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- Dec 5, 2013
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जाने उसके जहन में यह बात क्यों आई कि कहीं सितारा भी 'डसी' तो नहीं गई है। यह अन्देशा जाता रहा तो उसने उसके पेट पर कमीज सही की और फिर गिलास से पानी लेकर उसके मुंह पर छीटें मारने लगी। उसके जहन में यही सवाल था कि आखिर सितारा उसके कमरे में आकर बेहोश कैसे हो गई?
कुछेक क्षणों बाद सितारा के बदन में हल्का हल्का कम्पन हुआ तो हिना ने उसका चेहरा अपने दोनों हाथों में लेकर कहा "...सितारा...आंखें खोलो सितारा...।" सितारा ने फौरन आंखें खोल दीं। हिना को देखकर उसे इत्मीनान -सा हुआ। पर फिर जैसे ही उसे याद आया कि वह क्या देखकर बेहोश हुई थी...तो वह घबराकर एकदम उठकर बैठ गई।
"बीवी...।"
उसने फटी-फटी आंखों से पूरे कमरे का जायजा लिया - "वो...वो...।"
कुछ देखा है तूने कमरे में...?" हिना ने उसका हाथ पकड़ उसे उठाते हुए पूछा।
"हां...बीवी... हां... । वो...वो...।" सितारा के चेहरे पर घबराहट छा गई।
"परेशान मत हो । अब मैं आ गई हूं। बेड पर बैठ...।" हिना ने तसल्ली दी।
सितारा ने उसका हाथ मजबूती से थाम लिया। फिर वेड पर बैठने के बाद ही उसका हाथ नहीं छोड़ा। वह बेहद डरी हुई थी। हिना ने पानी का गिलास उसे थमा दिया। सितारा जल्दी-जल्दी सारा पानी पी गई और फिर डरी-डरी निगाहों से हिना की तरफ देखने लगी।
"डर क्यों रही हो?" हिना उसके दोनों हाथ थामते हुए बोली-"मुझे वताओ, क्या मामला है?"
"बीवी...मैं आपके कमरे में सफाई के लिए आई थी। रोज ही आती हूं। पर आज से पहले वो मुझे कभी नजर नहीं आया था।" सितारा खुद को सम्भालते हुए बोली।
"वो... कौन...? सांप था कोई...?" हिना ने अपना अनुमान लगाया।
"अरे नहीं बीवी! वो सांप नहीं था। वो जाने कौन था। यहीं बैठा था...जहां इस वक्त आप बैठी हैं। उसका पूरा बदन काले लिबास में ढंका हुआ था। चेहरा भी छिपा हुआ था। एक घूंघट-सा निकाला हुआ था... और उधर खिड़की की तरफ देख रहा था। मैं दरवाजा खोलकर जैसे ही अन्दर आई... उसने गर्दन घुमाकर मेरी तरफ देखा और
फिर तेजी से उठकर मेरी तरफ आया। मैं इतनी खौफजदा हो गई कि मेरी चीख भी न निकली। मेरी तो आंखों के आगे एकदम अंधेरा छा गया और मैं चकराकर गिर पड़ी...।" यह बताते-बताते सितारा की हालत फिर असामान्य होने लगी।
"डर मत... अब यहां कोई नहीं आ सकता...।" हिना धीरे से बोली।
"अल्लाह का शुक्र है बीवी कि आपने मेरी बात का यकीन कर लिया... वरना मेरा तो ख्याल था कि आप मेरा मजाक उड़ाएंगी...।"
"सितारा मैं जानती हूं कि तू सच कह रही है। फिर आखिर तुझे कोई ड्रामा करने की जरूरत भी क्या है। अच्छा, यह बता क्या तूने उसका चेहरा देखा था?"
"नहीं बीवी! मैंने बताया है ना कि उसने घूंघट-सा निकाल रखा था । "
"अच्छा, अब मेरी बात गौर से सुन। तू यह बात किसी को नहीं बताएगी। यहां तक कि अपनी मां को भी नहीं...।" हिना ने उसे सचेत किया।
"आखिर क्यों बीवी...।" वह परेशान हो गई।
"इसलिए कि सुनने वाले खामखां परेशान हो जाएंगे...।"
हिना ने समझाया- "तेरी मां का तो बुरा हाल हो जाएगा। वह तो वैसे ही जिन्न भूतों से बहुत डरती है।"
"हाय बीवी! क्या वो जिन्न था...?"
"अल्लाह जाने...।" हिना उसे टालते हुए बोली।
"बीवी...यह भी अच्छा हुआ कि आपने मुझे बेहोशी की हालत में देखा। अम्मा तो यही समझ रही होंगी कि मैं इतनी देर में यहां सफाई-सुथराई में लगी हूं। अगर वह देख लेती तो फिर उनसे कुछ छिपाना मुश्किल हो जाता।"
"मैं यह बात अब्बू को जरूर बताऊंगी...।" हिना कुछ सोचते हुए बोली- "बस और किसी को नहीं। उनको बताना जरूरी है।"
"जैसी आपकी मर्जी! वैसे यह बात सुनकर मालिक मुझे डांटेंगे तो नहीं...?" सितारा बोली।
"डाटेंगे क्यों...?" हिना अपनत्व से बोली-"जाओ, अब तुम भागो। खाने का इन्तजाम करो। बहुत भूख लगी है...।"
"आप मुंह-हाथ धोयें...।' सितारा बोली-"और डाइनिंग देती हूं।"
टेबल पर आ जाएं। मैं खाना लगा सितारा उठ गई। समीर राय कोठी पर ही थे और अभी उन्होंने भी खाना नहीं खाया था, हिना उन्हें खुद उनके कमरे से बुला लाई। दोनों ने मिलकर खाना खाया। खाने के बाद समीर राय का कॉफी पीने का मूड बना तो हिना बोली - "अब्बू, आप मेरे कमरे में चलें। मैं कॉफी बनाकर लाती हूं।"
"खैर तो है...?" समीर राय उठते हुए बोले।
"हां अब्बू...! खैर ही है। बस मेरा जी चाह रहा है कि आज मैं खुद आपको कॉफी बनाकर पिलाऊं...।" हिना ने हंसते हुए कहा।
हिना के किचन में जाने के बाद समीर राय उसके कमरे में आ गया और नर्म कोमल तकिये कमर के पीछे रखकर इत्मीनान से बैठ गया।
कमरे में हल्की-हल्की अजीब सी खुशगवार खुशबू फैली हुई थी। समीर राय ने दो-तीन गहरे सांस लिए। उसने 'खुशबू' पहचानने की कोशिश की। खुद समीर राय को परफ्यूम इस्तेमाल करने का वेहद शौक था। परफ्यूम की विभिन्न व आला
शीशियों से उनका ड्रैसिंग रूम भरा पड़ा था, लेकिन इस खुशबू की शिनाख्त वह भी न कर पाये।
हिना थोड़ी ही देर में ट्रे उठाये कमरे में दाखिल हुई। उसने ट्रे सेन्टर टेबल पर रखी व कपों में कॉफी उंडेलन लगी तो समीर राय ने पूछा-
"हिना यह कौन-सी खुशबू है...?"
हिना ने चारों तरफ देखा। उसका ख्याल था कि शायद अब्बू की निगाह किसी परफ्यूम की शीशी पर पड़ी है, लेकिन उसे कोई शीशी या स्प्रे नजर नहीं आया तो वह बोली-
"कहां अब्बू...?"
"जो इस वक्त तुम्हारे कमरे में महसूस हो रही है। कोई एयर-फ्रेशर है क्या...?" समीर राय कप थामे हुए बोले।
"नहीं अब्बू...!" हिना ने लम्बा सांस लेते हुए कहा- "यह खुशबू तो मेरे कमरे में आती रहती है। कभी-कभी तो यह बहुत तेज हो जाती है...।"
"हैरत है...।" वह बड़बड़ाये और दो-तीन लम्बे गहरे सांस लिए ।
हा अब्बू.... हाँ अब्बू हैरत ही हैरत है...।"
"क्यों, क्या हुआ...?" हिना के लहजे में कुछ ऐसा था कि समीर राय चौंक गया।
"अब्बू... आज जब मैं कालेज से वापिस आई तो सितारा मुझे इस कमरे में बेहोश मिली...।" हिना पापा के पैरों के निकट बैठते हुए बोली।
"हैं...!" समीर राय वाकई हैरान रह गया- “लेकिन मुझे तो किसी ने कुछ नहीं बताया।"
"किसी को कुछ मालूम होता तो आपको बताता..." हिना वोली-"वैसे अब मैंने सितारा को मना कर दिया है कि वह किसी को कुछ न बताये...।"
"हुआ क्या था...?" समीर राय ने पूछा।
...जब वह कमरे में सफाई के लिये आई तो उसने वेड पर एक शख्स को बैठे हुए देखा
"एक शख्स को बैठे हुए देखा...! कौन था वो...?" समीर राय की आंखों से रोष झलकने लगा। वह कुछ और समझा। वह समझा शायद घर के किसी नौकर-चाकर ने यह धृष्टता की है।
"अब्बू... मेरा यकीन है कि वो शख्स वह था... जिसे मैं अक्सर ख्वाब में देखती हूं। काले कपड़े में सिर से पैरों तक ढंका हुआ... ऊंचा लम्बा...।"
"यह तुम क्या कह रही हो...?" समीर राय ने उसे अविश्वास से देखा।
"मैं सच कह रही हूं अब्बू...।" हिना ने बताया- "सितारा को देखकर वह उठा व तेजी से दरवाजे की तरफ बढ़ गया...।"
"फिर...?
"बस अब्बू, फिर क्या... सितारा के लिए इतना ही काफी था। वह ऐसी खौफजदा हुई कि चीख भी न सकी। गिरी और बेहोश हो गई...।" हिना ने बात पूरी की।
"ओह...यह तो बहुत खतरनाक बात है। समीर राय चुसकना भूल गया-"तुम्हारे ख्वाब में आने वाला तुम्हारे कमरे में आ गया। बेटी! मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा...।"
"अब्बू...! अब मैं क्या कहूं...? मेरी तो खुद की समझ काम नहीं कर रही...।"
समीर राय कुछ क्षण खामोश रहा, फिर बोला-"अच्छा, फिर ऐसा करते हैं...।" उसे भविष्यवक्ता व तांत्रिक युवती अरुणिमा का ख्याल आ गया-"हम देवी अरुणिमा से मिलने चलते हैं। तुम मेरे साथ चलोगी। अब इस मामले में हमें देवी अरुणिमा की मदद लेनी होगी...।"
यूं समीर राय अगले दिन सुबह-सुबह ही अपनी बेटी हिना के साथ... भविष्यवक्ता आमिल देवी अरुणिमा से मिलने के लिए निकल लिया था।
कुछेक क्षणों बाद सितारा के बदन में हल्का हल्का कम्पन हुआ तो हिना ने उसका चेहरा अपने दोनों हाथों में लेकर कहा "...सितारा...आंखें खोलो सितारा...।" सितारा ने फौरन आंखें खोल दीं। हिना को देखकर उसे इत्मीनान -सा हुआ। पर फिर जैसे ही उसे याद आया कि वह क्या देखकर बेहोश हुई थी...तो वह घबराकर एकदम उठकर बैठ गई।
"बीवी...।"
उसने फटी-फटी आंखों से पूरे कमरे का जायजा लिया - "वो...वो...।"
कुछ देखा है तूने कमरे में...?" हिना ने उसका हाथ पकड़ उसे उठाते हुए पूछा।
"हां...बीवी... हां... । वो...वो...।" सितारा के चेहरे पर घबराहट छा गई।
"परेशान मत हो । अब मैं आ गई हूं। बेड पर बैठ...।" हिना ने तसल्ली दी।
सितारा ने उसका हाथ मजबूती से थाम लिया। फिर वेड पर बैठने के बाद ही उसका हाथ नहीं छोड़ा। वह बेहद डरी हुई थी। हिना ने पानी का गिलास उसे थमा दिया। सितारा जल्दी-जल्दी सारा पानी पी गई और फिर डरी-डरी निगाहों से हिना की तरफ देखने लगी।
"डर क्यों रही हो?" हिना उसके दोनों हाथ थामते हुए बोली-"मुझे वताओ, क्या मामला है?"
"बीवी...मैं आपके कमरे में सफाई के लिए आई थी। रोज ही आती हूं। पर आज से पहले वो मुझे कभी नजर नहीं आया था।" सितारा खुद को सम्भालते हुए बोली।
"वो... कौन...? सांप था कोई...?" हिना ने अपना अनुमान लगाया।
"अरे नहीं बीवी! वो सांप नहीं था। वो जाने कौन था। यहीं बैठा था...जहां इस वक्त आप बैठी हैं। उसका पूरा बदन काले लिबास में ढंका हुआ था। चेहरा भी छिपा हुआ था। एक घूंघट-सा निकाला हुआ था... और उधर खिड़की की तरफ देख रहा था। मैं दरवाजा खोलकर जैसे ही अन्दर आई... उसने गर्दन घुमाकर मेरी तरफ देखा और
फिर तेजी से उठकर मेरी तरफ आया। मैं इतनी खौफजदा हो गई कि मेरी चीख भी न निकली। मेरी तो आंखों के आगे एकदम अंधेरा छा गया और मैं चकराकर गिर पड़ी...।" यह बताते-बताते सितारा की हालत फिर असामान्य होने लगी।
"डर मत... अब यहां कोई नहीं आ सकता...।" हिना धीरे से बोली।
"अल्लाह का शुक्र है बीवी कि आपने मेरी बात का यकीन कर लिया... वरना मेरा तो ख्याल था कि आप मेरा मजाक उड़ाएंगी...।"
"सितारा मैं जानती हूं कि तू सच कह रही है। फिर आखिर तुझे कोई ड्रामा करने की जरूरत भी क्या है। अच्छा, यह बता क्या तूने उसका चेहरा देखा था?"
"नहीं बीवी! मैंने बताया है ना कि उसने घूंघट-सा निकाल रखा था । "
"अच्छा, अब मेरी बात गौर से सुन। तू यह बात किसी को नहीं बताएगी। यहां तक कि अपनी मां को भी नहीं...।" हिना ने उसे सचेत किया।
"आखिर क्यों बीवी...।" वह परेशान हो गई।
"इसलिए कि सुनने वाले खामखां परेशान हो जाएंगे...।"
हिना ने समझाया- "तेरी मां का तो बुरा हाल हो जाएगा। वह तो वैसे ही जिन्न भूतों से बहुत डरती है।"
"हाय बीवी! क्या वो जिन्न था...?"
"अल्लाह जाने...।" हिना उसे टालते हुए बोली।
"बीवी...यह भी अच्छा हुआ कि आपने मुझे बेहोशी की हालत में देखा। अम्मा तो यही समझ रही होंगी कि मैं इतनी देर में यहां सफाई-सुथराई में लगी हूं। अगर वह देख लेती तो फिर उनसे कुछ छिपाना मुश्किल हो जाता।"
"मैं यह बात अब्बू को जरूर बताऊंगी...।" हिना कुछ सोचते हुए बोली- "बस और किसी को नहीं। उनको बताना जरूरी है।"
"जैसी आपकी मर्जी! वैसे यह बात सुनकर मालिक मुझे डांटेंगे तो नहीं...?" सितारा बोली।
"डाटेंगे क्यों...?" हिना अपनत्व से बोली-"जाओ, अब तुम भागो। खाने का इन्तजाम करो। बहुत भूख लगी है...।"
"आप मुंह-हाथ धोयें...।' सितारा बोली-"और डाइनिंग देती हूं।"
टेबल पर आ जाएं। मैं खाना लगा सितारा उठ गई। समीर राय कोठी पर ही थे और अभी उन्होंने भी खाना नहीं खाया था, हिना उन्हें खुद उनके कमरे से बुला लाई। दोनों ने मिलकर खाना खाया। खाने के बाद समीर राय का कॉफी पीने का मूड बना तो हिना बोली - "अब्बू, आप मेरे कमरे में चलें। मैं कॉफी बनाकर लाती हूं।"
"खैर तो है...?" समीर राय उठते हुए बोले।
"हां अब्बू...! खैर ही है। बस मेरा जी चाह रहा है कि आज मैं खुद आपको कॉफी बनाकर पिलाऊं...।" हिना ने हंसते हुए कहा।
हिना के किचन में जाने के बाद समीर राय उसके कमरे में आ गया और नर्म कोमल तकिये कमर के पीछे रखकर इत्मीनान से बैठ गया।
कमरे में हल्की-हल्की अजीब सी खुशगवार खुशबू फैली हुई थी। समीर राय ने दो-तीन गहरे सांस लिए। उसने 'खुशबू' पहचानने की कोशिश की। खुद समीर राय को परफ्यूम इस्तेमाल करने का वेहद शौक था। परफ्यूम की विभिन्न व आला
शीशियों से उनका ड्रैसिंग रूम भरा पड़ा था, लेकिन इस खुशबू की शिनाख्त वह भी न कर पाये।
हिना थोड़ी ही देर में ट्रे उठाये कमरे में दाखिल हुई। उसने ट्रे सेन्टर टेबल पर रखी व कपों में कॉफी उंडेलन लगी तो समीर राय ने पूछा-
"हिना यह कौन-सी खुशबू है...?"
हिना ने चारों तरफ देखा। उसका ख्याल था कि शायद अब्बू की निगाह किसी परफ्यूम की शीशी पर पड़ी है, लेकिन उसे कोई शीशी या स्प्रे नजर नहीं आया तो वह बोली-
"कहां अब्बू...?"
"जो इस वक्त तुम्हारे कमरे में महसूस हो रही है। कोई एयर-फ्रेशर है क्या...?" समीर राय कप थामे हुए बोले।
"नहीं अब्बू...!" हिना ने लम्बा सांस लेते हुए कहा- "यह खुशबू तो मेरे कमरे में आती रहती है। कभी-कभी तो यह बहुत तेज हो जाती है...।"
"हैरत है...।" वह बड़बड़ाये और दो-तीन लम्बे गहरे सांस लिए ।
हा अब्बू.... हाँ अब्बू हैरत ही हैरत है...।"
"क्यों, क्या हुआ...?" हिना के लहजे में कुछ ऐसा था कि समीर राय चौंक गया।
"अब्बू... आज जब मैं कालेज से वापिस आई तो सितारा मुझे इस कमरे में बेहोश मिली...।" हिना पापा के पैरों के निकट बैठते हुए बोली।
"हैं...!" समीर राय वाकई हैरान रह गया- “लेकिन मुझे तो किसी ने कुछ नहीं बताया।"
"किसी को कुछ मालूम होता तो आपको बताता..." हिना वोली-"वैसे अब मैंने सितारा को मना कर दिया है कि वह किसी को कुछ न बताये...।"
"हुआ क्या था...?" समीर राय ने पूछा।
...जब वह कमरे में सफाई के लिये आई तो उसने वेड पर एक शख्स को बैठे हुए देखा
"एक शख्स को बैठे हुए देखा...! कौन था वो...?" समीर राय की आंखों से रोष झलकने लगा। वह कुछ और समझा। वह समझा शायद घर के किसी नौकर-चाकर ने यह धृष्टता की है।
"अब्बू... मेरा यकीन है कि वो शख्स वह था... जिसे मैं अक्सर ख्वाब में देखती हूं। काले कपड़े में सिर से पैरों तक ढंका हुआ... ऊंचा लम्बा...।"
"यह तुम क्या कह रही हो...?" समीर राय ने उसे अविश्वास से देखा।
"मैं सच कह रही हूं अब्बू...।" हिना ने बताया- "सितारा को देखकर वह उठा व तेजी से दरवाजे की तरफ बढ़ गया...।"
"फिर...?
"बस अब्बू, फिर क्या... सितारा के लिए इतना ही काफी था। वह ऐसी खौफजदा हुई कि चीख भी न सकी। गिरी और बेहोश हो गई...।" हिना ने बात पूरी की।
"ओह...यह तो बहुत खतरनाक बात है। समीर राय चुसकना भूल गया-"तुम्हारे ख्वाब में आने वाला तुम्हारे कमरे में आ गया। बेटी! मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा...।"
"अब्बू...! अब मैं क्या कहूं...? मेरी तो खुद की समझ काम नहीं कर रही...।"
समीर राय कुछ क्षण खामोश रहा, फिर बोला-"अच्छा, फिर ऐसा करते हैं...।" उसे भविष्यवक्ता व तांत्रिक युवती अरुणिमा का ख्याल आ गया-"हम देवी अरुणिमा से मिलने चलते हैं। तुम मेरे साथ चलोगी। अब इस मामले में हमें देवी अरुणिमा की मदद लेनी होगी...।"
यूं समीर राय अगले दिन सुबह-सुबह ही अपनी बेटी हिना के साथ... भविष्यवक्ता आमिल देवी अरुणिमा से मिलने के लिए निकल लिया था।