Incest पहाडी आम (इन्सेस्ट) - Page 5 - SexBaba
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Incest पहाडी आम (इन्सेस्ट)

सूरज के मोटे तगड़े लंड पर मुखिया की बीवी की नजर पढ़ते ही उसकी बुर उत्तेजना के मारे फुलने पीचकने लगी,,,, उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था उसे लग रहा था कि वह कोई सपना देख रही है कितना मोटा और लंबा लंड भी हो सकता है इसका उसे अंदाजा ही नहीं था,,, क्योंकि जवानी से लेकर उम्र के ईस पड़ाव तक बन जाने कितने लैंड को अपनी बुर में ले चुकी थी लेकिन आज तक उसकी आंखों के सामने उसकी बुर के अंदर इतना मोटा और तगड़ा लंड कभी भी प्रवेश नहीं कर पाया था,,, या यूं कह लो कि आज तक जितने भी मर्द उससे मिले थे उनका लंड ऐसा था ही नहीं तभी तो मुखिया की बीवी एकदम आश्चर्य चकित हो गई थी उसकी आंखों में उसे पाने की चमक साफ नजर आ रही थी सूरज को भी इस बात का एहसास हो गया था की मुखिया की बीवी उसके लंड को देख रही थी और यह एहसास होते ही सूरज के तन-बड़े में आग लगने लगी यह पहली मर्तबा था जब कोई औरत उसके लंड की तरफ देख रही थी,,,, सूरज शर्म से मरा जा रहा था लेकिन उसे अपने बदन मेंअत्यधिक उतेजना का अनुभव हो रहा था उसके हाथ में अभी भी उसका लंड था जिसमें से पेशाब की धार फूट रही थी वह मुखिया की बीवी को यह नहीं बोल पाया कि वह अपनी नजर को दुसरी तरफ कर ले क्योंकि ना जाने क्यों उसके मन में भी ऐसा हो रहा था की मुखिया की बीवी उसके लंड की तरफ देखते ही रहे,,, यही तो जवानी का नशा था यही तो इस उम्र की चाहत थी और इसी में सूरज मदहोशी के चरम शिखर पर विराजमान होता जा रहा था,,,,।

पेशाब करने के बाद जैसे ही सूरज ने लंड में से पेशाब की बूंद को झटकने के लिए अपने लंड को ऊपर नीचे करके दो-चार बार झटका और उसके इस तरह से झटकते हुए लंड को देखकर मुखिया की बीवी की उत्तेजना उसके बस में बिल्कुल भी नहीं रही और उसकी बुर से मदन रस की बुंद टपक कर नीचे जमीन पर गिर गई,,,, और फिर बिना कुछ बोले सूरज अपने लंड को वापस पजामे में डाल दिया लेकिन उसमें तंबू बना हुआ था,,,,।

हो गया मालकिन,,,,

हां अब ठीक है ,,ले लालटेन पकड़,,,, अब हमें चलना चाहिए,,,,, देख वह रही झोपड़ी बड़े से पेड़ के नीचे,,,, मैं आम के बगीचे की रखवाली के लिए ही है झोपड़ी बनवा कर रखी हूं,,,,,।

(हालांकि घना अंधेरा होने की वजह से वह झोपड़ी ठीक से सूरज को दिखाई नहीं दे रही थी लेकिन वह लालटेन पकड़कर आगे आगे चलने लगा,,,, और देखते ही देखते दोनों उस झोपड़ी के पास आ गए कुछ झोपड़ी के पास एक हेड पंप भी बना हुआ था,,, और हेड पंप को देखकर सूरज बोला,,,)

यह तो अच्छा की हो मालकिन की यहां पर हेड पंप गडवा कर रखी हो वरना अगर पानी प्यास लग जाए तो इंसान तो अपनी बिगर ही मर जाएगा,,,,।

इसीलिए तो हेड पंप लगवाई हूं,,,,,(इतना कहते हुए दोनों झोपड़ी के एकदम पास पहुंच गए एक हाथ में कुल्हाड़ी लिए हुए,,, मुखिया की बीवी लकड़ी के बने दरवाजे को खोलने लगी और लकड़ी का दरवाजा खोलते ही सूरज के हाथ में से लालटेन को ले ली और खुद पहले झोपड़ी में प्रवेश कर गई और उसके पीछे सूरज,,,,)

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रात पूरी तरह से गहरा चुकी थी चारों तरफ अंधेरा अंधेरा नजर आ रहा था,,, आपके बड़े-बड़े पेड़ होने की वजह से यह अंधेरा कुछ ज्यादा ही डरावना लग रहा था लेकिन इस समय ना तो मुखिया की बीवी के मन में किसी प्रकार का डर था और ना ही सूरज के मन में क्योंकि दोनों को एक दूसरे का साथ अच्छा लग रहा था और मुखिया की बीवी तो अपने मां के इरादों को पूरा करने के लिए सूरज को साथ में लेकर आई थी,,,, और जिस तरह का नजारा उसने कुछ देर पहले सूरज को दिखाई थी उसे देखने के बाद तो सूरज चारों खाने चित हो गया था वह पूरी तरह से मुखिया की बीवी की जवानी का गुलाम हो चुका था,,, इतने करीब से,,,, जिंदगी में पहली मर्तबा हुआ किसी औरत को पेशाब करते हुए देख रहा था जिसकी नंगी चिकनी गांड उसके इरादों को फिसलने पर मजबूर कर रही थी पहली बार वह औरत की बुर में से निकल रही सिटी की आवाज को एकदम साफ-साफ सुना था जिसे सुनने के बाद दुनिया का हर मधुर संगीत उसके लिए फीका नजर आ रहा था,,,,, वैसे तो सूरज इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि औरत से पेशाब करती है तो उनके बुर से सिटी की आवाज निकलती है लेकिन यह उसके लिए पहली बार था जब वह उस आवाज को सुना था,,, इसीलिए तो अभी भी उसके पजामे में उसका लंड तना हुआ था,,,।

मुखिया की बीवी के लिए खाई औरत थी इसीलिए जबरदस्ती उसे वहीं पर पेशाब करवाने के बहाने उसके लंड के दर्शन कर ली थी और आंखों ही आंखों में उसकी लंबाई और मोटी को नाप चुकी थी और मन ही मन प्रसन्न हो रही थी क्योंकि वह जानती थी कि जिस तरह का हथियार सूरज के पास है उसकी जवानी का रस पूरी तरह से निचोड़ देगा,,,,, सूरज के मुसल को वह अपनी ओखली में लेने के लिए तड़प रही थी,,,। दोनों छोटी सी घास फूस की झोपड़ी के पास पहुंच चुके थे,,,, लकड़ी के दरवाजे को खोलकर सबसे पहले मुखिया की बीवी उसे झोपड़ी में प्रवेश की ओर पीछे-पीछे सूरज,,,, सूरज का दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह पहली बार रात के एकांत में किसी खूबसूरत जवान औरत के साथ रात गुजारने वाला था उसे नहीं मालूम था कि आज की रात उसके साथ क्या होने वाला है,,, लेकिन मुखिया की बीवी की हरकत को देखकर इतना तो वह समझ ही गया था कि मजा बहुत आने वाला है,,,,,,।

थोड़ी ही देर में पुरी झोपड़ी में लालटेन के पीली रोशनी फैल गई झोपड़ी के अंदर सब कुछ साफ-साफ नजर आने लगा,,,, झोपड़ी के अंदर एक टेबल रखा हुआ था जिस पर गिलास और थाली रखी हुई थी पास में चारपाई बिछी हुई थी लेकिन बिस्तर मोड कर रखा गया था क्योंकि जब झोपड़ी के अंदर रुकना होता था तभी बिस्तर को चारपाई पर बिछाया जाता था,,,,, सूरज झोपड़ी के अंदर खड़ा होकर पुरी झोपड़ी में नजर घुमा कर देख रहा था घास फूस की झोपड़ी में भी छोटी सी खिड़की बनी हुई थी जिसमें से ठंडी हवा अंदर आती थी ताकि गर्मी ना लगे और इस समय भी ठंडी हवा खिड़की से झोपड़ी के अंदर बड़े आराम से आ रही थी और बदन में ठंडक का एहसास दिला रही थी,,,,। मुखिया की बीवी भी मुस्कुरा कर कभी सूरज की तरफ तो कभी अपनी झोपड़ी की तरफ देख रही थी ईस झोपड़ी में उसके जीवन के बहुत ही रंगीन रातें बीती थी यह वही चारपाई थी जिस पर उसने अपनी जवानी लुटाई थी,,, और आज अपनी ही चारपाई पर वहां सूरज का बिस्तर गर्म करने के इरादे से उसे लेकर आई थी,,,,।

अरे सूरज दरवाजा तो बंद कर दे नहीं तो जंगली जानवर अंदर घुस जाएंगे,,,,।

जी मालकिन,,,(इतना कहने के साथ ही वह दरवाजे की तरफ बढ़ गया,,, दरवाजे पर खड़े होकर वहां बाहर की तरफ नजर घुमाई तो बाहर का अंधेरा देखकर उसे थोड़ी बहुत घबराहट महसूस हो रही थी क्योंकि चारों तरफ उसे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था बस केवल चारों ओर से झींगुर की आवाज आ रही थी जिससे वातावरण और भी भयानक नजर आ रहा था,,, वह तो उसके साथ मुखिया की बीवी थी जिसकी जवानी के दर्शन वह कर चुका था और इसी लालच में हो उसके साथ इस आम के बगीचे की रखवाली करने के लिए इतनी रात को आया था वह जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया छोटी सी झोपड़ी को भी मुखिया की बीवी ने बहुत अच्छे तरीके से बनवा कर एक छोटा सा घर की तरह उसे सकल दे दी थी और इस झोपड़ी में रात रुकने लायक सभी साधन मौजूद थे,,,, दरवाजा बंद करने के बाद जैसे ही हो मुखिया की बीवी की तरफ घुमा मुखिया की बीवी उसे फिर से बोली,,,,।

लालटेन को टेबल पर रख दे,,,, ताकि पूरे झोपड़ी में रोशनी बनी रहे,,,, तुझे रोशनी में नींद तो आती है ना,,,

की मालकिन कोई दिक्कत नहीं होती,,,,,(सूरज सो रहा था की मुखिया की बीवी सहज रूप से यह सवाल पूछ रही थी,,, लेकिन हकीकत यही था कि वह लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ साफ-साफ देखना चाहती थी वरना उसे भी रोशनी में नींद नहीं आती थी,,,,)

ठीक है मुझे भी रोशनी पसंद है,,,

अब तुम्हारी कमर का दर्द कैसा है,,,(लालटेन को टेबल पर रखते हुए सूरज बोला)

कैसा क्या है इसका इलाज ही कहां हुआ है जो आराम मिल जाएगा,,,, हाय दइया बहुत दर्द कर रही है,,,(मुखिया की बीवी को जैसे एकदम से याद आ गया हो कि उसकी कमर में तो दर्द हो रहा था और तुरंत अपनी कमर पर हाथ रखते हुए बोली,,,)

लगता है मालिस से ही इसका दर्द ठीक होगा,,,,

मुझे भी ऐसा ही लग रहा है,,,,

लेकिन मालकिन यहां तेल मिलेगा कहां,,,(सूरज थोड़ा निराश होते हुए बोला)

अरे बुद्धू सब कुछ मिल जाएगा वह टेबल पर जो संदूक रखी है ना उसके अंदर देख सरसों के तेल की सीसी रखी होगी,,, मुखिया की बीवी के कहते हैं सूरज टेबल पर रखे हुए संदूक को खोलकर अंदर देखा तो अंदर वाकई में सरसों के तेल की शीशी दिया सलाई और थोड़ी बहुत काम के साधन पड़े हुए थे सरसों के तेल की शीशी को देखकर सूरज मन ही मन प्रसन्न होने लगा क्योंकि वह जानता था की मालिश के बहाने वह आज औरत के अंगों को स्पर्श कर पाएगा,,, वह जल्दी से सब दुख में से सरसों के तेल की शीशी को निकाल लिया और संदूक को बंद कर दिया,,,, मुखिया की बीवी सूरज की तरफ देख रही थी सूरज के चेहरे पर उत्सुकता और प्रसन्नता के भाव साफ नजर आ रहे थे और मुखिया की बीवी सूरज को देखकर प्रसन्न हो रही थी उसके अरमान मचल रहे थे क्योंकि वह अच्छी तरह से जानते थे कि बस थोड़ी देर की बात है उसके बाद तो सूरज उसकी पूरी तरह से गुलाम हो जाएगा और वह जो कहेगी वही करेगा ,,,,, क्योंकि मुखिया की बीवी को पूरा अनुभव था कि मर्द किस तरीके से औरत के काबू में आते हैं पहली मर्तबा तो वह सूरज को नहाने के बहाने अपनी खूबसूरत अंग के दर्शन करा कर उसे ऐसा मोह जाल में फंसा ही थी कि आज वह खुद आम के घने बगीचे में रात रुकने के लिए तैयार हो गया था,,,

सूरज तू मालिश कर तो लेगा ना,,,,,,,(मुखिया की बीवी जानबूझकर आश्चर्य से सूरज की तरफ देखते हुए बोली,,,, लेकिन औरतों से हमेशा कन्नी काटने वाला सूरज कुछ भी दिनों में औरतों के बेहद करीब रहने का शौकीन बन चुका था इसलिए पूरे आत्मविश्वास के साथ वह बोला,,,,)

जी मालकिन चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है ऐसी मालिश करूंगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी,,,,(हाथ में सीसी लिए हुए वह हल्की मुस्कान अपने चेहरे पर लाते हुए बोला,,,,,,, सूरज को मुस्कुराता हुआ देखकर मुखिया की बीवी के मन में भी संतुष्टि हो रही थी वह भी मुस्कुरा कर सूरज की तरफ अच्छी और हल्के से लंगड़ा कर चलने का बहाना करते हुए वहां बिस्तर के करीब जाने लगी और बोली,,,)

रुक पहले में बिस्तर लगा लूं,,,,,(इतना कहने के साथ ही वह चारपाई पर रखे हुए बिस्तर को खोलने लगी बिस्तर लगाने से सूरज मुखिया की बीवी को इनकार करना चाहता था लेकिन जिस तरह से वह बिस्तर लगाने के लिए झुकी हुई थी उसकी भारी भरकम गांड एकदम उभर कर सामने नजर आ रही थी साड़ी में कई होने के बावजूद भी उसकी रूपरेखा लालटेन की पीली रोशनी में एकदम साफ नजर आ रही थी सूरज तो एकदम मतवाला हो चुका था उसका मन कर रहा था कि पीछे से जाकर मुखिया की बीवी को पकड़ ले और उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर अपना लंड रगड़ रगड़ कर अपने तन की गर्मी को शांत करें,,, सूरज ठीक उसके पीछे खड़ा होकर मुखिया की बीवी को देख रहा था वह झुक कर बिस्तर लगा रही थी उसके इस तरह से झुकने में भी बड़ा आनंद था सूरज नजर भरकर उसके पिछवाड़े को देख रहा था,,,, की तभी उसे याद आया की झोपड़ी में तो एक ही कर पाई है वह कहां सोएगा क्योंकि यह तो निश्चित ही था कि मुखिया की बीवी चारपाई पर ही लेटने वाली है लेकिन उसके लेटने की कोई व्यवस्था नहीं थी और ना ही कोई चादर थी जिसे वह जमीन पर बिछाकर सो सके या चटाई पर आराम कर सके,,, इसलिए अपने मन में उमड़ रहे इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए वह मुखिया की बीवी से बोला,,,)

मालकिन यहां तो सिर्फ एक ही कर पाई है और कोई चटाई भी नहीं है मैं कहां सोऊंगा,,,,।

(उसके इस मासूमियत भरे सवाल पर मुखिया की बीवी मन ही मन प्रसन्न होने लगी और उसकी प्रसन्नता के भाव उसके होठों पर आ गए और मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

अरे बुद्धू एक ही चारपाई का मतलब है कि हम दोनों इसी पर सोएंगे तुझे कोई दिक्कत है क्या मेरे साथ सोने में,,,,।

(मुखिया की बीवी के मुंह से इतना सुनते ही सूरज के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी उसके मन की तरंगे उछाल मारने लगी,,,,,, वह एकदम से मदहोश हो गया और मुखिया की बीवी की तरफ आश्चर्य से देखने लगा,,, क्योंकि एक औरत के मुंह से इस तरह के जवाब कि उसे उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी वह सच में पड़ गया था कि यह खूबसूरत जवान औरत एक जवान लड़के के साथ एक ही चारपाई पर कैसे सो सकती है लेकिन यहां पर वही हो रहा था जिसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं किया था,,,, मुखिया की बीवी भी सूरज के चेहरे पर उठ रहे भाव को देख रही थी और समझ रही थी और मन ही मन प्रसन्न हो रही थी वह समझ गई थी कि एक ही चारपाई पर सोने के नाम पर सूरज की हालत खराब हो गई थी और वह‌ चोर नजरों से उसके पजामे की तरफ भी देखी तो उसके होश उड़ गए,,, उसके पजामे में अच्छा खासा तंबू बना हुआ था और उसके तंबू की शक्ल देखकर,,,, उसकी बुर पानी छोड़ने लगी और वह अपने मन में ही अपने आप से ही बोली,,,, बाप रे ये तो तेरी बुर का भोसड़ा बना देगा,,,,। सूरज के चेहरे पर अभी भी आश्चर्य के भाव साफ नजर आ रहे थे उसके मन में यही चल रहा था कि वह एक खूबसूरत जवान औरत के साथ एक ही बिस्तर पर कैसे सोएगा यह सोचकर वह हैरान भी था और उसे उत्सुकता भी हो रही थी क्योंकि वह इस अनुभव को पूरी तरह से जी लेना चाहता था,,,।

जो हाल इस समय सूरज का था वही हाल मुखिया की बीवी का भी था,,, ऐसा नहीं था कि यह मुखिया की बीवी के लिए पहली बार था जिंदगी में न जाने वह कितनी बार अनजान जवान मर्दों के सामने अपने कपड़ों को उतार कर नंगी हो चुकी थी और उनके साथ जवानी का मजा लूट चुकी थी लेकिन फिर भी सूरज के सामने न जाने क्यों उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह पहली बार यह सब करने जा रही थी और सूरज के लिए तो यह सब बिल्कुल नया सा था एक नई दुनिया नया सुख नहीं अनुभूति इसलिए उसके मन में उत्सुकता बहुत ज्यादा थी,,,,।

मुखिया की बीवी बिस्तर लगा चुकी थी सिरहाने दो तकिया भी था दो तकिया को देखकर सूरज मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रहा था क्योंकि जिंदगी में पहली बार वह खूबसूरत औरत के पास सोने जा रहा था और वह भी एक ही चारपाई पर,,, सूरज के हाथ में सरसों के तेल की सीसी थी सीसी की तरफ देखते हुए मुखिया की बीवी बोली,,,,।

तू तैयार है ना मालिश करने के लिए,,,,।

जी मालकिन,, ,,

(सूरज के इतना कहते ही मुखिया की बीवी मुस्कुराते हुए,,,, अपनी साड़ी का पल्लू कंधे पर से पकड़ कर नीचे गिरा दी और उसकी छातिया एकदम से उजागर हो गई ब्लाउज में कैद उसकी दोनों चूचियां जाल में फंसे हुए कबूतर की तरह पंख फड़फड़ा रहे थे सूरज तो मुखिया की बीवी का यह रूप देखता ही रह गया उसकी भरी फूली छाती देखकर उसके होश उड़ गए,,।)

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मुखिया की बीवी धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए सूरज को अपनी जवानी के जाल में पूरी तरह से फंसा रही थी,,, घनघोर रात में मुखिया की बीवी सूरज को लेकर अपने आम वाले बगीचे पर बगीचे की रखवाली करने के बहाने पहुंच चुकी थी और उसे झोपड़ी में मालिश के बहाने अपने वस्त्र उतारना शुरू कर दी थी मुखिया की बीवी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि दुनिया का कोई मर्द औरत के उत्तेजक बदन को देखकर मुंह नहीं मोडता,,, बल्कि खूबसूरत औरत के मादक रूप को देखकर वह उसका गुलाम बन जाता है और यही सूरज के साथ भी हो रहा था धीरे-धीरे सूरज मुखिया की बीवी के हर एक बात को मानते हुए आज उसके बेहद करीब पहुंच गया था,,,, सूरज को यह नहीं मालूम था कि आज की रात क्या होने वाला है लेकिन इतना जरुर जानता था कि मजा बहुत आने वाला है जिसकी शुरुआत हो चुकी थी,,।

मुखिया की बीवी अपने साड़ी के पल्लू को अपने कंधे पर से पकड़ कर नीचे गिरा दी थी जिसकी वजह से उसकी भारी भरकम चूचियां ब्लाउज में कैद एकदम से उजागर हो गई थी,, जिसे देखते ही सूरज की आंखें फटी की फटी रह गई थी सूरज की आंखों के सामने मुखिया की बीवी की खरबूजे जैसी चूचियां कबूतर की तरह उसके ब्लाउज की कैद में फड़फड़ा रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी चूचियां खुद ब्लाउज फाड़कर बाहर आने को उतारू हो चुकी है,,,, सूरज की तो सांसे ऊपर नीचे होने लगी क्योंकि मुखिया की बीवी की चूची हो कि बीच की पतली तरह एकदम साफ नजर आ रही थी और बहुत ही ऊपर और गहरी लकीर छोड़ रही थी,,,। सूरज आंख फाड़े मुखिया की बीवी की छातियो की तरफ देख रहा था और यह देखकर मुखिया की बीवी मन ही मन प्रसन्न हो रही थी जवानी की पहली सीढ़ी सफलतापूर्वक मुखिया की बीवी ने सूरज को पार करा दी थी,,,, मुखिया की बीवी अच्छी तरह से जानती थी कि जब सूरज का यह हाल सिर्फ ब्लाउज के ऊपर से देखने से है अगर वह ब्लाउज उतार कर अपनी नंगी चूचियां दिखाई की तब सूरज का क्या हाल होगा यह सोचकर वह मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,, ।

रुक जरा मैं साड़ी उतार दूं तब तू आराम से मालिश कर सकेगा नहीं तो मालिश करने में भी दिक्कत आएगी,,,,,(साड़ी को अपनी कमर से खोलते हुए मुखिया की बीवी बोली और उसकी यह बात सुनकर सूरज कुछ बोल नहीं पाया बस वह हैरान होकर मुखिया की बीवी की तरफ देखता रह गया और मुखिया की बीवी उसकी आंखों के सामने ही अपने वस्त्र को उतार रही थी अपनी साड़ी को अपने कमर से खोलकर उसे धीरे-धीरे अपनी कमर से अलग कर रही थी यह देखकर तो सूरज का तंबू एकदम बंबू बन चुका था,,, वह पसीने से तरबतर होने लगा था,,,.।,,, सूरज के सामने अपने वस्त्र उतारने में मुखिया की बीवी के भी तन बदन में हलचल हो रही थी खास करके जब-जब उसकी नजर सूरज के तंबू की तरफ जाती तब तब उसकी दोनों टांगों की पतली दरार में हलचल सी होने लगती थी उसकी बुर कुल बुलाने लगती थी,,, क्योंकि उसकी पारखी नजरे अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज के पजामे में कौन सा हथियार छुपा हुआ है और वैसे भी वह पेशाब करते हुए उसके लंड के दर्शन को कर चुकी थी और जिस तरह के हालात उसकी दोनों टांगों के बीच नजर आ रहे थे उसे देखते हुए वह अंदर ही अंदर थोड़ा घबरा भी रही थी,,,। क्योंकि नजर भर में ही उसने सूरज के लंड की मोटाई और लंबाई को अपनी आंखों से ही नाप ली थी उसके लंड कैसे पानी को देखते ही उसकी आंखों के सामने आलू बुखारा नजर आ रहा था जो कि उसके लंड का सुपाड़ा एकदम आलू बुखारे की तरह था,,, और यही सोचकर वह घबरा रही थी कि सूरज का आलू बुखारा जैसा सुपाड़ा उसकी गुलाबी बुर में कैसे घुसेगा,,, आज तक जितने मर्दों के साथ उसने संबंध बनाई थी यह सवाल उसके मन में कभी नहीं उभरा था लेकिन सूरज के मामले में कुछ अलग ही हलचल उसके मन में हो रही थी और इस हाल-चाल को लेकर वह‌ बेहद उत्सुक भी थी,,,, वह जल्द से जल्द सूरज के संड के मोटे सुपाड़े को अपनी गुलाबी छेद पर महसूस करना चाहती थी वह देखना चाहती थी कि एक जवान मर्द का मोटा तगड़ा लंड जब एक औरत की बुर पर स्पर्श होता है तो औरत को कैसा महसूस होता है हालांकि इस अनुभव से वह कई बार गुजर चुकी थी लेकिन आज नए अनुभव की तलाश उसे थी,,,, जिसके लिए वह धीरे-धीरे करके अपने कमर पर से अपनी साड़ी को खोलकर अपने बदन से अलग कर चुकी थी और उसे नीचे जमीन पर गिरा दी थी सूरज की आंखों के सामने अब वह केवल पेटिकोट और ब्लाउज में थी जो की पीली रोशनी में सबको साफ नजर आ रहा था सूरज हक्का-बक्का होकर मुखिया की बीवी की मदहोश कर देने वाली जवानी को अपनी आंखों को देख रहा था या यूं कह लो की मुखिया की बीवी की मदहोश जवानी का रस वह अपनी आंखों से पी रहा था,,,।

एक तरह से सूरज इस खेल में पूरी तरह से अनाड़ी ही था क्योंकि अगर उसकी जगह कोई और अनुभव से भरा हुआ जवान मर्द होता तो मुखिया की बीवी को अपने हाथों से अपने वस्त्र उतारने की जरूरत ही नहीं पड़ती वह खुद अपने हाथों से अब तक तो मुखिया की बीवी के वस्त्र को उतार कर उसे संपूर्णता नग्न कर चुका होता,,, लेकिन इसमें सूरज का भी कोई दोस्त नहीं था उसमें अनुभव की कमी थी वह इस खेल में पूरी तरह से नया था इस खेल के नियम के बारे में उसे बिल्कुल भी ज्ञान नहीं था वह नहीं जानता था कि औरत रूपी किताबों के पन्नों को किस तरह से खोला जाता है किस तरह से उसके अंगों के शब्दों को पढ़ा जाता है वह तो नादान की तरह बस आंखें फाड़े देखे जा रहा था और इतने से ही उसे अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव हो रहा था उसकी उत्तेजना इतनी चरम पर थी कि उसे लग रहा था कि उसका लंड फट जाएगा और उसे इस बात का डर था कि कहीं उसका लंड पजामा फाड़ कर बाहर न जाए,,,।

मुखिया की बीवी साड़ी को उतारकर जमीन पर फेंकने के बाद सूरज की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए चारपाई पर बैठ गई उसके पैर नीचे जमीन पर थे और वह सूरज की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी सूरज के होठों से एक भी शब्द फुट नहीं रहे थे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह कोई मूर्ति बन गया हो वह मुस्कुराते हुए बोली,,,।

देख सूरज,,, आज मजबूरी वश किसी जवान लड़के के सामने अपने कपड़े उतार रही हूं तुझ पर भरोसा करके लेकिन इस बात की खबर अपने मालिक को बिल्कुल भी नहीं होने देना नहीं तो मेरी सामत आ जाएगी और साथ में तेरी भी,,, मैं क्या कह रही हूं समझ रहा है ना,,,, इस बात को राज ही रखना है कि आज की रात झोपड़ी में क्या हो रहा है,,,।

बिल्कुल मालकिन मैं इस बात को किसी से नहीं कहूंगा मैं अच्छी तरह से जानता हूं एक औरत की इज्जत क्या होती है और वैसे भी कोई औरत अनजान मर्द के सामने इस तरह से कपड़े नहीं उतरती वह तो तुम्हारी मजबूरी है मैं सब समझता हूं आज की रात जो कुछ भी हो रहा है वह राज ही रहेगा तुम निशचिंत रहो,,,,

(सूरज का जवाब सुनकर मुखिया की बीवी मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

तू बहुत समझदार है इसीलिए तो तुझ पर भरोसा कर रही हूं,,,, अब अच्छे से मालिश करना ताकि मेरा दर्द एकदम से दूर हो जाए,,,।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो नमकीन ऐसी मालिश करूंगा कि तुम खुश हो जाओगी,,,।

ठीक है,,,(इतना कहकर मुस्कुराते हुए मुखिया की बीवी चारपाई पर पेट के बल लेट गई और पेट के बल लेटने से जो नजर सूरज की आंखों के सामने नजर आ रहा था उसे देखकर सूरज के तन बदन में आग लगने लगी उसके होश उड़ाने लगे और मदहोशी उसके नसों में घुलने लगी,,,, पेट के बल लेटने की वजह से,,, मुखिया की बीवी की भारी भरकम गांड और भी ज्यादा उभरी हुई नजर आने लगी क्योंकि उसने साड़ी उतारती थी और पेटिकोट का पतला कपड़ा उसके कसे हुए नितंबों से एकदम चिपक सा गया था,,ं और उसकी गांड की रूपरेखा एकदम साफ तौर पर नजर आ रही थी जिसे देखकर सूरज के तन बदन में आग लग रही थी उसके पीठ की नीचे कमर के इर्द-गिर्द जो हल्का सा दोनों तरफ गड्ढा पड़ा हुआ था उसे देखकर तो सूरज की जवानी मुखिया की बीवी की जवानी के आगे घुटने टेक रही थी सूरज मदहोश होकर मुखिया की बीवी के खूबसूरत बदन की रूपरेखा को देख रहा था और मुखिया की बीवी नजर को तिरछी करके सूरज की तरफ देखकर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी क्योंकि वह इतना तो समझ ही गई थी कि ,, सूरज उसकी गांड देखकर ही मंत्र मुग्ध हुआ जा रहा है,,,, सूरज को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और कुछ देर तक इसी तरह से खड़े होकर केवल मुखिया की बीवी की जवानी को रह गया वह तो यह भी भूल गया था की मदहोशी के आलम में उत्तेजित अवस्था में उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा था और पजामे में तंबू बनाया हुआ था,,,,।

अरे खड़ा होकर देखता ही रहेगा या मालिश भी करेगा,,,(मुखिया की बीवी की आवाज से सूरज की तंद्रा भंग हुई और एकदम से हड़बड़ा गयाऔर बोला,,,)

जजजज,,,,जी मालकिन मै शीशी का ढक्कन खोल रहा था,,,,(और इतना कहने के साथ ही वहां जल्दी-जल्दी सीसी का ढक्कन खोलने लगा सीसी का ढक्कन खुलते ही वह,, हाथ में सरसों के तेल की सीसी लिए हुए ठीक उसके बगल में चारपाई के पाटी पर बैठ गया,,,,,, इससे पहले उसने कभी भी किसी औरत की मालिश नहीं किया था हां अपने पिताजी की मालिश जरूर किया था जब उनकी कमर दुखती थी लेकिन एक औरत के अंगों की मालिश करने की लालच को वह रोक नहीं पाया था इसलिए हामी भर दिया था लेकिन फिर भी अनुभव न होने के बावजूद भी अपने पिताजी की पीठ और कमर की मालिश का अनुभव उसे जरूर था,,,।

दोनों तरफ से उत्सुकता बढ़ती जा रही थी मुखिया की बीवी जल्द से जल्द सूरज के हाथों को अपनी चिकनी नंगी पीठ पर महसूस करना चाहती थी उसका बस चलता है तो इसी समय अपने सारे वस्त्र उतार कर नंगी होकर सूरज से मालिश करवाती ,,,लेकिन धीरे-धीरे आगे बढ़ने में उसे भी मजा आ रहा था,,,

सूरज चारपाई की पाटी पर बैठा हुआ था,,, उसकी नज़रें मुखिया की बीवी के गोलाकार उभरे हुए नितंबों और उसकी चिकनी कमर पर ही टिकी हुई थी,,,। सूरज सरसों के तेल की सीसी में से तेल की धार को अपनी हथेली में गिराने लगा और फिर उसे सीसी को चारपाई के नीचे रख कर धीरे से अपनी हथेली को मुखिया की बीवी की कमर पर रख दिया और जैसे ही सूरज ने अपनी हथेली को मुखिया की बीवी की चिकनी कमर पर रखा मुखिया की बीवी एकदम से मदहोश हो गई उसके चेहरे के भाव एकदम से बदल गए ऐसा लग रहा था कि जैसे पहली बार यह सब हो रहा है और सूरज भी एक खूबसूरत जवान औरत की चिकनी कमर पर अपनी हथेली रखते ही उसके नरम नरम चिकनी कमर का एहसास हथेली पर होते ही मदहोश होने लगा,,,,, और धीरे-धीरे वह अपनी हथेली को मुखिया की बीवी की कमर पर घुमाना शुरू कर दिया,,,, सूरज का यह पहला मौका था जब वह किसी जवान खूबसूरत औरत की कमर की मालिश कर रहा था और पल भर में ही वह आनंद के परम सागर में गोते लगाने लगा उसे बहुत अच्छा लग रहा था उसकी नज़रें लगातार उसके नितंबों पर टिकी हुई थी वह मनी मनी यही चाह रहा था की मुखिया की बीवी अपनी पेटीकोट भी उतार देती तो उसकी नंगी गांड़ की मालिश करने में और ज्यादा मजा आता,, कुछ ही देर में सूरज की दोनों हथेलियां सरसों के तेल की चिकनाहट और मुखिया की बीवी की चिकनी कमर की चिकनाहट पाकर फिसलने लगी,,,, देखते ही देखते सूरज पेटिकोट के किनारे और ऊपर ब्लाउज के किनारे के बीचों बीच चिकनी पीठ पर तेल की मालिश करना शुरू कर दिया था और उसकी चिकनी पीठ सरसों के तेल की वजह से लालटेन की पीली रोशनी में एकदम चमक रही थी,,,, मुखिया की बीवी को सुखद अनुभव हो रहा था,,,ं एक तरफ उसे मालिश की वजह से आराम की अनुभूति हो रही थी वहीं दूसरी तरफ सूरज की हथेली से मदहोशी का एहसास भी हो रहा था जिसके चलते उसकी बुर से नमकीन रस टपक रहा था,,,। कुछ देर मालिश करने के बाद मालिश करते हुए सूरज बोला,,,

अब कैसा लग रहा है मालकिन,,,

बहुत मजा आ रहा है सूरज मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि तू मालिश करने में इतना माहिर है इतना तो औरतें भी अच्छी तरह से मालिश नहीं कर पाती तुझे मालूम है गांव में एक औरत है जिसे मालिश करने के लिए मैं बुलाती हूं वह अक्सर महीने में एक दो बार मेरी मालिश कर देती है लेकिन जितना अच्छा तू कर रहा है उतना वह नहीं कर पाती,,,,।

यह तो तुम्हारा बड़प्पन है मालकिन वरना में मालिश करने में माहिर तो नहीं हूं लेकिन अच्छी खासी कर लेता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही सरसों के तेल की चिकनाहट पाकर सूरज की उंगली एकदम से मुखिया की बीवी के ब्लाउज के किनारी में हल्के से प्रवेश कर गई,,,, और इसका एहसास मुखिया की बीवी को होते ही वह एकदम से मदहोश हो गई उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे जानबूझकर सूरज ने अपनी उंगली को उसके ब्लाउज में घुसाने की कोशिश किया हो,,, वह अंदर ही अंदर प्रसन्न होने लगी लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था तेल की चिकनाहट पाकर सूरज की उंगली अपने आप फिसल कर ब्लाउज में सरक गई थी,,,, लेकिन अनजाने में हुए इस हरकत से सूरज को भी बहुत अच्छा महसूस हो रहा था और उसकी हरकत पर मुखिया की बीवी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया होता ना देखकर सूरज की हिम्मत बढ़ने लगी थी और वह मालिश करते हुए अपनी उंगली को रह रहा कर मुखिया की बीवी के ब्लाउज में प्रवेश करा दे रहा था,, , सूरज की हरकत पर मुखिया की बीवी का दिल जोरो से धड़क रहा था उम्मीद की किरण उसे नजर आ रही थी उसे लग रहा था कि आगे का काम सूरज को बताना नहीं पड़ेगा वह खुद ही कर लेगा लेकिन कुछ देर तक सूरज की तरफ से इसी तरह की हरकत होती रही लेकिन इससे आगे वह बढ़ नहीं पा रहा था,,, इसलिए मुखिया की बीवी को लगने लगा कि उसे ही कुछ करना होगा वरना रात यूं ही मालिश में ही गुजर जाएगी,,,।

रात पूरी तरह से गहरा चुकी थी,,, एक अजीब सा सन्नाटा पूरे वातावरण में घुला हुआ था,,, रह रहकर कुत्तों के भौंकने की आवाज आती थी और झींगुर के शोर से वातावरण थोड़ा और भी ज्यादा डरावना हो जाता था लेकिन इन सब के बावजूद भी घनघोर रात में आम के बगीचे में बस्ती से दूर मुखिया की बीवी और सूरज एक दूसरे के संगत में आनंद प्रमोद में डूबे हुए थे इसलिए बाहर के वातावरण से उन दोनों को कुछ भी लेना-देना नहीं था,,,, मुखिया की बीवी जानती थी कि अब दूसरे वस्त्र को उतारने का समय आ गया है,,,, इसलिए वह बोली,.।

सूरज थोड़ा ऊपर भी दर्द कर रहा है,,,, ऊपर भी थोड़ी मालिश कर देता तो आराम मिल जाता,,,।

(इतना सुनकर सूरज के हाथ वहीं के वहीं रुक गए वह कुछ पल खामोश रहने के बाद बोला,,)

लेकिन मालकिन ब्लाउज में,,,,, मालिश कैसे होगी,,,

(सूरज थोड़ा रुक रुक कर बोला वैसे भी एक औरत के सामने ब्लाउज शब्द बोलते हुए उसके लंड की अकड़ बढ़ गई थी और उसके मुंह से इतना सुनकर मुखिया की बीवी मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और वह बोली).

अरे हां मैं जानती हूं इस तरह से मालिश नहीं हो पाएगी इसके लिए मुझे ब्लाउज को उतारना होगा,,,।

(मुखिया की बीवी के मुंह से इतना सुनते ही ,,, सूरज का दिमाग एकदम सन्न हो गया,,, पहली बार हो किसी औरत के मुंह से अपने ब्लाउस उतारने की बात को सुन रहा था,,, इसलिए उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी ,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह सच में मुखिया की बीवी के मुंह से ब्लाउज उतारने वाली बात सुना था या उसके कान बज रहे थे इसलिए अपने मन की तसल्ली के लिए वह बोला,,,)

क्या सच में उतारना पड़ेगा मालकिन,, !

हां रे सच में उतारना पड़ेगा क्या बिना उतारे मालिश कर पाएगा तु ,

नहीं ऐसे तो बिल्कुल भी मालिश नहीं हो पाएगी,,,

हां तो इसीलिए तो कह रही हूं कि ब्लाउज उतारना पड़ेगा,,, तेरे हाथों में तो जादू है,,,, रुक मैं अपना ब्लाउज उतार देती हूं,,,,,,,(इतना कहने के साथ ही मुखिया की बीवी धीरे से चारपाई पर उठकर बैठ गई उसका मुंह दूसरी तरफ था वह जानबूझकर सूरज की तरफ पी५ किए हुए बैठी थी क्योंकि वह सूरज के तन-बदन में और ज्यादा आग लगाना चाहती थी,,,, सूरज ठीक उसके पीछे चारपाई की पाटी पर बैठा हुआ था,,, और मुखिया की बीवी की हर क्रियाकलाप को देख रहा था,, ,। वह मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रहा था क्योंकि धीरे-धीरे मुखिया की बीवी अपने बदन पर से एक-एक वस्त्र उतरती जा रही थी साड़ी के बाद अब उसके ब्लाउज की बारी थी और ब्लाउज के उतरते ही सूरज जैसा जवान लड़का इतना तो जानता ही था कि ब्लाउज के अंदर औरतें अपने कौन से अंग को छुपा कर रखती हैं और ब्लाउज के उतरते ही उसका खूबसूरत अंग उजागर होने वाला था जिसे देखने के लिए सूरज का मन ललाईत हुआ जा रहा था,,, और दूसरी तरफ मुखिया की बीवी के भी तन-बदन में आग लग रहा था वह जानती थी कि सूरज के सामने वह धीरे-धीरे करके अपने सारे वस्त्र उतार कर एकदम नंगी हो जाएगी और एक खूबसूरत जवान औरत को आधी रात के वक्त कोई भी मर्द है संपूर्ण रूप से नंगी देखने के बाद अपने आप पर काबू नहीं कर पाएगा और यही सोचकर मुखिया की बीवी के तन बदन में भी हलचल मची हुई थी वैसे तो वह न जाने कितनी मर्दों के सामने अपने वस्त्र उतार कर नंगी हो चुकी थी लेकिन आज सूरज के सामने अपनी वस्तु उतारने में उसे कुछ ज्यादा ही मजा और आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,,।
 
रात का सन्नाटा झींगुर के आवाज और कुत्तों के भोगने की आवाज से थोड़ा बहुत भंग हो रहा था लेकिन इन सब की परवाह ना तो मुखिया की बीवी को था और ना ही सूरज को और ना ही दोनों की आंखों में थकान और नींद नजर आ रही थी दोनों की आंखों से नींद कोसों दूर जा चुकी थी आज की रात दोनों जाग कर ही बिताने वाले थे,,,,

मुखिया की बीवी चारपाई पर उठ कर बैठ गई थी उसकी पीठ सूरज की तरफ थी लालटेन की रोशनी पूरे झोपड़ी में अपना प्रकाश फैला रही थी,,,। मुखिया की बीवी अपने दोनों हाथों की नाजुक उंगलियों को हरकत देते हुए अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी और तिरछी नजर से सूरज की तरफ भी देख रही थी कि सूरज कहां देख रहा है और इस बात से उसका मन और ज्यादा प्रसन्न हो गया क्योंकि सूरज उसकी तरफ ही ललचाई आंखों से देख रहा था ,, धीरे-धीरे मुखिया की बीवी अपने ब्लाउज के ऊपर वाले बटन को खोल दी और दूसरे बटन को खोलने शुरू कर दी और दूसरे बटन को खोलते हुए वह सूरज से बोली,,,।

अच्छा सूरज यह बात कभी किसी औरत ने तेरे सामने इस तरह से अपने कपड़े उतारी है,,,(खेली खाई मुखिया की बीवी अपने इस सवाल से सूरज के चरित्र के बारे में जानना चाहती थी वह यह देखना चाहती थी कि सूरज वाकई में एकदम सीधा-साधा लड़का है या वह पहले भी औरतों की संगत में आ चुका है जिसका जवाब इस सवाल से उसे मिल जाने वाला था और मुखिया की बीवी की यह बात सुनकर सूरज बोला,,,)

नननन,,, नहीं मालकिन ऐसा कभी नहीं होगा कभी किसी औरत ने मेरी आंखों के सामने इस तरह से कपड़े नहीं उतारे हैं जैसा कि आप उतार रही हैं,,,,।

(सूरज का जवाब सुनकर मुखिया की बीवी को संतुष्टि हुई और मन ही मन प्रसन्न होने लगी और उसकी बात सुनकर वह अपना दूसरा बटन खोल चुकी थी और तीसरे बटन को खोलते हुए वह बोली,,,,)

देख सूरज तु अच्छा लड़का है,,, मुझे तेरे पर पूरा भरोसा है इसलिए तेरे सामने अपने कपड़े उतार रही हूं लेकिन तू यह बात बाहर किसी से भी मत बताना वरना तू ही मुश्किल में पड़ जाएगा,,,(इतना कहते हुए वह अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल चुकी थी उसके ब्लाउज के दोनों पार्ट एकदम से अलग हो चुके थे और पीछे बैठा सूरज यह सब देख रहा था भले ही उसे मुखिया की बीवी की चूची इस समय नजर ना आती हो लेकिन इस समय उसे पूरा अहसास हो रहा था की मुखिया की बीवी ने अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल चुकी थी और उसकी बात सुनकर वह बोला,,,)

बिल्कुल भी नहीं मालकिन भला मैं क्यों दूसरों को यह सब बताने लगा वैसे भी मैं यहां आम की रखवाली करने आया हूं मेरी मां को यह सब पता चलेगा तो मुझे ही भला बुरा कहेंगी इसलिए तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो यह सब मैं किसी से नहीं कहूंगा,,,,

(इतना सुनते ही मुखिया की बीवी के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर अपने ब्लाउस को दोनों हाथों से उतारने के लिए सूरज से बोली,,,)

अच्छी बात है ले जरा मेरा ब्लाउज पीछे से खींचना तो,,,,(इतना सुनते ही सूरज का दिल जोरो से धड़कने लगा उसकी हालत खराब होने लगी क्योंकि मुखिया की बीवी सीधे-सीधे उससे अपने ब्लाउज को उतरवा रही थी,,,।)

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अच्छी बात है ले जरा मेरा ब्लाउज पीछे से खींचना तो,,,,(इतना सुनते ही सूरज का दिल जोरो से धड़कने लगा उसकी हालत खराब होने लगी क्योंकि मुखिया की बीवी सीधे-सीधे उससे अपने ब्लाउज को उतरवा रही थी,,,

सूरज का दिल जोरो से धड़क रहा था मुखिया की बीवी के इस बात में उसके तन बदन में आग लगना शुरू कर दिया था वह मदहोशी के आलम में अपने कदम को रख चुका था वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कोई खूबसूरत जवान औरत इस तरह से उसे अपने कपड़े उतरवायेगी और वह भी ब्लाउज,,,, सूरज एक सीधा-साधा गांव का नौजवान लड़का था वैसे तो वह सच में ही सीधा-साधा था लेकिन कुछ दिनों से उसके साथ जो कुछ भी हो रहा था उन सभी हादसों के कारण उसके तन बदन में जवानी पूरी तरह से अंगड़ाई लेने लगी थी औरतों का संगत उनके अंगों को झांकना देखना उनके बारे में सोचना यह सब उसे उत्तेजित कर जाता था उसे ही सब का नतीजा था कि मुखिया की बीवी के साथ वह रात में आम की रखवाली करने के लिए आम के बगीचे में आ गया था और यहां आम की रखवाली करने की जगह उसकी नजर दूसरे ही आम पर टिकी हुई थी जिसे वह खुद अपने हाथों से निर्वस्त्र करने जा रहा था,,,, ।।

मुखिया की बीवी अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ करके सूरज को ब्लाउज को पीछे की तरफ खींचने के लिए बोल रही थी लेकिन सूरज पूरी तरह से हैरान था उत्तेजित था मदहोश था इसलिए उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना है वह बस आंख फाड़े चारपाई की पाटी पर बैठकर मुखिया की बीवी की जवानी को देख रहा था,,,,। और सूरज की तरफ से किसी भी प्रकार की हरकत होता हुआ ना देख कर मुखिया की बीवी फिर से बोली,,,।

अरे सूरज क्या कर रहा है उतार तो सही,,,,।

जजजज ,, जी,,,, मालकिन,,,,(मुखिया की बीवी की आवाज सुनते ही जैसे सूरज होश में आया हो इस तरह से हड़बड़ाहट भरे स्वर में बोला और फिर अपने हाथों को मुखिया की बीवी के ब्लाउज की तरफ बढ़ा दिया और अपने दोनों हाथों से मुखिया की बीवी के ब्लाउज को पकड़ लिया और इतनी मात्रा से ही सूरज के बदन में पूरी तरह से मदहोशी भर गई थी वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था क्योंकि वह औरत के बदन पर पहली बार उसके ब्लाउज को छू रहा था उसे पकड़ रहा था और वह भी उतारने के लिए यह एहसास ही सूरज के लिए बहुत खास था,,,। दोनों तरफ से हालत खराब हो रही थी मुखिया की बीवी की भी हालत खराब हो रही थी और सूरज का तो यह सब पहली बार था इसलिए उसकाहालत खराब होना लाजिमी था,,,, मुखिया की बीवी के बताएं अनुसार सूरज मुखिया की बीवी के ब्लाउज को पीछे की तरफ खींचकर उसके बाहों में से उतारने लगा और उसके खींचने की वजह से उसका ब्लाउज उतरना शुरू कर दिया यह एहसास उसके तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी को और ज्यादा भड़का रहा था आखिरकार सूरज भी एक मर्द था और मर्द में एक औरत के प्रति उत्तेजना और आकर्षक होना लाजिमी था और ऐसे हालात में तो सूरज कच्चा खिलाड़ी था वरना कोई और होता तो ब्लाउज के साथ-साथ उसकी पेटिकोट उतार कर उसे नंगी कर दिया होता है,,,,,।

धड़कते दिल के साथ देखते ही देखते सूरज मुखिया की बीवी की बाहों में से उसके ब्लाउज को उतार दिया और उसे अपने हाथ में लिए हुए मुखिया की बीवी की नंगी चिकनी मांसल पीठ को देखने लगा,,,, मुखिया की बीवी की नंगी चिकनी पीठ को देखकर ही सूरज को एहसास हो रहा था कि वह कितनी जवान से भरी हुई थी अपने बदन से ब्लाउज उतरते ही मुखिया की बीवी का भी दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि वह कमर के ऊपर नंगी हो चुकी थी उसकी नंगी चूचियां भले ही सूरज की आंखों के सामने नहीं थी लेकिन फिर भी उसे यकीन था कि सूरज उसकी नंगी चूचियों के बारे में ही सोच रहा होगा और उसका सोचना बिल्कुल सही था क्योंकि सूरज उसके दोनों खरबूजा के बारे में ही सोच रहा था की नंगी चूचियां कैसी दिखती होगी कैसा आकार होगा कठोर होगी कि नरम होंगी,,, यह सब सो कर सूरज परेशान हुआ जा रहा था और मुखिया की बीवी भी उसे इतनी जल्दी अपनी नंगी चूचियों के दर्शन करना नहीं चाहती थी वह धीरे-धीरे सूरज के तन बदन में आग लग रही थी उसे अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी और एक तरह से वह उसे अपना गुलाम बना देना चाहती थी,,,,।

अब उसे हाथ में ही लिए रहेगा या उसे नीचे भी रखेगा,,,,(मुखिया की बीवी की आवाज सुनते ही सूरज को एहसास हुआ कि उसके हाथ में उसके बदन से उतरा हुआ ब्लाउज था जिसमें उसके बदन की खुशबू थी उसके चुचीयो की खुशबू थी,,, जिस पर उसके पसीने की मादक खुशबू आ रही थी मुखिया की बीवी के कहते हैं सूरज उसके बदन से उतरे हुए ब्लाउज को जमीन पर रखने वाला था लेकिन उससे पहले ही ना जाने उसके मन में क्या हुआ वहां ब्लाउज को अपने नाक के करीब लाया और गहरी सांस लेते हुए उसे ब्लाउज की खुशबू को अपने अंदर उतारने लगा मानो की जैसे उसके हाथ में उसका ब्लाउज नहीं बल्कि उसकी चूचियां हो सूरज एकदम से मस्त हो गया और उसे जमीन पर रख दिया,,,,।

रात धीरे-धीरे और भी गहरी होती जा रही थी अभी बहुत समय था दोनों के पास इसलिए तो मुखिया की बीवी पूरी तरह से निश्चित थी और वैसे भी वह इस बात से भी निश्चित थी कि सूरज आज की रात के बाद उसकी जवानी का गुलाम हो जाएगा,,,। मुखिया की बीवी बिना कुछ बोले वापस पेट के बल लेट गई वह चाहती तो इसी समय पीठ के बल लेट कर अपनी जवानी के दोनों केंद्र बिंदु के दर्शन कर सकती थी लेकिन वह ऐसा इस समय नहीं करना चाहती थी,,,वह धीरे-धीरे खेल में आगे बढ़ना चाहती थी क्योंकि वह सूरज की तड़प को देख रही थी महसूस कर रही थी और उसे मजा आ रहा था,,,।

अब कंधों से लेकर कमर तक अच्छे से मालिश करना,,,

जी मालकिन,,,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज वापस सरसों के तेल की शीशी को नीचे से उठा लिया और उसमें से तेल की धार को इस बार अपनी हथेली में नहीं बल्कि मुखिया की बीवी की चिकनी पीठ पर गिराने लगा,,, जिसका एहसास मुखिया की बीवी को अच्छी तरह से हो रहा था,,,, सरसों की तेल की धार उसकी पीठ से होकर नीचे को गिरती ईससे पहले ही सूरज सरसों के तेल की सीसी को नीचे रखकर अपनी दोनों हथेलियां को उसकी नंगी चिकनी पेट पर रखकर मालिश करना शुरू कर दिया उसके कंधों से लेकर उसकी कमर की गहराई तक घूम रही थी,,,,, सूरज पहले केवल मुखिया की बीवी की कमर पर मालिश कर रहा था लेकिन वह अपने मन में सोच रहा था कि वह अपना ब्लाउज भी उतार देती तो मजा आ जाता है और ऐसा ही हुआ और इसलिए उसकी लालच और ज्यादा पढ़ने लगी थी वह अपने मन में सोच रहा था कि काश मुखिया की बीवी अपना पेटीकोट भी उतार कर नंगी हो जाती तो मालिश करने में और उसके खूबसूरत बदन को देखने में और स्पर्श करने में मजा आ जाता,,,।

जैसी सोच और विचार सूरज के मन में पनप रहे थे वही ख्याल मुखिया की बीवी के मन में भी आ रहा था वह भी अपनी पेटीकोट को उतार कर नंगी हो जाना चाहती थी और अपने पूरे नंगे बदन पर सूरज की मर्दाना हाथों को उसकी हथेलियों की रगड़ को महसूस करना चाहती थी,,,, लेकिन धीरे-धीरे इस समय वह सूरज की मालिश की कारीगरी का पूरा आनंद ले रही थी वैसे तो सूरज ने कभी भी किसी की भी मालिश किया नहीं जाने की मुखिया की बीवी की मालिश वहीं से कर रहा था मानों जैसे मालिश करने में वह उस्ताद हो,,,, अपनी दोनों हथेलियां को वहां कंधों से होते हुए नीचे की तरफ उसकी कमर की दोनों तरफ लेकर आता और नीचे की तरफ लाकर उसकी कमर को दोनों हाथों से इस तरह से दबोच लेता मानो जैसे की पीछे से उसकी चुदाई करने की तैयारी कर रहा हो और यही ख्याल मुखिया की बीवी के मन में भी आ जाता था जब वह पीछे से उसकी कमर को दोनों हाथों से थामता था और यह ख्याल उसके मन में आते ही उसकी बुर पानी फेंक देती थी,,,,।

सूरज बार-बार अपनी इस क्रिया को दोहराता था और जब उसकी दोनों हथेली ऊपर की तरफ कंधों पर आती तो वह कंधों को भी दोनों हाथों से थाम लेता था,,, ऐसा करने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी लेकिन अभी विवाह चारपाई की पाटी पर बैठा हुआ था और इस तरह से मालिश करने में उसे सहज नहीं महसूस हो रहा था लेकिन फिर भी आनंद ही आनंद उसे प्राप्त हो रहा था,,,,।

अब कैसा लग रहा है मालकिन,,,,(सूरज इस तरह से कंधों से लेकर के नीचे कमर तक अपनी हथेली घूमाता हुआ बोला,,,)

बहुत अच्छा लग रहा है रे,,,, ऐसी मालिश तो किसी ने नहीं किया था,,,,,आहहहहह,,,, तेरे हाथों में तो जादू है,,,, आज लगता है कि तू मेरे बदन से दर्द को निकाल फेंकेगा,,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मालकिन ऐसा ही होगा,,,,।

आहहहह,,,, थोड़ा हथेलियां को नीचे की तरफ भी ले जा वहां भी दर्द हो रहा है,,,,,।

(मुखिया की बीवी के मुंह से इतना सुनते ही सूरज के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उसका दिल जोरो से धड़कने लगा,,,, और इस बार बहुत अपनी हथेली को नीचे की तरफ लेकर आते हुए अपनी उंगली को मुखिया की बीवी की पेटिकोट के अंदर हल्के से घुसाने की कोशिश करने लगा और अपनी हथेली का दबाव उस जगह पर बढ़ाने लगा और बोला,,,

यहां पर मालकीन,,,,

हा रे यहां पर ऐसा लग रहा है की नस खींचा रही है,,,,

कहां यहां पर,,,,,(अपनी बीच वाली उंगली को उसकी पेटिकोट के अंदर डालकर उसके नितंबों के बीच की दरार के केंद्र बिंदु पर स्थिर करते हुए बोला और उसके इतने मात्र से ही सूरज का लंड पजामे में दंगल मचाने लगा,,,, क्योंकि उसे इतना तो एहसास हो ही रहा था कि वह अपनी उंगली को कौन सी जगह पर रखा हुआ है वह जगह हल्का सा गहरा गड्ढा लिया हुआ था जिससे,,, सूरज की मदहोशी बढ़ने लगी थी और यही हाल मुखिया की बीवी का भी था क्योंकि वह सूरज की उंगली को अपनी गांड की तरह की ऊपरी हिस्से पर महसूस कर रही थी और एकदम से गहरी सांस लेते हुए बोली,,,,।)

हां यहीं पर ज्यादा खिंचाव हो रहा है,,,,

रुकिए मालकिन मैं कोशिश करता हूं,,,,,,,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज सरसों के तेल की सीसी उठाकर थोड़ा सा तेल अपनी हथेली में गिरा दिया और उसे अपनी उंगली पर लगा लिया,,,,, उसका दील जोरों से धड़क रहा था,,, क्योंकि इस समय उंगली पर तेल लगाने की वजह से उसे पुरानी बात याद आ रही थी,,,,, जब गांव में एक दूसरे से बहस हो रही थी तब,,, गांव का ही एक आदमी उसके दोस्त को गुस्से में गाली देते हुए कह रहा था कि मादरचोद तेल लगाकर तेरी मां की चुदाई करूंगा,,,,, चुदाई करने वाली बातें तब तो ठीक थी लेकिन तेल लगाकर इस बात के मतलब को सूरज समझ नहीं पा रहा था,,, उसके मन में तेल लगाने वाली बात की जिज्ञासा बनी हुई थी और वह कई बार इस बात को जानने की कोशिश भी किया था लेकिन अपने भोलेपन के कारण वह अपने प्रश्न के उत्तर को ढूंढ नहीं पाया था,,,, अनायास ही यह बात उसके मन में आ गई थी लेकिन फिर भी वह अभी भी उसे आदमी के द्वारा कही गई बात के मतलब को अभी तक नहीं समझ पाया था,,,,,।

सूरज अपनी हाथ में और उंगली में सरसों का तेल लगाकर अपनी उंगली को चारपाई की पाटी पर बैठा हुआ,,, अपनी तेल लगी उंगली को मुखिया की बीवी की पेटीकोट के अंदर सरकाने लगा,,,, इतने से सूरज के तन बदन में अजीब सी उत्तेजना का संचार हो रहा था वह मदहोश हो रहा था वह अपनी उंगली को,,, मुखिया की बीवी के नितंबों के ऊपरी हिस्से की शुरुआती केंद्र बिंदु पर रखकर उसे हल्के हल्के दबाता हुआ मालिश कर रहा था,,,, नितंबों के बीच के उस गड्ढे में उंगली दबाने में सूरज को बहुत अच्छा लग रहा था और मुखिया की बीवी की तो हालत खराब हो रही थी उसकी बुर पूरी तरह से पानी से लपा लप हो रही थी,,,।

इस बात को सूरज और मुखिया की बीवी दोनों अच्छी तरह से समझ रहे थे कि इस तरह से अच्छी तरह से मालिश नहीं हो पा रही थी,,,, इसलिए मुखिया की बीवी बोली,,,।

तू पाटी पर बैठा है ना,,,

जी मालकिन,,,,

इसलिए तु ठीक से मालिश नहीं कर पा रहा है,,, एक काम कर तू मेरी कमर के दोनों तरफ घुटने रखकर आराम से बैठ जा तब तू आराम से मालिश कर पाएगा,,,,।

मुखिया की बीवी की बात सुनते ही सूरज की आंखों में नशा छाने लगा क्यों किसी सीधे-सीधे यह उसके ही फायदे की बात थी ऐसे में वह मुखिया की बीवी के नितंबों के स्पर्श में आ सकता था,,,,। वह तो उतावला हुआ जा रहा था लेकिन फिर भी जानबूझकर इनकार करते हुए बोला,,,।

कोई बात नहीं मालकीन ठीक है,,,,

अरे ठीक कैसे हैं तो ठीक से मालिश नहीं कर पा रहा है,,, चल जल्दी से जैसा रहती हूं वैसा ही कर,,,,

(सूरज को भला इसमें कौन सा एतराज था वह इस बार इनकार नहीं कर पाया और मुखिया की बीवी के बताएं अनुसार उसकी कमर के एक तरफ अपने घुटने को मोड कर रख दिया और दूसरी तरफ भी,,,ऐसा ही किया,,,,,,, इस तरह से वह मुखीया की बीवी के नितंबों पर सवार हो चुका था,,,, जिस तरह से सूरज मुखिया की बीवी के ऊपर बैठा हुआ था,,,ऐसै हालात मे ,,, मुखिया की बीवी की गांड से सुरज की गांड से स्पर्श हो रही थी।

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मुखिया की बीवी के कहे अनुसार सूरज उसके नितंबों पर सवार हो चुका था और वह भी मालिश करने के लिए और ऐसे हालात में मुखिया की बीवी की भारी भरकम गांड और सूरज की गांड आपस में स्पर्श हो रहे थे जो हाल सूरज का था वही हालत मुखिया की बीवी का भी था सूरज तो पूरी तरह से मदहोश हो रहा था क्योंकि एक औरत की गांड उसके बदन से जो स्पर्श हो रही थी और मालिश करने के लिए वह उसकी गांड पर सवार हो चुका था,,,,।

हां अब तु ठीक से मालिश कर पाएगा,,,(मुखिया की बीवी गहरी सांस लेते हुए बोली)

सही कह रही हो मालकिन अब अच्छे से मालिश हो पाएगी,,,,(सूरज भी मुखिया की बीवी कि सुर में सुर मिलाता हुआ बोला,,,)

जब तुझे मालूम था तो पहले क्यों नहीं बोला,,,

मैं भला क्या बोल सकता हूं मालकिन,,,

तू बोल दिया कर जो तेरे मन में हो,,, मैं तुझे डांटने वाली थोड़ी हूं,,,।

फिर भी आप मालकिन हैं,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज सरसों के तेल की शीशी को हाथ में लेकर तेल की धार को उसकी कमर के बीचों बीच गहरी दरार में गिरने लगा जिससे मुखिया की बीवी मदहोश होने लगी और फिर थोड़ी ही देर में सूरज दोनों हाथों से नीचे से लेकर के ऊपर तक कंधों तक मालिश करना शुरू कर दिया एक खूबसूरत जवान औरत के नंगे जिस्म पर हाथ घुमाने में कैसा आनंद की अनुभूति होती है आज वह आनंद की अनुभूति सूरज अपने अंदर महसूस कर रहा था वह बहुत ज्यादा उत्तेजित और मदहोश था उसका लंड पजामे में अपनी औकात में आ चुका था,,, वैसे भी एक खूबसूरत जवान औरत के गोलाकार भारी भरकम नितंबो पर बैठने का यह पहला अनुभव बेहद अतुलिनिय था,,, जिसकी तुलना और अनुभूति का वर्णन कर पाना शायद सूरज के लिए असंभव था,,,,। कमर से अपनी हथेली को उसे पर दबाव बनाते हुए ऊपर की तरफ ले जाते हुए सूरज बोला,,,)

अब कैसा लग रहा है मालकिन,,,,

बहुत सुकून मिल रहा है रे,,, मैं तो कभी सोची भी नहीं थी की मालिश करवाने में भी इतना आनंद आता होगा,,,, गजब का हुनर है तेरे हाथों में,,,,,

हुनर कहां मालकिन जरूरत पड़ने पर मालिश कर देता हूं बस,,,,(ऐसा कहते हुए अपने दोनों हथेलियां को मुखिया की बीवी के कंधों तक ले गया और कंधों को दोनों हथेली में दबोच लिया उसका इस तरह से दबोचना मुखिया की बीवी के तन बदन में काम रस की झड़ी बरसा रहा था मुखिया की बीवी उत्तेजित हुए जा रही थी क्योंकि इस तरह से उसका पकड़ना कुछ और कहानी कह रहा था,,,. बार-बार उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि जैसे पीछे से सूरज का बाप भोला उसके कंधों को पड़कर उसकी बुर में लंड पल रहा हूं और यह एहसास मुखिया की बीवी को पानी पानी कर रहा था उसकी बुर से मदन रस का बहाव हो रहा था,,,,)

फिर भी तेरे हाथों में जादू है बहुत अच्छा लग रहा है,,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मालकिन आज तुम्हारे बदन से पूरा दर्द गायब हो जाएगा और ऐसा कहते हुए वह कंधों से नीचे अपनी हथेली को लाया तो अन्य से ही तेल और मखमली बदन की चिकनाहट पाकर उसकी हथेली दोनों तरफ से नीचे की तरफ सरक गई और ऐसे हालात में उसकी दोनों हथेलियां मुखिया की बीवी की चुचियों तक पहुंच गई,,, और अनायास ही उसकी दोनों हथेलियां में मुखिया की बीवी के दोनों खरबूजे आ गए और अचानक से वह उन्हें दबा भी दिया,,,,। सूरज की यह हरकत मुखिया की बीवी के बाद में उत्तेजना की चिंगारी को और ज्यादा भड़का दी उसके मुंह से हल्की सी आह निकल गई और यह आवाज सूरज के कानों तक एकदम से पहुंच गई वह इस आवाज को पहचानता नहीं था वह सोचा कि उसकी वजह से मुखिया की बीवी को दर्द महसूस हो रहा है इसलिए वह बोला,,,।)

क्या हुआ मालकिन दुख रहा है क्या,, ,(हालांकि उसकी कौन-कौन चुचियों का एहसास अपनी हथेली में महसूस करके सूरज पूरी तरह से मस्त हो चुका था और उसे इस बात का एहसास हो चुका था कि आनायास ही उसके हाथ में मुखिया की बीवी का कौन सा अंग आ गया है,,,,, मुखिया की बीवी कुछ और कह पाती इससे पहले ही सूरज की बात सुनते ही उसके दिमाग में युक्ति सुझने लगी और वह बोली,, )

हां रे,,,, जहां पर तेरा हाथ गया था ना वहां ज्यादा दर्द कर रहा है,,,,

(जानबूझकर दर्द भरे स्वर में मुखिया की बीवी बोली तो उसकी बात सुनते ही सूरज का रोम रोम पुलकित होने लगा उसके लंड की अकड़ बढ़ने लगी क्योंकि वह जानता था कि अचानक उसका हाथ कहां पहुंच चुका था और इस पर मालिश करने के लिए मुखिया की बीवी बोल रही थी और मन ही मन प्रसन्न होता हुआ एक बार फिर से सूरज कमर से लेकर ऊपर की तरफ अपनी हथेली को ले गया,,,, और जहां से उसकी हथेली फ़ीसदी थी उसी जगह से वह अपनी दोनों हथेलियां को वापस उसकी चूचियों की तरफ ले गया लेकिन इस बीच उसके दिल की धड़कन पूरी तरह से बढ़ने लगी थी क्योंकि वह जानता था कि अगले पल उसकी हथेली मुखिया की बीवी की चूची पर होगी जिसे देखने के लिए वह मचलता रहता था तड़पता रहता था उन्हें छूने का आज उसे मौका मिल रहा था,,,,,।

मालिश के बहाने दबाने का मौका मिल रहा था हालांकि सूरज में इन सब का ज्ञान नहीं था लेकिन इतना तो जानता ही था कि क्या करना है इसलिए सूरज की हथेलियां नीचे की तरफ गई और दोनों हथेलियां उसकी चूचियों की तरफ आगे बढ़ते हुए तेल की चिकनाहट और जिस का मखमली पान पाकर उसकी हथेली पड़े आराम से उसकी दोनों चूचियों की तरफ फिसल कर पहुंच गई और सूरज हथेली में मुखिया की बीवी की चूची आते हैं उसे हल्के से दबाते हुए मालिश करने लगा यह सब सूरज की हालत तो खराब कर ही रहा था लेकिन मुखिया की बीवी की भी हालत बिल्कुल भी अच्छी नहीं थी उसकी भी सांस गहरी चलने लगी थी वह भी मदहोश होने लगी थी उदास की लहर उसके बदन में भी उठ रही थी,,,,, सूरज मुखिया की बीवी की आज्ञा पाकर बार-बार इसी हरकत को दोहरा रहा था मुखिया की बीवी की चूची को पकड़ने में दबाने में मसलने मुझे बहुत मजा आ रहा था हालांकि वहएक मर्द के तौर पर उसकी चूची को दबा नहीं पा रहा था बस मालिश के बहाने हल्के से स्पर्श करके उसे पर दबाव बना रहा था और इस बात को मुखिया की बीवी भी अच्छी तरह से जानती थी वह जानती थी कि जब सूरज का स्पर्श इतना लाजवाब है तो जब वह उसे जोर-जोर से दबाएगा तब कितना मजा आएगा,,,,,.

लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था आधी रात का समय हो चुका था गांव से दूर आम के बगीचे में छोटी सी झोपड़ी में एक खूबसूरत जवान औरत एक जवान लड़की के साथ मालिश का सुख भोग रही थी और यह मालिश का सुख दोनों को कहां लेकर जाने वाला था इस बात का एहसास अभी दोनों को भी नहीं था हालांकि मुखिया की बीवी अच्छी तरह से जानती थी कि आज की रात क्या करना है लेकिन सूरज तो बिल्कुल अनजान था लेकिन इतने सही जो उसे आनंद की प्राप्ति हो रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था आधी रात का समय हो जाने के बावजूद भी ना तो सूरज की आंखों में नींद थी ना तो मुखिया की बीवी की आंखों में दोनों की आंखों से नींद कोसों दूर जा चुकी थी,,,,, आम के बगीचे में फैला सन्नाटा रह रहकर कुत्तों की आवाज से थोड़ा बदल जाता था वैसे तो आमतौर पर आधी रात के समय गांव के बाहर जंगल जैसे बगीचे में यह वातावरण डरावना ही था लेकिन जिस तरह का खेल झोपड़ी के अंदर एक खूबसूरत जवान औरत और एक जवान मर्द खेल रहे थे उन दोनों को बाहरी वातावरण से कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा था वह दोनों तो लालटेन की पीली रोशनी में मदहोशी का आनंद लूट रहे थे,,,।

अभी तक के अनुभव से जिस तरह से सूरज मुखिया की बीवी के नितंबों पर सवार था,,, अब उसकी हरकत बढ़ने लगी थी क्योंकि उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था और वह अपने लंड का जवाब मुखिया की बीवी की गांड पर महसूस करना चाहता था,,, न जाने कैसे अनुभवहीन सूरज में इतनी हिम्मत आ गई थी इसीलिए वह अपने नितम्बो को थोड़ा पीछे की तरफ ले गया और मुखिया की बीवी की गांड के निचले हिस्से से जहां से उभार शुरुआत होती है वहां पर अपने नितंबों को टिका दिया,,,, ऐसा करते ही वाकई में सूरज का लंड जो पजामे में तना हुआ था वह मुखिया की बीवी की उभरी हुई गांड पर स्पर्श होने लगा और अनुभव से भरी हुई मुखिया की बीवी भी इस स्पर्श को इस गरमाहट को पूरी तरह से महसूस करके मदहोश हो गई,,,, सूरज की इस हिम्मत को वह मन ही मन सलाम कर रही थी हालांकि उसे ऐसा ही लग रहा था कि अनजाने में ही ऐसा हुआ है क्योंकि वह सूरज को अच्छी तरह से समझ गई थी वह जानती थी कि वह आगे से अपनी तरफ से किसी भी तरह की हरकत करने की हिम्मत नहीं कर पाएगा लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उसमें मुखिया की बीवी मस्त हुए जा रही थी और सूरज इस तरह से बार-बार मालिश करते हुए उसकी दोनों चूचियों को हथेली में लेकर दबाते हुए मालिश कर रहा था,,,, ।

अब कैसा लग रहा है मालकिन,,,?
 
बहुत अच्छा,,,,(अपनी सांसों को गहरी खींचते हुए मुखिया की बीवी बोली,,,, और यह सच ही था उसे बहुत अच्छा लग रहा था,,,, और एक काम से भरी हुई औरत को भला क्यों ना अच्छा लगता जब उसके ऊपर एक जवान लड़का अपनी गांड सटाकर उसकी गांड पर बैठा हो और उसका तना हुआ लंड उसकी नितंबो पर रगड़ रहा हो ,,उसकी गर्माहट से उसकी बुर पिघल रही हो,,, तो भला इससे ज्यादा आनंद दायक काम से भरी हुई औरत के लिए क्या होगा,,,,) आज मुझे बहुत सुकून मिल रहा है अच्छा हुआ मैं तुझे आम के बगीचे में ले आई वरना मैं तो जान ही नहीं पाती की मालिश इस तरह से भी होती है,,,,,

मैं तो ऐसा ही करता हूं मालकिन,,,, आज देखना तुम्हारे बदन से पूरा दर्द निकाल दूंगा,,,,

ऐसा ही करना सूरज बेटा,,,,,।

(मुखिया की बीवी और सूरज दोनों आनंद के सागर में गोते लगा रहे थे सूरज तो पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि कहीं उसके लंड की नसें फट ना जाए,,, इतना अत्यधिक कड़कपन उसने कभी महसूस नहीं किया था उसका लंड बार-बार मुखिया की बीवी की उभरी हुई गांड पर धंसा जा रहा था और इस चुभन को मुखिया की बीवी अच्छी तरह से जानती थी महसूस कर रही थी,,, और यह भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी गांड के दरार में चुभने वाली चीज क्या है,,, इसलिए तो उसकी मां और भी ज्यादा प्रसन्न हुआ जा रहा था क्योंकि उसे आवाज हो चुका था कि सूरज में कितना दम है,,,,

मालिश का कार्यक्रम लगातार जारी था और ऐसा भी नहीं था कि दोनों को किसी चीज के लिए जल्दबाजी हुई जा रही थी दोनों निश्चित थे,,, मुखिया की बीवी आराम से खटिया पर लेटी हुई थी और मालिश का आनंद लूट रही थी और जवानी से भरा हुआ सूरज मुखिया की खूबसूरत बीवी के नंगे जिस्म पर अपनी हथेली घुमा घुमा कर आनंद के सागर में गोते लगा रहा था,,,,,,,, लेकिन अनुभव से भरी हुई मुखिया की बीवी अच्छी तरह से जानती थी कि अब इस खेल में आगे बढ़ाने में ही बनाई थी क्योंकि उसकी बुर से पानी निकल निकल कर पूरा तालाब बन चुका था,,,

उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसकी पेटिकोट उसके मदन रस से भीग चुकी थी,,,, अब वह सूरज के सामने पूरी तरह से निर्वस्त्र हो जाना चाहती थी एकदम नंगी हो जाना चाहती थी,,, ताकि सूरज मदहोश हो जाए और उसकी जवानी की प्यास को अपने मजबूत औजार से बुझा सके,,, इसलिए वह अपने मन में युक्ति ढूंढ रही थी की कैसे सूरज के सामने एकदम नंगी हो जाए पैसे तो वह आधी नंगी तो हो ही चुकी थी लेकिन अभी उसके नंगेपन को उसका पेटिकोट ढका हुआ था और वैसे भी मर्दों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बिंदु अभी भी सूरज के नजर से दुर ही था। इसलिए कुछ देर तक इसी तरह से मालिश करवाने के बाद वह बहाना बनाते हुए बोली ,,।

सहहहह,,, सूरज जल्दी से मेरे ऊपर से उतर,,,,

(हड़बड़ाहट में मुखिया की बीवी बोली उसकी बात सुनकर सूरज भी समझ नहीं पाया और वैसे भी वहां मुखिया की बीवी के ऊपर से उठना नहीं चाहता था लेकिन फिर भी हैरान होते हुए बोला,,,।)

क्या हो गया मालकिन,,,,,?(एकदम से सूरज भी धीरे से अपने आप को उसके बदन से ऊपर उठाते हुए बोला)

अरे बड़े जोरों की पेशाब आई है,,,,,।

(एक बार फिर से मुखिया की बीवी के मुंह से पेशाब शब्द सुनते ही सूरज के तन बदन में आग लगने लगी उसकी आंखों में खुमारी छाने लगी,,,, किसी तरह से वह अपने आप को संभालते हुए ना चाहते हुए भी बोला,,,)

लेकिन मालकिन अभी तो आप करके आई थी ना,,,

तो क्या हो गया इस पर मेरा बस थोड़ी चलता है,,,,,(सूरज मुखिया की बीवी के ऊपर से उतरकर खटिया के नीचे खड़ा हो गया था मुखिया की बीवी इस अवस्था में धीरे से उठकर खटिया पर बैठ गई अभी भी उसका मुंह सामने की तरफ था उसकी पीठ सूरज की तरफ वैसे तो लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ नजर आ रहा था लेकिन सूरज जो देखना चाह रहा था अभी भी उसकी आंखों से दूर ही था,,,,,)

तू जल्दी से लालटेन ले ले,,,,(मुखिया की बीवी का इतना कहना था कि वह झोपड़ी के कोने में टंगी हुई लालटेन को लेने के लिए उसे और आगे बढ़ा और लालटेन को अपने हाथ में ले लिया तब तक मुखिया की बीवी खटिया पर से उठकर दरवाजे की तरफ आ चुकी थी वह चाहती तो इसी समय वहां अपनी नंगी चूचियों का दर्शन सूरज को कर सकती थी लेकिन वह उसकी तरफ को ज्यादा बढ़ाना चाहती थी इसलिए वह इस तरह से खड़ी थी कि उसकी पीठ अभी भी सूरज के सामने थी और वह धीरे से दरवाजा खोलकर झोपड़ी से बाहर आ गई,,,,

झोपड़ीके बाहर चारों तरफ धुप्प अंधेरा छाया हुआ था,,, कुछ भी नजर नहीं आ रहा था,,,, कोई और समय होता कोई और हालत होती तो शायद इस समय मुखिया की बीवी भी झोपड़ी से बाहर निकालने की हिम्मत ना करती क्योंकि बाहर कल अंधेरा देखकर ही मन में घबराहट हो रही थी लेकिन इस समय उसके मन में कुछ और चल रहा था वह सूरज को अपनी नंगी गांड के दर्शन करना चाहती थी जो की एक बार कर चुकी थी लेकिन इस समय का माहौल कुछ और था वह जानते थे कि सूरज पूरी तरह से गर्म हो चुका है इसलिए वह अपने जवानी का मुख्य द्वार उसे दिखाना चाहती थी,,,,

झोपड़ी के दरवाजे पर आगे मुखिया की बीवी खड़ी थी और पीछे सूरज लालटेन लेकर खड़ा था उसकी रोशनी झोपड़ी से बाहर निकल रही थी तो बाहर थोड़ा बहुत उजाला नजर आ रहा था और इस उजाले को देखकर मुखिया की बीवी झोपड़ी से बाहर निकल गई हालांकि इस समय सूरज को भी डर लग रहा था क्योंकि वह दूर-दूर घने पेड़ों की तरफ देख रहा था क्योंकि एकदम दोनों की तरह नजर आ रहे थे लेकिन उसकी आंखों के सामने जवानी से भरी हुई खूबसूरत औरत थी जो की कमर के ऊपर पूरी तरह से नंगी थी और उसके बदन पर केवल पेटिकोट था और उसके हुस्न के जादू में वह सब कुछ भूल चुका था,,,, मुखिया की बीवी की नंगी पीठ और उसके नितंबों के उभार को देखते हुए सूरज बोला,,,।

कहां जाना है मालकिन,,,?

ज्यादा दूर नहीं जाना है यही पास में हेड पंप के पास,,,,(और इतना कहकर मुखिया की बीवी फिर पंप की तरफ पैर आगे बढ़ा दी और पीछे सूरज भी हाथ में लालटेन लिए उसके पीछे-पीछे चल पड़ा सूरज जानबूझकर उसके पीछे चल रहा था ताकि लालटेन की पीली रोशनी में वह मुखिया की बीवी की नंगी गांड के दर्शन कर सके,,,, जैसे ही हैंडपंप आया मुखिया की बीवी ऐसा जताने लगी जैसे उस पेशाब काबू में नहीं हो रहा हो और वह तुरंत इसकी भी परवाह नहीं की की सूरज उसे कितनी दूरी पर खड़ा रहेगा तुरंत अपनी पेटिकोट कमर तक उठाकर एकदम से नीचे बैठ गई यह सब सूरज को लालटेन की रोशनी में दिखाई दे रहा था वह एकदम से मदहोश हो गया था,,,

दिन के उजाले में जितना साफ नहीं देखा जा सकता था उतना सूरज रात के अंधेरे में लालटेन की रोशनी में देख रहा था उसकी नजर एकदम से मुखिया की बीवी की गांड पर चिपक की गई जिस पर कुछ देर पहले बैठा हुआ था एक बार फिर से मुखिया की बीवी की बुर सेतेज सिटी की आवाज निकालने लगी जो की शांत वातावरण में पूरी तरह से मधुर संगीत भी खेल रही थी और यह संगीत सूरज के कानों में भी बड़े आराम से पहुंच रही थी सूरज तो मदहोश बज रहा था वह तो ऐसा लग रहा था कि जैसे चार बोतलों का नाश कर लिया हो उसकी आंखों में खुमारी छा रही थी और उसकी नजर मुखिया की बीवी की नंगी गांड से हट ही नहीं रही थी,,,।

सूरज को ऐसा लग रहा था कि जैसे काली रात में पूनम का चांद खिल गया हो और वह ठीक उसकी आंखों के सामने नजर आ रहा हो,,,, सूरज की जवानी जोर मार रही थी उसका लंड पर जाने में गदर मचाने को तैयार था जिसे वह हाथ से दबा दबा कर काबू में करने की कोशिश कर रहा था लेकिन लंड की अकड़ ,, बाढ़ के पानी की तरह बढ़ती जा रही थी जितना भी रोकने की कोशिश करो वह सब कुछ बिखर कर आगे बढ़ती चली जा रही है इस तरह से सूरज का हाल था सूरज का मन कर रहा था कि पीछे से जाकर मुखिया की बीवी की बुर में लंड डाल दे लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत भी नहीं थी और ना ही उसे इस तरह का कोईअनुभव था,,, इस तरह की अनुभव से वह काफी दूर था,,, उसे नहीं मालूम था की औरतों के साथ कैसे संबंध बनाया जाता है लेकिन इतना जरुर जानता था कि औरत को चोदा जाता है और लंड से चोदा जाता है,,, लेकिन कैसे यह नहीं जानता था इसीलिए तो वह इस समय मुखिया की बीवी की नजर में मूर्ख ही था वरना उसकी जगह कोई और होता तो अब तक खटिया पर कुश्ती खेल लिया होता,,,,।
 
मुखिया की बीवी की बुर से लगातार सिटी की आवाज आ रही थी और यह देखकर सूरज भी सोच में पड़ गया था की मुखिया की बीवी कितना मुतती है,,, मुखिया की बीवी तिरछी नजरों से सूरज की तरफ देखने की कोशिश कर रही थी और सूरज को लगातार अपनी तरफ देखा हुआ पाकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी मदहोशी उसके पूरे बदन में छा रही थी उसे अच्छा लग रहा था सूरज का इस तरह से उसे घूरना,,, उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए मुखिया की बीवी अपने दोनों हाथों को अपनी गोल-गोल गांड पर हल्के से चपत लगाते हुए उसे चारों तरफ फिराते हुए बोली,,,।

यहां मच्छर बहुत है,,,,

सच कह रही हो मालकिन जल्दी से उठ जाओ वरना मच्छर तुम्हारी गोरी गोरी गांड को काटकर लाल कर देंगे,,,,(अनजाने में ही सूरज के मुंह से यह शब्द निकल गई थी पहली बार में किसी औरत के सामने गोरी गोरी गांड के शब्दों का प्रयोग किया था और यह शब्द सुनकर मुखिया की बीवी एकदम मगन हो गई थी लेकिन जैसे ही सूरज को अपनी कई बातों का एहसास हुआ वह एकदम से शर्मिंदा हो गया और आगे कुछ बोल ही नहीं पाया लेकिन उसके सवाल का जवाब देते हुए मुखिया की बीवी बोली,,,)

क्या सच में मेरी गांड गोरी है,,,(सूरज की तरफ देखे बिना अपने चेहरे पर मुस्कुराहट लाते हुए वह बोली )

जी मालकिन एकदम गोरी,,,,

लेकिन तुझे कैसे मालूम,,,, तूने तो अभी तक मेरी गान्ड नही देखा है,,,,

मेरे सामने तो बैठी हो पेटिकोट उठाकर एकदम साफ दिखाई दे रही है,,,,,

हाय दैया इसका मतलब तू मेरी तरफ देख रहा है,,,(जानबूझकर चौंकने का नाटक करते हुए मुखिया की बीवी बोली,,,)

नननन,, नहीं मालकिन बिल्कुल नहीं वह तो अचानक ही मेरी नजर चली गई थी,,,,,

बहुत शैतान हो गया है तू,,,, खैर कोई बात नहीं तेरी तो नजर अचानक ही पड़ गई तेरी जगह कोई और होता तो जान बुझ कर देखता ही रहता,,, भला ऐसा मौका कौन छोड़ना चाहेगा,,,,।

अगर कोई ऐसा करे तो तुमको गुस्सा नहीं आएगा मालकिन,,,,

बिल्कुल नहीं रे यह सब तो सामान्य है और वैसे भी तेरी उम्र के लड़के या तेरे से बड़े आदमी यही सबसे ढूंढते रहते हैं तो ही एकदम सीधा-साधा है तभी तो मैं तुझे अपने साथ लेकर आई हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही मुखिया की बीवी पेटिकोट को हाथ में पकड़े हुए ही अपनी जगह पर खड़ी हो गई ,,,,,, अपनी नंगी गांड को ढकने की उसे बिल्कुल भी दरकार नहीं थी वह तो सूरज को अपनी जवानी का जलवा दिखाना चाहती थी,,,, लेकिन तभी वह धीरे से पेटीकोट को नीचे गिर कर एकदम से सूरज की तरफ घूम गई और उसकी नंगी छातिया एकदम से उजागर हो गई,,, हाथ में लालटेन लिए हुए सूरज की नजरे सीधे मुखिया की बीवी की मदहोश कर देने वाली छातियो पर चली गई,,, और उसकी नंगी चूचियों को देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई यह सब मुखिया की बीवी ने जानबूझकर की थी लेकिन तुरंत वह जानबूझकर एकदम से चौंकने का नाटक करते हुए अपने दोनों हाथों से अपनी चूचियों को ढकने का नाकाम प्रयास करते हुए बोली,,,।

मुखीया की बीवी

हाय दैया या मैं तो भूल गई,,,,,(उसकी बात सुनकर सूरज भी जैसे होश में आया हो वह भी शर्मिंदा होकर अपनी नजर को दूसरी तरफ घूमा लिया,,,, थोड़ी ही देर में दोनों वापस झोपड़ी में आ चुके थे और सूरज लालटेन को वापस अपनी जगह पर टांगने लगा और मुखिया की बीवी लकड़ी के दरवाजे को अपने हाथों से बंद करने लगी,,,, दरवाजा बंद करने के बाद वह सूरज को देखने लगी सूरज लालटेन को टांग कर जैसे ही घुमा तो अपनी आंखों के सामने मुखिया की बीवी को देखकर उसकी चूचियों को देखकर उसके बाद में रक्त का प्रभाव बड़ी तेजी से होने लगा वह एक बार फिर से फटी आंखों से मुखिया की बीवी की दोनों जवान को देखने लगा जो कि एकदम दशहरी आम की तरह थी,,,, अब मुखिया की बीवी अपनी चूचियों को अपने हाथों से छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही थी और सूरज से बोली,,,।

सूरज अब मैं चाहती हूं कि तुम मेरे पूरे बदन की मालिश करें और मेरे बदन के दर्द को एकदम जड़ से निकाल कर फेंक दें,,,,।

की मालकिन ऐसा ही होगा,,,,(उसकी नंगी चूचियों पर नजर गडाए हुए सूरज बोला,,,)

लेकिन उसके लिए मुझे अपना पेटीकोट भी उतारना होगा मुझे एकदम नंगी हो जाना पड़ेगा,,,,,।

(मुखिया की बीवी की बात सुनते ही सूरज के तो होश उड़ गए वह एकदम से आश्चर्य से मुखिया की बीवी की तरफ देखने लगा मुखिया की बीवी सूरज की हाव-भाव को देखकर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी...)

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