Incest RAKSHASH - Page 6 - SexBaba
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Incest RAKSHASH

मैंने 3रद और 4तह अपडेट दाल दिए हैं लेकिन उसमे कुछ स्पैलिंग मिस्टेक्स हो सकती हैं, क्योकि मस वर्ड से डायरेक्ट कॉपी करके पेस्ट किये हैं, जो बदलाव पहेली बार किये थे वो नहीं कर पाई, और हो सकता ह, कुछ लाइन मिस भी हो सकती हैं, क्योकि मैं ेउप्दते को मस वर्ड पैर लिखती हु और जब यहाँ अपलोड करती हु तो दुबारा पढ़ती हु उसमे कुछ गलतिया मिलती या कुछ ऐड करना होता ह तो यही क्र देती हु जिसका बदलल मैं कॉपी में नहीं होता, और अब मुझे याद नहीं मैंने क्या क्या बदलाव किये थे, इसलिए कुछ गलती हो जाये तो माफ़ कर देना,

और ेट्वोर्क आज भी प्रॉब्लम क्र रहे हैं,
 
अपडेट-5



महल पहुंच क्र देव सीधे निहारिका के पास गया और उसके गले लग गया, निहारिका भी आँखों में आंसू लिए देव से लिपट गई, दोनों माँ बेटे आंसुओ से एक दूसरे का स्वागत क्र रहे थे, काफी देर तक दोनों एक दूसरे से लिपटे रहे,

निहारिका- तुझे माँ की याद नहीं आई,

देव- माँ आपको क्या बताऊ आपके बिना, मैं कैसे रहा हु वह, लेकिन पिता का आदेश तो मन्ना hi था,

निहारिका- अब ऐसा कोई काम मत करना जिससे तुझे मुझसे दूर रहना पड़े, तेरे सिवा इस दुनिया में मेरा कोई अपना नहीं ह, अगर तू मेरे सामने नहीं होता ह तो ऐसा लगता ह जैसे मेरे शरीर में जान hi नहीं ह,

देव- मेरा भी व्है हाल ह माँ, आपके बिना जीवन अधूरा सा लगता ह,

निहारिका- अच्छा ये बता वह क्या किया, राजगुरु ने अधिक काम तो नहीं करवाया तुझसे

देव- मैं राजगुरु के भाई भौमिक जी के पास था, बहुत अच्छे इंसान हैं, उन्होंने मुझे बहुत कुछ सिखाया जड़ीबूटियों के बारे में सिखाया, और

इतना कह क्र देव चुप हो गया,

निहारिका- क्या हुआ, कुछ हुआ ह क्या वह, तेरा मन मेरे पास आकर भी दुखी सा लग रहा ह,

देव- ऐसा नहीं ह माँ, बस मैं सोच रहा था मैं प्रतियोगिता में क्या करूँगा,

निहारिका- तुझे युवराज नहीं बनना लेकिन खुद के लिए सम्मान तो कामना होगा न, ये तेरे लिए एक अवसर ह जिससे तू सबको बता सके किट ु कमजोर नहीं ह,

देव- माँ हम यहाँ से कही दूर चले जाते हैं न, मुझसे ये सब बर्दास्त नहीं होता, यहाँ कोई अपना नहीं ह,

निहारिका- मैं छह क्र भी ऐसा नहीं कर सकती

देव- क्यों माँ, ऐसा क्या ह यहाँ जिस वजह से आप नहीं जा सकती,

निहारिका- आज तू ऐसी बाते क्यों क्र रहा ह, क्या हुआ ह,

देव- मैं आपके साथ रहना चाहता हु, बस मैं और आप और कोई नहीं चाहिए मुझे,

निहारिका ने देव को फिर से गले लगा लिया,

देव ने निहारिका से कस्तूरी और भौमिक जी के शाप की बात को छुपा लिया, देव वो सब भूलना छटा था,

तभी वह अक्षरा और रीवा वह आ गई और अक्षरा आते hi देव से लिपट गई, रीवा उसके पास hi कड़ी थी लेकिन उसने कोई रियेक्ट नहीं किया,

अक्षरा- छोटी माँ देखो कैसे कमजोर हो गया ह, वह खाने को नहीं मिलता था क्या

देव- बहेनो का प्यार नहीं मिलता थान ा वह,

देव ने रीवा की तरफ देख क्र ये बात बोली, रीवा ने सर दूसरी तरफ कर लिया,

निहारिका- अब यहाँ आ गया ह न तो अब ठीक हो जायेगा,

रीवा- ऐसा कुछ करता hi क्यों ह जिससे सजा दी जाये, क्यों इस सब से दूर नहीं रहता

ये पहेली बार था जब रीवा ने देव के लिए कुछ चिंता दिखाई थी, शायद ये इस 15 दिन दुरी का असर था,

निहारिका के दिल में थोड़ी सी ख़ुशी आई रीवा की चिंता देख क्र,

अक्षरा- तुमने प्रतियोगिता की तैयारी की या नहीं,

देव- मुझे पार्टियोगिया में कोई दिलचस्पी नहीं ह, मैं हरु या जीतू किसको फरक पड़ता ह,

अक्षरा- पड़ता ह बहुत फरक पड़ता ह, अपने लिए न सही लेकिन हमारी ख़ुशी के लिए तो पूरा जोश में भाग लेना

देव- ठीक ह तुम खेती हो तो जरूर करूँगा,

रात के खाने पैर सभी बैठे हुए थे, देव भी सबके साथ hi था,

भवर सिंह- भौमिक जी के पास कुछ सीखा ह या ऐसे hi समय पूरा करके आ गए,

देव- जी औषधियों के बारे में सीखा ह

अमरावती- चलो किसी काम तो आएगा अब

काम्य- ये औषधियों का ज्ञान किस काम आएगा इसके,

अक्षरा- राजमहल को जितना सैनिको की जरुआत होती ह उससे ज्यादा जरुरत वैद जी की होती ह, और जब घर में hi औषधियों का ज्ञान हो जायेगा तो हमे वैद जी का इंतजार करने की जरुरत hi नहीं पड़ेगी,

अक्षरा की बात पैर भवर सिंह को हसी आ गई,

भवर सिंह- परसो प्रतियोगिता शुरू होगी देखते हैं इसके क्या काम आता ह,

देव- आपने अगर मुझे भी युद्ध कला सिखने दी होती तो शायद मैं भी इस प्रतियोगिता में अपना जोहर दिखता,

देव की बात सुनकर वह बैठे सभी के मुँह खुले रह गए, किसी को उम्मीद नहीं थी की देव कभी इस तरह से अपनी बात को भी रख सकता ह,

भवर सिंह गुस्से में- हमने तुम्हे वह तुम्हारी बतमीजी की सजा दें ेके लिए भेजा था, तुम वह से और अधिक बत्तमीज बन क्र लोटे हो,

देव- पुरे राजय को आपके सामने अपनी बात रखने का अधिकार ह, क्या मेरे परजा जितना भी अधिकार नहीं ह,

देव की इस बात से वह एक दम सनता च गया, भवर सिंह बड़े गोर से देव को देख रहे थे, अमरावती और सौमित्र गुस्से में लाल हो रही थी, निहारिका दरी हुई कड़ी थी उसकी इतनी भी हिम्मत नहीं हो रही थी की वो अपने बेटे के पास जाकर उसे शांत क्र सके या उसे हिम्मत दे सके,

काम्य- लगता ह राजगुरु जी इसे कुछ ज्यादा hi शिक्षा दे रहे हैं, बहुत बोलना सिख गया ह, खैर ये तो प्रतियोगिता में पता चल जायेगा की केवल बोलना सीखा ह या कुछ और भी, सुना ह वह लकडिया बहुत कटवाई हैं उन्होंने, और जंगलो में बड़े बड़े काम किये हैं,

बड़े बड़े काम सुनकर देव का मुँह पीला पद गया, देव ने काम्य की तरफ देखा काम्य देव को देख क्र मुस्कुरा रही थी, काम्य की नजरो से साफ़ लग रहा था उसे कुछ पता ह देव के बारे में, देव थोड़ा घबरा गया और चुप हो गया, जल्दी जल्दी अपना भोजन ख़तम किया और उठ क्र चला गया,

रात में निहारिका देव के पास आई, देव अपने hi खयालो में खोया हुआ था, उसे पता भी नहीं चला निहारिका कब उसके पास आ गई, देव की आँखे नाम थी, उसे कस्तूरी की याद सत्ता रही थी, उसे कोई ऐसी मिली थी जो इतना प्यार करती थी और देव ने उसे खो दिया,

निहारिका ने देव के सर पैर हाथ फिराया- क्या हुआ बीटा इतना उदास क्यों ह,

देव हड़बड़ा क्र उठा- माँ आप कब आई.

निहारिका- जब तू अपने खयालो में खोया हुआ किसी को याद क्र रहा था,

देव- नहीं नहीं माँ ऐसी तो कोई बात नहीं ह,

निहारिका- बीटा इस उम्र में ऐसा होता ह, वैसे मुझे इस उम्र सपने देखने का मौका नहीं मिला लेकिन फिर भी समझती हु, जब इस उम्र में कोई खोया खोया रहने लगे तो समझो उसे प्रेम हो गया ह, अपनी माँ को नहीं बताएगा,

देव- नहीं माँ ऐसी बात नहीं ह, मैं तो बस

निहारिका- तू नहीं बताना चाहता तो कोई बात नहीं, लेकिन मैं तेरी माँ हु, मुझसे कुछ छिपा नहीं रह सकता, खैर ये सब छोड़ और दूध पि ले, तूने बहुत दिन से दूध नहीं पिया ह, मेरे सीने में बहुत दर्द हो रहा ह,

देव- माँ क्या मेरा दूध पीना जरुरी ह

निहारिका- तू जनता ह न अगर तूने दूध नहीं पिया तो मुझे तकलीफ होगी और तेरे अलावा मेरी तकलीफ सुनने वाला कोण ह यहाँ,

देव निहारिका की तकलीफ नहीं देख सकता था, देव ने मुस्कुरा क्र है में सर हिला दिया, निहारिका ने अपनी चोली खोली और अपना स्तन देव के सामने कर दिया, निहारिका का स्तन देख क्र देव को कस्तूरी की चूचियों की याद आ गई, उसके अंदर एक दम से कामुकता का उफान आ गया था, देव समझ नहीं पाया ये क्या हुआ,

देव ने निहारिका के स्तानक ो मुँह में देने की जगह उस पैर अपने हाथ फिराए, ये पहेली बार था, खुद निहारिका चौंक गई, उसने देव की तरफ देखा तब तक देव अपना मुँह खोल क्र निहारिका के शैतान को मुँह में भर चुक्का था, निहारिका देव के चेरे के भाव नहीं देख पाई थी, देव ने निहिरका की चुकी को चूसना शुरू क्र दिया, इतने दिन बाद निहारिका अपनी चूचिया चुसवा रही थी, उसके मुँह से सिसकिया निकल गई, निहारिका की सिसकी से देव को कस्तूरी की सिसकियों की याद आ रही थी, देव के जोश बढ़ता जार है था, उसका हाथ निहारिका की दुश्री चुकी पैर पहुंच चुक्का था जिसे वो शेला रहा था और एक चुकी को चूस रहा था,

निहारिका की आँखे बंद थी, उसे बड़ी रहत मिल रही थी, उसके साइन पैर से इतना बोझ जो उतर रहा था, लेकिन आज देव के चुकी चूसने के तरीके से निहारिका के अंदर की औरत जग रही थी, न छाते हुए भी निहारिका की योनि में गिला पैन आ गया था, देव ने एक चुकी को अच्छी तरह चूसने के बाद दूसरी चुकी को मुँह में भर लिया, देव का लुंड भी अपनी उफान पैर आ चुक्का था, देव को पता भी नहीं चला की उसका लुंड खड़ा हो चुक्का ह, वो तो निहारिका की चूचिया चूसने में खोया हुआ था, वही निहारिका की आँखे भी बंद थी और वो देव के सर पैर हाथ फिराए जा रही थी,

कुछ hi देर में देव ने निहारिका की चुकी को खली क्र दिया, दूध आना बंद हो गया लेकिन देव ने चूसना बंद नहीं किया, निहारिका भी देव को नहीं रोक रही थी, उसे मजा आ रहा था,

अचानक hi निहारिका को अहसास हुआ ये क्या हो रहा ह, वो कामुकता का बहाव में भेटि जार hi ह, उसने जहटके से देव को अलग किया, देव ने चौंकते हुए निहारिका को देखा,

निहारिका की आँखों में शर्म और आश्चर्य था, वही देव पहले तो ऐसे चौंका जैसे उसकी पिरया चीज उससे चीन ली गई हो, लेकिन अगले hi पल उसे अहसास हुआ की वो क्या कर रहा था, उसे अपना खड़ा लुंड भी महसूस हुआ, देव एक दम से उठ कर बैठ गया, कुछ देर के लिए वह ख़ामोशी च गई, निहारिका ने उस ख़ामोशी को तोडा,

निहारिका- क्या सीखा तूने गुरु जी के पास, तूने उन्हें सम्मान तो दिया न

देव- है माँ, वो बहुत अच्छे इंसान ह, उन्होंने मुझे वचन दिया ह की वो मेरा हमेशा साथ देंगे

निहारिका- ये तो बड़ी अच्छी बात ह, प्रतियोगिता के बारे में क्या सोचा ह तूने

देव- मेरी इच्छा नहीं ह माँ लेकिन पिता जी की बात तो माननी होगी,

निहारिका- खुद को सुरक्षित रखना, मुझे इस प्रतियोगिता से कोई मतलब नहीं ह, बस तू सुरक्षित रहना चाहिए,

देव निहारिका से लिपट क्र सो gaya,niharika देव को hi निहारती रही, वही काम्य अभिजीत के साथ अमरावती सूरज के साथ और सौमित्र ज्वाला के साथ योजना बना रहे थे अपने अपने कमरे में, और अमिता और सोमिया अपनी शादी के सपने सजा रही थी, अपने अपने कमरे में लेती अपने hi बदन के साथ खेल रही थी, वही अक्षरा और रीवा एक साथ लेती हुई थी,

अक्षरा- रीवा आज तुमने पहेली बार देव के लिए कुछ सही बोलै ह,

रीवा- इस बात को ज्यादा मत खींच, वो बस ऐसे hi निकल गया था,

अक्षरा- ऐसे hi कुछ नहीं होता,

रीवा- मैं कुछ नहीं कहना छाती इस बारे में

अक्षरा- कुछ न कहने से सच झूट तोडना हो जायेगा, तुम्हारे मन में उसके लिए दया ह, लेकिन तुम दिखती नहीं,

रीवा- अक्षरा तुम इस परिवार को अच्छे से जानती हो, कोई भी माँ और देव को पसंद नहीं करता, उन दोनों ने तो उस नफरत के साथ जीना सिख लिया लेकिन मैं वो नफरत नहीं झेल सकती थी, इसलिए मैंने भी बाकि सबके साथ खुद को बदल लिया, लेकिन वो मेरी माँ ह और देव मेरा भाई ह, लेकिन मैं उनका साथ देकर सबकी नफरत की भागीदार नहीं बनना चाहती,

अक्षरा- तुमने कभी सोचा ह, इस परिवार में निहारिका जैसी माँ और देव जैसा भाई, या यु कहु उन दोनों जैसे भोले इंसान कोई नहीं ह, परिवार तो क्या पुरे राजय में कोई उनके जैसा नहीं ह, सबकी नफरत झेल क्र भी वो एक दूसरे के साथ हैं,

रीवा- वो कमजोर हैं, वो कुछ नहीं कर सकते इसलिए सबकी नफरत झेल रहे हैं,

अक्षरा- मुझे लगता ह हम कमजोर हैं वो नहीं, हमसे कोई नफरत न करे इस दर से हम अपनों का साथ नहीं दे प् रहे, सभी भाई बहेनो के साथ शामिल होने के लिए सच बोलने तक की हिम्मत नहीं ह, लेकिन वो दोनों कितने मजबूत हैं इसका पता तो इसी बात से चल जाता ह की वो कितने वर्सो से सबकी नफरत झेल रहे हैं लेकिन आज तक टूटे नहीं है, कमजोर वो नहीं हम सब हैं,

रीवा- देव मनहूस ह जब से वो पैदा हुआ ह पिता जी हमेशा दुखी रहते हैं, मेरे माता पिता एक दूसरे के करीब तक नहीं आते, ये सब उस देव की वजह से hi ह

अक्षरा- ये तो मुझे भी समझ नहीं आता ऐसा क्यों होता ह, इसके पीछे कोई तो वजह रही होगी,

रीवा- अब सो जाओ मुझे नींद आ रही ह,

अक्षरा सोचती हुई सो गई,

अगली सुबह महल में बहुत तेयारिया चल रही थी, सभी वयश्त थे, अगले दिन से प्रतियोगिता शुरू होनी थी जो 3 दिन चलने वाली थी और उसके बाद स्वंवर होना था, चारो राजकुमारियों को अच्छे से चन्दन के उप्टन का लेप लगाया जा रहा था,

इधर दूसरे राजय के राजा राजकुमार मंत्री भवनपुरा में आने लगे थे, उनका ाचे से स्वागत किआ जा रहा था, देव का यही काम था सबकी आवभगत करना, वही बाकि तीनो राजकुमार दूसरे राजय के राजकुमारों से मेलजोल बढ़ने में लगे हुए थे, सूरज सिंह की दोस्ती एक राजा प्रताप सिंह से हो गई, वो बड़ा hi ायश राजा था, लेकिन उसका राजय सभी से ताकतवर था, वो जिस राजय को जीत लेता उस राजय की रानियों को अपनी रखैल बना क्र रखता, उसे औरतो पैर अत्याचार करने में बहुत मजा आता था, वो जीती हुई औरतो को गले में पत्ता दाल क्र बांध क्र रखता पालतू जानवरो की तरह, उससे दुश्मनी ठीक न समझ क्र भवर सिंह ने उसे भी अपने बेटी की शादी के लिए चुना था,

प्रताप सिंह और सूरज पूरा दिन साथ रहे और मदिरा का सेवन करते रहे, सूरज ने प्रताप सिंह के लिए कुछ दसियो की व्यवस्था भी क्र दी थी, लेकिन प्रताप सिंह को दसियो में कोई रूचि नहीं थी वो तो राजाओ की पत्नियों का शिकार करता था, भवर सिंह ने प्रताप सिंह से अपनी पत्नी और बहन का परिचय करवाया था, प्रताप सिंह की नियत काम्य पैर ख़राब हो राखी थी, लेकिन वो यहाँ शादी के लिए आया था तो कुछ गड़बड़ नहीं करना छटा था,

लेकिन सूरज के साथ घूमते हुए उसकी नजर नारिका पैर पद गई, और प्रताप सिंह ने निहारिका को देखा तो वो मंत्रमुग्ध सा खड़ा रह गया, स्वर्ग की कोई अप्सरा उसके सामने आ गई हो, निहारिका तो वह से निकल गई लेकिन प्रताप सिंह अपनी जगह से हिल नहीं पाया,

सूरज ने प्रताप सिंह की हालत समझ ली थी,

सूरज- क्या हुआ महाराज, कहा खो गए,

प्रताप सिंह- ये अप्सरा कोण ह, इसने हमारे खून में उबाल पैदा कर दिया ह,

सूरज- ये महाराज की तीसरी पत्नी हैं निहारिका,

प्रताप सिंह- aahhhhhhhhhhhhhh दिल चलनी हो गया ये सुनकर, की ये महाराज की पत्नी ह, वर्ण इसे पाने के लिए मैं पुरे राजय को तबाह क्र देता,

सूरज- इसे देख क्र हर किसी के दिल में यही अरमान जागते हैं,

प्रताप सिंह के दिमाग में निहारिका अटक गई थी, वो उसे पाने के लिए उतावला हुआ जा रहा था, वो निहारिका को पाने के लिए कुछ भी कर सकता था,

शाम को राजय सभा में सभी राजा महाराजा राजकुमार बैठे हुए थे, सभी का आदर सत्कार किया जा रहा था,

राजगुरु- सभी राजाओ राजकुमारों का हमारे राजय में स्वागत ह, जैसा की आप सबको पता ह की हमारे राजय की 4 राजकुमारियों का स्वंवर होना ह, उसी के लिए आप सबको यहाँ आमंत्रित किया गया ह, वैसे तो स्वंवर में प्रतियोगिता हुआ करती थी लेकिन हमने फैसला अपनी राजकुमारियों को करने का अधिकार दिया ह, वो जिसे चाहे अपना वेर चुन सकती हैं, और इसी बिच हमारे राजय के युवराज का भी चयन होना ह, जिसके लिए प्रतियोगिता राखी गई ह, जो कल सुबह से प्रारम्भ हो जाएगी, महाराज चाहते हैं आप सब उस प्रतियोगिता के शाक्षी बने, और होने वाले युवराज के लिए अपना समर्थन दे, ताकि आगे चाक र हमारे राज्यों के बिच अच्छे सम्बन्ध बने रहे,

भवर सिंह- स्वंवर तीन दिन बाद होगा जब युवराज की घोषणा के साथ hi, तब तक राजकुमारी सभी राजाओ महाराजाओ से बात करके उनके बारे में जान सकती हैं, हम छाते हैं हमारी बेतिया अच्छे पतियों का चयन करे,

सभी ने ताली बजा कर भवर सिंह के फ लेस्ले का स्वागत किया, अब अगले तीन दिन प्रतियोगता होनी थी और दूसरे राजय से आये राजा राजकुमारी को अपनी पसंद की लड़की को अपनी तरफ आकर्षित करना था,

रात के भोजन के बाद सभी को आराम करने चले गए, राजकुमारिया अपने कमरे में बैठी हुई थी,

अमिता- यार इतने सरे राजा राजकुमार हमसे विवाह करने आये हुए हैं,

अक्षरा- इसमें क्या मजा ह, पिता जी ने सबके सामने कह तो दिया की हम अपनी मर्जी से किसी को पसंद कर्नेगे लेकिन उन्होंने 4 राजा और राजकुमारों के नाम बता दिए हैं की हमे उन्हें hi पसंद करना ह, अब हम आपसे में फैसला करना ह कोण किसे पसंद करेगी,

सोमिया- है यार इतने राजा ह लेकिन हमारे पास बस 4 लोगो के नाम ह,

रीवा- मुझे तो इनमे से कोई भी अच्छा नहीं लगा, सब एक से एक खतरनाक लग रहे हैं,

अक्षरा- सबसे ज्यादा खतरनाक वो प्रताप सिंह ह, उसके बारे में सब बुरा hi बुरा सुना ह मैंने, और पिता जी उसे भी चुनने को कहा ह, मैं तो उसे नहीं चुनने वाली, अगर उससे किसी की शादी हुई तो जीवन भर बर्बादी hi होनी ह,

रीवा- हम राजकुमारियों की जिंदगी उन रत्नो की तरह ह, जब तक राजा उन्हें अपने महल में सजा क्र रखता ह तो पूरा समाज सर झुका क्र प्रसंसा करता ह, और जिस दिन राजा अपनी झूटी शान दिखने के लिए उतर क्र दुसरो को दे देता ह तो सब कोई उसे लूटना तो छाते हैं लेकिन इज्जत नहीं करते,

ऐसे hi हम चारो जब तक इस महल में हैं हमे सब प्यार क्र रहे हैं, लेकिन तीन दिन बाद हमे किसी प्रताप सिंह जैसे हवन के हाथो सौंप दिया जायेगा, जो कभी किसी औरत की इज्जत नहीं करता,

अमिता- सही कहा रीवा, राजकुमारियों को हमेशा अपने राजय को बचने के लिए या पडोसी राजा से मित्रता बढ़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता ह, हमारा भी वही इस्तेमाल हो रहा ह,

सोमिया- अब जो भी हो लेकिन शादी तो करनी hi ह, हम सब यही तय कर लेते हैं कोण किसे अपना पति चुनेगी, ये फैसला लेने का अधिकार हमे दिया ह,

रीवा- क्या तुम तीनो की माओ ने तुम्हे नहीं बताया किसे अपना पति चुनना ह,

रीवा की बात पैर तीनो चुप हो गई,

रीवा- यहाँ बस औपचारिकता hi हो रही ह, मुझे बता दो मुझे किसके गले में जयमाला डालनी ह,

तीनो लड़कियों ने अपने अपने पति का नाम बता दिया, जो बचा था वो था प्रताप सिंह,

रीवा ने अपनी आँखे बंद क्र ली और घेरि साँस भरी, जैसे उसने अपने जीवन की आखरी साँस भरी हो,

अमिता और सोमिया ने भी एक सकूं भरी साँस ली, उन्हें यही चिंता थी कही प्रताप सिंह के साथ उनकी शादी न हो जाये, अमरावती सौमित्र और काम्य ने पहले hi समझा दिया था की प्रताप सिंह को नहीं चुनना,

अगली सुबह पुरे राजय में चहल पहल थी, सभी राजय के प्रतियोगिता सथल की तरफ चले जा रहे थे, पहले hi अपनी अपनी जगह पैर जाकर बैठ गए थे, राज परिवार के लोग भी वह पहुंचने लगे थे,

सभी लोग आ चुके थे, और जब राजकुमारिया सज धज क्र उस सभा में आई तो सभी राजाओ के अरमान उछलने लगे, ये सबको पता था इस राजय से ज्यादा सूंदर राजकुमारिया पुरे संसार में नहीं ह, वही उनके साथ उनकी माये कड़ी थी, कोई भी उनकी माँ नहीं बोल सकता था, सब एक दूसरे की बहन hi लग रही थी, और उन सबमे सबसे खूबसरूआत औरत थी निहारिका, उसे देख क्र तो हर राजा के दिल की धड़कन hi रुक जा रही थी, सबने नारिका के बारे में सुन रखा था लेकिन आज पहेली बार उसे अपने सामने देखा था, प्रताप सिंह तो बेशर्मो की तरह निहारिका को hi घूरे जा रहा था,

प्रताप सिंह की नजर रीवा पैर पड़ी और उसे पता चला की रीवा निहारिका की बेटी ह तो प्रताप सिंह ने रीवा को hi अपनी पत्नी बनाने का फैसला किया, उसके दिमाग में रीवा के जरिये निहारिका को पाने की इच्छा जग गई थी,

राज गुरु एक ऊँची जगह पैर खड़े हो गए,

राजगुरु- मैं यहाँ आये सभी महेमानो और प्रजा जानो का स्वागत करता हु, और आपके सामने प्रतियोगिता के कुछ नियम बताना छटा हु,

ये प्रतियोगिता चार चरणों में होगी, पहला चरण होगा बूढी का, इसमें सभी राजकुमारों की शाश्त्रो की शिक्षा की परीक्षा होगी, दूसरा चरण होगा युक्ति का, इसमें सभी राजकुमार अपनी युक्ति से समश्याओ का संधान कर्नेगे, और तीसरा चरण होगा सहन शक्ति का, इसमें राजकुमारों की शाहन शक्ति का परीक्षण होगा, और चौथा चरना होगा शक्ति का, इसमें राजकुमारों की युद्ध कला और उनकी शक्ति का परीक्षण होगा,

इन चारो परीक्षणों में से जो भी राजकुमार सबसे ज्यादा चरण पर करेगा वही युवराज होगा,

वह बैठे सभी ने तालियों से स्वागत किया, फिर राजगुरु ने भवर सिंह की अनुमति लेकर प्रतियोगिता का आरम्भ किया,

वह राजय के बड़े बड़े ज्ञानी लोगो को बुलवाया गया था, जो शास्त्रों के बहुत विद्वान् थे, फिर एक एक करके राजकुमारों को बुलवाया गया, और उनकी विद्या का परीक्षण होने लगा,

सबसे पहले आया सूरज उससे सवाल जवाब होने लगे, कुछ देर बाद उसे भेज दिया गया उसके बाद आया ज्वाला उससे भी सवाल जवाब होने लगे, उसके बाद अभिजीत और सबसे आखिर में देव, जब देव से सवाल जवाब शुरू हुए तो ऐसा लगा जैसे सवाल ख़तम hi न हो रहे हो, ये देख सभी आश्चर्य चकित थे, बाकि राजकुमारों से कुछ hi सवाल पूछे गए लेकिन देव से सबसे अधिक सवाल पूछे गए, देव भी जवाब देता रहा, वह लोगो की भीड़ में भौमिक जी और आचार्य जइब hi बैठे हुए थे आचर्य जी के साथ सुगंधा भी थी,

जब चारो राजकुमारों का परीक्षण हो गया तो राजगुरु जी विद्वानों के पास आये और उनसे सभी राजकुमारों के बारे में पूछा, जब विद्वानों ने विजेता का नाम बताया तो खुद राजगुरु भी अचंभित रह गए,

राजगुरु ने अपनी जगह पहुंच क्र विजेता का नाम बोलना शुरू किया,

राजगुरु- इस बूढी के परीक्षण में जो राजकुमार तिरसे स्थान पैर आया ह वो ह ज्वाला सिंह,

लोगो ने तालियों से स्वागत किया लेकिन सौमित्र गुस्से से लाल हो गई, जबकि अमरावती और काम्य खुश हो गई,

राजगुरु- दूसरे स्थान पैर आने वाले राजकुमार हैं सूरज सिंह,

सूरज का नाम दूसरे नंबर पैर सुनकर अमरावती के भी दन्त भींच गए, लेकिन काम्य ख़ुशी से उछाल पड़ी थी, भवर सिंह को भी यकीन नहीं हो रहा था की सूरज दूसरे स्थान पैर आ सकता ह, वो सबसे होशिराय लड़का था,

और जब राजगुरु ने पहले विजेता का नाम बोलै तो पूरा राजय खड़ा हो गया,

राजगुरु- और प्रथम स्थान पैर जो राजकुमार हैं वो हैं देवदूत,

किसी को अपने कानो पैर यकीन hi नहीं हुआ ये क्या हुआ, देवदूत पहले स्थान पैर कैसे आ सकता ह,

राजगुरु- आप सभी ने देखा होगा देवदूत से कुछ ज्यादा hi देर तक सवाल किये गए थे वो इसलिए क्योकि उसने सभी सवालो के जवाब सही दिए, और शास्त्रों के ज्ञानियों ने नियम बनाया था वो तब तक सवाल करेंगे जब तक राजकुमार सही जवाब देते रहेंगे, और उसी हिसाब से विजेता का फैसला होगा, तो इसमें राजकुअंर अभिजीत कुछ hi सवालो के जवाब दे पाए, उसके बाद ज्वाला सिंह और फिर सूरज सिंह, और जब देवदूत की बरी आई तो उसने सभी सवालो के जवाब सही दिए, ज्ञानियों के सवाल ख़तम हो गए लेकिन देवदूत का कोई भी जवाब गलत नहीं हुआ,

राजगुरु की बात सुनकर पूरा राजय आश्चर्या चकित था खुद भवर सिंह भी, वही आचार्य जी गर्व से अपना सर ुचा करे बैठे थे, भौमिक जी भी ख़ुशी से मुस्कुरा रहे थे, निहारिका की आँखों में आंसू थे, वो ख़ुशी से फूली नहीं समां रही थी, लेकिन अगले hi पल उसके चेहरे पैर चिंता के भाव उभर आये, उसकी नजर भवर सिंह पैर गई, भवर सिंह के चेरे पैर खुद गुस्से के भाव थे, निहारिका जानती थी भवर सिंह देवदूत की विजेता देखना पसंद नहीं करेगा,


अब बरी थी अगले चरण की जो था युक्ति, इसमें अपनी युक्ति का प्रदर्शन करना था,
 
अब तक सर्वर ठीक नहीं ह, अगला अपडेट तभी दे पाऊँगी जब सर्वर ठीक हो, पता hi hi चलता संस गे आया नहीं
 
जो प्रॉब्लम सर्वर अब दिखा रहा ह वो कुछ दिन पहले भी दिखा रहा था, और उन दिनों में मेरे पोस्ट किये हुए संस और अपडेट सब डिलीट हो गए थे, इस बार भी वैसा hi हो सकता ह, दुबारा अपडेट देने में बड़ी प्रॉब्लम होती ह,
 
अपडेट-6



अगली प्रतियोगिता से पहले सभी भोजन करने में व्यस्त थे, दूसरे राजयो के राजा राजकुमार यहाँ की राजकुमारियों से बात चित करने में लगे हुए थे, जिसका मौका लगता वो अपना प्रभाव ज़माने में लगा हुआ था, वही प्रताप सिंह निहारिका के आस पास घूम रहा था, वैसे तो सभी का धयान निहारिका पैर hi था लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी, लेकिन प्रताप सिंह को फरक नहीं पद रहा था, उसे बस निहारिका चाहिए थी,

प्रताप सिंह- कैसी हैं महारानी

निहारिका- मैं ठीक हु महाराज, आपको हमारे राजय का स्वागत पसंद तो आया न

प्रताप सिंह- पसंद तो बहुत आया ह, मन करता ह अपने साथ ले जाऊ

निहारिका- जी मैं कुछ समझी नहीं

प्रताप सिंह- मेरा मतलब ह, मन करता ह यही रह जाऊ,

निहारिका- ये तो हमारी खुशकिस्मती ह, हो सकता ह जल्दी hi दोनों परिवारों का सम्बन्ध जुड़ जाये, तो फिर आप यहाँ कभी भी आ सकते हैं,

प्रताप सिंह- मैं भी यही सोच रहा हु, तभी का इंतजार क्र रहा हु,

प्रताप दोहरी बात कर रहा था, जबकि निहारिका सीधे सवभाव में बात कर रही थी, इन दोनों को बात करते हुए भवर सिंह ने देख लिया, भवर सिंह जलन और गुस्से में भड़क गया, और उसमे घी का काम किया काम्य ने,

काम्य- भैया ये निहारिका प्रताप सिंह के आस पास कुछ ज्यादा hi घूम रही ह, प्रताप सिंह को तो आप जानते hi हैं वो कैसा इंसान ह, अगर उसकी नजर आपकी पत्नी पैर पद गई तो वो कुछ भी कर जायेगा, और ये निहारिका उसके साथ hi है है क्र बात कर रही ह, कही कोई योजना तू नहीं बना रही ये,

भवर सिंह गुस्से में निहारिका की तरफ गया, भवर सिंह को उस तरफ आता देख नजाने प्रताप सिंह को क्या हुआ वो वह से हैट गया, भवर सिंह का गुस्सा और बढ़ गया, उसके दिमाग में शक पैदा हो गया, वो निहारिका के पास पंहुचा

भवर सिंह- निहारिका ये प्रताप सिंह तुम्हारे पास क्या कर रहा था,

निहारिका- कुछ नहीं महाराज, बस यहाँ की तारीफ क्र रहा था,

भवर सिंह- तुम्हे बड़ी ख़ुशी हो रही थी तारीफ सुनकर

निहारिका- हमारे महेमान खुश हैं इसमें हमे तो खुश होना चाहिए न,

भवर सिंह ज्यादा बात कर पता तब तक काम्य वह आ गई, और भवर सिंह को प्रतियोगिता की बात करने के लिए ले गई,

निहारिका असमंजस सी में कड़ी रह गई,

चारो राजकुमारों को अभी तक किसी से मिलने की अनुमति नहीं थी, वो अगली प्रतियोगिता के इन्तेजार में थे, तीनो भाइयो को तो पता था अगली प्रतियोगिता क्या ह, उन तीनो के चेरे पैर चिंता साफ़ दिख रही थी, लेकिन देव आराम से बैठा हुआ था, उसे दर hi नहीं था क्या होने वाला ह,

कुछ देर बाद राजगुरु ने सन्देश भेज दिया की चारो राजकुमार तैयार रहे प्रतियोगिता शुरू होने वाली ह,

राजगुरु ने फिर से सबका धयान अपनी तरफ किया, और अगली प्रतियोगिता के बारे में बताया जो थी युक्ति मतलब चालाकी.

तीनो राजकुमार एक एक करके मैदान में गए और अपनी प्रतियोगिता खेल क्र बहार आ गए, उसके बाद गया देव सबसे आखिर में, वो जैसे मैदान में पाहकः और अपने चारो तरफ देखा तो देव एक दम घबरा गया क्योकि उनके सामने 5 जानवर खड़े थे, एक था शेर दूसरी तरफ था मगरमछ तीसरी तरफ था घोडा और चौथी तरफ था हठी, और बिच में थी 1 बकरी, चारो जनवाओ के पीछे थे दरवाजे, राजकुमार को अपनी बूढी के बल पैर वह से बहार निकलना था,

मैदान ुचि ुचि दीवारों से घिरा हुआ था वह से बहार निकलना आसान नहीं था, उनके उप्पेर लोग बैठे हुए देख रहे थे,

राजगुरु ने सभी को प्रतियोगिता के बारे में बता दिया,

सूरज ज्वाला और अभिजीत को तो पता था वह क्या होना ह, इसलिए वो तीनो पहले से तैयारी करके वह गए थे इस हिसाब से बहार निकल गए, लेकिन देव को कोई जानकारी नहीं थी, वो कुछ देर खड़ा रहा, फिर वो घोड़े की तरफ गया लेकिन घोडा ने उसके करीब आते hi उछलना शुरू क्र दिया, देव समझगया ये जंगली घोडा ह सवारी नहीं करने देगा, और रस्ते से हटेगा भी नहीं, हठी को अपनी जगह से हटाना भी आसान नहीं था, मगरमछ और शेर के तो पास जाना भी नामुमकिन था,

देव बकरी के पास गया और बकरी को खोल लिया, सभी को समझ आ गया की क्या होने वाला ह क्योकि इससे पहले तीनो राजकुमारों ने भी यही किया था, सूरज ने बकरी को खोला और मगरमछ के पास ले गया, मगरमछ के सामने बकरी को कर दिया मगरमछ बकरी की तरफ बछड़ा तो सूरज ने मगरमछ को खोल दिया और खुद उसके पीछे से निकल गया,

वही ज्वाला ने खुद को बहादुर दिखने के लिए बकरी को शेर के सामने डाला और शेर को खोल दिया और खुद दरवाजे से निकल गया, अभिजीत ने भी बकरी को मगरमछ के सामने डाला और वह से निकल गया,

नियम ये था की बिना जवार को खोले दरवाजे से बहार नहीं निकल सकते थे,

जब देव ने बकरी को खोला तो सब समझ गए की देव भी यही करेगा क्योकि तर्क भी ये hi था, लेकिन देव ने बकरी को मगरमछ के पास नहीं किया उससे थोड़ा दूर रखा, मगराच बकरी की तरफ बढ़ा तो देव ने पीछे से जाकर मगरमछ को खोल दिया, मगरमछ तेजी से बकरी की तरफ गया लेकिन देव उससे पहले दौड़ क्र बकरी के पास पहुंच गया और बकरी जो दर क्र भागने लगी थी उसे पकड़ लिया और मगरमछ से दूर ले गया, मगरमछ ने देव के पीछा किया लेकिन देव उससे दूर भाग रहा था, देव को मौका मिल गया की बहार निकलने का वो जैसे hi बकरी को लेकर दरवाजे पैर पंहुचा तो उसने देखा मगरमछ घोड़े की तरफ जा रहा ह, और घोडा बंधा हुआ, वो अपनी जान बचने के लिए बस अपनी जगह पैर कूद सकता ह, और मगरमछ आजाद ह,

देव एक पल के लिए रुका और दरवाजा खोल क्र बकरी को बहार भगा दिया और खुद वापस आ गया, सभी लोग ाश्चरा से देखने लगे, लेकिन भौमिक जी के चेरे पैर एक मुस्कान थी, उन्होंने गर्व से इधर उधर देखा,

देव दौड़ता हुआ घोड़े के नजदीक पंहुचा, घोडा डरा हुआ था, वो किसी को नजदीन नहीं आने दे रहा था, देव घोड़े के नजदीक पाहकः घोडा दर क्र पीछे हुआ तभी वह मगरमछ भी आ गया, देव ने तुरंत घोड़े की राशि खोल दी, जिससे घोडा उछलता हुआ भगा, मगरमछ देव की तरफ भगा लेकिन देव जल्दी से घोड़े की रस्सी पकड़ क्र उसके साथ भागने लगा, मगरमछ जैसे hi मुद क्र उनके पीछे गया देव ने रस्सी छोड़ी और दरवाजे की तरफ भगा और दरवाजा खोल दिया, और खड़ा हो गया,

सभी लोगो को लगा देव अब बहार आ जायेगा लेकिन वो खड़ा रहा, दरवाजा खुला देख घोडा भी उसकी तरफ आ गया देव ने उसे भी बहार निकल दिया और खुद दरवाजे से बहार निकल क्र दरवाजा बंद क्र दिया,

सभी ने तालिया बजा क्र देव क बहादुरी का स्वागत किया,

प्रतियोगिता समाप्त हो चुकी थी, राजगुरु फिर से अपनी जगह पहुंच गए,

राज गुरु – इस प्रतियोगिता में भी चारो राजकुमार सफल रहे, लेकिन तीनो राजकुमारों ने जो अपनी जान बचन के लिए किया उससे दो जाने चली गई,

तीनो राजकुमार चौंक गए, 2 जाने कैसे,

राजगुरु- उन्होंने बकरी का सहारा लेकर मगर को खोल दिया, जो बकरी के बाद सीधा घोड़े के पास जायेगा और कुछ देर घोडा खुद को बचा सकता ह लेकिन जल्दी hi मगर का शिकार हो जायेगा, लेकिन देवदूत ने अपनी बूढी और बहादुरी से अपने साथ साथ बाकि दोनों जाने भी बचा ली, उस बकरी की भी जो केवल वह राजकुमार की रक्षा के लिए बंधी थी और उस घोड़े की भी,

यही एक सच्चे योद्धा और राजा की पहचान होती ह जो अपनी जान से पहले बेजुबानो और परजा की सोचे,

प्रताप सिंह बिच में बोल पड़ा,

प्रताप सिंह- राजगुरु वो मगर खुला हुआ ह, वो उस हठी और शेर को भी तो खा सकता ह,

राजगुरु- इस हिसाब से तो तीनो राजकुमारों ने 4 जाने ले ली, लेकिन ऐसा नहीं ह, शायद उन तीनो राजकुअंरो ने ऐसा न सोचा हो की कोण जियेगा कोण मरेगा लेकिन देवदूत ने ऐसा सोचा, क्योकि मगर हठी से नहीं लड़ सकता, हठी उसे मर देगा और शेर से तो खुद हठी भी नहीं लड़ता, मगर शेर के पास जायेगा भी नहीं क्योकि ये पानी नहीं ह, पानी के अंदर मगर उन दोनों पैर हुम्ला कर सकता था लेकिन खुले मैदान में नहीं,

राजगुरु की बात पैर तालियों की गड़गड़ाहट होने लगी, खुद भवर सिंह ताली बजने से नहीं रह सका, लेकिन अमरावती सौमित्र काम्य सूरज ज्वाला और अभिजीत गुस्से में पागल हुए जा रहे थे,

राजगुरु खुद हैरत में थे, ये क्या हो गया, ये कैसे हो सकता ह, भौमिक जी राजगुरु के पास आये,

भौमिक जी- क्या हुआ भैया आप चिंतित हैं,

राजगुरु- ये सही नहीं हो रहा ह, इस लड़के को बचपन से कुछ नहीं सिखाया गया, बस विद्या दी गई ह बाकि कुछ नहीं फिर भी ये सबसे आगे ह,

भौमिक जी- आप शायद भूल रहे हैं विद्या से ज्यादा शक्तिशाली कुछ नहीं होता, हर मुश्किल का जवाब होता ह विद्या में,

राजगुरु- अगर ये जीत गया तो अनर्थ हो जायेगा,

भौमिक जी- ऐसा क्यों भैया आप कुछ छुपा रहे हैं मुझसे, आप इस लड़के से इतना डरते क्यों हैं, इतना मासूम ह ये लड़का,

राजगुरु- उधर देखो, (राजगुरु ने अमरावती सौमित्र और काम्य की तरफ इशारा किया,) वो तीनो अपने अपने बेटे को युवराज बनाना चाह्हती हैं, इसके लिए उन्होंने इस प्रतियोगिता के सरे चरण पहले hi पता कर लिए थे, फिर भी उनके बेटे हार रहे हैं, वो तीनो साजिसों की महारानी हैं, अगर उनके बेटे युवराज नहीं बने तो वो सब तबाह कर सकती हैं,

भौमिक जी- उनके दर से किसी गलत इंसान को युवराज बना देंगे आप

राजगुरु- तुम्हे क्या लगता ह भवर सिंह अच्छा इंसान ह, नहीं वो बहुत बुरा ह लेकिन हमारा धरम राजय को बचाना ह, मैं किसी तरह से इस राजय को बचता आ रहा हु, लेकिन अब साजिशे बहुत बढ़ गई हैं, और जैसा मैं देख रहा हु एक विध्वंश आ रहा ह इस राजय की तरफ, मुझे दर ह कही ये वही समय न हो, अगर देवदूत युवराज बना तो ये लोग उसे मरवा देंगी, और साथ में निहारिका को भी, जो होता दिख रहा ह,

भौमिक जी- इसीलिए उन दोनों की कुंडली में कुछ नहीं दीखता क्योकि उनकी जीवन रेखा hi नहीं ह,

राजगुरु- लेकिन मैंने उनकी मृत्यु नहीं देखि, उनकी कुंडली में उनकी मृत्यु का कोई योग नहीं बनता, ऐसा लगता ह जैसे उनकी कुंडली कोई और hi अपने हिसाब से लिख रहा ह,

भौमिक जी- भैया इस संसार में कितना भी ज्ञान आ जाये लेकिन कोई भगवान् के फैसलों को नहीं समझ सकता, शायद ये hi नियति हो, जो हो रहा ह होने दीजिये, बिच में बढ़ा मत बनिए,

राजगुरु- मैं नहीं चाहता इस लड़के को कुछ हो, लेकिन इससे इस राजय का विध्वंश जुड़ा हुआ ह,

तभी वह भवर सिंह आ गए, राजगुरु ने भौमिक जी को वह से भेज दिया,

भवर सिंह- राजगुरु देवदूत ने ये सब कैसे क्र लिया, हमारी उम्मीद के परे ये कैसे हो गया, क्या वो युवराज बन जायेगा, क्या वही होने जा रहा ह जिसका दर था,

राजगुरु- मुझे नहीं पता महाराज, लेकिन कुछ ठीक नहीं लग रहा, वैसे अभी दो प्रतियोगिता बची हुई हैं, अगर बाकि राजकुमारों में से कोई उन दोनों में जीत जाता ह, और देवदूत हर जाता ह तो ऐसा कुछ नहीं होगा,

भवर सिंह- वो हारना चाहिए राजगुरु,

रात में महल के कमरों में बहुत से लोग अलग अलग जगह एक hi बात पैर चर्चा कर रहे थे, की देव ने ये सब कैसे किया,

अमरावती- सूरज तू कैसे हर सकता ह,

सूरज- माँ मैं तो वही कर रहा हु जिसकी तैयारी की थी लेकिन वो हरामखोर देवदूत न जाने कैसे कुछ नै तरकीब लगा रहा ह,

अमरावती- वो युवराज नहीं बनना चाहिए, अगर वो युवराज बना तो सब तबाह हो जायेगा,

सूरज- तबाह हो जायेगा, कैसे तबाह हो जायेगा.

अमरावती- तू ये सब छोड़ बस किसी तरह उसे हरा

सूरज- आप चिंता मत कीजिये, मैंने सब इंतजाम किये हुए हैं,

वही काम्य अपने कमरे में थी अभिजीत के साथ

काम्य- मैं इस देवदूत को बर्बाद कर दूंगी, इसका ऐसा हशर करुँगी ये अपनी मोत के लिए तड़पेगा,

अभिजीत- माँ वो ये सब कैसे कर गया, मुझे यकीन नहीं हो रहा

काम्य- चुप हो जा तू नालायक, तू हमेषा अयाशी में hi लगा रहे, वो सूरज भी तुझसे जीत गया, कभी ठीक से अपने गुरु की बातो पैर धयान दिया होता तो आज ये हार न देखनी पड़ती,

अभिजीत चुप हो गया, काम्य गुस्से में इधर उधर घूमने लगी,

सौमित्र अपने कमरे में- अब वक़्त आ गया ह,

ज्वाला- कैसा वक़्त माँ,

सौमित्र- सब पता चल जायेगा, बहुत समय से इंतजार था मुझे इस समय का,

ज्वाला- क्या होने वाला ह माँ

सौमित्र- विनाश

इधर चारो राजकुमारिया एक hi कमरे में बैठी हुई थी,

अक्षरा- आज तो देव ने कमल hi कर दिया, दोनों प्रतियोगिता में विजेता रहा, किसी को उम्मीद नहीं थी वो ऐसा कर पायेगा,

रीवा- सही बोल रही ह, मैंने कभी सोचा भी नहीं था देव के पास इतनी बूढी ह, बिलकुल नासमझ सा लगता ह, लेकिन देखो आज कैसा कारनामा कर दिखाया,

अमिता- सच में यार आज तो कमल hi क्र दिया उसने, सूरज को भी हरा दिया,

सोमिया- मुझे कुछ अच्छा सा महसूस नहीं हो रहा दिल बहुत घबरा रहा ह, जिस लड़के से मेरी शादी की बात हो रही ह मुझे उसकी हरकते अच्छी नहीं लग रही,

अक्षरा- ये सभी राजा राजकुमार एक जैसे hi होते हैं, सभी कितनी गन्दी तरीके से देख रहे थे हमे,

रीवा- और वो प्रताप सिंह, मुझे तो उससे दर लग रहा ह,

अमिता- मुझे मर्दो की नजरे अच्छी लगती थी लेकिन आज ऐसा लग रहा था जैसे मैं एक नुमाइश की चीज हु, मुझे पता ह मुझे किसके गले में वरमाला डालनी ह फिर भी मैं लोगो के लिए तमशा सा बानी हुई थी,

रीवा- आज जो भी हो रहा था उसमे एक बात तो समझ आई गई की हम लड़किया खुद को कितना भी ताकतवर दिखा दे लेकिन हम बस इन मर्दो के लिए उन्हें खुश करने और राजनीती करने का सामान हैं, आज किसी की नजरो में छुपी अच्छे का अहसास हो रहा ह, साफ़ नजरे कितना सकूं दे सकती हैं,

सोमिया - किसकी बात कर ह्री हो तुम

अक्षरा- सिर्फ एक hi ह जिसकी नजरो में हमेशा सच्चाई और सफाई देखि ह, वो ह देव, क्यों रीवा सही कहा न

रीवा- है सही कहा, सूरज ज्वाला और अभिजीत की नजरो में भी मैंने खुद के लिए गन्दगी हवस देखि ह, लेकिन देव की नजरो में कभी किसी के लिए कुछ गलत नहीं देखा,

चारो बहेनो ने जब समाज का असली चेरा देखा तो उन्हें देव की अच्छे का अनुभव हुआ, दुनिया में हर औरत ताकतवर की तरफ आकर्षित होती ह, लेकिन जब उसे जीवन साथी चुनना होता ह तो वो हमेषा अच्छा और सच्चा इंसान hi ढूंढ़ती ह, और अब वो अपने पति के रूप में देव जैसी अच्छे वाला इंसान ढूंढ रही थी, लेकिन देव तो अकेला था इस दुनिया में और वो भी उनका भाई था,

इधर देव निहारिका के पास बैठा हुआ था,

निहारिका- आज तूने मेरा सर गर्व से ुचा कर दिया बीटा,

देव- मैंने कुछ नहीं किया माँ, मैं तो वही कर रहा था जो आपसे सीखा ह, ये सब ज्ञान मुझे आपसे hi तो मिला ह, आचार्य जी के बाद आपने hi मुझे सब सिखाया ह,

निहारिका- लेकिन तेरे जितने से कोई खुश नहीं ह, अगर तू बाकि दो प्रतियोगिता भी जीत गया तो

देव- तो क्या मैं खुद युवराज बनने से मन कर दूंगा, मैं तो बस आपके सम्मान के लिए ये प्रतियोगिता खेल रहा हु, आज मैंने सबकी नजरो में सम्मान देखा माँ, बस वही सम्मान चाहिए मुझे, इससे ज्यादा मई कुछ नहीं छठा,

निहारिका ने देव को गले से लगा लिया,

अगली सुबह सभी वैसे hi मैदान में पहुंच गए, राजगुरु जी अपनी जगह खड़े थे, सभी का स्वागत किया गया, प्रताप सिंह वह आते hi निहारिका को ढूंढ़ने लगा, निहारिका सबसे पीछे बैठी थी, प्रताप सिंह की नजर बार बार निहारिका पैर जा रही थी, काम्य ने भवर सिंह का धयान प्रताप सिंह पैर करवाया,

भवर सिंह का माथा फिर से चढ़ गया था, वो खुद निहारिका के पास नहीं जाता था लेकिन कोई और उसे देख ले ये उसे बर्दास्त नहीं था,

राजगुरु ने प्रतियोगिता की शुरुआत करवाई, ये प्रतियोगिता थी शहन्शक्ति की, इसमें चारो राजकुमारों को एक hi जगह पैर खड़े रहना था, जमीन में चार लकड़ी की बल्लिया गाड़ी हुई थी, जिन्हे पकड़ क्र खड़ा होना था, और जब तक कोई एक न रह जाये तब तक खड़े रहना था, तब तक न भोजन मिलेगा न hi पानी, वो कितने समय तक खड़े रह सकते थे, और वह आने वाली समश्याओ को कब तक झेल सकते थे, और किसी को बैठने की भी अनुमति नहीं थी,

चारो राजकुमार वह आ गए और अपनी अपनी जगह पैर खड़े हो गए, चारो नंगे पेअर थे, निचे राइट थी, कुछ देर तो सब आराम से खड़े रहे लेकिन एक जगह पैर खड़े रहना आसान काम नहीं था, जैसे जैसे गर्मी बढ़ने लगी, पानी की प्यास भी बढ़ने लगी, निचे से राइट गरम होने लगी थी, और उसमे जो चीटिया घूम रही थी वो राजकुमारों के शरीर पैर चढ़ने लगी थी, पैरो में दर्द होने लगा था, बाकि सब लोग आराम से बैठे थे भोजन कर रहे थे, वही प्रताप सिंह निहारिका के आस पास hi घूम रहा था, जिससे भवर सिंह गुस्से में आग बबूला हो रहा था,

काम्य भवर सिंह के आस पास hi घूम रही थी, वो बार बार भवर सिंह को प्रताप सिंह और निहारिका के बारे में भड़का रही थी,

काम्य- भैया ये औरत आपकी इज्जत पैर दाग लगवायेगी,

भवर सिंह- काम्य इसे यहाँ से ले जाओ,

काम्य- यहाँ से ले जाने से इसका क्या होगा, ये इस राजय में hi रहने लायक नहीं ह,

भवर सिंह- फ़िलहाल इसे ले जाओ, और मुझे लगता ह इस प्रताप सिंह के मुझे अपनी बेटी की शादी नहीं करनी छाइये,

काम्य- भैया प्रताप सिंह से दुश्मनी हमारे लिए ठीक नहीं ह, इस निहारिका की वजह से हम उससे दुश्मनी क्यों ले,

भवर सिंह चुप हो गया,

काम्य- मुझे कुछ साजिश का दर लग रहा ह

भवर सिंह – कैसी साजिश

काम्य- इधर ये निहारिका प्रताप सिंह से याराना बढ़ा रही ह, और उधर इसका बीटा देवदूत जिसे कोई ज्ञान नहीं था, कोई युद्ध कला नहीं सिखाई गई वो कितने आराम से प्रतियोगिता जीत रहा ह, कही ये सब इस निहारिका ने प्रताप सिंह के साथ मिलकर हमारे आदमियों को धन का लालच देकर प्रतियोगिता के बारे उस देवदूत को पहले से hi सब तो नहीं बता दिया, इसलिए वो जीत रहा ह,

भवर सिंह के दिमाग में चिंता उभरने लगे,

काम्य इतना बोल क्र वह से निकल गई, बहवर सिंह का धयान देव पैर गया जो बड़ी hi शांति से मैदान में खड़ा था, जबकि बाकि तीनो राजकुमारों को बड़ी तकलीफ हो रही थी, निचे गरम राइट पेअर जला रही थी, उप्पेर से कड़ी धुप शरीर जला रही थी, शरीर पैर चीटिया रेंग रही थी, भूक और प्यास से तकलीफ बढ़ रही थी, और शाम होते होते सबसे पहले सूरज ने हार मान ली उसके बाद ज्वाला ने फिर अभिजीत ने, और देव आखिर तक मैदान में खड़ा रहा,

राजगुरु ने देव को विजेता घोषित किया, पूरा राजय अचंभित था, जिसे सबसे कमजोर समझा जा रहा था उसने तीनो राजकुमारों को हरा दिया था, पूरा राजय ख़ुशी से तालिया बजा रहा था, जबकि अमरावती सोमिता और काम्य गुस्से में मरी जा रही थी, बावर सिंह भी चिंतित थे,

रात में चारो राजकुमारों का इलाज किया जा रहा था, देव की हालत भी काफी ख़राब हो गई थी, लेकिन वो सहन क्र रहा था और यही इस प्रतियोगिता का नियम था कोण ज्यादा सहन कर सकता ह,

रात में अमरावती सौमित्र और काम्य के कमरे में भूचाल आया हुआ था, वो चीजे इधर उधर फेंक रही थी,

अमरावती के कमरे में

सूरज- माँ शांत हो जाइये, हमारे पास मौका ह, कल शक्ति प्रदर्शन होगा, और आप जानती ह मुझसे ताकतवर यहाँ कोई नहीं ह,

अमरावती- तू नहीं समझता बेटे, वो देवदूत युवराज नहीं बनना चाहिए,

सूरज- माँ वो युवराज नहीं बनेगा, लेकिन आप इतना परेशां क्यों हो उससे, वो हमारा क्या बिगड़ लेगा,

अमरावती- मैं पिछले 19 सालो से इसी दर में हु की क्या होगा,

सूरज- मैं समझा नहीं माँ

अमरावती- जब जब इस इस महल में किसी लड़के ने जनम लिया ह, मैंने अपने एक प्रोहित से सबकी जनम कुंडली दिखाई ह, और जब ज्वाला पैदा हुआ था तो उसके भाग्य में न युवराज पद ह न hi राजा बनना लिखा था, फिर ये अभिजीत पैदा हुआ तो उसकी कुंडली में भी वही था, लेकिन जब ये देवदूत पैदा हुआ तो प्रोहित जी भी घबरा गए थे, उन्होंने कहा था इसका जनम बहुत hi विशेष कार्य के लिए हुआ ह, इसके भाग्य में राजा बनना लिखा ह, जब ये राजा बनेगा तो इससे बड़ा कोई राजा नहीं हो सकेगा,

सूरज- हम इसे राजा बनने hi नहीं देंगे,

अमरावती- जब यहाँ के राजगुरु ने इसकी कुंडली देखि तो उन्होंने कहा था ये राजा भवर सिंह के लिए जीवन में विध्वंश लाएगा, उनके हिसाब से ये कभी राजा नहीं बनेगा,

सूरज- दो भाग्य कैसे हो सकते हैं,

अमरावती- इन दोनों की बातो में एक खास बात थी,

सूरज- वो क्या

अमरावती- जो भी होगा वो इसकी 18 से 19 साल की उम्र के बिच में होगा,

सूरज- और ये उसी उम्र में ह इस वक़्त,

अमरवती- है

सूरज- आप चिंता मत करो, ये शादी होने दो मैं इसे रस्ते से हटा दूंगा, मैंने सब योजना बनाई हुई हैं,

वही दूसरे कमरे में सौमित्र और ज्वाला भी इसी मुद्दे पैर बात क्र रहे थे,

ज्वाला- मैं इस देवदूत को जान से मार दूंगा,

सौमित्र- इसे मरना hi होगा, वर्ण इसके लिए जो भविष्यवाणी हुई थी वो सच हो जाएगी,

ज्वाला- कोनसी भविष्यवाणी माँ

सौमित्र- मेरे पिता के राजगुरु ने देव के लिए भयव्या वाणी की थी की ये बहुत बड़ा योद्धा बनेगा, इससे जीत पाना नामुमकिन होगा, इसलिए मैंने महाराज को भेला फुसला क्र इसे कभी युद्ध कला hi सिखने नहीं दी, लेकिन ये बिना कुछ सीखे hi प्रतियोगिता जीत रहा ह, उन्होंने कहा था अगर इसे 18 से 19 साल के बिच तक रोक दिया तो ठीक वर्ण ये नहीं रुकेगा,

और हमारे राजगुरु बोलते हैं ह ये महाराज के लिए ठीक नहीं ह,

ज्वाला- मैं इसे कल hi मार दूंगा, इसका अंत निकट आ चुक्का ह, मैं इसे कुछ बनने hi नहीं दूंगा,

इधर काम्य भी इसी उधेड़ बन में लगी हुई थी,

काम्य- अभिजीत अगर तुझे राजा बनना ह तो सबसे पहले इस देव को रस्ते से हटाना होगा,

अभिजीत- माँ उसका दर नहीं ह वो तो डरपोक ह, सूरज और ज्वाला हमारे रस्ते में आएंगे, देव प्रतियोगिता जित क्र भी कुछ नहीं कर सकेगा,

काम्य- तू नहीं जनता बीटा, ये लड़का जैसा दीखता ह वैसा ह नहीं, इसके अंदर कुछ अलग hi ह, हमारे पास एक hi मौका होगा इसे रस्ते से हटाने का, अगर वो मौका हाथ से निकल गया तो सब बर्बाद हो जायेगा

अभिजीत- कैसा मौका

काम्य- जब ये पैदा हुआ था तो मैंने इसकी कुंडली एक तांत्रिक से दिखवाई थी, उसने बताया था की अगर लड़का जिन्दा रहा तो सब कुछ तहस नहस कर देगा, 18 साल से 19 साल के बिच में अगर इसे मार दिया तो ठीक वर्ण इसे कोई नहीं मार पायेगा, इसकी मृत्यु सिर्फ 18 से 19 साल के बिच में हो सकती ह, न उससे पहले और न उसके बाद,

अभिजीत- ऐसा कैसे हो सकता ह, एक इंसान hi तो ह जब चाहो मर दो,

काम्य- मैं पिछले 18 सालो से इसे मरने की कोशिश कर रही हु, इसके खाने में लगातार थोड़ा थोड़ा जहर मिलती आ रही हु ताकि ये बीमार होकर मर जाये और किसी को शक न हो, ये आज तक बीमार भी नहीं पड़ा, मैंने बहुत बार इसे मरने की कोशिश की ह लेकिन मार नहीं पाई, लेकिन अब जो हालत चल रहे हैं उस हिसाब से ऐसा लग रहा ह वो समय आ गया ह, यही समय ह जब इसे मरना सही होगा, वर्ण ये हम सबको तबाह कर देगा,

ऐसी hi चर्चा भवर सिंह और राजगुरु के बिच भी चल रही थी,

भवर सिंह- क्या लगता ह राज गुरु

राजगुरु- महाराज मुझे लगता ह समय आ गया ह,

भवर सिंह- लेकिन मैं ये सब करूँगा कैसे


राजगुरु- कुछ तो करना hi होगा,
 
अपडेट-7






सुबह सुबह निहारिका ने देव को उठाया और उसे तैयार क्र रही थी,

देव- माँ आज शक्ति का परीक्षण ह, और तीनो भाई मुझसे बहुत ज्यादा शक्तिशाली हैं,

निहारिका- तो कुआ हुआ, तूने अपने लिए वो सम्मान सबकी नजरो में कमा लिया ह, वैसे भी तुझे युवराज नहीं बनना ह,

देव- माँ अगर मैं गलती से जीत गया तो क्या होगा,

निहारिका- वो तुझे युवराज नहीं बनाएंगे, लेकिन अगर तू जीत गया तो वो मजबूर हो जायेंगे युवराज बनाना के लिए, और फैसला तेरे हाथ में होगा तू युवराज बनना चाहता ह या नहीं,

देव- मैं मन कर दूंगा, मुझे युवराज नहीं बनना

निहारिका- वो खुद चाहते हैं तू मन कर दे, वो तुझे युवराज पद छोड़ने के बदले कुछ न कुछ लालच देंगे, अगर ऐसा होता ह तो तू एक चीज मांग लेना,

देव- क्या माँ

निहारिका- अपने मां को,

निहारिका की बात पैर देव चौंक गया उसकी समझ में नहीं आया, उसकी माँ उसे क्या कहना चाहती ह, देव पूछने hi वाला था की रीवा वह आ गई, उसका चेरा बहुत उदास था, आँखे सूजी हुई थी जैसे पूरी रात सोइ hi न हो, वो सीधे निहारिका के गले से लग गई,

निहारिका और देव दोनों चौंक गए, क्योकि रीवा कभी ऐसा नहीं करती थी, निहारिका ने रीवा के सर पैर हाथ फिराया, निहारिका समझ गई की आज उस मन बहुत परेशां ह इसीलिए वो माँ की बहो में आई ह,

निहारिका- क्या हुआ बेटी, बहुत परेशां लग रही ह,

रीवा- माँ यहाँ से कही चलो, मुझे यहाँ नहीं रहना

निहारिका का दिल ख़ुशी से भर आया, आज पहेली बार रीवा ने अपनी माँ पैर कुछ विश्वास दिखाया था,

निहारिका- क्या हुआ किसी ने कुछ कहा ह क्या,

रीवा- माँ यहाँ कोई अपना नहीं ह

निहारिका- बेटी राजमहलो में कोई अपना नहीं होता सब मतलबी होते हैं, बस राजपथ के चक्कर में होते हैं, पैर तुझे किसने क्या कहा

रीवा- माँ मुझे उस प्रताप सिंह से शादी नहीं करनी, वो इंसान नहीं जानवर ह, औरतो की इज्जत बिलकुल नहीं करता, मैंने उसके बारे में सुना ह वो औरतो को अपना गुलाम बना क्र रखता ह, जानवरो की तरह बांध क्र रखता ह,

निहारिका- वो अपनी पत्नियों के साथ ऐसा नहीं करेगा, और तू भवर सिंह की बेटी ह तेरे बारे में ऐसा सोच भी नहीं सकता, क्या तुझे उसकी दूसरी रानियों की वजह से तकलीफ तो नहीं हो रही,

रीवा- माँ राजा की कई रनिया होती ह मैं ये बात समझती हु, लेकिन केवल रानियों की hi तो इज्जत नहीं होती, संसार में हर औरत सम्मान की हक्क्दर ह, अगर वो संसार में औरतो का सम्मान नहीं करता तो भविष्य में मेरा या आपका सम्मान कैसे करेगा, और मैंने उसकी नजरे देखि हैं आपके लिए, वो आपको बहुत गंदे तरीके से देखता ह,

निहारिका- मैं जानती हु बेटी, यहाँ जीतनेय भी लोग आये हैं उन सबकी नजर मुझ पैर रहती ह लेकिन मैं मजबूर हु, राजय में इतना बड़ा उत्सव ह उस वजह से मैं यहाँ सबके सामने है क्र बात करती हु,

रीवा- आपने कैसे जिया ये जीवन, पिता जी आपको न तो प्यार करते हैं और न hi सम्मान देते हैं फिर भी आप यहाँ ह क्यों, मैं तो अभी से तकलीफ महसूस क्र रही हु,

बिना सम्मान कैसे जिया जाता ह, मुझसे नहीं होगा,

देव- आप मन कर दो,

रीवा और निहारिका ने देव को देखा,

रीवा- तुझे नहीं पता, ऐसे कैसे मन कर सकती हु, पिता जी नाराज हो जायेंगे,

देव- उनकी नाराजगी की वजह से हमारी माँ ने अपनी साडी जिंदगी उदासी और दुःख में काट दी, अब आप भी वही करने जा रही हैं,

रीवा- तुझे कुछ नहीं पता, राजमहलों में ऐसा hi होता ह,

देव- ऐसा केवल अच्छे लोगो के साथ होता ह, ये सब महारानी अमरावती और सौमित्र के साथ क्यों नहीं हो रहा, और काम्य बुआ वो तो कभी अपने राजय में भी नहीं गई, उन्हें तो बहुत सम्मान मिलता ह, ये सब बस हमारे hi साथ क्यों ह,

रीवा- उसका कारन भी तू ह

निहारिका गुस्से में- रीवा क्या बकवास ह ये,

रीवा- बकवास क्या ह माँ, जब से ये पैदा हुआ ह तभी से तो पिता जी ने आपके पास आना बंद किया था, वर्ण उन्होंने सबसे बगावत करके आपसे शादी की थी, वो आपको पाने के लिए इतने पागल थे की उन्होंने राजगुरु की भी नहीं सुनी, फिर एक दम से क्या हुआ की उन्होंने आपको देखना तक बंद क्र दिया, पुरे संसार में आज भी आपसे सूंदर कोई नहीं ह, फिर क्यों हुआ ये सब, इसके पैदा होने के बाद hi हुआ ह न

रीवा की बात सुनकर देव का मुँह खुला रह गया,

निहारिका- तुम्हारे पिता क्या हैं ये तुम नहीं जानती, वो क्या छाते हैं और क्या करते हैं तुम सोच भी नहीं सकती,

रीवा- वो इसके पैदा होने के बाद hi तो ऐसे हुए हैं

निहारिका- वो कब कैसे थे मैं जानती हु, तू कुछ नहीं जानती,

रीवा- मुझे नहीं पता मैं क्या बोले जा रही हु, मेरा दम घुट रहा ह, मैं अपने होश में नहीं हु,

देव- आप क्या छाती हो,

रीवा- मैं उस प्रताप सिंह से शादी करना नहीं चाहती,

देव- ऐसा hi होगा, अगर मैं आज जीत गया तो युवराज पद को ठुकरा दूंगा और उसके बदले महाराज से आपकी आजादी मांग लूंगा,

देव की बात से रीवा और निहारिका दोनों स्तब्ध रह गए,

रीवा को यकीन hi नहीं हुआ की देव उसके लिए इतना बड़ा त्याग करने के लिए तैयार ह, वो देव जिसे उसने कभी प्यार देना तो दूर ठीक से बात तक नहीं की, हमेशा उसे कोसा ह, बुरा भला hi कहा ह, उसे अपमानित किया ह, वो भाई उसके लिए,

वही निहारिका को घबराहट होने लगी, पहला तो ये की वो जानती थी भवर सिंह इस बात के लिए कभी नहीं मानेगा दूसरा निहारिका कुछ और hi मंगवाना चाहती थी,

लेकिन जब निहारिका ने देखा की रीवा ख़ुशी से रो पड़ी ह और उसने देव को गले से लगा लिया तो वो वह चुप रह गई, आज पहेली बार रीवा ने देव को अपने गले से लगाया था, देव की आँखों से भी आंसू बहे जा रहे थे, लेकिन एक और अहसास उसके अंदर उभर आया था वो था कामुकता का, जब रीवा के शैतान देव की छाती पैर लगे तो देव के अंदर कामुकता उभर आई, ये पहेली बार था जब रीवा देव के नजदीक आई थी, दोनों के बिच ये बहुत hi अजीब पल था, और भौमिक जी का शाप देव पैर पूरा प्रभाव दाल रहा था, उसके दिमाग में कामुकता हो या न हो लेकिन उसका शरीर के अंदर कामुकता के भाव तुरंत आने लगे,

देव ने जल्दी से रीवा को अलग किया

देव- आप हिम्मत रखना, मैं सब ठीक क्र दूंगा,

यहाँ ये तीनो अपने दुःख को एक दूसरे के सामने रख रहे थे वही पूरा राज महल देव के खिलाफ साजिश कर रहा था, हर एक कमरे में बस देव के खिलाफ hi साजिश चल रही थी, कोई उसे रोकना चाहता था तो कोई मरना चाहता था, सभी ने कुछ न कुछ करने की तैयारी की हुई थी,

वही भौमिक जी अपने घर पैर थे, वो देव के प्रदर्शन से बहुत खुश थे, वो एक खुली जगह पैर धयान में बैठे हुए थे, वो भगवान् में धयान लगाने के लिए वह बैठे हुए थे लेकिन उनका धयान बस देव पैर hi जा रहा था, अचानक उन्हें एक ख्याल आया,

भौमिक जी खुद से hi- ये मैंने पहले क्यों नहीं सोचा, मैं उसकी कुंडली में खोज रहा था, मैं उसके उप्पेर धयान लगा क्र भी तो उसके बारे में जान सकता हु, ये विद्या भी तो मैंने सीखी थी,

भौमिक जी ने फिर से आँखे बंद की और देव पैर पूरा धयान लगाने लगे, उन्हें धयान लगाने से किसी के भविष्य की झलिया दिख जाती थी, और जो झलकियां भौमिक जी को दिखी उससे वो विचलित हो गए और तुरंत आँखे खोल दी, उनके चेरे पैर दर और घबराहट साफ़ दिख रही थी, वो तुरंत खड़े हुए और महल की तरफ तेजी से चल दिए, वो इतनी जल्दी में थे की आज भोजन करना तक भूल गए थे,

इधर देव अपने कमरे से निकल क्र उधर जा रहा था जहा प्रतियोगिता के लिए उसे तैयार किया जाने वाला था, वो जैसे hi महल से बहार निकलने वाला था तो उसने देखा कस्तूरी महल के अंदर की तरफ जा रही ह, कस्तूरी को देख क्र उसका दिल डगमगा गया, उसका मन विचलित हो गया, वो कस्तूरी से बात करना चाहता था, देव तुरंत कस्तूरी के पीछे चल दिया, कस्तूरी बड़ी तेजी से जा रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे वो चुप क्र जा रही ह, देव भी उसके पीछे तेजी से पंहुचा, कस्तूरी के कमरे में घुस गई जिसे देख देव चौंक गया, क्योकि ये कमरा अभिजीत का था, देव को कुछ समझ नहीं आया, वो अपनी जगह खड़ा रह गया,

फिर उसने आगे जाने का फैसला किया, देव आगे गया कमल की बात थी आज अभिजीत के कमरे के बहार कोई पहरेदार नहीं था, देव ने धीरे से अंदर झाका और जो उसने देखा उसे देख क्र देव के पैरो के निचे से जमीन निकल गई, कस्तूरी अभिजीत की बहो में थी, अभिजीत के हाथ कस्तूरी की बदन पैर घूम रहे थे, देव को अपनी आँखों पैर विश्वास नहीं हो रहा था, जिस लड़की से वो इतना प्यार करता था वो किसी और की बहो में थी,

देव को समझ hi नहीं आ रहा था वो क्या करे, तभी किसी के आने की आहात हुई देव ने देखा काम्य उधर आ रही ह, देव तुरंत वह से हैट गया, काम्य अंदर चली गई, काम्य के साथ पहरेदार भी था, देव वह से चुप चाप निकल गया, लेकिन उसकी आँखों में आंसू थे, वो पूरी तरह टूट गया था, ऐसा लग रहा था जैसे उसकी साँस hi रुक रही ह, वो महल से दौड़ता हुआ बहार निकला, वो बस दौड़े जा रहा था, लगातार दौड़े जार है था, दौड़ता हुआ वो जंगल में पहुंच गया, और बिलकुल सुमसान जगह पहुंच क्र एक जोर दर चीख के साथ चिलाय, और जोर से रोने लगा,

इधर भौमिक जी महल में पहुंचे देव से मिलने के लिए, लेकिन देव वह नहीं था वो प्रतियोगिता की जगह पैर पहुंचे लेकिन देव वह भी नहीं था, भौमिक जी परेशां हो गए थे, वो जगह जगह देव को ढूढ़ने लगे,

महल में प्रतियोगिता की तैयारी तेजी से हो रही थी, सभी अपनी अपनी जगह पहुंचने लगे थे,

भवर सिंह- राजगुरु क्या ये सही रहेगा,

राजगुरु- महाराज मैं नहीं जनता, मैं बस इतना जनता हु ये hi जरुरी ह, नियति हमसे ये क्यों करवा रही ह ये मेरी समझ में नहीं आ रहा, मैंने सभी का भविष्य देखा ह लेकिन इस लड़के के बारे में कुछ भी साफ साफ बोलना नामुमकिन सा ह, और इसके भविष्य से hi पुरे राजय का भविष्य जुड़ा हुआ ह,

भवर सिंह- ठीक ह तो जो मैंने बोलै ह वो कीजिये,

धीरे धीरे प्रतियोगिता मंडल सजने लगा, सब अपनी जगह पैर आ गए, तीनो राजकुमार अपनी जगह पैर पहुंच चुके थे, लेकिन देव उनके साथ नहीं था, सैनिक उसे ढूंढ रहे थे, राजगुरु अपनी जगह पैर पहुंच चुके थे घोषणा करने के लिए तभी एक सैनिक ने बताया की देव लापता ह, देव के लापता होने से राजगुरु चिंता में आ गए, ये खबर भवर सिंह तक भी पहुंची, भवर सिंह ने तुरंत सैनिको की एक टुकड़ी देव को ढूढ़ने भेजी, जब ये खबर भौमिक जी को लगी की देव लापता ह उन्हें थोड़ी सी रहत हुई लेकिन एक चिंता भी की वो चला कहा गया,

इधर प्रतियोगिता शुरू होने में देर हो रही थी, और देव जंगल में पड़ा हुआ था, उसे कोई सुध नहीं थी, तभी उसे कुछ याद आया उसे रीवा की याद आई, वो एक दम से उठा और अपने आंसू पोछे और चल दिया,

वही जब देव किसी को नहीं मिला तो मज़बूरी में राजगुरु जी ने प्रतियोगिता शुरू करने का आदेश दे दिया,

तीनो भाई खुश थे की देव यहाँ नहीं ह, उनका एक प्रतिद्वंदी जा चुक्का ह, जैसे hi तीनो भाई मैदान में आये तो देव को वह न देख क्र सभी में चर्चाये होने लगी, निहारिका को चिंता होने लगी वो आगे आ क्र इधर उधर देखने लगी,

राजगुरु- इस प्रतियोगिता में सिर्फ तीन राजकुमार hi हिस्सा लेंगे, हमारे राजकुमार देवदूत कही चले गए हैं, इसलिए वो यहाँ हिस्सा नहीं लेंगे,

लोगो में चर्चए जोर से होने लगी, तभी एक बच्चा चिलाय- वो आ गए हमारे राजकुमार

सबने उधर देखा तो देवदूत मैदान में चला आ रहा था, उसके कपडे गंदे थे मिटटी में साणे हुए, बाकि राजकुमार युद्ध के कपड़ो में थे जबकि देव अपने साधारण कपड़ो में था,

देव को वह देख क्र भौमिक जी का मुँह खुला रह गया उनके चेरे का रंग उड़ गया, वो जल्दी से देव को रोकना चाहते थे लेकिन ये नामुमकिन था, इस वक़्त वह उन्हें कोई नहीं जाने देता,

राजगुरु- राजकुमार देवदूत अब आ चुके हैं तो प्रतियोगिता शुरू करते हैं, इस प्रतियोगिता में शक्ति और युद्ध कला का प्रदर्शन होगा, और चारो राजकुमारों की एकता का प्रदर्शन भी होगा, सबसे पहले चारो राजकुमारों को उनके सामने आने वाले सैनिको से लड़ना होगा, जो वह हर मान जायेगा वह से हैट जायेगा, जो बचेगा उसे एक और युद्ध लड़ना होगा, अगर वह एक से जायदा राजकुमार बचे तो उन्हें आपस में लड़ क्र विजेता का फैसला करना होगा,

राजगुरु की बात सुनकर तीनो राजकुमार और उनकी माये चौंक गए क्योकि पहले ये सब नहीं था, पहले राजकुमारों को आपस में hi लड़कर विजेता घोषित होना था, इसलिए सभी ने एक दूसरे की कमजोरी के बारे में जानकरी इकठा की थी, लेकिन इसमें 2 नियम और जोड़ दिए गए थे, सौमित्र भवर सिंह के पास जाना चाहती थी लेकिन आज वह कोई नहीं पहुंच सकता था, भवर सिंह सबसे अलग बैठे हुए थे,

राजगुरु के द्वारा नियम सुनते hi जल्दी से एक सैनिक आया और उसने देव को एक कवच पहना दिया, जैसा बाकि राजकुमारों ने पहना हुआ था, सामने कुछ हथियार थे सभी राजकुमारों ने अपने हथियार उठा लिए, देव को बस कुल्हाड़ी चलनी आती थी जो वह नहीं थी, मज़बूरी में उसने तलवार उठाई,

तभी एक दरवाजा खुला और सामने से 50 सैनिक आ गए,

सैनिको को देख क्र सभी की हालत ख़राब हो गई, चारो अभी अभी जवान हुए थे इससे पहले कोई युद्ध नहीं लड़ा था, कोई अनुभव नहीं था उन्हें, लेकिन सामने जो सैनिक थे वो सभी बहुत ज्यादा अनुभवी थे, और खतरनाक भी थे,

राजगुरु के इशारे पैर हुम्ला शुरू हुआ, तभी सूरज बोलै

सूरज- सब एक साथ हो जाओ और चारो तरफ से एक दूसरे को बचाओ, तीनो भाइयो ने एक दूसरे से अपनी कमर लगा ली और हमले के लिए टायर हो गए, देव को उन्होंने अपने साथ शामिल नहीं किया, देव अकेला खड़ा रह गया, 50 में से 25 सैनिक देव की तरफ दौड़े और बाकि उन तीनो भाइयो की तरफ,

ये देख क्र निहारिका और भौमिक जी घबरा गए, और अक्षरा और रीवा ने अपने मुँह पैर हाथ रख लिया, अक्षरा को देव के लिए तकलीफ थी जबकि रीवा को दर था अगर देव हर गया तो उसके लिए कैसे बात करेगा,

तीनो राजकुमार बहुत अच्छे से सबका सामना कर रहे थे, जबी देव पैर चारो तरफ से हुम्ला हो रहा था वो तलवार को ऐसे चला रहा था जैसे कुल्हाड़ी चला रहा हो, वैसे तो इन सब तलवारो में धार नहीं लगाई गई थी, ताकि किसी को जखम न आये, लेकिन फिर भी थी तो तलवार hi, देव के शरीर पैर तलवारो के वॉर लगने लगे, और हर वॉर में उसके शरीर पैर जखम बन रहा था, वो राजकुमार था उसके शरीर पैर जखम देने की आज्ञा नहीं थी बस उन्हें कमजोर कर के हार मैंने के लिए मजबूर करना था, लेकिन यहाँ तो देव पैर सच में हुम्ला हो रहा था, कुछ लोग परेशां थे तो किसी को मजा आ रहा था,

देव ने कभी युद्ध नहीं किया कभी तलवार नहीं सीखी लेकिन उसके अंदर एक बहुत hi भेतरीन चीज थी जल्दी सिखने की, बचपन से hi वो सब कुछ बहुत जल्दी सिख जाता था, देव बचता बचता दीवार के पास आ गया तभी भीड़ में से एक आवाज आई जो एक लड़की की थी,

लड़की- देव अपने दिमाग का इस्तेमाल करो, इनकी युद्ध कला को सीखो और खुद का बचाव करो,

देव ने उप्पेर देखा तो वह सुगंधा कड़ी थी, और उसके साथ थे आचार्य जी, देव को तुरंत कस्तूरी याद आ गई वो उनके साथ कस्तूरी को भी ढूढ़ने लगा लेकिन वो नहीं दिखी, देव हताश सा होने लगा लेकिन ये वक़्त कमजोर पड़ने का नहीं था, देव ने सुगंधा की सलाह का इस्तेमाल किया और जैसे जैसे सैनिक हुम्ला कर रहे थे तलवार को चला रहे थे देव भी उन्ही की तरह तलवार चलने लगा था, देव घायल था लेकिन हार मैंने को तैयार नहीं था, तभी सभी सैनिको ने देव को बिच में घेर लिया और देव उनके बिच में डाब गया, किसी को देव दिखाई तक नहीं दे रहा था,

सबको लगा अब देव हार मन लेगा, वही भौमिक जी की आँखों में आंसू आ गए, ये वही पल था जो भौमिक जी ने देखा था, देव को सैनिको के बिच में दबे हुए और उसका दम घुट ते हुए देखा था, निहारिका भी बैचैन सी अपनी आँखों से आंसू बहा रही थी,

तभी एक जोर दर चिल्लाहट के साथ देव उठा और उसने सभी सैनिको को दूर धकेल दिया, देव के मुँह से खून आ रहा था, और उसके पेट की साइड में एक चाकू घुसा हुआ था, वह किसी धार दर हतियार का इस्तेमाल मन था फिर भी किसी ने देव के पेट में चाकू घुसा दिया था,

भौमिक जी को अपनी आँखों पैर यकीन नहीं हुआ, उन्होंने जो देखा था वो बदल कैसे गया, ऐसा कैसे हो सकता ह, देव के लिए हमेशा उनका देखा हुआ अलग कैसे हो जाता ह, देव की किस्मत पल पल कैसे बदल सकती ह,

देव लड़खड़ाता हुआ अपने घुटने पैर तलवार के सहारे बैठ गया था, सैनिक इधर उधर उसके चारो घूम रहे थे, देव चलता हुआ दीवार के पास पंहुचा और सुगंधा की तरफ हाथ उठाया, सुगंधा कितनी समझदार थी की बिना बोले देव की बात समझ गई और अपने शरीर पैर ओढ़ा हुआ दुप्पटा उतर क्र देव को दे दिया, किसी लड़की का ऐसे दुप्पटा उतर क्र देना समाज की नजरो में बहुत ख़राब मन जाता था, सुगंधा ने अपने शरीर की जरा भी चिंता नहीं की, उसे फरक hi नहीं पद रहा था कोण उसे देख रहा ह, उसका धयान बस देव पैर था,

देव ने अपनी कमर से चाकू निकला और वो दुपट्टा अपनी कमर पैर बांध लिया जिससे खून निकलना काम हो जाये, देव की आँखे लाल थी और वो बहुत hi गुस्से में सैनिको की तरफ चल दिया,

वही वो तीनो राजकुमार अब थक चुके थे, लेकिन उन्होंने 15 सैनिको को हरा क्र अलग क्र दिया था, वो जीत रहे थे और लोग तालिया बजा रहे थे, किसी ने एक बार भी ये नहीं सोचा की 3 राजकुमारों के लिए 25 सैनिक और अकेले देव के लिए 25 सैनिक ऐसा क्यों,

निहारिका भौमिक जी अक्षरा और रीवा को सब दिख रहा था लेकिन उनमे न हिम्मत थी न hi अधिकार था ये पूछने का,

तभी भीड़ में से कुछ लोग उठ खड़े हुए और सैनिको को बुरा भला कहने लगे अरे इतने सरे सैनिक अकेले राजकुमार से लड़ रहे हो, वह देखो तुम्हारे बाकि साथी हार गए हैं, जब भीड़ में ऐसी आवाज उठी तो जल्दी hi ये आवाज सब तरफ से आने लगी, तो मज़बूरी में उन सैनिको के सरदार को कुछ सैनिक राजकुमारों की तरफ भेजने पड़े,

इधर देव बड़ी फिरती से तलवार को गुमने लगा, उसने नहीं पता था वो किस सीधा में घुमा रहा ह लेकिन जो भी क्र रहा था उससे फायदा मिल रहा था, और उसने 10 सैनिको को जमीन में गिरा दिया था, इस प्रतियोगिता का नियम था जो जमीन में गिर जायेगा वो हरा मन जायेगा,

अब मैदान में बस 10 सैनिक बचे थे, और चारो राजकुमार, जल्दी hi मैदान में चारो राजकुमार खड़े थे, देव बुरी तरह घायल था, लेकिन हार नहीं मान रहा था, बाकि तीनो राजकुमार भी थके हुए थे लकिन ये hi असली प्रतियोगिता थी जो यहाँ हार गया वो कभी युवराज नहीं बन सकता, क्योकि जिस राजा के पास शक्ति नहीं होती कोई उसका सम्मान नहीं करता,

शक्ति प्रतियोगिता का दूसरा चरण शुरू हुआ और दरवाजा खुलते hi एक चीता निकल क्र सामने आया, बहुत hi विशाल शरीर का और ख़तरनाक था वो, उसे मैदान में देख क्र सभी दर गए, तीनो राजकुमारों की भी हवा ख़राब हो गई, इतने सैनिको से लड़ने के बाद अब एक चीता से लड़ना नामुमकिन था, और वैसे भी इस चीते से लड़ना तो मूरखता थी, चीता आगे बढ़ा तो तीनो राजकुमार पीछे हैट गए जबकि देव अपनी जगह खड़ा रहा और चीते को घूरता रहा,

देव जनता था अगर चीते की नजरो से नजरे हटी तो वो हुम्ला कर देगा, चीता देव के चारो तरफ घूमने लगा, तीनो राजकुमार एक साथ हो गए तलवार लेकर ताकि अगर चीता उनकी तरफ आये तो वो एक साथ हुम्ला कर सके,

देव के तरीके से चीता को खतरा दिखाई दिया तो वो आगे बढ़ गया, तीनो राजकुमारों के पास, ये देख क्र भवर सिंह दहशत में आ गया, वही तीनो राजकुमार दर से कंपनी लगे, वो पीछे हाथ रहे थे और तलवार चला रहे थे, तब तक देव तलवारो से कुछ कर रहा था,

फिर देव ने एक पत्थर उठाया और चीता को मारा, चीता ने देव की तरफ देखा, इस बार देव ने अपनी नजरे नहीं मिले, चीता देव की तरफ बढ़ने लगा, देव पीछे हटने लगा तो चीता की रफ़्तार बढ़ गई, वो देव पैर उछला तो देव निचे बैठ गया और चीता का मुँह जमीन में गाड़ी हुई तलवारो के बिच में घुस गया, देव ने तुरंत उप्पेर से एक तलवार और फसा दी, जिसे चीता वही फास गया, चीता ताकतवर था वो तलवारे उखड सकता था लेकिन जोर लगाने से तलवार उसकी गार्डन को काट रही थी, चीता वही शांत हो गया, तभी सूरज तलवार लेकर चीता की तरफ डोडा उसकी गर्दन काटने के लिए, जिसे देव ने रोक दिया,

देव- वो बेजुबान जानवर ह उसे मर क्र क्या हसली होगा, वो फास चुक्का ह हमे बस वही करना था,

तभी पीछे से ज्वाला ने सूरज पैर हुम्ला कर दिया क्योकि अगला चरण आपस में लड़ाई करनी थी, अभिजीत ने देव पैर हुम्ला कर दिया, देव अभिजीत से बचने लगा वो उस पैर कोई वॉर नहीं कर रहा था, सूरज और ज्वाला की लड़ाई जोर पैर थी, क्योकि दोनों की ताकत काफी ज्यादा थी, और युवराज पद के लिए वो दोनों की आपस में बड़ी स्पर्धा थी, एक तगड़ी लड़ाई के बाद सूरज ने ज्वाला को गार्डन से दबोच लिया और जमीन में पटक दिया, और नियम के हिसाब से जो जमीन में गिरा वो हारा मन जायेगा,

ज्वाला के गिरते hi सौमित्र ने गुस्से में सामान फेंक दिया, अमरावती ख़ुशी से मुस्कुरा रही थी,

इधर सूरज देव की तरफ बढ़ा, अभिजीत को पता था सूरज में उससे ज्यादा ताकत ह, और वो दोनों एक दूसरे के जिगरी दोस्त जैसे भी थे तो अभिजीत मुस्कुराता हुआ एक तरफ हैट गया, उसने सोचा सूरज पहले देव को हरा देगा, फिर आपस में कर लेंगे जो करना ह लेकिन सूरज अभिजीत की फितरत को जनता था, उसे पता था वो देव की तरफ जायेगा और अभिजीत पीछे से हुम्ला कर सकता ह, इसलिए सूरज ने अभिजीत को कोई मौका hi नहीं दिया और वो सीधा अभिजीत की तरफ गया और जब तक अभिजीत कुछ समझ पता सूरज ने अभिजीत को उठा क्र जमीन में पटक दिया, अभिजीत गुस्से में आग बबूला हो गया,

सूरज- मेरे भाई राज पथ पाने के लिए सब कुछ करना पड़ता ह,

सूरज देव की तरफ बढ़ा, अब देव के पास कोई तरीका नहीं था, क्योकि वो जनता था सूरज की ताकत और युद्ध कला उसके सामने बहुत ज्यादा ह, वो सूरज से कभी नहीं जीत सकता, सूरज ने अपनी तलवार फेंक दी और देव पैर मुक्को की बरसात कर दी, हर कोई हैरान था, सूरज उसे गिरना नहीं छह रहा था, वो उसे मार रहा था, देव कुछ भी नहीं कर प् रहा था,

सुगंधा जो से चिल्लाई- अरे कायर वो भाई ह तेरा,



सूरज उसकी तरफ देख क्र मुस्कुराया उसने देव को अपने कंधे पैर उठाने के लिए जैसे hi झुका देव ने एक जोर दर कोहनी सूरज की कमर में मर दी जिससे उसका संतुलन बिगड़ गया, सूरज ने देव को पकड़ा हुआ था जिससे दोनों एक साथ गिर गए, और ये प्रतियोगिता वही ख़तम हो गई,
 
अपडेट- 8



सुमसान जंगल में सात्विक तंत्र गुरु से तंत्र विद्या सिखने में लगा हुआ था, सात्विक बहुत तेजी से सभी विद्याये सिख रहा था, दोनों हवन क्र रहे थे तभी आसमान में बिजलिया चमकने लगी, मौसम ख़राब हो गया, बहुत hi खतरनाक तोफान शुरू हो गया था, हरे पैदा पैर बिजलिया गिर रही थी, खड़े खड़े पेड जल रहे थे, और हवा उसमे घी का काम कर ह्री थी,

सात्विक- गुरु जी ये क्या हो रहा ह, ऐसा लग रहा जैसे कुछ गलत होने जा रहा ह,

तंत्र गुरु- कुछ बदलने वाला ह, आसमान और धरती दोनों hi विरोध करना छह रहे हैं,

सात्विक- इसके परिणाम बुरे तो नहीं होंगे

गुरु- कोई परिणाम बुरे नहीं होते, बस अलग अलग इंसान के हिसाब से होते हैं, ऊपर वाले के हिसाब से सब सही hi होता ह, क्या पता इससे किसी को नुकसान हो तो किसी को फायदा होगा,

सात्विक- गुरु जी मेरी विद्या कब तक पूरी होगी, मुझे आगे भी जाना होगा, उस जगह को ढूंढ़ने,

गुरु- सब कुछ अपने समय के हिसाब से होगा, समय से पहले कुछ नहीं होगा, आज मैं तुम्हे अंतिम विद्या देने जा रहा हु, कल सुबह तू यहाँ से जा सकता ह अपनी मंजिल की तरफ, लेकिन ये याद रखना जोट ु हासिल करने जार है ह वो विनाश करि ह, और अगर तू उससे मिला तो शायद उसके बाद टूट ु नहीं रहेगा, और न जाने क्यों मुझे अहसास हो रहा ह की वो वापस आने वाला ह,

सात्विक- कोण गुरु जी, कोण आने वाला ह,

गुरु- तेरा मिलना उससे तय ह, शायद इसीलिए तूने ये विद्या पाई ह, मैं देख प् रहा हु, तेरा उससे मिलना तय ह, एक hi माली के बोये हुए बगीचे में फूल भी होते हैं और कांटे भी,

इधर प्रतियोगिता ख़तम हो गई थी लेकिन भवर सिंह के चेहरे पैर हताशा और दर दोनों दिख रहे थे, वही अमरावती और सौमित्र तो रोने के लिए तैयार थी, लेकिन काम्य बिलकुल खामोश बैठी हुई थी, वो उठी और अमरावती और सौमित्र को एक तरफ बुलाया और कुछ बात करने लगी,

देव मैदान से उठ कर घायल अवस्था में hi अपनी माँ के पास आया, लेकिन निहारिका वह नहीं थी, सभी लोग देव को बधाई देने के लिए आ रहे थे लेकिन देव तो अपनी माँ को ढूंढ रहा था, रीवा भी देव के पास आई, उसे ख़ुशी थी देव जीत गया अब वो उसकी शादी प्रताप सिंह से रोक देगा, देव माँ माँ चिल्ला रहा था, जब निहारिका नहीं मिली तो बाकि सबका धयान भी उधर गया, तभी काम्य बोली

काम्य- प्रताप सिंह भी यहाँ से गायब ह,

प्रताप सिंह का नाम सुनते hi भवर सिंह का गुस्सा चढ़ गया, वो तुरंत निहारिका को ढूंढ़ने निकला, देव भी निहारिका को ढूंढ़ने निकला, राजगुरु ने वह के माहौल को सम्हाल लिया,

देव इधर उधर देख रहा था तभी उसे निहारिका के चीखने की आवाज आई देव उस तरफ दौड़ पड़ा, वह बने एक कमरे में जैसे hi देव अंदर पंहुचा तो उसकी आँखे फटी रह गई, निहारिका जमीन पैर पड़ी हुई थी और प्रताप सिंह उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था, देव गुस्से में पागल हो गया और किसी पागल हठी की तरह चिंघाड़ता हुआ प्रताप सिंह पैर टूट पड़ा,

घायल देव में न जाने कहा से इतनी ताकत आ गई की उसने प्रताप सिंह को उठाया और दूर फेंक दिया और उस पैर मुक्को की बरसात कर दी, तभी वह भवर सिंह काम्य अमरावती सौमित्र सेनापति राजगुरु सब पहुंच गए,

भवर सिंह- क्या हो रहा ह यहाँ

प्रताप सिंह ने देव को धक्का दिया और भवर सिंह के पीछे चुप गया

प्रताप सिंह- महाराज मुझे बचाइए इन माँ बेटो से मुझे बचाइए,

भवर सिंह- ये सब क्या हो रहा ह यहाँ, तुम यहाँ क्या कर रहे हो प्रताप सिंह,

देव- ये मेरी माँ के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था,

भवर सिंह ने प्रताप सिंह की गार्डन पैर तलवार रख दी,

काम्य- रुकिए भाइये पहले प्रताप सिंह की भी बात सुन लेते हैं,

प्रताप सिंह- महाराज मुझे बोलने का मौका दीजिये

भवर सिंह- तुमने हमारे इज्जत से खेलना चाहा

प्रताप सिंह- मुझे ये औरत hi यह अलाइ थी

प्रताप सिंह की बात सुनते hi भवर सिंह के हाथ कैंप गए,

प्रताप सिंह- ये औरत मेरे पास आई थी दो दिन पहले और इसने कहा था अगर आप मेरे बेटे को युवराज बनाना में अपना समर्थन देंगे तो मैं आपके लिए कुछ भी करुँगी, फिर ये बोली की महाराज तो कुछ करते ह नहीं जब से देवदूत पैदा हुआ ह तब से मैं प्यासी हु, आप मेरी प्यास बुझा दिज्जिए और मेरी बेटी से शादी क्र लीजिये, इससे हमारा आगे का रास्ता भी साफ़ रहेगा, जैसे hi प्रतियोगिता में देव जीता ये मुझे यहाँ ले आई, अब रोने का नाटक कर रही ह,

प्रताप सिंह की बात सुनकर भवर सिंह ने बिना कुछ सोचे समझे निहारिका की तरफ तलवार चला दी, जिसके बिच में देव आ गया और वो तलवार देव के बाजु पैर चली जिससे वह खून भेने लगा,

राजगुरु- महाराज एक बार महारनी की बात तो सुनिए,

भवर सिंह- प्रताप सिंह को हमारे बिच की इतनी घेरि बात पता ह तो इसने hi बताई होगी, मैंने इसे बात करते देखा था,

काम्य- ये कलंकी ह, और इसका बीटा जॉय अहा प्रताप सिंह जी पैर जबरदस्ती का आरोप लगा रहा ह ये खुद एक लड़की के साथ जबरदस्ती करके आया ह,

इस बात ने वह एक और धमाका कर दिया था, तभी एक दासी कस्तूरी को लेकर आ गई,

काम्य – ये ह आचार्य की बेटी कस्तूरी, जब ये राजगुरु के पास गया था तो वह इसने स लड़की के साथ जबरदस्ती की, क्यों लड़की बता महाराज को इसने क्या किये तेरे साथ

कस्तूरी रो रही थी उसने अपना सर झुका लिया और जोर जोर से रोने लगी,

देव की आँखे भर आई थी, उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था, एक hi पल में उसकी पूरी दुनिया ख़तम हो गाइट hi, उसकी माँ और उस पैर जो इल्जाम लगे थे, वो इस समाज में कही मुँह दिखने के लायक नहीं थे,

भवर सिंह- इसकी सजा इन्हे कल दरबार में दी जाएगी, दोनों को बंदी बना लो और कारागृह में दाल दो,

तभी कुछ सैनिक आये और दोनों को ले गए,

कहा देव युवराज बनने वाला था कहा वो कारागृह में था, निहारिका का रो रो क्र बुरा हाल था, दोनों माँ बीटा एक दूसरे से लिपट क्र रो रहे थे, जल्दी hi ये खबर पुरे राजय में फ़ैल गई, और जैसे hi ये खबर आचार्य जी तक पहुंची तो उन्होंने आतम हत्या करने की कोशिश की उन्होंने जहर खा लिया, वो ये सदमा बर्दास्त नहीं कर पाए, एक तो उनकी बेटी के साथ ऐसा दुराचार हुआ और वो भी उनके सबसे पिरया शिष्य ने ऐसा किया, उन्हें बचा तो लिया गया लेकिन वो सदमे में चले गए,

वही भौमिक जी को जब ये खबर मिली तो वो बोखलाए हुए से महल की तरफ भागे, लेकिन महल में इतना कुछ हो गया था तो आज महाराज से किसी को मिलने की आज्ञा नहीं थी, राजगुरु भी भवर सिंह के साथ थे तो भौमिक जी राजगुरु से भी नहीं मिल पाए, उनकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था इसलिए वो तुरंत किसी एकांत जगह पैर पहुंच गए और धयान में बैठ गए, फिर से अपना धयान देव पैर केंद्रित किया और उसके बारे में जानने लगे, आज उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था वो काफी परेशां थे,

अक्षरा रीवा अमिता और सोमिया किसी को भी इस बात पैर यकीन नहीं हो रहा था, वो सब कुछ मानने को तैयार थी लेकिन निहारिका और देव ऐसा कर सकते हैं इस बात पैर यकीन नहीं कर प् रही थी, पुरे राजमहल में मातम जैसा माहौल था, लेकिन 6 लोग खुशिया मन रहे थे, अमरावती सौमित्र काम्य सूरज ज्वाला और अभिजीत,

वो सब एक साथ hi थे,

अमरावती- काम्य दीदी तुम्हे कैसे पता ये सब होगा, वो देवदूत जीत जायेगा,

कमाया- मुझे यकीन तो नहीं था लेकिन फिर भी मैंने तैयारी की हुई थी, इसलिए सभी को अलग अलग काम दिया हुआ था, सूरज को काम दिया था प्रताप सिंह को काबू में करने का, ये सब सूरज ने hi किया था, उसने hi प्रताप सिंह को निहारिका के पीछे लगाया,

सौमित्र- और वो कस्तूरी

काम्य- उसके बारे में फिर कभी जान लेना, अभी समय ह ख़ुशी मानाने का, कल उन्हें ऐसी सजा दिलवाऊंगी शर्म खुद कही जान दे देंगे,

पूरी रात किसी की दुःख में तो किसी की ख़ुशी में गुजर गई, देव ने निहारिका को कस्तूरी के बारे में सब बता दिया था,

कारागृह में देव और निहारिका एक दूसरे का हाथ थामे बैठे हुए थे,

देव- ये सब क्या हो गया माँ, मैं तो सम्मान पाने के लिए ये सब कर रहा था, और आज संसार का सबसे बड़ा इल्जाम लग गया, और पिता जी विश्वास भी कर लिया, मुझे अपराधी बनाया वो ठीक था ो मुझे पसंद नहीं करते लेकिन आपको क्यों अपराधी बनाया, आप पैर तो उन्हें विश्वास करना चाहिए था,

निहारिका- वो किसी पैर विश्वास नहीं करते और किसी को उनपर भी विश्वास नहीं करना चाहिए,

देव- फिर आपने उनसे शादी क्यों की, आप इतने वर्षो से ये सब झेल रही हैं, आपने विरोध क्यों नहीं किया,

निहारिका- मुझे नहीं पता कल सभा में हमे क्या सजा सुनाई जाएगी, लेकिन आज एक सच तुझे बता रही हु, जीवन में भवर सिंह पैर भरोसा मत करना, जिसने भी उस इंसान पैर भरोसा किया उसने उसे hi बर्बाद कर दिया,

बात उस समय की ह जब मैं जवान हुई थी, मेरे पिता भवर सिंह के सेनापति थे और मित्र भी थे, इसी वजह से भवर सिंह और उनकी बहन काम्य का हमारे घर आना जाना आम बात थी, भवर सिंह की दोस्ती मेरे भाई राजवीर से हो गाइट hi, दोनों काफी अच्छे दोस्त थे, मेरा भाई बहुत अच्छा योद्धा भी तो उस समय कोई भवर सिंह को टक्कर दे सकता था वो मेरा भाई hi था, और काम्य वो मेरे भाई को पसंद करने लगी थी, वो भवर सिंह के साथ हमारे घर आने लगी थी,

कुछ समय के लिए बहवर सिंह को युद्ध कला सिखने के लिए कही बहार भेजा गया था, इधर काम्य जवान हो रही थी उसका धयान राजवीर की तरफ बहुत ज्यादा होने लगा, दोनों के बिच नजदीकियां बढ़ रही थी, और मैं भी अपनी जवानी की तरफ बढ़ रही थी, जब कुछ वर्षो बाद भवर सिंह वापस आया तो वो हमारे घर आया और उसकी नजर मुझ पैर पड़ी, मुझे देख क्र उसके अंदर कामुकता भर गई, वो मुझे पाने के लिए पागल सा हो गया था, जबकि उसकी शादी हो चुकी थी, फिर एक युद्ध में भवर सिंह के पिता और मेरे पिता दोनों मरे गए, जिसके दुःख में मेरी माँ भी चल बसी, भवर सिंह को राजा बना दिया गया,

अब भवर सिंह कुछ भी कर सकता था, काम्य ने भवर सिंह से मेरे भाई राजवीर से शादी करने का प्रस्ताव रखा, तो भवर सिंह ने मेरे बही से मिला और उसके सामने एक ऐसी बात राखी की मेरे भाई का गुस्सा इतना बाद गया की उसने भवर सिंह को गालिया देकर घर से निकल दिया, भवर सिंह गुस्से में वह से चला गया, उस दिन राजवीर और भवर सिंह में बात चित बंद हो गई, एक दिन में घर में अकेली थी तो भवर सिंह वह आ गया और उसने मुझे अकेले देख क्र मेरे साथ दुराचार करना चाहा लेकिन तभी राजवीर आ गया और उन दोनों के बिच युद्ध हो गया, उस लड़ाई में राजवीर भवर सिंह पैर हावी हो रहा था किन ा जाने कहा से काम्य वह आ गई और उसने धोके से मेरे बही को पीछे से तलवार मर दी, उसका धोका राजवीर बर्दास्त नहीं कर पाया,

राजवीर- काम्य तुमने मेरे साथ धोखा किया,

काम्य- तुम मेरे बही को मरोगे मैं तुम्हे कैसे छोड़ दूंगी

राजवीर- तुम जानती हो इसने तुम्हरे बारे में क्या कहा था मुझसे

काम्य- जानती हु, तो इसमें बुराई क्या, इतना अच्छा अवसर था तुम्हारे पास लेकिन तुम इस लायक hi नहीं हो,

काम्य राजवीर से प्यार करती थी फिर भी उसने राजवीर को धोखा दिया, राजवीर जमीन पैर गिर गया, उसे बंदी बना लिया गया और मोत की सजा सुनाई गई राजा पैर हुम्ला करने के लिए, मैं अब अकेली रह गई थी, फिर भवर सिंह में मेरे साथ सोडा किया की अगर मैं उससे शादी कर लेती हु तो वो मेरे भाई को नहीं मरेगा, मैं अपने भाई को बचने के लिए मजबूर थी और उससे शादी कर ली, मेरा भाई आज भी उसकी कैद में ह, मैं होने भाई की वजह से आज तक भवर सिंह की यातनाये शेती आ ऋ हु, मेरी उम्र बहुत काम थी, और काम उम्र में hi रीवा पैदा हो गई और फिर तू, अब भाई के साथ साथ तुम दोनों की भी फ़िक्र थी मुझे,

मेरा भाई आज भी भवर सिंह की कैद में बंद ह, भवर सिंह किसी की नहीं सुनता, मुझे रीवा की फ़िक्र ह, न जाने वो कैसे रहेगी इन हैवानो के बिच में,

देव- आपने इतना बड़ा राज आज तक छुपा क्र रखा, हम उन्हें कैसा इंसान समझते थे और वो कैसे निकले, आपने मुझे उनसे लड़ने लायक योद्धा क्यों नहीं बनाया,

निहारिका- तेरे जनम के साथ hi भवर सिंह के अंदर एक दर पैदा हो गया था, वो तुझे पैदा होते hi मरना चाहता था लेकिन राजगुरु की वजह से नहीं मर पाया, राजगुरु ने कहा था अगर तुझे समय से पहले मर दिया तो पूरा राजय तबाह हो जायेगा, शायद इसीलिए ये लोग आज तक रुके हुए थे, और आज उन्होंने ये सब साजिश करके हम दोनों को रस्ते से होने का तरीका ढूढ़ा ह, और मेरी मज़बूरी देखो मैं कुछ नहीं बोल प् रही हु, अगर कुछ बोलती हु तो वो मेरे भाई को मार देगा, हमे शायद कोई सजा देकर यहाँ से दूर भेज दे, लेकिन वो राजवीर को मर देगा,

देव- मुझे किसी सजा का दुःख नहीं ह, बस दुःख ह की मैं आपके सम्मान के लिए कुछ नहीं कर सका, हमे सजा उस अपराध की मिलेगी जो हमने किया hi नहीं, फिर भी मैं मां के लिए वो सजा लेने को तैयार हु,

निहारिका- क्या पता उप्पेर वाले ने हमारे लिए ये hi सोचा हो, लेकिन अगर मुझे दुबारा जनम मिलता ह तो मैं तुझे ऐसा योद्धा बनाउंगी की पूरा संसार तेरे सामने सर झुकाये, इस जनम में जो गलती मैंने की ह वो दुबारा नहीं करुँगी, और मैं प्राथना करुँगी अगर मैं फिर से पैदा हुई तो मुझे तेरे जैसा hi पति मिले, जो सबसे इतना प्यार करता ह, मैं हमेषा प्यार के लिए तरसी हु, इस जनम में जितना प्यार तूने मुझे दिया ह उतना मेरे माता पिता भी नहीं दे पाए,

देव- मैं आपका बीटा hi पैदा होना चाहूंगा माँ,

दोनों माँ बेटे एक दूसरे के कंधे पैर सर रख क्र बैठे रहे,

अगली सुबह राज दरबार लगा हुआ था,

राजगुरु- वैसे तो प्रतियोगिता पूरी हो चुकी थी लेकिन देवदूत ने जो अपराध किया ह उसकी सजा उन्हें मिलेगी, और कोई अपराधी युवराज नहीं बन सकता, इसलिए महाराज के आदेश पैर युवराज की घोषणा फिर कभी समय आने पैर की जाएगी, और आज जो स्वंवर होना था ो भी रोका जाता ह, हम अपने महेमानो से माफ़ी चाहेंगे, लेकिन ये समय न्याय का ह और राजमहल के लिए दुःख का भी तो ऐसे में ये सब नहीं हो सकता, और बी ह अपराधियों को सजा देने का,

तभी निहारिका और देव को लेकर आ गए झांजीरो में बांध क्र,

भवर सिंह- इन दोनों में अपराध किया ह, ये राजमहल और राजय के साथ साथ समाज के भी अपराधी हैं, मैं इनकी कोई बात सुन्ना नहीं चाहता हु, राज गुरु इन्हे सजा दी जाये,

राजगुरु- इनदोनो की राजय से बहार निकल दिया जाये, और फिर कभी इस राजय की अस पास भी दिखे तो इन्हे मोत की सजा दी जाये,

काम्य- ये सजा काफी नहीं होगी, इससे समाज में क्या फरक पड़ेगा, कोई भी औरत या मर्द जब ऐसी हरकते करेगा तो बस उसे राजय से बहार क्र दिया जायेगा, उससे हम क्या उदहारण पेश करेंगे, इन्हे ऐसी सजा मिलनी चाहिए जिससे आने वाली पीडिया याद रखे की महारज अपनी पत्नी और बेटे को ऐसी सजा दे सकते हैं तो बाकि सब को कैसी सजा मिलेगी,

भवर सिंह- तुम hi बताओ क्या सजा दी जाये,

काम्य- इस निहारिका को अपनी सुंदरता पैर बहुत अभिमान ह, इसने उसी सुंदरता के अहंकार में ऐसी हरकत की, तो इसकी सजा ये ह की इसे पूरी तरह निर्वस्त्र करके पुरे राजय में हुअय जाये और लोग इन पैर अपना गुस्सा निकले , और इस देवदूत को भी इसकी माँ के साथ निर्वस्त्र करके ऐसे hi घुमाया जाये,

भवर ऐसा करना नहीं छटा था, लेकिन वो परजा के बिच निहारिका और देव के लिए नफरत पैदा करना छटा था, जिससे बह्विश्य में लोग उन्हें बुराई में hi याद रखे,

भवर सिंह ने तुरंत है बाहर ली, राजगुरु ने बहवर सिंह को देखा वो रोक्न अछते थे लेकिन रोक नहीं पाए, निहिरका और देव ने फटी आँखों से भवर सिंह को देखा उन्हें यकीन hi नहीं हुआ, उनके लिए ऐसा आदेश दिया गया, खुद पूरा सभा चौंक गई थी,

भवर सिंह- इस आदेश पैर अभी अमल किया जाये,

तुरंत दो सैनिक आगे आये उन्होंने निहारिका के कपडे उतरने के लिए हाथ बढ़ाये तभी देव ने उन पैर हुम्ला कर दिया,

एक सैनिक ने देव के सर में तलवार की मुठ मर दी जिससे वो जमीन में गिर गया और बेहोश हो गया, वो कल की लड़ाई से इतना घायल हो चुक्का था की उसके अंदर कोई जान hi नहीं बची थी, उसके जख्मो का कोई उपचार भी नहीं किया गया था, जब उसे होश आया तो वो महल के बहार पड़ा हुआ था, उसकी आँख खुली उसने चारो तरफ देखा तो बहुत से लोग खड़े थे, देव खड़ा हुआ तो उसे अहसास हुआ की वो नंगा ह, और जब उसने बराबर में देखा तो निहारिका भी नंगी कड़ी थी, निहारिका की आँखे बंद थी और उनसे आंसू बहे जा रहे थे,

देव ने नारिका को देखा वो जोर से चिलाय- हमे जान से मर दो, लेकिन ऐसा मत करो,

लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था, सैनिक उन्हें खींच क्र लेका चल दिए, पूरी परजा कड़ी हुई देख रही थी, कुछ औरतो ने अपने मुँह धक् लिए लेकिन मर्द बड़े चाव से निहारिका को देख रहे the,is संसार की सबसे खूसूरत औरत का चेरा देखना भी इन लोगो के लिए सपना जैसा था आज उन्हें वो औरत पूरी नंगी देखने को मिल रही थी, लोग उसे देख रहे थे और आहे भर रहे थे, निहारिका आँखे बंद किये सर झुका क्र चले जार hi थी, वही देव की आँखों में खून उतर रहा था, लोग उन दोनों पैर टमाटर गोबर न जाने क्या क्या फेंक रहे थे,

इधर प्रताप सिंह तुरंत महल से निकल चुक्का था और अपने सैनिको को आदेश दिया की जब भवर सिंह के सैनिक देवदूत और निहारिका को राजय से बहार चोदे तो निहारिका को तुरंत उठवा लेना और देवदूत को मार देना,

इधर देव और निहारिका के साथ ये सब हो रहा था और भौमिक जी अपने धयान में लगे थे, उन्हें पता hi नहीं चला कब रात हो गई कब सबेरा हो गया, इतना लम्बा धयान लगन ेके बाद उन्हें कुछ झल्कियादिखने लगी और जो झलकियां उन्हें दिख रही उन्हें भौमिक जी फिर घबरा गए और उनकी आँखे खुल गई, उन्ह ीक पहाड़ी दिख रही थी, और एक चीता दिख रहा था जो देव पैर हुम्ला करने वाला था, और एक झरना और गिरते हुए……….. भौमिक जी तुरंत आँख खोल क्र बैठ गए और जल्दी से महल की तरफ दौड़ पड़े,

इधर रीवा महल के छज्जे पैर कड़ी अपनी माँ और भाई की हालत देख रही थी, वो प्रताप सिंह से शादी रुकने की ख़ुशी मनाये या जो हुआ उसका दुःख मनाये,

देव और निहारिका को पुरे राजय के सामने नंगे यात्रा निकल क्र उन्हें राजय से बहार एक पहाड़ी पैर ले गए,

एक सैनिक- यार कसम से महाराज हमे सौंप देते तो सभी सैनिक इस औरत के साथ मजे करता, ऐसा बदन मैंने आज तक नहीं देखा,

दूसरा सैनिक- मजे तो हम अब भी कर लेते लेकिन महाराज के खास लोग भी आ रहे हैं पीछे,

फेल सैनिक- अरे जब ताका एते हैं तब तक मजे क्र ले,

तभी वह एक चीता की दहाड़ने की आवाज आई, सभी ने ुधा रदेखा तो एक गाड़ी पैर पिंजरे में चीता को लाया जार है था,

उस गाड़ी से उतरा एक सैनिक- इन दोनों को मार क्र इस चेतता को खिला दो, कोई गवाह या सबूत नाब अचे, ये महारज का आदेश ह,

सैनिको ने तुरंत तलवार निकली और देव और नाकि के पेट में उतर दी, न जाने कितनी तलवारे उनके शरीर में गुसा दी थी, फिर सभी पीछे हैट गए और चीता का पिंजरा खोल दिया, चीता चलता हुआ देव और निहारिका के नजदीक आया,

निहारिका लगभग मर hi चुकी थी, उसके शरीर से बहुत खून भी चुक्का था, देव की हालत भी खराब थी वो बस जैसे तैसे निहारिका को पकडे हुए खड़ा था, जैसे hi चीता उनकी तरफ आया, देव ने एक तलवार उठाई और चीता के पेट में घुसा दी, लेकिन चीता उन पैर कूद गया, जिससे वो तीनो एक साथ पहाड़ी से गिर गए और भेटे हुए झरने में जा गिरे,

सैनिको ने महल पहुंच क्र भवर सिंह की उनके मरने की खबर दे दी, लेकिन इस सब को प्रताप सिंह के सैनिक भी देख रहे थे, क्योकि वो निहारिका को पकड़ने के लिए उनके पीछे लगे हुए थे, उन्होंने प्रताप सिंह को ये खबर दी तो प्रताप सिंह गुस्से में पागल सा हो गया,

राजय सभा में बहवर सिंह राजगुरु के साथ साथ भवर सिंह क ापुरा परिवार बैठा हुआ था, राजय में आये हुए सभी महेमान जा चुके थे, आज सभा में किसी को आने की आज्ञा नहीं थी, लेकिन तभी सैनिको को धकेलते हुए भौमिक जी सभा में आ गए,

भौमिक जी को वह सीख क्र राजगुरु भी चकित रह गए,

राजगुरु- भौमिक मेरे बही तुम यहाँ

भौमिक- मत कहो मुझे आप भाई, आज आप मेरी नजरो से गिर गए हो, आप सबने साजिश करके उन लड़के को मरवा दिया, इस परिवार का और इस समाज का सबसे मासूम इंसान था वो, जिस लड़की के साथ दुराचार का अपराध आप सबने लगवाया ह वो लड़की खुद देव के पास आई थी उसे अपने प्रेम के जाल में फसाया और खुद उसके साथ सम्भोग किया, जब मैंने रोक तो उस लड़की ने मेरा भी विरोध किया, देव कैसे उसके साथ दुराचार कर सकता ह, ये सब तुम लोगो की साजिश ह और मुझे उम्मीद ह तुम सबने मिल्क रही महारनी निहारिका को भी ऐसे hi फसाया ह, तुम सबके अंदर का दर तुमसे ये करवा रहा ह, लेकिन तुम सबने गलत किया ह, लेकिन तुम कुछ भी कर लो जो होना ह वो होकर hi राजा, वो आएगा जरूर आएगा, उसे आना हो होगा, चाहे ये धरती फैट जाये या आसमान टूट पड़े, उसे आना hi होगा, मैं लेकर आऊंगा उसे, और जब वो आएगा तो विध्वंश होगा, पूरी धरती कैंप उठेगी, अपराधियों को सजा मिलेगी और ऐसा विनाश होगा ये पूरा राजय ठहराएगा, उस औरत का अपमान पूरी प्रकर्ति लेगी तुम सबसे,

इतना बोल क्र भौमिक जो तेज कदमो से वह से निकल गए, पूरा परिवार भोचक्का सा खड़ा रह गया, किसी के मुँह से कोई शब्द नहीं निकला था, कुछ लोगो के चेरे पैर चिंता थी तो कुछ इस बात से अचंभित थे की निहारिका और देव को साजिश करके महल से निकला गया ह, रीवा अक्षरा अमिता और सोमिया इस बात से परइ तरह चौंक गई थी,

भौमिक जी अपने घर जाने की जगह वह चले गए जहा देव और निहारिका को लेकर गए थे, वो जगह भौमिक जी ने अपने धयान में देखि थी, वो उस पहाड़ी पैर खड़े हो गए, झरना इतना घेरा था की कोई पहाड़ भी उसमे गिरे तो ढूंढ़ने से न मिले, भौमिक जी अपने घुटनो पैर बैठ गए, उनकी आँखों में आंसू थे, आज उन्हें अपने जीवन में सब धुंधला दिख रहा था, कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था, बस 15 दिन साथ रहने से hi देव से उनका रिश्ता ितं अमजबुत हो गया था,

भौमिक जी जोर से चिलए devvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvv.
 
अपडेट-9


भौमिक जी जो कुछ बोल क्र गए थे उससे भवर सिंह का परिवार चुप चाप सुनकर खामोश बैठा हुआ था, उस शांति को काम्य ने भांग किया,

काम्य- ये सब भौमिक जी बकवास क्र रहे हैं, उन्हें कुछ नहीं पता, बस उस लड़के के मोह में आकर सब बोले जा रहे हैं, हमने कुछ गलत नहीं किया ह, उस लड़के और उसकी माँ ने अपराध किया ह और उसी की सजा उन्हें मिली ह, अमरावती और सौमित्र ने काम्य का समर्थन किया, भवर सिंह चुप बैठा रहा, लेकिन राजगुरु के चेरे पैर दर और तकलीफ दिख रही थी,

रात में राजगुरु भौमिक जी के पास गए, लेकिन भोमिकजी घर नहीं आये थे, राजगुरु परेशां हो गए,

वही महल में जश्न मनाया जा रहा था, सूरज और अभिजीत ने आयाशी के लिए लड़किया बुवाई हुई थी, वो दोनों मदिरा और लड़की का आनंद उठा रहे थे, वही ज्वाला एक जानवर को काट रहा था और उस पैर अपनी हार का गुस्सा निकल रहा था, अमरावती सौमित्र और काम्य एक साथ बैठी थी,

सौमित्र - वो चला गया लेकिन दोनों माँ बेटे थे तो एक करिश्मा hi,

अमरावती - करिश्मा कैसे

सौमित्र- निहारिका का शरीर सच में बहुत खूब सूरत था, देखने वालो के खड़े हो गए होंगे, पूरी परजा को मजा आ गया होगा, कसम से बड़ी फुर्सत से बनाया उसे उप्पेर वाले ने, और वो देवदूत तुमने उसका हथियार देखा था, मुरझाया हुआ भी कितना बड़ा और मोटा था, मुझे नहीं लगता इतना बड़ा किसी का होता होगा, शरीर तो साधारण सा hi था लेकिन उसका लिंग सच में अजूबा था,

काम्य- तुम उसका लिंग देख रही थी

सौमित्र- अरे दीदी नजर चली गई थी बस

अमरावती- बोल तो सच hi रही ह, था तो बहुत बड़ा उसका, बेचारा कहा कहा भटक रहा होगा,

काम्य- वो इस दुनिया से जा चुक्का ह,

अमरावती- क्या कैसे

काम्य- उसे मरवा दिया गया ह, ये बात किसी को पता न चले, ये राज सबसे छुपा हुआ ह लेकिन महाराज ने उन दोनों माँ बेटो को मरवा दिया ह,

सौमित्र- क्या सच में, ये तो कमल हो गया, मतलब हमेशा के लिए हमारा रास्ता साफ़ हो गया उन माँ बेटो से,

काम्य- है बिलकुल,

अमरावती- उस लड़की और उसके परिवार का क्या हुआ

काम्य- वो परिवार लापता ह, न जाने कहा चले गए सब, और वो लड़की भी गायब ह,

सौमित्र- कही आपने hi तो गायब नहीं करवा दिया उन्हें,

काम्य- नहीं इसमें मेरा हाथ नहीं ह, लेकिन उनका मिलना बहुत जरुरी ह, एक तो इस भौमिक ने आकर सब गड़बड़ क्र दी थी, वो भला हो महाराज ने उसकी बात पैर धयान नहीं दिया वर्ण हमारे सर पैर भी तलवार लटकी मिलती,

अमरावती- लेकिन महारज ने उस पैर धयान क्यों नहीं दिया,

सौमित्र- महाराज गुस्से में रहे होंगे, इसलिए ध्यान नहीं दिया, खैर अब हमे जश्न मानना चाहिए,

तीनो बैठ क्र शराब पिने लगी,

वही चारो बहन एक कमरे बैठी थी और सभी उदास थी,

अमिता- मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा निहारिका माँ ऐसा कर सकती हैं,

सोमिया- हम देव की तारीफ कर रहे थे देखो उसने क्या किया,

अक्षरा- देव ऐसा नहीं कर सकता, आपने सुना न भौमिक जी ने क्या कहा था,

अमिता- लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी,

अक्षरा- सुनी क्यों नहीं ये बड़ी अजीब बात ह, महाराज के समाने इतनी बड़ी बात कही गई और उन्होंने उस पैर धयान नहीं दिया,

सोमिया- रीवा तुम कुछ नहीं बोल रही,

रीवा- क्या बोलू, जिसकी माँ और भाई पैर दुराचार का इल्जाम लगा हो और राजय से बहार क्र दिया गया हो, वो क्या बोलेगी, मैं तो शर्म से मर जाना चाहती हु, लेकिन मुझे यकीन नहीं ह मेरी माँ ऐसा करेगी, और देव का भी यकीन नहीं हो रहा, वो ऐसा नहीं कर सकता,

अमिता- हवस कुछ भी करवा सकती ह रीवा,

अक्षरा- जो हवस हम लोगो के भाइयो में दिखती ह वही हवस न, क्या तुमने अपने अपने सेज भाइयो में वो हवस देखि ह, कभी उनकी हवस के लिए तो तुम लोगो में से कोई नहीं बोलै, और जो इंसान दुनिया की हर औरत लड़की को सम्मान की नजर से देखता था उसके अंदर हवस दिख रही ह, इस राजय में कितनी hi लड़किया हैं जो राजकुमारों के साथ सम्भोग करने के लिए मरी जा रही होती हैं, फिर भी उसने कभी किसी को नजर उठा कर नहीं देखा, जब सूरज और अभिजीत ने उस लड़की के साथ दुराचार किया था तब केवल देव था उनका विरोध करने के लिए, उस समय आप सब में से कोई नहीं बोलै की हमारे भाइयो में हवस ह, उस बेचारी लड़की के साथ गलत हुआ, सिर्फ देव उसके लिए लड़ा और उसी की सजा उसे मिली थी, तब महाराज ने ये सजा सूरज और अभिजीत को क्यों नहीं दी, आज उस मस्सों लड़के को ऐसी सजा दी, और निहारिका माँ, इस राजय में एक से एक सूंदर मर्द हैं उनका मन तब तो नहीं भटका, आज भटेगा वो भी उस प्रताप सिंह के लिए, जिसका चेहरा भी कोई देखना नहीं चाहता, ये सब साजिश ह ये सब उन दोनों को फ़साने की साजिश ह,

अक्षरा की बात से वह ख़ामोशी च गई, सबको याद आया की कुछ समय पहले hi सूरज और अभिजीत ने एक लड़की के साथ ये सब किया था और काम्य ने सब कुछ वही ख़तम करवा दिया था, उन्हें कुछ भी नहीं बोलै गया, जब ये बात हम तक पहुंच सकती ह तो क्या महाराज तक नहीं पहुंची होगी,

सोमिया- सही बोल रही ह अक्षरा,

अमिता- हम उसके बारे इतना क्यों सोच रहे हैं, ये हमारा काम नहीं ह

रीवा का रोना निकल गया वो वह से उठी और बहार भाग गई,

सोमिया- कैसी बात करती ह अमिता तू, जो भी हुआ हो सही या गलत लेकिन रीवा को तो तकलीफ होगी न उसकी माँ और भाई हैं वो,

अमिता- मैंने सोचा hi नहीं, रीवा हमेशा हमारे साथ रहती ह न तो याद hi नहीं रहा इसका कोई रिश्ता भी ह उनसे,

अक्षरा गुस्से में अमिता को देखती हुई रीवा के पीछे चली गई,

अगले कुछ दिन ऐसे hi काट गए, महल में सनता था, भवर सिंह अपने कमरे से बहार नहीं निकला था, वही राजगुरु भौमिक जी को ढूंढ ढूंढ क्र परेशां हो चुके थे, वो घर नहीं लोटे थे, बाकि परजा में बस देव और निहारिका की बात थे, शुरू में तो उनके कर्मो की बुराई हो रही थी, लेकिन कुछ hi समय में वो बाते उनके शरीर पैर पहुंच गई, राजय के हर मर्द की जुबान पैर निहारिका के शरीर की तारीफ थी, वही जिन जिन औरतो ने देव के लुंड को देखा था वो सब चुप चुप क्र बस उसके बारे में hi बाते कर रही थी, किसी को फरक नहीं पड़ा था उनके साथ क्या हुआ, सही हुआ या गलत वो जिन्दा हैं या मर गए, किसी को फरक नहीं पड़ता था,

राजय के कुछ आयाश लोग, जो वेश्या वर्ती करवाते थे, या लूट पैट पार्टी थे, ऐसे लोगो के कुछ समूह निहारिका को ढूढ़ने निकल पड़े, उनके लिए निहारिका सोने का अंडा देने वाली मुर्गी थी, अगर वो मिल गई तो वो उनकी कमाई का साधन बन सकती थी, वो लोग राजय के आस पास के इलाको में ढूंढ रहे थे, लेकिन किसी को कोई जानकरी नहीं मिली, उनमे से एक लुटेरे ने राजा के सैनिको से अपनी जानकरी बधाई और उनसे खबर निकलवाई, तो पता चला आखरी बार देव और निहारिका को पहाड़ी पैर लेजाया गया था, तो वो लोग उस पहाड़ी पैर ढूंढ़ने लगे, इस खोजबीन में काफी दिन गुजर गए,

और महल का जीवन फिर से पहले जैसे चलने लगा, इन बीते दिनों में सूरज ज्वाला और अभिजीत पूरी आयाशी में लगे थे, वही काम्य अपने भाई से मिलने के लिए रोज उसके कमरे के बहार घूमती रहती थी, सौमित्र की कामुकता उसे परेशां कर रही थी, और अमरावती अपना जश्न मन रही थी राजय के सेना पति के साथ, उसने सेना पति को वादा किया था, प्रतियोगिता के बारे बताने के लिए उसे इनाम देने का और वो इनाम था अमरावती की छूट, राजगुरु और भवर सिंह के व्यस्त होने की वजह से सेनापति को पूरी आजादी मिल गई और उस आजादी का फायदा अमरावती और सेनापति खूब अच्छे से उठा रहे थे,

उधर सौमित्र पूरा दिन अपने कमरे में नंगी घूमती रहती उसके बदन की गर्मी उससे बर्दास्त नहीं हो रही थी, भवर सिंह उसके पास थे नहीं और सौमित्र बिना सम्भोग किये रह नहीं सकती थी,

इस बिच सात्विक की विद्या पूरी हो चुकी थी, और सात्विक इतना विद्वान बन गया की वो कुछ भी करने की शक्ति रखता था, उसे दक्षिण दिशा की तरफ निकलना था लेकिन उससे पहले वो अपने घर अपने भाइयो से मिलने आया, और जब सात्विक घर आया तो उसे भौमिक जी के बारे में पता चला, सात्विक और भौमिक में काफी प्रेम था, सात्विक को बड़ा दुःख हुआ,

राजगुरु- सात्विक तुम कहा चले गए थे, मैं कितना अकेला हो गया था, तुम भी चले गए थे और अब भौमिक भी चला गया,

सात्विक- भैया मैं आ गया हु न अब सब ठीक क्र दूंगा, आप चिंता मत कीजिये और आपके महाराज जो चाहते हैं मैं उसका हल भी लेकर आया हु,

राजगुरु- क्या सच, क्या ऐसा हो सकता ह,

सात्विक- मैं ऐसी विद्याये सिख क्र आया हु जो कुछ भी कर सकती हैं, लेकिन पहले मुझे दक्षिण दिशा की तरफ जाना ह, वह कुछ ऐसा ह जो हमे सफलता दे सकता ह, लेकिन मैं पहले भौमिक को ढूंढूंगा उसके बाद उधर जाऊंगा,

राजगुरु- कहा धुंडु उसे, मैं उसे कही नहीं ढूंढ पाया

सात्विक- मैं ढूंढ लूंगा, मुझे एक हवन करना होगा

राजगुरु- जो करना ह करो,

सात्विक ने राजगुरु की आज्ञा ली और अपने घर आकर एक तांत्रिक हवन करने बैठ गया, इस हवन से वो किसी भी इंसान को ढूंढ सकता था, तो उसने भौमिक जी को ढूंढ लिया जो अपने धयान में एक पहाड़ी पैर पेड के निचे बैठे हुए थे,

सात्विक ने राजगुरु को खबर भिजवाई की भौमिक जी मिल गए हैं वो उन्हें लेने जा रहा ह, सात्विक भौमिक जी के पास चल दिया,

इधर भवनपुरा में प्रताप सिंह ने हुम्ला कर दिया, उसके अंदर निहारिका को खोने का ऐसा दुःख था जिसे वो बर्दास्त नहीं कर प् रहा था, उसे वडा किया गया था की निहारिका उसकी हो जाएगी, लेकिन निहारिका मर गई, प्रताप सिंह ने अपनी बदनामी करवाई लेकिन निहारिका फिर भी नहीं मिली, प्रताप सिंह इसे अपने साथ धोखा मान रहा था और धोखे का बदला लेने के लिए वो चल दिया हुम्ला करने, उसकी सेना राजय के बहार आ चुकी थी, भवर सिंह को जब पता चला तो उसकी चिंताए बढ़ गई, प्रताप सिंह शक्तिशाली राजा था, उसके पास एक बड़ी सेना थी,

भवर सिंह के कमरे तक ये खबर पहुंचे गई, सेनापति जो अब तक अमरावती की छूट में घुसा पड़ा था वो अपनी सेना को तैयार करने लगा, कुछ hi देर में सभा में सभी जरुरी लोग खड़े थे,

भवर सिंह- ये प्रताप सिंह हम पैर क्यों हुम्ला कर रहा ह, हमने इसे यहाँ से जिन्दा भेज दिया, इस अहसासन का बदला वो युद्ध करके उतरेगा,

राजगुरु- महाराज हमे उससे बात करनी चाहिए, वो हमारा मित्र राजय ह, ऐसे हुम्ला क्यों कर रहा ह,

सेनापति- नहीं हमे हुम्ला करना चाहिए,

राजगुरु- उस सेना पैर हुम्ला करना इतना आसान नहीं ह, वो पूरी तैयारी के साथ आया ह और हमारे योद्धाओ ने काफी समय से युद्ध नहीं लड़ा ह, पूरी सेना को तैयार करने में समय लग जायेगा,

भवर सिंह- आप hi बताइये हमे क्या करना चाहिए,

राजगुरु- हमे उससे बात करनी चाहिए और जाना छाइये वो क्या चाहता ह, क्योकि हुम्ला करने से उसे भी कोई फायदा नहीं होगा, ये बा तवो भी जनता ह वो हमे हरा नहीं सकता, लेकिन नुकसान बहुत कर सकता ह, और इसमें उसका भी नुकसान होगा, और अगर बात चित करने से नहीं मंटा ह तो सेना तो ह hi युद्ध के लिए, जब हम उससे बायचित करते हैं तब तक सेनापति सेना को तैयार करेंगे इससे हमे समय भी मिल जायेगा,

भवर सिंह- ये सही ह, आप अपना दूत भेजिए वह,

काम्य- मैं जाउंगी दूत बनकर

भवर सिंह- नहीं ये नहीं हो सकता हम तुम्हे उस जानवर के पास नहीं भेज सकते,

काम्य- आप मुझ पैर बहरोसा रखिये, मैं hi हु जो बिगड़ती हुई बात को सम्हाल सकती हु,

भवर सिंह- नहीं तुम नहीं जाओगी, राजगुरु जायेंगे

राजगुरु को प्रताप सिंह के पास भेजा गया दूत बना कर,

राजगुरु प्रताप सिंह के सामने खड़े थे,

प्रताप सिंह- भवर सिंह ने आपको भेजा ह शांति के लिए, लेकिन जो मुझे चाहिए उसके बिना शांति नहीं होगी,

राजगुरु- क्या चाहिए तुम्हे,

प्रताप सिंह- जो मुझे चाहिए था वो तो तुम लोगो ने पहले hi ख़तम क्र दिया, मेरा अपमान हुआ ह इस महल में, मैं इस महल को तबाह क्र दूंगा,

राजगुरु- ये तो आप भी जानते हैं महाराज आप हमसे जीत नहीं सकते,

प्रताप सिंह- लेकिन नुकसान तो इतना बड़ा कर सकता हु के ये राजय कभी उभर नहीं पायेगा,

राजगुरु- इससे आपका भी नुकसान होगा, ऐसा रास्ता निकाइये जिससे दोनों को फायदा हो नुकसान नहीं,

प्रताप सिंह- भवर सिंह से कहना मुझे उसकी बेटियों से शादी करनी ह,

राजगुरु – बेटियों से, या किसी एक बेटी से,

प्रताप सिंह- नहीं दो बेटियों से,

राजगुरु- और वो कोण कोण हैं,

प्रताप सिंह- निहारिका की परछाई रीवा और दूसरी जिसे भवर सिंह चाहे,

राजगुरु- ये गलत ह, एक राजकुमारी से विवाह मन जा सकता ह लेकिन दो नहीं,

प्रताप सिंह- मेरी ये hi शरत ह, वर्ण युद्ध झेलो और तुम्हारी परजा को ये भी बता दूंगा की कैसे उस निहारिका को ख़तम किया था तुम सबने,

राजगुरु के चेरे पैर चिंता आ गई,

राजगुरु- ठीक ह मैं महाराज से बात करता हु,

राजगुरु ने वापस आकर भवर सिंह को सब बताया, अब भवर सिंह के पास कोई रास्ता नहीं था, लेकिन रीवा को तो आदेश देना आसान था क्योकि अब उसके लिए बोलने वाला कोई नहीं था वो तो खैर पहले भी नहीं था, लेकिन अब तो वो अनाथ जैसी थी, लेकिन बाकि तीनो राजकुमारियों में से किसे तैयार किया जाये, कोण प्रताप सिंह से शादी करेगी, क्योकि तीनो की माओ को मानना मुश्किल था,

लेकिन ये रास्ता खुद काम्य ने आसान क्र दिया उसने आगे बढ़ क्र अपनी बेटी का नाम बोल दिया, अक्षरा को जब पता चला उसकी माँ ने उसका नाम प्रताप सिंह से शादी करने के लिए बोलै ह तो उसे यकीन hi नहीं हुआ, इधर रीवा जो अपनी माँ और भाई को खो क्र उस प्रताप सिंह से बची थी, अब फिर उसी कैद में जाने वाली थी,

भवर सिंह ने प्रताप सिंह को सन्देश भिजवा दिया की वो शादी के लिए तैयार ह, लेकिन शादी की तरीक वो खुद तय करेंगे,

प्रताप सिंह खुश हो गया,

इधर सात्विक भौमिक जी को ढूंढता हुआ पहुंच गया उस जगह जहा भौमिक जी धयान में बैठे हुए थे, भौमिक जी को देख क्र सात्विक की आँखों में नाम आ गाइट hi, भौमिक जी की हालत hi ऐसी थी, जब से देव मारा था भौमिक जी ने कुछ नहीं खाया पिया था वो भूके प्यासे hi धयान में लगे हुए थे,

सात्विक भौमिक जी के पास बैठ गया,

सात्विक- भैया

सात्विक की आवाज सुनकर भौमिक जी ने आँखे खोल दी,

भोनिक जी- सात्विक मेरे भाई तू आ गया, कहा चला गया था तू, मैं कितना अकेला पद गया था,

सात्विक- तुमने ये क्या हालत बना राखी ह अपनी,

भौमिक जी- मैं अपनी जिमेदारियो में नाकाम रहा,

भौमिक जी ने सात्विक को साडी घटनाये कह सुनाई,

सात्विक- इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं ह, जो होना ह वो होकर hi रहेगा, तुम एक लड़के के लिए इतना परेशां हो और वही मैंने इतनी बड़ी उपलब्धि प् ली ह, मैंने ऐसी ऐसी विद्याये प्राप्त क्र ली हैं जिससे मैं कुछ भी कर सकता हु, उन्ही विद्याओ की वजह से मैं आपको ढूंढ पाया,

भौमिक जी- ये विद्याये उस राजा को अमरता देने के लिए हैं न जिसने ये सब किया ह, वो अत्याचारी राजा और उसका परिवार, उनके लिए तुम ये सब कर रहे हो,

सात्विक- नहीं भौमिक मैं तो ये सब भैया के कहने पैर क्र रहा हु, और अब खुद के लिए, हमारे लिए, मुझे कुछ ऐसी बाते पता चली हैं जिससे सब बदल जायेगा, मैं दक्षिण दिशा की तरफ जा रहा हु, जब वह से वापस आऊंगा तो देखना मैं सब बदल दूंगा, इस संसार में मेरा नाम विख्यात होगा,

भौमिक जी- मुझे बड़ी ख़ुशी होगी, तुमने किसी को ढूंढ़ने की विद्या पाई ह, क्या तुम मेरा एक काम कर सकते हो,

सात्विक- बोलो

भौमिक- तुम देव का पता लगा सकते हो वो कहा ह,

सात्विक- ये विद्या मरे हुआ का पता नहीं लगा सकती,

भौमिक- मेरा दिल कहता ह वो जिन्दा ह, तुम कोशिश तो करो,

सात्विक- ठीक ह तुम्हारे लिए जरूर करूँगा,

सात्विक ने वही पैर आसान लगाया और धयान में बैठ गया, भौमिक जी को कुछ सामान मंगवाया और हवन करने लगा,

काफी म्हणत करने के बाद भी वो देव को नहीं ढूंढ पाया,

भौमिक जी- क्या हुआ वो मिले

सात्विक- कुछ ह जो मुझे उनके पास तक जाने से रोक रहा ह, एक तेज रौशनी ह जो मुझे आगे देखने नहीं दे रही, ये कहना मुश्किल ह की वो जिन्दा ह या मर गए, क्योकि ये रौशनी उप्पेर वाले की ताकत भी हो सकती ह जो आत्मा का पता नहीं लगने देती, जो आत्माये मोक्ष प् जाती हैं उनके बारे में जान पाना नामुमकिन होता ह, या तो वो मर चुके हैं और मोक्ष प् चुके हैं,

सात्विक की बात से भौमिक जी का दिल रो पड़ा वो हताश हो गए, और जमीन पैर बैठ गए,

सात्विक- भाई आप इतने बड़े ज्ञानी हैं, किसी के जाने पैर ऐसे दुःख मन रहे हैं, इतना तो कोई अपनी संतान के लिए भी नहीं तड़पता, आप अपने परिवार को छोड़ क्र यहाँ भूके प्यासे दुःख मन रहे हैं वो भी एक अनजान राजकुमार का, ये अच्छे ज्ञानी की पहचान नहीं ह,

भौमिक जी- मैं नहीं जनता मेरा क्या रिश्ता ह उससे लेकिन ऐसा लगता ह बस वही अपना था मेरे लिए, उसके जैसी अच्छे मैंने किसी में नहीं देखि,

सात्विक- आप घर चलिए और अपने परिवार के बारे में सोचिये, बाकि सब उप्पेर वाले पैर छोड़ दीजिये, मैं अपनी मंजिल की तरफ बढ़ता हु, वापस आकर देखता हु क्या कर सकता हु आपके लिए,

सात्विक भौमिक जी को घर ले आया, और खुद अपनी मंजिल की तरफ निकल गया,

इधर महल में शादी की तैयारी शुरू हो गई, प्रताप सिंह संतोष तो नहीं था लेकिन उसे सकूं था निहारिका न सही उसकी बेटी तो उसके पास आ रही ह, भवर सिंह ने 15 दिन बाद शादी का समय रख दिया,

इधर सूरज और अभिजीत सुगंधा और उसके परिवार को ढूंढ रहे थे, कस्तूरी भी गायब थी, सूरज सिंह सुगंधा को बर्बाद करना चाहता था, क्योकि उसने भीड़ में से देव की मदद की थी, ये बात सूरज से बर्दास्त नहीं हो रही थी, वही ज्वाला युवराज बनने के लिए खुद को मजबूत क्र रहा था,

रीवा और अक्षरा अपनी किस्मत पैर रो रही थी लेकिन उन्हें बचने वाला कोई नहीं था,

अमरावती और सौमित्र एक बात नहीं समझ प् रही थी की काम्य अपनी बेटी की शादी प्रताप सिंह से करने के लिए क्यों मान गई, अक्षरा तो उसे सबसे ज्यादा प्यारी थी, फिर उस जानवर के पास क्यों भेज रही ह, उसकी कोई चल तो नहीं इस सब में,

क्योकि राजमहलों में कोई भी बिना कारन कुछ नहीं करता, और काम्य जैसी औरत इतना बड़ा कदम क्यों उठाएगी, और प्रताप सिंह कोई जवान लड़का भी नहीं था जिसके साथ अक्षरा का कोई भीतर भविष्य हो, वो भवर सिंह से भी बड़ा था उम्र में,

वही भवर सिंह को जो सकूं मिलना छाइये था वोन hi मिल रहा था, उसकी परेशानिया ख़तम hi नहीं हो रही थी, उसके लिए देव परेशानी थी लेकिन अब तो देव भी नहीं था, वो कभी समझ hi नहीं पाया की असली परेशानी उसकी महत्व कंषा ह, वो सब कुछ पाना चाहता था, अब उसका मन इस एक राजय से संतुष्ट नहीं हो रहा था, उसे और बड़ा राजा बनना था, जिसमे प्रताप सिंह सबसे बड़ा खतरा था, और वो खतरा अब उसके घर ताका ा चुक्का था, अपनी बेटियों का सोडा करके उसने इसका थोड़ अहल तो निकलना चाहा लेकिन प्रताप सिंह पैर विश्वास करना नमूमिक था, क्योकि प्रताप सिंह को भी बड़ा राजा बनना था, दूसरे राजाओ पैर भी राज करना था,

महल को सजा दिया गया था शादी के लिए, भवर सिंह की पत्नी और बेटे को मरे हुए अभी बस महीना भर हुआ था लेकिन उसे उनका कोई दुःख नहीं था, पुरे राजय में hi कोई दुःख नहीं था, कोई दुखी था तो वो थी रीवा और अक्षरा और एक और लड़की जो जंगलो में एक झोपडी में बैठी हुई आंसू बहा रही थी, उसके सर पैर एक आदमी ने हाथ फिराया- मत रो सुगंधा, मत रो

ये थी सुगंधा और आचार्य जी,

सुगंधा- पिता जी वो ऐसा नहीं ह, उसके साथ गलत हुआ ह,

आचार्य जी- मुझे भी यकीन नहीं होता वो ऐसा करेगा, लेकिन कस्तूरी झूट क्यों बोलेगी,

सुगंधा- अगर वो झूट नहीं बोल रही थी तो उसने आपको या घर में किसी को क्यों कुछ नहीं बताया, और वो ह कहा, उस दिन से गायब क्यों ह, और उसके साथ माँ भी गायब ह,

आचार्य जी- मैं खुद परेशां हु, लेकिन धुन्धु भी तो कहा, हम दोनों खुद समाज की नजरो से छिपे हुए यहाँ जी रहे हैं, हमे जरूर राजा के लोग दूध रहे होंगे, हमारी वजह से उनका बीटा और पत्नी को महल से निकल दिया गया,

सुगंधा- वो लोग कभी देव को न प्यार देते थे न hi सम्मान, उन्हें फरक नहीं पड़ता देव के साथ क्या हुआ, और आप कभी उस पैर शक मत करना, सूर्य अपना रास्ता बदल सकता ह लेकिन देव ऐसा कुछ नहीं कर सकता, एक बार ये कस्तूरी मिल जाये तब सच का पता चले,

शादी का समय नजदीक आता जा रहा था, प्रताप सिंह ने एक सेना तैयार की हुई थी जिसमे 500 सैनिको को अलग से तैयार किया गया था, जो इस काबिल थे की वो 500 सैनिक 10000 की सेना को आराम से मार गिराए, बहुत hi खूंखार थे वो,

शादी के दो दिन पहले hi प्रताप सिंह की बारात भवर सिंह के महल में आ चुकी थी, और प्रताप सिंह उन सैनिको को बाराती बना क्र महल के अंदर ले आया था, उसे अंदर डार्ट है कही भवर सिंह धोखा न कर दे, पुरे राजय में खुशिया मनाई जा रही थी, प्रताप सिंह के महल में आते hi सबसे पहले काम्य ने उसका स्वागत किया, अमरावती और सौमित्र भी खुश थी, क्योकि उनकी बेतिया बच गाइट hi, वही सूरज और अभिजीत भी प्रताप सिंह के स्वागत में लगे हुए थे, लेकिन ज्वाला वह से गायब था,

रात में काम्य प्रताप सिंह के पास पहुंची अकेले में,

प्रताप सिंह- आओ आओ काम्य जी, आपको देख क्र हमारा दिल खुश हो जाता ह,

काम्य- इसीलिए अपनी बेटी को भेज रही हु, ताकि आप उसे देख क्र खुश होते रहे,

प्रताप सिंह- हमारी इच्छा तो आपको ले जाने किट hi, लेकिन लगता ह अब आपकी बेटी से hi सबर करना पड़ेगा,

काम्य- लगता ह आपको कुँअरि लड़कियों की जगह हम जैसे भरे बदन की औरतो की चाहत ह,

प्रताप सिंह- सभी औरतो किन hi, आपकी चाहत ह बस

काम्य- और निहारिका की, उसकी चाहत नहीं थी,

प्रताप सिंह- क्यों जले पैर नमक छिड़क रही हो काम्य जी, उस औरत को पाने के लिए मैं दुबारा जनम भी ले सकता हु, मुझे हैरत ह की इतने वर्षो तक वो औरत मेरी नजरो के सामने क्यों नहीं आई, कसम पैदा करने वाले की उसे पाने के लिए मैं पूरा राजय उजाड़ देता,

काम्य- हहहहह शायद इसीलिए उप्पेर वाले ने उसे आपसे बचा क्र रखा था,

प्रताप सिंह- खैर उसकी बेटी भी उससे कुछ काम नहीं ह, लेकिन निहारिका होती तो कुछ अलग hi होता,

काम्य- निहारिका की बेटी और मेरी बेटी दोनों से आपकी शादी हो रही ह, लेकिन मेरी बेटी की तुलना उसके साथ मत करना, वाओ अहा रानी की तरह रही चाहिए, और वो रीवा नौकरानी की तरह,

प्रताप सिंह- अच्छा आप इसलिए यहाँ आई हो, आप जानती हो मेरी पहले से 4 रनिया ह, जिनमे से 2 तो काफी उम्र की हो चुकी हैं, फिर भी रनिया तो वही हैं, उनके बराबर का सम्मान तो इन दोनों को hi नहीं मिलेगा, उन रानियों से अलग भी न जाने कितनी hi राजकुमारी मेरी गुलाम हैं, मेरी चारो रानियों से 10 बच्चे हैं, और नाजायज कितने हैं ये तो मुझे गिनती भी नहीं ह, मेरे अंदर इतना वीर्य भरा हुआ की मन करता ह पुरे राजय की औरतो को अपने बच्चो की माँ बना दू, अब ये दोनों भी मेरे लुंड की सवारी करेंगी, और मेरी औलाद पैदा करेंगी, इनके बच्चे बड़े होकर मेरे राजय की सेवा करेंगे, फिर भी मैं आपकी बात का धयान रखूँगा, लेकिन उसमे मेरा क्या फायदा होगा,

काम्य- क्या चाहिए आपको



प्रताप सिंह ने मुस्कुरा कर काम्य को देखा,
 
अपडेट-10






भवर सिंह राजगुरु के साथ बैठा हुआ था,

भवर सिंह- राजगुरु हमने जो कार्य आपको दिया था उसमे कुछ सफलता मिली क्या,

राजगुरु- महाराज मेरा भाई सात्विक उसी में लगा हुआ ह, उसने मुझे बताया ह की वो अपनी मंजिल के बहुत करीब ह, उसे कुछ जानकारी मिली ह जिससे वो ये सब कर सकता ह

भवर सिंह- बहुत बढ़िया, उससे कहो जितना जल्दी हो सके ये काम करे,

राजगुरु- महाराज फ़िलहाल तो हमे इस शादी पैर धयान देना चाहिए, आपने न जाने क्यों ये शादी इसी समय राखी ह, मैंने आपको कहा था की ये समय ठीक नहीं ह, मुझे कुछ विनाश के संकेत दिख रहे हैं,

भवर सिंह- विनाश तो उस प्रताप सिंह का होगा, हमे डरने की जरुरत नहीं ह,

राजगुरु- ये आप कैसे कह सकते हैं,

भवर सिंह- ये hi वो समय ह राजगुरु जब पूरा भारत वर्ष हमारे राजय की ताकत को देखेगा, तुम भविष्य देखते हो, लेकिन हमने इस राजय का भविष्य उस समय दिखवा दिया था जब हम गद्दी पैर भी नहीं बैठे थे, ये hi वो समय ह जब ये राजय अपनी असली ताकत में होगा, मुझे उम्मीद ह तुम्हारा भाई जल्दी hi सफल होकर आएगा और हमे सबसे शक्ति शैली और अमर बना देगा फिर हम अपनी विजय यात्रा पैर निकलेंगे और सभी को जीत लेंगे,

राजगुरु चुप हो गए, लेकिन उनके मन में एक सवाल उठ रहा था की इस राजय की ताकत दिखेगी उसमे भवर सिंह की वजह से या किसी और की वजह से ये समझ के बहार था,

इधर रीवा अक्षरा अमिता और सोमिया बैठी हूत hi,

अमिता- यार इस प्रताप सिंह के कितने बच्चे हैं, जिसे देखो वो खुद को प्रताप सिंह का बीटा या बेटी बोलता ह,

सोमिया- मैंने माँ से सुना था इसके 10 बच्ची हैं और उससे ज्यादा नाजायज हैं, इसकी 4 रनिया हैं, अब दो और कर रहा ह, सुना ह इसका मन हवस से कभी नहीं भरता, और सबसे खास बात इसकी बस 1 बेटी ह वो भी इसकी तीसरी रानी से, सुना ह वो बड़ी खूंखार ह प्रताप सिंह उसी से थोड़ा सा डरता ह वार्ना ये किसी औरत की इज्जत नहीं करता, इसने बाकि रानियों या रखैलों से बेटो के अलावा जो बेतिया हुई थी उन्हें पैदा होते hi मरवा दिया, इसका बड़ा बीटा hi युवराज ह बाकि सब तो बस नाम के राजकुमार हैं, और सुना ह इसका बीटा इससे भी बड़ा हैवान और हवसी ह,

अक्षरा- हम लड़किया बस इसीलिए तो होती हैं, मेरा तो मन करता ह यहाँ से भाग जाऊ, मुझे किसी की गुलाम नहीं बनना,

रीवा- कोई फायदा नहीं ह, भाग क्र जायेंगे कहा, जब परिवार hi अपना न हो तो संसार में कोई अपना नहीं होता, ये hi हमारी नियति ह,

सोमिया- नियति बदल जाती ह, न जाने किसकी किस्मत में क्या लिखा हो, जैसे देव और निहारिका माँ के साथ हुआ, किसने सोचा था देव वो प्रतियोगिता जीत सकता ह, और वो जीत गया फिर भी अगले hi पल वो राजय से बहार क्र दिया गया, और मैंने तो ये भी सुना ह की देव और निहारिका माँ को मरवा दिया गया ह,

ये बात सुनते hi रीवा की साँस सी hi रुक गई,

अमिता- ये कहा सुना

सोमिया- काम्य बुआ और माँ बात कर रहे थे, उन्हें सैनिक राजय से बहार ले गए और मार दिया,

रीवा जोर से चीखी – nhiiiiiiiiiiiii

अमिता और सोमिया ने रीवा को बहो में भर लिया,

सोमिया- मुझे माफ़ करना मैं ये बताना नहीं छाती थी, लेकिन मेरे जज्बात अब नहीं रुक रहे थे, जब तक वो जिन्दा थे हमने कभी उनका सम्मान नहीं किया, आज वो इस दुनिया में नहीं ह, अब अहसास होता ह की उनसे अच्छा तो कोई और था hi नहीं, और भौमिक जी ने भी बताया था वो लड़की कस्तूरी खुद देव के पास आई थी,

अक्षरा- ये सब इस महल के लोगो की साजिश ह, मैं ये तो नहीं जानती की इसमें कोण कोण शामिल हैं, लेकिन इतना पता ह की मेरी माँ इसमें जरूर शामिल ह,

अमिता- ये बात अपने अंदर hi रखना अक्षरा, दीवारों के भी कान होते हैं, मुझे अब एक बात समझ आ गई ह की हमारे अपने ऐसे ह की वो खुद को बचने के लिए किसी की भी बलि दे सकते हैं,

ऐसे hi रात गुजर गई, और अगला दिन भी ऐसे hi गुजर गया, सब तैयारियों में लगे हुए थे, महल में नाचना गण होता रहा, और जल्दी hi शादी का दिन भी आ गया, रीवा और अक्षरा को दुल्हन बना दिया गया था, दोनों hi खूबसूरती में एक से बेहद एक एक थी, लेकिन चेरे पैर ख़ुशी नहीं थी, एक उदासी चाय हुई थी, लेकिन प्रताप सिंह ख़ुशी से फुला नहीं समां रहा था,

मंडप सज चुक्का था दुल्हन मंडप में आ चुकी थी, फेरो की तैयारी शुरू हो चुकी थी तभी प्रताप सिंह उठ गया, सभी चौंक गए,

भवर सिंह- क्या हुआ प्रताप सिंह आप ऐसे क्यों खड़े हो गए,

प्रताप सिंह- भवर सिंह जी आपने हमारी साडी बात तो मान ली लेकिन हम एक बात बतानी भूल गए थे, अब याद आ गई ह तो सोचा शादी से पहले उसे भी बता दे,

राजगुरु- ऐसी क्या बात रह गई जो आपको अब याद आई ह, वो भी फेरो से पहले,

प्रताप सिंह- मैं तुम्हारी दो बेटियों से शादी कर रहा हु उसके बदले में भी तो कुछ छाइये मुझे,

भवर सिंह- ये क्या बोल रहे हो, ये शादी की शरत तुमने hi तो राखी थी,

प्रताप सिंह- शरत किसी ने भी राखी हो, जब शादी होती ह तो लड़की वाले राजा को कुछ तो देते हैं,

काम्य- क्या चाहिए आपको

प्रताप सिंह- बहुत ज्यादा नहीं बस 100 हठी, 500 घोड़े, और उनके सैनिक और बस थोड़े से हिरे जवाहरात,

भवर सिंह- वो सब तो हम अपनी बेटियों की शादी में देते hi,

प्रताप सिंह- जो आप दे रहे हैं ये उससे अलग ह और उसके अलावा

भवर सिंह- उसके अलावा?

प्रताप सिंह- मेरे राजय के पास जुड़े हुए आपके राजय के 100 गाओं,

प्रताप सिंह की बात से वह सभी चौंक गए,

भवर सिंह- ये सब क्या बकवास ह, हम अपने राजय का हिस्सा कसिए दे सकते हैं और वैसे भी वो हिस्सा सबसे उपजाऊ ह हमारे लिए,

प्रताप सिंह- यही शरत ह हमारी, वर्ण ये शादी नहीं होगी,

भवर सिंह- तो मत करो

प्रताप सिंह- अगर फेरो पैर से तुम्हारी बेतिया उठ गई तो पुरे छत्रिया समाज में कोई इनसे शादी नहीं करेगा, ये साडी जिंदगी कुँअरि रहेंगी,

भवर सिंह- मेरी बेतिया कुँअरि रहेंगी लेकिन तुम यहाँ से वापस नहीं जा पाओगे,

प्रताप सिंह जोर से हँसा- हहहहहहहह

प्रताप सिंह- भवर सिंह तुम्हे क्या लगा, मैं यहाँ हु तो तुम मुझे कुछ भी कर सकते हो, मेरी सेना आज भी इस राजय को घेरे हुए खड़ी ह, और मेरे एक इशारे पैर अभी इसी समय यहाँ चारो तरफ खून भेना शुरू हो जायेगा, मेरे पीला हुए 500 खूंखार सैनिक यहाँ ह,

भवर सिंह- मैं तुझे जान से मार दूंगा,

प्रताप सिंह- कोशिश करके देख लो,

भवर सिंह ने संपत्ति को इशारा किया- सेनापति इसे बंदी बना लो,

सेनापति कुछ सेनिको के साथ आगे बढ़ा और तभी प्रताप सिंह ने अपना हाथ उठा कर इशारा किया और तभी वह चीख पुकार गूंजने लगी, प्रताप सिंह के सेनिको ने हुम्ला कर दिया, वो इतने ताकतवर थे की उनके समाने भवर सिंह के सैनिक बच्चे से लग रहे थे, प्रताप सिंह के सेनिको ने कत्लेआम मचा दिया था,

कुछ hi देर में प्रताप सिंह के सेनिको ने भवर सिंह और उसके परिवार को घेर लिया था,

प्रताप सिंह- ये तेरा राजय ह भवर सिंह लेकिन तू तेरे hi महल में मेरे सेनिको से घिरा हुआ खड़ा ह,

भवर सिंह- तुम यहाँ से बच क्र नहीं जा पाओगे,

प्रताप सिंह- कोण रोकेगा मुझे, तेरा पूरा परिवार मेरा बंदी ह, और इस राजय को मेरी सेना ने घेरा हुआ ह, जब राजा hi मेरा बंदी होगा तो ये पूरा राजय hi मेरा हो जायेगा, और अब मुझे शादी करने की क्या जरुरत ह तेरे परिवार की हर औरत मेरी रखैल बनेगी, सभी को नंगा घुमाऊंगा मैं,

भवर सिंह गुस्से में चीखता हुआ प्रताप सिंह की तरफ बढ़ा लेकिन प्रताप सिंह ने काम्य की गार्डन पैर तलवार रख दी,

भवर सिंह रुक गया,

प्रताप सिंह वैसे तेरी बहन भी किसी हसीना से काम नहीं ह, दिल करता ह इसी से शादी कर लू, न न शादी नहीं ये तो मेरी पालतू कुटिया बनेगी,

तभी पीछे से किसी के चीखने की आवाज आई,

राजगुरु- प्रताप सिंह हम यहाँ तुम्हारी कैद में हैं, और किसी को मत मारो, ये मार काट रोक दी,

प्रताप सिंह- अरे कोण ह जिसने मेरी आज्ञा के बिना किसी को मारा,

लेकिन प्रताप सिंह की सेना ने हुम्ला नहीं किया था, सभी सैनिक इधर उधर देखने लगे, तभी एक और चीख सुनाई दी, सबका धयान उधर गया, और देखा एक सैनिक हवा में उप्पेर उड़ रहा ह और फिर निचे जमीन में आकर गिरा, सब उधर देखने लगे, लेकिन आगे इतनी भीड़ थी की वह कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, और फिर सेनिको के छिलने की आवाज आने लगी, मारो मारो इधर से मारो उधर से मारो, पकड़ लो मर दो, उन आवाजों के बिच में अलग अलग सेनिको के चीखने की आवाज आ रही थी, सरे सैनिक उसी तरफ भागने लगे,

प्रताप सिंह- कोण ह किसने हुम्ला किया हम पैर, भवर सिंह रोक दे इस हमले को वर्ण तेरे परिवार को मार दूंगा,

भवर सिंह- मैं तो तुम्हारे समाने खड़ा हु मैं कहा से हुम्ला करवा सकता हु,

प्रताप सिंह जोर से चिलाय- रुक जाओ वर्ण इस परिवार को मार दूंगा,

प्रताप सिंह की बात का कोई असर नहीं था, अगर असर हुआ भी तो उल्टा hi क्योकि चीखे और तेज हो चुकी थी, जो सैनिक किसी भी सेना को मार गिराए वो मूली गाजर की तरह काट रहे थे,

तभी एक पेअर हवा में उड़ता हुआ आया और शादी के लिए बने हवन कुंड में आकर गिरा जिसे देख सब घबरा गए और तभी उसके पीछे किसी का हाथ किसा का पेअर तो किसी का सर आकर गिर रहा था, किसी का आधा धड़ हवा में उछाल हुआ दीखता, वह खड़े सभी दहशत में आ चुके थे, किसी की कुछ समझ में नहीं आ रहा था, प्रताप सिंह के लगभग 300 सैनिक मरे गए, बाकि सैनिक भी उसी तरफ भागे लेकिन वो सभी अपनी मोत की तरफ भाग रहे थे, और मोत भी ऐसी की किसी दुश्मन को भी न मिले, प्रताप सिंह थार थार कैंप रहा था, भवर सिंह खुश तो हो रहा था प्रताप सिंह के आदमियों को देख क्र लेकिन वह की मार काट देख उसकी भी रूह कैंप गई थी, और तभी एक सैनिक का आधा कटा हुआ शरीर भवर सिंह के पैरो में आकर गिरा, जिसे देख क्र सबकी सांसे रुक गई क्योकि उस शरीर को बिच में से चीरा हुआ था, और सबसे खास बात ये थी की उसके जो कपडे थे वो भवर सिंह के राजय के थे,

और जल्दी hi बाकी सेनिको के शरीर भी आने लगे, और जल्दी hi उनके साथ जो परजा के लोगो के शरीर के भाग भी आने लगे, अब दहशत वह खड़े सभी के दिलो में आ चुकी थी, क्योकि ये जो भी लोग थे वो सबको मार रहे थे, जो भी सामने आ रहा था,

भवर सिंह- सेनापति ये जिसकी भी सेना ह वो हमारी दोस्त नहीं ह, वो लोग हमारे भी आदमियों मार रहे हैं,

प्रताप सिंह- हम दोनों मिलकर इससे निजपत ते हैं उसके बाद खुद का फैसला कर लेंगे,

भवर सिंह को भी ये सही लगा उसने सेनापति को हमले का आदेश दे दिया, और खुद वह से भागने लगे, लेकिन वो ऐसी जगह खड़े थे जहा से सिर्फ एक hi रास्ता था निकलने का जिधर से हुम्ला हो रहा था, इसलिए भवर सिंह और प्रताप सिंह और दोनों का परिवार सेनिको के पीछे खड़े हो गए, और तभी एक सैनिक खून से लेथ पथ उनके पास आया और गिर पड़ा,

राजगुरु- सैनिक क्या हुआ, कोण हुम्ला क्र रहा ह, किसकी सेना ह ये, और महल तक कैसे आई,

सैनिक- ये सेना नहीं ह, ये सेना नहीं ह, वो वो अकेला अकेला

सैनिक इतना hi बोल पाया और उसने दम तोड़ दिया,

भवर सिंह- ये क्या बोल रहा था सेना नहीं ह, सेना नहीं ह तो कोण ह,

राजगुरु डरे सहने घबराये से बहवर सिंह को देखने लगे,

भवर सिंह- क्या हुआ राजगुरु क्या बताया इसने

राजगुरु- अकेला

भवर सिंह- अकेला?

तभी सेनिको के मरने की आवाजे करीब आने लगी, परिवार की औरतो की चीखे निकलने लगी, और जैसे hi सामने के सेनिको की भीड़ काम होने लगी तो सबकी नजर सामने गई, एक अकेला आदमी हाथ में एक कुल्हाड़ी लिए हुए आगे बढ़ा चला आ रहा था, उसका मुँह ढाका हुआ था, वो खून में पूरा भीगा हुआ था, और वो जिस पैर भी वॉर कर रहा था सामने वाले के शरीर को एक hi वॉर में चिर दे रहा था, इतनी ताकत एक इंसान में होना बहुत मुश्किल था, ऐसी मर काट और ताकत बस लोगो ने महभारत के युद्ध में और उन योद्धाओ में सुनी थी, लेकिन आज जो समाने हो रहा था उस पैर किसी को विश्वास नहीं हो रहा था,

और कुछ hi देर में उसने अपने सामने आये हुए सभी सेनिको और राजय के जो मर्द थे उन्हें भी मोत के घाट उतरता हु आगे बढ़ता हुआ आ रहा था,

प्रताप सिंह- कोण ह ये राक्षश, ये इंसान नहीं हो सकता, ये कोई राक्षश ह, ऐसी मर काट कोई राक्षश hi कर सकता ह,

भवर सिंह- मैं नहीं जनता ये कोण ह, लेकिन ये तुमने सही कहा ये कोई राक्षश hi ह,

अब भवर सिंह का सेना पति खुद उस आदमी के सामने आ गया था और उस आदमी ने कुल्हाड़ी का एक वॉर सेनापति पैर किया और उसकी गार्डन धड़ से अलग क्र दी, उसकी गार्डन अलग होते hi सभी औरतो की चीख निकल गई, उस आदमी ने सेनापति का सर बालो से पकड़ा और हवा में उठा के भवर सिंह और प्रताप सिंह के परिवार के पास आया, और सेनापति का सर भवर सिंह की तरफ उछाल दिया, भवर सिंह ने तुरंत सर को निचे फेंक दिया,

दर और घबराहट से किसी के मुँह से कोई आवाज नहीं निकल रही थी, दर की वजह से उन सभी को न जाने कहा कहा से पसीना निकल रहा था, सामने खड़े आदमी की बस आँखे दिख रही थी, बाकि पूरा ढाका हुआ था, और उसके पुर शरीर से खून टपक रहा था जो की उसके सामने आये सेनिको और लोगो का था,

वो बस शांति से खड़ा था, वो कुछ नहीं क्र रहा था हाथ में कुल्हाड़ी थी, उसके सामने खड़े सभी लोग थार थार कैंप रहे थे, बस वो अपने सामने खुद यमराज को देख रहे थे, बस इंतजार कर रहे थे की यमराज सबसे पहले किसको अपने साथ लेकर चैलेंज, जैसे hi उस आदमी का हाथ हिला तो सभी की चीख निकल गई,

राजगुरु- कोण हो तुम और क्या छाते हो,

राजगुरु के सवाल पैर भी सामने से कोई जवाब नहीं आया, वो बस खड़ा रहा, जब काफी देर कुछ नहीं हुआ तो प्रताप सिंह ने चालाकी करने की सोची उसने अपनी तलवार निकली और उस आदमी के पेट में घुसाने की कोशिश की लेकिन उस आदमी ने तलवार को अपने हाथ में पकड़ लिया, और प्रताप सिंह को अपनी तरफ खींच लिया, फर उसकी गार्डन पकड़ी और हवा में उठा लिया, प्रताप सिंह को पकड़ते hi प्रताप सिंह का परिवार चीखने लगा, और उसकी एक पत्नी जिसका नाम था रेणुका और उसकी बेटी रेवती, दोनों hi चीखती हुई सामने आई, और हाथ जोड़ क्र कड़ी हो गई,

उस आदमी ने दोनों को बड़े गौर से देखा और फिर प्रताप सिंह को देखा और न जाने क्या सोच क्र प्रताप सिंह को दूर फेंक दिया, फिर वो भवर सिंह की तरफ बढ़ा तो बिच में रीवा आ गई, और उसके पैरो में लेट गई, वो आदमी वही रुक गया,

उसने भवर सिंह को देखा फिर रीवा को देख क्र कुछ पल रुका और फिर अपनी कुल्हाड़ी उठाई और हवा मिले फिर मुदा और चला गया, ऐसा लगा जैसे कोई बवंडर आया और सब कुछ तहस नहस करके चला गया,

उसके जाते hi भवर सिंह घुटनो पैर गिर पड़ा, और प्रताप सिंह तो जहा गिरा था वह से हिला hi नहीं, भवर सिंह के गिरते वो बेहोश हो गया, सबने उसे उठाया और महल के अंदर की तरफ लेकर भागे, वही प्रताप सिंह को मौका मिल गया, वो उठा और अपनेपरिवार को लेकर तुरंत वह से भाग लिया, सबका धयान भवर सिंह पैर था, और दूर उस राक्षश पैर, प्रताप सिंह ने क्या किया था उस पैर किसी ने धयान hi नहीं दिया, प्रताप सिंह के साथ उसकी पातिना ुर बेटी hi थी बस, उसके बेटे और परिवार को उसने पहले hi भेज दिया था, कुछ लोगो, रिश्तेदार सेनिको और राजय के लोगो वह रुके थे उनमे औरतो के सिवा सब मर चुके थे,

प्रताप सिंह सीधा अपने राजय में जाकर रुका,

वही भवर सिंह को होश hi नहीं आ रहा था, सूरज अभिजीत और ज्वाला जो अब तक अपनी माओ के पीछे छुपे बैठे थे उन्हें बुखार चढ़ चुक्का था, उन्होंने आज तक ऐसे विनाश नहीं देखा था, उन्होंने तो क्या किसी ने ऐसा विनाश नहीं देखा था,

औरतो की हालत और भी ख़राब थी, रीवा अक्षरा अमिता और सोमिया वो चारो hi बेसुध सी पड़ी थी, इधर राजय में रोना चीखना मचा हुआ था, जिन जिन के पति बेटे मरे गए वो है है करके रो रहे थे, कोण आया क्यों मार गया किसी को कुछ समझ नहीं आया, बस एक सुनामी आई और अपने साथ सब बहा क्र ले गई,

पुरे राजय में मातम च गया, कहा अभी शादी हो रही थी कहा पूरा राजय मातम मन रहा था, भवर सिंह को जब होश आया तो वो थार थार कैंप रहा था, पसीने से भीगा हुआ था,

वो डार्क र उठ क्र बैठ गया और चारो तरफ देखन ेलगा, उसके पास बस राजगुरु और वैद hi थे, बाकि वैद परिवार के दूसरे लोगो को औषधि दे रहे थे,

भवर सिंह- राजगुरु राजगुरु क्या हुआ क्या हुआ कहा गया वो, क्या मेरे परिवार को मार दिया उसने, कहा ह मेरा परिवार,

राजगुरु- शांत हो जाइये महाराज सब सुरक्षित हैं वो चला गया ह, अब सब ठीक ह

भवर सिंह- कोण था वो,

राजगुरु- अभी तक उसकी कोई जानकरी नहीं ह, आप ठीक हो जाइये उसके बाद मैं पता करता हु,

भवर सिंह- मैं ठीक हु आप बस उसका पता कीजिये,

राजगुरु- मैं पूरी कोशिश करूँगा महाराज, हुए अपने जासूस भेजने चाहिए, आप जल्दी से सभा बुलाइये और पुरे राजय को इस दुःख में आपका साथ चाहिए, उनके भी बहुत लोग मरे हैं,

भवर सिंह- प्रताप सिंह वॉक अहा गया,

राजगुरु- वो मौका देख क्र भाग गया महाराज

भवर सिंह- हम उसे जिन्दा नहीं छोड़ेंगे, उसने हमारे साथ धोखा किया,

राजगुरु- धोखा हमारे किसी अपने ने किया ह,

भवर सिंह- ये क्या बोल रहे हो आप

राजगुरु- इतने सरे योद्धा हाथियों के साथ महल के अंदर कैसे आये, वो महेमान थे तो उनके पास हथियार कैसे आये, जभी महल से बहार hi सभी हथियार रखवा दिए जाते हैं,

भवर सिंह सोच में पद गया, हमारे पहेरेदारो ने ऐसे कैसे आने दिया,

भवर सिंह- उन पहेरेदारो को सभा में बुलवाइए जिसने ये किया,

राजगुरु- अब किसे बुलवाओ उस राक्षश ने सबको मर दिया, कोई भी नहीं बचा जो कुछ बता सके,

भवर सिंह- अब उस धोखेबाज का कैसे पता चलेगा, यहाँ तो सब अपने hi हैं,

राजगुरु- उसका भी पता कर लेंगे लेकिन उससे पहले इस राक्षश का कुछ करना होगा, इसके बारे में पता करना ज्यादा जरुरी ह,

भवर सिंह- राजगुरु वो कोई इंसान नहीं हो सकता, सभी राज्यों में पता करवाओ क्या ऐसा उनके यहाँ भी कोई आया ह या सिर्फ हमारे यहाँ आया ह,

राजगुर- मैं अभी पता करवाता हु,

उधर प्रताप सिंह दर में था, उसने अपनी सुरक्षा बढ़ा दी थी, उसके कमरे के बहार बहुत से सैनिक खड़े थे, प्रताप सिंह की बेटी रेवती उसने जीवन में पहेली बार खून देखा था, प्रताप सिंह अपनी बेटी को हमेशा छुपा कर रखता था, वो जीवन में पहेली बार अपने महल से बहार निकली थी और उसने आज वो नजारा देख लिया,

रेवती डार्क र अपने कमरे में शमी हुई सी बैठी थी, और रेणुका एक अच्छी योद्धा थी, प्रताप सिंह बस उसी के सामने थोड़ा झिझकता था, वो बहुत बड़ी जल्लाद थी, सही मायने में वो प्रताप सिंह से भी ज्यादा खतरनाक थी, वप खुद प्रताप सिंह की शादिया करवाती थी, उसे औरतो के साथ हैवानियत करने में बड़ा मजा आता था, वो औरतो को चीखते हुए देखना पसंद करती थी, प्रताप सिंह की ज्यादातर रखैल रेणुका की सेवा में रहती थी, प्रताप सिंह और रेणुका दोनों मिलकर औरतो के साथ मजे करते थे, रेणुका खुद एक हवन थी लेकिन आज उसने असली राक्षश देखा था, उसे बुखार चढ़ा हुआ था,

दोनों राजाओ में दर का माहौल था, और जल्दी hi ये खबर बाकि के राजाओ में भी पहुंच गई,

रात में राजगुरु अपने भाई भौमिक जी के पास पहुंचे क्योकि राजगुरु बस किसी की कुंडली पढ़ सकते थे, लेकिन इस राक्षश के बारे में कुछ जानते hi नहीं थे तो कुंडली कैसे पढ़ते, लेकिन भौमिक जी इसके अलावा बहुत कुछ देख सकते थे, इसलिए राजगुरु भौमिक जी के पास पहुंचे,

लेकिन भौमिक जी ने मिलने से मन कर दिया, राजगुरु हाथ जोड़ क्र भौमिक जी के घर के बहार खड़े हो गए,

अब भाई कैसा भी हो लेकिन भाई hi होता ह, भौमिक जी को अपने भाई पैर दया आ गई, उन्होंने राजगुरु को अंदर बुला लिया,

राजगुरु- भौमिक हमारा राजय बड़ी मुसीबत में ह अब तुम hi मदद कर सकते हो, यहाँ सात्विक भी नहीं ह जो उसके बारे में कुछ पता लगा सके, अब तुम hi हमारी सहायता कर सकते हो,

भौमिक जी- आपने मेरी कोई सहायता नहीं की थी, आपने उस लड़के को मरवा दिया, आपने ऐसा अपराध किया जिसकी कोई माफ़ी नहीं ह, और भगवान् उसी पाप की सजा दे रहा ह आप सबको,

राजगुरु- हमने जो किया वो गलत था लेकिन अब जो हो रहा ह वो और भी गलत हो जायेगा, पूरा राजय तबाह हो जायेगा, और हमारा कर्त्तव्य ह इस राजय की रक्षा करना, हमने भवर सिंह के पिता को वचन दिया था हमेषा इस राजय की रक्षा करेनेगे और भवर सिंह का साथ देंगे,

भौमिक जी- आपने कसम खाई थी मैंने नहीं,

राजगुरु- लेकिन राजय की रक्षा की तो खाई थीं ा,

भौमिक जी चुप हो गए, कुछ देर सोचने के बाद भौमिक जी ने आँखे बंद क्र ली और उस राक्षश के बारे में पता करने लगे, वो पूरी ताकत लगा रहे थे, लेकिन वह तक पहुंच नहीं प् रहे थे, वो कुछ भी ऐसा नहीं देख प् रहे थे, तभी उनके सर में एक तेज दर्द होने लगा, उनकी नसे फटने लगी, वो दर्द से बिलबिला उठे,

भौमिक जी- ahahhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhh मेरा सर

राजगुरु- क्या हुआ भौमिक

भौमिक- मेरा सर फैट रहा ह, भयानक दर्द हो रहा ह, ahahhhhhhhhhh जल्दी से वह एक औषधि राखी वो दीजिये मुझे वर्ण मेरी नसे फैट जाएँगी,

राजगुरु ने औषधि भौमिक जी को दी, कुछ देर बाद उन्हें रहत हुई,

राजगुरु- क्या हुआ था

भौमिक जी- मैं उसके बारे में कुछ नहीं देख प् रहा, ऐसा लगता ह जैसे वो इस दुनिया का ह hi नहीं, अलग hi ताकत ह कोई, मैं नहीं क्र पाउँगा, सात्विक शायद कुछ कर सके, शायद उसके अतीत का कुछ देख सके, क्योकि सात्विक ऐसा कर सकता ह,

राजगुरु- हमे जल्दी से सात्विक के पास जाना होगा,

राजगुरु तुरंत महल पहचुहे और जल्दी से कुछ घोड़े तैयार करवाए और कुछ सैनिक लेकर चल दिए सात्विक जी की तरफ, वो दक्षिण दिशा की तरफ गए थे वो भी पैदल तो सात्विक तक पहुंचना ज्यादा नुश्किल नहीं था, राजगुरु सात्विक के बारे में जानकरी निकलते हुए तेजी से उधर बढे जा रहे थे,

इधर रीवा और अक्षरा एक दूसरे से लिपटी हुई थी,

अक्षरा- रीवा ये सब क्या हुआ, क्या हम खुश होये या जो लोग मरे गए हैं उनके लिए दुःख मनाये,

रीवा- अक्षरा ये सब जो हुआ ह उसमे किसको फायदा हुआ ह, यहाँ मोत का तांडव हुआ ह लेकिन हमारे पिता के लिए हमारे लिए तो फायदा hi हुआ ह,

अक्षरा- वो कैसे



रीवा- हमारा फायदा तो ये हुआ की हमारी शादी उस प्रताप सिंह से रुक गई और प्रताप सिंह ने जो पिता जी को धोखा दिया हम पैर हुम्ला क्र दिया, अगर वो राक्षश नहीं आता तो हमारे राजय पैर प्रताप सिंह का कब्ज़ा हो जाता और हम सबकी प्रताप सिंह की रखैल होती,
 
अपडेट-11






दक्षिण दिशा में घने जंगलो के बिच में एक तेज रौशनी उठ रही थी, जिस जंगल में कोई जानवर तक नहीं घुसता था जहा सूर्य की रौशनी भी नहीं पहुँचती थी, एक ऐसी जगह यहाँ जीवन अपना दम तोड़ दे, उस जंगल में इतनी तेज रौशनी उठ रही थी की वह से हजारो किलोमीटर दूर से उस रौशनी को देखा जा सकता था, लेकिन उस रौशनी का तेज इतना अधिक था की कोई भी अपनी आँखों से उसकी तरफ देख नहीं प् रहा था, उस रौशनी के के करीब कोई जा hi नहीं प् रहा था, आस पास के राज्यों में उस रौशनी की चर्चा जोरो पैर थी, जो पिछले 1 महीने से दिख रही थी, अलग अलग राज्यों से सेनाय उधर जाने की कोशिश क्र रही थी लेकिन कोई भी वह तक नहीं पहुंच प् रहा था, जो भी उस रौशनी के 100 कम के आस पास आता उसकी आँखे धुंदला जाती उसे दिखना hi बंद हो जाता था,






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वह के नजदीकी राजय दर की वजह से खली होने लगे, ऐसा लग रहा था जैसे सूर्य धरती पैर आ गया हो लेकिन उसमे कोई गर्मी नहीं थी बस तेज रौशनी थी, और ऐसी hi मिलती जुलती रौशनी पहाड़ो में कही उठ रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे पहाड़ो के बिच में से कोई सूर्य बहार निकलना चाहता हो, बड़े बड़े ज्ञानी उस रौशनी को नहीं देख प् रहे थे,





इधर भवर सिंह के महल में बहुत कुछ हो चुक्का था, जब देव और निहारिका को मारा गया उसके 15 दिन बाद ये रौशनी उठने लगी थी, धीरे धीरे इसकी खबर आस पास के राज्यों में फैलती गई, जब भवर सिंह और प्रताप सिंह शादी में लगे हुए थे तो उत्तर और दक्षिण राजय इस रौशनी की खोज में लगे थे,

खैर राजगुरु बड़ी तेजी से सात्विक को ढूंढ़ते हुए जा रहे थे, और उन्हें सफलता भी मिल गई, सात्विक जैसा तेज किसी साधारण इंसान में नहीं होता इसलिए वो जहा से गुजरता था लोग उसे बड़ा सम्मान देते, इस वजह से राजगुरु को आसानी हो गई वह तक पहुंचने में,

राजगुरु जब सात्विक पास पहुंचे तो वो एक गाओं में रुका हुआ था, और वह कुछ जानकरी ले रहा था, राजगुरु को वह देख क्र सात्विक चौंक गया,

सात्विक- भैया आप यहाँ, क्या हुआ सब ठीक ह न

राजगुरु- बहुत बड़ी शंश्य आ गई ह हमारे राजय पैर, और उसके बारे में किसी को कुछ भी जानकारी नहीं ह

सात्विक- ऐसी क्या संशय आ गई ह, जिसकी वजह से आपको यहाँ तक आना पद गया,

राजगुरु ने राजय में जो हुआ उसके बारे में सब बता दिया,

सात्विक- राक्षश, नहीं भैया राक्षश ऐसा नहीं करते, और वैसे तो राक्षश बचे नहीं ह, और अगर हैं भी तो यहाँ नहीं आ सकते, ये कोई और ह,

राजगुरु- तुम hi पता करो ये कोण ह, क्या ह और क्यों हुम्ला किया ह,

सात्विक- भैया मेरे पास समय काम ह, मुझे एक विचित्र शक्ति के बारे में पता चला ह, मैं उसी की खोज में जा रहा हु,

राजगुरु- अगर तुम चले गए तो सब अनर्थ हो जायेगा, हमारा राजय ख़तम हो जायेगा,

सात्विक- भैया मेरा वह जाना बहुत जरुरी ह,

राजगुरु- मैं अपने सैनिक और घोड़े तुम्हे दे दूंगा जिससे तुम वह जल्दी पहुंच सको, पैदल तो तुम्हे वैसे भी समय लगने वाला ह,

सात्विक- लेकिन मैं यहाँ से कुछ नहीं देख पाउँगा, मैं उसी इंसान के बारे में पता कर सकता हु जिसे मैंने देखा हो, या वो जगह जहा कुछ हुआ हो,

राजगुरु- तो तुम्हे महल चलना होगा और सब देखना होगा,

सात्विक मजबूर हो गया वो अपने भाई की बात नहीं ताल सकता था, इसलिए राजगुरु के साथ वापस चल दिया,

इस सब में 3 दिन गुजर गए थे, सात्विक महल में पहुंचे तो राजगुरु उसे लेकर वही पहुंच गए जहा ये हुम्ला हुआ था, कुछ hi देर में भवर सिंह और पूरा परिवार वह आ गया, सात्विक के आने की खबर भौमिक जी को भी लगी वो भी वह आ गए,

सात्विक ने जब वह खून hi खून देखा, ऐसा मंजर था जिससे देख किसी का भी दिल दहल उठे,

सात्विक – महाराज हवन का इंतजाम कीजिये,

भवर सिंह ने सात्विक के बताये अनुसार हवन का इंतजाम करवा दिया, सात्विक हवन में बैठ गए, साथ में भौमिक जी को बैठा लिया भौमिक हवन में सात्विक की सहयता कर रहे थे,

सभी इंतजार में बैठे हुए थे, अचानक सात्विक जी की आँखे बंद हो गई लेकिन भौमिक जी हवन करते रहे, सात्विक ने पहले hi समझा दिया था, कुछ देर सात्विक शांत रहे लेकिन अचानक उनके चेरे पैर अजीब से भाव आने लगे, शरीर पसीने से भीगने लगा, अचानक सात्विक ने घबरा कर अपनी आँखे खोल दी,

सभी एक दम उठ खड़े हुए,

राजगुरु- क्या हु सात्विक सब ठीक ह न, तुम ठीक हो न,

सात्विक का गाला सूखा हुआ था, सात्विक ने लोटे में रखे पानी को जल्दी जल्दी पि लिया,

भौमिक जी- क्या हुआ सात्विक क्या देखा तुमने

सात्विक- वो बहुत गुस्से में ह, यहाँ जो हुआ वो तो कुछ भी नहीं ह, अगर उसे नहीं रोका गया तो वो सबकुछ तबाह करने की ताकत रखता ह, वो अकेला hi पुरे राजय का विनाश कर सकता ह,

भवर सिंह- ह कोण वो क्या ह वो, कोई राक्षश ह क्या,

सात्विक- मैं नहीं जनता, उसके बारे में कुछ नहीं दिख रहा बस काळा कपड़ो में चेरा ढाका हुआ, एक साया सा दीखता ह, लेकिन उसका क्रोध उसकी आँखों से दिख रहा ह, उसका शरीर फौलाद का ह, वो इंसान ह या कोई राक्षश ये तो मैं अभी नहीं बता सकता, मैंने उसका अतीत भी देखने की कोशिश की लेकिन ऐसा लगा जैसे उसका कोई अतीत hi नहीं ह, वो अभी पैदा हुआ ह,

राजगुरु- ये कैसे हो सकता ह,

सात्विक- भैया मैं वही बता रहा हु जो दिख रहा ह, बस इतना पता चला ह की वो बहुत तकलीफ में भी ह, एक गुफा दिख रही ह, उसके आस पास कोई और भी ह लेकिन एक तेज रौशनी मुझे कुछ देखने नहीं दे रही, ये रौशनी इतनी तेज ह की मेरे शरीर को चिर्र hi थी,

रौशनी का नाम सुनते hi भोनिक जी ने सात्विक को देखा,

भौमिक जी- क्या ये वैसी hi रौशनी थी सात्विक जैसे तुमने तब देखि थी,

सात्विक- है ये वैसी hi रौशनी थी, कुछ ह जो मुझे सब कुछ देखने नहीं दे रहा, मेरी विद्या अभी भी उतनी शक्तिशाली नहीं हुई ह जिससे मैं सबकुछ देख सकू,

राजगुरु- हमे क्या करना चाहिए सात्विक

सात्विक- उसे आप ताकत से तो नहीं रोक पाएंगे, हमे उससे भी ज्यादा ताकतवर किसी की जरुरत होगी, उसके लिए मुझे अपनी मंजिल को पाना होगा, और मुझे अभी निकलना होगा,

भौमिक जी- मैं तुम्हारे साथ चलता हु सात्विक,

सात्विक- मुझे भी ऐसा hi लगता ह, हम दोनों मिलकर hi इस संशय से निपट सकते हैं,

भवर सिंह- तब तक हम उसे कैसे रोकेंगे,

सात्विक- वो रुका कैसे था, ऐसा क्या हुआ था जिससे वो रुक गया,

अक्षरा- रीवा की वजह से,

सात्विक- वो कैसे,

राजगुरु- जब वो महाराज की तरफ बढ़ा तो ये बच्ची बिच में आ गई और हाथ जोड़ लिए, वो अचानक रुक गया,

सात्विक ने रीवा को आगे बुलाया,

सात्विक- बेटी तूने अपने पिता की रक्षा की ह, वर्ण उससे इन्हे बचाना नामुमकिन था, तेरे रहते तेरे पिता को कोई खतरा नहीं ह, महाराज इस बच्ची को अपने करीब रखिये, आप इसी की वजह से जिन्दा ह, और मुझे उम्मीद ह ये hi आपकी रक्षा कर सकती ह,

सात्विक की बात से पूरा परिवार चौंक गया, जिस लड़की को कभी ठीक से प्यार नहीं मिला, जिसे कभी सम्मान नहीं मिला आज वही इस राजय की रक्षक बन गई थी, भवर सिंह ने आँखों में आंसू लिए रीवा को देखा और आगे बढ़ क्र अपने सीने से लगा लिया, ये देख क्र अमरावती सौमित्र और काम्य के शरीर में आग सी लग गई,

राजगुरु- महाराज इन दोनों को तुरंत भेजना चाहिए ताकि ये जल्दी से अपनी मांजी को प् सके और इस राजय को बचा सके,

भवर सिंह- जैसा आप कहे राजगुरु,

सात्विक और भौमिक को सबसे तेज दौड़ने वाले घोड़ो और कुछ सेनिको को साथ भेज दिया गया,

पूरा परिवार घबराया हुआ था, भवर सिंह ने आदेश दे दिया की रीवा का कमरा उसके कमरे के सामने करवा दिया जाये, जब तक सात्विक और भौमिक उस राक्षश का अंत नहीं ढूंढ लेते तब तक रीवा हर कदम पैर भवर सिंह के साथ रहेगी, भवर सिंह को एक पल के लिए भी अकेला नहीं छोड़ेगी,

काम्य अमरावती और सौमित्र के लिए आग लगाने वाली बात थी, सबको लग रहा था रीवा को सम्मान मिल रहा ह, क्योकि पुरे राजय में ये खबर फ़ैल चुकी थी, सभी की जुबान पैर बस रीवा का hi नाम और उसकी तारीफ थी, इससे अमरावती सौमित्र काम्य सूरज ज्वाला अभिजीत जल भून गए, और इसका असर अमिता और सोमिया पैर भी hua,un दोनों के मन में भी जलन ने जगह ले लिट् hi, लेकिन वो दिखा नहीं रही थी, बस अक्षरा hi थी जो दिल से खुश थी, सबकी नजर में ये सम्मान था लेकिन रीवा के लिए तो ये एक सजा थी, उसकी अपनी जिंदगी तो कुछ रही hi नहीं, वो तो एक तरह से भवर सिंह की रक्षा कवच बन गई थी जिसे महारवाज की रक्षा करने के अलावा कुछ भी करने की अनुमति नहीं थी,

आस पास के राज्यों में भी राक्षश और रीवा की कहानी फैलने लगी, ये बात सब जानते हैं की एक बार कोई कहानी शुरू होती ह तो जीतनेय मुँह उतनी बाते हो जाती हैं, और जल्दी hi राक्षश की कहानी में और भी कहानिया जुड़ती चली गई, लोगो में दर फैलने लगा, और उनका दर hi उनकी कहानिया बनाने लगा, अब भवर सिंह का राजय और आस पास के राज्यों में ये बात घूमने लगी की रीवा में कोई देविया शक्ति ह, क्योकि कोई देवता hi किसी राक्षश से लड़ सकता ह, और रीवा ने राक्षश से युद्ध किया और उसे भगा दिया, राक्षश ने किसी लड़की और औरत को नहीं आरा था, तो ये भी खबरे फ़ैल गई की राक्षश लड़कियों से डरता ह, और उसका परिणाम ये हुआ की जो लोग लड़कियों के होने पैर दुःख मानते थे या उन्हें मार देते थे, वो अब अपनी बेटियों को साथ लेकर घूम रहे थे अपनी रक्षा के लिए, सभी राज्यों में लड़कियों का सम्मान होने लगा उनकी पूजा होने लगी,

इधर प्रताप सिंह तक भी ये खबर आ चुकी थी की भवर सिंह की जान उसकी बेटी रीवा ने बचाई थी, उसे भी अपना याद था की उसकी बेटी के सामने आने से hi उस राक्षश ने उसे दूर फेंक दिया था, और जब उसे पता चला की भवर सिंह ने रीवा को अपनी रक्षा के लिए अपने साथ रखा ह तो प्रताप सिंह ने भी अपनी बेटी रेवती को अपने पास रख लिया, वो अपने राजय में किसी को नहीं बता रहा था की उसकी बेटी की वजह से उसकी जान बची ह, क्योकि उसकी कहानी बताने वाला कोई जिन्दा वापस hi नहीं आया था अहा से, और जो वापस आये वो अपना मुँह खोलने वाले नहीं थे, उसने ये hi बताया की वो राक्षश से लड़ा और वह से निकल आया,

लेकिन खबरे कहा छुपती हैं, धीरे धीरे सबको समझ आने लगा की जो राजा हमेशा अपनी नवजात बेटिओ को मार देता था आज अपनी बेटी पैर इतना महेरबान क्यों ह, क्योकि प्रताप सिंह ने भी रेवती का सम्मान बढ़ा दिया था, अगर कुछ अच्छा हुआ था तो वो रेवती के लिए हुआ था, उसे पहेली बार अपने महल से बहार निकलने का मौका मिला था, अपने राजय को देखने का मौका मिला था, वर्ण उसने तो कभी अपने कमरे और अपनी माँ के कमरे के अलावा पूरा महल भी नहीं देखा था, उसे हमेषा मर्दो की नजरो से दूर रखा जाता था, बस दसिया होती थी उसके पास और कोई नहीं, किसी सैनिक को भी उसके आस पास जाने की अनुमति नहीं थी, क्योकि जिअसे प्रताप सिंह हवसी था वैसा hi वो पुरे समाज को समझता था, इसलिए अपनी बेटी पैर पाबन्दी रखता था, अब रेवती को महल में घूमने और प्रताप सिंह के साथ बहार निकलने की अनुमति मिल गई थी,

किसी के साथ अच्छा तो किसी के साथ बुरा हो रहा था,

वही भौमिक जी और सात्विक दोनों बड़ी तेजी से उस रौशनी की तरफ बढे चले जा रहे थे, वो जैसे जैसे उस रौशनी के नजदीक पहुंच रहे थे उनकी आँखों से दिखना बंद होता जा रहा था, लेकिन यहाँ भौमिक जी की विद्या काम आ रही थी, उन्होंने अपनी विद्या से खुद पैर और सात्विक पैर एक सुरक्षा कवच बनाया और आगे बढ़ते चले गए, जैसे जैसे वो नजदीक जार हे थे रौशनी और तेज होती जार hi थी, और कमल ये था की इतनी रौशनी में भी उन्हें ठण्ड लगने लगी थी, अब घोड़ो ने उनका साथ छोड़ दिया था और जो सैनिक साथ आये थे उनसे भी बर्दास्त नहीं हो रहा था, उस रौशनी के अंदर का दबाव वोन hi सेह प् रहे थे, उन्होंने भी भौमिक और सात्विक का साथ छोड़ दिया और वापस मुद गए, लेकिन दोनों भाई पैदल hi उस तरफ बढ़ते रहे,

भौमिक- सात्विक ये वैसा hi प्रकाश ह जो तुमने देव को खोजते समय देखा था,

सात्विक- है ये वैसा hi प्रकाश ह, मेरी विद्या भी इसके पर नहीं देख प् रही और उस राक्षश को ढूंढते हुए भी ऐसा hi प्रकाश था उसके आस पास,

भौमिक- तो क्या ऐसा हो सकता ह की देव यही पैर हो, इसीलिए तुम देख नहीं पाए उसे,

सात्विक- संभव ह, लेकिन वो यहाँ इतनी दूर कैसे आएगा,

भौमिक- उसके साथ कुछ भी हो सकता ह उसके लड़के का भविष्य लगातार बदलता रहता ह,

सात्विक- ऐसा कैसा हो सकता ह, संसार में किसी का भविष्य नहीं बदल सकता,

भौमिक- मैं जब जब उसका भविष्य देखा ह हर बार कुछ अलग hi दिखा ह, और सबसे खास बात उसके भविष्य की कुछ झालीखा hi दिख पति हैं जो बदल जाती हैं, पूरा भविष्य तो बस खली दीखता ह जैसे उसके जीवन में कुछ ह hi नहीं,

सात्विक- ये तो बड़ा अजीब ह, ऐसा कैसे हो सकता ह, आपसे भीतर भविष्य कोई नहीं देख पता और जब आप hi उसका भविष्य नहीं देख प् रहे हैं तो फिर जरूर कुछ बात ह,

भौमिक- हो सकता ह यही से हमे कुछ जानकरी मिल जाये,

दोनों भाई आगे बढ़ने लगे, और उस रौशनी के नजदीक पहुंचने लगे, सबसे कमल बात ये थी वो रौशनी में जितना अंदर जाते बस रौशनी उनके आगे hi दिखाई देती पीछे वही अँधेरा होता जाता, ऐसा लग रहा था रौशनी उन्ही के साथ सिमटती जा रही ह, लेकिन किसी और के लिए वो उतनी hi फैली हुई होती थी,

वो दोनों भाई उस रौशनी के अंतिम घेरे में पहुंच गए और उनके सामने था एक पेड जो उस रौशनी में चमक रहा था, उस पेड का हरे क पत्ता चमक रहा था, जैसे किसी ने हर पत्ते में रौशनी भर दी हो, इतना खूबसूरत नजर संसार में किसी ने नहीं देखा था, दोनों भाइयो की आँखे उस नज़ारे को देख क्र खुद आंसू बहाने लगी, दोनों अपने घुटनो पैर बैठ गए,

सात्विक- भाई क्या तुमने कभी इतना खूबसूरत कुछ देखा ह,

भौमिक- नहीं भाई कुछ नहीं देखा, इस पेड की रौशनी हजारो मिलो तक फ़ैल रही ह, और कितनी शीतलता ह यहाँ, अब तो ये रौशनी आँखों को सकूं दे रही ह,

सात्विक- लेकिन ये रौशनी इस पेड में आई कहा से, इस पेड का आकर देख क्र लगता ह ये हजारो साल पुराण पेड ह,

भौमिक- और ये रौशनी अभी क्यों आई, क्या यहाँ किसी देवता या भगवान् ने अवतर तो नहीं लिया, या फिर यहाँ किसी महर्षि ने कोई तपश्या की हो,

सात्विक- मैं नहीं जनता, लेकिन मुझे इतना पता ह ये रौशनी ये पेड हमारे भविष्य की चाबी ह,

दोनों भाई उस पेड के करीब पहुंच गए और जैसे hi वो पेड के करीब पहुंचे तो पेड के पत्तियों की रौशनी काम होती चली जा रही थी, वो डार्क र पीछे हुए तो रौशनी फिर चमकने लगी,

भौमिक- हम जितना इसके करीब जा रहे ये रौशनी उतना hi सिमटती जार hi ह, ये रौशनी जरूर इस पेड के अंदर से आ रही ह, जो दूर से ऐसा लग रहा जैसे ये पूरा पेड hi रौशनी पैदा कर रहा ह,

और हुआ भी वैसा hi जैस एही दोनों पेड के करीब पहुंचे तो रौशनी सिमट क्र पेड तन ेके बिच में रह गई,

सात्विक- इस पेड में कुछ रखा हुआ ह,

दोनों भाइयो ने जैसे hi पेड को हाथ लगाया, तभी एक जतका सा लगा और सब कुछ गायब हो गया, चारो तरफ अँधेरा च गया,

जैसे hi वह अँधेरा चाय तभी पहाड़ो में जो रौशनी चमक रही थी वो भी गायब हो गई, सब कुछ शांत हो गया,

सभी राज्यों में वो रौशनी दिखनी बंद हो गई, किसी को कुछ समझ नहीं आया की ये क्या हुआ, एक दम से वो रौशनी कहा से आई थी और कहा चली गई,

वही दूर एक गुफा में एक चीता बैठा हुआ था, और उसके सामने आग जल रही थी और उसके आग के दूसरी तरफ सुंदरता की मूरत बैठी हुई थी और उसके पास बैठा था एक लड़का,

और वो लड़का था देव और उसके पास बैठी हुई थी निहारिका, और सामने था वही चीता जिसने उस पहाड़ी पैर देव पैर हुम्ला किया था, तीनो जिन्दा थे और चीता एक पालतू जानवर की तरह उनके सामने बैठा हुआ था,

देव- माँ हमे वह जाना चाहिए और अपनी सच्चाई साबित करनी चाहिए,

निहारिका- नहीं देव हम ऐसा नहीं करेंगे, अब हम वो करेंगे जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की होगी,

देव- मैं अपने गुस्से को रोक नहीं प् रहा हु, जब उन्हें पता चलेगा हम जिन्दा हैं तो उनकी क्या हालत होगी,

निहारिका- सही समय आने पैर पता चलेगा उन्हें, अब हम वो निहारिका और देव नहीं हैं जिन्हे कोई आये और साजिश करके मरवा दे, हम यहाँ ह तो उसका कोई मकसद होगा, हमे अभी चुप क्र hi रहना होगा और अपना काम करना होगा,

देव उठा और दीवार के पास खड़ा हो गया, और सबसे खास बात ये थी की देव पूरा नंगा था, और उसका लुंड जोइस वक़्त पुरे जोश में खड़ा हुआ था, उसका लुंड का आकर पहले से भी ज्यादा बढ़ा हुआ था, और उसे जरा सिब hi शर्म नहीं आ रही थी अपनी माँ के सामने नंगा खड़ा होने में, देव दीवार के पास गया तभी निहारिका भी उठी और उसके पीछे गई, और जब निहारिका उठी तो ऐसा था जैसे कामदेव की रति खुद जमीन पैर उतर आई हो, संसार ने निहारिका की जो सुंदरता देखि थी आज वो उससे कई सो गुना अधिक सूंदर थी, उसका बदन इस समय किसी के सामने आ जाये तो वो जीवन में किसी और औरत को देख hi नाप ए, उसकी सुंदरता में अपने होश खो सकता था, शरीर का एक एक कटाव इतना जानलेवा था की जैसे किसी मूर्तिकार ने अपनी सबसे सूंदर मूर्ति बना क्र उस पैर अभिमान किया हो,

शायद संसार दुबारा ऐसी सुंदरता नहीं देख पायेगा,

निहारिका- शांत हो जा देव, हमे जिस अपराध की सजा मिली ह अब वो अपराध होगा, और ऐसा होगा की जिस जिस ने हमे अपराधी सब्त किया ह वो अपने अपराध के लिए रोयेंगे, तेरे पास संसार का सबसे खूबसूरत हथियार ह उसका इस्तेमाल क्र, और है इस दुनिया में तेरे और मेरे शिव कोई रिश्ता हमारा नहीं ह, तुझे उसके लिए जॉब hi कदम उठाना पड़े फरक नहीं पड़ता,

देव- उसके लिए मुझे संसार के सरे नियम तोड़ने होंगे,

निहारिका- तेरा ये जनम उन नियमो को तोड़ने के लिए hi हुआ ह, अब कोई नियम हमे नहीं रोक सकते,

देव- मैं उनकी जिंदगी नरख बना दूंगा,

निहारिका- उन्हें उस नरख का अनुभव होना भी चाहिए,

देव- वैसा hi होगा,

चीता ने भी एक जोर दर दहाड़ मरी,

निहारिका- लगता ह ये भी तैयार ह,

देव- तो सबसे पहले कहा

निहारिका ने बड़े गुस्से में बोलै – प्रताप सिंह

देव की आंको में गुस्सा भरा हुआ था,

वही प्रताप सिंह ने अपने संपत्ति को आदेश दिया हुआ था की संसस की सबसे ताकतवर सेना तैयार की जाये, संसार की कोई ताकत उस सेना से लड़ नाप ए, और पुरे राजय की घेरा बंदी कर दो,

प्रताप सिंह के दिल में दहशत बैठी हुई थी, वही रेवती इतने लोगो के सामने आने से थोड़ी गहराई हुई सी रहती थी लेकिन वो खुश भी बहुत थी, वही राजय के मर्द जब जब रेवती को देखते तो आहे भरते थे, क्योकि प्रताप सिंह से लोग बस डरते थे उसकी इजात नहीं करते थे, और जिस राजा की इज्जत नहीं करते उसके परिवार की इज्जत कैसे करेंगे, सभी की नजरो में गन्दगी थी, और ये बात रेवती को समझ भी आने लगी थी, रेवती को मर्दो को देख क्र काउतेज्ना तो होती लेकिन ऐसा कोई मर्द उसके समाने नहीं था जिसे दकह क्र उसके दिल में कोई भावनाये जागे, वो प्रताप सिंह को उन लोगो की नजरो के बारे में बता भी नहीं सकती थी उसे दर था कही प्रताप सिंह फिर से उसे वही कमरे में कैद न कर दे,

इधर प्रताप सिंह को पास्चतवा हो रहा था की उसकी शादी रीवा से हो रही थी और उसने सब गड़बड़ क्र दी, वो ये सब बाद में भी क्र सकता था एक बार शादी हो जाती तो आज दोनों सुरक्षा कवच उसके पास होते और वो राक्षश भवर सिंह को मार देता,

प्रतापप सिंह ने अपने ज्योत्षी को बुलवाया और उससे अपने भविष्य को दिखवाने लगा,

प्रताप सिंह- क्या दीखता ह मेरे भविष्य में,

ज्योत्षी- महाराज भविष्य कभी नहीं दीखता किसी का बस अच्छे बुरे का अनुमान लगाया जाता ह, और आपके भविष्य में अभी कोई अच्छा कार्य नहीं दिख रहा ह, लेकिन अगर आप चाहते हैं कुछ बदल जाये तो अपनी बेटी की शादी करवा दीजिये,

प्रताप सिंह- वही तो एक सुरक्षा कवच ह मेरा उसे भी खुद से दूर कैसे कर दू

ज्योत्षी- वो हमेशा बंद कमरों में रही ह, अब बहार निकली ह अगर उसका मन भटका तो आप रोक नहीं पाओगे, लड़की जवान हो रही ह और आपसे भीतर कोई नहीं समझ सकता, और ये सच भी ह जब तक वो आपकी तरफ कड़ी ह तभी तक आप सुरक्षित हैं लेकिन मैं उसे भक्ति हुए देख रहा हु,

ज्योत्षी की बात से प्रताप सिंह का दिमाग ख़राब हो गया, उसके मन में बहुत से विचार उठने लगे, वो जनता था इस उम्र में लड़की को रोकना आसान नहीं होता ह, उसने तुरंत रेणुका को बुलाने के लिए एक दासी को भेजा, ज्योत्षी वह से चले गए, प्रताप सिंह अपनी hi चिंता में बैठा हुआ था, तभी रेणुका वह आई,

रेणुका- क्या हुआ महाराज ऐसे उतावले होकर क्यों बुलावा भेजा

प्रताप सिंह- बात hi ऐसी थी

रेणुका- क्यों क्या कोई रखैल आपको शांत नहीं क्र पाई जो मेरी जरुरत पद गई,

प्रताप सिंह- बा तवो नहीं ह, बात हमारी बेटी रेवती की ह,

रेणुका- क्या हुआ रेवती को,

प्रताप सिंह- वो अब जवान हो गई ह और जवानी में लड़किया क्या कर सकती हैं,

रेणुका- क्या वो किसी से चुद गई ह,

प्रताप सिंह- नहीं अभी ऐसा नहीं हुआ ह लेकिन ज्योत्षी के हिसाब से उसे मन भटक रहा ह, और एक बार मन भटका तो रुकेगा नहीं,

रेणुका- मैं ऐसा नहीं होने दूंगी,

प्रताप सिंह- एक मर्द hi ऐसा होने से रोक सकता ह औरत नहीं,

रेणुका- वो कैसे

प्रताप सिंह- उसकी जरुरत पूरी करके,

रेणुका- क्या शादी से पहले,

प्रताप सिंह- उसकी शादी होना जरुरी तो नहीं ह न, अगर उसकी शादी हुई तो वो मुझसे दूर हो जाएगी और मेरी जिंदगी को खतरा होगा, वो बस मेरे पास रही चाहिए,

रेणुका- लेकिन उसकी जरुरत पूरी कैसे होगी, कोण करेगा ये

प्रताप सिंह ने बड़ी अजीब नजरो से रेणुका को देखा और मुस्कुराया,

रेणुका ने आँखे बड़ी करके प्रताप सिंह को देखा,

रेणुका- आपके दिमाग में ये सब आता कैसे ह,

प्रताप सिंह- क्यों तुम्हे पसंद नहीं आया क्या

रेणुका मुस्कुरा दी- मुझे कोई ऐतराज नहीं ह, बस आप देखना क्या करना ह,



रेवती अपनी आने वाली जिंदगी के सपने देख रही थी और उसके माँ बाप अलग hi योजना बना रहे थे,
 
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