Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - Page 16 - SexBaba
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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

नयी टीम, नए रूल्स





फिर मैंने जो बड़ी बुजुर्ग भाभी लोग थीं उनकी ओर मुंह कर के बोला, खूब आदर के साथ ५०० ग्राम मक्खन मार के,

" और आप लोग थोड़ा हम लोगों का का कहते हैं उ, मार्गदर्शक रहिएगा,... आप लोगों का जो इतना एक्सपीरियंस है, एक एक ननद क त कुल हाल चाल आप लोगों को मालूम होगा ही, तो बस आप लोग जैसे कहियेगा,... एकदम वैसे वैसे , और आप लोगन क आसीर्बाद और पिलानिंग से कहीं जीत गए,... तो जितने कच्चे टिकोरे होंगे न सब आप लोगों की झोली में,... "

वो भी मेरी बात से सहमत होती बोलीं , " ठीके कह रही हो , अब सांस फुला जाती है, चूल्हा झोंकते बच्चे पैदा करते,... "

और मैंने अगली पिलानिंग सुना दी,... " जो आप लोगन से सुना की कउनो टाइम का वो नहीं , ... तो हम सोच रहे थे की पौन घंटा ,... आखिर ओकरे बाद आधा पौन घंटा ननदों की रंगड़ाई, होली क मज़ा , फिर नहाना धोना, खाना पीना , सांझ के पहले घर लौटना ,... "

लेकिन फिर एक जेठानी जिन्हे मैंने मार्गदर्सक में डाला था खड़ी हो गयीं,... बोलीं अरे उ तोहार ननद कुल मानेंगी नहीं।





" तभी तो,... " मैंने जोड़ा,... " अरे हम लोग पौन घंटा से बात शुरू करेंगे , वो सब दो ढाई घंटा कहेंगी , एक -डेढ़ घंटा पर बात ख़तम हो जायेगी,.. तो भी पहले से तो बहुत ठीक रहेगा , और एक बात और ,... "

कोई और खड़ा होता उसके पहले मैंने अगली बात रख दी ,

" वो सब ससुरी मरती भी हैं फिर कोई न कोई ननद छिनार जिला देती है, तो ऐसे तो ,... तो जो चाहे दोनों टीम में पकड़ी जाने पर अगर वो टीम वाले अगर उसे तीन चार मिनट में झड़ा दें तो वो गेम से बाहर हो जायेगी , दुबारा अपनी टीम में नहीं जा सकती ,... "





अबकी मंजू भाभी ने एक संसोधन जारी किया जिसे मैंने तुरंत मान लिया,...

वो बोलीं,

' या तो झड़ जाए या खुद हाथ उठा के हार मान ले,... वो भी गेम से हरदम के लिए बाहर हो जाएगी "





तो फिर उन पुरानी जेठानियों ने काफी ज्ञान दिया जिसे मैंने एक कान से सुन के दूसरे कान से निकाल दिया , लेकिन तब तक किसी ने छुटकी का नाम ले लिया,...

" अरे उ नैनवा पक्की छिनार, वो तोहरे छुटकी बहिनिया को भी भौजाई की टीम में जुड़वाएगी , मानेगी नहीं। "

" अरे कैसे उसकी कौन शादी हुयी है यह गाँव में , भौजाई कैसे हुयी वो " मैं भी अड़ गयी , फिर मुस्कराते हुए मैंने तुरुप का पत्ता खोला,..." देखिये पहले तो हम लोग मानेगे नहीं , और मानेगे बहुत कहने सुनने पर तो अपनी तीन शर्तों के साथ ,.... "

अब वो जेठानिया भी मान गयी ,

लेकिन असली वाला तुरुप का पत्ता नहीं खोला था छुटकी जब आठ में थी , -- कैटगरी , ४२ किलो वाली फ्री स्टाइल में , जिले में नहीं पूरे रीजन में , रीजनल रैली में सेकेण्ड आयी थी, फ्री स्टाइल में और तीन साल से अपने स्कूल की कबड्डी टीम में थी और उसका स्कूल भी रीजनल रैली में तीसरे नंबर पर था, उसकी पकड़ तो कोई छूट नहीं सकता , फिर साँस भी डेढ़ दो मिनट तो बहुत आसानी से,... स्टेट के लिए कोचिंग भी की थी दो महीना,... स्पोर्ट्स हॉस्टल में,..

तो अब बचीं मैं मंजू भाभी और तीन चार जेठानियाँ जो टीम में थीं और मैंने पूरी बात बताई।

कुसुमा या चमेलिया का नाम तो मैंने पहले ही बता दिया था, और उसके हाथों के जादू के सब कायल थे उसके बाद दूसरा नाम मैंने लिया रमजनिया, अरे वही जो चंदू देवर , जिसकी सहायता से मैं अपने उस ब्रम्हचारी देवर को फिर से चोदू बना पायी, और मेरे उस के कुछ गुन बखारने के पहले मंजू भाभी बोल पड़ीं ,





" सही बोल रही हो, का ननद का भौजाई का गाँव क कउनो लौंडा सब का एक एक बात का हाल उसको मालूम रहता है ,... ननदों के टीम के एक एक का नस वो पकड़ के बता सकती है , फिर तगड़ी भी बहुत है, दो चार लौंडियों को तो झटक के छुड़ा के,... "

तीसरा नाम मैंने जोड़ा नउनिया क छुटकी बहू , गुलबिया का,





हमसे सात आठ महीने पहले गवना करा के आयी थी, खूब गोरी सुंदर , देह कद काठी जबरदस्त,... लेकिन दो चार महीने बाद मरद पंजाब कमाने चला गया तब से मरद बिना छनछनाई रहती है , गरम तावा पे पानी की बूँद डालने पे जो हालत होती है वही, और आपन कुल जोर कुँवार ननदन पे उतारती है , होली में दस बार मरद को फोन किया, वो बोला भी,... फिर वही बहाना , छुट्टी नहीं मिली , रिजर्वेशन नहीं मिला,... गाडी छूट गयी,... गुस्से में बोलती,

हमको मालूम है उंहा किससे गाँड़ मरा रहे हैं , नहीं आओ तोहरी बहिनिया क चोद के,...

और बहिन उसकी कौन , कजरी , नैना की सहायक,...





होली में कजरी के पिछवाड़े मैंने जो जड़ तक ऊँगली पेली थी दस मिनट तक और निकाल के सीधे उसके मुंह में , गुलबिया खूब खुश हुयी ,... तो आज जब सब एक से एक कच्ची उमर वाली ननदें मिलेंगी तो फिर तो,... और जो काम करने वाली होती हैं रोज चक्की चलाती हैं , कुंवे से पानी निकालती हैं सर पे दो दो घड़ा , बगल में एक घड़ा लेकर चलती हैं , पूरी पिंडलियाँ , जांघें हाथ सब एकदम कसे कसे ,...

और चौथा नाम एक जेठानी ने बताया, और नाम बताते ही मैं समझ गयी, उमर में चमेलिया और गुलबिया से थोड़ी बड़ी,.. लेकिन एक बार रतजगे में वो दुल्हिन बनी थी,... और एक जो दूल्हा बनी थी उसके ऊपर चढ़ के उसी को चोद दिया बेचारी की माँ बहन सब एक कर दी,...

जेठानी ने जोड़ा चूत से चूत पे घिस्सा देने में उसका कोई मुकाबला नहीं , बड़ी से बड़ी उम्र में दूनी हो ताकत में ज्यादा हो तो बस एक बार चढ़ गयी किसी लड़की, के ऊपर तो बस उसका पानी निकाल के दम लेती है और एक साथ दो ,दो तीन तीन , एक को चूत से रगडेंगी, बाकी दो को दोनों हाथ से ,.. और उसके पल्ले कोई पड़ गयी न तो एक दो ऊँगली का तो मतलब ही नहीं, कुँवारी हो, झील्ली न फटी हो , तो भी सीधे तीन ऊँगली, और गरियायेगी भी

स्साले इतने तोहार भाई गाँव में है कउनो के ताकत नहीं लंड,... में,... तोहार झिल्ली अब तक बची है,

तो बस चार ये , और मेरी तीन जेठानियाँ जो मुझसे तीन चार साल ही बड़ी थीं, दो तो आयी ही थीं एक को मंजू भाभी ने बुलवा लिया और उन चारो को भी , चमेलिया , गुलबिया रामजानिया,... मंजू भाभी और उनकी उम्र वाली दो जेठानियाँ तो थीं बस पन्दरह बीस मिनट में हम भौजाइयों की ११ की टीम पूरी ,... हाँ हमने क्या प्लानिंग की कैसे तैयारी की ,.. ये सब बता दूंगी तो मैच का मजा ही खतम हो जाएगा,...

इसलिए चलिए कुछ देर तक छुटकी के साथ क्या हो रहा है ये देखते हैं फिर सीधे मैच में
 
छुटकी की कच्ची अमिया





मैं बोल तो नहीं सकती थी लेकिन देख तो सकती थी , छुटकी को , नहीं नहीं वो अपनी माँ बहिन की नाक नहीं कटा रही थी बल्कि और आगे,...दस हाथ,... और मेरी चचेरी सासें , गाँव के रिश्ते वाली सासें सब पगलाई थीं उन कच्ची अमिया को देख कर,...

और छुटकी की कच्ची अमिया थी भी ऐसी , बस आती हुयी लेकिन इत्ती छोटी भी नहीं , सूरज की धूप तरह मटर के बस आते कच्चे दूध भरे दानों के साइज के निपल, और रुई के फाहों ऐसे छोटे छोटे उभार,... कौन न पागल हो जाए, और ये मैंने अपनी ससुराल में ये देख लिया था की लड़कियां तो झांटे आने के पहले ही लंड की तलाश शुरू कर देती हैं पर औरतें भी , जैसी जैसी उमर बढ़ती जाती है , माँ के बाद दादी बनने की तैयारी शुरू हो जाती है ,बहुएं दामाद आ जाते हैं उस उमर में और गरमाने लगती हैं, ... और सिर्फ मर्दों के लिए नहीं बल्कि , अगर कोई छुटकी की उमर वाली मिल जाए तो उसके कच्चे टिकोरे कुतर कुतर के,..

और यही हो रहा था,

मेरी ख़ास चचिया सास उसपे चढ़ी उससे झांटो भरी बुर चुसवा रही थीं, लेकिन क्रेडिट मेरी छुटकी बहिनिया को बल्कि मिश्राइन भौजी, रीतू भौजी और बाकी भौजाइयों को, कि उन्होंने चुसवा चुसवा के छुटकी से अपनी बुर, भोंसड़ा एकदम पक्की चूत चटोरी बना दिया था , उसे मालूम था गाड़ी सीधे भरतपुर स्टेशन पर नहीं घुस जाती बल्कि थोड़ी देर आस पास के छोटे स्टेशनों पर , कभी सिग्नल पर,... तो बस कभी उसकी जीभ की टिप जांघों को तो कभी फांकों को तो कभी सीधे क्लिट पे और सास में मस्ता रही थीं,

दोनों कच्चे टिकोरे दो सास लोगों ने बाँट लिए थे,

लेकिन कुछ देर में मैं नीचे थी , मेरी सास ऊपर और उनकी कुप्पी से सीधे मेरे मुंह में घलघल ,... और ननदें चिढ़ा रही थीं , भौजी होली का परसाद , पहले सास फिर ननद, ...

और सास के बाद जो मेरी चचिया सास जिन्हे छुटकी ने चूस चाट के झाड़ा था , वो मेरे ऊपर और छुल छुल ,... मेरे होंठ खुले,...

छुटकी के ऊपर भी एक सास चढ़ी

लेकिन आज मुझे एक अपने देवर को ब्रम्हचारी से व्यभिचारी बनाना था , असली बहनचोद , तो सास से बोल के मैं सरक ली।

पर छुटकी की हालत और,...सारी गाँव भर की बुजुर्ग औरतें , जो मेरी सास लगतीं थी,... जैसे पहली बार ये उभरता जोबन मिला था, जैसे तोते पेड़ पर कच्ची अमिया कुतरते हैं , फिर चटवाने वालियां, घलघल, छुलछुल ,... कल वैसे ही मेरी सास और नैना ने मिल के उसे देह के हर अंग से निकलने वाले ' रस ' के बारे में समझाया था तो नमकीन खारा,

कम से कम दो घंटे तक,... लेकिन छुटकी खूब रस ले रही थी,... मेरे मायके में भौजियों ने अच्छी ट्रेनिंग दी थी, हलांकि नमकीन शरबत पहली बार,... और उसे बचाया कौन उसकी सबसे बड़ी,... रगड़ाई करने वाली,नैना ननदिया ,... ननदें भी इस कच्ची कली का मज़ा लेने के लिए बेचैन थी,... बड़ी मुश्किल से सास लोगो से , ...लेकिन जो कहते हैं आसमान से गिरे खजूर में अटकी वाली हालत

और नैना की उम्र की कुछ उससे भी कम कजरी , छुटकी की समौरिया,... लेकिन खूब रगड़ाई हुयी , और पहली बार गाँव की होली, कपडे जो बचे खुचे थे, वो दस पंदह मिनट में ननदों ने चिथड़े , चिथड़े कर के बाँट लिए, और फिर तो कीचड़, कीच,... और भी बहुत कुछ , रंग वंग का नंबर तो बहुत बाद में आता है ,असली चीज़ तो देह की होली थी , ऊँगली हथेली रगड़ाई,... लेकिन छुटकी बराबर की टक्कर दे रही थी , एक दो को तो उसने धकेल के , .. और वो भी अपनी कच्ची चुनमुनिया से दर्जनों लंड खाये ननदों की चूत को रगड़ रगड़ के उनके छक्के छुड़ा रही थी,...
 
सगे भैया के साथ,





रिश्तों में हसीन बदलाव

गीता ने तीन तिरबाचा भरा , एकदम से चुदवा लेगी उससे जिसे भाभी बताएंगी ,...

और भाभी ने हलके हलके गीता के उभार मसलते हुए उसकी चूँचिया रगड़ते चूम के , हंस के वो बोलीं ,

" अरे ननद रानी लड़का तो तेरे घर में ही है इतना मस्त जवान लौंडा , तेरी कसम जब खोलेगा न तो सात इंच से कम नहीं होगा , पक्का चोदू,... तेरा भाई,... घर में छोरा , अरे थोड़ा सा डोरे डाल, ऐसे आ रहे जोबन गाँव जवार में नहीं है , आ जाएगा तेरे चक्कर में ,... "

अब गीता , गज़ भर उछली,.... भाभी ये क्या , मजाक ठीक है ,... लेकिन सच में ,...वो मेरा भाई है सगा भाई,... उसके साथ '

भाभी ने अब कस के उसके गाल चूमे और बोलीं,

' बिन्नो , डोली पे चढ़ के चुदवाने जिस के घर जायेगी , सज धज के लौंड़ा खाने सुहाग सेज पर बैठेगी वो भी तो किसी का भाई होगा , और जिसे तेरा भाई लाएगा चोदने वो भी तो किसी की बहन होगी,..."





गीता सोच में पड़ गयी , ये बात तो भाभी की एकदम सही है , और जब भाभी को लगा चिड़िया बस दाने चुगने वाली है , उन्होंने प्यार दुलार से गीता की ठुड्डी पकड़ के, आँखों में आँखे डाल के कहा,

" सुन बिन्नो , भाई से खास कर सगे भाई से करवाने में तीन जबरदस्त फायदे हैं , तू कहे तो बताऊँ, जबरदस्ती नहीं है,... बुरा माने तो '

गीता हंस के बोली , बताइये न भाभी , बुरा क्यों मानूंगी ,... "





और भाभी ने गिनवाना शुरू कर दिया ,

' देख पहला फायदा ,जगह का,...

किसी और से मानले तूने टांका भिड़ा लिया , गाँव का , पड़ोस के स्कूल का लौंडा ,... मिलेगी कहाँ,... गन्ने का खेत , अरहर,... और वो भी बारहों महीने तो रहते नहीं , ... फिर कब कौन सा बहाना बना के जायेगी रोज रोज,... और तुम दोनों के पास टाइम ,...

घर में सगे भाई के साथ जगह ही जगह , टाइम ही टाइम,... घर में माँ नहीं है तो दोनों जब जाहे जब , माँ सो जाए तो पूरी रात तेरी ,... और घर में माँ हो तो बाहर खेत वेत में,... कोई साथ देखेगा तो बोलेगा भी नहीं ,... "





गीता ध्यान से सुन भी रही थी सोच भी रही थी,... भाभी बोल तो सही रही थीं,...

और भाभी ने देखा की तीर निशाने पर लग रहा है तो उन्होंने दूसरा फायदा भी बताना शुरू कर दिया,...

" देख दूसरा,

डर हर लड़की को रहता है बदनामी का , और तू तो एकदम ही भोली है सीधी बछिया,... नहीं गाँव में बदनामी की बात नहीं,...

वो लड़का बदनामी का डर दिखाके लड़की को बोलेगा , चल में इस दोस्त के नीचे लेट वरना ,... और दूसरा दोस्त तीसरे के साथ ,... फिर दो चार महीने में लड़की पता चला पंचायती हो गयी , गाँव का हर लौंडा उसे चोद चुका है , फिर वो खुद लौंड़ा ढूंढ़ती फिरेगी , और उसकी पूछ भी नहीं , बदनामी अलग ,"

गीता बहुत ध्यान से सुन रही थी और भाभी ने बिना रुके अगला फायदा गिनवा दिया,...

"देख एक तो जगह वगह ढूँढ़ने का चक्कर नहीं , दूसरे बदनामी का डर नहीं लेकिन सबसे बड़ा फायदा ,... लम्बे समय तक मज़ा ले सकती है , लौंडे तो कल वो पढ़ने कहीं बाहर चला गया , कहीं कमाने चला गया , कहीं महीने दो महीने बाद कोई और लौंडिया उसे फांस ली , या उसी का मन भर गया,... तो बस दूसरा खूंटा ढूंढो , घर का माल है , सगा भाई है तो कहाँ जाएगा , और जाएगा भी लौट के घर पे आएगा,..."





गीता सोचती रही फिर बोली,...

"भाभी आपकी सब बातें सोलहों आना सही , लेकिन अगर भैया मुझे उस नजर से न देखते हों ,मतलब उन्हें मुझमे लड़की नहीं छोटी बहन नजर आती हूँ ,..."





भाभी मुस्करायीं समझ गयीं ननद फिसल रही है लेकिन उन्होंने बजाय जवाब देने के कुछ और बोला,

" जानती है तेरे भाई में वो बात है ,... मेरी नजर मर्दों के मामले में कभी गलत नहीं होती , उसका खूंटा खूब लंबा मोटा होगा ये तो मैं बता ही चुकी हूँ ,... लेकिन असली खेल है , ... वो लम्बी रेस का घोडा होगा , पक्का , दो चार बार झाड़ के ही झड़ेगा, बिन्नो ऐसे यार बड़ी मुश्किल से मिलते हैं छोड़ मत। "

अब गीता झुंझला उठी,...

" भाभी आपकी सब बात मैंने मान ली , मैं तैयार भी हो गयी , मान लीजिये लेकिन वो मुझे उस नजर से मतलब जैसे और लड़के देखते हैं ,...

भाभी ने हँसते हुए गीता को अँकवार में भर लिया और बोली , मैं काहें को हूँ।फिर प्यार से अपने ननद को चूमके बोलीं ,

' अरी पगली , तू यही कहना चाहती है न की तुम दोनों के रिश्तों में हसीन बदलाव कैसे आएगा , तो मैं बताती हूँ , असली चीज है लौंडो के लिए ये दोनों ,... "

कुर्ती के ऊपर से गीता के उभार सहलाते वो बोलीं, फिर समझाया,... ' देख पहले तो अपने इस रिश्ते को हसीन रिश्ते में बदल , जब अपने भैया को देख , उस में अपना यार देख , जो तुझे चूम रहा है तेरे चूजों को मसल रहा है , तेरी टांग उठा के ,... और अपनी निगाह बस उसके खूंटे की ओर , मज़ा तो तुझे वही देगा ,... बस रिश्तों में हसीन बदलाव शुरू हो जाएगा,... "





" अरे मेरी मीठी मीठी भाभी , वो तो मैं आज ही से शुरू कर दूंगी,... आपकी ननद हूँ , लेकिन वो मेरा भाई, वो रिश्तों में हसीन बदलाव,... कैसे उसे मेरा चस्का लगेगा,... "

" बताती हूँ , यार बात तेरी सही है थोड़ा ज्यादा ही सीधा है स्साला देवर मेरा , बस तू दुपट्टा उसके सामने ही हटाना , उसके पहले गले से चिपका के दोनों उभार उसे दिखाते हुए पूछना , बोलो भैया ऐसे मैं कैसी लगती हूँ , फिर उससे चिपक के बैठ और दुप्पटा जान बूझ के फर्श पे गिरा दे , कभी उसके कंधे पर हाथ रख कभी जांघ पे , बस दो चीज नोटिस करना की तुझसे नजरें चुरा रहा है की नहीं ,

दूसरे उसके तम्बू में बम्बू खड़ा हुआ की नहीं,.. फिर देखना की चोरी चोरी वो तेरे उभारों को देखना शुरू कर देगा , जब तू उसकी ओर नजर करेगी तो नजर चुरा लेगा। "





और गीता ने वही किया और रिश्तों में हसीन बदलाव शुरू हो गया,... और वो भी हो गया, जो दोनों भाई बहन चाहते थे।

लेकिन पहल गीता को ही करनी पड़ी, पहले तो भाभी ने जो टेस्ट बताया था, दुपट्टा गिराना उठाना, सम्हालना , गले से चिपकाना,... जवान होने से पहले ही लड़कियां सीख लेती हैं , दुपट्टा जवानी को छिपाने का नहीं, लड़कों को ललचाने का हथियार है, नयी नई उभर रही जवानी का साइनबोर्ड , ... कुछ तो है उसके पीछे जिसका पर्दा है,





और अगर कोई लड़का ज्यादा ही शर्मीला हो तो ऊँगली में दुप्पटे को फंसा के घुमाना, कभी दांतो के बीच दबा लेना तो कभी खिलखिला के हँसते हुए दुपट्टे से मुंह छिपा लेना,...

और भाभी ने जो पहचान बताई थी, रिश्तों में हसीन बदलाव को आजमाने की सौ फीसदी सही उतरी,... नजरें छुपाना चुराना , और गीता ने एकदम गले से चिपका के जब दुपट्टा किया , उसके उड़ने को तैयार कबूतर एकदम चोंचे उठाये,... बेचारे की हालत खराब,...





लेकिन जैसे ही गीता ने बड़े अंदाज से उसपर से नजरें हटायीं , चोरी पकड़ी गयी , एक टक निगाह भाई की उन्हों दोनों चूजों पे, ... ललचाता लिबराता,... लड़कियों की तो एड़ी में आँखे होती हैं , और लड़कों की निगाह पहचानना लड़कियां अपने आप सीख जाती हैं,... और गीता ने अपने भाई की निगाह पहचान ली,...

और आखिरी टेस्ट जो भाभी ने बताया था वो भी पूरा हो गया,.... घर में वो बारमूडा पहन के टहलता था, तम्बू में बम्बू , ... एकदम खड़ा तना, ...और साइज भी क्या,... जबरदस्त मान गयी गीता भाभी को भी अपने भैया को भी,...

और उसे चिढ़ाने का मौक़ा मिल गया , बारमूडा को अपने हाथ से सहलाते बोली,

"भैया तेरा तो ये बहुत अच्छा है, बरमूडा, देख एक दिन मैं ले लूंगी इसे,... मेरे ऊपर बहुत अच्छा लगेगा।"





बेचारे की हालत खराब,... किसी तरह थूक घोंटते बोला,.... " लड़कियां नहीं पहनती,... मैं नहीं दूंगा,... "

" बुद्धू' गीता एकदम चिपक गयी थी , वो झुकी और दुपट्टा फर्श पर गिर पड़ा या उसने गिरा दिया पर उठाने की कोशिश नहीं की , और उसके गाल पे हलकी सी चिकोटी काट के बोली ,

" तू भी न भैया,... जो चीज पसंद आये , अच्छी लगे मांग लेनी चाहिए , बल्कि घर की चीज को मांगने की भी क्या जरूरत,... बस सीधे ले लेनी चाहिए,... "

अब उस बेचारे की हालत खराब, नीचे तूफ़ान आ रहा था बड़ी मुश्किल से इस डबल मीनिंग दावतनामे का जवाब देने की कोशिश करता वो बोला,....

" और तू न दे तो,... "

वो जोर से खिलखिलाई, फिर अपने भाई का हाथ खींच सीधे अपने सीने पर रखती बोली,...

" तू भी न , मेरे दिल की आवाज सुनो न ,... आज तक मैंने तुझे कोई चीज मना की है , बचपन से , तो बड़ी हो गयी हूँ तो क्या हुआ , फिर मेरे मना करने पर कौन तू मानता था, तो अभी भी , पहले की तरह जबरदस्ती ले लो,... मैं थोड़ा हाथ पैर पटकूँगी , .... बस। "

जितना वो हाथ छुड़ाने की कोशिश करता,... उतना ही उसे वो और अपने उभारों पे खुल के दबाती,... लेकिन किसी तरह से वो छुडाके,... पर रिश्तों में हसीन बदलाव शुरू हो गया , गीता ने नोटिस किया अब तो उसे एक लड़की की तरह ही देखता था , जैसे कोई भी लड़का बात लड़की से करेगा , लेकिन निगाहें जुबना की नाप जोख करती रहेंगी,... और गीता भी,...
 
बहना ने डोरे डाले





अब उस बेचारे की हालत खराब, नीचे तूफ़ान आ रहा था बड़ी मुश्किल से इस डबल मीनिंग दावतनामे का जवाब देने की कोशिश करता वो बोला,....

" और तू न दे तो,... "

वो जोर से खिलखिलाई, फिर अपने भाई का हाथ खींच सीधे अपने सीने पर रखती बोली,...

" तू भी न , मेरे दिल की आवाज सुनो न ,... आज तक मैंने तुझे कोई चीज मना की है , बचपन से , तो बड़ी हो गयी हूँ तो क्या हुआ , फिर मेरे मना करने पर कौन तू मानता था, तो अभी भी , पहले की तरह जबरदस्ती ले लो,... मैं थोड़ा हाथ पैर पटकूँगी , .... बस। "

जितना वो हाथ छुड़ाने की कोशिश करता,... उतना ही उसे वो और अपने उभारों पे खुल के दबाती,... लेकिन किसी तरह से वो छुडाके,... पर रिश्तों में हसीन बदलाव शुरू हो गया , गीता ने नोटिस किया अब तो उसे एक लड़की की तरह ही देखता था , जैसे कोई भी लड़का बात लड़की से करेगा , लेकिन निगाहें जुबना की नाप जोख करती रहेंगी,... और गीता भी,...दुपट्टा उसका गले से चिपका ही रहता और भैया के सामने अपने एक हाथ से जानबूझ के ठीक जुबना के नीचे, उभरते उभारों को और उभार के,... और बेचारे भैया की खराब होती हालत, तम्बू में तने बम्बू को देख देख के उसे लगता, भाभी ने ठीक समझाया था





और मामला आगे दिन ही और आगे बढ़ गया,..

दोनों भाई बहन के कमरे तो अलग थे लेकिन बाथरूम एक ही था और बचपन से झगड़ा होता था, ... कौन पहले जाएगा , कौन कित्ती देर से ,.. ' माँ भैया निकल नहीं रहे है , मुझे स्कूल की देर हो जायेगी,... कल से पहले मैं ही जाउंगी,... "

और उस दिन भी गीता ही पहले बाथरूम गयी,... लेकिन अचानक उसकी आँखों ने नोटिस किया , बाथरूम के दरवाजे में, छेद, बहुत छोटा सा , नया और जब उसने दरवाजा अंदर से बंद किया तो एक हलकी सी रौशनी बाहर से आती,... वो मुस्करायी, सोच रही थी जो वो सोच रही है वही सही हो,... और थोड़ी देर में वही हुआ ,

छेद में से रौशनी आनी बंद हो गयी , कोई था बाहर से,...

बस गीता की आँखे चमक उठीं , ...वो साबुन लगा चुकी थी लेकिन फिर से दुबारा , खूब ढेर सारा झाग बना के सीधे अपने दोनों उभारों पे , और एक दम छेद के सामने,...

गीता को बाथरूम में गाना गाने की आदत शुरू से थी और उस को ले के भी दोनों में झगड़ा होता था,...

और साबुन लगाते , बल्कि वो अपने उभारों को ऐसे मसल रही थी जैसे कोई लड़का रगड़े, कभी नीचे से पकड़ के उभारती, कभी छोटे छोटे निप्स को अंगूठे और तर्जनी के बीच में रोल करती, अपने आप ही वो गाने लगी दादा फिल्म का गाना,





हमने माना हमपे साजन जोबनवा भरपूर है,...

हमने माना हमपे साजन जोबनवा भरपूर है,...

ये तो महिमा राम की , एमा हमारा का कसूर है,...

ये तो महिमा राम की , एमा हमारा का कसूर है,...

साल सोलहवां लगा हमरा ये तो हम भी जानत हैं

हमरी बगिया फुलवा महके ये तो हम भी मानत हैं।

साल सोलहवां वाली लाइन उसने तीन चार बार गायी,

और बहुत प्यार दुलार के साथ अपने नए आये उभारों को सहलाया,...





जब वो बाहर निकली तो उसके भैया की हालत खराब , निगाहें झुकाये , दोनों पैरों को दबा के ' उसे ' छुपाने की बेकार कोशिश करता,... बड़ी मुश्किल से गीता ने अपनी मुस्कान रोकी,... उसे देख के वो एक बार फिर से गुनगुनाने लगी,

जिया बेकरार है , छायी बहार है

आजा मेरे बालमा तेरा इंतजार है ,...

जितना वो उससे आँखें मिलाने को कोशिश करती, उतना वो आँखे चुराता,... और झट से वो बाथरूम में घुस गया, पर गीता ने आवाज लगा के रोक लिया,.. और चिढ़ाते हुए आंख नचा के बोली,...

" अरे भैया इत्ती जल्दी काहें है , टॉवेल तो यहीं छोड़ के जा रहे हो फिर बाथरूम से आवाज लगाओगे , गीता टॉवेल , टॉवेल , जल्दी,... " और ये कह के टॉवेल उस की ओर उछाल दी,...

पर अब वो भी थोड़ा हिम्मती हो रहा था , टॉवेल कैच करते हुए अबकी सीधे अपनी छोटी बहन के सीना ताने उभारों की ओर देखते हुए बोला,...

" अच्छा मैं मांगूंगा तो देगी नहीं तू,.. '

" एकदम नहीं ,... " गीता उसे और उकसाते बोली,

" ऐसे थोड़ी , थोड़ी देर तड़पाऊंगी , तीन बार बुलवाउंगी, फिर दे दूंगी , आखिर अपने प्यारे मीठे से भैया को नहीं दूंगी तो किसको दूंगी,... लेकिन ये तुमने मांगना कब से,... मंगते कहीं के और घर में कोई मांगता थोड़े ही है , बस कोई चीज अच्छी लगे , मन करे तो बस ले लेना, बिन मांगे लोगे तो मैं एकदम मना नहीं करुँगी "





ये कह के एक बार फिर गीता उससे सट गयी,... उसके गालों पर एक चिकोटी काटी , अपने उभारों से धक्का देते बोली,...

" अच्छा जाओ जल्दी नहाओ वरना मुझे ही बोलोगे,... "

और बाथरूम का दरवाजा बंद हो गया, गीता बाहर कपडे बदलते हुए एक बार फिर से सोच रही थी भाभी की बातों के बारे में,...

" बात उनकी एकदम सही है , आज के जमाने कौन लड़की शादी होने तक इन्तजार करती है, फिर आज कल शादी की उमर भी तो बढ़ती रहती है,... और कहि किसी इधर उधर के लौंडे से करवाने से तो भैया के साथ कौन बुरा है ,... और बेचारा कितना तड़प रहा है ,... इसके लिए ,... '

अपनी सहेली को सहलाते वो सोच रही थी फिर ब्रा पहनते हुए मुस्कारने लगी,

" भैया बेचारे ज़रा सा इसको देखने के लिए इत्ती जुगत लगाई , अरे मुझसे कहते मैं खोल के दिखा देती, मन तो करता है उनका खूब करता है लेकिन बस हिम्मत नहीं पड़ती यार स्साली गीता तुझे ही कुछ करना पडेगा , वरना तू भी तड़पती रहेगी , तेरा भाई भी,... "





कपडे पहन के वो अपना बिस्तर ठीक कर रही थी की उसकी निगाह भाई के मोबाइल पर पड़ गयी , उसकी बांछे खिल गयीं, भैया उसे छूने नहीं देते थे , स्मार्ट है तेरे समझ में नहीं आएगा,... हरदम छुपा के,... आज मिला है मौका ,...और खुद जब देखो तब उसी में घुसे रहते हैं, आज मिल गया है मौका , और झट से उसने मोबाइल हाथ में लिया लेकिन

अगले पल फिर उसका चेहरा मुरझा गया,...

भैया न , पता नहीं क्या क्या पासवर्ड , एक दो बार उसके कमरे में घुस के लेकिन खुला ही नहीं,...
 
भैया का मोबाइल





उसकी निगाह भाई के मोबाइल पर पड़ गयी , उसकी बांछे खिल गयीं, भैया उसे छूने नहीं देते थे , स्मार्ट है तेरे समझ में नहीं आएगा,... हरदम छुपा के,... आज मिला है मौका ,...और खुद जब देखो तब उसी में घुसे रहते हैं, आज मिल गया है मौका , और झट से उसने मोबाइल हाथ में लिया लेकिन

अगले पल फिर उसका चेहरा मुरझा गया,...भैया न , पता नहीं क्या क्या पासवर्ड , एक दो बार उसके कमरे में घुस के लेकिन खुला ही नहीं,...

पर आज वो पहले से खुला था , भैया लगता है कुछ देख रहे थे और वो कोई फिल्म,... लगता है उसके बाथरूम से निकलने की आवाज सुन के भैया ने जल्दी से तकिये के नीचे छिपा दिया होगा,...

और वो फिल्म देख के, गीता की साँसें तेज चलने लगी , दिल धड़कने लगा, एक हाथ उसका अपनी छाती पर , निपल्स पहले ही कड़क हो रहे थे , जाँघों के बीच में गीलापन, लसलसा सा , खुद ही वो अपनी जांघ से जाँघे रगड़ रही थी,

एक लड़की उसकी उमर की ही होगी, एक लड़के का ' वो ' खूब मोटा सा, अपने हाथ में , फिर गीता की आँखे फ़ैल गयीं , मुंह में ले के कैसे कैसे चूस रही थी , लेकिन बीच बीच लड़के का चेहरा भी दिख रहा था खूब खुश लग रहा था जैसे लड़की के चूसने से उसे खूब मजा आ रहा था

गीता को उस लड़के की जगह अपना भाई नजर आ रहा था , ... और सोच रही थी , भैया को अच्छा लगे तो वो भी मुंह में ले लेगी।





और थोड़ी ही देर में जो गीता अपने भैया को अब जब भी देखती थी सोचती थी वही ,...

वो लड़की पलंग पर लेटी दोनों टाँगे उठी , और उसका भाई ,.. नहीं वो लड़का टांगों के बीच में कित्ते जोर जोर से ,... और उसे लगा लड़की रोयेगी , पर वो तो मारे ख़ुशी के उसे अपनी ओर खींच रही थी , खुद नीचे से अपना ,..अपना चूतड़ उचका रही थी ,...





गीता देख फिल्म रही थी पर सोच अपने भाई के बारे में रही थी कितना मज़ा आये अगर भैया भी उसके साथ इसी तरह करें ,... वो कभी भी मना नहीं करेगी ,... इस लड़की को कित्ता मजा आ रहा है,...

फिर पोज बदल के , गोद में बिठा के , वो लड़की खुद ही उछल उछल के ,...





और वो लड़की बिस्तर पे लड़का पलंग के नीचे खड़ा,...

गीता की ऊँगली शलवार के अंदर अब सहेली के पास फांको को दबाती मसलती ,...





एक के बाद दूसरी फिल्म ,... फिर उसने जल्दी जल्दी बढ़ा के देखा और क्या है ,..पिक्चर फोल्डर खोला तो पहली ही पिक

उसकी अपनी,... कल जो भैया को तंग कर रही थी उकसा रही , थी रिश्तों में हसीन बदलाव के लिए बस वही सूट ,... दो चार पिक्स ,...





गीता जोर से मुस्करायी , सगी बहन को गर्ल फ्रेंड बनाना चाहते है और डरते भी हैं,..

लेकिन तभी बाथरूम से दरवाजा खुलने की आवाज आयी और झट से पहले तो गीता ने सारे फ़ोल्डर्स बंद किये फिर मोबाइल स्विच आफ किया तब तक वो निकल आये थे और उन्होंने गीता के हाथ में मोबाइल देख लिया,... और आग बबूला , लेकिन गीता समझ रही थी कित्ता गुस्सा है कित्ता मस्ती

" तुझे बोला था न की तेरे हाथ में ये मोबाइल देख लूंगा तो बहुत मारूंगा तुझे। "

बस गीता को मौका मिल गया, वो पिक्चरें देख के बहुत गरमा रही थी सहेली अभी भी गीली थी , उभार एकदम पत्थर, निप्स कंचे की तरह कुर्ती को फाड़ रहे थे,..





झप्प से बिस्तर उतर कर अपने भैया के पास और उसे कस के दबोच लिया और चिढ़ाते बोली,...

" तो मार लो न, डरती हूँ क्या किसी से,... खाली कहते रहते हो मारते तो हो नहीं , ले लिया मैंने तेरा,... '

उसकी गरम देह का असर तो होना ही था और उसके भाई ने भी अब कस के उसे दबोच लिया , बस गीता ने अपने कड़े कड़े उरोज उसके सीने में गड़ाने शुरू कर दिए , गाल भैया के गालों से रगड़ रहे थे,... बड़ी मुश्किल से उसका भाई बोल पाया,...

" तू डरती नहीं है "

" ना एकदम नहीं , किससे डरूंगी तुझसे , ... " कस के अपनी बाँहों से उसे भींचती मुस्कराती बोली,...

और अब उसका भाई भी अपनी देह उसकी देह से रगड़ रहा था , खूंटा खड़ा तना, ...

" मैं बड़ी जोर जोर से मारता हूँ "

" मैं भी बड़ी हो गयी हूँ ,... भैया लगता है तुझे पता नहीं '

एक बार फिर खुल के अपने उभार उसके सीने में दबाती वो बोली,... फिर हलके से उसके कान में बोली ,

" मैं, मैं ,...मैं मरवा लूंगी। "





अब रिश्तों में बदलाव आलमोस्ट पूरा हो गया था वो अपना खूंटा उसकी जाँघों के बीच गड़ा रहा था एक हाथ से छोटे छोटे अपनी सगी बहन के नितम्बों को दबा रहा था मसल रहा था, बहन सिसक रही थी, पिघल रही थी,...

" मैं कुछ भी करूँ,... "

बड़ी मुश्किल से उसके भाई के बोल फूटे , उसके समझ में नहीं आ रहा था अपनी बहन से साफ़ साफ़ मन की बात कैसे कहे,...लेकिन उसके मन की बात उसकी बहन ने खुद ही बोल दी वो भी एकदम साफ़ साफ़, उसके बाद कुछ बचा नहीं था।

" कुछ भी , ...और कुछ भी का मतलब कुछ भी करो,... मैं करवा लूंगी,... सच्ची सच्ची , मेरी कसम , तेरी कसम, माँ कसम। '

और कुछ देर तक दोनों , फिर उसका भाई बोला,...

" नहीं यार तुझे नहीं मालूम , बहुत दर्द होगा तुझे तू नहीं करवा पाएगी,... "

अब वो गुस्सा हो गयी , खींच के भाई का हाथ सीधे उसने अपने जोबन पर रख के खुल के कस के दबाया, और समझाते बोली,

" भैया, तुम खुद देख लो , मैं सच में बड़ी होगयी हूँ , मेरी दिल की बात सुनो,... और मुझे सब मालूम है , सब,..दर्द, खून खच्चर,... बस भैया,... '

" माँ से तो नहीं बोलेगी " अब प्यार से गाल सहलाते हुए उसके भाई ने पूछा,..

" भाई बहन की बात में माँ का क्या काम नहीं बोलूंगी , किसी से नहीं बोलूंगी , .. पक्का , तेरी कसम,... " उसके कान में जीभ से सुरसुरी करते गीता बोली,...लेकिन तबतक माँ की पुकार आ गयी और गीता उनके पास , लेकिन चलने के पहले अपनी ब्रा में छिपाए मोबाइल को अपने भाई को दूर से कैच करा के मुंह चिढ़ाते निकल गयी. गीता के दिमाग में रात भर वो फ़िल्में घूम रही थीं और उस लड़की की जगह वो और लड़के की जगह उसका भाई,... तीन साल ही तो बड़ा था,.. , लेकिन देह उसकी,... बस हाँ एक शरारत उसने की , बाथरूम तो उसी के कमरे से था , उसका छेद गोला प्रकार ले कर उसने थोड़ा और बड़ा कर दिया,...

अगले दिन वो नहाने गयी तो बस इन्तजार कर रही थी , छेद में आँख, आँख , कब आएगी ,...
 




सिमटता है अंधेरा पाँव फैलाती है दीवाली

हँसाए जाती है रजनी हँसे जाती है दीवाली

क़तारें देखता हूँ चलते-फिरते माह-पारों की

घटाएँ आँचलों की और बरखा है सितारों की

वो काले काले गेसू सुर्ख़ होंट और फूल से आरिज़

नगर में हर तरफ़ परियाँ टहलती हैं बहारों की

निगाहों का मुक़द्दर आ के चमकाती है दीवाली

पहन कर दीप-माला नाज़ फ़रमाती है दीवाली

उजाले का ज़माना है उजाले की जवानी है

ये हँसती जगमगाती रात सब रातों की रानी है

वही दुनिया है लेकिन हुस्न देखो आज दुनिया का

है जब तक रात बाक़ी कह नहीं सकते कि फ़ानी है

वो जीवन आज की रात आ के बरसाती है दीवाली
 
Page 136

किस्सा इन्सेस्ट यानी भैया के बहिनिया पर चढ़ने का

उर्फ़ गीता और उसके भैया का

My first attempt of writing incest, please do read, like and share your views
 
पूर्वाभास - पृष्ठ १ और २

भाग १ -पृष्ठ ५

भाग २ पृष्ठ ८

भाग ३ पृष्ठ १३

भाग ४, पृष्ठ १९

भाग ५ - पृष्ठ २२

भाग ६ --पृष्ठ २९ -३०

भाग ७ पृष्ठ ३५

भाग ८ पृष्ठ ४०

भाग ९ -पृष्ठ ४६

भाग १० --पृष्ठ ५०

भाग ११ - पृष्ठ ५३

भाग १२ - पृष्ठ ५८

भाग १३ -पृष्ठ ६२

भाग १४ पृष्ठ ६६

भाग १५ पृष्ठ ७२

भाग १६ -पृष्ठ ७६

भाग १७ -पृष्ठ ८१

भाग १८ - पृष्ठ ८७

भाग १९ - पृष्ठ ९१

भाग २० -पृष्ठ ९३

भाग २१ - पृष्ठ ९९

भाग २२ पृष्ठ १०३

भाग २३ पृष्ठ १०९

भाग २४ पृष्ठ ११३

भाग २५ पृष्ठ १२१

भाग २६ पृष्ठ १२७

भाग २७ पृष्ठ १३२

भाग २८ पृष्ठ १३६ -इन्सेस्ट की शुरुआत

भाग २९ -इन्सेस्ट का किस्सा -पृष्ठ १४५
 
भाग २९ -इन्सेस्ट का किस्सा -

तड़पाओगे, तड़पा लो,... हम तड़प तड़प के भी
 
भाग २९ -इन्सेस्ट का किस्सा

तड़पाओगे, तड़पा लो,... हम तड़प तड़प के भी





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" तो मार लो न, डरती हूँ क्या किसी से,... खाली कहते रहते हो मारते तो हो नहीं , ले लिया मैंने तेरा,... '

उसकी गरम देह का असर तो होना ही था और उसके भाई ने भी अब कस के उसे दबोच लिया , बस गीता ने अपने कड़े कड़े उरोज उसके सीने में गड़ाने शुरू कर दिए , गाल भैया के गालों से रगड़ रहे थे,... बड़ी मुश्किल से उसका भाई बोल पाया,...

" तू डरती नहीं है "

" ना एकदम नहीं , किससे डरूंगी तुझसे , ... "

कस के अपनी बाँहों से उसे भींचती मुस्कराती बोली,...

और अब उसका भाई भी अपनी देह उसकी देह से रगड़ रहा था , खूंटा खड़ा तना, ...

" मैं बड़ी जोर जोर से मारता हूँ "

" मैं भी बड़ी हो गयी हूँ ,... भैया लगता है तुझे पता नहीं '

एक बार फिर खुल के अपने उभार उसके सीने में दबाती वो बोली,... फिर हलके से उसके कान में बोली ,

" मैं, मैं ,...मैं मरवा लूंगी। "





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अब रिश्तों में बदलाव आलमोस्ट पूरा हो गया था वो अपना खूंटा उसकी जाँघों के बीच गड़ा रहा था एक हाथ से छोटे छोटे अपनी सगी बहन के नितम्बों को दबा रहा था मसल रहा था, बहन सिसक रही थी, पिघल रही थी,...

" मैं कुछ भी करूँ,... "

बड़ी मुश्किल से उसके भाई के बोल फूटे , उसके समझ में नहीं आ रहा था अपनी बहन से साफ़ साफ़ मन की बात कैसे कहे,...

" कुछ भी , ...और कुछ भी का मतलब कुछ भी करो,... मैं करवा लूंगी,... सच्ची सच्ची , मेरी कसम , तेरी कसम, माँ कसम। '

और कुछ देर तक दोनों , फिर उसका भाई बोला,...

" नहीं यार तुझे नहीं मालूम , बहुत दर्द होगा तुझे तू नहीं करवा पाएगी,... "

अब वो गुस्सा हो गयी , खींच के भाई का हाथ सीधे उसने अपने जोबन पर रख के खुल के कस के दबाया, और समझाते बोली,

" भैया, तुम खुद देख लो , मैं सच में बड़ी होगयी हूँ , मेरी दिल की बात सुनो,... और मुझे सब मालूम है , सब,..दर्द, खून खच्चर,... बस भैया,... '





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" माँ से तो नहीं बोलेगी " अब प्यार से गाल सहलाते हुए उसके भाई ने पूछा,..

" भाई बहन की बात में माँ का क्या काम नहीं बोलूंगी , किसी से नहीं बोलूंगी , .. पक्का , तेरी कसम,... "

उसके कान में जीभ से सुरसुरी करते गीता बोली,...





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लेकिन तबतक माँ की पुकार आ गयी और गीता उनके पास , लेकिन चलने के पहले अपनी ब्रा में छिपाए मोबाइल को अपने भाई को दूर से कैच करा के मुंह चिढ़ाते निकल गयी. गीता के दिमाग में रात भर वो फ़िल्में घूम रही थीं और उस लड़की की जगह वो और लड़के की जगह उसका भाई,... तीन साल ही तो बड़ा था,.. , लेकिन देह उसकी,... बस हाँ एक शरारत उसने की ,

बाथरूम तो उसी के कमरे से था , उसका छेद गोला प्रकार ले कर उसने थोड़ा और बड़ा कर दिया,...

अगले दिन वो नहाने गयी तो बस इन्तजार कर रही थी , छेद में आँख, आँख , कब आएगी ,...

और आज गीता पूरी तैयारी से थी , एक सहेली से वो वीट झटक के लायी थी, झांटे तो उसकी बहुत छोटी छोटी थीं कुछ ही दिन पहले आनी शुरू हुयी थीं , और वो खूब गोरी थी तो उसकी झांटे भी सुनहली रेशमी एकदम केसर,...

और वो झांटे ऐसे साफ़ कर रही थी की छेद से एकदम साफ़ साफ़ दिखे,...





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फिर चिक्कन मुक्कन करके अपनी सहेली को हथेली से खूब जोर जोर से मसल रही थी , सिसक रही थी , एक हाथ उभारो पर,...

वो समझ रही थी उसके भैया की क्या हालत हो रही होगी,... हो रही हो तो हो , ..उसने तो साफ़ साफ़ सिग्नल दे दिया , बस एक चीज बची थी जो उसकी सहेली उससे बार बार कहती,

" यार ऐसा भैया मेरा होता न तो वो स्साला अगर कुछ नहीं करता तो मैं ही उस स्साले को पटक के चोद देती , आखिर बनाने वाले ने लंड बनाया है क्यों बनाया है , चोदने के लिए न और घर में एक कन्या कुँवारी बैठी है ऊँगली से काम चला रही है। "

दोनों फांकों को फैला के अपनी तर्जनी में खूब थूक लगा के डालने की उसने कोशिश की , एक पोर भी न जा पाया,...

भले उसकी कोई सगी भाभी नहीं थी लेकिन सहेलियों की भाभियों ने उसे अपनी 'सहेली ' की, जाँघों के बीच वाली चूत कुमारी की सेवा करना अच्छी तरह सिखा दिया था. ऊँगली तो नहीं घुस पाती थी, कई भाभियाँ फेल हो चुकी थीं, और अब ये काम उसने अपने सगे भाई के ऊपर छोड़ दिया था, पर कैसे तर्जनी और दूसरी ऊँगली से दोनों फांकों को एक दूसरे से रगड़ा जाए, कैसे मंझली सबसे लम्बी ऊँगली को दरार में डाल के रगड़ा जाय, कभी कभी पूरी हथेली से हलके हलके, और अंगूठे से क्लिट को,





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गीता अपने हाथों से अपनी कसी कुँवारी चूत रगड़ रही थी और जान बूझ के इस तरह खड़ी थी की उसका भाई जो छेद से आँख गड़ा के देख रहा था, उसे उसकी कोरी बिन चुदी गुलाबो साफ़ साफ दिखे।

उसके स्कूल के टॉप के अंदर से झांकते जुबना को देखते तो उसका एकदम टनटना के खड़ा हो जाता है , स्साला अब मेरी फुद्दी देखेगा, बिना बालों वाली एकदम चिकनी, दोनों गुलाबी गुलाबी फांके, एकदम सहेलियों की तरह चिपकी,... तो क्या हालत होगी, उसकी , उसके खूंटे की,...

होनी है तो हो , वो सोच रही थी, थोड़ी देर पहले उसने कित्ता साफ़ साफ़ इशारा दे दिया था उसे,

" कुछ भी , ...और कुछ भी का मतलब कुछ भी करो,... मैं करवा लूंगी,... सच्ची सच्ची , मेरी कसम , तेरी कसम, माँ कसम। '

यहाँ तक बोली थी वो,

" भैया, तुम खुद देख लो , मैं सच में बड़ी होगयी हूँ , मेरी दिल की बात सुनो,... और मुझे सब मालूम है , सब,..दर्द, खून खच्चर,... बस भैया,... '

लेकिन बेचारा उसका भाई, हालत तो सच में उसकी ख़राब है, जिस तरह उसका खूंटा खड़ा होता है उसे देख के, और ये जो छेद किया है उसने उसको देखने के लिए, मन तो उसका भी मचल रहा है चढ़ने के लिए, तो चढ़ जाए न वो कौन रोक रही है।

और अब वो दोनों हाथों में साबुन ले ले के अपने जोबन पे लगा रही थी और सीधे छेद के सामने





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और आज जब नहा के निकली तो भाई की हालत उस दिन से भी ज्यादा खराब ,... वो झट से बाथरूम में घुस गया और मोबाइल आज उसका जैसे उसने जानबूझ के पलंग पे,...

गीता थोड़ी देर तक फ़िल्में देखती रही , एकदम गरम हो गयी , हर बार लड़कियां ही कभी खुद पहल कर के खूंटा पकड़तीं कभी खुद मुंह में ले लेती तो एक बार तो सच में एक लड़के पर चढ़ के चोद रही थी और वो लौंडा भी , ...खूब लम्बा मोटा लंड , ...





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लेकिन तब तक तक बाथरूम में पानी की आवाज बंद हो गयी, गीता से नहीं रहा गया ,

और जब उसने उस छेद के अंदर झाँक के देखा उसकी रूह फ़ना ,

भाभी ने अबतक जो जो बताया था सब सही निकला ,

लेकिन अबकी उनकी बात एकदम गलत हुयी

उसके भैया का कत्तई सात इंच का नहीं था,... उससे बहुत बड़ा , गीता के तो बित्ते के बराबर,... एकदम फनफनाया मुंह उसका खुला जैसे कोबरा नाग,...





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जो फिल्म वो देख रही थी न उन सबों से किसी से उसके भइया का उन्नीस नहीं था, गीता का हाथ पाने आप शलवार में घुस गया और वो रगड़ने लगी,...

और मोटा कितना था , गीता की सांस रुक गयी , उसके भैया का ,... बड़ी मुश्किल से तो उनकी मुट्ठी में ,... बस उसके दिमाग में यही बात घुसेगा कैसे अभी तो ऊँगली भी नहीं,...

लेकिन तब तक उसे मुट्ठ मारते अपने भैया की बुदबुदाने की आवाज आयी,

" गीता दे दे न, यार बहुत मन कर रहा है , आराम से लूंगा तेरी, ओह्ह कित्ता मजा आएगा तेरी लेने में, प्लीज गीता बस एक बार अपनी कोरी मटकी का रस ले लेने दे, एक बार मिल जाए न मेरी बहना ऐसा पेलूँगा, ऐसा पेलूँगा,... "

" ओह्ह तो पेलता क्यों नहीं, भैया, कैसे भाई हो बहन की चूत में आग लगी है और इत्ता मोटा लम्बा लेके और, ... बहन पियासी बैठी है , सच में भइया एकदम मना नहीं करुँगी, मैं तो खुद अपनी टाँगे फैला दूंगी, बस एक बार भैया,... ओह्ह उफ़ "


गीता दरवाजे के बाहर अपनी जाँघों के बीच हथेली से रगड़ते हुए, अपने भैया, अरविन्द को अपना मोटा लम्बा लंड मसलते देख के वो भी पिघल रही थी।

अंदर उसके भैया ने अपने लम्बे तगड़े लंड पे मुट्ठ मारने की रफ्तार बढ़ा दी थी. उधर बहन अपनी कोरी कुँवारी चूत मसल रही थी।

वो जोर जोर से मुठ मार रहा था,... इतना मोटा , एक मिनट के लिए गीता भी , कैसे घुसेगा उसके छेद में तो ऊँगली भी नहीं घुस पाती।
 
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