अध्याय 14
मैं वहां hi खड़ा रहा. उन्होंने फ़ोन को अपने सामने रखा. स्क्रीन उनके चेहरे को रोशन कर रही थी.
और अपने होठों को हल्का सा दबाकर एक एंगल बनाया... और वही राज़ भरी मुस्कराहट उनके चेहरे पर आ गयी.
क्लिक.
"उन्होंने सेल्फी ले ली थी. इसके बाद वह अपनी उँगलियों से स्क्रीन पर कुछ टाइप करने लगी. एक पल के लिए उनके हाथ रुके, शायद उन्होंने कुछ सोचा, और फिर 'सेंड' का बटन दबा दिया. इसके तुरंत बाद, वह अपने फ़ोन में कुछ ढूंढ़ने लगीं, जैसे कोई और पुरानी तस्वीर तलाश रही हों.
कुछ hi देर बाद मैंने देखा का अम्मी के हाथ बुरी तरह कांप रहे the—ab वह कम्पन किसी गहरी उत्तेजना की वजह से था या फिर किसी अनजाने खौफ से, मैं इस बात को समझ नहीं प् रहा था. फिर ऐसा लगा जैसे उन्होंने एक और मैसेज भेजा हो. उस वक़्त अम्मी का पूरा चेहरे शर्म और घबराहट से लाल हो चूका था.
उन्हें इस हालत में देखकर मेरा दिल बैठा जा रहा था... मेरे ज़हन में बस एक hi खौफनाक सवाल baar-baar कौंध रहा था की क्या अम्मी ने विशाल की उस गन्दी डिमांड के हिसाब से अपनी तसवीरें उसे भेज दी हैं?"
“Aisha…kahaan हो…” नीचे से किसी रिश्तेदार की आवाज़ आयी.
"बस आयी….," उन्होंने फ़ोन को क्लच में डालते हुए, बिना मेरी तरफ देखे, कहा और कमरे से निकल गयीं.
मैं अपनी जगह पर जड़ होकर वहां hi खड़ा रहा, जैसे पेअर ज़मीन से चिपक गए हों. मेरे कानों में नीचे चल रही पार्टी का वह हल्का, धुंधला सा शोर अब बिलकुल नहीं आ रहा था; बल्कि मेरे दिमाग के सन्नाटे में विशाल के वो खौफनाक मैसेज baar-baar गूँज रहे थे: "ब्लैक पहनिए, विथ रेड उन्देर्गर्मेन्ट्स ... मुझे पिक्चर में गुलाबी निप्पल्स नज़र आने चाहिए..."
Ek-ek शब्द मेरे कानों में पिघले हुए सीसे की तरह उतर रहा था. और अब... सबसे बड़ा खौफ हकीकत में बदल चूका था. उसने सब कुछ देख लिया था.
मेरा गाला सुख रहा था. मैंने ड्रेसिंग टेबल पर रखा पानी का गिलास उतःया और एक hi सांस में पूरा पी लिया. फिर मैंने आईने में खुद को देखा. वही आइना जिसमें अम्मी ने अभी अपना अक्स देखा था. मुझे अपनी आँखों में गुस्से के बदले एक अजीब सी थकावट और बेचारगी दिखाई दी.
'तैयार हो जाओ,' उन्होंने कहा था. हाँ, मैं तैयार होऊंगा.
मैं अब इस पार्टी को मिस नहीं कर सकता. मैं अब सिर्फ एक बीटा नहीं था जो शादी में आया है. मैं एक गवाह बन गया था. एक जासूस.
मैंने रोबोट की तरह अलमारी खोली और अपना कुरता निकाला. मैं jaldi-jaldi तैयार हुआ. हर कपडा जो मैं पहन रहा था, वह मुझे काँटों की तरह चुभ रहा था. मेरा दिमाग बस एक hi चीज़ सोच रहा था...
उसने अब वह तस्वीर देख ली होगी. वह अब क्या कह रहा होगा? क्या अम्मी नीचे पार्टी में भी उससे बात करेंगी?
मैं कमरे से निकल और सीढ़ियों की ओरे बढ़ा. Jaise-jaise मैं नीचे उतर रहा था, म्यूजिक तेज़ होता जा रहा था. लॉन को लिघ्तों से सजाया गया था. लोगों का एक बड़ा हुजूम tha—rishtedaar, दोस्त, सभी hans-bol रहे थे.
मेरी आँखें भीड़ को चीरते हुए सिर्फ एक शख्स को ढून्ढ रही थीं. और वह मुझे फ़ौरन दिख गयीं. वह लॉन के एक कोने में सीमा और कुछ दूसरी औरतों के साथ कड़ी थीं. उनके हाथ में एक जूस का गिलास था. और वह हंस रही थीं. खिलखिला कर. वह काला सूट भीड़ में अलग hi चमक रहा था, बिलकुल वैसा hi जैसा विशाल ने इमेजिन किया होगा.
मैं वहां hi, सीढ़ियों के पास, एक पत्थर की मूरत बनकर खड़ा रहा.
बाहर लॉन में ढोल की थाप, म्यूजिक का शोर और लोगों के बुलंद कहकहे गूँज रहे थे. लेकिन मेरे कानों में, ये साड़ी आवाज़ें जैसे हज़ारों मील दूर से आ रही थीं. एक घुटन वाली खामोशी ने मुझे जकड रखा था.
मेरी निगाहें, एक चुम्बकीये कशिश के साथ, भीड़ को काटकर सिर्फ अम्मी पर टिक गयीं. रिश्तेदारों और लोगों का हुजूम था और लाउडस्पीकर पर फ़िल्मी गाने बज रहे थे. चारों ओरे ख़ुशी का माहौल था, पर पता नहीं मैं क्यों उदास था.
वह एक माँ, एक बीवी और एक इज़्ज़तदार औरत की तरह बहुत hi नार्मल और बेफिक्र लग रही थीं. लेकिन अंदर hi अंदर मैं जानता था की यह सब एक झूठ और धोखा था.
उन्होंने अपने एक हाथ में एक सुनहरा क्लच पकड़ा हुआ था. वही क्लच जिसमें उनका फ़ोन था. और वही फ़ोन जिसमें अब 'विशाल' का जवाब आ चूका होगा.
'मस्त…' 'काश मैं वहां होता…..' 'टिल…..,'
मेरे दिमाग में उस हरामखोर के लफ़्ज़ून गूँज रहे थे.
"अरे साहिल, यहां अकेले क्यों खड़े हो?" सीमा खला की दूसरी बहिन ने मेरे पास आते hi कहा.
"सब वहां हैं. चलो."
मैंने ज़बरदस्ती अपने चेहरे पर मुस्कराहट लाने की कोशिश की. एक ऐसी मुस्कराहट जो मेरे होंठों से आगे नहीं जा सकीय.
"जी… बस अभी आया."
"अम्मी को देखा?" उन्होंने अम्मी की तरफ इशारा करते हुए कहा.
"आज तोह बहुत खूबसूरत लग रही हैं."
"हाँ," मैं बस इतना hi कह पाया. मेरी ज़बान मेरा साथ नहीं दे रही थी.
वह आंटी आगे बढ़ गयीं, और मैं वहां खड़ा रहा.
अम्मी, सीमा और दूसरी औरतों से hans-hans कर बातें कर रही थीं लेकिन उनकी नज़र baar-baa भीड़ में idhar-udhar दौड़ जाती thi…jaise किसी को ढून्ढ रही हों.
फिर, वही हुआ जिसका मुझे इंतज़ार था.
उन्होंने baaton-baaton के बीच बड़े hi कासुअल अंदाज़ में, अपना क्लच खोला और अपने मोबाइल को चेक किया. फिर उन्होंने फ़ौरन फ़ोन को वापस अंदर रख दिया और क्लच बंद कर दिया.
उन्होंने सीमा खला से कुछ कहा और पलटकर भीड़ से निकल गयीं. वह आहिस्ता से लॉन के उस हिस्से की तरफ चलने लगीं जहां कैटरिंग के स्टाल्स लगे हुए थे. स्टाल्स के पीछे रौशनी थोड़ी काम थी और लोगों का aana-jaana भी बहुत नहीं था.
मेरे पैरों ने khud-ba-khud हरकत की.
मैं लोगों के बीच से रास्ता बनाता, उनसे थोड़ा सा फासला रखते हुए, उनके पीछे चल पड़ा. हर कदम जो मैं उठा रहा था, मेरे दिल पर बोझ बन रहा था. मैं यह नहीं करना चाहता था. मैं भाग जाना चाहता था. लेकिन मैं रुक नहीं सका. मुझे जानना था. मुझे पूरा सच देखना था.
वह एक सजावटी दरख़्त के पास, अँधेरे में रुक गयीं. उन्होंने idhar-udhar देखा. मैं एक फ़ूड स्टाल के पीछे छुप गया.
उन्होंने फ़ोन निकाला. स्क्रीन की रौशनी ने उनके चेहरे को एक पल के लिए नीला कर दिया. और फिर... उन्होंने फ़ोन को अपने कान से लगा लिया. वह किसी से फ़ोन पर बातें कर रही थी.
मैं थोड़ा और करीब हुआ, इतना की उनकी आवाज़ का हल्का सा, सरसराता अंदाज़ मुझ तक पहुँच सके.
"Hello…," उन्होंने कहा. आवाज़ में एक अजीब सी खनक थी.
"पागल हो," वह धीरे से हंसीं. "अभी तोह भेजी… इतनी जल्दी?"
मेरा खून जिस्म में जैम गया.
"नहीं, नहीं…. अभी nahi…sab लोग हैं यहां...," उन्होंने अपनी पीठ भीड़ की तरफ करते हुए कहा, ताकि उनकी आवाज़ साफ़ जा सके.
"अच्छा... सच में? ... थैंक यू."
वह 'थैंक यू' इतना नरम था, इतना... गहरा था. यह वह 'थैंक यू' नहीं था जो रिश्तेदारों को दिया जाता है.
"तुम भी न..." वह फिर से हंसीं. "बस अब रखती हूँ... कोई आ न जाए. बाद में."
"Hello…," अम्मी ने फ़ोन कान से लगाते हुए कहा.
दूसरी तरफ से विशाल की हवस से भरी आवाज़ गूंजी: "तुम सच में बहुत सेक्सी हो... प्लीज, मुझे कुछ और तसवीरें भेजो न."
"पागल हो," वह धीरे से हंसीं. "अभी तोह भेजी… इतनी जल्दी?"
विशाल ने फिर से ज़िद की: "प्लीज... और भेजो. मेरा इतने से पेट नहीं भरने वाला."
"नहीं, नहीं…. अभी nahi…sab लोग हैं यहां...," उन्होंने हॉल में मौजूद मेहमानों की भीड़ की तरफ अपनी पीठ घुमाते हुए कहा.
तभी विशाल ने अपनी असली चाल चली: "मैं तुमसे बहुत ज़्यादा इम्प्रेस हुआ हूँ, ऐसा... अब तुम सीमा की तीन की बजाये पूरी छह तसवीरें डिलीट करवा सकती हो. देखा कितना सस्ता सौदा है... तुम्हारी सिर्फ हॉट पिक्चर के बदले, तुम्हारी बहिन की छह गन्दी तसवीरें हमेशा के लिए डिलीट!"
विशाल के मुंह से सीमा का नाम और यह सौदा सुनते hi ऐसा की आँखों में एक अजीब सी चमक कौंध गयी.
उन्होंने राहत की गहरी सांस ली और कहा, "अच्छा… सच में? … थैंक यू."
वह 'थैंक यू' इतना नरम था, इतना... गहरा और जज़्बातों से भरा हुआ था. यह वह 'थैंक यू' बिलकुल नहीं थी जो किसी रिश्तेदार या आम इंसान को दी जाती है. उस एक 'थैंक यू' में अपनी जवान बहिन सीमा की इज़्ज़त और उसकी पूरी ज़िन्दगी को उस दरिंदे के चंगुल से बचाने की तड़प और लाचारी छुपी हुई थी. अम्मी अपनी बहिन सीमा की खातिर अपने खुद के पाक जिस्म का सौदा करने को तैयार हो रही थीं.
"तुम भी न..." वह फिर से धीरे से मुस्कुराईं, जिसमें अपनी हार और विशाल के आगे घुटने टेकने का एहसास था. "बस अब फ़ोन रखती हूँ… कोई आ न जाए यहां. जो भी होगा… बाद में."
उन्होंने फ़ोन काटा. एक लम्बी सांस ली. अपनी आँखें बंद कीं. और एक पल के लिए, उनके चेहरे पर सुकून की मुस्कराहट फैल गयी.
मैं तेज़ी से पलटा. इससे पहले की वह मुझे देख ले. मैं वापस भीड़ की तरफ, रौशनी की तरफ भागा.
मेरा गाला बिलकुल सुख चूका था. ऐसा लग रहा था जैसे रेगिस्तान में मील का सफर तय किया हो. सीधे जूस काउंटर की तरफ गया.
"भैया कुछ ठंडा दे दो... कुछ भी," मैंने काउंटर वाले से कहा.
उसने मुझे एक गिलास पकड़ाया. मेरे हाथ अब भी कांप रहे थे. मैं पूरा गिलास एक hi सांस में जातक गया. ठंडा पानी मेरे अंदर की आग बुझाने की नाकाम कोशिश कर रहा था.
गिलास को काउंटर पर रखते hi, मैंने लम्बी सांस ली और नज़रें उठाकर भीड़ पर डालीं. यह शादी के अगले दिन की एक आम दावत थी, बिलकुल वैसी hi जैसे हमेशा होती है. जैसे एक रंगीन, शोर मचाता हुआ समंदर.
हर तरफ मेहमान और रिश्तेदार का हुजूम था. हवा में महंगे, mile-jule इत्र की महक थी, जो पास hi में पकते हुए कबाबों और बिरयानी की खुशबू से टकरा रही थी.
सीमा खला के रिश्तेदार alag-alag झुंडों में खड़े होकर बातें कर रहे थे और ठहाके भी लगा रहे डिस्ट्रक्शन. उनके bhaari-bharkam सोने के सेट उनके हैवी डिज़ाइनर कपड़ों पर दौलत और मालदारी की नुमाइश करते थे. उनके कहकहे बुलंद थे, उनकी बातें साफ़ सुनाई दे रही theen—kisi की नयी गाडी, किसी की बहु का नया जोड़ा, किसी का ये, किसी का वो. वह सब "show-off" कर रही थीं.
पूरा लॉन एक जश्न का मंज़र पेश कर रहा था. ज़िन्दगी से भरपूर. हर कोई यहां... मौजूद था.
और फिर मेरी नज़र वापस अम्मी पर पड़ी.
वह उस झुण्ड में बिलकुल अलग दिख रही थी. दूसरी औरतों ने रंग पहने थे, जश्न मनाने के लिए, और अम्मी ने काला पहना था… एक वादा पूरा करने के लिए.
वह उस पार्टी का हिस्सा होते हुए भी, उसका हिस्सा नहीं थीं. वह वहां कड़ी थीं, लेकिन उनका दिमाग, उनका दिल... उस फ़ोन कॉल में, उस 'विशाल' के पास था.
मेरी अम्मी, उस पूरी महफ़िल में, सबसे ज़्यादा अकेली.. सबसे ज़्यादा हसीं और सबसे ज़्यादा खतरनाक लग रही थीं.
खाना लगते hi भीड़ में एक हरकत सी पैदा हो गयी. लोगों के झुण्ड लॉन में रखे डाइनिंग टेबल की तरफ बढ़ने लगे, जहां से बिरयानी की तेज़ भाप और कोफ्ता कोरमा की महक उठ रही थी. प्लाटों के टकराने और चमचों की 'khan-khan' ने म्यूजिक की आवाज़ को भी दबा दिया था.
मैं अभी तक वहां, काउंटर के पास, अपना खाली गिलास हाथ में लिए खड़ा था.
"बीटा, यहां खड़े हो?" मैंने पलटकर देखा. मेरी नानी थीं. वह एक छोटी सी प्लेट पकडे, भीड़ में रास्ता तलाश करने की कोशिश कर रही थीं. उनका चेहरा थकावं और भीड़ की उल्जन से परेशान लग रहा था.
"नानी, लाइए." मैंने उनके हाथ से प्लेट ले ली. एक पल के लिए, उनकी jhurriyon-bhari, नरम उँगलियों का एहसास मुझे उस ज़हनी अज़ीयत से बाहर खींचर लाया.
"जीते रहो. बहुत भीड़ है. मुझे बस थोड़ी सी बिरयानी और ek-do कबाब दे दो. तुमने कुछ लिया?"
"मैं… मैं आपके बाद ले लूँगा," मैंने झूठ बोलै. मुझे भूख का कोई एहसास नहीं था.
मैं उनके लिए प्लेट bhar-kar लाया और भीड़ से थोड़ा दूर एक खाली टेबल तलाश की. हम वहां बैतह गए.
"तुम भी ले आओ न, बीटा. ऐसे क्यों खड़े हो?" नानी ने पहला निवाला लेते हुए कहा.
"लाता हूँ," कहकर मैं उठा और अपने लिए एक प्लेट ले आया. उसमें be-dili से थोड़ी सी बिरयानी और एक कबाब रख लिया.
मैं वापस नानी के पास बैतह गया.
"खाना अच्छा है. सीमा ने इंतज़ाम तोह बहुत अच्छा किया है," नानी धीमी आवाज़ में बोल रही थीं.
"हूँ," मैंने कहा. मेरा पूरा ध्यान, मेरी पूरी तवज्जो, लॉन के दुसरे कोने में थी.
ऐसा... अम्मी... वहां थीं. सीमा खला और वही do-three औरतों का ग्रुप ने एक अलग, बड़ा राउंड टेबल ले लिया था. उनकी पलटें भरी हुई थीं, लेकिन खाना काम और बातें ज़्यादा हो रही थीं. कहकहों की आवाज़ वहां से लगातार आ रही थी.
अम्मी उनके बीच बैठी थीं. बिलकुल सेण्टर में. वह हंस रही थीं, सीमा खला की किसी बात पर उन्होंने अपना सर पीछे झटक लिया. उनका काला हिजाब उस हंसी में भी बिलकुल सलीक़े से अपनी जगह पर था.
मैंने प्लेट में चम्मच घुमाया.
तभी... मैंने देखा.
उनका क्लच टेबल पर नहीं था. उनके हाथ में भी नहीं था. वह उनकी गॉड में रखा था. और उस क्लच के ऊपर उनका फ़ोन था.
मैंने अपनी निगाहें सख्त कर लीं.
सीमा खला ने कुछ कहा, और सब हांसे. अम्मी भी हंसीं. लेकिन उनकी हंसी के दौरान, उनका उल्टा हाथ उनकी गॉड में, टेबल के नीचे, हरकत कर रहा था. उनका अँगूठाह तेज़ी से स्क्रीन पर चल रहा था.
वह चाट कर रही थी. वह उन सबके सामने बैतःकार, उनकी बातों पर हँसते हुए, उनकी आँखों में देखते हुए... टेबल के नीचे, उस 'विशाल' से बात कर रही थीं.
स्क्रीन की हलकी सी नीली रौशनी उनके काले सूट पर पद रही थी, जिसे टेबल क्लॉथ ने बाकी दुनिया से छुपा रखा था.
एक hi वक़्त में दो किरदार. एक hi चेहरा, दो जगहये. एक "ऐसा" जो सीमा खला के जश्न में शरीक थी. और एक "ऐसा" जो उस 'विशाल' के साथ अपने राज़ भरे खेल में मगन थी.
मेरा गाला फिर से सुख गया. मैंने बिरयानी का जो निवाला मुंह में रखा था, वह ज़हर बन गया. ऐसा लगा जैसे मैं रेट चबा रहा हूँ.
"क्या हुआ? खाना पसंद नहीं आया?" नानी ने मेरी तरफ देखते हुए पूछा.
मैंने फ़ौरन खुद को संभाला. अपने गले में अटके हुए निवाले को ज़बरदस्ती नीचे उतारा.
"नहीं... नहीं नानी, बहुत अच्छा है. बस... पानी पीना है," मैंने कहा और पास hi रखा पानी का गिलास उठा लिया.
मैं पानी पी रहा था, लेकिन मेरी निगाहें अब भी उनपर थीं. वह अब भी टाइप कर रही थीं. मुस्कुराते हुए. हँसते हुए.
और मैं, उनका बीटा, अपनी नानी के पास बैतह, यह पूरा मंज़र देखने के लिए मजबूर था.
तभी... एक हंगामा हुआ. एक वेटर, जो शायद नया था, ड्रिंक्स की एक भारी ट्रे ले कर उनके टेबल के पास से गुज़रा. न जाने उसका पेअर कैसे फिसला... पूरी की पूरी ट्रे, लाल शरबत के गिलासों से भरी, उलटी हो गयी. एक चीख निकली.
"हाईए!"
पूरा ट्रे का लाल, चिपचिपा शरबत सीमा खला के महंगे, क्रीम रंग के डिज़ाइनर सूट पर गिरा था. एक पल के लिए, सब कुछ थम गया. फिर, अराजकता पहात पड़ी.
"अरे रे….!"
"अबे, क्या कर रहा है, दीखता नहीं है क्या!"
"पानी लाओ! टिश्यू दो!"
सीमा खला हड़बड़ा कर कड़ी हो गयीं, अपने कपड़ों को झटकने लगीं. उनके साथ बैठी सभी औरतें, अम्मी समेत, अपनी कुर्सियों से उछाल पड़ीं.
"है है, मेरा पूरा सूट खराब हो गया... यह दाग नहीं जाएगा!" सीमा खला की आवाज़ में रोने जैसा अंदाज़ था.
"सीमा! सीमा, सुनो…." अम्मी की आवाज़ सबसे पहले आयी. वह फ़ौरन सीमा खला की तरफ लपकीं.
"कुछ नहीं होता, okay, अभी साफ़ हो जाएगा."
"कैसे साफ़ होगा, ऐसा दीदी? देखो तोह..."
"आप मेरे साथ अंदर चलिए," अम्मी ने फ़ौरन फैसला किया, एक एक्सपर्ट की तरह सिचुएशन संभालते हुए.
"चलिए, मैं आपको वाशरूम ले जाती हूँ. नमक या सोडा से शायद हल्का हो जाए. चलिए!"
अम्मी ने सीमा खला को बाज़ू से पकड़ा और उन्हें घर के अंदर की तरफ ले जाने लगीं. उस जल्दबाज़ी में, उस दोस्ती निभाने के जोश में... वह सबसे ज़रूरी चीज़ भूल gayeen—apna फ़ोन.
उनका फ़ोन उनकी खाली कुर्सी पर पड़ा था. सब लोग उस हंगामे में बिजी थे. कोई भी उस फ़ोन को नहीं देख रहा था. सिवाए मेरे.
मैं उठा और फुर्ती से भीड़ में चलता हुआ उनके टेबल के पास जा पहुंचा. लोग अभी भी सीमा और ऐसा की जोड़ी को देख रहे थे.
मैं उस टेबल के पास पहुंचा और कांपते हाथों से फ़ोन उतःया. फ़ोन की स्क्रीन हमेशा की तरह लॉक थी, लेकिन मुझे पैटर्न याद था. मैंने फ़ोन को अनलॉक किया और व्हाट्सप्प खोला.
जैसा की उम्मीद थी, अम्मी विशाल से hi चाट कर रही थीं. मैंने चाट को ऊपर स्क्रॉल किया. मेरी उँगलियाँ स्क्रीन पर फिसल रही थीं.
मैंने ध्यान से देखा, उस आखिरी मैसेज के बाद विशाल ने अम्मी को कुछ और भी भेजा था. लेकिन वह मैसेज अब स्क्रीन से गायब था, उसे पूरी तरह डिलीट कर दिया गया था. चाट बॉक्स में 'थिस मैसेज वास् देलेटेड बी सेन्डर' देखकर मेरा दिमाग सुन्न हो गया.
मैं गहरी सोच में डूब गया की आखिर उस देलेटेड मैसेज में ऐसा क्या रहा होगा? क्या विशाल ने अपनी कोई बेहद अश्लील तस्वीर भेजी थी, या अम्मी से उनके जिस्म की कुछ और मांग की थी? मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा. तभी अचानक मेरी नज़र उस सेल्फी पर पड़ी, जिसे अम्मी ने खुद खींचकर विशाल भेज दी थी. उस तस्वीर ने मेरे पूरे वजूद को हिलाकर रख दिया.
अम्मी ने शाम को उसे जो सेल्फी सेंड की थी उस को विशाल ने थम्ब्स उप किया था और रिप्लाई दिया था—
लेकिन मेरी तोह जान hi निकल गयी जब मैंने दूसरी तस्वीर देखि. मम्मी विशाल का वादा पूरा करने के लिए आईने की तरफ देख रही थीं. ओह गॉड... वह काफी नीचे झुकी हुई थीं, जिससे उनके काले सूट का गाला पूरी तरह से खुल गया था और सामने का सब कुछ नुमाया हो रहा था. उस गहरे खुले गले के ठीक बीच में से उनकी लाल रंग की ब्रा साफ़ नज़र आ रही थी, जो उनके गोर बदन पर बिजली की तरह कौंध रही थी.
मगर उससे भी ज़्यादा चौकाने वाली और होश उदा देने वाली बात तोह कुछ और hi थी… अम्मी के दोनों दूध जैसे सफ़ेद और gol-matol मम्मी उस ढीले गले से बाहर छलक रहे थे, जो पूरी तरह से नंगे नज़र आ रहे थे. उनके उन उभरे हुए स्तनों के बीच के हिस्से और उनके गुलाबी निप्पल्स साफ़ दिखाई दे रहे थे, जो इस वक़्त पूरी तरह से तन चुके थे. यह खौफनाक और बेहद कामुक नज़ारा देखकर मेरी सांसें जैसे वहां hi थम गयीं, सीना oopar-neeche होने लगा.
एक तरफ दिल में अम्मी और विशाल के लिए बेइंतेहा गुस्सा उबाल रहा tha—aakhir अम्मी इतनी बेवफा और बेशर्म कैसे हो गयीं? उन्होंने अब्बू को इस तरह धोखा कैसे दे दिया? लेकिन दूसरी तरफ, अम्मी के उस मदहोश कर देने वाले जिस्म और इस तड़पा देने वाले नज़ारे को देखकर मेरे पैरों के बीच, मेरी टांगों के बीच एक अजीब सी बेचैनी और तेज़ हलचल होने लगी थी. मेरा ang-ang वासना की आग में सुलगने लगा था.
विशाल: Woooow…just woooow…Aisha ji…thank यू फॉर कीपिंग प्रॉमिस….
विशाल: "मैं भी अपना वादा पूरा करूंगा..."
जैसे hi स्क्रीन पर विशाल का यह मैसेज चमका, मेरे पूरे बदन में एक ठंडी सिहरन दौड़ गयी. 'वादा...' कैसा वादा? अम्मी ने आईने के सामने झुककर, अपने बदन की नुमाइश करके विशाल के लिए जो किया था, उसके बदले विशाल अम्मी को क्या देने वाला था? क्या वह अम्मी के इस दीवाना कर देने वाले जिस्म को अपनी बाँहों में भरने का वादा था?
उसके बाद विशाल ने कुछ और मैसेज किये the…..kya कर रही ho…khaan ho…ek और पिक दो…. और उसने अपनी एक सेल्फी भी सेंड की thi…..lekin अम्मी ने कोई रिप्लाई नहीं दिया था. मैं समझ गया की उस दौरान अम्मी ने फ़ोन नहीं देखा होगा.
फिर अम्मी का मैसेज,
ऐसा: अरे baba….itne सारे message…poora दिन बस व्हाट्सप्प hi करते हो क्या….
विशाल: Finally….time मिला aapko…batao क्या कर रही हो?
ऐसा: कुछ nahi….dinner कर रही थी….
विशाल: अच्छा ji…dinner के sath-sath chatting…vaah…
ऐसा: मल्टीटास्किंग हूँ मैं….
विशाल: अच्छा, और क्या टास्क कर रही हो अभी??
ऐसा: डिनर कर रही hoon….chat कर रही हूँ और सीमा की स्टुपिड बातों पर हंस भी रही हूँ ताकि किसी को शक न हो….
विशाल: "अरे बाप रे…. बहुत टैलेंटेड हो आप तोह…."
ऐसा: "वह तोह मैं हूँ….." (अम्मी के इस जवाब में एक अजीब सा नशा और अपनी खूबसूरती पर गुरूर था, जैसे वह विशाल को अपनी उँगलियों पर नचाने का मज़ा ले रही हों.)
विशाल: "और बहुत हॉट भी….."
ऐसा: "बदमाश…."
विशाल: "नहीं हो क्या?"
ऐसा: बलुशिंग इमोजी…
विशाल: "और हाँ…. आप जादूगर भी हो…."
ऐसा: "जादूगर?"
विशाल: "हाँ…. जादूगर… वहां baithe-baithe आपने किसी को खड़ा कर दिया… आपकी वो मदहोश कर देने वाली सेल्फी और उसके बाद वो काले सूट के गहरे गले से झांकते आपके वो gore-gore मम्मी, वो सुर्ख लाल रंग की ब्रा और उसमें से कामसमाते वो गुलाबी टिप्स… उन्हें देखते hi मेरा ang-ang बेकाबू होकर आपको सलूट करने लगा… वह पूरी तरह खड़ा हो गया है…."
ऐसा: "काबू में रखो…. अपने… इमोशंस को…" (अम्मी ऊपर से तोह उन्हें रोकने का नाटक कर रही थीं, लेकिन अंदर hi अंदर उनका अपना बदन भी इस नग्न सच को सुनकर सुलगने लगा होगा.)
विशाल: "यह तोह मुश्किल है…. मेरा इमोशन… मेरी कैसे सुनेगा… इसका रिमोट कण्ट्रोल तोह अब पूरी तरह तुम्हारे पास है… तुम्हारी इन कातिल तस्वीरों के पास है…."
ऐसा: "उफ्फ्फ…. अच्छा जी… तोह वह क्या कह रहा है…."
विशाल: "आपके रेस्पेक्ट में खड़ा हो गया है…. कह रहा है… सिर्फ सेल्फी से अब प्यास नहीं बुझने वाली… तुम्हें लाइव देखना है… किसी तंग काले सूट में, इनहिईन लाल रंग के उन्देर्गर्मेन्ट्स के साथ तुम्हें अपनी बाँहों में भीचना है…."
ऐसा: "पागल हो गए हो क्या…. और सुनो, आपने वह अश्लील सेल्फी तोह डिलीट कर दी है न… जो मैंने भेजी थी?" (अम्मी के दिल में एक दर था, लेकिन उस दर के पीछे एक अजीब सी उत्तेजना भी थी.)
विशाल: "न… कभी नहीं करूंगा. तुम्हारी इस जवानी के ख़ज़ाने को मैं अपनी आँखों से कभी दूर नहीं होने दूंगा. ?"
ऐसा: "बदमाश."
विशाल: "ऐसा hi हूँ मैं… अच्छा… यह बताओ… उस पारदर्शी काले सूट के नीचे, पंतय का कौन सा कलर है…." (विशाल अब अम्मी के जिस्म के आखिरी हिस्से के राज़ भी जान लेना चाहता था.)
ऐसा: "तुम्हें कैसे नहीं पता होगा?"
विशाल: "फिर भी. मैं तुम्हारे इन रसीले होठों से सुन्ना चाहता हूँ."
ऐसा: "'लाल'..." (सिर्फ एक shabd—'Laal'... जिसमें चाट के तापमान को और बढ़ा दिया. अम्मी ने कबूल कर लिया था की उन्होंने नीचे भी उसी सुर्ख लाल रंग की पंतय पहनी हुई है.)
विशाल: "ओह्ह्ह भेंचो…… अब तोह मिलना hi पड़ेगा… अब यह बर्दाश्त नहीं होता. आ जाऊं क्या अभी?" (विशाल वासना में पूरी तरह अँधा हो चूका था और गाली देते हुए अपनी चरम उत्तेजना ज़ाहिर कर रहा था.)
ऐसा: "न…. पागल मत बनो, घर में बहुत लोग हैं… पकडे गए तोह अनर्थ हो जाएगा."
विशाल: "लोगों को मरने दो….. बस 10 मिनट के लिए… वैसे मैं तुम्हारे बहुत करीब हूँ…."
ऐसा: "मतलब? तुम इस वक़्त कहाँ हो?" (अम्मी की धड़कनें अब दर और चाहत के मारे तेज़ी से भागने लगी थीं.)
विशाल: "मतलब मैं तुम्हारी hi गली में, अपनी कार में बैतह हूँ…. ठीक स्ट्रीट के एन्ड में…"
ऐसा: "ओह्ह्ह खुदा….. तुम तोह सच में पागल हो गए हो!"
विशाल: "प्लीज ऐसा…. अब मन मत करना… सिर्फ 10 मिनट… किसी तरह चुपके से टेरेस (छत) पर आ जाओ…."
ऐसा: "पर तुम ऊपर कैसे आओगे?... सब नीचे hi हैं." (अम्मी ने मन नहीं किया, बल्कि उनके इस सवाल ने साफ़ कर दिया की वह भी छत पर विशाल के उस गर्म जिस्म से टकराने के लिए तैयार हो चुकी थीं.)
विशाल: "तुम बस वहां पहुंचो… मैं पीछे के रास्ते से कुछ जुगाड़ करता हूँ…."
यह विशाल का लास्ट मैसेज tha…main समझ गया की इसके बाद वह शरबत वाला हादसा हुआ था और अम्मी ने फ़ोन वहां छोड़ दिया था.
"हो गया क्लीन, सीमा?"
टेबल पर बैठी एक औरत की आवाज़ ने मुझे होश में ला दिया.
अम्मी और सीमा खला वाशरूम से वापस आ रही थीं. सीमा खला अब भी अपने सूट का भीगा हुआ पल्ला पकडे थीं.
"...तुमने बचा लिया, ऐसा दीदी," सीमा खला कह रही थीं. "वार्ना मेरा तोह दिल hi बैतह गया था."
मैंने फ़ौरन फ़ोन को वापस वैसे hi कुर्सी पर रख दिया, स्क्रीन को लॉक करके.