Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर - Page 5 - SexBaba
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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

# 34 .

“क्या वही है?“ लारा जो कि अब सस्पेंस के मारे मरा जा रहा था, पूछ बैठा।

“ये वही द्वीप है जो हमें कल रास्ते में मिला था।“ सुयश की आवाज में भय स्पष्ट दिखाई दे रहा था।

सुयश के यह शब्द सुनते ही असलम को छोड़, सभी आश्चर्य में पड़ गए।

“ये कैसे संभव हो सकता है? आप ध्यान से देखिए सर, लगता है कि आप कहीं गलती कर रहे हैं? वह द्वीप तो बहुत पीछे छूट चुका है। उसके दोबारा मिलने का तो प्रश्न ही नहीं उठता।“ लारा के शब्दों में एक अजीब सी थरथराहट थी।

“नहीं लारा।“ असलम ने सुयश के बोलने से पहले ही कह दिया- “कैप्टन सही कह रहे हैं, यह वही द्वीप है, बिल्कुल वही। त्रिभुज की शक्ल वाला, अजीब सी मानवाकृति पहाड़ी वाला व गहरी धुंध वाला वही हरा-भरा द्वीप, जिसे हम कल पीछे छोड़ आए थे।“

“तो क्या हम 1 दिन तक इसी द्वीप के आसपास पानी में भटकते रहे?“ लारा ने चिंतित स्वर में कहा।

“पता नहीं, पर लगता तो कुछ ऐसा ही है। क्यों कि यह द्वीप तो चल नहीं सकता।“ सुयश ने कहा।

“अब हमें क्या करना चाहिए कैप्टेन?“ असलम आज्ञा की प्रतीक्षा कर रहा था पर उसके चेहरे पर बेचैनी के भाव स्पष्ट नजर आ रहे थे।

सुयश कुछ देर सोचता रहा और फिर बोला- “नहीं हमें शिप को इस द्वीप की ओर नहीं मोड़ना है।“

“तो क्या इस रहस्यमय द्वीप का रहस्य कभी नहीं खुलेगा ?“ लारा ने सुयश की ओर देखते हुए कहा।

“यदि इस शिप पर केवल हमारा स्टाफ होता और यात्री सफर ना कर रहे होते। तो मैं इस द्वीप का रहस्य जाने बिना यहां से कहीं नहीं जाता, पर आज हमारे साथ लगभग 2700 जिंदगियां और भी हैं और मैं यह रिस्क लेने को बिल्कुल भी तैयार नहीं हूं। हां, अगर हम सलामत अपनी सभ्यता तक पहुंच गए तो अगली बार मैं अकेला इस क्षेत्र में जरूर आऊंगा।“

अब सुयश के चेहरे पर बेबसी और गुस्से के निशान साफ दिख रहे थे।

“कैप्टन यदि आप कहें तो मैं कुछ लोगों के साथ इस द्वीप पर जाकर देखना चाहता हूं।“ लारा ने सुयश से रिक्वेस्ट करते हुए कहा-

“मैं जानना चाहता हूं कि आखिर इस द्वीप पर क्या है? और यह भी तो हो सकता है कि हमारा सोचना गलत हो । यह द्वीप साधारण द्वीपों की तरह हो या फिर यहां से हमें किसी तरीके की कोई मदद मिल जाए।“

“बिल्कुल नहीं।“ सुयश ने अपना फाइनल जवाब सुनाते हुए कहा- “मैं किसी को मौत के मुंह में नहीं भेज सकता।“

“कैप्टेन आप गलत सोच रहे हैं। हम तो वैसे भी मौत के मुंह में खड़े हैं।“ लारा ने दोबारा रिक्वेस्ट करते हुए सुयश से कहा-

“आज नहीं तो कल भटकते-भटकते हमारे शिप का ईधन खत्म हो जाएगा। फिर हम कितने दिन तक बीच सागर में खड़े रहेंगे। एक स्थिति यह भी आ जाएगी कि हमारे पास राशन और खाने-पीने का अन्य सामान भी खत्म हो जाएगा। तब शायद हमारे आस-पास कोई द्वीप भी ना हो। वह स्थिति आज की स्थिति से ज्यादा खतरनाक होगी। इसलिए मैं मौत से डर कर भागने के बजाय आज उसका सामना करना चाहता हूं। आप मुझे आर्डर दीजिए सर कि मैं उस द्वीप पर जाकर देख सकूं कि आखिर वहां ऐसा क्या है? जो बार-बार हमें घुमा कर उसी द्वीप के पास पटक रहा है। और फिर 2700 यात्रियों की जान खतरे में डालने से अच्छा है कि सिर्फ हम दो या तीन लोग इस प्रयोग को करके देखें। शायद मौत के रास्ते में ही कहीं जिंदगी की डोर हाथ लग जाए।“

सुयश ध्यान से लारा की बात सुन रहा था। लारा के चुप होने के बाद वह कुछ देर तक सोचता रहा और फिर बोल उठा-

“ठीक है, अगर तुम इतनी जिद कर रहे हो तो तुम उस द्वीप पर जा सकते हो। लेकिन शर्त यह है कि मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगा।“

“क्या !“ सुयश की बातें सुनकर लारा भौचक्का खड़ा रह गया।

“आप!.......आप वहां क्यों जाना चाहते हैं कैप्टन? वहां मौत का खतरा भी हो सकता है।“ असलम ने सुयश को समझाते हुए कहा।

“जब तुम अपनी जान का जोखिम लेने को तैयार हो, तो मैं क्यों नहीं?“ सुयश के शब्दों में दृढ़ता साफ झलक रही थी।

“आपको अभी शिप पर ही रहना चाहिए कैप्टेन। आपकी जिंदगी हमारे लिए बहुत कीमती है और वैसे भी आपके साथ 2700 यात्रियों की जान है, जबकि हमारे साथ ऐसा कुछ नहीं है।“ लारा के शब्द इमोशन से भरपूर थे।

“लारा बिल्कुल ठीक कह रहा है कैप्टेन।“ असलम ने भी लारा की बात का समर्थन करते हुए कहा- “और फिर वह कौन सा अकेला जा रहा है, वह अपनी सिक्योरिटी के दो आदमियों को अपने साथ ले लेगा।“

आखिरकार बड़ी मुश्किल से सुयश लारा की बात मान गया। आनन-फानन एक मोटर बोट समुद्र में उतारी गई। लारा दो गार्ड के साथ मोटर बोट पर सवार हो गया। असलम ने लारा को एक वॉकी-टॉकी सेट भी दे दिया।

सुयश व असलम की निगाहें, दूरबीन के द्वारा धीरे-धीरे दूर हो रही उस मोटरबोट की ओर थीं। धीरे-धीरे सूरज का सफर भी समाप्त हो रहा था। लेकिन फिर भी वह अपनी लालिमा के द्वारा पूरी दुनिया को रोशनी देने की अंतिम कोशिश कर रहा था।

ठीक उसी तरह लारा भी सूरज से प्रेरणा लेकर, जहाज के यात्रियों की जान बचाने के लिए अपनी अंतिम कोशिश कर रहा था। धीरे-धीरे मोटरबोट बहुत दूर पहुंच गई। इतनी दूर कि अब उसकी आवाज भी यहां तक नहीं आ रही थी। लेकिन वॉकी-टॉकी सेट से लारा का संपर्क सुयश से बना हुआ था। मोटरबोट अब उस भयानक दैत्याकार द्वीप की ओर बढ़ रही थी।

“तुम लोगों को डर तो नहीं लग रहा है?“ लारा ने दोनों गार्डों को संबोधित करते हुए कहा।

“नहीं सर, इसमें डर कैसा ? और वैसे भी डरना तो उनको चाहिए जो वहां बीच समुद्र में खड़े हैं। भला कभी किनारे की ओर जाने वाला भी डरता है।“ एक गार्ड ने मुस्कुरा कर कहा।

उस गार्ड की इस बात पर लारा सिर्फ मुस्कुरा दिया। तभी आराम से द्वीप की ओर जा रही बोट को एक झटका लगा और बोट रुक गई।

“क्या हुआ लारा ? तुमने मोटरबोट क्यों रोक दी ?“ वॉकी टॉकी सेट पर सुयश की आवाज सुनाई दी।

“मैंने नहीं रोकी सर, यह अपने आप झटके से रुक गयी है। मैं अभी देखता हूं कि क्या प्रॉब्लम है?“ लारा ने जवाब दिया।

“अगर किसी तरह का खतरा दिख रहा है तो वापस आ जाओ।“ सुयश की आवाज में चिंता के भाव थे।

“नहीं सर, अब हम लोग द्वीप के बहुत पास हैं। यहां से तो वापस लौटना बेवकूफी होगी। और वैसे भी आसपास कोई खतरा.......।“ कहते-कहते लारा एकाएक चुप सा हो गया।

“लारा.....लारा.....क्या देख रहे हो तुम?......हमें बताओ। तुम एका एक चुप क्यों हो गए?“ सुयश दूरबीन को आंखों पर लगाए, मोटरबोट की तरफ देखते हुए, वॉकी-टॉकी सेट पर चीखा।

“वो ....वो.....सर, पानी में मुझे कुछ हलचल होती दिख रही है।....... ऐसा लगा जैसे कोई विशालकाय जानवर पानी के नीचे तैर रहा हो।“ लारा ने घबराये स्वर में कहा।

“मूव.....मूव.....वापस आ जाओ। अपनी मोटरबोट को तुरंत मोड़ो।.... लारा........दैट्स माई आर्डर.. ... . मोटरबोट को तुरंत मोड़ दो।“

सुयश दूरबीन पर नजर गड़ाये हुए जोर-जोर से चीख रहा था।

“मैं........कोशिश कर रहा हूं सर। इसका इंजन तो स्टार्ट है, पर यह घूम नहीं रहा है।“ लारा की आवाज आयी।

“ओ.... गॉड!“ सुयश ने भगवान से लारा के लिए प्रार्थना करनी शुरू कर दी- “लारा की रक्षा करना।“

तभी_____उधर से खुशी की आवाज सुनाई दी- “मोटरबोट आगे बढ़ रही है सर। शायद यह किसी झाड़ियों में फंस गई थी।..... लेकिन.....यह क्या ?.......सर, अब तो यह रुक ही नहीं रही है...... यह अब तेजी से द्वीप की ओर जा रही है। मैं......क्या करूं सर.....? मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है?“ लारा घिघियाये से स्वर चीख रहा था।

“मोटरबोट का इंजन बंद कर दो। शायद उसके ब्रेक झाड़ी में फंसकर खराब हो गये हों।“ सुयश वॉकी-टॉकी सेट पर गला फाड़ कर चिल्लाया।

लारा ने झपट कर बोट का कंट्रोल अपने हाथों में ले लिया। दोनों गार्डों के चेहरे का रंग भय के कारण सफेद हो गया था। वह डरे सहमे से बोट को पकड़े बैठे थे। लारा ने जल्दी से आगे बढ़कर बोट का इंजन बंद कर दिया।

“कैप्टेन,.....मैंने बोट का इंजन बंद कर दिया है.....पर मोटरबोट..... अभी भी नहीं रुक रही है। यह बहुत तेजी से द्वीप की ओर जा रही है।.....लगता है यह अब द्वीप से टकरा कर ही रुकेगी “

लारा के शब्द सुन शिप पर खड़े सभी लोग भय से भर गये थे। तभी एक भयंकर झटका बोट को पुनः लगा । ये झटका पहले वाले से भी तेज था। अचानक लगे इस तेज झटके से दोनों गार्ड उछलकर समुद्र में जा गिरे। मोटर बोट अब रुक गयी थी।

“कैप्टन मोटरबोट पुनः रुक गयी है.....।“ लारा की आवाज पुनः आयी-

“पर मेरे दोनों गार्ड झटका लगने की वजह से समुद्र में गिर गए हैं.......मैं भी बहुत मुश्किल से गिरते-गिरते बचा हूं।...... सर वह दोनों गार्ड मुझे पानी में नजर नहीं आ रहे हैं....... पर.....यह....क्या ?..... ये पानी में.....हरा रंग....नहीं...नहीं......यह ....कैसे .....हो सकता है? ये दोनों आंखें......खटाक.....।“

वॉकी-टॉकी सेट पर सन्नाटा छा गया था। लारा से संपर्क टूट गया था।

“क्या हुआ लारा...... क्या देख रहे हो तुम?....लारा ऽऽऽऽऽऽऽ“ सुयश लगातार चीख रहा था।

लारा से सम्पर्क के टूटते ही इन्हें लारा की मोटरबोट पानी में डूबती हुई दिखाई दी। कुछ देर के बाद सब कुछ शांत हो गया था।

सफर भी खत्म हो गया था। सूर्य का भी और लारा का भी। रह गई थी तो केवल वातावरण में गूंजती लारा की चीखें और दूर-दूर तक वही सन्नाटे का साम्राज्य।

तीन और जिंदगियों को यह खूनी त्रिकोण निगल चुका था।.. .....................

जारी रहेगा............✍️
 
# 35 .

चैपटर-11 4 जनवरी 2002, शुक्रवार, 22:30;

सुयश ने इस हादसे के बाद शिप को द्वीप की ओर नहीं मुड़वाया। सुप्रीम फिर से एक अंजाने सफर पर चल दिया था।

धीरे-धीरे इस घटना की जानकारी भी लोगों तक पहुंच गई। कई लोगों को तो अब यह विश्वास हो गया था कि उनका अब बच पाना मुश्किल है। बहुत से लोग तो इस गम से बीमार हो गए थे।

डॉक्टर्स व सुप्रीम का स्टाफ अपनी पूरी कोशिश कर रहा था। माइकल भी मारथा के साथ अपने रूम में बैठा हुआ था।

शैफाली इस समय ब्रूनो के साथ दूसरे रुम में थी। माइकल की यही कोशिश थी कि वह शैफाली को शिप के हालात के बारे में ना जानने दे।

“क्या सोच रही हो मारथा ?“ माइकल ने मारथा के माथे पर चुंबन लेते हुए पूछा।

“यही कि अगर हम अपनी सभ्यता तक ना पहुंचे, तो हमारी इस फूल से कोमल बच्ची का क्या होगा ? इसने तो अभी ठीक से दुनिया भी नहीं देखी है। अगर हम ना रहे तो इसे भला कौन संभालेगा ?“ मारथा के शब्दों में चिन्ता साफ झलक रही थी।

“तुम भी क्या बेवकूफों जैसी बात करती हो ? हम सिडनी पहुचेंगे और जरुर पहुंचेंगे।“ माइकल ने मारथा को दिलासा देते हुए कहा-

“और वैसे भी हमारी बच्ची आँखों वालों से ज्यादा अच्छा देखती है, वह एक साधारण इंसान से ज्यादा समझदार है। तुमने देखा नहीं कि कैप्टन सुयश और प्रोफेसर अलबर्ट उसकी कैसे तारीफ कर रहे थे।“

“वो तो है लेकिन.........।“ अभी

मारथा अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाई थी कि तभी शैफाली ने ब्रूनो के साथ कमरे में प्रवेश किया। मारथा ने शैफाली को आता देख तुरंत अपने आंसू पोंछ लिए, जो कि उसके गालों तक ढुलक आए थे।

“मॉम-डैड, देखिये मैंने गणित की कितनी अच्छी प्रॉब्लम बनाई है।“ शैफाली ने चहकते हुए कहा।

“क्या बनाया आज मेरी बेटी ने?“ माइकल ने आगे बढ़कर शैफाली के गालों को चूम लिया।

“एक बहुत अच्छी गणित की पजल है।“ शैफाली ने माइकल के हाथों में कॉपी और पेन पकड़ाते हुए कहा।

माइकल भी कॉपी और पेन लेकर, ऐसे जमीन पर बैठ गया, मानो आज उसका गणित का क्लास हो और मास्टर जी हाथ में छड़ी लिए हुए खड़े हों।

“रेडी टू सॉल्व द पजल?“ शैफाली ने भोलेपन से पूछा।

“यस मास्टर जी !“ माइकल अक्सर ही ऐसे शैफाली को खुश करने की कोशिश किया करता था।

“ओ.के. तो अब आप सबसे पहले तीन अंकों की एक संख्या लिखिए।“ शैफाली सच में किसी टीचर की तरह बोलने लगी-

“पर ये ध्यान रहे कि पहला और तीसरा अंक समान नहीं होना चाहिए। मतलब कि ‘646‘ जैसी कोई संख्या नहीं होनी चाहिए।“

माइकल ने धीरे से अपनी कॉपी में एक संख्या ‘348‘ लिख ली।

“लिख लिया ?“ शैफाली ने पूछा।

“जी मास्टर जी !“ माइकल ने भी बच्चों जैसी आवाज में जवाब दिया।

“अब इसी संख्या को दूसरी जगह उलट कर लिख लीजिए। मतलब की पीछे वाली संख्या आगे ले जाइए और आगे वाली संख्या पीछे ले जाइए। बीच वाली संख्या को बीच में ही लिखा रहने दीजिए।“ शैफाली ने कहा।

“हां हो गया।“ माइकल ने दूसरी जगह पर ‘843‘ लिख लिया।

“अब आपके पास दो संख्याएं हो गई। अब दोनों संख्याओं में से जो संख्या बड़ी है, उसमें से छोटी वाली को घटा दीजिए।“

अब माइकल ने ‘843‘ में से ‘348‘ को घटा दिया । उत्तर ‘495‘ आया।

“घटा दिया।......अब क्या करुं मास्टर जी।“

“अब जो भी उत्तर आया है, उसके बाएं साइड की पहली संख्या मुझे बता दीजिए।“ शैफाली ने कहा।

“4“ माइकल ने कहा।

“आपका उत्तर ‘495‘ आया है।“ शैफाली ने चहकते हुए कहा।

इस बार मारथा व माइकल दोनों हैरान रह गए क्यों कि उत्तर एकदम सही था।

“ये तुमने कैसे जाना कि मेरा उत्तर ‘495‘ ही आया है?“ माइकल ने शैफाली का हाथ पकड़कर उसे अपनी तरफ खींचते हुए कहा।

“बता दूंगी लेकिन पहले वादा करिये कि आज आप मुझे ‘बर्गर‘ खिलायेंगे।“ शैफाली ने अपनी आंखें गोल-गोल नचाते हुए माइकल को भी ब्लैकमेल किया।

“अरे खिला दूंगा मेरी मां ! बर्गर के साथ ‘पिज्जा ‘ भी खिला दूंगा पर तुम उत्तर तो बताओ।“ माइकल ने बाकायदा शैफाली के आगे हाथ जोड़ते हुए कहा।

“तो फिर ठीक है सुनिए- जब भी तीन अंकों की किसी भी संख्या को लेकर उसे उलट कर बड़ी संख्या से छोटी संख्या को घटाते हैं तो बीच की संख्या हमेशा ‘9‘ ही आती है। अब बांए हाथ की जो संख्या मैंने आप से पूछी, उससे मुझे तीसरी संख्या का पता लगाने में आसानी हो गयी। मतलब की बीच की संख्या हमेशा ‘9‘ ही आएगी और बाएं हाथ की संख्या को ‘9‘ से घटाने पर जो भी आएगा। वही तीसरी संख्या होगी। मान लिया आपने हमें बाएं हाथ की संख्या ‘3‘ बताई होती तो तीसरी संख्या ‘9-3=6‘ होती । अर्थात पूरी संख्या ‘396‘ होती।“

“मार्वलश!“ माइकल ने आश्चर्यचकित होते हुए कहा।

“वैसे इसी तरह की एक और पजल भी है।“ शैफाली ने पुनः किसी संत की तरह उपदेश दिया।

“वह भी बता दीजिए मास्टर जी।“ माइकल जो की घुटनों के बल शैफाली के आगे बच्चा बनकर खड़ा था, पुनः बोल उठा।

इस बार शैफाली ने माइकल के हाथ से कॉपी लेकर, हाथ से टटोलते हुए ‘1‘ से लेकर ‘9‘ तक की संख्या लिखी, मगर ‘8‘ को छोड़ दिया। यानी कि वह संख्या थी- ‘12345679‘

अब उसने कॉपी पुनः माइकल के हाथ में पकड़ा दी।

“अब यह बताइए कि आपको ‘1‘ से लेकर ‘9‘ तक की संख्या में सबसे अच्छी संख्या कौन सी लगती है?“ शैफाली ने पुनः बोलते हुए कहा।

माइकल ने कुछ देर सोचने के बाद कहा- ‘8‘

“अब जो संख्या मैंने लि खी है, उस पूरे को 72 से गुणा कर दीजिए।“ शैफाली ने कहा।

“उससे क्या होगा ?“ माइकल ने छोटे बच्चों की तरह सवाल किया।

“आप पहले करिए तो शैफाली ने जिद की।

आखिरकार माइकल की गणित की कैलकुलेशन में जुट गया। कुछ देर के बाद उत्तर उसके सामने था। जिसे देखकर वह दंग रह गया। क्यो कि उत्तर ‘888888888‘ था।

“ये कैसे किया ? बता दो मगर शर्त मत रखना। मैं ब्रूनो को भी कुछ ना कुछ अच्छा अपने आप खिला दूंगा।“

“मैंने जो संख्या लिखी थी, वह एक तरह के कोड को सॉल्व करने वाली डिजिट है। इस डिजिट में ‘8‘ नहीं होता है। उसको लिखने के बाद मैंने आपसे आपका फेवरेट नंबर पूछा। तो आपने मुझे ‘8‘ बताया। तो मैंने ‘8‘ को ‘9‘ से गुणा कर दिया। उत्तर ‘72‘ आया। मैने यही नंबर आपको उस डिजिट से गुणा करने को दे दिया। यदि आप अपना फेवरेट अंक ‘3‘ बताते तो मैं उस संख्या को ‘27‘ से गुणा करने के लिए कहती। इसी तरह मैं ‘6‘ को ‘54‘ से गुणा करवाती और उत्तर ‘9‘ बार ‘6‘ (666666666) आता। है ना सिंपल सा।“ शैफाली ने भोलेपन से कहा।

“हां बहुत सिंपल है।“ इतना कहकर माइकल अपनी खोपड़ी पकड़ कर बैठ गया।

उसकी यह हालत देखकर मारथा जोर-जोर से हंसने लगी।

जारी रहेगा...........✍️
 
# 36 .

5 जनवरी 2002, शनिवार 13:00; "अटलांटिक महासागर"

उधर व्योम अब क्रूज पर खड़ा था।

“मिस्टर व्योम, यहां से बारामूडा त्रिकोण का रहस्यमई क्षेत्र शुरू हो जाता है। हम लोग इसके आगे नहीं जा सकते। वैसे सुप्रीम इसी जगह से गलत दिशा में मुड़ा था। नॉर्थ ईस्ट दिशा में 80 मील दूर से, उनका आखिरी मैसेज हमें रिसीव हुआ था।“

ऑफिसर ने कहा- “क्या आपको कोई आदमी, अपने साथ जाने के लिए चाहिए?“

“जी नहीं ! मैं इसके आगे का सफर अकेला ही तय करना चाहता हूं और वैसे भी यह सफर इतना आसान नहीं है। ये मौत का सफर है इसलिए मैं किसी और की जिंदगी का रिस्क उठाने को तैयार नहीं हूं। आप मुझे अकेले ही जाने दीजिए। वैसे भी मेरी पूरी जिंदगी एडवेंचर से खेलने में ही निकली है तो फिर डरना कैसा ? मौत से एक टक्कर और सही।“

व्योम के शब्दों में गजब का जज्बा नजर आ रहा था। कहकर व्योम धीरे से हेलीकॉप्टर की ओर बढ़ गया।

कुछ ही देर में वह हेलीकॉप्टर सहित आसमान में था। क्रूज पर खड़ा वह ऑफिसर, तब तक उस हेलीकॉप्टर को देखता रहा, जब तक कि वह उसकी नजरों से ओझल ना हो गया। फिर ऑफिसर ने अपने होठों ही होठों में उस वीर सपूत के मिशन के लिए भगवान से प्रार्थना की।

व्योम के दिमाग में बहुत सारे प्रश्न घूम रहे थे। वह ‘सुप्रीम’ के लिए चिंतित भी था। लेकिन इस समय वह बहुत सतर्कता के साथ, दोनों तरफ देखते हुए हेलीकॉप्टर चला रहा था।

कभी-कभी उसकी नजर स्पीडो मीटर पर और फ्यूल इंडिकेटर पर भी पड़ रही थी । दोनों ही फुल का इंडिकेशन दर्शा रहे थे। व्योम की नजरें लगातार उस अंतहीन समुद्र की ओर, आशा भरी नजरों से देख रही थी।

धीरे-धीरे समय बीतता जा रहा था। पर सुप्रीम का कहीं कोई अवशेष व्योम को नहीं मिल रहा था।

आसमान पर सूर्य बहुत तेजी से चमक रहा था। उसकी किरणें समुद्र की लहरों पर पड़कर एक अजीब सी चमक उत्पन्न कर रही थी। लेकिन व्योम को इस बात की खुशी थी कि अभी तक विद्युत चुंबकीय तरंगों का प्रकोप उसके हेलीकॉप्टर पर नहीं हुआ था। वह सोच रहा था कि अगर ऐसे ही सब कुछ सही रहा तो जल्द ही वह सुप्रीम को ढूंढ निकालेगा।

व्योम अपने ही विचारों में खोया था कि तभी उसे पानी में छोटी-छोटी भंवर बनती दिखाई देने लगीं। वह छोटी-छोटी भंवर अपने आप पानी में बन-बिगड़ रहीं थीं।

“अजीब सा क्षेत्र है यह। ये भंवर अपने आप कैसे बन-बिगड़ रहीं हैं? लगता है रहस्यमयी क्षेत्र शुरू हो चुका है। अब मुझे बहुत ध्यान से हेलीकॉप्टर ड्राइव करना पड़ेगा। कभी भी मैं विद्युत चुंबकीय तरंगों का शिकार बन सकता हूं।“ व्योम अपने मन ही मन में बुदबुदा रहा था।

“बाप रे!......यह मैं कौन से क्षेत्र में आ गया। यहां तो पानी के अंदर नुकीली चट्टाने निकली हुई हैं। लगता है जैसे पानी के अंदर कोई पर्वत श्रृंखला डूबी हुई हो और ये इतनी सारी शार्क यहां क्या कर रहीं हैं? कहीं....ऐसा तो नहीं कि सुप्रीम यहां डूब गया हो ?“ व्योम के दिमाग में ऊट-पटांग ख्याल आने लगे।

“नहीं -नहीं ! इतनी सारी पहाड़ियों के बीच सुप्रीम यहां नहीं पहुंच सकता और वैसे भी अगर सुप्रीम यहां डूबा होता तो उसके कुछ अवशेष तो यहां पर होते....और फिर सुप्रीम डूब कैसे सकता है? यहां ना तो किसी प्रकार तूफान के लक्षण दिखाई दे रहे हैं और ना ही कोई ऐसी मुसीबत, जिससे ‘सुप्रीम’ डूबे।“

व्योम ने हेलीकॉप्टर को आगे बढ़ा लिया। थोड़ा आगे बढ़ने पर उसे एक बड़ा अजीब सा नजारा दिखाई दिया, जिसे देखकर वह हैरान रह गया।

“यह समुद्र में अजीब-अजीब से फव्वारे कैसे निकल रहे हैं? और वह भी एक-दो नहीं बल्कि 15-16.... ..मैंने तो आज तक ऐसे फव्वारों के बारे में सुना तक नहीं जो समुद्र की लहरों से इतना ऊपर उठते हों।....... थोड़ा नीचे जाकर देखना चाहिए कि आखिर इन फव्वारों का रहस्य क्या है?“ कहते हुए व्योम ने हेलीकॉप्टर को थोड़ा और नीचे कर लिया।

“यह क्या ? ये फव्वारे तो चल फिर रहे हैं।.....ओ माई गॉड! ....... ये तो व्हेल मछलियां है। जिनके सिर से गर्म पानी के फव्वारे जैसे चल रहे हैं।.....इतनी सारी व्हेल...एक साथ। ......हे भगवान, यह तो बहुत खतरनाक क्षेत्र है। मुझे नहीं लगता कि यहां आज तक कोई पहुंचा होगा ?“ व्योम की आंखें आश्चर्य से फटी जा रही थीं-

“इतनी सारी व्हेल तो एक साथ बड़े से बड़ा क्रूज जहाज भी डुबो सकती हैं। तभी आज तक क्षेत्र से कोई बचकर नहीं निकल पाया। मुझे लगता है कि मैं गलत दिशा में आ गया। सुप्रीम इस तरफ नहीं आया होगा।“

व्योम ने हेलीकॉप्टर को अब दूसरी दिशा में मोड़ लिया। लेकिन अभी भी व्हेल वाले दृश्य को याद कर वह सिहर उठा। व्योम को अब दूसरी दिशा में चलते हुए काफी देर हो गई थी। लेकिन अभी तक उसे कुछ भी नजर नहीं आया था।

“दूर-दूर तक अंतहीन समुद्र...... आखिर कब तक मैं भटकता रहूंगा। ..... कहीं भी “सुप्रीम” का कोई अवशेष तक दिखाई नहीं दिया।.. ......ये क्या ?.....ये तो कोई द्वीप सा लग रहा है?...... पास चलकर देखना चाहिए शायद कोई सुराग ही मिल जाए। ......काफी हरा-भरा द्वीप है...... लेकिन इस द्वीप की आकृति कितनी विचित्र है। बिल्कुल त्रिकोण के जैसी।.....इसके बीच यह मानव आकृति वाली पहाड़ी कितनी अजीब है?......ऐसा लग रहा है जैसे सिर पर क्राऊन पहने कोई ग्रीक योद्वा बैठा हुआ है? यह द्वीप काफी रहस्यमयी लग रहा है.. ... पहले मुझे इस द्वीप से दूर रहकर ही इसका निरी क्षण करना चाहिए. ....... इस द्वीप के आस-पास धुंध भी काफी नजर आ रही है... इस द्वीप पर उतरने से पहले मुझे इस द्वीप को पीछे की साइड से भी देख लेना चाहिए“

यह सोच व्योम ने द्वीप से दूर रहकर ही अपना हेलीकॉप्टर द्वीप के पीछे की साइड मोड़ लिया। वह इस बात का भी ख्याल रख रहा था कि वह द्वीप से थोड़ा दूर रहे। व्योम को हेलीकॉप्टर उड़ाते हुए 5 मिनट बीत गये, पर वह द्वीप के पीछे की ओर नहीं पहुंच पाया।

“यह मैं द्वीप के पीछे की तरफ क्यों नहीं जा पा रहा ? मेरा हेलीकॉप्टर तो चल रहा है, पर मुझे ऐसा क्यों लग रहा है जैसे कि मैं एक ही जगह पर खड़ा हूं?“ व्योम ने खिड़की से नीचे द्वीप के किनारे की ओर झांका-

“ये समुद्र का पानी द्वीप से दूर क्यों हट रहा है?........ ओ माई गॉड...... यह द्वीप तो ..... यह द्वीप तो पानी में घूम रहा है..... ऐसा कैसे सम्भव है? तभी मैं द्वीप के पीछे की साइड नहीं जा पा रहा था .....क्यों कि मेरे हेलीकॉप्टर के साथ-साथ उसी स्पीड से यह द्वीप भी घूम रहा था.... ..मुझे पहले इस द्वीप से दूर हट जाना चाहिए..... फिर सोचता हूं कि क्या करुं?“

व्योम ने अपने हेलीकॉप्टर को द्वीप से थोड़ा और दूर कर लिया। व्योम का दिमाग बहुत तेजी से चलने लगा। कुछ देर सोचने के बाद व्योम ने अपने हेलीकॉप्टर को ‘ऑटोपायलेट‘ के हवाले किया और खुद एक पॉवरफुल दूरबीन निकालकर द्वीप की ओर देखने लगा। सबसे पहले उसकी नजर द्वीप के रहस्यमयी शेप पर गयी-

“इस द्वीप का शेप एक पर्फेक्ट त्रिकोण के शेप में है, इसका मतलब यह कोई नेचुरल द्वीप नहीं है..... पर इतना बड़ा द्वीप ‘मानव द्वारा निर्मित‘ कैसे हो सकता है?“ अब उसकी नजर द्वीप पर खड़ी उस मानव आकृति वाली पहाड़ी की ओर गयी-

“इस पूरे द्वीप पर सबसे विचित्र यह पहाड़ी ही है.....यह पहाड़ी बिल्कुल किसी ग्रीक गॉड की तरह प्रतीत हो रही है......कहीं..... कहीं यह ‘पोसाइडन‘ की मूर्ति तो नहीं ?“

यह ख्याल आते ही व्योम ने अपनी दूरबीन को और एडजस्ट किया। अब वह रहस्यमय पहाड़ी बिल्कुल साफ दिखने लगी थी-

“अब मैं श्योर हूं ये पोसाइडन की ही मूर्ति है......ग्रीक माइथालोजी के हिसाब से पोसाइडन समुद्र के देवता हैं...... तो क्या ?...... तो क्या मैं... .. इस समय अटलांटिस की धरती को देख रहा हूं? देवताओं की वह धरती जिसका जिक्र महाग्रंथों में किया गया है? तभी यह द्वीप इतना रहस्यमयी महसूस हो रहा है।“

व्योम की आंखें आश्चर्य से सिकुड़ गयीं। अभी वह यह सब सोच ही रहा था कि तभी उसे द्वीप के ऊपर कोई चीज हवा में उड़ती हुई दिखाई दी। उस चीज की स्पीड काफी तेज थी। व्योम ने दूरबीन को उस दिशा में किया-

“अरे यह क्या ? .... ये तो कोई झोपड़ी है जो हवा में उड़ रही है?.... ये सब क्या हो रहा है?....कहीं मैं कोई सपना तो नहीं देख रहा ?.... नहीं......नहीं ये सब सपना नहीं है..... ये झोपड़ी तो पोसाईडन की मूर्ति की ओर जा रही है।“

मूर्ति के चेहरे के पास पहुंचकर वह झोपड़ी गायब हो गयी- “कहां गयी. ... कहां गयी वह झोपड़ी ?.....अभी तो वह मूर्ति के चेहरे के पास ही थी।“

व्योम ने अपनी दूरबीन को इधर-उघर घुमाया पर उसे वह झोपड़ी कहीं भी दिखा ई नहीं दी। अब व्योम की नजरें पुनः द्वीप की ओर गयीं। तभी उसे द्वीप के तीनो ओर से कोई वाइब्रेशन जैसी तरंगे निकलती हुई दिखाई दीं। तरंगे पानी में और आसमान में बहुत तेजी से फैल गयी –

“अरे बाप रे....खतरा ऽऽऽऽ!“ पानी पर चलने वाली वह तेज तरंगें पानी को काटती हुई एक सेकेण्ड में ही बहुत दूर निकल गयीं। तभी हवा में फैली तरंगों ने व्योम के हेली कॉप्टर को भी अपनी निशाना बना लिया।

“शायद ये ही ‘विद्युत चुम्बकीय तरंगें हैं, मुझे तुरंत अपना हेलीकॉप्टर नीचे उतारना पड़ेगा।“ व्योम मन ही मन बड़बड़ाया।

तभी हेलीकॉप्टर का मैकेनिज्म फेल हो गया। व्योम खतरा भांपते ही तेजी से हेलीकॉप्टर को डाउन करने लगा। पर तब तक हेलीकॉप्टर के इंजन ने पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया और वह किसी परकटे पक्षी के समान आसमान में डोलने लगा। व्योम पूरी ताकत से हेलीकॉप्टर का बैलेंस बनाने की कोशिश करने लगा। 2 मिनट की असंभव कोशिश के बाद आखिरकार व्योम, हेलीकॉप्टर को सीधे समुद्र पर उतारने में सफल रहा। हेलीकॉप्टर के सारे यंत्र खराब हो चुके थे।

“थैंक गॉड! दुर्घटना होते-होते बच गई।“ व्योम ने एक गहरी सांस ली और फिर उस रहस्यमयी द्वीप को देखा, जो धुंध के बीच घिरा एक अजीब सी फीलिंग दे रहा था।

अचानक व्योम के जबड़े कस गये। अब वो फैसला ले चुका था और वह फैसला था द्वीप का रहस्य ढूंढने का। यह सोच व्योम ने हेलीकॉप्टर में लगा एक बटन दबा दिया। जिससे ड्राइविंग सीट के चारो तरफ बना काँच का केबिन और हेलीकॉप्टर के नीचे का स्टैंड हेलीकॉप्टर में ही कहीं समा गया।

अब वह हेलीकॉप्टर बिल्कुल एक आधुनिक मोटर बोट की तरह नजर आने लगा। व्योम ने धीरे से हेलीकॉप्टर में लगे बोट के इंजन को खींचा।

एक धड़धड़ाहट के साथ बोट का इंजन स्टार्ट हो गया और वह बोट धीरे-धीरे द्वीप की ओर बढ़ने लगी। व्योम ने एक नजर द्वीप पर मारी और हेलीकॉप्टर रुपी बोट में रखे, एक बॉक्स को खोलकर, उसमें रखे कुछ जरुरी सामान को निकालने लगा। कुछ ही देर में जरुरत के सभी सामान को व्योम ने एक छोटे से बैग में रख, उस बैग को अपनी कमर पर लगी बेल्ट के साथ बांध लिया।

अब उसकी नजर निरंतर पास आ रहे उस द्वीप की ओर थी। तभी दूर एक सुनहरी सी रोशनी ने व्योम का ध्यान अपनी ओर खींचा। वह सुनहरी रोशनी शनैः-शनैः तेज होती जा रही थी। व्योम उस रोशनी को देखने में इतना व्यस्त हो गया कि उसे पीछे से आ रहा एक भयानक खतरा दिखाई ही नहीं दिया। व्योम को अचानक से लगा कि उसकी बोट के पीछे कुछ है। जैसे ही वह पीछे पलटा उसे अपने पीछे समुद्र की लहरें लगभग 50 फुट ऊपर तक उठी हुई दिखाई दीं।

“ओ माइ गॉड!...... यह समुद्र की लहरें इतना ऊंचे कैसे उठ गई, ये तो मेरी बोट पर गिरने वाली है।“ व्योम ने घड़ी के सेकेण्डवें हिस्से में अपनी बोट से पानी में जम्प लगा दी।

तभी उसकी बोट के पीछे उठी लहर, बहुत तेजी से उसकी बोट पर आकर गिरी। एक बहुत तेज आवाज के साथ व्योम की बोट पूरी तरह टूटकर बिखर गयी। व्योम अब पूरा का पूरा समुद्र के अंदर था। एक सेकेण्ड के लिए उसकी आंख समुद्र में खुल गई और उसने समुद्र के अंदर जो दृश्य देखा, वह उसकी तो क्या ? उसके सात पुस्तों को हैरान करने के लिए काफी थी।

और इसी के साथ व्योम पर बेहोशी छाती चली गई। व्योम ने बेहोश होने के पहले अपने पास बहुत तेज सुनहरी रोशनी को देखा और इतना महसूस किया कि वह दो हाथों में है, जो कि उसे लेकर तेजी से द्वीप की ओर बढ़ रहे थे।

जारी रहेगा________✍️
 
# 37.

5 जनवरी 2002, शनिवार, 14:00; “सुप्रीम”

“मारिया !“ अलबर्ट ने मारिया की सूनी-सूनी आँखों में झांकते हुए पूछा- “क्या सोच रही हो ?“

“कुछ नहीं , बस इसी शिप के बारे में सोच रही हूं।“ मारिया ने जवाब दिया।

“क्या ?“ अलबर्ट ने पूछा।

“यही कि हमारी जिंदगी की शुरुआत भी ऐसे ही एक शिप पर हुई थी और आज अंत भी इसी शिप पर हो रहा है।“ मारिया के शब्दों में निराशा साफ झलक रही थी।

“ऐसा क्यों कहती हो ? अभी तो हमने एक नए सिरे से जिंदगी की शुरुआत करनी है, जिससे मैं हर कदम पर तुम्हारे साथ रहूंगा।“ अलबर्ट ने मारिया का हौसला बढ़ाने की कोशिश की।

“क्यों झूठ की डोर को पकड़े हुए चल रहे हो ? आज शिप के सभी यात्रियों को पता है कि हम कितनी खतरनाक मुसीबतों का सामना कर रहे हैं और अगला कोई लम्हा हमारी जिंदगी का आखिरी लम्हा भी साबित हो सकता है। लेकिन अब मुझे अपनी मौत की कोई चिंता नहीं है।“ मारिया ने कहा।

“क्यों ?“ अलबर्ट ने मारिया की आँखों में देखते हुए पूछा।

“क्यों कि अब तुम जो मेरे साथ हो और यदि तुम्हारा साथ हो तो मुझे मौत की कोई चिंता नहीं। बस एक ही अफसोस है कि अब हम तो अपनी जिंदगी जी चुके पर शैफाली सरीखे उन छोटे-छोटे बच्चों का क्या होगा ? उनका भला क्या दोष है? वह सब मौत के मुंह में क्यों जा रहे हैं? अभी उन्होंने तो ठीक तरीके से दुनिया को भी नहीं देखा है।“

अलबर्ट बोलती हुई मारिया को लगातार देख रहा था।

“क्या देख रहे हो इस तरह?“ मारिया ने पूछा।

“तुम्हें देख रहा हूं। मैं तुम्हें क्या समझता था और तुम क्या निकली? मैं समझता था कि तुम्हें केवल अपने सिवाय कोई नजर नहीं आता है। पर आज जब तुम स्वयं के बारे में छोड़कर, दूसरे ऐसे लोगों की चिंता कर रही हो, जिन्हें तुम ठीक तरह से जानती तक नहीं हो।“ अलबर्ट ने गहरी साँस लेते हुए कहा।

“इसी का नाम जिंदगी है।“ मारिया ने हल्की सी मुस्कान बिखेरते हुए कहा- “मैं तो पहले भी वही थी, जो आज हूं, पर आज तुम्हारे देखने का नजरिया बदल गया है।“

“तो क्यों ना हम इस बदली हुई जिंदगी को शैम्पेन पी कर सेलिब्रेट करें।“ अलबर्ट ने एकाएक माहौल को चेंज करते हुए कहा।

“आईडिया बुरा नहीं है।“ मारिया ने मुस्कुराते हुए कहा- “मैं अभी वेटर से शैम्पेन लाने के लिए कहती हूं।“

“वेटर को रहने दो।“ अलबर्ट ने खड़े होते हुए कहा- “मैं खुद ही ले आता हूं। इसी बहाने एक सिगरेट भी पी आऊंगा। क्यों कि तुम्हें तो पता है कि सिगरेट मेरी कमजोरी है और तुम्हें सिगरेट से नफरत है। इसलिए हमेशा सिगरेट मैं बाहर जा कर ही पीता हूं।“

मारिया ने धीमे से सिर हिलाकर अलबर्ट को अपनी सहमति दे दी। अलबर्ट ने सोफे से उठकर रूम का दरवाजा खोला और बाहर निकल गया।

5 जनवरी 2002, शनिवार 15:30; “सुप्रीम”

“ब्रैंडन ! लारा के बाद अब तुम ही सिक्योरिटी इंचार्ज हो। इसलिए तुम्हें आज मेरे साथ गश्त पर चलना होगा।“ सुयश ने लंबे-चैड़े ब्रैंडन से हाथ मिलाते हुए कहा।

“ओ.के. कैप्टेन!“ ब्रैंडन ने किसी नए-नए अधिकारी की तरह सैल्यूट मार कर, सुयश का इस्तकबाल किया- “मैं आपको किसी भी प्रकार की शिकायत का कोई मौका नहीं दूंगा।“

शायद कोई और समय होता तो ब्रैंडन की खुशी का ठिकाना ना रहता। लेकिन ऐसी स्थिति में और लारा की मौत के बाद ब्रैंडन को अपनी इस पोस्ट से इतनी खुशी नहीं हुई। थोड़ी ही देर में ब्रैंडन, सुयश के साथ गैलरी के चक्कर काट रहा था।

“हमें बिल्कुल सावधान रहना होगा कैप्टेन।“ ब्रैंडन ने सुयश के साथ चलते हुए कहा- “क्यों कि पिछले दो-तीन दिन के रिकॉर्ड कहते हैं कि हर शाम खतरों को समेटे हुए आती है। लेकिन आप बिल्कुल चिंता ना करें सर, मैंने अपनी सिक्योरिटी के सभी आदमियों को अलर्ट कर दिया है। मैं आशा करता हूं कि आज कोई भी ऐसी घटना नहीं.............।“

लेकिन इससे पहले कि ब्रैंडन कुछ और बोल पाता किसी के भागते कदमों की आहट सुन, दोनो दीवार से सट कर खड़े हो गये। जैसे ही भागने वाला इनके मोड़ पर मुड़ा। दोनों तुरंत निकल कर उसके सामने आ गये।

भागने वाला इंसान ऐलेक्स था। उसकी सांसे बुरी तरह से फूल-पिचक रहीं थीं। जैसे ही उसकी नजर सुयश पर पड़ी, उसने अपना उल्टा हाथ सुयश की ओर बढ़ाया।

“कैप्टन......... अब कोई..... नहीं बचेगा।“ इतना कहकर ऐलेक्स धड़ाम से फर्श पर गिरकर बेहोश हो गया। ऐलेक्स के शब्द ब्रैंडन और सुयश के लिए किसी धमाके से कम नहीं थे।

“ब्रैंडन, जल्दी पानी लाओ।“ सुयश ने चीखकर ब्रैंडन को आदेश दिया।

ब्रैंडन उठकर तुरंत भागा। पास में ही चिलिंग वाटर सिस्टम लगा हुआ था। ब्रैंडन ने तुरंत वहां रखे बर्तन में पानी लिया और भाग कर पुनः सुयश के पास पहुंच गया। सुयश ने पानी के छींटे ऐलेक्स के ऊपर मारे।

धीरे-धीरे एक कराहट के साथ ऐलेक्स को होश आ गया। होश में आते ही सबसे पहले ऐलेक्स ने घबरा कर इधर-उधर देखा और सुयश पर नजर पड़ते ही उसे तेजी से पकड़ लिया।

“कैप्टन......कैप्टन सबको बचाओ, नहीं तो वह सब को मार डालेंगे।“ ऐलेक्स घबराहट के कारण ठीक से बोल भी नहीं पा रहा था।

“क्या हुआ? कौन किसे मार डालेगा ?“ सुयश ने ऐलेक्स को झंझोड़ते हुए पूछा।

“वही ...... हरे कीड़े!“ ऐलेक्स ने जैसे बम फोड़ा।

“हरे कीड़े!“ सुयश और ब्रैंडन दोनों के मुंह से एक साथ निकला।

“हां...... मैं अपने कमरे में था। तभी बाहर गैलरी में मुझे खट-पट की आवाज महसूस हुई। मैंने धीरे से अपने कमरे का दरवाजा खोला। तो देखा ठीक वैसा ही हरा कीड़ा, जैसे क्रिस्टी के रुम मिला था। वह आगे-आगे उछलता हुआ गैलरी में जा रहा था। ना तो मेरे पास रिवाल्वर थी और ना ही कोई अन्य हथियार, जिससे मैं उस हरे कीड़े का सामना कर सकता। इसलिए मैं बिना आवाज किए, उस कीड़े के पीछे चल पड़ा। वह लगभग जमीन से 5-5 फुट ऊपर, मेंढक की तरह उछलता हुआ चल रहा था । उसकी स्पीड बहुत तेज थी। फिर भी मैं उसके पीछे लगा रहा। मैंने उसका कई गलियों तक पीछा किया। फिर एक गैलरी में मैं जैसे ही मुड़ा तो जो दृश्य मेरी आंखों ने देखा, उसे देखकर मेरी रूह फना हो गयी और मैं वहां से भाग खड़ा हुआ।“

बताते समय ऐलेक्स की आँखों के आगे सारे दृश्य घूमने लगे।

“ऐसा क्या देख लिया तुमने?“ सुयश का दिमाग ऐलेक्स की बातें सुनकर सांय-सांय करने लगा।

“मैंने देखा कि ठीक उसी के तरीके के कम से कम 10-12 हरे कीड़े उस पूरी गैलरी में टहल रहे थे।“ ऐलेक्स की आँखों में भय साफ नजर आ रहा था।

“क्या ऽऽऽऽऽऽ?“ सुयश को लगा जैसे किसी ने उसके सिर पर पहाड़ फेंक कर मार दिया हो।

“यह सब तुमने किस गैलरी में देखा ?“ ब्रैंडन ने ऐलेक्स से पूछा।

“आइए मेरे साथ। मैं आपको बताता हूं।“ इतना कहकर ऐलेक्स उन्हें लेकर एक दिशा की ओर चल दिया। लेकिन उसके पांवों में अभी भी भय की वजह से लड़खड़ाहट थी। तभी इन्हें गैलरी की एक साइड से अलबर्ट आता दिखा ई दिया।

“क्या बात है कैप्टन? आप लोग इतने घबराए हुए क्यों हैं?“ अलबर्ट ने बारी- बारी सबके चेहरे को देखते हुए कहा।

“अभी -अभी मिस्टर ऐलेक्स ने इस दिशा में लगभग 10-12 हरे कीड़े जाते देखे हैं।“ सुयश ने जवाब दिया।

“क्या ऽऽऽऽ? माई गॉड! वह एक कीड़ा ही इतना खतरनाक था, फिर 10-12 कीड़े।......अगर ऐसा हो गया और शिप के लोगों को पता चल गया तो भगदड़ मच जायेगी।“ अलबर्ट ने घबराते हुए कहा।

“यह भी तो हो सकता है कि मिस्टर ऐलेक्स ने 10-12 कीड़े देखे हों, तो यह पूरे शिप पर मिला कर 100-200 हों।“ ब्रैंडन ने अपने विचार रखे।

“अगर ऐसा हुआ तो शिप के किसी भी आदमी का बचना मुश्किल है।“ सुयश चिंतित स्वर में बड़बड़ाया।

“क्या आपने इसी दिशा में कीड़ों को जाते देखा था मिस्टर ऐलेक्स?“ अलबर्ट ने सबके साथ गैलरी में मुड़ते हुए कहा।

“जी हां !“ ऐलेक्स ने उत्तर दिया।

“माई गॉड!......इधर तो मेरा भी रूम पड़ता है। मारिया......मारिया कैसी होगी ?“

मारिया का विचार आते ही, हाथ में शैंपेन की बोतल और खाने का सामान लिए अलबर्ट ने अपने रूम की ओर दौड़ लगा दी। उसे अब ना तो उन कीड़ों की चिंता थी और ना ही अपनी।

सुयश सहित ब्रैंडन और ऐलेक्स भी अलबर्ट के पीछे भागे। उन तीनों की निगाहें तेजी से गैलरी में भी फिर रही थीं। अलबर्ट भागता हुआ अपने कमरे के दरवा जे पर पहुंचा। उसके कमरे का दरवाजा खुला हुआ था। वह भागकर तेजी से अपने कमरे में प्रवेश कर गया।

“मारिया-मारिया !.......कहां हो तुम?“ अलबर्ट की आवाज में चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही थीं।

रूम खाली था। अलबर्ट भागकर दूसरे कमरे में दाखिल हो गया, पर वह भी खाली था। अलबर्ट की बदहवासी बढ़ती जा रही थी। जल्दी ही उसने पूरा केबिन चेक कर डाला, पर मारिया कहीं ना थी।

“मारियाऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ!“ अलबर्ट गुस्से में जोर से चिल्ला उठा।

उसकी आंखों से झर-झर आंसू बहने लगे। शैंपेन की बोतल उसके हाथ से गिरकर टूट गई थी और साथ ही टूट गया था अलबर्ट के धैर्य का बांध। वह जमीन पर गिरकर फूट-फूट कर रोने लगा।

“तुम कहां चली गई मारिया?...... अब तो मैंने तुम्हारे साथ जिंदगी भर रहने का वादा भी कर लिया था।.. .. .....मुझे अकेला छोड़ने का तुम्हारा कोई हक नहीं था।...... अरे दो पल इंतजार तो कर लिया होता।.....मेरे आने का......अब मैं तुम्हारे बिना कैसे जिंदा रहूंगा ?“ अलबर्ट भावावेश में बोलता ही जा रहा था।

“शांत हो जाइए मिस्टर अलबर्ट।“ सुयश ने अलबर्ट के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा- “हो सकता है कि मारिया मैडम यहीं कहीं आस-पास गयीं हों और अभी वापस लौट आएं।“

“नहीं कैप्टेन....... मैं जान गया हूं कि........ वह अब इस दुनिया में नहीं है ......उसे भी शायद इन आने वाले पलों का एहसास हो गया था.. .........तभी वह मुझे बाहर जाने के लिए मना कर रही थी.......लेकिन मैं.......मैं तो अपनी इस कमीनी लत का गुलाम हो गया हूं।“ कहते हुए अलबर्ट ने अपनी जेब से सिगरेट का पैकेट निकाल लिया।

“मैं.......मैं जानता हूं कि मारिया को किसने मारा ?“ एकाएक ही अलबर्ट विक्षिप्त सा नजर आने लगा।

“क्या ऽऽऽऽ?“ अलबर्ट के शब्दों को सुन, सुयश सहित ब्रैंडन और ऐलेक्स अवाक रह गये- “आपको पता है कि मारिया मैडम को किसने मारा ?“

“हां..........मुझे पता है.......... उसको... .....उसको इसने मारा।“ अलबर्ट ने ‘क्लासिक‘ सिगरेट के पैकेट की ओर इशारा करते हुए कहा- “यही है जिसने मेरी मारिया को मुझसे छीन लिया............ मैं. .. ...मैं इसे जिंदा नहीं छोडूंगा......मैं भी इसे मार डालूंगा।“

इतना कहकर अलबर्ट ने सिगरेट का पैकेट जमीन पर फेंक दिया और उसे अपने पैरों तले कुचलने लगा सुयश, अलबर्ट की यह हालत देख, धीरे से फोन की ओर बढ़ गया-

“हैलो डॉक्टर निक्सन!........मैं रूम नंबर 927 से सुयश बोल रहा हूं। आप फौरन अपना बैग लेकर इस केबिन में आ जा इए।“ इतना कहकर सुयश ने फोन काट दिया।

उधर अलबर्ट अब पागलों की तरह अपना जूता उतारकर सिगरेट को पीट रहा था।

“नशीली चुड़ैल......आज मैं तुझे नहीं छोडूंगा.......मार डालूंगा।“

सुयश ने धीरे से ब्रैंडन को इशारा किया। ब्रैंडन ने आगे बढ़कर अलबर्ट को पीछे से पकड़ लिया। अलबर्ट अपने आपको ब्रैंडन की पकड़ से छुड़ाने की भरपूर कोशिश करने लगा।

“छोड़ो मुझे..........वरना कातिल भाग जाएगा........वो मेरी मारिया को...... ले जा रहा है।“

अलबर्ट अभी भी चिल्लाये जा रहा था। लेकिन लंबे-चैड़े ब्रैंडन की पकड़ बहुत शक्तिशाली थी। चाहकर भी अलबर्ट, ब्रैंडन की पकड़ से छूट नहीं पा रहा था। तभी डॉक्टर निक्सन भागते हुए अपने असिस्टेंट के साथ रुम में दाखिल हुए।

“क्या बात है कैप्टन?“ डॉक्टर निक्सन ने अलबर्ट पर एक नजर मारते हुए कहा।

“इन्हें तुरंत एक नींद का इंजेक्शन दीजिए।“ सुयश ने अलबर्ट की ओर इशारा करते हुए कहा।

“नहीं डॉक्टर.....! मुझे नींद का इंजेक्शन मत देना.........मैं अभी तक सो ही तो रहा था.............. आज पहली बार जागा हूं.......मुझे दोबारा मत सुलाओ.....वरना ...... वरना वो मेरी मारिया को ले जाएगा ।“ अब अलबर्ट की आवाज में गिड़गिड़ाहट के भाव थे।

डॉक्टर निक्सन ने तब तक इंजेक्शन बना लिया था। उसने आगे बढ़कर धीरे से अलबर्ट की दाहिनी बाजू में इंजेक्शन को चुभा दिया।

“छोड़ दो.......मुझे.....वो देखो.... मेरी मारिया.....मुझे बुला...रही .... है...वो... मुझे...पुकार..............।“

अलबर्ट अपनी बात पूरी किए बिना ही बेहोश हो गया। ब्रैंडन ने अब अपनी पकड़ ढीली कर दी। उसने अब अलबर्ट को धीरे से वहीं बिस्तर पर लिटा दिया और उसके दूसरे पैर का जूता भी खोलकर वहीं रख दिया।

“ब्रैंडन 2 आदमी इनकी सिक्योरिटी में लगा दो और तुम तुरंत मेरे साथ चलो, क्यों कि खतरा अभी टला नहीं है। वह कीड़े पता नहीं कहां तक पहुंच गये होंगे?“ सुयश ने कहा।

“कीड़े......? कैसे कीड़े?“ डॉक्टर निक्सन ने हैरानी से पूछा।

“सॉरी डॉक्टर, अभी कुछ भी बताने का समय नहीं है। जल्दी ही बताता हूं आपको।“

कहकर सुयश ने आखिरी बार अलबर्ट पर नजर मारी और तेजी के साथ कमरे से बाहर निकल गया। ऐलेक्स भी उसके पीछे था।

जारी रहेगा________✍️
 
# 38 .

चैपटर-12

5 जनवरी 2002, शनिवार 19:00;

थोड़ी देर के बाद ब्रैंडन पुनः सुयश से आ मिला।

“कैप्टन मैंने अपनी सिक्योरिटी के सभी आदमियों को पूरी तरह अलर्ट कर दिया है और हर ग्रुप के एक मेंबर को वॉकी टॉकी सेट भी दिला दिया है। अब शिप पर जैसे ही कोई घटना घटेगी, हमें तुरंत पता चल जाएगा।“ ब्रैंडन ने इधर-उधर नजर मारते हुए सुयश से कहा।

“वेरी गुड! अब हमें भी चलकर उन कीड़ों को ढूंढना चाहिए।“ कहकर सुयश अगली गली में मुड़ गया।

“आपने उन हरे कीड़ों को इसी तरफ आते देखा था ना ?“ सुयश ने ऐलेक्स को देखते हुए पूछा।

“जी हाँ !“ ऐलेक्स ने जवाब दिया।

“फिर वह सारे के सारे इतनी जल्दी कहां चले गए?“ ब्रेंडन बोल उठा।

“ऊपर वाले से दुआ करो कि वह सब जहां से आए थे, वहीं चले भी गए हों। वरना वास्तव में ही उनसे बचना बहुत मुश्किल हो जाएगा।“ सुयश ने हाथ से चेहरे पर क्रॉस बनाते हुए, ईश्वर से प्रार्थना की।

“वैसे सर आपको क्या लगता है?“ ब्रैंडन ने गंभीर स्वर में कहा- “क्या यह कीड़े स्वयं कहीं से आए हैं?“

“क्या मतलब?“ सुयश ने ठिठक कर रुकते हुए कहा।

“मतलब यह है सर, कि ऐसा भी तो हो सकता है कि कोई जानबूझकर इस शिप पर दहशत फैलाने के लिए, इन हरे कीड़ों को लेकर यहां आया हो ?“ ब्रैंडन ने अपनी बात को क्लियर करते हुए कहा।

“यह संभव नहीं है।“ ऐलेक्स ने तुरंत बोलते हुए कहा- “वह कीड़ा इतना

जहरीला और फुर्तीला है कि मुझे नहीं लगता कि कोई उस पर पार पा सकता है।“

"ऐलेक्स सही कह रहे हैं।“ सुयश ने भी ऐलेक्स के विचारों पर अपनी सहमति जताई।

“मैं भी आप लोगों की बातों से सहमत हूं। पर कुछ बातें हैं, जो मेरे दिल में खटक रहीं हैं।“ ब्रैंडन के शब्दों में शंका के भाव थे।

“कैसी बातें?“ सुयश ने पूछा।

“कैप्टन यह तो आप भी जानते हैं कि ये कीड़ा कितना फुर्तीला है....... जिस कीड़े ने गार्ड को बिना 1 सेकंड का समय दिए मार दिया हो, उसे हम फुर्तीला कह सकते हैं। पर ये बात मेरे समझ में नहीं आयी कि क्रिस्टी उस कीड़े से कैसे इतनी देर तक बचती रही ? क्रिस्टी ने ये भी कहा था कि उसने कीड़े को पैर मार दिया जिससे वह बेड के पीछे गिर गया। क्या यह संभव है कैप्टन कि जिस कीड़े ने गार्ड को, जो खतरा भांप कर बहुत सावधानी से चल रहा था, बिल्कुल समय नहीं दिया ? फिर उससे क्रिस्टी आखिर इतनी देर तक कैसे बचती रही ?“ ब्रैंडन ने कहा।

ब्रैंडन के शब्दों को सुनकर सुयश के चेहरे पर भी अब सोच के भाव आ गए, क्यों कि ब्रैंडन का तर्क वास्तव में जोरदार था।

“लेकिन अगर क्रिस्टी उन कीड़ों को शिप पर लाई होती, तो वह कीड़ों से स्वयं पर अटैक क्यों करवाती। और वैसे भी वह एक साधारण लड़की है, वह भला शिप पर दहशत क्यों फैलाना चाहेगी ?“ ऐलेक्स ने ब्रैंडन को देखते हुए कहा।

“ये आप नहीं बोल रहे हैं मिस्टर ऐलेक्स।“ सुयश ने ऐलेक्स के चेहरे का जायजा लेते हुए कहा- “आपका क्रिस्टी के प्रति प्यार बोल रहा है।“

ऐलेक्स ने एक क्षण के लिए अपना सिर झुका लिया। क्यों कि सुयश वास्तव में सही कह रहा था। तभी ब्रैंडन को फिर कुछ याद आया-

“कैप्टेन, एक बात और जो मैं आपसे बताना भूल गया था। जिस समय शैफाली अपने सपनों के बारे में बता रही थी, मैं भी वहीं पर था। आप लोगों का सारा ध्यान शैफाली पर था, इसलिए वहां पर घटी एक अजीब सी घटना पर आप लोगों ने ध्यान नहीं दिया था।“

“कैसी अजीब सी घटना ?“ शैफाली का नाम सुन सुयश ने हैरानी से ब्रैंडन की ओर देखा।

“जब शैफाली ने अपने सपनों के बारे में बताना शुरू किया तो उसके बगल बैठा ब्रूनो अचानक ‘कूं-कूं‘ करता हुआ उससे दूर हट गया था। जब तक शैफाली सपनों के बारे में बताती रही, वह डरा-डरा सा उससे दूर ही बैठा रहा। और जैसे ही शैफाली ने अपनी सपने वाली बात खत्म की, ब्रूनो फिर नॉर्मल हो कर शैफाली के पास आ गया था।“ ब्रैंडन ने कहा।

“मैं समझा नहीं ।“ सुयश की समझ में नहीं आया कि ब्रैंडन आखिर क्या कहना चाह रहा है?

“अब मैं आपको किस तरह से समझाऊं कि वहां उस समय कुछ ऐसा था, जिसे ब्रूनो जानवर होने की वजह से साफ-साफ देख रहा था।“ ब्रैंडन के शब्द रहस्य से भरे थे।

“आपका मतलब किसी आत्मा..... ..या किसी सुपर नेचुरल चीज से तो नहीं ?“ सुयश के चेहरे पर भी अब उलझन के भाव आ गये।

“आप बिल्कुल ठीक समझे कैप्टन, मैं इसी बारे में आपसे डिस्कस भी करना चाह रहा था, पर सारी घटनाएं इतनी तेजी से घटीं कि आप से बात करने का समय ही नहीं मिला।“ ब्रैंडन ने एक नजर रास्ते पर मारते हुए कहा।

“हूं......!“ सुयश ने एक गहरी सांस भरी और बोला- “बात चाहे जो कुछ भी हो, पर इतना जरूर है कि कोई विचित्र शक्ति, शैफाली के माध्यम से हमें कुछ बताना चाह रही है। लेकिन पहले इन कीड़ों को ढूंढकर खत्म करते हैं, वरना हम समय से पहले ही मौत के मुंह में चले जाएंगे। रही बात शैफाली के सपनों की तो हमें एक बार फिर शैफाली से मिलना पड़ेगा।“

इसके बाद तीनों ने सभी गैलरियां छान मारी, पर उन्हें कीड़े कहीं भी नजर नहीं आये।

“कैप्टेन, हमने आसपास की सारी गैलरियां देख लीं।“ ब्रैंडन ने इधर-उधर नजर मारते हुए सुयश से पूछा-

“क्या अब हमें डेक पर चल कर देखना चाहिए?“ लेकिन इससे पहले कि सुयश कोई जवाब दे पाता,

डेक की ओर खुलने वाला दरवाजा ‘धड़ा ऽऽऽक‘ की आवाज के साथ खुला और एक साया सीढ़ियों से लुढ़कता हुआ उनके सामने आकर गिरा। वह कोई और नहीं जॉनी था।

“क्या हुआ जॉनी ? क्या बात है?.... ... तुम इतना घबराए हुए क्यों हो?“ सुयश ने एक बार उस खुले दरवाजे को देखते हुए जॉनी को सहारा दिया।

“कैप्टन-कैप्टन.......ऊपर........ ऊपर!“ जॉनी ने घबराते हुए दरवाजे की ओर इशारा किया।

“क्या हुआ ऊपर? क्या ऊपर हरे कीड़े हैं?“ सुयश ने अपने शक के आधार पर जॉनी से पूछा।

“नहीं......!“ जॉनी ने थूक निगलते हुए, डरते हुए नहीं में सिर हिलाया-

“वो ऊपर...... लोथार. .....।“

“क्या हुआ लोथार को ?“ सुयश ने जॉनी की बात पूरी किए बिना ही जल्दी से पूछ लिया।

“ऊपर जल्दी जाइए कैप्टन........... वरना.......वरना वो उसे मार डालेगी।“

बस इससे ज्यादा जॉनी कुछ नहीं बोल सका। वह अपने होश खो बैठा।

“ऐलेक्स तुम इसे संभालो......और ब्रैंडन तुम मेरे साथ आओ।“ सुयश ने उठते हुए तेजी से आर्डर दनदनाया।

वह लपककर ब्रैंडन के साथ सीढ़ियां चढ़ता हुआ, दरवाजा खोलकर डेक पर आ गया। सामने उन्हें डेक की रेलिंग के पास लोथार खड़ा नजर आया, जो उस अंतहीन समुद्र में ना जाने क्या देख रहा था।

लोथार को सलामत देख सुयश ने चैन की सांस ली। लेकिन इससे पहले कि सुयश और कुछ सोच पाता, उसने देखा कि लोथार डेक की रेलिंग पर चढ़ रहा है। यह देखकर सुयश वहीं से चीख पड़ा-

“रुक जाओ लोथार.....! वरना तुम पानी में गिर जाओगे।“

सुयश की चीख सुन कर लोथार एक क्षण के लिए रुका और फिर उसने

पलटकर सुयश की ओर देखा।

“बेकार है कैप्टेन....।“ आपने आने में बहुत देर कर दी। वो मुझे बुला रही है।“ लोथार ने समुद्र की ओर अपनी तर्जनी उंगली से इशारा करते हुए कहा-

“अब मुझे उसके पास जाना ही होगा।“

“कौन....? कौन बुला रही है?“ सुयश का स्वर उलझा-उलझा सा था।

“वैसे तो मौत का कोई नाम नहीं होता। लेकिन हम उसे ‘लॉरेन‘ कह सकते हैं।“ लोथार के शब्दों में मौत की सी ठंडक थी।

“लॉरेन........!“ लोथार की बात सुन, सुयश और ब्रैंडन के दिमाग में धमाके से होने लगे। एक क्षण के लिए तो उनकी कुछ समझ में नहीं आया।

“लॉरेन?????? पर वो तो मर चुकी है।“ सुयश ने अटकते हुए स्वर में कहा-

“तुमने तो स्वयं उसकी लाश देखी थी।“

“मौत को भी भला आज तक कोई मार पाया है।“ लोथार के हर एक शब्द सुयश के दिमाग में किसी हथौड़े की तरह से चोट कर रहे थे-

“वो मुझे बुला रही है ......सुनो उसकी आवाज तुम्हें भी सुनाई देगी।“

एक क्षण के लिए लोथार पुनः समुद्र की ओर देखने लगा। मौके का फायदा उठाकर सुयश धीरे-धीरे लोथार की ओर बढ़ने लगा।

“वो.... आ गई।“ लोथार ने गहरे समुद्र के ओर देखते हुए कहा-

“वो... आ गई। मुझे अपने साथ ले जाने के लिए..........मुझे उसके साथ जाना ही होगा।“

उधर ब्रैंडन ने धीरे से वॉकी-टॉकी सेट निकाल कर शिप को रुकवाने के संकेत दे दिए। अब शिप की रफ्तार धीरे-धीरे कम होने लगी।

अब लोथार ने समुद्र की ओर देखते हुए अपना एक पैर रेलिंग की दूसरी साइड कर लिया। यह देखकर सुयश एक बार फिर चीख उठा-

“रुक जाओ लोथार....रुक जाओ।“

सुयश की आवाज सुनकर लोथार एक बार पुनः सुयश की ओर घूमकर बोला-

“क्या फायदा कैप्टेन! तुम मुझे रोक नहीं पाओगे। जब तुम इसे नहीं रोक पाए....... तो मुझे क्या रोकोगे.... ........हाऽऽऽहाऽऽऽहाऽऽऽ!“

इतना कहकर लोथार ने एक तरफ इशारा किया और तेजी से हंसकर समुद्र में कूद गया। वातावरण में ‘छपाक‘ की एक आवाज गूंज उठी।

तब तक ‘सुप्रीम’ भी रुक गया था।

सुयश और ब्रैंडन ने लोथार के शब्दों को समझ कर अपना चेहरा उस तरफ घुमाया, जिधर लोथार ने इशारा किया था और एक पल के लिए उनके रोंगटे खड़े हो गए।

उनसे लगभग 5 मीटर दूर अंधेरे में एक साया खड़ा था जिसकी आंखें अंधेरे में भी बहुत तेज चमक रहीं थीं।

उस जगह पर काफी अंधेरा होने के कारण उस साये का चेहरा साफ दिखाई नहीं दे रहा था। पर उसकी सफेद पोशाक अंधेरे में भी साफ दिख रही थी।

जारी रहेगा_________✍️
 
# 39 .

“कौन?.......कौन है वहां ?“ सुयश ने चीखकर पूछा।

पर उस साये की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। वह साया एकटक अब भी उन दोनों को देख रहा था। तभी ब्रैंडन रिवाल्वर निकाल कर पास आ गया।

“खबरदार! तुम जो भी हो, हिलना नहीं..... वरना गोली मार दूंगा।“ ब्रैंडन ने तेज आवाज में कहा। वह साया फिर भी चुपचाप खड़ा रहा।

“ब्रैंडन तुम यह रिवाल्वर मुझे दो, मैं इसे कवर करता हूं। तुम नीचे लोथार को देखो।“ सुयश ने उस साये से बिना नजरें हटाए, ब्रैंडन से रिवाल्वर मांगी।

ब्रैंडन को भी जैसे ही लोथार का ख्याल आया उसने अपनी रिवाल्वर सुयश को दे दी और भागकर रेलिंग के पास पहुंच गया।

“बचाओ.......कैप्टन बचाओ ....... मैं डूब रहा हूं।“ तभी वातावरण में लोथार की आवाज गूंजी। एक पल के लिए सुयश का ध्यान लोथार की तरफ गया। तभी वह साया उछलकर रेलिंग पर चढ़ने लगा।

“धांय!“ सुयश ने फुर्ती से आगे बढ़ते हुए, उस साये के पैरों पर एक फायर किया।

निशाना बिल्कुल सही था। गोली उस साये के दाहिने पैर पर लगी। साये को थोड़ा झटका अवश्य लगा। पर वह डेक की रेलिंग पर चढ़ने में सफल हो गया।

लेकिन इससे पहले कि वह पानी में कूद पाता। सुयश ने गजब की फुर्ती दिखाते हुए, छलांग लगाकर उसकी कॉलर पकड़ ली। लेकिन वह साया बिना इस बात की परवाह किए कि सुयश ने उसे पकड़ रखा है, वह पानी में कूद गया।

“चर्र......चर्र.....।“ उसकी शर्ट कॉलर का कुछ हिस्सा फाड़ती हुई, सुयश के हाथ में आ गई।

मगर वह साया पानी में कूदकर गायब होने में सफल हो गया। सुयश तुरंत उस फटे कपड़े को वहीं फेंककर लोथार की ओर भागा।

तब तक ब्रैंडन डेक पर मौजूद एक बहुत लंबा रस्सा उठा लाया और उसे रोल से खोलकर पानी में फेंकने की तैयारी करने लगा।

उधर फायर की आवाज सुनकर तौफीक व जेनिथ सहित कुछ अन्य लोग भी वहां भागकर पहुंच गए। अब सभी का ध्यान डूबते हुए लोथार पर था।

“मुझे बचा लीजिए कैप्टेन.....मैं डूब रहा हूं......मैं मर जाऊंगा।“ लोथार अपनी जान बचाने के लिए गिड़गिड़ा रहा था।

चांदनी रात होने की वजह से समुद्र की लहरें भी तेजी से उछल रहीं थीं।

“थोड़ी देर तैरने की कोशिश करो।“ सुयश ने पानी में रस्सा फेंकते हुए कहा- “मैं रस्सा फेंक रहा हूं।“

पहला निशाना गलत गया। रस्सा लोथार से बहुत दूर गिरा। यह देखकर तौफीक ने सुयश से रस्सा ले लिया- “मुझे दीजिए कैप्टेन, मैं ट्राई करता हूं।“

तौफीक ने रस्से का गोला बना कर बहुत तेजी से नचाया और निशाना लगाकर लोथार की ओर फेंका। अगर निशाना रिवाल्वर का होता तो तौफीक के चूकने का प्रश्न ही नहीं उठता था, पर वह रस्से से लगाया गया निशाना था। फिर भी वह निशाना इतना गलत नहीं था। वह रस्सा लोथार से थोड़ी दूरी पर जाकर गिरा।

“लोथार तैरकर रस्से को पकड़ने की कोशिश करो।“ तौफीक ने चिल्लाते हुए कहा- “वह तुमसे ज्यादा दूरी पर नहीं है।“

लोथार अपने हाथ पैर तो चला रहा था, पर जाने क्यों वह रस्से तक पहुंच नहीं पा रहा था।

“क्या बात है? क्या लोथार तैरना नहीं जानता ?“ सुयश ने झुंझला कर तौफीक से पूछा।

“उसे ज्यादा तैरना नहीं आता। वह अभी तैरना सीख रहा था।“ तौफीक ने सुयश को बिना देखे ही जवाब दिया- “लेकिन ऐसा भी नहीं है कि वह बिल्कुल अनाड़ी है।“

“फिर वह आगे बढ़कर रस्सा पकड़ क्यों नहीं पा रहा है?“ सुयश के चेहरे पर असमंजस के भाव थे। तभी लोथार गला फाड़कर चीख उठा-

“कैप्टेन मुझे बचाओ। वह पानी के नीचे है।......... उसने मेरा पैर पकड़ रखा है..... मैं तैर नहीं पा रहा हूं।.... मैं डूब जाऊंगा।“

सुयश यह सुनकर जैसे पागल हो गया। वह स्वयं पानी में कूदने के लिए रेलिंग पर चढ़ने लगा। यह देखकर तौफीक और ब्रैंडन समेत कई लोगों ने उसे पकड़ लिया।

“नहीं कैप्टेन, मैं आपको पानी में नहीं कूदने दूंगा।“ ब्रैंडन ने सुयश को रेलिंग से खींचते हुए कहा- “नीचे पानी में जान का खतरा है।“

“तो क्या करूं?“ सुयश के गले से चिंघाड़ सी निकली- “अपनी जान बचाने के लिए लोथार को ऐसे ही तड़प-तड़प कर मर जाने दूं। वहां पानी के नीचे वही कातिल है, जो सबको एक-एक करके मार रहा है। आज मैं उसे नहीं छोडूंगा।.....छोड़ दो .....जाने दो मुझे।“

तभी तौफीक समुद्र की ओर देखते हुए बोला- “रहने दीजिए कैप्टेन। अब हम किसी को नहीं बचा सकते। वह देखिए शार्को का एक झुंड चारों तरफ से इसी दिशा में आ रहा है। अब तो गोता-खोरों को भी नीचे भेजना बेकार है। अब दोनों में से कोई नहीं बच सकता।“

यह सुनकर सभी का ध्यान शिप के चारों तरफ पड़ रही सर्चलाइट की रोशनी में पानी में गया। बहुत सी शार्कों का एक झुंड उधर ही आता हुआ दिखायी दिया। जिनकी पूंछ पानी से बाहर दिख रहीं थीं।

वह बहुत तेजी से घेरा बना कर, इसी तरह आ रहीं थीं। शायद उन्हें इंसानो की खुशबू मिल गई थी। लोथार अब धीरे-धीरे डूब रहा था। वह बार-बार पानी के अंदर बाहर इस तरह से हो रहा था।

जैसे कोई उसे नीचे से बार-बार खींच रहा हो। कभी-कभी सफेद शर्ट में लिपटी हुई एक बांह पानी के नीचे से लोथार को पकड़े हुए दिख जाती थी। अब तो लोथार की चीखें भी बंद हो गई थीं। अब वह सिर्फ अपने हाथ-पैर चलाने की आखिरी कोशिश कर रहा था।

अब तक शिप की डेक पर असंख्य यात्रियों का जमावड़ा लग गया था। इन लोगों में बहुत से गार्ड भी शामिल थे। अब शार्कें लोथार से बहुत ज्यादा दूरी पर नहीं थीं। सुयश का खून इस सीन को देखकर बहुत तेजी से खोलने लगा, अचानक सुयश ने एक गार्ड के हाथ से मशीनगन खींचकर पास आ रही शार्कों पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं।

“जब तक संभव हो सके लोथार को बचाने की कोशिश करो।“ सुयश गोलियां चलाते हुए चीखा- “शार्कों पर गोलियां चलाओ, उन्हें पास मत आने दो।“

यह सुनते ही वहां खड़े सभी गार्डों ने शार्कों पर गोलियों की बौछार शुरू कर दी। “तड़...तड़.....तड़.....तड़.....तड़..।“ गोलियों की आवाज उस शांत वातावरण में बहुत दूर तक गूंज रहीं थीं।

उधर तौफीक ने लपककर ब्रैंडन से रिवाल्वर छीन ली। कोई और स्थिति होती तो शायद ब्रैंडन से तौफीक की हाथापाई हो रही होती। लेकिन ऐसी स्थिति में ब्रैंडन नॉर्मल रहा, क्यों कि अब उसे तौफीक के निशाने के बारे में मालूम हो चुका था।

तौफीक लगातार लोथार के शरीर पर चिपके उस हाथ को देख रहा था। थोड़ी देर तक देखते रहने के बाद तौफीक ने निशाना साधा और गोली चला दी।

“धांय!“ एक गोली उस रहस्यमय साये के हाथ की ओर झपटी , निशाना बिल्कुल अचूक था। गोली सीधा उस साये के हाथ पर लगी।

उस रहस्यमय साये को एक झटका लगा और लोथार उसकी हाथ की पकड़ से निकल गया। लोथार को जैसे ही अपने छूटने का अहसास हुआ, उसमें एक नई ताकत का संचार हो गया। वह तेजी से रस्सी की ओर झपटा।

अब लोथार उस रहस्यमय साये से अलग हो गया और रस्सी उसके हाथ में आ गई थी। कुछ लोगों ने तेजी से रस्सी को खींचना शुरू कर दिया।

उधर तौफीक ने लोथार को उस रहस्यमय साये से अलग होते देख, उस साये का निशाना बना कर गोलियों की बौछार कर दी। उस रहस्यमय साये को असंख्य गोलियां लग गयीं लेकिन उस साये ने फिर भी पानी में डुबकी लगाई और समुद्र की गहराइयों में ना जाने कहां खो गया।

उधर गार्ड लगातार गोलियां चलाकर शार्कों को रोकने की कोशिश कर रहे थे। पर कई शार्कों को गोलियां लगने से खून निकल आया था। जिसकी खुशबू पा कर वहां और सैकड़ों की तादाद में शार्क आ गईं। अब गार्डों के लिए इन शार्कों को रोक पाना बहुत मुश्किल था।

सभी शार्क अब घेरा बना कर, तेजी से लोथार की ओर बढ़ने लगीं। लोथार की दूरी अभी भी शिप से ज्यादा थी। आखिरकार हिंसक शार्कें लोथार पर तेजी से झपटीं। डर के कारण लोथार सहित कईयों की आंखें बंद हो गईं।

लेकिन अचानक एक अजीब सा चमत्कार हुआ। सारी शार्कें लोथार से लगभग 15 फुट की दूरी पर अचानक रुक गईं। सारे लोग अवाक होकर इस घटना को देखने लगे।

“ये क्या हुआ?“ तौफीक ने आश्चर्य भरे स्वर में कहा- “ये सारी शार्कें अचानक कैसे रुक गईं?“

“पता नहीं ! सुयश की आँखें भी आश्चर्य से फैल गयीं- “लेकिन मौका अच्छा है। लोथार को जल्दी खींचो।“

सुयश के इतना कहते ही लगभग 10-12 और लोग रस्सी पर झपटे। अब सभी तेजी से रस्सी खींचने लगे। लोथार के बचने की अब पूरी आशाएं हो गईं थीं।

तभी रस्सी एक जोरदार झटके से खिंचना बंद हो गई। सभी ने पूरी ताकत लगा कर देखी, पर रस्सी टस से मस नहीं हुई। सबकी निगाहें फिर लोथार पर गयीं।

अचानक लोथार के चेहरे के भाव दहशत में परिवर्तित हो गए। सभी को यह एहसास हो गया था कि पानी के नीचे कुछ तो है, शार्कें अपने आप नहीं रुकी थीं।

लेकिन इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, लोथार ‘गुलुप‘ की आवाज के साथ पानी में समा गया।

चूंकि लोथार ने रस्सी छूट जाने के डर से, अपने हाथ में कसकर फंसा रखी थी, इसलिए वह रस्सी भी तेजी से पानी में खिंचती चली गई।

रस्सी के खिंचाव का झटका इतना तेज था कि यदि कोई उसे पकड़े होता, तो वह भी समुद्र में खिंच गया होता।

एक निस्तब्ध सन्नाटा माहौल में कायम हो गया। अब सभी शार्कें भी इधर-उधर हो गईं। शायद उन्हें भी यह एहसास हो गया था कि अब शिकार उनके हाथ नहीं लगने वाला।

“आखिर हम लोथार को मरने से नहीं बचा पाए।“ सुयश के चेहरे पर दुख ही दुख दिखाई दे रहा था।

“कैप्टन वैसे आपको क्या लगता है?“ ब्रैंडन ने माहौल को हल्का करने के उद्देश्य से टॉपिक चेंज करते हुए कहा- “वह रहस्यमय साया कौन हो सकता है? आपने तो उसको बहुत करीब से देखा था।“

“कुछ पक्के तौर पर कह नहीं सकता, क्यों कि उस जगह पर बहुत अंधेरा था।“ सुयश ने अपने दिमाग में उस घटना को याद करते हुए कहा- “लेकिन एक बात तो है, उस साये की ड्रेस देखकर यह लग रहा था कि जैसे वह अपने शिप का कोई स्टाफ का आदमी हो।“

“क्या बात कर रहे हैं कैप्टेन?“ ब्रैंडन ने आश्चर्य भरे स्वर में कहा- “ये कैसे संभव हो सकता है?“

“मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं...... और हां उसके कंधे पर स्टार भी चमक रहे थे.....मुझे याद आ रहा है .....जब मैं उस पर झपटा तो उसकी शर्ट की कॉलर फट कर मेरे हाथ में आ गई थी।“

अचानक कुछ याद करके सुयश तेजी से उस तरफ भागा। जिधर उस रहस्यमय साये से उसकी हाथापाई हो रही थी। उस स्थान पर पहुंच कर सुयश ने अपनी नजरें इधर-उधर दौड़ाई। थोड़ी ही दूरी पर उसे वह फटी हुई कॉलर पड़ी दिखाई दी। सुयश ने आगे बढ़कर उस फटी हुई कॉलर को उठा लिया।

कॉलर के साथ कंधे पर लगे हुए 3 स्टार भी थे, जो यह बात साबित कर रहे थे कि वह रहस्यमय साया ऑफिसर रैंक का है। सुयश ने ध्यान से उस कपड़े को देखा। कॉलर के साथ शर्ट की बांई जेब भी थी। जो कि फट कर उस टुकड़े के साथ में आ गई थी।

उस नीम अंधेरे में भी जेब के ऊपर लगी नेम प्लेट साफ चमक रही थी। सुयश ने धड़कते दिल से उस बैच को उजाले में ला कर देखा।

उस पर जो नाम लिखा था, वो सुयश तो क्या, किसी के भी दिल की धड़कन रोकने के लिए पर्याप्त था______।

जारी रहेगा_________✍️
 
# 40 .

उस पर इंगिलश के साफ-साफ शब्दों में लिखा था-

“एफ. डी. रोजर“

“रोजर....................?“ सुयश ने होंठो ही होंठो में बुदबुदाया- “क्या रोजर अभी जिंदा है? क्या उस समय उसका हेलीकॉप्टर क्रैश नहीं हुआ था ? क्या उसने सभी को जान बूझकर गलत मैसेज दिया था ? क्या वह मरने का नाटक कर रहा था? वह इतने दिनों तक कहां था ? क्या शिप से लोगों की लाशें वही गायब कर रहा था ? क्या लॉरेन का ब्वॉयफ्रेंड वही था ?“

एका एक सुयश के दिमाग में जैसे हजारों सवाल कौंध गये। जिसने भी उस बैच को देखा, वह सकते की हालत में आ गया। अब सुयश के दिमाग में बार-बार लोथार के शब्द गूंजने लगे-

“वैसे तो मौत का कोई नाम नहीं होता लेकिन हम लोग उसे लॉरेन कह सकते हैं ......... मौत को भी भला कोई आज तक मार पाया है.. .....वो मुझे बुला रही है।“

“तो क्या लॉरेन भी जीवित है? या फिर सच में ही वो लॉरेन की आत्मा थी।“

सुयश अपने आप में बड़बड़ाये जा रहा था। उसकी बड़बड़ाहट तौफीक ने सुनी, तो वह भी आश्चर्य से भर उठा-

“आप ये क्या कह रहे हैं कैप्टन?... ..क्या लॉरेन वास्तव में जिंदा है?

सुयश ने अब झुंझला कर कहा-

“पता नहीं......मेरी तो अब बुद्धि ही काम नहीं कर रही कि मैं क्या समझूं और आप लोगों को क्या बताऊं?“

तभी ऐलेक्स जॉनी को लेकर आता दिखाई दिया। उनके साथ असलम भी था। उन्हें अभी यहां घटी घटना की कोई जानकारी नहीं थी।

“क्या हुआ कैप्टेन?“ असलम ने आगे बढ़ते हुए सुयश से कहा-

“अभी-अभी मुझे गोलियां चलने की आवाज सुनाई दीं। यहां सब ठीक तो है?“

सुयश ने असलम को अभी शांत रहने का इशारा किया और जॉनी से घूम कर पूछा-

“पहले आप बताएं मिस्टर जॉनी कि यहां क्या घटना घटी थी ?“

“पहले यह बताइए कैप्टेन, कि लोथार कहां है?“ जॉनी ने सुयश से उल्टा सवाल कर दिया।

“लोथार अब इस दुनिया में नहीं है।“ सुयश ने संजीदा स्वर में कहा- “हमने उसको बचाने की बहुत कोशिश की, पर असफल रहे। अब आप यहां घटी घटना के बारे में बताओ कि आपने यहां क्या देखा?“

“लोथार मर गया........!“ जॉनी एक पल के लिए सिहर उठा। असलम भी यह खबर सुनकर हैरान हो गया।

“मुझे पहले ही पता था कि वह बच नहीं पाएगा।.....वो उसे मार ही डालेगी।“ जॉनी ने डरे-डरे शब्दों में कहा।

“कौन?.....कौन उसे मार डालेगी ?“ अब असलम से रहा ना गया और वह पूछ ही बैठा ।

“वही.............जो मर कर भी सबको मार रही है- लॉरेन“ अब असलम का दिमाग सांय-सांय करने लगा।

“तुम पहेलियां बुझाकर अब सबको डरा ओ मत।“ सुयश ने ‘आप‘ से ‘तुम‘ पर आते हुए झुंझला कर कहा- “साफ-साफ शब्दों में बताओ कि तुमने यहां पर क्या देखा ?“

इस बार जॉनी ने साफ शब्दों में बोलना शुरु कर दिया- “मैं और लोथार यहां पर खड़े हो कर, शिप पर घट रही उन रहस्यमई घटनाओं के बारे में बात कर रहे थे कि तभी हमें अचानक एक खटके की आवाज सुनाई दी। यह आवाज उधर अंधेरे की तरफ से आई थी।

अभी हम सोच रहे थे कि हम क्या करें, तभी अंधेरे में हमें 2 साये दिखाई दिए। हम लोग यह समझ कर यहां छिप गए कि उन्होंने हमें नहीं देखा होगा। तभी उनमें से एक साया जो यकीनन किसी लड़की का था, अंधेरे से निकलकर डेक की रेलिंग के पास पहुंच गया और दूसरा साया वहीं अंधेरे में विलीन हो गया।

अब मैं और लोथार धीरे-धीरे दबे पाँव उस लड़की के पीछे पहुंच गये। हम थोड़ी देर तक खड़े उस साये के पीछे मुड़ने का इंतजार करते रहे, परंतु जब वह काफी देर तक पीछे ना मुड़ी, तो लोथार से ना रहा गया और वह पूछ बैठा-

“कौन हो तुम?“ लेकिन ना तो वो पीछे पलटी और ना ही उसने किसी तरह का जवाब दिया। तब लोथार अपनी आवाज तेज करते हुए पुनः जोर से बोला-

“मैं पूछता हूं कौन हो तुम? और इतनी रात गये अंधेरे में यहां क्या कर रही हो ?“

इस बार वह लड़की धीरे से पलटी और फिर हमें किसी जवाब की कोई जरूरत नहीं थी। क्यों कि हम उसे अच्छी तरह से पहचानते थे। वह लॉरेन थी। उसके चेहरे पर अब किसी तरह की गोली का कोई निशान नहीं था। मैं उसे देखकर इतना डर गया कि मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया। मैं वहां से भागने के लिए तुरंत मुड़ा, पर पीछे मुड़ते ही जैसे मेरे दिल ने धड़कना बंद कर दिया।

क्यों कि ठीक मेरे पीछे रोजर खड़ा था। वह खूनी नजरों से मुझे घूर रहा था। मुझे यह पता चल चुका था कि एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उसकी मौत हो चुकी है। अब खुद ही सोचिए कैप्टेन, जब 2-2 मुर्दे किसी के सामने खड़े हों, तो उसकी क्या हालत होगी ? एक क्षण के लिए तो मेरी कुछ समझ में ही नहीं आया कि मैं क्या करूं पर जैसे ही मुझे अपनी मौत का ख्याल आया, मेरे अंदर तुरंत पता नहीं कहां से इतना साहस आ गया कि मैने रोजर को बहुत तेजी से धक्का दिया और वहां से भाग निकला।

भागते समय जब मैंने पीछे मुड़ कर देखा, तो रोजर अपनी जगह से गायब था, लेकिन लॉरेन लोथार का हाथ पकड़कर पता नहीं क्या कर रही थी ? मैं तेजी से नीचे जाने वाले दरवाजे की ओर भागा। दरवाजा खोलकर जल्दी भागने के चक्कर में मेरा पैर फिसल गया और मैं आपके पास आ गिरा।“

इतना कहकर जॉनी चुप हो गया, मगर उसकी सांसे अब भी किसी धौंकनी के समान चल रही थी।

जॉनी के द्वारा सुनाई गई कहानी को सुनकर एक पल के लिए किसी के मुंह से कोई बोल नहीं फूटा। वहां खड़े सभी लोग उस पल को महसूस कर सिहर उठे। कई लोगों के चेहरे

दहशत के कारण सफेद हो गए।

थोड़ी देर खामोश रहने के बाद सुयश ने एक बार वहां खड़े सभी लोगों का चेहरा देखा और फिर धीरे से असलम को बोलने का इशारा किया। असलम तो जैसे इसी पल का इंतजार कर रहा था। वह इशारा मिलते ही तेजी से बोल उठा-

“क्या रोजर सर जिंदा हैं? अगर अभी तक वो जिंदा थे? तो हमसे मिले क्यों नहीं ?“ क्या.............. ...?“

असलम जैसे एक ही सांस में सारे सवाल पूछ लेना चाहता था, पर सुयश ने उसे हाथ के इशारे से रोका और फिर पहले सिलसिलेवार बाद में घटी घटना की जानकारी उसे दे दी।

“इसका मतलब क्या वो लॉरेन व रोजर सर की आत्माएं थीं ? असलम ने उलझे- उलझे स्वर में कहा।

“अब इस समय हम जिस हालात में हैं।“ सुयश ने असलम को समझाते हुए कहा- “उसमें हम किसी भी घटना पर आश्चर्य व्यक्त नहीं कर सकते। क्यों कि इस रहस्यमय क्षेत्र में अब जो भी घटना घट जाए, वह कम ही है। इसलिए बीती घटनाओं के बारे में सोचना छोड़ कर आगे आने वाले खतरों से निपटने के लिए कुछ सोचो।“

“क्या सोचें कैप्टन!“ ऐलेक्स का लहजा एका एक गर्म हो गया- “इन रहस्यमय घटनाओं से कैसे जीता जा सकता है? हम एक साधारण मानव हैं और यह सारी घटनाएं सुपर नेचुरल हैं। इन मुसीबतों से हम लड़ें भी तो कैसे? हम तो सिर्फ तमाशा बीन बनकर अपनी मौत का सिर्फ तमाशा देख सकते हैं। और इंतजार कर सकते हैं अपनी मौत का, कि वह अभी आएगी और बारी-बारी से हम सभी को ले जाएगी।“

“बस, इतने से ही घबरा गए मिस्टर ऐलेक्स।“ सुयश ने ऐलेक्स को जोश दिलाते हुए कहा- “हम इस समय दुनिया के सबसे रहस्यमई क्षेत्र में हैं। अगर इसे पार करना इतना ही आसान होता, तो अब तक ना जाने कब का इसका रहस्य खुल गया होता। अब जबकि हम इस क्षेत्र में फंस ही गए हैं, तो हमें खतरों का बहादुरी से सामना करना होगा, ना कि हथियार डालकर मौत का इंतजार।“

“आप ठीक कह रहे हैं कैप्टेन।“ जेनिथ ने सुयश को देखते हुए कहा- “ हमें खतरों का डटकर सामना करना चाहिए। लेकिन अभी कुछ ही देर पहले आपने देखा कि सिर्फ एक यात्री लोथार की जान खतरे में थी और हम लोग यहां सैकड़ों की संख्या में थे, फिर भी हम उसकी जिंदगी नहीं बचा पाए। फिर आप क्या सोचते हैं कि जब हम सबकी जान एक साथ खतरे में पड़ जाएगी तो क्या हमें कोई बचा पाएगा ?“

“देखिये मिस जेनिथ, यह जो हादसा हुआ है, इसमें अगर कोई लोथार की मदद नही कर सका तो उसका सबसे बड़ा कारण लोथार का समुद्र में होना था। वह हमारी पहुंच से बाहर था जिसकी वजह से हम उसका बचाव नहीं कर सके।“

सुयश ने जेनिथ को सफाई देते हुए कहा। सुयश नहीं चाहता था कि ऐसी स्थिति में सभी यात्री दहशत में दिखें, इसलिए वह हर संभव सभी का डर कम करना चाहता था।

“लोथार जब पहुंच के अंदर था, तब हमने उसका क्या कर लिया कैप्टेन?“ जॉनी के शब्दों में भी अब कड़वाहट स्पष्ट दिख रही थी- “मेरी तो आंखों के सामने, मैं लोथार को मौत के मुंह में छोड़कर भागा था। पर अगर रुक भी जाता तो क्या कर लेता ? यह भी हो सकता था कि इस समय आप मेरी मौत पर भी संवेदना प्रकट कर रहे होते। वैसे भी हम आखिर कर भी क्या सकते हैं? कोई इंसान हो तो उससे कुछ टकराने की सोचा भी जाए, पर इन आत्माओं का तो कुछ भी नहीं किया जा सकता।“

“आप भी मिस्टर जॉनी, इस युग में भी क्या आप आत्माओं पर विश्वास करते हैं? सुयश ने जॉनी से पूछा।

“पहले तो मैं भी नहीं करता था, पर आज की घटना को देखते हुए, अब मैं आत्माओं पर विश्वास करने लगा हूं।“

जॉनी ने जवाब दिया- “क्यों कि रोजर का हेलीकॉप्टर जब क्रैश हुआ तो किसी ने नहीं देखा। इसलिए हम ये बात मान सकते हैं कि शायद वह जिंदा बच गया हो और जिस रोजर को मैंने देखा, वो आत्मा ना होकर स्वयं रोजर हो। पर...... पर लॉरेन की लाश तो सभी ने देखी थी फिर लॉरेन मुझे कैसे दिखाई दी। वह निश्चित तौर पर आत्माएं ही थीं।“

“कैप्टन बात आत्माओं की नहीं है।“ जेनिथ ने जॉनी की ओर एक नजर मारते हुए सुयश से कहा- “बात आगे आने वाले खतरे की है, क्यों कि अब खतरा किसी भी रूप में आ सकता है, और रही बात आत्माओं की.......तो उस पर तो मुझे भी विश्वास नहीं है। मिस्टर जॉनी बेवजह सभी को फालतू की कहानी सुना कर डराने की कोशिश कर रहे हैं।“

“आप कहना क्या चाहती हैं मिस जेनिथ।“ जॉनी ने दाँत भींचकर कहा- “क्या मैं सबको आत्माओं की झूठी कहानी सुना कर डरा रहा था ? क्या मैंने रोजर और लॉरेन को नहीं देखा ? क्या मैं झूठ-मूठ में ही सीढ़ियों से गिरकर बेहोश होने का नाटक कर रहा था ?“

“नहीं -नहीं मिस्टर जॉनी !“ सुयश ने तुरंत बीच-बचाव करते हुए कहा- “जेनिथ के कहने का यह मतलब नहीं था।“

“मेरे कहने का मतलब बिल्कुल वही था मिस्टर जॉनी, जो आप समझ रहे हैं।“

अब जेनिथ ने पूरी तरह अपनी बात पर अड़ते हुए कहा- “और वैसे भी मुझे नशेड़ियों की बात पर बिल्कुल विश्वास नहीं। जिसे उजाले में मेजर और वेटर में अंतर नजर नहीं आता ,

उसने पता नहीं अंधेरे में किसे देखकर रोजर व लॉरेन समझ लिया हो। और कैप्टेन, आपने भी रोजर को देखा नहीं था, बल्कि उसकी ड्रेस और नेम प्लेट से अंदाजा लगाया कि वह रोजर है।“

जेनिथ की बात सुनकर जॉनी का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। अगर सुयश वहां ना खड़ा होता तो वह जेनिथ की इस बात का अभी करारा जवाब देता।

“मैं मिस्टर जॉनी की बात को बिल्कुल सिरे से नहीं झुठला सकता।“ सुयश ने एक गहरी सांस छोड़ते हुए कहा- “इसने रोजर व लॉरेन को तो देखा ही है। अब वह भले ही आत्माएं हो या किसी के द्वारा फैलाया हुआ कोई नाटक? वैसे मिस्टर जॉनी , आप आत्माओं के बारे में क्या जानते हैं?“

जारी रहेगा________✍️
 
# 41 .

“क्या मतलब? मैं समझा नहीं।“ जॉनी के चेहरे पर उलझन के भाव आ गये।

“मतलब बिल्कुल साफ है।“ सुयश ने अपनी बात को दोबारा रिपीट करते हुए कहा- “आप आत्माओं के बारे में क्या जानते हैं? यही की आत्माएं कैसी होती हैं? वह क्या कर सकती हैं? वगैरह-वगैरह।“

“आत्माएं........... जितना मैं जानता हूं और मैंने किताबों में पढ़ा है कि आत्माएं शरीर के अंदर होती हैं। वह एक सूक्ष्म ऊर्जा का रुप मात्र होती हैं। वह अपनी ऊर्जा के द्वारा किसी का भी रूप धारण कर सकती हैं। उसमें असीमित ताकत होती है। उन्हें दर्द का एहसास नहीं होता। वह किसी भी एक स्थान से दूसरे स्थान पर हवा में उड़ कर जा सकती हैं। और.....................।“

“और उनका कोई शरीर नहीं होता।“ सुयश ने जॉनी की बात को बीच से ही पकड़ कर अपने शब्दों में पूरा किया- “क्यों मैंने ठीक कहा ना ?“

“जी !“ जॉनी ने हां में सिर हिलाया।

“अगर आपको मेरी बात से इत्तेफाक है, तो वह लॉरेन और रोजर की आत्माएं तो हो ही नहीं सकती। क्यों कि आपके कहे अनुसार मिस्टर जॉनी, लॉरेन....लोथार का हाथ पकड़े हुए थी और फिर मैंने भी रोजर से हाथापाई की थी। इसका साफ मतलब है कि वह स-शरीर थे।“ सुयश ने लॉजिक देते हुए कहा।

“तो फिर आपका क्या कहना है कैप्टेन।“ ब्रैंडन ने सुयश की ओर देखते हुए पूछा- “कि वह लॉरेन और रोजर ही थे। वह अभी मरे नहीं हैं और जिंदा हैं।“

“नहीं.....मेरा यह कहने का भी मतलब नहीं है।“ सुयश ने फिर से तर्क दिया- “मैं तो सिर्फ ये कहना चाहता हूं कि वह लॉरेन और रोजर का मेकअप किये हुए कोई अपराधी भी हो सकता है, जो लोगों के दिलों में आत्माओं के नाम पर दहशत फैलाना चाहता हो।“

सुयश ने अपनी बातें कह तो दीं लेकिन सभी के दिमाग अब शक का ऐसा कीड़ा बैठ गया था कि शायद अब उसे निकालना संभव ना था।

कुछ देर के लिए वहां पर सन्नाटा छा गया।

5 जनवरी 2002, शनिवार 21:10;

सभी के दिमाग में उथल-पुथल मच रही थी लेकिन उन्हें पता था कि उनके सवालों का सही जवाब अब किसी के पास नहीं है। इसलिए वह सभी चुप थे।

अभी ये सारे लोग डेक से जाने की बात सोच ही रहे थे कि तभी सबको असलम की आवाज ने हैरान कर दिया-

“कैप्टेन वो समुद्र में क्या है?“ सभी असलम के एका एक इस तरह से बोलने से आश्चर्य से उस दिशा में देखने लगे, जिधर असलम इशारा कर रहा था। समुद्र में बहुत दूर कहीं रोशनी से देख रही थी।

“कैप्टेन, ये क्या हो सकता है?“ ब्रैंडन ने रोशनी की ओर देखते हुए कहा- “क्या ये हमारी तरह भटका हुआ कोई शिप है? या फिर कोई और अंजानी मुसीबत जो हमारी तरफ बढ़ रही है?“

अब डेक पर खड़े सभी यात्रियों का ध्यान उस रोशनी की तरफ गया। जहां एक तरफ सभी के दिल अंजानी आशंका से धड़क रहे थे, वहीं उनके मन में रोशनी के प्रति एक उत्सुकता भी थी।

“अभी वह इतनी दूर है कि कुछ कहा नहीं जा सकता।“ सुयश ने ध्यान से उस तरफ देखते हुए कहा- “असलम, शिप से तुरंत सिग्नल फ्लेयर आसमान की ओर फिंकवाओ। शायद वह कोई छोटा शिप हो। क्यों कि वह रोशनी चलती हुई सी लग रही है।“

असलम ने तुरंत वॉकी-टॉकी सेट पर ऑर्डर दनदना दिया। मुश्किल से अभी 5 मिनट भी ना बीते होंगे कि आसमान में सिग्नल फ्लेयर फेंके जाने लगे। वह फ्लेयर तेजी से आसमान में जाकर फट रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे बीच समुद्र में ‘दीपावली ‘ या ‘बैस्ताइल डे‘ मनाया जा रहा हो।

अब वह रोशनी थोड़ा स्पष्ट दिखना शुरू हो गई थी। बड़ी अजीब सी सुनहरी रोशनी थी, जो हर पल पास आती जा रही थी।

“यह तो कोई छोटी मोटर बोट जैसी चीज प्रतीत हो रही है।“ ऐलेक्स बोल उठा।

“हाँ ! और अब लगता है कि उसने हमें देख लिया है, क्यों कि अब वो हमारी ही तरफ आ रहा है।“ जेनिथ ने कहा।

तब तक वह अजीब सी रोशनी थोड़ा और पास आ गई।

“कैप्टेन, ये क्या हो सकता है?“ असलम आंखें फाड़-फाड़ कर उस रोशनी को देख रहा था- “यह तो मोटर बोट जैसी नहीं लग रही है। यह तो ऐसा लगता है जैसे कोई चीज पानी पर दौड़ रही हो।“

अब धीरे-धीरे सभी को यह विश्वास होने लगा था कि यह कोई नई मुसीबत है। अब वह रोशनी शिप से कुछ ही दूरी पर थी। सभी उस रोशनी को भौचक्के से देख रहे थे, क्यों कि वह रोशनी का प्रकाश पुंज अब एक मानव आकृति ले रहा था।

“यह क्या......? यह तो पानी पर दौड़ता हुआ कोई सुनहरा मानव लग रहा है।“ तौफीक के शब्दों में इस समय पूरी दुनिया जहान का आश्चर्य दिखने लगा।

“सुनहरा मानव!“ सुयश के दिमाग में यह शब्द लगातार किसी घंटे के समान चोट कर रहा था। उसे रह-रहकर शैफाली के सपने की याद आ रही थी-

“मैंने देखा एक सुनहरा मानव, जो हमें किसी दिशा में जाने के लिए इशारा कर रहा था “

“तो क्या शैफाली ने जो सपने देखे थे, वह सारे सच होंगे...... क्यों कि उसने अपने सपने में भविष्य में घटने वाले सारे दृश्य देखे थे?“ सुयश होंठो ही होंठो में बड़बड़ाया।

तब तक वह सुनहरा मानव शिप के बिल्कुल पास आ चुका था। उसके शरीर से इतनी तेज सुनहरी रोशनी निकल रही थी कि उसका चेहरा तक नहीं दिख पा रहा था।

वह पानी पर खड़ा होकर एकटक शिप के यात्रियों को घूरने लगा। असलम ने धीरे से एक गार्ड से रिवाल्वर ले ली। ब्रैंडन भी किसी खतरे से निपटने के लिए तैयार हो गया।

लेकिन सुयश ने हाथ के इशारे से सबको रोका। वह सुनहरे मानव के अगले कदम का इंतजार करने लगा। एक क्षण के लिए मानो समय रुक सा गया। डेक पर खड़े सभी लोग सम्मोहित अवस्था में विश्व के उस आठवें आश्चर्य को देख रहे थे।

किसी के मुंह से कोई शब्द नहीं निकल रहा था। सुनहरे मानव की निगाह अब लगातार सुयश पर थीं। उसके चेहरे के भाव तो नहीं दिख रहे थे, लेकिन यकीनन उसके चेहरे पर खुशी भरी मुस्कुराहट थी।

अच्छा ही हुआ कि सुनहरे मानव के शरीर से इतनी तेज रोशनी निकल रही थी, वरना उसकी शक्ल देखकर ना जाने कितने यात्री बेहोश हो कर गिर जाते और सबसे ज्यादा अचंभा तो सुयश को होता।

अचानक जैसे सुनहरे मानव को कुछ याद आया। उसने पहले सुयश की ओर देखा और फिर अपने सीधे हाथ की तर्जनी उंगली से एक दिशा में इशारा किया। और इससे पहले की कोई कुछ और समझ पाता, रोशनी का एक तेज झमाका हुआ और एक पल के लिए सबकी आंखें बंद हो गईं।

जब सबकी आंखें खुलीं तो दूर-दूर तक वही अंधकार नजर आया। वह रहस्यमय सुनहरा मानव अपनी जगह से गायब था।

“कहां गया..? कहां गया वह सुनहरा मानव?“ जॉनी ने डरते-डरते कहा।

“जहां से आया था, वहीं चला गया।“ सुयश ने जॉनी के डरे हुए चेहरे को देखते हुए जवाब दिया।

“कैप्टन यह क्या चीज थी ?“ तौफीक ने आश्चर्य भरे स्वर में सुयश से पूछा ।

“पता नहीं, देखने से तो कोई ऊर्जा मानव लग रहा था। पर यह समझ में नहीं आया कि वह उस दिशा में इशारा क्यों कर रहा था ?“ सुयश ने उस दिशा की ओर उंगली उठायी, जिधर अभी वह सुनहरा मानव इशारा कर रहा था।

“यह भी तो हो सकता है कि वह हमें भटका हुआ जानकर सही दिशा दिखा रहा हो। या फिर हमें किसी रहस्य की तह तक ले जाना चाहता हो।“ ब्रैंडन ने कहा।

“अब हमें क्या पता कि वह हमें सही दिशा दिखा रहा था या फिर से हमें भटका कर कहीं और ले जाना चाहता था ?“ ऐलेक्स के विचार सुन, सभी दहशत से भर उठे।

“मुझे तो वह कोई शैतानी आत्मा जैसा लग रहा था।“ जॉनी के विचार सबसे अलग थे- “और वह हम सब को मौत के मुंह में ले जाना चाहता था।“

“आप तो कम से कम अपने विचार अपने ही पास रखें।“ जेनिथ ने जॉनी की बात सुनकर फिर बुरा सा मुंह बनाया- “आत्मा के सिवा अब दिखता ही क्या है आपको ?“

जॉनी ने सुनकर एक गहरी सांस ली- “मत मानो मेरी बात, पर देखना एक दिन सब मरोगे।“

“आप बताइए कैप्टेन, कि हम क्या करें?“ ब्रैंडन ने सुयश को सोचते देख पूछ लिया- “क्या हमें शिप को सुनहरे मानव के कहने वाली दिशा में मुड़वाना चाहिए? या फिर हम जिस दिशा में चल रहे हैं, उसी दिशा में चलते रहना चाहिए।“

“मेरे ख्याल से वह सुनहरा मानव हमें सही दिशा में जाने के लिए कह रहा था, क्यों कि उसे अगर हमें किसी मुसीबत में ही फंसाना होता तो वह यहां भी ऐसा कर सकता था। और वैसे भी हम पूरी तरह रास्ता भटक चुके हैं। बार-बार उस रहस्यमय द्वीप का हमारे रास्ते में पड़ना, यह बात साबित करता है। तो फिर क्यों ना एक बार उस सुनहरे मानव के कहने के हिसाब से भी चल कर देख लिया जाए, शायद हम सही रास्ते पर आ ही जाएं।“

सुयश का यह तर्क सभी को सही लगा। और अब शिप को पुनः स्टार्ट कर उस दिशा में मोड़ लिया गया, जिधर उस सुनहरे मानव ने इशारा किया था।

धीरे-धीरे डेक पर खड़े सभी लोग अपने-अपने दिल में घूम रहे सैकड़ों प्रश्नों में से कुछ और प्रश्नों का इजाफा कर के अपने-अपने कमरों की ओर चल दिए। जब डेक पर सिर्फ स्टाफ के आदमी बचे तो सुयश ने ब्रैंडन की ओर घूमकर कहा-

“हां तो ब्रैंडन, मुझे लग रहा है कि आप बड़ी देर से मुझसे शायद कोई प्रश्न पूछना चाहते हैं, पर पूछ नहीं पा रहे हो। क्या बात है? आप क्या पूछना चाहते हो ?“ अब बताओ।“

ब्रैंडन ने तारीफ भरी नजरों से सुयश को देखा। कितनी आसानी से सुयश ने उसके मन की बात जान ली थी।

“आप बिल्कुल ठीक समझे कैप्टन, मैं वास्तव में बहुत देर से आपसे एक प्रश्न पूछना चाहता था। पर यात्रियों की वजह से पूछ नहीं पा रहा था। आप यह बताइए कि शैफाली के सपने के बारे में आपका क्या ख्याल है? क्यों कि अब हम अगर उसके सपने को एक साधारण सपना समझें, तो यह हमारी भूल होगी। क्यों कि उसके द्वारा बताई गई एक-एक बात अब सच हो रही है।“ ब्रैंडन ने सुयश को देखते हुए कहा।

ब्रैंडन ने एक क्षण रुककर वहां खड़े सभी के चेहरे को देखा और फिर पुनः बोलना शुरू कर दिया-

“तो क्या उसके द्वारा कही गई अब बाकी सारी बातें भी सच होंगी ?“

“कुछ कह नहीं सकते पर फिलहाल जो घटनाएं घट रही हैं उसको देखकर तो यही लगता है कि अब उसके द्वारा कही गई बाकी सारी बातें भी सच होंगी।“ सुयश ने एक गहरी साँस छोड़ते हुए कहा।

“वैसे कैप्टेन, शैफाली की बातों से एक पॉजिटिव प्वाइंट भी निकल कर सामने आता है।“ असलम ने कहा।

“वो क्या ?“ सुयश ने ना समझने वाले भाव से पूछा।

जारी रहेगा_________✍️
 
# 42 .

“वो यह कि हमें इतना परेशान होने की जरूरत नहीं है कि हमें किनारा मिलेगा कि नहीं ? क्यों कि शैफाली के सपनों के हिसाब से हम समुद्र में तो नहीं मरने वाले। हमें किनारा जरुर मिलेगा.........और वहां पर जंगली आदिवासियों के रूप में जीवन भी होगा। अब यह बात अलग है कि..........?“ कहते-कहते असलम ने अपनी बात अधूरी छोड़ दी।

“कि......।“ ब्रैंडन ने ‘कि ‘ शब्द पर जोर देकर असलम से बात पूरी करवानी चाही।

“कि वह रहस्यमय द्वीप कहीं फिर से हमारी राह में ना आ जाए और हमें उसी पर जाना पड़े।“ असलम ने अपनी बात को पूरा किया।

असलम की बात का मतलब समझ कर वहां खड़े सभी के शरीर में एक

झुरझुरी सी उठी।

“कहीं ऐसा तो नहीं कि कोई विचित्र शक्ति हमें शैफाली के माध्यम से कोई मैसेज देना चाह रही है।“ ब्रैंडन ने अपने शब्दों पर रहस्य की चाशनी लपेटते हुए कहा।

“फिलहाल तो हम इसे, मात्र एक भविष्य में घटने वाली घटना को देख सकने वाले सपने ही समझें तो बेहतर रहेगा और वैसे भी पूरे विश्व में बहुत से ऐसे लोग रहे हैं जो भविष्य में घटने वाली घटना को पहले से ही सपनों के माध्यम से देख लेते थे। अब्राहिम लिंकन ने भी अपनी मौत का दृश्य पहले से ही सपने में देख लिया था। वैज्ञानिक इस विषय पर लगातार शोध कर रहे हैं।“

“वैज्ञानिक इसे छठी इंद्रिय का मामला बताते हैं। पर वह छठी इंद्रिय क्या है? ये अभी तक वह पूरी तरह से पता नहीं लगा पाएं हैं और जहां तक मेरा ख्याल है कि जिस दिन सपनों का रहस्य पता चल जाएगा, उस दिन वैज्ञानिक ‘टाइम मशीन‘ की कल्पना को भी साकार कर सकेंगे। क्यों कि मेरा यह मानना है कि जिस व्यक्ति की सेंस पॉवर बहुत स्ट्रांग हो जाती है, वह अपने मस्तिष्क से निकलती ऊर्जा के साथ, अपना सूक्ष्म शरीर भी बाहर निकाल सकता है। और सूक्ष्म शरीर पर ना तो समय का कोई प्रभाव पड़ता है और ना ही दूरी का। इसी के कारण जब हम कल्पनाओं में खो जाते हैं, तो सेकेंड भर के समय में भी हजारों -लाखों किलोमीटर का फासला तय कर लेते हैं। ठीक उसी तरह जब सूक्ष्म शरीर में बहुत ज्यादा ऊर्जा प्रवाहित हो जाती है, तो वह समय को आगे या पीछे कर, हमें उस समय के घटना क्रम में लिए जाता है। इसे हम ‘टाइम-स्लिप‘ भी कहते हैं। पूरे विश्व में सैकड़ों ऐसे उदाहरण हैं जो टाइम-स्लिप के द्वारा स्लिप होकर बीते काल में या फिर भविष्य में चले गए। लौटने पर उन्होंने वहां पर देखी घटना व वातावरण का जिक्र भी किया। जिसे कि वैज्ञानिक पूर्ण रुप से समझ नहीं पाए। मुझे तो शैफाली में भी कुछ वैसी ही शक्तियां दिखाई देती हैं।“ सुयश ने अपने तर्कों से पूरा विज्ञान ही उड़ेल दिया।

“मुझे लगता है सर, कि हमें एक बार फिर शैफाली से मिलकर कुछ और जानने की कोशिश करनी चाहिए। हो सकता है कि कोई नया क्लू मिल जाए?“ ब्रैंडन ने कहा।

“हूं....!“ सुयश ने हुंकारी भरते हुए ब्रैंडन की बात पर सहमति जताई-

“कहना तो तुम्हारा ठीक है। लेकिन फिलहाल अब हमें अपने कमरों की ओर चलना चाहिए। क्यों कि बहस में पूरी रात बीत चुकी है और कुछ ही देर में एक नई सुबह होने वाली है। शैफाली से हम कल मिलेंगे।“

इतना कहकर सुयश ने एक बार फिर अंधकारमय समुद्र को देखा और फिर अपने रूम की ओर चल दिया।

6 जनवरी 2002, रविवार, 08:30; “सुप्रीम”

एक नई सुबह हो चुकी थी। नीले आसमान पर कहीं-कहीं सफेद बादलों की टुकड़ी दिखाई दे रही थी।

वह सुबह भी बाकी सुबह की तरह सामान्य थी। धीरे-धीरे यात्रियों का जमावड़ा डेक पर लगने लगा था। वक्त सूर्य के समान सात घोड़ों के रथ पर सवार हो तेजी से भाग रहा था।

कुछ लोगों पर जैसे इन खतरों से कोई प्रभाव नहीं पड़ा था, क्यों कि वह इतने खतरनाक माहौल में भी हंसी मजाक करते नजर आ रहे थे। शायद वह अपनी जिंदगी के अंतिम पल हंस के बिताना चाहते थे। इसी भीड़ में जैक और जॉनी बैठे थे।

“क्या सोच रहे हो जैक?“ जॉनी ने नशे भरी आवाज में लड़खड़ाते हुए कहा।

“मैं सोच रहा हूं कि कल तुमने वास्तव में लॉरेन व रोजर को देखा था या.......।“

कहते हुए जैक ने अपनी बात को अधूरा छोड़ दिया।

“या...........।“ जॉनी ने ‘या ‘ शब्द पर जोर देते हुए ना समझने वाले भाव में कहा।

“या फिर तुम सबसे झूठ बोल रहे थे।“ ये शब्द कहते-कहते जैक के चेहरे पर मुस्कुराहट के भाव आ गये।

“मैं.......मैं.....भला किसी से झूठ क्यों बोलूंगा ?“ जॉनी के शब्दों में गुस्सा उभरा।

“या फिर नशे की वजह से तुम्हें उन्हें पहचानने में कोई गलती हुई हो।“ जैक ने दोबारा जॉनी पर तंज कसा।

“अबे तू क्या मुझे नशेड़ी समझता है, मैंने वास्तव में लॉरेन व रोजर को देखा था।“ कहते कहते जॉनी अपनी कुर्सी से उठ खड़ा हुआ।

“बैठ जा भाई।“ जैक ने जॉनी को जबरदस्ती बैठाते हुए कहा- “तू हर बार पीकर कोई ना कोई बवाल खड़ा कर देता है। देखो सब लोग घूर-घूर कर इधर ही देख रहे हैं।

“अच्छा.....ये बता कि क्या कोई लड़की भी मुझको देख रही है?“ जॉनी ने नशे में बहकते हुए पूछा।

“हां देख तो रही है।“ जैक ने एक दिशा की ओर देखते हुए कहा।

“वह दिखने में कैसी है?“ जॉनी ने बिना उस तरफ देखे हुए ही पूछा।

“बहुत सुंदर! और उसकी स्माइल तो बहुत ही अच्छी है। उसकी आंखें नीली.......बाल सुनहरे और होंठ गुलाबी हैं।“ जैक ने लड़की की खूबसूरती में तारीफों के पुल बांध दिए-

“और वो ले......वह इसी तरह आ रही है।“

“क्याऽऽऽऽ इसी तरफ आ रही है।“ कहते हुए जॉनी ने एक तगड़ा पैग बनाया और एक ही साँस में पी गया।

“वो पास आ रही है।“ जैक ने फुसफुसाते हुए कहा- “अब वो बिल्कुल तुम्हारे पीछे है।“

जैक ने आखिरी के शब्द बोलते हुए जॉनी को धीरे से ‘थम्ब्स-अप‘ का इशारा किया और ‘बेस्ट ऑफ लक‘ बोल उठ कर खड़ा हो गया।

जॉनी इतना पीने के बाद अब पूरी तरह जोश में था। उसने धीरे से गले को खंखारा, अपने गले में लगी ‘बो ‘ को सही किया व एक झटके से पीछे मुड़ते हुए बोला -“एक्सक्यूज मी.......!“

लेकिन बाकी की बात उसके गले में रह गई। क्यों कि उसके पीछे लगभग xx-साल की एक बच्ची खड़ी थी ।

“आपने मुझसे कुछ कहा अंकल?“ छोटी लड़की ने भोलेपन से अपनी नीली-नीली आंखों से जॉनी को देखते हुए पूछा ।

जॉनी ने घबरा कर अपना सिर इस तरह दाएं-बाएं हिलाया, जैसे वह उसका सिर ना होकर किसी घड़ी का पेंडुलम हो। छोटी लड़की यह सुनकर आगे चली गयी।

अब जॉनी तुरंत जैक की ओर वापस घूमा।

“क्यों बेऽऽऽऽ....... तूने मुझसे झूठ क्यों बोला ?“ जॉनी के शब्दों में गुस्सा भरा था।

“मैंने......... मैंने कहां झूठ बोला। तुम मुझसे लड़की के बारे में पूछ रहे थे। उसकी उम्र के बारे में नहीं।“ जैक ने पूरा मजा लेते हुए जवाब दिया।

“बड़ी मुश्किल से थोड़ी चढ़ी थी..... ..सब उतार दी।“ जॉनी बड़बड़ाते हुए पुनः पैग बनाने लगा- “एक तो वैसे ही जब से उस साले रोजर को देखा है........साऽऽऽऽली चढ़ती ही नहीं है और तू भी मुझसे ही मजाक में लगा है।“

“अच्छा एक बात बता।“ जॉनी ने पुनः पैग गले के नीचे उतारते हुए कहा-

“यार हम लोगों के मरने के बाद उस दौलत का क्या होगा जो हमने एक साथ मिलकर लूटी.....?“

लेकिन इससे पहले कि जॉनी के मुंह से कुछ और गलत निकलता, जैक ने तुरंत मुंह पर उंगली रखते हुए, जॉनी को चुप रहने का इशारा किया- “श्ऽऽऽऽऽऽऽ श्ऽऽऽऽ...... अबे मरवायेगा क्या ? सबके सामने क्यों चिल्ला रहा है?“

“अच्छा छोड़ दौलत को........यह बता कि उससे.......बात हुई या नहीं ? कहीं ऐसा ना हो जाए.......कि वो हमारे बारे में......सबको बता दे?“ जॉनी ने चिंता व्यक्त की।

“टेंशन मत ले..।“ जैक ने इधर-उधर देखा और फिर अपने शब्दों में रहस्य

को भरते हुए कहा- “अगर वह हमारे बारे में किसी को बताएगा, तो वह खुद ही फंस जाएगा।“

“अरे हां......यह तो मैंने सोचा ही नहीं था। अब आज से उसके बारे में चिंता करना बंद।“

कहते हुए जॉनी धीरे से उठा और उस दिशा में चल दिया जिधर उसने अभी-अभी क्रिस्टी को जाते हुए देखा था।

जारी रहेगा_________✍️
 
Tiger 786 bhai maine bhi ye story aap sabhi ke liye likhi hai, agar aapsab nahi padhoge to kya hi faayda?
 
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