Adultery शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी) - Page 35 - SexBaba
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Adultery शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)

पिछले अपडेट में आपने पढ़ा की.. पीयूष, राजेश और मदन विदेश के ऑर्डर के बारे में विमर्श करते है.. आखिर तय होता है की पीयूष और मदन अमरीका जाएंगे.. दोनों के आग्रह करने के बावजूद, राजेश ने यह कहते हुए जाने से इनकार कर दिया की रेणुका को सगर्भावस्था में अकेली नहीं छोड़ सकता.. हालांकि उसकी न जाने की असली वजह तो फाल्गुनी ही थी..

मदन घर लौटता है.. प्यासी शीला और मदन के बीच एक दमदार संभोग होता है.. दोनों ही अपनी पुरानी स्वतंत्रता-सभर ज़िंदगी को मिस कर रहे है.. शीला बताती है की उसने उस ज़िंदगी में वापिस लौटने की योजना बनाई है.. मदन के पूछने पर भी उसने अपनी योजना के बारे में बताया नहीं..

अब आगे..


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दूसरे दिन सुबह जब शीला दूध लेने के लिए उठी तब सब से पहले उसकी नजर रसिक के बजाए, पड़ोस मे वैशाली के घर की तरफ गया.. ताला नहीं लगा हुआ था, उसका मतलब साफ था की पिंटू लौट चुका था.. शीला ने इशारे से ही रसिक को दूर रहने के लिए कहा.. रसिक समझ गया और दूध देकर निकल लिया

०८:३० बजे जब पिंटू शीला के घर नाश्ते के लिए आया तब मदन डाइनिंग टेबल पर बैठकर नाश्ता कर रहा था

मदन ने पिंटू को देखकर खुश होते हुए कहा "अरे आओ बेटा.. कब आए.. !! पता ही नहीं चला"

पिंटू डाइनिंग टेबल की कुर्सी पर बैठते हुए बोला "कल रात को आते आते काफी देर हो गई थी.. बस ही नहीं मिल रही थी"

मदन: "सही कहा, कल मुझे भी बस मिलने मे बड़ी दिक्कत हुई थी.. वैसे कैसी चल रही है नौकरी तुम्हारी?"

तब तक शीला चुपचाप आकर पिंटू के लिए नाश्ते की प्लेट परोसकर वापिस किचन में चली गई

खाते खाते पिंटू ने कहा "ठीक ही चल रही है पापा जी.. वैसे मैं इससे बेहतर नौकरी तलाश रहा हूँ"

मदन: "मेरे भी इंडस्ट्री में काफी कॉन्टेक्टस है, मैं भी एक-दो जगह बात करता हूँ.. तुम अपनी सारी डिटेल्स ईमेल कर देना मुझे"

पिंटू: "उसकी जरूरत नहीं है पापा जी, मैं खुद ढूंढ लूँगा.. कोशिश कर रहा हूँ, जल्द ही कुछ हो जाएगा"

मदन: "जैसी तुम्हारी मर्जी"

फिर दोनों मे से कोई कुछ नहीं बोला और पिंटू नाश्ता खतम कर ऑफिस के लिए रवाना हो गया

डाइनिंग टेबल से प्लेट समेत रही शीला को मदन ने पूछा

मदन: "राजेश की ऑफिस में इतनी अच्छी नौकरी तो है पिंटू की.. फिर वो क्यों बेकार में दूसरी नौकरी ढूंढ रहा होगा?"

शीला समझ रही थी की पिंटू किस वजह से दूसरी नौकरी ढूंढ रहा था.. वैशाली और राजेश के बीच जो कुछ भी हुआ था उसके बाद पिंटू राजेश से सीधे मुंह बात भी नहीं करता था.. दोनों के बीच सिर्फ काम के सिलसिले में प्रोफेशनल बातें ही होती थी.. जाहीर सी बात थी की पिंटू को राजेश बिल्कुल पसंद नहीं था और इसलिए वो दूसरी नौकरी ढूंढ रहा था..

लेकिन शीला ने इस बारे में कुछ भी नहीं कहा मदन से

शीला: "तरक्की करना तो हर कोई चाहता है.. उसमे क्या गलत है..!!"

मदन: "ये बात भी सही है" टेबल से उठते हुए मदन ने उस बात पर पूर्णविराम लगा दिया

मदन बाथरूम में नहाने के लीये चला गया और शीला अपनी योजना के बारे में सोचने लगी.. कुछ देर सोचने के बाद उसने अपना मोबाइल उठाया और फोन लगाया

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नहाकर तैयार होने के बाद, मदन बाहर निकला और शीला किचन के कामों मे व्यस्त हो गई.. पिछले दो दिनों मे पर्याप्त चुदाई मिलने से शीला आज बड़ी खुश थी.. खाना बनाते हुए वह सोच रही थी की अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो जल्द ही वह पुराने सुनहरे दिन वापिस लौट आएंगे.. और वह दोबारा मुक्त और स्वतंत्र ज़िंदगी अपनी मर्जी से जी पाएगी

खाना बनाना खत्म कर, वो बाहर बरामदे में, झूले पर बैठे बैठे धूप सेंकने लगी.. सर्दियाँ अब खतम होने पर थी पर फिर भी, ठंड का हल्का सा असर, वातावरण में अब भी मौजूद था.. झूले पर झूलते हुए, ठंडी हवा के झोंकों से, शीला की आँख लग गई..

वह कब तक सोती रही उसे पता ही नहीं चला.. अचानाक किसी ने उसके शरीर को पकड़कर हड़बड़ाया.. उसने अपनी आँख खोली तो सामने मदन खड़ा था.. गभराया हुआ.. वो कांप रहा था.. मदन को इस हाल में देखकर, शीला भी एक पल के लिए डर गई

शीला: "क्या हुआ मदन?"

मदन: "गजब हो गया शीला... अभी राजेश का फोन आया था.. !! उसने कहा की दो गुंडों ने ऑफिस में घुसकर पिंटू को बाहर खींच निकाला और उस पर जानलेवा हमला कर दिया.. !!!!"

शीला की आँखों के आगे अंधेरा सा छा गया.. !!! पैरों तले से जमीन खिसक गई

शीला: "बाप रे.. !!! कौन थे वो गुंडे?? कुछ हुआ तो नहीं पिंटू को?"

मदन: "मुझे कुछ पता नहीं है यार.. राजेश और ऑफिस के लोग मिलकर उसे अस्पताल ले गए है.. तैयार हो जा.. हमें जल्दी वहाँ पहुंचना पड़ेगा"

शीला फटाफट साड़ी बदलकर तैयार हो गई और दोनों ऑटो से सिटी हॉस्पिटल पहुँच गए

इनफार्मेशन काउंटर पर पूछताछ करने पर पता चला की पिंटू को ट्रॉमा सेंटर में दाखिल किया गया था.. बावरे होकर दोनों वहाँ पहुंचे तब उन्हें राजेश और उसकी ऑफिस के कर्मचारी वहाँ पर खड़े हुए मिले

मदन: "राजेश, कैसा हाल है पिंटू का? ज्यादा चोट आई है क्या?"

राजेश ने अपना पसीना पोंछते हुए कहा "यार, जिस हिसाब से उन गुंडों ने हमला किया था, लगता है वो पिंटू को जान से मारने के इरादे से ही आए थे"

मदन बेहद घबरा गया और बोला "यार कितनी चोट आई है उसे?? कहीं वो... !!!" आगे के शब्द उसके मुंह से निकल ही नहीं पाए

राजेश: "दोनों ने चाकू से हमला किया.. पर ऑफिस के कर्मचारी तुरंत बाहर पहुँच गए.. और उन गुंडों का सामना कर उन्हें भगा दिया.. फिर भी, एक ने चाकू पिंटू की कमर में घुसा दिया.. अपना बचाव करते हुए पिंटू की हथेलियों पर भी चोट आई है.. जब हम उसे लेकर आए तब वो बेहोश था.. देखते है डॉक्टर क्या कहते है"

शीला: "पर वो लोग कौन थे?"

राजेश: "पता नहीं.. मास्क पहन रखे थे दोनों ने.. बाइक पर आए थे.. जब हम सब ने मिलकर उनका सामना किया तब वो भाग गए.. हॉस्पिटल वालों ने पुलिस को इन्फॉर्म करने के लिए कहा है.. वो सब तो मैं संभाल लूँगा.. बस पिंटू को ज्यादा चोट न आई हो"

सब बाहर बैठकर डॉक्टर के बाहर आने का इंतज़ार करने लगे..

तभी वहाँ पुलिस उन्हें ढूंढते हुए पहुंची.. मदन और राजेश उठकर उस इंस्पेक्टर की ओर गए

इंस्पेक्टर: "आप दोनों कौन?"

मदन: "सर, मैं पिंटू का ससुर हूँ.. और यह राजेश है.. पिंटू इनकी कंपनी में ही काम करता है"

इंस्पेक्टर: "हम्म.. जिन पर हमला हुआ, मतलब आपके दामाद की किसी से कोई दुश्मनी या कोई झगड़ा चल रहा था क्या?"

मदन: "ऐसा तो कुछ भी नहीं था.. बड़ा ही सीधा लड़का है वो.. !!"

इंस्पेक्टर ने राजेश की तरफ मुड़कर देखा और पूछा "शायद आप कुछ बता सकें?? ऑफिस में किसी से मन-मुटाव या किसी तरह की अनबन.. ऐसा कुछ हो तो बताइए"

राजेश: "जैसा इन्हों ने बताया.. पिंटू बेहद सीधा लड़का है.. अपने काम से मतलब रखता है.. ऑफिस के अन्य कर्मचारियों से भी उसके संबंध काफी अच्छे है"

मदन: "सर, उन हमलावरों के बारे में कुछ पता चला?"

इंस्पेक्टर: "फिलहाल तो कुछ कह नहीं सकते.. हमने जांच शुरू कर दी है.. जैसा की मुझे ऑफिस के चपरासी ने बताया.. वह हमलावर चेहरे पर मास्क लगाकर आए थे.. बाइक का नंबर भी किसी ने नोट नहीं किया है.. सिर्फ इतना पता चला ही की बाइक लाल रंग की थी.. अब उस रंग की बाइक तो इस शहर में हजारों की तादाद में होगी.. कोई पुख्ता जानकारी के बगैर इस केस मे आगे तहकीकात करना मुश्किल होगा.. वैसे जिन पर हमला हुआ है, क्या वो होश में है?"

राजेश: "जब हम यहाँ लेकर आए तब तो वो बेहोश था.. ट्रीट्मेंट चल रहा है लेकिन अब तक डॉक्टर ने हमे कुछ बताया नहीं है"

इंस्पेक्टर: "ठीक है.. यह मेरा नंबर नोट कर लीजिए.. जैसे ही उनको होश आता है, हमें कॉल कीजिएगा.. ऐसे मामलों मे अक्सर विकटीम का स्टेटमेंट सब से महत्वपूर्ण होता है.. वहीं से आगे की कड़ी मिलने की उम्मीद है.. चलता हूँ मैं.. !!"

कुछ कागजों पर मदन की साइन लेकर पुलिस वाले चले गए..

शीला: "क्या कह रही थी पुलिस? कुछ पता चला की किसने हमला किया था?"

मदन ने परेशान होकर कहा "अरे यार, एक घंटे में कहाँ से पुलिस वाले कुछ पता करेंगे..!! न उनका हुलिया पता है और ना ही उनके बाइक के नंबर के बारे में जानकारी है.. वो कह रहे थे की होश में आने पर वो लोग पिंटू का स्टेटमेंट लेने आएंगे.. वहीं से कुछ सुराख मिलने की उम्मीद है"

शीला: "अरे मदन.. तुम्हारा वो दोस्त है ना पुलिस में.. !! क्या नाम था..!! हाँ, वो तपन देसाई.. !! याद है तुझे?"

मदन: "अरे हाँ यार.. तपन तो मुझे याद ही नहीं आया.. वो काम आ सकता है हमारे"

राजेश: "हाँ, ऐसे मामलों मे जान पहचान बहुत काम आती है.. एक बार बात कर तेरे उस दोस्त से"

मदन ने तपन को फोन लगाया और पूरी घटना के बारे में बताया.. इन्स्पेक्टर तपन ने अपनी ओर से पूरी कोशिश करने का आश्वासन दिया

मदन, शीला और राजेश वैटिंग रूम मे बेसब्री से डॉक्टर के आने का इंतज़ार कर रहे थे..

आधे घंटे बाद जब डॉक्टर बाहर आए, तब मदन, शीला और राजेश के साथ ऑफिस के बाकी कर्मचारियों ने भी उन्हें घेर लिया और पूछने लगे

मदन: "डॉक्टर साहब, कैसी तबीयत है अब पिंटू की?"

डॉक्टर: "देखिए, पहले तो यह बता दूँ की उनकी जान खतरे से बाहर है.. कमर पर लगा चाकू महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान नहीं कर पाया.. शायद हड़बड़ी में चलाया होगा चाकू.. अमूमन ऐसे मामलों मे हुए घाव जानलेवा होते है.. खून काफी बह गया था इसलिए हमें चढ़ाना पड़ा है.. हाथ में स्टीचेस लेने पड़े है.. और कमर पर भी.. उनकी हालत अभी स्थिर है"

राजेश: "वो होश में आ गया? क्या हम उससे मिल सकते है?"

डॉक्टर: "फिलहाल तो वह बेहोश है.. पर दवाई का असर कम होते ही, होश आ जाएगा.. मेरे हिसाब से आप लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है.. कुछ ही दिनों में वो ठीक हो जाएंगे.. हाँ, घर जाकर एकाद हफ्ते तक आराम करना होगा"

डॉक्टर का हाथ पकड़कर आभारवश होकर मदन ने कहा "बहोत बहोत शुक्रिया आपका सर, आपने उसकी जान बचा ली"

सब की जान में जान आई.. राजेश ने ऑफिस के अन्य कर्मचारियों को वापिस भेज दिया

मदन ने राजेश से कहा "तुम भी ऑफिस के लिए निकलो राजेश.. अब मैं और शीला यहाँ है.. और वैशाली अपने सास और ससुर के साथ आती ही होगी.. !!"

राजेश: "ठीक है.. कुछ भी काम हो तो बताना मुझे.. !!"

राजेश चला गया.. अब वैटिंग रूम मे मदन और शीला अकेले थे.. शीला बैठे बैठे किसी मैगजीन के पन्ने घुमा रही थी.. और मदन बड़े ही ध्यान से उसकी मुखमुद्रा को देख रहा था.. अजीब से विचारों का तुमुलयुद्ध चल रहा था उसके मन में..!!

पन्ने पलटते पलटते शीला का ध्यान अचानक मदन की ओर गया.. उसे महसूस हुआ, जैसे काफी देर से मदन, उसे बड़े ही अजीब तरीके से देख रहा था..

मैगजीन को टेबल पर रखकर, शीला ने मदन की आँखों मे देखा

शीला: "क्या बात है मदन.. ??? ऐसे क्यों तांक रहे थे मुझे?"

मदन ने नजरें झुका ली और कुछ बोला नहीं

शीला: "बता तो सही... क्या चल रहा है तेरे मन में?? अब तो डॉक्टर ने भी कह दिया की पिंटू खतरे से बाहर है.. फिर क्यों ऐसा मुंह बनाकर बैठा है?"

मदन ने कुछ देर सोचकर शीला के सामने देखा

मदन: "एक बात पूछूँ शीला?? सच सच बताना जो भी मैं पूछूँ"

शीला ने आश्चर्य से पूछा "अरे यार.. इतने अजीब तरीके से क्यों पेश आ रहा है.. !!! बता, क्या चल रहा है तेरे दिमाग में.. !!"

मदन ने थोड़ी सी हिचक के साथ कहा "आज जो हुआ.. मतलब पिंटू के साथ जो हुआ.. उसके पीछे कहीं.. !!"

शीला को समझ नहीं आ रहा था की मदन क्या पूछना चाह रहा था

शीला: "पहेलियाँ मत बुझा.. जो भी बोलना हो साफ साफ बोल"

मदन ने आखिर हिम्मत जुटाकर पूछ ही लिया " कल तू किसी योजना के बारे में बता रही थी.. जिससे पिंटू हमारे रास्ते का रोड़ा न बने और हम अपनी ज़िंदगी पहली की तरह गुजार सकें.. तो कहीं तूने तो.. !!" मदन फिर रुक गया

अब शीला के दिमाग की बत्ती जाली.. मदन के पूछने का असली अर्थ समझ आने पर उसके दिमाग का पारा चढ़ने लगा.. क्रोध के मारे वह थरथर कांपने लगी

शीला ने मदन का हाथ जोर से खींचते हुए कहा "इतनी गिरी हुई समझा है क्या मुझे?? तुझे पता भी है की तू क्या बोल रहा है..!!! एक माँ होकर अपनी बेटी के पति के साथ मैं ऐसा करूंगी?? तूने ऐसा सोच भी कैसे लिया?? इतने सालों में, क्या इतना ही समझ पाया तू मुझे??"

शीला का चेहरा गुस्से से तमतमाते हुए लाल हो गया.. उसकी आँखों से आँसू बहने लगे

मदन ने शीला का हाथ पकड़ लिया और कहा "यार.. तू गुस्सा मत कर.. कल तूने ही तो कहा था की तेरे दिमाग में कोई योजना चल रही थी.. मन मे शक को रखकर घुटते रहने से अच्छा मैंने पूछ ही लिया"

आग बबूला ही शीला ने मदन का हाथ झटकाकर छुड़ा लिया और पैर पटकते हुए वैटिंग रूम के बाहर चली गई.. बाहर लॉबी में जाकर उसने कूलर से ठंडा पानी पिया.. तब जाकर उसका गुस्सा थोड़ा सा शांत हुआ.. वो चलते चलते पार्किंग एरिया में आई और वहाँ छाँव मे पार्क किए हुए स्कूटर पर बैठ गई..

मदन की बात से अब तक उसका दिमाग भन्ना रहा था.. आखिर मदन ऐसी बात सोच भी कैसे सकता है.. !!

बैठे बैठे शीला सोच में पड़ गई.. आखिर किसी ने कौन से मकसद से पिंटू पर हमला किया होगा?? वैसे तो बेहद ही सीधा लड़का है.. घर से ऑफिस और ऑफिस से घर के बीच जीने वाला.. अपनी पत्नी को प्यार करने वाला.. माँ-बाप को बेहद इज्जत देने वाला.. कभी ऊंची आवाज में बात नहीं करने वाला.. !! ऐसे व्यक्ति से भला, किसी की क्या दुश्मनी हो सकती है.. !! वैसे सीधे और ईमानदार लोग, ऐसे लोगों को खटकते है जो कुछ उल्टा-सीधा करना चाहते हो और वह लोग रास्ते का रोड़ा बने हुए हो.. !! देखने जाएँ तो पिंटू शीला के लिए भी एक समस्या ही था.. पर उससे निजाद पाने के लिए इस तरह का कदम लेने के बारे मे वो कभी सोच भी नहीं सकती थी.. फिर आखिर ऐसा कौन हो सकता है जीसे पिंटू को मारने मे फायदा हो रहा हो.. !!

सोचते सोचते एक नाम शीला के दिमाग में बिजली की तरह कौंध गया.. हो सकता है की वो रसिक हो..!!! शीला की चूत के पीछे पागल रसिक के सारे गुलछर्रे, तब से बंद हो गए थे जब से पिंटू और वैशाली उनके पड़ोस में रहने आए थे.. न सुबह कुछ हो पाता था और ना ही दिन में.. !! पर क्या रसिक ऐसा कर सकता है? शीला ने अपने आप से सवाल पूछा और खुद ही जवाब दिया... बिल्कुल कर सकता है.. वासना और हवस इंसान से क्या क्या करवा सकती है वो शीला से बेहतर भला कौन जानता था.. !!

तभी पार्किंग में एक गाड़ी आकर रुकी.. और अंदर से वैशाली और उसके सास-ससुर नीचे उतरें.. वैशाली बेतहाशा रो रही थी.. शीला तुरंत उनके करीब गई.. शीला को देखकर वैशाली भागते हुए उसके पास आई और बिलख बिलखकर रोते हुए उससे लिपट गई.. उसके सास ससुर भी नजदीक खड़े थे.. दोनों के चेहरे विषाद और चिंता से लिप्त थे..

शीला ने वैशाली को ढाढ़स बांधते हुए कहा "रो मत बेटा.. पिंटू अब बिल्कुल ठीक है.. हमारी अभी डॉक्टर से बात हुई.. उसकी जान को कोई खतरा नहीं है.. कुछ ही दिनों में वो ठीक भी हो जाएगा"

वैशाई ने रोते हुए कहा "हमने क्या बिगाड़ा है किसी का जो ऊपर वाला हमें यह दिन दिखा रहा है.. !! मुझे उसे छोड़कर जाना ही नहीं चाहिए था.. सब मेरी गलती है"

वैशाली की सास ने उसकी पीठ को सहलाते हुए उसे शांत करने की कोशिश की और कहा "बेटा.. उसमे तेरी क्या गलती? खुद को दोष मत दे.. और तेरी मम्मी ने अभी कहा ना.. की वो बिल्कुल ठीक है.. फिर क्यों रो रही है.. !!! चल चुप हो जा.. और अपना मुंह धो ले.. ऐसी रोनी शक्ल बनाकर पिंटू के सामने मत जाना.. ऊपर वाले का लाख लाख शुकर है की पिंटू को कुछ हुआ नहीं.. !!"

शीला और वैशाली की सास ने मिलकर उसे शांत किया.. उसके ससुर गाड़ी से पानी की बोतल लेकर आए और वैशाली को पिलाया.. पानी पीने के बाद वह कुछ शांत हुई

वैशाली: "आप अकेले ही है मम्मी? कोई नहीं है क्या आप के साथ?"

शीला: "अभी कुछ दिन पहले तक सब यही पर थे.. पिंटू की ऑफिस वालों ने बड़ी ही बहादुरी से उन गुंडों का सामना किया..!!"

वैशाली: "पापा कहाँ है?"

शीला: "वो अंदर बैठे है.. पिंटू को मिलने की अभी इजाजत नहीं है पर डॉक्टर ने कहा है की उसके होश में आते ही हम उसे मिल पाएंगे और डरने की कोई बात नहीं है"

वैशाली ने अपना मुंह रुमाल से पोंछ लिया और तीनों चलकर वैटिंग रूम तक पहुंचे जहां मदन अपने सर पर हाथ रखकर बैठा हुआ था.. वह अपने आप को कोस रहा था की उसने कैसे शीला पर इतना बड़ा इल्जाम लगा दिया.. !!

उन तीनों को देखते ही मदन खड़ा हो गया और उसने आगे आकर वैशाली को गले लगा लिया

मदन: "पिंटू एकदम ठीक है बेटा.. शीला के बाहर जाने के बाद डॉक्टर वापिस आए थे.. उन्होंने कहा की थोड़ी ही देर में पिंटू को होश आ जाएगा.. फिर हम मिल सकते है"

पिंटू के पापा ने पूछा "मदन जी, आपने पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी?"

मदन: "जी, और पुलिस यहाँ आकर भी गई.. पिंटू के होश में आने के बाद उसका स्टेटमेंट लेंगे.. यहाँ का इंस्पेक्टर मेरा दोस्त है.. मैंने उससे भी बात कर ली है.. उसने कहा है की वो सब संभाल लेगा और जल्द से जल्द दोषी को पकड़ने मे मदद करेगा"

वैशाली: "कौन होगा जिसने पिंटू के साथ ऐसा किया... !!"

मदन शीला की ओर देखने लगा.. शीला ने आँखें झुका ली.. जैसा शीला को शक था.. की कहीं न कहीं इसके पीछे रसिक का हाथ होगा.. वो खुद को भी इसके लिए जिम्मेदार मानने लगी

शीला: "जो भी होगा पकड़ा जाएगा बेटा.. तपन अंकल से बात कर ली है पापा ने.. तू तो जानती है उनको"

वैशाली: "हाँ उन्हों ने हमारी बहोत मदद की थी"

तभी एक नर्स बाहर आई और कहा की पिंटू को होश आ गया था.. सब आई.सी.यू की ओर जाने लगे तो नर्स ने उन्हें रोक दिया और कहा की एक बार मे एक ही व्यक्ति अंदर जा सकता था

सब से पहले वैशाली अंदर मिलने गई

पिंटू को पट्टियाँ लगी हुई अवस्था में देखकर वह फिर से रोने लगी और जाकर पिंटू से लिपट गई

पिंटू ने सुस्त आवाज में कहा "मत रो यार.. देख, मैं एकदम ठीक हूँ.. एक दो दिन में घर आ जाऊंगा"

वैशाली ने रोते हुए कहा "सब मेरी गलती है पिंटू.. मैं क्यों तुझे छोड़कर गई?"

पिंटू ने हँसते हुए कहा "अरे पगली.. इसमें तेरी क्या गलती है? और तू यहाँ होती तो घर पर होती.. मुझ पर हमला तो ऑफिस मे हुआ..!!"

वैशाली: "फिर भी.. अब मैं तुझे छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगी"

नर्स ने तुरंत आकर कहा की खून बहने की वजह से काफी कमजोरी आ गई है इसलिए पैशन्ट से ज्यादा बातें न करें.. पीयूष का कपाल चूमकर वैशाली बाहर आ गई..

यह तय हुआ की उस रात मदन हॉस्पिटल में रुकेगा.. बाकी चारों को उसने घर भेज दिया

शीला-वैशाली और वैशाली के सास-ससुर, शीला के घर पहुंचे.. रात का खाना खाकर सब सो गए.. पर शीला की आँखों में नींद का नामोनिशान नहीं था.. वह बेसब्री से सुबह होने का इंतज़ार कर रही थी.. रसिक के आने का इंतज़ार कर रही थी

सुबह के पाँच बजने से पहले ही शीला जाग गई.. और बरामदे मे खड़ी हो गई.. काफी देर हो गई पर रसिक के आने के कोई चिन्ह नजर नहीं आ रहे थे..

कुछ देर इंतज़ार करने के बाद उसने रसिक की साइकिल की घंटी सुनी.. और वह सचेत हो गई.. !! जैसे ही रसिक उसके घर का गेट खोलने लगा, शीला ने उसे इशारा करके बगल में वैशाली के घर की तरफ जाने के लिए कहा.. और खुद भी उस दिशा में चलने लगी..

रसिक तो खुश हो गया.. उसने सोचा की आज भाभी ने बगल वाले घर पर सेटिंग कर दिया है.. साइकिल को साइड मे लगाकर वो उस घर के अंदर जाने लगा तब तक शीला ने ताला खोल दिया था और अंदर चली गई थी.. रसिक भी उसके पीछे पीछे अंदर गया..

जैसे ही वो अंदर गया.. शीला ने अंदर से दरवाजा बंद कर दिया.. रसिक आकर शीला से लिपट गया और शीला के बबलों को मसलने लगा.. तभी जबरदस्त ताकत के साथ शीला ने उसे धक्का दिया और रसिक अपना संतुलन खोकर नीचे फर्श पर गिर गया..!!! उसके आश्चर्य के बीच, शीला भागकर किचन में गई और एक छुरी हाथ में लिए.. दौड़कर आई और रसिक की छाती पर सवार हो गई

रसिक के दिमाग ने तो काम करना ही बंद कर दिया.. !!! उसे समझ ही नहीं आ रहा था की आज अचानक शीला भाभी ऐसे क्यों पेश आ रही थी.. !!! वो कुछ सोच या समझ पाता इससे पहले शीला ने उसका गिरहबान पकड़कर उसकी आँखों के सामने चाकू की नोक रखकर रणचंडी की तरह गुर्राई

शीला: "साले मादरचोद.. मैंने तुझे इतना कुछ दिया उसका यह सिला दिया तूने? आज तो तुझे मार डालूँगी मैं.. "

अपने मजबूत हाथों से शीला की कलाई को पकड़े रखा था रसिक ने.. वो चाहता तो एक ही पल में शीला को उठाकर दूर फेंक सकता था.. पर अब तक वह इस सदमे से उभर नहीं पाया था

रसिक: "आप क्या बात कर रही हो भाभी?? क्या किया मैंने?"

शीला: "हरामखोर भड़वे.. अपने लंड की आग बुझाने के लिए तूने मेरे दामाद पर हमला कर दिया?? आज तो तुझे जान से मार दूँगी"

रसिक एक पल के लिए हक्का-बक्का रह गया.. ये क्या कह रही थी भाभी..!! उसे तो इस बारे में कुछ पता ही नहीं था

शीला का हाथ मजबूती से पकड़कर रखते हुए उसने कहा "आप क्या कह रही हो..!! इस बारे में मुझे तो कुछ पता ही नहीं है भाभी..!!"

शीला अब भी गुस्से से थरथरा रही थी, वह बोली "मुझे नादान समझने की गलती मत करना रसिक.. सब जानती हूँ मैं.. जब से मेरा दामाद और वैशाली यहाँ रहने आए है तब से तेरा सब कुछ बंद हो गया मेरे साथ.. अपना रास्ता साफ करने के लिए तूने मेरे दामाद को मारने की कोशिश की"

रसिक अब और ना सह सका.. उसने एक झटके मे शीला के हाथ से चाकू छुड़ाकर दूर फेंक दिया.. और अपना पूरा जोर लगाकर उसने शीला को झटककर नीचे फर्श पर गिरा दिया और अपने विराट जिस्म का पूरा वज़न डालते हुए शीला पर सवार हो गया

इस श्रम और क्रोध के कारण, शीला हांफ रही थी.. हर सांस के साथ उसके वक्ष ऊपर नीचे हो रहे थे

रसिक ने शीला की दोनों कलाइयों को जमीन पर दबा दिया और गुस्से से बोला "बहोत बड़ी गलती कर दी भाभी आपने.. आज तक आपने मुझे ठीक से पहचाना नहीं.. गरीब हूँ इसका यह मतलब नहीं की मेरा ईमान नहीं है.. आपको पसंद करता हूँ इसलिए आपके पीछे मंडराता रहता हूँ.. पर मैं इतना गिरा हुआ भी नहीं हूँ की चोदने के चक्कर में किसी का खून कर दूँ..!! जो भी करता हूँ आपकी मर्जी से करता हूँ.. कभी जबरदस्ती नहीं करता.. न आप के साथ.. न किसी और के साथ.. !! छोटा आदमी समझकर कुछ भी इल्जाम लगा दोगी क्या..!!"

शीला अब भी गुस्से से कांप रही थी.. अपने आप को रसिक की पकड़ से छुड़ाने की भरपूर कोशिश की उसने.. पर रसिक के जोर के आगे उसकी एक न चली

रसिक: "भाभी, मैं चुदाई का भूखा जरूर हूँ.. पर मेरे भी कुछ उसूल है.. मैं किसी चूत के पीछे इतना भी पागल नहीं हो जाता की उसकी मर्जी के बगैर कुछ करूँ या फिर उसे पाने के लिए इतना नीचा गिर जाऊँ.. चोदने के लिए मुझे भी बहोत सुराख मिल सकते है.. और मिलते भी है.. !! आप यह गलतफहमी मत पालना की आपको पाने के चक्कर में मै किसी को इस तरह नुकसान पहुंचाऊँगा"

शीला अब भी गुर्रा रही थी, उसने गुस्से से कहा "यह बता की कल तू सुबह दूध देने आया उसके बाद तू कहाँ था? और झूठ मत बोलना क्योंकी पकड़ा जाएगा.. यहाँ का इंस्पेक्टर, मदन का बचपन का दोस्त है.. एक सेकंड नहीं लगेगा मुझे, तुझे अंदर करवाने में"

रसिक ने भी गुस्से से कहा "एक बार मैंने कह दिया ना की मैंने ऐसा कुछ नहीं किया.. !!! और हाँ.. कल सुबह दूध देने के बाद मैं रूखी के मायके गया था.. उसके भाई की शादी में.. यकीन न आए तो रूखी को फोन लगाकर पूछ लीजिएगा.. और फिर भी शक हो तो मेरे मोबाइल में ढेरों तस्वीरें है जो हमने शादी की दौरान खींची थी.. और पुलिस की धमकी मुझे मत दीजिए.. जब मैंने कुछ किया ही नहीं फीर पुलिस क्या, किसी के बाप से नहीं डरता मैं.. !!"

अब शीला थोड़ी शांत हुई.. उसे भी लगा की शायद गुस्से और जल्दबाजी में उसने कुछ ज्यादती कर दी रसिक के साथ.. शीला ने अपना शरीर ढीला छोड़ दिया.. शीला का जोर कम हुआ देख रसिक ने भी अपनी पकड़ छोड़ दी और शीला के जिस्म के ऊपर से उठ गया..

अपनी साड़ी को ठीक करते हुए शीला खड़ी हुई.. तब तक रसिक ने अपने फोन की गॅलरी खोली और उसे वह तस्वीरें दिखाने लगा जो पिछले दिन शादी में खींची थी.. काफी सारे फ़ोटो थे.. रसिक और रूखी के.. उनके नन्हे बेटे के साथ.. शादी के मंडप में.. खाना खाते हुए.. बारात में नाचते हुए.. फ़ोटोज़ पर टाइम-स्टेम्प भी लगा हुआ था जो पिछले दिन की तारीख दिखा रहा था.. देखकर शीला को तसल्ली हो गई..

शर्म के मारे झेंप गई शीला.. उसकी आँखें झुक गई.. रसिक गुस्से से उसकी ओर देख रहा था

उसने रसिक के कंधे पर हाथ रखकर कहा "मुझे माफ कर दे रसिक.. अचानक यह सब हो गया तो मेरा दिमाग चलना बंद हो गया"

रसिक ने तपते हुए कहा "मतलब आप कुछ भी इल्जाम लगा दोगे मुझ पर??"

रसिक को मनाने के लिए शीला ने उसे अपनी और खींचा और बाहों में भरते हुए कहा "ठीक है बाबा.. गुस्सा थूक दे.. गलती हो गई मेरी"

लेकिन रसिक ने शीला के विशाल बबलों को अनदेखा किया.. खुद को शीला की गिरफ्त से छुड़ाया.. घर का दरवाजा खोला और गुस्से से दरवाजे को पटककर बंद किया.. शीला उसे मनाने के लिए पीछे भागी पर तक तो वो साइकिल लेकर चला भी गया.. !!

शीला अपना सिर पकड़कर सोफ़े पर बैठ गई.. बहोत बड़ी गलती हो गई.. बेचारे रसिक पर गलत शक किया और उसे नाराज कर दिया..

उसने वैशाली के घर को ताला लगाया और अपने घर चली आई..

घर आकर उसने देखा तो वैशाली जाग गई थी

शीला: "इतनी जल्दी जाग गई?"

वैशाली: "हाँ मम्मी.. जल्दी तैयार होकर हॉस्पिटल जाना है.. पापा बेचारे पूरी रात वहाँ थे.. उन्हे घर भी तो भेजना है.. पर तुम कहाँ गई थी??"

अब शीला के पास कोई जवाब नहीं था.. पर उसका शातिर दिमाग कोई न कोई रास्ता ढूंढ ही लेता था

शीला: "अरे वो रसिक आज दिखा नहीं.. इसलिए बाहर गली में जाकर उसका इंतज़ार कर रही थी... पर पता नहीं आज वो आया ही नहीं.. वो कह तो रहा था की किसी शादी में जाने वाला था.. इसलिए शायद नहीं आया होगा.. कोई बात नहीं.. मैं नुक्कड़ की दुकान से दूध लेकर आती हूँ.. तू फ्रेश हो जा, तब तक मैं दूध लेकर आती हूँ और तेरे लिए चाय बना देती हूँ..!!"


वैशाली: "ठीक है मम्मी" कहते हुए वो टोवेल लेकर बाथरूम मे घुस गई और शीला अपना पर्स लेकर दूध लेने निकली

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पिछले अपडेट में आपने पढ़ा की ऑफिस में पिंटू पर दो अनजान शख्सों ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया.. ऑफिस के सहकर्मियों ने डट कर मुकाबला किया और दोनों हमलावर फरार हो गए.. लेकिन पिंटू को काफी चोटें आई.. उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया.. पिंटू पर यह हमला किसने किया होगा यह बात से शीला और मदन बेहद परेशान थे.. एक बार को मदन को यह भी शक हुआ की कहीं यह हमला शीला ने तो नहीं करवाया..!! पर शीला को रसिक पर शक था.. उसने रसिक की अपने तरीके से पूछताछ की लेकिन वह निर्दोष निकला और नाराज होकर चला गया.. फिर पिंटू पर हमला आखिर किया किसने..!!

अब आगे...!!!
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कुछ दिनों बाद..

शाम का वक्त था.. शहर से दूर, नीरव शांति के बीच, हरियाले खेतों के सानिध्य में बने एक प्यारे से फार्महाउस की ऊंची दीवारों के भीतर बने बंद कमरे मे, राजेश और फाल्गुनी बिस्तर पर लेटे हुए एक दूसरे के जिस्म के साथ खेल रहे थे,, अब हफ्ते में कम से कम एक दिन राजेश किसी न किसी बहाने यहाँ आ जाता था और फाल्गुनी, कविता के घर या किसी अन्य सहेली का नाम लेकर निकल जाती थी..

२३ साल की फाल्गुनी को बार बार शादी के लिए कहने के बावजूद वह मना कर रही थी.. अपने माता-पिता के कहने पर तीन चार लड़के भी देखे थे उसने.. लेकिन कोई दिल में बस ही नहीं रहा था.. सुबोधकांत से संबंधों के बाद ऐसा परिवर्तन आ गया था फाल्गुनी में की उसे जवान या हमउम्र के लड़के पसंद ही नहीं आते थे.. उसे तो पसंद थे, धीर-गंभीर और अनुभवी पुरुष..!! मनोविज्ञान भी कहता है की इंसान का प्रथम संभोग, उसके दिमाग पर गहरी छाप छोड़ता है.. फिर वह अच्छी भी हो सकती है और बुरी भी.. आधुनिक विचारों वाले उसके माता-पिता यह सोच रहे थे की उसे शायद और वक्त चाहिए था.. इसलिए स्वतंत्रता से उसे घूमने फिरने देते थे..

टाइट स्लीवलेस टॉप और ब्ल्यू जीन्स पहने फाल्गुनी राजेश के बगल में लेटे हुए उसके छाती के बालों से खेल रही थी.. राजेश ने उसे आलिंगन में ले लिया और उस के होंठों पर अपने होंठों की छाप छोड़ दी.. फाल्गुनी की बाँहें भी राजेश की कमर पर कस गई..






दोनों कुछ देर तक ऐसे ही एक-दूसरे के शरीर की गर्माहट का मजा लेता रहे.. फिर राजेश के होंठ फाल्गुनी की गरदन पर चुम्बन लेता हुए, उस की छातियों के मध्य आ गया और वहाँ पर अपनी गरम साँस छोड़ने लगे.. फाल्गुनी से अब रुका नहीं रहा जा रहा था.. उस ने राजेश के माथे पर प्यारी सी पप्पी दे दी..

दोनों के होंठ एक-दूसरे के होंठों का रस चुसने लगे.. इस के कारण दोनों के शरीर में वासना का आग पुरी तरह से भड़क गई.. दोनों एक-दूसरे के शरीर को सहलाने लगे.. राजेश ने फाल्गुनी के टॉप को उतार दिया, अंदर उसने ब्रा नहीं पहन रखी थी..






उसके मस्त कडक उरोज आजाद हो गया, उसे देख कर राजेश से रहा नहीं गया और उसने उसे होंठों में ले कर चुसना शुरु कर दिया.. इस के कारण फाल्गुनी का शरीर अकड़ने सा लगा.. उस के नाखुन राजेश की पीठ में गड गए.. राजेश ने उस के उरोजों का रस पीने के बाद अपना टी-शर्ट उतार दिया और फाल्गुनी का जीन्स निकाल दिया..

फाल्गुनी का जवान कडक बदन राजेश की आँखों के सामने था उसे देख कर राजेश का रक्त उसकी जाँघों के बीच इक्ठ्ठा होने लग गया था.. राजेश से अब रुका नहीं जा रहा था.. उस ने फाल्गुनी की लाल रंग की पेन्टी को भी उतार दिया.. अब फाल्गुनी और राजेश दोनों संपूर्णतः नग्न थे .. फाल्गुनी की उभरी हुयी सफाचट गुलाबी मुनिया राजेश को चाटने के लिये ललचा रही थी..






राजेश ने अपना सर उसकी चूत की तरफ किया और मुँह ले जाकर उस पर रख दिया.. भीनी भीनी सी सुगंध ने राजेश की नाक भर दी.. इस से वह और भी उत्तेजित हो गया.. राजेश के होंठ फाल्गुनी की चूत का रसपान करने लगे..

पहले उस ने बाहर से उसे चाटा फिर चूत के फलकों को अलग करके अपनी जीभ उस के अंदर डाल दी.. फाल्गुनी भी भरपुर उत्तेजित थी, उस की गुलाबों भी पानी से भरी हुई थी.. कुछ देर तक राजेश फाल्गुनी की चूत का स्वाद लेता रहा.. फाल्गुनी के मुँह से आह निकल रही थी.. वह उत्तेजना के कारण कसमसा रही थी..






राजेश ने उस की केले के तने के समान भरी जाँघों को चुमा और नीचे पिंडिलियों को चुमते हुये पंजों तक पहुँच गया.. फाल्गुनी ने भी उसके लंड को सहलाना शुरु कर दिया था..

फाल्गुनी की मुठ्ठी में तना हुआ लंड उभरा हुआ था.. इस कारण राजेश की हालत खराब होने लग गई..






उस ने अपने आप को सीधा किया, फाल्गुनी को चुमा और उस के अमरूद जैसे स्तनों को अपने हाथ से सहलाते हुए, निप्पलों को होंठों के बीच लेकर दांतों से काटा.. दर्द के कारण फाल्गुनी ने उसकी पीठ पर चिमटी काट ली..

अब राजेश अपने लंड को मसलते हुए फाल्गुनी के ऊपर आ गया और उस की टाँगों को फैला कर उनके बीच बैठ गया..

उसका लंड तन कर सीधा खड़ा था.. उसने फाल्गुनी की चूत के मुख पर उसे रख कर दबाव डाला तो लंड चूत में घुस गया.. अंदर नमी की वजह से घर्षण नहीं था.. दूसरे धक्कें में ही पुरा लंड चूत में समा गया.. फाल्गुनी ने अपनी बाँहें राजेश की पीठ पर कस ली.. वह कराह रही थी..

आहहह उहहहहह उईईई...






धीरे-धीरे राजेश लंड को अंदर बाहर करने लगा.. फिर नीचे से फाल्गुनी भी अपने टाइट कुल्हों को हिला कर उसका साथ देने लगी.. कमरे में फच-फच की आवाज भर गई.. फाल्गुनी की चूत की कसावट के कारण राजेश को बड़ा मज़ा आ रहा था.. कुछ देर तक धक्कें लगाने के बाद राजेश फाल्गुनी के ऊपर से उतर कर उस की बगल में लेट गया..

उसे अपनी ताकत को बचा कर रखना था.. अब वह बिस्तर पर तकिये के सहारे लेट गया और फाल्गुनी को अपने ऊपर लिटा लिया.. फाल्गुनी ने उसका लंड अपने हाथ की सहायता से चूत में डाल लिया और फिर वह कुल्हें उठा कर उसे अंदर बाहर करने लगी.. उस की गति बहुत तेज थी..






उसके कुल्हों के धक्कों की ताकत राजेश के जाँघों के जोड़ को पता चल रही थी.. राजेश ने फाल्गुनी के होंठों को अपने होंठो में भर लिया और दोनों एक-दूसरे को चुमने लगे.. नीचे से दोनों के शरीर एक-दूसरे को समाने के लिये मरे जा रहे थे..

राजेश स्खलित होने ही वाला था.. उसने फाल्गुनी को नीचे लेटाया और उसके ऊपर आ कर धक्कें लगाने लगा.. उसके शरीर में आग सी लग गई थी और अब वह उस से छुटकारा पाना चाहता था..

वही हुआ.. और राजेश की आँखें बंद सी हो गई और वह स्खलित हो कर फाल्गुनी के ऊपर लेट गया.. दोनों ही पसीने से नहा गया थे.. कुछ देर बाद वह फाल्गुनी की बगल में लेट गया.. दोनों की साँसें उखड़ी हुई थी.. कुछ देर लगी दोनों को उसे काबु में लाने में..






राजेश ने पलट कर फाल्गुनी से पुछा

राजेश: "कैसा लग रहा है?"

फाल्गुनी: "हर बार की तरह, मज़ा या गया अंकल.. आप की जवानी तो अभी तक कायम है, मेरी कमर का तो बाजा बज गया है पर फिर भी मन अभी भरा नही है"

राजेश: "चिंता मत कर स्वीटहार्ट, पूरी रात अपनी ही है.. !!"

राजेश के बालों को सहलाते हुए फाल्गुनी ने कहा "सुबोध अंकल के जाने के बाद मुझे नहीं लगता था की कोई भी उनकी जगह ले पाएगा.. पर आपसे मिलने के बाद वो गलतफहमी दूर हो गई.. सेक्स के प्रति मेरे विचार और खुल गए है.. और अब मैं ज्यादा से ज्यादा इन्जॉय करना चाहती हूँ.. और मुझे यकीन है की आप के साथ रहूँगी तो इन्जॉय करती ही रहूँगी"

राजेश ने जवाब नहीं दिया और केवल मुस्कुराया..

थोड़ी देर तक फाल्गुनी की गुलाबी निप्पलों से खेलते हुए राजेश ने कहा "यार, हफ्ते में सिर्फ एक दिन से मेरा तो मन नहीं भरता..!!"

फाल्गुनी हंसी और बोली "तो या जाइए.. मैंने कब मना किया.. !! यह फार्महाउस तो अपना ही है.. और कुछ दिनों बाद, मैं पी.जी. में शिफ्ट हो रही हूँ.. होम-डिजाइन का कोर्स जॉइन किया है.. कोर्स तो सिर्फ नाम का ही है.. पर उस बहाने मैं घर से दूर रहना चाहती हूँ.. मैंने पापा को इस बात के लिए पटा लिया है.. एक बार वहाँ चली गई फिर तो आप जब कहो, मैं यहाँ आ सकती हूँ"

राजेश: "हर बार घर से निकलने का बहाना बनाना मुश्किल है.. वैसे मेरी पत्नी काफी मुक्त विचारों वाली है पर फिलहाल वह जिस अवस्था में है, उसे छोड़कर आने के लिए मुझे कोई ठोस बहाना चाहिए.. पर वो मैंने कुछ सोच रखा है..!! जल्दी ही हम ज्यादा से ज्यादा मिल पाएंगे"

राजेश ने मुस्कुरा कर कहा "वैसे तो बड़ा लंबा सोचा है, पर अभी के लिए इतना जान लो की मैं हफ्ते में एक से ज्यादा बार तुम्हें मिल पाऊँगा"

बातें करते हुए दोनों थक कर लेट गया.. इस समय तो दूसरा दौर हो नहीं सकता था, ना राजेश ऐसा करना चाहता था लेकिन दूसरी बार करने का मन तो था ही.. रात को दोनों नें एक बार और संभोग किया जो शाम से भी जोरदार था और काफी लंबा भी चला.. दोनों के मन संतुष्ट हो गया थे..

सुबह उठकर राजेश को घर के लिए निकलना था.. वॉश-बेज़ीन के पास केवल टी-शर्ट पहने ब्रश कर रही फाल्गुनी, कमर से नीचे बिल्कुल नग्न थी.. हालांकि टी-शर्ट काफी लंबा होने के कारण वह अपनी लंबाई से फाल्गुनी के यौन अंगों को ढँक रहा था.. ब्रश खत्म कर जब फाल्गुनी झुककर वॉश-बेसिन के नलके से मुंह में पानी भरकर कुल्ले करने के लिए झुकी, तब उसकी टीशर्ट ऊपर उठ गई और उसके दोनों चूतड़ खुल गए.. उसका हल्का बादामी रंग वाला गांड का छेद नजर आने लगा..

तैयार होकर शुज की लेस बांध रहे राजेश की नजर जब इस द्रश्य पर पड़ी तो उससे रहा न गया.. वह तुरंत खड़ा हुआ, फाल्गुनी के पीछे आकर अपनी चैन खोलने लगा.. अपना सुलगता हुआ सुपाड़ा जब उसने फाल्गुनी की गांड के छेद पर रखा तब अनजान फाल्गुनी एकदम से सहम गई

फाल्गुनी: "ओह्ह अंकल.. क्या आप भी.. !!! फिर से शुरू हो गए.. !! ऑफिस जाना नहीं है.. ??"

राजेश: "बड़ी कमीनी चीज है तू.. एक तो झुककर अपनी गांड दिखाकर मुझे ललचा रही है और ऊपर से पूछ रही है की ऑफिस जाना है या नहीं" कहते हुए राजेश ने अपनी कमर को हल्का सा ठेलकर सुपाड़े को गांड के सँकरे छेद में डालने की कोशिश की

फाल्गुनी: "आह्ह राजेश अंकल.. लेकिन कुछ तेल या लयूबरीकेंट तो लगाइए.. !!"

पर राजेश के पास न समय था और ना ही धीरज.. !! उसकी नजर वहीं वॉश-बेसिन पर पड़े लिक्विड डिटर्जन्ट की बोतल पर पड़ी, जो अक्सर हाथ धोने के लिए रखा जाता है.. उसका पंपनुमा हेंडल दबाकर अपनी हथेली पर थोड़ा सा लिक्विड लिया और अपने लोड़े को उससे लसलसित कर दिया.. साबुन की चिकनाई अक्सर गाढ़ी होती है..

अब सुपाड़े को गांड के छेद पर रखकर जैसे ही उसने धकेल, उसका आधा लंड अंदर घुस गया.. फाल्गुनी ने सामने लगे मिरर पर अपने दोनों हाथ टेक रखे थे ताकि अपने आप को संतुलित रख सकें.. राजेश के हर धक्के के साथ वो आगे पीछे हो रही थी






यह स्थिति राजेश को ज्यादा अनुकूल नहीं लग रही थी.. उसने फाल्गुनी को कमर से उठाया और बेड की तरफ ले जाने लगा.. ऐसा करने पर उसका लंड पुचुक की आवाज करते हुए फाल्गुनी की गांड से बाहर निकल गया.. अब उसने फाल्गुनी को पेट के बल लिटा कर उस के कुल्हों को ऊपर किया और उसकी गुदा के मुख पर लंड को रख कर हाथ की सहायता से दबाया इस बार लंड का मुँह फाल्गुनी की गांड में पूरा घुस गया..

फाल्गुनी कराही "आहहहहहहहह उईईईईईईईई उहहहहहहहहह..."

राजेश ने हाथ से सहारा दे कर अपने लंड को थोड़ा और अंदर घुसेड़ दिया.. अब फाल्गुनी शांत हो गई थी.. तीसरी बार में आधें से ज्यादा लंड फाल्गुनी की गांड में समा गया.. अंदर से गांड की तंग मांसपेशियाँ लंड को कस रही थी..

राजेश ने अपना हाथ फाल्गुनी की चूत पर ला कर उसे सहलाना शुरु किया.. इस के बाद अपने कुल्हों को उठा कर लंड को पुरी ताकत से गांड में धकेल दिया.. उसका पुरा लंड फाल्गुनी की गांड में अब अंदर बाहर हो रहा था..






फाल्गुनी: "आह्ह.. जरा धीरे करो अंकल, दर्द हो रहा है"

राजेश ने फाल्गुनी का मुँह अपनी तरफ कर के चुमा और उसका चुम्बन लेने लगा.. इस से फाल्गुनी का दर्द कम हो गया.. या फिर यूं कहिए की दर्द से ध्यान विचलित हो गया.. अब वह भी अपने कुल्हें हिला कर राजेश के लंड को अंदर बाहर करने लगी.. कुछ देर तक राजेश फाल्गुनी की गांड भोगता रहे फिर झड़ कर उसकी बगल में लेट गया.. दोनों के शरीर पानी छोड़ रहे थे.. जो इस बात का सबूत था कि दोनों नें संभोग का भरपुर आनंद उठाया था और चरमोत्कर्ष को प्राप्त भी किया था






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पिंटू अब अपनी चोटों से उभर रहा था.. गनीमत थी की उसे ज्यादा चोटें नहीं आई थी क्योंकि हमलावर ज्यादा घातक वार करते उससे पहले ही ऑफिस के कर्मचारी उसकी मदद के लिए आ पहुंचे थे.. वैशाली, शीला और मदन, दिल-ओ-जान से उसकी देखभाल कर रहे थे.. दो तीन दिन रुकने के बाद, पिंटू के माता-पिता भी घर वापिस लौट गए थे..

कुछ दिनों बाद मदन ने फोन पर अपने इंस्पेक्टर तपन देसाई का संपर्क किया

मदन: "यार फिर कुछ पता चला की कौन था??"

इन्स. तपन: "मदन, ऑफिस के बाहर जो सीसीटीवी थे उसका कोई फायदा नहीं हुआ.. उन हमलावरों ने चेहरे पर मास्क लगा रखे थे.. और फुटेज से पता चला की उनकी बाइक पर नंबरप्लेट ही नहीं थी"

मदन: "मतलब?? अब कुछ नहीं हो सकता??"

इन्स. तपन: "यार कोशिश जारी है.. वह लोग जिस रास्ते से भागे थे उसके ट्राफिक कैमरा की फुटेज मँगवाई है.. पर तू तो जानता ही है.. आधे से ज्यादा कैमरा बंद होते है.."

मदन: "तपन, कुछ भी कर.. उनका पकड़ा जाना बहोत जरूरी है.. वरना मेरी बेटी और दामाद तो हमेशा उनके डर के तले जीते रहेंगे"

इन्स. तपन: "तू चिंता मत कर मदन.. मैं कुछ न कुछ जुगाड़ जरूर कर उन्हें पकड़ रहूँगा"

मदन: "यार जितनी जल्दी हो सके तू ट्राय करना.. कुछ ही दिनों में मुझे काम के सिलसिले में अमरीका जाना है.. वो लोग पकड़े जाएंगे तो मैं इत्मीनान से जा पाऊँगा वरना मेरी जान यहीं अटकी रहेगी"

इन्स. तपन: "देख भाई, तू मुझे मेरे हिसाब से काम करने दे.. कुछ ही समय में कुछ मिल जाने की उम्मीद है.. मैंने मेरी टीम को उस रास्ते पर जितनी भी दुकान, शॉपिंग मॉल या ऑफिस है, उन सब से सीसीटीवी चेक करने के लिए भेजा हुआ है.. कोई न कोई सुराग तो जरूर निकल आएगा"

मदन: "ठीक है दोस्त.. मुझे तुझ पर पूरा भरोसा है.. जैसे ही कुछ पता चलें, मुझे जरूर बताना"

इन्स. तपन: "ओके.."

एक गहरी सांस लेकर मदन सोच मे पड़ गया.. उसके बगल में बैठी शीला को इस संवाद से उतना तो पता चल ही गया की अब तक उन गुंडों की पहचान नहीं हो पाई थी.. !!

शीला: "चिंता मत करो मदन.. जल्द ही पता चल जाएगा"

मदन: "यार, मुझे चिंता इस बात को लेकर है की मुझे अमरीका जाना है.. और अगर यहाँ मेरी गैर-मौजूदगी में कुछ उल्टा-सीधा हो गया तो मैं अपने आप को कभी माफ नहीं कर पाऊँगा"

शीला: "देख मदन.. !! होनी को कोई टाल नहीं सकता.. पर ऐसी नकारात्मक सोच के साथ कैसे जिया जा सकते है..!! कुछ नहीं होगा.. और यहाँ हम इतने लोग तो है.. तू चिंता मत कर.. और जाने की तैयारियां शुरू कर"

निराश होकर मदन अपने कमरे में चला गया.. सोफ़े पर बैठी शीला सोच रही थी.. कुछ ही दिनों के बाद, मदन दो हफ्तों के लिए जा रहा था.. यह एक ऐसा अवकाश था जब वह अपनी मनमानी कर सकती थी... बस एक ही रोड़ा था उसकी राह में.. पिंटू और वैशाली की मौजूदगी.. अब वक्त आ गया था की इसके बारे में कुछ किया जाए..


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