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अपडेट-16
सात्विक अपनी मंजिल की तरफ बड़ी तेजी से चले जा रहा था, जिस जगह उसे पहुंचना था वो जगह लगभग 2 दिन की दुरी पैर थी, लेकिन आज सात्विक की चल में बहुत तेजी थी किसी साधारण इंसान से लगभग 4 गुना तेजी से सात्विक चल रहा था, वही हल भौमिक जी का भी था वो भी लगभग उसी रफ़्तार से महल की तरफ जा रहे थे,
सात्विक ने 2 दिन का सफर कुछ hi घंटो में क्र लिया था, वो अपनी मजिल की तरफ जाने में इतना खोया हुआ था की उसे अहसास hi नहीं हुआ वो कितनी रफ़्तार से जा रहा ह, लेकिन भौमिक को अपनी रफ़्तार का अहसास हो गया था, वो एक पल रुके और अनुमान लगाया की वो कहा पहुंच चुके हैं, उन्हें बड़ी हैरत हुई की इतनी जल्दी वो यहाँ तक कैसे आ सकते हैं, न hi उन्हें कोई भूक प्यास थी न hi कोई थकन थी, भौमिक जी समझ गए ये उसी रौशनी की वजह से हो रहा ह, उनके अंदर कुछ बदलाव आ गए हैं लेकिन वो क्या बदलाव हैं पूरी तरह नहीं पता,
उधर सात्विक उस पहाड़ के करीब पहुंच गया जहा वो जंगली लोग रहते थे, यही जगह बताई थी तांत्रिक गुरु ने,
सात्विक पहाड़ के पास खड़ा उसे देखे जा रहा था, उसे कुछ अलग नहीं दिख रहा था, वो पहाड़ी के उप्पेर चढ़ने लगा, और जैसे hi वो थोड़ा उप्पेर गया तो उसे उन जंगली लोगो ने घेर लिया,
एक आदमी- बाबा देख हमारा भोजन आ गया,
बूढ़ा आदमी- ये मुझे कुछ अलग लग रहा ह, इसके चेरे का तेज सबसे अलग ह, ये कोई साधारण इंसान नहीं लग रहा मुझे,
सात्विक- कोण हो तुम लोग,
बूढ़ा आदमी- हम कोण हैं ये तो तुम रहने दो, तुम बताओ तुम कोण हो और यहाँ आने की हिम्मत कैसे दिखाई,
सात्विक- कही जाने के लिए मुझे हिम्मत की जरुरत नहीं होती, खोल दो मुझे वर्ण सबको भसम कर दूंगा,
सभी उस पर है पड़े,
बूढ़ा आदमी- चलो रे आग जलाओ आज इसे हम भसम करेंगे,
यहाँ सात्विक को आग में भुनने की तैयारी की जाने लगी उधर रेवती देव से बात कर hi रही थी की वह कोई आ गया, रेवती एक दम घबरा गई और भाग के देव के पास परदे के पीछे चिप गई, घबराहट की वजह से वो भूल hi गई की देव बिलकुल नंगा ह,
कमरे में िन्दु आई थी, अब देव और फास गया था, रेवती के सामने कैसे वो सब करेगा, िन्दु को देख क्र रेवती और दर गई, वो देव से और चिपक गई, रेवती की जंघे देव के लुंड से रगड़ रही थी, देव के पास कोई और रास्ता नहीं था उसने रेवती को चुप रहने का इशारा किया और नंगा hi बहार आ गया, िन्दु उसे देख क्र मुस्कुरा पड़ी,
देव- आ गई आप,
िन्दु- कैसा लग रहा ह यहाँ,
देव- मुझे कब तक ऐसे रहना होगा,
िन्दु- जब तक हमारा दिल नहीं भर जाता, और मुझे लगता ह की कभी दिल भरेगा नहीं,
देव इस तरह से बात कर रहा था जैसे ये लगे की वो यहाँ मज़बूरी में फसा हुआ ह,
िन्दु- जल्दी करो जल्दी से मेरी फाड़ दो, फिर मुझे महाराज के पास जाना ह, उन्होंने एक सभा बुलाई ह,
िन्दु ने फटाफट अपने कपडे उतर दिए और नंगी हो गई, देव ने रेवती की तरफ देखते हुए दुखी सा मुँह बनाया, रेवती छुपी हुई ये सब देख रही थी, रेवती की सांसे फूलने लगी थी, उसके सामने उसकी सौतेली माँ िन्दु और उसका आधा अधूरा प्रेमी नंगे खड़े थे,
िन्दु आगे बढ़ी और देव के सामने बैठ गई और उसका लुंड मुँह में भर लिया, ये देख क्र तो रेवती का मुँह खुला रह गया, उसे अपनी आँखों पैर विश्वास नहीं हो रहा था, देव भी ऐसी जगह खड़ा था जहा से रेवती को सब कुछ साफ़ साफ़ दिखे,
िन्दु मजे से लुंड को चूस रही थी, कुछ देर चूसने के बाद िन्दु बिस्टेर पैर आ गई और अपनी टंगे फैला क्र लेट गई,
िन्दु- जल्दी से घुसा दो अपना ये लोढ़ा मेरी छूट में, कोशिश करना थोड़ा अंदर तक घुस जाये,
देव मुस्कुराया और अपना लुंड िन्दु की छूट पैर लगाया और धक्का मर दिया, िन्दु की चीख निकल गई, इधर रेवती की हालत ख़राब हो रही थी, उसके सामने हवस का नंगा नाच चल रहा था, एक तो वैसे hi वो आज कल बहुत गरम रहती थी जिसका कारन था रेणुका की काम उत्तेजना वर्धक दवाइया, जिससे रेवती गरम रहे और अपने बाप से चुद जाये, दवाइया तो असर क्र रही थी लेकिन किसी और मर्द के लिए,
देव िन्दु को छोड़ रहा था िन्दु लगातार चिलए जा रही थी, वही रेवती पूरी तरह गरम हो चुकी थी उसके हाथ उसकी चूचियों पैर पहच गए थे, और दूसरा हाथ उसकी छूट के उप्पेर, न जाने वो कब अपने अंगो से खेलने लगी थी, उभरती हुई जवानी जो पहले बार चुदाई देख रही थी वो भी दुनिया के सबसे खूबसूरत मर्द को छोड़ते हुए देख रही थी, इधर िन्दु चीखे मर मर क्र झाड़ रही थी, देव झड़ना चाहता था लेकिन िन्दु ज्यादा बर्दास्त नहीं क्र प् रही थी, एक लम्बी चुदाई के बाद िन्दु 4 बार झाड़ गई और देव ने भी अपना पूरा लावा िन्दु की छूट में भर दिया,
इधर अपनी छूट और चूचियों को रगड़ रगड़ क्र रेवती ने लाल क्र दिया था, इस बिच वो भी 3 बार झाड़ चुकी थी,
िन्दु- मजा आ गया जीवन में असली चुदाई का मजा मिला ह आज, तुम यहाँ आये ये हमारा सौभाग्य ह, ऐसा मर्द बड़ी किस्मत से मिलता ह, दुनिया में तुम्हारे जैसा मर्द शायद दूसरा कोई नहीं होगा,
देव- मैं तो गुलाम हु आपका,
िन्दु हसी और लड़खड़ाती हुई उठी और अपने कपडे पहनने लगी,
िन्दु- अभी चलती हु जल्दी hi आउंगी, उसके जाते hi देव बिस्टेर पैर लेट गया, िन्दु के जाने के बाद रेवती बहार निकल कर आई,
रेवती की आँखे लाल थी उसकी कपडे बयां कर रहे थे उसने अपने शरीर के साथ क्या किया ह,
रेवती- ये सब क्या था,
देव ने एक चादर अपने उप्पेर दाल ली,
रेवती- अब क्या छुपा रहे हो, मैं कब से तुम्हे नंगा देख रही हु, अब छुपाने का क्या फायदा,
देव- तुम मुझे क्यों देख रही थी,
रेवती- अरे मेरे सामने नंगे रहोगी तो देखूंगी न,
देव- तो अपनी आँखे बंद क्र लेती न,
रेवती- मैं क्यों करू अपनी आँखे बंद, ऐसा नजारा रोज तोडना मिलता ह देखने को,
देव- बड़ी बेशरम हो तुम तो,
रेवती- मैं ऐसी नहीं थी लेकिन न जाने क्यों अच्छा लग रहा ह ऐसी बेशर्मी करके, तुम में कुछ तो बात ह, तुम्हारे सामने शर्म दूर भाग जाती ह,
देव ने रेवती का हाथ पकड़ लिया और अपने उप्पेर खींच लिया, रेवती देव की नंगी छाती से चिपक गई, रेवती की चूचिया देव की छाती में डाब गाइट hi, रेवती की आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह निकल गई, रेवती थोड़ी चूंकि लेकिन उसने उठने की कोशिश नहीं की, रेवती ने देव की आँखों में देखा,
रेवती- लगता ह जनाब का अब तक मन नहीं भरा, इतनी देर से सम्भोग क्र रहे थे फिर भी उतावले हो,
देव- तुम्हारा मन नहीं कर रहा क्या,
देव की बात पैर रेवती शर्मा गई और उठने लगी, लेकिन देव ने उसे अपनी बहो में कास लिया,
रेवती- छोड़ो मुझे जाने दो कोई आ जायेगा,
देव- कोई नहीं आएगा,
रेवती- ये मेरी माँ का कमरा ह और उन्ही का बिस्टेर ह, उनके बिस्टेर में मैं उनकी बेटी किसी अनजान नंगे लड़के के साथ चिपकी हुई पड़ी हु कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा,
देव- यही की दोनों प्रेमी हैं,
रेवती- किसने कहा तुम मेरे प्रेमी हो,
देव- तुम मुझे प्यार नहीं करती, ोुह्ह्हह्ह माफ़ करना मुझस ेगलति हो गई, देव ने अपनी पकड़ ढीली कर दी,
रेवती थोड़ी सी बैचैन हो गई,
रेवती- मैंने ऐसा तो नहीं कहा,
देव- तो क्या कहा तुमने,
रेवती शर्मा गई,
देव ने मोके का फायदा उठाते हुए रेवती के होतो से अपने हॉट जोड़ दिए, रेवती ने कुछ देर तो कसमसाहट सी की लेकिन जल्दी hi शांत हो गई, देव ने उसे अपने उप्पेर लिटा लिया, देव का लुंड जो कुछ देर पहले hi िन्दु को छोड़ चुक्का था फिर से खड़ा हो गया था, जो अब सीधे रेवती की जंगो के बिच में घुसा जार है था,
रेवती आराम से देव के उप्पेर लेती थी, अब उसे कोई शर्म या घबराहट नहीं थी, बल्कि एक अलग hi रोमांच आ रहा था, देव के हाथ रेवती की गांड पैर पाहकः चुके थे, रेवती ने कोई विरोध नहीं किया, देव को रास्ता साफ़ दिखा और उसने रेवती के शरीर को मसलना शुरू क्र दिया, जिसका प्रभाव ये हुआ की रेवती ने भी देव के होतो को चूमना शुरू क्र दिया,
देव ने रेवती को अपने निचे क्र लिया और उसके पुरे बदन को चूमने लगा, रेवती भी मजे से उसका साथ दे रही थी वो तो पहले से hi गरम हुई बैठी थी, एक ऐसे अनजान लड़के साथ जो उससे बस दूसरी बार मिला था और दोनों बस संदिग्ध परिश्थिति में, लेकिन जवानी की काम वासना कुछ भी करने पैर मजबूर कर देती ह,
रेवती के हाथ देव के नंगे शरीर पैर घूम रहे थे, वो बड़ी उतावली हुई जा रही थी, देव ने भी तुरनत रेवती की चोली खोल दी जिससे रेवती की 34 के आकर की चूचिया सामने आ गई, देव ने तुरंत अपना मुँह रेवती की चूचियों पैर लगा दिया, रेवती भी उसका सर अपनी चूचियों पैर दबाने लगी, देव का एक हाथ रेवती के घागरे में घुस गया और उसकी जांघो के बिच छूट पैर पहुंच गया, रेवती की छूट पहले से hi बहुत गीली हुआ पड़ी थी, देव ने तुरनत एक उंगली उसकी छूट में घुसा दी, जिससे रेवती की दर्द भरी आह निकल गई,
देव ने रेवती कोअपनी गॉड में उठाया और उसका घागरा खोल दिया, और चोली को निकल क्र अलग फेंक दिया, कुछ hi पालो में रेवती देव की बहो में बिलकुल नंगी थी, उसका कैसा हुआ शरीर बहुत hi खूबसूरत था, रेवती थी भी बहुत खूबसूरत, देव रेवती को देखने लगा, उसके मन में अलग अलग भाव आ रहे थे, उसका दिमाग उसे रोक रहा था लेकिन दिल में जो नफरत थी वो आगे बढ़ने को उतीजीत कर रही थी,
देव ने अपने दिल की सुनी और रेवती को जांघो पैर अपने हॉट रख दिए, रेवती तो इस समय देव की कठपुतली बानी हुई थी,
इधर सात्विक को बंधा हुआ था और उसे भुनने के लिए आग जला दी गाइट hi,
सात्विक- रुक जाओ वर्ण तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा,
आदमी- हमारे लिए क्या अच्छा ह ये हम जानते हैं,
जब कोई नहीं मन तो सात्विक ने कुछ्ह मंत्र पढ़ने शुरू किये और जो आग सात्विक को भुनने के लिए जलाई थी वही आग वह के लोगो की झोपड़ियों में लगनेलगी, चारो तरफ भागदौड़ मच गई, चीख पुकार आने लगी, सबा घबरा गए, तभी वह का सबसे बूढ़ा आदमी जो एक झोपडी में लेता रहता था वो जमीन पैर रेंगता हुआ बहार आया और जोर से चिल्लाया- रुक जाओ सभी,
उसकी आवाज सुनकर कुछ लोग उसके पास आये और उसे सम्हालने लगे, वो आदमी सात्विक के पास आया और हाथ जोड़ क्र बैठ गया- महाराज इस आग को रोक लीजिये, ये सब मूरख लोग हैं इन्हे इंसान की पहचान नहीं ह, मैं जानतहुँ आप कोई बड़े तांत्रिक हैं, कोई तांत्रिक hi इस पहाड़ पैर ऐसा कुछ कर सकता ह,
सात्विक ने उस बूढ़े की बात सुनकर आग को रोक दिया, आग बंद होने पैर वह शांति हुई, सभी लोग सात्विक के पास आ गए और हाथ जोड़ लिए, एक लड़के ने सात्विक को खोल दिया,
बूढ़ा आदमी- महाराज हमे तो आपका hi इंतजार था,
सात्विक- मेरा इंतजार
बूढ़ा आदमी- है महाराज इस पहाड़ पैर को एक मंत्र में बंधा हुआ ह जिसे सिर्फ कोई बड़ा तांत्रिक hi खोल सकता ह, ऐसा तांत्रिक जिसके पास तंत्र और मंत्र दोनों की ताकत हो,
सात्विक- तुम्हे कैसे पता की मेरे पास तंत्र और मंत्र दोनों की शक्ति ह,
बूढ़ा आदमी- इस पहाड़ पैर कोई भी मंत्र काम नहीं करता और न hi कोई तंत्र काम करता ह, इस पहाड़ पैर वही कुछ चमत्कार कर सकता ह जिसमे दोनों की ताकत हो,
सात्विक- ऐसा क्या राज ह इस पहाड़ में,
बूढ़ा आदमी- इस पहाड़ में एक महँ शक्ति कैद ह, ऐसी शक्ति जिसका सामना पूरा संसार नहीं कर सकता ह,
सात्विक- मैं कुछ समझा नहीं,
बूढ़ा आदमी- आज से बहुत समय पहले एक महँ ऋषि ने इसे अपने मंत्रो से बांध दिया था, और इस पहाड़ को ऐसा बना दिया था की न hi कोई इसे तोड़ सकता ह न hi इस पहाड़ पैर कोई फल उगेगा ताकि कोई इस पहाड़ केर उप्पेर न आये, इस पहाड़ के अंदर एक गुफा ह जिसमे वो शक्ति कैद ह, उस ऋषि ने कहा था इस शक्ति को कोई महँ तंत्र और मंत्र का ज्ञानी hi बहरा नहीकल सकता ह,
ये सुन क्र सात्विक असमंजस में था, उसे ठीक से कुछ समझ hi आ रहा था,
सात्विक- तुम सब कोण हो,
आदमी- हम इस पहाड़ के रक्षक हैं, हमारी पीढ़िया हजारो सालो से इस पहाड़ की रक्षा करते आ रहे हैं ताकि कोई इस पहाड़ को नुकसान न पंहुचा सके,
सात्विक- क्या शक्ति ह वो
आदमी- आप इसे खोल क्र खुद hi देख लीजिये,
सात्विक ने पहाड़ को देखा और उसने महसूस किया की इसे मंत्रो से बंधा हुआ ह, सात्विक आया hi इस शक्ति के लिए था, सात्विक ने तुरंत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल शुरू क्र दिया, सात्विक की शक्ति उम्मीद से ज्यादा तेज काम कर रही थी, और जल्दी hi वो पहाड़ टूटने लगा उसमे दरार पड़ने लगी, और कुछ hi देर में वो अहद हिलने लगा और उसमे एक रास्ता बन गया, पुरे पहाड़ में दरार आ गई, पूरा जंगल कैंप उठा था,
वह के सभी लोग ख़ुशी से नाचने लगे थे,
इधर वो पहाड़ खुला वही भौमिक जी जो लगभग अपने राजय के करीब पहुंचने वाले थे एक दम से रुक गए, उनके दिल की धड़कन बढ़ने लग थी, उन्हें पसीना आने लगा था, ऐसा लग रहा था जैसे कुछ बड़ा होने वाला ह, मौसम बदल रहा था, आसमान में बदल च गए और बिजली कड़कने लगी, और ये मंजर सभी जगह था, उस पहाड़ पैर भी ऐसे hi हालत थे,
इधर प्रताप सिंह के राजय में बहुत जोर की आवाज हुई, आसमानी बिजली बिलुक महल के अंदर गिरी, चारो तरफ हाहाकार मच गया, इसकी आवाज देव और रेवती को भी आये, रेवती घबरा क्र देव से लिपट गई, देव भी चौंक गया ये सब क्या हुआ,
देव- रेवती उठो जल्दी से कपडे फिनॉल
रेवती- क्यों कुछ नहीं करोगे क्या,
देव- लगता ह महल में कुछ हुआ ह, शायद आसमानी बिजली गिरी ह तो हो सकता ह इधर कोई आ जाये, और वैसे भी मेरा ये अगर तुम्हारे अंदर गया तो तुम कुछ दिनों तक हिल भी नहीं पाओगी, ये सही समय नहीं ह कुछ करने का, तुम मेरी मदद करना चाहती हो, अगर आज तुम इसके निचे आ गई तो तुम्हे मदद की जरुरत होगी, मैं जल्दी hi आऊंगा तुम्हरे लिए, लेकिन अभी मेरा यहाँ से निकलना जरुरी ह,
रेवती- मैं तुम्हारे साथ चलूंगी, मुझे अपने साथ ले चलो, मुझे यहाँ दर लगता ह,
देव- किस बात का सर ये तुम्हरे पिता का घर ह, तुम राजकुमारी हो,
रेवती- तुम नहीं जानते यहाँ क्या हो रहा ह, मुझे ऐसा महसूस होता ह जैसे मेरे पिता की नियत मेरे लिए hi ख़राब हो रही ह, उन्होंने मुझे अपना रक्षा कवच बनाया हुआ ह, और हमेशा अपने साथ रखते हैं, कुछ समय पहले वो मेरी शादी करवाने वाले थे वह भवर सिंह के राजय में, लेकिन वह एक राक्षश आ गया जिस वजह से शादी नहीं हुई, वर्ण मेरी जिंदगी का सोडा तो उन्होंने पहले hi कर दिया था, और जब से उस राक्षश ने मुझे देख क्र मेरे पिता को जिन्दा छोड़ा ह तब से वो मुझे अपने करीब रखते हैं और न जाने कहा कहा हाथ लगते हैं, मुझे अब दर लग रहा ह,
ये शादी की बात देव के लिए कुछ नै थी, मतलब वह कुछ बड़ी योजना हो रही थी, और अपना hi पिता अपनी बेटी के साथ ये सब कैसे सोच सकता ह, ये सोच देव का दिमाग ख़राब हो गया,
देव- लेकिन तुम मेरे साथ कैसे जाओगी, मेरा कोई ठिकाना नहीं ह, मैं इधर उधर भटकता हु,
रेवती- इस कैद से तो अच्छी hi जिंदगी जियूँगी मैं,
देव को समझ नहीं आया क्या करे लेकिन समय काम था, उसे यहाँ से निकलना था, क्योकि उसके दिल में अजीब सी हलचल हो रही थी,
देव- ठीक ह तुम जल्दी से कपड़ो का इंतजाम करो और मेरे लिए किसी सैनिक के कपडे और खुद के लिए की गाओं की लड़की के कपड़ो का इंतजाम करो,
रेवती जल्दी से उठी और अपनी फटी हुई चोली को जल्दी से पहना और फिर अपना घागरा पहन क्र तुरंत बहार निकल गई, देव सोच में डूबा हुआ इधर उधर घूम रहा था, कुछ hi देर में रावटी आ गई, उसने कपडे दिए, देव ने कपडे बदले और रेवती ने भी कपडे बदल लिए,
देव- बहार क्या हो रहा ह
रेवती- भगदड़ मची हुई ह, एक आसमानी बिजली महल के बीचो बिच गिरी ह, और मेरे पिता मुझे धुंध रहे हैं उन्हें दर लग रहा ह, जल्दी करो कोई यहाँ आता hi होगा,
देव- ठीक ह हम इस भगदड़ का हिस्सा बन क्र यहाँ से निकलेंगे, बस तुम मुझे उस तालाब के पास ले चलो जहा हम मिले थे, वह से रास्ता मैं जनता हु, रेवती देव को लेकर छुपती हुई तालाब की तरफ ले जाने लगी, इधर प्रताप सिंह के सैनिक रेवती को ढूढ़ने में लगे हुए थे, और रेणुका जल्दी से डोडो hi अपने कमरे में आई देव को देखने के लिए, देव को वह न प् कर वो घबरा गई, उसने अपने आदमियों को देव को ढूढ़ने में लगा दिया,
वही देव एक सैनिक बन क्र रेवती को ऐस ेलेकर जार है था जैसे किसी दासी की जान बचा क्र कही सुरक्षित जगह पंहुचा रहा हो, बहुत मुश्किल नहीं हुई उन दोनों को तालाब तक पूछने में, तालाब के पास पहुंच क्र देव ने पहले हालत का निरिक्षण किया फिर जिस रस्ते से वो यहाँ आया था उसी रस्ते से रेवती को लेकर निकल गया, ज्यादा तर सैनिक महल की तरफ भाग रहे थे तो किसी ने धयान नहीं दिया, और देव को एक घोडा भी मिल गया देव ने रेवती को घोड़े पैर आगे बैठाया और दौड़ लगा दी, लेकिन कुछ सेनिको ने उसे रोक लिया
सैनिक- आईए तुम इस तरफ कहा जार हे हो, महल तो उधर ह, ये रास्ता तो जंगल एमए जाता ह,
देव- वो इस दासी की हालत ख़राब ह इसे इसके गाओं ले जार है हु,
बस यही गलती हो गई देव से,
सैनिक- इस महल की दसियो का को गाओं नहीं होता लड़के, यह ाकि दासी बस इसी महल के नादेर रहती हैं , कभी बहार नहीं जाती,
उस सैनिक ने तलवार निकल क्र रेवती के मुँह पैर ढके हुए घूँघट को हटा दिया, घूँघट हटते hi वो पहचान गया, क्योकि आज कल रेवती हमेषा प्रताप सिंह के साथ hi दिखाई देती थी,
वह के सेनिको ने देव पैर हुम्ला कर दिया, लेकिन देव कहा उनके काबू में आने वाला था, देव ने एक लात उस सैनिक को मरी और उसकी तलवार चीन ली, अब देव को तलवार ठीक से चलनी नहीं आती थी वो बस ऐसे hi तलवार को घूमता हुआ घोडा लेकर भागने लगा, वो यहाँ लड़ क्र समय ख़राब नहीं करना चाहता था, कुछ सैनिक उसके पीछे भागे और दो सैनिक महल की तरफ भागे प्रताप सिंह को इस बारे में बताने के लिए,
सेनिको ने जैसे hi प्रताप सिंह को ये सब बताया, और ये बात सुनते की की उसकी बेटी को उसके सुरक्षा कवच को लेकर कोई भाग गया ह पुरे राजय में कोहराम मच गया, प्रताप सिंह ने तुरंत तलवार निकली और उन दोनों सेनिको के सर काट दिए, और सेनापति से तुरंत सेना भेजने को कहा,
सेना पति ने तुरनत सेना की एक टुकड़ी निकल दी, लेकिन अब तक बहुत देर हो चुकी थी, वही रेणुका को जब पता चला की देव गायब ह और उधर रेवती भी गायब ह, उसका सर फटने को हो गया, उसे तो समझ hi नहीं आया की ये सब क्या हुआ,
देव रेवती को लेकर निकल तो गया लेकिन कह अजय ये समझ नहीं आ रहा था, उसके खुद के पास जगह नहीं थी तो रेवती को कहा रखता, और निहारिका के सामने उसे लेजा hi नहीं सकता था, क्योकि इस संसार में ऐसा कोई नहीं था जो निहारिका न पहचाने , दुनिया में उससे खूबसूरत औरत कोई नहीं थी, और ये बात सब जानते थे, देव को पहचानना आसान नहीं था क्योकि वो पहले ऐसा नहीं था जैसा अब ह, उसकी कभी कोई चर्चा नहीं करता था, उसके जीवन में उसकी जो चर्चा हुई थी वो बस उस प्रतियोगिता में hi हुई थी,
कैर देव ने अपने सर पैर मुसीबत तो ले hi ली थी,
इधर सात्विक उस पहाड़ के अंदर पहुंच चुक्का था और उसके पीछे थे वह के सभी लोग, पहाड़ के अंदर एक गुफा थी, ये पहाड़ बहार से पहाड़ था अंदर से तो ये एक महल जैसा था, जैसे महल का खण्डार हो और चाट की जगह वो पहाड़ से धक् दिया गया हो, लोगो ने मशाल बना क्र चारो तरफ रौशनी कर दी, सात्विक आगे बढ़ने लगा, एक दम सनता था अहा, लेकिन हवा ठंडी थी,
तभी सबको किसी चीज के गुरने की आवाज आई, सब दर से गए लेकिन सात्विक उस आवाज की तरफ चल दिया, आवाज के नजदीक पाहकः तो वह एक कमरा था जिसका दरवाजा बंद था, एक ादके ने आगे बढ़ क्र दरवाजे को हाथ लगाया तो वो हवा में उड़ता हुआ बहुत दूर जाकर गिरा,
बूढ़ा आदमी- महाराज इसे भी मंत्रो से बंधा हुआ ह, यही वो शक्ति ह,
सात्विक ने अपनी विद्याओ का इस्तेमाल किया और अपनी पूरी तनरा विद्या को लगा क्र उस दरवाजे को खोल दिया था, सात्विक ने दरवाजा तो खोल दिया था लेकिन उसने महसूस किया की वो जितना अपनी तंत्र विद्या का इस्तेमाल करता जार है था उतना hi मंत्रो की विद्या को भूलता जा रहा था, इसका कारन उसे समझ नहीं आया, और अभी समझने का समय भी नहीं था, कमरे का दरवाजा खुलते hi सभी अंदर आ गए, और सामने रखा था एक बहुत बड़ा पत्थर का ताबूत, जो चारो तरफ से बंद था, और उसी के अंदर से आवाज आ रही थी, बड़ी hi अजीब सी आवाजे थी,
सात्विक- क्या ह इसमें
किसी ने कोई जवाब नहीं दिया, सभी लोग हाथ जोड़ क्र उस ताबूत के चारो तरफ बैठ गए, सात्विक अचंभित था,
सात्विक ने ताबूत को चारो तरफ से देखना शुरू किया, उसमे तमिल और संस्कीरत भाषा में कुछ लिखा हुआ था, सबसे उप्पेर लिखा था एक नाम राजा भैरव,
( इस ताकत को यहाँ कैद किया जा रहा ह, इसे भगवन की शक्ति से कैद किया जा रहा ह, और सभी को सलाह दी जाती ह की इसे कभी न खोला जाये, ये ताकत पूरी इंसानियत को तबाह क्र सकती ह, पूरी इंसानियत को भ्रष्ट क्र सकती ह, यहाँ तक व्है आएगा जो अमरता के पीछे होगा, और अमरता hi सबसे बड़ा भरम ह दुनिया में, मृत्यु के सच को पहचानो अमरता के पीछे मत जाओ, वर्ण संसार नष्ट हो जायेगा, खुद को पहचानो और इस ताकत को यही बंद रहने दो, अगर ये बहार आएगी तो सर्वनाश होगा,
इसे ऐसे मंत्रो से बंधा जा रहा ह जिसे वही खोल सकता ह जिसके पास मंत्र और तंत्र की शक्ति हो, क्योकि जो मंत्र पढ़ेगा वो तंत्र की तरफ नहीं जायेगा और जो तंत्र पढता होगा वो मंत्र नहीं सिख सकता, इसलिए ऐसा दुनिया में कोई नहीं होगा जो मंत्र और तंत्र दोनों का ज्ञानी हो, और अगर फिर भी ऐसा कोई इंसान मिल भी गया और यहाँ तक आ गया तो समझो ये उप्पेर वाले की hi इच्छा ह, लेकिन जॉब hi करना सोच समझ क्र करना, )
ये सब पढ़ क्र सात्विक बिलकुल अचंभित था, ये कैसी ताकत ह, उसके अंदर अजीब सी भावनाये उभर रही थी, लेकिन जब से सात्विक इस पहाड़ पैर आया था उसके अंदर नकारात्मक ऊर्जा उभर रही थी, ऐसी ऊर्जा जो सात्विक की अच्छे को दबती जा रही थी, सात्विक के अंदर ताकत पाने की इच्छा बढ़ती जा थी, और उसी इच्छा के वश में होकर सात्विक ने वो ताबूत खोल दिया,
सात्विक अपनी मंजिल की तरफ बड़ी तेजी से चले जा रहा था, जिस जगह उसे पहुंचना था वो जगह लगभग 2 दिन की दुरी पैर थी, लेकिन आज सात्विक की चल में बहुत तेजी थी किसी साधारण इंसान से लगभग 4 गुना तेजी से सात्विक चल रहा था, वही हल भौमिक जी का भी था वो भी लगभग उसी रफ़्तार से महल की तरफ जा रहे थे,
सात्विक ने 2 दिन का सफर कुछ hi घंटो में क्र लिया था, वो अपनी मजिल की तरफ जाने में इतना खोया हुआ था की उसे अहसास hi नहीं हुआ वो कितनी रफ़्तार से जा रहा ह, लेकिन भौमिक को अपनी रफ़्तार का अहसास हो गया था, वो एक पल रुके और अनुमान लगाया की वो कहा पहुंच चुके हैं, उन्हें बड़ी हैरत हुई की इतनी जल्दी वो यहाँ तक कैसे आ सकते हैं, न hi उन्हें कोई भूक प्यास थी न hi कोई थकन थी, भौमिक जी समझ गए ये उसी रौशनी की वजह से हो रहा ह, उनके अंदर कुछ बदलाव आ गए हैं लेकिन वो क्या बदलाव हैं पूरी तरह नहीं पता,
उधर सात्विक उस पहाड़ के करीब पहुंच गया जहा वो जंगली लोग रहते थे, यही जगह बताई थी तांत्रिक गुरु ने,
सात्विक पहाड़ के पास खड़ा उसे देखे जा रहा था, उसे कुछ अलग नहीं दिख रहा था, वो पहाड़ी के उप्पेर चढ़ने लगा, और जैसे hi वो थोड़ा उप्पेर गया तो उसे उन जंगली लोगो ने घेर लिया,
एक आदमी- बाबा देख हमारा भोजन आ गया,
बूढ़ा आदमी- ये मुझे कुछ अलग लग रहा ह, इसके चेरे का तेज सबसे अलग ह, ये कोई साधारण इंसान नहीं लग रहा मुझे,
सात्विक- कोण हो तुम लोग,
बूढ़ा आदमी- हम कोण हैं ये तो तुम रहने दो, तुम बताओ तुम कोण हो और यहाँ आने की हिम्मत कैसे दिखाई,
सात्विक- कही जाने के लिए मुझे हिम्मत की जरुरत नहीं होती, खोल दो मुझे वर्ण सबको भसम कर दूंगा,
सभी उस पर है पड़े,
बूढ़ा आदमी- चलो रे आग जलाओ आज इसे हम भसम करेंगे,
यहाँ सात्विक को आग में भुनने की तैयारी की जाने लगी उधर रेवती देव से बात कर hi रही थी की वह कोई आ गया, रेवती एक दम घबरा गई और भाग के देव के पास परदे के पीछे चिप गई, घबराहट की वजह से वो भूल hi गई की देव बिलकुल नंगा ह,
कमरे में िन्दु आई थी, अब देव और फास गया था, रेवती के सामने कैसे वो सब करेगा, िन्दु को देख क्र रेवती और दर गई, वो देव से और चिपक गई, रेवती की जंघे देव के लुंड से रगड़ रही थी, देव के पास कोई और रास्ता नहीं था उसने रेवती को चुप रहने का इशारा किया और नंगा hi बहार आ गया, िन्दु उसे देख क्र मुस्कुरा पड़ी,
देव- आ गई आप,
िन्दु- कैसा लग रहा ह यहाँ,
देव- मुझे कब तक ऐसे रहना होगा,
िन्दु- जब तक हमारा दिल नहीं भर जाता, और मुझे लगता ह की कभी दिल भरेगा नहीं,
देव इस तरह से बात कर रहा था जैसे ये लगे की वो यहाँ मज़बूरी में फसा हुआ ह,
िन्दु- जल्दी करो जल्दी से मेरी फाड़ दो, फिर मुझे महाराज के पास जाना ह, उन्होंने एक सभा बुलाई ह,
िन्दु ने फटाफट अपने कपडे उतर दिए और नंगी हो गई, देव ने रेवती की तरफ देखते हुए दुखी सा मुँह बनाया, रेवती छुपी हुई ये सब देख रही थी, रेवती की सांसे फूलने लगी थी, उसके सामने उसकी सौतेली माँ िन्दु और उसका आधा अधूरा प्रेमी नंगे खड़े थे,
िन्दु आगे बढ़ी और देव के सामने बैठ गई और उसका लुंड मुँह में भर लिया, ये देख क्र तो रेवती का मुँह खुला रह गया, उसे अपनी आँखों पैर विश्वास नहीं हो रहा था, देव भी ऐसी जगह खड़ा था जहा से रेवती को सब कुछ साफ़ साफ़ दिखे,
िन्दु मजे से लुंड को चूस रही थी, कुछ देर चूसने के बाद िन्दु बिस्टेर पैर आ गई और अपनी टंगे फैला क्र लेट गई,
िन्दु- जल्दी से घुसा दो अपना ये लोढ़ा मेरी छूट में, कोशिश करना थोड़ा अंदर तक घुस जाये,
देव मुस्कुराया और अपना लुंड िन्दु की छूट पैर लगाया और धक्का मर दिया, िन्दु की चीख निकल गई, इधर रेवती की हालत ख़राब हो रही थी, उसके सामने हवस का नंगा नाच चल रहा था, एक तो वैसे hi वो आज कल बहुत गरम रहती थी जिसका कारन था रेणुका की काम उत्तेजना वर्धक दवाइया, जिससे रेवती गरम रहे और अपने बाप से चुद जाये, दवाइया तो असर क्र रही थी लेकिन किसी और मर्द के लिए,
देव िन्दु को छोड़ रहा था िन्दु लगातार चिलए जा रही थी, वही रेवती पूरी तरह गरम हो चुकी थी उसके हाथ उसकी चूचियों पैर पहच गए थे, और दूसरा हाथ उसकी छूट के उप्पेर, न जाने वो कब अपने अंगो से खेलने लगी थी, उभरती हुई जवानी जो पहले बार चुदाई देख रही थी वो भी दुनिया के सबसे खूबसूरत मर्द को छोड़ते हुए देख रही थी, इधर िन्दु चीखे मर मर क्र झाड़ रही थी, देव झड़ना चाहता था लेकिन िन्दु ज्यादा बर्दास्त नहीं क्र प् रही थी, एक लम्बी चुदाई के बाद िन्दु 4 बार झाड़ गई और देव ने भी अपना पूरा लावा िन्दु की छूट में भर दिया,
इधर अपनी छूट और चूचियों को रगड़ रगड़ क्र रेवती ने लाल क्र दिया था, इस बिच वो भी 3 बार झाड़ चुकी थी,
िन्दु- मजा आ गया जीवन में असली चुदाई का मजा मिला ह आज, तुम यहाँ आये ये हमारा सौभाग्य ह, ऐसा मर्द बड़ी किस्मत से मिलता ह, दुनिया में तुम्हारे जैसा मर्द शायद दूसरा कोई नहीं होगा,
देव- मैं तो गुलाम हु आपका,
िन्दु हसी और लड़खड़ाती हुई उठी और अपने कपडे पहनने लगी,
िन्दु- अभी चलती हु जल्दी hi आउंगी, उसके जाते hi देव बिस्टेर पैर लेट गया, िन्दु के जाने के बाद रेवती बहार निकल कर आई,
रेवती की आँखे लाल थी उसकी कपडे बयां कर रहे थे उसने अपने शरीर के साथ क्या किया ह,
रेवती- ये सब क्या था,
देव ने एक चादर अपने उप्पेर दाल ली,
रेवती- अब क्या छुपा रहे हो, मैं कब से तुम्हे नंगा देख रही हु, अब छुपाने का क्या फायदा,
देव- तुम मुझे क्यों देख रही थी,
रेवती- अरे मेरे सामने नंगे रहोगी तो देखूंगी न,
देव- तो अपनी आँखे बंद क्र लेती न,
रेवती- मैं क्यों करू अपनी आँखे बंद, ऐसा नजारा रोज तोडना मिलता ह देखने को,
देव- बड़ी बेशरम हो तुम तो,
रेवती- मैं ऐसी नहीं थी लेकिन न जाने क्यों अच्छा लग रहा ह ऐसी बेशर्मी करके, तुम में कुछ तो बात ह, तुम्हारे सामने शर्म दूर भाग जाती ह,
देव ने रेवती का हाथ पकड़ लिया और अपने उप्पेर खींच लिया, रेवती देव की नंगी छाती से चिपक गई, रेवती की चूचिया देव की छाती में डाब गाइट hi, रेवती की आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह निकल गई, रेवती थोड़ी चूंकि लेकिन उसने उठने की कोशिश नहीं की, रेवती ने देव की आँखों में देखा,
रेवती- लगता ह जनाब का अब तक मन नहीं भरा, इतनी देर से सम्भोग क्र रहे थे फिर भी उतावले हो,
देव- तुम्हारा मन नहीं कर रहा क्या,
देव की बात पैर रेवती शर्मा गई और उठने लगी, लेकिन देव ने उसे अपनी बहो में कास लिया,
रेवती- छोड़ो मुझे जाने दो कोई आ जायेगा,
देव- कोई नहीं आएगा,
रेवती- ये मेरी माँ का कमरा ह और उन्ही का बिस्टेर ह, उनके बिस्टेर में मैं उनकी बेटी किसी अनजान नंगे लड़के के साथ चिपकी हुई पड़ी हु कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा,
देव- यही की दोनों प्रेमी हैं,
रेवती- किसने कहा तुम मेरे प्रेमी हो,
देव- तुम मुझे प्यार नहीं करती, ोुह्ह्हह्ह माफ़ करना मुझस ेगलति हो गई, देव ने अपनी पकड़ ढीली कर दी,
रेवती थोड़ी सी बैचैन हो गई,
रेवती- मैंने ऐसा तो नहीं कहा,
देव- तो क्या कहा तुमने,
रेवती शर्मा गई,
देव ने मोके का फायदा उठाते हुए रेवती के होतो से अपने हॉट जोड़ दिए, रेवती ने कुछ देर तो कसमसाहट सी की लेकिन जल्दी hi शांत हो गई, देव ने उसे अपने उप्पेर लिटा लिया, देव का लुंड जो कुछ देर पहले hi िन्दु को छोड़ चुक्का था फिर से खड़ा हो गया था, जो अब सीधे रेवती की जंगो के बिच में घुसा जार है था,
रेवती आराम से देव के उप्पेर लेती थी, अब उसे कोई शर्म या घबराहट नहीं थी, बल्कि एक अलग hi रोमांच आ रहा था, देव के हाथ रेवती की गांड पैर पाहकः चुके थे, रेवती ने कोई विरोध नहीं किया, देव को रास्ता साफ़ दिखा और उसने रेवती के शरीर को मसलना शुरू क्र दिया, जिसका प्रभाव ये हुआ की रेवती ने भी देव के होतो को चूमना शुरू क्र दिया,
देव ने रेवती को अपने निचे क्र लिया और उसके पुरे बदन को चूमने लगा, रेवती भी मजे से उसका साथ दे रही थी वो तो पहले से hi गरम हुई बैठी थी, एक ऐसे अनजान लड़के साथ जो उससे बस दूसरी बार मिला था और दोनों बस संदिग्ध परिश्थिति में, लेकिन जवानी की काम वासना कुछ भी करने पैर मजबूर कर देती ह,
रेवती के हाथ देव के नंगे शरीर पैर घूम रहे थे, वो बड़ी उतावली हुई जा रही थी, देव ने भी तुरनत रेवती की चोली खोल दी जिससे रेवती की 34 के आकर की चूचिया सामने आ गई, देव ने तुरंत अपना मुँह रेवती की चूचियों पैर लगा दिया, रेवती भी उसका सर अपनी चूचियों पैर दबाने लगी, देव का एक हाथ रेवती के घागरे में घुस गया और उसकी जांघो के बिच छूट पैर पहुंच गया, रेवती की छूट पहले से hi बहुत गीली हुआ पड़ी थी, देव ने तुरनत एक उंगली उसकी छूट में घुसा दी, जिससे रेवती की दर्द भरी आह निकल गई,
देव ने रेवती कोअपनी गॉड में उठाया और उसका घागरा खोल दिया, और चोली को निकल क्र अलग फेंक दिया, कुछ hi पालो में रेवती देव की बहो में बिलकुल नंगी थी, उसका कैसा हुआ शरीर बहुत hi खूबसूरत था, रेवती थी भी बहुत खूबसूरत, देव रेवती को देखने लगा, उसके मन में अलग अलग भाव आ रहे थे, उसका दिमाग उसे रोक रहा था लेकिन दिल में जो नफरत थी वो आगे बढ़ने को उतीजीत कर रही थी,
देव ने अपने दिल की सुनी और रेवती को जांघो पैर अपने हॉट रख दिए, रेवती तो इस समय देव की कठपुतली बानी हुई थी,
इधर सात्विक को बंधा हुआ था और उसे भुनने के लिए आग जला दी गाइट hi,
सात्विक- रुक जाओ वर्ण तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा,
आदमी- हमारे लिए क्या अच्छा ह ये हम जानते हैं,
जब कोई नहीं मन तो सात्विक ने कुछ्ह मंत्र पढ़ने शुरू किये और जो आग सात्विक को भुनने के लिए जलाई थी वही आग वह के लोगो की झोपड़ियों में लगनेलगी, चारो तरफ भागदौड़ मच गई, चीख पुकार आने लगी, सबा घबरा गए, तभी वह का सबसे बूढ़ा आदमी जो एक झोपडी में लेता रहता था वो जमीन पैर रेंगता हुआ बहार आया और जोर से चिल्लाया- रुक जाओ सभी,
उसकी आवाज सुनकर कुछ लोग उसके पास आये और उसे सम्हालने लगे, वो आदमी सात्विक के पास आया और हाथ जोड़ क्र बैठ गया- महाराज इस आग को रोक लीजिये, ये सब मूरख लोग हैं इन्हे इंसान की पहचान नहीं ह, मैं जानतहुँ आप कोई बड़े तांत्रिक हैं, कोई तांत्रिक hi इस पहाड़ पैर ऐसा कुछ कर सकता ह,
सात्विक ने उस बूढ़े की बात सुनकर आग को रोक दिया, आग बंद होने पैर वह शांति हुई, सभी लोग सात्विक के पास आ गए और हाथ जोड़ लिए, एक लड़के ने सात्विक को खोल दिया,
बूढ़ा आदमी- महाराज हमे तो आपका hi इंतजार था,
सात्विक- मेरा इंतजार
बूढ़ा आदमी- है महाराज इस पहाड़ पैर को एक मंत्र में बंधा हुआ ह जिसे सिर्फ कोई बड़ा तांत्रिक hi खोल सकता ह, ऐसा तांत्रिक जिसके पास तंत्र और मंत्र दोनों की ताकत हो,
सात्विक- तुम्हे कैसे पता की मेरे पास तंत्र और मंत्र दोनों की शक्ति ह,
बूढ़ा आदमी- इस पहाड़ पैर कोई भी मंत्र काम नहीं करता और न hi कोई तंत्र काम करता ह, इस पहाड़ पैर वही कुछ चमत्कार कर सकता ह जिसमे दोनों की ताकत हो,
सात्विक- ऐसा क्या राज ह इस पहाड़ में,
बूढ़ा आदमी- इस पहाड़ में एक महँ शक्ति कैद ह, ऐसी शक्ति जिसका सामना पूरा संसार नहीं कर सकता ह,
सात्विक- मैं कुछ समझा नहीं,
बूढ़ा आदमी- आज से बहुत समय पहले एक महँ ऋषि ने इसे अपने मंत्रो से बांध दिया था, और इस पहाड़ को ऐसा बना दिया था की न hi कोई इसे तोड़ सकता ह न hi इस पहाड़ पैर कोई फल उगेगा ताकि कोई इस पहाड़ केर उप्पेर न आये, इस पहाड़ के अंदर एक गुफा ह जिसमे वो शक्ति कैद ह, उस ऋषि ने कहा था इस शक्ति को कोई महँ तंत्र और मंत्र का ज्ञानी hi बहरा नहीकल सकता ह,
ये सुन क्र सात्विक असमंजस में था, उसे ठीक से कुछ समझ hi आ रहा था,
सात्विक- तुम सब कोण हो,
आदमी- हम इस पहाड़ के रक्षक हैं, हमारी पीढ़िया हजारो सालो से इस पहाड़ की रक्षा करते आ रहे हैं ताकि कोई इस पहाड़ को नुकसान न पंहुचा सके,
सात्विक- क्या शक्ति ह वो
आदमी- आप इसे खोल क्र खुद hi देख लीजिये,
सात्विक ने पहाड़ को देखा और उसने महसूस किया की इसे मंत्रो से बंधा हुआ ह, सात्विक आया hi इस शक्ति के लिए था, सात्विक ने तुरंत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल शुरू क्र दिया, सात्विक की शक्ति उम्मीद से ज्यादा तेज काम कर रही थी, और जल्दी hi वो पहाड़ टूटने लगा उसमे दरार पड़ने लगी, और कुछ hi देर में वो अहद हिलने लगा और उसमे एक रास्ता बन गया, पुरे पहाड़ में दरार आ गई, पूरा जंगल कैंप उठा था,
वह के सभी लोग ख़ुशी से नाचने लगे थे,
इधर वो पहाड़ खुला वही भौमिक जी जो लगभग अपने राजय के करीब पहुंचने वाले थे एक दम से रुक गए, उनके दिल की धड़कन बढ़ने लग थी, उन्हें पसीना आने लगा था, ऐसा लग रहा था जैसे कुछ बड़ा होने वाला ह, मौसम बदल रहा था, आसमान में बदल च गए और बिजली कड़कने लगी, और ये मंजर सभी जगह था, उस पहाड़ पैर भी ऐसे hi हालत थे,
इधर प्रताप सिंह के राजय में बहुत जोर की आवाज हुई, आसमानी बिजली बिलुक महल के अंदर गिरी, चारो तरफ हाहाकार मच गया, इसकी आवाज देव और रेवती को भी आये, रेवती घबरा क्र देव से लिपट गई, देव भी चौंक गया ये सब क्या हुआ,
देव- रेवती उठो जल्दी से कपडे फिनॉल
रेवती- क्यों कुछ नहीं करोगे क्या,
देव- लगता ह महल में कुछ हुआ ह, शायद आसमानी बिजली गिरी ह तो हो सकता ह इधर कोई आ जाये, और वैसे भी मेरा ये अगर तुम्हारे अंदर गया तो तुम कुछ दिनों तक हिल भी नहीं पाओगी, ये सही समय नहीं ह कुछ करने का, तुम मेरी मदद करना चाहती हो, अगर आज तुम इसके निचे आ गई तो तुम्हे मदद की जरुरत होगी, मैं जल्दी hi आऊंगा तुम्हरे लिए, लेकिन अभी मेरा यहाँ से निकलना जरुरी ह,
रेवती- मैं तुम्हारे साथ चलूंगी, मुझे अपने साथ ले चलो, मुझे यहाँ दर लगता ह,
देव- किस बात का सर ये तुम्हरे पिता का घर ह, तुम राजकुमारी हो,
रेवती- तुम नहीं जानते यहाँ क्या हो रहा ह, मुझे ऐसा महसूस होता ह जैसे मेरे पिता की नियत मेरे लिए hi ख़राब हो रही ह, उन्होंने मुझे अपना रक्षा कवच बनाया हुआ ह, और हमेशा अपने साथ रखते हैं, कुछ समय पहले वो मेरी शादी करवाने वाले थे वह भवर सिंह के राजय में, लेकिन वह एक राक्षश आ गया जिस वजह से शादी नहीं हुई, वर्ण मेरी जिंदगी का सोडा तो उन्होंने पहले hi कर दिया था, और जब से उस राक्षश ने मुझे देख क्र मेरे पिता को जिन्दा छोड़ा ह तब से वो मुझे अपने करीब रखते हैं और न जाने कहा कहा हाथ लगते हैं, मुझे अब दर लग रहा ह,
ये शादी की बात देव के लिए कुछ नै थी, मतलब वह कुछ बड़ी योजना हो रही थी, और अपना hi पिता अपनी बेटी के साथ ये सब कैसे सोच सकता ह, ये सोच देव का दिमाग ख़राब हो गया,
देव- लेकिन तुम मेरे साथ कैसे जाओगी, मेरा कोई ठिकाना नहीं ह, मैं इधर उधर भटकता हु,
रेवती- इस कैद से तो अच्छी hi जिंदगी जियूँगी मैं,
देव को समझ नहीं आया क्या करे लेकिन समय काम था, उसे यहाँ से निकलना था, क्योकि उसके दिल में अजीब सी हलचल हो रही थी,
देव- ठीक ह तुम जल्दी से कपड़ो का इंतजाम करो और मेरे लिए किसी सैनिक के कपडे और खुद के लिए की गाओं की लड़की के कपड़ो का इंतजाम करो,
रेवती जल्दी से उठी और अपनी फटी हुई चोली को जल्दी से पहना और फिर अपना घागरा पहन क्र तुरंत बहार निकल गई, देव सोच में डूबा हुआ इधर उधर घूम रहा था, कुछ hi देर में रावटी आ गई, उसने कपडे दिए, देव ने कपडे बदले और रेवती ने भी कपडे बदल लिए,
देव- बहार क्या हो रहा ह
रेवती- भगदड़ मची हुई ह, एक आसमानी बिजली महल के बीचो बिच गिरी ह, और मेरे पिता मुझे धुंध रहे हैं उन्हें दर लग रहा ह, जल्दी करो कोई यहाँ आता hi होगा,
देव- ठीक ह हम इस भगदड़ का हिस्सा बन क्र यहाँ से निकलेंगे, बस तुम मुझे उस तालाब के पास ले चलो जहा हम मिले थे, वह से रास्ता मैं जनता हु, रेवती देव को लेकर छुपती हुई तालाब की तरफ ले जाने लगी, इधर प्रताप सिंह के सैनिक रेवती को ढूढ़ने में लगे हुए थे, और रेणुका जल्दी से डोडो hi अपने कमरे में आई देव को देखने के लिए, देव को वह न प् कर वो घबरा गई, उसने अपने आदमियों को देव को ढूढ़ने में लगा दिया,
वही देव एक सैनिक बन क्र रेवती को ऐस ेलेकर जार है था जैसे किसी दासी की जान बचा क्र कही सुरक्षित जगह पंहुचा रहा हो, बहुत मुश्किल नहीं हुई उन दोनों को तालाब तक पूछने में, तालाब के पास पहुंच क्र देव ने पहले हालत का निरिक्षण किया फिर जिस रस्ते से वो यहाँ आया था उसी रस्ते से रेवती को लेकर निकल गया, ज्यादा तर सैनिक महल की तरफ भाग रहे थे तो किसी ने धयान नहीं दिया, और देव को एक घोडा भी मिल गया देव ने रेवती को घोड़े पैर आगे बैठाया और दौड़ लगा दी, लेकिन कुछ सेनिको ने उसे रोक लिया
सैनिक- आईए तुम इस तरफ कहा जार हे हो, महल तो उधर ह, ये रास्ता तो जंगल एमए जाता ह,
देव- वो इस दासी की हालत ख़राब ह इसे इसके गाओं ले जार है हु,
बस यही गलती हो गई देव से,
सैनिक- इस महल की दसियो का को गाओं नहीं होता लड़के, यह ाकि दासी बस इसी महल के नादेर रहती हैं , कभी बहार नहीं जाती,
उस सैनिक ने तलवार निकल क्र रेवती के मुँह पैर ढके हुए घूँघट को हटा दिया, घूँघट हटते hi वो पहचान गया, क्योकि आज कल रेवती हमेषा प्रताप सिंह के साथ hi दिखाई देती थी,
वह के सेनिको ने देव पैर हुम्ला कर दिया, लेकिन देव कहा उनके काबू में आने वाला था, देव ने एक लात उस सैनिक को मरी और उसकी तलवार चीन ली, अब देव को तलवार ठीक से चलनी नहीं आती थी वो बस ऐसे hi तलवार को घूमता हुआ घोडा लेकर भागने लगा, वो यहाँ लड़ क्र समय ख़राब नहीं करना चाहता था, कुछ सैनिक उसके पीछे भागे और दो सैनिक महल की तरफ भागे प्रताप सिंह को इस बारे में बताने के लिए,
सेनिको ने जैसे hi प्रताप सिंह को ये सब बताया, और ये बात सुनते की की उसकी बेटी को उसके सुरक्षा कवच को लेकर कोई भाग गया ह पुरे राजय में कोहराम मच गया, प्रताप सिंह ने तुरंत तलवार निकली और उन दोनों सेनिको के सर काट दिए, और सेनापति से तुरंत सेना भेजने को कहा,
सेना पति ने तुरनत सेना की एक टुकड़ी निकल दी, लेकिन अब तक बहुत देर हो चुकी थी, वही रेणुका को जब पता चला की देव गायब ह और उधर रेवती भी गायब ह, उसका सर फटने को हो गया, उसे तो समझ hi नहीं आया की ये सब क्या हुआ,
देव रेवती को लेकर निकल तो गया लेकिन कह अजय ये समझ नहीं आ रहा था, उसके खुद के पास जगह नहीं थी तो रेवती को कहा रखता, और निहारिका के सामने उसे लेजा hi नहीं सकता था, क्योकि इस संसार में ऐसा कोई नहीं था जो निहारिका न पहचाने , दुनिया में उससे खूबसूरत औरत कोई नहीं थी, और ये बात सब जानते थे, देव को पहचानना आसान नहीं था क्योकि वो पहले ऐसा नहीं था जैसा अब ह, उसकी कभी कोई चर्चा नहीं करता था, उसके जीवन में उसकी जो चर्चा हुई थी वो बस उस प्रतियोगिता में hi हुई थी,
कैर देव ने अपने सर पैर मुसीबत तो ले hi ली थी,
इधर सात्विक उस पहाड़ के अंदर पहुंच चुक्का था और उसके पीछे थे वह के सभी लोग, पहाड़ के अंदर एक गुफा थी, ये पहाड़ बहार से पहाड़ था अंदर से तो ये एक महल जैसा था, जैसे महल का खण्डार हो और चाट की जगह वो पहाड़ से धक् दिया गया हो, लोगो ने मशाल बना क्र चारो तरफ रौशनी कर दी, सात्विक आगे बढ़ने लगा, एक दम सनता था अहा, लेकिन हवा ठंडी थी,
तभी सबको किसी चीज के गुरने की आवाज आई, सब दर से गए लेकिन सात्विक उस आवाज की तरफ चल दिया, आवाज के नजदीक पाहकः तो वह एक कमरा था जिसका दरवाजा बंद था, एक ादके ने आगे बढ़ क्र दरवाजे को हाथ लगाया तो वो हवा में उड़ता हुआ बहुत दूर जाकर गिरा,
बूढ़ा आदमी- महाराज इसे भी मंत्रो से बंधा हुआ ह, यही वो शक्ति ह,
सात्विक ने अपनी विद्याओ का इस्तेमाल किया और अपनी पूरी तनरा विद्या को लगा क्र उस दरवाजे को खोल दिया था, सात्विक ने दरवाजा तो खोल दिया था लेकिन उसने महसूस किया की वो जितना अपनी तंत्र विद्या का इस्तेमाल करता जार है था उतना hi मंत्रो की विद्या को भूलता जा रहा था, इसका कारन उसे समझ नहीं आया, और अभी समझने का समय भी नहीं था, कमरे का दरवाजा खुलते hi सभी अंदर आ गए, और सामने रखा था एक बहुत बड़ा पत्थर का ताबूत, जो चारो तरफ से बंद था, और उसी के अंदर से आवाज आ रही थी, बड़ी hi अजीब सी आवाजे थी,
सात्विक- क्या ह इसमें
किसी ने कोई जवाब नहीं दिया, सभी लोग हाथ जोड़ क्र उस ताबूत के चारो तरफ बैठ गए, सात्विक अचंभित था,
सात्विक ने ताबूत को चारो तरफ से देखना शुरू किया, उसमे तमिल और संस्कीरत भाषा में कुछ लिखा हुआ था, सबसे उप्पेर लिखा था एक नाम राजा भैरव,
( इस ताकत को यहाँ कैद किया जा रहा ह, इसे भगवन की शक्ति से कैद किया जा रहा ह, और सभी को सलाह दी जाती ह की इसे कभी न खोला जाये, ये ताकत पूरी इंसानियत को तबाह क्र सकती ह, पूरी इंसानियत को भ्रष्ट क्र सकती ह, यहाँ तक व्है आएगा जो अमरता के पीछे होगा, और अमरता hi सबसे बड़ा भरम ह दुनिया में, मृत्यु के सच को पहचानो अमरता के पीछे मत जाओ, वर्ण संसार नष्ट हो जायेगा, खुद को पहचानो और इस ताकत को यही बंद रहने दो, अगर ये बहार आएगी तो सर्वनाश होगा,
इसे ऐसे मंत्रो से बंधा जा रहा ह जिसे वही खोल सकता ह जिसके पास मंत्र और तंत्र की शक्ति हो, क्योकि जो मंत्र पढ़ेगा वो तंत्र की तरफ नहीं जायेगा और जो तंत्र पढता होगा वो मंत्र नहीं सिख सकता, इसलिए ऐसा दुनिया में कोई नहीं होगा जो मंत्र और तंत्र दोनों का ज्ञानी हो, और अगर फिर भी ऐसा कोई इंसान मिल भी गया और यहाँ तक आ गया तो समझो ये उप्पेर वाले की hi इच्छा ह, लेकिन जॉब hi करना सोच समझ क्र करना, )
ये सब पढ़ क्र सात्विक बिलकुल अचंभित था, ये कैसी ताकत ह, उसके अंदर अजीब सी भावनाये उभर रही थी, लेकिन जब से सात्विक इस पहाड़ पैर आया था उसके अंदर नकारात्मक ऊर्जा उभर रही थी, ऐसी ऊर्जा जो सात्विक की अच्छे को दबती जा रही थी, सात्विक के अंदर ताकत पाने की इच्छा बढ़ती जा थी, और उसी इच्छा के वश में होकर सात्विक ने वो ताबूत खोल दिया,










