Incest RAKSHASH - Page 2 - SexBaba
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Incest RAKSHASH

जो प्रॉब्लम सर्वर अब दिखा रहा ह वो कुछ दिन पहले भी दिखा रहा था, और उन दिनों में मेरे पोस्ट किये हुए संस और अपडेट सब डिलीट हो गए थे, इस बार भी वैसा hi हो सकता ह, दुबारा अपडेट देने में बड़ी प्रॉब्लम होती ह,
 
अपडेट-6



अगली प्रतियोगिता से पहले सभी भोजन करने में व्यस्त थे, दूसरे राजयो के राजा राजकुमार यहाँ की राजकुमारियों से बात चित करने में लगे हुए थे, जिसका मौका लगता वो अपना प्रभाव ज़माने में लगा हुआ था, वही प्रताप सिंह निहारिका के आस पास घूम रहा था, वैसे तो सभी का धयान निहारिका पैर hi था लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी, लेकिन प्रताप सिंह को फरक नहीं पद रहा था, उसे बस निहारिका चाहिए थी,

प्रताप सिंह- कैसी हैं महारानी

निहारिका- मैं ठीक हु महाराज, आपको हमारे राजय का स्वागत पसंद तो आया न

प्रताप सिंह- पसंद तो बहुत आया ह, मन करता ह अपने साथ ले जाऊ

निहारिका- जी मैं कुछ समझी नहीं

प्रताप सिंह- मेरा मतलब ह, मन करता ह यही रह जाऊ,

निहारिका- ये तो हमारी खुशकिस्मती ह, हो सकता ह जल्दी hi दोनों परिवारों का सम्बन्ध जुड़ जाये, तो फिर आप यहाँ कभी भी आ सकते हैं,

प्रताप सिंह- मैं भी यही सोच रहा हु, तभी का इंतजार क्र रहा हु,

प्रताप दोहरी बात कर रहा था, जबकि निहारिका सीधे सवभाव में बात कर रही थी, इन दोनों को बात करते हुए भवर सिंह ने देख लिया, भवर सिंह जलन और गुस्से में भड़क गया, और उसमे घी का काम किया काम्य ने,

काम्य- भैया ये निहारिका प्रताप सिंह के आस पास कुछ ज्यादा hi घूम रही ह, प्रताप सिंह को तो आप जानते hi हैं वो कैसा इंसान ह, अगर उसकी नजर आपकी पत्नी पैर पद गई तो वो कुछ भी कर जायेगा, और ये निहारिका उसके साथ hi है है क्र बात कर रही ह, कही कोई योजना तू नहीं बना रही ये,

भवर सिंह गुस्से में निहारिका की तरफ गया, भवर सिंह को उस तरफ आता देख नजाने प्रताप सिंह को क्या हुआ वो वह से हैट गया, भवर सिंह का गुस्सा और बढ़ गया, उसके दिमाग में शक पैदा हो गया, वो निहारिका के पास पंहुचा

भवर सिंह- निहारिका ये प्रताप सिंह तुम्हारे पास क्या कर रहा था,

निहारिका- कुछ नहीं महाराज, बस यहाँ की तारीफ क्र रहा था,

भवर सिंह- तुम्हे बड़ी ख़ुशी हो रही थी तारीफ सुनकर

निहारिका- हमारे महेमान खुश हैं इसमें हमे तो खुश होना चाहिए न,

भवर सिंह ज्यादा बात कर पता तब तक काम्य वह आ गई, और भवर सिंह को प्रतियोगिता की बात करने के लिए ले गई,

निहारिका असमंजस सी में कड़ी रह गई,

चारो राजकुमारों को अभी तक किसी से मिलने की अनुमति नहीं थी, वो अगली प्रतियोगिता के इन्तेजार में थे, तीनो भाइयो को तो पता था अगली प्रतियोगिता क्या ह, उन तीनो के चेरे पैर चिंता साफ़ दिख रही थी, लेकिन देव आराम से बैठा हुआ था, उसे दर hi नहीं था क्या होने वाला ह,

कुछ देर बाद राजगुरु ने सन्देश भेज दिया की चारो राजकुमार तैयार रहे प्रतियोगिता शुरू होने वाली ह,

राजगुरु ने फिर से सबका धयान अपनी तरफ किया, और अगली प्रतियोगिता के बारे में बताया जो थी युक्ति मतलब चालाकी.

तीनो राजकुमार एक एक करके मैदान में गए और अपनी प्रतियोगिता खेल क्र बहार आ गए, उसके बाद गया देव सबसे आखिर में, वो जैसे मैदान में पाहकः और अपने चारो तरफ देखा तो देव एक दम घबरा गया क्योकि उनके सामने 5 जानवर खड़े थे, एक था शेर दूसरी तरफ था मगरमछ तीसरी तरफ था घोडा और चौथी तरफ था हठी, और बिच में थी 1 बकरी, चारो जनवाओ के पीछे थे दरवाजे, राजकुमार को अपनी बूढी के बल पैर वह से बहार निकलना था,

मैदान ुचि ुचि दीवारों से घिरा हुआ था वह से बहार निकलना आसान नहीं था, उनके उप्पेर लोग बैठे हुए देख रहे थे,

राजगुरु ने सभी को प्रतियोगिता के बारे में बता दिया,

सूरज ज्वाला और अभिजीत को तो पता था वह क्या होना ह, इसलिए वो तीनो पहले से तैयारी करके वह गए थे इस हिसाब से बहार निकल गए, लेकिन देव को कोई जानकारी नहीं थी, वो कुछ देर खड़ा रहा, फिर वो घोड़े की तरफ गया लेकिन घोडा ने उसके करीब आते hi उछलना शुरू क्र दिया, देव समझगया ये जंगली घोडा ह सवारी नहीं करने देगा, और रस्ते से हटेगा भी नहीं, हठी को अपनी जगह से हटाना भी आसान नहीं था, मगरमछ और शेर के तो पास जाना भी नामुमकिन था,

देव बकरी के पास गया और बकरी को खोल लिया, सभी को समझ आ गया की क्या होने वाला ह क्योकि इससे पहले तीनो राजकुमारों ने भी यही किया था, सूरज ने बकरी को खोला और मगरमछ के पास ले गया, मगरमछ के सामने बकरी को कर दिया मगरमछ बकरी की तरफ बछड़ा तो सूरज ने मगरमछ को खोल दिया और खुद उसके पीछे से निकल गया,

वही ज्वाला ने खुद को बहादुर दिखने के लिए बकरी को शेर के सामने डाला और शेर को खोल दिया और खुद दरवाजे से निकल गया, अभिजीत ने भी बकरी को मगरमछ के सामने डाला और वह से निकल गया,

नियम ये था की बिना जवार को खोले दरवाजे से बहार नहीं निकल सकते थे,

जब देव ने बकरी को खोला तो सब समझ गए की देव भी यही करेगा क्योकि तर्क भी ये hi था, लेकिन देव ने बकरी को मगरमछ के पास नहीं किया उससे थोड़ा दूर रखा, मगराच बकरी की तरफ बढ़ा तो देव ने पीछे से जाकर मगरमछ को खोल दिया, मगरमछ तेजी से बकरी की तरफ गया लेकिन देव उससे पहले दौड़ क्र बकरी के पास पहुंच गया और बकरी जो दर क्र भागने लगी थी उसे पकड़ लिया और मगरमछ से दूर ले गया, मगरमछ ने देव के पीछा किया लेकिन देव उससे दूर भाग रहा था, देव को मौका मिल गया की बहार निकलने का वो जैसे hi बकरी को लेकर दरवाजे पैर पंहुचा तो उसने देखा मगरमछ घोड़े की तरफ जा रहा ह, और घोडा बंधा हुआ, वो अपनी जान बचने के लिए बस अपनी जगह पैर कूद सकता ह, और मगरमछ आजाद ह,

देव एक पल के लिए रुका और दरवाजा खोल क्र बकरी को बहार भगा दिया और खुद वापस आ गया, सभी लोग ाश्चरा से देखने लगे, लेकिन भौमिक जी के चेरे पैर एक मुस्कान थी, उन्होंने गर्व से इधर उधर देखा,

देव दौड़ता हुआ घोड़े के नजदीक पंहुचा, घोडा डरा हुआ था, वो किसी को नजदीन नहीं आने दे रहा था, देव घोड़े के नजदीक पाहकः घोडा दर क्र पीछे हुआ तभी वह मगरमछ भी आ गया, देव ने तुरंत घोड़े की राशि खोल दी, जिससे घोडा उछलता हुआ भगा, मगरमछ देव की तरफ भगा लेकिन देव जल्दी से घोड़े की रस्सी पकड़ क्र उसके साथ भागने लगा, मगरमछ जैसे hi मुद क्र उनके पीछे गया देव ने रस्सी छोड़ी और दरवाजे की तरफ भगा और दरवाजा खोल दिया, और खड़ा हो गया,

सभी लोगो को लगा देव अब बहार आ जायेगा लेकिन वो खड़ा रहा, दरवाजा खुला देख घोडा भी उसकी तरफ आ गया देव ने उसे भी बहार निकल दिया और खुद दरवाजे से बहार निकल क्र दरवाजा बंद क्र दिया,

सभी ने तालिया बजा क्र देव क बहादुरी का स्वागत किया,

प्रतियोगिता समाप्त हो चुकी थी, राजगुरु फिर से अपनी जगह पहुंच गए,

राज गुरु – इस प्रतियोगिता में भी चारो राजकुमार सफल रहे, लेकिन तीनो राजकुमारों ने जो अपनी जान बचन के लिए किया उससे दो जाने चली गई,

तीनो राजकुमार चौंक गए, 2 जाने कैसे,

राजगुरु- उन्होंने बकरी का सहारा लेकर मगर को खोल दिया, जो बकरी के बाद सीधा घोड़े के पास जायेगा और कुछ देर घोडा खुद को बचा सकता ह लेकिन जल्दी hi मगर का शिकार हो जायेगा, लेकिन देवदूत ने अपनी बूढी और बहादुरी से अपने साथ साथ बाकि दोनों जाने भी बचा ली, उस बकरी की भी जो केवल वह राजकुमार की रक्षा के लिए बंधी थी और उस घोड़े की भी,

यही एक सच्चे योद्धा और राजा की पहचान होती ह जो अपनी जान से पहले बेजुबानो और परजा की सोचे,

प्रताप सिंह बिच में बोल पड़ा,

प्रताप सिंह- राजगुरु वो मगर खुला हुआ ह, वो उस हठी और शेर को भी तो खा सकता ह,

राजगुरु- इस हिसाब से तो तीनो राजकुमारों ने 4 जाने ले ली, लेकिन ऐसा नहीं ह, शायद उन तीनो राजकुअंरो ने ऐसा न सोचा हो की कोण जियेगा कोण मरेगा लेकिन देवदूत ने ऐसा सोचा, क्योकि मगर हठी से नहीं लड़ सकता, हठी उसे मर देगा और शेर से तो खुद हठी भी नहीं लड़ता, मगर शेर के पास जायेगा भी नहीं क्योकि ये पानी नहीं ह, पानी के अंदर मगर उन दोनों पैर हुम्ला कर सकता था लेकिन खुले मैदान में नहीं,

राजगुरु की बात पैर तालियों की गड़गड़ाहट होने लगी, खुद भवर सिंह ताली बजने से नहीं रह सका, लेकिन अमरावती सौमित्र काम्य सूरज ज्वाला और अभिजीत गुस्से में पागल हुए जा रहे थे,

राजगुरु खुद हैरत में थे, ये क्या हो गया, ये कैसे हो सकता ह, भौमिक जी राजगुरु के पास आये,

भौमिक जी- क्या हुआ भैया आप चिंतित हैं,

राजगुरु- ये सही नहीं हो रहा ह, इस लड़के को बचपन से कुछ नहीं सिखाया गया, बस विद्या दी गई ह बाकि कुछ नहीं फिर भी ये सबसे आगे ह,

भौमिक जी- आप शायद भूल रहे हैं विद्या से ज्यादा शक्तिशाली कुछ नहीं होता, हर मुश्किल का जवाब होता ह विद्या में,

राजगुरु- अगर ये जीत गया तो अनर्थ हो जायेगा,

भौमिक जी- ऐसा क्यों भैया आप कुछ छुपा रहे हैं मुझसे, आप इस लड़के से इतना डरते क्यों हैं, इतना मासूम ह ये लड़का,

राजगुरु- उधर देखो, (राजगुरु ने अमरावती सौमित्र और काम्य की तरफ इशारा किया,) वो तीनो अपने अपने बेटे को युवराज बनाना चाह्हती हैं, इसके लिए उन्होंने इस प्रतियोगिता के सरे चरण पहले hi पता कर लिए थे, फिर भी उनके बेटे हार रहे हैं, वो तीनो साजिसों की महारानी हैं, अगर उनके बेटे युवराज नहीं बने तो वो सब तबाह कर सकती हैं,

भौमिक जी- उनके दर से किसी गलत इंसान को युवराज बना देंगे आप

राजगुरु- तुम्हे क्या लगता ह भवर सिंह अच्छा इंसान ह, नहीं वो बहुत बुरा ह लेकिन हमारा धरम राजय को बचाना ह, मैं किसी तरह से इस राजय को बचता आ रहा हु, लेकिन अब साजिशे बहुत बढ़ गई हैं, और जैसा मैं देख रहा हु एक विध्वंश आ रहा ह इस राजय की तरफ, मुझे दर ह कही ये वही समय न हो, अगर देवदूत युवराज बना तो ये लोग उसे मरवा देंगी, और साथ में निहारिका को भी, जो होता दिख रहा ह,

भौमिक जी- इसीलिए उन दोनों की कुंडली में कुछ नहीं दीखता क्योकि उनकी जीवन रेखा hi नहीं ह,

राजगुरु- लेकिन मैंने उनकी मृत्यु नहीं देखि, उनकी कुंडली में उनकी मृत्यु का कोई योग नहीं बनता, ऐसा लगता ह जैसे उनकी कुंडली कोई और hi अपने हिसाब से लिख रहा ह,

भौमिक जी- भैया इस संसार में कितना भी ज्ञान आ जाये लेकिन कोई भगवान् के फैसलों को नहीं समझ सकता, शायद ये hi नियति हो, जो हो रहा ह होने दीजिये, बिच में बढ़ा मत बनिए,

राजगुरु- मैं नहीं चाहता इस लड़के को कुछ हो, लेकिन इससे इस राजय का विध्वंश जुड़ा हुआ ह,

तभी वह भवर सिंह आ गए, राजगुरु ने भौमिक जी को वह से भेज दिया,

भवर सिंह- राजगुरु देवदूत ने ये सब कैसे क्र लिया, हमारी उम्मीद के परे ये कैसे हो गया, क्या वो युवराज बन जायेगा, क्या वही होने जा रहा ह जिसका दर था,

राजगुरु- मुझे नहीं पता महाराज, लेकिन कुछ ठीक नहीं लग रहा, वैसे अभी दो प्रतियोगिता बची हुई हैं, अगर बाकि राजकुमारों में से कोई उन दोनों में जीत जाता ह, और देवदूत हर जाता ह तो ऐसा कुछ नहीं होगा,

भवर सिंह- वो हारना चाहिए राजगुरु,

रात में महल के कमरों में बहुत से लोग अलग अलग जगह एक hi बात पैर चर्चा कर रहे थे, की देव ने ये सब कैसे किया,

अमरावती- सूरज तू कैसे हर सकता ह,

सूरज- माँ मैं तो वही कर रहा हु जिसकी तैयारी की थी लेकिन वो हरामखोर देवदूत न जाने कैसे कुछ नै तरकीब लगा रहा ह,

अमरावती- वो युवराज नहीं बनना चाहिए, अगर वो युवराज बना तो सब तबाह हो जायेगा,

सूरज- तबाह हो जायेगा, कैसे तबाह हो जायेगा.

अमरावती- तू ये सब छोड़ बस किसी तरह उसे हरा

सूरज- आप चिंता मत कीजिये, मैंने सब इंतजाम किये हुए हैं,

वही काम्य अपने कमरे में थी अभिजीत के साथ

काम्य- मैं इस देवदूत को बर्बाद कर दूंगी, इसका ऐसा हशर करुँगी ये अपनी मोत के लिए तड़पेगा,

अभिजीत- माँ वो ये सब कैसे कर गया, मुझे यकीन नहीं हो रहा

काम्य- चुप हो जा तू नालायक, तू हमेषा अयाशी में hi लगा रहे, वो सूरज भी तुझसे जीत गया, कभी ठीक से अपने गुरु की बातो पैर धयान दिया होता तो आज ये हार न देखनी पड़ती,

अभिजीत चुप हो गया, काम्य गुस्से में इधर उधर घूमने लगी,

सौमित्र अपने कमरे में- अब वक़्त आ गया ह,

ज्वाला- कैसा वक़्त माँ,

सौमित्र- सब पता चल जायेगा, बहुत समय से इंतजार था मुझे इस समय का,

ज्वाला- क्या होने वाला ह माँ

सौमित्र- विनाश

इधर चारो राजकुमारिया एक hi कमरे में बैठी हुई थी,

अक्षरा- आज तो देव ने कमल hi कर दिया, दोनों प्रतियोगिता में विजेता रहा, किसी को उम्मीद नहीं थी वो ऐसा कर पायेगा,

रीवा- सही बोल रही ह, मैंने कभी सोचा भी नहीं था देव के पास इतनी बूढी ह, बिलकुल नासमझ सा लगता ह, लेकिन देखो आज कैसा कारनामा कर दिखाया,

अमिता- सच में यार आज तो कमल hi क्र दिया उसने, सूरज को भी हरा दिया,

सोमिया- मुझे कुछ अच्छा सा महसूस नहीं हो रहा दिल बहुत घबरा रहा ह, जिस लड़के से मेरी शादी की बात हो रही ह मुझे उसकी हरकते अच्छी नहीं लग रही,

अक्षरा- ये सभी राजा राजकुमार एक जैसे hi होते हैं, सभी कितनी गन्दी तरीके से देख रहे थे हमे,

रीवा- और वो प्रताप सिंह, मुझे तो उससे दर लग रहा ह,

अमिता- मुझे मर्दो की नजरे अच्छी लगती थी लेकिन आज ऐसा लग रहा था जैसे मैं एक नुमाइश की चीज हु, मुझे पता ह मुझे किसके गले में वरमाला डालनी ह फिर भी मैं लोगो के लिए तमशा सा बानी हुई थी,

रीवा- आज जो भी हो रहा था उसमे एक बात तो समझ आई गई की हम लड़किया खुद को कितना भी ताकतवर दिखा दे लेकिन हम बस इन मर्दो के लिए उन्हें खुश करने और राजनीती करने का सामान हैं, आज किसी की नजरो में छुपी अच्छे का अहसास हो रहा ह, साफ़ नजरे कितना सकूं दे सकती हैं,

सोमिया - किसकी बात कर ह्री हो तुम

अक्षरा- सिर्फ एक hi ह जिसकी नजरो में हमेशा सच्चाई और सफाई देखि ह, वो ह देव, क्यों रीवा सही कहा न

रीवा- है सही कहा, सूरज ज्वाला और अभिजीत की नजरो में भी मैंने खुद के लिए गन्दगी हवस देखि ह, लेकिन देव की नजरो में कभी किसी के लिए कुछ गलत नहीं देखा,

चारो बहेनो ने जब समाज का असली चेरा देखा तो उन्हें देव की अच्छे का अनुभव हुआ, दुनिया में हर औरत ताकतवर की तरफ आकर्षित होती ह, लेकिन जब उसे जीवन साथी चुनना होता ह तो वो हमेषा अच्छा और सच्चा इंसान hi ढूंढ़ती ह, और अब वो अपने पति के रूप में देव जैसी अच्छे वाला इंसान ढूंढ रही थी, लेकिन देव तो अकेला था इस दुनिया में और वो भी उनका भाई था,

इधर देव निहारिका के पास बैठा हुआ था,

निहारिका- आज तूने मेरा सर गर्व से ुचा कर दिया बीटा,

देव- मैंने कुछ नहीं किया माँ, मैं तो वही कर रहा था जो आपसे सीखा ह, ये सब ज्ञान मुझे आपसे hi तो मिला ह, आचार्य जी के बाद आपने hi मुझे सब सिखाया ह,

निहारिका- लेकिन तेरे जितने से कोई खुश नहीं ह, अगर तू बाकि दो प्रतियोगिता भी जीत गया तो

देव- तो क्या मैं खुद युवराज बनने से मन कर दूंगा, मैं तो बस आपके सम्मान के लिए ये प्रतियोगिता खेल रहा हु, आज मैंने सबकी नजरो में सम्मान देखा माँ, बस वही सम्मान चाहिए मुझे, इससे ज्यादा मई कुछ नहीं छठा,

निहारिका ने देव को गले से लगा लिया,

अगली सुबह सभी वैसे hi मैदान में पहुंच गए, राजगुरु जी अपनी जगह खड़े थे, सभी का स्वागत किया गया, प्रताप सिंह वह आते hi निहारिका को ढूंढ़ने लगा, निहारिका सबसे पीछे बैठी थी, प्रताप सिंह की नजर बार बार निहारिका पैर जा रही थी, काम्य ने भवर सिंह का धयान प्रताप सिंह पैर करवाया,

भवर सिंह का माथा फिर से चढ़ गया था, वो खुद निहारिका के पास नहीं जाता था लेकिन कोई और उसे देख ले ये उसे बर्दास्त नहीं था,

राजगुरु ने प्रतियोगिता की शुरुआत करवाई, ये प्रतियोगिता थी शहन्शक्ति की, इसमें चारो राजकुमारों को एक hi जगह पैर खड़े रहना था, जमीन में चार लकड़ी की बल्लिया गाड़ी हुई थी, जिन्हे पकड़ क्र खड़ा होना था, और जब तक कोई एक न रह जाये तब तक खड़े रहना था, तब तक न भोजन मिलेगा न hi पानी, वो कितने समय तक खड़े रह सकते थे, और वह आने वाली समश्याओ को कब तक झेल सकते थे, और किसी को बैठने की भी अनुमति नहीं थी,

चारो राजकुमार वह आ गए और अपनी अपनी जगह पैर खड़े हो गए, चारो नंगे पेअर थे, निचे राइट थी, कुछ देर तो सब आराम से खड़े रहे लेकिन एक जगह पैर खड़े रहना आसान काम नहीं था, जैसे जैसे गर्मी बढ़ने लगी, पानी की प्यास भी बढ़ने लगी, निचे से राइट गरम होने लगी थी, और उसमे जो चीटिया घूम रही थी वो राजकुमारों के शरीर पैर चढ़ने लगी थी, पैरो में दर्द होने लगा था, बाकि सब लोग आराम से बैठे थे भोजन कर रहे थे, वही प्रताप सिंह निहारिका के आस पास hi घूम रहा था, जिससे भवर सिंह गुस्से में आग बबूला हो रहा था,

काम्य भवर सिंह के आस पास hi घूम रही थी, वो बार बार भवर सिंह को प्रताप सिंह और निहारिका के बारे में भड़का रही थी,

काम्य- भैया ये औरत आपकी इज्जत पैर दाग लगवायेगी,

भवर सिंह- काम्य इसे यहाँ से ले जाओ,

काम्य- यहाँ से ले जाने से इसका क्या होगा, ये इस राजय में hi रहने लायक नहीं ह,

भवर सिंह- फ़िलहाल इसे ले जाओ, और मुझे लगता ह इस प्रताप सिंह के मुझे अपनी बेटी की शादी नहीं करनी छाइये,

काम्य- भैया प्रताप सिंह से दुश्मनी हमारे लिए ठीक नहीं ह, इस निहारिका की वजह से हम उससे दुश्मनी क्यों ले,

भवर सिंह चुप हो गया,

काम्य- मुझे कुछ साजिश का दर लग रहा ह

भवर सिंह – कैसी साजिश

काम्य- इधर ये निहारिका प्रताप सिंह से याराना बढ़ा रही ह, और उधर इसका बीटा देवदूत जिसे कोई ज्ञान नहीं था, कोई युद्ध कला नहीं सिखाई गई वो कितने आराम से प्रतियोगिता जीत रहा ह, कही ये सब इस निहारिका ने प्रताप सिंह के साथ मिलकर हमारे आदमियों को धन का लालच देकर प्रतियोगिता के बारे उस देवदूत को पहले से hi सब तो नहीं बता दिया, इसलिए वो जीत रहा ह,

भवर सिंह के दिमाग में चिंता उभरने लगे,

काम्य इतना बोल क्र वह से निकल गई, बहवर सिंह का धयान देव पैर गया जो बड़ी hi शांति से मैदान में खड़ा था, जबकि बाकि तीनो राजकुमारों को बड़ी तकलीफ हो रही थी, निचे गरम राइट पेअर जला रही थी, उप्पेर से कड़ी धुप शरीर जला रही थी, शरीर पैर चीटिया रेंग रही थी, भूक और प्यास से तकलीफ बढ़ रही थी, और शाम होते होते सबसे पहले सूरज ने हार मान ली उसके बाद ज्वाला ने फिर अभिजीत ने, और देव आखिर तक मैदान में खड़ा रहा,

राजगुरु ने देव को विजेता घोषित किया, पूरा राजय अचंभित था, जिसे सबसे कमजोर समझा जा रहा था उसने तीनो राजकुमारों को हरा दिया था, पूरा राजय ख़ुशी से तालिया बजा रहा था, जबकि अमरावती सोमिता और काम्य गुस्से में मरी जा रही थी, बावर सिंह भी चिंतित थे,

रात में चारो राजकुमारों का इलाज किया जा रहा था, देव की हालत भी काफी ख़राब हो गई थी, लेकिन वो सहन क्र रहा था और यही इस प्रतियोगिता का नियम था कोण ज्यादा सहन कर सकता ह,

रात में अमरावती सौमित्र और काम्य के कमरे में भूचाल आया हुआ था, वो चीजे इधर उधर फेंक रही थी,

अमरावती के कमरे में

सूरज- माँ शांत हो जाइये, हमारे पास मौका ह, कल शक्ति प्रदर्शन होगा, और आप जानती ह मुझसे ताकतवर यहाँ कोई नहीं ह,

अमरावती- तू नहीं समझता बेटे, वो देवदूत युवराज नहीं बनना चाहिए,

सूरज- माँ वो युवराज नहीं बनेगा, लेकिन आप इतना परेशां क्यों हो उससे, वो हमारा क्या बिगड़ लेगा,

अमरावती- मैं पिछले 19 सालो से इसी दर में हु की क्या होगा,

सूरज- मैं समझा नहीं माँ

अमरावती- जब जब इस इस महल में किसी लड़के ने जनम लिया ह, मैंने अपने एक प्रोहित से सबकी जनम कुंडली दिखाई ह, और जब ज्वाला पैदा हुआ था तो उसके भाग्य में न युवराज पद ह न hi राजा बनना लिखा था, फिर ये अभिजीत पैदा हुआ तो उसकी कुंडली में भी वही था, लेकिन जब ये देवदूत पैदा हुआ तो प्रोहित जी भी घबरा गए थे, उन्होंने कहा था इसका जनम बहुत hi विशेष कार्य के लिए हुआ ह, इसके भाग्य में राजा बनना लिखा ह, जब ये राजा बनेगा तो इससे बड़ा कोई राजा नहीं हो सकेगा,

सूरज- हम इसे राजा बनने hi नहीं देंगे,

अमरावती- जब यहाँ के राजगुरु ने इसकी कुंडली देखि तो उन्होंने कहा था ये राजा भवर सिंह के लिए जीवन में विध्वंश लाएगा, उनके हिसाब से ये कभी राजा नहीं बनेगा,

सूरज- दो भाग्य कैसे हो सकते हैं,

अमरावती- इन दोनों की बातो में एक खास बात थी,

सूरज- वो क्या

अमरावती- जो भी होगा वो इसकी 18 से 19 साल की उम्र के बिच में होगा,

सूरज- और ये उसी उम्र में ह इस वक़्त,

अमरवती- है

सूरज- आप चिंता मत करो, ये शादी होने दो मैं इसे रस्ते से हटा दूंगा, मैंने सब योजना बनाई हुई हैं,

वही दूसरे कमरे में सौमित्र और ज्वाला भी इसी मुद्दे पैर बात क्र रहे थे,

ज्वाला- मैं इस देवदूत को जान से मार दूंगा,

सौमित्र- इसे मरना hi होगा, वर्ण इसके लिए जो भविष्यवाणी हुई थी वो सच हो जाएगी,

ज्वाला- कोनसी भविष्यवाणी माँ

सौमित्र- मेरे पिता के राजगुरु ने देव के लिए भयव्या वाणी की थी की ये बहुत बड़ा योद्धा बनेगा, इससे जीत पाना नामुमकिन होगा, इसलिए मैंने महाराज को भेला फुसला क्र इसे कभी युद्ध कला hi सिखने नहीं दी, लेकिन ये बिना कुछ सीखे hi प्रतियोगिता जीत रहा ह, उन्होंने कहा था अगर इसे 18 से 19 साल के बिच तक रोक दिया तो ठीक वर्ण ये नहीं रुकेगा,

और हमारे राजगुरु बोलते हैं ह ये महाराज के लिए ठीक नहीं ह,

ज्वाला- मैं इसे कल hi मार दूंगा, इसका अंत निकट आ चुक्का ह, मैं इसे कुछ बनने hi नहीं दूंगा,

इधर काम्य भी इसी उधेड़ बन में लगी हुई थी,

काम्य- अभिजीत अगर तुझे राजा बनना ह तो सबसे पहले इस देव को रस्ते से हटाना होगा,

अभिजीत- माँ उसका दर नहीं ह वो तो डरपोक ह, सूरज और ज्वाला हमारे रस्ते में आएंगे, देव प्रतियोगिता जित क्र भी कुछ नहीं कर सकेगा,

काम्य- तू नहीं जनता बीटा, ये लड़का जैसा दीखता ह वैसा ह नहीं, इसके अंदर कुछ अलग hi ह, हमारे पास एक hi मौका होगा इसे रस्ते से हटाने का, अगर वो मौका हाथ से निकल गया तो सब बर्बाद हो जायेगा

अभिजीत- कैसा मौका

काम्य- जब ये पैदा हुआ था तो मैंने इसकी कुंडली एक तांत्रिक से दिखवाई थी, उसने बताया था की अगर लड़का जिन्दा रहा तो सब कुछ तहस नहस कर देगा, 18 साल से 19 साल के बिच में अगर इसे मार दिया तो ठीक वर्ण इसे कोई नहीं मार पायेगा, इसकी मृत्यु सिर्फ 18 से 19 साल के बिच में हो सकती ह, न उससे पहले और न उसके बाद,

अभिजीत- ऐसा कैसे हो सकता ह, एक इंसान hi तो ह जब चाहो मर दो,

काम्य- मैं पिछले 18 सालो से इसे मरने की कोशिश कर रही हु, इसके खाने में लगातार थोड़ा थोड़ा जहर मिलती आ रही हु ताकि ये बीमार होकर मर जाये और किसी को शक न हो, ये आज तक बीमार भी नहीं पड़ा, मैंने बहुत बार इसे मरने की कोशिश की ह लेकिन मार नहीं पाई, लेकिन अब जो हालत चल रहे हैं उस हिसाब से ऐसा लग रहा ह वो समय आ गया ह, यही समय ह जब इसे मरना सही होगा, वर्ण ये हम सबको तबाह कर देगा,

ऐसी hi चर्चा भवर सिंह और राजगुरु के बिच भी चल रही थी,

भवर सिंह- क्या लगता ह राज गुरु

राजगुरु- महाराज मुझे लगता ह समय आ गया ह,

भवर सिंह- लेकिन मैं ये सब करूँगा कैसे


राजगुरु- कुछ तो करना hi होगा,
 
अपडेट-7






सुबह सुबह निहारिका ने देव को उठाया और उसे तैयार क्र रही थी,

देव- माँ आज शक्ति का परीक्षण ह, और तीनो भाई मुझसे बहुत ज्यादा शक्तिशाली हैं,

निहारिका- तो कुआ हुआ, तूने अपने लिए वो सम्मान सबकी नजरो में कमा लिया ह, वैसे भी तुझे युवराज नहीं बनना ह,

देव- माँ अगर मैं गलती से जीत गया तो क्या होगा,

निहारिका- वो तुझे युवराज नहीं बनाएंगे, लेकिन अगर तू जीत गया तो वो मजबूर हो जायेंगे युवराज बनाना के लिए, और फैसला तेरे हाथ में होगा तू युवराज बनना चाहता ह या नहीं,

देव- मैं मन कर दूंगा, मुझे युवराज नहीं बनना

निहारिका- वो खुद चाहते हैं तू मन कर दे, वो तुझे युवराज पद छोड़ने के बदले कुछ न कुछ लालच देंगे, अगर ऐसा होता ह तो तू एक चीज मांग लेना,

देव- क्या माँ

निहारिका- अपने मां को,

निहारिका की बात पैर देव चौंक गया उसकी समझ में नहीं आया, उसकी माँ उसे क्या कहना चाहती ह, देव पूछने hi वाला था की रीवा वह आ गई, उसका चेरा बहुत उदास था, आँखे सूजी हुई थी जैसे पूरी रात सोइ hi न हो, वो सीधे निहारिका के गले से लग गई,

निहारिका और देव दोनों चौंक गए, क्योकि रीवा कभी ऐसा नहीं करती थी, निहारिका ने रीवा के सर पैर हाथ फिराया, निहारिका समझ गई की आज उस मन बहुत परेशां ह इसीलिए वो माँ की बहो में आई ह,

निहारिका- क्या हुआ बेटी, बहुत परेशां लग रही ह,

रीवा- माँ यहाँ से कही चलो, मुझे यहाँ नहीं रहना

निहारिका का दिल ख़ुशी से भर आया, आज पहेली बार रीवा ने अपनी माँ पैर कुछ विश्वास दिखाया था,

निहारिका- क्या हुआ किसी ने कुछ कहा ह क्या,

रीवा- माँ यहाँ कोई अपना नहीं ह

निहारिका- बेटी राजमहलो में कोई अपना नहीं होता सब मतलबी होते हैं, बस राजपथ के चक्कर में होते हैं, पैर तुझे किसने क्या कहा

रीवा- माँ मुझे उस प्रताप सिंह से शादी नहीं करनी, वो इंसान नहीं जानवर ह, औरतो की इज्जत बिलकुल नहीं करता, मैंने उसके बारे में सुना ह वो औरतो को अपना गुलाम बना क्र रखता ह, जानवरो की तरह बांध क्र रखता ह,

निहारिका- वो अपनी पत्नियों के साथ ऐसा नहीं करेगा, और तू भवर सिंह की बेटी ह तेरे बारे में ऐसा सोच भी नहीं सकता, क्या तुझे उसकी दूसरी रानियों की वजह से तकलीफ तो नहीं हो रही,

रीवा- माँ राजा की कई रनिया होती ह मैं ये बात समझती हु, लेकिन केवल रानियों की hi तो इज्जत नहीं होती, संसार में हर औरत सम्मान की हक्क्दर ह, अगर वो संसार में औरतो का सम्मान नहीं करता तो भविष्य में मेरा या आपका सम्मान कैसे करेगा, और मैंने उसकी नजरे देखि हैं आपके लिए, वो आपको बहुत गंदे तरीके से देखता ह,

निहारिका- मैं जानती हु बेटी, यहाँ जीतनेय भी लोग आये हैं उन सबकी नजर मुझ पैर रहती ह लेकिन मैं मजबूर हु, राजय में इतना बड़ा उत्सव ह उस वजह से मैं यहाँ सबके सामने है क्र बात करती हु,

रीवा- आपने कैसे जिया ये जीवन, पिता जी आपको न तो प्यार करते हैं और न hi सम्मान देते हैं फिर भी आप यहाँ ह क्यों, मैं तो अभी से तकलीफ महसूस क्र रही हु,

बिना सम्मान कैसे जिया जाता ह, मुझसे नहीं होगा,

देव- आप मन कर दो,

रीवा और निहारिका ने देव को देखा,

रीवा- तुझे नहीं पता, ऐसे कैसे मन कर सकती हु, पिता जी नाराज हो जायेंगे,

देव- उनकी नाराजगी की वजह से हमारी माँ ने अपनी साडी जिंदगी उदासी और दुःख में काट दी, अब आप भी वही करने जा रही हैं,

रीवा- तुझे कुछ नहीं पता, राजमहलों में ऐसा hi होता ह,

देव- ऐसा केवल अच्छे लोगो के साथ होता ह, ये सब महारानी अमरावती और सौमित्र के साथ क्यों नहीं हो रहा, और काम्य बुआ वो तो कभी अपने राजय में भी नहीं गई, उन्हें तो बहुत सम्मान मिलता ह, ये सब बस हमारे hi साथ क्यों ह,

रीवा- उसका कारन भी तू ह

निहारिका गुस्से में- रीवा क्या बकवास ह ये,

रीवा- बकवास क्या ह माँ, जब से ये पैदा हुआ ह तभी से तो पिता जी ने आपके पास आना बंद किया था, वर्ण उन्होंने सबसे बगावत करके आपसे शादी की थी, वो आपको पाने के लिए इतने पागल थे की उन्होंने राजगुरु की भी नहीं सुनी, फिर एक दम से क्या हुआ की उन्होंने आपको देखना तक बंद क्र दिया, पुरे संसार में आज भी आपसे सूंदर कोई नहीं ह, फिर क्यों हुआ ये सब, इसके पैदा होने के बाद hi हुआ ह न

रीवा की बात सुनकर देव का मुँह खुला रह गया,

निहारिका- तुम्हारे पिता क्या हैं ये तुम नहीं जानती, वो क्या छाते हैं और क्या करते हैं तुम सोच भी नहीं सकती,

रीवा- वो इसके पैदा होने के बाद hi तो ऐसे हुए हैं

निहारिका- वो कब कैसे थे मैं जानती हु, तू कुछ नहीं जानती,

रीवा- मुझे नहीं पता मैं क्या बोले जा रही हु, मेरा दम घुट रहा ह, मैं अपने होश में नहीं हु,

देव- आप क्या छाती हो,

रीवा- मैं उस प्रताप सिंह से शादी करना नहीं चाहती,

देव- ऐसा hi होगा, अगर मैं आज जीत गया तो युवराज पद को ठुकरा दूंगा और उसके बदले महाराज से आपकी आजादी मांग लूंगा,

देव की बात से रीवा और निहारिका दोनों स्तब्ध रह गए,

रीवा को यकीन hi नहीं हुआ की देव उसके लिए इतना बड़ा त्याग करने के लिए तैयार ह, वो देव जिसे उसने कभी प्यार देना तो दूर ठीक से बात तक नहीं की, हमेशा उसे कोसा ह, बुरा भला hi कहा ह, उसे अपमानित किया ह, वो भाई उसके लिए,

वही निहारिका को घबराहट होने लगी, पहला तो ये की वो जानती थी भवर सिंह इस बात के लिए कभी नहीं मानेगा दूसरा निहारिका कुछ और hi मंगवाना चाहती थी,

लेकिन जब निहारिका ने देखा की रीवा ख़ुशी से रो पड़ी ह और उसने देव को गले से लगा लिया तो वो वह चुप रह गई, आज पहेली बार रीवा ने देव को अपने गले से लगाया था, देव की आँखों से भी आंसू बहे जा रहे थे, लेकिन एक और अहसास उसके अंदर उभर आया था वो था कामुकता का, जब रीवा के शैतान देव की छाती पैर लगे तो देव के अंदर कामुकता उभर आई, ये पहेली बार था जब रीवा देव के नजदीक आई थी, दोनों के बिच ये बहुत hi अजीब पल था, और भौमिक जी का शाप देव पैर पूरा प्रभाव दाल रहा था, उसके दिमाग में कामुकता हो या न हो लेकिन उसका शरीर के अंदर कामुकता के भाव तुरंत आने लगे,

देव ने जल्दी से रीवा को अलग किया

देव- आप हिम्मत रखना, मैं सब ठीक क्र दूंगा,

यहाँ ये तीनो अपने दुःख को एक दूसरे के सामने रख रहे थे वही पूरा राज महल देव के खिलाफ साजिश कर रहा था, हर एक कमरे में बस देव के खिलाफ hi साजिश चल रही थी, कोई उसे रोकना चाहता था तो कोई मरना चाहता था, सभी ने कुछ न कुछ करने की तैयारी की हुई थी,

वही भौमिक जी अपने घर पैर थे, वो देव के प्रदर्शन से बहुत खुश थे, वो एक खुली जगह पैर धयान में बैठे हुए थे, वो भगवान् में धयान लगाने के लिए वह बैठे हुए थे लेकिन उनका धयान बस देव पैर hi जा रहा था, अचानक उन्हें एक ख्याल आया,

भौमिक जी खुद से hi- ये मैंने पहले क्यों नहीं सोचा, मैं उसकी कुंडली में खोज रहा था, मैं उसके उप्पेर धयान लगा क्र भी तो उसके बारे में जान सकता हु, ये विद्या भी तो मैंने सीखी थी,

भौमिक जी ने फिर से आँखे बंद की और देव पैर पूरा धयान लगाने लगे, उन्हें धयान लगाने से किसी के भविष्य की झलिया दिख जाती थी, और जो झलकियां भौमिक जी को दिखी उससे वो विचलित हो गए और तुरंत आँखे खोल दी, उनके चेरे पैर दर और घबराहट साफ़ दिख रही थी, वो तुरंत खड़े हुए और महल की तरफ तेजी से चल दिए, वो इतनी जल्दी में थे की आज भोजन करना तक भूल गए थे,

इधर देव अपने कमरे से निकल क्र उधर जा रहा था जहा प्रतियोगिता के लिए उसे तैयार किया जाने वाला था, वो जैसे hi महल से बहार निकलने वाला था तो उसने देखा कस्तूरी महल के अंदर की तरफ जा रही ह, कस्तूरी को देख क्र उसका दिल डगमगा गया, उसका मन विचलित हो गया, वो कस्तूरी से बात करना चाहता था, देव तुरंत कस्तूरी के पीछे चल दिया, कस्तूरी बड़ी तेजी से जा रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे वो चुप क्र जा रही ह, देव भी उसके पीछे तेजी से पंहुचा, कस्तूरी के कमरे में घुस गई जिसे देख देव चौंक गया, क्योकि ये कमरा अभिजीत का था, देव को कुछ समझ नहीं आया, वो अपनी जगह खड़ा रह गया,

फिर उसने आगे जाने का फैसला किया, देव आगे गया कमल की बात थी आज अभिजीत के कमरे के बहार कोई पहरेदार नहीं था, देव ने धीरे से अंदर झाका और जो उसने देखा उसे देख क्र देव के पैरो के निचे से जमीन निकल गई, कस्तूरी अभिजीत की बहो में थी, अभिजीत के हाथ कस्तूरी की बदन पैर घूम रहे थे, देव को अपनी आँखों पैर विश्वास नहीं हो रहा था, जिस लड़की से वो इतना प्यार करता था वो किसी और की बहो में थी,

देव को समझ hi नहीं आ रहा था वो क्या करे, तभी किसी के आने की आहात हुई देव ने देखा काम्य उधर आ रही ह, देव तुरंत वह से हैट गया, काम्य अंदर चली गई, काम्य के साथ पहरेदार भी था, देव वह से चुप चाप निकल गया, लेकिन उसकी आँखों में आंसू थे, वो पूरी तरह टूट गया था, ऐसा लग रहा था जैसे उसकी साँस hi रुक रही ह, वो महल से दौड़ता हुआ बहार निकला, वो बस दौड़े जा रहा था, लगातार दौड़े जार है था, दौड़ता हुआ वो जंगल में पहुंच गया, और बिलकुल सुमसान जगह पहुंच क्र एक जोर दर चीख के साथ चिलाय, और जोर से रोने लगा,

इधर भौमिक जी महल में पहुंचे देव से मिलने के लिए, लेकिन देव वह नहीं था वो प्रतियोगिता की जगह पैर पहुंचे लेकिन देव वह भी नहीं था, भौमिक जी परेशां हो गए थे, वो जगह जगह देव को ढूढ़ने लगे,

महल में प्रतियोगिता की तैयारी तेजी से हो रही थी, सभी अपनी अपनी जगह पहुंचने लगे थे,

भवर सिंह- राजगुरु क्या ये सही रहेगा,

राजगुरु- महाराज मैं नहीं जनता, मैं बस इतना जनता हु ये hi जरुरी ह, नियति हमसे ये क्यों करवा रही ह ये मेरी समझ में नहीं आ रहा, मैंने सभी का भविष्य देखा ह लेकिन इस लड़के के बारे में कुछ भी साफ साफ बोलना नामुमकिन सा ह, और इसके भविष्य से hi पुरे राजय का भविष्य जुड़ा हुआ ह,

भवर सिंह- ठीक ह तो जो मैंने बोलै ह वो कीजिये,

धीरे धीरे प्रतियोगिता मंडल सजने लगा, सब अपनी जगह पैर आ गए, तीनो राजकुमार अपनी जगह पैर पहुंच चुके थे, लेकिन देव उनके साथ नहीं था, सैनिक उसे ढूंढ रहे थे, राजगुरु अपनी जगह पैर पहुंच चुके थे घोषणा करने के लिए तभी एक सैनिक ने बताया की देव लापता ह, देव के लापता होने से राजगुरु चिंता में आ गए, ये खबर भवर सिंह तक भी पहुंची, भवर सिंह ने तुरंत सैनिको की एक टुकड़ी देव को ढूढ़ने भेजी, जब ये खबर भौमिक जी को लगी की देव लापता ह उन्हें थोड़ी सी रहत हुई लेकिन एक चिंता भी की वो चला कहा गया,

इधर प्रतियोगिता शुरू होने में देर हो रही थी, और देव जंगल में पड़ा हुआ था, उसे कोई सुध नहीं थी, तभी उसे कुछ याद आया उसे रीवा की याद आई, वो एक दम से उठा और अपने आंसू पोछे और चल दिया,

वही जब देव किसी को नहीं मिला तो मज़बूरी में राजगुरु जी ने प्रतियोगिता शुरू करने का आदेश दे दिया,

तीनो भाई खुश थे की देव यहाँ नहीं ह, उनका एक प्रतिद्वंदी जा चुक्का ह, जैसे hi तीनो भाई मैदान में आये तो देव को वह न देख क्र सभी में चर्चाये होने लगी, निहारिका को चिंता होने लगी वो आगे आ क्र इधर उधर देखने लगी,

राजगुरु- इस प्रतियोगिता में सिर्फ तीन राजकुमार hi हिस्सा लेंगे, हमारे राजकुमार देवदूत कही चले गए हैं, इसलिए वो यहाँ हिस्सा नहीं लेंगे,

लोगो में चर्चए जोर से होने लगी, तभी एक बच्चा चिलाय- वो आ गए हमारे राजकुमार

सबने उधर देखा तो देवदूत मैदान में चला आ रहा था, उसके कपडे गंदे थे मिटटी में साणे हुए, बाकि राजकुमार युद्ध के कपड़ो में थे जबकि देव अपने साधारण कपड़ो में था,

देव को वह देख क्र भौमिक जी का मुँह खुला रह गया उनके चेरे का रंग उड़ गया, वो जल्दी से देव को रोकना चाहते थे लेकिन ये नामुमकिन था, इस वक़्त वह उन्हें कोई नहीं जाने देता,

राजगुरु- राजकुमार देवदूत अब आ चुके हैं तो प्रतियोगिता शुरू करते हैं, इस प्रतियोगिता में शक्ति और युद्ध कला का प्रदर्शन होगा, और चारो राजकुमारों की एकता का प्रदर्शन भी होगा, सबसे पहले चारो राजकुमारों को उनके सामने आने वाले सैनिको से लड़ना होगा, जो वह हर मान जायेगा वह से हैट जायेगा, जो बचेगा उसे एक और युद्ध लड़ना होगा, अगर वह एक से जायदा राजकुमार बचे तो उन्हें आपस में लड़ क्र विजेता का फैसला करना होगा,

राजगुरु की बात सुनकर तीनो राजकुमार और उनकी माये चौंक गए क्योकि पहले ये सब नहीं था, पहले राजकुमारों को आपस में hi लड़कर विजेता घोषित होना था, इसलिए सभी ने एक दूसरे की कमजोरी के बारे में जानकरी इकठा की थी, लेकिन इसमें 2 नियम और जोड़ दिए गए थे, सौमित्र भवर सिंह के पास जाना चाहती थी लेकिन आज वह कोई नहीं पहुंच सकता था, भवर सिंह सबसे अलग बैठे हुए थे,

राजगुरु के द्वारा नियम सुनते hi जल्दी से एक सैनिक आया और उसने देव को एक कवच पहना दिया, जैसा बाकि राजकुमारों ने पहना हुआ था, सामने कुछ हथियार थे सभी राजकुमारों ने अपने हथियार उठा लिए, देव को बस कुल्हाड़ी चलनी आती थी जो वह नहीं थी, मज़बूरी में उसने तलवार उठाई,

तभी एक दरवाजा खुला और सामने से 50 सैनिक आ गए,

सैनिको को देख क्र सभी की हालत ख़राब हो गई, चारो अभी अभी जवान हुए थे इससे पहले कोई युद्ध नहीं लड़ा था, कोई अनुभव नहीं था उन्हें, लेकिन सामने जो सैनिक थे वो सभी बहुत ज्यादा अनुभवी थे, और खतरनाक भी थे,

राजगुरु के इशारे पैर हुम्ला शुरू हुआ, तभी सूरज बोलै

सूरज- सब एक साथ हो जाओ और चारो तरफ से एक दूसरे को बचाओ, तीनो भाइयो ने एक दूसरे से अपनी कमर लगा ली और हमले के लिए टायर हो गए, देव को उन्होंने अपने साथ शामिल नहीं किया, देव अकेला खड़ा रह गया, 50 में से 25 सैनिक देव की तरफ दौड़े और बाकि उन तीनो भाइयो की तरफ,

ये देख क्र निहारिका और भौमिक जी घबरा गए, और अक्षरा और रीवा ने अपने मुँह पैर हाथ रख लिया, अक्षरा को देव के लिए तकलीफ थी जबकि रीवा को दर था अगर देव हर गया तो उसके लिए कैसे बात करेगा,

तीनो राजकुमार बहुत अच्छे से सबका सामना कर रहे थे, जबी देव पैर चारो तरफ से हुम्ला हो रहा था वो तलवार को ऐसे चला रहा था जैसे कुल्हाड़ी चला रहा हो, वैसे तो इन सब तलवारो में धार नहीं लगाई गई थी, ताकि किसी को जखम न आये, लेकिन फिर भी थी तो तलवार hi, देव के शरीर पैर तलवारो के वॉर लगने लगे, और हर वॉर में उसके शरीर पैर जखम बन रहा था, वो राजकुमार था उसके शरीर पैर जखम देने की आज्ञा नहीं थी बस उन्हें कमजोर कर के हार मैंने के लिए मजबूर करना था, लेकिन यहाँ तो देव पैर सच में हुम्ला हो रहा था, कुछ लोग परेशां थे तो किसी को मजा आ रहा था,

देव ने कभी युद्ध नहीं किया कभी तलवार नहीं सीखी लेकिन उसके अंदर एक बहुत hi भेतरीन चीज थी जल्दी सिखने की, बचपन से hi वो सब कुछ बहुत जल्दी सिख जाता था, देव बचता बचता दीवार के पास आ गया तभी भीड़ में से एक आवाज आई जो एक लड़की की थी,

लड़की- देव अपने दिमाग का इस्तेमाल करो, इनकी युद्ध कला को सीखो और खुद का बचाव करो,

देव ने उप्पेर देखा तो वह सुगंधा कड़ी थी, और उसके साथ थे आचार्य जी, देव को तुरंत कस्तूरी याद आ गई वो उनके साथ कस्तूरी को भी ढूढ़ने लगा लेकिन वो नहीं दिखी, देव हताश सा होने लगा लेकिन ये वक़्त कमजोर पड़ने का नहीं था, देव ने सुगंधा की सलाह का इस्तेमाल किया और जैसे जैसे सैनिक हुम्ला कर रहे थे तलवार को चला रहे थे देव भी उन्ही की तरह तलवार चलने लगा था, देव घायल था लेकिन हार मैंने को तैयार नहीं था, तभी सभी सैनिको ने देव को बिच में घेर लिया और देव उनके बिच में डाब गया, किसी को देव दिखाई तक नहीं दे रहा था,

सबको लगा अब देव हार मन लेगा, वही भौमिक जी की आँखों में आंसू आ गए, ये वही पल था जो भौमिक जी ने देखा था, देव को सैनिको के बिच में दबे हुए और उसका दम घुट ते हुए देखा था, निहारिका भी बैचैन सी अपनी आँखों से आंसू बहा रही थी,

तभी एक जोर दर चिल्लाहट के साथ देव उठा और उसने सभी सैनिको को दूर धकेल दिया, देव के मुँह से खून आ रहा था, और उसके पेट की साइड में एक चाकू घुसा हुआ था, वह किसी धार दर हतियार का इस्तेमाल मन था फिर भी किसी ने देव के पेट में चाकू घुसा दिया था,

भौमिक जी को अपनी आँखों पैर यकीन नहीं हुआ, उन्होंने जो देखा था वो बदल कैसे गया, ऐसा कैसे हो सकता ह, देव के लिए हमेशा उनका देखा हुआ अलग कैसे हो जाता ह, देव की किस्मत पल पल कैसे बदल सकती ह,

देव लड़खड़ाता हुआ अपने घुटने पैर तलवार के सहारे बैठ गया था, सैनिक इधर उधर उसके चारो घूम रहे थे, देव चलता हुआ दीवार के पास पंहुचा और सुगंधा की तरफ हाथ उठाया, सुगंधा कितनी समझदार थी की बिना बोले देव की बात समझ गई और अपने शरीर पैर ओढ़ा हुआ दुप्पटा उतर क्र देव को दे दिया, किसी लड़की का ऐसे दुप्पटा उतर क्र देना समाज की नजरो में बहुत ख़राब मन जाता था, सुगंधा ने अपने शरीर की जरा भी चिंता नहीं की, उसे फरक hi नहीं पद रहा था कोण उसे देख रहा ह, उसका धयान बस देव पैर था,

देव ने अपनी कमर से चाकू निकला और वो दुपट्टा अपनी कमर पैर बांध लिया जिससे खून निकलना काम हो जाये, देव की आँखे लाल थी और वो बहुत hi गुस्से में सैनिको की तरफ चल दिया,

वही वो तीनो राजकुमार अब थक चुके थे, लेकिन उन्होंने 15 सैनिको को हरा क्र अलग क्र दिया था, वो जीत रहे थे और लोग तालिया बजा रहे थे, किसी ने एक बार भी ये नहीं सोचा की 3 राजकुमारों के लिए 25 सैनिक और अकेले देव के लिए 25 सैनिक ऐसा क्यों,

निहारिका भौमिक जी अक्षरा और रीवा को सब दिख रहा था लेकिन उनमे न हिम्मत थी न hi अधिकार था ये पूछने का,

तभी भीड़ में से कुछ लोग उठ खड़े हुए और सैनिको को बुरा भला कहने लगे अरे इतने सरे सैनिक अकेले राजकुमार से लड़ रहे हो, वह देखो तुम्हारे बाकि साथी हार गए हैं, जब भीड़ में ऐसी आवाज उठी तो जल्दी hi ये आवाज सब तरफ से आने लगी, तो मज़बूरी में उन सैनिको के सरदार को कुछ सैनिक राजकुमारों की तरफ भेजने पड़े,

इधर देव बड़ी फिरती से तलवार को गुमने लगा, उसने नहीं पता था वो किस सीधा में घुमा रहा ह लेकिन जो भी क्र रहा था उससे फायदा मिल रहा था, और उसने 10 सैनिको को जमीन में गिरा दिया था, इस प्रतियोगिता का नियम था जो जमीन में गिर जायेगा वो हरा मन जायेगा,

अब मैदान में बस 10 सैनिक बचे थे, और चारो राजकुमार, जल्दी hi मैदान में चारो राजकुमार खड़े थे, देव बुरी तरह घायल था, लेकिन हार नहीं मान रहा था, बाकि तीनो राजकुमार भी थके हुए थे लकिन ये hi असली प्रतियोगिता थी जो यहाँ हार गया वो कभी युवराज नहीं बन सकता, क्योकि जिस राजा के पास शक्ति नहीं होती कोई उसका सम्मान नहीं करता,

शक्ति प्रतियोगिता का दूसरा चरण शुरू हुआ और दरवाजा खुलते hi एक चीता निकल क्र सामने आया, बहुत hi विशाल शरीर का और ख़तरनाक था वो, उसे मैदान में देख क्र सभी दर गए, तीनो राजकुमारों की भी हवा ख़राब हो गई, इतने सैनिको से लड़ने के बाद अब एक चीता से लड़ना नामुमकिन था, और वैसे भी इस चीते से लड़ना तो मूरखता थी, चीता आगे बढ़ा तो तीनो राजकुमार पीछे हैट गए जबकि देव अपनी जगह खड़ा रहा और चीते को घूरता रहा,

देव जनता था अगर चीते की नजरो से नजरे हटी तो वो हुम्ला कर देगा, चीता देव के चारो तरफ घूमने लगा, तीनो राजकुमार एक साथ हो गए तलवार लेकर ताकि अगर चीता उनकी तरफ आये तो वो एक साथ हुम्ला कर सके,

देव के तरीके से चीता को खतरा दिखाई दिया तो वो आगे बढ़ गया, तीनो राजकुमारों के पास, ये देख क्र भवर सिंह दहशत में आ गया, वही तीनो राजकुमार दर से कंपनी लगे, वो पीछे हाथ रहे थे और तलवार चला रहे थे, तब तक देव तलवारो से कुछ कर रहा था,

फिर देव ने एक पत्थर उठाया और चीता को मारा, चीता ने देव की तरफ देखा, इस बार देव ने अपनी नजरे नहीं मिले, चीता देव की तरफ बढ़ने लगा, देव पीछे हटने लगा तो चीता की रफ़्तार बढ़ गई, वो देव पैर उछला तो देव निचे बैठ गया और चीता का मुँह जमीन में गाड़ी हुई तलवारो के बिच में घुस गया, देव ने तुरंत उप्पेर से एक तलवार और फसा दी, जिसे चीता वही फास गया, चीता ताकतवर था वो तलवारे उखड सकता था लेकिन जोर लगाने से तलवार उसकी गार्डन को काट रही थी, चीता वही शांत हो गया, तभी सूरज तलवार लेकर चीता की तरफ डोडा उसकी गर्दन काटने के लिए, जिसे देव ने रोक दिया,

देव- वो बेजुबान जानवर ह उसे मर क्र क्या हसली होगा, वो फास चुक्का ह हमे बस वही करना था,

तभी पीछे से ज्वाला ने सूरज पैर हुम्ला कर दिया क्योकि अगला चरण आपस में लड़ाई करनी थी, अभिजीत ने देव पैर हुम्ला कर दिया, देव अभिजीत से बचने लगा वो उस पैर कोई वॉर नहीं कर रहा था, सूरज और ज्वाला की लड़ाई जोर पैर थी, क्योकि दोनों की ताकत काफी ज्यादा थी, और युवराज पद के लिए वो दोनों की आपस में बड़ी स्पर्धा थी, एक तगड़ी लड़ाई के बाद सूरज ने ज्वाला को गार्डन से दबोच लिया और जमीन में पटक दिया, और नियम के हिसाब से जो जमीन में गिरा वो हारा मन जायेगा,

ज्वाला के गिरते hi सौमित्र ने गुस्से में सामान फेंक दिया, अमरावती ख़ुशी से मुस्कुरा रही थी,

इधर सूरज देव की तरफ बढ़ा, अभिजीत को पता था सूरज में उससे ज्यादा ताकत ह, और वो दोनों एक दूसरे के जिगरी दोस्त जैसे भी थे तो अभिजीत मुस्कुराता हुआ एक तरफ हैट गया, उसने सोचा सूरज पहले देव को हरा देगा, फिर आपस में कर लेंगे जो करना ह लेकिन सूरज अभिजीत की फितरत को जनता था, उसे पता था वो देव की तरफ जायेगा और अभिजीत पीछे से हुम्ला कर सकता ह, इसलिए सूरज ने अभिजीत को कोई मौका hi नहीं दिया और वो सीधा अभिजीत की तरफ गया और जब तक अभिजीत कुछ समझ पता सूरज ने अभिजीत को उठा क्र जमीन में पटक दिया, अभिजीत गुस्से में आग बबूला हो गया,

सूरज- मेरे भाई राज पथ पाने के लिए सब कुछ करना पड़ता ह,

सूरज देव की तरफ बढ़ा, अब देव के पास कोई तरीका नहीं था, क्योकि वो जनता था सूरज की ताकत और युद्ध कला उसके सामने बहुत ज्यादा ह, वो सूरज से कभी नहीं जीत सकता, सूरज ने अपनी तलवार फेंक दी और देव पैर मुक्को की बरसात कर दी, हर कोई हैरान था, सूरज उसे गिरना नहीं छह रहा था, वो उसे मार रहा था, देव कुछ भी नहीं कर प् रहा था,

सुगंधा जो से चिल्लाई- अरे कायर वो भाई ह तेरा,



सूरज उसकी तरफ देख क्र मुस्कुराया उसने देव को अपने कंधे पैर उठाने के लिए जैसे hi झुका देव ने एक जोर दर कोहनी सूरज की कमर में मर दी जिससे उसका संतुलन बिगड़ गया, सूरज ने देव को पकड़ा हुआ था जिससे दोनों एक साथ गिर गए, और ये प्रतियोगिता वही ख़तम हो गई,
 
मैं सुबह से 10 बार सबके रिप्लाई कर चुकी हु, एक बार अपडेट भी दिया था लेकिन कुछ भी पोस्ट नहीं हुआ सब एरर दिखा रहा था
 
Hi मैं अब तक किसी को रिप्लाई नहीं क्र प् रही हु,
 
पिछले कुछ दिनों में वेबसाइट पैर बहुत प्रॉब्लम हुई है, परेशां होकर आगे लिखने का भी मन हैट रहा था, अभी भी मैं कुछ लोगो के रिप्लाई नहीं क्र प् रही हु,
 
मैं सुबह से 20 बार अपडेट पोस्ट क्र चुकी हु लेकिन नहीं हो रहा, ा मन सच में बहुत परेसाहन हो गई हु, अब मैं कोई भी अपडेट तब तक पोस्ट नहीं करूनही जब तक वेबसाइट ठीक से नहीं चलती, 20 मिनट्स काम में पूरा दिन लग जाता ह,
 
संस जा रहे हैं लेकिन अपडेट नहीं जा रहा
 
मैंने सब क्र लिया लेकिन अपडेट नहीं पोस्ट हो रहा
 
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