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# 43 .
6 जनवरी 2002, रविवार, 15:35; “सुप्रीम”
धीरे-धीरे दोपहर हो गयी। बहुत से यात्री लंच करके पुनः डेक पर आ गए। ऐलेक्स भी डेक पर बैठा क्रिस्टी के अजीब से स्वभाव के बारे में सोच रहा था। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्रिस्टी से क्या बात करे? जब वह क्रिस्टी से दूर रहता था तो हमेशा उसके बारे में सोचता रहता, पर जब क्रिस्टी उसके सामने आती तो वह घबराहट की वजह से सब कुछ भूल जाता था।
उसे इस खतरनाक भूल-भुलैया रूपी रास्ते से ज्यादा खतरनाक क्रिस्टी का रुप लग रहा था। वह समझ नहीं पा रहा था कि वह क्या करे? अभी ऐलेक्स इस उलझन में उलझा ही था कि तभी उसे सामने से क्रिस्टी आती दिखाई दी।
“क्या हुआ ऐलेक्स?“ क्रिस्टी ने पास आकर सामने की कुर्सी पर बैठते हुए कहा- “तुम इतना परेशान से क्यों हो ?“
“परेशान!......और मैं.....नहीं तो... ..मैं भला क्यों परेशान होने लगा ?“ ऐलेक्स ने घबराकर कहा।
“तो फिर तुम मुझसे बात क्यों नहीं करते? अब तो मैंने जान भी लिया है कि तुम गलत आदमी नहीं हो।“ क्रिस्टी ने हवा से माथे पर आए बालों को उंगली से पीछे करते हुए कहा।
“नहीं....नहीं। ऐसी कोई बात नहीं है। दरअसल मैं इस समय शिप के बारे में सोच रहा था।“ ऐलेक्स ने पुनः घबराए से लहजे में कहा।
“शिप के बारे में?“ क्रिस्टी ने बनावटी गुस्सा दिखाते हुए कहा- “तुम्हारे सामने इतनी खूबसूरत लड़की बैठी है और तुम शिप के बारे में सोच रहे हो।......अच्छा बताओ, तुम्हें मेरी इन खूबसूरत आंखों में क्या दिखाई दे रहा है?“ क्रिस्टी ने थोड़ा आगे झुकते हुए ऐलेक्स की आंखों में आंखें डालते हुए पूछा।
“तुम्हारी आंखों में.....।“ ऐलेक्स ने बड़ी मुश्किल से क्रिस्टी की आंखों में देखा। क्रिस्टी को इतना पास पा वह फिर से नर्वस हो गया।
“हां बताओ ना....... तुम्हें मेरी आंखों में क्या दिख रहा है?“ क्रिस्टी ने थोड़ा जिद्दी अंदाज में कहा।
“तुम्हारी आंखों में.............. अरे यह क्या ?“ अचानक ऐलेक्स ने बड़ी अजीब सी आवाज में कहा।
“क्या हुआ मेरी आंखों में?“ क्रिस्टी की आवाज की शोखी बरकरार थी।
“यह तो कोई परिंदा लगता है।“
“मेरी आंखों में परिंदा ?“ क्रिस्टी ने चैंककर ऐलेक्स को देखा।
“अरे नहीं.......तुम्हारी आंखों में नहीं। वहां देखो आसमान पर।“ ऐलेक्स ने कहते हुए आसमान की तरफ एक ओर इशारा किया।
अब क्रिस्टी का चेहरा भी उस ओर घूम गया। आसमान में दूर कहीं से उड़कर, उसी तरफ आता हुआ एक पक्षी दिखाई दिया।
“यह तो कोई पक्षी लग रहा है।“ क्रिस्टी ने कहा।
अब ऐलेक्स उठकर डेक की उस साइड की ओर चल दिया, जिस तरफ वह पक्षी आता दिखाई दे रहा था। क्रिस्टी भी अब ऐलेक्स के पीछे चल दी। अब तक डेक पर खड़ी जेनिथ सहित कई लोगों की नजर उस पक्षी पर पड़ चुकी थी। ऐलेक्स और क्रिस्टी भी वहां पर पहुंच गए।
“उस पक्षी ने अपने पंजे में शायद कोई चीज पकड़ रखी है?“ जेनिथ ने उस दिशा की ओर देखते हुए कहा।
तब तक उड़ता हुआ वह पक्षी, शिप की डेक पर लगी रेलिंग पर आकर बैठ गया। वह एक लंबी पूंछ वाला पहाड़ी तोता था, जिसके पैर में एक लगभग 4 मीटर लंबी डोरी बंधी थी।
“यह तो तोता लगता है।“ जेनिथ ने तोते को देखते हुए कहा- “पर इसके पैर में बंधी यह डोरी कैसी है?“
“लगता है यह किसी जगह पर बंधा हुआ था और यह वहां से डोरी तोड़कर भाग आया है।“ क्रिस्टी ने अपने विचार व्यक्त किए।
“समुद्र में पक्षी उसी स्थान पर बैठता है, जहां पर जमीन हो।“ जेनिथ ने तोते को देखते हुए कहा- “इसका मतलब कि यह तोता जिस दिशा से आया है, उस तरफ जमीन है और वह बहुत ज्यादा दूर नहीं है क्यों कि साधारणतया तोता वह पक्षी है, जो आसमान में उड़ते समय बहुत ज्यादा दूरी तय नहीं करता है।“
“एक बात और भी है।“ क्रिस्टी ने तोते के पैर में बंधी डोरी पर एक नजर मारते हुए कहा- “इसके पैर में डोरी भी बंधी है और किसी पक्षी के पैर में डोरी कोई इंसान ही बांध सकता है। इसका साफ मतलब है कि यह जहां से आया है। वहां पर इंसान भी है और जीवन भी।“
“हमें इस तोते को पकड़ना चाहिए। शायद इससे हमें कुछ और बातें भी पता चल जाएं।“ ऐलेक्स ने एक नजर जेनिथ पर डालते हुए कहा।
“तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो ऐलेक्स।“ जेनिथ ने ऐलेक्स की बातों का समर्थन करते हुए कहा- “पर हमें इस बात की सूचना कैप्टेन को भी दे देनी चाहिए।“
यह कहकर जेनिथ ने कुछ दूर खड़े एक सिक्योरिटी गार्ड को अपने पास बुलाया और उसे कैप्टन तक सूचना पहुंचाने को कह दिया।
अब जेनिथ की नजर एक बार फिर उस तोते पर पड़ी। उधर ऐलेक्स चुपचाप दबे पाँव उस तोते की ओर बढ़ा। ऐलेक्स की नजर तोते के पैर में बंधी डोरी पर थी। तोता भी अब ध्यान से ऐलेक्स को पास आते हुए देख रहा था। तोते के पास पहुंचकर ऐलेक्स ने उसके पैर में बंधी डोरी पर छलांग लगा दी।
मगर तोता पहले से ही सावधान था। वह तेजी से अपने स्थान से, पंख फड़फड़ा कर हवा में उड़ गया। आसमान में उड़ते हुए वह जोर से चिल्लाया- “ऐमू से धोखा..... ऐमू से धोखा..।“
“अरे यह तोता तो काफी तेज है और यह तो बहुत साफ..बोल रहा है।“ क्रिस्टी ने आश्चर्य से भरते हुए कहा।
“इसका मतलब यह है कि यह जहां से आया है, वहां पर सभ्य इंसान बसते हैं।“ जेनिथ ने भी आश्चर्य व्यक्त किया- “अब तो इसे पकड़ना और भी जरूरी हो गया है।“
अब तोता उड़ कर दूसरी जगह पर बैठ गया। लेकिन अब उसकी निगाहें लगातार उस भीड़ पर थीं, जो उसे घूर रही थी। धीरे-धीरे उस तोते को देखने के लिए डेक पर भीड़ बढ़ती जा रही थी।
इस बार ऐलेक्स ने धीरे से जेनिथ को इशारा किया। ऐलेक्स का इशारा समझ जेनिथ एक लंबा राउंड लगा कर तोते के दूसरी साइड में पहुंच गयी। इस बार ऐलेक्स सामने से व जेनिथ पीछे से तोते की ओर बढ़े।
तोते की निगाहें आगे बढ़ते हुए ऐलेक्स पर थीं। ऐलेक्स भी कोई ना कोई हरकत करके तोते का ध्यान अपनी ओर लगाए हुए था। जिसका फायदा उठा कर जेनिथ दबे पांव डोरी की ओर बढ़ने लगी।
डोरी अब जेनिथ से मात्र 1 मीटर की दूरी पर थी। तभी अचानक उस तोते को किसी के पीछे होने का एहसास हुआ। जैसे ही जेनिथ डोरी पर झपटी, तोता बिना एक सेकेंड गंवाए पुनः आसमान में था।
“धोखा.... ऐमू से धोखा......नहीं पकड़ पाओगे......नहीं पकड़ पाओगे।“ तोता आसमान में उड़ते हुए चिल्लाया।
अब तो जैसे तोते को कोई खेल मिल गया हो। वह बार-बार इधर-उधर बैठ रहा था और सारी भीड़ उसे पकड़ने का प्रयास कर रही थी। लेकिन पकड़ नहीं पा रही थी। तभी सुयश, ब्रैंडन और असलम के साथ भागा-भागा डेक पर आ पहुंचा।
सुयश की लाल आंखें इस बात का सबूत थीं कि वह ठीक से सो नहीं पाया है। वह विचित्र तोता इस समय पानी की टंकी पर बैठा, वहां खड़ी भीड़ को घूर रहा था। सुयश ने उस विचित्र तोते को देखा। तोते को देखते ही सुयश का दिमाग बहुत तेजी से चलने लगा उसे एक बार फिर शैफाली के सपने याद आने लगे क्यों कि शैफाली ने अपने सपनों में एक पहाड़ी तोते का भी जिक्र किया था।
सुयश समझ गया कि यह तोता भी उन रहस्यमय घटनाओं की अगली कड़ी है। सुयश की एकटक नजर अब उसे विचित्र तोते पर थी। कुछ देर उसे देखते रहने के बाद, सुयश चलता हुआ पानी की टंकी के नीचे पहुंच गया। तोता बारी-बारी से भीड़ में खड़े सभी लोगों पर नजर दौड़ा रहा था। तभी उसकी निगाह सुयश पर पड़ी।
एक क्षण के लिए वह सुयश को देखता रह गया और फिर उड़ता हुआ खुशी से चिल्लाया-
“दोस्त मिल गया.........दोस्त मिल गया.....ऐमू का दोस्त मिल गया।“ इतना कहकर वह तोता अपने पंख फड़फड़ाते हुए सुयश के कंधे पर आकर बैठ गया।
सभी इस घटना से आश्चर्यचकित रह गये क्यो कि जो तोता आधे घंटे से इन सबको तिगनी का नाच नचाए था वह उड़कर सुयश के कंधे पर इतनी आसानी से क्यों बैठ गया ?
सुयश ने जैसे ही तोते को अपने कंधे पर बैठते हुए देखा, झट से उसके पैर में बंधी डोरी को पकड़ लिया। तोते ने एक नजर गौर से सुयश को देखा और फिर उसके हाथ को, जिसमें वह डोरी पकड़े हुए था। तोता अब फिर से उड़ने की कोशिश करने लगा। वह हवा में अपने पंख फड़फड़ाते हुए चिल्लाया-
“धोखा ....... ऐमू से धोखा..... दोस्त नहीं...... यह ऐमू का दोस्त नहीं....।“ तोता लगातार उड़ने की कोशिश कर रहा था।
तोता फिर तीखी आवाज में चिल्लाया- “छोड़ दे....छोड़ दे..... ऐमू को छोड़ दे....तू दोस्त नहीं....तू ऐमू का दोस्त नहीं।“ उस तोते की आवाज में ना जाने ऐसी क्या बात थी कि सुयश ने एक पल के लिए उस तोते को देखा और फिर उसके दोंनो पंजे पकड़ कर उसके पैर में बंधी डोरी खोल दी।
तोता अब आजाद था। आजादी का एहसास होते ही वह बिना देर किए आसमान में उड़ गया और सुयश के सिर के ऊपर चक्कर काटने लगा-
“छोड़ दिया.....छोड़ दिया......डोरी भी खोल दिया....दोस्त है......दोस्त है..... ऐमू का दोस्त है।“ इतना कहकर वह पुनः सुयश के कंधे पर आकर बैठ गया।
सुयश ने धीरे से अपना बांया हाथ आगे बढ़ाया। वह तोता उछलकर उसकी कलाई पर बैठ गया। विचित्र बात तो यह थी कि उसके पंजों के नाखून, सुयश की कलाई में गड़ नहीं रहे थे।
“यह ऐमू कौन है?“ सुयश ने उस तोते को देखते हुए पूछा।
“ऐमू मैं.....ऐमू मेरा नाम..... मैं ऐमू......तुम ऐमू के दोस्त।“ ऐमू ने अपने पंख फैलाते हुए कहा।
“ये तो काफी समझदार तोता लगता है।“ ऐलेक्स ने ऐमू की ओर देखते हुए कहा।
“काट खाऊंगा..... मैं समझदार नहीं.......मैं तोता नहीं.......मैं ऐमू... ...ये ऐमू का दोस्त।“ ऐमू ने ऐलेक्स पर नाराजगी दिखाते हुए कहा।
“हां...हां हम समझ गये। तुम ऐमू और ये ऐमू के दोस्त।“ जेनिथ ने मुस्कुराते हुए कहा- “लेकिन कुछ और बताओगे?“
“बताऊंगा......बताऊंगा......पहले कुछ खाने को दो......ऐमू भूखा है.. ...पहले खाएगा...... फिर बताएगा।“
जारी रहेगा_________
6 जनवरी 2002, रविवार, 15:35; “सुप्रीम”
धीरे-धीरे दोपहर हो गयी। बहुत से यात्री लंच करके पुनः डेक पर आ गए। ऐलेक्स भी डेक पर बैठा क्रिस्टी के अजीब से स्वभाव के बारे में सोच रहा था। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्रिस्टी से क्या बात करे? जब वह क्रिस्टी से दूर रहता था तो हमेशा उसके बारे में सोचता रहता, पर जब क्रिस्टी उसके सामने आती तो वह घबराहट की वजह से सब कुछ भूल जाता था।
उसे इस खतरनाक भूल-भुलैया रूपी रास्ते से ज्यादा खतरनाक क्रिस्टी का रुप लग रहा था। वह समझ नहीं पा रहा था कि वह क्या करे? अभी ऐलेक्स इस उलझन में उलझा ही था कि तभी उसे सामने से क्रिस्टी आती दिखाई दी।
“क्या हुआ ऐलेक्स?“ क्रिस्टी ने पास आकर सामने की कुर्सी पर बैठते हुए कहा- “तुम इतना परेशान से क्यों हो ?“
“परेशान!......और मैं.....नहीं तो... ..मैं भला क्यों परेशान होने लगा ?“ ऐलेक्स ने घबराकर कहा।
“तो फिर तुम मुझसे बात क्यों नहीं करते? अब तो मैंने जान भी लिया है कि तुम गलत आदमी नहीं हो।“ क्रिस्टी ने हवा से माथे पर आए बालों को उंगली से पीछे करते हुए कहा।
“नहीं....नहीं। ऐसी कोई बात नहीं है। दरअसल मैं इस समय शिप के बारे में सोच रहा था।“ ऐलेक्स ने पुनः घबराए से लहजे में कहा।
“शिप के बारे में?“ क्रिस्टी ने बनावटी गुस्सा दिखाते हुए कहा- “तुम्हारे सामने इतनी खूबसूरत लड़की बैठी है और तुम शिप के बारे में सोच रहे हो।......अच्छा बताओ, तुम्हें मेरी इन खूबसूरत आंखों में क्या दिखाई दे रहा है?“ क्रिस्टी ने थोड़ा आगे झुकते हुए ऐलेक्स की आंखों में आंखें डालते हुए पूछा।
“तुम्हारी आंखों में.....।“ ऐलेक्स ने बड़ी मुश्किल से क्रिस्टी की आंखों में देखा। क्रिस्टी को इतना पास पा वह फिर से नर्वस हो गया।
“हां बताओ ना....... तुम्हें मेरी आंखों में क्या दिख रहा है?“ क्रिस्टी ने थोड़ा जिद्दी अंदाज में कहा।
“तुम्हारी आंखों में.............. अरे यह क्या ?“ अचानक ऐलेक्स ने बड़ी अजीब सी आवाज में कहा।
“क्या हुआ मेरी आंखों में?“ क्रिस्टी की आवाज की शोखी बरकरार थी।
“यह तो कोई परिंदा लगता है।“
“मेरी आंखों में परिंदा ?“ क्रिस्टी ने चैंककर ऐलेक्स को देखा।
“अरे नहीं.......तुम्हारी आंखों में नहीं। वहां देखो आसमान पर।“ ऐलेक्स ने कहते हुए आसमान की तरफ एक ओर इशारा किया।
अब क्रिस्टी का चेहरा भी उस ओर घूम गया। आसमान में दूर कहीं से उड़कर, उसी तरफ आता हुआ एक पक्षी दिखाई दिया।
“यह तो कोई पक्षी लग रहा है।“ क्रिस्टी ने कहा।
अब ऐलेक्स उठकर डेक की उस साइड की ओर चल दिया, जिस तरफ वह पक्षी आता दिखाई दे रहा था। क्रिस्टी भी अब ऐलेक्स के पीछे चल दी। अब तक डेक पर खड़ी जेनिथ सहित कई लोगों की नजर उस पक्षी पर पड़ चुकी थी। ऐलेक्स और क्रिस्टी भी वहां पर पहुंच गए।
“उस पक्षी ने अपने पंजे में शायद कोई चीज पकड़ रखी है?“ जेनिथ ने उस दिशा की ओर देखते हुए कहा।
तब तक उड़ता हुआ वह पक्षी, शिप की डेक पर लगी रेलिंग पर आकर बैठ गया। वह एक लंबी पूंछ वाला पहाड़ी तोता था, जिसके पैर में एक लगभग 4 मीटर लंबी डोरी बंधी थी।
“यह तो तोता लगता है।“ जेनिथ ने तोते को देखते हुए कहा- “पर इसके पैर में बंधी यह डोरी कैसी है?“
“लगता है यह किसी जगह पर बंधा हुआ था और यह वहां से डोरी तोड़कर भाग आया है।“ क्रिस्टी ने अपने विचार व्यक्त किए।
“समुद्र में पक्षी उसी स्थान पर बैठता है, जहां पर जमीन हो।“ जेनिथ ने तोते को देखते हुए कहा- “इसका मतलब कि यह तोता जिस दिशा से आया है, उस तरफ जमीन है और वह बहुत ज्यादा दूर नहीं है क्यों कि साधारणतया तोता वह पक्षी है, जो आसमान में उड़ते समय बहुत ज्यादा दूरी तय नहीं करता है।“
“एक बात और भी है।“ क्रिस्टी ने तोते के पैर में बंधी डोरी पर एक नजर मारते हुए कहा- “इसके पैर में डोरी भी बंधी है और किसी पक्षी के पैर में डोरी कोई इंसान ही बांध सकता है। इसका साफ मतलब है कि यह जहां से आया है। वहां पर इंसान भी है और जीवन भी।“
“हमें इस तोते को पकड़ना चाहिए। शायद इससे हमें कुछ और बातें भी पता चल जाएं।“ ऐलेक्स ने एक नजर जेनिथ पर डालते हुए कहा।
“तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो ऐलेक्स।“ जेनिथ ने ऐलेक्स की बातों का समर्थन करते हुए कहा- “पर हमें इस बात की सूचना कैप्टेन को भी दे देनी चाहिए।“
यह कहकर जेनिथ ने कुछ दूर खड़े एक सिक्योरिटी गार्ड को अपने पास बुलाया और उसे कैप्टन तक सूचना पहुंचाने को कह दिया।
अब जेनिथ की नजर एक बार फिर उस तोते पर पड़ी। उधर ऐलेक्स चुपचाप दबे पाँव उस तोते की ओर बढ़ा। ऐलेक्स की नजर तोते के पैर में बंधी डोरी पर थी। तोता भी अब ध्यान से ऐलेक्स को पास आते हुए देख रहा था। तोते के पास पहुंचकर ऐलेक्स ने उसके पैर में बंधी डोरी पर छलांग लगा दी।
मगर तोता पहले से ही सावधान था। वह तेजी से अपने स्थान से, पंख फड़फड़ा कर हवा में उड़ गया। आसमान में उड़ते हुए वह जोर से चिल्लाया- “ऐमू से धोखा..... ऐमू से धोखा..।“
“अरे यह तोता तो काफी तेज है और यह तो बहुत साफ..बोल रहा है।“ क्रिस्टी ने आश्चर्य से भरते हुए कहा।
“इसका मतलब यह है कि यह जहां से आया है, वहां पर सभ्य इंसान बसते हैं।“ जेनिथ ने भी आश्चर्य व्यक्त किया- “अब तो इसे पकड़ना और भी जरूरी हो गया है।“
अब तोता उड़ कर दूसरी जगह पर बैठ गया। लेकिन अब उसकी निगाहें लगातार उस भीड़ पर थीं, जो उसे घूर रही थी। धीरे-धीरे उस तोते को देखने के लिए डेक पर भीड़ बढ़ती जा रही थी।
इस बार ऐलेक्स ने धीरे से जेनिथ को इशारा किया। ऐलेक्स का इशारा समझ जेनिथ एक लंबा राउंड लगा कर तोते के दूसरी साइड में पहुंच गयी। इस बार ऐलेक्स सामने से व जेनिथ पीछे से तोते की ओर बढ़े।
तोते की निगाहें आगे बढ़ते हुए ऐलेक्स पर थीं। ऐलेक्स भी कोई ना कोई हरकत करके तोते का ध्यान अपनी ओर लगाए हुए था। जिसका फायदा उठा कर जेनिथ दबे पांव डोरी की ओर बढ़ने लगी।
डोरी अब जेनिथ से मात्र 1 मीटर की दूरी पर थी। तभी अचानक उस तोते को किसी के पीछे होने का एहसास हुआ। जैसे ही जेनिथ डोरी पर झपटी, तोता बिना एक सेकेंड गंवाए पुनः आसमान में था।
“धोखा.... ऐमू से धोखा......नहीं पकड़ पाओगे......नहीं पकड़ पाओगे।“ तोता आसमान में उड़ते हुए चिल्लाया।
अब तो जैसे तोते को कोई खेल मिल गया हो। वह बार-बार इधर-उधर बैठ रहा था और सारी भीड़ उसे पकड़ने का प्रयास कर रही थी। लेकिन पकड़ नहीं पा रही थी। तभी सुयश, ब्रैंडन और असलम के साथ भागा-भागा डेक पर आ पहुंचा।
सुयश की लाल आंखें इस बात का सबूत थीं कि वह ठीक से सो नहीं पाया है। वह विचित्र तोता इस समय पानी की टंकी पर बैठा, वहां खड़ी भीड़ को घूर रहा था। सुयश ने उस विचित्र तोते को देखा। तोते को देखते ही सुयश का दिमाग बहुत तेजी से चलने लगा उसे एक बार फिर शैफाली के सपने याद आने लगे क्यों कि शैफाली ने अपने सपनों में एक पहाड़ी तोते का भी जिक्र किया था।
सुयश समझ गया कि यह तोता भी उन रहस्यमय घटनाओं की अगली कड़ी है। सुयश की एकटक नजर अब उसे विचित्र तोते पर थी। कुछ देर उसे देखते रहने के बाद, सुयश चलता हुआ पानी की टंकी के नीचे पहुंच गया। तोता बारी-बारी से भीड़ में खड़े सभी लोगों पर नजर दौड़ा रहा था। तभी उसकी निगाह सुयश पर पड़ी।
एक क्षण के लिए वह सुयश को देखता रह गया और फिर उड़ता हुआ खुशी से चिल्लाया-
“दोस्त मिल गया.........दोस्त मिल गया.....ऐमू का दोस्त मिल गया।“ इतना कहकर वह तोता अपने पंख फड़फड़ाते हुए सुयश के कंधे पर आकर बैठ गया।
सभी इस घटना से आश्चर्यचकित रह गये क्यो कि जो तोता आधे घंटे से इन सबको तिगनी का नाच नचाए था वह उड़कर सुयश के कंधे पर इतनी आसानी से क्यों बैठ गया ?
सुयश ने जैसे ही तोते को अपने कंधे पर बैठते हुए देखा, झट से उसके पैर में बंधी डोरी को पकड़ लिया। तोते ने एक नजर गौर से सुयश को देखा और फिर उसके हाथ को, जिसमें वह डोरी पकड़े हुए था। तोता अब फिर से उड़ने की कोशिश करने लगा। वह हवा में अपने पंख फड़फड़ाते हुए चिल्लाया-
“धोखा ....... ऐमू से धोखा..... दोस्त नहीं...... यह ऐमू का दोस्त नहीं....।“ तोता लगातार उड़ने की कोशिश कर रहा था।
तोता फिर तीखी आवाज में चिल्लाया- “छोड़ दे....छोड़ दे..... ऐमू को छोड़ दे....तू दोस्त नहीं....तू ऐमू का दोस्त नहीं।“ उस तोते की आवाज में ना जाने ऐसी क्या बात थी कि सुयश ने एक पल के लिए उस तोते को देखा और फिर उसके दोंनो पंजे पकड़ कर उसके पैर में बंधी डोरी खोल दी।
तोता अब आजाद था। आजादी का एहसास होते ही वह बिना देर किए आसमान में उड़ गया और सुयश के सिर के ऊपर चक्कर काटने लगा-
“छोड़ दिया.....छोड़ दिया......डोरी भी खोल दिया....दोस्त है......दोस्त है..... ऐमू का दोस्त है।“ इतना कहकर वह पुनः सुयश के कंधे पर आकर बैठ गया।
सुयश ने धीरे से अपना बांया हाथ आगे बढ़ाया। वह तोता उछलकर उसकी कलाई पर बैठ गया। विचित्र बात तो यह थी कि उसके पंजों के नाखून, सुयश की कलाई में गड़ नहीं रहे थे।
“यह ऐमू कौन है?“ सुयश ने उस तोते को देखते हुए पूछा।
“ऐमू मैं.....ऐमू मेरा नाम..... मैं ऐमू......तुम ऐमू के दोस्त।“ ऐमू ने अपने पंख फैलाते हुए कहा।
“ये तो काफी समझदार तोता लगता है।“ ऐलेक्स ने ऐमू की ओर देखते हुए कहा।
“काट खाऊंगा..... मैं समझदार नहीं.......मैं तोता नहीं.......मैं ऐमू... ...ये ऐमू का दोस्त।“ ऐमू ने ऐलेक्स पर नाराजगी दिखाते हुए कहा।
“हां...हां हम समझ गये। तुम ऐमू और ये ऐमू के दोस्त।“ जेनिथ ने मुस्कुराते हुए कहा- “लेकिन कुछ और बताओगे?“
“बताऊंगा......बताऊंगा......पहले कुछ खाने को दो......ऐमू भूखा है.. ...पहले खाएगा...... फिर बताएगा।“
जारी रहेगा_________