Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर - Page 6 - SexBaba
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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

# 43 .

6 जनवरी 2002, रविवार, 15:35; “सुप्रीम”

धीरे-धीरे दोपहर हो गयी। बहुत से यात्री लंच करके पुनः डेक पर आ गए। ऐलेक्स भी डेक पर बैठा क्रिस्टी के अजीब से स्वभाव के बारे में सोच रहा था। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्रिस्टी से क्या बात करे? जब वह क्रिस्टी से दूर रहता था तो हमेशा उसके बारे में सोचता रहता, पर जब क्रिस्टी उसके सामने आती तो वह घबराहट की वजह से सब कुछ भूल जाता था।

उसे इस खतरनाक भूल-भुलैया रूपी रास्ते से ज्यादा खतरनाक क्रिस्टी का रुप लग रहा था। वह समझ नहीं पा रहा था कि वह क्या करे? अभी ऐलेक्स इस उलझन में उलझा ही था कि तभी उसे सामने से क्रिस्टी आती दिखाई दी।

“क्या हुआ ऐलेक्स?“ क्रिस्टी ने पास आकर सामने की कुर्सी पर बैठते हुए कहा- “तुम इतना परेशान से क्यों हो ?“

“परेशान!......और मैं.....नहीं तो... ..मैं भला क्यों परेशान होने लगा ?“ ऐलेक्स ने घबराकर कहा।

“तो फिर तुम मुझसे बात क्यों नहीं करते? अब तो मैंने जान भी लिया है कि तुम गलत आदमी नहीं हो।“ क्रिस्टी ने हवा से माथे पर आए बालों को उंगली से पीछे करते हुए कहा।

“नहीं....नहीं। ऐसी कोई बात नहीं है। दरअसल मैं इस समय शिप के बारे में सोच रहा था।“ ऐलेक्स ने पुनः घबराए से लहजे में कहा।

“शिप के बारे में?“ क्रिस्टी ने बनावटी गुस्सा दिखाते हुए कहा- “तुम्हारे सामने इतनी खूबसूरत लड़की बैठी है और तुम शिप के बारे में सोच रहे हो।......अच्छा बताओ, तुम्हें मेरी इन खूबसूरत आंखों में क्या दिखाई दे रहा है?“ क्रिस्टी ने थोड़ा आगे झुकते हुए ऐलेक्स की आंखों में आंखें डालते हुए पूछा।

“तुम्हारी आंखों में.....।“ ऐलेक्स ने बड़ी मुश्किल से क्रिस्टी की आंखों में देखा। क्रिस्टी को इतना पास पा वह फिर से नर्वस हो गया।

“हां बताओ ना....... तुम्हें मेरी आंखों में क्या दिख रहा है?“ क्रिस्टी ने थोड़ा जिद्दी अंदाज में कहा।

“तुम्हारी आंखों में.............. अरे यह क्या ?“ अचानक ऐलेक्स ने बड़ी अजीब सी आवाज में कहा।

“क्या हुआ मेरी आंखों में?“ क्रिस्टी की आवाज की शोखी बरकरार थी।

“यह तो कोई परिंदा लगता है।“

“मेरी आंखों में परिंदा ?“ क्रिस्टी ने चैंककर ऐलेक्स को देखा।

“अरे नहीं.......तुम्हारी आंखों में नहीं। वहां देखो आसमान पर।“ ऐलेक्स ने कहते हुए आसमान की तरफ एक ओर इशारा किया।

अब क्रिस्टी का चेहरा भी उस ओर घूम गया। आसमान में दूर कहीं से उड़कर, उसी तरफ आता हुआ एक पक्षी दिखाई दिया।

“यह तो कोई पक्षी लग रहा है।“ क्रिस्टी ने कहा।

अब ऐलेक्स उठकर डेक की उस साइड की ओर चल दिया, जिस तरफ वह पक्षी आता दिखाई दे रहा था। क्रिस्टी भी अब ऐलेक्स के पीछे चल दी। अब तक डेक पर खड़ी जेनिथ सहित कई लोगों की नजर उस पक्षी पर पड़ चुकी थी। ऐलेक्स और क्रिस्टी भी वहां पर पहुंच गए।

“उस पक्षी ने अपने पंजे में शायद कोई चीज पकड़ रखी है?“ जेनिथ ने उस दिशा की ओर देखते हुए कहा।

तब तक उड़ता हुआ वह पक्षी, शिप की डेक पर लगी रेलिंग पर आकर बैठ गया। वह एक लंबी पूंछ वाला पहाड़ी तोता था, जिसके पैर में एक लगभग 4 मीटर लंबी डोरी बंधी थी।

“यह तो तोता लगता है।“ जेनिथ ने तोते को देखते हुए कहा- “पर इसके पैर में बंधी यह डोरी कैसी है?“

“लगता है यह किसी जगह पर बंधा हुआ था और यह वहां से डोरी तोड़कर भाग आया है।“ क्रिस्टी ने अपने विचार व्यक्त किए।

“समुद्र में पक्षी उसी स्थान पर बैठता है, जहां पर जमीन हो।“ जेनिथ ने तोते को देखते हुए कहा- “इसका मतलब कि यह तोता जिस दिशा से आया है, उस तरफ जमीन है और वह बहुत ज्यादा दूर नहीं है क्यों कि साधारणतया तोता वह पक्षी है, जो आसमान में उड़ते समय बहुत ज्यादा दूरी तय नहीं करता है।“

“एक बात और भी है।“ क्रिस्टी ने तोते के पैर में बंधी डोरी पर एक नजर मारते हुए कहा- “इसके पैर में डोरी भी बंधी है और किसी पक्षी के पैर में डोरी कोई इंसान ही बांध सकता है। इसका साफ मतलब है कि यह जहां से आया है। वहां पर इंसान भी है और जीवन भी।“

“हमें इस तोते को पकड़ना चाहिए। शायद इससे हमें कुछ और बातें भी पता चल जाएं।“ ऐलेक्स ने एक नजर जेनिथ पर डालते हुए कहा।

“तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो ऐलेक्स।“ जेनिथ ने ऐलेक्स की बातों का समर्थन करते हुए कहा- “पर हमें इस बात की सूचना कैप्टेन को भी दे देनी चाहिए।“

यह कहकर जेनिथ ने कुछ दूर खड़े एक सिक्योरिटी गार्ड को अपने पास बुलाया और उसे कैप्टन तक सूचना पहुंचाने को कह दिया।

अब जेनिथ की नजर एक बार फिर उस तोते पर पड़ी। उधर ऐलेक्स चुपचाप दबे पाँव उस तोते की ओर बढ़ा। ऐलेक्स की नजर तोते के पैर में बंधी डोरी पर थी। तोता भी अब ध्यान से ऐलेक्स को पास आते हुए देख रहा था। तोते के पास पहुंचकर ऐलेक्स ने उसके पैर में बंधी डोरी पर छलांग लगा दी।

मगर तोता पहले से ही सावधान था। वह तेजी से अपने स्थान से, पंख फड़फड़ा कर हवा में उड़ गया। आसमान में उड़ते हुए वह जोर से चिल्लाया- “ऐमू से धोखा..... ऐमू से धोखा..।“

“अरे यह तोता तो काफी तेज है और यह तो बहुत साफ..बोल रहा है।“ क्रिस्टी ने आश्चर्य से भरते हुए कहा।

“इसका मतलब यह है कि यह जहां से आया है, वहां पर सभ्य इंसान बसते हैं।“ जेनिथ ने भी आश्चर्य व्यक्त किया- “अब तो इसे पकड़ना और भी जरूरी हो गया है।“

अब तोता उड़ कर दूसरी जगह पर बैठ गया। लेकिन अब उसकी निगाहें लगातार उस भीड़ पर थीं, जो उसे घूर रही थी। धीरे-धीरे उस तोते को देखने के लिए डेक पर भीड़ बढ़ती जा रही थी।

इस बार ऐलेक्स ने धीरे से जेनिथ को इशारा किया। ऐलेक्स का इशारा समझ जेनिथ एक लंबा राउंड लगा कर तोते के दूसरी साइड में पहुंच गयी। इस बार ऐलेक्स सामने से व जेनिथ पीछे से तोते की ओर बढ़े।

तोते की निगाहें आगे बढ़ते हुए ऐलेक्स पर थीं। ऐलेक्स भी कोई ना कोई हरकत करके तोते का ध्यान अपनी ओर लगाए हुए था। जिसका फायदा उठा कर जेनिथ दबे पांव डोरी की ओर बढ़ने लगी।

डोरी अब जेनिथ से मात्र 1 मीटर की दूरी पर थी। तभी अचानक उस तोते को किसी के पीछे होने का एहसास हुआ। जैसे ही जेनिथ डोरी पर झपटी, तोता बिना एक सेकेंड गंवाए पुनः आसमान में था।

“धोखा.... ऐमू से धोखा......नहीं पकड़ पाओगे......नहीं पकड़ पाओगे।“ तोता आसमान में उड़ते हुए चिल्लाया।

अब तो जैसे तोते को कोई खेल मिल गया हो। वह बार-बार इधर-उधर बैठ रहा था और सारी भीड़ उसे पकड़ने का प्रयास कर रही थी। लेकिन पकड़ नहीं पा रही थी। तभी सुयश, ब्रैंडन और असलम के साथ भागा-भागा डेक पर आ पहुंचा।

सुयश की लाल आंखें इस बात का सबूत थीं कि वह ठीक से सो नहीं पाया है। वह विचित्र तोता इस समय पानी की टंकी पर बैठा, वहां खड़ी भीड़ को घूर रहा था। सुयश ने उस विचित्र तोते को देखा। तोते को देखते ही सुयश का दिमाग बहुत तेजी से चलने लगा उसे एक बार फिर शैफाली के सपने याद आने लगे क्यों कि शैफाली ने अपने सपनों में एक पहाड़ी तोते का भी जिक्र किया था।

सुयश समझ गया कि यह तोता भी उन रहस्यमय घटनाओं की अगली कड़ी है। सुयश की एकटक नजर अब उसे विचित्र तोते पर थी। कुछ देर उसे देखते रहने के बाद, सुयश चलता हुआ पानी की टंकी के नीचे पहुंच गया। तोता बारी-बारी से भीड़ में खड़े सभी लोगों पर नजर दौड़ा रहा था। तभी उसकी निगाह सुयश पर पड़ी।

एक क्षण के लिए वह सुयश को देखता रह गया और फिर उड़ता हुआ खुशी से चिल्लाया-

“दोस्त मिल गया.........दोस्त मिल गया.....ऐमू का दोस्त मिल गया।“ इतना कहकर वह तोता अपने पंख फड़फड़ाते हुए सुयश के कंधे पर आकर बैठ गया।

सभी इस घटना से आश्चर्यचकित रह गये क्यो कि जो तोता आधे घंटे से इन सबको तिगनी का नाच नचाए था वह उड़कर सुयश के कंधे पर इतनी आसानी से क्यों बैठ गया ?

सुयश ने जैसे ही तोते को अपने कंधे पर बैठते हुए देखा, झट से उसके पैर में बंधी डोरी को पकड़ लिया। तोते ने एक नजर गौर से सुयश को देखा और फिर उसके हाथ को, जिसमें वह डोरी पकड़े हुए था। तोता अब फिर से उड़ने की कोशिश करने लगा। वह हवा में अपने पंख फड़फड़ाते हुए चिल्लाया-

“धोखा ....... ऐमू से धोखा..... दोस्त नहीं...... यह ऐमू का दोस्त नहीं....।“ तोता लगातार उड़ने की कोशिश कर रहा था।

तोता फिर तीखी आवाज में चिल्लाया- “छोड़ दे....छोड़ दे..... ऐमू को छोड़ दे....तू दोस्त नहीं....तू ऐमू का दोस्त नहीं।“ उस तोते की आवाज में ना जाने ऐसी क्या बात थी कि सुयश ने एक पल के लिए उस तोते को देखा और फिर उसके दोंनो पंजे पकड़ कर उसके पैर में बंधी डोरी खोल दी।

तोता अब आजाद था। आजादी का एहसास होते ही वह बिना देर किए आसमान में उड़ गया और सुयश के सिर के ऊपर चक्कर काटने लगा-

“छोड़ दिया.....छोड़ दिया......डोरी भी खोल दिया....दोस्त है......दोस्त है..... ऐमू का दोस्त है।“ इतना कहकर वह पुनः सुयश के कंधे पर आकर बैठ गया।

सुयश ने धीरे से अपना बांया हाथ आगे बढ़ाया। वह तोता उछलकर उसकी कलाई पर बैठ गया। विचित्र बात तो यह थी कि उसके पंजों के नाखून, सुयश की कलाई में गड़ नहीं रहे थे।

“यह ऐमू कौन है?“ सुयश ने उस तोते को देखते हुए पूछा।

“ऐमू मैं.....ऐमू मेरा नाम..... मैं ऐमू......तुम ऐमू के दोस्त।“ ऐमू ने अपने पंख फैलाते हुए कहा।

“ये तो काफी समझदार तोता लगता है।“ ऐलेक्स ने ऐमू की ओर देखते हुए कहा।

“काट खाऊंगा..... मैं समझदार नहीं.......मैं तोता नहीं.......मैं ऐमू... ...ये ऐमू का दोस्त।“ ऐमू ने ऐलेक्स पर नाराजगी दिखाते हुए कहा।

“हां...हां हम समझ गये। तुम ऐमू और ये ऐमू के दोस्त।“ जेनिथ ने मुस्कुराते हुए कहा- “लेकिन कुछ और बताओगे?“

“बताऊंगा......बताऊंगा......पहले कुछ खाने को दो......ऐमू भूखा है.. ...पहले खाएगा...... फिर बताएगा।“

जारी रहेगा_________✍️
 
# 44 .

ऐमू को इस तरह से बोलते देख ना चाहते हुए भी सभी के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

“ब्रैंडन...पहले तो शिप को उस दिशा में मोड़ने के लिए कह दो, जिधर से ये तोता........म...मेरा मतलब है कि यह ऐमू आया है।“ सुयश ने ऐमू को देखते हुए तुरंत अपनी बात सुधारी- “और हां ऐमू के खाने के लिए कुछ फल ले आओ।“

“फल नहीं खाता......ऐमू फल नहीं खाता..... फल उल्लू खाता.... ऐमू उल्लू नहीं.........मैं ऐमू.......ये ऐमू का दोस्त..... ऐमू टमाटर, मिर्ची खाता।“ ऐमू ने मुंह बनाते हुए कहा।

“अच्छा-अच्छा ! ऐमू जी के लिए टमाटर व मिर्ची भिजवा दो।“ इस बार सुयश के चेहरे पर भी मुस्कुराहट आ गई।

“अच्छा ऐमू जी, जब तक आप यहां बैठें और टमाटर मिर्ची खाएं। मैं अभी थोड़ी देर में आता हूं।“ सुयश ने ऐमू से कहा।

“जल्दी आना.....ऐमू के दोस्त...... तुम बार-बार ऐमू को छोड़ कर चले जाते हो।“

हालांकि सुयश ने ऐमू की बात सुनी जरुर, पर उसे कुछ समझ में नहीं आया कि ऐमू क्या बोल रहा है ?सुयश ऐमू को ब्रैंडन के हवाले कर, असलम को लेकर एक ओर बढ़ गया।

“कैप्टेन, मेरी समझ में नहीं आया कि आपने उस तोते की वजह से शिप क्यों मुड़वाया ?“ असलम ने चलते-चलते पूछा।

“क्यों ?“ सुयश ने ना समझने वाले भाव से कहा।

“क्यों कि कल जब आपने उस सुनहरे मानव की वजह से शिप को मुड़वाया था। तब से अभी तक हमारे ऊपर कोई मुसीबत नहीं आई है। फिर यह दोबारा से शिप को मोड़ना, मेरी समझ में नहीं आया।“ असलम ने कहा।

“तुम ऐमू को ध्यान से देखो असलम। वह कितनी साफ इंग्लिश बोलता हैं। इसका मतलब वह जिस दिशा से आया है, वहां पर सभ्य इंसान रहते हैं। इसलिए मैंने शिप को उस दिशा में मुड़वा दिया।“ सुयश ने असलम को समझाते हुए कहा।

“ठीक है कैप्टन, अगर आपने ऐसा सोचा है। तो सही ही सोचा होगा। पर जाने क्यों आज मेरा मन बहुत भारी-भारी सा हो रहा है। ऐसा लगता है जैसे आज कोई खतरनाक घटना घटने वाली है।“ असलम के चेहरे पर घबराहट साफ नजर आ रही थी।

“यह तुम्हारा भ्रम भी तो हो सकता है। अच्छा छोड़ो इस बात को।“ कहते हुए सुयश ने टॉपिक को चेंज किया- “यह बताओ कि अलबर्ट की स्थिति अब कैसी है? डॉक्टर निक्सन ने अलबर्ट के बारे में क्या बताया ?“

“अलबर्ट की स्थिति अब पहले से बहुत बेहतर है। कभी-कभी वो थोड़ा भावुक हो जाते हैं। लेकिन कोई ऐसी परेशानी की बात नहीं है। हम लोगों ने उन्हें पुरानी बातें भुलाने के लिए, उनके पुराने कमरे को बदलकर उन्हें नए कमरे में कर दिया है। आज सुबह से ही शैफाली और उसके मम्मी-पापा अलबर्ट के ही कमरे में हैं। डॉक्टर निक्सन के अनुसार भी वह पूरी तरह से नॉर्मल हैं। थोड़ी सी परेशानी उनके सिगरेट ना पीने की वजह से हुई थी क्यों कि वह काफी लंबे अरसे से सिगरेट पी रहे थे। लेकिन धीरे-धीरे वह अपने आप को कंट्रोल कर लेंगे।“ असलम ने कहा।

“चलो पहले मैं उन्हीं से मिल लूं। इसी बहाने थोड़ा उनका मन भी हल्का हो जाएगा।"

लेकिन इससे पहले की सुयश और असलम, अलबर्ट के नए कमरे की ओर बढ़ते, एक सिक्योरिटी गार्ड वहां दौड़ा-दौड़ा आया और बोला-

“कैप्टेन जल्दी चलिए, पता नहीं कैसे हमारी लैब में आग लग गई है?“

“क्या ऽऽऽ?“ सुयश ने आश्चर्य से कहा। यह खबर सुनते ही सुयश का दिमाग ब्लास्ट हो गया।

“असलम जल्दी चलो, लगता है कोई नयी मुसीबत हमारा इंतजार कर रही है।“ इतना कहकर सुयश, असलम को लेकर तेजी से लैब की ओर भागा।

चैपटर-14 6 जनवरी 2002, रविवार, 15:00;

थॉमस अपनी लैब में बैठा हुआ था। उसके बगल में रुमाल का एक ढेर लगा था। वह बार-बार अलग-अलग रुमाल उठाता और उस पर कोई केमिकल डालकर रुमाल को चेक कर रहा था। उसकी गहरी निगाहें रुमाल के ऊपर लगीं थीं।

अचानक एक रुमाल पर केमिकल डालते ही उसकी आंखें चमक उठीं। रुमाल पर कुछ छोटे-छोटे कण अब चमकने लगे थे। थॉमस ने एक बार पुनः वह रसायन उस रुमाल पर डाला और ध्यान से उसके रिएक्शन को देखने लगा। वह काले कण कुछ और ज्यादा गाढ़े हो गए।

“निश्चित ही यह बारूद के कण हैं।“ थॉमस मन ही मन बड़बड़ाया- “इसका मतलब है कि जिसने भी हॉल में लॉरेन को गोली मारी, यह रुमाल उसी का है और उसने रिवाल्वर को रुमाल से पकड़ रखा था।“

रुमाल का एक हिस्सा रिवाल्वर की नाल की वजह से थोड़ा जल भी गया था, जो अब थॉमस को साफ दिख रहा था। रुमाल से अभी भी संदल की खुशबू आ रही थी। थॉमस ने तुरंत रुमाल को उठाकर उसे पीछे पलटा। पीछे उस आदमी का नाम और रूम नंबर पड़ा था। थॉमस ने मन ही मन उस नाम को दोहराया।

“खाना खाने नहीं चलना है क्या सर?“ पीछे से उसके असिस्टेंट पीटर ने आवाज लगाई- “सभी लोग लंच के लिए जा चुके हैं, बस हम ही लोग बाकी बचे हैं।“

“2 मिनट रुक जाओ पीटर........या फिर ऐसा करो कि तुम खाने के लिए चलो, मैं बस थोड़ी ही देर में आ रहा हूं।“ थॉमस ने पीटर से कहा।

“ओ.के. सर।“ कहकर पीटर रुम से बाहर निकल गया, शायद उसे तेज भूख लगी थी।

“मुझे तुरंत कैप्टेन को कातिल का नाम बता देना चाहिए।“ थॉमस मन ही मन बड़बड़ाया।

यह सोचकर वह फोन की ओर बढ़ गया। थॉमस ने जैसे ही फोन को उठाकर अपने कान से लगाया, उसे फोन पर एक खरखराती आवाज सुनाई दी-

“तुझे अपनी जिंदगी प्यारी नहीं है क्या ? जो मेरे बारे में कैप्टन को बताने जा रहा है।“ एकदम से फोन पर आयी आवाज से थॉमस हैरान हो गया।

वह एक पल में समझ गया कि इस फोन के पैरलल में लगे किसी फोन पर कातिल मौजूद है और वह उसे भली भांति देख रहा है। यह अहसास ही उसे एक पल के लिए कंपा गया। थॉमस ने तुरंत आसपास के सभी फोन पर नजर मारी।

उसकी निगाह एक दिशा में जाकर ठहर गई। एक खंभे के पास अंधेरे में खड़ा, उसे एक साया नजर आया। जो उसी की तरफ देख रहा था। कातिल के सीधे हाथ में रिसीवर था, जो वह अपने कान पर लगाये था।

“कौन हो तुम?“ थॉमस ने हिम्मत करते हुए जोर से पूछा और फिर रिसीवर को धीरे से क्रैडल पर रख दिया।

“अभी-अभी तुमने मेरा नाम रुमाल पर से पढ़ा तो है, फिर भी भूल गए।“ कातिल की गुर्राती हुई आवाज वातावरण में गूंजी।

“तो क्या तुम......?“

“मेरा नाम लेने की कोशिश मत करो।“ कातिल ने थॉमस के शब्दों को बीच में ही काटते हुए, उसे चुप करा दिया- “क्यों कि मेरे हिसाब से हवा के भी कान होते हैं और मैं नहीं चाहता कि मेरी आवाज, मेरा नाम अभी किसी तक पहुंचे।“

“क्या चाहते हो तुम?“ थॉमस के शब्दों में भय साफ नजर आ रहा था।

“अजीब पागल हो तुम.....।“ कातिल के स्वर में खतरनाक भाव आ गये- “अब जब तुमने मेरा नाम ‘जान‘ लिया है, तो अब मैं भी तुम्हारी ‘जान‘ ही लूंगा।“

“तुम..... तुम मुझे नहीं मार सकते।“ थॉमस ने गिड़गिड़ाते हुए कहा ।

थॉमस की आँखें अब अंधेरे में भी कातिल के हाथ में थमे रिवाल्वर की स्पष्ट देख रहीं थीं। और इससे पहले कि थॉमस अपने बचाव में कुछ कर पाता, एक ‘पिट्‘ की आवाज हुई और एक गोली उसके गले में सुराख कर गई। थॉमस किसी कटे पेड़ की तरह धड़ाम से फर्श पर गिर गया। उसकी आंखों में आश्चर्य के भाव थे। शायद मरते दम तक उसे अपनी मौत पर विश्वास नहीं था।

कातिल ने रिवाल्वर की नाल से निकलते हुए धुंए को फूंक मारकर हवा में उड़ाया और फिर रिवाल्वर की नाल पर लगा साइलेंसर हटाकर, दोनों ही चीजें अपनी जेब के हवाले कर लीं। अब कातिल रुमाल के ढेर के पास पहुच गया। उसने अपनी जेब में हाथ डालकर एक लाईटर निकाल लिया। ‘खटाक‘ की आवाज के साथ लाइटर ऑन हुई और उससे निकलती हुई लौ ने तुरंत ही रुमाल के गठ्ठरों को अपने घेरे में ले लिया।

कातिल ने एक-दो जलते हुए रुमाल थॉमस के ऊपर व कुछ रुमाल कमरे में इधर-उधर फेंक दिये। धीरे-धीरे पूरे कमरे ने आग पकड़ ली। कुछ ज्वलनशील रसायनों को भी आग ने अपने घेरे में ले लिया। कातिल अब सधे कदमों से रुम के बाहर निकला और एक दिशा में चल दिया। कुछ आगे जाने पर उसकी स्पीड एका एक तेज हो गई। अब वह तेजी से चिल्ला रहा था-

“आग.....आग.....लैब में आग लग गई......गार्ड.....गार्ड..जल्दी सीजफायर लाओ।“ उसके चिल्लाते ही बहुत से लोगों का ध्यान उस ओर आकर्षित हो गया।

तब तक लैब से काला धुआं निकलने लगा था। बहुत से लोग लैब से धुंआ निकलते देख वहां पर एकत्रित हो गए। कुछ लोगों ने शीशे तोड़कर आग बुझाने के यंत्र निकाल लिए। वह सिलेण्डर हाथ में लेकर लैब में घुस गए। आग अभी इतनी ज्यादा नहीं फैली थी कि उसे बुझाया न जा सके।

धीरे-धीरे गार्ड्स ने आग पर काबू पा लिया। कातिल भी अब भीड़ में शामिल हो गया था। आग परशकंट्रोल होते देख उसके चेहरे पर एक दबी-दबी सी मुस्कान आ गयी। तभी वहां भागते हुए सुयश, असलम और ब्रैंडन दाखिल हुए।

“क्या हुआ? यह आग कैसे लग गई?“ सुयश ने एक गार्ड से पूछा।

“पता नहीं सर.......अभी इस बारे में कुछ मालूम नहीं हुआ है.... धुंआ छटे तो शायद कुछ समझ में आए।“

तभी पीटर वहां दौड़ता हुआ आया- “थॉमस सर तो ठीक हैं ना ?..... वो लैब के अंदर ही थे।“

“क्या ऽऽऽ?“ सुयश ने हैरानी से कहा। सुयश तुरंत छलांग लगाकर धुंए को हाथों से हटाता हुआ अंदर दाखिल हो गया।

धुंआ अब काफी कम हो गया था। लैब के सारे खिड़की दरवाजे खोल दिए गए और एग्जास्ट फैन चालू कर दिए गए। बामुश्किल 5 मिनट में ही धुंआ काफी हद तक छंट गया। पीटर भी अब अंदर दाखिल हो गया। तभी सुयश को दूर जमीन पर कुछ पड़ा दिखाई दिया।

पास पहुंचने पर पता चला कि वह थॉमस की लाश है। लाश बुरी तरह से जल गई थी, लेकिन फिर भी पीटर ने उसे पहचान लिया। लाश के कपड़ों से अभी भी कहीं-कहीं से धुआं निकल रहा था। धुंआ निकल जाने की वजह से अब रुम की सभी चीजें बिल्कुल साफ नजर आ रहीं थीं।

जारी रहेगा________✍️
 
# 45 .

थॉमस की लाश देखने के बाद सुयश की नजरें अब पूरी लैब में दौड़ने लगीं।

ब्रैंडन ने किसी भी यात्री को अंदर आने से मना कर दिया। सुयश की नजरें तेजी से किसी सर्चलाइट की तरह पूरी लैब में घूम रही थीं। तभी उसकी निगाह कुछ दूर पड़े एक अधजले रुमाल पर पड़ी। अचानक ही कुछ यादकर सुयश के दिमाग में धमाके से होने लगे। उसने फिर अपनी नजरें इधर-उधर दौड़ाईं।

अब उसकी नजरों के आगे लैब में बिखरे कई अधजले रुमाल नजर आने लगे। सुयश धीरे-धीरे चलता हुआ, थॉमस की लाश के पास आया और उसे ध्यान से देखने लगा। कुछ ही देर में सुयश की पैनी निगाहें थॉमस के गले पर थीं। अब वह थॉमस की लाश के पास बैठकर ध्यान से उसके गले के पास देखने लगा।

ब्रैंडन व असलम की भी निगाहें अब सुयश की निगाहों का पीछा करते हुए थॉमस की लाश के गले पर चलीं गयीं। गले के पास का हिस्सा जल जाने के बाद भी गोली का सुराख स्पष्ट नजर आ रहा था।

“आखिरकार लॉरेन के ब्वॉयफ्रेंड ने एक और कत्ल कर ही दिया।“ सुयश के चेहरे पर अफसोस के भाव आ गये।

“कैप्टेन आपकी यह बात तो सही है कि इनकी हत्या की गयी है और वह भी गोली मारकर। पर आप यह कैसे कह सकते हैं कि उनकी हत्या लॉरेन के ब्वॉयफ्रेंड ने की है।“ ब्रैंडन के स्वर में उत्सुकता के भाव नजर आये।

“ब्रैंडन जरा पूरी लैब में बिखरे हुए इन रुमालों को देखो और कुछ याद करने की कोशिश करो।“ सुयश के शब्दों को सुन ब्रैंडन और असलम दोनों की निगाह लैब में चारों ओर घूम गई।

“मैं समझ गया कैप्टेन कि आप क्या कहना चाहते हैं।“ ब्रैंडन ने गंभीर स्वर में कहा- “थॉमस ने जरूर रुमाल के द्वारा कातिल का पता लगा लिया होगा। जिससे की कातिल ने उसे खत्म कर दिया।“

“लेकिन इससे एक और बात पता चलती है कि कातिल जो भी है, वह बहुत तेज व चालाक है और वह हम लोगों की एक-एक हरकत पर नजर रखे है। ये भी हो सकता है कि बाहर खड़ी भीड़ में भी वह हो और यह पता करने की कोशिश कर रहा हो कि अंदर के हालात क्या हैं?“ सुयश ने बाहर खड़ी भीड़ पर नजर मारते हुए कहा।

“मेरी समझ में यह नहीं आया कि वह कातिल पागल है क्या ? जो उसने कत्ल करने के बाद लैब में आग लगा दी ? क्यों कि उसको भी पता होगा कि अगर शिप में आग ज्यादा भड़क जाती तो पूरा शिप जलकर राख हो जाता और शिप में तो वह स्वयं भी था। फिर उसने इतना बड़ा रिस्क कैसे लिया ?“ ब्रैंडन ने अपने दिमाग में घूम रहे प्रश्नों का उत्तर जानना चाहा।

“ये भी तो हो सकता है कि आग उसने इस तरह लगाई हो कि वह ज्यादा ना भड़कने पाए या फिर आग लगाने के बाद उसने ही सबको बुला कर इकट्ठा किया हो?“ सुयश ने कहा।

“होने को तो कुछ भी हो सकता है लेकिन वह सब हमारी कल्पना मात्र होगा। इसलिए फिलहाल बहस करने का को ई फायदा नहीं है। ऐसा करते हैं सर कि फिलहाल हम इस लाश को भी स्टोर रुम में रखवा देते हैं और बाकी की परेशानियों की ओर ध्यान दें। जो कि आने वाली हैं ना कि जो बीत गईं हैं।“ असलम ने सबको भविष्य की तस्वीर दिखाते हुए कहा।

“ठीक है ऐसा ही करो।“ सुयश ने सिर हिलाते हुए कहा- “ब्रैंडन तुम इस लाश को भी स्टोर रूम में रखवा दो और असलम तुम मेरे साथ अलबर्ट के रुम की ओर चलो।“ इतना कहकर सुयश लैब से बाहर निकल गया। असलम भी उसके पीछे-पीछे था।

6 जनवरी 2002, रविवार, 16:45;

“हां तो ग्रैंड अंकल, अब अगला सवाल।“ शैफाली ने अपनी नीली-नीली आंखें चमकाते हुए अलबर्ट को फिर से एक पहेली में उलझा दिया-

“सबसे पहले आपका जन्म जिस तारीख को हुआ था वह लिख लीजिए.......फिर उसे 4 से गुणा करके उसमें 13 जोड़ दीजिए।“

अलबर्ट शैफाली की कही बातों को सुनकर, एक पेज पर कैलकुलेशन करने लगा। चूंकि रुम का दरवाजा खुला था इसलिए सुयश व असलम को बेल बजाने की जरुरत नहीं पड़ी। वह दोनो कमरे में दाखिल हो गये।

अलबर्ट को कैलकुलेशन में व्यस्त देख सुयश व असलम बिना किसी को डिस्टर्ब किए सोफे पर बैठ गये। उधर शैफाली लगातार बोले जा रही थी-

“अब जो संख्या आई है उसे 25 से गुणा कर दीजिए.......अब आयी नयी संख्या में से 200 को घटा दीजिए..... अब आपका जन्म जिस महीने में हुआ है, उसे इस पूरी संख्या में जोड़ लीजिए......यानी कि यदि आपका जन्म जुलाई में हुआ हो तो पूरी संख्या में 7 को जोड़ दीजिए... ... अब फिर से पूरी संख्या को 2 से गुणा कर दीजिए........अब पूरे में से 40 को घटा दीजिए ........अब सबका गुणा 50 से कर दीजिए... ....अब जिस वर्ष में आपका जन्म हुआ है उसे पूरी संख्या में जोड़ लीजिए.. ....यानी यदि आपका जन्म सन 1950 में हुआ हो तो पूरी संख्या में 50 जोड़ लीजिए........ अब जो भी संख्या आई, उस पूरी संख्या से 10500 घटा दीजिए।“

इतना कहकर शैफाली अब चुप हो गई। अलबर्ट ने सारी कैलकुलेशन करने के बाद, पुनः इस तरह शैफाली को देखा मानो वह पूछना चाहता हो कि ‘अब क्या करना है?‘

शैफाली ने जब अलबर्ट को थोड़ी देर शांत देखा, तो पूछ लिया-

“हां ग्रैंड अंकल अब आप जो भी उत्तर आया है, वह मुझे बता दीजिए।“

‘260435‘ अलबर्ट ने शैफाली को उत्तर दिया।

“इसका मतलब आपका जन्म 26 अप्रैल सन 1935 को हुआ था।“ अलबर्ट शैफाली का उत्तर सुनकर हैरान हो गया। क्यों कि वह जो बोल रही थी, वह बिल्कुल सही था।

अलबर्ट एक पल के लिए अपनी सारी परेशानियां भूल गया। वह काफी देर तक इस कैलकुलेशन में उलझा रहा। परंतु यह नहीं समझ पाया कि यह कैलकुलेशन आई कैसे?

“कहिए ग्रैंड अंकल, पहेली कैसी रही?“ शैफाली ने चहकते हुए कहा।

“बहुत ही शानदार।“ अलबर्ट ने शैफाली की तारीफ करते हुए कहा- “पर तुम इतनी कठिन गणित की पहेलियां बना कैसे लेती हो ?“

“मुझे स्वयं नहीं पता ग्रैंड अंकल। मैं तो बस गणित के इन अक्षरों से खेलती हूं। खेलते-खेलते ये पहेलियां अपने आप बन जाती हैं।“ कहते-कहते शैफाली अचानक रुक गई। उसने इधर-उधर देखा। उसका चेहरा अब सोफे पर बैठे सुयश की ओर था।

“गुड इवनिंग कैप्टेन अंकल।“ शैफाली ने हवा में अपनी नाक पर जोर देते हुए कहा- “आपके साथ भी कोई है?“

“गुड इवनिंग बेटा।“ सुयश के चेहरे पर पुनः शैफाली के लिए तारीफ के भाव आ गये- “मेरे साथ इस शिप के सेकेंड असिस्टेंट कैप्टेन असलम हैं।“

“हैलो मिस्टर अलबर्ट, कैसे हैं आप?“ सुयश ने आगे बढ़कर अलबर्ट से हाथ मिलाया।

“ठीक हूं।“ अलबर्ट का स्वर बिल्कुल शांत था- “अब पहले से अच्छा महसूस कर रहा हूं।“

सुयश ने भी अलबर्ट से मारिया के बारे में कुछ ना पूछा। वह नहीं चाहता था कि अलबर्ट को मारिया की याद आए।

“शैफाली का दिया हुआ सवाल हल कर रहे थे?“ सुयश ने टॉपिक चेंज करते हुए पूछा।

“हां, उसके पास सवाल ही ऐसे हैं कि उसे हल करने में मजा आता है। वैसे ये काफी टैलेंटेड और एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी लड़की है।“

“आपने बिल्कुल सही कहा।“ सुयश ने भी शैफाली की तारीफ की- “मुझे भी ऐसा लगता है, जैसे शैफाली के अंदर कुछ अंजानी विचित्र शक्तियां हैं, लेकिन इसका पता इसे स्वयं नहीं है। अब शैफाली के सपनों के बारे में ही ले लीजिए। इसने जो भी अपने सपनों में देखा था, वह सब एक-एक करके सही हो रहे हैं।“

“तो क्या उस रहस्यमय द्वीप की तरह सुनहरा मानव भी दिखाई दिया ?“ चूंकि अलबर्ट को कल घटी घटना की कोई जानकारी नहीं थी, इसलिए वह पूछ बैठा।

“जी हां ! कल रात समुद्र की लहरों पर दौड़ता हुआ एक सुनहरा मानव हमें दिखाई दिया। जिसके शरीर से बहुत तेज सुनहरी रोशनी निकल रही थी। उसने ठीक शैफाली के सपनो की तरह एक दिशा की ओर इशारा किया और गायब हो गया। हमने कल शिप को भी उसी दिशा में मोड़ दिया था, जिधर उस सुनहरे मानव ने इशारा किया था।“ सुयश ने कहा।

“था ?......था से आपका क्या मतलब है कैप्टेन अंकल?“ शैफाली ने हैरानी से पूछा- “क्या अब शिप उस दिशा में नहीं चल रहा है?“

“नहीं !“ सुयश ने नकारात्मक अंदाज में अपना सिर हिलाया- “हमें ऐमू नाम का एक तोता उड़कर एक दिशा से आता हुआ दिखाई दिया। वह तोता बड़ा ही रहस्यमई था। वह बिल्कुल साफ इंग्लिश बोल रहा था, इसलिए हमने उसे एक सभ्य दुनिया से आया जानकर, शिप को उस दिशा में मोड़ दिया, जिधर से वह आया था।“

“ओ.....नो !“ शैफाली के शब्दों में अफसोस झलकने लगा।

“क्या हुआ?“ सुयश को भी शैफाली के शब्दों से किसी खतरे का अहसास हुआ- “क्या कोई गलती हो गई?“

“पता नहीं , पर जाने क्यों मुझे ऐसा लग रहा है, जैसे मैंने यह ऐमू नाम पहले भी कहीं सुन रखा है?“ शैफाली के शब्द इस बार किसी रहस्य से भरे थे।

“क्या ऽऽऽऽ? सुयश यह सुनकर सिहर उठा- “शैफाली तुम याद करने की कोशिश करो कि तुमने यह शब्द कहां सुन रखा है?“

“ऐमू......ऐमू ....।“ शैफाली ने होठों ही होठों में यह शब्द दोहराया और अपने दिमाग पर जोर देना शुरू कर दिया। शैफाली लगातार अपने दिमाग पर जोर डाल रही थी।

सभी की निगाहें अब सिर्फ और सिर्फ शैफाली पर थी। ब्रूनो शैफाली के पास शांत बैठा था। अचानक उसने एक झटके से अपना सिर उठा कर शैफाली की ओर देखा। ब्रूनो के कान अब खड़े हो गए और वह एकटक शैफाली को घूरने लगा।

अचानक ब्रूनो शैफाली के पास से उठा और कुछ दूर जा कर चुपचाप जमीन कर बैठ गया। लेकिन अभी भी उसकी आंखें शैफाली को घूर रही थीं। उधर शैफाली लगातार अपने दिमाग पर जोर डालते हुए ऐमू के बारे में सोच रही थी।

ब्रूनो की यह विचित्र हरकत इस बार किसी से छिपी ना रह सकी। सुयश ने बहुत ध्यान से इस बार ब्रूनो को देखा । जाने क्या सोचकर एक बार तो वह सिहर उठा। उसे ब्रैंडन की बात याद आ गई।

“यह क्या.......?“ अचानक शैफाली की आवाज ने सबको हैरान कर दिया- “यह तो वही रहस्यमई द्वीप है।“

जारी रहेगा_________✍️
 
Sanju@ bhai ye kahani bhi kisi apne ki hi hai, ispe bhi apni raay avasya dene ka kast kare :declare:
 
# 46 .

शैफाली के शब्दों को सुन एक पल के लिए सबके रोंगटे खड़े हो गए, पर शैफाली का बोलना निरंतर जारी रहा-

“यह वही द्वीप है जिसे मैंने पहले सपने में देखा था.......यह तोता..... .....यह यहां ? ......यह मूर्ति तो एक बहुत ही खूबसूरत लड़की की है.......इसके हाथ में डोरी है.....ऐमू .....ऐमू इस डोरी से बंधा है.......पर यह क्या ?......यह तो छूट गया... ...नहीं नहीं मैंने गलत कहा....... मूर्ति ने ऐमू को छोड़ दिया....... यह..... यह पत्थरों पर बनी अजीब सी आकृतियाँ कैसी ?.......यह क्या ?........यह तो आप हैं कैप्टेन अंकल.... .....पर आप.....आप इस द्वीप पर क्या कर रहे हैं?.....आपके हाथों में यह डायरी कैसी ?......यह झोपड़ी उड़ रही है.......ये झरना... ...और.... और यह रोशनी.......ये रोशनी तो बहुत तेज है.......मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा......मैं वापस आ रही हूं..... पीछे....और पीछे......हां अब रोशनी कुछ कम हुई........यह सुनहरा मानव..... मुझे रुकने का इशारा कर रहा है....... लेकिन मैं फिर वापस आ रही हूं ........आह्ऽऽऽऽ........मेरे सिर में बहुत तेज दर्द हो रहा है।“

बोलते-बोलते अचानक शैफाली ने अपना सिर पकड़ लिया। सभी जैसे सोते से जागे हों। सुयश ने आगे बढ़कर शैफाली को झकझोरा-

“क्या हुआ शैफाली ? तुम ठीक तो होना।“

शैफाली जैसे एका एक किसी सम्मोहन से बाहर आई- “क्या हुआ अंकल आप मुझे क्यों हिला रहे हैं?“

“तुम..... तुम ठीक तो हो ?“ मारथा ने आगे बढ़कर शैफाली को अपनी बाहों में ले लिया।

“क्यों ? क्या हुआ मुझे?“ शैफाली के शब्दों में आश्चर्य था- “आप लोग इतना परेशान क्यों है?“

“कुछ नहीं बेटा । तुम सुनहरे मानव व ऐमू के बारे में बता रही थी। इसलिए हम थोड़ा डर से गये थे।“ माइकल ने शैफाली के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा।

“मैं?“ शैफाली ने इस तरह से आश्चर्य व्यक्त किया, जैसे उसे कुछ समझ में ना आ रहा हो- “मैं..... सुनहरे मानव व ऐमू के बारे में बता रही थी......नहीं तो...... मैंने तो ऐसा कुछ नहीं कहा........मैं....मैं तो कह रही थी कि ऐमू नाम कुछ सुना हुआ लग रहा है।“ शैफाली के शब्दों में दुनिया भर का आश्चर्य भरा था।

“तो क्या शैफाली जो अब तक बोल रही थी, वह कोई उससे बुलवा रहा था ?“ सुयश ने होठों ही होठों में बड़बड़ाया- “क्या वह बिना सोये हुए भी सपना देख सकती है? क्या ब्रूनो किसी और को देखकर पीछे हट गया था। ऐसे ही सैकड़ों सवाल वहां मौजूद लोगों के दिमाग में घूमने लगे।

“क्या तुम्हें सचमुच यह याद नहीं कि तुम अभी क्या बोल रही थी ?“ असलम ने जेब से रुमाल निकाल कर अपने माथे पर छलक आए पसीने को पोंछते हुए कहा।

“नहीं......मुझे तो कुछ भी याद नहीं। क्या मैं वास्तव में कुछ बोल रही थी ?“ शैफाली ने अपने दिमाग पर जोर डाला।

“एक विशेष बात और भी है।“ सुयश ने सोफे से उठकर खड़े होते हुए कहा- “तुमने यह बताया कि उस रहस्यमय द्वीप पर मैं भी था। जबकि तुम बचपन से ही अंधी हो और तुम मेरा चेहरा नहीं पहचानती। फिर तुमने जो आदमी उस रहस्यमय द्वीप पर देखा, यह कैसे जाना कि वह मैं ही हूं?“

“मुझे नहीं पता कि मैंने कब आपके बारे में बताया।“ शैफाली ने अजीब से शब्दों में कहा।

ब्रूनो अब टहलता हुआ वापस शैफाली के पास जाकर बैठ गया।

असलम शैफाली की बात सुनकर इतना घबरा गया कि उसका पसीना ए.सी . रूम में भी नहीं रुक रहा था।

तभी शैफाली एका एक आश्चर्य से भर उठी। उसने अपना चेहरा असलम की ओर करते हुए अपनी नाक पर जोर दिया-

“मिस्टर असलम, आपने यही नाम बताया था ना कैप्टन अंकल।“ शैफाली के इस तरह टॉपिक चेंज करते देख, सुयश को बहुत अजीब सा महसूस हुआ।

सुयश का चेहरा अब शैफाली की ओर से हटकर असलम की ओर गया। शैफाली बिना सुयश का जवाब सुने पुनः असलम से मुखातिब होती हुई बोल उठी-

“हां तो असलम अंकल, आपके चेहरे पर कुछ पसीना आ रहा लगता है। क्या बात है आपकी तबीयत तो ठीक है?“

“हां.....मेरी तबियत को क्या हुआ?“

असलम शैफाली को अपनी ओर मुड़ता देख और घबरा गया-

“मैं.....मैं बिल्कुल ठीक हूं।“ असलम ने फिर से रुमाल से अपने चेहरे पर बह रहे पसीने को पोंछा।

“वैसे अंकल आप परफ्यूम बहुत अच्छा इस्तेमाल करते हैं।“ शैफाली के भोले से चेहरे पर अब एक नन्हीं सी मुस्कुराहट आ गयी- “संदल की खुशबू वाला परफ्यूम इस्तेमाल करते हैं ना ?“ शैफाली के शब्द सुन सुयश को बहुत तेज झटका लगा। उसे तुरंत शैफाली के वह शब्द याद आ गए-

“अंकल कातिल के रुमाल से संदल स्मेल वाले सेंट की भीनी-भीनी खुशबू आ रही थी।“

लेकिन वह चुपचाप खड़ा होकर शैफाली के शब्दों को सुन रहा था।

“आपने जवाब नहीं दिया असलम अंकल।“ आप संदल स्मेल वाला सेंट इस्तेमाल करते हैं ना ?“ शैफाली ने असलम को चुप देख दोबारा से पूछ लिया।

“हां.....यह मेरा फेवरेट सेंट है।“ असलम ने जवाब दिया।

“वैसे अंकल, आप रिवाल्वर तो चलाना जानते ही होंगे?“ शैफाली ने एक नया सवाल कर दिया।

“क्या बकवास है? क्या तुम मुझे कातिल समझ रही हो ?“ असलम ने सोफे से उठते हुए चिल्ला कर कहा।

“मैंने तो अभी यह बात आप से कही भी नहीं। फिर आप इतना क्यों परेशान हैं?“ शैफाली के चेहरे पर निरंतर मुस्कान बनी हुई थी।

“मैं तो जिस समय हॉल में कत्ल हुआ, उस समय वहां था भी नहीं। उस समय तो मैं शिप के कंट्रोल रूम में था।“ असलम ने कहा।

“असलम सही कह रहा है शैफाली।“ सुयश ने बीच में आते हुए असलम का बचाव किया- “ये तो उस समय कंट्रोल रूम में था और वह भी नशे की हालत में। ऐसी हालत में यह चलकर हॉल तक नहीं पहुंच सकता था।“

“आप इतने यकीन से कैसे कह सकते हैं कैप्टन अंकल कि असलम अंकल उस समय कंट्रोल रूम में ही थे और इन्होंने नशा ज्यादा कर रखा था। क्या उस समय आप इनके साथ थे?“ शैफाली ने जिद पकड़ते हुए कहा।

“नहीं मैं तो हॉल में ही था लेकिन बहुत से लोग उस समय असलम के साथ थे, जो इस बात की गवाही दे सकते हैं।“ सुयश ने कहा।

“अभी आप कह रहे थे कि यह इतना नशे की हालत में थे कि इन्हें होश भी नहीं था।“ शैफाली ने कहा- “तो फिर कहीं ऐसा तो नहीं कि इनके साथ जितने भी लोग थे, वह भी नशे की हालत में थे।“

“जी हां, आप सही कह रहीं हैं....वह सारे नशे की हालत में थे।“ अंजाने में ही सुयश के मुंह से शैफाली के लिए रेसपेक्ट भरे शब्द निकले।

“फिर आप इतने विश्वास से कैसे कह सकते हैं कि यह पूरी तरह नशे में धुत थे और सभी के साथ थे?“ शैफाली अपने लॉजिक से सभी को दूसरी दिशा में सोचने पर विवश कर रही थी- “यह भी तो हो सकता है कि इन्होंने ही सबको पीने की सलाह दी हो और जब सारे लोग नशे में धुत हो गए हों तो फिर यह धीरे से कंट्रोल रूम के बाहर आए हों और फिर हॉल में पहुंचकर इन्हों ने गोली चलाई हो और फिर तेजी से वापस आकर पुनः कंट्रोल रूम में पहुंच गए हो और फिर उसके बाद बेहोशी का नाटक करके सभी के बीच गिर पड़े हों।“

“तुम्हारी कहानी तो बहुत अच्छी है बेटे।“ असलम ने अब नॉर्मल होते हुए कहा- पर इसमें जरा भी सच्चाई नहीं है और वैसे भी ड्रिंक करने के लिए मैने नहीं रोजर सर ने सबसे कहा था।“

सुयश बहुत तेजी से इस समय जाने क्या सोच रहा था। तभी ड्रेजलर दौड़ता हुआ रुम में दाखिल हुआ-

“कैप्टेन-कैप्टेन आप यहां हैं। मैंने आपको ढूंढने के लिए पूरा शिप छान मारा। तब जा कर ब्रैंडन सर से आपके बारे में पता चला।“

“क्या बात है ड्रेजलर, तुम इतना घबराए हुए क्यों हो ?“ असलम ने ड्रेजलर की तरफ देखते हुए पूछा।

“सर वो रहस्यमय द्वीप एक बार फिर हमारे रास्ते में आ गया है।“ ड्रेजलर ने घबरा कर कहा। यह खबर सुनते ही सभी के होश उड़ गए।

“असलम तुम डेक पर पहुंचो। मैं अभी ड्रेजलर के साथ वहां पहुंचता हूं।“ सुयश ने एक तरह से ड्रेजलर को भी रोकते हुए कहा।

असलम ने अजीब सी नजर सुयश पर डाली और कमरे के बाहर निकल गया। ड्रेजलर सुयश को देखते हुए, उसके अगले हुक्म का इंतजार कर रहा था।

“हां ड्रेजलर, तुम तो हमारे कंट्रोल रूम में काम करते हो ना ?“ सुयश ने ड्रेजलर से पूछा।

“जी हां !“ ड्रेजलर ने अजीब सी नजरों से सुयश को देखा। वह समझ नहीं पा रहा था कि सुयश ने उसे क्यों रोका ? और वह उससे क्या पूछना चाहता है?

“ड्रेजलर, तुम न्यू ईयर की रात उस समय भी कंट्रोल रूम में थे, जब सभी नशे की हालत में हो गए थे और ‘सुप्रीम’ रास्ता भटक गया था?“

जारी रहेगा________✍️
 
क़ातिल ने किस सफ़ाई से धोई है आस्तीं,

उसको ख़बर नहीं कि लहू बोलता भी है। :writing:
 
DesiPriyaRai

Ufaq saba

despicable

Riky007

kamdev99008

VAJRADHIKARI

:waiting:
 
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