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चढ़ गयी माँ बेटे पर

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" माँ, एक बार आप चढ़ जाओ न फिर आप को देख के मैं भी सीख जाउंगी,... " लेकिन माँ उसके पीछे पड़ी रही आखिर तय ये हुआ की गीता पहले एक बार ट्राई करेगी , अगर उससे नहीं हुआ तो माँ खुद चढ़ के , अंदर ले के उसे दिखाएगी, लेकिन सिर्फ अंदर लेगी चुदवायेगी नहीं,
गीता जानती थी की भैया का मस्त लंड सिर्फ एक बार घुसने की देर है कौन लौंडिया फिर टांग सिकोड़ सकती है, माँ तो खूब खेली खायी, घाट घाट की पानी पी , अपने भैया को नहीं मना की तो मेरे भैया को क्यों मना करेगी। '
वो चढ़ी तो पांच मिनट कोशिश भी हुयी,... पर भाई बहन की लगी सधी, आज तो असली शिकार माँ का होना था,.. कभी वो ठीक से सटाती नहीं, खुद छेद चिपका लेती, तो कभी भाई खुद उसका अपनी कमर हिला के सरका देता,... और
माँ चढ़ी,
और गीता को समझाती रही देख ऐसी अपनी बुरिया को फैलाना चाहिए , ऐसे सटाओ और कमर के जोर से , दोनों हाथ से कंधे को पकड़ के कस के धक्का लगाओ ,

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अबकी उनके बेटे ने माँ की कमर कस के पकड़ लिया था और उनके धक्के के साथ उसने जोर का ऊपर पुश किया,
गप्पाक से सुपाड़ा पूरा अंदर चला गया,... और
अब गीता ने भी खेल ज्वाइन कर लिया,... उसने माँ के दोनों कंधे कस के दबोच लिए , बेटी ने कंधे पकडे थे, बेटे ने कमर, जबतक माँ समझती लंड आधे से ज्यादा अंदर,...
और गीता माँ के कान में बुदबुदा रही थी , "माँ बस थोड़ी देर पांच मिनट मैं अच्छी तरह सीख जाऊं ने देख देख के , प्लीज माँ , "
अच्छा तो उन्हें भी लग रहा था, इत्ते दिन बाद ऐसा मस्त जवान लंड भोंसडे में घुसा था, भोंसडे से एक दम चूत बना दिया था,... और दो टीनेजर्स की ताकत वो चाह के भी नहीं उठ सकती थीं , और सच बोलिये तो चाह भी नहीं रही थीं,
थोड़ी देर में चुदाई फुल स्पीड में हो गयी और वो भूल गयीं की उनके नीचे कौन लेटा है और जैसे वो गीता के फूफा और मौसा से गरिया गरिया के चुदवाती थीं बस उसी तरह से,...
" अबे स्साले लगा जांगर, का कुल ताकत अपनी बहिनी के बिलिया में डाल आये हो या रोपनी वालों की ताल पोखरिया में

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बस इतना कहना काफी थी, जैसे अरबी घोड़े को कोई ऐड लगा दे और वो चेतक बन जाए, क्या जबरदस्त धक्के नीचे से कमर उछाल उछाल के मारना उसने शुरू कर दिया, लेकिन उसके ऊपर चढ़ी कोई नहीं बछेड़ी नहीं, उसके मामा से चुदी, खुद उसकी,... वो हर धक्के का जवाब धक्के से,... कभी झुक के बड़ी बड़ी चूँचियाँ उसके चौड़ी छाती से रगड़ देतीं और वो किशोर सिहर जाता,...
लेकिन साथ में वो सिखा भी रही थी, ...
हाँ ठीक है मान गयी बहुत ताकत है , अब थोड़ा धीरे,.. अरे पागल सबसे पहले जिसको चोद रहे उससे बाकी मज़ा भी लो , बाकी मज़ा भी दो , चल पहले एक हाथ से चूँची पकड़ के दबा, अरे कस, कउनो टिकोरे वाली नहीं है ऊपर तोहार, ... अरे दो दो हाथ है न ,..
और खुद उसका हाथ पकड़ के अपने क्लिट पे , चल एक साथ निपल और यहाँ एक साथ रगड़ पहले धीरे धीरे फिर कस कस के , कउनो औरत पागल हो जायेगी,...

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सीखने के मामले में बेटा उनका बहुत तेज था, और धीरे धीरे उसने जैसे जैसे कहा जा रहा था,वैसे ही साथ में सांड़ से तगड़े धक्के,.. माँ भूल गयीं की वो सिर्फ अपनी बेटी को विपरीत रति सिखाने के लिए इसके ऊपर चढ़ीं थीं। गीता ने कब का अपना हाथ उनके कंधे पर से हटा लिया था और वो खुद अपने जोर से धक्के लगा रही थीं, दस मिनट से ऊपर हो गया था,
और कुछ देर में ही वो काँप रही थी , देह हिल रही थी। गीता ने पहचान लिया बस उसने भी पीछे से पकड़ के बड़े बड़े जोबन का रस लेना, होंठों को चूमना चूसना शुरू कर दिया, माँ ने खुद अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी और गीता कस कस के चूस रही थी ,

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वो बार बार झड़ रही थीं , नीचे से खूंटा जड़ तक घुसा था , हाँ धक्के रुक गए थे, एक बार झड़ना रुकता तो दूसरी बार. कुछ ही देर में वो थेथर हो गयी थीं फिर गीता ने उन्हें पकड़ के उस लम्बे भाले पर से उतारा,... वो कटे पेड़ की तरह पलंग पर बेटे के बगल में पड़ पर गिर गयी पर तारीफ़ की निगाह से अपने बेटे को देख रहा था , ...
क़ुतुब मीनार पे अब बहन के चढ़ने की बारी थी ,
पर थोड़ी देर में उनका बेटा, उसे तो बहन को निहुरा के पेलने में मजा आता था, तो वहीँ पलंग पे निहुरा के हचक हचक के चोदना शुरू कर दिया।

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और झड़ा बहन की बुर में ही।
बहन को दो बार अच्छी तरह से झाड़ के
लेकिन छुटकी के मन तो कुछ और ही चल रहा था , उसने गीता से पूछ लिया
"तो माँ बेटे की चुदाई फिर तो चालू हो गयी होगी। "

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" माँ, एक बार आप चढ़ जाओ न फिर आप को देख के मैं भी सीख जाउंगी,... " लेकिन माँ उसके पीछे पड़ी रही आखिर तय ये हुआ की गीता पहले एक बार ट्राई करेगी , अगर उससे नहीं हुआ तो माँ खुद चढ़ के , अंदर ले के उसे दिखाएगी, लेकिन सिर्फ अंदर लेगी चुदवायेगी नहीं,
गीता जानती थी की भैया का मस्त लंड सिर्फ एक बार घुसने की देर है कौन लौंडिया फिर टांग सिकोड़ सकती है, माँ तो खूब खेली खायी, घाट घाट की पानी पी , अपने भैया को नहीं मना की तो मेरे भैया को क्यों मना करेगी। '
वो चढ़ी तो पांच मिनट कोशिश भी हुयी,... पर भाई बहन की लगी सधी, आज तो असली शिकार माँ का होना था,.. कभी वो ठीक से सटाती नहीं, खुद छेद चिपका लेती, तो कभी भाई खुद उसका अपनी कमर हिला के सरका देता,... और
माँ चढ़ी,
और गीता को समझाती रही देख ऐसी अपनी बुरिया को फैलाना चाहिए , ऐसे सटाओ और कमर के जोर से , दोनों हाथ से कंधे को पकड़ के कस के धक्का लगाओ ,

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अबकी उनके बेटे ने माँ की कमर कस के पकड़ लिया था और उनके धक्के के साथ उसने जोर का ऊपर पुश किया,
गप्पाक से सुपाड़ा पूरा अंदर चला गया,... और
अब गीता ने भी खेल ज्वाइन कर लिया,... उसने माँ के दोनों कंधे कस के दबोच लिए , बेटी ने कंधे पकडे थे, बेटे ने कमर, जबतक माँ समझती लंड आधे से ज्यादा अंदर,...
और गीता माँ के कान में बुदबुदा रही थी , "माँ बस थोड़ी देर पांच मिनट मैं अच्छी तरह सीख जाऊं ने देख देख के , प्लीज माँ , "
अच्छा तो उन्हें भी लग रहा था, इत्ते दिन बाद ऐसा मस्त जवान लंड भोंसडे में घुसा था, भोंसडे से एक दम चूत बना दिया था,... और दो टीनेजर्स की ताकत वो चाह के भी नहीं उठ सकती थीं , और सच बोलिये तो चाह भी नहीं रही थीं,
थोड़ी देर में चुदाई फुल स्पीड में हो गयी और वो भूल गयीं की उनके नीचे कौन लेटा है और जैसे वो गीता के फूफा और मौसा से गरिया गरिया के चुदवाती थीं बस उसी तरह से,...
" अबे स्साले लगा जांगर, का कुल ताकत अपनी बहिनी के बिलिया में डाल आये हो या रोपनी वालों की ताल पोखरिया में

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बस इतना कहना काफी थी, जैसे अरबी घोड़े को कोई ऐड लगा दे और वो चेतक बन जाए, क्या जबरदस्त धक्के नीचे से कमर उछाल उछाल के मारना उसने शुरू कर दिया, लेकिन उसके ऊपर चढ़ी कोई नहीं बछेड़ी नहीं, उसके मामा से चुदी, खुद उसकी,... वो हर धक्के का जवाब धक्के से,... कभी झुक के बड़ी बड़ी चूँचियाँ उसके चौड़ी छाती से रगड़ देतीं और वो किशोर सिहर जाता,...
लेकिन साथ में वो सिखा भी रही थी, ...
हाँ ठीक है मान गयी बहुत ताकत है , अब थोड़ा धीरे,.. अरे पागल सबसे पहले जिसको चोद रहे उससे बाकी मज़ा भी लो , बाकी मज़ा भी दो , चल पहले एक हाथ से चूँची पकड़ के दबा, अरे कस, कउनो टिकोरे वाली नहीं है ऊपर तोहार, ... अरे दो दो हाथ है न ,..
और खुद उसका हाथ पकड़ के अपने क्लिट पे , चल एक साथ निपल और यहाँ एक साथ रगड़ पहले धीरे धीरे फिर कस कस के , कउनो औरत पागल हो जायेगी,...

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सीखने के मामले में बेटा उनका बहुत तेज था, और धीरे धीरे उसने जैसे जैसे कहा जा रहा था,वैसे ही साथ में सांड़ से तगड़े धक्के,.. माँ भूल गयीं की वो सिर्फ अपनी बेटी को विपरीत रति सिखाने के लिए इसके ऊपर चढ़ीं थीं। गीता ने कब का अपना हाथ उनके कंधे पर से हटा लिया था और वो खुद अपने जोर से धक्के लगा रही थीं, दस मिनट से ऊपर हो गया था,
और कुछ देर में ही वो काँप रही थी , देह हिल रही थी। गीता ने पहचान लिया बस उसने भी पीछे से पकड़ के बड़े बड़े जोबन का रस लेना, होंठों को चूमना चूसना शुरू कर दिया, माँ ने खुद अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी और गीता कस कस के चूस रही थी ,

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वो बार बार झड़ रही थीं , नीचे से खूंटा जड़ तक घुसा था , हाँ धक्के रुक गए थे, एक बार झड़ना रुकता तो दूसरी बार. कुछ ही देर में वो थेथर हो गयी थीं फिर गीता ने उन्हें पकड़ के उस लम्बे भाले पर से उतारा,... वो कटे पेड़ की तरह पलंग पर बेटे के बगल में पड़ पर गिर गयी पर तारीफ़ की निगाह से अपने बेटे को देख रहा था , ...
क़ुतुब मीनार पे अब बहन के चढ़ने की बारी थी ,
पर थोड़ी देर में उनका बेटा, उसे तो बहन को निहुरा के पेलने में मजा आता था, तो वहीँ पलंग पे निहुरा के हचक हचक के चोदना शुरू कर दिया।

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और झड़ा बहन की बुर में ही।
बहन को दो बार अच्छी तरह से झाड़ के
लेकिन छुटकी के मन तो कुछ और ही चल रहा था , उसने गीता से पूछ लिया
"तो माँ बेटे की चुदाई फिर तो चालू हो गयी होगी। "



























































