Incest RAKSHASH - Page 7 - SexBaba
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Incest RAKSHASH

अपडेट-12



काम्य अपने कमरे के बहार छज्जे पैर कड़ी थी और महल के बहार देख रही थी, एक दम शांत कड़ी थी अभिजीत उसके पास कब आया उसे पता hi नहीं चला,

अभिजीत - क्या हुआ माँ कहा खोई हुई हो,

काम्य- ऊम्मम तू कब आया,

अभिजीत - जब आप कही खोई हुई कड़ी थी, क्या सोच रही हो आप,

काम्य- ये राजय बदल रहा ह, यहाँ के हालत बदल रहे हैं,

अभिजीत- माँ उस राक्षश की वजह से ये सब हो रहा ह,

काम्य- मैंने जो सोचा था सब बर्बाद हो गया, सब ख़तम हो गया,

अभिजीत- क्या ख़तम हो गया,

काम्य- मेरी पूरी योजना बर्बाद हो गई, उस राक्षश ने बिच में आकर सब बिगड़ दिया,

अभिजीत- उसने तो हमे बचा लिया माँ वर्ण वो प्रताप सिंह हमे मार देता,

काम्य ने अभिजीत को देखा लेकिन कहा कुछ नहीं,

काम्य मन में – इस मूरख को क्या समझू इसे राजा बनाने के लिए मैंने क्या कुछ नहीं किया ह,

काम्य- तुझे मेरा एक काम करना होगा,

अभिजीत- क्या

काम्य ने अभिजीत को कुछ समझाना शुरू किया, जिसे सुनकर अभिजीत थोड़ा चौंक गया, लेकिन अपनी माँ की बात पैर सवाल करने की उसकी हिम्मत नहीं थी,

अभिजीत- ठीक ह माँ मैं अभी वह के लिए निकलता हु,

काम्य- ये बात किसी को पता न चले,

अभिजीत – जी माँ

अभिजीत वह से निकल गया, काम्य फिर से अपने खयालो में खो गई,

वही सौमित्र के अंदर की आग उसे झुलसा रही थी, जब से निहारिका और देव वाला कांड हुआ था उसके बाद से भवर सिंह सौमित्र के पास नहीं आया था, और सौमित्र के अंदर इतनी कामवासना थी की वो एक दिन भी चुदाई के बिना नहीं रह सकती थी, और अब तो सौमित्र को महीने बीत गए थे, सौमित्र बिस्टेर पैर पड़ी हुई अपने बदन को रगड़ रही थी, तभी उसकी दासी वह आई,






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Dasi-maharani आपका स्वस्थ्य सही नहीं लग रहा ह, आपके लिए कुछ लौ क्या,

सौमित्र ने दासी को देखा, सौमित्र की आँखे एक दम लाल हो राखी थी, आँखे वासना साफ़ दिख रही थी, सौमित्र ने दासी का हाथ पकड़ा और अपने उप्पेर खींच लिया, दासी एक दम घबरा गई,

दासी- महारानी

सौमित्र- चुप हो जा कुटिया एक दम चुप हो जा वर्ण तुझे कच्ची को खा जाउंगी,

दासी दर गई वो घबरा क्र चुप हो गई, सौमित्र ने उसे अपनी निचे क्र लिया और उसके उप्पेर आ गई, ये पहेली बार था जब दासी सौमित्र के बिस्टेर पैर लेती थी इतना नरम बिस्टेर उसने सपने में भी नहीं सोचा था, सौमित्र ने नशीली आँखों से दासी को देखा, और उसके उप्पेर झुकती चली गई, दासी को कुछ समझ नहीं आ रहा था, और अचानक ऐसा हुआ की दासी को आँखे फैट सी गई, क्योकि सौमित्र के हॉट दासी के होतो से जुड़ गए थे, दासी को यकीन hi नहीं हुआ ये क्या हो रहा ह, किसी औरत के साथ दासी का ये पहला अनुभव था, और वो भी महारानी के साथ, दासी घबराई हुई सी शांत लेती रही लेकिन सौमित्र पुरे जोश में दासी के हॉट चूसने लगी और फिर उसकी गार्डन को चूमने काटने लगी,






जल्दी hi दासी के मुँह से सिसकिया निकलने लगी, फिर सौमित्र ने दासी की चोली को पकड़ा और उसे फाड् दिया, जिससे दासी की चूचिया उभर क्र सामने आ गई, दासी की चूचिया थोड़ी ढीली और लटकी हुई थी, क्योकि दसियो का काम बस महल के मर्दो की सेवा करना और उनके भोग के लिए खुद को बिछा देना यही काम होता था, सौमित्र ने दासी की चूचियों को पकड़ा और जोर से खींच दिया, दासी की चीख निकल गई, सौमित्र ने उसे एक थपड मारा दासी दर क्र चुप हो गई,

सौमित्र- कुटिया रंडी चुप पड़ी रह, वर्ण तेरी इन चूचियों को काट क्र इनमे भूसा भर दूंगी फिर ये लटकी हुई नहीं रहेंगी, दासी और घबरा गई,

सौमित्र ने दासी का घागरा पकड़ा और फाड़ क्र अलग क्र दिया,

सौमित्र- माँ छुड़ानी रंडी तेरी छूट तो एक दम साफ़ ह किसके लिए साफ़ रखती ह इन्हे,

दासी कुछ नहीं बोल प् रही थी,

सौमित्र- बोल रैंड की जनि वानर तेरी छूट में गरम लोहा दाल दूंगी,

दासी- जी वो महारानी महल में वह के बाल साफ़ रखना हम दसियो का नियम होता ह, हमे सीखा क्र यहाँ भेज आजाता ह,

सौमित्र- अच्छा अच्छा तेरी वो गुरु माँ सिखाती होगी,

(असल में महल की दसियो को अलग से तैयार किया जाता था, पहले उन्हें महल के एक वैशल्या में वह की एक गुरु से शिक्षा मिलती थी, वो गुरु भी पहले दासी होती थी तरक्की मिलकर वाओ अहा पहकहति थी और आने वाली नै दसियो को तैयार किया जाता था,)

दासी- जी महारानी

सौमित्र- तो तेरी उस गुरु ने तुझे किसी महारनी को खुश करना नहीं सिखाया,

दासी- जी सिखाया था लेकिन इस महल में कभी जरुरत नहीं पड़ी

सौमित्र- तो भें की लोदी आज जरुरत ह, चल दिखा मुझे तेरी उस गुरु ने क्या सिखाया ह, अगर तू मुझे खुश नहीं कर पाई तो मैं खुद उस वैशल्या में जाकर उस गुरु की गांड मार लुंगी समझी,

अब दासी की गुरु की इज्जत की बात थी, दासी ने घेरि साँस भरी और सौमित्र की कमर में हाथ डाला और उसकी गांड को सहलाती हुई निचे ले गई और सीधे उसकी गांड में हाथ घुसा दिया, और कास क्र पकड़ क्र भींच दिया, सौमित्र की आह्ह्ह्ह निकल गई,

सौमित्र- दिखती कमजोर सी ह हाथ तो तेरे मजबूत हैं,

दासी ने सौमित्र की चोली को पकड़ा और खींच क्र फाड़ दिया, सौमित्र की चूचिया उछाल क्र बहार आ गई, इतनी बड़ी चूचिया देख दासी की आँखे भी खुल सी गई, एक दम गोल और ठोस थी, दासी ने तुरंत सौमित्र की चूचिया को अपने हाथो में पकड़ा और दबाने लगी और फिर अपने हॉट उसकी चूचियों पैर लगा दिए,

सौमित्र के अंदर आग भड़की हुई थी, जिस पैर दासी के ठन्डे हॉट उसे मजा दे रहे थे, सौमित्र ने दासी का सर अपनी चूचियों पैर दबा दिया, फिर दासी ने सौमित्र के घाघरे में हाथ डाला और नाडा खींच क्र खोल दिया,

दासी के लिए ये उसके जीवन का सब हसीं पल था, वो एक महारानी के नरम नरम बिस्टेर पैर लेती हुई थी और उसके नंगे बदन से महारानी का नंगा बदन रगड़ रहा था, दासी महारानी के हॉट और उसकी चूचियों को चूस रही थी, ये पल शायद hi किसी दासी के जीवन में आता हो, आज वो दासी खुद को सबसे भाग्यशाली समझ रही थी,

दासी ने सौमित्र को बिस्टेर पैर लिटाया और उसका घागरा निकल दिया, सौमित्र की बड़ी गांड उसके सामने आ गई, दासी ने तुरंत अपने हॉट सौमित्र की गांड पैर रख दिए, और फिर अपनी जीभ से सौमित्र की गांड और जांघो को चाटने लगी, सौमित्र के चूतड़ चाटने के बाद वो उसकी कमर को चाटती हुई उप्पेर गई और सौमित्र ाको सीधा कर दिया और फिर उसके हॉट चूमते हुए निचे चूचियों पैर आग ागि फिर पेट को चूमती हुई उसकी नाभि को जीभ से चाटने लगी, दासी के हाथ सौमित्र की जांघो को शेला रहे थे, फिर दासी अपनी चूचिया सौमित्र की जांघो पैर रगड़ने लगी और निचे होने लगी और छूट के उप्पेर के हिस्से को चाटने लगी जो बुल्कुल चिकना था,

दासी ने अपनी जीभ निकल क्र सौमित्र की छूट के उप्पेर छठा और फिर निचे की तरफ चली गई, और सौमित्र की जांघो को खोला और अपने हॉट उसकी छूट पैर रख दिए, सौमित्र की सिसकी निकल गई उसने दासी का सर अपनी छूट पैर दबा दिया, दासी समझ गई की सौमित्र कितनी तड़प रही ह, क्योकि उसकी छूट का रास किसी नदी की तरह बह रहा था, दासी ने तुरंत अपनी जीभ सौमित्र की छूट में घुसाई और जीभ से छूट को कुरेदने लगी, सौमित्र ये हुम्ला बर्दास्त नहीं क्र पाई और कुछ hi देर में दासी के मुँह पैर झड़ने लगी, वो अपनी गांड उठा उठा क्र दासी के मुँह पैर रगड़ने लगी, कुछ दे में सौमित्र शांत होने लगी लेकिन दासी रुकी नहीं वो लगातार सौमित्र की छूट चुस्ती रही,






सौमित्र को बहुत मजा आ रहा था लेकिन दासी का मुँह अब थकने लगा था, लेकिन महारानी को बिच में कैसे छोड़ सकती थी तो उसने नया तरीका लगाया और उठ क्र बैठ गई और सौमित्र की कमर उठा क्र उसकी छूट को उप्पेर उठा लिया फिर अपने पेअर सौमित्र के पैरो के बिच में डेल और अपनी छूट सौमित्र की छूट पैर रकः क्र बैठ गई, ये सौमित्र के लिए बिलकुल अलग अनुभव था, दासी ने अपनी छूट सौमित्र की छूट पैर रगड़नी शुरू की,





और बिच बिच में वो अपनी छूट सौमित्र की छूट पैर पटक रही थी जैसे कोई मर्द धक्के लगा रहा हो, सौमित्र के मजा दुगना हो गया था, दासी के पेअर जो सौमित्र की चूचियों के बिच रगड़ रहा था, सौमित्र दासी के उस पेअर को चूमने लगी वो मजे में भूल hi गई की ये किसी दासी का पेअर ह, दासी के लिए भी इससे ज्यादा अच्छा दिन और क्या हो सकता था जब एक महारानी उसके पेअर चाट रही थी,





दोनों का मजा काफी देर चला और दोनों एक साथ झड़ने लगी, दासी को लगा सौमित्र शांत हो जाएगी लेकिन सौमित्र दो बार झड़ने के बाद भी दासी को खुद से चिपका रही थी उसकी चूचियों को अपने चूचियों से रगड़ रही थी, दासी को कुछ और सोचना था तो उसने जोश जोश में बड़ा कदम उठा दिया और सौमित्र को घोड़ी बना दिया और उसकी गांड पैर 2-4 थपड मरे, सौमित्र वासना केन ऐश एमए थी उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था, उसे तो मजा आ रहा था, दासी ने सौमित्र के बाल पकडे और उसकी गांड पैर बैठ गई, और अपनी छूट सौमित्र की गांड पैर रगड़ने लगी और दूसरे हाथ से अपनी 3 उंगलिया सौमित्र की छूट में घुसा दी, अब सौमित्र को असली मजा आने लगा था,





दासी उसके बाल पकड़ क्र उसकी गांड पैर कूद रही थी जैसे घोड़ी की सवारी कर रही हो और अपनी उंगलिया सौमित्र की छूट में अंदर बहार कर रही थी, सौमित्र मजे में पागल हुई जा रही थी, दासी को मजा तो आ hi रहा था लेकिन आज वो जॉब hi कर रही थी उससे दासी के अंदर का एक गुस्सा सा निकल रहा था जैसे वो पुरे दासी समाज का बदला सौमित्र से ले रही हो, जैसे इन महल वालो ने दसियो पैर अत्याचार किये हैं उसके बदले आज वो सौमित्र को छोड़ रही थी जलील क्र रही थी,





तभी सौमित्र फिर से झड़ने लगी और इस बार वो इतनी जोर से जड़ी की सौमित्र का मूत निकल गया, और सौमित्र जो एक नंबर की आयाश औरत थी, वो कितने भी वासना के नशे में रहे वो जानती थी कब क्या करना ह, उसने तुरंत दासी को अपने नीच ेलिटाया और अपनी छूट उसके मुँह पैर रख क्र बैठ गई और झड़ने लगी साथ साथ दासी के मुँह में मूतने भी लगी, दासी सौमित्र के सर अपनी जांघो के बिच में दबा क्र बैठी हुई थी जिससे वो हिल भी नहीं प् रही थी, और सौमित्र का मूत दासी के मुँह में जार है था, पिने के अलावा उसके पास कोई और रास्ता नहीं था, सौमित्र न जाने कब तक अपनी छूट दासी के मुँह पैर दबाये बैठी रही, दासी का दम घुटने लगा था, वो अपने पेअर पटकने लगी थी,





तभी वह ज्वाला आ गया और अपने माँ को नंगी एक दासी के मुँह पैर छड़ी बीटा देख एक पल के लिए चौंक गया,

ज्वाला- माँ ये मर जाएगी,

सौमित्र ने ज्वाला की तरफ देखा और एक चादर उठा क्र अपने उप्पेर डाली लेकिन उस दासी के मुँह पैर से नहीं उठी,

सौमित्र- इसने मेरे शरीर को छुआ ह और वासना की खुमारी में न जाने क्या क्या किया ह, अब ये बात जाकर पुरे राजय में बताइये अपनी ढींगे हकेगी की इसने महारिणी को घोड़ी बना क्र उसकी सवारी की ह, और मैं महारानी हु मैं कुछ भी कर सकती हम एरा कोईकुछ नहीं कर सकता,

ज्वाला खड़ा हु अहसन लगा और वही उस दासी ने सौमित्र की जांघो के बिच छूट के निचे दबे हु असंस रुकने से दम तोड़ दिया,

दासी के मरने के बाद सौमित्र उसके उप्पेर से उत्तरी और एक सिल्क की चादर अपने उप्पेर लेप्ट क्र ज्वाला के सामने आ गई, वो पसीने से पूरी भीगी हुई थी जिससे चादर उसके नंगे शरीर से पूरी तरह चिपकी हुई थी सौमित्र का ेके क कटाव अलग hi दिख रहा था, उसकी चूचियों के चूचक चादर में साफ़ उभर क्र आ रहे थे, ज्वाला किन अजर सौमित्र के शरीर पैर hi थी, इस पुरे राजय में ऐसे शरीर वाली बहुत hi काम औरते थी, और कोई भी मर्द ऐसे शरीर की औरत को पाने के लिए कुछ भी कर सकता था,

ज्वाला नई नजरे खुद पैर महसूस करके सौमित्र हलकी सी मुस्कुराई लेकिन उसने कुछ भी ढकने की कोशिश नहीं की,

सौमित्र- तू यहाँ क्या कर रहा ह, तुझे पता ह न ये मेरा आराम करने का समय ह इस समय कोई नहीं आता,

ज्वाला- है वो तो मैं देख hi रहा था आप कैसा आराम कर रही थी, लेकिन मैं तो खबर लेकर आया था

सौमित्र- कैसी खबर

ज्वाला- आज अभिजीत काम्य बुआ के कमरे में गया था और जब वह से बहार आया तो तुरंत इस राजय से बहार निकल गया, और अपने साथ किसी को नहीं लेकर गया,

सौमित्र- वो तो अकेला कही नहीं जाता,

ज्वाला- वही तो, वो तो मूतने भी अकेला नहीं जाता तब भी उसके साथ सूरज या कोई और होता ह,

सौमित्र- इस काम्य का कोई भरोसा नहीं ह, ये इस राजय के सबसे खतरनाक ह, मुझे आज तक ये समझ नहीं आया की महाराज ने इसे अपने राजय में रखा क्यों ह, इसे अपने राजय में क्यों नहीं भेजते, और इसका पति कुणाल वो भी अपनी सुसराल में पड़ा हुआ ह उसकी कोई इज्जत नहीं करता फिर भी वो यहाँ ह, इतने सालो से वो यहाँ ह उसकी जरूर कोई साजिश ह, और उसने जो अभी कुछ समय में साजिशे की हैं वो उससे ये hi पता चलता ह की वो हम सबके लिए खतरा ह,

ज्वाला- मैं क्या करू

सौमित्र- उसके पीछे अपने जासूस भेज,

ज्वाला- वो तो मैंने भेज दिए हैं,

सौमित्र- देव हमारे रस्ते से हैट गया ह, अब हमे इस काम्य और अभिजीत को भी हटाना होगा, ये अभिजीत तो इस राजय का ह भी नहीं फिर ये युवाज पद के लिए प्रतियोगिता में उठा था, कोमय के इरादे ठीक नहीं ह,

ज्वाला- इस अभिजीत को तो मैं जब चहु रस्ते से हटा दूंगा, इसके अंदर इतना दम hi नहीं ह जो ये मुझसे टकरा सके, मेरी टक्कर उस सूरज से ह, वो बहुत ताकतवर ह,

सौमित्र- हम सबको रस्ते से हटा देंगे,

दोनों माँ बेटे अपनी hi योजना बनाने में लगे थे,

इधर प्रताप सिंह रेवती के साथ घूम रहा था अपने राजय में,

प्रताप सिंह- रेवती अब तू खुश ह न, तूने बहुत समय तक महल के अंदर जीवन बिताया ह, अब तुझे बहार की जिंदगी देखनी ह न,

रेवती ने डरते हुए है में सर हिलाया,

प्रताप सिंह- अरे दर क्यों रही ह, खुल क्र बोलै कर अब तू हमेशा ेरे साथ रहेगी तेरी हर जरुरत को मैं पूरा करूँगा, तुझे जॉब hi चाहिए मुझस ेबोल दिया कर,

इतना बोल क्र प्रताप सिंह ने रेवती को कमर पैर हाथ रख दिया, ये पहेली बार था जब प्रताप सिंह ने अपनी बेटी को छुआ था, रेवती का दिल अपने पिता के लिए स्नेह से उभर आया लेकिन अगले hi पल वो स्नेह घबराहट में बदल गया जब प्रताप सिंह का हाथ निचे सरकता हुआ रेवती की उभरी hi गांड पैर पहुंच गया, प्रताप सिंह ने हाथ हटाया नहीं वो बस अपना हाथ उसकी गांड पैर रख क्र इधर उधर देखता रहा,

रेवती घबरा गई थी उसकी हिल भी नहीं प् रही थी, उसे यकीन hi नहीं हो रहा था उसके साथ ये क्या हो रहा ह, उसके शरीर को पहेली बार किसी मर्द ने छुआ था ो भी उसके पिता ने और छुआ भी तो उस अंग को जिसे पति के अलावा कोई नहीं छू सकता,

रेवती समझ नहीं प् रही थी वो कैसे प्रतकिर्या दे, वो शांत रही, वही प्रताप सिंह खुश हो गया उसे लगा जैसे रेवती उसका साथ दे रही ह, रास्ता कहब था रथ पैर झटका लगा जिससे प्रताप सिंह ने अपना हाथ हटा लिया और रथ को पकड़ लिया, हाथ हटने से रेवती ने चैन की साँस ली, रेवती दोहरी मानसिकता में थी, एक तो उसके पिता का हाथ उसके शरीर पैर लगा इससे वो बैचैन थी दूसरा उसके शरीर पैर पहेली बार किसी मर्द के हाथ लगे थे तो उसकी जांघो के बिच न चाहते हुए भी हलचल शुरू हो चुकी थी,

रेवती महल आने तक एक दम शांत कड़ी रही और महल में घुसते hi दौड़ती हुई अपने कमरे चली गई, प्रताप सिंह भी तेजी से रेणुका के पास पंहुचा और उसे सब बताया,

रेणुका- आप बहुत ज्यादा उतावले हो रहे हैं, ये आपने ठीक नहीं किया वो लड़की ह उसने कुछ नहीं कहा इसका मतलब ये नहीं ह की वो तैयार ह, आपने हमेषा जबरदस्ती करनी सीखी ह, किसी लड़की को प्यार से अपना बनाया ह क्या कभी,

प्रताप सिंह – उसकी कोई जरुरत hi नहीं पड़ी,

रेणुका- लेकिन यहाँ पड़ेगी, वो आपकी बेटी ह, और अगर उसके साथ जबरदस्ती की और उसने बगावत कर दी तो न आप उसे मार सकते हैं न hi कैद क्र सकते हैं, क्योकि वही आपका सुरक्षा कवच ह, अगर उसे मारा तो आपका कवच टूट जायेगा और उसे कैद किया तो आपको भी उसके साथ कैद होना पद जायेगा,

प्रताप सिंह के चेरे पैर चिंता आ गई,

प्रताप सिंह- तो क्या करू मैं,

रेणुका- उसे थोड़ा प्यार दीजिये और आजादी दीजिये, ताकि वो आप पर विश्वास करे और आपके नजदीक आये, बस किसी मर्द की चाय उस पैर न पद पाए, अगर कोई मर्द उसके करीब हो तो वो बस आप हो, बाकि मुझ पैर छोड़ दीजिये उसके अंदर इतनी वासना भर दूंगी की वो खुद आपके पास चली आएगी,

प्रताप सिंह- बड़ा खुशकिस्मत हु मैं जोट ुम मेर पत्नी बानी,

रेणुका- इस संसार में मेरी क्रूरता बस आप hi पूरी करवा सकते थे, इसलिए आपकी हर इच्छा मैं पूरी करती हु,

प्रताप सिंह- सच में तुम कमल की औरत हो, मैं खुद को hi सबसे क्रूर समझता था लेकिन तुम्हे मेरी ये गलतफहमी दूर कर दी, अब बस जल्दी से रेवती को तैयार क्र दो, मैं उसे अपना बनाना चाहता हु,

रेणुका – अब आप उसे थोड़ी आजादी दीजिये, जवानी में कदम रखा ह उसने जरा उस जवानी का असर उसके यौवन पैर होने दीजिये,

प्रताप सिंह- जैसा तुम कहो, लेकिन आज मैंने जब उसके शरीर को छुआ तो झटका सा लगा, बड़ा कड़क शरीर ह उसका, मैंने आज तक उस पैर धयान क्यों नहीं दिया, बड़ी खूबसूरत ह हमारी रेवती, दुनिया की साडी खूबसूरती मेरी गुलाम होनी चाहिए,

रेणुका- और उस गुलाम खूबसूरती को मुझे कुचलने में मजा आता ह,

दोनों पति पत्नी हसने लगे,

फिर रेणुका रेवती के पास गई और देखा रेवती अपने बिस्टेर पैर उलटी लेती हुई ह और उसकी गांड का आकर बड़ा hi खूबसूरत लग रहा ह,

रेणुका मुस्कुरा दी,

रेणुका मन में- बड़ी खूबसूरत गांड ह किसी का भी दिल आ जाये इस पैर तो,

किसी के आने की आहात से रेवती उठ गई अपनी माँ को वह देख क्र डार्क र कड़ी हो गई,

रेवती- माँ आप यहाँ

रेणुका- अरे तू ऐसे दर क्यों गई तेरी माँ hi तो हु, ाचा ये बता तू खुश ह न तुझे महल से बहार निकलने का मौका मिला ह कैसा लग रहा ह,

रेवती- माँ मुझे ख़ुशी ह की आपने और पिता जी ने मुझे बहार निकलने का मौका दिया,

रेणुका- अब तू चिंता मत क्र तेरा जो दिल करे वो hi किया कर, और जो चाहिए वो मुझसे या अपने पिता से खुल क्र बोल दिया कर,

रेवती खुश हो गई, लेकिन उसके दिमाग में आज की घटना घूम रही थी उसे समझ नहीं आ रहा था ो अपनी माँ से कैसे कहे कही रेणुका नाराज हो गई तो क्या होगा, इसी दर से वो चुप रह गई,

रेणुका- तुझे बस एक बात का ख्याल रखना ह किट ेरे पिता के सिवा दुनिया का कोई मर्द तेरे आस पास भी न आये और किसी किन अजर तुझ पैर न पड़े और न hi तू किसी और मर्द को देखे,

रेवती की इस बात का मतलब तो ठीक से समझ नहीं आया लेकिन उसने अपनी माँ को मन है कर दिया की ऐसा hi होगा, लेकिन आप सब जानते हैं जिस चीज के लिए हमे रोका जाता ह हमारा डिंगा हमसे वो काम जरूर करवाता ह, दुनिया की कोई ताकत उस काम को करने से नहीं रोक पति, वैसे hi रेवती के दिमाग में जिज्ञाषा जग गई,

रेवती- माँ मैं हमारे उपवन में जाना चाहती हु, वह भेटे पानी में नहाना चाहती हु,

रेणुका- है है चली जाना कल सुबह चली जाना, बस ख्याल रहे तेरे अलावा कोई दासी भी उस उपवन के अंदर नहीं आणि चाहिए,

रेवती- ठीक ह माँ,

वही प्रताप सिंह का सबसे बड़ा बीटा जो अपने आप में hi एक जानवर था, उसके अंदर प्रताप सिंह का खून का पूरा असर था, और बेसुमार ताकत थी, प्रताप सिंह उसी की वजह से कभी कोई युद्ध नहीं हरा था, जब से उसे युवराज बनाया गयाथा तब से वही सभी युद्ध लड़ता था, जिस युद्ध में वो उतर जाता सामने कोई भी सेना उसका सामना नहीं करती थी, जब से उसे इस बात का पता चला था की किसी राक्षश ने उसके पिता पैर हुम्ला किया ह तब से वो पागलो की तरह उस राक्षश को ढूढ़ने में लगा हुआ था, उसने राक्षश की जानकरी देने वाले को इनाम की भी घोषणा कर दी थी, और दूसरी तैयारी वो भवर सिंह के राजय पैर हुम्ला करने की कर रहा था, जहा उसके पिता का अपमान हुआ, जिन लड़कियों से उसकी शादी रुक गई अब वो उस राजय को hi तबाह करके वह की हर राजकुमारी को अपना गुलाम बनाना छटा था,

खैर ये सब चल रहा था, सभी उस राक्षश को ढूढ़ने में लगे हुए थे,

अगली सुबह रेवती अपने उपवन में पहुंच गाइट hi जहा वो कभी अपने माँ के साथ एक या दो बार hi आई थी, यहाँ उसने रेणुका को बुल्कुल नंगी कोकर नहाते देखा था, भेटे हुए पानी में खुले आसमान ने निचे उसने अपनी hi माँ से नंगे होकर नहाने की बड़ी तारीफ सुनी थी, और जब उसके माँ बाप उस पैर इतने महरबान थे तो उसने सबसे पहले वही मांग लिया जिसके बारे में उसने अपनी माँ से सुना था, उसे साथ जो दसिया आई थी वो उपवन के बहार hi रुक गई, रेवती अकेली hi उपवन के अंदर गई और इतनी खूबसूरती देख क्र अकेली hi खुश हो रही थी, लेकिन आप सब जानते hi होंगे वो ख़ुशी कुछ hi देर की होती ह जिसे बाटने के लिए कोई न हो, कुछ hi देर में रेवती अकेले पैन से उदास सी होने लगी, फिर उसने नहाने का विचार किया और अपने कपडे उतरने लगी लेकिन न जाने क्या सोच क्र रुक गई और रानियों के लिए बने तालाब में घुस गई, पानी में भीगने से रेवती के कपड़ ेउसके शरीर से चिपक गए थे,

रेवती ने जब अपने शरीर को देखा और अपने उभरी हुई चूचियों पैर चिपके हुए कपड़ो को देखा तो वो कामुक होने लगी और अपनी hi चूचियों पैर हाथ फिरन ेलगी, तभी उसे पास को फुलवारी में कुछ हलचल महसूस हुई उसने डार्क र उधर देखा तो वह कोई नहीं था, वो कुछ देर इधर ुधा रदेखति रही, जब कुछ नहीं दिखा तो फिर से नहाने लगी, और जैसी hi उसने पानी के अंदर डुबकी लगाई और उप्पेर आई तो उसके समाने एक बहुत hi खूसूरत लड़का खड़ा था, वो इतना खूबसूरत था की शायद hi दुनिया में कोई उसे देख क्र उससे नजर हटा सके, और वो रेवती के बिलकुल सामने पानी में hi खड़ा था, रेवती को यकीन hi नहीं हुआ कोई लड़का उसके इतने करीब खड़ा,

कुछ पल तो रेवती उसे निहारती रही लेकिन जैसे hi लगा ये अनजान मर्द ह तो वो चीखने वाली थी तभी उस लड़के ने रेवती के मुँह पैर अपना हाथ रख दिया और उसे खुद से चिपका लिया, रेवती का भीगा हुआ शरीर उस लड़के से चिपक गया, रेवती की चूचिया उस लड़के के सीने में डाब गई, पानी के अंदर चूचिया वाइस ेभी थोड़ा सा फूल जाती हैं जो इस समय रेवती की भी फूली हुई थी और वो थोड़ी कामुक भी थी,


रेवती दर गई लेकिन उस लड़के की ताकत इतनी ज्यादा थी की रेवती जरा सी हिल तक नहीं पाई, उस लड़के ने रेवती के हाथो को पकड़ लिया और पानी के अंदर ले गया और रेवती को अपनी बहो में भर लिया,
 
अपडेट-13



प्रताप सिंह अपनी बेटी को भोगने के सपने देख रहा था और वही कोई अनजान लड़का उसकी बेटी के शरीर को पानी के अंदर अपने शरीर से रगड़ रहा था, रेवती पानी के अंदर चीला भी नहीं प् रही थी, उस लड़के ने रेवती का मुँह छोड़ दिया और उसे खुद से चिपका लिया और अपना हाथ रेवती की गांड पैर लेजाकर पकड़ लिया, एक तो रेवती की चूचिया उसकी छाती पैर रगड़ रही थी दूसरा रेवती की गांड उसके हाथो में थी,

कुछ देर पानी में तैरने के बाद उस लड़के ने रेवती को बहार निकला और फिर से उसका मुँह दबा लिया,

रेवती बहुत ज्यादा घबराई हुई थी, जब लड़के ने घबराई हुई रेवती की आँखों में देखा जहा उसे आंसू दिखाई दिए,

लड़का- अरे अरे रोना नहीं, मैं तुम्हे कुछ नहीं करूँगा,

रेवती ने बस अपना मुँह छुड़वाने की कोशिश की,

लड़का- अगर मैंने तुम्हारा मुँह छोड़ा तो तुम चिल्लाओगी,

रेवती ने न में सर हिलाया, तो लड़क ेने मुँह पैर से हल्का सा हाथ हटाया तो रेवती एक दम छिलने लगी तो लड़के ने फिर से मुँह दबा लिया,

लड़का- तुम तो झूटी हो, मुझसे मन करने फिर भी चिल्ला रही हो,

रेवती बेबस सी उसे देख रही थी,

लड़का- देखो अगर तुम छाती हो मैं तुम्हे कुछ न करू तो बस चिलाना मत, मैं तो बस बात करने आया हु,

इस बार रेवती ने हार मन ली, उसने इशारो में कहा की वो अब नहीं चिलायेगी, लड़के ने मुँह पैर से हाथ हटा लिया, रेवती गुस्से में उसे देखती रही,

रेवती- कोण हो तुम, और तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यहाँ आने की, तुम जानते हो मैं कोण हु,

लड़का- मैं क्यों जणू तुम कोण हो, मैं तो यहाँ से गुजर रहा था तो इधर बड़ी हरियाली सी दिखी तो मैं इधर आ गया फिर पानी की आवाज तो इधर आ गया यहाँ आकर देखा तो इतनी खूबसूरत लड़की अकेली नाहा रही ह और थोड़ी उदास सिब hi लग रही ह तो सोचा क्यों न इसके साथ नाहा लू इसे भी साथी मिल जायेगा,

रेवती ने पहेली बार किसी मर्द से अपनी तारीफ सुनी थी, और जवानी में कदम रखने वाली लड़की को उसकी सुंदरता की तारीफ सबसे ज्यादा पिरया होती ह,

रेवती- अच्छा जी, वैसे अकेली लड़की को उदास देख क्र उसकी अकेलापन दूर करने वाले आप ह कोण,

लड़का- मेरा नाम देव ह, दूर देश से आया हु, घूमने फिरने निकला हु,

रेवती- दूर देश के रहने वाले देव आप यहाँ अंदर घुसे कैसे, यहाँ तक आना किसी के लिए भी संभव नहीं ह,

देव- मैं तो आ गया, या यु कहु आपकी सुंदरता खींच ले,

रेवती- आपको इतनी दूर से मेरी सुंदरता दिख गाइट hi,

देव- ये बात तो आप अपनी सुंदरता से पूछिए,

रेवती- बहुत मजाक हो गया, यहाँ से चले जाओ, अगर मेरे पिता को पता चला न तो वो आपको मरवा देंगे,

देव- आपको मेरी फ़िक्र हो रही ह,

रेवती- मैं क्यों फ़िक्र करुँगी, आप कोई जासूस भी हो सकते हो,

देव- फिर तो आप शोर मचा दो और सबको बुला कर बता दो की आपने एक जासूस पकड़ा ह,

रेवती- मैं सच में शोर मचा दूंगी,

देव- मचाइए न शोर,

रेवती ने छिलने का नाटक किया लेकिन आवाज गले से बहार नहीं निकली, देव बस मुस्कुराता रहा,

रेवती- मैं आपको मौका दे रही हु, चले जाइये, वर्ण आपको संशय हो जाएगी,

देव- आप खेती हैं तो चला जाता हु, आपको मेरा यहाँ आना शायद अच्छा नहीं लगा,

रेवती- ऐसी बात नहीं ह, वो तो मैं

देव- मतलब आपको अच्छा लगा,

रेवती उसे देखने लगी, देव ने तुरंत आगे बढ़ क्र रेवती के होतो पैर अपने हॉट रख दिए और उसे पानी के अंदर ले गया, रेवती एक दम बोखला गई लेकिन पानी के अंदर कुछ नहीं क्र सकती थी, देव ने रेवती के होतो को अच्छे से चूमा और फिर उसे छोड़ दिया, रेवती एक दम पानी के बहार आई और घेरि घेरि साँस लेने लगी, जब उसका साँस और दिल संयम में आया तो उसने देव को डकः लेकिन देव वह नहीं था, रेवती ने पानी के अंदर देखा लेकिन देव वह से जा चुक्का था, वो कब निकला किधर से निकला रेवती को पता hi नहीं चला,

रेवती बौखलाई सी कड़ी रह गई,

वही एक सुमसान जगह पैर बिलकुल अंधकार था एक दम अँधेरा, ऐसा अँधेरा की जिसके अंदर अगर सूर्य भी जगमगाये तो दिख न पाए, तभी कुछ हलचल हुई और एक आवाज गुंजी- सात्विक

ये भौमिक जी की आवाज थी,

सात्विक- भौमिक तुम ठीक हो,

भौमिक- है मैं ठीक हूत ुम ठीक हो न, ये हम कहा पैर हैं, और कुछ दिख क्यों नहीं रहा ह, इतना अंधकार कैसे ह यहाँ

सात्विक- वो देखियो उधर एक रौशनी दिख रही ह,

दोनों को एक रौशनी का बिंदु सा दिख रहा था, दोनों भाइयो ने अंदाजे से एक दूसरे का हाथ पकड़ा और उस रौशनी की तरफ चल दिए, जैसे जैसी वो रौशनी के करीब जा रहे थे रौशनी तेज होती जार hi थी और जब वो उसके करीब पहुंचे तो रौशनी का एक गोला सा दिखाई दिया,

सात्विक- ये क्या हो सकता ह

भौमिक- बिना छुए तो पता नहीं चलेगा,

सात्विक- ठीक ह दोनों एक साथ उठाते हैं इसे,

दोनों भाइयो ने एक साथ उस गोले को छुआ और एक दम चारो तरफ तेज रौशनी हो गई और दोनों भाई एक दम बेहोश हो गए और वही गिर गए, और वो रौशनी का गोला उनके उप्पेर रुक गया और अचानक उस गले के दो भाग हुए और दोनों में एक एक भाग समां गया, और फिर से अँधेरा हो गया,

तभी उस जगह से काफी दुरी पैर एक पहाड़ ने एक हुंकार सी भरी गई, जैसे कोई विशाल जानवर सो कर उठा हो, और उस हुंकार से आस पास के जीतनेय भी जंगली जानवर थे सब भाग खड़े हुए, ये बस एक पहाड़ था, वो घने जंगल के बीचो बिच, इतना घाना जंगल की कोई इंसान कभी उसके अंदर नहीं घुस सकता था, लेकिन उस पहाड़ के उप्पेर कुछ लोग रहते थे, ऐसा लग रहा था जैसे वो बहुत लम्बे समय से यहाँ रहते हैं, पैदा पैर hi उनके घर थे, जंगली जानवरो को मर कर कहते थे, पूरा एक समुदाय था वह, एक गाओं जैसा बसाया हुआ था,

उस हुनकर को सुनकर पूरा गाओं एक दम खड़ा हो गया और एक जगह पैर इकठा हो गया,

उनमे से एक बुजुर्ग आदमी- वो आने वाले हैं, वो आने वाले हैं, हमारा इंतजार अब ख़तम होने वाला ह,

एक जवान लड़का- बाबा क्या हमारी पीडियो की सजा अब समाप्त होने वाली ह,

बुजुर्ग- है बीटा उम्मीद की किरण जग रही ह, हमारा जीवन बदलने वाला ह, आज ख़ुशी का दिन ह खुशिया मनाओ, बस धयान रहे यहाँ की आवाज बहार जंगल के बहार तक न चली जाये,

लड़का- बाबा ये जंगल इतना बड़ा ह की यहाँ की आवाज कोई नहीं सुन सकता, और इस जंगल में जो भी आएगा वो वापस नहीं जायेगा, हमारा भोजन बन जायेगा, वैसे भी बहुत समय से कोई इंसान इधर नहीं आया ह, जानवरो का मांस खा खा क्र अब थक चुके हैं,

इन लोगो को मांस से मतलब था ो चाहे किसी का भी हो,

खैर चलते हैं भवर सिंह के महल में जहा भवर सिंह अपने कमरे में लेता हुआ था, तभी उसके पास काम्य आ गई और कमरे के दरवाजे बंद हो गए, दोनों भाई बहन न जाने किस बारे में घेरि बात चित कर रहे थे, तभी वह अमरावती भी आ गई लेकिन द्वारपाल ने उसे रोक दिया,

अमरावती- तेरी इतनी हिम्मत तूने मुझे रोका,

ड्रॉपल- महारानी अंदर महारानी काम्य जी हैं, और महाराज का आदेश ह कोई भी अंदर न आने पाए वर्ण मेरी गार्डन काट दी जाएगी, और अगर किसी ने जबरदस्ती की तो उसका सर काट दिया जायेगा,

अब अमरावती की हिम्मत नहीं थी आगे कदम रखने की लेकिन उसका क्रोध सातवे आसमान पैर था, वो गुस्से में आपमें कमरे में आ गई, वो जानती थी की अगर इस राजय में अगर कोई उसका कुछ बिगड़ सकता ह तो सिर्फ काम्य ह, अब उसने काम्य को रस्ते से हटाने का फैसला कर लिया था, लेकिन संशय ये थी की भवर सिंह काम्य पैर जितना भरोसा करता था उतना किसी पैर नहीं करता, ऐसा क्या तरीका अपनाया जाये जिससे काम्य को रस्ते से हटाया जा सके,

चारो तरफ साजिसे hi साजिशे थी सबको राजपथ चाहिए था, कोई किसी की खुशी या दुःख के बारे कभी बात नहीं करता था सबको बस सत्ता चाहिए थी, लेकिन वही दूर एक गुफा में देव और निहारिका बैठे हुए थे जिनके अंदर कभी कोई लालच नहीं था, और आज तो उनके बस नफरत थी, सिर्फ नफरत,

निहारिका- क्या हुआ वह

देव- मुलाकात तो कर आया हु और अपना पहला कदम भी उठा आया हु, अब देखते हैं उसका क्या असर होगा,

निहारिका- जॉब hi करना होगा जल्दी करना होगा, लेकिन ख्याल रहे कुछ भी जबरदस्ती नहीं होना चाहिए, सब अपनी मर्जी से आये, तभी इन सबका घमंड तोडा जायेगा,

देव- माँ हमे महल में जाना होगा, वह के लोगो को अगर सबक सीखना ह तो हमे अंदर जाना होगा,

निहारिका- इसी लिए तो सबसे पहले इस प्रताप सिंह का इंतजाम करना होगा, ये hi वो इंसान ह जो महल के रस्ते खोलेगा, और उसके बाद हमे ढूंढ़ना ह कस्तूरी को,

देव- जिस दिन वो मेरे सामने आई मैं उसे मार दूंगा

निहारिका- नहीं तू ऐसा कुछ नहीं करेगा, उसे बस ढूंढ़ना होगा वो hi तो साडी सचाई बताएगी, उसने ऐसा क्यों किया किसके कहने पैर किया, सबकी साजिश सामने लानी होंगी,

हमे जो करना ह उसके लिए महल में जाना hi होगा,

देव- ठीक ह माँ मैं खोजता हु उसे,

निहारिका- मैं एक बात आज तक नहीं समझ पाई हु की हम बचे कैसे, और इस गुफा में कैसे पहुंचे,

देव- ये गुफा इस झरने के बिलकुल निचे ह, जब हम झरने से गिरे थे तो किसी चीज से टकराये थे, उसके बाद मुझे भी कुछ याद नहीं, हो सकता ह हम किसी पत्थर से टकरा क्र इस गुफा में आ गिरे,

निहारिका- लेकिन हमारे घाव कैसे भरे, और ये चीता ये भी हमारे साथ था इसके पेट में तो तलवार घुसी थी ये फिर भी जिन्दा ह, और तेरा शरीर ये पहले से कितना बदल गया ह,

देव- है वो तो ह, ये सब तो मेरी समझ में भी नहीं आया ये क्या हुआ, कैसे हुआ, शरीर तो बदल गया ह और आपका शरीर भी बदल गया ह आप पहले से भी कही ज्यादा खूबसूरत हो गई हैं,

निहारिका- अब मेरी खूबसूरती मेरी कमजोरी नहीं बनेगी, अब कोई मेरी तरफ आँख नहीं उठाएगा,

देव बस मुस्कुराया, तभी देव को बहुत तेज दर्द होने लगा, वो अपने पेट को पकड़ क्र बैठ गया ahhhhhhhhhhhhhhhhh\

निहारिका- क्या हुआ बीटा क्या हुआ तुझे,

देव- पता नहीं माँ बहुत तेज दर्द हो रहा ह,

निहारिका- कहा हो रहा ह,

देव- निचे,

निहारिका- निचे कहा, क्या पेट में दर्द ह,

देव- नहीं माँ निचे

निहारिका- निचे कहा,

देव से दर्द अब बर्दास्त नहीं हो रहा था उसने अपना निचे का कपडा खोला और निहारिका को दिखाया, निहारिका देख क्र घबरा सी गई,

देव- माँ इसमें बहुत दर्द हो रहा ह,

निहारिका ने डकः देव का लुंड एक दम खड़ा था और बहुत कड़क हो रखा था, लुंड की साडी नसे साफ़ साफ़ दिख रही थी,

निहारिका- इसमें इसमें कैसे,

देव- पता नहीं माँ बाउट दर्द हो रहा ह, ऐसा लग रहा ह जैस ऑय फैट जायेगा,

निहारिका देव के पेट पैर हाथ फिरने लगी उसे समझ नहीं आ रहा था क्या करे, वो लुंड को पकड़ना चाहती थी उसे देखना चाहती थी की संशय क्या ह लेकिन वो झिजक रही थी, उसेक हाथ कैंप रहे थे, लेकिन तभी उसके दिमाग में नए विचार दौड़ गए,

निहारिका मन में- अब मुझे वो निहारिका नहीं बनना, अब देव के अलावा मेरे लिए कुछ भी मायने नहीं रखता, मैंने साडी उम्र उसे अपना दूध पिलाया ह अब तक पीला रही हु, हम दोनों एक दूसरे को नंगे दखते हैं अब हमारे बिच की साडी शर्म और माँ बेटे के रिश्ते का नियम बदल चुक्का ह, अब मैं अपनी झिजक की वजह से देव को तकलीफ नहीं झेलने दूंगी,

निहारिका ने तुरंत देव के लुंड को पकड़ लिया और इधर ुधा रकरके देखने लगी,

निहारिका ने जैसे hi देव के लुंड को पकड़ा था तो उसके शरीर में कैंप काँपी सो दौड़ गई, उसने न जाने कितने वर्षो बाद उसने लुंड को अपने हाथ में लिया था, लेकिन निहारिका ने अपनी भावनाओ पैर काबू किया और लुंड को देखने लगी, उसके आकर और फूली हुई नसों के शिव कुछ गलत तो नहीं दिख रहा था,

निहारिका- देव कहा दर्द हो रहा ह,

देव- माँ पुरे में hi दर्द ह और ये नीच वाले हिस्से में भी,

देव ने अपने भरी और लटके हुए ाँद की तरफ इशारा किया,

निहारिका ने देव के ांडो को आपने हाथ में लिया तो देव को और दर्द हुआ, निहारिका ने खुद कभी इतना सम्भोग नहीं किया तो उसे इस बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं था, लेकिन फिर भी वो उसे लुंड और ाँद को अहलके हलके सहलाने लगी,

निहारिका के मुलायम हाथो का असर हो रहा था देव पैर, उसे कुछ रहत सी महसूस हुई थी, जैस एही देव को रहत महसूस हुई तो निहारिका समझ गई देव को क्या हो रहा ह, उसका हाथ एक दम रुक गया, क्योकि वो समझ गई थी की देव के अंदर सम्भोग की इच्छा जगी हुई ह, शायद वो अब तक अपनी इच्छाओ को रोकता आ रहा ह, या उसे अहसास hi नहीं ह उसके शरीर को सम्भोग की भी जरुरत ह, और ये दर्द सम्भोग न करने की वजह से हो रहा ह,

निहारिका के हाथ अब रुक गए क्योकि उसे अहसास हुआ की उसका बेटे के अंदर सम्भोग की इच्छा जाएगी हुई ह और वो उसकी माँ उसके सामने बैठ क्र अपने hi हाथो से अपने hi बेटे का लुंड पकड़ क्र अनजाने में hi उसे हाथमेथुन करवा रही हु, निहारिका के मन में ग्लानि के भाव आने लगे, उसने अपना हाथ हटाया और देव को कहा,

निहारिका- देव उठो और झरने के निचे खड़े हो जाओ, और खुद कोशंट करो,

निहारिका खुल क्र नहीं बोल प् रही थी, लेकिन देव ने निहारिका की बात मणि और झरने के निचे खड़ा हो गया,

दोनों माँ बीटा जब से उस हादसे से गुजरे हैं तब से एक दूसरे के समाने नंगे hi थे, देव गुफा से बहार गया था इसलिए उसने रस्ते में से किसी के कपडे पहन लिए निहारिका तो अभी भी नंगी hi थी, दोनों के अंदर बहुत हद तक शर्म ख़तम हो चुकी थी लेकिन फिर भी कुछ शर्म झिजक बाकि थी जो निहारिका को रोक रही थी,

निहारिका मन में- मैं इतना क्यों घबरा रही हु, हमने कुछ गलत नहीं किया, गलत तो उन लोगो ने किया ह और इतना गलत करने के बाद भी उनमे जरा सिब hi शर्म नहीं ह फिर मैं क्यों शर्मो, देव मेरा बीटा ह और बी हमारे बिच ऐसा कुछ नहीं ह जिसे छुपाया जा सके, फिर किस बात की झिझक, हमे अपने रिश्ते को बदलना होगा, दुनिया समाज के नियम अब हुमारेलिए कोई मायने नहीं रखते, अगर कुछ मायने रखता ह तो मेरे लिए देव और देव की लिए मैं, अब और कोई रिश्ता सम्बन्ध हमारे बिच नहीं आएगा, देव इस चीज में नासमझ ह मुझे hi उसका मार्ग दर्शन करना होगा, मुझे hi उसे सब समझाना होगा,

तभी वह देव आ गया एक दम नंगा, अब वो शांत लग रहा था, उसका लुंड भी पहले से काम कठोर था, उसका लुंड अभी बैठा नहीं था लेकिन पहले जितना कठोर नहीं था,

निहारिका- अब कैसा महसूस कर रहे हो,

देव- अब काफी रहत h,lekin ये हुआ क्यों, इससे पहले तो कभी नहीं हुआ,

निहारिका- देखो बीटा अब हमारे बिच ऐसा कुछ नहीं ह जिसके बारे में कुछ छुपाया जाये, या शरमाया जाये, वैसे तो ये सब बाते दोस्त समाज सीखा देते हैं, लेकिन तेरा तो कभी कोई दोस्त न बना न hi इस परिवार ने बनने दिया, तूने अपने जीवन का सबसे ज्यादा समय मेरे साथ बिताया ह तो ये मेरी जिमेदारी बनती थी की तुझे ये सब सिखौ, लेकिन तू अच्छा बनाने की सोच की वजह से और कुछ शर्मा ुर समाज के बनाये हुए नियम की वजह से नहीं क्र पाई, लेकिन अब मैं तुझे सब सीखूंगी, तुझे ऐसा बनना होगा जिसे दुनिया की कोई ताकत झुका न पाए,

देव- ऐसा क्या ह माँ जो मुझे जानना ह,

निहारिका- ये जो दर्द तुझे हो रहा था उसका कारन ह सम्भोग की इच्छा, तेरे अंदर सम्भोग की इच्छा हो रही ह लेकिन तू कर नहीं रहा ह, और जब वीर्य बहुत ज्यादा मात्रा में इकठा हो जाये तो ऐसा दर्द हो जाता ह कभी कभी, समय समय पैर शरीर को सम्भोग की जरुरत होती ह,

देव- लेकिन माँ मेरे मन में तो ऐसे कोई विचार नहीं आ रहे हैं,

निहारिका- शायद तू अपने विचारो को दबा रहा होगा, तुझे पता भी नहीं होगा,

देव- नहीं माँ, अगर ये सम्भोग न करने की वजह से तो मैं इसका कारन समझ गया,

निहारिका- कैसा कारन

देव- जब मैंने कस्तूरी के साथ सम्भोग किया था तब भौमिक जी ने नारझोंकर मुझे शार्प दिया था की मैं बिना सम्भोग केन hi रह सकूंगा, अगर मैंने समय समय पैर सम्भोग नहीं किया तो मेरा वीर्य hi मेरी जान ले लेगा,

निहारिका- उन्होंने ऐसा शाप दिया, उनकी हिम्मत कैसे हुई,

देव- उनकी गलती नहीं थी, उन्हें मुझ पैर विश्वास था और मैंने वो विश्वास तोडा था इसलिए उन्होंने वो शाप दिया,

निहारिका- उस समय तू कुछ और था लेकिन आज नहीं, आज तुझे ऐसा बनना होगा की कोई तुझे पैर झुका न सके, और तेरा ये श्राप तुझे कमजोर कर सकता ह, तुझे लगातार सम्भोग चाहिए उसके लिए तू किसी के सामने झुकेगा नहीं, तेरे सामने मैंने सरे रस्ते पहले hi बता दिए हैं, न कोई रिश्ता मायने रखता ह न hi कोई समाज या समाज के नियम अगर कुछ मायने रखता ह तो तू और तेरी जीत,

देव- माँ आप चिंता मत कीजिये मैं मर सकता हु लेकिन अपनी कमजोरी के लिए किसी के सामने झुक नहीं सकता,

निहारिका- अपने इस श्राप की कमजोरी को hi अपनी ताकत बना, ये श्राप तुझे मिला ह इसके पीछे भी कुछ अच्छा hi होगा, सिर्फ तू hi ऐसा ह जो इस श्राप को पूरा तू hi कर सकता ह, तेरा ये लिंग संसार की किसी भी औरत को संतुष्ट क्र सकता ह, इसलिए इसका इस्तेमाल क्र और हर वो औरत तेरे सामने झुकी होनी छाइये जिसने हम ेतकलीफ़ दी ह,

देव- ऐसा hi होगा माँ, अब मेरे अंदर किसी के लिए दया प्रेम सहनुभूति नहीं ह सिर्फ नफरत ह और ये नफरत सबको जला देगी,

निहारिका- प्रताप सिंह की बेटी का क्या हुआ,

देव- अपना पहला असर छोड़ आया हु उस पैर, उम्मीद करता हु उस पैर असर होगा,

निहारिका- जल्दी करना, प्रताप सिंह को जल्दी hi सबक सीखना ह, उसने मुझे चुनेकी कोशिश की थी, उसे मैं खुद मरूंगी,

देव- जी माँ,

दोनों माँ बीटा फिर बैठ गए, और सामने रखे फल खाने लगे,

उधर रेवती अपने बिस्टेर पैर लेती करवट बदल रही थी, वो बहुत बैचैन थी, जब से वो महल से बहार निकली थी तब से उसके अंदर जवानी उभर रही थी, और प्रताप सिंह वाली घटना ने उसके अंदर थोड़ा कामुकता के भाव पैदा किये थे लेकिन आज तो देव ने उसके अंदर पूरी वासना भर दी थी, एक अनजान लड़का उसके हितलाभ में उसके इतने नजदीक था, रेवती की चूचिया उसकी छाती से रागादि थी, और उसने रेवती के होतो को चूमा था, रेवती कभी गुस्सा करती कभी अपने होतो पैर उंगलिया फिरती, वो बार बार उसी पल को याद कर रही थी, उसे समझ hi नहीं आ रहा था क्या करे, उसका दिमाग बोल रहा था ये गलत हुआ ऐसे कैसे कोई उसे छू सकता ह लेकिन उसका दिल और उसका शरीर कुछ और hi बोल रहा था, उसके शरीर में रोमांच भरा हुआ था, न चाहते हुए भी उसकी छूट में गिला पैन आया हुआ था, और चूचिया कड़क हो राखी थी,

वो अपनी चूचियों पैर हाथ फिर रही थी तभी उसकी माँ रेणुका वह आ गई,

रेणुका- कैसी ह मेरी बेटी, आज मजा आया तुझे,

रेणुका की आवाज सुनकर रेवती एक दम बैठ गई,

रेवती- माँ आप यहाँ,

रेणुका- मैं ये पूछने आई थी की तुझ अच्छा लगन ा वह,

रेवती- है माँ बहुत अच्छा लगा, क्या मैं फिर से वह जा सकती हु,

रेणुका – है है जरूर

रेवती- माँ एक बात पुछु आप नाराज तो नहीं होगी,

रेणुका- है पूछ

रेवती- माँ क्या मर्द के हाथ लगने से लड़कियों को कुछ अलग का महसूस होता ह क्या,

रेणुका को लगा की रेवती प्रताप सिंह के बारे में बात कर रही ह, क्योकि उसी का हाथ रेवती के शरीर पैर लगे थे,

रेवती- है बीटा और जवानी में होता hi ह, और इसमें कोई बुराई नहीं ह, औरत बानी hi मर्द के लिए ह, और जब मर्द के हाथ लगते हैं तो औरत के शरीर पैर और भी निखार आता ह, अगर मर्द पसंद का हो तो उसके साथ सम्भोग का मजा लेना चाहिए, ये रिश्ते नाते और समाज को भूल जाना चाहिए, बस अपने शरीर की सुन्नी चाहिए, अब तू जवान ह तो मजे ले सकती ह,

रेणुका ने तो ये सलाह दे दी ये सोच की की रेवती प्रताप सिंह की तरफ आकर्षित हो जाये, लेकिन यह ऑटो मामला hi उल्टा था रेवती तो देव के बारे में बात कर रही थी, क्योकि देव ने तो उसके शरीर को छुआ था,

रेणुका सलाह देकर वह से चली गई और रेवती फिर से देव के खयालो में खो गई और अकेली hi मुस्कुराने लगी,

रात में अमरावती भवर सिंह के पास बैठी हुई थी,

अमरावती- आज मैं आपसे मिलने आई थी लेकिन उस द्वारपाल ने मिलने नहीं दिया, आपका दरवाजा भी बंद था,

भवर सिंह- है वो काम्य और मैं कुछ बात कर रहे थे,

अमरावती- ऐसी भी क्या बात हो गई जो कमरा बंद करके की गई, और आपकी hi पत्नी को आने की आज्ञा नहीं मिली,

भवर सिंह थोड़ा गुस्से में आ गया,

भवर सिंह- तुम कहना क्या चाहती हो, वो हमारी बहन ह हम उससे अकेले में बात नहीं कर सकते क्या,

अमरावती- मैं ऐसा तोडना बोल रही हु,

भवर सिंह- बोलना भी मत, और कभी मेरे और मेरी बहन के बिच में आने की कोशिश भी मत करना,

अमरावती- मैं कहा आ रही हु बिच में,

भवर सिंह – एक तो उस राक्षश का अब तक कुछ पता नहीं चला ह और तुम अलग दिमाग ख़राब कर रही हो,

अमरावती चुप हो गई, उसे पता था भवर सिंह को नाराज करना ठीक नहीं ह वर्ण वो कब मोत की सजा सुना दे क्या पता,

वही दूर एक जगह,

सुगंधा- पिता जी मैंने सुना ह किसी राक्षश ने हमारे राजय में बहुत आतंक मचाया ह, बहुत लोग मर दिए

आचार्य जी- सब कर्मो के फल ह बीटा,

सुगंधा- लेकिन वो भवर सिंह बच गया, जिसने देव को गायब करवा दिया, मैं तो चाहती थी की वो भी मर जाये,

आचार्य जी- ऐसा नहीं बोलते बीटा, किसी की मोत की इच्छा नहीं रखते, ये गलत ह,

सुगंधा- हमारे साथ जो हुआ वो सही था क्या, देव के साथ जो हुआ वो सही था

आचार्य जी- हमारे साथ जोहुआ उसकी जिम्मेदार तुम्हरी बहन ह भवर सिंह नहीं,

सुगंधा- मैं देव को ढूंढ़ना छाती हु पिता जी, मेरा दिल बहुत बैचैन हो रहा ह,

आचार्य जी- तू उसे कैसे ढूडन पायेगी बेटी,

सुगंधा- मुझे नहीं पता बस दिल कह रहा ह मैं उसे धुंध लुंगी,

आचार्य जी- मैंने तुम दोनों बहेनो को कभी नहीं रोका तो आज कैसे रोक सकता हु, जा कर ले जो तेरा दिल करे



वही रीवा अपने सपने में खोई हुई थी, और पसीने में भीगी हुई थी, वोट क जंगल में भाग रही थी उसके पीछे वो राक्षश एक तलवार लिए हुए चला आ रहा था, रीवा दर से कनपटी हुई भागी जार hi थी, उसके गले से आवाज भी नहीं निकल रही थी, वो एक पत्थर से टकराई और गिर पड़ी, तभी वो राक्षश उसके करीब आ गया और रीवा डार्क र चीख पड़ी तभी वह देव आ गया और उसने रीवा का हाथ पकड़ लिया और अचानक राक्षश गायब हो गया, तभी रीवा ने आँखे खोल दी, वो दर से हांफ रही थी,
 
अपडेट-14

अगले दो दिन सब शांत रहा देव रेवती से मिलने नहीं गया, उधर रेवती लगातार तालाब में जा रही थी नहाने के लिए, पहले दिन तो वो बस देव के आने का इंतजार क्र रही थी, उसका दिल बार बार देव को देखने का कर रहा था, लेकिन देव नहीं आया, उसके अगले दिन तो रेवती बैचैन हो गई, उसके अंदर देव से मिलने की बैचैनी हो रही थी, वो तालाब के बहार इधर उधर घूमती रही लेकिन देव नहीं आया,

देव जानबूझ क्र रेवती के पास नहीं गया था, उसने रेवती के अंदर एक आग लगा दी थी अब उसे बस इंतजार करना था, इस बिच देव निकल गया कस्तूरी को ढूढ़ने, क्योकि कस्तूरी hi सच बता सकती थी की उसने ऐसा क्यों किया,

देव की शंश्य थी की वो किसी से पूछ भी नहीं सकता था, क्योकि उसे सब जानते थे, इसलिए वो अकेला hi दूध रहा था, रेवती तो देव को पहचान नहीं पाई थी क्योकि उसने कभी देव को देखा hi नहीं था, वह प्रताप सिंह और उसके कुछ सेनिको के अलावा किसी ने नहीं देखा था, और सबसे कमल ये था की जिन सेनिको ने देखा था उन सभी को राक्षश मर चुक्का था,

देव किसी तरह जानकरी निकलता हुआ आचार्य जी के पास पहुंच चुक्का था, जब देव वह पंहुचा तो उसे बड़ा दुःख हुआ क्योकि आचार्य जी अकेले जमीन पैर घास पैर लेते हुए थे, उन्हें पानी देने वाला भी कोई नहीं था, जैसे hi आचार्य जी ने देव को देखा वो ख़ुशी से झूमते हुए खड़े हो गए,

आचार्य- देव देव तू आ गया मेरे बच्चे तू आ गया, मैं जनता था तू आएगा एक दिन,

देव- आचार्य जी आप यहाँ इस हालत में

आचार्य जी- समाज में कही मुँह दिखने लायक नहीं बचा मैं,

देव- मुझे माफ़ कर दीजिये आचार्य जी, मेरी वजह से ये सब हुआ लेकिन मैंने कस्तूरी के साथ जबरदस्ती नहीं की, हम एक दूसरे को प्यार करते थे और उस प्यार में बहक क्र hi हम एक दूसरे के करीब आये और कस्तूरी ने hi इसकी पहल की थी, वैसे मैं आपको कोई सफाई देने नहीं आया हु, पूरी दुनिया ने मुझे गलत समझ क्र सजा दी ह, आप भी दे सकते हैं,

आचार्य जी- मेरी परवरिश में कमी हो सकती ह लेकिन तुझे दी हुई शिक्षा में कोई कमी नहीं हो सकती, मैं जनता हु तू कभी झूट नहीं बोलेगा, और मैं ये भी जनता हु की कस्तूरी तुझसे प्रेम करती थी, एक पिता अपने बेटियों की आँखों में तेरे लिए प्रेम देख सकता ह, जो अब मुझे सुगंधा की आँखों में भी दीखता ह, लेकिन कस्तूरी ने ऐसा क्यों किया ये मेरी समझ में नहीं आ रहा, वो तुझसे प्रेम करती थी, फिर उसने ऐसा क्यों कहा, अगर कुछ गलत हुआ भी था तो वो मुझसे भी बोल सकती थी,

देव- ये hi तो मुझे जानना ह, कहा ह वो

आचार्य जी- नहीं जनता, उस दिन के बाद कस्तूरी और उसकी माँ दोनों गायब हैं, और मैं सुगन्धदा को लेकर यहाँ आ गया सबसे दूर,

देव- आप चिंता मत कीजिये, सब ठीक हो जायेगा, कस्तूरी खुद सबको सच बताएगी,

आचार्य जी- तुम बैठो मैं पानी लता हु, वैसे सुगंधा तुझे hi ढूढ़ने निकली ह,

देव- मुझे क्यों,

आचार्य जी- उसके अंदर तेरे लिए जो प्रेम ह उसी की वजह से,

देव- नहीं आचार्य जी, मैं अब वो देव नहीं हु जिससे कोई प्रेम क्र सके, या मैं किसी से प्रेम कर सकू, समझाइये सुगंधा को मेरे लिए अपने जीवन को बर्बाद न करे, मेरी मंजिल अब बहुत अलग ह,

अब मैं चलता हु आप अपना ख्याल रखना, जब सब ठीक हो जायेगा तब मैं आपको लेने आऊंगा, तब तक अपना ख्याल रखना,

देव वह से निकल गया आचार्य जी बस उसे देखते रह गए,

इधर राजगुरु परेशां थे क्योकि भौमिक और सात्विक के साथ जो सैनिक गए थे वो वापस आ गए और उन्होंने जो बताया उसे सुनकर राजगुरु को चिंता होने लगी थी, और भवर सिंह बार बार राजगुरु से पूछ रहा था की सफलता मिली या नहीं,

राजगुरु की परेशानिया बहुत ज्यादा बढ़ गाइट hi, एक तो उनके भाइयो का पता नहीं था, दूसरा वो राक्षश उसके बारे में अब तक कोई जानकरी नहीं थी, वो तो जैसे गायब hi हो गया था, और भवर सिंह खुद को अमर करने के लिए पागल हुआ जा रहा था, राजगुरु की समझ में कुछ नहीं आ रहा था की वो किस दिशा में पहले जाये, सरे रस्ते बंद hi दिखाई देते थे, और भवर सिंह का धयान बस खुद की जिंदगी पैर था जबकि उसका दुश्मन प्रताप सिंह जिन्दा था जो पुरे परिवार को मरने वाला था, फिर भी भवर सिंह उसके लिए कोई तैयारी नहीं क्र रहा था, ये बात राजगुरु को और परेशां कर रही थी, राजगुरु भवर सिंह को समझ नहीं प् रहे थे,

खैर इधर देव वापस चल दिया था वो प्रताप सिंह के राजय की तरफ जार है था रेवती से मिलने, रस्ते में उसने देखा की कुछ सैनिक कुछ लोगो को खींच क्र ला रहे थे, देव उनके करीब गया तो देखा ये प्रताप सिंह के राजय के सैनिक हैं,

देव ने सोचा इन लोगो को बचा लिया जाये,

देव- अरे ये क्या कर रहे हो कहा ले जा रहे हो इन्हे,

सैनिक- तू कोण ह बे, और तू जनता ह हम महाराज परतप सिंह के सैनिक ह, हमसे सवाल करने की तेरी हिम्मत कैसे हुई,

देव- अरे भाई इन बेचारो को क्यों ले जा रहे हो,

देव ने धयान दिया वह जीतनेय भी लोग थे सब हट्टे काटते थे, मतलब ये सैनिक तगड़े लोगो को hi पकड़ रहे हैं, देव को कुछ मामला अलग लगा,

सैनिक दूसरे सैनिक से- अरे ये कुछ ज्यादा hi सवाल पूछ रहा ह, लग भी तगड़ा रहा ह इसे भी ले चलो, महारानी ने 10 मंगाए थे हम 11 ले चलते हैं, महारानी खुश हो जाएगी,

देव को पकड़ने की बात पैर देव की बोहे चढ़ गई थी वो आगे बढ़ने hi वाला था लेकिन महारानी का नाम सुनकर रुक गया, ये अच्छा मौका था महारानी से मिलने का, बस उसे चिंता थी अगर प्रताप सिंह ने उसे देख लिया तो पहचान जायेगा, लेकिन आगे बढ़ने के लिए प्रताप सिंह के राजय में तो घुसना hi था ये तरीका अच्छा था,

देव ने डरने का नाटक किया, और सेनिको ने दौड़ क्र देव को पकड़ लिया और बांध लिया,

दूसरे लोग- अरे भाई तुम भी हमारे साथ फास गए,

देव- ये लोग छाते क्या हैं

एक लड़का- कोई नहीं जनता, ये लोग हर महीने आते हैं और अलग अलग जगह से हट्टे काटते मर्दो को ले जाते हैं, आज तक वो मर्द कभी वापस नहीं आये, इसलिए किसी को पता नहीं वह क्या होता ह, पिछले 15 साल से ये चला आ रहा ह,

दूसरा आदमी- कुछ लोगो का मन्ना ह की ये वह लेजाकर उन्हें गुलाम बनाते हैं और लड़ाई लड़वाते हैं, किसी ने अपने गाओं के एक आदमी को ऐसे लड़ते देखा था,

देव- चलो अब तो वह चल hi रहे हैं जाकर देख लेंगे ये क्या करवाते हैं,

सब डरे से सेनिको के पीछे चलते रहे लेकिन देव चौकन्ना होकर चल रहा था कही उसे कोई पहचान न ले, जैसी hi वो सब राजधानी के करीब पहुंचे, तो सैनिक सभी लोगो को मुख्या दरवाजे की जगह एक छुपे हुए रस्ते से अंदर ले जाने लगे, ये बात देव को खटक गई, और ये देव के लिए थोड़ा फायदेमंद भी था क्योकि वो सभी की नजरो से बच गया था, लेकिन अगर ये प्रताप सिंह के पास ले गए तो सब गड़बड़ हो जाएगी,

सेनिको ने सभी को एक तहखाने में बांध दिया, फिर कुछ तगड़े पहलवान जैसे 4 आदमी आये और अकड़ क्र बोले

आदमी- अरे हरामखोरो खड़े हो जाओ और जाकर नहाओ, एक दम साफ़ सुत्रे हो जाओ और वह कपडे रखे हैं उन्हें पहन लो,

सभी ने चुप चाप वैसा hi किया, नाहा क्र सबने कपडे पहने जो सिर्फ कमर के निचे बांधने की धोती और उप्पेर एक हल्का सा कुरता था,

फिर सभी को लाइन से खड़ा कर दिया, सभी के हाथ रस्सी से बांध क्र दीवार में फसे कुंडो से बांध दिए थे,

आदमी- कुछ समय बाद महारानियाँ आएँगी, कोई भी अपनी नजर उप्पेर नहीं करेगा वर्ण उसकी आँखे निकल लूंगा, महारानी जो करना चाहे उन्हें करने देना, अगर जिन्दा रहना चाहते हो तो,

सभी चुप रहे,

कुछ देर बाद दो औरते महारानियो जैसे कपड़ो में वह आ गई, सभी ने नजरे निचे कर ली, देव ने भी वैसा hi किया,

आदमी- महारानी ये नए आदमी आये हैं, आप एक बार परख ले फिर आदेश दे क्या करना हैं,

औरत- आज रात को इन सभी को वही पैर ले आओ, पहले थोड़ा मनोरनजन होगा फिर इन्हे परखा जायेगा,

आदमी- जी महारानी

वो दोनों औरत मुद क्र चल दी तभी देव ने नजर उठा कर देखा और उसकी नजर उन दोनों की गांड पैर गई, कितनी बड़ी गांड थी, और पतली सी कमर,

अब देव को रात का इंतजार था,

रात में उन सभी को एक बड़े से कमरे में लाया गया, कमरा पूरा सजा हुआ था, सभी मर्द खड़े हो गए, उनके हाथ अभी भी बंधे हुए थे, तभी वह कुछ औरतो के हसने की आवाज आई, इस बार देव ने उधर देखा तो सामने से 4 औरते हस्ते हुए चली आ रही थी, चारो hi काफी खूबसूरत थी, और देखने से महल की रनिया hi लग रही थी,

वो चारो बड़े बड़े बीएड पैर बैठ गई, और उनके सामने खाने पिने का सामान लगा दिया गया, फिर बहुत साडी लड़किया वह आ गई जिन्होंने सिर्फ एक कपडा अपने शरीर पैर लपेटा हुआ था,

औरत- महारानी रेणुका आज तो काफी मजबूत आदमी आये हैं, आज का खेल अच्छा चल सकता ह,

ये थी प्रताप सिंह पत्नी रेणुका,

रेणुका- लग तो रहा ह रानी िन्दु, आज का खेल अच्छा हो सकता ह, बहुत समय से अच्छा खेल नहीं देखा,

िन्दु ये प्रताप सिंह की दूसरी पत्नी थी, और साथ में 2 औरते और थी जिनमे से एक थी सेना पति की पत्नी योगिता और एक जवान लड़की जी थी इस राजय के महामंत्री की बेटी परिधि, देव उनमे से किसी को नहीं जनता था, और खेल क्या होने वाला ह ये भी समझ नहीं आ रहा था,

तभी सभी आदमियों के हाथ उप्पेर करके बांध दिए गए, और फिर वह से बाकि सभी आदमी चले गए, बस वो 11 आदमी और 10 लड़किया रह गई,

रेणुका- खेल शुरू करो,

तभी वो लड़किया आगे बढ़ी और सभी आदमियों के कपडे उतरने लगी, 10 लड़किया और 11 आदमी थे तो देव अकेला रह गया, उसके पास कोई नहीं आई थी,

िन्दु – महारानी इसे क्यों छोड़ दिया,

रेणुका- ये फालतू में मिल गया था, मैंने 10 आदमियों के लिए बोलै था हमारे चुटिया सैनिक इसे भी पकड़ लाये, अब एक दम नै लड़की कोई मिली नहीं, तो ये भी ऐसे hi नजारा देखेगा, अगर कोई मर्द जल्दी हर गया तो ये उसकी जगह ले लेगा,

योगिता- महारानी जब से आप यहाँ आई हैं आपने जिंदगी में इतना मजा भर दिया ह,

परिधि- सच में, मैंने कभी नहीं सोचा था इसमें इतना मजा आता ह,

रेणुका- मई समाज के नियमो से अलग चलने वाली औरत हु, ये सब मजे मर्द hi क्यों ले हम क्यों नहीं ले सकती,

अब देखो ये लड़किया इन मर्दो के साथ मजे लेंगी और हम इनके मजे लेंगी,

उन लड़कियों ने देव के अलावा सभी मर्दो को नंगा कर दिया, और खुद भी कपडे उतर क्र कड़ी हो गई, उन सभी मर्दो की हालत ख़राब थी, उन सभी मर्दो के लुंड मुरझाये हुए थे दर की वजह से, वो लड़किया अपना शरीर उनके शरीर से रगड़ने लगी, अपनी चूचिया उनकी छाती से रगड़ने लगी, फिर अपनी गांड को उनके लुंड पैर रगड़ने लगी, उनमे से कुछ मर्दो के लुंड में हरकत होने लगी, लेकिन खुश अभी भी डरे हुए थे, लेकिन मर्द किसी भी हालत में हो अपने सामने खूबसूरत और नंगी औरत को देख क्र खुद पैर काबू कर hi नहीं पता, और यहाँ भी सभी मर्दो के लुंड खड़े हो गए थे, देव का धयान उनमे से किसी भी लड़की पैर नहीं था, वो बस सामने बैठी रानियों को देख रहा था, क्योकि उसका लक्ष्य वो रनिया थी,

फिर वो लड़किया मर्दो के सामने बैठ गई और उनके लुंड को अपने मुँह में भर लिया, सबके लुंड साधारण आकर के थे, शायद उन मर्दो के लिए ये पहला मौका था जब कोई लड़की उनके लुंड को चूस रही थी, उन सभी के शरीर कंपनी लगे, उनके हाथ बंधे हुए थे वो कुछ नहीं कर प् रहे थे, जब मर्द या औरत के हाथ बंधे हो और कोई उनके साथ ये सब कर रहा हो तो उत्तेजना अधिक बढ़ जाती ह, ऐसा hi उनके साथ हुआ और उनमे से कुछ ने तुरंत अपना वीर्य बहार फेंक दिया, उन लड़कियों ने अपना मुँह हटा लिया,

लड़कियों ने रानियों की तरफ देखा,

िन्दु- ये तो बहुत जल्दी झाड़ गए, सालो में जरा सा भी दम नहीं ह, ये अपनी पत्नियों को कैसे छोड़ते होंगे,

रेणुका- कोई बात नहीं दुबारा खड़ा कर देंगे,

वो लड़किया फिर से उनका लुंड चूसने लगी लेकिन घबराहट में कुछ लोग के लुंड उठ hi नई रहे थे, जब काफी देर हो गई तो रेणुका ने इशारा किया की अगले को देखो, उनमे से एक लड़की देव के सामने आ गई, और जैसे hi उसने देव के कपडे उतरे तो वह सभी औरतो की आँखे फटी रह गई, इतना खूबसूरत शरीर और इतना बड़ा लुंड, शरीर में ेके क कटाव अलग दिख रहा था, और लुंड की एक एक नसे अलग hi गिनी जा सकती थी, लुंड किसी मीनार की तरह खड़ा था,

लुंड को देख क्र उस लड़की की भी सांसे फूल गई, उसने देव की तरफ देखा जो शांत खड़ा था, लड़की के हाथ कैंप रहे थे,

रेणुका- इसके साथ शुरू क्र

वो लड़की तुरनत निचे बैठ गई और देव के लुंड को मुट्ठी में पकड़ क्र अपनी जीभ से चाटने लगी, मुँह के अंदर लेने की हिम्मत नहीं हो रही थी, लुंड था hi इतना मोटा,

िन्दु- इसका इतना बड़ा कैसे ह, मैंने आज तक इससे बड़ा लुंड नहीं देखा, हमे पिछले 15 सालो में हजारो लुंड देखे हैं लेकिन इससे बड़ा आज तक नहीं देखा,

योगिता- रानी मैंने गधे का लुंड देखा ह ये उससे भी बड़ा लग रहा ह,

परिधि- और इसका शरीर और इसका रूप भी कितना सूंदर ह, ऐसा लगता ह जैसे कोई देवता जमीन पैर उतर आया हो,

रेणुका- अब ये देवता हमारा गुलाम ह, अभी देख तो ले बस इसका आकर hi बड़ा ह या इसमें डम्ब hi ह,

चारो आहे भर्ती हुई देव को देखने लगी, बाकि सभी मर्दो पैर से उनका धयान हैट चुक्का था, वो लड़की देव का लुंड चुस्ती रही, लेकिन देव के लुंड पैर कोई असर नहीं था, वो वैसा hi खड़ा रहा, अब लड़की का मुँह दुखने लगा तो रेणुका ने दूसरी लड़कियों को इशारा किया, अब 3 लड़किया और वह आ गई और सामनेबैत क्र एक साथ देव का लुंड चूसने लगी, ऐसे करते सभी 10 लड़किया अपना अपना जोर दिखा चुकी थी, कोई देव का लुंड चुस्ती तो कोई उसके ांध चुस्ती, कोई देव के पेट को चुम रही थी तो कोई उसकी कमर और पैरो को,

उन लड़कियों को भी देव का साथ मजा आ रहा था, लेकिन देव बिलकुल शांत खड़ा था,

िन्दु- किस मिटटी का बना ह ये, इस पैर कोई असर नहीं हो रहा ह,

रेणुका- जब छूट में घुसायेगा तब होगा असर,

रेणुका- चलो इसका हथियार अपने अंदर लो,

लड़किया उठी और एक मेज पास ले आई और उस पैर एक लड़की झुककर लेट गई, पीछे से दूसरी लड़की ने देव का लुंड पकड़ क्र उसकी छूट पैर लगाया, लड़की ने देव को ईशर किया की धक्का लगाए, लेकिन देव ने कुछ नहीं किया, तब एक लड़की पीछे गई और देव की कमर को धकेलने लगी, लुंड छूट से चिपका हुआ था, कुछ देर तो देव मजा लेता रहा फिर अचानक उसने एक जोर दर धक्का लगाया और ेखि धक्के में लुंड हकुट को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया, और उस लकड़ी की जोर दर चीख निकल गई, वो अपने हाथ मेज पैर पटकने लगी, लेकिन रेणुका का नियम था लुंड एक बार अंदर घुस गया तो बहार नहीं निकलना ह,

उन सभी लड़कियों को छोड़ने की आदत थी लेकिन इतना बड़ा लुंड तो उन्होंने सपने में भी नई देखा था,

देव ने लुंड बहार खींचा और फिर से धक्का मारा, और इस धक्के में वो लड़की बेहोश हो गई, देव ने दूसरी लड़की को देखा वो भी बेचारी सी दरी हुई देव को देख रही थी,

रेणुका जोर से छिलाई- हटाओ इस हराम जड़ी को और दूसरी लगो, उस लड़की को हटाया गया फिर दूसरी लड़की लेट गई, इस बरसने बहुत सात ेल अपनी छूट पैर लगाया और लुंड घुसवाया, वो बेचारी लुंड तो घुसवा गई लेकिन उसकी चीख भी पुरे कमरे में गूंज गई,

देव ने आधा लुंड उसकी छूट में घुसाया हुआ था और हलके हलके धक्के लगाए, और वो लड़की झाड़ गई, ऐसे करते करते सभी लड़कियों को देव ने छोड़ दिया लेकिन देव अब तक नहीं झाड़ा था, अब देव से बर्दास्त नहीं हो रहा था, उसके लुंड में दर्दहोने लगा था, वो झड़ना छटा था लेकिन झाड़ नहीं प् रहा था क्योकि कोई भी लड़की इतनी देर तकउसके सामने टिक hi नहीं प् रही थी जिससे देव अपना वीर्य निकल सके,, कस्तूरी के समय भी यही हुआ था,

रेणुका- ऐसा मर्द मैंने आज तक नहीं देखा,

रेणुका ने आवाज लगाई तो बहार स ेकुछ मर्द अंदर आये,

रेणुका- इन सभी को ले जाओ और यहाँ बस ये लड़का रहेगा, बाकि सभी को ले जाओ,

वो आदमी उन गुलामो को ले गए और लड़किया भी लड़खड़ाती हुई वह से चली गई, अब बस वह देव और वो चारो रह गई थी,

रेणुका- इतनी ताकत तुम्हारे अंदर कैसे आई,

देव- उप्पेर वाले की वजह से,

रेणुका- तुम नहीं जानते तुम क्या चीज हो, अजूबा हो तुम

योगिता- शायद hi संसार में कोई ऐसा मर्द होगा,

देव- मुझे जाने दीजिये मैं बहुत गरीब हु,

देव ने थोड़ा नाटक शुरू किया,

रेणुका- अगर तू हमारी बात मानेगा तो फिर गरीब नहीं रहेगा, जैसा हम खेती हैं वैसा hi करना होगा तुझे,

देव- आप जैसा कहेंगी मैं करूँगा बस मुझे मरना मत,

रेणुका- तू जनता ह मैं कोण हु, मैं इस राजय की महारानी हु,

देव के दिमाग में आया महारानी मतलब प्रताप सिंह की पत्नी, अरे वह ये तो कमल हो गया, ये तो सीधे खजाने का रास्ता मिल गया,

देव ने तुरंत अपना सर झुका दिया, जिससे रेणुका बड़ी खुश हो गई, उसे देव पसंद आया,

परिधि ने देव के शरीर पैर अपनी उंगलिया फिरै,

परिधि- बड़ा मजबूत शरीर ह तेरा, ये ऐसा कैसे बनाया,

देव- मैं मजदुर हु राजकुमारी, और मजदूरी करके hi ऐसा बन गया हु,

िन्दु- मजदुर इतने खूबसूरत होते हैं क्या, तेरे जैसा मर्द तो कही का राजा होना चाहिए,

रेणुका समझ गई थी की सभी की नियत ख़राब हो चुकी ह इस लड़के पैर, रेणुका मुस्कुराई

रेणुका- अब यहाँ जो होगा अगर ये बात तूने बहार किसी को भी बताई तो तेरी जान चली जाएगी, अगर तू चुप रहेगा तो ऐसा मजा मिलेगा की जिंदगी भर नहीं भूलेगा, और हमेशा इस महल में hi रहेगा, मजदूरी करने की जरुरत नहीं पड़ेगी,

देव- मैं आपकी परजा हु महारानी आप जो करेंगी उसमे मेरा भला hi होगा,

देव की बातो से सभी खुश हो गई थी,

रेणुका ने सभी औरतो को इशारा किया और इशारा मिलते hi तीनो ने अपने कपडे उतर दिए, तीनो के शरीर एक दम कैसा हुआ था, परिधि जवान थी तो उसके शरीर में निखार कुछ ज्यादा hi था लकिन जब रेणुका ने अपने कपडे उतरे तो असली निखार का पता चला, रेणुका उन चारो में सबसे सूंदर और कैसे हुए शरीर किट hi,

रेणुका- इसके हाथ खोल दो योगिता,

योगिता ने आगे आकर हाथ खोल दिए, देव के हाथ खोलते वक़्त उसने अपनी चूचिया देव की छाती पैर रागादि और अपनी जांघो को देव के लुंड पैर रगड़ा,

रेणुका- ऐसा मौका हर किसी के जीवन में नहीं आता, आज तक कुछ hi लोगो को ये मौका मिला ह जिसमे वो हममे से किसी एक के शरीर के साथ खेल पाया ह, लेकिन अगर वो हमे खुश नहीं कर पाया तो जिन्दा नहीं बच पाया, जो हमे खुश कर देता ह वो इस महल में hi रुक जाता हमारी सेवा में, वो जो बहार लोग देख रहे हो वो वही लोग हैं जिन्होंने हमे खुश किया ह,

देव- क्या कभी सभी को एक साथ खुश किया ह किसी ने

िन्दु- हम किसी एक को भी कोई खुश कर दे ऐसा भी बड़ी मुश्किल से मिलता ह,

देव मुस्कुराया उसकी मुस्कराहट देख रेणुका भी मुस्कुरा पड़ी, क्योकि उसे भी यकीन हो गया था की ये हम चारो को खुश कर सकता ह,

रेणुका- योगिता सबसे पहले तू चल तू काफी समय से प्यासी ह, तेरा पति आज कल युद्ध कीतैयारी में लगा रहता ह न,

िन्दु- हम दोनों भी तो प्यासी हैं महाराज भी तो नै नै लड़कियों के पीछे रहते हैं,

रेणुका- चिंता मत क्र मेरी जान सबका नंबर लगेगा,

योगिता खुश होती हुई बीएड पैर लेट गई, देव उसके सामने पंहुचा,

रेणुका- दिखाओ अपना हुनर,

देव ने बिना देरी करते हुए अपना लुंड योगिता की छूट पैर लगाया और हलके से रगड़ा, योगिता आहे भरने लगी थी, देव ने तुरंत लुंड पैर दबाव बनाया, उसने झटक अनहि मारा बस हलके से दबाव बनाया, और लुंड का टोपा छूट में घुस गया, छूट पूरी तरह गीली हुई पड़ी थी, फिर भी योगिता की चीख निकल गई,

देव जनता था इन रानियों को हाथ लगाना hi सबसे बड़ा जुर्म होता, इसलिए वो अपने हाथ पीछे करके खड़ा था और लुंड को घुसा रहा था, लुंड हलके हलके अंदर घुस रहा था योगिता अपना सर पटक रही थी,

योगिता- मार दिया इसने तो फाड़ दी मेरी छूट aahhhhhhhhhhhhhhhh इतना दर्द तो पहेली बार छोड़ने में भी नहीं हुआ था, इस जालिम ने हजारो बार चूड़ी हुई छूट से भी चीखे निकल दी, आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आज छूट को पता चला ह फटना किसे कहते है,

रेणुका- अभी तो थोड़ा सा hi घुसा ह तू अभी से चीखने लगी, अगर पूरा गया तो क्या करेगी,

योगिता- मैं तो मर hi जाउंगी,

रेणुका- हल्का हाथ रखना इस बेचारी पैर, इसके पति का लुंड छोटा सा hi ह इसे ज्यादा तगड़े लोदो का स्वाद नहीं चखा ह,

योगिता- इससे छोड़ने के बाद किसी और के लायक रहूंगी भी नहीं,

देव ने हलके हलके धक्के लगाने शुरू क्र दिए, चुदाई करते करते आधा लुंड योगिता की छूट में घुस चुक्का था, और योगिता ज्यादा देर देव को बर्दास्त नहीं क्र पाई और झड़ने लगी,

योगिता अपनी कमर को उछलने लगी उसे बहुत मजा आ रहा था, देव भी बिना रुके धक्के लगा रहा था, रेणुका ने देखा की योगिता फिर से गरम होने लगी ह तो उसने देव को रोक दिया,

रेणुका- साली कुटिया फिर से मजा लेने लगी तू तो, एक बार झाड़ गई ह फिर भी रुक नहीं रही ह,

योगिता- माफ़ करना महारानी, लेकिन मजा hi इतना आ रहा था की खुद को रोक नहीं पाई मैं,

देव बेचारा फिर से नहीं झाड़ पाया, अब देव का दिमाग ख़राब होने लगा था, उसके अंदर की ऊर्जा उस पैर हावी होने लगी थी,


अगली बरी थी परिधि की, परिधि जवान लड़की थी और बस कुछ hi बार चूड़ी थी, वो भी बस प्रताप सिंह से, रेणुका ने उसे अपने जाल में फसा कर प्रताप सिंह से छुड़वाया था, असल में रेणुका एक शोक था अपने बिस्टेर पैर नंगी लेट क्र दुसरो की चुदाई देखने का, वो पहले चुदाई देखती और खुद को गरम करती फिर पुरे जूनून के साथ चुदाई करती थी, उसके अंदर कामुकता कुछ ज्यादा hi थी, इसीलिए वो अपने पति प्रताप सिंह से अपने hi सामने दूसरी लड़कियों को चुदवाती फिर खुद प्रताप सिंह से चुदती, प्रताप सिंह की बाकि पत्नियों में बस िन्दु थी जिसे रेणुका के साथ ऐसा करने में मजा आने लगा था, या यु कहो की उसने रेणुका के साथ मिलकर रहने में hi फायदा समझा इससे उसे प्रताप सिंह का साथ भी मिल रहा था और रेणुका और भी मजे दिलवा रही थी, जब प्रताप सिंह से चुदाई का मजा मिलनकाम हो गया तो रेणुका ने ऐसे मर्द ढूंढने शुरू किये जिनके साथ वो दूसरी लड़कियों को चुदवाती और रेणुका देख क्र मजा लेती, उनमे से कोई ताकतवर मर्द मिल जाता तो रेणुका उसके साथ खुद भी मजा लेती और इस एही िन्दु योगिता और परिधि उसके साथ जुड़ गई, प्रताप सिंह योगिता और परिधि को भी छोड़ चुक्का था,
 
अपडेट-15



प्रताप सिंह की दोनों पत्निया देव से छोड़ने को तैयार पड़ी हुई थी और इधर प्रताप सिंह अपनी बेटी को छोड़ने के चक्कर में लगा हुआ tha,aur रेवती देव के खयालो में खोई हुई थी, वो अपने बिस्टेर पैर पड़ी देव के साथ बिताये उन पालो को याद क्र रही थी, वो छह क्र भी उन पालो को अपने दिमाग से नहीं निकल प् रही थी, वही देव परिधि को छोड़ रहा था, परिधि की छूट काफी टाइट थी, परिधि की हालत ख़राब थी, उसकी छूट में आधा लुंड भी ठीक से नहीं घुसा था, और परिधि जल्दी hi झाड़ गई थी, रेणुका ने तुरंत उसे हटा दिया और िन्दु को लिटा दिया, िन्दु ने जल्दी से लुंड अपनी छूट में ले लिया, िन्दु की छूट काफी खुली हुई थी और उसने हिम्मत दिखा क्र आधे से ज्यादा लुंड छूट में ले लिया था,





देव को भी थोड़ी रहत थी वो धक्के भी थोड़े आराम से लगा प् रहा था,

िन्दु- महारानी आज से पहले इतना मजा कभी नहीं आया, ये कोई जादूगर ह, ये लगातार चोदे जा रहा ह, फिर भी झाड़ नहीं रहा ह, ये कोई देवता hi ह, जो हमे मजा देने आया ह,






रेणुका- ये एक सम्पूर्ण मर्द ह और ये तभी झाड़ेगा जब इसे मजा आएगा, तुम सब इसे मजा नहीं दे प् रहे हो, जब तक इसका ये लुंड पूरा अंदर नहीं घुसेगा इसे मजा कैसे आएगा,

िन्दु- ahhhhhhhhhh पुरे में तो मैं मर जाउंगी,

रेणुका- तू ऐसे hi मजे ले ले इसे मजा मैं दूंगी,

िन्दुई अपनी कमर उछलने लगी और कुछ hi देर में झाड़ गई, देव को पसीने आने लगे थे, वो झड़ना चाहता था लेकिन छह क्र भी ऐसा नहीं क्र प् रहा था,

िन्दु के झड़ते hi रेणुका ने उसे अलग क्र दिया,

रेणुका- अब तेरी असली परीक्षा होगी, मैं भी देखु कितना छोड़ सकता ह तू, अपनी पूरी ताकत लगाना, मैं तेरी असली ताकत देखना चाहती हु,

देव बस मुस्कुराया

रेणुका देव के करीब आई और अपना शरीर उसके शरीर से रगड़ने लगी, ये देख क्र बाकि तीनो औरते चौंक गई क्योकि आज से पहले रेणुका ने किसी मर्द से अपना शरीर नहीं रगड़ा था, अगर चुदाई भी करती तो सिर्फ लुंड डलवा क्र बिना हाथ लगवाए चूड़ी थी, लेकिन आज वो खुद उस लड़के से चिपक रही थी, रेणुका ने अपनी गांड उसके लुंड पैर रागादि, तीनो औरतो ने जोश में चीखे मर दी,

देव के अंदर से एक कातिल मुस्कान उभर रही थी जिसे वो छुपा रहा था, वो रेणुका की छूट की धजिया उड़ने के लिए उतावला हो रहा था,

रेणुका ने देव का लुंड अपने हाथ में पकड़ा और उस पैर पानी दाल क्र धोया,

अच्छे से धोने के बाद रेणुका ने अपनी जीभ निकल क्र लुंड को छठ लिया,






िन्दु- महारानी ये आप क्या कर रही हैं ये एक मजदूर ह,

रेणुका- जब औरत को उसकी पसंद का मर्द मिलता ह फिर औरत को कोई फरक नहीं पड़ता वो राजा ह या भिकारी, और ये असली मर्द ह, इसने आज मेरा दिल जीत लिया ह अब देखना ह ये मुझे पूरी तरह जीत पता ह या नहीं,

इतना बोल क्र रेणुका ने लुंड को मुँह में भर लिया और चूसने लगी, बाकि तीनो उठ क्र उनके पास जाना छाती थी लेकिन तीनो की छूट में इतना दर्द था की उनसे हिला तक नहीं जा रहा था,






लुंड को अच्छे से चूसने के बाद रेणुका उसके सामने मजे पैर झुक गई और अपनी गांड उप्पेर क्र दी,





रेणुका- दिखा अपना हुनर अगर तूने मुझे जीत लिया न तेरी जिंदगी बदल जाएगी, मैं तुझे क्या से क्या बना दूंगी तू सोच भी नहीं सकता,

देव ने अपना लुंड रेणुका की छूट पैर रगड़ा जिससे रेणुका की आँखे बंद हो गई वो मस्ती मि सिसकिया लेने लगी, तभी देव ने लुंड को छूट पैर लगाया और धक्का लगा दिया, लुंड छूट को चीरता हुआ अंदर घुस गया, लुंड के घुसते hi रेणुका की आँखे बहार आ गई और मुँह खुला रह गया, सामने बैठी तीनि औरते है पड़ी,






लेकिन रेणुका के पास पर्तिकिर्या देने का समय नहीं था क्योकि देव ने उसे सम्हालने का मौका hi नहीं दिया और एक और धक्का लगा दिया, लुंड और अंदर घुस गया, न छाते हुए भी रेणुका के हाथ देव के पेट पैर चले गए उसे रोकने के लिए,





देव- अगर आपको दर्द हो रहा ह तो क्या मैं रुक जाऊ महारानी,

रेणुका बुरी फांसी थी, दर्द तो हो रहा था लेकिन वो उन तीनो के सामने जाहिर नहीं करना छाती थी, इससे उसका अपमान होता, इसी चक्कर में वो बोल पड़ी, नहीं नहीं रुकना मत पूरा दाल क्र hi रुकना,

देव मुस्कुराया और रेणुका की कमर को पकड़ लिया और लुंड को हल्का सा बहार खींचा और फिर से धकेल दिया, इस बार लुंड आधे से ज्यादा अंदर घुस हकूका था,

रेणुका- ahhhhhhhhhhh माँ मर गई भेनचोद aahhhhhhhhhhhhhh

तीनो फिर से है पड़ी,

रेणुका- हस्ती क्या हो मदर छोड़ो मैंने पूरा लिया ह,

देव- नहीं महारानी अभी पूरा नहीं गया,

देव की बात सुनकर रेणुका दर गई वही तीनो फिर से है पड़ी,

रेणुका- तो तुम रुके क्यों दाल दो पूरा,

लुंड घुसते hi रेनुआक के सवार बदल चुके थे जिसे वो अब तक तू बोल रही थी अब तुम पैर आ गाइट hi,

देव ने दो तीन धक्के लगाए और पूरा लुंड रेणुका की छूट में उतर दिया, रेणुका मेज पैर मुँह के बल गिर पड़ी थी, उसके होश उड़ चुके थे, वो इतनी बेसुध हो गाइट hi की उसके मुँह से चीख तक नहीं निकली थी,

जब रेणुका बेसुध सी गिर पड़ी तो िन्दु ने उठने की कोशिश की लेकिन हिल नहीं पाई, तब िन्दु को तरीका सुझा

िन्दु- ोू लुंड धरी ये मर जाएँगी, जल्दी से इनकी चूचियों को शिलाओं, इनकी गांड को मसलो, इन्हे चूमो छतो इन्हे गरम करो ताकि ये तुम्हारे लुंड को झेल सके,

देव ने तुरंत ऐसा hi करना शुरू किया, लुंड छूट में फसा हुआ था और देव रेणुका की चूचिया को मसल रहा था और कभी उसकी गांड को मसल रहा था, उसकी कमर को चुम रहा था, कुछ देर में रेणुका को रहत होने लगी थी वो होश में आने लगी थी, उसकी आँखों से आंसू निकल रहे थे,

देव- आप ठीक ह महारानी

रेणुका- बहुत बड़ा ह तुम्हारा, मैंने बहुत लुंड लिए हैं लेकिन तुम सबसे कमल के हो, अब हलके हलके कमर चलना,

देव ने वैसा hi किया, वो हलके हलके कमर हिलता रहा, रेणुका मेज पैर दन्त भींचे पड़ी थी, वो लुंड के धक्को को सहने की कोशिश क्र रही थी, और जैस ेजैस ेउसकी छूट में पानी आना शुरू हुआ उसे रहत होने लगी थी, देव का लुंड भी धक्को के साथ थोड़ा थोड़ा अंदर बहार होने लगा था, और ये रेणुका के लिए काफी था इसी में रेणुका झड़ने लगी, देव फिर से हताश हो गया था क्योकि रेणुका भी झाड़ गाइट hi और देव अब तक नहीं झाड़ा था,

रेणुका- ahhhhhhhhhhhhh माँ छोड़ दी मेरी aahhhhhhhhhhhh मजा आ गया uuufffffffffffffffff छोड़ो मुझे,

देव ने धक्के थोड़े तेज क्र दिए, देव को आगा रेणुका उसे रोक देगी लेकिन रेणुका ने रोका नहीं,






रेणुका- रुकना नहीं बस छोड़ते रहो, जब तक तुम झाड़ न जाओ छोड़ते रहो,

अब देव को रहत थी उसने अपने धक्के बढ़ा दिए, कुछ देर में रेणुका पड़ी हुई थक गई तो वो उठी और देव की गॉड में चढ़ गई और बिस्टेर की तरफ जाने का इशारा किया, देव उधर लेकर चल दिया, निचे से लुंड रेणुका की छूट में टकरा रहा था, न जाने रेणुका को क्या सुझा सुने अपनी कमर उठा क्र लुंड को छूट पैर लगाया और निचे हो गई, लुंड छूट में घुस गया,

रेणुका- ahhhhhhhhhhhhhhhhh रुको रुको बस ऐसे hi खड़े रहो ऐसे hi छोड़ो मुझे,

ये तरीका वह सभी के लिए नया था, सबको चुदाई का पता था लेकिन ऐसे भी चुदाई हो सकती ह ये किसी को नहीं पता था, देव ने रेणुका की गांड को अपने हाथो में पकड़ा और उसे लुंड पैर उछलने लगा, कुछ देर तो लुंड आध यही जार है था लेकिन जब पूरा लुंड रेणुका की छूट में घुसा तो वो चीख पड़ी, और जल्दी से बिस्टेर की तरफ इशारा किया, लुंड सीधा उसके पसलियों के बिच में घुस रहा था,






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देव ने रेणुका को बिसेर पैर लिटाया और उसके पैरो के बिच में आ गया और लुंड घुसा क्र छोड़ने लगा, इस बार लुंड थोड़ा आसानी से जार है था, देव को भी थोड़ मजा आ रहा था, रेणुका मजे में अपना सर पटक रही थी और जोर जोर से सिसकिया ले रही थी,

दोनों की चुदाई की आवाज कमरे में गूंज रही थी, थप थप थप थप और ahhhhhhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhhh,

रेणुका फिर से झड़ने लगी- ahhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhh छोड़ो मुझे और छोड़ो फेडो मेरी छूट तुम्हारी महारानी हु मैं अपनी महारानी को छोड़ो, तुम मजदुर हो मैं तुम्हारी मजदुर हु आज से, मैं तुम्हारे लिए महारानी नहीं हु मजदुर हु, मजदुर समझ क्र छोड़ो मुझे ahhhhhhhhhhhhhhhh

रेणुका की बाते सुनकर तीनि लड़कियों के मुँह हैरत से खुले रह गए, जबकि देव के मुँह पैर मुस्कान थी,






देव ने धक्के तेज कर दिए उसे क्या कर दिए खुद उसके धक्के तेज हो गए, इतने तेज की रेणुका का पूरा शरीर हिल जार है था, और फिर देव ने भी एक हुंकार बहरी और अपन ापुरा लावा रेणुका की छूट में भरता चला गया, देव रेणुका के उप्पेर गिर गया, रेणुका ने उसे अपनी बहाओ में कास क्र भर लिया,

रेणुका- ahhhhhhhhhhhh झाड़ जाओ पूरा झाड़ जाओ मेरे अंदर, अपना बेशकीमती लावा भर दो मेरी छूट में aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

कुछ देर में दोनों शांत हो गए और कमरे में बस उनकी घेरि घेरि सांसो की आवाज आती रही, किसी ने हिलं ेकी कोशिश भी नहीं की, सभी को इतनी थकन थी की उठना तो दूर हिलने तक की हिम्मत नहीं थी, और न जाने कब सभी को ऐसे hi नींद आ गई,

पांचो नंगे पड़े हुए थे, देव और रेणुका एक दूसरे से चिपके पड़े थे और िन्दु देव के पीछे उससे चिपकी हुई थी, योगिता और परिधि देव के पैरो में लेती हुई थी, प्रताप सिंह के परिवार की औरते देव के लुंड से चुद क्र उसी से चिपकी हुई लेती थी,

सुबह सबसे पहले िन्दु की आँख खुली उसने देखा सब सोये पड़े हैं, उसने देव को देखा तो एक मासूम सा चेहरा और इतना गठीला शरीर और इतना ताकतवर लुंड जो अभी भी खड़ा था, िन्दु ने अपने हॉट देव के होतो पैर रख दिए, और फिर उसके लुंड को चूमने लगी, देव की आँखे खुल गई थी लेकिन वो शांत लेता रहा,






िन्दु बड़े प्यार से देव के लुंड को चाट रही थी, तभी परिधि की भी आँख खुल गई, उसने िन्दु को लुंड चाटते हुए देखा तो तुरंत उसके पास आई और वो भी लग गई,

इधर रेणुका की आँख खुली उसने िन्दु और परिधि को लुंड चूसते देखा फिर मुस्कुराई और देव के चेरे को देखा, उसने देव का मुँह अपनी तरफ किया जिससे देव ने आँखे खोल दी, रेणुका ने देव की आँखों में देखा और अपने हॉट उसके हॉट से जोड़ दिए और चूमने लगी, निचे दो लड़किया उसका लुंड चूस रही टी उप्पेर रेनुला उसके हॉट चीस रही थी,






योगिता- आज आप सब यही लगी रहोगी, महल में हमे सब धुंध रहे होंगे, हम रत भर यही थी,

रेणुका- ऐसी रात बड़े नसीब से मिलती ह, ऐसी रात के लिए मैं कुछ भी हार्न ेके लिए तैयार हु,

देव- महारानी मेरे लिए क्या आदेश ह,

रेणुका- वैसे तो यह ालये हुए आदमियों को गुलाम बना क्र रखा जाता ह, जो अच्छी चुदाई करता ह वो महलो में काम आते हैं वर्ण बाकि गुलामो की लड़ाई में काम आते हैं लेकिन तुम अनोखे हो, तुम सिर्फ मेरे पास रहोगे, तुम मेरे कमरे में रहोगे,

देव- लेकिन वह तो महाराज होंगे

रेणुका- मेरे कमरे में कोई नहीं आ सकता, मैं और महाराजा लग कमरे में मिलते हैं, इसलिए तुम मेरे कमरे में रहोगे, और कभी बहार निकलना ह तो मुखौटा लगा क्र निकलोगे, मेरे गुलामो को मुखौटा लगाने का आदेश ह, वैसे तुम गुलाम नहीं हो, पैर इससे तुम सबकी नजरो से बचे रहोगे, अगर महाराज किन अजर पड़ी तुम पैर तो तुम्हे अपनी सेना में भर्ती क्र लेंगे, और किसी दूसरी औरत किन अजर पड़ी तो अपने साथ ले जाएगी, इसलिए तुम सिर्फ मेरे हो,

देव- समझ गया महारानी,

देव को यकीन hi नहीं हो रहा था उसकी किस्मत ऐसे उसका साथ देगी, जो वो चाहता था सब अपने आप हो रहा ह, महल में घुस गया प्रताप सिंह की दो पत्नियों को छोड़ दिया, और अब यहाँ रहने का मौका भी मिल गया था,

चारो औरते उठी सबकेमुह से दर्द भरी आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह निकल गई, फिर चारो hi है पड़ी, उन्होंने कपडे पहने और आदमियों को बुलाया और उन्हें समझा दिया की लड़के को कहा भेजना ह,

वो लोड देव को ा[ne sath le gaye aur usse ek talab me nhelaya aur sunder kapde diye aur ek mukhota diya aur renuka ke kamre me le gaye, bada hi sunder kamra tha, gol bister tha, dev ko thakan thi isliye aaram se bister per hi let gaya aur so gaya,

Wahi dakshin disha ke jungle me dono bhai bhomik aur satavik behosh pade hue the, ek jor dar chikh ke sath satavik ki aankh khul gai, wo apne sir ko pakdte hue uth kr baith gaya, uska sir fata jar ha tha, wo kuch pal aise hi baitha tha, jab wo thoda shant hua to apne charo taraf dekha jaha sirf andhera hi andhera tha, kahi kahi se halki fulki roshni aa rhi thi jisse pata chal rha tha ki din nikla hua h, satavik ko yaad aa rha tha ki wo yaha kaise aaye kyo aaye the, satavik ne turant us paid ko dekha to wo paid bich me do hisso me chira hua pada tha,

Satavik ne bhomik ko dekha jo abhi tak behosh the, satavik ne bhomik ko uthane ki koshish ki, satavik ke hilane se bhomik ne dheere se aankhe kholi, bhomik bahut hi shant the, unhe koi dard nhi tha bas thode achambhit se charo taraf dekh rhe the,

Bhomik- satavik kya hua yaha,

Satavik- pata nhi phele yaha se utho

Dono bhai khade ho gaye,

Bhomik- hum jis roshni ke piche aaye the wo kaha gai, hum to kahi aur the yaha wapas kaise aaye,

Satavik- main abhi kuch nhi janta, lekin yaha ab roshni nhi h, wo dkeho us paid ko jaha se roshni aa rhi thi, wo ab bich me se fat gaya h, iska matlab jo chij bhi iske ander thi wo ab yaha se ja chuki h,

Bhomik- matlab hume ye bhi pata nhi chala wo tha kya,

Satavik- mujhe bas ek sapna sa yaad h ki hum kahi dusri jagah the aur kuch humare ander sama gaya tha,

Bhomik- ha aisa hi kuch mujhe yaad h, jaise main koi sapna dekh rha hu,

Satavik- dono hi ek jiasa sapna nhi dekh sakte, khair wo sab pata kar lenge phele yaha se nikalte hain,

Dono bhai ladkhadate hua jungle se bahar ki taraf niklne lage, lein disha ka gyan nhi ho rha thaw o na jane kidhar chale jar he the, chalte chalte wo jungle se to bahar aa gaye lekin kisi aur hi disha me pahuch gaye the,

Unhe chalte hu andhera ho chukka tha wo raste me ek gaon me ruke, jaha unhe pata chala ki wo kafi dino se us jungle me behosh pade hue the,

Bhomik- satavik hume wapas mahal chalna chhaiye na jane waha kya ho rha hoga,

Satavik- tum mahal wapas jao mujhe kahi aur jana h, is roshni se to kuch safalta nhi mili lekin mujhe ek jagah jana h shayad waha kuch mil jaye,

Bhomik- thik h main subha rajay ki taraf jata hu,

Udhar dev renuka ke bister per leta hua tha, din me renuka ne uske liye bhojan bhijwa diya tha, pura din wo akela hi kamre me leta rha, usne ek manjil to pa lit hi lekin sahi manjil nhi mili ab tak nhi mili thi,

Raat me renuka uske pas aai, jise dekh kr dev turant ek gulam ki trha hath bandh kr khada ho gaya,

Renuka- are tum aise kyo khade ho aara se baitho tum mere koi gulam nhi ho,

Dev ne muskura kr hath khol liye, renuka ne uske kareeb jakr uske hot chum liye,

Renuka- kasam se aaj din itna achha tha mera ki pucho mat, itna sakoon tha pure shareer ko ki main bata nhi sakti, jeevan me pheli bar mujhe sambhog ka asli sukh mila h,

Dev- mujhe khuhsi hui ki main apni maharani ke kisi kaam aa saka,

Renuka- tumhe yaha takleef to nhi hui na,

Dev- main majdur aadmi hu maharani, mujhe aise mehlo e rhene ki aadat nhi h, main ko kaam karne dur dur jata rheta hu, mujhe din bhar aise kamre me baithne ki aadat nhi h,

Renuka- ooo ha pura din akele kamre me rehna bada mushkil hua hoga, waise tumhare pariwar me aur kon kon h,

Dev- bas main aur meri maa

Renuka- tumhari maa pareshan ho rhi hogi na,

Dev- abhi to nhi kyoki main kaam karne bahar jata hu to kuch din ruk kr hi aata hu,

Renuka- ye to achhi baat h,

Itna bol kr renuka ne apne kapde utar diye aur dev ke kapde utar kr usse lipat gai, aur dev ke hoto ko chumne lagi aur jaldi hi uske lund ko chusne lagi, kuch hi der me dono ki chudai shuru ho gai aur wo bhi bahut jabardast wali, aaj renuka ki chut khuli hui thi to dev ne uska pura fayda uthaya aur renuka chikhe pure kamre me gunj rhi thi, dono ki chudai kai ghante tak chali jisme renuka 4 bar jhadi thi, aaj dev ko maja aa rha tha use itna gyan ho chukka tha ki jhadne ke liye dimag ko kaha lagana hota h,

Chudai ke baad renuka dev ki baho me apne hi bister per chipak kr leti hui thi, jaise koi premika apne premi ke sath pyar ke ijhar kar rhi ho,

Renuka- pichle kuch samay se bas ye hi pal sakoon keg aye hain,

Dev- aap to maharani hain aapko bhi sakoon nhi milta,

Renuka- sakoon dhan sampati se nhi milta, sakoon milta h jab man khush hota h,

Dev- aapke pas to sab kuch h aur kya chhaiye aapko,

Renuka- takat duniya ki sabse badi takat,

Dev- maharaj pratap singh to bahut takatwar hain,

Renuka- ye waham bhi us rakshash ne khatam kr diya,

Dev- rakshash kon rakshash

Renuka- hua tha ek rakshash se samna, aisa lag rha tha jaise kisi bawander ke samne aa gaye ho, usne sab kuch tahas nahas kr diya, hum gaye to the maharaj ki shadi karwane lekin waha apne sabse achhe yodha kho kr aa gaye,

Dev- maharaj ki shadi, aapke hote hue unki dusri shadi kyo karwa rhi thi aap,

Renuka dev ki chudai se itni khush thi ki use ye hi pata nhi chala ki konsi baat batani chahiye aur konsi nhi, wo khud ko sach me dev ki premika samjhne lagi thi aur kamal ye tha ki usne ab tak dev ka naam bhi nhi pucha tha,

Renuka- pratap singh ko ladkiyo ka shok h aur mujhe logo ki chudai dekhne ka shok h jo tumhe pata chal hi chukka hoga, maharaj mere shok ko pura karte hain aur main unke shok ko, waise bhi is duniya me mera kuch h bhi nhi, bas meri ek beti h aur mujhe rishto s ekoi farak padta bhi nhi h, mainbachpan se hi aisi rhi hu, mujhe chudai dekhne aur aurto ke sath krurta karne me maja aata tha, mere chacha bahut jalim insan tha usi ke sath reh kr mujhe ye aadat pad gai, aur jab pratap singh se shadi hui to wo bhi meri soch ke jaisa hi mil gaya,

Dev ko gussa aa rha tha renuka per lekin wo shant tha,

Renuka- aur hum bhawar singh ke rajay me sirf shadi ke liye nhi gaye the pure rajay per kabja karne gaye the, aur waha kamya ne ………….

Renuka ne josh josh me bahut kuch dev ko bata diya, jise sunkr dev bhochakka sa reh gaya, jise sunkr dev ko yakeen hi nhi hua, dev ko bahut si baato ke jawab mil chuke the, kismet ne dev ko renuka ke pas bheja tha dev yaha aaya to bas pratap singh ke pariwar ki aurto ko chodne tha, lekin yaha aakr use kuch aur hi pata chal chukka tha,

Dev- mujhe yaha kab tak rhena hoga maharani,

Renuka- tumne kaise soch liya ki main tumhe kahi jane dungi, tum ab mere ho, kal indu aayegi use bhi thoda maja de dena, aur raat me mujhe, din me mere pas samay nhi hota, ab dev ke liye badi musibat ho chuki thi, use yaha se niklna tha, aur wo jis raste se aaya tha waha tak pahuchna itna asan nhi tha,

Lekin dev shant rha renuka usse chupak kr so gai lekin dev ke dimag me bahut kuch hulchul paida ho chuki thi, use apni maa ke pas pahuchna tha, lekin yaha abhi revati bhi thi jiske liye wo aaya tha lekin uske niche aa gai renuka aur indu,

Dev apne khayalo me sochta hua so gaya, agali subha jab wo utha to renuka ja chuki thi wo akela leta hua tha wo utha to uske kamre me ek dasi aakr uske liye nahane au rkhane ka intejam rakh gai, dev ek sone ke pinjre me kaid sa ho gaya tha, bhojan karke wo yaha se nikalne ka tarika dhundh rha tha tabhi kisi ke aane ki aahat hui dev samjh gaya ki indu aai hogi, dev ne turant apne kapde utar diye aur parde ke piche chip gaya use pata tha indu kyo aai h,

Jaise hi koi ander aaya dev ne piche se aakr use apni baho me bhar liya aur goad me utha liya, aur dev ka ek hath uski chuchiyo per gaya aur dusra hath sidhe unki jangho ke bich me, lekin tabhi wo chikh padi, aur uske chikte hi dev ne use chod diya wo niche gir gai, aur jab wo palat kr samne aai to wo indu nhi revati thi,

Revati ko waha dekh kr dev chonk gaya aur usse bhi buri halat thi revati ki, phele to wo kisi ke pakdne se buri trha dar gait hi dusra pakdne wale ne sidhe uske guptango ko pakad liya tha, ye to dart ha lekin chokne ki bari thi dev ko waha dekh kr wo bhi nanga, aur jab revati ki najre dev ke nange shareer per gai to uski palke jhapakna hi bhul gai, itna khubsurat hsareer aur sabse khas uska wo lund ek dum sidha khada tha, revati jameen me giri hui bas use bina palak jhapakaye dekhe ja rhi thi, dev bhi ghabraya sa use dekh rha tha,

Lekin jab dev ko ahsas hua revati kya dekh rhi h to wo halka sa muskuraya lekin usne sharmane ka natak kiya aur parde ke piche chip gaya,

Ek dum se revati ko bhi ahsas hua ki wo kya dekh rhi thi,

Revati sakpakati si uthi aur ek dum boli- tum yaha, tum yaha is halat me kya kar rhe ho,

Dev- tum yaha kya kar rhi ho,

Revati – ye meri maa ka kamra h main yaha kabhi bhi aa sakti hu,

Ab dev fas gaya thaw o kya bolega, usne kuch pal socha,

Dev- main yaha bandi hu,

Revati- bandi kamre me kon bandi hota h,

Dev- main tumse milne aaya tha, lekin tumhari dusri maa indu ne mujhe pakad liya aur yaha le aai, aur mere kapde bhi le gai, ab main nanga yaha se kaise jau, unhone kaha tha main aaungi tumse milne, to maine socha wahi aai hain isliye unhe kabje ke chakkar me tumhe pakad liya,

Revati ye sunkr chonk gai,

Revati- tum mujhs emilne aaye the, kyo

Dev- wo main kya batau us din tumhe dekha tab se dil ko sakoon nhi aa rha tha isliye aa gaya tha aur yaha fas gaya, ab wo aane hi wali hogi,

Revati- wo kya chahti h tumse,

Dev- jo ek aurat kisi mard se chahti h, main yaha se bhagna chahta hu lekin kaise bhagu,

Revati kuch sochne lagi,

Revati- tum abhi wahi karo jaisa wo kheti h jaise hi andhera hone ko hoga main tumhare liye kuch kapde le aaungi, aur yaha se nikal lungi, tab tak aise hi chupe raho, tumhe ab pata chalega kisi rajkumari ke najdeek aane ka natija,


रेवती हसने लगी, उसकी हसी बड़ी hi प्यारी थी, अगर ये पहले वाला देव होता तो उसी हसी में खाई खो जाता लेकिन इस देव को किसी से फरक नहीं पड़ता था,
 
अपडेट-16



सात्विक अपनी मंजिल की तरफ बड़ी तेजी से चले जा रहा था, जिस जगह उसे पहुंचना था वो जगह लगभग 2 दिन की दुरी पैर थी, लेकिन आज सात्विक की चल में बहुत तेजी थी किसी साधारण इंसान से लगभग 4 गुना तेजी से सात्विक चल रहा था, वही हल भौमिक जी का भी था वो भी लगभग उसी रफ़्तार से महल की तरफ जा रहे थे,

सात्विक ने 2 दिन का सफर कुछ hi घंटो में क्र लिया था, वो अपनी मजिल की तरफ जाने में इतना खोया हुआ था की उसे अहसास hi नहीं हुआ वो कितनी रफ़्तार से जा रहा ह, लेकिन भौमिक को अपनी रफ़्तार का अहसास हो गया था, वो एक पल रुके और अनुमान लगाया की वो कहा पहुंच चुके हैं, उन्हें बड़ी हैरत हुई की इतनी जल्दी वो यहाँ तक कैसे आ सकते हैं, न hi उन्हें कोई भूक प्यास थी न hi कोई थकन थी, भौमिक जी समझ गए ये उसी रौशनी की वजह से हो रहा ह, उनके अंदर कुछ बदलाव आ गए हैं लेकिन वो क्या बदलाव हैं पूरी तरह नहीं पता,

उधर सात्विक उस पहाड़ के करीब पहुंच गया जहा वो जंगली लोग रहते थे, यही जगह बताई थी तांत्रिक गुरु ने,

सात्विक पहाड़ के पास खड़ा उसे देखे जा रहा था, उसे कुछ अलग नहीं दिख रहा था, वो पहाड़ी के उप्पेर चढ़ने लगा, और जैसे hi वो थोड़ा उप्पेर गया तो उसे उन जंगली लोगो ने घेर लिया,

एक आदमी- बाबा देख हमारा भोजन आ गया,

बूढ़ा आदमी- ये मुझे कुछ अलग लग रहा ह, इसके चेरे का तेज सबसे अलग ह, ये कोई साधारण इंसान नहीं लग रहा मुझे,

सात्विक- कोण हो तुम लोग,

बूढ़ा आदमी- हम कोण हैं ये तो तुम रहने दो, तुम बताओ तुम कोण हो और यहाँ आने की हिम्मत कैसे दिखाई,

सात्विक- कही जाने के लिए मुझे हिम्मत की जरुरत नहीं होती, खोल दो मुझे वर्ण सबको भसम कर दूंगा,

सभी उस पर है पड़े,

बूढ़ा आदमी- चलो रे आग जलाओ आज इसे हम भसम करेंगे,

यहाँ सात्विक को आग में भुनने की तैयारी की जाने लगी उधर रेवती देव से बात कर hi रही थी की वह कोई आ गया, रेवती एक दम घबरा गई और भाग के देव के पास परदे के पीछे चिप गई, घबराहट की वजह से वो भूल hi गई की देव बिलकुल नंगा ह,

कमरे में िन्दु आई थी, अब देव और फास गया था, रेवती के सामने कैसे वो सब करेगा, िन्दु को देख क्र रेवती और दर गई, वो देव से और चिपक गई, रेवती की जंघे देव के लुंड से रगड़ रही थी, देव के पास कोई और रास्ता नहीं था उसने रेवती को चुप रहने का इशारा किया और नंगा hi बहार आ गया, िन्दु उसे देख क्र मुस्कुरा पड़ी,

देव- आ गई आप,

िन्दु- कैसा लग रहा ह यहाँ,

देव- मुझे कब तक ऐसे रहना होगा,

िन्दु- जब तक हमारा दिल नहीं भर जाता, और मुझे लगता ह की कभी दिल भरेगा नहीं,

देव इस तरह से बात कर रहा था जैसे ये लगे की वो यहाँ मज़बूरी में फसा हुआ ह,

िन्दु- जल्दी करो जल्दी से मेरी फाड़ दो, फिर मुझे महाराज के पास जाना ह, उन्होंने एक सभा बुलाई ह,

िन्दु ने फटाफट अपने कपडे उतर दिए और नंगी हो गई, देव ने रेवती की तरफ देखते हुए दुखी सा मुँह बनाया, रेवती छुपी हुई ये सब देख रही थी, रेवती की सांसे फूलने लगी थी, उसके सामने उसकी सौतेली माँ िन्दु और उसका आधा अधूरा प्रेमी नंगे खड़े थे,

िन्दु आगे बढ़ी और देव के सामने बैठ गई और उसका लुंड मुँह में भर लिया, ये देख क्र तो रेवती का मुँह खुला रह गया, उसे अपनी आँखों पैर विश्वास नहीं हो रहा था, देव भी ऐसी जगह खड़ा था जहा से रेवती को सब कुछ साफ़ साफ़ दिखे,

िन्दु मजे से लुंड को चूस रही थी, कुछ देर चूसने के बाद िन्दु बिस्टेर पैर आ गई और अपनी टंगे फैला क्र लेट गई,

िन्दु- जल्दी से घुसा दो अपना ये लोढ़ा मेरी छूट में, कोशिश करना थोड़ा अंदर तक घुस जाये,

देव मुस्कुराया और अपना लुंड िन्दु की छूट पैर लगाया और धक्का मर दिया, िन्दु की चीख निकल गई, इधर रेवती की हालत ख़राब हो रही थी, उसके सामने हवस का नंगा नाच चल रहा था, एक तो वैसे hi वो आज कल बहुत गरम रहती थी जिसका कारन था रेणुका की काम उत्तेजना वर्धक दवाइया, जिससे रेवती गरम रहे और अपने बाप से चुद जाये, दवाइया तो असर क्र रही थी लेकिन किसी और मर्द के लिए,

देव िन्दु को छोड़ रहा था िन्दु लगातार चिलए जा रही थी, वही रेवती पूरी तरह गरम हो चुकी थी उसके हाथ उसकी चूचियों पैर पहच गए थे, और दूसरा हाथ उसकी छूट के उप्पेर, न जाने वो कब अपने अंगो से खेलने लगी थी, उभरती हुई जवानी जो पहले बार चुदाई देख रही थी वो भी दुनिया के सबसे खूबसूरत मर्द को छोड़ते हुए देख रही थी, इधर िन्दु चीखे मर मर क्र झाड़ रही थी, देव झड़ना चाहता था लेकिन िन्दु ज्यादा बर्दास्त नहीं क्र प् रही थी, एक लम्बी चुदाई के बाद िन्दु 4 बार झाड़ गई और देव ने भी अपना पूरा लावा िन्दु की छूट में भर दिया,

इधर अपनी छूट और चूचियों को रगड़ रगड़ क्र रेवती ने लाल क्र दिया था, इस बिच वो भी 3 बार झाड़ चुकी थी,

िन्दु- मजा आ गया जीवन में असली चुदाई का मजा मिला ह आज, तुम यहाँ आये ये हमारा सौभाग्य ह, ऐसा मर्द बड़ी किस्मत से मिलता ह, दुनिया में तुम्हारे जैसा मर्द शायद दूसरा कोई नहीं होगा,

देव- मैं तो गुलाम हु आपका,

िन्दु हसी और लड़खड़ाती हुई उठी और अपने कपडे पहनने लगी,

िन्दु- अभी चलती हु जल्दी hi आउंगी, उसके जाते hi देव बिस्टेर पैर लेट गया, िन्दु के जाने के बाद रेवती बहार निकल कर आई,

रेवती की आँखे लाल थी उसकी कपडे बयां कर रहे थे उसने अपने शरीर के साथ क्या किया ह,

रेवती- ये सब क्या था,

देव ने एक चादर अपने उप्पेर दाल ली,

रेवती- अब क्या छुपा रहे हो, मैं कब से तुम्हे नंगा देख रही हु, अब छुपाने का क्या फायदा,

देव- तुम मुझे क्यों देख रही थी,

रेवती- अरे मेरे सामने नंगे रहोगी तो देखूंगी न,

देव- तो अपनी आँखे बंद क्र लेती न,

रेवती- मैं क्यों करू अपनी आँखे बंद, ऐसा नजारा रोज तोडना मिलता ह देखने को,

देव- बड़ी बेशरम हो तुम तो,

रेवती- मैं ऐसी नहीं थी लेकिन न जाने क्यों अच्छा लग रहा ह ऐसी बेशर्मी करके, तुम में कुछ तो बात ह, तुम्हारे सामने शर्म दूर भाग जाती ह,

देव ने रेवती का हाथ पकड़ लिया और अपने उप्पेर खींच लिया, रेवती देव की नंगी छाती से चिपक गई, रेवती की चूचिया देव की छाती में डाब गाइट hi, रेवती की आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह निकल गई, रेवती थोड़ी चूंकि लेकिन उसने उठने की कोशिश नहीं की, रेवती ने देव की आँखों में देखा,

रेवती- लगता ह जनाब का अब तक मन नहीं भरा, इतनी देर से सम्भोग क्र रहे थे फिर भी उतावले हो,

देव- तुम्हारा मन नहीं कर रहा क्या,

देव की बात पैर रेवती शर्मा गई और उठने लगी, लेकिन देव ने उसे अपनी बहो में कास लिया,

रेवती- छोड़ो मुझे जाने दो कोई आ जायेगा,

देव- कोई नहीं आएगा,

रेवती- ये मेरी माँ का कमरा ह और उन्ही का बिस्टेर ह, उनके बिस्टेर में मैं उनकी बेटी किसी अनजान नंगे लड़के के साथ चिपकी हुई पड़ी हु कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा,

देव- यही की दोनों प्रेमी हैं,

रेवती- किसने कहा तुम मेरे प्रेमी हो,

देव- तुम मुझे प्यार नहीं करती, ोुह्ह्हह्ह माफ़ करना मुझस ेगलति हो गई, देव ने अपनी पकड़ ढीली कर दी,

रेवती थोड़ी सी बैचैन हो गई,

रेवती- मैंने ऐसा तो नहीं कहा,

देव- तो क्या कहा तुमने,

रेवती शर्मा गई,

देव ने मोके का फायदा उठाते हुए रेवती के होतो से अपने हॉट जोड़ दिए, रेवती ने कुछ देर तो कसमसाहट सी की लेकिन जल्दी hi शांत हो गई, देव ने उसे अपने उप्पेर लिटा लिया, देव का लुंड जो कुछ देर पहले hi िन्दु को छोड़ चुक्का था फिर से खड़ा हो गया था, जो अब सीधे रेवती की जंगो के बिच में घुसा जार है था,

रेवती आराम से देव के उप्पेर लेती थी, अब उसे कोई शर्म या घबराहट नहीं थी, बल्कि एक अलग hi रोमांच आ रहा था, देव के हाथ रेवती की गांड पैर पाहकः चुके थे, रेवती ने कोई विरोध नहीं किया, देव को रास्ता साफ़ दिखा और उसने रेवती के शरीर को मसलना शुरू क्र दिया, जिसका प्रभाव ये हुआ की रेवती ने भी देव के होतो को चूमना शुरू क्र दिया,

देव ने रेवती को अपने निचे क्र लिया और उसके पुरे बदन को चूमने लगा, रेवती भी मजे से उसका साथ दे रही थी वो तो पहले से hi गरम हुई बैठी थी, एक ऐसे अनजान लड़के साथ जो उससे बस दूसरी बार मिला था और दोनों बस संदिग्ध परिश्थिति में, लेकिन जवानी की काम वासना कुछ भी करने पैर मजबूर कर देती ह,

रेवती के हाथ देव के नंगे शरीर पैर घूम रहे थे, वो बड़ी उतावली हुई जा रही थी, देव ने भी तुरनत रेवती की चोली खोल दी जिससे रेवती की 34 के आकर की चूचिया सामने आ गई, देव ने तुरंत अपना मुँह रेवती की चूचियों पैर लगा दिया, रेवती भी उसका सर अपनी चूचियों पैर दबाने लगी, देव का एक हाथ रेवती के घागरे में घुस गया और उसकी जांघो के बिच छूट पैर पहुंच गया, रेवती की छूट पहले से hi बहुत गीली हुआ पड़ी थी, देव ने तुरनत एक उंगली उसकी छूट में घुसा दी, जिससे रेवती की दर्द भरी आह निकल गई,

देव ने रेवती कोअपनी गॉड में उठाया और उसका घागरा खोल दिया, और चोली को निकल क्र अलग फेंक दिया, कुछ hi पालो में रेवती देव की बहो में बिलकुल नंगी थी, उसका कैसा हुआ शरीर बहुत hi खूबसूरत था, रेवती थी भी बहुत खूबसूरत, देव रेवती को देखने लगा, उसके मन में अलग अलग भाव आ रहे थे, उसका दिमाग उसे रोक रहा था लेकिन दिल में जो नफरत थी वो आगे बढ़ने को उतीजीत कर रही थी,

देव ने अपने दिल की सुनी और रेवती को जांघो पैर अपने हॉट रख दिए, रेवती तो इस समय देव की कठपुतली बानी हुई थी,

इधर सात्विक को बंधा हुआ था और उसे भुनने के लिए आग जला दी गाइट hi,

सात्विक- रुक जाओ वर्ण तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा,

आदमी- हमारे लिए क्या अच्छा ह ये हम जानते हैं,

जब कोई नहीं मन तो सात्विक ने कुछ्ह मंत्र पढ़ने शुरू किये और जो आग सात्विक को भुनने के लिए जलाई थी वही आग वह के लोगो की झोपड़ियों में लगनेलगी, चारो तरफ भागदौड़ मच गई, चीख पुकार आने लगी, सबा घबरा गए, तभी वह का सबसे बूढ़ा आदमी जो एक झोपडी में लेता रहता था वो जमीन पैर रेंगता हुआ बहार आया और जोर से चिल्लाया- रुक जाओ सभी,

उसकी आवाज सुनकर कुछ लोग उसके पास आये और उसे सम्हालने लगे, वो आदमी सात्विक के पास आया और हाथ जोड़ क्र बैठ गया- महाराज इस आग को रोक लीजिये, ये सब मूरख लोग हैं इन्हे इंसान की पहचान नहीं ह, मैं जानतहुँ आप कोई बड़े तांत्रिक हैं, कोई तांत्रिक hi इस पहाड़ पैर ऐसा कुछ कर सकता ह,

सात्विक ने उस बूढ़े की बात सुनकर आग को रोक दिया, आग बंद होने पैर वह शांति हुई, सभी लोग सात्विक के पास आ गए और हाथ जोड़ लिए, एक लड़के ने सात्विक को खोल दिया,

बूढ़ा आदमी- महाराज हमे तो आपका hi इंतजार था,

सात्विक- मेरा इंतजार

बूढ़ा आदमी- है महाराज इस पहाड़ पैर को एक मंत्र में बंधा हुआ ह जिसे सिर्फ कोई बड़ा तांत्रिक hi खोल सकता ह, ऐसा तांत्रिक जिसके पास तंत्र और मंत्र दोनों की ताकत हो,

सात्विक- तुम्हे कैसे पता की मेरे पास तंत्र और मंत्र दोनों की शक्ति ह,

बूढ़ा आदमी- इस पहाड़ पैर कोई भी मंत्र काम नहीं करता और न hi कोई तंत्र काम करता ह, इस पहाड़ पैर वही कुछ चमत्कार कर सकता ह जिसमे दोनों की ताकत हो,

सात्विक- ऐसा क्या राज ह इस पहाड़ में,

बूढ़ा आदमी- इस पहाड़ में एक महँ शक्ति कैद ह, ऐसी शक्ति जिसका सामना पूरा संसार नहीं कर सकता ह,

सात्विक- मैं कुछ समझा नहीं,

बूढ़ा आदमी- आज से बहुत समय पहले एक महँ ऋषि ने इसे अपने मंत्रो से बांध दिया था, और इस पहाड़ को ऐसा बना दिया था की न hi कोई इसे तोड़ सकता ह न hi इस पहाड़ पैर कोई फल उगेगा ताकि कोई इस पहाड़ केर उप्पेर न आये, इस पहाड़ के अंदर एक गुफा ह जिसमे वो शक्ति कैद ह, उस ऋषि ने कहा था इस शक्ति को कोई महँ तंत्र और मंत्र का ज्ञानी hi बहरा नहीकल सकता ह,

ये सुन क्र सात्विक असमंजस में था, उसे ठीक से कुछ समझ hi आ रहा था,

सात्विक- तुम सब कोण हो,

आदमी- हम इस पहाड़ के रक्षक हैं, हमारी पीढ़िया हजारो सालो से इस पहाड़ की रक्षा करते आ रहे हैं ताकि कोई इस पहाड़ को नुकसान न पंहुचा सके,

सात्विक- क्या शक्ति ह वो

आदमी- आप इसे खोल क्र खुद hi देख लीजिये,

सात्विक ने पहाड़ को देखा और उसने महसूस किया की इसे मंत्रो से बंधा हुआ ह, सात्विक आया hi इस शक्ति के लिए था, सात्विक ने तुरंत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल शुरू क्र दिया, सात्विक की शक्ति उम्मीद से ज्यादा तेज काम कर रही थी, और जल्दी hi वो पहाड़ टूटने लगा उसमे दरार पड़ने लगी, और कुछ hi देर में वो अहद हिलने लगा और उसमे एक रास्ता बन गया, पुरे पहाड़ में दरार आ गई, पूरा जंगल कैंप उठा था,

वह के सभी लोग ख़ुशी से नाचने लगे थे,

इधर वो पहाड़ खुला वही भौमिक जी जो लगभग अपने राजय के करीब पहुंचने वाले थे एक दम से रुक गए, उनके दिल की धड़कन बढ़ने लग थी, उन्हें पसीना आने लगा था, ऐसा लग रहा था जैसे कुछ बड़ा होने वाला ह, मौसम बदल रहा था, आसमान में बदल च गए और बिजली कड़कने लगी, और ये मंजर सभी जगह था, उस पहाड़ पैर भी ऐसे hi हालत थे,

इधर प्रताप सिंह के राजय में बहुत जोर की आवाज हुई, आसमानी बिजली बिलुक महल के अंदर गिरी, चारो तरफ हाहाकार मच गया, इसकी आवाज देव और रेवती को भी आये, रेवती घबरा क्र देव से लिपट गई, देव भी चौंक गया ये सब क्या हुआ,

देव- रेवती उठो जल्दी से कपडे फिनॉल

रेवती- क्यों कुछ नहीं करोगे क्या,

देव- लगता ह महल में कुछ हुआ ह, शायद आसमानी बिजली गिरी ह तो हो सकता ह इधर कोई आ जाये, और वैसे भी मेरा ये अगर तुम्हारे अंदर गया तो तुम कुछ दिनों तक हिल भी नहीं पाओगी, ये सही समय नहीं ह कुछ करने का, तुम मेरी मदद करना चाहती हो, अगर आज तुम इसके निचे आ गई तो तुम्हे मदद की जरुरत होगी, मैं जल्दी hi आऊंगा तुम्हरे लिए, लेकिन अभी मेरा यहाँ से निकलना जरुरी ह,

रेवती- मैं तुम्हारे साथ चलूंगी, मुझे अपने साथ ले चलो, मुझे यहाँ दर लगता ह,

देव- किस बात का सर ये तुम्हरे पिता का घर ह, तुम राजकुमारी हो,

रेवती- तुम नहीं जानते यहाँ क्या हो रहा ह, मुझे ऐसा महसूस होता ह जैसे मेरे पिता की नियत मेरे लिए hi ख़राब हो रही ह, उन्होंने मुझे अपना रक्षा कवच बनाया हुआ ह, और हमेशा अपने साथ रखते हैं, कुछ समय पहले वो मेरी शादी करवाने वाले थे वह भवर सिंह के राजय में, लेकिन वह एक राक्षश आ गया जिस वजह से शादी नहीं हुई, वर्ण मेरी जिंदगी का सोडा तो उन्होंने पहले hi कर दिया था, और जब से उस राक्षश ने मुझे देख क्र मेरे पिता को जिन्दा छोड़ा ह तब से वो मुझे अपने करीब रखते हैं और न जाने कहा कहा हाथ लगते हैं, मुझे अब दर लग रहा ह,

ये शादी की बात देव के लिए कुछ नै थी, मतलब वह कुछ बड़ी योजना हो रही थी, और अपना hi पिता अपनी बेटी के साथ ये सब कैसे सोच सकता ह, ये सोच देव का दिमाग ख़राब हो गया,

देव- लेकिन तुम मेरे साथ कैसे जाओगी, मेरा कोई ठिकाना नहीं ह, मैं इधर उधर भटकता हु,

रेवती- इस कैद से तो अच्छी hi जिंदगी जियूँगी मैं,

देव को समझ नहीं आया क्या करे लेकिन समय काम था, उसे यहाँ से निकलना था, क्योकि उसके दिल में अजीब सी हलचल हो रही थी,

देव- ठीक ह तुम जल्दी से कपड़ो का इंतजाम करो और मेरे लिए किसी सैनिक के कपडे और खुद के लिए की गाओं की लड़की के कपड़ो का इंतजाम करो,

रेवती जल्दी से उठी और अपनी फटी हुई चोली को जल्दी से पहना और फिर अपना घागरा पहन क्र तुरंत बहार निकल गई, देव सोच में डूबा हुआ इधर उधर घूम रहा था, कुछ hi देर में रावटी आ गई, उसने कपडे दिए, देव ने कपडे बदले और रेवती ने भी कपडे बदल लिए,

देव- बहार क्या हो रहा ह

रेवती- भगदड़ मची हुई ह, एक आसमानी बिजली महल के बीचो बिच गिरी ह, और मेरे पिता मुझे धुंध रहे हैं उन्हें दर लग रहा ह, जल्दी करो कोई यहाँ आता hi होगा,

देव- ठीक ह हम इस भगदड़ का हिस्सा बन क्र यहाँ से निकलेंगे, बस तुम मुझे उस तालाब के पास ले चलो जहा हम मिले थे, वह से रास्ता मैं जनता हु, रेवती देव को लेकर छुपती हुई तालाब की तरफ ले जाने लगी, इधर प्रताप सिंह के सैनिक रेवती को ढूढ़ने में लगे हुए थे, और रेणुका जल्दी से डोडो hi अपने कमरे में आई देव को देखने के लिए, देव को वह न प् कर वो घबरा गई, उसने अपने आदमियों को देव को ढूढ़ने में लगा दिया,

वही देव एक सैनिक बन क्र रेवती को ऐस ेलेकर जार है था जैसे किसी दासी की जान बचा क्र कही सुरक्षित जगह पंहुचा रहा हो, बहुत मुश्किल नहीं हुई उन दोनों को तालाब तक पूछने में, तालाब के पास पहुंच क्र देव ने पहले हालत का निरिक्षण किया फिर जिस रस्ते से वो यहाँ आया था उसी रस्ते से रेवती को लेकर निकल गया, ज्यादा तर सैनिक महल की तरफ भाग रहे थे तो किसी ने धयान नहीं दिया, और देव को एक घोडा भी मिल गया देव ने रेवती को घोड़े पैर आगे बैठाया और दौड़ लगा दी, लेकिन कुछ सेनिको ने उसे रोक लिया

सैनिक- आईए तुम इस तरफ कहा जार हे हो, महल तो उधर ह, ये रास्ता तो जंगल एमए जाता ह,

देव- वो इस दासी की हालत ख़राब ह इसे इसके गाओं ले जार है हु,

बस यही गलती हो गई देव से,

सैनिक- इस महल की दसियो का को गाओं नहीं होता लड़के, यह ाकि दासी बस इसी महल के नादेर रहती हैं , कभी बहार नहीं जाती,

उस सैनिक ने तलवार निकल क्र रेवती के मुँह पैर ढके हुए घूँघट को हटा दिया, घूँघट हटते hi वो पहचान गया, क्योकि आज कल रेवती हमेषा प्रताप सिंह के साथ hi दिखाई देती थी,

वह के सेनिको ने देव पैर हुम्ला कर दिया, लेकिन देव कहा उनके काबू में आने वाला था, देव ने एक लात उस सैनिक को मरी और उसकी तलवार चीन ली, अब देव को तलवार ठीक से चलनी नहीं आती थी वो बस ऐसे hi तलवार को घूमता हुआ घोडा लेकर भागने लगा, वो यहाँ लड़ क्र समय ख़राब नहीं करना चाहता था, कुछ सैनिक उसके पीछे भागे और दो सैनिक महल की तरफ भागे प्रताप सिंह को इस बारे में बताने के लिए,

सेनिको ने जैसे hi प्रताप सिंह को ये सब बताया, और ये बात सुनते की की उसकी बेटी को उसके सुरक्षा कवच को लेकर कोई भाग गया ह पुरे राजय में कोहराम मच गया, प्रताप सिंह ने तुरंत तलवार निकली और उन दोनों सेनिको के सर काट दिए, और सेनापति से तुरंत सेना भेजने को कहा,

सेना पति ने तुरनत सेना की एक टुकड़ी निकल दी, लेकिन अब तक बहुत देर हो चुकी थी, वही रेणुका को जब पता चला की देव गायब ह और उधर रेवती भी गायब ह, उसका सर फटने को हो गया, उसे तो समझ hi नहीं आया की ये सब क्या हुआ,

देव रेवती को लेकर निकल तो गया लेकिन कह अजय ये समझ नहीं आ रहा था, उसके खुद के पास जगह नहीं थी तो रेवती को कहा रखता, और निहारिका के सामने उसे लेजा hi नहीं सकता था, क्योकि इस संसार में ऐसा कोई नहीं था जो निहारिका न पहचाने , दुनिया में उससे खूबसूरत औरत कोई नहीं थी, और ये बात सब जानते थे, देव को पहचानना आसान नहीं था क्योकि वो पहले ऐसा नहीं था जैसा अब ह, उसकी कभी कोई चर्चा नहीं करता था, उसके जीवन में उसकी जो चर्चा हुई थी वो बस उस प्रतियोगिता में hi हुई थी,

कैर देव ने अपने सर पैर मुसीबत तो ले hi ली थी,

इधर सात्विक उस पहाड़ के अंदर पहुंच चुक्का था और उसके पीछे थे वह के सभी लोग, पहाड़ के अंदर एक गुफा थी, ये पहाड़ बहार से पहाड़ था अंदर से तो ये एक महल जैसा था, जैसे महल का खण्डार हो और चाट की जगह वो पहाड़ से धक् दिया गया हो, लोगो ने मशाल बना क्र चारो तरफ रौशनी कर दी, सात्विक आगे बढ़ने लगा, एक दम सनता था अहा, लेकिन हवा ठंडी थी,

तभी सबको किसी चीज के गुरने की आवाज आई, सब दर से गए लेकिन सात्विक उस आवाज की तरफ चल दिया, आवाज के नजदीक पाहकः तो वह एक कमरा था जिसका दरवाजा बंद था, एक ादके ने आगे बढ़ क्र दरवाजे को हाथ लगाया तो वो हवा में उड़ता हुआ बहुत दूर जाकर गिरा,

बूढ़ा आदमी- महाराज इसे भी मंत्रो से बंधा हुआ ह, यही वो शक्ति ह,

सात्विक ने अपनी विद्याओ का इस्तेमाल किया और अपनी पूरी तनरा विद्या को लगा क्र उस दरवाजे को खोल दिया था, सात्विक ने दरवाजा तो खोल दिया था लेकिन उसने महसूस किया की वो जितना अपनी तंत्र विद्या का इस्तेमाल करता जार है था उतना hi मंत्रो की विद्या को भूलता जा रहा था, इसका कारन उसे समझ नहीं आया, और अभी समझने का समय भी नहीं था, कमरे का दरवाजा खुलते hi सभी अंदर आ गए, और सामने रखा था एक बहुत बड़ा पत्थर का ताबूत, जो चारो तरफ से बंद था, और उसी के अंदर से आवाज आ रही थी, बड़ी hi अजीब सी आवाजे थी,

सात्विक- क्या ह इसमें

किसी ने कोई जवाब नहीं दिया, सभी लोग हाथ जोड़ क्र उस ताबूत के चारो तरफ बैठ गए, सात्विक अचंभित था,

सात्विक ने ताबूत को चारो तरफ से देखना शुरू किया, उसमे तमिल और संस्कीरत भाषा में कुछ लिखा हुआ था, सबसे उप्पेर लिखा था एक नाम राजा भैरव,

( इस ताकत को यहाँ कैद किया जा रहा ह, इसे भगवन की शक्ति से कैद किया जा रहा ह, और सभी को सलाह दी जाती ह की इसे कभी न खोला जाये, ये ताकत पूरी इंसानियत को तबाह क्र सकती ह, पूरी इंसानियत को भ्रष्ट क्र सकती ह, यहाँ तक व्है आएगा जो अमरता के पीछे होगा, और अमरता hi सबसे बड़ा भरम ह दुनिया में, मृत्यु के सच को पहचानो अमरता के पीछे मत जाओ, वर्ण संसार नष्ट हो जायेगा, खुद को पहचानो और इस ताकत को यही बंद रहने दो, अगर ये बहार आएगी तो सर्वनाश होगा,

इसे ऐसे मंत्रो से बंधा जा रहा ह जिसे वही खोल सकता ह जिसके पास मंत्र और तंत्र की शक्ति हो, क्योकि जो मंत्र पढ़ेगा वो तंत्र की तरफ नहीं जायेगा और जो तंत्र पढता होगा वो मंत्र नहीं सिख सकता, इसलिए ऐसा दुनिया में कोई नहीं होगा जो मंत्र और तंत्र दोनों का ज्ञानी हो, और अगर फिर भी ऐसा कोई इंसान मिल भी गया और यहाँ तक आ गया तो समझो ये उप्पेर वाले की hi इच्छा ह, लेकिन जॉब hi करना सोच समझ क्र करना, )


ये सब पढ़ क्र सात्विक बिलकुल अचंभित था, ये कैसी ताकत ह, उसके अंदर अजीब सी भावनाये उभर रही थी, लेकिन जब से सात्विक इस पहाड़ पैर आया था उसके अंदर नकारात्मक ऊर्जा उभर रही थी, ऐसी ऊर्जा जो सात्विक की अच्छे को दबती जा रही थी, सात्विक के अंदर ताकत पाने की इच्छा बढ़ती जा थी, और उसी इच्छा के वश में होकर सात्विक ने वो ताबूत खोल दिया,
 
अपडेट- 17






चारो तरफ एक अंधकार सा चाय हुआ था, ऐसा लग रहा था जैसे कोई शक्ति सूर्य को hi निगल रही ह, दिन में hi अँधेरा सा हो गया था, आसमान में बिजलिया कड़क रही थी, पक्षी इधर उधर उड़ रहे थे, जंगली जानवर शोर मचा रहे थे, सभी ज्योतिष ऐसे हालत देख क्र घबराये हुए थे, जगह जगह आसमान से बिजली गिर रही थी, और जहा भी बिजली गिरती पुरे इलाके को तहस नहस क्र देती, ये सिर्फ कुछ राजयो में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हो रहा था, भवर सिंह अपने महल की चाट पैर खड़ा हुआ था और रीवा को अपने सामने करके खड़ा था, रीवा hi नहीं बल्कि बाकि तीनो राजकुमारियों, अमिता सोमिया और अक्षरा को भी अपने करो तरफ खड़ा करके उनके बिच में खड़ा था, और ये सब नजारा देख रहा था, वही प्रताप सिंह दर क्र अपने महल में घुस चुक्का था, रेणुका पागलो की तरह पुरे महल में देव को ढूढ़ती फिर रही थी, उसने अपनी बेटी को खोजने की एक बार भी कोशिश नहीं की,

(किसी ने सही कहा ह जब औरत वासना में अंधी होती ह तो उसके लिए कोई रिश्ता मायने नहीं रखता, वो अपनी औलाद तक को भूल जाती ह, जिसका परिणा हम आज कल न्यूज़ में रोज देख रहे हैं)

देव रेवती को लेकर एक जंगल में रुक गया, तेज बारिश और तूफ़ान जैसे हालत हो रहे थे, देव के सामने एक पेड पैर बिजली गिरी जिससे दर क्र रेवती देव से लिपट गई, लेकिन देव के चेरे पैर कोई दर नहीं था, वो एक दम शांत था, देव घोड़े से उतरा और घोड़े को वापस भगा दिया, जिससे उसके पीछे आने वाले सैनिक उसे ढूंढ न पाए, देव के दिमाग में बस एक hi जगह आ रही थी, वो रेवती को लेकर सीधे आचार्य जी के पास पंहुचा, जहा सुगंधा भी वापस आ चुकी थी,

देव जैसे hi आचार्य जी की झोपडी में घुसा तो सुगंधा के हाथ में पानी से भरा घड़ा था जो तुरंत निचे गिर गया, और वो पागलो की तरह देव से लिपट गई, देव बस ऐसे hi खड़ा रह गया, वही रेवती पहले तो चौंक गई लेकिन फिर उसके अंदर जलन के भाव उभरने लगे,

सुगंधा – देव तुम ठीक हो न, तुम कहा चले गए थे मैंने तुम्हे कहा कहा नहीं ढूंढा,

आचार्य जी- बेटी उसे आराम से बैठने तो दे,

सुगंधा को अहसास हुआ वो कहा ह और क्या कर रही ह, वो शर्मा क्र पीछे हैट gai,fir उसकी नजर रेवती पैर गई,

देव- आचार्य जी आपकी सहायता चाहिए, और संसार में आपके सिवा मैं किसी पैर विश्वास नहीं क्र सकता,

सुगंधा- बिना झिजक बोलो, जान जा सकती ह लेकिन तुम्हारे विश्वास को टूटने नहीं दूंगी,

देव ने रेवती को देखा,

देव- रेवती तुम जरा बैठो मैं सुगंधा से बात करके आता हु,

देव और सुगंधा बहार आ गए,

सुगंधा- क्या बात ह देव

देव- ये रेवती ह प्रताप सिंह की बेटी,

प्रताप सिंह का नाम सुनकर सुगंधा के दन्त भींच गए,

सुगंधा – इसे यहाँ क्यों लाये हो तुम,

देव- क्योकि इसके बाप को उसकी किये का फल भुगतना ह,

सुगंधा के चेरे पैर एक मुस्कान आई,

सुगंधा- तो बताओ मुझे क्या करना ह,

देव- इसे इस बात का अहसास न हो की मैं कोण हु और ये यहाँ क्यों ले गई ह, इसे बस ये पता हो की मैं दूसरे राजय का रहने वाला हु,

सुगंधा – ऐसा hi होगा, मैं हर कदम पैर तुम्हारे साथ हु,

देव- मुझे अभी जाना होगा, और किसी को पता न चले मैं जिन्दा हु या नहीं, या यहाँ कभी आया था,

सुगंधा- पिता जी ने मुझे बता दिया था, तुम चिंता मत करो किसी को कुछ पता नहीं चलेगा,

देव- मेरा एक काम और करोगी, मैं तुम्हे कुछ ज्यादा hi जिम्मेदारी दे रहा हु, क्योकि सिर्फ तुम हो जिस पैर मैं विश्वास करने की हिम्मत कर रहा हु, क्योकि उस प्रतियोगिता के मैदान में सिर्फ तुम थी जो मेरी मदद के लिए आगे आई थी,

सुगंधा- एक दोस्त होने के नाते मेरा यही फर्ज था,

देव- तुम्हे कस्तूरी को धुंध क्र लाना होगा और उससे पता करना होगा उसने ये सब क्यों किया, क्योकि काफी कड़िया जुड़ रही हैं लेकिन एक कस्तूरी की कड़ी नहीं जुड़ प् रही, उसने किस वजह से ये सब किया,

सुगंधा की आँखों में नमी थी,

सुगंधा- मैं उसे पटल में से भी धुंध लाऊंगी,

देव- तुम्हारा अहसान रहेगा मुझ पैर,

सुगंधा ने देव को गले से लगा लिया,

दोनों अंदर आये,

देव- रेवती तुम्हे कुछ दिन यहाँ रहना होगा, मैं पहले अपने राजय में जाकर तुम्हरे लिए सब इंतजाम करता हु, तब तक तुम यहाँ चुप क्र रहो, ये सुगंधा ह मेरी दोस्त ह ये तुम्हरा ख्याल रखेगी,

रेवती- मैं यहाँ कैसे रहूंगी, मैं एक राजकुमारी हु, इस झोपडी में कैसे रह सकती हु,

देव- जहा तुम थी वो महल था या तुम्हरी कैद थी, वह सोने की कैद थी और यहाँ खुला आसमान ह, वह तुम साँस भी अपने पिता के अहसान से लेती थी और यहाँ तुम जो चाहे कर सकती हो, और ये तब तक hi ह जब तक मैं तुम्हारी सुरक्षा का इंतजाम न कर दू, इस जिंदगी को जी क्र देखो, और मैं जल्दी hi वापस आऊंगा,

रेवती देव से लिपट गई,

रेवती- मैं यहाँ तो रह लुंगी लेकिन तुम्हरे बिना नहीं रह पाऊँगी, तुमने मुझ पैर ऐसा जादू किया ह की मैं तुम्हारे बिना जीने की सोच भी नहीं सकती,

देव- इसीलिए मैं पहले जाकर सब ठीक करता हु,

रेवती को वह छोड़ क्र देव अपनी माँ के पास निकल लिया,

उधर भौमिक राजय में पहुंच चुक्के थे, पुरे राजय में हाहाकार मचा हुआ था, ये आसमान से गिरती हुई आपदा सब कुछ तबाह क्र रही थी, भौमिक जी ने राजय में घुसते hi कुछ मंत्र पढ़े और आसमान से गिरती हुई बिजली को रोक दिया, सब कुछ शांत होने लगा, और जैसे hi लोगो ने ये देखा की भौमिक जी ने सब कुछ रोक दिया ह तो उनकी जय जय कर होने लगी और भौमिक जी के महल पहुंचने से पहले hi ये खबर महल तक पहुंच गई की भौमिक जी ने बवंडर को रोक दिया ह,

राजगुरु और भवर सिंह को जैसे hi पता चला तो वो दोनों भौमिक जी को लेने के लिए महल के बहार hi आ गए,

भौमिक जी सबसे मिले, फिर वो सभी महल के अंदर एक कमरे में बैठे हुए थे, काम्य भी वही आ गई थी,

भवर सिंह- ये कैसे आपदा आ गई ह हमारे राजय में राजगुरु,

भौमिक- ये आपदा सिर्फ हमारे राजय में नहीं ह, मैं जिस रस्ते से आ रहा हु वह सब जगह ऐसे hi हालत हैं, कुछ बहुत बुरा होने वाला ह, जो इस संसार के लिए ठीक नहीं ह,

भवर सिंह- तुम दोनों भाई वह गए थे तुम्हे कुछ सफलता मिली क्या,

भौमिक जी ने उस जंगल में हुई साडी घटना कह सुनाई बस उस रौशनी अंदर सामने वाली बात कोछोड क्र, और बता दिया की सात्विक आगे गया ह,

भवर सिंह- मतलब तुम कुछ नहीं कर सके,

भौमिक जी ने थोड़े गुस्से में भवर सिंह पैर नजर डाली तभी अचानक से भौमिक जी के सामने एक नजारा आ गया जिसमे भवर सिंह के बहुत बड़ी सेना के साथ खड़ा था और उसके दूसरी तरफ एक अकेला इंसान खड़ा था,

भौमिक जी ने अपने सर को झटका और चारो तरफ देखा, उन्हें समझ hi नहीं आया ये क्या हुआ,

भौमिक जी- मुझे जाना होगा,

भवर सिंह- जाना होगा, तुम्हारा राजा यहाँ बैठा ह तुमसे बात कर रहा ह और तुम जाने की बात कर रहे हो,

भौमिक जी- मेरे पास इन सब बातो के अलावा भी बहुत चीजे हैं सोचने के लिए, और जो आप चाहते हैं उसके लिए सात्विक अपना काम कर रहा ह,

काम्य- अपने राजा को ऐसे उल्टा जवाब दे रहे हो, जानते हो इसका दंड मिल सकता ह

भौमिक जी- जैसे उन माँ बेटे को झूठा दंड देकर मरवा दिया ऐसे hi मुझे दंड देंगे, लेकिन ये मत भूलना मैं देव नहीं हु, और इस वक़्त आपका पूरा राजय मिलकर भी मेरा कुछ नहीं बिगड़ सकता,

भौमिक जी का ये रूप देख राजगुरु अचंभित थे, वो इससे पहले भी गुस्सा हुआ करते थे लेकिन आज उनके चेरे पैर अलग hi उग्र रूप था, राजगुरु ने भौमिक जी के अंदर के बदलाव को महसूस किया,

राजगुरु ने बात को सम्हाला- ऐसा कुछ नहीं ह भौमिक, तुम आओ मेरे साथ,

राजगुरु ने भवर सिंह को शांत रहने का इशारा किया और भौमिक को लेकर बहार निकल गए,

राजगुरु- भौमिक तुम मुझे कुछ बदले बदले लग रहे हो,

भौमिक- भैया वह कुछ हुआ था जिससे मैं अपने बदलाव महसूस कर रहा हु,

भौमिक जी ने अपने और सात्विक के सपने और उस रौशनी के सामने और अपना रफ़्तार के बारे में सब बताया,

भौमिक की बात सुनकर राजगुरु सोच में पद गए,

राजगुरु- भौमिक मैं तुम्हारे अंदर एक अलग hi ऊर्जा को महसूस क्र रहा हु, और ये भी महसूस कर रहा हु की वो ऊर्जा तुम्हारे अंदर नकारत्मक ऊर्जा को बढ़ा रही ह, भाई अगर हमे कोई ताकत मिलती ह तो उसे कैसे इस्तेमाल करना ह ये हमारी सोच पैर निर्भर करता ह, और तुम बहुत hi शांत इंसान हो तो अपनी इस ऊर्जा इस ताकत को संसार के भले के लिए इस्तेमाल करो,

भौमिक- लेकिन मैं नहीं जनता ये कैसी ऊर्जा ह, ये कैसी ताकत ह,

राजगुरु- तो पता करो, अपना धयान लगाओ, इस ऊर्जा को अपने काबू में करो और देखो ये ऊर्जा किस तरह की ह और तुम इसका इस्तेमाल कैसे संसार के भले के लिए कर सकते हो, और है जब तक इस ऊर्जा को काबू में न करो लो किसी को इसके बारे में मत बताना, क्योकि यहाँ सभी ताकत के भूके हैं, खुद भवर सिंह ऐसी hi ताकत पाने के लिए पागल हुआ जा रहा ह, कही वो तुम्हे कोई नुकसान न पंहुचा दे,

भौमिक- मैं इस भवर सिंह को नहीं छोडूंगा,

राजगुरु- ये तुम्हारा काम नहीं ह, तुम बस अपना धयान लगाओ और इस ताकत को काबू करो,

भौमिक- ठीक ह भैया

राजगुरु- मुझे सात्विक की चिंता हो रही ह, अगर उसके अंदर भी ये hi ताकत ह तो कही वो इस ताकत में खुद को न खो दे, अगर ये ताकत उस पैर हावी हो गई तो क्या होगा,

भौमिक- वो बहुत समझदार ह वो खुद को सम्हाल लेगा,

वही सात्विक ने जैसे hi ताबूत को खोला तो उसके सामने था एक बहुत hi लम्बा छोड़ा इंसान जिसे देख क्र ऐसा लग रहा था की वो सो रहा ह, बहुत hi घेरि नींद में सोया हुआ ह, और उसके सोने की आवाज इतनी ज्यादा थी की वो पहाड़ के बहार तक आ रही थी, ताबूत के खुलते hi वह हाथ जोड़े हुए बैठे लोग सर झुका क्र लेट गए,

सात्विक सब कुछ देख क्र बहुत अचंभित था, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था, तभी बूढ़ा आदमी उठा

बूढ़ा आदमी- आपने हमारे राजा को आजाद क्र दिया ह, इस संसार में कोई आपका कुछ नहीं बिगड़ सकता अब,

सात्विक- ये ह कोण और इस ताबूत में बंद होने के बाद भी ये जिन्दा कैसे हैं, जहा हवा तक नहीं आ जा सकती, और इन्हे किसने बंद किया, और क्यों बंद किया,

बूढ़ा आदमी- ये हैं इस पूरी धरती के राजा राजा भैरव, आज से कई हजार वर्ष पहले इन्होने पूरी धरती को जीत लिया, महा शक्तिशाली, महँ योद्धा, और सबसे खास बात भगवान् के महँ भगत, जिन्होंने भगवान् की तपश्या करके उन्हें खुश करके उनसे अमरता का वरदान पाया था, और उसके बाद पूरी धरती जीत ली, लेकिन फिर न जाने क्या हुआ की इन्हे यहाँ कैद कर दिया गया, और हमारे पूर्वज जो इनकी सेना में इनके सबसे खास योद्धा थे, वो इनकी सुरक्षा में यहाँ लगे रहे, और हमारी पीढ़ी कई हजार वर्षो से इस पर्वत की रक्षा करती आ रही ह, हमारे एक गुरु ने भविष्वाणी की थी की एक ऐसा इंसान आएगा जिसके पास तंत्र और मंत्र दोनों की ताकत होगी और भगवान् के दिव्यांश की शक्ति भी होगी, हमारे पूर्वज तब से आपके आने का इंतजार करते करते तबाह हो गए, हमारा सौभाग्य ह की आप हमारे सामने आये,

सात्विक- ये कैसे हो सकता ह, कोई अमर नहीं हो सकता,

बूढ़ा आदमी- उद्धरण आपके सामने ह, एक बंद पहाड़ में एक बंद कमरे में एक बंद ताबूत में जो इंसान बंद था जहा हवा तक नहीं जा सकती वो भूका प्यासा आराम से सो रहा ह, वो भी कई हजार वर्षो से,

सात्विक बस उस सोये हुए इंसान को देखे जा रहा था, उसका शरीर था भी इतना विशाल की वो चाहे तो पूरा पहाड़ उठा ले,

सात्विक- ये उठेंगे कैसे,

बूढ़ा आदमी- ये हम नहीं जानते,

सात्विक ने कुछ पालो के लिए अपनी आँखे बंद फिर

सात्विक- मुझे थोड़ा धयान लगाना होगा, इनकी नींद किसी मंत्र से बंधी हुई ह उसके लिए मुझे अपनी तंत्र विद्या को और जागृत करना होगा, मुझे एक शांत जगह चाहिए जिससे मैं धयान लगा सकू, तब तक तुम सब इनकी रक्षा करो ताकि कोई यहाँ तक न आ सके,

बूढ़ा आदमी- हम अपनी जान देकर भी इनकी रक्षा करेंगे,

सात्विक वह से निकल क्र एक शांत जगह पहुंच गया और अपनी तंत्र विद्या को और मजबूत करने के लिए धयान लगाने लगा, उधर भौमिक अपनी मंत्रो की शक्ति को मजबूत करने के लिए धयान लगा रहे थे, दोनों भाइयो के अंदर शक्ति समय थी, जिसमे एक अपने अंदर भगवान् की शक्ति को और मजबूत कर रहा था तो दूसरा नकारत्मक शक्ति को मजबूत क्र रहा था, जिसका परिणाम आगे चलकर दिखने वाला था,

देव रेवती को सुगंधा के पास छोड़ क्र निहारिका के पास चल दिया, और वह पहुंच क्र गुफा में घुसने से पहले उसने पुरे कपडे उतर दिए और नंगा hi गुफा में गया, निहारिका एक पत्थर पैर बैठी देव का hi इंतजार कर रही थी, देव के अंदर आते hi वो दौड़ती हुई देव से लिपट गई, निहारिका की हिलती हुई चूचिया देव की छाती से चिपक गई, और देव का मोटा लम्बा लकता हुआ लुंड निहारिका की जांघो से रगड़ रहा था लेकिन दोनों के मन में hi कोई गलत भावना नहीं थी, ये वो सच्चा प्रेम था, दोनों नंगे और संसार के सबसे खूबसूरत मर्द और औरत और जिनके पास संसार के सबसे खूबसूरत गुप्तांग थे, फिर भी दोनों के बिच वासना जैसा कुछ नहीं था, बस प्रेम था, और सिर्फ माँ बेटे का प्रेम नहीं था, क्योकि दोनों hi उस प्रेम से कही आगे निकल चुके थे,

निहारिका- कहा रह गया था,

देव- बस माँ दुश्मनो के खेमे में घुस गया था,

निहारिका- कस्तूरी मिली

देव- कस्तूरी तो नहीं मिली, है आचार्य जी और सुगंधा मिले, बड़ी बुरी हालत में जी रहे हैं कस्तूरी के कर्मो की वजह से,

नारिका- और क्या किया,

देव- मैं प्रताप सिंह के महल में गुसा और उसकी पत्नी रेणुका िन्दु और सेना पति की पत्नी योगिता और महामंत्री की बेटी परिधि को छोड़ दिया, रेणुका तो मेरे लिए पागल सी हो गाइट hi,

निहारिका- बहुत बढ़िया, मतलब तूने पहेली सफलता प् ली, और प्रताप सिंह की बेटी,

देव- उसे मैं अपने साथ ले आया, वो मेरे प्यार में पागल हो रही ह, दूसरी मुलाकात में hi मेरे साथ भाग आई ह,

निहारिका- ये तूने क्या किया उसे अपने साथ ले आया,

देव- यहाँ नहीं लाया हु सुगंधा के पास छोड़ दिया ह, उसके साथ कुछ करने का समय नहीं था, लेकिन उसके जरिये प्रताप सिंह को झुकाने का तरीका मिल गया ह,

नारिका- कैसा तरीका

देव- प्रताप सिंह को लगता ह रेवती उसकी जान बचा सकती ह, अब वो रेवती को वापस पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार ह, और वो कमीना इंसान अपनी बेटी को hi अपनी हवस का शिकार बनाना चाहता था,

निहारिका- वो तो ह hi गिरा हुआ, लेकिन अब कोई रिष्ता मेरे लिए मायने नहीं रखता ह, तुझे बहुत कुछ करना ह अभी,

देव- जनता हु मैं और मैं पीछे नहीं हटूंगा,

इधर प्रताप सिंह की सेना निकल चुकी थी रेवती को ढूढ़ने और देव ने आखिर में जो देव खेला था वो काम आ गया था, देव ने जो घोडा वापस भेजा था वो भवर सिंह के राजय की सीमा के अंदर आकर भेजा था, और प्रताप सिंह के सैनिक घोड़े तक पहुंच गए थे, और जैसे hi ये खबर प्रताप सिंह को मिली की रेवती को ले जाने वाला घोडा भवर सिंह के राजय में मिला ह, फिर तो प्रताप सिंह गुस्से में आग बबूला हो गया, उसे ये hi लगा की भवर सिंह ने बदला लेने के लिए hi उसकी बेटी को अगवा करवाया ह,

प्रताप सिंह और उसका बीटा वीरेंदर सिंह दोनों ने सेना तैयार क्र ली थी, प्रताप सिंह के और भी बहुत सरे बच्चे थे, जिनमे से 10 को जायज होने की उपाधि मिली हुई थी, जिनमे से एक थी रेवती और 9 लड़के जिसमे सबसे बड़ा था वीरेंदर सिंह बाकि 8 भी उसी की तरह खूंखार और ताकतवर थे, जो वीरेंदर की hi बात मानते थे,

खैर प्रताप सिंह की सेना तैयार हो चुकी थी भवन पूरा पैर हुम्ला करने के लिए, प्रताप सिंह के साथ आस पास के कई राजय मिल गए थे, कुछ hi दिनों में एक बड़ी सेना भवर सिंह के राजय की तरफ पहुंच चुकी थी, इधर प्रताप सिंह को कुछ पता hi नहीं था, वो तो बस पागल हुआ जा रहा था अमर होने के लिए,

और जब तक भवर सिंह को पता चलता तब तक प्रताप सिंह की सेना राजय के बहुत करीब आ चुकी थी, भवर सिंह को जैसे hi पता चला उसने युद्ध के लिए सेना को तैयार करवाया, राजगुरु ने फिर से प्रताप सिंह से बात करने की सलाह दी लेकिन भवर सिंह ने नहीं मणि और सेना तैयार क्र दी, युद्ध की तैयारी शुरू हो गई, और जब तक भवर सिंह की सेना महल के बहार पहकहति तब तक प्रताप सिंह उसके कई गाओं को तबाह करता हुआ अपनी सेना लेकर राजधानी में महल के सामने आ खड़ा हुआ था,

इतनी विशाल सेना देख क्र भवर सिंह और उसकी सेना के पेअर उखाड़ने लगे, भवर सिंह ने अपने बेटे सूरज और ज्वाला को युद्ध के लिए आगे भेजना चाहा लेकिन दोनों hi अपने पेअर पीछे खींचने लगे, जबकि प्रताप सिंह के बेटे सेना में सबसे आगे खड़े थे,

भवर सिंह को दिखाई दे गया की वो ये युद्ध नहीं जीत सकता, और जितनी बड़ी सेना सामने कड़ी थी वो पुरे राजय को तबाह कर सकती थी,

भवर सिंह- राजगुरु ये सेना पुरे राजय को तबाह कर देगी, कोई रास्ता सुझाइये,

राजगुरु- मैंने उससे बात करने की सलाह दी थी लेकिन आप मने नहीं अब वो इतना करीब आ गया ह की और उसे पता ह की वो जीत सकता ह,

भवर सिंह- तो क्या किया जाये,

राजगुरु- अब एक hi रास्ता ह,

भवर सिंह- कोनसा रास्ता,

अभिजीत- यहाँ से बहग चलते हैं

भागने की बात से सभी ने अभिजीत को गुस्से में देखा,

काम्य ने अभिजीत को चुप रहने का इशारा किया,

राजगुरु- हम प्रताप सिंह को द्वन्द युद्ध के लिए कहेंगे, क्योकि ये बात तो वो भी जनता ह युद्ध करने में उसके भी बहुत से सैनिक मरे जायेंगे, अगर द्वंद्व युद्ध से फैसला हो जायेगा तो शायद हम इस राजय को तबाह होने से बचा ले, और उम्मीद करते हैं हमारा योद्धा जीत गया तो पूरा राजय hi बच जाये,

सूरज- अगर हम हार गए तो,

राजगुरु- तो हम ये पूरा राजय हार जायेंगे लेकिन राजपरिवार को बचा लेंगे, और इस राजय के हजारो लोगो को भी,

काम्य- ये तरीका ठीक ह, आप खबर भिजवाइए प्रताप सिंह,

राजगुरु खुद ये खबर लेकर प्रताप सिंह के खेमे में पाहकः गए,

प्रताप सिंह- फिर से कोई समझौता लेकर आये हैं लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं होगा,

राजगुरु- मैं कोई समझौता लेकर नहीं आया हु महाराज, मैं बस सबकी भलाई के लिए आया हु,

प्रताप सिंह- अगर भवर सिंह आत्मसमर्पण कर दे और मेरी बेटी को वापस दे दे तो मैं किसी को नहीं मरूंगा,

राजगुरु- आपकी बेटी लेकिन आपकी बेटी यहाँ क्यों आएगी,

प्रताप सिंह- ज्यादा कहानिया मत बनाओ, मेरी बेटी को अगवा करवाया गया ह, और ये तुम लोगो ने करवाया ह,

राजगुरु- आपको गलत फहमी हुई ह, हमे ऐसा कुछ नहीं करवाया,

प्रताप सिंह- मुझे तुम लोगो पैर विश्वास नहीं ह, मैं इस राजय को जीत क्र अपनी बेटी वापस ले लूंगा,

राजगुरु- आपको हम पैर यकीन नहीं ह, आप जैसा चाहते हैं वैसा कीजिये, लेकिन पुरे राजय को तबाह करके या इतने सेनिको की बलि देकर आपने राजय जीत भी लिया तो आपको क्या मिलेगा ये तबाह हुआ राजय,

प्रताप सिंह- कहना क्या चाहते हो,

राजगुरु- अगर ये युद्ध द्वंद्व युद्ध में बदल जाये तो, आपका सबसे अच्छे योद्धा और हमारा सबसे अच्छा योद्धा आपस में लड़ क्र तय क्र दे की कोण जीतेगा, और जो भी जीते उसे सामने वाले राजा की बात माननी होगी,

राजगुरु की बात से प्रताप सिंह सोच में दुब गया,

प्रताप सिंह- इसमें कोई चल तो नहीं ह,

राजगुरु- हम सेनिको और परजा की रक्षा करना चाहते हैं बस,

प्रताप सिंह- ठीक ह लेकिन इसमें मेरी 2 शर्ते हैं,

राज गुरु- कैसी शर्ते,

प्रताप सिंह – पहेली ये की इसमें 4 – 4 योद्धा दोनों तरफ से लड़ेंगे और वो चारो राजपरिवार के लोग hi होंगे, अगर ये शरत मेजर ह तो ये फैसला होगा वर्ण हम इस पुरे राजय को तबाह कर देंगे,

राजगुरु जब प्रताप सिंह का सन्देश लेकर वापस आया और भवर सिंह को ये शर्ते बताई तो भवर सिंह की फैट गई उसके साथ साथ पुरे परिवार की फैट गई, क्योकि उसके परिवार मर्द hi नहीं थे, भवर सिंह को अपनी ताकत पैर बहुत घनाद था, लेकिन अपने बच्चो को कैसे सामने करेगा,

भवर सिंह- वो हम पैर युद्ध करने के लिए दूसरे राजाओ को साथ लाया ह, अपनी बेटी के अगवा होने का झूठा नाटक करके हमे बर्बाद करना चाहता ह,

राजगुरु- हो सकता ह लेकिन हमे कुछ तो करना hi होगा,

भवर सिंह – मेरे बेटो बताओ क्या फैसला ह तुम्हारा, क्या तुम उस प्रताप सिंह के परिवार के लोगो को हरा क्र इस राजय को बचाओगे, और हम उसके राजय को भी जीत लेनेगे,

द्वंद्व युद्ध का नाम सुनकर सभी घबरा गए, लेकिन यही मौका था सूरज और ज्वाला के लिए युवराज पद हासिल करने का,

सूरज और ज्वाला एक साथ- हम तैयार हैं,

काम्य- अभिजीत नहीं लड़ेगा, उसकी जगह कुणाल मेरे पति लड़ेंगे,

अब बेचारे कुणाल की आफत आ गई थी उसने आज तक कोई युद्ध नहीं लड़ा था,

काम्य का समर्थन भवर सिंह ने भी किया, और भवर सिंह सूरज ज्वाला और कुणाल युद्ध के लिए तैयार हो गए,

प्रताप सिंह को खबर भिजवा दी की हम द्वंद्व युद्ध के लिए तैयार ह, जल्दी hi एक महल के बहार hi मैदान तैयार क्र दिया गया, जिसके एक तरफ महल तो दूसरी तरफ प्रताप सिंह की सेना थी, और सेना को महल और इस युद्ध काफी दूर रोका दिया गया, बस प्रताप सिंह के योद्धा और परिवार के लोग hi मैदान के दूसरी टाफ नजदीक आये,

सभी मैदान में आ गए, राजगुरु और प्रताप सिंह के महामंत्री ने कुछ नियम बनाये जिसमे अगर परिवार का एक hi सदश्य मैदान में खड़ा ह तब तक युद्ध चलता रहेगा, और अगर कोई खुद हर मान लेता ह तो उसे मारा नहीं जायेगा, और अगर कोई योद्धा ज्यादा घायल हो जाये तो परिवार का कोई एक योद्धा उसकी जगह ले सकता ह, ये सिर्फ एक बार हो सकता ह,

ये आखिर वाला नियम प्रताप सिंह ने जानबूझ क्र बनवाया ताकि वो आखिर में युद्ध में आ सके और अपने हाथो से भवर सिंह को मार सके,

नियम बन गए थे, भवर सिंह सूरज ज्वाला और कुणाल मैदान में आ चुके थे, दूसरी तरफ से प्रताप सिंह के 4 बेटे वीरेंदर सिंह, इन्दर सिंह, जीतेन्द्र सिंह और संभु सिंह मैदान में आ खड़े हुए, चारो hi लम्बे चोदे और ताकतवर थे,



युद्ध का बिगुल बज चुक्का था, और चारो में युद्ध शुरू हो गया, इधर से भवर सिंह हावी पद रहा था वही दूसरी तरफ से वीरेंदर सिंह हावी हो रहा था, और सबसे कमजोर था कुणाल, बेचारा बस किसी तरह से अपनी जान बचा रहा था, भवर सिंह के लग कुणाल को गालिया दे रहे थे, वही प्रताप सिंह के लोग उसका मजाक बना रहे थे, लेकिन वो बेचारा तो अपनी जान बचा रहा था, कुणाल बहुत घायल हो चुक्का था, युद्ध काफी समय तक चल गया था, लेकिन प्रताप सिंह के बेटे भवर सिंह पैर हावी होने लगे थे, और संभु की तलवार कुणाल की गार्डन पैर आ चुकी थी,
 
अपडेट- 18



कुणाल की गार्डन पैर तलवार थी वही ज्वाला ने भी घुटने तक दिए थे, वो थक चुक्का था, बस भवर सिंह और सूरज पूरी हिम्मत से लड़ रहे थे, लेकिन सूरज भी बहुत घायल हो चुक्का था, वो भी हिम्मत हरने लगा था, प्रताप सिंह के बेटे किसी को हार मैंने के लिए हाथ उठाने hi नहीं दे रहे थे, वो लगातार मरे जा रहे थे, अपने बेटो को हारते देख भवर सिंह की हिम्मत टूटने लगी, उसकी तलवार के वॉर हलके पड़ने लगे थे,

तभी संभु ने कुणाल की गार्डन पैर तलवार राखी और जोर से चिलाय की – और ह क्या इसके खंडन में जो हमसे टक्कर ले सके, किसी की माँ ने उसे अपना दूध पिलाया हो तो आ जाओ,

संभु की बात पैर प्रताप सिंह के परिवार वाले और साथी हसने लगे, और भवर सिंह के परिवार वालो ने अपना सर झुखा लिया,

तभी एक आवाज आई- तुम सबकी माँ ने कितना दूध पिलाया ह ये मैं जरूर देखना चाहूंगा, माँ के दूध की बात ह तो मेरे कदम पीछे नहीं रह सकते,

सबने आवाज की तरफ देखा तो मैदान में hi थोड़ी दुरी पैर एक पेड था जिसमे से एक लड़का कूद क्र निचे आया, जिसे देख क्र वह बैठे सभी की आँखे फटी रह गई थी, क्योकि ते देव था, जो मुस्कुराता हुआ चला आ रहा था वो था ,

देव को वह देख क्र भवर सिंह और पूरा परिवार अचंभित था, वो जिन्दा कैसे है ये बहुत बड़ा सवाल था, खुद राजगुरु बुरी तरह चौंक गए थे, उधर प्रताप सिंह भी चौंक गया था क्योकि उसे भी यकीन नहीं हो रहा था ये जिन्दा कैसे ह,

लेकिन देव को वह देख क्र प्रताप सिंह के दिल में एक ख़ुशी सी आई उसे उम्मीद जगी की अगर ये जिन्दा ह तो निहारिका भी जिन्दा होगी,

वही अक्षरा और रीवा ख़ुशी से चिल्ला उठी, वो महल की चाट से सब देख रही थी, और दूर से देव को पहचान क्र वो ख़ुशी से उछाल पड़ी,

देव चलता हुआ युद्ध के बिच में आ गया, प्रताप सिंह भी उठ क्र वही आ गया,

प्रताप सिंह- तू जिन्दा ह, वह ये तो अच्छा ह, लेकिन तू इनकी तरफ से क्यों लड़ना चाहता ह, वैसे मुझे कोई ऐतराज नहीं ह, क्योकि तू मेरे बच्चो के सामने मट्टी का पुतला hi ह बस, लेकिन जिन्होंने तुझे और तेरी माँ को मरवाने की कोशिश की उनके लिए क्यों लड़ रहा ह,

देव- मेरा इनसे कोई सम्बन्ध नहीं ह, तू चाहे तो सबको मर दे, लेकिन तेरे बेटे ने माँ के दूध को ललकारा ह, दूध का कर्ज तो मुझे चुकाना होगा,

प्रताप सिंह- क्या तेरी माँ भी जिन्दा ह, वैसे तो अब तू इस परिवार का हिस्सा नहीं ह, क्यों भवर सिंह तूने इसे परिवार से बहार क्र दिया ह न, ये तो लड़ाई लड़ hi नहीं सकता लेकिन है अगर इसकी माँ जिन्दा ह तो मैं इसे मौका दे सकता हु, क्योकि इसे मरने के बाद इसकी माँ को मैं अपनी रखैल बनाऊंगा,

देव- तू जनता ह मैं यहाँ क्यों हु, इन लोगो को बचने के लिए नहीं बल्कि तुझे वो दर्द देने के लिए जिससे तू जिंदगी भर तड़पेगा, मैं तुझे मरूंगा नहीं बल्कि ऐसे ऐसे दर्द दूंगा जो तुझे रोज मरेंगे,

प्रताप सिंह- तू उसके लिए जिन्दा hi नहीं बचेगा, मेरे बच्चो सबसे पहले इसकी गार्डन धड़ से अलग कर दो, अगर ये हार भी मन्ना चाहे तब भी रहम मत करना, ये युद्ध में आ रहा ह तो नियम बदल रहा ह, अब हरने के बाद कोई रहम नहीं होगा, सबको मर देना,

प्रताप सिंह के बेटे हसने लगे,

वही भवर सिंह घबरा गया, उसे लगा अब मोत पक्की ह, पहले हार मान क्र जान तो बच सकती थी लेकिन अब तो सब मरेंगे,

भवर सिंह- तेरी हिम्मत कैसे हुई यहाँ आने की, तू हमे मरवाने आया ह,

देव ने कोई जवाब नहीं दिया वो कुणाल के पास गया और उसे खड़ा किया, और मैदान से थोड़ा दूर ले जाने लगा,

तभी पीछे संभु उसकी तरफ आया और देव तुरंत पीछे मुदा और संभु की गार्डन पकड़ी और हवा में उठा क्र दूर फेंक दिया,

और जैसे hi सबने ये नजारा देखा सबकी आँखे फटी रह गई, किसी को कुछ समझ नहीं आया ये क्या हुआ, संभु एक विशाल शरीर वाला बहुत ताकतवर इंसान ह, उसे 4 आदमी मिलकर भी ऐसे नहीं फेंक सकते थे,

देव ने कुणाल का हाथ पकड़ा और थोड़ी दुरी पैर लेजाकर बैठा दिया, फिर वापस मुदा और मैदान के बिच में आने लगा, उधर संभु दूर पड़ा हुआ था उसे तो पता hi नहीं चला वो इतनी दूर कैसे आ गिरा,

तभी जीतेन्द्र सिंह देव की तरफ तलवार लेकर डोडा जबकि देव खली हाथ hi आ रहा था, जीतेन्द्र ने तलवार चलाई जिससे देव एक तरफ हो गया और उसका हाथ पकड़ क्र एक मुक्का उसकी छाती में मारा जिससे जीतेन्द्र के मुँह से खून निकल आया, देव ने उसकी तलवार गिरा दी और प्रताप सिंह की तरफ मुस्कराकर देखते हुए उसका हाथ तोड़ दिया फिर दूसरा हाथ तोड़ दिया, जीतेन्द्र दर्द से छिलने लगा तो देव ने उसके मुँह पैर एक मुक्का मारा जिससे उसके सरे दन्त टूट कर बहार आ गए और जीतेन्द्र जमीन पैर बेहोश होकर गिर पड़ा, और प्रताप सिंह की हलकी सी चीख निकल गई,

ये नजारा देख क्र वह सभी फैट गई, खुद भवर सिंह और सूरज और ज्वाला की भी हालत ख़राब हो गई थी, लेकिन तभी वीरेंदर सिंह और इन्दर दोनों एक साथ देव की तरफ भागे, वीरेंदर आगे था तो देव ने उसके वॉर करने से पहले hi हाथ पकड़ा और दूर धकेल दिया, और पीछे आ रहे इन्दर को एक थपड मारा और उसकी तलवार वाला हाथ पकड़ लिया और मोड़ने लगा, फिर उसने प्रताप सिंह को देखा और इन्दर के हाथ में पकड़ी हुई तलवार को उसी के पेट में घुसा दिया और प्रताप सिंह को देखते हुए तलवार उसके पेट में घुमा दी, प्रताप सिंह गुस्से में चिल्ला उठा,

तभी पीछे से वीरेनदा आया और उसने तलवार का वॉर किया तो देव एक तरफ हो गया और वो वॉर सीधे इन्दर की गार्डन पैर हुआ और उसकी गार्डन अलग हो गई, वीरेंदर गुस्से में बोखला गया और लगातार तलवार घूमता हुआ देव पैर हुम्ला करने लगा लेकिन देव बड़े आराम से बचता रहा, फिर देव ने वीरेंदर की तलवार पकड़ ली और चीन क्र दूर फेंक दी, अब वीरेंदर हाथो से hi देव से लड़ने लगा,

वीरेंदर- मैं तुझे अपने हाथो से hi मरूंगा,


वीरेंदर सच में बहुत ताकतवर था, उसने दो तीन मुक्खे देव के मुँह और छाती में मरे, देव दो कदम पीछे हुआ और फिर खुद को सम्हाला और मुस्कुरा क्र प्रताप सिंह की तरफ देखा और एक जोर दर मुक्का वीरेंदर की छाती में मार दिया जिससे वो 10 कदम दूर जाकर गिरा, उसके गिरते hi प्रताप सिंह का पूरा परिवार खड़ा हो गया, देव आगे बढ़ा और वीरेंदर का हाथ पकड़ क्र उसे उठाया और एक जोर दर झटका उसके हाथ में मारा और कंधे पैर से हाथ तोड़ दिया, वीरेंदर दर्द से चीख पड़ा,

प्रताप सिंह घबरा गया और वो अपने बेटे की तरफ दौड़ पड़ा उसके पीछे उसके दूसरे बेटे भी थे, तभी देव ने अपनी तरफ आते हुए प्रताप सिंह को देख और मुस्कुराया, फिर उसने वीरेंदर की गार्डन पकड़ी और प्रताप सिंह की तरफ इशारा किया, की आ जा

और जैसे hi प्रताप सिंह ने तेज दौड़ लगाई तभी देव ने वीरेंदर की गार्डन पकड़ क्र घुमा दी जैसे कोई बच्चा की खिलोने की गार्डन घुमा देता ह, देव ने वीरेंदर की गार्डन मरोड़ क्र उसकी दिशा hi बदल दी थी, वीरेंदर के प्राण निकल गए और वो जमीन पैर गिर पड़ा, ये नजारा देख सबकी सांसे hi रुक गई, किसी में इतनी ताकत कैसे हो सकती ह, प्रताप सिंह तो अपने घुटनो पैर गिर पड़ा, और मैदान में चौथा योद्धा बचा था संभु सिंह, वो अपनी कमर को पकडे हुए पड़ा हुआ ये नजारा देख रहा था, और जैसे hi देव ने उसकी तरफ कदम बढ़ाये वो उठा और मैदान छोड़ क्र भाग लिया,

देव- क्यों प्रताप सिंह हो गया न फैसला, अब ले जा इन्हे उठा क्र और मन मातम, और पीला अपने बाकि बच्चो को उनकी माओ का दूध, जब ये तैयार हो जाये तो फिर ले आना, इतना बोल क्र देव मुदा और चल दिया, किसी की इतनी हिम्मत तक नहीं हुई की उसे रोक सके, वो चलता हुआ मैदान से बहार निकल गया, और काफी समय तक वह सनता च गया, भवर सिंह सूरज और ज्वाला भी घबराये हुए देव के किये कारनामे को देख रहे थे, उनकी तो प्रताप सिंह से भी ज्यादा फटी हुई थी, क्योकि देव अपना बदला ले रहा था, और शुरुआत प्रताप सिंह से की थी, उन्हें अपनी मोत भी दिखाई दे रही थी,

और महल के उप्पेर बैठी सभी औरतो की आँखे फटी हुई थी, अमरावती सौमित्र और काम्य को तो पसीने आये हुए थे, वही राजगुरु के चेरे पैर चिंता के भाव थे,

देव के वह से जाते hi प्रताप सिंह जोर से चीख चीख क्र रोने लगा, वो अपने दो बेटो को खो चुक्का था वो भी इतने ताकतवर योद्धाओ को,

भवर सिंह ने अपने बेटो को इशारा किया की जल्दी से यहाँ से निकल लो, वो तीनो वह से खिषकने लगे तभी प्रताप सिंह चिल्लाया- मेरे बेटो की मोत का परिणाम पूरा राजय भुगतेगा,

प्रताप सिंह- सेना पति हुम्ला करो और पुरे राजय को तहसनहस कर दो, किसी को जिन्दा मत छोड़ना, पूरा राजय जला दो,

सेना पति जो पहले से hi सेना को तैयार किये खड़ा था उसने तुरंत हमले का आदेश दे दिया, वही राजगुरु ने भी अपने सेनापति को युद्ध का आदेश दे दिया क्योकि अब कोई रास्ता नहीं बचा था, दोनों सेना एक दूसरे की तरफ चलने लगी,

अब भवर सिंह ख़ुशी मनाये की देव ने आकर उन्हें बचा लिया या मातम मनाये की उसकी वजह से पूरा राजय तबाह होने वाला ह,

तभी दोनों सेनाये एक दूसरे की तरफ दौड़ने लगी, और युद्ध शुरू हो गया, और भवर सिंह अपने बेटो को लेकर सेना के पीछे खड़ा था वही प्रताप सिंह अपने दोनों बेटो की लाशे गॉड में लिए बैठा था, उसके बाकि बेटे युद्ध में सबसे आगे थे, और तभी कुछ अजीब होने लगा, बहुत से सैनिक हवा में उड़ते दिखाई दिए, इस नज़ारे ने सबको चौंका दिया, और अचानक से युद्ध रुक गया, राजगुरु ने महल के उप्पेर से देखा और जोर से चिलए,

राजगुरु- महाराज जल्दी वह से निकालिये, अपनी जान बचाइए

भवर सिंह ने उप्पेर देखा,

राजगुरु – महाराज भागिए वह से राक्षश आ गया ह,

राक्षश का नाम सुनते hi वह दहशत फ़ैल गई, भवर सिंह और उसके बेटे तुरंत वह से महल क्र अंदर भाग लिया, और जैसे hi पीछे के सेनिको ने सुना राक्षश आ गया ह वो भी उलटे पाव भागने लगे, वही सेना को भागते देख प्रताप सिंह भी चौंक गया, और जब उसने उठ क्र देखा और सेनिको को हवा में उड़ते देखा, तभी उसकी नजर भवर सिंह पैर पड़ी, जो महल के अंदर भाग रहा था, पताप सिंह ने आगे बढ़ क्र देखा तो पाया की दोनों सेनाओ के बिच में वो राक्षश आ चुक्का ह अपनी कुल्हाड़ी लिए हुए और जो भी सामने आ रहा ह बस मार रहा ह, उसे फरक नहीं पद रहा की सामने किसकी सेना ह,

प्रताप सिंह ने तुरनत अपने बेटो को खबर भिजवाई की जल्दी से वह से निकालो और भागो, प्रताप सिंह की अपने बेटो की लाशो को लेकर वह से भाग लिया, दोनों सेनाओ में भगदड़ मच गई थी, अब तक सबने देव की ताकत देखि थी, जिसे देख क्र वो सब हैरत में पद गए थे, लेकिन अब जो वो देख रहे थे वो सच में भयानक था, वो राक्षश बस खून छटा था, दोनों सेनाओ के सैनिक एक साथ होकर राक्षश पैर हुम्ला करने लगे, लेकिन वो न जाने किस मिटटी का बना था कोई उसे छू भी नहीं प् रहा था,

दोनों सेनाओ में भगदड़ मच गई सब अपनी जान बचा कर भागने लगे, कोण किस तरफ भाग रहा था किसी को कुछ नहीं पता था, बस एक hi चीज दिमाग में थी बस अपनी जान बचाओ, और कुछ hi देर में पूरा मैदान खली हो गया, वह रह गई थी तो बस सेंको की लाशे, वो राक्षश मैदान में खड़ा हो गया और चारो तरफ देखने लगा, भवर सिंह और उसका परिवार छुपे हुए उसे देख रहे थे,

राक्षश कुछ पल वह ऐसे hi खड़ा रहा फिर अपनी कुल्हाड़ी को कंधे पैर रख क्र एक दिशा में चल दिया, उसके जाते hi सबने रहत की साँस ली,

राक्षश तो चला गया था लेकिन वो एक ऐसी दहशत छोड़ क्र चला गया था जिससे शायद hi कोई कभी उभर पाए, क्योकि 25-30 हजार सेनिको के बिच में अकेला खड़ा होकर सबसे युद्ध करने आ गया, ये अपने आप में hi बहुत भयानक था, और उससे भी ज्यादा खतरनाक था अकेले ने हजारो सेनिको को मार गिराया था,

प्रताप सिंह अपने राजय में लोट गया था और उसके साथ जो दूसरे राजय के राजा आये थे वो भी घबराये हुए अपने राजय में चले गए थे, उन्होंने अब तक रक्षाः के बारे में सुना था की ऐसा ह वैसा ह लेकिन आज अपनी आँखों से देख लिया था, और एक नहीं दो योद्धा देखे दूसरा देखा देव को जिसने वीरेंदर जैसे ताकतवर योद्धा की गार्डन किसी मुर्गे की तरह मरोड़ दी थी, और जैसे जैसे सबको पता चला की वो लड़का भवर सिंह का बीटा था, तो सबके दिल में भवर सिंह के राजय की ताकत की दहशत बैठ गई,

और ये वही समय था जिसके बारे में भवर सिंह ने कहा था की हमारे राजय की ताकत सब जगह पता चलेगी,

प्रताप सिंह अपने दो बेटो की लाशे और तीसरे अधमरे बेटे को लेकर अपने राजय में पंहुचा तो वह हाहाकार मच गया, बहुत से सैनिक मर चुके थे, प्रताप सिंह पूरी तरह टूट चुक्का था, जब रेणुका को खबर मिली तो उसके दिल में भी एक भय सा बैठ गया,

वही भवर सिंह घबराया हुआ सा अपनी राजगादी पैर बैठा हुआ था उसके सामने राजय के बड़े बड़े लोग बैठे हुए थे, भवर सिंह का पूरा परिवार डरा बैठा था,

कुणाल- आज देवदूत की वजह से हमारा परिवार जिन्दा ह,

काम्य- क्या बकवास कर रहे हो, उसकी वजह से पूरा राजय तबाह होने वाला था, प्रताप सिंह ने पुरे राजय पैर हुम्ला कर दिया था,

कुणाल- अगर वो नहीं आता तो इस राजय को बचने वाले महाराज और दोनों राजकुमार और मैं वही उस मैदान में पड़े हुए होते, फिर वो प्रताप सिंह क्या करता किसे पता था, तुमने देखा नहीं उसकी सेना तैयार कड़ी थी युद्ध के लिए, बस एक आवाज पैर hi पूरी सेना दौड़ पड़ी थी,

कुणाल की बात से सभा में बैठे बाकि लोग भी है है सही कहा करने लगे,

काम्य ने वह चुप रहना hi सही समझा,

राजगुरु- वो कहा से आया और कहा चला गया, किसी की कुछ समझ नहीं आया,

अभिजीत- अगर हम हर मान लेते तो प्रताप सिंह महाराज को मरता तोडना,

कुणाल- क्या भरोसा था की वो नहीं मरता, और राजय तो फिर भी चला जाता न, अब सब जिन्दा भी हैं और राजय भी बच गया,

भवर सिंह- उस राक्षश की वजह से, लेकिन ये राक्षश ह कोण जब आता ह बस मार्केट मचता ह,

सौमित्र - वो हमेशा युद्ध जैसे हालातो में क्यों आता ह,

अमरावती- हो सकता ह उसे खून खराबा करना और देखना पसंद हो,

भवर सिंह- ये सभा यही ख़तम होती ह, और सेना पति राजय की सुरक्षा बधाई जाये, और सैनिक भर्ती किये जाये, हमे अपनी पूरी ताकत दिखानी होगी,

राजगुरु- महाराज आपने कहा था हमारे राजय की ताकत सब देखंगे, आज वो ताकत सबने देखि जब देवदूत ने प्रताप सिंह के बेटो को खिलोनो की तरह तोड़ मरोड़ दिया,

भवर सिंह- ये hi तो चिंता का विषय ह राजगुरु,

राजगुरु ने सभी को भेज दिया बस वह भवर सिंह काम्य और राजगुरु बचे,

भवर सिंह- वो जिन्दा कैसे ह राजगुरु, उन सेनिको को बुलाओ जिन्होंने उन दोनों माँ बेटो को मारा था, और वो जिन्दा ह तो इतनी ताकत उसमे कहा से आई, ये संभव नहीं ह, कही वो कोई भूत तो नहीं था,,

राजगुरु- वो जिन्दा hi था महाराज, और उसकी ताकत ने मुझे भी अचंभित क्र दिया ह, भविष्वाणी सही होती दिख रही ह,

भवर सिंह- मैं उसे मार दूंगा, आदेश निकलवा दो, देवदूत जहा भी दिखाई दे उसे मार दिया जाये,

राजगुरु- आज का कारनामा देख क्र आपको लगता ह कोई उसे छू भी पायेगा,

भवर सिंह- सब कुछ ख़तम हो जायेगा, दो खतरे एक साथ हमारे सर पैर मंडरा रहे हैं, ये राक्षश तो था hi अब ये देवदूत भी आ गया ह,

काम्य - मेरे पास एक योजना ह,

भवर सिंह- कैसी योजना?

काम्य- क्यों न हम देव को वापस बुला ले,

भवर सिंह- ये क्या बोल रही हो,

काम्य- आज जो उसने ताकत दिखाई ह, उसे देख क्र लगता ह उसे कुछ ऐसा मिला ह जिससे उसकी ताकत इतनी बढ़ गई ह, अगर हमसे दूर रहेगा तो हम कभी पता नहीं कर सकेंगे की उसमे इतनी ताकत कहा से आई, और दूसरा हम उसकी ताकत का इस्तेमाल क्र सकते हैं अपने राजय की रक्षा करने के लिए, और अगर वो राक्षश फिर आता ह तो देव होगा हमारे पास उससे लड़ने के लिए, और हमे चिंता भी नहीं होगी की राक्षश देव को मर दे या देव राक्षश को दोनों में से जो भी मरेगा हमारा एक दुश्मन काम हो जायेगा, और देव हमारे नजदीक रहेगा तो वो कोई चाल भी नहीं चल पायेगा, हमारे पास मौका होगा उसे ख़तम करने का,

काम्य की बात से भवर सिंह और राजगुरु एक दूसरे का मुँह देखने लगे,

राजगुरु- वैसे तो मैं इस बार कोई चल कपट नहीं करना चाहता, एक बार करके hi मैं अपने भाई की नजरो में गिर चुक्का हु, लेकिन मैंने आपका नमक खाया ह और आपकी सेवा की कसम खाई ह इसलिए मजबूर हु, और मुझे कहना पद रहा ह की महारानी की बातो में सच्चाई ह, ये hi सबसे सही तरीका ह,

भवर सिंह- लेकिन वो हमारे पास क्यों आएगा, हमने उसके साथ इतना बुरा किया था,

काम्य- वो सब प्रताप सिंह ने किया था हमारे पास अच्छा तरीका ह प्रताप सिंह पैर इल्जाम लगाने का, और वैसे भी अब वो हमारा दुश्मन ह तो उससे सफाई मांगने कोण जायेगा,

भवर सिंह- और जो देव पैर इल्जाम लगे थे उनका क्या,

काम्य- वो मुझ पैर छोड़ दीजिये, बस आप पता करवाइये की वो ह कहा, और वो hi जिन्दा ह या उसकी माँ भी जिन्दा ह,

भवर सिंह- अगर उसकी माँ जिन्दा हुई तो उसे वापस लेन का तरीका तो ह मेरे पास,

तभी वह वो सैनिक आ गए जिन्होंने देव और निहारिका को मारा था,

भवर सिंह- मैं सच जानना चाहता हु, वह क्या हुआ था अगर झूट बोलै तो ऐसी मोत दूंगा की तुम्हारी आने वाली पीढ़िया भी याद करके डरेंगी,

सैनिक- महाराज हमने जो भी बताया था सच बताया था, हमने दोनों के शरीर अपनी तलवारो से चलनी क्र दिए थे, और वो महारानी तो वही गिर पड़ी थी बस राजकुमार के थोड़ी जान थी, फिर हमे चीता उन पैर छोड़ दिया, और चीता ने उन्हें खा लिया,

काम्य- अब भी मौका ह तुम्हारे पास सच बोलने का, क्योकि वो देव आज तुम सबके सामने आ चुक्का ह जिसे तुम लोग मारा हुआ बता रहे हो, अगर चाहते हो तुम्हारा परिवार जिन्दा रहे तो सच बता दो,

उन सेनिको में से एक बहुत दर गया और अपने हाथ जोड़ क्र भवर सिंह के समाने लेट गया,

सैनिक- महाराज हमे माफ़ कर दो, हमने एक बात झूट बोली

राजगुरु- कोनसी बात

सैनिक- हमने चीता को उन्हें कहते नहीं देखा, बल्कि जब चीता ने उन पैर छलांग लगाई तो राजकुमार ने अपने शरीर में से तलवार निकल क्र उस चीता के पेट में घुसा दी, और तीनो उस झरने से निचे गिर गए, हमने उसकेबाद भी तीनो क लाशो को ढूढ़ने की कोशिश किट hi लेकिन वो झरना इतना घेरा ह की उस तक पहुंचना भी संभव नहीं था, तो कोइजिन्दा कैसे बचता, और वो तो वैसे भी मर hi चुके थे, उनके बचने की कोई उम्मीद नहीं थी तो हमने उन्हें मारा मान लिया,

भवर सिंह ने गुस्से में अपने दन्त भींच लिए,

भवर सिंह- इन्हे ले जाओ मेरी नजरो के सामने से और जेल में डलवा दो, इनका फैसला मैं बाद में करूँगा,

दो सैनिक आकर उन सभी को लो गए,

काम्य- ये सोचने वाली बात ह की इतनी उचाई से गिरने के बाद और तलवार के इतने वॉर के बाद बच कैसे गया और क्या ये hi बचा ह या इसकी माँ भी,

भवर सिंह- राजगुरु उस झरने के पास खोज की जाये, सब जगह ढूंढा जाये, और पता करो ये बचे कैसे, और इतने दिन थे कहा,

राजगुरु- सबसे पहले तो देव को मरने का आदेश वापस लीजिये और सबको खबर भिजवाइए की आप देव से मिलना चाहते हैं क्योकि आपको पता चल गया ह की देवदूत बेकसूर ह, उसने कोई गुनाह नहीं किया ह, ये सब प्रताप सिंह की साजिश थी,

भवर सिंह- ठीक ह ऐसा hi किया जाये, उसे किसी भी तरह यहाँ लाया जाये, उसकी ताकत चाहिए मुझे, उसके अंदर वो ताकत कैसे आई, मुझे वो ताकत चाहिए,

वही एक कमरे में अक्षरा और रीवा ख़ुशी से नाच रही थी, देव जिन्दा ह देव जिन्दा ह,

अमिता- सिर्फ जिन्दा hi नहीं ह, ऐसा लगता ह जैसे उसके अंदर किसी और की आत्मा समां गई हो, देखा नहीं उसने कैसे मारा उन लोगो को,

सोमिया- है यार यकीन hi नहीं हो रहा, और वो कब से पेड पैर बैठा सब कुछ देख रहा था, वो पहले क्यों नहीं आया युद्ध के बिच में,

अक्षरा- वो क्यों आता, अब उसका रिश्ता hi क्या ह इस राजमहल से, उसे तो यहाँ से निकल दिया गया था, फिर वो क्यों बचने आता,

अमिता- फिर भी वो आया

रीवा- माँ के दूध पैर जो बात आ गई थी, और ये सब जानते हैं की उसके लिए माँ क्यात hi और माँ के लिए वो क्यात है,

अक्षरा- क्या निहारिका माँ भी जिन्दा होंगी,

रीवा- मैं नहीं जानती,

अमिता- क्या उन्हें वापस बुलाया जायेगा,

अक्षरा- मैंने सबकी आँखों में दर देखा था, आज उस इंसान से दर देखा था जिसकी किसी ने इज्जत तक नहीं की थी, और मुझे वो दर अच्छा लगा, हाहाहाहा मुझे वो दर अच्छा लगा, देव तुम आ जाओ,

सोमिया- ऐसे याद कर रही हो जैसे वो इसका भाई न हो कोई प्रेमी हो,

अक्षरा- उसके जैसा प्रेमी इस संसार में कोई हो hi नहीं सकता, ये मेरा दुर्भाग्य ह की मैं उसकी बहन हु, वर्ण मैं कबका उसे लेकर भाग जाती यहाँ से,

अक्षरा की बात से तीनो के मुँह खुले रह गए,

सोमिया- तू पागल हो गई ह क्या, क्या बकवास कर रही ह,

अक्षरा- तुम सबने हमेशा उसे तकलीफ दी ह, कभी उसकी तकलीफ को समझा नहीं ह, मैं उसे दर्द तकलीफ और अपमान झेलते देखा ह, फिर भी उसके चेरे पैर कोई नफरत नहीं देखि थी, उसके जैसा सच्चा इंसान बार बार पैदा नहीं होते, ऐसे लड़के से किसी को प्रेम न हो ऐसा हो hi नहीं सकता, तुम सब उससे नफरत करने और उसका अपमान करने में hi रह गए, अगर उसके अंदर किआ छै देखते तो मुझे पागल नहीं बोलते,

अमिता- वो हमारा भाई ह,

अक्षरा- है मैंने कब कहा उसके साथ सच में भाग जाउंगी, अगर भाई न होता तो सोचती,

अमिता- तू सच में पागल ह,

चारो बहन हसने लगी, आज बहुत दिन बाद उनके चेरे पैर हसी आई थी और वो भी सच्ची हसी,

उधर देव निहारिका के पास वापस आ गया था,

देव- माँ उस प्रताप सिंह को ऐसा दर्द देकर आया हु की वो खून के आंसू रो रहा होगा,

निहारिका- सच बीटा

देव- है माँ, अब जल्दी hi महल में चलने का समय आने वाला ह, कजुद भवर सिंह हमे लेकर जायेगा,

निहारिका- शाबाश बीटा, वही उसी महल में भवर सिंह और उसके अपनों को सजा दी जाएगी,

देव- है माँ सबको सजा मिलेगी, ऐसी सजा मिलेगी की वो उसे न किसी को बता पाएंगे न hi रोक पाएंगे, भवर सिंह तड़पेगा चीखे चिलायेगा लेकिन रोक नहीं पायेगा,


निहारिका देव से लिपट गई, निहारिका की नंगी चूचिया देव की नंगी छाती में डाब गई थी, और देव का लुंड निहारिका की जांघो के बिच में चुप सा गया था,
 
अपडेट-19



प्रताप सिंह खून के आंसू रो रहा था और रेणुका वो बदहवास सी पड़ी थी, और प्रताप सिंह की बाकि पत्निया भी रो रो क्र पागल हुई जा रही थी, उनमे से एक थी िन्दु जिसका बीटा था इन्दर जिसकी लाश को गॉड में लेकर वो रो रही थी,

अब रेणुका और िन्दु को कोण बताये की जिससे वो उछाल उछाल क्र चुद रही थी उसी ने ये सब किया ह, रेवती को भगा ले गया और इस महल के दो चिराग बुझा दिए,

रेणुका को किसी बेटे के मरने का दुःख नहीं था उसके दिमाग में बस वो लड़का घूम रहा था जिससे चुद क्र वो खुद को सम्पूर्ण समझ रही थी, उसे बेटी के गायब होने का भी उतना दुःख नहीं था, रेणुका की समझ में नहीं आ रहा था वो लड़का गया तो गया कहा, कही किसी दूसरी रानी ने तो उसे गायब नहीं करवा दिया, उसके दिमाग में बस देव hi था जिसका नाम तक वो नहीं जानती थी,

उधर प्रताप सिंह के दो बेटे मर चुके थे तीसरा उस हालत में था जो कभी भी मर सकता था, और संभु तो दर की वजह से पीला पद चुक्का था, उसने दो बार मोत का तांडव देखा था, एक तो जब देव आया और उसके तीनो भाइयो की फाड़ दी और उसके बाद जब वो राक्षश आया, उस राक्षश ने तो संभु के अंदर इतना दर पैदा कर दिया की उसे बुखार चढ़ गया जो उतर hi नहीं रहा था, प्रताप सिंह के 4 बेटे प्रताप सिंह के सामने खड़े थे, पांचवा बीटा हमेशा युद्ध से दूर रहता, जो रेणुका का बीटा था, रेणुका हमेशा उसे दूर रखती थी, बाकि सब बड़े योद्धा थे, लेकिन रेणुका का बीटा बहुत बड़ा आयाश था, उसे दो hi चीजों का शोक था एक था हमेषा कुछ नया सीखना और दूसरा लड़किया, वो दिन रात बस इसी काम में रहता था, प्रताप सिंह भी रेणुका की वजह से उसे कभी कुछ नहीं कहता था,

खैर वो बाद में आएगा फ़िलहाल इन चारो भाइयो को देख लेते हैं जो अपने भाइयो की लाशो के पास खड़े थे, उनमे सबसे बड़ा था रविंद्र

रविंद्र- पिता जी हम अपने भाइयो की कसम कहते हैं, हम उस भवर सिंह और उसके पुरे खानदान को ख़तम कर देंगे, ऐसी मोत देंगे की देखने वालो की आत्मा तक कैंप उठेगी,

प्रताप सिंह- सबसे पहले मुझे वो देवदूत चाहिए जिसने ये सब किया ह,

रविंद्र- हम लाएंगे उसे,

प्रताप सिंह- अब वो पहले जैसा नहीं ह, बहुत ताकत ह उसमे, लेकिन उसमे ये ताकत आई कहा से, इतनी जल्दी इतना बड़ा बदलाव कैसे आया उसमे, मुझे उसकी जानकरी चाहिए, पता करो उसने ऐसा क्या खाया ह जिससे वो इतना ताकतवर हो गया ह, मुझे वो ताकत चाहिए,

तभी वह बहुत से लोग आ गए, और जोर से शोर मचने लगे,- किसने मारा किसने मारा हमारे भांजो को,

ये थे वीरेंदर और इन्दर के मां जो उनके मरने की खबर सुनकर आ पहुंचे थे, वीरेंदर का मां भी एक शक्तिशाली राजा था, एक बहुत बड़ी सेना थी उसकी, जिसका नाम था शैलेन्द्र,

शैलेन्द्र- किसने किया ये सब, मैं उसे पुरे खानदान सहित मर दूंगा, मैं पूरी सेना के साथ आया हु, पहले उन्हें मरूंगा फिर अपने भांजे का अंतिम संस्कार करूँगा,

प्रताप सिंह- अब आमने सामने का युद्ध नहीं होगा, अब उन्हें उन्ही के घर के अंदर घुस क्र मरेंगे, अब खेल होगा उन सबके साथ खेल होगा, एक एक को मरूंगा,

रेणुका- उन लोगो में हमारी बेटी को गायब किया ह, अब वॉर उनकी बेटियों पैर होगा, उस भवर सिंह की सभी बेतिया मुझे यहाँ चाहिए, मैं उन्हें जिंदगी का असली पथ पढ़ाऊंगी,

शैलेन्द्र- उसका पूरा परिवार आपके पैरो में होगा,

फिर यहाँ अंतिम संस्कार की तैयारी होने लगी, वही सभी राजाओ में देव और राक्षश बस ये hi दो नाम गूंज रहे थे, देव की ताकत और राक्षश का दर,

भवर सिंह के आदमी उस झरने पैर पहुंच चुके थे, उन्होंने झरने के उप्पेर से निचे तक सब जगह देखा लेकिन ऐसा कुछ नहीं मिला जिसे कुछ अलग कहा जाये, क्योकि जिस गुफा में देव और निहारिका गिरे थे वो हजारो सालो से कभी किसी को नहीं दिखी फिर आज कैसे मिल जाती,

राजगुरु ने देव को ढूंढने के लिए भी आदमी लगाए हुए थे, देव को किसी तरह महल में वापस लाना था, कुछ दिन इसी खोज में निकल गए, लेकिन किसी को समझ नहीं आया देव गया कहा,

इधर देव फिर निकल चुक्का था सुगंधा और रेवती के पास, वह पहकहते hi रेवती देव से लिपट गई, क्योकि काफी दिनों बाद उसे कोई अपना दिखाई दिया था, पहेली बार वो अपने परिवार से दूर रही थी, लेकिन उसके चेरे पैर ख़ुशी थी,

देव- कैसा लग रहा ह यहाँ

रेवती- एक सकूं ह, एक आजादी ह, यहाँ पता चल रहा ह जीवन क्या होता ह, मैं सुगंधा के साथ लकडिया लेने भी जाती हु और पानी भी,

देव- ये तो बहुत ाचा ह,

रेवती- तुम कब लेकर चलोगे यहाँ से,

देव- अभी तो बोल रही थी मन लग रहा ह

रेवती- मन लग रहा ह लेकिन तुम्हारे बिना नहीं,

सुगंधा पास में hi कड़ी जल भून रही थी,

देव- अब समय आ चुक्का ह यहाँ से चलने का, तुम सभी के चलने का,

सुगंधा- हम नहीं जायेंगे,

देव- अब जवाब देने का समय ह सुगंधा, हमे जाना होगा, अब समय ह सचाई सामने लेन का,

सुगन्धदा- सच्चाई तो वो लाएगी सामने, उसका पता चल गया ह,

देव- कहा ह वो,

सुगंधा- बुरी हालत में ह, उसके कर्मो की सजा मिल रही ह,

देव- अब सरे राज खुलेंगे, मुझे उसकी जानकारी दो,

रेवती- ये किस बारे में बात कर रहे हो तुम दोनों, कैसे राज और कोण मिल गया,

देव- रेवती कुछ बाते ह जो तुम्हे समय आने पैर जननी होंगी, शायद तुम्हे अच्छी न लगे,

रेवती- ये तो सब जानने के बाद hi पता चलेगा की बात अच्छी लगेगी या नहीं,

देव- तैयारी करो मैं जल्दी hi अपना सन्देश भेजूंगा, जो सन्देश लेकर आएगा उससे डरना मत,

सुगंधा- तुम्हारे होते अब दर नहीं लगता,

देव ने सुगंधा को गले से लगा लिया,

देव- जीवन में आज महसूस हो रहा ह की मेरी माँ के अलावा भी कोई अपना ह,

रेवती मन में- जल्दी hi मैं सबसे खास बनूँगी तुम्हारी,

देव – अब मैं चलता हु तुम सब कुछ दिन बाद आ जाना और उसे साथ ले आना,

देव वह से निकल क्र वापस आ गया, राजय में आते hi उसे पता चल गया की सब जगह उसकी तलाश की जा रही ह, भवर सिंह उससे मिलना चाहता ह, देव ने आगे की योजना बनाई और एक गाओं के बहार एक पेड के निचे लेट गया, जिससे आने जाने वाले लोग उसे देख सके,

तभी कुछ गाओं वालो की नजर देव पैर पड़ी और वो तुरंत सेनिको के पास पहुंचे उन्हें बताने के लिए, सैनिक खबर मिलते hi उधर दौड़ पड़े और देव के सामने जाकर हाथ जोड़ क्र सर झुका कर खड़े हो गए,

सैनिक- राजकुमार आपको महाराज ने याद किया ह, उन्होंने आप पैर लगे सभी इल्जाम ख़तम क्र दिए हैं, उन्हें पता चल गया ह की ये सब प्रताप सिंह की साजिश थी,

देव- मैं अब कोई राजकुमार नहीं हु, और मेरा कोई रिश्ता नहीं ह उन सब से, चले जाओ यहाँ से और मुझे आराम करने दो,

जब सेनिको के समझने पैर भी देव नहीं मन तो सैनिक खबर लेकर भवर सिंह के पास पहुंचे और सब बता दिया,

भवर सिंह- इतना तेवर दिखा रहा ह हमे

काम्य- महाराज शांत रहिये, मैं जाउंगी उसे लेने, मैं देखती हु कैसे नहीं मंटा ह,

काम्य रथ पैर सवार हुई और अपने साथ रीवा और अक्षरा को भी ले लिया, काम्य जानती थी अक्षरा देव के लिए सबसे ज्यादा खास थी तो हो सकता ह अक्षरा को देख क्र वो शांत हो जाये,

काम्य जब वह पहुंची तो देव अब भी वही लेता था, और सैनिक उसके पास hi खड़े थे,

काम्य- देवदूत बीटा मेरा भतीजा देख तेरी बुआ तुझसे मिलने आई ह,

देव- पहले तो देवदूत तो कबका मर चुक्का ह, मेरा नाम देव ह, सिर्फ देव

काम्य- बड़ा प्यारा नाम ह देव हम सब देव hi बोलेंगे,

देव- और किस रिश्ते से यहाँ आई हो आप, आप वही हो न जिसने मुझ पैर इल्जाम लगाया था,

काम्य- वो सब गलतफहमी थी, हम उस प्रताप सिंह के बहकावे में आ गए थे, हमसे गलती हो गई, तुम्हारी पिता भी तुम्हे माफ़ी मांगना छाते हैं,

देव- हहहहह जान से मरवाने के बाद माफ़ी मांग रहे हो तुम सब

तभी अक्षरा दौड़ को देव से लिपट गई,

देव उसे गले लगाना चाहता था लेकिन उसके हाथ उठ hi नहीं रहे थे, उसी के पास कड़ी थी रीवा जिसकी आँखों में आंसू थे, वो बस एक तक देव को देखे hi जा रही थी और रोये जा रही थी,

कमाया- देख तेरी भेने तेरे लिए मरी जा रही हैं, हम सबको जब से पता चला की ंत्री गलती नहीं थी तब से हम तुम दोनों माँ बेटो को धुदनः रहे थे तुम हमे कही नहीं मिले,

देव बस मुस्कुराया, इस बार उसने अक्षरा को कास कर अपने गले से लगा लिया, अक्षरा की चूचिया देव की छाती में दबी हुई थी, और तभी रीवा पीछे से देव के गले लग गई, रीवा के गले लगते hi देव एक हल्का सा बैचैन हो गया, उसने अक्षरा की पकड़ ढीली की, अक्षरा भी अलग हुई,

अक्षरा- देव घर चल हम सब तुझे बहुत याद करते हैं,

काम्य- है बीटा चल महल में चल, तेरा पुरे सम्मान के साथ स्वागत किया जायेगा, तेरा खोया हुआ सम्मान वापस दिया जायेगा,

देव- मुझे जो चाहिए वो सब दिया जायेगा क्या,

काम्य- है सब कुछ दिया जायेगा, जो तुझे चाहिए तू सब ले सकता ह,

देव मुस्कुराया,

रीवा अभी तक कोई शब्द नहीं बोली थी,

देव- मेरा मन वह जाने का नहीं करता,

अब रीवा बोल पड़ी,

रीवा- और सजा मत दे हमे, तेरे और माँ के जाने से हम बहुत तड़पे हैं, मुझे नहीं पता बाकि सबका क्या हुआ लेकिन मैं और अक्षरा बहुत तड़पे हैं हमे और सजा मत दे,

देव ने रीवा की आँखों में देखा, रीवा के आंसू उसके दिल का हाल बयां कर रहे थे, एक पल के लिए देव का दिल पिघल सा गया, लेकिन उसके अंदर की नफरत अब उस पैर हावी थी उसने तुरंत खुद को सम्हाला,

देव- ठीक ह हम आएंगे, लेकिन जब खुद महाराज आरती का थल लेकर मेरी माँ का स्वागत करेंगे, और पूरी परजा के सामने हाथ जोड़ क्र मेरी माँ से माफ़ी मांगेंगे,

काम्य की हवा ख़राब हो गई, क्योकि भवर सिंह इस सब के लिए नहीं मानेगा,

काम्य- इससे क्या बदल जायेगा,

देव- सकूं आएगा,

देव के सब्दो में जो कठोरता थी उससे समझ आ गया की देव नहीं मानेगा,

काम्य – मैं महाराज को मानती हु,

कमाया वापस आई और जब उसने देव की शरत बताई तो भवर सिंह भड़क गया, लेकिन सबके समझने पैर वो मान गया,

काम्य ने देव को खबर भिजवा दी की महाराज मान गए हैं,

पुरे महल को सजा दिया गया, और पुरे राजय में दावत करवाई गई, सबको बता दिया गया की रानी निहारिका और देव वापस आ रहे हैं, वही भीड़ फिर से कड़ी हो गई थी, वही सब लोग खड़े थे जो दोनों माँ बेटो को नंगे राजय से बहार जाते हुए देख रहे थे और उसका आनंद उठा रहे थे, लेकिन आज सब बदल गया था आज दोनों वापस आ रहे थे तो उन्ही लोगो के रक्षक बन क्र, कुछ लोग सम्मान में खड़े थे तो कुछ ऐसे भी तो जो निहारिका को देखने के लिए उतावले थे,

भवर सिंह महल के दरवाजे पैर आ गया, और दोनों माँ बेटो का इंतजार करने लगा, सभी पलके बिछाये खड़े थे, काफी देर इंतजार करने के बाद भी कोई नजर नहीं आया तो भवर सिंह गुस्से में पागल होने लगा, तभी दूर से देव आता हुआ नजर आया, लेकिन वो अकेला था, जब वो नजदीक आया

काम्य- निहारिका नहीं आई बीटा

देव- जब वो इस महल में आई थी तो निहारिका थी, जब उन्हें इस महल से अपमानित करके निकला गया तब वो बस एक जिन्दा लाश थी, लेकिन अब वो एक शेरनी हैं, पुरे संसार की रानी हैं, और संसार की रानी को जैसे आना चाहिए वैसे hi आएँगी,

तभी चीता के दहाड़ने की आवाज गूंज गई, और आवाज भी इतनी तेज थी की वह खड़े सभी दर से कैंप उठे, और फिर दूर से एक बहुत बड़ा चीता चला आ रहा था और उसके सर पैर हाथ रख क्र चली आ रही थी निहारिका,






निहारिका की सुंदरता पैर जो निखार आया था उससे सभी की आँखे चकाचोंध हो रही थी, जॉब hi निहारिका को देखता तो बस एक hi ख्याल आता इतना सूंदर इतना रूपवान कोई कैसे हो सकता ह, अगर अमावश की रात की कालिख भी निहारिका पैर पड़े तो पूर्णिमा के चाँद की चांदनी बन जाये, ऐसा रूप था निहारिका का,

जिस समाज के मर्द ने निहारिका को नंगा देखा था और उसका आनंद उठाया था आज उनकी नजरे उप्पेर नहीं हो प् रही थी, उन्हें डार्ट है की निहारिका की सुंदरता उन्हें अँधा न क्र दे, वही भवर सिंह ने जब निहारिका को देखा तो उसका मुँह खुला रह गया, आँखे चुंधिया गई, और अमरावती सौमित्र और काम्य के अंदर से धुआँ निकल रहा था,

इस सब में सबसे खास थी निहारिका की चल और उस चीता के साथ चले आना, जिसे देख क्र लग रहा था कोई बाघिन अपने बाघ के साथ चली आ रही ह, उसकी चल भी किसी बाघिन से काम नहीं थी,

निहारिका जब सबके नजदीक आई तो भवर सिंह के हाथ में आरती की थाली थी, निहारिका को देख क्र वो हाथ हिलना तक भूल गया, निहारिका उसके सामने पहुंची लेकिन उसने भवर सिंह को देखा तक नहीं, उसने बस देव को देखा,

देव- माँ आइये

निहारिका ने बिना आरती करवाए अपना कदम आगे बढ़ाया और एक बार पलट क्र पूरी परजा को देखा जैसे कुछ कहना चाहती हो, निहारिका तो कुछ नहीं बोली लेकिन चीता ने एक जोर दर दहाड़ मरी जैसे वो निहारिका की तरफ से जवाब दे रहा हो, की मैं लोट आई हु, और इस बार कोई कमजोर या नाजुक निहारिका नहीं ह एक शेरनी वापस आई ह, चीता की आवाज से सब कैंप उठे और दर क्र पीछे हो गए, भवर सिंह के हाथ से थाली गिर गई, वो जैसे होश में आया हो,

भवर सिंह- ये चीता कहा चला आ रहा ह,

देव- ये माँ के साथ रहेगा हर कदम पैर,

भवर सिंह- ये कैसे हो सकता ह, एक जंगली जानवर महल के अंदर कैसे आ सकता ह,

निहारिका- इसका नाम दूत ह और ये मेरा बीटा ह और जहा मैं रहूंगी वह मेरे दोनों बेटे रहेंगे, देव और दूत मेरे दोनों बेटे,

निहारिका की आवाज में ऐसा रुआब था की सभी की आवाज गले में hi रुक गई, और निहारिका मुँह फेर क्र आगे बढ़ गई साथ में चीता भी,

निहारिका को जाते देख सभी अचंभित से खड़े थे, बस देव मुस्कुरा रहा था,

वही भवर सिंह के अंदर निहारिका को देख क्र काम वासना जग उठी थी, जो देव के पैदा होने से पहले hi ख़तम हो चुकी थी आज वो भावनाये फिर से उमड़ रही थी, वही भवनए जिसके लिए भवर सिंह ने जबरदस्ती निहारिका से शादी किट hi, उसे मजबूर करके, भवर सिंह की आँखों में तैरती हु वासना को देव ने पढ़ लिया था,

देव- माँ यहाँ आ तो गई ह, लेकिन उनके कमरे में बिना उनकी मर्जी के जाने की आज्ञा नहीं ह, इस राजय के राजा को भी इसकी आज्ञा नहीं ह, और उनके कमरे का आस पास कोई सैनिक नहीं होगा उनकी रक्षा दूत करेगा, और वो जनता ह कोण कितना खतरनाक ह,

देव वह से निहारिका के पीछे चला गया, बाकि सब वही खड़े देखते रह गए,

पुरे राजय में निहारिका और देव की hi चर्चा थी, और वह लगे प्रताप सिंह के जासूस भी ये खबर लेकर प्रताप सिंह की तरफ दौड़ पड़े,

भवर सिंह अपने कमरे में इधर उधर टहल रहा था, उस कमरे में अमरावती सौमित्र और काम्य भी बैठी हुई थी,

भवर सिंह- ये कैसे हो सकता ह, वो दोनों जिन्दा हैं, और जिस चीता को उन्हें खाने के लिए भेजा था, वो खूंखार जानवर आज उसका पालतू बनकर वापस आया ह, कोई उस जानवर को पालतू कैसे बना सकता ह, और ये देव इसके अंदर भी इतनी ताकत कैसे आई, एक डरपोक सा लड़का इतना ताकतवर कैसे हो सकता ह, वो भी कुछ hi महीनो में, और तुम सबने उस निहारिका को देखा, ऐसा लगा जैसे सवर्ग से कोई अप्सरा उतर आई हो, वो पहले से hi इतनी सूंदर थी अब तो ऐसा लगता ह संसार की साडी सुंदरता उसी में समां गई ह,

सौमित्र- और वो देव भी काम कभुसुरत होकर नहीं आया ह, संसार का सबसे सूंदर मर्द लगता ह,

काम्य- लेकिन ये सब हुआ कैसे,

भवर सिंह- कुछ भी करो कैसे भी करो लेकिन मुझे ये राज जानना ह, तुम सब क्या तरीका अपनाते हो तुम्हारी मर्जी लेकिन मुझे ये ताकत और रूप चाहिए,

तीनो औरते सोच में दुब गई, क्योकि उनके दिमाग में भी निहारिका की सुंदरता घूम रही थी, उन्हें भी वो राज जानना था, अपने लिए और अपने बेटो के लिए,

वही तीनो के बेटो के दिमाग में बस निहारिका घूम रही थी,

सूरज- यार क्या कमल की होकर आई ह ये निहारिका, कसम से आग लगा दी इसने तो,

अभिजीत- उसे देख क्र मेरा तो कदो में hi निकल गया था, मुझसे तो बर्दास्त hi नहीं हुआ, कोई इतना खूबसूरत किए हो सकता ह,

सूरज- ज्वाला तुझे कुछ नहीं हुआ,

ज्वाला- मेरा दिमाग बस प्रताप सिंह उस राक्षश और इस देव के बारे में hi सोच रहा था लेकिन जब से उस निहारिका को देखा ह ऐसा लगता ह मेरे दिमाग में बस गई ह हैट hi नहीं रही वह से, जैसे उसने कोई जादू सा कर दिया हो,

सूरज- सही बोल रहा ह, उसे देखने से पहले मेरे दिमाग में भी ये सब hi चल रहा था लेकिन अब कुछ और सोचने का मन hi नहीं कर रहा,

अभिजीत- मुझे वो चाहिए यार,

सूरज- मुझे भी,

ज्वाला- लेकिन अब उसके साथ देव ह और लगता ह काफी ताकतवर होकर आया ह, और वो चीता देखा था न कितना खूंखार था,

सूरज- वो चीता तो पालतू लग रहा ह उसे तो सम्हाल लेंगे, वो हमारा कुछ नहीं बिगड़ सकता, लेकिन देव का कुछ करना होगा, ताकत तो सच में बहुत लग रही ह,

वही चारो भेने दौड़ती हुई निहारिका के कमरे के सामने पहुंची जॉव ो चीता बैठा हुआ था, उसे देख क्र चारो दर गई, लेकिन चीता ने अपना मुँह घुमा लिया जैसे जाने का रास्ता दे रहा हो, तभी वह देव आ गया,

देव- ये जनता ह किसे रास्ता देना ह किसे नहीं, ये ऐसा जीव ह जो इंसान के अंदर के भाव को पढ़ लेता ह, अगर किसी के मन में गलत भावना ह तो ये पढ़ लेगा और उसे अंदर जाने hi नहीं देगा, इस समय इसने तुम सबको रास्ता दे दिया ह,

देव आगे बढ़ा और अंदर चला गया, चारो भेने चीता से डर्टी हुई अंदर आ गई, जहा निहारिका खिड़की के पास कड़ी बहार झांक रही थी,

रीवा दौड़ क्र अपनी माँ से लिपट गई,

रीवा- माँ आप लोट आई माँ, मैं बिलकुल अकेली हो गई थी माँ,

निहारिका- अच्छा लेकिन तेरे पास तो तेरे सब अपने थे, फिर तू अकेली कैसे हो गई, हम तेरे अपने थे hi कब जो हमारे बिना तू अकेली हो गई थी,

रीवा की आँखों में आंसू आ गए थे, उसने अपना सर निचे कर लिया,

अक्षरा- आप दोनों के जाने के बाद hi तो अहसास हुआ ह की कोण अपना ह कोण पराया,

अमिता- हम सबने आपका कभी सम्मान नहीं किया लेकिन आपके जाने के बाद अहसास हुआ की हम कितने गलत थे, इस महल में कितना कुछ गलत हो रहा था, आप दोनों को बस सजा hi दी जा रही थी,

सोमिया- वो भी अहसास तब हुआ जब हम पैर बीती, बस ऐसे hi हमारी शादी किसी भी अनजान आदमी से करवाई जा रही थी, फिर रीवा और अक्षरा की शादी उस प्रताप सिंह से करवाई जा रही थी, जो इस सब का जिम्मेदार था,

रीवा- मुझे माफ़ कर दो माँ, मैं कभी आपको और देव को वो सम्मान नहीं दे पाई, लेकिन अब मुझे समझ आ गया ह की इस संसार में बस आप दोनों hi सही हो,

अमिता- आप दोनों पैर ऐसे नियम तोड़ने का इल्जाम लगाया गया जिसे महल का हर इंसान रोज तोड़ता ह, इस महल में कितनी गन्दगी ह ये तो हमे अब समझ आई ह, और हम सब भी धीरे धीरे उसी गन्दगी में घुसते चले जा रहे थे,

निहारिका ने चारो को अपने गले से लगा लिया, निहारिका की आँखों में ख़ुशी थी लेकिन ऐसा कुछ नहीं था जिसे देख क्र कहा जा सके की एक माँ अपनी बेटी को देख क्र खुश ह, या कोई ममता के भाव आ रहे हैं,

निहारिका- अब सब बदल जायेगा,

वही प्रताप सिंह अपने राज सिंघासन पैर बेजान सा पड़ा हुआ था, क्योकि इस दुनिया में उसे अपने बेटो से प्यारा कुछ नहीं था, उसके पुरे राजय में मातम था, तभी एक सैनिक खबर लेकर आया, जिसे सुनकर प्रताप सिंह की आँखों में खून उतर आया था, खबर ये थी की देव और निहारिका महल में वापस आ गए हैं, और निहारिका और भी सूंदर होकर आई, सैनिक ने निहारिका की सुंदरता की सुंदरता का बहुत hi अच्छे से गुणगान किया, जिससे प्रताप सिंह और बोखला रहा था,

प्रताप सिंह- मेरे परिवार को बर्बाद करके वो खुशिया मन रहे हैं, उन सबकी जिंदगी को ऐसा बर्बाद करूँगा की वो सब खून के आंसू रोयेंगे, अब वो प्रताप सिंह का असली रूप देखेंगे,

इधर महल में रीवा बस निहारिका को बहो में भरे हुए बैठी रही,

अमिता- छोटी माँ मैंने तो सुना था आप दोनों को मरवा दिया ह, आप बचे कैसे,

इस सवाल पैर सब निहारिका का मुँह देखने लगे,

निहारिका- हम नहीं जानते, क्या हुआ कैसे हुआ लेकिन जब होश आया तो हम ठीक थे,

रीवा- आपको मरवाने में पुरे परिवार का हाथ था,

सोमिया- रीवा मैंने कहा था दीवारों के भी कान होते हैं,

अक्षरा- अब किसी के भी कान हो मैं नहीं डरने वाली, मैं खुल क्र बोल सकती हु की इन्हे मरवाने के लिए बाउट बड़ी साजिश की गई थी और मेरी माँ उसमे शामिल थी,

निहारिका- तुम लोग ये सब मत सोचो, तुम्हारी उम्र ये सोचने किन hi ह, इस उम्र में अपनी आने वाली जिंदगी के सपने देखो,

सोमिया- क्या सपने छोटी माँ, इस महल में दो बार शादिया होने वाली थी दोनों बार टूट गई, और आप तो जानती हैं जब राजकुमारियों की शादी टूट जाती ह तो उन्हें अपशगुन समझा जाता ह, और उनकी फिर शादिया नहीं होती,

निहारिका- तुम लोग बस शादी के hi सपने देखती हो, क्या किसी प्रेमी के सपने नहीं देखती, दुनिया में शादी के अलावा भी कुछ ह,

अक्षरा- प्रेम क्या कभी किसी राजकुमारी को उसका प्रेम मिला ह, रजुमारिया तो हमेषा एक सामान की तरह इधर से उधर बेचीं जाती हैं,

निहारिका- अब ऐसा नहीं होगा,

अमिता- हमारे पिता हमे जान से मार देंगे अगर उन्होंने प्रेम का नाम भी सुना तो

निहारिका- हहहहह जिस आदमी ने प्रेम में दुनिया की साडी सीमाएं लाँघ दी हो वो क्या कुछ करेगा, उस इंसान ने जो किया ह वो तो शायद कोई सोच भी नहीं सकता, लेकिन अब वही होगा जो उसने किया था, इस महल में भवर सिंह के किये कर्मो के हिसाब से hi सब होगा,

सभी लड़किया- हम कुछ समझे नहीं,

निहारिका- समय आने पैर समझ जाओगी, लेकिन अब तुम्हारी नै जिंदगी शुरू होगी, खुशियों भरी जिंदगी,

चारो लड़किया ख़ुशी से झूम उठी,


इधर देव अपने कमरे में घूम रहा था, उसके दिमाग में आगे क्या करना ह सोच रहा था तभी उसके कमरे में काम्य आ गई और जैसी hi वो अंदर आई वो एक दम ठिठक गई, क्योकि उसके सामने देव बिलकुल नंगा खड़ा था और उसका गठीला शरीर और सबसे खास उसका खड़ा हुआ लम्बा मोटा लुंड, जिसे देख क्र काम्य की आँखे फटी रह गई, उसकी सांसे थम सी गई, काम्य ने जब उसे पहले नंगा देखा था तब लुंड मुरझाया हुआ था लेकिन अब वो पुरे सवाब पैर था और पहले से भी बड़ा दिख रहा था,
 
अपडेट-20







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लुंड को देख क्र काया कुछ पालो के लिए वही जैम सी गई, देव ने काम्य को देखा और उसकी तरफ आ गया, देव को आता देख कमाया एक दम शर्मा गई, उसने अपनी गार्डन घुमा ली,





काम्य- देव तुम नंगे हो, तुम्हे शर्म नहीं आ रही,

देव- अब नहीं आती, पूरी दुनिया मुझे नंगा देख चुकी ह, अब फरक नहीं पड़ता, न इज्जत से न hi अपमान से,

काम्य- लेकिन मुझे पद रहा ह, मैं तुम्हारी बुआ हु,

देव- हमे नंगा करके राजय से बहार निकलने का आदेश भी तो आपका hi दिया हुआ था,

देव की बात से काम्य झिझक गई,

काम्य- वो मेरी गलती थी, मुझे गलतफहमी हो गई थी,

देव चलता हुआ काम्य के पास आया, काम्य के शरीर में सिरहन सी हो रही थी, वो अपनी नजर बचा रही थी, लेकिन फिर भी उसकी नजरे देव के शरीर और उसके लुंड पैर जा रही थी,

देव- तो बताइये कैसे आना हुआ,

काम्य- तुम पहले ये कपडे पहन लो,

देव ने ज्यादा न खींचते हुए एक कपडा अपने कमर के निचे बांध लिया,

देव- अब बताइये

काम्य- मैं बस तुम्हारा हाल पूछने आई थी, इतने समय बाद महल में आये हो, खा रहे इतना समय क्या हुआ उस दौरान, बहुत बुरे हालत देखे होंगे न, बस वही दुःख बाटने आई हु तुम्हारे साथ,

देव- बुआ जो बीत गया उसे क्या सुनना, और उप्पेर वाला जिसे बचता ह उसका कोई कुछ नहीं बिगड़ सकता,

काम्य समझ गई की देव अब बहुत बदल चुक्का ह इतनी आसानी से उसे काबू में नहीं किया जा सकता,

काम्य- देखो जो पहले हुआ उसके लिए अपने दिल में कोई गुस्सा नाराजगी मत रखना, तुम इस परिवार का हिस्सा हो, और मैं अपनी गलती का सुधर कर रही हु, इसलिए तुम्हे जॉब hi चाहिए मुझसे बोलना, किसी भी चीज की जरुरत हो मुझे बताना,

देव- मेरी जरुरत पूरा होने में खाई फिर से मुझ पैर बलात्कार का इल्जाम न लगवा देना,

काम्य – अब ऐसा कुछ नहीं होगा,

देव ने काम्य को बलात्कार का नाम लेकर बता दिया की उसकी जरुरत क्या ह,

काम्य- अच्छा मैं चलती हु, फिर आउंगी.

देव- सोच समझ क्र आना बुआ मुझे अब ऐसे hi रहने की आदत हो गई ह, और बार बार कपडे पहनना मुझे अच्छा नहीं लगता,

इतना बोल क्र देव ने कमर पैर बंधा हुआ कपडा खोल क्र एक तरफ रख दिया और कहड़ा हो गया, काम्य की नजर एक बार फिर देव के लुंड पैर पड़ी, उसकी आँखे बड़ी हो गई थी, लेकिन काम्य ने बस मुस्कुराया और सर निचे करके बहार चली गई,

उसे जाते हुए देख देव मुस्कुरा रहा था, देव की नजर काम्य को गांड पैर hi थी, और ये नजर काम्य ने भी महसूस की थी, कमरे से बहार आते hi काम्य ने एक घेरि साँस बहरी जैसे कब से खुद की साँस रोक क्र वह कड़ी थी,

काम्य खुद से hi- इसमें तो बड़ी आग भर गई ह, कुछ तो बहुत बड़ा हुआ ह जिससे इसका इतना बड़ा हो गया, ोूहः मैं भी क्या सोच रही हु, मुझे इसकी ताकत का पता करना होगा वो कैसे आई, वैसे कमल की ताकत ह और शरीर और भी कमल का हो गया ह और इसका लुंड वो तो एक अजूबा hi ह, क्या जितना बड़ा ह समय भी उतना hi अधिक लेता होगा, जरूर लेता होगा लुंड भी बड़ा और शरीर में ताकत भी ह,

काम्य देव के कमरे के बहार कड़ी ये hi सोच रही थी की तभी वह अक्षरा आ गई और देव के कमरे में जाने लगी, अक्षरा को देव के कमरे में जाते देख काम्य घबरा गई, उसे पता था देव अंदर नंगा ह,

काम्य- अक्षरा वह कहा जा रही ह,

अक्षरा- देव से मिलने क्यों क्या हुआ, क्या अब मैं उससे मिल भी नहीं सकती,

काम्य- अरे ऐसी बात नहीं ह, ऐसे सीधे किसी के कमरे में घुसना अच्छी बात नहीं ह, क्या पता वो किस हालत में हो,

अक्षरा- किस हालत में होगा, आराम कर रहा होगा और क्या, बहेनो के लिए उठ जायेगा,

काम्य- तू इस समय वह नहीं जाएगी चल मेरे साथ,

अक्षरा- लेकिन क्यों नहीं जाउंगी,

अब काम्य कैसे बताये की देव अपने कमरे में नंगा ह, और उसे नंगा देखना मतलब खुद पैर से काबू खो देना,

काम्य देव को मन कर रही थी तभी देव बहार आ गया,

देव- क्या हुआ बुआ क्यों रोक रही हो

काम्य ने घबरा क्र देव को देखा तो पाया की वो पुरे कपड़ो में खड़ा ह, काम्य ने रहत की साँस ली,

काम्य- कुछ नहीं बस ऐसे hi, ठीक ह तुम मिल लो देव से,

काम्य तेज कदमो से वह से चली गई, और अक्षरा देव के कमरे में आ गई, और आते hi सीधे उससे लिपट गई,

अक्षरा- अह्ह्ह्हह्ह मैं बहुत खुश हु तुम वापस आ गए, अब जाकर मुझे यहाँ कोई अपना सा लगा, तुम्हारे जाने के बाद ऐसा लगा जैसे पूरी दुनिया hi रुक हो गई ह,

देव- दुनिया कभी किसी के लिए नहीं रूकती,

अक्षरा- हमारी तो रुक गई थी,

देव ने अक्षरा को गले से लगाए रखा अपने दोनों हाथ उसकी कमर पैर रखे हुए थे और उसे खुद से चिपकाया हुआ था, अक्षरा भी उससे एक दम चिपकी हुई थी, और दोनों एक दूसरे की आँखों में आँखे दाल क्र बात कर रहे थे,

अक्षरा- तुम इतना कैसे बदल गए, तुमने तो सबको हैरत में दाल दिया, इतनी ताकत ऐसी सुंदरता, और देखो ये शरीर पहले से कितना मजबूत लग रहा ह, और तुम्हारा आत्मविस्वास, सब कुछ पहले से अलग ह,

देव- तुम्हे पसंद आया न

अक्षरा- बहुत पसंद आया,

देव- बस तो और क्या चाहिए,

अक्षरा की जंघे देव की जांघो से चिपकी हुई थी जिससे वह गर्मी का अहसास होने लगा था, और देव का मोटा लुंड जो अभी शांत था फिर भी अक्षरा के पेट के निचे उसे महसूस हो रहा था, लेकिन फ़िलहाल अक्षरा का धयान वह नहीं था,

अक्षरा- देव तुम थे कहा इतने दिन, क्या तुम्हे हमारी याद नहीं आई थी,

देव- सब यादे उन तकलीफो के निचे डाब गई थी, बस कुछ याद था तो वो अपमान,

अक्षरा देव के गले लग गई और अपना मुँह उसके सीने में दबा लिया,

अक्षरा- भूल जाओ वो सब, उन बुरी यादो को भूल जाओ, और आगे के जीवन के बारे में सोचो,

देव- वही सोच रहा हु,

देव ने अक्षरा के गलो को चुम लिया, गाल को चूमने पैर अक्षरा ने एक बार देव को देखा और फिर उसने भी देव के गलो को चुम लिया, इतने में hi देव के लुंड ने हलकी सी हलचल की, और उस हलचल को अक्षरा ने भी महसूस किया, लेकिन उसने कोई प्रतिकिर्या नहीं दी, दोनों ऐसे hi एक दूसरे की बहो में खड़े रहे,

तभी वह अमिता आ गई और दोनों को ऐसे देख एक दम चौंक गई,

अमिता- ये क्या हो रहा ह,

अमिता के आने से देव तो बिलकुल शांत रहा लेकिन अक्षरा न जाने क्यों घबरा सी गई,

अक्षरा- कुछ नहीं कुछ नहु हम तो बस गले लग रहे थे,

अमिता ने शक्की नजरो से दोनों को देखा, अक्षरा तुरंत अलग हो गई, देव के होतो पैर हलकी सी मकान आ गई,

देव- आओ अमिता दीदी कैसी हो,

अमिता- मैं तो ठीक हु, मुझे क्या तकलीफ होने वाली ह, मैं तो बस तुम्हारे बारे में जानने आई थी, पहले से काफी बदल चुके हो, ये बदलाव अच्छा लग रहा ह,

देव- बदलाव तो आप सबमे भी दिख रहा ह,

अमिता- बदलाव तो इस पुरे महल में आ चुक्का ह,

अक्षरा- कुछ लोग कभी नहीं बदलते,

देव- जो नहीं बदलते वो ज्यादा समय तक खड़े नहीं रहते,

अमिता- तुम्हे ठीक देख क्र मन पैर जो बोझ था वो उतर गया,

देव- कैसा बोझ

अमिता- हमने अहंकार में आकर हमेशा तुम्हारा अपमान किया था, जो हमे नहीं करना चाहिए था, लेकिन हम क्या करते बचपन से हमे ऐसा hi सिखाया गया था जैसे तुम हमारे भाई हो hi नहीं, बस हमारे शत्रु हो, और हम छह क्र भी तुम्हे भाई जैसा मान hi नहीं पाए,

देव- और अब मान भी नहीं पाओगी

अमिता चौंकते हुए- मतलब

देव- मेरा मतलब ह कोई रिश्ता एक दिन में नहीं बदल जाता, बस कुछ विचार बदल सकते हैं जैसे आपके बदले हैं, लेकिन वो विचार किसी रिश्ते को नहीं बदल सकते, इसलिए सही यही रहेगा की नए रिश्ते की शुरुआत इस भाई बहन के भरी रिश्ते से शुरू न करके दोस्ती से करते हैं,

अक्षरा- है ये अच्छा ह, मेरा तो कोई दोस्त भी नहीं था आज तक

देव- मैं हु न सबका दोस्त,

अमिता ने हलके से मुस्कुरा क्र देव का हाथ पकड़ लिया,

अमिता- बहुत समझदार हो गए हो,

कुछ देर बाते करने के बाद दोनों अपने कमरे में चली गई, रीवा देव से मिलना छाती थी लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी,

रात में देव निहारिका के कमरे में पंहुचा जहा निहारिका जमीन पैर लेती हुई थी वो भी बिलकुल नंगी होकर,






देव- माँ ये क्या आप निचे क्यों लेती हैं और बिना कपड़ो के,

निहारिका- अब ये नरम बिस्टेर अच्छे नहीं लगते, उस गुफा में उन पथरो पैर लेटकर जो समय बिताया था वो सबसे अच्छा समय था मेरे लिए, उसमे एक सकूं था, जितना आराम उन पथरो पैर मिला उतना इन बिस्टरो पैर कभी नहीं मिला, और इतने समय से बिना कपड़ो के रही हु की अब ये रेशम के मुलायम कपडे भी शरीर पैर चुभ रहे हैं, मुझे ऐसे hi अच्छा लग रहा ह,

देव- सही कहा माँ, मुझे भी वह नींद नहीं आ रही थी इसलिए आपके पास आ गया,

निहारिका- तो किसने कहा था अलग कमरे में रहने के लिए, क्यों गया था उधर, मुझे अच्छा नहीं लगा तू मुझे अकेला छोड़ क्र वह चला गया,

देव- ये महल ह माँ, यहाँ हमे कुछ नियम में रहना होगा, हमे अपना काम करना ह तो थोड़ा सम्हाल क्र रहना होगा इसलिए दूसरे कमरे में गया था, और फिर चारो भेने आपके पास थी तो उन्हें भी समय देना था,

निहारिका- मुझे फरक नहीं पड़ता किसी भी नियम से, भाड़ में गए सरे नियम, तू मुझसे दूर नहीं रहेगा, और दुनिया में कुछ भी तुझसे ज्यादा जरुरी नहीं ह मेरे लिए, और है मेरे सामने ये कपडे पहन क्र मत रहा क्र मुझे पसंद नहीं ह,

देव- ठीक ह माँ जैसा आप कहे,

देव ने तुरंत अपने कपडे उतर दिए, देव का लुंड पुरे सवाब में खड़ा हुआ था,

निहारिका- ये क्यों खड़ा ह,

देव- शायद इसकी जरुरत बढ़ रही ह, और वो काम्य आई थी और अक्षरा कुछ ज्यादा hi चिपक रही थी तो शायद इसलिए उत्तेजना हो रही ह,

निहारिका के चेहरे पैर हलकी सी जलन महसूस हुई ये क्यों हुई इसका अहसास उसे भी नहीं हुआ,

निहारिका- ओहो क्या बात ह दोनों माँ बेटी पैर एक साथ नजर ह,

देव- अक्षरा भोली ह, लेकिन काम्य बहुत शातिर ह,

निहारिका- तेरे मन में अक्षरा के लिए कोई भावनाये तो नहीं आ रही,

देव- नहीं माँ कोई भावनाये नहीं ह, बस एक hi विचार आता ह

निहारिका- वो क्या

देव- जो मासूम ह उसके साथ धोखा नहीं करना चाहता,

निहारिका- मैं भी यही चाहती हु, जो हमारे साथ हुआ वो हम किसी और के साथ नहीं करेंगे, लेकिन हमारा बदला कैसे पूरा होगा,

देव- वो सब खुद हमारा बदला पूरा करवाएंगे, हमे कुछ ऐसा करना होगा जो वो खुद हमारा साथ दे,

निहारिका- उसके लिए सबका सच सामने लाना होगा, और जब भवर सिंह का सच सामने आएगा तो सब कुछ बदल जायेगा,

देव- जल्दी hi सबके सच सामने आएंगे,

निहारिका- कहा सोयेगा निचे या नरम बिस्टेर पैर,

देव- जब आपको इन बिस्टरो पैर नींद नहीं आती तो मुझे कैसे आएगी,

निहारिका- आजा तो साथ सोते हैं,

दोनों माँ बेटे जमीन पैर hi लेट गए, और काफी देर शांत लेते रहे, फिर अचानक से निहारिका ने करवट ले ली और अपनी कमर देव से चिपका दी, देव सीधा hi लेता रहा कुछ दे रेज hi लेता रहा और न जाने कब नींद आ गई, और नींद में कब दोनों एक दूसरे से चिपक गए और निहारिका की गांड देव के लुंड से चिपकी हुई थी, और देव का लुंड निहारिका की जांघो के बिच में घुसा हुआ था, दोनों ऐसे लेते हुए थे जैसे कोई पति पत्नी सकूं से सो रहे हो,

अगली सुबह जब निहारिका की आँख खुली तो उसने देव का मोटा लुंड अपनी छूट पैर महसूस किया, और देव के हाथ निहारिका की चूचियों पैर थे, निहारिका की आँखे खुली थी फिर भी उसने उठने की कोशिश नहीं की, उसे बड़ा सकूं मिल रहा था, निहारिका की छूट में हलकी हलकी सुरबुराहट होने लगी थी, उसने पिछले 18-19 साल से खुद के अरमानो को दबाया हुआ था लेकिन अब उसके अंदर की कामुकता उस पैर हावी होने लगी थी, और ये बदलाव उसमे तब से आया था जब से वो उस गुफा में बेहोशी की हालत से होश में आये थे,

तभी देव की आँखे खुली और उसने महसूस किया की उसका लुंड कहा घुसा हुआ ह, वो थोड़ा सा बैचैन हो गया, उसने धीरे से अपने हाथ खींचे तो निहारिका ने तुरंत अपनी आँखे बंद क्र ली, देव ने हलके से उठ क्र देखा की उसकी माँ सोई हुई ह या नहीं, निहारिका की आँखे बंद देख क्र उसने अपनी कमर पीछे की और लुंड को निहारिका की जांघो के बिच से बहार निकला, और जैसे hi वो सीधा हुआ और उसकी नजर अपने लुंड पैर गई तो वह उसे हल्का सा गीला पैन महसूस हुआ, लुंड पैर गीला पैन देख क्र देव थोड़ा हैरत में आ गया, फिर उसने नारिका की तरफ देखा और उठ क्र कपडे पहन क्र बहार चला गया,

उसके जाते hi निहारिका उठ क्र बैठ गई, और अपना सर अपने घुटनो पैर रख क्र बैठ गई और कुछ सोचने लगी,

देव अपने कमरे में गया और फिर नाहा धो क्र महल में घूमने चला गया, आज वो जहा से गुजर रहा था हर कोई उसके सामने सर झुका रहा था, जो सम्मान उसे कभी नहीं मिला था आज हर कोई खुद आगे बढ़ क्र दे रहा था,

देव घूम रहा था तभी सामने से सूरज और अभिजीत आ गए, उन्हें देख क्र देव के माथे पैर सलवटे पद गई, लेकिन अभिजीत सामने से मुस्कुराता हुआ देव के पास आया,

अभिजीत- कैसे हो देव, तुम्हे महल में वापस आकर बड़ी ख़ुशी हो रही होगी, वैसे भी अब तो बहुत सम्मान मिल रहा ह तुम्हे, वैसे ये सम्मान पहले भी मिलना चाहिए था तुम्हे, तुम महाराज के बेटे हो तुम तो इस सम्मान के हक़दार थे,

देव- किसी राजा का बीटा होने से सम्मान नहीं मिलता सम्मान खुद कामना पड़ता ह, राज परिवार का होने की वजह से सम्मान नहीं मिलता बस लोग दर में सर झुकाते हैं, पीछे मुड़ते hi गालिया मिलती ह उन्हें,

सूरज- हर किसी के सामने भी लोग नहीं डरते, लेकिन तुम कुछ अलग हो कोई औषधीय खा क्र आये हो क्या, बहुत ताकतवर हो गए हो, अब तो शायद सब तुमसे डरेंगे,

देव- डरेंगे वो जिन्होंने कुछ गलत किया होगा, जिसने कुछ गलत नहीं किया उसे डरने की जरुरत नहीं ह, और रही बात ताकत की तो ये ताकत औषधियों किन hi ह ये भ्रम्चार्य की ताकत ह जो तुम लोग न जाने कितनी hi मासूम लड़कियों की जिंदगी बर्बाद करके खुद की ताकत को ख़तम कर चुके हो, वर्ण उस प्रताप सिंह के बेटो में इतनी ताकत hi कहा थी जो हमे टक्कर दे सके,

सूरज- भारमचार्य एक भरम ह, जिसके जक्कर में जवानी का असली मजा तुम कभी ले नहीं पाए,

देव- हहहहह, मैंने जो खुद पैर सयम रखा था उसका परिणाम ह ये ताकत जो मुझमे ह, और वो मजा खुद मेरे पास आएगा, मुझे किसी की जिंदगी बर्बाद करने की जरुरत नहीं ह, और है अब कोई और भी किसी की जिंदगी बर्बाद नहीं कर सकेगा,

इतना बोल क्र देव आगे बढ़ गया, सूरज और अभिजीत उसे देखते रह गए,

सूरज – बहुत बोलने लगा ह, इसे मैं खुद अपने हाथो से मरूंगा,

अभिजीत- तुम पागल हो गए हो क्या इससे भिड़ने की सोच रहे हो,

सूरज- तू डरपोक ह, हमेशा डरा हुआ रहता ह,

तभी देव के पास अक्षरा और सौमित्र आ गई थी, और एते hi देव के गले लग गई, जब सूरज ने उन दोनों को देव के गले लगे देखा तो उसके पुरे शरीर में आग सी लग गाइट hi, वो बस उन तीनो को घूरे जार है था,

अभिजीत- क्या हुआ इतना गुस्सा क्यों हो रहे हो,

सूरज- देख तेरी बहन कैसे उससे लिपट रही ह,

अभिजीत ने पीछे देखा

अभिजीत- अभी तो हर कोई उसे ऐसे hi प्यार दे रहा ह और अक्षरा तो उसे पहले से hi सबस ेज्यादा प्यार करती थी,

सूरज- ये वो प्यार नहीं ह, वो उसका सागा भाई तोडना ह जिससे वो ऐसे लिपट रही ह, क्या कभी तेरे साथ ऐसे लिपटी ह, न hi ेरे साथ कभी ऐसे गले मिली, हमसे तो बहुत दूर रहती ह, हम भी तो उसके भाई हैं, और अब तो वो सौमित्र भी देख कैसे लिपट रही ह जो कभी इससे नफरत करती थी,

अभिजीत- तुम कहना क्या छाते हो,

सूरज- ये देव अब बदल चुक्का ह, कही ऐसा न हो की वो तेरी बहन को छोड़………

अभिजीत- सूरज क्या बकवास कर रहा ह,

सूरज- अपनी आँखों से hi देख ले न, कोई भाई बहन इतना चिपकते हैं क्या, देख सौमित्र की चूचिया कैसे उसकी छाती पैर रगड़ रही हैं, और अक्षरा कैसे उसके हाथ को अपनी छाती पैर दबा रही ह, उसका हाथ देख कहा रगड़ रहा ह,

अभिजीत की नजर उधर hi थी, वही देव ने अक्षरा को और सौमित्र को कास कर खुद से चिपका लिया था,

अभिजीत गुस्से में वह से चल दिया सूरज भी उसके साथ निकल गया,

वही कामय सुबह सुबह अमरावती के कमरे में पहुंची,

अमरावती- क्या बात ह आज आप यहाँ खुद चाक र आई हैं, लगता ह बहुत hi जरुरी काम होगा,

काम्य- हम सबका अब एक hi जरुरी काम ह देव और निहारिका, उन्हें अपने काबू में करना और उनसे उनका राज जानना,

अमरावती- है ये ह तो जरुरी लेकिन ये होगा कैसे, वो हम पैर यकीन कैसे करेंगे,

काम्य- तुम जानती हो एक मर्द की कमजोरी क्या होती ह,

अमरावती- वासना और खूबसूरत औरत

काम्य- तो देव इस समय वो hi मर्द ह जिसे किसी औरत की जरुरत ह, और मैं समझती हु की तुम्हे भी देव जैसा मर्द पसंद आएगा,

अमरावती चौंकती हुई काम्य को देखने लगी,

अमरावती- ये क्या बोल रही हो आप, आपको शर्म नहीं आई ऐसा बोलते हुए,

काम्य- ये सटी सावित्री होने का नाटक मत करो मेरे सामने, हमे अगर उस देव को काबू करना ह तो उसे अपने हुसैन के जाल में फ़साना hi होगा,

अमरावती- मैं तुम्हारी भाभी हु, इस राजमहल की महारानी, मैं ये सब करुँगी उसके लिए किसी दासी को भेजो, ये मेरा अपमान ह,

काम्य- अच्छा अपमान ह, और सेना पति के साथ इसी बिस्टेर पैर उछाल कूद करना उसमे बड़ा सम्मान मिला होगा,

सेना पति का नाम सुनते hi अमरावती की साँस hi रुक गई, उसका मुँह सफ़ेद पद गया,

काम्य- घबराओ नहीं मैं किसी से कुछ नहीं कहने वाली, मैं जानती हु इस उम्र में औरत की जरुरत बढ़ जाती ह और राजाओ की इतनी रनिया होती ह की वो किस किस पैर धयान दे, किसकी जरुरत पूरी करे, और इन मर्दो को वैसे hi बहार मुँह मरने की आदत पद जाती ह अपनी पत्नियों को वो सुख दे hi नहीं पते,

अमरावती अभी भी घबराई हुई थी, क्योकि काम्य को इस राज का पता चलना मतलब गले में फांसी का फंदा होना जैसा था,

अमरावती- वो वो मैं बस वो, मैं मैं बहक गई थी, मुझे माफ़ कर दो दीदी मैं बहक गई थी,

काम्य- मैं कुछ बोल तोडना रही हु, अगर कुछ कहना होता तो तभी बोल देती, मैं तो यहाँ इसलिए आई हु की इससे हमारा काम भी हो जायेगा और तुम्हारी जरुआत भी पूरी हो जाएगी,

अमरावती- वो मेरे बेटे जैसा ह, मैं उसके साथ कैसे

काम्य- वो हमारा कुछ नहीं ह, उससे हमारा कोई रिश्ता नहीं ह,

अमरावती- लेकिन मैं कैसे, ये मुझसे नहीं होगा,

काम्य- जैसी तुम्हारी मर्जी, मैं तो तुम्हे मौका देने आई थी, तुमने महाराज को धोखा दिया ह, शायद इसी तरह से महाराज की सहायता कर दो तो तुम्हारा भला हो जाये,

काम्य कड़ी हो गई,

काम्य- सोचना इस बारे में इसमें तुम्हारा भला hi ह,

कामय बहार चली गई और अमरावती को एक बहुत बड़ी शंश्य दे गई थी,

काम्य वह से सीधा सौमित्र के पास पहुंची जो अपना सिंगर करने में लगी हुई थी, काम्य की एते hi उसकी दसिया बहार चली गई,

सौमित्र- क्या बात ह आज दीदी खुद मेरे कमरे में

काम्य- काम hi कुछ ऐसा ह,

सौमित्र- खेइये क्या कर सकती हु,

काम्य- एक जिम्मेदारी देनी ह तुम्हे, और तुम hi कर सकती हो, क्योकि इस राजय में सिर्फ तुम हो जिसके अंदर वो हुनर ह जो किसी को भी अपनी उंगलियों पर नचा सके,

अपनी तारीफ सुनकर सौमित्र ख़ुशी से झूम उठी,

सौमित्र- हहहहहए आप मुझे बना रही हैं, ऐसा कुछ नहीं ह,

काम्य- नहीं मैं सच बोल रही हु,

सौमित्र- मेरी तारीफ छोड़िये आप काम बताइये बस समझिये हो गया,

काम्य- तुम्हे उस देव को अपने हुसैन के जाल में फ़साना होगा,

काम्य की बात सुनकर सौमित्र एक दम चौंक गई और आँखे फाड़ क्र काम्य को देखने लगी,

सौमित्र- ये क्या बोल रही ho,ye कैसे होगा,

काम्य- तुम चाहो तो कुछ भी कर सकती हो, और इसमें तुम्हारा भी फायदा ह,

सौमित्र- मेरा क्या फायदा ह,

काम्य- एक तो तुम महाराज की सहयता कर पाओगी जिससे महाराज तुम्हे खुश हो जायेंगे, और मैं जानती हु की तुम्हारे अंदर कितनी कामुकता ह, जिसे महाराज भी शांत नहीं कर सकते, लेकिन मैंने देखा ह वो देव तुम्हारी कामुकता को शांत क्र सकता ह, उसका वो मोटा लम्बा हथिया जो तुमने उस दिन मुरझाया हुआ देखा था, अब वो उससे भी ज्यादा बड़ा हो चुक्का ह, इतना बड़ा की कोई घोड़ी भी उसे न झेल पाए, मुझे यकीन ह तुहरे शिव और कोई और नहीं झेल सकता ह, और जब मर्द को सुख मिलता ह तभी वो अपने राज उगलता ह,

कामय की बात सुनकर सौमित्र बस एक तक काम्य को देखे जार hi थी,

सौमित्र- दीदी आप जानती हैं क्या बोल रही हैं, अपनी भाभी को किसी और मर्द के नोचे छोड़ने को बोल रही हैं, अगर किसी को पता चला तो क्या होगा,

काम्य- इस समय सबसे जरुरी ह देव की ताकत का पता लगाना, अउ राग राई राज खुल गया तो निहारिका की सुंदरता का राज भी पता चल जायेगा, जिससे तुम और भी सूंदर हो सकती हो, सोच लो इसमें कोई नुकसान नहीं ह, और ये महल हमारा ह इसमें हम क्या करते हैं कोई नहीं जान सकता, और महाराज को दूर रखने का काम मेरा ह, वो सब मैं सम्हाल लुंगी,

सौमित्र- दीदी मुझे बड़ा अजीब लग रहा ह, मैंने कभी किसी पराये मर्द के साथ रिश्ता नहीं बनाया,

काम्य- लेकिन मैं जानती हु की तुम्हारे अंदर वो इच्छा ह, और देव का लुंड तुम्हे आकर्षित कर रहा था, अब मौका ह अपनी िछाये पूरी करने का और मैंइसमे तुम्हरे साथ हु,

सौमित्र सोच में दुब गई,

काम्य- तुम आराम से सोचो, और शाम को एक बार देव के कमरे में होकर आना फिर फैसला करना, शायद उसे देख क्र तुम्हारे विचार जल्दी बन जाये,

इतना बोल क्र काम्य बहार चली गई, सौमित्र बस उसी सोच में डूबी रह गई,

देव और निहारिका जिस काम के लिए यहाँ आये थे वो तो खुद काम्य उनके लिए कर रही थी, अनजाने में hi काम्य देव की सहायता कर रही थी,

इधर तीनो भाई सूरज ज्वाला और अभिजीत एक साथ बैठे हुए थे,

ज्वाला- मुझे यहाँ क्यों बुलवाया, क्या हुआ ह

सूरज- होना क्या ह वो देव यहाँ आकर हमारी बहेनो को फसा रहा ह,

अभिजीत- है और हमारी भेने भी उसकी तरफ आकर्षित हो रही हैं,

ज्वाला- ये तुम कैसे कह सकते हो,

सूरज- हम अपनी आँखों से देख क्र आ रहे हैं,

ज्वाला- तो तुम मुझसे क्या चाहते हो,

अभिजीत- उस देव की मोत

ज्वाला- वो अभी तो संभव नहीं ह,

सूरज- मैं कुछ और सोच रहा हु,

दोनों सूरज को देखने लगे,

और जब सूरज ने बोलना शुरू किया तो दोनों के मुँह खुले रह गए, वो फटी हुई आँखों से सूरज को देख रहे थे,

ज्वाला- ची तू ऐसा कैसे सोच सकता ह,

सूरज- इसमें बुराई क्या ह,

अभिजीत- मैं तैयार हु,

ज्वाला- टब hi पागल हो गया ह, अगर महाराज को पता चला तो जानते हो क्या होगा,

सूरज- कुछ नहीं होगा

ज्वाला- मुझे लड़किया नहीं चाहिए मुझे वो निहारिका चाहिए,


सूरज- पहले अपना शिकार यहाँ से शुरू कर्नेगे उसके बाद उस निहारिका का भी शिकार करेंगे और उन दोनों माँ बेटी के साथ तीनो मिलकर उसके साथ कर्नेगे,
 




वैरी गुड मॉर्निंग डरेस्ट फ्रेंड्स 💋 💋 ❤️ 🌹 🌹 🌹 🌹 ❤️
 
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