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- Dec 5, 2013
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### Part - 18
शावर में साबुन और अनियंत्रित स्पर्श ने आनंद मित्तल और अनीता ग्रोवर के बीच की साड़ी औपचारिकताओं को ध्वस्त कर दिया था. अनीता की 'यह वाक़ई बहुत बड़ा है' वाली टिपण्णी ने आनंद जी के आत्मविश्वास और उत्तेजना को चरम पर पहुंचा दिया था.
आनंद जी ने अब पानी की बौछारें बंद कर दी. कमरे में अचानक आयी शांति और भाप भरे माहौल ने उत्तेजना को और बढ़ा दिया था.
आनंद जी ने अनीता को दीवार की और धकेला, और प्यार से उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया.
आनंद जी (अत्यंत धीमे, आदेश भरे स्वर में): "अनीता... तुमने मुझे इतना लम्बा इंतज़ार करवाया है. अब मैं कोई और औपचारिकता नहीं चाहता. मैं तुम्हे पूरी तरह महसूस करना चाहता हूँ."
अनीता की आँखें उनके चेहरे पर तिकी थी. वह समझ गयी की आनंद जी क्या चाहते हैं.
आनंद जी: "इसे अपने मुँह में लो. मैं तुम्हारे समर्पण को देखना चाहता हूँ."
अनीता, जो अब पूरी तरह से इस 'समझौता' और अपने पति के बच्चे की चाहत के लिए समर्पित थी, उसने कोई विरोध नहीं किया. उसकी आँखों में अब कोई शर्म नहीं थी, बल्कि एक शांत, तीव्र इच्छा थी.
अनीता धीरे से नीचे झुकी.
आनंद जी ने अपनी आँखें बंद कर ली. वह पांच साल की तड़प के अंतिम क्षणों को महसूस कर रहे थे.
अनीता ने आनंद जी के तने हुए लुंड को अपने मुँह में लिया.
आनंद जी को अपने शरीर में एक तीव्र, वर्जित लहार महसूस हुई. सविता के 'हैंड जॉब' के बाद, यह किसी महिला द्वारा दिया गया पहला mukh-maithun (ओरल सेक्स) था, और वह भी अनीता जैसी सुन्दर, विवाहित महिला dwara—yah अनुभव अत्यंत रोमांचक और उत्तेजक था.
अनीता ने थोड़ी देर के लिए रूककर, आनंद जी की आँखों में देखा, मनो वह उनकी प्रतिक्रिया जानना चाहती हो. फिर, उसने चूसना शुरू कर दिया.
अनीता की कुशलता और समर्पण ने आनंद जी को उन्माद की स्थिति में पहुंचा दिया. वह अपने बाल पकडे हुए थे, उनकी पीठ बाथरूम की ठंडी दीवार से तिकी हुई थी, और उनके मुँह से सिसकारियां निकल रही थी.
आनंद जी (दबी हुई आवाज़ में): "उह्ह्ह... आह! अनीता... तुम... तुम कितनी कमाल हो!"
पानी की बूँदें उनके पसीने से मिल रही थी, और उनके बैडरूम के पहले अंतरंग क्षण की शुरुआत, इस बाथरूम में, mukh-maithun की तीव्र उत्तेजना के साथ हो रही थी. आनंद जी को लगा की विनोद और सविता के साथ किया गया यह समझौता उनकी ज़िन्दगी का सबसे बेहतरीन फैसला था. उनकी तड़प को अब पूरी तरह से विसर्जन का रास्ता मिल चूका था.
आनंद मित्तल, अनीता ग्रोवर के द्वारा दिए गए तीव्र mukh-maithun (ओरल सेक्स) के आनंद में डूबे हुए थे. उनकी वर्षों की शारीरिक तड़प अब पूरी तरह से नियंत्रण से बहार थी. जब अनीता ने कुछ देर बाद सांस लेने के लिए मुँह हटाया, तो आनंद जी ने बिना कोई पल गंवाए, यह तय किया की वह भी अनीता को उसी तरह का तीव्र आनंद देंगे.
आनंद जी ने अनीता को प्यार से उठाया और शावर फिर से ों कर दिया. गर्म पानी की बौछारें उन दोनों के उत्तेजित शरीरों पर पद रही थी. आनंद जी अब दीवार से हटकर, अपनी उत्तेजना को नियंत्रित करते हुए, अनीता को वहीँ बाथरूम के फ्लोर पर झुका दिया.
आनंद जी ने अनीता की और देखा और उसके नीचे हिस्से पर अपना ध्यान केंद्रित किया. अनीता ने बच्चे पैदा करने के उद्देश्य से, उस यात्रा की तयारी में, अपने गुप्त अंग को पूरी तरह से 'क्लीन शेव' कर रखा था. यह saaf-safai आनंद जी के लिए एक और अनअपेक्षित और उत्तेजक सरप्राइज थी.
आनंद जी, जो वर्षों से शारीरिक संतुष्टि से दूर थे, उन्होंने तुरंत पहल की. उन्होंने अनीता की 'छूट' को चूसना और चेतना शुरू कर दिया.
अनीता के लिए, यह अनुभव बिलकुल नया और चौंकाने वाला था. उसका पति विनोद, पारम्परिक था और कभी भी इस तरह के अंतरंग खेल में शामिल नहीं हुआ था. अनीता को ज़िन्दगी में पहली बार यह मज़ा नसीब हुआ था.
अनीता के मुँह से ज़ोरदार, अनियंत्रित आहें निकलने लगी.
अनीता (सीसकरते हुए): "ओह! आनंद जी... यह... यह क्या है! आह! यह तो स्वर्ग है! रुको मत... प्लीज... ऐसे hi करते रहो..."
आनंद मित्तल ने अनीता के आग्रह को सुना और पूरी लग्न और कुशलता से उसे आनंद देना जारी रखा. अनीता की क्लीन शेव वाली त्वचा ने उन्हें पूरी तरह से साफ़ और तीव्र अनुभव दिया, जिससे आनंद जी की अपनी उत्तेजना और भी ज़्यादा बढ़ गयी.
आनंद जी, अपनी दशकों की वासना को अब अनीता के माध्यम से पूरा कर रहे थे. उन्हें लगा की वह इस पल के लिए hi जी रहे थे.
अनीता का शरीर पानी की बौछारों के नीचे काँप रहा था. उसे लगा की विनोद के साथ उसका पूरा वैवाहिक जीवन सूखा और अधूरा था, और उसने कभी सोचा भी नहीं था की यौन आनंद इतना तीव्र हो सकता है.
उस तीव्र आनंद के बीच, वह आनंद जी के साथ आना अपनी ज़िन्दगी का सबसे सही फैसला मान रही थी. बच्चा पैदा करने का उनका लक्ष्य तो था hi, लेकिन आनंद जी ने उसे जो शारीरिक संतुष्टि दी थी, वह अमूल्य थी.
कुछ hi पलों में, अनीता ज़ोरदार चीख के साथ अपनी चरम सीमा पर पहुँच गयी. उसकी टांगें थरथरा रही थी.
आनंद जी ऊपर उठे, उनके चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थी. उन्होंने अनीता को धीरे से उठाया और दोनों पानी की बौछारों के नीचे कसकर गले मिल गए.
अब, कोई समझौता या कागज़ात उनके बीच नहीं थे. वे पूरी तरह से ek-doosre के प्रति समर्पित the—ek बच्चा पैदा करने के मिशन पर, और एक अपने वर्जित आनंद की यात्रा पर.
*************
गर्म पानी के शावर और mukh-maithun के तीव्र दौर के बाद, आनंद मित्तल और अनीता ग्रोवर दोनों पूरी तरह से शांत, लेकिन अत्यधिक उत्तेजित थे.
आनंद जी ने प्यार से तौलिया उठाया और अनीता का गीला, saaf-suthra बदन पोंछना शुरू किया. यह स्पर्श अब वासना से ज़्यादा, स्नेह और परवाह का था.
आनंद जी (मुस्कुराते हुए): "तुम इतनी खूबसूरत हो, अनीता, की मैं अपनी आँखें नहीं हटा प् रहा."
अनीता (शरमाते हुए): "और आप तो... आप तो जादूगर हैं, आनंद जी. मुझे नहीं पता था की कोई पुरुष इतना आनंद भी दे सकता है."
फिर अनीता ने तौलिया लिया और आनंद जी का शरीर पोंछा. जब दोनों पूरी तरह से सूख गए, तो वे नग्न अवस्था में hi बिस्टेर की और बढे. होटल का आलिशान बिस्टेर उनका इंतज़ार कर रहा था.
वे दोनों ek-doosre के बगल में लेते, और आनंद जी ने तुरंत एक ज़ोरदार चुम्बन (किश) के साथ शुरुआत की. यह चुम्बन अब वर्षों की तड़प को सीधे संतुष्टि में बदल रहा था.
चुम्बन गहरा हुआ, और आनंद जी ने धीरे से खुद को अनीता के ऊपर स्थापित किया. उन्होंने ज़रा भी देर न करते हुए, अपने लुंड को अनीता की योनि (छूट) में दाल दिया.
अनीता (आह भरते हुए): "आह... आनंद जी!"
जैसे hi उनका वासना का एक बड़ा hi pyara-sa खेल शुरू हुआ, उनकी शारीरिक क्रियाओं के saath-saath, उनके बीच एक अंतरंग और उत्तेजक बातचीत भी चल रही थी, जो उनके संबंधों की जटिलता और जूनून को दर्शाती थी.
आनंद (धीमे, उत्तेजित स्वर में): "तुम... तुम बहुत गर्म हो, अनीता. तुम्हारे अंदर यह जो गर्माहट है... इसने मेरी सालों की तड़प को ख़तम कर दिया. मैं पागल हो रहा हूँ."
अनीता (हलकी सिसकारी के साथ): "और आप... आह!... आप तो आग लगा रहे हैं. मुझे लग रहा है जैसे मैं... मैं पहली बार सांस ले रही हूँ. विनोद ने कभी... कभी मुझे ऐसे आह! छुआ hi नहीं... या शायद उन्हें पता hi नहीं था की यह सब इतना प्यारा हो सकता है."
आनंद (गति बढ़ाते हुए): "मुझे पता है. मैं भी... मैं भी तुम्हारी तड़प समझता हूँ. इसीलिए मैंने सविता की बात मानी. तुम्हे पता है, तुम्हारे बच्चे की चाहत... मेरी इस भूख को जायज़ ठहराती है."
अनीता (आनंद में चीखते हुए): "हाँ! हमें... हमें एक बीटा चाहिए, आनंद जी! उन्हह!... हमें सफल होना है... और इसके लिए... इसके लिए मैं जो भी... जो भी आप कहेंगे... आह!... वह सब करुँगी."
आनंद (झुककर उसके होंठों पर चुम्बन करते हुए): "तुम कमाल हो. तुम्हारी यह ईमानदारी... और तुम्हारा यह समर्पण... मुझे और भी ज़्यादा उत्तेजित कर रहा है."
अनीता: "मुझे लगता है... मुझे लगता है, यह वही पल है... आह!... जिस के लिए मैं इतने साल जी रही थी. मैं... ओह!... मैं आपके साथ बहुत सुरक्षित महसूस कर रही हूँ... जैसे मैं किसी राजा की... रानी हूँ!"
आनंद: "तुम रानी hi हो, अनीता. मेरी रानी. और मैं तुम्हे वह सब दूंगा, जो तुम मांगोगी... तुम्हारी हर इच्छा पूरी करूँगा!"
अनीता (अंतिम तीव्रता में): "फिर... आह!... फिर मुझे अभी... अभी एक और बार... और ज़ोर से! मैं... मैं माँ बनना चाहती हूँ!"
दोनों की बातचीत में उनकी ज़रूरतों और इच्छाओं का मिश्रण था. आनंद जी अपनी वासना मिटा रहे थे, और अनीता अपने मातृत्व के सपने को साकार करने की तीव्र इच्छा में आनंदित थी. पहाड़ों के उस आलिशान कमरे में, न केवल उनके शरीर मिल रहे थे, बल्कि उनकी वर्षों की दबी हुई इच्छाएं भी ek-doosre में विसर्जित हो रही थी.
शावर में साबुन और अनियंत्रित स्पर्श ने आनंद मित्तल और अनीता ग्रोवर के बीच की साड़ी औपचारिकताओं को ध्वस्त कर दिया था. अनीता की 'यह वाक़ई बहुत बड़ा है' वाली टिपण्णी ने आनंद जी के आत्मविश्वास और उत्तेजना को चरम पर पहुंचा दिया था.
आनंद जी ने अब पानी की बौछारें बंद कर दी. कमरे में अचानक आयी शांति और भाप भरे माहौल ने उत्तेजना को और बढ़ा दिया था.
आनंद जी ने अनीता को दीवार की और धकेला, और प्यार से उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया.
आनंद जी (अत्यंत धीमे, आदेश भरे स्वर में): "अनीता... तुमने मुझे इतना लम्बा इंतज़ार करवाया है. अब मैं कोई और औपचारिकता नहीं चाहता. मैं तुम्हे पूरी तरह महसूस करना चाहता हूँ."
अनीता की आँखें उनके चेहरे पर तिकी थी. वह समझ गयी की आनंद जी क्या चाहते हैं.
आनंद जी: "इसे अपने मुँह में लो. मैं तुम्हारे समर्पण को देखना चाहता हूँ."
अनीता, जो अब पूरी तरह से इस 'समझौता' और अपने पति के बच्चे की चाहत के लिए समर्पित थी, उसने कोई विरोध नहीं किया. उसकी आँखों में अब कोई शर्म नहीं थी, बल्कि एक शांत, तीव्र इच्छा थी.
अनीता धीरे से नीचे झुकी.
आनंद जी ने अपनी आँखें बंद कर ली. वह पांच साल की तड़प के अंतिम क्षणों को महसूस कर रहे थे.
अनीता ने आनंद जी के तने हुए लुंड को अपने मुँह में लिया.
आनंद जी को अपने शरीर में एक तीव्र, वर्जित लहार महसूस हुई. सविता के 'हैंड जॉब' के बाद, यह किसी महिला द्वारा दिया गया पहला mukh-maithun (ओरल सेक्स) था, और वह भी अनीता जैसी सुन्दर, विवाहित महिला dwara—yah अनुभव अत्यंत रोमांचक और उत्तेजक था.
अनीता ने थोड़ी देर के लिए रूककर, आनंद जी की आँखों में देखा, मनो वह उनकी प्रतिक्रिया जानना चाहती हो. फिर, उसने चूसना शुरू कर दिया.
अनीता की कुशलता और समर्पण ने आनंद जी को उन्माद की स्थिति में पहुंचा दिया. वह अपने बाल पकडे हुए थे, उनकी पीठ बाथरूम की ठंडी दीवार से तिकी हुई थी, और उनके मुँह से सिसकारियां निकल रही थी.
आनंद जी (दबी हुई आवाज़ में): "उह्ह्ह... आह! अनीता... तुम... तुम कितनी कमाल हो!"
पानी की बूँदें उनके पसीने से मिल रही थी, और उनके बैडरूम के पहले अंतरंग क्षण की शुरुआत, इस बाथरूम में, mukh-maithun की तीव्र उत्तेजना के साथ हो रही थी. आनंद जी को लगा की विनोद और सविता के साथ किया गया यह समझौता उनकी ज़िन्दगी का सबसे बेहतरीन फैसला था. उनकी तड़प को अब पूरी तरह से विसर्जन का रास्ता मिल चूका था.
आनंद मित्तल, अनीता ग्रोवर के द्वारा दिए गए तीव्र mukh-maithun (ओरल सेक्स) के आनंद में डूबे हुए थे. उनकी वर्षों की शारीरिक तड़प अब पूरी तरह से नियंत्रण से बहार थी. जब अनीता ने कुछ देर बाद सांस लेने के लिए मुँह हटाया, तो आनंद जी ने बिना कोई पल गंवाए, यह तय किया की वह भी अनीता को उसी तरह का तीव्र आनंद देंगे.
आनंद जी ने अनीता को प्यार से उठाया और शावर फिर से ों कर दिया. गर्म पानी की बौछारें उन दोनों के उत्तेजित शरीरों पर पद रही थी. आनंद जी अब दीवार से हटकर, अपनी उत्तेजना को नियंत्रित करते हुए, अनीता को वहीँ बाथरूम के फ्लोर पर झुका दिया.
आनंद जी ने अनीता की और देखा और उसके नीचे हिस्से पर अपना ध्यान केंद्रित किया. अनीता ने बच्चे पैदा करने के उद्देश्य से, उस यात्रा की तयारी में, अपने गुप्त अंग को पूरी तरह से 'क्लीन शेव' कर रखा था. यह saaf-safai आनंद जी के लिए एक और अनअपेक्षित और उत्तेजक सरप्राइज थी.
आनंद जी, जो वर्षों से शारीरिक संतुष्टि से दूर थे, उन्होंने तुरंत पहल की. उन्होंने अनीता की 'छूट' को चूसना और चेतना शुरू कर दिया.
अनीता के लिए, यह अनुभव बिलकुल नया और चौंकाने वाला था. उसका पति विनोद, पारम्परिक था और कभी भी इस तरह के अंतरंग खेल में शामिल नहीं हुआ था. अनीता को ज़िन्दगी में पहली बार यह मज़ा नसीब हुआ था.
अनीता के मुँह से ज़ोरदार, अनियंत्रित आहें निकलने लगी.
अनीता (सीसकरते हुए): "ओह! आनंद जी... यह... यह क्या है! आह! यह तो स्वर्ग है! रुको मत... प्लीज... ऐसे hi करते रहो..."
आनंद मित्तल ने अनीता के आग्रह को सुना और पूरी लग्न और कुशलता से उसे आनंद देना जारी रखा. अनीता की क्लीन शेव वाली त्वचा ने उन्हें पूरी तरह से साफ़ और तीव्र अनुभव दिया, जिससे आनंद जी की अपनी उत्तेजना और भी ज़्यादा बढ़ गयी.
आनंद जी, अपनी दशकों की वासना को अब अनीता के माध्यम से पूरा कर रहे थे. उन्हें लगा की वह इस पल के लिए hi जी रहे थे.
अनीता का शरीर पानी की बौछारों के नीचे काँप रहा था. उसे लगा की विनोद के साथ उसका पूरा वैवाहिक जीवन सूखा और अधूरा था, और उसने कभी सोचा भी नहीं था की यौन आनंद इतना तीव्र हो सकता है.
उस तीव्र आनंद के बीच, वह आनंद जी के साथ आना अपनी ज़िन्दगी का सबसे सही फैसला मान रही थी. बच्चा पैदा करने का उनका लक्ष्य तो था hi, लेकिन आनंद जी ने उसे जो शारीरिक संतुष्टि दी थी, वह अमूल्य थी.
कुछ hi पलों में, अनीता ज़ोरदार चीख के साथ अपनी चरम सीमा पर पहुँच गयी. उसकी टांगें थरथरा रही थी.
आनंद जी ऊपर उठे, उनके चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थी. उन्होंने अनीता को धीरे से उठाया और दोनों पानी की बौछारों के नीचे कसकर गले मिल गए.
अब, कोई समझौता या कागज़ात उनके बीच नहीं थे. वे पूरी तरह से ek-doosre के प्रति समर्पित the—ek बच्चा पैदा करने के मिशन पर, और एक अपने वर्जित आनंद की यात्रा पर.
*************
गर्म पानी के शावर और mukh-maithun के तीव्र दौर के बाद, आनंद मित्तल और अनीता ग्रोवर दोनों पूरी तरह से शांत, लेकिन अत्यधिक उत्तेजित थे.
आनंद जी ने प्यार से तौलिया उठाया और अनीता का गीला, saaf-suthra बदन पोंछना शुरू किया. यह स्पर्श अब वासना से ज़्यादा, स्नेह और परवाह का था.
आनंद जी (मुस्कुराते हुए): "तुम इतनी खूबसूरत हो, अनीता, की मैं अपनी आँखें नहीं हटा प् रहा."
अनीता (शरमाते हुए): "और आप तो... आप तो जादूगर हैं, आनंद जी. मुझे नहीं पता था की कोई पुरुष इतना आनंद भी दे सकता है."
फिर अनीता ने तौलिया लिया और आनंद जी का शरीर पोंछा. जब दोनों पूरी तरह से सूख गए, तो वे नग्न अवस्था में hi बिस्टेर की और बढे. होटल का आलिशान बिस्टेर उनका इंतज़ार कर रहा था.
वे दोनों ek-doosre के बगल में लेते, और आनंद जी ने तुरंत एक ज़ोरदार चुम्बन (किश) के साथ शुरुआत की. यह चुम्बन अब वर्षों की तड़प को सीधे संतुष्टि में बदल रहा था.
चुम्बन गहरा हुआ, और आनंद जी ने धीरे से खुद को अनीता के ऊपर स्थापित किया. उन्होंने ज़रा भी देर न करते हुए, अपने लुंड को अनीता की योनि (छूट) में दाल दिया.
अनीता (आह भरते हुए): "आह... आनंद जी!"
जैसे hi उनका वासना का एक बड़ा hi pyara-sa खेल शुरू हुआ, उनकी शारीरिक क्रियाओं के saath-saath, उनके बीच एक अंतरंग और उत्तेजक बातचीत भी चल रही थी, जो उनके संबंधों की जटिलता और जूनून को दर्शाती थी.
आनंद (धीमे, उत्तेजित स्वर में): "तुम... तुम बहुत गर्म हो, अनीता. तुम्हारे अंदर यह जो गर्माहट है... इसने मेरी सालों की तड़प को ख़तम कर दिया. मैं पागल हो रहा हूँ."
अनीता (हलकी सिसकारी के साथ): "और आप... आह!... आप तो आग लगा रहे हैं. मुझे लग रहा है जैसे मैं... मैं पहली बार सांस ले रही हूँ. विनोद ने कभी... कभी मुझे ऐसे आह! छुआ hi नहीं... या शायद उन्हें पता hi नहीं था की यह सब इतना प्यारा हो सकता है."
आनंद (गति बढ़ाते हुए): "मुझे पता है. मैं भी... मैं भी तुम्हारी तड़प समझता हूँ. इसीलिए मैंने सविता की बात मानी. तुम्हे पता है, तुम्हारे बच्चे की चाहत... मेरी इस भूख को जायज़ ठहराती है."
अनीता (आनंद में चीखते हुए): "हाँ! हमें... हमें एक बीटा चाहिए, आनंद जी! उन्हह!... हमें सफल होना है... और इसके लिए... इसके लिए मैं जो भी... जो भी आप कहेंगे... आह!... वह सब करुँगी."
आनंद (झुककर उसके होंठों पर चुम्बन करते हुए): "तुम कमाल हो. तुम्हारी यह ईमानदारी... और तुम्हारा यह समर्पण... मुझे और भी ज़्यादा उत्तेजित कर रहा है."
अनीता: "मुझे लगता है... मुझे लगता है, यह वही पल है... आह!... जिस के लिए मैं इतने साल जी रही थी. मैं... ओह!... मैं आपके साथ बहुत सुरक्षित महसूस कर रही हूँ... जैसे मैं किसी राजा की... रानी हूँ!"
आनंद: "तुम रानी hi हो, अनीता. मेरी रानी. और मैं तुम्हे वह सब दूंगा, जो तुम मांगोगी... तुम्हारी हर इच्छा पूरी करूँगा!"
अनीता (अंतिम तीव्रता में): "फिर... आह!... फिर मुझे अभी... अभी एक और बार... और ज़ोर से! मैं... मैं माँ बनना चाहती हूँ!"
दोनों की बातचीत में उनकी ज़रूरतों और इच्छाओं का मिश्रण था. आनंद जी अपनी वासना मिटा रहे थे, और अनीता अपने मातृत्व के सपने को साकार करने की तीव्र इच्छा में आनंदित थी. पहाड़ों के उस आलिशान कमरे में, न केवल उनके शरीर मिल रहे थे, बल्कि उनकी वर्षों की दबी हुई इच्छाएं भी ek-doosre में विसर्जित हो रही थी.