Fantasy इच्छाधारी देव - SexBaba
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Fantasy इच्छाधारी देव

hotaks

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फ्रेंड्स ये कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है जिसका वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नहीं है. न hi इसमें लिखे गए किसी भी पत्र का कोई अस्तित्व है. ये कहानी सिर्फ मनोरंजन की दृष्टि से लिखी गयी है इस कहानी के द्वारा किसी भी जाती, धरम, समाज या व्यक्ति विशेष का अपमान करने का या उन्हें ठेस पहुंचने का कोई उद्देश्य नहीं है. यदि इस कहानी में कही किसी प्रकार की कोई भी समानता पाई जाती है तो ये महज एक इत्तेफ़ाक़ hoga.to कृपया इसे महज़ एक कहानी की तरह hi पढ़े और इसका मज़ा ले.

अपडेट 1


बात बहोत बार कही गयी है दुसरो का पता नहीं लेकिन मेरे मामले में ये सही है क ये मेरी पहली कहानी है. जो रेगुलर रीडर्स होंगे वो जान जायेगे. एक तो मेरी लैंग्वेज से दूसरे मेरी कहानी से. अब ज्यादा बाटे न करते हुए सीधे hi कहानी पर आते है. चाररेक्टर्स आते जायेगे और इंट्रो होता जायेगा. प्लीज गाइस मेरा हौसला टूटने मत दीजियेगा. आपके कमैंट्स मेरे लिए कीमती है.

एक बहोत hi घाना जांगले था जहा ऊँचे ऊँचे पेड़ थे वो इतने घने थे की सूरज की रौशनी भी उन्हें क्रॉस कर के जमीन पे नहीं आ रही थी. इसलिए वह अँधेरा, सीलन, और हलकी ठण्ड भी थी . उसी घने जंगल में एक अँधेरी गुफा थी . जिसमे किसी के जोर जोर से बोले जाने वाले अजीब से मंत्रो की आवाज़ आ रही थी.

अघोरी . . जी है वह एक लगभग नंगा शख्स बैठा है जिसका नाम है अघोरी. वो किसी पूजा में मग्न है उसके करीब hi दो बहोत hi खूबसूरत और नंगी लड़किया कड़ी थी. जिनके चुके बहोत बड़े बड़े थे और गांड भी लेकिन कमर एक डैम पतली दोनों के बाल खुले हुए थे और वो ऐसे कड़ी थी जैसे अघोरी के आदेश का इंतजार कर रही थी . तभी अघोरी ने उन्हें इशारे से नीचे बैठने को कहा और उनके बैठते hi एक चाकू ले के एक लड़की की जांघ पे हल्का सा कट लगा दिया जिससे खून निकलने लगा अघोरी ने अपने अंगूठे पे भी कट लगाया और अपने उसी अंगूठे से लड़की की जांघ से बहते खून को मिला के उठाया और अपने सामने धरती पे hi वो कुछ अजीब सी आकृति बनाए लगा. जब वो आदि टेडी लकीरे बना चूका तो दूसरी लड़की की, की जांघ पे भी वैसे चाकू से कट लगाया और अपने खून बहते अंगूठे से उस लड़की की जांघ से बहते खून को मिला के उठाया और जमीन पे बानी हुई आकृति पूरे करने लगा. जब वो आकृति पूरी बन गयी तब उसने कुछ पानी अपने हाथ में लेके मन्त्र पड़े जिससे उसका अंगूठा एक डैम ठीक हो गया और वही कुछ चीते दोनों लड़कियों की जांघो पे मरे जिससे लड़कियों की जकंग से बहता खून भी एक डैम गायब हो गया वो लड़किया फिर से कड़ी हो गयी वही पे. यहाँ अघोरी कुछ मंत्र पड़ता हुआ उस तस्वीर पे भस्म फेंकने लगा देखते hi देखते वह एक सांप क जोड़े की तस्वीर बन गयी और कुश समय बाद वह का दृश्य ऐसे लगने लगा जैसे टीवी पे कोई फिल्म चल रही हो एक जांगले वह भी दिखाई दे रहा था जिसमे वो दोनों सांप आगे बढ़ रहे थे अघोरी ने थोड़ी देर ध्यान से देखा और फिर ठहाका लगता हुआ हाथ हवा में हिलने लगा कोई कुछ समझ नहीं पा रहा था. पर तभी वह कुछ रौशनी हुई और एक बड़ा शख्स वह आ गया.

अघोरी- गुरदेव आप आ गए मए आपको hi बुलाने वाला था . ये देखिये मेरी सालो की म्हणत रंग लायी.

ये नाग और नागिन है जो इसी तरफ बाद रहे है और करीब एक महीने बाद इसी जंगल में प्रवेश करेंगे. तब मेरी मनोकामना पूरी हो जाएगी गुरुदेव.

Gurudev(GD)- है अघोरी तेरी मनोकामना पूरी हो जाएगी लेकिन तू नहीं जनता क इसमें अभी कितनी मुश्किलें है. अभी बस तूने उन्हें ढूंढा hi है. अभी तू आने वाली मुश्किलों से अनजान है.

अघोरी- गुरुदेव कैसी भी मुश्किलें आ जाये मेरी शक्तियों के सामने उनकी कोई औकात नहीं. बस ये नाग नागिन मुझे मिल जाये फिर मए अपना उद्देश्य पूरा करुगा. और बन जाउगा सर्वशक्तिमान. कोई मुझे नहीं हरा पायेगा न hi कोई मुझे मार पायेगा.

गढ़- तू मेरा शिष्य है इसलिए तुझे आगाह करता हु. तेरे उद्देश्य की पूर्ति के लिए इस नाग का मरना बहोत जरूरी है वो भी पूरी तरह. क्यों की ये hi तेरे काम में रुकावट दाल सकता. है. तुझे तो इस नागिन की जरुरत है न नाग को मार कर hi तू इस नागिन के साथ सम्भोग कर पायेगा उस से पहले नहीं. और याद रहे उस नाग को तुझे इस जंगल में आने से पहले मरना है क्युकी यहाँ आ कर उस नाग की शक्ति भी दस गुना बढ़ जाएगी और तेरी मुश्किलें भी बढ़ेगी.,

अघोरी- तो क्या मए उसे अभी मार दू?

GD-nahi उसे इस जंगल के बहार hi मरना जंगल के बहार जो गाँव है जब वो वह तक पहुंचे तब मरना है उसे क्यों क अभी वो रक्षा कवच में है अभी तू उनका कुछ नहीं बिगड़ पायेगा बल्कि अभी अगर तूने उन पे हमला किया तो तू फिर कई वर्षो तक उन्हें धुंध भी नहीं पायेगा. वो नाग अपनी नागिन को अपनी शक्तियों के कवच में छुपा लेगा . अभी वो लोग निश्चिन्त है इसलिए तुझे दिख रहे है.

अघोरी ठीक है गुरुदेव ऐसा hi होगा उसे मए जंगल के बहार वाले गाँव में पहुंचते hi मार दुगा अब से मेरी नजर हर पल उन पे रहेगी.

गढ़- मए अब भी कहता हु छोड़ दे ये सब इसमें तेरी जान भी जा सकती है.

अघोरी – नहीं गुडइव मए आपकी ये बात नहीं मानुगा.

गढ़- मुह्जे जो कहना था कह दिया बाकि तू जाने और तेरी किस्मत. इतना कहते hi गढ़ वह से चलेगये.

अघोरी फिर से ठहाके लगते हुए – क्या खूबसूरत नागिन है इसे अपने लुंड से छोड़ के इसका कुंवारा लहू निकलूंगा तभी मेरी आगे की योजना पूरी होगी. है है है है है है है है है ....
 
अपडेट - 2

सूर्य ग्रह – ये उस गाँव का नाम है जो उसी जंगल के बहार है जहा अघोरी अपनी घिनौनी साजिशे बना रहा है. पर यहाँ का माहौल कुछ अलग है. यहाँ के लोग भी अपनी मस्ती में मस्त है यही हमारा हीरो भी है उसका एक अच्छा खासा संपन्न परिवार है माँ बाप, भाई, बहन, भाभी, वो खुद एक डैम साधारण सा न किसी से कोई दुश्मनी न कोई बैर अभी वो नहीं जनता की बहोत जल्द उसका सामना कितने खतरनाक हालातो से होने वाला है पर अभी वो चैन की नींद सो रहा है और अपने सपनो की हसीं दुनिया में hi खोया हुआ है. तभी उसे ऐसा महसूस होता है जैसे उसे कोई बुला रहा हो

देवा…… देवा…… देवा…… देवा……

देवा .. कौन है ? कौन बुला रहा है, मुझे कोई नजर क्यों नहीं आ रहा?

…….. मए हु देवा एक फ़कीर.

और वह कुछ धुआं सा उठता है और उसमे से एक बूढ़ा आदमी नजर आता है. जिसके चेहरे पे बहोत ज्यादा तेज़ था एक हाथ में मनको की माला सफ़ेद धोती कुर्ते में. लम्बी सफ़ेद दाढ़ी और कंधो तक झूलते सफ़ेद बालो वाला वो बूढ़ा शख्स मुस्करा के बोलै.

देवा.. आप कौन है बाबा.

… हु तो मए एक फ़कीर hi लेकिन भटक रहा हु अपनी मंजिल की तलाश में.

देवा . . . . बाबा आप मेरे पास क्यों आये है. क्या चाहिए आपको मुझसे?

फ़कीर बाबा - देवा मेरी मंजिल का रास्ता तुझसे हो के hi निकलता है और मए तुझसे इसीलिए मिलने आया हु . क्यों की अब वो वक़्त ज्यादा दूर नहीं और अब तुझे भी मेरी सहायता की जरूरत होगी.

देवा . . लेकिन बाबा मए आपकी मदद कैसे कर सकता हु

फ़कीर बाबा . . देवा इस पूरे संसार में एक तू hi तो है जो मेरी मदद कर सकता है लेकिन अभी उसमे कुछ वक़्त है . इससे पहले तुझे बहोत कुछ जानना समझना और सीखना है. बाकि बाटे तुझे सही वक़्त पे पता चल जाएगी.

देवा . . लेकिन बाबा मए तो एक साधारण सा इंसाने हु भला मए किसी के क्या काम आ सकता हु

फ़कीर बाबा . .बीटा नियति ने अगर तुझे चुना है तो तू भी बदलेगा और तेरा वक़्त भी बदलेगा. मए फिर आउगा तुझसे मिलने.

तभी देवा की आँख खुल जाती है वो पूरा पसीने में भीगा हुआ था. सुबह हो गयी थी और वो सोच रहा की ये जो सपना देखा क्या ये सच है या उसका कोई वहां . फिर वो अपना सर झटक देता है और चला जाता है अपने नित्यकर्म निपटने और जब लौटता है तो देखता है उसकी भाभी आँगन में नाहा रही थी ये रोज का था उसकी भाभी अपने गोर चिकने बदन पे चूचियों तक अपने पेटीकोट को बंद के नाहा रही थी देवा की नजर उस पे जाती है लेकिन वो आगे बाद जाता है.

देवा . . माँ जल्दी नाश्ता दे दो मुझे खेत जाना है.

देवा की माँ सावित्री देवी हाथ में नाश्ते की थाली लिए आती है.

सावित्री देवी. . बीटा आज तू जल्दी आ जाना क्यों की आज थोड़ा काम है. शहर जाना है और वापसी में तेरी बहन को भी मां के घर से लाना है. हफ्ता भर हो गया है उसे वह गए हुए.

देवा . . ठीक है माँ आ जाउगा.

फिर देवा निकल जाता है. आइये तब तक देवा के परिवार के बारे में जानते है.

देवा के घर में उसकी माँ बाप भाई भाभी और बहन है जिसमे से

बाप दीनानाथ एक बेहद ईमानदार और इज्जतदार सेहतमंद और अच्छा इंसाने है जो अपने खुशहाल परिवार के साथ चैन से अपनी जिंदगी गुजर रहा है. शुरू से hi गाँव में रहने क कारन इनके जिस्म में आज भी भरपूर कसावट है और आज भी अपनी पत्नी सावित्री देवी को जब पटक के छोड़ते है तो उनकी चीखे निका देते है. लेकिन अपनी पत्नी के आलावा ये किसी पे नजर नहीं रखते.

माँ सावित्री देवी उम्र तो उसकी भी हो गयी है लेकिन एक तो गाँव की मिटटी का असर दूसरा इस उम्र तक भी पति के मोठे तगड़े लुंड से रोज छोड़ने का कमल उसके शरीर पे भी है. 5.5” की हिघ्त, गोरा रंग, गठीला बदन, भरी भरी 36 की चूचिया और 38 की निकलती हुई गांड. और गांड से भी नीचे तक झूमते हुए उसके काळा घने बाल. किसी का भी मन ललचा दे और जो अगर कोई उसे नंगी देख ले तो कमजोर दिल वाला तो वही हार्ट अटैक से मर जाये ऐसा कातिलाना फिगर है उसका. और फिर रोज रात को पति का लुंड लेने का और गारे वीर्य को अपनी बुर में लेने का भी कमल है जो उसे बूढ़ी नहीं होने देता. पर संस्करो की पक्की है . पति के साथ बिस्तर पर किसी रंडी की तरह खुल के छुड़वाने वाली, पर अपने कमरे से बहार निकलते hi वो एक देवी से काम नहीं अपने तीनो बच्चो को सामान रूप से प्यार तो देती hi है बहु को भी बेटी से काम नहीं समझती.

भाई रघु - किसी काम का नहीं वो बस आवारागर्दी करता रहता है और नशे की आदत ने उसे बर्बाद कर दिया है सारा दिन या तो अपने आवारा दोस्तों के साथ घूमना, जुआ खेलना, या शराब पी कर कही पड़े रहना . इसी वजह से शायद अब तक वो जिंदगी में कुछ न कर पाया यहाँ तक की बाप भी न बन पाया.

बहन पायल - एक 19 साल की कड़क जवानी से भरपूर लड़की है रंग रूप में माँ पे hi गयी है. मस्त भरा हुआ जिस्म 32 की तानी हुई चूचिया और 34 की उभरती हुई गांड एक डैम गोरी हसीं.

भाभी दिया - ये है देवा की भाभी जो ख़ूबसूरती में किसी से काम नहीं मस्त 34 32 36 का फिगर है इनका और दूध सी गोरी है ये भी. जब उलटे पल्ले की साड़ी पहन कर निकलती है तो साइड से झांकती हुई इनकी कमर तो एक मरीज का लुंड भी खड़ा कर दे और मुस्कान ऐसी की इंसाने अपना सब कुछ उस पे वार दे. परिवार में सब से प्यार से रहती है पति के नाकारा होने के बावजूद घर में सबका सम्मान करती है इसलिए सब इन्हे प्यार भी करते है और पूरा ख्याल भी रखते है इनके पिताजी दीनानाथ जी के दोस्त है और इसी वजह से अपनी बेटी दिया की शादी दीनानाथ के बेटे से कर दी लेकिन आज वो अपने फैसले पे पछताते भी है पर कर कुछ नहीं सकते. दिया को घर में सब का प्यार मिलता है पर जो प्यार पति से चाहिए बिस्तर पे उस के लिए वो आज भी तरसती है. शादी शुदा है पर. आज भी कुवारी है क्यों की रघु से आज तक इनकी सील भी नहीं टूटी. वजह ? एक तो इन्हे शराब के नशे से बहार आने का समय नहीं है. कभी गलती से ये होशो हवस में अपने कमरे में घुस भी गए और दिया की कोशिशों से ये उस के ऊपर चढ़ भी गए तो इनकी लुल्ली दिया की बुर में जाने से पहले hi झाड़ जाती है सिर्फ बुर की गर्मी महसूस होते hi. क्यों की है तो दिया भी एक जवान और गरम लड़की hi और बिना चुदाई किये तो उसकी छूट भी एक डैम कोरी और टाइट hi है जिसे रघु आज तक भेद नहीं पाया शादराब ने उसे इस काबिल hi नहीं छोड़ा के वो दिया को रगड़ के छोड़ सके और उसे वो जिस्मानी ख़ुशी दे सके. दिया को आज भी इंतजार में है के कभी उसकी भी जन्दगी में खुशिया आएगी जो फिर कभी उसका साथ नहीं छोड़ेगी.

बाकी चाररेक्टर जब आएंगे तो उनका इंट्रो भी होता जायेगा चलते है अपने देवा के पास.

देवा अपने खेत में काम करते हुए पसीने से भीगा हुआ था यु तो उनका खेत भी काफी बड़ा था और वह और भी गाँव के लोग मजदूरी करते थे पर देवा भी उनके साथ hi लग कर काम करता था. एक म्हणत काश मजदूर की तरह. किसी मालिक की तरह नहीं. उसे इस हालत में देख कर कोई कह hi नहीं सकता के इतने बड़े खेतो का मालिक है देवा.

तभी एक कार बहोत तेजी से चलती हुई आयी और देवा के खेत के पास थोड़ी अंदर आ कर मिटटी में उसके पहिये फास गए. देवा की नजर उस कार पे गयी तो वो दौड़ता हुआ वह पंहुचा देवा समझ गया था की ये कार ठाकुर की छोटी बहन ज्योति ठाकुर की है जो काफी गुस्से वाली है देवा उन लोगो से दूर hi रहता था. लेकिन अब वो खुद hi आ गयी है तो उसे वह तक जाना पड़ा.

देवा. . . क्या हुआ ठकुराइन

ज्योति ठाकुर. . अपने घमंड में , अँधा है क्या दीखता नहीं हमारी कार का पहिया तेरे खेत की मिटटी में फंस गया है. चल निकल इसे.

देवा ने अपने 4-5 आदमियों को आवाज़ लगायी और सब मिल के निकलने लगे कार को. ज्योति ठाकुर और उसकी दो सहेलिया कार के अंदर hi बैठी थी जिससे थोड़ी दिक्कत आ रही थी

देवा . . . ठकुराइन आप लोग बहार आ जाइये कार आसानी से निकल आएगी.

ज्योति और उसकी सहेलिया बहार आयी तो ज्योति. . देवा पे हँसते हुए. तेरा बाप तो बड़ा पहलवान बना फिरता है तुझमे उसने ताक़त नहीं डाली क्या. एक कार का पहिया निकलने के लिए 5 आदमी बुलाता है और तुम 6 मिल के भी कार नहीं निकल पाए. मुझे कार से ुअटार्ने को कहना hi पड़ा तुझे.

देवा को उसकी ये बाटे बहोत तेज चुभती है पर वो कुछ नहीं कहता . जैसे तैसे कार निकलती है .

देवा. . . ठकुराइन हमने आपकी मदद की है अपनी सहेलियों के सामने आपको हमारा अपमान नहीं करना चाहिए.

ज्योति . . दो कौड़ी के आदमी तू हमें सिखाएगा क क्या करना चाहिए हमें और क्या नहीं. अभी मए जल्दी में हु लेकिन तुझे इस बात का जवाब मए जल्दी hi दूगी .

ज्योति वह से चली जाती है और देवा भी अपना सर झटक कर अपने काम पे लग जाता है. फिर दिन भर के काम से निपट के वो अपने घर जाता हे .

देवा . . . माँ चल जल्दी खाना लगा फिर शहर भी निकलना है.

सावित्री - तू आ गया बीटा . जल्दी से हाथ मुँह धो ले

देवा . . अरे माँ तू तो कमल की लग रही है आज तैयार हो के .

स . . चल बदमाश माँ पे नजर डालता है. चल जल्दी कर खाना लगा देती हु मए.

दिया . . मुस्कराते हुए. माँ इसमें देवा का कोई कसूर नहीं है एक तो आप देवा को बहु नहीं दिला रही हो दूसरे खुद आज आप बहोत खूबसूरत लग रही हो. ये भी क्या करे बेचारा.

स . . हलके से मुस्कराते हुए. . तू फिर शुरू हो गयी कोई मौका नहीं छोड़ती न तू भी. जब देखो तुम सब मिल के मुझि को छेड़ते रहते हो.

देवा. . हाथ मुँह धोके आता है और खाना खा के फिर अपने ट्रेक्टर पे माँ को ले के निकल जाता है, जहा वो शहर जाते है और सावित्री अपने और घर के लोगो के लिए कुछ कपडे खरीदती है फिर वो लोग निकल जाते है देवा के मां के घर........................
 
अपडेट 3

देवा ननिहाल


देवा के तीन मां और मामिया है और 2 मौसी भी मौसियो की अपनी अलग दुनिया है जहा वो अपने परिवार के साथ है. इस वक़्त घर में सभी मौजूद थे, देवा और उसकी माँ को वह पहुंचते हुए शाम हो गयी थी अँधेरा भी बाद गया tha.deva का ट्रेक्टर एक बहोत बड़े घर के सामने रुकता है.

ननिहाल

1 मां श्यामलाल एक किसान

ममी सुनीता 34 30 36 इनकी एक बेटी है

आगे उसके मां से कुछ हुआ hi नहीं कोशिश तो करते है लेकिन महीने में 1-2 बार hi जिसकी वजह से मामी दुखी रहती है बेचारी.

2 मां किशन लाल ये भी एक किसान है

ममी भर्ती 32 30 34 की एक दुबली पतली लम्बी लेकिन बेहद खूबसूरत औरत है. इनका एक बीटा है. आगे का कुछ किशन लाल से भी हुआ hi नहीं ये बीटा भी शायद इसलिए हो गया क्यों की शादी के नए नए जोश में इनकी बुर रोज चुदती थी और नयी नयी जवानी थी, काम उम्र थी तो खून गरम था इसलिए भर्ती की बच्चेदानी ने भी किशन लाल के वीर्य को अपने अंदर बंद कर लिया और बच्चा ठहर गया अब तो इन्हे भी महीने में एक दो बार hi शारीरिक सुख नसीब होता है वो भी जब ये खुद नंगी हो के पति की धोती खोले, और उनका लुंड चूस चूस के खड़ा करे जो की बहोत मुश्किल से होता है. वार्ना चुदाई का कोई चांस नहीं

3 मां रामलाल अपने hi गाँव की पोस्ट ऑफिस में जॉब भी मिल गया है तो शादी की बाते चल रही है. शरीर से कोई खास नहीं है.

1 मौसी तारा. बड़ी खतरनाक फिगर है इनकी 38 34 40 इतना गदराया हुआ बदन की नजर hi न हेट लेकिन फिर भी शरीर से मोती नहीं . ये अपने पति से कभी संतुष्ट नहीं होती , हो भी कैसे इस खूंखार बदन को जैसा लुंड चाहिए वो इनके पति के पास नहीं वो बेचारा एक दुबला पतला इंसाने है जो छोड़ना तो दूर छूट की गर्मी से hi झाड़ जाता है बस लुंड अंदर गया नहीं के इनकी पिचकारी निकल जाती है. पर ये कहानी आजकल है. शादी के शुरुआती दिनों में इनके 2 साल के अंदर hi दो बच्चे हो चुके है . क्यों की उस वक़्त न तो तारा देवी का जिस्म इतना खूंखार था न hi ये चुदाई की इतनी भूखी थी जितनी आज है तब तो ये ½ घंटा भी नहीं चुद पति थी क इनकी कमर जवाब दे देती थी और आज तो कोई इन्हे रात भर भी ठोके तो सुबह को ये उससे पहले उठ के रेसलिंग कर सकती है. ( जोक्स ा part) .

2 मौसी सरिता ये भी अपनी बहन की hi तरह है और इनकी छूट भी प्यासी है इनके भी 2 बचे है पर पति से संतुष्टि नहीं है आजकल. कारन शामे है दोनों भाइयो का. बहार कही मुँह कोई मरता नहीं तो बस ये सब जलती hi रहती है अपनी hi जिस्म की आग में.

बैक तो स्टोरी

ट्रेक्टर की आवाज़ सुन के बड़े मां श्याम लाल बहार आते है और अपनी बहन और भांजे को देख के खुश हो जाते है

S.L. - अरे आओ भांजे आज बड़े दिनों बाद आये . कैसी हो दीदी

और वो आगे बाद के बहन के पेअर छूटा है.

सावित्री - ठीक हु भैया . तुम कैसे हो और मेरी भाभी कैसी है.

सल - सब ठीक है चलो आओ अंदर

सब अंदर आते है. और सबसे मिलते है पायल दौड़ती हुई आती है और आकर माँ और भाई के गले मिलती है

पायल माँ कैसी है तू और भाई तू कैसा है

सावित्री- तू तो यहाँ आ कर भूल गयी . घर नहीं जाना क्या

देवा . अरे माँ मए तो मन कर रहा था के इसे यही रहने दे वार्ना घर पे सब का दिमाग कहती रहेगी

पायल रूठ के . . क्या भाई मए कहा किसी को परेशां करती हु. और ऐसा है तो नहीं जोगी मए

सावित्री . . अरे ऐसे क्या रूठती है अपने भाई से. वो मजाक कर रहा है.

पायल - जानती हु माँ मए . वार्ना मुझे भी पता है भाई मुझे कितना प्यार करते है.

तभी बड़ी ममी आ जाती है

सुनीता .. कौन किसे प्यार करता हे भाई

देवा उठ के सुनीता के पैर छूटा है तो सुनीता उसे रोक का अपने गले लगा लेती है देवा की चौड़ी छाती से लग के उस के बदन में चीटिया रेंगने लगती है और छूट भी कुछ गीली हो जाती है . देवा को भी ममी की बड़ी बड़ी चूचिया अपने सीना में चुभती हु सी लगती है. और उसका लुंड भी कुछ हरकत करने लगता है जिसकी हलकी सी चुभन सुनीता को उसकी नाभि पे होती है तो आश्चर्य से देवा को देखती है देवा की नजर जैसे hi ममी से मिलती है वो शर्मा जाता है. सुनीता मुस्करा के उसे एक बार फिर कास के गले से लगाती है और उसके सुपडे की गर्मी अपनी नाभि पे महसूस करती है और फिर वो न चाहते हु भी देवा से खुद को अलग करती है, और अपनी ननद से

सुनीता . दीदी अब तो अपना देवा भी जवान हो गया है बहु कब ला रही हो

सावित्री हंस के . हां रे लाना तो है पर पहले पायल को विदा करेंगे उसके बाद .

सुनीता शरारत से. देवा तुझे अगर किसी चीज़ की जरुरत हो तो मुझे बताना मए मन नहीं करुँगी बल्कि सब व्यवस्था कर दूगी . यहाँ गाँव में खूब हरियाली है.

देवा . . क्या ममी आप भी. मुझे भला इस गाँव की हरियाली से क्या लेना वो तो हमारे गाँव में भी है. सुनीता हंस के हां वो तो होगी hi . चल सही है दीदी का कहना भी, लगता है अभी तेरी शादी में सच मच देर करना hi सही है. क्यों की अभी तेरा ध्यान असली हरियाली की तरफ नहीं जा पाया है.

ये सुन के सुनीता और सावित्री हसने लगती है लेकिन देवा और पायल को कुछ समझ नहीं आता.

फिर देवा अपनी दूसरी ममी भर्ती से मिलता है वो भी देवा को गले लगाती है. इस बार देवा अपना लुंड दूर hi रखता है जिससे उसका लुंड तो भर्ती के शरीर से नहीं छू पता लेकणि देवा का सीना उभर के भर्ती की सूचियों पे पूरा दबाव डालता है जिससे वो भी गर्माने लगती है. देवा के मजबूत शरीर को देखते हुए वो भी खुश होती है. और फिर बातो के लम्बा दौर चलता है उस के बाद सब खाना खा के सोने चले जाते है. जिसमे की सुनीता और भर्ती आज अपने पति को छोड़ के सावित्री के साथ hi सोने चली जाती है. वैसे भी उनके पति तो किसी काम के है नहीं .

वह जांगले में अघोरी एक शेर की खाल पे लेता हुआ है उसका सर कनिका की गॉड में है जो उसे अपनी चुकी पीला रही थी बीच बीच में जब अघोरी उसकी निप्पल पे दन्त गदा देता तो कनिका की सिसकारी निकल जाती, अघोरी अपने दूसरे हाथ से उसकी दूसरी बड़ी सी चुशी मसल रहा था. नीचे उसके पैरो के पास मनिका बैठी थी जो के अघोरी का बड़ा सा कला लुंड चूस रही थी हलाकि उसे अघोरी के जिस्म से उठती बदबू बिलकुल बर्दाश्त नहीं हो रही थी उसका लुंड चूसते हुए उसे ऐसा लग रहा था क अभी उलटी आ जाएगी लेकिन वो वह से हैट नहीं सकती थी क्युकी अगर अघोरी को भनक भी लगी तो वो मनिका का सर उदा देगा. बस इसलिए मनिका उसका लुंड चूसे जा रही थी. और खुद अघोरी कनिका के हाथो से जैम पे जैम भी पी रहा था. तभी उस गुफा के उस विशेष कमरे में एक बाज़ उड़ता हुआ आता है. जिस की आवाज़ सुन कर. अघोरी एक डैम से कनिका और मनिका को दूर धकेल देता है और गजब की फुर्ती से उठ कर खड़ा हो जाता है. और नंगा hi दौड़ता हुआ वही हवन कुंड के पास आ जाता है जहा उसने नाग और नागिन को देखा था. उस गोले में फिर से देखने पे अघोरी की आँखे लाल हो जाती है. क्यों की नाग और नागिन इस रात के सन्नाटे में लिपटे हुए थे और प्यार में मस्त थे.

अघोरी – नहीं ये नहीं हो सकता ये नाग इस नागिन को नहीं छोड़ सकता इन्हे रोकना होगा. अगर ऐसा हो गया तो मेरे इतने सालो की तपस्या भांग हो जाएगी मए कभी सर्वशक्तिमान नहीं बन पाउगा. क्या करू जिससे ये नागिन को छोड़ न पाए. तभी उसे कुछ सूझता है. और उसकी आँखे चमकने लगती है.

वो मंत्र पढ़ हाथ में कुछ काळा डेन लेता है और उस गोले में फेंक देता है. और देखने लगता है.

जहा नाग नागिन प्रेम में दुबे हुए एक दूसरे से लिपटे थे. वह से थोड़ी hi दूरी पे कुछ जनगली लोग नाचते हुए निकलने लगते है. उनके हाथो में ढोल भी थे और कुछ के हाथो में बीन भी थी.

इंट्रोडस इच्छाधारी नाग नागिन

नागराज रूद्र और नागरानी नीलम


रूद्र और नीलम एक दूसरे के प्यार में दुबे हुए थे {अभी ये दोनों इंसानी रूप में hi थे }

नीलम – ये क्या कर रहे हो रूद्र तुम जानते हो अभी पूनम की रात दूर है उसके बाद hi हमारा विवाह हो पायेगा और मए हमेशा के लिए तुम्हरी हो जोगी तब तक थोड़ा सा इंतजार और करो . मुझे यु न बहकाओ. क्यों की मए भी बहक गयी तो वो शक्ति जो तुम्हे और हमारे वंश को मिलने वाली है वो व्यर्थ हो जाएगी.

रूद्र – नीलम मए तुम्हारे रूप में अपने होश खो रहा हु बहोत लम्बे समय से कई सेकड़ो सालो से मए खुद को रोके हुए हु लेकिन लगता है आज मए खुद को रोक नहीं प् रहा हु. मए भोलेनाथ से क्षमा मांग लगा लेकिन अभी तो मेरा साथ दो . और रूद्र उसके होठो को चूमने लगता है

नीलम हस्ते हुए – अच्छा क्षमा मांग लोगे जानबूझकर किये हुए गुनाहो की क्षमा नहीं मिलती नागराज, भोलेनाथ इतने भी भोले नहीं . और मए तो तुम्हरी hi हु. क्या थोड़ा सा साबरा नहीं रख सकते.

रूद्र – तुम्हरे इस रूप को देख कर तो ऋषि मुनि भी अपना तप छोड़ दे मए तो उनके सामने कुछ भी नहीं .

नीलम - ऐसा मत कहो. तुम सा शक्तिशाली नाग आज इस धरती पे कोई नहीं. और हजारो सालो की तपस्या के बाद तुम इतने ताक़तवर हुए हो. और मए भी. तुम्हे याद है हम लोग तो साधारण से नाग नागिन थे जो यु hi एक दूजे के प्यार मए पद गए . लेकिन हमें अगर उस फ़कीर बाबा ने सही राह न दिखाई होती तो हम दोनों कब के इस संसार से विदा ले चुके होते .

रूद्र – है नीलम उन्होंने कहा था के हमारा जनम यु hi नहीं हुआ हमारे जीवन का उद्देश्य बहोत बड़ा है. उसके लिए हमें कठोर तपस्या कर के इच्छाधारी बनना होगा. और तब हमारा मिलान भी होगा और हमारा प्रेम भी अमर हो जायेगा और फिर इस सर्प योनि के बाद जब भी हमारा अगला जनम होगा तो इंसाने रूप में होगा और तब हमें मोक्ष भी मिलेगा. और अब वो घडी भी ज्यादा दूर नहीं.

नीलम – और तुम इतनी कड़ी म्हणत को अपनी इस वासना की भेंट चढ़ाना चाहते हो? याद है फ़कीर बाबा ने हमें एक लक्ष्य दिया है और ये भी कहा था के अगर उससे पहले हमने अपना संयम खोया और अगर हम सम्भोग कर बैठे तो उसी पल हम दोनों वापस साधारण नाग नागिन बन के नाग लोक में पहुंच जायेगे और हमारी सेकड़ो वर्षो की तपस्या साडी म्हणत विफल हो जाएगी.

रूद्र – नहीं नीलम मए तो तुम्हरे इस रूप से बस बहक गया था. पर तुम्हारा धन्यवाद के तुमने मुझे सही राह दिखाई. मुझे याद दिलाया के मुझे मेरे "भाई" को वापस पाना है

तभी उन्हें वो आवाज़े सुनाई देती है. और वो छिटक कर एक दूजे से अलग हो जाते . उन्हें अलग होते देख अघोष की आँखों में चमक आ जाती है. और होठो पे कमीनी मुस्कान भी.

रूद्र – लगता है कुछ इंसान सांपो को पकड़ने निकले है चलो यहाँ से जल्दी

फिर रूद्र और नीलम वह से दूर हो जाते है और रत के अँधेरे में छुप जाते है. क्यों की अभी वो कोई शक्ति प्रदर्शन नहीं कर सकते थे.

इधर देवा के ननिहाल में

देवा बाजु वाले कमरे में सोया हुआ है. दिन भर की थकावट के बाद देवा जैसे hi बिस्तर पे लेता उसे नींद आ गयी थी नींद में वही आवाज़े उसे सुनाई देती है. और थोड़ी देर बाद फ़कीर बाबा आ जाते है.

फ बी . . देवा . कैसा है रे.

देवा . . ठीक हु बाबा. आपने बताया नहीं आप कौन है और मुझसे क्या चाहते है.

फब. देवा तू शरीर से बड़ा हुआ है लेकिन दिमाग से नहीं और अभी तुझ में कोई ताक़त भी नहीं . तू अभी न तो मुझे समझ पायेगा न hi कुछ कर पायेगा . तुझे अपनी शक्तियों को जगाना होगा देवा. समय निकट आ रहा है.

देवा. . पर वो कैसे बाबा

फब . योग साधना से बीटा. योग द्वारा hi तुझे अपनी शक्तियों को जाग्रत करना होगा. जिससे तुम्हारे अंदर कई सरे परिवर्तन आएंगे.

देवा . . बाबा लेकिन ऐसा नहीं है मुझमे बहोत ताक़त है. दिन भर तो मए खेतो में काम करता हु .

फब . . मुस्कराते हुए . अगर तू ऐसा समझता है तो ठीक है इस बात की परीक्षा भी हो जाएगी. और उसकी शुरुआत अभी से होगी . लेकिन अगर मेरी बात सही निकली तो तू वही करेगा जो मए कहुगा.

देवा . . ठीक है बाबा.

फब . . अब ध्यान से सुन तेरी परीक्षा अभी से शुरू होगी और असल इम्तेहान कल होगा. तुझे इस बात का अंदाज़ा होगा की तुझमे क्या है और किस बात की कमी है. लेकिन तू घबराना मत. और ये ले अंगूठी

बाबा उसे एक अंगूठी देते है

देवा . . बाबा ये क्यों

फब . . जब तुझे लगे क तू हालत से मुकाबला नहीं कर प् रहा है या तुझे कुछ भी जानना हो तू मुझे यद् कर के इस अंगूठी को अपने माथे पे लगाना. अब मए चलता हु. लेकिन याद रखना तेरी परीक्षा शुरू हो चुकी है अभी से .

फिर फ़कीर बाबा मुस्कराते हुए गायब हो जाते है. और देवा एक झटके से उठ के बैठ जाता है. वो फिर पसीने से लथपथ था. उसकी नजर अपने हाथो पे जाती है तो उसकी ऊँगली में बाबा की दी हुई वही अंगूठी मौजूद थी . जिसे देख देवा को अब फब पे यकीन बाद जाता है. हलाकि कमरे में पंखा चल रहा था. पर उसका गाला सूखा हुआ था. उसे बहोत तेज प्यास लगी हुई थी. वो तेज तेज साँसे ले रहा था तभी उसकी नजर घडी पे जाती है अभी उसे सोये हुए कोई 2 घंटे hi हुए थे. वो देखता है तो पानी का जग वही पे भरा हुआ रखा था वो पानी पीटा है और फिर पेशाब करने के लिए बहार निकलता है.

बहार घाना अँधेरा था. पेशाब करने के बाद थोड़ी देर देवा. ठंडी हवा में सांस लेता है और अपने कमरे की तरफ जाता है तो देखता है माँ के कमरे की खिड़की से आवाज़े आरही थी शायद उसकी दोनों ममिया भी वही थी उसकी आवाज़े बहोत धीमी थी देवा वह चला जाता है थोड़ी देर को टाइम पास करने पर जैसे hi वो खिड़की तक पहुँचता है उसके कानो में बड़ी ममी की आवाज़ पड़ती है और वो अपना नाम सुन के रुक जाता है.

सुनीता. . दीदी अपना देवा तो काफी बड़ा हो गया है.

सावित्री . तुझे कैसे पता

सुनीता. अरे जब शाम को उसे गले लगाया था तभी पता चल गया था उसका तो पूरा खड़ा हो गया था और मेरी नाभि पे चुभ रहा था . और दोनों ममिया हसने लगती है.

सावित्री . . पागल हो तुम दोनों कोई अपने बच्चे के बारे में ऐसा सोचता है क्या

भर्ती . . सच दीदी उसको अपने सीने से लगा के तो मेरी भी गीली हो गयी थी

सावित्री . . तो यहाँ क्यों पड़ी है जा न अपने पति के पास और ठंडी कर ले अपनी.

भर्ती . . कहा दीदी उन से तो अभी कुछ होता hi नहीं बस छूट में डालते hi निकल जाता है आपके भाई का

सुनीता. . ये छोटी सच कह रही है दीदी. पर आप सुनाओ जीजा जी शांत हे या अब तक आपकी छूट फाड़ते रहते है.

देवा के कानो से धुंवा निकल रहा था लेडीज की बाटे सुन के पर वो खड़ा सुनता रहा. उसके लुंड में भी हरकत शुरू हो गयी थी. उसे अब अपनी माँ के जवाब का इंतजार था.

सावित्री . . कहा शांत हुए है वो. वो तो जब तक रोज मुझे पूरा निचोड़ न ले उन्हें नींद hi नहीं आती . ये तो बच्चो का थोड़ा दर है उन्हें वार्ना पहले तो दिन में भी मौका निकल कर पटक देते थे बिस्तर में और रगड़ डालते थे.

सुनीता . . हाय दीदी आप तो खूब मजे लेती हो. और यहाँ हमारे पति यानि आपके भाई तो किसी काम के hi नहीं है.

भर्ती . . तो फिर दीदी आज की रत तो जीजा जी से कटेगी hi नहीं आज तो आप यहाँ है. कही वो किसी और पे न चढ़ जाये.

सावित्री . . नहीं ऐसा नहीं है मए उन्हें कई सालो से जानती हु. उन्हें जिस्म की भूख भले hi बहोत ज्यादा है पर मेरे अलावा आज तक किसी को छुआ भी नहीं .

सुनीत . . फिर आज कैसे रुक गयी आप यहाँ. जीजा जी की फ़िक्र नहीं आपको?

सावित्री . . मुस्करा के हां तो मए इसलिए तो रात को रुकना नहीं चाहती थी पर देवा को खेत क काम भी देखने थे और हमें शहर भी जाना था इसलिए देर हो गई यहाँ आने में वार्ना तो हम यहाँ आते और यहाँ से निकल के शाम तक घर भी पहुंच जाते.

भर्ती . . तो आज रत क्या हाल होगा अकेले उनका

सावित्री . . होगा क्या काट लगे आज की रात . वैसे कल उन्होंने 3 गुना कसार निकली है.

सुनीता . . मतलब?

सावित्री . . अरे मूरख रोज तो रत को एक बार hi करते है वो मेरे साथ पर कल तो उन्होंने पूरी रत भर मुझे रगड़ा है कमरे में जाते hi जो मुझे नंगी कर के प्यार करना चालू किया तो मत पूछ ऐसा कोई तरीका नहीं जिसमे उन्होंने मुझे नहीं छोड़ा हो. रत को 10 बजे मए कमरे में गयी थी और सुबह 4 बजे जा के मुझे सोने दिया . वो भी इसलिए क्यों की फिर सुबह 6 बजे उठना पड़ता है. और इन 6 घंटो में उन्होंने तीन बार मुझे अलग अलग तरीको से छोड़ा और अपना पानी निकला और दो बार मुझे अपना पानी पिलाया.

इतना सुनते hi सुनीता और भर्ती की छूट तेजी से बहने लगती है. और साड़ी के ऊपर से hi अपनी अपनी छूट को रगड़ने लगती है और यहाँ छूट तो सावित्री की भी गीली हो गयी थी कल रात की चुदाई को यद् कर के .

देवा का लुंड भी खड़ा हो गया था अपनी माँ की बाते सुन कर

सुनीता . . हाय दीदी कितनी खुशकिस्मत हो तुम . इस उम्र में भी जीजा आपको रत भर छोड़ते है जैसे कोई अपनी नयी नवेली दुल्हन को . और यहाँ हम दोनों तो सुलगती रह जाती है.

भर्ती . . है दीदी और जैसा बाप वैसा बीटा देवा भी ऐसा hi होगा बिस्तर पे.

सावित्री . . क्या पता ये तो वक़्त hi बताएगा . अब रघु को hi ले लो कई बार बहु से बात की है मैने. पर वो कहती है की रघु को पीने से hi फुर्सत नहीं तो वो छोड़ भी नहीं पता और उसका वीर्य भी कमजोर है जिससे बच्चा नहीं हो सकता. ये बात डॉक्टर ने साफ साफ कह दी है. अब देवा कैसा निकलेगा ये तो ऊपर वाला जाने.

सुनीता. . दीदी चिंता मत करो अपना देवा गबरू जवान है. उस रघु के जैसा नशेड़ी नहीं देखना देवा सब की झोली में खुशिया hi भरेगा.

देवा अब वह नहीं रुकता और अपने कमरे में निकल जाता है तभी देवा का ध्यान अपने लुंड पे जाता है उसका लुंड उस समय बाटे सुन के तो खड़ा हुआ था लेकिन अभी इतनी जल्दी बैठ चूका था और उसका साइज भी कोई खास नहीं था. सोया हुआ 4 “ का और खड़ा होने पर भी मुश्किल से 6” का होता था . ज्यादा मोटा भी नहीं था उसका लुंड.

देवा . . हे भगवन क्या मए किसी काम का नहीं . पिताजी तो माँ को सोने भी नहीं देते और यहाँ मेरा लुंड है जो शायद उन के मुकाबले कही भी नहीं है.

तभी देवा को फ़कीर बाबा याद आ जाते है. “ देवा अभी तुझमे कई कमिया है” . सही कहा था फ़कीर बाबा ने मुझमे कमिया है . मए तो बेकार में खुश था की मए ताक़तवर हु. और बाबा ने कहा था मेरी परीक्षा अभी शुरू होगी . जिसमे मुझे अपना अस्तित्व पता चलेगा. एक बात तो पता चल गयी. अब आगे देखते है.

यही सोचते हुए देवा सो जाता है. और अगली सुबह . .

उठ देवा कितना सोयेगा मेरे बेटे घर नहीं जाना क्या. अपनी माँ की ऐसी hi आवाज़ों से देवा की नींद टूटी है और वो देखता की माँ वही देवा की तरफ पीठ कर के कड़ी है और अपना बैग भी बना रही है साथ hi देवा को आवाज़े दे के उठा भी रही है,

देवा.. अरे माँ पलटो तो सही मए कब का उठ गया अब तो आवाज़े लगाना बंद कर.

सावित्री . . मुस्करा के देवा को देखती है. उठ गया बीटा चल जल्दी से तैयार हो जा फिर निकलते है घर की और

उसके बाद देवा भी जल्दी से तैयार हो के नाश्ता कर के चलने को तैयार हो जाता है थोड़ी hi देर में उसकी माँ और बहन भी आ जाती है फिर सबसे विदा ले के तीनो चल देते है अपने घर की तरफ. आज भी देवा को लगा की उसकी ममिया उसे बड़ी हसरत से देख रही थी जाते हुए. पर अभी वो उन पे ध्यान नहीं देता. और रत को बाबा से की हुई बातो hi सोचते हुए आगे बाद रहा था. की तभी देवा का ट्रेक्टर खाद खडाते हुए बंद हो जाता है.

अब साला ये क्या हुआ चलिए पता चल जायेगा नेक्स्ट अपडेट में . . . . .
 
अपडेट 4

तभी देवा का ट्रेक्टर खाद खडाते हुए बंद हो जाता है.

सावित्री . . क्या हुआ बीटा.

देवा . माँ शायद कुछ खराबी आ गयी है रुको देखता हु.

पायल . . भैया बहोत धुप लग रही है.

देवा . . तुम लोग वह छाव में पेड़ के नीचे बैठ जाओ अभी चलते है.

तभी वह तेजी से एक कार गुजरती है. और आगे जाकर जोर से ब्रेक लगती है कार में. देवा का ध्यान वह जाता है तो देखता है कार वापस आ रही थी. धीरे धीरे कार का शीशा नीचे होता है और अंदर बैठे शख्स को देख के देवा थोड़ा घबरा जाता है क्यों की कार में था ठाकुर का छोटा बीटा बाला ठाकुर. एक हत्ता कट्टा इंसान जिसकी बड़े बड़े बाल थे चेहरे पे पैसे का घमंड आँखों में, सिर्फ हवस, वहशीपन और क्रूरता. वो किसी को भी अपने सामने कुछ नहीं समहता था. जैसे हर मर्द उस का गुलाम है और हर औरत उसकी रंडी. उसी बाला ठाकुर की गन्दी नजर देवा की माँ और बहन को घूर रही थी. सावित्री देवी इस बात से बेखबर थी की कोई गन्दी और हवस भरी नजर से उसे घूर रहा है उस समय वो अपने आँचल से अपना पसीना पांच रही थी उसका आँचल ऊपर होने की वजह से उसकी भरी भरी चूचिया ब्लाउज में दिख रही थी जिन्हे बाला देख रहा था और अपने होठो पे जबान फिर रहा था दूसरी तरफ पायल की भी ठोस चूचिया ऊपर नीचे होती हुई दिख रही थी. बाला कार से बहार आ जाता है और वही खड़ा हो के उन्हें घूरता है.

बाला ठाकुर . . . ा सुनो तुम दोनों यहाँ आओ बाला पायल और सावित्री को बुलाता है.

देवा . . क्या हुआ ठाकुर साहिब देवा उसके करी बा जाता है

बट . . तू कौन है बे

देवा . मए देवा हु ठाकुर साहिब और ये मेरी माँ और बहन है.

बट . . दोनों hi बड़ी मस्त माल है रे .

इतना कह के बाला हंसने लगता है देवा का खून उबलने लगता है.

देवा . . ठाकुर तमीज से बात कर

बट . . तू मादरचोद हमें तमीज सिखाएगा.

इतना कह के वो देवा को झापड़ मर देता है देवा लड़खड़ा जाता है. और दूर जा के गिरता है

बट. . आज देख मए तेरे सामने यही तेरी माँ को छोड़ूगा और तेरी बहन तो कुवारी काली है न इसे तो अपनी हवेली पे ले जा के अपने बिस्तर पर इस की सील तोड़ूगा और फिट ये दोनों. . . . .

बस इतना सुनते hi देवा कूद पड़ता है ठाकुर के ऊपर लेकिन ठाकुर एक मजबूत बदन का मालिक था वो देवा को पकड़ के एक पंच उसके मुँह पे मरता है और उसे एक लात मर के दूर फेंक देता है.

तभी सावित्री दौड़ के आती है. और देवा को उठाते हुए .

सावित्री . . बाला ठाकुर ये सही नहीं कर रहे हो तुम चले जाओ यहाँ से वार्ना अंजाम अच्छा नहीं होगा.

बट - साली छिनाल तू हमें सीखने लगी. तेरी तो . . इतना कह के अभी बाला उनकी तरफ बड़ा hi था के उसे आस पास के खेतो से लोग आते हुए दीखते है .

बट . . अभी तो मए जा रहा हु लेकिन तुम लोगो को छोड़ूगा नहीं

देवा . . बाला तूने मेरी माँ और बहन पे नजर दाल के सही नहीं किया मए तुझे नहीं छोड़ूगा

बट....... अबे जा सेल तू दो कौड़ी का लोंदा मेरी झांट भी नहीं उखड सकता. बहोत जल्द मए तेरे hi घर आ कर तेरे घर की हर औरत को छोड़ूगा वो भी तेरी आँखों के सामने उखड सकता है तो उखड लेना.

लोग अब काफी नजदीक आ गए थे बाला अपनी कार में बैठ के निकल जाता है. थोड़ी देर बाद देवा भी अपना ट्रेक्टर ठीक कर के निकल पड़ता है. यहाँ एक तरफ जहा पायल दर के मरे अपनी माँ के सीने से चिपकी हुई काँप रही थी वही देवा को बहोत गुस्सा आ रहा था एक बाला के ऊपर दूसरा अपने ऊपर के वो कुछ कर नहीं पाया और बाला उसकी माँ और बहन को गालिया देता रहा . दूसरी तरफ सावित्री भी चिंता में थी की उसका बीटा उस बाला का मुक़ाबला नहीं कर पाया ये उसने तभी भांप लिया था जब बाला ने देवा को दूर फेंका था. सावित्री ने फैसला किया के वो अपने पति से कह कर देवा को पहलवानी के गुर सिखलाएगी.

तीनो घर पहुँच गए पर उन्होंने किसी को कुछ बताया नहीं . देवा तो थोड़ी देर बाद निकल गया खेतो की तरफ. और वह जा कर सोचने लगा की ये हुआ क्या आज उसके साथ . तभी उसकी नजर बाबा की दी हुई अंगूठी पे जाती है. वो तुरंत खेत में hi बने अपने कमरे में जाता है और अंगूठी को अपने माथे से लगा के बाबा को यद् करता है . और अपनी आँखे खोलता है . तो देखता है उसके सामने चारो तरफ धुआं फैला हुआ है और वो धुआं फ़कीर बाबा की आकृति में बदलने लगता है.

फब . . तूने मुझे यद् किया देवा?

देवा . . बाबा आज मेरे साथ जो हुआ आप जानते है ?

फब . . मुस्कराते हुए मुझसे कुछ भी छुपा नहीं है देवा. तू अपनी बात बोल.

देवा . . बाबा अगर आपको सब पता था तो आपने मुझे पहले क्यों नहीं बताया?

फब . . बताया तो था कल रत को . क तेरी परीक्षा शुरू हो चुकी है और असल परीक्षा कल होगी. अब तो मानते हो न के तुझमे कमिया है. तू एक आम इंसाने है देवा. जो की यु तो बिलकुल ठीक है लेकिन विपरीत परिस्थिति में तू खुद को संभल नहीं पायेगा. बस एक साधारण इंसाने की तरह तू हर काम अच्छे से कर सकता है उस हिसाब से तू ठीक है. लेकिन तू नहीं जनता क विशेष परिस्थिति से कैसे सामना करना चाहिए. कल से लेकर अब तक जो भी हुआ वो तेरी असलियत थी अब तो मेरी बात मानेगा न?

देवा . . है बाबा मए मंटा हु लेकिन मए क्या करू मुझे समझ में नहीं आ रहा है?

फब . . देवा तुझमे बहोत ताक़त शक्तियों का भंडार है. लेकिन वो तेरे अंदर सो रही है, और वक़्त के साथ कुछ नयी ताकते भी मिलेगी. किन्तु उन्हें पाने के लिए म्हणत तो तुझे hi करनी होगी. अपनी सोई शक्तियों को तुझे खुद जगाना होगा पहले.

देवा . .लेकिन कैसे बाबा

फ़कीर बाबा उसके सर पे हाथ रखता है. और उनके हाथ से एक नीली रौशनी निकल कर देवा की जिस्म में समां जाती है. थोड़ी देर के बाद बाबा अपना हाथ हटते है. और मुस्करा के देवा की तरफ देखते है. “ अब तू बहोत कुछ समझ जायेगा देवा क्यों की मैने तेरे अंदर अपनी कुछ शक्तिया दाल दी है. लेकिन यद् रखना के तुझे रोज योग साधना में बैठने है. और जो मंत्र मैने तेरे दिमाग में दाल दिया है उसी का अनुसरण करना है और जाप भी काम से काम रोज 2 घंटे तू साधना में बैठेगा तो अपनी सोइ हुई शक्तियों को जगा पायेगा. लेकिन याद रहे तुझे कोई न देख पाए ये साधना करते हुए . वार्ना तू सवालो के जाल में hi फंस जायेगा और अपने उद्देश्य से भटक जायेगा.

देवा . . बाबा मुझे अपने अंदर कुछ परिवर्तन महसूस हो रहा है और सर भी घूम रहा है.

फब . ये मेरी दी हुई शक्तियों के कारन है. इससे तेरी अंदर की कुछ शक्तिया जाग्रति हो रही है. लेकिन बाकि सोई हुई है. थोड़ी देर में तेरा जिस्म उन शक्तियों को संभल लेगा और तू ाचा भी महसूस करेगा.

इतना बोल कर फ़कीर बाबा चले जाते है और देवा को वही नींद आ जाती है. कोई एक घंटे बाद देवा उठता है और देखता है के सूरज डूब रहा है. वो जैसे hi उठ के खड़ा होता है और एक अंगड़ाई लेता है उसका कुरता फैट जाता है. देवा को हैरानी होती है. जैसे hi उसकी नजर अपने जिसमे पे जाती है उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती है. देवा का जिस्म किसी पहलवान की तरह हो चूका था. उसके कंधे , सीना हाथ पैर सब एक डैम मजबूत हो चुके थे. उसकी धोती भी उसे बहोत कासी हुई लग रही थी और जांघो के पास से फैट चुकी थी. क्यों की उसकी जंघे भी चौड़ी हो गयी thi.Deva बहार देखता है सब लोग जा चुके थे दूर दूर तक कोई भी नहीं था वो वापस अपने कमरे में आता है और वही रखे बॉक्स में से अपने दूसरे कपड़े निकलता है और पहने हुए कपडे जो जगह जगह से फैट चुके थे उतरता है जैसे hi देवा पूरा नंगा होता है उसकी आश्चर्य की सीमा नहीं रहती क्युकी उसकी नजर सीढ़ी गयी अपने लुंड पे जो अभी सोया हुआ था लेकिन सोया हुआ hi उसका लुंड किसी अजगर की तरह झूल रहा था करीब 9” लम्बा बड़ा और मोटा लोढ़ा उसकी जांघो के बीच झूल रहा था देवा को याद आता है की फ़कीर बाबा ने क्या किया था और वो सब समझ जाता है. वो जल्दी से दूसरे कपडे पहनता है हलाकि वो भी उसे कुछ छोटे लगते है पर अभी तो यही था उस के पास फिर वो घर की तरफ निकल पड़ता है

तभी उसे एक पेड़ के नीचे कोई जख्मी हालत में दिखती है, वो कोई लेडी थी लगभग 40+ होगी देवा दौड़ता हुआ उसके पास पंहुचा

देवा . . अरे आप कौन है और ये आपकी ऐसी हालत किसने कर दी आपका खून बाह रहा है होठो से, कपडे भी फाटे हुए है.

औरत . . बीटा मुझे छोड़ो मए ठीक हु, वह कुछ लोग मेरी बेटी को उठा के ले गए है उसे बचाओ.

देवा . . आप चिंता मत कीजिये, मए देखता हु.

देवा आगे दौड़ता हुआ जाता है तो उसे किसी की चीख सुनाई देती है. और देवा उसी तरफ दौड़ के जाता है. अभी वो गन्ने के खेतो से थोड़ा दूर hi था क एक लड़की वह से दौड़ती हुई निकलती है और आकर देवा की छाती से चिपक जाती है. वो बहोत दरी हुई थी, उसके होठो से खून भी निकल रहा था और उसका ब्लाउज भी कंधे से फटा हुआ था. वो देवा को देखती है तो देवा उसे इशारे से शांत रहने को कहता है.

इंट्रोडसिंग

देवा का प्यार पूनम

देवा तो उसकी ख़ूबसूरती देख कर उसे देखता hi रह जाता है गोरा रंग, गुलाबी होठ, पतली कमर, लम्बे बाल, बड़ी बड़ी कजरारी आँखे जो इस वक़्त रोने क बावजूद बहोत प्यारी लग रही थी.

देवा उसी में खोया हुआ था क तभी वो लड़की कहती है

लड़की . . सुनिए मुझे बचा लीजिये. ये लोग मेरे साथ जबरदस्ती कर रहे है. .

देवा खेतो की तरफ देखता है तो अंदर से तीन हट्टे काटते गुंडे टाइप दौड़ते हुए आते है.

ग1 . .अबे ा चल लोंड़िया को इधर भेज और निकल यहाँ से

देवा . . कौन हो तुम लोग इस गाँव के तो नहीं लगते

ग2 . . लगता है ये ऐसे नहीं मानेगा मए देखता हु

वो जैसे hi देवा क करीब आता है देवा उसे एक घुसा जमा के पेट में मरता है. वो काम से काम 5 फुट ऊपर हो कर 10 फुट दूर जा कर गिरता है. उसे खुद यकीन नहीं था के ये देवा ने खुद किया . बूत वो अभी ध्यान नहीं देता इस बात पर.

ग3 . . सेल तेरी इतनी हिम्मत तूने हमारे साथी पर हाथ उठाया जनता है हम कौन है.

देवा . . वही पुछा था कौन हो तुम लोग यहाँ क्या कर रहे हो . के तभी तेरा साथी मुझे मरने आ गया. चल तू hi बता

तभी दोनों गुंडे उस के पास आते है.

ग1 . . देख हमें ये लड़की चाहिए हम दोपहर से इसका पीछा कर रहे है बस में. बहोत इंतजार किया है हमने इसकी जवानी लूटने का. ये सोच कर के जहा ये उतरेगी वही इसे पकड़ के इस काली को फूल बनायेगे. साली अपनी माँ के साथ थी इसकी माँ को तो सुला डाला हमने तू निकल वार्ना तेरे को भी लुढ़का डालेंगे.

इतना कह कर उसने चाकू निकल लिया तो दूसरे ने भी चाकू निकला.

देवा ने एक नजर उस लड़की पे डाली और एक झटके में दोनों का हाथ पकड़ के किसी के कुछ भी समझने से पहले एक झटका मारा दोनों के हाथ कंधे से उखड गए. और दोनों घुटनो पे आ गए तो देवा ने एक एक लत दोनों के सर में मरी और दोनों hi धुल चाटने लगे . तभी खेत में से एक करीब 6 फुट का कला सैंड जैसा आदमी निकला जिसने सिर्फ लंगोट पहन रखा था और कुछ नहीं दोनों हाथो से अपने लुंड को दबा रखा था जैसे दर्द बर्दाश्त करने की कोशिश कर रहा हो. शायद लड़की का उद्घाटन यही करने वाला था.

देवा धीरे से लड़की के कण में . . अब ये कौन है.

लड़की ,.. . ये मेरी इज्जत लूटने hi वाला था के मए इसे लत मर के भाग निकली थी. बाकि तीनो तब थोड़ा दूर थे. इसकी चीख सुन के तीनो मेरे पीछे आये.

देवा . . है भाई अब तू बोल तेरे साथी तो बोलने की हालत में रह नहीं गए है.

बॉस . . ये मेरी छमिया है इसे मेरे हवाले करदे वार्ना यही गाड़ दुगा. इतना कहते हुए वो देवा के चेहरे के बिलकुल पास आ गया.

देवा. . सेल एक लड़की तो सम्भली नहीं तुझसे मुझे क्या गड़ेगा. तेरे लुंड पे लात मार के आ गयी ये.

बॉस . . तू मुझे जनता नहीं “ और उसने देवा का गाला पकड़ लिया और एक घुसा देवा को जड़ दिया मुँह पे. देवा को कोई खास असर नहीं हुआ उस घुसे का तब उसने देवा के पेट में लात मरी और खुद से दूर किया.

और लड़की का हाथ पकड़ के खींचते हुए ले जाने लगा. तभी देवा ने उछाल क एक लात मरी उसकी पीठ पे. वो लड़की का हाथ छोड़ के दूर जा गिरा. देवा भी उस के पास पंहुचा.

बोस तेरी माँ की च…. “ इससे ज्यादा वो नहीं का पाया क्यों की देवा ने उसे लात घुसो पे रख लिया .

देवा . . सेल एक तो लड़की की इज्जत पे हाथ डालता है और फिर मेरी माँ को गली देता है. यानि दो दो गलतिया. लड़की चाहिए तुझे.

देवा उसे मरे जा रहा था . बिना रुके. उसके मुँह से खून निकलने लगा था. तभी देवा ने उसका हाथ पकड़ के उलटी दिशा में घुमाया और उसके कंधे पे अपना घुटना दे मारा. वो भैंसे की तरह डकारता हुआ औंधे मुँह गिरा और बेहोश हो गया.

देवा ने बाकि के तीनो गुंडों को देखा और चिल्ला के बोलै आज के बाद इस गाँव में नजर आये तो पहले गांड मरुँगा फिर गाड़ दूंगा. निकलो अपने इस कचरे बॉस को ले के.

देवा ने लड़की को इशारा किया और वो जाने लगे आगे. थोड़ी hi दूर गए थे की तभी देवा फुर्ती से पलटा. उसे पता नहीं किस शक्ति ने इशारा किया के कुछ खतरा है उसके पीछे .

पीछे मुड़ते hi देवा ने लड़की को एक तरफ धक्का दिया और खुद भी कूद गया .

हुआ ये की वो बॉस बेहोश नहीं हुआ था बस नाटक किया था देवा के मुड़ते hi उसने पास पड़ी कुल्हाड़ी उठाई और देवा को मरने लगा था क देवा हैट गया.

देवा ने फुर्ती से वही कुल्हाड़ी उसके हाथो से चीन के उसकी जांघ पे मरी.

देवा . . मादरचोद पीठ पे वार करता है. तेरी बहन की छूट. सेल.

देवा इससे पहले की दूसरा वार करता. लड़की ने उसे रोक दिया.

देवा . . सुनो बे गंदुओ आखरी बार छोड़ रहा हु अभी के अभी निकलो वार्ना यही छोड़ डालूगा सबको.

तीनो गुंडे अपने जख्मी बॉस को सहारा दे के वह से लंगड़ाते हुए निकल गए.

देवा और लड़की दोनों उसकी माँ के पास पहुंचे. वो शायद रट हुए बेहोश हो गयी थी. देवा ने पास के कुए से पानी ला कर उसे होश में लाया .

अपनी बेटी को सही सलामत देख के वो औरत रट हुए बेटी से लिपट गयी थोड़ी देर के बाद जब दोनों अलग हुए.

औरत . . बीटा मए तुम्हारी बहोत अहसानमंद हु जो तूने मेरी बेटी को बचा लिया उन दरिंदो से.

देवा . कैसी बात करती हो काकी .आप लोग तो यहाँ हमारे मेहमान है आखिर आप हमारे गाँव में है. तो अहसान कहे का. वैसे आप लोग है कौन और यहाँ किस के पास जा रहे है?

औरत. बीटा मेरा नाम देवकी है और ये है मेरी भांजी पूनम मए इसकी मौसी हु अगर आज इसे कुछ हो जाता तो मए अपनी बहन पद्मा को मुँह नहीं दिखा पति. ये मेरी नहीं मेरी बहन की बेटी है. इसे यहाँ छोड़ने आयी हु मए. ये हमारे गाँव के पास वाले शहर में पड़ती थी इसलिए काफी समय से मेरे पास रही है आज इसे छोड़ने आयी थी इसकी माँ के पास.

पता नहीं क्यों लेकिन देवा ये सोच कर खुश हो जाता है के अब पूनम उसी के गाँव में रहेगी. वो पूनम को देख के मुस्करा देता है. पूनम भी शायद यही सोच रही थी तो वो भी मुस्करा देती है.

फिर वो लोग देवा के साथ साथ चलने लगती है.

काकी चलिए मए आपको ले चलता हु पूनम के घर देवा ने ये बात उस लड़की को देखते हुए कही और मुस्करा दिया लड़की भी शर्मा गयी और तिरछी नजर से देवा को देखने लगी.

औरत. क्या तुम जानते हो पद्मा को

देवा . . अरे काकी वो तो हमारे पास hi रहती है. और मुझे अपने घर का hi सदस्य मानती है. और वो तो हमारी अपनी है. इतना कह कर देवा ने पूनम को देखा पूनम भी देवा को हैरानी से देखि और उसकी मुस्कान गहरी हो गयी.

तभी पूनम का घर आ गया.

देवा . . दरवाजा पीटते हुए. काकी अरे ो काकी

अंदर से आवाज आयी का हुआ रे देवा अभी काकी की यद् कैसे आ गयी ठहर जा आती हु.

देवा . . अरे जल्दी आ काकी देख किसे लाया हु.

पद्मा . . आती हु बाबा इतना क्या उतावला होता है तू भी.

तभी पद्मा बहार आयी और सबको देख के खिल उठी और दौड़ के अपनी बेटी और बहन को गले से लगा लिया. और सबको अंदर ले गयी .

पद्मा . . देवा तू कैसे ले आया इनको .

देवा . . अरे कुछ नहीं काकी बस ये रस्ते में मिल गए तो साथ ले आया.

देवकी . . नहीं देवा इसे पूरी बात बता.

पद्मा . . थोड़ा परेशां होते हुए. पूरी बात मतलब. कुछ हुआ है क्या?

देवा . . अरे नहीं काकी ये छोटी काकी तो बस यु hi.

तभी देवकी बोल पड़ी

देवकी . . पद्मा ये देवा कुछ नहीं बता पायेगा सुन मए बताती हु . आज अगर देवा न होता तो तुझे न मए जिन्दा मिलती न hi तेरी बेटी. क्यों की आज रस्ते में . . . .

और देवकी साडी घटना पद्मा को बताती है. पूरी बात सुन कर पद्मा की आँखे भर आती है. वो उठ के देवा के आगे हाथ जोड़ के कड़ी हो जाती . और उसका धन्यवाद् करती है.

देवा . . अरे काकी क्या करती हो . ये तो मेरा फर्ज था. वो देवा से लिपट के फुट फुट के रोने लगती है.

देवा के तो होश hi उड़ जाते है. क्युकी पद्मा काकी का शरीर एक डैम कैसा हुआ था उसके पति को मरे हुए काफी समय हो गया था लेकिन खेतो में म्हणत कर कर के पद्मा का शरीर ठोस बना हुआ था. उसकी कड़ी चूचिया जब देवा के सीने से चिपकती है तो देवा का लुंड खड़ा होने लगता है. देवा थोड़ी देर के लिए सब भूल जाता है. और वो भी पद्मा काकी को बहो में भर लेता है . और उसकी पीठ सहला के अपनी hi दुनिया में खो जाता है . तभी पद्मा काकी को उसकी बुर पे कुछ बहोत मोटा और मजबूत सा चुभता हुआ महसूस होता है तो उसे होश आता है. के ये तो देवा का लुंड है और वही खड़ा हो के चुभ रहा है तो वो जल्दी से देवा से दूर होती है. और आँखे फाड् के देखती है देवा का तम्बू बना होता है.

देवा का ये तम्बू देवकी भी देख लेती है और उसके होठो पे शरारती मुस्कान आ जाती है. पूनम तो कब की अंदर जा चुकी थी.

देवकी दोनों को धरती पे लेन के लिए कहती है

देवकी .. क्या हुआ देवा कुछ चाहिए क्या?

देवा उसकी तरफ देखता है तो समझ जाता है के देवकी क्या कहना चाहती है. देवा पद्मा की तरफ देखते हुए देवकी से.

देवा . . नहीं काकी अभी नहीं

देवकी . . अगर कुछ चाहिए तो मुझे बता देना मए भी पद्मा की बहन हु कोई परै नहीं. तुझे मन तो कर नहीं पाउगी अभी तो मए यही हु कुछ दिन . और अगर चाहे तो पद्मा से भी मांग सकते हो वो भी मन नहीं करेगी .

देवा सकपका जाता है.

देवा . . अच्छा काकी मए चलता हु काफी देर हो गयी है.

इतना कह कर देवा निकल जाता है जल्दी से उसे दोनों की हंसी सुनाई देती है.

देवा को नहीं पता था लेकिन कोई था जो उसे वह से निकलते हुए देख रहा था. बड़ी हसरत भरी नजरो से . और वो थी पूनम. उसके dilo-dimag पे अब देवा का राज हो चूका था. उसकी इज्जत बचा के देवा ने उसे जीत लिया था. ये बात शायद hi कभी वो देवा से कह पाए. लेकिन ये भी सच था के पूनम और देवा के बिना एक दूजे से कुछ कहे उनका प्यार शुरू हो गया था. क्युकी यहाँ बेचैनी तो देवा के दिल में भी थी, जिस तरह पूनम का दिल देवा को यद् कर रहा था उसी तरह देवा भी पूनम को यद् कर रहा था. फिर देवा घर पहुँचता है और रत का खाना खा के जब देवा अपने बिस्तर पे आ के लेता तो वही सब यद् करने लगा. पूनम का देवा को तिरछी नजर से देखना, उसका शर्माना, हलके से मुस्कराना. देवा भी ये सब यद् कर रहा था और यही सोच रहा था के कब सुबह हो और. वो पूनम को किसी बहाने से एक बार देख ले. देवा की नींद तो पूनम ने चुरा hi ली थी. जब उससे रहा नहीं गया तो सिर्फ अपने मन को तसल्ली देने के लिए. वो अपने घर की छत पे चला गया. के शायद पूनम नजर आ जाये. जो की रत के इस वक़्त नामुमकिन hi था. वो चाट पे खड़ा हो के बहोत देर तक पूनम के घर की तरफफ देखता रहा लेकिन वह तो पूरा अँधेरा था सब सो रहे थे.

आखिर थक हर कर जब देवा पलट के जाने लगा तो तभी
 
अपडेट -5

आखिर थक हर कर जब देवा पलट के जाने लगा तो तभी उसकी नजर अपने hi घर की खिड़की पे गयी जो के उसके पिताजी का कमरा था . वह देख के देवा का हलक सूखने लगा क्यों की

वह देवा के पिता जी और सुकि माँ दोनों hi नंगे एक दूजे से लिपटे खड़े थे. Deenanath(DN), सावित्री देवी (सड़). की एक चुकी को चूस रहा था और एक चुकी को बड़े जोर जोर से दबा रहा था. सावित्री के चेहरे को देख के लग रहा था की उसे जितना दर्द हो रहा है उतना hi मजा भी आ रहा है इसलिए वो दन का लुंड भी जोर जोर से हिअ रही थी. तभी दन ने सड़ को नीचे झुकाया और अपना बड़ा सा लुंड सड़ के मुँह में दाल दिया जिसे वो मुट्ठ मरते हुए चूसने लगी. और दूसरे हाथ से दन के अंडो को सहलें लगी

ये सब देख के देवा की नसों में उबाल आने लगा और उसका लुंड भी खड़ा हो के विकराल रूप में आ गया जो उसकी धोती में बड़ा सा तम्बू बना दिया देवा का हाथ खुद बा खुद अपने लुंड को सहलाने लगा. इधर थोड़ी देर के बाद दन ने सड़ को पलटाया और उसकी छूट पे अपना लुंड सेट करके उसकी कमर पकड़ी और एक जोर का धक्का लगा दिया जिस से सड़ का मुँह पूरा खुल गया देवा को उनकी आवाज़े तो सुनाई नहीं दे रही थी लेकिन शायद सड़ ने बहोत जोर की सिसकारी भरी होगी क्यों की उसने तभी अपने मुँह पे हाथ भी रख लिया . इधर दन सावित्री की चूचिया दबाते हुए जोर जोर से धक्के मर के छोड़ने लगा. फिर उसने सावित्री की एक तंग को हवा में उठा दिया और पीछे से खड़े खड़े hi उसे छोड़ने लगा .

देवा अपने माँ बाप की ऐसी खतरनाक चुदाई देख के जहा चकित था वही उसे मजा भी आ रा था. फिर दन ने सावित्री को बस्तर पे मिचनरी पोज़ में लिटाया और उसके ऊपर लेट के बहोत तेज तेज और गहरे धक्के मरने लगा इस बीच पता नहीं सावित्री कितनी बार झड़ी होगी क्यों की देवा ने उसे अब तक तीन बार कमान की तरह अकड़ते तो देखा था इधर देवा से भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था ऐसी धुआंधार चुदाई उसने कभी नहीं देखि थी उसने भी अपना लुंड निकला और अपने लुंड को सहलाने लगा. देवा का लुंड अब खूंखार रूप ले चूका था उसका मोटा सूपड़ा बिलकुल लाल हो गया था और लुंड तो हाथ की मुट्ठी में hi नहीं आ रहा था वह. दन भी सावित्री को पटक पटक के छोड़ रहा था उसकी दोनों चूचिया दबा के बस थपाथप पेले जा रहा था अपना तगड़ा लुंड . दन और सावित्री पूरे पसीने पसीने हो चुके थे कर्रेब आधे घंटे तक वैसे hi छोड़ने के बाद दन ने पूरा लुंड निकल के जड़ तक सावित्री की बुर में घुसा दिया और सावित्री से पूरी तरह चिपक गया और अपना गरम पानी सावित्री की बुर में अंदर तक छोड़ने लगा. सावित्री भी इस गरम पानी की धार से शायद खुद को रोक नहीं पायी और पूरी कमर उठा दी और दन की छाती से चिपक गयी दोनों एक दूसरे के गले मिले हुए थे नंगे , बिस्तर पे और अपनी सांसे ठीक कर रहे थे. इधर देवा भी अब आंखे बंद किये हुए जोर जोर से लुंड हिला रहा था पर उसका पानी निकल hi नहीं रहा था.

तभी देवा की आंखे खुली और जो उसने देखा उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी क्यों की उसे अहसास हुआ की किसी नाजुक हाथ ने उसका मोटा मुसल पकड़ लिया है और अब उसके होठ देवा के मोठे सुपडे को चूस रहे थे. देवा ने एक झटके से खुद को छुड़ाया तो देखा की

उसकी प्यारी भाभी दिया सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में उसके पैरो में बैठी थी घुटनो के बल और दिया ने फिर देवा का लुंड पकड़ लिया और उसे चूसने लगी देवा भी अभी पानी निकलने को बेचैन था उसने भी कोई बात नहीं की और अपनी भाभी का सर पकड़ के अपना लुंड उनके मुँह में डालने लगा. जो की बड़ी मुश्किल से सिर्फ सूपड़ा hi ले प् रही थी दिया ने भी अपने पेटीकोट के अंदर हाथ दाल दिया और अपनी छूट को मसलने लगी. करीब दस मिनट तक दिया के चूसने से देवा के अंडो में उबाल आने लगा और देवा ने भलभला के पानी की 1,2,3,4,5,6,7,8, पता नहीं कितनी मोती मोती पिचकारियां दिया के मुँह में छोड़ी.

दिया का पूरा मुँह देवा के पानी से भर गया . काफी तो उसके गले के नीचे उतर गया काफी सारा उसके ब्लाउज से होते हुए चूचियों को और फिर बहते हुए उसके पेट को भिगोने लगा तब देवा ने दिया का सर छोड़ दिया. दिया की छूट तो कब की झाड़ चुकी थी अब दिया दूर बैठी अपनी सांसे ठीक कर रही थी. थोड़ी देर बाद

देवा – भाभी ये क्या किया आपने ये गलत है.

दिया मुस्कराते हुए – क्या देवर जी माँ बाबू जी की चुदाई देखना सही है जो आप देख रहे थे और अपना ये मुसल हिला रहे थे?, क्या तुम्हरे भाई का यु नशे में धुत्त हो के रोज रत को गिरते पड़ते रहना और कमरे में आते hi बेहोश हो के बिस्तर पे गिर जाना सही है? अगर मए किसी और से चुद जाऊ तो क्या वो सही है? हुम्म्ह छोड़िये देवर जी भाषण मत दीजिये मेरी परेशानी कोई नहीं समझता .

देवा अपनी भाभी के मुँह से डायरेक्ट बाबू जी की चुदाई की बात सुन के हैरान था.

देवा – ऐसी बात नहीं भाभी लेकिन मैने आपको कभी इस नजर से नहीं देखा और आज अचानक आपसे ऐसा रिश्ता मए कुछ समझ नहीं पा रहा हु .

दिया – मए आपकी मन की इस्थिति समझ रही हु देवर जी लेकिन मुझे संभल लो इससे पहले की मेरा खुद से नियंत्रण ख़तम हो जाये मुझे तुम hi थम लो. मए किसी और के पास तो नहीं जा रही न . मए इस घर की बहु हु मेरी कोख में इस घर का बीज hi होना चाहिए. मए हाथ जोड़ती हु. मुझे उस दोराहे पे खड़ा मत करो मुझे बहकने मत दो.

और दिया की आँखों में ासु आ गए.

देवा – भाभी मेरा साथ चाहिए तो मेरी एक शर्त है.

दिया सवालिया नजरो से देखती है देवा को

देवा – मेरा साथ चाहिए तो आपको हमेशा के लिए इन आसुओ का साथ छोड़ना होगा . इतना कह कर देवा मुसूसकरा देता है

दिया दौड़ के देवा के गले लग जाती, और उसके होठ चूसने लगती है.

देवा. – पर भाभी मुझे इस खेल का कुछ पता नाहीआज पहली बार तो किसी की चुदाई देखि वो भी अपनी माँ और बाबूजी की.

दिया – हैरान होते हुए. क्या देवर जी धोती में अजगर लिए घूमते हो और कहते हो कुछ पता नहीं. वैसे तुम्हारा ये लुंड सच में बहोत बड़ा है मेरे तो मुँह में hi नहीं जार रहा था इतना बड़ा और इतना मोटा. इतना तो बाबू जी का भी नहीं है.

देवा – भाभी वो सब मए नहीं बता सकता न आप समझ सकती हो बस जो सच है वो मैने बताया आपको. अब अगर ये मुसल चाहिए तो आपको hi म्हणत करनी होगी . वैसे बाबूजी का भी लिया है क्या आपने

दिया – नहीं देवर जी वो तो मैने उन्हें माँ जी के साथ करते हुए कई बार देखा है बहोत बार तो दिन में भी देखा है. इसलिए जानती हु की उनका कैसा है. पर तुम्हारा तो उनसे काफी अलग है और उनसे भी बहोत अच्छा. मजा आएगा.

तो देवर जी आज से मए आपकी टीचर हु इस खेल को पूरा सीखा दूगी. कल रत को आपकी पहली क्लास लगेगी. कल घर पे भी कोई नहीं होगा. जी भर के खेलूंगी आप के इस मुसल के साथ और आपको भी मास्टर बना दूगी चुदाई का.

फिर देवा और दिया दोनों नीचे आने लगते है और दोनों की नजर एक बार फिर माँ बाबू जी के कमरे की तरफ जाती है तो दोनों मुस्कराने लगते है एक दूसरे को देख कर क्यों की माँ बाबूजी एक बार फिर चुदाई में लग चुके थे इस बार माँ बाबू जी के लुंड पे बैठ के कूद रही थी और उनकी बड़ी बड़ी चूचिया हवा में उच्छल रही थी. और बाबू जी भी नीचे से कमर उठा के धक्के मर रहे थे.

दिया – चलो नीचे वर्ण हम दोनों भी आज अभी यही शुरू हो जायेगे.

फिर दिया और देवा नीचे आ कर अपने अपने कमरे में सोने चले जाते है.

करीब 3 बजे देवा की नींद खुलती है तो वो उठ कर अपने खेत चला जाता है . पूरे रस्ते सुनसान पड़े थे . वो सीधा अपने खेत वाले कमरे में पहुँचता है और लग जाता है अपनी योग साधना में. पूरे तीन घंटे योग साधना में बैठने के बाद देवा उठता है उसे काफी फरक महसूस हो रहा था अपने शरीर में . वो वही से अपने नित्य कर्म से निपट के सीधा घर आता है. तो देखता है सामने आँगन में माँ रगड़ रगड़ के नाहा रही थी लेकिन उसकी माँ के लिए ये कोई नहयी बात नहीं थी इसलिए वो कोई खास ध्यान नहीं देती देवा पर.

सावित्री – अरे देवा कहा गया था सुबह सुबह.

देवा – वो माँ मए तो यु hi सुबह की ठंडी हवा खाने निकल गया था. देवा बात तो कर रहा था सावित्री से लेकिन उसका ध्यान अपनी माँ की मोती मोती चूचियों पे था जो की पेटीकोट गीला होने की वजह से साफ साफ नजर आ रही थी. इन्हे उसने रात में नंगा देखा था दबते हुए अभी भी वो कुछ लाल लग रही थी और उन पे बाबू जी दांतो के निशान भी नजर आ रहे थे जो बता रहे थे की इन पे रात को बहोत म्हणत हुई है.

पर देवा को इस तरह घूरते हुए उसकी भाभी दिया देख लेती है. तो वो देवा को आवाज़ लगा देती है.

दिया – देवर जी जरा ये चीनी का डब्बा उतर दीजिये न,

देवा तुरंत रसोई घर में जाता है तो दिया – क्या देवर जी सुबह सुबह ठरक जग गयी क्या ?

देवा – क्या मतलब

दिया- अच्छा जी क्या मतलब? अरे देवर जी मैने सब देखा आप वह क्या कर रहे थे

देवा हकलाते हुए – अरे भाभी क्या कह रही हो मए तो कुछ नहीं कर रहा था

दिया- अच्छा तो ये आपका तम्बू क्यों बना हुआ है धोती में

मुझे सब पता है आप माजी की चूचिया देख रहे थे न? और साथ hi अपना ये अजगर भी सहला रहे थे. ये तो मैने देख लिया कही बाबू जी या पायल देख लेते या माँ जी की नजर पद जाती तो ? जरा ध्यान से देवर जी इतना उतावलापन अच्छा नहीं.

देवा मुस्कराते हुए – तो आप hi दिखा दो न यहाँ तो कोई भी नहीं

दिया – ाचा अभी रत में तो बड़ा नाटक कर रहे थे अब क्या हुआ. अब सुबह होते hi आपको मेरी चूचिया देखनी है.

देवा- अरे नहीं भाभी बस वो मन कर रहा है देखना के

दिया- अरे देवर जी थोड़ा सबर कर लो आज माँ , बाबू जी और पायल तीनो बहार जार रहे है. किसी रिश्तेदार के यहाँ. अब वो कल hi आएंगे . मैने कहा था न कल रत को. आज की रात हमारी होगी. पर दिन में कुछ नहीं

देवा – ठीक है भाभी जैसा तुम कहो .

तभी सावित्री देवी भी नाहा के आ जाती है तो देवा रसोई घर से निकल के अपने कमरे में आ जाता है और फिर नाहा धो के निकल पड़ता है खेतो की तरफ. तभी उसे रस्ते में ठाकुर का आदमी मिलता है.

ठाकुर का आदमी - ा सुनो तुम्हे अभी ठाकुर साब ने हवेली बुलाया है. चलो मेरे साथ

देवा - क्या काम पद गया ठाकुर को मुझसे

आदमी – वो सब नहीं जनता मए. तुम चलो

देवा- मए कोई नौकर नहीं हु. न तेरे ठाकुर का न तेरा. जा बोल दे ठाकुर को देवा ने बोलै है दिन में आउगा और मिल लगा उससे

आदमी – तू जनता है किस के लिए बात कर रहा है.

देवा- अबे भाड़े के टट्टू तुझे जितना बोलै गया तूने कर दिया , अब जो मैने कहा है जा के बोल ठाकुर को

आदमी – इसका अंजाम सही नहीं होगा देवा

देवा – तू ऐसे hi जायेगा या मार खा के जायेगा

वो आदमी देवा को घूरता हुआ चला जाता है.

देवा भी आगे बाद जाता है. और पूनम के घर के सामने से निकलता है क तभी उसे पूनम नजर आ जाती है . पूनम ने भी देवा को देख लिया था और उस की भी नजर देवा पे ठहर जाती है.

देवा उसे देख के हाथ हिला देता है. जिसे देख क पूनम भी हाथ दिखती है और मुस्क्रत देती है. देवा का दिल खुश हो जाता है. पूनम इशारे में पूछती है कहा जा रहे हो देवा भी इशारे में बोलता है खेतो में.

देवा थोड़ा आगे बाद के पूनम के पास जाता है. तो वो भी अपने दरवाजे पे आ जाती है .

देवा – काकी कहा है ?

पूनम मुस्कराते हुए - अंदर है बुलाऊ क्या ?

देवा – नहीं बस तुम्हे देखना था तो आ गया

पूनम- मुझे क्यों ?अभी कल hi तो मिले है

देवा – है पूनम लेकिन पता नहीं क्यों पर रत भर तुम्हे याद करता रहा नींद hi नहीं आ रही थी. तुम्हे नींद आ गयी?

पूनम - है मुझे तो बहोत अच्छी नींद आयी (झूठ)

देवा का चेहरा उतर जाता जिसे देख के पूनम को हंसी आ जाती है

पूनम – क्या हुआ आपको ये मुँह क्यों उतर गया ? क्या मुझे नहीं सोना था रात को ?

देवा – नहीं ऐसी बात नहीं अच्छा मए चलता हु मुझे खेत जाना है देर हो रही है ,.

पूनम – ठीक है जाओ

देवा जाने लगता है तो पीछे से पूनम – सुनिए ?

देवा बिना मुड़े – क्या हुआ ?

पूनम कितने बजे तक लौटेंगे?

देवा – क्यों ? आपको क्या मतलब ?

पूनम – ऐसे hi पूछ रही थी .

देवा - शाम को लौटूंगा 6 बजे.

पूनम – ठीक है. लेकिन कुछ बाते पूछी नहीं जाती

देवा अब पूनम की तरफ देख कर - मए समझा नहीं

पूनम - आपने मुझसे सोने की बात पूछी न?

देवा – है

पूनम - मेरी आँखों की लाली क्या कह रही है आप को इतना भी समझ में नहीं आया क्या जो मुँह फुला के जाने लगे थे

तब देवा ध्यान से देख कर ख़्हुशः हो जाता है और दौड़ के पूनम के पास आ जाता है.

देवा – अरे है तुम्हारी आँखे तो लाल है ऐसा क्यों ?

पूनम बुद्धू रत भर जागने के बाद आंखे लाल नहीं होगी क्या ?

और इतना कह कर वो शर्मा कर अंदर भाग जाती है.

देवा पहले तो सोच में पद जाता है लेकिन जब उसकी समझ में बात आती है क पूनम भी रत भर जगी रही उसकी याद में.

ये समझ में आते hi देवा का दिल ख़ुशी से उछलने लगता है. वो पूनम के पास जाना चाहता था लेकिन अब मुमकिन नहीं था क्यों क अंदर जाता तो काकी को जवाब देना पड़ता जो वो नहीं चाहता था .

देवा अपने खेत पहुंच जाता है और आज पहले से कही ज्यादा फुर्ती से वो काम निपटता है वो भी बिना थके . उसे देख के बाकि मजदुर हैरान हो रहे थे लेकिन देवा का ध्यान तो पूनम की तरफ hi था . दिन में वो काम कर hi रहा था के तभी उस तरफ उसे देवकी आती हुई नजर आती है.

देवकी पास आकर देवा को देखती है. तो देखती रह जाती है . इस समय देवा सिर्फ धोती में था ऊपर का बदन पूरा नंगा पसीने में भीगा हुआ था. उसकी चौड़ी छाती और बहो की मछलिया देख के देवकी की छूट गीली होने लगती है.

देवा भी छाँव में आ जाता है – आओ देवकी काकी बैठो कैसी हो आप हमारा गाँव पसंद आया के नहीं .

देवलखि – अरे देवा ये गाँव तो अब मुझे सबसे ज्यादा पसंद आया है .

देवा – ऐसा क्यों

देवकी बस दिल आगया है

देवा वही टंकी से पानी निकल के हाथ मुँह धोने लगता है तभी

देवकी - तेरी पीठ तो पूरी मिटटी में सनी हुई है रुक जा मए साफ़ कर देती हु

वो उठ के कपडा गीला करके देवा की पीठ को साफ़ करने लगती है फिर धीरे कपडा छोड़ के देवा की पीठ सहलाने लगती है . और उसकी पीठ को चूमने लगती है जिससे देवा के शरीर में करंट दौड़ने लगता है. देवा तुरंत उठ कर देवकी को गॉड में ले के कमरे में घस जाता है देवकी भी देवा से लिपट जाती आहे और देवा के होठो पे टूट पड़ती है

देवकी – देवा क्या आकर्षण है रे तुझमे जो इस उम्र में भी मए तेरी तरफ खींची चली आयी पता है रत भर मैने तुझे याद किया

देवा- इसकी क्या जरुरत थी काकी अगर रहा नहीं जार अहा था तो बुला लेती न मुझे. मए सुला देता तुम्हे. इतना कह के वो देवकी की चूचिया दबा देता है और दूसरे हाथसे उसकी बुर को साड़ी के ऊपर से मुट्ठी में भर के दबा देता है.

देवकी - sssssssseeeeeeeeeeeee मत कर देवा अभी . मए खुद को रोक नहीं पाउगी .

देवा – तो रुकने को कौन कह रहा है.

देवकी - मुझे पता होता तू भी मुझे यद् कर रहा है तो मए टाइम निकल के आती न . अभी तो जाना पड़ेगा मुझे आज पद्मा के साथ बाजार जाना है वार्ना आज तो अपनी प्यास तुझसे बुझा के hi जाती पर कल मए शाम को ाउगि यही इसी कमरे में . . अब मए जा रही हु देवा. और वो देवा के सीन से लग के उसके होठो को जी भर के चुस्ती है और निकल जाती है कमरे से.

देवा भी थोड़ी देर खुद को ठीक करता है फिर निकल पड़ता है हवेली की तरफ .

देवा मन में – आज तो इस ठाकुर की माँ छोड़ दुगा अगर इसने कुछ उल्टा सीधा कहा तो . चलो देखते है क्या कहता है.

जैसे hi देवा हवेली पंहुचा गेट पे hi दरबान ने उसे रोक लिया.

देवदरबान – इ कहा घुसा जार रहा है.

देवा – तेरे बाप ने बुलाया है मुझे. जा के बोल देवा आया है.

दरबान घूरते हुए गेट क पास hi बानी कोठरी में गया और वह से फ़ोन लगाया ठाकुर को. दो मिनट बात करने के बाद बहार आया

दरबान - जाओ अंदर ठाकुर साब बैठे है.

देवा अंदर चला गया और वह उसे नौकर ने रुकने को कहा . थोड़ी देर के बाद ठाकुर देवा के सामने आया.

ये है ठाकुर दुर्जन सिंह एक सफारी सुईठे में था वो . हाथ में एक छड़ी लिए . रोबदार मूछे. लाल बड़ी बड़ी आँखे. चेहरे पे वही पैसे का घमंड .

ठाकुर - आओ देवा. बहोत इंतजार करवाया तुमने हमको.

देवा – ऐसी बात नहीं ठाकुर साब मए सुबह खेत जा रहा था जब आपका आदमी आया था . और काम छोड़ के आ नहीं सकता था इसलिए दोपहर में आने को कहा था.

ठाकुर – तुम्हरे काम हमारे हुकुम से बाद कर कब से हो गए देवा.

देवा – मए काम को हमेशा पहले रखता हु ठाकुर साब ये बात सब जानते है. मए काम छोड़ के किसी के कहने पे नहीं जाता चाहे वो मेरा आप hi क्यों न हो.

ठाकुर – ऐसी अकड़ वाली बाटे हम ठाकुरो को शोभा देती है तुझ जैसे मामूली आदमी के मुँह से नहीं

देवा – ठकुर साब इंसाने मामूली है या नहीं ये तो वक़्त आने पे hi पता चलता है . किसी के कह देने से कोई मामूली नहीं हो जाता और फिर मन के पैसे में हम आपसे आज पीछे है लेकिन कल किसने देखा है . और पैसा तो हाथ की मेल होता है इसलिए उस से औकात तय नहीं की जाती.

ठाकुर - देवा मैने यहाँ तुझे बहस करने को नहीं बुलाया. और जिस काम से बुलाया था उसके लिए आने में तूने देर कर दी.

देवा – मए समझा नहीं.

ठाकुर - मैने यहाँ तुझे इसलिए बुलाया था क तुझ से उस पैसे के बारे में बात करू जो तेरे बाप ने हमसे लिया था आज से 5 महीने पहले. पर न तेरे बाप आया न तू नहीं मेरा पैसा . और आज सुबह भी तुझे बुलाया तो तू नहीं आया. इसलिए मैने अपने अपने आदमियों को तेरे घर भेजा है वसूली के लिए.

देवा – लेकिन वो पैसा मेरे पिता जी ने 6 महीने के लिए लिया था अभी तो 5 महीने hi हुए है. फिर वसूली कहे की. वो तो आपको समय से मिल hi जायेगे अपने आदमियों को वापस बुला लो.

ठाकुर – है 5 महीने hi हुए है. लेकिन तुम लोग नहीं आये तो मुझे चिंता होने लगी अपने पैसो की . इसलिए मेरे आदमी गए है. और अब वो मेरे बुलाने पे नहीं आएंगे. खुद hi वापस आएंगे.

देवा - ठकुर अब तक मैने तुझसे “ठाकुर साब और आप” कह कर बात की इसका मतलब ये मत समझना की इस गाँव के दूसरे लोगो की तरह मए तेरा गुलाम हु. पैसा जरुरत के लिए hi तुमसे लिया था मेरे बाबू जी ने तूने हमारे 4 एकड़ खेत अपने पास लिखवा के रखे है कोई दान नहीं दिया था. वो तो तुझे मिल hi जायेगे. लेकिन एक बात यद् रखना अगर तेरे आदमियों ने मेरे घर में कोई बदतमीजी की तो न वो आदमी बचेंगे न तू. मेरे घर की एक ीत भी हिली तो तेरी इस हवेली का नक्शा बदल दुगा मए. और अगर मेरे किसी घर वाले पे आंच आयी तो उसकी गर्मी से यहाँ के लोग भी नहीं बचेंगे . याद रखना ठाकुर ये देवा का वादा है तुमसे.

तभी एक आदमी तलवार निकलते हुए – ठाकुर साब से ऐसी बात कर के तू यहाँ से जजिन्दा नहीं जा सकता.

देवा – ठाकुर समझाओ इसे. तलवार कोई भी रख सकता है निकल सकता है. लेकिन ये नहीं भूलना चाहिए के तलवार किस के लिए निकल रहे हो.

उस आदमी ने तलवार का वॉर देवा की पीठ पे करना छह तभी देवा ने फुर्ती से पलट के अपनी तरफ आती तलवार को हाथ पे रोका और एक झटके में तलवार खींच ली. और तलवार का दस्ता उसी आदमी की खोपड़ी पे मारा तो वो आदमी वही गिर पड़ा. देवा ने तलवार ठाकुर के पैरो के पास फेंकी

देवा – ठाकुर अभी ये तलवार तेरे पैरो में फेंक रहा हु लेकिन ऐसी कोई भी तलवार अब मेरे ऊपर उठी तो फिर मेरे हाथ से तलवार कोई छुड़ा नहीं पायेगा जब तक यहाँ लाशो का ढेर न लग जाये. दुआ करना तेरे आदमियों ने मेरे घर पे कोई गलत हरकत न की हो .

देवा फुर्ती से वह से निकला और तेजी से अपने घर पंहुचा. तो देवा के घर के आँगन में एक आदमी खड़ा था हाथ में बन्दूक लिए . देवा को देखते hi उसने बन्दूक तान दी.

आदमी - देवा तूने आने में देर कर दी अभी तो हमारे लोग अंदर व्यस्त है. तू जा अब 2-3 घंटे बाद आना. देवा कुछ समझ पता तभी अंदर से उसकी भाभी की चीख सुनाई दी. देवा ने उस आदमी को देखा तो वो मुस्करा रहा था.

देवा का खून खोल उठा उसने पालक झपकने से पहले एक जम्प लिया और उस आदमी की गार्डन पकड़ के उलटी दिशा में गहमा दी तो वो वही कटे हुए पेड़ की तरह गिर पड़ा. और यमलोक पहुंच गया. देवा दौड़त हुआ भाभी के कमरे तक पंहुचा तो दरवाजा अंदर से बंद था देवा ने जमा क एक लात मरी और . . . .
 
थँक्स फॉर ुर कमैंट्स एंड सुप्पोर्टस आगे आगे देखिये सब की लेगा देवा खबर. और हम यही आप सब लोगो को बताना चाहते है की थ्रिल, सुस्पेंस और एक्शन आगे बहोत मिलेगा बूत रोमांस और सेक्स की आगे गुंजाईश थोड़ी काम हो जाएगी तो प्लीज स्टोरी के साथ बने रहे और आप सब अपना साथ बनाये रखे. और स्टोरी के हर पहलू को एन्जॉय करे क्यों की जब जिस चीज़ का समय आएगा वो भरपूर मिलेगी

नेक्स्ट अपडेट जल्द hi

bye
 
अपडेट – 6

देवा ने जमा क एक लात मरी और . . . .

दरवाजे के टुकड़े हो गए साथ hi अंदर दो आदमी भी औंधे मुँह गिर पड़े. शायद वो दरवाजे के पास hi खड़े थे. और टूटे दरवाजे की चपेट में आ गए अंदर का नजारा बड़ा खतरनाक था दिया भाभी पलंग पे बिलकुल नंगी लेती हुई थी. वह दो आदमियों ने दिया भाभी के हाथ पकड़ रखे थे और दो ने पेअर पकड़ के फैला रखे थे. और एक जो शायद उस टीम का बॉस था वो नंगा खड़ा था अपना लुंड पकड़ के और बस दिया भाभी की बुर में डालने hi वाला था लेकिन दरवाजे के टूटते hi सबने चौंक कर उस तरफ देखा देवा को देखते hi

दिया चिल्लाई - देवा बचाओ मुझे.

देवा पे तो खून सवार हो चूका था उसने दिया के पैरो के पास वाले दोनों आदमियों को गार्डन से पकड़ के अपनी तरफ खिंचा और पीछे फेंक दिया और कूद कर दिया के सिरहाने खड़े दोनों आदमियों की छाती पे लात मरी वो भी दोनों गिर पड़े.

देवा ने पलंग पे बिछी चादर दिया के जिस्म पे डाली और पलंग से सीधा फ्लाइंग किक मरी उस बॉस पे जो की सीढ़ी उस के जबड़े पे लगी और उसके दो दांत शहीद हो गए. दिया तो हैरानी से देवा की फाइटिंग देख रही थी उसे यकीन hi नहीं हो रहा था. क देवा ऐसा लड़ सकता है. तरभी दिया की चीख निकल गयी क्यों की एक आदमी ने देवा के ऊपर तलवार से वॉर कर दिया जो उसकी पीठ पे लगा देवा ने पलट के उस आदमी को घुसा मारा और वो खिड़की तरोड़ते हुए बहार आँगन में जा के गिरा. तभी बाकि के तीन लोगो ने एक साथ देवा पे तलवारो से वॉर किया लेकिन देवा ने पास पड़ी लोहे की कुर्सी उठा के तेजी से अपने ऊपर कर दी तीनो तलवारे लोहे की कुर्सी पे पड़ी देवा ने उस कुर्सी को hi घुमाया तो तीनो आदमी जमीन पे गिरे देवा ने कुर्सी में फांसी तलवार निकली और अपनी तरफ बढ़ते एक आदमी को फेंक कर तलवार मरी जो उसके पेट में घुस कर पीठ से बहार झाँकने लगी .

ये देख के बॉस भी क्रोध में आ गया .

बॉस – सेल तूने ठाकुर के आदमी को मार डाला तू तो गया

पर देवा ने बिना कोई जवाब दिए दूसरी तलवार उठाकर बाकि दो आदमियों की गर्दन चीयर दी अब बॉस की गांड फटने लगी वो नंगा hi बहार भगा तो देवा ने जमीन पे रोल हो कर तलवार का वॉर उसकी टैंगो पे किया तो वो भी जमीन पे गिरा. और तड़पने लगा.

देवा – मादरचोद तेरी हिम्मत कैसे हुई देवा के घर की इज्जत पे हाथ डालने की मए तुझे तो जिन्दा छोड़ूगा नहीं, देवा ने तलवार अपने सर से ऊपर तक उठाई और तेजी से नीचे लाया क तभी

बॉस – नहीं मुझे मत मारो ये सब मैने ठाकुर के कहने पे किया है. उसी ने कहा था के देवा के घर में जो मिले उसे मार डालो क्यों की तुमने बाला ठाकुर से पन्गा लिया और ज्योति ठाकुर से भी . इसलिए, और ठाकुर ने ये भी कहा था के देवा की माँ और बहन को कुछ मत करना उन्हें पकड़ के हवेली ले आना और उसकी भाभी के साथ जो करना चाहो कर के उसे वही मार डालना . और साथ में देवा उसके बाप और भाई को भी मार देना. मुझे माफ़ कर दो देवा

देवा की आँखे गुस्से से लाल हो रही थी ये सब सुन कर की ठाकुर ने उसकी माँ और बहन को उठवाने के लिए इन्हे भेजा था.

देवा – तूने ये सब बता कर मुझसे खुद को बचा लिया. अब मए तुझे नहीं मरुँगा जा मैने तुझे छोड़ दिया.

बॉस की आँखों में चमक आ गयी ये सोच कर की चलो जान बची अब ठाकुर से कुछ भी कह दुगा .

तभी देवा ने अपनी भाभी को इशारा किया . दिया वह आयी वो दर से काँप रही थी.

देवा – भाभी मैने इसे छोड़ दिया है इसे जाने देते है .

दिया - देवा तू इसे कैसे छोड़ सकता है इसने मेरी इज्जत लूटनी चाही .

देवा तलवार दिया की तरफ बढ़ाता हुआ. – तो इतना गुस्सा है तो तुम hi मार डालो इसे ये लो तलवार.

दिया - मए इसे कैसे मार सकती हु ?

देवा ने एक सेकंड में तलवार घुमाई उसकी ब्याह पे

दिया को देखते हुए ऐसे मारो

वो बॉस चीखने लगा दिया उसके सामने तलवार ले के कड़ी थी लेकिन उस के हाथ अभी भी काँप रहे थे .

देवा – भाभी आप इसे मार नहीं सकती न लेकिन इसे सजा तो आप hi देंगी ये अपने इसी लुंड से आपकी इज्जत लूटना चाहता था, न जाने अब ताकि कितनी औरतो की जिंदगी इसने बर्बाद की होगी इससे, और अगर आज आपने इसे छोड़ दिया तो ये आगे भी न जाने कितनी औरतो और लड़कियों की जिंदगी बर्बाद करेगा, कितना तदपि होगी वो सब जब इस नीच ने उन सबकी इज्जत लूटी होगी और तब वो रोइ गिड़गिड़ाई होगी लेकिन ये उसी तरह हँसता रहा होगा जैसे थोड़ी देर पहले ये आप के सामने नंगा खड़ा हंस रहा था क्या होता आपका अगर मए सही वक़्त पे न आ गया होता काट डालो इसे.

दिया का हाथ तेजी से घुमा और उस बॉस का लुंड जड़ से कट के हवा में उड़ गया और वो हलक फाड़ के चिल्लाने लगा और और थोड़ी देर तड़प के बेहोश हो गया. देव ने बहार देखा तो लोगो की भीड़ जमा थी लेकिन जैसे hi देवा बहार निकला उसे खून में रंगा हुआ देख के सब उसके पास आने लगे तभी अंदर से दिया निकली वो अब कपडे पहन चुकी थी.

देवा – गाँव वालो. मए देवा आज तुम सबको वचन देता हु के ठाकुर या उसका कोई भी आदमी अब किसी पे जुल्म नहीं करेगा और किया तो उनकी लाशे भी ठाकुर को नहीं मिलेगी. तुम में से अगर कोई ठाकुर को बताना चाहे तो जा के बता दे के उसके कुत्तो के देवा ने काट डाला है. डैम है तो देवा का बाल उखड के दिखा दो.

इतना कह कर देवा ने ठाकुर के आदमियों की जीप में hi ठाकुर के आदमियों को भरा और दिया को बोल दिया घर को साफ़ कर दो

और खुद निकल गया जीप ले कर. और देवा गाड़ी को फुल स्पीड में दौड़ाये जा रहा था एक गहरी खाई की तरफ जैसे hi गाड़ी खाई के पास पहुंची फुर्ती से देवा ने गाड़ी से बहार छलांग लगाई और गाड़ी सीधे जा कर हजारो फुट गहरी खाई में गिरी और फिर एक धमाका हुआ और ठाकुर के सरे आदमी उस धमाके में उड़ गए.

देवा घर आया तो दिया उसी का इंतजार कर रही थी. दिया दौड़ के देवा के सीने से चिपक गयी. देवा ये सब क्या हो गया.

देवा – कुछ नहीं हुआ भाभी. उन कमीनो को नरकवासी कर दिया अब कोई इस घर की तरफ नहीं आएगा. और उस ठाकुर को तो मए आज hi ख़तम करुगा.

दिया – नहीं देवा तू ठाकुर को कुछ नहीं करेगा अभी. तुझे मेरी कसम . उसे और उसके पूरे परिवार को जो घमंड है न पैसे का उस घमंड को तोडना है, ठाकुर ने जो दहशत भर दी है गाँव के लोगो में उसे दूर करना है, उसने मेरी इज्जत लूटने की कोशिश की माँ जी और पायल की इज्जत लूटने का सोचा उन्हें आपने बिस्तर की रंडी बनाना की साजिश की इस घर के मर्दो को मरने की कोशिश की न? आज मए तुझसे कहती हु ठाकुर खंडन की कोई भी छूट तेरे लुंड से नहीं बचनी चाहिए कसम खा तू उस घर की हर औरत को छोड़ के उन्हें माँ बनाएगा. ठाकुर खंडन में तेरा वंश बढ़ेगा आज से. और ये खुशखबरी जब तू ठाकुर को सुना दे तब तू उसे मौत देगा उसे पहले नहीं. अगर तूने ये नहीं किया तो मेरा मारा हुआ मुँह देखेगा.

देवा – ऐसा hi होगा भाभी. अब उस खंडन की कोई भी बुर मेरे लुंड से नहीं बचेगी.

दिया – अच्छी बात है. तो फिर चलो खाना खा लो बहोत देर हो गयी है. जैसा मैने बताया था माँ बाबू जी और पायल तो बहार गए है. तेरे भाई का कोई भरोसा नहीं. तो हम दोनों खाना खा लेते है.

देवा – है ठीक है मए मुँह हाथ धो लेता हु आप खाना लगाओ.

देवा हाथ मुँह धो के आ जाता है तब तक खाना भी लग गया था. फिर दोनों खाना कहते है आज दिया उसे अपने हाथो से खिलाती है और देवा भी बड़े प्यार से दिया को खाना खिलता है . जब खाना खा के दोनों फ्री होते है तो दिया कहती है

दिया – देवा तुम बहार का दरवाज़ा लगा दो और थोड़ी देर यही रुको जब मए कहु तब मेरे कमरे में आ जाना.

फिर दिया अपने कमरे में चली जाती है और देवा भी घर का दरवाज़ा लगा के बैठक में आ जाता है

थोड़ी देर के बाद दिया आवाज़ लगाती है देवा को और देवा अंदर जाता है कमरे में तो दिया एक ट्रांसपेरेंट निघ्त्य में उसे नजर आती है लाल सुर्ख लिपिस्टिक लगाए हुए, बाल खुले हुए. वो देवा की तरफ बहे फैला देती है तो देवा लपक के दिया को बहो में भर लेता है और उसके पूरे चेहरे और गार्डन पे चूमने लगता है. फिर होठो को भी चूसने लगता है चूसने क्या काटने लगता है

दिया – रुको देवा ऐसे नहीं थोड़ा प्यार से करो प्यार से मेरे हर अंग को चूमो प्यार से मेरे होठो को चुसो जैसे तुम इनका रास पी रहे हो . ऐसे जबरदस्ती से या ताक़त से नहीं . ये ताक़त ये जूनून बहोत बाद के लिए रखो.

फिर वो खुद देवा के होठो को चुस्ती है और देवा भी वैसे hi प्यार से चूसने लगता है तो दिया देवा का हाथ पकड़ के अपनी चुकी पे रख देती है और देवा को इशारा करती है देवा धीरे धीरे दिया की चूचिया सहलाने लगता है और बीच बीच में दबाता जाता है इतने में दिया की निप्पल्स तन जाती है जो देवा की उंगलियों में आती है तो देवा उन्हें होल होल मसलने लगता है दिया की सिसकारियां शुरू हो जाती है.

फिर दोनों पलंग पी एते है तो दिया खुद लेट जाती है और देवा को अपने बगल में लिटा देती है और देवा का हाथ पकड़ के अपनी निघ्त्य के किनारे पे रख के ऊपर उठाने लगती है तो देवा समझ जाता है और दिया की निघ्त्य को उसकी गांड तक उठा देता है.

दिया की साँसे भरी होने लगती है वो देवा को नीचे धकेलती है तो देवा दिया की गोरी चिकनी नंगी टाँगे देख के उन्हें सहलाने और चूमने लगता है . और धीरे धीरे उसकी छूट ताका ा जाता है दिया ने अभी पेंटी पहनी हुई थी, देवा बड़े प्यार से दिया की छूट को पेंटी के ऊपर से सहलाता है और एक चुम्मा वही पे दे देता है तो दिया भी कमर ऊपर ुषक के अपनी छूट देवा के मुँह पे दबा देती है देवा और ऊपर आता है दिया की नाभि पे और उसके चिकने पेट पे चूमने लगता है साथ hi उसकी कमर को दबाने लगता है.

तभी बहार से कोई दरवाजा पीटता है.

दिया – आ गया तेरा भाई . साला न खुद कुछ करता है न मुझे करने देता है इतने सालो बाद आज कुश सुच मिल रहा था वो भी इससे देखा नहीं जाता

देवा – कोई बात नहीं उसे सुला के मेरे कमरे में आ जाना

दिया - नहीं आज तो इसके सामने hi छुडवाउगि मए इसी बिस्तर पेट ु देखता जा. यही रहना तू बस इस अलमारी की आड़ में. बीच में मत आना जब तक मए न कहु.

दिया एक चुन्नी लेके बहार निकलती है और दरवाजा खोल कर रघु को अंदर आने देती है . फिर दरवाजा बंद कर के रघु को ले कर कमरे में पहुँचती है.

रघु - क्यों साली किस के लिए इतना सजी हुई है रंडी . तेरा कोई ग्राहक आने वाला है क्या

देवा को बहोत बुरा लगता है क रघु ऐसे बात कर रहा है दिया से वो बहार आने hi वाला था के दिया उसे देख के इशारे से मन करती है .

दिया - है मेरे राजा कोई तो आज लूटेगा इस जवानी को लेकिन वो मेरा ग्राहक नहीं बल्कि मेरा प्यार है.

रघु कौन है वो हरामजादा

दिया – हस्ते हुए हरामजादा नहीं शहजादा और वो तुम हो

इतना कह कर दिया अपनी चुन्नी उतर इ फेंक देती है और अपने हाथो से अपनी चूचिया दबाने लगती है रघु ये देख के बहकने लगता है और अपने कपडे उतर जे फेंक देता है

रघु – साली बहोत आग लगी है न तेरी छूट में आज तो बुझा hi दुगा चल जल्दी से नंगी हो जा

दिया - खुद hi कर दो न मुझे भी नंगी

रघु दिया को धक्का दे के बिस्तर पे गिरता है और उसके ऊपर चढ़ के अपना 5 इन्चा का लुंड उसकी छूट पे रगड़ने लगता है. नशे में उसे ये भी नहीं मालूम चलता की बीच में पेंटी भी है.

रघु रुक साली अभी अंदर दाल के तेरी बुर फाड़ता हु मए.

दिया - हां फाड़ डालो मेरी बुर मेरे राजा aaaaaaaaaaaahhhhhhhhh और जोर से छोड़ मजा आ रहा है. आज तो गजब कर दिया तूने फेडो मेरी छूट को ऐसे hi कहा थे अब तक और जोर से छोड़ो.

रघु भी नशे में 8-10 धक्के लगता है और

रघु – ले मेरा पानी अपनी बुर में और पैदा कर मेरे बचे को

और रघु झाड़ जाता आहे और दिया के बगल में लुढ़क के बेहोश हो जाता है.

दिया मुस्कराते हुए देवा को देखती है.

देखा ये है इसकी औकात मुझे रंडी कहने वाला नामर्द है ये. इसे नशे में ये तक पता नहीं चलता के इसकी लुल्ली जिसे ये बहोत बड़ा लुंड समहता है . मेरी बुर में गयी के नहीं गयी.

पेंटी उतरे बिना hi इसे लगा के इसने मुझे छोड़ लिया. और इसे इस खंडन का वारिस भी चाहिए. अब क्या वारिस मेरी पेंटी से पैदा करू मए?

देवा आगे बाद के दिया को बहो में भर लेता है

देवा – नहीं मेरी प्यारी भाभी पेंटी से नहीं और इसकी लुल्ली से नहीं इस खंडन का वारिस तो इस बुर से ( दिया की बुर दबाते हुए) और मेरिस लुंड से hi पैदा होगा. ठाकुर खंडन में अपने वारिस पैदा करने से पहले मए अपनी भाभी को पेट से करुगा. बोलो मेरे बच्चो की माँ बनोगी?

दिया – मए तो तरस रही हु उस दिन के लिए. देवा. आ जा बना दे मुझे अपने बच्चो की माँ. पर पहले रुक ( दिया देवा से अलग हो कर अपनी ड्रेसिंग टेबल तक जाती है और वह से सिन्दूर लाती है. ) देवा पहले मेरी मांग भर के मुझे अपनी पत्नी बना लो मए नहीं चाहती के मए अपने पति के आलावा किसी और के बच्चे की माँ बनु .

देवा भी सिन्दूर उठा के दिया की मांग में भर देता है और उसके होठो को हलके से चुम लेता है.

देवा आज से अकेले में तू मुझे भाभी नहीं दिया बुलाया कर

नहीं भाभी जो मजा भाभी को छोड़ने में आएगा वो दिया को नहीं. इसलिए तू मेरी भाभी hi रहेगी

दिया मुस्क्रत देती है. – ठीक है मेरे देवर राजा जैसा तुम्हे अच्छा लगे

और दिया चिपक जाती है देवा से देवा भी फिर से दिया को चूमने लगता है और दिया की निघ्त्य उतर के फेंक देता है अब दिया सिर्फ ब्रा पेंटी में देवा के सामने कड़ी थी और वो बेहद खूबसूरत लग रही थी. बिलकुल क़यामत.

देवा दिया को लिटा देता है और उसे चूमते हुए उसकी ब्रा के ऊपर से hi चूचियों को मसलने लगता है और दिया तड़पने लगती है

फिर दिया भी देवा को सीधा लिटा डीटी है और अपनी पीठ देवा की तरफ कर के कहती है

देवा – अपनी भाभी की ब्रा खोल के आज इस रिश्ते को चूरू करो

देवा दिया की पीठ को चूमते हुए उसकी ब्रा का हुक खोल देता है और फिर उसके कंधो को चूमते हुए ब्रा की स्ट्रेप नीचे करता है दिया अब खुद सेही कड़ी हो जाती है पलंग पर और अपनी पेंटी खुद उतर लेती है और दोनों पैर देवा के दोनों तरफ कर के कमर पे हाथ रख के कड़ी हो जाती है .

दिया - देवा कैसी लग रही हु

देवा – इस धरती की तो नहीं लग रही हो और लपक के उसे अपने ऊपर खींच लेता है और दिया की चूचियों को मुँह में भर के चूसने लगता है . और साथ hi उसकी मखमली गांड को दबाने लगता है. दिया भी देवा के बालो को सहला सहला के अपनी चूचिया उसे पीला रही थी बगले में hi रघु नशे में धुत्त पड़ा था. बीच बीच में देवा जब nipp;e को काट लेता तो दिया की सिसकारियां फुट पड़ती . थोड़ी देर तक चुकी पीन ेके बाद दिया बोली देवा मैने बहोत इंतजार किया है इस पल का अब दाल दो अपना ये मुसल मेरी छूट में. पर उसे पहले मुझे थोड़ा चूस लेने दो

फिर दिया देवा के लुंड के पास आती आहे और उसका लुंड पकड़ के पहले चूमती है फिर लुंड की खुशबू को सूंघती है

दिया – देवा तेरे लुंड से तेरी मर्दानगी की खुशबू आ रही है जो बहोत प्यारी है

इतना कह के वो देवा का लुंड अपने होठो में भर्ती है और बड़ी मुश्किल से थोड़ा सा hi लुंड जाता है जिसे वो चूसने लगती है क्यों की देवा का लुंड बहोत मोटा हो चुक्का था और उसे भी मोटा था उसका सूपड़ा एक डैम ला फुला हुआ .

दिया देवा का लुंड चाट भी रही थी पूरा का पूरा अपनी जबान से और कोशिश कर के ज्यादा से ज्यादा लुंड मुँह में लेने की कोशिश बभी कर रही थी

दिया एक झटके में उठ के देवा के होठ चूमती है

दिया - देवा अब दाल दो पहले सूपड़ा डालना अपना और दो मिनट रुक कर आधा लुंड डालना और धीरे धीरे छोड़ना फिर जब मए इशारा दू तब पूरा दाल देना.

देवा आजा है पोजीशन में और दिया की दोनों टैंगो के बीच बैठ के उसकी छूट को सहला के उसके उसके दोनों लिप्स खोलता है और अपनी ऊँगली को थूक से गीला कर के छूट में डालता है और फिर अपना सूपड़ा रख के हल्का सा पुश करता है तो कुछ नहीं होता तब दिया अपनी छूट को खोल के देवा का लुंड सेट कर देती है और देवा जमा क ीक शॉट मरता है देवा का सूपड़ा अपनी जिंदगी की पहली एंट्री करता है छूट में दिया को दर्द तो बहोत होता है पर वो अपने दांतो से होठ काट के बर्दाश्त करती है और अपनी चुकी पे देवा का मुँह दबा देती है और धीरे से बोलती है देवा मेरी सील तोड़ देना अब की बार. मए चिल्लाऊंगी पर तू परेशां मत होना जब कहु रुक जाना अब थोक दे .

देवा फिर से आगे बढ़ता है और एक जोरदार धक्का देता है दिया की चूचिया पकड़ के तो दिया की चीख निकल जाती है aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh देवा aaaaaaaaaauiiiiii maaaaaaaaaaaa मार डाला रुक रुक रुक रुक देवा हिलना भी मत मेरी छूट फैट गयी maaaaaaaaaaaaaa

देवा दिया की nipp;es को चूसने लगता है और अपनी कमर को वही रोक देता है थोड़ी देर के बाद दिया खुद को संभल लेती है और देवा को इशारा करती आहे तो देवा भी धीरे धीरे अपनी कमर को हिला के दिया को छोड़ने लगता है. कोई 10 मिनट बाद दिया जोर जोर से अपनी कमर हिलती है और झाड़ जाती है. देवा दाल दे पूरा मए आ रही हु देवा भी आधे लुंड से छोड़ते चपड़ते एक डैम से पूरा लुंड दिया की बुर में बच्चेदानी तक उतर देता है. और दिया एक बार ग़फ़ीर चीख पड़ती है.

देवा – भाभी इतना चीख रही हो. पूरा गाँव उठा डौगी तुम तो .

दिया थोड़ी देर खुद को सँभालने में लेती है. फिर

दिया – तू चिंता मत कर अगर बहार कोई सुनेगा तो समझेगा की रघु मुझे मार रहा है. ये कोई नहीं जान पायेगा की देवा मेरिमार रहा है. तू छोड़ अब पूरी तरह मुझे

देवा उठ के बैठ जाता है लेकिन अपना लुंड नहीं निकलता . वो दिया की दोनों टैंगो को ऊपर उठता है और खुद घुटनो के बल बैठ के धक्के मरना चालू कर देता है दिया की तो आहे निकलने लगती है वो बस बिस्तर की चादर पकड़ कर मोड़ रही थी और देवा छोड़ता जारहा था ये दोनों की पहली चुदाई hi थी. तो दोनों पूरे जोश में एक दूजे को पछाड़ने में लगे हुए थे तभी देवा दिया की दोनों टैंगो को नीचे करके उसके हाथो को पकड़ के खींच लेता है और उसे अपनी गॉड में बिठा के छोड़ने लगता है दिया भी देवा से लिपट के उसकी गॉड में उच्छल रही थी.

तभी रघु नशे में चिल्लाता है.

रघु - क्यों ऋ रंडी इतना क्यों चिल्ला रही है. सोने दे मुझे.

दोनों रघु को देखते है और दिया और जोर जोर से आवाज़े करने लगती है. छोड़ मुझे छोड़ और जोर से छोड़ आआआह्ह्ह्हह्ह माँ मजा आ गया आज तो

करीब 50 मिनट की इस चुदाई में जहा दिया 4 बार झाड़ गयी थी वही देवा भी अब अपना नल खोलने की तयारी में था वो दिया को सीधा लिटा देता है. और उसे बहो में भर के कास कास के छोड़ने लगता है दिया की बुर पूरी चिकनी हो चुकी थी अंदर से इसलिए अब उसे भी दर्द की जगह मजा मिल रहा था और फिर दोनों एक साथ चीखते हुए झड़ते है और देवा अपना पूना पानी दिया की बच्चेदानी में छोड़ देता है. और थोड़ी देर के बाद दिया के ऊपर से नीचे उतरता है.

दिया का पूरा बदन लाल हो चुक्का था देवा के रगड़ने से . उसकी बुर भी काफी खुल गयी थी और सूज गयी थी पर उइसके होठो पे एक बहोत प्यारी मुस्कान थी और चेहरे पे सुकून. दिया की गांड के नीचे पूरी चादर खून के धब्बो से भरी हुई थी. कोई आधे घंटे बाद दिया उठती है बाथरूम जाने के लिए तो लड़खड़ा जाती है.

देवा – अरे भाभी रुको मए ले चलता हु .

फिर देवा दिया को बहो में ले के बाथरूम जाता है और खुद उसकी छूट को साफ़ भी करता है. दिया और देवा दोनों पेशाब कर के फिर से अंदर आ जाते है दिया इस बार भी देवा की गॉड में hi थी . थोड़ी देर आराम करने के बाद देवा एक बार और दिया को छोड़ता है और अपना पानी इस बार भी उसकी बच्चेदानी में hi दाल देता है रात के 2 बजे तक ये चुदाई चलती आहे फिर देवा अपने कमरे में जा के सो जाता है .

अपने नियम के अनुसार देवा 3 बजे उठ जाता है . सिर्फ एक घंटे की नींद कर के और पहुंच जाता है अपने खेत वाले कमरे में और लग जाता है अपनी योग साधना में. और फिर 6 बजे वो घर आ कर सो गया. नीदं में उसे फिर से फ़कीर बाबा मिले.

फब – देवा कैसे हो बीटा?

देवा – प्रणाम बाबा

फब जीते रहो देवा

देवा - बाबा कल मेरे से कुछ गुनाह हुए है.

फब – नहीं देवा ुणसमे से कोई भी ऐसा काम नहीं जिसे गुनाह कहा जाये. जिन लोगो को तूने मारा उनका समय पूरा हो गया तहत ुम तो जरिया थे. और फिर वो लोग तो तुम्हारे परिवार के दुश्मन बन कर आये थे.

देवा – पर बाबा जो मेरा सम्बन्ध बन गया मेरी अपनी भी भाभी के साथ वो? क्या वो गुनाह नहीं?

फब – नहीं देववो नियति है. टेरेवांश को आगे बढ़ने का ये पहला चरण था. अभी तेरे रिश्ते ऐसे और भी बनेगे. लेकिन तू ये मत सोचना के इसमें कुछ भी गलत है. क्यों की ये सब पहले से रचा गया है. तू चच कर भी इसे रोक नहीं पायेगा. तू नहीं जनता इससे कितने लोगो के दुःख दूर होंगे और कितने घरो में खुशिया आएगी.

फब - एक बात और देवा बहोत hi काम समय में तेरा जीवन बदलने वाला है. कुछ नए हालातो से तेरा मुकाबला होना है. इसलिए ये जॉब hi हो रहा है उसमे तू घबरा मत जाना ये सब तो बस शुरुआत है. आगे चाक इ तुझे इस घर और परिवार से भी दूर जाना है. इसलिए यहाँ के कामो को जल्दी से ख़तम करो

देवा – मुझे कहा जाना है बाबा?

फब - सब पता चल जायेगा देवा. जो शक्तिया मैने तुझे दी है कल की तेरी लड़ाई और पहले सम्भोग के बाद वो कई गुना बाद चुकी है. तुझे खुद बा खुद पता चलता जायेगा. और अपनी ताक़त तो तू देख hi रहा है. इसे संभल कर इस्तेमाल करना देवा. खुद पे नियंत्रण भी जरूरी है. अच्छा मए चलता हु अपना ध्यान रखना.

करीब 2 घंटे बाद hi उस के पास दिया आ गयी उठाने. दिया ने उसके होठो को प्यार से चूमा और जोर से गले लगाया तो देवा की नींद खुल गयी खुद को दिया की बहो में देख के देवा ने भी दिया को बहो में कास लिया.

दिया – ये क्या सुबह सुबह शुरू हो गए रात को पेट नहीं भरा क्या

देवा – तुमसे पेट कभी नहीं भरेगा मेरा. जिंदगी भर प्यार करुगा ऐसे hi

दिया – रहने दो. कल रत का किया हुआ अब तक भुगत रही हु. पूरे बदन में दर्द हो रहा है और छूट का तो बुरा हाल है. घर का काम न होता तो अब तक सो रही होती मए.

देवा – अरे पहले क्यों नहीं बताया. आ जाओ मए बदन की मालिश कर दू

दिया – न बाबा तुमने मालिश शुरू की तो दर्द और बड़ा डोज. चलो उठो भी अब. कब तक सोगे.

देवा – तुम ऐसे मेरे पास आ गयी रघु कहा है. कही वो देख न ले.

दिया - देखता वो है जो होश में हो वो तो अब तक बेहोश पड़ा है. रत को बिस्तर से गिर गया था अब तक जमीन पे पड़ा है.

देवा – आचाये बताओ रात को तुम उसे ऐसे क्यों दिखा रही थी जैसे क वो तुम्हे छोड़ रहा हो और तुम्हे बहोत मजा आ रहा हो.

दिया – मेरे बधु बालम वो तो मैने इसलिए किया के उसे लग ेके उसी के छोड़ने से मए माँ बानी हु. थोड़ा बहोत होश था hi तो मेरी बाटे तो उसने भी सुनी hi थीं न. और मुझे पता है तेरे इस मुसल से छुड़वा के ( देवा का लुंड दबाते हुए) मए पेट से तो हो hi जोगी इसी महीने देख लेना . पर तुझे रोज रात को मेरे पास आ कर मुझे छोड़ना होगा.

देवा – रोज रात को क्यों मए तो दिन रात तुझे छोड़ूगा. और जल्द hi हमारा बीटा आएगा इस घर में.

दिया ाचा ठीक है जो चाहो कर लेना चलो जल्दी उठो .

फिर दिया कमरे से निकल जाती है और देवा बिस्तर से उठ कर नाहा धो के और नाश्ता कर के अपने खेतो की तरफ निकलता है और
 
अपडेट – 7

देवा बिस्तर से उठ कर नाहा धो के और नाश्ता कर के अपने खेतो की तरफ निकलता है और . . . .

आगे

नजर उसकी वही पूयम के घर पे थी की तभी उसे घर के बहार देवकी नजर आ जाती है वो उसे बुला लेती है

देवकी - देवा कहा जा रहा है इधर तो आ

देवा – है काकी बोलो क्या हुआ

देवकी अरे होना क्या है ? तू कहा चल दिया.

देवा – खेत hi जा रहा हु काकी.

देवकी - अंदर तो आ जा चले जाना

देवा पद्मा के घर के अंदर आता है और बैठ जाता है.

देवकी – पूनम जरा पानी तो लाना देख देवा आया है

इतना सुनते hi पूनम जो रसोई में थी तुरंत दौड़ के आती है और देवा को दूर से देख के मुस्क्रत देती है

पूनम - अभी लायी पानी मौसी

पूजनम पानी ले के आती है और देवा को देती है दोनों की नजरे मिलती है और एक दूसरे को देख कर मुस्करा देते है

तभी देवकी भी आ कर सामने बैठ जाती है.

देवकी - देवा तेरे माँ बाबूजी कहा है कल से दिखाई नहीं दिए

देवा – काकी वो थोड़ा काम से गए थे कल आज आ जायेगे.

देवकी – अच्छा ये बता कल क्या धमाचौकड़ी मची हुई थी तेरे घर में.? ये ठाकुर के लोगो क्यों आये थे.

देवा – अरे कुछ नहीं काकी उनका तो काम hi है लोगो को परेशां करना. पर अब कोई नहीं आएगा. न मेरे घर न इस पूरे गाँव में किसी के घर. मैने अच्छे से समझा दिया है.

देवकी – देवा ये लोग सही नहीं है इनसे तो बच के hi रहने. इनका कोई भरोसा नहीं ये लोग खून खराबा करने से पीछे नहीं हट्टे.

देवा – अरे काकी मर गए देवा को मरने वाले. किसी की इतनी हिम्मत नहीं के देवा से पंजा भी लड़ा सके. अगर वक़्त आया तो देख लेना.

तभी पद्मा जो के अनजान थी के घर में देवा आया है. वो बस यु hi अपना पेटीकोट अपनी गोरी गोरी चूचियों तक चढ़ाये कमरे में आ जाती है . वो अभी नाहा के आयी थी. उसका ध्यान hi नहीं जाता देवा पर वो तो कमरे में आ कर अपना पेटीकोट चूचियों से नीचे कर के कमर पे गांठ बांधने लगती है

देवा – नमस्ते काकी

देवा की आवाज सुन कर पद्मा जैसे hi उस तरफ देखती है उसके होश उड़ जाते है वो नमस्ते कर के अपने हाथो से अपनी चूचिया ढकना चाहती है पर उसकी चूचिया इतनी बड़ी थी के उसके हाथो से छुपती hi नहीं. देवा को भरपूर नजारा मिला था पद्मा की गोरी चूचियों और उसके कैसे हुए बदन का.

पद्मा चरण अंदर जाती है और कपडे पहनने लगती है वो शर्मा भी रही थी और उसे गुस्सा भी आ रहा था खुद पर के वो भी क्या बिना देखे वही पर पेटीकोट खोलने लगी.

थोड़ी देर बाद वो वापस कमरे में आती है देवा और पद्मा एक दूजे से आँख नहीं मिला पा रहे थे फिर देवकी ने hi कहा देवकी – तू तो आता hi नहीं यहाँ कोई नाराजगी है क्या.

देवा - नहीं तो काकी ऐसी कोई बात नहीं

देवकी – तो फिर आता क्यों नहीं अरे शाम को जब तू खली होता है तो आ जाया कर थोड़ी देर को . पद्मा भी अकेली रहती है. आखिर एक जवान बेटी से कब तक बात करेगी वो भी अपनी सहेलियों के पास चली जाती है तो पद्मा अकेली पद जाती है . मए भी कितने दिन यहाँ रुकोगी.

देवा थोड़ा पद्मा को छेड़ते हुए

देवा – अरे काकी ये पद्मा काकी ने कभी बताया नहीं के वो अकेली है और उन्हें मेरी जरुरत है. वार्ना कब का इनके खली पैन को भर देता.

देवकी भी समझ जाती है - तो देवा अब कौन सी देर हुई है. आ के भर देना जब तेरा मन करे.

देवा – क्या ?

देवकी - अरे मेरा मतलब आ जाया करना यहाँ. वैसे तू क्या समझ रहा था ?

देवा – कुछ नहीं काकी. और अब आप ने तो कह दिया पर लगता नहीं की पद्मा काकी को मेरी कोई जरुरत है.

पद्मा एक झटके में - मैने ऐसा कब कहा तू जरूर आना मए इंतजार करुँगी तेरा

ये सुन कर देवकी और देवा हंसने लगते है और पद्मा को समझ आ जाता है उसने जल्द बजी में क्या बोल दिया वो शर्मा जाती है

देवा – ठीक है काकी मए आ जाउगा अब मए चलता हु मुझे खेत भी जाना है.

देवकी - ठीक है देवा आते रहना

देवा के जाने के बाद देवकी पद्मा से - सुन मुझे तो ये देवा बड़ा भ गया है.

पद्मा – क्या कह रही हो देवकी तेरा दिमाग तो सही है.

देवकी - आरी पागल मए तो पूनम क लिए कह रही थी देख तेरे पास hi रहेगी जिंदगी भर और अगर पूनम और देवा की शादी हो जाती है तो दोनों जिंदगी भर तेरा ख्याल रखेंगे. और फिर देवा जैसा गबरू जवान, इतना सुन्दर सुशील , मेहनती और शरीफ लड़का तुझे कहा मिलेगा.

पद्मा - तुम कह तो सही रही हो मए भी कुछ दिनों से इसी बारे में सोच रही थी.

देवकी – तू सोचती रह जाएगी और देवा की माँ उसकी शादी कही और लगा देगी. तू ठहर जा, मए आयी हु तो इस देवा की माँ से बात कर के जोगी. कल hi बात कर लगी मए .

पद्मा – जैसा तुझे सही लगे वैसे मुझे कोई एतराज नहीं है. देवा तो मुझे भी बहोत पसंद है.

उधर पूनम भी ये सब बाते सुन रही थी और मन hi मन बेहद खुश हो जाती है. के उसका प्यार उसे मिलने वाला है.

यहाँ देवा जैसे hi अपने खेत पंहुचा के तभी ज्योति ठाकुर की कार आ के देवा के पास रूकती है.

जत – ा सुनो, तुम्हारा नाम hi देवा है न

देवा – है पर तुम ये क्यों पूछ रही हो

जत – क्यों क तेरे दिन पूरे हो चुके है. पहले मुझसे पन्गा लिया फिर भाई से और अब तो तुमने हमारे बाप से ठाकुर दुर्जन सिंह से भी पन्गा ले लिया है. अब तेरा ये चेहरा ज्यादा दिन नहीं दिखेगा.

देवा – तुम एक लड़की हो अगर इतनी hi बात तेरे भाई ने कर दी होती तो वो और कुछ कहने क लायक नहीं रहता.

जत – तेरी इतनी हिम्मत मेरे भाई के बारे में ऐसा बोलै ? तू तो गया देवा, और तुझे मेरे लड़की होने की चिंता करने की जरुरत नहीं है. वक़्त आने पे मए दिखा दूगी तुझे भी. वैसे यहाँ से 3 कम दूर हमारा फार्म हाउस है. आज शाम तक मए वही हु अपनी सहेलियों के साथ अगर मर्दानगी अजमानी हो तो आ जाना मए भी देखु कितना बड़ा मर्द है तू. उस दिन तो तेरे से मेरी कार का एक पहिया नहीं उठ रहा था.

देवा – वक़्त बदलते वक़्त नहीं लगता उस दिन और आज के दिन में बहोत फर्क है . तैयार रहना इस मर्द की मर्दानगी देखने के लिए

ज्योति ठाकुर एक मजाक उड़ने वाले अंदाज़ में देवा को देखती है और आगे निकल जाती है .

देवा अपने खेत में जा कर व्यस्त हो जाता है. दिन में उसे पूनम आती हुई दिखती है तो देवा उसकी तरफ बाद जाता है जब दोनों की नजर मिलती है तो देवा उसे कुछ आगे जाने का इशारा करता है जहा पे देवा का कमरा था पूनम उस तरफ जाती है तो देवा भी थोड़ा सा घूम के उस तरफ जाता है और देवा उसे वही पे अपने कमरे के पीछे खुले में बैठा देता हे.

देवा – कैसी हो पूनम

पूनम - मए तो ठीक हु आप कैसे है

देवा - बस जी रहे किसी के इंतजार में

पूनम नजरे नीचे करके – किस का इंतजार है आपको ?

देवा थोड़ा पूनम की तरफ बाद कर उसका हाथ पकड़ लेता है तो पूनम काँप उठती है उसकी हथेलिया पसीने से भीग जाती है और उसके होठ कंपनी लगते है.

देवा - क्या हुआ पूनम तुम ऐसे क्यों काँप गयी मैने तुम्हारा हाथ पकड़ के गलती की क्या?

पूनम – नहीं , पर आज पहली बार किसी ने मुझे छुआ है तो अजीब सा लगा मुझे.

देवा – पूनम तुम बेहद खूबसूरत हो बिलकुल चाँद की तरह और मए चाहता हु क इस चाँद की चांदनी से मेरी दुनिया जगमगा जाये. क्या अपने दिल में मुझे थोड़ी सी जगह डौगी

पूनम – इस दिल में तो सिर्फ आप hi है जब से आपको देखा है . आप थोड़ी सी जगह की बात कर रहे है. सच ये है के अब इस दिल में आप के आलावा किसी और के लिए जगह hi नहीं है सिर्फ आप hi है मेरे दिल में बस.

देवा - -ओह्ह पूनम तूने तो मेरी जिंदगी में खुशिया भर दी ये कह कर .

पूनम - नहीं देवा, आपने अपने दिल में जगह दे कर मेरी इज्जत बड़ाई है. पर कभी मेरा साथ तो नहीं छोड़ेगे न

देवा - मरते डैम तक नहीं. लेकिन एक बात का वादा करो के अगर मए कही चला गया तो तुम मेरा इंतजार करोगी.

पूनम देवा के होठो पे अपना हाथ रख देती है - ऐसी बात मत करो मुझे छोड़ के कही मत जाना वार्ना मए जी नहीं पाउगी.

देवा उसका हाथ चुम के - नहीं पूनम मए कही नहीं जाउगा तुम्हे छोड़ के लेकिन कुछ दिनों बाद मुझे कही जाना तो है अभी मए बता नहीं सकता कहा लेकिन जाना पड़ेगा मुझे पर मेरा वादा है मए वापस जरूर आउगा और फिर कही नहीं जाउगा.

पूनम - ठीक है मए इंतजार करुँगी. पर मुझे धोखा मत देना.

देवा पूनम को अपने सीने से लगा लेता है - धोखा और तुम्हे?

भला कोई अपनी सांसो को धोखा देता है क्या तुम तो मेरी जिंदगी बन चुकी हो .

पूजनम - तो ले चलो न अपने घर

देवा – अभी उसमे समय है पूनम. लेकिन ये याद रखना के मेरी दुल्हन तो तुम hi बनोगी.

इतना कह कर देवा पूनम का चेहरा उठा के अपने होठ उसके होठो की तरफ बढ़ाता है के पूनम शर्मा के अपना चेहरा घुमा लेती है

पूनम – खाना खाया आपने ?

देवा - अभी नहीं बस थोड़ी देर में भाभी ले आएगी तो खा लगा

पूनम - मए भी कितनी बुद्धू हु मुझे पता होता तो मए hi ले आती.

देवा - कोई बात नहीं कल ले आना

तभी पूनम को दूर से भाभी आती हुई दिखती है .

पूनम – देवा मए चलती हु अब . भाभी आ रही है.

देवा – रुको न भाभी आती है तो आये उनसे कैसा दर

पूनम - दर नहीं देवा मुझे शर्म आयरगी न भाभी के सामने. अभी मए जाती हु फिर ाउगि और है कल शायद आपको एक खुशखबरी भी मिलेगी घर पे

देवा छेड़ते हुए – पूनम अभी तो हमने कुछ किया नहीं तो खुशखबरी इतनी जल्दी कैसे ?

पूनम - धत्त बेशरम वो वाली नहीं. और जो मिलेगी तो आप खुद समझ जायेगे.

और फिर पूनम घूम के दूसरे रस्ते से निकल जाती है. जिससे के उसे भाभी न देख पाए.

देवा भी अपने काम में लग जाता है थोड़ी देर में दिया भी आ जाती है. और देवा को खाने के लिए आवाज़ लगाती है.

देवा हाथ मुँह धो कर आता है कमरे में और खाना खाने बैठ जाता है तो दिया कमरे का दरवाजा लगा के देवा के सामने आ जाती है .

देवा भी दिया को खींच के गॉड में बिठा लेता है और उसके चुके मसलने लगता है. साथ hi उसके गले को चाटने लगता है दिया सिसकारियां भरने लगती है.

दिया - sssssssssssssseeeeeeeeeee देवा मत कर न अभी. अगर मूड बन गया तो ?

देवा – वही तो बना रहा हु भाभी

दिया नहीं देवा अभी यहाँ नहीं तू जल्दी से खाना खा ले घर पे माँ बाबूजी भी बस पहुंचने वाले होंगे. रात को मेरे कमरे में आ कर जो करना हो कर लेना. अभी पेट भर के खाना खा ले रात को म्हणत करवाउंगी खुद तुझसे

देवा - भाभी तुम hi खिला दो न

फिर दिया अपने हाथो से देवा को खाना खिलाती है देवा भी दिया को खिलता है जब दोनों का खाना हो जाता है तो देवा फिर दिया को वही पड़ी खाट पे लिटा देता है अपने साथ. और उसकी कमर पे टांग रख कर उसकी गांड मसलने लगता है साथ hi उसे चूमते हुए उसकी चूचिया भी मसता है दिया भी देवा को थोड़ी देर तक चूमती है और फिर दिया उइठ के बैठ जाती है.

देवा – क्या हुआ भाभी ?

दिया - देवा मुझे जाना होगा बहोत देर हो गयी है. शाम को जल्दी आना

देवा – शाम को आने में थोड़ा वक़्त लगेगा

दिया - क्यों?

देवा – आकर बताउगा अभी तुम घर जाओ मए आ जाउगा.

फिर दिया चली जाती है और देवा भी अपने काम की देखरेख में लग जाता है और फिर वो अपना ट्रेक्टर निकल के चल पड़ता है ज्योति ठाकुर के फार्म हाउस की तरफ

जैसे hi देवा पहुँचता है देखता है के ज्योति ठाकुर बहार hi अपनी सहेलियों के साथ बैठी थी कुर्सियों पे

ज्योति ठाकुर - आ गए देवा मुझे तो उम्मीद hi नहीं थी के तू आएगा और अब आ गया है तो यहाँ से जिन्दा जायेगा नहीं तेरी खबर मए अपने नौकरो से कह कर तेरे घर भिजवा दूगी. ताकि वो जंगल से तेरी लाश के टुकड़े बीन ले

देवा - वो तो अभी पता चल जायेगा कौन जिन्दा रहेगा कौन मरेगा. लेकिन एक बात मेरी भी सुन लो ज्योति ठाकुर. अगर मए बच गया तो इस देवा की रंडी बनेगी तू. तेरी छूट का उद्घाटन मए hi करुगा. और तुझे पेट से भी करुगा. तू मेरे hi बच्चो की माँ बनेगी.

जत – devaaaaaaaaaaaaaaaa होश में बात कर

देवा मुस्कराते हुए - क्या हुआ इतना hi डैम है के मेरी एक हुंकार से hi पेशाब निकल गया . अपने आदमियों की मर्दानगी पे भरोसा नहीं रहा क्या तुम्हे?

अगर अपने आदमियों की ताक़त पे भरोसा है तो मेरी शर्त मंजूर कर.

ज्योति थोड़ी देर सोचती है और फिर

जत – देवा तूने जो बात कही है उसके बाद तूने जिन्दा रहने का हक़ खो दिया है. अब तो सच मच तू मरेगा और अब तेरी लाश भी तेरे घरवालों को नहीं मिलेगी उसे मेरे शिकारी कुत्ते खायेगे.

देवा अपनी कमर पे हाथ रख कर – भाषण बंद कर ये बोल यहाँ क्यों बुलाया है?

मए ऊपर कड़ी रहूगी और तुझे वह से देखूँगी हर जगह तू मेरी नजर में रहेगा और तेरे हर कदम पे मेरे गुलाम और मेरे कुत्ते खड़े मिलेंगे जो तुझे नोच डालेंगे फिर भी तू हम तक पहुंच गया तो हम तेरे गुलाम

देवा - आआआआह क्या बात है मजा आ गया आज तो तेरी छूट फाड़ के जाउगा ज्योति ठाकुर.

जत – जबान को लगाम दे देवा वार्ना अभी तलवार से काट डालूँगी तेरी जबान

देवा – चल जा अंदर मए आता हु और है बिस्तर सजा के रखना क्यों की ये देवा आज तेरे ऊपर चढ़ेगा. और तुझे कालो से फूल बनाएगा चल जा

ज्योति ठाकुर उसे घूरती हुई अंदर चली जाती है. ज्योति के अंदर जाने के बाद देवा अपने चारो तरफ देखता है तो वह 5-7 लोग लाठिया लिए खड़े थे बाकि उसे कोई नहीं दीखता लेकिन वो लोग अपनी जगह पे खड़े hi थे किसी ने कोई हमला नहीं किया. सब hi लोग पहलवान टाइप के थे जो सिर्फ धोती में hi थे. उनका शरीर तेल की मालिश से चमक रहा था. तभी उसे ज्योति ठाकुर अपने फार्म हाउस की चाट पे नजर आयी देवा ने उसे स्माइल दी और

देवा ने एक कदम आगे बढ़ाया hi था के एक लाठी सनसनाती हुई आयी और देवा के पैरो में लगी. देवा थोड़ा लड़खड़ाया लेकिन गिरा नहीं. तभी उसके ऊपर एक डैम से 6 लोगो ने लाठियों से वॉर किया तो देवा ने अपने दोनों हाथ अपने सर के ऊपर किये और सब लाठियों के वॉर अपने हाथो पे झेले और दोनों हाथ मिला के उसने झटका मारा तो 6 क6 लोग उड़ते हुए दूर जा गिरे. तभी देवा ने पीछे देखा तो उस पे अगला वॉर हो चुक्का था उसने वो लाठी भी अपने हाथ से रोकी और लठैत के पेट में hi घुसा दी और उसी के डैम से देवा ने लठैत को दूर फेंका अब देवा के हाथ में लाठी थी जो भी उसके करीब आता देवा की पंखे क जैसी तेज चल रही लाठी उस के बदन के किसी न किसी हिस्से पे पद जाती थोड़ी hi देर में किसी का सर फटा था तो किसी के पैर टूटे तो किसी का हाथ कुल मिला के बहार का मैदान साफ़ हो गया जिसे देख के ज्योति ठाकुर आग बबूला हो गयी . देवा ने उसे फिर देखा और आँख मरी और अंदर को जाने लगा तो ज्योति ठाकुर भी अंदर वाले हिस्से में आगयी देखने की अब देवा कैसे बचता है.

देवा ने कदम अंदर रखा hi था क एक गोली तेजी से उसके कान के पास से गुजर गयी देवा झटके से पीछे हो गया. और दीवार के साइड में हो गया

तभी उसे फ़कीर बाबा की आवाज़ सुनाई दी

फब – देवा तेरे पास शक्तियों की कमी नहीं उनका इस्तेमाल कर ये समय है तेरी शक्ति परिक्षण का ये लोग तो मामूली है इन सब को तू चुटकियो में उदा सकता है अपने दिमाग का इस्तेमाल कर देवा. तुझे जो मंत्र मैने दिया था उसे याद कर के जो चाहेगा वासे hi होगा . देवा इतना सुनते hi मन में मन्त्रको दोहराता है और रूम में दोनों हाथ उठा के आ गया उसे हाथ ऊपर उठाये देख एक एक कर के 5 लोग बहार आये सब के हाथ में बंदूके या मोज़र थे.

देवा – भाई लोग मुझे मत मारो जो कहोगे करुगा.

ऊपर से ज्योति ठाकुर – क्यों देवा निकल गयी साड़ी हवा अभी तो मए बहोत ऊपर हु तू तो वही ढेर हो गया. ा तुम लोग मार डालो इसे

इतना सुनते hi एक आदमी ने देवा की कनपटी पे अपना मोज़र लगाया और जैसे hi गोली चली देवा फुर्ती से नीचे झुका और उसका मोज़र छीन के उसी पे फायर कर दिया. ये देख के बाकि सबने अपने अपने जगह से साइड में छलांग लगा दी देवा वही खड़ा रहा चौकन्ना हो कर. उसने छुपने की कोई कोशिश नहीं की. बस एक हलकी सी आहात हुई देवा के पीछे देवा ने सामने के शीशे में देखा के एक आदमी ने हल्का सा सर बहार निकला है देवा ने बिना मुड़े पीछे फिर किया और उस आदमी की खोपड़ी भी उड़ गयी जब देवा फायर कर रहा था के तभी उसकी बायीं तरफ वाले ने भी देवा पे फायर मारा देवा अपनी जगह से बस हल्का सा सरक गया गोली देवा क करीब से निकल गयी देवा ने उसे भी शूट किया तो गोली उसकी दोनों आँखों के बीच से निकल के तीसरी आँख बना गयी .

बाकि बचे दो लोग जो देवा की दोनों तरफ छुपे हुए देवा को देख रहे थे उन दोनों ने एक दूसरे को इशारो में कुछ कहा और देवा के सामने आ गए और उस पे अपनी गन तान दी

ा1 – हम दो है तू एक तेरे हाथ में मोज़र भी एक हम दोनों में से कोई एक मरेगा लेकिन दूसरे की गोली से तू नहीं बचेगा. इतना कह कर उसने अपने साथी को इशारा किया और दोनों ने एक साथ देवा पे गोली चलाई देवा ने वो इशारा देख लिया था पर उसने किसी पे कोई गोली नहीं चलायी. जैसे hi फायर हुआ देवा अपनी जगह पे सिर्फ बैठ गया और खेल ख़तम उन दोनों की hi गोली एक दूजे को लगी. देवा मुस्कराते हुए उठा और फिर ऊपर देखा ज्योति ठाकुर के माथे पे पसीना आगया tha.deva ने दौड़ के ऊपर जाने वाली सीढ़ियों पे छलांग लगायी और दौड़ता हुआ ऊपर पंहुचा और वह ज्योति ठाकुर अपनी सहेलियों के साथ कड़ी थी. लेकिन उसके हाथ में तलवार थी अब.

जत – देवा तूने सबको मार डाला लेकिन अब भी तू मुझसे ुत नहीं दूर है . मए तेरे टुकड़े कर दूगी. देवा ने उसे मुस्कराते हुए देखा और पास पड़ी कुर्सी पे बैठ गया ज्योति ने उसे निश्चिन्त देखा तो उसे क्रोध आ गया उसने देवा की गार्डन पर अपनी तलवार का वॉर किया देवा एक झटके में झुका और सामने पड़े अंगूर उठा के सीधा हो गया और खाने लगा. ज्योति का वॉर खली चला गया देवा के झुकने से.

अपना वॉर खली जाते देख के ज्योति ठाकुर को गुस्सा आने लगा उसने तलवार सीढ़ी देवा के पेट में मरने चाही तो देवा एक अंगड़ाई ले कर करवट बदल के बैठ गया. तलवार सिर्फ कुर्सी को चीरती हुई निकल गयी. इससे पहले की ज्योति तलवार निकल कर अगला वॉर करती देवा ने उसकी तलवार को पकड़ के खेच लिया कुर्सी से. अब ज्योति के हाथ में तलवार का हैंडल था और देवा के हाथ में उसी तलवार का सामने का हिस्सा . ज्योति तलवार खींच रही थी पर तलवार देवा के हाथ से निकल hi नहीं रही थी.

फिर देवा ने अपना हाथ हल्का सा ढीला किया. तो तलवार निकलने लगी ज्योति वो तलवार खींचती जा रही थी और देवा के हाथ को चीरती हुई तलवार निकल रही थी . ज्योति मुस्कराने लगी तो देवा भी मुस्क्रत रहा जब तलवार पूरी निकल गयी तो ज्योति ने दुबारा वॉर किया इस बार देवा ने तलवार को पकड़ के ज्योति से छीन लिया और उसे मोड़ के दो टुकड़े कर दिए.

देवा – ज्योति ठाकुर तू मेरा खून देखना चाहती थी इसलिए तुझे ये वॉर करने दिया . वैसे तो मए ऊपर आते hi तुझे अपने नीचे लिटा सकता था तेरे हाथ में एक क्या दस तलवार भी होती तो तू मेरा कुछ नहीं उखड सकती थी . अब चल तूने मेरा खून निकला मए तेरी बुर छोड़ के तेरा खून निकल देता हु हिसाब बराबर. ज्योति ठाकुर गुस्से में देवा को थप्पड़ मरने को बढ़ती है तो देवा उसे पकड़ के वही जमीन पे लिटा देता है और उसकी साड़ी तो उठा देता और खींच के उसकी पेंटी फाड़ देता है ज्योति छटपटा रही थी देवा ने अपनी धोती से अपना लुंड निकला और ज्योति की चिकनी बुर पे रख के हल्का सा पुश किया तो ज्योति की बुर में देवा का सूपड़ा सिर्फ दो इंच तक गया और ज्योति की हालत ख़राब होने लगी aaaaaaaaahhhhhhhhhhh देवा मत कर रुक जा प्लीएएएएएएएस. देवा ने उसकी दोनों चूचियों को पाद के उसके होठो को अपने होठो में कैद कर लिया और चूसने लगा कोई 5 मिनट बाद देवा ने अपना किश तोडा.
 
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. . . . कोई 5 मिनट बाद देवा ने अपना किश तोडा.

अब आगे.

ज्योति ने नीचे देखा तो दर गयी देवा का भयंकर लुंड उसकी छूट में 2 इंच घुसा हुआ था अब भी. देवा ने ज्योति ठाकुर को मुस्करा के देखा और सीधा खड़ा हो गया उसके दोनों पैरो के बीच ज्योति ठाकुर अपनी नंगी बुर लिए पड़ी थी. और नीचे से देवा के विशाल लुंड को देख रही थी.

उसकी बाकि सहेलियों की छूट भी देवा का लुंड देख के गीली हो चुकी थी अब तक.

देवा – ज्योति ठाकुर इस लुंड से मए तुझे अभी छोड़ सकता हु. लेकिन मुझे बलात्कार पसंद नहीं है , मए तेर भाइयो के जैसा कमीना नहीं हु. तेरा घमंड तोड़ने के लिए मैने तुझे चूमा है अपने होठो से भी और अपने लुंड से भी वो यद् रखना अब चलता हु.

देवा ने अपनी धोती पूरी खोल दी और जैसे hi धोती बांधने laga.jyoti की एक सहेली आगे बड़ी और देवा का लुंड पकड़ के अपने मुँह में दाल के चूसने लगी

देवा – ो मैडम ये क्या कर रही हो? पर वो तो सुनने को तैयार hi नहीं थी और जितना हो सकता था देवा का लुंड अपने मुँह में ले के गपागप चूसने लगी. और अपनी बुर को सहलाने लगी. थोड़ी देर बाद वो झाड़ गयी तो उसने देवा का लुंड छोड़ा देवा ने उसे स्माइल दी. और धोती पहनने लगी

सहेली – अरे आपका तो हुआ hi नहीं रुक जाओ मए निकल देती हु.

देवा – मैडम ये देवा का लुंड है इतनी आसानी से नहीं झाड़ता.

सहेली - मुझे पसंद आया फिर मिलना मुझसे. मेरा नाम कावेरी है. पास वाले शहर में रहती हु.

देवा – किस्मत में होगा तो जरूर मिलेंगे.

फिर देवा धोती बाँध कर वह से निकल गया अपने घर की और लेकिन जैसे hi देवा पूनम के घर के पास पंहुचा .

देवा मन में - अरे मर गए आज तो देवकी काकी आने वाली थी खेत में अब तो इतनी देर हो गयी है बीटा देवा काकी नहीं छोड़ेगी. निकल ले कल पता लेना उसे.

और देवा चुप चाप छुपते हुए पूनम के घर को क्रॉस कर के निकल जाता है.

देवा जैसे hi घर पहुँचता है. सामने उसके बाबू जी बैठे थे . देवा जा कर उनके पैर छूटा है

दन - जीते रहो कैसे हो बीटा?

देवा - ठीक हु बाबू जी कैसा रहा आपका सफर

दन - ठीक था . तुम सुनाओ कल क्या हुआ था इस घर में

देवा – कुछ खास नहीं बाबू जी बस वो ठाकुर ने वसूली के लिए कुछ आदमी भेजे थे. पर मैने उन्हें समझा के भेज दिया अब वो लोग कभी नहीं आएंगे.

दन – ठाकुर को इतनी भी क्या जल्दी है हमने तो 6 महीने कहे थे न अभी तो टाइम है.

देवा – जी बाबू जी मैने कह दिया है उसे की टाइम पे पैसा पंहुचा दुगा. और आप भी फ़िक्र न करे मए खुद hi उसे निपटा दुगा

दन - क्या मतलब ?

देवा – अरे बाबू जी मेरा मतला मए टाइम पे खुद hi पैसे दे दुगा उसे. आप चिंता न करे, सिर्फ आराम कीजिये आप

दन - है फिर ठीक है. चाह तेरी माँ कह रही थी तुझे कुछ पहलवनै के डाव पेच सीखा दू तो कल सुबह तैयार रहना 7 बजे मए तुझे सीखना शुरू करुगा.

देवा - जी बाबू जी मए तैयार रहुगा.

फिर देवा अंदर कमरे में जाता है और लेट जाता है . तभी उसकी माँ और बहन भी आ जाती है वह. और उसका हल चल पूछती है. फिर थोड़ी देर के बाद सब लोग खाना खा के करीब 9.30 बजे अपने अपने कमरे में सोने चले जाते है.

करीब 11.00 बजे तक दिया इंतजार करती है और फिर देवा के कमरे में पहुंच जाती है जहा देवा पहले से नंगा लेता हुआ था और दिया का hi इंतजार कर रहा था. दिया के आटे hi दोनों एक दूजे में समां जाते है और देवा 2 बार दिया की तर्रेके से चुदाई करता है. रात का 1 बज गया था तभी रघु के आने की आहात होती है और दिया दरवाजा खोल के बिना रघु से कोई बात किये अपने कमरे में आती है और सो जाती है. रघु भी लड़खड़ाता हुआ आता है दिया के नाम पे कोई 10-12 गालिया देता है और वही लुढ़क जाता है जमीन पर और बेहोश हो जाता है.

दिया – रघु का पेण्ट उतर देती है और खुद भी नंगी हो जाती है और सो जाती है. जिससे के रघु ये समझे की उसने रात को दिया को छोड़ा था.

सुबह के 3 बजे देवा वैसे hi अपनी साधना में लग जाता है. जब उसकी साधना पूरी होती है और वो आंखे खोल कर देखता है सामने फ़कीर बाबा का मुस्कराता हुआ चेहरा नजर आता है.

फब - देवा तेरी साधना बहोत अच्छी जा रही है. और तूने मेरी उम्मीद से बाद कर कामयाबी भी हासिल की है. अब तेरी शारीरिक शक्ति भी बाद चुकी है जो निरंतर साधना से अभी और कई गुना बढ़ेगी, लेकिन अभी तुझे शास्त्र विद्या भी सीखनी है. और लड़ाई के डाव पेच भी, जिस के लिए कल तुम्हरे पिता जी ने कहा था. तू उनसे तो आज से hi सीखेगा लेकिन उस के बाद तू जंगल में उत्तर दिशा में जाना वह तुझे कोई मिलेगा और वो जो भी चीज़ देगा वो ले के यहाँ आ जाना और कल से यहाँ पे तू उनका अभ्यास करेगा.

देवा – लेकिन बाबा मए यहाँ कैसे अब्यास करुगा. यहाँ तो जगह भी काम है और मुझे कोई भी देख सकता है.

फ़कीर बाबा अपने हाथ से इशारा करता है और उसी कमरे में एक कोने से जमीन खसक जाती है फ़कीर बाबा की आंखे बंद थी. और देवा ध्यान से उन्हें देख रहा था. थोड़ी डेरे के बाद फ़कीर बाबा अपनी आँखे खोलते है.

देवा अब तू यहाँ से नीचे जा और अपने अभयस की जगह देख ले तेरे शिव अभी कोई और वह नहीं जा सकता. जो चीज़ तुझे जंगल में मिलेगी उसे तू यही लेकर रखना और उसके बाद जो भी हो हैरान मत होना . खतरनाक लड़ाई के लिए जिस विद्या की जरुरत होगी वो तुझे कल मिलेगी. जब तू साधना में बैठेगा . ध्यान रखना आज तुझे उस जंगल से जो भी मिले उसे मामूली मत समझना और उस चीज़ को यही लेकर रखना

अब मए चलता हु.

देवा उन्हें प्रणाम करता है फ़कीर बाबा चले गए . फिर देवा भी घर जा के तैयार होता है और ठीक 7 बजे अपने बाबू जी के सामने खड़ा होता है.

देवा आज से तेरी लड़ने की शिक्षा शुरू होगी जो भी मए बताऊ धायण से सीखना .

उसके बाद दन देवा को पहलवानी के डाव सीखने लगता है. और करीब दो घंटे की कड़ी म्हणत के बाद वो लोग. रुकते है. और कल फिर अभ्यास के लिए कह कर घर आ जाते है. जहा उनका नाश्ता इंतजार कर रहा था. अभी देवा ने नाश्ता किया hi था के देवकी आ जाती है.

देवा देवकी को देख के मुस्क्रत देता है देवकी भी मुस्करा के देवा के करीब जाती है .

देवकी – क्यों रे कहा था कल शाम को मैने कितना इंतजार किया तेरा. वो काकी किसी से काम था तो वह जाना पड़ा. आज आजाना शाम को . देवकी नहीं आज शाम को नहीं दिन में hi ाउगि . बहोत खुजली हो रही है देवा. तभी सावित्री आ जाती है . और देवा उठ के चला जाता है वह से .

सावित्री – अरे देवकी बहन कैसी हो?

देवकी - ठीक हु तुम कैसी हो? और कैसा रहा कल का सफर.

सावित्री - ठीक रहा. पर घर से दूर कहा मन लगता है. वह थी तो भी यही की चिंता लगी हुई थी. देवा तो खेतो में चला जाता है. रघु का तो तुम जानती hi हो. तो पीछे बहु अकेली पद जाती है न. आखिर यहाँ उस के साथ भी तो कोई होना चाहिए . इसलिए मए कल रत को hi आ गयी थी.

देवा – माँ मए खेत जा रहा हु.

सावित्री - ठीक है बीटा.

देवकी - ये सही कहा बहु तो अकेली पद hi जाती है. तू देवा की शादी क्यों नहीं कर देती. ये जिम्मेदारी भी पूरी हो जाएगी.

सावित्री - है चाहती तो मए भी हु. पर अभी पायल का रिश्ता तो मिल जाये उस के बाद देवा की भी करनी hi है.

देवकी – अरे मए वही तो कहने आयी हु . तेरी पायल मुझे बहोत पसंद है. मए अपने बेटे रामु के लिए उसका हाथ मांगने आयी हु. मेरे रामु को तो तुम जानती hi हो न. चाहो तो उसकी पूछताछ करा लो किसी से भी कह कर.

सावित्री – अरे देवकी बहन कैसी बाते करती है. भला अपने रामु की जांचपड़ताल भी मुझे बहार वालो से करवानी पड़ेगी क्या. ये तो बहोत खहसही की बात है मए आज hi पायल की बापू से बात करती हु .

देवकी – तू तो जानती hi है. रामु के बापू को जब से लकवा लगा है सारे काम, खेतो की जिम्मेदारी सब रामु पे है पूरा घर वो hi तो संभालता है मए तो चाहती हु पायल जल्दी से मेरे घर बहु बन के आये और आकर घर को संभल ले.

सावित्री – ये तो बहोत अच्छी बात है. लेकिन इस बारे में मुझे देवा के बापू से और बाकि सबसे भी बात करनी होगी और मए समझती हु कोई भी इंकार नहीं करेगा. भगवन ने चाहा तो सब अच्छा hi होगा.

देवकी - एक और बात कहनी है तुमसे

सावित्री – है कहो न

देवकी - जिस तरह रामु के लिए मुझे पायल भ गयी है उसी तरह देवा के लिए भी मेरी नजर में लड़की है अगर तू कहे तो . . .

सावित्री - क्या बात है तू तो आज सुबह सुबह इस घर में खुशियों की पूरी दुनिया hi ले आयी. एक hi दिन में मेरे दोनों बच्चो का घर बसा देगी क्या.

देवकी - सावित्री बहन बच्चो का घर बस जाये और हम लोगो को क्या चाहिए.

सावित्री – ये तो सही बात है वैसे वो लड़की कौन है जिसे तू मेरी बहु बनाना चाहती है?

देवकी - तुम भी उन लोगो को अच्छे से जानती हो लड़की भी तेरी देखि हुई है. लेकिन वो दहेज़ के नाम पे ज्यादा कुछ नहीं दे पाएंगे क्यों की वो हैसियत में तुमसे काम है.

सावित्री – अरे देवकी बस इतना hi जाना है क्या हमें तूने? हमें कुछ नहीं चाहिए बस लड़की घर सँभालने वाली हो और मेरे देवा को पसंद आणि चाहिए. मुझे और कुछ नहीं चाहिए. अब बता कौन है वो लड़की और उसके पिता क्या करते है ?

देवकी - असल में उसके पिता इस दुनिया में नहीं है. और वो लड़की ...

सावित्री - देवकी एक मिनट रुक जा. कुछ मत बोलना इससे आगे.

देवकी तो सावित्री का मुँह देखने लगती है. और सावित्री एक डैम खामोश उसे देख रही थी. फिर सावित्री उठकर अंदर चली जाती है. देवकी का चेहरा उतर जाता है. के शायद सावित्री से बात करने में उसने थोड़ी जल्दी कर दी. तभी सावित्री और उसकी बहु दोनों बहार आती है सावित्री दिया के हाथ से प्लेट ले कर देवकी के मुँह में मिठाई दाल देती है.

सावित्री – देवकी बहन मुझे तेरे दोनों रिश्ते मंजूर है ये मिठाई इस बात के लिए है क तूने सुबह सुबह मुझे शुभ समाचार दिया. पर है अभी मुझे दोनों रिश्तो के लिए घर पे बात करनी है इसलिए मए तुमसे समय मांग रही हु.

देवकी - पर तुमने लड़की के बारे में तो सुना hi नहीं फिर मंजूर कैसे कर लिया

सावित्री – इतनी दुनिया मैने भी देखि है देवकी. और है पद्मा को मेरी तरफ से बधाई देना मत भूलना क्यों की मुझे पूनम जैसी hi बहु चाहिए थी. मए तो खुद पद्मा से पूनम मांगने hi वाली थी . बस पायल का रिश्ता होने तक रुकी हुई थी पर आज जब तू खुद hi पपौणम की बात निकल बैठी तो मए क्यों चुकती भला . ये कह कर वो देवकी को गले से लगा लेती है. दिया भी उन्हें बधाई देती और दिया सच में दिल से खुश भी थी इस रिश्ते से क्यों की वो खुद भी चाहती थी क देवा का घर बस जाये.

इधर देवा इन सब बातो से बेखबर जंगल की तरफ चला जा रहा था. उत्तर दिशा में पर काफी दूर आने पे भी उसे कोई नजर नहीं आ रहा था . एक बार तो देवा के मन में विचार आया के अंगूठी के जरिये फ़कीर बाबा को बुला लू फिर उसने सोचा के अगर बाबा ने कहा है तो मुझे कोई तो मिलेगा hi मुझे बस आगे बढ़ना चाहिए बिना कुछ सोचे. करीब एक घंटे तक बिना रुके जंगल में आगे बढ़ने के बाद अचानक देवा को एक झोपडी नजर आयी. तो देवा दौड़ कर उस झोपडी तक पहुंच गया. और वह पहुंच कर उसने देखा के झोपडी का दरवाजा बंद है. तो उसने दरवाजा खटखटाया. तभी अंदर से आवाज आयी

……अंदर आ जाओ देवा मए तुम्हरा hi इंतजार कर रहा हु.

देवा चौक गया के ये कौन है और इसे मेरा नाम कैसे पता चला. चलो अंदर चल कर पूछते है. देवा ने दरवाजा खोला और जैसे hi कदम अंदर रखा.

देवा किसी गहरी खाई में गिरने लगा वो जोर से चीख पड़ा लेकिन उसकी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं था. देवा तेजी से नीचे की तरफ गिरा जा रहा ठावो बस हवा में हाथ पाँव मार रहा था पर उसे कोई सहर नहीं मिल रहा था जिसे पकड़ कर वो खुद को नीचे गिरने से रोक सके. अचानक देवा के नीचे गिरने की स्पीड धीरे धीरे काम होने लगी. और वह ऊपर जंगल में देवा जिस झोपडी में अंदर गया था अब वह कुछ भी नहीं था. देवा लगातार नीचे की और जा रहा था अचानक उसके पाँव जमीन पे पड़े और वो सुरक्षित जमीन पे खड़ा हो गया.

अपने चारो तरफ देखा तो वो एक खुली जगह पे था जहा चारो तरफ सुनहरी धुप थी देवा के गाँव में जहा धुप से पसीने निकल रहे थे उस के विपरीत यहाँ उसे धुप बहोत अच्छी लग रही थी. पास hi बहोत खूबसूरत झरना भी बाह रहा था. देवा इन्ही सब चीज़ो को देखने में खोया हुआ था के अचानक उसे अपने पीछे से आवाज़ आती है. वह एक नौवजवान लड़का खड़ा था जो उसे देख कर मुस्क्रत रहा था. उसके चेहरे पे बहोत अनोखी चमक थी. और उसने कुछ अजीब से कपडे पहन रखे थे. हाथो और पैरो पे ऐसे रस्सी लपेटी हुई थी जैसे सांप लपेटे हो.

देवा - तुम कौन हो दोस्त

अजनबी – जब दोस्त कहा है तो फिर दोस्त hi हु मए. वैसे मेरा नाम नागार्जुन है. मए यही रहता हु. और तुम्हे भी यहाँ हमारी सहायता के लिए बुलाया गया है फ़कीर बाबा के द्वारा. ये ईश्वर का रचा गया सारा खेल है.

देवा – मए कुछ समझ नहीं पा रहा हु

नागार्जुन – सब समझ जाओगे लेकिन अभी कुछ समय रुक जाओ क्यों की अभी न तुम समझने की स्थिति में हो न hi हमारी मदद करने की स्थिति में. इसलिए मए तुम्हे अभी कुछ नहीं बता पाउगा . वैसे भी मुझे इसका अधिकार भी नहीं है. अभी तुम ये मुझसे लो जिस के लिए तुम यहाँ ताका ए हो.

नागार्जुन देवा को एक छोटा सा संदूक देता है जो इतना छोटा था की देवा की मुट्ठी में hi आ गया .

देवा – क्या यही देने के लिए फ़कीर बाबा ने आपसे कहा था.

नागार्जुन - है देवा यही है वो चीज़

देवा – कमल है इससे मए क्या करुगा. मुझे तो लगा तुम कोई बहोत बड़ी या चमत्कारी चीज़ डोज. देवा उस संदूक को उलट पलट कर देखने लगा जिसमे कुछ खास नहीं दिखा उसे.

नागार्जुन - देवा कुछ बाते वक़्त पर छोड़ दो सब पता चल जायेगा तुम्हे

देवा – अच्छा ये तो बता दो ये कौन सी जगह है. मुझे ये जानी पहचानी लग रह है.

नागार्जुन - तुम यहाँ के योद्धा रह चुके हो पिछले जनम में. और ये नाग लोक है देवा.

देवा - क्या नाग लोक, योद्धा ? मुझे तो कुछ याद hi नहीं

नागार्जुन मैने कहा न वक़्त आने पे सब समझ जाओगे. अब मए चलता हु

देवा – लेकिन मए कहा जाऊ.

नागार्जुन - देवा तुम्हारे अंदर असीम शक्तिया है उनका उपयोग करो. अपनी आँखे बंद कर के तुम जहा चाहो एक पल में पहुंच सकते हो बस तुम्हारे सोचने की देर है.

देवा – ये कैसे हो सकता है. मए तो एक साधारण इंसाने हु

देवा – फ़कीर बाबा की दी हुई शक्तिया तुम्हारे पास है . और तुम रोज अपनी शक्तियों को जगा भी रहे हो तुम सब कर सकते हो. यकीन न हो तो कर के देख लो. क्यों की अब तुम साधारण नहीं रहे.

इतना कह कर नागार्जुन गायब हो जाता है. और देवा को अकेले सोचते हुए छोड़ जाता है.

देवा भी थोड़ी देर सोचता है और अपनी आँखे बंद कर के उसी जगह का ध्यान करता है जहा कल बाबा ले गए थे यानि उस के खेत वाले कमरे के तहखाने में. देवा जैसे hi आँखे खोलता है खुद को अपने खेत वाले कमरे के तहखाने में पता hae.Deva मन में . . बाबा ने कहा था के यहाँ आकर इसे रखना है. चाओ रख देता हु और बाबा से पूछुंगा क इसका करना क्या है.

देव उस छोटे से संदूक को वही कोने में रख देता है. जमीन पे रखते hi उस संदूक का आकर बढ़ने लगता है और वो करीब 4 फुट ऊँचा और 5 फुट चौड़ा संदूक बन जाता है. देवा तो बस देखता hi रह गया. उसे यकीन hi नहीं आरहा था के इसी संदूक को अभी वो अपनी मुट्ठी में दबा के यहाँ लाया है. अब वो संदूक इतना भरी लग रहा था के जिसे हिलना तक किसी के बस की बात नहीं.

देवा ने डरते हुए उस संदूक का ढक्कन उठाया तो अंदर से हवका एक झोंका उसे छूटे हुए निकला और थोड़ा धुवा भी निकला उस संदूक से देवा ने अपने हाथ से धुए को इधर उधर किया और अंदर देखा तो उसमे कई तरह के हथियार भरे हुए थे. एक से बढ़कर एक तलवारे भले , चाकू , देवा ने जब उन्हें साइड क्या तो हैरान रह गया अंदर तो सोने के सिक्को से भरा हुआ था संदूक. और उसमे इतना सोना था के अगर देवा चाहे तो अपने गाँव जैसे 500 गाँव खरीद सकता था या शायद उसे भी कही ज्यादा सोना था संदूक में.

देवा वो सब देख कर न चाहते हुए भी हैरान और परेशां हुआ जा रहा था. उसने वो संदूक बंद कर दिया बिना उसमे से कुछ निकले. जैसे hi संदूक का ढक्कन बंद हुआ देवा फिर चौक गया क्यों की सामने एक बेहद खूबसूरत लड़की कड़ी मुस्क्रत रही थी.

देवा – अरे कौन हो तुम और इस कमरे में कैसे आयी हो

लड़की – मए तो आपकी गुलाम हु मालिक कहिये मेरे लिए क्या हुकुम है.

देवा - अरे कहे का मालिक क्या कह रही हो तुम सबसे पहले अपने बारे में बताओ

लड़की - जो हुकुम मालिक . मए इन शास्त्रों की और इस सोने की रक्षक हु. ये जिस के पास भी रहेगा मए उसी की गुलाम हु. सदियों से इनका इस्तेमाल नहीं हुआ है . आज ये आपको सौपी गयी है और आपने hi इस सांडोक का ढक्कन खोल कर मुझे आज़ाद किया है. इसलिए आज से मए आपकी गुल्म हु.

देवा – देखो अभी मए कुछ समझ नहीं पा रहा हु क्या तुम कुछ बता सकती हो.

लड़की नहीं मालिक मए कुछ नहीं बता सकती, है इतना जरूर जानती हु क कल सुबह की पहली किरण से पहले आप सब जान जायेगे, तब आपको मेरी और इन सब चीज़ो की जरुरत पड़ेगी.

देवा – चाहा ठीक है. मए अब जा रहा हु. तुम्हे कुछ खाना हो तो मेरे साथ चलो या कहो तो यही पे ले औ.

लड़की मुस्कराते हुए नहीं मालिक मुझे इन चीज़ो की जरुरत नहीं पड़ती. ठीक है फिर मए जाता हु

. . . अरे है तुम्हारा नाम क्या है .

लड़की - मेरा नाम शलाका है मालिक.

देवा - ठीक आहे अब मए चलता हु और है मेरा नाम देवा है मालिक नहीं आज से तुम मुझे मेरे नाम से hi बुलाओगी समझी.

शलाका – जी बिलकुल लेकिन जरा रुकिए देवा

देवा – अब क्या हुआ?
 
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