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- Dec 5, 2013
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अब तक
"तू नकुल की रखेल बन जा. फिर वो तेरी ये हालत ठीक कर देगा. अगर वो नहीं मन तो मैं खुद उसके निचे आ जाउंगी. ताकि वह तेरी आग शांत कर सके." प्रिय एक कुटिल मुस्कान उसके चेहरे पर तैयार गयी, अपनी ये बात कहते हुए. उसे अब विश्वास था की चांदनी नकुल रंडी बनाने के लिए तैयार no जाएगी. "क्या सोच रही है. अगर तेरी हाँ है तो मैं नकुल से बात करू."
"ठीक है. मैं उसकी पर्सनल रंडी बनाने को तैयार हु. और तुझे उसके निचे आने की जरुरत नहीं है. पिछले बार भी मेरी वजह से तुझे वो सब झेलना पड़ा. मैं नहीं चाहती की फिर वो सब तू झेले." चांदनी रावत की बात सुन प्रिय अपना फ़ोन निकल नकुल को लगाने लगी. प्रिय कई बार उसके सामने hi उसके बारे में बात कर चुकी थी. इसलिए चांदनी को प्रिय पर सक नहीं था नकुल ने hi प्रिय को ऐसा करने को कहा था. "तू फ़ोन बाद में कर लेना. पहले मेरी इस छूट कर कुछ कर, तब से hi तो रही है."
अब आगे
"मुझे ये नहीं आ रहा की वो तेरे घर कैसे पहुंच गया. और तेरे बाप कुछ करने की जगह चुप बैठा हुआ सब होता हुआ देख रहा था. साला सच में hi तेरे बाप एक no. का चुटिया है." रणबीर बियर का एक घुट लेने के बाद यह बात हामिश से कहा. उसका दिन के बाद से आज हामिश जे अपने दोस्त से ये बात कहा था, ताकि वह नकुल को सबक शिखा सके. चार दोस्त इस समय रणबीर के फार्महाउस बैठ बैठे हुए थे, जहाँ चार लड़कियों को एक रूम बंद कर रखा था और उनके साथ अपने हथियार का उपयोग करने वाले थे.
"देख रणबीर तुझे जो कहाँ मेरे बाप को बोल या उसकी मर ले. मुझे कोई फरक नहीं पडने वाला. पर तुझे इस नकुल और बहन का कुछ करना होगा. और हाँ मेरा नाम इसमें नहीं आना चाहिए, क्योकि मैं ने अपनी माँ से वादा किया है उसकी कमस खा कर." हामिश ने साफ़ मन कर दिया था की उसका नाम नहीं आना चाहिए जो भी वह करेगा, साथ इसका कारन भी बता दिया था. रुपेश मेहरान और रहीम खान भी चुस्की लेते हुए हामिश के कंधे पर हाथ रख उसको अस्वस्थ किया की उसके साथ कुछ नहीं होगा.
"चल छोड़, मुझे पता है, तू अपनी माँ और बहन से कितना प्यार करता है. मैं वादा करता हु कल नकुल की बहन को हम सब यही मिलकर उसकी नाथ उतरेंगे. और सबसे पहले उसकी नाथ तू उतरेगा." रहीम ने हामिश को बता दिया था की कल क्या करने वाला था. जो करने वाला है उसमे उसका नाम तो नहीं आएगा, पर फल वो भी खायेगा.
"देख रहीम मैं उस लड़की को हाथ तभी लगूंगा जब रणबीर उसको काली से फूल बना देगा. वो उस दिन उसके दो दिन बाद. जब तक चाहे तुम उसके साथ कुछ भी करो." हामिश ने अपने आप सेफ रखने के लिए बहुत hi चालाकी से मन कर दिया था. की नकुल की बहन के साथ कुछ करने तो जरूर पर बाद में. "ये मत सोचना में दर के बोल रहा हु. क्यों इसे पहले भी मैं यही करते आया हु. क्यों भूल गए उस प्रोफेसर की लड़की को, जब तुम सबने मुझे पहले करने को कहा था तो मैं मन कर दिया था. उसके बाद रहीम ने उसकी सील तोड़ी थी." हामिश ने ये बात बहुत hi सोच समझ कर कहा था, शायद उसे नकुल के टक्कट अंदाज़ा उसी दिन हो गया था जब उसके घर आ कर वो कांड किया था.
"अरे यार तुझे सफाई देने की कोई जरुरत नहीं है. मुझे पता है, तू हमेशा से यही करता आया है." रुपेश ने कहा. पर सायद ये भूल गए थे की हामिश ने एक बार इनके सामने hi एक पुलिस वाली की बेटी की बहुत बुरी तरह चुदाई की थी, वह पर उस लड़की का बाप भी था पर वो कुछ नहीं कर पाया अपनी बेटी के किये. सायद ये सब इस लिए भी भूल गए थे क्योकि हामिश ने ऐसा पहली बार किया था, इसे पहले उसने कभी पहल नहीं की थी. और आज यही उसके काम आने वाला था.
"चल यार ये सब छोड़. और चल मजे लेते है उन लड़कियों के. और हाँ आज तू सबसे पहले किसी भी एक लड़की को चुनेगा. उसके बाद हम सब." रणबीर ने बात को ख़त्म करते हुए कहा. हामिश भी इस बात के लिए मन नहीं किया और अपना एंटी घुट पीने के बाद बोतल वही छोड़ खड़ा हो गया. उसके पीछे बाकि सब, और चल दिए एक रूम की तरफ जहाँ पर चार लड़कियों बंद कर राखी थी. रूम में पहुंचने के बाद हामिश ने सबसे पहले उसने लड़की चुनी. उस लड़की की हाइट 5 फट होगी और रंग सवाल और बंदन का कटवा साफ़ उसके कपड़ो में से झलक रहा था.
"यार, मेरे भाई, ये तेरे लिए." हामिश ने उस लड़की रणबीर की तरह धकेलते हुए कहा. हामिश एक पुलिस वाले के बीटा था और उसे पता था की कैसे सामने वाले को अपने पक्ष में किया जाता है. ये देख कर देख तीनो hi हैरान थे क्योकि उनकी सोच गलत साबित हुए थी. "यार जा तू मजे कर इसके साथ, हम तीनो इन तीनो से मजे करेंगे."
"ठीक है हामिश." इतना कहने के बाद वहां से चला गया. वही तीनो ने एक लड़की ली और हामिश वही रहा, बाकि के दोनों अलग रूम में चले गए. चारो hi अपने अपने पार्टनर के साथ चुदाई काम प्रोग्राम सुरु कर चुके थे. हामिश ने बहुत hi बारीकी से सोचने के बाद आज उसने ये बात बताई थी अपने दोस्तों से. जैसा उसने सोचा था वैसा hi हुआ भी था.
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धादायक और के बाँदा निचे गिर गया. पीछे से एक आदमी उस बन्दे के सर पर जोर से डंडा मारा था. फिर उस आदमी ने एक रूम का दरवाजा खोला और सामने बैठ हुई औरत से कहा, "जल्दी करो. वर्ण वो सभी आते hi होंगे. अगर मुझे उनमे से किसी ने भी देख लिया तो मेरी जान सकती है."
"भाई उमेश मैं आपका ये एहसान जिंदगी भर नहीं भूलूँगी." उस औरत ने कहा.
"ये बात बाद में कर लेना. पहले यहाँ से निकालो. आओ मेरी पीछे." उमेश ने बिच में hi उस औरत को टोकते हुए बोलै. वो औरत भी उसके पीछे हो ली. छुपते छुपाते वो दोनों उस जगह से निकल आये. फिर उमेश उस औरत को ले कर एक तरह चल दिया. काफी दूर जाने के बाद उमेश ने फिर से कहा, "ये पैसे रखिये. आप ये देख hi रही है की हम अभी जंगल में खड़े है. आप यहाँ से सीधे जाना है करीब एक किलोमीटर वह पर मैं एक जीप छुपा रखा है. ये उसकी चाभी."
"आप भी मेरे साथ चलिए, अगर उन्हें ये बात पता चली आपने मुझे भगाया है तो वो सभी आपको जान से मर देंगे. प्लीज आप मेरे साथ चलिए." उस औरत ने हाथ जोड़ते हुए अपने साथ चलने को कहा. उमेश ने उस औरत का हाथ पकड़ते हुए फिरसे कहा, "अगर मैं वहां पर नहीं मिला तो उन्हें पक्का सक हो जायेगा मुझे पे. इस लिए मुझे जाना hi होगा." फिर उमेश उस औरत वही पर छोड़ वापस चला गया. वो औरत थोड़े दे उसे जाते हुए देखती रही, उसके बाद अपने रस्ते हो ली.
"मैडम मैं उसे छोड़ दिया. आपने जैसा कहा मैं ने वैसा hi किया है. इसके लिए मुझे अपने एक आदमी को ज़ख़्मी करना पड़ा." उमेश ने ये बात फ़ोन कहा. जहाँ दूसरी तरफ लाजवंती उर्फ़ रेशमा ठाकुर थी. आज 10 दिन हो गए थे, उसके वहां से गए हुए. "मैडम मेरे ये समझ में नहीं आ रहा की अपने उस औरत एक महीने बाद छोड़ने के लिए कहा था फिर इतनी जल्दी क्यों छोड़ दिया.",
"उमेश ये तुम नहीं समझ सकते की मैं ने ऐसा क्यों किया. तुम अपने साथियों को ले कर वहां से चले जाओ. जब तक मैं तुम्हे कांटेक्ट न करू तुम मुझे कांटेक्ट करने की कोशिश भी मत करना. समझ आयी मेरी बात." लाजवंती उमेश को समझते हुए बोली. उसके बाद उसने फ़ोन कट कर दी. उमेश उसके बाद वहां से अपने अड्डे पर चला गया. जब वह पंहुचा तो उसके साथियों उस आदमी को स्कोर्पियन में बैठा उसे पकड़ रखा था. उमेश आगे सीट पर वहां से चला गया.
"मेरे लाल मैं आ रही हु. मैं तुझे कुछ नहीं होने दूंगी. सायद अब तो तू मुझे नफ़रत भी करने लगा होगा. जिस तरह मेरी हंसशकाल ने मुझे तेरे बारे बात कर रही थी. इस बात से मैं अंदाज़ा लगा सकती हु उसने तेरे साथ बहुत गलत किया होगा, मेरे लाल नकुल. मैं तेरी साडी नफ़रत को प्यार में बदल दूंगी, चाहे मुझे कुछ भी करना पड़े." रेशमा ठाकुर मैं में सोचते हुए सीधे चल रही थी. ऐसे hi उसके मैं में ानेको ख्याल आते रहे और उनके बारे में सोचती रही. ऐसे hi चलती हुए उसे जगह पर पहुंच गयी जहाँ पर उमेश ने कहा था, यहाँ तक आने में रेशमा ठाकुर को पुरे 2 घंटे लग गए थे. रेशमा चारो तरफ देखा उसे कही जीप नहीं दिखाई दी. ये देख कुछ परेशां हो गयी को किस तरह यहाँ से वो निकलेगी. पर कुछ सोच कर वह आगे बढ़ गयी, अभी उसने 20 कदम hi चली थी के एक तरह उसे जीप कड़ी हुई दिख. रेशमा ठाकुर भाग कर उस जीप के पास गयी और उसके ऊपर पड़े हुए झड़ी को हटाने लगी. इसमें उसे 40 मिनट लगे. उसके बाद वह उसमे बैठ और चालू कर वहां से निकल गयी.
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"प्रिय तुम्हारी माँ का फ़ोन आया था. वह तुम्हे भुला रही है. इस लिए तुझे कल hi निकलना होगा." मंजू बुआ ने प्रिय से बोली, जो अभी चांदनी के साथ सीढ़ियों से उतर कर निचे आ रही थी. प्रिय अपनी बुआ की बात सुन थोड़ी चिंतिति हो गयी, क्योकि उसको नकुल का दिया हुआ काम बिच में hi छोड़ कर जाना पद रहा था. वही चांदनी का तो बहुत ज्यादा परेशां हो गयी थी. अब उसे दर लगने लगा था अपने आपसे की कैसे वो खुद को रोकेगी.
"पर बुआ, माँ ने मुझे इतनी जल्दी क्यों बुलाया. क्या उन्होंने आपको कुछ बताया." प्रिय कारन जानना चाहा की उसकी माँ उसे क्यों बुला रही थी. जब की उन्होंने ने यहाँ पर रहने को कहा था ताकि वह नकुल कैसे भी कर के वहां ला सके.
"माँ आप ममी से बात करो न की वह प्रिय को कुछ दिन और यहाँ रहने दे. फिर चाहे वो उसे भुला ले." चांदनी रावत अपनी माँ के गले में अपनी बाहें दाल यह बात कही. उसका ये बात कहना इस लिए महत्वपूर्ण था क्योकि प्रिय के चले जाने से उसकी जिस्म की गर्मी को शांत कौन रहता. "प्लीज माँ आप बात करो न ममी से."
"देख बेटी, अगर तेरी ममी को कोई जरुरी काम नहीं होता न तो वह प्रिय को यहाँ से नहीं बुलाती. इस लिए मैं उससे बात नहीं करने वाली. और प्रिय तुम कल जा रही हो." मंजू बुआ ने आदेश hi सुना दिया था दोनों को, की प्रिय यहाँ से कल जाएगी तो जाएगी. फिर वहां से अपने रूम में चली गयी. उसके बाद प्रिय चांदनी को ले कर घर से निकल गयी.
वही तरुण रावत बेटे से नकुल को सबक शिखा ने ले लिए बात पर चर्च कर रहा था. उसके बेटे ने भी दो तीन राय दिए. जिसमे से सिर्फ एक hi पसंद आया वो था अपनी बहु का इस्तेमाल कर नकुल को मंजू के नज़रो में गिरना. इस बात पर सहमत दोनों हो गए थे.
अब तक
"तू नकुल की रखेल बन जा. फिर वो तेरी ये हालत ठीक कर देगा. अगर वो नहीं मन तो मैं खुद उसके निचे आ जाउंगी. ताकि वह तेरी आग शांत कर सके." प्रिय एक कुटिल मुस्कान उसके चेहरे पर तैयार गयी, अपनी ये बात कहते हुए. उसे अब विश्वास था की चांदनी नकुल रंडी बनाने के लिए तैयार no जाएगी. "क्या सोच रही है. अगर तेरी हाँ है तो मैं नकुल से बात करू."
"ठीक है. मैं उसकी पर्सनल रंडी बनाने को तैयार हु. और तुझे उसके निचे आने की जरुरत नहीं है. पिछले बार भी मेरी वजह से तुझे वो सब झेलना पड़ा. मैं नहीं चाहती की फिर वो सब तू झेले." चांदनी रावत की बात सुन प्रिय अपना फ़ोन निकल नकुल को लगाने लगी. प्रिय कई बार उसके सामने hi उसके बारे में बात कर चुकी थी. इसलिए चांदनी को प्रिय पर सक नहीं था नकुल ने hi प्रिय को ऐसा करने को कहा था. "तू फ़ोन बाद में कर लेना. पहले मेरी इस छूट कर कुछ कर, तब से hi तो रही है."
अब आगे
"मुझे ये नहीं आ रहा की वो तेरे घर कैसे पहुंच गया. और तेरे बाप कुछ करने की जगह चुप बैठा हुआ सब होता हुआ देख रहा था. साला सच में hi तेरे बाप एक no. का चुटिया है." रणबीर बियर का एक घुट लेने के बाद यह बात हामिश से कहा. उसका दिन के बाद से आज हामिश जे अपने दोस्त से ये बात कहा था, ताकि वह नकुल को सबक शिखा सके. चार दोस्त इस समय रणबीर के फार्महाउस बैठ बैठे हुए थे, जहाँ चार लड़कियों को एक रूम बंद कर रखा था और उनके साथ अपने हथियार का उपयोग करने वाले थे.
"देख रणबीर तुझे जो कहाँ मेरे बाप को बोल या उसकी मर ले. मुझे कोई फरक नहीं पडने वाला. पर तुझे इस नकुल और बहन का कुछ करना होगा. और हाँ मेरा नाम इसमें नहीं आना चाहिए, क्योकि मैं ने अपनी माँ से वादा किया है उसकी कमस खा कर." हामिश ने साफ़ मन कर दिया था की उसका नाम नहीं आना चाहिए जो भी वह करेगा, साथ इसका कारन भी बता दिया था. रुपेश मेहरान और रहीम खान भी चुस्की लेते हुए हामिश के कंधे पर हाथ रख उसको अस्वस्थ किया की उसके साथ कुछ नहीं होगा.
"चल छोड़, मुझे पता है, तू अपनी माँ और बहन से कितना प्यार करता है. मैं वादा करता हु कल नकुल की बहन को हम सब यही मिलकर उसकी नाथ उतरेंगे. और सबसे पहले उसकी नाथ तू उतरेगा." रहीम ने हामिश को बता दिया था की कल क्या करने वाला था. जो करने वाला है उसमे उसका नाम तो नहीं आएगा, पर फल वो भी खायेगा.
"देख रहीम मैं उस लड़की को हाथ तभी लगूंगा जब रणबीर उसको काली से फूल बना देगा. वो उस दिन उसके दो दिन बाद. जब तक चाहे तुम उसके साथ कुछ भी करो." हामिश ने अपने आप सेफ रखने के लिए बहुत hi चालाकी से मन कर दिया था. की नकुल की बहन के साथ कुछ करने तो जरूर पर बाद में. "ये मत सोचना में दर के बोल रहा हु. क्यों इसे पहले भी मैं यही करते आया हु. क्यों भूल गए उस प्रोफेसर की लड़की को, जब तुम सबने मुझे पहले करने को कहा था तो मैं मन कर दिया था. उसके बाद रहीम ने उसकी सील तोड़ी थी." हामिश ने ये बात बहुत hi सोच समझ कर कहा था, शायद उसे नकुल के टक्कट अंदाज़ा उसी दिन हो गया था जब उसके घर आ कर वो कांड किया था.
"अरे यार तुझे सफाई देने की कोई जरुरत नहीं है. मुझे पता है, तू हमेशा से यही करता आया है." रुपेश ने कहा. पर सायद ये भूल गए थे की हामिश ने एक बार इनके सामने hi एक पुलिस वाली की बेटी की बहुत बुरी तरह चुदाई की थी, वह पर उस लड़की का बाप भी था पर वो कुछ नहीं कर पाया अपनी बेटी के किये. सायद ये सब इस लिए भी भूल गए थे क्योकि हामिश ने ऐसा पहली बार किया था, इसे पहले उसने कभी पहल नहीं की थी. और आज यही उसके काम आने वाला था.
"चल यार ये सब छोड़. और चल मजे लेते है उन लड़कियों के. और हाँ आज तू सबसे पहले किसी भी एक लड़की को चुनेगा. उसके बाद हम सब." रणबीर ने बात को ख़त्म करते हुए कहा. हामिश भी इस बात के लिए मन नहीं किया और अपना एंटी घुट पीने के बाद बोतल वही छोड़ खड़ा हो गया. उसके पीछे बाकि सब, और चल दिए एक रूम की तरफ जहाँ पर चार लड़कियों बंद कर राखी थी. रूम में पहुंचने के बाद हामिश ने सबसे पहले उसने लड़की चुनी. उस लड़की की हाइट 5 फट होगी और रंग सवाल और बंदन का कटवा साफ़ उसके कपड़ो में से झलक रहा था.
"यार, मेरे भाई, ये तेरे लिए." हामिश ने उस लड़की रणबीर की तरह धकेलते हुए कहा. हामिश एक पुलिस वाले के बीटा था और उसे पता था की कैसे सामने वाले को अपने पक्ष में किया जाता है. ये देख कर देख तीनो hi हैरान थे क्योकि उनकी सोच गलत साबित हुए थी. "यार जा तू मजे कर इसके साथ, हम तीनो इन तीनो से मजे करेंगे."
"ठीक है हामिश." इतना कहने के बाद वहां से चला गया. वही तीनो ने एक लड़की ली और हामिश वही रहा, बाकि के दोनों अलग रूम में चले गए. चारो hi अपने अपने पार्टनर के साथ चुदाई काम प्रोग्राम सुरु कर चुके थे. हामिश ने बहुत hi बारीकी से सोचने के बाद आज उसने ये बात बताई थी अपने दोस्तों से. जैसा उसने सोचा था वैसा hi हुआ भी था.
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धादायक और के बाँदा निचे गिर गया. पीछे से एक आदमी उस बन्दे के सर पर जोर से डंडा मारा था. फिर उस आदमी ने एक रूम का दरवाजा खोला और सामने बैठ हुई औरत से कहा, "जल्दी करो. वर्ण वो सभी आते hi होंगे. अगर मुझे उनमे से किसी ने भी देख लिया तो मेरी जान सकती है."
"भाई उमेश मैं आपका ये एहसान जिंदगी भर नहीं भूलूँगी." उस औरत ने कहा.
"ये बात बाद में कर लेना. पहले यहाँ से निकालो. आओ मेरी पीछे." उमेश ने बिच में hi उस औरत को टोकते हुए बोलै. वो औरत भी उसके पीछे हो ली. छुपते छुपाते वो दोनों उस जगह से निकल आये. फिर उमेश उस औरत को ले कर एक तरह चल दिया. काफी दूर जाने के बाद उमेश ने फिर से कहा, "ये पैसे रखिये. आप ये देख hi रही है की हम अभी जंगल में खड़े है. आप यहाँ से सीधे जाना है करीब एक किलोमीटर वह पर मैं एक जीप छुपा रखा है. ये उसकी चाभी."
"आप भी मेरे साथ चलिए, अगर उन्हें ये बात पता चली आपने मुझे भगाया है तो वो सभी आपको जान से मर देंगे. प्लीज आप मेरे साथ चलिए." उस औरत ने हाथ जोड़ते हुए अपने साथ चलने को कहा. उमेश ने उस औरत का हाथ पकड़ते हुए फिरसे कहा, "अगर मैं वहां पर नहीं मिला तो उन्हें पक्का सक हो जायेगा मुझे पे. इस लिए मुझे जाना hi होगा." फिर उमेश उस औरत वही पर छोड़ वापस चला गया. वो औरत थोड़े दे उसे जाते हुए देखती रही, उसके बाद अपने रस्ते हो ली.
"मैडम मैं उसे छोड़ दिया. आपने जैसा कहा मैं ने वैसा hi किया है. इसके लिए मुझे अपने एक आदमी को ज़ख़्मी करना पड़ा." उमेश ने ये बात फ़ोन कहा. जहाँ दूसरी तरफ लाजवंती उर्फ़ रेशमा ठाकुर थी. आज 10 दिन हो गए थे, उसके वहां से गए हुए. "मैडम मेरे ये समझ में नहीं आ रहा की अपने उस औरत एक महीने बाद छोड़ने के लिए कहा था फिर इतनी जल्दी क्यों छोड़ दिया.",
"उमेश ये तुम नहीं समझ सकते की मैं ने ऐसा क्यों किया. तुम अपने साथियों को ले कर वहां से चले जाओ. जब तक मैं तुम्हे कांटेक्ट न करू तुम मुझे कांटेक्ट करने की कोशिश भी मत करना. समझ आयी मेरी बात." लाजवंती उमेश को समझते हुए बोली. उसके बाद उसने फ़ोन कट कर दी. उमेश उसके बाद वहां से अपने अड्डे पर चला गया. जब वह पंहुचा तो उसके साथियों उस आदमी को स्कोर्पियन में बैठा उसे पकड़ रखा था. उमेश आगे सीट पर वहां से चला गया.
"मेरे लाल मैं आ रही हु. मैं तुझे कुछ नहीं होने दूंगी. सायद अब तो तू मुझे नफ़रत भी करने लगा होगा. जिस तरह मेरी हंसशकाल ने मुझे तेरे बारे बात कर रही थी. इस बात से मैं अंदाज़ा लगा सकती हु उसने तेरे साथ बहुत गलत किया होगा, मेरे लाल नकुल. मैं तेरी साडी नफ़रत को प्यार में बदल दूंगी, चाहे मुझे कुछ भी करना पड़े." रेशमा ठाकुर मैं में सोचते हुए सीधे चल रही थी. ऐसे hi उसके मैं में ानेको ख्याल आते रहे और उनके बारे में सोचती रही. ऐसे hi चलती हुए उसे जगह पर पहुंच गयी जहाँ पर उमेश ने कहा था, यहाँ तक आने में रेशमा ठाकुर को पुरे 2 घंटे लग गए थे. रेशमा चारो तरफ देखा उसे कही जीप नहीं दिखाई दी. ये देख कुछ परेशां हो गयी को किस तरह यहाँ से वो निकलेगी. पर कुछ सोच कर वह आगे बढ़ गयी, अभी उसने 20 कदम hi चली थी के एक तरह उसे जीप कड़ी हुई दिख. रेशमा ठाकुर भाग कर उस जीप के पास गयी और उसके ऊपर पड़े हुए झड़ी को हटाने लगी. इसमें उसे 40 मिनट लगे. उसके बाद वह उसमे बैठ और चालू कर वहां से निकल गयी.
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"प्रिय तुम्हारी माँ का फ़ोन आया था. वह तुम्हे भुला रही है. इस लिए तुझे कल hi निकलना होगा." मंजू बुआ ने प्रिय से बोली, जो अभी चांदनी के साथ सीढ़ियों से उतर कर निचे आ रही थी. प्रिय अपनी बुआ की बात सुन थोड़ी चिंतिति हो गयी, क्योकि उसको नकुल का दिया हुआ काम बिच में hi छोड़ कर जाना पद रहा था. वही चांदनी का तो बहुत ज्यादा परेशां हो गयी थी. अब उसे दर लगने लगा था अपने आपसे की कैसे वो खुद को रोकेगी.
"पर बुआ, माँ ने मुझे इतनी जल्दी क्यों बुलाया. क्या उन्होंने आपको कुछ बताया." प्रिय कारन जानना चाहा की उसकी माँ उसे क्यों बुला रही थी. जब की उन्होंने ने यहाँ पर रहने को कहा था ताकि वह नकुल कैसे भी कर के वहां ला सके.
"माँ आप ममी से बात करो न की वह प्रिय को कुछ दिन और यहाँ रहने दे. फिर चाहे वो उसे भुला ले." चांदनी रावत अपनी माँ के गले में अपनी बाहें दाल यह बात कही. उसका ये बात कहना इस लिए महत्वपूर्ण था क्योकि प्रिय के चले जाने से उसकी जिस्म की गर्मी को शांत कौन रहता. "प्लीज माँ आप बात करो न ममी से."
"देख बेटी, अगर तेरी ममी को कोई जरुरी काम नहीं होता न तो वह प्रिय को यहाँ से नहीं बुलाती. इस लिए मैं उससे बात नहीं करने वाली. और प्रिय तुम कल जा रही हो." मंजू बुआ ने आदेश hi सुना दिया था दोनों को, की प्रिय यहाँ से कल जाएगी तो जाएगी. फिर वहां से अपने रूम में चली गयी. उसके बाद प्रिय चांदनी को ले कर घर से निकल गयी.
वही तरुण रावत बेटे से नकुल को सबक शिखा ने ले लिए बात पर चर्च कर रहा था. उसके बेटे ने भी दो तीन राय दिए. जिसमे से सिर्फ एक hi पसंद आया वो था अपनी बहु का इस्तेमाल कर नकुल को मंजू के नज़रो में गिरना. इस बात पर सहमत दोनों हो गए थे.