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"हिना, बेटी....।" मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है। कुदरत ने हमारे साथ अजीब खेल खेला है। जिस माहौल से मैं तुम्हें बचाकर और खुद बचकर यहां आया..उन हालात ने हमारा अभी तक पीछा नहीं छोड़ा है। बेटा...आदामी अच्छा बनना भी चाहे तो उसका बुरा और खून-आलूदा अतीत उसे अच्छा बनने नहीं देता। अभी तो इस गौतक या सुहेल को हमारे बारे में कुछ नहीं मालमू.अगर मालूम हो जाएगा तो वह इस रिश्ते को भी भूल जाएगा। उस पौत्री से कौन शादी करेगा..जिसका दादा लड़के के बाप का कातिल हो...।
"लेकिन अब्बू..! हम तो कातिल नहीं...। आपने तो किसी का कत्ल नहीं किया। गौतम के वालिद तो किसी के कातिल नहीं थे...।" हिना उत्तेजित-सी बोली-"फिर हम क्यों डरें ?'
"मैं भी इसी नतीजे पर पहुंचा हू कि हमें अपना यह भयानक अतीत भूलना होगा।
हिना कुछ क्षण खामोश रही, फिर ठिठकते हुए व संजीदा लहजे में बोली-"अब्बू ! आप अगर मेरी मानें तो जाकर गौतम के मामू को यह सब कुछ साफ-साफ बता दें। अगर उन लोगों ने इंसानियत होगी...अतीत को भूलने की ख्वाहिश होगी और दसूरों को माफ करने का जज्बा होगा...तो ठीक है। वर्ना वो अपने घर खुश और हम अपने घर... ।'"हिना ने अपना दो टूक फैसला सुना दिया।
समीर राय उसे बड़ी खुशगवार हैरत से देखने लगा। जो फैसला वह खुद इतने दिनों से नहीं कर पाया था, वह फैसला हिना ने कुछेक क्षणों में ही कर दिया था ।समीर राय ने एक बहुत बड़ा बोझ अपने जहन से उतर गया महसूस किया था।
:: समाप्त::
"लेकिन अब्बू..! हम तो कातिल नहीं...। आपने तो किसी का कत्ल नहीं किया। गौतम के वालिद तो किसी के कातिल नहीं थे...।" हिना उत्तेजित-सी बोली-"फिर हम क्यों डरें ?'
"मैं भी इसी नतीजे पर पहुंचा हू कि हमें अपना यह भयानक अतीत भूलना होगा।
हिना कुछ क्षण खामोश रही, फिर ठिठकते हुए व संजीदा लहजे में बोली-"अब्बू ! आप अगर मेरी मानें तो जाकर गौतम के मामू को यह सब कुछ साफ-साफ बता दें। अगर उन लोगों ने इंसानियत होगी...अतीत को भूलने की ख्वाहिश होगी और दसूरों को माफ करने का जज्बा होगा...तो ठीक है। वर्ना वो अपने घर खुश और हम अपने घर... ।'"हिना ने अपना दो टूक फैसला सुना दिया।
समीर राय उसे बड़ी खुशगवार हैरत से देखने लगा। जो फैसला वह खुद इतने दिनों से नहीं कर पाया था, वह फैसला हिना ने कुछेक क्षणों में ही कर दिया था ।समीर राय ने एक बहुत बड़ा बोझ अपने जहन से उतर गया महसूस किया था।
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