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- Dec 5, 2013
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चल मैं अच्छी तरह से जानती हूं ऐसा ही है मुझे बनने की कोशिश मत कर और वैसे भी मुझसे डरने की भी कोशिश मत कर मैं कहीं तुझे खा जाने वाली नहीं हूं,,, चल अब जल्दी से अपना पजामा उतार,,,,
नहीं नहीं मालकिन,,,,
क्यों क्या हुआ पजामा उतारने में तु इतना घबरा क्यों रहा है,,,,
मुझे शर्म आती है मैं भला तुम्हारे सामने कैसे अपना पजामा उतार सकता हूं,,,
वाह बेटा एक मर्द होकर शर्माता है लेकिन मैं तो तेरे सामने बिल्कुल भी शर्म नहीं कि तेरे सामने अपनी एक कपड़े उतार कर नंगी हो गई हो और तू है अपना पजामा उतारने में शर्मा रहा है,,, चल जल्दी कर मुझे भी देखना है तेरा हथियार तूने तो मेरा सब कुछ देख लिया आखिर मेरा भी हक बनता है तेरा देखने के लिए,,,,।
मुझसे नहीं होगा मालकिन,,,(सूरज शरमाते हुए बोला लेकिन ईस बीच अभी भी उसकी उंगली मुखिया की बीवी की बुर में अंदर बाहर हो रही थी,,,)
अच्छा तो उसे अपना पजामा उतार नहीं जा रहा है लेकिन अपनी उंगली को मेरी बुर में बराबर अंदर बाहर कर रहा है यह तुझसे अच्छे से हो रहा है मैं भी अच्छी तरह से जानती हूं तुझे भी मजा आ रहा है बस नाटक मत कर जल्दी से पजामा उतार,,,(बुर में उंगली वाली बात सुनकर सूरज एकदम से अपनी उंगली को बाहर निकाल लिया और मुखिया की बीवी की तरफ देखने लगा मुखिया की बीवी आपके सारे से उसे अपना पजामा उतारने के लिए कहने लगी,,,, सूरज के लिए यह जहां एक तरफ शर्मिंदगी वाली बात थी वहीं दूसरी तरफ किस्मत वाली भी बात थी क्योंकि मुखिया की बीवी उसका लंड देखना चाहती थी,,, सूरज को भी लग रहा था कि आज उसकी किस्मत चमकने वाली है इसलिए ज्यादा ना नुकुर करते हुए मुखिया की बीवी की बात मान लिया,,, और मुखिया की बीवी के ऊपर ही सवार बैठा हुआ था धीरे से घुटनों के बाद होकर खड़ा हो गया उसके दोनों घुटने मुखिया की बीवी की मोटी मोटी जांघों के ईर्द गिर्द टिकी हुई थी,,,, उसके इस तरह से उठते ही उसका अच्छा खासा तंबू एकदम से उभर कर सामने आ गया जिस पर नजर पढ़ते ही मुखिया की बीवी की बुर उत्तेजना के मारे फूलने पिचकने लगी,,,, मुखिया की बीवी तो देखते ही रह गई,,, उसे रहा नहीं गया और वहां खुद अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर सूरज के पजामे को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसे नीचे की तरफ खींचने लगी,,,, सूरज का दिल जोरे से धड़क रहा था,,,, वह कुछ कर नहीं रहा था बल्कि मुखिया की बीवी की हरकत को देख रहा था,,, मुखिया की बीवी पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी,,, वह सूरज के पजामे को नीचे की तरफ खींच रही थी लेकिन सूरज का मोटा तगड़ा लंड लोहे के रोड की तरह एकदम से खड़ा था जिसकी वजह से सूरज का पायजामा खुटे में अड सा गया था,,,।
अनुभव से भरी हुई मुखिया की बीवी समझ गई की सूरज का लंड कुछ ज्यादा ही लंबा है इसलिए वह धीरे से थोड़ा सा उठ गई और फिर उसके पजामी को आगे की तरफ खींचकर लंड की किनारी से हटाकर पजामे को उतारने लगी,,,
पजामा सूरज के घुटनों में लाकर वह अपनी आंखों के सामने की अद्भुत नजारे को देखते रह गई उसकी आंखें आश्चर्य से चोडी हो गई,,वह कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि किसी मर्द का लंड इतना मोटा और लंबा हो सकता है,,, गहरी सांस लेते हुए वह सूरज के लंड को देखती रह गई और उठती बैठती सांसों के साथ-साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह लहरा रही थी,,,, और सूरज मुखिया की बीवी की तरफ प्यासी नजरों से देख रहा था पहली बार हुआ किसी औरत के सामने नंगा हो रहा था पहली बार कोई औरत उसकी लंड को देख रही थी,,,, कुछ देर तक तो मुखिया की बीवी कुछ बोल नहीं पाई और फिर धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए उसे हल्के से सूरज के लंड पर रखते हुए बोली,,,।
हाय दैया इतना मोटा और लंबा और इतना गरम,,, बाप रे बाप,,,,
(मुखिया की बीवी के आश्चर्य को देखकर उसे हैरान होता हुआ देखकर सूरज बोला,,,)
क्या हुआ मालकिन इतनी हैरान क्यों है,,,,?
(सूरज को इस बात का आभास भी नहीं था कि उसका लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था कुदरत ने उसे कुछ ज्यादा ही मरदाना ताकत दिया था,,,)
अरे पगले हैरान ना होऊ तो क्या करु,,,
क्यों ऐसा क्या हो गया,,,
अरे यह पूछ क्या नहीं हुआ सच-सच बताना कौन से तेल से मालिश करता है तु अपने लंड की,,,
मालीश,,,, नहीं नहीं मालकिन बिल्कुल भी नहीं मैं इस पर मालिश नहीं करता,,,,
तो यह इतना मोटा और लंबा क्यों है,,,(सूरज के लंड को अपनी हथेली में दबाते हुए बोली और उसकी ईस हरकत से सूरज के मुंह से हल्किसी सिशिकारी फूट पड़ी,,,,,)
मुझे क्या मालूम मालकिन,,,(सूरज एकदम मदहोश होता हुआ बोला,,, वाकई में मुखिया की बीवी हैरान थी जिंदगी में उसने बहुत मर्दों के साथ हम बिस्तर हुई थी कई मर्दों के लंड को अपनी बुर मिली थी उनकी मोटी और लंबाई उसे अच्छी तरह से पहचानती थी समझती थी और जानती थी इसलिए तो वह सूरज के लंड की लंबाई और मोटी उसके आकार को देखकर पूरी तरह से हैरान थी क्योंकि इतना मोटा लंबा उसने आज तक नहीं देखी थी इसलिए तो सूरज के लंड को देखकर उसकी बुर पानी छोड़ रही थी,,,)
सच में तू कमाल का है,,,,(मुखिया की बीवी मदहोश हो चुकी थी वह अपना आपा खो चुकी थी आधी रात के समय गांव से दूर आम के बगीचे में झोपड़ी के अंदर लालटेन की रोशनी में एक जवान लड़के के सानिध्य में वह पूरी तरह से अपना आपा खो चुकी थी खास करके उसके लंड के दर्शन करके,,,, और इतना कहने के साथ ही सूरज को समझ पाता है इससे पहले ही वह अपने प्यासे होठों को धीरे से सूरज के लंड के करीब ले गई और फिर उसपर अपने होंठ रखकर चुंबन कर दी,,,, सूरज एकदम से खबर आ गया एकदम से चौंक गया एक खूबसूरत औरत के लाल-लाल होठों का स्पर्श अपने लैंड पर महसूस करते ही उसके बदन में सनसनी सी दौड़ गई और वह घबराकर अपने कमर को पीछे की तरफ ले लिया लेकिन अगले ही पल मुखिया की बीवी कुर्ती दिखाते हुए अपने दोनों हाथों को उसके नितंबों पर ले गई और उसे अपनी तरफ खींचकर बैठे-बैठे ही उसके लंड के सुपाड़े को अपने लाल लाल होठों के बीच भर ली,,,, सूरज हैरान आश्चर्य से भर चुका था क्योंकि उसका मोटा तगड़ा लंड उसका सुपाड़ा जो कि आलू बुखारा की तरह गोल-गोल और बड़ा था वह एक खूबसूरत औरत के लाल लाल होठों के बीच था,,, वह कभी सपने भी नहीं सोच सकता था कि औरत ईस तरह की भी हरकत कर सकती है,,,
लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रहा था क्योंकि जिस तरह की हरकत मुखिया की बीवी ने की थी उसे हरकत के बारे में सोचकर उसे महसूस करके सूरज की बोलती बंद हो गई थी वह कुछ बोल पाता इससे पहले ही मुखिया की बीवी पूरी तरह से उसे अपने काबू में ले ली थी और धीरे-धीरे करके उसके आधे लंड को अपने मुंह में भर ली थी और उसे रसमलाई की तरह चूस रही थी चाट रही थी,,,, रह रहकर सूरज की सांस अटक जा रही थी सूरज मदहोश हो चुका था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह आसमान की सैर कर रहा हो,,, वह मुखिया की बीवी को इस तरह की हरकत करने से रोकना चाहता था लेकिन रोक भी नहीं पा रहा था क्योंकि उसे भी मजा आ रहा था पहली बार में ही बस स्वर्ग का सुख भोग रहा था एक औरत से किस तरह का सुख मिलता है आज उसे एहसास हो रहा था,,,,,।
देखते ही देखते मुखिया की बीवी मदहोश और उत्तेजना में अपने गले तक सुरज के लंड को उतार ली थी ईसके बावजूद भी डेढ़ इंच जितना लंड मुंह के बाहर ही रह जा रहा था,,, इसलिए तो वह और ज्यादा हैरान थी वह अपने मन में यही सोच रही थी कि जब उसकी बुर में घुसेगा तब क्या धमाल मचाएगा यही सोचकर उसकी बुर पानी छोड़ रही थी ,,,। और सूरज की तो हालात पूरी तरह से खराब हो चुकी थी ना चाहते हुए भी मदहोशी में उसकी आंखें बंद हो चुकी थी और अपने आप ही उसकी कमर आगे पीछे करके हिलना शुरू कर दी थी,,,, उत्तेजना और मदहोशी में दोनों का बदन पसीने से तरबतर हो चुका था खिड़की से आ रही शीतल हवा भी दोनों की जवानी की गर्मी को शीतलता प्रदान करने में नाकामयाब साबित हो रही थी,,,।
मुखिया की बीवी के मुंह से,,गुं,,गुं ,, की आवाज लगातार आ रही थी उसे जब सांस लेने में दिक्कत होने लगी तो वह धीरे से अपने मुंह में से सूरज के लंड को बाहर निकाल दे और गहरी गहरी सांस लेने लगी उसका मुंह लंड के निकल जाने के बावजूद भी गोल छल्ले की तरह बना हुआ था जिसमें से लार टपक रहा था और सूरज का लंड भी मुखिया की बीवी के लार और थूक से पूरी तरह से सना हुआ था,,,। सूरज भी गहरी गहरी सांस ले रहा था और मुखिया की बीवी की तरफ देख रहा था मुखिया की बीवी सूरज की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली,,,।
कैसा लगा सूरज,,,?
बड़ा अजीब सा लग रहा था मालकिन मेरी तो सांस ही ऊपर नीचे हो गई,,,,(हांफते हुए सूरज बोला,,)
यह खेल ही ऐसा है इसमें सांस ऊपर नीचे हो ही जाती है,,, कि तेरा लंड सच में बहुत मोटा और लंबा है मैं आज तक ऐसा लंड नहीं देखी किसी की भी बुर में जाएगा तो बुर फाड़ देगा,,,,।
(मुखिया की बीवी के मुंह से अपनी मर्दानगी की ताकत की तारीफ को सुनकर सूरज गदगद हुआ जा रहा था लेकिन उसके द्वारा लंड चूसने वाली बात उसे कुछ समझ में नहीं आ रही थी क्योंकि काम क्रीड़ा के बारे में सूरज को कोई भी ज्ञान नहीं था और उसे नहीं मालूम था कि औरत मर्द को और मर्द औरत को किस-किस तरह से खुश करता है,,, इसलिए वह बोला,,,)
मालकिन लेकिन मुझे समझ में नहीं आया तुम इतने गंदे अंग को अपने मुंह में लेकर क्यों चूस रही थी,,,।
अरे बुद्धू यह गंदा अंग नहीं है बल्कि है तो हम औरतों के लिए कुदरत का उसे हिसाब खजाना है,,,, दौलत सूरत मिले ना मिले समय समय पर औरत को यह मिलना चाहिए और तेरे पास तो औरत को अपना गुलाम बनाने का हथियार है,,,, मैं सच कह रही हुं तू अपने लंड से जिस किसी की भी चुदाई करेगा वह जिंदगी भर तेरी गुलाम बनकर रह जाएगी,,,।
यह क्या कह रही हो मालकिन,,,,
मैं सच कह रही हूं रे अपने अनुभव से बता रही हूं,,,, हर औरत की जरूरत का सामान तेरे पास है,,,, और तेरी जरूरत का सामान,,,,(इतना कहने के साथ है अपने दोनों हाथों को सूरज के चेहरे की तरफ ले गई और सूरज के चेहरे को दोनों हाथों में भरकर उसे अपनी छातियों की तरफ खींचने लगी और जैसे ही उसके होंठ,,,उसकी चुचियों के करीब आए वह तुरंत उसके होंठों को अपनी चूची के छुहारे पर सटाते हुए) मेरे पास है,,,,,(सूरज तो एकदम मदहोश हो गया,,, कुछ देर पहले वह अपने दोनों हाथों में लेकर उसकी चूचियों को मालिश करते हुए दबा रहा था मसल रहा था लेकिन यह एहसास बिल्कुल नया था उसके होठ मुखिया की बीवी के खरबूजे जैसी चूचियों से सटे हुए थे,,,, और वह इस तरह से गहरी गहरी सांस ले रहा था नरम नरम चुची का एहसास उसे दीवाना बना रहा था,,,, लेकिन सूरज ज्यों का त्यो था,,, इसलिए मुखिया की बीवी मदहोश होते हुए बोली,,,)
सूरज मेरे राजा बच्चों की तरह मेरी चूची मुंह में लेकर पी,,, जोर-जोर से दबा दबा के पी मेरे राजा,,,,,आहहहहह,,,,,(मुखिया की बीवी पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रही थी
नहीं नहीं मालकिन,,,,
क्यों क्या हुआ पजामा उतारने में तु इतना घबरा क्यों रहा है,,,,
मुझे शर्म आती है मैं भला तुम्हारे सामने कैसे अपना पजामा उतार सकता हूं,,,
वाह बेटा एक मर्द होकर शर्माता है लेकिन मैं तो तेरे सामने बिल्कुल भी शर्म नहीं कि तेरे सामने अपनी एक कपड़े उतार कर नंगी हो गई हो और तू है अपना पजामा उतारने में शर्मा रहा है,,, चल जल्दी कर मुझे भी देखना है तेरा हथियार तूने तो मेरा सब कुछ देख लिया आखिर मेरा भी हक बनता है तेरा देखने के लिए,,,,।
मुझसे नहीं होगा मालकिन,,,(सूरज शरमाते हुए बोला लेकिन ईस बीच अभी भी उसकी उंगली मुखिया की बीवी की बुर में अंदर बाहर हो रही थी,,,)
अच्छा तो उसे अपना पजामा उतार नहीं जा रहा है लेकिन अपनी उंगली को मेरी बुर में बराबर अंदर बाहर कर रहा है यह तुझसे अच्छे से हो रहा है मैं भी अच्छी तरह से जानती हूं तुझे भी मजा आ रहा है बस नाटक मत कर जल्दी से पजामा उतार,,,(बुर में उंगली वाली बात सुनकर सूरज एकदम से अपनी उंगली को बाहर निकाल लिया और मुखिया की बीवी की तरफ देखने लगा मुखिया की बीवी आपके सारे से उसे अपना पजामा उतारने के लिए कहने लगी,,,, सूरज के लिए यह जहां एक तरफ शर्मिंदगी वाली बात थी वहीं दूसरी तरफ किस्मत वाली भी बात थी क्योंकि मुखिया की बीवी उसका लंड देखना चाहती थी,,, सूरज को भी लग रहा था कि आज उसकी किस्मत चमकने वाली है इसलिए ज्यादा ना नुकुर करते हुए मुखिया की बीवी की बात मान लिया,,, और मुखिया की बीवी के ऊपर ही सवार बैठा हुआ था धीरे से घुटनों के बाद होकर खड़ा हो गया उसके दोनों घुटने मुखिया की बीवी की मोटी मोटी जांघों के ईर्द गिर्द टिकी हुई थी,,,, उसके इस तरह से उठते ही उसका अच्छा खासा तंबू एकदम से उभर कर सामने आ गया जिस पर नजर पढ़ते ही मुखिया की बीवी की बुर उत्तेजना के मारे फूलने पिचकने लगी,,,, मुखिया की बीवी तो देखते ही रह गई,,, उसे रहा नहीं गया और वहां खुद अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर सूरज के पजामे को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसे नीचे की तरफ खींचने लगी,,,, सूरज का दिल जोरे से धड़क रहा था,,,, वह कुछ कर नहीं रहा था बल्कि मुखिया की बीवी की हरकत को देख रहा था,,, मुखिया की बीवी पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी,,, वह सूरज के पजामे को नीचे की तरफ खींच रही थी लेकिन सूरज का मोटा तगड़ा लंड लोहे के रोड की तरह एकदम से खड़ा था जिसकी वजह से सूरज का पायजामा खुटे में अड सा गया था,,,।
अनुभव से भरी हुई मुखिया की बीवी समझ गई की सूरज का लंड कुछ ज्यादा ही लंबा है इसलिए वह धीरे से थोड़ा सा उठ गई और फिर उसके पजामी को आगे की तरफ खींचकर लंड की किनारी से हटाकर पजामे को उतारने लगी,,,
पजामा सूरज के घुटनों में लाकर वह अपनी आंखों के सामने की अद्भुत नजारे को देखते रह गई उसकी आंखें आश्चर्य से चोडी हो गई,,वह कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि किसी मर्द का लंड इतना मोटा और लंबा हो सकता है,,, गहरी सांस लेते हुए वह सूरज के लंड को देखती रह गई और उठती बैठती सांसों के साथ-साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह लहरा रही थी,,,, और सूरज मुखिया की बीवी की तरफ प्यासी नजरों से देख रहा था पहली बार हुआ किसी औरत के सामने नंगा हो रहा था पहली बार कोई औरत उसकी लंड को देख रही थी,,,, कुछ देर तक तो मुखिया की बीवी कुछ बोल नहीं पाई और फिर धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए उसे हल्के से सूरज के लंड पर रखते हुए बोली,,,।
हाय दैया इतना मोटा और लंबा और इतना गरम,,, बाप रे बाप,,,,
(मुखिया की बीवी के आश्चर्य को देखकर उसे हैरान होता हुआ देखकर सूरज बोला,,,)
क्या हुआ मालकिन इतनी हैरान क्यों है,,,,?
(सूरज को इस बात का आभास भी नहीं था कि उसका लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था कुदरत ने उसे कुछ ज्यादा ही मरदाना ताकत दिया था,,,)
अरे पगले हैरान ना होऊ तो क्या करु,,,
क्यों ऐसा क्या हो गया,,,
अरे यह पूछ क्या नहीं हुआ सच-सच बताना कौन से तेल से मालिश करता है तु अपने लंड की,,,
मालीश,,,, नहीं नहीं मालकिन बिल्कुल भी नहीं मैं इस पर मालिश नहीं करता,,,,
तो यह इतना मोटा और लंबा क्यों है,,,(सूरज के लंड को अपनी हथेली में दबाते हुए बोली और उसकी ईस हरकत से सूरज के मुंह से हल्किसी सिशिकारी फूट पड़ी,,,,,)
मुझे क्या मालूम मालकिन,,,(सूरज एकदम मदहोश होता हुआ बोला,,, वाकई में मुखिया की बीवी हैरान थी जिंदगी में उसने बहुत मर्दों के साथ हम बिस्तर हुई थी कई मर्दों के लंड को अपनी बुर मिली थी उनकी मोटी और लंबाई उसे अच्छी तरह से पहचानती थी समझती थी और जानती थी इसलिए तो वह सूरज के लंड की लंबाई और मोटी उसके आकार को देखकर पूरी तरह से हैरान थी क्योंकि इतना मोटा लंबा उसने आज तक नहीं देखी थी इसलिए तो सूरज के लंड को देखकर उसकी बुर पानी छोड़ रही थी,,,)
सच में तू कमाल का है,,,,(मुखिया की बीवी मदहोश हो चुकी थी वह अपना आपा खो चुकी थी आधी रात के समय गांव से दूर आम के बगीचे में झोपड़ी के अंदर लालटेन की रोशनी में एक जवान लड़के के सानिध्य में वह पूरी तरह से अपना आपा खो चुकी थी खास करके उसके लंड के दर्शन करके,,,, और इतना कहने के साथ ही सूरज को समझ पाता है इससे पहले ही वह अपने प्यासे होठों को धीरे से सूरज के लंड के करीब ले गई और फिर उसपर अपने होंठ रखकर चुंबन कर दी,,,, सूरज एकदम से खबर आ गया एकदम से चौंक गया एक खूबसूरत औरत के लाल-लाल होठों का स्पर्श अपने लैंड पर महसूस करते ही उसके बदन में सनसनी सी दौड़ गई और वह घबराकर अपने कमर को पीछे की तरफ ले लिया लेकिन अगले ही पल मुखिया की बीवी कुर्ती दिखाते हुए अपने दोनों हाथों को उसके नितंबों पर ले गई और उसे अपनी तरफ खींचकर बैठे-बैठे ही उसके लंड के सुपाड़े को अपने लाल लाल होठों के बीच भर ली,,,, सूरज हैरान आश्चर्य से भर चुका था क्योंकि उसका मोटा तगड़ा लंड उसका सुपाड़ा जो कि आलू बुखारा की तरह गोल-गोल और बड़ा था वह एक खूबसूरत औरत के लाल लाल होठों के बीच था,,, वह कभी सपने भी नहीं सोच सकता था कि औरत ईस तरह की भी हरकत कर सकती है,,,
लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रहा था क्योंकि जिस तरह की हरकत मुखिया की बीवी ने की थी उसे हरकत के बारे में सोचकर उसे महसूस करके सूरज की बोलती बंद हो गई थी वह कुछ बोल पाता इससे पहले ही मुखिया की बीवी पूरी तरह से उसे अपने काबू में ले ली थी और धीरे-धीरे करके उसके आधे लंड को अपने मुंह में भर ली थी और उसे रसमलाई की तरह चूस रही थी चाट रही थी,,,, रह रहकर सूरज की सांस अटक जा रही थी सूरज मदहोश हो चुका था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह आसमान की सैर कर रहा हो,,, वह मुखिया की बीवी को इस तरह की हरकत करने से रोकना चाहता था लेकिन रोक भी नहीं पा रहा था क्योंकि उसे भी मजा आ रहा था पहली बार में ही बस स्वर्ग का सुख भोग रहा था एक औरत से किस तरह का सुख मिलता है आज उसे एहसास हो रहा था,,,,,।
देखते ही देखते मुखिया की बीवी मदहोश और उत्तेजना में अपने गले तक सुरज के लंड को उतार ली थी ईसके बावजूद भी डेढ़ इंच जितना लंड मुंह के बाहर ही रह जा रहा था,,, इसलिए तो वह और ज्यादा हैरान थी वह अपने मन में यही सोच रही थी कि जब उसकी बुर में घुसेगा तब क्या धमाल मचाएगा यही सोचकर उसकी बुर पानी छोड़ रही थी ,,,। और सूरज की तो हालात पूरी तरह से खराब हो चुकी थी ना चाहते हुए भी मदहोशी में उसकी आंखें बंद हो चुकी थी और अपने आप ही उसकी कमर आगे पीछे करके हिलना शुरू कर दी थी,,,, उत्तेजना और मदहोशी में दोनों का बदन पसीने से तरबतर हो चुका था खिड़की से आ रही शीतल हवा भी दोनों की जवानी की गर्मी को शीतलता प्रदान करने में नाकामयाब साबित हो रही थी,,,।
मुखिया की बीवी के मुंह से,,गुं,,गुं ,, की आवाज लगातार आ रही थी उसे जब सांस लेने में दिक्कत होने लगी तो वह धीरे से अपने मुंह में से सूरज के लंड को बाहर निकाल दे और गहरी गहरी सांस लेने लगी उसका मुंह लंड के निकल जाने के बावजूद भी गोल छल्ले की तरह बना हुआ था जिसमें से लार टपक रहा था और सूरज का लंड भी मुखिया की बीवी के लार और थूक से पूरी तरह से सना हुआ था,,,। सूरज भी गहरी गहरी सांस ले रहा था और मुखिया की बीवी की तरफ देख रहा था मुखिया की बीवी सूरज की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली,,,।
कैसा लगा सूरज,,,?
बड़ा अजीब सा लग रहा था मालकिन मेरी तो सांस ही ऊपर नीचे हो गई,,,,(हांफते हुए सूरज बोला,,)
यह खेल ही ऐसा है इसमें सांस ऊपर नीचे हो ही जाती है,,, कि तेरा लंड सच में बहुत मोटा और लंबा है मैं आज तक ऐसा लंड नहीं देखी किसी की भी बुर में जाएगा तो बुर फाड़ देगा,,,,।
(मुखिया की बीवी के मुंह से अपनी मर्दानगी की ताकत की तारीफ को सुनकर सूरज गदगद हुआ जा रहा था लेकिन उसके द्वारा लंड चूसने वाली बात उसे कुछ समझ में नहीं आ रही थी क्योंकि काम क्रीड़ा के बारे में सूरज को कोई भी ज्ञान नहीं था और उसे नहीं मालूम था कि औरत मर्द को और मर्द औरत को किस-किस तरह से खुश करता है,,, इसलिए वह बोला,,,)
मालकिन लेकिन मुझे समझ में नहीं आया तुम इतने गंदे अंग को अपने मुंह में लेकर क्यों चूस रही थी,,,।
अरे बुद्धू यह गंदा अंग नहीं है बल्कि है तो हम औरतों के लिए कुदरत का उसे हिसाब खजाना है,,,, दौलत सूरत मिले ना मिले समय समय पर औरत को यह मिलना चाहिए और तेरे पास तो औरत को अपना गुलाम बनाने का हथियार है,,,, मैं सच कह रही हुं तू अपने लंड से जिस किसी की भी चुदाई करेगा वह जिंदगी भर तेरी गुलाम बनकर रह जाएगी,,,।
यह क्या कह रही हो मालकिन,,,,
मैं सच कह रही हूं रे अपने अनुभव से बता रही हूं,,,, हर औरत की जरूरत का सामान तेरे पास है,,,, और तेरी जरूरत का सामान,,,,(इतना कहने के साथ है अपने दोनों हाथों को सूरज के चेहरे की तरफ ले गई और सूरज के चेहरे को दोनों हाथों में भरकर उसे अपनी छातियों की तरफ खींचने लगी और जैसे ही उसके होंठ,,,उसकी चुचियों के करीब आए वह तुरंत उसके होंठों को अपनी चूची के छुहारे पर सटाते हुए) मेरे पास है,,,,,(सूरज तो एकदम मदहोश हो गया,,, कुछ देर पहले वह अपने दोनों हाथों में लेकर उसकी चूचियों को मालिश करते हुए दबा रहा था मसल रहा था लेकिन यह एहसास बिल्कुल नया था उसके होठ मुखिया की बीवी के खरबूजे जैसी चूचियों से सटे हुए थे,,,, और वह इस तरह से गहरी गहरी सांस ले रहा था नरम नरम चुची का एहसास उसे दीवाना बना रहा था,,,, लेकिन सूरज ज्यों का त्यो था,,, इसलिए मुखिया की बीवी मदहोश होते हुए बोली,,,)
सूरज मेरे राजा बच्चों की तरह मेरी चूची मुंह में लेकर पी,,, जोर-जोर से दबा दबा के पी मेरे राजा,,,,,आहहहहह,,,,,(मुखिया की बीवी पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रही थी