Adultery शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी) - Page 25 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)

मदन: "रेणुका, शीला अभी गई.. हम भी उसके पीछे चलें?"

तमन्ना: "सर, आगे बड़े ग्राउंड पर बहोत सारे स्टॉल लगाए गए है.. शॉपिंग के लिए.. पूरी रात वहाँ आस-पास के टुरिस्ट आते है.. आप भी एक बार जाइए.. शायद कुछ पसंद आ जाए.. यहाँ ऐसी ऐसी चीजें मिलती है जो ओपन मार्केट में आपको कहीं नहीं मिलेगी"

रेणुका: "चल मदन हम भी चलते है.. मुझे पक्का यकीन है की शीला वहीं पर होगी.. "

मदन: "हाँ चल.. मुझे भी उस मादरचोद का चेहरा देखना है जो मेरी बीवी को खुलेआम घोड़ी बनाकर चोद रहा था" रेणुका का हाथ पकड़कर मदन ने अपने साथ लिया और दोनों उस ग्राउन्ड की तरह चल दीये..

रेणुका के स्तन उस पतले टॉप के अंदर, बिना ब्रा के सहारे.. झूल रहे थे.. मदन की कमर में हाथ डालकर दोनों ग्राउन्ड की तरफ जाने लगे..






रास्ते के मोड के पास.. एक बड़ा सा प्लॉट था.. जहां लाइन से स्टॉल लगे हुए थे.. और बड़ी बड़ी फ़्लड लाइट की रोशनी में.. ढेर सारे कपल्स..शॉपिंग का आनंद ले रहे थे.. तो कहीं कहीं जोड़े एक दूसरे के जिस्मों के साथ विकृत हरकतें भी कर रहे थे.. हाथ में बियर के टीन लिए.. शराब के ग्लास लिए.. सब मजे कर रहे थे.. एक स्टॉल पर हुक्का-बार था.. और वहाँ सब मिलकर धुआँ उड़ाते हुए ३१ दिसंबर को अलविदा कहने के लिए आतुर थे.. !! कहीं कोई शराब पी रहा था तो कोई गांजे के कश लगाकर झूम रहा था..

रेणुका के हाथ में सिगरेट थी और मदन के हाथ में बियर की बोतल.. मदन की कमर पर हाथ लपेटे हुए रेणुका आराम से घूम रही थी.. कभी वो खुद सिगरेट का दम लगाती तो कभी मदन के होंठों पर रखकर उसे कश लगाने देती..

दोनों उस छोटे से बाजार में घूमने लगे.. दो सौ के करीब लोग होंगे.. ठंड के बावजूद.. लड़कियां और औरतें न्यूनतम कपड़े पहनकर अपने जिस्म की नुमाइश कर आजादी का आनंद उठा रही थी..

आखिर दोनों ने शीला को पीछे से देखा.. शीला के भारी भरकम चूतड़ों से ही मदन ने उसे पहचाल लीया.. पर वो अकेली क्यों खड़ी थी?? उसका वो आशिक कहाँ गया??






रेणुका: "मदन डार्लिंग, चल हम वहाँ चलते है.. शीला वहाँ है तो उसका वो लंड भी यही कहीं लटक रहा होगा"

मदन: "हाँ, चल वहीं चलते है"

दोनों भीड़ मे छुपते-छुपाते धीरे धीरे उस स्टॉल के करीब जाकर खड़े हो गए जहां शीला खड़ी थी.. मदन की नजर बेसब्री से शीला के आशिक को तलाश रही थी.. उस चक्कर में.. आसपास की अर्ध-नग्न सुंदरियों के जिस्म का आनंद लेने का भी उसे मन नहीं हो रहा था..

"राज डार्लिंग.. !!" शीला ने आवाज लगाई

रेणुका और मदन को वह स्पष्ट सुनाई दिया.. और तभी एक दुकान के पास से आवाज आई "यस डार्लिंग.. आया.. मैं हल्का होकर अभी आया"

"ओके डीयर.. " शीला ने जवाब दिया..

उस पुरुष की आवाज और बोलने के लहजे ने मदन और रेणुका की 90% जिज्ञासा को वहीं खतम कर दिया.. दोनों ने ताज्जुब से एक दूसरे की तरफ देखा.. दोनों की नजरें आपस मे टकराई.. रेणुका मुस्कुराई.. मदन के सवाल का वह जवाब ही था.. पर मदन अब भी थोड़ा सा व्याकुल था..

वो थोड़ा आगे बढ़ा.. और एक पेड़ के तने के पीछे छुपकर मर्दों के टॉइलेट की तरफ देखने लगा.. डब्बे जैसे अस्थायी टॉइलेट से निकले शख्स की शक्ल देखकर दंग रह गया मदन.. वो राजेश ही था..!!!! रेणुका का पति और मदन का दोस्त.. !!!

कुछ पल तक स्तब्ध रहने के बाद.. जैसे ही मदन सोचता गया.. उतना ही रोमांचित होता गया.. थोड़ी देर पहले का जो गुस्सा और ईर्ष्या के भाव थे.. वो अब ओजल हो चुके थे.. और अपनी पार्टनर बदलने की विकृत इच्छा को परोक्ष रूप से पूर्ण होता देख, वह एक अकथित सा आनंद महसूस कर रहा था..

मदन चलते हुए रेणुका के पास आया.. और उसके कंधों पर हाथ रखकर अपनी ओर ऐसे खींच लिया जैसे वो उसकी आधिकारिक पत्नी हो.. और उसी तरह वो राजेश-शीला के सामने पेश आना चाहते थे.. रेणुका को कोई हर्ज नहीं था क्योंकि उसका खुद का पति ही परस्त्री के साथ रंगरेलियाँ मना रहा था..

रात के साढ़े ग्यारह बज गए थे और ३१ दिसंबर खत्म होने को थी.. सारा माहोल अपने सुरूर पर था.. लोग नशे मे चूर होकर डी.जे. के ताल पर झूम रहे थे.. लड़कियां अपने अंग उछलते हुए ऐसे नाच रही थी जैसे बारह बजे दुनिया का नाश हो जाने वाला हो.. और यह उनकी आखिरी पार्टी हो.. !!!

शराब की बौछारों और सिगरेट की धुएं के बीच जवानी मदहोश होकर नाच रही थी.. पर इन तमाम लोगों मे दो जोड़ें ऐसे थे जिनके लिए आज की रात कुछ ज्यादा ही खास थी.. !! उन्हें कुछ ऐसा हासिल हुआ था जो अक्सर लोग चाहकर भी नहीं पा सकते...

पार्टनर स्वेपिंग... यौन-साथी/पति या पत्नी की दो जोड़ों के बीच अदलाबदली... !!!

विकृत पर बेहद उत्तेजना प्रदान करने वाला साहस.. !! जिसे करने के लिए.. सामाजिक बंधनों को तोड़ने की हिम्मत चाहिए.. और साथ ही साथ अपने साथी को गैर की बाहों मे देख पाने की ताकत भी होनी चाहिए.. वही लोग इस साहस को अंजाम दे पाते है.. !!

दोनों जोड़ें अपने नए अंदाज मे.. एक दूसरे के सामने प्रकट होने वाले थे..!! रेणुका ने मदन के कान मे कुछ कहा और वह सुनकर मदन ने हंसकर रेणुका के गालों पर हल्की सी पप्पी दे दी.. बियर का घूंट मारते हुए मदन सीधे वहाँ जाकर खड़ा हुआ जहां राजेश और शीला खड़े खड़े शॉपिंग कर रहे थे.. !!!

बोलते वक्त लहराती और चलते वक्त ठोकरे खा रही शीला को देखकर ही मदन समझ गया की आज उसकी पत्नी सारी सीमाएं पार कर चुकी थी.. भयंकर मात्रा मे शराब पी रखी थी शीला ने जो देखकर ही प्रतीत हो रहा था

रेणुका और मदन, शीला-राजेश के एकदम बगल मे ही खड़े थे पर अब भी शीला या राजेश का ध्यान उन दोनों पर नहीं गया था

रेणुका: "डार्लिंग, मुझे वो बेल्ट पसंद आ गया.. मेरे लिए खरीद लोगे, प्लीज??"

रेणुका की आवाज सुनते ही, चोंककर शीला और राजेश ने रेणुका की ओर देखा.. पर रेणुका ने शीला या राजेश की तरफ देखा ही नहीं.. और मदन को अपनी तरफ खींचकर उससे चिपकते हुए.. स्टॉल मे लगे कपड़े दिखाती रही

मदन: "अरे मेरी जान.. तेरे पास कितने सारे बेल्ट है फिर भी तुझे नया बेल्ट चाहिए.. !! ओके, ले लेता हूँ.. अब खुश.. !!"

रेणुका: "ओह.. यू आर सच ए स्वीटहार्ट.. आई लव यू डार्लिंग"

मदन: "आई लव यू टू, जानेमन.. !!"

शीला और राजेश स्तब्ध होकर उन दोनों को देखते रहे.. !! और वही तो यह दोनों चाहते थे.. उन्हें झटका देना.. !!! नशे मे धूत शीला को पता ही नहीं था की उसने फोन पर इस रिसॉर्ट का नाम रेणुका को बता दिया था.. !!! वो तो ईसी असमंजस में थी की रेणुका और मदन आखिर यहाँ पहुंचे कैसे??

अब राजेश और शीला ने एक दूसरे के सामने देखा.. और मन ही मन समझ गए.. की कोई किसी को कुछ भी कहने की परिस्थिति मे नहीं था.. इस हमाम मे सब नंगे थे.. इसलिए शीला ने भी रेणुका और मदन के सामने बगैर देखे बातें करना जारी रखा

शीला: "राज डार्लिंग.. आज तो मज़ा आ गया.. ज़िंदगी मे ऐसा मज़ा मुझे पहले कभी नहीं आया.. तूने आज इतने जबरदस्त स्ट्रोक्स लगाए की अब तक उसका नशा नीचे मेरे छेद पर छाया हुआ है.. सचमुच.. तुम वाकई एक जानदार मर्द हो.. आज से मैं तुम्हारी ग़ुलाम हो गई..!!"

रेणुका: "मदन.. जानु, चलो यहाँ से.. शायद कुछ बाजारू रंडियाँ पार्टी मे आ गई है.. कहीं तुम्हें चुरा न ले.. तुम्हें सतर्क रहना चाहिए.. देखो, वो शॉप है वहाँ चलते है.. और वहाँ एक रेस्टोरेंट भी है.. भूख भी लगी है.. चलो कुछ खाते है"

मदन: "ओह स्योर डार्लिंग.. चलो.. वैसे तुमने आज मुझे इतना थका दिया है की मुझे भी ज़ोरों की भूख लगी है"

रेणुका: "हाँ.. आज रोज के मुकाबले कुछ ज्यादा ही खा लेना क्योंकि आज तो मैं तुम्हारी छुट्टी कर देने वाली हूँ.. बहोत काम बाकी है अभी"

दोनों चलते चलते उस रेस्टोरेंट मे घुसे और एक टेबल पर जा बैठें.. राजेश और शीला भी उनके पीछे पीछे आ गए और बगल वाले टेबल पर बैठ गए.. अब भी दोनों जोड़ें आपस मे बात नहीं कर रहे थे.. रेस्टोरेंट मे काफी अंधेरा था.. मदन ने तीरछी नज़रों से देखा.. शीला राजेश की शॉर्ट्स के ऊपर से ही उसके लंड से खेल रही थी.. और राजेश खुलेआम शीला के बबले दबा रहा था..

यह देखकर रेणुका ने अपना टॉप उठाकर एक स्तन को बाहर निकाला और मदन को चूसने के लिए कहा..








रेणुका: "आह्ह यार.. बड़े टाइट हो गए है.. जरा चूस कर उन्हें ढीला कर दो.. कितने दिन हो गए किसी ने दबाए ही नहीं ठीक से इन्हें"

मदन: "क्यों, तेरा हसबंड नहीं दबाता तेरा??"

रेणुका: "वो दबाता तो तुम से क्यों दबवाने पड़ते मुझे.. !! अब उस निकम्मे को याद कर मेरा मूड मत खराब करो.. और चूसना शुरू करो"

मदन: "ओके डार्लिंग.. तुम समोसे खाओ.. तब तक मैं तुम्हारा दूध चूसकर तरोताजा हो जाता हूँ"

राजेश की नज़रों के सामने ही मदन रेणुका का स्तन पकड़कर चूसने लगा.. उन्हें दिखाने के लिए.. शीला अब टेबल से नीचे झुकी और राजेश का लंड शॉर्ट्स के बाहर निकालकर चूसने लगी.. दोनों कपल्स आपसी नोंक-झोंक का मज़ा ले रहे थे.. !!








अचानक पूरे रिसॉर्ट मे अंधेरा छा गया.. डीजे की तेज आवाज बंद हो गई.. घनघोर जंगल के बीच बना यह प्राइवेट रिसॉर्ट कुछ समय के लिए सन्नाटे से भर गया.. फिर लोगों की घबराहट भरी अफरातफरी की आवाज़ें आने लगी.. लोग अपने साथियों को ढूँढने के लिए आवाज लगाने लगे.. एकदम से क्या हो गया?? लगता है पावर-कट हुआ था..

फिर से अचानक लाइट आ गई.. लेसर की लाइटें आसमान मे अपना जलवा बिखेरने लगी.. और आतशबाजी के धमाकों से सारे माहोल गूंजने लगा.. तब पता चला की १२ बज चुके थे और नए साल के स्वागत के लिए लाइट बंद की गई थी.. फिर से डीजे की कान फाड़ देने वाली ध्वनि से माहोल थिरकने लगा.. लोग नाचने लगे.. मस्ती से चिल्लाने लगे.. कही शेंपेईन की बोतलें खुली तो कही लोग कपल डांस करने लगे..

अब शीला राजेश के साथ और मदन रेणुका के साथ ठुमकने लगा.. एक दूसरे को जलाने की जैसे होड सी लग चुकी थी दोनों जोड़े मे.. राजेश शीला के बबलों पर आफ़रीन था तो रेणुका मदन के लोड़े की आशिक थी.. डांस के दौरान उनकी बेशर्म हरकतों को अब आसपास के लोग भी देख रहे थे.. और सारे लोग चिल्लाकर शीला को अपने बबले खोलने के लिए उकसा रहे थे.. नशे मे नाच रही शीला अपने शरीर को भी ठीक से संतुलित नहीं रख पा रही थी.. मदहोश होकर.. चिल्ला रहे लोगों की एक के बाद एक फरमाइशें पूरी करती जा रही थी..














अब डांस-फ्लोर पर कई लोग शीला के आसपास नाचते हुए पहुँच गए.. और टोली बनाकर वो सब शीला के जिस्म को नोच रहे थे.. कुछ नटखट लोगों ने शीला के बूब्स पर ही शेंपेईन और बियर गिराना शुरू कर दिया था.. शीला अब शराब से पूरी तरह भीग चुकी थी.. और थिरकते हुए नाचे जा रही थी..

गीले वस्त्रों वाली स्त्री वैसे भी बेहद कामुक लगती है.. ऊपर से उसमे शीला के गदराए मांसल शरीर का नशा भी जुड़ चुका था.. शराब और शबाब दोनों आपस मे मिल चुके थे.. शराब से भीगकर शीला के कपड़े उसके जिस्म पर चिपक गए थे.. नाचते नाचते जिसका जहां मन चाहता वहाँ शीला को छू रहा था.. लगभग तमाम लोग शीला के बदन को सारी गलत जगहों पर छु चुके थे.. मदन के सामने ही लोग उसकी पत्नी के बारे मे गंदी गंदी कमेंट्स कर रहे थे.. लेकिन मदन बेबस था.. क्योंकि फिलहाल शीला राजेश की पार्टनर थी..

राजेश बेफिक्र होकर शीला के इस मुक्त-व्यापार का मज़ा लेते हुए बियर पी रहा था.. यहाँ पब्लिक पर शीला के जिस्म का नशा चढ़ चुका था.. तमाम लोग शीला के बदन को दबाने और नोचने के लिए बेकरार थे.. शीला किसी को रोक नहीं रही थी और आराम से नशे मे धूत होकर म्यूज़िक के ताल पर नाचे जा रही थी..






यह सिलसिला एक घंटे तक चला.. एक बज चुका था.. डीजे का संगीत बंद हुआ.. और एक के बाद एक लोग लौटने लगे.. शराब का नशा इतना भारी हो गया था की शीला-राजेश और रेणुका-मदन भी लड़खड़ाते हुए अपने कॉटेज पर चले गए और सो गए

सुबह पाँच बजे राजेश और शीला चुपके से निकल गए.. !!

साढ़े पाँच बजे रेणुका की आँख खुली.. उसने जागकर देखा तो वह नंगे बदन मदन के बगल मे पड़ी हुई थी.. पिछली रात की बातें याद आते ही उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई.. उसकी नजर सो रहे मदन के लंड पर गई.. जो बेचारा रात के ओवर-टाइम के बाद लाश बनकर पड़ा हुआ था..

रेणुका ने बैठे बैठे अपने बालों को जोड़े मे बांधा.. और मदन के लोड़े को हल्के से सहलाया.. फिर झुककर उसे चूम लिया.. मन ही मन वह मदन के लंड का आभार प्रकट कर रही थी.. जीतने ऑर्गैज़म मदन के लंड ने दीये थे वो आज से पहले, एक रात मे, उसे कभी नहीं मिले थे..

हाथों की गर्मी और होंठों के स्पर्श से मदन और उसका का लंड अंगड़ाई लेकर जागने लगा..

मदन: "गुड मॉर्निंग हनी.. !!" कहते हुए मदन ने नंगी रेणुका की गोद मे अपना सर रख दिया.. रेणुका मदन की बालों भरी छाती मे अपनी उँगलियाँ फेरने लगी.. अपना चेहरा मदन के होंठों पर दबाते हुए उसने कहा "गुड मॉर्निंग.. मदन.. !! ३१ दिसंबर खत्म हो गई.. मुझे लगता है की अब हमें चलना चाहिए.. "

रेणुका के स्तनों के नरम स्पर्श से मदन का लंड नींद से जाग रहे सांप की तरह उठ चुका था.. पर अभी उसके फुँकारने पर ध्यान देने का समय नहीं था रेणुका के पास.. वह जल्दी से जल्दी घर पहुँच जाना चाहती थी


आधे घंटे मे मदन और रेणुका तैयार होकर निकल गए.. रास्ते मे शीला और राजेश के बारे मे बातें करते हुए दोनों कुछ घंटों मे अपने शहर पहुँच गए.. रेणुका ने मदन के घर से थोड़े दूर गाड़ी रोकी और मदन उतर गया

अगला अपडेट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
 
अध्यापकों ने मिलकर बजा दी कॉलेज कन्याओं की बैंड













 
आधे घंटे मे मदन और रेणुका तैयार होकर निकल गए.. रास्ते मे शीला और राजेश के बारे मे बातें करते हुए दोनों कुछ घंटों मे अपने शहर पहुँच गए.. रेणुका ने मदन के घर से थोड़े दूर गाड़ी रोकी और मदन उतर गया

रेणुका: "ओके मदन.. मैं अब निकलती हूँ.. बहुत मज़ा आया, यार.. !! टाइम नहीं था.. वरना सुबह सुबह एक और राउन्ड करने की इच्छा थी.. "

मदन: "यार, मेरा भी बड़ा मन था की तुझे एक दिन और शीला बनाकर रखू.. वैशाली भी लौटी नहीं होगी.. मेरा यह लंड, एक बार और तेरी चूत मारना चाहता है.. पर क्या करे??"

रेणुका: "मैं तो तैयार हूँ.. पर शीला घर पर आ चुकी होगी.. जब हम निकले तब उनका कॉटेज खाली था.. मतलब वो दोनों कब के निकल चुके थे और घर पर पहुँच भी चुके होंगे.. "

दोनों बातें कर रहे थे तब रेणुका पर राजेश का फोन आया.. उसने रेणुका से कहा की वह दोनों चाहे तो वही रुक जाए.. क्योंकि राजेश और शीला एक दिन और साथ रहने वाले थे.. मदन चाहे तो शीला से बात कर सकता है.. !!

यह सुनते ही रेणुका और मदन के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान आ गई..

मदन ने तुरंत शीला को फोन लगाया..

मदन: "शीला, मेरा इंतज़ार मत करना.. हम दोनों कल ही आएंगे"

शीला: "ओके.. " कहते हुए शीला ने फोन काट दिया

मदन मुस्कुराते हुए बोला "रेणुका, कभी सपने भी नहीं सोचा था की अपने ही शहर मे हम इस तरह अपने पार्टनर बदल पाएंगे"

रेणुका: "वो तो ठीक है मदन.. पर यहाँ शहर मे.. कोई हमे देख लेगा तो दिक्कत हो जाएगी.. उससे अच्छा तो वही होता की हम रिसॉर्ट मे रुक जाते.. यार मुझे तो उस जंगल मे ही चुदवाने मे बड़ा मज़ा आ रहा था"

मदन: "सही कहा रेणु.. पर कोई बात नहीं.. अब चांस मिला ही है तो हम उसे जाया नहीं होने देंगे.. हम घर पर नहीं जाएंगे.. किसी अच्छी होटल मे जाकर.. पहले लंच लेते है.. फिर कोई मूवी देखेंगे.. और रात को मस्त चुदाई करेंगे..!!"

जवाब मे रेणुका ने मदन के कंधे पर अपना सिर रखकर अनुमति दे दी

रेणुका ड्राइविंग सीट से उठ गई और गाड़ी मदन को चलाने दे दी.. मदन तेजी से गाड़ी चलाते हुए अपने और रेणुका के घर के इलाके से दूर जाने लगा.. करीब पंद्रह मिनट बाद वो दोनों एक बढ़िया सी रेस्टोरेंट मे बैठे था.. खाना खाने के बाद.. दोनों करीब के एक पार्क मे जा बैठे और प्रेमी-युगलों की तरह काफी देर तक बाते करते रहे.. फिर दोनों एक मॉल मे गए और एक घंटे तक, हाथ मे हाथ डालकर घूमते रहे..

आखिर एक मल्टीप्लेक्स के पास जाकर मदन ने गाड़ी रोकी.. रात के नौ बजे का शो था.. शो शुरू होने मे देर थी पर यहाँ मल्टीप्लेक्स मे सब की नज़रों के सामने रहने मे खतरा था.. इसलिए रेणुका चलते हुए बाहर आ गई.. और मदन भी बाहर जाकर दूर एक टपरी पर खड़े खड़े सिगरेट फूंकने लगा..

जब शो का टाइम हुआ और सारी ऑडियंस अंदर चली गई उसके बाद दोनों अंदर गए और अपनी सीट पर बैठ गए..

सिनेमा हॉल के अंधेरे मे हीरोइन के लटके-झटके देखते हुए रेणुका के कामुक हाथ मदन के लंड पर पहुँच गए.. और उसे रात की चुदाई के लिए तैयार करने लगे.. पूरा दिन इतनी मस्ती से बीता था की वह दोनों शीला-राजेश को भूल ही गए थे..






इंटरवल के दौरान रेणुका ने मदन से कहा "यार, उन दोनों को फोन तो लगा.. और पूछ.. की वह लोग कहाँ है.. !!"

मदन ने राजेश को फोन लगाया तब रात के ग्यारह बज चुके थे..

राजेश ने फोन उठाकर बिना हैलो कहे.. फोन चालू रखकर बाजू मे रख दिया.. क्योंकि तब राजेश और शीला के बीच घमासान चुदाई चल रही थी.. मूवी फिर से शुरू हो चुका था.. लेकिन रेणुका और मदन तो फोन को कान पर लगाकर... साथ मे सुनने लगे थे.. गरम होकर मदन रेणुका के स्तनों को दबा रहा था और रेणुका मदन के लंड को मसल रही थी.. और साथ ही साथ दोनों राजेश-शीला की चुदाई के लाइव-अपडेट को सुन रहे थे






शीला: "ओह्ह राजेश.. फक मी हार्ड.. आह.. तेरे साथ इतना मज़ा आ रहा है.. अब तो मैं उसे ढीले मदन के पास जाने ही नहीं वाली.. मुझे तो अब सिर्फ तू ही चाहिए.. ओह्ह.. !!"

राजेश: "क्या बॉडी है तेरा, शीला... !!! ये तेरे बड़े बड़े बॉल... ओहोहओहो.. रेणुका का तो कोई मुकाबला ही नहीं है इनके सामने.. कितनी गरम है तू, मेरी जान.. !! और तेरे भोसड़े मे ऐसी गर्मी है की लंड बाहर निकालने का मन ही नहीं करता.. !! काश रेणुका के बदले तू मेरी पत्नी होती.. !!"

फोन पर कान लगाकर रेणुका और मदन लाइव कमेंटरी सुन रहे थे.. और सिनेमा-हॉल मे ही एक दूसरे के गुप्त अंगों को मदहोश होकर सहला रहे थे..






रात के एक बजे मूवी खत्म हुआ..

मदन: "यार माँ चुदाने गई सारी दुनियादारी.. अब मुझे शीला क्या सोचेगी उसकी कोई फिक्र नहीं है.. होटल छोड़.. हम दोनों मेरे घर ही चलते है.. शीला आ जाएगी तो देख लेंगे"

रेणुका; "ठीक है.. जैसा तुम ठीक समझो.. !!"

दोनों गाड़ी मे मदन के घर की तरफ निकल गए.. मदन गाड़ी चला रहा था और रेणुका झुककर उसका लंड चूस रही थी.. बीच बीच मे मदन उसकी पीठ पर हाथ फेर लेता तो कभी नीचे हाथ डालकर उसका बबला दबा देता.. !!

करीब डेढ़ बजे दोनों मदन के घर के पास पहुंचे.. इतनी ठंड थी की पूरी सोसायटी मे सन्नाटा छाया हुआ था..

मदन का लंड छोड़कर रेणुका गाड़ी से उतरी और मदन के घर का मैन गेट खोलकर बरामदे के अंदर जाने से पहले वही रुक गई.. अपना जीन्स और पेन्टी घुटनों तक उतारकर.. वह अपनी गोरी गांड हिलाकर मदन को आमंत्रित करने लगी.. मदन का लंड यह द्रश्य देखकर ही पागलों की तरह उछलने लगा..






मदन तुरंत गाड़ी से उतरा और रेणुका के करीब पहुंचकर अपनी पेंट की चैन खोलने लगा.. रेणुका के मस्त गोरे चूतड़ों को सहलाते हुए उसने कूल्हों को फैलाकर रेणुका की गुलाबी चूत को उजागर कर दिया.. !! अपने स्तनों को दबाते हुए रेणुका और झुक गई ताकि योनि-प्रवेश मे आसानी हो.. चूत की फाँकों पर रगड़ते हुए मन तो मदन का भी कर रहा था की लंड अंदर डाल दे.. आसपास भले ही सन्नाटा था पर यहाँ खतरा मोड़कर चुदाई करने मे मज़ा नहीं आता..





वो रेणुका को खींचकर घर के अंदर ले गया.. और दोनों बिस्तर पर जा गिरे.. !!

मदन बोला "बाहर बड़ी गर्मी दिखा रही थी.. देखता हूँ की अब कितनी गर्मी बची है..!!"

अपने दोनों मम्मे टॉप के अंदर दबाते हुए रेणुका ने शैतानी मुस्कान के साथ कहा: "यह तो अंदर डालकर जाँचने से ही पता चलेगा..!!"

मदन बेड पर आ कर बैठ गया.. रेणुका उसके पास खिसक आई.. मदन ने उसका चेहरा अपने दोनों हाथों में पकड़ा और उसके माथे पर चुम्बन ले लिया.. इस से रेणुका का चेहरा लाल हो गया.. उसके शरीर में करंट दौड़ गया.. रेणुका के होंठ मदन के होंठों से चिपक गए.. दोनों गहरे चुम्बन में डुब गए..

पिछले दिन इतनी धुआंधार चूदाइयाँ होने के बावजूद दोनों का जैसे मन ही नहीं भरा था.. असल में, शीला और राजेश को एक साथ देखकर.. थोड़ी सी ईर्ष्या और थोड़ी सी उत्तेजना के चलते, दोनों की भूख और तीव्र हो चली थी.. कुछ देर बाद दोनों सांस फुलने के कारण अलग हो गए .. दोनों की सांस बहोत तेज चल रही थी..

मदन ने रेणुका को अपने शरीर से चिपका लिया.. रेणुका ने अपना चेहरा उसकी छाती में छुपा लिया.. उसके हाथ रेणुका की पीठ को सहलाने लगे.. रेणुका उसके हाथों से पिघलती सी गई.. वह भी मदन की पीठ सहलाने लगी.. दोनों के शरीर में काम की आग लगनी शुरु हो गई थी.. मदन ने उसके टॉप को सर के ऊपर से उतार दिया.. उम्र के साथ रेणुका के उरोज ढ़ल भले गया थे लेकिन उसकी पुष्टता कम नहीं हुई थी.. मदन के हाथों द्वारा सहलाये जाने से वह उत्तेजित हो कर कठोर हो गया थे.. निप्पल फुल कर लंबें हो गया..

मदन निप्पलों को अपनी ऊंगलियों के बीच लेकर दबाते रहे.. रेणुका आहहहहहहहहहहहह करने लग गई.. इस के बाद मदन ने गरदन झुका कर निप्पलों को अपने होंठों के बीच दबोच लिया और उसको चुसने लगे.. इस से रेणुका की उत्तेजना और बढ़ गई.. पहले एक निप्पल चुसा गया और फिर दूसरे का नंबर आया.. इस से रेणुका का सारा शरीर अकड़ने लगा.. उसने मदन का कुर्ता उतार दिया.. अब उसके हाथ मदन के नंगें शरीर पर घुम रहे थे.. मदन के निप्पल भी उसकी ऊंगलियों में आ गया.. वह उसे मसलने लगी.. इस से मदन के शरीर में उत्तेजना की लहरें उठने लग गई.. काफी देर तक दोनों एक दूसरे के शरीर में वासना की आग भड़काते रहे..

जब आग भड़क गई तो मदन ने रेणुका का जीन्स भी उतार दिया.. वह भी अपने कपड़ें उतार कर नंगा हो गया.. रेणुका का शरीर अभी भी उम्र को छुपाने में सफल हो रहा था.. शरीर में भरपुर कसाब मौजूद था.. कही पर फालतु मांस नहीं था.. मदन ने उसकी जाँघों पर हाथ फिरा कर उसे और उत्तेजित करना शुरु कर दिया.. इस के बाद वह उसे लिटा कर उसके सारे शरीर को चुमने लग गया.. स्तनों को दबाने और चुमने के बाद वह उसकी कमर को चुम कर उसकी नाभी को गिला कर के उसकी जाँघों के मध्य में उतर गया.. बिना बालों वाली चूत की मादक सुगंध उसकी नाक में आने लग गई.. उसकी ऊंगली रेणुका की चूत में घुस गई, वहाँ नमी तो थी लेकिन कम थी.. उसनें अपनी ऊंगली को चूत के अंदर बाहर करना शुरु कर दिया.. रेणुका आहहहह उहहहहहहहह करने लग गई.. कुछ देर बाद ही रेणुका ने उत्तेजित हो कर उसके होंठ अपने होंठों में ले कर काटना शुरु कर दिया..






मदन 69 की पोजिशन में आ गया और उसका लंड अब रेणुका के चेहरे पर लहरा रहा था.. रेणुका ने उसे अपने मुँह में ले लिया.. मुँह की नमी और जीभ का स्पर्श पा कर मदन का लंड और तनाव लेने लगा.. रेणुका उसे अपने मुँह से अंदर बाहर करने लगी..






कुछ देर बाद मदन को लगा कि वह रेणुका के मुँह में ना स्खलित हो जाये यही सोच कर वह रेणुका के ऊपर से उठ गया और उसकी जाँघों को चौड़ा करके उसके बीच में बैठ गया.. रेणुका ने भी अपनी टाँगें फैला ली.. मदन ने अपने तने लंड को रेणुका की चूत पर रख कर दबाया तो लंड अंदर तो गया लेकिन वहाँ पर नमी की कमी होने के कारण आगे नहीं खिसका.. मदन ने दूबारा प्रयास किया, मदन ने थोड़ा सा थूक लेकर अपने सुपाड़े पर मल दिया और उसने अपने लंड को रेणुका की चूत के मुँह पर लगाया और जोर डाला तो लंड आसानी से चूत में समा गया..





दूसरी बार धक्का देने से मदन का लंड अंडकोष तक चूत में समा गया.. रेणुका दर्द से कराही.. मदन रुका और फिर उसंने धक्कें लगाने शुरु कर दिये.. रेणुका के हाथ मदन की पीठ पर पहुँच गए.. रेणुका की भरी जाँघों के बीच मदन का लंड पुरा समा रहा था.. रेणुका इस का पुरा आनंद उठा रही थी.. आनंद के कारण उसकी आँखें बंद हो गई थी.. काफी देर तक मदन धक्कें लगाता रहा फिर थक कर रेणुका के ऊपर से उतर कर बगल में लेट गया.. कुछ देर आराम करने के बाद वह फिर से रेणुका में समा गया और उसकी चूत पर प्रहार करने लगा.. रेणुका ने अपनी बांहें मदन की गरदन में डाल कर उसे झुकाया और उसके होंठ चुम कर कहा "यार मदन, कल पूरा दिन चुदाई करने के बाद अब भी तुम्हारा दम कायम है..!!"





रेणुका ने अपनी चूत को कसना और मथना शुरु कर दिया था.. मदन समझ गया थे कि अब वह दोनों स्खलित होने वाले है.. रेणुका भी स्खलित हो चुकी थी उसकी टाँगें मदन की पीठ पर आ गई.. मदन ने बड़े जोर से पिचकारी मारी और रेणुका के ऊपर लेट गया.. उसकी सांस बड़े जोर से चल रही थी.. वह लुढक कर रेणुका की बगल में आ गया..

रेणुका की छातियाँ जोर जोर से ऊपर नीचे हो रही थी.. वह भी चरम के आनंद में डुबी हुई थी.. कुछ देर तक दोनों अपनी सांसों को सहेजते रहे.. जब दोनों कुछ नॉर्मल हुए तो रेणुका बोली "आज भी मेरी कमर का दम निकल गया.."

दोनों के निजी अंग पानी छोड़ रहे थे.. और काफी थक चुके थे..

रात के दो बजे से लेकर जो सेक्स का सिलसिला चला वो साढ़े तीन तक जारी रहा.. प्यास तो कम नहीं हुई.. पर दोनों की ऊर्जा खतम हो चुकी थी.. एक दूसरे की बाहों मे बाहें डालकर मदन और रेणुका गहरी नींद सो गए..

नींद तब खुली जब सुबह साढ़े पाँच बजे डोरबेल बजी.. रेणुका ने उठकर पास पड़ा शीला का गाउन पहन लिया और झटपट दरवाजा खोला

सामने रसिक खड़ा था

रसिक: "आप अभी तक यहीं हो?? शीला भाभी कहाँ है??" रसिक की आँखें शीला के मांसल बदन को ढूंढ रही थी.. कई दिनों हो गए थे भाभी के गूँदाज बबलों को दबाए हुए..

रेणुका ने हंसकर चुटकी लेते हुए कहा "नहीं, अब मैं ही मदन भैया के साथ रहूँगी.. शीला का मेरे पति के साथ ब्याह हो गया है.. अब से मैं ही रोज दूध लेने आऊँगी.. और तू शीला के साथ जो जो करता था.. वो सब मेरे साथ करना होगा.. समझा.. !!" आँख मारकर कातिल मुस्कान के साथ रेणुका ने कहा

रेणुका किचन से दूध भरने के लिए पतीला लेकर आई

रसिक: "क्या भाभी आप भी.. !! भाभी का गाउन क्या पहन लिया.. आप तो साहब की बीवी बन गई.. !!"

अपने दोनों स्तनों को गाउन के ऊपर से... दोनों हाथों से एक कर दबाते हुए रेणुका ने अत्यंत कामुक अंदाज मे कहा "ओह्ह.. !! रसिक.. क्या फ़र्क है मुझ मे और शीला मे??"

रसिक ने रेणुका के बॉल पकड़कर दबाते हुए कहा "सब से पहला फ़र्क तो इसका ही है.. शीला भाभी के बबले इतने बड़े है की एक किलोमीटर दूर से भी नजर आ जाते है"






रेणुका ने रसिक का लंड पाजामे के ऊपर से पकड़कर दबा दिया.. लंड एकदम टाइट हो गया

रेणुका: "तेरे पास तो बहोत सारी भेस होगी.. ये बता.. तू सिर्फ ज्यादा दूध देने वाली भेस को ही चारा देता है क्या?? कम दूध देने वाली भेस को कुछ नहीं खिलाता?"

रसिक: "कैसी बात कर रही हो भाभी.. !! दूध ज्यादा दे या कम.. चारा तो सब को डालना ही पड़ता है"

रेणुका: "बिल्कुल वैसे ही.. देख.. मेरे चाहे शीला जीतने बड़े न हो.. फिर भी ये तेरा खड़ा तो हो ही गया ना.. !!!"

रसिक: "उसका तो काम ही है खड़ा होने का.. कही भी खड़ा हो जाता है.. आखिर मर्द का लंड है.. भेस के थन देखकर भी खड़ा हो जाता है.. तो यहाँ आपकी चूचियाँ देखकर तो खड़ा हो ही जाएगा..!! चलिए, अब उलटे हो जाइए.. ताकि मैं घुसा दूँ... मुझे देर हो रही है.. "

"रसिक मादरचोद.. तू दूध देने आता है या लंड घुसाने??" पीछे से मदन की आवाज आई

मदन ने बाहर आकर कहा "तुम दोनों अपना खेल अंदर आकर करो.. बाहर कोई देख लेगा..

मदन के पीछे पीछे रेणुका और रसिक घर के अंदर आ गए और दरवाजा बंद कर लिया

रेणुका: "साले, परसो तो मुझे चोद चोदकर रुला दिया था.. फिर भी तेरा मन नहीं भरा.. !! चल अब बाहर निकाल इसे.. थोड़ा चूस लेती हूँ.. !!" कहते हुए रेणुका घुटनों पर बैठकर उसके पाजामे का नाड़ा खोलने लगी.. "कितना बांध कर रखता है इसे.. !! अंदर दम घुट जाएगा इसका"

रसिक ने रेणुका के गाउन मे हाथ डालकर उसके दोनों स्तनों को पकड़ लिया और दूसरे हाथ से अपनी लंगोट के साइड से.. अपना गधे जैसा लंबा मोटा और काला लंड बाहर निकाला.. रेणुका ने तुरंत लंड का हवाला ले लिया.. और उस काले नाग के सुपाड़े को चूमते हुए बोली "बाप रे.. !! इसे तो देखकर ही कुछ कुछ होने लगता है"

रेणुका ने तुरंत उसके सुपाड़े को मुंह मे भरकर गीला कर दिया.. और फिर आराम से नीचे बैठकर चूसने लगी.. वो चूसने मे मगन थी तभी मदन भी अपना लोडा खोलकर रेणुका के सामने खड़ा हो गया






मदन: "एक से तेरा क्या होगा रेणुका.. !! आज तो तू दो दो लंड एक साथ चूस"

रेणुका ने रसिक का लंड चूसते हुए दूसरे हाथ से मदन का लंड पकड़ लिया और हिलाने लगी.. अब वो बारी बारी से दोनों लंड चूस रही थी.. कभी मदन के लंड को चूसती तो कभी रसिक के.. दोनों लंड रेणुका के मुख की लार से लिप्त होकर.. टाइट हो गए थे.. !!

अब रेणुका को मदन का लंड चूसने देकर.. रसिक उसके पीछे खड़ा हो गया.. और उसकी कमर उचककर एक ही धक्के मे अपना लंड अंदर घुसेड़ दीया...






रेणुका के मुंह से मदन का लंड छूट गया और वो दर्द से कराह उठी.. "ऊईईई माँ.. साले धीरे से डाल.. मेरी चूत है.. कोई सार्वजनिक कुआं नहीं.. जिसमे जो चाहा डाल दिया.. "

रसिक ने रेणुका की बात अनसुनी कर धक्के लगाना शुरू कर दिया.. रेणुका भी अपनी चूत मे धक्के लेते लेते मदन का लंड चूसती रही.. रसिक ने गति बढ़ाई और रेणुका का बदन अकड़ने लगा... और रसिक के डंडे ने जैसे ही अंदर गरम वीर्य की बौछार की.. रेणुका की चूत ने भी भरपूर मात्रा मे पानी छोड़ दिया.. अपना काम खतम कर रसिक ने फटाफट पाजामा पहन लिया.. और फिर दरवाजा खोलकर भाग गया.. !!






रेणुका की चूत से रसिक का वीर्य बाहर निकलकर फर्श पर गिर रहा था.. उसे साफ करना जरूरी था.. वो उठकर बाथरूम की तरफ गई.. पीछे पीछे मदन भी गया.. शावर ऑन कर.. दोनों ने साथ मे ही नहाते नहाते जबरदस्त चुदाई की.. !! तृप्त होकर दोनों बाहर निकले

रेणुका कपड़े पहन रही थी तब तक मदन ने झोमेटो से नाश्ता ऑर्डर कर दिया... थोड़ी ही देर मे लड़का पार्सल दे गया.. डाइनिंग टेबल पर बैठकर दोनों बातें करते हुए नाश्ता करने लगे..

मदन: "रेणुका, वाकई पिछले दो दिन.. मेरी ज़िंदगी के सबसे यादगार दिन थे.. अगर फिर कभी ऐसा मौका मिला तो मैं छोड़ूँगा नहीं"

रेणुका: "मदन, मैं तो सोच रही हूँ.. की अगर पूरी ज़िंदगी ही ऐसे रहना पड़ा तो मुझे कोई हर्ज न होगा.. तेरे साथ मुझे उतना ही मज़ा आता है जितना राजेश के साथ.. हाँ, मुझे संतुष्ट करने का तेरा तरीका मुझे जरूर ज्यादा पसंद है.. !! फिर से मौका जरूर ढूँढेंगे.. तेरे घर पर तो वैशाली के कारण कुछ मुमकिन नहीं होगा.. हाँ, जब राजेश शहर से बाहर होगा तब मैं तुझे जरूर बुला लूँगी.. "

मदन: "वैसे अब राजेश हो न हो, क्या फरक पड़ता है?"

रेणुका: "हाँ, वो भी है.. मेरे कहने का मतलब यह था की मैं यहाँ शायद न आ पाउ.. पर तुम मेरे घर कभी भी आ सकते हो"

मदन: "रेणुका, आई लव यू यार"

रेणुका ने मुस्कुराकर मदन के गाल पर हाथ फेरते हुए कहा "आई लव यू टू, मदन.. !!"

तभी घर की डोरबेल बजी...


डाइनिंग टेबल के पास की खिड़की से रेणुका ने देखा.. वैशाली थी.. !!! अच्छा हुआ जो तुरंत दरवाजा नहीं खोल दिया.. वरना मुसीबत हो जाती.. !!!

अगला अपडेट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
 
Back
Top