Incest Porn Kahani - EK MAA - SexBaba
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Incest Porn Kahani - EK MAA

hotaks

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ये कहानी एक माँ की ह कैसे वो अपने बच्चो को पलटी ह कैसे उन्हें दुनिया का ज्ञान देती ह

दोस्तों मैं एक नई स्टोरी स्टार्ट क्र रही हु उम्मीद करती हु आप सब का प्यार जरूर मिलेगा ये अंजलि की कहानी ह इसमें प्यार धोका साजिश बदला सब होगा तो अपनी प्यारी रिया का साथ दे



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अपडेट- 1



ये कहानी एक माँ की ह कैसे उसने अपने परिवार को पला सम्हाला कैसे अपनी बेटियों को दुनिया का ज्ञान दिया कैसे bête को दुनिया के सामने लड़ना सिखाया तो शुरू करते हैं

उत्तर प्रदेश का एक छोटे से गाओं खेड़ा जो शहर की चमक चांद से बहुत दूर था गाओं के पास से एक नदी भेटि थी जिसमे लोग अपने जीवन के लिए पानी का इस्तेमाल करते थे, गाओं में लगभग 100 hi परिवार होंगे जो बड़े hi प्यार से रहते थे और भारत में सभी जगह की तरह hi यहाँ भी आमिर और गरीब थे आमिर इतने आमिर की उनके पास पहुंचना भी मुश्किल था ये वो परिवार थे जिन्होंने इस गाओं को बसाया था तो यहाँ की सभी जमीने इनकी hi थी, बाकि लोग धीरे धीरे यहाँ आकर बेस थे फिर उनके भी परिवार बनते चले गए वो लोग जमीदारो के खेतो में काम करते थे फिर सर्कार ने किसी योजना के तहत जमीदारो से कुछ जमीने लेकर गाओं के गरीब लोगो में बात दी लेकिन जिन लोगो को मजदूरी करने की आदत पद चुकी थी वो जमीने कैसे सम्हाल पते उनमे से बहुत से परिवारों ने जमी वापस जमीदारो को बेच दी और पैसे से कुछ दिन मौज की और फिर वापस अपनी उसी मजदूरी की जिंदगी में लग गए,

कुछ ऐसे भी थे जिन्हे पता hi नहीं था की उनके पास कुछ जमीने भी ह पढ़े लिखे वो थे नहीं जमीदारो ने जमीने कब्ज़ा क्र ली थी और वो लोग अपनी hi जमीनों पैर मजदूरी करके अपना पेट भरते थे, ऐसा hi एक परिवार था राजेश का,

उसका परिवार अब से 100 साल पहले इस गाओं में आकर बसा था धीरे धीरे परिवार बड़ा होता गया सभी अपने काम में लग गए थे और आप तो जानते hi होंगे हमारे यहाँ बच्चे बड़े होते hi अलग हो जाते हैं ऐसे hi राजेश का भी काफी बड़ा परिवार था लेकिन वो अपने पिता की अकेली औलाद था बाकि उसके परिवार वाले उसे कोई रिश्ता नहीं रखते थे,

राजेश बिलकुल अनपढ़ आदमी था और बहुत hi भोला देखने में ठीक थक था न hi बहुत खूबसूरत न hi बदसूरत एक नार्मल इंसान उसके माता पिता की मोत जल्दी hi हो गई थी, राजेश मजदूरी करके अपना और अपने परिवार का पेट भरता था,

राजेश की पत्नी अंजलि बहुत hi खूबसूरत बाला थी पुरे गाओं में उसे खूबसूरत औरत नहीं आई थी पूरा गाओं राजेश से नफरत करता था की कैसे इस अनपढ़ पागल को इतनी खूबसूरत औरत मिल गई

कैसे मिली ये कहानी में आगे पता चलेगा

अंजलि- 38 की आगे थी

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उसकी काम उम्र में शादी हो गई थी बहुत hi समझदार और खूबसूरत औरत थी जितनी महेनत राजेश करता अंजलि भी उतनी hi करती थी उप्पर वाले ने उसे बड़ी फुर्सत से बनाया था 36 30 36 का साइज था उसका हाइट 5 फिट 5 इंच रंग एक दम गोरा उसकी चल इतनी मस्त थी जैसे कोई हेरोइन कैटवाक क्र रही हो गाओं में औरते सीधी चलती थी लेकिन अंजलि की चल में ऐसी नजाकत थी की गाओं के बूढ़े तो उसकी हिलती हुई गांड देख क्र hi झाड़ जाते थे, गाओं का शायद hi ऐसा कोई मर्द होगा जो अंजलि की चढ़ाई न करना चाहता हो गाओं में जवान होते लड़के जब पहेली मुठ मरते थे तो उनका लुंड सबसे पहले अंजलि को देख क्र hi खड़ा होता था जाने अंजलि की वजह से कितने मर्दो ने अपने जीवन का अनमोल रास नाली में बहा दिया था,

अंजलि के 6 बच्चे थे लेकिन कोई बोल hi नहीं सकता था की इस औरत की छूट से 6 बच्चे निकल चुके हैं,

जिसमे सबसे पहेली बेटी सीमा उफ्फ्फफ्फ्फ़ इसका नाम hi सीमा ह बस लेकिन इसकी सुंदरता की कोई सीमा नहीं ये बहुत hi काम उम्र में जवानी की तरफ बढ़ गई थी बिलकुल अपनी माँ पर गई ह साइज 34 28 36 था इसकी गांड इसका सबसे बड़ा आकर्षण ह इसकी चल भी कुछ अलग hi ह ये अपनी माँ को देख क्र hi सीखी ह लेकिन पूरी तरह अंजलि जैसी चल में नहीं चल पति कोशिश करती थी जिससे उसकी गांड बहुत होती थी गाओं में हर लड़का आदमी बूढ़ा इसे छोड़ना चाहता ह लेकिन इसने कभी किसी की तरफ नजर उठा क्र नहीं देखा

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दूसरी बेटी दीपा ये भी कमल की लड़की थी लेकिन इसका रंग अपनी माँ और बहन से थोड़ा सा सावला था नार्मल देखने में तो ये की काफी गोरी थी लेकिन अपनी माँ बहन जितनी नहीं साइज इसका 34 26 34 था कमल का फिगर थे लेकिन घर से बहार बहुत काम जाती थी मर्दो को इसे देखने के लिए तरसना पड़ता था

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तीसरी बेटी रूचि ये बहुत hi चंचल और नटखट थी पुरे गाओं में उछलती रहती थी इसे दोस्ती करना बहुत पसंद था इसे सवभाव इतना प्यारा था की हर कोई इससे प्यार से बात करता था इसका साइज 32 26 32 था सूंदर ये भी काफी थी लेकिन मर्दो की नजरो में ज्यादा नहीं आई है लड़के जरूर लाइन मरते रहते थे लेकिन ये इतनी भोली थी की इसे खेलने के अलावा किसी और चीज से मतलब hi नहीं था,

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फिर दो bête कपिल और सचिन ये दोनों जुड़वाँ थे आगे अभी काम थी लेकिन दोनों हमेशा साथ रहते गाओं के लड़के इन्हे अपने साथ नहीं खेलने देते इसलिए ये हमेशा एक साथ रहते

तीसरा बीटा तुषार ये बहुत सूंदर और लम्बा तगड़ा था अभी आगे काम थी ये भी अपने भाइयो के साथ hi रहता था ये 6 भें भाई हमेशा साथ रहते भेने अपने भाइयो का बहुत ख्याल रखती,

गाओं के सरकारी स्कूल में सभी ने पढाई की जो बस 10तह क्लास तक था अंजलि चाचती थी की बच्चे आगे पढ़े लेकिन राजेश मजदूरी करके इतना भी नहीं कमा पता था जिससे अपने परिवार को खाना भी ठीक से खिला सके, तो अंजलि ने ये बीड़ा अपने कंधे पैर उठाया और गाओं से 10 कम दूर क़स्बा था जहा कुछ प्राइवेट स्कूल थे जिनमे अंजलि ने पढ़ना शुरू क्र दिया था,

अंजलि एक पढ़ी लिखी औरत थी ये बात पुरे गाओं में सभी के लिए अचम्भे की थी की इतनी सूंदर पढ़ी लिखी औरत ने राजेश से शादी क्यों की, लेकिन जवाब कभी किसी को नहीं मिला बहुत लोगो ने राजेश से दोस्ती की ताकि पता चले लेकिन राजेश कभी इस बारे में बात नहीं करता गाओं की औरत अंजलि को भड़कती रहती उसके बारे में जानने के लिए की राजेश जैसे अनपढ़ से शादी क्यों की तू इतनी सूंदर ह तुझसे तो कोई भी मर्द पैसे वाला मर्द शादी क्र लेता लेकिन अंजलि भी कभी नहीं कुछ खेती,

गाओं के जमीदारो के परिवार के मर्द राजेश को अपने यहाँ मजदूरी पैर लगते जिससे उसकी पत्नी अंजलि के करीब जा सके लेकिन कभी मौका नहीं मिला अंजलि ने किसी को मौका नहीं दिया, गाओं की सबसे अच्छी बात ये थी की यहाँ किसी के साथ जबरदस्ती नहीं हो सकती थी, जमीदारो के परिवार अपने मान सम्मान के लिए कुछ भी क्र सकते थे, है पैसा कामना और जमीन पैर कब्ज़ा करने में लगे रहते जो गाओं की औरत पैट जाती उसे छोड़ लेते लेकिन चुप क्र क्योकि वो गाओं में लोगो को बेवकूफ तो बनाते थे लेकिन गुंडागर्दी नहीं करते थे, उसका एक सब बड़ा कारन जमीदारो के परिवार की सबसे बड़ी मुखिया चंद्रो देवी थी जो काफी मजबूत औरत थी पूरा गाओं उनका सम्मान करता था,

जब से वो मुखिया बानी थी जमीदारो ने जमीनों पैर कब्ज़ा करना बंद क्र दिया था वो जमीन खरीदने की कोशिश करते बस न किसी पैर जुलम करते न किसी का हक़ मरते लेकिन जिसका हक़ पहले मर चुके थे उसे वापस भी नहीं किया कभी गाओं की औरतो को छोड़ना कहते थे लेकिन जबरदस्ती नहीं जो अपनी मर्जी से आये उसे पता क्र छोड़ते,

वापस कहानी पैर आते हैं,

अंजलि पद्धति तो गाओं के बच्चे भी उसके पास टूशन पढ़ने लगे, जिससे वो बच्चो की फीस का इंतजाम क्र लेती तीनो लड़किया कसबे में पढ़ने जाने लगी लड़के गाओं में hi पढ़ रहे थे, फिर जल्दी hi सीमा ने जिम्मेदारी सम्हालनी शुरू क्र दी लेकिन उसके शोक बड़े ुचे थे वो हमेसा पैसो की दुनिया जीना चाहती थी लेकिन इस गरीबी में कैसे करती,

फिर दीपा ने भी बच्चो को पढ़ना शुरू क्र दिया अपने कॉलेज भी जाती और बच्चो को भी पद्धति दोनों बहेनो ने मिलकर अपने भाइयो की पढाई का खर्चा उठा लिया था, क्योकि अंजलि ने सोच रखा था की लड़को को इतना पढ़ाएगी ताकि वो आगे गरीबी न देखे और लड़कियों को भी इतना पढ़ाएगी की जिससे शादी हो कोई अच्छा परिवार मिल जाये वर्ण अपने लायक हो जाये,

तो अभी लड़के पढ़ रहे हैं तब तक बेटियों से कहानी की शुरुआत करते हैं,

बात तब की ह जब सीमा की आगे 18 की थी तीनो बहन कसबे में पढ़ने जाती थी सीमा बा क्र रही थी दीपा 12तह में थी और रूचि 11तह में , दीपा और रूचि एक hi स्कूल में थी सीमा उसके पास कॉलेज में, यहाँ तीनो के काफी दोस्त थे गाओं में जरूर ये गरीब थे लेकिन यहाँ इन्होने कभी अहसास नहीं होने दिया की वो लोग कितने गरीब हैं अंजलि ने हमेशा उन्हें अच्छे कपडे पहनाये अच्छे तरीके से जीना सिखाया लड़किया जल्दी सब सिख भी गई, स्च्होल कॉलेज के सभी लड़के उनके पीछे पागल थे जषायद hi कोई बचा होगा जिसने इन्हे परपोज़ न किया हो जॉब अच् गए वो कोशिश में थे लेकिन इन्होने किसी को घास नहीं डाली,

जब भी इन्हे कोई परपोज़ करता ये सबसे पहले अंजलि को आकर बताते अंजलि इन्हे समझा देती की लड़को की आदत ह वो ऐसा करेंगे तुम अपने मन की सुन्ना वो कभी इन्हे दबाने की या रोकने की कोशिश नहीं करती वो बस इतना बोलती जो भी फैसला लेना अपने दिल और दिमाग से सोच क्र लेना मैं हमेशा तुम्हे साथ हु, माँ की बातो से तीनो बेटियों की हिम्मत हमेशा बढ़ी रहती और वो हमेशा सही गलत सोच क्र hi काम करती लेकिन ये जवानी ये किसी को कुछ सही करने देंगी तभी तो कोई कुछ सही क्र पायेगा,

बस यही असर हुआ सीमा पैर उसकी जवानी उसके अंडर भूचाल ला रही थी, कॉलेज के काफी लड़को से उसकी दोस्ती थी जिनसे हसी मजाक चलता रहता था उसकी एक खास शैली मेघा थी जो हमेशा सीमा के साथ रहती थी मेघा का एक बर्फ भी था जो उसे घूमता फिरता गिफ्ट्स दिलाता दोनों के बिच चुदाई भी हो चुकी थी इसे मेघा जानती थी जानती क्या थी जब उनकी चुदाई हुई तो पहरेदारी सीमा ने hi की थी, मेघा की चुदाई उसके घर में hi हुई थी उसका घर कसबे में hi था तो सीमा उसके घर जाती रहती थी पहेली चुदाई के बाद मेघा और खुल गई और अपने और अपने बर्फ अमित के किस्से सीमा को सुनती रहती थी,

सीमा के अंदर तो वैसे hi बहुत गर्मी थी ये गर्मी क्यों थी कहा से आई क्योकि उसके दिमाग में पूरा टाइम बस सेक्स सेक्स और सेक्स hi घूमता रहता था ो खुद को कैसे रोकती थी ये तो बस वही जाने, अब उसकी दोस्त भी मेघा जैसी बन गई थी जो लड़को के साथ घूमती डबल मीनिंग बाते करती रहती सीमा भी उसके साथ मजे करती थी, सीमा ने गाओं में कभी टीवी नहीं देखा था लेकिन मेघा के घर उसे टीवी देखने को मिला जिससे उसके सपनो को और बढ़ावा मिल गया, फिल्मो की दुनिया देख क्र उसका दिल हमेशा वही जिंदगी जीने को करता था

अब सीमा काफी बोल्ड और फ्रैंक हो चुकी थी लड़को के साथ डबल मीनिंग मजाक उसके लिए काफी नार्मल बात थी और ऐसा नहीं की वो बस कॉलेज में hi ऐसा करती उसके घर में अपनी माँ से अपनी बहेनो और भाइयो से भी ऐसा मजाक क्र लेती थी बस पिता राजेश से नहीं राजेश तो वैसे भी दिन भर बहार hi रहता

अंजलि का घर गाओं से बहार था जो कच्ची मिटटी का बना हुआ था जिसमे दो कमरे थे बने थे एक जिसमे उनका सामान रखा था उसी में सब सोते थे दूसरे में रसोई का सामान रखा था और अग्गे घास फुस का छप्पर डाला हुआ था, नहाने के लिए या तो सभी नदी में जाकर नहाते या घर के बहार एक कपडा टेंगा हुआ थे राशि पैर जिसे चारो तरफ से कवर क्र देते, गाओं के आने जाने वाले बस मौका देखते की कही अंजलि या उसकी बेटी नहाती हुई दिख जाये,

लेकिन अंजलि हमेशा टाइम से पहले उठ क्र नाहा लेती थी और तीनो बेतिया भी वैसा hi करती वो गाओं में किसी के भी उठने से पहले नाहा धोकर अपना काम निपटा लेती चारो एक दूसरे के सामने hi कपडे बदल लेती यहाँ तक की नंगी भी हो जाती अंजलि के खुले सवभाव की वजह से तीनो बेतिया भी खुल गई वो एक दूसरे के अंगो के बारे में खुल क्र बात क्र लेती थी,

इतना hi नहीं तीनो bêto के सामने भी अंजलि को कपडे बदलने में कोई ऐतराज नहीं होता था बस नंगी नहीं होती थी, तीनो भेने भी कपडे बदल hi लेती थी,



पूरा परिवार बड़ी ख़ुशी से रहता था जहा सीमा की छूट दिन भर लुंड मांगती रहती थी वही दीपा थोड़ी शर्मीली थी उसकी दोस्ती तो थी लेकिन बोलती काम थी जवानी उसे भी पूरी आ चुकी थी सीमा और दीपा एक दूसरे से सब कुछ बताती सीमा मेघा और उसके बर्फ के साथ घूम घूम क्र छूट लुंड जैसे शब्द बोलने लगी थी जो उसने दीपा को भी सीखा दिए लेकिन दीपा शर्माती थी,

कॉलेज में मेघा का जन्मदिवस था तो उसके बर्फ ने उसे बहुत से गिफ्ट दिए उसने मेघा को एक मोबाइल दिया




सीमा- यार तेरे तो मजे हैं तेरा बर्फ हमेशा तुझे कुछ न कुछ देता रहता ह

मेघा- तो तू भी बना ले कोई आमिर बर्फ मुझे क्यों नजर लगा रही ह

सीमा- यार मुझे दर लगता ह

मेघा- अरे इसमें डरने वाली क्या बात ह तेरे सूंदर लड़की पुरे कॉलेज में नहीं ह सरे लड़के तुझे देखते hi अपने लुंड से सोचने लगते हैं तू बस है कर दे फिर देखना कैसे गिफ्टों की लाइन लगती ह

सीमा- यार अगर गिफ्ट्स का पता मम्मी को चल गया तो क्या होगा

मेघा- कुछ पता नहीं चलता मुझे देख मेरा कब से बर्फ ह आज तक किसी को पता चला

सीमा- अच्छा मेरी छोड़ तू बता आज तो वो तेरी जुरूर लेगा इतना महंगा मोबाइल जो दिया ह

मेघा- है आज उसने मुझे अपने दोस्त के घर बुलाया ह बोल रहा था अहा कोई नहीं होगा टब hi चल मेरे साथ

सीमा- मैं क्या करुँगी वह तू मजे लेगी और मैं अपनी छूट रगडूंगी

मेघा- अरे उसका दोस्त होगा उसके साथ मजे ले लेना

सीमा- चुप रह कामिनी तू hi चुद मैं ऐसे hi किसी के निचे नहीं आने वाली

मेघा- कब तक बचाएगी अपनी इस मुनिया को ऐसा न हो कोई फ्री में hi थोक जाये

तभी उसका बर्फ आ गया मेघा सीमा को bye बोल क्र निकल गई, सीमा सोच में दुब गई यार इसके कितने मजे हैं ये तो सब कुछ करती ह चुदाई भी करवाती ह गिफ्ट भी लेती ह एक मैं हु न छूट की प्यास बुझती ह न hi जेब की,




(आज शरुआत की ह तो यही तक पोस्ट क्र रही हु अगला part परसो आ जायेगा इसी टाइम)
 
अपडेट- 2



वही गाओं में एक उम्र दर्ज औरत जो लगभग 80 साल के आस पास होगी अंजलि के घर आई, जिसे देख क्र अंजलि ने तुरंत उसके पेअर चुने के लिए आगे आ गई

अंजलि- कैसे हो सरला काकी आज मेरी याद कैसे आ गई

सरला काकी- शर्म नहीं आ रही तुझे मुझसे पूछ रही ह खुद कभी नहीं आती मुझसे मिलने मैं इस उम्र भी तेरे पास आ जाती हूत ु ह की कभी भूल से भी उदार नहीं आती

अंजलि- काकी आप को तो सब पता hi ह मैं गाओं के अंदर जाना नहीं चाहती

काकी- है जानती हु अच्छा ये बता बच्चे कैसे हैं और राजेश ठीक ह खुश तो रहता ह न

अंजलि- काकी उनकी ख़ुशी तो उनके पैदा होने से hi ख़तम हो गई थी और जब माँ बाप चले गए उसके बाद तो ख़ुशी जैसा शब्द उन्होंने सुना hi नहीं, बीएस जैसे तैसे खुद को बिजी रखते हैं

काकी- इसमें उसकी गलती नहीं ह उसके साथ इतना कुछ हुआ ह की कोई भी इंसान बर्दास्त नहीं क्र पायेगा ये तो तू थी तेरी वजह से आज वो एक सकूं की जिंदगी जी रहा ह

अंजलि- छोड़ो काकी आप भी क्या बात लेकर बैठ गई अपनी बताओ कैसे आना हुआ

काकी- अरे वो बड़ी मैक्लीन ने तुझे बुलवाया ह बोल रही थी काफी दिनों से मुलाकात नहीं हुई

अंजलि- ठीक ह काकी मैं मिल आउंगी ये बताइये क्या लेंगी आप

काकी- कुछ नहीं मेरी बच्ची अब चलती हु

अंजलि ने फिर सरला काकी के पेअर छुए तभी बहार से तुषार आ गया

काकी- कैसा ह मेरा बचा

तुषार- ठीक हु काकी

सरला तुषार के सर पैर हाथ फिरती हुई बहार चली गई

तुषार अंजलि से- माँ तू सरला काकी के पेअर क्यों चुटी ह गाओं में कोई उन्हें अपने घर में भी नहीं घुसता तू उन्हें घर में बुलाती ह और पेअर भी छूटे ह

अंजलि- बीटा काकी हमसे बहुत बड़ी ह और बड़ो का आशीर्वाद लेना चाहिए

तुषार- लेकिन गाओं वाले तो नहीं करते

अंजलि- गाओं वाले उन्हें नीच मानते हैं पैर हम गाओं वालो से अलग ह गाओं वाले तो हम लोगो से भी ठीक से बात नहीं करते हम लोगो को रोज सम्मान के लिए लड़ना पड़ता ह

तुषार- माँ ऐसा क्यों होता ह हमारे साथ हमारे खंडन के लोग भी हमे सम्मान नहीं देते

अंजलि- गरीबी बीटा गरीबी तेरे पापा बहुत सीधे और भोले हैं इसलिए पैसे hi दौड़ भाग से दूर रहे लेकिन गरीबी भोले इंसाने को बर्बाद क्र देती ह और गाओं वालो की सोच पैर मत जाया क्र, सरला काकी का सम्मान किया ह ये दे का काम करती ह पुरे गाओं की औरतो को ये hi बच्चा पैदा करवाती ह तब तो पूरा गाओं इन्हे घर में घुसने देता ह और जैसे hi काम ख़तम होता ह अनाज देकर भेज देते हैं फिर अपने बच्चो को हाथ भी नहीं लगाने देते, इन्होने hi तुम सभी भाई बहेनो को पैदा करवाया था और तेरे पापा को भी इन्होने hi पैदा करवाया था तो ये कैसे नीच हुई इनसे ज्यादा सम्मान तो किसी का नहीं हो सकता

तुषार- माफ़ करना माँ मुझसे गलती हो गई मैं आगे से ख्याल रखूँगा उनका सम्मान न गिरे

तुषार पुरे घर में सबसे अलग था बहुत शांत सभी चीजों को बड़े धयान से सुनता था दिमाग भी बहुत तेज था हमेशा क्लास में फर्स्ट आता था बस अनजलि को उसकी hi ज्यादा चिंता था अंजलि को पता था ये बहुत कामयाब होगा लेकिन भावुक बहुत था कही जीवन में ऐसा मोड़ न आ जाये की इसकी भावनाये इसे कमजोर क्र दे,

उधर रस्ते में तीनो बहन पैदल hi अपने घर आ रही थी और उनके पीछे पड़ोस के गाओं के कुछ लड़के बड़ी जोर जोर से हसी मजाक करते हुए आ रहे थे, हसीमाजक क्या वो सब उन तीनो पैर कमैंट्स पास करते हुए आ रहे थे, जिससे तीनो hi बहेनो का अलग अलग रिएक्शन था जिसमे सीमा उनके कमैंट्स सुन क्र एक्सीटेंड हो रही थी उसकी छूट गीली हो रही थी वही दीपा दर रही थी और शर्मा भी रही थी वही रूचि गुस्सा दिखा रही थी,

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तीनो घर आ गयी घर में घुसते hi अंजलि ने तीनो का मूड अध् लिया था जिसमे सीमा बड़ी खुश सी थी दीपा हमेशा की तरह शांत लेकिन रूचि अभी भी गुस्से में थी

अंजलि- तुझे क्या हुआ ऐसे क्यों मुँह चढ़ा क्र आई ह

रूचि- कुछ नहीं माँ बस वो पड़ोस गाओं के लड़के रस्ते भर पीछा करते हैं और पता नहीं क्या क्या बोलते हैं

सीमा - कुछ नहीं माँ ये तो ऐसे hi गुस्सा करती ह ऐसा कुछ नहीं लड़को की तो आदत होती ह कुछ न कुछ बोलने की

दीपा- माँ लड़के कुछ भो बोले हमे क्या करना ह

अंजलि मुस्कुराई और बोली देखो तुम लड़किया हो इसलिए चुप होकर डार्क र घर आ जाओगी लड़के तो बोलते hi ह उन्हें इग्नोर क्र देना चाहिए ये सब बाते तुम लोगो के दिमाग में नहीं आणि चाहिए

अंजलि- मैंने तुम्हे इतना मजबूत बनाया ह किसी का भी जवाब उसके मुँह पैर दे आओ, लड़के तुम्हे कुछ बोल रहे हैं और तुम्हे उनके शब्दों से कोई ऐतराज नहीं ह या तुम्हे अच्छे लग रहे हैं तो कोई प्रॉब्लम नहीं ह लेकिन अगर तुम्हे वो बाते पसंद नहीं आ रही तो तुरंत उसका जवाब दो जिससे सामने वाले को मौका hi न मिले आगे बढ़ने का

दीपा- लेकिन अगर हम उनसे लड़ेंगे और उन्होंने कुछ क्र दिया तो

अंजलि- क्या कर सकते हैं वो तुम्हारे साथ जान से तो नहीं मार सकते न

दीपा- माँ वो छेद चढ़ कर सकते हैं

अंजलि- देख बीटा जिस दिन तुम लोगो ने ये सोच लिया तुम्हारे पास बहुत कीमती चीज ह तुम्हारी इजात उसे छुपा क्र रखोगी अब्चा क्र रखोगी तो तुम कभी इस दुनिया के सामने अपनी नजर नहीं उठा पाओगी क्योकि पूरी दुनिया तुम्हारी उसी इज्जत को लूटना चाहती ह

रूचि- तो क्या करे माँ

अंजलि- अपनी इज्जत को सम्हाल क्र रखो बस डरा क्र मत रखो क्योकि इस इज्जत को एक न एक दिन कोई जरूर ले लेगा चाहे शादी के बाद इसलिए खुल क्र जियो अउ रेज मूड मत ख़राब किया करो अपनी भें सीमा को देखो वो कितनी खुश नजर आ रही ह उन लड़को की बाते सुन क्र इससे तो शायद अच्छी लगी होगी

सीमा- नहीं माँ मैं तो बीएस आपकी बात सुन रही थी

रूचि- है माँ दीदी तो वह भी मुस्कुरा रही थी कोई हमारे प्राइवेट पार्ट्स के बारे में बोल रहा था और ये खुश हो रही थी

सीमा- मैं कब खुश हो रही थी बकवास क्र रही ह माँ ये

रूचि- अच्छा माँ दीपा से पूछ लो

अंजलि- अच्छा लड़ो नहीं कोई बात नहीं अगर वॉक हश हो रही ह तो अपने शरीर की टैरिफ सुन्ना सबको पसंद होता ह, वैसे क्या बोल रहे थे वो

रूचि- वो बोल रहे थे देख इसकी गए…..

तभी कपिल और सचिन अंदर आ गए रुचे चुप गई

कपिल- माँ भूक लग रही ह

कुछ देर बाद तुषार भी आ गया फिर अंजलि ने सबको कहा जाओ हाथ मुँह धो क्र आओ और कपडे बदलो मैं खाना लगाती हु, फिर सभी को खाना दिया और सभी एक निचे बैठ क्र खाना खा रहे थे जिसे देख क्र अंजलि बहुत खुश हो रही थी,

फिर शाम को अंजलि जमीदारो के घर चली गई बड़ी मालकिन से मिलने, गाओं का कोई भी ऐसे hi उनसे नहीं मिल सकता था लेकिन अंजलि को खुली छूट थी घर के अंदर आने की

अंजलि सीधे उनके रूम में पहुंची और जाकर चंद्रो देवी के पेअर छुए

अंजलि- कैसी हो अम्मा

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चंद्रो देवी- बिना बुलाये भी मिलने आ जाया क्र कभी

अंजलि- अम्मा समय hi नहीं मिलता बच्चे बड़े हो रहे हैं उनकी पढाई की वजह से काम भी ज्यादा करना पड़ता ह

चंद्रो देवी- तुझसे कितनी बार कहा ह मुझसे कुछ पैसे ले लिया क्र बच्चो को पढ़ने के लिए

अंजलि- अम्मा आपको क्या लगता ह मैं उन्हें पाल नहीं पाऊँगी

चंद्रो देवी- मुझे बस तुझ पैर hi यकीन ह तू hi उन्हें पाल सकती ह, अच्छा राजेश ठीक ह

अंजलि- है अम्मा वो ठीक हैं लेकिन उन्हें इतना काम करते देख क्र बड़ा दुःख होता ह

चंद्रो देवी- क्या क्र बीटा उसका आत्मसम्मान बहुत जरुरी ह वो किसी से मॉडल लेगा नहीं और मैं भी उसे फिर कोई दर्द में जाते नहीं देख सकती

अंजलि- आप चिंता मत करो अम्मा सब ठीक हो जायेगा

चंद्रो देवी- कैसे ठीक होगा इस गरीबी में 6 बच्चे हैं और लड़कियों क शादी कैसे करेगी

अंजलि- मैं उन्हें इतना पढ़ाऊंगी की कोई रिश्ते वाला उनकी पढाई देख क्र hi ले जाये

चंद्रो देवी- बहुत हिम्मत ह तुझ में तेरे जैसे मैं आज तक कोई नहीं देखि तेरे माँ बाप भी बहुत अचे होंगे,

तूने कभी अपने परिवार के बारे में कुछ नहीं बताया कोण ह कहा ह कहा से आई ह तू,

अंजलि- अम्मा क्या करोगी जान क्र कुछ बाते छुपी hi रहे तो अच्छा ह और मेरे लिए ज्यादा अच्छा ह

चंद्रो देवी- मैं नहीं पूछँगी लेकिन बस मन में आ जाता ह कभी कभी, अच्छा सुन अजय आने वाला ह लंदन से 3 दिन बाद टाइम मिले तो आकर मिल लेना

अंजलि अजय का नाम सुन क्र चंद्रो देवी की तरफ देखने लगी उसकी आँखों में एक अलग hi चमक थी लेकिन अगले hi पल वो चमक गायब हो गई और एक ख़ामोशी आ गई

अंजलि- अम्मा अब क्यों बहुत टाइम बीत गया ह अब नहीं

चंद्रो देवी- मैं तुझे जबरदस्ती नहीं क्र रही तेरा मन हो तो आ जाना वैसे भी वो आते hi तुझसे मिलने hi भागेगा पैर मैं नहीं चाहती वो तेरे घर जाये

अंजलि- अम्मा मैं अब दूर रहना चाहती हु

चंद्रो देवी- ठीक ह तेरी मर्जी

अंजलि- अम्मा अब मैं चलती हु अँधेरा होने वाला ह

फिर अंजलि वह से घर आ गई, पुरे रस्ते वो बस अजय के बारे में hi सोचती हुई आ रही थी उसे डार्ट है कही अजय से सामना होगा तो क्या होगा क्या वाओ अहा जाकर बदल गया होगा या नहीं उसकी शादी भी हो गई ह श्यादा अब वो ठीक हो गया हो, फिर उसने अपने सर को झटका और अपनी विचारो को शांत किया,

शाम को पूरा परिवार एक 100 वाट के बल्ब के निचे चादर बिछा क्र खिचड़ी से भारा पतीला बिच में रख क्र बैठे थे जिसमे से अंजलि ने सभी को पिले चावलों की खिचड़ी (कुछ लोग उसे तहरी भी बोलते हैं वैसे) परोस दी, पुरे गाओं में ये सब्सि खास बात थी इस परिवार की दिन में कोई कही भी होगा स्कूल कॉलेज या काम पैर लेकिन रात के खाने पैर पूरा परिवार एक साथ hi बैठेगा अगर घर में एक भी सदश्य नहीं होता तो सभी इंतजार करते हैं और एक साथ hi खाना कहते हैं,

राजेश अपने परिवार को देख क्र खुश होता रहता था रात को खान ेके टाइम सभी अपनी अपनी दिन चरिया सुनते बस लड़कियों वाली बाते अंजलि तक hi होती, फिर राजेश बोलै- बालको एक बात पूछनी थी तुम सब से

सभी ने राजेश की तरफ देखा अंजलि ने भी थोड़ा सुर्प्रीस्ली,

राजेश- वो हमारे चन्दन चौदर्य हैं न कसबे वाले जिनके यहाँ मैं काम करने जाता हु उनकी एक भैंस दूध काम दे रही ह आज कल वो उसे कसईओ को देने वाले थे तो मैंने उनसे वो भैंस अपने लिए मांग ली ह वैसे तो वो बूढी हो चुकी ह लेकि हम उसकी अच्छी खावै करेंगे तो 1 या 2 किलो दूध तो दे दी देगी अगर तुम सब कहो तो ले औ,

सभी ने एक साथ है बोलै क्योकि किसी भी बच्चे ने आज तक माँ के अलावा दूध नहीं पिया था, बचो की बात सुन क्र राजेश बहुत खुश हुआ वो ख़ुशी उसके फेस पैर अलग hi दिख रही थी चाहे 1 किलो hi सही पैर उसने अपने बच्चो के लिए दूध का इंतजाम तो किया,

अंजलि- आप जॉब hi करते हैं उसमे आपको झिझकने की जरुरत नहीं ह और आपको अच्छा लगता ह तो ले आइये हमसे पूछने की जौरात नहीं बस बता दिया वही काफी ह,

राजेश- नहीं बच्चे बड़े हो गए हैं और समझदार भी तो उनसे पूछना जरुरी ह,

अंजलि- आप कभी गलत नहीं करते, अच्छा ये तो बताओ उसे रखेंगे कहा

सचिन- माँ बहार जगह ह न वही रख लेंगे

अंजलि- और रात में तब कह ारखेंगे और जब हम सब अपने अपने काम पैर चले जायेंगे तब क्या करेंगे,

राजेश- है ये तो मैंने सोचा hi नहीं

राजेश थोड़ा दुखी हो गया और बोलै चलो फिर मैं मन क्र देता हु

राजेश माँ मन उतर गया और और बच्चे भी दुखी हो गए तो अंजलि बोली आप ले आओ मैं इंतजाम क्र दूंगी कल आप उसे ले आना और कल बच्चो सब जल्दी आ जाना अपनी अपनी भैंस का अच्छे से वेलकम कर्नेगे सब खुश हो गए,

फिर सभी सोने चले गए इनके घर में सब बहुत जल्दी सो जाते हैं क्योकि अंजलि सभी बच्चो को 3 बजे उठा देती ह पहले जंगल पानी करवा क्र लती ह फिर नियम से सभी को योग और एक्सरसाइज करवाती अंजलि सभी योग और घरेलू एक्सरसाइज में परफेक्ट थी कैसे ये किसी को नहीं पता बच्चो ने काफी बार जानने की कोशिश की लेकिन अंजलि हमेशा बात को घुमा देती,

इस योग का hi परिणाम था जो तीनो लड़किया इतना सेक्सी फिगर बनाया हुआ था तीनो लड़के भी काम आगे में तगड़े शरीर के मालिक थे,

तो वापस आते हैं सरे बच्चे अंदर सो गए अंजलि और राजेश बहार खुले आसमान के निचे एक चारपाई पैर बैठे थे,

अंजलि- आज सरला काकी आई थी मिलने

राजेश- क्यों क्या हु असब ठीक तो ह न

अंजलि- है ठीक ह अम्मा ने बुलवा भिजवाया था

राजेश- कुछ कहे रहे थी क्या कही उन्होंने किसी को कुछ

अंजलि- नहीं नहीं आप परेशां न हो उन्होंने कुछ नहीं कहा बस हल चल पूछने के लिए बुलाया था

राजेश- ाचा ाचा

अंजलि- और वो अजय आ रहा ह लंदन से कुछ दिनों बाद

राजेश- अब क्यों आ रहा ह वो

अंजलि- अपने परिवार के साथ आ रहा ह

राजेश- तुम कहो तो हम लोग कुछ दिन के लिए कही चले जाये

अंजलि- हहहहह आप क्यों चिंता क्र रहे हो मैं हु न मैं सब सम्हाल लुंगी

फिर दोनों वही एक साथ लेट गए एक छोटी सी चारपाई पैर राजेश और अंजलि एक दूसरे से चिपक क्र लेट गए थे, जिससे अंजलि की विशाल चूचिया राजेश की पीठ पैर मस्सग का काम क्र रही थी थोड़े hi देर में राजेश को नींद आ गई लेकिन अंजलि जाग रही थी और कुछ बहुत hi घेरि सोच में थी,

अगली सुबह सभी अपनी दिनचर्या के हिसाब से अपने अपनी मजिल की तरफ निकल गए, अंजलि सभी के अंदर एक ऐसी एनर्जी भर क्र भेजती थी की सरे बच्चे हमेशा खुश रहते,

तीनो बहन जा रही थी आज उन्हें घोडा टेंगा मिल गया था आप सब घोडा टेंगा तो जानते hi होंगे आज के टाइम में बड़ी मुश्किल से देखने को मिलते हैं लेकिन इस गाओं में ये hi कसबे में जाने का साधन था, गाड़िया बस जमीदारो के पास थी कुछ लोगो ने बाइक खरीद राखी थी गाओं में घोडा टेंगा भी बस दो थे जो कभी टाइम पैर मिल जाते कभी नहीं,

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तो तीनो बहन टंगे में बैठ गई काफी भीड़ थी, भीड़ का फायदा उठाते हुए एक अधेड़ उम्र के आदमी ने दीपा की जांघ पैर हाथ फिर दिया, दीपा बेचारी डार्क र पीछे खिसक गई, जिसे रूचि ने ऑब्सेर्वे क्र लिया, उस आदमी ने जब दुबारा हाथ दीपा की जांघ पैर रखा तो रूचि ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसकी उंगलिया मोड़ दी, और इतनी जोर से मोदी की उसकी उंगली टूट गई, वो बहुत जोर से चिलाय आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मर दिया भें की लोदी ने अह्ह्ह्हह्हह में उंगली

टेंगा रुक गया और वह बवाल शुरू हो गया कोई कुछ समझ नहीं पाया क्या हुआ क्योकि वो आदमी कुछ बताने की हालत में नहीं था ो दर्द में चिलए जार है था और रूचि और दीपा कुछ बोल नहीं रही थी, तभी एक बाइक वह से गुजरी तो लोगो ने उस आदमी को बाइक पैर बैठा क्र भेज दिया डॉ. के पास, फिर लोग तीनो लड़कियों को बाइज्जत करने लगे

तुम लड़कियों को शर्म हाय ह या नहीं इतने बड़े आदमी की उंगली तोड़ दी,

रूचि- उसने हरकत hi ऐसी किट hi

एक औरत – देखो कैसी बोल रही ह खुद तो घर के बहार घूमती रहती ह और यहाँ ज्ञान दे रही ह

रूचि- ज्ञान नहीं दे रही मेरा बस चलता तो हाथ काट देती

आदमी- अपनी माँ पैर गई ह इनकी माँ ने hi इन्हे इतना बोलना सिखाया ह जवान हो गई ह फिर भी इन्हे घर से दूर अकेले भेज देती ह लोगो किन अजर तो ख़राब होगी ह

सीमा- अपनी बेटी पैर करो न नजर ख़राब और ख़बरदार जो मेरी माँ को कुछ कहा तो, चलो यहाँ से ऐसे लोगो के मुँह नहीं लगते

फिर वो तीनि अपने अपने स्कूल चली गई,

शाम को जब सब घर वापस आये तो एक आदमी घर आया और उसने पचायत का आदेश सुनाया की पुरे परिवार को 1 हरष बाद पंचायत में आना ह, पूरा परिवार घबराहट होने लगी अंजलि को कुछ समझ नहीं आया तो उसने बचो की तरफ देखा तीनो लड़कियों के फेस दर से पिले पद चुके थे, अंजलि समझ गई कुछ हुआ ह

अंजलि- क्या हुआ बचो कोई प्रॉब्लम हुई ह क्या किसी ने कुछ कहा तुम्हे

(अंजलि अपने बच्चो पैर पूरा भरोसा करती थी उसे पता था उसके बच्चे कोई गलती नहीं करेंगे)

सीमा- माँ आज सुबह टंगे में जाते हुए एक आदमी ने दीपा को परेशां किया तो रूचि ने उसकी उंगली तोड़ दी,

अंजलि- क्या किया उसने

सीमा- वो मैं उसने

अंजलि- बोल शर्मा मत ये तेरे भाई ह मैंने तुम्हे शर्माना नहीं सिखाया और भाइयो के सामने तो बिलकुल नहीं बोल क्या हुआ

रूचि- मैं बताती हु माँ, उस आदमी ने दीपा की जांघ पैर हाथ फिराया दीपा घबरा गई जब उसने दूसरी बार हाथ घुमाया तो मैं उसका हाथ पकड़ लिया और उसकी उंगली मेरे हाथ में आ गई और मैंने इतनी जोर से मरोड़ दी की कमीने की उंगली hi टूट गई,

रुचे की बात सुनकर तीनो भाइयो ने उसे गले से लगा लिया और बोले वह दीदी वह तू सच में डरा सिंह की चली ह सही किया

अंजलि- शाबाश बीटा तूने मेरा सर गर्व से ुचा क्र दिया, तुम दोनों सिख लो कुछ इससे जो गलत के सामने झुकता ह दुनिया उसकी झुका क्र मर लेती ह

अंजलि की बात पैर सभी की हसी निकल गई

अंजलि- ये हसने की बात नहीं ह तुम सभी समझ लो जीवन में गलत के सामने कभी मत झुकना बाकि मैं तुम्हारे पीछे खड़ी हु चलो पंचायत आज देखती हु किसकी माँ ने मर्द पैदा क्र दिया यहाँ,

दीपा- माँ पापा को तो आने दे

अंजलि- तेरे पापा को इस सब से दूर रखो मैं उन्हें कोई टेंशन नहीं देना चाहती वो वैसे भी पूरा दिन काम में बिजी रहते हैं ऐसी प्रॉब्लम मैं खुद देख लुंगी चलो मेरे साथ

थोड़ी देर में सब पंचायत में खड़े थे और वो सभी लोग भी वही थे जो टंगे में उस टाइम थे, और वो आदमी भी था जिसकी उंगली टोटी थी उसने अपना रोना शुरू क्र दिया

आदमी( भूरा ) – पांचो इस लड़की ने मेरी उंगली तोड़ दी, इसे सजा मिलनी छाइये

अंजलि- क्यों तोड़ी ये नहीं बताओगे भूरा चाचा

भूरा- तेरी लड़किया बत्तमीज हैं बड़े छोटे की शर्म नहीं ह इन्हे

अंजलि- ख़बरदार चाचा अगर मेरी बछीटेरे पापा को इस सब से दूर रखो मैं उन्हें कोई टेंशन नहीं देना चाहती वो वैसे भी पूरा दिन काम में बिजी रहते हैं ऐसी प्रॉब्लम मैं खुद देख लुंगी चलो मेरे साथ

थोड़ी देर में सब पंचायत में खड़े थे और वो सभी लोग भी वही थे जो टंगे में उस टाइम थे, और वो आदमी भी था जिसकी उंगली टोटी थी उसने अपना रोना शुरू क्र दिया

आदमी( भूरा ) – पांचो इस लड़की ने मेरी उंगली तोड़ दी, इसे सजा मिलनी छाइये

अंजलि- क्यों तोड़ी ये नहीं बताओगे भूरा चाचा

भूरा- तेरी लड़किया बत्तमीज हैं बड़े छोटे की शर्म नहीं ह इन्हे

अंजलि- ख़बरदार चाचा अगर मेरी बच्चियों के बारे में कुछ बोलै तो



भूरा- देख रहे हो पांचो इस अंजलि की जबान कैसी चल रही ह गाओं की बहु होकर कितनी बोल रही ह इसे शर्म ह hi नहीं न ये पर्दा करती ह न hi कोई शर्म करती ह राजेश बेचारा दिन भर काम करता ह ये पता नहीं कह अकहा गुलछर्रे उड़ाती ह

भूरा की बात सुनकर तुषार को इतना गुस्सा आ गया की उसने भूरा की गरदन पकड़ क्र जमीन से ऊपर उठा लिया और बोलै भें के लोडे तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी माँ को ऐसा बोलने की तुझे मैं जान से मर दूंगा




तभी लोगो ने भाग क्र भूरा को छुड़वाया,

पंचायत के सदाशय- ऐ लड़के तेरी हिम्मत कैसे हुई पंचायत में भूरा पैर हाथ उठाने की तुझे सजा मिलेगी

अंजलि- क्यों सजा मिलेगी क्या गलती की ह क्या अपनी इज्जत के लिए बोलना लड़ना गलत ह

इस भूरा ने टंगे में मेरी बेटी को गलत जगह छुआ तो मेरी बेटी ने उंगली तोड़ दी और भरी पंचायत में इसने मेरी बजती की तो मेरे bête ने उसे सबक सिखाया ये गलत कैसे ह

भूरा- मैं नहीं वो गलती से हाथ लग गया था टंगे में इतनी भीड़ थी और जब जवान लड़किया गाओं से बहार जाएँगी तो मर्दो किन अजर तो पड़ेगी hi क्यों भेजती ह िंह ेगाओं से बहार

अंजलि- तुम सब की तरह घर में दबा क्र रख लू जैसे तुम सबने अपनी बेटियों को आगे नहीं पढ़ने दिया मेरी बेतिया पढेंगी और अपनी जिंदगी जियेंगी, ख़बरदार जो मेरी बेटियों को कुछ कहा तो और है अगर किसी में डैम हो तो मेरी बेटी की तरफ आँख उठा क्र तो देखो गंगा मैया की कसम बिच में फाड् क्र रख दूंगी,

भूरा- देखा पांचो कितनी जलील औरत ह ये इसे तो पंचायत में बोलने की तमीज hi नहीं ह

तभी पीछे से आवाज आई तुझे तमीज ह तू क्या बोल रहा ह वो गाओं की बहु ह ये गाओं की बेतिया ह जिनके बारे में तू ये सब बकवास क्र रहा ह,

ये आवाज सुनते hi पूरी पंचायत कड़ी हो गई क्योकि ये आवाज थी चंद्रो देवी की,

भूरा- आप नहीं जानती ये क्या बोल रही थी

चंद्रो देवी- चुप रह मुझे मत सीखा कोण क्या बोल रहा था, अंजलि क्या हुआ था

अंजलि ने पूरी घटना सबके सामने सुना दी,

चंद्रो देवी- तो पांचो अब इस गाओं में ऐसा होगा इस गाओं में आज तक किसी औरत आया लड़की के साथ गलत हरकत नहीं हुई और इस 60 साल के बूढ़े ने अपनी पोती की उम्र की लड़की को गलत तरह से छुआ और अपनी बहु जैसी अंजलि को गलत शब्द बोले तो गुन्हेगार कोण हुआ,

पंचायत- ठकुराइन सही बोल रही हो आप इस गाओं में किसी ने ऐसी हरकत नहीं की भूरा तुझे सजा मिलेगी तू सबके सामने ांजलिअ ुर उसकी बेटियों से माफ़ी मागेगा और गले 1 महीने तक गाओं कही घूमता नहीं दिखता अपने घर में बंद रहेगा,

पंचायत का फैसला सुनकर भूरा गुस्से में जल भून गया लेकिन कुछ क्र नहीं सकता था इसलिए धीरे से उसने सबसे माफ़ी मांगी और घर की तरफ चला गया,

चंद्रो देवी- अब मेरी बात पूरा गाओं सुन ले तुम लोगो ने अपनी बेटियों को घरो में कैद किया हुआ ह ये अकेली औरत ह जिसने अपने बच्चो को पढ़ना चाहती ह उसे हौसला नहीं दे सकते तो उसे दबाओ भी मत,

पूरा गाओं चुप खड़ा था फिर सभी अपने अपने घर चले गए अंजलि का परिवार खुश था

रूचि- माँ तू इस टुशु को कुछ अलग से खिलाती ह क्या ये सबसे छोटा ह और उस भूरा को इसने कैसे बच्चे की तरह उठा लिया

दीपा- तू नजर मत लगा मेरे भाई को अब तो ये छोटा ह जब और बड़ा होगा तो और ताकतवर बनेगा

सचिन- ओहो हमारे अंदर भी ताकत ह बस हम दिखते नहीं ह

सीमा- हहहहए रेने दो तुम दोनों हमेशा चुप खड़े रहते हो,

कपिल- दीदी हमारा सवभाव बस शांत रहने का ह जैसे आपका और दीपा दी का लेकिन ये दोनों तुषार और रूचि दोनों का सवभाव गलत का जवाब देना ह जैसे माँ बोलती ह गलत की आगे मत झुको, हम चारो पापा पैर गए हैं और ये दोनों माँ पैर

कपिल की बात सुनकर अंजलि एक दम शांत हो गई जो अभी तक अपने बच्चो की बातो पैर है रही थी उसके फेस पैर गंभीरता आ गई थी,

अंजलि- अब ये बाते ख़तम करो और घर जाकर चुप रहना कभी अपने पापा के सामने अपनी तारीफे करने लगो,

फिर सब घर आ गए कुछ देर बाद राजेश भी आ गया, उसके साथ एक भैंस भी थी, जिसे देख क्र पूरा परिवार खुश हो गया, अंजलि ने सबके लिए हलवा बनाया सभी बहुत खुश थे राजेश तो अपने पुरे परिवार को देख क्र hi खुश होता रहता था, फिर अंजलि ने राजेश को आज हुई पूरी घटना सुना दी राजेश ने आगे बढ़ क्र रूचि को गले लगा लिए और बोलै शाबाश मेरी बच्ची तूने मेरा सर गर्व से उप्पेर क्र दिया राजेश इतना भाविक हो गया की उसकी आँखों में आंसू आ गए,

राजेश- इस गाओं ने मुझे बहुत बाइज्जत किया ह आज तुम बच्चो ने मेरी इजात को बढ़ा दिया ह

भावनाओ में राजेश बोल तो गया लेकिन अंजलि ने तूअंत उसे हाथ लगे ाजिससे उसे अहसास हो गया की वो कुछ गलत बोल गया ह लेकिन अब देर हो चुकी थिस अरे बचो के मन में ये बात अटक गाइट hi,

अंजलि ने बात को बदला और माहौल को फिर से खुशनुमा किया,
 
अपडेट-3

अंजलि- अब ये बताओ दूध तो सबको पीना ह पैर भैंस का काम कोण कोण क्या क्या कर्ज?

तुषार- मैं तो उसे नहलाऊंगा

सचिन- तो मैं उसे चारा दाल दूंगा

कपिल- तो सुबह शाम अंदर बहार बांधने की जिमेदारी मेरी

अन्जाइ- बहुत बढ़िया लड़कियों तुम क्या करोगी

रूचि- हम क्या करेंगे और क्यों करेंगे ये मुस्टंडे ह तो सही करने को हम तो राजकुमारिया हैं

अनजलि- अरे वह राजकुमारी जी फिर तो दूध भी उसे hi मिलेगा जो उसकी सेवा करेगा

दीपा- नहीं नहीं मैं करुँगी वैसे मुज्झे आता नहीं ह पैर इन्हे देख क्र सिख लुंगी.

सीमा- हम इनकी हेल्प करेंगे रुचे तुषार के साथ मैं सचिन के साथ और दीपा कपिल के साथ.

अंजलि- ठीक ह बढ़िया अब ये बताओ दूध निकलेगा कोण किसी को आता ह.

सभी एक दूसरे का मुँह देखने लगे क्योकि पुरे परिवार में बस राजेश hi था जिसे दूध निकलना आता था बाकि किसी ने आज तक दूध निकलता hi नहीं देखा.

सीमा- माँ हमने तो आज तक दूध निकला hi नहीं देखा लेकिन आपको तो आता होगा न आपके गाओं में आपके घर तो गे भैंस रही होंगी

सीमा की बात पैर अंजलि और राजेश थोड़े घबरा से गए अंजलि के मुँह से एक भी शब्द नहीं निकला तभी राजेश ने बात सम्हाली.

राजेश- तुम्हारी माँ भी तुम लोगो की तरह राजकुमरि बनने के चक्क्र में ऐसे काम नहीं करती थी इसलिए इसे भी कुछ नहीं आया आज तक.

राजेश ने बात को सम्हालते हुए अंजलि का मजाक बनाया जिससे सब है पड़े.

रूचि- हे भगवन ऐसा होगा राजकुमारी बनने के चक्क्र में मैं न बनती राजकुमारी मैं तो सब सिख लुंगी.

सब जोर से हसने लगे ये था परिवार जिनके पास इतनी गरीबी थी की रोज कमाते रोज कहते थे. लेकिन उनके प्यार और एकता की वजह से दुःख और तकलीफ के बाद भी वो पुरे गाओं में सबसे ज्यादा खुश थे और ये hi सबसे बड़ी वजह थी लोगो की उनसे छिड़ने की.

सभी गाओं में आप सबने देखा hi होगा की खंडन में जो परिवार सबसे गरीब या काम पढ़ा लिखा होता ह तो पूरा खंडन उसे और गरीब बनाने में लग जाता ह वो पूरी ताकत लगा देते हैं उसे बर्बाद करने में वो सब चाहते हैं उसके बच्चे न पढ़े अगर उसके बच्चे पढ़ लिए तो समाज में उसकी इजात बढ़ जाएगी जो वो होने देना नहीं चाहते और ये hi सब हो रहा था राजेश के साथ, और जब उसके खंडन के लोग राजेश को खुश देखते उसे बच्चो को पढता हुआ देखते तो उन्हें राजेश से और नफरत होती वो पूरी कोशिश करते उसे बर्बाद करने की.

कहानी पैर वापस आते हैं.

अंजलि का परिवार जिस भैंस के दूध की प्लानिंग क्र रहे थे वो तो दूध देती hi नहीं थी 3 दिन में 1 बार 1 किलो दूध देती थी बस लेकिन फिर भी सब खुश थे. रूचि ने उसका नाम रज्जो रख दिया और बोली खबर दर अगर आज के बाद किसी उसे भैंस कहा तो सब उसे रज्जो hi कहेंगे सभी ने सहमति में जवाब दिया फिर सब खुश होकर सोने लगे लेकिन अंजलि की आँखों में नींद नहीं थी आज उसे कुछ यादे सत्ता रही थी जो वो जाने अनजाने में सीमा ने कुरेद दी थी. उसका दिमाग शांत नहीं हो रहा था

अंजलि अपनी सोच में- बच्चे अब बड़े हो गए हैं और जरुरत से ज्यादा समझदार भी अगर इन्हे कभी मेरे बारे में पता चला तो क्या होगा और अपने पिता के बारे में पता लगा तो होगा क्या वो झेल पाएंगे क्या वो फिर भी प्यार से रह पाएंगे अगर उन्हें खुद के बारे में पता लगा तब क्या होगा नहीं नहीं ऐसा नहीं होगा मैं ऐसा नहीं होने दूंगी मैं अपने परिवार को बिखरने नहीं दूंगी ये बाते कभी किसी के सामने नहीं आएँगी.

अंजलि की आँखों में आंसू थे जो उस 100 वाट के बल्ब की रौशनी में एक मोती की तरह चमक रहे थे और इन अनमोल मोतियों को भेटा हुआ कोई देख रहा था लेकिन उसने कोई कोशिश नहीं की उन्हें रोकने की बस ऐसे hi चुप चाप लेते हुए देख रहा तो वो इंसान. कोण हो सकता ह क्या राजेश या कोई सी बेटी या कोई बीटा अभी नहीं पता वक़्त बताएगा ये तो.

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अगले दिन सब अपने काम में लग आगये आज राजेश काम पैर नहीं गया आज उसने भँइस के खाने और रहने का इंतजाम किया बाकि सब अपनी अपनी मंजिल की तरफ चले गए. आज एक काम अलग हो गया रूचि और दीपा के स्कूल की छुट्टी जल्दी हो गई उनके एग्जाम की डेट शीट आ गाइट hi जो 15 दिन बाद से शुरू होने थे तो प्रिंसिपल ने आज हाफ टाइम से छुट्टी क्र दी और बोलै कल से अगले 10 दिन तक स्कूल में एक्स्ट्रा क्लासेस चलेंगी कोई भी स्टूडेंट हॉलिडे नहीं करेगा इसी वजह से आज जल्दी भेजा जार है ह ताकि सभी रेस्ट क्र सके. बच्चे ख़ुशी ख़ुशी घर भाग लिए. दीपा और रूचि ने सीमा के कॉलेज के गेट पैर इनफार्मेशन दे दी की वो घर जा रही हैं और घर की तरफ चल दिए उन्हें टेंगा मिल गया वो घर पहुंच गए जल्दी.

घर पहुंचे तो देखा दरवाजा खुला हुआ ह उन्होंने सोचा उनके पापा घर पैर hi होंगे वो अंदर गई तो उन्हें वह कोई दिखाई नहीं दिया राजेश दीखता भी कैसे वो तो रज्जो के लिए चारा लेने गया था तो घर में कोण था रूचि तो उछलती हुई कमरे में कपडे बदलने घुस गई लेकिन दीपा कमरों में अच्छे से देखने लगी फिर वो बहार देखने लगी घूमते हुए वो घर के पीछे जाने लगी तो उसे कुछ आवाज आई वो आवाज की तरफ गई तो उसे वह जो देखा उसकी साँस hi अटक गई वो अपनी पालक भी झपकना भूल चुकी थी वो बस देखे hi जा रही. नजारा hi कुछ ऐसा था वह सचिन अपने 6 इंच के लुंड की मुठ मर रहा था.

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उसकी आँखे बंद थी और वो बस आह्हः अह्ह्ह्ह अह्ह्ह क्र रहा था और अपने लुंड को हिलाये जा रहा था और तभी उसने एक जोर से आह्ह्ह्ह भरी और उसके लुंड ने लावा उगलना शुरू क्र दिए जिसे दीपा मन्त्र मुग्ध सी उसे देखे जा रही थी वो तो उसमे ऐसे खो गई थी जैसे ये लावा उसी के लिए निकला गया हो.

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उसने पहले बार किसी को ऐसे हिलाते और वीर्य निकलते देखता था लुंड तो देखने को मिल गए पहले भी क्योकि गाओं के बहुत से बेशरम लोग थे जो इस परिवार की औरतो के सामने hi अपना 5-5 िची लुंड निकल क्र म्यूट लगते थे और मुश्कुरा क्र अपनी बेशर्मी दिखते थे. लेकिन आज उसने अब तक का सबसे बड़ा लुंड देखा वो भी अपने भाई का मूत मरते हुई. इधर सचिन के लुंड ने भी लगातार 7-8 धार मरी और शांत होने लगा तो दीपा की तंत्र टूटी और वो चुपसे वह से निकल गई कमरे में आकर बैठ गई.

रूचि- कहा चली गई थी

दीपा- कही नहीं यही थी बहार देख रही थी कही पापा बहार तो नहीं ह

तभी बहार से सचिन आ गया

सचिन- तुम दोनों कब आये

दीपा घरबरा क्र बोली अभी अभी बस बिलकुल अभी

रूचि- अरे तू ऐसे क्यों दर रही ह जैसे चोरी करके आये हैं हम अभी आये हैं हम तू स्कूल नहीं गया आज

सचिन- गया था लेकिन पेट में दर्द था तो आ गया था जल्दी

रूचि – तो दरवाजा खुला छोड़ क्र कहा गया था

सचिन- वो मैं पीछे था फ्रेश हो रहा था

दीपा- हो गया फ्रेश हाथ तो धो लिए न

दीपा की बात पैर सचिन थोड़ा सा झेप गया है है और हाथ नहीं धोऊंगा क्या पागल हो दी आप भी

दीपा- चल बहार जा मुझे कपडे बढ़ने ह

सचिन चला गया तो रूचि ने पूछा आज तूने सचिन को बहार क्यों भेजा हमने तो हमेशा भाइयो के सामने भी कपडे बदले ह माँ ने तो हमे नहीं सिखाया ऐसे चुप क्र कुछ करना

दीपा- अरे पागल अब हम जवान हो चुके हैं और ये लड़के भी पुरे जवान हो चुके हैं

रूचि- अच्छा जी आज सुबह तक हम सब बच्चे थे और 4 घंटे के अंदर hi हम सब जवान हो गए हैं क्या ड्रामा ह ये क्या हुआ तुझे

दीपा- तू तो पागल ह मैं ऐसा नहीं बोल रही

रूचि- तो क्या बोल रही ह तू मैं माँ से hi पूछूँगी आज कुछ अलग सिखाया ह क्या इसे

दीपा- अरे नहीं यार ऐसी कोई बात नहीं ह तू बुला ले उसे मैं बदल लुंगी उसके सामने hi बस

रूचि- चल चल शर्मीली छमिया बदल ले अब तू अकेले hi मैं भी जा रही हु बहार और रुचु भी बाहर आ गयी.

दीपा के अंदर बड़ी बैचनी हो रही थी उसके दिमाग में लुंड से निकलते वीर्य की तस्वीर हैट hi नहीं रही थी कपडे बदलते बदलते उसके हाथ कब उसकी चूचियों पैर चले गए उसे अहसास hi नहीं हुआ जब बहार से कुछ आहत हुई तो वो खयालो से बहार आई और जल्दी कपडे पहने.

कपिल और तुषार भी आ चुके थे गाओं के स्कूल की छुट्टी जल्दी हो जाती थी क्योकि सुबह को स्टार्ट जल्दी होता था कसबे के स्कूल में दूर से बच्चे आते थे तो सुबह टी टाइमिंग देर से स्टार्ट होती तो छुट्टी भी देर से होती. घर में घुसते hi

तुषार- तुम लोग आज इतनी जल्दी कैसे तुम लोगो के पेट में भी दर्द था क्या

रूचि- हमारे पेट में क्यों दर्द हो दर्द हो जाये मेरे दुश्मनो को वो कल से एक्स्ट्रा कॉसेस ह इसलिए जल्दी छुट्टी हो गई.

तुषार- अच्छा चल आज तू खाना लगा दे हमारे लिए

रूचि- क्यों जैसे रोज आकर कहते हो वैसे hi खा लो

कपिल- रहने दे टुशु ये न देने वाली हमे रोटी हम खुद hi खा लेंगे

तभी दीपा आई- तुम कपडे बदलो मैं गरम करती हु खाना.

तुषार- वाओ दीदी आप hi हो सबसे बेस्ट दीदी मेरी और उसने दीपा को गले से लगा लिया और पूरा जकड लिया जससे दीपा की चूचिया तुषार की छाती में डाब गई.

ऐसे गले तो ये लोग हमेशा लगते रहते थे कोई अलग बात नहीं थी लेकिन दीपा के लिए कुछ नया था उसे तुषार की छोड़ छाती में अपनी चूचिया दबते hi अलग अहसास हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ था उसके अंदर की भवनए बदलने लगी थी जभी तुषार बिलकुल नार्मल था उसने दीपा को आजाद क्र दिया लेकिन दीपा के फेस से लग रहा था की वो आजाद होना नहीं चाहती थी उसे आन्नद आ रहा था जब से सचिन को उस हालत में देखा उसकी तो हरकत hi बदल गई वो पूरी hi बदल गई उसके अंदर बहुत भावनाये थी जो वो कभी किसी से शेयर नहीं करती बहुत काम बोलती शर्मीली जोट hi जिसकी वजह से वो अपनी फिल्लिंग्स भी दबती आ रही थी लेकिन आज सचिन को वो सब करता देख उसके अंदर हलचल हो गई और उसे मर्द का स्पर्श बहुत सकूं दे रहा था.

अधूरे मन से दीपा अलग हुई और खाना देने लगी.

उधर सीमा की छुट्टी हुई तो गेट पैर गार्ड ने बता दिया की उसक भेने चली गई अब सीमा को अकेले घर जाना था वो बेचारी चल दी अकेले आज उसे अकेले देख क्र कॉलेज से कुछ hi दुरी पैर एक लड़के ने उसका रास्ता रोक लिया और बोलै ो मैडम क्या हाल चल ह

सीमा घबरा गई उसने इधर उधर देखा वह कोई नहीं था. सीमा चुप आगे चलने लगी तो उसने लड़के ने सीमा का हाथ पकड़ा और एक लेटर सीमा को देते हुए बोलै ये लो इसे पढ़ क्र जवाब देना सीमा ने वो लत्तेर निचे फेंक दिया तो उस लड़के ने गुस्से में सीमा को रोका. सीमा दर गई वो बेचारी कुछ बोल hi नहीं प् रही थी उसके मुँह से एक भी शब्द नहीं निकल रहा था तभी पीछे से एक लड़का आया और उसने फेल वाले लड़के की गार्डन पकड़ी और बोलै और भूतनी के तेरी हिमत कैसे हुई लड़की को छेड़ने की

पहला लड़का- ू मादरचोद निकल यहाँ से ये मेरा माल ह

दूसरा लड़का- भें के लोडे इतना मरूंगा अपनी भें भी तुझे माल hi नजर आने लगेगी

तभी पीछे से कुछ लड़के और ा गए ोये जांय भाई क्या हुआ इस दूसरे लड़के का नाम जांय था.

जांय- अरे यार ये भोसड़ी का हमारे पड़ोस गाओं की लड़की को छेद रहा ह

बस फिर क्या था लड़की की सहायता करने तो पूरी मर्द जाट कड़ी हो जाती ह उन्होंने भी सबने मिलकर उस लड़के की अच्छी वाली धुलाई क्र दी.

जांय- सीमा तुम चलो यहाँ से मेरे दोस्त देख लेंगे इसे

सीमा- शर्माती हुई उसके साथ चल दी.

सीमा चुप काहप चल रही थी जांय भी कुछ कहना चाहता था लेकिन शायद हिम्मत नहीं जूता पाया. लास्ट में सीमा को hi बात शुरू करनी पड़ी.

सीमा- तुम मेरा नाम जानते हो

जांय- है हम एक hi कॉलेज में सेक्शन अलग ह पैर नाम तो पता चल hi जाता ह. वैसे आज तुम अकेली जा रही हमेशा तुम्हरी कोई न कोई बहन या तीनो एक साथ रहती हो.

सीमा- है आज उनकी छुट्टी जल्दी हो गई

जांय- अच्छा अच्छा

फिर दोनों एक दूसरे की पसनद न पसंद हाल चल फॅमिली पूछते चलते रहे. जांय कुछ कहना चाहता था लेकिन उसे डार्ट है कही बात न बिगड़ जाये अब दोनों के रस्ते अलग होने में ज्यादा वक़्त नहीं था. अब जांय ने हिम्मत करके बोलै

जांय- सीमा मैं काफी टाइम से तुमसे कुछ कहना चाहता था कभी हिम्मत नहीं हो पाई और हमेशा तुम्हारी बहन तुम्हारे साथ होती थी आज मैं तुम बोल देता हु फैसला तुम्हारा ह तुम जॉब hi फैसला लोगी मुझे मंजूर होगा.

सीमा को समझ तो आ रहा था जांय क्या बोलने वाला इसलिए उसकी धड़कन तेज होती जा रही थी.

जांय- सीमा मैं तुम्हे पसनद करता हु और तुमसे दोस्ती करना चाहता हु अगर तुम्हे लगे मैं तुम्हारे लायक नहीं हु तो मन क्र देना

जब तक जांय की बात ख़तम होती या सीमा कुछ बोल पता उनके रास्तो का मोड़ आ गया.

जांय बस ये hi बोल पाया मैं तुम्हारी है या न का वेट करूँगा अगर तुम्हारी है ह तो कॉलेज में एक बार मेरे सेक्शन में झक क्र चली जाना मेरा सेक्शन b.com स ह.

सीमा बस निचे देखती हुई आगे बढे जा रही थी उसके दिल और दिमाग में तूफ़ान आया हुआ था उसका दिमाग दर रहा था दिल बैचैन था ो समझ नहीं प् रही थी क्या करे. वो तो कब से चाहती थी उसका बर्फ हो लेकिन कोई अच्छा मिल hi नहीं रहा था लेकिन जांय काफी स्मार्ट था और देख क्र लगता भी था की पैसे वाला भी ह. और आज जो उसने सीमा की हेल्प की उस लड़के से बचा क्र उसे तो सीमा पूरी तरह इम्प्रेस हो गई थी. अब तक की ए सभी परपोसल में जांय सबसे बेस्ट ऑप्शन था. सीमा ये hi सब सोचते हुए चले जा रही थी उसके दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था वो घर पहुंची उसके कुछ देर बाद अंजलि भी आ गई.

शाम को जब पूरा परिवार एक साथ बैठा तो अंजलि ने सीमा और दीपा के एक्सप्रेशन नोट किये जो पूरी तरह बदले हुए थे. ये एक माँ किन अजर थी या एक औरत की या दोनों की. अंजलि ने सीमा के फेस पैर ख़ुशी से भरी शर्म महसूस क्र ली थी और दीपा की आँखों में उसने एक नशा सा महसूस किया एक खुमारी सी. लेकिन ये सही समय नहीं था बात करने का.

एक और इंसाने था जो अंजलि की आँखों में कुछ ढूंढ रहा था लेकिन जो औरत सबकी आंखे पढ़ सकती थी भला उसकी आँखे कोई कैसे पढ़ सकता था उसकी आँखों में बच्चो के लिए प्रेम के अलावा कुछ नहीं मिला कभी. लेकिन जो इंसाने ढूंढ रहा था ो रुकने वाला नहीं था उसके दिमाग में कुछ बैठ गया था या किसी ने कुछ बैठा दिया था.

नेक्स्ट डे सभी अपने काम पैर निकल गए रस्ते में चारो माँ बेटी एक साथ जा रहे थे तो अंजलि ने सीमा को अपने साथ किया और दीपा और रूचि आगे चलने लगी.

अंजलि- सीमा बीटा कुछ ऐसी बात ह जोट ुम मुझे बताना चाहती हो या मुझे पता होनी चाहिए.

अंजलि का ऐसे एक दम डायरेक्ट सवाल पूछने से सीमा की फैट गई उसकी तो साँस hi अटक गई लेकिन आप सब तो जानते hi ह जब लड़की आशिक़ी करती ह तो उसके घर वाले उसे रेंज हाथो भी पकड़ ले वो झूट hi बोलती रहेगी वो भी पुरे कॉन्फिडेंस से वही सीमा ने किया.

सीमा- नहीं तो माँ ऐसी तो कोई बात नहीं ह अगर कुछ बात होगी तो आपसे तो खुद hi आकर बताउंगी.

अंजलि समझ गई की सीमा झूट बोल रही ह लेकिन उसने बात को आगे नहीं बढ़ाया. फिर दोनों चुप चल दी फिर अंजलि ने दीपा को अपने पास बुलाया और शामे सवाल उसे पूछा अब बेचारी दीपा सीमा की तरह नजबुत नहीं थी तो दर गई कल की पूरी घटना एक hi झटके में अंजलि को बता दी.

अंजलि- तूने किसी को बताई तो नहीं ये बात

दीपा- नहीं माँ

अंजलि- गुड बताना भी मत बीटा जब जवानी आती ह तो मन ऐसे भटकने लगता ह तो ऐसी गलतिया हो जाती ह ये सब नेचुरल ह और इसमें शर्माने की कोई बात नहीं ह सेक्स बॉडी की नीड ह जैसे खाना हवा पानी वैसे hi बॉडी को एक टाइम के बाद सेक्स भी चाहिए. बस अभी उसकी आगे काम ह इसलिए गलत मन जायेगा बाकि तेरे लिए गलत नहीं ह अगर तुझे नीड हो तो तू कर सकती ह तेरी आगे हो गई ह

अंजलि की बात सुनकर दीपा शर्मा गई

अंजलि- बीटा मैंने मेरे बच्चो को शर्माना नहीं सिखाया इसलिए जब जॉब hi लगे या रिक्वायर्ड हो मुझे बताओ मैं तुम्हे सही सलाह दूंगी.

दीपा है में गार्डन हिलती हुई चली गई. लेकिन अंजलि को लगा अब बच्चो को जीवन की सबसे बड़ी शिक्षा देने का टाइम आ गया ह.

फिर सभी अपनी अपनी मंजिल की तरफ चले गए. कॉलेज पहुंचते hi सीमा ने कल की साडी बात मेघा को बताई

मेघा- हे मेरी जान तूने है क्यों नहीं बोली फिर उसे

सीमा- यार मैं समझ नहीं प् रही थी सोचा तुझसे एक बार बात क्र लू फिर है बोलूंगी

मेघा- अरे पागल ऐसे मोके रोज नहीं मिलते इतना स्मार्ट ह वो

सीमा- है यार स्मार्ट तो ह

मेघा- तो छमिया बोल दे है तुझे भी लुंड मिल जायेगा तेरी इस मुनिअ की प्यास भी बुझ जाएगी

सीमा- रहने दे बस ये hi काम ह क्या

मेघा- अच्छा जी जैसे वो तो तेरी लेगा hi नहीं न

सीमा- मैं नहीं देने वाली इतनी आसानी से

मेगा- वो तो टाइम बताएगा पैर तू चल तो सही उसके सेक्शन में

सीमा- नहीं यार मुझे दर लग रहा ह

मेघा ने जबरदस्ती सीमा का हाथ खींचा और चल दी जांय की क्लास की तरफ. मेघा ने बस हाथ पकड़ा हुआ था सीमा तो खुद hi उसके साथ चले जा रही थी.

वो दोनों जांय की क्लास के सामने से गुजरी तो जांय उन्हें दिखाई नहीं दिया. सीमा का तो मुँह hi उतर गया वो दोनों वापस से आई और अंदर झाकने लगी लेकिन वोन hi दिखा जांय क्लास में होता तो दीखता भी. अब सीमा को गुस्सा आ गया वो बोली कितने फत्तू लड़के हैं ह फिर जवाब सुनने से डरते हैं बताओ आज स्कूल hi नहीं आया. मैं क्या पागल हु जॉय अहा चक्क्र काट रही हु



मेघा- तू कहा चक्क्र काट रही तुझे तो मैं खींच क्र ले हूत एरा मन तोडना था

सीमा- चुप रह कुटिया अगर मेरा मन न होता तो मैं यहाँ ताका ा जाती क्या कॉलेज hi नहीं आती फिर तो. मेरा मूड ख़राब हो गया मन क्र रहा ह उसकी जान ले लू अभी.

तभी पीछे से आवाज आई बाँदा हाजिर हुकुम करो खुद अपनी जान दे देगा.

सीमा और मेघा ने पीछे मुद क्र देखा तो जांय खड़ा था जो एक कोने में चिप क्र उन दोनों की हरकते देख रहा था. और जैसे hi सीमा को ये बात समझ आई की जो नाटक सीमा करने वाली थी जांय को सताने का उल्टा पद गया ह जांय ने hi उसे सत्ता दिया. सीमा शर्मा गई और बोली तुम बड़े ख़राब हो ऐसा कोई करता ह क्या मैं बात नहीं करती तुमसे.

जांय- माफ़ करना मैं तो ऐसे hi तुम्हे देखने बहार निकला था तो देखा तुम लोग इधर hi आ रहे हो तो सोचा देखु तो तुम्हारी है ह या न बस इसी लिए चिप गया.

मेघा- तो क्या देखा आपने है या न

जांय- मुझे तो दो बार है दिखाई दी

सीमा फिर शर्मा गई

मेघा- ठीक ह तो आज कही पार्टी चलो आज मेरी सहेली ने किसी को है बोली ह पार्टी तो बनती ह.

जांय- आप लोग कॉलेज के बहार निकलो मैं वही मिलता हु अगर एक साथ जायेंगे तो लोग तुम्हारे बारे में बाते बनाएंगे.

जांय की बात सुनकर सीमा इतनी खुश हो गई उसकी नजरो में जांय की इज्जत और बढ़ गई. फिर वो लोग बहार चले गए घूमने खाया पिया सीमा अभी भी श्रम रही थी उसकी तरफ से सरे जवाब मेघा hi दिए जा रही थी. जांय ने सीमा को एक ब्रेस्लेट खरीद क्र दिया. जिससे सीमा बहुत खुश हो गई क्योकि ये उसका पहला गिफ्ट था बस उसे अपनी माँ से छुपाना था.

ऐसे hi दिन गुजर गया शाम को सब घर आ गए. आज अंजलि ने कुछ ज्ञान देने का फैसला किया था क्या ह वो ज्ञान ये अगले part में बताउंगी.

कहानी पसंद करने के लिए बहुत धन्यवाद
 
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शाम को सभी एक साथ बैठे थे राजेश अभी नहीं आया था. दीपा अपनी माँ से थोड़ा झिजक रही थी वही सीमा का दिल उसके काबू में नहीं था एक तो आज उसका पहला बर्फ बना था दूसरा उसकी माँ को शायद शक था की कुछ गड़बड़ ह वॉक हश भी थी और दरी हुई भी. रूचि हमेशा की तरह एक दम खुश वही सचिन और कपिल नासमझो की तरह बैठे थे. और तुषार उसके अंदर क्या ह ये अंजलि भी नहीं पकड़ पति थी एक वही था जो अंजलि की तरह अपने दिल की बात अपने फेस पैर कभी आने hi नहीं देता था. अंजलि को बस तुषार से hi दर लगता था क्योकि अगर उसे अतीत के बारे में एक तिनका भी बिला तो वो पूरा खेत खोद लेगा. लेकिन अंजलि नहीं जानती थी की तुषार के मन में तिनके की जगह पूरा पेड़ आ चुक्का था. जी है वो तुषार hi था जो अपनी माँ को रात में रट हुए देख रहा था वो हमेशा अपनी माँ के शब्दों में सच और झूट ढूंढ़ता रहता था लेकिन उसे कभी झूट जैसा कुछ नहीं मिला लेकिन फिर भी वो कुछ ढूंढ़ता रहता था.

सभी लोग एक साथ निचे बैठ क्र चाय पि रहे थे तो अंजलि बोली मुझे तुम सब से कुछ बात करनी ह. सीमा दर गई की कही उसकी माँ को कुछ पता तो नहीं चल गया. इधर दीपा भी दर गई कही उसकी माँ कल वाली बात सबको न बता दे.

सीमा तुरंत बोल पड़ी- माँ पापा के सामने नहीं करोगी या उनसे छुपा क्र करनी ह

अंजलि- बीटा मैं कभी तेरे पापा से कुछ नहीं चिपटी.

सचिन- माँ हम तुम्हे एक बात बताना तो भूल hi गए. पिछले हफ्ते स्कूल में हम सब स्टूडेंट्स का मेडिकल टेस्ट हुआ था तो ये हमारा तुषार पुरे स्कूल में इससे अच्छी फिटनेस किसी की नहीं आई डॉ. बोल रहा था की तुम अपनी आगे से काफी बड़े लगते हो.

सचिन की बात से अंजलि थोड़ी सी घबरा गई जिसे तुषार ने पकड़ लिया.

तुषार- माँ वो अरुण सर भी बोल रहे थे मैं सचिन और कपिल से बड़ा हु

अंजलि- खुद को सम्हालते हुए पागल ह क्या वो कुछ भी बोलेंगे तू मन लेगा तुझे अपनी माँ पैर भरोसा ह न

तुषार- है माँ आप पैर तो पूरा भरोसा ह लेकिन जब कोई कुछ कहता ह तो दिमाग घूम जाता ह. आप और पापा हमे कुछ बताते भी नहीं.

अंजलि- क्या नहीं बताया हमने.

तुषार- उस दिन पापा बोल रहे थे की गाओं वालो ने उन्हें बहुत परेशां रखा लकिन आपने बात बदल दी थी. आज तक हमारे नाना या मां के बारे में आपने कभी नहीं बताया. पुरे गाओं में ये कोई नहीं जनता की आप कहा से आई हो और इतनी पढ़ी लिखी होने के बाद भी आपने एक अनपढ़ इंसाने से शादी क्यों की.

अंजलि ने एक थपड तुषार को मर दिया ख़बरदार अगर अपने पापा के बारे में कुछ गलत शब्दों का इस्तेमाल किया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा मैं अपने बच्चो के लिए किसी से भी लड़ सकती हु और अपने पति के लिए अपने बच्चो से भी इस दुनिया में अगर कोई सच्चा और अच्छा इंसाने कोई ह तो वो तुम्हारे पापा ह.

तुषार को अपनी गलती का अहसास हुआ वो जोश में कुछ ज्यादा hi बोल गया था. उसने तुरंत अंजलि के पेअर पकड़ लिए और बोलै श्री माँ मेरा वो इरादा नहीं था पापा के लिए कुछ गलत तो हमारे दिमाग में भी नहीं आ सकता मुझे माफ़ क्र दो. मैं बस वो सब पूछ रहा था जो ये पूरा गाओं पूछता ह. हम सब यही रहते हैं स्कूल में लड़के अजीब अजीब बट्टे करते हैं. मैं तो अपने मुँह से बोल भी नहीं सकता क्या क्या बाते करते हैं बहुत गुस्सा आता ह इसलिए मेरे दिमाग में भी से सब सवाल जनम लेने लगे.

अंजलि- शांत हो जा और कुछ देर के लिए तुम सब बहार चले जाओ मुझे अकेला छोड़ दो मेरा दिमाग जब शांत होगा तब मैं बात करुँगी.

सभी ने वह से चुप निकलना hi सही समझा. और सभी बहार निकल गए अपनी रज्जो को लेकर हरी घास khilane.idhar अंजलि शोकेड मुद्रा में बस बैठी हुई थी और सोचे जा रही थी की अब वो क्या करे उसे पता था एक दिन ये सवाल उसके सामने जरूर आएंगे बहार वालो का तो वो मुँह बंद करवा देगी लेकिन अपने बच्चो का क्या करेगी. वो काफी देर बैठी रही फिर कुछ सोच क्र उठी और कमरे का सामान सही करने लगी. उसने जैसे hi सचिन का बेग उठाया तो उसके बेग से साडी बुक्स निचे गिर गई. जैसे hi अंजलि ने बुक वापस रखने लगी तो उसके हाथ एक अलग बुक लग गई. उस पैर लिखा था रंगीन रेट.

बुक को देखते hi अंजलि का माथा ठनक गया वो समझ गई की ये क्या उसने बुक खोली तो पहेली hi पिछ में एक अंग्रेज लड़की बिलकुल नंगी कड़ी थी.

दूसरी पिछ में एक कला मर्द बिलकुल नंगा अपना लुंड लिए खाया था और वही लड़की उसके सामने बैठी थी.

तीसरी पिछ में लड़की ने वो मोटा कला लुंड अपने मुँह में लिया हुआ था. आगे पिछ में अब दो लड़किया थी और एक कला मर्द दोनों उसका लुंड चाट रही थी. फिर दो काळा मर्द और एक लड़की जो दोनों लुंड को हाथ में लेकर बैठी थी. अंजलि जैसे जैसे फोटो देखती जा रही थी वो गरम होती जा रही थी. अगर अंजलि जैसी औरत भी ये फोटो देख क्र गरम हो गाइट hi तो समझो वो कब से प्यासी रही होगी. आगे भी बहुत से पिछ थे जिन्हे अंजलि बड़ी तलीनता से देख रही थी. पूरी बुक देखन ेके बाद उसने वो बुक वापस बेग में दाल दी और बाकि बुक्स देखने लगी उसके हाथ एक और बुक लगी जिस पैर लिखा था गरम कहानिया.

अंजलि ने जैसे hi पहेली स्टोरी देखि उसकी छूट में करंट सा दौड़ गया ये एक भाई बहन की चुदाई कहानी थी जिसमे एक बहन ने अपने जलवे दिखा क्र भाई को पता क्र अपनी चुदाई करवाई. अगली कहानी माँ bête किट hi जिसमे एक bête ने अपनी माँ को पता क्र छोड़ा और अपने बचे की माँ बनाया. अंजलि बड़ी तेजी से स्टोरी पढ़े जा रही थी उसका एक हाथ कब उसकी छूट पैर चला गया उसे पता hi नहीं चला.

बहार जब कुछ आहात हुई तो उसकी तंत्र टूटी उसने जल्दी से बुक वापस बेग में राखी और सामन सही करने लगी. बच्चे वापस आ चुके थे इधर अंजलि की आँखे एक दम लाल हो राखी थी उसका शरीर एक डैम गरम था कोई भी समझदार इंसाने देख लेता तो समझ जाता की अंजलि छुडास की भूक में तप रही ह लेकिन बच्चे तो उल्टा hi समझ गए. उन्हें लगा उनकी माँ अकेले में खूब रोइ ह और इसलिए उसकी ये हालत ह. सभी ने अपनी माँ को एक साथ गले लगा लिया और सभी एक साथ माफ़ी मांगने लगे.

अंजलि के अंदर की ममता उभर आई और सेक्स का नशा हल्का होने लगा उसने भी सभी को प्यार किया और अपनी मुस्कराहट बिखेरी. कुछ देर बाद राजेश भी आ गया. फिर सीमा और दीपा ने खाना बनाया सबने एक साथ खाना खाया अंजलि ने सभी को सोन ेके लिए ेबोल दिया तुषार बोलै मैं आज माँ के पास सोऊंगा.

सीमा- माँ को चारपाई पैर सोती ह और तू सैंड जैसा अकेला भी उस चारपाई पैर नहीं आता तो माँ के साथ कैसे लेटेगा.

तुषार- मुझे नहीं पता मैं सबसे छोटा हु मैं तो सोऊंगा

अंजलि- ठीक ह ठीक ह सो जाना

वो खुश हो गया और भाग बहार बिछी चारपाई पैर लेट गया. अंजलि ने राजेश से कहा की आप आज अंदर सो जाओ. राजेश भी बिना कोई सवाल की चुप जाकर लेट गया. बाकि सब निचे कपडे बिछा क्र सोते थे उनके पास 1 hi चारपाई थी. अब इस छोटी सी चारपाई पैर दोनों कैसे आते लेकिन फिर भी एक दूसरे से चिपक क्र लेट गए. अंजलि ने तुषार की बाह पैर अपना सर रख लिया. अंजलि की चूचिया तुषार की छाती से हलकी सी टच हो रही थी दोनों के पेअर एक दूसरे को टच हो रहे थे.

तुषार- माँ मुझे माफ़ क्र दो मुझे गलती हो मैंने आपका दिल दुखाया

अंजलि- कोई बात नहीं मेरे बच्चे दुनिया की बाते सबका दिमाग ख़राब क्र देती ह तू चिंता मत क्र सजा आराम से.

अंजलि ने उप्पेर होकर तुषार का माथा चुम लिया जिससे तुषार का मुँह अंजलि की चूचियों पैर रगड़ गया इससे तुषार को तो कोई फरक नहीं पड़ा लेकिन अंजलि की सिसकी निकलते निकलते रह गई. उसने खुद को सम्हाला और निचे होकर लेट गई. तुषार ने आँखे बंद की और सोने लगा लेकिन अंजलि के दिमाग में सचिन के बेग से मिली बुक्स आ गई वो तस्वरी वो काळा मोठे लुंड याद करते hi अंजलि फिर से गरम होने लगती ह. वो काफी देर तक बस बस उन्ही तस्वीरों को hi याद करने लगती ह. इधर तुषार सो चुक्का था और सोते hi उसने अपनी पोशण चेंज की लेकिन यहाँ जगह काम थी तो कैसे क्र पता इसलिए अंजलि ने दूसरी तरफ फेस क्र लिया और उसके लिए ेजगह बनाई.

तुषार ने अंजलि को पीछे से बहो में भर लिया और उसे पूरी तरह चिपक गया. तुषार का हाथ अंजलि की भरी भरी चूचियों पैर आ गया जिससे उसकी चुकी डाब गई अंजलि के मुँह से आह निकल गई कितने समय बाद इन चूचियों को पैर दबाव पड़ा ह. पीछे से तुषार की बॉडी गर्मी बढ़ा रही थी. अंजलि की गांड तुषार के लुंड से बिलकुल चिपकी हुई थी लेकिन अंजलि ने साड़ी फेनी थी इसलिए उसे तुषार के सोये हुए लुंड का कोई अहसास नहीं था. इधर अंजलि गरम होती जा रही थी इसके दिमाग में वो कहानिया आने लगी केस ीक bête ने अपनी माँ को छोड़ा और उसे प्रेग्नेंट किया. अंजलि की छूट में खुजली बढ़ती जा रही थी उसका एक हाथ साड़ी के उप्पेर से hi अपनी छूट को रगड़ रहा था. न जाने कब अंजलि का वो हाथ साड़ी के अंदर घुस गया और छूट को रगड़ने लगा.

इस रगड़ने में अंजलि इतना खो गई की वो अपने bête की बहो में सोइ हुई ह उसकी गांड जो छूट रगड़ने से हिल रही थी वो हिल हिल क्र उसी के bête के लुंड पैर रगड़े मर रही थी जिससे उसका लुंड खड़ा होने लगा. और कुछ hi देर में तुषार का लुंड पूरी औकात में आ गया. अंजलि को इसका अहसास तब हुआ जब उसने अपनी छूट में उंगली डालने की कोशिश की तो अपनी गांड पीछे की तरफ दबाई तो तुषार का खड़ा हुआ मुसल की गांड में घुसने लगा. अंजलि एक दम चौंक गई उसने तुरंत अपना हाथ बहार निकल लिया. और उस हाथ को पीछे लेजाकर चेक किया था उसके हाथ में तुषार का मोटा लुंड हाथ में आ गया उसने लोअर के उप्पेर से hi उसका लुंड पकड़ा और एक hi झटके में हाथ हटा लिया.

अंजलि एक दम घबरा गई इतना मोटा हे भगवान् इसका इतना मोटा कैसे हो सकता किसी का भी इतना मोटा कैसे हो सकता ह और ये तो खड़ा ह अब मैं क्या करू आगे खिसकने की भी जगह नहीं थी. वही लुंड को किसी औरत के हाथ का अहसास मिल चुक्का था उसने तुरंत एक झटका मारा और तुषार ने अंजलि को कस क्र बहो में भर लिया. लुंड का दबाव और भड़ने लगा अंजलि क गांड पैर वो छह क्र भी नहीं उठ प् रही थी. उसके मन में बहुत उथल पुथल चल रही थी.

अंजलि क्या क्र रही ह तू ये तेरा बीटा ह अपनी हवस पैर काबू रख इतने सालो तक तूने खुद को रोका ह ये हवस तुझे हरा नहीं सकती.

दूसरा मन में वो स्टोरी चल रही थी केस ेके bête ने माँ को छोड़ा. मैं कोनसा चुद रही हु बस लुंड की गर्मी का अहसास ले रही हु ये मेरा बीटा ह तो इसकी हर चीज पैर मेरा हक़ ह.

ऐसे hi उधेड़ बन में कब अंजलि फिर अपनी छूट रगड़ने लगी उसे भी पता नहीं चला और छूट रगड़ने से उसकी गांड आगे पीछे हिल रही थी जिससे तुषार शायद किसी सपने में पहुंच चुक्का था और इस कंडीशन में सपने में इस आगे के लड़के क्या करते है ये तो सब आप जानते hi होंगे. तुषार के लुंड ने भी जोर दिखाना शुरू क्र दिया और तुषार की कमर हलकी हलकी हिलने लगी और तुषार ने अंजलि को कास क्र खुद से भिज लिया तुषार के हाथ में अंजलि की एक चुकी आ गई जिसे तुषार ने बहुत जोर से भींच लिया और तुषार झड़ने लगा. वही अंजलि के मुँह से चीख सी निकल गई उसने तुरंत अपने मुँह पैर हाथ रखा. तुषार का हमला इतना जबरदस्त था की अंजलि भी उसके साथ hi झाड़ गई.

तुषार के झड़ते hi वो शांत लेट गया वही अंजलि की तो नींद hi उड़ चुकी थी. ये क्या हुआ एक माँ बीटा एक दूसरे के अंगो से खुद को रगड़ क्र ठन्डे हुए थे तुषार को तो अहसास नहीं था लेकिन अंजलि तो होश में थी. क्या तूने ये ठीक किया अंजलि खुद से hi बात करने लगी.

अंजलि खुद से- ये अच्छा नहीं हुआ अंजलि ये सही नहीं हुआ वो बीटा ह तेरा तुझे ऐसा नहीं करना चाहिए.

दूसरी सोच- लेकिन इसमें मेरी भी की ागलति ह मैं भी तो कब से प्यासी हु इतने सालो से खुद को रोकती आई हु.

पहेली सोच- तो क्या अपने bête से hi चुद जाएगी कुटिया ह क्यात ु.

दूसरी सोच- चूड़ी तोडना हु उसे तो पता hi नई क्या हुआ

पहेली सोच- तुझे तो पता ह

दूसरी सोच- आज तक पढ़ा ह इंसाने भी धरती पैर एक जानवर ह ह 2 पैरो पैर चलना वाला जानवर और जानवर का कोई रिश्ता नहीं होता सेक्स में कोई रिश्ता नहीं होता

अंजलि ने अपनी सोच को झटका क्योकि वो फिर गरम हो चुकी थी वो धीरे से उठी और साइड में चली गई और अपनी साड़ी उठा क्र अपनी छूट में अच्छे से उंगली करने लगी काफी देर तक अच्छे से उंगली की जब तक वो झाड़ नहीं गई. इस बार उसे थोड़ी शांति मिली वो धीरे से वापस आकर लेट गई और सो गई.

सुबह तुषार की आँख पहले खुल गई और लड़के तो जानते hi होंगे की सुबह को एक हेअल्थी मर्द का लुंड सुबह तन कर खड़ा रहता ह वैसे hi तुषार का लुंड एक दम खड़ा था जो अंजलि की गांड में घुसा हुआ था. तुषार धीरे से उठा तो लोअर पैर लगे डेग से ुए पता चल गे ाकि रात उसका नाईट फॉल हो गया ह. उसे बड़ी शर्म आ रही थी खुद पैर गुस्सा भी आ रहा की वो ऐसा कैसे क्र सकता अपनी माँ के बारे में ये सब कैसे सोच सकता हु.

उसने सबसे पहले अपने कपडे चेंज किये और फ्रेश होने चला गया. बाकि सब भी जग चुके थे बस आज अंजलि hi नहीं उठी थी जो सबसे पहले उठ क्र बच्चो को उठती थी लेकिन आज पहेली बार ऐसा हुआ था.

रूचि- आज माँ को क्या हुआ पहेली बार माँ अब तक नहीं उठी

सचिन- तो क्या हुआ उठा देते हैं

राजेश- नहीं कोई नहीं उठाएगा सोने दो उसे. बहुत दिन बात इतने सकूं से सो रही ह

राजेश अंजलि के पास आया और बड़े सकूं से सोती हुई अंजलि को देखने लगा और बोलै आज पहेली बात तुम्हारी माँ के चेरे पैर पहले जैसा सकूं दिखा ह. तुम सब अपना काम ख़तम करो और अपने अपने स्कूल जाओ. सभी काम पैर लग गए तुषार थोड़ा झिझकता सा अपने काम ख़तम क्र रहा था. सभी तैयार हो चुके थे जैसे hi निकलने वाले थे तो अंजलि की आँख खुल गई. उसने उठ क्र देखा तो सभी जाने को तैयार हैं अंजलि एक दम कड़ी हो गई माफ़ करना बच्ची पता नहीं कैसे इतनी घेरि नींद आ गई बहुत देर हो गई.

राजेश- कोई बात नहीं अंजलि आज तुम घर पैर hi रहो स्कूल से छुट्टी ले लो

अंजलि- लेकिन

राजेश- आज मैं कह रहा हु मन लो

अंजलि- ठीक ह क्र लेती हु छुट्टी. सब जल्दी आना अकेले घर में रुकना मुश्किल होआ ह तुम्हारे बिना.

सभी अंजलि के गले मिले और चले गए. अंजलि भी घर की साफ़ सफाई में लग गई. वो काम किये जा रही थी लेकिन उसके दिमाग में बुक की तस्वीरें वो कहानी तुषार का लुंड सब एक साथ घूम रहे थे. वो बस काम किये जा रही थी कुछ hi देर में उसने पूरा घर साफ़ क्र दिया और इस सफाई में उसे आज फिर एक बुक मिली सचिन के सामान में hi राखी थी. उसने सोचा बाद में पढूंगी क्या ह इसमें.

अब प्रॉब्लम ये थी की वो नहाये कैसे अब तो पूरा दिन निकल आया था उसने सोचा चलो आज नदी पैर कपडे धो लती हु फिर अंदर कमरे में hi नाहा लुंगी. वो कपडे लेकर नदी पैर पहुंच गई जहा कुछ औरते पहले से hi कपडे धो रही थी.

पहेली औरत- अरे देख आज तो मास्टरनी नदी पैर आ रही ह कपडे लेकर

दूसरी औरत- मर्दो को रिझाना होगा करम जेल को

पहेली औरत- आरी ये तो किसी मर्द को घास hi नहीं डालती

दूसरी औरत- आरी मैंने बहुत कुछ सुना ह इसके बारे में की ये एक no. की चैनल ह

तीसरी औरत- अरे काकी क्यों खामखा की बात बना रही हो किसी मर्द की मजाल तक नहीं इसी तरफ नजर भी उठा क्र देख ले ये तो लड़ने मरने को तैयार रहती ह और इसका वो सब्द बीटा तुषार देखा उसने भूरा को कैसे उठा लिया था.

पहेली औरत- अरे पता नहीं ये सरे बच्चे राजेश के हैं या किसी और के

दूसरी औरत- अरे मैं तो राजेश को बहुत कमउम्र से देखती आ रही हु मुझे तो लगता था इससे कोई अपनी लड़की कभी न भियायेगी लेकिन पता नहीं इसे क्या दिख उसमे की 6-6 ुलद जान दी उसकी.

तभी अंजलि आ गई राम राम सभी को

सभी एक साथ राम राम अंजलि कैसी ह

अंजलि- अच्छी हु

दूसरी औरत- आज यहाँ कैसे आ गाइट ु तो कभी दिखती hi नहीं.

अंजलि- बस काकी आज कपडे ज्यादा हो गए थे.

फिर अंजलि अपने कपडे धोने लगी. बाकि औरते भी अपना काम निपटा क्र नदी में कूद गई नहाने और नाहा क्र पेड़ के पीछे गीले कपडे बदल क्र गाओं की तरफ चली गई. अब अंजलि अकेली रह गई उसने अपनी साड़ी अपने पेटीकोट में घुसाई और लग गई कपडे धोने कुछ देर बाद जब वो कपडे मणि में धो रही थी तो उसका पेअर फिसल गया और वो नदी में गिर गई और पूरी भीग गई उसकी साड़ी उसके बदन से पूरी चिपक गई. उसके शरीर का एक एक कटाव अलग hi दिखाई दे रहे था.

अंजलि जैसे hi पानी से बहार निकलने की कोशिश करने लगी तो सामने एक आदमी खड़ा था जो अंजलि को घूरे जार है था अंजलि किन अजर जैसे hi उस पैर पड़ी वो डार्क र सहम गई और अपने अंगो को जो पानी में भीगने की वजह से कपड़ो में से अलग hi दिख रहे थे अपने हाथो से छुपाने की कोशिश करने लगी.

ये एक 40 -42 साल का युवक था बहुत hi स्मार्ट लम्बा छोड़ा किसी हीरो की तरह. ये था अजय चंद्रो देवी का सबसे छोटा बीटा जो विदेश में रहता था बचपन से विदेश में hi रहा ह वही पैर शादी क्र लिट् hi इसने.

आज पहेली बार अंजलि की आँखों में किसी के लिए दर देखा था. वो बड़ी बेशर्मी से अंजलि को देखे जा रहा था. अंजलि शमी सी पानी के अंदर hi कड़ी थी. तभी पीछे से आवाज आई जो किसी लड़की की थी. हे अजय व्हाट यू दोंग तेरे? के फ़ास्ट वे अरे लेट.

अजय- यस बेबी ी ऍम किंग.

और अजय अंजलि की तरफ मुस्कुराता हुआ चला गया. अंजलि तुरंत पानी से बहार निकली और कपडे उठा क्र गीले कपड़ो में hi अपने घर की तरफ तेज तेज कदमो से चल दी. और घर आते hi दरवाजा बंद करके अपनी ससे काबू करने लगी उसकी सांसे फुल गाइट hi जिससे उसकी भेज ब्लाउज में तानी हुई चूचिया उप्पेर निचे हो रही थी वो काफी देर तक ऐसे hi कड़ी रही. काफी देर बाद वो शांत हुई और अपने कपडे बदले नाहा तो वो बेचारी ऐसे hi लिट् hi फिर भी थोड़ा सा पानी दाल क्र अपनी रसोई में बैठ क्र hi नाहा ली और तैयार हो गई. जब तक बच्चे स्कूल से नहीं आ गए तब तक उसने दरवाजा नहीं खोला था. सभी बच्चे आ चुके थे. तुषार अंजलि से नज़ारे चुरा रहा था और अंजलि भी थोड़ा सा तुषार से बच रही थी. तुषार को लगा की अंजलि को रात के बारे में पता चल चुक्का ह इसलिए वो मुझसे दूर रह रही ह. फिर रात को पूरा परिवार एक साथ बैठा था तो सचिन और कपिल ने बताया की आज स्कूल में पॉलीटेक्निक के टीचर आये थे. जो बच्चे 10तह में हैं वो ये फॉर्म भर सकते हैं. तो हम दोनों ने वो फॉर्म भर दिया हमारे पास पैसे नहीं थे तो प्रिंसिपल ने दे दिए कल उन्हें देने ह.

राजेश- ये पॉलिटेक्निक क्या ह

सचिन- पता नहीं पापा वो टीचर बोल रहे थे इंजीनियर का करसे ह

राजेश- तुम जानती हो अंजलि इसके बारे में कुछ

अंजलि- है जानती हु ये एक डिप्लोमा करसे ह इंजीनियर बनने की पहेली सीडी ह. लेकिन उसके लिए तुम्हे बहुत महेनत करनी पड़ेगी अगर तुम दोनों टॉप लिस्ट में आओगे तो तुम्हे सरकारी कॉलेज मिल जायेगा जिसमे फीस बहुत काम लगेगी, नहीं तो किसी प्राइवेट कॉलेज में no. आया तो बहुत फीस देनी पड़ेगी जो हम नहीं दे पाएंगे.

कपिल- माँ हम दोनों बहुत महेनत करेंगे और देखना हमारा no. जरूर सरकारी में आएगा.

राजेश- लेकिन ये सरकारी कॉलेज ह कहा

अंजलि- वैसे तो बहुत सरे हैं पैर लखनऊ में सबसे अच्छा ह. अगर तुम दोनों वह no. ले आओ तो तुम्हारे पापा सर गर्व से ुचा हो जायेगा.

सीमा- माँ आपको सब कुछ कैसे पता होता ह आपसे कुछ भी पूछ लो वही बता देती हो. इतनी नॉलेज कहा से ली आपने

अंजलि- बीटा जब मैं पढ़ती थी तो सब कुछ जानने की कोशिश करती थी बस ये नहीं की जो मैं पढ़ रही हु उसी से मतलब राखु.

सभी चुप हो गए राजेश ने छुपी को तोडा और बोलै. बीटा अगर तुम दोनों ने ये क्र दिया न तो सच में मेरी इज्जत बढ़ जाएगी पुरे गाओं में. दोनों bête खड़े हुए और राजेश के पेअर छू क्र बोले पापा हम पूरी जान लगा देंगे इसमें no. जरूर लेकर आएंगे.

अंजलि- है मुझे यकीन ह तुम ले आओगे लेकिन उसके लिए तुम्हे फालतू की किताबे फेंकनी होगी.

अंजलि की ये बात सुनते hi सचिन की साँस अटक गई उसे समझ आ गया उसकी माँ क्या बोल रही ह. वो तुरंत बोलै जरूर माँ अब से बस अपनी hi किताबे पढूंगा. अंजलि खुश हो गई बाकि किसी को कुछ समझ नहीं आया. अंजलि इसलिए खुश थी की उसे कुछ ज्यादा नहीं समझाना पड़ा.

रात को राजेश पड़ोस गाओं में चला गया वह किसी की शादी थी जिसमे उसे कुछ काम मिला था. इधर सोते टाइम तुषार चुप चाप अपनी जगह लेट गया. लेकिन अंजलि के अंदर तो बेचैनी होने लगी वो कुछ देर तो लेती रही. अंजलि को बेचैनी होने लगी तो उसने तुषार को आवाज लगाई बीटा क्या आज अपनी माँ के पास नहीं सोयेगा. अंजलि की आवाज सुनकर तुषार घबरा गया अब वो कैसे मन करे.

अंजलि- टुशु बीटा मैं यहाँ बहार अकेली कैसे सोऊंगी तू मेरे पास hi आ जा.

तुषार मन करना चाहता था लेकिन क्र नहीं पाया और चुप चाप उठ क्र आ गया और लेट गया अपनी माँ के पास. तुषार चुप था तो अंजलि ने hi बात करनी शुरू की

अंजलि- क्या हुआ टुशु आज सुबह से चुप ह

तुषार- आप भी तो नहीं बोली मुझसे

अंजलि- अरे मैं तो इतना बिजी थी फिर उन दोनों भाइयो ने ऐसी खुश खबरि दी की उसी में खो गई. अच्छा तूने फॉर्म क्यों नहीं भरा तू तो उन दोनों से भी होशियार ह.

तुषार- क्योकि मैं आप सब से दूर नहीं रह सकता

अंजलि- अरे मेरा बीटा, और तुषार को अपने गले से लगा लिया जिससे अंजलि की चूचिया तुषार की छाती में डाब गई.

आज अंजलि ने साड़ी नहीं फेनी थी एक मैक्सी फेनी थी वैसे तो पूरी कवर थी लेकिन निचे न ब्लाउज थान ा hi पेटीकोट बस ब्रा पंतय थी. क्या चल रहा था अंजलि के दिमाग में क्योकि अंजलि ऐसी औरत तो नहीं लगती थी जो अपने hi bête के साथ ऐसे हरकत कर जाये.

तुषार को अंजलि की कठोर और भरी चूचियों का अहसास हो रहा था जिससे उसका लुंड खड़ा होने लगा वो खुद को पीछे किये जार है था लेकिन इस चारपाई से बहार कैसे जाये.

अंजलि ऐसी hi उसकी बहो में ख़ामोशी से लेती थी. थोड़ी देर बाद अंजलि ने करवट बदल ली और अपनी गांड तुषार के लुंड के सामने क्र दी. लुंड तो पहले से hi खड़ा था जिससे अंजलि की गांड उस पैर अच्छे से रगड़ गई. अंजलि ने कोई रिएक्शन नहीं दिया जबकि तुषार दर गया था की उसकी माँ उस पैर गुस्सा करेगी लेकिन अंजलि ने तो अपनी गड और पीछे करके उसके लुंड से चिपका दी आज साड़ी नहीं थी निघ्त्य का पतला सा कपडा था लुंड सीधा गांड में घुसता हुआ महसूस हुआ.

दोनों थोड़ी देर तक चुप चाप पड़े रहे. तुषार को जल्दी hi नींद आ गयी लेकिन अंजलि ख़ामोशी से लुंड की गर्मी का अहसास ले रही थी. जैसे hi उसे यकीन हुआ की तुषार सो गया ह उसने तुरंत अपनी छूट में उंगली करना शुरू क्र दिया और तब तक करती रही जब तक झाड़ नहीं गई.

अगले दिन सभी उठे और अपनी अपनी मंजिल की तरफ चले गए. ऐसे hi 4 दिन बीत गए रोज अंजलि तुषार के लुंड का मजा ले रही थी अब तो तुषार को भी अहसास हो चुक्का था की उसकी माँ जान बुझ क्र ऐसा क्र रही ह वो अभी इतना बड़ा नहीं था की सही गलत अच्छा बुरा जान सके जवान लड़का था और अंजलि जैसी बाला की खूबसूरत औरत सामने हो तो बड़े बड़े ऋषियों का भी मन बहक जाये.

अब तो तुषार भी अंजलि से बिलकुल चिपक जाता और अपना लुंड उसकी गांड में घुसा देता. वही दूसरी तरफ सीमा और जांय की प्रेम लीला पूरा परवान चढ़ने लगी थी. दोनों मौका देख क्र कॉलेज से बहार निकल जाते और घूमते फिरते जांय रोज छोटा मोटा गिफ्ट सीमा के लिए लता. एक दिन जांय सीमा को मूवी दिखने ले गया. कसबे में hi पिक्चर हॉल था कुछ खास नहीं था लेकिन कॉलेज के लड़के लड़किया यहाँ बहुत रंगरलिया मनाते थे. सीमा पहेली बार मूवी देखने आई थी वो भी अपने ासिक के साथ.

मूवी स्टार्ट होते hi आस पास के लड़के लड़किया एक दूसरे को चूमने छेद चढ़ करने लगे. जिसका असर सीमा पैर भी हुआ उसके अंदर तो वैसे hi बहुत गर्मी थी वो तो कब से छोड़ना चाहती थी. जांय उसे लाया भी इसी लिए था. कुछ hi देर में दोनों के हॉट एक दूसरे से मिल गए. ये उनका पहला किश था सीमा जल्दी hi हैट गई लेकिन कुछ देर में फिर दोनों शुरू हो गए इस बार जांय ने एक हाथ उसकी कमर पैर रख दिया. जैसे जैसे किश घेरा होता जा रहा था जांय का हाथ सीमा की चुकी की तरफ बढ़ता जार है था.

जैसे hi जांय ने सीमा की चुकी पकड़ी सीमा एक दम पीछे हो गई. जांय को लगा शायद सीमा नाराज हो गई. लेकिन उसकी ये गलत फहमी अगले hi पल दूर हो गई जब सीमा ने खुद उसका सर पकड़ क्र वाइल्ड किश करना शुर किया जांय ने भी तुरंत अपना हाथ उसकी चुकी पैर रख दिया और दबाने लगा. कुछ देर इंटरवल हो गया.

सीमा की आँखे बिलकुल लाल हो राखी थी. उसकी छूट में बढ़ आ चुकी थी वो तुरंत बाथरूम गई वह उसने एक बार अच्छे से अपनी छूट को रगड़ा और बोली चिंता मत क्र मेरी प्यारी तेरी तसली करने के लिए hi तो ये सब कर रही हु और खुद पैर hi है पड़ी.

फिर वापस अपनी सीट पैर बैठ गई और लाइट बंद होते hi फिर दोनों शुरू हो गए इस बार जांय ने सीमा का हाथ पकड़ा और अपने लुंड पैर रख दिया. सीमा ने एक दम पीछे हटा लिया लेकिन जांय ने फिर से पकड़ा और रख दिया इस बार उसका हाथ हटने नहीं दिया कुछ hi सेकण्ड्स में सीमा ने जोर लगाना बंद क्र दिया और जांय के लुंड को फील करने लगी. जांय ने सीमा की चुकी दबनी शुरू क्र दी सीमा पूरी तरह गरम हो चुकी थी उसने जांय के लुंड को कास क्र पकड़ लिया. जांय की आअह्ह्ह निकल गई उसे लगा वो अभी झाड़ जायेगा. उसने सीमा का हाथ हटाना चाहा लेकिन इस बार सीमा ने हाथ नहीं हटाया. और जांय के लुंड ने पिचकारी छोड़ दी.

लुंड ढीला होते hi जांय के अरमान भी ढीले हो गए वो शांत बैठ गया लेकिन सीमा की गर्मी कहा शांत होने वाली थी. उसने फिर किश करने की कोशिश की तो जांय बोलै मूवी ख़तम होने वाली ह बहार षाले हैं यहाँ से. जांय ने सीमा का हाथ पकड़ा और बहार ले आया.
 
अपडेट-5


सीमा का मूड बहुत ख़राब था उसे जो चाहिए था वो मिला नहीं. जांय ने उसे एक गिफ्ट दिलवाया और घर भेज दिया. अब सीमा अकेले hi घर आती थी क्योकि दीपा और रूचि की एक्स्ट्रा क्लासेस चल रही थी. और ये सीमा के लिए अच्छा था ो जांय के साथ मजे ले रही थी वो बात अलग ह की उसे अभी ऐसा कोई मजा नहीं मिला था.

आज रात को राजेश वापस आ चुक्का था तो अंजलि ने तुषार को अपने पास नहीं बुलाया. तुषार बेचारा आज बेचैनी से करवट बदल रहा था बैचैन तो अंजलि भी थी उसे तुषार की लत सी पद गाइट hi इन 4 रातो में. कुछ दिन ऐसे hi नार्मल रहा एक दिन सीमा और जांय को मौका मिल गया अपनी रासलीला मनाने का और ये मौका मिला भी तो गन्ने के खेत में. आज जांय पुरे मूड में था और सीमा भी कोई विरोध नहीं क्र रही थी.


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जांय ने सीमा को चूमना शुरू किया और उसकी चूचिया दबाने लगा. जांय सीमा के कपडे उतरना चाहता था लेकिन सीमा ने मन क्र दिया जांय ने जल्दी जल्दी सीमा की सलवार खोली



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और पंतय के उप्पेर से hi उसकी छूट को रगड़ने लगा सीमा भी जांय के लुंड को रगड़ रही थी. जांय सीमा की जंघे चाट रहा था कभी पंतय के उप्पेर से hi उसकी छूट चाट रहा था सीमा पूरी गरम हो चुकी थी. सीमा ने जल्दी जल्दी जांय की पंत खोलनी शुरू की तो उसका 5 इंच का लुंड सामने आ गया पतला सा लुंड देख सीमा का मन मुरर्झा सा गया क्योकि उसने मेघा के सतह काफी बार पोर्न देखि थी और उसमे जो लुंड देखे उनके सामने तो ये नुन्नी थी. लेकिन छुडास का नशा इतना हावी था की आगे कुछ सोचना बंद क्र दिया.

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जॉनी ने सीमा को वही खेत में लिटाया और अपना लुंड उसकी छूट पैर रगड़ने लगा. छूट तो आग फेंक रही थी जांय ने लुंड छूट पैर रखा और डालने की कोशिश की लेकिन वो फिसल गया. उसने फिर कोशिश की वो अंदाजे से hi लुंड छूट पैर लगा रहा था क्योकि उसे निचे कुछ दिख hi नहीं रहा था ुवो तो सीमा के उप्पेर झुका हुआ था. जब काफी देर बात नहीं बानी तो सीमा ने hi उसका लुंड पकड़ा और अपनी छूट के मुँह पैर लगाया और जैसे hi जांय का लुंड सीमा की छूट से टच हुआ तो छूट की गर्मी और सीमा के हाथ ने ऐसी गर्मी पैदा की की जांय के लुंड ने पिचकारी छोड़ दी.

वो सीमा के उप्पेर गिर गया आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह सीमा अह्ह्ह्हह्हह तू बहुत गरम ह देख मैं पहले hi पिघल गया. जांय ये सब सीमा को खुश करने के लिए बोल रहा था लेकिन सीमा इस टाइम पूरी गरम थी वो बोली जांय ये सब मत करो प्लस मेरी प्यास बुझा दो प्लस जांय आह्ह्ह्हह्ह खड़ा करो न इसे प्लस जल्दी करो.

जांय- अरे ऐसे नहीं होता यार इसे टाइम चाहिए ये तुम लड़कियों की तरह तोडना ह हर टाइम तैयार रहे

सीमा- अगर ये खड़ा hi नहीं हो सकता तो मुझे यहाँ क्यों लाये

जांय- अरे गुस्सा मत करो अभी चलो यहाँ से ये जगह ठीक नहीं ह इसलिए मेरा मूड थोड़ा अपसेट हो रहा था इसलिए जल्दी हो गया अगली बार किसी अच्छी जगह करेंगे तब तुम्हे जन्नत दिखाऊंगा

सीमा अपना मन मसोस क्र उठी कपडे ठीक किये और चुप चाप घर आ गई. घर पैर तुषार अकेला चारपाई पैर लेता अंजलि के साथ बीते रातो को याद करके अपने लुंड को मसल रहा था.


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अब वो अंजलि को माँ से ज्यादा एक कामुक औरत के रूप में देखने लगा था.

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सचिन और कपिल बहार खेलने गए थे. सीमा घर में घुसी तो उसकी नजर तुषार पैर गई जसका हाथ लोअर के अंदर था.

किसी के आने की आहात से तुषार भी घबरा गया और खड़ा हो गया जिस वजह से उसका लुंड जो लोअर फाड् क्र बहार आने को तैयार था किसी मीनार की तरह दिख रहा था.


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सीमा किन अजर सीधे उसके लुंड पैर गई जिसे देख क्र उसका मुँह खुला का खुला रह गया. लेकिन अगले hi पल उसने खुद को सम्हाला और कमरे में चली गई. तुषार ने भी तुरंत अपने लुंड को उप्पेर की तरफ करके अपने लोअर की बेल्ट में फसा लिया.

सीमा मन में- हे ये तुषार कितना बड़ा हो गया ह और इसका तो उसे भी बड़ा हो गया ह. हे कितनी किस्मत वाली होगी इसकी गफ बनेगी एक मैं हु जिसके नसीब में जांय लिखा था. सीम एकपडे उतर क्र कड़ी थी उसके हाथ उसकी चूचियों पैर थे. वो अभी तक गरम थी जांय ने उसे गरम करके भेज दिया था और घर आते hi ऐसा नजारा मिल गया. वो अपनी चूचियों को मसल रही थी तभी बहार से आवाज आई, माँ आप आ गई.

सीमा ने तुरंत कपडे पहने और बहार आ गई. अंजलि घर आ चुकी थी. बाकि का दिन बस ऐसे hi नार्मल काट गया अगले दिन सीमा ने मेघा को सब बताया.

मेघा- यार लगता ह सेल में दम hi नहीं ह, मेरे बर्फ ने तो पहेली बार में hi मेरी सील तोड़ दी थी और एक ये ह की अंदर भी नहीं घुसा पाया.

सीमा- अब मैं क्या करू

मेघा- यार एक बात धयान से सुन चुदाई तो साडी जिंदगी होती रहेगी लेकिन सील किसने तोड़ी कैसे टूटी ये हमेशा याद रहेगा इसलिए इसे ऐसी याद बनाना की जब भी याद करे तो मुँह शर्म से लाल हो जाये.

सीमा- सही बोल रही ह यार लेकिन अब मैं करू तो क्या करू

मेघा- क्या करना ह ये तो बाद में सोचेंगे लेकिन तू इस जांय को अब ऐसा चांस मत देना कही ये गोली वाली खा क्र तेरी सील तोड़ गया तो हमेशा दुःख रहेगा किसी तगड़े मर्द से सील टूटने का मजा नहीं ले सकीय.

सीमा- मुझे ऐसी लुल्ली से नहीं तुड़वानी अपनी सील मुझे तो वो काळा मोठे लुंड पसंद ह जो पोर्न में देखे थे.

मेघा- सुन ये देख तुझे एक चीज दिखती हु ये स्फोरम यहाँ बहुत साडी स्टोरी ह जिन्हे पढ़ क्र मजा आता ह पूरी चुदाई से भरपूर कहानिया ह.

मेघा ने सीमा को बहुत सी कहानिया दिखाई जिनमे से कुछ कुछ लाइन सीमा ने पढ़ी.

सीमा- यार मैं कैसे पढूंगी इन कहानियो को मेरे पास तो फ़ोन भी नहीं ह.

मेघा- तू चिंता मत क्र तू मेरे साथ घर चलना मैं अपने प्रिंटर से तुझे इन कहानियो के प्रिंट दे दूंगी आराम से पढ़ लेना और अपने हाथ से hi अपनी छूट शांत क्र लेना जब तक तुझे कोई ऐसा मर्द न मिल जाये जो तेरी छूट को अचे से फाड् सके.

सीमा के दिमाग में एक दम तुषार का वो मोटा खड़ा लुंड याद आ गया, उसने तुरंत सर को झटका और हम्म्म किया. फिर दोनों क्लास में बिजी हो गई. शाम को सीमा मेघा के पास से कुछ स्टोरीज के प्रिंट ले आई. प्रिंट ा4 पप्पेर पैर थे तो उन्हें हाथ में लेकर सबके सामने पढ़ती भी रहेगी तो किसी को शक नहीं होता सबको नोट्स hi लगते.

सभी के एग्जाम शुरू होने वाले थे तो अंजलि ने घर में रूल बना दिया की घर में आते hi सब पढ़ने बैठ जाया करेंगे और देर रात तक पढ़ेंगे भी सभी बच्चे बस स्कूल कॉलेज से आते hi पढ़ने बैठ जाते थे और दिल लगा क्र पढ़ रहे थे. बीएस एक सीमा hi थी जो पढाई के नाम पैर मेघर की दी हुई स्टोरी पढ़ती रहती थी और गरम होती रहती थी उसे स्टोरी में इतना मजा आने लगा की वो बस उन्ही में खो जाती और उसके दिमाग में बड़ा लुंड बड़ा लुंड परिवार में चुदाई भाई से चुदाई और सबसे ज्यादा वो तुषार का लुंड घूमने लगा. उन स्टोरी का सीमा पैर ऐसा असर हुआ की वो तुषार को अपने ासिक की तरह देखने लगी उसके दिमाग में बस तुषार का hi लुंड घूमता रहता. वो इमेजिन करती रहती कितना बड़ा होगा.


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लेकिन एक तो वो लड़की थी दूसरा उसी बहन तो आगे कैसे बढ़ सकती थी इधर सबके एग्जाम शुरू हो चुके थे तो वो छह क्र भी कुछ नहीं क्र प् रही थी. 1 मोनथस बाद एग्जाम ख़तम हुए तो छुट्टिया शुरू हो गयी. अब सभी घर में रहते लेकिन अंजलि एक प्राइवेट स्कूल में थी तो उसे जाना पड़ता था. इधर सीमा ने कहानी पढ़ पढ़ क्र उनकी कुछ ट्रिक तुषार पैर अपनानी शुरू क्र दी वो झुक झुक क्र अपनी चूचिया तुषार को दिखने की कोशिश करती.


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तुषार के दिमाग में तो पहले से hi उसकी माँ अंजलि चाय हुई थी वो बस अंजलि को को ताड़ता रहता. और मौका देख क्र अपना लुंड मसलता रहता. इधर दीपा के अंदर पहले से hi हलचल थी उसी कोई खास शैली भी नहीं थी जिससे वो ये सब बाते क्र सके. उसे बहुत कुछ जानना था लेकिन बताने वाला कोई नहीं था. वैसे तो अंजलि सबको बहुत ओपन रखती थी लेकिन कोई भी सीधे जाकर अपनी माँ से ये तो नहीं पूछ सकता की चुदाई कैसे होती ह.

सचिन और कपिल के दिमाग बस पढाई में लगे हुए थे अब उनके एग्जाम का दिन भी आ गया जिसके लिए उन्हें सिटी जाना था तो तय हुआ की तीनो भाई एक साथ जायेंगे उन्हें वह रात को पहुंचना पड़ेगा एग्जाम सुबह 8 बजे शुरू हो जायेगा तो उन्होंने रात में कसबे से ट्रैन पकड़ी और शहर आ गए.

आज पहेली बार घर में औरते अकेली थी राजेश तो बहार लेट गया अंजलि बेटियों के पास लेट गई आज उसे मौका मिला बेटियों से बात करने का.

अंजलि- मैं तुम तीनो से कुछ बात करना चाहती हु.

रूचि- है माँ बताओ

अंजलि- देखो तुम तीनो जवान हो चुकी हो और तुम्हे इस उम्र में कुछ जरूरते भी होंगी तो मुझे अपना दोस्त समझ क्र hi बात करना कुछ भी मत छुपाना.

तीनो बहन एक साथ बोली हम तो कुछ नहीं छुपाते .

अंजलि- मैं जो पूछने जा रही हु वो कोई माँ नहीं पूछती.

तीनो घबरा गई उनकी माँ ऐसा क्या पूछने वाली ह

अंजलि- तुम तीनो प्यार के बारे में क्या सोचती हो

सीमा- माँ ये कैसा सवाल हुआ

अंजलि- सीधा सवाल ह बीटा एक लड़के और लड़की के बिच प्यार के रिश्ते के बारे में क्या सोचते हो.

रूचि- माँ मुझे किसी लड़के में कोई इंट्रेस्ट नहीं ह

अंजलि- ऐसा क्यों क्या तुझे लड़को को देख क्र अट्रेक्शन नहीं होता

रूचि- नहीं माँ मुझे किसी को देख क्र अट्रेक्शन नहीं होता और मेरे भाइयो से ज्यादा स्मार्ट लड़के पुरे गाओं में नहीं ह फिर कोई कैसे पसंद आये. और पूरा गाओं इतनी गन्दी नजर से देखता ह की मन करता ह सबकी आँख फोड़ दू

अंजलि- लेकिन बीटा भाई से शादी तो नहीं होती न हर लड़की को एक साथी की जरुरत होती ह.

दीपा- माँ ऐसा क्यों होता ह क्यों चाहिए हमे साथी

अंजलि- देखो बीटा जब लड़का लड़की जवान होते हैं तो उनके अंदर बहुत बदलाव आते हैं . और बहुत सी जरुरत बढ़ जाती ह जिससे मस्टरबैशन करने लगते हैं नहीं तो लड़को की तरफ अत्त्रक्ट हो जाते हैं.

सीमा- माँ क्या किसी की तरफ अत्त्रक्ट होना गलत ह

अंजलि- नहीं बीटा बिलकुल गलत नहीं ह लेकिन ये देखना जरुरी ह की क्या वो तुम्हारे लायक ह या नहीं. अगर तुम्हारी चॉइस गलत हो गई तो तुम किसी और को ढूंढोगे अगर वो भी सही न हुआ तो कब तक ढूंढोगे

सीमा- माँ जिस लड़के से माँ बाप शादी करवाते हैं अगर वो भी सही न निकले तो क्या होगा

अंजलि- तो भी लाइफ बर्बाद हो जाती ह

दीपा- माँ ऐसा क्या होना चाहिए जो सही साथी बन सके

अंजलि- बीटा कुछ क्वालिटीज़ होती ह जैसे पहेली वो इस काबिल हो की आपको अच्छा खाना अच्छा पहना अच्छा जीवन दे सके. दूसरा आपसे से प्यार करे सम्मान करे तीसरा आपको बिस्टेर पैर खुश रखे.

अंजलि की बात सुनकर तीनो शर्मा गई.

अंजलि- इसमें शर्माने की क्या बात ह मैंने आज तक तुम्हे शर्माना सिखाया ह क्या. अपने मन की बात खुल क्र रखो

सीमा- माँ ये कैसे पता चलेगा की वो बिस्टेर पैर खुश रख पायेगा या नहीं.

अंजलि- है ये hi सबसे बड़ी प्रॉब्लम होती ह बिना टेस्ट करे कैसे पता चलेगा की वो हमे खुश रख सकता ह या hi.

सीमा- माँ खुश करने के लिए क्या चाहिए

अंजलि- पहले तो उसका साइज इस लायक होकि तसली क्र सके. दूसरा उसकी टाइमिंग लबे समय तक सुख सके.

रूचि- माँ मुझे नहीं सुन्नी ये सब गन्दी बाते

अंजलि- अच्छा जी जब तेरी शादी होगी तेरा पति तेरी लेगा जब गन्दी नहीं लगेगी तुझे.

रूचि- मुझे नहीं करनी शादी मैं अपने भाइयो से hi शादी क्र लुंगी फिर कोई hi लेगा मेरी.

जोश जोश में ये क्या बोल गई रूचि जिसका अहसास होते hi उसने अपने मुँह पैर हाथ रख लिया.

अंजलि कहा रुकने वाली थी.

अंजलि- शादी के बाद कोई लड़का नहीं बक्शता लेगा तो वो भी

रूचि- माँ क्या बोलती हो तुम भी सोने दो मुझे.

Anjali-achha ठीक ह. मजाक नहीं सीरियस बात अगर तुम्हारी लाइफ में कोई ह कोई बर्फ कोई दोस्त तो मुझे बता सकती हो मैं तुम्हारी हेल्प hi करुँगी.

तीनो ने एक साथ न कहा कोई नहीं ह हमे कोई चाहिए भी नहीं. यहाँ सीमा झूट बोल गई.

अंजलि ने ok कहा और सब सोने लगे.

अगला दिन सबका बड़ा बोरियत भरा कटा क्योकि तीनो लड़के बहार थे घर में रह क्र बोर हो जाते गरीबी में इंसाने के पास करने को कुछ नहीं होता न मनोरनजन का साधन न कही घूमना छोटा सा घर न hi अलग कमरा.

एग्जाम देकर तीनो वापस आये सभी खुश थे शहर जो देख क्र आये थे ऐसी ऐसी लड़किया जिन्होंने इतने टाइट टाइट कपडे पहने थे की ेके क अंग अलग दिख रहा था. तुषार के दिमाग में तो बस अंजलि थी जैसे जब एक लड़का जवान होता ह तो उसका दिल किसी हेरोइन या लड़की पैर आ जाता ह और वो उसके लिए दीवाना हो जाता ह न उसके अलावा कुछ सूझता ह न समझ आता ह.

ऐसा hi हाल सीमा का था उसके दिमाग में तुषार घूम रहा था बस. लेकिन इस घर में कहा मौका मिलता तो पूरी छुट्टिया ऐसे hi तड़पते हुए काट गई. और सबसे पहेली खुश खबरि आई की दोनों भाइयो का पॉलिटेक्निक में no. आ गया लखनऊ सरकारी कॉलेज में. ये सबसे बड़ी ख़ुशी की बात थी ये खबर पुरे गाओं में फ़ैल गई पूरा गाओं अचंभित था. राजेश का सीना गर्व से फुला नहीं समां रहा था. इधर तुषार ने 10तह में टॉप किया था. पुरे परदेश में ये और भी ख़ुशी का दिन था. दीपा भी 12तह में बहुत अच्छे no. से पास हुई. सरे बच्चो ने नाम रोशन क्र दिया राजेश और अंजलि का पुरे गाओं में चर्चे हो gaye.khudh चंद्रो देवी बधाई देने आई राजेश के घर.

फिर दोनों भाई लखनऊ चले गए वही हॉस्टल में सिफत हो गए. दीपा और सीमा एक hi कॉलेज में आ गए. सीमा ने जांय से मिलना बंद क्र दिया. दीपा को सीमा और जांय के बारे में पता चल गया तो सीमा को बताना पड़ा सब कुछ धीरे धीरे दीपा और सीमा पूरी तरह ओपन हो चुके थे दोनों बहाना से ज्यादा दोस्त बन गए थे.

एक दूसरे के सरे राज खुल गए थे एक दूसरे के सामने ये भी की सीमा तुषार पैर लाइन मर रही ह. और दीपा ने सचिन को मुठ मरते देखा था. इन दोनों के बिच बाते अब लिमिट से बहार थी बहेनो वाली नहीं थी.

सीमा- यार दीपू मेरी छूट बहुत प्यासी ह मैं खुद को कण्ट्रोल नहीं क्र प् रही हु.

दीपा- क्र भी क्या सकते हैं हम हालत तो मेरी भी यही ह लेकिन किसके पास जाये. वैसे तो गाओं का हर लड़का हमारे उप्पेर चढ़ना चाहता ह लेकिन मम्मी पापा की बदनामी हो जाएगी वैसे भी पापा की बहुत इंसुल करते ह ये गाओं वाले.

सीमा- है यार मुझे ये जांय मिला था तो सेल में दम hi नहीं ह, और मैं अपनी सील ऐसे टुटपुँजियो से नहीं तुड़वाना चाहती.

दीपा- तो शादी का इंतजार क्र फिर

सीमा- मुझसे नहीं होता इंतजार मेरी गर्मी मुझे रुकने hi नहीं दे रही. मेरा तो मन करता ह किसी दिन तुषार को पटक क्र उसके उप्पेर चढ़ जाऊ.

दीपा- वो भाई ह हमारा साली भाई बहन का रिश्ता तो बकश दे

सीमा- क्या भाई क्या बहन लुंड को दिमाग नहीं होता और छूट की आँख नहीं होती जो ये देखा कोण किसका ह

दीपा- तू तो बहुत गाड़ी हो गई ह सीमा ऐसा नहीं होता.

सीमा- होता ह यार ऐसा भी होता ह ये देख ये कहानिया पढ़ना और बताना क्या होता ह क्या नहीं

दीपा- लेकिन वो अभी छोटा ह.

सीमा- छोटा अगर उसका देख लिया न चीख निकल जाएगी फाड् देगा वो पूरी

दीपा- तूने कब देखा

सीमा- खुला नहीं देखा कपड़ो के उप्पेर से hi देखा था एक बार जब से देखा ह कुछ और दिख hi नहीं रहा.

दीपा- यार मैंने तो सचिन का देखा था बहुत बड़ा था

सीमा- सच में, लेकिन मुझे लगता ह तुषार का ज्यादा बड़ा होगा

दीपा- नहीं सचिन का बड़ा होगा

सीमा- चल लगी शरत

दीपा- कैसी शरत.

सीमा- अगर तुषार का बड़ा हुआ तो तू मेरी मदद करेगी तुषार से छोड़ने में.

दीपा- तू पागल ह क्या मैं क्यों कृ मदद और भाई से कोई कैसे चुद सकता ह.

सीमा- यार तू मुझे ये भाई बहन का लैक्टुरे मत दे. तुषार मेरे दिल दिमाग में बस चुक्का ह मैं उसे पाकर hi रहूंगी चाहे कुछ भी हो जाये. और शरत तो लगा शरत लगाने से क्यों दर रही ह

दीपा- मैं नहीं डर्टी किसी से ठीक ह लगी शरत. लेकिन देखेंगे कैसे

सीमा- ये तो किस्मत पैर निर्भर ह शायद वो भी ऐसे hi मुठ मरता दिख जाये या गलती से नंगा दिख जाये.

दीपा- अच्छा छोड़ ये सब जब दिखना होगा दिख जायेगा.

सीमा- मैं कुछ जुगाड़ लगाती हु

दोनों ऐसे hi बात करती हुई घर आ गई इन दोनों की इतनी पत्नी लगी की ये दिनभर आपस में hi बात करती रहती सीमा के दिमाग में बस सेक्स भरा था ो मौका मिलते hi सेक्स की बाते करती रहती सेक्स बुक्स पढ़ती रहती.

वही अंजलि भी तुषार के लिए बैचैन थी उसके दिमाग में भी तुषार का मोटा लुंड बैठ चुक्का था. वो बहुत प्यासी थी उसे भी सेक्स की बहुत जरुरत थी और वो क्यों थी राजेश के होते हुए भी वो क्यों प्यासी थी ये आगे पता चलेगा, लेकिन वो किसी गैर मर्द के पास नहीं जा सकती थी इससे राजेश की बदनामी होती अपना बीटा hi उसे सही ऑप्शन लगा लेकिन वो खुद कैसे कहे की वो तुषार से छोड़ना चाहती ह.

एक दिन रूचि अपनी माँ से बोली माँ हम लोग कही घूमने नहीं जा सकते क्या

अंजलि- क्यों नहीं जा सकते बता कहा जाना ह

रूचि- माँ हमारे पास इतनी पैसे तो ह नहीं हम कही घूम आ सके लेकिन हम सब यहाँ गाओं से दूर कही नदी किनारे षाले ह इस संडे को.

अंजलि को बड़ा दुःख हुआ की वो अपने बच्चो को ऐसा जीवन नहीं दे पाई जिसमे वो अपने मन का जीवन जी सके. अंजलि ने है क्र दी तो तय हो गया की संडे को सभा गाओं से दूर नदी किनारे पिकनिक मनाएंगे.



जल्दी hi संडे भी आ गया, अंजलि ने सुबह जल्दी से खाना बनाया और पैक क्र लिया तीनो लड़कियों ने भी अपने कपडे पैक किये तुषार को तो बस एक अंडर वियर और टॉवल रखना था. राजेश हमेश ाकि तरह अपने काम पैर चला गया.
 
आप बहुत बारीकी से स्टोरी को पढ़ते हो और वैसे hi उस पैर कमेंट देते हो अच्छा लगता ह जब कोई इतना मन से कहानी पढता ह, अंजलि की सोच उसके हालातो की वजह से ह और दुनिया में हर इंसान की सोच उसके हालत के हिसाब से होती ह किसी को प्यार में बस हवस दिखती ह तो किसी को पूरी दुनिया, कुछ राज ऐसे होते हैं जो बच्चो से भी छुपाने पते ह सही वक़्त आने तक जब तक वो उन हालातो को समझ न सके

बहुत बहुत धन्यवाद
 
अपडेट- 6






जब तक गाओं में उजाला होता पूरा परिवार गाओं से काफी दूर घने जंगल के पास पहुंच गए नदी किनारे hi अपना डेरा दाल लिया और बैठ गए उगते सूरज को देखने. क्या सूंदर नजारा था सबके चेहरे पैर बड़ी सकूं भरी मुस्कान थी,


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फिर शुरू किया अपना पिकनिक सबसे पहले तय हुआ की सभी चुपम छुपाई खेलेंगे पैदा में, अंजलि भी उनके साथ शामिल थी. कोई कह hi नहीं सकता था अंजलि इतने बच्चो की माँ ह.

सीमा बार बार तुषार के पास छुपने का मौका देख रही थी एक पेड के पीछे दो इंसाने कैसे चुप सकते थे तो सीमा तुषार से चिपक जाती कभी अपनी चूचिया उसकी छाती में दबा लेती कभी अपनी गांड उसके लुंड पैर रगड़ देती, तुषार का लुंड सर उठाने लगा था.


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तुषार मन में- ये क्या हो रहा ह दीदी ये सब क्यों क्र रही ह क्या दीदी मेरे साथ वो सब करना चाहती ह, क्या एक बहन अपने भाई के साथ वो सब क्र सकती ह. जब मेरे जैसा बीटा अपनी माँ के साथ वो सब क्र सकता ह तो बाकि किसी को क्या कहु. क्या पता दुनिया में ऐसा hi होता हो.

हैट मैं क्यों सोच रहा हु जब वो खुद मेरे पास आ रही ह तो मुझे क्या प्रॉब्लम ह,

दूसरा मन – यार वो तेरी बहन ह अगर उसके साथ कुछ क्र दिया तो उसकी शादी कैसे होगी.

हवस से भरा मन- अगर तूने कुछ नहीं किया तो कोई और क्र देगा अगर बहन में इतनी गर्मी ह और वो खुद आना चाहती ह तू मन करेगा तो किसी और के पास चली जाएगी फिर तो बदनामी का भी दर ह घर की बात घर मर hi रहेगी.

उसने अपने दिमाग को झटका और बोलै देखा जायेगा जो होगा बस मजा ले.

तुषार ने भी सीमा के साथ हरकत करनी शुरू क्र दी. दीपा का पूरा धयान सीमा पैर hi था सीमा की हरकत से वो भी गरम होती जा रही थी. काफी देर खेलने के बाद जब धुप काफी तेज हो गई तो अंजलि बोली की अब पहले सब मिलकर कपडे धोयेंगे फिर नाहा क्र खाना खाएंगे.


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गरीबो का पिकनिक भी ऐसा hi होता ह वो उसमे भी काम ढूंढ लेते ह. तो सभी लग गए कपडे धोने. तुषार पानी के अंदर घुस गया बाकि चारो लेडीज कपडे धोने लगी और तुषार की तरफ फेंक देती तुषार उन्हें अच्छे से पानी में निकल देता. तभी अंजलि ने एक ब्रा तुषार की तरफ फेंकी तुषार ने उसे पकड़ा और थोड़ा शोकेड सा ब्रा को देखता रहा.


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अंजलि- देख क्या रहा ह निकल न पानी में अच्छे से निचोड़ना

ब्रा तुषार के हाथ में देख क्र तीनो बहाना शर्मा गई. लेकिन अंजलि ने कोई झिजक या शर्म नहीं दिखाई.

तुषार धीरे से पानी के अंदर करके उसे धोने लगा ब्रा इतनी शॉट थी की उसे चुने से hi तुषार का लुंड खड़ा होने लगा.


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तभी अंजलि ने एक पंतय उसे दे दी.

पंतय बड़ी छोटी सीट hi वो बड़े अचम्बे से देख रहा था उसके घर में इतनी छोटी गांड किसकी ह जिसे इतनी सी पंतय आ जाएगी.


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अंजलि- शर्मा क्यों रहा ह ये हमारी अंडर गारमेंट्स हैं टब hi तो फेंटा ह अंडर वियर और बनियान मैं या तेरी बहन भी तो धोते हैं तेरे अंडर वियर तो तुझे क्या प्रॉब्लम हो रही ह हमारे अंडर गारमेंट्स धोने में कपडे hi तो ह इतना क्यों शर्मा रहा ह. और तुम तीनो ऐसे क्यों है रही हो. इसमें हसने और शर्माने की तो कोई जरुरत नहीं ह हम सब एक छोटे से घर में रहते हैं तो ये सब छुपाना न तो संभव ह न hi जरुरी और तुम सब के बहार कोई दोस्त नहीं ह अगर तुम एक दूसरे के दोस्त नहीं बनोगे तो अकेले पद जाओगे. इसलिए भाई बहन से पहले दोस्त बनो और ये सब नार्मल चीजे हैं तुम यहाँ गाओं में रहते हो तो तुम्हे लगता ह की ये hi दुनिया ह जब बहार निकलोगे तो खुद को बहुत पीछे पाओगे इसलिए आगे बढ़ो और ये सब फालतू की शर्म छोड़ो.

अंजलि की बात सुनकर तुषार बिना किसी झिजक के अच्छे से उन्हें धोने लगा लेकिन सीमा दीपा और अंजलि तीनो की छूट गीली हो चुकी थी. अंजलि अपने बच्चो के बिच बहुत ओपन रखना चाहती थी उसे अंदाजा था की सब किसी और दिशा में भी जा सकता ह लेकिन वो आगे hi बढ़ रही थी.

जब सरे कपडे धो गए तो सभी सूखने चल दिए तुषार जैसे hi बहार निकला तो उसका लोअर उसे जांघो से चिपक गया जिससे उसका लुंड साफ दिखने लगा जो पूरी तरह खड़ा तो नहीं था लेकिन जितना भी खड़ा था बड़ा खतरनाक लग रहा था सीमा की तो नजर hi अटक गई उस पैर सीमा hi क्या इस बार तो चारो लेडीज किन अजर वही थी. रुचे ने तुरंत नजर हटाई और काम में लग गई. सीमा बस उसे घूरे जा रही थी दीपा चुप चुप क्र देख रही थी अंजलि एक दम नार्मल थी.


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कपडे सूखने के बाद नहाने का प्रोग्राम हुआ तो तुषार ने कपडे निकले और अंडर वियर में आ गया. अंजलि ने अपनी साड़ी निकल क्र रख दी, तीनो लड़किया सूट सलवार में hi पानी में घुस गई, पानी में घुसते hi सबके कपडे उनके शरीर से चिपक गए.

और जैसे hi पहेली डुबकी लगा क्र उप्पेर आई तो रूचि का सूट डार्क कलर का था जिसमे कुछ पता नहीं चला वही दीपा ने ब्रा के साथ समीज भी फेनी थी. जो भीगते hi अलग दिखने लगी लेकिन कुछ खास पता नहीं चल रहा था लेकिन जैसे hi तुषार किन अजर सीमा पैर पड़ी उसकी आंके बड़ी हो गई सीमा का सूट पूरा उसे चिपक गया था उसका सूट तो दिख hi नहीं रहा था ऐसा लग रहा था जैसे वो बस ब्रा में कड़ी हो उसके ब्रा से आधे चुके दिख रहे थे. तुषार के लुंड ने फुंकार मारनी शुरू क्र दी. वही जान अंजलि पैर नजर पड़ी तो उसका ब्लाउज पानी में भीगने से और निचे हो गया जिससे उसकी भरी भरी चुहिया दिखने लगी. अंजलि का पैतकत पानी में तैर रहा था मतलब निचे उसकी टंगे बिलकुल नंगी थी. वो तो पानी कमर से उप्पेर था इसलिए निचे का कुछ दिखना आसान नहीं था. तुषार का लुंड फटने को तैयार था.


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अपने घर के 4-4 ऐसे जबरदस्त आइटम जो पुरे गाओं के लुंड खड़ा रखती ह वो इस हालत में तुषा रके समाने थी. वो बेचारा क्या क्र सकता था. तभी सीमा तैरने लगी और तुषार के नजदीक आ गई और उसे चिकोटी काट ली तुषार की तंत्र टूटी उसने भी लपक क्र सीमा को पकड़ लिया और पीछे से अपनी बहो में भर लिया जिससे उसका खड़ा लुंड सीमा की गांड में घुस गया कपडे तो पहले से hi गीले थे तो ऐसा लगा जैसे लुंड सीधा गांड से टकराया हो इतना मोठे लुंड का अहसास होते hi सीमा और गरम हो गई और अपनी गांड उसके लुंड पैर और दबा दी जैसे hi तुषार को स्की गांड का अहसास हुआ तो उसने सीमा को ढीला छोड़ दिया सीमा तूअंत निकल गई भाग गई.


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रूचि भी भाग भाग क्र सभी को छेद रही थी दीपा बड़े आराम से नाहा रही थी. अंजलि भी तैरती हुई तुषार के पास आई तो उसका हाथ गलती से या जानबूझ क्र तुषार के लुंड पैर लग गया. अंजलि ने तुषार की तरफ देखा और मुस्कुरा दी पहले तो तुषार दर गया लेकिन अंजलि की मुस्कराहट देख क्र मुस्कुरा दिया.

सीमा बार बार तुषार के पास जाकर कभी अपनी चूचिया रगड़ देती कभी अपनी गांड उसके लुंड से रगड़ देती तुषार ने भी मोके का फायदा उठाना शुरू क्र दिया वो भी भी सीमा की गांड पैर हाथ घुमा देता कभी उसकी सुचिया दबा देता. आग दोनों तरफ बराबर लग चुकी थी बस मौका चाहिए था. वही एक दो बार अंजलि ने भी अपनी गांड तुषार के लुंड पैर रगड़ दी. काफी देर नहाने के बाद जैसे hi बहार निकलने की बात आई तो तुषार बोलै तुम लग चलो मैं अभी आता हु. उसका लुंड खड़ा था ो कैसे बहार आता.

जिसे अंजलि समझ गई थी वो मुस्कुराई ठीक ह तू नाहा ले हम कपडे बदलते हैं. वो चारो पानी के बहार निकल क्र पैदा की तरफ जाने लगी तो तुषा रकि नजर भीगे कपड़ो में हिलती हुई भरी भरी गांड पैर चली गई जिससे कपडे पुरे चिपके हुए थे साइड से उन सबकी पंतय अलग hi दिखाई दे रही थी वही अंजलि का पेटीकोट उसकी गंडमें hi घुस गया. जब तक वो चारो दिखती रही तुषार उन्हें घूरे hi जार है था ो पानी के अंदर अपने अंडर वियर में हाथ दाल क्र लुंड को मसल रहा था. तभी अंजलि ने पीछे मुद क्र देखा तो उसने एक hi पल में पकड़ लिया की तुषार क्या घुस रहा ह और पानी में क्या क्र रहा ह वो मुस्कुराती हुई चली गई.


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तुषार ने खुद को शांत किया और बहार आ गया तब तक चारो लेडीज कपडे बदल चुकी थी, फिर तुषार ने भी कपडे बदले और सबने एक साथ खाना खाया और वही घास पैर लेट क्र बाते करते हुए सो गए.

तुषार और सीमा की बाते आँखों hi आँखों में चल रही थी जिस पैर दीपा की नजर थी. शाम तक वो सब वही रहे और मस्ती करते रहे और अँधेरे में घर आ गए. घर आते hi सीमा ने दीपा से पूछा क्यों देखा उसका कितना बड़ा ह

दीपा- देखा तो नहीं पैर बड़ा तो काफी लग रहा था

सीमा- अरे जो कपडे में से इतना बड़ा लग रहा था सच में तो बहुत बड़ा होगा.

दीपा- क्या पता कपडे की वजह से बड़ा लग रह अहो.

सीमा- तू नहीं मानेगी सामने से hi देखेगी चल ठीक ह जल्दी hi तुझे सामने से दिखा दूंगी.

अगले 3 दिन सब नार्मल रहा बस मौका मिलते hi सीमा तुषार को छेद जाती या तुषार उसकी गांड शेला देता, एक दिन सीमा ने तुषार से कहा की कल मैं कॉलेज से छुट्टी करुँगी टब hi रुक जाना.

तुषार- लेकिन माँ को शक हो गया तो.

सीमा- ठीक ह तू स्कूल जाना और जल्दी ह वापस आ जाना

तुषार- कही पकडे गए तो

सीमा- कुछ नहीं होगा तू बस जैसा मैं का रही हु वैसा hi करना.

तुषार मान गया सीमा ने दीपा को बताया की वॉक अल तुषार के साथ कुछ करने वाली ह. दीपा शोकेड हो गई कैसे करेगी. सीमा ने दीपा को प्लान समझाया रु बोली की कॉलेज से जल्दी निकल आना कल और आकर चुप जाना और देखना कोई शोर मत करना बस. दीपा भी मान गई.

रात को तीनो hi बड़े बैचैन थे किसी को नींद नहीं आ रही थी दीपा को एक्सिटमेंट थी की वॉक अल तुषार का बड़ा लुंड देखेगी, वही सीमा को बड़े लुंड से छोड़ने की जल्दबाजी थी और तुषार उसे तो पहेली बार चुदाई का सुच मिल सकता था उसका लुंड तो बैठ hi नहीं रहा था.

जैसे तैसे करके नींद आई बेचारो को और अपने प्लान के अनुसार सीमा ने बोलै उसके पेट में दर्द ह वो आज कॉलेज नहीं जा पायेगी. तो अंजलि ने कहा की अकेले घर में कैसे रहेगी दीपा टब hi रुक जा. दीपा का नाम सुनते hi तुषार को चिंता हो गई वो तुरंत बोलै मैं रुक जाऊंगा वैसे भी मेरी अभी क्लासेस ठीक से स्टार्ट भी नहीं हुई. अंजलि ने कहा ठीक ह. दीपा तू आज जल्दी आ जाना और सीमा की मेडिसिन ले आना. और रूचि तू छुट्टी के बाद मेरे स्कूल आ जाना हम दोनों साथ आ जायँगे.

सीमा और दीपा और तुषार की तो किस्मत hi खुल गई तीनो एक दम खुश हो गए. फिर सभी निकल गए, सीमा थोड़ी देर लेती रही उसका पूरा शरीर कैंप रहा था ो बहुत एक्सीटेंड थी लेकिन एक घबराहट भी थी, वो बस कूद क्र उठना चाहती थी और तुषार से लिपटना चाहती थी, लेकिन शरीर इतना भरी सा हो गया था की उस पैर उठा hi नहीं जार है था, वही तुषार घर के बहार बैठा था ो बस ये hi सोचे जार है था आगे क्या होगा.

वो अंदर कैसे जाये उसे लग रहा था उसे पैरो में जान hi नहीं ह उसका लुंड ख़ुशी से बैठ hi नहीं रहा था. लेकिन हिम्मत वो बिलकुल ख़तम थी, दोनों एक दूसरे का वेट क्र रहे थे, सीमा का जांय के साथ वो सब करना आसान था ो उसे बर्फ था और शुरुआत भी जांय ने hi किट hi लेकिन अपने भाई के साथ ये सब करना वो भी छोटे भाई के साथ हिमायत तो उसकी भी जीरो थी.

दोनों hi अनादि थी थे ये भी नहीं पता था शुरू कैसे करे, अब सीमा ने hi बीड़ा उठाया आगे बढ़ने का उसने हिम्मत जूता का बहार आई और तुषार को आवाज लगाई

सीमा- टुशु अंदर आजा बहार क्यों बैठा ह.

तुषार- आया दीदी बस ऐसे hi बैठा था आपको कुछ चाहिए क्या

सीमा- तू अंदर तो आ जा

तुषार उठा और अंदर चला गया,

सीमा- आजा यही मेरे पास लेट जा

तुषार ने भी कोई विरोध किये बिना चारपाई पैर उसके पास लेट गया. दोनों के शरीर एक दूसरे से टकरा रहे थे, तुषार शांत लेता था सीमा ने आगे बढ़ने का सोचा और उसके सर पैर हाथ घूमने लगी जिससे उसकी एक चुकी तुषार के साइन से रगड़ने लगी. कुछ देर बाद उसने अपना हाथ तुषार के साइन पैर रख क्र अपनी एक जांघ तुषार की जांघो पैर राखी और उसे चिपक गई, सीमा की दोनों चूचिया तुषार से रगड़ने लगी.


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तुषार का लुंड पूरी तरह अकड़ चुक्का था सीमा ने अपना पेअर उप्पेर की तरफ बढ़ाना शुरू किया और बी उसका घुटना तुषार के लुंड के उप्पेर था, जिसे वो हलक हल्का रगड़ रही थी, तुषार पूरी तरह गरम हो चुक्का था उसने भी एक हाथ सीमा की जांघ पैर रख क्र हलके हलके दबाने लगा.

कुछ देर ऐसे hi रहने के बाद सीमा ने तुषार का हाथ पकड़ क्र सीधे अपनी गांड पैर रख दिया, ये सीमा ने बड़ा कदम उठाया था तुषार ने भी उसकी गांड को मुट्ठी में भर लिया सीमा के मुँह से आह निकल गई. तुषार ने तुरंत सीमा को खींच क्र अपने से चिपका लिया और अपने हॉट उसके गलो पैर रख दिए, सीमा ने भी तुषार के सर में हाथ डाला और उसके बालो को कास क्र पकड़ लिया और उसकी गार्डन चूमने लगी चूमने क्या काटने लगी,

सीमा ने दूसरा हाथ तुषार के लुंड पैर रख दिया और पूरी ताकत से मुठी में भर लिया, तुषार के मुँह से आ निकल गई फिर सीमा ने तुषार का सर पकड़ा और अपनी चूचियों पैर रगड़ने लगी, सीमा ने जल्दी से तुषार की शर्ट निकल दी और उसकी पंत भी खोलने लगी तुषार सीमा की कमर पैर हाथ घूमता रहा, पंत के खुलते hi सीमा ने अपना कुरता निकल फेंका और सलवार भी खोल दी, और चार पाई पैर लेट गई और बोली.


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टुशु जल्दी क्र चढ़ जा मेरे उप्पेर, ये पहला वर्ड था इन दोनों के बिच तुषार सीमा के उप्पेर आ गया और उसके गले को चूमने लगा और अपने हाथ से उसकी चुकी दबाने के लिए जैसे hi उसने अपना हाथ सीमा की चुकी पैर रखा तो सीमा ने उसका हाथ हटा दिया और बोली ये सब नहीं तू सीधे निचे दाल.

तुषार को थोड़ा बुरा लगा तो वो पेट को चूमता हुआ निचे जाने लगा तो सीमा जोर से बोली तूने सुना नहीं जल्दी से निचे के कपडे निकल और अपना हतियार दाल अंदर,

तुषार- दीदी ऐसे तोडना होता ह

सीमा- तुझे ज्यादा पता ह कैसे होता ह जैसे मैं बोल रही हु वैसे क्र

तुषार- दीदी इसमें क्या मजा आएगा

सीमा- मुझे आज तक नहीं पता मजा क्या होता ह तुजे अभी से पता चल गया कैसे मजा लेते हैं

तुषार- दीदी मेरे स्कूल में बहुत लड़को के पास मोबाइल ह मैंने उसमे देखा ह प्यार कैसे होता ह.

सीमा- चीला क्र कुत्ते तू यहाँ प्यार करने आया ह क्या प्यार करने के लिए मैं तेरी गर्लफ्रेंड नहीं हु बहन हु बहन से प्यार करेगा तू.

अब तुषार को गुस्सा आ गया था

तुषार- बहन से प्यार नहीं क्र सकते लेकिन ये सब क्र सकते हैं

सीमा- अरे पगले ये तो बॉडी की जरुरत ह तेरी भी और मेरी भी तो इसमें भाई बहन जैसा कुछ नहीं होता लेकिन प्यार करने में समाज क्या कहेगा

तुषार- दीदी आप हवस में अंधी हो चुकी हो आपको समझ भी आ रहा ह आप क्या बोल रही हो. जहा प्यार नहीं होता वो रिश्ता नाजायज होता ह अगर प्यार भाई बहन का भी हो तो रिश्ता जायज मन सकते हैं बिना प्यार के तो बस हवस ह.

सीमा- ोये भेनचोद तू मुझे छोड़ रहा ह या नहीं ये भाषण मत दे

सीमा की ऐसी लैंग्वेज सुन क्र तुषार का मुँह खुला रह गया.

तुषार- दीदी ये आप क्या बोल रही हो आप गली देती हो

सीमा- देख टुशु भाई मैं इस टाइम बहुत गरम हु मुझे समझ नहीं आ रहा मैं क्या बोल रही हूत ु बस मुझे ठंडी क्र दे तू जो कहेगा मैं वो करुँगी हमेशा तेरी गुलाम रहूंगी तू जहा बोलेगा तेरे निचे लेट जाउंगी तू बस अभी मुझे ठंडा क्र दे

तुषार- दीदी ये गलत ह मैं ये नहीं क्र सकता माँ ने हमे हमेशा सिखाया ह प्यार से hi सब कुछ होता ह

सीमा- भोसड़ी के तेरी माँ की छूट सेल तू नामर्द ह हिजड़ा ह तू,

तुषार- दीदी जबान सम्हाल क्र बात करो

सीमा- टुशु बीटा तू माँ की बातो में क्यों आ रहा ह तूने सोचा ह वो औरत बहुत गड़बड़ ह

तुषार- दीदी ये क्या बकवास क्र रही हो

सीमा- अरे तूने उसे कभी पापा के साथ हमबिस्तर होते देखा ह जब से मैंने होश सम्हाला ह तब से तो नहीं देखा हम सबकी उम्र आप में मैच नहीं करती हमारी शकल आपस में मैच नहीं करती क्या पता हम अपने बाप की औलाद ह या किसी और की. पापा को देख क्र लगता ह क्या वो हमारी माँ जैसी औरत को खुश रख सकते हैं. और पापा से तो किसी क भी शकल नहीं मिलती, हमारी माँ ने जवानी में बहुत मजे लिए होंगे तू क्यों दर रहा ह वो भी तो खूब चूड़ी होगी पता नहीं किस किस से चूड़ी होगी, तू आजा छोड़ मुझे.

तुषार ने एक झांटे दर थपड जड़ दिया सीमा के मुँह पैर और गार्डन पकड़ क्र बोलै- ख़बरदार अगर माँ के बारे में कुछ गलत खा तो जान से मर दूंगा, काश ऐसा hi हो हम सब अलग हो और तू मेरी बहन न हो तो अच्छा ह तुझे दीदी कहने में मुझे बड़ी शर्म आएगी आज के बाद , चल भाग यहाँ से तुषार अपनी माँ का बीटा ह ऐसे लंगोट का ढीला नहीं पड़ेगा.

सीमा- अरे मेरे भाई नाराज मत हो ले दबा ले मेरी चुकी ये और सीमा ने अपनी ब्रा उतर दी, और उसकी कड़क और मोती चूचिया बहार आ गई तुषार ने नजर घुमा ली, सीमा ने तुरंत अपनी पंतय उतर दी और बोली देख न निचे भी खुला ह तू खुल क्र मजे ले ले जैसे तुझे लेने हैं.

तुषार- मैं तुझे बहुत प्यार देता लेकिन तू प्यार के लिए नहीं हवस के लिए आई थी अब नहीं, और तुषार उठा और अपने कपडे पहनने लगा,

सीमा- बहुत बड़ी गलती क्र रहा ह तुषार, ये तू अच्छा नहीं क्र रहा मैं तुझे माफ़ नहीं करुँगी

तुषार- मत करना माफ़ और आज के बाद कभी बात मत करना मुझसे

सीमा- एक लड़की को इस हालत में लेकर जेल करना बहुत भरी पड़ेगा तुझे तूने एक नागिन की छेड़ा ह बहुत पढतायेगा तू

तुषार- तब का तब देखेंगे, और बहार चला गया.

सेम्मा बहुत देर तक ऐसे hi नंगी बैठी रही उसकी आँखे गुस्से और हवस में लाल हो राखी थी उसके सर की नसे फटी जा रही थी, काफी देर ऐसे hi बैठे रहने के बाद उसे अहसास हुआ की क्या हो गया जैसे उन्स्की हवस काम होने लगी तो उसे अपनी बेइज्जती का अहसास ज्यादा होने लगा जिसका परिणाम ये था की उसके दिमाग में तुषार के लिया नफरत सी हो गई.

जब तक दीपा वापस आई ये सब कांड हो चुक्का था तुषार नदी में पैर चला गया था वो लगतार 2 हरष तक नदी में hi तैरता रहा जब तक hi पूरी तरह थक क्र बैठ नहीं गया. उधर हवस और गुस्से में सीमा को सच में फीवर आ गया था, दीपा जब वापस आई तो उसने देखा सीमा बिस्टेर में लेती ह उसने सोचा सब कुछ हो चुक्का ह और सीमा चुदाई का मजा लेकर आराम र रही ह. उसने आते hi सीमा को बहो में भर लिया और बोली

क्यों बनो हो गई तसली बड़ी जल्दी कांड क्र लिया मेरे आने का वेट तक नहीं किया. सीमा की समझ में नहीं आया क्या कहे, कुछ सोच क्र वो बोली

नहीं दीपा मैंने खुद को रोक लिया भाई के साथ ये सब करना बहुत गलत ह भाई बहन के रिश्ते पैर डेग लग जाता इसलिए खुद को रोक लिया और वैसे भी मेरी तबियत ख़राब हो गई, दीपा ने उसका मथा देखा तो वो पूरी तरह गरम था. दीपा को बड़ी निराशा हुई लेकिन वो चुप रहे गई. शाम को जब अंजलि और रूचि आई तो देखा सीमा बुखार में पड़ी हुई ह तुषार घर में नहीं ह,

कुछ देर बाद तुषार भी आ गया अंजलि ने पूछा कहा गया था तेरी बहन इतने फीवर में ह और तू बहार घूम रहा था.

तुषार- वो माँ मैं पड़ोस गाओं चला गया था अहा एक दोस्त रहता ह उसे मिलने

अंजलि- बीटा मुझे तुझसे ये उम्मीद नहीं थी तेरी बहन को तेरी जरुरत थी और तूने उसे धोका दे दिया

तुषार चौंक गया धोका मैंने क्या धोका दिया माँ

अंजलि- अरे ऐसी हालत में उसे अकेले छोड़ गया, बीटा मैंने क्या सिखाया ह हालत कैसे hi चाहे कुछ भी कैसी भी जरुरत हो तुम भाई बहेनो को एक दूसरे का साथी बनना ह चाहे उसके लिए दुनिया का कोई भी काम क्यों न छोड़ना पड़े,

सीमा- क्या सच में माँ चाहे कोई भी काम हो कैसा भी काम हो हम ीक दूसरे का साथी बनना hi पड़ेगा

ये बात उसने तुषार को देखते हुए बोली.

अंजलि- है बच्चो जीवन में बहुत प्रोब्लेम्स आती ह अगर तुम सब एक साथ हो तो कोई तुम्हे कमजोर नहीं क्र सकता. कोई तुम्हे हरा नहीं सकता.

सेम्मा मन में हरूंगी तो मैं तुझे तुषार तुझे अपने पैरो में न गिरवा दिया तो मेरा नाम सीमा नहीं तू मुझसे भिक मांगेगा तू खुद मेरी छूट की भीक मांगेगा. मैं तुझे बार बाद क्र दूंगी तुषार.



कहा अंजलि अपने परिवार को एक मिस्साल बनाना चाहती थी यहाँ तो कुछ और hi हो गया प्यार और हवस के खेल में नफरत बिच में घुस गई अब क्या होगा इस परिवार क्या करेगी सीमा कैसे सम्हालेगी अंजलि.

(मुझे जल्दी में अच्छे gif नहीं मिले उसके लिए माफ़ी चाहती हु जैसे मिले मैंने दाल दिए यहाँ सेक्स से भरपूर तो मिलते हैं लेकिन कहानी बनाने वाले मुश्किल से मिलते हैं gif)
 
अपडेट-7




रात को खाने के समय बड़ी ख़ामोशी थी दीपा तो वैसे hi काम बोलती थी सीमा एक दम खामोश थी अंजलि को लगा की बीमारी की वजह से ह, तुषार भी शांत था बस रूचि hi दिन भर की बकर बकर किये जा रही थी. फिर रात को सब जल्दी hi सोने लगे लेकिन सीमा और तुषार की आँखों में नींद नहीं थी. सीमा आज जो हुआ बस वही सोचे जार hi थी उसने सोच लिया था चाहे कुछ हो जाये अब वो चुद क्र hi रहेगी, चाहे उसके लिए किसी से भी छोड़ना पड़े कोण रोकेगा मुझे मैं किसी से नहीं डरूंगी.

वही तुषार के दिमाग में सीमा की हवस घूम रह थी उसे ये समझ नहीं आ रहा था जब वो खुद सीमा के पास गया था तो आगे क्यों नहीं बढ़ पाया उसे तो पहले hi पता था ये सब प्यार नहीं ह फिर वो प्यार क्यों ढूंढ रहा था, उसके दिमाग में भी तो हवस hi थी फिर ऐसा क्यों किया उसने, और उसे भी ज्यादा वो सेमा की कही बातो से परेशां था की हम सब किसके बच्चे हैं पापा से तो हमारी शकल मिलती hi नहीं, फिर खुद शांत किया और बोलै जरुरी नहीं सब की शकल मिले ये कोई कहानी तोडना ह जो शकल मिलेगी, वो पागल हो गई ह उस पैर धयान मत दे.

दोनों सोचते सोचते सो गए, अगली सुबह सब नार्मल अपने काम में लग गए और चले गए अपनी मंजिल की तरफ. कॉलेज में भी सीमा बहुत शांत थी उसका दिमाग पूरा टाइम गुस्से में रहने लगा मेघा ने बहुत जाननेकी कोशिश की लेकिन उसने उसे भी कुछ नहीं बताया, दीपा बस उसे ऑब्सरव क्र रही थी कुछ पूछ नहीं रही थी उसके दिमाग में आ गया था की तुषार और सीमा के बिच कुछ गलत हुआ ह जिससे सीमा ऐसा रियेक्ट क्र रही ह. कुछ दिन ऐसे hi गुजर गए घर में बड़ी शांति रहने लगी. सचिन और कपिल रहते थे तो चहल पहल रहती थी, तुषार तो पहले से hi शांत रहता था लेकिन अब तो ख़ामोशी सी च गई थी, बस रूचि hi थोड़ी बहुत चहल पहल रखती थी,

एक दिन स्कूल से अंजलि थोड़ा जल्दी आ गई तो बस तुषार आया हुआ था. अंजलि ने अपना बेग रखा और चारपाई पैर लेट गई, तुषार उसके लिए पानी ले आया, अंजलि ने आँखे बंद की हुई थी, तुषार की नजर सीधे अंजलि के खुले पेट पैर गई जहा उसकी घेरि नाभि बड़ी खूबसूरत लग रही थी, थकन के कारन अंजलि थोड़े घेरे साँस ले रही थी जिससे उसकी विशाल चूचिया उप्पेर निचे हो रही थी,


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ये नजारा देख क्र तुषार के लुंड ने एक झटका मारा. लुंड की आवाज जैसे hi तुषार के दिमाग तक पहुंची तो उसने खुद को सम्हाला और आवाज लगाई माँ पानी ले लो, अंजलि ने आँखे खोली और मुस्कुराती हुई थोड़ी तिरछी होकर अपने एक हाथ के सहारे से लेट गई और पानी का गिलास पकड़ लिया,

इस पोजीशन में उसकी साड़ी का पलु साइड में गिर गया और उसके घेरे गले से उसकी एक चुकी आधी से कुछ ज्यादा बहार को झाकने लगी,


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तुषार का तो गाला hi सुच गया, तुषार ने बहुत बार अंजलि को ब्लाउज पेटीकोट यहाँ तक की ब्रा में भी देखा ह लेकिन तब वैसी फीलिंग नहीं थी लेकिन आज उसका लुंड रुकने के नाम hi नहीं ले रहा था, वो खुद को कण्ट्रोल क्र रहा था लेकिन लुंड को दिमाग नहीं होता इसलिए उसने उठना शुरू क्र दिया, जिससे उसके पंत में उभर दिखने लगा था, जिसे अंजलि ने भी देख लिया जैसे hi अंजलि की नजर तुषार के उभरते हुए लुंड पैर गई तो उसे अहसास हुआ की उसकी क्या पोजीशन ह और तुषार को क्या दिख रहा ह, अंजलि के फेस पैर एक मुस्कान आ गई, उसने खुद को ठीक करने की कोशिश नहीं की,

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कुछ देर बाद वो उठी और तुषर के सामने hi अपनी साड़ी उतरने लगी, तुषार अंजलि को कपडे बदलते देख बहार को जाने लगा तो अंजलि ने उसे आवाज लगाई और बोली टुशु बीटा साड़ी को समेत क्र रख दे मुझे टाइम लग जायेगा तुषार बेचारा वापस रुक गया, अंजलि का ब्लाउज नई दिन का था जो उसकी क्लीवेज को साफ़ दर्शा रहा था, उसका पेटकोट भी बहुत टाइट था नॉर्मली औरते ढीले ढीले पेटीकोट फेंटी थी लेकिन अंजलि जब स्कूल जाती तो टाइट पेटीकोट फेंटी इससे उसकी गांड का उभर अलग hi दीखता था, और इस टाइट पेटीकोट में से अंजलि की गांड अलग hi दिख रही थी, और उसकी वो चिकनी पतली कमर तुषार का बुरा हल हो रखा था,


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अंजलि तुषार की हालत का पूरा मजा ले रही थी उसने माहौल को और कामुक बनाने के लिए वो झुक गई जिससे उसकी गांड पूरी उभर क्र बहार आ गई वो झुक क्र एक अक्स में से कपडे निकलने लगी, तुषार का लुंड अब पूरी औकात पैर आ चुक्का था,

तुषार मन में- ऊऊफफफफफफ माँ ये क्या क्र रही हो मेरी हालत ख़राब हो रही ह, मन क्र रहा ह बस कपडे फाड् क्र चढ़ जाऊ उप्पेर हे ये क्या हो रहा ह मुझे अपनी hi माँ के बारे में ये सब सोच रहा हु, लेकिन जब माँ खुद अपने हुसैन के दीदार करा रही ह तो मैं यो दारू, नहीं नहीं क्या पता वो नार्मल हो मैं hi ज्यादा सोच रहा हु, लेकिन कोई माँ अपने bête को अपनी गांड ऐसे दिखती ह क्या, क्या सीमा ठीक बोल रही थी की माँ अपनी जवानी में किस किस से चूड़ी होगी, चीच ची क्या बकवास सोच रहा ह,

लेकिन ह तो औरत hi जरुरत भी होती होगी और सच भी ह हमने कभी माँ पापा को एक साथ नहीं देखा वर्ण छोटे से घर में तो कभी तो दीखता. तुषार अपनी सोच में इतना खो गया की कब अंजलि कड़ी हो गई और तुषार के पास आ गई और बोली खा खो गया मेरा बच्चा कुछ चाहिए क्या,

तुषार- हड़बड़ा क्र नहीं माँ कुछ नहीं बस ऐसे hi

अंजलि- मुस्कुराते हुए ये मेरा ब्लाउज के हुक खोल दे बहुत टाइट हो रखा ह मेरे हाथ नहीं पहुंच रहे ये देख मेरी छाती भीची पड़ी ह इनमे.

तुषार ने अंजलि की चूचियों की तरफ देखा जो ब्लाउज में से बहार को उभरी हुई थी,


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तुषार- माँ इतना टाइट क्यों फेंटी हो

अंजलि- बीटा अगर मैं भी ऐसे hi गाओं की दूसरी औरतो की तरह पूरी कवर्ड होकर बहार निकलूंगी तो कोई नौकरी भी नहीं देगा, आज कल दुनिया से लड़ने के लिए सबसे पहले खुद की झिजक को ख़तम करना पड़ता ह

तुषार- लेकिन माँ अपने शरीर को दिखाना ऐसे नुमाइश करना जरुरी तो नहीं ह.

अंजलि- नुमाइश करना सही नहीं ह लेकिन अपनी ख़ुशी के लिए पहना बुरा नहीं ह, अच्छा ये बता जब तुम्हारे कॉलेज में कोई पेरेंट्स एते ह तो उनमे कुछ ऐसे होंगे जो बिलकुल गाओं की वेश भूषा में आएंगे कुछ अच्छे शेरी कपड़ो में तो तुम्हे कोण ज्यादा सही लगता ह.

तुषार- जो शेरी कपड़ो में आते हैं

अंजलि- वो क्यों

तुषार- उनका तरीका उनकी बात चित उनका कॉन्फिडेंस अच्छा होता ह वो साफ़ सुत्रे लगते हैं.

अंजलि- बीटा साफ़ तो गाओं के लोग भी होते हैं लेकिन आज की पीढ़ी के हिसाब से खुद को ढालना होता ह, इसलिए मैं रहती जरूर इस गाओं में हु यहाँ के लोग बहुत पुराणी सोच के हैं लेकिन मैं तो पुराणी नहीं हु और मुझे ऐसे देख मेरे स्कूल के बच्चे मुझसे खुश रहते ह तो ओनर खुश रहते ह समझे. और कपड़ो में बुराई नहीं होती बस नजर क्या देख रही ह उसमे होती ह, लोग पुरे कवर्ड कपड़ो में भी कमैंट्स क्र देते हैं इसलिए खुद को आज के हिसाब से जीना सिखाओ समझे.

तुषार- जी माँ समझ गया

अंजलि- समझ गया तो जल्दी से मेरा ब्लाउज उतर मतलब खोल.

तुषार ने कपट हाथो से अंजलि के ब्लाउज का हुक खोलना शुरू किया और उसका हाथ अंजलि की नंगी कमर पैर टच हो रहा था.

तुषार- माँ आपकी स्किन कितनी सॉफ्ट ह

अंजलि- अच्छा छू क्र देख और बता कितनी सॉफ्ट ह

तुषार ने अंजलि की पीठ पैर हाथ घूमना शुरू किया माँ बिलकुल माखन जैसी ह, तुषार के हाथ से अंजलि का शरीर कैंप उठा उसका रोंगटे खड़े हो गए,

तुषार
- माँ आपको ठण्ड लग रही ह क्या आपके तो रोंगटे खड़े हो रखे हैं

अंजलि- नहीं बीटा ठण्ड नहीं ह बस ऐसे hi कभी कभी होता ह

फिर अंजलि ने अपना ब्लाउज उतर दिया और बता में तुषा रके सामने कड़ी हो गई अंजलि की चूचिया उसकी रेड ब्रा में से आधी बहार दिख रही थी जेस्पर रोंगटे खड़े थे ऊऊफफफफफफ क्या खूबसूरत नजारा था,

अंजलि- यहाँ से देख ये और भी सॉफ्ट होगा

अंजलि ने अपनी चुकी और पेट की तरफ इशारा किया, तुषार ने अपना हाथ अंजलि के पेट पैर रख दिया अंजलि के मुँह से आह निकल गई उसने अपने हॉट अपने दांतो में दबा लिए, तुषार का दूसरा हाथ जैसे hi अंजलि की चुकी की तरफ जाने लगा तो बहार से कुछ आहात हुई तो अंजलि को होश आया और बोली देखना कोण ह, तुषार तुरंत बहार चला गया, अंजल ने जल्दी से कपडे पहने,

बहार रूचि आ चुकी थी, तुषार अपने दोनों हाथ लोअर की जेब में दाल क्र चल रहा था जिससे वो लोअर को थोड़ा आगे की तरफ उठा सके क्योकि वो पूरा गरम हो चुक्का था जिसे उसका लुंड पूरा बहार को उभर रहा था उसे छिपाने के लिए वो दोनों हाथ जेब में दाल क्र चल रहा था, जिसे देख क्र रूचि बोली

रूचि- ओहो नवाब साहिब को देखो कैसे स्टाइल में चल रहा ह ऐसे चल रहा ह जैसे कही मॉडलिंग क्र रहा हो हाथ सामने से,

रुचे अंदर आ गई तुषार भी पीछे अंदर आ गया और बोलै तुझे क्या मैं कैसे भी चालू खुद तो चुहिया जैसी ह,

रूचि- माँ देखो टुशु मुझे चुहिया बोल रहा ह

तुषार- माँ ये मुझे चिड़ा रही

अंजलि ने तुषार को देखा वो अभी बह ी जेब में हाथ दिए खड़ा था अंजलि समझ गई वो ऐसे क्यों खड़ा ह उसकी हसी छूट गई.

रूचि- मैं चुहिया हु तो तू चूहा ह

अंजलि- बीटा ये चूहा नहीं इसका तो नेवला ह

मजे मजे में अंजलि कुछ ज्यादा बोल गई जो तुषार की समझ में आ गया था लेकिन रूचि नहीं समझ पाई और बोली- है है तू नेवला ह नेवला

तुषार अंजलि की बात पैर बुरी तरह झेंप गया इधर अंजलि को भी अहसास हो गया वो क्या बोल गई उसके फेस पैर शर्म से भी एक मुस्कान आ गई जिसे देख तुषार भी मुस्कुरा पड़ा तो रूचि बोली देखो कैसे है रहा ह नेवले के नाम पैर तो तुषार बोलै है मैं नेवला हु बहुत जोर से कथूंगा बहुत दर्द होगा फिर मत बोलना मैं तो मर गई कोई बचाओ मुझे,

रूचि- अच्छा हाथ लगा क्र दिखाना फिर बताउंगी कोई जान बचा क्र भागता ह

तुषार- तू hi जान की भीक मांगेगी मैं तुझे भागने भी नहीं दूंगा,

अंजलि- बस करो तुम दोनों रूचि कपडे बदल ले जल्दी से

तभी दीपा और सीमा आ गए सीमा के आते hi तुषार का मूड ख़राब हो गया और वो बहार चला गया जिसे अंजलि और दीपा ने अच्छे से महसूस किया वो दोनों hi समझ गई कुछ गड़बड़ ह दीपा को तो पता था उस दिन जो होने वाला था उसमे hi कुछ गड़बड़ हुई ह लेकिन अंजलि को समझ नहीं आया उसने सोचा बाद में बात करुँगी.

रात को सोते टाइम तुषार के दिमाग में बस अंजलि hi घूम रही थी उसका वो सॉफ्ट बदन उसकी वो विशाल चूचिया उसका लुंड पूरा तना हुआ खड़ा थान ा चाहते हुए भी उसका हाथ उसके लोअर के अंदर चला गया और वो अपना लुंड धीरे धीरे हिलने लगा, उसके दिमाग में अंजलि की बात घूम रही थी की इसका तो नेवला ह क्या माँ ने मेरा लुंड देखा ह क्या सबका इतना बड़ा नहीं होता क्या मेरा ज्यादा बड़ा ह, वो बस ये सब सोचे जार है था और लुंड हिलाये जार है था और वो बहुत एक्सीटेंड हो गया और उसके लुंड ने लोअर के अंदर hi धार मर दी और जैसे hi तुष् रके लुंड से धार निकली उसके मुँह से आह्हः निकल गई और वो आहहह सुनी दीपा ने,

उसकी आँख खुल गई, वैसे तो अँधेरा था लेकिन चाँद की रौशनी काफी उजाला दे रही थी रोशनदान से जिससे ये अहसास हो गया था की तुषार की चादर हिल रही ह और दीपा तुरंत समझ गई की तुषार क्या क्र रहा ह, अब तुषार का रास तो निकल गया और उसका हाथ अंडर वियर लोअर सब गन्दा हो गया, अब वो उठे तो कसिए उठे और साफ़ भी करे तो कैसे बहार अंजलि और राजेश सोये हुए हैंअंदर तीनो भेने साफ़ कसिए करे वो बेचारा ऐसे hi लेता रहा अपने लोअर से hi हाथ को पूछ लिया, और लेते लेते कुछ hi देर में नींद आ गई, जब तुषार की कोई हरकत नहीं हुई तो दीपा भी सो गई, सुबह तुषार की आँख सबसे देर से खुली वो जल्दी जल्दी भाग क्र रेडी हुआ और अपना अंडर वियर तो धो दिया लेकिन लोअर धोना भूल गया और कॉलेज चला गया,

दोपहर को जब सब वापस आये तो दीपा ने तुषार का लोअर देखा उसने सोचा मैं धो देती हु उसने जैसे hi लोअर को उठाया उसका हाथ उस जगह लगा जहा तुषार का वीर्य निकला था ो हिस्सा एक डैम सुच गया था, दीपा ने उसे नाख़ून से कुरेदा उसे समझ नहीं आया तो उसने सूंघ क्र देखा तो एक तीखी सिग अंध उसके दिमाग में चढ़ गई. उसने पहेली बार वीर्य की गंध संगी थी, वैसे तो अजीब थी पैर वो बर्बर उस गांड को सूंघती रही, और उसके दिमाग को झटका लगा जब उसे याद आया की रात तुषार क्या क्र रहा था उसे समझ आ गया ये क्या ह, ये तुषार का वीर्य ह जो उसके हाथ में ह जिसे वो अपनी उंगली से कुरेद रही ह जिसे सूंघ रही ह,

इतना सोचते hi दीपा की छूटे क दम गीली हो गई उसके अंदर उत्तेजना का ऐसा परवाह डोडा की उसका रोम रोम उत्तेजित हो उठा वो बार बार वीर्य पैर उंगली घुमाये जा रही थी और अगले hi पल उसने कुछ ऐसा किया जो गाओं में तो क्या शहर की लड़किया भी न करे उसने उस वीर्य को जीभ से चाट लिया, उसकी आंखे बंद हो गई उसे वो नमकीन सा टेस्ट इतना अच्छा लगा की वो उसे चाट टी hi रही, तभी अंदर से सीमा की आवाज आई दीपा कहा ह इधर आ मेरी हेल्प करवा, दीपा की तंत्र टूटी और उसने जल्दी से लोअर पानी में भीगा दिया और अपना फेस साफ़ किया और दौड़ क्र अंदर आ गया, है क्या हुआ

सीमा- कहा मर गई थी ये बर्तन साफ़ क्र दे मैं यहाँ अकेले लगी हुई हु

दीपा- तो गुस्सा क्यों क्र रही ह आ तो रही थी हमेसाह शोर मचती रहती ह कीलसू कही की.

फिर कुछ दिन ऐसे hi नार्मल गुजर गए बड़ी शांति थी परिवार में, बस ये बदलाव हुआ की सीमा अब घर से या तो देर से कॉलेज जाती या देर से वापस आती या जाती hi नहीं, छुट्टी मर देती. अंजलि को ये बात खटक रही थी लेकिन टाइम नहीं था बात क्र पाने का सीमा अकेले मौका नहीं दे रही थी की अंजलि उसे कुछ बात क्र सके.

एक दिन सीमा कॉलेज नहीं गई और इत्तेफाक से उस दिन तुषार का स्कूल खुलते hi छुट्टी हो गई किसी प्रिंसिपल के फादर की डेथ हो गाइट hi तो तुषार वापस घर आ गया, वो जैसे hi घर पंहुचा तो उसे घर में एक लड़का घुसता हुआ दिखा,

तुषार घबरा गया की कही कोई चोर तो नहीं ह उसकी बहन घर में अकेली ह, वो दबे पाओ से घर की तरफ जाने लगा वो धीरे से दरवाजे के पास पंहुचा तो अंदर से हसने की आवाज आ रही थी उस थोड़ी शांति मिली, लेकिन अगले hi पल दिमाग ख़राब हो गया कोई लड़का घर में सबके पीछे से आया ह और सीमा उसे है क्र बात क्र रही ह, तुषार ने धीरे से दरवाजे से जनक क्र देखा तो उसे उन दोनों के पेअर दिखे. जिसमे लड़के के पेअर जमीं पैर थे और सीमा के पेअर हवा में, तुषार ने एक झटके से दरवाजा खोल दिया तो देखा गाओं का एक लड़का जिसका नाम कलवा ह वो चारपाई पैर बैठा ह और उसकी बहन सीमा उसकी गोद में बैठी ह दोनों के हॉट आपस में मिले हुए हैं कलवा का एक हाथ सीम ाकि चुकी पैर ह और दूसरा हाथ सीम ाकि गांड पैर,

दरवाजा खुलने की आवाज से वो दोनों भी चौंक गए सीमा एक दम कड़ी हो गई, कलवा भी सतर्क हो गया और तुरंत भागने लगा, जिए तुषार ने पकड़ लिया और 3-4 घुसे उसमे जड़ दिए, सीमा तुरंत बिच में आ गई

सीमा- छोड़ दे उसे, हाथ मत लगा उसे

तुषार कुछ नहीं सुन रहा था ो बस कलवा को मरे जार है था

सीमा- तुषार मैं बोल रही हु छोड़ दे उसे

जब तुषार ने नहीं सुना तो सीमा में तुषार की कमर में थप्पड़ मरने शुरू क्र दिए, तुषार का गुस्सा और बढ़ गया उसने सीमा को पीसह धकेल दिया जिससे सीमा निचे जा क्र गिरी उसके मुँह से दर्द भरी चीख निकल गई, तुषार का धयान एक दम सीमा पैर गया और वो उसकी तरफ गया तो कलवा को मौका मिल गया भागने का और वाओ अहा से तुरंत भाग गया,

तुषार ने सीमा को उठाया तो सीमा ने तुषा रको धकेल दिया,

तुषार- ये सब क्या ह तू पागल हो गई ह क्या

सीमा- तू कोण होता ह मुझे रोकने वाला मैं जो चाहे करू तुझे इससे क्या

तुषार- तुझे परिवार की इज्जत की कोई चिंता नहीं ह ये कलवा तेरा भाई लगता ह ये पापा के चाचा के लड़के का लड़का ह रिश्ते में तेरा भाई ह

सीमा- तो क्या हुआ उसके पास हिम्मत ह वो एक मर्द ह लड़की को खुश क्र सकता ह तेरी तरह नामर्द नहीं ह

तुषार- तुझे हो क्या गया ह तू कोई रंडी नहीं ह तू एक शरीफ घर की लड़की ह

सीमा- फलतू की बकवास मत क्र मेरे साथ मेरा मन मैं जिससे चहु चुडु जो चाहे करू तू कोण होता ह मुझे रोकने वाला और आज तो तू आ गया कल कोण आएगा मौका मिलते hi मैं उसे चुद लुंगी मुझे कोई नहीं रोक सकता.

अब तुषार का दिमाग ख़राब हो चुक्का था उसे समझ नहीं आ रहा था ो क्या करे कैसे सीमा को रोके

तुषार- मुझे माँ से बात करनी पड़ेगी आज आने दे माँ को

सीमा- माँ क्या करेगी मारेगी पिटेगी इससे ज्यादा क्या करेगी लेकिन मैं जरूर छोडूंगी.

तुषार ने एक थप्पड़ सीम ाको मर दिया एक थप्पड़ पड़ते hi सीमा लगभग बेहोश सी हो गई, तुषार ने उसे उठा क्र चारपाई पैर लिटा दिया, और गुस्से में घर के बहार बैठ गया, वो तब तक ऐसे hi बैठ रहा जब तक दीपा कॉलेज से नहीं आ गई, दीपा ने तुषार को देखा वो गुस्से में बैठा ह उसने पूछा क्या हु अभी ऐसे क्यों बैठा ह, तुषार ने बस न में गार्डन हिलाई और बहार को चल दिया, दीपा अंदर आई तो देखा सीमा चारपाई पैर लेती ह, दीपा उसके पास पहुंची तो देखा सीमा के फेस पैर उंगलिया छपी हुई ह सीमा को बहुत तेज बुखार आया हुआ ह,

ऐसा लग रहा था सीमा बहुत देर से रो रही ह, दीपा ने सीमा से पूछ ाक्य हुआ ऐसे क्यों लेती ह किसी ने कुछ किआ क्या किसी ने मारा तुझे, सीमा ने कोई जवाब नहीं दिया,

दीपा की समझ में तो ये आ गया की तुषार ने hi ये किया ह लेकिन क्यों, ये तुषार से hi पता चल सकता था, दीपा तुरंत बहार आई और तुषार को आवाज लगी ,

दीपा- टुशु तूने सीमा पैर हाथ उठाया

तुषार चुप रहा

दीपा- मैं कुछ पूछ रही हु तुझसे

तुषार ने दीपा की तरफ देखा उसकी आँख इनाम थी उसने बस इतना कहा मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था.

दीपा- ऐसा क्या हुआ जो तुझे अपनी बड़ी बहन पैर हाथ उठाना पड़ा.

तुषार- दीदी मैं आपको नहीं बता पाउँगा मुझमे इतनी हिम्मत नहीं ह

दीपा- टुशु हमारी माँ ने हम भाई बहेनो को ऐसे पला ह की हमारे बिच कभी कोई राज राज न रहे चाहे कोई भी बात हो एक दूसरे का सहारा बनना ह हमे अगर कोई प्रॉब्लम ह तो तेरी बहन उसमे तेरी हेल्प करेगी.

तुषार- दीदी मैं बताता हु फिर आप hi बताना की क्या कृ मैं,

फिर तुषार ने सीमा और अपने बिच जो हुआ वो सब बताया और आज जो हुआ वो भी बताया बस शबदो का इस्तेमाल साफ़ सूत्र किया,

तुषार की बात सुनकर दीपा कुछ देर शांत रही फिर बोली, मुझे एक बात बता जब तू सीमा के साथ वो सब करने को तैयार था तो तू पीछे क्यों हैट गया. क्या तुझे तब अहसास हुआ की वो तेरी बहन ह.

तुषार- नहीं दीदी वह भाई बहन की बात नहीं थी लेकिन दीदी वो सब हवस में क्र रही थी और हवस में हमारे रिश्ता क्या होता हमारे बिच प्यार जैसा कुछ नहीं रहता बस हवस रहती न hi भाई बहन का रिस्ता रहता न प्यार का बस हवस रहती तो वैसे hi सब ख़तम हो जाता,

दीपा- बात तो तेरी ठीक ह लेकिन जब लड़की खुद आगे बढ़ क्र अपना शरीर किसी को सौंप रही हो और लड़का उसे दुत्कार दे तो उसका आतम सम्मान को चोट लगती ह और लड़की ये अपमान बर्दास्त नहीं क्र पति आज वो जॉब hi क्र रही ह सब उसी अपमान में जलकर क्र रही हैं.

तुषार- तो आप क्या चाहती हो मैं वो सब करू उनके साथ

दीपा- ये तेरा फैसला ह क्या करना ह क्या नहीं लेकिन तुझे सीमा के साथ प्यार से सब सम्हालना पड़ेगा वर्ण वो गलत hi करती चली जाएगी.

दीपा से बात करके तुषार का दिमाग कुछ शांत हुआ, लेकिन अब दीपा को समझ नहीं आ रहा था ो क्या करे सीमा को कैसे समझाए, उसने हिम्मत करके सीमा से बात करने की कोशिश की लेकिन सीमा उसकी एक भी सुनने को तैयार नहीं थी

सीमा- तू मुझे ज्यादा ज्ञान मत दे मुझे पता ह मैं क्या क्र रही हु तुझे भी माँ को बताना ह तो बता दे मैं वही करुँगी जो मेरे दिल में आएगा.

दीपा चुप हो गई उसने सोचा शायद टाइम के साथ सीमा का दिमाग शांत हो जाये,

कुछ देर बाद अंजलि भी आ गई तो सेमा ने फीवर का नाम लेकर चादर ओढ़ ली जिससे उसका फेस न दिखे.

कुछ दिन ऐसे hi निकल गए लेकिन इस बिच एक बात हुई दीपा के दिल में तुषार के लिए एक ऐसा प्यार का बी जग गया जैसे कोई प्रेमिका को अपने पेर्मी से होता ह दीपा मौका मिलते hi तुहार को निहारती रहती थी उसके दिल में दिन भर बस तुषार hi तुषार घूमता रहता, उसके बहुत से कारन थे, पहला जो भाई बहन की कहानिया उसने पढ़ी उसे उसके दिल में भाई बहन जैसा कोई रिश्ता बचा hi नहीं दूर सीमा के मुँह से तुषार के लुंड की टैरिफ तीसरा तुषार का वीर्य चेतना छोटा जो अच्छे और प्यार का उद्धरण तुषार ने दिया था उसे दीपा के दिमाग में बस तुषार hi तुषार था, वो अपना सब कुछ तुषार पैर न्योछावर क्र देना चाहती थी,

एक दिन सीमा और दीपा कॉलेज से आ रही थी तो कलवा रस्ते में खड़ा था उसने सीमा को इशारा किया तो सीमा ने मुस्कुरा क्र उसका जवाब दिया, दीपा को बड़ा गुस्सा आया वो बोली- सीमा तू ऐसा क्यों क्र रही ह ये कलवा जैसे लोगो से दूर क्यों नहीं रहती, तुझे पता ह न की ये लोग पापा को कितना जलील करते हैं इन्ही लोगो की वजह से हम पुरे गाओं से अलग रहते हैं.

सीमा- जो किया इसके परिवार ने किया इसमें कलवा की क्या गलती ह और क्या पता हमारे पापा ने भी कुछ तो किया होगा तभी तो ये लोग उन्हें बुरा भला कहते हैं

दीपा – चीला क्र सीमा तेरा दिमाग तो ख़राब नहीं हो गया ह क्या बकवास किये जार hi ह

सीमा- तू मेरे मुँह मत लग मैं वही करुँगी जो मेरा दिल करेगा

इधर दोनों बहेनो की बहस देख क्र कलवा वह से खिसक गया.

शाम को जब अंजलि वापस आई तो दीपा के फेस पैर गुस्सा देखा वो उसे कुछ पूछना चाहती थी लेकिन रात को मौका नहीं मिला,



अगले दिन सीमा ने फिर छुट्टी का बहाना क्र दिया, दीपा का दिमाग खटका तो उसने तुषार को बोल दिया की जल्दी वापस आ जाये, वो रुकना चाहती थी लेकिन रुक नहीं पाई.
 
अपडेट-8






आज अंजलि ने सोच लिया था की दीपा से बात करेगी क्योकि एक वही थी जो सब सच बता सकती थी. तुषार और रूचि निकल गए, दीपा और अंजलि एक साथ निकले, तुषार ने जल्दी से रूचि को उसके कॉलेज छोड़ा और घर की तरफ वापस दौड़ लगा दी, वही अंजलि और दीपा को टेंगा मिल गया तो बात नहीं हो पाई तो अंजलि ने कहा की आज वो लंच से छुट्टी लेगी तो तू भी स्कूल की तरफ आ जाना जल्दी छुट्टी लेकर.

तुषार को जाने और वापस आने में 2 हरष लग गए थे, इधर मौसम भी करब हो गया और हलकी हलकी बारिश होने लगी, तुषार जैसे hi घर पंहुचा तो दरवाजा बंद था, वो धीरे से दरवाजे के पास पंहुचा तो अंदर से आवाज आई, कलवा धीरे क्र दर्द होता ह,

कलवा- अरे मेरी जान दर्द में hi तो मजा ह आज तुझे पूरा मजा दूंगा

सीमा- अच्छा बिच में पिघल तो नहीं जायेगा मेरी गर्मी से

कलवा- अरे तेरे जैसी बहुत को ठंडा किया ह आज तेरी प्यास भी बुझा दूंगा ये देख मेरा लोढ़ा

इतना सुनते hi तुषार का गुस्सा सातवे आसमान पैर पहुंच गया और उसने एक जोर दर लत दरवाजे पैर मरी तो दरवाजे की कुण्डी टूट गई, वो अंदर घुसा तो देखा कलवा नंगा खड़ा ह और सीमा ब्रा और सलवार में उसके सामने बैठी ह, कलवा का 5 इंच का लुंड सीमा के हाथो में ह,


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तुषार ने कलवा की गांड पैर एक लात मरी वो सीमा के उप्पेर जाकर गिरा, सीमा ने जल्दी से खुद को सम्हाला और तुषार को पकड़ने की कोशिश की लेकिन तुषार सीमा के कहा काबू में आने वाला था उसने सीमा को एक तरफ धकेला और कलवा की पीछे से गार्डन पकड़ ली और उसकी गांड पैर दो तीन लत जड़ दी,

सीमा ने पीछे से तुषार को बहो में भर लिया और पीछे की तरफ खींचने लगी उसका ये परिणाम हुआ की सीमा तुषार को लेकर पीछे की तरफ गिर गई, सीमा की चूचिया तुषार की कमर में धस रही थी लेकिन हालत ऐसी थी की किसको अहसास होगा इस सब का, तुषार ने खुद को उठाना चाहा तो उसका हाथ सीमा की चुकी पैर चला गया और जल्द बजी में तुषार ने अपनी मुठी बंद क्र ली सीमा के मुँह से दर्द भरी चीख निकल गई,

लेकिन तुषार पैर कोई असर नहीं था, कलवा अपने कपडे उठा रहा था जल्दी जल्दी तुषार ने भाग क्र कलवा की गार्डन पकड़ ली, सीमा फिर से उठी और तुषार से कलवा को छुड़वाने लगी, तुषार ने फिर सीमा को धक्का दिया लेकिन इस बार गलती से तुषार का हाथ सीमा की ब्रा में फास गया और धक्का इतना तेज था की सीमा दूर जाकर गिरी और उसकी ब्रा फैट क्र तुषार के हाथ में hi फांसी रह गई,

सीमा को अहसास हुआ की वो उप्पेर से नंगी हो गई ह लेकिन कलवा का दर उसे जयदा था खु ढके नंगा होने से भी क्योकि तुषार उसे जान से मर देता, सीमा को कुछ नहीं सूझ रहा था तो उसने फिर से तुषार का सर पकड़ा और अपनी छाती में दबा क्र लेट गई और कलवा से छिलाई भाग यहाँ से भेनचोद,


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कलवा- मेरे कपडे

सीमा- मादरचोद कपडे छोड़ जान बचा भाग जा यहाँ से

कलवा नंगा hi बहार को भगा बहार बारिश हो रही थी, इसलिए गाओं बिलकुल खली था कलवा जंगल की तरफ भागने लगा,

तुषार भी उसके पीछे भागने लगा तो सीमा ने उसे बहो में भर लिया और बोली रुक जा तुषार रुक जा

तुषार- छोड़ दे कुटिया मुझे मैं उसे जान से मर दूंगा

सीमा- उसकी गलती नहीं ह जाने दे उसे

लेकिन तुषार रुकने का नाम hi नहीं ले रहा था तो सीमा को जब कुछ नहीं सुझा तो उसने तुषार के बाल पकडे और अपने हॉट तुषार के होतो पैर रख दिए और जबरदस्ती उसके हॉट को चूसने लगी चूसने क्या लगभग खाने लगी थी, तुषार खुद को छूटने की कोशिश क्र रहा था लेकिन उसके सर के बाल सीमा की हाथो में थे, जिसकी वजह से वो खुद छूटा नहीं प् रह अतः, सीमा काफी मजबूत लड़की थी,


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बाल खींचने की वजह से तुषार का गुस्सा और बढ़ रहा था और गुस्से में उसने सीमा को अपनी गॉड में उठाया और चारपाई पैर पटक दिया और उसकी एक चुकी को पूरी ताकत से मसल दिया जिससे सीमा की चीख निकल गई, और उसके हॉट खुल गए, उसके हाथ तुषार के बालो से ढीले पद गए, तुषार ने तुरंत अपना सर अलग किया और एक थपड सीमा को जड़ दिया और बोलै बहुत गर्मी ह न तेरे अंदर आज मैं तेरी साडी गर्मी निकलता हु कुटिया,

तुषार ने सीमा की चुकी पूरी तरह मसल दी और उसके होतो पैर अपने हॉट रख क्र बुरी तरह से चूसने लगा,


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तुषार सीमा की टैंगो के बिच आ चुक्का था उसका लुंड पूरी तरह खड़ा था जो सीमा की छूट से टकरा रहा था, सीमा ने भी एक थपड तुषार को मारा तो तुषा रने सीमा की सलवार का नाडा तोड़ दिया और खींच क्र बहार निकल दी, सीमा तुषार के लिए खिलोने जैसी थी, तुषार ने सीमा को अपनी गॉड में भरा और उसकी जांघो को चूमने लगा सीमा पूरी तरह गरम हो रही थी, जहा उसके साथ ऐसा बर्ताव हो रहा था वो उतनी hi गरम होती जा रही थी,

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तुषार ने सीमा की पंतय पकड़ क्र फाड् दी, पंतय फाड़ने के चक्क्र में पंतय की रगड़ सीमा की छूट में लगी जिस उसकी छूट के उप्पेर का हिस्सा चील गया लेकिन न तुषार रुका न hi सीमा, तुषार ने अपनी उंगली सीमा की छूट में घुसा दी सीमा के मुँह से आह निकल गई, तुषार एक हाथ से सीमा की चुकी मसल रहा था दूसरे हाथ से उसकी छूट में उंगली क्र रहा था,

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सीमा ने तुषार के बाल पकड़ लिए थे और उसके सर को झुका क्र अपने पेट पैर लगा रही थी और अपनी छूट को उछाल रही थी, सीमा का एक हाथ तुषार की पंत पैर पहुंच चुक्का था लेकिन उसे खोलने का कोई तरीका नहीं मिला,

फिर तुषार ने उसे धकेल क्र खड़ा हो गया तो सीमा किसी रंडी की तरह तुषार को देख रही थी और हांफ रही थी, तुषार ने अपनी पंत खोली और निचे क्र दी और जैसे hi उसने अपना अंडरवियर निचे किया सीमा की आँखे फटी रह गई,


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कलवा जांय दोनों के मिला क्र भी तुषार के लुंड के बराबर नहीं होते इतना बड़ा लुंड सीमा की आँखे ख़ुशी से चमक उठी, लेकिन तुषा रतो गुस्से में था उसने सीमा का सर पकड़ा और अपने लुंड पैर दबाने लगा, सीमा ने मुँह नहीं खोला तो तुषार ने उसके बाल पकड़ लिए जिससे सीमा का मुँह खुल गया तो तुरंत तुषा रने अपना लुंड उसके मुँह में दे दिया,

तुषार- चूस साली कुटिया चूस इसे बहुत शोक ह न तुझे लुंड से खेलने का रंडी अब खेल


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सीमा की आँखों से आंसू आ रहे थे, इतना मोटा लुंड उसके मुँह में था जीवन में पहेली बसर उसने लुँड्का स्वाद चखा था, कुछ hi देर में तुषार ने लुंड बहार निकल लिया तब सीमा को रहत हुई लेकिन अगले hi पल जो हुआ वो और भी बुरा था तुषार ने सीमा को निचे लिटाया और उसकी टैंगो के आ गया और अपना लुंड उसकी छूट पैर रखा और एक जोर दर धक्का मर दिया, पहले hi धक्के में लुंड सीमा की छूट को चीरता हुआ एक तिहाई अंदर घुस गया, सीमा की एक जबरदस्त चीख निकल गई, अगर बहार बदल न गरज रहे होते तो शायद आधा गाओं ये चीख सुन लेता,

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दर्द तो तुषार को भी हुआ था क्योकि उसका भी ये पहेली बार hi था ो भी इतनी तिगत छूट में तुषार का लुंड चील गया था लेकिन गुस्से और जानूं में उसे कुछ नहीं दिखा, उसने तुरंत दूसरा धक्का मारा और लुंड आधे से ज्यादा अंदर घुस गया, सीमा की आँखों से आँशु पानी की तरह अभी रहे थे वो चीखे जा रही थी,

निकल ले भाई मैं मर जाउंगी आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बहुत बड़ा ह फैट गई मेरी मैं मर जाउंगी मुझसे गलती हो गई मुझे माफ़ क्र दे प्लस निकल ले

निकल ले कुत्ते भें छोड़ निका ले इसे तू जो कहेगा मैं करुँगी प्लस आज बकश दे मुझे प्लस

लेकिन तुषा रको कुछ नहीं सुन रहा था लुंड आगे भी नहीं जार है था तो तुषार ने थोड़ा सा खींचा और दुबारा अंदर क्र दिया, लुंड बड़ा टाइट खींच रहा था तुषार लगातार अंदर बहार करने लगा,

सीमा लगातार अह्ह्ह्हह अहहहहह क्र रही थीं hi नहीं प्लस बस बस छोड़ दे भाई छोड़ दे कुत्ते अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह फैट गई मेरी छूट भोसड़ी के रुक जा रुक जा

अगले 5 मिनट तक तुषार ऐसे hi आराम से धक्के मरता रहा इतने देर में सीमा की छूट गीली हो चुकी थी कुछ छूट से निकलने वाला खून भी चिकनी क्र रहा था सीमा की दर्द भरी चीखे अब मजे भरी आह में बदल चुकी थी, तुषा रको भी रहत हो गई थी लुंड आराम से अंदर जार है था , तुषा रांख बंद किये धक्के लगाए जार है था, सीमा भी आँखेबंद किये मजे ले रही थी, तुषार का पुरालुंड कब सीमा की छूट में चला गया दोनों को पता hi नहीं चला, तुषार के धक्के तेज होने लगे थे,


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सीमा ज्यादा देर खुद को नहीं रोक पाई और झाड़ गई, वो निचे से अपनी छूट उछलने लगी तुषा रखा जोश भी बढ़ गया वो और तेज धक्के मरने लगा, सीमा तो झाड़ गई लेकिन तुषार का नहीं हुआ था लुंड का आगे का हिस्सा छिलने की वजह से उसकलुण्ड सुन्न हो चुक्का था जिससे उसका टाइम और बढ़ गया पहेली बार में hi वो किसी मंझे हुए मर्द से भी ज्यादा देर तक छोड़ रहा था, सीमा फिर गरम होने लगी उसके मुँह से फिर सिसकिया निकलने लगी दोनों फिर से घमाशान युद्ध में घुस गए इस बार सीमा पूरा मजा ले रही थी तुषार के धक्के इतने तेज थे की ऐसा लग ररः था जैसे वो पूरा hi छूट में घुसना चाहता हो सीमा ज्यादा देर नहीं रोक पाई और फिर झाड़ गई, इस बार तुषार भी झड़ने की कगार पैर आ चुक्का था और तेज तेज धक्के लगाने लगा, और एक तेज अह्ह्ह्हह्हह के साथ अपने लुंड का गधा वीर्य सीमा की छूट में भरने लगा, 2 मिनट्स तक तुषार ऐसे hi धक्के मरता रहा उसका रास बहुत देर तक निकला,

फिर वो सीमा के उप्पेर hi ढेर हो गया, दोनों काफी देर तक ऐसे hi लेते रहे, लेकिन जैसे hi तुषार को अहसास हुआ की उसने क्या किया ह वो झटके से खड़ा हो गया उसका लुंड प्लप की आवाज के साथ छूट से बहार आ गया जिससे सीमा के मुँह से दर्द भरी आअह्हह्ण निकल गई, तुषार ने अपनी पंत फेनी और घर के बहार निकल गया और बारिश में भीगता हुआ चलता रहा, सोचता रहा ये उसने क्या क्र दिया वो इतना गिरा हुआ कैसे हो सकता ह अपनी hi बहन के साथ ये सब बहुत बड़ा पाप हो गया ह उसे अब वो क्या करे कैसे मुँह दिखायेगा अपनी माँ को उसकी माँ क्या कहेगी, वो सोचता हुआ चला जार है था,

वही सीमा बहुत देर तक ऐसे hi पड़ी रही उसका दिमाग सोच hi नहीं प् रहा था की क्या हुआ अभी उसके दिमाग से हवस का नशा पूरी तरह उतर चुक्का था, उसे अहसास हुआ की वो अपनी हवस की मिटने के लिए क्या करने चली गई थी अपने परिवार की इज्जत भी नहीं सोची, अब वो कसिए अपने भाई के समाने आ पायेगी कैसे हिम्मत जूता पायेगी, बहुत से ख्याल उसके दिमाग में आ रहे थे, फिर उसने खुद को उठाने की कोशिश की लेकिन छूट में इतना भयंकर दर्द हुआ जैसे किसी ने चाकू से काट दिया हो उसने जैसे तैसे खुद को सम्हाला तो देखा वह खून hi खून ह उसकी छूट से खून और वीर्य मिला हुआ भी रहा ह, अब वो क्या करे कैसे उठे कैसे सब कुछ साफ़ करे, वो काफी देर लेती रही,

वही दूसरी तरफ अंजलि और दीपा एक छप्पर के निचे खड़े थे जहा अंजलि ने दीपा से पूछा की घर में क्या चल रहा ह क्यों सरे बच्चे तनाव में हैं, पहले तो दीपा बात को टलती रही लेकिन अंजलि के सामने बात नहीं घुमाई जा सकती, तो दीपा ने सीमा की साडी बातेअंजली से बता दी और सीमा और तुषार के बिच क्या हुआ वो भी, आज सीमा ने छुट्टी क्यों की तुषार वापस घर जाने वाला ह ये भी, अंजलि का दिमाग घूम गया वो तुरंत बोली जल्दी से घर चल वह कुछ अनर्थ न हो जाये, कुछ उच्च नीच हो गई तो हम मुँह दिखने लायक नहीं रहेंगे, दोनों माँ बेटी बारिश में hi तेज तेज कदमो से घर की तरफ चल दिए,

दीपा- माँ सीमा ऐसी क्यों ह

अंजलि- उसकी गलती नहीं ह बीटा बच्चा पैदा होते समय जैसी सोच माँ की होगी औलाद की वैसी hi हो जाती ह

दीपा- क्या मतलब

अंजलि- कुछ नहीं फिर कभी समझाउंगी,

जब तक वो घर पहुंचे यहाँ सब कुछ शांत हो चुक्का था, सीमा ने जैसे तैसे खुद को उठाया और सफाई की लेकिन शरीर चल नहीं रहा था तो वो लेट गई, और कुछ hi मिंटो में सो गई, कुछ देर बाद अंजलि और दीपा घर पहुंचे तो सब शांत था सीमा सो रही थी, दरवाजा खुला हुआ था तुषार थान hi, अंजलि ने सीमा के सर पैर हाथ रखा तो वो बुखार में तप रही थी,

सर पैर हाथ लगने से सीमा की आँख खुल गई उसने मुस्कुरा क्र माँ की तरफ देखा आज उसकी मुस्कराहट में जो सकूं और सन्ति थी वो अंजलि को पहले कभी नहीं दिखी, चेरे पैर थकन और दर साफ़ दिख रहा था लेकिन फिर भी कितना सकूं सा था उसके चेरे पैर उसके हॉट अभी तक सूजे हुए थे जो एक दम लाल हो रखे थे,

अंजलि- क्या हुआ बीटा सब ठीक ह न

सीमा- मुस्कुराते हुआ है माँ सब ठीक ह आप जल्दी आ गई

अंजलि- है बरसिह की वजह से, दीपा बीटा फैर्स्ट ऐड बॉक्स लेकर आ

दीपा उठा ले

अंजलि ने उसमे से एक फीवर की दवाई दी सीमा को, सीमा जैसे hi दवाई लेने के लिए उठने लगी तो उसके मुँह से दर्द भरी चीख निकल गई,

अंजलि- क्या हुआ कही चोट लगी ह क्या

सीमा- है माँ वो बारिश में पेअर फिसल गया था तो जांघ में खिचाव आ गया ह उठा नहीं जार है

अंजलि तुरंत समझ गई की ये कैसा खिचाव ह,

अंजलि- दीपा ये चारपाई रसोई में लगा दे और कपडे बिछा दे,

दीपा ने तुरंत चारपाई उठाई और रसोई में दाल दी, फिर अंजलि ने सीमा को सहारा देकर रसोई में ले गई सीमा से बिलकुल चला नहीं जार है था,

अंजलि- दीपा मैं सीमा को दवाई लगा रही हूत ु देख जरा तुषार कहा ह

तुषार का नाम सुनते hi सीमा के शरीर में कम्पन सी हो गई जिसे अंजलि ने भी महसूस क्र लिया, दीपा बिना कोई सवाल किये बारिश में hi चल दी तुषार को देखने

अंजलि- जल्दी से अपने कपडे उतर

सीमा- माँ क्या बोल रही ह क्यों उतारू

अंजलि – मैं जो बोल रही हु वो क्र मैं पानी गरम करके लती हु जब तक औ पूरी तरह बिना कपड़ो के लेती मिलना.

सीमा की कुछ समझ नहीं आया लेकिन माँ की बात कैसे ताल सकती थी, अंजलि पानी गरम करके ले तब तक जैसे तैसे सीमा ने पुरे कपडे उतरे और चादर ओढ़ क्र लेट गई,

अंजलि- ये चादर भी हटा

सीमा- माँ मुझे शर्म आ रही ह

अंजलि- मैंने तुझे शर्माना सिखाया ह क्या माँ से शर्माएगी मैं तुझे बचपन से नंगी देखा ह आज तुझे शर्म आ रही ह

अंजलि ने चादर खींच क्र अलगरख दी, सीमा पूरी नंगी उसके सामने लेती थी सीमा ने शर्म से अपन ामुह फेर लिया, अंजलि ने देखा उसकी चूचिया बिलकुल लाल हो राखी ह फर अंजलि ने सीमा के पेअर खोले जो सीमा ने भींच रखे थे, जैसे hi अंजलि नजर सीम ाकि छूट पैर गई उसके मुँह खुला रह गया, इतनी बुरी हालत तो 4 आदमी मिलकर भी नहीं क्र सकते किसी की छूट की,

अंजलि ने कोई सवाल नहीं किया बस गरम पानी में भीगा कपडा सीमा की छूट पैर रखा सीमा के मुँह से आह्ह्ह्ह माँ निकल गया,

अंजलि- बस बस मेरी बची थोड़ी देर में दर्द बंद हो जायेगा

अंजलि काफी देर तक सीमा की छूट को गरम पानी से साफ़ करती रही सीमा को बड़ी रहत मिल रही थी फिर अंजलि ने गरम पानी से सीमा की चूचिया भी धोई सीमा को बड़ा आराम मिला फिर अंजलि ने एक तुबे ली और सीम ाकि छूट पैर लगाई और एक मोती रुई उसकी छूट पैर रख क्र पंतय पहना दी और बोली इससे जलन नहीं होगी फिर एक रबर की बोतल में गरम पानी करके उसे दिया और बोली इसे अपनी टैंगो के बिच में रख क्र सिकाई करती रहना, एक दवाई दी खाने को,

अब तक अंजलि ने ये नहीं पूछा की किसने किया क्यों किया क्या हुआ था, सीमा बहुत शर्मिंदा हो रही थी, उसके मुँह से कुछ नहीं निकल रहा था, अंजलि ने सीमा को कपडे पहनाये और उठ क्र चल दी, तो सीमा ने उसका हाथ पकड़ लिया और बोली माँ पूछोगी नहीं किसके साथ मैंने मुँह कला किया ह,

अंजलि- जब तेरा दिल हो बताने का खुद बता देना मैंने अपने बच्चो को राज रखना नहीं सिखाया कुछ छुपाना नहीं सिखाया, मैंने तुम सब को आजादी दी ह अपनी जिंदगी जीने की जो दिल आये करो बस अपने पापा की इज्जत ख़राब मत करवाना

सीमा- माँ मैंने पापा की इज्जत hi ख़राब करवा दी

अंजलि- ये फैसला भी तेरा ह बीटा मैं तब भी तेरा साथ नहीं छोडूंगी, हर इंसाने को अपनी जिंदगी जीने का अधिकार होता ह वो किसके साथ क्या रिश्ता रखना चाहता ह ये तुम सबका फैसला ह, मैं तुम्हे कभी नहीं रोकूंगी तुम्हारे हर फैसले में मैं तुम्हारे साथ हु

सीमा- अगर मैं कहु की मैंने भाई बहन के रिश्ते को कलंकित किया ह तब भी

अंजलि- बीटा रिश्ता हमारे दिल से होता ह हम उस रिश्ते को क्या मानते हैं, समाज ने बस नाम दिए हैं रिश्तो के लेकिन कैसे निभाने ह वो हमारे दिल को पता होता ह अगर तुम्हारे दिल में भाई बहाना का रिश्ता ऐसा होना चाहिए तो उसे ऐसे hi निभाओ. दुनिया के लिए तुम भाई बहन hi हो लेकिन भाई बहन के अलावा तुम और कोनसा रिस्ता रखते हो ये तुम्हारा खुद का फैसला ह मैं हर तरह से तुम्हारे साथ हु बस माँ से झूट बोलकर कुछ मत करना

सीमा की आँखो में आंसू थे उसने अंजलि को बहो में भर लिया और रोने लगी माँ आप कितनी अच्छी हैं मैं hi पागल थी जो कभी आपको ठीक से समझ नहीं पाई

अंजलि- कोई बात नहीं ये उम्र hi ऐसी ह ये सब छोड़ और ये बता क्या हुआ था

फिर सीमा ने आज दिन की पूरी घटना बताई

माँ जब उसने मेरे मुँह में घुसाया तो मैं दर गई कही मैं मर न जाऊ फिर उसने निचे घुसाया तो बहुत दर्द हुआ फिर थोड़ी देर में मजा आने लगा मेरा तो दो बार हुआ उसका एक hi बार हुआ था लेकिन जब हवस उत्तरी तो बहुत शर्मिंदगी हुई, वो भी बहार चला गया तब से आया hi नहीं,

अंजलि- उसने अपना वीर्य तेरे अंदर दाल दिया क्या

सीमा- जी माँ हम खुद को रोक hi नहीं पाए न hi समझ आया की क्या होता ह

अंजलि- बस बीटा आगे लाइफ में इसी बात का ख्याल रखना की जब तक शादी न हो जाये वीर्य अंदर न डाला जाये वर्ण गरबनीरोधक गोलिया कहानी पड़ेंगी जिससे आगे चाक र माँ बनने में प्रॉब्लम हो सकती ह,

वैसे उसका ज्यादा बड़ा था क्या

सीमा शर्मा गई और बस हाथ से इशारा किया जो उसकी कोहनी से थोड़ा आगे था , जिसे देख अंजलि का मुँह खुला रह गया, उसे अचम्बा हुआ की उसके bête का लुंड इतना बड़ा ह और सीमा पहेली बार में hi इतना बड़ा झेल गई,

अंजलि को समझ आ गया था सीमा को डोमिनाते सेक्स पसंद ह उसके अंदर वाइल्ड रफ़ सेक्स की फीलिंग्स ह इसलिए वो झेल गई,

सीमा- माँ आगे से आपका क्या मतलब ह क्या मैं आगे भी क्र सकती हु क्या तुषार करेगा

अंजलि- ये तो तेरे उप्पेर ह तू अपने भाई से प्यार करती ह या बस हवस, तुझे सोचना ह कैसे अपने परिवार को जोड़ क्र रखना ह

तभी बहार से दीपा आ गई माँ मुझे नहीं मिला कही भी मैं तो पूरा गाओं घूम आई,

अंजलि- तू कपडे बदल ले मैं देखती हु

अंजलि कड़ी सोच रही थी की क्या करे कही तुषार शर्म में आकर कोई गलत कदम न उठा ले, वो काफी देर दरवाजे पैर hi कड़ी रही तो देखा सामने से रूचि और तुषार चले आ रहे हैं भीगते हुए, तुहार जैसे hi अंजलि के सामने आया तो उसका सर झुक गया, अंजलि समझ गई उसे खुद पैर शर्म आ रही ह लेकिन अंजलि ने उसे कुछ अहसास नहीं होने दिया की उसे पता ह आज क्या हुआ ह,

अंजलि- अरे कहा भीग रहा ह और तू रुक नहीं सकती थी कही भीगती आ रही ह

रूचि- माँ मैं तो रुक hi गई थी तो देखा ये महाशय बारिश में भीगते हु ेचले जार हे हैं मैं आवाज लगाई तो सुना नहीं फि रमुझे भाग क राइज पकड़ा पड़ा तो मैं भी भेज गई, इससे पूछा कहा जार है ह तो बोलता ह तुझे लेने आया हु मैं इसके पीछे से चिल्ला रही थी सुन तो रहा नहीं था फिर हम दोनों घर आ गए भीगते हुए मजा आ गया भीगने में, पैर अब ठण्ड लग रही ह,

अंजलि- उफ्फ्फ्फ़ ये लड़की भी न चल जड़ी से कपडे बदले तुम दोनों मैं सबके लिए गरम गरम चाय बनती हु,

रूचि जल्दी से रूम में घुस क्र कपडे बदल क्र आ गई तुषार अभी भी ऐसे hi खड़ा था,

अंजलि- तुझे क्या हुआ टब hi कपडे बदल ले जल्दी जा,

वो सर निचे किये चला गया, जब बहार आया तो सभी रसोई में बैठे थे तुषार बहार hi खड़ा हो गया,

अंजलि ने उसे आवाज लगी अंदर hi आजा यही चाय पिएंगे सब, तुषार खड़ा रहा तो रूचि उसका हाथ पकड़ क्र अंदर खींच क्र ले गई, उसने देखा सीमा चारपाई पैर लेती ह बाकि सब निचे बैठे हैं,

तुषार और सीमा की नजर आपस में टकराई तो सीमा ने शर्मा क्र नजर निचे क्र ली और तुषार ने शर्मिंदगी में, तुषार को लगा घर में हंगामा होगा लेकिन यहाँ तो माहौल कुछ और hi था सब खुश थे सीमा भी खुश hi लग रही थी, तुषार साइड में बैठ गया जहा सीमा सीधे उसे न देख पाए, अंजलि सब समझ रही थी, उसने सोचा दोनों को एक साथ बैठा क्र बात करुँगी अकेले में, फिर सब चाय पिने लगे,

तुषार को लगा सीमा ने किसी को कुछ नहीं बताया ह, वो थोड़ा नार्मल हुआ लेकिन उसके अंदर एक दर जरूर बैठा हुआ था, वही दीपा सोच रही थी की तुषार ने सीमा और कलवा का खेल बिगड़ दिया और तुषार नाराज ह सीमा से, लेकिन सच क्यात है ये किसी को नहीं पता था,

लेकिन सीमा के दिल में तुषार के लिए जो प्यार उमड़ा था शायद hi उसे कभी उसे ज्यादा प्यार का अहसास हुआ हो, वही अंजलि कोई रियेक्ट नहीं क्र रही थी, वॉक अरे भी तो क्या करे उसके बीटा और बेटी आपस में सेक्स क्र चुके हैं वो उन्हें रोकने की जगह अपन बेटी की सेवा क्र रही थी जैसे सुहागरात के बाद सास अपनी बहु की देखभाल करती ह,



ये कैसी माँ ह जो भाई बहाना को प्यार करने से सेक्स करने से रोकने की जगह उन्हें आजादी दे रही ह, सीमा के दिमाग में एक बार भी ये बात नहीं आई की एक माँ कैसे अपनी बेटी को उसके hi भाई से छोड़ने की आजादी दे सकती ह, इस टाइम तो सीमा को अंजलि दुनिया की सबसे अच्छी माँ लग रही थी, रात सबकी अच्छी गुजरी बस तुषार परेशां था उसे पछतावा था अपनी हरकत पैर, लेकिन सीमा बहुत खुश थी, अगले दिन अंजलि ने सीमा को एक गोली लेकर दी प्रेगनेंसी रोकने के लिए, कमल की माँ ह ये अपनी बेटी को प्रेगनेंसी रोकने की किट देती ह उसे कंडोम उसे करने की सलाह देती ह, जहा लोग ऐसा कुछ होने पैर लड़कियों को मर देते हैं वही ये अपनी बेटी को चुदाई के तरीके सीखा रही थी, ऐसा लगता था जैसे वो इस दुनिआ की hi न हो,
 
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