Incest RAKSHASH - Page 3 - SexBaba
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Incest RAKSHASH

अपडेट- 8



सुमसान जंगल में सात्विक तंत्र गुरु से तंत्र विद्या सिखने में लगा हुआ था, सात्विक बहुत तेजी से सभी विद्याये सिख रहा था, दोनों हवन क्र रहे थे तभी आसमान में बिजलिया चमकने लगी, मौसम ख़राब हो गया, बहुत hi खतरनाक तोफान शुरू हो गया था, हरे पैदा पैर बिजलिया गिर रही थी, खड़े खड़े पेड जल रहे थे, और हवा उसमे घी का काम कर ह्री थी,

सात्विक- गुरु जी ये क्या हो रहा ह, ऐसा लग रहा जैसे कुछ गलत होने जा रहा ह,

तंत्र गुरु- कुछ बदलने वाला ह, आसमान और धरती दोनों hi विरोध करना छह रहे हैं,

सात्विक- इसके परिणाम बुरे तो नहीं होंगे

गुरु- कोई परिणाम बुरे नहीं होते, बस अलग अलग इंसान के हिसाब से होते हैं, ऊपर वाले के हिसाब से सब सही hi होता ह, क्या पता इससे किसी को नुकसान हो तो किसी को फायदा होगा,

सात्विक- गुरु जी मेरी विद्या कब तक पूरी होगी, मुझे आगे भी जाना होगा, उस जगह को ढूंढ़ने,

गुरु- सब कुछ अपने समय के हिसाब से होगा, समय से पहले कुछ नहीं होगा, आज मैं तुम्हे अंतिम विद्या देने जा रहा हु, कल सुबह तू यहाँ से जा सकता ह अपनी मंजिल की तरफ, लेकिन ये याद रखना जोट ु हासिल करने जार है ह वो विनाश करि ह, और अगर तू उससे मिला तो शायद उसके बाद टूट ु नहीं रहेगा, और न जाने क्यों मुझे अहसास हो रहा ह की वो वापस आने वाला ह,

सात्विक- कोण गुरु जी, कोण आने वाला ह,

गुरु- तेरा मिलना उससे तय ह, शायद इसीलिए तूने ये विद्या पाई ह, मैं देख प् रहा हु, तेरा उससे मिलना तय ह, एक hi माली के बोये हुए बगीचे में फूल भी होते हैं और कांटे भी,

इधर प्रतियोगिता ख़तम हो गई थी लेकिन भवर सिंह के चेहरे पैर हताशा और दर दोनों दिख रहे थे, वही अमरावती और सौमित्र तो रोने के लिए तैयार थी, लेकिन काम्य बिलकुल खामोश बैठी हुई थी, वो उठी और अमरावती और सौमित्र को एक तरफ बुलाया और कुछ बात करने लगी,

देव मैदान से उठ कर घायल अवस्था में hi अपनी माँ के पास आया, लेकिन निहारिका वह नहीं थी, सभी लोग देव को बधाई देने के लिए आ रहे थे लेकिन देव तो अपनी माँ को ढूंढ रहा था, रीवा भी देव के पास आई, उसे ख़ुशी थी देव जीत गया अब वो उसकी शादी प्रताप सिंह से रोक देगा, देव माँ माँ चिल्ला रहा था, जब निहारिका नहीं मिली तो बाकि सबका धयान भी उधर गया, तभी काम्य बोली

काम्य- प्रताप सिंह भी यहाँ से गायब ह,

प्रताप सिंह का नाम सुनते hi भवर सिंह का गुस्सा चढ़ गया, वो तुरंत निहारिका को ढूंढ़ने निकला, देव भी निहारिका को ढूंढ़ने निकला, राजगुरु ने वह के माहौल को सम्हाल लिया,

देव इधर उधर देख रहा था तभी उसे निहारिका के चीखने की आवाज आई देव उस तरफ दौड़ पड़ा, वह बने एक कमरे में जैसे hi देव अंदर पंहुचा तो उसकी आँखे फटी रह गई, निहारिका जमीन पैर पड़ी हुई थी और प्रताप सिंह उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था, देव गुस्से में पागल हो गया और किसी पागल हठी की तरह चिंघाड़ता हुआ प्रताप सिंह पैर टूट पड़ा,

घायल देव में न जाने कहा से इतनी ताकत आ गई की उसने प्रताप सिंह को उठाया और दूर फेंक दिया और उस पैर मुक्को की बरसात कर दी, तभी वह भवर सिंह काम्य अमरावती सौमित्र सेनापति राजगुरु सब पहुंच गए,

भवर सिंह- क्या हो रहा ह यहाँ

प्रताप सिंह ने देव को धक्का दिया और भवर सिंह के पीछे चुप गया

प्रताप सिंह- महाराज मुझे बचाइए इन माँ बेटो से मुझे बचाइए,

भवर सिंह- ये सब क्या हो रहा ह यहाँ, तुम यहाँ क्या कर रहे हो प्रताप सिंह,

देव- ये मेरी माँ के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था,

भवर सिंह ने प्रताप सिंह की गार्डन पैर तलवार रख दी,

काम्य- रुकिए भाइये पहले प्रताप सिंह की भी बात सुन लेते हैं,

प्रताप सिंह- महाराज मुझे बोलने का मौका दीजिये

भवर सिंह- तुमने हमारे इज्जत से खेलना चाहा

प्रताप सिंह- मुझे ये औरत hi यह अलाइ थी

प्रताप सिंह की बात सुनते hi भवर सिंह के हाथ कैंप गए,

प्रताप सिंह- ये औरत मेरे पास आई थी दो दिन पहले और इसने कहा था अगर आप मेरे बेटे को युवराज बनाना में अपना समर्थन देंगे तो मैं आपके लिए कुछ भी करुँगी, फिर ये बोली की महाराज तो कुछ करते ह नहीं जब से देवदूत पैदा हुआ ह तब से मैं प्यासी हु, आप मेरी प्यास बुझा दिज्जिए और मेरी बेटी से शादी क्र लीजिये, इससे हमारा आगे का रास्ता भी साफ़ रहेगा, जैसे hi प्रतियोगिता में देव जीता ये मुझे यहाँ ले आई, अब रोने का नाटक कर रही ह,

प्रताप सिंह की बात सुनकर भवर सिंह ने बिना कुछ सोचे समझे निहारिका की तरफ तलवार चला दी, जिसके बिच में देव आ गया और वो तलवार देव के बाजु पैर चली जिससे वह खून भेने लगा,

राजगुरु- महाराज एक बार महारनी की बात तो सुनिए,

भवर सिंह- प्रताप सिंह को हमारे बिच की इतनी घेरि बात पता ह तो इसने hi बताई होगी, मैंने इसे बात करते देखा था,

काम्य- ये कलंकी ह, और इसका बीटा जॉय अहा प्रताप सिंह जी पैर जबरदस्ती का आरोप लगा रहा ह ये खुद एक लड़की के साथ जबरदस्ती करके आया ह,

इस बात ने वह एक और धमाका कर दिया था, तभी एक दासी कस्तूरी को लेकर आ गई,

काम्य – ये ह आचार्य की बेटी कस्तूरी, जब ये राजगुरु के पास गया था तो वह इसने स लड़की के साथ जबरदस्ती की, क्यों लड़की बता महाराज को इसने क्या किये तेरे साथ

कस्तूरी रो रही थी उसने अपना सर झुका लिया और जोर जोर से रोने लगी,

देव की आँखे भर आई थी, उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था, एक hi पल में उसकी पूरी दुनिया ख़तम हो गाइट hi, उसकी माँ और उस पैर जो इल्जाम लगे थे, वो इस समाज में कही मुँह दिखने के लायक नहीं थे,

भवर सिंह- इसकी सजा इन्हे कल दरबार में दी जाएगी, दोनों को बंदी बना लो और कारागृह में दाल दो,

तभी कुछ सैनिक आये और दोनों को ले गए,

कहा देव युवराज बनने वाला था कहा वो कारागृह में था, निहारिका का रो रो क्र बुरा हाल था, दोनों माँ बीटा एक दूसरे से लिपट क्र रो रहे थे, जल्दी hi ये खबर पुरे राजय में फ़ैल गई, और जैसे hi ये खबर आचार्य जी तक पहुंची तो उन्होंने आतम हत्या करने की कोशिश की उन्होंने जहर खा लिया, वो ये सदमा बर्दास्त नहीं कर पाए, एक तो उनकी बेटी के साथ ऐसा दुराचार हुआ और वो भी उनके सबसे पिरया शिष्य ने ऐसा किया, उन्हें बचा तो लिया गया लेकिन वो सदमे में चले गए,

वही भौमिक जी को जब ये खबर मिली तो वो बोखलाए हुए से महल की तरफ भागे, लेकिन महल में इतना कुछ हो गया था तो आज महाराज से किसी को मिलने की आज्ञा नहीं थी, राजगुरु भी भवर सिंह के साथ थे तो भौमिक जी राजगुरु से भी नहीं मिल पाए, उनकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था इसलिए वो तुरंत किसी एकांत जगह पैर पहुंच गए और धयान में बैठ गए, फिर से अपना धयान देव पैर केंद्रित किया और उसके बारे में जानने लगे, आज उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था वो काफी परेशां थे,

अक्षरा रीवा अमिता और सोमिया किसी को भी इस बात पैर यकीन नहीं हो रहा था, वो सब कुछ मानने को तैयार थी लेकिन निहारिका और देव ऐसा कर सकते हैं इस बात पैर यकीन नहीं कर प् रही थी, पुरे राजमहल में मातम जैसा माहौल था, लेकिन 6 लोग खुशिया मन रहे थे, अमरावती सौमित्र काम्य सूरज ज्वाला और अभिजीत,

वो सब एक साथ hi थे,

अमरावती- काम्य दीदी तुम्हे कैसे पता ये सब होगा, वो देवदूत जीत जायेगा,

कमाया- मुझे यकीन तो नहीं था लेकिन फिर भी मैंने तैयारी की हुई थी, इसलिए सभी को अलग अलग काम दिया हुआ था, सूरज को काम दिया था प्रताप सिंह को काबू में करने का, ये सब सूरज ने hi किया था, उसने hi प्रताप सिंह को निहारिका के पीछे लगाया,

सौमित्र- और वो कस्तूरी

काम्य- उसके बारे में फिर कभी जान लेना, अभी समय ह ख़ुशी मानाने का, कल उन्हें ऐसी सजा दिलवाऊंगी शर्म खुद कही जान दे देंगे,

पूरी रात किसी की दुःख में तो किसी की ख़ुशी में गुजर गई, देव ने निहारिका को कस्तूरी के बारे में सब बता दिया था,

कारागृह में देव और निहारिका एक दूसरे का हाथ थामे बैठे हुए थे,

देव- ये सब क्या हो गया माँ, मैं तो सम्मान पाने के लिए ये सब कर रहा था, और आज संसार का सबसे बड़ा इल्जाम लग गया, और पिता जी विश्वास भी कर लिया, मुझे अपराधी बनाया वो ठीक था ो मुझे पसंद नहीं करते लेकिन आपको क्यों अपराधी बनाया, आप पैर तो उन्हें विश्वास करना चाहिए था,

निहारिका- वो किसी पैर विश्वास नहीं करते और किसी को उनपर भी विश्वास नहीं करना चाहिए,

देव- फिर आपने उनसे शादी क्यों की, आप इतने वर्षो से ये सब झेल रही हैं, आपने विरोध क्यों नहीं किया,

निहारिका- मुझे नहीं पता कल सभा में हमे क्या सजा सुनाई जाएगी, लेकिन आज एक सच तुझे बता रही हु, जीवन में भवर सिंह पैर भरोसा मत करना, जिसने भी उस इंसान पैर भरोसा किया उसने उसे hi बर्बाद कर दिया,

बात उस समय की ह जब मैं जवान हुई थी, मेरे पिता भवर सिंह के सेनापति थे और मित्र भी थे, इसी वजह से भवर सिंह और उनकी बहन काम्य का हमारे घर आना जाना आम बात थी, भवर सिंह की दोस्ती मेरे भाई राजवीर से हो गाइट hi, दोनों काफी अच्छे दोस्त थे, मेरा भाई बहुत अच्छा योद्धा भी तो उस समय कोई भवर सिंह को टक्कर दे सकता था वो मेरा भाई hi था, और काम्य वो मेरे भाई को पसंद करने लगी थी, वो भवर सिंह के साथ हमारे घर आने लगी थी,

कुछ समय के लिए बहवर सिंह को युद्ध कला सिखने के लिए कही बहार भेजा गया था, इधर काम्य जवान हो रही थी उसका धयान राजवीर की तरफ बहुत ज्यादा होने लगा, दोनों के बिच नजदीकियां बढ़ रही थी, और मैं भी अपनी जवानी की तरफ बढ़ रही थी, जब कुछ वर्षो बाद भवर सिंह वापस आया तो वो हमारे घर आया और उसकी नजर मुझ पैर पड़ी, मुझे देख क्र उसके अंदर कामुकता भर गई, वो मुझे पाने के लिए पागल सा हो गया था, जबकि उसकी शादी हो चुकी थी, फिर एक युद्ध में भवर सिंह के पिता और मेरे पिता दोनों मरे गए, जिसके दुःख में मेरी माँ भी चल बसी, भवर सिंह को राजा बना दिया गया,

अब भवर सिंह कुछ भी कर सकता था, काम्य ने भवर सिंह से मेरे भाई राजवीर से शादी करने का प्रस्ताव रखा, तो भवर सिंह ने मेरे बही से मिला और उसके सामने एक ऐसी बात राखी की मेरे भाई का गुस्सा इतना बाद गया की उसने भवर सिंह को गालिया देकर घर से निकल दिया, भवर सिंह गुस्से में वह से चला गया, उस दिन राजवीर और भवर सिंह में बात चित बंद हो गई, एक दिन में घर में अकेली थी तो भवर सिंह वह आ गया और उसने मुझे अकेले देख क्र मेरे साथ दुराचार करना चाहा लेकिन तभी राजवीर आ गया और उन दोनों के बिच युद्ध हो गया, उस लड़ाई में राजवीर भवर सिंह पैर हावी हो रहा था किन ा जाने कहा से काम्य वह आ गई और उसने धोके से मेरे बही को पीछे से तलवार मर दी, उसका धोका राजवीर बर्दास्त नहीं कर पाया,

राजवीर- काम्य तुमने मेरे साथ धोखा किया,

काम्य- तुम मेरे बही को मरोगे मैं तुम्हे कैसे छोड़ दूंगी

राजवीर- तुम जानती हो इसने तुम्हरे बारे में क्या कहा था मुझसे

काम्य- जानती हु, तो इसमें बुराई क्या, इतना अच्छा अवसर था तुम्हारे पास लेकिन तुम इस लायक hi नहीं हो,

काम्य राजवीर से प्यार करती थी फिर भी उसने राजवीर को धोखा दिया, राजवीर जमीन पैर गिर गया, उसे बंदी बना लिया गया और मोत की सजा सुनाई गई राजा पैर हुम्ला करने के लिए, मैं अब अकेली रह गई थी, फिर भवर सिंह में मेरे साथ सोडा किया की अगर मैं उससे शादी कर लेती हु तो वो मेरे भाई को नहीं मरेगा, मैं अपने भाई को बचने के लिए मजबूर थी और उससे शादी कर ली, मेरा भाई आज भी उसकी कैद में ह, मैं होने भाई की वजह से आज तक भवर सिंह की यातनाये शेती आ ऋ हु, मेरी उम्र बहुत काम थी, और काम उम्र में hi रीवा पैदा हो गई और फिर तू, अब भाई के साथ साथ तुम दोनों की भी फ़िक्र थी मुझे,

मेरा भाई आज भी भवर सिंह की कैद में बंद ह, भवर सिंह किसी की नहीं सुनता, मुझे रीवा की फ़िक्र ह, न जाने वो कैसे रहेगी इन हैवानो के बिच में,

देव- आपने इतना बड़ा राज आज तक छुपा क्र रखा, हम उन्हें कैसा इंसान समझते थे और वो कैसे निकले, आपने मुझे उनसे लड़ने लायक योद्धा क्यों नहीं बनाया,

निहारिका- तेरे जनम के साथ hi भवर सिंह के अंदर एक दर पैदा हो गया था, वो तुझे पैदा होते hi मरना चाहता था लेकिन राजगुरु की वजह से नहीं मर पाया, राजगुरु ने कहा था अगर तुझे समय से पहले मर दिया तो पूरा राजय तबाह हो जायेगा, शायद इसीलिए ये लोग आज तक रुके हुए थे, और आज उन्होंने ये सब साजिश करके हम दोनों को रस्ते से होने का तरीका ढूढ़ा ह, और मेरी मज़बूरी देखो मैं कुछ नहीं बोल प् रही हु, अगर कुछ बोलती हु तो वो मेरे भाई को मार देगा, हमे शायद कोई सजा देकर यहाँ से दूर भेज दे, लेकिन वो राजवीर को मर देगा,

देव- मुझे किसी सजा का दुःख नहीं ह, बस दुःख ह की मैं आपके सम्मान के लिए कुछ नहीं कर सका, हमे सजा उस अपराध की मिलेगी जो हमने किया hi नहीं, फिर भी मैं मां के लिए वो सजा लेने को तैयार हु,

निहारिका- क्या पता उप्पेर वाले ने हमारे लिए ये hi सोचा हो, लेकिन अगर मुझे दुबारा जनम मिलता ह तो मैं तुझे ऐसा योद्धा बनाउंगी की पूरा संसार तेरे सामने सर झुकाये, इस जनम में जो गलती मैंने की ह वो दुबारा नहीं करुँगी, और मैं प्राथना करुँगी अगर मैं फिर से पैदा हुई तो मुझे तेरे जैसा hi पति मिले, जो सबसे इतना प्यार करता ह, मैं हमेषा प्यार के लिए तरसी हु, इस जनम में जितना प्यार तूने मुझे दिया ह उतना मेरे माता पिता भी नहीं दे पाए,

देव- मैं आपका बीटा hi पैदा होना चाहूंगा माँ,

दोनों माँ बेटे एक दूसरे के कंधे पैर सर रख क्र बैठे रहे,

अगली सुबह राज दरबार लगा हुआ था,

राजगुरु- वैसे तो प्रतियोगिता पूरी हो चुकी थी लेकिन देवदूत ने जो अपराध किया ह उसकी सजा उन्हें मिलेगी, और कोई अपराधी युवराज नहीं बन सकता, इसलिए महाराज के आदेश पैर युवराज की घोषणा फिर कभी समय आने पैर की जाएगी, और आज जो स्वंवर होना था ो भी रोका जाता ह, हम अपने महेमानो से माफ़ी चाहेंगे, लेकिन ये समय न्याय का ह और राजमहल के लिए दुःख का भी तो ऐसे में ये सब नहीं हो सकता, और बी ह अपराधियों को सजा देने का,

तभी निहारिका और देव को लेकर आ गए झांजीरो में बांध क्र,

भवर सिंह- इन दोनों में अपराध किया ह, ये राजमहल और राजय के साथ साथ समाज के भी अपराधी हैं, मैं इनकी कोई बात सुन्ना नहीं चाहता हु, राज गुरु इन्हे सजा दी जाये,

राजगुरु- इनदोनो की राजय से बहार निकल दिया जाये, और फिर कभी इस राजय की अस पास भी दिखे तो इन्हे मोत की सजा दी जाये,

काम्य- ये सजा काफी नहीं होगी, इससे समाज में क्या फरक पड़ेगा, कोई भी औरत या मर्द जब ऐसी हरकते करेगा तो बस उसे राजय से बहार क्र दिया जायेगा, उससे हम क्या उदहारण पेश करेंगे, इन्हे ऐसी सजा मिलनी चाहिए जिससे आने वाली पीडिया याद रखे की महारज अपनी पत्नी और बेटे को ऐसी सजा दे सकते हैं तो बाकि सब को कैसी सजा मिलेगी,

भवर सिंह- तुम hi बताओ क्या सजा दी जाये,

काम्य- इस निहारिका को अपनी सुंदरता पैर बहुत अभिमान ह, इसने उसी सुंदरता के अहंकार में ऐसी हरकत की, तो इसकी सजा ये ह की इसे पूरी तरह निर्वस्त्र करके पुरे राजय में हुअय जाये और लोग इन पैर अपना गुस्सा निकले , और इस देवदूत को भी इसकी माँ के साथ निर्वस्त्र करके ऐसे hi घुमाया जाये,

भवर ऐसा करना नहीं छटा था, लेकिन वो परजा के बिच निहारिका और देव के लिए नफरत पैदा करना छटा था, जिससे बह्विश्य में लोग उन्हें बुराई में hi याद रखे,

भवर सिंह ने तुरंत है बाहर ली, राजगुरु ने बहवर सिंह को देखा वो रोक्न अछते थे लेकिन रोक नहीं पाए, निहिरका और देव ने फटी आँखों से भवर सिंह को देखा उन्हें यकीन hi नहीं हुआ, उनके लिए ऐसा आदेश दिया गया, खुद पूरा सभा चौंक गई थी,

भवर सिंह- इस आदेश पैर अभी अमल किया जाये,

तुरंत दो सैनिक आगे आये उन्होंने निहारिका के कपडे उतरने के लिए हाथ बढ़ाये तभी देव ने उन पैर हुम्ला कर दिया,

एक सैनिक ने देव के सर में तलवार की मुठ मर दी जिससे वो जमीन में गिर गया और बेहोश हो गया, वो कल की लड़ाई से इतना घायल हो चुक्का था की उसके अंदर कोई जान hi नहीं बची थी, उसके जख्मो का कोई उपचार भी नहीं किया गया था, जब उसे होश आया तो वो महल के बहार पड़ा हुआ था, उसकी आँख खुली उसने चारो तरफ देखा तो बहुत से लोग खड़े थे, देव खड़ा हुआ तो उसे अहसास हुआ की वो नंगा ह, और जब उसने बराबर में देखा तो निहारिका भी नंगी कड़ी थी, निहारिका की आँखे बंद थी और उनसे आंसू बहे जा रहे थे,

देव ने नारिका को देखा वो जोर से चिलाय- हमे जान से मर दो, लेकिन ऐसा मत करो,

लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था, सैनिक उन्हें खींच क्र लेका चल दिए, पूरी परजा कड़ी हुई देख रही थी, कुछ औरतो ने अपने मुँह धक् लिए लेकिन मर्द बड़े चाव से निहारिका को देख रहे the,is संसार की सबसे खूसूरत औरत का चेरा देखना भी इन लोगो के लिए सपना जैसा था आज उन्हें वो औरत पूरी नंगी देखने को मिल रही थी, लोग उसे देख रहे थे और आहे भर रहे थे, निहारिका आँखे बंद किये सर झुका क्र चले जार hi थी, वही देव की आँखों में खून उतर रहा था, लोग उन दोनों पैर टमाटर गोबर न जाने क्या क्या फेंक रहे थे,

इधर प्रताप सिंह तुरंत महल से निकल चुक्का था और अपने सैनिको को आदेश दिया की जब भवर सिंह के सैनिक देवदूत और निहारिका को राजय से बहार चोदे तो निहारिका को तुरंत उठवा लेना और देवदूत को मार देना,

इधर देव और निहारिका के साथ ये सब हो रहा था और भौमिक जी अपने धयान में लगे थे, उन्हें पता hi नहीं चला कब रात हो गई कब सबेरा हो गया, इतना लम्बा धयान लगन ेके बाद उन्हें कुछ झल्कियादिखने लगी और जो झलकियां उन्हें दिख रही उन्हें भौमिक जी फिर घबरा गए और उनकी आँखे खुल गई, उन्ह ीक पहाड़ी दिख रही थी, और एक चीता दिख रहा था जो देव पैर हुम्ला करने वाला था, और एक झरना और गिरते हुए……….. भौमिक जी तुरंत आँख खोल क्र बैठ गए और जल्दी से महल की तरफ दौड़ पड़े,

इधर रीवा महल के छज्जे पैर कड़ी अपनी माँ और भाई की हालत देख रही थी, वो प्रताप सिंह से शादी रुकने की ख़ुशी मनाये या जो हुआ उसका दुःख मनाये,

देव और निहारिका को पुरे राजय के सामने नंगे यात्रा निकल क्र उन्हें राजय से बहार एक पहाड़ी पैर ले गए,

एक सैनिक- यार कसम से महाराज हमे सौंप देते तो सभी सैनिक इस औरत के साथ मजे करता, ऐसा बदन मैंने आज तक नहीं देखा,

दूसरा सैनिक- मजे तो हम अब भी कर लेते लेकिन महाराज के खास लोग भी आ रहे हैं पीछे,

फेल सैनिक- अरे जब ताका एते हैं तब तक मजे क्र ले,

तभी वह एक चीता की दहाड़ने की आवाज आई, सभी ने ुधा रदेखा तो एक गाड़ी पैर पिंजरे में चीता को लाया जार है था,

उस गाड़ी से उतरा एक सैनिक- इन दोनों को मार क्र इस चेतता को खिला दो, कोई गवाह या सबूत नाब अचे, ये महारज का आदेश ह,

सैनिको ने तुरंत तलवार निकली और देव और नाकि के पेट में उतर दी, न जाने कितनी तलवारे उनके शरीर में गुसा दी थी, फिर सभी पीछे हैट गए और चीता का पिंजरा खोल दिया, चीता चलता हुआ देव और निहारिका के नजदीक आया,

निहारिका लगभग मर hi चुकी थी, उसके शरीर से बहुत खून भी चुक्का था, देव की हालत भी खराब थी वो बस जैसे तैसे निहारिका को पकडे हुए खड़ा था, जैसे hi चीता उनकी तरफ आया, देव ने एक तलवार उठाई और चीता के पेट में घुसा दी, लेकिन चीता उन पैर कूद गया, जिससे वो तीनो एक साथ पहाड़ी से गिर गए और भेटे हुए झरने में जा गिरे,

सैनिको ने महल पहुंच क्र भवर सिंह की उनके मरने की खबर दे दी, लेकिन इस सब को प्रताप सिंह के सैनिक भी देख रहे थे, क्योकि वो निहारिका को पकड़ने के लिए उनके पीछे लगे हुए थे, उन्होंने प्रताप सिंह को ये खबर दी तो प्रताप सिंह गुस्से में पागल सा हो गया,

राजय सभा में बहवर सिंह राजगुरु के साथ साथ भवर सिंह क ापुरा परिवार बैठा हुआ था, राजय में आये हुए सभी महेमान जा चुके थे, आज सभा में किसी को आने की आज्ञा नहीं थी, लेकिन तभी सैनिको को धकेलते हुए भौमिक जी सभा में आ गए,

भौमिक जी को वह सीख क्र राजगुरु भी चकित रह गए,

राजगुरु- भौमिक मेरे बही तुम यहाँ

भौमिक- मत कहो मुझे आप भाई, आज आप मेरी नजरो से गिर गए हो, आप सबने साजिश करके उन लड़के को मरवा दिया, इस परिवार का और इस समाज का सबसे मासूम इंसान था वो, जिस लड़की के साथ दुराचार का अपराध आप सबने लगवाया ह वो लड़की खुद देव के पास आई थी उसे अपने प्रेम के जाल में फसाया और खुद उसके साथ सम्भोग किया, जब मैंने रोक तो उस लड़की ने मेरा भी विरोध किया, देव कैसे उसके साथ दुराचार कर सकता ह, ये सब तुम लोगो की साजिश ह और मुझे उम्मीद ह तुम सबने मिल्क रही महारनी निहारिका को भी ऐसे hi फसाया ह, तुम सबके अंदर का दर तुमसे ये करवा रहा ह, लेकिन तुम सबने गलत किया ह, लेकिन तुम कुछ भी कर लो जो होना ह वो होकर hi राजा, वो आएगा जरूर आएगा, उसे आना हो होगा, चाहे ये धरती फैट जाये या आसमान टूट पड़े, उसे आना hi होगा, मैं लेकर आऊंगा उसे, और जब वो आएगा तो विध्वंश होगा, पूरी धरती कैंप उठेगी, अपराधियों को सजा मिलेगी और ऐसा विनाश होगा ये पूरा राजय ठहराएगा, उस औरत का अपमान पूरी प्रकर्ति लेगी तुम सबसे,

इतना बोल क्र भौमिक जो तेज कदमो से वह से निकल गए, पूरा परिवार भोचक्का सा खड़ा रह गया, किसी के मुँह से कोई शब्द नहीं निकला था, कुछ लोगो के चेरे पैर चिंता थी तो कुछ इस बात से अचंभित थे की निहारिका और देव को साजिश करके महल से निकला गया ह, रीवा अक्षरा अमिता और सोमिया इस बात से परइ तरह चौंक गई थी,

भौमिक जी अपने घर जाने की जगह वह चले गए जहा देव और निहारिका को लेकर गए थे, वो जगह भौमिक जी ने अपने धयान में देखि थी, वो उस पहाड़ी पैर खड़े हो गए, झरना इतना घेरा था की कोई पहाड़ भी उसमे गिरे तो ढूंढ़ने से न मिले, भौमिक जी अपने घुटनो पैर बैठ गए, उनकी आँखों में आंसू थे, आज उन्हें अपने जीवन में सब धुंधला दिख रहा था, कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था, बस 15 दिन साथ रहने से hi देव से उनका रिश्ता ितं अमजबुत हो गया था,

भौमिक जी जोर से चिलए devvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvv.
 
लो जी किसी तरह से हो गया ह लेकिन मैं इसमें कोई सुधर नहीं क्र पाई हु, कुछ जगह गलतिया होंगी तो माफ़ करना प्लस
 
पोस्ट करने के बाद भी मैं एडिट नहीं क्र प् रही हु
 
अपडेट-9


भौमिक जी जो कुछ बोल क्र गए थे उससे भवर सिंह का परिवार चुप चाप सुनकर खामोश बैठा हुआ था, उस शांति को काम्य ने भांग किया,

काम्य- ये सब भौमिक जी बकवास क्र रहे हैं, उन्हें कुछ नहीं पता, बस उस लड़के के मोह में आकर सब बोले जा रहे हैं, हमने कुछ गलत नहीं किया ह, उस लड़के और उसकी माँ ने अपराध किया ह और उसी की सजा उन्हें मिली ह, अमरावती और सौमित्र ने काम्य का समर्थन किया, भवर सिंह चुप बैठा रहा, लेकिन राजगुरु के चेरे पैर दर और तकलीफ दिख रही थी,

रात में राजगुरु भौमिक जी के पास गए, लेकिन भोमिकजी घर नहीं आये थे, राजगुरु परेशां हो गए,

वही महल में जश्न मनाया जा रहा था, सूरज और अभिजीत ने आयाशी के लिए लड़किया बुवाई हुई थी, वो दोनों मदिरा और लड़की का आनंद उठा रहे थे, वही ज्वाला एक जानवर को काट रहा था और उस पैर अपनी हार का गुस्सा निकल रहा था, अमरावती सौमित्र और काम्य एक साथ बैठी थी,

सौमित्र - वो चला गया लेकिन दोनों माँ बेटे थे तो एक करिश्मा hi,

अमरावती - करिश्मा कैसे

सौमित्र- निहारिका का शरीर सच में बहुत खूब सूरत था, देखने वालो के खड़े हो गए होंगे, पूरी परजा को मजा आ गया होगा, कसम से बड़ी फुर्सत से बनाया उसे उप्पेर वाले ने, और वो देवदूत तुमने उसका हथियार देखा था, मुरझाया हुआ भी कितना बड़ा और मोटा था, मुझे नहीं लगता इतना बड़ा किसी का होता होगा, शरीर तो साधारण सा hi था लेकिन उसका लिंग सच में अजूबा था,

काम्य- तुम उसका लिंग देख रही थी

सौमित्र- अरे दीदी नजर चली गई थी बस

अमरावती- बोल तो सच hi रही ह, था तो बहुत बड़ा उसका, बेचारा कहा कहा भटक रहा होगा,

काम्य- वो इस दुनिया से जा चुक्का ह,

अमरावती- क्या कैसे

काम्य- उसे मरवा दिया गया ह, ये बात किसी को पता न चले, ये राज सबसे छुपा हुआ ह लेकिन महाराज ने उन दोनों माँ बेटो को मरवा दिया ह,

सौमित्र- क्या सच में, ये तो कमल हो गया, मतलब हमेशा के लिए हमारा रास्ता साफ़ हो गया उन माँ बेटो से,

काम्य- है बिलकुल,

अमरावती- उस लड़की और उसके परिवार का क्या हुआ

काम्य- वो परिवार लापता ह, न जाने कहा चले गए सब, और वो लड़की भी गायब ह,

सौमित्र- कही आपने hi तो गायब नहीं करवा दिया उन्हें,

काम्य- नहीं इसमें मेरा हाथ नहीं ह, लेकिन उनका मिलना बहुत जरुरी ह, एक तो इस भौमिक ने आकर सब गड़बड़ क्र दी थी, वो भला हो महाराज ने उसकी बात पैर धयान नहीं दिया वर्ण हमारे सर पैर भी तलवार लटकी मिलती,

अमरावती- लेकिन महारज ने उस पैर धयान क्यों नहीं दिया,

सौमित्र- महाराज गुस्से में रहे होंगे, इसलिए ध्यान नहीं दिया, खैर अब हमे जश्न मानना चाहिए,

तीनो बैठ क्र शराब पिने लगी,

वही चारो बहन एक कमरे बैठी थी और सभी उदास थी,

अमिता- मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा निहारिका माँ ऐसा कर सकती हैं,

सोमिया- हम देव की तारीफ कर रहे थे देखो उसने क्या किया,

अक्षरा- देव ऐसा नहीं कर सकता, आपने सुना न भौमिक जी ने क्या कहा था,

अमिता- लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी,

अक्षरा- सुनी क्यों नहीं ये बड़ी अजीब बात ह, महाराज के समाने इतनी बड़ी बात कही गई और उन्होंने उस पैर धयान नहीं दिया,

सोमिया- रीवा तुम कुछ नहीं बोल रही,

रीवा- क्या बोलू, जिसकी माँ और भाई पैर दुराचार का इल्जाम लगा हो और राजय से बहार क्र दिया गया हो, वो क्या बोलेगी, मैं तो शर्म से मर जाना चाहती हु, लेकिन मुझे यकीन नहीं ह मेरी माँ ऐसा करेगी, और देव का भी यकीन नहीं हो रहा, वो ऐसा नहीं कर सकता,

अमिता- हवस कुछ भी करवा सकती ह रीवा,

अक्षरा- जो हवस हम लोगो के भाइयो में दिखती ह वही हवस न, क्या तुमने अपने अपने सेज भाइयो में वो हवस देखि ह, कभी उनकी हवस के लिए तो तुम लोगो में से कोई नहीं बोलै, और जो इंसान दुनिया की हर औरत लड़की को सम्मान की नजर से देखता था उसके अंदर हवस दिख रही ह, इस राजय में कितनी hi लड़किया हैं जो राजकुमारों के साथ सम्भोग करने के लिए मरी जा रही होती हैं, फिर भी उसने कभी किसी को नजर उठा कर नहीं देखा, जब सूरज और अभिजीत ने उस लड़की के साथ दुराचार किया था तब केवल देव था उनका विरोध करने के लिए, उस समय आप सब में से कोई नहीं बोलै की हमारे भाइयो में हवस ह, उस बेचारी लड़की के साथ गलत हुआ, सिर्फ देव उसके लिए लड़ा और उसी की सजा उसे मिली थी, तब महाराज ने ये सजा सूरज और अभिजीत को क्यों नहीं दी, आज उस मस्सों लड़के को ऐसी सजा दी, और निहारिका माँ, इस राजय में एक से एक सूंदर मर्द हैं उनका मन तब तो नहीं भटका, आज भटेगा वो भी उस प्रताप सिंह के लिए, जिसका चेहरा भी कोई देखना नहीं चाहता, ये सब साजिश ह ये सब उन दोनों को फ़साने की साजिश ह,

अक्षरा की बात से वह ख़ामोशी च गई, सबको याद आया की कुछ समय पहले hi सूरज और अभिजीत ने एक लड़की के साथ ये सब किया था और काम्य ने सब कुछ वही ख़तम करवा दिया था, उन्हें कुछ भी नहीं बोलै गया, जब ये बात हम तक पहुंच सकती ह तो क्या महाराज तक नहीं पहुंची होगी,

सोमिया- सही बोल रही ह अक्षरा,

अमिता- हम उसके बारे इतना क्यों सोच रहे हैं, ये हमारा काम नहीं ह

रीवा का रोना निकल गया वो वह से उठी और बहार भाग गई,

सोमिया- कैसी बात करती ह अमिता तू, जो भी हुआ हो सही या गलत लेकिन रीवा को तो तकलीफ होगी न उसकी माँ और भाई हैं वो,

अमिता- मैंने सोचा hi नहीं, रीवा हमेशा हमारे साथ रहती ह न तो याद hi नहीं रहा इसका कोई रिश्ता भी ह उनसे,

अक्षरा गुस्से में अमिता को देखती हुई रीवा के पीछे चली गई,

अगले कुछ दिन ऐसे hi काट गए, महल में सनता था, भवर सिंह अपने कमरे से बहार नहीं निकला था, वही राजगुरु भौमिक जी को ढूंढ ढूंढ क्र परेशां हो चुके थे, वो घर नहीं लोटे थे, बाकि परजा में बस देव और निहारिका की बात थे, शुरू में तो उनके कर्मो की बुराई हो रही थी, लेकिन कुछ hi समय में वो बाते उनके शरीर पैर पहुंच गई, राजय के हर मर्द की जुबान पैर निहारिका के शरीर की तारीफ थी, वही जिन जिन औरतो ने देव के लुंड को देखा था वो सब चुप चुप क्र बस उसके बारे में hi बाते कर रही थी, किसी को फरक नहीं पड़ा था उनके साथ क्या हुआ, सही हुआ या गलत वो जिन्दा हैं या मर गए, किसी को फरक नहीं पड़ता था,

राजय के कुछ आयाश लोग, जो वेश्या वर्ती करवाते थे, या लूट पैट पार्टी थे, ऐसे लोगो के कुछ समूह निहारिका को ढूढ़ने निकल पड़े, उनके लिए निहारिका सोने का अंडा देने वाली मुर्गी थी, अगर वो मिल गई तो वो उनकी कमाई का साधन बन सकती थी, वो लोग राजय के आस पास के इलाको में ढूंढ रहे थे, लेकिन किसी को कोई जानकरी नहीं मिली, उनमे से एक लुटेरे ने राजा के सैनिको से अपनी जानकरी बधाई और उनसे खबर निकलवाई, तो पता चला आखरी बार देव और निहारिका को पहाड़ी पैर लेजाया गया था, तो वो लोग उस पहाड़ी पैर ढूंढ़ने लगे, इस खोजबीन में काफी दिन गुजर गए,

और महल का जीवन फिर से पहले जैसे चलने लगा, इन बीते दिनों में सूरज ज्वाला और अभिजीत पूरी आयाशी में लगे थे, वही काम्य अपने भाई से मिलने के लिए रोज उसके कमरे के बहार घूमती रहती थी, सौमित्र की कामुकता उसे परेशां कर रही थी, और अमरावती अपना जश्न मन रही थी राजय के सेना पति के साथ, उसने सेना पति को वादा किया था, प्रतियोगिता के बारे बताने के लिए उसे इनाम देने का और वो इनाम था अमरावती की छूट, राजगुरु और भवर सिंह के व्यस्त होने की वजह से सेनापति को पूरी आजादी मिल गई और उस आजादी का फायदा अमरावती और सेनापति खूब अच्छे से उठा रहे थे,

उधर सौमित्र पूरा दिन अपने कमरे में नंगी घूमती रहती उसके बदन की गर्मी उससे बर्दास्त नहीं हो रही थी, भवर सिंह उसके पास थे नहीं और सौमित्र बिना सम्भोग किये रह नहीं सकती थी,

इस बिच सात्विक की विद्या पूरी हो चुकी थी, और सात्विक इतना विद्वान बन गया की वो कुछ भी करने की शक्ति रखता था, उसे दक्षिण दिशा की तरफ निकलना था लेकिन उससे पहले वो अपने घर अपने भाइयो से मिलने आया, और जब सात्विक घर आया तो उसे भौमिक जी के बारे में पता चला, सात्विक और भौमिक में काफी प्रेम था, सात्विक को बड़ा दुःख हुआ,

राजगुरु- सात्विक तुम कहा चले गए थे, मैं कितना अकेला हो गया था, तुम भी चले गए थे और अब भौमिक भी चला गया,

सात्विक- भैया मैं आ गया हु न अब सब ठीक क्र दूंगा, आप चिंता मत कीजिये और आपके महाराज जो चाहते हैं मैं उसका हल भी लेकर आया हु,

राजगुरु- क्या सच, क्या ऐसा हो सकता ह,

सात्विक- मैं ऐसी विद्याये सिख क्र आया हु जो कुछ भी कर सकती हैं, लेकिन पहले मुझे दक्षिण दिशा की तरफ जाना ह, वह कुछ ऐसा ह जो हमे सफलता दे सकता ह, लेकिन मैं पहले भौमिक को ढूंढूंगा उसके बाद उधर जाऊंगा,

राजगुरु- कहा धुंडु उसे, मैं उसे कही नहीं ढूंढ पाया

सात्विक- मैं ढूंढ लूंगा, मुझे एक हवन करना होगा

राजगुरु- जो करना ह करो,

सात्विक ने राजगुरु की आज्ञा ली और अपने घर आकर एक तांत्रिक हवन करने बैठ गया, इस हवन से वो किसी भी इंसान को ढूंढ सकता था, तो उसने भौमिक जी को ढूंढ लिया जो अपने धयान में एक पहाड़ी पैर पेड के निचे बैठे हुए थे,

सात्विक ने राजगुरु को खबर भिजवाई की भौमिक जी मिल गए हैं वो उन्हें लेने जा रहा ह, सात्विक भौमिक जी के पास चल दिया,

इधर भवनपुरा में प्रताप सिंह ने हुम्ला कर दिया, उसके अंदर निहारिका को खोने का ऐसा दुःख था जिसे वो बर्दास्त नहीं कर प् रहा था, उसे वडा किया गया था की निहारिका उसकी हो जाएगी, लेकिन निहारिका मर गई, प्रताप सिंह ने अपनी बदनामी करवाई लेकिन निहारिका फिर भी नहीं मिली, प्रताप सिंह इसे अपने साथ धोखा मान रहा था और धोखे का बदला लेने के लिए वो चल दिया हुम्ला करने, उसकी सेना राजय के बहार आ चुकी थी, भवर सिंह को जब पता चला तो उसकी चिंताए बढ़ गई, प्रताप सिंह शक्तिशाली राजा था, उसके पास एक बड़ी सेना थी,

भवर सिंह के कमरे तक ये खबर पहुंचे गई, सेनापति जो अब तक अमरावती की छूट में घुसा पड़ा था वो अपनी सेना को तैयार करने लगा, कुछ hi देर में सभा में सभी जरुरी लोग खड़े थे,

भवर सिंह- ये प्रताप सिंह हम पैर क्यों हुम्ला कर रहा ह, हमने इसे यहाँ से जिन्दा भेज दिया, इस अहसासन का बदला वो युद्ध करके उतरेगा,

राजगुरु- महाराज हमे उससे बात करनी चाहिए, वो हमारा मित्र राजय ह, ऐसे हुम्ला क्यों कर रहा ह,

सेनापति- नहीं हमे हुम्ला करना चाहिए,

राजगुरु- उस सेना पैर हुम्ला करना इतना आसान नहीं ह, वो पूरी तैयारी के साथ आया ह और हमारे योद्धाओ ने काफी समय से युद्ध नहीं लड़ा ह, पूरी सेना को तैयार करने में समय लग जायेगा,

भवर सिंह- आप hi बताइये हमे क्या करना चाहिए,

राजगुरु- हमे उससे बात करनी चाहिए और जाना छाइये वो क्या चाहता ह, क्योकि हुम्ला करने से उसे भी कोई फायदा नहीं होगा, ये बा तवो भी जनता ह वो हमे हरा नहीं सकता, लेकिन नुकसान बहुत कर सकता ह, और इसमें उसका भी नुकसान होगा, और अगर बात चित करने से नहीं मंटा ह तो सेना तो ह hi युद्ध के लिए, जब हम उससे बायचित करते हैं तब तक सेनापति सेना को तैयार करेंगे इससे हमे समय भी मिल जायेगा,

भवर सिंह- ये सही ह, आप अपना दूत भेजिए वह,

काम्य- मैं जाउंगी दूत बनकर

भवर सिंह- नहीं ये नहीं हो सकता हम तुम्हे उस जानवर के पास नहीं भेज सकते,

काम्य- आप मुझ पैर बहरोसा रखिये, मैं hi हु जो बिगड़ती हुई बात को सम्हाल सकती हु,

भवर सिंह- नहीं तुम नहीं जाओगी, राजगुरु जायेंगे

राजगुरु को प्रताप सिंह के पास भेजा गया दूत बना कर,

राजगुरु प्रताप सिंह के सामने खड़े थे,

प्रताप सिंह- भवर सिंह ने आपको भेजा ह शांति के लिए, लेकिन जो मुझे चाहिए उसके बिना शांति नहीं होगी,

राजगुरु- क्या चाहिए तुम्हे,

प्रताप सिंह- जो मुझे चाहिए था वो तो तुम लोगो ने पहले hi ख़तम क्र दिया, मेरा अपमान हुआ ह इस महल में, मैं इस महल को तबाह क्र दूंगा,

राजगुरु- ये तो आप भी जानते हैं महाराज आप हमसे जीत नहीं सकते,

प्रताप सिंह- लेकिन नुकसान तो इतना बड़ा कर सकता हु के ये राजय कभी उभर नहीं पायेगा,

राजगुरु- इससे आपका भी नुकसान होगा, ऐसा रास्ता निकाइये जिससे दोनों को फायदा हो नुकसान नहीं,

प्रताप सिंह- भवर सिंह से कहना मुझे उसकी बेटियों से शादी करनी ह,

राजगुरु – बेटियों से, या किसी एक बेटी से,

प्रताप सिंह- नहीं दो बेटियों से,

राजगुरु- और वो कोण कोण हैं,

प्रताप सिंह- निहारिका की परछाई रीवा और दूसरी जिसे भवर सिंह चाहे,

राजगुरु- ये गलत ह, एक राजकुमारी से विवाह मन जा सकता ह लेकिन दो नहीं,

प्रताप सिंह- मेरी ये hi शरत ह, वर्ण युद्ध झेलो और तुम्हारी परजा को ये भी बता दूंगा की कैसे उस निहारिका को ख़तम किया था तुम सबने,

राजगुरु के चेरे पैर चिंता आ गई,

राजगुरु- ठीक ह मैं महाराज से बात करता हु,

राजगुरु ने वापस आकर भवर सिंह को सब बताया, अब भवर सिंह के पास कोई रास्ता नहीं था, लेकिन रीवा को तो आदेश देना आसान था क्योकि अब उसके लिए बोलने वाला कोई नहीं था वो तो खैर पहले भी नहीं था, लेकिन अब तो वो अनाथ जैसी थी, लेकिन बाकि तीनो राजकुमारियों में से किसे तैयार किया जाये, कोण प्रताप सिंह से शादी करेगी, क्योकि तीनो की माओ को मानना मुश्किल था,

लेकिन ये रास्ता खुद काम्य ने आसान क्र दिया उसने आगे बढ़ क्र अपनी बेटी का नाम बोल दिया, अक्षरा को जब पता चला उसकी माँ ने उसका नाम प्रताप सिंह से शादी करने के लिए बोलै ह तो उसे यकीन hi नहीं हुआ, इधर रीवा जो अपनी माँ और भाई को खो क्र उस प्रताप सिंह से बची थी, अब फिर उसी कैद में जाने वाली थी,

भवर सिंह ने प्रताप सिंह को सन्देश भिजवा दिया की वो शादी के लिए तैयार ह, लेकिन शादी की तरीक वो खुद तय करेंगे,

प्रताप सिंह खुश हो गया,

इधर सात्विक भौमिक जी को ढूंढता हुआ पहुंच गया उस जगह जहा भौमिक जी धयान में बैठे हुए थे, भौमिक जी को देख क्र सात्विक की आँखों में नाम आ गाइट hi, भौमिक जी की हालत hi ऐसी थी, जब से देव मारा था भौमिक जी ने कुछ नहीं खाया पिया था वो भूके प्यासे hi धयान में लगे हुए थे,

सात्विक भौमिक जी के पास बैठ गया,

सात्विक- भैया

सात्विक की आवाज सुनकर भौमिक जी ने आँखे खोल दी,

भोनिक जी- सात्विक मेरे भाई तू आ गया, कहा चला गया था तू, मैं कितना अकेला पद गया था,

सात्विक- तुमने ये क्या हालत बना राखी ह अपनी,

भौमिक जी- मैं अपनी जिमेदारियो में नाकाम रहा,

भौमिक जी ने सात्विक को साडी घटनाये कह सुनाई,

सात्विक- इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं ह, जो होना ह वो होकर hi रहेगा, तुम एक लड़के के लिए इतना परेशां हो और वही मैंने इतनी बड़ी उपलब्धि प् ली ह, मैंने ऐसी ऐसी विद्याये प्राप्त क्र ली हैं जिससे मैं कुछ भी कर सकता हु, उन्ही विद्याओ की वजह से मैं आपको ढूंढ पाया,

भौमिक जी- ये विद्याये उस राजा को अमरता देने के लिए हैं न जिसने ये सब किया ह, वो अत्याचारी राजा और उसका परिवार, उनके लिए तुम ये सब कर रहे हो,

सात्विक- नहीं भौमिक मैं तो ये सब भैया के कहने पैर क्र रहा हु, और अब खुद के लिए, हमारे लिए, मुझे कुछ ऐसी बाते पता चली हैं जिससे सब बदल जायेगा, मैं दक्षिण दिशा की तरफ जा रहा हु, जब वह से वापस आऊंगा तो देखना मैं सब बदल दूंगा, इस संसार में मेरा नाम विख्यात होगा,

भौमिक जी- मुझे बड़ी ख़ुशी होगी, तुमने किसी को ढूंढ़ने की विद्या पाई ह, क्या तुम मेरा एक काम कर सकते हो,

सात्विक- बोलो

भौमिक- तुम देव का पता लगा सकते हो वो कहा ह,

सात्विक- ये विद्या मरे हुआ का पता नहीं लगा सकती,

भौमिक- मेरा दिल कहता ह वो जिन्दा ह, तुम कोशिश तो करो,

सात्विक- ठीक ह तुम्हारे लिए जरूर करूँगा,

सात्विक ने वही पैर आसान लगाया और धयान में बैठ गया, भौमिक जी को कुछ सामान मंगवाया और हवन करने लगा,

काफी म्हणत करने के बाद भी वो देव को नहीं ढूंढ पाया,

भौमिक जी- क्या हुआ वो मिले

सात्विक- कुछ ह जो मुझे उनके पास तक जाने से रोक रहा ह, एक तेज रौशनी ह जो मुझे आगे देखने नहीं दे रही, ये कहना मुश्किल ह की वो जिन्दा ह या मर गए, क्योकि ये रौशनी उप्पेर वाले की ताकत भी हो सकती ह जो आत्मा का पता नहीं लगने देती, जो आत्माये मोक्ष प् जाती हैं उनके बारे में जान पाना नामुमकिन होता ह, या तो वो मर चुके हैं और मोक्ष प् चुके हैं,

सात्विक की बात से भौमिक जी का दिल रो पड़ा वो हताश हो गए, और जमीन पैर बैठ गए,

सात्विक- भाई आप इतने बड़े ज्ञानी हैं, किसी के जाने पैर ऐसे दुःख मन रहे हैं, इतना तो कोई अपनी संतान के लिए भी नहीं तड़पता, आप अपने परिवार को छोड़ क्र यहाँ भूके प्यासे दुःख मन रहे हैं वो भी एक अनजान राजकुमार का, ये अच्छे ज्ञानी की पहचान नहीं ह,

भौमिक जी- मैं नहीं जनता मेरा क्या रिश्ता ह उससे लेकिन ऐसा लगता ह बस वही अपना था मेरे लिए, उसके जैसी अच्छे मैंने किसी में नहीं देखि,

सात्विक- आप घर चलिए और अपने परिवार के बारे में सोचिये, बाकि सब उप्पेर वाले पैर छोड़ दीजिये, मैं अपनी मंजिल की तरफ बढ़ता हु, वापस आकर देखता हु क्या कर सकता हु आपके लिए,

सात्विक भौमिक जी को घर ले आया, और खुद अपनी मंजिल की तरफ निकल गया,

इधर महल में शादी की तैयारी शुरू हो गई, प्रताप सिंह संतोष तो नहीं था लेकिन उसे सकूं था निहारिका न सही उसकी बेटी तो उसके पास आ रही ह, भवर सिंह ने 15 दिन बाद शादी का समय रख दिया,

इधर सूरज और अभिजीत सुगंधा और उसके परिवार को ढूंढ रहे थे, कस्तूरी भी गायब थी, सूरज सिंह सुगंधा को बर्बाद करना चाहता था, क्योकि उसने भीड़ में से देव की मदद की थी, ये बात सूरज से बर्दास्त नहीं हो रही थी, वही ज्वाला युवराज बनने के लिए खुद को मजबूत क्र रहा था,

रीवा और अक्षरा अपनी किस्मत पैर रो रही थी लेकिन उन्हें बचने वाला कोई नहीं था,

अमरावती और सौमित्र एक बात नहीं समझ प् रही थी की काम्य अपनी बेटी की शादी प्रताप सिंह से करने के लिए क्यों मान गई, अक्षरा तो उसे सबसे ज्यादा प्यारी थी, फिर उस जानवर के पास क्यों भेज रही ह, उसकी कोई चल तो नहीं इस सब में,

क्योकि राजमहलों में कोई भी बिना कारन कुछ नहीं करता, और काम्य जैसी औरत इतना बड़ा कदम क्यों उठाएगी, और प्रताप सिंह कोई जवान लड़का भी नहीं था जिसके साथ अक्षरा का कोई भीतर भविष्य हो, वो भवर सिंह से भी बड़ा था उम्र में,

वही भवर सिंह को जो सकूं मिलना छाइये था वोन hi मिल रहा था, उसकी परेशानिया ख़तम hi नहीं हो रही थी, उसके लिए देव परेशानी थी लेकिन अब तो देव भी नहीं था, वो कभी समझ hi नहीं पाया की असली परेशानी उसकी महत्व कंषा ह, वो सब कुछ पाना चाहता था, अब उसका मन इस एक राजय से संतुष्ट नहीं हो रहा था, उसे और बड़ा राजा बनना था, जिसमे प्रताप सिंह सबसे बड़ा खतरा था, और वो खतरा अब उसके घर ताका ा चुक्का था, अपनी बेटियों का सोडा करके उसने इसका थोड़ अहल तो निकलना चाहा लेकिन प्रताप सिंह पैर विश्वास करना नमूमिक था, क्योकि प्रताप सिंह को भी बड़ा राजा बनना था, दूसरे राजाओ पैर भी राज करना था,

महल को सजा दिया गया था शादी के लिए, भवर सिंह की पत्नी और बेटे को मरे हुए अभी बस महीना भर हुआ था लेकिन उसे उनका कोई दुःख नहीं था, पुरे राजय में hi कोई दुःख नहीं था, कोई दुखी था तो वो थी रीवा और अक्षरा और एक और लड़की जो जंगलो में एक झोपडी में बैठी हुई आंसू बहा रही थी, उसके सर पैर एक आदमी ने हाथ फिराया- मत रो सुगंधा, मत रो

ये थी सुगंधा और आचार्य जी,

सुगंधा- पिता जी वो ऐसा नहीं ह, उसके साथ गलत हुआ ह,

आचार्य जी- मुझे भी यकीन नहीं होता वो ऐसा करेगा, लेकिन कस्तूरी झूट क्यों बोलेगी,

सुगंधा- अगर वो झूट नहीं बोल रही थी तो उसने आपको या घर में किसी को क्यों कुछ नहीं बताया, और वो ह कहा, उस दिन से गायब क्यों ह, और उसके साथ माँ भी गायब ह,

आचार्य जी- मैं खुद परेशां हु, लेकिन धुन्धु भी तो कहा, हम दोनों खुद समाज की नजरो से छिपे हुए यहाँ जी रहे हैं, हमे जरूर राजा के लोग दूध रहे होंगे, हमारी वजह से उनका बीटा और पत्नी को महल से निकल दिया गया,

सुगंधा- वो लोग कभी देव को न प्यार देते थे न hi सम्मान, उन्हें फरक नहीं पड़ता देव के साथ क्या हुआ, और आप कभी उस पैर शक मत करना, सूर्य अपना रास्ता बदल सकता ह लेकिन देव ऐसा कुछ नहीं कर सकता, एक बार ये कस्तूरी मिल जाये तब सच का पता चले,

शादी का समय नजदीक आता जा रहा था, प्रताप सिंह ने एक सेना तैयार की हुई थी जिसमे 500 सैनिको को अलग से तैयार किया गया था, जो इस काबिल थे की वो 500 सैनिक 10000 की सेना को आराम से मार गिराए, बहुत hi खूंखार थे वो,

शादी के दो दिन पहले hi प्रताप सिंह की बारात भवर सिंह के महल में आ चुकी थी, और प्रताप सिंह उन सैनिको को बाराती बना क्र महल के अंदर ले आया था, उसे अंदर डार्ट है कही भवर सिंह धोखा न कर दे, पुरे राजय में खुशिया मनाई जा रही थी, प्रताप सिंह के महल में आते hi सबसे पहले काम्य ने उसका स्वागत किया, अमरावती और सौमित्र भी खुश थी, क्योकि उनकी बेतिया बच गाइट hi, वही सूरज और अभिजीत भी प्रताप सिंह के स्वागत में लगे हुए थे, लेकिन ज्वाला वह से गायब था,

रात में काम्य प्रताप सिंह के पास पहुंची अकेले में,

प्रताप सिंह- आओ आओ काम्य जी, आपको देख क्र हमारा दिल खुश हो जाता ह,

काम्य- इसीलिए अपनी बेटी को भेज रही हु, ताकि आप उसे देख क्र खुश होते रहे,

प्रताप सिंह- हमारी इच्छा तो आपको ले जाने किट hi, लेकिन लगता ह अब आपकी बेटी से hi सबर करना पड़ेगा,

काम्य- लगता ह आपको कुँअरि लड़कियों की जगह हम जैसे भरे बदन की औरतो की चाहत ह,

प्रताप सिंह- सभी औरतो किन hi, आपकी चाहत ह बस

काम्य- और निहारिका की, उसकी चाहत नहीं थी,

प्रताप सिंह- क्यों जले पैर नमक छिड़क रही हो काम्य जी, उस औरत को पाने के लिए मैं दुबारा जनम भी ले सकता हु, मुझे हैरत ह की इतने वर्षो तक वो औरत मेरी नजरो के सामने क्यों नहीं आई, कसम पैदा करने वाले की उसे पाने के लिए मैं पूरा राजय उजाड़ देता,

काम्य- हहहहह शायद इसीलिए उप्पेर वाले ने उसे आपसे बचा क्र रखा था,

प्रताप सिंह- खैर उसकी बेटी भी उससे कुछ काम नहीं ह, लेकिन निहारिका होती तो कुछ अलग hi होता,

काम्य- निहारिका की बेटी और मेरी बेटी दोनों से आपकी शादी हो रही ह, लेकिन मेरी बेटी की तुलना उसके साथ मत करना, वाओ अहा रानी की तरह रही चाहिए, और वो रीवा नौकरानी की तरह,

प्रताप सिंह- अच्छा आप इसलिए यहाँ आई हो, आप जानती हो मेरी पहले से 4 रनिया ह, जिनमे से 2 तो काफी उम्र की हो चुकी हैं, फिर भी रनिया तो वही हैं, उनके बराबर का सम्मान तो इन दोनों को hi नहीं मिलेगा, उन रानियों से अलग भी न जाने कितनी hi राजकुमारी मेरी गुलाम हैं, मेरी चारो रानियों से 10 बच्चे हैं, और नाजायज कितने हैं ये तो मुझे गिनती भी नहीं ह, मेरे अंदर इतना वीर्य भरा हुआ की मन करता ह पुरे राजय की औरतो को अपने बच्चो की माँ बना दू, अब ये दोनों भी मेरे लुंड की सवारी करेंगी, और मेरी औलाद पैदा करेंगी, इनके बच्चे बड़े होकर मेरे राजय की सेवा करेंगे, फिर भी मैं आपकी बात का धयान रखूँगा, लेकिन उसमे मेरा क्या फायदा होगा,

काम्य- क्या चाहिए आपको



प्रताप सिंह ने मुस्कुरा कर काम्य को देखा,
 
अपडेट-10






भवर सिंह राजगुरु के साथ बैठा हुआ था,

भवर सिंह- राजगुरु हमने जो कार्य आपको दिया था उसमे कुछ सफलता मिली क्या,

राजगुरु- महाराज मेरा भाई सात्विक उसी में लगा हुआ ह, उसने मुझे बताया ह की वो अपनी मंजिल के बहुत करीब ह, उसे कुछ जानकारी मिली ह जिससे वो ये सब कर सकता ह

भवर सिंह- बहुत बढ़िया, उससे कहो जितना जल्दी हो सके ये काम करे,

राजगुरु- महाराज फ़िलहाल तो हमे इस शादी पैर धयान देना चाहिए, आपने न जाने क्यों ये शादी इसी समय राखी ह, मैंने आपको कहा था की ये समय ठीक नहीं ह, मुझे कुछ विनाश के संकेत दिख रहे हैं,

भवर सिंह- विनाश तो उस प्रताप सिंह का होगा, हमे डरने की जरुरत नहीं ह,

राजगुरु- ये आप कैसे कह सकते हैं,

भवर सिंह- ये hi वो समय ह राजगुरु जब पूरा भारत वर्ष हमारे राजय की ताकत को देखेगा, तुम भविष्य देखते हो, लेकिन हमने इस राजय का भविष्य उस समय दिखवा दिया था जब हम गद्दी पैर भी नहीं बैठे थे, ये hi वो समय ह जब ये राजय अपनी असली ताकत में होगा, मुझे उम्मीद ह तुम्हारा भाई जल्दी hi सफल होकर आएगा और हमे सबसे शक्ति शैली और अमर बना देगा फिर हम अपनी विजय यात्रा पैर निकलेंगे और सभी को जीत लेंगे,

राजगुरु चुप हो गए, लेकिन उनके मन में एक सवाल उठ रहा था की इस राजय की ताकत दिखेगी उसमे भवर सिंह की वजह से या किसी और की वजह से ये समझ के बहार था,

इधर रीवा अक्षरा अमिता और सोमिया बैठी हूत hi,

अमिता- यार इस प्रताप सिंह के कितने बच्चे हैं, जिसे देखो वो खुद को प्रताप सिंह का बीटा या बेटी बोलता ह,

सोमिया- मैंने माँ से सुना था इसके 10 बच्ची हैं और उससे ज्यादा नाजायज हैं, इसकी 4 रनिया हैं, अब दो और कर रहा ह, सुना ह इसका मन हवस से कभी नहीं भरता, और सबसे खास बात इसकी बस 1 बेटी ह वो भी इसकी तीसरी रानी से, सुना ह वो बड़ी खूंखार ह प्रताप सिंह उसी से थोड़ा सा डरता ह वार्ना ये किसी औरत की इज्जत नहीं करता, इसने बाकि रानियों या रखैलों से बेटो के अलावा जो बेतिया हुई थी उन्हें पैदा होते hi मरवा दिया, इसका बड़ा बीटा hi युवराज ह बाकि सब तो बस नाम के राजकुमार हैं, और सुना ह इसका बीटा इससे भी बड़ा हैवान और हवसी ह,

अक्षरा- हम लड़किया बस इसीलिए तो होती हैं, मेरा तो मन करता ह यहाँ से भाग जाऊ, मुझे किसी की गुलाम नहीं बनना,

रीवा- कोई फायदा नहीं ह, भाग क्र जायेंगे कहा, जब परिवार hi अपना न हो तो संसार में कोई अपना नहीं होता, ये hi हमारी नियति ह,

सोमिया- नियति बदल जाती ह, न जाने किसकी किस्मत में क्या लिखा हो, जैसे देव और निहारिका माँ के साथ हुआ, किसने सोचा था देव वो प्रतियोगिता जीत सकता ह, और वो जीत गया फिर भी अगले hi पल वो राजय से बहार क्र दिया गया, और मैंने तो ये भी सुना ह की देव और निहारिका माँ को मरवा दिया गया ह,

ये बात सुनते hi रीवा की साँस सी hi रुक गई,

अमिता- ये कहा सुना

सोमिया- काम्य बुआ और माँ बात कर रहे थे, उन्हें सैनिक राजय से बहार ले गए और मार दिया,

रीवा जोर से चीखी – nhiiiiiiiiiiiii

अमिता और सोमिया ने रीवा को बहो में भर लिया,

सोमिया- मुझे माफ़ करना मैं ये बताना नहीं छाती थी, लेकिन मेरे जज्बात अब नहीं रुक रहे थे, जब तक वो जिन्दा थे हमने कभी उनका सम्मान नहीं किया, आज वो इस दुनिया में नहीं ह, अब अहसास होता ह की उनसे अच्छा तो कोई और था hi नहीं, और भौमिक जी ने भी बताया था वो लड़की कस्तूरी खुद देव के पास आई थी,

अक्षरा- ये सब इस महल के लोगो की साजिश ह, मैं ये तो नहीं जानती की इसमें कोण कोण शामिल हैं, लेकिन इतना पता ह की मेरी माँ इसमें जरूर शामिल ह,

अमिता- ये बात अपने अंदर hi रखना अक्षरा, दीवारों के भी कान होते हैं, मुझे अब एक बात समझ आ गई ह की हमारे अपने ऐसे ह की वो खुद को बचने के लिए किसी की भी बलि दे सकते हैं,

ऐसे hi रात गुजर गई, और अगला दिन भी ऐसे hi गुजर गया, सब तैयारियों में लगे हुए थे, महल में नाचना गण होता रहा, और जल्दी hi शादी का दिन भी आ गया, रीवा और अक्षरा को दुल्हन बना दिया गया था, दोनों hi खूबसूरती में एक से बेहद एक एक थी, लेकिन चेरे पैर ख़ुशी नहीं थी, एक उदासी चाय हुई थी, लेकिन प्रताप सिंह ख़ुशी से फुला नहीं समां रहा था,

मंडप सज चुक्का था दुल्हन मंडप में आ चुकी थी, फेरो की तैयारी शुरू हो चुकी थी तभी प्रताप सिंह उठ गया, सभी चौंक गए,

भवर सिंह- क्या हुआ प्रताप सिंह आप ऐसे क्यों खड़े हो गए,

प्रताप सिंह- भवर सिंह जी आपने हमारी साडी बात तो मान ली लेकिन हम एक बात बतानी भूल गए थे, अब याद आ गई ह तो सोचा शादी से पहले उसे भी बता दे,

राजगुरु- ऐसी क्या बात रह गई जो आपको अब याद आई ह, वो भी फेरो से पहले,

प्रताप सिंह- मैं तुम्हारी दो बेटियों से शादी कर रहा हु उसके बदले में भी तो कुछ छाइये मुझे,

भवर सिंह- ये क्या बोल रहे हो, ये शादी की शरत तुमने hi तो राखी थी,

प्रताप सिंह- शरत किसी ने भी राखी हो, जब शादी होती ह तो लड़की वाले राजा को कुछ तो देते हैं,

काम्य- क्या चाहिए आपको

प्रताप सिंह- बहुत ज्यादा नहीं बस 100 हठी, 500 घोड़े, और उनके सैनिक और बस थोड़े से हिरे जवाहरात,

भवर सिंह- वो सब तो हम अपनी बेटियों की शादी में देते hi,

प्रताप सिंह- जो आप दे रहे हैं ये उससे अलग ह और उसके अलावा

भवर सिंह- उसके अलावा?

प्रताप सिंह- मेरे राजय के पास जुड़े हुए आपके राजय के 100 गाओं,

प्रताप सिंह की बात से वह सभी चौंक गए,

भवर सिंह- ये सब क्या बकवास ह, हम अपने राजय का हिस्सा कसिए दे सकते हैं और वैसे भी वो हिस्सा सबसे उपजाऊ ह हमारे लिए,

प्रताप सिंह- यही शरत ह हमारी, वर्ण ये शादी नहीं होगी,

भवर सिंह- तो मत करो

प्रताप सिंह- अगर फेरो पैर से तुम्हारी बेतिया उठ गई तो पुरे छत्रिया समाज में कोई इनसे शादी नहीं करेगा, ये साडी जिंदगी कुँअरि रहेंगी,

भवर सिंह- मेरी बेतिया कुँअरि रहेंगी लेकिन तुम यहाँ से वापस नहीं जा पाओगे,

प्रताप सिंह जोर से हँसा- हहहहहहहह

प्रताप सिंह- भवर सिंह तुम्हे क्या लगा, मैं यहाँ हु तो तुम मुझे कुछ भी कर सकते हो, मेरी सेना आज भी इस राजय को घेरे हुए खड़ी ह, और मेरे एक इशारे पैर अभी इसी समय यहाँ चारो तरफ खून भेना शुरू हो जायेगा, मेरे पीला हुए 500 खूंखार सैनिक यहाँ ह,

भवर सिंह- मैं तुझे जान से मार दूंगा,

प्रताप सिंह- कोशिश करके देख लो,

भवर सिंह ने संपत्ति को इशारा किया- सेनापति इसे बंदी बना लो,

सेनापति कुछ सेनिको के साथ आगे बढ़ा और तभी प्रताप सिंह ने अपना हाथ उठा कर इशारा किया और तभी वह चीख पुकार गूंजने लगी, प्रताप सिंह के सेनिको ने हुम्ला कर दिया, वो इतने ताकतवर थे की उनके समाने भवर सिंह के सैनिक बच्चे से लग रहे थे, प्रताप सिंह के सेनिको ने कत्लेआम मचा दिया था,

कुछ hi देर में प्रताप सिंह के सेनिको ने भवर सिंह और उसके परिवार को घेर लिया था,

प्रताप सिंह- ये तेरा राजय ह भवर सिंह लेकिन तू तेरे hi महल में मेरे सेनिको से घिरा हुआ खड़ा ह,

भवर सिंह- तुम यहाँ से बच क्र नहीं जा पाओगे,

प्रताप सिंह- कोण रोकेगा मुझे, तेरा पूरा परिवार मेरा बंदी ह, और इस राजय को मेरी सेना ने घेरा हुआ ह, जब राजा hi मेरा बंदी होगा तो ये पूरा राजय hi मेरा हो जायेगा, और अब मुझे शादी करने की क्या जरुरत ह तेरे परिवार की हर औरत मेरी रखैल बनेगी, सभी को नंगा घुमाऊंगा मैं,

भवर सिंह गुस्से में चीखता हुआ प्रताप सिंह की तरफ बढ़ा लेकिन प्रताप सिंह ने काम्य की गार्डन पैर तलवार रख दी,

भवर सिंह रुक गया,

प्रताप सिंह वैसे तेरी बहन भी किसी हसीना से काम नहीं ह, दिल करता ह इसी से शादी कर लू, न न शादी नहीं ये तो मेरी पालतू कुटिया बनेगी,

तभी पीछे से किसी के चीखने की आवाज आई,

राजगुरु- प्रताप सिंह हम यहाँ तुम्हारी कैद में हैं, और किसी को मत मारो, ये मार काट रोक दी,

प्रताप सिंह- अरे कोण ह जिसने मेरी आज्ञा के बिना किसी को मारा,

लेकिन प्रताप सिंह की सेना ने हुम्ला नहीं किया था, सभी सैनिक इधर उधर देखने लगे, तभी एक और चीख सुनाई दी, सबका धयान उधर गया, और देखा एक सैनिक हवा में उप्पेर उड़ रहा ह और फिर निचे जमीन में आकर गिरा, सब उधर देखने लगे, लेकिन आगे इतनी भीड़ थी की वह कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, और फिर सेनिको के छिलने की आवाज आने लगी, मारो मारो इधर से मारो उधर से मारो, पकड़ लो मर दो, उन आवाजों के बिच में अलग अलग सेनिको के चीखने की आवाज आ रही थी, सरे सैनिक उसी तरफ भागने लगे,

प्रताप सिंह- कोण ह किसने हुम्ला किया हम पैर, भवर सिंह रोक दे इस हमले को वर्ण तेरे परिवार को मार दूंगा,

भवर सिंह- मैं तो तुम्हारे समाने खड़ा हु मैं कहा से हुम्ला करवा सकता हु,

प्रताप सिंह जोर से चिलाय- रुक जाओ वर्ण इस परिवार को मार दूंगा,

प्रताप सिंह की बात का कोई असर नहीं था, अगर असर हुआ भी तो उल्टा hi क्योकि चीखे और तेज हो चुकी थी, जो सैनिक किसी भी सेना को मार गिराए वो मूली गाजर की तरह काट रहे थे,

तभी एक पेअर हवा में उड़ता हुआ आया और शादी के लिए बने हवन कुंड में आकर गिरा जिसे देख सब घबरा गए और तभी उसके पीछे किसी का हाथ किसा का पेअर तो किसी का सर आकर गिर रहा था, किसी का आधा धड़ हवा में उछाल हुआ दीखता, वह खड़े सभी दहशत में आ चुके थे, किसी की कुछ समझ में नहीं आ रहा था, प्रताप सिंह के लगभग 300 सैनिक मरे गए, बाकि सैनिक भी उसी तरफ भागे लेकिन वो सभी अपनी मोत की तरफ भाग रहे थे, और मोत भी ऐसी की किसी दुश्मन को भी न मिले, प्रताप सिंह थार थार कैंप रहा था, भवर सिंह खुश तो हो रहा था प्रताप सिंह के आदमियों को देख क्र लेकिन वह की मार काट देख उसकी भी रूह कैंप गई थी, और तभी एक सैनिक का आधा कटा हुआ शरीर भवर सिंह के पैरो में आकर गिरा, जिसे देख क्र सबकी सांसे रुक गई क्योकि उस शरीर को बिच में से चीरा हुआ था, और सबसे खास बात ये थी की उसके जो कपडे थे वो भवर सिंह के राजय के थे,

और जल्दी hi बाकी सेनिको के शरीर भी आने लगे, और जल्दी hi उनके साथ जो परजा के लोगो के शरीर के भाग भी आने लगे, अब दहशत वह खड़े सभी के दिलो में आ चुकी थी, क्योकि ये जो भी लोग थे वो सबको मार रहे थे, जो भी सामने आ रहा था,

भवर सिंह- सेनापति ये जिसकी भी सेना ह वो हमारी दोस्त नहीं ह, वो लोग हमारे भी आदमियों मार रहे हैं,

प्रताप सिंह- हम दोनों मिलकर इससे निजपत ते हैं उसके बाद खुद का फैसला कर लेंगे,

भवर सिंह को भी ये सही लगा उसने सेनापति को हमले का आदेश दे दिया, और खुद वह से भागने लगे, लेकिन वो ऐसी जगह खड़े थे जहा से सिर्फ एक hi रास्ता था निकलने का जिधर से हुम्ला हो रहा था, इसलिए भवर सिंह और प्रताप सिंह और दोनों का परिवार सेनिको के पीछे खड़े हो गए, और तभी एक सैनिक खून से लेथ पथ उनके पास आया और गिर पड़ा,

राजगुरु- सैनिक क्या हुआ, कोण हुम्ला क्र रहा ह, किसकी सेना ह ये, और महल तक कैसे आई,

सैनिक- ये सेना नहीं ह, ये सेना नहीं ह, वो वो अकेला अकेला

सैनिक इतना hi बोल पाया और उसने दम तोड़ दिया,

भवर सिंह- ये क्या बोल रहा था सेना नहीं ह, सेना नहीं ह तो कोण ह,

राजगुरु डरे सहने घबराये से बहवर सिंह को देखने लगे,

भवर सिंह- क्या हुआ राजगुरु क्या बताया इसने

राजगुरु- अकेला

भवर सिंह- अकेला?

तभी सेनिको के मरने की आवाजे करीब आने लगी, परिवार की औरतो की चीखे निकलने लगी, और जैसे hi सामने के सेनिको की भीड़ काम होने लगी तो सबकी नजर सामने गई, एक अकेला आदमी हाथ में एक कुल्हाड़ी लिए हुए आगे बढ़ा चला आ रहा था, उसका मुँह ढाका हुआ था, वो खून में पूरा भीगा हुआ था, और वो जिस पैर भी वॉर कर रहा था सामने वाले के शरीर को एक hi वॉर में चिर दे रहा था, इतनी ताकत एक इंसान में होना बहुत मुश्किल था, ऐसी मर काट और ताकत बस लोगो ने महभारत के युद्ध में और उन योद्धाओ में सुनी थी, लेकिन आज जो समाने हो रहा था उस पैर किसी को विश्वास नहीं हो रहा था,

और कुछ hi देर में उसने अपने सामने आये हुए सभी सेनिको और राजय के जो मर्द थे उन्हें भी मोत के घाट उतरता हु आगे बढ़ता हुआ आ रहा था,

प्रताप सिंह- कोण ह ये राक्षश, ये इंसान नहीं हो सकता, ये कोई राक्षश ह, ऐसी मर काट कोई राक्षश hi कर सकता ह,

भवर सिंह- मैं नहीं जनता ये कोण ह, लेकिन ये तुमने सही कहा ये कोई राक्षश hi ह,

अब भवर सिंह का सेना पति खुद उस आदमी के सामने आ गया था और उस आदमी ने कुल्हाड़ी का एक वॉर सेनापति पैर किया और उसकी गार्डन धड़ से अलग क्र दी, उसकी गार्डन अलग होते hi सभी औरतो की चीख निकल गई, उस आदमी ने सेनापति का सर बालो से पकड़ा और हवा में उठा के भवर सिंह और प्रताप सिंह के परिवार के पास आया, और सेनापति का सर भवर सिंह की तरफ उछाल दिया, भवर सिंह ने तुरंत सर को निचे फेंक दिया,

दर और घबराहट से किसी के मुँह से कोई आवाज नहीं निकल रही थी, दर की वजह से उन सभी को न जाने कहा कहा से पसीना निकल रहा था, सामने खड़े आदमी की बस आँखे दिख रही थी, बाकि पूरा ढाका हुआ था, और उसके पुर शरीर से खून टपक रहा था जो की उसके सामने आये सेनिको और लोगो का था,

वो बस शांति से खड़ा था, वो कुछ नहीं क्र रहा था हाथ में कुल्हाड़ी थी, उसके सामने खड़े सभी लोग थार थार कैंप रहे थे, बस वो अपने सामने खुद यमराज को देख रहे थे, बस इंतजार कर रहे थे की यमराज सबसे पहले किसको अपने साथ लेकर चैलेंज, जैसे hi उस आदमी का हाथ हिला तो सभी की चीख निकल गई,

राजगुरु- कोण हो तुम और क्या छाते हो,

राजगुरु के सवाल पैर भी सामने से कोई जवाब नहीं आया, वो बस खड़ा रहा, जब काफी देर कुछ नहीं हुआ तो प्रताप सिंह ने चालाकी करने की सोची उसने अपनी तलवार निकली और उस आदमी के पेट में घुसाने की कोशिश की लेकिन उस आदमी ने तलवार को अपने हाथ में पकड़ लिया, और प्रताप सिंह को अपनी तरफ खींच लिया, फर उसकी गार्डन पकड़ी और हवा में उठा लिया, प्रताप सिंह को पकड़ते hi प्रताप सिंह का परिवार चीखने लगा, और उसकी एक पत्नी जिसका नाम था रेणुका और उसकी बेटी रेवती, दोनों hi चीखती हुई सामने आई, और हाथ जोड़ क्र कड़ी हो गई,

उस आदमी ने दोनों को बड़े गौर से देखा और फिर प्रताप सिंह को देखा और न जाने क्या सोच क्र प्रताप सिंह को दूर फेंक दिया, फिर वो भवर सिंह की तरफ बढ़ा तो बिच में रीवा आ गई, और उसके पैरो में लेट गई, वो आदमी वही रुक गया,

उसने भवर सिंह को देखा फिर रीवा को देख क्र कुछ पल रुका और फिर अपनी कुल्हाड़ी उठाई और हवा मिले फिर मुदा और चला गया, ऐसा लगा जैसे कोई बवंडर आया और सब कुछ तहस नहस करके चला गया,

उसके जाते hi भवर सिंह घुटनो पैर गिर पड़ा, और प्रताप सिंह तो जहा गिरा था वह से हिला hi नहीं, भवर सिंह के गिरते वो बेहोश हो गया, सबने उसे उठाया और महल के अंदर की तरफ लेकर भागे, वही प्रताप सिंह को मौका मिल गया, वो उठा और अपनेपरिवार को लेकर तुरंत वह से भाग लिया, सबका धयान भवर सिंह पैर था, और दूर उस राक्षश पैर, प्रताप सिंह ने क्या किया था उस पैर किसी ने धयान hi नहीं दिया, प्रताप सिंह के साथ उसकी पातिना ुर बेटी hi थी बस, उसके बेटे और परिवार को उसने पहले hi भेज दिया था, कुछ लोगो, रिश्तेदार सेनिको और राजय के लोगो वह रुके थे उनमे औरतो के सिवा सब मर चुके थे,

प्रताप सिंह सीधा अपने राजय में जाकर रुका,

वही भवर सिंह को होश hi नहीं आ रहा था, सूरज अभिजीत और ज्वाला जो अब तक अपनी माओ के पीछे छुपे बैठे थे उन्हें बुखार चढ़ चुक्का था, उन्होंने आज तक ऐसे विनाश नहीं देखा था, उन्होंने तो क्या किसी ने ऐसा विनाश नहीं देखा था,

औरतो की हालत और भी ख़राब थी, रीवा अक्षरा अमिता और सोमिया वो चारो hi बेसुध सी पड़ी थी, इधर राजय में रोना चीखना मचा हुआ था, जिन जिन के पति बेटे मरे गए वो है है करके रो रहे थे, कोण आया क्यों मार गया किसी को कुछ समझ नहीं आया, बस एक सुनामी आई और अपने साथ सब बहा क्र ले गई,

पुरे राजय में मातम च गया, कहा अभी शादी हो रही थी कहा पूरा राजय मातम मन रहा था, भवर सिंह को जब होश आया तो वो थार थार कैंप रहा था, पसीने से भीगा हुआ था,

वो डार्क र उठ क्र बैठ गया और चारो तरफ देखन ेलगा, उसके पास बस राजगुरु और वैद hi थे, बाकि वैद परिवार के दूसरे लोगो को औषधि दे रहे थे,

भवर सिंह- राजगुरु राजगुरु क्या हुआ क्या हुआ कहा गया वो, क्या मेरे परिवार को मार दिया उसने, कहा ह मेरा परिवार,

राजगुरु- शांत हो जाइये महाराज सब सुरक्षित हैं वो चला गया ह, अब सब ठीक ह

भवर सिंह- कोण था वो,

राजगुरु- अभी तक उसकी कोई जानकरी नहीं ह, आप ठीक हो जाइये उसके बाद मैं पता करता हु,

भवर सिंह- मैं ठीक हु आप बस उसका पता कीजिये,

राजगुरु- मैं पूरी कोशिश करूँगा महाराज, हुए अपने जासूस भेजने चाहिए, आप जल्दी से सभा बुलाइये और पुरे राजय को इस दुःख में आपका साथ चाहिए, उनके भी बहुत लोग मरे हैं,

भवर सिंह- प्रताप सिंह वॉक अहा गया,

राजगुरु- वो मौका देख क्र भाग गया महाराज

भवर सिंह- हम उसे जिन्दा नहीं छोड़ेंगे, उसने हमारे साथ धोखा किया,

राजगुरु- धोखा हमारे किसी अपने ने किया ह,

भवर सिंह- ये क्या बोल रहे हो आप

राजगुरु- इतने सरे योद्धा हाथियों के साथ महल के अंदर कैसे आये, वो महेमान थे तो उनके पास हथियार कैसे आये, जभी महल से बहार hi सभी हथियार रखवा दिए जाते हैं,

भवर सिंह सोच में पद गया, हमारे पहेरेदारो ने ऐसे कैसे आने दिया,

भवर सिंह- उन पहेरेदारो को सभा में बुलवाइए जिसने ये किया,

राजगुरु- अब किसे बुलवाओ उस राक्षश ने सबको मर दिया, कोई भी नहीं बचा जो कुछ बता सके,

भवर सिंह- अब उस धोखेबाज का कैसे पता चलेगा, यहाँ तो सब अपने hi हैं,

राजगुरु- उसका भी पता कर लेंगे लेकिन उससे पहले इस राक्षश का कुछ करना होगा, इसके बारे में पता करना ज्यादा जरुरी ह,

भवर सिंह- राजगुरु वो कोई इंसान नहीं हो सकता, सभी राज्यों में पता करवाओ क्या ऐसा उनके यहाँ भी कोई आया ह या सिर्फ हमारे यहाँ आया ह,

राजगुर- मैं अभी पता करवाता हु,

उधर प्रताप सिंह दर में था, उसने अपनी सुरक्षा बढ़ा दी थी, उसके कमरे के बहार बहुत से सैनिक खड़े थे, प्रताप सिंह की बेटी रेवती उसने जीवन में पहेली बार खून देखा था, प्रताप सिंह अपनी बेटी को हमेशा छुपा कर रखता था, वो जीवन में पहेली बार अपने महल से बहार निकली थी और उसने आज वो नजारा देख लिया,

रेवती डार्क र अपने कमरे में शमी हुई सी बैठी थी, और रेणुका एक अच्छी योद्धा थी, प्रताप सिंह बस उसी के सामने थोड़ा झिझकता था, वो बहुत बड़ी जल्लाद थी, सही मायने में वो प्रताप सिंह से भी ज्यादा खतरनाक थी, वप खुद प्रताप सिंह की शादिया करवाती थी, उसे औरतो के साथ हैवानियत करने में बड़ा मजा आता था, वो औरतो को चीखते हुए देखना पसंद करती थी, प्रताप सिंह की ज्यादातर रखैल रेणुका की सेवा में रहती थी, प्रताप सिंह और रेणुका दोनों मिलकर औरतो के साथ मजे करते थे, रेणुका खुद एक हवन थी लेकिन आज उसने असली राक्षश देखा था, उसे बुखार चढ़ा हुआ था,

दोनों राजाओ में दर का माहौल था, और जल्दी hi ये खबर बाकि के राजाओ में भी पहुंच गई,

रात में राजगुरु अपने भाई भौमिक जी के पास पहुंचे क्योकि राजगुरु बस किसी की कुंडली पढ़ सकते थे, लेकिन इस राक्षश के बारे में कुछ जानते hi नहीं थे तो कुंडली कैसे पढ़ते, लेकिन भौमिक जी इसके अलावा बहुत कुछ देख सकते थे, इसलिए राजगुरु भौमिक जी के पास पहुंचे,

लेकिन भौमिक जी ने मिलने से मन कर दिया, राजगुरु हाथ जोड़ क्र भौमिक जी के घर के बहार खड़े हो गए,

अब भाई कैसा भी हो लेकिन भाई hi होता ह, भौमिक जी को अपने भाई पैर दया आ गई, उन्होंने राजगुरु को अंदर बुला लिया,

राजगुरु- भौमिक हमारा राजय बड़ी मुसीबत में ह अब तुम hi मदद कर सकते हो, यहाँ सात्विक भी नहीं ह जो उसके बारे में कुछ पता लगा सके, अब तुम hi हमारी सहायता कर सकते हो,

भौमिक जी- आपने मेरी कोई सहायता नहीं की थी, आपने उस लड़के को मरवा दिया, आपने ऐसा अपराध किया जिसकी कोई माफ़ी नहीं ह, और भगवान् उसी पाप की सजा दे रहा ह आप सबको,

राजगुरु- हमने जो किया वो गलत था लेकिन अब जो हो रहा ह वो और भी गलत हो जायेगा, पूरा राजय तबाह हो जायेगा, और हमारा कर्त्तव्य ह इस राजय की रक्षा करना, हमने भवर सिंह के पिता को वचन दिया था हमेषा इस राजय की रक्षा करेनेगे और भवर सिंह का साथ देंगे,

भौमिक जी- आपने कसम खाई थी मैंने नहीं,

राजगुरु- लेकिन राजय की रक्षा की तो खाई थीं ा,

भौमिक जी चुप हो गए, कुछ देर सोचने के बाद भौमिक जी ने आँखे बंद क्र ली और उस राक्षश के बारे में पता करने लगे, वो पूरी ताकत लगा रहे थे, लेकिन वह तक पहुंच नहीं प् रहे थे, वो कुछ भी ऐसा नहीं देख प् रहे थे, तभी उनके सर में एक तेज दर्द होने लगा, उनकी नसे फटने लगी, वो दर्द से बिलबिला उठे,

भौमिक जी- ahahhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhh मेरा सर

राजगुरु- क्या हुआ भौमिक

भौमिक- मेरा सर फैट रहा ह, भयानक दर्द हो रहा ह, ahahhhhhhhhhh जल्दी से वह एक औषधि राखी वो दीजिये मुझे वर्ण मेरी नसे फैट जाएँगी,

राजगुरु ने औषधि भौमिक जी को दी, कुछ देर बाद उन्हें रहत हुई,

राजगुरु- क्या हुआ था

भौमिक जी- मैं उसके बारे में कुछ नहीं देख प् रहा, ऐसा लगता ह जैसे वो इस दुनिया का ह hi नहीं, अलग hi ताकत ह कोई, मैं नहीं क्र पाउँगा, सात्विक शायद कुछ कर सके, शायद उसके अतीत का कुछ देख सके, क्योकि सात्विक ऐसा कर सकता ह,

राजगुरु- हमे जल्दी से सात्विक के पास जाना होगा,

राजगुरु तुरंत महल पहचुहे और जल्दी से कुछ घोड़े तैयार करवाए और कुछ सैनिक लेकर चल दिए सात्विक जी की तरफ, वो दक्षिण दिशा की तरफ गए थे वो भी पैदल तो सात्विक तक पहुंचना ज्यादा नुश्किल नहीं था, राजगुरु सात्विक के बारे में जानकरी निकलते हुए तेजी से उधर बढे जा रहे थे,

इधर रीवा और अक्षरा एक दूसरे से लिपटी हुई थी,

अक्षरा- रीवा ये सब क्या हुआ, क्या हम खुश होये या जो लोग मरे गए हैं उनके लिए दुःख मनाये,

रीवा- अक्षरा ये सब जो हुआ ह उसमे किसको फायदा हुआ ह, यहाँ मोत का तांडव हुआ ह लेकिन हमारे पिता के लिए हमारे लिए तो फायदा hi हुआ ह,

अक्षरा- वो कैसे



रीवा- हमारा फायदा तो ये हुआ की हमारी शादी उस प्रताप सिंह से रुक गई और प्रताप सिंह ने जो पिता जी को धोखा दिया हम पैर हुम्ला क्र दिया, अगर वो राक्षश नहीं आता तो हमारे राजय पैर प्रताप सिंह का कब्ज़ा हो जाता और हम सबकी प्रताप सिंह की रखैल होती,
 
अपडेट-11






दक्षिण दिशा में घने जंगलो के बिच में एक तेज रौशनी उठ रही थी, जिस जंगल में कोई जानवर तक नहीं घुसता था जहा सूर्य की रौशनी भी नहीं पहुँचती थी, एक ऐसी जगह यहाँ जीवन अपना दम तोड़ दे, उस जंगल में इतनी तेज रौशनी उठ रही थी की वह से हजारो किलोमीटर दूर से उस रौशनी को देखा जा सकता था, लेकिन उस रौशनी का तेज इतना अधिक था की कोई भी अपनी आँखों से उसकी तरफ देख नहीं प् रहा था, उस रौशनी के के करीब कोई जा hi नहीं प् रहा था, आस पास के राज्यों में उस रौशनी की चर्चा जोरो पैर थी, जो पिछले 1 महीने से दिख रही थी, अलग अलग राज्यों से सेनाय उधर जाने की कोशिश क्र रही थी लेकिन कोई भी वह तक नहीं पहुंच प् रहा था, जो भी उस रौशनी के 100 कम के आस पास आता उसकी आँखे धुंदला जाती उसे दिखना hi बंद हो जाता था,






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वह के नजदीकी राजय दर की वजह से खली होने लगे, ऐसा लग रहा था जैसे सूर्य धरती पैर आ गया हो लेकिन उसमे कोई गर्मी नहीं थी बस तेज रौशनी थी, और ऐसी hi मिलती जुलती रौशनी पहाड़ो में कही उठ रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे पहाड़ो के बिच में से कोई सूर्य बहार निकलना चाहता हो, बड़े बड़े ज्ञानी उस रौशनी को नहीं देख प् रहे थे,





इधर भवर सिंह के महल में बहुत कुछ हो चुक्का था, जब देव और निहारिका को मारा गया उसके 15 दिन बाद ये रौशनी उठने लगी थी, धीरे धीरे इसकी खबर आस पास के राज्यों में फैलती गई, जब भवर सिंह और प्रताप सिंह शादी में लगे हुए थे तो उत्तर और दक्षिण राजय इस रौशनी की खोज में लगे थे,

खैर राजगुरु बड़ी तेजी से सात्विक को ढूंढ़ते हुए जा रहे थे, और उन्हें सफलता भी मिल गई, सात्विक जैसा तेज किसी साधारण इंसान में नहीं होता इसलिए वो जहा से गुजरता था लोग उसे बड़ा सम्मान देते, इस वजह से राजगुरु को आसानी हो गई वह तक पहुंचने में,

राजगुरु जब सात्विक पास पहुंचे तो वो एक गाओं में रुका हुआ था, और वह कुछ जानकरी ले रहा था, राजगुरु को वह देख क्र सात्विक चौंक गया,

सात्विक- भैया आप यहाँ, क्या हुआ सब ठीक ह न

राजगुरु- बहुत बड़ी शंश्य आ गई ह हमारे राजय पैर, और उसके बारे में किसी को कुछ भी जानकारी नहीं ह

सात्विक- ऐसी क्या संशय आ गई ह, जिसकी वजह से आपको यहाँ तक आना पद गया,

राजगुरु ने राजय में जो हुआ उसके बारे में सब बता दिया,

सात्विक- राक्षश, नहीं भैया राक्षश ऐसा नहीं करते, और वैसे तो राक्षश बचे नहीं ह, और अगर हैं भी तो यहाँ नहीं आ सकते, ये कोई और ह,

राजगुरु- तुम hi पता करो ये कोण ह, क्या ह और क्यों हुम्ला किया ह,

सात्विक- भैया मेरे पास समय काम ह, मुझे एक विचित्र शक्ति के बारे में पता चला ह, मैं उसी की खोज में जा रहा हु,

राजगुरु- अगर तुम चले गए तो सब अनर्थ हो जायेगा, हमारा राजय ख़तम हो जायेगा,

सात्विक- भैया मेरा वह जाना बहुत जरुरी ह,

राजगुरु- मैं अपने सैनिक और घोड़े तुम्हे दे दूंगा जिससे तुम वह जल्दी पहुंच सको, पैदल तो तुम्हे वैसे भी समय लगने वाला ह,

सात्विक- लेकिन मैं यहाँ से कुछ नहीं देख पाउँगा, मैं उसी इंसान के बारे में पता कर सकता हु जिसे मैंने देखा हो, या वो जगह जहा कुछ हुआ हो,

राजगुरु- तो तुम्हे महल चलना होगा और सब देखना होगा,

सात्विक मजबूर हो गया वो अपने भाई की बात नहीं ताल सकता था, इसलिए राजगुरु के साथ वापस चल दिया,

इस सब में 3 दिन गुजर गए थे, सात्विक महल में पहुंचे तो राजगुरु उसे लेकर वही पहुंच गए जहा ये हुम्ला हुआ था, कुछ hi देर में भवर सिंह और पूरा परिवार वह आ गया, सात्विक के आने की खबर भौमिक जी को भी लगी वो भी वह आ गए,

सात्विक ने जब वह खून hi खून देखा, ऐसा मंजर था जिससे देख किसी का भी दिल दहल उठे,

सात्विक – महाराज हवन का इंतजाम कीजिये,

भवर सिंह ने सात्विक के बताये अनुसार हवन का इंतजाम करवा दिया, सात्विक हवन में बैठ गए, साथ में भौमिक जी को बैठा लिया भौमिक हवन में सात्विक की सहयता कर रहे थे,

सभी इंतजार में बैठे हुए थे, अचानक सात्विक जी की आँखे बंद हो गई लेकिन भौमिक जी हवन करते रहे, सात्विक ने पहले hi समझा दिया था, कुछ देर सात्विक शांत रहे लेकिन अचानक उनके चेरे पैर अजीब से भाव आने लगे, शरीर पसीने से भीगने लगा, अचानक सात्विक ने घबरा कर अपनी आँखे खोल दी,

सभी एक दम उठ खड़े हुए,

राजगुरु- क्या हु सात्विक सब ठीक ह न, तुम ठीक हो न,

सात्विक का गाला सूखा हुआ था, सात्विक ने लोटे में रखे पानी को जल्दी जल्दी पि लिया,

भौमिक जी- क्या हुआ सात्विक क्या देखा तुमने

सात्विक- वो बहुत गुस्से में ह, यहाँ जो हुआ वो तो कुछ भी नहीं ह, अगर उसे नहीं रोका गया तो वो सबकुछ तबाह करने की ताकत रखता ह, वो अकेला hi पुरे राजय का विनाश कर सकता ह,

भवर सिंह- ह कोण वो क्या ह वो, कोई राक्षश ह क्या,

सात्विक- मैं नहीं जनता, उसके बारे में कुछ नहीं दिख रहा बस काळा कपड़ो में चेरा ढाका हुआ, एक साया सा दीखता ह, लेकिन उसका क्रोध उसकी आँखों से दिख रहा ह, उसका शरीर फौलाद का ह, वो इंसान ह या कोई राक्षश ये तो मैं अभी नहीं बता सकता, मैंने उसका अतीत भी देखने की कोशिश की लेकिन ऐसा लगा जैसे उसका कोई अतीत hi नहीं ह, वो अभी पैदा हुआ ह,

राजगुरु- ये कैसे हो सकता ह,

सात्विक- भैया मैं वही बता रहा हु जो दिख रहा ह, बस इतना पता चला ह की वो बहुत तकलीफ में भी ह, एक गुफा दिख रही ह, उसके आस पास कोई और भी ह लेकिन एक तेज रौशनी मुझे कुछ देखने नहीं दे रही, ये रौशनी इतनी तेज ह की मेरे शरीर को चिर्र hi थी,

रौशनी का नाम सुनते hi भोनिक जी ने सात्विक को देखा,

भौमिक जी- क्या ये वैसी hi रौशनी थी सात्विक जैसे तुमने तब देखि थी,

सात्विक- है ये वैसी hi रौशनी थी, कुछ ह जो मुझे सब कुछ देखने नहीं दे रहा, मेरी विद्या अभी भी उतनी शक्तिशाली नहीं हुई ह जिससे मैं सबकुछ देख सकू,

राजगुरु- हमे क्या करना चाहिए सात्विक

सात्विक- उसे आप ताकत से तो नहीं रोक पाएंगे, हमे उससे भी ज्यादा ताकतवर किसी की जरुरत होगी, उसके लिए मुझे अपनी मंजिल को पाना होगा, और मुझे अभी निकलना होगा,

भौमिक जी- मैं तुम्हारे साथ चलता हु सात्विक,

सात्विक- मुझे भी ऐसा hi लगता ह, हम दोनों मिलकर hi इस संशय से निपट सकते हैं,

भवर सिंह- तब तक हम उसे कैसे रोकेंगे,

सात्विक- वो रुका कैसे था, ऐसा क्या हुआ था जिससे वो रुक गया,

अक्षरा- रीवा की वजह से,

सात्विक- वो कैसे,

राजगुरु- जब वो महाराज की तरफ बढ़ा तो ये बच्ची बिच में आ गई और हाथ जोड़ लिए, वो अचानक रुक गया,

सात्विक ने रीवा को आगे बुलाया,

सात्विक- बेटी तूने अपने पिता की रक्षा की ह, वर्ण उससे इन्हे बचाना नामुमकिन था, तेरे रहते तेरे पिता को कोई खतरा नहीं ह, महाराज इस बच्ची को अपने करीब रखिये, आप इसी की वजह से जिन्दा ह, और मुझे उम्मीद ह ये hi आपकी रक्षा कर सकती ह,

सात्विक की बात से पूरा परिवार चौंक गया, जिस लड़की को कभी ठीक से प्यार नहीं मिला, जिसे कभी सम्मान नहीं मिला आज वही इस राजय की रक्षक बन गई थी, भवर सिंह ने आँखों में आंसू लिए रीवा को देखा और आगे बढ़ क्र अपने सीने से लगा लिया, ये देख क्र अमरावती सौमित्र और काम्य के शरीर में आग सी लग गई,

राजगुरु- महाराज इन दोनों को तुरंत भेजना चाहिए ताकि ये जल्दी से अपनी मांजी को प् सके और इस राजय को बचा सके,

भवर सिंह- जैसा आप कहे राजगुरु,

सात्विक और भौमिक को सबसे तेज दौड़ने वाले घोड़ो और कुछ सेनिको को साथ भेज दिया गया,

पूरा परिवार घबराया हुआ था, भवर सिंह ने आदेश दे दिया की रीवा का कमरा उसके कमरे के सामने करवा दिया जाये, जब तक सात्विक और भौमिक उस राक्षश का अंत नहीं ढूंढ लेते तब तक रीवा हर कदम पैर भवर सिंह के साथ रहेगी, भवर सिंह को एक पल के लिए भी अकेला नहीं छोड़ेगी,

काम्य अमरावती और सौमित्र के लिए आग लगाने वाली बात थी, सबको लग रहा था रीवा को सम्मान मिल रहा ह, क्योकि पुरे राजय में ये खबर फ़ैल चुकी थी, सभी की जुबान पैर बस रीवा का hi नाम और उसकी तारीफ थी, इससे अमरावती सौमित्र काम्य सूरज ज्वाला अभिजीत जल भून गए, और इसका असर अमिता और सोमिया पैर भी hua,un दोनों के मन में भी जलन ने जगह ले लिट् hi, लेकिन वो दिखा नहीं रही थी, बस अक्षरा hi थी जो दिल से खुश थी, सबकी नजर में ये सम्मान था लेकिन रीवा के लिए तो ये एक सजा थी, उसकी अपनी जिंदगी तो कुछ रही hi नहीं, वो तो एक तरह से भवर सिंह की रक्षा कवच बन गई थी जिसे महारवाज की रक्षा करने के अलावा कुछ भी करने की अनुमति नहीं थी,

आस पास के राज्यों में भी राक्षश और रीवा की कहानी फैलने लगी, ये बात सब जानते हैं की एक बार कोई कहानी शुरू होती ह तो जीतनेय मुँह उतनी बाते हो जाती हैं, और जल्दी hi राक्षश की कहानी में और भी कहानिया जुड़ती चली गई, लोगो में दर फैलने लगा, और उनका दर hi उनकी कहानिया बनाने लगा, अब भवर सिंह का राजय और आस पास के राज्यों में ये बात घूमने लगी की रीवा में कोई देविया शक्ति ह, क्योकि कोई देवता hi किसी राक्षश से लड़ सकता ह, और रीवा ने राक्षश से युद्ध किया और उसे भगा दिया, राक्षश ने किसी लड़की और औरत को नहीं आरा था, तो ये भी खबरे फ़ैल गई की राक्षश लड़कियों से डरता ह, और उसका परिणाम ये हुआ की जो लोग लड़कियों के होने पैर दुःख मानते थे या उन्हें मार देते थे, वो अब अपनी बेटियों को साथ लेकर घूम रहे थे अपनी रक्षा के लिए, सभी राज्यों में लड़कियों का सम्मान होने लगा उनकी पूजा होने लगी,

इधर प्रताप सिंह तक भी ये खबर आ चुकी थी की भवर सिंह की जान उसकी बेटी रीवा ने बचाई थी, उसे भी अपना याद था की उसकी बेटी के सामने आने से hi उस राक्षश ने उसे दूर फेंक दिया था, और जब उसे पता चला की भवर सिंह ने रीवा को अपनी रक्षा के लिए अपने साथ रखा ह तो प्रताप सिंह ने भी अपनी बेटी रेवती को अपने पास रख लिया, वो अपने राजय में किसी को नहीं बता रहा था की उसकी बेटी की वजह से उसकी जान बची ह, क्योकि उसकी कहानी बताने वाला कोई जिन्दा वापस hi नहीं आया था अहा से, और जो वापस आये वो अपना मुँह खोलने वाले नहीं थे, उसने ये hi बताया की वो राक्षश से लड़ा और वह से निकल आया,

लेकिन खबरे कहा छुपती हैं, धीरे धीरे सबको समझ आने लगा की जो राजा हमेशा अपनी नवजात बेटिओ को मार देता था आज अपनी बेटी पैर इतना महेरबान क्यों ह, क्योकि प्रताप सिंह ने भी रेवती का सम्मान बढ़ा दिया था, अगर कुछ अच्छा हुआ था तो वो रेवती के लिए हुआ था, उसे पहेली बार अपने महल से बहार निकलने का मौका मिला था, अपने राजय को देखने का मौका मिला था, वर्ण उसने तो कभी अपने कमरे और अपनी माँ के कमरे के अलावा पूरा महल भी नहीं देखा था, उसे हमेषा मर्दो की नजरो से दूर रखा जाता था, बस दसिया होती थी उसके पास और कोई नहीं, किसी सैनिक को भी उसके आस पास जाने की अनुमति नहीं थी, क्योकि जिअसे प्रताप सिंह हवसी था वैसा hi वो पुरे समाज को समझता था, इसलिए अपनी बेटी पैर पाबन्दी रखता था, अब रेवती को महल में घूमने और प्रताप सिंह के साथ बहार निकलने की अनुमति मिल गई थी,

किसी के साथ अच्छा तो किसी के साथ बुरा हो रहा था,

वही भौमिक जी और सात्विक दोनों बड़ी तेजी से उस रौशनी की तरफ बढे चले जा रहे थे, वो जैसे जैसे उस रौशनी के नजदीक पहुंच रहे थे उनकी आँखों से दिखना बंद होता जा रहा था, लेकिन यहाँ भौमिक जी की विद्या काम आ रही थी, उन्होंने अपनी विद्या से खुद पैर और सात्विक पैर एक सुरक्षा कवच बनाया और आगे बढ़ते चले गए, जैसे जैसे वो नजदीक जार हे थे रौशनी और तेज होती जार hi थी, और कमल ये था की इतनी रौशनी में भी उन्हें ठण्ड लगने लगी थी, अब घोड़ो ने उनका साथ छोड़ दिया था और जो सैनिक साथ आये थे उनसे भी बर्दास्त नहीं हो रहा था, उस रौशनी के अंदर का दबाव वोन hi सेह प् रहे थे, उन्होंने भी भौमिक और सात्विक का साथ छोड़ दिया और वापस मुद गए, लेकिन दोनों भाई पैदल hi उस तरफ बढ़ते रहे,

भौमिक- सात्विक ये वैसा hi प्रकाश ह जो तुमने देव को खोजते समय देखा था,

सात्विक- है ये वैसा hi प्रकाश ह, मेरी विद्या भी इसके पर नहीं देख प् रही और उस राक्षश को ढूंढते हुए भी ऐसा hi प्रकाश था उसके आस पास,

भौमिक- तो क्या ऐसा हो सकता ह की देव यही पैर हो, इसीलिए तुम देख नहीं पाए उसे,

सात्विक- संभव ह, लेकिन वो यहाँ इतनी दूर कैसे आएगा,

भौमिक- उसके साथ कुछ भी हो सकता ह उसके लड़के का भविष्य लगातार बदलता रहता ह,

सात्विक- ऐसा कैसा हो सकता ह, संसार में किसी का भविष्य नहीं बदल सकता,

भौमिक- मैं जब जब उसका भविष्य देखा ह हर बार कुछ अलग hi दिखा ह, और सबसे खास बात उसके भविष्य की कुछ झालीखा hi दिख पति हैं जो बदल जाती हैं, पूरा भविष्य तो बस खली दीखता ह जैसे उसके जीवन में कुछ ह hi नहीं,

सात्विक- ये तो बड़ा अजीब ह, ऐसा कैसे हो सकता ह, आपसे भीतर भविष्य कोई नहीं देख पता और जब आप hi उसका भविष्य नहीं देख प् रहे हैं तो फिर जरूर कुछ बात ह,

भौमिक- हो सकता ह यही से हमे कुछ जानकरी मिल जाये,

दोनों भाई आगे बढ़ने लगे, और उस रौशनी के नजदीक पहुंचने लगे, सबसे कमल बात ये थी वो रौशनी में जितना अंदर जाते बस रौशनी उनके आगे hi दिखाई देती पीछे वही अँधेरा होता जाता, ऐसा लग रहा था रौशनी उन्ही के साथ सिमटती जा रही ह, लेकिन किसी और के लिए वो उतनी hi फैली हुई होती थी,

वो दोनों भाई उस रौशनी के अंतिम घेरे में पहुंच गए और उनके सामने था एक पेड जो उस रौशनी में चमक रहा था, उस पेड का हरे क पत्ता चमक रहा था, जैसे किसी ने हर पत्ते में रौशनी भर दी हो, इतना खूबसूरत नजर संसार में किसी ने नहीं देखा था, दोनों भाइयो की आँखे उस नज़ारे को देख क्र खुद आंसू बहाने लगी, दोनों अपने घुटनो पैर बैठ गए,

सात्विक- भाई क्या तुमने कभी इतना खूबसूरत कुछ देखा ह,

भौमिक- नहीं भाई कुछ नहीं देखा, इस पेड की रौशनी हजारो मिलो तक फ़ैल रही ह, और कितनी शीतलता ह यहाँ, अब तो ये रौशनी आँखों को सकूं दे रही ह,

सात्विक- लेकिन ये रौशनी इस पेड में आई कहा से, इस पेड का आकर देख क्र लगता ह ये हजारो साल पुराण पेड ह,

भौमिक- और ये रौशनी अभी क्यों आई, क्या यहाँ किसी देवता या भगवान् ने अवतर तो नहीं लिया, या फिर यहाँ किसी महर्षि ने कोई तपश्या की हो,

सात्विक- मैं नहीं जनता, लेकिन मुझे इतना पता ह ये रौशनी ये पेड हमारे भविष्य की चाबी ह,

दोनों भाई उस पेड के करीब पहुंच गए और जैसे hi वो पेड के करीब पहुंचे तो पेड के पत्तियों की रौशनी काम होती चली जा रही थी, वो डार्क र पीछे हुए तो रौशनी फिर चमकने लगी,

भौमिक- हम जितना इसके करीब जा रहे ये रौशनी उतना hi सिमटती जार hi ह, ये रौशनी जरूर इस पेड के अंदर से आ रही ह, जो दूर से ऐसा लग रहा जैसे ये पूरा पेड hi रौशनी पैदा कर रहा ह,

और हुआ भी वैसा hi जैस एही दोनों पेड के करीब पहुंचे तो रौशनी सिमट क्र पेड तन ेके बिच में रह गई,

सात्विक- इस पेड में कुछ रखा हुआ ह,

दोनों भाइयो ने जैसे hi पेड को हाथ लगाया, तभी एक जतका सा लगा और सब कुछ गायब हो गया, चारो तरफ अँधेरा च गया,

जैसे hi वह अँधेरा चाय तभी पहाड़ो में जो रौशनी चमक रही थी वो भी गायब हो गई, सब कुछ शांत हो गया,

सभी राज्यों में वो रौशनी दिखनी बंद हो गई, किसी को कुछ समझ नहीं आया की ये क्या हुआ, एक दम से वो रौशनी कहा से आई थी और कहा चली गई,

वही दूर एक गुफा में एक चीता बैठा हुआ था, और उसके सामने आग जल रही थी और उसके आग के दूसरी तरफ सुंदरता की मूरत बैठी हुई थी और उसके पास बैठा था एक लड़का,

और वो लड़का था देव और उसके पास बैठी हुई थी निहारिका, और सामने था वही चीता जिसने उस पहाड़ी पैर देव पैर हुम्ला किया था, तीनो जिन्दा थे और चीता एक पालतू जानवर की तरह उनके सामने बैठा हुआ था,

देव- माँ हमे वह जाना चाहिए और अपनी सच्चाई साबित करनी चाहिए,

निहारिका- नहीं देव हम ऐसा नहीं करेंगे, अब हम वो करेंगे जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की होगी,

देव- मैं अपने गुस्से को रोक नहीं प् रहा हु, जब उन्हें पता चलेगा हम जिन्दा हैं तो उनकी क्या हालत होगी,

निहारिका- सही समय आने पैर पता चलेगा उन्हें, अब हम वो निहारिका और देव नहीं हैं जिन्हे कोई आये और साजिश करके मरवा दे, हम यहाँ ह तो उसका कोई मकसद होगा, हमे अभी चुप क्र hi रहना होगा और अपना काम करना होगा,

देव उठा और दीवार के पास खड़ा हो गया, और सबसे खास बात ये थी की देव पूरा नंगा था, और उसका लुंड जोइस वक़्त पुरे जोश में खड़ा हुआ था, उसका लुंड का आकर पहले से भी ज्यादा बढ़ा हुआ था, और उसे जरा सिब hi शर्म नहीं आ रही थी अपनी माँ के सामने नंगा खड़ा होने में, देव दीवार के पास गया तभी निहारिका भी उठी और उसके पीछे गई, और जब निहारिका उठी तो ऐसा था जैसे कामदेव की रति खुद जमीन पैर उतर आई हो, संसार ने निहारिका की जो सुंदरता देखि थी आज वो उससे कई सो गुना अधिक सूंदर थी, उसका बदन इस समय किसी के सामने आ जाये तो वो जीवन में किसी और औरत को देख hi नाप ए, उसकी सुंदरता में अपने होश खो सकता था, शरीर का एक एक कटाव इतना जानलेवा था की जैसे किसी मूर्तिकार ने अपनी सबसे सूंदर मूर्ति बना क्र उस पैर अभिमान किया हो,

शायद संसार दुबारा ऐसी सुंदरता नहीं देख पायेगा,

निहारिका- शांत हो जा देव, हमे जिस अपराध की सजा मिली ह अब वो अपराध होगा, और ऐसा होगा की जिस जिस ने हमे अपराधी सब्त किया ह वो अपने अपराध के लिए रोयेंगे, तेरे पास संसार का सबसे खूबसूरत हथियार ह उसका इस्तेमाल क्र, और है इस दुनिया में तेरे और मेरे शिव कोई रिश्ता हमारा नहीं ह, तुझे उसके लिए जॉब hi कदम उठाना पड़े फरक नहीं पड़ता,

देव- उसके लिए मुझे संसार के सरे नियम तोड़ने होंगे,

निहारिका- तेरा ये जनम उन नियमो को तोड़ने के लिए hi हुआ ह, अब कोई नियम हमे नहीं रोक सकते,

देव- मैं उनकी जिंदगी नरख बना दूंगा,

निहारिका- उन्हें उस नरख का अनुभव होना भी चाहिए,

देव- वैसा hi होगा,

चीता ने भी एक जोर दर दहाड़ मरी,

निहारिका- लगता ह ये भी तैयार ह,

देव- तो सबसे पहले कहा

निहारिका ने बड़े गुस्से में बोलै – प्रताप सिंह

देव की आंको में गुस्सा भरा हुआ था,

वही प्रताप सिंह ने अपने संपत्ति को आदेश दिया हुआ था की संसस की सबसे ताकतवर सेना तैयार की जाये, संसार की कोई ताकत उस सेना से लड़ नाप ए, और पुरे राजय की घेरा बंदी कर दो,

प्रताप सिंह के दिल में दहशत बैठी हुई थी, वही रेवती इतने लोगो के सामने आने से थोड़ी गहराई हुई सी रहती थी लेकिन वो खुश भी बहुत थी, वही राजय के मर्द जब जब रेवती को देखते तो आहे भरते थे, क्योकि प्रताप सिंह से लोग बस डरते थे उसकी इजात नहीं करते थे, और जिस राजा की इज्जत नहीं करते उसके परिवार की इज्जत कैसे करेंगे, सभी की नजरो में गन्दगी थी, और ये बात रेवती को समझ भी आने लगी थी, रेवती को मर्दो को देख क्र काउतेज्ना तो होती लेकिन ऐसा कोई मर्द उसके समाने नहीं था जिसे दकह क्र उसके दिल में कोई भावनाये जागे, वो प्रताप सिंह को उन लोगो की नजरो के बारे में बता भी नहीं सकती थी उसे दर था कही प्रताप सिंह फिर से उसे वही कमरे में कैद न कर दे,

इधर प्रताप सिंह को पास्चतवा हो रहा था की उसकी शादी रीवा से हो रही थी और उसने सब गड़बड़ क्र दी, वो ये सब बाद में भी क्र सकता था एक बार शादी हो जाती तो आज दोनों सुरक्षा कवच उसके पास होते और वो राक्षश भवर सिंह को मार देता,

प्रतापप सिंह ने अपने ज्योत्षी को बुलवाया और उससे अपने भविष्य को दिखवाने लगा,

प्रताप सिंह- क्या दीखता ह मेरे भविष्य में,

ज्योत्षी- महाराज भविष्य कभी नहीं दीखता किसी का बस अच्छे बुरे का अनुमान लगाया जाता ह, और आपके भविष्य में अभी कोई अच्छा कार्य नहीं दिख रहा ह, लेकिन अगर आप चाहते हैं कुछ बदल जाये तो अपनी बेटी की शादी करवा दीजिये,

प्रताप सिंह- वही तो एक सुरक्षा कवच ह मेरा उसे भी खुद से दूर कैसे कर दू

ज्योत्षी- वो हमेशा बंद कमरों में रही ह, अब बहार निकली ह अगर उसका मन भटका तो आप रोक नहीं पाओगे, लड़की जवान हो रही ह और आपसे भीतर कोई नहीं समझ सकता, और ये सच भी ह जब तक वो आपकी तरफ कड़ी ह तभी तक आप सुरक्षित हैं लेकिन मैं उसे भक्ति हुए देख रहा हु,

ज्योत्षी की बात से प्रताप सिंह का दिमाग ख़राब हो गया, उसके मन में बहुत से विचार उठने लगे, वो जनता था इस उम्र में लड़की को रोकना आसान नहीं होता ह, उसने तुरंत रेणुका को बुलाने के लिए एक दासी को भेजा, ज्योत्षी वह से चले गए, प्रताप सिंह अपनी hi चिंता में बैठा हुआ था, तभी रेणुका वह आई,

रेणुका- क्या हुआ महाराज ऐसे उतावले होकर क्यों बुलावा भेजा

प्रताप सिंह- बात hi ऐसी थी

रेणुका- क्यों क्या कोई रखैल आपको शांत नहीं क्र पाई जो मेरी जरुरत पद गई,

प्रताप सिंह- बा तवो नहीं ह, बात हमारी बेटी रेवती की ह,

रेणुका- क्या हुआ रेवती को,

प्रताप सिंह- वो अब जवान हो गई ह और जवानी में लड़किया क्या कर सकती हैं,

रेणुका- क्या वो किसी से चुद गई ह,

प्रताप सिंह- नहीं अभी ऐसा नहीं हुआ ह लेकिन ज्योत्षी के हिसाब से उसे मन भटक रहा ह, और एक बार मन भटका तो रुकेगा नहीं,

रेणुका- मैं ऐसा नहीं होने दूंगी,

प्रताप सिंह- एक मर्द hi ऐसा होने से रोक सकता ह औरत नहीं,

रेणुका- वो कैसे

प्रताप सिंह- उसकी जरुरत पूरी करके,

रेणुका- क्या शादी से पहले,

प्रताप सिंह- उसकी शादी होना जरुरी तो नहीं ह न, अगर उसकी शादी हुई तो वो मुझसे दूर हो जाएगी और मेरी जिंदगी को खतरा होगा, वो बस मेरे पास रही चाहिए,

रेणुका- लेकिन उसकी जरुरत पूरी कैसे होगी, कोण करेगा ये

प्रताप सिंह ने बड़ी अजीब नजरो से रेणुका को देखा और मुस्कुराया,

रेणुका ने आँखे बड़ी करके प्रताप सिंह को देखा,

रेणुका- आपके दिमाग में ये सब आता कैसे ह,

प्रताप सिंह- क्यों तुम्हे पसंद नहीं आया क्या

रेणुका मुस्कुरा दी- मुझे कोई ऐतराज नहीं ह, बस आप देखना क्या करना ह,



रेवती अपनी आने वाली जिंदगी के सपने देख रही थी और उसके माँ बाप अलग hi योजना बना रहे थे,
 
अपडेट-12



काम्य अपने कमरे के बहार छज्जे पैर कड़ी थी और महल के बहार देख रही थी, एक दम शांत कड़ी थी अभिजीत उसके पास कब आया उसे पता hi नहीं चला,

अभिजीत - क्या हुआ माँ कहा खोई हुई हो,

काम्य- ऊम्मम तू कब आया,

अभिजीत - जब आप कही खोई हुई कड़ी थी, क्या सोच रही हो आप,

काम्य- ये राजय बदल रहा ह, यहाँ के हालत बदल रहे हैं,

अभिजीत- माँ उस राक्षश की वजह से ये सब हो रहा ह,

काम्य- मैंने जो सोचा था सब बर्बाद हो गया, सब ख़तम हो गया,

अभिजीत- क्या ख़तम हो गया,

काम्य- मेरी पूरी योजना बर्बाद हो गई, उस राक्षश ने बिच में आकर सब बिगड़ दिया,

अभिजीत- उसने तो हमे बचा लिया माँ वर्ण वो प्रताप सिंह हमे मार देता,

काम्य ने अभिजीत को देखा लेकिन कहा कुछ नहीं,

काम्य मन में – इस मूरख को क्या समझू इसे राजा बनाने के लिए मैंने क्या कुछ नहीं किया ह,

काम्य- तुझे मेरा एक काम करना होगा,

अभिजीत- क्या

काम्य ने अभिजीत को कुछ समझाना शुरू किया, जिसे सुनकर अभिजीत थोड़ा चौंक गया, लेकिन अपनी माँ की बात पैर सवाल करने की उसकी हिम्मत नहीं थी,

अभिजीत- ठीक ह माँ मैं अभी वह के लिए निकलता हु,

काम्य- ये बात किसी को पता न चले,

अभिजीत – जी माँ

अभिजीत वह से निकल गया, काम्य फिर से अपने खयालो में खो गई,

वही सौमित्र के अंदर की आग उसे झुलसा रही थी, जब से निहारिका और देव वाला कांड हुआ था उसके बाद से भवर सिंह सौमित्र के पास नहीं आया था, और सौमित्र के अंदर इतनी कामवासना थी की वो एक दिन भी चुदाई के बिना नहीं रह सकती थी, और अब तो सौमित्र को महीने बीत गए थे, सौमित्र बिस्टेर पैर पड़ी हुई अपने बदन को रगड़ रही थी, तभी उसकी दासी वह आई,






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Dasi-maharani आपका स्वस्थ्य सही नहीं लग रहा ह, आपके लिए कुछ लौ क्या,

सौमित्र ने दासी को देखा, सौमित्र की आँखे एक दम लाल हो राखी थी, आँखे वासना साफ़ दिख रही थी, सौमित्र ने दासी का हाथ पकड़ा और अपने उप्पेर खींच लिया, दासी एक दम घबरा गई,

दासी- महारानी

सौमित्र- चुप हो जा कुटिया एक दम चुप हो जा वर्ण तुझे कच्ची को खा जाउंगी,

दासी दर गई वो घबरा क्र चुप हो गई, सौमित्र ने उसे अपनी निचे क्र लिया और उसके उप्पेर आ गई, ये पहेली बार था जब दासी सौमित्र के बिस्टेर पैर लेती थी इतना नरम बिस्टेर उसने सपने में भी नहीं सोचा था, सौमित्र ने नशीली आँखों से दासी को देखा, और उसके उप्पेर झुकती चली गई, दासी को कुछ समझ नहीं आ रहा था, और अचानक ऐसा हुआ की दासी को आँखे फैट सी गई, क्योकि सौमित्र के हॉट दासी के होतो से जुड़ गए थे, दासी को यकीन hi नहीं हुआ ये क्या हो रहा ह, किसी औरत के साथ दासी का ये पहला अनुभव था, और वो भी महारानी के साथ, दासी घबराई हुई सी शांत लेती रही लेकिन सौमित्र पुरे जोश में दासी के हॉट चूसने लगी और फिर उसकी गार्डन को चूमने काटने लगी,






जल्दी hi दासी के मुँह से सिसकिया निकलने लगी, फिर सौमित्र ने दासी की चोली को पकड़ा और उसे फाड् दिया, जिससे दासी की चूचिया उभर क्र सामने आ गई, दासी की चूचिया थोड़ी ढीली और लटकी हुई थी, क्योकि दसियो का काम बस महल के मर्दो की सेवा करना और उनके भोग के लिए खुद को बिछा देना यही काम होता था, सौमित्र ने दासी की चूचियों को पकड़ा और जोर से खींच दिया, दासी की चीख निकल गई, सौमित्र ने उसे एक थपड मारा दासी दर क्र चुप हो गई,

सौमित्र- कुटिया रंडी चुप पड़ी रह, वर्ण तेरी इन चूचियों को काट क्र इनमे भूसा भर दूंगी फिर ये लटकी हुई नहीं रहेंगी, दासी और घबरा गई,

सौमित्र ने दासी का घागरा पकड़ा और फाड़ क्र अलग क्र दिया,

सौमित्र- माँ छुड़ानी रंडी तेरी छूट तो एक दम साफ़ ह किसके लिए साफ़ रखती ह इन्हे,

दासी कुछ नहीं बोल प् रही थी,

सौमित्र- बोल रैंड की जनि वानर तेरी छूट में गरम लोहा दाल दूंगी,

दासी- जी वो महारानी महल में वह के बाल साफ़ रखना हम दसियो का नियम होता ह, हमे सीखा क्र यहाँ भेज आजाता ह,

सौमित्र- अच्छा अच्छा तेरी वो गुरु माँ सिखाती होगी,

(असल में महल की दसियो को अलग से तैयार किया जाता था, पहले उन्हें महल के एक वैशल्या में वह की एक गुरु से शिक्षा मिलती थी, वो गुरु भी पहले दासी होती थी तरक्की मिलकर वाओ अहा पहकहति थी और आने वाली नै दसियो को तैयार किया जाता था,)

दासी- जी महारानी

सौमित्र- तो तेरी उस गुरु ने तुझे किसी महारनी को खुश करना नहीं सिखाया,

दासी- जी सिखाया था लेकिन इस महल में कभी जरुरत नहीं पड़ी

सौमित्र- तो भें की लोदी आज जरुरत ह, चल दिखा मुझे तेरी उस गुरु ने क्या सिखाया ह, अगर तू मुझे खुश नहीं कर पाई तो मैं खुद उस वैशल्या में जाकर उस गुरु की गांड मार लुंगी समझी,

अब दासी की गुरु की इज्जत की बात थी, दासी ने घेरि साँस भरी और सौमित्र की कमर में हाथ डाला और उसकी गांड को सहलाती हुई निचे ले गई और सीधे उसकी गांड में हाथ घुसा दिया, और कास क्र पकड़ क्र भींच दिया, सौमित्र की आह्ह्ह्ह निकल गई,

सौमित्र- दिखती कमजोर सी ह हाथ तो तेरे मजबूत हैं,

दासी ने सौमित्र की चोली को पकड़ा और खींच क्र फाड़ दिया, सौमित्र की चूचिया उछाल क्र बहार आ गई, इतनी बड़ी चूचिया देख दासी की आँखे भी खुल सी गई, एक दम गोल और ठोस थी, दासी ने तुरंत सौमित्र की चूचिया को अपने हाथो में पकड़ा और दबाने लगी और फिर अपने हॉट उसकी चूचियों पैर लगा दिए,

सौमित्र के अंदर आग भड़की हुई थी, जिस पैर दासी के ठन्डे हॉट उसे मजा दे रहे थे, सौमित्र ने दासी का सर अपनी चूचियों पैर दबा दिया, फिर दासी ने सौमित्र के घाघरे में हाथ डाला और नाडा खींच क्र खोल दिया,

दासी के लिए ये उसके जीवन का सब हसीं पल था, वो एक महारानी के नरम नरम बिस्टेर पैर लेती हुई थी और उसके नंगे बदन से महारानी का नंगा बदन रगड़ रहा था, दासी महारानी के हॉट और उसकी चूचियों को चूस रही थी, ये पल शायद hi किसी दासी के जीवन में आता हो, आज वो दासी खुद को सबसे भाग्यशाली समझ रही थी,

दासी ने सौमित्र को बिस्टेर पैर लिटाया और उसका घागरा निकल दिया, सौमित्र की बड़ी गांड उसके सामने आ गई, दासी ने तुरंत अपने हॉट सौमित्र की गांड पैर रख दिए, और फिर अपनी जीभ से सौमित्र की गांड और जांघो को चाटने लगी, सौमित्र के चूतड़ चाटने के बाद वो उसकी कमर को चाटती हुई उप्पेर गई और सौमित्र ाको सीधा कर दिया और फिर उसके हॉट चूमते हुए निचे चूचियों पैर आग ागि फिर पेट को चूमती हुई उसकी नाभि को जीभ से चाटने लगी, दासी के हाथ सौमित्र की जांघो को शेला रहे थे, फिर दासी अपनी चूचिया सौमित्र की जांघो पैर रगड़ने लगी और निचे होने लगी और छूट के उप्पेर के हिस्से को चाटने लगी जो बुल्कुल चिकना था,

दासी ने अपनी जीभ निकल क्र सौमित्र की छूट के उप्पेर छठा और फिर निचे की तरफ चली गई, और सौमित्र की जांघो को खोला और अपने हॉट उसकी छूट पैर रख दिए, सौमित्र की सिसकी निकल गई उसने दासी का सर अपनी छूट पैर दबा दिया, दासी समझ गई की सौमित्र कितनी तड़प रही ह, क्योकि उसकी छूट का रास किसी नदी की तरह बह रहा था, दासी ने तुरंत अपनी जीभ सौमित्र की छूट में घुसाई और जीभ से छूट को कुरेदने लगी, सौमित्र ये हुम्ला बर्दास्त नहीं क्र पाई और कुछ hi देर में दासी के मुँह पैर झड़ने लगी, वो अपनी गांड उठा उठा क्र दासी के मुँह पैर रगड़ने लगी, कुछ दे में सौमित्र शांत होने लगी लेकिन दासी रुकी नहीं वो लगातार सौमित्र की छूट चुस्ती रही,






सौमित्र को बहुत मजा आ रहा था लेकिन दासी का मुँह अब थकने लगा था, लेकिन महारानी को बिच में कैसे छोड़ सकती थी तो उसने नया तरीका लगाया और उठ क्र बैठ गई और सौमित्र की कमर उठा क्र उसकी छूट को उप्पेर उठा लिया फिर अपने पेअर सौमित्र के पैरो के बिच में डेल और अपनी छूट सौमित्र की छूट पैर रकः क्र बैठ गई, ये सौमित्र के लिए बिलकुल अलग अनुभव था, दासी ने अपनी छूट सौमित्र की छूट पैर रगड़नी शुरू की,





और बिच बिच में वो अपनी छूट सौमित्र की छूट पैर पटक रही थी जैसे कोई मर्द धक्के लगा रहा हो, सौमित्र के मजा दुगना हो गया था, दासी के पेअर जो सौमित्र की चूचियों के बिच रगड़ रहा था, सौमित्र दासी के उस पेअर को चूमने लगी वो मजे में भूल hi गई की ये किसी दासी का पेअर ह, दासी के लिए भी इससे ज्यादा अच्छा दिन और क्या हो सकता था जब एक महारानी उसके पेअर चाट रही थी,





दोनों का मजा काफी देर चला और दोनों एक साथ झड़ने लगी, दासी को लगा सौमित्र शांत हो जाएगी लेकिन सौमित्र दो बार झड़ने के बाद भी दासी को खुद से चिपका रही थी उसकी चूचियों को अपने चूचियों से रगड़ रही थी, दासी को कुछ और सोचना था तो उसने जोश जोश में बड़ा कदम उठा दिया और सौमित्र को घोड़ी बना दिया और उसकी गांड पैर 2-4 थपड मरे, सौमित्र वासना केन ऐश एमए थी उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था, उसे तो मजा आ रहा था, दासी ने सौमित्र के बाल पकडे और उसकी गांड पैर बैठ गई, और अपनी छूट सौमित्र की गांड पैर रगड़ने लगी और दूसरे हाथ से अपनी 3 उंगलिया सौमित्र की छूट में घुसा दी, अब सौमित्र को असली मजा आने लगा था,





दासी उसके बाल पकड़ क्र उसकी गांड पैर कूद रही थी जैसे घोड़ी की सवारी कर रही हो और अपनी उंगलिया सौमित्र की छूट में अंदर बहार कर रही थी, सौमित्र मजे में पागल हुई जा रही थी, दासी को मजा तो आ hi रहा था लेकिन आज वो जॉब hi कर रही थी उससे दासी के अंदर का एक गुस्सा सा निकल रहा था जैसे वो पुरे दासी समाज का बदला सौमित्र से ले रही हो, जैसे इन महल वालो ने दसियो पैर अत्याचार किये हैं उसके बदले आज वो सौमित्र को छोड़ रही थी जलील क्र रही थी,





तभी सौमित्र फिर से झड़ने लगी और इस बार वो इतनी जोर से जड़ी की सौमित्र का मूत निकल गया, और सौमित्र जो एक नंबर की आयाश औरत थी, वो कितने भी वासना के नशे में रहे वो जानती थी कब क्या करना ह, उसने तुरंत दासी को अपने नीच ेलिटाया और अपनी छूट उसके मुँह पैर रख क्र बैठ गई और झड़ने लगी साथ साथ दासी के मुँह में मूतने भी लगी, दासी सौमित्र के सर अपनी जांघो के बिच में दबा क्र बैठी हुई थी जिससे वो हिल भी नहीं प् रही थी, और सौमित्र का मूत दासी के मुँह में जार है था, पिने के अलावा उसके पास कोई और रास्ता नहीं था, सौमित्र न जाने कब तक अपनी छूट दासी के मुँह पैर दबाये बैठी रही, दासी का दम घुटने लगा था, वो अपने पेअर पटकने लगी थी,





तभी वह ज्वाला आ गया और अपने माँ को नंगी एक दासी के मुँह पैर छड़ी बीटा देख एक पल के लिए चौंक गया,

ज्वाला- माँ ये मर जाएगी,

सौमित्र ने ज्वाला की तरफ देखा और एक चादर उठा क्र अपने उप्पेर डाली लेकिन उस दासी के मुँह पैर से नहीं उठी,

सौमित्र- इसने मेरे शरीर को छुआ ह और वासना की खुमारी में न जाने क्या क्या किया ह, अब ये बात जाकर पुरे राजय में बताइये अपनी ढींगे हकेगी की इसने महारिणी को घोड़ी बना क्र उसकी सवारी की ह, और मैं महारानी हु मैं कुछ भी कर सकती हम एरा कोईकुछ नहीं कर सकता,

ज्वाला खड़ा हु अहसन लगा और वही उस दासी ने सौमित्र की जांघो के बिच छूट के निचे दबे हु असंस रुकने से दम तोड़ दिया,

दासी के मरने के बाद सौमित्र उसके उप्पेर से उत्तरी और एक सिल्क की चादर अपने उप्पेर लेप्ट क्र ज्वाला के सामने आ गई, वो पसीने से पूरी भीगी हुई थी जिससे चादर उसके नंगे शरीर से पूरी तरह चिपकी हुई थी सौमित्र का ेके क कटाव अलग hi दिख रहा था, उसकी चूचियों के चूचक चादर में साफ़ उभर क्र आ रहे थे, ज्वाला किन अजर सौमित्र के शरीर पैर hi थी, इस पुरे राजय में ऐसे शरीर वाली बहुत hi काम औरते थी, और कोई भी मर्द ऐसे शरीर की औरत को पाने के लिए कुछ भी कर सकता था,

ज्वाला नई नजरे खुद पैर महसूस करके सौमित्र हलकी सी मुस्कुराई लेकिन उसने कुछ भी ढकने की कोशिश नहीं की,

सौमित्र- तू यहाँ क्या कर रहा ह, तुझे पता ह न ये मेरा आराम करने का समय ह इस समय कोई नहीं आता,

ज्वाला- है वो तो मैं देख hi रहा था आप कैसा आराम कर रही थी, लेकिन मैं तो खबर लेकर आया था

सौमित्र- कैसी खबर

ज्वाला- आज अभिजीत काम्य बुआ के कमरे में गया था और जब वह से बहार आया तो तुरंत इस राजय से बहार निकल गया, और अपने साथ किसी को नहीं लेकर गया,

सौमित्र- वो तो अकेला कही नहीं जाता,

ज्वाला- वही तो, वो तो मूतने भी अकेला नहीं जाता तब भी उसके साथ सूरज या कोई और होता ह,

सौमित्र- इस काम्य का कोई भरोसा नहीं ह, ये इस राजय के सबसे खतरनाक ह, मुझे आज तक ये समझ नहीं आया की महाराज ने इसे अपने राजय में रखा क्यों ह, इसे अपने राजय में क्यों नहीं भेजते, और इसका पति कुणाल वो भी अपनी सुसराल में पड़ा हुआ ह उसकी कोई इज्जत नहीं करता फिर भी वो यहाँ ह, इतने सालो से वो यहाँ ह उसकी जरूर कोई साजिश ह, और उसने जो अभी कुछ समय में साजिशे की हैं वो उससे ये hi पता चलता ह की वो हम सबके लिए खतरा ह,

ज्वाला- मैं क्या करू

सौमित्र- उसके पीछे अपने जासूस भेज,

ज्वाला- वो तो मैंने भेज दिए हैं,

सौमित्र- देव हमारे रस्ते से हैट गया ह, अब हमे इस काम्य और अभिजीत को भी हटाना होगा, ये अभिजीत तो इस राजय का ह भी नहीं फिर ये युवाज पद के लिए प्रतियोगिता में उठा था, कोमय के इरादे ठीक नहीं ह,

ज्वाला- इस अभिजीत को तो मैं जब चहु रस्ते से हटा दूंगा, इसके अंदर इतना दम hi नहीं ह जो ये मुझसे टकरा सके, मेरी टक्कर उस सूरज से ह, वो बहुत ताकतवर ह,

सौमित्र- हम सबको रस्ते से हटा देंगे,

दोनों माँ बेटे अपनी hi योजना बनाने में लगे थे,

इधर प्रताप सिंह रेवती के साथ घूम रहा था अपने राजय में,

प्रताप सिंह- रेवती अब तू खुश ह न, तूने बहुत समय तक महल के अंदर जीवन बिताया ह, अब तुझे बहार की जिंदगी देखनी ह न,

रेवती ने डरते हुए है में सर हिलाया,

प्रताप सिंह- अरे दर क्यों रही ह, खुल क्र बोलै कर अब तू हमेशा ेरे साथ रहेगी तेरी हर जरुरत को मैं पूरा करूँगा, तुझे जॉब hi चाहिए मुझस ेबोल दिया कर,

इतना बोल क्र प्रताप सिंह ने रेवती को कमर पैर हाथ रख दिया, ये पहेली बार था जब प्रताप सिंह ने अपनी बेटी को छुआ था, रेवती का दिल अपने पिता के लिए स्नेह से उभर आया लेकिन अगले hi पल वो स्नेह घबराहट में बदल गया जब प्रताप सिंह का हाथ निचे सरकता हुआ रेवती की उभरी hi गांड पैर पहुंच गया, प्रताप सिंह ने हाथ हटाया नहीं वो बस अपना हाथ उसकी गांड पैर रख क्र इधर उधर देखता रहा,

रेवती घबरा गई थी उसकी हिल भी नहीं प् रही थी, उसे यकीन hi नहीं हो रहा था उसके साथ ये क्या हो रहा ह, उसके शरीर को पहेली बार किसी मर्द ने छुआ था ो भी उसके पिता ने और छुआ भी तो उस अंग को जिसे पति के अलावा कोई नहीं छू सकता,

रेवती समझ नहीं प् रही थी वो कैसे प्रतकिर्या दे, वो शांत रही, वही प्रताप सिंह खुश हो गया उसे लगा जैसे रेवती उसका साथ दे रही ह, रास्ता कहब था रथ पैर झटका लगा जिससे प्रताप सिंह ने अपना हाथ हटा लिया और रथ को पकड़ लिया, हाथ हटने से रेवती ने चैन की साँस ली, रेवती दोहरी मानसिकता में थी, एक तो उसके पिता का हाथ उसके शरीर पैर लगा इससे वो बैचैन थी दूसरा उसके शरीर पैर पहेली बार किसी मर्द के हाथ लगे थे तो उसकी जांघो के बिच न चाहते हुए भी हलचल शुरू हो चुकी थी,

रेवती महल आने तक एक दम शांत कड़ी रही और महल में घुसते hi दौड़ती हुई अपने कमरे चली गई, प्रताप सिंह भी तेजी से रेणुका के पास पंहुचा और उसे सब बताया,

रेणुका- आप बहुत ज्यादा उतावले हो रहे हैं, ये आपने ठीक नहीं किया वो लड़की ह उसने कुछ नहीं कहा इसका मतलब ये नहीं ह की वो तैयार ह, आपने हमेषा जबरदस्ती करनी सीखी ह, किसी लड़की को प्यार से अपना बनाया ह क्या कभी,

प्रताप सिंह – उसकी कोई जरुरत hi नहीं पड़ी,

रेणुका- लेकिन यहाँ पड़ेगी, वो आपकी बेटी ह, और अगर उसके साथ जबरदस्ती की और उसने बगावत कर दी तो न आप उसे मार सकते हैं न hi कैद क्र सकते हैं, क्योकि वही आपका सुरक्षा कवच ह, अगर उसे मारा तो आपका कवच टूट जायेगा और उसे कैद किया तो आपको भी उसके साथ कैद होना पद जायेगा,

प्रताप सिंह के चेरे पैर चिंता आ गई,

प्रताप सिंह- तो क्या करू मैं,

रेणुका- उसे थोड़ा प्यार दीजिये और आजादी दीजिये, ताकि वो आप पर विश्वास करे और आपके नजदीक आये, बस किसी मर्द की चाय उस पैर न पद पाए, अगर कोई मर्द उसके करीब हो तो वो बस आप हो, बाकि मुझ पैर छोड़ दीजिये उसके अंदर इतनी वासना भर दूंगी की वो खुद आपके पास चली आएगी,

प्रताप सिंह- बड़ा खुशकिस्मत हु मैं जोट ुम मेर पत्नी बानी,

रेणुका- इस संसार में मेरी क्रूरता बस आप hi पूरी करवा सकते थे, इसलिए आपकी हर इच्छा मैं पूरी करती हु,

प्रताप सिंह- सच में तुम कमल की औरत हो, मैं खुद को hi सबसे क्रूर समझता था लेकिन तुम्हे मेरी ये गलतफहमी दूर कर दी, अब बस जल्दी से रेवती को तैयार क्र दो, मैं उसे अपना बनाना चाहता हु,

रेणुका – अब आप उसे थोड़ी आजादी दीजिये, जवानी में कदम रखा ह उसने जरा उस जवानी का असर उसके यौवन पैर होने दीजिये,

प्रताप सिंह- जैसा तुम कहो, लेकिन आज मैंने जब उसके शरीर को छुआ तो झटका सा लगा, बड़ा कड़क शरीर ह उसका, मैंने आज तक उस पैर धयान क्यों नहीं दिया, बड़ी खूबसूरत ह हमारी रेवती, दुनिया की साडी खूबसूरती मेरी गुलाम होनी चाहिए,

रेणुका- और उस गुलाम खूबसूरती को मुझे कुचलने में मजा आता ह,

दोनों पति पत्नी हसने लगे,

फिर रेणुका रेवती के पास गई और देखा रेवती अपने बिस्टेर पैर उलटी लेती हुई ह और उसकी गांड का आकर बड़ा hi खूबसूरत लग रहा ह,

रेणुका मुस्कुरा दी,

रेणुका मन में- बड़ी खूबसूरत गांड ह किसी का भी दिल आ जाये इस पैर तो,

किसी के आने की आहात से रेवती उठ गई अपनी माँ को वह देख क्र डार्क र कड़ी हो गई,

रेवती- माँ आप यहाँ

रेणुका- अरे तू ऐसे दर क्यों गई तेरी माँ hi तो हु, ाचा ये बता तू खुश ह न तुझे महल से बहार निकलने का मौका मिला ह कैसा लग रहा ह,

रेवती- माँ मुझे ख़ुशी ह की आपने और पिता जी ने मुझे बहार निकलने का मौका दिया,

रेणुका- अब तू चिंता मत क्र तेरा जो दिल करे वो hi किया कर, और जो चाहिए वो मुझसे या अपने पिता से खुल क्र बोल दिया कर,

रेवती खुश हो गई, लेकिन उसके दिमाग में आज की घटना घूम रही थी उसे समझ नहीं आ रहा था ो अपनी माँ से कैसे कहे कही रेणुका नाराज हो गई तो क्या होगा, इसी दर से वो चुप रह गई,

रेणुका- तुझे बस एक बात का ख्याल रखना ह किट ेरे पिता के सिवा दुनिया का कोई मर्द तेरे आस पास भी न आये और किसी किन अजर तुझ पैर न पड़े और न hi तू किसी और मर्द को देखे,

रेवती की इस बात का मतलब तो ठीक से समझ नहीं आया लेकिन उसने अपनी माँ को मन है कर दिया की ऐसा hi होगा, लेकिन आप सब जानते हैं जिस चीज के लिए हमे रोका जाता ह हमारा डिंगा हमसे वो काम जरूर करवाता ह, दुनिया की कोई ताकत उस काम को करने से नहीं रोक पति, वैसे hi रेवती के दिमाग में जिज्ञाषा जग गई,

रेवती- माँ मैं हमारे उपवन में जाना चाहती हु, वह भेटे पानी में नहाना चाहती हु,

रेणुका- है है चली जाना कल सुबह चली जाना, बस ख्याल रहे तेरे अलावा कोई दासी भी उस उपवन के अंदर नहीं आणि चाहिए,

रेवती- ठीक ह माँ,

वही प्रताप सिंह का सबसे बड़ा बीटा जो अपने आप में hi एक जानवर था, उसके अंदर प्रताप सिंह का खून का पूरा असर था, और बेसुमार ताकत थी, प्रताप सिंह उसी की वजह से कभी कोई युद्ध नहीं हरा था, जब से उसे युवराज बनाया गयाथा तब से वही सभी युद्ध लड़ता था, जिस युद्ध में वो उतर जाता सामने कोई भी सेना उसका सामना नहीं करती थी, जब से उसे इस बात का पता चला था की किसी राक्षश ने उसके पिता पैर हुम्ला किया ह तब से वो पागलो की तरह उस राक्षश को ढूढ़ने में लगा हुआ था, उसने राक्षश की जानकरी देने वाले को इनाम की भी घोषणा कर दी थी, और दूसरी तैयारी वो भवर सिंह के राजय पैर हुम्ला करने की कर रहा था, जहा उसके पिता का अपमान हुआ, जिन लड़कियों से उसकी शादी रुक गई अब वो उस राजय को hi तबाह करके वह की हर राजकुमारी को अपना गुलाम बनाना छटा था,

खैर ये सब चल रहा था, सभी उस राक्षश को ढूढ़ने में लगे हुए थे,

अगली सुबह रेवती अपने उपवन में पहुंच गाइट hi जहा वो कभी अपने माँ के साथ एक या दो बार hi आई थी, यहाँ उसने रेणुका को बुल्कुल नंगी कोकर नहाते देखा था, भेटे हुए पानी में खुले आसमान ने निचे उसने अपनी hi माँ से नंगे होकर नहाने की बड़ी तारीफ सुनी थी, और जब उसके माँ बाप उस पैर इतने महरबान थे तो उसने सबसे पहले वही मांग लिया जिसके बारे में उसने अपनी माँ से सुना था, उसे साथ जो दसिया आई थी वो उपवन के बहार hi रुक गई, रेवती अकेली hi उपवन के अंदर गई और इतनी खूबसूरती देख क्र अकेली hi खुश हो रही थी, लेकिन आप सब जानते hi होंगे वो ख़ुशी कुछ hi देर की होती ह जिसे बाटने के लिए कोई न हो, कुछ hi देर में रेवती अकेले पैन से उदास सी होने लगी, फिर उसने नहाने का विचार किया और अपने कपडे उतरने लगी लेकिन न जाने क्या सोच क्र रुक गई और रानियों के लिए बने तालाब में घुस गई, पानी में भीगने से रेवती के कपड़ ेउसके शरीर से चिपक गए थे,

रेवती ने जब अपने शरीर को देखा और अपने उभरी हुई चूचियों पैर चिपके हुए कपड़ो को देखा तो वो कामुक होने लगी और अपनी hi चूचियों पैर हाथ फिरन ेलगी, तभी उसे पास को फुलवारी में कुछ हलचल महसूस हुई उसने डार्क र उधर देखा तो वह कोई नहीं था, वो कुछ देर इधर ुधा रदेखति रही, जब कुछ नहीं दिखा तो फिर से नहाने लगी, और जैसी hi उसने पानी के अंदर डुबकी लगाई और उप्पेर आई तो उसके समाने एक बहुत hi खूसूरत लड़का खड़ा था, वो इतना खूबसूरत था की शायद hi दुनिया में कोई उसे देख क्र उससे नजर हटा सके, और वो रेवती के बिलकुल सामने पानी में hi खड़ा था, रेवती को यकीन hi नहीं हुआ कोई लड़का उसके इतने करीब खड़ा,

कुछ पल तो रेवती उसे निहारती रही लेकिन जैसे hi लगा ये अनजान मर्द ह तो वो चीखने वाली थी तभी उस लड़के ने रेवती के मुँह पैर अपना हाथ रख दिया और उसे खुद से चिपका लिया, रेवती का भीगा हुआ शरीर उस लड़के से चिपक गया, रेवती की चूचिया उस लड़के के सीने में डाब गई, पानी के अंदर चूचिया वाइस ेभी थोड़ा सा फूल जाती हैं जो इस समय रेवती की भी फूली हुई थी और वो थोड़ी कामुक भी थी,


रेवती दर गई लेकिन उस लड़के की ताकत इतनी ज्यादा थी की रेवती जरा सी हिल तक नहीं पाई, उस लड़के ने रेवती के हाथो को पकड़ लिया और पानी के अंदर ले गया और रेवती को अपनी बहो में भर लिया,
 
अपडेट-13



प्रताप सिंह अपनी बेटी को भोगने के सपने देख रहा था और वही कोई अनजान लड़का उसकी बेटी के शरीर को पानी के अंदर अपने शरीर से रगड़ रहा था, रेवती पानी के अंदर चीला भी नहीं प् रही थी, उस लड़के ने रेवती का मुँह छोड़ दिया और उसे खुद से चिपका लिया और अपना हाथ रेवती की गांड पैर लेजाकर पकड़ लिया, एक तो रेवती की चूचिया उसकी छाती पैर रगड़ रही थी दूसरा रेवती की गांड उसके हाथो में थी,

कुछ देर पानी में तैरने के बाद उस लड़के ने रेवती को बहार निकला और फिर से उसका मुँह दबा लिया,

रेवती बहुत ज्यादा घबराई हुई थी, जब लड़के ने घबराई हुई रेवती की आँखों में देखा जहा उसे आंसू दिखाई दिए,

लड़का- अरे अरे रोना नहीं, मैं तुम्हे कुछ नहीं करूँगा,

रेवती ने बस अपना मुँह छुड़वाने की कोशिश की,

लड़का- अगर मैंने तुम्हारा मुँह छोड़ा तो तुम चिल्लाओगी,

रेवती ने न में सर हिलाया, तो लड़क ेने मुँह पैर से हल्का सा हाथ हटाया तो रेवती एक दम छिलने लगी तो लड़के ने फिर से मुँह दबा लिया,

लड़का- तुम तो झूटी हो, मुझसे मन करने फिर भी चिल्ला रही हो,

रेवती बेबस सी उसे देख रही थी,

लड़का- देखो अगर तुम छाती हो मैं तुम्हे कुछ न करू तो बस चिलाना मत, मैं तो बस बात करने आया हु,

इस बार रेवती ने हार मन ली, उसने इशारो में कहा की वो अब नहीं चिलायेगी, लड़के ने मुँह पैर से हाथ हटा लिया, रेवती गुस्से में उसे देखती रही,

रेवती- कोण हो तुम, और तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यहाँ आने की, तुम जानते हो मैं कोण हु,

लड़का- मैं क्यों जणू तुम कोण हो, मैं तो यहाँ से गुजर रहा था तो इधर बड़ी हरियाली सी दिखी तो मैं इधर आ गया फिर पानी की आवाज तो इधर आ गया यहाँ आकर देखा तो इतनी खूबसूरत लड़की अकेली नाहा रही ह और थोड़ी उदास सिब hi लग रही ह तो सोचा क्यों न इसके साथ नाहा लू इसे भी साथी मिल जायेगा,

रेवती ने पहेली बार किसी मर्द से अपनी तारीफ सुनी थी, और जवानी में कदम रखने वाली लड़की को उसकी सुंदरता की तारीफ सबसे ज्यादा पिरया होती ह,

रेवती- अच्छा जी, वैसे अकेली लड़की को उदास देख क्र उसकी अकेलापन दूर करने वाले आप ह कोण,

लड़का- मेरा नाम देव ह, दूर देश से आया हु, घूमने फिरने निकला हु,

रेवती- दूर देश के रहने वाले देव आप यहाँ अंदर घुसे कैसे, यहाँ तक आना किसी के लिए भी संभव नहीं ह,

देव- मैं तो आ गया, या यु कहु आपकी सुंदरता खींच ले,

रेवती- आपको इतनी दूर से मेरी सुंदरता दिख गाइट hi,

देव- ये बात तो आप अपनी सुंदरता से पूछिए,

रेवती- बहुत मजाक हो गया, यहाँ से चले जाओ, अगर मेरे पिता को पता चला न तो वो आपको मरवा देंगे,

देव- आपको मेरी फ़िक्र हो रही ह,

रेवती- मैं क्यों फ़िक्र करुँगी, आप कोई जासूस भी हो सकते हो,

देव- फिर तो आप शोर मचा दो और सबको बुला कर बता दो की आपने एक जासूस पकड़ा ह,

रेवती- मैं सच में शोर मचा दूंगी,

देव- मचाइए न शोर,

रेवती ने छिलने का नाटक किया लेकिन आवाज गले से बहार नहीं निकली, देव बस मुस्कुराता रहा,

रेवती- मैं आपको मौका दे रही हु, चले जाइये, वर्ण आपको संशय हो जाएगी,

देव- आप खेती हैं तो चला जाता हु, आपको मेरा यहाँ आना शायद अच्छा नहीं लगा,

रेवती- ऐसी बात नहीं ह, वो तो मैं

देव- मतलब आपको अच्छा लगा,

रेवती उसे देखने लगी, देव ने तुरंत आगे बढ़ क्र रेवती के होतो पैर अपने हॉट रख दिए और उसे पानी के अंदर ले गया, रेवती एक दम बोखला गई लेकिन पानी के अंदर कुछ नहीं क्र सकती थी, देव ने रेवती के होतो को अच्छे से चूमा और फिर उसे छोड़ दिया, रेवती एक दम पानी के बहार आई और घेरि घेरि साँस लेने लगी, जब उसका साँस और दिल संयम में आया तो उसने देव को डकः लेकिन देव वह नहीं था, रेवती ने पानी के अंदर देखा लेकिन देव वह से जा चुक्का था, वो कब निकला किधर से निकला रेवती को पता hi नहीं चला,

रेवती बौखलाई सी कड़ी रह गई,

वही एक सुमसान जगह पैर बिलकुल अंधकार था एक दम अँधेरा, ऐसा अँधेरा की जिसके अंदर अगर सूर्य भी जगमगाये तो दिख न पाए, तभी कुछ हलचल हुई और एक आवाज गुंजी- सात्विक

ये भौमिक जी की आवाज थी,

सात्विक- भौमिक तुम ठीक हो,

भौमिक- है मैं ठीक हूत ुम ठीक हो न, ये हम कहा पैर हैं, और कुछ दिख क्यों नहीं रहा ह, इतना अंधकार कैसे ह यहाँ

सात्विक- वो देखियो उधर एक रौशनी दिख रही ह,

दोनों को एक रौशनी का बिंदु सा दिख रहा था, दोनों भाइयो ने अंदाजे से एक दूसरे का हाथ पकड़ा और उस रौशनी की तरफ चल दिए, जैसे जैसी वो रौशनी के करीब जा रहे थे रौशनी तेज होती जार hi थी और जब वो उसके करीब पहुंचे तो रौशनी का एक गोला सा दिखाई दिया,

सात्विक- ये क्या हो सकता ह

भौमिक- बिना छुए तो पता नहीं चलेगा,

सात्विक- ठीक ह दोनों एक साथ उठाते हैं इसे,

दोनों भाइयो ने एक साथ उस गोले को छुआ और एक दम चारो तरफ तेज रौशनी हो गई और दोनों भाई एक दम बेहोश हो गए और वही गिर गए, और वो रौशनी का गोला उनके उप्पेर रुक गया और अचानक उस गले के दो भाग हुए और दोनों में एक एक भाग समां गया, और फिर से अँधेरा हो गया,

तभी उस जगह से काफी दुरी पैर एक पहाड़ ने एक हुंकार सी भरी गई, जैसे कोई विशाल जानवर सो कर उठा हो, और उस हुंकार से आस पास के जीतनेय भी जंगली जानवर थे सब भाग खड़े हुए, ये बस एक पहाड़ था, वो घने जंगल के बीचो बिच, इतना घाना जंगल की कोई इंसान कभी उसके अंदर नहीं घुस सकता था, लेकिन उस पहाड़ के उप्पेर कुछ लोग रहते थे, ऐसा लग रहा था जैसे वो बहुत लम्बे समय से यहाँ रहते हैं, पैदा पैर hi उनके घर थे, जंगली जानवरो को मर कर कहते थे, पूरा एक समुदाय था वह, एक गाओं जैसा बसाया हुआ था,

उस हुनकर को सुनकर पूरा गाओं एक दम खड़ा हो गया और एक जगह पैर इकठा हो गया,

उनमे से एक बुजुर्ग आदमी- वो आने वाले हैं, वो आने वाले हैं, हमारा इंतजार अब ख़तम होने वाला ह,

एक जवान लड़का- बाबा क्या हमारी पीडियो की सजा अब समाप्त होने वाली ह,

बुजुर्ग- है बीटा उम्मीद की किरण जग रही ह, हमारा जीवन बदलने वाला ह, आज ख़ुशी का दिन ह खुशिया मनाओ, बस धयान रहे यहाँ की आवाज बहार जंगल के बहार तक न चली जाये,

लड़का- बाबा ये जंगल इतना बड़ा ह की यहाँ की आवाज कोई नहीं सुन सकता, और इस जंगल में जो भी आएगा वो वापस नहीं जायेगा, हमारा भोजन बन जायेगा, वैसे भी बहुत समय से कोई इंसान इधर नहीं आया ह, जानवरो का मांस खा खा क्र अब थक चुके हैं,

इन लोगो को मांस से मतलब था ो चाहे किसी का भी हो,

खैर चलते हैं भवर सिंह के महल में जहा भवर सिंह अपने कमरे में लेता हुआ था, तभी उसके पास काम्य आ गई और कमरे के दरवाजे बंद हो गए, दोनों भाई बहन न जाने किस बारे में घेरि बात चित कर रहे थे, तभी वह अमरावती भी आ गई लेकिन द्वारपाल ने उसे रोक दिया,

अमरावती- तेरी इतनी हिम्मत तूने मुझे रोका,

ड्रॉपल- महारानी अंदर महारानी काम्य जी हैं, और महाराज का आदेश ह कोई भी अंदर न आने पाए वर्ण मेरी गार्डन काट दी जाएगी, और अगर किसी ने जबरदस्ती की तो उसका सर काट दिया जायेगा,

अब अमरावती की हिम्मत नहीं थी आगे कदम रखने की लेकिन उसका क्रोध सातवे आसमान पैर था, वो गुस्से में आपमें कमरे में आ गई, वो जानती थी की अगर इस राजय में अगर कोई उसका कुछ बिगड़ सकता ह तो सिर्फ काम्य ह, अब उसने काम्य को रस्ते से हटाने का फैसला कर लिया था, लेकिन संशय ये थी की भवर सिंह काम्य पैर जितना भरोसा करता था उतना किसी पैर नहीं करता, ऐसा क्या तरीका अपनाया जाये जिससे काम्य को रस्ते से हटाया जा सके,

चारो तरफ साजिसे hi साजिशे थी सबको राजपथ चाहिए था, कोई किसी की खुशी या दुःख के बारे कभी बात नहीं करता था सबको बस सत्ता चाहिए थी, लेकिन वही दूर एक गुफा में देव और निहारिका बैठे हुए थे जिनके अंदर कभी कोई लालच नहीं था, और आज तो उनके बस नफरत थी, सिर्फ नफरत,

निहारिका- क्या हुआ वह

देव- मुलाकात तो कर आया हु और अपना पहला कदम भी उठा आया हु, अब देखते हैं उसका क्या असर होगा,

निहारिका- जॉब hi करना होगा जल्दी करना होगा, लेकिन ख्याल रहे कुछ भी जबरदस्ती नहीं होना चाहिए, सब अपनी मर्जी से आये, तभी इन सबका घमंड तोडा जायेगा,

देव- माँ हमे महल में जाना होगा, वह के लोगो को अगर सबक सीखना ह तो हमे अंदर जाना होगा,

निहारिका- इसी लिए तो सबसे पहले इस प्रताप सिंह का इंतजाम करना होगा, ये hi वो इंसान ह जो महल के रस्ते खोलेगा, और उसके बाद हमे ढूंढ़ना ह कस्तूरी को,

देव- जिस दिन वो मेरे सामने आई मैं उसे मार दूंगा

निहारिका- नहीं तू ऐसा कुछ नहीं करेगा, उसे बस ढूंढ़ना होगा वो hi तो साडी सचाई बताएगी, उसने ऐसा क्यों किया किसके कहने पैर किया, सबकी साजिश सामने लानी होंगी,

हमे जो करना ह उसके लिए महल में जाना hi होगा,

देव- ठीक ह माँ मैं खोजता हु उसे,

निहारिका- मैं एक बात आज तक नहीं समझ पाई हु की हम बचे कैसे, और इस गुफा में कैसे पहुंचे,

देव- ये गुफा इस झरने के बिलकुल निचे ह, जब हम झरने से गिरे थे तो किसी चीज से टकराये थे, उसके बाद मुझे भी कुछ याद नहीं, हो सकता ह हम किसी पत्थर से टकरा क्र इस गुफा में आ गिरे,

निहारिका- लेकिन हमारे घाव कैसे भरे, और ये चीता ये भी हमारे साथ था इसके पेट में तो तलवार घुसी थी ये फिर भी जिन्दा ह, और तेरा शरीर ये पहले से कितना बदल गया ह,

देव- है वो तो ह, ये सब तो मेरी समझ में भी नहीं आया ये क्या हुआ, कैसे हुआ, शरीर तो बदल गया ह और आपका शरीर भी बदल गया ह आप पहले से भी कही ज्यादा खूबसूरत हो गई हैं,

निहारिका- अब मेरी खूबसूरती मेरी कमजोरी नहीं बनेगी, अब कोई मेरी तरफ आँख नहीं उठाएगा,

देव बस मुस्कुराया, तभी देव को बहुत तेज दर्द होने लगा, वो अपने पेट को पकड़ क्र बैठ गया ahhhhhhhhhhhhhhhhh\

निहारिका- क्या हुआ बीटा क्या हुआ तुझे,

देव- पता नहीं माँ बहुत तेज दर्द हो रहा ह,

निहारिका- कहा हो रहा ह,

देव- निचे,

निहारिका- निचे कहा, क्या पेट में दर्द ह,

देव- नहीं माँ निचे

निहारिका- निचे कहा,

देव से दर्द अब बर्दास्त नहीं हो रहा था उसने अपना निचे का कपडा खोला और निहारिका को दिखाया, निहारिका देख क्र घबरा सी गई,

देव- माँ इसमें बहुत दर्द हो रहा ह,

निहारिका ने डकः देव का लुंड एक दम खड़ा था और बहुत कड़क हो रखा था, लुंड की साडी नसे साफ़ साफ़ दिख रही थी,

निहारिका- इसमें इसमें कैसे,

देव- पता नहीं माँ बाउट दर्द हो रहा ह, ऐसा लग रहा ह जैस ऑय फैट जायेगा,

निहारिका देव के पेट पैर हाथ फिरने लगी उसे समझ नहीं आ रहा था क्या करे, वो लुंड को पकड़ना चाहती थी उसे देखना चाहती थी की संशय क्या ह लेकिन वो झिजक रही थी, उसेक हाथ कैंप रहे थे, लेकिन तभी उसके दिमाग में नए विचार दौड़ गए,

निहारिका मन में- अब मुझे वो निहारिका नहीं बनना, अब देव के अलावा मेरे लिए कुछ भी मायने नहीं रखता, मैंने साडी उम्र उसे अपना दूध पिलाया ह अब तक पीला रही हु, हम दोनों एक दूसरे को नंगे दखते हैं अब हमारे बिच की साडी शर्म और माँ बेटे के रिश्ते का नियम बदल चुक्का ह, अब मैं अपनी झिजक की वजह से देव को तकलीफ नहीं झेलने दूंगी,

निहारिका ने तुरंत देव के लुंड को पकड़ लिया और इधर ुधा रकरके देखने लगी,

निहारिका ने जैसे hi देव के लुंड को पकड़ा था तो उसके शरीर में कैंप काँपी सो दौड़ गई, उसने न जाने कितने वर्षो बाद उसने लुंड को अपने हाथ में लिया था, लेकिन निहारिका ने अपनी भावनाओ पैर काबू किया और लुंड को देखने लगी, उसके आकर और फूली हुई नसों के शिव कुछ गलत तो नहीं दिख रहा था,

निहारिका- देव कहा दर्द हो रहा ह,

देव- माँ पुरे में hi दर्द ह और ये नीच वाले हिस्से में भी,

देव ने अपने भरी और लटके हुए ाँद की तरफ इशारा किया,

निहारिका ने देव के ांडो को आपने हाथ में लिया तो देव को और दर्द हुआ, निहारिका ने खुद कभी इतना सम्भोग नहीं किया तो उसे इस बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं था, लेकिन फिर भी वो उसे लुंड और ाँद को अहलके हलके सहलाने लगी,

निहारिका के मुलायम हाथो का असर हो रहा था देव पैर, उसे कुछ रहत सी महसूस हुई थी, जैस एही देव को रहत महसूस हुई तो निहारिका समझ गई देव को क्या हो रहा ह, उसका हाथ एक दम रुक गया, क्योकि वो समझ गई थी की देव के अंदर सम्भोग की इच्छा जगी हुई ह, शायद वो अब तक अपनी इच्छाओ को रोकता आ रहा ह, या उसे अहसास hi नहीं ह उसके शरीर को सम्भोग की भी जरुरत ह, और ये दर्द सम्भोग न करने की वजह से हो रहा ह,

निहारिका के हाथ अब रुक गए क्योकि उसे अहसास हुआ की उसका बेटे के अंदर सम्भोग की इच्छा जाएगी हुई ह और वो उसकी माँ उसके सामने बैठ क्र अपने hi हाथो से अपने hi बेटे का लुंड पकड़ क्र अनजाने में hi उसे हाथमेथुन करवा रही हु, निहारिका के मन में ग्लानि के भाव आने लगे, उसने अपना हाथ हटाया और देव को कहा,

निहारिका- देव उठो और झरने के निचे खड़े हो जाओ, और खुद कोशंट करो,

निहारिका खुल क्र नहीं बोल प् रही थी, लेकिन देव ने निहारिका की बात मणि और झरने के निचे खड़ा हो गया,

दोनों माँ बीटा जब से उस हादसे से गुजरे हैं तब से एक दूसरे के समाने नंगे hi थे, देव गुफा से बहार गया था इसलिए उसने रस्ते में से किसी के कपडे पहन लिए निहारिका तो अभी भी नंगी hi थी, दोनों के अंदर बहुत हद तक शर्म ख़तम हो चुकी थी लेकिन फिर भी कुछ शर्म झिजक बाकि थी जो निहारिका को रोक रही थी,

निहारिका मन में- मैं इतना क्यों घबरा रही हु, हमने कुछ गलत नहीं किया, गलत तो उन लोगो ने किया ह और इतना गलत करने के बाद भी उनमे जरा सिब hi शर्म नहीं ह फिर मैं क्यों शर्मो, देव मेरा बीटा ह और बी हमारे बिच ऐसा कुछ नहीं ह जिसे छुपाया जा सके, फिर किस बात की झिझक, हमे अपने रिश्ते को बदलना होगा, दुनिया समाज के नियम अब हुमारेलिए कोई मायने नहीं रखते, अगर कुछ मायने रखता ह तो मेरे लिए देव और देव की लिए मैं, अब और कोई रिश्ता सम्बन्ध हमारे बिच नहीं आएगा, देव इस चीज में नासमझ ह मुझे hi उसका मार्ग दर्शन करना होगा, मुझे hi उसे सब समझाना होगा,

तभी वह देव आ गया एक दम नंगा, अब वो शांत लग रहा था, उसका लुंड भी पहले से काम कठोर था, उसका लुंड अभी बैठा नहीं था लेकिन पहले जितना कठोर नहीं था,

निहारिका- अब कैसा महसूस कर रहे हो,

देव- अब काफी रहत h,lekin ये हुआ क्यों, इससे पहले तो कभी नहीं हुआ,

निहारिका- देखो बीटा अब हमारे बिच ऐसा कुछ नहीं ह जिसके बारे में कुछ छुपाया जाये, या शरमाया जाये, वैसे तो ये सब बाते दोस्त समाज सीखा देते हैं, लेकिन तेरा तो कभी कोई दोस्त न बना न hi इस परिवार ने बनने दिया, तूने अपने जीवन का सबसे ज्यादा समय मेरे साथ बिताया ह तो ये मेरी जिमेदारी बनती थी की तुझे ये सब सिखौ, लेकिन तू अच्छा बनाने की सोच की वजह से और कुछ शर्मा ुर समाज के बनाये हुए नियम की वजह से नहीं क्र पाई, लेकिन अब मैं तुझे सब सीखूंगी, तुझे ऐसा बनना होगा जिसे दुनिया की कोई ताकत झुका न पाए,

देव- ऐसा क्या ह माँ जो मुझे जानना ह,

निहारिका- ये जो दर्द तुझे हो रहा था उसका कारन ह सम्भोग की इच्छा, तेरे अंदर सम्भोग की इच्छा हो रही ह लेकिन तू कर नहीं रहा ह, और जब वीर्य बहुत ज्यादा मात्रा में इकठा हो जाये तो ऐसा दर्द हो जाता ह कभी कभी, समय समय पैर शरीर को सम्भोग की जरुरत होती ह,

देव- लेकिन माँ मेरे मन में तो ऐसे कोई विचार नहीं आ रहे हैं,

निहारिका- शायद तू अपने विचारो को दबा रहा होगा, तुझे पता भी नहीं होगा,

देव- नहीं माँ, अगर ये सम्भोग न करने की वजह से तो मैं इसका कारन समझ गया,

निहारिका- कैसा कारन

देव- जब मैंने कस्तूरी के साथ सम्भोग किया था तब भौमिक जी ने नारझोंकर मुझे शार्प दिया था की मैं बिना सम्भोग केन hi रह सकूंगा, अगर मैंने समय समय पैर सम्भोग नहीं किया तो मेरा वीर्य hi मेरी जान ले लेगा,

निहारिका- उन्होंने ऐसा शाप दिया, उनकी हिम्मत कैसे हुई,

देव- उनकी गलती नहीं थी, उन्हें मुझ पैर विश्वास था और मैंने वो विश्वास तोडा था इसलिए उन्होंने वो शाप दिया,

निहारिका- उस समय तू कुछ और था लेकिन आज नहीं, आज तुझे ऐसा बनना होगा की कोई तुझे पैर झुका न सके, और तेरा ये श्राप तुझे कमजोर कर सकता ह, तुझे लगातार सम्भोग चाहिए उसके लिए तू किसी के सामने झुकेगा नहीं, तेरे सामने मैंने सरे रस्ते पहले hi बता दिए हैं, न कोई रिश्ता मायने रखता ह न hi कोई समाज या समाज के नियम अगर कुछ मायने रखता ह तो तू और तेरी जीत,

देव- माँ आप चिंता मत कीजिये मैं मर सकता हु लेकिन अपनी कमजोरी के लिए किसी के सामने झुक नहीं सकता,

निहारिका- अपने इस श्राप की कमजोरी को hi अपनी ताकत बना, ये श्राप तुझे मिला ह इसके पीछे भी कुछ अच्छा hi होगा, सिर्फ तू hi ऐसा ह जो इस श्राप को पूरा तू hi कर सकता ह, तेरा ये लिंग संसार की किसी भी औरत को संतुष्ट क्र सकता ह, इसलिए इसका इस्तेमाल क्र और हर वो औरत तेरे सामने झुकी होनी छाइये जिसने हम ेतकलीफ़ दी ह,

देव- ऐसा hi होगा माँ, अब मेरे अंदर किसी के लिए दया प्रेम सहनुभूति नहीं ह सिर्फ नफरत ह और ये नफरत सबको जला देगी,

निहारिका- प्रताप सिंह की बेटी का क्या हुआ,

देव- अपना पहला असर छोड़ आया हु उस पैर, उम्मीद करता हु उस पैर असर होगा,

निहारिका- जल्दी करना, प्रताप सिंह को जल्दी hi सबक सीखना ह, उसने मुझे चुनेकी कोशिश की थी, उसे मैं खुद मरूंगी,

देव- जी माँ,

दोनों माँ बीटा फिर बैठ गए, और सामने रखे फल खाने लगे,

उधर रेवती अपने बिस्टेर पैर लेती करवट बदल रही थी, वो बहुत बैचैन थी, जब से वो महल से बहार निकली थी तब से उसके अंदर जवानी उभर रही थी, और प्रताप सिंह वाली घटना ने उसके अंदर थोड़ा कामुकता के भाव पैदा किये थे लेकिन आज तो देव ने उसके अंदर पूरी वासना भर दी थी, एक अनजान लड़का उसके हितलाभ में उसके इतने नजदीक था, रेवती की चूचिया उसकी छाती से रागादि थी, और उसने रेवती के होतो को चूमा था, रेवती कभी गुस्सा करती कभी अपने होतो पैर उंगलिया फिरती, वो बार बार उसी पल को याद कर रही थी, उसे समझ hi नहीं आ रहा था क्या करे, उसका दिमाग बोल रहा था ये गलत हुआ ऐसे कैसे कोई उसे छू सकता ह लेकिन उसका दिल और उसका शरीर कुछ और hi बोल रहा था, उसके शरीर में रोमांच भरा हुआ था, न चाहते हुए भी उसकी छूट में गिला पैन आया हुआ था, और चूचिया कड़क हो राखी थी,

वो अपनी चूचियों पैर हाथ फिर रही थी तभी उसकी माँ रेणुका वह आ गई,

रेणुका- कैसी ह मेरी बेटी, आज मजा आया तुझे,

रेणुका की आवाज सुनकर रेवती एक दम बैठ गई,

रेवती- माँ आप यहाँ,

रेणुका- मैं ये पूछने आई थी की तुझ अच्छा लगन ा वह,

रेवती- है माँ बहुत अच्छा लगा, क्या मैं फिर से वह जा सकती हु,

रेणुका – है है जरूर

रेवती- माँ एक बात पुछु आप नाराज तो नहीं होगी,

रेणुका- है पूछ

रेवती- माँ क्या मर्द के हाथ लगने से लड़कियों को कुछ अलग का महसूस होता ह क्या,

रेणुका को लगा की रेवती प्रताप सिंह के बारे में बात कर रही ह, क्योकि उसी का हाथ रेवती के शरीर पैर लगे थे,

रेवती- है बीटा और जवानी में होता hi ह, और इसमें कोई बुराई नहीं ह, औरत बानी hi मर्द के लिए ह, और जब मर्द के हाथ लगते हैं तो औरत के शरीर पैर और भी निखार आता ह, अगर मर्द पसंद का हो तो उसके साथ सम्भोग का मजा लेना चाहिए, ये रिश्ते नाते और समाज को भूल जाना चाहिए, बस अपने शरीर की सुन्नी चाहिए, अब तू जवान ह तो मजे ले सकती ह,

रेणुका ने तो ये सलाह दे दी ये सोच की की रेवती प्रताप सिंह की तरफ आकर्षित हो जाये, लेकिन यह ऑटो मामला hi उल्टा था रेवती तो देव के बारे में बात कर रही थी, क्योकि देव ने तो उसके शरीर को छुआ था,

रेणुका सलाह देकर वह से चली गई और रेवती फिर से देव के खयालो में खो गई और अकेली hi मुस्कुराने लगी,

रात में अमरावती भवर सिंह के पास बैठी हुई थी,

अमरावती- आज मैं आपसे मिलने आई थी लेकिन उस द्वारपाल ने मिलने नहीं दिया, आपका दरवाजा भी बंद था,

भवर सिंह- है वो काम्य और मैं कुछ बात कर रहे थे,

अमरावती- ऐसी भी क्या बात हो गई जो कमरा बंद करके की गई, और आपकी hi पत्नी को आने की आज्ञा नहीं मिली,

भवर सिंह थोड़ा गुस्से में आ गया,

भवर सिंह- तुम कहना क्या चाहती हो, वो हमारी बहन ह हम उससे अकेले में बात नहीं कर सकते क्या,

अमरावती- मैं ऐसा तोडना बोल रही हु,

भवर सिंह- बोलना भी मत, और कभी मेरे और मेरी बहन के बिच में आने की कोशिश भी मत करना,

अमरावती- मैं कहा आ रही हु बिच में,

भवर सिंह – एक तो उस राक्षश का अब तक कुछ पता नहीं चला ह और तुम अलग दिमाग ख़राब कर रही हो,

अमरावती चुप हो गई, उसे पता था भवर सिंह को नाराज करना ठीक नहीं ह वर्ण वो कब मोत की सजा सुना दे क्या पता,

वही दूर एक जगह,

सुगंधा- पिता जी मैंने सुना ह किसी राक्षश ने हमारे राजय में बहुत आतंक मचाया ह, बहुत लोग मर दिए

आचार्य जी- सब कर्मो के फल ह बीटा,

सुगंधा- लेकिन वो भवर सिंह बच गया, जिसने देव को गायब करवा दिया, मैं तो चाहती थी की वो भी मर जाये,

आचार्य जी- ऐसा नहीं बोलते बीटा, किसी की मोत की इच्छा नहीं रखते, ये गलत ह,

सुगंधा- हमारे साथ जो हुआ वो सही था क्या, देव के साथ जो हुआ वो सही था

आचार्य जी- हमारे साथ जोहुआ उसकी जिम्मेदार तुम्हरी बहन ह भवर सिंह नहीं,

सुगंधा- मैं देव को ढूंढ़ना छाती हु पिता जी, मेरा दिल बहुत बैचैन हो रहा ह,

आचार्य जी- तू उसे कैसे ढूडन पायेगी बेटी,

सुगंधा- मुझे नहीं पता बस दिल कह रहा ह मैं उसे धुंध लुंगी,

आचार्य जी- मैंने तुम दोनों बहेनो को कभी नहीं रोका तो आज कैसे रोक सकता हु, जा कर ले जो तेरा दिल करे



वही रीवा अपने सपने में खोई हुई थी, और पसीने में भीगी हुई थी, वोट क जंगल में भाग रही थी उसके पीछे वो राक्षश एक तलवार लिए हुए चला आ रहा था, रीवा दर से कनपटी हुई भागी जार hi थी, उसके गले से आवाज भी नहीं निकल रही थी, वो एक पत्थर से टकराई और गिर पड़ी, तभी वो राक्षश उसके करीब आ गया और रीवा डार्क र चीख पड़ी तभी वह देव आ गया और उसने रीवा का हाथ पकड़ लिया और अचानक राक्षश गायब हो गया, तभी रीवा ने आँखे खोल दी, वो दर से हांफ रही थी,
 
अपडेट-14

अगले दो दिन सब शांत रहा देव रेवती से मिलने नहीं गया, उधर रेवती लगातार तालाब में जा रही थी नहाने के लिए, पहले दिन तो वो बस देव के आने का इंतजार क्र रही थी, उसका दिल बार बार देव को देखने का कर रहा था, लेकिन देव नहीं आया, उसके अगले दिन तो रेवती बैचैन हो गई, उसके अंदर देव से मिलने की बैचैनी हो रही थी, वो तालाब के बहार इधर उधर घूमती रही लेकिन देव नहीं आया,

देव जानबूझ क्र रेवती के पास नहीं गया था, उसने रेवती के अंदर एक आग लगा दी थी अब उसे बस इंतजार करना था, इस बिच देव निकल गया कस्तूरी को ढूढ़ने, क्योकि कस्तूरी hi सच बता सकती थी की उसने ऐसा क्यों किया,

देव की शंश्य थी की वो किसी से पूछ भी नहीं सकता था, क्योकि उसे सब जानते थे, इसलिए वो अकेला hi दूध रहा था, रेवती तो देव को पहचान नहीं पाई थी क्योकि उसने कभी देव को देखा hi नहीं था, वह प्रताप सिंह और उसके कुछ सेनिको के अलावा किसी ने नहीं देखा था, और सबसे कमल ये था की जिन सेनिको ने देखा था उन सभी को राक्षश मर चुक्का था,

देव किसी तरह जानकरी निकलता हुआ आचार्य जी के पास पहुंच चुक्का था, जब देव वह पंहुचा तो उसे बड़ा दुःख हुआ क्योकि आचार्य जी अकेले जमीन पैर घास पैर लेते हुए थे, उन्हें पानी देने वाला भी कोई नहीं था, जैसे hi आचार्य जी ने देव को देखा वो ख़ुशी से झूमते हुए खड़े हो गए,

आचार्य- देव देव तू आ गया मेरे बच्चे तू आ गया, मैं जनता था तू आएगा एक दिन,

देव- आचार्य जी आप यहाँ इस हालत में

आचार्य जी- समाज में कही मुँह दिखने लायक नहीं बचा मैं,

देव- मुझे माफ़ कर दीजिये आचार्य जी, मेरी वजह से ये सब हुआ लेकिन मैंने कस्तूरी के साथ जबरदस्ती नहीं की, हम एक दूसरे को प्यार करते थे और उस प्यार में बहक क्र hi हम एक दूसरे के करीब आये और कस्तूरी ने hi इसकी पहल की थी, वैसे मैं आपको कोई सफाई देने नहीं आया हु, पूरी दुनिया ने मुझे गलत समझ क्र सजा दी ह, आप भी दे सकते हैं,

आचार्य जी- मेरी परवरिश में कमी हो सकती ह लेकिन तुझे दी हुई शिक्षा में कोई कमी नहीं हो सकती, मैं जनता हु तू कभी झूट नहीं बोलेगा, और मैं ये भी जनता हु की कस्तूरी तुझसे प्रेम करती थी, एक पिता अपने बेटियों की आँखों में तेरे लिए प्रेम देख सकता ह, जो अब मुझे सुगंधा की आँखों में भी दीखता ह, लेकिन कस्तूरी ने ऐसा क्यों किया ये मेरी समझ में नहीं आ रहा, वो तुझसे प्रेम करती थी, फिर उसने ऐसा क्यों कहा, अगर कुछ गलत हुआ भी था तो वो मुझसे भी बोल सकती थी,

देव- ये hi तो मुझे जानना ह, कहा ह वो

आचार्य जी- नहीं जनता, उस दिन के बाद कस्तूरी और उसकी माँ दोनों गायब हैं, और मैं सुगन्धदा को लेकर यहाँ आ गया सबसे दूर,

देव- आप चिंता मत कीजिये, सब ठीक हो जायेगा, कस्तूरी खुद सबको सच बताएगी,

आचार्य जी- तुम बैठो मैं पानी लता हु, वैसे सुगंधा तुझे hi ढूढ़ने निकली ह,

देव- मुझे क्यों,

आचार्य जी- उसके अंदर तेरे लिए जो प्रेम ह उसी की वजह से,

देव- नहीं आचार्य जी, मैं अब वो देव नहीं हु जिससे कोई प्रेम क्र सके, या मैं किसी से प्रेम कर सकू, समझाइये सुगंधा को मेरे लिए अपने जीवन को बर्बाद न करे, मेरी मंजिल अब बहुत अलग ह,

अब मैं चलता हु आप अपना ख्याल रखना, जब सब ठीक हो जायेगा तब मैं आपको लेने आऊंगा, तब तक अपना ख्याल रखना,

देव वह से निकल गया आचार्य जी बस उसे देखते रह गए,

इधर राजगुरु परेशां थे क्योकि भौमिक और सात्विक के साथ जो सैनिक गए थे वो वापस आ गए और उन्होंने जो बताया उसे सुनकर राजगुरु को चिंता होने लगी थी, और भवर सिंह बार बार राजगुरु से पूछ रहा था की सफलता मिली या नहीं,

राजगुरु की परेशानिया बहुत ज्यादा बढ़ गाइट hi, एक तो उनके भाइयो का पता नहीं था, दूसरा वो राक्षश उसके बारे में अब तक कोई जानकरी नहीं थी, वो तो जैसे गायब hi हो गया था, और भवर सिंह खुद को अमर करने के लिए पागल हुआ जा रहा था, राजगुरु की समझ में कुछ नहीं आ रहा था की वो किस दिशा में पहले जाये, सरे रस्ते बंद hi दिखाई देते थे, और भवर सिंह का धयान बस खुद की जिंदगी पैर था जबकि उसका दुश्मन प्रताप सिंह जिन्दा था जो पुरे परिवार को मरने वाला था, फिर भी भवर सिंह उसके लिए कोई तैयारी नहीं क्र रहा था, ये बात राजगुरु को और परेशां कर रही थी, राजगुरु भवर सिंह को समझ नहीं प् रहे थे,

खैर इधर देव वापस चल दिया था वो प्रताप सिंह के राजय की तरफ जार है था रेवती से मिलने, रस्ते में उसने देखा की कुछ सैनिक कुछ लोगो को खींच क्र ला रहे थे, देव उनके करीब गया तो देखा ये प्रताप सिंह के राजय के सैनिक हैं,

देव ने सोचा इन लोगो को बचा लिया जाये,

देव- अरे ये क्या कर रहे हो कहा ले जा रहे हो इन्हे,

सैनिक- तू कोण ह बे, और तू जनता ह हम महाराज परतप सिंह के सैनिक ह, हमसे सवाल करने की तेरी हिम्मत कैसे हुई,

देव- अरे भाई इन बेचारो को क्यों ले जा रहे हो,

देव ने धयान दिया वह जीतनेय भी लोग थे सब हट्टे काटते थे, मतलब ये सैनिक तगड़े लोगो को hi पकड़ रहे हैं, देव को कुछ मामला अलग लगा,

सैनिक दूसरे सैनिक से- अरे ये कुछ ज्यादा hi सवाल पूछ रहा ह, लग भी तगड़ा रहा ह इसे भी ले चलो, महारानी ने 10 मंगाए थे हम 11 ले चलते हैं, महारानी खुश हो जाएगी,

देव को पकड़ने की बात पैर देव की बोहे चढ़ गई थी वो आगे बढ़ने hi वाला था लेकिन महारानी का नाम सुनकर रुक गया, ये अच्छा मौका था महारानी से मिलने का, बस उसे चिंता थी अगर प्रताप सिंह ने उसे देख लिया तो पहचान जायेगा, लेकिन आगे बढ़ने के लिए प्रताप सिंह के राजय में तो घुसना hi था ये तरीका अच्छा था,

देव ने डरने का नाटक किया, और सेनिको ने दौड़ क्र देव को पकड़ लिया और बांध लिया,

दूसरे लोग- अरे भाई तुम भी हमारे साथ फास गए,

देव- ये लोग छाते क्या हैं

एक लड़का- कोई नहीं जनता, ये लोग हर महीने आते हैं और अलग अलग जगह से हट्टे काटते मर्दो को ले जाते हैं, आज तक वो मर्द कभी वापस नहीं आये, इसलिए किसी को पता नहीं वह क्या होता ह, पिछले 15 साल से ये चला आ रहा ह,

दूसरा आदमी- कुछ लोगो का मन्ना ह की ये वह लेजाकर उन्हें गुलाम बनाते हैं और लड़ाई लड़वाते हैं, किसी ने अपने गाओं के एक आदमी को ऐसे लड़ते देखा था,

देव- चलो अब तो वह चल hi रहे हैं जाकर देख लेंगे ये क्या करवाते हैं,

सब डरे से सेनिको के पीछे चलते रहे लेकिन देव चौकन्ना होकर चल रहा था कही उसे कोई पहचान न ले, जैसी hi वो सब राजधानी के करीब पहुंचे, तो सैनिक सभी लोगो को मुख्या दरवाजे की जगह एक छुपे हुए रस्ते से अंदर ले जाने लगे, ये बात देव को खटक गई, और ये देव के लिए थोड़ा फायदेमंद भी था क्योकि वो सभी की नजरो से बच गया था, लेकिन अगर ये प्रताप सिंह के पास ले गए तो सब गड़बड़ हो जाएगी,

सेनिको ने सभी को एक तहखाने में बांध दिया, फिर कुछ तगड़े पहलवान जैसे 4 आदमी आये और अकड़ क्र बोले

आदमी- अरे हरामखोरो खड़े हो जाओ और जाकर नहाओ, एक दम साफ़ सुत्रे हो जाओ और वह कपडे रखे हैं उन्हें पहन लो,

सभी ने चुप चाप वैसा hi किया, नाहा क्र सबने कपडे पहने जो सिर्फ कमर के निचे बांधने की धोती और उप्पेर एक हल्का सा कुरता था,

फिर सभी को लाइन से खड़ा कर दिया, सभी के हाथ रस्सी से बांध क्र दीवार में फसे कुंडो से बांध दिए थे,

आदमी- कुछ समय बाद महारानियाँ आएँगी, कोई भी अपनी नजर उप्पेर नहीं करेगा वर्ण उसकी आँखे निकल लूंगा, महारानी जो करना चाहे उन्हें करने देना, अगर जिन्दा रहना चाहते हो तो,

सभी चुप रहे,

कुछ देर बाद दो औरते महारानियो जैसे कपड़ो में वह आ गई, सभी ने नजरे निचे कर ली, देव ने भी वैसा hi किया,

आदमी- महारानी ये नए आदमी आये हैं, आप एक बार परख ले फिर आदेश दे क्या करना हैं,

औरत- आज रात को इन सभी को वही पैर ले आओ, पहले थोड़ा मनोरनजन होगा फिर इन्हे परखा जायेगा,

आदमी- जी महारानी

वो दोनों औरत मुद क्र चल दी तभी देव ने नजर उठा कर देखा और उसकी नजर उन दोनों की गांड पैर गई, कितनी बड़ी गांड थी, और पतली सी कमर,

अब देव को रात का इंतजार था,

रात में उन सभी को एक बड़े से कमरे में लाया गया, कमरा पूरा सजा हुआ था, सभी मर्द खड़े हो गए, उनके हाथ अभी भी बंधे हुए थे, तभी वह कुछ औरतो के हसने की आवाज आई, इस बार देव ने उधर देखा तो सामने से 4 औरते हस्ते हुए चली आ रही थी, चारो hi काफी खूबसूरत थी, और देखने से महल की रनिया hi लग रही थी,

वो चारो बड़े बड़े बीएड पैर बैठ गई, और उनके सामने खाने पिने का सामान लगा दिया गया, फिर बहुत साडी लड़किया वह आ गई जिन्होंने सिर्फ एक कपडा अपने शरीर पैर लपेटा हुआ था,

औरत- महारानी रेणुका आज तो काफी मजबूत आदमी आये हैं, आज का खेल अच्छा चल सकता ह,

ये थी प्रताप सिंह पत्नी रेणुका,

रेणुका- लग तो रहा ह रानी िन्दु, आज का खेल अच्छा हो सकता ह, बहुत समय से अच्छा खेल नहीं देखा,

िन्दु ये प्रताप सिंह की दूसरी पत्नी थी, और साथ में 2 औरते और थी जिनमे से एक थी सेना पति की पत्नी योगिता और एक जवान लड़की जी थी इस राजय के महामंत्री की बेटी परिधि, देव उनमे से किसी को नहीं जनता था, और खेल क्या होने वाला ह ये भी समझ नहीं आ रहा था,

तभी सभी आदमियों के हाथ उप्पेर करके बांध दिए गए, और फिर वह से बाकि सभी आदमी चले गए, बस वो 11 आदमी और 10 लड़किया रह गई,

रेणुका- खेल शुरू करो,

तभी वो लड़किया आगे बढ़ी और सभी आदमियों के कपडे उतरने लगी, 10 लड़किया और 11 आदमी थे तो देव अकेला रह गया, उसके पास कोई नहीं आई थी,

िन्दु – महारानी इसे क्यों छोड़ दिया,

रेणुका- ये फालतू में मिल गया था, मैंने 10 आदमियों के लिए बोलै था हमारे चुटिया सैनिक इसे भी पकड़ लाये, अब एक दम नै लड़की कोई मिली नहीं, तो ये भी ऐसे hi नजारा देखेगा, अगर कोई मर्द जल्दी हर गया तो ये उसकी जगह ले लेगा,

योगिता- महारानी जब से आप यहाँ आई हैं आपने जिंदगी में इतना मजा भर दिया ह,

परिधि- सच में, मैंने कभी नहीं सोचा था इसमें इतना मजा आता ह,

रेणुका- मई समाज के नियमो से अलग चलने वाली औरत हु, ये सब मजे मर्द hi क्यों ले हम क्यों नहीं ले सकती,

अब देखो ये लड़किया इन मर्दो के साथ मजे लेंगी और हम इनके मजे लेंगी,

उन लड़कियों ने देव के अलावा सभी मर्दो को नंगा कर दिया, और खुद भी कपडे उतर क्र कड़ी हो गई, उन सभी मर्दो की हालत ख़राब थी, उन सभी मर्दो के लुंड मुरझाये हुए थे दर की वजह से, वो लड़किया अपना शरीर उनके शरीर से रगड़ने लगी, अपनी चूचिया उनकी छाती से रगड़ने लगी, फिर अपनी गांड को उनके लुंड पैर रगड़ने लगी, उनमे से कुछ मर्दो के लुंड में हरकत होने लगी, लेकिन खुश अभी भी डरे हुए थे, लेकिन मर्द किसी भी हालत में हो अपने सामने खूबसूरत और नंगी औरत को देख क्र खुद पैर काबू कर hi नहीं पता, और यहाँ भी सभी मर्दो के लुंड खड़े हो गए थे, देव का धयान उनमे से किसी भी लड़की पैर नहीं था, वो बस सामने बैठी रानियों को देख रहा था, क्योकि उसका लक्ष्य वो रनिया थी,

फिर वो लड़किया मर्दो के सामने बैठ गई और उनके लुंड को अपने मुँह में भर लिया, सबके लुंड साधारण आकर के थे, शायद उन मर्दो के लिए ये पहला मौका था जब कोई लड़की उनके लुंड को चूस रही थी, उन सभी के शरीर कंपनी लगे, उनके हाथ बंधे हुए थे वो कुछ नहीं कर प् रहे थे, जब मर्द या औरत के हाथ बंधे हो और कोई उनके साथ ये सब कर रहा हो तो उत्तेजना अधिक बढ़ जाती ह, ऐसा hi उनके साथ हुआ और उनमे से कुछ ने तुरंत अपना वीर्य बहार फेंक दिया, उन लड़कियों ने अपना मुँह हटा लिया,

लड़कियों ने रानियों की तरफ देखा,

िन्दु- ये तो बहुत जल्दी झाड़ गए, सालो में जरा सा भी दम नहीं ह, ये अपनी पत्नियों को कैसे छोड़ते होंगे,

रेणुका- कोई बात नहीं दुबारा खड़ा कर देंगे,

वो लड़किया फिर से उनका लुंड चूसने लगी लेकिन घबराहट में कुछ लोग के लुंड उठ hi नई रहे थे, जब काफी देर हो गई तो रेणुका ने इशारा किया की अगले को देखो, उनमे से एक लड़की देव के सामने आ गई, और जैसे hi उसने देव के कपडे उतरे तो वह सभी औरतो की आँखे फटी रह गई, इतना खूबसूरत शरीर और इतना बड़ा लुंड, शरीर में ेके क कटाव अलग दिख रहा था, और लुंड की एक एक नसे अलग hi गिनी जा सकती थी, लुंड किसी मीनार की तरह खड़ा था,

लुंड को देख क्र उस लड़की की भी सांसे फूल गई, उसने देव की तरफ देखा जो शांत खड़ा था, लड़की के हाथ कैंप रहे थे,

रेणुका- इसके साथ शुरू क्र

वो लड़की तुरनत निचे बैठ गई और देव के लुंड को मुट्ठी में पकड़ क्र अपनी जीभ से चाटने लगी, मुँह के अंदर लेने की हिम्मत नहीं हो रही थी, लुंड था hi इतना मोटा,

िन्दु- इसका इतना बड़ा कैसे ह, मैंने आज तक इससे बड़ा लुंड नहीं देखा, हमे पिछले 15 सालो में हजारो लुंड देखे हैं लेकिन इससे बड़ा आज तक नहीं देखा,

योगिता- रानी मैंने गधे का लुंड देखा ह ये उससे भी बड़ा लग रहा ह,

परिधि- और इसका शरीर और इसका रूप भी कितना सूंदर ह, ऐसा लगता ह जैसे कोई देवता जमीन पैर उतर आया हो,

रेणुका- अब ये देवता हमारा गुलाम ह, अभी देख तो ले बस इसका आकर hi बड़ा ह या इसमें डम्ब hi ह,

चारो आहे भर्ती हुई देव को देखने लगी, बाकि सभी मर्दो पैर से उनका धयान हैट चुक्का था, वो लड़की देव का लुंड चुस्ती रही, लेकिन देव के लुंड पैर कोई असर नहीं था, वो वैसा hi खड़ा रहा, अब लड़की का मुँह दुखने लगा तो रेणुका ने दूसरी लड़कियों को इशारा किया, अब 3 लड़किया और वह आ गई और सामनेबैत क्र एक साथ देव का लुंड चूसने लगी, ऐसे करते सभी 10 लड़किया अपना अपना जोर दिखा चुकी थी, कोई देव का लुंड चुस्ती तो कोई उसके ांध चुस्ती, कोई देव के पेट को चुम रही थी तो कोई उसकी कमर और पैरो को,

उन लड़कियों को भी देव का साथ मजा आ रहा था, लेकिन देव बिलकुल शांत खड़ा था,

िन्दु- किस मिटटी का बना ह ये, इस पैर कोई असर नहीं हो रहा ह,

रेणुका- जब छूट में घुसायेगा तब होगा असर,

रेणुका- चलो इसका हथियार अपने अंदर लो,

लड़किया उठी और एक मेज पास ले आई और उस पैर एक लड़की झुककर लेट गई, पीछे से दूसरी लड़की ने देव का लुंड पकड़ क्र उसकी छूट पैर लगाया, लड़की ने देव को ईशर किया की धक्का लगाए, लेकिन देव ने कुछ नहीं किया, तब एक लड़की पीछे गई और देव की कमर को धकेलने लगी, लुंड छूट से चिपका हुआ था, कुछ देर तो देव मजा लेता रहा फिर अचानक उसने एक जोर दर धक्का लगाया और ेखि धक्के में लुंड हकुट को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया, और उस लकड़ी की जोर दर चीख निकल गई, वो अपने हाथ मेज पैर पटकने लगी, लेकिन रेणुका का नियम था लुंड एक बार अंदर घुस गया तो बहार नहीं निकलना ह,

उन सभी लड़कियों को छोड़ने की आदत थी लेकिन इतना बड़ा लुंड तो उन्होंने सपने में भी नई देखा था,

देव ने लुंड बहार खींचा और फिर से धक्का मारा, और इस धक्के में वो लड़की बेहोश हो गई, देव ने दूसरी लड़की को देखा वो भी बेचारी सी दरी हुई देव को देख रही थी,

रेणुका जोर से छिलाई- हटाओ इस हराम जड़ी को और दूसरी लगो, उस लड़की को हटाया गया फिर दूसरी लड़की लेट गई, इस बरसने बहुत सात ेल अपनी छूट पैर लगाया और लुंड घुसवाया, वो बेचारी लुंड तो घुसवा गई लेकिन उसकी चीख भी पुरे कमरे में गूंज गई,

देव ने आधा लुंड उसकी छूट में घुसाया हुआ था और हलके हलके धक्के लगाए, और वो लड़की झाड़ गई, ऐसे करते करते सभी लड़कियों को देव ने छोड़ दिया लेकिन देव अब तक नहीं झाड़ा था, अब देव से बर्दास्त नहीं हो रहा था, उसके लुंड में दर्दहोने लगा था, वो झड़ना छटा था लेकिन झाड़ नहीं प् रहा था क्योकि कोई भी लड़की इतनी देर तकउसके सामने टिक hi नहीं प् रही थी जिससे देव अपना वीर्य निकल सके,, कस्तूरी के समय भी यही हुआ था,

रेणुका- ऐसा मर्द मैंने आज तक नहीं देखा,

रेणुका ने आवाज लगाई तो बहार स ेकुछ मर्द अंदर आये,

रेणुका- इन सभी को ले जाओ और यहाँ बस ये लड़का रहेगा, बाकि सभी को ले जाओ,

वो आदमी उन गुलामो को ले गए और लड़किया भी लड़खड़ाती हुई वह से चली गई, अब बस वह देव और वो चारो रह गई थी,

रेणुका- इतनी ताकत तुम्हारे अंदर कैसे आई,

देव- उप्पेर वाले की वजह से,

रेणुका- तुम नहीं जानते तुम क्या चीज हो, अजूबा हो तुम

योगिता- शायद hi संसार में कोई ऐसा मर्द होगा,

देव- मुझे जाने दीजिये मैं बहुत गरीब हु,

देव ने थोड़ा नाटक शुरू किया,

रेणुका- अगर तू हमारी बात मानेगा तो फिर गरीब नहीं रहेगा, जैसा हम खेती हैं वैसा hi करना होगा तुझे,

देव- आप जैसा कहेंगी मैं करूँगा बस मुझे मरना मत,

रेणुका- तू जनता ह मैं कोण हु, मैं इस राजय की महारानी हु,

देव के दिमाग में आया महारानी मतलब प्रताप सिंह की पत्नी, अरे वह ये तो कमल हो गया, ये तो सीधे खजाने का रास्ता मिल गया,

देव ने तुरंत अपना सर झुका दिया, जिससे रेणुका बड़ी खुश हो गई, उसे देव पसंद आया,

परिधि ने देव के शरीर पैर अपनी उंगलिया फिरै,

परिधि- बड़ा मजबूत शरीर ह तेरा, ये ऐसा कैसे बनाया,

देव- मैं मजदुर हु राजकुमारी, और मजदूरी करके hi ऐसा बन गया हु,

िन्दु- मजदुर इतने खूबसूरत होते हैं क्या, तेरे जैसा मर्द तो कही का राजा होना चाहिए,

रेणुका समझ गई थी की सभी की नियत ख़राब हो चुकी ह इस लड़के पैर, रेणुका मुस्कुराई

रेणुका- अब यहाँ जो होगा अगर ये बात तूने बहार किसी को भी बताई तो तेरी जान चली जाएगी, अगर तू चुप रहेगा तो ऐसा मजा मिलेगा की जिंदगी भर नहीं भूलेगा, और हमेशा इस महल में hi रहेगा, मजदूरी करने की जरुरत नहीं पड़ेगी,

देव- मैं आपकी परजा हु महारानी आप जो करेंगी उसमे मेरा भला hi होगा,

देव की बातो से सभी खुश हो गई थी,

रेणुका ने सभी औरतो को इशारा किया और इशारा मिलते hi तीनो ने अपने कपडे उतर दिए, तीनो के शरीर एक दम कैसा हुआ था, परिधि जवान थी तो उसके शरीर में निखार कुछ ज्यादा hi था लकिन जब रेणुका ने अपने कपडे उतरे तो असली निखार का पता चला, रेणुका उन चारो में सबसे सूंदर और कैसे हुए शरीर किट hi,

रेणुका- इसके हाथ खोल दो योगिता,

योगिता ने आगे आकर हाथ खोल दिए, देव के हाथ खोलते वक़्त उसने अपनी चूचिया देव की छाती पैर रागादि और अपनी जांघो को देव के लुंड पैर रगड़ा,

रेणुका- ऐसा मौका हर किसी के जीवन में नहीं आता, आज तक कुछ hi लोगो को ये मौका मिला ह जिसमे वो हममे से किसी एक के शरीर के साथ खेल पाया ह, लेकिन अगर वो हमे खुश नहीं कर पाया तो जिन्दा नहीं बच पाया, जो हमे खुश कर देता ह वो इस महल में hi रुक जाता हमारी सेवा में, वो जो बहार लोग देख रहे हो वो वही लोग हैं जिन्होंने हमे खुश किया ह,

देव- क्या कभी सभी को एक साथ खुश किया ह किसी ने

िन्दु- हम किसी एक को भी कोई खुश कर दे ऐसा भी बड़ी मुश्किल से मिलता ह,

देव मुस्कुराया उसकी मुस्कराहट देख रेणुका भी मुस्कुरा पड़ी, क्योकि उसे भी यकीन हो गया था की ये हम चारो को खुश कर सकता ह,

रेणुका- योगिता सबसे पहले तू चल तू काफी समय से प्यासी ह, तेरा पति आज कल युद्ध कीतैयारी में लगा रहता ह न,

िन्दु- हम दोनों भी तो प्यासी हैं महाराज भी तो नै नै लड़कियों के पीछे रहते हैं,

रेणुका- चिंता मत क्र मेरी जान सबका नंबर लगेगा,

योगिता खुश होती हुई बीएड पैर लेट गई, देव उसके सामने पंहुचा,

रेणुका- दिखाओ अपना हुनर,

देव ने बिना देरी करते हुए अपना लुंड योगिता की छूट पैर लगाया और हलके से रगड़ा, योगिता आहे भरने लगी थी, देव ने तुरंत लुंड पैर दबाव बनाया, उसने झटक अनहि मारा बस हलके से दबाव बनाया, और लुंड का टोपा छूट में घुस गया, छूट पूरी तरह गीली हुई पड़ी थी, फिर भी योगिता की चीख निकल गई,

देव जनता था इन रानियों को हाथ लगाना hi सबसे बड़ा जुर्म होता, इसलिए वो अपने हाथ पीछे करके खड़ा था और लुंड को घुसा रहा था, लुंड हलके हलके अंदर घुस रहा था योगिता अपना सर पटक रही थी,

योगिता- मार दिया इसने तो फाड़ दी मेरी छूट aahhhhhhhhhhhhhhhh इतना दर्द तो पहेली बार छोड़ने में भी नहीं हुआ था, इस जालिम ने हजारो बार चूड़ी हुई छूट से भी चीखे निकल दी, आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आज छूट को पता चला ह फटना किसे कहते है,

रेणुका- अभी तो थोड़ा सा hi घुसा ह तू अभी से चीखने लगी, अगर पूरा गया तो क्या करेगी,

योगिता- मैं तो मर hi जाउंगी,

रेणुका- हल्का हाथ रखना इस बेचारी पैर, इसके पति का लुंड छोटा सा hi ह इसे ज्यादा तगड़े लोदो का स्वाद नहीं चखा ह,

योगिता- इससे छोड़ने के बाद किसी और के लायक रहूंगी भी नहीं,

देव ने हलके हलके धक्के लगाने शुरू क्र दिए, चुदाई करते करते आधा लुंड योगिता की छूट में घुस चुक्का था, और योगिता ज्यादा देर देव को बर्दास्त नहीं क्र पाई और झड़ने लगी,

योगिता अपनी कमर को उछलने लगी उसे बहुत मजा आ रहा था, देव भी बिना रुके धक्के लगा रहा था, रेणुका ने देखा की योगिता फिर से गरम होने लगी ह तो उसने देव को रोक दिया,

रेणुका- साली कुटिया फिर से मजा लेने लगी तू तो, एक बार झाड़ गई ह फिर भी रुक नहीं रही ह,

योगिता- माफ़ करना महारानी, लेकिन मजा hi इतना आ रहा था की खुद को रोक नहीं पाई मैं,

देव बेचारा फिर से नहीं झाड़ पाया, अब देव का दिमाग ख़राब होने लगा था, उसके अंदर की ऊर्जा उस पैर हावी होने लगी थी,


अगली बरी थी परिधि की, परिधि जवान लड़की थी और बस कुछ hi बार चूड़ी थी, वो भी बस प्रताप सिंह से, रेणुका ने उसे अपने जाल में फसा कर प्रताप सिंह से छुड़वाया था, असल में रेणुका एक शोक था अपने बिस्टेर पैर नंगी लेट क्र दुसरो की चुदाई देखने का, वो पहले चुदाई देखती और खुद को गरम करती फिर पुरे जूनून के साथ चुदाई करती थी, उसके अंदर कामुकता कुछ ज्यादा hi थी, इसीलिए वो अपने पति प्रताप सिंह से अपने hi सामने दूसरी लड़कियों को चुदवाती फिर खुद प्रताप सिंह से चुदती, प्रताप सिंह की बाकि पत्नियों में बस िन्दु थी जिसे रेणुका के साथ ऐसा करने में मजा आने लगा था, या यु कहो की उसने रेणुका के साथ मिलकर रहने में hi फायदा समझा इससे उसे प्रताप सिंह का साथ भी मिल रहा था और रेणुका और भी मजे दिलवा रही थी, जब प्रताप सिंह से चुदाई का मजा मिलनकाम हो गया तो रेणुका ने ऐसे मर्द ढूंढने शुरू किये जिनके साथ वो दूसरी लड़कियों को चुदवाती और रेणुका देख क्र मजा लेती, उनमे से कोई ताकतवर मर्द मिल जाता तो रेणुका उसके साथ खुद भी मजा लेती और इस एही िन्दु योगिता और परिधि उसके साथ जुड़ गई, प्रताप सिंह योगिता और परिधि को भी छोड़ चुक्का था,
 
अपडेट-15



प्रताप सिंह की दोनों पत्निया देव से छोड़ने को तैयार पड़ी हुई थी और इधर प्रताप सिंह अपनी बेटी को छोड़ने के चक्कर में लगा हुआ tha,aur रेवती देव के खयालो में खोई हुई थी, वो अपने बिस्टेर पैर पड़ी देव के साथ बिताये उन पालो को याद क्र रही थी, वो छह क्र भी उन पालो को अपने दिमाग से नहीं निकल प् रही थी, वही देव परिधि को छोड़ रहा था, परिधि की छूट काफी टाइट थी, परिधि की हालत ख़राब थी, उसकी छूट में आधा लुंड भी ठीक से नहीं घुसा था, और परिधि जल्दी hi झाड़ गई थी, रेणुका ने तुरंत उसे हटा दिया और िन्दु को लिटा दिया, िन्दु ने जल्दी से लुंड अपनी छूट में ले लिया, िन्दु की छूट काफी खुली हुई थी और उसने हिम्मत दिखा क्र आधे से ज्यादा लुंड छूट में ले लिया था,





देव को भी थोड़ी रहत थी वो धक्के भी थोड़े आराम से लगा प् रहा था,

िन्दु- महारानी आज से पहले इतना मजा कभी नहीं आया, ये कोई जादूगर ह, ये लगातार चोदे जा रहा ह, फिर भी झाड़ नहीं रहा ह, ये कोई देवता hi ह, जो हमे मजा देने आया ह,






रेणुका- ये एक सम्पूर्ण मर्द ह और ये तभी झाड़ेगा जब इसे मजा आएगा, तुम सब इसे मजा नहीं दे प् रहे हो, जब तक इसका ये लुंड पूरा अंदर नहीं घुसेगा इसे मजा कैसे आएगा,

िन्दु- ahhhhhhhhhh पुरे में तो मैं मर जाउंगी,

रेणुका- तू ऐसे hi मजे ले ले इसे मजा मैं दूंगी,

िन्दुई अपनी कमर उछलने लगी और कुछ hi देर में झाड़ गई, देव को पसीने आने लगे थे, वो झड़ना चाहता था लेकिन छह क्र भी ऐसा नहीं क्र प् रहा था,

िन्दु के झड़ते hi रेणुका ने उसे अलग क्र दिया,

रेणुका- अब तेरी असली परीक्षा होगी, मैं भी देखु कितना छोड़ सकता ह तू, अपनी पूरी ताकत लगाना, मैं तेरी असली ताकत देखना चाहती हु,

देव बस मुस्कुराया

रेणुका देव के करीब आई और अपना शरीर उसके शरीर से रगड़ने लगी, ये देख क्र बाकि तीनो औरते चौंक गई क्योकि आज से पहले रेणुका ने किसी मर्द से अपना शरीर नहीं रगड़ा था, अगर चुदाई भी करती तो सिर्फ लुंड डलवा क्र बिना हाथ लगवाए चूड़ी थी, लेकिन आज वो खुद उस लड़के से चिपक रही थी, रेणुका ने अपनी गांड उसके लुंड पैर रागादि, तीनो औरतो ने जोश में चीखे मर दी,

देव के अंदर से एक कातिल मुस्कान उभर रही थी जिसे वो छुपा रहा था, वो रेणुका की छूट की धजिया उड़ने के लिए उतावला हो रहा था,

रेणुका ने देव का लुंड अपने हाथ में पकड़ा और उस पैर पानी दाल क्र धोया,

अच्छे से धोने के बाद रेणुका ने अपनी जीभ निकल क्र लुंड को छठ लिया,






िन्दु- महारानी ये आप क्या कर रही हैं ये एक मजदूर ह,

रेणुका- जब औरत को उसकी पसंद का मर्द मिलता ह फिर औरत को कोई फरक नहीं पड़ता वो राजा ह या भिकारी, और ये असली मर्द ह, इसने आज मेरा दिल जीत लिया ह अब देखना ह ये मुझे पूरी तरह जीत पता ह या नहीं,

इतना बोल क्र रेणुका ने लुंड को मुँह में भर लिया और चूसने लगी, बाकि तीनो उठ क्र उनके पास जाना छाती थी लेकिन तीनो की छूट में इतना दर्द था की उनसे हिला तक नहीं जा रहा था,






लुंड को अच्छे से चूसने के बाद रेणुका उसके सामने मजे पैर झुक गई और अपनी गांड उप्पेर क्र दी,





रेणुका- दिखा अपना हुनर अगर तूने मुझे जीत लिया न तेरी जिंदगी बदल जाएगी, मैं तुझे क्या से क्या बना दूंगी तू सोच भी नहीं सकता,

देव ने अपना लुंड रेणुका की छूट पैर रगड़ा जिससे रेणुका की आँखे बंद हो गई वो मस्ती मि सिसकिया लेने लगी, तभी देव ने लुंड को छूट पैर लगाया और धक्का लगा दिया, लुंड छूट को चीरता हुआ अंदर घुस गया, लुंड के घुसते hi रेणुका की आँखे बहार आ गई और मुँह खुला रह गया, सामने बैठी तीनि औरते है पड़ी,






लेकिन रेणुका के पास पर्तिकिर्या देने का समय नहीं था क्योकि देव ने उसे सम्हालने का मौका hi नहीं दिया और एक और धक्का लगा दिया, लुंड और अंदर घुस गया, न छाते हुए भी रेणुका के हाथ देव के पेट पैर चले गए उसे रोकने के लिए,





देव- अगर आपको दर्द हो रहा ह तो क्या मैं रुक जाऊ महारानी,

रेणुका बुरी फांसी थी, दर्द तो हो रहा था लेकिन वो उन तीनो के सामने जाहिर नहीं करना छाती थी, इससे उसका अपमान होता, इसी चक्कर में वो बोल पड़ी, नहीं नहीं रुकना मत पूरा दाल क्र hi रुकना,

देव मुस्कुराया और रेणुका की कमर को पकड़ लिया और लुंड को हल्का सा बहार खींचा और फिर से धकेल दिया, इस बार लुंड आधे से ज्यादा अंदर घुस हकूका था,

रेणुका- ahhhhhhhhhhh माँ मर गई भेनचोद aahhhhhhhhhhhhhh

तीनो फिर से है पड़ी,

रेणुका- हस्ती क्या हो मदर छोड़ो मैंने पूरा लिया ह,

देव- नहीं महारानी अभी पूरा नहीं गया,

देव की बात सुनकर रेणुका दर गई वही तीनो फिर से है पड़ी,

रेणुका- तो तुम रुके क्यों दाल दो पूरा,

लुंड घुसते hi रेनुआक के सवार बदल चुके थे जिसे वो अब तक तू बोल रही थी अब तुम पैर आ गाइट hi,

देव ने दो तीन धक्के लगाए और पूरा लुंड रेणुका की छूट में उतर दिया, रेणुका मेज पैर मुँह के बल गिर पड़ी थी, उसके होश उड़ चुके थे, वो इतनी बेसुध हो गाइट hi की उसके मुँह से चीख तक नहीं निकली थी,

जब रेणुका बेसुध सी गिर पड़ी तो िन्दु ने उठने की कोशिश की लेकिन हिल नहीं पाई, तब िन्दु को तरीका सुझा

िन्दु- ोू लुंड धरी ये मर जाएँगी, जल्दी से इनकी चूचियों को शिलाओं, इनकी गांड को मसलो, इन्हे चूमो छतो इन्हे गरम करो ताकि ये तुम्हारे लुंड को झेल सके,

देव ने तुरंत ऐसा hi करना शुरू किया, लुंड छूट में फसा हुआ था और देव रेणुका की चूचिया को मसल रहा था और कभी उसकी गांड को मसल रहा था, उसकी कमर को चुम रहा था, कुछ देर में रेणुका को रहत होने लगी थी वो होश में आने लगी थी, उसकी आँखों से आंसू निकल रहे थे,

देव- आप ठीक ह महारानी

रेणुका- बहुत बड़ा ह तुम्हारा, मैंने बहुत लुंड लिए हैं लेकिन तुम सबसे कमल के हो, अब हलके हलके कमर चलना,

देव ने वैसा hi किया, वो हलके हलके कमर हिलता रहा, रेणुका मेज पैर दन्त भींचे पड़ी थी, वो लुंड के धक्को को सहने की कोशिश क्र रही थी, और जैस ेजैस ेउसकी छूट में पानी आना शुरू हुआ उसे रहत होने लगी थी, देव का लुंड भी धक्को के साथ थोड़ा थोड़ा अंदर बहार होने लगा था, और ये रेणुका के लिए काफी था इसी में रेणुका झड़ने लगी, देव फिर से हताश हो गया था क्योकि रेणुका भी झाड़ गाइट hi और देव अब तक नहीं झाड़ा था,

रेणुका- ahhhhhhhhhhhhh माँ छोड़ दी मेरी aahhhhhhhhhhhh मजा आ गया uuufffffffffffffffff छोड़ो मुझे,

देव ने धक्के थोड़े तेज क्र दिए, देव को आगा रेणुका उसे रोक देगी लेकिन रेणुका ने रोका नहीं,






रेणुका- रुकना नहीं बस छोड़ते रहो, जब तक तुम झाड़ न जाओ छोड़ते रहो,

अब देव को रहत थी उसने अपने धक्के बढ़ा दिए, कुछ देर में रेणुका पड़ी हुई थक गई तो वो उठी और देव की गॉड में चढ़ गई और बिस्टेर की तरफ जाने का इशारा किया, देव उधर लेकर चल दिया, निचे से लुंड रेणुका की छूट में टकरा रहा था, न जाने रेणुका को क्या सुझा सुने अपनी कमर उठा क्र लुंड को छूट पैर लगाया और निचे हो गई, लुंड छूट में घुस गया,

रेणुका- ahhhhhhhhhhhhhhhhh रुको रुको बस ऐसे hi खड़े रहो ऐसे hi छोड़ो मुझे,

ये तरीका वह सभी के लिए नया था, सबको चुदाई का पता था लेकिन ऐसे भी चुदाई हो सकती ह ये किसी को नहीं पता था, देव ने रेणुका की गांड को अपने हाथो में पकड़ा और उसे लुंड पैर उछलने लगा, कुछ देर तो लुंड आध यही जार है था लेकिन जब पूरा लुंड रेणुका की छूट में घुसा तो वो चीख पड़ी, और जल्दी से बिस्टेर की तरफ इशारा किया, लुंड सीधा उसके पसलियों के बिच में घुस रहा था,






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देव ने रेणुका को बिसेर पैर लिटाया और उसके पैरो के बिच में आ गया और लुंड घुसा क्र छोड़ने लगा, इस बार लुंड थोड़ा आसानी से जार है था, देव को भी थोड़ मजा आ रहा था, रेणुका मजे में अपना सर पटक रही थी और जोर जोर से सिसकिया ले रही थी,

दोनों की चुदाई की आवाज कमरे में गूंज रही थी, थप थप थप थप और ahhhhhhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhhh,

रेणुका फिर से झड़ने लगी- ahhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhh छोड़ो मुझे और छोड़ो फेडो मेरी छूट तुम्हारी महारानी हु मैं अपनी महारानी को छोड़ो, तुम मजदुर हो मैं तुम्हारी मजदुर हु आज से, मैं तुम्हारे लिए महारानी नहीं हु मजदुर हु, मजदुर समझ क्र छोड़ो मुझे ahhhhhhhhhhhhhhhh

रेणुका की बाते सुनकर तीनि लड़कियों के मुँह हैरत से खुले रह गए, जबकि देव के मुँह पैर मुस्कान थी,






देव ने धक्के तेज कर दिए उसे क्या कर दिए खुद उसके धक्के तेज हो गए, इतने तेज की रेणुका का पूरा शरीर हिल जार है था, और फिर देव ने भी एक हुंकार बहरी और अपन ापुरा लावा रेणुका की छूट में भरता चला गया, देव रेणुका के उप्पेर गिर गया, रेणुका ने उसे अपनी बहाओ में कास क्र भर लिया,

रेणुका- ahhhhhhhhhhhh झाड़ जाओ पूरा झाड़ जाओ मेरे अंदर, अपना बेशकीमती लावा भर दो मेरी छूट में aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

कुछ देर में दोनों शांत हो गए और कमरे में बस उनकी घेरि घेरि सांसो की आवाज आती रही, किसी ने हिलं ेकी कोशिश भी नहीं की, सभी को इतनी थकन थी की उठना तो दूर हिलने तक की हिम्मत नहीं थी, और न जाने कब सभी को ऐसे hi नींद आ गई,

पांचो नंगे पड़े हुए थे, देव और रेणुका एक दूसरे से चिपके पड़े थे और िन्दु देव के पीछे उससे चिपकी हुई थी, योगिता और परिधि देव के पैरो में लेती हुई थी, प्रताप सिंह के परिवार की औरते देव के लुंड से चुद क्र उसी से चिपकी हुई लेती थी,

सुबह सबसे पहले िन्दु की आँख खुली उसने देखा सब सोये पड़े हैं, उसने देव को देखा तो एक मासूम सा चेहरा और इतना गठीला शरीर और इतना ताकतवर लुंड जो अभी भी खड़ा था, िन्दु ने अपने हॉट देव के होतो पैर रख दिए, और फिर उसके लुंड को चूमने लगी, देव की आँखे खुल गई थी लेकिन वो शांत लेता रहा,






िन्दु बड़े प्यार से देव के लुंड को चाट रही थी, तभी परिधि की भी आँख खुल गई, उसने िन्दु को लुंड चाटते हुए देखा तो तुरंत उसके पास आई और वो भी लग गई,

इधर रेणुका की आँख खुली उसने िन्दु और परिधि को लुंड चूसते देखा फिर मुस्कुराई और देव के चेरे को देखा, उसने देव का मुँह अपनी तरफ किया जिससे देव ने आँखे खोल दी, रेणुका ने देव की आँखों में देखा और अपने हॉट उसके हॉट से जोड़ दिए और चूमने लगी, निचे दो लड़किया उसका लुंड चूस रही टी उप्पेर रेनुला उसके हॉट चीस रही थी,






योगिता- आज आप सब यही लगी रहोगी, महल में हमे सब धुंध रहे होंगे, हम रत भर यही थी,

रेणुका- ऐसी रात बड़े नसीब से मिलती ह, ऐसी रात के लिए मैं कुछ भी हार्न ेके लिए तैयार हु,

देव- महारानी मेरे लिए क्या आदेश ह,

रेणुका- वैसे तो यह ालये हुए आदमियों को गुलाम बना क्र रखा जाता ह, जो अच्छी चुदाई करता ह वो महलो में काम आते हैं वर्ण बाकि गुलामो की लड़ाई में काम आते हैं लेकिन तुम अनोखे हो, तुम सिर्फ मेरे पास रहोगे, तुम मेरे कमरे में रहोगे,

देव- लेकिन वह तो महाराज होंगे

रेणुका- मेरे कमरे में कोई नहीं आ सकता, मैं और महाराजा लग कमरे में मिलते हैं, इसलिए तुम मेरे कमरे में रहोगे, और कभी बहार निकलना ह तो मुखौटा लगा क्र निकलोगे, मेरे गुलामो को मुखौटा लगाने का आदेश ह, वैसे तुम गुलाम नहीं हो, पैर इससे तुम सबकी नजरो से बचे रहोगे, अगर महाराज किन अजर पड़ी तुम पैर तो तुम्हे अपनी सेना में भर्ती क्र लेंगे, और किसी दूसरी औरत किन अजर पड़ी तो अपने साथ ले जाएगी, इसलिए तुम सिर्फ मेरे हो,

देव- समझ गया महारानी,

देव को यकीन hi नहीं हो रहा था उसकी किस्मत ऐसे उसका साथ देगी, जो वो चाहता था सब अपने आप हो रहा ह, महल में घुस गया प्रताप सिंह की दो पत्नियों को छोड़ दिया, और अब यहाँ रहने का मौका भी मिल गया था,

चारो औरते उठी सबकेमुह से दर्द भरी आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह निकल गई, फिर चारो hi है पड़ी, उन्होंने कपडे पहने और आदमियों को बुलाया और उन्हें समझा दिया की लड़के को कहा भेजना ह,

वो लोड देव को ा[ne sath le gaye aur usse ek talab me nhelaya aur sunder kapde diye aur ek mukhota diya aur renuka ke kamre me le gaye, bada hi sunder kamra tha, gol bister tha, dev ko thakan thi isliye aaram se bister per hi let gaya aur so gaya,

Wahi dakshin disha ke jungle me dono bhai bhomik aur satavik behosh pade hue the, ek jor dar chikh ke sath satavik ki aankh khul gai, wo apne sir ko pakdte hue uth kr baith gaya, uska sir fata jar ha tha, wo kuch pal aise hi baitha tha, jab wo thoda shant hua to apne charo taraf dekha jaha sirf andhera hi andhera tha, kahi kahi se halki fulki roshni aa rhi thi jisse pata chal rha tha ki din nikla hua h, satavik ko yaad aa rha tha ki wo yaha kaise aaye kyo aaye the, satavik ne turant us paid ko dekha to wo paid bich me do hisso me chira hua pada tha,

Satavik ne bhomik ko dekha jo abhi tak behosh the, satavik ne bhomik ko uthane ki koshish ki, satavik ke hilane se bhomik ne dheere se aankhe kholi, bhomik bahut hi shant the, unhe koi dard nhi tha bas thode achambhit se charo taraf dekh rhe the,

Bhomik- satavik kya hua yaha,

Satavik- pata nhi phele yaha se utho

Dono bhai khade ho gaye,

Bhomik- hum jis roshni ke piche aaye the wo kaha gai, hum to kahi aur the yaha wapas kaise aaye,

Satavik- main abhi kuch nhi janta, lekin yaha ab roshni nhi h, wo dkeho us paid ko jaha se roshni aa rhi thi, wo ab bich me se fat gaya h, iska matlab jo chij bhi iske ander thi wo ab yaha se ja chuki h,

Bhomik- matlab hume ye bhi pata nhi chala wo tha kya,

Satavik- mujhe bas ek sapna sa yaad h ki hum kahi dusri jagah the aur kuch humare ander sama gaya tha,

Bhomik- ha aisa hi kuch mujhe yaad h, jaise main koi sapna dekh rha hu,

Satavik- dono hi ek jiasa sapna nhi dekh sakte, khair wo sab pata kar lenge phele yaha se nikalte hain,

Dono bhai ladkhadate hua jungle se bahar ki taraf niklne lage, lein disha ka gyan nhi ho rha thaw o na jane kidhar chale jar he the, chalte chalte wo jungle se to bahar aa gaye lekin kisi aur hi disha me pahuch gaye the,

Unhe chalte hu andhera ho chukka tha wo raste me ek gaon me ruke, jaha unhe pata chala ki wo kafi dino se us jungle me behosh pade hue the,

Bhomik- satavik hume wapas mahal chalna chhaiye na jane waha kya ho rha hoga,

Satavik- tum mahal wapas jao mujhe kahi aur jana h, is roshni se to kuch safalta nhi mili lekin mujhe ek jagah jana h shayad waha kuch mil jaye,

Bhomik- thik h main subha rajay ki taraf jata hu,

Udhar dev renuka ke bister per leta hua tha, din me renuka ne uske liye bhojan bhijwa diya tha, pura din wo akela hi kamre me leta rha, usne ek manjil to pa lit hi lekin sahi manjil nhi mili ab tak nhi mili thi,

Raat me renuka uske pas aai, jise dekh kr dev turant ek gulam ki trha hath bandh kr khada ho gaya,

Renuka- are tum aise kyo khade ho aara se baitho tum mere koi gulam nhi ho,

Dev ne muskura kr hath khol liye, renuka ne uske kareeb jakr uske hot chum liye,

Renuka- kasam se aaj din itna achha tha mera ki pucho mat, itna sakoon tha pure shareer ko ki main bata nhi sakti, jeevan me pheli bar mujhe sambhog ka asli sukh mila h,

Dev- mujhe khuhsi hui ki main apni maharani ke kisi kaam aa saka,

Renuka- tumhe yaha takleef to nhi hui na,

Dev- main majdur aadmi hu maharani, mujhe aise mehlo e rhene ki aadat nhi h, main ko kaam karne dur dur jata rheta hu, mujhe din bhar aise kamre me baithne ki aadat nhi h,

Renuka- ooo ha pura din akele kamre me rehna bada mushkil hua hoga, waise tumhare pariwar me aur kon kon h,

Dev- bas main aur meri maa

Renuka- tumhari maa pareshan ho rhi hogi na,

Dev- abhi to nhi kyoki main kaam karne bahar jata hu to kuch din ruk kr hi aata hu,

Renuka- ye to achhi baat h,

Itna bol kr renuka ne apne kapde utar diye aur dev ke kapde utar kr usse lipat gai, aur dev ke hoto ko chumne lagi aur jaldi hi uske lund ko chusne lagi, kuch hi der me dono ki chudai shuru ho gai aur wo bhi bahut jabardast wali, aaj renuka ki chut khuli hui thi to dev ne uska pura fayda uthaya aur renuka chikhe pure kamre me gunj rhi thi, dono ki chudai kai ghante tak chali jisme renuka 4 bar jhadi thi, aaj dev ko maja aa rha tha use itna gyan ho chukka tha ki jhadne ke liye dimag ko kaha lagana hota h,

Chudai ke baad renuka dev ki baho me apne hi bister per chipak kr leti hui thi, jaise koi premika apne premi ke sath pyar ke ijhar kar rhi ho,

Renuka- pichle kuch samay se bas ye hi pal sakoon keg aye hain,

Dev- aap to maharani hain aapko bhi sakoon nhi milta,

Renuka- sakoon dhan sampati se nhi milta, sakoon milta h jab man khush hota h,

Dev- aapke pas to sab kuch h aur kya chhaiye aapko,

Renuka- takat duniya ki sabse badi takat,

Dev- maharaj pratap singh to bahut takatwar hain,

Renuka- ye waham bhi us rakshash ne khatam kr diya,

Dev- rakshash kon rakshash

Renuka- hua tha ek rakshash se samna, aisa lag rha tha jaise kisi bawander ke samne aa gaye ho, usne sab kuch tahas nahas kr diya, hum gaye to the maharaj ki shadi karwane lekin waha apne sabse achhe yodha kho kr aa gaye,

Dev- maharaj ki shadi, aapke hote hue unki dusri shadi kyo karwa rhi thi aap,

Renuka dev ki chudai se itni khush thi ki use ye hi pata nhi chala ki konsi baat batani chahiye aur konsi nhi, wo khud ko sach me dev ki premika samjhne lagi thi aur kamal ye tha ki usne ab tak dev ka naam bhi nhi pucha tha,

Renuka- pratap singh ko ladkiyo ka shok h aur mujhe logo ki chudai dekhne ka shok h jo tumhe pata chal hi chukka hoga, maharaj mere shok ko pura karte hain aur main unke shok ko, waise bhi is duniya me mera kuch h bhi nhi, bas meri ek beti h aur mujhe rishto s ekoi farak padta bhi nhi h, mainbachpan se hi aisi rhi hu, mujhe chudai dekhne aur aurto ke sath krurta karne me maja aata tha, mere chacha bahut jalim insan tha usi ke sath reh kr mujhe ye aadat pad gai, aur jab pratap singh se shadi hui to wo bhi meri soch ke jaisa hi mil gaya,

Dev ko gussa aa rha tha renuka per lekin wo shant tha,

Renuka- aur hum bhawar singh ke rajay me sirf shadi ke liye nhi gaye the pure rajay per kabja karne gaye the, aur waha kamya ne ………….

Renuka ne josh josh me bahut kuch dev ko bata diya, jise sunkr dev bhochakka sa reh gaya, jise sunkr dev ko yakeen hi nhi hua, dev ko bahut si baato ke jawab mil chuke the, kismet ne dev ko renuka ke pas bheja tha dev yaha aaya to bas pratap singh ke pariwar ki aurto ko chodne tha, lekin yaha aakr use kuch aur hi pata chal chukka tha,

Dev- mujhe yaha kab tak rhena hoga maharani,

Renuka- tumne kaise soch liya ki main tumhe kahi jane dungi, tum ab mere ho, kal indu aayegi use bhi thoda maja de dena, aur raat me mujhe, din me mere pas samay nhi hota, ab dev ke liye badi musibat ho chuki thi, use yaha se niklna tha, aur wo jis raste se aaya tha waha tak pahuchna itna asan nhi tha,

Lekin dev shant rha renuka usse chupak kr so gai lekin dev ke dimag me bahut kuch hulchul paida ho chuki thi, use apni maa ke pas pahuchna tha, lekin yaha abhi revati bhi thi jiske liye wo aaya tha lekin uske niche aa gai renuka aur indu,

Dev apne khayalo me sochta hua so gaya, agali subha jab wo utha to renuka ja chuki thi wo akela leta hua tha wo utha to uske kamre me ek dasi aakr uske liye nahane au rkhane ka intejam rakh gai, dev ek sone ke pinjre me kaid sa ho gaya tha, bhojan karke wo yaha se nikalne ka tarika dhundh rha tha tabhi kisi ke aane ki aahat hui dev samjh gaya ki indu aai hogi, dev ne turant apne kapde utar diye aur parde ke piche chip gaya use pata tha indu kyo aai h,

Jaise hi koi ander aaya dev ne piche se aakr use apni baho me bhar liya aur goad me utha liya, aur dev ka ek hath uski chuchiyo per gaya aur dusra hath sidhe unki jangho ke bich me, lekin tabhi wo chikh padi, aur uske chikte hi dev ne use chod diya wo niche gir gai, aur jab wo palat kr samne aai to wo indu nhi revati thi,

Revati ko waha dekh kr dev chonk gaya aur usse bhi buri halat thi revati ki, phele to wo kisi ke pakdne se buri trha dar gait hi dusra pakdne wale ne sidhe uske guptango ko pakad liya tha, ye to dart ha lekin chokne ki bari thi dev ko waha dekh kr wo bhi nanga, aur jab revati ki najre dev ke nange shareer per gai to uski palke jhapakna hi bhul gai, itna khubsurat hsareer aur sabse khas uska wo lund ek dum sidha khada tha, revati jameen me giri hui bas use bina palak jhapakaye dekhe ja rhi thi, dev bhi ghabraya sa use dekh rha tha,

Lekin jab dev ko ahsas hua revati kya dekh rhi h to wo halka sa muskuraya lekin usne sharmane ka natak kiya aur parde ke piche chip gaya,

Ek dum se revati ko bhi ahsas hua ki wo kya dekh rhi thi,

Revati sakpakati si uthi aur ek dum boli- tum yaha, tum yaha is halat me kya kar rhe ho,

Dev- tum yaha kya kar rhi ho,

Revati – ye meri maa ka kamra h main yaha kabhi bhi aa sakti hu,

Ab dev fas gaya thaw o kya bolega, usne kuch pal socha,

Dev- main yaha bandi hu,

Revati- bandi kamre me kon bandi hota h,

Dev- main tumse milne aaya tha, lekin tumhari dusri maa indu ne mujhe pakad liya aur yaha le aai, aur mere kapde bhi le gai, ab main nanga yaha se kaise jau, unhone kaha tha main aaungi tumse milne, to maine socha wahi aai hain isliye unhe kabje ke chakkar me tumhe pakad liya,

Revati ye sunkr chonk gai,

Revati- tum mujhs emilne aaye the, kyo

Dev- wo main kya batau us din tumhe dekha tab se dil ko sakoon nhi aa rha tha isliye aa gaya tha aur yaha fas gaya, ab wo aane hi wali hogi,

Revati- wo kya chahti h tumse,

Dev- jo ek aurat kisi mard se chahti h, main yaha se bhagna chahta hu lekin kaise bhagu,

Revati kuch sochne lagi,

Revati- tum abhi wahi karo jaisa wo kheti h jaise hi andhera hone ko hoga main tumhare liye kuch kapde le aaungi, aur yaha se nikal lungi, tab tak aise hi chupe raho, tumhe ab pata chalega kisi rajkumari ke najdeek aane ka natija,


रेवती हसने लगी, उसकी हसी बड़ी hi प्यारी थी, अगर ये पहले वाला देव होता तो उसी हसी में खाई खो जाता लेकिन इस देव को किसी से फरक नहीं पड़ता था,
 
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