Incest RAKSHASH - Page 4 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest RAKSHASH

अपडेट-16



सात्विक अपनी मंजिल की तरफ बड़ी तेजी से चले जा रहा था, जिस जगह उसे पहुंचना था वो जगह लगभग 2 दिन की दुरी पैर थी, लेकिन आज सात्विक की चल में बहुत तेजी थी किसी साधारण इंसान से लगभग 4 गुना तेजी से सात्विक चल रहा था, वही हल भौमिक जी का भी था वो भी लगभग उसी रफ़्तार से महल की तरफ जा रहे थे,

सात्विक ने 2 दिन का सफर कुछ hi घंटो में क्र लिया था, वो अपनी मजिल की तरफ जाने में इतना खोया हुआ था की उसे अहसास hi नहीं हुआ वो कितनी रफ़्तार से जा रहा ह, लेकिन भौमिक को अपनी रफ़्तार का अहसास हो गया था, वो एक पल रुके और अनुमान लगाया की वो कहा पहुंच चुके हैं, उन्हें बड़ी हैरत हुई की इतनी जल्दी वो यहाँ तक कैसे आ सकते हैं, न hi उन्हें कोई भूक प्यास थी न hi कोई थकन थी, भौमिक जी समझ गए ये उसी रौशनी की वजह से हो रहा ह, उनके अंदर कुछ बदलाव आ गए हैं लेकिन वो क्या बदलाव हैं पूरी तरह नहीं पता,

उधर सात्विक उस पहाड़ के करीब पहुंच गया जहा वो जंगली लोग रहते थे, यही जगह बताई थी तांत्रिक गुरु ने,

सात्विक पहाड़ के पास खड़ा उसे देखे जा रहा था, उसे कुछ अलग नहीं दिख रहा था, वो पहाड़ी के उप्पेर चढ़ने लगा, और जैसे hi वो थोड़ा उप्पेर गया तो उसे उन जंगली लोगो ने घेर लिया,

एक आदमी- बाबा देख हमारा भोजन आ गया,

बूढ़ा आदमी- ये मुझे कुछ अलग लग रहा ह, इसके चेरे का तेज सबसे अलग ह, ये कोई साधारण इंसान नहीं लग रहा मुझे,

सात्विक- कोण हो तुम लोग,

बूढ़ा आदमी- हम कोण हैं ये तो तुम रहने दो, तुम बताओ तुम कोण हो और यहाँ आने की हिम्मत कैसे दिखाई,

सात्विक- कही जाने के लिए मुझे हिम्मत की जरुरत नहीं होती, खोल दो मुझे वर्ण सबको भसम कर दूंगा,

सभी उस पर है पड़े,

बूढ़ा आदमी- चलो रे आग जलाओ आज इसे हम भसम करेंगे,

यहाँ सात्विक को आग में भुनने की तैयारी की जाने लगी उधर रेवती देव से बात कर hi रही थी की वह कोई आ गया, रेवती एक दम घबरा गई और भाग के देव के पास परदे के पीछे चिप गई, घबराहट की वजह से वो भूल hi गई की देव बिलकुल नंगा ह,

कमरे में िन्दु आई थी, अब देव और फास गया था, रेवती के सामने कैसे वो सब करेगा, िन्दु को देख क्र रेवती और दर गई, वो देव से और चिपक गई, रेवती की जंघे देव के लुंड से रगड़ रही थी, देव के पास कोई और रास्ता नहीं था उसने रेवती को चुप रहने का इशारा किया और नंगा hi बहार आ गया, िन्दु उसे देख क्र मुस्कुरा पड़ी,

देव- आ गई आप,

िन्दु- कैसा लग रहा ह यहाँ,

देव- मुझे कब तक ऐसे रहना होगा,

िन्दु- जब तक हमारा दिल नहीं भर जाता, और मुझे लगता ह की कभी दिल भरेगा नहीं,

देव इस तरह से बात कर रहा था जैसे ये लगे की वो यहाँ मज़बूरी में फसा हुआ ह,

िन्दु- जल्दी करो जल्दी से मेरी फाड़ दो, फिर मुझे महाराज के पास जाना ह, उन्होंने एक सभा बुलाई ह,

िन्दु ने फटाफट अपने कपडे उतर दिए और नंगी हो गई, देव ने रेवती की तरफ देखते हुए दुखी सा मुँह बनाया, रेवती छुपी हुई ये सब देख रही थी, रेवती की सांसे फूलने लगी थी, उसके सामने उसकी सौतेली माँ िन्दु और उसका आधा अधूरा प्रेमी नंगे खड़े थे,

िन्दु आगे बढ़ी और देव के सामने बैठ गई और उसका लुंड मुँह में भर लिया, ये देख क्र तो रेवती का मुँह खुला रह गया, उसे अपनी आँखों पैर विश्वास नहीं हो रहा था, देव भी ऐसी जगह खड़ा था जहा से रेवती को सब कुछ साफ़ साफ़ दिखे,

िन्दु मजे से लुंड को चूस रही थी, कुछ देर चूसने के बाद िन्दु बिस्टेर पैर आ गई और अपनी टंगे फैला क्र लेट गई,

िन्दु- जल्दी से घुसा दो अपना ये लोढ़ा मेरी छूट में, कोशिश करना थोड़ा अंदर तक घुस जाये,

देव मुस्कुराया और अपना लुंड िन्दु की छूट पैर लगाया और धक्का मर दिया, िन्दु की चीख निकल गई, इधर रेवती की हालत ख़राब हो रही थी, उसके सामने हवस का नंगा नाच चल रहा था, एक तो वैसे hi वो आज कल बहुत गरम रहती थी जिसका कारन था रेणुका की काम उत्तेजना वर्धक दवाइया, जिससे रेवती गरम रहे और अपने बाप से चुद जाये, दवाइया तो असर क्र रही थी लेकिन किसी और मर्द के लिए,

देव िन्दु को छोड़ रहा था िन्दु लगातार चिलए जा रही थी, वही रेवती पूरी तरह गरम हो चुकी थी उसके हाथ उसकी चूचियों पैर पहच गए थे, और दूसरा हाथ उसकी छूट के उप्पेर, न जाने वो कब अपने अंगो से खेलने लगी थी, उभरती हुई जवानी जो पहले बार चुदाई देख रही थी वो भी दुनिया के सबसे खूबसूरत मर्द को छोड़ते हुए देख रही थी, इधर िन्दु चीखे मर मर क्र झाड़ रही थी, देव झड़ना चाहता था लेकिन िन्दु ज्यादा बर्दास्त नहीं क्र प् रही थी, एक लम्बी चुदाई के बाद िन्दु 4 बार झाड़ गई और देव ने भी अपना पूरा लावा िन्दु की छूट में भर दिया,

इधर अपनी छूट और चूचियों को रगड़ रगड़ क्र रेवती ने लाल क्र दिया था, इस बिच वो भी 3 बार झाड़ चुकी थी,

िन्दु- मजा आ गया जीवन में असली चुदाई का मजा मिला ह आज, तुम यहाँ आये ये हमारा सौभाग्य ह, ऐसा मर्द बड़ी किस्मत से मिलता ह, दुनिया में तुम्हारे जैसा मर्द शायद दूसरा कोई नहीं होगा,

देव- मैं तो गुलाम हु आपका,

िन्दु हसी और लड़खड़ाती हुई उठी और अपने कपडे पहनने लगी,

िन्दु- अभी चलती हु जल्दी hi आउंगी, उसके जाते hi देव बिस्टेर पैर लेट गया, िन्दु के जाने के बाद रेवती बहार निकल कर आई,

रेवती की आँखे लाल थी उसकी कपडे बयां कर रहे थे उसने अपने शरीर के साथ क्या किया ह,

रेवती- ये सब क्या था,

देव ने एक चादर अपने उप्पेर दाल ली,

रेवती- अब क्या छुपा रहे हो, मैं कब से तुम्हे नंगा देख रही हु, अब छुपाने का क्या फायदा,

देव- तुम मुझे क्यों देख रही थी,

रेवती- अरे मेरे सामने नंगे रहोगी तो देखूंगी न,

देव- तो अपनी आँखे बंद क्र लेती न,

रेवती- मैं क्यों करू अपनी आँखे बंद, ऐसा नजारा रोज तोडना मिलता ह देखने को,

देव- बड़ी बेशरम हो तुम तो,

रेवती- मैं ऐसी नहीं थी लेकिन न जाने क्यों अच्छा लग रहा ह ऐसी बेशर्मी करके, तुम में कुछ तो बात ह, तुम्हारे सामने शर्म दूर भाग जाती ह,

देव ने रेवती का हाथ पकड़ लिया और अपने उप्पेर खींच लिया, रेवती देव की नंगी छाती से चिपक गई, रेवती की चूचिया देव की छाती में डाब गाइट hi, रेवती की आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह निकल गई, रेवती थोड़ी चूंकि लेकिन उसने उठने की कोशिश नहीं की, रेवती ने देव की आँखों में देखा,

रेवती- लगता ह जनाब का अब तक मन नहीं भरा, इतनी देर से सम्भोग क्र रहे थे फिर भी उतावले हो,

देव- तुम्हारा मन नहीं कर रहा क्या,

देव की बात पैर रेवती शर्मा गई और उठने लगी, लेकिन देव ने उसे अपनी बहो में कास लिया,

रेवती- छोड़ो मुझे जाने दो कोई आ जायेगा,

देव- कोई नहीं आएगा,

रेवती- ये मेरी माँ का कमरा ह और उन्ही का बिस्टेर ह, उनके बिस्टेर में मैं उनकी बेटी किसी अनजान नंगे लड़के के साथ चिपकी हुई पड़ी हु कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा,

देव- यही की दोनों प्रेमी हैं,

रेवती- किसने कहा तुम मेरे प्रेमी हो,

देव- तुम मुझे प्यार नहीं करती, ोुह्ह्हह्ह माफ़ करना मुझस ेगलति हो गई, देव ने अपनी पकड़ ढीली कर दी,

रेवती थोड़ी सी बैचैन हो गई,

रेवती- मैंने ऐसा तो नहीं कहा,

देव- तो क्या कहा तुमने,

रेवती शर्मा गई,

देव ने मोके का फायदा उठाते हुए रेवती के होतो से अपने हॉट जोड़ दिए, रेवती ने कुछ देर तो कसमसाहट सी की लेकिन जल्दी hi शांत हो गई, देव ने उसे अपने उप्पेर लिटा लिया, देव का लुंड जो कुछ देर पहले hi िन्दु को छोड़ चुक्का था फिर से खड़ा हो गया था, जो अब सीधे रेवती की जंगो के बिच में घुसा जार है था,

रेवती आराम से देव के उप्पेर लेती थी, अब उसे कोई शर्म या घबराहट नहीं थी, बल्कि एक अलग hi रोमांच आ रहा था, देव के हाथ रेवती की गांड पैर पाहकः चुके थे, रेवती ने कोई विरोध नहीं किया, देव को रास्ता साफ़ दिखा और उसने रेवती के शरीर को मसलना शुरू क्र दिया, जिसका प्रभाव ये हुआ की रेवती ने भी देव के होतो को चूमना शुरू क्र दिया,

देव ने रेवती को अपने निचे क्र लिया और उसके पुरे बदन को चूमने लगा, रेवती भी मजे से उसका साथ दे रही थी वो तो पहले से hi गरम हुई बैठी थी, एक ऐसे अनजान लड़के साथ जो उससे बस दूसरी बार मिला था और दोनों बस संदिग्ध परिश्थिति में, लेकिन जवानी की काम वासना कुछ भी करने पैर मजबूर कर देती ह,

रेवती के हाथ देव के नंगे शरीर पैर घूम रहे थे, वो बड़ी उतावली हुई जा रही थी, देव ने भी तुरनत रेवती की चोली खोल दी जिससे रेवती की 34 के आकर की चूचिया सामने आ गई, देव ने तुरंत अपना मुँह रेवती की चूचियों पैर लगा दिया, रेवती भी उसका सर अपनी चूचियों पैर दबाने लगी, देव का एक हाथ रेवती के घागरे में घुस गया और उसकी जांघो के बिच छूट पैर पहुंच गया, रेवती की छूट पहले से hi बहुत गीली हुआ पड़ी थी, देव ने तुरनत एक उंगली उसकी छूट में घुसा दी, जिससे रेवती की दर्द भरी आह निकल गई,

देव ने रेवती कोअपनी गॉड में उठाया और उसका घागरा खोल दिया, और चोली को निकल क्र अलग फेंक दिया, कुछ hi पालो में रेवती देव की बहो में बिलकुल नंगी थी, उसका कैसा हुआ शरीर बहुत hi खूबसूरत था, रेवती थी भी बहुत खूबसूरत, देव रेवती को देखने लगा, उसके मन में अलग अलग भाव आ रहे थे, उसका दिमाग उसे रोक रहा था लेकिन दिल में जो नफरत थी वो आगे बढ़ने को उतीजीत कर रही थी,

देव ने अपने दिल की सुनी और रेवती को जांघो पैर अपने हॉट रख दिए, रेवती तो इस समय देव की कठपुतली बानी हुई थी,

इधर सात्विक को बंधा हुआ था और उसे भुनने के लिए आग जला दी गाइट hi,

सात्विक- रुक जाओ वर्ण तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा,

आदमी- हमारे लिए क्या अच्छा ह ये हम जानते हैं,

जब कोई नहीं मन तो सात्विक ने कुछ्ह मंत्र पढ़ने शुरू किये और जो आग सात्विक को भुनने के लिए जलाई थी वही आग वह के लोगो की झोपड़ियों में लगनेलगी, चारो तरफ भागदौड़ मच गई, चीख पुकार आने लगी, सबा घबरा गए, तभी वह का सबसे बूढ़ा आदमी जो एक झोपडी में लेता रहता था वो जमीन पैर रेंगता हुआ बहार आया और जोर से चिल्लाया- रुक जाओ सभी,

उसकी आवाज सुनकर कुछ लोग उसके पास आये और उसे सम्हालने लगे, वो आदमी सात्विक के पास आया और हाथ जोड़ क्र बैठ गया- महाराज इस आग को रोक लीजिये, ये सब मूरख लोग हैं इन्हे इंसान की पहचान नहीं ह, मैं जानतहुँ आप कोई बड़े तांत्रिक हैं, कोई तांत्रिक hi इस पहाड़ पैर ऐसा कुछ कर सकता ह,

सात्विक ने उस बूढ़े की बात सुनकर आग को रोक दिया, आग बंद होने पैर वह शांति हुई, सभी लोग सात्विक के पास आ गए और हाथ जोड़ लिए, एक लड़के ने सात्विक को खोल दिया,

बूढ़ा आदमी- महाराज हमे तो आपका hi इंतजार था,

सात्विक- मेरा इंतजार

बूढ़ा आदमी- है महाराज इस पहाड़ पैर को एक मंत्र में बंधा हुआ ह जिसे सिर्फ कोई बड़ा तांत्रिक hi खोल सकता ह, ऐसा तांत्रिक जिसके पास तंत्र और मंत्र दोनों की ताकत हो,

सात्विक- तुम्हे कैसे पता की मेरे पास तंत्र और मंत्र दोनों की शक्ति ह,

बूढ़ा आदमी- इस पहाड़ पैर कोई भी मंत्र काम नहीं करता और न hi कोई तंत्र काम करता ह, इस पहाड़ पैर वही कुछ चमत्कार कर सकता ह जिसमे दोनों की ताकत हो,

सात्विक- ऐसा क्या राज ह इस पहाड़ में,

बूढ़ा आदमी- इस पहाड़ में एक महँ शक्ति कैद ह, ऐसी शक्ति जिसका सामना पूरा संसार नहीं कर सकता ह,

सात्विक- मैं कुछ समझा नहीं,

बूढ़ा आदमी- आज से बहुत समय पहले एक महँ ऋषि ने इसे अपने मंत्रो से बांध दिया था, और इस पहाड़ को ऐसा बना दिया था की न hi कोई इसे तोड़ सकता ह न hi इस पहाड़ पैर कोई फल उगेगा ताकि कोई इस पहाड़ केर उप्पेर न आये, इस पहाड़ के अंदर एक गुफा ह जिसमे वो शक्ति कैद ह, उस ऋषि ने कहा था इस शक्ति को कोई महँ तंत्र और मंत्र का ज्ञानी hi बहरा नहीकल सकता ह,

ये सुन क्र सात्विक असमंजस में था, उसे ठीक से कुछ समझ hi आ रहा था,

सात्विक- तुम सब कोण हो,

आदमी- हम इस पहाड़ के रक्षक हैं, हमारी पीढ़िया हजारो सालो से इस पहाड़ की रक्षा करते आ रहे हैं ताकि कोई इस पहाड़ को नुकसान न पंहुचा सके,

सात्विक- क्या शक्ति ह वो

आदमी- आप इसे खोल क्र खुद hi देख लीजिये,

सात्विक ने पहाड़ को देखा और उसने महसूस किया की इसे मंत्रो से बंधा हुआ ह, सात्विक आया hi इस शक्ति के लिए था, सात्विक ने तुरंत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल शुरू क्र दिया, सात्विक की शक्ति उम्मीद से ज्यादा तेज काम कर रही थी, और जल्दी hi वो पहाड़ टूटने लगा उसमे दरार पड़ने लगी, और कुछ hi देर में वो अहद हिलने लगा और उसमे एक रास्ता बन गया, पुरे पहाड़ में दरार आ गई, पूरा जंगल कैंप उठा था,

वह के सभी लोग ख़ुशी से नाचने लगे थे,

इधर वो पहाड़ खुला वही भौमिक जी जो लगभग अपने राजय के करीब पहुंचने वाले थे एक दम से रुक गए, उनके दिल की धड़कन बढ़ने लग थी, उन्हें पसीना आने लगा था, ऐसा लग रहा था जैसे कुछ बड़ा होने वाला ह, मौसम बदल रहा था, आसमान में बदल च गए और बिजली कड़कने लगी, और ये मंजर सभी जगह था, उस पहाड़ पैर भी ऐसे hi हालत थे,

इधर प्रताप सिंह के राजय में बहुत जोर की आवाज हुई, आसमानी बिजली बिलुक महल के अंदर गिरी, चारो तरफ हाहाकार मच गया, इसकी आवाज देव और रेवती को भी आये, रेवती घबरा क्र देव से लिपट गई, देव भी चौंक गया ये सब क्या हुआ,

देव- रेवती उठो जल्दी से कपडे फिनॉल

रेवती- क्यों कुछ नहीं करोगे क्या,

देव- लगता ह महल में कुछ हुआ ह, शायद आसमानी बिजली गिरी ह तो हो सकता ह इधर कोई आ जाये, और वैसे भी मेरा ये अगर तुम्हारे अंदर गया तो तुम कुछ दिनों तक हिल भी नहीं पाओगी, ये सही समय नहीं ह कुछ करने का, तुम मेरी मदद करना चाहती हो, अगर आज तुम इसके निचे आ गई तो तुम्हे मदद की जरुरत होगी, मैं जल्दी hi आऊंगा तुम्हरे लिए, लेकिन अभी मेरा यहाँ से निकलना जरुरी ह,

रेवती- मैं तुम्हारे साथ चलूंगी, मुझे अपने साथ ले चलो, मुझे यहाँ दर लगता ह,

देव- किस बात का सर ये तुम्हरे पिता का घर ह, तुम राजकुमारी हो,

रेवती- तुम नहीं जानते यहाँ क्या हो रहा ह, मुझे ऐसा महसूस होता ह जैसे मेरे पिता की नियत मेरे लिए hi ख़राब हो रही ह, उन्होंने मुझे अपना रक्षा कवच बनाया हुआ ह, और हमेशा अपने साथ रखते हैं, कुछ समय पहले वो मेरी शादी करवाने वाले थे वह भवर सिंह के राजय में, लेकिन वह एक राक्षश आ गया जिस वजह से शादी नहीं हुई, वर्ण मेरी जिंदगी का सोडा तो उन्होंने पहले hi कर दिया था, और जब से उस राक्षश ने मुझे देख क्र मेरे पिता को जिन्दा छोड़ा ह तब से वो मुझे अपने करीब रखते हैं और न जाने कहा कहा हाथ लगते हैं, मुझे अब दर लग रहा ह,

ये शादी की बात देव के लिए कुछ नै थी, मतलब वह कुछ बड़ी योजना हो रही थी, और अपना hi पिता अपनी बेटी के साथ ये सब कैसे सोच सकता ह, ये सोच देव का दिमाग ख़राब हो गया,

देव- लेकिन तुम मेरे साथ कैसे जाओगी, मेरा कोई ठिकाना नहीं ह, मैं इधर उधर भटकता हु,

रेवती- इस कैद से तो अच्छी hi जिंदगी जियूँगी मैं,

देव को समझ नहीं आया क्या करे लेकिन समय काम था, उसे यहाँ से निकलना था, क्योकि उसके दिल में अजीब सी हलचल हो रही थी,

देव- ठीक ह तुम जल्दी से कपड़ो का इंतजाम करो और मेरे लिए किसी सैनिक के कपडे और खुद के लिए की गाओं की लड़की के कपड़ो का इंतजाम करो,

रेवती जल्दी से उठी और अपनी फटी हुई चोली को जल्दी से पहना और फिर अपना घागरा पहन क्र तुरंत बहार निकल गई, देव सोच में डूबा हुआ इधर उधर घूम रहा था, कुछ hi देर में रावटी आ गई, उसने कपडे दिए, देव ने कपडे बदले और रेवती ने भी कपडे बदल लिए,

देव- बहार क्या हो रहा ह

रेवती- भगदड़ मची हुई ह, एक आसमानी बिजली महल के बीचो बिच गिरी ह, और मेरे पिता मुझे धुंध रहे हैं उन्हें दर लग रहा ह, जल्दी करो कोई यहाँ आता hi होगा,

देव- ठीक ह हम इस भगदड़ का हिस्सा बन क्र यहाँ से निकलेंगे, बस तुम मुझे उस तालाब के पास ले चलो जहा हम मिले थे, वह से रास्ता मैं जनता हु, रेवती देव को लेकर छुपती हुई तालाब की तरफ ले जाने लगी, इधर प्रताप सिंह के सैनिक रेवती को ढूढ़ने में लगे हुए थे, और रेणुका जल्दी से डोडो hi अपने कमरे में आई देव को देखने के लिए, देव को वह न प् कर वो घबरा गई, उसने अपने आदमियों को देव को ढूढ़ने में लगा दिया,

वही देव एक सैनिक बन क्र रेवती को ऐस ेलेकर जार है था जैसे किसी दासी की जान बचा क्र कही सुरक्षित जगह पंहुचा रहा हो, बहुत मुश्किल नहीं हुई उन दोनों को तालाब तक पूछने में, तालाब के पास पहुंच क्र देव ने पहले हालत का निरिक्षण किया फिर जिस रस्ते से वो यहाँ आया था उसी रस्ते से रेवती को लेकर निकल गया, ज्यादा तर सैनिक महल की तरफ भाग रहे थे तो किसी ने धयान नहीं दिया, और देव को एक घोडा भी मिल गया देव ने रेवती को घोड़े पैर आगे बैठाया और दौड़ लगा दी, लेकिन कुछ सेनिको ने उसे रोक लिया

सैनिक- आईए तुम इस तरफ कहा जार हे हो, महल तो उधर ह, ये रास्ता तो जंगल एमए जाता ह,

देव- वो इस दासी की हालत ख़राब ह इसे इसके गाओं ले जार है हु,

बस यही गलती हो गई देव से,

सैनिक- इस महल की दसियो का को गाओं नहीं होता लड़के, यह ाकि दासी बस इसी महल के नादेर रहती हैं , कभी बहार नहीं जाती,

उस सैनिक ने तलवार निकल क्र रेवती के मुँह पैर ढके हुए घूँघट को हटा दिया, घूँघट हटते hi वो पहचान गया, क्योकि आज कल रेवती हमेषा प्रताप सिंह के साथ hi दिखाई देती थी,

वह के सेनिको ने देव पैर हुम्ला कर दिया, लेकिन देव कहा उनके काबू में आने वाला था, देव ने एक लात उस सैनिक को मरी और उसकी तलवार चीन ली, अब देव को तलवार ठीक से चलनी नहीं आती थी वो बस ऐसे hi तलवार को घूमता हुआ घोडा लेकर भागने लगा, वो यहाँ लड़ क्र समय ख़राब नहीं करना चाहता था, कुछ सैनिक उसके पीछे भागे और दो सैनिक महल की तरफ भागे प्रताप सिंह को इस बारे में बताने के लिए,

सेनिको ने जैसे hi प्रताप सिंह को ये सब बताया, और ये बात सुनते की की उसकी बेटी को उसके सुरक्षा कवच को लेकर कोई भाग गया ह पुरे राजय में कोहराम मच गया, प्रताप सिंह ने तुरंत तलवार निकली और उन दोनों सेनिको के सर काट दिए, और सेनापति से तुरंत सेना भेजने को कहा,

सेना पति ने तुरनत सेना की एक टुकड़ी निकल दी, लेकिन अब तक बहुत देर हो चुकी थी, वही रेणुका को जब पता चला की देव गायब ह और उधर रेवती भी गायब ह, उसका सर फटने को हो गया, उसे तो समझ hi नहीं आया की ये सब क्या हुआ,

देव रेवती को लेकर निकल तो गया लेकिन कह अजय ये समझ नहीं आ रहा था, उसके खुद के पास जगह नहीं थी तो रेवती को कहा रखता, और निहारिका के सामने उसे लेजा hi नहीं सकता था, क्योकि इस संसार में ऐसा कोई नहीं था जो निहारिका न पहचाने , दुनिया में उससे खूबसूरत औरत कोई नहीं थी, और ये बात सब जानते थे, देव को पहचानना आसान नहीं था क्योकि वो पहले ऐसा नहीं था जैसा अब ह, उसकी कभी कोई चर्चा नहीं करता था, उसके जीवन में उसकी जो चर्चा हुई थी वो बस उस प्रतियोगिता में hi हुई थी,

कैर देव ने अपने सर पैर मुसीबत तो ले hi ली थी,

इधर सात्विक उस पहाड़ के अंदर पहुंच चुक्का था और उसके पीछे थे वह के सभी लोग, पहाड़ के अंदर एक गुफा थी, ये पहाड़ बहार से पहाड़ था अंदर से तो ये एक महल जैसा था, जैसे महल का खण्डार हो और चाट की जगह वो पहाड़ से धक् दिया गया हो, लोगो ने मशाल बना क्र चारो तरफ रौशनी कर दी, सात्विक आगे बढ़ने लगा, एक दम सनता था अहा, लेकिन हवा ठंडी थी,

तभी सबको किसी चीज के गुरने की आवाज आई, सब दर से गए लेकिन सात्विक उस आवाज की तरफ चल दिया, आवाज के नजदीक पाहकः तो वह एक कमरा था जिसका दरवाजा बंद था, एक ादके ने आगे बढ़ क्र दरवाजे को हाथ लगाया तो वो हवा में उड़ता हुआ बहुत दूर जाकर गिरा,

बूढ़ा आदमी- महाराज इसे भी मंत्रो से बंधा हुआ ह, यही वो शक्ति ह,

सात्विक ने अपनी विद्याओ का इस्तेमाल किया और अपनी पूरी तनरा विद्या को लगा क्र उस दरवाजे को खोल दिया था, सात्विक ने दरवाजा तो खोल दिया था लेकिन उसने महसूस किया की वो जितना अपनी तंत्र विद्या का इस्तेमाल करता जार है था उतना hi मंत्रो की विद्या को भूलता जा रहा था, इसका कारन उसे समझ नहीं आया, और अभी समझने का समय भी नहीं था, कमरे का दरवाजा खुलते hi सभी अंदर आ गए, और सामने रखा था एक बहुत बड़ा पत्थर का ताबूत, जो चारो तरफ से बंद था, और उसी के अंदर से आवाज आ रही थी, बड़ी hi अजीब सी आवाजे थी,

सात्विक- क्या ह इसमें

किसी ने कोई जवाब नहीं दिया, सभी लोग हाथ जोड़ क्र उस ताबूत के चारो तरफ बैठ गए, सात्विक अचंभित था,

सात्विक ने ताबूत को चारो तरफ से देखना शुरू किया, उसमे तमिल और संस्कीरत भाषा में कुछ लिखा हुआ था, सबसे उप्पेर लिखा था एक नाम राजा भैरव,

( इस ताकत को यहाँ कैद किया जा रहा ह, इसे भगवन की शक्ति से कैद किया जा रहा ह, और सभी को सलाह दी जाती ह की इसे कभी न खोला जाये, ये ताकत पूरी इंसानियत को तबाह क्र सकती ह, पूरी इंसानियत को भ्रष्ट क्र सकती ह, यहाँ तक व्है आएगा जो अमरता के पीछे होगा, और अमरता hi सबसे बड़ा भरम ह दुनिया में, मृत्यु के सच को पहचानो अमरता के पीछे मत जाओ, वर्ण संसार नष्ट हो जायेगा, खुद को पहचानो और इस ताकत को यही बंद रहने दो, अगर ये बहार आएगी तो सर्वनाश होगा,

इसे ऐसे मंत्रो से बंधा जा रहा ह जिसे वही खोल सकता ह जिसके पास मंत्र और तंत्र की शक्ति हो, क्योकि जो मंत्र पढ़ेगा वो तंत्र की तरफ नहीं जायेगा और जो तंत्र पढता होगा वो मंत्र नहीं सिख सकता, इसलिए ऐसा दुनिया में कोई नहीं होगा जो मंत्र और तंत्र दोनों का ज्ञानी हो, और अगर फिर भी ऐसा कोई इंसान मिल भी गया और यहाँ तक आ गया तो समझो ये उप्पेर वाले की hi इच्छा ह, लेकिन जॉब hi करना सोच समझ क्र करना, )


ये सब पढ़ क्र सात्विक बिलकुल अचंभित था, ये कैसी ताकत ह, उसके अंदर अजीब सी भावनाये उभर रही थी, लेकिन जब से सात्विक इस पहाड़ पैर आया था उसके अंदर नकारात्मक ऊर्जा उभर रही थी, ऐसी ऊर्जा जो सात्विक की अच्छे को दबती जा रही थी, सात्विक के अंदर ताकत पाने की इच्छा बढ़ती जा थी, और उसी इच्छा के वश में होकर सात्विक ने वो ताबूत खोल दिया,
 
अपडेट- 17






चारो तरफ एक अंधकार सा चाय हुआ था, ऐसा लग रहा था जैसे कोई शक्ति सूर्य को hi निगल रही ह, दिन में hi अँधेरा सा हो गया था, आसमान में बिजलिया कड़क रही थी, पक्षी इधर उधर उड़ रहे थे, जंगली जानवर शोर मचा रहे थे, सभी ज्योतिष ऐसे हालत देख क्र घबराये हुए थे, जगह जगह आसमान से बिजली गिर रही थी, और जहा भी बिजली गिरती पुरे इलाके को तहस नहस क्र देती, ये सिर्फ कुछ राजयो में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हो रहा था, भवर सिंह अपने महल की चाट पैर खड़ा हुआ था और रीवा को अपने सामने करके खड़ा था, रीवा hi नहीं बल्कि बाकि तीनो राजकुमारियों, अमिता सोमिया और अक्षरा को भी अपने करो तरफ खड़ा करके उनके बिच में खड़ा था, और ये सब नजारा देख रहा था, वही प्रताप सिंह दर क्र अपने महल में घुस चुक्का था, रेणुका पागलो की तरह पुरे महल में देव को ढूढ़ती फिर रही थी, उसने अपनी बेटी को खोजने की एक बार भी कोशिश नहीं की,

(किसी ने सही कहा ह जब औरत वासना में अंधी होती ह तो उसके लिए कोई रिश्ता मायने नहीं रखता, वो अपनी औलाद तक को भूल जाती ह, जिसका परिणा हम आज कल न्यूज़ में रोज देख रहे हैं)

देव रेवती को लेकर एक जंगल में रुक गया, तेज बारिश और तूफ़ान जैसे हालत हो रहे थे, देव के सामने एक पेड पैर बिजली गिरी जिससे दर क्र रेवती देव से लिपट गई, लेकिन देव के चेरे पैर कोई दर नहीं था, वो एक दम शांत था, देव घोड़े से उतरा और घोड़े को वापस भगा दिया, जिससे उसके पीछे आने वाले सैनिक उसे ढूंढ न पाए, देव के दिमाग में बस एक hi जगह आ रही थी, वो रेवती को लेकर सीधे आचार्य जी के पास पंहुचा, जहा सुगंधा भी वापस आ चुकी थी,

देव जैसे hi आचार्य जी की झोपडी में घुसा तो सुगंधा के हाथ में पानी से भरा घड़ा था जो तुरंत निचे गिर गया, और वो पागलो की तरह देव से लिपट गई, देव बस ऐसे hi खड़ा रह गया, वही रेवती पहले तो चौंक गई लेकिन फिर उसके अंदर जलन के भाव उभरने लगे,

सुगंधा – देव तुम ठीक हो न, तुम कहा चले गए थे मैंने तुम्हे कहा कहा नहीं ढूंढा,

आचार्य जी- बेटी उसे आराम से बैठने तो दे,

सुगंधा को अहसास हुआ वो कहा ह और क्या कर रही ह, वो शर्मा क्र पीछे हैट gai,fir उसकी नजर रेवती पैर गई,

देव- आचार्य जी आपकी सहायता चाहिए, और संसार में आपके सिवा मैं किसी पैर विश्वास नहीं क्र सकता,

सुगंधा- बिना झिजक बोलो, जान जा सकती ह लेकिन तुम्हारे विश्वास को टूटने नहीं दूंगी,

देव ने रेवती को देखा,

देव- रेवती तुम जरा बैठो मैं सुगंधा से बात करके आता हु,

देव और सुगंधा बहार आ गए,

सुगंधा- क्या बात ह देव

देव- ये रेवती ह प्रताप सिंह की बेटी,

प्रताप सिंह का नाम सुनकर सुगंधा के दन्त भींच गए,

सुगंधा – इसे यहाँ क्यों लाये हो तुम,

देव- क्योकि इसके बाप को उसकी किये का फल भुगतना ह,

सुगंधा के चेरे पैर एक मुस्कान आई,

सुगंधा- तो बताओ मुझे क्या करना ह,

देव- इसे इस बात का अहसास न हो की मैं कोण हु और ये यहाँ क्यों ले गई ह, इसे बस ये पता हो की मैं दूसरे राजय का रहने वाला हु,

सुगंधा – ऐसा hi होगा, मैं हर कदम पैर तुम्हारे साथ हु,

देव- मुझे अभी जाना होगा, और किसी को पता न चले मैं जिन्दा हु या नहीं, या यहाँ कभी आया था,

सुगंधा- पिता जी ने मुझे बता दिया था, तुम चिंता मत करो किसी को कुछ पता नहीं चलेगा,

देव- मेरा एक काम और करोगी, मैं तुम्हे कुछ ज्यादा hi जिम्मेदारी दे रहा हु, क्योकि सिर्फ तुम हो जिस पैर मैं विश्वास करने की हिम्मत कर रहा हु, क्योकि उस प्रतियोगिता के मैदान में सिर्फ तुम थी जो मेरी मदद के लिए आगे आई थी,

सुगंधा- एक दोस्त होने के नाते मेरा यही फर्ज था,

देव- तुम्हे कस्तूरी को धुंध क्र लाना होगा और उससे पता करना होगा उसने ये सब क्यों किया, क्योकि काफी कड़िया जुड़ रही हैं लेकिन एक कस्तूरी की कड़ी नहीं जुड़ प् रही, उसने किस वजह से ये सब किया,

सुगंधा की आँखों में नमी थी,

सुगंधा- मैं उसे पटल में से भी धुंध लाऊंगी,

देव- तुम्हारा अहसान रहेगा मुझ पैर,

सुगंधा ने देव को गले से लगा लिया,

दोनों अंदर आये,

देव- रेवती तुम्हे कुछ दिन यहाँ रहना होगा, मैं पहले अपने राजय में जाकर तुम्हरे लिए सब इंतजाम करता हु, तब तक तुम यहाँ चुप क्र रहो, ये सुगंधा ह मेरी दोस्त ह ये तुम्हरा ख्याल रखेगी,

रेवती- मैं यहाँ कैसे रहूंगी, मैं एक राजकुमारी हु, इस झोपडी में कैसे रह सकती हु,

देव- जहा तुम थी वो महल था या तुम्हरी कैद थी, वह सोने की कैद थी और यहाँ खुला आसमान ह, वह तुम साँस भी अपने पिता के अहसान से लेती थी और यहाँ तुम जो चाहे कर सकती हो, और ये तब तक hi ह जब तक मैं तुम्हारी सुरक्षा का इंतजाम न कर दू, इस जिंदगी को जी क्र देखो, और मैं जल्दी hi वापस आऊंगा,

रेवती देव से लिपट गई,

रेवती- मैं यहाँ तो रह लुंगी लेकिन तुम्हरे बिना नहीं रह पाऊँगी, तुमने मुझ पैर ऐसा जादू किया ह की मैं तुम्हारे बिना जीने की सोच भी नहीं सकती,

देव- इसीलिए मैं पहले जाकर सब ठीक करता हु,

रेवती को वह छोड़ क्र देव अपनी माँ के पास निकल लिया,

उधर भौमिक राजय में पहुंच चुक्के थे, पुरे राजय में हाहाकार मचा हुआ था, ये आसमान से गिरती हुई आपदा सब कुछ तबाह क्र रही थी, भौमिक जी ने राजय में घुसते hi कुछ मंत्र पढ़े और आसमान से गिरती हुई बिजली को रोक दिया, सब कुछ शांत होने लगा, और जैसे hi लोगो ने ये देखा की भौमिक जी ने सब कुछ रोक दिया ह तो उनकी जय जय कर होने लगी और भौमिक जी के महल पहुंचने से पहले hi ये खबर महल तक पहुंच गई की भौमिक जी ने बवंडर को रोक दिया ह,

राजगुरु और भवर सिंह को जैसे hi पता चला तो वो दोनों भौमिक जी को लेने के लिए महल के बहार hi आ गए,

भौमिक जी सबसे मिले, फिर वो सभी महल के अंदर एक कमरे में बैठे हुए थे, काम्य भी वही आ गई थी,

भवर सिंह- ये कैसे आपदा आ गई ह हमारे राजय में राजगुरु,

भौमिक- ये आपदा सिर्फ हमारे राजय में नहीं ह, मैं जिस रस्ते से आ रहा हु वह सब जगह ऐसे hi हालत हैं, कुछ बहुत बुरा होने वाला ह, जो इस संसार के लिए ठीक नहीं ह,

भवर सिंह- तुम दोनों भाई वह गए थे तुम्हे कुछ सफलता मिली क्या,

भौमिक जी ने उस जंगल में हुई साडी घटना कह सुनाई बस उस रौशनी अंदर सामने वाली बात कोछोड क्र, और बता दिया की सात्विक आगे गया ह,

भवर सिंह- मतलब तुम कुछ नहीं कर सके,

भौमिक जी ने थोड़े गुस्से में भवर सिंह पैर नजर डाली तभी अचानक से भौमिक जी के सामने एक नजारा आ गया जिसमे भवर सिंह के बहुत बड़ी सेना के साथ खड़ा था और उसके दूसरी तरफ एक अकेला इंसान खड़ा था,

भौमिक जी ने अपने सर को झटका और चारो तरफ देखा, उन्हें समझ hi नहीं आया ये क्या हुआ,

भौमिक जी- मुझे जाना होगा,

भवर सिंह- जाना होगा, तुम्हारा राजा यहाँ बैठा ह तुमसे बात कर रहा ह और तुम जाने की बात कर रहे हो,

भौमिक जी- मेरे पास इन सब बातो के अलावा भी बहुत चीजे हैं सोचने के लिए, और जो आप चाहते हैं उसके लिए सात्विक अपना काम कर रहा ह,

काम्य- अपने राजा को ऐसे उल्टा जवाब दे रहे हो, जानते हो इसका दंड मिल सकता ह

भौमिक जी- जैसे उन माँ बेटे को झूठा दंड देकर मरवा दिया ऐसे hi मुझे दंड देंगे, लेकिन ये मत भूलना मैं देव नहीं हु, और इस वक़्त आपका पूरा राजय मिलकर भी मेरा कुछ नहीं बिगड़ सकता,

भौमिक जी का ये रूप देख राजगुरु अचंभित थे, वो इससे पहले भी गुस्सा हुआ करते थे लेकिन आज उनके चेरे पैर अलग hi उग्र रूप था, राजगुरु ने भौमिक जी के अंदर के बदलाव को महसूस किया,

राजगुरु ने बात को सम्हाला- ऐसा कुछ नहीं ह भौमिक, तुम आओ मेरे साथ,

राजगुरु ने भवर सिंह को शांत रहने का इशारा किया और भौमिक को लेकर बहार निकल गए,

राजगुरु- भौमिक तुम मुझे कुछ बदले बदले लग रहे हो,

भौमिक- भैया वह कुछ हुआ था जिससे मैं अपने बदलाव महसूस कर रहा हु,

भौमिक जी ने अपने और सात्विक के सपने और उस रौशनी के सामने और अपना रफ़्तार के बारे में सब बताया,

भौमिक की बात सुनकर राजगुरु सोच में पद गए,

राजगुरु- भौमिक मैं तुम्हारे अंदर एक अलग hi ऊर्जा को महसूस क्र रहा हु, और ये भी महसूस कर रहा हु की वो ऊर्जा तुम्हारे अंदर नकारत्मक ऊर्जा को बढ़ा रही ह, भाई अगर हमे कोई ताकत मिलती ह तो उसे कैसे इस्तेमाल करना ह ये हमारी सोच पैर निर्भर करता ह, और तुम बहुत hi शांत इंसान हो तो अपनी इस ऊर्जा इस ताकत को संसार के भले के लिए इस्तेमाल करो,

भौमिक- लेकिन मैं नहीं जनता ये कैसी ऊर्जा ह, ये कैसी ताकत ह,

राजगुरु- तो पता करो, अपना धयान लगाओ, इस ऊर्जा को अपने काबू में करो और देखो ये ऊर्जा किस तरह की ह और तुम इसका इस्तेमाल कैसे संसार के भले के लिए कर सकते हो, और है जब तक इस ऊर्जा को काबू में न करो लो किसी को इसके बारे में मत बताना, क्योकि यहाँ सभी ताकत के भूके हैं, खुद भवर सिंह ऐसी hi ताकत पाने के लिए पागल हुआ जा रहा ह, कही वो तुम्हे कोई नुकसान न पंहुचा दे,

भौमिक- मैं इस भवर सिंह को नहीं छोडूंगा,

राजगुरु- ये तुम्हारा काम नहीं ह, तुम बस अपना धयान लगाओ और इस ताकत को काबू करो,

भौमिक- ठीक ह भैया

राजगुरु- मुझे सात्विक की चिंता हो रही ह, अगर उसके अंदर भी ये hi ताकत ह तो कही वो इस ताकत में खुद को न खो दे, अगर ये ताकत उस पैर हावी हो गई तो क्या होगा,

भौमिक- वो बहुत समझदार ह वो खुद को सम्हाल लेगा,

वही सात्विक ने जैसे hi ताबूत को खोला तो उसके सामने था एक बहुत hi लम्बा छोड़ा इंसान जिसे देख क्र ऐसा लग रहा था की वो सो रहा ह, बहुत hi घेरि नींद में सोया हुआ ह, और उसके सोने की आवाज इतनी ज्यादा थी की वो पहाड़ के बहार तक आ रही थी, ताबूत के खुलते hi वह हाथ जोड़े हुए बैठे लोग सर झुका क्र लेट गए,

सात्विक सब कुछ देख क्र बहुत अचंभित था, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था, तभी बूढ़ा आदमी उठा

बूढ़ा आदमी- आपने हमारे राजा को आजाद क्र दिया ह, इस संसार में कोई आपका कुछ नहीं बिगड़ सकता अब,

सात्विक- ये ह कोण और इस ताबूत में बंद होने के बाद भी ये जिन्दा कैसे हैं, जहा हवा तक नहीं आ जा सकती, और इन्हे किसने बंद किया, और क्यों बंद किया,

बूढ़ा आदमी- ये हैं इस पूरी धरती के राजा राजा भैरव, आज से कई हजार वर्ष पहले इन्होने पूरी धरती को जीत लिया, महा शक्तिशाली, महँ योद्धा, और सबसे खास बात भगवान् के महँ भगत, जिन्होंने भगवान् की तपश्या करके उन्हें खुश करके उनसे अमरता का वरदान पाया था, और उसके बाद पूरी धरती जीत ली, लेकिन फिर न जाने क्या हुआ की इन्हे यहाँ कैद कर दिया गया, और हमारे पूर्वज जो इनकी सेना में इनके सबसे खास योद्धा थे, वो इनकी सुरक्षा में यहाँ लगे रहे, और हमारी पीढ़ी कई हजार वर्षो से इस पर्वत की रक्षा करती आ रही ह, हमारे एक गुरु ने भविष्वाणी की थी की एक ऐसा इंसान आएगा जिसके पास तंत्र और मंत्र दोनों की ताकत होगी और भगवान् के दिव्यांश की शक्ति भी होगी, हमारे पूर्वज तब से आपके आने का इंतजार करते करते तबाह हो गए, हमारा सौभाग्य ह की आप हमारे सामने आये,

सात्विक- ये कैसे हो सकता ह, कोई अमर नहीं हो सकता,

बूढ़ा आदमी- उद्धरण आपके सामने ह, एक बंद पहाड़ में एक बंद कमरे में एक बंद ताबूत में जो इंसान बंद था जहा हवा तक नहीं जा सकती वो भूका प्यासा आराम से सो रहा ह, वो भी कई हजार वर्षो से,

सात्विक बस उस सोये हुए इंसान को देखे जा रहा था, उसका शरीर था भी इतना विशाल की वो चाहे तो पूरा पहाड़ उठा ले,

सात्विक- ये उठेंगे कैसे,

बूढ़ा आदमी- ये हम नहीं जानते,

सात्विक ने कुछ पालो के लिए अपनी आँखे बंद फिर

सात्विक- मुझे थोड़ा धयान लगाना होगा, इनकी नींद किसी मंत्र से बंधी हुई ह उसके लिए मुझे अपनी तंत्र विद्या को और जागृत करना होगा, मुझे एक शांत जगह चाहिए जिससे मैं धयान लगा सकू, तब तक तुम सब इनकी रक्षा करो ताकि कोई यहाँ तक न आ सके,

बूढ़ा आदमी- हम अपनी जान देकर भी इनकी रक्षा करेंगे,

सात्विक वह से निकल क्र एक शांत जगह पहुंच गया और अपनी तंत्र विद्या को और मजबूत करने के लिए धयान लगाने लगा, उधर भौमिक अपनी मंत्रो की शक्ति को मजबूत करने के लिए धयान लगा रहे थे, दोनों भाइयो के अंदर शक्ति समय थी, जिसमे एक अपने अंदर भगवान् की शक्ति को और मजबूत कर रहा था तो दूसरा नकारत्मक शक्ति को मजबूत क्र रहा था, जिसका परिणाम आगे चलकर दिखने वाला था,

देव रेवती को सुगंधा के पास छोड़ क्र निहारिका के पास चल दिया, और वह पहुंच क्र गुफा में घुसने से पहले उसने पुरे कपडे उतर दिए और नंगा hi गुफा में गया, निहारिका एक पत्थर पैर बैठी देव का hi इंतजार कर रही थी, देव के अंदर आते hi वो दौड़ती हुई देव से लिपट गई, निहारिका की हिलती हुई चूचिया देव की छाती से चिपक गई, और देव का मोटा लम्बा लकता हुआ लुंड निहारिका की जांघो से रगड़ रहा था लेकिन दोनों के मन में hi कोई गलत भावना नहीं थी, ये वो सच्चा प्रेम था, दोनों नंगे और संसार के सबसे खूबसूरत मर्द और औरत और जिनके पास संसार के सबसे खूबसूरत गुप्तांग थे, फिर भी दोनों के बिच वासना जैसा कुछ नहीं था, बस प्रेम था, और सिर्फ माँ बेटे का प्रेम नहीं था, क्योकि दोनों hi उस प्रेम से कही आगे निकल चुके थे,

निहारिका- कहा रह गया था,

देव- बस माँ दुश्मनो के खेमे में घुस गया था,

निहारिका- कस्तूरी मिली

देव- कस्तूरी तो नहीं मिली, है आचार्य जी और सुगंधा मिले, बड़ी बुरी हालत में जी रहे हैं कस्तूरी के कर्मो की वजह से,

नारिका- और क्या किया,

देव- मैं प्रताप सिंह के महल में गुसा और उसकी पत्नी रेणुका िन्दु और सेना पति की पत्नी योगिता और महामंत्री की बेटी परिधि को छोड़ दिया, रेणुका तो मेरे लिए पागल सी हो गाइट hi,

निहारिका- बहुत बढ़िया, मतलब तूने पहेली सफलता प् ली, और प्रताप सिंह की बेटी,

देव- उसे मैं अपने साथ ले आया, वो मेरे प्यार में पागल हो रही ह, दूसरी मुलाकात में hi मेरे साथ भाग आई ह,

निहारिका- ये तूने क्या किया उसे अपने साथ ले आया,

देव- यहाँ नहीं लाया हु सुगंधा के पास छोड़ दिया ह, उसके साथ कुछ करने का समय नहीं था, लेकिन उसके जरिये प्रताप सिंह को झुकाने का तरीका मिल गया ह,

नारिका- कैसा तरीका

देव- प्रताप सिंह को लगता ह रेवती उसकी जान बचा सकती ह, अब वो रेवती को वापस पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार ह, और वो कमीना इंसान अपनी बेटी को hi अपनी हवस का शिकार बनाना चाहता था,

निहारिका- वो तो ह hi गिरा हुआ, लेकिन अब कोई रिष्ता मेरे लिए मायने नहीं रखता ह, तुझे बहुत कुछ करना ह अभी,

देव- जनता हु मैं और मैं पीछे नहीं हटूंगा,

इधर प्रताप सिंह की सेना निकल चुकी थी रेवती को ढूढ़ने और देव ने आखिर में जो देव खेला था वो काम आ गया था, देव ने जो घोडा वापस भेजा था वो भवर सिंह के राजय की सीमा के अंदर आकर भेजा था, और प्रताप सिंह के सैनिक घोड़े तक पहुंच गए थे, और जैसे hi ये खबर प्रताप सिंह को मिली की रेवती को ले जाने वाला घोडा भवर सिंह के राजय में मिला ह, फिर तो प्रताप सिंह गुस्से में आग बबूला हो गया, उसे ये hi लगा की भवर सिंह ने बदला लेने के लिए hi उसकी बेटी को अगवा करवाया ह,

प्रताप सिंह और उसका बीटा वीरेंदर सिंह दोनों ने सेना तैयार क्र ली थी, प्रताप सिंह के और भी बहुत सरे बच्चे थे, जिनमे से 10 को जायज होने की उपाधि मिली हुई थी, जिनमे से एक थी रेवती और 9 लड़के जिसमे सबसे बड़ा था वीरेंदर सिंह बाकि 8 भी उसी की तरह खूंखार और ताकतवर थे, जो वीरेंदर की hi बात मानते थे,

खैर प्रताप सिंह की सेना तैयार हो चुकी थी भवन पूरा पैर हुम्ला करने के लिए, प्रताप सिंह के साथ आस पास के कई राजय मिल गए थे, कुछ hi दिनों में एक बड़ी सेना भवर सिंह के राजय की तरफ पहुंच चुकी थी, इधर प्रताप सिंह को कुछ पता hi नहीं था, वो तो बस पागल हुआ जा रहा था अमर होने के लिए,

और जब तक भवर सिंह को पता चलता तब तक प्रताप सिंह की सेना राजय के बहुत करीब आ चुकी थी, भवर सिंह को जैसे hi पता चला उसने युद्ध के लिए सेना को तैयार करवाया, राजगुरु ने फिर से प्रताप सिंह से बात करने की सलाह दी लेकिन भवर सिंह ने नहीं मणि और सेना तैयार क्र दी, युद्ध की तैयारी शुरू हो गई, और जब तक भवर सिंह की सेना महल के बहार पहकहति तब तक प्रताप सिंह उसके कई गाओं को तबाह करता हुआ अपनी सेना लेकर राजधानी में महल के सामने आ खड़ा हुआ था,

इतनी विशाल सेना देख क्र भवर सिंह और उसकी सेना के पेअर उखाड़ने लगे, भवर सिंह ने अपने बेटे सूरज और ज्वाला को युद्ध के लिए आगे भेजना चाहा लेकिन दोनों hi अपने पेअर पीछे खींचने लगे, जबकि प्रताप सिंह के बेटे सेना में सबसे आगे खड़े थे,

भवर सिंह को दिखाई दे गया की वो ये युद्ध नहीं जीत सकता, और जितनी बड़ी सेना सामने कड़ी थी वो पुरे राजय को तबाह कर सकती थी,

भवर सिंह- राजगुरु ये सेना पुरे राजय को तबाह कर देगी, कोई रास्ता सुझाइये,

राजगुरु- मैंने उससे बात करने की सलाह दी थी लेकिन आप मने नहीं अब वो इतना करीब आ गया ह की और उसे पता ह की वो जीत सकता ह,

भवर सिंह- तो क्या किया जाये,

राजगुरु- अब एक hi रास्ता ह,

भवर सिंह- कोनसा रास्ता,

अभिजीत- यहाँ से बहग चलते हैं

भागने की बात से सभी ने अभिजीत को गुस्से में देखा,

काम्य ने अभिजीत को चुप रहने का इशारा किया,

राजगुरु- हम प्रताप सिंह को द्वन्द युद्ध के लिए कहेंगे, क्योकि ये बात तो वो भी जनता ह युद्ध करने में उसके भी बहुत से सैनिक मरे जायेंगे, अगर द्वंद्व युद्ध से फैसला हो जायेगा तो शायद हम इस राजय को तबाह होने से बचा ले, और उम्मीद करते हैं हमारा योद्धा जीत गया तो पूरा राजय hi बच जाये,

सूरज- अगर हम हार गए तो,

राजगुरु- तो हम ये पूरा राजय हार जायेंगे लेकिन राजपरिवार को बचा लेंगे, और इस राजय के हजारो लोगो को भी,

काम्य- ये तरीका ठीक ह, आप खबर भिजवाइए प्रताप सिंह,

राजगुरु खुद ये खबर लेकर प्रताप सिंह के खेमे में पाहकः गए,

प्रताप सिंह- फिर से कोई समझौता लेकर आये हैं लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं होगा,

राजगुरु- मैं कोई समझौता लेकर नहीं आया हु महाराज, मैं बस सबकी भलाई के लिए आया हु,

प्रताप सिंह- अगर भवर सिंह आत्मसमर्पण कर दे और मेरी बेटी को वापस दे दे तो मैं किसी को नहीं मरूंगा,

राजगुरु- आपकी बेटी लेकिन आपकी बेटी यहाँ क्यों आएगी,

प्रताप सिंह- ज्यादा कहानिया मत बनाओ, मेरी बेटी को अगवा करवाया गया ह, और ये तुम लोगो ने करवाया ह,

राजगुरु- आपको गलत फहमी हुई ह, हमे ऐसा कुछ नहीं करवाया,

प्रताप सिंह- मुझे तुम लोगो पैर विश्वास नहीं ह, मैं इस राजय को जीत क्र अपनी बेटी वापस ले लूंगा,

राजगुरु- आपको हम पैर यकीन नहीं ह, आप जैसा चाहते हैं वैसा कीजिये, लेकिन पुरे राजय को तबाह करके या इतने सेनिको की बलि देकर आपने राजय जीत भी लिया तो आपको क्या मिलेगा ये तबाह हुआ राजय,

प्रताप सिंह- कहना क्या चाहते हो,

राजगुरु- अगर ये युद्ध द्वंद्व युद्ध में बदल जाये तो, आपका सबसे अच्छे योद्धा और हमारा सबसे अच्छा योद्धा आपस में लड़ क्र तय क्र दे की कोण जीतेगा, और जो भी जीते उसे सामने वाले राजा की बात माननी होगी,

राजगुरु की बात से प्रताप सिंह सोच में दुब गया,

प्रताप सिंह- इसमें कोई चल तो नहीं ह,

राजगुरु- हम सेनिको और परजा की रक्षा करना चाहते हैं बस,

प्रताप सिंह- ठीक ह लेकिन इसमें मेरी 2 शर्ते हैं,

राज गुरु- कैसी शर्ते,

प्रताप सिंह – पहेली ये की इसमें 4 – 4 योद्धा दोनों तरफ से लड़ेंगे और वो चारो राजपरिवार के लोग hi होंगे, अगर ये शरत मेजर ह तो ये फैसला होगा वर्ण हम इस पुरे राजय को तबाह कर देंगे,

राजगुरु जब प्रताप सिंह का सन्देश लेकर वापस आया और भवर सिंह को ये शर्ते बताई तो भवर सिंह की फैट गई उसके साथ साथ पुरे परिवार की फैट गई, क्योकि उसके परिवार मर्द hi नहीं थे, भवर सिंह को अपनी ताकत पैर बहुत घनाद था, लेकिन अपने बच्चो को कैसे सामने करेगा,

भवर सिंह- वो हम पैर युद्ध करने के लिए दूसरे राजाओ को साथ लाया ह, अपनी बेटी के अगवा होने का झूठा नाटक करके हमे बर्बाद करना चाहता ह,

राजगुरु- हो सकता ह लेकिन हमे कुछ तो करना hi होगा,

भवर सिंह – मेरे बेटो बताओ क्या फैसला ह तुम्हारा, क्या तुम उस प्रताप सिंह के परिवार के लोगो को हरा क्र इस राजय को बचाओगे, और हम उसके राजय को भी जीत लेनेगे,

द्वंद्व युद्ध का नाम सुनकर सभी घबरा गए, लेकिन यही मौका था सूरज और ज्वाला के लिए युवराज पद हासिल करने का,

सूरज और ज्वाला एक साथ- हम तैयार हैं,

काम्य- अभिजीत नहीं लड़ेगा, उसकी जगह कुणाल मेरे पति लड़ेंगे,

अब बेचारे कुणाल की आफत आ गई थी उसने आज तक कोई युद्ध नहीं लड़ा था,

काम्य का समर्थन भवर सिंह ने भी किया, और भवर सिंह सूरज ज्वाला और कुणाल युद्ध के लिए तैयार हो गए,

प्रताप सिंह को खबर भिजवा दी की हम द्वंद्व युद्ध के लिए तैयार ह, जल्दी hi एक महल के बहार hi मैदान तैयार क्र दिया गया, जिसके एक तरफ महल तो दूसरी तरफ प्रताप सिंह की सेना थी, और सेना को महल और इस युद्ध काफी दूर रोका दिया गया, बस प्रताप सिंह के योद्धा और परिवार के लोग hi मैदान के दूसरी टाफ नजदीक आये,

सभी मैदान में आ गए, राजगुरु और प्रताप सिंह के महामंत्री ने कुछ नियम बनाये जिसमे अगर परिवार का एक hi सदश्य मैदान में खड़ा ह तब तक युद्ध चलता रहेगा, और अगर कोई खुद हर मान लेता ह तो उसे मारा नहीं जायेगा, और अगर कोई योद्धा ज्यादा घायल हो जाये तो परिवार का कोई एक योद्धा उसकी जगह ले सकता ह, ये सिर्फ एक बार हो सकता ह,

ये आखिर वाला नियम प्रताप सिंह ने जानबूझ क्र बनवाया ताकि वो आखिर में युद्ध में आ सके और अपने हाथो से भवर सिंह को मार सके,

नियम बन गए थे, भवर सिंह सूरज ज्वाला और कुणाल मैदान में आ चुके थे, दूसरी तरफ से प्रताप सिंह के 4 बेटे वीरेंदर सिंह, इन्दर सिंह, जीतेन्द्र सिंह और संभु सिंह मैदान में आ खड़े हुए, चारो hi लम्बे चोदे और ताकतवर थे,



युद्ध का बिगुल बज चुक्का था, और चारो में युद्ध शुरू हो गया, इधर से भवर सिंह हावी पद रहा था वही दूसरी तरफ से वीरेंदर सिंह हावी हो रहा था, और सबसे कमजोर था कुणाल, बेचारा बस किसी तरह से अपनी जान बचा रहा था, भवर सिंह के लग कुणाल को गालिया दे रहे थे, वही प्रताप सिंह के लोग उसका मजाक बना रहे थे, लेकिन वो बेचारा तो अपनी जान बचा रहा था, कुणाल बहुत घायल हो चुक्का था, युद्ध काफी समय तक चल गया था, लेकिन प्रताप सिंह के बेटे भवर सिंह पैर हावी होने लगे थे, और संभु की तलवार कुणाल की गार्डन पैर आ चुकी थी,
 
अपडेट- 18



कुणाल की गार्डन पैर तलवार थी वही ज्वाला ने भी घुटने तक दिए थे, वो थक चुक्का था, बस भवर सिंह और सूरज पूरी हिम्मत से लड़ रहे थे, लेकिन सूरज भी बहुत घायल हो चुक्का था, वो भी हिम्मत हरने लगा था, प्रताप सिंह के बेटे किसी को हार मैंने के लिए हाथ उठाने hi नहीं दे रहे थे, वो लगातार मरे जा रहे थे, अपने बेटो को हारते देख भवर सिंह की हिम्मत टूटने लगी, उसकी तलवार के वॉर हलके पड़ने लगे थे,

तभी संभु ने कुणाल की गार्डन पैर तलवार राखी और जोर से चिलाय की – और ह क्या इसके खंडन में जो हमसे टक्कर ले सके, किसी की माँ ने उसे अपना दूध पिलाया हो तो आ जाओ,

संभु की बात पैर प्रताप सिंह के परिवार वाले और साथी हसने लगे, और भवर सिंह के परिवार वालो ने अपना सर झुखा लिया,

तभी एक आवाज आई- तुम सबकी माँ ने कितना दूध पिलाया ह ये मैं जरूर देखना चाहूंगा, माँ के दूध की बात ह तो मेरे कदम पीछे नहीं रह सकते,

सबने आवाज की तरफ देखा तो मैदान में hi थोड़ी दुरी पैर एक पेड था जिसमे से एक लड़का कूद क्र निचे आया, जिसे देख क्र वह बैठे सभी की आँखे फटी रह गई थी, क्योकि ते देव था, जो मुस्कुराता हुआ चला आ रहा था वो था ,

देव को वह देख क्र भवर सिंह और पूरा परिवार अचंभित था, वो जिन्दा कैसे है ये बहुत बड़ा सवाल था, खुद राजगुरु बुरी तरह चौंक गए थे, उधर प्रताप सिंह भी चौंक गया था क्योकि उसे भी यकीन नहीं हो रहा था ये जिन्दा कैसे ह,

लेकिन देव को वह देख क्र प्रताप सिंह के दिल में एक ख़ुशी सी आई उसे उम्मीद जगी की अगर ये जिन्दा ह तो निहारिका भी जिन्दा होगी,

वही अक्षरा और रीवा ख़ुशी से चिल्ला उठी, वो महल की चाट से सब देख रही थी, और दूर से देव को पहचान क्र वो ख़ुशी से उछाल पड़ी,

देव चलता हुआ युद्ध के बिच में आ गया, प्रताप सिंह भी उठ क्र वही आ गया,

प्रताप सिंह- तू जिन्दा ह, वह ये तो अच्छा ह, लेकिन तू इनकी तरफ से क्यों लड़ना चाहता ह, वैसे मुझे कोई ऐतराज नहीं ह, क्योकि तू मेरे बच्चो के सामने मट्टी का पुतला hi ह बस, लेकिन जिन्होंने तुझे और तेरी माँ को मरवाने की कोशिश की उनके लिए क्यों लड़ रहा ह,

देव- मेरा इनसे कोई सम्बन्ध नहीं ह, तू चाहे तो सबको मर दे, लेकिन तेरे बेटे ने माँ के दूध को ललकारा ह, दूध का कर्ज तो मुझे चुकाना होगा,

प्रताप सिंह- क्या तेरी माँ भी जिन्दा ह, वैसे तो अब तू इस परिवार का हिस्सा नहीं ह, क्यों भवर सिंह तूने इसे परिवार से बहार क्र दिया ह न, ये तो लड़ाई लड़ hi नहीं सकता लेकिन है अगर इसकी माँ जिन्दा ह तो मैं इसे मौका दे सकता हु, क्योकि इसे मरने के बाद इसकी माँ को मैं अपनी रखैल बनाऊंगा,

देव- तू जनता ह मैं यहाँ क्यों हु, इन लोगो को बचने के लिए नहीं बल्कि तुझे वो दर्द देने के लिए जिससे तू जिंदगी भर तड़पेगा, मैं तुझे मरूंगा नहीं बल्कि ऐसे ऐसे दर्द दूंगा जो तुझे रोज मरेंगे,

प्रताप सिंह- तू उसके लिए जिन्दा hi नहीं बचेगा, मेरे बच्चो सबसे पहले इसकी गार्डन धड़ से अलग कर दो, अगर ये हार भी मन्ना चाहे तब भी रहम मत करना, ये युद्ध में आ रहा ह तो नियम बदल रहा ह, अब हरने के बाद कोई रहम नहीं होगा, सबको मर देना,

प्रताप सिंह के बेटे हसने लगे,

वही भवर सिंह घबरा गया, उसे लगा अब मोत पक्की ह, पहले हार मान क्र जान तो बच सकती थी लेकिन अब तो सब मरेंगे,

भवर सिंह- तेरी हिम्मत कैसे हुई यहाँ आने की, तू हमे मरवाने आया ह,

देव ने कोई जवाब नहीं दिया वो कुणाल के पास गया और उसे खड़ा किया, और मैदान से थोड़ा दूर ले जाने लगा,

तभी पीछे संभु उसकी तरफ आया और देव तुरंत पीछे मुदा और संभु की गार्डन पकड़ी और हवा में उठा क्र दूर फेंक दिया,

और जैसे hi सबने ये नजारा देखा सबकी आँखे फटी रह गई, किसी को कुछ समझ नहीं आया ये क्या हुआ, संभु एक विशाल शरीर वाला बहुत ताकतवर इंसान ह, उसे 4 आदमी मिलकर भी ऐसे नहीं फेंक सकते थे,

देव ने कुणाल का हाथ पकड़ा और थोड़ी दुरी पैर लेजाकर बैठा दिया, फिर वापस मुदा और मैदान के बिच में आने लगा, उधर संभु दूर पड़ा हुआ था उसे तो पता hi नहीं चला वो इतनी दूर कैसे आ गिरा,

तभी जीतेन्द्र सिंह देव की तरफ तलवार लेकर डोडा जबकि देव खली हाथ hi आ रहा था, जीतेन्द्र ने तलवार चलाई जिससे देव एक तरफ हो गया और उसका हाथ पकड़ क्र एक मुक्का उसकी छाती में मारा जिससे जीतेन्द्र के मुँह से खून निकल आया, देव ने उसकी तलवार गिरा दी और प्रताप सिंह की तरफ मुस्कराकर देखते हुए उसका हाथ तोड़ दिया फिर दूसरा हाथ तोड़ दिया, जीतेन्द्र दर्द से छिलने लगा तो देव ने उसके मुँह पैर एक मुक्का मारा जिससे उसके सरे दन्त टूट कर बहार आ गए और जीतेन्द्र जमीन पैर बेहोश होकर गिर पड़ा, और प्रताप सिंह की हलकी सी चीख निकल गई,

ये नजारा देख क्र वह सभी फैट गई, खुद भवर सिंह और सूरज और ज्वाला की भी हालत ख़राब हो गई थी, लेकिन तभी वीरेंदर सिंह और इन्दर दोनों एक साथ देव की तरफ भागे, वीरेंदर आगे था तो देव ने उसके वॉर करने से पहले hi हाथ पकड़ा और दूर धकेल दिया, और पीछे आ रहे इन्दर को एक थपड मारा और उसकी तलवार वाला हाथ पकड़ लिया और मोड़ने लगा, फिर उसने प्रताप सिंह को देखा और इन्दर के हाथ में पकड़ी हुई तलवार को उसी के पेट में घुसा दिया और प्रताप सिंह को देखते हुए तलवार उसके पेट में घुमा दी, प्रताप सिंह गुस्से में चिल्ला उठा,

तभी पीछे से वीरेनदा आया और उसने तलवार का वॉर किया तो देव एक तरफ हो गया और वो वॉर सीधे इन्दर की गार्डन पैर हुआ और उसकी गार्डन अलग हो गई, वीरेंदर गुस्से में बोखला गया और लगातार तलवार घूमता हुआ देव पैर हुम्ला करने लगा लेकिन देव बड़े आराम से बचता रहा, फिर देव ने वीरेंदर की तलवार पकड़ ली और चीन क्र दूर फेंक दी, अब वीरेंदर हाथो से hi देव से लड़ने लगा,

वीरेंदर- मैं तुझे अपने हाथो से hi मरूंगा,


वीरेंदर सच में बहुत ताकतवर था, उसने दो तीन मुक्खे देव के मुँह और छाती में मरे, देव दो कदम पीछे हुआ और फिर खुद को सम्हाला और मुस्कुरा क्र प्रताप सिंह की तरफ देखा और एक जोर दर मुक्का वीरेंदर की छाती में मार दिया जिससे वो 10 कदम दूर जाकर गिरा, उसके गिरते hi प्रताप सिंह का पूरा परिवार खड़ा हो गया, देव आगे बढ़ा और वीरेंदर का हाथ पकड़ क्र उसे उठाया और एक जोर दर झटका उसके हाथ में मारा और कंधे पैर से हाथ तोड़ दिया, वीरेंदर दर्द से चीख पड़ा,

प्रताप सिंह घबरा गया और वो अपने बेटे की तरफ दौड़ पड़ा उसके पीछे उसके दूसरे बेटे भी थे, तभी देव ने अपनी तरफ आते हुए प्रताप सिंह को देख और मुस्कुराया, फिर उसने वीरेंदर की गार्डन पकड़ी और प्रताप सिंह की तरफ इशारा किया, की आ जा

और जैसे hi प्रताप सिंह ने तेज दौड़ लगाई तभी देव ने वीरेंदर की गार्डन पकड़ क्र घुमा दी जैसे कोई बच्चा की खिलोने की गार्डन घुमा देता ह, देव ने वीरेंदर की गार्डन मरोड़ क्र उसकी दिशा hi बदल दी थी, वीरेंदर के प्राण निकल गए और वो जमीन पैर गिर पड़ा, ये नजारा देख सबकी सांसे hi रुक गई, किसी में इतनी ताकत कैसे हो सकती ह, प्रताप सिंह तो अपने घुटनो पैर गिर पड़ा, और मैदान में चौथा योद्धा बचा था संभु सिंह, वो अपनी कमर को पकडे हुए पड़ा हुआ ये नजारा देख रहा था, और जैसे hi देव ने उसकी तरफ कदम बढ़ाये वो उठा और मैदान छोड़ क्र भाग लिया,

देव- क्यों प्रताप सिंह हो गया न फैसला, अब ले जा इन्हे उठा क्र और मन मातम, और पीला अपने बाकि बच्चो को उनकी माओ का दूध, जब ये तैयार हो जाये तो फिर ले आना, इतना बोल क्र देव मुदा और चल दिया, किसी की इतनी हिम्मत तक नहीं हुई की उसे रोक सके, वो चलता हुआ मैदान से बहार निकल गया, और काफी समय तक वह सनता च गया, भवर सिंह सूरज और ज्वाला भी घबराये हुए देव के किये कारनामे को देख रहे थे, उनकी तो प्रताप सिंह से भी ज्यादा फटी हुई थी, क्योकि देव अपना बदला ले रहा था, और शुरुआत प्रताप सिंह से की थी, उन्हें अपनी मोत भी दिखाई दे रही थी,

और महल के उप्पेर बैठी सभी औरतो की आँखे फटी हुई थी, अमरावती सौमित्र और काम्य को तो पसीने आये हुए थे, वही राजगुरु के चेरे पैर चिंता के भाव थे,

देव के वह से जाते hi प्रताप सिंह जोर से चीख चीख क्र रोने लगा, वो अपने दो बेटो को खो चुक्का था वो भी इतने ताकतवर योद्धाओ को,

भवर सिंह ने अपने बेटो को इशारा किया की जल्दी से यहाँ से निकल लो, वो तीनो वह से खिषकने लगे तभी प्रताप सिंह चिल्लाया- मेरे बेटो की मोत का परिणाम पूरा राजय भुगतेगा,

प्रताप सिंह- सेना पति हुम्ला करो और पुरे राजय को तहसनहस कर दो, किसी को जिन्दा मत छोड़ना, पूरा राजय जला दो,

सेना पति जो पहले से hi सेना को तैयार किये खड़ा था उसने तुरंत हमले का आदेश दे दिया, वही राजगुरु ने भी अपने सेनापति को युद्ध का आदेश दे दिया क्योकि अब कोई रास्ता नहीं बचा था, दोनों सेना एक दूसरे की तरफ चलने लगी,

अब भवर सिंह ख़ुशी मनाये की देव ने आकर उन्हें बचा लिया या मातम मनाये की उसकी वजह से पूरा राजय तबाह होने वाला ह,

तभी दोनों सेनाये एक दूसरे की तरफ दौड़ने लगी, और युद्ध शुरू हो गया, और भवर सिंह अपने बेटो को लेकर सेना के पीछे खड़ा था वही प्रताप सिंह अपने दोनों बेटो की लाशे गॉड में लिए बैठा था, उसके बाकि बेटे युद्ध में सबसे आगे थे, और तभी कुछ अजीब होने लगा, बहुत से सैनिक हवा में उड़ते दिखाई दिए, इस नज़ारे ने सबको चौंका दिया, और अचानक से युद्ध रुक गया, राजगुरु ने महल के उप्पेर से देखा और जोर से चिलए,

राजगुरु- महाराज जल्दी वह से निकालिये, अपनी जान बचाइए

भवर सिंह ने उप्पेर देखा,

राजगुरु – महाराज भागिए वह से राक्षश आ गया ह,

राक्षश का नाम सुनते hi वह दहशत फ़ैल गई, भवर सिंह और उसके बेटे तुरंत वह से महल क्र अंदर भाग लिया, और जैसे hi पीछे के सेनिको ने सुना राक्षश आ गया ह वो भी उलटे पाव भागने लगे, वही सेना को भागते देख प्रताप सिंह भी चौंक गया, और जब उसने उठ क्र देखा और सेनिको को हवा में उड़ते देखा, तभी उसकी नजर भवर सिंह पैर पड़ी, जो महल के अंदर भाग रहा था, पताप सिंह ने आगे बढ़ क्र देखा तो पाया की दोनों सेनाओ के बिच में वो राक्षश आ चुक्का ह अपनी कुल्हाड़ी लिए हुए और जो भी सामने आ रहा ह बस मार रहा ह, उसे फरक नहीं पद रहा की सामने किसकी सेना ह,

प्रताप सिंह ने तुरनत अपने बेटो को खबर भिजवाई की जल्दी से वह से निकालो और भागो, प्रताप सिंह की अपने बेटो की लाशो को लेकर वह से भाग लिया, दोनों सेनाओ में भगदड़ मच गई थी, अब तक सबने देव की ताकत देखि थी, जिसे देख क्र वो सब हैरत में पद गए थे, लेकिन अब जो वो देख रहे थे वो सच में भयानक था, वो राक्षश बस खून छटा था, दोनों सेनाओ के सैनिक एक साथ होकर राक्षश पैर हुम्ला करने लगे, लेकिन वो न जाने किस मिटटी का बना था कोई उसे छू भी नहीं प् रहा था,

दोनों सेनाओ में भगदड़ मच गई सब अपनी जान बचा कर भागने लगे, कोण किस तरफ भाग रहा था किसी को कुछ नहीं पता था, बस एक hi चीज दिमाग में थी बस अपनी जान बचाओ, और कुछ hi देर में पूरा मैदान खली हो गया, वह रह गई थी तो बस सेंको की लाशे, वो राक्षश मैदान में खड़ा हो गया और चारो तरफ देखने लगा, भवर सिंह और उसका परिवार छुपे हुए उसे देख रहे थे,

राक्षश कुछ पल वह ऐसे hi खड़ा रहा फिर अपनी कुल्हाड़ी को कंधे पैर रख क्र एक दिशा में चल दिया, उसके जाते hi सबने रहत की साँस ली,

राक्षश तो चला गया था लेकिन वो एक ऐसी दहशत छोड़ क्र चला गया था जिससे शायद hi कोई कभी उभर पाए, क्योकि 25-30 हजार सेनिको के बिच में अकेला खड़ा होकर सबसे युद्ध करने आ गया, ये अपने आप में hi बहुत भयानक था, और उससे भी ज्यादा खतरनाक था अकेले ने हजारो सेनिको को मार गिराया था,

प्रताप सिंह अपने राजय में लोट गया था और उसके साथ जो दूसरे राजय के राजा आये थे वो भी घबराये हुए अपने राजय में चले गए थे, उन्होंने अब तक रक्षाः के बारे में सुना था की ऐसा ह वैसा ह लेकिन आज अपनी आँखों से देख लिया था, और एक नहीं दो योद्धा देखे दूसरा देखा देव को जिसने वीरेंदर जैसे ताकतवर योद्धा की गार्डन किसी मुर्गे की तरह मरोड़ दी थी, और जैसे जैसे सबको पता चला की वो लड़का भवर सिंह का बीटा था, तो सबके दिल में भवर सिंह के राजय की ताकत की दहशत बैठ गई,

और ये वही समय था जिसके बारे में भवर सिंह ने कहा था की हमारे राजय की ताकत सब जगह पता चलेगी,

प्रताप सिंह अपने दो बेटो की लाशे और तीसरे अधमरे बेटे को लेकर अपने राजय में पंहुचा तो वह हाहाकार मच गया, बहुत से सैनिक मर चुके थे, प्रताप सिंह पूरी तरह टूट चुक्का था, जब रेणुका को खबर मिली तो उसके दिल में भी एक भय सा बैठ गया,

वही भवर सिंह घबराया हुआ सा अपनी राजगादी पैर बैठा हुआ था उसके सामने राजय के बड़े बड़े लोग बैठे हुए थे, भवर सिंह का पूरा परिवार डरा बैठा था,

कुणाल- आज देवदूत की वजह से हमारा परिवार जिन्दा ह,

काम्य- क्या बकवास कर रहे हो, उसकी वजह से पूरा राजय तबाह होने वाला था, प्रताप सिंह ने पुरे राजय पैर हुम्ला कर दिया था,

कुणाल- अगर वो नहीं आता तो इस राजय को बचने वाले महाराज और दोनों राजकुमार और मैं वही उस मैदान में पड़े हुए होते, फिर वो प्रताप सिंह क्या करता किसे पता था, तुमने देखा नहीं उसकी सेना तैयार कड़ी थी युद्ध के लिए, बस एक आवाज पैर hi पूरी सेना दौड़ पड़ी थी,

कुणाल की बात से सभा में बैठे बाकि लोग भी है है सही कहा करने लगे,

काम्य ने वह चुप रहना hi सही समझा,

राजगुरु- वो कहा से आया और कहा चला गया, किसी की कुछ समझ नहीं आया,

अभिजीत- अगर हम हर मान लेते तो प्रताप सिंह महाराज को मरता तोडना,

कुणाल- क्या भरोसा था की वो नहीं मरता, और राजय तो फिर भी चला जाता न, अब सब जिन्दा भी हैं और राजय भी बच गया,

भवर सिंह- उस राक्षश की वजह से, लेकिन ये राक्षश ह कोण जब आता ह बस मार्केट मचता ह,

सौमित्र - वो हमेशा युद्ध जैसे हालातो में क्यों आता ह,

अमरावती- हो सकता ह उसे खून खराबा करना और देखना पसंद हो,

भवर सिंह- ये सभा यही ख़तम होती ह, और सेना पति राजय की सुरक्षा बधाई जाये, और सैनिक भर्ती किये जाये, हमे अपनी पूरी ताकत दिखानी होगी,

राजगुरु- महाराज आपने कहा था हमारे राजय की ताकत सब देखंगे, आज वो ताकत सबने देखि जब देवदूत ने प्रताप सिंह के बेटो को खिलोनो की तरह तोड़ मरोड़ दिया,

भवर सिंह- ये hi तो चिंता का विषय ह राजगुरु,

राजगुरु ने सभी को भेज दिया बस वह भवर सिंह काम्य और राजगुरु बचे,

भवर सिंह- वो जिन्दा कैसे ह राजगुरु, उन सेनिको को बुलाओ जिन्होंने उन दोनों माँ बेटो को मारा था, और वो जिन्दा ह तो इतनी ताकत उसमे कहा से आई, ये संभव नहीं ह, कही वो कोई भूत तो नहीं था,,

राजगुरु- वो जिन्दा hi था महाराज, और उसकी ताकत ने मुझे भी अचंभित क्र दिया ह, भविष्वाणी सही होती दिख रही ह,

भवर सिंह- मैं उसे मार दूंगा, आदेश निकलवा दो, देवदूत जहा भी दिखाई दे उसे मार दिया जाये,

राजगुरु- आज का कारनामा देख क्र आपको लगता ह कोई उसे छू भी पायेगा,

भवर सिंह- सब कुछ ख़तम हो जायेगा, दो खतरे एक साथ हमारे सर पैर मंडरा रहे हैं, ये राक्षश तो था hi अब ये देवदूत भी आ गया ह,

काम्य - मेरे पास एक योजना ह,

भवर सिंह- कैसी योजना?

काम्य- क्यों न हम देव को वापस बुला ले,

भवर सिंह- ये क्या बोल रही हो,

काम्य- आज जो उसने ताकत दिखाई ह, उसे देख क्र लगता ह उसे कुछ ऐसा मिला ह जिससे उसकी ताकत इतनी बढ़ गई ह, अगर हमसे दूर रहेगा तो हम कभी पता नहीं कर सकेंगे की उसमे इतनी ताकत कहा से आई, और दूसरा हम उसकी ताकत का इस्तेमाल क्र सकते हैं अपने राजय की रक्षा करने के लिए, और अगर वो राक्षश फिर आता ह तो देव होगा हमारे पास उससे लड़ने के लिए, और हमे चिंता भी नहीं होगी की राक्षश देव को मर दे या देव राक्षश को दोनों में से जो भी मरेगा हमारा एक दुश्मन काम हो जायेगा, और देव हमारे नजदीक रहेगा तो वो कोई चाल भी नहीं चल पायेगा, हमारे पास मौका होगा उसे ख़तम करने का,

काम्य की बात से भवर सिंह और राजगुरु एक दूसरे का मुँह देखने लगे,

राजगुरु- वैसे तो मैं इस बार कोई चल कपट नहीं करना चाहता, एक बार करके hi मैं अपने भाई की नजरो में गिर चुक्का हु, लेकिन मैंने आपका नमक खाया ह और आपकी सेवा की कसम खाई ह इसलिए मजबूर हु, और मुझे कहना पद रहा ह की महारानी की बातो में सच्चाई ह, ये hi सबसे सही तरीका ह,

भवर सिंह- लेकिन वो हमारे पास क्यों आएगा, हमने उसके साथ इतना बुरा किया था,

काम्य- वो सब प्रताप सिंह ने किया था हमारे पास अच्छा तरीका ह प्रताप सिंह पैर इल्जाम लगाने का, और वैसे भी अब वो हमारा दुश्मन ह तो उससे सफाई मांगने कोण जायेगा,

भवर सिंह- और जो देव पैर इल्जाम लगे थे उनका क्या,

काम्य- वो मुझ पैर छोड़ दीजिये, बस आप पता करवाइये की वो ह कहा, और वो hi जिन्दा ह या उसकी माँ भी जिन्दा ह,

भवर सिंह- अगर उसकी माँ जिन्दा हुई तो उसे वापस लेन का तरीका तो ह मेरे पास,

तभी वह वो सैनिक आ गए जिन्होंने देव और निहारिका को मारा था,

भवर सिंह- मैं सच जानना चाहता हु, वह क्या हुआ था अगर झूट बोलै तो ऐसी मोत दूंगा की तुम्हारी आने वाली पीढ़िया भी याद करके डरेंगी,

सैनिक- महाराज हमने जो भी बताया था सच बताया था, हमने दोनों के शरीर अपनी तलवारो से चलनी क्र दिए थे, और वो महारानी तो वही गिर पड़ी थी बस राजकुमार के थोड़ी जान थी, फिर हमे चीता उन पैर छोड़ दिया, और चीता ने उन्हें खा लिया,

काम्य- अब भी मौका ह तुम्हारे पास सच बोलने का, क्योकि वो देव आज तुम सबके सामने आ चुक्का ह जिसे तुम लोग मारा हुआ बता रहे हो, अगर चाहते हो तुम्हारा परिवार जिन्दा रहे तो सच बता दो,

उन सेनिको में से एक बहुत दर गया और अपने हाथ जोड़ क्र भवर सिंह के समाने लेट गया,

सैनिक- महाराज हमे माफ़ कर दो, हमने एक बात झूट बोली

राजगुरु- कोनसी बात

सैनिक- हमने चीता को उन्हें कहते नहीं देखा, बल्कि जब चीता ने उन पैर छलांग लगाई तो राजकुमार ने अपने शरीर में से तलवार निकल क्र उस चीता के पेट में घुसा दी, और तीनो उस झरने से निचे गिर गए, हमने उसकेबाद भी तीनो क लाशो को ढूढ़ने की कोशिश किट hi लेकिन वो झरना इतना घेरा ह की उस तक पहुंचना भी संभव नहीं था, तो कोइजिन्दा कैसे बचता, और वो तो वैसे भी मर hi चुके थे, उनके बचने की कोई उम्मीद नहीं थी तो हमने उन्हें मारा मान लिया,

भवर सिंह ने गुस्से में अपने दन्त भींच लिए,

भवर सिंह- इन्हे ले जाओ मेरी नजरो के सामने से और जेल में डलवा दो, इनका फैसला मैं बाद में करूँगा,

दो सैनिक आकर उन सभी को लो गए,

काम्य- ये सोचने वाली बात ह की इतनी उचाई से गिरने के बाद और तलवार के इतने वॉर के बाद बच कैसे गया और क्या ये hi बचा ह या इसकी माँ भी,

भवर सिंह- राजगुरु उस झरने के पास खोज की जाये, सब जगह ढूंढा जाये, और पता करो ये बचे कैसे, और इतने दिन थे कहा,

राजगुरु- सबसे पहले तो देव को मरने का आदेश वापस लीजिये और सबको खबर भिजवाइए की आप देव से मिलना चाहते हैं क्योकि आपको पता चल गया ह की देवदूत बेकसूर ह, उसने कोई गुनाह नहीं किया ह, ये सब प्रताप सिंह की साजिश थी,

भवर सिंह- ठीक ह ऐसा hi किया जाये, उसे किसी भी तरह यहाँ लाया जाये, उसकी ताकत चाहिए मुझे, उसके अंदर वो ताकत कैसे आई, मुझे वो ताकत चाहिए,

वही एक कमरे में अक्षरा और रीवा ख़ुशी से नाच रही थी, देव जिन्दा ह देव जिन्दा ह,

अमिता- सिर्फ जिन्दा hi नहीं ह, ऐसा लगता ह जैसे उसके अंदर किसी और की आत्मा समां गई हो, देखा नहीं उसने कैसे मारा उन लोगो को,

सोमिया- है यार यकीन hi नहीं हो रहा, और वो कब से पेड पैर बैठा सब कुछ देख रहा था, वो पहले क्यों नहीं आया युद्ध के बिच में,

अक्षरा- वो क्यों आता, अब उसका रिश्ता hi क्या ह इस राजमहल से, उसे तो यहाँ से निकल दिया गया था, फिर वो क्यों बचने आता,

अमिता- फिर भी वो आया

रीवा- माँ के दूध पैर जो बात आ गई थी, और ये सब जानते हैं की उसके लिए माँ क्यात hi और माँ के लिए वो क्यात है,

अक्षरा- क्या निहारिका माँ भी जिन्दा होंगी,

रीवा- मैं नहीं जानती,

अमिता- क्या उन्हें वापस बुलाया जायेगा,

अक्षरा- मैंने सबकी आँखों में दर देखा था, आज उस इंसान से दर देखा था जिसकी किसी ने इज्जत तक नहीं की थी, और मुझे वो दर अच्छा लगा, हाहाहाहा मुझे वो दर अच्छा लगा, देव तुम आ जाओ,

सोमिया- ऐसे याद कर रही हो जैसे वो इसका भाई न हो कोई प्रेमी हो,

अक्षरा- उसके जैसा प्रेमी इस संसार में कोई हो hi नहीं सकता, ये मेरा दुर्भाग्य ह की मैं उसकी बहन हु, वर्ण मैं कबका उसे लेकर भाग जाती यहाँ से,

अक्षरा की बात से तीनो के मुँह खुले रह गए,

सोमिया- तू पागल हो गई ह क्या, क्या बकवास कर रही ह,

अक्षरा- तुम सबने हमेशा उसे तकलीफ दी ह, कभी उसकी तकलीफ को समझा नहीं ह, मैं उसे दर्द तकलीफ और अपमान झेलते देखा ह, फिर भी उसके चेरे पैर कोई नफरत नहीं देखि थी, उसके जैसा सच्चा इंसान बार बार पैदा नहीं होते, ऐसे लड़के से किसी को प्रेम न हो ऐसा हो hi नहीं सकता, तुम सब उससे नफरत करने और उसका अपमान करने में hi रह गए, अगर उसके अंदर किआ छै देखते तो मुझे पागल नहीं बोलते,

अमिता- वो हमारा भाई ह,

अक्षरा- है मैंने कब कहा उसके साथ सच में भाग जाउंगी, अगर भाई न होता तो सोचती,

अमिता- तू सच में पागल ह,

चारो बहन हसने लगी, आज बहुत दिन बाद उनके चेरे पैर हसी आई थी और वो भी सच्ची हसी,

उधर देव निहारिका के पास वापस आ गया था,

देव- माँ उस प्रताप सिंह को ऐसा दर्द देकर आया हु की वो खून के आंसू रो रहा होगा,

निहारिका- सच बीटा

देव- है माँ, अब जल्दी hi महल में चलने का समय आने वाला ह, कजुद भवर सिंह हमे लेकर जायेगा,

निहारिका- शाबाश बीटा, वही उसी महल में भवर सिंह और उसके अपनों को सजा दी जाएगी,

देव- है माँ सबको सजा मिलेगी, ऐसी सजा मिलेगी की वो उसे न किसी को बता पाएंगे न hi रोक पाएंगे, भवर सिंह तड़पेगा चीखे चिलायेगा लेकिन रोक नहीं पायेगा,


निहारिका देव से लिपट गई, निहारिका की नंगी चूचिया देव की नंगी छाती में डाब गई थी, और देव का लुंड निहारिका की जांघो के बिच में चुप सा गया था,
 
अपडेट-19



प्रताप सिंह खून के आंसू रो रहा था और रेणुका वो बदहवास सी पड़ी थी, और प्रताप सिंह की बाकि पत्निया भी रो रो क्र पागल हुई जा रही थी, उनमे से एक थी िन्दु जिसका बीटा था इन्दर जिसकी लाश को गॉड में लेकर वो रो रही थी,

अब रेणुका और िन्दु को कोण बताये की जिससे वो उछाल उछाल क्र चुद रही थी उसी ने ये सब किया ह, रेवती को भगा ले गया और इस महल के दो चिराग बुझा दिए,

रेणुका को किसी बेटे के मरने का दुःख नहीं था उसके दिमाग में बस वो लड़का घूम रहा था जिससे चुद क्र वो खुद को सम्पूर्ण समझ रही थी, उसे बेटी के गायब होने का भी उतना दुःख नहीं था, रेणुका की समझ में नहीं आ रहा था वो लड़का गया तो गया कहा, कही किसी दूसरी रानी ने तो उसे गायब नहीं करवा दिया, उसके दिमाग में बस देव hi था जिसका नाम तक वो नहीं जानती थी,

उधर प्रताप सिंह के दो बेटे मर चुके थे तीसरा उस हालत में था जो कभी भी मर सकता था, और संभु तो दर की वजह से पीला पद चुक्का था, उसने दो बार मोत का तांडव देखा था, एक तो जब देव आया और उसके तीनो भाइयो की फाड़ दी और उसके बाद जब वो राक्षश आया, उस राक्षश ने तो संभु के अंदर इतना दर पैदा कर दिया की उसे बुखार चढ़ गया जो उतर hi नहीं रहा था, प्रताप सिंह के 4 बेटे प्रताप सिंह के सामने खड़े थे, पांचवा बीटा हमेशा युद्ध से दूर रहता, जो रेणुका का बीटा था, रेणुका हमेशा उसे दूर रखती थी, बाकि सब बड़े योद्धा थे, लेकिन रेणुका का बीटा बहुत बड़ा आयाश था, उसे दो hi चीजों का शोक था एक था हमेषा कुछ नया सीखना और दूसरा लड़किया, वो दिन रात बस इसी काम में रहता था, प्रताप सिंह भी रेणुका की वजह से उसे कभी कुछ नहीं कहता था,

खैर वो बाद में आएगा फ़िलहाल इन चारो भाइयो को देख लेते हैं जो अपने भाइयो की लाशो के पास खड़े थे, उनमे सबसे बड़ा था रविंद्र

रविंद्र- पिता जी हम अपने भाइयो की कसम कहते हैं, हम उस भवर सिंह और उसके पुरे खानदान को ख़तम कर देंगे, ऐसी मोत देंगे की देखने वालो की आत्मा तक कैंप उठेगी,

प्रताप सिंह- सबसे पहले मुझे वो देवदूत चाहिए जिसने ये सब किया ह,

रविंद्र- हम लाएंगे उसे,

प्रताप सिंह- अब वो पहले जैसा नहीं ह, बहुत ताकत ह उसमे, लेकिन उसमे ये ताकत आई कहा से, इतनी जल्दी इतना बड़ा बदलाव कैसे आया उसमे, मुझे उसकी जानकरी चाहिए, पता करो उसने ऐसा क्या खाया ह जिससे वो इतना ताकतवर हो गया ह, मुझे वो ताकत चाहिए,

तभी वह बहुत से लोग आ गए, और जोर से शोर मचने लगे,- किसने मारा किसने मारा हमारे भांजो को,

ये थे वीरेंदर और इन्दर के मां जो उनके मरने की खबर सुनकर आ पहुंचे थे, वीरेंदर का मां भी एक शक्तिशाली राजा था, एक बहुत बड़ी सेना थी उसकी, जिसका नाम था शैलेन्द्र,

शैलेन्द्र- किसने किया ये सब, मैं उसे पुरे खानदान सहित मर दूंगा, मैं पूरी सेना के साथ आया हु, पहले उन्हें मरूंगा फिर अपने भांजे का अंतिम संस्कार करूँगा,

प्रताप सिंह- अब आमने सामने का युद्ध नहीं होगा, अब उन्हें उन्ही के घर के अंदर घुस क्र मरेंगे, अब खेल होगा उन सबके साथ खेल होगा, एक एक को मरूंगा,

रेणुका- उन लोगो में हमारी बेटी को गायब किया ह, अब वॉर उनकी बेटियों पैर होगा, उस भवर सिंह की सभी बेतिया मुझे यहाँ चाहिए, मैं उन्हें जिंदगी का असली पथ पढ़ाऊंगी,

शैलेन्द्र- उसका पूरा परिवार आपके पैरो में होगा,

फिर यहाँ अंतिम संस्कार की तैयारी होने लगी, वही सभी राजाओ में देव और राक्षश बस ये hi दो नाम गूंज रहे थे, देव की ताकत और राक्षश का दर,

भवर सिंह के आदमी उस झरने पैर पहुंच चुके थे, उन्होंने झरने के उप्पेर से निचे तक सब जगह देखा लेकिन ऐसा कुछ नहीं मिला जिसे कुछ अलग कहा जाये, क्योकि जिस गुफा में देव और निहारिका गिरे थे वो हजारो सालो से कभी किसी को नहीं दिखी फिर आज कैसे मिल जाती,

राजगुरु ने देव को ढूंढने के लिए भी आदमी लगाए हुए थे, देव को किसी तरह महल में वापस लाना था, कुछ दिन इसी खोज में निकल गए, लेकिन किसी को समझ नहीं आया देव गया कहा,

इधर देव फिर निकल चुक्का था सुगंधा और रेवती के पास, वह पहकहते hi रेवती देव से लिपट गई, क्योकि काफी दिनों बाद उसे कोई अपना दिखाई दिया था, पहेली बार वो अपने परिवार से दूर रही थी, लेकिन उसके चेरे पैर ख़ुशी थी,

देव- कैसा लग रहा ह यहाँ

रेवती- एक सकूं ह, एक आजादी ह, यहाँ पता चल रहा ह जीवन क्या होता ह, मैं सुगंधा के साथ लकडिया लेने भी जाती हु और पानी भी,

देव- ये तो बहुत ाचा ह,

रेवती- तुम कब लेकर चलोगे यहाँ से,

देव- अभी तो बोल रही थी मन लग रहा ह

रेवती- मन लग रहा ह लेकिन तुम्हारे बिना नहीं,

सुगंधा पास में hi कड़ी जल भून रही थी,

देव- अब समय आ चुक्का ह यहाँ से चलने का, तुम सभी के चलने का,

सुगंधा- हम नहीं जायेंगे,

देव- अब जवाब देने का समय ह सुगंधा, हमे जाना होगा, अब समय ह सचाई सामने लेन का,

सुगन्धदा- सच्चाई तो वो लाएगी सामने, उसका पता चल गया ह,

देव- कहा ह वो,

सुगंधा- बुरी हालत में ह, उसके कर्मो की सजा मिल रही ह,

देव- अब सरे राज खुलेंगे, मुझे उसकी जानकारी दो,

रेवती- ये किस बारे में बात कर रहे हो तुम दोनों, कैसे राज और कोण मिल गया,

देव- रेवती कुछ बाते ह जो तुम्हे समय आने पैर जननी होंगी, शायद तुम्हे अच्छी न लगे,

रेवती- ये तो सब जानने के बाद hi पता चलेगा की बात अच्छी लगेगी या नहीं,

देव- तैयारी करो मैं जल्दी hi अपना सन्देश भेजूंगा, जो सन्देश लेकर आएगा उससे डरना मत,

सुगंधा- तुम्हारे होते अब दर नहीं लगता,

देव ने सुगंधा को गले से लगा लिया,

देव- जीवन में आज महसूस हो रहा ह की मेरी माँ के अलावा भी कोई अपना ह,

रेवती मन में- जल्दी hi मैं सबसे खास बनूँगी तुम्हारी,

देव – अब मैं चलता हु तुम सब कुछ दिन बाद आ जाना और उसे साथ ले आना,

देव वह से निकल क्र वापस आ गया, राजय में आते hi उसे पता चल गया की सब जगह उसकी तलाश की जा रही ह, भवर सिंह उससे मिलना चाहता ह, देव ने आगे की योजना बनाई और एक गाओं के बहार एक पेड के निचे लेट गया, जिससे आने जाने वाले लोग उसे देख सके,

तभी कुछ गाओं वालो की नजर देव पैर पड़ी और वो तुरंत सेनिको के पास पहुंचे उन्हें बताने के लिए, सैनिक खबर मिलते hi उधर दौड़ पड़े और देव के सामने जाकर हाथ जोड़ क्र सर झुका कर खड़े हो गए,

सैनिक- राजकुमार आपको महाराज ने याद किया ह, उन्होंने आप पैर लगे सभी इल्जाम ख़तम क्र दिए हैं, उन्हें पता चल गया ह की ये सब प्रताप सिंह की साजिश थी,

देव- मैं अब कोई राजकुमार नहीं हु, और मेरा कोई रिश्ता नहीं ह उन सब से, चले जाओ यहाँ से और मुझे आराम करने दो,

जब सेनिको के समझने पैर भी देव नहीं मन तो सैनिक खबर लेकर भवर सिंह के पास पहुंचे और सब बता दिया,

भवर सिंह- इतना तेवर दिखा रहा ह हमे

काम्य- महाराज शांत रहिये, मैं जाउंगी उसे लेने, मैं देखती हु कैसे नहीं मंटा ह,

काम्य रथ पैर सवार हुई और अपने साथ रीवा और अक्षरा को भी ले लिया, काम्य जानती थी अक्षरा देव के लिए सबसे ज्यादा खास थी तो हो सकता ह अक्षरा को देख क्र वो शांत हो जाये,

काम्य जब वह पहुंची तो देव अब भी वही लेता था, और सैनिक उसके पास hi खड़े थे,

काम्य- देवदूत बीटा मेरा भतीजा देख तेरी बुआ तुझसे मिलने आई ह,

देव- पहले तो देवदूत तो कबका मर चुक्का ह, मेरा नाम देव ह, सिर्फ देव

काम्य- बड़ा प्यारा नाम ह देव हम सब देव hi बोलेंगे,

देव- और किस रिश्ते से यहाँ आई हो आप, आप वही हो न जिसने मुझ पैर इल्जाम लगाया था,

काम्य- वो सब गलतफहमी थी, हम उस प्रताप सिंह के बहकावे में आ गए थे, हमसे गलती हो गई, तुम्हारी पिता भी तुम्हे माफ़ी मांगना छाते हैं,

देव- हहहहह जान से मरवाने के बाद माफ़ी मांग रहे हो तुम सब

तभी अक्षरा दौड़ को देव से लिपट गई,

देव उसे गले लगाना चाहता था लेकिन उसके हाथ उठ hi नहीं रहे थे, उसी के पास कड़ी थी रीवा जिसकी आँखों में आंसू थे, वो बस एक तक देव को देखे hi जा रही थी और रोये जा रही थी,

कमाया- देख तेरी भेने तेरे लिए मरी जा रही हैं, हम सबको जब से पता चला की ंत्री गलती नहीं थी तब से हम तुम दोनों माँ बेटो को धुदनः रहे थे तुम हमे कही नहीं मिले,

देव बस मुस्कुराया, इस बार उसने अक्षरा को कास कर अपने गले से लगा लिया, अक्षरा की चूचिया देव की छाती में दबी हुई थी, और तभी रीवा पीछे से देव के गले लग गई, रीवा के गले लगते hi देव एक हल्का सा बैचैन हो गया, उसने अक्षरा की पकड़ ढीली की, अक्षरा भी अलग हुई,

अक्षरा- देव घर चल हम सब तुझे बहुत याद करते हैं,

काम्य- है बीटा चल महल में चल, तेरा पुरे सम्मान के साथ स्वागत किया जायेगा, तेरा खोया हुआ सम्मान वापस दिया जायेगा,

देव- मुझे जो चाहिए वो सब दिया जायेगा क्या,

काम्य- है सब कुछ दिया जायेगा, जो तुझे चाहिए तू सब ले सकता ह,

देव मुस्कुराया,

रीवा अभी तक कोई शब्द नहीं बोली थी,

देव- मेरा मन वह जाने का नहीं करता,

अब रीवा बोल पड़ी,

रीवा- और सजा मत दे हमे, तेरे और माँ के जाने से हम बहुत तड़पे हैं, मुझे नहीं पता बाकि सबका क्या हुआ लेकिन मैं और अक्षरा बहुत तड़पे हैं हमे और सजा मत दे,

देव ने रीवा की आँखों में देखा, रीवा के आंसू उसके दिल का हाल बयां कर रहे थे, एक पल के लिए देव का दिल पिघल सा गया, लेकिन उसके अंदर की नफरत अब उस पैर हावी थी उसने तुरंत खुद को सम्हाला,

देव- ठीक ह हम आएंगे, लेकिन जब खुद महाराज आरती का थल लेकर मेरी माँ का स्वागत करेंगे, और पूरी परजा के सामने हाथ जोड़ क्र मेरी माँ से माफ़ी मांगेंगे,

काम्य की हवा ख़राब हो गई, क्योकि भवर सिंह इस सब के लिए नहीं मानेगा,

काम्य- इससे क्या बदल जायेगा,

देव- सकूं आएगा,

देव के सब्दो में जो कठोरता थी उससे समझ आ गया की देव नहीं मानेगा,

काम्य – मैं महाराज को मानती हु,

कमाया वापस आई और जब उसने देव की शरत बताई तो भवर सिंह भड़क गया, लेकिन सबके समझने पैर वो मान गया,

काम्य ने देव को खबर भिजवा दी की महाराज मान गए हैं,

पुरे महल को सजा दिया गया, और पुरे राजय में दावत करवाई गई, सबको बता दिया गया की रानी निहारिका और देव वापस आ रहे हैं, वही भीड़ फिर से कड़ी हो गई थी, वही सब लोग खड़े थे जो दोनों माँ बेटो को नंगे राजय से बहार जाते हुए देख रहे थे और उसका आनंद उठा रहे थे, लेकिन आज सब बदल गया था आज दोनों वापस आ रहे थे तो उन्ही लोगो के रक्षक बन क्र, कुछ लोग सम्मान में खड़े थे तो कुछ ऐसे भी तो जो निहारिका को देखने के लिए उतावले थे,

भवर सिंह महल के दरवाजे पैर आ गया, और दोनों माँ बेटो का इंतजार करने लगा, सभी पलके बिछाये खड़े थे, काफी देर इंतजार करने के बाद भी कोई नजर नहीं आया तो भवर सिंह गुस्से में पागल होने लगा, तभी दूर से देव आता हुआ नजर आया, लेकिन वो अकेला था, जब वो नजदीक आया

काम्य- निहारिका नहीं आई बीटा

देव- जब वो इस महल में आई थी तो निहारिका थी, जब उन्हें इस महल से अपमानित करके निकला गया तब वो बस एक जिन्दा लाश थी, लेकिन अब वो एक शेरनी हैं, पुरे संसार की रानी हैं, और संसार की रानी को जैसे आना चाहिए वैसे hi आएँगी,

तभी चीता के दहाड़ने की आवाज गूंज गई, और आवाज भी इतनी तेज थी की वह खड़े सभी दर से कैंप उठे, और फिर दूर से एक बहुत बड़ा चीता चला आ रहा था और उसके सर पैर हाथ रख क्र चली आ रही थी निहारिका,






निहारिका की सुंदरता पैर जो निखार आया था उससे सभी की आँखे चकाचोंध हो रही थी, जॉब hi निहारिका को देखता तो बस एक hi ख्याल आता इतना सूंदर इतना रूपवान कोई कैसे हो सकता ह, अगर अमावश की रात की कालिख भी निहारिका पैर पड़े तो पूर्णिमा के चाँद की चांदनी बन जाये, ऐसा रूप था निहारिका का,

जिस समाज के मर्द ने निहारिका को नंगा देखा था और उसका आनंद उठाया था आज उनकी नजरे उप्पेर नहीं हो प् रही थी, उन्हें डार्ट है की निहारिका की सुंदरता उन्हें अँधा न क्र दे, वही भवर सिंह ने जब निहारिका को देखा तो उसका मुँह खुला रह गया, आँखे चुंधिया गई, और अमरावती सौमित्र और काम्य के अंदर से धुआँ निकल रहा था,

इस सब में सबसे खास थी निहारिका की चल और उस चीता के साथ चले आना, जिसे देख क्र लग रहा था कोई बाघिन अपने बाघ के साथ चली आ रही ह, उसकी चल भी किसी बाघिन से काम नहीं थी,

निहारिका जब सबके नजदीक आई तो भवर सिंह के हाथ में आरती की थाली थी, निहारिका को देख क्र वो हाथ हिलना तक भूल गया, निहारिका उसके सामने पहुंची लेकिन उसने भवर सिंह को देखा तक नहीं, उसने बस देव को देखा,

देव- माँ आइये

निहारिका ने बिना आरती करवाए अपना कदम आगे बढ़ाया और एक बार पलट क्र पूरी परजा को देखा जैसे कुछ कहना चाहती हो, निहारिका तो कुछ नहीं बोली लेकिन चीता ने एक जोर दर दहाड़ मरी जैसे वो निहारिका की तरफ से जवाब दे रहा हो, की मैं लोट आई हु, और इस बार कोई कमजोर या नाजुक निहारिका नहीं ह एक शेरनी वापस आई ह, चीता की आवाज से सब कैंप उठे और दर क्र पीछे हो गए, भवर सिंह के हाथ से थाली गिर गई, वो जैसे होश में आया हो,

भवर सिंह- ये चीता कहा चला आ रहा ह,

देव- ये माँ के साथ रहेगा हर कदम पैर,

भवर सिंह- ये कैसे हो सकता ह, एक जंगली जानवर महल के अंदर कैसे आ सकता ह,

निहारिका- इसका नाम दूत ह और ये मेरा बीटा ह और जहा मैं रहूंगी वह मेरे दोनों बेटे रहेंगे, देव और दूत मेरे दोनों बेटे,

निहारिका की आवाज में ऐसा रुआब था की सभी की आवाज गले में hi रुक गई, और निहारिका मुँह फेर क्र आगे बढ़ गई साथ में चीता भी,

निहारिका को जाते देख सभी अचंभित से खड़े थे, बस देव मुस्कुरा रहा था,

वही भवर सिंह के अंदर निहारिका को देख क्र काम वासना जग उठी थी, जो देव के पैदा होने से पहले hi ख़तम हो चुकी थी आज वो भावनाये फिर से उमड़ रही थी, वही भवनए जिसके लिए भवर सिंह ने जबरदस्ती निहारिका से शादी किट hi, उसे मजबूर करके, भवर सिंह की आँखों में तैरती हु वासना को देव ने पढ़ लिया था,

देव- माँ यहाँ आ तो गई ह, लेकिन उनके कमरे में बिना उनकी मर्जी के जाने की आज्ञा नहीं ह, इस राजय के राजा को भी इसकी आज्ञा नहीं ह, और उनके कमरे का आस पास कोई सैनिक नहीं होगा उनकी रक्षा दूत करेगा, और वो जनता ह कोण कितना खतरनाक ह,

देव वह से निहारिका के पीछे चला गया, बाकि सब वही खड़े देखते रह गए,

पुरे राजय में निहारिका और देव की hi चर्चा थी, और वह लगे प्रताप सिंह के जासूस भी ये खबर लेकर प्रताप सिंह की तरफ दौड़ पड़े,

भवर सिंह अपने कमरे में इधर उधर टहल रहा था, उस कमरे में अमरावती सौमित्र और काम्य भी बैठी हुई थी,

भवर सिंह- ये कैसे हो सकता ह, वो दोनों जिन्दा हैं, और जिस चीता को उन्हें खाने के लिए भेजा था, वो खूंखार जानवर आज उसका पालतू बनकर वापस आया ह, कोई उस जानवर को पालतू कैसे बना सकता ह, और ये देव इसके अंदर भी इतनी ताकत कैसे आई, एक डरपोक सा लड़का इतना ताकतवर कैसे हो सकता ह, वो भी कुछ hi महीनो में, और तुम सबने उस निहारिका को देखा, ऐसा लगा जैसे सवर्ग से कोई अप्सरा उतर आई हो, वो पहले से hi इतनी सूंदर थी अब तो ऐसा लगता ह संसार की साडी सुंदरता उसी में समां गई ह,

सौमित्र- और वो देव भी काम कभुसुरत होकर नहीं आया ह, संसार का सबसे सूंदर मर्द लगता ह,

काम्य- लेकिन ये सब हुआ कैसे,

भवर सिंह- कुछ भी करो कैसे भी करो लेकिन मुझे ये राज जानना ह, तुम सब क्या तरीका अपनाते हो तुम्हारी मर्जी लेकिन मुझे ये ताकत और रूप चाहिए,

तीनो औरते सोच में दुब गई, क्योकि उनके दिमाग में भी निहारिका की सुंदरता घूम रही थी, उन्हें भी वो राज जानना था, अपने लिए और अपने बेटो के लिए,

वही तीनो के बेटो के दिमाग में बस निहारिका घूम रही थी,

सूरज- यार क्या कमल की होकर आई ह ये निहारिका, कसम से आग लगा दी इसने तो,

अभिजीत- उसे देख क्र मेरा तो कदो में hi निकल गया था, मुझसे तो बर्दास्त hi नहीं हुआ, कोई इतना खूबसूरत किए हो सकता ह,

सूरज- ज्वाला तुझे कुछ नहीं हुआ,

ज्वाला- मेरा दिमाग बस प्रताप सिंह उस राक्षश और इस देव के बारे में hi सोच रहा था लेकिन जब से उस निहारिका को देखा ह ऐसा लगता ह मेरे दिमाग में बस गई ह हैट hi नहीं रही वह से, जैसे उसने कोई जादू सा कर दिया हो,

सूरज- सही बोल रहा ह, उसे देखने से पहले मेरे दिमाग में भी ये सब hi चल रहा था लेकिन अब कुछ और सोचने का मन hi नहीं कर रहा,

अभिजीत- मुझे वो चाहिए यार,

सूरज- मुझे भी,

ज्वाला- लेकिन अब उसके साथ देव ह और लगता ह काफी ताकतवर होकर आया ह, और वो चीता देखा था न कितना खूंखार था,

सूरज- वो चीता तो पालतू लग रहा ह उसे तो सम्हाल लेंगे, वो हमारा कुछ नहीं बिगड़ सकता, लेकिन देव का कुछ करना होगा, ताकत तो सच में बहुत लग रही ह,

वही चारो भेने दौड़ती हुई निहारिका के कमरे के सामने पहुंची जॉव ो चीता बैठा हुआ था, उसे देख क्र चारो दर गई, लेकिन चीता ने अपना मुँह घुमा लिया जैसे जाने का रास्ता दे रहा हो, तभी वह देव आ गया,

देव- ये जनता ह किसे रास्ता देना ह किसे नहीं, ये ऐसा जीव ह जो इंसान के अंदर के भाव को पढ़ लेता ह, अगर किसी के मन में गलत भावना ह तो ये पढ़ लेगा और उसे अंदर जाने hi नहीं देगा, इस समय इसने तुम सबको रास्ता दे दिया ह,

देव आगे बढ़ा और अंदर चला गया, चारो भेने चीता से डर्टी हुई अंदर आ गई, जहा निहारिका खिड़की के पास कड़ी बहार झांक रही थी,

रीवा दौड़ क्र अपनी माँ से लिपट गई,

रीवा- माँ आप लोट आई माँ, मैं बिलकुल अकेली हो गई थी माँ,

निहारिका- अच्छा लेकिन तेरे पास तो तेरे सब अपने थे, फिर तू अकेली कैसे हो गई, हम तेरे अपने थे hi कब जो हमारे बिना तू अकेली हो गई थी,

रीवा की आँखों में आंसू आ गए थे, उसने अपना सर निचे कर लिया,

अक्षरा- आप दोनों के जाने के बाद hi तो अहसास हुआ ह की कोण अपना ह कोण पराया,

अमिता- हम सबने आपका कभी सम्मान नहीं किया लेकिन आपके जाने के बाद अहसास हुआ की हम कितने गलत थे, इस महल में कितना कुछ गलत हो रहा था, आप दोनों को बस सजा hi दी जा रही थी,

सोमिया- वो भी अहसास तब हुआ जब हम पैर बीती, बस ऐसे hi हमारी शादी किसी भी अनजान आदमी से करवाई जा रही थी, फिर रीवा और अक्षरा की शादी उस प्रताप सिंह से करवाई जा रही थी, जो इस सब का जिम्मेदार था,

रीवा- मुझे माफ़ कर दो माँ, मैं कभी आपको और देव को वो सम्मान नहीं दे पाई, लेकिन अब मुझे समझ आ गया ह की इस संसार में बस आप दोनों hi सही हो,

अमिता- आप दोनों पैर ऐसे नियम तोड़ने का इल्जाम लगाया गया जिसे महल का हर इंसान रोज तोड़ता ह, इस महल में कितनी गन्दगी ह ये तो हमे अब समझ आई ह, और हम सब भी धीरे धीरे उसी गन्दगी में घुसते चले जा रहे थे,

निहारिका ने चारो को अपने गले से लगा लिया, निहारिका की आँखों में ख़ुशी थी लेकिन ऐसा कुछ नहीं था जिसे देख क्र कहा जा सके की एक माँ अपनी बेटी को देख क्र खुश ह, या कोई ममता के भाव आ रहे हैं,

निहारिका- अब सब बदल जायेगा,

वही प्रताप सिंह अपने राज सिंघासन पैर बेजान सा पड़ा हुआ था, क्योकि इस दुनिया में उसे अपने बेटो से प्यारा कुछ नहीं था, उसके पुरे राजय में मातम था, तभी एक सैनिक खबर लेकर आया, जिसे सुनकर प्रताप सिंह की आँखों में खून उतर आया था, खबर ये थी की देव और निहारिका महल में वापस आ गए हैं, और निहारिका और भी सूंदर होकर आई, सैनिक ने निहारिका की सुंदरता की सुंदरता का बहुत hi अच्छे से गुणगान किया, जिससे प्रताप सिंह और बोखला रहा था,

प्रताप सिंह- मेरे परिवार को बर्बाद करके वो खुशिया मन रहे हैं, उन सबकी जिंदगी को ऐसा बर्बाद करूँगा की वो सब खून के आंसू रोयेंगे, अब वो प्रताप सिंह का असली रूप देखेंगे,

इधर महल में रीवा बस निहारिका को बहो में भरे हुए बैठी रही,

अमिता- छोटी माँ मैंने तो सुना था आप दोनों को मरवा दिया ह, आप बचे कैसे,

इस सवाल पैर सब निहारिका का मुँह देखने लगे,

निहारिका- हम नहीं जानते, क्या हुआ कैसे हुआ लेकिन जब होश आया तो हम ठीक थे,

रीवा- आपको मरवाने में पुरे परिवार का हाथ था,

सोमिया- रीवा मैंने कहा था दीवारों के भी कान होते हैं,

अक्षरा- अब किसी के भी कान हो मैं नहीं डरने वाली, मैं खुल क्र बोल सकती हु की इन्हे मरवाने के लिए बाउट बड़ी साजिश की गई थी और मेरी माँ उसमे शामिल थी,

निहारिका- तुम लोग ये सब मत सोचो, तुम्हारी उम्र ये सोचने किन hi ह, इस उम्र में अपनी आने वाली जिंदगी के सपने देखो,

सोमिया- क्या सपने छोटी माँ, इस महल में दो बार शादिया होने वाली थी दोनों बार टूट गई, और आप तो जानती हैं जब राजकुमारियों की शादी टूट जाती ह तो उन्हें अपशगुन समझा जाता ह, और उनकी फिर शादिया नहीं होती,

निहारिका- तुम लोग बस शादी के hi सपने देखती हो, क्या किसी प्रेमी के सपने नहीं देखती, दुनिया में शादी के अलावा भी कुछ ह,

अक्षरा- प्रेम क्या कभी किसी राजकुमारी को उसका प्रेम मिला ह, रजुमारिया तो हमेषा एक सामान की तरह इधर से उधर बेचीं जाती हैं,

निहारिका- अब ऐसा नहीं होगा,

अमिता- हमारे पिता हमे जान से मार देंगे अगर उन्होंने प्रेम का नाम भी सुना तो

निहारिका- हहहहह जिस आदमी ने प्रेम में दुनिया की साडी सीमाएं लाँघ दी हो वो क्या कुछ करेगा, उस इंसान ने जो किया ह वो तो शायद कोई सोच भी नहीं सकता, लेकिन अब वही होगा जो उसने किया था, इस महल में भवर सिंह के किये कर्मो के हिसाब से hi सब होगा,

सभी लड़किया- हम कुछ समझे नहीं,

निहारिका- समय आने पैर समझ जाओगी, लेकिन अब तुम्हारी नै जिंदगी शुरू होगी, खुशियों भरी जिंदगी,

चारो लड़किया ख़ुशी से झूम उठी,


इधर देव अपने कमरे में घूम रहा था, उसके दिमाग में आगे क्या करना ह सोच रहा था तभी उसके कमरे में काम्य आ गई और जैसी hi वो अंदर आई वो एक दम ठिठक गई, क्योकि उसके सामने देव बिलकुल नंगा खड़ा था और उसका गठीला शरीर और सबसे खास उसका खड़ा हुआ लम्बा मोटा लुंड, जिसे देख क्र काम्य की आँखे फटी रह गई, उसकी सांसे थम सी गई, काम्य ने जब उसे पहले नंगा देखा था तब लुंड मुरझाया हुआ था लेकिन अब वो पुरे सवाब पैर था और पहले से भी बड़ा दिख रहा था,
 
अपडेट-20







internet afbeelding

लुंड को देख क्र काया कुछ पालो के लिए वही जैम सी गई, देव ने काम्य को देखा और उसकी तरफ आ गया, देव को आता देख कमाया एक दम शर्मा गई, उसने अपनी गार्डन घुमा ली,





काम्य- देव तुम नंगे हो, तुम्हे शर्म नहीं आ रही,

देव- अब नहीं आती, पूरी दुनिया मुझे नंगा देख चुकी ह, अब फरक नहीं पड़ता, न इज्जत से न hi अपमान से,

काम्य- लेकिन मुझे पद रहा ह, मैं तुम्हारी बुआ हु,

देव- हमे नंगा करके राजय से बहार निकलने का आदेश भी तो आपका hi दिया हुआ था,

देव की बात से काम्य झिझक गई,

काम्य- वो मेरी गलती थी, मुझे गलतफहमी हो गई थी,

देव चलता हुआ काम्य के पास आया, काम्य के शरीर में सिरहन सी हो रही थी, वो अपनी नजर बचा रही थी, लेकिन फिर भी उसकी नजरे देव के शरीर और उसके लुंड पैर जा रही थी,

देव- तो बताइये कैसे आना हुआ,

काम्य- तुम पहले ये कपडे पहन लो,

देव ने ज्यादा न खींचते हुए एक कपडा अपने कमर के निचे बांध लिया,

देव- अब बताइये

काम्य- मैं बस तुम्हारा हाल पूछने आई थी, इतने समय बाद महल में आये हो, खा रहे इतना समय क्या हुआ उस दौरान, बहुत बुरे हालत देखे होंगे न, बस वही दुःख बाटने आई हु तुम्हारे साथ,

देव- बुआ जो बीत गया उसे क्या सुनना, और उप्पेर वाला जिसे बचता ह उसका कोई कुछ नहीं बिगड़ सकता,

काम्य समझ गई की देव अब बहुत बदल चुक्का ह इतनी आसानी से उसे काबू में नहीं किया जा सकता,

काम्य- देखो जो पहले हुआ उसके लिए अपने दिल में कोई गुस्सा नाराजगी मत रखना, तुम इस परिवार का हिस्सा हो, और मैं अपनी गलती का सुधर कर रही हु, इसलिए तुम्हे जॉब hi चाहिए मुझसे बोलना, किसी भी चीज की जरुरत हो मुझे बताना,

देव- मेरी जरुरत पूरा होने में खाई फिर से मुझ पैर बलात्कार का इल्जाम न लगवा देना,

काम्य – अब ऐसा कुछ नहीं होगा,

देव ने काम्य को बलात्कार का नाम लेकर बता दिया की उसकी जरुरत क्या ह,

काम्य- अच्छा मैं चलती हु, फिर आउंगी.

देव- सोच समझ क्र आना बुआ मुझे अब ऐसे hi रहने की आदत हो गई ह, और बार बार कपडे पहनना मुझे अच्छा नहीं लगता,

इतना बोल क्र देव ने कमर पैर बंधा हुआ कपडा खोल क्र एक तरफ रख दिया और कहड़ा हो गया, काम्य की नजर एक बार फिर देव के लुंड पैर पड़ी, उसकी आँखे बड़ी हो गई थी, लेकिन काम्य ने बस मुस्कुराया और सर निचे करके बहार चली गई,

उसे जाते हुए देख देव मुस्कुरा रहा था, देव की नजर काम्य को गांड पैर hi थी, और ये नजर काम्य ने भी महसूस की थी, कमरे से बहार आते hi काम्य ने एक घेरि साँस बहरी जैसे कब से खुद की साँस रोक क्र वह कड़ी थी,

काम्य खुद से hi- इसमें तो बड़ी आग भर गई ह, कुछ तो बहुत बड़ा हुआ ह जिससे इसका इतना बड़ा हो गया, ोूहः मैं भी क्या सोच रही हु, मुझे इसकी ताकत का पता करना होगा वो कैसे आई, वैसे कमल की ताकत ह और शरीर और भी कमल का हो गया ह और इसका लुंड वो तो एक अजूबा hi ह, क्या जितना बड़ा ह समय भी उतना hi अधिक लेता होगा, जरूर लेता होगा लुंड भी बड़ा और शरीर में ताकत भी ह,

काम्य देव के कमरे के बहार कड़ी ये hi सोच रही थी की तभी वह अक्षरा आ गई और देव के कमरे में जाने लगी, अक्षरा को देव के कमरे में जाते देख काम्य घबरा गई, उसे पता था देव अंदर नंगा ह,

काम्य- अक्षरा वह कहा जा रही ह,

अक्षरा- देव से मिलने क्यों क्या हुआ, क्या अब मैं उससे मिल भी नहीं सकती,

काम्य- अरे ऐसी बात नहीं ह, ऐसे सीधे किसी के कमरे में घुसना अच्छी बात नहीं ह, क्या पता वो किस हालत में हो,

अक्षरा- किस हालत में होगा, आराम कर रहा होगा और क्या, बहेनो के लिए उठ जायेगा,

काम्य- तू इस समय वह नहीं जाएगी चल मेरे साथ,

अक्षरा- लेकिन क्यों नहीं जाउंगी,

अब काम्य कैसे बताये की देव अपने कमरे में नंगा ह, और उसे नंगा देखना मतलब खुद पैर से काबू खो देना,

काम्य देव को मन कर रही थी तभी देव बहार आ गया,

देव- क्या हुआ बुआ क्यों रोक रही हो

काम्य ने घबरा क्र देव को देखा तो पाया की वो पुरे कपड़ो में खड़ा ह, काम्य ने रहत की साँस ली,

काम्य- कुछ नहीं बस ऐसे hi, ठीक ह तुम मिल लो देव से,

काम्य तेज कदमो से वह से चली गई, और अक्षरा देव के कमरे में आ गई, और आते hi सीधे उससे लिपट गई,

अक्षरा- अह्ह्ह्हह्ह मैं बहुत खुश हु तुम वापस आ गए, अब जाकर मुझे यहाँ कोई अपना सा लगा, तुम्हारे जाने के बाद ऐसा लगा जैसे पूरी दुनिया hi रुक हो गई ह,

देव- दुनिया कभी किसी के लिए नहीं रूकती,

अक्षरा- हमारी तो रुक गई थी,

देव ने अक्षरा को गले से लगाए रखा अपने दोनों हाथ उसकी कमर पैर रखे हुए थे और उसे खुद से चिपकाया हुआ था, अक्षरा भी उससे एक दम चिपकी हुई थी, और दोनों एक दूसरे की आँखों में आँखे दाल क्र बात कर रहे थे,

अक्षरा- तुम इतना कैसे बदल गए, तुमने तो सबको हैरत में दाल दिया, इतनी ताकत ऐसी सुंदरता, और देखो ये शरीर पहले से कितना मजबूत लग रहा ह, और तुम्हारा आत्मविस्वास, सब कुछ पहले से अलग ह,

देव- तुम्हे पसंद आया न

अक्षरा- बहुत पसंद आया,

देव- बस तो और क्या चाहिए,

अक्षरा की जंघे देव की जांघो से चिपकी हुई थी जिससे वह गर्मी का अहसास होने लगा था, और देव का मोटा लुंड जो अभी शांत था फिर भी अक्षरा के पेट के निचे उसे महसूस हो रहा था, लेकिन फ़िलहाल अक्षरा का धयान वह नहीं था,

अक्षरा- देव तुम थे कहा इतने दिन, क्या तुम्हे हमारी याद नहीं आई थी,

देव- सब यादे उन तकलीफो के निचे डाब गई थी, बस कुछ याद था तो वो अपमान,

अक्षरा देव के गले लग गई और अपना मुँह उसके सीने में दबा लिया,

अक्षरा- भूल जाओ वो सब, उन बुरी यादो को भूल जाओ, और आगे के जीवन के बारे में सोचो,

देव- वही सोच रहा हु,

देव ने अक्षरा के गलो को चुम लिया, गाल को चूमने पैर अक्षरा ने एक बार देव को देखा और फिर उसने भी देव के गलो को चुम लिया, इतने में hi देव के लुंड ने हलकी सी हलचल की, और उस हलचल को अक्षरा ने भी महसूस किया, लेकिन उसने कोई प्रतिकिर्या नहीं दी, दोनों ऐसे hi एक दूसरे की बहो में खड़े रहे,

तभी वह अमिता आ गई और दोनों को ऐसे देख एक दम चौंक गई,

अमिता- ये क्या हो रहा ह,

अमिता के आने से देव तो बिलकुल शांत रहा लेकिन अक्षरा न जाने क्यों घबरा सी गई,

अक्षरा- कुछ नहीं कुछ नहु हम तो बस गले लग रहे थे,

अमिता ने शक्की नजरो से दोनों को देखा, अक्षरा तुरंत अलग हो गई, देव के होतो पैर हलकी सी मकान आ गई,

देव- आओ अमिता दीदी कैसी हो,

अमिता- मैं तो ठीक हु, मुझे क्या तकलीफ होने वाली ह, मैं तो बस तुम्हारे बारे में जानने आई थी, पहले से काफी बदल चुके हो, ये बदलाव अच्छा लग रहा ह,

देव- बदलाव तो आप सबमे भी दिख रहा ह,

अमिता- बदलाव तो इस पुरे महल में आ चुक्का ह,

अक्षरा- कुछ लोग कभी नहीं बदलते,

देव- जो नहीं बदलते वो ज्यादा समय तक खड़े नहीं रहते,

अमिता- तुम्हे ठीक देख क्र मन पैर जो बोझ था वो उतर गया,

देव- कैसा बोझ

अमिता- हमने अहंकार में आकर हमेशा तुम्हारा अपमान किया था, जो हमे नहीं करना चाहिए था, लेकिन हम क्या करते बचपन से हमे ऐसा hi सिखाया गया था जैसे तुम हमारे भाई हो hi नहीं, बस हमारे शत्रु हो, और हम छह क्र भी तुम्हे भाई जैसा मान hi नहीं पाए,

देव- और अब मान भी नहीं पाओगी

अमिता चौंकते हुए- मतलब

देव- मेरा मतलब ह कोई रिश्ता एक दिन में नहीं बदल जाता, बस कुछ विचार बदल सकते हैं जैसे आपके बदले हैं, लेकिन वो विचार किसी रिश्ते को नहीं बदल सकते, इसलिए सही यही रहेगा की नए रिश्ते की शुरुआत इस भाई बहन के भरी रिश्ते से शुरू न करके दोस्ती से करते हैं,

अक्षरा- है ये अच्छा ह, मेरा तो कोई दोस्त भी नहीं था आज तक

देव- मैं हु न सबका दोस्त,

अमिता ने हलके से मुस्कुरा क्र देव का हाथ पकड़ लिया,

अमिता- बहुत समझदार हो गए हो,

कुछ देर बाते करने के बाद दोनों अपने कमरे में चली गई, रीवा देव से मिलना छाती थी लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी,

रात में देव निहारिका के कमरे में पंहुचा जहा निहारिका जमीन पैर लेती हुई थी वो भी बिलकुल नंगी होकर,






देव- माँ ये क्या आप निचे क्यों लेती हैं और बिना कपड़ो के,

निहारिका- अब ये नरम बिस्टेर अच्छे नहीं लगते, उस गुफा में उन पथरो पैर लेटकर जो समय बिताया था वो सबसे अच्छा समय था मेरे लिए, उसमे एक सकूं था, जितना आराम उन पथरो पैर मिला उतना इन बिस्टरो पैर कभी नहीं मिला, और इतने समय से बिना कपड़ो के रही हु की अब ये रेशम के मुलायम कपडे भी शरीर पैर चुभ रहे हैं, मुझे ऐसे hi अच्छा लग रहा ह,

देव- सही कहा माँ, मुझे भी वह नींद नहीं आ रही थी इसलिए आपके पास आ गया,

निहारिका- तो किसने कहा था अलग कमरे में रहने के लिए, क्यों गया था उधर, मुझे अच्छा नहीं लगा तू मुझे अकेला छोड़ क्र वह चला गया,

देव- ये महल ह माँ, यहाँ हमे कुछ नियम में रहना होगा, हमे अपना काम करना ह तो थोड़ा सम्हाल क्र रहना होगा इसलिए दूसरे कमरे में गया था, और फिर चारो भेने आपके पास थी तो उन्हें भी समय देना था,

निहारिका- मुझे फरक नहीं पड़ता किसी भी नियम से, भाड़ में गए सरे नियम, तू मुझसे दूर नहीं रहेगा, और दुनिया में कुछ भी तुझसे ज्यादा जरुरी नहीं ह मेरे लिए, और है मेरे सामने ये कपडे पहन क्र मत रहा क्र मुझे पसंद नहीं ह,

देव- ठीक ह माँ जैसा आप कहे,

देव ने तुरंत अपने कपडे उतर दिए, देव का लुंड पुरे सवाब में खड़ा हुआ था,

निहारिका- ये क्यों खड़ा ह,

देव- शायद इसकी जरुरत बढ़ रही ह, और वो काम्य आई थी और अक्षरा कुछ ज्यादा hi चिपक रही थी तो शायद इसलिए उत्तेजना हो रही ह,

निहारिका के चेहरे पैर हलकी सी जलन महसूस हुई ये क्यों हुई इसका अहसास उसे भी नहीं हुआ,

निहारिका- ओहो क्या बात ह दोनों माँ बेटी पैर एक साथ नजर ह,

देव- अक्षरा भोली ह, लेकिन काम्य बहुत शातिर ह,

निहारिका- तेरे मन में अक्षरा के लिए कोई भावनाये तो नहीं आ रही,

देव- नहीं माँ कोई भावनाये नहीं ह, बस एक hi विचार आता ह

निहारिका- वो क्या

देव- जो मासूम ह उसके साथ धोखा नहीं करना चाहता,

निहारिका- मैं भी यही चाहती हु, जो हमारे साथ हुआ वो हम किसी और के साथ नहीं करेंगे, लेकिन हमारा बदला कैसे पूरा होगा,

देव- वो सब खुद हमारा बदला पूरा करवाएंगे, हमे कुछ ऐसा करना होगा जो वो खुद हमारा साथ दे,

निहारिका- उसके लिए सबका सच सामने लाना होगा, और जब भवर सिंह का सच सामने आएगा तो सब कुछ बदल जायेगा,

देव- जल्दी hi सबके सच सामने आएंगे,

निहारिका- कहा सोयेगा निचे या नरम बिस्टेर पैर,

देव- जब आपको इन बिस्टरो पैर नींद नहीं आती तो मुझे कैसे आएगी,

निहारिका- आजा तो साथ सोते हैं,

दोनों माँ बेटे जमीन पैर hi लेट गए, और काफी देर शांत लेते रहे, फिर अचानक से निहारिका ने करवट ले ली और अपनी कमर देव से चिपका दी, देव सीधा hi लेता रहा कुछ दे रेज hi लेता रहा और न जाने कब नींद आ गई, और नींद में कब दोनों एक दूसरे से चिपक गए और निहारिका की गांड देव के लुंड से चिपकी हुई थी, और देव का लुंड निहारिका की जांघो के बिच में घुसा हुआ था, दोनों ऐसे लेते हुए थे जैसे कोई पति पत्नी सकूं से सो रहे हो,

अगली सुबह जब निहारिका की आँख खुली तो उसने देव का मोटा लुंड अपनी छूट पैर महसूस किया, और देव के हाथ निहारिका की चूचियों पैर थे, निहारिका की आँखे खुली थी फिर भी उसने उठने की कोशिश नहीं की, उसे बड़ा सकूं मिल रहा था, निहारिका की छूट में हलकी हलकी सुरबुराहट होने लगी थी, उसने पिछले 18-19 साल से खुद के अरमानो को दबाया हुआ था लेकिन अब उसके अंदर की कामुकता उस पैर हावी होने लगी थी, और ये बदलाव उसमे तब से आया था जब से वो उस गुफा में बेहोशी की हालत से होश में आये थे,

तभी देव की आँखे खुली और उसने महसूस किया की उसका लुंड कहा घुसा हुआ ह, वो थोड़ा सा बैचैन हो गया, उसने धीरे से अपने हाथ खींचे तो निहारिका ने तुरंत अपनी आँखे बंद क्र ली, देव ने हलके से उठ क्र देखा की उसकी माँ सोई हुई ह या नहीं, निहारिका की आँखे बंद देख क्र उसने अपनी कमर पीछे की और लुंड को निहारिका की जांघो के बिच से बहार निकला, और जैसे hi वो सीधा हुआ और उसकी नजर अपने लुंड पैर गई तो वह उसे हल्का सा गीला पैन महसूस हुआ, लुंड पैर गीला पैन देख क्र देव थोड़ा हैरत में आ गया, फिर उसने नारिका की तरफ देखा और उठ क्र कपडे पहन क्र बहार चला गया,

उसके जाते hi निहारिका उठ क्र बैठ गई, और अपना सर अपने घुटनो पैर रख क्र बैठ गई और कुछ सोचने लगी,

देव अपने कमरे में गया और फिर नाहा धो क्र महल में घूमने चला गया, आज वो जहा से गुजर रहा था हर कोई उसके सामने सर झुका रहा था, जो सम्मान उसे कभी नहीं मिला था आज हर कोई खुद आगे बढ़ क्र दे रहा था,

देव घूम रहा था तभी सामने से सूरज और अभिजीत आ गए, उन्हें देख क्र देव के माथे पैर सलवटे पद गई, लेकिन अभिजीत सामने से मुस्कुराता हुआ देव के पास आया,

अभिजीत- कैसे हो देव, तुम्हे महल में वापस आकर बड़ी ख़ुशी हो रही होगी, वैसे भी अब तो बहुत सम्मान मिल रहा ह तुम्हे, वैसे ये सम्मान पहले भी मिलना चाहिए था तुम्हे, तुम महाराज के बेटे हो तुम तो इस सम्मान के हक़दार थे,

देव- किसी राजा का बीटा होने से सम्मान नहीं मिलता सम्मान खुद कामना पड़ता ह, राज परिवार का होने की वजह से सम्मान नहीं मिलता बस लोग दर में सर झुकाते हैं, पीछे मुड़ते hi गालिया मिलती ह उन्हें,

सूरज- हर किसी के सामने भी लोग नहीं डरते, लेकिन तुम कुछ अलग हो कोई औषधीय खा क्र आये हो क्या, बहुत ताकतवर हो गए हो, अब तो शायद सब तुमसे डरेंगे,

देव- डरेंगे वो जिन्होंने कुछ गलत किया होगा, जिसने कुछ गलत नहीं किया उसे डरने की जरुरत नहीं ह, और रही बात ताकत की तो ये ताकत औषधियों किन hi ह ये भ्रम्चार्य की ताकत ह जो तुम लोग न जाने कितनी hi मासूम लड़कियों की जिंदगी बर्बाद करके खुद की ताकत को ख़तम कर चुके हो, वर्ण उस प्रताप सिंह के बेटो में इतनी ताकत hi कहा थी जो हमे टक्कर दे सके,

सूरज- भारमचार्य एक भरम ह, जिसके जक्कर में जवानी का असली मजा तुम कभी ले नहीं पाए,

देव- हहहहह, मैंने जो खुद पैर सयम रखा था उसका परिणाम ह ये ताकत जो मुझमे ह, और वो मजा खुद मेरे पास आएगा, मुझे किसी की जिंदगी बर्बाद करने की जरुरत नहीं ह, और है अब कोई और भी किसी की जिंदगी बर्बाद नहीं कर सकेगा,

इतना बोल क्र देव आगे बढ़ गया, सूरज और अभिजीत उसे देखते रह गए,

सूरज – बहुत बोलने लगा ह, इसे मैं खुद अपने हाथो से मरूंगा,

अभिजीत- तुम पागल हो गए हो क्या इससे भिड़ने की सोच रहे हो,

सूरज- तू डरपोक ह, हमेशा डरा हुआ रहता ह,

तभी देव के पास अक्षरा और सौमित्र आ गई थी, और एते hi देव के गले लग गई, जब सूरज ने उन दोनों को देव के गले लगे देखा तो उसके पुरे शरीर में आग सी लग गाइट hi, वो बस उन तीनो को घूरे जार है था,

अभिजीत- क्या हुआ इतना गुस्सा क्यों हो रहे हो,

सूरज- देख तेरी बहन कैसे उससे लिपट रही ह,

अभिजीत ने पीछे देखा

अभिजीत- अभी तो हर कोई उसे ऐसे hi प्यार दे रहा ह और अक्षरा तो उसे पहले से hi सबस ेज्यादा प्यार करती थी,

सूरज- ये वो प्यार नहीं ह, वो उसका सागा भाई तोडना ह जिससे वो ऐसे लिपट रही ह, क्या कभी तेरे साथ ऐसे लिपटी ह, न hi ेरे साथ कभी ऐसे गले मिली, हमसे तो बहुत दूर रहती ह, हम भी तो उसके भाई हैं, और अब तो वो सौमित्र भी देख कैसे लिपट रही ह जो कभी इससे नफरत करती थी,

अभिजीत- तुम कहना क्या छाते हो,

सूरज- ये देव अब बदल चुक्का ह, कही ऐसा न हो की वो तेरी बहन को छोड़………

अभिजीत- सूरज क्या बकवास कर रहा ह,

सूरज- अपनी आँखों से hi देख ले न, कोई भाई बहन इतना चिपकते हैं क्या, देख सौमित्र की चूचिया कैसे उसकी छाती पैर रगड़ रही हैं, और अक्षरा कैसे उसके हाथ को अपनी छाती पैर दबा रही ह, उसका हाथ देख कहा रगड़ रहा ह,

अभिजीत की नजर उधर hi थी, वही देव ने अक्षरा को और सौमित्र को कास कर खुद से चिपका लिया था,

अभिजीत गुस्से में वह से चल दिया सूरज भी उसके साथ निकल गया,

वही कामय सुबह सुबह अमरावती के कमरे में पहुंची,

अमरावती- क्या बात ह आज आप यहाँ खुद चाक र आई हैं, लगता ह बहुत hi जरुरी काम होगा,

काम्य- हम सबका अब एक hi जरुरी काम ह देव और निहारिका, उन्हें अपने काबू में करना और उनसे उनका राज जानना,

अमरावती- है ये ह तो जरुरी लेकिन ये होगा कैसे, वो हम पैर यकीन कैसे करेंगे,

काम्य- तुम जानती हो एक मर्द की कमजोरी क्या होती ह,

अमरावती- वासना और खूबसूरत औरत

काम्य- तो देव इस समय वो hi मर्द ह जिसे किसी औरत की जरुरत ह, और मैं समझती हु की तुम्हे भी देव जैसा मर्द पसंद आएगा,

अमरावती चौंकती हुई काम्य को देखने लगी,

अमरावती- ये क्या बोल रही हो आप, आपको शर्म नहीं आई ऐसा बोलते हुए,

काम्य- ये सटी सावित्री होने का नाटक मत करो मेरे सामने, हमे अगर उस देव को काबू करना ह तो उसे अपने हुसैन के जाल में फ़साना hi होगा,

अमरावती- मैं तुम्हारी भाभी हु, इस राजमहल की महारानी, मैं ये सब करुँगी उसके लिए किसी दासी को भेजो, ये मेरा अपमान ह,

काम्य- अच्छा अपमान ह, और सेना पति के साथ इसी बिस्टेर पैर उछाल कूद करना उसमे बड़ा सम्मान मिला होगा,

सेना पति का नाम सुनते hi अमरावती की साँस hi रुक गई, उसका मुँह सफ़ेद पद गया,

काम्य- घबराओ नहीं मैं किसी से कुछ नहीं कहने वाली, मैं जानती हु इस उम्र में औरत की जरुरत बढ़ जाती ह और राजाओ की इतनी रनिया होती ह की वो किस किस पैर धयान दे, किसकी जरुरत पूरी करे, और इन मर्दो को वैसे hi बहार मुँह मरने की आदत पद जाती ह अपनी पत्नियों को वो सुख दे hi नहीं पते,

अमरावती अभी भी घबराई हुई थी, क्योकि काम्य को इस राज का पता चलना मतलब गले में फांसी का फंदा होना जैसा था,

अमरावती- वो वो मैं बस वो, मैं मैं बहक गई थी, मुझे माफ़ कर दो दीदी मैं बहक गई थी,

काम्य- मैं कुछ बोल तोडना रही हु, अगर कुछ कहना होता तो तभी बोल देती, मैं तो यहाँ इसलिए आई हु की इससे हमारा काम भी हो जायेगा और तुम्हारी जरुआत भी पूरी हो जाएगी,

अमरावती- वो मेरे बेटे जैसा ह, मैं उसके साथ कैसे

काम्य- वो हमारा कुछ नहीं ह, उससे हमारा कोई रिश्ता नहीं ह,

अमरावती- लेकिन मैं कैसे, ये मुझसे नहीं होगा,

काम्य- जैसी तुम्हारी मर्जी, मैं तो तुम्हे मौका देने आई थी, तुमने महाराज को धोखा दिया ह, शायद इसी तरह से महाराज की सहायता कर दो तो तुम्हारा भला हो जाये,

काम्य कड़ी हो गई,

काम्य- सोचना इस बारे में इसमें तुम्हारा भला hi ह,

कामय बहार चली गई और अमरावती को एक बहुत बड़ी शंश्य दे गई थी,

काम्य वह से सीधा सौमित्र के पास पहुंची जो अपना सिंगर करने में लगी हुई थी, काम्य की एते hi उसकी दसिया बहार चली गई,

सौमित्र- क्या बात ह आज दीदी खुद मेरे कमरे में

काम्य- काम hi कुछ ऐसा ह,

सौमित्र- खेइये क्या कर सकती हु,

काम्य- एक जिम्मेदारी देनी ह तुम्हे, और तुम hi कर सकती हो, क्योकि इस राजय में सिर्फ तुम हो जिसके अंदर वो हुनर ह जो किसी को भी अपनी उंगलियों पर नचा सके,

अपनी तारीफ सुनकर सौमित्र ख़ुशी से झूम उठी,

सौमित्र- हहहहहए आप मुझे बना रही हैं, ऐसा कुछ नहीं ह,

काम्य- नहीं मैं सच बोल रही हु,

सौमित्र- मेरी तारीफ छोड़िये आप काम बताइये बस समझिये हो गया,

काम्य- तुम्हे उस देव को अपने हुसैन के जाल में फ़साना होगा,

काम्य की बात सुनकर सौमित्र एक दम चौंक गई और आँखे फाड़ क्र काम्य को देखने लगी,

सौमित्र- ये क्या बोल रही ho,ye कैसे होगा,

काम्य- तुम चाहो तो कुछ भी कर सकती हो, और इसमें तुम्हारा भी फायदा ह,

सौमित्र- मेरा क्या फायदा ह,

काम्य- एक तो तुम महाराज की सहयता कर पाओगी जिससे महाराज तुम्हे खुश हो जायेंगे, और मैं जानती हु की तुम्हारे अंदर कितनी कामुकता ह, जिसे महाराज भी शांत नहीं कर सकते, लेकिन मैंने देखा ह वो देव तुम्हारी कामुकता को शांत क्र सकता ह, उसका वो मोटा लम्बा हथिया जो तुमने उस दिन मुरझाया हुआ देखा था, अब वो उससे भी ज्यादा बड़ा हो चुक्का ह, इतना बड़ा की कोई घोड़ी भी उसे न झेल पाए, मुझे यकीन ह तुहरे शिव और कोई और नहीं झेल सकता ह, और जब मर्द को सुख मिलता ह तभी वो अपने राज उगलता ह,

कामय की बात सुनकर सौमित्र बस एक तक काम्य को देखे जार hi थी,

सौमित्र- दीदी आप जानती हैं क्या बोल रही हैं, अपनी भाभी को किसी और मर्द के नोचे छोड़ने को बोल रही हैं, अगर किसी को पता चला तो क्या होगा,

काम्य- इस समय सबसे जरुरी ह देव की ताकत का पता लगाना, अउ राग राई राज खुल गया तो निहारिका की सुंदरता का राज भी पता चल जायेगा, जिससे तुम और भी सूंदर हो सकती हो, सोच लो इसमें कोई नुकसान नहीं ह, और ये महल हमारा ह इसमें हम क्या करते हैं कोई नहीं जान सकता, और महाराज को दूर रखने का काम मेरा ह, वो सब मैं सम्हाल लुंगी,

सौमित्र- दीदी मुझे बड़ा अजीब लग रहा ह, मैंने कभी किसी पराये मर्द के साथ रिश्ता नहीं बनाया,

काम्य- लेकिन मैं जानती हु की तुम्हारे अंदर वो इच्छा ह, और देव का लुंड तुम्हे आकर्षित कर रहा था, अब मौका ह अपनी िछाये पूरी करने का और मैंइसमे तुम्हरे साथ हु,

सौमित्र सोच में दुब गई,

काम्य- तुम आराम से सोचो, और शाम को एक बार देव के कमरे में होकर आना फिर फैसला करना, शायद उसे देख क्र तुम्हारे विचार जल्दी बन जाये,

इतना बोल क्र काम्य बहार चली गई, सौमित्र बस उसी सोच में डूबी रह गई,

देव और निहारिका जिस काम के लिए यहाँ आये थे वो तो खुद काम्य उनके लिए कर रही थी, अनजाने में hi काम्य देव की सहायता कर रही थी,

इधर तीनो भाई सूरज ज्वाला और अभिजीत एक साथ बैठे हुए थे,

ज्वाला- मुझे यहाँ क्यों बुलवाया, क्या हुआ ह

सूरज- होना क्या ह वो देव यहाँ आकर हमारी बहेनो को फसा रहा ह,

अभिजीत- है और हमारी भेने भी उसकी तरफ आकर्षित हो रही हैं,

ज्वाला- ये तुम कैसे कह सकते हो,

सूरज- हम अपनी आँखों से देख क्र आ रहे हैं,

ज्वाला- तो तुम मुझसे क्या चाहते हो,

अभिजीत- उस देव की मोत

ज्वाला- वो अभी तो संभव नहीं ह,

सूरज- मैं कुछ और सोच रहा हु,

दोनों सूरज को देखने लगे,

और जब सूरज ने बोलना शुरू किया तो दोनों के मुँह खुले रह गए, वो फटी हुई आँखों से सूरज को देख रहे थे,

ज्वाला- ची तू ऐसा कैसे सोच सकता ह,

सूरज- इसमें बुराई क्या ह,

अभिजीत- मैं तैयार हु,

ज्वाला- टब hi पागल हो गया ह, अगर महाराज को पता चला तो जानते हो क्या होगा,

सूरज- कुछ नहीं होगा

ज्वाला- मुझे लड़किया नहीं चाहिए मुझे वो निहारिका चाहिए,


सूरज- पहले अपना शिकार यहाँ से शुरू कर्नेगे उसके बाद उस निहारिका का भी शिकार करेंगे और उन दोनों माँ बेटी के साथ तीनो मिलकर उसके साथ कर्नेगे,
 




वैरी गुड मॉर्निंग डरेस्ट फ्रेंड्स 💋 💋 ❤️ 🌹 🌹 🌹 🌹 ❤️
 
अपडेट- 21



ये तीनो भाई एक ऐसी योजना बना रहे थे एक ऐसी योजना जो हर रिश्ते को तर तर करने वाली थी, असल में सूरज ने जो विचार रखे थे वो ये थे,

सूरज- मैं जो बोलने जा रहा हु उसे धयान से सुन्ना और आराम से सोचना, वो देव हमारी बहेनो को फ़साने में लगा हुआ ह, और जैसा मुझे लग रहा ह वो जल्दी hi उन्हें छोड़ देगा, क्योकि हमारी भेने भी उसकी तरफ आकर्षित दिख रही हैं, क्योकि उनकी उम्र हो चुकी ह और तुम देख hi रहे हो उन पैर जवानी कितनी उभर क्र आ रही ह, और ऐसी जवानी में लड़की को लुंड चाहिए hi छाइये, और उनकी शादी भी नहीं हो प् रही ह, दो बार शादी टूट चुकी ह, शायद अब उनसे कोई शादी भी न करे ऐसे में उनका मन भटक रहा होगा, और उस देव ने हमारी सहायता करके सबके दिल में जगह सी बना ली ह, तो हो सकता ह वो उसके निचे आ जाये, और अगर उस देव ने हमारी बहेनो को छोड़ दिया तो हम कही मुँह दिखने लायक नहीं रहेंगे, वो देव कुछ करे उससे पहले हम तीनो एक दूसरे की बहेनो को पता क्र छोड़ देते हैं, वो हमारी सगी भेने नहीं हैं तो ज्यादा फरक भी नहीं पड़ेगा, और उनके अंदर की वासना की आग भी बुझ जाएगी, और वो उस देव के पास नहीं जाएँगी, और घर की बात घर में hi रह जाएगी, और उस रीवा को तीनो छोड़ लेंगे,

सूरज की इस बात से पहले तो दोनों भाई चौंक गए लेकिन जल्दी hi तीनो ने सहमति क्र ली थी, कहने को तो ये सिर्फ देव की वजह से कर रहे थे लेकिन उनके अंदर पहले से hi चारो लड़कियों के लिए वासना भरी हुई थी, और ये बात चारो लड़किया भी जानती थी,

अभिजीत- मुझे सोमिया चाहिए,

सूरज- मुझे अक्षरा चाहिए, वो देव से बहुत लिपट रही थी, उसकी चीखे मेरा लुंड निकलेगा,

ज्वाला- तो अमिता मेरी हुई, और रीवा

सूरज- उसकी तो तीनो मिलकर फाड़ेंगे, रीवा और निहारिका को तो हम अपनी रखैल बनाएंगे, भविषा में हम तीनो में से राजा कोई भी बने लेकिन ये दोनों माँ बेटी हमारी रखैल होंगी,

अभिजीत- लेकिन हम उन्हें पटायेंगे कैसे,

सूरज- जैसे हमने आज तक राजय की इतनी लकडिया पाते हैं, लड़की को बस लुंड चाहिए, एक बार उसे बस छोड़ दो फिर वो किसी से कुछ नहीं खेती क्योकि कोई भी लड़की शर्म की वजह से किसी से नहीं बताती की उसे किसी ने छोड़ दिया ह, और बताएगी भी तो समाज उसे hi गालिया देगा, लड़को का क्या बिगड़ता ह, इसलिए एक बार छोड़ने के बाद हमारी भेने भी चुप रह जाएँगी, और फिर जब उन्हें चुदाई में मजा आने लगेगा तो हमारा साथ देंगी,

ज्वाला- वैसे जब दूसरे की बहन को छोड़ hi रहे हैं तो एक एक का hi मजा क्यों ले, जब हम सबके मजे ले सकते हैं,

अभिजीत- तुमने मेरे मुँह की बात चीन ली, हमारे सामने सगी बहेनो के अलावा 3 लड़किया हैं तो सबका मजा लेंगे न,

सूरज- फिर अपनी बहेनो को hi क्यों बक्शा जाये, अब तो चारो का मजा लेंगे,

ज्वाला- सगी बहन के साथ

सूरज- अरे वो किसी से तो छुड़ेगी hi और छूट और लुंड को क्या पता कोण सागा ह कोण पराया,

तीनो है पड़े, तीनो ने तय कर लिया की अब चारो लड़कियों को छोड़ा जायेगा,

सूरज- पहले अमिता सोमिया और अक्षरा को छोडनेगे फिर वो hi हमारे लिए रीवा को लेकर आएँगी, और तीनो मिकर रीवा को छोड़ेंगे,

अभिजीत- जल्दी से तैयारी करो अब रुका नहीं जा रहा देखो मेरा लुंड कैसे उछाले मर रहा ह,

सूरज- जल्दी hi उन्हें अपने ठिकाने पैर लेकर चलते हैं वही उन्हें काली से फूल बना क्र वापस लाएंगे,

ज्वाला- ठीक ह कोई अच्छा सा दिन तय क्र लेना और मुझे बता देना,

अभिजीत- मैं वह सब इंतजाम करवा देता हु,

तीनो भाई ख़ुशी से झूमने लगे और शराब पीकर नाचने लगे, और अपनी hi बहेनो के लिए अश्लील बाते करने lage,unki चूचियों और गांड के लिए खूब गन्दा बोल बोल क्र थके मरने लगे,

देव महल के बहार गया तो आज पूरी परजा उसके सामने सर झुका रही थी, देव को कुछ ऐसे खास लोग चाहिए तो जो उसकी मदद कर सके, क्योकि ऐसे बहुत कार्य थे जो उससे बहार भी करने थे, तभी एक औरत उसके सामने आ गई, और हाथ जोड़कर कड़ी हो गई,

देव- क्या बात ह

औरत- मैं आपसे माफ़ी मांगना चाहती हु,

देव- माफ़ी किस बात की,

औरत- एक दिन मैंने आपका अपमान किया था, मैंने कहा था पहले अपने लिए इज्जत बनाओ फिर हमारी मदद करना,

देव हँसा- कोई बात नहीं, उस समय तो सबने अपमान hi दिया था, और मुझे किसी सम्मान की जौरात नहीं ह और किसी अपमान का भय नहीं ह,

औरत- इसीलिए तो आप इस संसार के सबसे महँ इंसान ह, आपको सम्मान तो कभी छाइये hi नहीं था, और जो अपमान आपने झेला ह उसके बाद आपको अपमान का भय रहेगा hi नहीं, क्योकि उससे ज्यादा तो अपमान हो hi नहीं सकता,

तभी एक नौजवान लड़का वह आ गया और देव के सामने हाथ जोड़ लिए,

देव- माँ जी ये कोण ह?

औरत- ये मेरे बेटी का बीटा ह, मेरी बेटी कहा गायब हो गई कोई नहीं जनता, वो महल में काम करने जाती थी , कुछ साल पहले वापस hi नहीं आई, हमारी कोई नहीं सुनता,

देव- क्या नाम ह तुम्हारा

लड़का- अभेंद्र

देव- अच्छा नाम ह, क्या करते हो

औरत- बस काम धुंध रहा ह राजकुमार, ये तो सेना में जाने को बोलता ह लेकिन मुझे दर लगता ह,

देव- हम्म्म सेना में जाना चाहते हो,

अभेंद्र- राजकुमार मैं देस की सेवा करना चाहता हु लेकिन नानी जाने नहीं देती बोलती हैं की ऐसे राजाओ के लिए अपनी जान को देव पैर क्यों लगाना जो प्रजा के दुःख नहीं देखता,

औरत- इसे माफ़ कर दो राजकुमार इसे नहीं पता क्या बोल रहा ह,

देव- कोई बात नहीं माँ जी सच hi बोल रहा ह, और सच बोलना कोई अपराध नहीं ह,

अभेंद्र ने एक उम्मीद की नजरो से देव को देखा, जैसे उसे लगा हो की शायद ये हमारा भला कर दे,

देव- देखो इस समय मैं ये तो नहीं जनता की तुम्हारी माँ कहा ह, वो ह भी या नहीं, मैं कोई झूटी उम्मीद नहीं दूंगा, लेकिन इतना विश्वास दिला सकता हु की अगर उनके साथ कुछ गलत हुआ ह तो गलत करने वालो को सजा जरूर मिलेगी,

अभेंद्र- कोण देगा उन्हें सजा, मैं जनता हु वो राजपरिवार के hi लोग हैं,

देव- वो चाहे जो भी हो उन्हें सजा जरूर मिलेगी, लेकिन उसके लिए तुम क्या कर सकते हो, इस राजय को एक खुश हल राजय बनाने के लिए क्या कर सकते हो,

अभेंद्र- अपने राजय की सेवा करना मेरा धरम ह, उसके लिए मैं कुछ भी कर सकता हु,

देव- ठीक ह तो कल मुझे आकर मिलना राजय के बहार उत्तेर दिशा में जो खण्डार ह वह,

अभेंद्र- ठीक ह राजकुमार,

औरत- तू चला जायेगा तो हमारा घर कैसे चलेगा,

देव- ये इस राजय के लिए काम करेगा तो इसे वेतन भी मिलेगा, लेकिन आपको ख्याल रखना ह की ये बता किसी को पता न चले की ये किसके पास काम करता ह,

औरत- हमे आप पैर पूरा यकीन ह, आप hi हम सबका भला कर सकते हैं, मैं किसी से कोई जीकर नहीं करुँगी,

देव हाथ जोड़ क्र वह से निकल गया, वो आगे कई गाओं में घुमा, और शाम तक वापस आ गया,

इधर भवर सिंह ने दिन में कई बार कोशिश की निहारिका से मिलने की लेकिन हर बार वो चीता सामने खड़ा मिला, भवर सिंह को बहुत गुस्सा आ रहा था, वो उस चीता को मरवा देना चाहता था लेकिन फ़िलहाल कुछ भी गलत करना उसके लिए नुकसान दायक था,

इधर अमरावती और सौमित्र को पूरा दिन हो गया था सोचते सोचते की वो क्या करे, अमरावती को अच्छा लुंड मिल रहा था, उसकी वासना शांत हो रही थी लेकिन उसके अंदर का दर उसे परेशां कर रहा था क्योकि उसका राज काम्य को पता था, और काम्य से खतरनाक कोई नहीं था, इधर सौमित्र इस सोच में थी की उसे ये करना चाहिए या नहीं, अंत में दोनों ने आगे बढ़ने का फैसला क्र hi लिया था,

देव जब महल से बहार था तो अक्षरा और रीवा परेशां सी उसे ढूंढती फिर रही थी, उसके वापस आते hi दोनों उसके पास पहुंची,

रीवा- कहा चला गया था हम कब से धुंध रहे थे,

देव- क्यों क्या हुआ, कोई परेशानी ह क्या

अक्षरा- बस तू नहीं दीखता तो चिंता सी होने लगती ह, यहाँ बहुत दुश्मन ह न जाने कोण क्या करे,

देव- हाहाहाहा जब वो लोग मुझ पैर हावी थे तब तुम्हे डरना चाहिए था तब तुम नहीं डरे, अब वो मेरा कुछ नहीं कर सकते अब क्यों दर रही हो,

रीवा- तू इस समय अपने गुस्से और नाराजगी से भरा हुआ ह तुझे अभी समझ नहीं आएगा हम क्यों दर रहे हैं,

देव- क्या मुझे नाराज होने का भी अधिकार नहीं ह,

रीवा- पूरा हक़ ह, मैं नहीं चाहती की 18 साल की नाराजगी कुछ hi पालो में दूर हो जाये, और हमने तुझे इतनी तकलीफे दी हैं की इंसान पूरी जिंदगी उन्हें नहीं भूल सकता, फिर भी हम इंतजार करेंगी की तू हमे अपने दिल से माफ़ कर दे, क्योकि हमे माफ़ करना आसान नहीं होगा,

अक्षरा बस दोनों की बाते सुन रही थी,

अक्षरा- ोये तू चुप क्र, मैं इतना इंतजार नहीं कर सकती, अब जो गलती हो गई उसे बदल तो नहीं सकते तो क्या साडी उम्र ऐसे hi दुःख में जीवन बिताएंगे, और देव बाबू तुम, बहुत हो गई नाराजगी अब हमे माफ़ कर दो, जो सजा देनी ह दे दो हम है क्र उस सजा को पूरा करेंगी लेकिन हमसे अब नाराज मत रहना मैं जी नहीं पाऊँगी,

अक्षरा की आँखों में आंसू आ गए,

देव ने उसे गले लगा लिया,

देव- मैं कोई नाराज नहीं हु, तुम बस ये रोया मत करो समझी न,

रीवा की आँखे भी नाम थी और होतो पैर हलकी सी मुस्कान थी,

जब से देव महल में आया था राजगुरु न जाने किस गणित में लगे हुए थे, वो अपने कर्म में बैठे बहुत सी कुण्डलिया खोले बैठे थे, उनके अंदर का दर उनके चेरे पैर साफ़ दिख रहा था,

राजगुरु खुद से hi- कुछ समझ नहीं आ रहा, आज भी उसका भविष्य क्यों नहीं दिख रहा ह, जहा तक उसका भविष्य दीखता था वो समय पूरा हो चुक्का ह, उसे मर जाना चाहिए था, फिर वो जिन्दा कैसे ह, और तबाही आ रही ह, मुझे दिख रहा ह कुछ बहुत बुरा होने वाला ह, कैसे रोकू, अब तक सात्विक भी वापस नहीं आया ह, भौमिक को बुलवाता हु वो कुछ मदद कर सके, नहीं नहीं वो अपनी साधना में लगा ह,

अरे है ये तो मैंने सोचा hi नहीं भौमिक को जो शक्तिया मिली हैं शायद वो किसी काम आ जाये, और अगर भौमिक को मिली हैं तो सात्विक को भी मिली होगी, मेरे दोनों भाई हमारे राजय को बचा सकते हैं,

राजगुरु खुद से बात कर hi रहे थे की अचानक उनके दिमाग में कुछ हलचल हुई,

राजगुरु खुद से hi- शक्तिया मैंने इस तरफ क्यों नहीं सोचा, ये शक्तिया एक दम आई कहा से, और कही देव के साथ भी तो ऐसा कुछ तो नहीं हुआ जो भौमिक और सात्विक के साथ हुआ ह, क्योकि एक भौमिक कुछ hi समय में ताकतवर बन गया ह, कही एशिया hi कुछ देव और निहारिका के साथ तो नहीं हुआ, क्या कोई शकित जागृत हो रही हैं, इस संसार में कोई देविया शक्तिया जागृत हो रही हैं, लेकिन ये शक्तिया हैं क्या, कहा से आई, मुझे इस पैर धयान देना होगा, मुझे महाराज से बात करनी होगी,

राजगुरु तुरंत उठे और भवर सिंह की पास चल दिए फिर अचानक रुक गए,

राजगुरु- नहीं नहीं भवर सिंह को अगर इस बारे में पता चला तो वो पागल हो जायेगा, और पुरे राजय को युद्ध में झोक देगा, पहले मुझे hi सब पता करना होगा, उसी के बाद कुछ बोल सकता हु,

राजगुरु ने फिर से कुछ बहुत पुराणी किताबे निकल ली और पढ़ने लगे,

वही जंगलो में सात्विक अपने धयाम में बैठा था और उसका शरीर एक दम तप रहा था जैसे उसके शरीर में आग लगी हुई हो, उसके चेरे पैर तपन की लाली साफ़ दिख रही थी, तभी उसने एक दम अपनी आँखे खोल दी, उसकी आँखे लाल हो राखी थी, आँखे खुलते hi उसके चेरे पैर एक अजीब सी मुस्कान आ गई, सात्विक खड़ा हुआ और उसने अपने चारो तरफ देखा और जोर जोर से हसने लगा, वो बस हस्ता hi रहा, उसकी हसी बहुत भयानक थी, फिर अचानक वोट क दम चुप हो गया,

सात्विक खुद से hi- पूरा संसार इस शक्ति के लिए पागल ह, लेकिन ये शक्ति मेरे पास ह, मैं कुछ भी कर सकता हु, मैं सर्वशक्ति शैली हु, सबसे महँ तांत्रिक हु मैं, तंत्र गुरु अब मैं आपसे भी ज्यादा शक्ति शैली हु, इस संसार में मुझसे बड़ा तांत्रिक पैदा नहीं हो सकता, अब ये पूरी दुनिया मेरे सामने झुकेगी,

सात्विक के अंदर नकारात्मक ऊर्जा ने अपनी जगह बना ली थी, जिस वजह से उसकी तांत्रिक विद्या का ज्ञान और बढ़ गया था और वो उस पैर हावी भी हो गई थी, सात्विक के अंदर दबी हुई महत्वकांक्षाए अब उभर क्र बहार आ रही थी, वो हमेशा से सर्वशक्ति शैली बनना चाहता था लेकिन राजगुरु और भौमिक की सांगत में उसके ये विचार उसके अंदर hi दबे रहते थे लेकिन अब उसके अंदर की अच्छे कही खो चुकी थी, और उसकी बुराई ने जगह बना ली थी,

सात्विक वह से चल दिया उस पहाड़ की तरफ जहा भैरव सोया हुआ था, सात्विक ने अपनी रफ़्तार पैर धयान दिया और अपनी तेज रफतार को देख क्र वो और खुश हुआ,

कुछ hi देर में वो उस गुफा में पहुंच गया, राजा भैरव के रक्षक अभी भी उस ताबूत को घेरे बैठे हुए थे, सात्विक को वापस आया देख सब खड़े हो गए,

उनका बूढ़ा आदमी- महाराज आप आ गए,

सात्विक- है और इन्हे जगाने की विद्या भी सिख ली ह,

सात्विक ने भैरव सिंह को जैसे hi छुआ तो वो एक दम से किसी और दुनिया में पहुंच गया, चारो तरफ एक दम शांति थी, खुला आसमन था सात्विक ने अपने चारो तरफ देखा तो उसने पाया की वो अंतरिक्ष में ह, और वो हवा में उड़ रहा ह, एक पल के लिए वो घबरा गया, तभी उसे एक आवाज आई,

आवाज- तो तुम हो वो महँ तांत्रिक जो मुझे जगाने आया ह, अगर तुमने मुझे जगा दिया तो इस पुरे संसार को तेरे सामने झुका दूंगा,

सात्विक आवाज की तरफ जाना चाहता था लेकिन उसका खुद पैर कोई काबू नहीं था,

सात्विक- कोण हो तुम

आवाज- राजा भैरव

सात्विक- हम ह कहा

भैरव- मेरे मस्तिष्क में

सात्विक- आपको कैसे जागो,

भैरव- मुझे जगाने के लिए पहले तुम्हे तीनो शक्तियों को आजाद करना होगा, जिसमे से दो आजाद हो चुकी हैं, जब तक वो तीसरी आजाद नहीं होगी तब तक मेरे ये निंद्रा नहीं टूटेगी,

सात्विक- कहा हैं वो शक्तिया

भैरव- एक तो मैं तुम्हारे अंदर महसूस कर प् रहा हु, दूसरी आजाद हो गई ह लेकिन मैं नहीं जनता और तीसरी तुम्हे खुद ढूढ़नी होगी, और वो शक्ति किसी ऐसे के पास होनी चाहिए जो तुम्हारे और मेरे कहने पैर चल सके, हमारा साथी बनना चाहिए, जैसे hi वो शक्ति आजाद होगी तुम्हे महसूस हो जाएगी उसके बाद तुम मेरी नींद्र के मंत्रो को तोड़ सकते हो,

सात्विक- मैं अपना धयान लगा क्र उस शक्ति को ढूंढता हु,

भैरव- ये इतना आसान नहीं ह, वो ढूढ़ने से कभी नहीं मिल सकती, अगर ऐसे मिल जाती तो बहुत से ज्ञानी उन शक्तियों को ढूंढते हुए मृत्यु को प्राप्त हो गए, वो कब के धुंध लेते,

सात्विक- फिर मुझे क्या करना होगा,

भैरव- तुम्हे सब जगह जाना होगा, और खोजना होगा, जब तुम उस शक्ति के करीब होंगे या उस शक्ति के प्रभाव वाले इंसान से मिलोगे तो तुम्हे खुद अहसास हो जायेगा, अब जाओ और जल्दी से उसे धुंध क्र वापस आओ,

तभी सात्विक को एक झटका लगा और वो वापस उस गुफा में पहुंच गया और उसने अपना हाथ हटाया,

बूढ़ा आदमी- क्या हुआ महाराज आप कहा खो से गए थे, राजा कब उठेंगे,

सात्विक- उसके लिए मुझे कही जाना होगा, एक खोज पैर, तुम सब में से सबसे अच्छे योद्धा मेरे साथ चलो इस खोज के लिए, तुम्हरे राजा को जगाने के लिए ये खोज बहुत जरुरी ह,

बूढ़ा आदमी- महाराज आप जिसे चाहो ले जाओ, ये सभी बहुत शक्ति शैली योद्धा हैं, इस संसार में इन्हे कोई नहीं हरा सकता, बस इन्हे समय पैर मॉस और औरत मिलनी चाहिए, ये उसके बिना नहीं रह सकते,

सात्विक- सब मिलेगा,

सात्विक उस गुफा से निकल गया और उसके साथ 20 आदमी और चल दिए, जो देखने में hi बहुत खूंखार और ताकतवर थे,

ये सफर सात्विक को कहा लेजाने वाला था वो भी नहीं जनता था, वो पहले से बहुत बदल चुक्का था लेकिन ये सफर उसे और कितना बदलने वाला था इसका उसे अंदाजा नहीं था,

रात के भोजन के समय भवर सिंह अपने परिवार के साथ बैठा हुआ था लेकिन वह सिर्फ काम्य अमरावती सौमित्र और तीनो राजकुमार थे, क्योकि निहारिका का भोजन उसके कमरे में hi लगवाया गया था और चारो लड़किया भी निहारिका के साथ hi भोजन कर रही थी, और देव तो वही होता जहा उसकी माँ होती,

भवर सिंह- हमारी बेतिया कहा ह वो आज भोजन पैर साथ क्यों नहीं हैं,

सूरज- वो उन माँ बेटो के साथ भोजन कर रही हैं,

भवर सिंह गुस्से में आग बबूला हो गया,

भवर सिंह- उनकी हिम्मत कैसे हुई,

काम्य- करने दीजिये महाराज फ़िलहाल उन्हें छेड़ना ठीक नहीं ह,

अभिजीत- लेकिन माँ इससे तो हमारा परिवार बिखर जायेगा, जब सब अपनी मर्जी से काम करने लगेंगे तो महाराज का दर ख़तम हो जायेगा,

काम्य- तुम अभी कुछ नहीं जानते यहाँ क्या चल रहा ह तो अपन ामुह बंद रखो,

भवर सिंह- उसे क्यों दन्त रही हो वो सही तो बोल रहा ह,

काम्य- वो दोनों अभी वापस आये हैं तो थोड़ा बहुत प्यार लुटाने दो, समय आने पैर सब बदल जायेगा,

भवर सिंह- तुमने कोई तरीका निकला क्या उसके बारे में जानने का,

काम्य ने अमरावती और सौमित्र की तरफ देख क्र कहा- तरीका निकला तो ह देखते हैं वो कितना जल्दी आपकी सहायता कर पते हैं,

भवर सिंह- जो भी उनकी जानकारी निकलेगा हम उन्हें बहुत बड़ा पुरुस्कार देंगे,

पुरुस्कार का नाम सुनते hi सौमित्र खुश हो गई,

भोजन करने के बाद जब सब अपने कमरे में चले गए तो काम्य ने सौमित्र से पूछा क्या वो तैयार ह तो सौमित्र ने हामी भर दी,

उसके बाद काम्य अमरावती के पास गई और उससे भी पूछा, अमरावती के पास कोई और रास्ता नहीं था उसने भी है कर दी, काम्य खुश होती हुई अपने कमरे में आ गई, जहा उसने कुणाल को बिस्टेर पैर धकेला और उसके उप्पेर चढ़ क्र बैठ गई,

कुणाल- क्या कर रही हो,

काम्य- मुझे तुम्हरा लुंड छाइये मेरी छूट में, आज मुझे ऐसा छोड़ो की मेरी चीखे पूरा महल सुन ले,

कुणाल- ये क्या बोल रही हो, क्या हुआ ह तुम्हे

काम्य- मैंने वो साक्षात कामदेव को देख लिया ह, और मेरे अंदर की आग अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रही ह, जितना बोल रही हु उतना करो वर्ण मैं जाती हु बहार किसी और के पास,

कुणाल- करता हु करता हु,

कुणाल ने जालिद से अपने कपडे उतरे और काम्य के कपडे उतरे और सीधा अपना लुंड उसकी छूट में घुसा दिया, काम्य के मुँह से बस हलकी सी आह्हः निकली उसकी पूरी तरह भीगी हुई छूट में कुणाल के लुंड का ठीक से पता तक नहीं चला वो कब घुस गया, कुणाल ने जल्दी जल्दी धक्के लगाने शुरू क्र दिए, वो काम्य की चीख निकलना चाहता था लेकिन मर्द की सबसे बड़ी गलती hi यही होती ह वो जितनी जल्द बजी में छोड़ता ह उतनी hi जल्दी झाड़ता ह, और अगर ऐसे में औरत उसके शरीर पैर अपना हाथ फिर दे तो वो बर्दास्त hi नहीं कर पता, वही कुणाल के साथ हुआ और 10 मिनट्स में hi उसका शरीर अकडने लगा और उसने जल्दी से अपना लुंड बहार निकल लिया और काम्य की जांघो पैर अपना रास निकल दिया,

कुणाल के झड़ते hi काम्य गुस्से में पागल सी हो गई और उसने एक जोर दर थपड कुणाल के गलो पैर जड़ दिया, कुणाल की आँखों में आंसू आ गए,

काम्य- जब इस लुंड में दम hi नहीं था तो मेरे जैसी औरत से शादी hi क्यों की, नामरद इंसान तेरी वजह से मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई, तू जनता ह न मेरे अंदर कितनी आग ह अब कोण बुझायेगा मेरी इस आग को,

कुणाल के पास कोई शब्द नहीं थे, वो बेचारा उठा और चुप चाप अपने कपडे उठा कर वह से निकल क्र दूसरे बराबर के कर्म में आ गया जिसका रास्ता काम्य के कमरे के अंदर से hi था,

वही काम्य बिस्टेर पैर पद गई और अपनी छूट को अपने hi हाथो से रगड़ने लगी,

इधर अमरावती ने अपना मन पक्का किया और देव के कमरे की तरफ चल दी, और जैसे hi उसने कमरे में कदम रखा तो उसकी सांसे hi थम सी गई, सामने का नजारा इतना खूबसूरत था की दुनिया की कोई भी औरत एक बार देख ले तो नजर न हटा पाए, क्योकि सामने देव बिलकुल नंगा खड़ा था और बड़ा सा लुंड हवा में किसी मीनार की तरह खड़ा था और देव के हाथ में एक तलवार थी जिसे वो बड़े धयान से देख रहा था, उसका धयान hi नहीं था अमरावती कब उसके कमरे में आई या फिर उसे सब पता था और वो बस ये दिखा रहा था की उसे जानकरी नहीं ह,

अमरावती एक मूर्ति की तरह कड़ी रह गई, तभी देव पलटा और अमरावती को देख क्र चोकने का नाटक किया,

देव- आप आप यहाँ,

अमरावती भी एक दम होश में आई, और उसने तुरंत अपना मुँह फेर लिए,

देव – ओह्ह माफ़ करना महारानी, मैं कमरे में ऐसे hi रहता हु,

अमरावती- नहीं माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए, मैं बिना बताये तुम्हारे कमरे में आ गई,

देव- कोई बात नहीं मैं कपडे पहन लेता हु,

अमरावती को लगा जैसे कोई कीमती खजाना छुपाया जार है ह और वो एक दम बोल पड़ी,

अमरावती- नहीं नहीं कोई जरुरत नहीं ह, मैं अपनी वजह से तुम्हे तकलीफ नहीं दे सकती, तुम जैसा रहना चाहो रह सकते हो,

देव- लेकिन आपको परेशानी होगी, आप मेरी तरफ देख भी नहीं प् रही हैं,

अमरावती ने तुरंत अपना मुँह देव की तरफ कर दिया और खुद को सम्हालने की कोशिश की,

अमरावती- हम राजपरिवार के लोग हैं, हमे ये सब सिखाया जाता ह, और ये शर्म उन लोगो के लिए होती ह जिन्होंने समाज को अच्छी तरह नहीं पहचाना ह, हम परिवार हैं और परिवार में एक दूसरे के सामने ऐसे आना कोई बड़ी बात नहीं ह,

देव- क्या सच में हम एक परिवार हैं,

अमरावती- जो पहले हो चुक्का ह उसे बदला तो नहीं जा सकता लेकिन एक नै शुरुआत तो की जा सकती ह, हमे अहसास ह की तुम्हारे साथ गलत हुआ ह, इस उम्र में हर किसी लड़के को एक साथी की जरुरत होती ह, तुम्हे भी थी तो तुमने उस लड़की के साथ रिश्ता बनाया इसमें क्या गलत ह,

देव- लेकिन किसी ने मेरी बात नहीं सुनी,

अमरावती- तुमने गलत लड़की पैर भरोसा क्र लिया था, वो तुम्हारे लायक थी hi नहीं, और जैसा तुम्हारा रूप और तुम्हारा ये अंग ह उसके लिए तो कोई कामुक और अनुभवी औरत hi कुछ कर सकती ह,

देव ने अमरावती की आँखों में झाँका जिसकी नजर बार बार देव के खड़े लुंड पैर जा रही थी,

देव- मेरी किस्मत ऐसी कहा महारानी जहा कोई अनुभवी औरत मेरे नजदीक आ सके,

अमरावती- शायद तुमने कभी अपना खास हुनर किसी को दिखाया नहीं इसलिए कोई आई नहीं,

देव- अब हुनर दिखने के लिए किसी के साथ जबरदस्ती तो नहीं क्र सकता न,

अमरावती- सही कहा, लेकिन अब तुम्हे चिंता करने की जरुरत नहीं ह, अब मैं तुम्हारे साथ हु, तुम्हे जॉब hi चाहिए मुझसे कह सकते हो, मैं तुम्हारी दोस्त जैसी हु, और दोस्तों को अपना हाल बताया जा सकता ह, वैसे भी तुम मेरे सेज बेटे नहीं हो, इसलिए दोस्त बन सकते हो,

देव- मुझे ख़ुशी होगी आपसे दोस्ती करके, आपको तो अनुभव भी बहुत होगा, क्या आप मेरी सहायता कर सकती हैं,

अमरावती- मैं मैं कैसे

देव- मेरा मतलब ह कोई अनुभवी औरत ढूंढने में,

अमरावती- है है जरूर, तुम्हे जो चाहिए मुझे बोलना मैं सब कर दूंगी, अब हम सब एक hi परिवार हैं, अपने दिल में कोई गलत भाव मत रखना, जो चाहिए खुल क्र बोलना, मैं सब दे दूंगी,


अमरावती की नजरे सिर्फ देव के खड़े लुंड पैर थी जो बिच बिच में हलके झटके खा रहा था,
 




मेरे सभी प्यारे दोस्त मुझे ऐसे hi प्यार दे रहे हैं, और मैं खुद को महारानी जैसा फील करती हु

ी लव यू आल माय फ्रेंड्स
 
अपडेट-22



अमरावती तो वापस आ गई लेकिन उसके दिमाग से देव का खड़ा लुंड निकल hi नहीं रहा था, उसने कमरे में आते hi अपने कपडे उतरे और अपनी छूट को रगड़ने लगी,





वही देव निहारिका के पास था दोनों माँ बीटा फिर से नंगे होकर एक दूसरे से चिपके लेते थे, आज निहारिका ने चूचियों में हल्का दर्द था,

निहारिका- देव तूने काफी दिन से दूध नहीं पिया ह, आज इनमे दर्द हो रहा ह,

देव- है माँ ये सब हालत में याद hi नहीं रहा, मुझे भी दूध की जरुरत महसूस हो रही ह,

निहारिका ने तुरंत अपनी एक चुकी देव के मुँह की तरफ कर दी, देव ने तुरंत उसे मुँह में भर लिया और चूसने लगा,






निहारिका की आँखे बंद हो गई उसका हाथ देव के सर पैर पहुंच गया और बालो में उंगलिया फिरने लगी, वही देव का हाथ निहारिका के पेट पैर था, दोनों को अहसास hi नहीं हुआ कब माँ बीटा का दूध पीना पिलाना चूचिया चूसने में बदल गया था, देव ने दूसरी सूची को चूसना शुरू किया, वो दूध काम निकल रहा था बल्कि निहारिका की चूचियों को अपनी जीभ और डंडो से कुरेद रहा था, निहारिका को भी बहुत मजा आ रहा था,





निहारिका देव का सर अपनी चूचियों पैर दबा रही थी और दूसरा हाथ देव के हाथ पैर रख क्र अपने पेट पैर रगड़ रही थी, और रगड़ते रगड़ते देव के हाथ निहारिका की छूट के उप्पेर पहुंच गया, जहा निहारिका की छूट के बाल उगते हैं, लेकिन कमल था की निहारिका की छूट पैर कोई बाल नहीं था एक दम साफ़ और चिकना था वह पैर, लेकिन जब वो महल से निकली थी तब उसकी छूट पैर सुनहरे बाल थे, लेकिन उस गुफा में जाने के बाद बहुत कुछ बदल गया,

खैर जब निहारिका का दूध आना बंद हो गया तब भी देव उसकी चूचिया चुस्त रहा, निहारिका भी उसे रोक नहीं रही थी, और देव का खड़ा लुंड निहारिका की जांघो पैर रगड़ रहा था, काफी देर दोनों ऐसे hi रहे, अब निहारिका को बैचनी होने लगी थी वो अपनी जंघे भिचने लगी थी, वो अपना काबू खोटी जा थी थी,

निहारिका ने एक दम अपनी आँखे खोली और वो होश में आई, उसने अपने हालत को देखा और खुद पैर hi शर्मिंदा हुई, फिर उसने देव का सर शलया और उसे सीधा लेटने को बोलै, देव ने भी बिना कुछ कहे सीधा लेट गया, उसका लुंड किसी मीनार की तरह सीधा खड़ा था, जो बहुत hi बड़ा लग रहा था, निहारिका की नजर उसके लुंड पैर गई तो वो और बैचैन हो उठी, वो बार बार लुंड को hi देखे जा रही थी, ऐसे hi देखते देकते उसे नींद आ गई,

वही काम्य अपने कमरे में अपने बिस्टेर पैर नंगी पड़ी हुई थी, तभी उसके कमरे में कोई आया, और अपने कपडे उतरने लगा, कपडे उतर क्र सीधा काम्य के बिस्टेर पैर चढ़ गया और अपना बड़ा सा लुंड काम्य की छूट पैर लगाया और एक जोर दर धक्का मर दिया, काम्य की आँखे बंद थी, वोट क दम चीख पड़ी, और उसने अपनी आँखे खोली, तब तक उस आदमी ने जोर दर धक्के लगाने शुरू क्र दिए, उसका लुंड ठीक थक बड़ा और मोटा था, काम्य अहहहहहहह ahhhhhhhhhh करने लगी, वो आदमी लगातार धक्के लगता रहा,






कमाया- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह है छोड़ो ऐसे hi छोड़ो, और जोर से छोड़ो, मेरी चीखे निकल दो, फाड् दो मेरी छूट ahhhhhhhhhhh और जोर से और जोर से, ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

दोनों की चुदाई लगभग 30 मिनट्स तक चली जिसमे दोनों एक साथ झाड़ गए, और एक दूसरे से लिपट गए, काम्य उसके होतो को चूमने लगी, जब दोनों शांत हो गए तो वो आदमी उठा और अपने कपडे पहने और बहार चला गया,

अगली सुबह सबकी दिनचर्या शुरू हो गई थी, देव फिर से महल से बहार निकल चुक्का था, वो वह पंहुचा जहा उसने अभेंद्र को बुलवाया था, वह वो इंतजार करने लगा,

कुछ समय बाद अभेंद्र आ गया,

अभेंद्र- माफ़ करना राजकुमार आने में देर हो गई,

देव- कोई बात नहीं, तुम आये ये hi काफी ह,

अभेंद्र- बताइये क्या काम करना होगा मुझे,

देव- सबसे पहले ये जान लो ये काम आसान नहीं होगा, इसमें बहुत खतरा ह, और इस काम में तभी जुड़ना जब तुम मुझ पैर पूरा विश्वास कर सको, जो मैं कहु वैसा hi करो, और मुझे यकीन दिलाओ की मेरा विश्वास नहीं तोड़ोगे,

अभेंद्र- राजकुमार मैं गरीब लड़का हु, लेकिन मेरा जमीर मुझे किसी का विश्वास नहीं तोड़ने देगा, और रही बात आप पैर विश्वास की तो मैं इतना जनता हु इस राजय में आपसे ज्यादा विश्वास करने लायक शायद कोई नहीं ह, आज आपकी ताकत देख क्र लोग आपके सामने झुकते हैं लेकिन मैं आपको तब से देख रहा हु जब आप कुछ नहीं थे फिर भी इस राजय के लोगो की मदद करने की कोशिश करते थे,

देव- मुझे ख़ुशी हुई की मैंने सही इंसान को चुना ह,

अभेंद्र- राजकुमार आप बस बोलिये क्या करना ह,

देव- मैं और तुम लगभग एक hi उम्र के हैं तो ये बार बार राजकुमार मत बोलो, मेरा नाम देव ह इसलिए सिर्फ देव बोलो,

अभेंद्र- ये कैसे हो सकता ह, आप हमारे राजकुमार हैं,

देव- मैं कोई राजय नहीं चाहता इसलिए मैं खुद को राजपरिवार नहीं मंटा, मैं खुद को एक परजा hi मंटा हु और इसलिए उसी परजा की तरफ से सोच क्र उनका भला करना छटा हु, अगर तुम मेरे साथ देना चाहते हो तो मुझे देव कहो,

अभेंद्र- ठीक ह मैं आपको देव hi कहूंगा,

देव- बहुत बढ़िया, तो अब मेरी बात धयान से सुनो, सबसे पहले तुम्हे अपने जैसे ईमानदार और म्हणती लड़को को इकठा करना होगा और एक समूह तैयार करना होगा, और उनका काम महल के बहार हो रही सभी गतिविधियों की जानकरी लेकर देने का होगा, सबको आत्मरक्षा करने के लिए तैयार करवाना होगा, जिससे कोई भी संशय आये तो वो अपनी और गाओं वालो की रक्षा कर सके, कोशिश करना जॉब hi लड़के आये सब अलग अलग गाओं के हो ताकि सभी जगह से जानकरी मिल सके,

अभेंद्र- ठीक ह,

देव- और सबसे पहले एक घर का इंतजाम करो गाओं के अंदर जहा कुछ लोग रहेंगे,

अभेंद्र- हो जायेगा,

देव ने कुछ सोने के सिक्के अभेंद्र को दिए और भी बहुत कुछ समझाया,

देव ने अपने साथ लोगो को जोड़ना शुरू क्र दिया था,

देव महल वापस आया तो सौमित्र उसका इंतजार में कड़ी थी,

सौमित्र- कैसे हो देव बीटा सुबह सुबह कहा घूम आये,

देव- कही नहीं महारानी बस देख रहा था राजय वैसा hi ह या कुछ बदल गया ह,

सौमित्र- राजय कैसे बदल सकता ह,

देव- बहुत कुछ बदल रहा ह, तो लगा कही राजय भी बदल गया हो, वैसे मैं गलत नहीं था राजय बदल तो गया ह,

सौमित्र- मैंने आज तक ये hi सुना था जो होता ह अच्छे के लिए होता ह, क्या पता इसमें भी कुछ अच्छा होगा,

देव- हाहाहाहा अच्छा मजाक था,

सौमित्र- मजाक नहीं ह, अब तुम hi देखो जब तुम यहाँ से गए थे तब ये राजय और परिवार तुम्हारे साथ कैसा बर्ताव करता था, लेकिन आज सभी तुम्हारे सामने सम्मान में सर झुकाते हैं, जब तुम गए थे तुम्हारे अंदर एक साधारण इंसान जितनी hi ताकत थी, लेकिन आज तुम्हारे अंदर शायद किसी भी इंसान से बहुत ज्यादा ताकत दिखती ह, जब तुम गए थे तो तुम एक अंडर लड़के थे, नलेकिन आज तुम मेरे हिसाब संसार के सबसे खूबसूरत मर्द हो, तो बदलाव जो हुआ ह उसमे कुछ भला hi लिखा हुआ ह,

सौमित्र दुश्मन थी लेकिन उसने ऐसी बात बोल दी थी जिससे देव के अंदर हलचल सी हो गाइट hi, उसे बहुत कुछ याद आ रहा था, उसके साथ बुरा व्यव्हार होना, और सब कुछ बदल जाना इतनी ताकत मिलनी, मतलब सब उप्पेर वाले की योजना होगी, ये सब किसी कारन से hi हो रहा ह,

सौमित्र- क्या सोचने लगे,

देव – ूमममहहह कुछ नहीं, आप बहुत समझदारी की बात करती हैं, वैसे आप यहाँ क्या कर रही थी,

सौमित्र- तुमसे मिलने का मन किया तो इधर आ गई, हमने कभी ठीक से बात नहीं की सोचा जब सब कुछ बदल रहा ह तो हम खुद क्यों नहीं बदल सकते, मैं हमारे रिश्ते की नै शुरुआत करने आई हु,

देव- नै शुरुआत वो कैसे

सौमित्र- आओ कही ठेलते हुए बात करते हैं,

दोनों महल में बगीचे में घूमने लगे,

सौमित्र- देखो मेरा और तुम्हारा रिश्ता सौतेली माँ और सौतेले बेटे का ह, जो शायद बदल नहीं सकता, और कोई भी औरत किसी भी रिश्ते को सम्हाल सकती ह लेकिन सौतेले पैन का रिश्ता बहुत खतरनाक होता ह, और मैं केवल दिखावा नहीं करना छाती की मैं तुम्हारी अच्छी माँ बनूँगी ये सब,

देव- तो आप क्या करना चाहती हैं,

सौमित्र- मैं चाहती हु की अब नै शुरुआत हो तो नए तरीके से हो भूल जाते हैं हमारे बिच कोई रिश्ता ह, भूल जाते हैं इस सौतेले रिश्ते को,

देव- मेरी समझ में तो कुछ नहीं आ रहा

सौमित्र- ये समझो हम पहेली बार मिले हैं और तुम एक खूबसूरत लड़के और मैं एक खूबसूरत लड़की हु, शुरुआत दोस्ती से करते हैं,

देव- लेकिन आप महारानी हैं,

सौमित्र- भाड़ में जाये महारानी, क्या किसी महारानी का दोस्त नहीं हो सकता, महाराज के पास अनेको लड़किया होती आयाशी के लिए, क्या मैं एक दोस्त भी नहीं बना सकती,

देव- लेकिन ये सब कैसे मैं कैसे

सौमित्र- तुम बहुत प्यारे हो, तुम्हे एक अच्छे दोस्त की जरुरत ह, तुम मेरे दोस्त बनो फिर मैं तुम्हे इस संसार से लड़ना सिखाऊंगी,

देव- आपकी बात सही तो लग रही ह, हमारा पुराण रिश्ता कोईख़ास नहीं था शायद ये नया चल जाये, लेकिन महाराज

सौमित्र- महाराज का दर निकल दो दिमाग से उनके लिए मैं कड़ी हु न,

देव ने हाथ जोड़ क्र नए रिश्ते की शुरुआत करने का धन्यवाद कहा, लेकिन सौमित्र ने देव को अपने गले से लगा लिया और उसे अपनी बड़ी बड़ी और कठोर चूचियों का अहसास करवाया, और धीरे से बोली

सौमित्र- दोस्त गले लगते हैं, दोस्तों के पास ये अधिकार होता ह समझे

देव ने भी मुस्कुराते हुए अपनी बहे सौमित्र की कमर में दाल दी और हल्का सा दबाव बनाया, जिससे सौमित्र की आह्हः निकल गई उसकी चूचिया और डाब गई देव की छाती में,

इधर ये दोनों गले लगे हुए थे वही इन्हे दूर कड़ी अमरावती देख रही थी, और उसके अंदर एक आग सी लग रही थी, वो समझ गाइट hi की सौमित्र क्या करना चाहती ह,

अमरावती खुद से hi- अच्छा ये करमजली इस देव से उसके राज जान क्र महाराज की नजरो में उप्पेर आना चाहती ह, लेकिन मैं ऐसा होने नहीं दूंगी, मैं इससे पहले hi सब कुछ जान लुंगी, चाहे उसके लिए मुझे कुछ भी करना पड़े, देव तैयार रहो मैं आ रही हु अपना जलवा दिखने,

देव वह से निकल क्र निहारिका के पास जार है था तो उसने देखा की अभिजीत अक्षरा और सोमिया से कुछ बात कर रहा था, देव को ज्यादा समझ नहीं आया बस इतना सुना की अभिजीत बोल रहा था की हम सब वह पहले की तरह जायेंगे बहुत मजा आएगा,

और अक्षरा बोल रही थी की देव को भी ले लो, इस बात से अभिजीत थोड़ा नाराज होकर चला गया,

देव वह से आगे बढ़ गया और निहारिका के पास पंहुचा, जहा निहारिका नाहा धो क्र एक लाल साड़ी में अपना सिंगर कर रही थी,

देव- आपको इस दिखावटी सिंगर की जरुरत नहीं ह माँ, आप वैसे hi इस दुनिया में सबसे खूबसूरत हैं,

निहारिका ने मुस्कुरा कर देव को देखा,

निहारिका- तुझे मेरे खुनसुरति कब से दिखने लगी, इस महल की औरते काम हैं क्या जो माँ की खूबसूरती देख रहा ह,

देव- दुनिया की कोई भी स्त्री आपकी जगह नहीं ले सकती, और महल की औरते प्यार के लायक नहीं हैं लेकिन आपको भगवान् ने बनाया hi प्यार करने के लिए है,

देव की बातो में एक प्रेमी जैसी भावनाये दिख रही थी, निहारिका कोई बच्ची नहीं थी उसे समझ आ रहा था लेकिन माँ बेटे का रिश्ता ये मैंने नहीं दे रहा था वही हाल देव का भी था ो जो बाते बोल रहा था वो एक प्रेमी की जुबान थी लेकिन उसे खुद भी अहसास नहीं था ो क्या बोल रहा ह और क्यों बोल रहा ह,

निहारिका- मेरा प्यार तो हमेशा सिर्फ तेरे लिए ह, इस प्यार पैर बस तेरा अधिकार ह,

देव- अरे मैं तो बताना hi भूल गया की दोनों महारानियाँ अपनी अपनी इज्जत थाली में परोस क्र खुद मेरे पास लेकर आई ह, और रिश्ते की नै शुरुआत करना चाहती हैं, दोस्त बनना चाहती हैं,

निहारिका- ये सब उनकी चल ह, वो दोस्त बनकर तुजे जाल में फ़साना चाहती है, और तुझे तेरे बारे में सब जानना चाहेंगी,

देव- जनता हु माँ, और मैं खुद चाहता हु वो आये,

निहारिका- मैं भी यही चाहती हु, ताकि आगे चलकर कोई तेरे उप्पेर उंगली न उठा सके की तूने किसी का फायदा उठाया ह, खुद तेरे निचे आने सबको, लेकिन बस इतना ख्याल रखें जो एक बार निचे आ जाये वो दुबारा वह से निकल न पाए, जिस भी औरत के साथ सम्भोग करना वो ऐसा करना की ऐसा करना की उसे जीवन का असली सुख मिल सके, चाहे वो तेरे दुश्मन hi क्यों न हो, जो तेरे पास आये वो कभी किसी और के पास न जा पाए,

देव- ऐसा hi होगा माँ,

निहारिका- तेरे शरीर में कुछ हो तो नहीं रहा क्योकि तुझे काफी समय हो गया ह सम्भोग किये बिना,

देव- हो तो रहा ह माँ लेकिन बर्दास्त कर रहा हु, ताकि जो भी पहले आये उसके अंदर hi अपनी गर्मी को शांत कृ,

निहारिका- ज्यादा देर मत करना, कही ये गर्मी तुझे hi नुक्सान न पंहुचा दे,

देव- अभी ऐसा नहीं लग रहा और मुझे उम्मीद ह जल्दी hi दोनों महारानियो में से कोई निचे आएगी, और है मैं रेवती को यहाँ बुला रहा हु, ताकि वो नजदीक रहे,

निहारिका- लेकिन रखोगे कहा,

देव- मैंने इंतजाम किये हैं जल्दी hi हो जायेंगे, अब रेवती को दूर रखना ठीक नहीं ह कही वो वापस जाने की जिद न करने लगे,

निहारिका- जैसे तुझ ठीक लगे,

देव- लेकिन मुझे लगता ह रेवती का झुकाव कुछ ज्यादा hi हो रहा ह, और ये सिर्फ वासना नहीं ह,

निहारिका- प्रेम में धोखा मत देना,

देव- मेरी जिंदगी में प्रेम के लिए कोई जगह नहीं ह,

देव की बात से नहारिका की आँखों में अजीब सा दर्द उभर आया था,

इधर सात्विक अपने साथ 10 योद्धाओ के लेकर तीसरी शक्ति को ढूढ़ने चल दिया था, और उसके साथ जो आदमी थे वो जिस गाओं या राजय से निकलते वह तबाही मचा देते, जानवरो का शिकार तो करते hi थे, साथ में वह की लड़कियों को उठा लेते और उनके साथ बलात्कार करते और उन्हें मार देते, दक्षिण दिशा में दर का माहौल हो गया था, सब जगह बाते घूमने लगी की एक आदमी के साथ 10 जानवरो जैसे योद्धा हैं और वो तबाही मचा रहे हैं,

सात्विक को कुछ दिन तो अजीब लगा लेकिन जल्दी hi इस सब की आदत सी होने लगी, उसे फरक पड़ना बंद हो गया था,

इधर राजगुरु दो दिन तक अपने कमरे में बैठे कुछ पढ़ने में व्यस्त थे,

भवर सिंह से जब राजगुरु की मुलाकात नहीं हुई तो उसने राजगुरु के पास खबर भिजवाई मिलने के लिए, राजगुरु ने कुछ समय माँगा,

रात के खाने पैर भवर सिंह ने अक्षरा और रीवा को निहारिका के पास विनती करने के लिए भिजवाया की पूरा परिवार एक साथ खाना खायेगा, वो निहारिका को देखना चाहता था, जाब्स इ निहारिका आई थी भवर सिंह उसे देखने के लिए पागल हुआ जार है था, लेकिन वो चीता मिलने hi नहीं दे रहा था,

निहारिका ने आज न जाने क्यों भवर सिंह की विनती मान ली, और पूरा परिवार खाना खाने साथ बैठा था, वही चीता भी बैठा हुआ था निहारिका के बराबर में,

भवर सिंह- आज मुझे ख़ुशी ह आज पूरा परिवार एक साथ बैठ क्र खाना खा रहा ह,

आज सच में पहेली बार था जब पूरा परिवार साथ बैठा हुआ था क्योकि आजसेपहले निहारिका कभी साथ में बैठ क्र खाना नहीं कहती थी वो तो बस खाना परोसने में hi रहती थी, लेकिन आज वो किसी महारनी की तरह बैठी हुई थी,

काम्य- हम सब परिवार हैं, कुछ गलतिया परिवार में हो जाती हैं, लेकिन उन्हें भूल क्र आगे बढ़ना चाहिए, ह न देव बीटा,

देव- हम यहाँ हैं तो आगे बढ़ने के लिए hi हैं,

सूरज- पिता जी मैं सोच रहा था की इस अवसर पैर हम सभी कही घूमके आते हैं, काफी समय से सब महल में hi हैं,

भवर सिंह- अच्छा विचार ह लेकिन मैं राजधानी से दूर नहीं जा सकता अभी हालत ठीक नहीं हैं,

काम्य- तुम सब बच्चे घूम आओ, हम बड़े नहीं जायेंगे,

तीनो भाई खुश हो गए लेकिन देव को नहीं ले जाना था तो उसे कैसे रोका जाये, लेकिन वो शंश्य खुद देव ने हल क्र दी,

देव- मैं नहीं जाऊंगा, मैं बहुत दिन बाद आया हु तो यही आराम करूँगा,

भवर सिंह- तो ठीक ह बाकि बच्चे हो आओ,

लड़किया मन करने लगी वो बिना देव के नहीं जाना चाहती थी, लेकिन उनकी माओ ने उन्हें जबरदस्ती तैयार क्र दिया, इस सब में रीवा रुक गई, अब तीनो भाई और तीनो बहेनो के जाने का फैसला हो गया,

देव ने शंका भरी नजरो से तीनो भाइयो को देखा क्योकि उनके चेरे की ख़ुशी कुछ अलग hi तरह की थी,

तो फैसला हो गया की कुछ दिन बाद वो सब घूमने जायेंगे, इधर अमरावती और सौमित्र खुश थी की उनके पास अच्छा मौका होगा देव के नजदीक जाने का,

रात में अमरावती देव के पास आई और उससे इधर उधर की बाते की थोड़ा है बोल क्र उसने दोनों के बिच के माहौल को हल्का किया,

अगली सुबह देव अभेंद्र से मिला, अभेंद्र ने अपने साथ 4 लड़के और जोड़ लिए थे, देव ने अभेंद्र को एक काम दिया, और अभेंद्र ने एक घर देख लिया था,

अगले कुछ दिन ऐसे hi निकल गए, अमरावती और सौमित्र देव के साथ खुलती जा रही थी, उनकी बाते हसी मजाक से आगे बढ़ने लगी थी, अमरावती ने देव को नंगा देखा था तो वो देव के शरीर की तारीफ करती और बाते घुमा घुमा क्र उसके लुंड की भी तारीफ करती, सौमित्र अपने शरीर की तारीफ करके देव को रिझाती,

अक्षरा भी देव के साथ बहुत खुल गई थी, वो हमेशा देव से चिपकी रहती, रीवा भी देव के साथ रहना चाहती थी लेकिन वो हिम्मत नहीं कर पति बस अक्षरा के पीछे पीछे रहती ताकि देव के साथ रह सके,

देव ने अभेंद्र के हाथ एक सन्देश भेजा कस्तूरी को की वो रेवती को लेकर आ जाये, काफी समय हो गया था रेवती से मिले हुए, और रेवती का मन भटक सकता था,

राजगुरु को काफी समय हो गया था अपने कमरे में, वो किताबो में खोये हुए थे कितभी उन्होंने एक किताब को बंद किया और अपनी आँखों पैर हाथ रख लिया,

राजगुरु- मुझे महाराज से बात करनी होगी, हमे तैयार रहना होगा,

राजगुरु तुरंत वो किताब लेकर महल की तरफ चल दिए, और भवर सिंह के सामने पहुंच गए,

भवर सिंह- राजगुरु ऐसा क्या हुआ की आप इतने समय से हमे मिले तक नहीं,

राजगुरु- आज कल हो रहे बदलावों के बारे में खोज क्र रहा था,

भवर सिंह- कैसी खोज,

राजगुरु- महाराज एक शक्ति जागृत हो रही ह,

भवर सिंह- शक्ति कैसी शक्ति,

राजगुरु- एक राजा, सबसे शक्ति शैली राजा, और जो अमर ह,

अमर सुनकर भवर सिंह खड़ा हो गया,

भवर सिंह- ये क्या बोल रहे हो, कोई अमर ह, कही वो उन 7 अमर लोगो में से तो नहीं,

राजगुरु- नहीं महाराज, हमारे 7 चिरन्जीवियों का जीकर हमेशा होता आया ह लेकिन ये एक ऐसा योद्धा ह जिसके बारे में सब जगह से छुपाया गया था, ऐसा लगता ह जैसे इनके अस्तित्व को hi मिटने की कोशिश की गई थी, मेरे पास हमारे इतिहास से जुड़े हर राजा और हम इंसान से जुडी किताबे हैं लेकिन इस राजा के बारे में कभी किसी किताब में नहीं बताया गया, बस एक जगह इसका जीकर ह वो भी एक तांत्रिक की किताब में,

भवर सिंह- तांत्रिक की किताब में, कही कोई तांत्रिक केवल कहानी बनाने लिए कुछ लिख गया होगा,

राजगुरु- नहीं महाराज ये तांत्रिक बहुत बड़े गुरु हैं, ये तांत्रिक जरूर हैं लेकिन इन्होने कभी कोई गलत कार्य नहीं किया ह, ये कभी कुछ गलत नहीं लिखते,

भवर सिंह- क्या लिखा ह उस राजा के बारे में, क्या उसमे बताया गया ह की वो अमर कैसे बना,

राजगुरु- इस किताब में उसका नाम बताया गया ह राजा भैरव, और लिखा ह की अबसे हजारो वर्षो पहले ये पूरी धरती पैर राज करता था, बहुत शक्ति शैली राजा था, लेकिन इतनी शक्ति होने के बाद भी इसके अंदर मृत्यु का दर समां गया और इसने तपश्या शुरू क्र दी थी, और भगवान् को प्रसन्न कर लिया था, और अपने लिए अमरता का वरदान माँगा, और कहा जाता ह इसने तीन बार भगवान् को धरती पैर बुलाया था, ये संसार में कोई नहीं कर पाया था,

भवर सिंह- क्या भगवन ने इसे वरदान दिया,

राजगुरु- है वरदंत तो दिया लेकिन वो वरदान क्या ह उसका जीकर नहीं ह, इसमें बस लिखा ह की अमर बनने के बाद उस राजा ने ऐसा आतंक मचाया की पूरी धरती कंपनी लगी, लेकिन फिर अचानक वो रुक गया और कही गायब हो गया, फिर कभी किसी को नहीं मिला, उसे बहुत लोगो ने ढूंढा लेकिन किसी को पता नहीं चला, उसकी ताकत और अमरता की वजह से बहुत लोग उसे खोजते थे लेकिन किसी को वोन hi मिला,

भवर सिंह- तो अब उसका क्या हुआ ह

राजगुरु- इस किताब में लिखा ह की समय आने पैर वो वापस आएगा, और जब वो आएगा तो फिर से वही आतंक होगा, जो उसका दुश्मन होगा या दुश्मनी करेगा वो सबको समाप्त कर देगा, उससे शक्ति शैली अगर कुछ ह तो वो भगवान् की शक्ति ह, बाकि कोई उससे नहीं लड़ सकता, और जब वो इस संसार में वापस आएगा तो धरती कांपेगी आसमान से बिजलिया गिरेंगी, अलग अलग शक्तिया जगेंगी, नकारत्मक और सकारात्मक शकितया जगेंगी,

भवर सिंह- कही वो रअक्षर वही तो नहीं ह, लेकिन हम तो उसके शत्रु नहीं हैं वो यहाँ क्यों आया ह,

राजगुरु- नहीं महाराज मुझे नहीं लगता ये राक्षश वो राजा हैं, ये बस वो शक्ति ह जिनक ेजाग्ने का जीकर हो रहा ह, और वो सफ़ेद रौशनी जिसका जीकर भौमिक ने किया था, वो जरूर उस राजा से hi जुडी हुई ह,

भवर सिंह- राजगुरु उस राजा के बारे में और जानकरी निकालो, मुझे उसकी ताकत और अमरता चाहिए, उससे जुडी हर छोटी से छोटी जानकरी लेकर दो मुझे,

राजगुरु- मैं कोशिश करता हु महाराज लेकिन हमे ख्याल रखना ह उसे अपना शत्रु नहीं बनाना ह,

भवर सिंह- नहीं हम उसे अपना दोस्त बनाएंगे, मुझे लग रहा ह जैसे मैं जल्दी hi अमर होने वाला हु, वो समय आने वाला ह,

रात में देव अपने कमरे में बैठा हुआ था की अमरावती वह आ गई उसका रोज का समय था देव के पास आने का,

अमरावती- आज तुम कपडे पहने हुए बैठे हो क्या बात ह,

देव- क्यों कपडे पहनना गलत बात ह क्या, आपने भी तो पहने हुए हैं,

अमरावती- नहीं गलत बात नहीं ह तुम रोज बिना कपड़ो के रहते हो न इसलिए पूछा,

देव- आपको अच्छा नहीं लगा क्या,

अमरावती- बिना कपड़ो के और भी खूबसूरत लगते हो तुम, हहहहहहए

देव- अच्छा जी काश मैं भी ऐसा कह पता, लेकिन मैंने तो आपको बिना कपड़ो के देखा hi नहीं,

अमरावती- तुमने कभी कहा hi नहीं,

देव- क्या

अमरावती- मेरा मतलब ह की मैं ऐसे कैसे किसी और के कमरे में बिना कपड़ो की ा सकती हु,

देव- तो अपने कमरे में तो होती होंगी ह न

अमरावती- वो मेरा कमरा ह जैसे चाहे रह सकती हु जैसे तुम यहाँ रहते हो,

देव- अरे वह मतलब आपके कमरे में नंगे देखा जा सकता ह,

अमरावती- क्या कभी नंगी औरत नहीं देखि,

देव- आपके जैसे आकर किसी के पास नहीं होता,

अमरावती- आकर तो तुम्हारे जैसा भी किसी के पास नहीं ह,

देव- मेरा आकर

अमरावती- मेरा मतलब तुम्हरा शरीर ऐसा शरीर किसी के पास नहीं होता,

देव- मैंने तो अपना सब कुछ दिखा रखा ह,

अमरावती- तो मैंने कभी मन किया ह क्या,

देव- आपने कभी मुझे बुलाया भी तो नहीं,

अमरावती उठी और बहार को चल दी, देव को लगा की अमरावती नाराज हो गई ह,

देव- क्या हुआ नाराज हो गई हैं,

अमरावती ने पलट क्र देखा और शर्माती हुई बोली,

अमरावती- मैं यहाँ कुछ नहीं दिखाउंगी, अगर कुछ देखना ह तो मेरे कमरे में आना होगा,


देव के चेरे पैर मुस्कान आ गई, जिसे देख अमरावती भी हलकी सी मुस्काई, फिर अमरावती बड़ी अदा के साथ पलटी और गांड हिलती हुई चली गई,
 
Back
Top