अपडेट-3
अंजलि- अब ये बताओ दूध तो सबको पीना ह पैर भैंस का काम कोण कोण क्या क्या कर्ज?
तुषार- मैं तो उसे नहलाऊंगा
सचिन- तो मैं उसे चारा दाल दूंगा
कपिल- तो सुबह शाम अंदर बहार बांधने की जिमेदारी मेरी
अन्जाइ- बहुत बढ़िया लड़कियों तुम क्या करोगी
रूचि- हम क्या करेंगे और क्यों करेंगे ये मुस्टंडे ह तो सही करने को हम तो राजकुमारिया हैं
अनजलि- अरे वह राजकुमारी जी फिर तो दूध भी उसे hi मिलेगा जो उसकी सेवा करेगा
दीपा- नहीं नहीं मैं करुँगी वैसे मुज्झे आता नहीं ह पैर इन्हे देख क्र सिख लुंगी.
सीमा- हम इनकी हेल्प करेंगे रुचे तुषार के साथ मैं सचिन के साथ और दीपा कपिल के साथ.
अंजलि- ठीक ह बढ़िया अब ये बताओ दूध निकलेगा कोण किसी को आता ह.
सभी एक दूसरे का मुँह देखने लगे क्योकि पुरे परिवार में बस राजेश hi था जिसे दूध निकलना आता था बाकि किसी ने आज तक दूध निकलता hi नहीं देखा.
सीमा- माँ हमने तो आज तक दूध निकला hi नहीं देखा लेकिन आपको तो आता होगा न आपके गाओं में आपके घर तो गे भैंस रही होंगी
सीमा की बात पैर अंजलि और राजेश थोड़े घबरा से गए अंजलि के मुँह से एक भी शब्द नहीं निकला तभी राजेश ने बात सम्हाली.
राजेश- तुम्हारी माँ भी तुम लोगो की तरह राजकुमरि बनने के चक्क्र में ऐसे काम नहीं करती थी इसलिए इसे भी कुछ नहीं आया आज तक.
राजेश ने बात को सम्हालते हुए अंजलि का मजाक बनाया जिससे सब है पड़े.
रूचि- हे भगवन ऐसा होगा राजकुमारी बनने के चक्क्र में मैं न बनती राजकुमारी मैं तो सब सिख लुंगी.
सब जोर से हसने लगे ये था परिवार जिनके पास इतनी गरीबी थी की रोज कमाते रोज कहते थे. लेकिन उनके प्यार और एकता की वजह से दुःख और तकलीफ के बाद भी वो पुरे गाओं में सबसे ज्यादा खुश थे और ये hi सबसे बड़ी वजह थी लोगो की उनसे छिड़ने की.
सभी गाओं में आप सबने देखा hi होगा की खंडन में जो परिवार सबसे गरीब या काम पढ़ा लिखा होता ह तो पूरा खंडन उसे और गरीब बनाने में लग जाता ह वो पूरी ताकत लगा देते हैं उसे बर्बाद करने में वो सब चाहते हैं उसके बच्चे न पढ़े अगर उसके बच्चे पढ़ लिए तो समाज में उसकी इजात बढ़ जाएगी जो वो होने देना नहीं चाहते और ये hi सब हो रहा था राजेश के साथ, और जब उसके खंडन के लोग राजेश को खुश देखते उसे बच्चो को पढता हुआ देखते तो उन्हें राजेश से और नफरत होती वो पूरी कोशिश करते उसे बर्बाद करने की.
कहानी पैर वापस आते हैं.
अंजलि का परिवार जिस भैंस के दूध की प्लानिंग क्र रहे थे वो तो दूध देती hi नहीं थी 3 दिन में 1 बार 1 किलो दूध देती थी बस लेकिन फिर भी सब खुश थे. रूचि ने उसका नाम रज्जो रख दिया और बोली खबर दर अगर आज के बाद किसी उसे भैंस कहा तो सब उसे रज्जो hi कहेंगे सभी ने सहमति में जवाब दिया फिर सब खुश होकर सोने लगे लेकिन अंजलि की आँखों में नींद नहीं थी आज उसे कुछ यादे सत्ता रही थी जो वो जाने अनजाने में सीमा ने कुरेद दी थी. उसका दिमाग शांत नहीं हो रहा था
अंजलि अपनी सोच में- बच्चे अब बड़े हो गए हैं और जरुरत से ज्यादा समझदार भी अगर इन्हे कभी मेरे बारे में पता चला तो क्या होगा और अपने पिता के बारे में पता लगा तो होगा क्या वो झेल पाएंगे क्या वो फिर भी प्यार से रह पाएंगे अगर उन्हें खुद के बारे में पता लगा तब क्या होगा नहीं नहीं ऐसा नहीं होगा मैं ऐसा नहीं होने दूंगी मैं अपने परिवार को बिखरने नहीं दूंगी ये बाते कभी किसी के सामने नहीं आएँगी.
अंजलि की आँखों में आंसू थे जो उस 100 वाट के बल्ब की रौशनी में एक मोती की तरह चमक रहे थे और इन अनमोल मोतियों को भेटा हुआ कोई देख रहा था लेकिन उसने कोई कोशिश नहीं की उन्हें रोकने की बस ऐसे hi चुप चाप लेते हुए देख रहा तो वो इंसान. कोण हो सकता ह क्या राजेश या कोई सी बेटी या कोई बीटा अभी नहीं पता वक़्त बताएगा ये तो.
अगले दिन सब अपने काम में लग आगये आज राजेश काम पैर नहीं गया आज उसने भँइस के खाने और रहने का इंतजाम किया बाकि सब अपनी अपनी मंजिल की तरफ चले गए. आज एक काम अलग हो गया रूचि और दीपा के स्कूल की छुट्टी जल्दी हो गई उनके एग्जाम की डेट शीट आ गाइट hi जो 15 दिन बाद से शुरू होने थे तो प्रिंसिपल ने आज हाफ टाइम से छुट्टी क्र दी और बोलै कल से अगले 10 दिन तक स्कूल में एक्स्ट्रा क्लासेस चलेंगी कोई भी स्टूडेंट हॉलिडे नहीं करेगा इसी वजह से आज जल्दी भेजा जार है ह ताकि सभी रेस्ट क्र सके. बच्चे ख़ुशी ख़ुशी घर भाग लिए. दीपा और रूचि ने सीमा के कॉलेज के गेट पैर इनफार्मेशन दे दी की वो घर जा रही हैं और घर की तरफ चल दिए उन्हें टेंगा मिल गया वो घर पहुंच गए जल्दी.
घर पहुंचे तो देखा दरवाजा खुला हुआ ह उन्होंने सोचा उनके पापा घर पैर hi होंगे वो अंदर गई तो उन्हें वह कोई दिखाई नहीं दिया राजेश दीखता भी कैसे वो तो रज्जो के लिए चारा लेने गया था तो घर में कोण था रूचि तो उछलती हुई कमरे में कपडे बदलने घुस गई लेकिन दीपा कमरों में अच्छे से देखने लगी फिर वो बहार देखने लगी घूमते हुए वो घर के पीछे जाने लगी तो उसे कुछ आवाज आई वो आवाज की तरफ गई तो उसे वह जो देखा उसकी साँस hi अटक गई वो अपनी पालक भी झपकना भूल चुकी थी वो बस देखे hi जा रही. नजारा hi कुछ ऐसा था वह सचिन अपने 6 इंच के लुंड की मुठ मर रहा था.
उसकी आँखे बंद थी और वो बस आह्हः अह्ह्ह्ह अह्ह्ह क्र रहा था और अपने लुंड को हिलाये जा रहा था और तभी उसने एक जोर से आह्ह्ह्ह भरी और उसके लुंड ने लावा उगलना शुरू क्र दिए जिसे दीपा मन्त्र मुग्ध सी उसे देखे जा रही थी वो तो उसमे ऐसे खो गई थी जैसे ये लावा उसी के लिए निकला गया हो.
उसने पहले बार किसी को ऐसे हिलाते और वीर्य निकलते देखता था लुंड तो देखने को मिल गए पहले भी क्योकि गाओं के बहुत से बेशरम लोग थे जो इस परिवार की औरतो के सामने hi अपना 5-5 िची लुंड निकल क्र म्यूट लगते थे और मुश्कुरा क्र अपनी बेशर्मी दिखते थे. लेकिन आज उसने अब तक का सबसे बड़ा लुंड देखा वो भी अपने भाई का मूत मरते हुई. इधर सचिन के लुंड ने भी लगातार 7-8 धार मरी और शांत होने लगा तो दीपा की तंत्र टूटी और वो चुपसे वह से निकल गई कमरे में आकर बैठ गई.
रूचि- कहा चली गई थी
दीपा- कही नहीं यही थी बहार देख रही थी कही पापा बहार तो नहीं ह
तभी बहार से सचिन आ गया
सचिन- तुम दोनों कब आये
दीपा घरबरा क्र बोली अभी अभी बस बिलकुल अभी
रूचि- अरे तू ऐसे क्यों दर रही ह जैसे चोरी करके आये हैं हम अभी आये हैं हम तू स्कूल नहीं गया आज
सचिन- गया था लेकिन पेट में दर्द था तो आ गया था जल्दी
रूचि – तो दरवाजा खुला छोड़ क्र कहा गया था
सचिन- वो मैं पीछे था फ्रेश हो रहा था
दीपा- हो गया फ्रेश हाथ तो धो लिए न
दीपा की बात पैर सचिन थोड़ा सा झेप गया है है और हाथ नहीं धोऊंगा क्या पागल हो दी आप भी
दीपा- चल बहार जा मुझे कपडे बढ़ने ह
सचिन चला गया तो रूचि ने पूछा आज तूने सचिन को बहार क्यों भेजा हमने तो हमेशा भाइयो के सामने भी कपडे बदले ह माँ ने तो हमे नहीं सिखाया ऐसे चुप क्र कुछ करना
दीपा- अरे पागल अब हम जवान हो चुके हैं और ये लड़के भी पुरे जवान हो चुके हैं
रूचि- अच्छा जी आज सुबह तक हम सब बच्चे थे और 4 घंटे के अंदर hi हम सब जवान हो गए हैं क्या ड्रामा ह ये क्या हुआ तुझे
दीपा- तू तो पागल ह मैं ऐसा नहीं बोल रही
रूचि- तो क्या बोल रही ह तू मैं माँ से hi पूछूँगी आज कुछ अलग सिखाया ह क्या इसे
दीपा- अरे नहीं यार ऐसी कोई बात नहीं ह तू बुला ले उसे मैं बदल लुंगी उसके सामने hi बस
रूचि- चल चल शर्मीली छमिया बदल ले अब तू अकेले hi मैं भी जा रही हु बहार और रुचु भी बाहर आ गयी.
दीपा के अंदर बड़ी बैचनी हो रही थी उसके दिमाग में लुंड से निकलते वीर्य की तस्वीर हैट hi नहीं रही थी कपडे बदलते बदलते उसके हाथ कब उसकी चूचियों पैर चले गए उसे अहसास hi नहीं हुआ जब बहार से कुछ आहत हुई तो वो खयालो से बहार आई और जल्दी कपडे पहने.
कपिल और तुषार भी आ चुके थे गाओं के स्कूल की छुट्टी जल्दी हो जाती थी क्योकि सुबह को स्टार्ट जल्दी होता था कसबे के स्कूल में दूर से बच्चे आते थे तो सुबह टी टाइमिंग देर से स्टार्ट होती तो छुट्टी भी देर से होती. घर में घुसते hi
तुषार- तुम लोग आज इतनी जल्दी कैसे तुम लोगो के पेट में भी दर्द था क्या
रूचि- हमारे पेट में क्यों दर्द हो दर्द हो जाये मेरे दुश्मनो को वो कल से एक्स्ट्रा कॉसेस ह इसलिए जल्दी छुट्टी हो गई.
तुषार- अच्छा चल आज तू खाना लगा दे हमारे लिए
रूचि- क्यों जैसे रोज आकर कहते हो वैसे hi खा लो
कपिल- रहने दे टुशु ये न देने वाली हमे रोटी हम खुद hi खा लेंगे
तभी दीपा आई- तुम कपडे बदलो मैं गरम करती हु खाना.
तुषार- वाओ दीदी आप hi हो सबसे बेस्ट दीदी मेरी और उसने दीपा को गले से लगा लिया और पूरा जकड लिया जससे दीपा की चूचिया तुषार की छाती में डाब गई.
ऐसे गले तो ये लोग हमेशा लगते रहते थे कोई अलग बात नहीं थी लेकिन दीपा के लिए कुछ नया था उसे तुषार की छोड़ छाती में अपनी चूचिया दबते hi अलग अहसास हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ था उसके अंदर की भवनए बदलने लगी थी जभी तुषार बिलकुल नार्मल था उसने दीपा को आजाद क्र दिया लेकिन दीपा के फेस से लग रहा था की वो आजाद होना नहीं चाहती थी उसे आन्नद आ रहा था जब से सचिन को उस हालत में देखा उसकी तो हरकत hi बदल गई वो पूरी hi बदल गई उसके अंदर बहुत भावनाये थी जो वो कभी किसी से शेयर नहीं करती बहुत काम बोलती शर्मीली जोट hi जिसकी वजह से वो अपनी फिल्लिंग्स भी दबती आ रही थी लेकिन आज सचिन को वो सब करता देख उसके अंदर हलचल हो गई और उसे मर्द का स्पर्श बहुत सकूं दे रहा था.
अधूरे मन से दीपा अलग हुई और खाना देने लगी.
उधर सीमा की छुट्टी हुई तो गेट पैर गार्ड ने बता दिया की उसक भेने चली गई अब सीमा को अकेले घर जाना था वो बेचारी चल दी अकेले आज उसे अकेले देख क्र कॉलेज से कुछ hi दुरी पैर एक लड़के ने उसका रास्ता रोक लिया और बोलै ो मैडम क्या हाल चल ह
सीमा घबरा गई उसने इधर उधर देखा वह कोई नहीं था. सीमा चुप आगे चलने लगी तो उसने लड़के ने सीमा का हाथ पकड़ा और एक लेटर सीमा को देते हुए बोलै ये लो इसे पढ़ क्र जवाब देना सीमा ने वो लत्तेर निचे फेंक दिया तो उस लड़के ने गुस्से में सीमा को रोका. सीमा दर गई वो बेचारी कुछ बोल hi नहीं प् रही थी उसके मुँह से एक भी शब्द नहीं निकल रहा था तभी पीछे से एक लड़का आया और उसने फेल वाले लड़के की गार्डन पकड़ी और बोलै और भूतनी के तेरी हिमत कैसे हुई लड़की को छेड़ने की
पहला लड़का- ू मादरचोद निकल यहाँ से ये मेरा माल ह
दूसरा लड़का- भें के लोडे इतना मरूंगा अपनी भें भी तुझे माल hi नजर आने लगेगी
तभी पीछे से कुछ लड़के और ा गए ोये जांय भाई क्या हुआ इस दूसरे लड़के का नाम जांय था.
जांय- अरे यार ये भोसड़ी का हमारे पड़ोस गाओं की लड़की को छेद रहा ह
बस फिर क्या था लड़की की सहायता करने तो पूरी मर्द जाट कड़ी हो जाती ह उन्होंने भी सबने मिलकर उस लड़के की अच्छी वाली धुलाई क्र दी.
जांय- सीमा तुम चलो यहाँ से मेरे दोस्त देख लेंगे इसे
सीमा- शर्माती हुई उसके साथ चल दी.
सीमा चुप काहप चल रही थी जांय भी कुछ कहना चाहता था लेकिन शायद हिम्मत नहीं जूता पाया. लास्ट में सीमा को hi बात शुरू करनी पड़ी.
सीमा- तुम मेरा नाम जानते हो
जांय- है हम एक hi कॉलेज में सेक्शन अलग ह पैर नाम तो पता चल hi जाता ह. वैसे आज तुम अकेली जा रही हमेशा तुम्हरी कोई न कोई बहन या तीनो एक साथ रहती हो.
सीमा- है आज उनकी छुट्टी जल्दी हो गई
जांय- अच्छा अच्छा
फिर दोनों एक दूसरे की पसनद न पसंद हाल चल फॅमिली पूछते चलते रहे. जांय कुछ कहना चाहता था लेकिन उसे डार्ट है कही बात न बिगड़ जाये अब दोनों के रस्ते अलग होने में ज्यादा वक़्त नहीं था. अब जांय ने हिम्मत करके बोलै
जांय- सीमा मैं काफी टाइम से तुमसे कुछ कहना चाहता था कभी हिम्मत नहीं हो पाई और हमेशा तुम्हारी बहन तुम्हारे साथ होती थी आज मैं तुम बोल देता हु फैसला तुम्हारा ह तुम जॉब hi फैसला लोगी मुझे मंजूर होगा.
सीमा को समझ तो आ रहा था जांय क्या बोलने वाला इसलिए उसकी धड़कन तेज होती जा रही थी.
जांय- सीमा मैं तुम्हे पसनद करता हु और तुमसे दोस्ती करना चाहता हु अगर तुम्हे लगे मैं तुम्हारे लायक नहीं हु तो मन क्र देना
जब तक जांय की बात ख़तम होती या सीमा कुछ बोल पता उनके रास्तो का मोड़ आ गया.
जांय बस ये hi बोल पाया मैं तुम्हारी है या न का वेट करूँगा अगर तुम्हारी है ह तो कॉलेज में एक बार मेरे सेक्शन में झक क्र चली जाना मेरा सेक्शन b.com स ह.
सीमा बस निचे देखती हुई आगे बढे जा रही थी उसके दिल और दिमाग में तूफ़ान आया हुआ था उसका दिमाग दर रहा था दिल बैचैन था ो समझ नहीं प् रही थी क्या करे. वो तो कब से चाहती थी उसका बर्फ हो लेकिन कोई अच्छा मिल hi नहीं रहा था लेकिन जांय काफी स्मार्ट था और देख क्र लगता भी था की पैसे वाला भी ह. और आज जो उसने सीमा की हेल्प की उस लड़के से बचा क्र उसे तो सीमा पूरी तरह इम्प्रेस हो गई थी. अब तक की ए सभी परपोसल में जांय सबसे बेस्ट ऑप्शन था. सीमा ये hi सब सोचते हुए चले जा रही थी उसके दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था वो घर पहुंची उसके कुछ देर बाद अंजलि भी आ गई.
शाम को जब पूरा परिवार एक साथ बैठा तो अंजलि ने सीमा और दीपा के एक्सप्रेशन नोट किये जो पूरी तरह बदले हुए थे. ये एक माँ किन अजर थी या एक औरत की या दोनों की. अंजलि ने सीमा के फेस पैर ख़ुशी से भरी शर्म महसूस क्र ली थी और दीपा की आँखों में उसने एक नशा सा महसूस किया एक खुमारी सी. लेकिन ये सही समय नहीं था बात करने का.
एक और इंसाने था जो अंजलि की आँखों में कुछ ढूंढ रहा था लेकिन जो औरत सबकी आंखे पढ़ सकती थी भला उसकी आँखे कोई कैसे पढ़ सकता था उसकी आँखों में बच्चो के लिए प्रेम के अलावा कुछ नहीं मिला कभी. लेकिन जो इंसाने ढूंढ रहा था ो रुकने वाला नहीं था उसके दिमाग में कुछ बैठ गया था या किसी ने कुछ बैठा दिया था.
नेक्स्ट डे सभी अपने काम पैर निकल गए रस्ते में चारो माँ बेटी एक साथ जा रहे थे तो अंजलि ने सीमा को अपने साथ किया और दीपा और रूचि आगे चलने लगी.
अंजलि- सीमा बीटा कुछ ऐसी बात ह जोट ुम मुझे बताना चाहती हो या मुझे पता होनी चाहिए.
अंजलि का ऐसे एक दम डायरेक्ट सवाल पूछने से सीमा की फैट गई उसकी तो साँस hi अटक गई लेकिन आप सब तो जानते hi ह जब लड़की आशिक़ी करती ह तो उसके घर वाले उसे रेंज हाथो भी पकड़ ले वो झूट hi बोलती रहेगी वो भी पुरे कॉन्फिडेंस से वही सीमा ने किया.
सीमा- नहीं तो माँ ऐसी तो कोई बात नहीं ह अगर कुछ बात होगी तो आपसे तो खुद hi आकर बताउंगी.
अंजलि समझ गई की सीमा झूट बोल रही ह लेकिन उसने बात को आगे नहीं बढ़ाया. फिर दोनों चुप चल दी फिर अंजलि ने दीपा को अपने पास बुलाया और शामे सवाल उसे पूछा अब बेचारी दीपा सीमा की तरह नजबुत नहीं थी तो दर गई कल की पूरी घटना एक hi झटके में अंजलि को बता दी.
अंजलि- तूने किसी को बताई तो नहीं ये बात
दीपा- नहीं माँ
अंजलि- गुड बताना भी मत बीटा जब जवानी आती ह तो मन ऐसे भटकने लगता ह तो ऐसी गलतिया हो जाती ह ये सब नेचुरल ह और इसमें शर्माने की कोई बात नहीं ह सेक्स बॉडी की नीड ह जैसे खाना हवा पानी वैसे hi बॉडी को एक टाइम के बाद सेक्स भी चाहिए. बस अभी उसकी आगे काम ह इसलिए गलत मन जायेगा बाकि तेरे लिए गलत नहीं ह अगर तुझे नीड हो तो तू कर सकती ह तेरी आगे हो गई ह
अंजलि की बात सुनकर दीपा शर्मा गई
अंजलि- बीटा मैंने मेरे बच्चो को शर्माना नहीं सिखाया इसलिए जब जॉब hi लगे या रिक्वायर्ड हो मुझे बताओ मैं तुम्हे सही सलाह दूंगी.
दीपा है में गार्डन हिलती हुई चली गई. लेकिन अंजलि को लगा अब बच्चो को जीवन की सबसे बड़ी शिक्षा देने का टाइम आ गया ह.
फिर सभी अपनी अपनी मंजिल की तरफ चले गए. कॉलेज पहुंचते hi सीमा ने कल की साडी बात मेघा को बताई
मेघा- हे मेरी जान तूने है क्यों नहीं बोली फिर उसे
सीमा- यार मैं समझ नहीं प् रही थी सोचा तुझसे एक बार बात क्र लू फिर है बोलूंगी
मेघा- अरे पागल ऐसे मोके रोज नहीं मिलते इतना स्मार्ट ह वो
सीमा- है यार स्मार्ट तो ह
मेघा- तो छमिया बोल दे है तुझे भी लुंड मिल जायेगा तेरी इस मुनिअ की प्यास भी बुझ जाएगी
सीमा- रहने दे बस ये hi काम ह क्या
मेघा- अच्छा जी जैसे वो तो तेरी लेगा hi नहीं न
सीमा- मैं नहीं देने वाली इतनी आसानी से
मेगा- वो तो टाइम बताएगा पैर तू चल तो सही उसके सेक्शन में
सीमा- नहीं यार मुझे दर लग रहा ह
मेघा ने जबरदस्ती सीमा का हाथ खींचा और चल दी जांय की क्लास की तरफ. मेघा ने बस हाथ पकड़ा हुआ था सीमा तो खुद hi उसके साथ चले जा रही थी.
वो दोनों जांय की क्लास के सामने से गुजरी तो जांय उन्हें दिखाई नहीं दिया. सीमा का तो मुँह hi उतर गया वो दोनों वापस से आई और अंदर झाकने लगी लेकिन वोन hi दिखा जांय क्लास में होता तो दीखता भी. अब सीमा को गुस्सा आ गया वो बोली कितने फत्तू लड़के हैं ह फिर जवाब सुनने से डरते हैं बताओ आज स्कूल hi नहीं आया. मैं क्या पागल हु जॉय अहा चक्क्र काट रही हु
मेघा- तू कहा चक्क्र काट रही तुझे तो मैं खींच क्र ले हूत एरा मन तोडना था
सीमा- चुप रह कुटिया अगर मेरा मन न होता तो मैं यहाँ ताका ा जाती क्या कॉलेज hi नहीं आती फिर तो. मेरा मूड ख़राब हो गया मन क्र रहा ह उसकी जान ले लू अभी.
तभी पीछे से आवाज आई बाँदा हाजिर हुकुम करो खुद अपनी जान दे देगा.
सीमा और मेघा ने पीछे मुद क्र देखा तो जांय खड़ा था जो एक कोने में चिप क्र उन दोनों की हरकते देख रहा था. और जैसे hi सीमा को ये बात समझ आई की जो नाटक सीमा करने वाली थी जांय को सताने का उल्टा पद गया ह जांय ने hi उसे सत्ता दिया. सीमा शर्मा गई और बोली तुम बड़े ख़राब हो ऐसा कोई करता ह क्या मैं बात नहीं करती तुमसे.
जांय- माफ़ करना मैं तो ऐसे hi तुम्हे देखने बहार निकला था तो देखा तुम लोग इधर hi आ रहे हो तो सोचा देखु तो तुम्हारी है ह या न बस इसी लिए चिप गया.
मेघा- तो क्या देखा आपने है या न
जांय- मुझे तो दो बार है दिखाई दी
सीमा फिर शर्मा गई
मेघा- ठीक ह तो आज कही पार्टी चलो आज मेरी सहेली ने किसी को है बोली ह पार्टी तो बनती ह.
जांय- आप लोग कॉलेज के बहार निकलो मैं वही मिलता हु अगर एक साथ जायेंगे तो लोग तुम्हारे बारे में बाते बनाएंगे.
जांय की बात सुनकर सीमा इतनी खुश हो गई उसकी नजरो में जांय की इज्जत और बढ़ गई. फिर वो लोग बहार चले गए घूमने खाया पिया सीमा अभी भी श्रम रही थी उसकी तरफ से सरे जवाब मेघा hi दिए जा रही थी. जांय ने सीमा को एक ब्रेस्लेट खरीद क्र दिया. जिससे सीमा बहुत खुश हो गई क्योकि ये उसका पहला गिफ्ट था बस उसे अपनी माँ से छुपाना था.
ऐसे hi दिन गुजर गया शाम को सब घर आ गए. आज अंजलि ने कुछ ज्ञान देने का फैसला किया था क्या ह वो ज्ञान ये अगले part में बताउंगी.
कहानी पसंद करने के लिए बहुत धन्यवाद