लगी, अपनी आंखें बंद करके उस पल का आनंद लेते हुए.. "हम्म... इस तरह भी मज़ा आ रहा है मुझे तो," वह धीरे से बुदबुदाई, वह धीरे-धीरे आगे-पीछे हिलने लगी, अपने हाथों से अपने भारी स्तनों को मसलते हुए.. पियूष लाश की तरह पड़ा रहा..
कमरे में सिर्फ शीला की सांसों और बिस्तर की टांगें हिलने की कीचुड़ कीचुड़ आवाजें ही सुनाई दे रही थीं.. शीला ने अपनी गति बढ़ा दी, अपने कूल्हों को जोर से घुमाते हुए लंड पर भोसड़ा रगड़ रही थी..
"उफ्फ़.. आहह.. ओहह..!!" शीला एक और ऑर्गेज़्म की तरफ बढ़ रही थी.. अपने गदराए बदन को पीयूष के लंड पर मथनी की तरह मथते हुए उसने दो उंगलियों से अपनी जामुन जैसी क्लिटोरिस को रगड़ना शुरू कर दिया.. बिना लंड-प्रवेश के झड़ने का यही उसका तरीका था..
एक हाथ से स्तन की निप्पल को मरोड़ रही शीला के दूसरे हाथ की उँगलियाँ उसकी क्लीट को मसल रही थी और साथ ही वो अपनी कमर को आगे पीछे घिस रही थी.. उसका शरीर खींचने लगा.. वो सीलिंग की तरफ देखते हुए कराहने लगी... एक हल्की चीख मारकर उसके भोसड़े ने ढेर सारा चिपचिपा रस पीयूष के मृत लंड पर गिरा दिया.. कुछ पलों के लिए उसी अवस्था में रहकर शीला ने इस ऑर्गेज़्म का पूरा लुत्फ उठाया.. फिर धीरे से सरककर वो पीयूष के बगल में लेट गई.. एक संतुष्टि भरी नजर से उसने खर्राटे मार रहे पीयूष की तरफ देखा और मुस्कुराकर करवट बदलकर सो गई..!!!
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