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सुमसान जंगल में सात्विक तंत्र गुरु से तंत्र विद्या सिखने में लगा हुआ था, सात्विक बहुत तेजी से सभी विद्याये सिख रहा था, दोनों हवन क्र रहे थे तभी आसमान में बिजलिया चमकने लगी, मौसम ख़राब हो गया, बहुत hi खतरनाक तोफान शुरू हो गया था, हरे पैदा पैर बिजलिया गिर रही थी, खड़े खड़े पेड जल रहे थे, और हवा उसमे घी का काम कर ह्री थी,
सात्विक- गुरु जी ये क्या हो रहा ह, ऐसा लग रहा जैसे कुछ गलत होने जा रहा ह,
तंत्र गुरु- कुछ बदलने वाला ह, आसमान और धरती दोनों hi विरोध करना छह रहे हैं,
सात्विक- इसके परिणाम बुरे तो नहीं होंगे
गुरु- कोई परिणाम बुरे नहीं होते, बस अलग अलग इंसान के हिसाब से होते हैं, ऊपर वाले के हिसाब से सब सही hi होता ह, क्या पता इससे किसी को नुकसान हो तो किसी को फायदा होगा,
सात्विक- गुरु जी मेरी विद्या कब तक पूरी होगी, मुझे आगे भी जाना होगा, उस जगह को ढूंढ़ने,
गुरु- सब कुछ अपने समय के हिसाब से होगा, समय से पहले कुछ नहीं होगा, आज मैं तुम्हे अंतिम विद्या देने जा रहा हु, कल सुबह तू यहाँ से जा सकता ह अपनी मंजिल की तरफ, लेकिन ये याद रखना जोट ु हासिल करने जार है ह वो विनाश करि ह, और अगर तू उससे मिला तो शायद उसके बाद टूट ु नहीं रहेगा, और न जाने क्यों मुझे अहसास हो रहा ह की वो वापस आने वाला ह,
सात्विक- कोण गुरु जी, कोण आने वाला ह,
गुरु- तेरा मिलना उससे तय ह, शायद इसीलिए तूने ये विद्या पाई ह, मैं देख प् रहा हु, तेरा उससे मिलना तय ह, एक hi माली के बोये हुए बगीचे में फूल भी होते हैं और कांटे भी,
इधर प्रतियोगिता ख़तम हो गई थी लेकिन भवर सिंह के चेहरे पैर हताशा और दर दोनों दिख रहे थे, वही अमरावती और सौमित्र तो रोने के लिए तैयार थी, लेकिन काम्य बिलकुल खामोश बैठी हुई थी, वो उठी और अमरावती और सौमित्र को एक तरफ बुलाया और कुछ बात करने लगी,
देव मैदान से उठ कर घायल अवस्था में hi अपनी माँ के पास आया, लेकिन निहारिका वह नहीं थी, सभी लोग देव को बधाई देने के लिए आ रहे थे लेकिन देव तो अपनी माँ को ढूंढ रहा था, रीवा भी देव के पास आई, उसे ख़ुशी थी देव जीत गया अब वो उसकी शादी प्रताप सिंह से रोक देगा, देव माँ माँ चिल्ला रहा था, जब निहारिका नहीं मिली तो बाकि सबका धयान भी उधर गया, तभी काम्य बोली
काम्य- प्रताप सिंह भी यहाँ से गायब ह,
प्रताप सिंह का नाम सुनते hi भवर सिंह का गुस्सा चढ़ गया, वो तुरंत निहारिका को ढूंढ़ने निकला, देव भी निहारिका को ढूंढ़ने निकला, राजगुरु ने वह के माहौल को सम्हाल लिया,
देव इधर उधर देख रहा था तभी उसे निहारिका के चीखने की आवाज आई देव उस तरफ दौड़ पड़ा, वह बने एक कमरे में जैसे hi देव अंदर पंहुचा तो उसकी आँखे फटी रह गई, निहारिका जमीन पैर पड़ी हुई थी और प्रताप सिंह उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था, देव गुस्से में पागल हो गया और किसी पागल हठी की तरह चिंघाड़ता हुआ प्रताप सिंह पैर टूट पड़ा,
घायल देव में न जाने कहा से इतनी ताकत आ गई की उसने प्रताप सिंह को उठाया और दूर फेंक दिया और उस पैर मुक्को की बरसात कर दी, तभी वह भवर सिंह काम्य अमरावती सौमित्र सेनापति राजगुरु सब पहुंच गए,
भवर सिंह- क्या हो रहा ह यहाँ
प्रताप सिंह ने देव को धक्का दिया और भवर सिंह के पीछे चुप गया
प्रताप सिंह- महाराज मुझे बचाइए इन माँ बेटो से मुझे बचाइए,
भवर सिंह- ये सब क्या हो रहा ह यहाँ, तुम यहाँ क्या कर रहे हो प्रताप सिंह,
देव- ये मेरी माँ के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था,
भवर सिंह ने प्रताप सिंह की गार्डन पैर तलवार रख दी,
काम्य- रुकिए भाइये पहले प्रताप सिंह की भी बात सुन लेते हैं,
प्रताप सिंह- महाराज मुझे बोलने का मौका दीजिये
भवर सिंह- तुमने हमारे इज्जत से खेलना चाहा
प्रताप सिंह- मुझे ये औरत hi यह अलाइ थी
प्रताप सिंह की बात सुनते hi भवर सिंह के हाथ कैंप गए,
प्रताप सिंह- ये औरत मेरे पास आई थी दो दिन पहले और इसने कहा था अगर आप मेरे बेटे को युवराज बनाना में अपना समर्थन देंगे तो मैं आपके लिए कुछ भी करुँगी, फिर ये बोली की महाराज तो कुछ करते ह नहीं जब से देवदूत पैदा हुआ ह तब से मैं प्यासी हु, आप मेरी प्यास बुझा दिज्जिए और मेरी बेटी से शादी क्र लीजिये, इससे हमारा आगे का रास्ता भी साफ़ रहेगा, जैसे hi प्रतियोगिता में देव जीता ये मुझे यहाँ ले आई, अब रोने का नाटक कर रही ह,
प्रताप सिंह की बात सुनकर भवर सिंह ने बिना कुछ सोचे समझे निहारिका की तरफ तलवार चला दी, जिसके बिच में देव आ गया और वो तलवार देव के बाजु पैर चली जिससे वह खून भेने लगा,
राजगुरु- महाराज एक बार महारनी की बात तो सुनिए,
भवर सिंह- प्रताप सिंह को हमारे बिच की इतनी घेरि बात पता ह तो इसने hi बताई होगी, मैंने इसे बात करते देखा था,
काम्य- ये कलंकी ह, और इसका बीटा जॉय अहा प्रताप सिंह जी पैर जबरदस्ती का आरोप लगा रहा ह ये खुद एक लड़की के साथ जबरदस्ती करके आया ह,
इस बात ने वह एक और धमाका कर दिया था, तभी एक दासी कस्तूरी को लेकर आ गई,
काम्य – ये ह आचार्य की बेटी कस्तूरी, जब ये राजगुरु के पास गया था तो वह इसने स लड़की के साथ जबरदस्ती की, क्यों लड़की बता महाराज को इसने क्या किये तेरे साथ
कस्तूरी रो रही थी उसने अपना सर झुका लिया और जोर जोर से रोने लगी,
देव की आँखे भर आई थी, उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था, एक hi पल में उसकी पूरी दुनिया ख़तम हो गाइट hi, उसकी माँ और उस पैर जो इल्जाम लगे थे, वो इस समाज में कही मुँह दिखने के लायक नहीं थे,
भवर सिंह- इसकी सजा इन्हे कल दरबार में दी जाएगी, दोनों को बंदी बना लो और कारागृह में दाल दो,
तभी कुछ सैनिक आये और दोनों को ले गए,
कहा देव युवराज बनने वाला था कहा वो कारागृह में था, निहारिका का रो रो क्र बुरा हाल था, दोनों माँ बीटा एक दूसरे से लिपट क्र रो रहे थे, जल्दी hi ये खबर पुरे राजय में फ़ैल गई, और जैसे hi ये खबर आचार्य जी तक पहुंची तो उन्होंने आतम हत्या करने की कोशिश की उन्होंने जहर खा लिया, वो ये सदमा बर्दास्त नहीं कर पाए, एक तो उनकी बेटी के साथ ऐसा दुराचार हुआ और वो भी उनके सबसे पिरया शिष्य ने ऐसा किया, उन्हें बचा तो लिया गया लेकिन वो सदमे में चले गए,
वही भौमिक जी को जब ये खबर मिली तो वो बोखलाए हुए से महल की तरफ भागे, लेकिन महल में इतना कुछ हो गया था तो आज महाराज से किसी को मिलने की आज्ञा नहीं थी, राजगुरु भी भवर सिंह के साथ थे तो भौमिक जी राजगुरु से भी नहीं मिल पाए, उनकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था इसलिए वो तुरंत किसी एकांत जगह पैर पहुंच गए और धयान में बैठ गए, फिर से अपना धयान देव पैर केंद्रित किया और उसके बारे में जानने लगे, आज उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था वो काफी परेशां थे,
अक्षरा रीवा अमिता और सोमिया किसी को भी इस बात पैर यकीन नहीं हो रहा था, वो सब कुछ मानने को तैयार थी लेकिन निहारिका और देव ऐसा कर सकते हैं इस बात पैर यकीन नहीं कर प् रही थी, पुरे राजमहल में मातम जैसा माहौल था, लेकिन 6 लोग खुशिया मन रहे थे, अमरावती सौमित्र काम्य सूरज ज्वाला और अभिजीत,
वो सब एक साथ hi थे,
अमरावती- काम्य दीदी तुम्हे कैसे पता ये सब होगा, वो देवदूत जीत जायेगा,
कमाया- मुझे यकीन तो नहीं था लेकिन फिर भी मैंने तैयारी की हुई थी, इसलिए सभी को अलग अलग काम दिया हुआ था, सूरज को काम दिया था प्रताप सिंह को काबू में करने का, ये सब सूरज ने hi किया था, उसने hi प्रताप सिंह को निहारिका के पीछे लगाया,
सौमित्र- और वो कस्तूरी
काम्य- उसके बारे में फिर कभी जान लेना, अभी समय ह ख़ुशी मानाने का, कल उन्हें ऐसी सजा दिलवाऊंगी शर्म खुद कही जान दे देंगे,
पूरी रात किसी की दुःख में तो किसी की ख़ुशी में गुजर गई, देव ने निहारिका को कस्तूरी के बारे में सब बता दिया था,
कारागृह में देव और निहारिका एक दूसरे का हाथ थामे बैठे हुए थे,
देव- ये सब क्या हो गया माँ, मैं तो सम्मान पाने के लिए ये सब कर रहा था, और आज संसार का सबसे बड़ा इल्जाम लग गया, और पिता जी विश्वास भी कर लिया, मुझे अपराधी बनाया वो ठीक था ो मुझे पसंद नहीं करते लेकिन आपको क्यों अपराधी बनाया, आप पैर तो उन्हें विश्वास करना चाहिए था,
निहारिका- वो किसी पैर विश्वास नहीं करते और किसी को उनपर भी विश्वास नहीं करना चाहिए,
देव- फिर आपने उनसे शादी क्यों की, आप इतने वर्षो से ये सब झेल रही हैं, आपने विरोध क्यों नहीं किया,
निहारिका- मुझे नहीं पता कल सभा में हमे क्या सजा सुनाई जाएगी, लेकिन आज एक सच तुझे बता रही हु, जीवन में भवर सिंह पैर भरोसा मत करना, जिसने भी उस इंसान पैर भरोसा किया उसने उसे hi बर्बाद कर दिया,
बात उस समय की ह जब मैं जवान हुई थी, मेरे पिता भवर सिंह के सेनापति थे और मित्र भी थे, इसी वजह से भवर सिंह और उनकी बहन काम्य का हमारे घर आना जाना आम बात थी, भवर सिंह की दोस्ती मेरे भाई राजवीर से हो गाइट hi, दोनों काफी अच्छे दोस्त थे, मेरा भाई बहुत अच्छा योद्धा भी तो उस समय कोई भवर सिंह को टक्कर दे सकता था वो मेरा भाई hi था, और काम्य वो मेरे भाई को पसंद करने लगी थी, वो भवर सिंह के साथ हमारे घर आने लगी थी,
कुछ समय के लिए बहवर सिंह को युद्ध कला सिखने के लिए कही बहार भेजा गया था, इधर काम्य जवान हो रही थी उसका धयान राजवीर की तरफ बहुत ज्यादा होने लगा, दोनों के बिच नजदीकियां बढ़ रही थी, और मैं भी अपनी जवानी की तरफ बढ़ रही थी, जब कुछ वर्षो बाद भवर सिंह वापस आया तो वो हमारे घर आया और उसकी नजर मुझ पैर पड़ी, मुझे देख क्र उसके अंदर कामुकता भर गई, वो मुझे पाने के लिए पागल सा हो गया था, जबकि उसकी शादी हो चुकी थी, फिर एक युद्ध में भवर सिंह के पिता और मेरे पिता दोनों मरे गए, जिसके दुःख में मेरी माँ भी चल बसी, भवर सिंह को राजा बना दिया गया,
अब भवर सिंह कुछ भी कर सकता था, काम्य ने भवर सिंह से मेरे भाई राजवीर से शादी करने का प्रस्ताव रखा, तो भवर सिंह ने मेरे बही से मिला और उसके सामने एक ऐसी बात राखी की मेरे भाई का गुस्सा इतना बाद गया की उसने भवर सिंह को गालिया देकर घर से निकल दिया, भवर सिंह गुस्से में वह से चला गया, उस दिन राजवीर और भवर सिंह में बात चित बंद हो गई, एक दिन में घर में अकेली थी तो भवर सिंह वह आ गया और उसने मुझे अकेले देख क्र मेरे साथ दुराचार करना चाहा लेकिन तभी राजवीर आ गया और उन दोनों के बिच युद्ध हो गया, उस लड़ाई में राजवीर भवर सिंह पैर हावी हो रहा था किन ा जाने कहा से काम्य वह आ गई और उसने धोके से मेरे बही को पीछे से तलवार मर दी, उसका धोका राजवीर बर्दास्त नहीं कर पाया,
राजवीर- काम्य तुमने मेरे साथ धोखा किया,
काम्य- तुम मेरे बही को मरोगे मैं तुम्हे कैसे छोड़ दूंगी
राजवीर- तुम जानती हो इसने तुम्हरे बारे में क्या कहा था मुझसे
काम्य- जानती हु, तो इसमें बुराई क्या, इतना अच्छा अवसर था तुम्हारे पास लेकिन तुम इस लायक hi नहीं हो,
काम्य राजवीर से प्यार करती थी फिर भी उसने राजवीर को धोखा दिया, राजवीर जमीन पैर गिर गया, उसे बंदी बना लिया गया और मोत की सजा सुनाई गई राजा पैर हुम्ला करने के लिए, मैं अब अकेली रह गई थी, फिर भवर सिंह में मेरे साथ सोडा किया की अगर मैं उससे शादी कर लेती हु तो वो मेरे भाई को नहीं मरेगा, मैं अपने भाई को बचने के लिए मजबूर थी और उससे शादी कर ली, मेरा भाई आज भी उसकी कैद में ह, मैं होने भाई की वजह से आज तक भवर सिंह की यातनाये शेती आ ऋ हु, मेरी उम्र बहुत काम थी, और काम उम्र में hi रीवा पैदा हो गई और फिर तू, अब भाई के साथ साथ तुम दोनों की भी फ़िक्र थी मुझे,
मेरा भाई आज भी भवर सिंह की कैद में बंद ह, भवर सिंह किसी की नहीं सुनता, मुझे रीवा की फ़िक्र ह, न जाने वो कैसे रहेगी इन हैवानो के बिच में,
देव- आपने इतना बड़ा राज आज तक छुपा क्र रखा, हम उन्हें कैसा इंसान समझते थे और वो कैसे निकले, आपने मुझे उनसे लड़ने लायक योद्धा क्यों नहीं बनाया,
निहारिका- तेरे जनम के साथ hi भवर सिंह के अंदर एक दर पैदा हो गया था, वो तुझे पैदा होते hi मरना चाहता था लेकिन राजगुरु की वजह से नहीं मर पाया, राजगुरु ने कहा था अगर तुझे समय से पहले मर दिया तो पूरा राजय तबाह हो जायेगा, शायद इसीलिए ये लोग आज तक रुके हुए थे, और आज उन्होंने ये सब साजिश करके हम दोनों को रस्ते से होने का तरीका ढूढ़ा ह, और मेरी मज़बूरी देखो मैं कुछ नहीं बोल प् रही हु, अगर कुछ बोलती हु तो वो मेरे भाई को मार देगा, हमे शायद कोई सजा देकर यहाँ से दूर भेज दे, लेकिन वो राजवीर को मर देगा,
देव- मुझे किसी सजा का दुःख नहीं ह, बस दुःख ह की मैं आपके सम्मान के लिए कुछ नहीं कर सका, हमे सजा उस अपराध की मिलेगी जो हमने किया hi नहीं, फिर भी मैं मां के लिए वो सजा लेने को तैयार हु,
निहारिका- क्या पता उप्पेर वाले ने हमारे लिए ये hi सोचा हो, लेकिन अगर मुझे दुबारा जनम मिलता ह तो मैं तुझे ऐसा योद्धा बनाउंगी की पूरा संसार तेरे सामने सर झुकाये, इस जनम में जो गलती मैंने की ह वो दुबारा नहीं करुँगी, और मैं प्राथना करुँगी अगर मैं फिर से पैदा हुई तो मुझे तेरे जैसा hi पति मिले, जो सबसे इतना प्यार करता ह, मैं हमेषा प्यार के लिए तरसी हु, इस जनम में जितना प्यार तूने मुझे दिया ह उतना मेरे माता पिता भी नहीं दे पाए,
देव- मैं आपका बीटा hi पैदा होना चाहूंगा माँ,
दोनों माँ बेटे एक दूसरे के कंधे पैर सर रख क्र बैठे रहे,
अगली सुबह राज दरबार लगा हुआ था,
राजगुरु- वैसे तो प्रतियोगिता पूरी हो चुकी थी लेकिन देवदूत ने जो अपराध किया ह उसकी सजा उन्हें मिलेगी, और कोई अपराधी युवराज नहीं बन सकता, इसलिए महाराज के आदेश पैर युवराज की घोषणा फिर कभी समय आने पैर की जाएगी, और आज जो स्वंवर होना था ो भी रोका जाता ह, हम अपने महेमानो से माफ़ी चाहेंगे, लेकिन ये समय न्याय का ह और राजमहल के लिए दुःख का भी तो ऐसे में ये सब नहीं हो सकता, और बी ह अपराधियों को सजा देने का,
तभी निहारिका और देव को लेकर आ गए झांजीरो में बांध क्र,
भवर सिंह- इन दोनों में अपराध किया ह, ये राजमहल और राजय के साथ साथ समाज के भी अपराधी हैं, मैं इनकी कोई बात सुन्ना नहीं चाहता हु, राज गुरु इन्हे सजा दी जाये,
राजगुरु- इनदोनो की राजय से बहार निकल दिया जाये, और फिर कभी इस राजय की अस पास भी दिखे तो इन्हे मोत की सजा दी जाये,
काम्य- ये सजा काफी नहीं होगी, इससे समाज में क्या फरक पड़ेगा, कोई भी औरत या मर्द जब ऐसी हरकते करेगा तो बस उसे राजय से बहार क्र दिया जायेगा, उससे हम क्या उदहारण पेश करेंगे, इन्हे ऐसी सजा मिलनी चाहिए जिससे आने वाली पीडिया याद रखे की महारज अपनी पत्नी और बेटे को ऐसी सजा दे सकते हैं तो बाकि सब को कैसी सजा मिलेगी,
भवर सिंह- तुम hi बताओ क्या सजा दी जाये,
काम्य- इस निहारिका को अपनी सुंदरता पैर बहुत अभिमान ह, इसने उसी सुंदरता के अहंकार में ऐसी हरकत की, तो इसकी सजा ये ह की इसे पूरी तरह निर्वस्त्र करके पुरे राजय में हुअय जाये और लोग इन पैर अपना गुस्सा निकले , और इस देवदूत को भी इसकी माँ के साथ निर्वस्त्र करके ऐसे hi घुमाया जाये,
भवर ऐसा करना नहीं छटा था, लेकिन वो परजा के बिच निहारिका और देव के लिए नफरत पैदा करना छटा था, जिससे बह्विश्य में लोग उन्हें बुराई में hi याद रखे,
भवर सिंह ने तुरंत है बाहर ली, राजगुरु ने बहवर सिंह को देखा वो रोक्न अछते थे लेकिन रोक नहीं पाए, निहिरका और देव ने फटी आँखों से भवर सिंह को देखा उन्हें यकीन hi नहीं हुआ, उनके लिए ऐसा आदेश दिया गया, खुद पूरा सभा चौंक गई थी,
भवर सिंह- इस आदेश पैर अभी अमल किया जाये,
तुरंत दो सैनिक आगे आये उन्होंने निहारिका के कपडे उतरने के लिए हाथ बढ़ाये तभी देव ने उन पैर हुम्ला कर दिया,
एक सैनिक ने देव के सर में तलवार की मुठ मर दी जिससे वो जमीन में गिर गया और बेहोश हो गया, वो कल की लड़ाई से इतना घायल हो चुक्का था की उसके अंदर कोई जान hi नहीं बची थी, उसके जख्मो का कोई उपचार भी नहीं किया गया था, जब उसे होश आया तो वो महल के बहार पड़ा हुआ था, उसकी आँख खुली उसने चारो तरफ देखा तो बहुत से लोग खड़े थे, देव खड़ा हुआ तो उसे अहसास हुआ की वो नंगा ह, और जब उसने बराबर में देखा तो निहारिका भी नंगी कड़ी थी, निहारिका की आँखे बंद थी और उनसे आंसू बहे जा रहे थे,
देव ने नारिका को देखा वो जोर से चिलाय- हमे जान से मर दो, लेकिन ऐसा मत करो,
लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था, सैनिक उन्हें खींच क्र लेका चल दिए, पूरी परजा कड़ी हुई देख रही थी, कुछ औरतो ने अपने मुँह धक् लिए लेकिन मर्द बड़े चाव से निहारिका को देख रहे the,is संसार की सबसे खूसूरत औरत का चेरा देखना भी इन लोगो के लिए सपना जैसा था आज उन्हें वो औरत पूरी नंगी देखने को मिल रही थी, लोग उसे देख रहे थे और आहे भर रहे थे, निहारिका आँखे बंद किये सर झुका क्र चले जार hi थी, वही देव की आँखों में खून उतर रहा था, लोग उन दोनों पैर टमाटर गोबर न जाने क्या क्या फेंक रहे थे,
इधर प्रताप सिंह तुरंत महल से निकल चुक्का था और अपने सैनिको को आदेश दिया की जब भवर सिंह के सैनिक देवदूत और निहारिका को राजय से बहार चोदे तो निहारिका को तुरंत उठवा लेना और देवदूत को मार देना,
इधर देव और निहारिका के साथ ये सब हो रहा था और भौमिक जी अपने धयान में लगे थे, उन्हें पता hi नहीं चला कब रात हो गई कब सबेरा हो गया, इतना लम्बा धयान लगन ेके बाद उन्हें कुछ झल्कियादिखने लगी और जो झलकियां उन्हें दिख रही उन्हें भौमिक जी फिर घबरा गए और उनकी आँखे खुल गई, उन्ह ीक पहाड़ी दिख रही थी, और एक चीता दिख रहा था जो देव पैर हुम्ला करने वाला था, और एक झरना और गिरते हुए……….. भौमिक जी तुरंत आँख खोल क्र बैठ गए और जल्दी से महल की तरफ दौड़ पड़े,
इधर रीवा महल के छज्जे पैर कड़ी अपनी माँ और भाई की हालत देख रही थी, वो प्रताप सिंह से शादी रुकने की ख़ुशी मनाये या जो हुआ उसका दुःख मनाये,
देव और निहारिका को पुरे राजय के सामने नंगे यात्रा निकल क्र उन्हें राजय से बहार एक पहाड़ी पैर ले गए,
एक सैनिक- यार कसम से महाराज हमे सौंप देते तो सभी सैनिक इस औरत के साथ मजे करता, ऐसा बदन मैंने आज तक नहीं देखा,
दूसरा सैनिक- मजे तो हम अब भी कर लेते लेकिन महाराज के खास लोग भी आ रहे हैं पीछे,
फेल सैनिक- अरे जब ताका एते हैं तब तक मजे क्र ले,
तभी वह एक चीता की दहाड़ने की आवाज आई, सभी ने ुधा रदेखा तो एक गाड़ी पैर पिंजरे में चीता को लाया जार है था,
उस गाड़ी से उतरा एक सैनिक- इन दोनों को मार क्र इस चेतता को खिला दो, कोई गवाह या सबूत नाब अचे, ये महारज का आदेश ह,
सैनिको ने तुरंत तलवार निकली और देव और नाकि के पेट में उतर दी, न जाने कितनी तलवारे उनके शरीर में गुसा दी थी, फिर सभी पीछे हैट गए और चीता का पिंजरा खोल दिया, चीता चलता हुआ देव और निहारिका के नजदीक आया,
निहारिका लगभग मर hi चुकी थी, उसके शरीर से बहुत खून भी चुक्का था, देव की हालत भी खराब थी वो बस जैसे तैसे निहारिका को पकडे हुए खड़ा था, जैसे hi चीता उनकी तरफ आया, देव ने एक तलवार उठाई और चीता के पेट में घुसा दी, लेकिन चीता उन पैर कूद गया, जिससे वो तीनो एक साथ पहाड़ी से गिर गए और भेटे हुए झरने में जा गिरे,
सैनिको ने महल पहुंच क्र भवर सिंह की उनके मरने की खबर दे दी, लेकिन इस सब को प्रताप सिंह के सैनिक भी देख रहे थे, क्योकि वो निहारिका को पकड़ने के लिए उनके पीछे लगे हुए थे, उन्होंने प्रताप सिंह को ये खबर दी तो प्रताप सिंह गुस्से में पागल सा हो गया,
राजय सभा में बहवर सिंह राजगुरु के साथ साथ भवर सिंह क ापुरा परिवार बैठा हुआ था, राजय में आये हुए सभी महेमान जा चुके थे, आज सभा में किसी को आने की आज्ञा नहीं थी, लेकिन तभी सैनिको को धकेलते हुए भौमिक जी सभा में आ गए,
भौमिक जी को वह सीख क्र राजगुरु भी चकित रह गए,
राजगुरु- भौमिक मेरे बही तुम यहाँ
भौमिक- मत कहो मुझे आप भाई, आज आप मेरी नजरो से गिर गए हो, आप सबने साजिश करके उन लड़के को मरवा दिया, इस परिवार का और इस समाज का सबसे मासूम इंसान था वो, जिस लड़की के साथ दुराचार का अपराध आप सबने लगवाया ह वो लड़की खुद देव के पास आई थी उसे अपने प्रेम के जाल में फसाया और खुद उसके साथ सम्भोग किया, जब मैंने रोक तो उस लड़की ने मेरा भी विरोध किया, देव कैसे उसके साथ दुराचार कर सकता ह, ये सब तुम लोगो की साजिश ह और मुझे उम्मीद ह तुम सबने मिल्क रही महारनी निहारिका को भी ऐसे hi फसाया ह, तुम सबके अंदर का दर तुमसे ये करवा रहा ह, लेकिन तुम सबने गलत किया ह, लेकिन तुम कुछ भी कर लो जो होना ह वो होकर hi राजा, वो आएगा जरूर आएगा, उसे आना हो होगा, चाहे ये धरती फैट जाये या आसमान टूट पड़े, उसे आना hi होगा, मैं लेकर आऊंगा उसे, और जब वो आएगा तो विध्वंश होगा, पूरी धरती कैंप उठेगी, अपराधियों को सजा मिलेगी और ऐसा विनाश होगा ये पूरा राजय ठहराएगा, उस औरत का अपमान पूरी प्रकर्ति लेगी तुम सबसे,
इतना बोल क्र भौमिक जो तेज कदमो से वह से निकल गए, पूरा परिवार भोचक्का सा खड़ा रह गया, किसी के मुँह से कोई शब्द नहीं निकला था, कुछ लोगो के चेरे पैर चिंता थी तो कुछ इस बात से अचंभित थे की निहारिका और देव को साजिश करके महल से निकला गया ह, रीवा अक्षरा अमिता और सोमिया इस बात से परइ तरह चौंक गई थी,
भौमिक जी अपने घर जाने की जगह वह चले गए जहा देव और निहारिका को लेकर गए थे, वो जगह भौमिक जी ने अपने धयान में देखि थी, वो उस पहाड़ी पैर खड़े हो गए, झरना इतना घेरा था की कोई पहाड़ भी उसमे गिरे तो ढूंढ़ने से न मिले, भौमिक जी अपने घुटनो पैर बैठ गए, उनकी आँखों में आंसू थे, आज उन्हें अपने जीवन में सब धुंधला दिख रहा था, कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था, बस 15 दिन साथ रहने से hi देव से उनका रिश्ता ितं अमजबुत हो गया था,
भौमिक जी जोर से चिलए devvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvv.
सुमसान जंगल में सात्विक तंत्र गुरु से तंत्र विद्या सिखने में लगा हुआ था, सात्विक बहुत तेजी से सभी विद्याये सिख रहा था, दोनों हवन क्र रहे थे तभी आसमान में बिजलिया चमकने लगी, मौसम ख़राब हो गया, बहुत hi खतरनाक तोफान शुरू हो गया था, हरे पैदा पैर बिजलिया गिर रही थी, खड़े खड़े पेड जल रहे थे, और हवा उसमे घी का काम कर ह्री थी,
सात्विक- गुरु जी ये क्या हो रहा ह, ऐसा लग रहा जैसे कुछ गलत होने जा रहा ह,
तंत्र गुरु- कुछ बदलने वाला ह, आसमान और धरती दोनों hi विरोध करना छह रहे हैं,
सात्विक- इसके परिणाम बुरे तो नहीं होंगे
गुरु- कोई परिणाम बुरे नहीं होते, बस अलग अलग इंसान के हिसाब से होते हैं, ऊपर वाले के हिसाब से सब सही hi होता ह, क्या पता इससे किसी को नुकसान हो तो किसी को फायदा होगा,
सात्विक- गुरु जी मेरी विद्या कब तक पूरी होगी, मुझे आगे भी जाना होगा, उस जगह को ढूंढ़ने,
गुरु- सब कुछ अपने समय के हिसाब से होगा, समय से पहले कुछ नहीं होगा, आज मैं तुम्हे अंतिम विद्या देने जा रहा हु, कल सुबह तू यहाँ से जा सकता ह अपनी मंजिल की तरफ, लेकिन ये याद रखना जोट ु हासिल करने जार है ह वो विनाश करि ह, और अगर तू उससे मिला तो शायद उसके बाद टूट ु नहीं रहेगा, और न जाने क्यों मुझे अहसास हो रहा ह की वो वापस आने वाला ह,
सात्विक- कोण गुरु जी, कोण आने वाला ह,
गुरु- तेरा मिलना उससे तय ह, शायद इसीलिए तूने ये विद्या पाई ह, मैं देख प् रहा हु, तेरा उससे मिलना तय ह, एक hi माली के बोये हुए बगीचे में फूल भी होते हैं और कांटे भी,
इधर प्रतियोगिता ख़तम हो गई थी लेकिन भवर सिंह के चेहरे पैर हताशा और दर दोनों दिख रहे थे, वही अमरावती और सौमित्र तो रोने के लिए तैयार थी, लेकिन काम्य बिलकुल खामोश बैठी हुई थी, वो उठी और अमरावती और सौमित्र को एक तरफ बुलाया और कुछ बात करने लगी,
देव मैदान से उठ कर घायल अवस्था में hi अपनी माँ के पास आया, लेकिन निहारिका वह नहीं थी, सभी लोग देव को बधाई देने के लिए आ रहे थे लेकिन देव तो अपनी माँ को ढूंढ रहा था, रीवा भी देव के पास आई, उसे ख़ुशी थी देव जीत गया अब वो उसकी शादी प्रताप सिंह से रोक देगा, देव माँ माँ चिल्ला रहा था, जब निहारिका नहीं मिली तो बाकि सबका धयान भी उधर गया, तभी काम्य बोली
काम्य- प्रताप सिंह भी यहाँ से गायब ह,
प्रताप सिंह का नाम सुनते hi भवर सिंह का गुस्सा चढ़ गया, वो तुरंत निहारिका को ढूंढ़ने निकला, देव भी निहारिका को ढूंढ़ने निकला, राजगुरु ने वह के माहौल को सम्हाल लिया,
देव इधर उधर देख रहा था तभी उसे निहारिका के चीखने की आवाज आई देव उस तरफ दौड़ पड़ा, वह बने एक कमरे में जैसे hi देव अंदर पंहुचा तो उसकी आँखे फटी रह गई, निहारिका जमीन पैर पड़ी हुई थी और प्रताप सिंह उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था, देव गुस्से में पागल हो गया और किसी पागल हठी की तरह चिंघाड़ता हुआ प्रताप सिंह पैर टूट पड़ा,
घायल देव में न जाने कहा से इतनी ताकत आ गई की उसने प्रताप सिंह को उठाया और दूर फेंक दिया और उस पैर मुक्को की बरसात कर दी, तभी वह भवर सिंह काम्य अमरावती सौमित्र सेनापति राजगुरु सब पहुंच गए,
भवर सिंह- क्या हो रहा ह यहाँ
प्रताप सिंह ने देव को धक्का दिया और भवर सिंह के पीछे चुप गया
प्रताप सिंह- महाराज मुझे बचाइए इन माँ बेटो से मुझे बचाइए,
भवर सिंह- ये सब क्या हो रहा ह यहाँ, तुम यहाँ क्या कर रहे हो प्रताप सिंह,
देव- ये मेरी माँ के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था,
भवर सिंह ने प्रताप सिंह की गार्डन पैर तलवार रख दी,
काम्य- रुकिए भाइये पहले प्रताप सिंह की भी बात सुन लेते हैं,
प्रताप सिंह- महाराज मुझे बोलने का मौका दीजिये
भवर सिंह- तुमने हमारे इज्जत से खेलना चाहा
प्रताप सिंह- मुझे ये औरत hi यह अलाइ थी
प्रताप सिंह की बात सुनते hi भवर सिंह के हाथ कैंप गए,
प्रताप सिंह- ये औरत मेरे पास आई थी दो दिन पहले और इसने कहा था अगर आप मेरे बेटे को युवराज बनाना में अपना समर्थन देंगे तो मैं आपके लिए कुछ भी करुँगी, फिर ये बोली की महाराज तो कुछ करते ह नहीं जब से देवदूत पैदा हुआ ह तब से मैं प्यासी हु, आप मेरी प्यास बुझा दिज्जिए और मेरी बेटी से शादी क्र लीजिये, इससे हमारा आगे का रास्ता भी साफ़ रहेगा, जैसे hi प्रतियोगिता में देव जीता ये मुझे यहाँ ले आई, अब रोने का नाटक कर रही ह,
प्रताप सिंह की बात सुनकर भवर सिंह ने बिना कुछ सोचे समझे निहारिका की तरफ तलवार चला दी, जिसके बिच में देव आ गया और वो तलवार देव के बाजु पैर चली जिससे वह खून भेने लगा,
राजगुरु- महाराज एक बार महारनी की बात तो सुनिए,
भवर सिंह- प्रताप सिंह को हमारे बिच की इतनी घेरि बात पता ह तो इसने hi बताई होगी, मैंने इसे बात करते देखा था,
काम्य- ये कलंकी ह, और इसका बीटा जॉय अहा प्रताप सिंह जी पैर जबरदस्ती का आरोप लगा रहा ह ये खुद एक लड़की के साथ जबरदस्ती करके आया ह,
इस बात ने वह एक और धमाका कर दिया था, तभी एक दासी कस्तूरी को लेकर आ गई,
काम्य – ये ह आचार्य की बेटी कस्तूरी, जब ये राजगुरु के पास गया था तो वह इसने स लड़की के साथ जबरदस्ती की, क्यों लड़की बता महाराज को इसने क्या किये तेरे साथ
कस्तूरी रो रही थी उसने अपना सर झुका लिया और जोर जोर से रोने लगी,
देव की आँखे भर आई थी, उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था, एक hi पल में उसकी पूरी दुनिया ख़तम हो गाइट hi, उसकी माँ और उस पैर जो इल्जाम लगे थे, वो इस समाज में कही मुँह दिखने के लायक नहीं थे,
भवर सिंह- इसकी सजा इन्हे कल दरबार में दी जाएगी, दोनों को बंदी बना लो और कारागृह में दाल दो,
तभी कुछ सैनिक आये और दोनों को ले गए,
कहा देव युवराज बनने वाला था कहा वो कारागृह में था, निहारिका का रो रो क्र बुरा हाल था, दोनों माँ बीटा एक दूसरे से लिपट क्र रो रहे थे, जल्दी hi ये खबर पुरे राजय में फ़ैल गई, और जैसे hi ये खबर आचार्य जी तक पहुंची तो उन्होंने आतम हत्या करने की कोशिश की उन्होंने जहर खा लिया, वो ये सदमा बर्दास्त नहीं कर पाए, एक तो उनकी बेटी के साथ ऐसा दुराचार हुआ और वो भी उनके सबसे पिरया शिष्य ने ऐसा किया, उन्हें बचा तो लिया गया लेकिन वो सदमे में चले गए,
वही भौमिक जी को जब ये खबर मिली तो वो बोखलाए हुए से महल की तरफ भागे, लेकिन महल में इतना कुछ हो गया था तो आज महाराज से किसी को मिलने की आज्ञा नहीं थी, राजगुरु भी भवर सिंह के साथ थे तो भौमिक जी राजगुरु से भी नहीं मिल पाए, उनकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था इसलिए वो तुरंत किसी एकांत जगह पैर पहुंच गए और धयान में बैठ गए, फिर से अपना धयान देव पैर केंद्रित किया और उसके बारे में जानने लगे, आज उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था वो काफी परेशां थे,
अक्षरा रीवा अमिता और सोमिया किसी को भी इस बात पैर यकीन नहीं हो रहा था, वो सब कुछ मानने को तैयार थी लेकिन निहारिका और देव ऐसा कर सकते हैं इस बात पैर यकीन नहीं कर प् रही थी, पुरे राजमहल में मातम जैसा माहौल था, लेकिन 6 लोग खुशिया मन रहे थे, अमरावती सौमित्र काम्य सूरज ज्वाला और अभिजीत,
वो सब एक साथ hi थे,
अमरावती- काम्य दीदी तुम्हे कैसे पता ये सब होगा, वो देवदूत जीत जायेगा,
कमाया- मुझे यकीन तो नहीं था लेकिन फिर भी मैंने तैयारी की हुई थी, इसलिए सभी को अलग अलग काम दिया हुआ था, सूरज को काम दिया था प्रताप सिंह को काबू में करने का, ये सब सूरज ने hi किया था, उसने hi प्रताप सिंह को निहारिका के पीछे लगाया,
सौमित्र- और वो कस्तूरी
काम्य- उसके बारे में फिर कभी जान लेना, अभी समय ह ख़ुशी मानाने का, कल उन्हें ऐसी सजा दिलवाऊंगी शर्म खुद कही जान दे देंगे,
पूरी रात किसी की दुःख में तो किसी की ख़ुशी में गुजर गई, देव ने निहारिका को कस्तूरी के बारे में सब बता दिया था,
कारागृह में देव और निहारिका एक दूसरे का हाथ थामे बैठे हुए थे,
देव- ये सब क्या हो गया माँ, मैं तो सम्मान पाने के लिए ये सब कर रहा था, और आज संसार का सबसे बड़ा इल्जाम लग गया, और पिता जी विश्वास भी कर लिया, मुझे अपराधी बनाया वो ठीक था ो मुझे पसंद नहीं करते लेकिन आपको क्यों अपराधी बनाया, आप पैर तो उन्हें विश्वास करना चाहिए था,
निहारिका- वो किसी पैर विश्वास नहीं करते और किसी को उनपर भी विश्वास नहीं करना चाहिए,
देव- फिर आपने उनसे शादी क्यों की, आप इतने वर्षो से ये सब झेल रही हैं, आपने विरोध क्यों नहीं किया,
निहारिका- मुझे नहीं पता कल सभा में हमे क्या सजा सुनाई जाएगी, लेकिन आज एक सच तुझे बता रही हु, जीवन में भवर सिंह पैर भरोसा मत करना, जिसने भी उस इंसान पैर भरोसा किया उसने उसे hi बर्बाद कर दिया,
बात उस समय की ह जब मैं जवान हुई थी, मेरे पिता भवर सिंह के सेनापति थे और मित्र भी थे, इसी वजह से भवर सिंह और उनकी बहन काम्य का हमारे घर आना जाना आम बात थी, भवर सिंह की दोस्ती मेरे भाई राजवीर से हो गाइट hi, दोनों काफी अच्छे दोस्त थे, मेरा भाई बहुत अच्छा योद्धा भी तो उस समय कोई भवर सिंह को टक्कर दे सकता था वो मेरा भाई hi था, और काम्य वो मेरे भाई को पसंद करने लगी थी, वो भवर सिंह के साथ हमारे घर आने लगी थी,
कुछ समय के लिए बहवर सिंह को युद्ध कला सिखने के लिए कही बहार भेजा गया था, इधर काम्य जवान हो रही थी उसका धयान राजवीर की तरफ बहुत ज्यादा होने लगा, दोनों के बिच नजदीकियां बढ़ रही थी, और मैं भी अपनी जवानी की तरफ बढ़ रही थी, जब कुछ वर्षो बाद भवर सिंह वापस आया तो वो हमारे घर आया और उसकी नजर मुझ पैर पड़ी, मुझे देख क्र उसके अंदर कामुकता भर गई, वो मुझे पाने के लिए पागल सा हो गया था, जबकि उसकी शादी हो चुकी थी, फिर एक युद्ध में भवर सिंह के पिता और मेरे पिता दोनों मरे गए, जिसके दुःख में मेरी माँ भी चल बसी, भवर सिंह को राजा बना दिया गया,
अब भवर सिंह कुछ भी कर सकता था, काम्य ने भवर सिंह से मेरे भाई राजवीर से शादी करने का प्रस्ताव रखा, तो भवर सिंह ने मेरे बही से मिला और उसके सामने एक ऐसी बात राखी की मेरे भाई का गुस्सा इतना बाद गया की उसने भवर सिंह को गालिया देकर घर से निकल दिया, भवर सिंह गुस्से में वह से चला गया, उस दिन राजवीर और भवर सिंह में बात चित बंद हो गई, एक दिन में घर में अकेली थी तो भवर सिंह वह आ गया और उसने मुझे अकेले देख क्र मेरे साथ दुराचार करना चाहा लेकिन तभी राजवीर आ गया और उन दोनों के बिच युद्ध हो गया, उस लड़ाई में राजवीर भवर सिंह पैर हावी हो रहा था किन ा जाने कहा से काम्य वह आ गई और उसने धोके से मेरे बही को पीछे से तलवार मर दी, उसका धोका राजवीर बर्दास्त नहीं कर पाया,
राजवीर- काम्य तुमने मेरे साथ धोखा किया,
काम्य- तुम मेरे बही को मरोगे मैं तुम्हे कैसे छोड़ दूंगी
राजवीर- तुम जानती हो इसने तुम्हरे बारे में क्या कहा था मुझसे
काम्य- जानती हु, तो इसमें बुराई क्या, इतना अच्छा अवसर था तुम्हारे पास लेकिन तुम इस लायक hi नहीं हो,
काम्य राजवीर से प्यार करती थी फिर भी उसने राजवीर को धोखा दिया, राजवीर जमीन पैर गिर गया, उसे बंदी बना लिया गया और मोत की सजा सुनाई गई राजा पैर हुम्ला करने के लिए, मैं अब अकेली रह गई थी, फिर भवर सिंह में मेरे साथ सोडा किया की अगर मैं उससे शादी कर लेती हु तो वो मेरे भाई को नहीं मरेगा, मैं अपने भाई को बचने के लिए मजबूर थी और उससे शादी कर ली, मेरा भाई आज भी उसकी कैद में ह, मैं होने भाई की वजह से आज तक भवर सिंह की यातनाये शेती आ ऋ हु, मेरी उम्र बहुत काम थी, और काम उम्र में hi रीवा पैदा हो गई और फिर तू, अब भाई के साथ साथ तुम दोनों की भी फ़िक्र थी मुझे,
मेरा भाई आज भी भवर सिंह की कैद में बंद ह, भवर सिंह किसी की नहीं सुनता, मुझे रीवा की फ़िक्र ह, न जाने वो कैसे रहेगी इन हैवानो के बिच में,
देव- आपने इतना बड़ा राज आज तक छुपा क्र रखा, हम उन्हें कैसा इंसान समझते थे और वो कैसे निकले, आपने मुझे उनसे लड़ने लायक योद्धा क्यों नहीं बनाया,
निहारिका- तेरे जनम के साथ hi भवर सिंह के अंदर एक दर पैदा हो गया था, वो तुझे पैदा होते hi मरना चाहता था लेकिन राजगुरु की वजह से नहीं मर पाया, राजगुरु ने कहा था अगर तुझे समय से पहले मर दिया तो पूरा राजय तबाह हो जायेगा, शायद इसीलिए ये लोग आज तक रुके हुए थे, और आज उन्होंने ये सब साजिश करके हम दोनों को रस्ते से होने का तरीका ढूढ़ा ह, और मेरी मज़बूरी देखो मैं कुछ नहीं बोल प् रही हु, अगर कुछ बोलती हु तो वो मेरे भाई को मार देगा, हमे शायद कोई सजा देकर यहाँ से दूर भेज दे, लेकिन वो राजवीर को मर देगा,
देव- मुझे किसी सजा का दुःख नहीं ह, बस दुःख ह की मैं आपके सम्मान के लिए कुछ नहीं कर सका, हमे सजा उस अपराध की मिलेगी जो हमने किया hi नहीं, फिर भी मैं मां के लिए वो सजा लेने को तैयार हु,
निहारिका- क्या पता उप्पेर वाले ने हमारे लिए ये hi सोचा हो, लेकिन अगर मुझे दुबारा जनम मिलता ह तो मैं तुझे ऐसा योद्धा बनाउंगी की पूरा संसार तेरे सामने सर झुकाये, इस जनम में जो गलती मैंने की ह वो दुबारा नहीं करुँगी, और मैं प्राथना करुँगी अगर मैं फिर से पैदा हुई तो मुझे तेरे जैसा hi पति मिले, जो सबसे इतना प्यार करता ह, मैं हमेषा प्यार के लिए तरसी हु, इस जनम में जितना प्यार तूने मुझे दिया ह उतना मेरे माता पिता भी नहीं दे पाए,
देव- मैं आपका बीटा hi पैदा होना चाहूंगा माँ,
दोनों माँ बेटे एक दूसरे के कंधे पैर सर रख क्र बैठे रहे,
अगली सुबह राज दरबार लगा हुआ था,
राजगुरु- वैसे तो प्रतियोगिता पूरी हो चुकी थी लेकिन देवदूत ने जो अपराध किया ह उसकी सजा उन्हें मिलेगी, और कोई अपराधी युवराज नहीं बन सकता, इसलिए महाराज के आदेश पैर युवराज की घोषणा फिर कभी समय आने पैर की जाएगी, और आज जो स्वंवर होना था ो भी रोका जाता ह, हम अपने महेमानो से माफ़ी चाहेंगे, लेकिन ये समय न्याय का ह और राजमहल के लिए दुःख का भी तो ऐसे में ये सब नहीं हो सकता, और बी ह अपराधियों को सजा देने का,
तभी निहारिका और देव को लेकर आ गए झांजीरो में बांध क्र,
भवर सिंह- इन दोनों में अपराध किया ह, ये राजमहल और राजय के साथ साथ समाज के भी अपराधी हैं, मैं इनकी कोई बात सुन्ना नहीं चाहता हु, राज गुरु इन्हे सजा दी जाये,
राजगुरु- इनदोनो की राजय से बहार निकल दिया जाये, और फिर कभी इस राजय की अस पास भी दिखे तो इन्हे मोत की सजा दी जाये,
काम्य- ये सजा काफी नहीं होगी, इससे समाज में क्या फरक पड़ेगा, कोई भी औरत या मर्द जब ऐसी हरकते करेगा तो बस उसे राजय से बहार क्र दिया जायेगा, उससे हम क्या उदहारण पेश करेंगे, इन्हे ऐसी सजा मिलनी चाहिए जिससे आने वाली पीडिया याद रखे की महारज अपनी पत्नी और बेटे को ऐसी सजा दे सकते हैं तो बाकि सब को कैसी सजा मिलेगी,
भवर सिंह- तुम hi बताओ क्या सजा दी जाये,
काम्य- इस निहारिका को अपनी सुंदरता पैर बहुत अभिमान ह, इसने उसी सुंदरता के अहंकार में ऐसी हरकत की, तो इसकी सजा ये ह की इसे पूरी तरह निर्वस्त्र करके पुरे राजय में हुअय जाये और लोग इन पैर अपना गुस्सा निकले , और इस देवदूत को भी इसकी माँ के साथ निर्वस्त्र करके ऐसे hi घुमाया जाये,
भवर ऐसा करना नहीं छटा था, लेकिन वो परजा के बिच निहारिका और देव के लिए नफरत पैदा करना छटा था, जिससे बह्विश्य में लोग उन्हें बुराई में hi याद रखे,
भवर सिंह ने तुरंत है बाहर ली, राजगुरु ने बहवर सिंह को देखा वो रोक्न अछते थे लेकिन रोक नहीं पाए, निहिरका और देव ने फटी आँखों से भवर सिंह को देखा उन्हें यकीन hi नहीं हुआ, उनके लिए ऐसा आदेश दिया गया, खुद पूरा सभा चौंक गई थी,
भवर सिंह- इस आदेश पैर अभी अमल किया जाये,
तुरंत दो सैनिक आगे आये उन्होंने निहारिका के कपडे उतरने के लिए हाथ बढ़ाये तभी देव ने उन पैर हुम्ला कर दिया,
एक सैनिक ने देव के सर में तलवार की मुठ मर दी जिससे वो जमीन में गिर गया और बेहोश हो गया, वो कल की लड़ाई से इतना घायल हो चुक्का था की उसके अंदर कोई जान hi नहीं बची थी, उसके जख्मो का कोई उपचार भी नहीं किया गया था, जब उसे होश आया तो वो महल के बहार पड़ा हुआ था, उसकी आँख खुली उसने चारो तरफ देखा तो बहुत से लोग खड़े थे, देव खड़ा हुआ तो उसे अहसास हुआ की वो नंगा ह, और जब उसने बराबर में देखा तो निहारिका भी नंगी कड़ी थी, निहारिका की आँखे बंद थी और उनसे आंसू बहे जा रहे थे,
देव ने नारिका को देखा वो जोर से चिलाय- हमे जान से मर दो, लेकिन ऐसा मत करो,
लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था, सैनिक उन्हें खींच क्र लेका चल दिए, पूरी परजा कड़ी हुई देख रही थी, कुछ औरतो ने अपने मुँह धक् लिए लेकिन मर्द बड़े चाव से निहारिका को देख रहे the,is संसार की सबसे खूसूरत औरत का चेरा देखना भी इन लोगो के लिए सपना जैसा था आज उन्हें वो औरत पूरी नंगी देखने को मिल रही थी, लोग उसे देख रहे थे और आहे भर रहे थे, निहारिका आँखे बंद किये सर झुका क्र चले जार hi थी, वही देव की आँखों में खून उतर रहा था, लोग उन दोनों पैर टमाटर गोबर न जाने क्या क्या फेंक रहे थे,
इधर प्रताप सिंह तुरंत महल से निकल चुक्का था और अपने सैनिको को आदेश दिया की जब भवर सिंह के सैनिक देवदूत और निहारिका को राजय से बहार चोदे तो निहारिका को तुरंत उठवा लेना और देवदूत को मार देना,
इधर देव और निहारिका के साथ ये सब हो रहा था और भौमिक जी अपने धयान में लगे थे, उन्हें पता hi नहीं चला कब रात हो गई कब सबेरा हो गया, इतना लम्बा धयान लगन ेके बाद उन्हें कुछ झल्कियादिखने लगी और जो झलकियां उन्हें दिख रही उन्हें भौमिक जी फिर घबरा गए और उनकी आँखे खुल गई, उन्ह ीक पहाड़ी दिख रही थी, और एक चीता दिख रहा था जो देव पैर हुम्ला करने वाला था, और एक झरना और गिरते हुए……….. भौमिक जी तुरंत आँख खोल क्र बैठ गए और जल्दी से महल की तरफ दौड़ पड़े,
इधर रीवा महल के छज्जे पैर कड़ी अपनी माँ और भाई की हालत देख रही थी, वो प्रताप सिंह से शादी रुकने की ख़ुशी मनाये या जो हुआ उसका दुःख मनाये,
देव और निहारिका को पुरे राजय के सामने नंगे यात्रा निकल क्र उन्हें राजय से बहार एक पहाड़ी पैर ले गए,
एक सैनिक- यार कसम से महाराज हमे सौंप देते तो सभी सैनिक इस औरत के साथ मजे करता, ऐसा बदन मैंने आज तक नहीं देखा,
दूसरा सैनिक- मजे तो हम अब भी कर लेते लेकिन महाराज के खास लोग भी आ रहे हैं पीछे,
फेल सैनिक- अरे जब ताका एते हैं तब तक मजे क्र ले,
तभी वह एक चीता की दहाड़ने की आवाज आई, सभी ने ुधा रदेखा तो एक गाड़ी पैर पिंजरे में चीता को लाया जार है था,
उस गाड़ी से उतरा एक सैनिक- इन दोनों को मार क्र इस चेतता को खिला दो, कोई गवाह या सबूत नाब अचे, ये महारज का आदेश ह,
सैनिको ने तुरंत तलवार निकली और देव और नाकि के पेट में उतर दी, न जाने कितनी तलवारे उनके शरीर में गुसा दी थी, फिर सभी पीछे हैट गए और चीता का पिंजरा खोल दिया, चीता चलता हुआ देव और निहारिका के नजदीक आया,
निहारिका लगभग मर hi चुकी थी, उसके शरीर से बहुत खून भी चुक्का था, देव की हालत भी खराब थी वो बस जैसे तैसे निहारिका को पकडे हुए खड़ा था, जैसे hi चीता उनकी तरफ आया, देव ने एक तलवार उठाई और चीता के पेट में घुसा दी, लेकिन चीता उन पैर कूद गया, जिससे वो तीनो एक साथ पहाड़ी से गिर गए और भेटे हुए झरने में जा गिरे,
सैनिको ने महल पहुंच क्र भवर सिंह की उनके मरने की खबर दे दी, लेकिन इस सब को प्रताप सिंह के सैनिक भी देख रहे थे, क्योकि वो निहारिका को पकड़ने के लिए उनके पीछे लगे हुए थे, उन्होंने प्रताप सिंह को ये खबर दी तो प्रताप सिंह गुस्से में पागल सा हो गया,
राजय सभा में बहवर सिंह राजगुरु के साथ साथ भवर सिंह क ापुरा परिवार बैठा हुआ था, राजय में आये हुए सभी महेमान जा चुके थे, आज सभा में किसी को आने की आज्ञा नहीं थी, लेकिन तभी सैनिको को धकेलते हुए भौमिक जी सभा में आ गए,
भौमिक जी को वह सीख क्र राजगुरु भी चकित रह गए,
राजगुरु- भौमिक मेरे बही तुम यहाँ
भौमिक- मत कहो मुझे आप भाई, आज आप मेरी नजरो से गिर गए हो, आप सबने साजिश करके उन लड़के को मरवा दिया, इस परिवार का और इस समाज का सबसे मासूम इंसान था वो, जिस लड़की के साथ दुराचार का अपराध आप सबने लगवाया ह वो लड़की खुद देव के पास आई थी उसे अपने प्रेम के जाल में फसाया और खुद उसके साथ सम्भोग किया, जब मैंने रोक तो उस लड़की ने मेरा भी विरोध किया, देव कैसे उसके साथ दुराचार कर सकता ह, ये सब तुम लोगो की साजिश ह और मुझे उम्मीद ह तुम सबने मिल्क रही महारनी निहारिका को भी ऐसे hi फसाया ह, तुम सबके अंदर का दर तुमसे ये करवा रहा ह, लेकिन तुम सबने गलत किया ह, लेकिन तुम कुछ भी कर लो जो होना ह वो होकर hi राजा, वो आएगा जरूर आएगा, उसे आना हो होगा, चाहे ये धरती फैट जाये या आसमान टूट पड़े, उसे आना hi होगा, मैं लेकर आऊंगा उसे, और जब वो आएगा तो विध्वंश होगा, पूरी धरती कैंप उठेगी, अपराधियों को सजा मिलेगी और ऐसा विनाश होगा ये पूरा राजय ठहराएगा, उस औरत का अपमान पूरी प्रकर्ति लेगी तुम सबसे,
इतना बोल क्र भौमिक जो तेज कदमो से वह से निकल गए, पूरा परिवार भोचक्का सा खड़ा रह गया, किसी के मुँह से कोई शब्द नहीं निकला था, कुछ लोगो के चेरे पैर चिंता थी तो कुछ इस बात से अचंभित थे की निहारिका और देव को साजिश करके महल से निकला गया ह, रीवा अक्षरा अमिता और सोमिया इस बात से परइ तरह चौंक गई थी,
भौमिक जी अपने घर जाने की जगह वह चले गए जहा देव और निहारिका को लेकर गए थे, वो जगह भौमिक जी ने अपने धयान में देखि थी, वो उस पहाड़ी पैर खड़े हो गए, झरना इतना घेरा था की कोई पहाड़ भी उसमे गिरे तो ढूंढ़ने से न मिले, भौमिक जी अपने घुटनो पैर बैठ गए, उनकी आँखों में आंसू थे, आज उन्हें अपने जीवन में सब धुंधला दिख रहा था, कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था, बस 15 दिन साथ रहने से hi देव से उनका रिश्ता ितं अमजबुत हो गया था,
भौमिक जी जोर से चिलए devvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvv.





















