Incest मेरी बीवियां, परिवार..…और बहुत लोग… - Page 8 - SexBaba
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Incest मेरी बीवियां, परिवार..…और बहुत लोग…

Friends, apologies for the delay in reply...been quite busy with my work and am not getting much time...but will surely ensure that by this weekend, I will post the next update...

Since there is a gap in updates, इस बार भी लम्बा अपडेट ही देने की कोशिश करूंगा. अपडेट तो जल्दी लिख पाता हूँ लेकिन फोटोज के लिए बहुत समय लगता है. आशा है आप समझ सकते हो. साथ बने रहिये. फिर से धन्यवाद. !!!
 
38th Update (दीपू के मजे…पूरे जोश में) (Mega Update)



कविता कहती है की वो भी उनके साथ जाना चाहती है तो वसु इस बात के लिए भी मान जाती है क्यूंकि वसु को पता था की मीना उसकी बेटी है तो उसके साथ जाना एकदम स्वाभाविक ही है और फिर तीनो मीना के घर की तरफ निकल जाते है….



अब आगे..

अगली सुबह:



अगली सुबह तीनो दीपू मीना और कविता मीना के घर के लिए निकल जाते है दीपू के कार में. २- ३ घंटे के बाद वो तीनो मीना के घर पहुँच जाते है जहाँ मनोज उनका इंतज़ार कर रहा था. मनोज को पता था की मीना वापस आ रही है तो उसने ऑफिस से छुट्टी ले लिया था.



मीना के घर पे:

मनोज सब को देख कर बहुत खुश हो जाता है और फिर तीनो घर में प्रवेश करते है. घर में चाय पानी होने के बाद सब हॉल में बैठे हुए होते है.

मनोज मीना को देख कर: क्या बात है तुम बहुत थकी हुई लग रही हो.

मीना: ऐसी कोई बात नहीं है.

मनोज: लेकिन तुम्हारे चेहरे से पता चल रहा ही की शायद तुमने बहुत काम किया है.

मीना अपने आप को थोड़ा संभालते हुए: वो क्या है ना... बड़ी दीदी अब प्रेग्नेट हो गयी है तो डॉक्टर ने उसे आराम करने को कहा है. (मैं ये बात लिखना भूल गया था की मनोज को भी पता चल गया था की उसकी बेहन वसु फिर से प्रेग्नेंट हो गयी है). तो घर का काम हम ही करते थे... इसीलिए ऐसा लग रहा है की मैं थकी हुई हूँ और ऐसा बोलते हुए मीना एक नज़र दीपू पे डालती है और उसे देख कर चुपके से हस देती है.

ये दृश्य कविता भी देख लेती है लेकिन कुछ नहीं कहती लेकिन मन में सोचती है की दीपू ने उसकी इन पिछले ५ दिनों में बहुत बजायी है..

मनोज: तो भांजे तुम भी अब बाप बनने वाले हो. बधाई हो.

दीपू: धन्यवाद मामा.

मनोज: अब यहाँ २- ३ दिन रह कर जाना. मुझे भी अच्छा लगेगा.

दीपू: आपकी बात तो सही लेकिन लेकिन हम कल ही निकल जाएंगे क्यूंकि घर पे सिर्फ दिव्या और माँ है. अब वसु भी आराम कर रही है तो हमें जाना होगा.

मनोज: ठीक है. अगर तुम लोग रुक जाते तो अच्छा होता.

दीपू: कोई नहीं मामा जब अगली बार आएंगे तो और ज़्यादा दिन रहेंगे. वैसे एक बात पूछूं?

मनोज: हां पूछो क्या बात है?

दीपू: मैं सोच रहा हूँ की अब यहां दादा दादी तो नहीं है. तो आप भी क्यों नहीं आ जाते और हमारे साथ रहते?

मनोज: बात तो तुम्हारी सही है लेकिन मेरी यहां नौकरी है ना.

दीपू: आप मेरे साथ मेरे बिज़नेस में हाथ बटा सकते हो अगर आप वहाँ आ जाओगे तो.

मनोज कुछ सोचता है और कहता है की वो भी इस बारे में सोचेगा और जल्दी ही उसे बताएगा की वो उनके पास आ सकता या नहीं. इस बात पे दीपू भी मान जाता है और फिर ऐसे ही बातें करते हुए उनका दिन निकल जाता है.



रात को:



मनोज और मीना:



रात को खाना खा कर मनोज और मीना अपने कमरे में सोने चले जाते है तो वहीँ दीपू और कविता भी दुसरे कमरे में सोने चले जाते है. मनोज मीना को अपनी बाहों में लेकर ऊपर पंखे की तरफ देख रहा था. मीना मनोज को ऐसे देखते हुए पूछती है: क्या सोच रहे हो?

मनोज: कुछ नहीं यार.... तुम जिस काम के वहां गयी थी वो हो गया क्या?

मीना मनोज के मुँह से ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और अपनी आँखें नीचे करती हुई हाँ में उसे जवाब देती है.

मनोज: मैं भी चाहता हूँ की तुम भी जल्दी माँ बन जाओ. तुम्हारी ख़ुशी से ज़्यादा मेरे लिए कुछ नहीं है.

मनोज की ये बात सुनकर मीना एकदम भावुक हो जाती है और उसकी आँखों से आंसूं निकल आते है. वो मनोज के ऊपर आकर उसकी आँखों में देखते हुए कहती है... तुमने जो बात कही है तुम नहीं जानते मुझे कितना सुकून मिला है. अगर हम कभी माँ बाप भी नहीं बन सकते तो भी मुझे शायद कोई गिला शिकवा नहीं होता लेकिन तुम्हारा ये प्यार ही मेरी ज़िन्दगी के लिए काफी है और ऐसा कहते हुए मीना मनोज के होंठों को चूम लेती है बड़े प्यार से.

मनोज भी उसको चूमता है और कहता है... तुम जल्दी से माँ बन जाओगी तो इस घर में बहुत खुशियां होगी. मीना भी उस बात से सहमत होती है और फिर से रोने लगती है. मनोज उसकी आँखें पोछते हुए कहता है... और ज़्यादा इमोशनल मत हो जाओ वरना मुझे भी तकलीफ होगी. मीना इस बात पे हस देती है और फिर अपनी आँखें साफ़ करते हुए फिर से मनोज की बाहों में लुढ़क जाती है और फिर दोनों बड़ी चैन की नींद में चले जाते है.



दीपू और कविता:



वहीँ दुसरे कमरे में कविता भी सोने की तैयारी करती है और बिस्तर पे जाकर लेट जाती है.

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दीपू भी फिर कमरे में आता है और कविता को बिस्तर पे लेटा देख कर उसका लंड एकदम तन कर खड़ा होजाता है क्यूंकि वो उस पोज़ में बहुत सेक्सी लग रही थी.

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वो भी थोड़ी थकी हुई थी तो वैसे ही साडी में ही लेट जाती है बिस्तर पे और सोते समय उसकी साडी नाभि ने नीचे सरक जाती है और वो बहुत कामुक लग रही थी.. उसी को देख कर दीपू का यह हाल हुआ था (याने लंड को एकदम तन कर कड़क हो गया था). वो कविता के ऊपर चड कर उसकी चूची को दबाते हुए कहता है... इतनी जल्दी कैसे सो रही हो जान?

कविता: तुम कभी थकते नहीं क्या? पिछले पांच दिनों से तुमने मीना की खूब बजायी है और अभी फिर से मेरे ऊपर चड गए हो. थोड़ा आराम भी कर लिया करो. ये तुम्हारी सेहत के लिए अच्छा होगा.

दीपू: वैसे थक कैसे सकता हूँ जान जब घर में इतनी मस्त बीवियां है और जो रोज़ मेरा इंतज़ार करती है और मैं भी इंतज़ार करता हूँ की कब बिस्तर पे नंगा कर के तुम सब को चोदू. क्यों तुम्हे पसंद नहीं है क्या? और रही बात मीना की तो उसमें तुम्हारा भी फायदा है ना. तुम भी जल्दी नानी बन जाओगी.

दीपू के ऐसा कहने से कविता एकदम शर्मा जाती है और दीपू को प्यार से देख कर हस देती है.

दीपू: देखो तो कैसी मेरी बीवी शर्मा रही है. बोलो क्या कहती हो?

कविता: जानू आज तुम आराम कर लो. वैसे भी पिछले पांच दिनों से अपने लंड को आराम नहीं दिए हो और आज फिर गाडी भी चला कर आये हो. जब कल घर चले जाएंगे तो मैं ही तुम्हारे पास आऊँगी और मुझे भी जम के चोदना. मैं तुम्हे मना नहीं करूंगी. और वैसे भी वसु तो पेट से है. उसे तो आराम की ज़रुरत है तो बाकी दोनों बीवियां ही तुम्हारा ख़याल रखेंगी.

दीपू इस बात पे मान जाता है और कहता है ठीक है लेकिन एक चुम्मी तो बनती है ना.

दीपू के कहने पे कविता खुद अपने होंठ दीपू के होंठों से मिला देती है और दोनों एक गहरे और प्रगढ़ चुम्बन में जुड़ जाते है और दोनों अपनी जीभ एक दुसरे से मिलाते हुए पीते है.

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३- ४ Min के गहरे चुम्बन के बाद कविता दीपू को अपने ऊपर से हटा देती है और उसको बगल में सुला कर उसके कंधे पे अपना सर रख कर थोड़ा आराम करती है और देखते ही देखते दोनों गहरी नींद में चले जाते है.



अगली सुबह:



अगली सुबह कविता नाहा धो कर अपने कमरे में तैयार होती रहती है. उस वक़्त वो नहा कर सिर्फ ब्रा और पैंटी में आईने के सामने खड़ी होकर तैयार होती रहती है तो दीपू भी तैयार होने के लिए वहां आता है कविता को ऐसे देख कर उससे रहा नहीं जाता और पीछे से उसे पकड़ कर उसकी चूची को दबाते हुए उसके गले को चूमता है और कहता है...

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दीपू कविता की चूची दबाते हुए कहता है... जान अब ये थोड़े बड़े हो गए है और हाथ में अच्छे से समां रहे है और दबाने में भी मजा आ रहा है.

कविता: हाँ ये तो बड़े होंगे ही ना जब तुम और मेरी सौतनें इसे दबा दबा कर और चूस चूस कर बड़े जो कर रहे हो.

दीपू : वैसे तुम तो क़यामत लग रही हो जा. मन करता है अभी तुम्हे बिस्तर पे पटक कर तुम्हारी दोनों छेदों को खोल दूँ.

कविता: चुप कर... जब देखो तुम्हे यही सब सूझता है. कभी अपने दिमाग से भी सोचो और सिर्फ अपने लंड से नहीं क्यूंकि कविता को उस ब्रा पैंटी में देख कर उसका लंड खड़ा हो गया था और उसकी गांड को चुभ रहा था. और ऐसा कहते हुए वो हस देती है.

दीपू: अभी हस लो. घर चलने के बाद इस हसी का बदला लूँगा. चलो मैं भी तैयार होता हूँ लेकिन पहले मुझे मुँह मीठा करना है और ऐसा बोल कर वो कविता को अपनी और घुमा कर फिर से उसके लाल होंठ पे टूट पड़ता है. पहले तो कविता थोड़ा चक्र जाती है लेकिन वो भी दीपू का साथ देते हुए वो भी उसके होंठ पे टूट पड़ती है. दीपू उसके होंठ चूसते हुए उसकी चूची को भी ज़ोर से दबा देता है और कविता की सिसकी उसके मुँह में ही डाब जाती है क्यूंकि दीपू उसकी जुबां को भी चूस रहा था.

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फिर थोड़ी देर बाद दोनों अलग होते है और दीपू बाथरूम की तरफ जाता है तो कविता उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक लेती है और उसके कान के पास आकर कहती है: मुझे भी तुम्हारे बदले का इंतज़ार रहेगा और उसे आँख मार कर उसे बाथरूम की तरफ धकेल देती है.

फिर वो भी नाहा कर तैयार हो कर आ जाता है और मीना और मनोज से कहता है की वो अपने घर के लिए निकल जाएंगे. इतने में कविता भी तैयार हो कर बाहर आती है तो उसे देख कर दीपू मन में सोचता है ये तो आज मुझे मार ही डालेगी. उसने एक स्लीवलेस ब्लाउज पहना हुआ था जिसमें से उसकी आधी चूचियां जैसे बाहर आने को तड़प रही थी और अपनी साडी में नाभि के नीचे ही बाँधा हुआ था. वो तो एकदम क़यामत लग रही थी.

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उसे देख कर मीना धीरे से उसके कान में कहती है: माँ तुम तो बहुत सुन्दर दिख रही हो. संभाल लेना अपने पति को और ध्यान से घर जाना. कविता ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और प्यार से उसके गाल को खींचती है लेकिन कुछ नहीं कहती.

फिर दोनों उनसे अलविदा लेकर अपने घर के लिए निकल पड़ते है. उस दिन मौसम बड़ा अच्छा था और थोड़े बादल भी छाए हुए थे. जब वो रास्ते में होते है तो बारिश शुरू हो जाती है और सुहाने मौसम में दीपू भी गाडी चलाते हुए दोनों मजे से जा रहे थे.

दीपू: डार्लिंग मस्त बारिश हो रही है और मौसम भी बहुत अच्छा है.

कविता: हाँ तुम सही कह रहे हो. मेरा तो मन कर रहा है की थोड़ा बारिश में भीग जाऊं.

दीपू कविता की बात सुनकर कार को एक जगह रोक देता है और फिर दोनों कार से बाहर आकर वहां थोड़ा टहलते है क्यूंकि वो जगह बहुत अच्छी थी... बारिश की वजह से वो और खूबसूरत लग रहा था. बहुत सारे हरे भरे पेड़ पौधे और शानदार हरियाली छायी हुई थी जब वो थोड़ा घूम लेते है तो भीग जाते है लेकिन उनको उसकी परवाह ना थी... क्यूंकि उन्हें वहां देखने वाला जोई नहीं था और फिर वहां से उन्हें घर ही जाना था.

कविता उन गीले कपड़ों में और भी सेक्सी लग रही थी और दीपू से रहा नहीं जाता तो वो कविता को पकड़ कर अपने होंठ उससे जोड़ लेता है और दोनों एक गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है. कविता भी उस मौसम में गरम हो गयी थी और वो भी दीपू का पूरा साथ देती है और दोनों एक दुसरे का रस चूसने में लग जाते है. दीपू उसको चूमते वक़्त उसकी नाभि में ऊँगली कर के उसे और भड़का देता है जिससे उसकी चूत बहने लगती है.

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थोड़ी देर ऐसे ही चूमने के बाद दोनों एक पेड़ के नीचे बैठ जाते है और फिर बातें करते हुए और ठन्डे मौसम का मजा लेते हुए दोनों के होंठ जुड़ जाते है.

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दोनों खूब ऐसे ही मस्ती करते है और अब बारिश भी बंद हो गयी थी तो वो दोनों वापस कार में आकर अपने घर की और निकल पड़ते है.

थोड़ी दूर ऐसे ही जाने के बाद वो एक चाय की टापरी पे रुक कर चाय पीते है. दीपू जब पैसे दे रहा होता है तो कविता बगल में एक पेड़ के पास उसका इंतज़ार करती है.

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उसको देख कर दीपू से रहा नहीं जाता क्यूंकि कविता ऐसे खड़ी थी जैसे वो उसे चोदने का निमंत्रण दे रही थी. बारिश में भीगने और चूमने से कविता भी गरम हो गयी थी.

दीपू कविता को देख कर कार में आने का इशारा करता है और कार में आते ही कविता देखती है की दीपू अपना पैंट खोले अपने लंड को बाहर निकाला हुआ है. कविता भी उसको देख कर समझ जाते है और हस्ते हुए कार में बैठ कर सीधा उसके लंड को मुँह में लेकर चूसने लगती है.

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अब दीपू को भी मजा आ रहा था क्यूंकि ये पहली बार था जब वो किसीके साथ कार में मस्ती कर रहा था. दीपू भी अपनी गांड को उठा कर उसके मुँह में अपना लंड पूरी ज़ोर से घुसा रहा था और कविता भी पीछे हटने वाली नहीं थी. ५ Min की लंड चुसाई के बाद दीपू का लंड पूरा कविता की थूक से भीग गया था और अपने पूरे फॉर्म में था.

कविता: जानू आज ऐसा पहला मौका मिला है जब हम दोनों घर से बाहर है और दूर भी और हमें यहाँ देखने वाला कोई नहीं है. क्यों ना आज मुझे खुले में चोदो.

दीपू: क्या बात है डार्लिंग तुम तो आज बड़ी ठरकी लग रही हो.

कविता: हाँ क्यों नहीं. सुबह से ही तुमने मेरे होंठ चूस चूस कर और चूची दबा दबा कर मुझे बहुत गरम कर दिए हो और बेहका भी दिए हो. पता नहीं मैं घर जाने तक रह पाऊंगी या नहीं. और वैसे भी तुमने भी आज तक कभी ऐसे खुले में किसी को चोदा नहीं है तो तुम्हे भी मजा आएगा.

दीपू: जानू तुम्हारी बात भी सही है और अब मेरा भी मन कर रहा है और ऐसा कहते हुए दीपू एक सुनसान जगह पे अपनी गाडी रोक देता है और फिर कविता को भी बाहर आने को कहता है. जब कविता भी बाहर आती है तो दीपू उसे कार की बोनेट पे रख कर उसके होंठ और गले को चूसने लग जाता है.

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देखते ही देखते दीपू कविता को नंगा कर देता है और फिर उसको गले से चूमते हुए उसकी चूची को ज़ोर ज़ोर से दबाते रहता है. खुले आसमान के नीचे उन्हें देखने वाला कोई नहीं था तो कविता भी ज़ोर ज़ोर से आँहें भर्ती रहती है और कहती है... ऐसे ही दबाओ जानू... बहुत परेशान करती है.

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तुमने कहा था ना घर में की अब ये थोड़े बड़े हो गए है तो और दबाओ और बड़े कर दो.

दीपू: ज़रूर मेरी जान और जब इनमें दूध आएगा तो पीने में बड़ा मजा आएगा.

दीपू जब ये बात कहता है तो कविता मुड़कर उसकी तरफ देखती है तो दीपू कहता है: जब माँ पेट से हो गयी है तो तुमने नहीं होना है क्या?

दीपू की ये बात सुनकर कविता एकदम खुश हो जाती है और उसके होंठों को चूम कर कहती है.... सोचा था घर जाकर मैं तुमसे इस बारे में बात करूंगी... लेकिन तुमने तो अभी मेरे मन की बात केह दी है. हाँ मुझे भी जल्दी ही फिर से माँ बनना है. बनाओगे ना मुझे भी?

दीपू: ये भी कोई पूछने वाली बात है क्या और ऐसे कहते हुए दीपू कविता को पेड़ के सहारे करते हुए अपना मोटा और तना हुआ लंड उसकी गीली चूत में डाल देता है और खड़े खड़े ही उसको चोदने लगता है. इस पोजीशन में दोनों को बहुत मजा आ रहा था क्यूंकि दोनों के लिए ये पहली बार था.

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५- १० Min की ऐसी लम्बी चुदाई के बाद दीपू कविता को अपने कार के पास लाकर उसे कार के सहारे करते हुए फिर से उसको चोदने लगता है और इस बार वो कविता की एक टांग उठा कर अपने कंधे पे रखते हुए उसे ठोकने लगता है.

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दीपू कविता को चोदते हुए: जानू मजा आ रहा है ना?

कविता: पूछो मत. मैंने तो ऐसा मजा आज तक कभी लिया ही नहीं. क्यों तुम्हे मजा नहीं आ रहा है क्या?

दीपू: मुझे भी बहुत मजा आ रहा है. देखो खुले आसमान में हमें यहाँ देखने वाला कोई नहीं है और तुम तो इतनी ज़ोर से चिल्ला रही हो. इतनी ज़ोर से तुम घर में चिल्लाती तो शायद बगल वाले भी अपने घर आकर पूछे की कोई झगड़ा कर रहा है क्या. इस बात पे दोनों है देते है और दीपू कविता को चोदते वक़्त कविता अपने होंठ दीपू से मिला देती है. दीपू अब उसके होंठों का रस पीते हुए उसकी चूचियों को दबाते हुए पेल रहा था. इन तीनो हमलों से कविता झेल नहीं पाती और फिर से अपना पानी छोड़ देती है. अब दोनों थोड़े थके हुए थे लेकिन कोई हार मानने केलिए तैयार नहीं था.

कविता: जानू आज हमने इतने नए तरीके से चुदाई की है तो घर जाने से पहले एक बार कार में भी मुझे चोद दो. मैं ये भी एहसास करना चाहती हूँ.

दीपू: क्या बात है जानू आज तो तुम्हे बड़े अच्छे ideas आ रहे है.

कविता: सब तुम्हारी बदौलत ही है. तुमने ही हम सब को एक एक कर के और एक साथ सब को चोदा है... कभी बिस्तर पे तो कभी बाथरूम में तो कभी किचन में. मैंने सोचा जब तुम इतने नए तरीके और जगह में चोदते हो तो क्यों ना कार में भी हो जाए.

दीपू: नेकी और पूछ पूछ (जो कहावत है).

दीपू फिर कविता को कार में भी नए नए अंदाज़ में चोदता है... पीछे की सीट पे उसकी टांगें अपने कन्धों पे रख कर तो कभी कविता उसकी गोद में बैठ कर तो कभी कविता को घोड़ी बना कर कार में उसे हर पोजीशन में चोदता है.

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इस चुदाई से दोनों बहुत तृप्त हो जाते है. जहाँ कविता को याद भी नहीं रहता की उसने कितनी बार झडा है उनके चुदाई के दौरान... और आखिर में दीपू भी हार मान जाता है और कहता है की तो भी झड़ने वाला है और ऐसे कहते हुए वो इस बार कविता की चूचियों पे अपना पानी गिरा देता है. और बहुत सारा पानी गिराता है.

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इतना गिरा हुआ पानी देख कर कविता कहती है: मैंने आज गलती की है. तुम्हे अपना पानी मेरी चूत में ही डालना था. मैं भी फिर ज़रूर पेट से हो जाती और ऐसा कहते हुए वो हस देती है.

दीपू भी हाँफते हुए सीट पे गिर जाता है और अपनी साँसों को सम्भालता है. कविता भी दीपू के पानी को अपने अंगूठे में लेकर चूसती है और कहती है.... तुम्हारा पानी तो आज बहुत अच्छा लग रहा है और उसे आँख मार देती है

दीपू: चिंता मत करो. तुम चाहो तो अब से हर बार मेरा पानी अपनी चूत में ही लेना. दीपू के ऐसा कहने से कविता एकदम खुश हो जाती है और दीपू को चूम लेती है.

५ Min बाद दोनों फिर कार से उतर कर अपने आप को साफ़ करते है (उन्होंने घर से पानी लाया हुआ था) और फिर अपने घर की और निकल जाते है.

२- ३ घंटे में वो घर पहुँच जाते है. वसु सोयी हुई थी तो दिव्या ही उनका इंतज़ार कर रही थी. जब वो घर आते है तो दिव्या देखती है की दोनों थोड़े थके हुए है और कविता का चेहरा भी थोड़ा बिगड़ा हुआ था और उसके बाल भी भीकरें हुए थे.

दीपू अपने कमरे में चला जाता है तो दिव्या कविता को देख कर कहती है: क्या बात है दीदी तुम्हारा चेहरा और बाल देख कर ऐसा लगता है जैसे कहीं से झगड़ा कर के आ रहे हो.

कविता दिव्या को अपनी बाहों में लेकर उसके होंठ चूमते हुए कान में कहती है: हाँ हम दोनों ने खुले आसमान में “बहुत लड़ाई” की है और उसको देखते हुए आँख मार के हस देती है.

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दिव्या कविता की बात सुनकर खुले मुँह से उसको देखती रहती है तो कविता कहती है: जानू बहुत मजा आया. उसने तो मुझे पूरा थका ही दिया है. करीब एक घंटे तक उसने मुझे छोड़ा ही नहीं और मेरी खूब बजायी है और हम दोनों को बहुत मजा आया. मैं तो अब बहुत थक गयी हूँ और सोने जा रही हूँ और ऐसा बोल कर वो भी कमरे में चली जाती है सोने के लिए क्यूंकि उसका बदन भी अब बहुत टूट रहा था.

दिव्या भी अपना हाथ माथे पे रख कर मुस्कुराते हुए वो भी सोने चली जाती है. शाम को फिर सब उठते है और चाय पीने बैठ जाते है. दीपू अब थोड़ा फ्रेश लग रहा था लेकिन कविता के चेहरे पे अभी भी थोड़ी थकान दिख रही थी. उसको देख कर लता पूछती है की इतनी थकी क्यों लग रही है तो कविता कुछ नहीं कहती और दीपू की तरफ देखती है. दीपू हस देता है और लता को कुछ बहाना बता देता है.



रात को:



रात को फिर सब खाना खा कर सोने चले जाते है तो कविता कहती है की वो वसु के साथ सोयेगी तो वसु भी मान जाती है. लता दिव्या और दीपू को देख कर मन में सोचती है की आज दिव्या तो गयी और हस्ते हुए वो भी दुसरे कमरे में सोने चली जाती है.

दिव्या भी फिर कमरे में चली जाती है और फिर दीपू को प्यास लगती है तो वो पानी पीने किचन जाता है.

जब वो पानी पीते रहता है तो वहां दिव्या आती है जो की लगभग नंगी ही थी. वो एक छोटी और पतली पैंटी पहने हुए अपनी गांड मटकाते हुए दीपू के पास आती है तो दीपू बड़ी ललचायी नज़र से उसको देखते रहता है.

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दिव्या: क्यों जानू लगता है तुम तो बड़े मजे कर के आ रहे हो. एक तो दीदी को पेट से कर दिया और पिछले एक हफ्ते से कविता दीदी की ले रहे हो. लगता है अब तुम्हे मुझमे ज़्यादा दिलचस्पी नहीं है. कविता दीदी ने बताया था की आज आते वक़्त तुम दोनों ने क्या किया है.

दीपू: ऐसे कैसे हो सकता है जान की मुझे तुमपे दिलचस्पी नहीं है. क्यों तुम्हे जलन हो रही है क्या?

दिव्या: थोड़ी रूठी आवाज़ में... नहीं तो क्या? ऐसा लगता है तुम मुझे भूल ही गए हो.

दीपू फिर दिव्या को अपनी बाहों में लेकर उसको चूमते हुए... ऐसा कभी हो सकता है क्या? तुम जैसी हो... वैसे ही तुम्हारी दोनों दीदियाँ भी है.

दिव्या: मतलब?

दीपू: मतलब तुम जितनी चिकनी और चुड़क्कड़ हो वैसे ही तुम्हारी दीदियाँ है और उसे आँख मारते हुए फिर से उसकी गांड को दबाते हुए उसको चूमने लगता है.

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दिव्या झूठे गुस्से से: किसीको मनाना है तो कोई तुमसे ही सीखे और फिर वो भी अपनी जुबां दीपू के मुँह में दे देती है और दोनों एक प्रगाढ़ चुम्बन में जुड़ जाते है. थोड़ी देर बाद दीपू: जानू अभी थोड़ा चाय पीने का मन कर रहा है. चाय बनाओगी क्या?

दिव्या: क्यों नहीं और फिर थोड़ी देर बाद वो चाय बना कर अपनी गांड मटकाते हुए दीपू के पास आती है और उसे चाय देती है.

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दिव्या को देख कर दीपू का लंड एकदम तन जाता है क्यूंकि दिव्या की मस्त बड़ी बड़ी चूचियां एकदम कामुक तरह से हिल रही थी जब वो चाय लेकर आती है तो. अब दीपू से भी रहा नहीं जाता है वो चाय को बगल में रख कर दिव्या के होंठों पे टूट पड़ता है और फिर से दोनों एक गहरी चुम्बन में भिड़ जाते है और दीपू भी दिव्या की चूचियों को मसलते रहता है.

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थोड़ी देर बाद दीपू दिव्या को वहां किचन के स्लैब पे रख कर उसके पैरों को अपने कंधे पे रखते हुए उसकी चूत चूसने लग जाता है. दिव्या भी आह आह करते हुए सिसकिया लेती रहती है और अपने हाथ दीपू के सर के ऊपर रख कर उसे अपनी चूत पे दबा देती है.

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दीपू भी बड़े चाव से दिव्या की चूत और गांड दोनों को चूसते और चूमते रहता है. दिव्या का तो हाल बेहाल हो जाता है और जब दीपू उसकी चूत चूसते हुए अपनी एक ऊँगली उसकी गांड में डालता है तो दिव्या सेहन नहीं पाती और अपनी पानी छोड़ देती है जिसे दीपू पूरा पी जाता है. अब दीपू का भी लंड एकदम खड़ा हो गया था और वो दिव्या को स्लैब से उठा कर नीचे करते हुए उसे बिठा देता है.

जब दीपू के लंड को उसके अंडरवियर से निकलती है तो वो एक स्प्रिंग की तरह एकदम खड़ा हुआ उसके चेहरे के सामने आ जाता है.

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दिव्या बड़ी ललचायी नज़र से उसको देखते हुए उसके लंड पे टूट पड़ती है और अब तो उसे आदत भी हो गयी थी और एक ही बार में उसका पूरा खड़ा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने और चाटने लगती है.

दीपू भी अपना हाथ उसे सर के पीछे रखकर अपने लंड को आगे पीछे करता है जैसे वो उसका मुँह चोद रहा है.

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५ Min की मुँह चुदाई के बाद दीपू कहता है: अगर तुम ऐसे ही चूसते रहोगी तो मैं भी झड़ जाऊँगा तुम्हारे मुँह में.

दिव्या: अपना मुँह उसके लंड से निकालते हुए नहीं मुँह में मत झडो. आज मुझे भी ऐसे ही चोदो जैसे तुमने कविता को चोदा था. बस फरक इतना है की वो खुले आसमान के नीचे था और अब यहाँ किचन में है और मैं भी बहुत गरमा गयी हूँ. आज मेरी पूरी गर्मी निकाल दो.

दीपू: चलो ये भी अच्छा है और ऐसा कहते हुए वो दिव्या के पीछे आकर उसे थोड़ा झुकता है और उसे पता था की दोनों ही अब बहुत उत्तेजित है और दिव्या की चूत भी पूरी भीगी हुई है और अपने लंड को दिव्या की चूत में एक ही बार में पूरा अंदर डाल देता है. दिव्या की तो जैसे जान ही निकल गयी थी की एक बार में ही उसने पूरा घुसा दिया है.

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दीपू अब दनादन उसे पेले जा रहा था जिससे उसकी बड़ी चूचियां भी हिल रही थी और वो दृश्य बड़ा ही उत्तेजनक था. अगर कोई उन दोनों को देख लेते तो सोचते की दोनों तो जन्नत में पहुँच गए है. दीपू उसे ठोकते हुए उसे चूमते रहता है.

फिर दीपू उसकी एक टांग उठाता है जिससे उसकी चूत भी खुल जाती है और वैसे ही टांग उठा कर अपना पूरा लंड उसकी चूत में फिर से दाल देता है और अब खड़े खड़े ही उसको चोदने लग जाता है.

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थोड़ी देर बाद दिव्या कहती है की उसके पाँव दुःख रहे है तो दीपू उसे फिर से स्लैब में बिठा कर उसके पैरों को अपने कंधे पे रखते हुए वैसे ही झटके मारते रहता है और उसका लंड भी पूरी तरह दिया की चूत के जड़ तक पहुँच जाता है.

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दीपू: जानू मजा आ रहा है ना? अब भी कोई शिकायत है क्या?

दिव्या दीपू को चूमते हुए... नहीं... तुम्हे भी पता है मैं भी ऐसी चुदाई के लिए बहुत दिनों से तड़प रही थी. पिछले हफ्ते तो तुम सिर्फ कविता और मीना पे ही ध्यान दे रहे थे और ऐसा लगा की तू हम दोनों को भूल ही गया है.

दीपू: उसको ठोकते हुए... माँ ने ही कहा था की मीना अपने घर जाने वाली है तो उसी के साथ थोड़ा वक़्त गुज़ार. समझ गयी?

दिव्या: अब ज़्यादा बकवास नहीं और मुझे ऐसे ही चोदते रहो. बहुत मजा आ रहा है.

थोड़ी देर ऐसे ही पेलने के बाद दीपू कहता है: अब तुम्हे असली जन्नत दिखाता हूँ.

दिव्या: मतलब?

दीपू दिव्या को स्लैब से उठा कर उसे फिर से झुकाता है और इस बार बिना कुछ बताये अपने लंड पे थूक लगा कर भले ही वो दिव्या की चूत के पानी से भीगा हुआ था... दिव्या की कमर को पकड़ कर उसकी उठी हुई गांड पे अपना लंड रखता है. दिव्या को जब ये एहसास होता है तो वो पलट कर दीपू को देखती है लेकिन तब तक बहुत देर हो गयी थी क्यूंकि दीपू अपने पूरे दम से शॉट मारता है और उसका पूरा लंड दिव्या की गांड पे पूरा घुस जाता है.

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दिव्या की तो जैसे सांसें ही बंद हो गयी थी इस दमदार ठुकाई से... उसने सोचा नहीं था की दीपू एक बार में ही पूरा लंड उसकी गांड में डाल देगा... लेकिन दीपू रुकता नहीं और उसको चूमते हुए क्यूंकि उसे पता था की दिव्या को बहुत दर्द होगा... तुम्हे भी ऐसी ही चुदाई चाहिए थी ना... दिव्या अपने आंसूं पोछते हुए... तुम तो बड़े जालिम निकले... पहले मुझे बता तो देते... मैं तुम्हे गांड मारने से मन तो नहीं करती...

दीपू: जानू कभी कभी ऐसे surprises भी मजेदार होते है और दीपू दिव्या की गांड मारते रहता है. कुछ मिनट बाद दीपू से भी रहा नहीं जाता और वो अपना लंड उसकी गांड से निकाल कर अपना पूरा माल उसकी गांड के ऊपर ही निकाल देता है.

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अब दोनों थक गए थे और थोड़ा आराम करते है जहाँ दिव्या अपनी साँसों को संभालती रहती है. इन सब के दौरान उन्हें पता नहीं चलता की लता को भी थोड़ी प्यास लगी हुई थी और वो पानी पीने किचन की तरफ जाती है और बाहर से ही दोनों की चुदाई देख कर वो भी एकदम गरमा जाती है और अपनी चूत मसलते हुए सोचती है की दीपू का लंड तो एकदम सही है.

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एकदम दुमदार और बड़ा और और कितना पानी गिराता है...अगर इतना पानी वो दिव्या और कविता की चूत में डालेगा तो घर में बच्चों की लाइन लग जायेगी... इसी वजह से वो तीनो को एकदम खुश रक्त है. मुझे वसु से बात करनी पड़ेगी या फिर कुछ जुगाड़ करना पड़ेगा वरना मैं रह नहीं पाऊँगी. लता चुपचाप वहां से अपने कमरे में चली जाती है और फिर दोनों दिव्या और दीपू भी अपने आप को साफ़ कर के एक दुसरे को चूमते हुए अपने कमरे में चले जाते है. जाते वक़्त वो वसु के कमरे में देखते है तो दोनों वसु और कविता मस्त नींद में थे. दीपू मन में सोचता है की शादी के बाद आज उसका एकदम सुनहरा दिन था और ऐसी दिन उसने बहुत काम ही महसूस किया था....



Note: मुझे ये अपडेट लिखने के लिए बहुत मेहनत, समय और सोच भी लगा. ख़ास कर के फोटोज ढूंढने में. आशा की आप सब भी इस अपडेट को उतना ही प्यार देंगे जितना अब तक आपने दिया है. धन्यवाद.!!
 
Friends, I had planned to update and post my next post today but due to some office work i had to travel. Currently I am out of my house. Will post the update once I am back and the work pressure reduces a little bit..should not take more than 2-3 days. I hope you all understand. Much Thanks for your patience and support.
 
39th Update (ठरकी वसु और ऋतू/ निशा की प्यास) (Mega Update)



दीपू मन में सोचता है की शादी के बाद आज उसका एकदम सुनहरा दिन था और ऐसी दिन उसने बहुत काम ही महसूस किया था....….

अब आगे..



अगली सुबह:



अगली सुबह दीपू जब नींद से उठता है तो देखता है की दिव्या और कविता दोनों उसके कन्धों पे अपना सर रखे हुए नंगी सो रहे है. उन दोनों को देख कर दीपू के चेहरे पे हसी आ जाती है. वसु वहाँ बिस्तर पे नहीं थी तो दीपू को लगता है की वो उठ गयी है. दीपू फिर दिव्या को उठाता है तो दिव्या थोड़ी अंगड़ाई लेते हुए कहती है: सोने दो ना. रात को तो तुमने मेरी गांड मारके मुझे इतना थका दिया है की अभी तो उठने का मन नहीं कर रहा है.

दीपू को पिछले दिन की चुदाई याद आती है और सोचता है की ऐसे दिन उसे बहुत ही काम देखने को मिले. फिर वो दोनों को ठीक से सुला कर खुद उठ जाता है और बाथरूम की तरफ निकल जाता है. वो तैयार हो कर किचन में जाता है तो वहाँ वसु चाय बना रही होती है.

दीपू पीछे से वसु को अपनी बाहों में लेकर उसके गले को चूमते हुए कहता है: क्या बात है? आज जल्दी उठ गयी हो?

वसु: जल्दी कहाँ? रोज़ तो इसी समय उठती हूँ. आज भी वैसे ही उठ गयी हूँ. इसमें नया क्या है? वैसे कल कविता कह रही थी की तुम दोनों ने खुले आसमान के नीचे बहुत मजे किये है और जिस तरह से दिव्या घोड़े बेच कर सो रही है लगता है उसका भी वैसे ही हाल है.

वो पीछे मुड़ कर दीपू को देखते हुए कहती है... लगता है तू तो मुझे भूल ही गया है. तेरी बाकी दोनों बीवियों का अच्छे से ख्याल रख रहा है लेकिन तू तो मुझ पे ध्यान ही नहीं देता.

दीपू: उसकी आँखों में देखते हुए अपने होंठ उसके होंठों से मिला देता है जिसमें वसु भी पूरा उसका साथ देती है और उसकी गांड को दबाते हुए कहता है...

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ऐसा कभी हो सकता है क्या की मैं आप को भूल जाऊं? आप तो मेरी जान हो और फिर उसकी जीभ को वसु के मुँह में डालता है तो वसु भी उसका स्वागत करती है और दोनों एक गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है.

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थोड़ी देर बाद... वसु: उन दोनों को देख कर मुझे थोड़ी जलन हो रही है.

दीपू: क्यों?

वसु: तू तो उन दोनों के साथ पूरा मजे कर रहा है और ऐसा कहते हुए वसु रुक जाती है… जैसे केह रही हो की वो अब वसु को भूल गया है

दीपू उसकी चूची को दबाते हुए कहता है....

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डॉक्टर ने तुम्हे थोड़ा आराम करने को कहा है...इसीलिए तुम थोड़ा आराम कर लो. दीपू उसे चूमते हुए उसकी चूची को दबाते हुए कहता है... इसमें दूध कब आएगा? मुझे भी दूध पीना है.

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वसु: चुप कर बेशरम... दूध तो हमारे होने वाले बच्चे के लिए है और आएगा.. तुम्हे क्यों पिलाऊंगी?

दीपू: मैं भी तो तुम्हारा बच्चा हूँ ना... मुझे नहीं पिलाओगी क्या?

वसु: उसको देखते हुए... बच्चा जो मुझे चोद के फिर से गाभिन कर दिया और कहता है बच्चा हूँ.... हस्ते हुए... बेशरम कहीं के...

दीपू: हस्ते हुए मैं कितना बेशरम हूँ बताओं क्या? चलो कमरे में या फिर यहीं पे तुम्हे बताता हूँ.

वसु: चुप कर... बाकी लोग भी आ जाएंगे.

दीपू: तो आने दो ना.... वो भी तो तुम्हारी सौतन ही है ना.. हमारी बेशर्मी देख कर वो भी अपने कपडे निकाल कर हमारे साथ जुड़ जाएंगे.

वसु: उसके होंठों को चूमते हुए... चुप कर और बाहर निकल जा. मैं चाय बना कर लाती हूँ और वो दीपू को धक्का देकर किचन से उसे बाहर भेज देती है.

फिर सब उठ जाते है और अपना काम करते है दीपू भी तैयार हो कर अपने काम के लिए निकल जाता है और घर की औरतें अपने काम में व्यस्त हो जाती है. वसु देखती है की दिव्या लंगड़ा कर चल रही है. उसे सोचने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगा की पिछली रात उसकी मस्त ठुकाई हुई है. जब वो लंगड़ाते हुए चल रही थी तो लता वसु के पास आकर उसके कान में धीरे से कहती है...

लता: वसु देख रही हो दिव्या की क्या हालत हुई है?

वसु: हाँ मैं समझ सकती हूँ.

लता: तू तो सिर्फ समझ सकती है लेकिन मेरी तो बहुत बुरी हालत है.

वसु: क्यों?

लता: इसीलिए की कल रात को मैं पानी पिने किचन की तरफ आ रही थी लेकिन वहां दोनों प्यार के शहज़ादे थे और दीपू क्या चुदाई कर रहा था... दिव्या की... उनको देख कर तो मेरी चूत भी पूरी गीली हो गयी थी और फिर रात को ठीक से नींद भी नहीं आयी.

वसु: लता की तरफ देख कर: तो महारानी लगता है आप भी अभी पूरी उत्तेजित हो.

लता: हाँ रे... अब तो मुझसे भी रहा नहीं जा रहा है. दीपू का बड़ा और तगड़ा लंड कल पहली बार देखी थी तो लगा की वो तुम तीनो को कैसे संभालता है और प्यार से वसु के पेट पे हाथ रख कर... नतीजा तो मैं देख ही रही हूँ और लगता है इस घर में और खुशियां भी जल्दी ही आने वाली है और ऐसा कहते हुए वो प्यार से वसु के होंठ चूम लेती है. वसु भी शर्मा जाती है लेकिन कुछ नहीं कहती.

लता: मेरी हालत का कुछ सुधार बता ना... लगता है आज मैं पैंटी नहीं पेहन पाऊँगी. मेरी चूत से तो पानी रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है.

वसु: मैं समझ सकती हूँ.

लता: मेरा भी कुछ जुगाड़ करना. लता की ये बात सुनकर वसु उसकी तरफ देखती है तो पाती है की लता की आँखों में चाहत और तड़प दोनों दिख रही थी और बड़ी चाहत से उसे देख रही थी.

वसु: मुझे पता है तू भी दीपू के नीचे आने के लिए तड़प रही है लेकिन मैं क्या करू? तू ही बता.( वसु को पता था की लता बड़ी उत्तेजित और कामुक औरत है जिसकी वजह से उसका तलाक हुआ था क्यूंकि उसका पहले वाला पति उसे पूरी तरह से बिस्तर पे खुश नहीं कर पाया था.)

लता: बड़े प्यार से और उसे मनाते हुए... शायद मेरा कहना गलत होगा... आखिर में तुम उसकी बीवी हो... लेकिन एक बार दीपू से बात करो ना.

वसु थोड़ा नाटक करते हुए (लेकिन मन में सोचती है की दीपू के लिए एक और चूत जल्दी ही मिलने वाला है) मैं कैसे कह सकती हूँ की वो (दीपू) अपनी बुआ से हमबिस्तर हो जाए.

लता: तू सही कह रही है. मैं बाहर अपना और तुम सब का मुँह काला नहीं करना चाहती हूँ किसी और से मिलकर क्यूंकि पता नहीं वो आदमी कैसा होगा. और मुझे दीपू में वो सब दीखता है जो एक अच्छे पति और आदमी में हो. मैं ये नहीं कह रही की मैं भी दीपू से शादी कर लून (और मन में सोचती है की अगर सच में दीपू उससे शादी करने के लिए मान जाता है तो वो बहुत खुश नसीब समझेगी अपने आप को) लेकिन अगर एक बार वो भी मुझसे मिल जाएगा और मुझे भी वो ख़ुशी देगा जो तुम सब को मिलता है तो मैं तुम्हारी ज़िन्दगी भर आभारी रहूंगी और दुखी मन से अपना चेहरा नीचे झुका लेती है.

वसु को लता पे दया आती है और उसका सर उठा कर उसकी आँखों में देखते हुए कहती है की वो दीपू से इस बारे में बात करेगी. वो मानेगा या नहीं वो उसपर निर्भर करता है.

लता: हाँ तेरी बात भी सही है. उसका भी मंजूर होना ज़रूरी है.

वसु: तू चिंता मत कर और अपना ये मुरझाया हुआ चेहरे पे हसी ला. ठीक है?

लता: ठीक है.

और फिर दोनों अपने काम में लग जाते है.

लता की बात सुनकर वसु भी काफी उत्तेजित हो जाती है और बहक जाती है. वो चुपके से अपने कमरे में जाती है और साडी निकल कर पैंटी के ऊपर से ही अपनी चूत मसलते हुए दीपू को याद करती है और साथ में लता की बातें भी की कैसे उसने पिछली रात दिव्या की बजायी थी.

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वहीँ लता भी नहाने चली जाती है और नहाते वक़्त अपनी चूत को मसलते हुए पिछली रात के मंज़र को याद करते हुए अपनी चूत मसलते रहती है और जब उससे रहा नहीं जाता तो अपनी चूत में २ ऊँगली डाल कर मसलते हुए दीपू को याद करते हुए आखिर में वो झड़ जाती है.

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फ़ोन पे बातचीत:



वहीँ दूसरी तरफ वसु अपनी चूत को मसलते हुए दीपू को फ़ोन करती है.

वसु: क्या कर रहे हो बेटा?

दीपू: मैं अपने काम में बिजी हूँ. बोलो आज अचानक कैसे कॉल किया और क्या कर रही हो?

वसु अपनी चूत को मसलते हुए अपनी सिसकारियां रोक नहीं पाती और फ़ोन पे ही बात करते हुए सिसकती है जो दीपू सुन लेता है.

दीपू: वो आवाज़ सुन कर... मुझे तो ये आवाज़ सुनी सुनी हुई लग रही है. क्या कर रही हो?

वसु: तुम क्या जानो मैं क्या कर रही हूँ... आज और अभी मैं इतना बेहक गयी हूँ और तुम्हे याद करते हुए नंगी हो कर अपनी चूत को मसल रही हूँ. तुम तो आजकल इस्पे ध्यान नहीं देते. ये सब तुम्हारा ही नतीजा है की मैं अपने आप को शांत कर रही हूँ.

दीपू जब वसु की ये बात फ़ोन पे सुनता है तो वो भी बेहक जाता है और उसका लण्ड भी खड़ा हो जाता है.

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दीपू: आप कहो तो मैं अभी घर आ जाता हूँ... आपकी सारी गर्मी निकाल दूंगा ये मेरा वादा है.

वसु: नहीं तुम अभी अपना काम करना और जो ये वादा तुम कर रहे हो ना... वो आज रात को पूरा करना. आज मैं तुम्हे छोड़ने वाली नहीं हूँ.

दीपू: चिंता मत करो... मैं भी तुम्हे छोडूंगा नहीं और फिर दोनों उत्तेजित ही हो कर थोड़ी बहुत बातें करते है और अब दीपू से भी रहा नहीं जाता तो वो अपना लण्ड निकाल कर वसु को याद करते हुए मुठियाते रहता है क्यूंकि उसके ऑफिस में उसे एक अलग कमरा/ केबिन था जिसमें बहुत ही काम लोग आते थे.

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फिर फ़ोन कट कर देते है. जब दीपू फ़ोन बंद कर के थोड़ी गहरी सांसें लेने लगता है (क्यूंकि वो भी वसु की बातें और उसको याद कर के वो भी ठरकी हो गया था) और अपने खड़े लण्ड को पैंट में एडजस्ट करने लगता है तो ठीक उसी वक़्त ऋतू उसके पास आती है कुछ काम के लिए. ऋतू को पता नहीं था तो वो दरवाज़ा खोल कर अंदर आ जाती है बिना खटखटाये. ऋतू दीपू का चेहरा देख कर थोड़ी चिंता करती है की उसे कुछ हो तो नहीं गया (दीपू आँखें बंद किये हुए अपने पैंट को ठीक करते रहता है) और वो अपनी नज़रें नीचे करते हुए उसके पैंट में बने खड़े लण्ड को देखती है तो उसका भी बुरा हाल हो जाता है और फिर दीपू का ध्यान हटाने के लिए थोड़ा खास्ती है तो दीपू ऋतू को देख कर चक्र जाता है क्यूंकि उसने सोचा नहीं था की ऋतू उसके पास आएगी.

दीपू: आंटी आप? कुछ काम था क्या? अब ऋतू का चेहरा भी एकदम लाल हो गया था जो की उसके चेहरे पे दिख रहा था. उसको भी लगता है की उसे वहां से चला जाना चाहिए तो वो कुछ बोल कर वहां से निकल जाती है और फिर ऑफिस में अपने केबिन में जाकर गहरी सांसें लेते हुए सोचती है की दीपू किसको याद कर के इतना बेहक गया है वो भी अपनी चूत को मसलने से नहीं रोक पाती.

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दीपू भी सोच में पड़ जाता है की ऋतू ने उसे किस हालत में देखा है और वो क्या सोचती होगी उसके बारे में.

ये पहली बार था जब ऋतू ने दीपू का खड़ा और लम्बा लण्ड देखा था और वो तो उसके चेहरे से जा ही नहीं रहा था.

और जब से ऋतू ने दीपू के खड़े लण्ड को देखा था तब से उसका मन काम में नहीं लग रहा था. वो किसी तरह उस दिन गुज़ारती है और शाम को अपने घर चले जाती है.

वहीँ दूसरी तरफ जब वसु दीपू से बात करते हुए अपनी चूत मसल रही थी उसी वक़्त कमरे में दिव्या और कविता भी आ जाते है और वसु को ऐसी हालत में देख कर हस देते है और उन्हें लगता है की वो दीपू से ही बात कर रही है.

दिव्या भी अपनी गांड मटकाते हुए और लंगड़ाते हुए वसु के पास आती है और कहती है... मैं कुछ मदत करू या फिर अपनी उँगलियों से ही काम चलाओगी?

कविता भी वसु से ऐसे ही पूछती है और उसे आँख मार देती है.

वसु: चुप कर... कुछ भी बक्ति रहती है.

दीपू: किस्से बात कर रही हो?

वसु: तुम्हारी बाकी दोनों बीवियां भी आ गयी है. बात करोगे क्या? जब वसु ये बात दीपू से कहती है तो उसी वक़्त ऋतू दीपू के पास आती है.

दीपू: मैं अभी थोड़ा अपने काम से बिजी हूँ. घर आकर बात करता हूँ और ऐसे कहते हुए वो फ़ोन कट कर देता है और ऋतू की तरफ थोड़े आश्चर्य से देखता है.



यहाँ वसु के कमरे में...



वसु दिव्या को देख कर: क्यों रे बहुत लंगड़ाते हुए चल रही हो?

दिव्या: क्या कहूँ दीदी... कल रात दीपू ने बिना बताये ही अपना पूरा लण्ड एक बार में ही मेरी गांड में डाल दिया. मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी थी. काफी देर तक मेरी गांड मारी और नतीजा देख ही रही हो. मैं ठीक से चल भी नहीं पा रही हूँ लेकिन फिर भी बहुत मजा आया कर रात को.

उस कमीने ने जितना दर्द दिया उतना ही मजा भी दिया और वो बिस्तर पे आकर झुक कर वसु का हाथ हटा कर उसकी चूत चूसने लगती है.

वसु भी दीपू से बात कर के बहुत बहक गयी थी और अपना हाथ दिव्या के सर पे रख कर उसे अपनी चूत पे दबा देती है. कविता ये सब देख कर वो भी अपने कपडे निकल कर नंगी हो कर वसु के पास आती है और जहाँ दिव्या वसु की चूत चूस रही थी वहीँ कविता और वसु के होंठ मिल जाते है और दोनों अपनी जुबां को एक दुसरे के मुँह में डाल कर रास आदान प्रदान कर रहे थे.

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तीनो काफी देर तक एक दुसरे को चूस और चाट कर शांत करते है और फिर थोड़ी देर बाद आंहें भरते हुए हफ्ते रहते है.

वसु: आज रात दीपू मेरे साथ ही सोयेगा.

दिव्या और कविता एक साथ: हाँ आज वो तुम्हारे साथ ही सोयेगा. आज तो हम उसे झेल नहीं पाएंगे. तुम ही झेल लो उसे. फिर ऐसे ही बात करते हुए तीनो सो जाते है.

शाम को दीपू घर आकर हाथ मुँह धो कर किचन में पानी पीने जाता है तो वहां वसु उसका इंतज़ार कर रही थी...

वसु अपना काम कर रही थी जिसकी वजह से उसके कपडे थोड़े भीग गए थे और उन भीगे कपड़ों में वो तो केहर ढ़ा रही थी और इंतज़ार ऐसे कर रही थी जैसे उसके चेहरे पे लिखा था की अभी मुझे कमरे में लेकर जम की चुदाई कर. क्यूंकि उसके कपड़ों में उसकी चूचियां जैसे बाहर आने के लिए तड़प रही हो. अपनी साडी भी नाभि के बहुत नीचे बाँधी थी और वो एकदम कामुक लग रही थी.

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दीपू उसको देख कर उसे दोपहर की बात याद आती है जब वो दोनों फ़ोन पे कामुक बातें की थी. दीपू उसको देख कर उसके पास आता है और अपनी बाहों में लेकर कहता है... अभी मैं थोड़ा थका हुआ हूँ वरना अभी तुमको कमरे में लेकर चलता.

वसु: धीरे से उसके कान में कहती है: मैं भी तो उसकी का इंतज़ार कर रही हूँ की कब तुम मुझे बिस्तर पे चढ़ा कर मुझे भी जम के चोदोगे जैसे तुमने कल कविता और दिव्या की चुदाई की थी और उसकी तरफ देख कर उसे आँख मार देती है.

दीपू गहरी सांस लेते हुए: हाय..इसी अदा पे तो मैं तुम पे मरता हूँ... और रही चुदाई की बात... तो आज रात को तैयार रेहना...और हाँ... ज़रुरत पड़े तो तुम्हारे पीछे वाले छेद में तेल लगा लेना... नहीं तो बिना तेल की ही आज वहां पर जंग होगा और हस देता है.

वसु भी दीपू के कान में कहती है... आज मुझे सिर्फ पीछे वाले छेद में जंग चाहिए. और प्यार से उसके होंठ चूम लेती है. दीपू भी उसको चूमते हुए कहता है... आज रात को तो फिर बहुत मजा आएगा.

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इतने में वहां दिव्या भी लंगड़ाते हुए आ जाती है तो दीपू उसे देख कर कहता है: लँगड़ाके क्यों चल रही हो? अब तक ठीक नहीं हुई क्या?

दिव्या: इतनी जल्दी कैसे ठीक होगी? कल रात को तो तुमने मुझे बताये बिना ही एक बार में ही अपना लम्बा डंडा मेरी गांड में दाल दिया था.. दर्द तो होगा ही ना.. इतनी जल्दी कैसे ठीक होगा?

दीपू भी दिव्या को अपनी बाहों में लेकर कहता है..आज भी आ जाओ कमरे में... फिर से एक और राउंड हो जाए.

दिव्या: ना बाबा... आज तो मेरी हिम्मत नहीं है. आज दीदी ही तुम्हारे साथ सोयेगी. क्यों दीदी... सो रही हो ना दीपू के साथ?

वसु हाँ में सर हिला देती है तो दिव्या उसको बाहों में लेकर कहती है.. आज बच के रेहना... कहीं मेरी तरह ही तुम्हारी हालत ना कर दे...

वसु दिव्या की आँखों में देख कर कहती है... तू यहाँ आने से पहले मैं दीपू से कह रही थी की मेरी भी तुम्हारी जैसे ही हालत कर दे आज रात को... और प्यार से दिव्या के होंठ चूम लेती है.

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दिव्या दीपू की तरह देख कर: आज तो तेरे मजे है... और इस बात पे सब हस देते है.

और फिर शाम को सब बैठ कर बातें करते है और फिर रात को खाना खाने के बाद दिव्या और कविता वसु को उसके कमरे में छोड़ कर दोनों दुसरे कमरे में सोने चले जाते है. उन दोनों को दुसरे कमरे में जाता देख कर लता को भी लगता है की आज वसु का नंबर है और मन में हस्ती है और सोचती है की उसका नंबर कब आएगा? क्या कभी दीपू उसकी तरफ आकर्षित होगा? क्या वो उसे अपनी ओर आकर्षित कर पाएगी? यही सब सोचते हुए वो भी सोने चली जाती है.



वसु के कमरे में:



दीपू अपने कमरे में जाने से पहले बाथरूम जाता है और फिर थोड़ा फ्रेश होकर कमरे में आता है. कमरे में आते ही जब वसु दीपू को देखती है तो देखते ही रह जाती है क्यूंकि दीपू जब बाथरूम से बाहर आया था तो वो पूरा लगभग नंगा ही था. वो सिर्फ एक अंडरवियर पहने हुए था जिसमें से उसका पूरा लण्ड तना हुआ दिख रहा था

वैसे वसु भी काम नहीं थी. वो बिस्तर पे ऐसे लेटी हुई थी जिससे उसकी गांड पूरी उभर कर दिख रही थी और उसका ब्लाउज भी पूरा बैकलेस था और उसकी चिकनी पीठ दिख रही थी जिसमें वो बहुत कामुक लग रही थी..

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कमरे में दीपू के आने की आहट होती है तो वसु उसकी और मुड कर देखती है तो दीपू उसे देखता ही रह जाता है क्यूंकि वो तो बहुत कातिल लग रही थी.

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दीपू फिर बिस्तर पे आकर वसु के बगल में बैठ जाता है तो वसु से भी रह नहीं जाता और उसको पकड़ते हुए अपनी जुबां उसके मुँह में दाल देती है और दीपू भी उसकी जुबां को चूसते रह जाता है और दोनों एक लम्बी और गहरी चुम्बन में जुड़ जाते है. दीपू भी वसु के पेट और चूची को दबाने लग जाता है.

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5 Min बाद जब दोनों थोड़ा अलग होते है तो दोनों को अपनी साँसों में काबू करने में मुश्किल होती है क्यूंकि वो दोनों का चुम्बन उतना गहरा और प्रगढ़ था.

दीपू: क्या बात है... आज तो तुम एकदम भूके शेरनी की तरह मुझ पे टूट पड़ी हो.. वैसे तुम्हे चूमने में बड़ा मजा आया.

वसु: हाँ कुछ ऐसे ही समझो... बहुत दिनों बाद तुम जो मेरे पास आये हो और जब से मैंने कविता और दिव्या से सुना है की कैसे तुमने उनकी ठुकाई की है मैं भी चाहती हूँ की तुम भी मुझे वैसे ही चोदो.

दीपू वसु की बात सुनकर हस देता है और इस बार प्यार से अपने होंठ उसके होंठों से जोड़ कर इस बार दोनों बड़े प्यार से एक दुसरे को चूमते है.

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एक दुसरे के बिना जाने ही दोनों के कपडे उनके बदन से अलग हो जाते है और अब दोनों नंगे हो कर एक दुसरे पे अपना प्यार जुटाते रहते है. दीपू फिर वसु के चूची को अपने हाथ में लेकर दबाता रहता है तो दूसरी चूची को अपने मुँह में लेकर चूसने लग जाता है.

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वसु भी अब अपने रंग में आने लगती है और एकदम गरम और ठरकी हो जाती है और दीपू का सर पकड़ कर अपनी चूची पे दबा देती है और कहती है... हाँ ऐसे ही चूसो और दबाओ... बहुत दिनों से ये बहुत परेशान कर रहे है. सुबह तुमने कहा था की तुम भी दूध पीना चाहते हो तो जल्दी ही तुम्हे वो मौका दूँगी. वसु ऐसे ही मस्ती में बडबाडे रहती है और शायद उसे पता भी नहीं चलता की वो क्या बक रही है क्यूंकि वो इतनी उत्तेजित हो गयी थी.

दीपू फिर वसु को बिस्तर पे सुलाकर फिर से उसकी चूची पे टूट पड़ता है और फिर से एक चूची को मुँह में लेकर चूसने लग जाता है. वसु फिर से अपना हाथ उसके सर के ऊपर रख कर उसे अपने सीने पे दबा देती है.

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थोड़ी देर बाद वसु दीपू की और देखती है और कहती है. वसु: एक बात कहूँ? आज मेरी एक बात मानोगे?

दीपू: मैंने तुम्हारी बात कभी टाली है क्या? बोलो क्या बोलना है?

वसु: मेरी चूत आज बहुत बह रही है और में चाहती हूँ की मेरी चूत को अच्छे से आज चूस लो लेकिन आज मेरी सिर्फ गांड ही मारना. डॉक्टर ने कहा था की मुझे थोड़ा आराम की ज़रुरत है लेकिन इतने दिन तक तुम्हारा लण्ड नहीं ली है तो मुझसे रहा नहीं गया.

मुझे भी पता है... बहुत दिनों बाद तुम मेरे पास आ रहे हो और मेरी चूत चोदोगे तो मुझे थोड़ा दर्द होगा... इसीलिए मैं चाहती हूँ की सिर्फ मेरी गांड ही मारो आज. क्या कहते हो?

दीपू: तुम्हारी बात भी सही है. तुम्हारे पेट में हमारा बच्चा पल रहा है तो हमें भी थोड़ा सावधान रहना पड़ेगा. चिंता मत करो. जैसे तुम कहोगी वैसे ही करेंगे और फिर दीपू वसु को चूमते हुए नीचे की तरफ जाता है और जब उसका रस से बहती चूत को देखता है जो पूरा गीला था और एकदम फूला हुआ था जैसे उसे आमंत्रण कर रहा था.

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चुसाई और चटाई :



उस अद्भुत नज़ारे को देख कर दीपू से भी रहा नहीं जाता और वो बिना देरी किया वसु की चूत को चूसने और चाटने लग जाता है. वसु भी अपना हाथ दीपू के सर के ऊपर रख कर उसे अपनी चूत पे दबा देती है.

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वसु को भी इसमें बहुत मजा आ रहा था. वो भी अब आंहें भर्ती रहती है और साथ में सिसकियाँ भी लेती रहती है.

थोड़ी देर बाद दीपू बिस्तर के किनारे पे सर रख कर वसु को इशारा करता है तो वसु समझ जाती है और फिर अपने पैर फैलाते हुए वो दीपू के मुँह पे बैठ जाती है और दीपू बड़े मजे से उसकी चूत को चूसने लग जाता है.





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५- १० Min तक अच्छे से चूसने और चाटने के बाद अब दीपू से भी रहा नहीं जाता तो वो भी बिस्तर से उठ जाता है और वसु को अपने सामने बुलाता है. वसु जब घुटनों पे बैठ के उसके सामने आती है तो दीपू का लण्ड पूरा तना हुआ था और एक तरह से जैसे वो वसु को सलाम कर रहा था.

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वसु भी उस अद्भुत लण्ड को देख कर उसके मुँह में भी पानी आ जाता है और वो भी बड़ी शिद्दत से उसके लण्ड पे टूट पड़ती है. दीपू भी अपना हाथ उसे सर पे रख कर अपने लण्ड पे दबा देता है और वसु भी बड़े चाव से उसका लण्ड चूसने में लग जाती है. वसु को पता भी नहीं चलता कब दीपू का ८. ५ इन लण्ड पूरे उसके मुँह में चला गया है और एक तरह से वो उसके गले के जड़ तक पहुँच गया था.

दीपू तो जैसे जन्नत पे पहुँच गया था... उसे इतना मजा आ रहा था. इतना अच्छा लण्ड चुसाई तो शायद कविता और दिव्या ने भी शायद नहीं किया था जितना वसु कर रही थी. (ऐसा दीपू मन में सोचता है).

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ऐसे ही १० Min तक वसु दीपू को मजे देती है और कहती है की वो भी उसके लण्ड को अंदर लेने के लिए तरस रही है.

वसु: मैं पहले चाहती हूँ की तुम मेरी अच्छे से गांड चाट लो और फिर अपना ये मूसल मेरी गांड में डालना. कल जैसे दिव्या के साथ किया था मेरे साथ वैसा नहीं करना. अब तक मेरी गांड को तुम्हारे लण्ड की पूरी आदत नहीं हुई है. इस बात पे दीपू हस है और कहता है... जैसे तुम्हारा हुकुम मेरी जान.



वहीँ ऋतू के घर में:



ऋतू के घर में दोनों ऋतू और निशा खाना का लेते है और फिर निशा बर्तन को रखने किचन में जाती है तो ऋतू अपने कमरे में चली जाती है. निशा किचन में पूरा काम कर के सफाई करने में लग जाती है तो वहीँ ऋतू कमरे में जाकर अपने कपडे निकल कर सिर्फ एक छोटी ब्रा और पैंटी पहने हुए निशा का इंतज़ार करती रहती है

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जब काफी देर तक निशा नहीं आती तो ऋतू से रहा नहीं जाता ओर वो अपनी चूत मसलते रहती है ओर उसकी पैंटी भी पूरी गीली हो गयी थी ओर जब निशा कमरे में आती है तो वो नज़ारा देख कर हस्ते हुए वो भी बिस्तर की ओर बढ़ती है.

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निशा: क्या बात है माँ... आज मेरे आने से पहले ही आप शुरू हो गयी? लगता है आज आपकी प्यास बहुत बढ़ गयी है.

ऋतू: क्या बताओं बेटा आज ये मुझे बहुत परेशान कर रही है और उसे देखते हुए फिर से अपनी चूत मसलते रहती है. देखना कितनी गीली हो गयी है आज ये.

निशा: वो तो मुझे भी दिख रहा है लेकिन बात क्या है की आज आप इतनी बेहक गयी हो?

ऋतू: पता नहीं क्यों (वो निशा को अभी बताना नहीं चाहती थी की उसने ऑफिस में दीपू का खड़ा लण्ड उसके पैंट में देखा था).

निशा: मैं हूँ ना.. फिलहाल आपकी इस गर्मी को मैं ठंडा कर देती हूँ और ऐसा कहते हुए वो वो भी बिस्तर पे ऋतू के पैरोँ के बीच में आकर उसकी पैंटी को अलग करते हुए उसकी चूत चूसने लग जाती है.

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ऋतू भी बहुत गरमा गयी थी तो वो भी अपनी उत्तेजना में निशा का सर अपनी चूत पे दबा देती है और वो भी अपनी गांड उछालते हुए अपनी चूत को उसके मुँह में देने की कोशिश करती है. निशा भी मस्त होकर ऋतू की बहुत गरम और भीगी हुई चूत को चूमती और चूसती है.

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ऋतू: हाँ बेटा ऐसे ही चूस मेरी चूत को.... आज कुछ ज़्यादा ही परेशान कर रही है मुझे.... और ऋतू भी आहहह ओहहह आहहह करते हुए मजे में चिल्लाती है. क्यूंकि उस घर में वो दोनों ही थे तो उसकी आवाज़ सुनने वाला और कोई नहीं था. और कुछ देर बाद जब निशा उसके भगनशे को चूमती है तो ऋतू से रहा नहीं जाता और ज़ोर ज़ोर से आँहें भरते हुए और सिसकारी लेते हुए वो झड़ जाती है और अपना पानी फेंकती है जिसे निशा पूरा पी जाती है.

निशा: माँ आज तो आपने बहुत ज़्यादा पानी छोड़ा है... इतना तो पहले कभी नहीं छोड़ा था... लेकिन आपके पानी का स्वाद बड़ा अच्छा था.

ऋतू: पता नहीं क्यों लेकिन आज मुझे इसकी बहुत ज़रुरत थी बेटा.

फिर निशा ऋतू को चूमते हुए ऊपर आती है. पहले उसके गहरे नाभि को चूमती है जिससे ऋतू की सोई हुई आग फिर से उठने लगती है. उसकी नाभि को चूमने के बाद निशा और ऊपर आती है और उसकी दोनों ठोस चूचियों पे अपनी जुबां की कलाकारी दिखाती है.

अब ऋतू भी धीरे धीरे फिर से अपने रंग में आने लगती है. ऋतू निशा का सर पकड़ कर अपनी एक चूची पे दबाती है तो निशा भी उसके खड़े हुए निप्पल को अपने मुँह में लेती है. इस पल को दोनों एन्जॉय करते है जब निशा ऋतू के निप्पल को चूसते हुए ऋतू को देखती है और ऋतू भी जैसे निशा को उकसा रही थी की उसकी चूची को और ज़ोर से चूसे.

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थोड़ी देर बाद जब निशा और ऊपर आने लगती है तो ऋतू के दोनों चूची एकदम लाल हो गए थे. निशा ऊपर आकर ऋतू से पूछती है... मजा आया क्या माँ?

ऋतू कुछ जवाब नहीं देती बल्कि उसके होंठों को अपने होंठों से मिला देती है और दोनों बहुत ही गीले और गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है और एक दुसरे की जीभ को चूसने लगते है. एक तरह से ये ऋतू की तरफ से निशा के लिए जवाब था की उसे कितना मजा आया है.

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कुछ समय बाद...



निशा: माँ मेरा भी बहुत बुरा हाल है... मेरी चूत भी एकदम भीगी हुई है और पूरी गीली हो गयी है.

ऋतू: मैं जानती हूँ बेटा की तेरा भी ऐसे ही हाल होगा. चल अब मैं तेरी सेवा करती हूँ और ऐसा बोलते हुए ऋतू निशा को सुला देती है और बिना देरी किये हुए सीधा उसकी चूत ही चूसने लगती है. उसे पता था की निशा भी बहुत गरमा गयी है और उसे यही चाहिए.

ऋतू भी अपनी २ उंगलियां निशा की चूत में डाल कर उसे दोहरा मजा देती है... अपनी जुबां से और अपनी उँगलियों से भी.

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ऋतू के ऐसा करने से पता नहीं निशा कितनी बार झड़ जाती है. आखिर में वो भी थोड़ी थक जाती है और ज़ोर ज़ोर के सांसें लेते हुए ऋतू को अपने ऊपर लेकर अपनी चूत का स्वाद उसकी जुबां से लेती है क्यूंकि निशा ने ऋतू के होंठों पे कब्ज़ा कर लिया था.

ऋतू: क्यों बेटा अभी तुझे थोड़ी राहत मिली है क्या?

निशा: हाँ और ना.

ऋतू: मतलब?

निशा: राहत तो मिली है लेकिन आपके चेहरा देख कर लगता है नहीं. इस बात पे दोनों हस देते है और दोनों एक दुसरे को देखते है और फिर अगले ही क्षण दोनों ६९ पोजीशन में आकर एक दुसरे की चूत को फिर से खाने लग जाते है जैसे की उनकी ज़िन्दगी का आखरी खाना हो.

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जब दोनों एक दुसरे को संतुष्ट कर लेते है तो निशा ऋतू की बाहों में अपना सर रख कर कहती है: आज क्या हुआ है आपको जो आज आप इतनी गरमा गई हो? आज से पहले तो आपके अंदर इतनी गर्मी नहीं देखि.

ऋतू फिर निशा की तरफ देखती है और उसे झूट बोलती है की आज कुछ ज़्यादा ही गरमा गयी है. बात ये थी की दोपहर से जब से उसने दीपू को देखा था... तब से वो गरमा गयी थी लेकिन ये बात वो निशा से कहना नहीं चाहती थी.



वापस वसु के कमरे में…. उसकी कुटाई :



दीपू: चलो आप घोड़ी बन जाओ. मैं आपकी गांड अच्छे से चाटता हूँ ताकि वो गीला भी हो जाए और फिर आपको ज़्यादा तकलीफ भी नहीं होगी. वसु फिर दीपू के सामने घोड़ी बन जाती है और दीपू उसकी गांड को चाटते हुए अच्छे से गीला कर देता है.

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उसे भी बहुत मजा आ रहा था और दीपू भी वसु की चूत से लेकर गांड को चाटने में लग जाता है. ये दोहरे हमले को वसु झेल नहीं पाती और दीपू के चाटने से ही वो फिर से झड़ जाती है. उसे पता था की उस रात वो कई बार झाड़ेगी जिसकी कोई गिनती नहीं होगी.

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जब दीपू को लगता है की वसु की गांड चिकनी हो गयी है तो वो उसे पीठ के बल सुला देता है और अपने लुंड पे थूक लगा के उसे भी गीला कर देता है. वसु: थोड़ा आराम से डालना दीपू. मेरी गांड अभी भी पूरी खुली नहीं है.

दीपू: चिंता मत करो.... आराम से ही डालूंगा और ऐसा कहते हुए वो वसु के ऊपर झुक कर उसको चूमते हुए अपने लुंड को उसकी गांड के छेड़ पे रख कर अंदर घेसेडने की कोशिश करता है तो पहली बार जाता नहीं है. फिर से दुबारा दीपू अपने उँगलियों से उसकी गांड में दाल कर अंदर बाहर करता है जिससे उसकी गांड थोड़ी खुल जाती है. फिर वो वसु को देखते हुए अपने लण्ड को उसकी गांड पे रखते हुए धक्का देता है तो फक की हलकी आवाज़ से उसका लण्ड उसकी गांड मं घुस जाता है.

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वसु को बहुत दर्द होता है और उसकी आँखों से आंसू आने लगते है. दीपू झुक कर उसकी आंसू को पी जाता है और कहता है: हो ग आया जानू. एक बार अंदर चला गया तो जो दर्द होना तो वो हो गया. अब और ज़्यादा नहीं होगा और ऐसा कहते हुए दीपू फिर से धक्का देता है और इस बार उसका आधा लण्ड वसु की गांड में घुस जाता है. दीपू इस बार अपने होंठ वसु के होंटो से मिला देता है जिससे वसु की आवाज़ दीपू के मुँह में ही दब जाती है. दीपू थोड़ी देर ऐसे ही रहता है और जब वसु को थोड़ी राहत मिलती है तो दीपू को लगता है की अब वसु थोड़ी ठीक है तो फिर से दीपू अपने होंठ वसु के होंठों से जोड़ते हुए एक और ज़बरदस्त झटका मारता है जिससे उसका पूरा लण्ड वसु की गांड की जड़ तक चला जाता है और वहां समा जाता है. वसु की तो जैसे जान ही निकल गयी थी. दीपू वसु का ध्यान हटाने के लिए उसकी चूमते हुए उसकी चूचियों को दबाने लगता है और दुसरे हाथ को उसकी चूत में दाल कर अंदर बाहर करने लगता है. वसु का ध्यान उसकी गांड की दर्द से भटक जाता है क्यूंकि उसपर ऊपर और नीचे भी हमले हो रहे थे. थोड़ी देर बाद वसु भी इन हमलों में मजा ले रही थी और अब उसे भी मजा आने लगता है. दीपू भी समझ जाता है की वसु का दर्द भी काम हो गया है तो वो भी अपने लण्ड को अंदर बाहर करते हुए उसकी गांड मारने लगता है.

वसु भी अब उसके लण्ड को अपनी गांड में लेकर अपनी गांड उछाल कर और अंदर तक लेने की कोशिश करती है. दीपू ये देख कर हस देता है तो वसु थोड़ा शर्मा जाती है.

दीपू: इसमें शर्माने की क्या बात है?

वसु: थोड़ा नकली गुस्सा दिखाते हुए... तूने तो कहा था की आराम से करेगा... और अब जब मुझे अच्छा लग रहा है तो ऐसे ही मेरी गांड मार.. और फिर दीपू भी दनादन वसु की गांड मारने लग जाता है. थोड़ी देर बाद दीपू कहता है: जानू अब घोड़ी बन जाओ... पीछे से तुम्हारी गांड मारना चाहता हूँ.

वसु की दीपू की बात मान कर घोड़ी बन जाती है और इस बार दीपू बिना डरे हुए उसकी गांड में अपना लम्बा मूसल एक ही बार में उसकी जड़ तक घुसा देता है.

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अब दीपू का लण्ड वसु की गांड में आराम से और बड़े मजे से पूरा अंदर तक जा रहा था जिसमें वसु को भी मजा आने लगता है. ऐसे ही १०- १५ Min तक दीपू पोज़ बदल बदल कर वसु की गांड की कुटाई करता है और इन सब में पता नहीं वसु कितनी बार अपना पानी छोड़ देती है.

आखिर में दीपू से भी रहा नहीं जाता और वो भी कहता है की उसका पानी भी निकलने वाला है तो वसु कहती है की वो उसका पानी पीना चाहती है. दीपू फिर ऐसे ही ३- ४ झटके और मारता है और अपना लण्ड उसकी गांड से निकाल लेता है. वसु झट से उसके लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगती है और अब दीपू से भी रहा नहीं जाता है और वो भी ज़ोर ज़ोर से आँहें भरते हुए अपना पानी निकाल देता है जिसे वसु पुअर शिद्दत से पी जाती है.

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अब दीपू भी थक जाता है और वो बिस्तर पे लुढ़क कर अपनी साँसों को संभालते हुए वसु को अपनी बाहो में ले लेता है.

दीपू: अब तो तुम्हे कोई शिकायत नहीं है ना की मैं तुम्हारे पास नहीं आ रहा हूँ.

वसु: मैं तो जानती हूँ बेटा. मैं तो ऐसे ही मजाक कर रही थी. मुझे पता है तू हम तीनो से बहुत प्यार करता है.

दीपू: हाँ तुम सही केह रही हो माँ. वैसे कविता भी केह रही थी उसको भी फिर से माँ बनना है.

वसु: फिर से का क्या मतलब है तुम्हारा? वो तो अब तुम्हारी बीवी है और सुहागन भी है. अगर वो ऐसा केह रही है तो एकदम सही केह रही है.

वो भी लगभग मेरी उम्र की ही है. अगर वो भी माँ बनना चाहती है तो मैं तो कहती हूँ की अपना पानी उसके अंदर ही डालना. वैसे भी तुम्हारा वीर्य बहुत गाढ़ा होता है. मुझे पता है की अगर तुम हर बार उसके अंदर ही डालोगे तो वो भी तुम्हे और हम सब को हल्दी ही खुश खबर देगी.

दीपू: अच्छा सुझाव दिया है. अब मैं वैसे ही करूंगा जैसा तुमने कहा है. अगर कविता माँ बन जायेगी तो तुम भी दादी बन जाओगी... ऐसा कहते हुए वो वसु की तरफ देख कर हस देता है और वसु भी उसको देख कर प्यार से उसके होंठ चूम लेती है.

वसु: वैसे एक बात बताओं?

दीपू: क्या?

वसु: तेरी बुआ भी तुझ पे मरती है. कल रात उसने तुझे और दिव्या को किचन में तुम्हारा खेल.... या फिर कहूँ तो चुदाई देख लिया था... वो तो तुम्हारा लण्ड देख कर पागल हो गयी है.

दीपू: तुम्हे कैसे पता?

वसु: आज सुबह वो मुझ से कह रही थी जब उसने देखा की दिव्या आज लंगड़ा के चल रही थी और मुझे बताया. बेचारी की तुमने कल खूब गांड कुटाई किये हो.

दीपू: तो मैं क्या करूँ?



वसु: करना क्या है? जैसे तेरा मन करे वो कर...तू जो भी निर्णय लेगा उसमें मेरी सहमती होगी. तू उसकी चिंता मत कर.

Note: Apologies for the delay...was quite busy and hence could not find time earlier...

As usual, ये अपडेट लिखने में भी बहुत मेहनत और परिश्रम लगा. आशा है ये अपडेट भी आपको पसंद आएगा. Looking forward to your likes, comments and reviews. Thanks.
 
Friends, I had thought of providing the next update by tomorrow. (Started writing as well...once I got time)...but since today morning, I am down with high fever and bed ridden.

So, pls expect some delay in the update. तबियत ठीक होते ही मैं अपडेट पोस्ट करने की कोशिश करूंगा. Hope you all can understand.

Much Thanks for your support and patience. 🙏🙏
 
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