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- Dec 5, 2013
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बेटीचो
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असली बात ये थी की मैं ज़रा अपने कमरे का एक चक्कर लगा के देखना चाहती थी की मेरी ननद पर चढ़ाई अभी शुरू हुयी की नहीं।
ननद मेरी मेरे बिस्तर पे मेरे मरद के साथ,
खिड़की हलकी सी खुली थी, दिख भी रहा था और सुनाई भी दे रहा था, खेल बस शुरू हो रहा था। मेरे मरद का हाथ अपने पेट पे रख के ननद मेरी बड़े दुलार से अपने पेट में की बिटिया से बोल रही थी,
" देख बेटी तेरा बेटीचोद बाप, केतना इन्तजार करा के आया है, लेकिन तेरे साथ इन्तजार नहीं कराने दूंगी जैसे ही जवानी के फूल खिलेंगे न, "
और मेरे मरद ने, जिसे मेरी ननद बेटीचोद बाप कह रही थीं, ननद के पेट को चूम लिया, और मेरी ननद को छेड़ते हुए पेट से बोला,
" ये तेरी महतारी न नम्बरी छिनार है "
" हे ये तोहार बिटिया हमरो नंबर डकायेगी, मैं छिनार तो ये महाछिनार, और सबसे पहले अपने बाप के साथ " ननद चुप रहने वाली थोड़ी थी,
" तो का हुआ," पेट सहलाते वो बोले मेरी ननद से,
" बीज मैं लगा रहा हूँ तो फल कौन खायेगा, और फल क्या कच्ची अमिया भी आय गयी तो बिना कुतरे "
" एकदम " इनका सर सहलाते हुए प्यार से मेरी ननद ने वायदा किया, " अपने हाथ से अपने सामने, खुद खोल के, लेकिन सबसे पहले जहाँ से नौ महीने बाद तोहार बिटिया निकली उहाँ चूम चाट के, चुसो न भैया कस के "
मेरी तरह से मेरी ननद भी जानती थी की मेरा मरद कितना बड़ा चूत चटोरा है , वो अपनी सगी बहन की दोनों चिकनी मख़मली जाँघों को फैला के
और मेरी ननद अपने पेट को सहला के जैसे अपनी होने वाली बेटी से बात कर रही हों,
" देख रही है इस स्साले बेटीचोद को,... कैसे अभी से तेरे लिए ललचा रहा है। अरे जिस बहनचोद ने अपनी सगी बहन नहीं छोड़ा वो बेटी को कैसे छोड़ेगा और छोड़ना चाहिए भी नहीं। अरे जब बाहर निकलेगी न नौ महीने बाद तब देखना अपने इस बेटीचोद बाप की बदमाशी, तेरे सामने चढ़ेगा तेरी माँ पे,... "
और यह सब सुन के मेरे सैंया और ननद के भैया और गरमा रहे थे, जिस मस्ती मेरी ननद की बातें सुन के मेरे मर्द को और जोश आ रहा था और वो कस कस के अपनी बहन की बुर चाट रहे थे।
मेरी ननद अपने भाई को और उकसाते, आगे में घी डालते, अपने पेट को सहलाते बोली,
' जिस उमर में तेरी सहेलियां गुड्डे से खेलेंगी न तुझे अपने हाथ से असली मोटा मस्त लौंड़ा पकडाउंगी, तेरे बाप का, ऐसा मस्त मिलेगा नहीं "
और ये बात मेरी ननद की सोलहो आने सही थी,
मैंने इनके पहले तो किसी और का, और साल भर, लेकिन इस फागुन में तो मैंने किसी देवर को मना नहीं किया, ऐन होली के दिन ननदोई जी और उनके दोस्त ने, फिर पड़ोस वाले सुनील और उसके दोस्तों ने भी भी और होली के पहले मैंने खुद चंदू को, और मायके से लौटने के बाद एकदम कच्चा केला, चुन्नू, फिर कबड्डी के अगले दिन तो मैंने गिनना ही छोड़ दिया, देवर है तो फागुन में भौजी को तो , और अगर कोई देवर झिझकता तो मैं खुद उसके ऊपर, लेकिन बात असली यही थी की ननद जो इस बेटी चोद मेरे मरद की होने वाली बेटी को समझा रही थीं, मेरा मरद सबसे बीस ।
खाली लम्बाई मोटाई में ही नहीं, उसमें नन्दोई जी का उनसे उन्नीस होगा अट्ठारह नहीं और कड़ा भी जबरदस्त था, और चंदू का तो करीब करीब बराबर ही और सुपाड़ा बहुत ही मोटा, इसलिए तो भोंसडे वालियों की भी फटती थी और कमल का भी वही हाल,
लेकिन मेरे मरद की सबसे बदमाशी वाली बात थी चोदने के साथ साथ जो वो तंग करता था, तड़पाता था, कभी ऊँगली से कभी होंठों से कभी जीभ से, लड़की खुद ही बोलती थी, ' चोद स्साले', मारे गरमी के पागल हो जाती थी। खुद मैं, पहली रात को ही इन्होने कभी चूम के कभी चूस चूस के कभी ऊँगली से कभी होंठों से, मेरी ये हालत कर दी थी की झिल्ली तो बाद में फटी, मेरी शर्म लाज पहले उतर गयी और पांच बार इस बदमाश ने मुझसे कहलवाया, ' पेलो न, अंदर डालो, पूरा डालो, हाँ और " तब जा के,
और अब जो उनकी बहन ने बेटीचोद होने का कह के उन्हें उकसाया तो ऐसे उन्होंने अपनी बहन को गरमाया उससे दस बार कबुलवाया की अपनी पहलौठी बेटी के सामने ही चुदवायेगी, खुल के चुदववायेगी जिससे वो भी, और अपने से अपनी बेटी को उनके लिए और उस के बाद क्या धकापेल चुदाई शुरू हुयी भाई बहन की और मेरी ननद बेटी को उनसे जोड़ के क्या मस्त गालियां दे रही थी, " चल बेटीचोद, मेरी तो तुझे चुदी मिली, तेरी बेटी की तो जब एकदम कच्ची कली रहेगी तभी तुझसे, और सबके सामने मामा बोलेगी लेकिन पिलवाते समय बापू। "
तभी मुझे याद आया की मैं ननदोई जी को अपनी और उनकी सास के पास अकेले छोड़ के आयी हूँ और उनका स्टॉक लेने आयी हूँ
और मैं अपनी ननद के कमरे की ओर,
मुझे मालूम था ननदोई जी का स्टॉक कहाँ रखा रहता था, व्हिस्की की दो बोतल निकाल के मैं सासू जी के कमरे की ओर चल दी,
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असली बात ये थी की मैं ज़रा अपने कमरे का एक चक्कर लगा के देखना चाहती थी की मेरी ननद पर चढ़ाई अभी शुरू हुयी की नहीं।
ननद मेरी मेरे बिस्तर पे मेरे मरद के साथ,
खिड़की हलकी सी खुली थी, दिख भी रहा था और सुनाई भी दे रहा था, खेल बस शुरू हो रहा था। मेरे मरद का हाथ अपने पेट पे रख के ननद मेरी बड़े दुलार से अपने पेट में की बिटिया से बोल रही थी,
" देख बेटी तेरा बेटीचोद बाप, केतना इन्तजार करा के आया है, लेकिन तेरे साथ इन्तजार नहीं कराने दूंगी जैसे ही जवानी के फूल खिलेंगे न, "
और मेरे मरद ने, जिसे मेरी ननद बेटीचोद बाप कह रही थीं, ननद के पेट को चूम लिया, और मेरी ननद को छेड़ते हुए पेट से बोला,
" ये तेरी महतारी न नम्बरी छिनार है "
" हे ये तोहार बिटिया हमरो नंबर डकायेगी, मैं छिनार तो ये महाछिनार, और सबसे पहले अपने बाप के साथ " ननद चुप रहने वाली थोड़ी थी,
" तो का हुआ," पेट सहलाते वो बोले मेरी ननद से,
" बीज मैं लगा रहा हूँ तो फल कौन खायेगा, और फल क्या कच्ची अमिया भी आय गयी तो बिना कुतरे "
" एकदम " इनका सर सहलाते हुए प्यार से मेरी ननद ने वायदा किया, " अपने हाथ से अपने सामने, खुद खोल के, लेकिन सबसे पहले जहाँ से नौ महीने बाद तोहार बिटिया निकली उहाँ चूम चाट के, चुसो न भैया कस के "
मेरी तरह से मेरी ननद भी जानती थी की मेरा मरद कितना बड़ा चूत चटोरा है , वो अपनी सगी बहन की दोनों चिकनी मख़मली जाँघों को फैला के
और मेरी ननद अपने पेट को सहला के जैसे अपनी होने वाली बेटी से बात कर रही हों,
" देख रही है इस स्साले बेटीचोद को,... कैसे अभी से तेरे लिए ललचा रहा है। अरे जिस बहनचोद ने अपनी सगी बहन नहीं छोड़ा वो बेटी को कैसे छोड़ेगा और छोड़ना चाहिए भी नहीं। अरे जब बाहर निकलेगी न नौ महीने बाद तब देखना अपने इस बेटीचोद बाप की बदमाशी, तेरे सामने चढ़ेगा तेरी माँ पे,... "
और यह सब सुन के मेरे सैंया और ननद के भैया और गरमा रहे थे, जिस मस्ती मेरी ननद की बातें सुन के मेरे मर्द को और जोश आ रहा था और वो कस कस के अपनी बहन की बुर चाट रहे थे।
मेरी ननद अपने भाई को और उकसाते, आगे में घी डालते, अपने पेट को सहलाते बोली,
' जिस उमर में तेरी सहेलियां गुड्डे से खेलेंगी न तुझे अपने हाथ से असली मोटा मस्त लौंड़ा पकडाउंगी, तेरे बाप का, ऐसा मस्त मिलेगा नहीं "
और ये बात मेरी ननद की सोलहो आने सही थी,
मैंने इनके पहले तो किसी और का, और साल भर, लेकिन इस फागुन में तो मैंने किसी देवर को मना नहीं किया, ऐन होली के दिन ननदोई जी और उनके दोस्त ने, फिर पड़ोस वाले सुनील और उसके दोस्तों ने भी भी और होली के पहले मैंने खुद चंदू को, और मायके से लौटने के बाद एकदम कच्चा केला, चुन्नू, फिर कबड्डी के अगले दिन तो मैंने गिनना ही छोड़ दिया, देवर है तो फागुन में भौजी को तो , और अगर कोई देवर झिझकता तो मैं खुद उसके ऊपर, लेकिन बात असली यही थी की ननद जो इस बेटी चोद मेरे मरद की होने वाली बेटी को समझा रही थीं, मेरा मरद सबसे बीस ।
खाली लम्बाई मोटाई में ही नहीं, उसमें नन्दोई जी का उनसे उन्नीस होगा अट्ठारह नहीं और कड़ा भी जबरदस्त था, और चंदू का तो करीब करीब बराबर ही और सुपाड़ा बहुत ही मोटा, इसलिए तो भोंसडे वालियों की भी फटती थी और कमल का भी वही हाल,
लेकिन मेरे मरद की सबसे बदमाशी वाली बात थी चोदने के साथ साथ जो वो तंग करता था, तड़पाता था, कभी ऊँगली से कभी होंठों से कभी जीभ से, लड़की खुद ही बोलती थी, ' चोद स्साले', मारे गरमी के पागल हो जाती थी। खुद मैं, पहली रात को ही इन्होने कभी चूम के कभी चूस चूस के कभी ऊँगली से कभी होंठों से, मेरी ये हालत कर दी थी की झिल्ली तो बाद में फटी, मेरी शर्म लाज पहले उतर गयी और पांच बार इस बदमाश ने मुझसे कहलवाया, ' पेलो न, अंदर डालो, पूरा डालो, हाँ और " तब जा के,
और अब जो उनकी बहन ने बेटीचोद होने का कह के उन्हें उकसाया तो ऐसे उन्होंने अपनी बहन को गरमाया उससे दस बार कबुलवाया की अपनी पहलौठी बेटी के सामने ही चुदवायेगी, खुल के चुदववायेगी जिससे वो भी, और अपने से अपनी बेटी को उनके लिए और उस के बाद क्या धकापेल चुदाई शुरू हुयी भाई बहन की और मेरी ननद बेटी को उनसे जोड़ के क्या मस्त गालियां दे रही थी, " चल बेटीचोद, मेरी तो तुझे चुदी मिली, तेरी बेटी की तो जब एकदम कच्ची कली रहेगी तभी तुझसे, और सबके सामने मामा बोलेगी लेकिन पिलवाते समय बापू। "
तभी मुझे याद आया की मैं ननदोई जी को अपनी और उनकी सास के पास अकेले छोड़ के आयी हूँ और उनका स्टॉक लेने आयी हूँ
और मैं अपनी ननद के कमरे की ओर,
मुझे मालूम था ननदोई जी का स्टॉक कहाँ रखा रहता था, व्हिस्की की दो बोतल निकाल के मैं सासू जी के कमरे की ओर चल दी,