Incest मेरी बीवियां, परिवार..…और बहुत लोग… - Page 7 - SexBaba
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Incest मेरी बीवियां, परिवार..…और बहुत लोग…

34th Update (जन्मदिन का तोहफा) (माँ - बेटा स्पेशल) (Mega Update)



और हाँ... अब से मैं रोज़ इस बिस्तर पे आपके साथ ही सो जाऊँगी...;ऋतू: प्यार से उसको देख कर... मेरी बच्ची...



अब आगे..



दो दिन बाद जब ऋतू ऑफिस जाती है तो दीपू देखता है की उसका चेहरा उस दिन बहुत खिला हुआ था और आज वो थोड़ी सज के आयी थी जिसमें एक तरह से वो सेक्सी भी लग रही थी. वो ऋतू को देख कर कहता है...

दीपू: आज आपको इस तरह देख कर अच्छा लग रहा है.

ऋतू: किस तरह.

दीपू: आज आपके चेहरा थोड़ा खिला हुआ लग रहा है. ऋतू ये बात सुनकर थोड़ा शर्मा जाती है और कहती है... ये सब तेरी बेहन की वजह से है. उसने ही मुझे अच्छे से “समझाया” है की जो हुआ उसे बदल तो नहीं सकते लेकिन हमें अपना जीवन भी जीना है. वो इतना बोल कर थोड़ा उदास हो जाती है तो दीपू पहचान जाता है और वो जाकर ऋतू को प्यार से गले लगा लेता है और कहता है की निशा ने जो कहा है ठीक है. और फिर दीपू उसे अपनी बाहों में थोड़ा ज़ोर के भींच लेता है और ऐसे ही उसे सांत्वना देता है.

फिर दीपू उसे अपने से अलग करता है और फिर अपनी जगह जाकर काम करने लगता है. ऋतू दीपू को देखती रहती है और उसे निशा की बात याद आती है की क्या पता उनके जीवन में और कोई आ सकता है क्या.

ऋतू दीपू को देखती रहती है और सोचती है “क्या ये लड़का हमारी जीवन में आ सकता है क्या”. लेकिन कुछ देर बाद वो सोचती है की वो गलत सोच रही है और उस ख्याल को अपने मन से निकाल लेती है. वो बात अभी उसके मन से निकल जाता है लेकिन कहीं उसके दिमाग में एक छोटी से जगह ले लिया था.

फिर वो दोनों अपने काम में लग जाते है. दीपू जब शाम को घर जाता है तो देखता है की मीना एक सेक्सी पोज़ में खड़ी हो कर जैसा उसका इंतज़ार कर रही हो. वो मीना को देख कर कुछ नहीं कहता लेकिन फिर उसे याद आता है की अभी मीना वहां उनके घर क्यों है....

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और ऐसे ही सोचते हुए वो वोफे पे बैठा है तो लता उसके लिए चाय लेकर आती है. लता को देख कर दीपू अपनी आँखें थोड़ी बड़ी करता है और ना चाहते हुए भी उसका लंड उसके Pant में खड़ा हो जाता है... क्यूंकि उस वक़्त लता एक मैक्सी पहने हुई आयी थी जिसमें से उसकी ठोस चूचियां दिख रही थी और वो थोड़ी झुक कर जब दीपू को चाय देती है तो जैसे उसकी चूचियां उसकी मैक्सी से बहार आने को तड़प रहे थे.

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दीपू: बुआ क्या बात है आज आपने चाय लायी है? माँ नहीं है क्या?

लता: क्यों माँ ही लाएगी तो तू चाय पीयेगा क्या? बुआ के हाथ से चाय नहीं लेगा क्या?

दीपू: ऐसी बात नहीं है बुआ. मैं तो ऐसे ही पूछ रहा था. वो लता के हाथ से चाय लेकर चाय पीने लगता है तो उसे भी थोड़ा लता के साथ मजे लेने का मन करता है.

दीपू: चाप पीते वक़्त लता को देख कर “आज तो चाय कुछ ज़्यादा ही मीठी लग रही है”. लता ये बात सुनकर हस देती है और वो भी उसी अंदाज़ में कहती है: तुझे रोज़ ऐसी मीठी चाय चाहिए तो बोल रोज़ मैं तुझे देती हूँ और उसके बगल में बैठ जाती है.

लता: वैसे दीपू तू तो मुझसे ठीक से बात भी नहीं करता. क्यों मेरा यहाँ रहना तुझे अच्छा नहीं लगता क्या?

दीपू: नहीं बुआ ऐसी कोई बात नहीं है. आप यहाँ हमारे साथ रहो तो हमें भी अच्छा लगता है. जहाँ तक बात करने की बात है... आप तो देख ही रही हो... अभी अभी उस सदमे से सब थोड़ा बाहर आ रहे है. ऐसे में ज़्यादा बात कहाँ हो सकती है?

लता: हां बेटा तू ठीक ही कह रहा है.

दीपू: वैसे माँ मौसी और बाकी सब कहाँ गए है?

लता: वो बाजार गए है घर का सामान लाने के लिए. जल्दी ही आ जाएंगे.

कुछ देर बाद तीनो बाजार से घर आते है और वसु दीपू को देख कर... तू कब आया?

दीपू: अभी १० Min ही पहले आया था.

फिर वसु और दिव्या किचन में सामान रकने चले जाते है. थोड़ी देर बाद दीपू किचन में जाता है तो वसु कुछ काम कर रही थी. दीपू वसु के पीछे जाता है तो उसका तना हुआ लंड वसु की गांड पे रगड़ता है जिसे वसु भी महसूस करती है. दीपू वसु की चूची को दबाते हुए पहले उसके गले को चूमता है और फिर कान में कहता है....

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क्या बात है? आज बुआ और मीना तो कहर ढा रहे है जैसे तुम अभी केहर ढा रही हो.. वसु पलट कर दीपू को देखते हुए... प्यार से हस्ते हुए दीपू के कान में कहती है... लगता है तेरी बुआ तुझपे लाइन मार रही है.

दीपू: मैं समझा नहीं.

वसु: मैं तुम्हे रात में बताती हूँ. अभी छोड़ मुझे... बहुत काम है.

फिर दीपू वसु को छोड़ कर बहार हॉल में आ जाता है तो दिव्या और कविता भी जैसे उसको रिझाने में लगे हुए थे. दीपू मन में सोचता है: चलो ठीक है. अब सब धीरे धीरे घर का माहौल ठीक हो रहा है जो की अच्छा भी है. वैसे ही आज सुबह आंटी को भी देखा था. वो भी बहुत गज़ब की लग रही थी आज... ऐसे ही सोचते हुए वो अपने कमरे में चला जाता है.

रात को सब खाना खा कर अपने कमरे में जाते है तो आज कविता भी दीपू के साथ उसके कमरे में आती है जो की बहुत दिनों के बाद था... क्यूंकि जब से मीना वहां आयी थी कविता रोज़ उसके साथ ही रहती थी.

दीपू कविता को कमरे में देख कर उसको दीवार से सत्ता के उसके होंठ चूमता है तो कविता भी उसका पूरा साथ देती है.

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दोनों एक दुसरे को अच्छे से निचोड़ते और रस पीते है और दीपू कविता को चूमते हुए उसकी चूची और गांड भी दबा देता है तो कविता सिसकी लेते हुए कहती है.. बहुत दिनों से मैं भी तड़प रही हूँ दीपू. जब से मीना यहाँ आयी है मैं तेरे पास नहीं आ सकी. मैं तेरे पास आना चाहती हूँ लेकिन उसको अकेले छोड़ के नहीं आ सकती. कविता दीपू को चूमने में इतनी व्यस्त थी की उसको पता भी नहीं चलता की दीपू ने उसके कपडे निकल दिए है और उसे पूरा नंगा कर दिया है.

कविता को जब ये एहसास होता है तो कहती है: तुमने तो मुझे पूरा नंगा कर दिया है लेकिन खुद कपडे पहने हो.

दीपू: मैंने तुम्हे मना किया है क्या? कविता फिर दीपू को चूमते हुए उसके कपडे भी निकल देती है और उसे भी नंगा कर देती है.

दीपू भी फिर थोड़े मजे लेते हुए कहता है: मेरे पास क्यों आना चाहती हो? तुम्हारी बेटी तो तुम्हारे पास ही है ना...

कविता भी हस्ते हुए: क्यों मैं अपने पती के पास नहीं आ सकती क्या?

दीपू: हाँ क्यों नहीं ज़रूर आ सकती हो... लेकिन क्यों?

कविता: बड़ा शैतान बन रहा है ना.... तू सुन... मैं भी तेरा लंड मेरी चूत में लेने के लिए तड़प रही हूँ. अभी खुश?

दीपू: फिर से उसको चूमते हुए... मैं तो तुम्हारी गांड का चहेता हूँ.. इतनी मस्त गांड लेकर घूमती हो.

कविता: तो गांड भी मार लेना. मना किसने किया है. सुहागरात में मेरी गांड मारने के बाद मुझे भी अभी गांड में लेने में मजा आता है .

इतने में वहां वसु भी आ जाती है तो दोनों को देख कर.. लगता है बहुत दिनों के बाद मिया बीवी मिल रहे है. लगे रहो.. और उनके सामने से जाने लगती है तो कविता वसु को पकड़ कर उसकी ओर खींचते हुए... तू कहाँ जा रही है.. आज बहुत दिनों बाद मिया बीवी मिल रहे है लेकिन सौतन भी तो नहीं मिले ना बहुत दिनों से... और ऐसा कहते हुए कविता अपने होंठ वसु के होंठ से जुड़ा देती है और दोनों भी एक मस्त लम्बे गहरे और गीले चुम्बन में जुड़ जाते है. वसु को भी पता नहीं चलता की कब उसके कपडे भी उसके बदन से अलग हो गए है. अब कमरे में तीनो नंगे थे जिसमें एक मस्त खड़ा हुआ लंड और दो रस बहाती हुई चूते.

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3-4 min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अलग होते है तो दोनों एक दुसरे को देख कर हस देते है और वसु कहती है: तू सही कह रही हो कविता. मुझे भी ये अहसास बहुत दिनों बाद मिला है.

दीपू उन दोनों को देख कर: ये तो बहुत नाइंसाफी है. तुम दोनों तो मजे ले रहे हो और देखो मेरी हालत और अपने खड़े लंड पे इशारा करता है. ये शाम से ही ऐसा खड़ा है जब से बुआ को देखा है. इसका कुछ करो ना... उसका खड़ा लंड देख कर दोनों भी उसके पास आते है और दोनों मिल कर उसके होंठ पे टूट पड़ते है. तीनो में फिर से एक मस्त गहरा चुम्बन चलता है और दीपू भी अपने हाथ से दोनों की गांड भी दबा देता है.

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दोनों फिर अलग होते है और एक दुसरे को देख कर दोनों एक साथ घुटने पे बैठ कर दीपू का लंड निकल कर दोनों खूब मस्त से दीपू का लंड चूसते है. इसमें दीपू को भी मजा आ रहा था. वो अपने लंड से वसु का मुँह चोदता है तो वहीँ कविता की उसकी गोटियों से खेलते रहती है.

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दीपू तो अपना पूरा ८. ५ इन लंड वसु के गले तक उतार देता है जिसे वसु भी बड़े मजे से चूसने और चाटने लगती है. थोड़ी देर बाद दीपू फिर कविता का मुँह चोदने लगता है और कविता भी अपने थूक और मुँह से दीपू का लंड को पूरा गीला कर देती है.

ऐसा सिलसिला करीब १०- १५ Min तक चलता है जहाँ दोनों बीवी बारी बारी से दीपू के लंड को शेयर करते है. दीपू तो जैसे जन्नत पे पहुँच गया था. आखिर में उससे भी रहा नहीं जाता और गुर्राते हुए कहता है की वो झड़ने वाला है तो वसु और कविता दीपू को देख कर कहते है की हमारे मुँह में ही अपना रस पीला दो.. बहुत दिनों से हमने भी तुम्हारा रस चका नहीं है.

दीपू से भी रहा नहीं जाता और ऐसे ही ३- ४ और धक्के मार कर आखिर में अपना पानी छोड़ देता है जिसे दोनों बड़े चाव से अपने मुँह में ले लेती है. दीपू तो जैसे रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था.. करीब १-२ Min तक वो झड़ते रहता है तो उसका पानी दोनों की चूचियों पे भी गिर जाता है. आखिर में उसका मुरझाया हुआ लंड अपने मुँह से अलग कर के वसु और कविता फिर से चुम्बन में जुड़ जाते है और दीपू का पानी फिर से एक दुसरे की जुबां से चूसते हुए चक लेते है. कुछ बूँदें उनकी चूचियों पे भी गिरता है तो दोनों बारी बारी से एक दुसरे की चूचियां भी साफ़ कर लेती है.

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तीनो थोड़ा थक जाते है तो बिस्तर पे जाकर लेट जाते है तो दोनों वसु और कविता दीपू के कंधे पे अपना सर रख कर तीनो एक दुसरे को देखते है.

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कविता: एक बात कहूँ.

वसु: बोल.

कविता: हम सब को पता है की मीना यहाँ बहुत दिनों से है और क्यों है. वो मुझसे कह रही थी की वो अपने घर भी वापस जाना चाहती है और उसे घर की याद भी बहुत आ रही है और मनोज की चिंता भी हो रही है.

वसु: मैं समझ सकती हूँ कविता.

कविता दीपू की तरफ देख कर... जैसे पूछ रही हो की तुम क्या कहना चाहते हो...

दीपू: तुम ठीक कह रही हो. एक काम करो. मैं जानता हूँ की ये सब उसके साथ पहली बार होगा तो बहुत शर्माएगी. तो तुम ही उसे तैयार करो और हाँ तुमने भी उसके साथ ही रहना है. समझी?

कविता: मतलब?

वसु: अरे पगली इसका मतलब है की तुम, मीना और ये... एक साथ.. समझी?

कविता: ना बाबा ना... मुझे बहुत शर्म आएगी...वो भी मेरी बेटी के साथ... ना बाबा ना...

दीपू: अब तुम ही अपने पती के सामने ऐसे शरमाओगी तो फिर मीना का क्या होगा? सोचा हैं तुमने? वो तो तुमसे भी ज़्यादा शर्माएगी. इसीलिए कह रहा था की तुम ही उसे तैयार करो. कविता ना ना करती है और कहती है तुम दोनों के साथ रहना और बेटी के साथ रहने में बहुत फरक है .लेकिन वसु भी उसे समझाती है की दीपू जो कह रहा है वो सही है. और मीना की बात भी सही है की मनोज गांव में अकेला है तो उसकी भी देखभाल करना ज़रूरी है. आखिर में कविता मान जाती है.

दीपू: माँ तुम मुझे बुआ के बारे में अभी बताने वाली थी. क्या बात है?

वसु: तो तुझे याद है वो बात.

कविता: कौनसी बात?

इस बार वसु आगे आकर दीपू के सामने ही कविता का सर पकड़ कर उसको चूमते हुए कहती है... लगता है कि एक और चिड़िया इसकी दीवानी हो गयी है.

दीपू और कविता एक साथ: समझे नहीं.

वसु: दीपू याद है पिछले हफ्ते जब तुम्हारी तबियत खराब हो गयी थी और हम डॉक्टर के पास गए थे और उस दिन रात को जब दिव्या तुम्हे हल्का कर रही थी.

दीपू: हाँ याद है.

कविता: उसे समझ नहीं आता तो पूछती है ये हल्का का क्या मतलब है?

वसु: पगली दिव्या इसके लंड को अच्छे से चूस कर इसका पानी गिरा रही थी क्यूंकि उस दिन डॉक्टर ने ऐसा कहने को कहा था.

दीपू: हाँ याद है लेकिन इसका बुआ से क्या लेना है?

वसु: बात ये है की जब तुम दोनों कमरे में थे तो लता तुम दोनों को बहार खिड़की के पास खड़े होकर तुम दोनों के जलवे देख रही थी और अपनी चूत को मसलते हुए अपने आप को शांत कर रही थी. मैंने उसे ये करते हुए देखा और पुछा तो उसने मुझे अंदर का नज़ारा दिखाया जहाँ तुम दोनों बहुत मजे कर रहे थे. मुझसे भी रहा नहीं गया वो scene देख कर तो मैं भी थोड़ा आगे बढ़ गयी.

तुम तो जानते हो की लता का तलाक क्यों हुआ है. वो भी हमारी तरह एकदम चुड़क्कड़ औरत है और उसने भी लंड लेकर बहुत दिन या कहूँ साल हो गए है और वो भी लंड के लिए तड़प रही है. तो इसीलिए आज तुम्हे रिझाने के लिए ऐसे सेक्सी कपडे पहन कर तुम्हारे पास आयी थी. अब समझे की एक और चिड़िया क्यों फस रही है?

कविता: अब समझी. दीपू को देख कर... लगता है तुम्हे और तुम्हारे लंड को बहुत आराम करने की ज़रुरत है और ऐसा कहते हुए दोनों वसु और कविता हस देते है.

दीपू: कविता आज तुम यहीं सो जाओ और फिर तीनो सो जाते है.



जन्मदिन



कुछ दिन बाद वसु का जन्मदिन था. ये बात सब को पता था. तो सुबह सुबह सब लोग उसे उसकी जन्मदिन की बधाई देते है लेकिन तब तक दीपू उठा हुआ नहीं था तो वसु को थोड़ी जलन होती है की सबने तो उसे बधाई दी है लेकिन उसका बेटा और साथ में पती भी घोड़े बेच कर सो रहा है.

सब लोग कहते है की उसकी जन्मदिन कैसे मनाया जाए तो वसु कुछ नहीं कहती और वो एक तरह से दीपू का इंतज़ार करती है.

जब काफी देर तक दीपू नहीं आता तो वो थोड़े गुस्से से उसके कमरे में जाती है लेकिन उसे दीपू बिस्तर पे नहीं दीखता. वो पलट कर जाने लगती है तो दीपू पीछे से उसको पकड़ते हुए अपनी तरफ घुमा कर उसके होंठों को चूमते हुए दीपू वसु को जन्मदिन की बधाई देता है. चुम्बन उसका एकदम गीला और रस से भरा हुआ था और जैसे दोनों एक दुसरे की जुबां को खा लेना चाहते हो.

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वसु थोड़ी झूटी नाराज़गी दिखाते हुए कहती है: मैं तो तुम्हारा सुबह से इंतज़ार कर रही थी और सोची थी की तुम ही सबसे पहले मुझे विश करोगे. लेकिन तुमने सबसे आखरी में विश किया है और प्यार से उसके सीने में मुक्का मारती है.

दीपू: मैं जानता हूँ जान लेकिन सच बताना सिर्फ मैंने ही तुम्हे ऐसा विश किया है ना और ऐसा कहते हुए फिर से अपने होंठ वसु के होंठों से जोड़ देता है तो इस बार वसु भी पूरे प्यार से उसका साथ देते हुए दोनों चूमते है और एक दुसरे की जुबां को लड़ाते है.

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२ Min तक उनका मस्त गहरा किस चलता है. फिर दोनों अलग होते है तो जैसे उनकी सांसें बंद हो गयी थी.

दीपू: बोलो मैंने सही कहा ना?

वसु: एकदम सही. ऐसे बधाई किसीने मुझे नहीं दिया है.

दीपू: अच्छा जान तुम्हे तो पता है ना की मुझे आज तुमसे क्या चाहिए तुम्हारे जन्मदिन पे जो तुमने बहुत पहले भी वादा किया था. वसु को इस बारे में पता था लेकिन जैसे उसे मालूम नहीं वैसे रियेक्ट करती है.

वसु: मुझे तो कुछ भी याद नहीं है जानू. तुम किस बारे में बात कर रहे हो. लेकिन दीपू उसकी आँखों में देखता है तो समझ जाता है तो दीपू फिर से उसे अपने सीने से लगा लेता है और अपना हाथ पीछे ले जाकर उसकी गांड को मसलते हुए उसकी साडी के ऊपर से ही उसकी गांड के छेद को टटोलते हुए उसके कान में कहता है: मुझे तुम्हारा ये तोहफा चाहिए.

वसु: ना बाबा मैंने कभी वहां लिया नहीं है तो ये तोहफा भूल ही जाओ.

दीपू: ऐसे कैसे? तुम मुझे एक तोहफा दो. मैं तुम्हे भी एक तोहफा दूंगा.

वसु दीपू की तरफ देख कर: तुम कौनसा तोहफा देने वाले हो?

दीपू वसु के कान में कहता है: तोहफा ये है की, और ऐसा कहते हुए दीपू वसु के पेट के ऊपर हाथ रख कर... जल्दी ही तुम्हारा पेट फुला दूंगा और तुम्हे फिर से माँ बना दूंगा और तुम मुझे भी एक बाप बना दोगी. बोलो कैसा रहेगा मेरा तोहफा जो की हम दोनों के लिए रहेगा?

वसु दीपू की बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और उसके सीने में फिर से हल्का सा मुक्का मारते हुए फिर से प्यार से उसके होंठ को चूम के वहां से भाग जाती है.

फिर देर सुबह दीपू के कहने पे कविता दोनों ऋतू और निशा को भी शाम को घर पे खाने के लिए बुलाती है. वो वजह पूछते है तो कविता उन्हें बताती है की वसु का जन्मदिन है तो सब मिलकर उसे मनाएंगे. जब शाम होती है तो वसु भी तैयार होने चले जाती है और उसी समय ऋतू और निशा भी वहां आ जाते है. दीपू एक केक लाता है और सब वसु की आने की राह देखते है. थोड़ी देर बाद जब वसु कमरे से बहार आती है तो सब लोग उसे देख कर एकदम दंग रह जाते है क्यूंकि वो बहुत सुन्दर दिख रही थी जब वो सज कर आयी थी. वसु को देखते ही दीपू का लंड उसके Pant में तन जाता है और ऐसा ही कुछ हाल बाकियों का भी होता है (याने बाकी भी उसे देख कर उत्तेजित हो जाते है). वो ऐसे सज के आयी थी जैसे आज उसकी शादी हो जबकि आज उसका जन्मदिन था.

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वसु ऋतू और निशा को देख कर बहुत खुश हो जाती है और दोनों को गले से लगा लेती है. दोनों भी फिर वसु को उसकी जन्मदिन की बधाई देते है और फिर वसु दीपू के लाये हुए केक को काट कर उसका जन्मदिन मनाते है.

फिर सब लोग अच्छा स्पेशल खाना खाते है जो आज कविता और दिव्या ने बनाया था वसु के जन्मदिन की ख़ुशी में.

खाना खाने के बाद ऋतू और निशा अपने घर जाने की बात करते है तो दीपू वसु और बाकी सब भी उन्हें उस दिन रुकने को कहते है लेकिन ऋतू नहीं मानती तो दीपू उन्हें उनके घर छोड़ने के लिए उन साथ चला जाता है.

खाना खाने के बाद सब साफ़ सफाई कर के दिव्या और कविता किचन में जाकर वसु को बुलाते है. वसु जब वहां आती है तो दोनों दिव्या और कविता एक दुसरे को देखते है और वसु को गले लगा लेते है और पहले दिव्या फिर बाद में कविता वसु के होंठ चूम कर कहते है: जन्मदिन की बधाई हो.

तुम तो आज बहुत सुन्दर और सेक्सी लग रही हो इन कपड़ों में. तुम्हे देख कर तो हमारी चूत भी गीली हो गयी है. पता नहीं दीपू का क्या हाल होगा.

दिव्या एक केक का टुकड़ा अपने मुँह में लेकर उसे वसु को खिलाती है तो वसु समझ जाती है और वो भी दिव्या के मुँह से वो केक का टुकड़ा ले लेती है और दोनों एक मस्त गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है. २ Min बाद...

दिव्या: तुझे याद है दीपू के जन्मदिन पे उसने ऐसे ही हमें केक खिलाया था. वसु दिव्या की आँखों में देख कर हाँ कहती है तो कविता भी दिव्या की तरह एक केक का टुकड़ा अपने मुँह में ले लेती है और वसु को खिलाती है और वो दोनों भी केक को खाते हुए एक दुसरे के होंठों का रस चूस लेते है.

दिव्या: ऋतू और निशा के होते हुए हम तुम्हें ऐसा केक नहीं खिला सकते थे... इसीलिए तुम्हे यहाँ बुलाया है.

दिव्या: वैसे तुम लोगों ने महसूस किया है क्या.... हम तीनो की चूचियों का साइज और आकर भी थोड़ा बढ़ गया है.

कविता: हाँ मैंने भी महसूस किया है. वो फिर वसु की चूचियों को दबाते हुए... बढ़ेंगे क्यों नहीं... हमारा पती तो रोज़ इन्हे चूस चूस कर और दबा दबा कर हमें बेचैन करता है तो ये तो बढ़ने ही थे.

दिव्या कविता से धीरे से... हमारी तो सिर्फ चूचियां ही बढ़ी है और उसकी गांड पे अपना पंजा रख कर... तेरी तो गांड भी उभर आयी है.

कविता ये सुनके शर्मा जाती है और कहती है... हाँ उभर ही आएंगे ना... जब से उसने हमारी सुहागरात में मेरी गांड मारी है तब से तो वो उसका दीवाना हो गया है.

ऐसे ही थोड़ी मस्ती करने के बाद तीनो हॉल में आ जाते है तो लता उनको देख कर पूछती है की आपस में क्या मस्ती हो रही है? वसु कुछ बहाना बना देती है और वो सब दीपू का इंतज़ार करते है और थोड़ी देर बाद दीपू भी ऋतू और निशा को उनके घर छोड़ कर वापस आ जाता है.



तोहफा



दीपू के आने के बाद दिव्या कहती है की रात बहुत हो गयी है... सोने का टाइम आ गया है और वो दीपू की तरफ देख कर आँख मार देती है जैसे कहना छा रही हो की वसु के साथ वो भी मजे करे. लेकिन दीपू के मन में तो कुछ और ही ख्याल था. वो कमरे में जाता है और वहां से कविता को बुलाता है. जब कविता अंदर आती है तो...

दीपू: आज सिर्फ मैं और माँ ही साथ सोयेंगे. आज तुम मीना के साथ और दिव्या और बुआ सो जाओ या फिर सब एक साथ सो जाओ. आज माँ का जन्मदिन है तो वो मेरे साथ ही गुजारेगी.

कविता: ऐसे क्यों कहते हो. वो भी तो हमारी ही है. हमें भी उसके साथ सोने दो ना.

दीपू: आज के लिए मेरी बात मान लो. कल से मैं किसीको मना नहीं करूंगा और सब एक साथ सो जाएंगे. और हाँ हमारे कमरे से बाहर जाने के बाद एक तेल की शीशी यहाँ रख देना ताकि किसीको पता ना चले.

कविता ये बात सुनकर एकदम हैरान हो जाती है और दीपू की बात समझने की कोशिश करती है तो दीपू कविता को अपनी बाहों में लेकर: हाँ तुम जो सोच रही हो आज वही होगा. माँ ने भी कहा था की जन्मदिन तक सबर करे.

कविता: याने तुम आज रात को...

दीपू: हाँ जान आज रात को माँ की गांड का उद्धघाटन करना है जैसे मैंने हमारी सुहागरात में तुम्हारा किया था और ऐसा बोलते हुए दीपू कविता की गांड दबा देता है और अपनी ऊँगली से उसकी साडी के ऊपर से उसकी गांड में ऊँगली करता है.

कविता सिसकी लेती है और कहती है: मैं भी साथ रहती हूँ ना वसु के साथ. आज तुम दोनों की गांड मार लेना.

दीपू: तुम्हारी बात भी सही है लेकिन आज माँ का जन्मदिन है तो अकेले ही... चिंता मत करो... तुम्हारी ये ख्वाइश भी जल्दी पूरी करूंगा और सिर्फ वसु के साथ नहीं.

कविता: मतलब?

दीपू: कविता के होंठ चूमते हुए... मतलब ये की जब तुम और मीना एक साथ रहोगे तब... और हस देता है.

कविता: ना बाबा ना... मैं मीना के सामने अपनी गांड नहीं मरवाऊँगी.

दीपू: चलो देखते है. अभी कमरा खाली करो और वसु को बोलो की जल्दी वो तैयार होकर यहाँ आये और फिर दोनों कमरे से निकल जाते है.

कविता फिर किचन में जाती है और चुपके से एक तेल की शीशी दीपू के कमरे में रख देती है और फिर वापस किचन में आकर वसु को बुलाती है.

वसु: क्यों बुलाया है?

कविता: कल तुम सुबह आराम से जागना. चाय मैं या और कोई बना देंगे और तुझे कमरे में लाकर दे देंगे.

वसु: ऐसा क्यों भला? मैं देर सुबह तक क्यों सोती रहूंगी?

कविता: अरे मेरी बन्नो और वसु को अपनी बाहों में लेकर उसके होंठ चूमते हुए... आज तुम्हारा जन्मदिन है ना... तो दीपू तुम्हे तोहफा जो दे रहा है.

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कविता के बात सुनकर वसु उसकी तरफ आँखें फाड़ते हुए देखती है तो कविता एक हाथ से उसकी चूची दबाती है तो दुसरे हाथ से उसकी गांड को सहलाते हुए... हाँ दीपू ने मुझे बताया है. आज तुम भी पूरी औरत बन जाओगी और जब दीपू को मोटा और लम्बा डंडा जब तुम्हारी गांड में जाएगा तो तुम्हे थोड़ी तकलीफ होगी लेकिन बाद में तुम्हे बहुत मजा आएगा और उसके लंड पे उछलते रहोगी. समझी मेरी बन्नो.

वसु इस बात पे शर्मा जाती है तो कविता कहती है: चल तैयार होकर कमरे में जा. तेरा पती तेरा इंतज़ार कर रहा है और फिर से कविता वसु को चूम कर दोनों बहार आ जाते है और कविता सब को कहती है की आज सिर्फ दीपू और वसु ही एक साथ सोयेंगे और कोई नहीं. कोई और कुछ नहीं कहता तो सब लोग अपने कमरे में सोने चले जाते है और वसु अच्छे से तैयार हो कर दीपू के कमरे में जाती है जहाँ वो पहले से ही उसका इंतज़ार कर रहा था.



कमरे में:



कमरे में जब वसु आती है तो दीपू उसे देखता ही रह जाता है क्यूंकि वसु बहुत सेक्सी तरीके से उसके लिए सज कर आयी थी. उसकी साडी ट्रांसपेरेंट थी जिसमे से उसका पूरा बदन एक रौशनी की तरह चमक रहा था और उसके मस्त ठोस चूचियां आधे से ज़्यादा बहार थे जैसे बाहर आने के लिए तड़प रहे हो. और उसनी अपनी साडी नाभि से ३ इंच नीचे बंधा था... या फिर ये कहे की अपनी चूत के जस्ट ऊपर बाँधा था.

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वसु भी कविता की बात सुनकर वो भी बहुत उत्तेजित थी और दीपू को देखते ही उस पर टूट पड़ती है और सीधा उसके होंठों पे कब्ज़ा कर लेती है जिसका दीपू को ऐतराज़ नहीं था और वो भी वसु की जीभ को पूरा चूसते रहता है. वसु भी दीपू की जीभ को अपने मुँह में लेकर दोनों एक दुसरे का रस पीते रहते है. ये किस बहुत देर तक चलता और जब दोनों अलग होते है तो उनकी सांसें उखड़ती रहती है.

दीपू: ये तो मेरे लिए भी नया है. इतना ज़बरदस्त किस तो मैंने भी आज तक तुमको नहीं किया था.

वसु: अब चुप कर और आज मुझे ठंडा करो. आज मैं बहुत गरम हूँ और अपनी पूरी गर्मी आज तुम मुझ पे उतार दो और ऐसा कहते हुए वसु फिर से दीपू के होंठ पे टूट पड़ती है और फिर से उन दोनों के बीच उनकी जुबां की लड़ाई शुरू हो जाती है.

जब दोनों चूम रहे होते है तो दीपू वसु की ब्लाउज निकल फेकता है और देखता है की उसने ब्रा नहीं पहना था. ५ Min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अलग होते है और दोनों के मुँह से लार टपकती रहती है. वसु उत्तेजना में दीपू का सर पकड़ कर अपनी ठोस चूचियों पे दबा देती है और दीपू भी अब पीछे नहीं रहने वाला था. वो भी वसु की चूचियों पे टूट पड़ता है और अपनी जुबां से चूसते छाते हुए वसु को भी मजा देता है.

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पहले एक फिर बाद में दुसरे के साथ भी यही करता है और दीपू के चूसने और चाटने से ही वसु अभी पहली बार झड़ जाती है और उसकी जांघें भी गीली हो जाती है क्यूंकि पानी चूत से निकल कर उसकी जांघें गीली कर देती है.

दीपू फिर वसु को सुला देता है और उसकी गहरी नाभि को चूमता और चाटता है तो जैसे वसु जन्नत पे पहुँच जाती है और दीपू का सर उसकी नाभि पे दबा देती है. दीपू नाभि को चूमते हुए उसकी साडी को निकल देता और पेटीकोट का नाडा खोलता है तो वसु भी उसकी मदत करते हुए अपनी गांड उठा देती है और वसु उसकी पेटीकोट भी निकल फेंकता है और उसे पूरा नंगा कर देता है और वो नाभि को चूमते हुए नीचे आता है और उसकी रस से भरी हुई एकदम फूली हुई गुलाबी चूत देखता है तो देखते ही रह जाता है.

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दीपू: लगता है पूरी तैयारी कर के आयी हो.

वसु: हां मुझे भी पता है की तुम मेरी पैंटी वैसे ही निकालने वाले हो तो पेहेनना का क्या फायदा? और वैसे भी पहनती तो वो भी भीग जाती और उसे फिर से धोना पड़ता और हस देती है. देखो तुमने मुझे कितना उत्तेजित कर दिया है.

दीपू: हाँ दिख तो रहा है की तुम्हारी चूत एकदम रस बहा रही है.

वसु: फिर देखते ही रहोगे क्या और ऐसा बोल कर वसु दीपू का सर पकड़ का अपनी रस बहाती चूत पे धस देती है और दीपू भी बड़े चाव से वसु की चूत चाटने लग जाता है ऊपर से नीचे तक और फिर उसकी गांड को भी चाटता है तो वसु एकदम सीहक जाती है और दीपू का सर और ज़ोर से दबा देती है.

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5-10 min तक दीपू उसकी चूत चाटता है और अपनी दो उंगलियां भी उसकी चूत में दाल कर अंदर बाहर करते हुए उसको दुगना मज़ा देता है.... अपनी जुबां से और अपनी उँगलियों से भी. आखिर में वसु से रहा नहीं जाता तो फिर से एक और बार झड़ जाती है और दीपू उसका पानी शरबत जैसे समझ कर पूरा पी जाता है और उसके ऊपर आकर उसको चूमते हुए... कैसे लगा मेरी जान?

वसु: बहुत मजा आया.. तुमने तो मुझे पूरा थका ही दिया है.

दीपू: अभी कहाँ... अभी तो रात शुरू ही हुई है और ऐसा कहते हुए दीपू बिस्तर पे सो जाता है और वसु को खींचते हुए अपने मुँह पे बिठा लेता है और वसु भी अपनी चूत को उसके मुँह पे रगड़ते हुए मजे लेती है तो दीपू अपनी एक ऊँगली उसकी गांड में डालने की कोशिश करता है तो उसकी गांड जो कुंवारी थी तो बहुत टाइट थी और उसकी ऊँगली भी अंदर नहीं जा पाती.

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दीपू वैसे ही वसु को अपने मुँह पे बिठाते हुए उसे फिर से जन्नत की सैर कराता है और आखिर में वसु फिर से हार जाती है और अपना पानी बहाते हुए वो बगल में गिर कर ज़ोर ज़ोर से आंहें भरते हुए दीपू को देखती है जो अपनी जुबां से उसकी पानी चाट रहा था.

वसु दीपू की तरफ देखती हैं और उसे प्यार से चूमते हुए वो भी नीचे जाती है और उसके खड़े लंड को पकड़ कर... वसु: लगता है ये महाराज तो आज कुछ ज़्यादा ही जोश में है. (दीपू कब का नंगा हो गया था वसु की तरह). दीपू: हाँ होगा ही ना... जिस तरह से तुम उत्तेजित थी... वही मेरा महाराज भी उत्तेजित था. अब बातें काम और काम ज़्यादा और मुझे भी जन्नत की सैर कराओ... और ऐसा कहते हुए दीपू वसु के सर को पकड़ कर अपने लंड भी झुकाता है तो ये तो वसु के लिए निमंत्रण ही था. वो भी बड़े मजे से दीपू के लंड को चूमते और चाटते हुए उसका पूरा लंड मुँह में ले लेती है. वसु भी आज पूरे जोश में थी और अपने थूक और लार से दीपू का पूरा लंड एकदम गीला कर देती है. दीपू भी उसके मुँह लो लगता चोदते रहता है और ५- १० मं के बाद जब दीपू को लगता है की अगर वसु रुकी नहीं तो वो झड़ जाएगा तो दीपू अपना लंड वसु के मुँह से निकलता है. वसु का तो ऐसे हाल था जैसे कोई बच्चे से एक चॉकलेट किसीने छीन लिया हो.

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दीपू फिर वसु को सुला कर उसके पेअर को अपने कंधे पे रखते हुए बिना उसे बताये पूरा एक बार में ही अपना लंड उसकी पूरी गीली हुई चूत में उतार देता है. वसु को बड़ा सुकून मिलता क्यूंकि आज कई दिनों बाद वो दोनों अकेले थे और काफी दिनों बाद दीपू ने उसे चोदा था.

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वसु: आह दीपू.... कितना अच्छा लग रहा है. बहुत दिनों बाद तुमने एक बार में ही अपना लंड मेरी चूत में पूरा एक साथ ही घुसा दिया है. उसके चेहरे के एक्सप्रेशंस बता रहे थे की उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था बहुत दिनों के बाद इस चुदाई में.

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देपु: जान मुझे भी बहुत अच्छा लगा और ऐसा कहते हुए दीपू भी अब पूरे जोश में वसु को चोदने लगता है और उसका लंड भी किसी पिस्टन की तरह वसु के गीली चूत में अंदर बाहर होते रहता है.

कहने की बात नहीं है की पूरे कमरे में दोनों की सिसकारियां और आहात से पूरा कमरा गूँज रहा था. हो भी सकता है की उनकी आवाज़ें घर के बाकी लोगों को भी सुनाई दे लेकिन आज वो दोनों बिना किसी के डरे पूरे मजे ले रहे थे और एक दुसरे को दे भी रहे थे.

10 – 15 Min की ऐसी धुआंदार चुदाई के बाद जब दोनों थोड़ा थक जाते है तो अब दीपू बिस्तर पे सो जाता है और वसु उसके लंड पे बैठ कर ऊपर नीचे कूदतते रहती है. दीपू भी उसकी उछलती चूचियों को पकड़ कर वो भी मस्ती में दाना दान वसु को पेलते रहता है.

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आखिर में दोनों थक जाते है तो दीपू फिर से वसु को पलटा कर पेलते हुए आखिर में ज़ोर से गुर्राते हुए अपना पूरा माल वसु की चूत में ही छोड़ देता है और उसके पूरे बच्चेदानी में अपना पानी छोड़ देता है जिसका अहसास वसु को भी होता है. लेकिन आज इस दुमदार चुदाई से वसु बहुत खुश थी और सच में आज उसका जन्मदिन बहुत “अच्छे से मना था”.

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दोनों थके हारे वसु दीपू के कंधे पे सर रख कर: आज तो तुमने मुझे बहुत अच्छा तोहफा दिया है. तुमने तो अपना पूरा गाढ़ा माल मेरा अंदर ही डाला है जो मैंने भी महसूस किया है. लगता है आज इस रात हम दोनों को तोहफा मिलेगा और शर्म से अपना चेहरे झुका लेती है.

दीपू: वसु की ओर देख कर: अरे डार्लिंग अभी तक तो तुम्हे तोहफा दिया ही नहीं है. ये तो एक ट्रेलर था. पिक्चर तो अभी पूरी बाकी है और ऐसा कहते हुए दीपू वसु को अपनी गोद में उठा लेता है और वो बाथरूम की तरफ जाता है. वसु एकदम चक्र जाती है दीपू के ऐसा करने से लेकिन उसे भी अच्छा लगता ही उसका पती उसका कितना ख्याल रख रहा है. दोनों फिर बाथरूम में जाकर दोनों एक दुसरे को साफ़ करते है.

दोनों फिर बाहर आकर एक दुसरे की बाहों में रहते हुए बातें करते है.

वसु: मुझे बहुत अच्छा लगा जब तुमने मुझे अपनी गोद में लेकर बाथरूम गए थे.

दीपू: मुझे पता है... आज की दुमदार चुदाई से तुम एकदम थक गयी होगी और शायद तुम्हे चलने में भी तकलीफ होती. चलो कोई नहीं.. तुम्हे अच्छा लगा तो ठीक बात है. अब तुम्हारे तोहफे का समय आ गया है. वसु को पता था इसका मतलब लेकिन वो दीपू को मनाने की कोशिश करती है की वो ना करे. लेकिन दीपू कहाँ मानने वाला था.

दीपू: किसी और दिन होता तो शायद मैं मान जाता. लेकिन आज तुम्हारा जन्मदिन है और तुमने वादा भी किया था. चिंता मत करो... मैं एकदम आराम से करूंगा... और देखो तुम्हारी सौतन भी तुम्हारा कितना ख्याल रखती है. वो तुम्हारे लिए एक तेल की शीशी भी लायी है ताकि तुम्हे तकलीफ ना हो.

वसु दीपू की ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और आखिर में वो भी मान जाती है.

दीपू: चलो तुम घोड़ी बन जाओ तो वसु भी एक आज्ञाकारी बीवी की तरह घोड़ी बन जाती है और अपनी गांड थोड़ा उठा देती है. दीपू के मुँह में उसकी उठी हुई गांड देख कर पानी आ जाता है और उसकी गांड की पाटों को अलग करते हुए थोड़ा फैला कर उसकी गांड को चाटने लगता है.

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वसु को पहले थोड़ी दिक्कत और जलन लगती है लेकिन कुछ देर बाद उसे भी मजा आने लगता है. दीपू भी थोड़ी थूक और तेल से वसु की गांड को गीला करता है और चाटते हुए अपनी एक ऊँगली बड़ी मुश्किल से अंदर डालता है. पहले तो थोड़ी मुश्किल से उसकी ऊँगली अंदर जाती है लेकिन थूक और तेल की चिकनाहट से आखिर में पूरा अंदर चला जाता है और कुछ देर पहले जैसे उसकी चूत के साथ किया था... दीपू वही उसकी गांड के साथ भी करता है... याने अपनी जुबां और ऊँगली से उसकी गांड को चाटने और चोदने लगता है. उसके इस दोहरे हमले से वसु फिर से एक और बार झड़ जाती है जिससे उसे बहुत सुकून मिलता है. कुछ देर बाद दीपू भी वसु से अपना लंड चुसवाते है और जब दीपू का लंड भी पूरा तन जाता है तो वो वसु को सुला कर उसके पेअर को अपने कंधे प्रे रख लेता है और वसु की तरफ देखता है.

वसु आखिर में हां कह देती है और आने वाले हमले की राह देखती है. दीपू अपना लंड उसकी गांड में डालने की कोशिश करता है तो फिसल जाता है और चूत से टकरा जाता है. वसु एक सिसकारी लेती है. दीपू फिर बगल में रखे तेल से अपने लंड को पूरा गीला करता है और वैसे ही तेल वसु की गांड के छेद पे भी दाल कर उसे भी गीला कर देता है.

दीपू फिर से कोशिश करता है और फिर फक की हलकी आवाज़ के साथ उसका सुपाड़ा अंदर चला जाता है.

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वसु को बहुत दर्द होता है जैसे किसीने उसकी गांड में एक रोड दाल दिया हो. वसु ज़ोर से चिल्लाती है और उसकी आँखों से आंसूं बहने लगते है. दीपू को पता था की पहली बार ये होना ही है तो वो झुक कर उसके आंस्सों पीते हुए उसके होंठ को चूमता है. बस जानू थोड़ा सेहन कर लो... आगे बहुत मजा आने वाला है और फिर वो उसकी चूची को पीने लगता है. वसु को थोड़ी राहत मिलती जो सिर्फ १ मं तक ही रहता है. वसु की चूची पीने के बाद दीपू फिर से वसु के होंठों को ज़ोर से चूमता है और उसी वक़्त दीपू पूरी दम से एक और झटका मारता है और इस बार उसका आधे से ज़्यादा लंड वसु की गांड में चला जाता है. अगर दीपू उसका मुँह बंद नहीं करता तो शायद बगल के कमरे में सोये लोग दौड़ कर यहां आ जाते. वसु का दम घुटने लगता है क्यूंकि दीपू ने उसका मुँह अपने मुँह में रख लिया था. वो अपने हाथ दीपू की पीठ पे रख कर अपने नाखून से दीपू की पीठ को रगड़ देती है और उसपर खरोच भी आ जाते है. लेकिन दीपू उसकी परवाह नहीं करता है ऐसे ही वसु को देखते हुए आखिर में एक और झटका मारता है और उसका पूरा लंड वसु की गांड के जड़ तक समा जाता है. वसु काहाल बहुत बुरा हो गया था और दीपू वैसे ही अपना लंड वसु की गांड में रखते हुए ३- ४ Min तक ऐसे ही रहता है.

5 Min बाद जब वसु अपनी आँखें खोलती है तो वो रो रही थी. दीपू बड़े प्यार से उसके आंसूं पोछते हुए कहता है... जानू जो दर्द तुम्हे होना था वो हो गया. अभी कुछ देर में तुम्हे मजा भी आने वा है. वसु कुछ नहीं कहती और दीपू को देखती रहती है. इस वक़्त दोनों कुछ नहीं करते और एक दुसरे को ही देखते रहते है.

कुछ देर बाद जब वसु को थोड़ी राहत मिलती है तो वो दीपू को अपने आँखों से इशारा करती है तो दीपू हस देता है और फिर अपने लंड को थोड़ा बाहर निकल कर फिर से अंदर डालता है और फिर धीरे धीरे उसकी गांड की कुटाई करने में लग जाता है. पहले तो वसु को थोड़ी जलन होती है और दर्द भरी आवाज़ निकालती रहती है लेकिन कुछ देर बाद वो आवाज़ सिसकारी में बदल जाती है और अब वसु को भी इस गांड चुदाई में मजा आने लगता है.

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वसु: जानू ऐसे ही गांड मारो. अब मजा आ रहा है. पहले दर्द देते हो फिर मजा भी देते हो.

दीपू: मैंने कहा था ना... दर्द के बाद मजा... और वैसे भी दर्द में भी मजा है.

वसु दीपू की ये बात सुन कर उसके कंधे पे मुक्का मारती है और वो भी अपनी गांड चुदाई का मजा लेने लगती है.

थोड़ी देर बाद दीपू वसु को घोड़ी बना देता है और फिर पीछे से उसकी गांड मारने लगता है.

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इसमें दोनों को बहुत मजा आ रहा था. वसु तो इतने मजे में थी की उसको पता भी नहीं चलता कितनी बार वो झड़ चुकी है इस रात... पहले चूत की कुटाई और अब गांड की कुटाई में. दीपू वसु की गांड मारते हुए आगे झुक कर उसकी झूलती हुई चूचियों को पकड़ कर उसे मसलने लगता है और इस दोहरे हमले में वसु को भी बहुत मजा आता है.

१० मं तक ऐसे ही चोदने के बाद दीपू बिस्तर पे लेट जाता है और वसु अपनी गांड उसके लंड पे रख कर उछलने लगती है.

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अब उसका गांड भी काफी हद तक खुल गया था और अब लंड बड़े आसानी से उसकी गांड में अंदर बाहर हो रहा था. अब पूरे कमरे में फच फच की आवाज़ों से कमरा गूँज रहा था और ये आवाज़ दोनों के लिए एक तरह से निमंत्रण था. दीपू भी बड़ी शिद्दत से वसु की गांड मार रहा था और वसु भी ऐसे ही उत्तेजित होकर अपनी गांड मरवा रही थी. ये सिलसिला काफी देर तक चलता रहा और आखिर में दीपू से भी रहा नहीं जाता वो आखरी में ३- ४ ज़ोरदार झटके मारते हुए वसु की गांड में ही झड़ जाता है. जब से वो दोनों बाथरूम से आये थे... अब तक एक घंटे से ज़्यादा हो गया था. अभी आधी रात हो गयी थी और दोनों भी बहुत थक चुके थे. आखिर में वसु भी दीपू के बगल में लुढ़क कर गिर जाती है और फिर थोड़ी देर बाद दीपू के कंधे पर अपना सर रख कर अपनी सांसें दुरुस्त करती रहती है. थोड़ी देर बाद...

वसु दीपू से: तुमने आज मेरी ज़िन्दगी का सबसे अच्छा तोहफा दिया है. मैंने अपनी जन्मदिन इतना अच्छा कभी नहीं बिताया है.



दीपू भी प्यार से वसु का माथा चूमते हुए... मेरे लिए भी आज का दिन स्पेशल था. चलो अब सो जाते है... वर्ण सुबह उठने में देरी होगी. वसु: देरी तुम्हे होगी... मुझे नहीं. दीपू: मतलब? वसु: बुद्धू देरी तुम्हे ऑफिस में जाने के लिए होगी. मैं तो घोड़े बेच कर सोने वाली हूँ. दोनों इस बात पे हस देते है और एक दुसरे की बाहों में सो जाते है.

Note: This time also, took a lot of effort to write this mega update (7000+ words). Hope aap भी इस अपडेट को उतना ही प्यार देंगे जितना मुझे मेहनत लगा लिखने में. Look forward to the likes, comments and support. Thank you.
 
अपडेट लिख रहा हूँ. अगर आज हो गया तो पोस्ट कर दूंगा... नहीं तो कल.. साथ बने रहिये
 
35th Update (रात के मजे जारी है) (Mega Update)

दीपू भी प्यार से वसु का माथा चूमते हुए... मेरे लिए भी आज का दिन स्पेशल था. चलो अब सो जाते है... वर्ण सुबह उठने में देरी होगी. वसु: देरी तुम्हे होगी... मुझे नहीं. दीपू: मतलब? वसु: बुद्धू देरी तुम्हे ऑफिस में जाने के लिए होगी. मैं तो घोड़े बेच कर सोने वाली हूँ. दोनों इस बात पे हस देते है और एक दुसरे की बाहों में सो जाते है.

अब आगे..

अगली सुबह:


अगली सुबह दीपू उठता है तो देखता है की वसु घोड़े बेच के सो रही है. उसे देख कर दीपू को हसी आती है और वो प्यार से उसका माथा चूम कर फ्रेश होने बाथरूम जाता है.

फ्रेश हो कर वो किचन में जाता है तो कविता वहां पर चाय बना रही होती है. वो जाकर कविता को पीछे से पकड़ कर उसके कान को चूमते हुए उसकी चूची दबाता है.

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कविता: आह...आह सुबह सुबह फिर से चालु हो गए. रात को मजा नहीं आया क्या?

दीपू: रात की बात अलग है और सुबह की. वैसे भी तुममे में और वसु में फरक भी है ना.

कविता: तुम तो बड़े ज़ालिम निकले.

दीपू: क्यों क्या हुआ?

कविता: होना क्या है... रात को तुम दोनों मजे कर रहे थे और हम को अकेले छोड़ दिया. ठीक से सो भी नहीं पाए.

दीपू: क्यों? सोये क्यों नहीं?

कविता: सोते कैसे? रात भर तो इतनी आवाज़ें आ रही थी तुम्हारे कमरे से. वैसे मेरी बन्नो अब कैसी है?

दीपू: तुम ही जाकर देख लो ना तुम्हारी बन्नो कैसे है और उसे पलट कर... तुम तुम्हारी बन्नो को देख लेना लेकिन पहले मेरा मुँह तो मीठा कर दो और ऐसा कहते हुए वो कविता को चूमता है तो कविता भी सुबह सुबह पूरी उसका साथ देती है और दोनों २ - ३ min तक एक दुसरे को चूस चूस कर रस पीते है.

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२ Min बाद कविता: अब मुझे जाने दो और दीपू को धक्का देते हुए उसे अलग करती है. उसे चाय देकर वो कमरे में जाती है वसु को देखने के लिए.

कविता फिर चाय लेकर वसु के कमरे में जाती है तो देखती है की वो मस्त सो रही है. उसको देख कर हस्ते हुए वो वसु को उठाती है.

कविता: उठ जा मेरी बन्नो. और कितना सोयेगी देख सुबह हो गयी है और दीपू को भी ऑफिस जाना है.

वसु अंगड़ाई लेते हुए: सोने दे ना. मुझे बहुत नींद आ रही है.

कविता: वो तो बड़ा ज़ालिम निकला. लगता है तुझे सोने नहीं दिया.

वसु: हाँ रे... पूरी रात पेलता रहा और सोने नहीं दिया. १- २ घंटे पहले ही सोई हूँ. इसीलिए तो कह रही हूँ सोने दे कर के.

कविता: अभी नहीं. पहले उठ कर फ्रेश हो जा. दोपहर को सो जाना. कोई तुझे रोकेगा नहीं. वैसे तू पलट और देकने दे तेरी क्या हालत हैं. ऐसा कहते हुए कविता वसु को पेट के बल सुला कर उसकी कमर से चादर निकल कर उसकी गांड देखती है. उसमें से अभी भी थोड़ा पानी आ रहा था और उसकी गांड काफी खुली हुई और सूझ गयी थी.

कविता उसको देख कर: क्या बात है बन्नो लगता है रात को तुझे मस्त तरीके से चोदा है. अभी भी तेरी गांड से पानी निकल रहा है और ऐसा कहते हुए कविता उसकी गांड की तरफ झुक कर उसकी गांड को चाटती है और उसमें से निकला पानी को चाट कर कहती है... पानी अभी भी सूखा नहीं है.

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और वैसे भी लगता है की उसने तेरी गांड पूरी खोल दी है. मेरी २ उंगलियां भी आराम से जा रही है और ऐसा कहते हुए कविता वसु की गांड में २ उंगलियां दाल कर अंदर बाहर करने लगती है.

वसु: मत करना नहीं तो मैं फिर से बहक जाऊँगी.

कविता: मुझे पता है. एक बार जब गांड में लेना शुरू करोगी तो वहीँ लेने की इच्छा होगी.

वसु: हाँ सही कहा. पहले तो बहुत दर्द हुआ लेकिन फिर बाद में बहुत मजा आया. अब अपनी उंगलियां निकाल वर्ना...

कविता: वर्ना क्या?

वसु कुछ बोलने को होती इतने में वहां दिव्या भी आ जाती है.

दिव्या: मैं तो तुम दोनों को किचन में ढूढ़ रही थी लेकिन तुम दोनों तो सुबह सुबह ही मेरे आने से पहले ही शुरू हो गए?

कविता: देख ना वसु की क्या हालत हो गयी है और ऐसा कहते हुए कविता वसु की गांड को थोड़ा फैला देती है और दिव्या को दिखाती है और उसकी गांड खुल जाती है और अंदर का लाल छेद सब दीखता है.

दिव्या उसे देख कर अपना मुँह खोले कहती है... बाप रे... लगता है ये दोनों रात में बहुत मजे किये और मुझे भी पता नहीं था की दीपू दीदी की गांड का उद्धघाटन करेगा.

कविता: इसीलिए तो कल दीपू ने रात में कहा था की वो वसु के साथ अकेला सोयेगा और देख अभी भी इसकी गांड से पानी निकल रहा है और मैंने चख भी लिया है.

दिव्या कविता के पास आकर: मुझे भी चकना है और कविता को पकड़ कर उसके होंठ चूसने लगती है जिसमें कविता भी उसका साथ देती है और दीपू का पानी एक दुसरे से शेयर करते है.

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वसु दोनों को देख कर मुस्कुराती है लेकिन कुछ नहीं कहती.

इतने में दीपू कमरे में आता है और तीनो को देख कर हस्ते हुए कहता है: मैं नहाने जा रहा हूँ. कोई आएगा क्या मेरे साथ? तीनो एक साथ: ना बाबा... तुम अकेले ही नहा लो. हमें पता है अगर हम तुम्हारे साथ आएंगे तो तुम फिर से शुरू हो जाओगे. दीपू कुछ नहीं कहता और हस्ते हुए बाथरूम में चला जाता है नहाने.

थोड़ी देर बाद जब दीपू नहा कर बाहर आता है तो तीनो ऐसे ही मस्ती करते रहते है.

दीपू: अरे यार देखो मेरी पीठ में कुछ हुआ हस क्या? जलन हो रही हैऔर मेरा हाथ वहां नहीं पहुँच रहा हैऔर दीपू पीछे मुड कर अपने पीठ उन्हें दिखाता है.

दीपू के पीठ पे बहुत खरोंचे दिख रही थी और ऐसा लगता हैजैसे किसी ने उसकी पीठ पर नाखून से खरोंचा है. तीनो उसकी पीठ देख कर उसके पास जाते है और पूछते है की ये कैसा हुआ? पहले तो कभी ऐसा नहीं हुआ था. फिर दीपू को रात की याद आती है और वसु को देखते हुए कहता है... ये तो वसु ही बता सकती है.

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जब दीपू ये बात बोलता हस तो वसु दीपू को देखती रहती है और फिर उसे भी रात का ख्याल आता हस जब उसने उत्तेजना में दीपू की पीठ पर अपने नाखून गाढ़े थे. वसु को जब याद आता हस तो उसकी आँखों से आंसू आ जाते हस और दीपू से कहती हस की ये मेरी गलती है और रोने लगती है. दीपू उसे अपनी बाहों में लेकर चुप कराता हस और कहता हस की इसमें रोने की क्या बात है?

वसु: मुझे दुःख होगा ना की तुम्हारी पीठ पे मेरी नाखून के निशाँ है.

दीपू: अरे ये तेरी नाखून के निशाँ नहीं बल्कि हमारे प्यार की निशानी है. देखो तुम्हारे बदन पे भी ऐसे निशाँ है और दिव्या और कविता को वसु का गाला दिखाता है जहाँ पर उनके प्यार की निशानी थी.

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दीपू को थोड़ी मस्ती सूझती हस तो वो वसु के बदन से चादर हटा कर दिव्या और कविता से कहता है: देखो हमारे प्यार की निशानी इसकी चूची पे भी है. आगे से तुम लोगों को भी ऐसे ही निशानी दिखेगी अपने बदन पर और दोनों को आँख मार देता है.

वसु ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती हस और अपने हाथ से अपनी चूचियों को ढकने की कोशिश करती है.

दीपू: अब क्या शर्माना?

वसु दीपू को देखती रहती है तो दिव्या और कविता दोनों हस देते है और फिर झुक कर दोनों वसु की चूची पे टूट पड़ते है और दोनों एक एक को लेकर चूसना शुरू कर देते है.

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दीपू: चलो मैं ऑफिस के लिए निकल जाता हूँ. तुम सब आराम करो. आज रात को तुम्हे (दिव्या और कविता) को जागना है. जाते वक़्त वो तीनो के होंठ पे गहरा चुम्बन देता है जिसमें तीनो उसका साथ देती है और फिर वो अपने ऑफिस के लिए निकल जाता है और दिव्या उसे छोड़ने बाहर चले जाती है.. फिर वसु भी बाथरूम में चली जाती है और नहा धो कर फ्रेश हो कर चाय पीती है.

कविता: सुनो वसु मैं सोने जा रही हूँ. मुझे दो घंटे बाद उठा देना.

वसु: मैं रात भर जागी रही तो समझ आता है लेकिन अभी तुझे क्यों नींद आ रही है?

कविता: इसीलिए बन्नो की हमें भी रात भर नींद नहीं आयी. चल मुझे सोने दे.

वसु: ऐसे कैसे सोने दूँगी तुझे और वो कविता को बिस्तर पे फेक देती है और उसके ऊपर छड़ कर उसकी आँखों में देखते हुए उसकी चूची को दबाते हुए: बोल ना रात को नींद क्यों नहीं आयी तुझे?

कविता इस बात से शर्मा जाती है और वसु को पकड़ के उसके होंठ चूमते हुए धीरे से उसके कान में कहती है: लगता है मैंने मीना को भी एक तरह से समझा दिया है की दीपू उससे “मिलने” जल्दी ही आने वाला है.

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वसु: ये तो बड़ी अच्छी बात है. अगर मीना भी माँ बन जाए तो मैं भी दादी बन जाऊँगी. वैसे बताना रात को तूने क्या किया की मीना समझ गयी है.

कविता: तो फिर सुन...


पिछली रात कविता के कमरे में:

पिछली रात को जब दीपू और वसु अपने प्यार के रंग में रंग रहे थे वहीँ कविता और मीना को उनकी आवाज़ें और सिसकियाँ सुनाई दे रही थी.

दोनों कविता और मीना को नींद नहीं आ रही थी और सोते वक़्त दोनों की पीठ एक दुसरे की तरफ थी. उनकी आवाज़ सुनकर दोनों उत्तेजित हो चुके थे और एक दुसरे के बिना जाने अपनी चूत मसल रही थी. लेकिन वो अपनी उत्तेजना को कितनी देर तक रोक पाते एक दुसरे के जाने बिना. कविता का हाथ पूरी उसके चूत के पानी से भीग गया था क्यूंकि वो इतनी उत्तेजित हो गयी थी. ऐसा नहीं था की पहले आवाज़ नहीं आती थी लेकिन आज आवाज़ें कुछ ज़्यादा ही आ रही थी (क्यूंकि उनको पता नहीं था की दीपू आज वसु की गांड मार रहा है.) और यही हाल मीना का भी था.

कविता को नींद नहीं आती तो वो पलट कर मीना की तरफ देखती है तो वही हाल मीना का भी था. आखिर में दोनों एक दुसरे को देखते है और मीना कहती है

मीना: आज ये आवाज़ें बहुत ज़ोर से आ रही है. क्या दीपू... ऐसा बोल कर मीना रुक जाती है तो कविता मीना की आँखों में देख कर कहती है: हाँ बेटी जो तू सोच रही है वो सही है. दीपू लम्बे रेस का घोडा है और वो जल्दी थकता नहीं है बल्कि हमें थका देता है. तेरा तो पता नहीं लेकिन मैं बहुत उत्तेजित हो चुकी हूँ और मेरी चूत एकदम गीली हो गयी है.

मीना कविता को देखते हुए: माँ आप ये कैसी गन्दी बात कर रही हो और अपनी आँखें झुका लेती है.

कविता: बेटी इसमें क्या गन्दी बात है? जो है वो है और मैं झूट नहीं बोल रही हूँ. कविता को लगता है की मीना शर्मा रही है और उसका शर्माना दूर करना पड़ेगा तो वो मीना का हाथ पकड़ कर अपनी चूत पे रख देती है.

मीना को लगा नहीं था की उसकी माँ कभी ऐसा कर सकती है तो मीना झट से अपना हाथ छुड़ा लेती है.

मीना: आप क्या कर रही हो?

कविता फिर मीना के ऊपर आ जाती है और उसकी आँखों में देखते हुए कहती है.... क्यों मनोज ने कभी ऐसा नहीं किया क्या?

मीना थोड़ा शर्माते हुए: कभी नहीं.

कविता: एक बात कहूँ... बिस्तर पे तू जितनी शर्माएगी तो उतना ही पछ्तायेगी. तुझे कभी मजा नहीं आएगा. पहले में भी तेरी ही तरह थी. बहुत शर्माती थी और जिसे तो गन्दी बात कहती हो मैं भी कभी नहीं कहती थी. लेकिन दीपू, वसु और दिव्या ने कमरे में मुझे पूरा बेशरम बना दिया और तब से मुझे भी रोज़ मजे मिलते है और मैं भी खूब मजे देती हूँ.

कविता मीना के होंठ चूमती है तो फिर से मीना चौक जाती है क्यूंकि अब तक किसी औरत/लड़की ने मीना को ऐसा चूमा नहीं था. मीना शर्म से अपने होंठ बंद ही रखती है जिसे कविता समझ जाती है.

कविता: अपनी जुबां खोलना. मीना कविता की आँखों में देख कर मना करती है तो कविता हस्ते हुए अपना एक हाथ उसकी चूची पे रख कर ज़ोर से दबा देती है तो मीना की सिसकारी निकल जाती है तो उसी वक़्त कविता फिर से मीना को चूमती है और इस बार अपनी जीभ उसके मुँह में घुसा देती है मीना के होंठ और जुबां चूसने लगती है.

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यह १- २ Min चलता है. मीना को पहले थोड़ा अजीब लगता है लेकिन अब उसे भी थोड़ा मजा आने लगता है.

कविता उसको चूमते हुए अब उसकी दोनों चूचियां दबाते रहती है तो मीना भी बहकने लगती है. मीना सिसकारियां लेते हुए कहती है की उसे भी अब अच्छा लग रहा है और उसे कुछ हो रहा है.

कविता ये बात सुनकर हस देती है और उसके गले को चूमते हुए उसकी चूची पे आ जाती है और उसके कपडे निकालते हुए उसकी एक चूची को मुँह में लेकर चूसने लगती है. मीना से भी अब रहा नहीं जाता और वो कविता का सर अपनी चूची पे दबा देती है. कविता को अब लगता है की मीना भी खुल रही है. वो एक चूची को मुँह में लेकर चूसती है तो दोस्सरे को ज़ोर से दबाती है.

अब मीना भी रंग में आने लगती है. १० Min तक मीना की चूचियों को चाटने और चूसने के बाद कविता फिर से मीना के ऊपर आकर फिर से उसको चूमती है तो इस बार मीना पूरे जोश में कविता को चूमती है और दोनों एक दुसरे का रस पीते है. कुछ देर बाद दोनों अलग होते है तो हफ्ते रहते है.

मीना:आज तक मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ है माँ... और फिर थोड़ा शर्माते हुए... अच्छा भी लगा.

कविता: ये हुई ना बात मेरी बेटी. बिस्तर पे तू जितना खुलेगी उतना ही तुझे मजा आएगा.

मीना: लेकिन मनोज तो कभी ऐसा नहीं करता.

कविता: इसीलिए तो इतना शर्माती है. मीना भी अब थोड़ा खुलने लगती है तो कहती है: वैसे आप तो बहुत अच्छे से चूमती हो. मैंने आज तक किसीको ऐसा नहीं चूमा.

कविता: मतलब?

मीना शर्माते हुए: जब आपने अपनी जुबां मेरे मुँह में डाल कर... ऐसा बोलते हुए मीना रुक जाती है तो कविता कहती है: बेटी अभी तो तुझे बहुत कुछ जानना है. वैसे में भी तेरी तरह ही थी. मुझे भी पहले ठीक से चूमना नहीं आता था... लेकिन मेरा पति और दो सौतन है ना... मेरा सब शर्म दूर कर दिया और अब तो दोनों होंठ को बहुत अच्छे से चूमती हूँ.

मीना थोड़ा आश्चर्य से कविता को देख कर: दोनों होंठ?

कविता मीना के कान में कहती है... हाँ... दोनों होंठ... एक ऊपर के और एक नीचे के... और ऐसा कहते हुए कविता मीना की चूत पे अपना हाथ रख कर ज़ोर से दबा देती है और कहती है... ये है दूसरी होंठ... कविता के ऐसे करने से मीना भी बेहक जाती है और फिर से कविता का सर पकड़ कर उसके होंठ पे टूट पड़ती हैं जैसे उसकी जुबां को खा जायेगी.

थोड़ी देर बाद... मीना: माँ अभी भी उस कमरे से बहुत आवाज़ आ रही है.

कविता: मैंने कहा था ना... दीपू बहुत लम्बी रेस का घोडा है. और वैसे भी आज वसु का जन्मदिन है तो उसकी हालत तो बुरी होनी ही है.

कविता फिर मीना को चूमते हुए नीचे की तरफ जाती है और पहले चूचियां, गहरी नाभि और मीना की जांघ को अच्छे से चूमती और चाटती है. इतना करते है मीना झड़ जाती है और आज काफी दिनों बाद उसका पानी निकला था... क्यूंकि इतने दिनों के बाद उसे ऐसा मजा मिल रहा था. कविता चूमते और चाटते हुए जब वो मीना की चूत के पास आती है तो देखती है की वहां पर थोड़े बाल है.

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कविता मीना की तरफ देख कर: ये क्या... इतने सारे बाल बढ़ा रखे है तुमने? साफ़ क्यों नहीं करती? अगर ऐसा ही रहा तो इन्फेक्शन भी हो जाएगा. और वैसे एक बात बताओं..दीपू को एकदम साफ़ और चिकना चाहिए.

उसने हम सब को पहले ही कह दिया था इस बारे में. तो तू भी अब से एकदम चिकनी और साफ़ रखना.

मीना उसकी बात सुनकर हाँ में सर हिलाती है तो फिर कविता उसकी चूत चाटने लगती है और अपनी जुबां निकल कर ऊपर से नीचे तक चूत चाटने लग जाती है.

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मीना तो जैसे आसमान में पहुँच गयी थी क्यूंकि उसे आज तक इतना मजा कभी नहीं मिला था.. एक और बात थी की आज तक वो किसी औरत के साथ बिस्तर पे नहीं थी... और आज वो इस बिस्तर पे किसी और के साथ नहीं बल्कि उसकी माँ के साथ ही बिस्तर पे मजे ले रही थी.

कविता उसकी चूत को चूमते हुए एक ऊँगली उसकी चूत में डालते हुए अंदर बाहर करती है तो ये दोहरा झटका मीना सेहन नहीं कर पाती और कविता का सर पकड़ कर उसकी चूत पे दबा देती है और ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां लेने लगती है.

लेकिन ये आवाज़ दुसरे कमरे की आवाज़ों से कम ही था.

कविता भी अपनी जुबां को उसकी लाल गुलाबी रस से भरी चूत में अंदर तक ठेल देती है और बड़ी शिद्दत से उसकी चूत को चूसने लगती है. ७- ८ Min में ही मीना फिर से झड़ कर जैसे जमीन पे आ जाती है और हफ्ते रहती है.

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कविता अपना सर उठा कर मीना को देखती है और उसके चेहरे पे संतुष्टि के भाव देख कर उसे भी बड़ा सुकून मिलता है और ऊपर आकर मीना को देखते हुए फिर से अपने होंठ उसके होंठ से जोड़ देती है और दोनों फिर से एक गहरी लम्बी चुम्बन का मजा लेते है. मीना को इस बात का पता नहीं था की इस चुम्बन में वो खुद अपना रस चख रही थी.

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कविता मीना को देख कर: कैसा लगा?

मीना: बहुत अच्छा लगा. मुझे पता नहीं था की एक औरत को चूमने में इतना मजा आता है.

कविता: मेरी लाडो मेरा पूछने का मतलब था की तेरा रस कैसे लगा तुझे?

मीना: मैं समझी नहीं.

कविता: जब ५ Min पहले जब हम दोनों एक दुसरे का रस चूस रहे थे तो तुमने अपनी चूत का रस चखा है. जब मैं तुम्हारी चूत चूस रही थी तो तुमने अपना पानी गिरा दिया था जो मैंने बड़े चाव से चक लिया था और वही तुमने चखा था मेरी जुबां से.

मीना कविता की बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और कुछ नहीं कहती.

कविता: चिंता मत कर... अभी तुझे बहुत कुछ सीखना है. चल जैसे मैंने तुझे संतुष्ट किया है तू भी मुझे कर. मेरी चूत भी बहुत गीली हो गयी है.

मीना फिर से कविता को चूमते हुए उसके चूची को पकड़ कर कहती है: ये इतने बड़े कैसे हो गए है? मेरे तो काफी छोटे है.

कविता जान बूझ कर: क्या बड़े हो गए है?

मीना थोड़ा हिचखिचाती है लेकिन आखिर कह ही देती है: ये तुम्हारी चूचियां.

कविता: मैंने कहा था ना... बिस्तर पे एकदम बेशरम बन जा और अपने बदन के अंगों को जैसे देसी भाषा में बोलते है वैसे ही बोलै कर. तुझे भी बहुत मजा आएगा.

मीना: मैं समझ गयी माँ... तो बोलो ये चूचियां तो मेरे हाथ में भी सही से नहीं आ रहे है. काफी बड़े हो गए है. मेरे कब इतने बड़े होंगे?

कविता: जब से शादी हुई है तब से एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब दीपू या वसु या दिव्या ने इसे चूसा और दबाया ना हो. वो तीनो तो रोज़ इससे बहुत खेलते है और इसे चूस चूस कर ही मेरा पानी निकाल देते है. और हाँ जब तक तू यहाँ है और जिस दिन तू दीपू के पास जायेगी तो तब से रोज़ ये दबाएगा और जल्दी ही मेरी तरह ही तेरे भी बड़े हो जाएंगे और मीना को आँख मार देती है.

अब तेरी बारी है तो तू भी ज़रा अच्छे से चूस दे. कविता की ये बात सुनकर मीना भी अच्छे से चूसती और चाटती रहती है और वो तो उसके निप्पल को भी काटती है जिसमें कविता को भी बहुत मजा आता. फिर वो भी अपनी माँ की तरह उसके बदन से खेलते हुए नीचे जाती है और उसकी गोल और गहरी नाभि को जैसे एकदम खा जाती है. इससे तो कविता को तारे नज़र आते है. वो मीना का सर अपनी नाभि पे ज़ोर से दबा देती है और आज पहली बार (और ना जाने कितनी बार) झड़ जाती है और अपना पानी छोड़ देती है. कविता को बड़ा सुकून मिलता है झड़ने से और मीना जब उसकी चूत पे आकर देखती है तो एकदम गुलाबी रस से पूरा भरा हुआ था. जैसे वो एक तरह से मीना को दावत दे रहा था की आ जाओ और मुझे अच्छे से चूस लो.

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अब मीना भी पीछे नहीं हटने वाली थी और वो भी पूरे जोश और ख़ुशी से कविता की चूत को चूसने और काटने लग जाती है. वो भी उसकी माँ की तरह २ उंगलियां उसकी चूत में डालती है जो आसानी से चले जाते है.

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कविता तो जैसे जन्नत पे पहुँच गयी थी और वो अपना हाथ मीना के सर के ऊपर रख कर उसे अपनी चूत पे दबा देती है और उत्तेजना में बड़बड़ाती रहती है. उसे भी पता नहीं चलता की वो क्या बक रही है क्यूंकि वो भी उतनी ही उत्तेजना में थी.

मीना भी खूब कविता की चूत चूसती है

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और ८- १० Min के बाद जब कविता से रहा नहीं जाता तो ज़ोर से सिसकारी लेते हुए झड़ जाती है और अपना पूरा पानी गिरा देती है. मीना बी उसका पूरा पानी पी जाती है. पहले तो उसे थोड़ा अजीब लगा लेकिन बाद में उसे तो जैसे उसका पानी शहद जैसे लगा जिसे वो पूरा निगल गयी. मीना जब कविता को देखती है तो थकी हुई अपनी आँखें बंद कर के ज़ोर ज़ोर से सांसें ले रही थी.

मीना फिर ऊपर आकर कविता की तरह उसको चूमती है और कविता भी मीना के मुँह से अपना रस चख लेती है.

मीना: माँ कैसे लगा?

कविता: पूछ मत बेटी... तूने तो मुझे जन्नत तक ले गयी थी. ऐसा लगा ही नहीं की तू ये सब पहली बार कर रही है.

मीना: हाँ ये सब मेरे लिए पहली बार ही था लेकिन शायद मैंने वैसे ही किया जैसे आप ने किया था.

कविता फिर मीना को अपनी बाहों में ले कर कहती है: तू शायद सोच रही होगी तो मैंने तेरे साथ ऐसा क्यों किया. बात ये है की जब तू दीपू के साथ बिस्तर पे रहेगी तो तुझे कोई गिल्ट नहीं होना चाहिए की तू ये सब जबरदस्ती के लिए कर रही है. मैं सिर्फ इतना ही कहूँगी की तू पूरे मन से उसके पास जा और फिर जब तू माँ बन जायेगी तो तेरी ख़ुशी दुगनी हो जायेगी. मैं फिर से एक बार और कहूँगी की तू एक बार मनोज से बात कर ले और तुम दोनों को इसमें कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए आगे जा कर.

और हाँ एक बाद याद रखना. जब भी तुझे बच्चा होगा वो तेरा और मनोज का ही होगा (दुनिया की नज़रों में)भले ही तुम दीपू के साथ हम बिस्तर होगी. तुम दोनों मिलकर उसे अपना नाम देना. समझ गयी. यही हम सब भी चाहते है.

मीना: आप ठीक कह रही हो माँ. मैं तो पूरे दिल से उसके पास जाऊँगी लेकिन जैसे आपने कहा मैं एक बार फिर से मनोज से बात कर लेती हूँ.

कविता फिर मीना को देख कर प्यार से उसका माथा चूम लेती है और कहती है अब सो जाए?

मीना: नहीं माँ इतनी जल्दी नहीं. देखो अभी भी उसके कमरे से आवाज़ आ रही है. मैं तो ये सोच कर ही परेशान हूँ की मैं उसका लंड झेल पाऊँगी की नहीं.

कविता: चिंता मत कर. मैं उससे कहूँगी की आराम से करे. वो मेरी बात मान लेगा. एक और बात. दीपू ने मुझसे कहा है की जब तू उसके पास जायेगी तो मैं भी तेरे साथ रहूँ. वो नहीं चाहता की तू कोई गिल्ट फील करे.

मीना: हाँ ये सही रहेगा. जब आप मेरे साथ रहोगे तो मुझे भी कोई दिक्कत नहीं होगी.

कविता: चल हम दोनों एक दुसरे को मजे देते है.

मीना: वो कैसे?

कविता: हम दोनों एक दुसरे को एक बार फिर से चूस कर झाड़ा देते है तो दोनों को मजा आएगा.

मीना: कैसे?

कविता फिर बिस्तर पे सो जाती है और मीना की चूत को अपने मुँह में ले लेती है और उसी तरह से उसे भी सुला कर उसका मुँह अपनी चूत पे रख देती है. याने दोनों ६९ पोजीशन पे आ जाते है

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और फिर दोनों एक दुसरे की चूत में ऊँगली करते हुए चाटने और चूसने लगते है. ये मीना के लिए नया था क्यूंकि उसने इस पोजीशन में कभी भी नहीं किया था. उसे भी मजा आने लगा और देखते ही देखते दोनों एक दुसरे को संतुष्ट कर देते है और फिर से एक दुसरे का पानी निकल कर पी जाते है. इसमें दोनों को संतुष्टि मिलती है और आखिर में कविता मीना को अपनी बाहों में लेकर सो जाती है क्यूंकि दोनों भी बहुत थके हुए थे.


<Back to Present>

वसु: कविता की पिछली रात की बात सुनकर वसु कहती है: वाह तूने तो बहुत अच्छा किया .

वसु : मुझे ख़ुशी है की शायद मीना मान गयी है. मुझे उम्मीद है की तू जल्दी ही नानी बन जायेगी.

कविता: और तू दादी... दोनों हस देते है और दोनों फिर से एक दुसरे को गहरा चुम्बन देते है और सो जाते है.

दोपहर को जब दोनों सो कर उठते है तो वसु थोड़ा लंगड़ाते हुए चल रही थी क्यूंकि उसे अभी भी बहुत दर्द हो रहा था. लता उसको हॉल में ऐसे आता देख कर हस देती है और कहती है कल तुम्हारा जन्मदिन शायद “बहुत अच्छे” से मनाया गया है. वसु ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और झूठे गुस्से से लता को डाटती है.

लता: मैं तो मजाक कर रही थी. तू आराम कर. हम संभाल लेंगे.

वसु: वैसे दिव्या कहाँ है? वो दिख नहीं रही है.

लता: वो भी तेरे सामान घोड़े बेच कर सो रही है.

वसु: क्यों उसे क्या हुआ है?

लता: पता नहीं. वो भी तुम्हारी तरह ही सो रही है.

वसु:ठीक है मैं देख कर आती हूँ.


दिव्या के कमरे में:

वसु जब दिव्या के कमरे में जाती है तो देखती है की वो भी गहरी नींद में सो रही है. वसु उसे देख कर उसे उठाती है तो दिव्या भी अंगड़ाई लेते हुए उठ जाती है और वसु से कहती है: जन्मदिन तो तुम्हारा था. तुम्हारी क्या हालत है मुझे ठीक से पता नहीं लेकिन मेरी तो हालत एकदम बुरी है. बदन भी दुःख रहा है. सोने दो ना.

वसु: चल बकवास मत कर. दोपहर हो गयी है. और कितना सोयेगी. उठ जा. वैसे तेरे बदन क्यों दर्द कर रहा है?

दिव्या: जाओ पहले दरवाज़ा बंद कर दो. वसु दरवाज़ा बंद कर देती है तो दिव्या कहती है... ये बुआ भी ना... लगता है बहुत चुड़क्कड़ है.

वसु: क्यों क्या हुआ?

दिव्या: होना क्या है... कल रात को तुम्हारे कमरे से आवाज़ें आ रही थी और हम दोनों को नींद नहीं आयी तो बुआ तो मेरे ऊपर ही आ गयी और पूरा बदन निचोड़ दिया. मेरे होंठ, चूची, जांग, चूत और गांड... किसी को नहीं छोड़ा और खूब चूस चूस कर पता नहीं कितनी बार मुझे झडा दिया.

वैसे मैं भी पीछे नहीं थी. मैंने भी उसको पूरा निचोड़ दिया और उसे भी उतना ही मजा दिया.

वसु: उसको देख कर लगता तो नहीं है की इतना कुछ हुआ होगा.

दिव्या: वो मेरे से थोड़ी देर पहली ही जाग गयी होगी और देखना खाना खाने के बाद फिर से सो जायेगी.

वसु इस बात पे हस देती है और फिर प्यार से दिव्या के होंठ से अपने होंठ मिला देती है और दोनों भी एक मस्त चुम्बन में जुड़ जाते है.

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वसु: एक बात बताओं...

दिव्या: क्या?

वसु: तुम्हारे जैसे हाल कविता और मीना का भी है. वसु जब ये बात कहती है तो दिव्या अपना मुँह खोले आश्चर्य से वसु को देखती रहती है.

वसु: हाँ सही कह रही हूँ. सुबह जब मैं फ्रेश हो कर आयी थी तो कविता ने मुझे उनकी रात की बात बतायी... एक और बात... लगता है मीना भी अब दीपू के लिए तैयार हो रही है. दिव्या ये बात सुनकर खुश हो जाती है.

दिव्या: वैसे अब तुम्हारा दर्द कम हुआ के नहीं? मुझे पता है जब वो गांड मारता है तो बदन को पूरा तोड़ देता है.

वसु: हाँ ये एहसास मुझे भी कल हुआ है. लेकिन अब मैं थोड़ा ठीक हूँ.

दिव्या: चिंता मत करो... जल्दी ही तुम्हे भी इसकी आदत पड़ जायेगी और दोनों हसने लगते है.

दिव्या: वैसे लगता है जन्मदिन तुम्हारा हुआ... और बदन सब का टूटा.... इस बात पे दोनों हस्ते है और फिर वसु दरवाज़ा निकाल कर दोनों बाहर आ जाते है....


Note: दिव्याऔर लता का रात का Scene नहीं लिखा है क्यूंकि वो बोरिंग हो जाता. बस ये imagine कर लो की जैसे कविता और मीना ने रात बितायी थी वैसे ही इन दोनों की रात भी बीती. :)

मैं काफी Busy रहता हूँ अपने काम पर... और शायद उपदटेस थोड़े Delay हो रहे है ..लेकिन मेरे पिछले ३- ४ उपदटेस Mega Updates रहे है और उनको लिखने में बहुत टाइम लगता है... सोचना भी बहुत पड़ता है और कौनसा फोटो कहाँ ऐड करना है ये भी बहुत मुश्किल काम है. इसीलिए मैं आशा करता हूँ की इस अपडेट में Minimum ३५- ४० लाइक्स और कमैंट्स आएंगे. जब तक नहीं आते मैं नेक्स्ट अपडेट लिखना स्टार्ट नहीं करूंगा. मैं ये कोई गुस्से या नाराज़गी से नहीं कह रहा हूँ...लेकिन जब मैं इतना मेहनत करता हूँ एक अपडेट पोस्ट करने के लिए तू मुझे भी उतना ही Motivation मिलना चाहिए otherwise लिखने का कोई फायदा नहीं रहेगा. I hope you all agree and understand. Thank you.
 
36th Update (घर में खुशियों का आगमन)



दिव्या: वैसे लगता है जन्मदिन तुम्हारा हुआ... और बदन सब का टूटा.... इस बात पे दोनों हस्ते है और फिर वसु दरवाज़ा निकाल कर दोनों बाहर आ जाते है....



अब आगे..

अगली सुबह:



सब लोग अपना काम करते हस और चाय पीते हुए बातें करते रहते है. वसु अभी भी थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थी जिसे देख कर सब अपनी हसीं दबा देते हस लेकिन वसु उनके चेहरे को देख कर समझ जाती है और थोड़े गुस्से नज़र से दीपू की तरफ देखती है. दीपू भी उसको देख कर आँख मार देता है.

थोड़ी देर बाद जब वसु किचन में जाती हस तो वहां से वो दीपू को बुलाती है. दीपू जब वसु के पास किचन में जाता हस तो

वसु: तुम कितने बेशरम हो गए हो. मुझसे ठीक से चला नहीं जा रहा हस और तुम आँख मार रहे हो.

दीपू: वसु को अपनी बाँहों में लेकर... इसमें शर्म कैसा? मैं तो अपनी बीवी को आँख मार रहा हूँ और तुम्हे भी याद होगा जब दिव्या और कविता का भी ऐसा हाल था जब... इतना बोल कर दीपू रुक जाता हस तो वसु उसे झूठे गुस्से से देखती हस और हस देती है.

दीपू दरवाज़े पे देखते है की कोई नहीं है तो उसका सर पकड़ कर अपने होंठ उसके होंठ से जोड़ देता है जिसमें वसु भी उसका पूरा साथ देती है और दोनों ३- ४ Min तक एक दुसरे का रस चूस लेते है.

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दोनों किस करते वक़्त दीपू वसु की गांड दबा देता है लेकिन वसु की हलकी चीख दीपू के होंठों पे डाब जाती है. ४ Min बाद जब दोनों अलग होते है तो वसु दीपू के सीने मैं हल्का मुक्का मारती है और उसे दूर कर देती है.

दीपू: चल जल्दी ठीक हो जाओ. अब तो रोज़ तुम्हारी गांड मारूंगा. उसके पास आकर उसके कान में: बोलो मेरा लंड लोगी ना अपने गांड में.

वसु: चुप कर. तुझे हर बार यही बात सूझती है क्या? बाहर निकल और ऑफिस के लिए तैयार हो जा. और उसे बाहर धकेल देती है. जब वो निकल जाता है तो वसु के चेहरे पे हसी आ जाती है और मन में सोचती है... कल सच में गांड मरवाने में बड़ा मजा आया... जितना दर्द देते है उतना ही मजा भी देता है……

और जैसे दीपू ने कहा था.... उस रात वो दिव्या की जम के बजाता है आगे और पीछे से और उसे भी पूरा खुश कर देता है. दिव्या का भी वो वसु जैसा हाल कर देता है. कविता बच जाती है क्यूंकि वो उस रात मीना के साथ सोई हुई थी.



कुछ दिनों बाद:



कुछ दिनों बाद सुबह सब अपने काम में लगे रहते है. दीपू भी अपने ऑफिस चला गया था. घर में सब लोग बैठ कर ऐसे ही बात कर रहे थे. वसु को थोड़ा चक्कर आता है और और उसका सर थोड़ा भारी लग रहा था.

वसु: मुझे थोड़ा चक्कर आ रहा है और ऐसे बोलते हुए उसके पेट में थोड़ा गड़बड़ होता है और वो भाग कर बाथरूम में चली जाती है जहाँ उसे उल्टियां होने लगती है. वसु के हालत देख कर कविता और दिव्या भी उसके पीछे भागते है लेकिन वसु बाथरूम में जा कर दरवाज़ा अंदर से बंद कर लेती है.

कविता: क्या हुआ? तुमने दरवाज़ा क्यों बंद कर दिया?

थोड़ी देर बाद वसु अपने आप को थोड़ा ठीक करते हुए बाथरूम का दरवाज़ा खोलती है और कहती है... सर थोड़ा चकरा रहा था और थोड़ी उल्टियां भी हुई है.

कविता ये बात सुन कर: क्या बात है क्यूंकि उसे शायद पता चल गया था की वसु को चक्कर क्यों आ रहा है.

कविता उसे अपनी बाहों में लेकर कान में कहती है: बन्नो बधाई हो. लगता है तू माँ बनने वाली है.

दिव्या को कुछ पता नहीं चलता तो वो उन दोनों को ऐसे देख कर पूछती है की वसु को क्या हुआ है?

कविता: अरे बुद्धू तू जल्दी से मौसी बनने वाली है या फिर छोटी माँ. दिव्या ये बात सुनकर एकदम खुश हो जाती है और वसु को गले लगा लेती है.

वसु: मुझे पता नहीं की तुम जो कह रही हो वो सही है या नहीं.

कविता: क्यों जब दीपू और निशा पैदा हुए थे तो तुझे उल्टियां नहीं आयी थी क्या? और ऐसा बोल कर कविता हस देती है और कहती है चल तुझे डॉक्टर के पास लेकर जाते है.

बाहर आने से पहले कविता दोनों से कहती है की फिलहाल ये बात मीना और लता को ना बताएं. जब कन्फर्म हो जाएगा तभी उन्हें बताएँगे और उन्हें थोड़ा सरप्राइज भी देंगे. इस बात पे दोनों मान जाते है और अपने आप को ठीक करके बाथरूम से बाहर आ जाते है.

लता: क्या हुआ वसु को?

कविता: कुछ नहीं दीदी... इसका सर थोड़ा भारी लग रहा है. एक बार डॉक्टर को दिखा कर ले आते है.

लता: हाँ ठीक रहेगा.

दिव्या: मैं एक बार दीपू को फ़ोन कर के उसे भी हॉस्पिटल आने को कहती हूँ.

लता: हाँ उसे भी पता चलना चाहिए ना की उसकी बीवी की हालत ठीक नहीं है और ऐसा कहते हुए सब हस देते है.

दिव्या दीपू को फ़ोन करती है. ठीक उसी वक़्त दीपू किसीसे मिलने बाहर गया था और जल्दबाज़ी में अपना फ़ोन नहीं ले जाता. जब दिव्या फ़ोन करती है तो ऋतू उसका फ़ोन receive करती है.

दिव्या: दीपू?

ऋतू: मैं ऋतू बोल रही हूँ. दीपू थोड़ा बाहर गया है. बोलो क्या काम है.

दिव्या: कुछ नहीं माँ जी… लगता है दीदी वसु की थोड़ी तबियत खराब हो गयी है. हम उसे डॉक्टर के पास ले जा रहे है. अगर दीपू होता तो उसे भी वहाँ आने को कहते.

ऋतू थोड़ा घबराते हुए: सब ठीक तो है ना दिव्या. अचानक वसु की तबियत को क्या हुआ है?

दिव्या: पता नहीं माँ जी. डॉक्टर के पास जाएंगे तो पता चलेगा.

ऋतू: मैं भी आऊं क्या?

दिव्या: नहीं माँ जी ज़रुरत नहीं है. हाँ हो सके तो शाम को एक बार आ जाना. सब से मुलाकात भी हो जायेगी और तब तक हम दीदी को डॉक्टर के पास भी दिखा लाएंगे.

ऋतू: हाँ ये ठीक कहा तुमने. हम शाम को आ जाएंगे.

दिव्या: ठीक है मा जी और दीपू को भी बता दीजिये.

ऋतू: तू चिंता मत कर. जैसे ही वो यहां आएगा मैं उसे बता दूँगी. वो जल्दी ही वहाँ पहुँच जाएगा और फिर फ़ोन रख कर देती है.



हॉस्पिटल में:



कविता और दिव्या फिर वसु को डॉक्टर के पास लय जाते है. डॉक्टर उसे चेक करती है और दोनों को देख कर कहती है... इनके पति कहाँ है?

कविता: जी वो अपने काम पे गए है.

डॉक्टर: आप दोनों कौन हो?

दिव्या: हम इसकी बहने है. वैसे दीदी की हालत कैसी है? वो ठीक तो हो जायेगी ना?

डॉक्टर: चिंता करने की कोई बात नहीं है. बस खुश खबर ही है की आपकी दीदी पेट से है और वो जल्दी ही माँ बनने वाली है. डॉक्टर की बात सुनकर जहाँ कविता और दिव्या खुश हो जाती है वहीँ वसु शर्मा कर अपने सर नीचे कर लेती है.

डॉक्टर: इसीलिए मैंने इनके पति के बारे में पुछा था.

कविता: जी ये बात हम उनको बता देंगे.

डॉक्टर: ठीक है लेकिन अब इनका ज़्यादा ख्याल रखना. कोई भारी चीज़ उन्हें उठाने मत देना और अब इनको आराम की बहुत ज़रुरत है और जहाँ तक हो सके इसको खुश रखना. ये जितना खुश रहेगी बच्चा भी उतना ही अच्छा और तंदुरुस्त होगा. और समय समय पे दवायें लेते रहना.

कविता: जी समझ गए. और फिर तीनो हॉस्पिटल से घर के लिए निकल जाते है.

कार में जब तीनो बैठे होते है तो कविता और दिव्या दोनों वसु को बहुत बधाई देते है और प्यार से उसके पेट पे हाथ रख कर कविता धीरे से उसके कान में कहती है: बधाई हो बन्नो. तू फिर से माँ बनने वाली है. वसु थोड़ा शर्मा जाती है और उसी लय में कहती है धीरे से... चिंता मत कर... तू भी मेरी तरह ही जल्दी से पेट से हो जायेगी. जिस तरह दीपू अपना माल तेरे अंदर ही छोड़ता है मुझे पता है तेरा भी ऐसे ही हालत जल्दी ही हो जायेगी और ऐसे ही बातें करते हुए वो घर आ जाते है.

तब तक दीपू भी घर आ जाता है. ऑफिस में जब वो अपने सीट पे आया था तो ऋतू ने उसे बताया था की वसु की हालत ठीक नहीं है. वो वसु को फ़ोन करता है तो उसका फ़ोन स्विच ऑफ होता है तो वो लता को फ़ोन करता है और वो कहती है की वो तीनो हॉस्पिटल गए है और वो जल्दी ही घर आ जाए.



घर पे:



घर में सब लोग उनके आने का इंतज़ार कर रहे होते है. दीपू से रहा नहीं जाता और वो टहलते हुए फिर से फ़ोन करता है तो इस बार कविता फ़ोन receive कर के कहती है की वो सब घर आ रहे है.

दीपू: माँ को क्या हुआ है? तो ठीक तो है ना?

कविता: हम जल्दी ही घर आ रहे है और तुम्हे सब बता देंगे. अगर उतनी ही चिंता थी तो तू हॉस्पिटल क्यों नहीं आया?

दीपू: मुझे काम में थोड़ा देर हो गया इसीलिए नहीं आ पाया.

कविता: ठीक है इंतज़ार कर.... हम जल्दी ही घर आ रहे है.

थोड़ी देर बाद वसु कविता और दिव्या घर आ जाते है तो बाकी तीनो भी उनका ही इंतज़ार करते रहते है. उनको देख कर दीपू दौड़ कर वसु को पकड़ कर उससे पूछता है की उसे क्या हुआ है और वो अब कैसी है? वसु कुछ नहीं कहती और शर्म से अपनी आँखें नीचे कर लेती है.

दिव्या: अब इतनी जल्दी क्या है? हम घर आ गए है ना... हमें पहले पानी तो पीने दो. फिर मीना जा कर सब के लिए पानी लाती है और सब बैठ कर उनके बोलने का इंतज़ार करते है की आखिर बात क्या है और वसु की हालत क्यों बिगड़ी है.

कविता और दिव्या उन दोनों को देख कर मन में ही हस्ती रहती है.

आखिर में दीपू से रहा नहीं जाता तो वो कहता है: तुम लोग सब चुप क्यों हो? कोई बताएगा की आखिर बात क्या है.

कविता फिर दीपू की तरफ देख कर थोड़े गुस्से (दिखावा) से कहती है... तूने क्या किया है. वसु की ज़रा भी फ़िक्र नहीं है. दीपू को लगता है की सच में वसु को कोई बिमारी है और उसे चिंता सताने लगती है.

दीपू: मैंने क्या किया है?

कविता को लगता है की अब उसे और परेशान करना अच्छा नहीं है तो वो हस्ते हुए कहती है.... अरे पगले तेरी बीवी को कुछ नहीं हुआ है. दीपू को अब भी समझ नहीं आता तो पूछता है की फिर वो सब डॉक्टर के पास क्यों गए?

कविता फिर उठ कर दीपू के पास जाती है और उसके कान को पकड़ कर... बुद्धू तू बाप बनने वाला है.

कविता जब ये बात बताती है तो शॉक से पहले दीपू को कुछ समझ नहीं आता. २ Min बाद जब ये बात उसके दिमाग में जाती है तो ख़ुशी से कविता को पकड़ कर उसे गले लगाता है और फिर वसु की तरफ देखता है जो अपने सर नीचे करे हुए हस्ती रहती है.

लता और मीना भी ये बात सुनकर एकदम खुश हो जाते है तो दीपू वसु के पास आकर उसके चेहरे के ऊपर कर के उसकी आँखों में देखते हुए पूछता है तो वसु शर्म से हाँ कह कर अपनी आँखें नीचे कर लेती है. दीपू तो ख़ुशी से पागल हो जाता है और वो वसु को अपनी बाहों में लेकर ज़ोर से उसे गले लगा लेता है. इतने में लता और मीना भी उसके पास आकर वसु को प्यार से दुलारते है और उसे बधाई देते है.

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लता दीपू से: तू तो बड़ा तेज़ निकला रे और हस देती है.

अब घर में थोड़ा ख़ुशी का माहौल था तो इतने में दिव्या मिठाई लाती है और पहले दीपू को और फिर बाद में वसु को भी मिठाई पकड़ाती है. दोनों एक दुसरे को देख कर मिठाई आपस में बाटते है और एक दुसरे को खिलाते है. दीपू फिर सभी को अपने हाथ से मिठाई खिलाता है और सब ख़ुशी से मिठाई खाते है.

दोपहर को सब ख़ुशी से खाना खा कर आराम करने चले जाते है.

दीपू वसु को अपनी बाहों में लेकर ऐसे ही बातें करता रहता है तो इतने में वहां दोनों कविता और दिव्या भी आ जाते है.

दोनों वसु को देख कर कहते है: हमें बहुत ख़ुशी है की तुम माँ बनने वाली हो लेकिन थोड़ी जलन भी हो रही है. वसु उनकी बात समझ जाती है और दीपू की और देख कर कहती है... तुम क्या कहते हो?

दीपू हस्ते हुए क्यूंकि (उसे भी पता चल गया था की उन दोनों ने वो बात क्यों की)...मैं क्या कहूँ? अगर तुम सब एक साथ पेट से हो गए तो फिर तुम्हारे छोटे दीपू का ख्याल कौर रखेगा और हस देता है.

वसु: बात तो तुम्हारी सही है लेकिन उनकी बात भी सही है. कविता भी बिस्तर पे आकर दीपू के दुसरे कंधे पे अपना सर रख कर... मुझे भी जल्दी से माँ बना दोनों ना.... देखो मेरी उम्र भी वसु जितनी ही है. अगर और देरी हुई तो फिर मुझे भी कठिनाई हो सकती है और बड़े आस से दीपू की तरफ देखती है.

दिव्या भी झूटी गुस्से से कहती है... अगर तू भी पेट से हो गयी तो मैं क्यों पीछे रहूँ. जानू मेरे बारे में भी सोचो ना... कविता से: अगर तुम भी पेट से हो गयी तो फिर ये तो मुझे रोज़ सोने भी नहीं देगा और मेरी बजाते रहेगा. मैं उसे इतना ना झेल पाऊँगी.

दीपू: तुम दोनों की बात भी सही है.

दीपू कविता को देखते हुए: अगर तुम और मीना एक साथ पेट से हो गयी तो फिर मीना को एक भाई/ बेहन मिल जाएगी और तुम भी नानी बन जाओगी. क्या कहती हो?

कविता ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है तो वसु उठकर कविता के पास आती है और उसको देखते हुए अपने होंठ उसके होंठ से जोड़ देती है और उसको चूमते हुए कहती है...

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दीपू की बात एकदम सही है. कविता शर्मा जाती है और कहती है की वो एक बार मीना से भी बात कर लेगी.

फिर ऐसे ही मस्ती की बातें करते हुए सब सो जाते है.



शाम को:



ऋतू और निशा भी उनके घर आते है और वसु के बारे में पूछते है तो फिर कविता दोनों को भी खुश खबर देती है तो दोनों भी बहुत खुश हो जाते है.

निशा वसु को कमरे में ले जाती है और निशा वसु को अपने गले लगा कर कहती है... माँ तुमने इतने दिनों बाद एक अच्छी खबर सुनाई है. मैं बहुत खुश हूँ और उसको देखते हुए उसकी आँखों से आंसूं निकल आते है.

वसु समझ जाती है और उसको अपने बाहों में लेकर कहती है: मैं समझ सकती हूँ बेटा तू क्यों रो रही है. अगर सब ठीक होता तो ऐसा खबर तुम मुझे देती और मैं नानी बन जाती लेकिन ऊपर वाले की बात को कोई नहीं टाल सकता.

निशा: नहीं माँ ये तो ख़ुशी के आंसूं है.

वसु: मैं तेरी माँ हूँ... मुझे सब पता है तू चाहे कितना भी झूट बोल दे.

निशा अब कुछ नहीं कह पाती और अपनी आँखें साफ़ कर के दोनों बाहर आते है.

ऋतू भी वसु को देख कर एकदम खुश हो जाती है और वो भी उसको थोड़ा अलग ले जाकर कहती है: तुमने तो बहुत अच्छी खबर दी हो वसु.

वसु ऋतू को अपने बाहों में लेकर उसका धन्यवाद करती है और जब देखती है की वो दोनों ही अकेले है तो उसके होंठ को प्यार से चूम कर कहती है... सच में...मैंने कभी नहीं सोचा था की इस उम्र में मैं फिर से पेट से हो जाऊंगी.

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ऋतू: अभी तेरी उम्र ही क्या है? तू तो अभी भी जवान और गदरायी लग रही हो. और दीपू तो एक हट्टा कट्टा नौजवान लड़का है. ये तो होना ही था और मैं भी बहुत खुश हूँ और फिर उसके चेहरे पर भी उदासी छा जाती है.

वसु ऋतू को गले लग कर... चिंता मत करो.. मुझे तुम्हारे और दिनेश के बारे में भी पता चला था की वो भी तुमसे शादी करना चाहता था जैसे दीपू ने मुझसे किया. लेकिन क्या पता भगवान् ने तुम्हारे और निशा के लिए कुछ सोचा होगा.

वैसे तुम भी तो अपने उम्र से बहुत काम ही लगती हो और तुम भी तो एकदम सेक्सी लग रही हो. अगर तुम चाहो तो लड़कों की लाइन लग जायेगी... बस तुम्हारी हाँ की देरी है. बोलो क्या कहती हो?

ऋतू: नहीं रे.... अभी मैं ऐसा कुछ नहीं सोच रही हूँ. मुझे तो निशा को लेकर बहुत चिंता हो जाती है. वो तो अभी भी जवान है और इतनी काम उम्र में ही वो विधवा हो गयी है.

वसु: मैं समझ सकती हूँ. हमें भी उसकी बहुत चिंता लगी रहती है. देखते है अगर मैं कुछ कर सकती हूँ तो....

और फिर दोनों बाहर आ जाते है और सब से मिल कर बातें करने लग जाते है. फिर सब लोग मिल कर ख़ुशी ख़ुशी से खाना खाते है और दोनों अपने घर चले जाते है भले ही दीपू और बाकी लोग उनको उस रात रुकने के लिए कहते है. लेकिन ऋतू नहीं मानती और दोनों ऋतू और निशा अपने घर चले जाते है.



मीना और मनोज की बातें:



अब लोग वसु का अच्छे से ध्यान रखते है और उसे कुछ कान नहीं करने देते. घर में सब काम कविता और दिव्या ही करते है. जब सब अपने काम में लगे रहते है तो मीना मनोज को फ़ोन करती है.

मीना मनोज से: कैसे हो तुम?

मनोज: मैं ठीक हो. क्या बात है बहुत दिनों बाद फ़ोन कर रही हो.

मीना: तुम्हे तो पता है ना.... अभी अभी ही यहाँ पर हालत थोड़ा ठीक हो रहा है. कल ही निशा और उसकी सास आये थे घर पे. उनको देख कर मुझे भी थोड़ा बुरा लगा.

मनोज: हम्म.... तुम्हारी बात भी सही है. बोलो और क्या बात है?

मीना: मैं जिसके लिए यहां इतनी देर से हूँ तुम्हे कोई आपत्ति तो नहीं है ना? कहीं ऐसा ना हो की जब मैं माँ बन जाऊं तो तुम्हे बुरा ना लगे. अगर भगवान् की मर्ज़ी है तो हम दोनों बिना माँ बाप बने ही अपनी ज़िन्दगी गुज़ार सकते है. मुझे उसके कोई प्रॉब्लम नहीं है.

मनोज: हाँ तुम सही कह रही हो. शायद मुझ में ही कमी है. लेकिन अगर तुम माँ बन गयी तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं रहेगा... अभी भी और आगे जाकर भी.

मीना: ठीक है. एक और बात... मुझे माँ ने बताया है की जब बच्चा होगा तो वो हमारा ही होगा. हम ही उसे अपना नाम देंगे और दीपू और बाकी दीदी भी इस बात के लिए मान गए है.

मनोज: ये तो बहुत अच्छी बात है. ठीक है हो सके तो जल्दी आ जाना. मेरा यहां अकेले रहना भी मुश्किल हो रहा है.

मीना: हाँ जल्दी आने की कोशिश करती हूँ और फिर वो फ़ोन कट कर देती है.

उस रात जब मीना और कविता साथ में होते है सोने के लिए तो मीना कहती है...

मीना: देखो ना माँ... वसु दीदी भी पेट से हो गयी है. मैंने मनोज से इस बारे में बात की है जो हमने कुछ दिन पहले बात की थी.. उन्होंने भी कहा है की उन्हें कोई प्रॉब्लम नहीं है... ना अब या फिर आगे जा कर भी.

कविता: ये तो बहुत अच्छी बात है बेटा. मैं जल्दी ही वसु और दीपू से इस बारे में बात करती हूँ.

मीना: ठीक है माँ.. मुझे भी बता देना.

कविता: ठीक है उनसे बात करके ज़रूर बता दूँगी.

मीना: वैसे एक और बात है माँ.

कविता: क्या?

मीना: कल से मेरे “अच्छे दिन” शुरू होने वाले है...

कविता मीना की तरफ देख कर समझ जाती है और प्यार से उसका माथा चूम कर कहती है... आशा करो की जल्दी ही तू भी मुझे खुश खबर दे….

वहीँ रात को ऋतू और निशा दोनों एक दुसरे की बाहों में रह कर बाते करते है.

निशा: देखो ना माँ वसु माँ फिर से पेट से हो गयी है. पता नहीं मुझे कभी ऐसा ख़ुशी मिलेगा के नहीं.

ऋतू: मैं जानती हूँ बेटा. तू तो अभी भी जवान है. बोल तेरे लिए कोई लड़का देखूं क्या?

निशा: नहीं माँ... मैंने अपनी ज़िन्दगी में सिर्फ दो लोगों से प्यार किया है. निशा की बात सुनकर ऋतू निशा की तरफ देखती है तो निशा कहती है... हाँ मैं सही कह रही हूँ. एक दिनेश और...

ऋतू: और दूसरा कौन है? कोई और है क्या जिसके बारे में मुझे पता नहीं है... निशा ऋतू की तरफ देख कर... दूसरा और कोई नहीं... मेरा भाई दीपू...

ऋतू निशा की बात सुनकर आश्चर्य से उसे देखती है और फिर हस देती है...

निशा: आप क्यों हस रही हो माँ?

ऋतू: कुछ नहीं बेटा..मैंने इसके बारे में कभी सोचा नहीं था......

निशा: क्या सोचा नहीं था?

ऋतू: यही की तू भी दीपू से प्यार करती है.

निशा: “भी” का क्या मतलब है?

ऋतू: कुछ नहीं बेटा...

और फिर ऋतू निशा को देख कर प्यार से उसके होंठों को चूमती है जिसमें निशा भी उसका साथ देती है. ऋतू निशा की जुबां को अपने मुँह में लेती है और निशा भी पूरी शिद्दत से अपनी जुबां ऋतू के मुँह में देती है और दोनों एक दुसरे का रस पीते है और दोनों एक दुसरे को फिर से “शांत” करके सो जाते है….





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20 Lacs / 2 Mil views for my story...

Friends, Much Thanks for your love and support to my story. Truly appreciate your support and comments.

My only regret is that i am unable to post my updates "quickly" as much as you want it...due to conditions that are out of my control (like too much work pressure, health, etc)..which I hope you all understand.

But one thing is certain...
ye story पूरा Complete होगा और इसे मैं अधूरा नहीं छोडूंगा जैसे काफी स्टोरीज इस फोरम पे अधूरी है.

Btw, will post the next update max by Sunday...one day extra to look for pictures for my update... :)

Much Thanks once again!!
 
37th Update (मीना और कविता की जुगलबंदी) (Mega Update)



और फिर ऋतू निशा को देख कर प्यार से उसके होंठों को चूमती है जिसमें निशा भी उसका साथ देती है. ऋतू निशा की जुबां को अपने मुँह में लेती है और निशा भी पूरी शिद्दत से अपनी जुबां ऋतू के मुँह में देती है और दोनों एक दुसरे का रस पीते है और दोनों एक दुसरे को फिर से “शांत” करके सो जाते है….

अब आगे..



अगली सुबह:



अगली सुबह फिर सब लोग अपना काम करने में व्यस्त हो जाते है. घर की औरतें घर के काम में बिजी रहती है तो वहीँ दीपू भी अपने ऑफिस चला जाता है. अब उनका बिज़नेस भी थोड़ा बढ़ रहा था और उसी में उसका वक़्त भी निकल रहा था. जहाँ वो दिन में अपने काम में बिजी रहता है वहीँ रात को घर में अपनी बीवियों की मस्त चुदाई करता है जिसमें सब बहुत खुश भी थे. अब तो उनकी खुशियों में और भी चार चाँद लग गए थे जब से पता चला था की वसु प्रेग्नेंट है. वसु अब थोड़ा घर में आराम ही करती थी और घर के सब काम कविता और दिव्या ही देखती थी और कभी कभी लता भी अपना हाथ बटाती थी कुछ कामों में.



दो दिन बाद:



कविता वसु को कमरे में बुला कर: वसु सुनो एक बात करनी थी तुमसे.

वसु: हाँ बोलो सब ठीक तो है ना?

कविता: हां कोई प्रॉब्लम नहीं है. कल रात मीना कह रही थी की मनोज अब घर में अकेला है और वो उसे बुला रहा है. और वैसे भी अगले हफ्ते उनकी शादी की सालगिराह है तो मीना मनोज के पास जाना चाहती है.

वसु: अरे मैं तो ये बात भूल ही गयी थी की अगले हफ्ते उनकी सालगिराह है. अच्छा किया जो तुमने मुझे याद दिला दिया. तो क्या मीना जाना चाहती है?

कविता: हाँ तुमने सही कहा. और एक और बात.

वसु: क्या?

कविता: उसको अपने पास खींच कर उसके कान में.... अभी उसके “अच्छे दिन” चल रहे है और वो चाहती है की वो जाने से पहले.... इतना बोल कर कविता चुप हो जाती है तो वसु समझ जाती है और कहती है... अब से मीना जब तक यहां रहेगी, और वो तो अगले हफ्ते जाने वाली है, तब तक दीपू मीना के साथ ही सोयेगा. ठीक है और उसे आँख मार देती है.

कविता: सिर्फ मीना नहीं मैं भी उसके साथ ही सोऊँगी.

वसु: तू क्यों? उन दोनों को अलग मजे करने देना...

कविता: तुम्हारी बात तो सही है लेकिन मीना बहुत शर्मा रही है और वो अकेले दीपू के साथ नहीं सो सकती.

वसु: हम्म.... मैं समझ सकती हूँ. तो ठीक है तू भी उसके साथ सो जा और मजे कर और वसु भी कविता को अपनी बाहों में लेकर प्यार से उसके होंठों को चूमते हुए... क्या पता तुम दोनों एक साथ खुश खबर दे दे और ऐसा कहते हुए उसकी गांड दबा देती है.

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कविता: मैं भी यही चाहती हूँ की मैं भी जल्दी माँ बन जाऊं. मेरी भी उम्र हो रही है और तुमसे सिर्फ कुछ महीने ही छोटी हूँ. अगर मैं भी माँ बन गयी तो मुझे भी बहुत ख़ुशी होगी. कविता जब ये बात कहती है तो वसु फिर से उसकी गांड दबा देती है और कहती है की वो बात सही कर रही है.

कविता: आह थोड़ा आराम से दबाना. अभी भी थोड़ा दर्द है वहां पे. तुझे तो पता है वो तो अब तो मेरी गांड के पीछे ही पड़ा रहता है.

वसु: क्यों तुझे मजा नहीं आता क्या?

कविता: मजा तो आता है लेकिन साला दर्द भी उतना ही देता है.

वैसे तू तो बच गयी. तू तो सिर्फ एक बार ही गांड मरवा चुकी है लेकिन तू प्रेग्नेंट हो गयी तो बच गयी... नहीं वो वो भी तेरी रोज़ गांड मारता और ऐसा कहते हुए कविता भी वसु के होंठ चूम लेती है और फिर दोनों अलग होकर अपना काम करते है.

कविता फिर समय देख कर मीना को भी बता देती है की दीपू उनके साथ ही सोयेगा. मीना ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है लेकिन कुछ नहीं कहती.

कविता: सुन बेटा जैसे मैंने तुझे पहले बताया था शायद आज तू थोड़ा शर्माएगी क्यूंकि आज पहली बार है तो आज मैं भी तेरे साथ आऊँगी. लेकिन सिर्फ आज के लिए. बाकी दे दिन तू अकेली ही उसके साथ सोना जब तक तू यहां है. ठीक है?

मीना: ठीक है माँ जैसे आप कहोगे.

कविता: और सुन जैसे मैंने तुझे बताया था जब हम कमरे में एक साथ होंगे तो अपना शर्म दूर करना. जितना तू शर्माएगी उतना ही तुझे ग्लानि होगी. लेकिन जब तू थोड़ा खुल जायेगी तो तुझे भी बहुत मजा आएगा. मुझे पता है तो एक “नेक” काम करने के लिए उसके साथ सोने को तैयार हो गयी है. मैं ये बात अच्छी तरह से जानती हूँ. लेकिन फिर भी मैं चाहती हूँ की तू अपने मैं में कोई गिल्ट फीलिंग मत रखना और जब तक तू यहाँ है मजे कर. ऐसे मौके तुझे ज़िन्दगी भर याद रहेंगे.

मीना: ठीक है माँ.

मीना: आप सही कह रहे हो. मैं अगर दीपू के साथ सोऊँगी तो इसमें मेरा भी कुछ फायदा है. ये बात मैंने मनोज से भी कर ली है.

कविता: ठीक है बेटा फिर आज रात को हम दोनों उसके साथ ही सोयेंगे. ठीक है?

मीना: ठीक है.



रात को:



रात को खाना खाने के बाद दीपू थोड़ी देर टीवी देखता है और फिर कमरे में जाता है जहाँ वसु सोने की तैयारी कर रही थी. दीपू कमरे में जाता है और वसु को अपनी बाहों में भर लेता है.

दीपू को वहां देख कर वसु कहती है: आज तुम यहाँ नहीं बल्कि कविता के कमरे में सोने जाओ. काफी दिनों से तूने उसकी तरफ ज़्यादा ध्यान नहीं दिया. तू हमेशा मुझ पर ही चड़ा रहता है और देख लिया ना नतीजा और ऐसा कहते हुए वसु दीपू का हाथ अपने पेट पे रखती है.

दीपू: क्यों इस नतीजे से तुम खुश नहीं हो क्या?

वसु: मैं तो बहुत खुश हूँ बेटा. तुमने मुझे फिर से मुझे वो ख़ुशी दी है जो हर एक सुहागन चाहती है और यही ख़ुशी तुम्हारी तीसरी बीवी भी चाहती है तो अब जाओ उनके कमरे में. आज से तुम वहीँ सोओगे...समझे और दीपू के होंटो को चूमती है तो दीपू भी कहाँ पीछे रहने वाला था. वो भी वसु को चूमता है और २ Min ही वो एक प्रगाढ़ चुम्बन में जुड़ जाते है और दोनों एक दुसरे की जीभ और रस को अच्छी तरह से पीते है

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और फिर २ Min बाद वसु दीपू को अलग करती है और कहती है: अब बहुत हो गया. और ज़्यादा देर हम चूमते रहे तो मैं फिर से बहक जाऊँगी. जाओ और अपना प्यार अपनी तीसरी बीवी को दिखाओ और दीपू को धक्का देकर उसे कविता के कमरे में भेज देती है.

जब दीपू कविता के कमरे में जाता हस तो वहां कोई नहीं रहता लेकिन कमरे को थोड़ा अच्छे से सजा हुआ था... जैसे आज किसीका सुहागरात हो. दीपू उस सजे हुए कमरे को देख कर आश्चर्य हो जाता है लेकिन जब वहां कोई नहीं था तो वो कमरे में बिस्तर पे बैठ कर अपना मोबाइल देखते रहता है.

थोड़ी देर बाद कविता और मीना एकदम सजकर कमरे में दाखिल होता हस तो दीपू उन्हें देखता रह जाता है. उसने कभी नहीं सोचा था की कविता और मीना उसे ऐसे रूप पे नज़र आएंगे. उनको देख कर तो जैसे दीपू की लार टपक जाती है और खुले मुँह से उन्हें देखते रह जाता है क्यूंकि दोनों के कपडे ऐसे थे जो ज़्यादा दिखा रहे थे और बहुत कम छुपा रहे थे. दोनों अपने जलवे मस्त दिखा रहे थे. ब्लाउज से झलकती चूचियां जैसे वो ब्लाउज को फाड़ कर बाहर आ जाए, साडी नाभि ने नीचे बाँधा हुआ जिसे उन दोनों को और भी कामुक बना रहा था

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कविता: अंदर आकर: मेरे प्यारे पतिदेव अपना मुँह बंद कर लो वरना मक्खी घुस जायेगी मुँह में और हस देती है. वहीँ मीना भी थोड़ा शर्माते हुए अंदर आती है लेकिन अपनी नज़रें नीचे कर लेती है और कुछ नहीं कहती. दोनों उसके पास आते है और दीपू कविता को पकड़ने की कोशिश करता है तो कविता मना कर देती है और कहती है: अभी कुछ नहीं. थोड़ी देर वहां कुर्सी पे बैठो. दीपू कुछ बोलने को होता है तो कविता उसे फिर से रोक देती है और कुर्सी में बैठने को कहती है.

दीपू ना चाहते हुए भी बगल में रखे कुर्सी पे बैठ जाता है तो दोनों कविता और मीना बिस्तर पे छड़ कर दीपू की तरफ देखते हुए गले मिलते है और फिर एक दुसरे को देखते हुए अपने होंठ मिला लेते है और दोनों कविता और मीना एक दुसरे के होंठों को पूरे जी जान से रस निचोड़ने लग जाते है.

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उनके गहरे चुम्बन को देख कर दीपू का लंड एकदम तन जाता है और उसके पैंट में तम्बू बन जाता है जिसे कविता देख लेती है जब दोनों चुम्बन से अलग होते है तो.

कविता और मीना फिर से चुम्बन में जुड़ जाते है और मीना को पता भी नहीं चलता कब कविता उसके बदन से कपडे निकाल देती है और वो सिर्फ एक छोटी ब्रा और पैंटी में रह जाती है. मीना भी कविता के कपडे निकालते रहती है तो दीपू से रहा नहीं जाता और वो कुर्सी से उठ कर उनके पास आता है और अपने घुटनों पे बैठ कर मीना की गहरी नाभि को चूमता है. (दीपू को भी पता था की वो दोनों आज उससे चुदने के लिए मस्त मूड में है). मीना सिसकारी लेती है तो वो कविता के होंठ चूम लेती है और उसकी जुबां अपने मुँह में लेकर चूसने लगती है .

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२ Min बाद दीपू वही काम कविता के साथ करता है और कविता की गहरी नाभि को चूमता रहता है. मीना कविता के पीछे आकर उसको चूमते हुए दोनों एक दुसरे का रस पीते रहते है है.

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इन सब में तीनो को बहुत मजा आ रहा था और उन्हें पता था की रात तो अभी बाकी है और बहुत कुछ होने वाला है उस रात.

देखते देखते मीना कविता को ऊपर से नंगी कर देती है और पीछे से मीना उसकी चूचियों को दबाती रहती है और दीपू उसकी नाभि को चूमता रहता है.

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कविता इस दुगनी हमले को झेल नहीं पाती और पहली बार ही झड़ जाती है.

कविता: तुम दोनों तो लगता है आज मुझे छोड़ोगे नहीं.

दीपू: छोड़ना भी नहीं चाहते है तुम्हे. ऐसे ही छेड़खानी करते हुए तीनो फिर से बिस्तर पे आ जाते है जहाँ कविता के दोनों बगल में दीपू और मीना सो जाते है और कविता दीपू के होंठों को चूसने लगती है तो वहीँ वहीँ दीपू और मीना उसके ठोस चूचियों और पेट को सहलाते रहते है.

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दीपू फिर मीने के होंठ को भी चूम लेता है तू मीना जो कुछ देर पहले जब कमरे में शर्मा रही थी अब पूरी तरह से खुल कर दीपू को अपने होंठों का जाम पीला रही थी और साथ में दीपू के होंठों को भी चूस रही थी.

ये सिलसिला काफी देर तक चलता है और उस रात काफी दिनों के बाद मीना भी झड़ गयी थी. वो काफी दिनों से ऐसी ख़ुशी से दूर ही रही थी क्यूंकि मनोज उसे वो शारीरिक सुख देने में थोड़ा वंचित था. मीना के चेहरे पे एक तरह से ख़ुशी झलक रही थी जिसे कविता ने भी देख लिया था और वो मन ही मन खुश भी हो रही थी.

जब तीनो एक दुसरे को चूस और चूम रहे थे तीनो के कपडे भी उनके बदन से निकल गयी जिसका किसीने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया. थोड़ी देर बाद दीपू को एहसास हुआ था की उसका लंड पूरा टाइट और खड़ा हो गया है और उसे थोड़ी राहत की ज़रुरत भी थी.

दीपू फिर खड़ा होकर अपना लंड मीना को दिखाता है जैसे वो मीना को सलाम दे रहा है तो मीना उसे देख कर अपना मुँह खोले उसे देखती रहती है क्यूंकि उसने अपने ज़िन्दगी में इतना बड़ा और मोटा लंड नहीं देखा था.

मीना कविता को देख कर अपनी आँखें बड़ी करती हुई: ये क्या है माँ? मैंने तो आज तक इतना बड़ा और लम्बा लंड कभी नहीं देखा.

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कविता हस कर: ये वही अस्त्र है बेटा जो हर औरत अपने मर्द में चाहती है और यही है जो हम तीनो सौतनों को बहुत खुश करता और रखता है और हमें रात भर ठीक से सोने भी नहीं देता है. दीपू दिल का जितना अच्छा है उतना ही ये भी अच्छा है.

दीपू थोड़ा खासते हुए: तुम लोग बस बातें ही करते रहोगे क्या? मेरे छोटू को भी खुश करो... तभी तो ये तुम्हे भी उतना ही मजा देगा.

कविता और मीना दोनों एक दुसरे की तरफ देखते है और फिर दोनों ही उसके लंड पे टूट पड़ते है और दोनों बारी बारी से उसका लंड चूसते रहते है. दीपू का लंड मीना के लिए इतना बड़ा था की वो उसे पूरा अपने मुँह में नहीं ले पा रही थी. कविता देखती है और फिर अपने थूक से उसे पूरा गीला और चिकना करके मीना के मुँह में उसे डाल कर मीना के मुँह को आगे पीछे करती है जैसे की दीपू उसके मुँह को चोद रहा हो.

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इसमें दीपू को भी बहुत मजा आ रहा था और वो भी अब मीना के मुँह को चोद रहा था. अब मीना भी बड़े मजे से दीपू के पूरे लंड को अपने मुँह में लेने की कोशिश कर रही थी.

उसको देख कर कविता से भी रहा नहीं जाता और वो भी मीना का साथ देते हुए दीपू का लंड चूसती है और अब दोनों ही बारी बारी से दीपू का लंड चूसते हुए उसे मजा देते है. दीपू को तो लगता है जैसे वो जन्नत में पहुँच गया है और फिर दोनों का सर पकड़ कर दोनों की मुँह को चोदते रहता है.

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दीपू कविता को देख कर: जान मेरे पास आओ ना. कविता उसको देख कर हस्ते हुए दीपू के पास आती है तो दीपू उसकी दोनों टांगों को अलग करते हुए अपने मुँह पे बिठा लेता है. जहाँ मीना उसके लंड पे भिड़ी थी वहीँ दीपू भी कविता की चूत को चूसे और चूमे जा रहा था.

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वो कविता की चूत को चूसते हुए अपने एक ऊँगली उसकी गांड में दाल देता है तो कबिता ज़ोर से आह आह करते हुए सिसकी लेती है. कविता की सिसकी से मीना का ध्यान उसकी तरफ जाता है तो मीना को एक और झटका लगता है जब वो देखती है की दीपू अपनी एक ऊँगली उसकी गांड में दाल कर अंदर बाहर कर रहा था और वहीँ उसकी चूत भी चूस रहा था.

मीना को झटका इसलिए लगा क्यूंकि उसने कभी नहीं सोचा था की दीपू उसकी माँ की गांड के साथ ऐसा कर रहा है. उन दोनों को देख कर मीना भी एकदम उत्तेजित हो जाती है और फिर से दीपू को लंड को चूसती है और फिर से एक और बार दोनों कविता और मीना झड़ जाते है. जहाँ मीना के निकले पानी से उसकी जांघ भीग जाती है वहीँ दीपू भी कविता के पानी को अपने मुँह में लेकर पूरा पी जाता है. इस कार्य में काफी वक़्त बिता लेते है तीनो और आखिर में कविता और मीना हाँफते हुए दीपू से अलग हो कर बिस्तर पे गिर जाते है.

दीपू फिर मीना को सुलाकर उसके टांगों के बीच आ जाता है और देखता है की उसकी चूत एकदम गीली और थोड़ी फूली हुई है. उसको देख कर दीपू के मुँह में पानी आ जाता है और बिना देरी किया वो उसकी चूत पे टूट पड़ता है और अपनी जुबां से उसकी चूत चूमते चाटते हुए उसके चूत के दाने को भी चाट लेता है जिससे मीना की जैसे जान निकल जाती है.

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वो अब ज़ोर ज़ोर से सिस्क्यान लेते हुए अपनी गांड उठा कर अपनी चूत को दीपू के मुँह में दाल देती है और उसके सर को पकड़ कर उसकी चूत पे दबा देती है. अब कमरे में थोड़ी ज़ोर से आवाज़ें आ रही थी तो कविता सरक कर अपनी चूत उसके मुँह पे रख कर उसके चाटने के कहती है जिससे उसकी आवाज़ें कविता की चूत पे ही दब जाती है.

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मीना की उत्तेजना इतनी बड़ जाती है की वो भी पूरे जोश में कविता की चूत को चूसती है और एक बार तो उसकी चूत को काट भी लेती है. कविता भी बहुत गरमा जाती है और वो मीना की चूचियों को पकड़ कर ज़ोर से मरोड़ देती है. अब उस कमरे में चूसने और चूमने का घमासान शुरू हो चूका था और तभी बंद होता है जब मीना और कविता फिर से एक और बार अपना पानी निकाल लेते है जिसे दीपू और मीना पी जाते है.

जब दोनों कविता और मीना अपने आप को संभाल कर हाँफते हुए एक दुसरे को देखते रहते है तो दीपू कविता के ऊपर आकर उसके होंठ चूमते हुए कहता है... मीना का स्वाद तो बहुत अच्छा है. मीना को ये बात समझ नहीं आती तो वो कविता की तरफ सवालिया नज़र से देखती है तो कविता हस कर कहती है... जब माँ का स्वाद अच्छा है तो बेटी का भी अच्छा होगा ना.

दीपू ये बात सुनकर हस देता है और फिर से कविता को चूमते हुए नीचे सरक कर कविता की टांगें पकड़ कर उसे अपनी और खींचते हुए कहता है... जानू अब तुम्हारी बारी है.

कविता थोड़ा हफ्ते हुए: थोड़ा रुक जाओ ना... हम दोनों का पूरा पानी निकल गया है और थक भी गए है.

दीपू: तो तुम्हे और थोड़ा थकाता हूँ.

कविता: जानू मान जाओ ना..

दीपू: जब तुम दोनों ने मुझे जन्नत की सैर कराई है तो तुम्हे भी तो कराना है ना और कविता की बात को ना मानते हुए उसके पैरों को अपने कंधे पे रखते हुए उसकी लाल और गीली हुई चूत पे फिर से टूट पड़ता है और इस बार तो कविता की गांड से लेकर चूत तक चूसने लग जाता है. कविता का तो हाल बहुत बुरा हो गया था और अपने मुट्ठी को चादर से पकड़ लेती है और वो भी ज़ोर ज़ोर से आह आह करते हुए सिसकारी लेती है.

मीना को उसे देख कर थोड़े दया आती है और फिर उसे पास जाकर उसके होंठों को चूमते हुए उसकी मस्त ठोस चूची को दबाने लगती है और वहीँ दीपू भी अपने काम में लगा रहता है और वो कविता की गांड पे ज़्यादा ध्यान देते हुए उसकी गांड को चूसते हुए अपनी २ उंगलियां उसकी गांड में दाल कर उँगलियों से चोदने लगता है. कविता इन तीन हमलो को झेल नहीं पाती और २ Min के अंदर ही उसकी चूत से फवारा फिर से निकल जाता है जिसे दीपू बड़े चाव से अपने गले में भर लेता है.

कविता फिर दीपू को थोड़े गुस्से से देखती है तो दीपू हस्ते हुए उसके ऊपर आकर उसके होंठ चूमता है और फिर अगले मिनट वो मीना के होंठ भी चूमता है और अपनी जुबां मीना के मुँह में दाल कर दोनों एक दुसरे को आदान प्रदान करते है.

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दीपू मीना से: तुम्हारी मम्मी का स्वाद कैसे लगा? मीना इस बात से बहुत शर्मा जाती है लेकिन कुछ नहीं कहती. दीपू: चलो अब तक तो तुम्हे आधी जन्नत की सैर कराया है. अब पूरी सैर कराता हूँ और ऐसा बोलकर वो मीना को सुलाकर उसकी टांगों के बीच आ जाता है.

मीना के रस से भीगे हुए चूत को अपने खड़े लंड से रगड़ता रहता है और मीना को थोड़ा डर भी लगने लगता है की वो इतना बड़ा लंड कैसे ले पाएगी.

मीना: थोड़ा आराम से डालना. बहुत दिन हो गए है ना.

दीपू: छेड़खानी के साथ... क्या बहुत दिन हो गए है?

इतने में कविता हस देती है और मीना को कहती है... दीपू ऐसे ही बेशरम है... जब तक तुम पूरा खुल नहीं जाओगी वो तुम्हे ऐसे ही तड़पाएगा.

मीना: मैं समझी नहीं.

कविता: बेटी इसका कहने का मतलब है की तुम अपनी शर्म छोड दो और बोलो की बहुत दिनों से क्या नहीं हुआ है. मीना ये बात सुनकर बहुत शर्मा जाती है और दीपू की आँखों में देखते हुए कहती है... बहुत दिनों से तुम्हारे मामा ने मुझे चोदा नहीं है. इसीलिए मेरी चूत बहुत टाइट है और आराम से डालना.

दीपू फिर से हस्ते हुए: क्या डालूं और कहाँ डालूं.

मीना: तो तुम मानोगे नहीं.

दीपू: अगर तुम शर्म से ये सब करोगी तो तुम्हे मजा नहीं आएगा और तुम्हे वो सुख नहीं मिलेगा जो मामा ने तुम्हे बहुत दिनों से दिया नहीं है. तो बोलो क्या डालूं और कहाँ डालूं.

मीना: अपना ये मोटा लंड मेरी चूत में धीरे से डालो और मुझे चोदो. अब ठीक है?

दीपू भी हस्ते हुए... ये हुई ना बात और कविता को इशारा करता है की एक बार उसके लंड को अच्छे से चूस कर और खड़ा कर दे. कविता भी फिर दीपू के लंड को अच्छे से एक और बार चूस कर दीपू से कहती है... अब अपने लंड का कमाल दिखाओ और मीना को वो सुख दो जो तुम हम सब को रोज़ देते हो.

दीपू फिर झुक कर मीना को चूमते हुए उसका ध्यान बताता है और अपने लंड को उसकी गीली और टाइट चूत में धक्का मारता है तो आधा लंड उकसी चूत में चला जाता है.

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जब लंड पूरा मीना की चूत में चला जाता है तो उसके चेहरे के एक्सप्रेशंस बता रहे थे की उसे ऐसा सुख बहुत दिनों बाद मिला है लेकिन ये भी सही था की दीपू का वो झटका मीना सेहन नहीं कर पायी और मीना की तो जैसे जान ही निकल गयी थी. उसकी आँखों से आंसू आने लगते है और वो छटपटाते रहती है बिस्तर में. उसकी हालत को देख कर कविता को भी दया आती है और उसके बालों में हाथ घुमा कर: बेटा हो गया है. जो दर्द होना था हो गया है.

मीना: नहीं माँ बहुत दर्द कर रहा है. पता नहीं मैं पूरा ले पाऊँगी की नहीं.

दीपू: चिंता मत करो. दुनिया में ऐसी कोई चूत नहीं है जो लंड को ना ले सके और ऐसा कहते हुए फिर से एक और ज़बरदस्त झटका मारता है जिससे दीपू का पूरा ८. ५ इन लंड पूरा मीना की चूत की जड़ में समा जाता है.

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मीना का बहुत बुरा हाल था और वो बिस्तर पे छटपटाते रहती है. कविता उसके होंठ को चूमते हुए उसे दुलारती है और कहती है... चुप हो जा बेटी...

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दीपू भी वैसे ही अपना लंड उसकी चूत में रखे हुए उसे गाल को चूमते हुए झुक कर उसकी चूची को चूमता है और दूसरी चूची को दबाता रहता है. थोड़ी देर बाद जब मीना को थोड़ी राहत मिलती है तो वो दीपू को देखते हुए आँखों से इशारा करती है की वो अब ठीक है. दीपू फिर उसे देखते हुए अपने लंड को बाहर निकल कर फिर से अब धीरे से अंदर डालते हुए उसे चोदने लगता है. ऐसे ही चोदते हुए दीपू और कविता दोनों उसके उभारों को मसलते और चूमते रहते है.

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अब मीना को भी इस चुदाई मैं मजा आने लगता है और दीपू के इशारे पर कविता फिर से अपनी गांड उठाते हुए मीना के सर पे बैठ जाती है. अब मीना कविता की चूत को चूसती रहती है तो वहीँ दीपू के झटके भी स्पीड पकड़ने लगते है और दीपू भी अब दनादन मीना को पेलते रहता है.

थोड़ी देर बाद दीपू मीना को घोड़ी बनने को कहता है और फिर वो अब पीछे से मीना को पेलने लगता है और अपना पूरा लंड उसकी चूत में उतारते हुए काम में लग जाता है.

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इस पोजीशन में मीना को भी बहुत मजा आ रहा था और दीपू मीना की सुकड़ी हुई छोटी से गांड के छेद को देख कर एक पल के लिए उसका मन डोल जाता है की वो अपना लंड उसकी गांड में डाल दे. लेकिन उसे पता था की मीना बहुत दिनों बाद चुद रही है तो उसे बहुत तकलीफ होगी और वो ये ख्याल अपने मन से निकालते हुए उसे घोड़ी के पोजीशन में ही चोदते रहता है. कविता भी मीना के सामने अपनी टांगें खोल कर उसको जैसे दावत देती है तो मीना भी बड़े चाव से कविता की चूत चूसने लग जाती है और कविता भी मीना का सर अपनी चूत में दबा देती है. अब कमरे में धुंआदार चुदाई का माहौल बन गया था जहां सब को मजा आ रहा था.

इतने में ना जाने कितनी बार दोनों मीना और कविता झड़ जाते है उन्हें पता ही नहीं चलता. १०- १५ मं की धुंआदार चुदाई के बाद दीपू को लगता है की वो झड़ जाएगा लेकिन वो कविता को ठोकने से पहले झड़ना नहीं चाहता था. अब मीना भी बहुत थक गयी थी और दीपू से कहती है की वो बहुत थक गयी है.

दीपू: इतनी जल्दी थक गयी हो? अभी तो रात बाकी है.

मीना: तुम तो ऐसे कह रहे हो की तुम थके नहीं हो.

दीपू: नहीं मैं तो थका नहीं हूँ. देखना चाहती हो... और ऐसा बोल कर अपना लंड मीना की चूत से निकाल कर वो कविता को इशारा करता है तो मीना भी थोड़ी हाँफते हुए बगल में लुढ़क जाती है और अपनी साँसों को संभालते रहती है.

दीपू कविता से: जानू तुम भी घोड़ी बन जाओ आज तो तुम्हारी गांड मारने का बहुत मन कर रहा है.

कविता: मैंने तुम्हे कभी मन किया है क्या और ऐसा कहते हुए कविता दीपू के सामने घोड़ी बन जाती है और दीपू अपने गीलू लंड पे गीला मीना की चूत के पानी से थूक लगा कर अपने लंड को कविता की गांड पे रखते हुए एक ज़ोरदार शॉट मारता है और उसका पूरा का पूरा लंड कविता की गांड की जड़ में घुस जाता है.

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भले ही कविता की गांड खुल चुकी थी लेकिन उसने सोचा नहीं था की दीपू एक ही बार में अपना बड़ा लंड उसकी गांड में पेल देगा. उसे बड़ा दर्द होता है और वो ज़ोर की चिल्लाती है. कविता की गांड की चुदाई देख कर मीना का मुँह पूरा खुला का खुला रह कर बड़े आश्चर्य से उन्हें देखती रहती है और मन में सोचती है की उसकी माँ ने इतना बड़ा लंड कैसे एक ही झटके में ले लिया है. दीपू को भी लगता है की उसका झटका बड़ा तेज़ है तो वो आगे झुक कर कविता की पीठ को चूमते हुए अपने हाथ से उसकी बड़ी झूलती हुई चूचियों को पकड़ कर दबाते हुए कहता है... जानू क्या करून तुम्हारी मस्त गांड को देख कर रहा नहीं गया और एक ही बार में पूरा पेल दिया. कविता भी थोड़ी रूठी हुई आवाज़ में कहती है... तुम तो बड़े ज़ालिम निकले. एक बार भी नहीं सोचा की मेरी गांड की क्या हालत होगी.

दीपू: चुप हो जाओ और अब मजे लो और ऐसा कहते हुए दीपू अब धीरे धीरे कविता की गांड मारने लगता है और जब कविता को थोड़ा सुकून मिलता है तो वो भी अपनी गांड चुदाई की मजे लेती रहती है. उन दोनों को देख कर बगल में सोई हुई मीना भी गरम होने लगती है और अपनी गीली चूत मसलते रहती है.

थोड़ी देर बाद ऐसे ही कविता की गांड मारने के बाद बगल में लेट जाता है और कविता को उसके ऊपर आने को कहता है. कविता भी अब मजे में उठ कर दीपू के लंड पे बैठ कर उसके लंड को अपनी गांड में पूरा अंदर ले लेती है और फिर उसके लंड पे उछलते रहती है.

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दीपू भी मजे से उसकी गांड मारते हुए पीछे से उसकी चूचियों को पकड़ कर दबाते रहता है.

दीपू काफी देर से दोनों को पेल रहा था.... पहले मीना और अब कविता. उसको लगता है की वो भी झड़ने वाला है और कविता को पेलते हुए कहता है की वो भी झड़ने वाला है तो कविता उसकी तरफ देख कर कहती है... तुम मीना के अंदर ही अपना पानी निकाल को और ऐसा कहते हुए कविता दीपू को धकेल देती है और मीना के पास भेज देती है दीपू को. मीना भी उन दोनों की चुदाई देख कर बहुत गरम हो गयी थी और अपनी टांगें फैला कर दीपू को उसके पास बुलाती है तो दीपू भी तुरंत उसके पास जाकर अब बिना कोई रेहम किये हुए एक ही बार में अपना लंड मीना की चूत में पूरा पेल देता है. उसे पता था की वो अब ज़्यादा देर नहीं रह पायेगा और ५- ६ ज़बरदस्त शॉट्स के बाद अपना पूरा गाढ़ा और गरम वीर्य मीना के अंदर ही डाल देता है.

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मीना को भी लगता है की उसका बड़ा लंड उसके बच्चेदानी को छु रहा है और उसका पानी भी वहीँ गिर रहा है. ये बात सोच कर मीना को भी बड़ी ख़ुशी होती है और जब दीपू अपना पूरा पानी मीना के अंदर झड़ कर अलग हो जाता है तो कविता भी देख लेती है और मन में सोचती है की जिस काम के लिए मीना दीपू के नीचे आयी थी शायद वो जल्दी ही सच हो जाए. सब लोग थके हुए थोड़ा आराम करते है और दीपू और कविता बाथरूम में जाकर फ्रेश हो कर आते है. जब मीना बाथरूम जाने को होती है तो कविता उसे रोक देती है और धीरे से उसके कान में कहती है की तू अब जाकर बाथरूम में साफ़ मत कर. दीपू का पानी अपने चूत में ही समा ले और उसे बाहर गिरने मत देना. मीना कविता की बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और हस्ते हुए उसकी बात मान लेती है और वहीँ बिस्तर पे पढ़े रहती है.

थोड़ी देर बाद जब सब थोड़ा आराम करते है जहाँ दोनों कविता और मीना दीपू की बाहों में लेटे हुए थे तो दीपू पूछता है.

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दीपू: क्यों मजा आया के नहीं?

कविता: तुमने तो मुझे चलने के लायक भी नहीं छोड़ा. देखा जब मैं बाथरूम जा रही थी तो लंगड़ा कर चल रही थी. दीपू: इसमें क्या है? सब को तो पता ही है की तुम्हारी चाल बिगड़ने वाली है और कविता को आँख मार कर हस देता है. कविता भी झूटी गुस्से से दीपू के कंधे हे मुक्का मारती है और हस देती है.

दीपू मीना को देख कर: तुम्हे कैसे लगा? मीना एकदम शर्मा जाती है लेकिन कुछ नहीं कहती. उसको देख कर कविता दीपू से कहती है: चुप हो जाओ तुम. उसे क्यों परेशान कर रहे हो? फिर ऐसे ही तीनो मस्ती में बातें करते हुए दोनों नंगी ही दीपू के दोनों कन्धों पे सर रख कर आराम करते है.

मीना: सच कहूँ तो बहुत दिनों बाद मुझे बहुत मजा आया. आज पता चला की बिस्तर पे अगर औरत अपनी शर्म छोड़ दे और खुल के बातें कर और दीपू की तरफ देख कर और तुम जैसा कोई साथी हो तो बहुत मजा आता है और इस बार बिना कोई शर्म किये दीपू के होंठों को चूम लेती है. कविता ये देख कर बहुत खुश हो जाती है और वो भी अपने होंठ दोनों के होंठों से मिला देती है और तीनो एक गहरे चुम्बन में पढ़ कर अलग हो जाते है.

कविता: अब तो मुझे नींद आ रही है. सो जाते है.

दीपू: ऐसे कैसे जान? तुमने कैसे सोच लिया है की मैं तुमने इतनी जल्दी सोने दूंगा. दीपू की ये बात सुनकर दोनों मीना और कविता एक दुसरे को देखते है. पहले थोड़ा आश्चर्य से फिर हस देते है.

इस प्रकार दीपू उन दोनों को रात में २ बार और मस्त पेलता है और आखिर में करीब ३- ४ चार बजे सो जाते है.

सुबह जब दिव्या उनके कमरे में आकर देखती है की तीनो नंगे एक दुसरे की बाहों में सोये है तो वो हस्ते हुए वहां से निकल जाती है.

ऐसे ही जब तक मीना रहती है दीपू उसे रोज़ रात को पेलता है (अकेले में). कविता की हालत बहुत खराब हो गयी थी और वो अगले २- ३ दिन तक घर में लंगड़ा कर ही चलती रहती है जिसे देख कर दोनों वसु और दिव्या अपनी हसी नहीं रोक पते.

कविता वसु को देख कर: हस लो... तुम्हे क्या? अब तो तुम पेट से हो गयी हो तो तुम्हे तो आराम मिलेगा और दीपू तुम्हारा गुस्सा सब मेरे पे निकाल दिया. उसने तो २ घंटे से ज़्यादा मेरी गांड मारी तभी तो मेरी ये हालत है की मैं ठीक से चल भी नहीं पा रही हूँ .

इस बात पे दिव्या हस्ती है तो कविता कहती है: ज़्यादा हसो मत. मैं दीपू से कह दूँगी और जब वो तुम्हारी गांड मारेगा तो फिर ऐसे ही हसना. मैं तो लंगड़ा कर चल रही हूँ. तू तो अपनी बिस्तर से उठ भी नहीं पाएगी.

दिव्या भी कविता को छेड़ते हुए: हाय मेरे भी ऐसे दिन आ जाए तो कितना मजा आएगा.

कविता भी उसको अपनी बाहों में लेकर उसके होंठ चूमते हुए...

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चिंता मत कर.. और उसकी गांड दबाते हुए...तेरी ख्वाइश भी जल्दी पूरी होगी. मैं दीपू से कह दूँगी और देखना तू जो छा रही है ना... दीपू को वैसे ही करने को कहती हूँ और फिर तीनो एक दूसे को पकड़ कर चूमते है और कहते है की हम कितने खुश है की हमें दीपू जैसा पति मिला है जो हम सब को इतना खुश रखता है.



अगले हफ्ते:

अगले हफ्ते मीना कहती है की उसे अपने घर जाना है क्यूंकि वो यहाँ इस घर में बहुत दिनों से है और वहां उसके घर में मनोज भी अकेला ही है. वैसे भी हमारी सालगिराह जल्दी ही आने वाली है और मनोज चाहते है की उस दिन मैं उनके साथ ही रहूँ. वसु भी इस बात को मान जाती है और दीपू को कहती है की वो मीना को अपने घर छोड़ आये. कविता कहती है की वो भी उनके साथ जाना चाहती है तो वसु इस बात के लिए भी मान जाती है क्यूंकि वसु को पता था की मीना उसकी बेटी है तो उसके साथ जाना एकदम स्वाभाविक ही है और फिर तीनो मीना के घर की तरफ निकल जाते है.
 
38th Update (दीपू के मजे…पूरे जोश में) (Mega Update)



कविता कहती है की वो भी उनके साथ जाना चाहती है तो वसु इस बात के लिए भी मान जाती है क्यूंकि वसु को पता था की मीना उसकी बेटी है तो उसके साथ जाना एकदम स्वाभाविक ही है और फिर तीनो मीना के घर की तरफ निकल जाते है….



अब आगे..

अगली सुबह:



अगली सुबह तीनो दीपू मीना और कविता मीना के घर के लिए निकल जाते है दीपू के कार में. २- ३ घंटे के बाद वो तीनो मीना के घर पहुँच जाते है जहाँ मनोज उनका इंतज़ार कर रहा था. मनोज को पता था की मीना वापस आ रही है तो उसने ऑफिस से छुट्टी ले लिया था.



मीना के घर पे:

मनोज सब को देख कर बहुत खुश हो जाता है और फिर तीनो घर में प्रवेश करते है. घर में चाय पानी होने के बाद सब हॉल में बैठे हुए होते है.

मनोज मीना को देख कर: क्या बात है तुम बहुत थकी हुई लग रही हो.

मीना: ऐसी कोई बात नहीं है.

मनोज: लेकिन तुम्हारे चेहरे से पता चल रहा ही की शायद तुमने बहुत काम किया है.

मीना अपने आप को थोड़ा संभालते हुए: वो क्या है ना... बड़ी दीदी अब प्रेग्नेट हो गयी है तो डॉक्टर ने उसे आराम करने को कहा है. (मैं ये बात लिखना भूल गया था की मनोज को भी पता चल गया था की उसकी बेहन वसु फिर से प्रेग्नेंट हो गयी है). तो घर का काम हम ही करते थे... इसीलिए ऐसा लग रहा है की मैं थकी हुई हूँ और ऐसा बोलते हुए मीना एक नज़र दीपू पे डालती है और उसे देख कर चुपके से हस देती है.

ये दृश्य कविता भी देख लेती है लेकिन कुछ नहीं कहती लेकिन मन में सोचती है की दीपू ने उसकी इन पिछले ५ दिनों में बहुत बजायी है..

मनोज: तो भांजे तुम भी अब बाप बनने वाले हो. बधाई हो.

दीपू: धन्यवाद मामा.

मनोज: अब यहाँ २- ३ दिन रह कर जाना. मुझे भी अच्छा लगेगा.

दीपू: आपकी बात तो सही लेकिन लेकिन हम कल ही निकल जाएंगे क्यूंकि घर पे सिर्फ दिव्या और माँ है. अब वसु भी आराम कर रही है तो हमें जाना होगा.

मनोज: ठीक है. अगर तुम लोग रुक जाते तो अच्छा होता.

दीपू: कोई नहीं मामा जब अगली बार आएंगे तो और ज़्यादा दिन रहेंगे. वैसे एक बात पूछूं?

मनोज: हां पूछो क्या बात है?

दीपू: मैं सोच रहा हूँ की अब यहां दादा दादी तो नहीं है. तो आप भी क्यों नहीं आ जाते और हमारे साथ रहते?

मनोज: बात तो तुम्हारी सही है लेकिन मेरी यहां नौकरी है ना.

दीपू: आप मेरे साथ मेरे बिज़नेस में हाथ बटा सकते हो अगर आप वहाँ आ जाओगे तो.

मनोज कुछ सोचता है और कहता है की वो भी इस बारे में सोचेगा और जल्दी ही उसे बताएगा की वो उनके पास आ सकता या नहीं. इस बात पे दीपू भी मान जाता है और फिर ऐसे ही बातें करते हुए उनका दिन निकल जाता है.



रात को:



मनोज और मीना:



रात को खाना खा कर मनोज और मीना अपने कमरे में सोने चले जाते है तो वहीँ दीपू और कविता भी दुसरे कमरे में सोने चले जाते है. मनोज मीना को अपनी बाहों में लेकर ऊपर पंखे की तरफ देख रहा था. मीना मनोज को ऐसे देखते हुए पूछती है: क्या सोच रहे हो?

मनोज: कुछ नहीं यार.... तुम जिस काम के वहां गयी थी वो हो गया क्या?

मीना मनोज के मुँह से ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और अपनी आँखें नीचे करती हुई हाँ में उसे जवाब देती है.

मनोज: मैं भी चाहता हूँ की तुम भी जल्दी माँ बन जाओ. तुम्हारी ख़ुशी से ज़्यादा मेरे लिए कुछ नहीं है.

मनोज की ये बात सुनकर मीना एकदम भावुक हो जाती है और उसकी आँखों से आंसूं निकल आते है. वो मनोज के ऊपर आकर उसकी आँखों में देखते हुए कहती है... तुमने जो बात कही है तुम नहीं जानते मुझे कितना सुकून मिला है. अगर हम कभी माँ बाप भी नहीं बन सकते तो भी मुझे शायद कोई गिला शिकवा नहीं होता लेकिन तुम्हारा ये प्यार ही मेरी ज़िन्दगी के लिए काफी है और ऐसा कहते हुए मीना मनोज के होंठों को चूम लेती है बड़े प्यार से.

मनोज भी उसको चूमता है और कहता है... तुम जल्दी से माँ बन जाओगी तो इस घर में बहुत खुशियां होगी. मीना भी उस बात से सहमत होती है और फिर से रोने लगती है. मनोज उसकी आँखें पोछते हुए कहता है... और ज़्यादा इमोशनल मत हो जाओ वरना मुझे भी तकलीफ होगी. मीना इस बात पे हस देती है और फिर अपनी आँखें साफ़ करते हुए फिर से मनोज की बाहों में लुढ़क जाती है और फिर दोनों बड़ी चैन की नींद में चले जाते है.



दीपू और कविता:



वहीँ दुसरे कमरे में कविता भी सोने की तैयारी करती है और बिस्तर पे जाकर लेट जाती है.

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दीपू भी फिर कमरे में आता है और कविता को बिस्तर पे लेटा देख कर उसका लंड एकदम तन कर खड़ा होजाता है क्यूंकि वो उस पोज़ में बहुत सेक्सी लग रही थी.

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वो भी थोड़ी थकी हुई थी तो वैसे ही साडी में ही लेट जाती है बिस्तर पे और सोते समय उसकी साडी नाभि ने नीचे सरक जाती है और वो बहुत कामुक लग रही थी.. उसी को देख कर दीपू का यह हाल हुआ था (याने लंड को एकदम तन कर कड़क हो गया था). वो कविता के ऊपर चड कर उसकी चूची को दबाते हुए कहता है... इतनी जल्दी कैसे सो रही हो जान?

कविता: तुम कभी थकते नहीं क्या? पिछले पांच दिनों से तुमने मीना की खूब बजायी है और अभी फिर से मेरे ऊपर चड गए हो. थोड़ा आराम भी कर लिया करो. ये तुम्हारी सेहत के लिए अच्छा होगा.

दीपू: वैसे थक कैसे सकता हूँ जान जब घर में इतनी मस्त बीवियां है और जो रोज़ मेरा इंतज़ार करती है और मैं भी इंतज़ार करता हूँ की कब बिस्तर पे नंगा कर के तुम सब को चोदू. क्यों तुम्हे पसंद नहीं है क्या? और रही बात मीना की तो उसमें तुम्हारा भी फायदा है ना. तुम भी जल्दी नानी बन जाओगी.

दीपू के ऐसा कहने से कविता एकदम शर्मा जाती है और दीपू को प्यार से देख कर हस देती है.

दीपू: देखो तो कैसी मेरी बीवी शर्मा रही है. बोलो क्या कहती हो?

कविता: जानू आज तुम आराम कर लो. वैसे भी पिछले पांच दिनों से अपने लंड को आराम नहीं दिए हो और आज फिर गाडी भी चला कर आये हो. जब कल घर चले जाएंगे तो मैं ही तुम्हारे पास आऊँगी और मुझे भी जम के चोदना. मैं तुम्हे मना नहीं करूंगी. और वैसे भी वसु तो पेट से है. उसे तो आराम की ज़रुरत है तो बाकी दोनों बीवियां ही तुम्हारा ख़याल रखेंगी.

दीपू इस बात पे मान जाता है और कहता है ठीक है लेकिन एक चुम्मी तो बनती है ना.

दीपू के कहने पे कविता खुद अपने होंठ दीपू के होंठों से मिला देती है और दोनों एक गहरे और प्रगढ़ चुम्बन में जुड़ जाते है और दोनों अपनी जीभ एक दुसरे से मिलाते हुए पीते है.

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३- ४ Min के गहरे चुम्बन के बाद कविता दीपू को अपने ऊपर से हटा देती है और उसको बगल में सुला कर उसके कंधे पे अपना सर रख कर थोड़ा आराम करती है और देखते ही देखते दोनों गहरी नींद में चले जाते है.



अगली सुबह:



अगली सुबह कविता नाहा धो कर अपने कमरे में तैयार होती रहती है. उस वक़्त वो नहा कर सिर्फ ब्रा और पैंटी में आईने के सामने खड़ी होकर तैयार होती रहती है तो दीपू भी तैयार होने के लिए वहां आता है कविता को ऐसे देख कर उससे रहा नहीं जाता और पीछे से उसे पकड़ कर उसकी चूची को दबाते हुए उसके गले को चूमता है और कहता है...

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दीपू कविता की चूची दबाते हुए कहता है... जान अब ये थोड़े बड़े हो गए है और हाथ में अच्छे से समां रहे है और दबाने में भी मजा आ रहा है.

कविता: हाँ ये तो बड़े होंगे ही ना जब तुम और मेरी सौतनें इसे दबा दबा कर और चूस चूस कर बड़े जो कर रहे हो.

दीपू : वैसे तुम तो क़यामत लग रही हो जा. मन करता है अभी तुम्हे बिस्तर पे पटक कर तुम्हारी दोनों छेदों को खोल दूँ.

कविता: चुप कर... जब देखो तुम्हे यही सब सूझता है. कभी अपने दिमाग से भी सोचो और सिर्फ अपने लंड से नहीं क्यूंकि कविता को उस ब्रा पैंटी में देख कर उसका लंड खड़ा हो गया था और उसकी गांड को चुभ रहा था. और ऐसा कहते हुए वो हस देती है.

दीपू: अभी हस लो. घर चलने के बाद इस हसी का बदला लूँगा. चलो मैं भी तैयार होता हूँ लेकिन पहले मुझे मुँह मीठा करना है और ऐसा बोल कर वो कविता को अपनी और घुमा कर फिर से उसके लाल होंठ पे टूट पड़ता है. पहले तो कविता थोड़ा चक्र जाती है लेकिन वो भी दीपू का साथ देते हुए वो भी उसके होंठ पे टूट पड़ती है. दीपू उसके होंठ चूसते हुए उसकी चूची को भी ज़ोर से दबा देता है और कविता की सिसकी उसके मुँह में ही डाब जाती है क्यूंकि दीपू उसकी जुबां को भी चूस रहा था.

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फिर थोड़ी देर बाद दोनों अलग होते है और दीपू बाथरूम की तरफ जाता है तो कविता उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक लेती है और उसके कान के पास आकर कहती है: मुझे भी तुम्हारे बदले का इंतज़ार रहेगा और उसे आँख मार कर उसे बाथरूम की तरफ धकेल देती है.

फिर वो भी नाहा कर तैयार हो कर आ जाता है और मीना और मनोज से कहता है की वो अपने घर के लिए निकल जाएंगे. इतने में कविता भी तैयार हो कर बाहर आती है तो उसे देख कर दीपू मन में सोचता है ये तो आज मुझे मार ही डालेगी. उसने एक स्लीवलेस ब्लाउज पहना हुआ था जिसमें से उसकी आधी चूचियां जैसे बाहर आने को तड़प रही थी और अपनी साडी में नाभि के नीचे ही बाँधा हुआ था. वो तो एकदम क़यामत लग रही थी.

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उसे देख कर मीना धीरे से उसके कान में कहती है: माँ तुम तो बहुत सुन्दर दिख रही हो. संभाल लेना अपने पति को और ध्यान से घर जाना. कविता ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और प्यार से उसके गाल को खींचती है लेकिन कुछ नहीं कहती.

फिर दोनों उनसे अलविदा लेकर अपने घर के लिए निकल पड़ते है. उस दिन मौसम बड़ा अच्छा था और थोड़े बादल भी छाए हुए थे. जब वो रास्ते में होते है तो बारिश शुरू हो जाती है और सुहाने मौसम में दीपू भी गाडी चलाते हुए दोनों मजे से जा रहे थे.

दीपू: डार्लिंग मस्त बारिश हो रही है और मौसम भी बहुत अच्छा है.

कविता: हाँ तुम सही कह रहे हो. मेरा तो मन कर रहा है की थोड़ा बारिश में भीग जाऊं.

दीपू कविता की बात सुनकर कार को एक जगह रोक देता है और फिर दोनों कार से बाहर आकर वहां थोड़ा टहलते है क्यूंकि वो जगह बहुत अच्छी थी... बारिश की वजह से वो और खूबसूरत लग रहा था. बहुत सारे हरे भरे पेड़ पौधे और शानदार हरियाली छायी हुई थी जब वो थोड़ा घूम लेते है तो भीग जाते है लेकिन उनको उसकी परवाह ना थी... क्यूंकि उन्हें वहां देखने वाला जोई नहीं था और फिर वहां से उन्हें घर ही जाना था.

कविता उन गीले कपड़ों में और भी सेक्सी लग रही थी और दीपू से रहा नहीं जाता तो वो कविता को पकड़ कर अपने होंठ उससे जोड़ लेता है और दोनों एक गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है. कविता भी उस मौसम में गरम हो गयी थी और वो भी दीपू का पूरा साथ देती है और दोनों एक दुसरे का रस चूसने में लग जाते है. दीपू उसको चूमते वक़्त उसकी नाभि में ऊँगली कर के उसे और भड़का देता है जिससे उसकी चूत बहने लगती है.

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थोड़ी देर ऐसे ही चूमने के बाद दोनों एक पेड़ के नीचे बैठ जाते है और फिर बातें करते हुए और ठन्डे मौसम का मजा लेते हुए दोनों के होंठ जुड़ जाते है.

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दोनों खूब ऐसे ही मस्ती करते है और अब बारिश भी बंद हो गयी थी तो वो दोनों वापस कार में आकर अपने घर की और निकल पड़ते है.

थोड़ी दूर ऐसे ही जाने के बाद वो एक चाय की टापरी पे रुक कर चाय पीते है. दीपू जब पैसे दे रहा होता है तो कविता बगल में एक पेड़ के पास उसका इंतज़ार करती है.

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उसको देख कर दीपू से रहा नहीं जाता क्यूंकि कविता ऐसे खड़ी थी जैसे वो उसे चोदने का निमंत्रण दे रही थी. बारिश में भीगने और चूमने से कविता भी गरम हो गयी थी.

दीपू कविता को देख कर कार में आने का इशारा करता है और कार में आते ही कविता देखती है की दीपू अपना पैंट खोले अपने लंड को बाहर निकाला हुआ है. कविता भी उसको देख कर समझ जाते है और हस्ते हुए कार में बैठ कर सीधा उसके लंड को मुँह में लेकर चूसने लगती है.

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अब दीपू को भी मजा आ रहा था क्यूंकि ये पहली बार था जब वो किसीके साथ कार में मस्ती कर रहा था. दीपू भी अपनी गांड को उठा कर उसके मुँह में अपना लंड पूरी ज़ोर से घुसा रहा था और कविता भी पीछे हटने वाली नहीं थी. ५ Min की लंड चुसाई के बाद दीपू का लंड पूरा कविता की थूक से भीग गया था और अपने पूरे फॉर्म में था.

कविता: जानू आज ऐसा पहला मौका मिला है जब हम दोनों घर से बाहर है और दूर भी और हमें यहाँ देखने वाला कोई नहीं है. क्यों ना आज मुझे खुले में चोदो.

दीपू: क्या बात है डार्लिंग तुम तो आज बड़ी ठरकी लग रही हो.

कविता: हाँ क्यों नहीं. सुबह से ही तुमने मेरे होंठ चूस चूस कर और चूची दबा दबा कर मुझे बहुत गरम कर दिए हो और बेहका भी दिए हो. पता नहीं मैं घर जाने तक रह पाऊंगी या नहीं. और वैसे भी तुमने भी आज तक कभी ऐसे खुले में किसी को चोदा नहीं है तो तुम्हे भी मजा आएगा.

दीपू: जानू तुम्हारी बात भी सही है और अब मेरा भी मन कर रहा है और ऐसा कहते हुए दीपू एक सुनसान जगह पे अपनी गाडी रोक देता है और फिर कविता को भी बाहर आने को कहता है. जब कविता भी बाहर आती है तो दीपू उसे कार की बोनेट पे रख कर उसके होंठ और गले को चूसने लग जाता है.

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देखते ही देखते दीपू कविता को नंगा कर देता है और फिर उसको गले से चूमते हुए उसकी चूची को ज़ोर ज़ोर से दबाते रहता है. खुले आसमान के नीचे उन्हें देखने वाला कोई नहीं था तो कविता भी ज़ोर ज़ोर से आँहें भर्ती रहती है और कहती है... ऐसे ही दबाओ जानू... बहुत परेशान करती है.

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तुमने कहा था ना घर में की अब ये थोड़े बड़े हो गए है तो और दबाओ और बड़े कर दो.

दीपू: ज़रूर मेरी जान और जब इनमें दूध आएगा तो पीने में बड़ा मजा आएगा.

दीपू जब ये बात कहता है तो कविता मुड़कर उसकी तरफ देखती है तो दीपू कहता है: जब माँ पेट से हो गयी है तो तुमने नहीं होना है क्या?

दीपू की ये बात सुनकर कविता एकदम खुश हो जाती है और उसके होंठों को चूम कर कहती है.... सोचा था घर जाकर मैं तुमसे इस बारे में बात करूंगी... लेकिन तुमने तो अभी मेरे मन की बात केह दी है. हाँ मुझे भी जल्दी ही फिर से माँ बनना है. बनाओगे ना मुझे भी?

दीपू: ये भी कोई पूछने वाली बात है क्या और ऐसे कहते हुए दीपू कविता को पेड़ के सहारे करते हुए अपना मोटा और तना हुआ लंड उसकी गीली चूत में डाल देता है और खड़े खड़े ही उसको चोदने लगता है. इस पोजीशन में दोनों को बहुत मजा आ रहा था क्यूंकि दोनों के लिए ये पहली बार था.

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५- १० Min की ऐसी लम्बी चुदाई के बाद दीपू कविता को अपने कार के पास लाकर उसे कार के सहारे करते हुए फिर से उसको चोदने लगता है और इस बार वो कविता की एक टांग उठा कर अपने कंधे पे रखते हुए उसे ठोकने लगता है.

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दीपू कविता को चोदते हुए: जानू मजा आ रहा है ना?

कविता: पूछो मत. मैंने तो ऐसा मजा आज तक कभी लिया ही नहीं. क्यों तुम्हे मजा नहीं आ रहा है क्या?

दीपू: मुझे भी बहुत मजा आ रहा है. देखो खुले आसमान में हमें यहाँ देखने वाला कोई नहीं है और तुम तो इतनी ज़ोर से चिल्ला रही हो. इतनी ज़ोर से तुम घर में चिल्लाती तो शायद बगल वाले भी अपने घर आकर पूछे की कोई झगड़ा कर रहा है क्या. इस बात पे दोनों है देते है और दीपू कविता को चोदते वक़्त कविता अपने होंठ दीपू से मिला देती है. दीपू अब उसके होंठों का रस पीते हुए उसकी चूचियों को दबाते हुए पेल रहा था. इन तीनो हमलों से कविता झेल नहीं पाती और फिर से अपना पानी छोड़ देती है. अब दोनों थोड़े थके हुए थे लेकिन कोई हार मानने केलिए तैयार नहीं था.

कविता: जानू आज हमने इतने नए तरीके से चुदाई की है तो घर जाने से पहले एक बार कार में भी मुझे चोद दो. मैं ये भी एहसास करना चाहती हूँ.

दीपू: क्या बात है जानू आज तो तुम्हे बड़े अच्छे ideas आ रहे है.

कविता: सब तुम्हारी बदौलत ही है. तुमने ही हम सब को एक एक कर के और एक साथ सब को चोदा है... कभी बिस्तर पे तो कभी बाथरूम में तो कभी किचन में. मैंने सोचा जब तुम इतने नए तरीके और जगह में चोदते हो तो क्यों ना कार में भी हो जाए.

दीपू: नेकी और पूछ पूछ (जो कहावत है).

दीपू फिर कविता को कार में भी नए नए अंदाज़ में चोदता है... पीछे की सीट पे उसकी टांगें अपने कन्धों पे रख कर तो कभी कविता उसकी गोद में बैठ कर तो कभी कविता को घोड़ी बना कर कार में उसे हर पोजीशन में चोदता है.

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इस चुदाई से दोनों बहुत तृप्त हो जाते है. जहाँ कविता को याद भी नहीं रहता की उसने कितनी बार झडा है उनके चुदाई के दौरान... और आखिर में दीपू भी हार मान जाता है और कहता है की तो भी झड़ने वाला है और ऐसे कहते हुए वो इस बार कविता की चूचियों पे अपना पानी गिरा देता है. और बहुत सारा पानी गिराता है.

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इतना गिरा हुआ पानी देख कर कविता कहती है: मैंने आज गलती की है. तुम्हे अपना पानी मेरी चूत में ही डालना था. मैं भी फिर ज़रूर पेट से हो जाती और ऐसा कहते हुए वो हस देती है.

दीपू भी हाँफते हुए सीट पे गिर जाता है और अपनी साँसों को सम्भालता है. कविता भी दीपू के पानी को अपने अंगूठे में लेकर चूसती है और कहती है.... तुम्हारा पानी तो आज बहुत अच्छा लग रहा है और उसे आँख मार देती है

दीपू: चिंता मत करो. तुम चाहो तो अब से हर बार मेरा पानी अपनी चूत में ही लेना. दीपू के ऐसा कहने से कविता एकदम खुश हो जाती है और दीपू को चूम लेती है.

५ Min बाद दोनों फिर कार से उतर कर अपने आप को साफ़ करते है (उन्होंने घर से पानी लाया हुआ था) और फिर अपने घर की और निकल जाते है.

२- ३ घंटे में वो घर पहुँच जाते है. वसु सोयी हुई थी तो दिव्या ही उनका इंतज़ार कर रही थी. जब वो घर आते है तो दिव्या देखती है की दोनों थोड़े थके हुए है और कविता का चेहरा भी थोड़ा बिगड़ा हुआ था और उसके बाल भी भीकरें हुए थे.

दीपू अपने कमरे में चला जाता है तो दिव्या कविता को देख कर कहती है: क्या बात है दीदी तुम्हारा चेहरा और बाल देख कर ऐसा लगता है जैसे कहीं से झगड़ा कर के आ रहे हो.

कविता दिव्या को अपनी बाहों में लेकर उसके होंठ चूमते हुए कान में कहती है: हाँ हम दोनों ने खुले आसमान में “बहुत लड़ाई” की है और उसको देखते हुए आँख मार के हस देती है.

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दिव्या कविता की बात सुनकर खुले मुँह से उसको देखती रहती है तो कविता कहती है: जानू बहुत मजा आया. उसने तो मुझे पूरा थका ही दिया है. करीब एक घंटे तक उसने मुझे छोड़ा ही नहीं और मेरी खूब बजायी है और हम दोनों को बहुत मजा आया. मैं तो अब बहुत थक गयी हूँ और सोने जा रही हूँ और ऐसा बोल कर वो भी कमरे में चली जाती है सोने के लिए क्यूंकि उसका बदन भी अब बहुत टूट रहा था.

दिव्या भी अपना हाथ माथे पे रख कर मुस्कुराते हुए वो भी सोने चली जाती है. शाम को फिर सब उठते है और चाय पीने बैठ जाते है. दीपू अब थोड़ा फ्रेश लग रहा था लेकिन कविता के चेहरे पे अभी भी थोड़ी थकान दिख रही थी. उसको देख कर लता पूछती है की इतनी थकी क्यों लग रही है तो कविता कुछ नहीं कहती और दीपू की तरफ देखती है. दीपू हस देता है और लता को कुछ बहाना बता देता है.



रात को:



रात को फिर सब खाना खा कर सोने चले जाते है तो कविता कहती है की वो वसु के साथ सोयेगी तो वसु भी मान जाती है. लता दिव्या और दीपू को देख कर मन में सोचती है की आज दिव्या तो गयी और हस्ते हुए वो भी दुसरे कमरे में सोने चली जाती है.

दिव्या भी फिर कमरे में चली जाती है और फिर दीपू को प्यास लगती है तो वो पानी पीने किचन जाता है.

जब वो पानी पीते रहता है तो वहां दिव्या आती है जो की लगभग नंगी ही थी. वो एक छोटी और पतली पैंटी पहने हुए अपनी गांड मटकाते हुए दीपू के पास आती है तो दीपू बड़ी ललचायी नज़र से उसको देखते रहता है.

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दिव्या: क्यों जानू लगता है तुम तो बड़े मजे कर के आ रहे हो. एक तो दीदी को पेट से कर दिया और पिछले एक हफ्ते से कविता दीदी की ले रहे हो. लगता है अब तुम्हे मुझमे ज़्यादा दिलचस्पी नहीं है. कविता दीदी ने बताया था की आज आते वक़्त तुम दोनों ने क्या किया है.

दीपू: ऐसे कैसे हो सकता है जान की मुझे तुमपे दिलचस्पी नहीं है. क्यों तुम्हे जलन हो रही है क्या?

दिव्या: थोड़ी रूठी आवाज़ में... नहीं तो क्या? ऐसा लगता है तुम मुझे भूल ही गए हो.

दीपू फिर दिव्या को अपनी बाहों में लेकर उसको चूमते हुए... ऐसा कभी हो सकता है क्या? तुम जैसी हो... वैसे ही तुम्हारी दोनों दीदियाँ भी है.

दिव्या: मतलब?

दीपू: मतलब तुम जितनी चिकनी और चुड़क्कड़ हो वैसे ही तुम्हारी दीदियाँ है और उसे आँख मारते हुए फिर से उसकी गांड को दबाते हुए उसको चूमने लगता है.

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दिव्या झूठे गुस्से से: किसीको मनाना है तो कोई तुमसे ही सीखे और फिर वो भी अपनी जुबां दीपू के मुँह में दे देती है और दोनों एक प्रगाढ़ चुम्बन में जुड़ जाते है. थोड़ी देर बाद दीपू: जानू अभी थोड़ा चाय पीने का मन कर रहा है. चाय बनाओगी क्या?

दिव्या: क्यों नहीं और फिर थोड़ी देर बाद वो चाय बना कर अपनी गांड मटकाते हुए दीपू के पास आती है और उसे चाय देती है.

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दिव्या को देख कर दीपू का लंड एकदम तन जाता है क्यूंकि दिव्या की मस्त बड़ी बड़ी चूचियां एकदम कामुक तरह से हिल रही थी जब वो चाय लेकर आती है तो. अब दीपू से भी रहा नहीं जाता है वो चाय को बगल में रख कर दिव्या के होंठों पे टूट पड़ता है और फिर से दोनों एक गहरी चुम्बन में भिड़ जाते है और दीपू भी दिव्या की चूचियों को मसलते रहता है.

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थोड़ी देर बाद दीपू दिव्या को वहां किचन के स्लैब पे रख कर उसके पैरों को अपने कंधे पे रखते हुए उसकी चूत चूसने लग जाता है. दिव्या भी आह आह करते हुए सिसकिया लेती रहती है और अपने हाथ दीपू के सर के ऊपर रख कर उसे अपनी चूत पे दबा देती है.

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दीपू भी बड़े चाव से दिव्या की चूत और गांड दोनों को चूसते और चूमते रहता है. दिव्या का तो हाल बेहाल हो जाता है और जब दीपू उसकी चूत चूसते हुए अपनी एक ऊँगली उसकी गांड में डालता है तो दिव्या सेहन नहीं पाती और अपनी पानी छोड़ देती है जिसे दीपू पूरा पी जाता है. अब दीपू का भी लंड एकदम खड़ा हो गया था और वो दिव्या को स्लैब से उठा कर नीचे करते हुए उसे बिठा देता है.

जब दीपू के लंड को उसके अंडरवियर से निकलती है तो वो एक स्प्रिंग की तरह एकदम खड़ा हुआ उसके चेहरे के सामने आ जाता है.

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दिव्या बड़ी ललचायी नज़र से उसको देखते हुए उसके लंड पे टूट पड़ती है और अब तो उसे आदत भी हो गयी थी और एक ही बार में उसका पूरा खड़ा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने और चाटने लगती है.

दीपू भी अपना हाथ उसे सर के पीछे रखकर अपने लंड को आगे पीछे करता है जैसे वो उसका मुँह चोद रहा है.

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५ Min की मुँह चुदाई के बाद दीपू कहता है: अगर तुम ऐसे ही चूसते रहोगी तो मैं भी झड़ जाऊँगा तुम्हारे मुँह में.

दिव्या: अपना मुँह उसके लंड से निकालते हुए नहीं मुँह में मत झडो. आज मुझे भी ऐसे ही चोदो जैसे तुमने कविता को चोदा था. बस फरक इतना है की वो खुले आसमान के नीचे था और अब यहाँ किचन में है और मैं भी बहुत गरमा गयी हूँ. आज मेरी पूरी गर्मी निकाल दो.

दीपू: चलो ये भी अच्छा है और ऐसा कहते हुए वो दिव्या के पीछे आकर उसे थोड़ा झुकता है और उसे पता था की दोनों ही अब बहुत उत्तेजित है और दिव्या की चूत भी पूरी भीगी हुई है और अपने लंड को दिव्या की चूत में एक ही बार में पूरा अंदर डाल देता है. दिव्या की तो जैसे जान ही निकल गयी थी की एक बार में ही उसने पूरा घुसा दिया है.

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दीपू अब दनादन उसे पेले जा रहा था जिससे उसकी बड़ी चूचियां भी हिल रही थी और वो दृश्य बड़ा ही उत्तेजनक था. अगर कोई उन दोनों को देख लेते तो सोचते की दोनों तो जन्नत में पहुँच गए है. दीपू उसे ठोकते हुए उसे चूमते रहता है.

फिर दीपू उसकी एक टांग उठाता है जिससे उसकी चूत भी खुल जाती है और वैसे ही टांग उठा कर अपना पूरा लंड उसकी चूत में फिर से दाल देता है और अब खड़े खड़े ही उसको चोदने लग जाता है.

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थोड़ी देर बाद दिव्या कहती है की उसके पाँव दुःख रहे है तो दीपू उसे फिर से स्लैब में बिठा कर उसके पैरों को अपने कंधे पे रखते हुए वैसे ही झटके मारते रहता है और उसका लंड भी पूरी तरह दिया की चूत के जड़ तक पहुँच जाता है.

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दीपू: जानू मजा आ रहा है ना? अब भी कोई शिकायत है क्या?

दिव्या दीपू को चूमते हुए... नहीं... तुम्हे भी पता है मैं भी ऐसी चुदाई के लिए बहुत दिनों से तड़प रही थी. पिछले हफ्ते तो तुम सिर्फ कविता और मीना पे ही ध्यान दे रहे थे और ऐसा लगा की तू हम दोनों को भूल ही गया है.

दीपू: उसको ठोकते हुए... माँ ने ही कहा था की मीना अपने घर जाने वाली है तो उसी के साथ थोड़ा वक़्त गुज़ार. समझ गयी?

दिव्या: अब ज़्यादा बकवास नहीं और मुझे ऐसे ही चोदते रहो. बहुत मजा आ रहा है.

थोड़ी देर ऐसे ही पेलने के बाद दीपू कहता है: अब तुम्हे असली जन्नत दिखाता हूँ.

दिव्या: मतलब?

दीपू दिव्या को स्लैब से उठा कर उसे फिर से झुकाता है और इस बार बिना कुछ बताये अपने लंड पे थूक लगा कर भले ही वो दिव्या की चूत के पानी से भीगा हुआ था... दिव्या की कमर को पकड़ कर उसकी उठी हुई गांड पे अपना लंड रखता है. दिव्या को जब ये एहसास होता है तो वो पलट कर दीपू को देखती है लेकिन तब तक बहुत देर हो गयी थी क्यूंकि दीपू अपने पूरे दम से शॉट मारता है और उसका पूरा लंड दिव्या की गांड पे पूरा घुस जाता है.

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दिव्या की तो जैसे सांसें ही बंद हो गयी थी इस दमदार ठुकाई से... उसने सोचा नहीं था की दीपू एक बार में ही पूरा लंड उसकी गांड में डाल देगा... लेकिन दीपू रुकता नहीं और उसको चूमते हुए क्यूंकि उसे पता था की दिव्या को बहुत दर्द होगा... तुम्हे भी ऐसी ही चुदाई चाहिए थी ना... दिव्या अपने आंसूं पोछते हुए... तुम तो बड़े जालिम निकले... पहले मुझे बता तो देते... मैं तुम्हे गांड मारने से मन तो नहीं करती...

दीपू: जानू कभी कभी ऐसे surprises भी मजेदार होते है और दीपू दिव्या की गांड मारते रहता है. कुछ मिनट बाद दीपू से भी रहा नहीं जाता और वो अपना लंड उसकी गांड से निकाल कर अपना पूरा माल उसकी गांड के ऊपर ही निकाल देता है.

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अब दोनों थक गए थे और थोड़ा आराम करते है जहाँ दिव्या अपनी साँसों को संभालती रहती है. इन सब के दौरान उन्हें पता नहीं चलता की लता को भी थोड़ी प्यास लगी हुई थी और वो पानी पीने किचन की तरफ जाती है और बाहर से ही दोनों की चुदाई देख कर वो भी एकदम गरमा जाती है और अपनी चूत मसलते हुए सोचती है की दीपू का लंड तो एकदम सही है.

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एकदम दुमदार और बड़ा और और कितना पानी गिराता है...अगर इतना पानी वो दिव्या और कविता की चूत में डालेगा तो घर में बच्चों की लाइन लग जायेगी... इसी वजह से वो तीनो को एकदम खुश रक्त है. मुझे वसु से बात करनी पड़ेगी या फिर कुछ जुगाड़ करना पड़ेगा वरना मैं रह नहीं पाऊँगी. लता चुपचाप वहां से अपने कमरे में चली जाती है और फिर दोनों दिव्या और दीपू भी अपने आप को साफ़ कर के एक दुसरे को चूमते हुए अपने कमरे में चले जाते है. जाते वक़्त वो वसु के कमरे में देखते है तो दोनों वसु और कविता मस्त नींद में थे. दीपू मन में सोचता है की शादी के बाद आज उसका एकदम सुनहरा दिन था और ऐसी दिन उसने बहुत काम ही महसूस किया था....



Note: मुझे ये अपडेट लिखने के लिए बहुत मेहनत, समय और सोच भी लगा. ख़ास कर के फोटोज ढूंढने में. आशा की आप सब भी इस अपडेट को उतना ही प्यार देंगे जितना अब तक आपने दिया है. धन्यवाद.!!
 
Friends, I had planned to update and post my next post today but due to some office work i had to travel. Currently I am out of my house. Will post the update once I am back and the work pressure reduces a little bit..should not take more than 2-3 days. I hope you all understand. Much Thanks for your patience and support.
 
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दीपू मन में सोचता है की शादी के बाद आज उसका एकदम सुनहरा दिन था और ऐसी दिन उसने बहुत काम ही महसूस किया था....….

अब आगे..



अगली सुबह:



अगली सुबह दीपू जब नींद से उठता है तो देखता है की दिव्या और कविता दोनों उसके कन्धों पे अपना सर रखे हुए नंगी सो रहे है. उन दोनों को देख कर दीपू के चेहरे पे हसी आ जाती है. वसु वहाँ बिस्तर पे नहीं थी तो दीपू को लगता है की वो उठ गयी है. दीपू फिर दिव्या को उठाता है तो दिव्या थोड़ी अंगड़ाई लेते हुए कहती है: सोने दो ना. रात को तो तुमने मेरी गांड मारके मुझे इतना थका दिया है की अभी तो उठने का मन नहीं कर रहा है.

दीपू को पिछले दिन की चुदाई याद आती है और सोचता है की ऐसे दिन उसे बहुत ही काम देखने को मिले. फिर वो दोनों को ठीक से सुला कर खुद उठ जाता है और बाथरूम की तरफ निकल जाता है. वो तैयार हो कर किचन में जाता है तो वहाँ वसु चाय बना रही होती है.

दीपू पीछे से वसु को अपनी बाहों में लेकर उसके गले को चूमते हुए कहता है: क्या बात है? आज जल्दी उठ गयी हो?

वसु: जल्दी कहाँ? रोज़ तो इसी समय उठती हूँ. आज भी वैसे ही उठ गयी हूँ. इसमें नया क्या है? वैसे कल कविता कह रही थी की तुम दोनों ने खुले आसमान के नीचे बहुत मजे किये है और जिस तरह से दिव्या घोड़े बेच कर सो रही है लगता है उसका भी वैसे ही हाल है.

वो पीछे मुड़ कर दीपू को देखते हुए कहती है... लगता है तू तो मुझे भूल ही गया है. तेरी बाकी दोनों बीवियों का अच्छे से ख्याल रख रहा है लेकिन तू तो मुझ पे ध्यान ही नहीं देता.

दीपू: उसकी आँखों में देखते हुए अपने होंठ उसके होंठों से मिला देता है जिसमें वसु भी पूरा उसका साथ देती है और उसकी गांड को दबाते हुए कहता है...

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ऐसा कभी हो सकता है क्या की मैं आप को भूल जाऊं? आप तो मेरी जान हो और फिर उसकी जीभ को वसु के मुँह में डालता है तो वसु भी उसका स्वागत करती है और दोनों एक गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है.

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थोड़ी देर बाद... वसु: उन दोनों को देख कर मुझे थोड़ी जलन हो रही है.

दीपू: क्यों?

वसु: तू तो उन दोनों के साथ पूरा मजे कर रहा है और ऐसा कहते हुए वसु रुक जाती है… जैसे केह रही हो की वो अब वसु को भूल गया है

दीपू उसकी चूची को दबाते हुए कहता है....

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डॉक्टर ने तुम्हे थोड़ा आराम करने को कहा है...इसीलिए तुम थोड़ा आराम कर लो. दीपू उसे चूमते हुए उसकी चूची को दबाते हुए कहता है... इसमें दूध कब आएगा? मुझे भी दूध पीना है.

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वसु: चुप कर बेशरम... दूध तो हमारे होने वाले बच्चे के लिए है और आएगा.. तुम्हे क्यों पिलाऊंगी?

दीपू: मैं भी तो तुम्हारा बच्चा हूँ ना... मुझे नहीं पिलाओगी क्या?

वसु: उसको देखते हुए... बच्चा जो मुझे चोद के फिर से गाभिन कर दिया और कहता है बच्चा हूँ.... हस्ते हुए... बेशरम कहीं के...

दीपू: हस्ते हुए मैं कितना बेशरम हूँ बताओं क्या? चलो कमरे में या फिर यहीं पे तुम्हे बताता हूँ.

वसु: चुप कर... बाकी लोग भी आ जाएंगे.

दीपू: तो आने दो ना.... वो भी तो तुम्हारी सौतन ही है ना.. हमारी बेशर्मी देख कर वो भी अपने कपडे निकाल कर हमारे साथ जुड़ जाएंगे.

वसु: उसके होंठों को चूमते हुए... चुप कर और बाहर निकल जा. मैं चाय बना कर लाती हूँ और वो दीपू को धक्का देकर किचन से उसे बाहर भेज देती है.

फिर सब उठ जाते है और अपना काम करते है दीपू भी तैयार हो कर अपने काम के लिए निकल जाता है और घर की औरतें अपने काम में व्यस्त हो जाती है. वसु देखती है की दिव्या लंगड़ा कर चल रही है. उसे सोचने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगा की पिछली रात उसकी मस्त ठुकाई हुई है. जब वो लंगड़ाते हुए चल रही थी तो लता वसु के पास आकर उसके कान में धीरे से कहती है...

लता: वसु देख रही हो दिव्या की क्या हालत हुई है?

वसु: हाँ मैं समझ सकती हूँ.

लता: तू तो सिर्फ समझ सकती है लेकिन मेरी तो बहुत बुरी हालत है.

वसु: क्यों?

लता: इसीलिए की कल रात को मैं पानी पिने किचन की तरफ आ रही थी लेकिन वहां दोनों प्यार के शहज़ादे थे और दीपू क्या चुदाई कर रहा था... दिव्या की... उनको देख कर तो मेरी चूत भी पूरी गीली हो गयी थी और फिर रात को ठीक से नींद भी नहीं आयी.

वसु: लता की तरफ देख कर: तो महारानी लगता है आप भी अभी पूरी उत्तेजित हो.

लता: हाँ रे... अब तो मुझसे भी रहा नहीं जा रहा है. दीपू का बड़ा और तगड़ा लंड कल पहली बार देखी थी तो लगा की वो तुम तीनो को कैसे संभालता है और प्यार से वसु के पेट पे हाथ रख कर... नतीजा तो मैं देख ही रही हूँ और लगता है इस घर में और खुशियां भी जल्दी ही आने वाली है और ऐसा कहते हुए वो प्यार से वसु के होंठ चूम लेती है. वसु भी शर्मा जाती है लेकिन कुछ नहीं कहती.

लता: मेरी हालत का कुछ सुधार बता ना... लगता है आज मैं पैंटी नहीं पेहन पाऊँगी. मेरी चूत से तो पानी रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है.

वसु: मैं समझ सकती हूँ.

लता: मेरा भी कुछ जुगाड़ करना. लता की ये बात सुनकर वसु उसकी तरफ देखती है तो पाती है की लता की आँखों में चाहत और तड़प दोनों दिख रही थी और बड़ी चाहत से उसे देख रही थी.

वसु: मुझे पता है तू भी दीपू के नीचे आने के लिए तड़प रही है लेकिन मैं क्या करू? तू ही बता.( वसु को पता था की लता बड़ी उत्तेजित और कामुक औरत है जिसकी वजह से उसका तलाक हुआ था क्यूंकि उसका पहले वाला पति उसे पूरी तरह से बिस्तर पे खुश नहीं कर पाया था.)

लता: बड़े प्यार से और उसे मनाते हुए... शायद मेरा कहना गलत होगा... आखिर में तुम उसकी बीवी हो... लेकिन एक बार दीपू से बात करो ना.

वसु थोड़ा नाटक करते हुए (लेकिन मन में सोचती है की दीपू के लिए एक और चूत जल्दी ही मिलने वाला है) मैं कैसे कह सकती हूँ की वो (दीपू) अपनी बुआ से हमबिस्तर हो जाए.

लता: तू सही कह रही है. मैं बाहर अपना और तुम सब का मुँह काला नहीं करना चाहती हूँ किसी और से मिलकर क्यूंकि पता नहीं वो आदमी कैसा होगा. और मुझे दीपू में वो सब दीखता है जो एक अच्छे पति और आदमी में हो. मैं ये नहीं कह रही की मैं भी दीपू से शादी कर लून (और मन में सोचती है की अगर सच में दीपू उससे शादी करने के लिए मान जाता है तो वो बहुत खुश नसीब समझेगी अपने आप को) लेकिन अगर एक बार वो भी मुझसे मिल जाएगा और मुझे भी वो ख़ुशी देगा जो तुम सब को मिलता है तो मैं तुम्हारी ज़िन्दगी भर आभारी रहूंगी और दुखी मन से अपना चेहरा नीचे झुका लेती है.

वसु को लता पे दया आती है और उसका सर उठा कर उसकी आँखों में देखते हुए कहती है की वो दीपू से इस बारे में बात करेगी. वो मानेगा या नहीं वो उसपर निर्भर करता है.

लता: हाँ तेरी बात भी सही है. उसका भी मंजूर होना ज़रूरी है.

वसु: तू चिंता मत कर और अपना ये मुरझाया हुआ चेहरे पे हसी ला. ठीक है?

लता: ठीक है.

और फिर दोनों अपने काम में लग जाते है.

लता की बात सुनकर वसु भी काफी उत्तेजित हो जाती है और बहक जाती है. वो चुपके से अपने कमरे में जाती है और साडी निकल कर पैंटी के ऊपर से ही अपनी चूत मसलते हुए दीपू को याद करती है और साथ में लता की बातें भी की कैसे उसने पिछली रात दिव्या की बजायी थी.

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वहीँ लता भी नहाने चली जाती है और नहाते वक़्त अपनी चूत को मसलते हुए पिछली रात के मंज़र को याद करते हुए अपनी चूत मसलते रहती है और जब उससे रहा नहीं जाता तो अपनी चूत में २ ऊँगली डाल कर मसलते हुए दीपू को याद करते हुए आखिर में वो झड़ जाती है.

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फ़ोन पे बातचीत:



वहीँ दूसरी तरफ वसु अपनी चूत को मसलते हुए दीपू को फ़ोन करती है.

वसु: क्या कर रहे हो बेटा?

दीपू: मैं अपने काम में बिजी हूँ. बोलो आज अचानक कैसे कॉल किया और क्या कर रही हो?

वसु अपनी चूत को मसलते हुए अपनी सिसकारियां रोक नहीं पाती और फ़ोन पे ही बात करते हुए सिसकती है जो दीपू सुन लेता है.

दीपू: वो आवाज़ सुन कर... मुझे तो ये आवाज़ सुनी सुनी हुई लग रही है. क्या कर रही हो?

वसु: तुम क्या जानो मैं क्या कर रही हूँ... आज और अभी मैं इतना बेहक गयी हूँ और तुम्हे याद करते हुए नंगी हो कर अपनी चूत को मसल रही हूँ. तुम तो आजकल इस्पे ध्यान नहीं देते. ये सब तुम्हारा ही नतीजा है की मैं अपने आप को शांत कर रही हूँ.

दीपू जब वसु की ये बात फ़ोन पे सुनता है तो वो भी बेहक जाता है और उसका लण्ड भी खड़ा हो जाता है.

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दीपू: आप कहो तो मैं अभी घर आ जाता हूँ... आपकी सारी गर्मी निकाल दूंगा ये मेरा वादा है.

वसु: नहीं तुम अभी अपना काम करना और जो ये वादा तुम कर रहे हो ना... वो आज रात को पूरा करना. आज मैं तुम्हे छोड़ने वाली नहीं हूँ.

दीपू: चिंता मत करो... मैं भी तुम्हे छोडूंगा नहीं और फिर दोनों उत्तेजित ही हो कर थोड़ी बहुत बातें करते है और अब दीपू से भी रहा नहीं जाता तो वो अपना लण्ड निकाल कर वसु को याद करते हुए मुठियाते रहता है क्यूंकि उसके ऑफिस में उसे एक अलग कमरा/ केबिन था जिसमें बहुत ही काम लोग आते थे.

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फिर फ़ोन कट कर देते है. जब दीपू फ़ोन बंद कर के थोड़ी गहरी सांसें लेने लगता है (क्यूंकि वो भी वसु की बातें और उसको याद कर के वो भी ठरकी हो गया था) और अपने खड़े लण्ड को पैंट में एडजस्ट करने लगता है तो ठीक उसी वक़्त ऋतू उसके पास आती है कुछ काम के लिए. ऋतू को पता नहीं था तो वो दरवाज़ा खोल कर अंदर आ जाती है बिना खटखटाये. ऋतू दीपू का चेहरा देख कर थोड़ी चिंता करती है की उसे कुछ हो तो नहीं गया (दीपू आँखें बंद किये हुए अपने पैंट को ठीक करते रहता है) और वो अपनी नज़रें नीचे करते हुए उसके पैंट में बने खड़े लण्ड को देखती है तो उसका भी बुरा हाल हो जाता है और फिर दीपू का ध्यान हटाने के लिए थोड़ा खास्ती है तो दीपू ऋतू को देख कर चक्र जाता है क्यूंकि उसने सोचा नहीं था की ऋतू उसके पास आएगी.

दीपू: आंटी आप? कुछ काम था क्या? अब ऋतू का चेहरा भी एकदम लाल हो गया था जो की उसके चेहरे पे दिख रहा था. उसको भी लगता है की उसे वहां से चला जाना चाहिए तो वो कुछ बोल कर वहां से निकल जाती है और फिर ऑफिस में अपने केबिन में जाकर गहरी सांसें लेते हुए सोचती है की दीपू किसको याद कर के इतना बेहक गया है वो भी अपनी चूत को मसलने से नहीं रोक पाती.

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दीपू भी सोच में पड़ जाता है की ऋतू ने उसे किस हालत में देखा है और वो क्या सोचती होगी उसके बारे में.

ये पहली बार था जब ऋतू ने दीपू का खड़ा और लम्बा लण्ड देखा था और वो तो उसके चेहरे से जा ही नहीं रहा था.

और जब से ऋतू ने दीपू के खड़े लण्ड को देखा था तब से उसका मन काम में नहीं लग रहा था. वो किसी तरह उस दिन गुज़ारती है और शाम को अपने घर चले जाती है.

वहीँ दूसरी तरफ जब वसु दीपू से बात करते हुए अपनी चूत मसल रही थी उसी वक़्त कमरे में दिव्या और कविता भी आ जाते है और वसु को ऐसी हालत में देख कर हस देते है और उन्हें लगता है की वो दीपू से ही बात कर रही है.

दिव्या भी अपनी गांड मटकाते हुए और लंगड़ाते हुए वसु के पास आती है और कहती है... मैं कुछ मदत करू या फिर अपनी उँगलियों से ही काम चलाओगी?

कविता भी वसु से ऐसे ही पूछती है और उसे आँख मार देती है.

वसु: चुप कर... कुछ भी बक्ति रहती है.

दीपू: किस्से बात कर रही हो?

वसु: तुम्हारी बाकी दोनों बीवियां भी आ गयी है. बात करोगे क्या? जब वसु ये बात दीपू से कहती है तो उसी वक़्त ऋतू दीपू के पास आती है.

दीपू: मैं अभी थोड़ा अपने काम से बिजी हूँ. घर आकर बात करता हूँ और ऐसे कहते हुए वो फ़ोन कट कर देता है और ऋतू की तरफ थोड़े आश्चर्य से देखता है.



यहाँ वसु के कमरे में...



वसु दिव्या को देख कर: क्यों रे बहुत लंगड़ाते हुए चल रही हो?

दिव्या: क्या कहूँ दीदी... कल रात दीपू ने बिना बताये ही अपना पूरा लण्ड एक बार में ही मेरी गांड में डाल दिया. मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी थी. काफी देर तक मेरी गांड मारी और नतीजा देख ही रही हो. मैं ठीक से चल भी नहीं पा रही हूँ लेकिन फिर भी बहुत मजा आया कर रात को.

उस कमीने ने जितना दर्द दिया उतना ही मजा भी दिया और वो बिस्तर पे आकर झुक कर वसु का हाथ हटा कर उसकी चूत चूसने लगती है.

वसु भी दीपू से बात कर के बहुत बहक गयी थी और अपना हाथ दिव्या के सर पे रख कर उसे अपनी चूत पे दबा देती है. कविता ये सब देख कर वो भी अपने कपडे निकल कर नंगी हो कर वसु के पास आती है और जहाँ दिव्या वसु की चूत चूस रही थी वहीँ कविता और वसु के होंठ मिल जाते है और दोनों अपनी जुबां को एक दुसरे के मुँह में डाल कर रास आदान प्रदान कर रहे थे.

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तीनो काफी देर तक एक दुसरे को चूस और चाट कर शांत करते है और फिर थोड़ी देर बाद आंहें भरते हुए हफ्ते रहते है.

वसु: आज रात दीपू मेरे साथ ही सोयेगा.

दिव्या और कविता एक साथ: हाँ आज वो तुम्हारे साथ ही सोयेगा. आज तो हम उसे झेल नहीं पाएंगे. तुम ही झेल लो उसे. फिर ऐसे ही बात करते हुए तीनो सो जाते है.

शाम को दीपू घर आकर हाथ मुँह धो कर किचन में पानी पीने जाता है तो वहां वसु उसका इंतज़ार कर रही थी...

वसु अपना काम कर रही थी जिसकी वजह से उसके कपडे थोड़े भीग गए थे और उन भीगे कपड़ों में वो तो केहर ढ़ा रही थी और इंतज़ार ऐसे कर रही थी जैसे उसके चेहरे पे लिखा था की अभी मुझे कमरे में लेकर जम की चुदाई कर. क्यूंकि उसके कपड़ों में उसकी चूचियां जैसे बाहर आने के लिए तड़प रही हो. अपनी साडी भी नाभि के बहुत नीचे बाँधी थी और वो एकदम कामुक लग रही थी.

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दीपू उसको देख कर उसे दोपहर की बात याद आती है जब वो दोनों फ़ोन पे कामुक बातें की थी. दीपू उसको देख कर उसके पास आता है और अपनी बाहों में लेकर कहता है... अभी मैं थोड़ा थका हुआ हूँ वरना अभी तुमको कमरे में लेकर चलता.

वसु: धीरे से उसके कान में कहती है: मैं भी तो उसकी का इंतज़ार कर रही हूँ की कब तुम मुझे बिस्तर पे चढ़ा कर मुझे भी जम के चोदोगे जैसे तुमने कल कविता और दिव्या की चुदाई की थी और उसकी तरफ देख कर उसे आँख मार देती है.

दीपू गहरी सांस लेते हुए: हाय..इसी अदा पे तो मैं तुम पे मरता हूँ... और रही चुदाई की बात... तो आज रात को तैयार रेहना...और हाँ... ज़रुरत पड़े तो तुम्हारे पीछे वाले छेद में तेल लगा लेना... नहीं तो बिना तेल की ही आज वहां पर जंग होगा और हस देता है.

वसु भी दीपू के कान में कहती है... आज मुझे सिर्फ पीछे वाले छेद में जंग चाहिए. और प्यार से उसके होंठ चूम लेती है. दीपू भी उसको चूमते हुए कहता है... आज रात को तो फिर बहुत मजा आएगा.

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इतने में वहां दिव्या भी लंगड़ाते हुए आ जाती है तो दीपू उसे देख कर कहता है: लँगड़ाके क्यों चल रही हो? अब तक ठीक नहीं हुई क्या?

दिव्या: इतनी जल्दी कैसे ठीक होगी? कल रात को तो तुमने मुझे बताये बिना ही एक बार में ही अपना लम्बा डंडा मेरी गांड में दाल दिया था.. दर्द तो होगा ही ना.. इतनी जल्दी कैसे ठीक होगा?

दीपू भी दिव्या को अपनी बाहों में लेकर कहता है..आज भी आ जाओ कमरे में... फिर से एक और राउंड हो जाए.

दिव्या: ना बाबा... आज तो मेरी हिम्मत नहीं है. आज दीदी ही तुम्हारे साथ सोयेगी. क्यों दीदी... सो रही हो ना दीपू के साथ?

वसु हाँ में सर हिला देती है तो दिव्या उसको बाहों में लेकर कहती है.. आज बच के रेहना... कहीं मेरी तरह ही तुम्हारी हालत ना कर दे...

वसु दिव्या की आँखों में देख कर कहती है... तू यहाँ आने से पहले मैं दीपू से कह रही थी की मेरी भी तुम्हारी जैसे ही हालत कर दे आज रात को... और प्यार से दिव्या के होंठ चूम लेती है.

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दिव्या दीपू की तरह देख कर: आज तो तेरे मजे है... और इस बात पे सब हस देते है.

और फिर शाम को सब बैठ कर बातें करते है और फिर रात को खाना खाने के बाद दिव्या और कविता वसु को उसके कमरे में छोड़ कर दोनों दुसरे कमरे में सोने चले जाते है. उन दोनों को दुसरे कमरे में जाता देख कर लता को भी लगता है की आज वसु का नंबर है और मन में हस्ती है और सोचती है की उसका नंबर कब आएगा? क्या कभी दीपू उसकी तरफ आकर्षित होगा? क्या वो उसे अपनी ओर आकर्षित कर पाएगी? यही सब सोचते हुए वो भी सोने चली जाती है.



वसु के कमरे में:



दीपू अपने कमरे में जाने से पहले बाथरूम जाता है और फिर थोड़ा फ्रेश होकर कमरे में आता है. कमरे में आते ही जब वसु दीपू को देखती है तो देखते ही रह जाती है क्यूंकि दीपू जब बाथरूम से बाहर आया था तो वो पूरा लगभग नंगा ही था. वो सिर्फ एक अंडरवियर पहने हुए था जिसमें से उसका पूरा लण्ड तना हुआ दिख रहा था

वैसे वसु भी काम नहीं थी. वो बिस्तर पे ऐसे लेटी हुई थी जिससे उसकी गांड पूरी उभर कर दिख रही थी और उसका ब्लाउज भी पूरा बैकलेस था और उसकी चिकनी पीठ दिख रही थी जिसमें वो बहुत कामुक लग रही थी..

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कमरे में दीपू के आने की आहट होती है तो वसु उसकी और मुड कर देखती है तो दीपू उसे देखता ही रह जाता है क्यूंकि वो तो बहुत कातिल लग रही थी.

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दीपू फिर बिस्तर पे आकर वसु के बगल में बैठ जाता है तो वसु से भी रह नहीं जाता और उसको पकड़ते हुए अपनी जुबां उसके मुँह में दाल देती है और दीपू भी उसकी जुबां को चूसते रह जाता है और दोनों एक लम्बी और गहरी चुम्बन में जुड़ जाते है. दीपू भी वसु के पेट और चूची को दबाने लग जाता है.

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5 Min बाद जब दोनों थोड़ा अलग होते है तो दोनों को अपनी साँसों में काबू करने में मुश्किल होती है क्यूंकि वो दोनों का चुम्बन उतना गहरा और प्रगढ़ था.

दीपू: क्या बात है... आज तो तुम एकदम भूके शेरनी की तरह मुझ पे टूट पड़ी हो.. वैसे तुम्हे चूमने में बड़ा मजा आया.

वसु: हाँ कुछ ऐसे ही समझो... बहुत दिनों बाद तुम जो मेरे पास आये हो और जब से मैंने कविता और दिव्या से सुना है की कैसे तुमने उनकी ठुकाई की है मैं भी चाहती हूँ की तुम भी मुझे वैसे ही चोदो.

दीपू वसु की बात सुनकर हस देता है और इस बार प्यार से अपने होंठ उसके होंठों से जोड़ कर इस बार दोनों बड़े प्यार से एक दुसरे को चूमते है.

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एक दुसरे के बिना जाने ही दोनों के कपडे उनके बदन से अलग हो जाते है और अब दोनों नंगे हो कर एक दुसरे पे अपना प्यार जुटाते रहते है. दीपू फिर वसु के चूची को अपने हाथ में लेकर दबाता रहता है तो दूसरी चूची को अपने मुँह में लेकर चूसने लग जाता है.

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वसु भी अब अपने रंग में आने लगती है और एकदम गरम और ठरकी हो जाती है और दीपू का सर पकड़ कर अपनी चूची पे दबा देती है और कहती है... हाँ ऐसे ही चूसो और दबाओ... बहुत दिनों से ये बहुत परेशान कर रहे है. सुबह तुमने कहा था की तुम भी दूध पीना चाहते हो तो जल्दी ही तुम्हे वो मौका दूँगी. वसु ऐसे ही मस्ती में बडबाडे रहती है और शायद उसे पता भी नहीं चलता की वो क्या बक रही है क्यूंकि वो इतनी उत्तेजित हो गयी थी.

दीपू फिर वसु को बिस्तर पे सुलाकर फिर से उसकी चूची पे टूट पड़ता है और फिर से एक चूची को मुँह में लेकर चूसने लग जाता है. वसु फिर से अपना हाथ उसके सर के ऊपर रख कर उसे अपने सीने पे दबा देती है.

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थोड़ी देर बाद वसु दीपू की और देखती है और कहती है. वसु: एक बात कहूँ? आज मेरी एक बात मानोगे?

दीपू: मैंने तुम्हारी बात कभी टाली है क्या? बोलो क्या बोलना है?

वसु: मेरी चूत आज बहुत बह रही है और में चाहती हूँ की मेरी चूत को अच्छे से आज चूस लो लेकिन आज मेरी सिर्फ गांड ही मारना. डॉक्टर ने कहा था की मुझे थोड़ा आराम की ज़रुरत है लेकिन इतने दिन तक तुम्हारा लण्ड नहीं ली है तो मुझसे रहा नहीं गया.

मुझे भी पता है... बहुत दिनों बाद तुम मेरे पास आ रहे हो और मेरी चूत चोदोगे तो मुझे थोड़ा दर्द होगा... इसीलिए मैं चाहती हूँ की सिर्फ मेरी गांड ही मारो आज. क्या कहते हो?

दीपू: तुम्हारी बात भी सही है. तुम्हारे पेट में हमारा बच्चा पल रहा है तो हमें भी थोड़ा सावधान रहना पड़ेगा. चिंता मत करो. जैसे तुम कहोगी वैसे ही करेंगे और फिर दीपू वसु को चूमते हुए नीचे की तरफ जाता है और जब उसका रस से बहती चूत को देखता है जो पूरा गीला था और एकदम फूला हुआ था जैसे उसे आमंत्रण कर रहा था.

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चुसाई और चटाई :



उस अद्भुत नज़ारे को देख कर दीपू से भी रहा नहीं जाता और वो बिना देरी किया वसु की चूत को चूसने और चाटने लग जाता है. वसु भी अपना हाथ दीपू के सर के ऊपर रख कर उसे अपनी चूत पे दबा देती है.

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वसु को भी इसमें बहुत मजा आ रहा था. वो भी अब आंहें भर्ती रहती है और साथ में सिसकियाँ भी लेती रहती है.

थोड़ी देर बाद दीपू बिस्तर के किनारे पे सर रख कर वसु को इशारा करता है तो वसु समझ जाती है और फिर अपने पैर फैलाते हुए वो दीपू के मुँह पे बैठ जाती है और दीपू बड़े मजे से उसकी चूत को चूसने लग जाता है.





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५- १० Min तक अच्छे से चूसने और चाटने के बाद अब दीपू से भी रहा नहीं जाता तो वो भी बिस्तर से उठ जाता है और वसु को अपने सामने बुलाता है. वसु जब घुटनों पे बैठ के उसके सामने आती है तो दीपू का लण्ड पूरा तना हुआ था और एक तरह से जैसे वो वसु को सलाम कर रहा था.

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वसु भी उस अद्भुत लण्ड को देख कर उसके मुँह में भी पानी आ जाता है और वो भी बड़ी शिद्दत से उसके लण्ड पे टूट पड़ती है. दीपू भी अपना हाथ उसे सर पे रख कर अपने लण्ड पे दबा देता है और वसु भी बड़े चाव से उसका लण्ड चूसने में लग जाती है. वसु को पता भी नहीं चलता कब दीपू का ८. ५ इन लण्ड पूरे उसके मुँह में चला गया है और एक तरह से वो उसके गले के जड़ तक पहुँच गया था.

दीपू तो जैसे जन्नत पे पहुँच गया था... उसे इतना मजा आ रहा था. इतना अच्छा लण्ड चुसाई तो शायद कविता और दिव्या ने भी शायद नहीं किया था जितना वसु कर रही थी. (ऐसा दीपू मन में सोचता है).

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ऐसे ही १० Min तक वसु दीपू को मजे देती है और कहती है की वो भी उसके लण्ड को अंदर लेने के लिए तरस रही है.

वसु: मैं पहले चाहती हूँ की तुम मेरी अच्छे से गांड चाट लो और फिर अपना ये मूसल मेरी गांड में डालना. कल जैसे दिव्या के साथ किया था मेरे साथ वैसा नहीं करना. अब तक मेरी गांड को तुम्हारे लण्ड की पूरी आदत नहीं हुई है. इस बात पे दीपू हस है और कहता है... जैसे तुम्हारा हुकुम मेरी जान.



वहीँ ऋतू के घर में:



ऋतू के घर में दोनों ऋतू और निशा खाना का लेते है और फिर निशा बर्तन को रखने किचन में जाती है तो ऋतू अपने कमरे में चली जाती है. निशा किचन में पूरा काम कर के सफाई करने में लग जाती है तो वहीँ ऋतू कमरे में जाकर अपने कपडे निकल कर सिर्फ एक छोटी ब्रा और पैंटी पहने हुए निशा का इंतज़ार करती रहती है

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जब काफी देर तक निशा नहीं आती तो ऋतू से रहा नहीं जाता ओर वो अपनी चूत मसलते रहती है ओर उसकी पैंटी भी पूरी गीली हो गयी थी ओर जब निशा कमरे में आती है तो वो नज़ारा देख कर हस्ते हुए वो भी बिस्तर की ओर बढ़ती है.

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निशा: क्या बात है माँ... आज मेरे आने से पहले ही आप शुरू हो गयी? लगता है आज आपकी प्यास बहुत बढ़ गयी है.

ऋतू: क्या बताओं बेटा आज ये मुझे बहुत परेशान कर रही है और उसे देखते हुए फिर से अपनी चूत मसलते रहती है. देखना कितनी गीली हो गयी है आज ये.

निशा: वो तो मुझे भी दिख रहा है लेकिन बात क्या है की आज आप इतनी बेहक गयी हो?

ऋतू: पता नहीं क्यों (वो निशा को अभी बताना नहीं चाहती थी की उसने ऑफिस में दीपू का खड़ा लण्ड उसके पैंट में देखा था).

निशा: मैं हूँ ना.. फिलहाल आपकी इस गर्मी को मैं ठंडा कर देती हूँ और ऐसा कहते हुए वो वो भी बिस्तर पे ऋतू के पैरोँ के बीच में आकर उसकी पैंटी को अलग करते हुए उसकी चूत चूसने लग जाती है.

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ऋतू भी बहुत गरमा गयी थी तो वो भी अपनी उत्तेजना में निशा का सर अपनी चूत पे दबा देती है और वो भी अपनी गांड उछालते हुए अपनी चूत को उसके मुँह में देने की कोशिश करती है. निशा भी मस्त होकर ऋतू की बहुत गरम और भीगी हुई चूत को चूमती और चूसती है.

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ऋतू: हाँ बेटा ऐसे ही चूस मेरी चूत को.... आज कुछ ज़्यादा ही परेशान कर रही है मुझे.... और ऋतू भी आहहह ओहहह आहहह करते हुए मजे में चिल्लाती है. क्यूंकि उस घर में वो दोनों ही थे तो उसकी आवाज़ सुनने वाला और कोई नहीं था. और कुछ देर बाद जब निशा उसके भगनशे को चूमती है तो ऋतू से रहा नहीं जाता और ज़ोर ज़ोर से आँहें भरते हुए और सिसकारी लेते हुए वो झड़ जाती है और अपना पानी फेंकती है जिसे निशा पूरा पी जाती है.

निशा: माँ आज तो आपने बहुत ज़्यादा पानी छोड़ा है... इतना तो पहले कभी नहीं छोड़ा था... लेकिन आपके पानी का स्वाद बड़ा अच्छा था.

ऋतू: पता नहीं क्यों लेकिन आज मुझे इसकी बहुत ज़रुरत थी बेटा.

फिर निशा ऋतू को चूमते हुए ऊपर आती है. पहले उसके गहरे नाभि को चूमती है जिससे ऋतू की सोई हुई आग फिर से उठने लगती है. उसकी नाभि को चूमने के बाद निशा और ऊपर आती है और उसकी दोनों ठोस चूचियों पे अपनी जुबां की कलाकारी दिखाती है.

अब ऋतू भी धीरे धीरे फिर से अपने रंग में आने लगती है. ऋतू निशा का सर पकड़ कर अपनी एक चूची पे दबाती है तो निशा भी उसके खड़े हुए निप्पल को अपने मुँह में लेती है. इस पल को दोनों एन्जॉय करते है जब निशा ऋतू के निप्पल को चूसते हुए ऋतू को देखती है और ऋतू भी जैसे निशा को उकसा रही थी की उसकी चूची को और ज़ोर से चूसे.

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थोड़ी देर बाद जब निशा और ऊपर आने लगती है तो ऋतू के दोनों चूची एकदम लाल हो गए थे. निशा ऊपर आकर ऋतू से पूछती है... मजा आया क्या माँ?

ऋतू कुछ जवाब नहीं देती बल्कि उसके होंठों को अपने होंठों से मिला देती है और दोनों बहुत ही गीले और गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है और एक दुसरे की जीभ को चूसने लगते है. एक तरह से ये ऋतू की तरफ से निशा के लिए जवाब था की उसे कितना मजा आया है.

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कुछ समय बाद...



निशा: माँ मेरा भी बहुत बुरा हाल है... मेरी चूत भी एकदम भीगी हुई है और पूरी गीली हो गयी है.

ऋतू: मैं जानती हूँ बेटा की तेरा भी ऐसे ही हाल होगा. चल अब मैं तेरी सेवा करती हूँ और ऐसा बोलते हुए ऋतू निशा को सुला देती है और बिना देरी किये हुए सीधा उसकी चूत ही चूसने लगती है. उसे पता था की निशा भी बहुत गरमा गयी है और उसे यही चाहिए.

ऋतू भी अपनी २ उंगलियां निशा की चूत में डाल कर उसे दोहरा मजा देती है... अपनी जुबां से और अपनी उँगलियों से भी.

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ऋतू के ऐसा करने से पता नहीं निशा कितनी बार झड़ जाती है. आखिर में वो भी थोड़ी थक जाती है और ज़ोर ज़ोर के सांसें लेते हुए ऋतू को अपने ऊपर लेकर अपनी चूत का स्वाद उसकी जुबां से लेती है क्यूंकि निशा ने ऋतू के होंठों पे कब्ज़ा कर लिया था.

ऋतू: क्यों बेटा अभी तुझे थोड़ी राहत मिली है क्या?

निशा: हाँ और ना.

ऋतू: मतलब?

निशा: राहत तो मिली है लेकिन आपके चेहरा देख कर लगता है नहीं. इस बात पे दोनों हस देते है और दोनों एक दुसरे को देखते है और फिर अगले ही क्षण दोनों ६९ पोजीशन में आकर एक दुसरे की चूत को फिर से खाने लग जाते है जैसे की उनकी ज़िन्दगी का आखरी खाना हो.

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जब दोनों एक दुसरे को संतुष्ट कर लेते है तो निशा ऋतू की बाहों में अपना सर रख कर कहती है: आज क्या हुआ है आपको जो आज आप इतनी गरमा गई हो? आज से पहले तो आपके अंदर इतनी गर्मी नहीं देखि.

ऋतू फिर निशा की तरफ देखती है और उसे झूट बोलती है की आज कुछ ज़्यादा ही गरमा गयी है. बात ये थी की दोपहर से जब से उसने दीपू को देखा था... तब से वो गरमा गयी थी लेकिन ये बात वो निशा से कहना नहीं चाहती थी.



वापस वसु के कमरे में…. उसकी कुटाई :



दीपू: चलो आप घोड़ी बन जाओ. मैं आपकी गांड अच्छे से चाटता हूँ ताकि वो गीला भी हो जाए और फिर आपको ज़्यादा तकलीफ भी नहीं होगी. वसु फिर दीपू के सामने घोड़ी बन जाती है और दीपू उसकी गांड को चाटते हुए अच्छे से गीला कर देता है.

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उसे भी बहुत मजा आ रहा था और दीपू भी वसु की चूत से लेकर गांड को चाटने में लग जाता है. ये दोहरे हमले को वसु झेल नहीं पाती और दीपू के चाटने से ही वो फिर से झड़ जाती है. उसे पता था की उस रात वो कई बार झाड़ेगी जिसकी कोई गिनती नहीं होगी.

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जब दीपू को लगता है की वसु की गांड चिकनी हो गयी है तो वो उसे पीठ के बल सुला देता है और अपने लुंड पे थूक लगा के उसे भी गीला कर देता है. वसु: थोड़ा आराम से डालना दीपू. मेरी गांड अभी भी पूरी खुली नहीं है.

दीपू: चिंता मत करो.... आराम से ही डालूंगा और ऐसा कहते हुए वो वसु के ऊपर झुक कर उसको चूमते हुए अपने लुंड को उसकी गांड के छेड़ पे रख कर अंदर घेसेडने की कोशिश करता है तो पहली बार जाता नहीं है. फिर से दुबारा दीपू अपने उँगलियों से उसकी गांड में दाल कर अंदर बाहर करता है जिससे उसकी गांड थोड़ी खुल जाती है. फिर वो वसु को देखते हुए अपने लण्ड को उसकी गांड पे रखते हुए धक्का देता है तो फक की हलकी आवाज़ से उसका लण्ड उसकी गांड मं घुस जाता है.

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वसु को बहुत दर्द होता है और उसकी आँखों से आंसू आने लगते है. दीपू झुक कर उसकी आंसू को पी जाता है और कहता है: हो ग आया जानू. एक बार अंदर चला गया तो जो दर्द होना तो वो हो गया. अब और ज़्यादा नहीं होगा और ऐसा कहते हुए दीपू फिर से धक्का देता है और इस बार उसका आधा लण्ड वसु की गांड में घुस जाता है. दीपू इस बार अपने होंठ वसु के होंटो से मिला देता है जिससे वसु की आवाज़ दीपू के मुँह में ही दब जाती है. दीपू थोड़ी देर ऐसे ही रहता है और जब वसु को थोड़ी राहत मिलती है तो दीपू को लगता है की अब वसु थोड़ी ठीक है तो फिर से दीपू अपने होंठ वसु के होंठों से जोड़ते हुए एक और ज़बरदस्त झटका मारता है जिससे उसका पूरा लण्ड वसु की गांड की जड़ तक चला जाता है और वहां समा जाता है. वसु की तो जैसे जान ही निकल गयी थी. दीपू वसु का ध्यान हटाने के लिए उसकी चूमते हुए उसकी चूचियों को दबाने लगता है और दुसरे हाथ को उसकी चूत में दाल कर अंदर बाहर करने लगता है. वसु का ध्यान उसकी गांड की दर्द से भटक जाता है क्यूंकि उसपर ऊपर और नीचे भी हमले हो रहे थे. थोड़ी देर बाद वसु भी इन हमलों में मजा ले रही थी और अब उसे भी मजा आने लगता है. दीपू भी समझ जाता है की वसु का दर्द भी काम हो गया है तो वो भी अपने लण्ड को अंदर बाहर करते हुए उसकी गांड मारने लगता है.

वसु भी अब उसके लण्ड को अपनी गांड में लेकर अपनी गांड उछाल कर और अंदर तक लेने की कोशिश करती है. दीपू ये देख कर हस देता है तो वसु थोड़ा शर्मा जाती है.

दीपू: इसमें शर्माने की क्या बात है?

वसु: थोड़ा नकली गुस्सा दिखाते हुए... तूने तो कहा था की आराम से करेगा... और अब जब मुझे अच्छा लग रहा है तो ऐसे ही मेरी गांड मार.. और फिर दीपू भी दनादन वसु की गांड मारने लग जाता है. थोड़ी देर बाद दीपू कहता है: जानू अब घोड़ी बन जाओ... पीछे से तुम्हारी गांड मारना चाहता हूँ.

वसु की दीपू की बात मान कर घोड़ी बन जाती है और इस बार दीपू बिना डरे हुए उसकी गांड में अपना लम्बा मूसल एक ही बार में उसकी जड़ तक घुसा देता है.

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अब दीपू का लण्ड वसु की गांड में आराम से और बड़े मजे से पूरा अंदर तक जा रहा था जिसमें वसु को भी मजा आने लगता है. ऐसे ही १०- १५ Min तक दीपू पोज़ बदल बदल कर वसु की गांड की कुटाई करता है और इन सब में पता नहीं वसु कितनी बार अपना पानी छोड़ देती है.

आखिर में दीपू से भी रहा नहीं जाता और वो भी कहता है की उसका पानी भी निकलने वाला है तो वसु कहती है की वो उसका पानी पीना चाहती है. दीपू फिर ऐसे ही ३- ४ झटके और मारता है और अपना लण्ड उसकी गांड से निकाल लेता है. वसु झट से उसके लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगती है और अब दीपू से भी रहा नहीं जाता है और वो भी ज़ोर ज़ोर से आँहें भरते हुए अपना पानी निकाल देता है जिसे वसु पुअर शिद्दत से पी जाती है.

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अब दीपू भी थक जाता है और वो बिस्तर पे लुढ़क कर अपनी साँसों को संभालते हुए वसु को अपनी बाहो में ले लेता है.

दीपू: अब तो तुम्हे कोई शिकायत नहीं है ना की मैं तुम्हारे पास नहीं आ रहा हूँ.

वसु: मैं तो जानती हूँ बेटा. मैं तो ऐसे ही मजाक कर रही थी. मुझे पता है तू हम तीनो से बहुत प्यार करता है.

दीपू: हाँ तुम सही केह रही हो माँ. वैसे कविता भी केह रही थी उसको भी फिर से माँ बनना है.

वसु: फिर से का क्या मतलब है तुम्हारा? वो तो अब तुम्हारी बीवी है और सुहागन भी है. अगर वो ऐसा केह रही है तो एकदम सही केह रही है.

वो भी लगभग मेरी उम्र की ही है. अगर वो भी माँ बनना चाहती है तो मैं तो कहती हूँ की अपना पानी उसके अंदर ही डालना. वैसे भी तुम्हारा वीर्य बहुत गाढ़ा होता है. मुझे पता है की अगर तुम हर बार उसके अंदर ही डालोगे तो वो भी तुम्हे और हम सब को हल्दी ही खुश खबर देगी.

दीपू: अच्छा सुझाव दिया है. अब मैं वैसे ही करूंगा जैसा तुमने कहा है. अगर कविता माँ बन जायेगी तो तुम भी दादी बन जाओगी... ऐसा कहते हुए वो वसु की तरफ देख कर हस देता है और वसु भी उसको देख कर प्यार से उसके होंठ चूम लेती है.

वसु: वैसे एक बात बताओं?

दीपू: क्या?

वसु: तेरी बुआ भी तुझ पे मरती है. कल रात उसने तुझे और दिव्या को किचन में तुम्हारा खेल.... या फिर कहूँ तो चुदाई देख लिया था... वो तो तुम्हारा लण्ड देख कर पागल हो गयी है.

दीपू: तुम्हे कैसे पता?

वसु: आज सुबह वो मुझ से कह रही थी जब उसने देखा की दिव्या आज लंगड़ा के चल रही थी और मुझे बताया. बेचारी की तुमने कल खूब गांड कुटाई किये हो.

दीपू: तो मैं क्या करूँ?



वसु: करना क्या है? जैसे तेरा मन करे वो कर...तू जो भी निर्णय लेगा उसमें मेरी सहमती होगी. तू उसकी चिंता मत कर.

Note: Apologies for the delay...was quite busy and hence could not find time earlier...

As usual, ये अपडेट लिखने में भी बहुत मेहनत और परिश्रम लगा. आशा है ये अपडेट भी आपको पसंद आएगा. Looking forward to your likes, comments and reviews. Thanks.
 
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