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33rd Update (सेक्सी मालिश और प्यार सास बहु के बीच)
दीपू: मत पुछा.. बहुत मजा आया. अब दीपू को भी अच्छा लगने लगता है और उसका मन भी अब हल्का हो जाता है जो इतने दिनों से भारी था. अब वो अपने पुराने रूप में आ गया था... और वो सोचता है की वो कल ही निशा से बात करेगा और सब कुछ ठीक कर देगा…. अब उसके मन में कोई उलझन या दुविधा नहीं थी….
अब आगे..
अगली सुबह दीपू उठता है तो देखता है की दिव्या पूरी नंगी उसे पकड़ कर मस्त गहरी नींद में सो रही है. उसको देख कर दीपू को बड़ा प्यार आता है और फिर प्यार से उसका माथा चूम कर बाथरूम चला जाता है. आज उसका मन बहुत हल्का और अच्छा लग रहा था क्यूंकि पिछली रात दिव्या ने उसको चूस चूस कर हल्का कर दिया था. नाहा धो कर फ्रेश होने के बाद वो निशा के कमरे में जाता है तो देखता है की निशा भी गहरी नींद में है. उसे रात भी ठीक से नींद नहीं आयी थी तो वो काफी देर बाद रात में सोई थी. वो निशा को उस हालत में देख कर कमरे से बाहर आ जाता है और किचन में जाता है जहाँ वसु सब के लिए चाय बना रही थी.
वो वसु के पीछे जाकर उसे पीछे से अपनी बाहों में लेता है और कहता है चाय से पहले उसे थोड़ा मीठा चाहिए. वसु उसकी बात का मतलब समझ जाती है और पीछे मुड़ते हुए उसको देख कर कहती है... आज मेरा बेटा मुझे पुराने रूप में दिख रहा है और दीपू को बाहों में लेकर रोती है. दीपू भी बात को समझते हुए वसु को जोर से पकड़ कर उसे दिलासा देता है और कहता है की वो सब ठीक कर देगा. वसु को इस हालत में देख कर उसने जो बात १ Min पहले कहा था.... वो भूल जाता है और उसके आंसूं पोछता है. वसु भी फिर अपने आंसूं पॉच कर कहती है... क्यों मीठा नहीं चाहिए क्या?
दीपू मना कर देता है क्यूंकि इस हालत को अच्छे से समझता है. इतने में वहां कविता भी आ जाती है और वो भी वसु को गले लग कर रोती है. दीपू दोनों को अपनी बाहों में लेता है और उसकी आँखों में भी आंसू आ जाते है. फिर थोड़ी देर बाद वसु अपने आप को संभालती है क्यूंकि वो अब इस घर की सबसे बड़ी थी और उसे ही अब घर को संभालना था. फिर सब चाय पी कर बातें करते है.
थोड़ी देर बाद दीपू फिर से निशा के कमरे में जाता है तो वो तभी फ्रेश होकर बाथरूम से बाहर आती है और दीपू को देख कर वो दौड़ कर उसके गले लग जाती है और ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है. आज काफी दिनों बाद दोनों मिले थे और निशा अपने आप को रोक नहीं पाती और दीपू की बाहों में रोती रहती है.
दीपू: चुप हो जा निशा.... मुझे पता है हो हुआ वो अच्छा नहीं हुआ. लेकिन अब हम कुछ नहीं कर सकते.
निशा की रोने की आवाज़ सुन कर बाकी लोग भी कमरे में आ जाते है और दोनों को देख कर उनकी आँखें भी भर आती है.
निशा: ये सब कैसे हुआ भाई? मैंने कभी नहीं सोचा था की ऐसा कुछ होगा. इस दुनिया में मैं सिर्फ २ लोगों से ही प्यार करती हूँ और भगवान् ने मुझसे एक को छीन लिया है और रोते रहती है.
दीपू: चुप हो जा. मैं हूँ ना.... सब ठीक कर दूंगा. अगर तू ही ऐसे रहेगी तो आंटी और माँ कैसे ठीक से रह पाएगी.
अब आंटी को तुझे ही संभालना है. दिनेश तेरा पति था तो वो आंटी का बेटा भी था. सोच उनके ऊपर क्या गुज़र रही होगी. इन सब बातों में वहां का वातावरण और भी दुःखमयी हो जाता है.
दीपू फिर निशा को अलग कर के उसे बिस्तर पे बिठा देता है. निशा अपनी आँखें साफ़ करते हुए दीपू से पूछती है की सब कैसे हुए. दीपू को लगता है की उसे सब बता देना चाहिए और उस एक्सीडेंट के बारे में थोड़ा उसे और सब को बता देता है.
दीपू की बातें सुनकर किसी को कुछ कहने की हिम्मत नहीं होती. फिर दीपू ही बात शुरू करता है.
दीपू: सुन निशा जैसे माँ ने बताया है अब आंटी भी रोज़ ऑफिस आएगी और मेरा साथ देगी. दिनेश भी यही चाहता था की हम अपने कंपनी को और आगे बढाए जो मैं उसे पूरा करने वाला हूँ. हो सके तो तुम भी कभी कभी आ जाना. तेरे लिए भी अच्छा रहेगा. और दीपू ये बात बोलते हुए वो ऋतू की तरफ देखता है. वो कुछ नहीं कहती तो वसु उसकी तरफ से हाँ कह देती है.
फिर निशा भी अपने आप को संभालती है और क्या करना है उसके बारे में सोचती रहती है. उस दिन और कुछ नहीं होता और सब अपने काम में बिजी हो जाते है.
दो दिन बाद ऋतू वसु से कहती है
ऋतू: वसु अब हम अपने घर चले जाएंगे. यहाँ अब बहुत दिन से रह रहे है. जैसे दीपू ने कहा अब जो हो गया उसे तो बदला नहीं जा सकता लेकिन ज़िन्दगी भी रुक नहीं सकती.
ऋतू के इस बात पे वसु कुछ नहीं कह पाती और कहती है की १- २ दिन और रुक जाए उनके घर. लेकिन ऋतू कहती है की २ दिन बाद तो जाना ही होगा तो आज ही क्यों नहीं. ऋतू फिर निशा को भी बता देती है तो वो भी तैयार हो जाती है. वसु दीपू को भी ये बात बताती है तो १- २ घंटे बाद सब लोग उनको छोडने उनके घर जाते है. ऋतू के घर के अंदर जाते है ऋतू और निशा को दिनेश की फिर याद आती है क्यूंकि आज वो अपने घर काफी दिनों बाद आये थे) तो फिर से उनकी आँखें नम हो जाती है. इस बार कविता ऋतू को संभालती है तो दिव्या निशा को. फिर एक घंटे बाद दीपू और बाकी लोग वहां से निकल जाते है और रह जाते है ऋतू और निशा अपने घर में....
कुछ दिन ऐसे ही बीत जाते है और अब धीरे धीरे सब नार्मल होने लगता है. जहाँ दीपू वसु और बाकी लोग भी थोड़ा सामान्य हो जाते है वहीँ ऋतू और निशा अभी भी दिनेश की याद में ही रहते है. उनके जाने के बाद ऋतू निशा से कहती है की वो भी उसके साथ ही सो जाए लेकिन निशा थोड़ा शर्माती है और कहती है की कुछ दिन उसे समय दे. जब वो भी थोड़ा नार्मल हो जायेगी तो वो खुद उनके कमरे में सोने आएगी. दोनों ऋतू और निशा अपने अपने कमरे में रोज़ रात को सोते है लेकिन एक दुसरे के जाने बिना दोनों अपनी गर्मी में तड़पते रहते है. जहाँ निशा दिनेश को याद करके अपनी चूत मसलते हुए अपनी गर्मी निकालने की कोशिश करती है वहीँ ऋतू भी अपनी बरसों से दबी हुई प्यास को रोक नहीं पाती और वो भी अपनी चूत मसलते हुए सोचती है की काश वो अभी इस वक़्त एक मर्द की बाहों में हो...
वहीँ दीपू के घर में भी अब नार्मल हो जाता है और दीपू भी अब रोज़ रात को मजे करता है और लेता भी है. वसु कविता और दिव्या भी अब रोज़ उसके लंड पे झूलते रहते है लेकिन रह जाती है तो मीना और एक तरह से लता भी. उसे (मीना ) भी अब यहाँ आये हुए काफी दिन हो गए थे लेकिन यहाँ के हालत ही ऐसे थे की उसके मन में भी सेक्स की भावना नहीं आयी थी. लेकिन जब ऋतू और निशा वापस चले गए और सब नार्मल हो गया और घर के बाकी लोग भी मजे कर रहे है तो अब फिर से मीना के मन में भी अब वो भावनाएं जागने लगी थी लेकिन वो अपनी माँ कविता से कहने से शर्माती थी भले ही सब को पता था की मीना वहां क्यों है. पिछले दिनों में घर का माहौल ही ऐसा था की किसी की उस पर ज़्यादा नज़र भी नहीं गयी थी और ये नार्मल से बात थी जिसे मीना भी समझती थी.
वही हाल लता का भी था. वो तो पिछली बार दिव्या और दीपू को देखी थी मजे करते हुए. और अब तो रोज़ उनको सुबह देख कर थोड़ी सी जलन भी होती थी उसको क्यूंकि दीपू की तीनो पत्नियों के चेहरे पर एक अलग ही चमक नज़र आती थी क्यूंकि दीपू तो उन्हें बहुत खुश रखता था. लता ने सोचा की एक बार वो इस बारे में वसु से बात करेगी...
एक दिन रात को निशा को प्यास लगती है तो वो देखती है की उसके कमरे में उस दिन पानी नहीं रखा था तो वो पानी पीने किचन में जाती है. पानी पीकर जब वो अपने कमरे में जा रही थी तो वो ऋतू के कमरे में जाकर उनको एक बार देख कर अपने कमरे में वापिस जाने की सोचती है और यही सोच के साथ वो ऋतू के कमरे की तरफ चली जाती है. ऋतू को इस बात का कभी एसएस नहीं था की निशा उसके कमरे के तरफ कभी आएगी.... इसीलिए उसने कमरे का दरवाज़ा सिर्फ बंद किया था लेकिन अंदर से उसने कुंडली नहीं लगाई थी.
निशा जब वो दरवाज़े के पास आकर उसको थोड़ा खोलने की कोशिश करती है तो दरवाज़ा खुल जाता है और अंदर नाईट लैंप की रौशनी में कमरे में थोड़ी रौशनी थी और निशा अंदर का नज़ारा देख कर मन में सोचती है “हम दोनों की हालत एक जैसे ही है... दोनों एक ही कश्ती में सवार कर रहे है....” क्यूंकि ऋतू अपनी आँखें बंद किये हुए अपनी Nighty को कमर तक उठाये अपनी पैंटी के ऊपर से अपनी चूत मसल रही थी और बड़बड़ाये जा रही थी.
निशा वो नज़ारा देख कर चुपके से बहार आकर दरवाज़ा बंद कर देती है लेकिन वो नज़ारा देख कर वो भी बहक जाती है और बगल में कड़ी होकर वो भी अपनी चूत मसलते रहती है. थोड़ी देर में जब उसको थोड़ा होश आता है तो वो अपने आप को ठीक कर के मन में ही हस्ती है लेकिन फिर उसे एक बात का ख्याल आता है की वो तो दिनेश की बारे में सोच कर गरमा जाती है और अपनी चूत मसलते रहती है.... लेकिन माजी का क्या... किसके बारे में वो सोच रही है....
कुछ दिन बाद जैसे दीपू ने कहा था ऋतू भी अब ऑफिस जाना शुरू कर दिया था. ऋतू को ऑफिस में देख कर दीपू को भी बहुत अच्छा लगा. क्यूंकि ऋतू काफी दिनों बाद ऑफिस आयी थी तो दीपू उसे अपने ऑफिस में जो कुछ भी हुआ था (जो दिनेश और दीपू ने इन पिछले महीनो में काम किया था) वो ऋतू को बताता है.
ऋतू: बहुत अच्छा दीपू. तुम दोनों ने बहुत अच्छा काम किया है.
दीपू: हाँ आंटी... जैसा मैंने और दिनेश ने सोचा था वैसे ही और आगे काम होगा और अपना बिज़नेस बढ़ेगा. ऋतू ये बात सुनकर खुश हो जाती है और अपना काम करने लगती है.
कुछ दिन बाद:
कुछ दिन बाद निशा अपने घर को सफाई के चलते झाड़ू पोछा करती है और किचन में अपना काम करती रहती है.
उस वक़्त ऋतू ऑफिस से हर आती है और निशा को बुलाती है... निशा बेटी...वो इतना ही बोल पाती है की उसके पैर फिसल जाते है और ज़मीन पे धड़ाम से गिर जाती है. वो इसलिए की ज़मीन अभी भी थोड़ी गीली थी निशा के पोछने से जिसका ऋतू को पता नहीं था. ज़ोर की आवाज़ की वजह से निशा दौड़ते हुए बाहर आती है तो उसे थोड़ी घबराहट होती है क्यूंकि ऋतू नीचे फर्श पे पड़ी हुई थी और उसे बहुत तकलीफ हो रही थी.
निशा: माँ क्या हुआ? मुझे पता नहीं था की आप आ रही हो... अभी मैंने घर पोछा था और फर्श थोड़ी गीली थी. ऋतू को अब भी थोड़ा दर्द हो रहा था तो निशा आकर उसे उठाती है और सोफे पे बिठा देती है. ऋतू के गिरने से उसकी कमर और पेट की जगह पर दर्द हो रहा था.
ऋतू अपने आप को संभालती है और फिर निशा उसे पानी देती है. ऋतू को थोड़ा आराम मिलता पर ज़्यादा नहीं. वो थोड़ी मुश्किल में रहती है लेकिन निशा को बताती नहीं. फिर निशा अपना काम करती है और रात को दोनों खाना खाने के बाद दोनों अपने कमरे में सोने चले जाते है. (क्यूंकि ऋतू ने निशा को नहीं बताया था निशा को पता नहीं लगा की ऋतू को अब भी कमर और पेट में दर्द कम नहीं हुआ है). जब ऋतू को दर्द कम नहीं होता तो वो निशा को अपने कमरे में बुलाती है. निशा भी थोड़ी परेशानी में आकर पूछती है की क्या हुआ है?
ऋतू: बेटा मैंने तुम्हे बताया नहीं लेकिन मुझे कमर और पेट में अब भी दर्द कर रहा है शाम को गिरने से.
निशा: माँ आपने पहले क्यों नहीं बताया? हम डॉक्टर के पास हो आते.
ऋतू: मुझे लगा था की दर्द कम हो जाएगा. इसीलिए तुम्हे बताया नहीं और डॉक्टर के पास नहीं गए. बेटा थोड़ा Jhandu बाम लगा दे... शायद थोड़ा आराम मिल जाए.
निशा: क्यों नहीं माँ... अगर आप पहले बता देते तो मैं आपको पहले ही बाम लगा देती.
निशा फिर थोड़ी मुश्किल से अपना हाथ निशा की कमर और पेट पे ले जाकर बाम लगाती है. कुछ देर उसे ठीक लगता है लेकिन फिर से ऋतू को थोड़ा दर्द महसूस होता है और वो निशा से कहती है की एक और बार फिर से बाम लगा दे.
निशा: माँ जी आप बुरा ना माने तो फिर से बाम लगाने से अच्छा है की मैं आपकी कमर को एक बार मालिश कर दूँ. मालिश करने से आपको थोड़ा आराम भी मिल जाएगा और आज रात मैं आपके पास ही सोती हूँ.
ऋतू को समझ नहीं आता की वो निशा को क्या जवाब दे. निशा नहीं मानती और कहती है की वो ऋतू की कमर की मालिश करेगी.
ऋतू: वो तो ठीक है बेटा लेकिन मालिश कैसे करोगी?
निशा: आप अपना मैक्सी उतार दे... मैं थोड़ा तेल हलकी सी गरम करके लाती हूँ और फिर तेल से अच्छी मालिश करती हूँ.. ऋतू मना करती है लेकिन निशा मानती नहीं तो आखिर में ऋतू कहती है: बेटा वो तो ठीक है लेकिन मैंने मैक्सी के अंदर कुछ नहीं पहना है.
निशा: धीरे से उसके कान में: तो क्या हुआ माँ जी... आपके पास जो है... ऐसा बोल कर निशा रुक जाती है.
ऋतू: लेकिन बेटा मुझे थोड़ी शर्म आती है.
निशा: मैं समझ सकती हूँ माँ जी. लेकिन अब इस घर में हु दोनों के सिवा और कोई नहीं है तो फिर आपको मुझसे क्या शर्माना? अगर आपको फिर भी शर्म आती है तो मैं आपको एक टॉवल दे देती हूँ. आप उसे ओढ़ लीजिये.
तब तक मैं तेल भी ले आती हूँ और निशा किचन में चली जाती है तेल लाने के लिए. उसके जाते ही ऋतू भी अपनी मैक्सी उतार देती है और वो आगे जाकर अपने आपको आईने में एक बार देख कर हस देती है की उस बदन इस उम्र में भी एकदम गदराया हुआ है. काले लम्बे बाल जो उसकी कमर तक आते थे.. उसकी चूचियां अभी भी एकदम ठोस थी और उनमें अभी भी कोई लचक नहीं थी. उसका पेट एकदम सपाट था जिसमें कोई चर्बी नहीं थी. एकदम गहरी और कामुक नाभि और उसकी टांगों के बीच एकदम पतली से लकीर के माफिक एकदम बंद चूत जो बहुत दिनों से चुदी या खुली नहीं थी.
वो फिर एक बार पीछे मुड कर देखती है तो पाती है की उसकी गांड भी एकदम मस्त उठी हुई है. फिर वो हस्ते हुए बिस्तर पे लेट जाती है और अपना टॉवल कमर पे धक् लेती है. वो ऊपर से नंगी ही थी लेकिन अपनी गांड और पैरों को टॉवल से ओढ़ ली थी. वो अभी भी थोड़ी असहामन्जस में थी लेकिन उसका दर्द बी ही कम नहीं हुआ था तो वो वैसे ही लेट कर निशा का इंतज़ार करती है.
निशा फिर थोड़ी देर बाद एक कटोरे में तेल लेकर आती है लेकिन वो कमरे में आने से पहले वो भी अपने कपडे बदल लेती है और वो भी एक मैक्सी पहन कर आती है और वो भी ऋतू की तरह अंदर और कुछ नहीं पहना था.
तेल मालिश
कमरे में आते ही निशा ऋतू को देखती है तो उसके चेहरे पे हलकी सी हसी आ जाती है.
ऋतू: आ गयी बेटा?
निशा: हाँ माँ तेल लेकर आयी हूँ. आपकी अच्छे से मालिश कर दूँगी तो आपका दर्द भी दूर हो जाएगा.
ऋतू: मैं भी यही चाहती हूँ बेटा की ये दर्द जल्दी चला जाए. मुझे सोने में भी मुश्किल हो रही है.
निशा: आप चिंता मत करिये. आपको जल्दी ही आराम मिलेगा. निशा फिर ऋतू के पीछे आती है और अपने दोनों पैर अलग कर के ऋतू के जाँघों के बीच आकर थोड़ा तेल को अपने हाथ में मलती है और थोड़ा तेल को ऋतू के कमर पे डालती है.
निशा: यहीं ना माँ?
ऋतू: हाँ बीटा... वहां से थोड़ा नीचे तक.
निशा: ठीक है.
और निशा धीरे धीरे ऋतू की कमर पे हाथ फेरते हुए मलती है. जब निशा ऐसा कर रही थी तो ऋतू को बड़ा सुकून मिल रहा था और वो अपने मुँह से हलकी सी सिसकारी भी लेती है.
निशा धीरे धीरे मालिश करती रहती है और इसमें ऋतू को भी अब थोड़ा आराम मिल रहा था. निशा अपने हाथ को और थोड़ा नीचे ले जाती है मालिश करते वक़्त तो उसे टॉवल बीच में आ जाता है और ठीक से वो ऋतू की कमर को मल नहीं पाती.
निशा कुछ सोचती है और कहती है: माँ थोड़ा नीचे मालिश करना है तो ये टॉवल बीच में आ रहा है. इसे निकाल दूँ क्या?
ऋतू को जब ये मालिश थोड़ा अच्छा लग रहा था तो वो निशा की बात सुनकर अपना सर उठा कर कहती है.
ऋतू: बेटा अगर तू इसे निकल देगी तो कैसे... इतना बोल कर रुक जाती है जैसे कहना चाहती हो की वो पूरी नंगी हो जायेगी.
लेकिन ऋतू को थोड़ा डर था की अगर निशा उसे पूरी नंगी कर देगी तो उसे उसकी चूत भी दिख जायेगी जो की निशा की मालिश की वजह से वो भी थोड़ी उत्तेजित हो गयी थी और अनजाने में ही उसकी चूत ने थोड़ा पानी बहाना शुरू कर दिया था. बात ये तो ही बहुत सालों बाद किसीने ऋतू को इस तरह छुआ था और वो भी थोड़ी कामुक तरीके से.
निशा समझ जाती है और झुक कर उसके कान में कहती है: यहाँ हम दोनों के अलावा और कोई नहीं है. मैं तो आपकी बेटी की तरह ही हूँ. मुझसे क्या शर्माना. और वैसे भी जब मैं आपकी कमर मालिश कर रही हूँ तो इसी तरह से आपके पैर भी मालिश कर देती हूँ. ऋतू इस बात से कुछ नहीं कह पाती और हाँ कह देती है क्यूंकि वो भी थोड़ी थकी हुई थी और पैरों की मालिश की बात सुनकर वो हाँ कह देती है.
ऋतू के हाँ कहने के साथ ही निशा उसका टॉवल निकल कर वो ऋतू को पूरा नंगा कर देती है और उसकी उठी हुई गांड को देख कर मन में सोचती है: क्या मस्त गांड है...वो फिर से तेल लेकर इस बार और अच्छे से मालिश करती है और वो अब कमर से लेकर गांड से होते हुए पैरों की भी मालिश करने लगती है. ऋतू को पहले थोड़ा अलग लगा लेकिन अब उसे भी अब मजा आने लगा क्यूंकि उसे भी अब बहुत सुकून मिल रहा था.
निशा ऐसे ही मालिश करते हुए उसकी जाँघों को भी मालिश करती है और ऐसा करने के साथ ही उसका हाथ उसके चूत के बहुत करीब पहुँच जाता है.
उसका हाथ वहां आते ही ऋतू भी एक सिसकारी लेती है और भले ही वो हलकी थी लेकिन कमरे के सुनसान माहौल में वो आवाज़ निशा को भी सुनाई देती है.
निशा: कैसे लग रहा है माँ?
ऋतू: बहुत अच्छा लग रहा है बेटा. मुझे नहीं पता था की तू इतनी अच्छी मालिश भी करती है. इस बात पे निशा कुछ नहीं कहती और निशा मालिश करते हुए वो ऋतू की गांड को भी अच्छे से मालिश करती है.
वहां करते वक़्त उसे वहां का भूरा सिकुड़ा हुआ छेड़ दीखता है जो थोड़ा बंद और खुल रहा था जो इस बात का प्रमाण था की ऋतू को भी अपनी गांड पे मालिश अच्छी लग रही है और साथ ही ऋतू भी धीमी गति से आंहें भर रही थी.
जब वो ऋतू की जाँघों पे अपना हाथ रख कर मालिश करती है तो उसके हाथ में कुछ चिपचिपा लगता है. ये और कुछ नहीं बल्कि ऋतू की चूत का पानी था जिसे निशा बहुत अच्छे से पहचान गयी क्यूंकि वो भी ऐसे पानी से बहुत वाकिफ थी लेकिन कुछ नहीं बोली. वो फिर से इस बार ऋतू का पूरा पीछे का बदन को अच्छे से मालिश करती है... कन्धों से लेकर पैर तक. जब वो कन्धों और गले के पीछे मालिश करती है तो ऋतू कहती है... तूने तो सच में मुझे बहुत आराम दिया है बेटी. ऐसे ही मालिश थोड़ी और कर दो. मुझे भी बड़ा सुकून मिलेगा.
निशा: आप चिंता मत कीजिये माँ... आज के बाद आप मुझे रोज़ मालिश करने को बोलोगी और हस देती है. इस बात पे ऋतू भी हस देती है.
10 -15 Min तक ऐसे ही मालिश करती है और इस बीच निशा भी अपनी मैक्सी उतार देती है और वो भी नंगी ही ऋतू की मालिश करती है. क्यूंकि ऋतू का चेहरा दूसरी तरफ था वो देख नहीं पाती की निशा भी पूरी नंगी हो गयी है.
निशा: माँ जी अब पलट जाईये. आपके पेट पे भी अच्छे से मालिश कर देती हूँ. आपको और अच्छा लगेगा.
ऋतू ये बात सुनकर कहती है... इसकी ज़रुरत नहीं है बेटा. कमर तक ही ठीक है.
निशा: ऐसे कैसे माँ जी? मुझे पता है जब आप गिरी थी तो आपको कमर और पेट में दर्द हो रहा था. मैं आपकी पेट भी मालिश कर देती हूँ तो आपको अच्छा लगेगा. ऋतू कुछ नहीं कह पाती तो निशा उसके बदन से उठ कर थोड़ा अलग हो जाती है जिससे ऋतू को पलटने में आसानी हो जाती है.
जब वो पलट कर निशा को देखती है तो उसे बहुत आश्चर्य होता है की निशा भी उसकी तरह नंगी है.
ऋतू: बेटा तुमने कपडे क्यों निकल दिए?
निशा: अगर मैं कपड़ों में रह कर मालिश करती तो मेरे कपडे भी तेल की वजह से खराब हो जाते. आप चिंता मत करिये. आपका दर्द अब जल्दी ही निकल जाएगा.
ऋतू फिर निशा के सामने पलट कर पीठ के बल लेट गयी तो उसकी आँखों में एकदम शर्म थी जिसकी वजह से वो अपनी आँखें नीचे कर लेती है क्यूंकि दोनों को पता था की ऋतू की मस्त ठोस चूचियां उसके उत्तेजित होने से एकदम तन गए है और उसके गहरे भूरे रंग के चूचक बेहद कड़क और लुभावने लग रहे थे जैसे कह रहे हो को कोई इसको मुँह में लेकर अच्छे से चूसो और काटो..
निशा ये बात समझ जाती है लेकिन कुछ नहीं करती. निशा फिर तेल लेकर उसकी मस्त गहरी नाभी पे डालती है मालिश करने के लिए और जैसे ही निशा ऐसे करती है ऋतू अपने आप को रोक नहीं पाती और ज़ोर से सिसकी लेती है.
निशा: अनजान बनते हुए भले ही उसको पता था... क्या हुआ माँ?
ऋतू: कुछ नहीं बेटा... और शर्म से चुप हो जाती है.
निशा फिर ऋतू के पेट और नाभि को अच्छे से मालिश करते हुए ऊपर आती है उसकी चूची की तरफ. ऋतू निशा की तरफ देखती है तो निशा अपना हाथ उसके चूची के ऊपर से ले जाकर गले और कंधे और गले पे मालिश करती है जिसकी उम्मीद ऋतू को नहीं थी. ऋतू को लगा था की निशा उसकी चूचियां मालिश करेगी. निशा के ऐसे मालिश करने से अब ऋतू को भी बहुत अच्छा लग रहा था.
वहां पे अच्छे से मालिश करने के बाद निशा फिर से अपने हाथ में तेल दाल कर इस बार उसकी चुहियों की तरफ बढ़ती है तो ऋतू को पता चल जाता है तो वो अपने हाथ को निशा के हाथ पे रख कर मना करने की कोशिश करती है लेकिन वो भी धीरे से. जैसे वो एक दिखावा हो. निशा समझ जाती है और वो ऋतू का हाथ हटा कर अपने हाथ को ऊपर लेकर उसकी चूची पे तेल डाल के अच्छे से मसलती है. अब ऋतू से भी रहा नहीं जाता तो वो अपने हाथ को निशा के हाथ के ऊपर रख कर खुद ही ज़ोर से उसकी चूची दबा देती है.
मालिश बदल गया प्यार में…
ऋतू: हाँ बेटा अच्छे से मसलो. बहुत सालों बाद किसीने इसे छुआ है. निशा एक हाथ से उसकी एक चूची को दबाती और मसलती है तो वो अपने दुसरे हाथ को नीचे ले जा कर उसकी चूत को छूती है जो रस से बह रहा था और वो रस निशा के उँगलियों पे लग जाता है.
निशा वो उंगलियां निकाल कर ऋतू की आँखों में देखते हुए वो उंगलियां देखती है जो पूरी गीली थी और उसे अपने मुँह में लेकर चाट लेती है. ऋतू की आँखें तो शर्म से एकदम लाल हो जाती है और अपनी आँखें बड़ी करती हुई वो निशा को देखती रहती है.
ऋतू थोड़ा शर्माते हुए: तू क्या कर रही है?
निशा: वही जो दिनेश हमेशा मेरे साथ करता है और हस देती है ….लेकिन इसमें शर्माने की कोई बात नहीं हैं.
निशा ऋतू की तरफ देखती है तो ऋतू की आंखों में थोड़ी बेबसी और वासना भी नज़र आती है जैसे कह रही हो की वो भी बहुत प्यार के लिए तरस रही है.
निशा झुक कर अपने होंठ ऋतू के होंठों से मिलाती है तो ऋतू को थोड़ी शर्म आती है और होंठ बंद ही रखती है.
निशा: लगता है बहुत सालों से आपने किसी को चूमा नहीं है.
ऋतू अपनी आँखें अभी भी बंद करते हुए... कौन होगा जिसे मैं चूमू... दिनेश के पिता तो बहुत सालों पहले मुझे छोड़ के चले गए थे.
निशा: आपकी बात भी सही है. मैं आपको बताती हूँ की कैसे चूमते है. आप अपनी आँखें खोले और अब हम दोनों के बीच में कोई शर्म नहीं रेहनी चाहिए. हम दोनों एक ही कश्ती में सवार कर रहे है. आप भी जानती है की हम दोनों बहुत प्यासी है ख़ास कर के जब से दिनेश चला गया है.
निशा ऐसे बोलते हुए फिर से वो ऋतू को चूमती है तो इस बार ऋतू उसका साथ देती है और दोनों पहले धीरे धीरे लेकिन 1 Min के अंदर ही दोनों एक प्रगढ़ चुम्बन में जुड़ जाते है और दोनों अपनी जुबां एक दुसरे के मुँह में डाल कर अपना रस आदान प्रदान करते है.
निशा ऋतू को चूमते हुए अपने हाथ से इस बार उसकी चूचियों को ज़ोर से दबाती है तो ऋतू के मुँह से सिसकारी निकलती है लेकिन वो निशा के मुँह में ही दब जाती है.
5 Min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अपनी सांसें संभालते हुए अलग होते है तो इस बार निशा ऋतू की आँखों में एक नया ख़ुशी का अहसास देखती है.
ऋतू: बहुत सालों बाद किसीने मुझे इतने अच्छे से चूमा हैं बेटा.
निशा: ये तो कुछ भी नहीं है माजी. आज आपको और मज़ा दूँगी. आपक देखते रहो.
ऋतू को इस बात का पता चल जाता है और आँखों से जैसे पूछती है की आगे और क्या हो सकता है. अब दोनों के चेहरे एक दुसरे के बहुत पास थे और निशा ऋतू से कहती है...
निशा: एक राज़ की बात बताओं.
ऋतू: क्या?
निशा: आपको दीपू के बारे में क्या पता है?
ऋतू: इसमें क्या है. वो बहुत होनहार लड़का है और अपनी बीवियों को बहुत खुश रखता है.
निशा: आपकी बात तो सही है लेकिन उसने किस से शादी की है?
ऋतू: वो तो तुम्हारी मम्मी और मौसी से शादी की है. तो इसमें राज़ की क्या बात है?
निशा: राज़ ये है की जब मैं और दिनेश हनीमून पे गए थे तो उसने मुझे बताया था की उसने आपको बहुत तड़पते हुए देखा है.... ख़ास कर के प्यार और जिस्म के प्यार की तड़प.
ऋतू निशा की ये बात सुनकर कुछ नहीं कहती.
निशा: और दिनेश भी दीपू की तरह आपसे शादी करना चाहता था और वो मुझसे ये बात बतायी और मुझसे मेरी तरफ से जैसे परमिशन मांग रहा था की वो आपसे शादी करेगा और हम दोनों एक दुसरे की सौतन बन जाएंगे.
ऋतू जब निशा के मुँह से ये बात सुनती है तो एकदम आश्चर्य से निशा की तरफ अपना मुँह खोले देखती रहती है.
निशा: हाँ माँ मैं सच कह रही हूँ. बस आपकी बदकिस्मती हैं की वो ये काम नहीं कर सका और हमें छोड़ के चला गया.
निशा के ऐसे बोलने से ऋतू की आँखों में आंसू आ जाते है और कहती है... क्या वो सच में मुझसे इतना प्यार करता था की वो मुझसे शादी करना चाहता था?
निशा: हाँ माँ. लेकिन आप चिंता मत करो. मैं हूँ ना... मैं उसकी कमी तो हर तरह से पूरी नहीं कर सकती लेकिन मैं भी आपको उतना ही प्यार दूँगी जो आप बरसों से छा रही थी और ऐसा बोलते हुए वो फिर से ऋतू को चूमने लगती है.
इस बार ऋतू पूरे जोश के साथ निशा को चूमती है और एक तरह से उसके होंठ काट लेती है. इसमें दोनों को मज़ा आता है और २ min बाद निशा कहती है: जैसा बेटा वैसे माँ.
ऋतू: मतलब:
निशा: मतलब ये की दिनेश भी मुझे पूरी जोश और शिद्दत के साथ मुझे चूमता था और कभी कभी जैसे अभी आपने किया मेरे होंठ भी काट देता था... और ऐसा बोलते हुए निशा हस देती है.
निशा फिर ऋतू की गर्दन चूमते हुए नीचे आती और एक हाथ से उसकी मदमस्त चूची दबाते हुए दुसरे दुसरे को मुँह में लेकर चूसती रहती है. उसके बड़े बड़े चूचियों के ऊपर गहरे भूरे रंग के चूचक बेहद कड़क और लुभावने लग रहे थे। निशा ने उसकी एक चूची को पकड़ के जोर से दबाया. निशा उसके चुच्ची को दबाके जीभ से चूचकों के साथ खिलवाड़ करने लगा। ऋतू चूचक के साथ छेड़छाड़ होते ही मस्त होने लगी। उसके मुंह से सिसकारी फूट पड़ी। ऋतू के मुंह से सिर्फ उफ़्फ़फ़फ़, आहहहहह... की आवाज़ें निकलने लगी… ऋतू ने निशा का सर पकड़ लिया और उसके मुंह में चूचक घुसेड़ने लगी क्यूंकि निशा की इस हरकत से ऋतू भी अब बहुत गरम हो गयी थी और उसकी उत्तेजना धीरे धीरे उसके सर पे सवार हो रही थी . निशा ऋतू के चूचियों को मुंह में भरकर चूसे जा रही था जिसमें दोनों को बहुत मजा आ रहा था.
निशा बारी बारी से दोनों चूकियों का मर्दन कर रही थी और ऋतू की सिसकारियां पूरे कमरे में गूँज रही थी. ५ min बाद जब निशा ने ऋतू की तरफ देखा तो उसके चेहरे पे हसी आ गयी क्यूंकि इस वक़्त ऋतू सच में बहुत कामुक और आकर्षक लग रही थी.
निशा के चूची मर्दन से ना जाने कितनी बार ऋतू ने अपना पानी छोड़ दिया था और अब तक तो निशा नीचे भी नहीं गयी थी. निशा फिर थोड़ी देर बाद उसके पेट और नाभि को चूमते हुए नीचे जाकर उसकी मस्त जाँघों को चूमती है. ऋतू की तो एक तरह से हालत उत्तेजना के मारे एकदम बत्तर हो गयी थी. आखिर में ऋतू से भी रहा नहीं जाता और बोल ही देती है. निशा क्यों तड़पा रही हो मुझे? कुछ करो ना..
निशा ऋतू को छेड़ते हुए... क्या करून माँ?
ऋतू: तू इतनी भी सयानी नहीं है. तुझे पता है क्या करना है.
निशा एकदम भोली बनते हुए कहती है मुझे पता नहीं क्या करना है. आप मुझे बताये ना क्या करना है. मुझे आपके मुँह से सुन्ना है.
ऋतू: तू नहीं मानेगी... तो सुन... तूने मेरी जिस्म में जो आग भरी है उसे बुझा दे और ऐसा कहते हुए ऋतू थोड़ा उठते हुए निशा का सर पकड़ कर अपनी चूत पे दबा देती है.
निशा को भी लगता है की उसे ऋतू को और तड़पाना नहीं चाहिए और वो भी बड़ी शिद्दत से ऋतू की चूत को ऊपर से नीचे तक चाटने लगती है और अपनी एक ऊँगली को उसकी चूत में डालने की कोशिश करती है लेकिन वो उसमें सफल नहीं हो पाती क्यूंकि ऋतू की चूत कहा जाए तो बहुत सालों से बंद थी और अब तो वो जैसे एक कुंवारी बन गयी थी.
निशा फिर ऋतू की चूत के दाने को छेड़ती है तो ऋतू से रहा नहीं जाता और ज़ोर से उफ़्फ़फ़फ़ आहहहहह... की आवाज़ें निकालते हुए निशा का सर अपनी चूत पे और ज़ोर से दबा देती है.
ऋतू से भी अब रहा नहीं जाता और वो अपना पानी निकल देती है जिसे निशा बड़े चाव से पी जाती है और ऋतू की तरफ देख कर कहती है... आपका पानी तो बहुत स्वादिष्ट है. ऋतू झड़ कर ज़ोर ज़ोर से आंहें भर्ती रहती है क्यूंकि कई सालों बाद उसे किसीने झडाया था.
वो अलग बात है की कभी कभी वो अपने आपको अपने उँगलियों से ही संतुष्ट करती रहती थी लेकिन वो संतुष्टि की ख़ुशी अभी किसी और ने दिया था... और वो कोई और नहीं उसकी खुद की बहु थी.
ऋतू जब अपने आपको संभालती रहती है तो निशा उसके ऊपर आकर उसकी आँखों में देखते हुए फिर से उसके होंठों पे चूमती है तो इस बार ऋतू बड़े प्यार से निशा के होंठ चूमती है जैसे वो उसका धन्यवाद कर रही हो.
निशा: माँ जी आपका पानी तो बड़ा मस्त है. आप मेरा पानी नहीं चखना चाहोगे? निशा के इस बात पे ऋतू हस देती है और फिर से उसे चूमते हुए उसे पलटा कर अब वो निशा के ऊपर आ जाती है.
पिछले आधे घंटे से हो रहे काम में निशा की हालत भी बुरी थी. उसकी चूचियां भी एकदम तन गयी थी और उसके चूचक भी पूरे खड़े हो गए थे. ऋतू भी उसकी एक चूची को मुँह में लेकर मस्त चूसती रहती है और कहती है... तेरी चूची भी बहुत अच्छी है निशा. काश अगर दिनेश होता तो जल्दी ही इसमें दूध भी आ जाता. इस बात पे निशा की आँखों में आंसूं आ जाते है लेकिन कहती है... ये तो किस्मत की बात है माँ और फिर निशा भी ऋतू की तरह अपना हाथ उसके सर पे रख कर उसे अपनी चूचियों पे दबा देती है. शायद ये ऋतू का पहली बार था की उसने किसी औरत की चूची को चूसा है लेकिन वो भी काफी अनुभवी थी और ऐसा नहीं लग रहा था की वो पहली बार ही किसीकी चूची चूस रही हो. निशा को भी अब इसमें मजा आ रहा था और वो भी सिसकारियां लेने लगती है.
ऋतू भी अपना अनुभव दिखाते हुए कभी कभी वो निशा की चूची को काट भी लेती है ख़ास कर के उसके उठे हुए चूचक को. निशा ने पहले कभी ऐसा महसूस नहीं किया था और वो तो जैसे सातवें आसमान में पहुँच गयी थी.
ऋतू फिर नीचे जाती है और इस बार वो उसकी नाभि को चूमती है और उसकी जुबां से उसको छेड़ती है. ऐसा करने से निशा एकदम मचल जाती है और अपना हाथ ऋतू के सर के ऊपर रख कर ज़ोर से उसकी नाभि पे दबा देती है. उसके नाभि को छेड़ने से ही निशा फिर से एक और बार झड़ जाती है और बिस्तर को एक तरह से गीला कर देती है.
निशा: माँ तुमने ये सब कहाँ से सीखा है? आप तो मुझे जन्नत पे पहुंचा रही हो.
ऋतू: क्यों तू अकेली ही है क्या जो मुझे मज़ा दे सकती है और ऐसा बोल कर वो हस देती है. थोड़ी देर बाद जब वो और नीचे उसकी टांगों के बीच आती है तो वहां का नज़ारा देख कर ऋतू के मुँह में भी पानी आ जाता है. निशा अपनी दोनों टांगें उठा कर ऋतू को उसकी फूली हुई और रस से भीगी हुई चूत का दर्शन कराती है और साथ में उसकी मस्त उठी हुई चूचियां भी ऋतू को नज़र आती है. उसकी चूत एकदम गुलाबी और रस से भरी हुई थी और अभी भी कुछ बूँदें उसकी चूत से गिर कर उसकी गांड पे गिर रही थी.
ऋतू भी उस नज़ारे को देख कर रह नहीं पाती और उसकी गुलाबी चूत पे टूट पड़ती है और अपनी जुबां पूरी अंदर डाल कर उसकी चूत को अपने मुँह से चोदते रहती है. निशा तो जैसे जन्नत पे पहुँच गयी थी और ना जाने क्या बड़बड़ा रही थी. ऋतू उसकी चूत को अच्छे से चाट कर अपनी २ उंगलियां उसमें घुसा देती है और क्यूंकि निशा की चूत कुछ दिन पहले ही दिनेश ने खोला था... तो आराम से ऋतू की उंगलियां उसमें घुस जाती है और फिर लगातार अपने मुँह और उँगलियों से उसकी चूत पे दोहरा हुम्ला करती है.
निशा: हाँ माँ..... ऐसे ही मेरी चूत को खा जाओ.... मुझे भी बहुत दिनों से इसने परेशान कर रखा था..... हाँ... ऐसे ही... उफ्फ उफ़्फ़्फ़ करते हुए निशा ऋतू के सर को अपनी चूत पे दबाती रहती है. आखिर में निशा सेह नहीं पाती और जल्दी ही वो अपनी चरम सुख पे पहुँच जाती है और अपना पानी छोड़ देती है जिसे ऋतू पूरा निगल लेती है.
अब निशा को भी थोड़ी राहत मिलती है अपना चरम सुख पा कर और फिर ऋतू उसके ऊपर आकर उसको चूमती है और खुद का रस उसे पिलाती है.
ऋतू: क्यों कैसे लगा तुम्हारा रस?
निशा इस बात से शर्मा जाती है और कुछ नहीं कहती. दोनों फिर एक दुसरे की बाहों में लेटे रहते है.
ऋतू: मैंने सोचा नहीं था की तुम्हारी मालिश इतनी अच्छी होगी.
निशा हस हुए: मैं तो पूछना ही भूल गयी. अब तो आपकी कमर और पेट का दर्द कम हो गया है ना?
ऋतू: हाँ बेटी वो दर्द तो कम हो गया है और उसको देखते हुए कहती है... एक दर्द कम कर दिया है और दूसरा दर्द और बढ़ा दिया है और उसके होंठ को प्यार से चूम लेती है.
निशा: आपका वो दूसरा दर्द तो कभी भी कम हो सकता है मा जी.. और हस देती है.
ऋतू: वैसे बेटा अभी मेरा मन नहीं भरा है. बहुत सालों बाद तुमने मुझे ये फिर से एहसास दिलाया है की मेरी भी कुछ ज़रूरतें है जो मैं अब तक अपने से ही सिम्मट के राखी हुई थी.
निशा: मैं जानती हूँ माँ... क्या पता आगे हम दोनों की ज़िन्दगी में क्या लिखा है. वैसे मेरा भी मन नहीं भरा है. क्यों ना हम एक दुसरे को ही फिर से जन्नत की सैर कराये.
ऋतू: मतलब?
निशा: मतलब ये की मैं आपको खुश करून और आप मुझे... दोनों एक साथ.
ऋतू: वो कैसे?
निशा: वो ऐसे... और ऐसे बोल कर निशा ऋतू को सुलाती है और निशा उसके ऊपर आ जाती है ऋतू निशा की मखमली रस बहाती चूत को अपने सामने फिर से देख कर रह नहीं पाती और उसकी चूत को चूसने और चाटने लग जाती है. निशा भी वैसे ही करती है और दोनों ६९ पोजीशन में आ जाते है. फिर और क्या था...
दोनों एक दुसरे की चूत पे टूट पड़ते है और अगले १० Min तक ना जाने दोनों एक दुसरे का पनाइ निकाल देते है. आखिर में दोनों थक कर एक दुसरे की बाहों में फिर से आ जाते है.
ऋतू: मैंने ये कभी नहीं सोचा था की तुम मुझे इतनी ख़ुशी दोगी. और हाँ अगर दिनेश मुझसे शादी करने की बात करता तो शायद उसके बारे में सोचती और शायद हाँ भी कर देती. जैसे तुमने कहा जब से दीपू ने वसु से शादी किया है मैंने देखा है की वसु भी बहुत खुश रहती है और उसके चेहरे पे एक चमक सी आ गयी है. और हस्ते हुए हम दोनों एक दुसरे की सौतन बन जाते.
निशा: माँ आप ठीक कह रही हो. जितने दिन मैं घर में थी शादी के बाद एक भी दिन ऐसा नहीं गया जब मैं रात को अपने आप को ऊँगली करती थी उनकी आवाज़ सुन कर... ये सोच कर की दिनेश भी मुझे भी उतना ही प्यार करेगा जितना दीपू माँ से करता है. हम दोनों एक दुसरे की सौतन ना बने लेकिन प्यार तो कर सकते है ना... और इस बार निशा ऋतू के होंठ चूम लेती है और इस बार दोनों बड़ी कामुकता के साथ एक दुसरे की जुबां चूसने लगते है...
और हाँ... अब से मैं रोज़ इस बिस्तर पे आपके साथ ही सो जाऊँगी...;ऋतू: प्यार से उसको देख कर... मेरी बच्ची...
Note: apologies for the delay...काम से बहुत Busy था. This is my longest update till date (6500+ words). लिखने में बहुत मेहनत और सोच लगी. आशा है आप भी इस अपडेट को उतना ही प्यार, Likes और कमैंट्स देंगे. धन्यवाद. On a lighter note..hope the comment would not be "looking for next update"...
दीपू: मत पुछा.. बहुत मजा आया. अब दीपू को भी अच्छा लगने लगता है और उसका मन भी अब हल्का हो जाता है जो इतने दिनों से भारी था. अब वो अपने पुराने रूप में आ गया था... और वो सोचता है की वो कल ही निशा से बात करेगा और सब कुछ ठीक कर देगा…. अब उसके मन में कोई उलझन या दुविधा नहीं थी….
अब आगे..
अगली सुबह दीपू उठता है तो देखता है की दिव्या पूरी नंगी उसे पकड़ कर मस्त गहरी नींद में सो रही है. उसको देख कर दीपू को बड़ा प्यार आता है और फिर प्यार से उसका माथा चूम कर बाथरूम चला जाता है. आज उसका मन बहुत हल्का और अच्छा लग रहा था क्यूंकि पिछली रात दिव्या ने उसको चूस चूस कर हल्का कर दिया था. नाहा धो कर फ्रेश होने के बाद वो निशा के कमरे में जाता है तो देखता है की निशा भी गहरी नींद में है. उसे रात भी ठीक से नींद नहीं आयी थी तो वो काफी देर बाद रात में सोई थी. वो निशा को उस हालत में देख कर कमरे से बाहर आ जाता है और किचन में जाता है जहाँ वसु सब के लिए चाय बना रही थी.
वो वसु के पीछे जाकर उसे पीछे से अपनी बाहों में लेता है और कहता है चाय से पहले उसे थोड़ा मीठा चाहिए. वसु उसकी बात का मतलब समझ जाती है और पीछे मुड़ते हुए उसको देख कर कहती है... आज मेरा बेटा मुझे पुराने रूप में दिख रहा है और दीपू को बाहों में लेकर रोती है. दीपू भी बात को समझते हुए वसु को जोर से पकड़ कर उसे दिलासा देता है और कहता है की वो सब ठीक कर देगा. वसु को इस हालत में देख कर उसने जो बात १ Min पहले कहा था.... वो भूल जाता है और उसके आंसूं पोछता है. वसु भी फिर अपने आंसूं पॉच कर कहती है... क्यों मीठा नहीं चाहिए क्या?
दीपू मना कर देता है क्यूंकि इस हालत को अच्छे से समझता है. इतने में वहां कविता भी आ जाती है और वो भी वसु को गले लग कर रोती है. दीपू दोनों को अपनी बाहों में लेता है और उसकी आँखों में भी आंसू आ जाते है. फिर थोड़ी देर बाद वसु अपने आप को संभालती है क्यूंकि वो अब इस घर की सबसे बड़ी थी और उसे ही अब घर को संभालना था. फिर सब चाय पी कर बातें करते है.
थोड़ी देर बाद दीपू फिर से निशा के कमरे में जाता है तो वो तभी फ्रेश होकर बाथरूम से बाहर आती है और दीपू को देख कर वो दौड़ कर उसके गले लग जाती है और ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है. आज काफी दिनों बाद दोनों मिले थे और निशा अपने आप को रोक नहीं पाती और दीपू की बाहों में रोती रहती है.
दीपू: चुप हो जा निशा.... मुझे पता है हो हुआ वो अच्छा नहीं हुआ. लेकिन अब हम कुछ नहीं कर सकते.
निशा की रोने की आवाज़ सुन कर बाकी लोग भी कमरे में आ जाते है और दोनों को देख कर उनकी आँखें भी भर आती है.
निशा: ये सब कैसे हुआ भाई? मैंने कभी नहीं सोचा था की ऐसा कुछ होगा. इस दुनिया में मैं सिर्फ २ लोगों से ही प्यार करती हूँ और भगवान् ने मुझसे एक को छीन लिया है और रोते रहती है.
दीपू: चुप हो जा. मैं हूँ ना.... सब ठीक कर दूंगा. अगर तू ही ऐसे रहेगी तो आंटी और माँ कैसे ठीक से रह पाएगी.
अब आंटी को तुझे ही संभालना है. दिनेश तेरा पति था तो वो आंटी का बेटा भी था. सोच उनके ऊपर क्या गुज़र रही होगी. इन सब बातों में वहां का वातावरण और भी दुःखमयी हो जाता है.
दीपू फिर निशा को अलग कर के उसे बिस्तर पे बिठा देता है. निशा अपनी आँखें साफ़ करते हुए दीपू से पूछती है की सब कैसे हुए. दीपू को लगता है की उसे सब बता देना चाहिए और उस एक्सीडेंट के बारे में थोड़ा उसे और सब को बता देता है.
दीपू की बातें सुनकर किसी को कुछ कहने की हिम्मत नहीं होती. फिर दीपू ही बात शुरू करता है.
दीपू: सुन निशा जैसे माँ ने बताया है अब आंटी भी रोज़ ऑफिस आएगी और मेरा साथ देगी. दिनेश भी यही चाहता था की हम अपने कंपनी को और आगे बढाए जो मैं उसे पूरा करने वाला हूँ. हो सके तो तुम भी कभी कभी आ जाना. तेरे लिए भी अच्छा रहेगा. और दीपू ये बात बोलते हुए वो ऋतू की तरफ देखता है. वो कुछ नहीं कहती तो वसु उसकी तरफ से हाँ कह देती है.
फिर निशा भी अपने आप को संभालती है और क्या करना है उसके बारे में सोचती रहती है. उस दिन और कुछ नहीं होता और सब अपने काम में बिजी हो जाते है.
दो दिन बाद ऋतू वसु से कहती है
ऋतू: वसु अब हम अपने घर चले जाएंगे. यहाँ अब बहुत दिन से रह रहे है. जैसे दीपू ने कहा अब जो हो गया उसे तो बदला नहीं जा सकता लेकिन ज़िन्दगी भी रुक नहीं सकती.
ऋतू के इस बात पे वसु कुछ नहीं कह पाती और कहती है की १- २ दिन और रुक जाए उनके घर. लेकिन ऋतू कहती है की २ दिन बाद तो जाना ही होगा तो आज ही क्यों नहीं. ऋतू फिर निशा को भी बता देती है तो वो भी तैयार हो जाती है. वसु दीपू को भी ये बात बताती है तो १- २ घंटे बाद सब लोग उनको छोडने उनके घर जाते है. ऋतू के घर के अंदर जाते है ऋतू और निशा को दिनेश की फिर याद आती है क्यूंकि आज वो अपने घर काफी दिनों बाद आये थे) तो फिर से उनकी आँखें नम हो जाती है. इस बार कविता ऋतू को संभालती है तो दिव्या निशा को. फिर एक घंटे बाद दीपू और बाकी लोग वहां से निकल जाते है और रह जाते है ऋतू और निशा अपने घर में....
कुछ दिन ऐसे ही बीत जाते है और अब धीरे धीरे सब नार्मल होने लगता है. जहाँ दीपू वसु और बाकी लोग भी थोड़ा सामान्य हो जाते है वहीँ ऋतू और निशा अभी भी दिनेश की याद में ही रहते है. उनके जाने के बाद ऋतू निशा से कहती है की वो भी उसके साथ ही सो जाए लेकिन निशा थोड़ा शर्माती है और कहती है की कुछ दिन उसे समय दे. जब वो भी थोड़ा नार्मल हो जायेगी तो वो खुद उनके कमरे में सोने आएगी. दोनों ऋतू और निशा अपने अपने कमरे में रोज़ रात को सोते है लेकिन एक दुसरे के जाने बिना दोनों अपनी गर्मी में तड़पते रहते है. जहाँ निशा दिनेश को याद करके अपनी चूत मसलते हुए अपनी गर्मी निकालने की कोशिश करती है वहीँ ऋतू भी अपनी बरसों से दबी हुई प्यास को रोक नहीं पाती और वो भी अपनी चूत मसलते हुए सोचती है की काश वो अभी इस वक़्त एक मर्द की बाहों में हो...
वहीँ दीपू के घर में भी अब नार्मल हो जाता है और दीपू भी अब रोज़ रात को मजे करता है और लेता भी है. वसु कविता और दिव्या भी अब रोज़ उसके लंड पे झूलते रहते है लेकिन रह जाती है तो मीना और एक तरह से लता भी. उसे (मीना ) भी अब यहाँ आये हुए काफी दिन हो गए थे लेकिन यहाँ के हालत ही ऐसे थे की उसके मन में भी सेक्स की भावना नहीं आयी थी. लेकिन जब ऋतू और निशा वापस चले गए और सब नार्मल हो गया और घर के बाकी लोग भी मजे कर रहे है तो अब फिर से मीना के मन में भी अब वो भावनाएं जागने लगी थी लेकिन वो अपनी माँ कविता से कहने से शर्माती थी भले ही सब को पता था की मीना वहां क्यों है. पिछले दिनों में घर का माहौल ही ऐसा था की किसी की उस पर ज़्यादा नज़र भी नहीं गयी थी और ये नार्मल से बात थी जिसे मीना भी समझती थी.
वही हाल लता का भी था. वो तो पिछली बार दिव्या और दीपू को देखी थी मजे करते हुए. और अब तो रोज़ उनको सुबह देख कर थोड़ी सी जलन भी होती थी उसको क्यूंकि दीपू की तीनो पत्नियों के चेहरे पर एक अलग ही चमक नज़र आती थी क्यूंकि दीपू तो उन्हें बहुत खुश रखता था. लता ने सोचा की एक बार वो इस बारे में वसु से बात करेगी...
एक दिन रात को निशा को प्यास लगती है तो वो देखती है की उसके कमरे में उस दिन पानी नहीं रखा था तो वो पानी पीने किचन में जाती है. पानी पीकर जब वो अपने कमरे में जा रही थी तो वो ऋतू के कमरे में जाकर उनको एक बार देख कर अपने कमरे में वापिस जाने की सोचती है और यही सोच के साथ वो ऋतू के कमरे की तरफ चली जाती है. ऋतू को इस बात का कभी एसएस नहीं था की निशा उसके कमरे के तरफ कभी आएगी.... इसीलिए उसने कमरे का दरवाज़ा सिर्फ बंद किया था लेकिन अंदर से उसने कुंडली नहीं लगाई थी.
निशा जब वो दरवाज़े के पास आकर उसको थोड़ा खोलने की कोशिश करती है तो दरवाज़ा खुल जाता है और अंदर नाईट लैंप की रौशनी में कमरे में थोड़ी रौशनी थी और निशा अंदर का नज़ारा देख कर मन में सोचती है “हम दोनों की हालत एक जैसे ही है... दोनों एक ही कश्ती में सवार कर रहे है....” क्यूंकि ऋतू अपनी आँखें बंद किये हुए अपनी Nighty को कमर तक उठाये अपनी पैंटी के ऊपर से अपनी चूत मसल रही थी और बड़बड़ाये जा रही थी.
निशा वो नज़ारा देख कर चुपके से बहार आकर दरवाज़ा बंद कर देती है लेकिन वो नज़ारा देख कर वो भी बहक जाती है और बगल में कड़ी होकर वो भी अपनी चूत मसलते रहती है. थोड़ी देर में जब उसको थोड़ा होश आता है तो वो अपने आप को ठीक कर के मन में ही हस्ती है लेकिन फिर उसे एक बात का ख्याल आता है की वो तो दिनेश की बारे में सोच कर गरमा जाती है और अपनी चूत मसलते रहती है.... लेकिन माजी का क्या... किसके बारे में वो सोच रही है....
कुछ दिन बाद जैसे दीपू ने कहा था ऋतू भी अब ऑफिस जाना शुरू कर दिया था. ऋतू को ऑफिस में देख कर दीपू को भी बहुत अच्छा लगा. क्यूंकि ऋतू काफी दिनों बाद ऑफिस आयी थी तो दीपू उसे अपने ऑफिस में जो कुछ भी हुआ था (जो दिनेश और दीपू ने इन पिछले महीनो में काम किया था) वो ऋतू को बताता है.
ऋतू: बहुत अच्छा दीपू. तुम दोनों ने बहुत अच्छा काम किया है.
दीपू: हाँ आंटी... जैसा मैंने और दिनेश ने सोचा था वैसे ही और आगे काम होगा और अपना बिज़नेस बढ़ेगा. ऋतू ये बात सुनकर खुश हो जाती है और अपना काम करने लगती है.
कुछ दिन बाद:
कुछ दिन बाद निशा अपने घर को सफाई के चलते झाड़ू पोछा करती है और किचन में अपना काम करती रहती है.
उस वक़्त ऋतू ऑफिस से हर आती है और निशा को बुलाती है... निशा बेटी...वो इतना ही बोल पाती है की उसके पैर फिसल जाते है और ज़मीन पे धड़ाम से गिर जाती है. वो इसलिए की ज़मीन अभी भी थोड़ी गीली थी निशा के पोछने से जिसका ऋतू को पता नहीं था. ज़ोर की आवाज़ की वजह से निशा दौड़ते हुए बाहर आती है तो उसे थोड़ी घबराहट होती है क्यूंकि ऋतू नीचे फर्श पे पड़ी हुई थी और उसे बहुत तकलीफ हो रही थी.
निशा: माँ क्या हुआ? मुझे पता नहीं था की आप आ रही हो... अभी मैंने घर पोछा था और फर्श थोड़ी गीली थी. ऋतू को अब भी थोड़ा दर्द हो रहा था तो निशा आकर उसे उठाती है और सोफे पे बिठा देती है. ऋतू के गिरने से उसकी कमर और पेट की जगह पर दर्द हो रहा था.
ऋतू अपने आप को संभालती है और फिर निशा उसे पानी देती है. ऋतू को थोड़ा आराम मिलता पर ज़्यादा नहीं. वो थोड़ी मुश्किल में रहती है लेकिन निशा को बताती नहीं. फिर निशा अपना काम करती है और रात को दोनों खाना खाने के बाद दोनों अपने कमरे में सोने चले जाते है. (क्यूंकि ऋतू ने निशा को नहीं बताया था निशा को पता नहीं लगा की ऋतू को अब भी कमर और पेट में दर्द कम नहीं हुआ है). जब ऋतू को दर्द कम नहीं होता तो वो निशा को अपने कमरे में बुलाती है. निशा भी थोड़ी परेशानी में आकर पूछती है की क्या हुआ है?
ऋतू: बेटा मैंने तुम्हे बताया नहीं लेकिन मुझे कमर और पेट में अब भी दर्द कर रहा है शाम को गिरने से.
निशा: माँ आपने पहले क्यों नहीं बताया? हम डॉक्टर के पास हो आते.
ऋतू: मुझे लगा था की दर्द कम हो जाएगा. इसीलिए तुम्हे बताया नहीं और डॉक्टर के पास नहीं गए. बेटा थोड़ा Jhandu बाम लगा दे... शायद थोड़ा आराम मिल जाए.
निशा: क्यों नहीं माँ... अगर आप पहले बता देते तो मैं आपको पहले ही बाम लगा देती.
निशा फिर थोड़ी मुश्किल से अपना हाथ निशा की कमर और पेट पे ले जाकर बाम लगाती है. कुछ देर उसे ठीक लगता है लेकिन फिर से ऋतू को थोड़ा दर्द महसूस होता है और वो निशा से कहती है की एक और बार फिर से बाम लगा दे.
निशा: माँ जी आप बुरा ना माने तो फिर से बाम लगाने से अच्छा है की मैं आपकी कमर को एक बार मालिश कर दूँ. मालिश करने से आपको थोड़ा आराम भी मिल जाएगा और आज रात मैं आपके पास ही सोती हूँ.
ऋतू को समझ नहीं आता की वो निशा को क्या जवाब दे. निशा नहीं मानती और कहती है की वो ऋतू की कमर की मालिश करेगी.
ऋतू: वो तो ठीक है बेटा लेकिन मालिश कैसे करोगी?
निशा: आप अपना मैक्सी उतार दे... मैं थोड़ा तेल हलकी सी गरम करके लाती हूँ और फिर तेल से अच्छी मालिश करती हूँ.. ऋतू मना करती है लेकिन निशा मानती नहीं तो आखिर में ऋतू कहती है: बेटा वो तो ठीक है लेकिन मैंने मैक्सी के अंदर कुछ नहीं पहना है.
निशा: धीरे से उसके कान में: तो क्या हुआ माँ जी... आपके पास जो है... ऐसा बोल कर निशा रुक जाती है.
ऋतू: लेकिन बेटा मुझे थोड़ी शर्म आती है.
निशा: मैं समझ सकती हूँ माँ जी. लेकिन अब इस घर में हु दोनों के सिवा और कोई नहीं है तो फिर आपको मुझसे क्या शर्माना? अगर आपको फिर भी शर्म आती है तो मैं आपको एक टॉवल दे देती हूँ. आप उसे ओढ़ लीजिये.
तब तक मैं तेल भी ले आती हूँ और निशा किचन में चली जाती है तेल लाने के लिए. उसके जाते ही ऋतू भी अपनी मैक्सी उतार देती है और वो आगे जाकर अपने आपको आईने में एक बार देख कर हस देती है की उस बदन इस उम्र में भी एकदम गदराया हुआ है. काले लम्बे बाल जो उसकी कमर तक आते थे.. उसकी चूचियां अभी भी एकदम ठोस थी और उनमें अभी भी कोई लचक नहीं थी. उसका पेट एकदम सपाट था जिसमें कोई चर्बी नहीं थी. एकदम गहरी और कामुक नाभि और उसकी टांगों के बीच एकदम पतली से लकीर के माफिक एकदम बंद चूत जो बहुत दिनों से चुदी या खुली नहीं थी.
वो फिर एक बार पीछे मुड कर देखती है तो पाती है की उसकी गांड भी एकदम मस्त उठी हुई है. फिर वो हस्ते हुए बिस्तर पे लेट जाती है और अपना टॉवल कमर पे धक् लेती है. वो ऊपर से नंगी ही थी लेकिन अपनी गांड और पैरों को टॉवल से ओढ़ ली थी. वो अभी भी थोड़ी असहामन्जस में थी लेकिन उसका दर्द बी ही कम नहीं हुआ था तो वो वैसे ही लेट कर निशा का इंतज़ार करती है.
निशा फिर थोड़ी देर बाद एक कटोरे में तेल लेकर आती है लेकिन वो कमरे में आने से पहले वो भी अपने कपडे बदल लेती है और वो भी एक मैक्सी पहन कर आती है और वो भी ऋतू की तरह अंदर और कुछ नहीं पहना था.
तेल मालिश
कमरे में आते ही निशा ऋतू को देखती है तो उसके चेहरे पे हलकी सी हसी आ जाती है.
ऋतू: आ गयी बेटा?
निशा: हाँ माँ तेल लेकर आयी हूँ. आपकी अच्छे से मालिश कर दूँगी तो आपका दर्द भी दूर हो जाएगा.
ऋतू: मैं भी यही चाहती हूँ बेटा की ये दर्द जल्दी चला जाए. मुझे सोने में भी मुश्किल हो रही है.
निशा: आप चिंता मत करिये. आपको जल्दी ही आराम मिलेगा. निशा फिर ऋतू के पीछे आती है और अपने दोनों पैर अलग कर के ऋतू के जाँघों के बीच आकर थोड़ा तेल को अपने हाथ में मलती है और थोड़ा तेल को ऋतू के कमर पे डालती है.
निशा: यहीं ना माँ?
ऋतू: हाँ बीटा... वहां से थोड़ा नीचे तक.
निशा: ठीक है.
और निशा धीरे धीरे ऋतू की कमर पे हाथ फेरते हुए मलती है. जब निशा ऐसा कर रही थी तो ऋतू को बड़ा सुकून मिल रहा था और वो अपने मुँह से हलकी सी सिसकारी भी लेती है.
निशा धीरे धीरे मालिश करती रहती है और इसमें ऋतू को भी अब थोड़ा आराम मिल रहा था. निशा अपने हाथ को और थोड़ा नीचे ले जाती है मालिश करते वक़्त तो उसे टॉवल बीच में आ जाता है और ठीक से वो ऋतू की कमर को मल नहीं पाती.
निशा कुछ सोचती है और कहती है: माँ थोड़ा नीचे मालिश करना है तो ये टॉवल बीच में आ रहा है. इसे निकाल दूँ क्या?
ऋतू को जब ये मालिश थोड़ा अच्छा लग रहा था तो वो निशा की बात सुनकर अपना सर उठा कर कहती है.
ऋतू: बेटा अगर तू इसे निकल देगी तो कैसे... इतना बोल कर रुक जाती है जैसे कहना चाहती हो की वो पूरी नंगी हो जायेगी.
लेकिन ऋतू को थोड़ा डर था की अगर निशा उसे पूरी नंगी कर देगी तो उसे उसकी चूत भी दिख जायेगी जो की निशा की मालिश की वजह से वो भी थोड़ी उत्तेजित हो गयी थी और अनजाने में ही उसकी चूत ने थोड़ा पानी बहाना शुरू कर दिया था. बात ये तो ही बहुत सालों बाद किसीने ऋतू को इस तरह छुआ था और वो भी थोड़ी कामुक तरीके से.
निशा समझ जाती है और झुक कर उसके कान में कहती है: यहाँ हम दोनों के अलावा और कोई नहीं है. मैं तो आपकी बेटी की तरह ही हूँ. मुझसे क्या शर्माना. और वैसे भी जब मैं आपकी कमर मालिश कर रही हूँ तो इसी तरह से आपके पैर भी मालिश कर देती हूँ. ऋतू इस बात से कुछ नहीं कह पाती और हाँ कह देती है क्यूंकि वो भी थोड़ी थकी हुई थी और पैरों की मालिश की बात सुनकर वो हाँ कह देती है.
ऋतू के हाँ कहने के साथ ही निशा उसका टॉवल निकल कर वो ऋतू को पूरा नंगा कर देती है और उसकी उठी हुई गांड को देख कर मन में सोचती है: क्या मस्त गांड है...वो फिर से तेल लेकर इस बार और अच्छे से मालिश करती है और वो अब कमर से लेकर गांड से होते हुए पैरों की भी मालिश करने लगती है. ऋतू को पहले थोड़ा अलग लगा लेकिन अब उसे भी अब मजा आने लगा क्यूंकि उसे भी अब बहुत सुकून मिल रहा था.
निशा ऐसे ही मालिश करते हुए उसकी जाँघों को भी मालिश करती है और ऐसा करने के साथ ही उसका हाथ उसके चूत के बहुत करीब पहुँच जाता है.
उसका हाथ वहां आते ही ऋतू भी एक सिसकारी लेती है और भले ही वो हलकी थी लेकिन कमरे के सुनसान माहौल में वो आवाज़ निशा को भी सुनाई देती है.
निशा: कैसे लग रहा है माँ?
ऋतू: बहुत अच्छा लग रहा है बेटा. मुझे नहीं पता था की तू इतनी अच्छी मालिश भी करती है. इस बात पे निशा कुछ नहीं कहती और निशा मालिश करते हुए वो ऋतू की गांड को भी अच्छे से मालिश करती है.
वहां करते वक़्त उसे वहां का भूरा सिकुड़ा हुआ छेड़ दीखता है जो थोड़ा बंद और खुल रहा था जो इस बात का प्रमाण था की ऋतू को भी अपनी गांड पे मालिश अच्छी लग रही है और साथ ही ऋतू भी धीमी गति से आंहें भर रही थी.
जब वो ऋतू की जाँघों पे अपना हाथ रख कर मालिश करती है तो उसके हाथ में कुछ चिपचिपा लगता है. ये और कुछ नहीं बल्कि ऋतू की चूत का पानी था जिसे निशा बहुत अच्छे से पहचान गयी क्यूंकि वो भी ऐसे पानी से बहुत वाकिफ थी लेकिन कुछ नहीं बोली. वो फिर से इस बार ऋतू का पूरा पीछे का बदन को अच्छे से मालिश करती है... कन्धों से लेकर पैर तक. जब वो कन्धों और गले के पीछे मालिश करती है तो ऋतू कहती है... तूने तो सच में मुझे बहुत आराम दिया है बेटी. ऐसे ही मालिश थोड़ी और कर दो. मुझे भी बड़ा सुकून मिलेगा.
निशा: आप चिंता मत कीजिये माँ... आज के बाद आप मुझे रोज़ मालिश करने को बोलोगी और हस देती है. इस बात पे ऋतू भी हस देती है.
10 -15 Min तक ऐसे ही मालिश करती है और इस बीच निशा भी अपनी मैक्सी उतार देती है और वो भी नंगी ही ऋतू की मालिश करती है. क्यूंकि ऋतू का चेहरा दूसरी तरफ था वो देख नहीं पाती की निशा भी पूरी नंगी हो गयी है.
निशा: माँ जी अब पलट जाईये. आपके पेट पे भी अच्छे से मालिश कर देती हूँ. आपको और अच्छा लगेगा.
ऋतू ये बात सुनकर कहती है... इसकी ज़रुरत नहीं है बेटा. कमर तक ही ठीक है.
निशा: ऐसे कैसे माँ जी? मुझे पता है जब आप गिरी थी तो आपको कमर और पेट में दर्द हो रहा था. मैं आपकी पेट भी मालिश कर देती हूँ तो आपको अच्छा लगेगा. ऋतू कुछ नहीं कह पाती तो निशा उसके बदन से उठ कर थोड़ा अलग हो जाती है जिससे ऋतू को पलटने में आसानी हो जाती है.
जब वो पलट कर निशा को देखती है तो उसे बहुत आश्चर्य होता है की निशा भी उसकी तरह नंगी है.
ऋतू: बेटा तुमने कपडे क्यों निकल दिए?
निशा: अगर मैं कपड़ों में रह कर मालिश करती तो मेरे कपडे भी तेल की वजह से खराब हो जाते. आप चिंता मत करिये. आपका दर्द अब जल्दी ही निकल जाएगा.
ऋतू फिर निशा के सामने पलट कर पीठ के बल लेट गयी तो उसकी आँखों में एकदम शर्म थी जिसकी वजह से वो अपनी आँखें नीचे कर लेती है क्यूंकि दोनों को पता था की ऋतू की मस्त ठोस चूचियां उसके उत्तेजित होने से एकदम तन गए है और उसके गहरे भूरे रंग के चूचक बेहद कड़क और लुभावने लग रहे थे जैसे कह रहे हो को कोई इसको मुँह में लेकर अच्छे से चूसो और काटो..
निशा ये बात समझ जाती है लेकिन कुछ नहीं करती. निशा फिर तेल लेकर उसकी मस्त गहरी नाभी पे डालती है मालिश करने के लिए और जैसे ही निशा ऐसे करती है ऋतू अपने आप को रोक नहीं पाती और ज़ोर से सिसकी लेती है.
निशा: अनजान बनते हुए भले ही उसको पता था... क्या हुआ माँ?
ऋतू: कुछ नहीं बेटा... और शर्म से चुप हो जाती है.
निशा फिर ऋतू के पेट और नाभि को अच्छे से मालिश करते हुए ऊपर आती है उसकी चूची की तरफ. ऋतू निशा की तरफ देखती है तो निशा अपना हाथ उसके चूची के ऊपर से ले जाकर गले और कंधे और गले पे मालिश करती है जिसकी उम्मीद ऋतू को नहीं थी. ऋतू को लगा था की निशा उसकी चूचियां मालिश करेगी. निशा के ऐसे मालिश करने से अब ऋतू को भी बहुत अच्छा लग रहा था.
वहां पे अच्छे से मालिश करने के बाद निशा फिर से अपने हाथ में तेल दाल कर इस बार उसकी चुहियों की तरफ बढ़ती है तो ऋतू को पता चल जाता है तो वो अपने हाथ को निशा के हाथ पे रख कर मना करने की कोशिश करती है लेकिन वो भी धीरे से. जैसे वो एक दिखावा हो. निशा समझ जाती है और वो ऋतू का हाथ हटा कर अपने हाथ को ऊपर लेकर उसकी चूची पे तेल डाल के अच्छे से मसलती है. अब ऋतू से भी रहा नहीं जाता तो वो अपने हाथ को निशा के हाथ के ऊपर रख कर खुद ही ज़ोर से उसकी चूची दबा देती है.
मालिश बदल गया प्यार में…
ऋतू: हाँ बेटा अच्छे से मसलो. बहुत सालों बाद किसीने इसे छुआ है. निशा एक हाथ से उसकी एक चूची को दबाती और मसलती है तो वो अपने दुसरे हाथ को नीचे ले जा कर उसकी चूत को छूती है जो रस से बह रहा था और वो रस निशा के उँगलियों पे लग जाता है.
निशा वो उंगलियां निकाल कर ऋतू की आँखों में देखते हुए वो उंगलियां देखती है जो पूरी गीली थी और उसे अपने मुँह में लेकर चाट लेती है. ऋतू की आँखें तो शर्म से एकदम लाल हो जाती है और अपनी आँखें बड़ी करती हुई वो निशा को देखती रहती है.
ऋतू थोड़ा शर्माते हुए: तू क्या कर रही है?
निशा: वही जो दिनेश हमेशा मेरे साथ करता है और हस देती है ….लेकिन इसमें शर्माने की कोई बात नहीं हैं.
निशा ऋतू की तरफ देखती है तो ऋतू की आंखों में थोड़ी बेबसी और वासना भी नज़र आती है जैसे कह रही हो की वो भी बहुत प्यार के लिए तरस रही है.
निशा झुक कर अपने होंठ ऋतू के होंठों से मिलाती है तो ऋतू को थोड़ी शर्म आती है और होंठ बंद ही रखती है.
निशा: लगता है बहुत सालों से आपने किसी को चूमा नहीं है.
ऋतू अपनी आँखें अभी भी बंद करते हुए... कौन होगा जिसे मैं चूमू... दिनेश के पिता तो बहुत सालों पहले मुझे छोड़ के चले गए थे.
निशा: आपकी बात भी सही है. मैं आपको बताती हूँ की कैसे चूमते है. आप अपनी आँखें खोले और अब हम दोनों के बीच में कोई शर्म नहीं रेहनी चाहिए. हम दोनों एक ही कश्ती में सवार कर रहे है. आप भी जानती है की हम दोनों बहुत प्यासी है ख़ास कर के जब से दिनेश चला गया है.
निशा ऐसे बोलते हुए फिर से वो ऋतू को चूमती है तो इस बार ऋतू उसका साथ देती है और दोनों पहले धीरे धीरे लेकिन 1 Min के अंदर ही दोनों एक प्रगढ़ चुम्बन में जुड़ जाते है और दोनों अपनी जुबां एक दुसरे के मुँह में डाल कर अपना रस आदान प्रदान करते है.
निशा ऋतू को चूमते हुए अपने हाथ से इस बार उसकी चूचियों को ज़ोर से दबाती है तो ऋतू के मुँह से सिसकारी निकलती है लेकिन वो निशा के मुँह में ही दब जाती है.
5 Min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अपनी सांसें संभालते हुए अलग होते है तो इस बार निशा ऋतू की आँखों में एक नया ख़ुशी का अहसास देखती है.
ऋतू: बहुत सालों बाद किसीने मुझे इतने अच्छे से चूमा हैं बेटा.
निशा: ये तो कुछ भी नहीं है माजी. आज आपको और मज़ा दूँगी. आपक देखते रहो.
ऋतू को इस बात का पता चल जाता है और आँखों से जैसे पूछती है की आगे और क्या हो सकता है. अब दोनों के चेहरे एक दुसरे के बहुत पास थे और निशा ऋतू से कहती है...
निशा: एक राज़ की बात बताओं.
ऋतू: क्या?
निशा: आपको दीपू के बारे में क्या पता है?
ऋतू: इसमें क्या है. वो बहुत होनहार लड़का है और अपनी बीवियों को बहुत खुश रखता है.
निशा: आपकी बात तो सही है लेकिन उसने किस से शादी की है?
ऋतू: वो तो तुम्हारी मम्मी और मौसी से शादी की है. तो इसमें राज़ की क्या बात है?
निशा: राज़ ये है की जब मैं और दिनेश हनीमून पे गए थे तो उसने मुझे बताया था की उसने आपको बहुत तड़पते हुए देखा है.... ख़ास कर के प्यार और जिस्म के प्यार की तड़प.
ऋतू निशा की ये बात सुनकर कुछ नहीं कहती.
निशा: और दिनेश भी दीपू की तरह आपसे शादी करना चाहता था और वो मुझसे ये बात बतायी और मुझसे मेरी तरफ से जैसे परमिशन मांग रहा था की वो आपसे शादी करेगा और हम दोनों एक दुसरे की सौतन बन जाएंगे.
ऋतू जब निशा के मुँह से ये बात सुनती है तो एकदम आश्चर्य से निशा की तरफ अपना मुँह खोले देखती रहती है.
निशा: हाँ माँ मैं सच कह रही हूँ. बस आपकी बदकिस्मती हैं की वो ये काम नहीं कर सका और हमें छोड़ के चला गया.
निशा के ऐसे बोलने से ऋतू की आँखों में आंसू आ जाते है और कहती है... क्या वो सच में मुझसे इतना प्यार करता था की वो मुझसे शादी करना चाहता था?
निशा: हाँ माँ. लेकिन आप चिंता मत करो. मैं हूँ ना... मैं उसकी कमी तो हर तरह से पूरी नहीं कर सकती लेकिन मैं भी आपको उतना ही प्यार दूँगी जो आप बरसों से छा रही थी और ऐसा बोलते हुए वो फिर से ऋतू को चूमने लगती है.
इस बार ऋतू पूरे जोश के साथ निशा को चूमती है और एक तरह से उसके होंठ काट लेती है. इसमें दोनों को मज़ा आता है और २ min बाद निशा कहती है: जैसा बेटा वैसे माँ.
ऋतू: मतलब:
निशा: मतलब ये की दिनेश भी मुझे पूरी जोश और शिद्दत के साथ मुझे चूमता था और कभी कभी जैसे अभी आपने किया मेरे होंठ भी काट देता था... और ऐसा बोलते हुए निशा हस देती है.
निशा फिर ऋतू की गर्दन चूमते हुए नीचे आती और एक हाथ से उसकी मदमस्त चूची दबाते हुए दुसरे दुसरे को मुँह में लेकर चूसती रहती है. उसके बड़े बड़े चूचियों के ऊपर गहरे भूरे रंग के चूचक बेहद कड़क और लुभावने लग रहे थे। निशा ने उसकी एक चूची को पकड़ के जोर से दबाया. निशा उसके चुच्ची को दबाके जीभ से चूचकों के साथ खिलवाड़ करने लगा। ऋतू चूचक के साथ छेड़छाड़ होते ही मस्त होने लगी। उसके मुंह से सिसकारी फूट पड़ी। ऋतू के मुंह से सिर्फ उफ़्फ़फ़फ़, आहहहहह... की आवाज़ें निकलने लगी… ऋतू ने निशा का सर पकड़ लिया और उसके मुंह में चूचक घुसेड़ने लगी क्यूंकि निशा की इस हरकत से ऋतू भी अब बहुत गरम हो गयी थी और उसकी उत्तेजना धीरे धीरे उसके सर पे सवार हो रही थी . निशा ऋतू के चूचियों को मुंह में भरकर चूसे जा रही था जिसमें दोनों को बहुत मजा आ रहा था.
निशा बारी बारी से दोनों चूकियों का मर्दन कर रही थी और ऋतू की सिसकारियां पूरे कमरे में गूँज रही थी. ५ min बाद जब निशा ने ऋतू की तरफ देखा तो उसके चेहरे पे हसी आ गयी क्यूंकि इस वक़्त ऋतू सच में बहुत कामुक और आकर्षक लग रही थी.
निशा के चूची मर्दन से ना जाने कितनी बार ऋतू ने अपना पानी छोड़ दिया था और अब तक तो निशा नीचे भी नहीं गयी थी. निशा फिर थोड़ी देर बाद उसके पेट और नाभि को चूमते हुए नीचे जाकर उसकी मस्त जाँघों को चूमती है. ऋतू की तो एक तरह से हालत उत्तेजना के मारे एकदम बत्तर हो गयी थी. आखिर में ऋतू से भी रहा नहीं जाता और बोल ही देती है. निशा क्यों तड़पा रही हो मुझे? कुछ करो ना..
निशा ऋतू को छेड़ते हुए... क्या करून माँ?
ऋतू: तू इतनी भी सयानी नहीं है. तुझे पता है क्या करना है.
निशा एकदम भोली बनते हुए कहती है मुझे पता नहीं क्या करना है. आप मुझे बताये ना क्या करना है. मुझे आपके मुँह से सुन्ना है.
ऋतू: तू नहीं मानेगी... तो सुन... तूने मेरी जिस्म में जो आग भरी है उसे बुझा दे और ऐसा कहते हुए ऋतू थोड़ा उठते हुए निशा का सर पकड़ कर अपनी चूत पे दबा देती है.
निशा को भी लगता है की उसे ऋतू को और तड़पाना नहीं चाहिए और वो भी बड़ी शिद्दत से ऋतू की चूत को ऊपर से नीचे तक चाटने लगती है और अपनी एक ऊँगली को उसकी चूत में डालने की कोशिश करती है लेकिन वो उसमें सफल नहीं हो पाती क्यूंकि ऋतू की चूत कहा जाए तो बहुत सालों से बंद थी और अब तो वो जैसे एक कुंवारी बन गयी थी.
निशा फिर ऋतू की चूत के दाने को छेड़ती है तो ऋतू से रहा नहीं जाता और ज़ोर से उफ़्फ़फ़फ़ आहहहहह... की आवाज़ें निकालते हुए निशा का सर अपनी चूत पे और ज़ोर से दबा देती है.
ऋतू से भी अब रहा नहीं जाता और वो अपना पानी निकल देती है जिसे निशा बड़े चाव से पी जाती है और ऋतू की तरफ देख कर कहती है... आपका पानी तो बहुत स्वादिष्ट है. ऋतू झड़ कर ज़ोर ज़ोर से आंहें भर्ती रहती है क्यूंकि कई सालों बाद उसे किसीने झडाया था.
वो अलग बात है की कभी कभी वो अपने आपको अपने उँगलियों से ही संतुष्ट करती रहती थी लेकिन वो संतुष्टि की ख़ुशी अभी किसी और ने दिया था... और वो कोई और नहीं उसकी खुद की बहु थी.
ऋतू जब अपने आपको संभालती रहती है तो निशा उसके ऊपर आकर उसकी आँखों में देखते हुए फिर से उसके होंठों पे चूमती है तो इस बार ऋतू बड़े प्यार से निशा के होंठ चूमती है जैसे वो उसका धन्यवाद कर रही हो.
निशा: माँ जी आपका पानी तो बड़ा मस्त है. आप मेरा पानी नहीं चखना चाहोगे? निशा के इस बात पे ऋतू हस देती है और फिर से उसे चूमते हुए उसे पलटा कर अब वो निशा के ऊपर आ जाती है.
पिछले आधे घंटे से हो रहे काम में निशा की हालत भी बुरी थी. उसकी चूचियां भी एकदम तन गयी थी और उसके चूचक भी पूरे खड़े हो गए थे. ऋतू भी उसकी एक चूची को मुँह में लेकर मस्त चूसती रहती है और कहती है... तेरी चूची भी बहुत अच्छी है निशा. काश अगर दिनेश होता तो जल्दी ही इसमें दूध भी आ जाता. इस बात पे निशा की आँखों में आंसूं आ जाते है लेकिन कहती है... ये तो किस्मत की बात है माँ और फिर निशा भी ऋतू की तरह अपना हाथ उसके सर पे रख कर उसे अपनी चूचियों पे दबा देती है. शायद ये ऋतू का पहली बार था की उसने किसी औरत की चूची को चूसा है लेकिन वो भी काफी अनुभवी थी और ऐसा नहीं लग रहा था की वो पहली बार ही किसीकी चूची चूस रही हो. निशा को भी अब इसमें मजा आ रहा था और वो भी सिसकारियां लेने लगती है.
ऋतू भी अपना अनुभव दिखाते हुए कभी कभी वो निशा की चूची को काट भी लेती है ख़ास कर के उसके उठे हुए चूचक को. निशा ने पहले कभी ऐसा महसूस नहीं किया था और वो तो जैसे सातवें आसमान में पहुँच गयी थी.
ऋतू फिर नीचे जाती है और इस बार वो उसकी नाभि को चूमती है और उसकी जुबां से उसको छेड़ती है. ऐसा करने से निशा एकदम मचल जाती है और अपना हाथ ऋतू के सर के ऊपर रख कर ज़ोर से उसकी नाभि पे दबा देती है. उसके नाभि को छेड़ने से ही निशा फिर से एक और बार झड़ जाती है और बिस्तर को एक तरह से गीला कर देती है.
निशा: माँ तुमने ये सब कहाँ से सीखा है? आप तो मुझे जन्नत पे पहुंचा रही हो.
ऋतू: क्यों तू अकेली ही है क्या जो मुझे मज़ा दे सकती है और ऐसा बोल कर वो हस देती है. थोड़ी देर बाद जब वो और नीचे उसकी टांगों के बीच आती है तो वहां का नज़ारा देख कर ऋतू के मुँह में भी पानी आ जाता है. निशा अपनी दोनों टांगें उठा कर ऋतू को उसकी फूली हुई और रस से भीगी हुई चूत का दर्शन कराती है और साथ में उसकी मस्त उठी हुई चूचियां भी ऋतू को नज़र आती है. उसकी चूत एकदम गुलाबी और रस से भरी हुई थी और अभी भी कुछ बूँदें उसकी चूत से गिर कर उसकी गांड पे गिर रही थी.
ऋतू भी उस नज़ारे को देख कर रह नहीं पाती और उसकी गुलाबी चूत पे टूट पड़ती है और अपनी जुबां पूरी अंदर डाल कर उसकी चूत को अपने मुँह से चोदते रहती है. निशा तो जैसे जन्नत पे पहुँच गयी थी और ना जाने क्या बड़बड़ा रही थी. ऋतू उसकी चूत को अच्छे से चाट कर अपनी २ उंगलियां उसमें घुसा देती है और क्यूंकि निशा की चूत कुछ दिन पहले ही दिनेश ने खोला था... तो आराम से ऋतू की उंगलियां उसमें घुस जाती है और फिर लगातार अपने मुँह और उँगलियों से उसकी चूत पे दोहरा हुम्ला करती है.
निशा: हाँ माँ..... ऐसे ही मेरी चूत को खा जाओ.... मुझे भी बहुत दिनों से इसने परेशान कर रखा था..... हाँ... ऐसे ही... उफ्फ उफ़्फ़्फ़ करते हुए निशा ऋतू के सर को अपनी चूत पे दबाती रहती है. आखिर में निशा सेह नहीं पाती और जल्दी ही वो अपनी चरम सुख पे पहुँच जाती है और अपना पानी छोड़ देती है जिसे ऋतू पूरा निगल लेती है.
अब निशा को भी थोड़ी राहत मिलती है अपना चरम सुख पा कर और फिर ऋतू उसके ऊपर आकर उसको चूमती है और खुद का रस उसे पिलाती है.
ऋतू: क्यों कैसे लगा तुम्हारा रस?
निशा इस बात से शर्मा जाती है और कुछ नहीं कहती. दोनों फिर एक दुसरे की बाहों में लेटे रहते है.
ऋतू: मैंने सोचा नहीं था की तुम्हारी मालिश इतनी अच्छी होगी.
निशा हस हुए: मैं तो पूछना ही भूल गयी. अब तो आपकी कमर और पेट का दर्द कम हो गया है ना?
ऋतू: हाँ बेटी वो दर्द तो कम हो गया है और उसको देखते हुए कहती है... एक दर्द कम कर दिया है और दूसरा दर्द और बढ़ा दिया है और उसके होंठ को प्यार से चूम लेती है.
निशा: आपका वो दूसरा दर्द तो कभी भी कम हो सकता है मा जी.. और हस देती है.
ऋतू: वैसे बेटा अभी मेरा मन नहीं भरा है. बहुत सालों बाद तुमने मुझे ये फिर से एहसास दिलाया है की मेरी भी कुछ ज़रूरतें है जो मैं अब तक अपने से ही सिम्मट के राखी हुई थी.
निशा: मैं जानती हूँ माँ... क्या पता आगे हम दोनों की ज़िन्दगी में क्या लिखा है. वैसे मेरा भी मन नहीं भरा है. क्यों ना हम एक दुसरे को ही फिर से जन्नत की सैर कराये.
ऋतू: मतलब?
निशा: मतलब ये की मैं आपको खुश करून और आप मुझे... दोनों एक साथ.
ऋतू: वो कैसे?
निशा: वो ऐसे... और ऐसे बोल कर निशा ऋतू को सुलाती है और निशा उसके ऊपर आ जाती है ऋतू निशा की मखमली रस बहाती चूत को अपने सामने फिर से देख कर रह नहीं पाती और उसकी चूत को चूसने और चाटने लग जाती है. निशा भी वैसे ही करती है और दोनों ६९ पोजीशन में आ जाते है. फिर और क्या था...
दोनों एक दुसरे की चूत पे टूट पड़ते है और अगले १० Min तक ना जाने दोनों एक दुसरे का पनाइ निकाल देते है. आखिर में दोनों थक कर एक दुसरे की बाहों में फिर से आ जाते है.
ऋतू: मैंने ये कभी नहीं सोचा था की तुम मुझे इतनी ख़ुशी दोगी. और हाँ अगर दिनेश मुझसे शादी करने की बात करता तो शायद उसके बारे में सोचती और शायद हाँ भी कर देती. जैसे तुमने कहा जब से दीपू ने वसु से शादी किया है मैंने देखा है की वसु भी बहुत खुश रहती है और उसके चेहरे पे एक चमक सी आ गयी है. और हस्ते हुए हम दोनों एक दुसरे की सौतन बन जाते.
निशा: माँ आप ठीक कह रही हो. जितने दिन मैं घर में थी शादी के बाद एक भी दिन ऐसा नहीं गया जब मैं रात को अपने आप को ऊँगली करती थी उनकी आवाज़ सुन कर... ये सोच कर की दिनेश भी मुझे भी उतना ही प्यार करेगा जितना दीपू माँ से करता है. हम दोनों एक दुसरे की सौतन ना बने लेकिन प्यार तो कर सकते है ना... और इस बार निशा ऋतू के होंठ चूम लेती है और इस बार दोनों बड़ी कामुकता के साथ एक दुसरे की जुबां चूसने लगते है...
और हाँ... अब से मैं रोज़ इस बिस्तर पे आपके साथ ही सो जाऊँगी...;ऋतू: प्यार से उसको देख कर... मेरी बच्ची...
Note: apologies for the delay...काम से बहुत Busy था. This is my longest update till date (6500+ words). लिखने में बहुत मेहनत और सोच लगी. आशा है आप भी इस अपडेट को उतना ही प्यार, Likes और कमैंट्स देंगे. धन्यवाद. On a lighter note..hope the comment would not be "looking for next update"...