Incest RAKSHASH - Page 5 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest RAKSHASH

अपडेट-23



भवर सिंह और राजगुरु दोनों महल के एक तहखाने में थे जहा बहुत सी किताबे और बहुत सा इतहास लिखा रखा था, भवर सिंह ने सुबह होने का इंतजार भी नहीं किया था, वो खुद राजगुरु के साथ लग गया था,

राजगुरु- महाराज आप आराम कीजिये मैं खोजता हु उसके बारे में अधिक जानकारी,

भवर सिंह- नहीं राजगुरु अब मुझसे सबर नहीं हो रहा, मैं खुद उसके बारे में जानना चाहता हु, हमारे दादा जी को इतहास में बहुत रूचि थी, वो हमेशा बोलते थे की हमारा इतिहास हमारा अतीत ह और अतीत से hi भविष्य की चाबी मिलती ह, इसलिए वो हमेशा अलग अलग राज्यों का इतिहास भी लिखवाया करते थे, उन्होंने उस समय का इतहास भी लिखवाया था जब युगो का परिवर्तन हो रहा था,

राजगुरु- मैं जनता हु महाराज मेरे पिता जी hi उनके सहायक रहे थे, उसी इतहास की कुछ किताबे मेरे पास थी जहा से मुझे ये जानकारी मिली थी, हो न हो उसके बारे में और भी अधिक लिखा गया होगा,

भवर सिंह- लेकिन मेरे दादा जी ऐसे नहीं थे जो किसी से दर कर उसका इतहास hi न लिखे,

राजगुरु- इसीलिए बोल रहा हु वो ताकत सब कुछ बर्बाद कर सकती ह क्योकि जिससे आपके दादा जी घबरा गए तो सोचिये वो कैसी ताकत होगी,

भवर सिंह- वो चाहे जो भी हो लेकिन मुझे वो चाहिए, किसी भी कीमत पैर,

राजगुरु और भवर सिंह राजा भैरव के बारे में खोज रहे थे, वही देव अपने शरीर पैर बस एक कपडा पहन क्र अपने कमरे से निकल क्र बहार चल दिया अमरावती के कमरे की तरफ, वो कमरे के बहार पंहुचा तो वह बस एक दासी कड़ी थी, कोई पहरेदार नहीं था,

देव समझ गया ये अमरावती ने जानबूझ क्र किया ह,

देव के वह पहुंचते hi दासी ने उसके सामने सर झुकाया और जाने का रास्ता दे दिया, देव कमरे के अंदर चला गया, कमरे में से बहुत hi भेतरीन खुशबु आ रही थी, पूरा कमरा महक रहा था, चारो तरफ फूल hi फूल थे, देव आज पहेली बार अमरावती के कमरे में आया था, उसे नहीं पता था की ये सिर्फ आज के लिए ह या हमेशा hi ऐसा रहता ह, चारो तरफ दिए जल रहे थे, पूरा कमरा रौशनी में जगमगा रहा था, देव ने चारो तरफ देखा लेकिन अमरावती नजर नहीं आ रही थी,

देव चलता हुआ बिस्टेर के पास पहुंच गया, वो आवाज लगाने hi वाला था की उसे हलकी आहात की आवाज हुई, देव ने पलटना चाहा टी अमरावती की आवाज आई- रुको पलटना नहीं, देव रुक गया,

अमरावती- मैं सिर्फ हमारी दोस्ती के लिए ऐसा कर रही हु, क्योकि दोस्त hi सबसे खास होते हैं, तुम ये बात किसी को बताओगे तो नहीं,

देव- दोस्तों के राज नहीं खोले जाते, क्या मैं पालतू,

अमरावती ने बस हम्म्म्म कहा, देव ने धीरे से पलट क्र देखा तो सामने अमरावती कड़ी थी एक कला झीना सा कपडा ओढ़े हुए, जिसमे से उसका खूबसूरत शरीर दिख रहा था, उसकी बड़ी बड़ी चूचिया उस कपडे में से बहार आने को तैयार थी, अमरावती की भरी जंघे पैर कपडा चिपका हुआ था, देव एक तक उसे देखे जा रहा था देव का लुंड पहले hi खड़ा था लेकिन अब तो वो उफान पैर था,






अमरावती- ऐसे क्यों देख रहे हो,

देव- आप बहुत खूबसूरत हैं,

अमरावती- मुझे शर्म आ रही ह,

देव- दोस्तों में कैसी शर्म

अमरावती ने देव को देखा और बड़ी ऐडा से घूम गई, जिससे अमरावती की भरी और उभरी हुई गांड देव के सामने आ गई थी, देव चलता हुआ अमरावती के पास पंहुचा और उसके कंधे पैर हाथ रख दिया, अमरावती ने तुरंत अपना शरीर देव से सत्ता दिया,

देव- बस इतना hi दिखाओगी,

अमरावती- इससे ज्यादा मुझमे हिम्मत नहीं ह,

देव ने नीरस होकर सर झुका लिया,

अमरावती- मैंने कहा मुझमे हिम्मत नहीं ह, तुम चाहे तो देख सकते हो,

देव ने थोड़ा सा चौंकते हुए अमरावती को देखा फिर उसका मतलब समझ क्र मुस्कुरा दिया, और उसने अमरावती का कपडा पकड़ा और हलके से खींचना शुरू क्र दिया, अमरावती ने कपडा ढीला छोड़ दिया था जो उसके शरीर से फिसलता हुआ निचे जा गिरा, और कपडे के गिरते hi अमरावती का खूबसूरत शरीर देव के सामने था, अमरावती की भरी चूचिया एक दम गोल आकर लिए थी, देव अमरावती के चारो तरफ घूमने लगा, अमरावती शर्मा क्र सर निचे किये कड़ी थी,






देव अमरावती के सामने आया और उसके चेरे को उप्पेर उठाया,

देव- इतना खूबसूरत शरीर ह आपका पूरी दुनिया आपके सामने झुक सकती ह,

अमरावती- तुम्हे पसंद आया

देव- बहुत

इतना बोलते hi अमरावती देव से लिपट गई, और उसकी भरी चूचिया देव की छाती में डाब गई, अमरावती ऐसा व्यव्हार कर रही थी जैसे सच में वो देव के प्रेम में पागल हो गई हो, एक नौजवान लड़की जब पहेली बार अपने प्रेमी के सामने ये सब करती ह तो वो जितनी उत्साहित होती ह वैसा hi अमरावती कर रही थी, देव भी कोई कसार नहीं छोड़ रहा था, दोनों के मन में कुछ और hi था लेकिन दिखावा और नाटक बहुत hi भेतरीन कर रहे थे,

देव- आपने मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल दे दिया मुझे आज,

अमरावती- क्या मैं अब कपडे पहन लू

देव- मेरा मन नहीं भरा

अमरावती- तो तुमने क्यों पहने हुए हैं,

देव ने तुरंत अमरावती को अलग किया और जो कपडा उसने पहना हुआ था तुरंत उतर क्र अलग क्र दिया, देव का खड़ा लुंड एक दम मीनार की तरह सामने आ गया, जिसे देख अमरावती की सांसे फूलने लगी,






देव- अब ठीक ह,

अमरावती- अब ये मेरे लिए मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल ह,

देव- कुछ hi समय में हमारी दोस्ती कितनी खास हो गई ह, ये हमने पहले क्यों नहीं सोचा,

अमरावती- पहले हम गलत सोच के साथ चल रहे थे न,

देव- अब हमारी दोस्ती मिशाल बनेगी,

अमरावती देव के करीब आई और उसके गले लग गई, उसके मुँह से एक आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह निकल गई, नंगे शरीर आपस में रगड़े और देव का खड़ा नानग लुंड अमरावती की जांघो के बिच में रगड़ गया,

देव- ये ज्यादा तो न हो जाये,

अमरावती- होने दो ज्यादा, अब हमारे बिच कुछ पर्दा नहीं ह, अब मैं इस पल को जी भर क्र जीना चाहती हु,

देव ने भी अपनी बहे अमरावती की कमर में दाल दी और उसे कास क्र खुद से चिपका लिया, अमरावती की बड़ी बड़ी चूचिया देव की छाती में डाब गई जिससे उसके उभर और उप्पेर को उठ गए, और देव का लुंड अमरावती की जांघो में ाड़ने लगा, तो अमरावती ने हलकी सी जांघ खोल दी जिससे देव का लुंड अमरावती की जांघो के बिच में घुस गया, अमरावती की लम्बाई देव से काम नहीं थी वो इस महल में सबसे लम्बी थी, कुछ अमरावती हलकी सी अपने पंजो पैर आ गाइट hi,

लुंड की रगड़ जब अमरावती की छूट पैर हुई तो उसकी आँखे बंद हो गई, देव के हाथ तुरंत अमरावती की गांड पैर चले गए, और उसने कास क्र उसकी गांड को पकड़ लिया, अब अमरावती का वजन देव के हाथो और शरीर पैर था, अमरावती को ऐसा लग रहा था जैसे वो देव के लुंड पैर बैठी हुई ह, अमरावती ने देव को देखा,

देव- ये गलत तो नहीं हो रहा न महारानी,

अमरावती- जो हो रहा ह होने दो, आज मत रोको, मैं बहुत प्यासी हु मेरे दोस्त अपनी इस दोस्त की प्यास बुझा दो,

इतना बोल क्र अमरावती ने देव के होतो पैर अपने हॉट रख दिए, देव सब कुछ अमरावती से hi करवा रहा था, बस देव उसका साथ दे रहा था,

देव ने भी तुरंत उसके होतो को चूमना शुरू क्र दिया, दोनों एक दूसरे के होतो को चबाये जार हे थे, देव ने अमरावती की गांड को कास क्र पकड़ा और हवा में उठा लिया अमरावती ने भी तुरंत अपनी पेअर देव की कमर पैर लप्पेट दिए और उसकी गॉड में आ गई, देव का खड़ा लुंड मीचे से अमरावती की छूट और गांड पैर रगड़ रहा था, उप्पेर अमरावती की चूचिया देव की छाती में रगड़ रही थी, और दोनों के हॉट एक दूसरे का रास पान कर रहे थे,

दोनों पागलो की तरह एक दूसरे को चुम रहे थे, कुछ देर बाद देव ने अमरावती को बिस्टेर पैर लिटाया और उसके उप्पेर आ गया,

देव- क्या इरादा ह,

अमरावती- मैंने अपने इरादे बता दिए हैं, अब तुम बताओ क्या इरादा ह,

देव- बहुत तकलीफ होगी,

अमरावती- मुझे वो तकलीफ चाहिए, मैंने पूरी जवानी उस तकलीफ का इंतजार किया ह लेकिन कोई मुझे वो तकलीफ नहीं दे पाया,

देव- कोई मतलब

अमरावती के मुँह से जोश जोश में कुछ ज्यादा hi निकल गया था उसने तुरंत बात को सम्हाला,

अमरावती- महाराज और कोण,

देव- आपकी चीखे बहार कोई सुन न ले,

अमरावती- उसकी चिंता तुम मत करो, इस कमरे से बहार कोई आवाज नहीं जाती, और बहार मेरी खास दासी कड़ी ह, वो सब सम्हाल लेगी

देव- मतलब आपने पूरी तैयारी की हुई ह,

अमरावती- अब और मत तड़पो मुझे, मैं इस खूबसूरत प्यारे से लिंग को अपने अंदर महसूस करना चाहती हु,

देव- मैं आपको वो सुख दूंगा इसके बाद आपको किसी सुख की जरुरत hi नहीं होगी,

देव ने अमरावती के होतो पैर फिर से अपने हॉट रख दिए और एक हाथ उसकी चूचियों पैर ले गया और मसलने लगा, निचे से देव का खड़ा लुंड अमरावती की छूट पैर रगड़ रहा था, अमरावती अपनी छूट को निचे से उछलने लगी और देव के खड़े लुंड पैर रगड़ने लगी, और देव के होतो को चूसने लगी,

कुछ देर हॉट चूसने के बाद देव ने अमरावती की गरदन चुनी शुरू क्र दी, और फिर निचे आने लगा और अपने हॉट अमरावती की चूचियों पैर रख दिए, अमरावती के चूचक बफी बड़े थे, देव ने एक चुकी को मुँह में भर लिया और दूसरी को अपने हाथ से मसलने लगा,






जब देव अमरावती की चूचियों को चूस रहा था तो उसके दिमाग में निहारिका की चूचिया आ गई, वैसे तो अमरावती की चूचिया बहुत बड़ी थी लेकिन जो आकर और कड़क पैन निहारिका की चूचियों का था वो बात अमरावती की चूचियों में नहीं थी,

देव को चूचिया चूसने का बहुत अनुभव था, बचपन से आज तक उसने सबसे ज्यादा चूचिया hi तो चूसी थी, लेकिन अमरावती ने शायद बहुत समय से अपनी चूचिया नहीं चूसै थी, और देव की चुकी चूसने की कला से अमरावती कामुकता में भर्ती जार hi थी, वो अपनी उंगलिया देव के सर पैर घुमा रही थी और अपना एक हाथ अपनी जांघो के बिच रगड़ रही थी जिससे देव का खड़ा लुंड अमरावती के हाथ पैर रगड़ रहा था, अमरावती ने देव का लुंड पकड़ लिया,

लुंड हाथ में आते hi अमरावती का शरीर कैंप उठा, इतना बड़ा और मोटा लुंड जिसके साडी नसे उसकी उंगलियों को महसूस हो रही थी, अमरावती ने लुंड को मुट्ठी में पकड़ा और अपनी छूट पैर रगड़ने लगी और दबाने लगी,






लेकिन देव का इरादा अभी ऐसा करने का नहीं था, देव थोड़ा उप्पेर हो गया, अमरावती ने चौंकते हुए देव को देखा,

देव मुस्कुराया- आज आप जीवन का असली सुख का अनुभव करेंगी अमरावती जी,

देव ने अमरावती को नाम से बुलाया तो उसका शरीर में और जोश भर गया, देव उसकी चूचियों को चुस्त हुआ उसके सपाट पेट पैर पंहुचा और फिर उसकी छूट के उप्पेर आ गया जो बिलकुल चिकनी थी, ऐसा लग रहा था जैसे अमरावती ने आज hi वह की सफाई की ह, वैसे भी अमरावै की दासी रोज उसकी छूट को साफ़ करती थी, देव ने छूट के उप्पेर के हिस्से को अपनी उंगलियों से शलया जिससे अमरावती का पेट में कपकपाहट होने लगी,

देव ने अपने हॉट अमरावती की जांघो पैर रख दिए, जांघो पैर हॉट लगते hi अमरावती एक दम उठ क्र बैठ गई लेकिन देव ने उसे पीछे धकेल दिया, अमरावती अपना सर बिस्टेर पैर इधर उधर करने लगी, देव जांघो को चूमता हुआ अमरावती की जंघे फ़ैलाने लगा जो अमरावती ने खुद पैर काबू करने के लिए आपस में भींच राखी थी, देव ने अपनी उंगलिया अमरावती की जांघो पैर फिरै और उप्पेर उसकी जांघो के बिच घुसता चला गया, अमरावती की जंघे खुलती चली और अमरावती को वो चिकनी छूट देव की आँखों के सामने आ गई थी,

अमरावती सर उठा क्र देव को देख रही थी की वो क्या करने वाला ह, देव ने अमरावती की आँखों में झाँका और अपना मुँह उसकी छूट पैर लगा दिया, अमरावती के मुँह से अह्ह्ह्हह्हह निकल गई और वो बिस्टेर पैर लुढ़क गई, उसके हाथ खुद देव के सर पैर चले गए, देव ने भी अमरावती की छूट के होतो को अपने होतो से अच्छे से चूमा और फिर अपनी जीभ निकल क्र छूट को चाट लिया, अमरावती अपनी कमर हिलने लगी, छूट पहले से hi पूरी तरह गीली हुई पड़ी थी, वो तो देव के लुंड की सिर्फ रगड़ से hi झड़ने की कगार पैर पहुंच गई थी,






अमरावती- ahhhhhhhhhhh देव क्या कर रहे हो, तुम मुझे पागल कर दे रहे हो, uuuffffffffffffffffff बहुत मजा आ रहा ा, बहुत सालो से किसी मर्द ने मेरी छूट को नहीं चूसा ह,

देव बिना कुछ बोले बस अमरावती की छूट को चूस रहा था अपनी जीभ को उसकी छूट की घेरे तक दाल रहा था, अमरावती पहले से पागल हुई पड़ी थी वो देव का हुम्ला बर्दास्त नहीं कर पाई, उसके हाथ देव के सर पैर चले गए और उसने देव के सर को अपनी छूट पैर दबा लिया और निचे से अपनी छूट को उछलने लगिए ुर देव के मुँह पैर छूट को रगड़ क्र झड़ने लगी,

अमरावती- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह देव खा जाओ मेरी छूट निचोड़ दो इसे, ahhhhhhhhhhhhh बहुत मजा आ रहा ह, तुम कमल के हो देव, बहुत सालो बाद किसी मर्द ने चूसा ह ahhhhhhhhhhh

अमरावती की सिसकारियां बहदति जा रही थी, कुछ देर में वो झाड़ क्र शांत हो गई तो देव उठा और अमरावती छूट में भीगे अपने हॉट सीधे अमरावती के होतो से जोड़ दिए, अमरावती भी पगली की तरह उसके होतो को चूसने लगी और उन पैर लगा अपनी छूट का नमकीन पानी का सवाद लेने लगी,

देव अमरावती के पैरो के बिच में था उसने अपना लुंड अमरावती की छूट पैर लगाया और धकेलने hi वाला था लेकिन अमरावती ने उसे रोक दिया,

अमरावती- रुक जाओ, तुमने मुझे बहुत मजा दिया ह मैं तुम्हे भी वो मजा देना चाहती हु,

अमरावती ने देव को बिस्टेर पैर लिटाया और देव का लुंड सीधा खड़ा हो गया था, अमरावती देव के उप्पेर आ गई और अपने हाथो में देव के लुंड को पकड़ क्र उससे खेलने लगी, देव का लुंड अमरावती के दोनों हाथो में था, वो उसकी लम्बाई अउ रमते का अनुमान लगा रही थी, फिर अमरावती ने देव की आँखों में देखते हुए लुंड के टोपे पैर अपनी जीभ फिरै, देव ने मुस्कुराते हुए आँखे बंद क्र ली, अमरावती को अहसास हो रहा था की वो देव पैर काबू पति जा रही ह,






अमरावती ने अपना मुँह खोला और लुंड को अपने मुँह में भरने की कोशिश की लेकिन लुंड इतना मोटा था की अमरावती के गाल चीरने लगे,





अमरावती कुछ देर लुंड को ऐसे hi मुँह में लेकर बैठी रही, जब उसका मुँह दुखने लगा तो उसने लुंड को बहार निकला और चाटने लगी, वो लुंड को उप्पेर से निचे तक चाट रही थी,





फिर उसने देव के ांडो को अपने मुँह में भर लिया और एक एक ाँद को रसगुल्ले की तरह चूस रही थी,





काफी देर लुंड को चूसने के बाद जब उसका मुँह दुखने लगा तो उसने लुंड को अपनी चूचियों बिच रखा और अपनी चूचियों से लुंड को रगड़ने लगी ,





देव को बहुत मजा आ रहा था, ये वही अमरावती थी जिसने देव और उसकी माँ निहारिका को हमेषा जलील किया था, आज वो उसके लुंड के साथ खेल रही थी,

अमरावती को काफी देर हो चुकी थी लुंड के साथ खेलते हुए लेकिन देव का लुंड ऐसे hi खड़ा था, अमरावती को उम्मीद थी की वो देव को अपनी अदाओ से hi झाड़ देगी लेकिन लुंड और भी खूंखार होता जार है था, अब अमरावती ने हर मान लिट् hi, उसने एक तेल की शीशी उठाई और उसमे से बहुत सात ेल लुंड पैर डाला और मालिश करने लगी,

देव- ये कैसा तेल ह

अमरावती- इससे तुम्हारा लुंड और मजबूत हो जायेगा,

देव- क्या आपको लगता ह इससे ज्यादा मजबूत लुंड होना चाहिए,

अमरावती- इससे ज्यादा मजबूत कुछ नहीं हो सकता ह, ये एक अजूबा ह, असल में मैं इसे चिकना कर रही हु ताकि मैं इसे अपनी छूट में झेल सकू,

अमरावती ने बहुत सा तेल अपनी छूट पैर भी डाला और देव के बराबर में लेट गई,

अमरावती- अब आ जाओ मेरे उप्पेर और चढ़ जाओ मुझपे, अब बर्दास्त नहीं हो रहा ये घोड़े जैसा लुंड मेरी छूट में घुसा दो,

देव उसके पैरो के बिच में आ गया और पहले अपनी उंगली छूट में दाल क्र थोड़ी अंदर बहार की ताकि छूट पूरी तरह चिकनी हो जाये, फिर उसने अपना लुंड छूट पैर रकह और रगड़ने लगा,






smartphone png hd

अमरावती- मत तड़पाओ अब घुसा दो अपना लोढ़ा मेरी छूट में, फाड़ दो इस छूट को,

देव ने लुंड का दबाव बनाया और लुंड का टोपा छूट में घुस गया, लुंड के घुसते hi अमरावती की आँखे फैट गई, उसने अपना मुँह तकिये के निचे दबा लिया, देव ने रुक्न ेकी कोशिश नहीं की वो दबाव बनता hi रहा और तेल की चिकनाहट की वजह से काफी लुंड छूट में घुसता चला गया, अमरावती काफी चूड़ी हुई औरत थी, और उसने अपनी छूट से दो दो बच्चे निकल रखे थे, छूट काफी खुली हुई थी लेकिन देव का लुंड फटी हुई छूट को फाड़ने की भी ताकत रखता था,

अमरावती के मुँह से अह्ह्ह अह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह बस बस बस रुक जाओ रुक जाओ निकलने लगा, देव एक पल के लिए रुका,

देव- क्या हुआ

अमरावती- बहुत मोटा ह, इतना मोटा लुंड झेलना आसान नहीं ह, मेरी फैट रही ह,

देव- बहार निकलू क्या

अमरावती- नहीं नहीं बहार मत निकलना, वर्ण दुबारा नहीं डलवा पाऊँगी, कुछ पल रुको फिर धीरे धीरे डालना,

देव कुछ पल रुका उसने अमरावती की चूचियों के साथ खेलना शुरू क्र दिया, जैसे hi अमरावती की हालत ठीक सी लगी देव ने फिर से लुंड का दबाव बना दिया, न न करते हुए भी देव का आधे से ज्यादा लुंड अमरावती की छूट में घुस गया था, आज तक यहाँ तक अमरावती की छूट में किसी का पूरा लुंड भी नहीं गया था जहा तक देव का आधे से कुछ ज्यादा लुंड घुस गया था, अमरावती के मुँह से दर्द बहरी चिक निकल गाइट hi, जो बहार कड़ी दासी ने भी सुनी थी, दासी को भी हैरत हुई की अमरावती की चीख निकल सके ऐसा भी कोई ह क्या दुनिया में,

देव ने हलकी हलकी कमर हिलाई जिसे अमरावती दर्द से बिलबिला ुति थी, वो अपना सर इधर ुधा रपातक रही थी, देव बिना परवाह किये कमर हिलता रहा, और जिसका परिणाम ये हुआ की अमरावती की छूट ने हल्का हल्का पानी छोड़ना शुरू क्र दिया जिससे लुंड को आसानी होने लगी, कुछ देर में अमरावती का दर्द कुछ काम हुआ, उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे, छूट लुंड पैर फांसी हुई थी,

तभी देव ने हल्का सा लुंड बहार खींचा और फिर से घुसा दिया अमरावती का मुँह खुला रह गया, ahhhhhhhhhhhhhhhhh माँ मर गई फैट गई मेरी छूट ahhhhhhhhhhhhhhhhh

ये आवाज जब दासी के कानो में गई तो वो दौड़ क्र अंदर आई, और जब उसने देखा की देव का मुसल जैसा लुंड अमरावती की छूट में फसा हुआ ह, उसकी आँखे फटी रह गई,

वो कंपकंपाती हुई आवाज में बोली- महारानी जरा धीरे आपकी आवाज बहार आ रही ह,

दासी की आवाज से देव और अमरावती दोनों चौंक गए,

अमरावती- क्या करू इसका लुंड मेरी छूट फाड़ता hi जार है ह,

देव- महारानी आपकी आवाज किसी ने सुन ली तो अनर्थ हो जायेगा,

अमरावती- मैं खुद पैर काबू पाने की कोशिश करती हु, तू जा और नजर रख,

दासी बहार चली गई,

अमरावती- इतना दर्द तो फेल बार भी नहीं हुआ था, अगर तुम किसी कुँअरि लड़की किछूट छोड़ोगे तो कसम से उसे मर hi डोज,

देव- कोई तो ऐसी बानी होगी जो इस लुंड को आराम से अपनी छूट में ले लेगी,

देव ने अपनी कमर चली शुरू क्र दी और अमरावती लूँ ढकी मर झेल नहीं पाई और झड़ने लगी, झड़ने का ये फायदा हुआ की छूट और चिकनी हो गई और लुंड को आसानी हो गई और लुंड और अंदर घुस गया, अमरावती झड़ते हुए अपनी छूट उछाल रही थी और देव भी ढके लगा रहा था,

अमरावती झाड़ का शांत हुई लेकिन देव नहीं रुका वो लगातार छोड़ता रहा, अमरावती जीवन में पहेली बार झड़ने के बाद भी चुद रही थी, अमरावती ने देव को अपने उप्पेर लिटा लिया और देव धक्के लगाने लगा, कुछ hi देर में अमरावती फिर से झड़ने लगी, लेकिन देव अभी भी नहीं झाड़ रहा था, अमरावती को बड़ी हैरत हुई, लेकिन जो मजा उसे आ रहा था उसके लिए जीवन का असली सुख वही था, वो न जाने किस किस से चूड़ी थी लेकिन देव जस्या मर्द उसे पहेली बार मिला था,

अमरावती- मेरा दो बार हो गया ह तुम भी कर लो न

देव- मेरा इतनी जल्दी नहीं होता महारानी,

देव ने अमरावती को घोड़ी बना दिया और उसकी बड़ी सी गांड देव के सामने आ गई, देव का मन तो किया इसकी गांड में अपना ये मुसल घुसा दे लेकिन जल्दबाजी ठीक नहीं थी, उसने छूट में लुंड घुसाया और अमरावती के बाल पकड़ क्र उसकी सवारी करने लगा,






अमरावती की हालत ख़राब हो चुकी थी, वो अब चौथी बार झाड़ रही थी, अब लुंड और अंदर तक जार है था जिसे वो आराम से झेल रही थी,

अमरावती- ahhhhhhhhhh देव तुमने तो मुझे अपनी घोड़ी बना लिया अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह करो अपनी घोड़ी की सवारी, कैसी ह तुम्हारी घोड़ी, तुम्हे पसंद आई

देव- बहुत गदराई हुई घोड़ी ह

अमरावती- तुमने मेरा जीवन सफल क्र दिया, ऐसा सुख जीवन में कभी नहीं मिला था, तू लाजवाब हो aahhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhh मैं तो तुम्हारी गुलाम हो गई, काश तुम मुझे पहले मिले होते, ahhhhhhhhhhhh काश तुम मेरे बेटे होते मैं तो दिन रात तुमसे hi चुदती,

अमरावती की ये बात देव के दिमाग में तकर मार गई, मैं बीटा होता तो मुझसे चुदती, क्या कोई बीटा अपनी माँ को छोड़ सकता ह, और नजाने क्यों देव की आँखों के समाने निहारिका आ गई नंगी देव की आँखे बंद हो चुकी थी और बंद आँखों में उसे निहारिका दिख रही थी, और उसका जोश इतना बेहद गया की उसने पूरा रफ़्तार से अमरावती को छोड़ना शुरू क्र दिया, अमरावती मुँह के बल बिस्टेर पैर गिर गई लेकिन देव रुका नहीं वो पूरी ताकत से अमरावती को छोड़ रहा था, अमरावती ने अपना यह बिस्टेर में दबा लिया था उसकी चीखे बिस्टेर में डाब गाइट hi, और देव ने पुरे जोश में एक हुंकार भरी और अपना पूरा लावा अमरावती की छूट में बाहरणा शुरू क्र दिया, अमरावती में इतनी ताकत hi नहीं बची थी की वो देव को रोक सके, और देव इस जोश में था की उसे अहसास hi नहीं हुआ की उसने लावा कहा निकल दिया ह,






लुंड का वीर्य निकलते hi देव अमरावती के उप्पेर hi लेट गया और लुंड और अंदर तक घुस गया, अमरावती की साँस hi रुक गई थी, वो बेसुध सी बिस्टेर पैर उलटी पड़ी थी, और देव उसके उप्पेर लेता था लुंड छूट में घुसाए हुए, काफी देर तक दोनों शांत लेते रहे, दोनों की सांसो की आवाज कमरे आ रही थी,

कुछ देर बाद जब देव शांत हुआ तो उसे अहसास हुआ की वो क्या सोच रहा था, उसे खुद पैर बहुत गुस्सा आया, उसने आँखे खोली और अमरावती के उप्पेर उठा, उसका लुंड अभी भी खड़ा था जब लुंड छूट में से बहार निकला तो उसके साथ अमरावती की छूट भी बहार को खींचती हुई चली आई जिससे अमरावती को दर्द हुआ और उसकी फिर से चीख निकल गई,

देव ने उसकी गांड को शलया, अमरावती ने बस सर घुमा क्र देव को देखा उसका लुंड छूट के रास में भीगा हुआ अब तक खड़ा था अमरावती को हैरत हुई, लेकिन बोलने की हिम्मत नहीं थी, देव उसके बराबर में hi लेट गया,

अमरावती ने एक बरतें निचे गिराया जिससे उसकी दासी डोडी हुई अंदर आई और दोनों की हालत देख क्र शर्मा गई लेकिन जब उसकी नजर देव के खड़े लुंड पैर गई तो वो घबरा गई,

देव- क्या डुबारकरने की हिम्मत ह आप्मने अमरावती


अमरावती- नहीं दुबारा किया तो मैं मर जाउंगी, मुझे ठीक होने में हफ्तों लग जायेंगे,
 
क्या अब संस जा रहे हैं
 
अपडेट-24




देव ने कपडे पहने और अपने कमरे में आ गया और दासी अमरावती की सेवा में लग गई, जब उसने अमरावती की छूट देखि तो घबरा गई थी,

दासी- ये आपने क्या बाला ले ली महारानी ये तो किसी हवन का लुंड लगता ह,

अमरावती- आज इसने मुझे स्वर्ग की सेर करवा दी, ऐसा सुख दिया ह की जीवन भर इस सुख को नहीं भूल पाऊँगी, मैं तो इसकी कर्जदार हो गई, मैं क्यों इससे इतनी नफरत करती थी इससे ज्यादा प्यार करने लायक तो दुनिया में कुछ ह hi नहीं,

इधर देव अपने कमरे में आया और नहाया, फिर वो कपडे पहन क्र एक जगह बैठ गया उसके दिमाग में बड़ी हलचल हो रही थी, वो खुद पैर बहुत गुस्सा हो रहा था, वो अपने आप से नाराज था क्योकि अमरावती को छोड़ते समय उसके दिमाग में निहारिका का ख्याल कैसे आया, उसकी माँ का ख्याल क्यों आया, वो अपने आप की अपराधी मान रहा था, वो बहुत देर तक ऐसे hi बैठा रहा उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी अपनी माँ के पास जाने की, वही निहारिका अकेली लेती हुई थी उसके दिमाग में बस यही चल रहा था की देव अभी तक अमरावती के hi पास ह, वो खुश होना चाहती थी लेकिन उसका दिल खुश नहीं था, वो बस देव के बारे में hi सोच रही थी की वो अब तक आया क्यों नहीं, उसे बेचैनी हो रही थी,

जब काफी समय बीत गया तो निहारिका उठी और एक कपडा अपने उप्पेर डाला और देव के कमरे में चल दी इस उम्मीद में की देव वापस आ गया होगा, जब निहारिका ने कमरे में प्रवेश किया तो देखा देव अपना सर अपने हाथो पैर रखे बैठा ह, निहारिका घबरा गई वो दौड़ क्र देव के पास पहुंची,

निहारिका- देव क्या हुआ देव तू ठीक ह न, तू ऐसे क्यों बैठा ह,

निहारिका को वह देख क्र देव चौंक गया, उसके दिमाग में फिर से वही सब घूम गया, उसकी आँखे नाम हो गई,

देव की आँखों में नाम देख क्र निहारिका और घबरा गई, उसने देव को अपने सीने से लगा लिया, निहारिका का कपडा उसके शरीर से खिसक गया था, निहारिका की चूचिया फिर देव के चेहरे पैर रगड़ गई, जिस चीज से देव बच रहा था वही सब और अधिक हो रहा था,

निहारिका- क्या हुआ बेटे सब ठीक ह न, तू ठीक ह न, बता मुझे क्या हुआ किसी ने कुछ कहा क्यात एरा दिल दुखाया किसी ने, तू बता मुझे इस बार मैं किसी को नहीं बख्शूंगी, बिच में से चिर दूंगी, तू बता मुझे,

देव- नहीं माँ किसी ने कुछ नहीं कहा, लेकिन

निहारिका- लेकिन क्या बोल मेरा दिल बैठा जा रहा ह,

देव- मैंने अपराध किया ह माँ, बहुत बड़ा अपराध किया ह,

निहारिका- तू और कोई अपराध क्र दे ये हो hi नहीं सकता, मैं मान hi नहीं सकती, तू बता मुझे क्या हुआ ह, मुझे फैसला करने दे सही और गलत का,

देव- मैं नहीं बता पाउँगा माँ

निहारिका- तू अपनी माँ से नहीं बता पायेगा, हमारे बिच ऐसा क्या छुपा हुआ ह जिसकी वजह से तू मुझे बता नहीं सकता, क्या कुछ कमी रह गई मेरे से जिससे तू मुझे बात बताने से मन कर रहा ह

देव- नहीं माँ ऐसी बात नहीं ह, कमी मुझमे रह गई ह

निहिरका- ऐसा मत बोल बीटा तुझे मेरी कसम बता क्या हुआ ह,

देव ने सर निचे झुका लिया लेकिन अब माँ की कसम थी तो बताना hi था,

देव- माँ जब मैं अमरावती के साथ और हमारे बिच सम्भोग चल रहा था उस समय

निहारिका धयान से सुन रही थी, देव चुप हो गया,

निहिरका- बोल बोल शर्मा मत,

देव- उस समय मेरे दिल में न जाने क्यों आपका hi ख्याल आ रहा था, मैं अमरावती के शरीर से खेल रहा था और मेरा दिमाग उसके शरीर की तुलना आप से कर रहा था, जब मेरा लिंग उसके अंदर था तब भी मुझे आपके शरीर का ख्याल आ रहा था, और मैं अपना आप खोता जा रहा था, मुझे माफ़ कार्डो माँ मुझसे अपराध हुआ ह, सम्भोग के समय आपका ख्याल ाँ hi अपराध ह माँ

निहारिका कुछ पल चुप रही उसे समझ नहीं आया की वो क्या कहे, लेकिन न जाने क्यों उसके दिल में एक सकूं सा था उसे इस बात का बिलकुल बुरा या गलत नहीं लग रहा था, उल्टा उसका मन खुश हो रहा था, देव किसी और औरत के साथ होते हुए भी बस मेरे बारे में सोच रहा था ये hi बात निहारिका के लिए सबसे ज्यादा मायने रख रही थी,

निहारिका- तू शांत हो जा तूने कुछ गलत नहीं किया, तुझसे कोई अपराध नहीं हुआ ह,

देव- माँ लेकिन

निहारिका- मेरी बात धयान से सुन,

देव चुप हो गया

निहारिका- जब बच्चा पैदा होता ह तो औरत को दूध उसके जनम के 2 या ज्यादा से ज्यादा 3 साल तक आ पता ह, लेकिन मुझे आज तक आ रहा ह, कोई माँ अपने जवान बेटे के सामने अपनी चूचिया नहीं दिखती लेकिन मैं तुझे आज तक दूध पीला रही हु, क्योकि मेरा दूध रुक नहीं रहा और मुझे तकलीफ होती ह, क्या मैंने गलत किया,

देव ने न में सर हिलाया,

निहारिका- जब हमे महल से निकला गया तो पुरे राजय ने मुझे नंगा देखा और न जाने कैसे कैसे विचार अपने मन में लाये और मैं तेरे सामने भी नंगी थी, उस गुफा में जब जगे तब हम नंगे थे और उस दिन से हम नंगे hi हैं, क्या एक माँ अपने जवान बेटे के समाने नंगी रह सकती ह, क्या बीटा अपनी माँ के सामने ऐसे नंगा रह सकता ह, लेकिन हमने किया क्योकि हमारे हालत बदल चुके थे, हमारी दुन्या बदल चुकी थी, हमारे लिए ये दुनिया ये समाज ये परिवार सब रिश्ते ख़तम हो चुके थे, हम हर रिश्ते से उप्पेर उठ चुके थे,

देव- लेकिन हमारे विचार सुध थे,

निहारिका- तेरा ये खड़ा लुंड हमेशा मेरे सामने खड़ा रहता ह, जब हम एक दूसरे से चिपक क्र सोते हैं तो तेरे ये लुंड मेरे गुप्तांगो पैर रगता ह कहा कहा लगता ह क्या वो गलत नहीं ह, लेकिन हमारे लिए अब कोई फरक नहीं पड़ता, जब तुझे तकलीफ हो रही थी तो मैंने अपने हाथो से तेरे इस बड़े लुंड को हिला कर तेरी तकलीफ काम की थी क्या वो गलत नहीं था, लेकिन हमारे लिए गलत नहीं था,

तेरे पास मैं रहती हु वो भी हमेषा नंगी इसलिए तेरा दिमाग दुनिया की हर औरत की तुलना मुझसे hi करेगा, इसमें कुछ गलत नहीं ह, तूने कोई अपराध नहीं किया ह, समाज हमारे रिश्ते को क्या कहता ह मैं नहीं सोचती मैं इतना जानती हु की तू मेरा ह और मैं तेरी, हम दोनों एक दूसरे का सहारा हैं और एक दूसरे के पूरक हैं, और दिमाग में ऐसे विचार आ जाना कोई गलत नहीं हैं, और अगर तुझे फिर भी झिजक ह तो मैं तुझे अपनी तरफ से पूरी आजादी दे रही हु तू जो चाहे सोच सकता ह, तुझ पैर कोई अपराध नहीं होगा, सोच में बस एक औरत हु और तू एक मर्द ह, और इस दुनिया में हम दोनों से ज्यादा खूबसूरत जोड़ी कोई नहीं ह, मैं तेरे लिए कुछ भी कर सकती हु, और ये hi उम्मीद मैं तुझसे करती हु,

देव- माँ आप कितनी सुलझी हुई हैं, आप कितना आराम से सब कर देती हैं,

निहारिका- हालत सब सीखा देते हैं, लेकिन तू हमेषा ख्याल रखना कोई भी चीज तुझे कमजोर नहीं कर सकती, तुझे ऐसा बनना ह जिसे कोई झुका न सके, तेरे रस्ते में कुछ भी आये तुझे कुछ भी करना पड़े मुझे फरक नहीं पड़ता, और रही बात औरत की तो तेरे सामने हर औरत झुकनी चाहिए, चाहे वो कोई भी हो, मेरे अपमान का यही बदला ह,

देव निहारिका से लिपट गया,

निहारिका- पहले से कपडे उतर और मेरे कमरे आ जा, यहाँ कोई आ सकता ह वह कोई नहीं आएगा,

कुछ देर में दोनों माँ बीटा फिर से नंगे लेते हुए थे और देव का लुंड अभी भी खड़ा था,

निहारिका- ये अब तक खड़ा क्यों ह क्या अमरावती तुझे शांत नहीं क्र पाई,

देव- वो तो मुझे कभी शांत नहीं क्र पति अगर आपके ख्याल मेरे दिमाग में नहीं आते तो, आपका ख्याल आते hi मैं बेकाबू हो गया और मैं झाड़ गया,

निहारिका मुस्कुरा दी,

निहारिका- कोई बात नहीं, बता मुझे वह क्या हुआ,

देव ने सब बताना शुरू किया, जिसे सुनकर निहारिका के शरीर में बेचैनी सी हो रही थी, लेकिन वो खुद पैर काबू किये सब सुन रही थी, दोनों बात करते करते एक दूसरे से लिपट क्र सो गए,

अगली सुबह सूरज ज्वाला अभिजीत के साथ अमिता सोमिया और अक्षरा चल दिए घूमने फिरने के लिए, सूरज और अभिजीत ने पूरा इंतजाम किया हुआ था, उनके साथ कुछ सैनिक और दसिया भी गए थे, सभी सैनिक तीनो भाइयो के खास आदमी थे, अक्सर ने रीवा को मानाने की कोशिश की लेकिन अब रीवा ने उनके साथ रहने का दिखावा बंद क्र दिया था, अब उसे उनके साथ अच्छा नहीं लगता था, इसलिए वो नहीं गई, जब वो निकल रहे थे तो तीनो भाइयो के चेहरे पैर जो ख़ुशी थी और उन्होंने देव को देख क्र एक अजीब का मुँह बनाया, देव को लगने लगा की कुछ गड़बड़ ह,

लेकिन फ़िलहाल देव ने ज्यादा नहीं सोचा, उन सबको विदा करने अमरावती नहीं आ पाई थी क्योकि वो अपने बिस्टेर पैर से उठ hi नहीं प् रही थी, उसे बुखार चढ़ा हुआ था, उन सबके जाते hi देव भी निकल गया, देव अभेंद्र के पास पंहुचा,

अभेंद्र ने अब तक 10 लड़को को जोड़ लिया था, सभी देव के लिए जीने मरने के लिए तैयार थे, सभी में अपने राजय के लिए कुछ करने का जज्बा था, देव ने सभी को उनका काम समझा दिया, सभी अलग अलग दिशा में निकल गए,

देव- अभेंद्र वो लोग कब आ रहे हैं,

अभेंद्र- आज पहुंच जायेंगे, हमारे दो आदमी उन्ही के साथ हैं,

देव- किसी को पता न चले वो कोण हैं,

अभेंद्र- मुझे बस एक दर ह इतनी सूंदर लड़किया इस गाओं में रहेंगी तो लोग उनसे जरूर मिलने आएंगे, अगर किसी को पता चल गया तो गड़बड़ न हो जाये,

देव- तुम उन्हें अपने रिश्तेदार बताओगे, वो सब इस गाओं से काफी दूर के हैं, बस आचार्य जी का दर ह मुझे क्योकि उन्हें दूर दूर के गाओं के लोग जानते हैं,

अभेंद्र- वो काफी बीमार लग रहे थे क्यों न उन्हें उपचार के लिए कही भेज दिया जाये,

देव- अच्छा विचार ह लेकिन कहा भेजू,

अभेंदेरा- मैं इंतजाम करता हु,

शाम तक सुगंधा और रेवती गाओं में पहुंचने वाले थे, रेवती अब तक तो खुश थी लेकिन अब उससे देव के बिना रहा नहीं जा रहा था, वही कस्तूरी और उसकी माँ को अभेंद्र के आदमियों ने उठवा लिया था,

अभेंद्र- उन दोनों का क्या करना ह

देव- पहले सुगंधा से मिलूंगा मैं फिर उन माँ बेटी से,

शाम को सुगंधा और रेवती आ गई देव पहले से उनके इंतजार में वही खड़ा था, देव को देख क्र रेवती दौड़ क्र उससे लिपट गई,

सुगंधा बेचारी दुखी सी होकर रह गई,

रेवती- कहा चले जाते हो तुम, इतने समय बाद मिलते हो, मैं अपने परिवा रको छोड़ क्र सिर्फ तुम्हरे लिए आई थीऔर तुम hi मुझे नहीं मिलते, अब मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती,

देव- जल्दी hi हम साथ रहेंगे

रेवती- मुझे कोई बहाना नहीं सुन्ना अब, मैं अब तुम्हे कही नहीं जाने दूंगी,

देव- बस कुछ दिनों की बात ह

सुगंधा- देव क्या तुम्हारी कस्तूरी से बात हुई

देव- नहीं अभी नहीं पहले मैं तुमसे बात करना चाहता था, क्या बताया उन्होंने,

सुगंधा- वो कुछ बताने के लिए तैयार नहीं हैं, कस्तूरी तो बस अपना मुँह निचे किये रहती ह, जबकि माँ के तेवर हमेशा विरोधी हैं, मैं जब उनसे मिली तो उसके बादउन्होंने वह से भागने का विचार बना लिया था ये तो तुम्हारे आदमी सही समय पैर आ गए, और उन्हें पकड़ लिया, अब तुम hi उनसे पुछु उन्होंने ऐसा क्यों किया,

रेवती- किसने क्या किया मुझे भी कुछ बता दो

देव- सही समय आने पैर बता दूंगा, मैं तुम्हे सब बताऊंगा, फिर तुम्हे hi फैसला करना होगा,

रेवती- मेरा फैसला तो तुम्हारे लिए hi रहेगा,

देव मुस्कुराया

देव के मन में बस यही था की ये लड़की बहुत भोली ह, मैं इसके साथ गलत कर रहा हु, इसकी तो कोई गलती भी नहीं ह फिर ये क्यों सजा भुगत रही ह,

देव- मैं उनसे कल मिलूंगा, बहुत सवाल हैं उनके लिए,

देव अपने कार्य में लगा हुआ था जबकि राजगुरु और भवर सिंह राजा भैरव के बारे में जानकरी निकलने में लगे हुए थे लेकिन कोई सफलता नहीं मिल रही थी, अब कोई और तरीका नहीं बचा था,

राजगुरु- महाराज अब एक hi रास्ता ह इस बारे में पता करने का,

भवर सिंह- वो क्या

राजगुरु- भौमिक और सात्विक, सात्विक उस अमर शक्ति को खोजने hi गया हुआ था हो न हो उसे जरूर जानकारी मिली होगी,

भवर सिंह- तो बुलवाओ सात्विक को, और पता करवाओ,

राजगुरु- लेकिन उसकी कोई जानकरी नहीं ह वॉक अहा गया ह,

भवर सिंह- अपने आदमी भेजो और तुरंत सात्विक को खोजने कर यहाँ लाओ,

राजगुरु ने एक सेना की टुकड़ी तुरंत सात्विक की खोज में निकल दी,

वही सात्विक अपनी खोज में निकला हुआ था, वो एक जगह रुक क्र आराम कर रहा था, उसे अपने भाइयो की याद आ रही थी, उसके साथ घूम रहे आदमी भी सात्विक के पास आ गए, उनमे से एक आदमी बोलै

आदमी- महाराज आप किस सोच में दुबे हुए हैं, बहुत देर से देख रहे हैं हम,

सात्विक- कुछ नहीं अपने परिवार और भाइयो की याद कर रहा था,

आदमी- बहुत प्रेम ह आपको अपने भाइयो से

सात्विक- है मेरे बही ऐसे hi हैं, और भौमिक तो बहुत भोला ह,

आदमी- कुछ बताइये अपने भाई के बारे में हमारा कुछ समय व्यतीत हो जायेगा,

सात्विक ने भौमिक और राजगुरु के बारे में बताना शुरू किया, और बात करते करते जब सात्विक देवदूत की घटना पैर पंहुचा तो उसे अचानक याद आया की भौमिक जब उसके पास देवदूत को खोजने के लिए आय था तो एक तेज रौशनी उसे दिखाई दी थी, उस रौशनी को याद करते hi सात्विक खड़ा हो गया,

आदमी- क्या हुआ महाराज

सात्विक- वो शक्ति मिल गई, मुझे पहले क्यों नहीं याद आया उस शक्ति के बारे में, चलो जल्दी हमे कही पहुंचना ह,

आदमी- अभी तो हम आराम करने के लिए रुके थे,

सात्विक- तुम्हे वो शक्ति ढूंढनी ह या आराम करना ह,

इतना सुनते hi सरे आदमी खड़े हो गए, सात्विक और आदमी तुरंत चल दिए भवनपुरा की तरफ, क्योकि सात्विक ने वो गुफा वही देखि थी,

अब ये वह कोनसी आफत लेकर जा रहे थे ये देखना था,

रात को देव अमरावती के पास गया और उसके हाल चल पूछे, देव को अपने पास देख क्र अमरावती ख़ुशी से गड गड हो गई,

देव- कैसी हो आप

अमरावती- तुम्हे मेरी चिंता हुई ये देख क्र मुझे ख़ुशी हुई, लेकिन तुमने मेरी ऐसी हालत क्र दी ह की मैं हिल भी नहीं प् रही हु, मेरी छूट पूरी तरह फैट गई ह और सूज गई है, ऐसा कोण छोड़ता ह,

देव- माफ़ करना मैं अधिक जोश में आ गया था

अमरावती- अरे माफ़ी क्यों मांग रहे हो, तुमने तो मुझे जीवन का असली सुख दिया ह, ये दर्द मुझे इतना सकूं दे रहा ह की मैं बयां नहीं क्र सकती, एक औरत के लिए सबसे बड़ा उपहार ह ये दर्द,

देव- मेरे लिए कोई सेवा हो तो बताइये

अमरावती- मैं तो ये जानना चाहती थी तुम्हारे अंदर इतना बड़ा बदलाव आया कहा से, तुम कमल के हो गए हो, मैं एक दोस्त के नाते पूछ रही हु,

देव- किसी दिन फुर्सत में बताऊंगा, जब हम साथ होंगे अगल बार तब,

अमरावती खुश हो गई, देव वह से निकल क्र अपने कर्म में जा रहा था की उसे सौमित्र मिल गई,

सौमित्र- क्यों पहलवान कहा घूम रहे हो,

देव- कही नहीं बस ऐसे hi टहल रहा हु, लेकिन आप यहाँ इस वक़्त

सौमित्र- है बस मन नहीं लग रहा था, बच्चे सभी घूमने गए हैं, तो अकेले उदास सी हो रही थी तो सोचा अपने दोस्त से मिल औ,

देव- मुझे बुलवा लेती मैं आ जाता,

सौमित्र- तुम कहा आते हो, मैं खुद औ तो मिल लेते हो वर्ण कभी आते hi नहीं मिलने, की दोस्त की खबर भी ले लू, दिन्हार न जाने कहा घूमते रहते हो,

देव- आपके साथ भी घूम लूंगा आप कहो तो,

सौमित्र- मेरे साथ घूमने में तुम्हारा बहुत फायदा ह,

देव- मैं फायदा उठाना नहीं जनता

सौमित्र- इसलिए अब तक इतना दूर हो वानर सवर्ग की सेर कर चुके होते,

देव- सवर्ग की सेर वो कैसे,

सौमित्र- तुमने कभी पहाड़ियों पैर चढ़ क्र गुफा में परिवेश किया ह, किया तो होगा लेकिन बड़ी पहाड़ी और घेरि गुफा नहीं मिली होगी,

देव- मेरा आकर कुछ बड़ा ह मैं गुफा में ठीक से घुस नहीं पता,

सौमित्र- गुफा अपना आकर बदल लेती ह, तुम्हे कोई ढंग की गुफा नहीं मिली होगी,

देव- आप जानती हैं ऐसी गुफा

सौमित्र- मौका दो कभी मैं दिखा दूंगी,

देव- कही महाराज नाराज न हो जाये,

सौमित्र- महाराज अब गुफा में नहीं घुसते, और मेरे पास जो गुफा ह वो खली रहना पसंद नहीं करती,

देव- गुफा खली रही भी नहीं चाहिए वर्ण गुफा बंद हो जाती ह,

सौमित्र- तुम्हे बहुत पता ह गुफा के बारे में,

देव- बस अब तक पता hi ह गुफा ठीक से देखि नहीं ह,

सौमित्र- मेरे पास आ जाना, मैं दिखा दूंगी,

देव- आप आना मेरे कमरे में वह कोई देख नहीं सकेगा मुझे गुफा में घुसते हुए,

दोनों खुल क्र चुदाई की बात कर रहे थे और वो भी बड़ी शालीनता से,

तभी वह काम्य आ गई,

काम्य- क्या बात हो रही दोनों माँ बीटा में,

माँ बीटा सुनकर दोनों एक दम झेप गए,

सौमित्र- देव मेरा बीटा नहीं ह,

काम्य- अरे तुम्हारे पति का बीटा तुम्हारा भी तो बीटा हुआ न, वैसे क्या बात हो रही थी,

सौमित्र- कुछ नहीं मैं देव को गुफा में घुसने के तरीका समझा रही थी,

काम्य- अरे गुफा में घुसना तो सबको आता ह, इसमें क्या सीखना,

देव- नहीं बुआ मैं अभी सिख रहा हु, आपको आता ह तो आप सीखा देना,

देव की बात पैर कमाया थोड़ी झेप गई जबकि सौमित्र की हसी निकल गई,

देव वह से निकल गया,

काम्य- क्या चल रहा ह तुम्हे कुछ सफलता मिली या नहीं

सौमित्र- दोस्ती करके देख लिया सब तरह से बात निकलवाने की कोशिश क्र ली लेकिन ये हर बार ताल जाता ह, लेकिन अब मुझे औरत का सबसे बड़ा हतियार इस्तेमाल करना होगा, उसके बाद तो ये मेर सामने तोते की तरह सब बोलेगा,

काम्य- तो जल्दी करो समय बीत रहा ह,

सौमित्र- कोशिश तो ये hi ह,

इधर देव निहारिका के पास पंहुचा तो वह रीवा बैठी हुई थी,

देव- तुम उन्सबके साथ घूमने क्यों नहीं गई,

रीवा- अब मेरा मन नहीं करता उनके साथ रहने का,

देव- क्यों अब तुम्हे उनसे सम्मान नहीं छाइये,

रीवा- सम्मान तो मैंने कभी पाया hi नहीं, उनके साथ रहने से हमेशा अपमान hi मिल यह, माँ का प्यार ठीक से मिल पाया, पिता तो कभी प्यार देते hi नहीं थे, भाई को प्यार कभी दे नहीं पाई, और उन्होंने लोगो ने तो कभी अपना समझा hi नहीं, मेरे साथ जो हुआ वो होना hi चाहिए था, मैं इसी लायक हु,

निहारिका- जो बीत गया उसे भूल जा, और आगे के बारे में सोच,

रीवा- माँ ऐसा लगता ह जिंदगी थम सी गई ह, आप दोनों वापस आ गए मेरे लिए सबसे बड़ी ख़ुशी ये hi ह, लेकिन ऐसा लगता ह जैसे सब कुछ अधूरा ह, ऐसा लगता ह जैसे मैं अब मैं नहीं हु, मेरे अंदर सब कुछ बदल गया ह,

निहारिका- तेरी शादी करवा देते हैं,

रीवा- हुम्म्म शादी, मेरी तो किस्मत भी ऐसी ह की मैं न खुश हो सकती हु न दुखी, दो बार मेरी शादी होने वाली थी और दोनों बार उस प्रताप सिंह से, दोनों बार मैं बच गई तो मन करता ह ख़ुशी मनौ, लेकिन दो बार शादी टूट गई ह अब शायद hi कभी कोई मुझसे शादी करेगा इस बात का दुःख मनौ,

निहारिका- संसार में हर लड़की के लिए कोई न कोई बना होता ह,

रीवा- लेकिन क्या कभी लड़की की पसंद का पति नहीं मिल सकता,

निहारिका- मिलता ह जरूर मिलता ह,

रीवा- लेकिन जैसा लड़का मुझे पसंद ह इस संसार में मुझे नहीं मिल सकता,

रीवा ने ये बात देव को देख क्र बोली, निहारिका ने भी इस बात पैर गोर किया,

निहारिका- जब सच्चे मन से कुछ पाने की इच्छा की जाती ह तो वो जरूर मिलता ह, बस मन साफ़ होना छाइये और उसे पाने की इच्छा मजबूत होनी चाहिए,

रीवा- उसे पाने के लिए मैं कुछ भी कर सकती हु,

इधर सात्विक ने भवनपुरा की सीमा में प्रवेश क्र लिया था, रात काफी हो चुकी थी और बाकि आदमी थक गए थे वो सब आराम करने के लिए रुक गए,

सात्विक वही डेरा जमा कर अपने धयान में बैठ गया, और उसके आदमी निकल गए गाओं में अपना शिकार ढूंढने, और जल्दी hi वो गाओं की कुछ औरतो को उठा लाये, और उनके पालतू जानवर भी उठा लाये, और उन सबने उन औरतो का बलात्कार किया, वो औरते चीखती रही लेकिन उनकी पुकार सुनने वाला वह कोई नहीं था, उन आदमियों ने औरतो का बलात्कार करके ऐसे hi छोड़ दिया और उनके जानवरो को भून क्र खा गए, सात्विक को इस सब से कोई फरक नहीं पद रहा था,

वही रात में सौमित्र चुपके से देव के कमरे की तरफ चल दी, आज उसके इरादे देव को अपने जाल में पूरी तरह फ़साने के थे, अब वो खुद वह फसने जा रही थी या देव को फ़साने ये तो सुबह hi पता चलने वाला था,

वही अमिता सोमिया और अक्षरा अपने भाइयो या यु कहु अपने शैतान भाइयो के साथ पहुंच चुकी थी अपनी मंजिल पैर,

रात हो चुकी थी तो उन्हें पता hi नहीं चला वॉक अहा आ चुके हैं, वो महल से तो निकले थे पहाड़ो पैर बर्फ में घूमने के लिए, वो बर्फ में तो पहुंचे लेकिन कही और, ये जगह भवन पूरा से काफी दूर थी, यहाँ कभी कोई नहीं आता था क्योकि यहाँ ठण्ड बहुत रहती थी, यहाँ भवर सिंह का एक छोटा सा महल बना हुआ था, जो कोई खतरा होने पैर राजा को छिपाने के लिए बनाया गया था, इसकी जानकरी बस अभिजीत को थी, जो उसे काम्य ने बताई थी, ताकि अगर महल में कोई खतरा हो तो वो यहाँ आकर चुप सके, लेकिन अभिजीत ने ये जानकरी सूरज को भी दे दी थी, और दोनों ने इसे अपनी आयाशी का अड्डा बना लिया था, और न जाने कितनी hi लड़कियों को यहाँ लेकर उन्होंने बलात्कार किया और यही बर्फ में दबा दिया, उन बेचारियो की कोई खोज तक नहीं मिली थी,

आज इस जगह पैर तीनो बहन आ गई थी, और बेचारी ये नहीं जानती थी जिन भाइयो को वो अपनरक्षक समझ क्र यहाँ आई थी वो hi उनके भक्षक बने बैठे थे,

रात में…

अभिजीत- चले क्या रात की थकन दूर कृते हैं, मुझसे सबर नहीं हो रहा,

सूरज- अभी नहीं बहुत रात हो चुकी ह, और यहाँ अँधेरा भी बहुत ह, अगर कुछ बात बिगड़ी तो हम सम्हाल नहीं पाएंगे,

ज्वाला- पूरी तैयारी के साथ करते हैं, दिन में उन्हें पटाने की कोशिश करेंगे अगर नहीं मणि तो कल रात में उद्घाटन कर देंगे,

अभिजीत- इन दसियो का क्या करेंगे,

सूरज- हमारे साथ 30 सैनिक हैं, जो हमारे खास आदमी हैं, और यहाँ खाना बनाना वाली और अलग अलग काम के हिसाब से 10 दसिया हैं, क्यों न सभी दसियो को अपने सेनिको को दे दे वो भी मजे कर लेंगे, और हमारा राज हमेषा छुपा कर रखेंगे,

ज्वाला- लेकिन अगर लड़किया नहीं मणि तो हमे जबरदस्ती करनी होगी और हमारे किसी सैनिक ने कही बहार बता दिया तो क्या होगा,

अभिजीत- तो इन सभी सेनिको को यही मार देंगे और बोल देंगे की उस राक्षश ने मर दिया, कोई शक भी नहीं करेगा,

ज्वाला- अगर लड़किया छोड़ने के बाद भी नहीं मणि तो क्या करेंगे, उन्होंने खर जाकर सब बता दिया तो क्या होगा,

अभिजीत- अगर ये लड़किया भी नहीं मणि तो इनके साथ यहाँ खूब मजे कर्नेगे फिर इन्हे भी यही मार क्र दबा देंगे, और सब इल्जाम उस राक्षश पैर दाल देंगे,



अभिजीत की बात से दोनों भाई उसका मुँह देखते रह गए, लेकिन उसके चेरे पैर कोई झिजक या रहम नहीं था, बस एक क्रूरता थी,
 
अपडेट- 25




रात ने धीमी रौशनी में सौमित्र देव के कमरे में कड़ी थी और देव बस एक कपडा अपनी कमर पैर लपेटे हुए उसके सामने खड़ा था, देव का मजबूत शरीर सौमित्र को अपनी तरफ आकर्षित क्र रहा था,

देव- माफ़ करना संयत्र जी, रात में मैं कपडे नहीं पहनता,

सौमित्र- रात में तो मूरख लोग कपडे फेंटे हैं, रात कपडे पहनने के लिए नहीं होती उतरने के लिए होती ह,

देव- अब मेरे पास कोई ह hi नहीं जिसके कपडे उतर सकू, आपके पास तो ह कपडे उतरवाने वाले भी और उतरने वाले भी,

सौमित्र- तुम राजकुमार हो और इतने खूबसूरत और ताकतवर नौजवान हो तुम्हारे सामने तो पुरे राजय की लड़किया अपने आप को बिछा देंगी, तुम्हे किसकी चिंता,

देव- उनमे वो बात नहीं ह, इस राजय में कोई आप जैसी खूबसूरत और इतने भरे हुए शरीर की मालकिन हो तो किसी के बारे में सोचु,

सौमित्र- तुम्हे मेरा शरीर पसंद आया,

देव- ऐसा कोई ह जो आपको और आपके शरीर को पसंद न करे,

सौमित्र- क्या पसंद आया तुम्हे मेरे शरीर में,

देव- क्या क्या तारीफ करू, ये नशीली आँखे और ये खूबसूरत हॉट और पतली गार्डन और आपके उभरे हुए बड़े और गोल शता..

सौमित्र- है है बोलो न खुल क्र बोलो दोस्तों में कुछ भी बोलने की आजादी ह,

देव- बोल दू,

सौमित्र- बेझिझक

देव- आपकी ये उभरे हुए भरी बहरी चूचिया, जो आपकी चोली फाड़ने को तैयार रहते हैं, हमेशा बहार झांकते रहते हैं, आपका पतला पेट और आपके उभरे हुए नितम्ब, जिन पैर आपका घागरा कैसा हुआ रहता ह, शायद आप अपने कपडे खुद कैसे हुए सिलवाती हैं, जिनमे से आपके उभर दूर से hi दीखते हैं,

सौमित्र- आज जाकर किसी ने असली सुंदरता की पहचान की ह मेरी, मैं जब से जवान हुई थी मेरा शरीर पैर सबकी नजर रहती थी, और औरत के उस शरीर का फायदा hi क्या जो मर्दो की नजरो में वासना न भर दे, इसलिए मुझे ये कैसे हुए कपडे पहनना पसंद ह,

देव- आपके अंदर की कामुकता साफ़ दिखती ह आपके शरीर से,

सौमित्र- मेरे अंदर कितनी कामुकता ह इसका तो तुम अंदाजा hi नहीं लगा सकते, 2—2 मर्द मिलकर भी मेरी कामुकता को शांत नहीं क्र सकते,

देव- शायद आपको कोई असली मर्द मिला hi नहीं,

सौमित्र- उस असली मर्द की hi तो तलाश ह, ये राजा लोग इतनी इतनी शादिया कर लेते हैं और और नै नै रानियों के घगरो में घुसे रहते हैं, वो ये भूल जाते हैं उनकी और भी रनिया हैं, जिनकी वासना को शांत करना भी उन्ही राजाओ की जिम्मेदारी ह, और जब उम्र बढ़ती ह तो कामुकता भी बढ़ती जाती ह, दुनिया जवान होती लड़की को रोकने में लगी रहती ह लेकिन ये दुनिया भूल जाती ह की असली वासना की आग उस औरत में होती ह जिसने इस वासना के खेल का मजा लिया हुआ होता ह और फिर वो मजा मिलना बंद हो जाता ह, वो अपनी आग को बुझाने के लिए कुछ भी कर सकती ह, और कोई साधारण मर्द उस आग को बुझा नहीं पता, ऐसी hi मेरी आग ह

देव- शादी के बाद तो औरत को अपनी वासना को काबू में रखना होता ह,

सौमित्र- तुम जानते हो एक औरत के अंदर किसी भी मर्द से 10 गुना ज्यादा गर्मी होती ह, और एक मर्द कुछ दिन भी बिना अपनी प्यास बुझाये नहीं रह सकता, फिर औरत कैसे रहती होगी, वो सालो तक तड़पती रह जाती ह, हम औरते बस समाज और इज्जत के दर में अपनी वासना को दबा कर रखती हैं, जब हम अपना सब कुछ अपने पति के लिए न्योछावर कर देती हैं तो क्या उनकी जिम्मेदारी नहीं होती की हमारी जरुरत को पूरा करे,

देव- है ये तो सही बात ह

सौमित्र- तुम जानते हो शादिया क्यों की जाती ह,

देव- शादी तो उप्पेर वाला जोड़ी बना क्र भेजता ह,

सौमित्र- उप्पेर वाला किसी एक के साथ hi जोड़ी बनाएगा न, फिर ये राजा इतनी शादिया क्यों करते हैं,

देव सोच में पद गया,

सौमित्र- जब लड़की जवान होती ह तो उसके अंदर वासना का सैलाब उठने लगता ह, और कोई मर्द उसका फायदा न उठा ले, और कितने मर्द उसका फायदा उठा सकते हैं इस दर से शादी की पार्था समाज में आई, एक मर्द चुनने लगे जिसके साथ शादी करने लगे ताकि उस औरत की वासना को शांत रखा जा सके, और वो उस मर्द के बच्चे पैदा करे और उसके घर को सम्हाल ले, इससे औरत की सहारा मिलना शुरू हुआ और उसकी वासना की आग को शांत रखने का तरीका मिल गया, धीरे धीरे ये पार्था बन गई, लेकिन मर्दो पैर रोक नहीं थी वो कितनी भी शादी करते रहे, धीरे धीरे बात एक शादी पैर आ गई लेकिन ये राजा कभी खुद पैर कोई नियम नहीं लगते,

इन्होने अयाशी के लिए कई कई शादिया की, किसी ने राजाओ से दोस्ती करने के लिए शादिया की, एक मर्द एक hi औरत को संतुष्ट कर सकता ह, लेकिन इन्होने कई कई रनिया राखी फिर ये किसी को संतुष्ट नहीं क्र पाए, और ये नै नै लड़कियों दसियो के पीछे घूमते और इनकी रनिया ताकतवर सेनिको के साथ गुलछर्रे उड़ाती आ रही है,

देव- औरतो को भी मर्दो जैसी आजादी मिलनी चाहिए अपनी वासना को शांत करने की,

सौमित्र- अगर ऐसा होता तो तुम्हारे माँ को 20 साल से तड़पना नहीं पड़ता, मुझे हैरत होती ह निहारिका को देख क्र वो 20 साल से इस आग को कैसे सम्हालती आ रही ह, मैं 20 दिन खुद को नहीं रोक सकती, वो कितनी प्यासी होगी, मैं तो इसका अंदाजा भी नहीं लगा सकती, वो अंदर से जल रही होगी, जीवन का इतना बड़ा सुख उसे नहीं मिला, और जब औरत को सम्भोग नहीं मिलता तो उसके अंदर की साडी खुशिया मर जाती हैं,

सौमित्र की बात देव के दिमाग में घंटियों की तरह बजने लगी, उसने कभी अपनी माँ की इस तकलीफ को तो समझा hi नहीं, अब तक देव ये तो समझ चुक्का था की हर सम्भोग हर इंसान की एक बहुत बड़ी जरुरत ह, और पूरी दुनिया इसी सम्भोग के पीछे पागल हो राखी ह, लेकिन आज तक उसने अपनी माँ के बारे में इस तरह से नहीं सोचा था, आज सौमित्र की बातो ने उसके दिमाग में तूफ़ान सा ला दिया था,

सौमित्र- ऊऊफफफफफफ माफ़ करना मैं कहा का ज्ञान लेकर बैठ गई, ये ज्ञान का समय नहीं ह,

देव- जी जी है

सौमित्र- क्या हुआ क्या सोचने लगे,

देव- कुछ नहीं बस ऐसे hi,

सौमित्र- ज्यादा मत सोचो, तो हम कहा थे है असली मर्द पैर, क्या तुम असली मर्द हो,

देव- वो तो आप hi बता पाओगी की मैं कैसा मर्द हु,

सौमित्र- तुम्हारे सरे गन एक सम्पूर्ण मर्द जैसे hi हैं, लेकिन बिस्टेर में कैसे हो वो तो बिस्टेर पैर hi पता चल सकता ह,

देव- आप क्या चाहती हैं,

सौमित्र- एक औरत जो पूरी तरह कामुक ह, और इतनी रात में किसी गैर मर्द के कमरे में जो आधी नंगी हालत में खड़ा ह, उसके सामने कड़ी ह और वासना और सम्भोग पैर ज्ञान दे रही ह, तुम hi सोच लो वो क्या छाती ह, अगर इतना नहीं सोच सकते तो तुम कुछ नहीं कर पाओगे,

देव हल्का सा मुस्कुराया और तुरंत सौमित्र की कमर में हाथ दाल क्र खुद से चिपका लिया, सौमित्र अह्ह्ह करती हुई देव से चिपक गई, सौमित्र जैसे hi देव से चिपकी देव को अहसास हो गया की सौमित्र ने जो कपडा पहना हुआ ह उसके निचे उसने कोई दूसरा कपडा नहीं पहना ह, सौमित्र की चूचिया उस सिल्क के कपडे में से सीधे देव की नंगी छाती से रगड़ खा रही थी, देव को सौमित्र के उभरे हुए चुचकों का अहसास हो रहा था,

सौमित्र- बहुत ताकत ह तुम्हारे अंदर, कमल की ताकत पाई ह तुमने, कहा से मिली ये ताकत,

देव- बस आप उप्पेर वाले की किरपा से मिल गई,

सौमित्र ने अपनी कमर देव से चिपका दी और उसकी जांघो के बिच उसे देव के खड़े लुंड का अहसास हुआ, सौमित्र और देव दोनों के hi कपडे एक दम चिकने थे, और दोनों ने hi निचे कुछ नहीं पहन रखा था,

लुंड की लम्भे और मोटाई का अहसास होते hi सुमिरता के शरीर में सिरहन सी दौड़ गई, सौमित्र ने देव की कमर पैर हाथ फिराए,

सौमित्र- ऐसी ताकत इतनी आसानी से नहीं मिलती, क्या कोई तपश्या करके भगवान् को पर्सन किया था या किसी ने वरदान दिया ह,

देव- आपको इस पल को जीना ह या ताकत का परिक्षण करना ह,

सौमित्र- मैं जिस मर्द की होने जा रही हु क्या उसके बारे में जानने का अधिकार नहीं ह मुझे,

देव- सवाल में दम ह, अच्छा आपके हर सवाल का जवाब दूंगा अगर आपने मुझे पूरी तरह संतुष्ट क्र दिया तो,

सौमित्र- हहहहहए अच्छा जी, ये तो हुई तुम्हारी शरत अब मेरी शरत, अगर तुम मुझे पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाए तो क्या करोगे,

देव- है ये बात सही ह, आप hi बताओ क्या सजा होगी,

सौमित्र- कोई सजा नहीं बस एक वचन देना होगा, अगर तुम मुझे संतुष्ट नहीं क्र पाए तो तुम हमेशा मेरे होकर रहोगे ये ताकत सिर्फ मेरे लिए उठेगी

देव- मतलब आप मुझे अपना गुलाम बनाना चाहती हैं,

सौमित्र- नहीं नहीं गुलाम नहीं बस अपना बनाना छाती हु,

देव- ठीक ह दे दिया वचन, लेकिन इन दोनों hi शर्तो में आपका फायदा हुआ, इसमें मेरा क्या फायदा हुआ,

सौमित्र- ूउम्मम्मम्म अच्छा ये शरत मुझ पैर भी लागु होती ह, अगर मैं तुम्हे संतुष्ट नहीं कर पाई तो हमेशा के लिए तुम्हारी गुलाम बन जाउंगी, जो तुम बोलोगे जैसा तुम बोलोगे वही करुँगी, इस संसार में मेरे लिए तुमसे ज्यादा खास कोई नहीं होगा ये मेरा वचन ह,

देव- वचन निभा पाओगी

सौमित्र- मैं चाहे जैसी भी हु, कितना भी बुरा करती हु लेकिन अगर वचन दे दिया तो कभी पीछे नहीं हठती,

सौमित्र को अपने आप पैर बहुत विश्वास था, क्योकि वो जानती थी की उसके अंदर इतनी गर्मी ह की वो 3 बार सम्भोग करने के बाद भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होती, उसने इतनी कामोत्तेजक औषधीय खाई थी की उसके अंदर की गर्मी शांत hi नहीं होती थी, भवर सिंह को लगातार कामोत्तेजक औषदीय खिला क्र भी वो सौमित्र को कभी संतुष्ट नहीं कर पाया, सौमित्र को लगता था की शायद दुनिया का कोई मर्द उसे संतुष्ट नहीं कर पायेगा, वो जानती थी की अगर एक जबरदस्त चुदाई हुई तो मर्द एक बार झड़ने के बाद काफी समय तक दुबारा अपना लुंड खड़ा नहीं कर पता, इसी विश्वास में उसने शरत लगा ली थी,

देव ने अपने हाथ और कास दिए और सौमित्र को खुद से चिपका लिया, और एक हाथ सौमित्र की गांड पैर ले गया, चिकने कपडे के निचे नंगी गांड पैर हाथ रखते hi देव को आनंद की अनुभूति हो गई थी, उसने मजबूत हाथो से सौमित्र की गांड पैर एक थपड मारा और कास क्र भींच लिया, सौमित्र के मुँह से दर्द भरी आह्ह्ह्हह निकल गई थी,

सौमित्र ने तुरंत देव के बालो कोपकड़ा और कास कर खींच क्र सर पीछे किया, देव उसे देख क्र मुस्कुरा रहा था, सौमित्र मुस्कुराई और अपने हॉट देव के होतो से मिला दिए, सौमित्र का हॉट चूमने का तरीका बड़ा खतरनाक था, वो होतो को चबा रही थी, देव सौमित्र को अच्छे से समझ चुक्का था ो जान गया था की सौमित्र को धुधर चुदाई पसंद ह, देव ने भी उसके होतो को चूसना शुरू क्र दिया और उसकी गांड को मसलता रहा, सौमित्र का एक हाथ देव की जांघो के बिच पहुंच चुक्का था, और जैसे hi सौमित्र के हाथ में देव का वो अंग आया जिसके लिए ये शर्ते लग रही थी सौमित्र का मुँह खुला रह गया, उसने देव के होतो को चूसना बंद क्र दिया और सर ीचे करके देव को देखा, फिर झटके वो अलग हुई और देव के सामने कड़ी हो गई, उसने हाथ बढ़ा क्र देव का बंधा हुआ कपडा खोल दिया, और कपडा खुलते hi देव का लुंड उछाल क्र सामने आ गया, सौमित्र का गाला सुख गया, उसने घेरि साँस भरते हुए देव के लुंड को देखा फिर देव को देखा,






देव- क्या हुआ सौमित्र जी,

सौमित्र- ये ये ये क्या ह,

देव- वही जिसकी आपको जरुरत ह,

सौमित्र- ये इतना बड़ा कैसे ह, उस दिन मैंने देखा था तब तो इतना बड़ा नहीं था,

देव- आपने इसे सोया हुआ देखा होगा,

अब सोमिता की फैट रही थी, देव के लुंड का आकर देख क्र hi उसकी हालत ख़राब हो रही थी,

देव- आपको दर लग रहा ह क्या, क्या शरत से दर गई आप, कही हार न जाओ,

सौमित्र ने एक दम देव को देखा, बात तो सच थी की सौमित्र दर गई थी एक तो लुंड का आकर और हर का दर,

सौमित्र- मैं किसी से नहीं डर्टी और ये कितना भी बड़ा क्यों न हो अंदर जाकर खली तो होगा hi, बस आकर का दर ह थोड़ा दर्द देगा,

देव- अब ये आपके उप्पेर ह आप कितना प्यार देती हैं इसे ताकि ये दर्द न दे,

सौमित्र के दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था, वो हारना नहीं चाहती थी, लेकिन अब कोई तरीका सूझ नहीं रहा था, और सामने जो लुंड था वो सौमित्र को डरा तो रहा था लेकिन अपनी तरफ किसी चुम्बक की तरह खींच भी रहा था, सौमित्र की आँखों नशा उतरने लगा था छूट गीली होने लगी थी,

सौमित्र देव के सामने अपने घुटनो पैर बैठ गई, और लुंड को अपने हाथो में पकड़ लिया, सौमित्र दोनों हाथो से लुंड की लम्बाई को नापने की कोशिश कर रही थी, फिर वो लुंड को आगे पीछे करने लगी, और लुंड को उठा क्र पलट क्र देखने लगी, सौमित्र ने अपना मुँह खोला और लुंड को मुँह में भरने की कोशिश की,






उसने लुंड को मुँह में भर तो लिया लेकिन ऐसा लगा जैसे लुंड मुँह में फास गया हो, सौमित्र ने बड़ी मुश्किल से लुंड को बहार निकला, उसके मुँह से थूक टपक रहा था, सौमित्र ने लुंड को निचे तक छठा,

सौमित्र कर तो रही थी लेकिन दर भी रही थी, उसने देव एक ाँद अपनी मुठी में पकडे और दबा दिए, लेकिन देव के चेरे पैर कोई दर्द नहीं था, ये देख सौमित्र और चिंता में आ गई, सौमित्र कुछ कहना चाहती थी की तभी महल का घंटा बजने लगा,

ये घंटा तभी बजता था जब कोई खतरा होता था, घंटा बजते hi सौमित्र को मौका मिल गया वो कड़ी हो गई,

सौमित्र- लगता ह महल पैर हुम्ला हुआ ह, मुझे जल्दी से कमरे में जाना होगा,

उसने अपने कपडे उठाये और जल्दी से दौड़ती हुई चली गई, देव ने भी कपडे पहने और बहार आ गया,

बहार बहुत से सैनिक कुछ लोगो को घेरे हुए खड़े थे, भवर सिंह और राजगुरु महल की चाट पैर खड़े थे, देव भी वह पहुंच गया,

भवर सिंह - क्या हुआ ह, कोनसा खतरा आ गया अब

सैनिक- महाराज ये लोग महल के अंदर चोरी से घुस आये हैं,

भवर सिंह- कोण हैं ये

उस भीड़ में से एक आदमी- महाराज हम आपके hi राजय के एक गाओं से हैं और आपके पास फर्याद लेकर आये हैं, हमे बचा लीजिये, हमारे परिवारों को बचा लीजिये,

राजगुरु- क्या हुआ ह, और ये कोनसा समय ह फर्याद करने का, और अगर बड़ी शंश्य थी तो अपने गाओं के पास के सेनिको को बताना चाहिए था,

आदमी- हमने बताया लेकिन कोई हमारी सहायता नहीं कर सका,

सैनिक- ये बकवास कर रहा ह,

देव- तुम चुप रहो और उन्हें बोलने दो, और इन पैर तलवारे क्यों तान राखी हैं, हटाओ इन्हे

देव निचे पहुंच गया और उन गाओं वालो को आराम से बैठाया,

देव के वह पहकहने से भवर सिंह और राजगुरु भी वही आ गए,

भवर सिंह- ये लोग दुश्मन भी हो सकते हैं,

देव- आप अपने hi राजय के लोगो को नहीं पहचान सकते फिर कैसे राज करेंगे,

भराव सिंह गुस्से में- देव

देव ने भवर सिंह पैर कोई धयान नहीं दिया,

देव- है आप लोग बताइये क्या हुआ,

आदमी- राजकुमार हमारे गाओं में कुछ लोग आ गए और उन्होंने हमारी बहु बेटियों को उठा लिया और हमारे जानवर भी ले गए, हमने बचने की कोशिश की तो उन्होंने गाओं के कई लोग मार दिए,

देव- आपको गाओं के मुखिया के पास जाना छाइये था, उसके पास सैनिक होते हैं

आदमी- मैं गाओं का मुखिया hi हु राजकुमार, उन लोगो ने सेनिको को मर दिया, और मेरी बेटी को ले गए, वो बहुत ताकतवर हैं, हमने दूसरे गाओं वालो से मदद मांगी लेकिन कोई मदद के लिए नहीं आया सब दर गए, इसलिए हम फर्याद लेकर यहाँ आ गए, रात हो जाने की वजहसे हमे कोई मिलने नहीं दे रहा था इसलिए हम चुपके से घुसे,

राजगुरु- कितने लोग थे वो, क्या कोई सेना थी

आदमी- नहीं राजगुरु सेना नहीं थी लेकिन 10-12 लोग होंगे हम ठीक से गईं नहीं पाए, वो हमारी लड़कियों और जानवरो को लेकर जंगल में चले गए थे,

भवर सिंह- राजगुरु एक सेना की टुकड़ी सुबह होते hi वह भेजिए,

आदमी- महाराज सुबह तक तो वो उन्हें न जाने क्या करंगे,

देव- आप चिंता मत कीजिये मैं चलता हु आपके साथ,

राजगुरु- रात में अकेले

देव- राजपरिवार का पहला कर्तव्य ह अपनी परजा की सुरक्षा करना,

इतना बोल क्र देव उन गाओं वालो के साथ चल दिया,

राजगुरु- कुछ सैनिक उन सबके साथ जाओ, और साडी जानकरी लेकर दो हमे,

गाओं महल से काफी दुरी पैर था, कुछ घंटो का सराफ था, गाओं के लोग बैल गाड़ी से वह आये थे, देव ने जल्दी से घोड़ो का इंतजाम किया और कुछ लोगो को साथ लेकर उस तरफ दौड़ पड़ा,

फिर भी वह पहुंचने में समय लग गया था, उसके बाद देव कुछ गाओं वालो के साथ उस जंगल में घुस गया, जहा वो आदमी सबको लेकर गए थे, जंगल एक दम सुमसान था, काफी समय ढूंढने के बाद किसी के रोने की आवाज उन्हें आई, देव उस तरफ दौड़ पड़ा, और जैसे hi देव वह पूछा तो देव की आँखे भर आई,

देव के पीछे सैनिक और गाओं वाले भी थे, सामने का नजारा बहुत डरावना था, गाओं की जितनी भी लड़किया थी सब वह नंगी पड़ी थी, किसी को पेड से नंगा करके बंधा हुआ था तो किसी के दोनों पेअर खोल क्र अलग अलग डिश में बंधे हुए थे, और साफ़ दिख रहा था की उन्हें बांध क्र उनके साथ दुराचार किया गया ह, सभी लड़किया मरने जैसी हालत में थी, उनके गुपतनगो से खून निकल रहा था,

गाओं वालो ने दौड़ क्र सभी पैर कपडे ढके और उन्हें खोला, वह चारो तरफ खून hi खून था, जानवर कटे हुए पड़े थे, उनके अलावा और कोई नहीं था, मतलब वो लोग जा चुके थे,

देव सबको लेकर गाओं में पंहुचा, लड़कियों के उपचार के लिए वेद आ गए, उन सभी लड़कियों में से बस एक लड़की कुछ होश में थी बहुत दरी हुई थी और बस रोये जा रही थी, गाओं वालो ने उसे थोड़ी हिम्मत बंधे,

वही देव का गुस्सा बढ़ता जा रहा था, देव उस लड़की के सामने बैठा,

देव- तुम अब सुरक्षित हो, बस एक बार ये बता दो की वो लोग कोण थे और कहा गए,

लड़की जोर जोर से रोने लगी, तो गाओं वालो ने हिम्मत दिखा क्र उन्हें शांत किया,

लड़की- हमे मर दो, हमे मर दो हम जीना नहीं चाहते, हम बर्बाद हो चुके हैं,

लड़की का पिता रोने लगा- नहीं बेटी ऐसा मत बोल तेरे सिवा मेरा ह hi कोण

तभी एक औरत बोली- अब ये जीकर भी क्या करेंगी, समाज में क्या मुँह दिखाएंगी, अब इन्हे जिन्दा रह क्र क्या मिलेगा समाज के तने, इन्हे तो मर hi जाना चाहिए,

औरत की बात से तभी पीछे से ऐसी hi कुछ और भी आवाजे आने लगी,

देव का गुस्सा बहुत बेहद चुक्का था और वो चिल्ला क्र खड़ा हुआ- बससससससस, बस करो तुम सब, तुम लोगो में कुछ इंसानियत ह या नहीं, ये लड़किया मोत से लड़ क्र जिन्दा वापस आई हैं, इनके साथ इतना बुरा हुआ ह और तुम इन्हे समाज के नियम सीखा क्र मरना चाहते हो,

औरत- राजकुमार महलो में ऐसा होता होगा की दुराचार करके उसे माफ़ कर दे लेकिन हम सामाजिक लोग हैं,

देव- ये कैसे सामाजिक लोग हो तुम, जो अपराध किसी और ने किया उसकी सजा अपनी hi बच्चियों को दे रहे हो, इनकी क्या गलती थी,

औरत- गलती किसी की भी रही हो लेकिन अब ये अपवित्र हो चुकी हैं,

देव – क्या ह पवित्रता, किसी ने इनके साथ दुराचार किया तो अपवित्र हो गई, अगर से चुप क्र किसी मर्द के साथ जाती और तुम सबको पता न चलता तो ये पवित्र रहती, इनके साथ जो हुआ उसके जिम्मेदार आप सब हैं, आप सब इनकी रक्षा नहीं कर सके, और उन हैवानो के हाथो जाने दिया इसलिए इनके साथ ये सब हुआ ह, तो क्या आप सबको सजा दी जाये, आपकी वजह से इन लड़कियों की जिंदगी बर्बाद हुई ह, तो आपको सजा में मोत दे दी जाये,

मोत का नाम सुनते hi सब दर गए,

देव- तुम एक औरत होकर दूसरी औरत के दर्द को नहीं समझ प् रही, धिक्कार ह तुम्हारे औरत होने पर, औरत की योनि नित्य करम करने और एक नै जिंदगी को इस दुनिया में लेन के लिए बानी ह, किसी जानवर के छू लेने से वो अपवातिरा कैसे हो सकती ह, जब किसी का मन भटक जाये तो वो अपवित्र होता ह, शरीर नहीं होता,

एक आदमी- अब इनसे कोण शादी करेगा, कोई इन्हे नहीं अपनाएगा,

देव- वो सब बाद में देखंगे, और अगर ऐसे मर्द इन्हे अपनाएंगे जो इनकी रक्षा नहीं कर सकते, तो अच्छा hi ह ये शादी hi न करे,

मुखिया- राजकुमार ये समय इन बातो का नहीं ह, वो लोग भाग जायेंगे,

देव तुरंत उस लकड़ी के पास बैठ गया, देव की बातो से उस लड़की में काफी हिम्मत आ गई थी,

देव- मुझे बताओ क्या हुआ था,

लड़की- वो 11 लोग थे, जिनमे 10 ने हमारे साथ ये सब किया और एक बूढ़ा बस एक तरफ बैठा हुआ था, उन्होंने हमारे जानवरो को मार दिया और कच्चा hi खाने लगे फिर आग में भून क्र खाने लगे, और उन्होंने एक सैनिक को भी पकड़ा हुआ था जिसे मार क्र भून क्र खा लिए, और हमारे साथ, वो फिर रोने लगी,

देव- हमे ये जेकरि महल तक पहुचानी होगी, और सब जगह बताना होगा की राजय में 11 नरभक्षी घूम रहे हैं, जो इंसानो को मार क्र कहते हैं, और तुम सब मेरे साथ महल चलो वह साडी जानकारी महाराज को देनी होगी,

गाओं वाले मन करने लगे, लेकिन मुखिया के समझने के कुछ लोग मान गए, और बैल गाड़िया तैयार की, इस सब में अब तक सवेरा हो चुक्का था, बाकि लड़कियों को होश तो आ चुक्का था लेकिन उनकी हालत ख़राब थी, देव ने विश्वास दिलाया की महल में अच्छे वैद से उनका इलाज करवाया जायेगा,

सभी लड़किया और गाओं के लोग महल में चल दिए, वह तक पहुंचने में उन्हें काफी समय लग गया, दोपहर का समय हो गया था, सेनिको ने आगे पहुंच क्र महल में सब जानकरी दे दी थी, पुरे महल में खबर फ़ैल गई की राजय में नरभक्षी मानव घूम रहे हैं,

भवर सिंह और राजगुरु एक सभा में बैठे हुए थे, उस सभा में बहुत घेरे मुद्दे पैर चर्चा हो रही थी, वह सिर्फ भवर सिंह राजगुरु और काम्य और एक और इंसान बैठा हुआ था, वही देव राजधानी में प्रवेश कर चुक्का था सभी को लेकर, सभी लोग जब महल के अंदर पहुंचे तो उन लड़कियों को देखने के लिए काफी आदमी औरत खड़े थे, वो सब ऐसे देख रहे थे जैसे कोई मनोरजन के लिए प्रदर्शनी निकल रही हो, सभी लड़किया शर्म और दर से अपना मुँह छिपा रही थी, वही देव का अंदर एक तूफान सा उमड़ रहा था, देव को वो पल याद आ रहा था जब उसे और निहारिका को महल से निकला गया था और ये सब लोग ऐसे hi खड़े तमाशा देख रहे थे, देव के अंदर इतना गुस्सा था की वो सब को उसी पल भसम कर देना चाहता था,

जैसे hi देव सभी लोगो को लेकर महल के सामने पंहुचा तो सेनिको ने उसे रोक दिया की महाराज किसी के साथ सभा में बैठे हुए हैं, देव गुस्से में था

देव- इससे जरुरी मुद्दा और क्या हो सकता ह,

देव गुस्से में सेनिको को दूर करने लगा तभी पीछे से लड़किया चीखने लगी, उनकी चीख सुनकर देव तुरंत उनके पास पंहुचा तो देखा लड़किया दरी हुई थी और भाग क्र देव के पीछे चिप गई,

देव- क्या हुआ तुम दर क्यों रही हो, तुम सुरक्षित हो,

लड़किया- वो वो लोग यही आ गए हैं, वो हमे मर देंगे,



लड़कियों ने जिस तरफ इशारा किया सभी लोगो के साथ देव ने उधर देखा तो वह 10 बड़े hi भयानक लोग खड़े हुए थे,
 
अपडेट-26






देव- तुम यकीन से बोल सकती हो ये वही लोग हैं,

लड़किया- जी है ये वही लोग हैं,

लड़कियों के साथ साथ गाओं के लोग भी बोलने लगे- है है राजकुमार ये वही लोग हैं, इन्होने hi सब किया ह,

गाओं का मुखिया- ये लोग तो हमसे पहले hi महाराज के पास आ गए, लगता ह ये राजमहल के hi आदमी हैं, चलो वापस अब हमारी क्या सुनवाई होगी, जब राजा के खास लोग hi अतयाचार कर्नेगे तो हम लोग कहा सुरक्षित रहेंगे,

देव को किसी की बाते सुनाई नहीं दे रही थी, उन्हें देख क्र देव को बस उन लड़कियों की हालत याद आ रही थी कैसे वो उन पैदा से बंधी हुई थी, उनके साथ हुआ अत्याचार याद आ रहा था, उन माओ का रोना और लड़कियों का दर्द से तड़पना याद आ रहा था, इधर गाओं वाले वापस मुद गए, देव उन्हें रोकने की जगह उन आदमियों की तरफ चल दिया,

देव को उधर जाता देख वो लड़किया रुक गई और देव को देखने लगी, देव उन आदमियों के सामने पहुंच गया, वो आदमी एक दूसरे के साथ हसी मजाक क्र रहे थे, देव को अपने पास आया देख उसे देखने लगे, देव की आँखों में जो गुस्सा था वो सभी को दिख रहा था, उन लोगो ने भी देव को देखा और उसकी तरफ वैसे hi अकड़ क्र खड़े हो गए, तभी उनमे से एक की नजर उन लड़कियों पैर पड़ी,

वो बोलै – अरे वो देखो रात वाली लड़किया, अरे ये तो दुबारा आ गई,

दूसरा बोलै- अरे लगता ह रात इन्हे कुछ ज्यादा hi मजा मिल गया था, फिर से अपनी मरवाने आई हैं, लेकिन हम एक बार किसी को छोड़ दे तो दुबारा नहीं छोड़ते,

अब और किसी साबुत की जरुरत नहीं थी देव को, किसी और के कुछ बोलने से पहले hi एक जोर दर मुक्का उस आदमी के मुँह पैर आया और मुक्का लगते hi वो हवा में उड़ता हुआ काफी दूर जाकर गिरा उसके मुँह से एक दर्द बहरी चीख निकल गई,

ये इतना तेजी से हुआ की किसी को कुछ समझ नहीं आया, बस वो उड़ता हुआ दिखाई दिया और गिरता हुआ, और देव का मुक्का जिस पैर खून लगा हुआ था, बाकि आदमी अपने साथी की तरफ दौड़े, उसे खड़ा किया, तो उसके मुँह से खून की धार निकल पड़ी और उसके साथ उसके आगे के सरे दन्त बहार आ गए, उसका पूरा मुँह खून से लेथ पथ हो गया,






उसकी हालत देख क्र गाओं के सभी लोग रुक गए और लड़कियों के चेरे पैर एक मुस्कान थी उस मुस्कान में बहुत गुस्सा था,

बाकि आदमी देव की तरफ दौड़ पड़े, जो सबसे आगे था देव ने उसे हवा में उठा लिया और जमीन में इतनी जोर से देकर मारा की उसकी कमर की साडी हड़िया टूट गई, उसके गिरते hi पीछे वाले एक दम रुक गए, उनके चेरे पैर एक दर सा उभर आया था, आज उन्होंने असली दर का अनुभव किया था, देव ने उस गिरे हुए आदमी की छाती पैर पेअर रखा और आगे बढ़ गया, वो लोग थोड़ेपीछे हटने लगे, लेकिन फिर उनमे से दो देव पैर कूद पड़े, देव ने एक लात उस एकाडमी के पैरो के बिच में मरी और लात इतनी जोर की थी की वो अपने ांडो कोपकाड क्र जमीन में गिर पड़ा, और दर्द से चीखने लगा और कुछ hi पल में बेहोश हो गया,






देव ने दूसरे आदमी की गार्डन में एक हाथ मारा और वो लड़खड़ाता हुआ दूर जाकर गिरा, बाकि 6 लोगो ने हथियार निकल लिए, तभी दूर खड़े सैनिक दौड़ क्र आये और देव को रोकने लगे,

सैनिक- राजकुमार ये लोग महाराज से मिलने आये हैं, आप इनपर ऐसे हुम्ला नहीं कर सकते,

देव ने गुस्से में उन सेनिको को देखा और गुस्से में चिल्ला कर बोलै

देव- इन लोगो ने इन लड़कियों के साथ जो हैवानियत की ह उसके बाद इन्हे जीने का कोई अधिकार नहीं ह, और अगर जिन्दा रहना चाहते हो तो बिच में से हाथ जाओ और दूर रहो, वर्ण कसम महादेव की सभी यही चिर क्र रख दूंगा,

देव का ये रूप देख क्र सेनिको की रूह तक कैंप उठी, वो डार्क र पीछे हाथ गए, उनमे से दो सैनिक महल के अंदर भागे महाराज को सब बताने के लिए,

इधर वो 6 लोग देव के पास पहुंच चुके थे हाथो हथियार लेकर, देव निहथा hi उनकी तरफ बढ़ गया, उन्होंने देव पैर हुम्ला कर दिया वो भी एक साथ, देव उनके हथियारों से बचने लगा, तभी उन लड़कियों में से एक लड़खड़ाती हुई आगे बढ़ी और वह पड़ी हुई एक ढल देव की तरफ उछाल दी,

लड़की- खुद को बचाओ भैया,

देव ने वो ढल पकड़ ली और उन आदमियों के वॉर रोकने लगा और बिच में मौका मिलते hi अपने मुक्को से उन पैर वॉर करने लगा, देव ने उस ढल से hi ऐसा घातक हुम्ला किया की उन सभी आदमियों की हालत ख़राब हो गई थी, सभी घायल हो चुके थे, वो सभी आदमी बहुत ताकतवर थे, लेकिन आज वो जिससे लाडे थे वो उनका बाप था, आज उन्हें अहसास हुआ की असली ताकत क्या होती ह,

कुछ hi देर में सभी आदमी जमीन पैर पड़े हुए थे, देव ने सभी को एक जगह इकठा किया, जो लोग उन लड़कियों को देखने आये थे उन्होंने देव का वो भयंकर रूप देख लिया था, उनकी आँखों ने आज वो देख लिया जिसे देख क्र शायद उन्हें नींद तक नहीं आने वाली थी,






वो बेचारी लड़किया एक साथ कड़ी रो रही थी, उनके परिवार वाले आँखों में आंसू लिए हाथ जोड़े खड़े थे,

देव ने लड़कियों को अपने पास बुलाया

देव- ये तुम्हारे अपराधी हैं, जो सजा देना चाहो तुम hi फैसला करो,

वो लड़किया घबरा कर देव को देखने लगी,

देव- नारी का अपमान करने वाले को भगवान् भी माफ़ नहीं करते, और तुम्हारे साथ मैं खड़ा हु, करो अपना फैसला,

लड़किया- मर दो इन्हे भैया मर दो इन्हे,

देव मुस्कुराया और उसने एक तलवार उठा ली और उनकी तरफ बढ़ गया, तभी पीछे से आवाज आई रुक जाओ

देव ने पलट क्र देखा तो भवर सिंह राजगुरु काम्य और उनके साथ सात्विक खड़ा हुआ था, अपने आदमियों की ऐसी हालत देख सात्विक क्रोध से भर उठा,

देव- इन्होने अपराध किया ह

भवर सिंह- उसका फैसला हम करेंगे तुहे ये अधिक रकिस्ने दिया किट ुम फैसला करो, और बिना सबूत के इनकी ये हालत क्र दी तुमने,

देव- ये खड़ी लड़किया जोअपने साथ हुसे अत्याचार की गवाही दे रही हैं, इससे बड़ा क्या सबूत चाहिए, और इन्होने खुद मन ह की इन्होने इनके साथ दुराचार किया ह,

भवर सिंह- फिर भी तुम्हे सजा देने का अधिकार नहीं ह, इनकी सजा हम तय करेंगे, इनकी सजा ये ह की इन्हे राजय से बहार क्र दिया जाये,

भवर सिंह की बात सुनकर वह खड़े गाओं वाले और लड़किया चौंक गए, देव ने गुस्से में भवर सिंह को देखा,

भवर सिंह- सेनिको इन लोगो को उठा क्र ले जाओ

सैनिक जैसे hi आगे बढे देव ने गुस्से में उन्हें देखा, वो दर कर पीछे हो गए,

देव- ये लड़किया अगर आपकी बेतिया होती तब भी इन्हे ये hi सजा मिल रही होती,

देव की बात पैर भवर सिंह गुस्से से भर गया,

भवर सिंह- तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इन मामूली लड़कियों की तुलना हमारी बेटिओ से करने की,

देव बहुत hi गुस्से में चिल्लाकर बोलै- ये मामूली नहीं हैं, इंसान हैं ये और इस धरती पैर जो पैदा होता ह सब बराबर का अधिकार लेकर आते हैं,

देव की आवाज इतनी जोरदार थी की भवर सिंह भी कैंप उठा,

देव- इनकी सजा इन लड़कियों ने तय कर दी ह और वो सजा मैं दूंगा इन हैवानो को, जिसमे दम हो रोक लो,

देव ने तलवार उठाई और उन आदमियों की तरफ घुमा वो आदमी दर से कंपनी लगे, देव ने जैसे hi तलवार चलाई तभी पीछे से एक रंगीन रौशनी का गोला देव से टकराया जिससे देव दूर जाकर गिरा और तलवार उसके हाथ से गिर गई, देव से टकराते hi गोला गायब हो गई,

ये नजारा देख क्र वह खड़े सभी चौंक गए, ये क्या चमत्कार हुआ, सबने उस रंगीन गोले को छोड़ने वाले को देखा तो वो था सात्विक, जिसके हाथो में एक रौशनी का गोला बना हुआ था,

सात्विक- एक तुमने एक भी कदम आगे बढ़ाया तो अपनी जान से जाओगे,

अब ये लड़ाई कुछ अलग रूप में आ चुकी थी,

राजगुरु- सात्विक ये क्या कर रहे हो, वो राजकुमार हैं और राजकुमार पैर हुम्ला करना राज द्रोह ह,

सात्विक- इसने hi कहा न इस धरती पैर पैदा होने वाले सभी लोग बराबर हैं, और इसने जिन लोगो पैर हुम्ला किया ह वो मेरे साथ हैं,

राजगुरु- सात्विक मैं कहता हु रुक जाओ

लेकिन सात्विक कहा सुनने वाला था,

तभी देव खड़ा हुआ और सात्विक की तरफ पलटा, उसके चेरे पैर जो क्रोध था वो बयां करना नामुमकिन था, उसके आँखे लाल हो चुकी थी, वो सात्विक की तरफ बढ़ा तो सात्विक ने फिर से वो रौशनी का गोला देव पैर फेंका लेकिन इस बार वो गोला देव से टकराया पैर देव को कोई नुकसान नहीं पंहुचा सका, बस देव दो कदम पीछे हुआ, देव फिर आगे बढ़ा, ये देख क्र सभी चकित थे लेकिन सबसे ज्यादा चकित था सात्विक उसे यकीन hi नहीं हुआ की सामने खड़ा साधारण सा लड़का उसकी शक्ति को कैसे सेह गया,

सात्विक ने कुछ मंत्र पढ़े और एक नै शक्ति को उत्पन किया और देव की तरफ फेंका लेकिन वो शक्ति देव तक पहुंचने से पहले hi किसी दूसरी शक्ति से टकराई और नष्ट हो गई, सबने उधर देखा तो सामने से भौमिक जी चले आ रहे थे, और उन्होंने उस शक्ति को रोका था,

भौमिक जी चलते हुए सीधे देव के सामने खड़े हो गए और उनकी आँखों में आंसू और प्रेम था, निस्वार्थ प्रेम, ऐसा प्रेम जो एक माँ अपने बच्चे से करती ह एक पिता अपना संतान से करता ह, भौमिक जी देव को जिन्दा देख क्र ख़ुशी से अपने आप को काबू में नहीं रख प् रहे थे, तभी पीछे सात्विक बोल पड़ा,

सात्विक- भौमिक तुम बिच में से हैट जाओ, इस लड़के ने हमारे आदमियों पैर हुम्ला किया ह

भौमिक जी- सात्विक ये तुम क्या कर रहे हो, ये देव ह हमारा देव, ये जिन्दा ह, हमे तुम्हे इस एही तो ढूंढने के लिए कहा था,

सात्विक- इसने अपराध किया ह

भौमिक जी- देव कभी कोई अपराध नहीं कर सकता, फिर भी अगर इस ेगलति हुई ह तो हम माफ़ी मांगते हैं,

देव- नहीं गुरु जी, माफ़ी मत मांगिये, अपराधी ये सब हैं, और इसकी सजा में इन्हे देकर रहूँगा,

देव ने फिर तलवार उठा ली और उन आदमियों की तरफ बढ़ा, सात्विक ने फिर देव पैर हुम्ला किया इस बार भौमिक जी ने बिच में हो रोक लिया, दोनों भाइयो में शक्ति का परदार्धन होने लगा, और वह खड़े लोग आश्चर्य और दर से कैंप रहे थे, उन्होंने इससे पहले ऐसी कोई शक्ति या चमत्कार नहीं देखा था,

इधर सब दोनों भाइयो की शक्ति देख रहे थे वही देव ने ताकवर से उन आदमियों के सर धड़ से अलग कर दिए, वह खड़ी सभी लड़किया ख़ुशी से उछलने लगी, वो जोर जोर से हसने लगी, उन्हें हस्ता देख सब उन्हें देखने लगे, फिर वो हस्ते हस्ते रोने लगी और जोर जोर से चीखने लगी, उनकी चीख में इतना दर्द था की पत्थर भी रो पड़े,

सबका धयान उधर गया, सात्विक और भौमिक ने भी उधर देखा, तो उन्हें पता चला की देव ने सबको मर दिया ह, भवर सिंह की जबान को तो लखवा मार चुक्का था, उसके मुँह से कोई शब्द नहीं निकला, वही काम्य एक तरफ कड़ी थी, राजगुरु अपने भाइयो को आपस में लड़ता देख और उनकी शक्ति देख क्र hi सदमे में थे, सौमित्र और अमरावती अपने छज्जे पैर कड़ी सब नजारा देख रही थी, वही निहारिका अपने चीता के साथ वही आ गई थी,

सात्विक- ये तूने क्या कर दिया, तू जनता नहीं ह तूने किसके आदमियों को मारा ह, इस राजय का सर्वनाश हो जायेगा, इस राजय को अब कोई नहीं बचा पायेगा,

देव- अगर ये किसी शैतान के भी आदमी होते तब भी इन्होने जो कार्य किया ह उसके लिए मैं ये hi सजा देता,

सात्विक- इसका परिणाम सब भुगतेंगे

भौमिक जी- कैसा परिणाम सात्विक, तुम्हे हुआ क्या ह, तुम अपने राजय में खड़े हो और अपने लोगो की रक्षा करने की जगह तुम उन्हें hi डरा रहे हो,

सात्विक- महाराज मैंने जो आपको बताया ह, उसमे आपका hi फायदा ह, अब आप सोच लीजिये आपको क्या करना ह, और भौमिक ये लड़का इस राजय के लिए दुर्भाग्य लाएगा, तुम सोच लो तुम्हे किस तरफ रहना ह,

भौमिक जी- अगर धरती फैट जाये और आस्मां टूट पड़े तब भी कोई चीज मुझे देव के खिलाफ नहीं कड़ी कर सकती,

दोनों भाइयो की बात सुनकर राजगुरु बोखला से गए थे,

सात्विक एक पल के लिए ठिठक गया, उसके दिमाग में हलचल हुई की उसने अपनी शक्ति का इस्तेमाल किया था लेकिन सामने खड़े लड़के को कुछ नहीं हुआ, कोई साधारण इंसान इस शक्ति को नहीं शी सकता, इसका मतलब ये कोई साधारण इंसान नहीं ह, कही ये वही तो नहीं जिसके पास वो शक्ति ह, ओह्ह ये मुझसे क्या हो गया मुझे तो इसके साथ मित्रता करनी थी, इसे अपनी तरफ करना था,

राजगुरु- शांत हो जाओ तुम दोनों, भाई होकर आपस में लड़ रहे हो,

भौमिक- मैं लड़ नहीं रहा, बस सात्विक को रोक रहा हु, ताकि वो गलत जगह अपनी शक्ति का गलत जगह इस्तेमाल न करे,

सात्विक- माफ़ क्र देना भाई, मैं क्रोध में अँधा हो गया था, महाराज मुझे माफ़ कर देना मैंने आपके बेटे पैर हुम्ला किया, लेकिन ये मेरे आदमी थे, और ये

देव – आपके आदमियों ने इस राजय की शांति भांग की ह, इन लड़कियों की जिंदगी बर्बाद की ह,

भवर सिंह- ये माफी मांग रहे हैं न, और इन लोगो को सजा तुम दे चुके हो, वो भी हमारी मर्जी के खिलाफ, अब शांति रखो,

देव कुछ बोलने वाला था तभी एक लड़का दौड़ता हुआ देव के पास आ रहा था उसे देख क्र देव चौंक गया, देव जल्दी से उसके पास पंहुचा,

देव- क्या हुआ तुम ऐसे दोड़तेहुए यहाँ सबके सामने क्यों आ गए,

लड़का- माफ़ करना राजकुमार लेकिन मैं खुद को रोक नहीं सकता था बात इतनी जरुरी ह,

देव- क्या हुआ

लड़के ने कुछ बताना शुरू किया, जिसे सुनकर देव के दन्त गुस्से में भींच गए,

देव- मैं उन्हें जान से मार दूंगा, तुम जल्दी से घोडा तैयार रखो में अभी आया,

देव तुरंत वापस मुदा और भौमिक जी से बोलै

देव- गुरु जी इन लड़कियों को मैं आपके हवाले क्र रहा हु, इनका उपचार कीजिये, जब तक मैं वापस नहीं आता ये आपके पास रहेंगी, और मुखिया आप लोग जाना चाहते हैं तो जा सकते हैं, ये लड़किया अगर आपके लिए बोझ हैं तो आज के बाद ये सब यही रहेंगी मेरी सुरक्षा में, जिनके भीतर भविष्य के लिए जो मैं कर सकता हु वो करूँगा, अभी मुझे कही जाना ह,

भौमिक जी- देव अभी मिले हो और फिर जा रहे हो,

देव- गुरु जी जाना बहुत जरुरी ह, आकर आपसे मिलूंगा, तब तक आप यहाँ सम्हाल लीजिये, फिर देव ने निहारिका को देखा, जैसे उससे आज्ञा मांग रहा हो, निहिरका ने मुस्कुरा कर आदेश दे दिया,

देव जोर से चिल्लाया- दत्ततत्टटटट

तभी चीता दहाड़ता हुआ उसके पास आ गया, चीता को देख क्र सब दर गए, देव ने उसके सर पैर हाथ फिर्या और बोलै- जब तक मैं न औ माँ के पास से दूर मत जाना समझे,

चीता ने एक दम सर झुका दिया, ये देख क्र सभी आश्चर्य से बाहर गए, देव ने तुरंत बहार के लिए दौड़ लगा दी, बहार एक लड़का घोडा लिए खड़ा, देव घोड़े पैर बैठा और पूरी रफ़्तार से दौड़ पड़ा,

जब यहाँ ये सब चल रहा था उस समय सूरज ज्वाला और अभिजीत अपनी योजना बना रहे थे, सुबह होते hi वो लोग अपनी बहेनो के कमरे में गए, सूरज अक्षरा के कमरे में गया, ज्वाला अमिता के कमरे में और अभिजीत सोमिया के कमरे में पंहुचा, तीनो भेने मजे से सोइ हुई थी, तो उनके सोने का फायदा उठा क्र वो लोग उनक ेबिस्तर में घुस गए, और उनसे चिपक क्र लेट गए, किसी को अपने पास पाकर उनकी आँख खुली और सामने अपने भियो को देख वो तीनो चौंक गई, और तीनो का एक hi सवाल था- तुम यहाँ क्या कर रहे हो,

तीनो भाई- बहेनो को प्यार देने आये हैं,

तीनो लड़कियों ने उन्हें धकेल क्र अपने अपने कमरे से बहार क्र दिया, फिर वोन अहा धोकर क्र तैयार होकर बहार आ गई और तीनो एक साथ बैठी हुई थी,

अक्षरा- आज बहुत अजीब बात हुई, सूरज भाई मेरे कमरे में मेरे बिस्टेर में घुस आये थे,

सोमिया- क्या सच में, अभिजीत भी मेरे बिस्टेर में घुस गया था,

अमिता- और ज्वाला मेरे बिस्टेर में

तीनो चौंक गई

अक्षरा- ये कोई इत्तेफाक नहीं हो सकता,

अमिता- कुछ गड़बड़ लग रही ह,

तभी तीनो भाई वह आ गए,

सूरज- कैसी हो तीनो, नींद ाची आई न, यहाँ मजा आ रहा ह न,

सोमिया- हम लोग हैं कहा, ये जगह कुछ नै सी लग रही ह,

अमिता- है ये वो जगह तो नहीं ह जहा हम पहले गए थे,

अभिजीत- ये नै जगह ह, यहाँ बहुत शांति ह, को परेशां नहीं करने वाला,

अक्षरा- हम राजकुमारिया हैं, हमे वैसे भी कोई परेशां नहीं कर सकता,

सूरज- अच्छा तुम लोग कुछ समय से दुखी रहती होगी न,

सोमिया- क्यों हम क्यों दुखी रहेंगी

ज्वाला- तुम लोगो की शादी टूट गई ह, और बी उम्मीद भी काम ह शादी होने की

तीनो बहन एक दूसरे को देखने लगी,

अभिजीत- अब हम सब जवान हो चुके हैं, एक दूसरे से अपने दिल की बाते करने में कोई ऐतराज नहीं ह, तुम हमे बता सकती हो अपने दिल की बात

अमिता- कैसी बात,

अभिजीत- हम जानते हैं तुम लोग जवान हो और जवानी में बहुत सी िछाये होती होंगी, जरुरत होगी एक साथी की, एक प्रेमी की, हमे अपना भाई मत समझो अपना दोस्त समझो,

सोमिया- ये क्या बकवास कर रहे हो

ज्वाला- अरे इसमें बकवास की क्या बात ह,

तभी वह दासी आ गई और शरबत ले आई,

सभी ने शरबत ले लिया, और पिने लगे, तीनो बहन शरबत पि रही थी और तीनो भाई खुश हो रहे थे, क्योकि उन्होंने पहले उस शरबत में नशीली और कम्यूटजक दवाई मिला दी थी, कुछ देर वह शांति रही और जब शरबत खता हो गया तो कुछ देर इंतजार करने के बाद जब शरबत का असर तीनो बहेनो की आँखों में दिखने लगा तो तीनो भाइयो में अपना देव फिर से चलना शुरू किया,

सूरज- देखो अब इस संसार में तुम्हे कोई नहीं अपनाएगा, लेकिन हम तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़ेंगे, और घर की बात घर में रहेगी,

ज्वाला- है और तुम्हे सरे सुख भी मिलेंगे,

अभिजीत- हमे बहुत अनुभव ह, हम बहुत मजा देंगे

अक्षरा नशे से की हालत में- कैसा मजा क्या बोल रहे हो,

सूरज- वही मजा जो तुम्हे चाहिए, तुम्हारे शरीर को छाइये, तुम्हारे अंदर की आग को शांत हम hi कर सकते हैं,

सोमिया- ये क्या क्या बोले जा रहे हो,

ज्वाला- अरे हम सब सेज भाई बहन तोडना हैं, डरने की जरुरत नहीं ह, किसी को कुछ पता नहीं चलेगा

अभिजीत- इसी लिए तो हम यहाँ आये हैं, ताकि किसी को कुछ पता न चले,

अमिता गुस्से में उठी और लड़खड़ा गई, और जैसे hi वो लड़खड़ाई तो ज्वाला ने तुरंत उसे पकड़ लिया और उसकी गांड को कास कर पकड़ लिया,

अमिता को झटका लगा उसने ज्वाला को देखा, तब तक अभिजीत ने सोमिया को खड़ा किया और उसकी चूचियों की तरफ हाथ बढ़ाया, इधर सूरज ने अक्षरा की चेरे की तरफ अपना चेरा बढ़ाया और उसके हॉट चूमने hi वाला तह ाकि एक जोर दर थपड की आवाज वहगंज गई, थपड लगते hi जैसे सब होश में आये हो,

अमिता ने ज्वाला को दूर धकेला और सोमिया ने अभिजीत को एक थपड जड़ दिया,

थपड लगते hi तीनो भाई गुस्से में भर गए, उन्होंने तीनो बहेनो को एक एक थपड मर िद्या जिससे वो जमीन पैर गिर पड़ी, वो तीनो भेने पहले hi नशे की हालत में थी, उनके गिरते hi उनके मुँह से दर्द भरी चीख निकल गई, चीखने की आवाज से दसिया डोडी हुई आई, और वह के हालत देख क्र चौंक गई, उन्हें कुछ समझ नहीं आया की यहाँ क्या हुआ,

सूरज ने सेनिको को आवाज लगाई, तो वह कुछ सैनिक आ गए,

सूरज- इन दसियो को ले जाओ और मजे करो, और जब तक हम न बोल इधर मत आना, चाहे कुछ भी हो जाये, सैनिक एक दूसरे को देख क्र मुस्कुरा दिए, और दसियो की तरफ बढ़ गए,

दासी उनसे डार्क र भागने लगी, लेकिन जाती भी कहा बेचारी पकड़ी गई,

वही तीनो भाइयो ने अपनी बहेनो को उठाया और एक कमरे में ले आये और बिस्टेर पैर गिरा दिया,

ज्वाला- अलग अलग कमरे में ला जाये क्या,

अभिजीत- नहीं यार यही करते हैं न एक दूसरे के सामने इससे ये जल्दी hi खुल जाएँगी,

तीनो भाई लड़कियों के पास पहचुहे और उनके उप्पेर टूट पड़े, तीनो लकडिया नशे की हालत में थी लेकिन वो पूरा विरोध क्र रही थी, तो लड़को ने उन्हें एक एक थपड और मारा,

अभिजीत- क्यों नाटक कर रही हो, उस देव से छोड़ने को तो बड़ी पागल हुई जार hi हो तुम सब, वो भी तो भाई ह, जब उससे चुद सकती हो तो हममे क्या बुराई ह, उससे ज्यादा मजा देंगे हम,

अपने भाइयो के मुँह से ऐसी बाते सुनकर तीनो बहेनो की आँखों से आंसू बह रहे थे, वो अंदर से टूट गई थी,

सूरज- तुम मान क्यों नहीं रही हो,

ज्वाला- नहीं मान रही तो जबरदस्ती छोड़ देते हैं, जब चुदाई में मजा आने लगेगा तो खुद हमारा साथ देंगी,

सूरज- बांध दो इन्हे और नंगा करो इनके शरीर को देखे तो सही कैसा,

उन्होंने तीनो लकड़ियों को बांध दिया वो नशे में पूरा विरोध नहीं क्र प् रही थी, फिर उनहेवनो ने तीनो के कपडे फाड़ने शुरू क्र दिए थे, तीनो भेने विरोध करती रही और मार कहती रही, और कुछ hi देर में बेहोश हो गई,

उनके उप्पेर पानी गिरने से उन्हें होश आया, और उन्होंने खुद को देखा तो वो बिलकुल नंगी बंधी हुई कड़ी थी, और उनके सामने उनके भाई बिलकुल नंगे होकर बैठे अपने लुंड को सेहला रहे थे, उनके सामने शराब राखी हुई थी, वो जैम छलका रहे थे और अपने लुंड हिला रहे थे, अगर वो सिर्फ सौतेले भाई होते तो शायद लड़कियों को इतना दुःख न होता, उन तीनो में उनके सेज भाई भी थे जो उन्हें देख क्र अपने लुंड को हिला रहे थे और उनके शरीर के बारे में मजे ले ले कर बाते कर रहे थे,

तीनो बहेनो का रो रो क्र बुरा हाल था, उनका नशा काफी हद तक उतर चुक्का था, रह गया था तो सिर्फ दर्द और तकलीफ,

अभिजीत- जल्दी शुरू करो न यार मुझसे सबर नहीं हो रहा, देखो इस सोमिया की चूचिया देखो कितनी बड़ी हैं, हे बिना चूड़े इतनी बड़ी हैं तो छोड़ने के बाद तो हाहाकार मचा देंगी,

ज्वाला- और इस अमिता को देखो, इसकी लम्बाई और भरी हुई जंघे, और उभरी हुई छुई आह्ह्ह्हह्ह

सूरज- और ये अक्षरा तो उप्पेर से निचे तक पूरी क़यामत ह,

अभिजीत- सबका सवाद लेंगे यार

अक्षरा- ये धरती अभी फैट जाये और तुम तीनो उसमे समां जाओ, तुम किसी के भाई नहीं हो सकते,

अमिता- तुम इंसान hi नहीं हो,

सोमिया- भगवान् तुम्हे कभी माफ़ नहीं करेगा,

अभिजीत- जब तुम लोगो को मजा आने लगेगा तो तुम खुद भगवान् से हमारी शिफारिश करोगी,

सूरज- तुम तीनो उस देव से बहुत चिपकती थीं ा, आज के बाद तुम सिर्फ हमसे चिपकेगी, और फिर हम उस देव की बहन रीवा और उसकी माँ निहारिका को अपनी रखैल बांयेंगे,

अभिजीत- मैं उस रीवा को छोडूंगा,

ज्वाला- मुझे वो निहारिका चाहिए,

सूरज- तीनो मिकर छोडनेगे, खूब रगड़ रगड़ क्र हहहहहहह,

तीनो भाई उठे और लड़कियों की तरफ बढ़ गए, तभी बहार से किसी के चीखने की आवाज आई, तीनो भाई चौंक गए, तभी एक सैनिक दौड़ता हुआ अंदर आया,

सूरज- तेरी हिम्मत कैसे हुई अंदर आने की,

वो सैनिक कुछ बोल पता उससे पहले hi एक तलवार उसके पीछे से घुसी और सीना चिर गई,



वो नजारा देख क्र तीनो भाई घबरा गए, और जैसे hi वो सैनिक गिरा और सामने जो आया उसे देख क्र वह सभी की हालत ख़राब हो गई, क्योकि सामने जो खड़ा था वो था,
 
अपडेट-27




हहहहहहह अरे वह क्या भेतरीन नजारा ह आओ रे अंदर आओ देखो यहाँ क्या चल रहा ह, देखो भवर सिंह के परिवार में क्या हो रहा ह,

सूरज- सेनिको

आदमी- सब मर चुके हैं,

सूरज- कोण हो तुम

आदमी- प्रताप सिंह का बीटा रविंद्र, तुम सबकी मोत,

सूरज और ज्वाला जल्दी से अपनी तलवार उठाने दौड़े लेकिन तभी कुछ और लोग और आ गए, उन्होंने अपनी तलवारो से सभी को घेर लिया, ये थे प्रताप सिंह के बेटे सुरेंद्र सोमेंद्र भानु और संभु,

प्रताप सिंह के जासूस लगातार भवर सिंह के राजय में नजर रखे हुए थे, और जब उन्होंने सूरज ज्वाला और अभिजीत को अपनी बहेनो के साथ और कुछ hi सेनिको के साथ जाते देखा तो तुरंत प्रताप सिंह को खबर भिजवा दी, प्रताप सिंह के बेटे तुरंत एक सेना की टुकड़ी लेकर निकल गए, और इधर जासूस लगातार पीछे लगे हुए थे, और जासूसों की वजह से वो सब वह पहुंच गए, और जब इन तीनो भाइयो ने सेनिको के हवाले दसियो को किया तो सरे सैनिक लापरवाह हो गए, और अपने हथियार छोड़ क्र दसियो के साथ दुराचार करने के लिए उत्साहित हो गए और तभी रविंद्र और उसके भाइयो ने सेना सहित उन पैर हुम्ला कर दिया और सभी सेनिको को मर दिया और दसिया को पकड़ लिया,

सूरज- रविंद्र अब हमारी क्या दुश्मनी ह, तुम्हे कुछ करना ह तो देव के साथ करो उसी ने तो तुम्हारे भाइयो को मारा ह,

रविंद्र- हैट भेनचोद, तुम सब मरोगे और आज असली मजा आएगा, तुम सबके सामने तुम्हारी भेने छोड़ेंगी,

सुरेंद्र- ये सेल तो अपनी hi बहेनो को छोड़ने के चक्कर में हैं, लगता ह सेल बलात्कार करने वाले हैं,

भानु- सालो में भवर सिंह का गन्दा खून ह न,

तीनो बहेनो का रो रो क्र बुरा हाल था, अभी तक उनके hi भाई उनकी इज्जत लूटने को उतारू थे लेकिन अब जो सामने खड़े थे वो तो पुरे हवन थे, उन्हें अपनी मोत साफ़ साफ़ दिख रही थी, उन्होंने अपनी जिंदगी की डोर को टूट ते हुए महसूस क्र लिया था,

अभिजीत- हमने तो तुम्हारे पिता की मदद की थी उस निहारिका को पाने में, हम तुम्हारे साथी हैं, तुम्हे हमारी भेने चाहिए तो ले जाओ हम कुछ नहीं करेंगे, तुम जो चाहे करो, सूरज और ज्वाला ने भी है में है मिले,

तीनो बहेनो ने नफरत भरी नजरो से उन्हें देखा,

रविंद्र- इन तीनो को तो हम तुम्हारे सामने hi छोड़ेंगे और फिर हमारे सरे सैनिक इन्हे छोड़ेंगे, उसके बाद पूरी सेना इनकी इज्जत की धजिया उड़ाएंगी, लेकिन तुम तीनो का अलग hi इंतजाम किया जायेगा, तुम तीनो की गांड मरी जाएगी, हमारी सेना में बहुत सरे सैनिक तुम जैसे नामर्दो की गांड मरने के लिए उतावले रहते हैं,

फिर उन्होंने तीनो भाइयो को वही बांध दिया और वो लड़कियों के पास पहुंचे,

रविंद्र- तुम्हे दर तो नहीं लग रहा मेरी जान, तुम तीनो को ये उतना मजा नहीं दे पते जितना हम देंगे और हमारे सैनिक देंगे,

अक्षरा- हमने तो अपनी जिंदगी तभी ख़तम मान ली थी जब इन हैवानो ने हमे नंगा किया और छुआ था, अब तुम सब हमारे साथ कुछ भी कर लो कोई फरक नहीं पड़ता, हम अब जिन्दा hi नहीं हैं, लेकिन ये बात अच्छे से याद रख लेना जब वो आएगा और वो जरूर आएगा, तब तुम्हे अहसास होगा असली दर का,

रविंद्र- इस बार जब वो आएगा तो उसकी मोत मेरे हाथो होगी, वो मेरा तांडव देखेगा,

अक्षरा- हहहहहह मोत उसकी मोत हहहहहहहहहह , तांडव क्या होता ह वो उसने दिखाया था उस युद्ध में, तेरा बाप और तेरा ये भाई तो वह था न, इसने अपनी आँखों से देखा था न वो क्या कर सकता ह, जब उसने वो युद्ध लड़ा था तब तो वो लड़ना भी नहीं चाहता था, लेकिन अब तुमने उसकी बहेनो के साथ बलात्कार करने का विचार बना रहे हो, सिर्फ इसी विचार के लिए वो तुम सबको ऐसी मोत देगा की तुम अगली बार जनम भी नहीं लेना चाहोगे,

भानु- बहुत बोलती ह, सबसे पहले इसे hi छोड़ेंगे, इतना छोड़ेंगे की ये मर जाये,

भानु आगे बढ़ा तभी बहार से किसी के चीखने की आवाज आई,

रविंद्र- संबु देख क्या हुआ कही उन दसियो के चक्कर में सैनिक आपस में न लड़ पड़े, सैनिक ज्यादा हैं और दासी काम,

संभु बहार गया, बहार से आवाजे और तेज आने लगी, तो सुरेंद्र बहार को गया और तभी संबु दौड़ता हुआ आया और सुरेंद्र से टकरा गया,

रविंद्र- क्या हुआ ऐसे पागलो की तरह क्यों डोडा आ रहा ह,

संभु दर से कांपते हुए- वो आ गया ह, वो आ गया ह,

रविंद्र- कोण आ गया ह, तू दर क्यों रहा ह, क्या हुआ

अक्षरा- तुम सबका बाप आ गया ह,

रविंद्र गुस्से में अक्षरा के पास आया और उसके बाल पकडे तभी एक सैनिक दरवाजे से उड़ता हुआ अंदर आया और रविंद्र के उप्पेर गिरा, और दरवाजे पैर खड़ा था देव खून से लतपथ, वो खून में नहाया हुआ था,

फ़्लैश बैक….

जब घूमने जाने की बात पैर तीनो भाई खुश हुए तो देव को शक हो चुक्का था इसलिए उसने अपना एक आदमी तीनो भाइयो के पीछे जासूसी के लिए लगा दिया था, और जब वो लोग बताये हुई मंजिल की जगह दूसरी जगह चले गए तो वो आदमी उनके पीछे वही पाउच गया और महल के अंदर hi घुस गया, और जब रात में तीनो भाई अपनी बहेनो को छोड़ने की योजना बना रहे थे तो उसने सुन ली और वो मौका देख क्र वह से निकल गया, वो पैदल आया था इसलिए वापस आने में समय लग गया, और रात में देव महल में था नहीं, जैसे देव वापस आया तो उसने तुरंत देव को जानकारी दी, देव तुरंत वह से घोडा लेकर यहाँ के लिए निकल गया लेकिन जब वो इस महल तक पूछा तो प्रताप सिंह की सेना के घोड़े उसे दिख गए, इसलिए उसने अपने घोड़े को दूर रोका और चुप क्र वह पंहुचा, जब वो नजदीक आया तो देखा, प्रताप सिंह के सेनिको ने यहाँ के सेनिको मो मर दिया और दसियो के साथ दुराचार करने की कोशिश कर रहे थे,

जो नजारा देव रात देख क्र आया था उससे देव का दिमाग गुस्से से आग बबूला हुआ पड़ा था और यहाँ भी सामने वैसा hi नजारा होने जा रहा था, देव गुस्से में आप खो बैठा और उसने सेनिको के हथियारों में से एक गदा उठा ली, और उन के बिच में कूद पड़ा, वो बस गदा को घुमाये जा रहा था, देव को फरक नहीं पद रहा था गदा किसको कहा लग रही ह, लेकिन जिसको भी एक बार गदा लग जाती वो सीधा नरख को सिधार जाता, दसियो को छोड़ क्र सैनिक देव पैर टूट पड़े, जिससे दसिया एक तरफ चुप गई, कुछ hi देर में देव ने आधे से ज्यादा सैनिक मार गिराए, कुछ सैनिक भागने लगे लेकिन देव ने किसी को भागने नहीं दिया, देव के हाथ में जो हथियार आ रहा था वो बिना किसी जानकरी के बस घुमाये जा रहा था, देव की ताकत और फुर्ती इतनी ज्यादा थी की कोई उसके करीब भी नहीं आ प् रहा था,

अब कुछ hi सैनिक बचे तो देव ने हथियार फेंक दिया और हाथो से सबको मरने लगा, सेनिका का खून उसके शरीर पैर गिर रहा था, तभी उसने एक सैनिक का हाथ उखड लिया और तभी वह संभु आया, देव को इस हालत में देख वो दर से कंपनी लगा और उलटे पाव भाग लिया,

अंदर आते hi देव ने जब तीनो बहेनो को नंगे बंधे देखा तो उसका गुस्सा और बढ़ गया, उसने क्रोध में जलती हुई आँखों से सबको देखा और उसके सामने आ गया सोमेंद्र, और शायद उसके जीवन की ये सबसे बड़ी गलती थी, जिसका पास्चतवा प्रताप सिंह को होने वाला थे, देव ने एक जोर दर घुसा सोमेंद्र की छाती में मारा, घुसा लगते hi ऐसा लगा जैसे देव का हाथ सोमेंद्र की छाती को फाड़ क्र बहार निकल गया हो, सोमेंद्र के मुँह से खून की फुहार छूट गई,

देव इतने पैर भी शांत नहीं हुआ उसने सोमेंद्र को हवा में उठाया और अपने घुटने पैर पटक दिया जिससे उसकी कमर की हड्डी भी टूट गई, सोमेंद्र ने वही अपने प्राण त्याग दिए, भानु देव की तरफ आया तो एक मुक्का उसके मुँह पैर पड़ा और मुक्का लगते hi वो दीवार से जा लगा और बेहोश हो गया, देव का ये खूंखार रूप देख क्र संभु ने भानु को कंधे पैर उठाया और बहार को दौड़ लगा दी, सुरेंद्र की समझ में कुछ नहीं आ रहा था,

इधर देव रविंद्र की तरफ बढ़ा, रविंद्र ने देव पैर वॉर किया लेकिन देव ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे जमीन में पटक दिया और उसकी छाती पैर अपना पेअर रख क्र उसके हाथ को खींचने लगा, रविंद्र दर्द से चिकने लगा, उसकी चीख इतनी दर्द भरी थी की सुनने वाले की आत्मा तक कैंप जाये, लेकिन देव के कानो तक उसकी चीख नहीं पहुंच रही थी वो अपने क्रोध में पागल हुआ जा रहा था, और उसी क्रोध में उसने रविंद्र का हाथ उखड लिया,

ये देख क्र सुरेंद्र ने भी बहार को दौड़ लगा दी, इनके सरे सैनिक मरे जा चुके थे, सुरेंद्र संभु और भानु बचे थे, भानु बेहोश था, इसलिए संभु उसे घोड़े पैर लड़ क्र भाग लिया, पीछे पीछे सुरेंद्र भी भाग गया,

जब दसियो ने उन्हें भागते देखा तो वो अंदर की तरफ भागी, अंदर का नजारा देख वो और दर गई, उन्होंने दौड़ क्र तीनो लड़कियों को खोला, दसिया खुद बेचारी नंगी हालत में थी, लेकिन वो राजकुमारियों की सच्ची सेवक थी, जो अपनी इज्जत की परवाह किये बिना भी राजकुमारियों की इज्जत को ढकने के लिए चादर उठा क्र उन पैर ढकने लगी,

वही देव रविंद्र की छाती चढ़ क्र बैठा हुआ था और उसके मुँह पैर मुक्के बरसाए जा रहा था, रविंद्र का जबड़ा टूट चुक्का था वो लहू लुहान पड़ा हुआ था, उसमे कोई जान नहीं थी,

अक्षरा दौड़ क्र देव के पास पहुंची

अक्षरा- देव रुक जा भाई रुक जा वो मर गया ह,

देव- इन्हे नारी का सम्मान करना नहीं आता मैं इन्हे आज सिखाऊंगा नारी का सम्मान कैसे किया जाता ह,

अमिता- रुक जा देव रुक जा, अब वो अगले जनम में सिख क्र hi पैदा होगा,

देव की नजर तीनो भाइयो पैर पड़ी, जो बंधे हुए थे नंगे, लेकिन सामने का नजारा देख क्र उनका पिशाब निकल गया था, सामने उन्हें अपनी मोत दिख रही थी वो भी इतनी भयानक की उसके बारे में सुनकर hi आदमी मर जाये,

देव उठा और तीनो की तरफ चल दिया, जब तीनो बहेनो ने देखा की देव सूरज ज्वाला और अभिजीत की तरफ जा रहा ह तो वो समझ गई की इनकी भी मोत पक्की ह,

अक्षरा ने तुरंत अपनी पकड़ी हुई चादर छोड़ दी और देव से लिपट गई,

अक्षरा- रुक जा देव रुक जा

देव- नहीं इन्हे जीने का कोई हक़ नहीं ह,

सोमिया भी पीछे से देव के लिपट गई,

अमिता- रुक जाओ देव हमारे लिए रुक जाओ, मोत इनकी सजा नहीं ह,

देव रुक गया,

अमिता दसिया से- तुम सब बहार जाओ,

साडी दासी बहार चली गई,

अमिता आगे बढ़ी,

अक्षरा और सोमिया की समझ में कुछ नहीं आया अमिता क्या करने वाली ह,

अमिता- इन सभी ने आज हमारी आत्मा को मर दिया ह, इन्हे बहन छोड़ने का शोक ह न, इनके दिमाग में शक था की हम देव के साथ चुद जाएँगी, इन्होने हमारे शरीर को छूकर हमारे अंदर से किसी भी रिश्ते को मर दिया ह, अब ये देख्नेगे की जब औरत के अंदर की आत्मा मरती ह, जब औरत के सभी रिश्ते मरते हैं तो वो क्या कर जाती हैं,

अमिता ने अपने उप्पेर ोधी हुई चादर उतर क्र फेंक दी,

अमिता- देखो ये खूबसूरत जंघे और ये उभरी हुई छूट, देखो अपनी बहन को

इतना बोल क्र अमिता देव के नजदीक गई और अपने शरीर को उसके खून में भीगे शरीर से चिपका दिया और अपने हॉट देव के होतो पैर रख दिए, ये देख क्र अक्षरा और सोमिया चौंक गई, वही तीनो भाई दर की वजह से सहमे हुए थे,

देव ने अमिता को अलग किया,

देव- ये क्या कर रही हो आप,

अमिता- माफ़ करना देव मैंने तुमसे तुम्हारी मर्जी नहीं पूछी, लेकिन ये hi मेरी मर्जी ह, देखो कमीनो आज से ये खूबसूरत जंघे और छूट देव की हो गई, इस पैर सिर्फ देव का अधिकार हो गया ह, तुम लोग बहन को भाई से छुड़वाना चाहते थे न तो ये बहन अपने भाई से छुड़ेगी, देव से छुड़ेगी,

देव आश्चर्चकित सा देख रहा था तभी सोमिया भी आगे बढ़ी और नंगी हो गई और देव के सामने पहुंच गई,

सोमिया- सही कहा अमिता, ये लोग जो करना चाहते थे अब वो होगा लेकिन हमारी मर्जी से होगा, देखो नामर्दो देखो ये खूबसूरत बड़ी बड़ी चूचिया आज से देव की हो गई अब तुम hi इनका नाप लेकर बताना की देव से छोड़ने के बाद ये कितनी बड़ी हुई हैं,

सोमिया ने भी देव के होतो से हॉट मिला दिए,

अक्षरा जो पहले से hi नंगी कड़ी थी,

अक्षरा- तुम्हे मैं उप्पेर से निचे तक क़यामत लगती हु न तो देखो ये क़यामत आज से देव के लुंड के निचे रहेगी और देव अब से रोज तुम्हारी बहेनो को छोड़ेगा, और तुम्हारी भेने उछाल उछाल क्र देव उसके लुंड से छोड़ेंगी, और तुम तीनो देखोगे जैसे अब देखोगे,

अक्षरा ने तो कमल hi कर दिया था उसने अपनी गांड देव के लुंड पैर रागादि और तीनो बहियो की तरफ देख क्र मुस्कुराई, फिर पलट क्र देव के होतो पैर अपने हॉट रख दिए और उन्हें चूसने लगी,

देव- लेकिन ये सब गलत ह

अमिता- गलत तो वो था जब इन सबने साजिश करके निहारिका माँ को उस जल्लाद प्रताप सिंह के हवाले क्र दिया था, गलत वो था जब इन सबने साजिश करके तुम पैर इल्जाम लगवा क्र महल से बहार निकलवा दिया,

सोमिया- गलत वो था जब इन सबने मिलर तुम दोनों को मरने की कोशिश की, गलत वो था जब इन्होने अपनी बेटियों का सोडा उस प्रताप सिंह के साथ कर दिया,

अक्षरा- गलत वो था जो ये करने जा रहे थे, और वो प्रताप सिंह के बेटे हमारे साथ करते, आज इन्होने हमारी आत्मा को hi मर दिया, और जब आत्मा hi मर जाती ह तो उसका कोई रिश्ता नहीं रहता, ऐसे hi हमारा कोई रिश्ता नहीं बचा ह, इन्होने कहा था की अब हमारी शादी नहीं होगी और ये हमारी जरुरत पूरी कर्नेगे, अब हमे किसी की जरुरत नहीं ह,

अमिता- क्या तुम हमे अपनाओगे, क्या तुम हमारे साथी बनोगे,

देव- वो बाद की बात ह लेकिन अगर ये सब किसी को पता चला तो

सोमिया- ये किसी को नहीं बताएँगे, अगर ये बताएँगे तो इन्हे जवाब देना होगा इन्होने हमारे साथ क्या किया,

देव ने तीनो बहेनो को अपने गले से लगा लिया, तीनो नंगी hi देव से लिपटी हुई थी, देव का एक हाथ अमिता की गांड पैर था और दूसरा हाथ सोमिया की गांड पैर, देव ने तीनो भाइयो की तरफ देखा और उसकी आँखों में एक चमक थी, जैसे उसने अपनी मंजिल प् ली हो,

अक्षरा- देव तुम यहाँ पहुंचे कैसे, तुम्हे कैसे पता हम यहाँ हैं और हमारे साथ कुछ गलत हो रहा ह,

देव- बाद में बताऊंगा फ़िलहाल तुम कपडे फेनो और यहाँ से निकलो,

अमिता ने दसियो को बुलाया, दसियो ने उनके लिए नहाने और कपड़ो का इंतजाम कर दिया था, वो लोग नाहा धो क्र बैठ गए, अब तक अँधेरा हो चुक्का था,

देव- हमे महल जाना चाहिए,

सोमिया- रात में जाना ठीक नहीं ह, हम सुबह निकलनेगे,

फिर सबने मिलकर वह मरे गए सभी सेनिको की लाशो को और सोमेंद्र और रविंद्र की लाश को उनके घोड़ो पैर बांध क्र घोड़े भागे दिए, घोड़ो की आदत होती ह अपने घर वापस जाने की,

इन्होने तीनो भाइयो को खोला नहीं ऐसे hi बंधे रहने दिया नंगे hi,

रात में तीनो भेने एक दूसरे से लिपटी हुई बैठी थी, और रोये जा रही थी, देव आस पास का सुरक्षा का जायजा लेने गया था, दसिया खुद परेशां और दुखी थी लेकिन फिर भी वो काम कर रही थी,

अमिता- ये क्या हो गया, ऐसा लगता ह जैसे हमारी पूरी दुनिया hi उजाड़ गई हो, अचानक hi ये सब कैसे हो गया,

सोमिया- सही कहा मुझे नफरत हो रही ह ज्वाला से, वो दोनों फिर भी सौतेले थे लेकिन वो तो सागा भाई था, उसने ये सब की

अक्षरा- ये सब अचानक नहीं हुआ ह, हम तीनो जानते हैं उनकी नजर हमेशा से हमारे लिए गन्दी थी, वो कभी हिम्मत नहीं कर पाए थे, देव के लिए उनकी नफरत इतनी ज्यादा थी की वो उसके बदले हमे शिकार बनाने चल दिए,

अमिता- मैं उन्हें कभी माफ़ नहीं करुँगी, मैं महाराज से इसकी शिकायत करुँगी,

सोमिया- है मैं माँ को बताउंगी,

अक्षरा- कोई फायदा नहीं होगा, वो अपने बेटो को बचने के लिए हमारी बलि चढ़ा देंगे, और अगर हम कुछ बताने जायेंगे तो ये लोग हमारे बारे में भी बता देंगे की हमने देव के साथ क्या किया,

अमिता- अगर हमने घर नहीं बताया तो ये फिर से कुछ कर सकते हैं,

सोमिया- वो तो घर जाकर सोचेंगे लेकिन जो हमने देव के साथ किया क्या वो सही था, देव भी हमारा भाई ह, अपने hi भाई के साथ ये सब गलत नहीं ह क्या,

अक्षरा- क्या तुमने कभी देव को अपना भाई मन था,

दोनों ने न में सर हिलाया

अक्षरा- जब तुमने दिल से कोई रिश्ता नहीं मन तो उस सामजिक रिश्ते की दुहाई देकर खुद की जिंदगी क्यों बर्बाद क्यों करनी, वो रिश्ता बनाओ जो हमारा दिल चाहता ह,

ये सब तो अपने साथ हुए व्यव्हार का शोक मन रहे थे वही राजमहल में भी कुछ हो रहा था,

जब देव वह से निकला था तो उसके निकलते hi.

भवर सिंह- ये सब क्या हो रहा ह मेरे महल में, क्या यहाँ के राजा का दर ख़तम हो गया ह, जो कोई भी आकर अपनी मर्जी से फैसला कर देता ह,

राजगुरु- महाराज पहले यहाँ से चलते हैं, और एक सभा बुलाते हैं और आराम से बैठ क्र उस पैर चर्चा करते हैं,

भवर सिंह ने सबको देखा, वो बहुत कुछ करना चाहता था लेकिन सात्विक और भौमिक की शक्तियों ने उसे इतना प्रभावित किया की उसके दिमाग में वो शक्ति पाने कीइच्छा जग उठी,

राजगुरु- सात्विक और भौमिक तुम भी सभा में आओ, हमे बहुत कुछ बाते करनी ह,

भौमिक जी- नहीं भैया, पहले मुझे इन लड़किया का उपचार करना ह, मैं इन्हे लेकर अपने घर जार है हु वह इनका उपचार करूँगा,

भवर सिंह- क्या ये राजा के आदेश से भी ज्यादा जरुरी ह,

भौमिक जी- है जरुरी ह, इनका जीवन सबसे ज्यादा जरुरी ह,

निहारिका- महात्मा भौमिक जी इन लड़कियों को मेरे कमरे में भिजवाइए और इनका क्या उपचार होना ह वो यहाँ के वैद को बताइये, इनका उपचार मेरे सामने होगा,

निहारिका की बात सुनकर सब शांत हो गए और लड़कियों को निहारिका ले जाने लगी, गाओं वाले अभी भी वही खड़े थे,

निहारिका- आप सब चाहे तो यही रुक सकते हैं, या वापस जा सकते हैं, देव के वापस आने के बाद आपका जो नुक्सान हुआ ह उसकी भरपाई करवा दी जाएगी, और ये लड़किया अब वह वापस नहीं जाएँगी जब तक ये खुद न बोल दे, अब से ये यही रहेंगी,

निहारिका ने ये बात आदेश की तरह बोली थी, आज पहेली बार वो अपने अधिकार का इस्तेमाल किया था, जिसके सामने भवर सिंह कुछ नहीं बोल सका,

गाओं वाले वापस चले गए, उन्हें संतोष था की उनके अपराधी मरे गए, कुछ देर बाद सभा बैठी हुई थी, जिसमे भवर सिंह राजगुरु स्तविक भौमिक काम्य सौमित्र और सेनापति और राजय के कुछ बड़े लोग बैठे हुए थे,

भवर सिंह- राजगुरु देव ने हमारी आज्ञा का उलंघन किया ह, उसे सजा तो मिलनी छाइये,

भौमिक- सजा फिर से सजा, आप लोग कभी नहीं बदलेंगे, लेकिन इस बार मैं खड़ा हु देखता हु देव को कोई कैसे आँख भी उठा कर देखता ह,

राजगुरु- शांत हो जाओ भौमिक कुछ नहीं किया जार है

सात्विक- महाराज माफ़ करना गलती मेरिट hi, मेरे साथियो ने अपराध किया था, उन्हें सजा मिलनी hi चाहिए थी, मैंने क्रोध में आ क्र देव पैर हुम्ला कर दिया, भौमिक मेरे भाई मुझे माफ़ कर दे मैंने तुझ पैर भी हुम्ला किया,

राजगुरु- अब सही ह, ये सिद्ध हो गया की वो अपराधी थे और उन्हें सजा मिल गई, महाराज अगर आप इस मुद्दे पैर देव का विरोध कर्नेगे तो परजा आपके खिलाफ हो जाएगी, ये देव का साथ देने का समय ह,

काम्य- राजगुरु ठीक बोल रहे हैं महाराज, देव ने कुछ गलत नहीं किया ह, वो अपराधी थे उन्हें सजा मिल hi गई ह,

भवर सिंह- ठीक ह मैं इस बार मान जाता हु,

राजगुरु- सात्विक तुम यहाँ जिस मुद्दे पैर बात करने आये थे वो बताओ,

सात्विक- भैया मुझे ऐसी शक्ति के बारे में पता चला ह जो इस संसार का अस्तित्व hi बदल सकती ह,

भवर सिंह- कैसी शक्ति

सात्विक- एक समय पैर एक राजा हुए थे राजा भैरव

भैरव का नाम सुनते hi राजगुरु और भवर सिंह के कान खड़े हो गए,

भवर सिंह- तुम भैरव के बारे में क्या जानते हो,

सात्विक- सब कुछ

भवर सिंह- ये सभा यही ख़तम की जाती ह, राजगुरु आप सात्विक और भौमिक को लेकर हमारे सभा कमरे में आओ,

भवर सिंह उठ कर चला गया और सभा ख़तम हो गई, उसके ीचे राजगुरु सात्विक और भौमिक भी थे, भवर सिंह के कमरे में काम्य और भवर सिंह बैठे हुए थे,

भवर सिंह- अब बताओ सात्विक क्या जानते हो, मुझे सब बताओ

सात्विक- राजा भैरव वो इंसान जिसने अमरता प्रपात की थी,

भवर सिंह- लेकिन कैसे की थी,

सात्विक- अब से हजारो वर्षो पहले भैरव ने बहुत कड़ी तपश्या किट hi और भगवान् को प्रसन्न किया था, और उसने ये तीन बार किया था, और जब भगवान् धरती पैर आये तो हर बार उनकी शक्ति का एक अंश यहाँ इस धरती पैर रह गया, भगवान् की ऊर्जा का एक मात्रा रत्ती भर का अंश भी महा शक्ति शैली था, तो इस हिसाब से तीन अंश धरती पैर रह गए,

भवर सिंह- कहा ह वो अंश कहा ह वो शक्ति,

सात्विक- उन तीन शक्तियों में से एक का आधा आधा भाग मुझमे और भौमिक में ह, हम जिस रौशनी की तलाश में गए थे वही रौशनी hi वो शक्ति थी, और हम अनजाने में hi उस शक्ति तक पहुंच गए थे,

सात्विक की बात सुनकर भवर सिंह काम्य और राजगुरु तीनो hi चौंक गए,

भवर सिंह तो ख़ुशी से फुला नहीं समां रहा था, उसे अहसास हो गया की जल्दी hi वो शक्ति उसे मिल सकती ह,

भवर सिंह- और बाकि शक्तिया,

सात्विक – दूसरी शक्ति आपके राजय में

सात्विक इतना hi बोल पाया था की उसके दिमाग में आवाज आने लगी जैसे भौमिक उसके दिमाग में घुस क्र उससे कुछ बोल रहा हो,

सात्विक ने भौमिक को देखा और भौमिक ने बिना मुँह खोके hi सात्विक से बात करनी शुरू क्र दी उसके दिमाग में hi,

भौमिक- बस सात्विक आगे मत बताना, उसका नाम मत लेना, अगर उसका नाम लिया तो सब अनर्थ हो जायेगा, ये सब उसके शत्रु बन जायेंगे, उसके पास से शक्ति पाने के लिए ये कुछ भी कर सकते हैं,

सात्विक ने भौमिक की बात समझ ली, और वो ये hi चाहता था भौमिक उस पैर भरोसा करे ताकि देव उसके साथ आ सके, तो उसने भौमिक का भरोसा जीतने के लिए इस बात को रोक दिया,

भवर सिंह- हमारे राजय में क्या सात्विक

सात्विक- आपके राजय में कही ह,

भवर सिंह- हहहहहह मैं जनता था, मैं जनता था, दादा जी ने बताया था की,

इतना बोल क्र भवर सिंह चुप हो गया, फिर उसने बात को पलटा,

भवर सिंह- कह अहो सकती ह वो शक्ति,

सात्विक- वही ढूंढने मैं आया हु महाराज,

राजगुरु- और वो तीसरी शक्ति वॉक अहा ह

सात्विक- कोई नहीं जनता ह, मुझे उसे भी तलाश करना ह, वो शक्ति तब तक किसी काम किन hi जबतक वो किसी इंसान के अंदर न जाये,

काम्य- क्या होता ह उस शक्ति से, कैसे काम करती ह वो

सात्विक- क्या क्या करती ह मैं नहीं जनता, लेकिन ितं ापता ह उस शक्ति ने मेरे अंदर ज्ञान का भंडार भर दिया ह, एक अलग hi ऊर्जा ह, जिसका नमूना आप देख चुके हो, और लगता ह भौमिक को भी वैसी hi ऊर्जा मिली ह,



भौमिक- सही बोल रहे हो, उस शक्ति में ज्ञान का भंडार ह, वो हमारी साडी कुंडलियों को जागृत क्र देती ह, बस ये हम पैर निर्भर करता ह की हम उस इस्तेमाल कैसे करते हैं,
 
अपडेट- 2



सुबह सुबह देवदूत महल से बहार पास के गाओं की तरफ निकल गया था घूमने, रस्ते में एक बहुत hi खूबसूरत लड़की उसके सामने आकर कड़ी हो गई,

देवदूत- कस्तूरी तूने मेरा रास्ता क्यों रोका,

ये ह कस्तूरी, उम्र 19 साल






देवदूत की सच्ची दोस्त, देवदूत निहारिका के अलावा सिर्फ इसी से बात करना पसंद करता ह, ये महल के आचार्य की बेटी ह, बचपन में जब सभी बच्चे आचार्य के पास शिक्षा लेने आते तो वही कस्तूरी से देवदूत की दोस्ती हो गई, कस्तूरी की एक बहन ह सुगंधा, उम्र 20 साल,





कस्तूरी- अब तू मिलने क्यों नहीं आता, पिता जी भी हमेशा तेरी प्रतीक्षा करते रहते हैं, तू आता hi नहीं,

देवदूत- समय hi नहीं मिलता,

कस्तूरी- है है तुझे बहुत राज महल के काम काज करने हैं, कोई तुझसे कुछ करवाता भी ह,

कस्तूरी की बात से देवदूत का मुँह उतर गया, कस्तूरी समझ गई वो दुखी ह,

कस्तूरी- अछ्हा माफ़ कर दे गलती हो गई, चल मेरे साथ पिता जी से मिलते हैं,

देवदूत कस्तूरी के साथ चला गया, वह एक बुजुर्ग आचार्य जी बच्चो को पढ़ा रहे थे, देवदूत ने उनके पेअर छुए और आशीर्वाद लिया, देवदूत की आवाज सुनकर सुगंधा अंदर से डोडी हुई आई, और साथ में उसकी माँ भी,

आचार्य- कैसे हो राजकुमार, बहुत दिन बाद इधर आये हो,

देवदूत- आचार्य जी आप तो राजकुमार मत बोलिये आप तो देवदूत hi बोलिये,

आचर्य- सच कहु बीटा मैंने आज तक तेरे जैसा होनहार बच्चा नहीं देखा, मैंने बहुत राजकुमारों को बहुत से बच्चो को शिक्षा दी ह लेकिन तुमसे होनहार कोई नहीं था,

देवदूत- ये बस आपको hi दिखा आचार्य जी, मेरे अपनों को नहीं,

कस्तूरी- तू हमेषा चिंता में रहता ह, जीवन को आनंद में जिया कर,

वही सुगंधा देवदूत के लिए खाने के लिए ले आई, वो देवदूत के पास कड़ी होकर उसे निहारने लगी, उसकी आँखों में देवदूत के लिए प्यार साफ़ दिख रहा था, सुगंधा की माँ भी ये महसूस कर रही थी,

कुछ देर देवदूत के वह रुकने के बाद वो वह से निकल गया अपने एकांत की तरफ, उसके जाते hi,

कस्तूरी की माँ- तुम तीनो बाप बेटी इस लड़के लिए इतने पागल क्यों हो, उसका अपने परिवार में कोई सम्मान नहीं ह, लेकिन तुम तीनो ऐसा समझते हो जैसे अगला राजा वही होगा,

कस्तूरी- माँ वो राजा का बीटा ह फिर भी इतना साधारण ह, उसके अंदर न कोई घमंड न hi किसी से नफरत ह, वो ह hi ऐसा जिससे सब पसंद करे,

कस्तूरी की माँ- तुम दोनों इतनी खूबसूरत हो, तुम अपना धयान किसी सेनापति के बेटे पैर या बड़े राजकुमारों पैर लगाओ ताकि तुम दोनों का भविष्य रानियों की तरह गुजरे,

आचर्य- मेरी बेतिया किसी बिगड़े हुए राजकुमारों की दसिया बन क्र नहीं जियेंगी

कस्तूरी की माँ- दासी बनने के लिए नहीं पत्नी बनने के लिए बोल रही हु,

सुगंधा- माँ राजाओ की पत्नी दसियो से काम कहा होती हैं,

कस्तूरी माँ- तुम्हे कुछ नहीं पता, मेरे जैसा जीवन मत जियो वर्ण साडी जिंदगी ऐसे hi गुजरा करना पड़ेगा,

कस्तूरी और सुगंधा की माँ बड़बड़ाती हुई अंदर चली गई, दोनों बहेनो के अपनी माँ की बात है क्र ताल दी,

वही महल में राजगुरु भवर सिंह के पास बैठे हुए थे, और उसे आने वाले खतरे के लिए आगाह कर रहे थे,

भवर सिंह- राज गुरु ये किस तरह का खतरा ह हमारे राजय को,

राजगुरु- महाराज, अब तक पूरी जानकरी तो मैं नहीं निकल पाया हु, लेकिन हमे महल की सुरक्षा बढ़ानी पड़ेगी,

भवर सिंह- राजगुरु क्या हमारी ताकत उस लायक नहीं की हम किसी खतरे से लड़ सके,

राज गुरु – महाराज इस संसार में अनेको शक्तिशाली लोग हुए हैं, लेकिन सभी का अंत तो हुआ hi ह,

भवर सिंह- राज गुरु कुछ ऐसा कीजिये जिससे हम हमेशा जीवित रह सके,

राजगुरु- ये कैसा सवपन देख रहे हैं महाराज, आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ ह, ये संभव hi नहीं ह,

भवर सिंह- क्यों संभव नहीं ह, कभी किसी ने कोशिश नहीं की होगी, आप इतने बड़े ज्योतिष के ज्ञाता ह, आप इतने बड़े वैद हैं आपको तो सब जानकरी होगी,

राजगुरु- महाराज किसी को सवस्थ करना और उसका भविष्य की झलकियां देखने से किसी को अमर नहीं बनाया जा सकता,

भवर सिंह- आप कोशिश कीजिये, कुछ तो ऐसा होगा जिससे मैं अमर हो सकू,

राजगुरु सोच में दुब गए, उनके दिमाग में काफी हलचल हो गई, किसी राजा का ऐसा सवपन देखना अपने आप में hi विनाश का कारन ह, राजा का मोह अपने जीवन के लिए बहुत बढ़ता जा रहा ह,

राजगुरु अपने घर लोट आये और सात्विक और भाविक से इस बारे में चर्चा की,

सात्विक- हमे इस पैर विचार करना चाहिए, अगर राजा नाराज हो जायेंगे तो हमे भी दंड दे सकते हैं,

भाविक- भैया उन्हें समझाना होगा, ऐसे विचार त्याग दे,

राजगुरु- मैं कोशिश करूँगा उन्हें समझा सकू फिर भी तुम दोनों इसकी खोज शुरू करो, इसमें क्या हो सकता ह,

बड़े भाई की आज्ञा hi उनके लिए सबसे पहले था दोनों इस काम में लग गए,

वही महल में सूरज और अभिजीत बैठे हुए थे,

सूरज- कोई मदमस्त जवान लड़की चाहिए, आज बहुत मन ह सम्भोग का,

अभिजीत- तो चलो किसी गाओं में घूम आते हैं कोई तो मिल जाएगी,

सूरज- अभिजीत मेरा मन किसी बहुत hi खूबसरूआत औरत का शिकार करने का ह,

अभिजीत- जितनी मुझे जानकारी ह, महाराज की तीसरी पत्नी निहारिका से खूबसूरत औरत इस पुरे राजय में नहीं ह,

सूरज- क्या बोल रहे हो, वो हमारी माँ जैसी लगती हैं,

अभिजीत- माँ तो नहीं ह न, और सुना ह महाराज उनके पास नहीं जाते उन्हें भी जरुरत तो होगी hi न,

अभिजीत की बात सूरज के दिमाग में घूम गई, वही अभिजीत के चेहरे पैर एक खतरनाक मुस्कराहट आ गई थी,

वही काम्य अपने कमरे के बहार बने चौबारे में खिली हुई धुप में बिलकुल नंगी होकर लेती थी, 3 औरते उसकी मालिश कर रही थी, काम्य का हर रोज का था, नहाने से पहले वो मालिश जरूर करवाती थी, उसका नंगा बदन वो भी धुप में तेल की वजह से चमक मर रहा था,

एक दासी- महारानी आपसे खूबसूरत शरीर इस संसार में किसी का नहीं होगा,

दूसरी दासी- लेकिन वो निहारिका, वो कितनी खूबसूरत ह, उस पैर तो उम्र का असर दीखता hi नहीं ह,

काम्य ने तुरंत एक थप्पड़ उस दासी को मर दिया,

काम्य- रंडी उसकी तारीफ करती ह मेरे सामने,

दासी- माफ़ करना महारानी,

काम्य- फिर से ऐसी गलती न हो,

काम्य नंगी hi उठी और कमरे के अंदर चल दी, उसकी चूचिया उसके चलने से उछाल रही थी, और गांड किसी मोरनी की तरह घूम रही थी, तभी कमरे में उसके पति कुणाल सिंह आ गया, काम्य को नंगा देख क्र एक पल के लिए ठिठक गया, कुणाल को वह देख क्र दसिया सर झुका क्र जाने लगी, तभी काम्य ने उसे रोका,

काम्य- यही कड़ी रहो और देखो मेरे पास क्या ह जो उस निहारिका के पास नहीं ह,

काम्य आगे बढ़ी और कुणाल के कपडे उतरने लगी, कुणाल उसे रोकना छटा था लेकिन काम्य जब जींद पैर होती ह उसे कोई नहीं रोक सकता, कुणाल उन दसियो के सामने झीखक रहा था, काम्य ने कुणाल को बिलकुल नंगा कर दिया, कुणाल एक सूंदर शरीर का मालिक था, लेकिन उसका लुंड आज के नार्मल इंसान जैसा hi थी लगभग 7 इंच, जो शायद आज के समय में तो काफी बड़ो में आता ह लेकिन उस समय ये छोटे हतियारो में गिना जाता था,

कुणाल के लुंड को देख क्र दसियो की हसी निकल गई, लेकिन काम्य के गुस्से से दर क्र उन्होंने अपनी हसी को रोक लिया,

काम्य कुणाल को बिस्टेर पैर लिटा क्र उस पैर चढ़ गई और अपने हाथ से लुंड पकड़ क्र अपनी छूट में घुस लिया, लुंड एक बार में hi पूरा छूट में घुस गया, काम्य उसके उप्पेर कूदने लगी,

काम्य- ये सुख ह उस निहारिका के पास, मैं महारानी हु और वो दासी, और दासी की सुंदरता किसी काम की नहीं होती, वो बरसो से प्यासी ह और प्यासी hi रहेगी,

काम्य बहुत जोश में कूद रही थी, काम्य का ये जोश कुणाल बर्दास्त नहीं क्र पाया और कुछ hi देर में उसकी हालत ख़राब हो गई, उसका शरीर कपङे लगा वो काम्य को रोकना छटा था लेकिन काम्य पैर जूनून सवार था, अब कुणाल के लिए मुसीबत हो गई थी, एक तो काम्य अभी शांत नहीं हुई थी और कुणाल झड़ने वाला था दूसरा काम्य के अंदर झड़ना मतलब अपनी मोत को दावत देना था, काम्य का नियम था उसके अंदर नहीं झड़ना,

कुणाल से जब रुकना नामुमकिन हो गया तो उसने जबरदस्ती काम्य को अपने उप्पेर से धकेला और अह्ह्ह्हह्ह ahhhhhhhhhhh करके लुंड की धार मरने लगा, काम्य बिस्टेर से निचे गिर गई, हवस और गिरने की वजह से उसका गुस्सा सातवे आसमान पैर पहुंच गया, इधर उन दासी के चेरे पैर हसी थी जिसे वो बड़ी मुश्किल से दबाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उनकी किस्मत ख़राब थी काम्य ने वो मुस्कराहट देख ली और गुस्से में तलवार उठा क्र उस दासी को गार्डन पैर वॉर क्र दिया जिसने निहारिका को सूंदर बताया था,

बाकि दोनों दसिया तुरंत काम्य के पैरो में गिर गई,

काम्य- उठो और मुझे शांत करो, वर्ण तुम दोनों भी ऐसे hi यहाँ तड़प रही होगी, दोनों दसिया तुरनत काम्य को बिस्टेर पैर ले गई और काम्य की टैंगो को खोल क्र उसकी छूट को चाटने लगी, दूसरी काम्य की चुच्यो को चूसने लगी, उनकी आँखों में आंसू थे, अपने सहेली को मोत से तड़पते देख क्र और अपनी मोत के दर से उनका शरीर कैंप रहा था, लेकिन फिर भी वो जल्दी से जल्दी काम्य को शांत करने में लगी हुई थी, इधर कुणाल ने शर्मिंदा सा होकर अपने कपडे पहने और चुप चाप बहार निकल गया, काम्य को उन दोनों दसियो के साथ और तीसरी दासी को तड़पते हुए छोड़ क्र,

वही अमरावती अपने बेटे सूरज के साथ अपने कमरे में बैठी हुई थी,

अमरावती- सूरज अब तुम जवान हो चुके हो, राजय के कार्यो में हाथ बताओ महराज का, अगर तुम ये सब हरकते करोगे तो परजा तुम्हे अगला राजा कैसे मानेगी, राजा बनने के बाद परजा तुम्हारा विरोध नहीं करेगी लेकिन जब राजा बनाया जाता ह तो उससे पहले परजा के बिच तुम कैसे हो ये सभी देखते हैं,

सूरज- माँ इसमें मेरी गलती नहीं ह, मैंने सब शांति से किया था, लेकिन वो अभिजीत उसने सब किया, मेरे साथ करने से तो वो चुप रह गई थी लेकिन अभिजीत की वजह से उसने विद्रोह क्र दिया,

अमरावती- इस राजय की हर लड़की पैर तुम्हारा अधिकार ह तुम राजा के बेटे हो और अगले राजा भी हो, लेकिन अभी तुम्हे अपनी पहचान बनानी ह, इसलिए थोड़ा ख्याल रखो और इस अभिजीत से सम्हाल कर रहो, ये अपनी माँ जैसा शातिर ह, शादी के बाद भी इसकी माँ यहाँ पड़ी हुई ह, अपने भाई की लाड़ली बानी हुई ह और पुरे राजय पैर आदेश चलती ह,

सूरज- जिस दिन मैं राजा बना उस दिन बुआ और उसके परिवार को सबसे पहले बह्गाउंगा,

अमरावती- शाबाश बीटा, और इस ज्वाला और उसकी माँ सौमित्र को भी ख़तम करना, इस सौमित्र की वजह से तुम्हारे पिता हमसे मिलने तक नहीं आते,

सूरज- उस सौमित्र को तो मैं दासी बनूँगा, आपके सरे काम किया करेगी

अमरावती- और वो निहारिका

सूरज- uuufffffffffff माँ किसका नाम ले लिया, उसे तो मैं अपनी रखैल बनूँगा, ऐसी औरत मिलना दुर्लभ ह,

अमरावती एक पल के लिए चीड़ सी गई निहारिका की तारीफ सुनकर लेकिन खुश भी हो गई, उसका बीटा निहारिका को रखैल बनाएगा,

अमरावती- न जाने सरे मर्द उसके पीछे hi क्यों पड़े रहते हैं,

सूरज- माँ उस औरत में कुछ तो जादू ह, जब भी उसे देखता हु तो जवानी जोर मरने लगती ह,

अमरावती- शर्म क्र अपनी माँ के सामने ऐसी बात कर रहा ह, और दूसरी औरत की तारीफ क्र रहा ह,

सूरज- माँ उससे आपकी भी सेवा करवाऊंगा, और उसके बेटे से घोड़ो की सेवा करवाऊंगा,

दोनों माँ बीटा अपने आप में hi खुश हो रहे थे,

वही अमिता सोमिया रीवा और अक्षरा राजय में घूमने निकली हुई थी, राजय की सबसे खूबसूरत लड़किया राजय में घूम रही थी, उन्हें देखने के लिए राजय का हर मर्द और लड़का पलके बिछाये खड़ा था,

मर्द आज के हो या किसी भी युग के, उनके सामने खूबसूरत लड़की आये तो अपने नजरो की हवस को छुपा नहीं पते, चाहे उनके सामने कोई महारानी हो या नौकरानी,

ऐसी hi हालत यहाँ के मर्दो की थी, हर किसी के मन में बस उन लकड़ियों को पाने की चाहत थी, उन लड़कियों के साथ सैनिक भी थे, वैसे भी सूरज ज्वाला और अभिजीत की वजह से राजमहल की औरतो के लिए भी लोगो में गुस्सा था, सबको पता था ये तीनो राजय की औरतो लड़कियों के साथ क्या करते हैं, इसलिए पुरे राजय के मर्द महल की औरतो के वही सब करना छाते थे, लेकिन डरते थे,

इधर लड़किया भी जवान हो चुकी थी उनके अंदर भी सम्भोग की िछाये उठने ागि थी, उन्हें मर्दो की नजरो में दिखने वाली हवस में अब सकूं सा मिलने लगा था,

जब कोई लड़की जवानी में कदम रखती ह तो वो अपने शरीर को छुपाती ह लेकिन जब वो पूरी जवान हो चुकी होती ह तो उसी शरीर को दिखने लगती ह, जब तक उसे कोई ऐसा मर्द नहीं मिलता जो उसकी जवानी को अच्छे से शांत क्र सके तब तक उसके दिल के साथ साथ शरीर भी मर्दो को देख क्र रोमांचित हो उठता ह, वही हालत इन सबकी भी थी, इनमे रीवा ऐसी थी जिसके दिल में किसी मर्द के लिए कोई भी भावना नहीं आती थी, लेकिन बाकि तीनो को मर्दो की आँखों से निहारे जाने में मजा आता था,

एक बग्गी पैर चढ़ क्र सभी घूम रही थी और बाते कर रही थी,

अमिता- देखो वो सब मर्द हमे कैसी नजरो से देख रहे हैं, अगर उन्हें मौका मिल ए तो अभी हम पैर टूट पड़े,

सोमिया- हम उनकी पहुंच से बहुत दूर हैं, वो सब सपने hi देख सकते हैं,

अमिता- पिताजी हमारी शादी क्यों नहीं करते, जब हमारी माये हमारी उम्र की थी तो हम पैदा हो चुके थे, और हमने अब तक जवानी का पहला सावन भी नहीं देखा, अब बर्दास्त नहीं होता, अगर पिता जी ऐसे hi देर करते रहे कही हम अपना कौमार्य ऐसे hi किसी सैनिक को न सौंप दे,

अक्षरा- क्या बोल रही हो दीदी, चीई

सोमिया- क्यों तेरा दिल नहीं करता क्या,

अक्षरा- करता तो ह लेकिन इस लोगो के साथ ची नहीं, मेरा राजकुमार तो कोई अलग hi होगा, इतना ताकतवर की दुनिया उसके सामने झुक जाये,

अमिता- रीवा तू बड़ी चुप ह तुझे जरुरत नहीं ह क्या,

रीवा- नहीं दीदी मेरे मन में ऐसी भावनाये नहीं आती किसी के लिए, शरीर को जरुरत होती ह लेकिन दिल में कभी नहीं आता की मैं किसी की तरफ आकर्षित हो जाऊ,

सोमिया- अपनी माँ पैर गई ह न, जैसे वो इतने वर्षो से बिना पति के जी रही ह ऐसे hi ये भी ह, उन्हें भी पति की जरुरत नहीं ह और इसे भी मर्द की जरुरत नहीं ह, कही दोनों माँ बेटी एक साथ तो नहीं कर लेती, हहहहहहहह

सोमिया की बात पैर तीनो है पड़ी, लेकिन रीवा के चेहरा शर्म से झुक गया, वो जवाब देना चाहती थी लेकिन कही उसकी भेने उससे नाराज न हो जाये इसलिए चुप रह गई,

तभी बग्गी रुक गई, सबका धयान उधर गया तो सामने एक बुजुर्ग औरत कड़ी थी,

अमिता बग्गी चलने वाले से- क्या हुआ

बाघी वाला- राजकुमारी वो औरत रास्ता रोक क्र कड़ी ह,

सोमिया- क्या अब कोई भी हमारा रास्ता रोक खड़ा हो जायेगा क्या,

रीवा- एक बार बात सुन लेते हैं, शायद कोई संशय हो,

अमिता- शंश्य होगी तो महाराज से बोले, हमे रोकने का क्या मतलब, सैनको हटाओ इसे, और कोड़े मारो राजकुमारियों का रास्ता रोकने के लिए,

सैनिक तुरंत आगे बढे और औरत को दूर धकेल दिया, वो औरत रट हुए हाथ जोड़ क्र आगे बढ़ी,

औरत- राजकुमारी मेरी गुहार सुनिए, मेरी प्राथना सुनिए, मेरी बेटी लापता ह, मेरी प्राथना सुनिए,

लेकिन उसकी सुनने वाला वह कोई नहीं था, सैनिक ने फिर से धकेला और उसे लात मरी जिससे वो दूर जाकर गिरी तभी वह देवदूत आ गया और उसने उस औरत को पकड़ लिया,

देवदूत- सैनिक ये क्या तरीका, किसी औरत पैर हाथ उठाना hi तुम्हारी मर्दानगी ह,

सैनिक- राजकुमार मुझे राजकुमारियों ने आदेश दिया था,

अमिता- तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे दिए आदेश के बिच में आने की,

देवदूत- बिना अपराध के सजा देना, ये कैसा आदेश ह

अमिता- उसने हमारा रास्ता रोका

देवदूत- परजा का अधिकार होता ह राजमहल के लोगो से बात करने का, अगर वो महल तक नहीं आ पते तो हमारी जिम्मेदारी ह उनके पास तक जाये,

अमिता- तुम मेरा अपमान कर रहे हो, इसकी सजा तुम्हे पिता जी देंगे,

अमिता ने बग्गी को आगे बढ़ने का आदेश दिया, देवदूत ने उस औरत को आराम से बैठाया और पानी पिलवाया,

देवदूत- अम्मा क्या हुआ क्या संशय ह मुझे बताओ,

औरत- तुम्हे क्या बताऊ राजकुमार तुम्हारी बात तो तुम्हारी भेने भी नहीं सुनती फिर राजा कैसे सुनेंगे, पहले अपनी पहचान बनाओ फिर किसी की मदद करना, तुम्हरी वजह से अब राजकुमारी भी मेरी बात नहीं सुनेगी,

देवदूत को बड़ा आश्चर्य हुआ, वो उस औरत की सहायता कर रहा था लेकिन ये उल्टा उसे hi कोष रही ह, औरत उठी और अपने घर की तरफ चली गई, देवदूत वही खड़ा रह गया, फिर वो भी दुखी होकर महल में लोट आया, महल में पहुंचते hi उसके पास बुलावा आया की महाराज ने उसे बुलाया ह,

देवदूत महाराज के सामने पंहुचा तो वह अमिता सोमिया रीवा अक्षरा और उनके साथ थी अमरावती,

भवर सिंह कड़क आवाज में- देवदूत तुमने राजकुमारी का अपमान किया आज वो भी परजा के सामने

देवदूत- नहीं महाराज मैंने अपमान नहीं किया, उन्होंने एक औरत को सजा दी वो भी बस इस बात के लिए की उस औरत ने इनका रास्ता रोक क्र अपनी बात खेनि चाही, मैंने बस इनसे कहा की बिन अपराध के सजा क्यों दे जाये,

अमिता- मैंने उससे कहा था की अगर कोई बात खेनि ह तो महाराज के पास जाओ लेकिन वो तो हमे hi रोकना छाती थी, मुझे उसकी कोई चल लगी इसलिए मैंने उसे रस्ते से हटवाया,

अमिता साफ़ झूट बोल गई, लेकिन उसकी बात का समर्थन करने के लिए सोमिया और रीवा ने हामी भर दी, अक्षरा दर से चुप रह गई, देवदूत को झूठा साबित क्र दिया गया,

भवर सिंह- देवदूत तुम्हारी ये सजा ह तुम अगले 15 दिन के लिए महल से बहार रहोगे और राजगुरु के घर रह क्र उनसे कुछ सीखोगे,

देवदूत ने चुप चाप वो सजा मान ली, वो खुद महल से दूर रहना छटा था लेकिन उसे अपनी माँ से दूर रहना था ये hi दुःख था बस,

रात में देवदूत अपनी माँ की गॉड में सर रख क्र लेता हुआ था,

देवदूत- माँ लोग ऐसे क्यों होते हैं,

देवदूत ने आज की हुई साडी घटना निहारिका को बताई,

निहारिका- बीटा लोग ताकत के सामने झुक जाते हैं, लोग उसी को सम्मान देते हैं जो उनसे ताकतवर होता ह, जो इस दुनिया को झुका सकता ह वही इस दुनिया पैर राज कर सकता ह वो अच्छा ह या बुरा इससे लोगो को कोई फरक नहीं पड़ता, उन्हें फरक पड़ता ह की वो उनके काम आ सकता ह या नहीं, और इस समय महाराज अच्छे ह या बुरे किसी को फरक नहीं पद रहा, वो उनकी मदद कर सकते हैं चाहे उसके बदले में वो लोगो से उनका सब कुछ चीन ले, और उसी रस्ते पैर महाराज के सभी बच्चे चल रहे हैं,

देवदूत- आपने मुझे वो रास्ता क्यों नहीं सिखाया, आपने मुझे सबका दर्द देखना क्यों सिखाया

निहारिका- क्योकि मैं तुझे उनके जैसा नहीं बनाना चाहती, तू मेरा बीटा ह तेरे अंदर प्यार दया दुसरो की सहायता करने की हिम्मत होनी चाहिए, संसार को तेरे जैसे लोगो की बहुत जरुरत ह, लेकिन है जब अत्याचार अपनी चरम सीमा पैर पहुंच जाये तो उसे रोना भी जरुरी ह,

देवदूत- माँ मुझे राजगुरु के पास जाने की सजा मिली ह,

निहारिका- इसमें तेरा hi कुछ भला होगा बीटा, उप्पेर सब कुछ सोच क्र hi करवाता ह,

देवदूत राज गुरु के पास जाने की तैयारी क्र रहा था वही जब ये खबर राजगुरु को मिली तो वो काफी परेशां हो गए,

भौमिक- भैया आप कुछ परेशां लग रहे हैं,

राज गुरु- महाराज का छोटा बीटा देवदूत उसे सजा मिली ह 15 दिन मेरे पास रहने की

भौमिक- तो इसमें क्या परेशानी ह

राज गुरु- सजा उसे नहीं मुझे मिली ह, उसका यहाँ आना मेरे लिए सजा ह,

भौमिक- ऐसा क्यों,

राजगुरु- ये लड़का और इसकी माँ, कुछ अजीब ह इन दोनों में, मैं कितनी भी कोशिश कर लू लेकिन इनके बारे में कुछ नहीं जान पता, सिर्फ इस बात के की ये महाराज के लिए ठीक नहीं ह,

भौमिक- आप इसे मेरे पास रहने दीजिये, मैं इसे सम्हाल लूंगा

राजगुरु- ठीक ह, तुम hi देखो इसे, और तुम्हे कुछ जानकारी मिली उस बारे में जो मैंने ढूंढ़ने को कहा था,

भौमिक- अब तक तो नहीं, मैंने आर्युवेद की सभी औषधियों के बारे में जानकरी निकली लेकिन ऐसी कोई औषधि नहीं ह जो इंसान को अमर क्र सके, किसी को लम्बे समय तक जिन्दा रखा जा सकता ह लेकिन अमर नहीं बनाया जा सकता,

राजगुरु- ये बात महाराज को कैसे समझौ, वासी सात्विक कहा ह, आज दिखाई नहीं दिया,

भौमिक- वो भी खोजने में hi लगे हुए हैं, बोल रहे थे उनके कुछ मित्र हैं जिनसे वो जानकरी निकालेंगे,

राजगुरु- आज कल सात्विक कुछ शांत सा रहता ह, उसके सवभाव में भी कुछ बदलाव आ रहे हैं, तुम्हे कुछ बताता ह क्या, उसकी पत्नी ने बताया की वो घर भी नहीं जाता काफी दिन तक, कहा जाता ह,

भौमिक- पता नहीं भैया मैंने इस बात पैर धयान नहीं दिया, आप कहे तो जानकरी निकलू

राजगुरु- नहीं नहीं कही उसे ये न लगे की मैं उस पैर शंका कर रहा ह, मेरा वहां हो सकता ह, सुबह देवदूत आ जायेगा, मैं उसे तुम्हारे पास भेज दूंगा, अब तुम जाओ और आराम करो,

भौमिक चला गया,

अगले दिन देवदूत पहुंच गया राजगुरु जी की सेवा में, उन्होंने उसे भौमिक के पास भेज दिया, जब देवदूत भौमिक के सामने पंहुचा, ये इन दोनों का पहेली बार आमना सामना था, आज से पहले राजगुरु के भाई कभी राजा के अलावा उनके परिवारों से नहीं मिले थे,

देवदूत को देखते hi भौमिक उसे गोर से देखने लगे, भौमिक लगातार देवदूत को देखे जा रहे थे, देवदूत हाथ जोड़ क्र उनके सामने खड़ा था, एक भोली सी मुस्कान के साथ, चेरे पैर मासूमियत आँखों में भोलापन, शरीर का आकर एक मर्द का लेकिन चेरे और हाथो की त्वचा बिलकुल किसी लड़की की तरह चमकदार और मुलायम दिख रही थी,

देवदूत- प्रणाम गुरु जी

भौमिक होश में आये,

भौमिक- गुरु जी, मैं तुम्हारा गुरु नहीं हु,

देवदूत- आप राजगुरु के भाई ह, वो पुरे राजय के गुरु हैं, आप भी उनकी तरह विद्वान हैं तो आप भी गुरु hi हुए न,

भौमिक- काफी समझदार हो,

देवदूत- बताइये मुझे क्या करना होगा,

भौमिक- अष्धियो के बारे में क्या जानते हो,

देवदूत- थोड़ा बहुत, जिनसे साधारण बीमारियों का इलाज किया जा सके,

भौमिक- तो मेरे साथ चलो इन 15 दिन तुम मेरे साथ औषधियों के बारे में जानोगे, सब कहते हैं तुम्हारा शरीर युद्ध करने योग्य नहीं ह, लेकिन युद्ध सिर्फ हतियारो से नहीं लड़ा जाता, युद्ध में घायल योद्धाओ को औषधि भी दी जाती ह, तुम युद्ध में लड़के न सही लेकिन किसी को बचने के काम तो आ hi सकते हो,

देवदूत- मैं युद्ध कर सकता हु, लेकिन बचपन से मुझे युद्ध कला से दूर रखा गया ह, उसका कारन मैं नहीं जनता, आज तक किसी ने न मेरी ताकत को परखा ह न hi मुझे हतियार उठाने दिए हैं, बस शिक्षा दी ह, मेरे तीनो भाई युद्ध कला में निपुण्ड हैं,

भौमिक- हो सकता ह महाराज को तुम्हारी चिंता हो,

देवदूत- ये कैसी चिंता की मुझे खुद का रक्षा करना भी नहीं सिखाया गया,

भौमिक- अगर तुम्हे किसी ने नहीं सिखाया तो तुम खुद सिख लो, युद्ध कला सिर्फ युद्ध में काम आती ह लेकिन जब खुद की जान पैर आती ह तो अपनी hi ताकत काम आती ह, और जिसके पास ताकत होती ह उसके सामने कोई कला काम नहीं करती,

देवदूत- मुझे नहीं पता मेरे अंदर क्या ह, मैं ऐसा हु तो क्यों हु,


भौमिक- हम पता क्र लेंगे, आओ पहले कुछ जल पैन कर लो,
 
नेटवर्क इतने ख़राब ह की एक एक रिप्लाई करने में घंटो लग रहे हैं,
 
अपडेट-3




महल में अमिता अपनी माँ अमरावती के पास बैठी हुई थी,

अमिता- माँ मेरी शादी कब होगी,

अमरावती- तुझे बड़ी जल्दी हो रही ह शादी की,

अमिता- माँ मेरी उम्र हो गई ह, आपकी शादी भी तो जल्दी hi हो गई थी फिर मेरी क्यों नहीं हो रही,

अमरावती- तेरे लायक कोई राजा या राजकुमार नहीं मिल रहा महाराज को,

अमिता- तो मेरा स्वंवर रखवा दीजिये न, मैं खुद पसंद क्र लुंगी,

अमरावती- स्वंवर बस नाम के लिए होता ह, उसमे लड़की के माता पिता hi बताते हैं किसे अपना पति चुनना होता ह, जिद दिन महाराज को तुम्हारे योग्य लड़का मिल जायेगा वो बता देंगे, तब तक तू खुद पैर सयम रखना, अपना खजाना ऐसे hi मत लुटवा देना, अगर तेरे पति को पता चला तेरा कौमार्य भांग हो चुक्का ह तो राजाओ के युद्ध हो जायेंगे और बहुत बदनमी भी होगी,

अमिता- मतलब जब तक पति न मिले मैंने ऐसे hi तड़पती रहूंगी, आप पिता जी से कहिये जल्दी से मेरी शादी करवाए, अगर कुछ उच्च नीच हो गई तो फिर मुझे दोष मत देना,

अमरावती ने अपना माथा पकड़ लिया,

शाम को जब भवर सिंह अमरावती के पास आया तो अमरावती ने सबसे पहले अमिता की शादी की बात की और समझाया की उनकी बेटी अब बहुत बड़ी हो चुकी ह,

भवर सिंह- अमिता hi नहीं बाकि दोनों लड़किया भी अब बड़ी हो चुकी हैं, और काम्य की बेटी भी शादी लायक हो चुकी ह, मैं सोच रहा हु सभी की शादी एक साथ क्र दी जाये, इससे राजय का खर्च भी काम होगा, बार बार खर्चा नहीं करना होगा, मैंने कुछ राजकुमारों और राजाओ को देखा ह शादी के लायक, मैं उन्हें खबर भिजवाता हु, और एक स्वम्वर का आयोजन करता हु,

अमरावती- जब आपने देख hi रखे हैं तो स्वंवर की क्या जरुरत ह,

भवर सिंह- अगर स्वंवर नहीं होगा तो आस पास के ताकतवर राजा नाराज हो जायेंगे, जो हमारे राजय के लिए अच्छा नहीं ह, और उसी के साथ मैं सोच रहा हु की, ऐसा करो तुम पुरे परिवार को बुलवाओ,

अमरावती- आप क्या सोच रहे ह मुझे तो बताइये,

भवर सिंह- पहले सबको सभा में बुलवाओ फिर वही बताता हु,

अमरावती के मन ने शंका आ गई, लेकिन महाराज का आदेश था तो मन्ना hi था, अमृता ने सबके पास खबर भिजवा दी,

कुछ hi समय में पूरा परिवार महाराज के कमरे के बहार सभा करने के लिए एक कमरे में इकठा हो गए, देवदूत वह था hi नहीं, निहारिका एक कोने में कड़ी हो गई,

काम्य- क्या बात ह भैया सबको इस तरह यहाँ बुलाया

भवर सिंह- मैंने कुछ फैसले लिए हैं, और पहला फैसला ये ह की कुछ hi समय में चारो लड़कियों का स्वंवर होगा, और कुछ राजाओ को मैंने चुना हुआ ह उनके बारे में तुम्हे जानकारी मिल जाएगी, तो उन्हें hi चुनना स्वंवर में,

स्वंवर का नाम सुनकर अमिता और सौमित्र के दिल ख़ुशी से झूमने लगे, लेकिन रीवा के मन में हलचल सी हो गई, वो शादी के नाम से hi विचलित हो जाती थी, अक्षरा अभी जीवन को ख़ुशी से जीना छाती थी,

काम्य- भैया इतनी जल्दी शादी का ैस्ले

भवर सिंह- सभी लड़किया जवान हो चुकी हैं, जल्दी नहीं देर हो चुकी ह, इन सबकी शादी तो काफी समय पहले हो जनि छाइये थी लेकिन सही राजा नहीं मिले थे,

सौमित्र- सही सोचा ह आपने,

भवर सिंह- और उसी स्वंवर के बाद मैं युवराज की घोषणा करूँगा,

ये बड़ा धमाका था, सबके कान खड़े हो गए, अमरावती सौमित्र और काम्य तीनो ने चौंक क्र भवर सिंह को देखा,

काम्य- इसकी या जरुरत ह अभी भैया, अभी तो आप राजा हैं, अभी से युवराज क्यों,

अमरावती- महराज सही सोच रहे हैं, युवराज तो होना hi चाहिए,

सूरज ज्वाला और अभिजीत की आँखों में चमक आ गई थी,

सौमित्र- लेकिन युवराज चुना किस तरह जायेगा,

भवर सिंह- ये ह सही सवाल, तुम सच में बहुत समझदार हो सौमित्र,

सौमित्र की तारीफ से काम्य और अमरावती जल भून गई, और सौमित्र ख़ुशी से झूम उठी,

भवर सिंह- तीनो राजकुमारों को कुछ कार्य दिए जायेंगे, प्रतियोगिता करवाई जाएगी, जो भी राजकुमार जीतेगा वही युवराज बनेगा,

भवर सिंह 3 राजकुमार बोलै था और उसके बेटे भी तीन थे, अब काम्य के दिल में दर बैठ गया, वही अमरावती और सौमित्र सूरज और ज्वाला खुश हो गए की अभिजीत तो पहले hi बहार हो गया, और देवदूत को वो आसानी से हरा hi लेंगे, मुकाबला बस सूरज और ज्वाला में hi होगा,

काम्य- भैया फिर तो हमे अपने राजय चले जाना चाइये अब,

भवर सिंह- ऐसा क्यों बोल रही ह बहन

काम्य- आपके तीनो बेटे युवराज की प्रतियोगिता खेलेंगे हम यहाँ देख क्र क्या करेंगे,

भवर सिंह- मेरे तीनो बेटे, नहीं नहीं तुम गलत समझ रही हो, तीसरा राजकुमार देवदूत नहीं अभिजीत ह, देवदूत इस लायक hi नहीं ह की उसे किसी प्रतियोगिता में उतरा जाये, वो मेरा बीटा ह ये मेरा दुर्भाग्य ह, उसे इस राजमहल में रहने दिया जाता ह वही काफी ह,

भवर सिंह की बात से काम्य खुश हो गई लेकिन अमरावती और सौमित्र के चेरे पैर नाराजगी साफ़ दिख रही थी, सूरज और अभिजीत ने भी एक दूसरे को मुस्कुरा कर सहमति जताई लेकिन उस मुस्कराहट ने जलन साफ़ दिख रही थी,

इस सब के बिच निहारिका एक कोने में कड़ी अपनी भीगी हुई आँखों से मुस्कुरा रही थी, उसे दुःख था उसके बेटे का इस परिवार में कोई सम्मान नहीं ह लेकिन ख़ुशी थी की वो इस प्रतियोगिता से दूर रहेगा,

तभी अक्षरा बोली- मां जी देवदूत को मौका तो मिलना चाहिए अपनी क़ाबलियत दिखने का,

भवर सिंह- बेटी तू उसे नहीं जानती, वो तुम सबके लिए ठीक नहीं ह, उसके बारे में ज्यादा मत सोचा कर, और अब तुम लड़किया अपना घूमने फिरने का शोक पूरा कर लो, फिर शादी होकर पिता जैसे तहत नहीं मिलेंगे, इसलिए कल तुम सब पहाड़ो पैर घूम आओ और तीनो राजकुमार भी साथ जायेंगे, वह काफी अच्छा लगेगा तुम सबको,

सभी ख़ुशी से झूम उठे,

वही देवदूत भौमिक के साथ औषधीय ढूंढ रहा था, और उनके बारे में सिख रहा था, देवदूत आगे बढ़ गया तो भौमिक जी ने आवाज लगाई- देव जरा रुको

देवदूत- आपने मुझे देव क्यों कहा, देव सिर्फ मेरी माँ बोलती ह, बाकि कोई नहीं बोलता,

भौमिक- क्यों बोलती हैं वो तुम्हे देव

देवदूत- प्यार से

भौमिक- तो मतलब जो तुम्हे प्यार करते हैं या पसंद करते हैं वो तुम्हे देव बोल सकते हैं न

देवदूत- है बोल तो सकते हैं

भौमिक- तो मैं तुम्हे पसंद करता हु, तुम मेरे बेटे जैसे हो, इसलिए मैंने तुम्हे देव बोलै और अब से मैं तुम्हे देव hi बोलूंगा, तुम और तुम्हारा रूप किसी देवता से काम नहीं ह,

देवदूत- जैसा आप ठीक समझे गुरु जी,

(यहाँ से देवदूत को देव लिखा जायेगा)

भौमिक ने मन में सोचा- कितना भोला ह ये लकड़ा, कोई इसे नापसंद कैसे कर सकता ह, कोई इसे सजा कैसे दे सकता ह, लेकिन बड़े बहिया खुद इससे दूर रहना छाते हैं तो मतलब उन्होंने इसकी कुंडली में देखा होगा, इसलिए महाराज इससे दूर रहते हैं, मुझे इसकी कुंडली को देखना पड़ेगा, ऐसा क्या ह जिस वजह से इसे इतना सेना पद रहा ह,

कुछ समय बाद दोनों वापस आ गए, और भौमिक जी राजगुरु के पास चले गए, राजगुरु घर पैर नहीं थे, तो भौमिक जी देवदूत की कुंडली उठा लाये,

रात्रि में भौमिक जी देव की कुंडली को पढ़ने लगे, लेकिन उसमे कुछ नहीं मिला था एक दम खली थी, भमिक जी ाश्चरायचकित रह गए, राजगुरु जी के पास राजपरिवार के सभी लोगो की कुंडली होती ह और वो भी पूरी तरह से लिखी हुई, लेकिन देव की कुंडली एक दम खली ऐसा कैसे हो सकता था, राजगुरु जी ने देव की कुंडली में कुछ लिखा क्यों नहीं,

भौमिक जी ने अगले दिन राजगुरु से बात करने का विचार किया,

वही राजगुरु का दूसरा भाई सात्विक, अमरत्व की खोज में एक बहुत बड़े तांत्रिक के पास पहुंच गया था, सात्विक अपने दोनों भाइयो की तरह hi काफी विद्वान् था लेकिन उसके अंदर महेत्वकंषा बहुत यदा थी, उसने जो विद्या प्रपात किट hi उससे संतुष्ट नहीं था, वो और भी ज्ञान पाना चाहता था, और जब राजगुरु ने सात्विक को खोज के लिए भेजा तो उसे मौका मिल गया अलग अलग विद्वानों से मिलने का और ज्ञान प्रपात करने का,

सात्विक जिस तांत्रिक के पास पंहुचा वो कहने को तो तांत्रिक था लेकिन उसने अपनी तंत्र विद्या का कभी गलत इस्तेमाल नहीं किया था, हमेशा लोगो की भलाई के लिए hi उसका इस्तेमाल किया था, इसलिए सब उसे सम्मान की नजरो से देखते थे, दूर दूर से लोग उनसे तंत्र विद्या सिखने आते थे, क्योकि संसार में कुछ शमश्याओ का समाधान मंत्रो में होता ह तो कुछ का संधान तंत्र से होता ह,

सात्विक- तंत्र गुरु मैं आपके पास बड़ी आस लेकर आया हु,

तंत्र गुरु- तू जिस आस से आया ह वो इस संसार का सबसे बड़ा राज ह, तू अमरत्व को खोज में आया ह, और अमरत्व कोई ऐसी चीज नहीं ह जो किसी को भी दान में मिल जाये, बड़े बड़े ज्ञानियों ने अमरत्व को पाने की कोशिश की ह लेकिन कोई अमर नहीं हो पाया, महाविद्वान रवां भी अमरत्व पाने गया था लेकिन उसे भी मृत्यु आई, बहुत ऋषि योद्धा हुए जिन्होंने अमरत्व पाने की कोशिश की लेकिन कोई अमर नहीं हुआ,

सात्विक- लेकिन 7 चिरंजीवी तो ह दुनिया में,

तंत्र गुरु – वो किसी महतवपूरण कार्य के लिए धरती पैर रुके हुए हैं, जिस दिन उनका कार्य समापत हो जायेगा वो भी चले जायेंगे, खुद भगवन ने अमरत्व नहीं रखा अपने लिए फिर तुम कैसे प् सकते हो,

सात्विक- कोई तो होगा जो उसके नजदीक पंहुचा होगा,

तंत्र गुरु- तू मेरे पास आया ह तुझे खली हाथ तो नहीं जाने दूंगा, एक जानकरी देता हु,

हर युग में कोई न कोई ऐसा जरूर आता ह जो अमरत्व पाने की कोशिश करता ह, अमरत्व की इच्छा तो सब पाना चाहते हैं लेकिन कोशिश बहुत काम कर पते हैं, उनमे से एक महायोद्धा था जो अमरत्व तक पहुंच गया था, तुझे उसके बारे में जानना होगा, अगर तूने उसके बारे में जान लिया तो शायद तुझे सफलत मिल जाये,

सात्विक- मैं उसके बारे में कैसे जान पाउँगा

तंत्र गुरु- वह तक पहुंचने में तेरी ये विद्या काम नहीं आएगी, तुझे और ज्ञान की जरुरत ह,

सात्विक- मुझे वो विद्या सीखनी ह,

तंत्र गुरु – तंत्र विद्या सिखने के लिए बहुत कुछ खोना पड़ता ह, मंत्र भगवान् के नजदीक ले जाते हैं लेकिन तंत्र शैतान के नजदीक ले जाता ह, अगर तंत्र इंसान पैर हावी हुआ तो बुराई की तरफ चला जायेगा, मैं तांत्रिक हु लेकिन तंत्र को अपने काबू में रखता हु, क्यात ु ऐसा कर पायेगा,

सात्विक- मैं आपको निराश नहीं करूँगा,

गुरु- ठीक ह तो कल से मैं तुझे सिखाऊंगा,

सात्विक खुश हो गया,

अगली सुबह भौमिक जी राजगुरु के पास चल दिए देव के बारे में बात करने के लिए, वही राजमहल में सभी भाई बहन चाट दिए घूमने फिरने, देव औरषदीयो के बारे में पढ़ने लगा, और मंत्रो को सिखने लगा, और सात्विक की तंत्र विद्या शुरू हो गई,

भौमिक जी- भैया मुझे आपसे जरुरी बात करनी ह,

राजगुरु- है भौमिक बताओ क्या हुआ, तुम कल भी आये थे,

भौमिक- मुझे देवदूत के बारे में बात करनी ह, मैंने इसकी कुंडली पढ़ी लेकिन उसमे कुछ भी नहीं लिखा ह,

राजगुरु- तुम्हे उसकी कुंडली पढ़ने की इच्छा क्यों हुई

भौमिक- मैंने उसके मस्तिष्क को पढ़ा लेकिन ज्यादा कुछ पढ़ नहीं पाया, ऐसा लगा जैसे उसकी जीवन रेखा बिलकुल खली ह,

राजगुरु- इसलिए उसकी कुंडली में कुछ नहीं लिखा ह, मैंने बहुत कोशिश कर ली उसके बारे में जानने की लेकिन कितनी भी कोशिश करू कुछ देख hi नहीं पता, सब खली खली नजर आता ह,

भौमिक- फिर आप उसे खुद से दूर क्यों रखते हैं, फिर महाराज उससे नाराज क्यों रहते हैं,

राजगुरु- जब जब मैंने उसकी कुंडली को देखा ह तब तब एक विध्वंश दिखाई दिया ह, मैं उस विध्वंश का कारन समझ नहीं पाया हु, और जब भी देवदूत की कुंडली भवर सिंह के जोड़ क्र देखता हु तो भवर सिंह का विनाश hi दीखता ह, कारन मेरी समझ से बहार ह, लेकिन इतना समझ आता ह ये लड़का भवर सिंह के लिए ठीक नहीं ह, और न hi इसकी माँ, मैंने भवर सिंह को बहुत रोका इस औरत से शादी न करे, लेकिन वो नहीं मन, उसकी सुंदरता में अपना संयम खो बैठा, लेकिन जब से ये लड़का निहारिका के गर्भ में आया तब से hi भवर सिंह का मोह भांग हो गया,

भौमिक के दिमाग में आया ी निहारिका की कुंडली भी देखनी होगी,

भौमिक- भैया मैं पुरे राजपरिवार की कुण्डलिया देखना चाहता हु,

राजगुरु- ठीक ह ले जाना, फ़िलहाल मुझे समझ नहीं आ रहा, महाराज ने ऐसा फैसला लिया ह जो मेरी समझ में नहीं आ रहा,

भौमिक- क्या हुआ ह

राजगुरु- महाराज ने चारो लड़कियों की शादी का विचार किया ह, और उनके लिए लड़के भी देख लिए हैं, स्वंवर की तैयारी शुरू की जाएगी आज से,

भौमिक- इसमें परेशानी क्या ह शादी तो होनी hi ह एक दिन

राजगुरु- तुम सबकी कुंडली पढ़ो और उसमे देखो क्या लिखा, फिर समझ जाओगे मैं क्यों परेशां हु,

भौमिक ने सबकी कुण्डलिया उठाई और अपने घर ले आया,

देव पहाड़ो से औषदीय लेकर आ रहा था तो उसे रस्ते में कस्तूरी और सुगंधा मिल गई,

कस्तूरी- कहा जार हे हो, यहाँ तुम्हे देखने की उम्मीद नहीं थी,

देव- मैं भौमिक जी के पास रुका हुआ कुछ समय के लिए, लेकिन तुम दोनों यहाँ क्या कर रही हो,

कस्तूरी- मैं और सुगंधा उनके पास औषधि लेने आये थे, पिता जी का स्वस्थ्य कुछ ठीक नहीं ह,

देव- बहुत दूर आये हो, ये तो तुम्हे गाओं में भी मिल जाती,

कस्तूरी- गाओं के वेद जी ने hi यहाँ भेजा ह,

देव- अच्छा अच्छा आओ चलो,

कस्तूरी- तुम कब तक रहोगे यहाँ,

देव- अभी तो एक hi दिन हुआ ह 15 दिन रुकना ह,

कस्तूरी- मैं सोच रही थी मैं भी यही रुक जाऊ,

देव- तुम क्या करोगी यहाँ रह क्र

कस्तूरी- तुम्हारे साथ रहूंगी न, तुम्हे भी कोई अपना मिल जायेगा, और मैं भी कुछ सिख जाउंगी

देव- गुरु जी ऐसे किसी को नहीं रखते, मुझे तो महाराज का आदेश मिला था,

कस्तूरी- मेरी मौसी उनके घर के पास hi रहती हैं, मैं उनके पास रुकूंगी,

देव- जैसा तुम्हे ठीक लगे,

वो उनके साथ चल दिया, सुगंधा हमेशा की तरह खामोश और देव को निहारती हुई उनके पीछे चल दी,

भौमिक जी के पास जाकर कस्तूरी ने कुछ बीमारी बताई जिसकी दवा उन्होंने दे दी, कस्तूरी ने सुगंधा को वो दवाई लेकर वापस भेज दिया, सुगंधा का मन नहीं था जाने का लेकिन जाना पड़ा, कस्तूरी अपनी मौसी के घर चली गई,

महल में सबके दिमाग में तूफ़ान मचा हुआ था, अमरावती सौमित्र और काम्य तीनो के दिमाग में भूचाल आया हुआ था, तीनो hi अपने अपने बेटे को युवराज बनाना चाहती थी, लेकिन भवर सिंह ने किसी को ये पता नहीं चलने दिया था की प्रतियोगिता कैसी होंगी,

काम्य ने अपने गुप्तचरों को लगा दिया ताकि महाराज क्या करने वाले हैं उसकी जानकरी मिल जाये, वही अमरावती ने सेना पति को बुलवाया हुआ था, क्योकि प्रतियोगिता की तैयारी तो सेनापति hi करने वाले थे,

अमरावती- सेनापति मुझे जानना ह की महाराज क्या करने वाले हैं,

सेनापति- महारानी ये मैं कैसे बता सकता हु, महाराज का आदेश ह किसी को कोई जानकरी न दी जाये,

अमरावती- ये तुम मुझसे बोल रहे हो,

सेनापति- माफ़ कीजिये महारानी, अगर मैंने महाराज की बात का उलंघन किया तो वो मुझे जान से मरवा देंगे,

अमरावती- ये बात हमारे बिच hi रहेगी,

सेनापति- इसमें मेरा क्या फायदा होगा,

अमरावती- वही जो हमेशा रहता ह,

सेनापति खुश हो गया, और प्रतियोगिता से जुडी साडी बाते अमरावती को बता दी,

वही सौमित्र अपने हुसैन का जादू भवर सिंह पैर चला रही थी, भवर सिंह बिस्टेर पैर लेते हुए थे और सौमित्र नंगी होकर अपनी भरी भरी चूचिया भवर सिंह की छाती पैर रगड़ रही थी,

भवर सिंह- क्या बात ह आज बहुत उतावली हो रही हो,

सौमित्र- क्या करू जब जब आपको नजदीक पति हु खुद को रोक नहीं पति, आपके अंदर ऐसी hi बात ह, हमेशा मुझे दीवाना बना क्र रखते हो,

भवर सिंह- दीवाना तो तुमने बनाया हुआ ह मुझे अपना, कमल का शरीर ह तुम्हारा, इस उम्र में भी इतना कैसा हुआ ह,

सौमित्र- ये सब आपकी वजह से hi ह, आपका प्यार की वजह से hi ये निखार आता ह मुझमे, और आपका ये शैतान हमेशा मुझे बैचैन किये रखता ह,

सौमित्र ने भवर सिंह के 8 इंच लुंड को पकड़ क्र बोलै,

भवर सिंह- न जाने तुम्हे अंदर ऐसी क्या खूबी ह, हम तुम्हारे पास चले आते हैं, वर्ण अमरावती के पास जाये भी महीनो हो जाते हैं,

सौमित्र- और उस कलमुही निहारिका के पास,

भवर सिंह- उसका नाम मत लिया करो हमारे सामने, न जाने हमे उससे शादी hi क्यों की,

सौमित्र ने तुरंत भवर सिंह के लुंड को अपने जीभ से चाट लिया,

भवर सिंह- ये कला हमने सिर्फ तुम्हारे पास hi देखि ह, आज तक ऐसा किसी औरत ने नहीं किया, सब इसे गन्दा मानती ह तुम बड़े प्यार से इसे चुस्ती हो,

सौमित्र- आप का हर अंग हमारे लिए खास ह, और ये hi तो हमे संतोष देता ह इसे तो प्यार करना हमारा कर्त्तव्य ह,

सौमित्र ने भवर सिंह का लुंड चूसना शुरू कर दिया, भवर सिंह मजे में आंखे बंद किये सौमित्र का सर सहलाने लगा, कुछ देर लुंड चूसने के बाद सौमित्र लुंड के उप्पेर बैठ गई और लुंड को छूट में भर क्र उस पैर कूदने लगी, भवर सिंह सौमित्र की गांड को पकड़ क्र उसे लुंड पैर उछलने लगा,

भवर सिंह- तुम्हारे नितम्ब कितने बड़े हैं,

सौमित्र- आपको पसंद ह इसीलिए तो बड़े किये ह मेरे महाराज, लीजिये न मजा अपनी रानी का, देखिये आपकी रानी कैसे आपके लिंग को अपनी योनि में लेकर उसे निचोड़ रही ह,

भवर सिंह ने सौमित्र को निचे लिटाया और उसके उप्पेर आ गया और जोर से धक्के लगाने लगा, सौमित्र ने भवर सिंह को काफी गरम कर दिया था, भवर सिंह भी काफी देर तक चुदाई क्र लेता था उसका कारन था सौमित्र का उसे उत्तेजक औषदीय खिलाना,

दोनों की चुदाई आधे घंटे से जायदा चली जिसमे दोनों एक साथ झड़ने लगे, भवर सिंह ने अपना पूरा रास सौमित्र की योनि में भर दिया,

जब दोनों शांत हुए,

सौमित्र- आपने मेरे अंदर hi अपना वीर्य छोड़ दिया, मैं इस उम्र में फिर से गर्भवती हो गाइट हो,

भवर सिंह- आज तुम्हे बहुत गरम कर दिया था, वैद से दवाई ले लेना,

सौमित्र – कोई बात नहीं मैं ले लुंगी, आप खुश ह न मुझे बस ये hi छाइये

भवर सिंह- असली ख़ुशी तुम hi देती हो मुझे,

सौमित्र- लेकिन आप क्या करते हैं,

भवर सिंह- क्या करता हु

सौमित्र- जब से मैं यहाँ आई हु आपको असली सुख मैंने दिया और आपने युवराज बनाना के लिए चारो लड़को में प्रतियोगिता रख दी, मेरा बीटा ज्वाला आपके लिए जान तक देने को तैयार रहता ह, आप उसके बारे में सोचते hi नहीं,

भवर सिंह- हहहहह तुम इस बात से नाराज हो, अरे हमारा ज्वाला बहुत होनहार ह, वो ये प्रतियोगिता आराम से पर क्र लेगा, और तुम ये तो सोचो राजा के बाद युवराज कोण बनता ह, राजा का बड़ा बीटा और बड़ा बीटा सूरज ह, मैंने तो ज्वाला को मौका दिया ह, ताकि वो अपनी योग्यता साबित करे और युवराज बन जाये, जिससे परिवार में युद्ध न हो,

अगर मैं ऐसा नहीं करता तो सूरज तो खुद hi युवराज बन जाता राजय के नियम के हिसाब से,

भवर सिंह की बात सुनकर सौमित्र खुश हो गई, उसे बहवर सिंह की बात समझ आ गई,

सौमित्र- लेकिन इस प्रतियोगिता में होने क्या वाला ह, आप मुझे तो बता hi सकते हो,

भवर सिंह सौमित्र के जाल में फास गया था और उसने प्रतियोगिता की साडी बाते सौमित्र को बता दी, इधर भवर सिंह सौमित्र को सब बता रहा था वही काम्य के जासूस अपने काम में लगे हुए थे, जहा प्रतियोगिता की तैयारी हो रही थी वह से साडी जानकरी काम्य तक पंहुचा रहे थे, तीनो माये अपने अपने बेटे को युवराज बनाना के लिए अपनी चल चल रही थी, उधर निहारिका बस अपने बेटे की याद में खोयी थी, जब से वो पैदा हुआ पहेली बार निहारिका से दूर गया ह, निहारिका उसके बिना ाहदुरि थी, जब देव उसके पास नहीं होता तो वो बैचैन हो जाती थी,

इधर देव को अपनी माँ से दूर रहना भी अच्छा नहीं लग रहा था, लेकिन सजा तो पूरी करनी hi थी, शाम को देव औषधियों के बारे में पढ़ रहा था तभी कस्तूरी वह आ गई,

कस्तूरी- क्या कर रहे हो,

देव- तुम यहाँ

कस्तूरी- क्यों मैं तुमसे मिलने नहीं आ सकती क्या, मेरा मन नहीं लग रहा था,

देव- यहाँ मन नहीं लगता तो यहाँ आई hi क्यों थी,

कस्तूरी- तुम सच में पागल हो, कुछ नहीं समझते,

देव- क्या नहीं समझता, समझाओ मुझे,

कस्तूरी- तुम जवान हो गए हो क्या तुम्हारे दिल में कुछ नहीं होता,

देव- मेरे दिल में क्या होगा, और क्यों होगा कुछ

कस्तूरी- मेरे दिल में होता ह,

देव- क्या होता ह

कस्तूरी- जब तुम मुझसे दूर होते हो तो दिल बहुत बैचैन होता ह, कुछ अच्छा नहीं लगता, बस तुम्हारे पास आने का मन करता ह, तुहे देख क्र hi दिल को सकूं आता ह, इस दुनिया में बस तुम hi मुझे अपने लगते हो तुम्हारे अलावा किसी और के बारे में सोचने का भी ान नहीं करता,

कस्तूरी की बात से देव थोड़ा कंफ्यूज सा खड़ा था, क्योकि उसके दिल में भी ऐसी hi हलचल थी लेकिन कस्तूरी के लिए नहीं अपनी माँ के लिए,

देव का मन बहुत साफ़ था, उसमे अब तक कोई हवस या सम्भोग के लिए कोई सोच नहीं थी, कस्तूरी उसकी बहुत अच्छी दोस्त थी लेकिन कस्तूरी के दिल में क्या ह वो कभी समझ नहीं पाया,

कस्तूरी और देव बात कर रहे थे तभी भौमिक जी वह आ गए, कस्तूरी भौमिक जी को प्रणाम करके वह से चली गई और देव के दिमाग में हलचल कर गई,

भौमिक जी- क्या हुआ देव, कहा खोये हुए हो,

देव- गुरु जी एक बात पुछु

भौमिक जी- है है पूछो

देव- ये जो कस्तूरी गई ह, ये मेरी दोस्त ह वो बोलती ह उसका दिल मेरे बिना नहीं लगता, मुझसे मिलने के लिए बैचैन रहती ह, ऐसा क्यों होता ह

भौमिक जी मुस्कुराये- क्योकि वो तुमसे प्रेम करती ह, जब लड़की ऐसा बोले तो समझ जाओ तो तुम्हसे बहुत प्रेम करती ह, और तुम्हारे बिना नहीं रह सकती,

इतना बोल क्र भौमिक जी अंदर चले गए, देव और कंफ्यूज हो गया, क्योकि उसके दिमाग में तो बस उसकी माँ hi रहती थी, उसने तो कभी कस्तूरी के बारे में ऐसा सोचा hi नहीं, और यहाँ उसकी माँ भी नहीं थी जो उसे इस बारे में कुछ समझा सके,

रात का खाना खा क्र देव सोने चला गया लेकिन भौमिक जी सबकी कुंडली लेकर बैठ गए, और बड़े धयान से सबकी कुंडली पढ़ने लगे, सभी की कुंडली में कुछ न कुछ खास था लेकिन निहारिका और देव की कुंडली एक जगह आकर बिलकुल खली थी, भौमिक जी ने सभी तरह से कुंडली को पढ़ लिया, भौमिक को राजगुरु से ज्यादा ज्ञान था कुंडली पढ़ने में, लेकिन वो भी निहारिका और देव की कुंडली को ठीक से नहीं समझ पाए, और जब चारो लड़कियों की कुंडली पढ़ी तो चौंक गए,

भौमिक जी खुद से hi- ये कैसे हो सकता ह, ये संभव नहीं ह, संसार में इस वक़्त कोई ऐसा नहीं ह जो इस काबिल हो,

भौमिक जी देव की कुंडली को लेकर चिंतित हो गए, देव की कुंडली में न hi मृत्यु का पता चल रहा थान hi hi उसके आगे के जीवन का, जब किसी भी तरह से देव की कुंडली नहीं समझ आई उसके जीवन के बारे में नहीं पढ़ पाए तब उन्होंने एक hi अनुमान लगाया की देव का जीवन लम्बा नहीं ह, और इस बच्चे ने जीवन में खुद की रक्षा करना तक नहीं सीखा, ये कैसे जियेगा, जिसका पिता hi उसके जीने मरने की परवाह न करता हो उसे कोण बचा पायेगा,



देव के लिए भौमिक जी के दिल में दर्द उभर आया, उन्होंने फैसला क्र लिया की वो खुद देव को सब कुछ सिखाएंगे, केवल औषदीयो के बारे में सिखने से इसकी जान नहीं बचेगी, इसे खुद की रक्षा करना तो सीखना hi होगा, पता नहीं मैं उसे सीखा पाउँगा या नहीं, मात्रा 15 दिन में मैं उसे क्या सीखा सकूंगा,
 
अपडेट-4




अगले दिन भौमिक जी ने देव को बिना बताये उसका प्रशिक्षण शुरू क्र दिया, वो देव से ऐसे काम करवाने लगे जिससे उसकी ताकत का अनुमान लग सके, और वो खुद अपनी ताकत को महसूस क्र सके, जैसे लकडिया कटवाना, बजन उठवाना, तलवार की जगह कुल्हाड़ी का इस्तेमाल करवा रहे थे, वही कस्तूरी रोज देव के पास मिलने चली आती थी, जब से कस्तूरी ने देव को अपने दिल का हाल सुनाया था तब से देव का धयान भी कस्तूरी की तरफ भटकने लगा था, उसे कस्तूरी की तरफ आकर्षण महसूस होने लगा था, वो भी समय मिलते hi कस्तूरी के पास पहुंच जाता और उससे बाते करने लगता,

भौमिक जी को ये बात कुछ अच्छी नहीं लग रही थी, उन्हें लग रहा था देव का धयान भटक न जाये, इसलिए उन्होंने कस्तूरी का देव के पास आने पैर रोक लगा दी, लेकिन प्रेम कहा किसी से रुकने वाला होता ह, कस्तूरी न दिन देखती न रात वो मौका मिलते hi देव से मिलने चली आती, दोनों चुप चुप क्र मिलने लगे थे,

अगले 4 दिन यही चलता रहा, उधर अमरावती सौमित्र और काम्य ने अपने अपने जासूस भेज क्र तीनो राजकुमारों सूरज ज्वाला और अभिजीत प्रतियोगिता की जानकरी दे दी, जिससे वो वह अपनी तैयारी में जुट गए,

कस्तूरी और देव का प्रेम आगे बढ़ने लगा था, देव से ज्यादा कस्तूरी उतावली हुई जा रही थी, और उसे उतावले पैन में एक दिन दोनों प्रेमी जोड़े एक पेड के निचे बैठे बाते क्र रहे थे, कस्तूरी देव की बहो में लेती हुई थी, देव उसके गलो पैर उंगलिया फिर रहा था, कस्तूरी मदहोश हुए जार hi थी, देव के मन में कोई गलत भावना नहीं थी,

लेकिन कस्तूरी का मन भटकने लगा था, उसके हैट देव के सर में घूमने लगे थे, और धीरे धीरे कस्तूरी देव को अपने नजदीक लेन लगी थी, दोनों के चेरे एक दूसरे के बहुत करीब आ चुके थे, दोनों की ाँकेः एक दूसरे की आँखों में झांक रही थी, दोनों के हॉट एक दूसरे के बहुत करीब थे, कस्तूरी की आँखों में लाली च चुकी थी, कस्तूरी के हॉट खुल गए और उसने देव के होतो को अपने होतो में भर लिया, देव को एक झटका लगा, उसके लिए बहुत hi अनोखा अनुभव था, कस्तूरी के मुलायम फूल जैसे होतो का स्पर्श देव को उत्तेजित क्र गया, देव को अंदाजा नहीं था क्या करना ह लेकिन आनंद बहपुर आ रहा था, कस्तूरी ने हलके हलके अपने होतो से देव के होतो को चूसना शुरू क्र दिया, पहेली बार देव को कामुकता का अहसास हो रहा था, उसके बदन में अकड़न सी होने लगी थी, देव का लिंग में हलचल होने लगी थी, जो कस्तूरी के कमर के निचे दबा हुआ था,

कुछ hi पालो में कस्तूरी को देव के लिंग का अहसास होने लगा था, देव को तो पता भी नहीं चला उसका लिंग कब खड़ा हो गया, उसे कस्तूरी हॉट चस्मे में इतना मजा आ रहा था, देव के हाथ न जाने कब कस्तूरी के शैतान पैर पहुंच गए, कस्तूरी के हाथ भी देव की गार्डन और बालो में घूम रहे थे, जैसे hi देव का हाथ कस्तूरी के शैतान पैर गया तो देव ने हलके से दबा दिया जिससे कस्तूरी और कामुक हो गई और उसने देव के हॉट को काट लिया,

देव को दर्द हुआ और वोट क दम अलग हो गया, उसने कस्तूरी को देखा जो उसे दकह क्र मुस्कुरा रही थी,

देव- ये सब क्यात है,

कस्तूरी- मजा नहीं आया क्या,

देव- तुमने ये सब कहा सीखा, ऐसा कोण करता ह,

कस्तूरी- ये कोई सिखाता तोडना ह, ये तो हर जवान इंसान खुद सिख जाता ह, ये hi तो प्रेम ह, जब किसी से प्रेम होता ह तो ऐसा लड़का और लड़की इसी तरह अपने प्रेम का इजहार करते हैं,

देव- तुम्हे किसने कहा ऐसा करते हैं,

कटोरी- बस मुझे पता ह, मेरे साथ रहोगे तो तुम भी सिख जाओगे,

देव बार बस कस्तूरी के होतो को देखे जार है था, कस्तूरी देव की भावनाओ को समझ रही थी और मुस्कुरा रही थी, लेकिन उसने दुबारा देव को किश करने की कोशिश नहीं की, और देव में तो हिम्मत hi नहीं थी,

कस्तूरी- अब चलना छाइये वर्ण गुरु जी नाराज हो जायेंगे,

देव को गुरु जी की याद आई तो वो भी तुरंत चल दिया लेकिन उसकी धोती के अंदर उसका खड़ा हुआ लुंड साफ़ हिलता हुआ हसुस हो रहा था, देव को जल्दी जल्दी में उसका अहसास hi नहीं था लेकिन कस्तूरी का धयान बार बार उसके खड़े लुंड की तरफ hi जा रहा था, वो अंदर hi अंदर मुस्कुराती हुई जा रही थी,

देव के घर पहुचन इ पैर भौमिक जी काफी नाराज हुए, क्योकि उन्हें महसूस हो रहा था की देव का धयान बहतक रहा ह, लेकिन देव राजा का बीटा था ो उसे ज्यादा खुश बोल भी नहीं प् रहे थे, फिर भी वो अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे थे देव को मजबूत करने की,

यहाँ से सब चल रहा था वही सात्विक तंत्र विद्या सिखने में खुद को समर्पित क्र चुक्का था, तंत्र गुरु भी बहुत खुश थे, बहुत समय बाद कोई ऐसा शिष्य मिला था जो इतनी तेजी से सिख रहा था,

अगले कुछ दिनों तक ऐसे hi चलता रहा, सौमित्र ने भवर सिंह से बोल क्र राजकुमार और राजकुमारियों को वापस बुलवा लिया, सौमित्र चाहती थी की उसका बीटा ज्वाला प्रतियोगिता की तैयारी करे, उसका फायदा अमरावती और काम्य को भी हो गया, तीनो ने अपने अपने बेटे को प्रतियोगिता की तैयारी में लगा दिया,

वही देव प्रेम के वशीभूत हो चुक्का था, कस्तूरी हर समय देव के साथ रहने लगी थी, और दोनों के बिच अब बात चुम्बन से भी आगे बढ़ चुकी थी, अब देव के हाथ कस्तूरी के शरीर पैर भी घूमने लगे थे, वो अपने हाथो से कस्तूरी के शैतान का नाप भी लेने लगा था, और उसकी गांड को अच्छे से मसलने लगा था, केवल 12 दिन में दोनों में प्रेम का इजहार हुआ और बात यहाँ तक पहुंच चुकी थी, उस समय के हिसाब से बहुत तेजी आगे बढ़ रहे थे, कस्तूरी कुछ ज्यादा hi उतावली थी,

इधर सात्विक की ोी खबर नहीं थी जिससे राजगुरु परेशां थे, इससे पहले सात्विक बिना बताये कही नहीं गया था, इस बार भेजा तो राजगुरु ने hi था लेकिन उन्हें जानकरी नहीं थी वो गया कहा ह, राजगुरु की दूसरी चिंता थी राजकुमारियों का स्वंवर, वो भवरसिंघ से इस बारे में बात नहीं कर प् रहे थे, वही भौमिक जी देव को लेकर काफी चिंतित थे, उन्हें पता था प्रतियोगिता में देव को भी हिस्सा लेना होगा और प्रतियोगिता आसान नहीं होगी, लेकिन देव का धयान तो कस्तूरी की तरफ भटक रहा था,

आज सजा का अंतिम दिन था, देव अपने काम में व्याशत था, तभी वह ाकस्तूरी आ गई और देव को लेकर जंगल में चली गई, आज कस्तूरी के इरादे अलग थे, उसे पता था देव का यहाँ अंतिम दिन ह, उसके बाद वो महल में चला जायेगा,

कस्तूरी और देव दोनों नदी किनारे पहुंचे और कस्तूरी देव का हाथ पकड़ क्र नदी में घुस गई,

देव- कस्तूरी गुरु जी नाराज हो जायेंगे, उन्होंने आज मुझे बहुत काम दिया हुआ ह,

कस्तूरी- आज मैं भी तुम्हे कुछ देने आई हु, ऐसा कुछ जो तुम्हे जीवन भर याद रहेगा,

देव को समझ नहीं आया, नदी में भीगने की वजह से दोनों के कपडे भीग क्र शरीर से चिपक गए थे, कस्तूरी के कपडे जब उसके शरीर से चिपके तो उसका ेके क उभर अलग से नुमाया होने लगा, भीगे कपड़ो उसके शैतान और भी बड़े लग रहे थे, कस्तूरी ने आगे बढ़ क्र अपने भीगे हुए शैतान देव की छाती में दबा दिए, देव की सांसे भरी होने लगी थी, कस्तूरी ने नदी के अंदर hi देव के होतो पैर अपने हॉट रख दिए, पानी के अंदर दो तपते हुए बदन आपस में रगड़ खा रहे थे, कस्तूरी की चूचिया फूल क्र कड़क हो चुकी थी जो देव के छाती में रगड़ रही थी, देव का लुंड अपनी औकात में आने लगा था, गीले कपड़ो में लुंड सीधा कस्तूरी की योनि के उप्पेर टकरा रहा था, जिससे कस्तूरी और गरम हो गई और वो देव से पूरी तरह चिपक गई,

कस्तूरी ने देव के हाथ पकडे और अपने नितम्बो पैर रख दिए, कस्तूरी के नितम्बो पैर उसके कपडे चिपक और उन्हें और आकर्षक बना रहे थे, देव के हाथ कस्तूरी के नितम्बो पैर कस्ते चले गए, कस्तूरी भी किसी बेल की तरह देव से लिपट गई थी, दोनों एक दूसरे के होतो का रास पिने में लगे हुए थे, काफी देर रसपान करने के बाद जब दोनों के हॉट दुखने लगे तो कस्तूरी ने अपना हाथ निचे लेजाकर देव की जांघो के बिच में घुसा दिया और सीधे उसके लुंड को मुठी में भर लिया, लुंड को पकड़ते hi दोनों को झटका लगा और एक दम चौंक गए,

देव को उम्मीद नहीं थी ऐसा होने की वो तो इसलिए चौंका लेकिन कस्तूरी क्यों चूंकि, कस्तूरी ने देव की तरफ देखा,

कस्तूरी- ये क्या ह,

देव- क्या हुआ

कस्तूरी ने देव का हाथ पकड़ा और पानी से थोड़ा बहार की तरफ ले आई, देव की कुछ समझ में नहीं आ रहा था, कस्तूरी देव की धोती खोलने लगी,

देव- ये क्या कर रही हो,

कस्तूरी- मुझे द्केहना ह

देव- क्या देखना ह

कस्तूरी- तुम्हारा वो,

देव- वो मतलब

कस्तूरी- तुम्हारा लिंग देखना ह मुझे

देव- की गन्दी वो कोई देखने की चीज होती ह क्या,

कस्तूरी- अभी तुम्हे या पता वो क्या क्या करने की चीज होती ह, आज सब सीखा दूंगी तुम्हे,

देव- नहीं मैं नहीं दिखा सकता,

कस्तूरी- तुम मुझसे प्रेम करते हो न

देव- है करता हु

कस्तूरी – तो जो मैं कर रही हु करो दो न,

देव कमजोर पद गया उसने खुद को ढीला छोड़ दिया, कस्तूरी ने जल्दी से देव का धोती खोली और उसका कुरता उप्पेर किया और जब कस्तूरी के सामने देव का लिंग आया तो कस्तूरी की आँखे फटी रह गई, वोट क तक उसे देखती रही,

देव- बस देख लिया

कस्तूरी- रुक जाओ देखने दो, इससे खूबसूरत पुरे संसार में कुछ नहीं हो सकता, तुम हमेशा कहते हो न तुम्हे भगवान् ने कुछ खास नहीं दिया, ये दिया ह खास एक ऐसी चीज जो किसी को दिखाई नहीं जाती लेकिन जिसने देख ली वो तुम्हारे hi गुणगायेगी, दुनिया में इससे खूबसूरत और बड़ा लिंग शायद hi किसी का होगा, तुमने संसार की किसी भी स्त्री के सामने अपना लिंग क्र दिया तो वो तुम्हारी देवानी हो जाएगी, तुम्हारे अलावा कुछ नहीं मांगेगी,

देव- ऐसा क्या ह इसमें

कस्तूरी- तुम्हे अभी ज्ञान नहीं ह इसकी ताकत का, इसके सामने हर औरत कमजोर पद जाती ह, मैं धन्य हो गई ये मुझे मिला ह,

कस्तूरी ने फटाफट देव का कुरता भी उतर दिया और देव बिलकुल नंगा था, शरीर तो देव का साधारण hi था, बस लिंग उसका सबसे जबरदस्त था,

कस्तूरी फिर से देव को पानी में ले आई और अपने कपडे खोलने लगी, देव की आँखों में चमक आ रही थी, उसका लुंड झटके मर रहा था, और जब कस्तूरी ने अपनी चोली खोल क्र देव की तरफ पलटी तो कस्तूरी के शैतान देख क्र देव को निहारिका के शैतान याद आ गए, कस्तूरी के शैतान निहारिका के सामने बहुत छोटे थे,

कस्तूरी- क्या देख रहे हो पसंद आये

देव- तुम्हारे शैतान छोटे हैं,

कस्तूरी- इस उम्र में छोटे hi होते हैं और इतने भी छोटे नहीं हैं, छू क्र देखो कितने कठोर हैं,

देव ने कस्तूरी के सतानो पैर अपने हाथ रख दिए और दबाने लगा,

देव- इनमे दूध भी आता ह

कस्तूरी- अरे बुद्धू वो तो बच्चे होने के बाद आता ह,

कस्तूरी ने निचे के कपडे भी खोल दिए और नदी के बहार फेंक दिए, और देव से चिपक गई, दोनों के नंगे बदन पानी के अंदर एक दूसरे से चिपके हुए थे, देव का लुंड कस्तूरी की जांघो के बिच में घुसा जार है था, कस्तूरी ने एक तंग उठा क्र देव के पैरो में लप्पेट दी, जिससे लुंड इसधे कस्तूरी की छूट पैर टकराने लगा, देव का एक हाथ कस्तूरी की गांड पैर था उंगलिया कस्तूरी की गांड में घुसी हुई थी,

ठन्डे पानी में तो तपते हुए शरीर आग लगा रहे थे,

कस्तूरी- कैसा लग रहा ह

देव- अच्छा लग रहा ह, कुछ अलग

कस्तूरी – अभी और अच्छा लगेगा,

कस्तूरी देव को बहार ले आई और पेड के निचे घास पैर लेट गई, कस्तूरी की गोल चूचिया उभर क्र सामने आ रही थी, सपाट पेड जांघो के उप्पेर हलके हलके सुनहरे बाल, देव के अंदर काम अग्नि फुट रही थी, वही कस्तूरी उंगली से देब को अपने पास बुला रही थी, देव आगे बढ़ा उसका बड़ा लम्बा मोटा लुंड हिल रहा था, कस्तूरी ने हाथ बढ़ा कर लुंड को पकड़ लिया और नीच खींच लिया, देव वही बैठ गया, कस्तूरी ने अपने हॉट देव के होतो से जोड़ दिए, और देव को अपने उप्पेर लिटा लिया और अपने दोनों पेअर खोल दिया, देव उनके बिच में आ गया और देव का लुंड कस्तूरी की छूट से टकराने लगा,

कस्तूरी ने हॉट चूमते हुए hi हाथ निचे लेजाकर देव का लुंड पकड़ क्र अपनी योनि पैर सही जगह लगा दिया,

कस्तूरी- देव घुसा दो अंदर,

देव- ये गलत तो नहीं होगा

कस्तूरी- प्रेम में कुछ गलत नहीं होता, ये प्रेम की पहचान ह, जो हो रहा ह उसे होने दो अब रोको नहीं,

कस्तूरी ने देव के नितम्बो को पकड़ा और अपने तरफ दबाने लगी, लुंड का दबाव योनि पैर पड़ने लगा, देव का लिंग इतना बड़ा था इतनी आसानी से कस्तूरी की योनि में कैसे घुस सकता था, वो अपनी जगह से फिसल गया, कस्तूरी ने फिर से लुंड को पकड़ क्र अपनी योनि पैर लगाया और देव से कहा धक्का लगन ेके लिए, देव ने वैसा hi किया धक्का लगा दिया और धक्का इतना तेज था की लुंड छूट को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया, कस्तूरी की दर्द भरी चीख निकल गई, कस्तूरी की आँखे फटी रह गई, देव दर गया वोट क दम से उठने लगा, लेकिनकास्टरी ने उसे अपनी बहो में भर लिया,

कस्तूरी- हिलो नहीं, बस ऐसे hi रहो,

देव- तुम्हे दर्द हो रहा ह

कस्तूरी- अरे पगले ये hi तो दर्द एक लड़की को औरत बनता ह, उसके अरमानो को पूरा करता ह, इस दर्द ले लिए hi तो लड़किया इतना इंतजार करती हैं, तुम रुको नहीं हलके हलके अंदर घुसाओ, तेज धक्का मत लगाना बस प्यार से हलके हलके,

देव ने कस्तूरी की बात मणि और हलके हलके लिंग को धकेलने लगा, कुछ देर में कस्तूरी बस बस करने लगी,

कस्तूरी- बस बस और नहीं जा पायेगा, मैं मर जाऊंगा अगर इससे ज्यादा अंदर गया था, अब बर्दास्त नहीं हो रहा, तुम आराम से लेट जाओ मेरे उप्पेर, हिलना मत वर्ण बहुत दर्द होगा,

देव ने वैसा hi किया वो कस्तूरी के उप्पेर शांति से लेट गया, कस्तूरी भी काफी देर तक आँखेबंद किये लेती रही, खुद को शांत करने की कोशिश कर रही थी, देव के लुंड से उसे बहुत दर्द हो रहा था, जब उसे थोड़ी रहत हुई तो उसने निचे से खुद hi कमर हिलनी शुरू क्र दी, देव बस उसके उप्पेर लेता रहा, मजा तो देव को भी आ रहा था लेकिन उसका दिल कर रहा था ो भी ऐसे कमर हिलाये लेकिन कस्तूरी ने उसे मन कर दिया था,

कुछ देर में कस्तूरी की योनि गीली होने लगी थी और वो झड़ने लगी थी, झड़ते हुए कस्तूरी बोली- अब करो हलके हलके,

देव ने तुरंत हलके हलके कमर हिलनी शुरू क्र दी, देव को बहुत मजा आ रहा था, कस्तूरी भी मजे में आहे भर रही थी, कस्तूरी जब जहद क्र शांत होने लगी तो उसे फिर से दर्द होने लगा, क्योकि देव रुक नहीं रहा था, वो झाड़ नहीं रहा था,

कस्तूरी- देव तुम भी कर लो न

देव- क्या कर लू

कस्तूरी- तुम्हे मजा आ रहा ह न

देव- है बहुत मजा आ रहा ह

कस्तूरी- फिर तुम्हारा वीर्य क्यों नहीं निकल रहा

देव- कैसे निकलता ह वीर्य मुझे नहीं पता

अब कस्तूरी की मुसीबत आ गई थी, उसे दर्द हो रहा था और देव का वीर्य hi नहीं निकल रहा था, कस्तूरी ने हिमायत करके फिर से खुद को गरम किया, और देव के गलो ो होतो को कानो को गार्डन को चूमने लगी, देव को और मजा आने लगा उसकी रफ़्तार और बढ़ने लगी, कस्तूरी ने निचे हाथ लेजाकर लुंड को सहलाने की सोची और जैसे hi लुंड पैर हाथ गया तो उसे अहसास हुआ की अभी तो देव का आधा लुंड भी अंदर नहीं घुसा ह, उसे दर लगने लगा था अगर ये पूरा अंदर घुस गया तो वो मर hi जाएगी,

देव काफी देर तक ऐसे hi कस्तूरी की चुदाई करता रहा, कस्तूरी फिर से झड़ने लगी थी, लेकिन देव पैर कोई फरक नहीं पड़ा था ो ऐसे hi छोड़ रहा था, लेकिनअब देव भी थकने लगा था, उसका वीर्य तो नहीं निकल रहा था लेकिन वो लगातार धक्के लगाने से थक गया था, कस्तूरी की भी हालत ख़राब हो चुकी थी,

कस्तूरी को मज़बूरी में देव को रोकना hi पड़ा,

कस्तूरी- देव रुक जाओ बस और नहीं हो पायेगा मुझसे,

देव- बहुत मजा आ रहा था कस्तूरी

कस्तूरी- किसी और दिन ये मजा ले लेना, अब रुक जाओ,

देव ने कस्तूरी की बात मन ली, और उसके उप्पेर से उठ गया, जैसे हो देव उठा लुंड छूट को खींचता हुआ बहार आ गया, कस्तूरी की फिर से दर्द बरी चीख निकल गई, कस्तूरी बेसुध सी पद गाइट hi, उससे अपनी टंगे भी बंद नहीं हो रही थी, वो टंगे खोले पड़ी थी,

देव- कस्तूरी क्या हुआ

कस्तूरी- कुछ देर सांसे लेने दो

देव- तुम्हारी योनि से खून आ रहा ह

कस्तूरी ने एक दम से उठ क्र देखा और वो चौंक गई, उसने अपनी छूट की हालत देखि जहा एक गुफा सी बन गई थी,

कस्तूरी ने अपना सर वापस जमीन पैर रखा और साँस भरने लगी,

कस्तूरी- देव मुझे नदी में ले चलो, शायद वह कुछ रहत मिल जाये,

देव ने नंगे hi कस्तूरी को अपनी गॉड में उठाया और नदी में ले गया, ठंडा ठंडा पानी जब कस्तूरी की योनि में लगा तो उसकी आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह निकल गई, वो देव से लिपट गई, काफी देर दोनों ऐसे hi खड़े रहे,

तभी वह भौमिक जी आ गए और दोनों को नंगे शरीर नदी में देख उन्हें क्रोध आ गया,

भौमिक जी- देव तुम यहाँ अपनी सजा पूरी करने आये हो या ये अधरम करने, और ये लड़की शादी से पहले इसने ये अधरम किया ह, मैं देव को मजबूत बनाने के लिए क्या क्या कर रहा हु और ये यहाँ खुद को बर्बाद करने में लगा हुआ ह, तुझे सम्भोग का सुख चाहिए न तो मैं तुझे शाप देता हु आज के बाद तेरे मस्तिष्क में बस सम्भोग hi घूमेगा, तू बिना सम्भोग के नहीं रह पायेगा, अगर तूने सम्भोग नहीं किया तो तेरे अंदर का वीर्य hi तेरी जान ले लेगा,

इतना बोल क्र भौमिक जी वह से वापस लोट गए, लेकिन देव और कस्तूरी भौचक्के से वही खड़े रह गए, देव की आँखों में आंसू थे, वो आत्मग्लानि में जल रहा था,

कस्तूरी- तुम इतना क्यों घबरा रहे हो, हमने कुछ गलत नहीं किया ह, हम एक दूसरे से प्रेम करते हैं, और प्रेम में ये सब गलत नहीं होता,

देव- मैंने गुरु का अपमान किया ह, और उससे ज्यादा गलत कुछ नहीं होता,

देव तुरंत नदी के बहार निकला और कपडे पहन क्र भौमिक जी की तरफ चल दिया, कस्तूरी भी उसके पीछे लड़खड़ाती हुई आई कपडे पहन क्र उसके पीछे पीछे चल दी,

देव भौमिक जी के सामने पंहुचा और उनके पैरो में लेट गया,

देव- गुरु जी मुझे चमा क्र दीजिये, मैंने अपराध किया ह, आका दिल दुखाया ह, आपका अपमान किया ह, आप जो चाहे मुझे सजा दे दीजिये मैं भुगतने के लिए तैयार हु लेकिन आप मुझसे नाराज न रहे,

भौमिक जी- तुमने गुरु शिष्य का नियम तोडा ह,

देव- मैं आपका अपराधी हु,

तभी कस्तूरी वह आ गई,

कस्तूरी- कैसा अपराध, हमने कोई अपराध नहीं किया ह, हम एक दूसरे से प्रेम करते हैं, और मैं कोई बच्ची नहीं हु, मैंने अपनी मर्जी से ये सब किया ह, तुमने मेरे साथ कोई जबरदस्ती नहीं की थी, इस राजय के राजकुमार लड़कियों के साथ जबरदस्ती करते हैं, उन्हें तो कोई सजा नहीं मिल रही, हमने तो फिर भी अपने प्रेम में अपनी सीमाएं तोड़ी हैं. अगर हमने गलती की ह तो हमे सजा देने का अधिकार हमारे माता पिता का ह, आपने बिना सोचे समझे देव को शाप दे दिया,

देव- कस्तूरी चुप हो जाओ, ये हमारी गलती ह, मेरी गलती ह, मैंने गुर जी का अपमान किया ह,

कस्तूरी- तू भूल ेहो तुम्हे नहीं पता कोई भी तुम पैर अधिकार दिखता ह और तुम उसे अपना मान लेते हो, 15 दिन में इनका इतना अह्दिकर हो गया

देव- कस्तूरी अपना मुँह बंद रखो, गुरु जी के लिए एक भी शब्द मत बोलना,

कस्तूरी- क्यों न बोलू मैं बोलूंगी, इन्होने तुम्हे शाप कैसे दिया, इन्हे क्या पता प्रेम क्या होता ह, इन्होने कभी जीवन में प्रेम किया हो तो पता हो,

देव- बस अगर एक भी शब्द बोलै तो मेंभूल जाऊंगा हमारे बिच कोई रिश्ता ह,

कस्तूरी- ये क्या बोल रहे हो, तुम हमारे रिश्ते को भूल जाओगे,

देव- मैं गुरु का अपमान नहीं सहूंगा,

कस्तूरी कैद अंत गुस्से में भींच गए,

कस्तूरी- तुम मुझे त्याग रहे हो, तुम्हे कोई प्यार नहीं करता मैंने तुम्हे प्यार किया और तुम मुझे टैग रहे हो, आज समझ आया कोई तुम्हे क्यों प्यार नहीं करता, तुम प्यार के पायक hi नहीं हो, तुमने मेरे प्यार का अपमान किया ह, तुम्हे कभी प्यार नहीं मिलेगा,

कस्तूरी वह से गुस्से में चली गई, देव आँखों में आंसू लिए खड़ा रह गया, खुद भौमिक जी भोचके से देखते रह गए,

भौमिक जी को अपनी गलती का अहसास हो रहा था, ये देव एक निजी जीवन था ो उसमे कुछ भी कर सकता था, उन्हें कोई अधिकार नहीं था उसके जीवन में झाकने का और इतना बड़ा शाप दे देने का, देव के जेवण में जो खुशिया आई थी वो उनकी वजह से आज फिर से चीन गई, देव बस जाती hi कस्तूरी को देखता रहा,

भौमिक जी- मुझे चमा कर दो देव, मैंने बिना सोचे समझे तुम पैर क्रोध किया और ऐसा शाप दे दिया,

देव- आप क्यों चमा मांग रहे हैं गुरु जी, गलती मेरी ह

भौमिक जी- नहीं बीटा प्रेम तो निस्वार्थ होता ह उसमे कोई गलती नहीं होती, मैं तुम्हारे प्रेम को समझ नहीं पाया और गलती क्र बैठा, मैंने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया, न जाने क्यों मुझे ितं अक्रोध आ गया और मैंने शाप दे दिया, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, इसके पीछे जरूर कोई न कोई बड़ी वजह होगी,

देव- मैं आपके शाप को आपका आशीर्वाद समझ क्र सवीकार करता हु,

भौमिक जी- मैं अपने दिए शाप को तो नहीं बदल सकता लेकिन एक वचन देता हु, जीवन में मैं हर कदम पैर तुम्हारे साथ रहूँगा, आज के बाद तुम्हारी सभी तकलीफो का जवाब मैं दूंगा, तुमने जो सम्मान मुझे दिया ह उसके बदले मैं तुम्हर ऐसा गुरु बनूँगा जो तुम्हार ेहजीवन को बदल देगा,

देव- गुरु से कुछ भी गलती से नहीं होता उसके पीछे कोई न कोई बड़ी वजह होती ह, ाज्जो हुआ उसके लिए भी कोई वजह जरूर होगी,

भौमिक जी- तुम्हारा वापस जाने का समय हो गया ह, और यहाँ जो तुमने कार्य किये हैं उनसे जॉब hi सीखा ह उसका इस्तेमाल प्रतियोगिता में करना,

देव- गुरु जी मैं युवराज नहीं बनना चाहता, न hi कोई मुझे युवराज बनाना चाहेगा,

भौमिक जी- सब कुछ हमारी सोच के हिसाब से नहीं होता, होगा वही जो उप्पेर वाला चाहता ह, इसलिए नियति जो छाती ह वही करते जाओ, और मैं तुम्हारे प्रेम के लिए माफ़ी चाहूंगा

देव- गुरु जी आपने hi कहा ह न जो होता ह उसके पीछे कारन होता ह, शायद इसके पीछे भी कोई कारन हो,

भौमिक जी ने देव को गले से लगा लिया,

देव भौमिक जी से विदा लेकर महल की तरफ चल दिया, उसका मन दुखी था, आज उसने प्रेम की घेरे को समझा था और शायद अपना प्रेम खो भी दिया था, और कस्तूरी ने उसे बात करने का मौका तक नहीं दिया था, कहा कस्तूरी उसके लिए भौमिक जी से लड़ रही थी कहा वो अपने प्यार को hi खो बैठी,



क्रोध ार अहंकार ये दो चीजे हमेशा अपनों को खुद से दूर कर देती हैं,
 
Back
Top