Fantasy इच्छाधारी देव - Page 43 - SexBaba
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Fantasy इच्छाधारी देव

अपडेट – 246

Uuuuuuffffffffffffitna तगड़ा धक्का आआआआह्ह्ह्हह्ह मार hi डालेगा क्याआ

Sssssseeeeeeeeeeaaaaaaaaahhhhhh देवऔउउउउउउठ्हहहहहह….

देवा ने अब बिना रुके तेज धक्के मरने चालू कर दिए जिससे सावित्री की बड़ी बड़ी चूचिया तेजी से ऊपर नीचे हो कर हिलने लगी और देवा उन्हें देखते हुए सावित्री की बुर में अपना तगड़ा लुंड पेलने लगा.

देवा 10 मिनट सावित्री को पूरी तेजी से छोड़ता rah….aur चुदाई की मस्ती में सावित्री झड़ने लगी…

Savitri-aahh...mmaaiinnn...aaii...oohh...Deva...yeesss...yess.. aahhh...aaaiiiii...

और सावित्री झड़ने लगी और चुदाई की आवाज़े बदलने लगी

Aaahh…ahhh..yyeess…..uumm…fffuuuucchhh..ffuucchhh…ffuuccchh……yeeehh..yeeehh..aaahhh..oohh…aahhh..ahhh…. aahhh..ahahh….aaahhh

ऐसी आवाज़ों के साथ सावित्री झाड़ gai...uske झड़ते hi देवा ने लुंड निकल लिया और खड़ा हो कर सावित्री की छूट देखने लगा.....

सावित्री- aahh..Deva...kya हुआ...??

देवा- आज तुम्हारी छूट का उद्घाटन हो गया.. मेरे लुंड से.

सावित्री- hmm..par रात अभी बाकि है देवा.. और तेरा तो अब भी पूरा खड़ा है न.

देवा- जनता hu...maa चलो अब पलट jao...tumhe पलटा कर छोड़ता हु....

सावित्री तुरंत पलट कर बीएड पर कुटिया बन gai...aur देवा ने पीछे से लुंड को अंदर डाला और कमर पकड़ कर चुदाई सुरु कर दी...

सावित्री- aahhhh..Deva...bahut एक्सपर्ट हो छोड़ने me...aaahhh

देवा- है maa..ab बस देखते jao...tumhe कैसे- कैसे छोड़ता hu...ye lo....yeehhhhh

सावित्री- aaahhhh...aaram से Deva...ohh...oohh..aahhhh

Deva-yesss…ye.lo…yeeehhh..yeeehhh....

Savitri-aahh..ahahhhh..ahahh….yees...aur tteejj….aaahh..aur तीजज....

zooorr…sssee…aahahh…aaaiiiseee…hhhii…aahahh….zzoooorrr…ssee..

सावित्री पूरी मस्ती में आवाज़ करती हुई अपनी गांड पीछे कर- कर के देवा का लुंड ले रही thi.....aur देवा भी फुल मस्ती में सावित्री की छूट के परखच्चे उदा रहा था....

देवा- maa...lund की सवारी करोगी...

सावित्री- aaahh...ha deva...ha...karao na...aaj तो जो तू चाहेगा वो करुँगी एक अलग hi दुनिया में ले आया तू तो मुझे आज तक मेरी पूरी जिंदगी में ऐसी फीलिंग नहीं हुई मुझे देवा

देवा जल्दी से सोफे पर लेट गया और सावित्री को ऊपर आने का बोलै...

सावित्री अपनी छूट में लुंड भरते हुए देवा के ऊपर बैठ गई और देवा ने सावित्री की गांड पकड़ के उसे उछलना सुरु कर दिया....

देवा- मज़ा आया न maa...haa

सावित्री- uumm..haa deva...bahut...aahh..aahh..aahh..aaahh..

देवा- जम्प jump...yehhh..

सावित्री- ओह yes..oh yess..yess..yess..yess...

देवा- aahh...gand तो बड़ी मस्त hai...teri माँ ये भी मारनी पड़ेगी..

सावित्री- aaahh...maar lena...ohh..yess..yess..yess..aaahhh...aahh...ab तो मए पूरी तेरी हो चुकी हु

करीब 5 मिनट बाद सावित्री फिर से झड़ने लगी और चुदाई की आवाज़े रूम में गूंजने लगी....

ahhh..ahh..ttthhppp..ttthhpp..tthhpp..aahhhh..yeeess..oohh..jjooorr…ssee..…aaahhhhh…tthhpp…tthhpp…oohh…yyeess…ahahhh..main gaaiiiii...aaaahhhh...

सावित्री के झड़ने के साथ hi देवा भी झड़ने के करीब आ गया... तो देवा ने सावित्री क वापस नीचे लिटाया और पूरा लुंड बहार निकल के एक hi धक्के में वापस दाल दिया अभी सावित्री सांस भी नहीं ले पायी थी के देवा के लुंड से उसकी छूट फिर से भर गयी

लेकिन इस बार देवा रुका नहीं और पूरी ताक़त से सावित्री की छूट में लुंड डालने लगा. कोई 15-20 धक्को में hi सावित्री का पूरा चेहरा लाल हो गया और उसने देवा के कंधे बड़ी जोर से पकड़ लिए और देवा ने अपना लुंड सावित्री की बुर में पूरा अंदर तक दाल कर एक डैम रुक गया और देवा के लुंड से बहोत तेज और बहतो गधा वीर्य निकला जिसे सावित्री ने अपनी कोख में पहुँचता हुआ महसूस किया. सावित्री के चेहरे पे एक तेज रौशनी चमकी उसका पूरा बदन hi उस रौशनी में नाहा गया जिसे सवित्र महसूस नहीं कर पायी क्यों की वो तो देवा के द्वारा छोड़े जा रहे उस गाढ़े वीर्य को अपने अंदर गिरता महसु करने में मगन थी.

कोई 8-10 तेज पिचकारियां छोड़ने के बाद देवा का शरीर कुछ ढीला हुआ तो सावित्री ने भी देवा के जिसमे से अपनी पकड़ को ढीला किया. दोनों की नजरे मिली तो देवा ने सावित्री के होठो पे चुम लिया. और उसके ऊपर से उठने लगा धीरे धीरे जैसे जैसे देवा का लुंड सावित्री की छूट से बहार आ रहा था सावित्री को एक अलग hi आनंद मिल रहा था. फिर देवा साइड में होकर लेट गया और गहरी साँसे लेने लगा.

कुछ देर बाद सावित्री देवा की तरफ पलट गयी और उसके सीने पे हाथ फिरते हुए उसके सीने को चुम लिया.

सावित्री - देवा ये हमने क्या कर दिया शायद ये गलत हुआ हमारे बीच. हमें ये नहीं करना चाहिए था.

देवा - नहीं माँ जो हुआ वो होना hi था इसके आलावा कोई चारा भी नहीं था.

सावित्री - वो तो सही है देवा लेकिन गलती मेरी भी थी मए भी बहक गयी थी. सच तो ये है के मैने तुझे और पद्मा को एक साथ देख लिया था देवा. और मए चाहती थी के पद्मा से पहले मए तुझे पाव क्यों की तू मेरा बीटा है और मए भी प्यासी थी मए मानती हु पद्मा गलत नहीं है वो कई सालो से प्यासी है तेरा हाथ पकड़ कर वो गलती नहीं कर रही है. हलाकि तू उसका होने वाला दामाद है लेकिन उसकी अपनी मजबूरिया है जिसकी वजह से मए उसे गलत तो नहीं कहुगी लेकिन मुझे उससे जलन होने लगी और मए उससे पहले तुझे पाना चाहती थी और वही हुआ . मैने तुझे उससे पहले प् hi लिया.

देवा –असल में ये एक अनुष्ठान hi था यही समझ लो. क्यों की ये सब जो हमारे बीच हुआ है वो सम्भोग नहीं नहीं था ये सब तो सिर्फ बाबू जी की जिंदगी को बचने के लिए hi हुआ है न.

सावित्री झटके से देवा की तरफ देखने लगती है उसकी आँखों से अचानक आंसू रुक गए थे.

सावित्री - ये तो तूने सही कहा मए भी कुछ देर के लिए तेरा प्यार प् कर इतनी भयंकर षड़यंत्र वाली बात तो भूल hi गयी थी.

देवा ने सावित्री को कास के अपने सीने से लगा लिया – अरे माँ जब तक मए हु बाबू जी की तरफ उठने वाली हर टेडी नजर को पहले मेरा सामना करना पड़ेगा और तेरा बीटा इतना कमजोर नहीं के उसे कोई यु hi हरा दे.

सावित्री देवा के गले से लगी हुई थी तो देवा ने शरारत से सावित्री की गांड की दरार में ऊँगली फिर दी

देवा – अब ये बताओ ये मुझे कब दे रही हो

सावित्री एक डैम देवा से दूर हो गयी और उसकी छाती में मुक्के मरने लगी

सावित्री - बदमाश पीछे से लेगा मुझे मरना चाहता है क्या एक तो इतना बड़ा घोड़े के जैसा है तेरा मए मर hi जोगी

देवा - तो क्या मुझे तुम अपनी गांड नहीं डौगी ?

सावित्री - अब तो सब कुछ तेरा hi है जो चाहे ले लो . एक बात कहु मुझे तुम्हरे साथ बहोत अच्छा लगा जिंदगी का एक नया अनुभव मिला. तुम सच में एक मर्द हो देवा. उम्मम्माह्ह्ह

देवा ने हस्ते हुए सावित्री को गले से लगा के चुम लिया और फिर अपने होठ सावित्री के होठो पे रख के चूसने लगा दोनों के बदन फिर से गर्माने लगे और अब सावित्री खुद देवा के ऊपर लेट कर देवा को तेजी से और गहराई से चूमने लगी. देवा ने भी सावित्री की चूचिया पकड़ के मरोड़नी शुरू कर दी बारिश जो रुक चुकी थी फिर से बदल गरजने लगे इधर कमरे में पलंग के ऊपर फिर से चुदाई का तूफ़ान उठने लगा उधर बहार बारिश फिर से तेज होने लगी. और दोनों hi काफी देर बरसते रहे कोई 4 बजे जाकर सावित्री को नींद आयी और देवा उठकर नहाने चला गया और फिर से नहाकर अपनी साधना में बैठ गया.
 
तो फ्रेंड्स अब है टाइम नए अपडेट का जो की बस थोड़ी hi देर में मिल जायेगा आप सबको. पिछले अपडेट से मुझे पता चला के मैने जो कुछ महीनो से अपडेट देने में देर की या जो देर मुझसे हुई चाहे वो किसी भी कारन से हो. लेकिन मैने उसी वजह से अपने बहोत से बेहतरीन और रेगुलर रीडर्स को खोया है. जिनका रिव्यु मुझे पहले हर अपडेट के बाद मिला करते थे. मए कोशिश करुगा के मेरे पुराने रीडर्स भी मुझे वापस मिले और नए लोग भी जुड़े.
 
अपडेट - 247

सुबह सावित्री की आंख खुली तो वो अपने कमरे में अपने hi बिस्तर पे एक डैम नंगी सोई हुई थी उसका बदन आज एक अनोखी ताजगी से भरा हुआ सा महसूस हो रहा था. उसने एक भरपूर अंगड़ाई ली खिड़की से आती हुई सुनहरी धुप में उसका गोरा बदन चमक उठा और उसकी गोरी चूचिया चमक उठी. रत की बाटे यद् कर के उसके चेहरे पे एक नयी नवेली दुल्हन की तरह शर्म की लाली फ़ैल गयी. उसकी छूट में भी हल्का हल्का दर्द महसूस हो रहा था. जबकि अभी वो अपने बिस्तर पे सिर्फ बैठी हुई hi थी. थोड़ी देर बाद वो उठी और बाथरूम जाने लगी तो उसकी छूट में एक तेज दर्द भरी तीस उठी सावित्री फिर से बीएड पे बैठ गयी.

सावित्री मन में - उफ़ ऐसा लग रहा है जैसे कल रत मेरी सुहागरात थी. कितना दर्द हो रहा है मेरी छूट में. जब की इसी छूट से तीन बच्चे पैदा कर चुकी हु उसके बाद भी. लेकिन मजा भी बहतो आया क्या लुंड है मेरे देवा का पूरा खोल के रख दिया अंदर तक इतनी गहराई तक तो देवा के बापू भी नहीं पहुंचे जहा तक कल देवा के लुंड ने मुझे छुआ और मेरे अंदर कोहराम मचाया.

सावित्री अपनी hi बातो पे मुस्करा दी और फिर से उठी लेकिन इस बार सावधान थी. वो लंगड़ाते हुए बाथरूम में आयी और गरम पानी चला कर फ्रेश होने लगी फिर बाथटब में गुनगुने पानी में लेट कर अपने पूरे बदन को आराम देने लगी.

इधर देवा नाश्ता कर के अपनी गाड़ी से सीधा पूनम के घर आ गया. जहा दरवाजे पे उसकी मुलाकात सुधा से हो गयी जो के नाहा चुकी थी और आंगन में hi कड़ी अपने गीले बल सूखा रही थी.

देवा पे नजर पड़ते hi सुधा मुस्करा दी.

सुधा - आइये देवर जी क्या बात है आप तो हमें भूल hi गए. न मिलते है न बात करते है. कोई गलती हो गयी क्या हम से?

देवा – अरे नहीं भाभी आप जैसी खूबसूरत औरत से भला कोई गलती हो सकती है क्या? वो तो मए hi थोड़ा व्यस्त tha.isiliye

सुधा - लो जी अब इसमें खूबसूरती कहा से आ गयी गलती तो किसी से भी हो सकती है न.

देवा – नहीं मेरी प्यारी भाभी आप से कोई गलती नहीं हुई . इतना कह कर देवा सुधा के गाल खींचता है.

सुधा गाल सहलाते हुए– उईईईईई माआआ क्या करते हो देवर जी ये कोई खींचने की चीज़ है क्या?

देवा सुधा की चूचियों को देखते हुए – सही कहा खींचना तो किसी और चीज़ को चाहिए गलती हो गयी जरा इधर आओ.

सुधा देवा की नजर से समझ गयी देवा क्या खींचना चाहता है.

सुधा - न जी रहने दो अभी अभी नाहा के आयी हु आप फिर से गन्दा कर डोज. और ये सब करना हो तो किसी दिन फुर्सत में आइये घर पे. यु आंगन में खड़े खड़े ये सब करोगे तो पूरे गाँव में बदनाम न हो जायेगे हम?

देवा – जब हम है तो क्या गम है भाभी

देवा आगे बढ़ कर सुधा का हाथ पकड़ लेता है और उसे कोने में ले जा कर उसके होठो पे अपने होठ रख देता है सुधा छटपटाने लगती है इस दर से के कोई आ न जाये लेकिन देवा अभी पूरे मूड में था और नहायी हुई सुध के बदन से उठती हुई खुशबू से वो मदहोश हुआ जा रहा था.

देवा सुधा के होठो को चूसे जा रहा था थोड़ी देर के कश्मकश के बाद सुधा भी देवा के होठो के जादू में खोने लगती है और वो भी देवा के होठो को चूसने लगती है. 2-3 मिनट तक देवा सुधा के होठ चुस्त रहता है तभी अंदर से किसी की आवाज़ सुन कर सुधा खुद को देवा से दूर करती है और अपनी उखड़ी साँसे सँभालने लगती है और तेजी से एक तरफ बढ़ जाती है देवा सुधा की मटकती गांड को देखता hi रह जाता है,

तभी वह पद्मा आ जाती है

पद्मा - अरे देवा तू कब आया आजा अंदर आ

देवा - जी अभी आया बस भाभी से बात कर रहा था.

देवा और पद्मा दोनों अंदर आ जाते है.

पद्मा - तुम बैठो मए अभी आयी

पद्मा किचन में चली जाती है तभी पूनम बहार आती है उसकी आँखों में एक खास चमक थी. वो आकर देवा के बगल में बैठ जाती है.

पूनम - बधाई हो सर जी. आखिर आपने मेरी सासु माँ को मेरी सौतन बना hi दिया कल रत.

देवा – तू न मेरी जासूसी न किया कर.

पूनम - हक़ बनता है आखिर होने वाली धर्म पत्नी हु. वैसे मैने कोई जासूसी नहीं की थी, न hi मए आपको देखने गयी थी. वो तो बस यु hi आपसे मिलने आयी थी रत में लेकिन आप टॉवल पहने माँ के कमरे की तरफ जा रहे थे. तो मैने थोड़ा सा आगे पीछे का जायजा लिया और सब समझ गयी फिर मए चुप चाप चली आयी थी. माँ ठीक तो है न?

देवा – है वो ठीक है कल जब मए आगे बढ़ने लगा . . . . . माँ को गिलटी फील हो रही थी जो की जायज भी था लेकिन फिर पहले मैने, और फिर फ़कीर बाबा ने आकर माँ को सब समजा दिया तो माँ भी शांत हुई.

पूनम - चलो अच्छा hi हुआ अब काम से काम बाबूजी के सर पे लटकती तलवार तो हैट hi गयी. एक मिनट इसका मतलब अब माँ भी हम सब के बारे में सब जानती है?

देव – है अब उन्हें भी सब पता है और सबकी असलियत भी जान गयी है.

पूनम चलो ये सबसे अच्छा हुआ. धीरे धीरे एक एक को सब पता चल रहा है एक दिन सभी हमें जान जायेगे और फिर इन सबको लेकर हम लोग नगरी की तरफ जायेगे. लेकिन सुनो अब माँ को ज्यादा परेशां न करना.

देवा – न जी मए तो नहीं करुगा लेकिन अब वो मेरे बिना कहा रह पायेगी.

पूनम देवा को मरते हुए - बहोत शरारती हो गए हो. अच्छा सुनो तुम्हे सबका ध्यान रखना है जो जो तुम्हारे बच्चो की माँ बनने वाली है. तुम्हे तो ध्यान hi नहीं है उनका. बस काम हुआ और भूल गए न.

देवा - नहीं यार सबका ध्यान है बस अब सबसे मिलने नहीं जा प् रहा हु.

पूनम - मए समझ सकती हु लेकिन काम से काम बात तो कर hi सकते हो न. सब को अच्छा लगेगा.

देवा – ठीक है दिया भाभी तो साथ है hi हवेली भी चक्कर लगा hi लेता हु. दोनों मामियो से और देवकी काकी की देवरानी से मिल लगा. क्यों की ये सभी मेरे बच्चो की माँ बनने जा रही है.

पूनम - क्यों वो बसंती भूल गए क्या?

देवा – नहीं उसे नहीं भुला लेकिन उससे बात नहीं करुगा उससे मिल लगा वो भी तो यही है न.

पूनम - अब क्या प्लान है?

तभी वह शलाका आ जाती है.

शलाका - ोये तोता मैना क्या हो रहा है ? बस कोई कोना मिला नहीं के शुरू हो जाते हो.

पूनम - नहीं रे ये क्या शुरू होंगे. इनके लिए इस रुट की लाइन अभी उपलब्ध नहीं है.

शलाका और पूनम हसने लगती है.

शलाका - वैसे आप जिस प्लान की पूछ रही थी वो मए hi बता देती हु. तो प्लान है आज मुंबई जाने का वो महल खरीदने जाना है आज हमें . भूल गयी क्या रात को hi तो देव ने बताया था.

पूनम - है रे याद है मए तो यु hi पूछ रही थी नॉर्मली. ok तो तुम लोग जाओ फिर और जल्दी आना.

देवा - बस शलाका को hi लेने आया था और तुम लोगो से मिलने भी. अब काकी और भाभी से भी तो मिलना जरुरी है न.

देवा की इस बात पर पूनम के होठो पर मुस्कान आ जाती है. वो देवा की बात समझ जाती है.
 
अपडेट - 248

देवा - बस शलाका को hi लेने आया था और तुम लोगो से मिलने भी. अब काकी और भाभी से भी तो मिलना जरुरी है न.

देवा की इस बात पर पूनम के होठो पर मुस्कान आ जाती है. वो देवा की बात समझ जाती है.

अब आगे . . . .

तभी वह पद्मा आ जाती है - अरे तुम दोनों भी पागल hi हो देवा को बहार hi बातो में लगा दिया. देवा आ जा अंदर बैठ कर बाटे कर ले और पूनम तू जा इनके लिए कुछ नाश्ता ले आ.

देवा- नहीं काकी बस हमें अभी शहर जाना है कुछ काम है तो मए शलाका को लेने आया था, हमें निकलना पड़ेगा अभी नाश्ता मए कर के hi आया हु तो यहाँ बाद में कर लगा.

पूनम - है माँ ये यहाँ बाद में आकर भर पेट खा लगे. अभी तो पेट भरा hi है.

पद्मा - तू चुप रह नजर मत लगा.

शलाका – काकी हम लोग हो कर आते है फिर देवा को यही छोड़ जायेगे आप लोग आराम से खिला पीला देना.

पद्मा - ठीक है जल्दी आना देवा.

देवा – है काकी अब हम चलते है.

फिर शलाका और देवा रर में बैठ कर वह से निकल जाते है और रूद्र को पिक कर के वो मुंबई के लिए रावण हो जाते है.

रूद्र गाडी चलते हुए - यार देवा नागलोक बहोत याद आता है कभी कभी.

शलाका - सच कहा रूद्र हमें भी हमारी तिलिस्म नगरी की बहोत यद् आती है बीते हुए दिनों की.

रूद्र – है सच में कितने अचे दिन थे ये साला यहाँ इस पृथ्वी लोक में लोग कितने लालची है कितने मतलबी है कितनी गन्दगी है यहाँ और हमारे लोक में कितना सुकून है.

देव मुस्कराते हुए – अरे यार किसने कहा के हमारे लोक में लोभ लालच गन्दगी नहीं है. वह भी यही सब है भूल गए कितने बुरे लोग है हमारे नागलोक और तिलिस्म लोक के आस पास. और उन लोगो में कितना लालच भरा हुआ है खुद का लोक उनसे संभालता नहीं और दूसरे के लोक पे कब्ज़ा जमाना चाहते है. हर जगह का यही हल है भाई.

रूद्र - फिर भी यहाँ से बेहतर है यार वह.

देव – ऐसा नहीं है दोस्त हर जगह उस ईश्वर की बनाई हुई है और उसने कुदरत के खजाने हर जगह बिखेर रखे है. उस के घर में किसी चीज़ की कमी नहीं है. वो तो हर जगह को hi सुन्दर बना के रखता है ये तो वह रहने वालो के ऊपर है की उस खूबसूरती को कितना संभल के रखते है और कितना बर्बाद करते है. अब खुद hi देख लो क्या संजीवनी जैसी बूटी हमारे यहाँ उपलब्ध है ? नहीं न. लेकिन वही बूटी इस धरती पर थी और आज भी है लेकिन लोगो ने अपनी गलतियों से आधुनिकता की होड़ में उस कीमती खजाने को खो दिए है बस. क्यों की कुदरत कभी कुछ देकर वापस नहीं लेती. ये तो बस वह रहने वाले hi देख नहीं पते.

रूद्र - बात तो ये भी ठीक है. लेकिन मुझे तो मेरा लोक hi पसंद है और मुझे उसकी यद् बहोत आती है. यार ये सब जल्दी ख़तम करते है और वापस चलते है न अपने लोक में.

देव – नहीं रूद्र ये मेरे लिए इस जनम में संभव नहीं है. है तुम सब चाहो तो जा सकते हो क्यों की तुम लोगो के ऊपर यहाँ का क़र्ज़ नहीं है. मुझे अपने इस जनम के माता पिता का ख्याल रखना है अंतिम साँस तक. और फिर मेरा यहाँ का भाई और भाभी भी तो है उन सब को छोड़ कर मए नहीं जा सकता. और शायद पूनम के भी यही विचार होंगे. लेकिन तुम सब जा सकते हो और मए उसके लिए रोकूंगा नहीं.

शलाका और रूद्र एक दूसरे को देखते है. और रूद्र तेज बराक लगा के गाडी साइड में रोकता है.

रूद्र - क्या बोलै बे, हम तुझे छोड़ के जाये? ये तू सोच भी कैसे सकता है?

देव – अरे मेरे बाप गाड़ी क्यों रोक दी मैने तो एक जनरल बात की थी और जो जायज भी है. भला तुम लोग यहाँ कब तक मेरे लिए रुकोगे.

रूद्र – देख देव आज बोल दिया है आज के बाद कभी मत कहना के हम तुझे यहाँ छोड़ के नाग लोक चले जाये मए तुझसे बिछड़ कर नहीं रह सकता ये तू जनता है न. और फिर जहा तेरे बगैर सैकड़ो साल बिता लिए तो तू क्या समझता है हम यहाँ कुछ साल नहीं बिता सकते? यार यहाँ काम से काम हम साथ तो है न. मए भी उन लोगो की लम्बी जिंदगी की दुआ मांगूगा जिनके लिए तू यहाँ रुकना चाहता है लेकिन ये धरती लोक है यहाँ के लोगो की जिंदगी बहोत ज्यादा हुई तो 80-90 साल उसके ऊपर बहोत काम hi जी पते है, उसमे से भी आधी जिंदगी तो उनकी हो चुकी है. तो मए भी तब तक यहाँ रुकुंगा जब तक तू रुकेगा.

देव – अच्छा ठीक है यार मत जाना मुझे छोड़ कर वैसे भी जब चाहे हम लोग नाग लोक जा hi सकते है. कोई ऐसा काम शुरू कर देंगे जिस के बहाने कई दिनों तक हम यहाँ से निकल सके लेकिन पहले ये सब झमेले तो ख़तम हो अब गाड़ी चला.

रूद्र गाड़ी आगे बड़ा देता है

शलाका - है देव एव सही है. मए भी यही कहना चाहती थी के आगे की जिंदगी की प्लानिंग तो बहोत दूर की बात है पहले इन झमेलों को निपटना है.

रूद्र – अरे तो क्या बड़ी बात है उसमे ये ठाकुर एंड सोन तो जल्दी hi निपट जायेगे न.

देव – तू उस अघोरी को भूल रहा है जो मैं जड़ है इस झमेले की.

रूद्र - है यार उस में थोड़ा समय लग सकता है अभी. क्यों की उस के लिए तो अभी और काम करना है न. वैसे फ़कीर बाबा ने कुछ बताया है क्या उसके बारे में ?

देव – अभी तो फ़िलहाल कुछ नहीं बताया क्यों की वो भी बाबू जी की सेहत के सुधरने का hi इंतजार कर रहे है शायद. क्यों की जो परमानेंट सुरक्षा चक्र दोनों नागरियो के लिए बनाना है उसे वो भी जल्दी hi निपटना चाहते है. पर बाबू जी की सेहत बिगड़ने से हमारा वो मिशन अधूरा hi रह गया है अभी.

रूद्र - हम्म्म तो मतलब बाबू जी के ठीक होने के बाद हमें फिर चलना है लेकिन कहा?

देव – नहीं मालूम पिछली बार की तरह इस बार भी मुझे कुछ नहीं मालूम लेकिन इतना अंदाज़ा लगा सकता हु के जॉब hi होगा आसान तो नहीं होगा. तिलिस्मी चक्र से बढ़कर hi होगा कुछ. अनजाने खतरों से भरा एक खतरनाक सफर. और सिर्फ फ़कीर बाबा hi जानते है के आगे हमें कहा जाना है और किस चीज़ के लिए जाना है.

शलाका - लेकिन देव घर में तो मैने सुना है के बाबू जी के ठीक होते hi सबकी शादी करवा देंगे.

देव मुस्कराते हुए – तुम्हे जल्दी है क्या नागार्जुन की दुल्हन बनने की ?

शलाका - जी नहीं मुझे कोई जल्दी नहीं है समझे मर.

देव – देखो अभी मैने माँ को ये जरूर कहा है के बाबूजी के ठीक होने के बाद हम शादी कर लगे लेकिन जहा तक मए समझता हु अभी हमारे विवाह का कोई योग नहीं है न हम लोगो के पास कोई समय है, क्यों की अघोरी को अब मए कोई चांस नहीं देना चाहता उसे ख़तम किये बगैर अब मए शादी तो नहीं करुगा.

रूद्र - है देव उसे तो पहले निपटना hi है लेकिन यार हमारे इन कामो में बेचारी पायल का क्या दोष वो क्यों घर में बैठी रहे उसका सोच कुछ.

देव – हम्म्म्म मए भी वही सोच रहा हु के पायल की शादी कैसे करवाई जाये रामु से क्यों की सगाई तो हमने साथ में कर ली अब अकेले उसकी शादी कैसे करवाई जाये.

रूद्र - सोच भाई जल्दी सोच कही देर न हो जाये. वैसे एक आईडिया है देव.

देव – बोल

रूद्र - क्यों न देवकी काकी को टपका दे मतलब वो ऐसी हालत में आ जाये के रामु खुद शादी की जल्दी करे फिर तो पायल की शादी हो hi जाएगी न जल्दी, वो भी हम सब के बगैर. क्या बोलते हो?

देव – अबे गधे काम से काम कुछ ढंग का तो सोच ले ये देवकी काकी को क्यों टपकना है अब. कुछ भी बोलता है.

रूद्र - भाई सोच के देख मैने एक डैम सही दिमाग लगाया है. और फिर देवकी काकी की सिर्फ हालत बिगड़नी है उन्हें सचमुच नहीं टपकना शादी के बाद उन्हें ठीक कर देंगे न बस 10-15 दिन की कहानी बनेगी और कुछ नहीं और अपना काम भी हो जायेगा. क्या बोलता है?

देव – देखो रूद्र ज्यादा दिमाग खर्च मत कर वैसे भी ज्यादा है नहीं तेरे पास. तो तू चिल मार मए देख लगा.

शलाका हसने लगी तो रूद्र - क्या भाई बेइज्जती कर दी न
 
अपडेट – 249

शलाका हसने लगी तो रूद्र - क्या भाई बेइज्जती कर दी न

देव – नहीं बे लेकिन आईडिया ऐसा हो के सब राजी ख़ुशी पायल की शादी करने को तैयार हो ऐसे नहीं के किसी को मर दो बीमार कर दो ये सब फालतू बाटे है.

रूद्र चल ठीक है भाई तू hi देख ले अब मए क्या कहु

ये लोग ऐसे hi बाटे करते हुए अपना सफर पूरा कर रहे थे

उधर अघोरी अपनी साधना में बैठा था के तभी एक झटके में उसकी आंखे खुल जाती है. और उसके चेहरे पे एक धूर्त मुस्कान आ जाती है. वो तेजी से उठ खड़ा होता है और फिर लम्बे लम्बे कदम उठता हुआ एक तरफ जाता है.

उस कोने में एक बहोत बड़ा शीशे का गोला रखा हुआ था अघोरी वह जा कर उस गोले के चारो तरफ हाथ घूमता है और अजीब तरह के मंत्र पढ़ने लगता है थोड़ी hi देर में उस शीशे में भयानक शकल का पिशाचराज प्रकट होता है.

पर - क्या हल है अघोरी इस समय हमारी याद कैसे आ गयी तुम्हे? तुम एक बार जो हम से बात कर के गए उसके बाद न तुम आये न तुम्हारा कोई सन्देश आया. क्या तुम हम से मजाक कर के गए थे ? पिशाचराज ने बहोत hi धीरे , गंभीर और बेहद सार्ड खतरनाक आवाज़ में कहा जिसे कोई आम इंसान सुन ले तो उसे हार्ट अटैक hi हो जाये.

अघोरी - नहीं मित्र हमारे बीच जो बाटे हुई थी वो कोई मजाक नहीं था और उसी बात के लिए अभी मैने तुमसे संपर्क किया है

पिशाचराज एक डैम सतर्क हो गया - कहना क्या चाहते हो अघोरी साफ साफ बोलो.

अघोरी - है पिशाचराज वो वक़्त आ गया है इस समय इस गाँव में देव और रूद्र नहीं है. वो लोग कही बहार गए हुए है किसी फालतू से काम के लिए. और वो मुर्ख अपने साथ साथ तिलिस्म नगरी की एक राजकुमारी को भी ले गए है मतलब इस समय अगर तुम हमला कर दो तो उनकी ताक़त अधूरी hi है जिसे तुम हरा सकते हो. सोच लो ऐसे मौके बहोत काम hi आते है. उनकी ताक़त अधूरी, वो किसी भी होने वाले हमले से बेखबर, और तुम पूरी तयारी से पूरी ताक़त से हमला करोगे, जब तक देव और रूद्र वह आये तुम काम कर के निकल चुके होंगे.

पर – अघोरी तुम डरते होंगे उस देव और रूद्र से मए नहीं डरता लेकिन अगर बात उनकी ताक़त की है तो फिर तिलिस्म नगरी की बड़ी राजकुमारी तो अभी वही है न.

अघोरी - उसके लिए तो तुम अकेले hi काफी हो पिशाचराज और सोच लो उसकी सुंदरता का भी कोई जवाब नहीं यदि तुमने उसे अपने अधीन कर लिया तो उसकी शक्तिया और उसका खूबसूरत बदन hi नहीं पूरी तिलिस्म नगरी भी तुम्हारी हो जाएगी.

पर – इतनी देर की बकवास बातो के बाद पहली बात तुमने काम की बताई है मुझे, वैसे और कौन कौन है वह?

अघोरी - कोई खास नहीं है अब यहाँ पर. बस खास तो वो राजकुमारी पूनम hi है और मेरी जान वो नागिन नीलम और उसके साथियो में इस वक़्त जो है वो है नागार्जुन वो एक मामूली सिपाही है नागलोक का, उसके आलावा एक पुरुष है गुरुम कर के और उसकी मंगेतर चन्नो इन दोनों को देव ने कुछ hi समय पहले अपनी शक्तिया दी है उनसे उम्मीद नहीं के वो तुम्हारी ताक़त का मुकाबला कर पाएंगे और फिर तुम्हारे पास तो पूरी मायावी सेना भी है आ जाओ यहाँ मए भी हु तुम्हारे साथ आज इन सबका बाजा बजा hi देते है.

पर – वो तो सब ठीक है किन्तु तुमने बहोत गलत समय पर मुझे यद् किया है अघोरी. क्यों की इस समय माँ ीक बेहद खास काम में व्यस्त हु

ाघोती – मेरी बाटे सुनने के बाद भी तुम्हे लगता है के इससे जरूरी कोई कार्य हो सकता है अरे छोडो सरे काम और आजाओ जल्दी से.

पर – ाघोती मुझे तुम्हारी आवाज़ में आदेश की बू आ रही है और पिशाचराज को आदेश देने की तुम्हारी औकात नहीं है इसीलिए शब्दों को संभल कर इस्तेमाल करो.

ाघोती की गांड फैट गयी – अरे नहीं मित्र मए भला क्यों तुम्हे आदेश दुगा. अघोरी ने फिर पिशाचराज को लालच देने का सोचा….

मए तो ये कह रहा था के तुम्हारी पसंद की हर चीज़ है यहाँ और आसानी से मिल सकती है यदि तुम आ जाते तो अच्छा होता.

पर – है ऐसी hi भाषा में बात किया करो मुझसे. और रही बात आने की तो मैने कह दिया है मए अभी नहीं आ सकता पर तुम चिंता मत करो मए अपने बेहद खास आदमी को भेजुंगा. जो किसी मामले में काम नहीं है. तुम निश्चिन्त रहो.

अघोरी का उत्साह थोड़ा ठंडा पद गया. फिर भी उसने आखरी प्रयास किया…. लेकिन मित्र ऐसे मौके बार बार नहीं आते.

पर – मैने कहा न जिसे मए भेज रहा हु उसे कमजोर समझने की गलती मत करना और उसका स्वागत भी यही सोचकर करना के मए खुद आया हु. यदि उसने कोई भी ऐसी बात बताई जो मुझे पसंद नहीं आयी तो यद् रखना ये तुम्हारे लिए भी अच्छा नहीं होगा.

अघोरी - कैसी बाते करते हो मित्र तुम जिसे चाहो भेजो उसका यहाँ पूरा ख्याल मए खुद रखुगा. पर जल्दी से भेज देना वार्ना कही ऐसा न हो के ये मौका भी निकल जाये.

पर – भेजता हु. किन्तु इन सब में से मुझे वो दोनों hi कान्ये सुरक्षित चाहिए यानि राजमुकारी और वो गाँव की गोरी चन्नो. क्यों की कुवारी कान्ये और उनका गरम खून तो मेरी कमजोरी है मेरी तामसिक शक्तियों की बढ़ोतरी के लिए मुझे वो दोनों चाहिए.

अघोरी - मए यद् रखुगा और वो दोनों hi तुम्हे मिल जाएगी अगर तुम्हारे भजे उस शख्स ने अपना काम अचे से किया तो.

पर - ठीक है मए कल तक भेजता हु उसे, तब तक तुम अपनी तरफ से तयारी कर लो.

उधर देवा एंड पार्टी भी पूरे दिन का सफर कर के रात को मुंबई पहुंच गए थे इस समय वो लोग एक होटल में थे.

देव - शलाका अब बोलो क्या प्लान है तुम्हारा. कुछ सोचा है या मए hi सोचु?

शलाका - देव जहा तक मेरी जानकारी है और जैसा मए बता चुकी हु वो इस समय अपने झोपड़े में hi है तो उसमे प्लान क्या कल सीधे चल कर बात करते है उससे और कल hi कोर्ट में चल के वो महल अपने नाम करवा लेते है.

रूद्र - ठीक तो है कल ये काम हो जायेगा तो कल hi हम लोग महल चलेंगे.

देव - ठीक है फिर सो जाओ तुम लोग.

शलाका - देव क्या मए कुछ बात कर सकती हु तुमसे अभी.

देव - है बोलो

शलाका - ये रजनी का क्या सन है देव

रूद्र – क्यों उसे क्या हुआ? कुछ हुआ है क्या जो मए नहीं जनता.

देव – नहीं यार ये शलाका तो यु hi . और शलाका उसका कोई सन नहीं है और जो है वो वक़्त आने पे सामने आएगा. उसकी चिंता मत करो.

शलाका - नहीं देव बात इतनी सी नहीं है तुम जानते हो मए और पूनम दोनों hi तिलिस्मी शक्तियों में माहिर है हमारे सामने कोई तिलिस्मी दीवार ज्यादा देर नहीं टिक सकती लेकिन ये रजनी कोई अलग hi चीज़ है . हम उसे िडेंटीफ़्य नहीं कर प् रहे है. आखिर ऐसा क्या है उसकी आइडेंटिटी में जो उसने खुद को छुपा के रखा है?

रूद्र – ये क्या कह रही हो तुम? उसने खुद को छुपा के रखा है? देव क्या ये सच है?

देव – है सच है लेकिन कोई घबराने की बात नहीं है .
 
अपडेट – 250

रूद्र – क्या बात करता है यार अगर उसे किसी से खतरा होता और उस वजह से खुद की आइडेंटिटी छुपाई होती तो काम से काम शलाका या पूनम भाभी तो उसकी ईद देख सकती थी मन की उसने बहरी खतरों से खुद को सेफ करने के लिए ऐसा किया हो लेकिन उसमे ये लोग भी नहीं जा सकती इसका मतलब जनता है तू. गंभीर बहोत गंभीर और तू इसे इतना हलके में ले रहा है.

देव -अरे यार तुम लोग तो राइ का पहाड़ बना रहे हो मए कह रहा हु न कुछ नहीं है. कोई खतरा नहीं है……. फ़िलहाल.

रूद्र - देख भाई मए मैंने hi वाला था तेरी बात लेकिन तूने जो अभी अभी पॉज लिया उससे मए भी कुछ कुछ समझ रहा हु और एक तो ये तेरे हलके में लेने की आदत से मए बड़ा परेशां हु पिछले जनम में भी तूने मेरी बातो को हलके में लिया था और अंजाम तूने देख hi लिया अब फिर तू हलके में ले रहा है. और चल ठीक है तेरी hi मन लेते है के कुछ नहीं है तो फिर तू hi क्यों नहीं घुस जाता . घुस जा और जाकर देख उसकी असलियत क्या है क्यों वो अपनी सचाई छुपा रही है. और तेरी बातो से तो मुझे लग रहा है के तूने भी कोशिश की है लेकिन कामयाब नहीं हो पाया . है न?

देव – है ये सच है.

शलाका - और तुम फिर भी कह रहे हो कुछ नहीं है? ऐसी कोई दीवार नहीं जिसे तुम नहीं भेद सकते चाहे वो कोई तिलिस्म हो या कुछ और, लेकिन रजनी ने खुद को ऐसे कोहरे में कैद किया हुआ है के उसमे तुम भी नहीं देख प् रहे हो क्या ये बात इतनी hi साधारण है बोलो?

देव – देखो उसकी सचाई तो मुझे पता नहीं चल पायी है लेकिन उसके मक़सद का कुछ अंदाजा है मुझे और तुम लोग निश्चिन्त रहो सही वक़्त आने पे सब साफ हो जायेगा. रही बात धोखे की तो उसे उसका काम करने दो, पहले उसके बारे में सिर्फ मए जनता था अब तुम दोनों और तीसरी पूनम भी जानती hi है तो बस सावधान रहना लेकिन जब तक मए न कहु अपनी तरफ से कुछ मत करना. रूद्र पिछले जनम में मैने सच में गलती की थी हालत को गंभीरता से नहीं लिया था लेकिन उस समय मए पूनम के प्यार के नशे में था उससे मिलान की बेताबी थी. लेकिन इस बार मए किसी भी नशे में नहीं हु मए रजनी के बारे में जितना जनता हु उससे ज्यादा अभी कोई कुछ नहीं जान सकता और तुम सब लोग भी जितना समझ चुके हो उससे अब मेरे मन में रजनी की तरफ से होने वाले किसी भी हमले से निश्चिन्त हो गया हु क्यों की अब हम में से कोई भी उस पर आंखे बंद कर के भरोसा तो करेगा नहीं और वो हम में से किसी के साथ अब काम से काम धोखे से कुछ नहीं कर सकती बाकि रहा सवाल शक्ति का तो उसकी शक्तियों का जवाब भला तुम में से कौन नहीं दे पायेगा. बोलो? अब सो जाओ बहोत देर हो गयी है कल चलना भी है हम लोगो को.

रूद्र – रुक मेरी भी बात सुन ले सोने से पहले. तूने जो कहा वो ठीक है देव, लेकिन तू मुझे भी जनता है अगर किसी ने हमारी फॅमिली की तरफ तिरछी नजर की तो मए तेरे इशारे का इंतजार भी नहीं करुगा चीयर डालूगा, उसे जमीन के इतना अंदर गाड़ दुगा के पटल भी उसे 500 फ्लोर ऊपर नजर आये. यद् रखना.

देव हंस कर - है मेरे बाप मए जनता हु अब जाओ और सो जाओ.

फिर शलाका दूसरे कमरे में चली जाती है और रूद्र वही रखे एक बीएड पे सोने चला जाता है.

देव मन में - तुम लोगो को जो अंदेशा है वो बिलकुल सही है. लेकिन ये कोई नहीं जनता के जब वो करने पे आएगी तो कितना कुछ हो जायेगा जिसे कोई रोक नहीं पायेगा और मेरे दोस्त रूद्र तू भी उसे नहीं रोक पायेगा क्यों की तू उसे अभी जनता hi कहा है. देखलो मुझे जो पता है उसे जान कर भी मए कुछ नहीं कर प् रहा हु. तो तुम लोग कैसे कर पाओगे?

फिर देव भी आराम करने लगता है. रत के कोई 3 बजे देव की आंख खुलती है और वो फ्रेश हो कर अपनी साधना में बैठ जाता है और अपने ध्यान में बैठा हुआ hi सूक्ष्म अवस्था में वो उस महल के पास जा पहुँचता है.

रत के अँधेरे में वो महल किसी भूत की तरह hi दिख रहा था दूर से hi बेहद खतरनाक. देव हवा में तैरता हुआ. उस महल के बगीचे में उतरता है अभी उसके कदम वह पड़े hi थे के किसी अदृश्य शक्ति ने उसे उठा के दूर फेंक दिया. और उसे एक आवाज़ सुनाई दी.

………….. कौन हो तुम और यहाँ क्या लेने आये हो.

देव ने सामने देखा तो उसे एक कला साया लहराता हुआ नजर आया.

देव – मेरा नाम देव सिंह है और मुझे ये महल चाहिए. इसीलिए मए यहाँ आया हु. तुम कौन हो.

मए इस महल का रक्षक रखा हु. और तुम इस महल में नहीं जा सकते. इस महल में किसी नयी आत्मा को आने की इजाजत नहीं है चल जा यहाँ से.

देव – तुम जानते नहीं हो मुझे इसीलिए ऐसा कह रहे हो. बेहतर है मेरे बारे में जान लो फिर फैसला करो.

रखा – मए जरूरी नहीं समझता. तेरे बारे में जानने की मुझे कोई जरुरत नहीं है. अब निकलो यहाँ से वार्ना अगर मैने भेजा तो ऊपर hi जाओगे.

देव के होठो पे मुस्कान आ जाती है – चल ठीक है भाई मए जाता हु. लेकिन जो तुझे जवाब तो दे दू. इतना कह कर देव ने हाथ आगे बढ़ाये और उसके हाथ से एक रेड कलर की लेज़र निकली जिसमे वो कला साया जकड़ता चला गया वो अपनी पूरी ताक़त लगा रहा था लेकिन वो हिल भी नहीं प् रहा था.

देव – अब सुन ज्यादा फड़फड़ा मत मरेगा नहीं तू जब तक मए न चहु. ऐसी आवाज़ सुनने की आदत नहीं है मेरी मए चहु तो तुझे इसी पल रखा से रख बना सकता हु और तुझे तेरा मालिक भी न बचा पायेगा. लेकिन मए जनता हु तेरी इतनी औकात नहीं के यहाँ कब्ज़ा करे. है तेरा मालिक यहाँ होता तो उससे मए बात कर के समझ सकता था, उसे क्या चाहिए मेरी मित्रता या अपनी मौत. तो ये हुआ तेरी भाषा का और मुझे धकेलने का जवाब अभी मए जाता हु लेकिन अगली बार आउगा तो तेरे मालिक से मिल कर बात करुगा समझा और सुन बे अगली बार मेरे आड़े मत आना वार्ना जनता है न रखा से राख . याद रखना मेरी बात चलता हु.….. इतना कह कर देव अपनी शक्ति वापस खिंच लेता है.

जैसे hi देव वापस जाने को पलटा वह एक तेज रौशनी चमकी और एक साया वह नजर आने लगा जिसे देख के रखा अपने सीने पे हाथ रख कर घुटनो के बल जमीन पे बैठ गया और उसके हाथ में जो भरी भरकम तलवार थी उसे भी उसने जमीन पे टिका दिया.

वो साया एक युवती का था उस युवती ने रखा की तरफ देखा तक नहीं और देव की तरफ आने लगी. देव ये सब बहोत गौर से देख रहा था.

युवती - कौन हो तुम और यहाँ तक कैसे पहुंच गए. उसकी आवाज़ में एक गर्जना थी. जो जितनी सुरीली थी उतनी hi खतरनाक भी लग रही थी.

देवा - क्यों यहाँ आना कोई मुष्किल काम तो नहीं है फिर ये सवाल क्यों ? देव ने पूरी दबंगई से जवाब दिया.

युवती - देखो नवजवान इस समय तुम भले hi अपने सूक्ष्म रूप में हो लेकिन हम तुम्हे इतना तो देख hi प् रहे है के तुम कोई साधारण आत्मा नहीं. क्यों की जिसे तुम आसान बता रहे हो न वह तक पहुंचना किसी आम मामूली आत्मा के बस की बात नहीं चाहे वो कोई योगी hi क्यों न हो. और जिस तरह तुमने रखा को मजबूर किया वो तो नामुमकिन है. अब अपना परिचय दो. क्यों की तुम हमारी सीमा में हो और यहाँ पर मए जो तुमसे बात कर रही हु वो सिर्फ इसीलिए के मए तुमसे आकर्षित हुई के तुम यहाँ तक आ पहुंचे हो अब बोलो कौन हो तुम?

देव - मुझे ये बताने में कोई आपत्ति नहीं के मए कौन हु लेकिन आपके आने से जिस तरह ये रखा जमीन पे लोट गया उससे मुझे भी आपकी शख्सियत का अहसास हो रहा है. और जिस तरह आपने मुझे कोई पहुंची हुई चीज़ समझ लिया है तो इससे आपके ज्ञान का भी आभास मुझे हो रहा है तो आप खुद क्यों नहीं जान लेती के मए कौन हु.

युवती मुस्करा के - मेरी तारीफ के लिए धन्यवाद लेकिन मए अपने ज्ञान के बावजूद तुम्हे जान नहीं प् रही हु इसीलिए पूषा है.

देव – चलो मन ली आपकी बात लेकिन अपना परिचय देने से पहले क्या मए आपका परिचय जान सकता हु?

युवती – मैने पहले पुछा है तो ये हक़ मुझे पहले है न? और इस धरती पे एक कहावत भी है के लेडीज फर्स्ट. तो इसीलिए वो हक़ मेरा है. तो पहले तुम hi बताओ.

देव – सही कहा आप अपने ज्ञान के बावजूद मुझे नहीं जान प् रही है यानि मए आपसे कही ज्यादा आगे हु ज्ञान के मामले में तो उस हिसाब से आपको मेरी बात का जवाब पहले दे देना चाहिए.

युवती मुस्करा के - बहोत जिद्दी हो तुम चलो मए hi बता देती हु. मए हु प्रेतलोक की राजकुमारी . प्राण और …………
 
अपडेट – 251

युवती मुस्करा के - बहोत जिद्दी हो तुम चलो मए hi बता देती हु. मए हु प्रेतलोक की राजकुमारी . प्राण और …………

अब आगे. . . . .

मए यहाँ बहोत समय से वास कर रही हु. मेरे पिता जी के आदेश पर मए यहाँ आयी हु मुझे किसी का इंतजार है. लेकिन वो इंतजार ख़तम होने का नाम hi नहीं लेता. अब ये मत पूछना के मुझे किस का इंतजार है क्यों की किसी अनजान व्यक्ति को ये बताने का अधिकार मेरे पास नहीं है. वो मए सिर्फ उसे बता सकती हु जिसका मए इंतजार कर रही हु वो भी तब जब वो मेरे सामने आ जाये. अब तुम बोलो कौन हो तुम?

देव - राजकुमारी प्राण आप परेशां न हो मए आपको मजबूर नहीं करुगा कुछ बताने के लिए. और रही बात मेरी तो मए हु राजकुमार देव सिंह नाग लोक का युवराज. किसी आवश्यक कार्य से मुझे इस महल की जरुरत है. और कल hi मए ये महल खरीदने वाला हु मुझे मेरी शक्तियों से ये आभास हुआ की यहाँ कुछ साये है जो आम इंसान को आसपास भी नहीं आने देते तो रत की इस तन्हाई में बस देखने चला आया. ये सोच कर के यदि वो साये अचे है तो उनसे बात कर के उन्हें समझा सकू जिससे मेरे काम में रूकावट न आये. और मानवता की भलाई का काम भी न रुके. और यदि बुरे है तो उन्हें मुक्ति दे सकू. और यकीन मानिये मए ये कर सकता हु इसमें मुझे कोई परेशानी नहीं होगी, किन्तु मए ये देख रहा हु के यहाँ वास करने वाले आप लोग बुरे नहीं है. और मए आपके सामने अपनी बात भी रख सकता हु.

प्राण ने बिना पीछे देखे अपने हाथ के इशारे से रखा को जाने को कहा और रखा वह से गायब हो गया.

प्राण - राजकुमार dev……aapne हमें अच्छा कहा और मन ये जान कर मुझे ख़ुशी हुई, और आप सही है, के आप अपनी बात हमारे सामने रख सकते है. क्यों के मानवता के दुश्मन तो हम भी नहीं. किन्तु किसी को मुक्ति देना तो मुझे भी आता है, लेकिन यहाँ बात लड़ाई की या खुद को श्रेष्ट साबित करने की नहीं हो रही है, सिर्फ हम दोनों का वार्तालाप चल रहा है. इसीलिए कृपया इस बात का ध्यान रखे के ये वार्तालाप कोई भयानक रूप न लेने पाए क्यों की शक्तिया यदि दोनों तरफ हो तो नुकसान भी दोनों का हो सकता है कोई भी इस दुनिया में अमर हो कर नहीं आया है. अब ये तो हुआ आपकी बात का जवाब.

किन्तु यदि आप सच मच hi राजकुमार देव सिंह है तो फिर ये मेरे लिए भी ख़ुशी की बात है क्यों के अब मए आपको बता सकती हु के मए काफी लम्बे समय से अपने पिता जी के आदेश पर यहाँ आपका hi इंतजार कर रही थी, क्यों के उन्हें आपसे एक बहोत hi महत्त्व पूर्ण काम है और ग्रहो की दशा के चलते और आपकी अद्भुत शक्तियों की वजह से आपको ढूँढना हम लोगो के लिए भी संभव नहीं था किन्तु मेरे पिता जी को इतना पता चल गया था के आप इस जगह पे आने वाले है, कब? ये उन्हें पता नहीं चल पाया. इसलिए उन्होंने इस जगह की रक्षा के लिए और आपसे मिलने के लिए मुझे भेज दिया जब तक आप न आये तब तक मए इस जगह का ध्यान राखु आपके शिव और किसी को आने न दू और जब आप आएं तो उन्हें बताऊ. यकीन मानिये ये महल अगर इतने लम्बे समय बाद भी सही सलामत खड़ा है तो वो इसीलिए के हमने इसे संभल रखा है वार्ना ये तो वक़्त की आंधी से कब का मिटटी में मिल चूका होता. आज आप आये है मेरा और मेरे पिता जी का इंतजार पूर्ण हुआ. देव आपका बहोत बहोत धन्यवाद. और आपका ह्रदय से स्वागत है इस महल में. जो के असल में आपका hi है. भले hi दुनिया की नजर में इस का मालिक कोई और है. लेकिन इसके असली मालिक तो आप hi है.

देव - अरे अरे राजकुमारी ये धन्यवाद क्यों दे रही है आप मुझे. और दुनिया की नजर में इसका जो असली मालिक है उसे उसका हक़ तो देना बनता hi है. बिना वो हक़ दिए इस महल को मए अपना नहीं कह सकता. तो कल वो हक़ उन्हें देना जरूरी है. बाकि रही बात आपकी तो ये तो मुझे पता hi नहीं था के आप जैसी खूबसूरत राजकुमारी मेरा इंतजार कर रही है नहीं तो भोलेनाथ की सौगंध मए आपको बिलकुल इंतजार नहीं करवाता.

प्राण मुस्करा के – आप सचमुच एक नेक दिल इंसान है राजकुमार देव वार्ना इस खंडहर की भी भला कोई कीमत है जो आप इसके मालिक को देने की बात कर रहे है.

देव – राजकुमारी प्राण सच तो सच होता है इसका मालिक असल में जो है उसका हक़ भला मए कैसे मार सकता हु, ये उसकी पुश्तैनी मिलकियत है. वो तो इसे अब तक बेच चूका होता न, किन्तु आप लोगो के पहरे की वजह से वो ये नहीं कर पाया, और देखा जाये तो उसका कारन भी जाने अनजाने मए hi हुआ अब तो उसे इस महल की कीमत ज्यादा hi मिलनी चाहिए क्यों की इतने समय से उसने तकलीफे भी भोगी है जो की शायद आप लोगो के यहाँ न होने से उसे न भोगनी पड़ती. पर आप लोग मेरे इंतजार में यहाँ डेरा दाल के बैठे थे और भोगना पड़ा उस गरीब को. अब मए ये महल भी अपने कब्जे में ले लू तो क्या ये उसके साथ अन्याय नहीं होगा? शक्तियों का मतलब ये तो नहीं है न के हम किसी के भी ऊपर मनमानी करे?

प्राण - बहोत खूब देव आपने तो मेरा दिल जीत लिया. एक अचे राजकुमार के सरे गन आप में है.

देव – क्या सच में इतनी खूबसूरत राजकुमारी का दिल मए जीत चूका?

प्राण - कही आप मुझे छेड़ तो नहीं रहे राजकुमार?, भला मए कहा खूबसूरत हु? मए तो एक प्रेत हु.

देव - तो क्या हुआ भूत प्रेत तो भोलेनाथ को भी प्रिय होते है और उनके सबसे नजदीक भी होते है जिस तरह आप भोलेनाथ की भक्त है मए भी उन्ही का भक्त हु. और जब सब उसी ने बनाया है तो आपकी खूबसूरती पे संदेह कर के मुझे भोलेनाथ के क्रोध का शिकार नहीं होना. साथ hi आप बहोत खूबसूरत है ये भी सच hi है.

प्राण - आप बाते तो बहोत अच्छी कर लेते है.

देव - मए और भी बहोत कुछ अच्छा कर लेता हु आज तो मिले है हम और यदि तक़दीर में हुआ तो आगे आगे आप जान जाएगी.

प्राण - ओह्ह्हो राजकुमार देव कही हम पे डोरे तो नहीं दाल रहे. काफी तेज हो आप तो. जो बात कहने में औरो को एक लम्बा वक़्त लग जाता है आपने तो पहली hi मुलाकात में कह दी. कही मए नाराज हो गयी तो?

देव – तो मए आपको “प्यार से “ मन लगा.

प्राण – लगता है आपसे बातो में जीत पाना कठिन होगा मेरे लिए. और फिर आपके ये डोरे डालने की आदत तो उफ्फ्फ. अब आपकी ताक़तों से नहीं बल्कि आपके प्यार से दर लगता है साहिब.

देव – अरे कहा राजकुमारी आप दर जाये ऐसा तो कुछ दिखाया hi नहीं हमने. आप चाहेगी तो कभी वो भी देख लीजियेगा. वैसे अगर डोरे डालता तो क्या आप फस्ती?

प्राण - ये तो हम भी नहीं जानते देव लेकिन खूबसूरती में तो आप भी काम नहीं. आइये अंदर चलते है. मए पिताजी को भी सन्देश भिजवा देती हु वो भी जल्द hi आ जायेगे और आपसे बात भी कर लगे.

देव – क्या बात है पहली मुलाकात भी अचे से नहीं हुई और आप हमें अपने पिता श्री से मिलवाने को व्याकुल भी हो गयी लगता है आप मेरे बिना रह hi नहीं प् रही है मिलान की इतनी बेताबी?

प्राण प्यार से घूरते हुए – देव अब बस भी कीजिये. कितना छेड़ेगे हमें. चलिए अंदर.

देव – नहीं राजकुमारी अभी नहीं अभी बहोत समय हो चूका है और रत भी ख़तम होने को है. मए दिन में आउगा. इस महल के वारिस से इसका सौदा कर के. वैसे आपकी इजाजत है न ? मए इस महल को खरीद सकता हु न उसके मालिक से? कही ऐसा न हो के मए खरीद भी लू मेरे पैसे भी लग जाये और आप मुझे बहार गेट पे hi खड़ा रखे.

प्राण थोड़ा इतराते हुए – हम्म्म्म ऐसा हो भी सकता है क्यों की दुनिया के लिए भले hi इस महल का मालिक कोई और है जिससे आप सौदा करने जा रहे है लेकिन इस महल पे कब्ज़ा तो मेरा hi है शायद में आप को महल खरीद लेने के बाद भी यहाँ आने hi न दू तो? और मए भी बिना कोई मुआवजा लिए अपना कब्ज़ा क्यों छोडूगी? भले hi ये कब्ज़ा जबरदस्ती का है लेकिन महल है तो मेरे hi कब्जे में न ? तो आपको हमें भी खुश करना होगा. महल का मुआवजा देकर. तब महल मिलेगा आपको.

देव – हे भोलेनाथ फिर तो मेरे पैसे डूब जायेगे. आप ऐसा न करे राजकुमारी मुझ गरीब पे दया कीजिये. रही बात आपको खुश करने की तो मेरा जो है वो आप ले सके तो ले लीजिये. बोलिये ले पायेगी?

प्राण – अच्छा जी खरीदने निकले हो महल और खुद को गरीब कहते हो वाह राजकुमार क्या बात है? वैसे ऐसा क्या है आपके पास जो आप समझ रहे है मए न ले पाउगी?

देव – मए तो आपसे निवेदन hi कर सकता हु आप आज्ञा दे तो मए ये महल खरीद लू? बाकि मेरे पास जो है वो भी आप देख लेना जब आपका मन हो.
 
अपडेट – 252

प्राण - जाइये राजकुमार कर लीजिये सौदा इस महल का आप भी क्या याद रखेंगे हमें, हमने दिया आपको ये महल हमारी पहली मुलाकात की निशानी के टूर पर. हमें नहीं चाहिए कोई मुआवजा वैसे भी हमने आपको बताया हमने आपकी गैरहाजिरी में इस महल को बस सुरक्षित रखने के लिए hi यहाँ डेरा डाला था है यदि कब्ज़ा किया होता तो मुआवजा भी लेते. कब्ज़ा नहीं तो मुआवजा कहे का? हमने तो बस पहरेदारी hi की है. है आप उसके बदले अगर हमें कुछ मेहनताना दे देंगे तो वही बहोत होगा हमारे लिए.

देव – आभारी रहुगा राजकुमारी प्राण और आपका ये तोहफा भी बहोत सहेज के रखुगा. रही बात मेहनताने की तो वो भी दे पाया तो एक दिन दे दुगा. और आप ले पायी तो ले लेना.

प्राण – हाहाहाहाहा बहोत खूब देव आप बेमिसाल है. अब अभी क्या इरादा है?

देव – इरादे तो कुछ नेक नहीं है लेकिन वक़्त की मज़बूरी है इसीलिए अभी इजाजत चाहुगा हलाकि जाने का मन तो मेरा भी नहीं लेकिन मजबूर हु. वैसे भी ये महल अपने नाम करवा के मुझे यही आना है. अपने कुछ साथियो के साथ.

प्राण - ठीक है फिर मए आपका कल इंतजार करुँगी इंसानी रूप में hi.

देव - चिंता मत कीजिये जो मेरे साथ आये है वो भी कुछ काम नहीं है. आप किसी भी रूप में रहे उन्हें फरक नहीं पड़ने वाला. वैसे वो सब आपको भी पसंद आएंगे.

---------- अब आज्ञा दीजिये कल मिलता हु आपसे.

प्राण - ठीक है देव शुभ रात्रि. मुझे बेताबी से कल का इंतजार रहेगा.

फिर देव वह से गायब हो जाता है और पीछे प्राण उस जगह को मुस्कराती हुई देख रही थी. जहा कुछ देर पहले देव की परछाई थी. उसके बाद प्राण तेजी से अंदर जाती है अपने रूम में.

प्राण आंखे बंद कर के एक जगह कड़ी हो जाती है और अपने पिता को यद् करती है तो सामने एक भयानक शकल की आकृति उभर के आती है.

प्रेत राज - कहो पुत्री इस समय कैसे यद् किया, कोई विपत्ति आयी है क्या?

प्राण - कोई विपत्ति नहीं आयी पिता जी, किन्तु आपके लिए एक अच्छी खबर है, पिता जी वो आ गए जिसका हमें और आपको इंतजार था.

प्रेतराज - लेकिन तुम्हे किसने कहा ये वही है?

प्राण - आप तो जानते है के इस महल को हमने किन किन शक्तियों से बांध के रखा है. कोई साधारण आत्मा तो यहाँ आ hi नहीं सकती कोई दिव्या आत्मा hi आ सकती है और फिर मैने खुद उनसे परिचय लिया, बिना कुछ बताये. तो उन्होंने अपने परिचय में मुझे बताया के वो नागलोक के युवराज देव सिंह है.

प्रेत राज - ये तो सचमुच बेहद ख़ुशी की बात है आखिर हमारा इंतजार पूरा हुआ. और तुम्हारी म्हणत भी रंग लायी है बेटी. लेकिन वो है कहा अभी? मेरी बात उनसे करवाओ उन्हें सामने लाओ मए उनसे मिलने को बेचैन हु. उनसे बात कर लू तो मए अभी आ जाता हु. अब साबरा नहीं होता.

प्राण - वो इस वक़्त यहाँ नहीं है. वो ये कह कर चले गए के कल दिन में आएंगे. इस महल को अपने नाम करवाने के बाद. इसके असली मालिक को इस महल की कीमत दे देने के बाद hi वो इस महल में आधिकारिक तौर पर आएंगे और रहेंगे भी.

प्रेतराज - तुमने ठीक कहा पुत्री ये देव सिंह hi हो सकते है. इतने ऊंचे विचार हर किसी के नहीं होते. देखो बेटी कल जब वो आये तो हमें सन्देश भेज देना हम खुद उनसे बात करेंगे.

प्राण - ठीक है पिता जी.

इधर देव वापस अपने स्थूल शरीर में वापस आता है. तो देखता है के 4 बजने वाले है और कमरे में शलाका और रूद्र भी साधना में बैठे है तो वो भी चुप चाप अपनी साधना में लीं हो जाता है.

दूसरे दिन सुबह नास्ते पर

देव – है तो शलाका अब बोलो क्या प्लान है कहा चलना है?

शलाका - देव मैने एक बांग्ला यहाँ खरीद लिया है जो तुमने कहा था और अब तो बस उसी बन्दे के पास चलना है. और मैने देखा है अभी थोड़ी देर पहले के वो अपने hi झोपड़े में नशा कर के पड़ा है और अपनी बीवी से लड़ भी रहा है. वो इतनी जल्दी नार्मल होने वाला नहीं इसीलिए आराम से नाश्ता कर के निकलते है. कही नहीं जायेगा वो इतनी जल्दी.

रूद्र - है ये सही है पहले पेट पूजा hi करते क्या पता दिन भर कहा कहा भटकना पड़े. वैसे देव ये सब तो शलाका कही जाये बगैर भी कर सकती है न फिर ये नार्मल रास्ता क्यों?

देव – अबे सब कुछ मैजिक से नहीं होता कुछ बाटे सीधे तरीके से करना hi सही होता है. यु तो हमें कुछ करना hi न पड़े अगर सब मैजिक से करे तो. लेकिन उससे हमारी शक्तिया काम होती जाएगी. क्यों के हम उन पर hi निर्भर हो जायेगे. और इससे होगा ये के हम हो जायेगे कमजोर जो हमारे लिए बुरा होगा बहोत बहोत बुरा. और हमारे दुश्मनो के लिए इससे अच्छा तो कुछ हो hi नहीं सकता न. इसलिए नार्मल hi चलना है. और फिर यद् है न हमें इस मिशन में उस मन्नू को आम आदमी बैंकर hi हराना है बस उसके बराबर की ताक़तों से. उसे पूरा मौका दुगा मए अगर वो मुझे हरा सके तो हरा दे. और तू सुन ले बे यहाँ की जो कलए है उनकी प्रैक्टिस पे भी ध्यान दे ले थोड़ा सा हर वक़्त नीलम के साथ गुटरगूँ न किया कर.

रूद्र – ाजी है घंटा हराएगा वो चूज़ा मुझे अपनी पिस्टरोल से. मए बिना शक्तियों के भी उस जैसे 100 मन्नू को संभल सकता हु. अपना रूप नहीं देखा अभी उसने, जनता नहीं क्या भाई को सेल.

देव - है बे मालूम है जनता हूत ु कितना बड़ा राक्षस है. बिना शक्तियों के भी. वैसे भी उसके पास तो कोई जादुई ताकते या शक्तिया है नहीं तो उस के सामने क्या इस्तेमाल करना इन चीज़ो को. ये सब तो हमें बचा के रखनी है हमारी लड़ाई बहोत लम्बी है. ये इतनी आसानी से ख़तम नहीं होने वाली.

रूद्र - डरा मत बे ऐसे तो मए बड़ा हो जाउगा . मेरी नीलम का क्या होगा यार.

शलाका उसकी भोली शकल देख के हंस पड़ती है.

देव - अबे मारा क्यों जा रहा है तुझसे ज्यादा समझदार तो नीलम है सेल सबर का फल मीठा hi मिलेगा बहोत मीठा आम.

रूद्र - सेल फल तो कब के पाक चुके है, और आम तो बहोत बड़े और रसीले हो चुके है तेरी वजह से खा नहीं प् रहा हु मए.

शलाका – शुतुप रूद्र.

रूद्र - मए कितना सबर करू यार तुझे तो पता भी नहीं जब तुझसे नहीं मिला था न तब भी नीलम के साथ hi था लेकिन हमने शादी नहीं की अबे शादी क्या सेल हल्का फुल्का रोमांस तक न किया हमने. इसीलिए तू मुझे सबर का पथ न पड़ा तो बेहतर होगा वार्ना मुँह फोड़ दुगा तेरा सेल तेरी वजह से अब तक कुंवारा भटक रहा हु सब सेट है फिर भी अकेला hi घूम रहा हु.

शलाका की हंसी तो उनकी बहस सुन के रुक hi नहीं रही थी.

रूद्र - ा शलाका तू हंस मत तू भी लटक गयी न इस चक्कर में देख तेरा नागार्जुन भी रेडी है फिर भी यहाँ धक्के खा रही है हमारे साथ. सोच अगर अपनी नगरी में होती तो तेरे बापू ने तुझे ब्याह के नागलोक भेज भी दिया होता और तू अपने बच्चो के साथ खेल राइ होती. तेरा बाप भी नाना बनने का सुख भोग रहा होता. और तू नागार्जुन का भोग लगा चुकी होती.

शलाका - बस कर रूद्र हंसा हंसा के मरेगा क्या . और मए कोई मरी नहीं जा रही शादी के लिए. मए इंतजार कर लगी चलो अब जल्दी से नाश्ता भी हो गया है अपना. क्यों के ये हमारी शुरुआत hi है बस अंत तक पहुंचने के लिए तो चलो शुरू करते है रॉक न रोल .

रूद्र – एस्सस वे कैन दो आईटी. लेटस बूम.

फिर तीनो वह से निकलते है बहार hi उनके लिए होटल की गाड़ी बंव कड़ी थी वो लोग बैठते है उसमे और शलाका गाड़ी बड़ा देती है उस बस्ती की तरफ जहा रहता है उस आलीशान लेकिन खतरनाक महल का मालिक.

थोड़ी देर के बाद शलाका गाड़ी रोकती है.
 
अपडेट - 253

फिर तीनो वह से निकलते है बहार hi उनके लिए होटल की गाड़ी बंव कड़ी थी वो लोग बैठते है उसमे और शलाका गाड़ी बड़ा देती है उस बस्ती की तरफ जहा रहता है उस आलीशान लेकिन खतरनाक महल का मालिक.

थोड़ी देर के बाद शलाका गाड़ी रोकती है.

अब आगे . . .

ये एक बेहद hi गरीब टाइप की बस्ती थी जिसमे अधिकांश मजदूर टाइप के hi लोग रहते थे या फिर उनसे भी गरीब जो दिन भर कचरा बिन के या रिक्शा चला के या भीख मांग कर अपने परिवार का और अपना गुजरा करते है.

बस्ती की हालत बेहद ख़राब थी. सुबह का समय था लोगो की आवाजाही चालू hi थी. लेकिन इस वक़्त से hi वह जिंदगी चल नहीं दौड़ रही थी. कुछ लोग एक कोने में बैठे गप्पे हेंक रहे थे तो कुछ लोग जुआ खेल रहे थे बीड़ी का धुआं फैला हुआ था चारो तरफ से. वही कुछ नंगे बच्चे खेल रहे थे. नालिया भयानक बदबू मर रही थी. जगह जगह कचरे के ढेर सड़ांध मार रहे थे और उस पर भीं भीनती मक्खिया माहौल को बिगड़ने में अपना पूरा योगदान दे रही थी.

बस्ती की गली में भी रस्ते की जगह नाली hi बानी थी जो कीचड़ से भरी हुई थी. और वह के रहने वाले तो ऐसे गुजर रहे थे जैसे बहनचोद कोई साफ सुथरा हाईवे हो. तीनो ने एक दूजे को देखा.

रूद्र - अबे जाये कहा से रास्ता किधर है ?

शलाका - वही है जहा से लोग निकल के आ रहे है. हमें वही से जाना होगा.

रूद्र - हैट रे मए न जा रहा वह से. साला राजमहलों से सीधा गटर में. पागल हुआ है क्या?

देव गली में hi नजर गड़ाए था उसने बिना रूद्र की तरफ देखे hi कहा

……….. बकवास न कर बे चल चुप चाप और अब आगे तू चलेगा हम दोनों तेरे पीछे आएंगे.

रूद्र ने सदा सा मुँह बना के देव को देखा और मन hi मन हजरो गालिया दे दी उसे.

देव – चल बे आगे, गालिया बाद में देते रहना. ी डोनेट मंद एंड ी don’t केयर.

रूद्र ने ब्लैक चमचमाती हुई बंव का गेट खोला और शानदार सूट में बहार निकला उसके ब्लैक जुटे भी सूरज की रौशनी में भयानक चमक रहे थे. वो आगे बड़ा तो शलाका उसे रास्ता बताती जा रही थी पीछे से. तीनो hi एक डैम भयानक स्मार्ट लग रहे थे. आजु बाजु वाले लोग उन्हें आश्चर्य से देख रहे थे के ऐसे शानदार लोग इस स्लम बस्ती में क्यों आये है, लोंदे तो नजरो से hi शलाका को छोड़ने में लग गए थे यहाँ तक की कुछ ठरकी बूढ़े भी शलाका को देख कर अपना लुंड सहलाने से खुद को रोक नहीं प् रहे थे उसकी मटकती गांड और भरी गोर चुके उन सब पर कहर बरसा रहे थे उसके पतले होठ सब का गाला सूखने के लिए काफी थे. थोड़ी hi देर के बाद वो तीनो एक टूटी फूटी झोपडी के बहार खड़े थे.

रूद्र - हशह्ह्ह आखिर आ hi गए. ी सक्सेस्स्फुल्ली कम्पलीट माय टास्क मास्टर नाउ योर टर्न.

देव ने आगे बढ़ कर दरवाजा बजाय लेकिन कोई जवाब न आया. तीन चार बार दरवाजा पीटने पर अंदर से एक औरत ने दरवाजा खोला जो उस वक़्त सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में कड़ी थी उसके बाल बिखरे हुए थे पेटीकोट पे जहा साइड में नाडा बांधते है वो हिस्सा जरुरत से ज्यादा hi फटा हुआ था ब्लूज़ का भी सिर्फ बीच का हुक लगा था जिस वजह से ब्लाउज के ऊपर से और नीचे से उसके लगभग पूरे hi मोठे मोठे काळा चुके बहार कूद पड़ने को तैतयार थे बस उस एक कमजोर हुक ने बड़ी hi बहादुरी से उन्हें बहार निकलने से रोका हुआ था. उसका ब्लाउज निप्पल वाली जगह पे थूक से गीले अलग hi चमक रहे थे. चुचो की घाटी पर बने लाल निशान उनके दबोचे जाने की कहानी बता रहे थे उस पर दांतो के निशान बता रहे थे के उन्हें चबाया भी गया है बहोत देर तक. यही हल उसकी कमर का भी था जिस पर नाखुनो के निशान भी थे और जो मसले जाने की वजह से लाल भी पड़ी हुई थी. कुल मिला के उसे देख के कोई भी बता सकता था के वो अंदर किस काम में बिजी थी. और दरवाजा खुलने में इतनी देर क्यों लगा दी थी.

तीनो ने उसे गहरी नजर से देखा. वो औरत भी तीनो को हैरत से देख रही थी के इतने बड़े लोग यहाँ क्या करने आये है. उसे अपनी हालत का तो पूरा अहसास था लेकिन उसके चेहरे पे कोई शर्मिंदगी नहीं थी बस आधे में उठ आने की झुंझलाहट जरूर थी. और चेहरे से hi पता चल रहा था के अगर वह उनकी जगह बस्ती का कोई और आदमी होता तो वो उसे अभी लात मार के भगा देती और 100 गालिया देती हुई उसके मुँह पे दरवाजा पटक के मरती वो अलग. लेकिन इस शानदार टेकड़ी को अपने दरवाजे पे देखकर उसके नाले भी ढीले पद गए.

औरत - जी कहिये ?

शलाका - धन्ना है क्या?

औरत - है जी है न अभी बुलाती हु. आप लोग आइये अंदर

रूद्र - न, हम लोग इधर hi ठीक है तुम धन्ना को बुलाओ जल्दी से.

वो औरत अंदर गयी और थोड़े देर के बाद धन्ना बहार आया वो भी पसीने में भीगा हुआ hi था, ऊपर से नंगा और नीचे एक मैली और फटी हुई सी लुंगी पहनी हुई थी. तीनो को देखते hi धन्ना हाथ जोड़े उनके सामने आधा झुक गया.

धन्ना – जी हुजूर कहिये क्या बात है?

रूद्र - क्या भाई सुबह सुबह म्हणत ?

धन्ना – जी? मए समझा नहीं.

देव – वो छोडो हमें तुमसे कुछ काम है तुम अभी हमारे साथ चलो.

धन्ना - कहा चलना है मालिक ?और आप लोग है कौन ?

रूद्र - जो भी है ये समझ लो तुम्हारे लिए तो अच्छा वक़्त बन कर hi आये है. अब जल्दी चलो यहाँ से यार यहाँ खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा मुझसे. देर की तो अच्छा वक़्त कही बदबू की वजह से चला न जाये फिर करते रहना दिन भर म्हणत अंदर भी और बहार भी.

शलाका - घर में अभी कौन कौन है?

धन्ना – जी मए हु मेरी जोरू है और मेरी बच्ची है जो बहार खेल रही होगी.

देव – ठीक है एक काम करो तुम अपने परिवार के साथ बहार मैं रोड पे आओ हम लोग तुम्हारा इंतजार कर रहे है.

धन्ना - लेकिन मालिक आप लोग है कौन और हमें कहा ले जा रहे है.

देव – घबराओ मत धन्ना सब बता देंगे अभी फ़िलहाल तुम लोग 5 मिनट में कपडे बदल के आ जाओ. हम तुम्हारा इंतजार कर रहे है. देव ने बहोत आराम से कहा जिससे धन्ना कुछ कुछ आश्वस्त हो गया के ये कोई गलत लोग नहीं है.

इतना कह कर देव रूद्र और शलाका वह से वापस पलट गए और बहार आकर गाड़ी में बैठ गए सभी लोग उन्हें देख रहे थे. इतने शानदार कपडे कीमती जुटे और तीनो की आँखों पे भयानक स्टाइलिश चश्मे और उस पर इतनी महंगी गाड़ी वाले इस गन्दी बस्ती में कैसे? और क्यों? ये सवाल सब के चेहरे पे साफ़ दिख रहा था कोई 10 मिनट बाद धन्ना अपनी बीवी और बेटी के साथ उन्हें आता नजर आया.

रूद्र - देव मए तेरे हाथ जोड़ता हु भाई थोड़ा सा मैजिक उसे करने दे मए इनके साथ कार में कैसे बैठुंगा. बहोत बदबू आएगी यार. प्लीज.

शलाका और देवा मुस्करा दिए.

देवा – ठीक है लेकिन खुशबू इतनी hi फैलनी चाहिए कार में के उन्हें कोई शक न हो. वार्ना मए साडी खुसबू गायब कर दुगा.

रूद्र - थैंक्स बीआरओ. भगवन करे जल्द hi तू 8-10 बच्चो का चाचा बने.

शलाका हस्ते हुए - चल चल 8-10 बच्चो के बाप.

धन्ना उस गाड़ी के सामने आया तो गाड़ी देख कर hi उसकी आंखे चुंधिया गयी नयी चमचमाती ब्लैक कलर की बंव जिसके पूरे शीशे भी ब्लैक hi थे.

धन्ना हाथ बांध कर गाड़ी के पास आकर खड़ा हो गया उसे अंदर कुछ नजर नहीं आ रहा था. उधर सरे लोग आंखे फाडे धन्ना को और गाड़ी को hi देख रहे थे. और सोच भी रहे थे के ये धन्ना गाड़ी के पास क्या कर रहा है.

पीछे वाली सीट से शलाका निकली और उन्हें अंदर बैठने को बोलै पहले धन्ना और फिर उसकी बीवी अपनी 7 साल की बेटी को लेकर उस गाड़ी में बैठी तो उसके बगल में शलाका भी बैठ गयी.

अब क्यों की रूद्र ने गाड़ी में मैजिक से परफ्यूम स्प्रे कर दिया था इसीलिए उनके बदन से कोई बदबू नहीं आ रही थी.

धन्ना – मालिक मए समझ नहीं प् रहा हु के आप लोग कौन है और हमें क्यों और कहा ले कर जा रहे है हमसे कोई गलती हुई क्या?

देवा – नहीं धन्ना कोई गलती नहीं हुई बस तुमसे कुछ बात करनी है लेकिन ये जगह ऐसी बातो के लायक नहीं इसीलिए तुम्हे सही जगह ले के जा रहे है तुम परेशां मत हो थोड़ी देर में hi साडी बाटे तुम्हारे सामने होगी. आराम से बैठो.

रूद्र गाड़ी चलते हुए उसी बंगले के सामने आ जाता है जो शलाका ने लिया था. पोर्च में गाड़ी रोक कर रूद्र और देवा उतारते है शलाका भी बहार आ जाती है और उन लोगो को भी नीचे उतरने के लिए कहती है.
 
अपडेट - 254

धन्ना और उसकी बीवी तो हैरान से उस बंगले को देख रहे थे.

देवा - आओ धन्ना अंदर आ जाओ यहाँ हम लोग आराम से बात कर पाएंगे.

धन्ना - लेकिन हुजूर हमारे पैर गंदे है आपके माकन का फर्श ख़राब होगा.

देव – मुस्कराते हुए ……. अरे कुछ नहीं होगा तुम लोग अंदर आओ.

फिर सभी अंदर आ जाते है जहा हॉल में hi आलीशान सोफे रखा था. रूद्र देवा और शलाका आगे बढ़कर उन पर बैठ जाते है उधर धन्ना अपने परिवार के साथ सामने हाथ बंधे खड़ा था.

देवा – अरे रुक क्यों गए आप लोग आओ और यहाँ बैठो सोफे पर.

धन्ना फिर से डरते हुए – नहीं मालिक सोफे ख़राब हो जायेगा हमारे कपडे आप देख hi रहे है ये बहोत मेले है.

रूद्र – अरे यार अब आ भी जाओ न क्यों लम्बा खींच रहे हो हर बात को आओ बैठो अपने परिवार के साथ. किसी बात की चिटा मत करो.

धन्ना और उसकी बीवी धीरे धीरे चलते हुए आगे बढ़ते है और सोफे पे बैठते है , बैठते क्या है बस थोड़ी सी गांड टिका लेते है अच्छी तरह बैठने में अभी भी उन्हें बहोत ज्यादा संकोच हो रहा था. लेकिन उनकी बेटी तो कूद के चढ़ गयी सोफे पर और ख़ुशी से उछलने लगी.

देवा ने शलाका को इशारा किया तो शलाका ने सामने टेबल पे राखी डिशेस के ढक्कन हटा दिए जिसमे तरह तरह की खाने की चीजे थी और फल भी थे.

देवा – लो धन्ना कुछ खा लो

धन्ना – नहीं सर्कार ये हम नहीं खा पाएंगे. आप लोग बस ये बताइये के आप लोग हमें यहाँ क्यों लाये है. मेरा जी बहोत घबरा रहा है. इन सब बातो की आदत नहीं है न हमें.

देवा - बताता हु पहले ये जूस पी लो. शलाका ……………..

शलाका सामने रखे जग से जूस के गिलास भर्ती है और सभी को देती है धन्ना की बेटी तो ख़ुशी से ले लेती है और पीने लगती है. लेकिन धन्ना और उसकी बीवी गिलास को और उसमे रखे जूस को hi देखते रहे, लेकिन पीने की हिम्मत नहीं हो रही थी उनकी.

देवा रूद्र और शलाका ने भी अपने गिलास उठाये और जूस पीने लगे.

देवा - देखो धन्ना डरने की कोई जरुरत नहीं है तुम ये जूस पीयो और मेरी बात ध्यान से सुनो.

मेरा नाम देवा है ये मेरा भाई रूद्र है और ये मेरी साली है इनका नाम है शलाका. हम तुमसे एक सौदा करने आये है.

धन्ना - मुझसे? भला आप जैसे बड़े लोग हमसे क्या hi सौदा करेंगे साहिब? मेरे पास तो कुछ है भी नहीं. शायद आपको कुछ गलफहमी हुई है . मए तो एक बेहद hi गरीब और मामूली आदमी हु जो गली मोहल्लो से कचरा बीन कर अपना और अपने परिवार का गुजरा करता हु. मेरी बीवी और बच्ची के आलावा मेरा कोई नहीं है. और इन दोनों को मए नहीं बेचने वाला. मए गरीब जरूर हु लेकिन बेगैरत नहीं हु साहब मए हाथ जोड़ता हु मुझ गरीब पे जुल्म मत कीजिये. मेरी बीवी के सिवाय मेरा कोई नहीं और मेरी बच्ची तो हम दोनों की जान है. अगर आप लोगो ने उसे हमसे छीन लाया तो हम दोनों hi जीते जी मर जायेगे साहिब हम पे रहम कीजिये. इस मासूम पे दया कीजिये साहिब. इसे हमसे अलग मत कीजियेगा.

धन्ना की बीवी - आप हमें छोड़ दीजिये हमें जाने दीजिये साहब. हम मर जायेगे अगर हमारी बेटी हमसे दूर हुई तो. हम आपके आगे हाथ जोड़ते है ऐसा जुल्म मत करना.

देवा – धन्ना……… ये तुम दोनों क्या बाते करने लगे शांत हो जाओ तुमसे किसने कहा के हम तुम्हारी बीवी या बेटी तुमसे खरीदने आये है. क्या हम तुम्हे इतने गिरे हुए लगते है? तुम शायद भूल रहे हो के तुम्हारे पास एक आलीशान महल है जिसके के तुम एकलौते मालिक हो. हम उसे खरीदने की बात कर रहे hae.aur तुम क्या अनाप शनाप सोचने लगे.

देवा के मुँह से महल का नाम सुन कर धन्ना के माथे पे पसीना आ गया. वो और उसकी बीवी एक दूजे को देखने लगे उसकी बीवी की गर्दन इंकार में हिलने लगी.

धन्ना - ओह्ह्ह तो आप उस मनहूस महल की बात कर रहे है. मुझे माफ़ कीजिये साहिब मैने गलत सोच लिया, क्या करू छोटा आदमी हु न छोटी बुद्धि है. था वो कोई आलीशान महल किसी ज़माने में सर्कार, पर अब वो सिर्फ एक भूतिया महल है जहा रत को तो छोडो दिन में भी कोई जाने की हिम्मत नहीं करता. मुंबई जैसी जगह पे होने के बावजूद उस की तरफ कोई आंख उठाने की हिम्मत नहीं कर पता, आम आदमी तो छोडो यहाँ के बड़े बड़े गैंगस्टर और भाई लोग भी उस तरफ नहीं झांकते. क्यों की वो सच में भूतिया hi है. ये साबित भी हो चूका है. पूरे देश में ऐसी कुछ hi इमारते है जिन्हे सरकारी टूर पर भूतिया घोषित किया गया है. और इसे इत्तेफ़ाक़ कहे या मेरा खोता नसीब के उन कुछ गिनी चुनी इमारतों में एक वो महल भी है. इसीलिए उसका मालिक हो कर भी मए कंगाल hi हु.

देवा – धन्ना मए सब जनता हु उस महल के बारे में और मए तुमसे वो महल खरीदना चाहता हु.

धन्ना – मालिक आप गलती कर रहे है. उसे खरीदने की बात सोचना भी आपको महंगा पद सकता है. मुझे नहीं चाहिए ऐसे पैसे जिससे किसी की जान चली जाये, मए एक बेहद गरीब इंसान हु लेकिन फिर भी किसी को मर कर मए अपने परिवार का पेट भरना गुनाह समझता हु. और अगर मैने वो महल आपको दिया तो आप लोगो की जान जाएगी hi और मए नहीं चाहता मेरी वजह से ऐसा हो. आपने अभी देखा न जब आपने महल का नाम hi लिया था तो मेरी बीवी की गर्दन इंकार में हिलने लगी थी क्यों की ये भी इस सच्चाई से वाकिफ है और हम दोनों hi नहीं चाहते के कोई मासूम इंसान उस महल के रूप में गलती से भी हमसे अपनी मौत खरीद ले. उस महल को भूल जाइये साहिब मए आपसे हाथ जोड़ कर विनती करता हु.

देवा – तुम्हरी बातो से मुझे ख़ुशी हुई धन्ना इतना गरीब होने के बाद भी तुमने सच का साथ दिया और न सिर्फ अपनी बात ईमानदारी से सामने राखी बल्कि वो भयानक महल बेचने से इंकार भी किया. वार्ना तुम्हारी जगह अगर कोई लालची इंसान होता तो ऐसे महल के खरीददार को सामने प् कर उसकी बड़ाई करता और जैसे तैसे कर के बेचने की कोशिश करता. पर तुमने ऐसा नहीं किया. है वो सब बाटे सच है जो तुमने अभी कही और मए ये सब जनता भी हु लेकिन फिर भी मुझे वो महल चाहिए तुम उसकी कीमत बोलो. और है मए कोई गैंगस्टर या बुरा इंसान नहीं हु. मए वह एक होटल बनाना चाहता हु वह की समस्याओ को मए जनता भी हु और यकीन मनो उस से मए महल को आज़ाद भी करवा लगा.

धन्ना – हुजूर जिस महल को कोई फोटो में देखने की हिम्मत नहीं कर सकता आप उसे खरीदने आये है. उसकी कोई कीमत नहीं है मालिक. मए यु hi लिख के दे देता हु. आज से वो महल आपका हुआ. मुझे कुछ नहीं चाहिए उस के बदले में क्यों की मेरे नाम पे वो महल है फिर भी आज तक मुझे दरिद्रता hi नसीब हुई है. थे मेरे पूर्वज कभी राजे महाराजे लेकिन वो बहोत ज्यादा पुराणी बात है कई पीडिया गुजर गयी अब तो बस मए नाम का hi उस महल का मालिक हु जिस तरह मेरा नाम धनराज है लेकिन फिर भी पॉकेट में धन का कोई राज नहीं और मए धनराज होकर भी धन्ना बना हुआ हु उसी तरह वो बस नाम का महल है असल में तो वो भूतो का डेरा hi है. तो नाम पे मत जाइये. वो महल मेरे लिए अभिशाप है लोग मेरा मजाक उड़ाते है उस महल का नाम लेकर. फिर भी अगर आप उसे लेना hi चाहते है तो मए अभी इसी वक़्त वो महल आपको देता हु आप लोग जहा चाहे वह मुझसे लिखवा ले. मए दस्तखत करने को तैयार हु. और बदले में मुझे कुछ नहीं चाहिए. धन्ना ने हाथ जोड़ के भीगी आँखों से कहा.

देवा – देखो धन्ना ईश्वर जो करता है उसमे कुछ न कुछ राज छुपा होता है. तुम्हरे पूर्वज राजे महाराजे थे न खुद hi देख लो पीडिया गुजर जाने के बाद भी और इतने गरीब होने के बाद भी तुम्हरे अंदर उन्ही की वो ऐडा आज भी जिन्दा है इंसानियत की भलाई करने की ऐडा, दुसरो का हिट सोचने की ऐडा. अब तक सिर्फ तुम्हारा वक़्त ख़राब था धन्ना और वक़्त का क्या है पल में बदल जाता है. उसकी चिंता मत करो. और जो महल तुम्हारे लिए अभिशाप था आज उसी महल की बदौलत तुम्हारी और तुम्हारे परिवार की जिंदगी सवारने जा रही है. तुम्हारा वक़्त बदलने जा रहा है तुम कीमत बोलो. मए यकीन दिलाते हु की जो तुम कहोगे उससे ज्यादा hi दुगा काम नहीं.

धन्ना - मए क्या कहु मालिक मुझे तो कुछ पता hi नहीं है आप मुझे कीमत बताने को कह रहे है मए तो यु hi महल आपको देने के लिए तैयार हु. फिर भी आप इतना कह रहे है तो आप जो उचित समझे 10-20 हजार दे दीजिये. वैसे मुझे वो भी नहीं चाहिए मए आपसे कह चूका हु के बिना कुछ लिए hi मए महल आपके नाम करने को तैयार हु. मए यु hi लिख के देने को तैयार हु.
 
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