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- Dec 5, 2013
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सोनू सूरज को अच्छी तरह से जानता था उसके व्यक्तित्व से भी अच्छी तरह से वाकिफ था,,, इसीलिए तो औरतों के प्रति उसकी शर्म को देखकर वह आने वाले समय के बारे में उसे आगाह कर रहा था,,,, लेकिन सोनू किस तरह की बातों को सुनकर सूरज के तन-बदन में बहुत ही उम्मादक हलचल होने लगी थी जिसके चलते उसका लंड खड़ा हो चुका था,,, और जिस तरह से उसने बयान किया था कि अगर किसी भी औरत ने उसे चोदने के लिए अपने साथ ले गई तो आखिर में क्या होगा,,, सोनू के मुंह से अपने लिए औरत के साथ की निष्फलता के बारे में सुनकर सूरज को गुस्सा तो आया था लेकिन उसके मुंह से सुनी हुई बात उसे बेहद उत्तेजित कर गई थी हालांकि वह इस तरह की बातों में बिल्कुल भी रुचि नहीं रखता था लेकिन सोनू उसका खास मित्र था,,, इसीलिए वह सोनू की बात को ध्यान से सुन भी रहा था और उसकी बातों का आनंद भी ले रहा था,,,,।
आखिरकार सूरज जब गुस्सा होकर वहां से जाने लगा तो सोनू तालाब के दूसरे छोर पर एक खूबसूरत औरत को घनी झाड़ियां की तरफ जाते हुए देख लिया था वह लपक कर सूरज का हाथ पकड़ लिया और उसे अपने साथ चलने के लिए कहा अब तक सूरज को नहीं मालूम था कि वह कहां ले चलने के लिए बोल रहा है लेकिन दोस्त होने के नाते वह उसके साथ चलने लगा,,, सोनू का यह नित्य कर्म था वह हमेशा औरतों की ताक झांक में लगा रहता था,,, कब कैसे औरत का कौन सा अंग उसे नजर आ जाए इसी में वह रुचि लिया करता था और इसीलिए घंटे कहीं भी बैठकर औरतों का इंतजार करता था खास करके इसी जगह पर जहां से औरतों का गुजरना होता था सोच के लिए,,, क्योंकि यही एक ऐसा पल होता है जब सोनू चोरी छुपे औरत के अंगों को अपनी आंखों से देख कर अपने हाथ से ही अपना लंड हिला कर अपनी गर्मी शांत करने की कोशिश करता था,,,, सही मायने में देखा जाए तो सोनू का चरित्र कुछ ठीक नहीं था और वह यह काम गांव के और भी दूसरे हमारा लड़कों के साथ मिलकर किया करता था लेकिन ज्यादातर उसे अकेले में ही मजा आता था लेकिन आज वह सूरज को भी इस काम में शामिल करने की सोच लिया था इसीलिए तो वह उसका हाथ पकड़ कर आगे आगे चलने लगा,,,।
देख आराम से चल बिल्कुल भी शोर मत करना और बात तो मुझे बिल्कुल भी मत करना जैसा मैं कह रहा हूं वैसा ही करना फिर देखना तुझे कैसा नजारा दिखाता हूं,,,,(सोनू इस तरह से सूरज का हाथ पकड़े आगे आगे धीरे-धीरे कदम रखते हुए बढ़ रहा था)
बता तो सही कहां लेकर चल रहा है,,,?
जहन्नुम में नहीं लेकर जा रहा हूं मैं तुझे स्वर्ग का आनंद लेने के लिए लिए जा रहा हूं देखना तुझे इतना मजा आएगा कि रोज मेरे साथ इस तरह से चला आएगा,,,।
तेरी बातें मुझे कुछ समझ में नहीं आती हमेशा उल्टा-सुलता काम करते रहता है,,,
उल्टा-सुलता काम करते रहता हूं तभी तो मजा लूट रहा हूं तेरी तरह होता तो पागल हो जाता,,,,
चल रहने दे मुझे इस तरह का काम नहीं करना है मैं अपने आप में ही खुश हूं,,,
तभी तो कहता हूं समय रहते कुछ सीख ले वरना शादी के बाद जो मैंने कहा हूं ना वैसा ही होगा लात मार के औरत चली जाएगी किसी दूसरे के पास फिर बजाते रहना गुनगुना,,,, अब कुछ बोलना नहीं,,,,।
(इतना कहने के साथ ही सोनू सूरज का हाथ पकड़ कर धीरे-धीरे कदम रखने लगा क्योंकि वह दोनों जहां से गुजर रहे थे वहां पर पेड़ की सूखी पत्तियां ढेर सारी बिजी हुई थी जिसकी वजह से उसे पर पैर रखने से उसमें आवाज उत्पन्न हो रही थी और ऐसा होने से दूसरी तरफ की औरत का ध्यान उन दोनों की तरफ जा सकता था और ऐसा होने नहीं देना चाहता था सोनू इसलिए बहुत ही संभलकर कदम रखने के लिए इशारे में ही सोनू ने सूरज को बोल दिया था,,,, अब तक सूरज को सोनू उसे कहां ले जा रहा है इस बारे में कोई खास खबर नहीं थी बस वह उसका हाथ पकड़े पीछे-पीछे चला जा रहा था,,,,और दूसरी तरफ वह औरत इस बात से बेखबर की उसके पीछे दो जवान लड़के चले आ रहे हैं वह अपनी ही धुन में झाड़ियों में चली जा रही थी,,,।
थोड़ी देर बाद वह औरत घनी झाड़ियों के बीच पहुंचकर वहां रुक गई,,,, और उसे इस तरह से रुकते देखकर सोनू भी खुद को और सूरज को घनी झाड़ियां के पीछे छुपा लिया था और उसे रोकने के लिए बोला था वह औरत गांव की ही थी लेकिन सूरज उसे पहचान नहीं पा रहा था लेकिन सोनू उसे अच्छी तरह से जानता था और वह जानता था कि इस समय वह औरत यहां पर जरूर आती है इसलिए वह यहीं पर हमेशा रुक कर उसका इंतजार किया करता था,,,,
यहां पर करना क्या है,,,?(सूरज आश्चर्य जताते हुए बोला)
सईईईईई,,,(उंगली को अपने होंठ पर रखकर उसे शांत रहने का इशारा करते हुए सोनू धीरे से बोला,,,) तुझे करना कुछ नहीं है बस देखना है इसलिए कुछ बोल मत ,,,,(सोनू का इशारा पाकर सूरज की एकदम खामोश हो गया वह भी उसे औरत की तरफ देखने लगा लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यहां होने क्या वाला है इसलिए धीरे से बोला)
अरे इतना तो बता उस औरत के पीछे क्यों मुझे लेकर आया है,,,,
तू सवाल बहुत पुछता है तुझे कह रहा हूं सिर्फ देखने के लिए थोड़ी देर में तुझे सब पता चल जाएगा कि मैं तुझे यहां किस लिए लेकर आया हूं,,,,।
(सोनू कि ईस तरह की बात सुनकर सूरज फिर से खामोश हो गया और वह भी झाड़ियों के पीछे छुपकर उसे औरत की तरफ देखने लगा क्योंकि उन दोनों की तरफ पीठ करके खड़ी थी,,,, उसका चेहरा नहीं दिख रहा है था इसलिए सूरज उसे पहचान नहीं पा रहा था,,,,,, सोनू के साथ-साथ सूरज का दील भी जोरों से धड़क रहा था सोनू का दिल तो उत्तेजना के मारे धड़क रहा था क्योंकि वह जानता था कि कुछ भी देर में क्या होने वाला है लेकिन सूरज का दिल थोड़ी घबराहट की वजह से धड़क रहा था क्योंकि उसे नहीं मालूम था कि यहां वह क्या कर रहा है और वह भी एक औरत को चोरी चुपके देख कर होने क्या वाला है,,,,।
सोनू और सूरज दोनों झाड़ियों के पीछे छुप कर उसे औरत की क्रियाकलाप को देख रहे थे,,, और वह औरत घनी झाड़ियां के बीच खड़ी होकर इधर-उधर देख रही थी अब तक सूरज ने उसे औरत का चेहरा नहीं देख पाया था इसलिए वह नहीं जानता था कि वह औरत कौन है लेकिन इतना तो जानता ही था कि जो कोई भी है उसके गांव की ही है,,,, कुछ देर तक वह औरत इधर-उधर चारों तरफ नजर घुमा कर पूरी तसल्ली कर लेने के बाद अपने दोनों हाथों को अपनी जांघों तक की साड़ी को हल्के से पकड़ ली,,, और यह देखकर सोनू का दिल जोरो से धड़कने लगा और जिस तरह से वह औरत ने अपने दोनों हाथ को दोनों तरफ करके साड़ी को पकड़ कर रखी थी थोड़ा-थोड़ा सूरज को भी अंदाजा होने लगा कि वह औरत क्या करने वाली है इसलिए उसका भी दिल बड़े जोरों से धड़कने लगा,,,, और उन दोनों की आंखों के सामने वह औरत धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगी और इस बीच वह चारों तरफ नजर घुमा कर देख भी ले रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन वह कहां जानती थी कि ठीक उसके पीछे घनी झाड़ियों में दो जवान लड़के उसकी हर एक हरकत पर कड़ी निगरानी रखे हुए हैं,,,, उस औरत को धीरे-धीरे साड़ी को ऊपर की तरफ उठता देख कर सोनू एकदम से खुश होता हुआ बोला,,,।
अब आएगा असली मजा अब देखना सूरज तू पागल हो जाएगा इस नजारे को देखकर,,,,
तेरी बातें मुझे कुछ समझ में नहीं आ रही है,,,
सब कुछ समझ में आ जाएगा ,,, बस तू देखता जा,,,।
(अब सूरज का भी दिल बड़े जोरों से धड़कने लगा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने वह औरत अपनी साड़ी को घुटनों तक उठा दी थी इतना तो वह समझ ही गया था कि वह औरत क्या करने वाली है आज तक सूरज में औरत के इस क्रियाकलाप को अपनी आंखों से कभी नहीं देखा था,,,, और ना ही इस तरह के नजारे को देखने की कभी उसने कोशिश भी किया था और ना ही कभी उत्सुक था लेकिन आज जो कुछ भी हो रहा था उसके साथ पहली बार हो रहा था इसलिए उसके मन में अजीब सी बेचैनी हो रही थी देखते ही देखते वह औरत अपनी साड़ी को मोटी मोटी जांघों तक उठा दी थी,,, घुटनों तक तो ठीक था उसे औरत की मोटी मोटी चिकनी गोरी जांघों को देखकर सूरज के बदले में उत्तेजना का असर होने लगा उसकी दोनों टांगों के बीच लटक रहे हथियार में अजीब सी हलचल होने लगी क्योंकि आज तक उसने औरत का यह रूप नहीं देखा था आज उसकी मोती मोती जांघों को देखकर उसकी आंखें चमक रही थी सोनू के लिए तो यह रोज का था ,, ।)
यार सूरज यह औरत क्या करने जा रही है,,,(सूरज उत्सुकता दिखाते हुए बोला)
अबे साले अगर मैं सब कुछ बता दूंगा तो देखने में मजा नहीं आएगा इसलिए तो सिर्फ अपनी आंखों से देखता रहे,,,,।
(सोनू का जवाब सुनकर सूरज फिर खामोश हो गया और अपनी नजरों को उसे औरत की क्रियाकलाप पर एकदम से गड़ा दिया हालांकि सूरज को इस तरह का नजारा देखने की रुचि तो बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन बढ़ती उम्र के साथ-साथ उसके बदन में इस तरह के नजारे को देखकर अजीब सी हरकत हो रही थी क्योंकि वह भी पूरी तरह से जवान हो चुका था औरत का हल्का सा नंगा बदन देखकर भी कोई भी जवान लड़के का लंड खड़ा हो जाता है,,, और इस प्राकृतिक असर से सूरज भी बाकात नहीं था,,,, झाड़ियां के बीज खड़ी उसे औरत को तो अंदाजा भी नहीं था कि उसके क्रियाकलाप को दो जवान लड़के अपनी आंखों से देख कर उत्तेजित हो रहे हैं वह तो अपने ही धुन में थी उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी लेकिन वह चारों तरफ नजर घूमा कर पूरी तरह से तसल्ली कर लेने के बाद ही बैठना चाहती थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि कोई उसे इस हालत में देखें वैसे भी गांव की औरतों में शर्म हया कुछ ज्यादा ही कूट-कूट कर भरी होती है,,,,।
आखिरकार सूरज जब गुस्सा होकर वहां से जाने लगा तो सोनू तालाब के दूसरे छोर पर एक खूबसूरत औरत को घनी झाड़ियां की तरफ जाते हुए देख लिया था वह लपक कर सूरज का हाथ पकड़ लिया और उसे अपने साथ चलने के लिए कहा अब तक सूरज को नहीं मालूम था कि वह कहां ले चलने के लिए बोल रहा है लेकिन दोस्त होने के नाते वह उसके साथ चलने लगा,,, सोनू का यह नित्य कर्म था वह हमेशा औरतों की ताक झांक में लगा रहता था,,, कब कैसे औरत का कौन सा अंग उसे नजर आ जाए इसी में वह रुचि लिया करता था और इसीलिए घंटे कहीं भी बैठकर औरतों का इंतजार करता था खास करके इसी जगह पर जहां से औरतों का गुजरना होता था सोच के लिए,,, क्योंकि यही एक ऐसा पल होता है जब सोनू चोरी छुपे औरत के अंगों को अपनी आंखों से देख कर अपने हाथ से ही अपना लंड हिला कर अपनी गर्मी शांत करने की कोशिश करता था,,,, सही मायने में देखा जाए तो सोनू का चरित्र कुछ ठीक नहीं था और वह यह काम गांव के और भी दूसरे हमारा लड़कों के साथ मिलकर किया करता था लेकिन ज्यादातर उसे अकेले में ही मजा आता था लेकिन आज वह सूरज को भी इस काम में शामिल करने की सोच लिया था इसीलिए तो वह उसका हाथ पकड़ कर आगे आगे चलने लगा,,,।
देख आराम से चल बिल्कुल भी शोर मत करना और बात तो मुझे बिल्कुल भी मत करना जैसा मैं कह रहा हूं वैसा ही करना फिर देखना तुझे कैसा नजारा दिखाता हूं,,,,(सोनू इस तरह से सूरज का हाथ पकड़े आगे आगे धीरे-धीरे कदम रखते हुए बढ़ रहा था)
बता तो सही कहां लेकर चल रहा है,,,?
जहन्नुम में नहीं लेकर जा रहा हूं मैं तुझे स्वर्ग का आनंद लेने के लिए लिए जा रहा हूं देखना तुझे इतना मजा आएगा कि रोज मेरे साथ इस तरह से चला आएगा,,,।
तेरी बातें मुझे कुछ समझ में नहीं आती हमेशा उल्टा-सुलता काम करते रहता है,,,
उल्टा-सुलता काम करते रहता हूं तभी तो मजा लूट रहा हूं तेरी तरह होता तो पागल हो जाता,,,,
चल रहने दे मुझे इस तरह का काम नहीं करना है मैं अपने आप में ही खुश हूं,,,
तभी तो कहता हूं समय रहते कुछ सीख ले वरना शादी के बाद जो मैंने कहा हूं ना वैसा ही होगा लात मार के औरत चली जाएगी किसी दूसरे के पास फिर बजाते रहना गुनगुना,,,, अब कुछ बोलना नहीं,,,,।
(इतना कहने के साथ ही सोनू सूरज का हाथ पकड़ कर धीरे-धीरे कदम रखने लगा क्योंकि वह दोनों जहां से गुजर रहे थे वहां पर पेड़ की सूखी पत्तियां ढेर सारी बिजी हुई थी जिसकी वजह से उसे पर पैर रखने से उसमें आवाज उत्पन्न हो रही थी और ऐसा होने से दूसरी तरफ की औरत का ध्यान उन दोनों की तरफ जा सकता था और ऐसा होने नहीं देना चाहता था सोनू इसलिए बहुत ही संभलकर कदम रखने के लिए इशारे में ही सोनू ने सूरज को बोल दिया था,,,, अब तक सूरज को सोनू उसे कहां ले जा रहा है इस बारे में कोई खास खबर नहीं थी बस वह उसका हाथ पकड़े पीछे-पीछे चला जा रहा था,,,,और दूसरी तरफ वह औरत इस बात से बेखबर की उसके पीछे दो जवान लड़के चले आ रहे हैं वह अपनी ही धुन में झाड़ियों में चली जा रही थी,,,।
थोड़ी देर बाद वह औरत घनी झाड़ियों के बीच पहुंचकर वहां रुक गई,,,, और उसे इस तरह से रुकते देखकर सोनू भी खुद को और सूरज को घनी झाड़ियां के पीछे छुपा लिया था और उसे रोकने के लिए बोला था वह औरत गांव की ही थी लेकिन सूरज उसे पहचान नहीं पा रहा था लेकिन सोनू उसे अच्छी तरह से जानता था और वह जानता था कि इस समय वह औरत यहां पर जरूर आती है इसलिए वह यहीं पर हमेशा रुक कर उसका इंतजार किया करता था,,,,
यहां पर करना क्या है,,,?(सूरज आश्चर्य जताते हुए बोला)
सईईईईई,,,(उंगली को अपने होंठ पर रखकर उसे शांत रहने का इशारा करते हुए सोनू धीरे से बोला,,,) तुझे करना कुछ नहीं है बस देखना है इसलिए कुछ बोल मत ,,,,(सोनू का इशारा पाकर सूरज की एकदम खामोश हो गया वह भी उसे औरत की तरफ देखने लगा लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यहां होने क्या वाला है इसलिए धीरे से बोला)
अरे इतना तो बता उस औरत के पीछे क्यों मुझे लेकर आया है,,,,
तू सवाल बहुत पुछता है तुझे कह रहा हूं सिर्फ देखने के लिए थोड़ी देर में तुझे सब पता चल जाएगा कि मैं तुझे यहां किस लिए लेकर आया हूं,,,,।
(सोनू कि ईस तरह की बात सुनकर सूरज फिर से खामोश हो गया और वह भी झाड़ियों के पीछे छुपकर उसे औरत की तरफ देखने लगा क्योंकि उन दोनों की तरफ पीठ करके खड़ी थी,,,, उसका चेहरा नहीं दिख रहा है था इसलिए सूरज उसे पहचान नहीं पा रहा था,,,,,, सोनू के साथ-साथ सूरज का दील भी जोरों से धड़क रहा था सोनू का दिल तो उत्तेजना के मारे धड़क रहा था क्योंकि वह जानता था कि कुछ भी देर में क्या होने वाला है लेकिन सूरज का दिल थोड़ी घबराहट की वजह से धड़क रहा था क्योंकि उसे नहीं मालूम था कि यहां वह क्या कर रहा है और वह भी एक औरत को चोरी चुपके देख कर होने क्या वाला है,,,,।
सोनू और सूरज दोनों झाड़ियों के पीछे छुप कर उसे औरत की क्रियाकलाप को देख रहे थे,,, और वह औरत घनी झाड़ियां के बीच खड़ी होकर इधर-उधर देख रही थी अब तक सूरज ने उसे औरत का चेहरा नहीं देख पाया था इसलिए वह नहीं जानता था कि वह औरत कौन है लेकिन इतना तो जानता ही था कि जो कोई भी है उसके गांव की ही है,,,, कुछ देर तक वह औरत इधर-उधर चारों तरफ नजर घुमा कर पूरी तसल्ली कर लेने के बाद अपने दोनों हाथों को अपनी जांघों तक की साड़ी को हल्के से पकड़ ली,,, और यह देखकर सोनू का दिल जोरो से धड़कने लगा और जिस तरह से वह औरत ने अपने दोनों हाथ को दोनों तरफ करके साड़ी को पकड़ कर रखी थी थोड़ा-थोड़ा सूरज को भी अंदाजा होने लगा कि वह औरत क्या करने वाली है इसलिए उसका भी दिल बड़े जोरों से धड़कने लगा,,,, और उन दोनों की आंखों के सामने वह औरत धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगी और इस बीच वह चारों तरफ नजर घुमा कर देख भी ले रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन वह कहां जानती थी कि ठीक उसके पीछे घनी झाड़ियों में दो जवान लड़के उसकी हर एक हरकत पर कड़ी निगरानी रखे हुए हैं,,,, उस औरत को धीरे-धीरे साड़ी को ऊपर की तरफ उठता देख कर सोनू एकदम से खुश होता हुआ बोला,,,।
अब आएगा असली मजा अब देखना सूरज तू पागल हो जाएगा इस नजारे को देखकर,,,,
तेरी बातें मुझे कुछ समझ में नहीं आ रही है,,,
सब कुछ समझ में आ जाएगा ,,, बस तू देखता जा,,,।
(अब सूरज का भी दिल बड़े जोरों से धड़कने लगा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने वह औरत अपनी साड़ी को घुटनों तक उठा दी थी इतना तो वह समझ ही गया था कि वह औरत क्या करने वाली है आज तक सूरज में औरत के इस क्रियाकलाप को अपनी आंखों से कभी नहीं देखा था,,,, और ना ही इस तरह के नजारे को देखने की कभी उसने कोशिश भी किया था और ना ही कभी उत्सुक था लेकिन आज जो कुछ भी हो रहा था उसके साथ पहली बार हो रहा था इसलिए उसके मन में अजीब सी बेचैनी हो रही थी देखते ही देखते वह औरत अपनी साड़ी को मोटी मोटी जांघों तक उठा दी थी,,, घुटनों तक तो ठीक था उसे औरत की मोटी मोटी चिकनी गोरी जांघों को देखकर सूरज के बदले में उत्तेजना का असर होने लगा उसकी दोनों टांगों के बीच लटक रहे हथियार में अजीब सी हलचल होने लगी क्योंकि आज तक उसने औरत का यह रूप नहीं देखा था आज उसकी मोती मोती जांघों को देखकर उसकी आंखें चमक रही थी सोनू के लिए तो यह रोज का था ,, ।)
यार सूरज यह औरत क्या करने जा रही है,,,(सूरज उत्सुकता दिखाते हुए बोला)
अबे साले अगर मैं सब कुछ बता दूंगा तो देखने में मजा नहीं आएगा इसलिए तो सिर्फ अपनी आंखों से देखता रहे,,,,।
(सोनू का जवाब सुनकर सूरज फिर खामोश हो गया और अपनी नजरों को उसे औरत की क्रियाकलाप पर एकदम से गड़ा दिया हालांकि सूरज को इस तरह का नजारा देखने की रुचि तो बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन बढ़ती उम्र के साथ-साथ उसके बदन में इस तरह के नजारे को देखकर अजीब सी हरकत हो रही थी क्योंकि वह भी पूरी तरह से जवान हो चुका था औरत का हल्का सा नंगा बदन देखकर भी कोई भी जवान लड़के का लंड खड़ा हो जाता है,,, और इस प्राकृतिक असर से सूरज भी बाकात नहीं था,,,, झाड़ियां के बीज खड़ी उसे औरत को तो अंदाजा भी नहीं था कि उसके क्रियाकलाप को दो जवान लड़के अपनी आंखों से देख कर उत्तेजित हो रहे हैं वह तो अपने ही धुन में थी उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी लेकिन वह चारों तरफ नजर घूमा कर पूरी तरह से तसल्ली कर लेने के बाद ही बैठना चाहती थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि कोई उसे इस हालत में देखें वैसे भी गांव की औरतों में शर्म हया कुछ ज्यादा ही कूट-कूट कर भरी होती है,,,,।