Incest पहाडी आम (इन्सेस्ट) - Page 8 - SexBaba
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Incest पहाडी आम (इन्सेस्ट)

सोनू की चाची का गदराया बदन सूरज को भा गया था,,, इसीलिए तो घास का ढेर उठाते समय सूरज उसका हाथ पकड़ लिया था और कुछ देर के लिए दोनों एक दूसरे की आंखों में खो गए थे वैसे तो सूरज को ज्यादा अनुभव औरतों के बारे में था नहीं लेकिन सोनू की चाची की आंखों में भी वही दिख रहा था जो मुखिया की बीवी की आंखों में दिख रहा था इससे सुरज अंदाजा लगा दिया था कि सोनू की चाची का भी हाल मुखिया की बीवी की तरह ही है,,,, वैसे तो सोनू की चाची से सूरज बहुत बार मिल चुका था कई बार मुलाकात हुई थी और बातचीत भी हुई थी क्योंकि वह सोनू का दोस्त जो था उसके घर पर आना जाना अक्सर उसका लगा रहता था लेकिन सूरज ने कभी भी सोनू की चाची को गलत नजरिए से नहीं देखा था लेकिन सोनू ने ही खुद सूरज को झाड़ियां में अपनी चाची को पेशाब करते हुए दिखाया था उसकी बड़ी-बड़ी गांड उसे समय सूरज के तन बदन में आग लगागई थी,,, उस समय सूरज को औरतों के अंगों के बारे में कुछ ज्यादा ज्ञान नहीं था लेकिन फिर भी सोनू की चाची की बड़ी-बड़ी गांड उसे औरतों के बारे में सोने के लिए मजबूर कर गई थी,,,।

सोनू की चाची की गांड के दर्शन करने के बाद सूरज की मुलाकात मुखिया की बीवी के साथ हुआ था जिसने उसे एक ही बात में स्वर्ग का सुख प्रदान की थी,,, और मुखिया की बीवी के बदौलत ही औरतों के अंगों के बारे में सोचने समझने लगा था उनके तरफ आकर्षित होने लगा था और यही कारण था कि सोनू की चाची की तरफ उसका आकर्षण बढ़ता जा रहा था एक तो सोनू ने खुद अपनी ही चाची की मजबूरी बता दिया था सोनू ने खुद यह बता दिया था कि उसका मरियल सा चाचा उसकी चाची को खुश नहीं कर पाता इससे सूरत समझ गया था की मुखिया की बीवी की तरह सोनू की चाची को भी मोटा तगड़ा लंड चाहिए,,,।

आगे आगे चल रही सोनू की चाची का पिछवाड़ा देखकर सूरज का लंड खड़ा हो गया था,, और सूरज मन ही मन ठान लिया था कि मुखिया की बीवी की तरह सोनू की चाची की भी बुर में वह झंडा गाड़ के रहेगा,,,, घास के गठ्ठर को सोनू के घर पहुंचाते पहुंचाते ही दोपहर हो गई थी,,, सूरज को बहुत जोरों की भूख लगी हुई थी,,,, दोपहर हो चली थी खाने का समय भी हो रहा था उसे मालूम था कि उसकी मां खाने पर उसका इंतजार कर रही होगी,,, इसलिए वह अपने घर की ओर चल दिया,,,।

नदी पर जो कुछ भी उसने देखा था वह एक अमिट छाप की तरह उसके दिमाग पर छप गया था,,,। उसे अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था की नदी पर जो कुछ भी उसने देखा था वह उसकी मां थी उसे तो ऐसा ही लग रहा था कि जैसे स्वर्ग से कोई अप्सरा नदी में नहाने के लिए नदी में जल क्रीड़ा करने के लिए उतर आई हो,,, उसकी अदाएं उसका भोलापन उसके घने घने बाल पानी में भीगे हुए जो कभी उसकी पीठ से चिपके हुए तो कभी बालों की लट सीधा उसकी चूचियों तक पहुंच रही थी पानी में भीगी हुई बालों की लट बेहद खूबसूरत लग रही थी,,, खरबूजे की तरह गोल-गोल चुचीया एकदम कसी हुई,,, भरावधार बदन होने के बावजूद भी पूरा बदन एकदम कसा हुआ था जरा भी ढीलापन नहीं था,,, गोलाकार नितंबों को देखकर सूरज को ऐसा ही लग रहा था कि जैसे चंद्रमा आसमान को छोड़कर नदी के पानी में उतर आया हो कुल मिलाकर नदी में जो कुछ भी सूरज ने देखा था उसे स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा लग रही थी वह यकीन नहीं कर पा रहा था कि,, नदी के पानी में नहा रही हो औरत स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा नहीं बल्कि उसकी मां है,,,।

सूरज इस बात को तो अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां खूबसूरत है लेकिन इतनी ज्यादा खूबसूरत है यह पहली बार उसे एहसास हो रहा था और पल भर में ही हुआ मुखिया की बीवी की खूबसूरती से अपनी मां की खूबसूरती की तुलना करने लगा था जिसमें उसकी मां की खूबसूरती बाजी मार गई थी,,, इसीलिए तो वह अपनी मां की तरफ आकर्षित हो गया था,,, वैसे भी जब उसका झुकाव औरतों की तरफ बढ़ रहा था,, तभी उसे अपनी मां में एक औरत नजर आने लगी थी जिसकी तरफ वह धीरे-धीरे आकर्षित हो रहा था लेकिन अब वह पक्के तौर पर अपनी मां की जवानी का दीवाना बन गया था,,,,।

देखते ही देखते थोड़ी देर में हो अपने घर पर पहुंच गया जहां पर उसकी मां खाने पर उसका इंतजार कर रही थी,,,, जैसे ही वह घर में प्रवेश किया तो सामने आंगन में ही उसकी मां बेठी हुई थी और उसे देखते ही मुस्कुराते हुए बोली,,,।

अरे खाना तो खा लिया होता,,, सुबह से गांव-गांव भटक रहा है,,,।

भूख नहीं लगी थी मां,,,(अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला,,,)

अभी भी नहीं लगी है,,,

नहीं नहीं अभी तो लगी है इसीलिए तो आया हूं,,,,

तो जल्दी से हाथ मुंह धो ले,,,, मैं खाना परोस देती हूं,,,

ठीक है मां,,,(इतना कहकर वह हाथ मुंह धोने के लिए बाहर चला गया,,,, और हाथ मुंह धोते हुए अपने मन में सोचने लगा,,,,,,, नदी में नहा रही मां मे और अभी खाने पर इंतजार कर रही मां मे कितना जमीन आसमान का फर्क है,,,, इसे देखकर तो लगता ही नहीं है की नदी में यही नहा रही थी और वह भी एकदम नंगी होकर,,,, अभी तो घर में एकदम संस्कारी और मर्यादा से भरी हुई लग रही है लेकिन नदी पर अपने कपड़े उतार कर जिस तरह से नहा रही थी उसे देखने के बाद लगता ही नहीं था कि यह जमीन की कोई औरत है ऐसा ही लग रहा था कि स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा है,,,। इस समय वह अपने बदन के कीमती अंगों को कपड़ों में छुपा रखी है लेकिन उसे समय नदी पर अपने सारे कपड़े उतार कर अपने बेश कीमती अंगों को एकदम उजागर करके नहा रही थी,,,, यह सब सोच कर सूरज अपने मन में सोचने लगा कि कहीं उसकी मां का भी चरित्र मुखिया की बीवी की तरह तो नहीं फिर अपने ही मन में उठकर सवाल का खुद ही जवाब देते हुए वह बोला,,,

नहीं नहीं किसी के कपड़े उतारकर नहाने पर उसके चरित्र के बारे में कैसे जान सकते हो,, नंगी होकर नहाना तो कोई चरित्र का मापदंड नहीं है,,, मां बिल्कुल भी मुखिया की बीवी की तरह नहीं है अगर होती तो वह नदी में खुली जगह पर नहाती ना कि बड़े-बड़े पत्थरों के पीछे,,,, लेकिन फिर भी अगर मन को उसे समय उसे अवस्था में नहाते हुए कोई भी देख लेता तो उसका भी लंड खड़ा हो जाता,,,, यह सब सोते हुए उसे थोड़ी देर हो गई तो उसकी मां खुद घर के बाहर निकाल कर उसे देखने के लिए आई और उसे अभी भी हाथ पैर धोते हुए देखकर बोली,,,)

अभी तक धो नहीं पाया,,,।

(अपनी मां की आवाज सुनते ही वहां एकदम से अपने ख्यालों से बाहर आया और अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला ,,,)

बस बस हो गया,,, तुम चलो मैं आता हूं,,,,,।

ठीक है जल्दी आ,,,,(इतना कहकर वह अंदर की तरफ जाने लगी तब तक सूरज भी उसके पीछे-पीछे चलने लगा आगे आगे चल रही है अपनी मां का पिछवाड़ा देखकर वह अपने मन में कल्पना करने लगा कि अगर यह बिना कपड़े के चलेगी तो कैसी नज़र आएगी और उसकी कल्पना इतनीजबरदस्ती थी कि वह सच में सोचने लगा था कि जैसे उसकी मां सच में उसके आगे आगे बिना कपड़ों के नग्न अवस्था में चल रही है एकदम नंगी होकर और पीछे-पीछे वह चल रहा है,,, नदी पर नहाते हुए अपनी मां को पूरी तरह से नंगी दे चुका था इसलिए उसकी गांड के आकार की कल्पना करना उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं थी इसलिए वह बड़े आराम से अपनी मां की नंगी गांड की कल्पना कर रहा था और आगे आगे चल रही सुनैना उसके कल्पना के मुताबिक ही जबरदस्त लग रही थी अपनी गांड मटका मटका चल रही थी जिसे देखकर सूरज का लंड अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था,,,।

आंगन में पहुंचने के बाद सूरज सबसे पहले पालथी मार कर बैठ गया क्योंकि उस समय उसके पजामे में तंबू बना हुआ था,,, और वह नहीं चाहता था कि उसकी मां की नजर उसके पजामे पर पड़े,,,, ठीक उसके सामने उसकी मां बैठ गई थी लेकिन वह सूरज की तरह नहीं बल्कि अपने घुटनों को मोड कर बैठी थी,,,, वह खाना परोस रही थी और खाना परोसते हुए उसकी साड़ी कंधे पर से नीचे सरक गई थी जिसकी वजह से उसकी भारी भरकम भरावदार छातिया एकदम साफ नजर आ रही थी,, सूरज की नजर सीधे अपनी मां की छाती पर पहुंच गई उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों के बीच की लकीर एकदम साफ नजर आ रही थी जो की बहुत ही लंबी और गहरी थी और उसके सांस लेने की वजह से उसकी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी जो कि सूरज को एकदम साफ नजर आ रही थी सूरज एकदम पागल हुआ जा रहा था मदहोश हुआ जा रहा था लेकिन इस बात से उसकी मां पूरी तरह से अनजान थी,,,।

उसकी मां सुनना तो सहज रूप से खाना परोस रही थी वह नहीं जानती थी कि उसका बेटा उसके अंगों को प्यासी नजरों से देख रहा है ब्लाउज में से झांक रही है उसकी चूचियां कबूतर की तरह फड़फड़ा रही थी मानो कि जैसे आजादी के लिए नारा लगा रही हो,,,, अपनी मां की चूचियों को देखकर जो की ब्लाउज में कह दी सूरज को मुखिया की बीवी की चुचीया याद आ गई,,,, क्योंकि सूरजमुखी की बीवी की तरह ही अपनी मां की चूचियों को आजाद करना चाहता था उन्हें ब्लाउज के कैद से बाहर निकलना चाहता था उन्हें खुली हवा में सांस लेने देना चाहता था,,,, लेकिन वह जानता था कि ऐसा करना उसके लिए नामुमकिन है,,,,।

देखते ही देखते सुनैना अपने बेटे के लिए और खुद के लिए खाना परोस ली और खाने की थाली को अपने बेटे की तरफ आगे बढ़कर अपनी जगह से उठने लगी तो वह थोड़ा सा आगे की तरफ झुक गई जिसकी वजह से उसकी सूचना ब्लाउज में एकदम खरबूजे की तरह गोल-गोल लटक गई उसकी चूचियां इतनी भारी हुई थी कि,,, सूरज को इस बात का डर था कि कहीं चूचियों के भार से उसकी मां की ब्लाउज का बटन ना टूट जाए,,,, और सूरज अपने मन में कल्पना करने लगा कि बिना ब्लाउज पहने नंगी चूचियां लेकर अगर उसकी मां उसके लिए खाना परोसेगी तो कैसी नज़र आएगी,,, अपनी मां के बारे में सोच सोच कर उसकी हालत खराब हुए जा रही थी,,,, तभी सुनैना पानी भर लोटा लेकर आई हो इस बार साड़ी को थोड़ा घुटनों के नीचे तक उठकर बैठ गई और पानी भर लोटा बीच में रख दी,,,,,।

अरे खाना तो खा,,,(खाने का निवाला अपने मुंह में डालते हुए सुनैना बोली)

खा रहा हूं मा ,,(और इतना कहकर वह भी खाने लगा,,, खाते-खाते वह बोला,,)

रानी कहां गई दिखाई नहीं दे रही है,,,,

पका हुआ आम लेकर अपनी सहेली के वहां गई है खाते हुए,,,,,,

लगता है आज वह बहुत खुश है,,,

हां खुश क्यों नहीं होगी पका हुआ आम जो मिल गया है,,,,,,।

सही कह रही हो मा रानी को आम बहुत पसंद है,,,

रानी को ही क्यों मुझे भी बहुत पसंद है लेकिन क्या करें,,, मौसम चल जाता है लेकिन जी भर कर आम खाने को नहीं मिलता,,,,।

लेकिन मैं और रानी बगीचे में आम तोड़ कर तो लाए थे,,,।

अरे उसे बगीचे के हम तो केवल अचार बनाने को ही काम आते हैं पकाने पर भी वह ठीक तरह से पकता नहीं है,,,(खाना खाते हुए सुनैना पूरी इस बार वह अपनी साड़ी को अपने कंधे से गिरने नहीं दी थी और सूरज अपने मन में यही चाहता था कि किसी भी तरह से उसकी मां की साड़ी का पल्लू उसके कंधे से नीचे गिर जाए तो एक बार फिर से उसे बेहद खूबसूरत नजारा देखने को मिल जाए,,,, वैसे भी सूरज की तरह हर मर्दों कि यही फितरत होती है औरत को भले ही कितनी बार नंगी देखने अपने ही बिस्तर पर भोग ले लेकिन हर एक बार औरत के अंगों से उनकी नई ख्वाहिश जागने लगती है जिसमें सूरज भी बाकात नहीं था।)
 
और मुखिया के बगीचे का आम,,,(खाना खाते हुए सूरज अपनी मां से बोला)

अरे मुखिया के बगीचे का आम तो देखकर ही लगता है कि मीठा पका हुआ है देख नहीं रहा है उसकी खुशबू से सारा घर महक रहा है,,,।

हां तुम ठीक कह रही हो मा पूरा घर महक रहा है,, लेकिन तुमको भी खा लेना चाहिए था ना,,,,।

हां हां मैं तो खाऊंगी पहले खाना तो खा लु,,,।

(सूरज देख रहा था कि उसकी मां कितनी खुश नजर आ रही थी वाकई में पका हुआ आम बहुत कम ही खाने को मिलता था,,,, लेकिन अब उसे लग रहा था की मुखिया की बीवी के साथ जिस तरह का उसका रिश्ता है पूरे मौसम में उसके परिवार को जी भर कर पके हुए आम खाने को मिलेंगे,,,, थोड़ी देर में दोनों खाना खा चुके थे तो उसकी मां जल्दी से उठ कर गई और पानी में रखे हुए दो आम को लेकर आई जो कि बड़े-बड़े और एकदम पके हुए थे एक आम को वह सूरज की तरफ आगे बढ़ा दी जिसे सूरज ने थाम लिया और दूसरे आम को वह खुद ले ली और उसे गोल-गोल घुमा कर खुश होकर देखने लगी,,,, तभी सूरज बोला)

मां चाकु लाओ में आम तो काट लूं,,,,

तू एकदम बेवकूफ है भला आम को काट कर खाया जाता है,,, आम को तो देख ऐसे खाते हैं,,,(और इतना कहने के साथ ही सुनैना आम के ऊपरी हिस्से को थोड़ा सा नोच कर फेंक दी और उसे गोल-गोल घुमा कर मुंह में भरकर दबा दबा कर चूसना शुरू कर दी,,, और अपने बेटे को दिखाते हुए बोली,,,)

देख ऐसे खाया जाता है आम को,, दबा दबा कर और चुस चुस कर,,,,,

(सूरज अपनी मां को देख रहा था आम खाने के उसके तरीके को देख रहा था और उसे तरीके को देखकर उसे मुखिया की बीवी याद आ गई,,, जिसकी दोनों चूचियों को इसी तरह से दबा दबा कर उसे मुंह में लेकर चूस रहा था वाकई में इस तरह से मुखिया की बीवी के साथ उसे बहुत मजा आया था और यह ख्याल उसके मन में आते ही वह अपने मन में सोचने लगा कि उसकी मां सच कह रही है आम खाने का मजा दबा कर ही आता है और वह अपने मन में सोचने लगा कि काश इस समय उसके हाथों में उसकी मां की चूचियां होती तो वह अपनी मां की चूचियों को दबा दबा कर उसका रस पी जाता,,,,।

अपनी मां की तरह ही सूरज भी आम का लुफ्त उठाने लगा,,,, थोड़ी देर में दोनों आम खाकर तृप्त हो चुके थे,,,, सूरज अपनी मां को प्रसन्न मुद्रा में देखकर बोला,,,,।

और खाना चाहो तो और खा लो,,,

नहीं नहीं रात को खाएंगे आज रात को पूरी और तरकारी बनाऊंगी,,,

पूरी और तरकारी,,,(सूरज खुश होता हुआ बोला)

हां पूरी और तरकारी तुझे बहुत पसंद है ना,,, आम के साथ पूरी खाने में बहुत मजा आता है,,,।

चलो ठीक है,,,, लेकिन मां बाबूजी अभी तक नहीं आए हैं,,,,

कह कर तो गए थे चार-पांच दिन लग जाएंगे,,,,

अरे हां मां की याद आया तुम शाम को जल्दी खाना बना लेना कल देर हो गई थी बगीचे पर जाने में मालकिन ने कहा है कि जल्दी आना,,,,।

मतलब तुझे आज भी जाना है,,,,

कुछ दिन तक तो जाना होगा जब तक बगीचे के आम मार्केट में नहीं पहुंच जाते,,,,।

ओहहहहह ,,,,,, कोई बात नहीं लेकिन तेरी मालकिन बहुत दयालु है,,,, जो इतनी सारी सब्जी तरकारी फल और पके हुए आम दे दी ,,

सच में मां मुखिया की बीवी बहुत दयालु है वरना ईतना कुछ कोई नहीं देता,,,,।

(थोड़ी देर में दोनों हाथ मुंह धो कर खड़े हो गए थे,,,, सुनैना बोली)

अब खाना खा लिया है तो आराम कर ले रात भर जागना पड़ता होगा,,,,।

(यह सुनते ही सूरज की आंखों के सामने आम के बगीचे का झोपड़ी के अंदर का सारा दृश्य उसकी आंखों के सामने तैरने लगा रात भर नया खुद सोया था और ना ही मुखिया की बीवी सोई थी रात भर दोनों जवानी का खेल खेलते रह गए थे कितना मजा आया था दोनों को पहली बार में ही मुखिया की बीवी उसे औरत का सुख देकर मर्द बना दी थी,,, सूरज अपने मन में सोचने लगा कि,,, उसकी मां को यही लग रहा होगा की रात भर जाग कर वह आम के बगीचे की रखवाली कर रहा होगा,,, जबकि सच तो यह था कि रात भर वह पेड़ के आम की नहीं बल्कि,, मुखिया की बीवी की खूबसूरत बदन के दशहरी आम की चुसाई और उसकी चुदाई कर रहा था,,,, अपनी मां के सवाल का जवाब देते हुए सूरज बोला)

कोई दिक्कत नहीं है मां,,,, मुझे नींद नहीं आ रही है,,,,(और इतना कहकर वह जैसे ही घर के बाहर जाने वाला था कि तभी उसे कुछ याद आया और वह तुरंत घूम कर खुश होते हुए अपने कुर्ते की जेब में से₹2 निकाला और,,, अपना हाथ आगे करते हुए हथेली को खोल दिया,,,, सूरज की हथेली में₹2 का सिक्का देखकर सुनैना की आंखों की चमक बढ़ गई,,,, और वह तुरंत उस सिक्के को अपने बेटे की हथेली में से ले ली और बोली,,,)

ये पैसा कहां से लाया,,,,,?

मुखिया की बीवी ने दिए रानी ने नहीं बताई क्या,,,!

नहीं रानी नहीं तो मुझे सिर्फ आम सब्जी और तरकारी के बारे में ही बताई थी,,,,।
 
सुबह-सुबह आते समय मुखिया की बीवी ने यह पैसे भी दी थी,,, मैं तुम्हें देने के लिए ही रखा था,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनते ही सुनैना एकदम से खुश हो गई और आगे बढ़कर उसे अपने गले से लगा ली,, अपनी छाती से लगा ली,,,, सुनैना सहज थी वह खुशी से अपने बेटे को गले लगाई थी,,,, उसमें मार्तत्व झलक रहा था,,, लेकिन सूरज की हालत खराब हो चुकी थी क्योंकि उसकी मां की बड़ी-बड़ी चूचियां जिस पर कुछ देर पहले वह प्यासी नजरों से नजर बनाए बैठा था वही चूचियां सीधे-सीधे उसके सीने में चुभने लगी थी,,,,, ब्लाउज में कैद होने के बावजूद भी सुनैना की खरबूजे जैसी चूचियों का छोटा सा छुआरा भाले की नोक की तरह उसके सीने में धंस रहा था,,,,)

ओहहह सूरज मेरे बेटे तेरी जिंदगी की पहली कमाई है मैं बहुत खुश हूं,,,,(ऐसा कहते हुए सुनैना बहुत खुश हो रही थी लेकिन सूरज उत्तेजना के मारे तड़प रहा था पल भर में उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था और वह अपनी दोनों हाथों को अपनी मां की पीठ पर रख दिया था सुनैना को सूरज की उत्तेजना का आभास तक नहीं हो रहा था लेकिन जैसे ही सुनैना को अपने दोनों टांगों के बीच कुछ चुभता हुआ महसूस हुआ वह एकदम से सहम उठी,,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है लेकिन वह इतना तो समझ ही गई थी कि उसकी दोनों टांगों के बीच उगने वाली चीज क्या है इसलिए पल भर में उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी सूरज पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था वह अपनी मां की चिकनी पीठ पर अपने दोनों हाथ को रखा हुआ था उसका मन कर रहा था कि अपने दोनों हथेलियां को उसकी कमर से होता हुआ उसके नितंबों पर रख दे लेकिन ऐसा वह कर पाता इससे पहले ही सुनैना एकदम सहज होते हुए अपने बेटे से अलग हो गई और अपने चेहरे पर उत्तेजना के भाव को बिल्कुल भी ना लाते हुए एकदम सहज रूप से बोली,,,,)

मुझे बहुत खुशी है बेटा की तू कमाने लगा है,, भगवान करे तो ऐसे ही तरक्की करता रहे,,,।

ठीक है मा मैं हमेशा कोशिश करता रहूंगा और इसी तरह से तुम्हें खुश रखने की कोशिश करूंगा,,,,,(और इतना कहकर वह वहां से जाने लगा लेकिन उसके जाते-जाते सुनैना की नजर अपने बेटे के पजामे पर पड़ गई और उसके होश उड़ गए,,, क्योंकि उसके बेटे के पजामे में अच्छा खासा तंबू बना हुआ था,,,।)

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आज सुनैना अपने बेटे के अनुसार जल्दी खाना बनाने लगी थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा आज भी आम के बगीचे में रखवाली करने जाएगा,,,, सूरज ठीक समय पर अपने घर पर पहुंच गया था और जैसा कि दोपहर में उसकी मां ने सब्जी पूरी बनाने का वादा की थी सूरज को अपनी थाली में सब्जी पूरी ही मिली जिसे देखकर वह भी बहुत खुश था और साथ में पका हुआ आम पेट भर के खाने के बाद सूरज प्रसन्न होते हुए अपनी मां से बोला,,,।

तुम्हारे हाथों में तो जादू है मां,,,, सच में मजा आ गया बहुत दिनों बाद पूरी और आम खाने को मिला है,,,।

और यह सब तुम्हारी बदौलत भैया,,,,, अगर तुम आम की रखवाली करने के लिए मुखिया की बीवी के साथ ना जाते तो शायद यह सब नहीं मिलता,,,।

हां तु सच कह रही है रानी,,,, आज सच में बहुत मजा आ गया पिताजी होते तो वह भी बहुत खुश होते वैसे पिताजी का कुछ अता पता नहीं चल रहा है,,,,(सूरज अपनी मां की तरफ मुखातिब होता हुआ बोला)

क्या बताऊं बोल कर तो गई थी कि दो-चार दिन में लौट आऊंगा लेकिन अभी तक कोई पता ठिकाना नहीं है और यह कोई नई बात नहीं है दो-चार दिन का बोलकर जाते हैं और 10 12 दिन में ही वापस आते हैं,,,,।

कोई बात नहीं मां,,,, अच्छा अब मैं चलता हूं अंधेरा होने लगा है समय पर पहुंचना है,,,,।

बेटा तुझे डर तो नहीं लगता ना रात को,,,,

नहीं मन बिल्कुल भी नहीं लगता मुखिया की बीवी रहती है ना,,,, और वह तो हमेशा रात को वहां पर रुक चुकी है इसलिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है,,,।

वहां जाकर सो जाता है कि जागता रहता है,,,।

(अपनी मां के ही सवाल पर सूरज अपने मन में ही बोला मुखिया की बीवी जैसी खूबसूरत औरत हो तो भला नींद किसे आती है,,,, लेकिन फिर भी वह अपनी मां से ऐसा बोल तो सकता नहीं था इसलिए वह बोला,,,)

कोई दिक्कत नहीं है मां,,,, जब तक मालकिन जाती है तब तक जागना पड़ता है और मालकिन के नींद आते ही वह भी सो जाने के लिए बोलती है,,,,।

तब तो ठीक है,,,,,।

अच्छा मैं चलता हूं पहले मालकिन के वहां जाना है फिर वहां से बगीचा,,,,।

ठीक है बेटा संभाल कर जाना,,,, ।

(सूरज वहां से मुस्कुराता हुआ मालकिन के घर की तरफ चला गया था और सूरज की मां उसे छोड़ने के लिए दरवाजे तक आई थी और तब तक अपने बेटे को देखते रही जब तक कि वह आंखों से ओझल नहीं हो गया आखिरकार वह एक मां थी और उसका बेटा रात भर जाग कर आम की रखवाली करने के लिए गया था या एक तरह का काम ही था और उससे पहले कभी उसके बेटे ने इस तरह का काम नहीं किया था इसलिए उसके मन में थोड़ी चिंता भी थी अपने बेटे को लेकर,,, उसके जाते ही सुनैना लकड़ी से बने दरवाजे को बंद कर दिया और फिर अंदर आ गई अंदर अभी भी रानी खाना खा रही थी उसे सुनैना बोली,,,,)

खाना खाकर बर्तन साफ कर देना मैं कब तक झाड़ू लगा देती हूं,,,,,।

ठीक है मां,,,,,(हमको मुंह में लेकर चूसते हुए रानी बोली,,,, और थोड़ी ही देर में रानी अपनी मां के बताएं अनुसार बर्तन को साफ कर दी और उसकी मां झाड़ू लगाकर घर की सफाई कर दी और फिर वह अपने कमरे में सोने चली गई,,,,, सोते हुए वह अपने बेटे के बारे में सोच रही थी,,, उसके द्वारा लाई गई सब्जी तरकारी और फल के बारे में सोच रही थी और₹2 के बारे में सोच रही थी,,,,,₹2 के बारे में सोचकर उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे,,,, वह मन ही मन यह सोचकर खुश हो रही थी कि उसका बेटा अब कमाने लगा था,,,, यह सोचकर प्रसन्न हो रही थी कि उसका बेटा आप जवान हो गया था बड़ा हो गया था घर की जवाबदारी को संभाल सकता था,,, लेकिन तभी उसे वह पल याद आ गया जब वह खुशी के मारा अपने बेटे को गले लगाई थी,,,,।

उसे पल को याद करके उसके बदन में एकदम से सिहरन सी दौड़ने लगी,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,, की जो कुछ भी हुआ था उसे पर उसे विश्वास नहीं हो रहा था वह पल एकदम अविश्वसनीय था,,, वह तो सहज रूप से अपने बेटे को खुशी के मारे गले लगाई थी लेकिन गले लगाने पर उसकी दोनों टांगों के बीच जी कठोर चीज में दस्तक दिया था उस चीज के बारे में सोचकर अभी भी उसकी टांगों के बीच हलचल महसूस हो रही थी,,,, वह अपने मन में यही सोच रही थी कि उसके बेटे का लंड आखिरकार खड़ा कैसे हो गया,,, दो बच्चों की मां होने के साथ-साथ में पूरी तरह से अनुभव से भरी हुई थी इतना तो वह जानती ही थी कि एक मर्द का लंड कब खड़ा होता है,,,।

अगर उसकी जगह कोई और औरत सूरज को गले लगाती तो शायद वह समझ सकती थी की औरत का इस वर्ष उसके बेटे को उत्तेजित कर गया था लेकिन वह तो उसकी मां थी और अपनी मां के गले लगते ही उसका बेटा क्यों उत्तेजित हो गया कि उसका लंड खड़ा हो गया और साथ ही साथ खड़ा होने के साथ ही सीधे-सीधे उसकी बुर पर ठोकर मारने लगा,,, यह बात पूरी तरह से सुनैना को अचंभित कर दे रही थी,,, और यह सब याद करके वह अपने बिस्तर पर करवट बदल रही थी,,,।

एक अजीब सा एहसास उसके बदन में मदहोशी घोल रहा था,,, जहां एक तरफ वह अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से स्तब्ध थी वहीं दूसरी तरफ ना जाने क्यों अपने बेटे की हरकत की वजह से उसके बदन में उत्तेजना की फुहार उठ रही थी वह अपने बेटे के बारे में सोने के लिए मजबूर हो गई थी,,, क्योंकि जिस तरह से वह अपने बेटे को गले लगाई थी उस तरह से,, उसे भी उसका पति बहुत बार गले लगा कर चुंबनों की बरसात उसके गर्दन पर उसके चेहरे पर उसके होठों पर कर दिया था लेकिन कभी भी उत्तेजना में पूरी तरह से समर्पित होने के बावजूद भी उसके पति का लंड कभी भी उसकी दोनों टांगों के बीच से गुजरता हुआ उसकी बुर पर ठोकर नहीं मारा था,, पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा होने के बावजूद भी लेकिन उसके बेटे का लंड बड़े आराम से सड़ी सहित उसकी बुर पर दस्तक दे रहा था यह सुनैना के लिए बेहद अचंभित भरा था वह अपने मन में अपने बेटे के लैंड को सोचने पर मजबूर हो गई थी कि उसके बेटे का लंड वाकई में कितना बड़ा है और कितना दमदार है,,,।

ना चाहते हुए भी अपने बेटे के बारे में सोच कर उसके बदन में उत्तेजना का असर पूरी तरह से छाने लगा था वह मदहोश होने लगी थी यहां तक की कुछ दिनों से वह अपने पति से संभोग सुख प्राप्त नहीं कर पाई थी और वैसे भी उसका पति बहुत कम ही उसे संभोग सुख दे रहा था कभी यह बहाना तो कभी वह बहन कभी थकान का बहाना करके वह सो जाता था तो कभी रात रात भर वह घर से बाहर ही लेता था ऐसे हालात में सुनैना का बिस्तर पर करवट बदलना लाजमी था,,, इसलिए तो इस समय वह चुदवासी हुए जा रही थी,,,, मदहोश हुए जा रही थी,,, बार-बार उसे अपनी बुर पर अपने बेटे के लंड की ठोकर महसूस हो रही थी,,, जिसके चलते उसे अपनी बुर से मदन रस का बहाव होता हुआ महसूस हो रहा था ,,।

जवानी से भरी हुई खूबसूरत औरत की बेबसी इससे ज्यादा क्या होगी कि वह पति के होने के बावजूद अपनी बिस्तर पर अकेली करवटें बदल कर रात गुजार रही हो,,, इस समय सबसे खूबसूरत औरत होने के बावजूद भी सुनैना दुखियारी थी,,, जो सुख उसे झोली भर भर के मिलना था उस सुख के लिए वह तरस जाती थी,,,, लेकिन अपने बेटे के बारे में सोचकर अनजाने में ही उसके बारे में जिस तरह के ख्याल उसके मन में आ रहे थे उसके चलते उसकी साड़ी पूरी तरह से उसकी कमर के इर्द गिर्द इकट्ठा हो गई थी कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,, और अपनी आंखों को बंद करके वह अपने पति का ख्याल करते हुए अपनी हथेली को अपनी बुर पर रख दी थी और अपने पति की हरकत के बारे में सोच रही थी लेकिन वह एकदम से झटके से अपनी आंख खोल दी थी क्योंकि उसकी कल्पना में उसके ख्यालों में उसके पति का नहीं बल्कि उसके बेटे का चेहरा आ जा रहा था वह हैरान थी इस तरह की कल्पना से ,,,,, लेकिन वह इस बात से भी इनकार नहीं कर पा रही थी कि उसके बेटे का चेहरा उसकी आंखों के सामने आते ही उसके वतन में उत्तेजना का तूफान उठने लगता था जिसके चलते वह अपनी हथेली में अपनी बुर को दबोच ली थी,,,,।

आंखों को खोलकर हैरानी से वह अपने आप से ही बात करते हुए बोली,,,।

यह क्या हो रहा है,,,, सूरज का चेहरा क्यों आ जा रहा है मेरे ख्यालों में मैं तो अपने पति के बारे में सोच रही हूं,,,,,(गहरी सांस लेते हुए अपने आप से रिश्ता की बातें करते हुए फिर से अपनी आंखों को बंद कर दी और इस बार अपनी उंगली को धीरे-धीरे अपनी बुर में डालने लगी और कल्पना करने लगेगी जैसे उसका पति अपना लंड उसकी बुर में डाल रहा होगा लेकिन यह क्या और फिर से हैरान होकर अपनी आंखों को खोल दी क्योंकि इस बार भी उसके ख्यालों में उसका पति नहीं बल्कि उसका बेटा आ जा रहा था जो अपने दोनों हाथों से उसकी टांगों को खोल दिया था,,,, एक तरफ पूरी तरह से हैरान थी इस तरह की कल्पना को लेकर और दूसरी तरफ इस तरह की कल्पना उसके भजन में पूरी तरह से मदहोशी का नशा खोल दे रहा था वह ,,विवश हो जा रही थी इस तरह की कल्पना करने के लिए,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें ऐसा उसके साथ पहली बार हो रहा था। वह अपनी गरदन उठा कर अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच ले गई तो अभी भी उसकी उंगली उसकी बुर में फंसी हुई थी,,,,,।

सुनैना कुछ समझ नहीं पा रही थी कि वह क्या करें एक तरफ उसके बदन की प्यास उसे व्याकुल बना रही थी उसकी तड़प को बढ़ा रही थी और दूसरी तरफ अनजाने में ही उसके बेटे का ख्याल उसकी तरफ को और ज्यादा बढ़ा रहा था लेकिन आनंदित कर दे रहा था उसे अपनी बुर एकदम साफ दिखाई दे रही थी लालटेन की पीली रोशनी में उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी बुर उत्तेजना के मारे फुल कर कचोरी हो गई थी,,,,, उंगली का सहारा वह पहले भी ले चुकी थी,,,। ऐसी हालत में जब कभी भी उसे पति की जरूरत पड़ती थी तो मजबूरन उसे अपनी उंगली का सहारा लेना पड़ता था,,,,।

और ऐसा करके वह कुछ गलत नहीं करती थी वैसे तो सुनैना बहुत ही सीधी और संस्कारी औरत थी,,,, आज तक उसके बारे में कोई बोल नहीं सकता था कि उसका चरित्र खराब है या उसे किसी के साथ देखा गया है गांव की सबसे सीधी शादी औरत सुनैना ही थी लेकिन रात को कभी कबार अपने पति की जरूरत पड़ने पर मजबूर होकर वह अपनी उंगली का सहारा ले लेती थी और ऐसा करना उसके लिए बिल्कुल भी गलत नहीं था क्योंकि वह जानती थी कि वह तो अपने पसंद की प्यास बुझाने के लिए सिर्फ उंगली का सहारा ले रही है गांव में तो दूसरी ओर से जरूरत पड़ने पर दूसरी मर्दों का सहारा लेकर भले ही शरीर सुख प्राप्त कर लेती थी लेकिन चरित्रहीन बन जाती थी और ऐसे में कोई भी उन पर उंगली उठा सकता था लेकिन सुनैना संस्कारी औरत थी और वह नहीं चाहती थी कि उसकी बदनामी गांव में हो या उसके बारे में कोई गलत बातें करें या उसकी तरफ उंगली उठाएं इसीलिए वह अपनी जवानी को बरकरार रखी हुई थी ,,,।।

वैसे तो वह अपने पति से शरीर सुख के मामले में बहुत खुश थी क्योंकि उसका पति जब भी उसके साथ शरीर संबंध बनाता था तो उसे पूर्ण रूप से संतुष्ट करता था वैसे भी भोला पूरी तरह से सक्षम था किसी भी औरत को संतुष्ट करने में,,, लेकिन उसके प्रति उसका बेरुखापन सुनैना को सोचने पर मजबूर कर देता था वह अपने आप को आईने में देखकर सोचती थी कि क्या वह खूबसूरत नहीं है जो उसका पति उसके साथ संभोग नहीं करता,,,, रात भर घर से गायब रहता है वह अपने मन में यही सोच रही थी कि अगर वह किसी और को मिली होती तो शायद दिन-रात वह उसकी पूजा सेवा करता उसे पूरी तरह से संतुष्ट करता लेकिन भोला बिल्कुल भी ऐसा नहीं करता था बहुत कहाँ पर ही वह उसके साथ शरीर संबंध बनाता था,,, सुनैना को तो यही लगता था कि शायद वह काम के चक्कर में खेतों में काम करने की वजह से ही उसके साथ ठीक से समय नहीं गुजार पाता,,,, क्योंकि हकीकत तो वह जानती ही नहीं थी कि उसके पति का मुखिया की बीवी के साथ चक्कर चल रहा था और वह दिन-रात मुखिया की बीवी के वहां ही पड़ा रहता था ,,,,,।
 
यह सब तो सुनैना की आप बीती थी उसका दर्द था उसके दिल का जख्म था लेकिन इस समय कमरे का हालात पूरी तरह से बदला हुआ था पति की करे हाजिरी में वह पूरी तरह से कामाअग्नि में जल रही थी ,,, ऊपर से उसकी कल्पना ने उसे पर और ज्यादा कहर बरसाया हुआ था,,, जहां वह अपनी उंगली का सहारा लेकर अपने पति की कल्पना करती थी वही आज कल्पना में उसके पति की जगह बार-बार उसके बेटे का चेहरा आ जा रहा था और यह सब दिन में जो कुछ भी हुआ था उसी का साया था उसी का अक्स था,,, जिसमें वह पूरी तरह से डूबती जा रही थी,,, ।

कमरे का लकड़ी का दरवाजा बंद था और कमरे में लालटेन जल रही थी जिसकी पीली रोशनी में सबको सांप दिखाई दे रहा था जवानी से भरी हुई मदहोश कर देने वाली जवानी की मालकिन सुनैना अपने खटिया पर लेटी हुई थी और उसकी साड़ी कमर के ईर्द गिर्द इकट्ठा हो गई थी,,, कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगी थी और उसकी एक ऊंगली उसकी बुर के अंदर खुशी हुई थी और वह गरदन उठाकर अपनी दोनों टांगों के बीच ही देख रही थी,,,,, उसकी कल्पनाओं का घोड़ा बड़ी तेजी से दौड़ता था लेकिन आज हुआ बार-बार अपनी कल्पनाओं के घोड़े की लगाम को खींच दे रही थी उसे रोक दे रही थी क्योंकि कल्पनाओं का घोड़ा उसे मंजिल से भटक रहा था आज मंजिल का रास्ता बदल दे रहा था,,,,, मंजिल का रास्ता क्या आज पूरी मंजिल ही बदल दे रहा था सफर वैसा ही था लेकिन मंजिल का ठिकाना दूसरा हो चुका था सुनैना अपनी आंखों को बंद करने में घबरा रही थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि जो चेहरा उसके कल्पना में आ जा रहा है वह उसका बेटा है उसका सगा बेटा जिसके साथ वह कभी सपने में भी इस तरह की हरकत करने को सोच नहीं सकती थी लेकिन फिर भी आज क्यों ऐसा हो रहा है यह सब उसके समझ के परे था,,,,।

धीरे-धीरे उसके बदन में उत्तेजना और मदहोशी बढ़ने लगी थी अधूरा काम उसे पूरा करना था लेकिन उसका मन घबरा रहा था आंखों को बंद करने में वह डर रही थी लेकिन उसकी नज़रें उसकी कचोरी जैसी खुली हुई दूर के अंदर घुसी हुई उसकी उंगली पर टीकी हुई थी,,, क्योंकि उस उंगली को उसने लंड का कार्य करने की जिम्मेदारी जो सौंप रखी थी,,,,, बदन की प्यास बढ़ती जा रही है क्योंकि वह जानती थी कि अधूरा कार्य करके छोड़ देना उचित नहीं था बार-बार उसकी आंखों के सामने दोपहर वाला दृश्य नजर आ रहा था जब वह अपने बेटे को गले लगाई थी और उसे समय उसके बेटे का लंड सीधे उसकी बुर पर दस्तक दे रहा था और उसने अपने बेटे के पजामे में बना हुआ तंबू भी देखी थी यह सब सुनैना के कदम को डगमगा रहा था,,, वह अपनी बुर में उंगली को डालकर बाकी हथेलियां से अपनी बुर को दबोच ले रही थी वह उत्तेजित हो रही थी मदहोश हो रही थी तड़प रही थी लेकिन आंखों को बंद नहीं कर रही थी,,,।

लेकिन ऐसा वह कब तक करती बदन की प्यास उसे पूरी तरह से मजबूर कर दे रही थी आंखों को बंद करने के लिए और फिर वह भी अपने मन में सोचने लगी कि वह वास्तव में तो अपने बेटे के साथ कुछ कर नहीं रही है तो कल्पना करने में क्या हर्ज है और यही सोचकर वह अपनी आंखों को बंद कर दी और आंखों को बंद करते ही एक बार फिर से उसकी कल्पनाओं के घोड़े की लगाम धीरी हो गई और उसका घोड़ा बड़ी तेजी से दौड़ने लगा दौड़ने क्या लगा मानो कि आसमान में उड़ने लगा पल भर में उसकी आंखों के सामने उसके बेटे का चेहरा नजर आने लगा के बेटे का चेहरा नहीं बल्कि उसका बेटा पुरा का पूरा खुद नजर आने लगा,, उसकी सांसे बड़ी तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी वह अपने मन में कल्पना करने लगी,,, ।

वह अपने मन में सोचने लगी कि वह इसी तरह से अपनी बिस्तर पर गहरी नींद में सो रही है और उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई है उसकी दोनों टांगें खुली हुई है और तभी कमरे का दरवाजा खुलता है और उसका बेटा कमरे में प्रवेश करता है उसके बेटे की नजर सीधे बिस्तर पर जाती है जहां पर वह खुद होकर सो रही है अपनी मां की खुली हुई टांग में से झांकती हुई उसकी गुलाबी बुर को देखकर सूरज की आंखों में वासना के दौर नजर आने लगते हो पूरी तरह से मदहोश हो जाता है,,,, कल्पना में अभी भी सुनैना की आंखें बंद है और वह पूरी तरह से नींद की आगोश में सो रही है,,,, सूरज की आंखें अपनी मां की जवानी देखकर फटी की फटी रह गई वह पूरी तरह से पागल हो गया पहली बार वह इस तरह से नजर देख रहा था अपनी मां को अर्धनग्न अवस्था में अर्थव्यवस्था हालत में सोता हुआ देखकर उसकी वासना पूरी तरह से जाग गई और वह धीरे से कमरे का दरवाजा बंद कर दिया,,,,,।

और धीरे-धीरे अपनी मां के करीब बढ़ने लगा,,,, सुनैना की कल्पना बहुत ही तेज थी कल्पना में वह सब कुछ सोच रही थी उसका बेटा यह जानता था कि उसके पिताजी घर पर नहीं है और इसलिए वह इस मौके का फायदा उठाना चाहता था वह धीरे से आकर अपनी मां की खटिया पर बैठ गया जिसका हल्का सा एहसास सुनैना को हुआ लेकिन उसकी आंखें बंद की बंदे रही और धीरे से सूरज ने अपनी हथेली को अपनी मां की कचोरी जैसी फुली हुई बुर पर रख दिया,,, और वैसे ही तुरंत सुनैना की आंख खुल गई आंख खुलते ही सुनैना अपने पास अपने बेटे को बैठा हुआ देख कर एकदम से घबरा गई लेकिन सूरज बिल्कुल भी नहीं घबराया और इशारे में ही उसे चुप रहने का इशारा किया उसकी मां एकदम से शांत हो गई क्योंकि उसकी हथेली उसकी बुर पर जो थी और वह मदहोश हो रही थी,,,,,।

बहुत खूबसूरत बुर है तुम्हारी मां,,, आज तुम्हें तुम्हारी बुर में अपना लंड डालकर ही रहुंगा,,,।

नहीं बेटा ऐसा मत करना हम दोनों के बीच मां बेटे का रिश्ता है इस तरह का रिश्ता बिल्कुल भी मान्य नहीं है,,,।

चारदीवारी के अंदर मां बेटे के बीच क्या चल रहा है भला दूसरों को क्या पता चलेगा,,, तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो किसी को कानों कान तक खबर नहीं पड़ेगी,,,(और इतना कहने के साथ तेरी सूरज खटिया पर से उठकर खड़ा हो गया और अपने पजामी को उतारने लगा सुनैना की नजर उसके पजामी पर ही टीकी हुई थी और जैसे ही पजामा उसने उतारा,,, अपने बेटे का लंड देखकर सुनैना की आंखें फटी की फटी रह गई,,,।)

नहीं बेटा ऐसा बिल्कुल भी मत करना हम दोनों के बीच इस तरह का रिश्ता संभव नहीं है,,,।

कैसे संभव नहीं है,,,,(लंड को हाथ में लेकर हिलाते हुए,,,) तुम एक औरत हो और मैं एक मर्द बस इस समय यही रिश्ता हम दोनों के पीछे तुम्हारे पास खूबसूरत बुर है तो मेरे पास मोटा तगड़ा लंड है और तुम तो जानती हो की बोर और लंड अपने बीच किस तरह का रिश्ता होता है,,,(और इतना कहने के साथ ही सूरज अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आ गया इस तरह की कल्पना करते हुए सुनैना के तन बदन में आग लगी हुई थी वह पल भर में ही पसीने से तरबतर हो गई,,, उसकी कल्पना वाकई में बहुत जबरदस्त थी वह कल्पना में ही अपनी उंगली को अपनी बर के अंदर बाहर कर रही थी और मदहोश हुए जा रही थी,,,)

नहीं बेटा ऐसा बिल्कुल भी मत करना तेरे पिताजी को पता चलेगा तो गजब हो जाएगा,,,।

कुछ नहीं होगा मां,,, तुम तो अच्छी तरह से जानती हो कि पिताजी बाहर गए हुए हैं और 10 12 दिन बाद ही लौटेंगे इसलिए तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो किसी को कुछ भी नहीं पता चलेगा और तुम एकदम मस्त हो जाओगी,,,,।

(और अपनी मां के नानुकुर के बावजूद भी सूरज अपनी मनमानी करता हुआ अपने लंड को उसके गुलाबी छेद में डालना शुरू कर दिया और देखते-देखते हो अपनी मां की कमर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया और इस दौरान कल्पना करते हुए अपनी आंखों को बंद करके जवानी का मजा लूटते हुए सुनैना अपनी उंगली को बड़ी तेजी से अपनी बर के अंदर बाहर कर रही थी यहां तक की अपने बेटे का लंड का अंदाजा लगा लेने के बाद अच्छी तरह से जानती थी कि एक उंगली से उसका कुछ नहीं होने वाला इसलिए वह दूसरी उंगली भी अपनी बुर में डाल दी थी,, और फिर देखते ही देखते सुनैना के कल्पनाओं का घोड़ा उसे चरम सुख के बेहद करीब ले जाने लगा वह मदहोश होने लगी बार-बार अपनी कमर को ऊपर उठा ले रही थी और देखते ही देखते उसकी बुर से मदन रस की पिचकारी निकल पड़ी और वह एकदम से निहाल हो गई,,,,।

जब वह कल्पना से बाहर आई तो बहुत देर हो चुकी थी अपने बेटे की कल्पना करके वह पूरी तरह से मत हो चुकी थी और आज उसे अपनी उंगली का सहारा लेने में इतना मजा आया था कि ऐसा माया उसे पहले कभी नहीं आया था लेकिन जैसे ही वासना का तूफान उसके सर से उतरा उसकी आंखों में आंसू आ गए क्योंकि कल्पना में ही सही वह गलत कर रही थी इस बात का अंदाजा उसे अच्छी तरह से था और फिर ऐसा दोबारा न करने की कसम खाकर वह सो गई,,।

दूसरी तरफ सूरज एक बार फिर से मुखिया की बीवी की जवानी को लुटने में पूरी तरह से मुसगुल हो गया,,, मुखिया की बीवी सूरज को धीरे-धीरे संभोग के सारे दांव पेंच सीखा रही थी, और धीरे-धीरे सूरज संभोग के हर एक आसन में पारंगत होता चला जा रहा था ऐसा रोज का सिलसिला हो चुका था रोज वह मुखिया की बीबी की जवानी कब मजा लूट रहा था और धीरे-धीरे वह पूरी तरह से मर्द बन चुका था यह सिलसिला कब तक चलता रहा जब तक की बगीचे का आम मार्केट में नहीं पहुंच गए,,,।

कुछ दिन गुजरने के बाद खेतों में काम करते-करते शाम ढलने लगी सूरज खेत पर अकेले ही काम कर रहा था,,,, और सूखी हुई लड़कियों का इकट्ठा कर रहा था ईंधन के लिए जब ढेर सारी लड़कियां इकट्ठी हो गई तो वह उन्हें बांधकर अपने सर पर गट्ठर बनाकर रख लिया था,,, और फिर गांव की तरफ आने के लिए निकल गया देखते ही देखते हैं अंधेरा होने लगा,,,, जब थोड़ी थकान महसूस हुई तो वह कट्टर अपने सर से उतर कर वहीं बगल में रख दिया और कुछ देर के लिए वहीं बैठ गया,,,, शाम ढल चुकी थी अंधेरा हो चुका था,, लेकिन चांदनी रात होने की वजह से अंधेरा होने के बावजूद भी सब कुछ साफ नजर आ रहा था तभी उसे दूर से कुछ औरतों के हंसने और खिलखिलाना की आवाज आने लगी और वह वहीं पर छुप कर बैठ गया,,,, वह देखना चाहता था कि रात के अंधेरे में कौन औरतें इधर आ रही है,,,।

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घास का ढेर सर पर लाद कर लौटते समय,, अंधेरा होने लगा था और ज्यादा वजन होने की वजह से वह थोड़ा आराम करने के लिए सूरज घास के गठ्ठर को वहीं पास में रखकर बैठ गया था और दूर से आ रही औरतों की हंसने और बात करने की आवाज से वह एकदम से हैरान हो गया था कि अंधेरे में कौन आ रहा है और यही देखने के लिए वह झाड़ियां के पीछे छुप गया था,,,।

शाम ढल चुकी थी धीरे-धीरे अंधेरा पूरी तरह से छाने लगा था लेकिन चांदनी रात होने की वजह से अंधेरे में भी सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,, गांव से यह जगह थोड़ी दूर थी,,, और औरतों की आवाज उनके हंसने की आवाज जिस तरह से आ रही थी इसलिए सूरज सोच में पड़ गया था,,, कि आखिरकार यह औरतें कौन है और रात होने पर यहां क्यों आ रही है,,, यही छिपकर वह देखना चाह रहा था तभी औरतों की आवाज और उनके हंसने की आवाज और ज्यादा करीब आने लगी,,,, जिस जगह से उन औरतों की आवाज आ रही थी वह जगह बड़े-बड़े पेड़ों से घिरी हुई थी,,, इसलिए अभी तक वह औरतें नजर नहीं आई थी,,,,, तभी थोड़ी ही देर में औरतों की परछाई नजर आने लगी,,,, सूरज झाड़ियों के पीछे छुपकर यही देखना चाह रहा था कि वह औरतें कौन है और यहां क्या करने आ रही है,,,।

लेकिन जैसे ही वह औरतें और करीब आई चांदनी रात में उन औरतों का चेहरा सूरज को एकदम साफ नजर आने लगा और जैसे ही उन औरतों का चेहरा उसे दिखाई दिया उसका दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि वह तीन औरतें थी,,, एक उसकी खुद की मां थी एक पड़ोस वाली औरत थी और तीसरी सोनू की चाची थी तीनों आपस में बातें करते हुए सूरज जहां छुपा हुआ था इस झाड़ियां के करीब आ रही थी और जैसे ही सूरज की नजर उन तीनों के हाथ पर पड़ी और उन तीनों के हाथ में,,, लोटा देखा तो उसका दिल और ज्यादा जोरों से धड़कने लगा क्योंकि वह सारा माजरा समझ गया था कि वह तीन औरतें वहां क्या करने आ रही थी,,,,।

सूरज अपने आप को झाड़ियों के पीछे एकदम से छुपा लिया था,,, ताकि वह तीनों में से किसी के भी नजर उसे करना पड़े क्योंकि ऐसी हालत में अगर उसे पर नजर पड़ जाती तो वह शर्मिंदा हो जाता है इसलिए वह अपने आप को छुपाए हुए था,,, देखते देखते वह तीनों औरतें एकदम करीब आ गई सूरज को इस बात का डर था कि कहीं उन दिनों में से कोई उसकी तरफ या उसके पास ना आ जाए और उसे देखना ले लेकिन उसकी किस्मत अच्छी थी कि वह तीनों वह जिस झाड़ी के पीछे छुपा हुआ था ठीक उसके सामने जाकर खड़ी हो गई थी। तीनों के हाथ में लोटा था,, इसलिए सूरत समझ गया था कि वह तीनों सौच करने आई थी,,, लेकिन फिर वह अपने मन में सोचने लगा इतनी दूर आने की क्या जरूरत है कोई पास में ही तो नाला बताएं उसी में चले जाना चाहिए था उस नाले की गहराई में वह तीनों नजर भी नहीं आती,,,।

सूरज का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह समझ गया था कि थोड़ी देर में तीनों औरतों की नंगी गांड उसे दिखाई देने वाली है जिसमें उसकी खुद की सगी मां की भी गांड शामिल थी,,, वह तीनों कुछ देर खड़ी होकर बातें कर रही थी और उन तीनों की बातचीत सूरज को एकदम साफ सुनाई दे रही थी,,, उनमें से पड़ोस वाली जो औरत थी वह बोली,,,।

सुन रही हो सुनैना भाभी,,,

क्या हुआ,,,,?

अरे हुआ क्या है,,,, सोनू की चाची को देखो पूरी तरह जवानी से गदराइ हुई है,,,,, और मजा लेने के चक्कर में अभी तक बच्चा पैदा नहीं कर रही है,,,।

(उसे औरत की बात सुनकर सूरज का दिन जोरों से धड़कने लगा क्योंकि उसकी बात सुनकर वह समझ गया था कि अब तीनों के बीच अंदरुनी बातें होने वाले हैं,,,, उस औरत की बात सुनकर सुनैना बोली,,,)

हां रे तू सच कह रही है,,, क्यों रे तुझे आगे की सोच नहीं है अभी तक तु मजा मार रही है,,,, जरा आगे की सोच इस उम्र में बच्चे हो जाएंगे तो आगे चलकर तुझे ही अच्छा लगेगा लेकिन तू है कि रोज मजा लेने के चक्कर में बच्चों के बारे में सोच ही नहीं रही है,,,।

क्या भाभी तुम भी इसकी बातों में आ गई,,, तुम्हें लगता है कि मैं बच्चा नहीं चाहती,,,,।

चाहती है तो अभी तक हुआ कि नहीं,,,।

अब यह सब तो भगवान की मर्जी है मैं तो चाहती हूं कि हो जाए,,,, लेकिन हो ही नहीं रहा है,,,,।

थोड़ा जोर-जोर से धक्का मरवाया कर,,,, जल्दी बच्चा हो जाएगा,,,,(सूरज के पड़ोस वाली औरत बोली और उसकी बात सुनकर सूरज का लंड खड़ा होने लगा,,, उसकी बात सुनकर सुनैना हंसने लगी और उसे हंसता हुआ देखकर सोनू की चाची बोली,,,,)

क्या भाभी तुम भी,,,, उनको देखकर लगता है कि वह जोर-जोर से धक्का लगा पाते होंगे,,,,।

वही तो मैं भी सोच रही हूं,,,,, उनका शरीर देखकर मुझे लगता नहीं है कि वह कुछ कर पाते होंगे,,,,(सुनैना थोड़ा सा मजाक करते हुए बोली और अपनी मां के मुंह से इस तरह की बात सुनकर सूरज के तन बदन में आग लगने लगी,,,, क्योंकि उसकी बात सुनकर सूरज को एहसास हो रहा था कि उसकी मां भी जानती है कि औरत को छोड़ने के लिए मर्दाना अं ग के साथ-साथ गठीला बदन भी चाहिए,,,, सुनैना की बात सुनकर पड़ोस वाली औरत बोली)

हां भाभी मुझे भी कुछ जोड़ी जमती नहीं है,,, क्योंकि इनको देखो जवानी से भरी हुई ऊपर से नीचे तक जवानी से लदी हुई है,,, और भाई साहब को देखो मरीयल सा शरीर,,, मुझे तो लगता है की भाभी की बुर में डालते ही ढेर हो जाते होंगे,,,।(इतना कहने के साथ ही वह हंसने लगी साथ में सूरज की मां भी हंसने लगी उन दोनों का हंसता हुआ देखकर सोनू की चाची बोली)

हां हां हंस लो,,,, मेरी बेबसी पर तो हंसोगी ही ,,, तुम दोनों के पति हट्टे कट्टे हैं इसलिए,,, तुम दोनों जन ऐसा कह रही हो,,,।

नहीं रे ऐसा बिल्कुल भी नहीं है,,, यह तो थोड़ी बहुत हंसी मजाक हो रही थी लेकिन मैं सच में कह रही हूं कि तू बच्चा चाहती नहीं है या हो नहीं रहा है,,,।

सच कहूं तो भाभी हो ही नहीं रहा है मुझे भी बच्चों का बहुत शौक है लेकिन कर भी क्या सकती हूं,,,,

तेरे पति में तो खोट नहीं है,,,(सुनैना बोली)

मुझे और उनको देखकर क्या लगता है,,,

मुझे तो खोट तेरे पति मे हीं लगता है ,,(सुनैना बोली)

तो क्या भाभी,,,, मुझ में कोई कमी नहीं है मैं तो बच्चा चाहती हूं लेकिन सोनू के चाचा से ही कुछ नहीं होता,,,,।

(उन तीनों की बातों को सुनकर सूरज की हालत खराब हो रही थी सूरज इतना तो समझ गया था कि सोनू की चाची वाकई में बच्चा चाहती है लेकिन हो नहीं रहा था,,,, लेकिन अभी भी तीनों खड़ी की खड़ी ही थी तीनों में से कोई भी सौच करने के लिए बैठा नहीं था,,, जिसका सूरज को बेसब्री से इंतजार था,,,। वह तीनों औरतें आपस में विचार विमर्श कर ही रही थी कि तभी सूरज के पड़ोस वाली औरत बोली,,,,)

अरे भाभी देर हो रही है पहले जो करने आए हैं करते हुए बातचीत तो हगते हुए भी कर लेंगे,,,।

हां रे सच कह रही है,,, सोनू की चाची का दुख सुन कर तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,(सुनैना सोनू की चाची से सहानुभुति जताते हुए बोली,,,, सुनैना की बात सुनकर सूरज के पड़ोस वाली औरत बोली,,, )

समझना क्या है भाभी,,, मैं तो कहती हूं सोनू के साथ ही चुदवा कर मां बन जाना चाहिए,,,,(इतना कहते हुए वह धीरे-धीरे अपनी साड़ी ऊपर की तरफ उठने लगी वह सूरज जहां छुपा हुआ था उसके ठीक सामने खड़ी थी और उसकी मां और सोनू की चाची की पीठ सूरज की तरफ थी,,,, चांदनी रात के उजाले में सूरज को सब कुछ साथ नजर आ रहा था,,,, उसकी बात सुनकर सोनू की चाची बोली,,,,)

तू ही चुदवा ले अपने बेटे से दो-तीन और बच्चे पैदा कर ले,,,,।

मैं तो कर लूं,,, जिस दिन मुन्ना के बापू में लगेगा कि दम नहीं रहेगा तो मैं जरूर अपने बेटे से चुदवाऊंगी,,, आखिरकार यह भी तो जरूरी है लेकिन अभी तो मेरा मुन्ना बहुत छोटा है,,,, देखना उसे खिला-खिला कर सांड बनाऊंगी,,,,,,।

हां ताकि रोज तेरे ऊपर चढ़ सके,,, (उसकी बात सुनकर सुनैना भी चुटकी लेते हुए बोली तो अपनी मां की यह बात सुनकर सूरज का लंड एकदम से खड़ा हो गया क्योंकि सूरज को यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी मां इस तरह की बात करेगी क्योंकि आज तक उसने अपनी मां के मुंह से इस तरह के अश्लील शब्दों को कभी सुना भी नहीं,,था। और इस यकीन नहीं हो रहा था उसकी मां आपस में इस तरह की बातें कर रही है,,,,, सुनैना की बात सुनकर वह बोली,,)

हां भाभी मैं तो यही चाहती हूं,,,, आखिरकार औरत की होती किस लिए है,,,लंड लेने के लिए ही ना,,,

(उसे औरत की बात सुनकर तो सूरज की हालत और खराब होने लगी)

बुर लंड लेने के लिए बनी है तो क्या दिन रात लेती ही रहेगी,,,,(सुनैना भी उसकी बात पर चुटकी लेते हुए बोली तो अपनी मां के मुंह से लंड शब्द सुनकर सूरज का लंड एकदम से टन्ना गया,,,)

तो क्या भाभी मैं तो लेती रहूंगी मैं तो इसे भी यही समझा रही हूं,,, अगर भाई साहब से आग नहीं बुझ रही है तो,,, सोनू का ही ले ले वह भी तो जवान हो चुका है उसका भी तो लंड खड़ा होता होगा तुझे देख कर,,,,।

क्या बोल रही है रै थोड़ा तो शर्म कर,,,(सुनैना उसकी बात सुनकर उसकी बात को काटते हुए बोली)

तो क्या हो गया भाभी मैं सच कह रही हूं हर घर में यही हालत है लड़का जवान होते ही सबसे पहले उन लोगों की नजर घर की औरतों पर ही जाती है,,,,।

(सूरज के पड़ोस वाली औरत साड़ी को जांघों तक उठाए हुए बोली अभी तक वह भी अपनी साड़ी को कमर तक नहीं उठाई थी बाकी सोनू की चाची और सूरज की मां उसी तरह से हाथ में लोटा लेकर खड़ी थी,,, उसकी बात सुनकर सुनैना बोली,,,)

तुझे कैसे मालूम,,,, कि घर के लड़कों की नजर घर की औरतों पर ही रहती है,,,।

मुझे अनुभव है भाभी,,,,।

इसे तो सब चीज का अनुभव हो चुका है,,,,(सोनू की चाची बीच में बोली)

अनुभव से ही इंसान सीखता है और अनुभव से ही सुख का रास्ता प्राप्त होता है,,, तुम्हारे में अनुभव नहीं है इसीलिए तुम एक ही मर्द के पीछे खड़ी हो और अभी तक अपना दुख दूर नहीं कर पाई हो तुम्हारी जगह में होती तो अब तक सोनू से संबंध बनाकर मां बन गई होती,,,,।

तो फिर सोनू का नाम ली वह उसका भतीजा है,,,,(उसकी बात सुनकर सुनैना फिर से बोली,,, और सोनू की चाची भी सुनैना के सुर में सुर मिलाते हुए बोली)

तुझे लगता है कि सोनू से कुछ हो पाएगा ठीक से घास का ढेर तो उठा नहीं पाता है मेरा बोज कैसे उठा पाएगा,,,,।

(उन तीन औरतों के पीछे सोनू का जिक्र हो रहा था और सोनू का जिक्र आते ही सूरज की हालत खराब होने लगी उसे समझ में आ गया कि घर में अगर जमा लड़का होता है तो उस पर औरतों की भी नजर रहती है,,, तभी तो सोनू की चाची ऐसा बोल रही है वह भी सोनू को अच्छी होगी,,,उसका दम खम देखी होगी,,, तभी तो उसके बारे में ऐसा बोल रही है,,,। सोनू की चाची की बात सुनकर वह औरत बोली,,,)

अरे भाभी रहने दो सोनू को पतला दुबला मत समझो जब ऐसा मौका मिलता है तो यही पतले दुबले लडके गोद में उठाकर चुदाई करते हैं,,,,।

अरे यह सब छोड़ तू बता रही थी कि तुझे अनुभव है तुझे कैसे पता चला कि घर के जवान लड़के घर की औरतों पर नजर रखते हैं,,,,(बीच में उसकी बात काटते हुए सुनैना बोली,,,,, सूरज अपने पड़ोस वाली औरत की बात सुनकर इसी बारे में सोच रहा था बस समझ गया था कि हर घर में यही होता है सोनू अपनी चाची को प्यासी नजरों से देखा है और वह खुद अपनी ही मां को गंदी नजरों से देखने लगा है,,, इसका मतलब साफ है हर घर में जवान लड़की घर की औरतों को ही गंदी नजर से देखते हैं और मौका तलाशते हैं,,,, सुनैना की बात सुनकर वह बोली,,,)

अरे हां भाभी,,,, तुम तो जानती हो कि सोनू की तरह ही मेरे घर में भी एक भतीजा था जो दो-तीन साल से दूसरे गांव चला गया,,,।

हां हां,,,,,(सुनैना उसके सुर में सुर मिलाते हुए बोली)

वो मुझ पर हमेशा गंदी नजर रखता था,,,।

गंदी नजर रखता था लेकिन तुझे कैसे पता चला,,,,,(सोनू की चाची होली क्योंकि भतीजे का सवाल था वह अपने भतीजे की काली करतूत बता रही थी और उसका खुद का भतीजा था सोनू इसलिए वह बड़े गौर से सुन रही थी)

अरे यह सब तो रोज का था लेकिन मुझे एक दिन पता चला जब मैं दोपहर में,,,सौच करने के लिए तालाब के किनारे जा रही थी,,, तो मुझे लगा कि कोई मेरे पीछे पीछे आ रहा है,,,, मैं बार-बार पीछे मुड़कर देख ले रही थी लेकिन वह पेड़ के पीछे छुप जा रहा था,,,। और मैं कुछ समझ नहीं पा रही थी,,,, और देखते ही देखते मैं तालाब पर पहुंच मुझे इतना तो यकीन हो गया था कि कोई तो है जो मेरे पीछे-पीछे आ रहा है लेकिन मुझे इतने जोरो की लगी हुई थी कि मुझे ना चाहते हुए भी वही झाड़ियां में बठना पड़ा,,,,।

फिर क्या हुआ,,,?(उत्सुकता दिखाते हुए सुनैना बोली)

फिर क्या मैं तुमसे पीछे की तरफ देखी तो मैं दंग रह गई पेड़ के पीछे मेरा ही भतीजा छुप कर मुझे देख रहा था मेरी गांड देख रहा था,,,।

फिर तूने क्या की,,,,(सोनू की चाची बोली)

मैं तो एकदम दंग रह गई मुझे यकीन नहीं हो रहा है ताकि मेरा ही भतीजा मुझे इस हालत में देखने के लिए तड़प रहा है उस दिन तो मैंने कुछ नहीं बोली,,, दो-चार दिन इसी तरह से मैं दोपहर के समय आती रही और वह भी मेरे पीछे-पीछे आता रहा,,,,।

फिर,,,,(सुनैना बोली)

फिर क्या मैं तो परेशान होगई थी,,,, लेकिन एक बात है भाभी न जाने क्यों उसके सामने,,, साड़ी कमर तक उठाकर गांड दिखाने में बहुत मजा आने लगा था,,,।

क्या कह रही है तू,,,,(सोनू की चाची एकदम से आश्चर्य जताते हुए बोली,,, सूरज यह सब सुन रहा था उन औरतों की बातें सुनकर उसकी हालत खराब हो रही थी वह बेहद उत्तेजना का अनुभव कर रहा था,,और जिस तरह से सोनू की चाची पूछ रही थी सूरज अच्छी तरह से जानता था कि जिस तरह के हालात उसकी पड़ोसन के थे वही हालत सोनू की चाची के भी थे लेकिन सोनू की चाची को इस बात का अहसास तक नहीं था कि उसका भी भतीजा दिन रात उसे देखने की कोशिश करता रहता है,,,)

हां भाभी मुझे तो बहुत मजा आ रहा था मैं जानती थी कि वह मुझे चुप कर देख रहा है और उसकी मौजूदगी में मैं जब साड़ी उठाकर कमर तक लाती थी तो मेरी नंगी गांड देखकर जितना हुआ मस्त होता था उससे ज्यादा मजा मुझे भी आने लगा था मुझे पूरा विश्वास है अगर तुम लोग भी ऐसा करके देखोगी तो बहुत मजा आएगा,,,,।

अरे इसके तो भतीजा है मेरे कौन सा भतीजा है जो मैं दिखाती फिरूंगी,,,,(इस बार सुगंधा अपने हाथ में लिया हुआ लोटा नीचे जमीन पर रख दी और अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी यह देखकर सूरज का दिल जोरो से धड़कने लगा और अपनी मां की बात सुनकर उसकी भी उत्सुकता बढ़ने लगी कि अब आगे क्या बात होती है,,,,)

हां सही बात है सुनैना भाभी के भतीजा कहां है,,,(इतना कहने के साथ ही सोनू की चाची भी अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी और यह देखकर सूरज का लंड टनटनाने लगा,,,,)

अरे भतीजा नहीं है तो बेटा तो है ना,,,, एकदम जवान गठीला बदन वाला,,,,।

(अपने पड़ोस वाली औरत के मुंह से अपना जिक्र सुनते ही सूरज एकदम से सचेत हो गया,,,, अपने बेटे का जिक्र सुनकर नाराजगी दिखाते हुए सुनैना बोली,,)

अरे पागल हो गई है क्या वह मेरा बेटा है,,,,।(और इतना कहने के साथ ही सुनैना अपनी साड़ी को एकदम कमर तक उठा दी और कमर तक साड़ी के उठते ही सूरज को उसकी मां की मदमस्त कर देने वाली नंगी गोरी गांड नजर आने लगी जो की चांदनी रात में चमक रही थी,,,,, यह नजारा देखते ही सूरज का लंड एकदम ताव में आ गया,,,,,, साड़ी को कमर तक उठाने पर कुछ क्षण तक इस स्थिति में खड़े रहने के बाद वह धीरे से बैठ गई ऐसा लग रहा था कि वह कुछ क्षण तक खड़ी होकर अपने बेटे को ही अपनी गांड के दर्शन करा रही थी,,, और सोनू की चाची भी उसी तरह से अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर अपनी नंगी गांड दिखाकर वह भी बैठ गई,,,,, अब तक जो खड़ी थी वह भी धीरे से बैठ गई अब इस तरह से दो औरतों की गांड सूरज के ठीक सामने थी और तीसरी सामने बैठी हुई थी और इतनी दूर से उसका कुछ भी नजर नहीं आ रहा था क्योंकि वहां पर बड़ी-बड़ी घास उगी हुई थी,,,, और वह औरत बोली,,,,)

बेटा है तो क्या हो गया,,,, एक बार अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी गांड दिखाना फिर कहना कि तुम्हारा बेटा अपनी आंखें बंद कर लिया या आंखें फाड़ कर देखने लगा,,,,,। भाभी इस दुनिया में सब मर्द एक जैसे ही होते हैं अगर उनकी आंखों के सामने उनकी मां बहन भी कपड़े उतार कर नंगी हो जाए तो उनके खूबसूरत बदन को देखने से वह इनकार नहीं कर पाएंगा,,,,।,,, इसीलिए कहती हूं भाभी अगर मेरी बात पर यकीन ना आए तो बस एक बार,,,, अपने बेटे के सामने अनजान बनते हुए कपड़े उतार कर देखना तुम्हारी नंगी गांड तुम्हारा नंगा बदन देखकर ना उसका लंड खड़ा हो जाए तो मेरा नाम बदल देना,,,,,।

(पड़ोस वाली औरत की बात सुनकर जहां पर सूरज के तन बदन में आग लग रही थी क्योंकि वह जानता था कि उसकी पड़ोसन जो कुछ भी कह रही है उसमें सत प्रतिशत सच्चाई है,,,, क्योंकि वह जानता था कि अगर उसकी पड़ोसन के कहे अनुसार उसकी मां अपने कपड़े उतार कर खड़ी हो जाएगी तो सच में उसका लंड खड़ा हो जाएगा,,,,।
 
वहीं दूसरी तरफ सूरज का जिक्र आते ही सोनू की चाची उस पल को याद करने लगी जिस पल वह भी घास का बड़ा सा गट्ठर सर पर उठाकर लाइ थी और उसकी मदद करने के लिए सोनू को बोली थी लेकिन सोनू से वजनदार घास का ढेर उठा नहीं और सूरज वाजद्दर घास को उठाने लगा जिसमें खुद सोनू की चाची उसकी मदद करने लगी और सोनू की चाची का हाथ सूरज पकड़ लिया था उसे पर सोनू की चाची पूरी तरह से मदहोश हो गई थी मस्त हो गई थी उस पल सोनू की चाची सूरज की आंखों में डूबने लगी थी,,,,

और दूसरी तरफ जिस तरह से उसकी पड़ोस वाली औरत सूरज का जिक्र कर रही थी सुनैना को तुरंत वह घटना याद आ गई,,, जब खुशी के मारे उसने अपने बेटे को गले लगाई थी और गले लगाने की वजह से उसके बेटे का लंड खड़ा हो गया था और सीधे उसकी बुर पर दस्तक दे रहा था,,, उस घटना को याद करके सुनैना को अपने पड़ोस वाली औरत की बातों पर विश्वास हो गया,,, उसे यकीन हो गया कि दुनिया के सब मर्द एक जैसे ही होते हैं,,,

पड़ोस वाली औरत की बात सुनकर सुनैना बोली,,,, चल रहने दे,,, नहीं तो तु तो यह कहेगी की मुझे सूरज से चुदवा लेना चाहिए,,,,।

(इतना सुनते ही सूरज की हालत एकदम से खराब हो गई उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई उसके कानों में रस घोल रहा हो,,, वह पूरी तरह से मस्त हो गया था,,, एक तो उसे अपनी मां पर विश्वास नहीं था कि वह इस तरह से किसी गंदे शब्द का प्रयोग करेगी और वह भी उसमें उसका नाम जोड़कर,,,,, इसीलिए तो यह सुनने में वह पूरी तरह से मदहोश हो गया था,,,,, उसे अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं हो रहा था,,, और वह धीरे से अपना पैजामा नीचे करके अपने लंड को बाहर निकाल लिया और तीनों औरतों को देखकर उनकी नंगी गांड को देखकर उनकी अश्लील बातों को सुनकर अपने लंड को धीरे-धीरे हिलाना शुरू कर दिया,,, सुनैना की बात सुनकर,,,, वह औरत एकदम से उत्साहित होते हुए बोली,,,)

हां बिल्कुल भाभी मैं भी यही कहना चाह रही थी सूरज को देखते हो ना कितना गठीला बदन है उसका लंबा खट्टा खट्टा है उसका लंड जरूर एकदम गधे के जैसा लंबा और मोटा होगा,,,, एक बार बुर में जाएगा तो पानी निकालने के बाद ही निकलेगा बाहर,,,,।

(उसे औरत की बात सुनकर सुनैना की खुद की हालत खराब हो रही थी उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में से पेशाब तो निकल ही रहा था साथ में मदन रस भी निकल रहा था क्योंकि जैसा वह औरत बोलती थी उसे तरह की कल्पना सुनैना करने लगती थी,,,, और सूरज उसे औरत की बात सुनकर मन ही मन उसे धन्यवाद कर रहा था क्योंकि वहां उसकी मां को अपने ही बेटे के साथ हम बिस्तर होने का रास्ता दिखा रही थी,,,, उस औरत की बात सुनकर,,, सोनू की चाची बोली,,,,)

अच्छा मेरी चुदक्कड़ रानी तू कभी कह रही है की भाभी को अपने बेटे से चुदवा लेना चाहिए मुझे कह रही है कि अपने भतीजे से चुदवा लेना चाहिए,,, लेकिन क्या तू अपने भतीजे से चुदवाई यह तो तूने बताई ही नहीं,,,।

अरे यही तो बताने जा रही हूं और वैसे भी भाभी सोनू से तेरी प्यास बुझने वाली नहीं है तेरा गदराया बदन देखकर,,, तेरे लिए सूरज ही ठीक है,,,।

अरे बाबा तुम दोनों बारी-बारी से चुदवा लेना मेरे बेटे से,,,बस,,,, लेकिन तू यह तो बता फिर क्या हुआ,,,,।

(सूरज देख रहा था कि उसकी मां आगे की बात सुनने के लिए बहुत उत्सुक नजर आ रही थी और उन तीनों को देखकर उनकी बातों पर सुनकर सूरज की हालत खराब हो रही थी वह अपने लंड को मुठिया रहा था,,,,)

अरे फिर क्या भाभी मेरे भतीजे की हरकत की वजह से मुझे भी मजा आने लगा,,,, और एक दिन में नहा रही थी घर पर ही और वह चोरी से मुझे नहाते हुए देख रहा था मुझे मालूम था कि वह मुझे देख रहा है इसलिए मैं जानबूझकर अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर नहा रही थी और मुझे नंगी देखकर तो उसकी हालत खराब हो गई और उसने भी अपना लंड बाहर निकाल कर हिलाना शुरू कर दिया,,,, मौका देखकर मैं उसका हाथ पकड़ लिया और उसे एकदम से दीवार की औट से बाहर खींच ली,,, और जब मेरी नजर उसके लंड पर पड़ी तो मेरे तो होश उड़ गए,,, पहली बार में इतना मोटा और लंबा लंड देख रही थी मेरी तो बुर पानी पानी होने लगी,,,,।

फिर क्या करी,,,,?(सुनैना उत्साहित होते हुए बोली उसे उसकी बात में बहुत ही मजा आ रहा था यहां तक कि उसे अपने बदन में उत्तेजना का अनुभव हो रहा था)

फिर क्या मैं उसे रंगे हाथ पकड़ ली थी मैं उसके साथ मनमानी कर लेना चाहती थी इसलिए मैं उससे बोली,,,,।

यह क्या कर रहा है तू अपनी चाची को देखकर इस तरह से कोई हरकत करता है क्या,,,,?

(तब वह घबराते हुए बोला,,,)

कुछ नहीं चाची तुम बहुत खूबसूरत हो इसलिए ना चाहते हुए भी मुझसे यह हरकत हो जाती है,,,।

इसका मतलब कि तू अपनी चाची को ही चोदना चाहता है ना,,,,।

(मेरी बात सुनकर वह हा में सिर हिला दिया,,, क्या करूं भाभी उसका लंड देखकर मैं खुद पागल हो गई थी और मैं न जाने कौन सी मदहोशी में थी कि सीधे उसका लंड पर हाथ रख दे जो एकदम गरम था एकदम मोटा लंबा और जानती थी कि अगर उसका लंड एक बार मेरी बुर में गया तुमने जिंदगी भर के लिए उसकी गुलाम हो जाऊंगी,,, और मैं उसके लंड को हिलाते हुए बोली,,,)

चोदेगा मुझे,,,,

(वह कुछ बोला नहीं बस हां मैं से हिला दिया मैं जानती थी वह इनकार नहीं कर सकता और मैं उसका हाथ पकड़ कर घुसल खाने में खींच ली लेकिन मेरी किस्मत खराब थी कि इस समय उसके चाचा आ गए और हम दोनों को गुसलखाने में देख ली मैं एकदम घबरा गई डर गई पर मैंने सारा ईल्जाम अपने भतीजे पर ही थोप दिया,,, उसके चाचा उस पर इतना गुस्सा हुए की दोनों भाइयों में झगड़ा हो गया और वह अपने बेटे को लेकर अपने परिवार को लेकर दूसरे गांव में जाकर बस गया,,,,।

बाप रे इतना कुछ हो गया था तुम दोनों में लेकिन यह तूने अच्छा नहीं की,,,,(सुनैना सोच करते हुए बोली)

क्या अच्छा नहीं की भाभी,,

तेरी भी गलती थी लेकिन तूने सारा एग्जाम उसे पर लगा दी जिसकी वजह से उस बेचारे को गांव छोड़ना पड़ा,,,।

अरे भाभी इस बात का अफसोस तो मुझे भी है लेकिन क्या करती रही हाथ जो पकड़ी गई थी अगर उसे पर एग्जाम ना लगती तो उसके चाचा तो मेरी जान ही ले लेते,,,, वैसे सही है भाभी उसे दिन अगर उसका लंड मेरी बुर में चला गया होता तो मेरी तो जिंदगी बन गई होती और हां जब तक पड़े न जाओ तब तक यह काम करते ही रहना चाहिए बहुत मजा आता है इसमें,,,,,,,,।

भाभी यह तो पागल हो गई है,,,(सोनू की चाची सुनैना से बोली तो सुनैना उसकी बात सुनकर बोली)

ऐसी बात नहीं है यह जो भी कह रही है उसमें सच्चाई है और मुझे तो लगता है शायद हर घर में ऐसा होता ही होगा तो भी अपनी सोनू पर नजर रखना कहीं ऐसा ना हो कि वह तुझ पर नजर रखता हो तुझे देख कर अपना हीलाता हो,,,,।

तब तो भाभी तुम्हें भी सूरज पर नजर रखना होगा सूरज तो एकदम सांड की तरह है कहीं ऐसा ना हो कि तुम्हारी नंगी गांड देखकर तुम पर ही टूट पड़े,,, और वैसे भी भाभी मुझे पूरा यकीन है कि अगर ऐसा कुछ हो गया तुम्हारे और सूरज के बीच में तो सूरज तुम्हें मत कर देना जिंदगी का एहसास सुख देगा कभी पाई नहीं होगी हर एक धक्का जबरदस्त होगा,,,।

धत्,,, बेशर्म,,,, मैं तो कहती हूं कि तू ही ले जा सूरज को अपने घर दिन रात उससे चुदवा,,,, उसका भी भला कर और वह तेरा भला कर देगा,,,, तुझे मां बनने का सुख देगा,,,,।

क्या भाभी तुम भी,,,

अरे सच कह रही हूं सोनू की चाची,,,, मुझे पूरा यकीन है कि मेरे बेटे से चुदवा कर तू मां जरूर बन जाएगी,,,।

(अपनी मां की तरह की बातें सुनकर सूरज के लंड में एकदम से ताव आ गया क्योंकि इसकी मां खुद सोनू की चाची को उसे चुदवाने के लिए बोल रही थी,, तीनों की गंदी बातों को सुनकर उसे पूरा यकीन हो गया था कि मर्दों की तरह औरतें भी आपस में इसी तरह की गंदी बातें करती हैं,,,, तीनों के बारे में सोचकर सूरज जोर-जोर से अपने लंड को हिला रहा था,,, और तीनों को भी यहां पर आए काफी देर हो चुकी थी इसलिए तीनों लोटे में से पानी लेकर अपनी गांड धोने लगी और धीरे से खड़ी हो गई सूरज अपनी मां की नंगी गांड को देखकर सोनू की चाची की नंगी गांड को देखकर जोर जोर से अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते उसके लंड से वीर्य का फवारा फुटा और वह गहरी सांस लेने लगा,,,,,।

तीनों औरतें वापस गांव की तरफ जा रही थी सूरज अपने पजामी को ऊपर करके कुछ देर तक वहीं बैठ रहा तो फिर जब वह तीनों औरतें उसकी आंख से ओझल हो गई तो अभी धीरे से उठकर खड़ा हुआ और घास के ढेर को अपने सर पर रखकर गांव की तरफ चलने लगा।)

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घास लेकर लौटते समय मैदान में जो कुछ भी हुआ था उसे अपनी आंखों से देखकर सूरज की तो सीटी पीटी गुम हो गई थी,,,। क्योंकि उसने अपनी आंखों से एक साथ तीन-तीन औरतों को सौच करते हुए देखा था,, उन तीन औरतों में एक उसकी मां भी थी जिसकी नंगी गोरी गांड देख कर उसका लंड एकदम से खड़ा हो गया था,,,, यह उसके जीवन का पहला मौका था जब उसने एक साथ तीन-तीन औरतों को इस अवस्था में देखा था,,,। वैसे तो सूरज कभी भी औरतों को इस स्थिति में देखना पसंद नहीं करता था और ना ही कभी देखा था लेकिन जिस दिन से उसके दोस्त सोनू ने उसे अपनी ही चाची की मद-मस्त कर देने वाली गांड को दिखाया था,,, और उसी दिन से सूरज का औरतों को देखने का नजरिया पूरी तरह से बदल गया था,,,।

अब हालात इस तरह के बन गए थे कि वह अपने ही घर पर अपनी बहन और अपनी मां को गंदी नजर से देखना शुरू कर दिया था नतीजन मैदान में वह अपनी मां को और बाकी दोनों औरतों को सौच करते हुए देख रहा था ,, और उन तीनों की बातों को भी सुन रहा था उन बातों के केंद्र में सोनू और वह खुद था और सोनू और उसमें जिस तरह की तुलना हो रही थी सोनू उसमें बिल्कुल भी खड़ा नहीं उतर रहा था सूरज का पलड़ा गठीले बदन को देखकर भारी नजर आ रहा था,,,, सूरज उन तीनों औरतों की बातों को सुनकर पूरी तरह से आश्चर्यचकित हो गया था उसे यकीन नहीं हो रहा था की औरतें बिस्तर की बातें करती होगी खास करके उसे इस बात से और अचंभा हो रहा था कि उन तीनों औरतों में उसकी मां भी थी जो गंदी बातें कर रही थी,,,,।

उन तीनों की बातों को सुनकर सूरज समझ गया था कि सोनू की चाची मां बनने के लिए तड़प रही है लेकिन सोनू का चाचा उसे मां बनाने में सक्षम नहीं है यहां तक कि उसे शरीर सुख देने में भी सक्षम नहीं है, यह बात उसे अपनी ही पड़ोस वाली औरत से सुनने को मिली थी,,,,। उसे औरत की बात को सुनकर सूरज इतना तो समझ गया था कि औरत को खुश करने के लिए मर्दों का गठीला बदन और उसका मर्दाना अंग दोनों सांड की तरह होना चाहिए जैसा कि उसका खुद का था और बात ही बात में उसे पड़ोस वाली औरत ने यह भी कहा था कि अगर उसे मन बना है तो सूरज से चुदवा ले या सोनू से,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि सोनू की चाची सोनू से कभी भी नहीं चुदवाने वाली,, क्योंकि सोनू को वह हमेशा डांटती हई रहती थी क्योंकि सोनू कभी भी उसके चाचा के मां के मुताबिक काम नहीं करता था और इसीलिए वह भी सोचती हो कि कि जब वह छोटा-मोटा काम नहीं कर पता तो भला उसे चोदकर मां कैसे बनाएगा,,,,।

उन तीनों की बातों को सुनकर सूरज को अपना भविष्य उज्जवल नजर आ रहा था,,,।,,, समझ गया था कि थोड़ी सी कोशिश करने पर सोनू की चाची के साथ-साथ उसकी पड़ोस वाली औरत की उसके नीचे आने के लिए तैयार हो जाएगी और अगर सही किस्मत रहे तो उसकी मां भी उसके सामने अपनी दोनों टांगें खोल देगी,,,, यही बात उसे पूरी तरह से उत्तेजित कर गई थी जिसके चलते हम तीनों औरतों की अश्लील बातों को सुनकर उनकी नंगी गांड देखकर सूरज से रहा नहीं गया था और वह अपनी मां के साथ-साथ दोनों औरतों की नंगी गांड देखकर अपने लंड को अपने पजामे से बाहर निकालने के लिए मजबूर हो गया था,,, और उन तीनों औरतों के पिछवाड़े को देखकर अपने हाथों से अपने लंड को निकाल कर अपने लंड की गर्मी को शांत किया,,,।

उन तीनों को वहां से निकल जाने के बाद कुछ देर बाद सूरज भी अपने घर की तरफ चल दिया,,,,,,, रात हो चुकी थी उसकी मां खाना बना रही थी सूरज घास का ढेर उसके उचित स्थान पर रखकर सीधे अपनी मां के पास पहुंच गया वह जानता था कि अभी खाना नहीं बना होगा लेकिन वह अपनी मां से बातें करना चाहता था अपनी मां खूबसूरत चेहरे को देखना चाहता था उसकी गोलाईयों को झांकना चाहता था,,, इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,।

खाना तैयार हो गया क्या मां,,,,।

नहीं अभी समय है क्यों आज तुझे ज्यादा भूख लग गई है क्या,,,,?(गरम-गरम रोटी को तवे पर रखते हुए बोली,,,, और उसे गरम रोटी को देखकर सूरज अपने मन में तुरंत सोचने लगा कि उसकी मां की भी तवे की तरह एकदम गरम होगी और रोटी की तरह चुदवासी होने पर फुल जाती होगी,,,, कितना गजब लगता होगा उसकी बुर देखकर,,,, सूरज को इस तरह से ख्यालों में खोया देखकर सुनैना फिर बोली,,,)

क्या हुआ क्या सोच रहा है,,,?

कककक,,, कुछ तो नहीं मैं तो यह कह रहा था कि आज सच में मुझे बड़ी जोरों की भूख लगी है,,,,।

क्यों खेत में ज्यादा मेहनत करना पड़ गया क्या,,,?

हां मां आज इतना सारा खास काट कर लाया हूं कि तीन-चार दिन तक घास लाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी,,,,।

अरे कितना सारा घास काट कर लाया है और तूने इतना सारा घास उठा कैसे लिया,,,,।(सुनैना अपने बेटे की तरफ देखकर आश्चर्य जताते हुए बोली,,क्योंकि वह जानती थी कि ज्यादा से ज्यादा सूरज कितना बोझ उठा पाएगा,,,,)

अरे मा अभी तो अंधेरा हो गया है सुबह देखना तब तुम ही सोच में पड़ जाओगी,,,,,,।

अरे ज्यादा से ज्यादा कितना उठा लेगा दो टोकरी उससे ज्यादा कहा उठा पता है तू,,,,।

अरे मां,,, अब मैं पहले वाला सूरज नहीं हूं,, पूरी तरह से मर्द बन गया हूं,,,,,।

(अपने बेटे के मुंह से मर्द शब्द सुनते ही सुनैना के तन बदन में हलचल सिमटने लगी और उसे उसे दिन वाली घटना याद आ गई जब उसे खुशी के मारे गले लगाई थी,, इस समय अपने बेटे का मर्द होने का एहसास उसने एकदम साफ तौर पर अपनी दोनों टांगों के बीच महसूस की थी,,,,, और पल भर में उसे अभी-अभी मैदान में सोच करने वाली घटना याद आती जब उसकी पड़ोस वाली औरत ही उसे भी अपने बेटे के साथ संबंध बनाने के लिए बोल रही थी और यह भी कह रही थी कि सूरज कितना गठीले बदन वाला है बहुत मजा देगा,,,,,,, सुनैना कुछ देर के लिए ख्यालों में खो गई थी तो इस बार सूरज उसे होश में लाते हुए बोला,,,,)

अरे क्या सोच रही हो मुझ पर विश्वास नहीं है क्या,,,?

नहीं नहीं अब तो तुझ पर विश्वास करना ही होगा,,,, क्योंकि अब तू तो रोजगारी भी करने लगा है बड़ा हो गया है,,,,।

बड़ा नहीं पूरा मर्द हो गया हूं,,,,।(सूरज मर्द शब्द का उपयोग अपनी मां के सामने बार-बार जानबूझकर कर रहा था,,,, क्योंकि बड़ा हो गया हूं इसका मतलब सामान्य होता है लेकिन पूरा मर्द हो गया हम इसका मतलब एक औरत को खुश करने लायक हो गया हूं ऐसा वह समझता था और ऐसा था अभी तभी तो जब-जब सूरज के मुंह से मर्द शब्द सुनती थी सुनैना के तन बदन में आग लग जाती थी,,)

हां हां पूरा मर्द हो गया है लेकिन यह तो समय आएगा तभी पता चलेगा,,,,,(सुनैना के मुंह से भी अचानक यह शब्द निकल गया उसके कहने का मतलब यह था कि जब कभी मौका मिलेगा तो वह भी आजमा लेगी कि उसका बेटा कितना मर्द हो गया है,,,। अपनी मां की बात सुनकर सूरज बोला,,,)

कैसा समय इसमें समय क्या देखना आजमाना है तो अभी आजमा लो,,,,,,(सूरज अपनी मां से दो अर्थ वाली बात कर रहा था लेकिन एकदम सहज होकर ताकि उसकी मां को बिल्कुल भी सपना हो कि वह किस बारे में बात कर रहा था लेकिन उसकी मां उसके कहने के मतलब को अपने तरीके से ले रही थी इसलिए उसकी बात सुनकर उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल मचने लगी,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसे क्या हो रहा है यह सब सौच करते समय की बात का ही नतीजा था,,,, जो उसके मन में अपने ही बेटे को लेकर गंदी-गंदी भावनाएं पैदा हो रही थी,,,,, फिर भी अपने आप को संभालते हुए सुनैना अपने बेटे से नजर मिलाई बिना ही तवे पर रोटी को पलटते हुए बोली,,, )

अभी ईस समय आजमाने जैसा कुछ भी नहीं है,,,, जब आजमाना होगा तब आजमा लूंगी वैसे भी तू कहां भागा जा रहा है,,,।

(अपनी मां की बातें सुनकर सूरज अपने मन में ही बोला कल पर क्यों छोड़ती हो मां चलो अभी आजमालो चलो अपने कमरे में खटिया पर तुम्हारा बदन दर्द न करने लगे तो बोलना ऐसी चुदाई करूंगा की खटिया टूट जाएगी और तुम्हारी बुर का भोसड़ा बन जाएगा,,,, सूरज अपने मन में ही इस तरह की बातों को सोचकर एकदम से गर्म हो गया और उसका लंड एकदम से खड़ा हो गया वह जिस तरह से बैठा था उसके पजामे के आगे वाले भाग में,,,, ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे सूरज कुछ भरा हो,,, और अनजाने में ही सुनैना की नजर अपने बेटे की पजामे के आगे वाले भाग पर चली गई,,, और जैसे ही पजामे के आगे फुले वाले भाग को देखी,,, सुनैना के तो होश उड़ गई उसके बदन में मीठी-मीठी गुदगुदी होने लगी,,, उसे वाकई में एहसास होने लगा कि वाकई में उसका बेटा मर्द हो गया है,,,, लेकिन जल्द ही उसने अपनी नजर को वहां से हटा ली,,, सुनैना की हालत खराब हो रही थी,,,,,,, सुनैना का दिल जोरो से धड़क रहा था अपने बेटे की उपस्थिति में उसे पहली बार इस तरह का एहसास हो रहा था और यह सब किस लिए हो रहा था,,, उसे अच्छी तरह से समझ में आ रहा था,,,,,।

इसी बीच आटा गुंथने और तवे पर पकने में उसके साड़ी का पल्लू कब उसके कंधे से नीचे गिर गया उसे पता ही नहीं चला और साड़ी का पल्लू नीचे गिरते ही उसकी भारी भरकम चूचियां एकदम से नजर आने लगी जिस पर सूरज की नजर पडते ही उसकी आंखों में वासना की चमक दिखाई देने लगी,,, अजीब से असमंजस में पड़ी सुनैना को इस बात का भान हीं नहीं था कि उसके साड़ी का पल्लू उसके कंधे से नीचे गिर गया है,,,, और ईसी का फायदा उठाते हुए सूरज अपनी आंखों को सेंक रहा था,,,, चूल्हे के सामने खाना बनाने से और गर्मी का मौसम होने की वजह से पसीने की बूंदे उसके माथे से होते हुए मोती के दाने की तरह उसके बदन से लुढ़कते हुए सीधे उसकी चूचियों के बीच की पतली दरार में प्रवेश कर रही थी,,,। यह नजारा ऐसा लग रहा था मानों जैसे गहरी खाई में झरना का पानी गिर रहा हो,,, और इससे कामुक नजारे को देखकर सूरज को इस बात का डर था की कही उसके लंड से झरना ना बहने लगे,,,,।

कुछ देर के लिए दोनों के बीच वार्तालाप एकदम से बंद हो चुकी थी क्योंकि सूरज अपनी मां की चूचियों को ताड़ने में लगा हुआ था,,, गनीमत इस बात का था कि उसकी मां की चूचियां ब्लाउज में कह देती अगर ब्लाउज के बाहर आजाद होती तो शायद सूरज अपनी मां के दोनों कबूतरों को अपनी हथेलियों में दबोच लेता,,, इसी बीच सुनैना की नजर जैसे ही अपनी बेटी पर पड़ी तो उसकी नजर के सिधान को देखकर वह एकदम से चौंक गई,,, तुरंत उसकी नजर अपनी छतिया पर गई तो उसके होश उड़ गए उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसके साड़ी का पल्लू उसके कंधे से नीचे गिर गया है और उसकी भारी भरकम खरबूजा जैसी चुचीया एकदम से उजागर हो गई है,, और उसकी चूचियों को उसका ही बेटा प्यासी नजरों से देख रहा है,,,, सुनैना तो एकदम से बेहाल हो गई अपने बेटे के नजरिया को देखकर वह अंदर ही अंदर पानी पानी हो रही थी उसे नहीं मालूम था कि उसका बेटा वाकई में इतना बड़ा हो गया है कि खुद की मां को प्यासी नजरों से देख रहा है,,,,।
 
सुनैना को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें चूल्हे की आग को वह अपने हाथों से ठीक कर रही थी क्योंकि चूल्हे में आग कमजोर पड़ती जा रही थी लेकिन उसकी दोनों टांगों के बीच की आग भढ़कती जा रही थी,,,, सुनैना को साफ महसूस हो रहा था कि उसकी बुर पानी छोड़ रही थी,,, और यह एहसास उसे एकदम से सोचने पर मजबूर कर दे रहा था कि यह उसे क्या हो रहा है,,, ऐसा तो पहले कभी नहीं हुआ था और वह भी अपने बेटे की मौजूदगी में और अपने बेटे के कारण ही वह क्यों इतनी उत्तेजित हो रही है क्यों इतनी शर्मिंदगी महसूस हो रही है क्यों,,, उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल मची हुई है,,,,। वह अपनी साड़ी के पल्लु को ठीक कर लेना चाहती थी लेकिन ऐसा करने में उसे शर्म महसूस हो रही थी,,, लेकिन इसी तरह से बैठे रहना भी उचित नहीं था,,,, इसी बीच उसकी नजर एक बार फिर से अपने बेटे की पजामे के आगे वाले भाग पर गई तो वह फिर से मदहोश होने लगी,,, क्योंकि वह भाग और भी ज्यादा फूलने लगा था और यह देखकर तो उसके होश उड़े जा रहे थे क्योंकि वह अनुभवी थी वह जानती थी कि उत्तेजित होने पर मर्द का पजामा कितना ऊपर उठता है लेकिन उसके बेटे का तो ऐसा लग रहा था की बेल को बांधने वाला खूंटा हो गया,,, इसलिए सुनैना को समझ में नहीं आ रहा था कि उसके बेटे का लंड कितना मोटा और तगड़ा और लंबा है,,,,।

उत्तेजना के हमारे सुनैना की सांस ऊपर नीचे हो रही थी और उसी के साथ ही उसकी भारी भरकम चूंचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी जो कि उसे और भी ज्यादा शर्मिंदगी महसूस करवा रही थी क्योंकि उसकी उठाती बैठी थी चूचियों को देखकर उसके बेटे की हालत और ज्यादा खराब हो रही थी,,,, वह इस स्थिति से निकलना चाहती थी लेकिन कैसे उसे समझ में नहीं आ रहा था कि तभी उसने सब्जी में डालने के लिए पानी का ध्यान आ गया और वह अपने बेटे से बोली,,,।

सूरज जरा एक लोटा पानी लाना तो सब्जी में डालना है,,,,।

ठीक है मां अभी लाता हूं,,,,(सूरज बेमन से बोला क्योंकि वहां से हटने का मन उसका बिल्कुल भी नहीं था,,, क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसकी मां की चूचियां थी जो बड़ी मादक तरीके से ऊपर नीचे हो रही थी,,,, सूरज वहां से पानी लेने चला गया और इसी मौके का फायदा उठाते हुए सुनैना अपनी साड़ी के पल्लू को एकदम से ठीक कर ली एक तरह से अपनी बेटी से घबरा गई थी उसकी नजरिया को देखकर अंदर ही अंदर उसे डर लगने लगा था और वह भी इस बात का एहसास करने लगी थी कि वाकई में उसकी चुचीया,, ब्लाउज के अंदर का देती वरना जिस तरह से उसका बेटा प्यासी आंखों से देख रहा था वह जरूर उसकी चूचियों को अपने हाथ में भर लेता,,,।

थोड़ी ही देर में सूरज पानी भरकर ले आया और उसकी मां सब्जी में डालकर उसे अच्छे से पकाने लगी और थोड़ी देर में भोजन तैयार हो गया था,,,, भोजन तैयार होने पर वह खाना परोसने लगी और आवाज देकर रानी को बुलाई लेकिन रानी घर के बाहर अपनी सहेलियों से बातें कर रही थी इसलिए वह जोर से आवाज थोड़ी देर में आई,,,, तब तक सुनैना अपने बेटे के लिए भोजन परोस दी थी,,, सुनैना का पति भोला घर पर आ चुका था लेकिन अभी भी उसका ठिकाना नहीं था कभी-कभी आधी रात को आता था कभी-कभी आता ही नहीं था इसलिए वह उसका खाना नहीं परोसी और रानी का इंतजार करने लगी,,,।

तुम भी खा लो मां,,,,

नहीं तो खा ले मैं रानी के साथ खा लूंगी वरना उसे अकेले खाना पड़ेगा,,,।

ठीक है,,,(और ऐसा कहकर सूरज खाना खाने लगा,,,, सूरज बार-बार अपनी मां की तरफ देख ले रहा था लेकिन उसकी मां इस पर अपने कपड़ों को दुरुस्त करके बैठी हुई थी हालांकि साड़ी का पल्लू ठीक करने के बाद भी अपनी चूचियों की गोलाइयों को छुपा नहीं सकती थी क्योंकि उसकी चूचियां इतनी ज्यादा उन्नत और उभरी हुई थी की साड़ी के अंदर से भी अपने उभार को बखूबी दिखा रही थी,,,,,, तभी रोटी तोड़कर अपने मुंह में डालते हुए सूरज अपनी मां से बोला,,)

मां तवे पर रोटी क्यों फूल जाती है,,?(सूरज शरारत भरी अंदाज में बोला था रोटी के फूल ने से इसका मतलब साफ था वह अपनी मां की बुर के बारे में बात कर रहा था लेकिन सुनैना नहीं जानती थी कि उसका बेटा किस उद्देश्य से इस तरह की बात कर रहा है इसलिए वह एकदम सहज होते हुए बोली,,)

तभी पर जब रोटी गरम होती है तो अपने आप ही फुल जाती है,,,,।

(इस बात को कहने में उसे एकदम से अपनी दोनों टांगों के बीच की स्थिति का ख्याल आ गया,,, वह एकदम से मदहोश होने लगी और अपने आप से ही बोली यही हाल तो उसकी बुर का भी होता है जब वह गर्म होती है तो उसकी बुर भी तवे पर रखी हुई रोटी की तरह फूल जाती है,,,, और यह ख्याल उसके मन में आते हैं उसकी बुर से पानी टपकने लगा और वह अपने आप से ही बोली,,, यह मुझे क्या हो रहा है मेरे मन में इस तरह के ख्याल क्यों आ रहे है,,, और वह भी अपने बेटे को लेकर,,, नहीं नहीं ऐसा नहीं होना चाहिए यह पाप है यह गलत है,,,,, और सूरज अपनी मां का जवाब सुनकर मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रहा था क्योंकि वह जानता था कि वह किस बारे में पूछा है,,,,,, थोड़ी देर में खाना खाकर सूरज कुछ दिन के लिए बाहर डालने के लिए चला गया था और इसी बीच रानी भी घर में आकर अपनी मां के साथ खाना खा चुकी थी घर का काम खत्म करके,,, अपने कमरे में सोने चली गई थी,,,।

लेकिन उसकी आंखों में नींद नहीं थी बार-बार उसे अपने बेटे का ख्याल आ रहा था उसके पजामे में बने हुए तंबू का ख्याल आ रहा था और जिस तरह वह उसकी चूचियों को देख रहा था उसे बारे में सोच कर तो उसकी बुर से पानी टपक रहा था,,,, कुल मिलाकर सुनैना का बुरा हाल था बार-बार वह अपनी बेटी का ख्याल अपने मन में न लाने की दुहाई देती थी लेकिन अपने मां के आगे मजबूर हो जाती थी,,, बार-बार उसके मन में उसके बेटे का ख्याल आ रहा था वह बार-बार करवट बदल रही थी और अपने पति को याद कर रही थी क्योंकि इस मादकता भरे चक्रव्यूह से इस समय उसका पति ही उसे बाहर निकाल सकता था उसकी चुदाई करके,,, लेकिन वह जानती थी कि उसका पति का कोई ठिकाना नहीं है आए भी या ना भी आए,,,,,।

अपनी बुर की प्यास से वह लाचार हो चुकी थी,,,। जब कोई रास्ता नजर नहीं आया तो मजबूरन उसे अपनी उंगली का सहारा लेना पड़ा और अपनी आंखों को बंद करके धीरे-धीरे अपनी साड़ी को अपनी गांड ऊपर उठकर कमर तक अपनी साड़ी को खींच दी और कमर के नीचे हो पूरी तरह से नंगी हो गई अपनी गुलाबी बुर को अपनी हथेली से रगड़ने लगी,,, धीरे-धीरे उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,, वह मदहोश हो रही थी बेकाबू हो रही थी,,,। और न जाने कैसा नशा उसके दिलों दिमाग पर छाया हुआ था कि कल्पना ने उसे अपना बेटा नजर आने लगा जो उसकी प्यास को देखकर उसे पर तरस खा रहा था,,, ।

अपनी प्यासी बुर को लगातार मसलते हुए वह अपने बेटे की तरफ देख रही थी,,, उसका बेटा भी अपनी मां की स्थिति से वाकिफ हो चुका था इसलिए बिना कुछ बोले अपनी पजामा को उतार कर एकदम नंगा हो गया और अपने खड़े लंड को हाथ में लेकर हिलने लगा,,,, कल्पना में सुनैना अपने हाथ की उंगली से इशारा करके अपने बेटे को अपने पास बुलाने लगी,,, और सूरज अपने लंड को हिलाते हुए अपनी मां के पास पहुंच गया और धीरे से अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आ गया अब कुछ भी कहने की जरूरत नहीं थी आंखों को बंद करके सुनैना पूरी तरह से कल्पना की दुनिया में खो चुकी थी और वह कल्पना में देख रही थी कि उसका बेटा उसके गुलाबी छेंद पर अपना मोटा सुपाड़ा रखकर अपनी कमर को आगे की तरफ खेलने लगा और इसी बीच उसकी उंगली उसकी बुर में प्रवेश करने लगी और जैसे-जैसे वह उंगली को अंदर बाहर कर रही थी वैसे वैसे उसका बेटा कल्पना में अपनी कमर हिला कर अपनी मां को चोद रहा था देखते ही देखते उसके धक्के एकदम तेज हो गए,,

और वास्तविक जीवन में सुनैना की उंगली बड़ी तेजी से अंदर बाहर होने लगी देखते ही देखते सूरज कल्पना में अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर जोर-जोर से धक्के लगना शुरू कर दिया और पूरे कमरे में सुनैना की सिसकारी की आवाज गुंजने लगी,,, और फिर देखते ही देखते उसका पानी निकल गया,,,, जब उसकी आंख खुली तो खटिया पर उसका बेटा नहीं था वह अकेले ही थी और उसकी उंगलि बुर में घुसी हुई थी,,, अपनी ना समझी और चाहत पर उसे हंसी आ गई लेकिन जो कुछ भी उसने की थी उसे लेकर उसे पछतावा होने लगा और आइंदा ऐसी गलती न करने की कसम खाकर वह करवट लेकर सो गई,,,।

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