Incest The Tiger - Page 27 - SexBaba
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Incest The Tiger

अपडेट 183

लास्ट अपडेट

खालिदा : उउउउम मेरा आने वाला है फिर से दमांद जी आप भी आ जाओ न प्लस बाद मैं छोड़ लेना दोबारा मायआ मैं आ रही हूँ और मैंने उनको मुस्कुरा कर देखा और उनको बीएड पर उलटा लिटाया और पीछे से छोड़ने लगा

ाआअह maaaaaaaaaa पहली बार मैं हे जन्नत दिखा दी आप ने दमांद जी maaaaaaaaaa मैं आ रही होओओओओ मायआ मैं आआआआ रही हूँ

मई : मैं भी आ रहा हूँ मेरी जाआआं मैं भी आ रहा हूँ और हम दोनों एक साथ झड़ने लगे और दोनों के हे जिस्म कम्पनी लगे

और मेरे धक्को की रफ़्तार इतनी तेज थी की झड़ने के बाद खालिदा किसी तड़पती कुटिया की तरह बीएड पर अधमरी हालत मैं गिर पड़ी.

अब आगे

खालिदा के बीएड पर गिरते hi मई भी बीएड पर लेट गया , कुछ देर आराम करने के बाद मई उठा तो देखा खालिदा बीएड पर वैसे hi पेट के बल लेती हुई है उसकी बड़ी गांड को देख के मेरे मान में उसके गांड मरने का ख्याल आया मई उठ क्र खालिदा के पास गया और उनकी बड़ी बड़ी गांड को हाथो में ले क्र सहलाने लगा





कुछ देर तक मई वैसे hi अपनी सास के गांड को सहलाता रहा जब उनको अहसास हुआ की मई क्या क्र रहा हु तो वो बोली.

खालिदा: अभी भी आपका मान नहीं भरा दमांद जी.

मई : क्या कृ सासु माँ आपकी ये बड़ी बड़ी गांड को देख क्र मेरा मान हो रहा है की मई अपना लुंड आपके गांड में दाल दू.

खालिदा: न बाबा न अब मई तुम्हे कुछ भी करने नहीं दूंगी एक तो पहले से hi मेरी हालत बहुत ख़राब है मई तो सोच रही थी की जिन्दा बच भी पाऊँगी गई की नहीं.

मई : माफ़ करना सासु अम्मी जो भी मई आपसे बेरहमी से किया लेकिन मैंने आपको वैसा hi बेरहमी वाला दृश्य देखते हुवे देखा इसलिए मुझे लगा की आपको वैसा hi चुदाई पसंद है.

खालिदा: मैंने अब तक ऐसा कभी सोचा न था लेकिन जब मैंने तुम्हारे लोक के वहसि पैन वाला दृशय देखा तो मैंने भी सोचा की ऐसे तो मैंने अपने जीवन भर हमेसा अपने सौहार के आगे टंगे फैला के लेट गयी और वो आये और दो धक्के मर क्र सो गए लेकिन आज जो तुम ने किया उसे मई अपने जिंदगी भर नहीं भूल पाऊँगी सुक्रिया दमांद जी अपने मुझे वो सुख दिया जिसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी .

मई : आगे भी मई आपको वो सुख दूंगा सासु अम्मी पर इसके लिए आपको हमारे लोक आना होगा या फिर मुझे जीन लोक आना होगा लेकिन अब की बार जब भी मई आपसे मिलूंगा तब मई आपकी ये बड़ी बड़ी गांड जजूर मरूँग.

खालिदा : ऐसे सुख के लिए तो मई कही भी आ जायँगी दमांद जी और ये गांड भी मई आपको hi दूंगी तब तक मई आपके आदम लोक में कैसे गांड मरते है वो भी सिख लुंगी.

मई : ठीक है सासु अम्मी अब मई चलता हु आप भी आराम करे.

उसके बाद मई अपने कपडे पहन क्र नुसरत के रूम में आ गया और सो गया क्योकि अगले दिन हमे वापस भी जाना था.

अगली सुबह सभी फ्रेश हो क्र एक जगह बैठे हुवे थे नुसरत और उनकी अम्मी थोड़ी तकलीफ में थी, मेरे सामने बैठी हीना मुझे hi देख रही थी, फिर मई सब की तरफ देख क्र बोलना सुरु किया.

मई : अब्बा हुरूर मेरे जाने के बाद आपको hi जिन लोक की बागडोर सम्हालनी है और कोई भी जरुरत पड़ने पर आप मुझे बुला सकते है.

फिर कुछ देर और इधर उधर की बाते करने के बाद हम ने जाने की इजाज़त मांगी .

खालिदा : (स्टेबेला से) बजी मेरी बच्चियों का ख्याल रखना वह आदम लोक में आप hi इनकी अम्मी रहेंगी.

स्टेबेला: ये भी कोई कहने की बात है खालिदा ये मेरी भी तो बच्चिया है बचपन से hi मई तीनो में कोई अंतर नहीं किया है न मई कभी करूंगी तुम बेफिक्र रहो वैसे भी वह मेरी बहन अमांडा भी रहती है हम वही रहेंगे .

मई : वैसे अब उनका नाम अमांडा नहीं अलका है.

कदर: दमांद जी फिर कब आओगे वापस जिन लोक .

मई : जब मुझे लगेगा की नाग लोक जाना है उस समय मई यहाँ वापस आऊंगा उसी समय हीना से भी निकाह करूँगा.

फिर हम वह से सीधे अपने लोक आ गए.

( ये व्ही दिन है जब शहीद केशव का पार्थिक सरीर उनके घर में लाया गया था.)

हम पहले अलका के पास गए क्योकि स्टेबेला और बाकियो को भी व्ही रखना था फ़िलहाल सुमन का भी पेट अब थोड़ा दिखने लगा था इसलिए उनको भी यही रखना था फिर उनको रम्भा के पास छोड़ना था ,

मैंने दरवाज़ा खुलवाया तो एक नौकर ने दरवाज़ा खोला वो मुझे पहचानता था इसलिए मैंने उसे अलका के बारे में पूछा तो उसने बताया की वो अपने कमरे में है ,मई तुरंत उनके रूम में गया तो देखा की वो अपने कपड़ो को सही से रख रही है जब उनको कुछ आहात हुई तब उसने मेरी तरफ देखा और तुरंत मेरे करीब आयी .

अलका: टाइगर तुम जीन लोक से कब आये .

मई : अभी hi आया हु और बहार चलिए आपके लिए भी सुप्रिसे है लेकिन ऐसे नहीं ऐसे.( उनकी आँखों को अपने हाथों से धक् दिया)

फिर उनको रूम से बहार लेकर आया और स्टेबेला के आगे खड़ा क्र दिया, फिर मैंने धीरे से अपना हाथ उनकी आँखों से हटा लिया.

स्टेबेला को देकते hi अलका के आँखों में आंसू आ गए और उसने स्टेबेला को अपने गले से लगा लिया.

अलका: स्टेबेला मेरी बहन कितने सालो बाद तुम्हे देख रही हु मेरी बहन जब से नील प्लेनेट का विनाश हुआ था तब के बाद आज तुम्हे देख रही हु.

स्टेबेला: मेरा भी कुछ ऐसा hi हॉल है दीदी.

दोनों सौतन काम बहने एक दूसरे के गले लग क्र आंसू बहा रही थी फिर कुछ देर बाद दोनों अलग हुई फिर अलका ने कहा.

अलका: ये तीनो कोण है स्टेबेला कितनी प्यारी बच्चिया है.

स्टेबेला: दीदी ये तीनो हमारे बेटे टाइगर की पत्निया है ये नुसरत और नीलोफर मेरे बड़े भाई की बेटी है और ये नरगिश है मेरी बेटी.

अलका: ओह.. मेरे हमारे बेटे ने तीन शादियां और क्र ली .ोूहः no मैं तो एक बात भूल hi गयी , टाइगर तुम्हे अभी hi तुम्हारे बुआ के घर जाना है.

मई : बुआ के घर पर क्यों?

अलका: ये तो तुम्हे वह जाने पर hi पता चलेगा.

सुमन: मई भी चलती हु टाइगर तुम्हारे साथ.

अलका: नहीं सुमन तुम नहीं जा सकती तुम्हारे पेट का उभर दिख रहा है और वह तुम्हारे फॅमिली के सभी लोग होंगे तो तुम्हारा जाना ठीक नहीं, तुम जाओ टाइगर जल्दी.

फिर मई उन्हें bye बोल क्र गायब हो क्र बुआ के घर के समीप hi वीरान जगह पे आया और नार्मल हो क्र बुआ के घर की तरफ चल दिया पर बुआ के घर के समीप जाते hi मुझे कुछ अनहोनी होनी की आशंका होने लगी , क्यों की बुआ के घर के दूर तक गाड़ियों की लाइन लगी हुई थी और लोगो का हुजूम लगा हुआ था आर्मी के भी लोग और उनकी गाड़िया भी दिखाई दे रही थी मई उन सब को चीरता हुआ आगे बढ़ने के लगा घर के समीप जाते hi मुझे मेरे दोनों चाचा दिखे , तभी उन दोनों की नजर भी मुझ पर पड़ी.

राजेंद्र: टाइगर बीटा कहा था तू जा अंदर जा तेरी बुआ और बहनो को सम्हाल सभी का रो रो के बुरा हल हो गया है .

ये सुनते hi मई घर के अंदर भगा अंदर जा क्र देखता हु की सामने किसी लाश को सफ़ेद कपडे से ढाका गया है सिर्फ उसका चेहरा hi दिखाई दे रहा है उनके श्रद्धांजलि के फूल (फ्लावर 🌺🌹🌺🌺🌹) रखे हुवे है और उनके पास hi बुआ रो रही थी जिसे मेरी माँ और गीता बुआ भी रो क्र सांत्वना दे रही थी कविता, काव्य दोनों के पास मेरी बहने स्नेहा ,सुमन और ऋतू रूचि बैठ कर बैठ कर रो रही है समिति भी व्ही पास में hi बैठी हुई थी जिसे मेरी चची अर्चना संत करा रही थी ,फिर मैंने लाश के चेहरे की तरफ देखा तब मेरा भी दिल दहल गया क्योकि ये मेरे फूफा जी की लाश थी, मई भी व्ही जोर से फूफा जी बोल क्र रोने लगा जिस से सब का धयान भी मेरी तरफ हुआ और पहले बुआ मेरे पास रट हुवे आ क्र लिपट गयी उसके बाद फिर समिति काव्य कविता भी मेरे से लिपट कर रोने लगी साथ में मई भी उनसे लिपट कर रो रहा था .
 
अपडेट 184

अब तक

ये सुनते hi मई घर के अंदर भगा अंदर जा क्र देखता हु की सामने किसी लाश को सफ़ेद कपडे से ढाका गया है सिर्फ उसका चेहरा hi दिखाई दे रहा है उनके श्रद्धांजलि के फूल (फ्लावर 🌺🌹🌺🌺🌹) रखे हुवे है और उनके पास hi बुआ रो रही थी जिसे मेरी माँ और गीता बुआ भी रो क्र सांत्वना दे रही थी कविता, काव्य दोनों के पास मेरी बहने स्नेहा ,समान और ऋतू रूचि बैठ कर रो रही है समिति भी व्ही पास में hi बैठी हुई थी जिसे मेरी चची अर्चना संत करा रही थी ,फिर मैंने लाश के चेहरे की तरफ देखा तब मेरा भी दिल दहल गया क्योकि ये मेरे फूफा जी की लाश थी, मई भी व्ही जोर से फूफा जी बोल क्र रोने लगा जिस से सब का धयान भी मेरी तरफ हुआ और पहले बुआ मेरे पास रट हुवे आ क्र लिपट गयी उसके बाद फिर समिति काव्य कविता भी मेरे से लिपट कर रोने लगी साथ में मई भी उनसे लिपट कर रो रहा था .

अब आगे......

कुछ देर तक मई भी उनके पास बैठ कर रोटा रहा फिर मैंने सोचा की मई भी अगर ऐसा hi रोटा रहा तो इन्हे कोण सम्हालेगा इसलिए मई अपने आप को मजबूत बनाते हुवे अपने आंसू रोके और उनसब को भी दिलासा देते हुवे उस सब को चुप करने लगा फिर पापा, दोनों चाचा और फूफा जी आये और केशव फूफा को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने लगे फूफा जी सैनिक थे इसलिए उन्हें तिरंगे से उनके सरीर को ढाका हुआ था जब फूफा जी के सवह को जे जाने के लिए उठाया जाने लगा तब बुआ का रोना और बढ़ गया वो माँ और गीता बुआ सीता बुआ को रोक रही थी नहीं तो सीता बुआ तो फूफा जी के सवह को ले जाने hi नहीं दे रही थी खैर जैसे तैसे हम ने फूफा जी की अर्थी निकली और पुरे विदी विधान के साथ फूफा जी का अंतिम संस्कार हुआ फूफाजी को मैंने hi मुखाग्नि दी क्यों की फूफा जी के परिवार में और कोई मर्द नहीं था और वो मुझे अपना बीटा hi मानते थे इसलिए सब के कहने पर मैंने उनका अंतिम संस्कार किया .

ऐसे hi कुछ दिन बिट गए बुआ के घर शोक का माहौल था मेरे परिवार के सभी लोग अभी यही पर थे गीता बुआ का भी पूरा परिवार यही पर tha,beete दिनों में मई जान गया था की फूफा जी की मौत कैसे हुई .

अभी सभी लोग हॉल में बैठे हुवे थे सिवाय सीता बुआ के वो अपने रूम में हमारे बेटे को दूध पीला रही थी मई हाल से निकल क्र सीता बुआ के पास गया वो बीएड पर बैठ कर हमारे बेटे को दूध पीला रही थी अभी मई कुछ बोलने वाला था की उन्होंने मुझे संत रहने का इसरा किया और बीएड पर बैठने का भी इसरा किया कुछ देर बाद बुआ ने मुन्ने की साइड में बिस्तर पर सुलाया फिर कहा.

सीता: वो मुन्ना सोने वाला था इसलिए तुम्हे संत रहने को कहा था.

कुछ देर तक न मैंने कुछ कहा न बुआ ने फिर मैंने hi ख़ामोशी को तोड़ते हुवे कहा.

मई : बुआ फूफा जी को जिसने भी मारा है मई उसका वो हॉल करूँगा की वो सपने में भी नहीं सोचा होगा.

सीता: इस से क्या होगा टाइगर? तुम्हारे फूफा तो वापस नहीं आ जागेंगे न और मई अब जायदा दूध और बर्दाश्त नहीं क्र सकती वो तो चले गए मुझे छोड़ क्र वो मैंने सह लिया लेकिन अगर तुम्हे कुछ हो गया तो nhi-nhi अब जो हो गया उसे भूल जाओ भगवन की मर्जी समझ क्र .

मई : मुझे कुछ नहीं होगा बुआ इस पृथ्वी पर ऐसा कोई नहीं है जो मुझे हानि पंहुचा सके तो और रही फूफा जी की बात तो मई तो उसे जिन्दा नहीं छोडूंगा चाहे कुछ भी हो .

बुआ रट हुवे मुझे गले लगा क्र टाइगर तुम्हे कुछ हो गया तो मई भी अपनी जान दे दूंगी तब तुम hi सोचो की हमारे बेटे का क्या होगा जो अभी अभी दुनिया में आया है.

मई : कुछ नहीं होगा बुआ मुझे, और आप मेरी बात धयान से सुनिए बाईट दिनों में आपको कभी ऐसा लगा हो की आपके अंदर कुछ अलग सी सकतिया महसूस हुई हो .

गले से अलग हो क्र है कुछ दिनों से मैंने अपने अंदर कुछ सकती महसूस तो की है जैसे अभी कुछ दिनों से मैंने ठीक से खाना भी नहीं खाया है फिर भी मुझ में बहुत एनर्जी है है और मुझे थकन भी नहीं होती.

बुआ: ये सब मेरे hi कारन हुआ है मैंने अब तक जिनके साथ सेक्स किया है उनसब में कुछ न कुछ सकतिया जरूर आयी है और अब तो मई जिन्नो का बादशाह भी हु तो मेरी सकती कई गुना बढ़ गयी है.

तभी रूम के दरवाजे पर जो अब तक हमारी बात सुन रही थी वो आकर कहती है.

समिति: है भाभी टाइगर सही कह रहा है वो अभी कुछ दिन पहले जीन लोक से hi वापस आया है.

सीता: तू क्या हमारी बाते सुनने के लिए आयी थी .

समिति: नहीं भाभी मई तो आप दोनों को बुलाने आयी थी टाइगर के पापा आप दोनों को बहार बुला रहे है.

फिर हम तीनो हॉल में आ क्र सभी के साथ बैठ गए .

राजेस्वर: सीता मैंने तै किया है की अब से तुम लोग हमारे साथ रहोगे मई नहीं चाहता तुम लोग यह रहो टाइगर भी कुछ दिनों में फाइनल एग्जाम के बाद वह चला जायेगा ऐसे में इस घर में कोई मर्द hi नहीं रहेगा और तुम लोगो को मई अकेले ऐसे hi छोड़ नहीं सकता.

सीता : पर हम कैसे वह रह सकते है और इस घर से उनकी यादें जुडी हुई है इस घर को बहुत अरमान से उन्होंने ख़रीदा था .

राजेंद्र: सीता दुहरे तीनो भाई अपनी बहेनो और बच्चो को सम्हाल सकते है और रही घर की बात तो हम उसे बेचने के लिए नहीं कह रहे है ,ा रे भाई जब बच्चे यह रहे है पढाई क्र रहे है तो जब उनको यह आना हो गए तो वो इस घर में रहा लेंगे हम भी वीकेंड में कभी यह आना हुआ तो हम लोगो भी यह रहा देंगे क्यों भाभी.

आरती (मजाकिया अंदाज में) सीता तुम बिरादरी में हमारी नाक कटवाना चाहती हो क्या लोग क्या कहेंगे मेरे पति को की बीवी के बहन को अपने घर रख लिया और अपनी बहन को वह अकेला छोड़ दिया.

सीता: नहीं भाभी मई ऐसा कुछ भी नहीं होने दूंगी ठीक है अगर आप सब यही चाहते हो तो मई आप लोगो के साथ जाने को तैयार हु पर बाकि सभी से भी पूछना तो पड़ेगा.

रवि: ठीक है दीदी अभी पूछ लेते है कविता काव्य तुम्हारी क्या इच्छा है.

कविता: मां जी टाइगर के साथ हम भी फाइनल एग्जाम के बाद आ जायेंगे.

काव्य: जी मां जी .

रवि: और समिति जी आपकी क्या इच्छा है.

समिति: मई फ़िलहाल तो इन लोगो के फाइनल एग्जाम तक यही रहूंगी फिर मई अमेरिका चली जाउंगी वह मेरी एक फ्रेंड रहती है शीतल उनका वह खुद का बिज़नेस है वो मुझे वह कब से बुला रही थी तो मैंने सोचा की मई भी उनके साथ जा क्र रहूंगी.

सीता: पर समिति तुम वह अकेली कैसे रहोगी.

समिति: अकेली कहा भाभी शीतल है न वह उसी के साथ रहूंगी वो मुझे फ्रेंड काम बहन जाएदा मानती है टाइगर तो उस को बहुत अच्छी तरह जनता है क्यों टाइगर.

मई : है बुआ वो बहुत अच्छी लड़की है जाने दो समिति बुआ को.

सब है इसलिए बुआ कहना पद रहा था.

राजेस्वर: ठीक है फिर सब का हो गया तो दो दिन बाद सीता हम लोगो के साथ जाएगी और बाकि टाइगर कविता काव्य फाइनल एग्जाम के बाद आएंगे किसी को और कोई प्रॉब्लम तो नहीं है न?

गीता: मुझे है भैया:

राजेंद्र: अब तुझे क्या हुआ तुझे भी हमारे साथ चलना है तो chal...hahahah

चाचा की इस बात वे सब है दिए.

गीता: वैरी फनी हहहह हो गया बस्स्स...

मई ये कहना चाहती हु की दीदी अभी मेरे साथ रहेगी क्योकि कुछ दिनों बाद ऋतू के पापा की छुट्टी ख़तम हो जाएँगी तो वो चले जायेंगे मई घर में अकेली हो जाउंगी इसलिए मई चाहती हु की दीदी मेरे साथ रहे फिर टाइगर के एग्जाम होने के बाद वो आ जाएंगे दीदी को लेने इस बहाने टाइगर भी देख लेगा हमारा घर.

राजेंद्र :ठीक है फिर जैसे तेरी मर्जी.

फिर सब लोग एक साथ खाना खा क्र गए.
 
अपडेट 185

गीता: मुझे है भैया:

राजेंद्र: अब तुझे क्या हुआ तुझे भी हमारे साथ चलना है तो chal...hahahah

चाचा की इस बात वे सब है दिए.

गीता: वैरी फनी हहहह हो गया बस्स्स...

मई ये कहना चाहती हु की दीदी अभी मेरे साथ रहेगी क्योकि कुछ दिनों बाद ऋतू के पापा की छुट्टी ख़तम हो जाएँगी तो वो चले जायेंगे मई घर में अकेली हो जाउंगी इसलिए मई चाहती हु की दीदी मेरे साथ रहे फिर टाइगर के एग्जाम होने के बाद वो आ जाएंगे दीदी को लेने इस बहाने टाइगर भी देख लेगा हमारा घर.

राजेंद्र :ठीक है फिर जैसे तेरी मर्जी.

फिर सब लोग एक साथ खाना खा क्र गए.

खाना खाने के बाद मई अपनी बहनो को जिन लोक की सहजादियो से मिलाने के लिए ले जाना चाहता था इस लिए मैंने सब को ले कर निकलने लगा तो ऋतू और रूचि भी जाने की जिद्द करने लगी तब मैंने स्नेहा की तरफ देखा और वो मेरी बात समझ गयी की मई पूछ रहा हु की अब इनका क्या करे.

स्नेहा - टाइगर इन लोगो को भी ले चलो ये लोग भी थोड़ा घूम फिर लेंगी.

मई - ठीक है फिर चलो तुम दोनों भी .

फिर हम सभी लोग अलका के के घर आ गए वह पर सुमन को देख कर ऋतू और रूचि चौक गए .

ऋतू: सुमन दीदी आप यह पर हो लेकिन सब तो कह थे की आप बिज़नेस सिखने के लिए गए हुवे हो .

सुमन: अब मई तुम्हे क्या बताऊ मेरी बहन , कुछ सोच...... है तुम टाइगर से hi पूछो इस सब के बारे में.

मई - म मई क्या बताऊ इस सब के बारे में.

तभी अलका ने कहा , मई बताती हु बीटा तुम्हे .

रूचि - आप कोण है और आप कैसे जानती है इस सब के बारे में.

अलका - क्यों की मई टाइगर की माँ भी हु और....

ऋतू - और क्या ?

अलका - और पत्नी भी .

ऋतू और रूचि - क्या माँ भी और... और पत्नी भी....

अलका- है ये बात सुरु होती है........

फिर अलका ने ने उन्हें सब कुछ बताना सुरु किया नील प्लेनेट से लेकर क्र मेरी शादी, जीन लोक और मेरी शक्तियों के बारे में , ये सब सुन क्र दोनों बहनो के मुँह खुले के खुले hi रह गए.

ऋतू- तो क्या टाइगर भाई की बहुत साडी पत्निया है और उनमे से स्नेहा और सुमन दीदी भी शामिल है .

सोनम - है और भी लाइन में लगी हुई है जैसे की मई, काव्य, कविता, पूर्वी ,और भी बहुत है.

रूचि -(सुमन को देख कर) ओह माय गॉड ये आपका पेट फुला हुआ है इसलिए आप यह पर हो.

सुमन- है रूचि अब इस हालत में मई सब के सामने कैसे जा सकती हु.

ऋतू - टाइगर भाई इनसे भी मिलाओ हमे.

मई - इनसे मिलो ये है मेरी दूसरी माँ और ....

ऋतू - और पत्नी भी यही न .

मई - है और ये तीनो है जीन लोक की सहजादिया और मेरी पत्नी भी.

नरगिस - सहजादिया नहीं महारानियाँ कहिये , बादशाह सलामत.

मई - ओह है मई तो भूल hi गया था की अब से मई जीन लोक का बादशाह भी हु.

हम सब एक दूसरे से मिल क्र बात hi क्र रहे की तभी वह पर दिव्या, दीपिका, नीलम, रचना और संध्या भी आ गए .

उन्हें देख कर रूचि बोल पड़ी..

रूचि - अब ये लोग कोण है

( ऋतू और रूचि मेरे मां की फॅमिली के बारे में नहीं जानते थे)

नीलम - हम तीनो बहने टाइगर की पत्निया है और ये दोनों होने वाली

ऋतू- ओह माय गॉड एंटी शादिया क्र चुके हो अब ये भी बता दो बच्चे कितने है 2-4 तो होंगे hi .

नीलम - है है न क्यों तुम्हे भी चाहिए क्या

इस बात पर सब है दिए.

ऋतू - ममहजए नहीं चाहिए अभी बच्चे अभी तो मेरी पढाई भी पूरी नहीं हुई.

नीलम- हम भी अभी पढ़ hi रहे है फिर भी देखो शादी क्र ली है तुम अपना देखो मेरी बहन टाइगर जैसा हैंडसम तुम्हे कोई मिल सकता है क्या, टाइगर तुम्हे पसंद आता है या नहीं.

ऋतू - पर वो मेरा भाई लगता है मैंने कभी भी उसे उस नजर से नहीं देखा.

स्नेहा- भाई वाली बात तो तू छोड़ hi दे और नीलम तू क्यों और इनकी बीबियो की लिस्ट बढ़ा रही है उसको नहीं पसंद टाइगर तो जाने दे न .

अभी नीलम कुछ बोलने hi वाली थी की रूचि बोल पड़ी ..

रूचि - स्नेहा दीदी मुझे कुछ कहना है.

स्नेहा - है बोल छुटकी अब तुझे क्या कहना है.

रूचि - वो दीदी मई ये कह रही थी की मई टाइगर को बहुत पहले से hi पसंद करती हु पर ये सोच के अपने आप पर कण्ट्रोल किये की ये मेरे मां का बीटा है रिश्ते में मेरा भाई लगता है, मगर अब आप सब को देख कर मुझे लगता है की मेरी भी मुराद पूरी हो जाएगी तो दीदी मेरी भी शादी करवा दो न टाइगर से .

मई रूचि की बात सुन क्र अपना सर पकड़ लिया और मान में बोलै ये लड़की तो पागल है ऐसा कोण बोलता है.

ऋतू - रूचि ये तू क्या बोल रही है कुछ अकाल वकाल है की नहीं अभी तू अपनी उम्र देख बड़ी आयी शादी करने वाली.

नीलम - उसको क्यों डाट रही है तुम्हे टाइगर नहीं पसंद तो तुम रहने दो उस बेचारी को तो उसका प्यार मिलना चाहिए न , और स्नेहा दीदी मई इसे इसलिए बोल रही थी क्योंकि हम सभी बहने एक साथ hi रहे और जब काव्य और कविता टाइगर से प्यार करती है तो ये दोनों क्यों पीछे रहे.

अलका - नीलम अब इस बात को यही ख़तम करो बीटा टाइगर को जो भी प्यार करता है वो उसको उसका प्यार देता है अब किसी के साथ जबरदस्ती थोड़ी क्र सकते है अब तुम लोग इधर आओ और अपनी दूसरी माँ और बहनो से मिलो

फिर सब लोग एक दूसरे से मिले बाते करते रहे शाम तक हम घर गए,

कुछ दिन बाद सीता बुआ गीता बुआ के साथ उनके घर चली गयी मेरे परिवार वाले भी चले गए अब वह बचे हम चार मई काव्य कविता और समिति, मई अपना सामान भी अब यही सिफत क्र लिया था अब मुझे रम्भा लो भी लेन के लिए जाना था
 
अपडेट 186

मैंने सोच लिया था की रम्भा को अभी नहीं लाऊंगा जब मेरे एग्जाम हो जायेंगे उस के बाद hi इस बारे में सोचूंगा .

ऐसे hi पूरा दिन निकल गया रात को खाना खाने के बाद हम सभी लोग व्ही पर बैठ कर बाटे करते रहे उसके बाद एक एक क्र के सोने के लिए अपने रूम में चले गए मई भी अपने रूम में आ गया अभी मई बीएड पर बैठा hi था की मेरे मोबाइल की मैसेज टोन बजी और जब मैंने मैसेज खोल कर देखा तोह वो समिति का था जिसमे लिखा था की अभी सोना मत मुझे तुम से एक जरुरी बात करनी है.

मई मान में सोचा की इनको मुझसे क्या बात करनी hogi,chhodo आएगी तो पता hi चल जायेगा.

मई बिस्तर पर लेट क्र मोबाइल पर वीडियो देखने लगा थोड़ी देर बाद समिति मेरे रूम में आयी और बिस्तर पर बैठ गयी ,उनको देख कर मैं भी बैठ गया .

जब वो थोड़ी देर तक कुछ नहीं बोली तो मई बोल पड़ा.

मई: समिति जी आपको मुझ से कुछ बात करनी थी.

समिति ने एक नजर मेरी तरफ देखा फिर सर निचे क्र ली.

मई : समिति जी आपको जो कुछ भी कहना है बे झिजक बोलिये आप मेरी पत्नी भी है आपको पूरा हक़ है मुझे हर बात कहने का.

समिति: टाइगर बात दरसअल ये है की मई आप लोगो के एग्जाम तक hi यह पर हु उसके बाद मई अपनी फ्रेंड शीतल के पास चली जाउंगी .

मई : है ये बात तो अपने सब के सामने hi कही थी फिर क्या दिकत है.

समिति: बात दरसअल ये है टाइगर की मई भी शीतल के जैसे तुम्हारे बच्चे के साथ वह रहना चाहती हु .

मई : शीतल के जैसे मतलब?

समिति: ( अपने सर को मार क्र ) मई ये कहना चाहती हु की जब तक मई यह पर हु तुम मुझे प्रेग्नेंट क्र दो फिर उसके बाद मई उसे चली जाउंगी और व्ही तुम्हारे बच्चे को जन्म दूंगी.

मई : ओह्ह्ह तो ये बात है , ये बोलने के लिए आपको इतना झिझकने की जरुरत नहीं है ये बात आप मुझे ऐसे hi बोल सकती है ये आपका अधिकार है, लेकिन आपको ये तो पता hi होगा की प्रेग्नेंट होने के लिए क्या करना पड़ता है.

समिति: है मुझे पता है और मई ये सोच रही थी की कही आपको बुरा न लगे.

मई : इसमें बुरा लगने वाली क्या बात है , ये तो खुसी की बात है मुझे और बाप बनने का मौका मिलेगा.

समिति: मई ये सोच रही थी की कही तुम मन न क्र दो ये बोल क्र की तुम फिर से अभी बाप नहीं बनना चाहते .

मई : आप भी न कुछ भी सोचती हो ,आप एक बार बहार चेक क्र लो वो दोनों सो गयी है या नहीं .

समिति: हम्म्म.

फिर समिति बहार चली गयी और थोड़ी देर बाद आकर गेट लॉक किये और एकदम से मुझे बिस्तर में गिरा क्र मुझ पर टूट पड़ी वो मेरे होठो को ऐसे चूस रही थी जैसे मेरे होठो पे कोई रसीली चीज़ लगी हो और वो उसे पूरा निचोड़ लेना चाहती हो.

मई भी समिति का ये नया रूप देखकर आश्चर्य चकित हो जाता hu.....aur खुश भी हो जाता हु.....

फिर किश तोड़ कर ओह्ह्ह टाइगर मेरे पति डॉ मेरे कपडे उतारो मुझे नंगी करो कितने दिन भी हो गए आपसे चुदाई करवाए हुवे आज मुझे अच्छे से छोड़ो ताकि मई प्रेग्नेंट हो जाऊ.

समिति पूरी गरम हो चुकी थी और चुदाई जैसे सब्दो का इस्तेमाल क्र रही थी.

मई भी समिति को गरम देख कर उनके कपडे निकलने सुरु क्र देता हु समिति ने टी शर्ट पहना हुआ था उसे उतर दिए फिर उसके वाइट ब्रा को भी निकल दिया समिति ऊपर से पूरी नंगी हो गयी फिर मैंने उसके लेग्गिंस को भी उतर दिए उसके बाद पैंटी के ऊपर से hi उसके छूट को चुम कर पैंटी को भी निकल दिया....

समिति की छूट पूरी क्लीन शवेद थी ऐसे लग रहा था की आज hi क्लीन की हो समिति की चिकनी और सपाट छूट को देख कर मई समिति की छूट को अपने हाथ से सहलाने लगता हु...

समिति की छूट अपना रास बहा रही thii..aur मई समिति के निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूस रहा था... समिति पर दो तरफ़ा हमला हो रहा thaa..aur समिति जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी.

स अमिता की चूँचियों के निप्पल बिलकुल तीर की तारा खड़े thee..jo उसकी उत्तेजना को साफ़ बयान कर रहे thee..mai समिति की चूँचियों के एक निप्पल पर अपने डाट गदा देता हूँ.......

Samita...hayeeeeeee पति डॉ जी मार डालोगे क्या ऊऊफफफफफफफफफ इतनी तेज़ मत काटो ऊऊफफफफफफफफफ मम्माआआ सशह्ह्हह्ह

मई - ओह्ह ... समिति जी आपका पड़ी बहोत जालिम है सबकुछ तेज़ hi करता है.. चुदाई भी तेज़ hi करेगा...

समिति- उउउउउउफफ्फ्फ पतिदेव जी आज जोर से की चुदाई करो अपनी पत्नी की ऊऊफफफफफफफफफ अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती ऊऊफफफफफफफफफ अपनी पत्नी को छोड़ो पतिदेव जी हैएएइ.

समिति की बातो को सुनकर मई समिति की टांगों को अपने हाथों से फैला देता hu.....aur फिर से समिति की चिकनी और चमकदार छूट को देखता हु......

स अमिता- ..ऊऊफफफफफफफफफ ऐसे मत देखो टाइगर जी मैंने तुम्हारे लिए hi इसको साफ़ किया hai..ab जंगल भी नहीं है ..अपने हथियार का इस्तेमाल करो पतिदेव जी और मेरी छूट घुसा दो उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़...

मई समिति की बात सुनते hi अपने लुंड का गरम सूपड़ा समिति की छूट पर लगा देता हु और समिति अपने मन को मज़बूत करते हुए अपनी आँखों को बंद कर लेती hai...mai समिति की छूट में एक धक्का लगता हु और मेरे लुंड का सूपड़ा छूट को पूरी तरह फैलाते हुए समिति की छूट में घुस जाता है..

छूट में लुंड का सूपड़ा घुसते hi समिति दर्द से कास मासा कर रह जाती है, क्यों की समिति को बहुत दिन हो गए थे टाइगर से चूड़े हुवे

समिति- ahhh..hayeeeeeee माआआआ सशह्ह्ह्हह्ह

समिति की दर्द भरी आवाज़ सुनकर मई रुक जाता हु और समिति की आँखों में देखता hu.magar समिति की आँखें बंद थी..

मई - ऑंखें खोलो समिति क्या तुम को अब भी दर्द होता है.

समिति - है जी बहुत दिन हो गए है आपसे चूड़े हुवे इसलिए थोड़ा दर्द हो रहा है, आप करते रो मई दर्द सह लुंगी.

मई समिति की बात सुनकर धीरे धीरे अपने लुंड को समिति की छूट में अंदर करने लगता हु और समिति का दर्द होने लगता है...

समिति ohhh..hayeeeeeee माआआ पतिदेव जी मम्माआआ सशह्ह्हह्ह

समिति की छूट में मेरा आधा से ज्यादा लुंड घुस चूका thaa..mai एक लम्बी सांस लेते हुए अपने लुंड को हल्का सा बहार खींचता हु और एक करारा धक्का समिति की छूट में लगता hu.jisse मेरा पूरा लुंड समिति की छूट के सभी बंद दरवाज़े खोलता हुवा उसकी छूट के जड़ में घुस जाता hai..lund जड़ तक घुसते hi समिति दर्द से सिकुड़ जाती hai...uska शरीर टेढ़ा हो जाता hai..aur वो एक बहोत तेज़ चीख मारती है..

समिति- ohhh....hayeeeeeeeeeeeee मममममअअअअअअअ माअरररररररर gayiiiiiiiiiii मेरे पतिदेव जीईई uuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiii मम्माआमीीी ममार्र्र्रर गगगगगगाययययययीईईईई रररीी iiiiiiiiiiiiiiii उउउउइइइइइइइइइ मम्माआआ

मई प्यार से समिति के होंठों को चूमने लगता hai..aur उसकी चूँचियों को एक हाथ से सहलाने लगता है...

मई - ohhhh....bas समिति जी हो गया अब दर्द नहीं होगा ऊऊफफफफफफफफफ आपकी छूट बहोत कासी हुई है अभी तक ऊऊफफफफफफफफफ इसीलिए आपको इतनी तकलीफ हो रही है ..

मई अपने लुंड को अंदर बहार नहीं कर रहा thaa..bas वो मई समिति के होंठों को चुम रहा thaa..aur जल्द hi समिट अपनी गांड को हल्का सा हिलाते हुए बोलती है..

समिति - माआआ हहहहाआईई टाइगर जी उफ्फ्फ तुमने तो मेरी जान hi निकाल दी उउउउइइइइइइइइइ हहहहाआईई तुम्हारे हथियार को देखते hi मैं समझ गयी थी की मेरी आज फिर से फटने वाली है उउउउइइइइइइइइइ मगर मैं खुश hoon...aakhir मेरे पतिदेव ने फिर से मुझे प्यार जो दे रहा है. किसका है ...

मई - तुम्हारा hi पति हु मेरी जान.

समिति- पतिदेव जी आगे बढ़ो और अपनी पत्नी को रगड़ो और रात भर छोड़ो ऊऊफफफफफफफफफ aaaaahhhhhhhhhh मैं आज अपने पति के साथ पूरी रात छोडूंगी और खुल कर chudungi..main अपना सबकुछ अपने पति को दूंगी ऊऊफफफफफफफफफ

समिति की बात सुनकर मई अपने लुंड को हलके हलके अंदर बहार करना सुरु करता hu.mai अपने लुंड के धक्के लगते हुए समिति की एक चूंकि पर अपने दंड से काट रहा thaa..aur समिति दर्द और मस्ती में सिसकारियां लेते हुए आहें भर रही thii...aur उसकी छूट के रास से छूट में चिकनाहट होने लगी

समिति- ..आआह्ह्ह्हह मम्माआआ टाइगर जी ऐसे hi अपनी पत्नी की चुदाई करो उफ्फ्फ आखिर पत्नी तुम्हारी hoon..tum hi पति हो छोड़ो अपनी पत्नी को उफ्फ्फफ्फ्फ़....

मई - समिति अब आपको दर्द तो नहीं हो रहा उफ्फ्फ आपको अब कैसा लग रहा है..

Samita-dard को छोडो टाइगर जी सिर्फ छोड़ो ऊऊफफफफफफफफफ माआआआ तुमसे छोड़ने से मुझे दर्द में भी मज़ा आ रहा है uuuffffffffff.....



समिति को मज़ा आने लगा thaa..wo अपनी छूट में मेरे लुंड के रगड़ से आसमान में उड़ने लगी thii..aur बराबर बिना शर्माए मेरे से सबकुछ बोल रही थी..





मई - समिति आपकी छूट बहोत खूबसूरत और कासी हुई है आज भी ..और ऊऊफफफफफफफफफ कितनी चिकनी है

समिति: टाइगर जी उफ्फ्फ आआह्ह्ह्हह तुम्हारे लिए छूट को चिकनी किया है ऊऊफफफफफफफफफ ाचे से इसकी चमक और बढ़ा do..apne लुंड का कमाल दिखाओ और मुझे ऐसे छोड़ो की मैं सबकुछ भूल जॉन आआह्ह्ह्हह ऊऊफफफफफफफफफ टाइगर जी मेरे अंदर उबाल उठ रहा है uuuuuuuffffffffffff मैं झड़ने वाली हूँ ऊऊफफफफफफफफफ

मई - समिति झाड़ जाओ मैं तो अभी बहोत दूर hoon..main आज रात में आपको रात में सूरज दिखा दूंगा..

समिति - टाइगर जी बीएस तुम hi मेरी बाँहों में रहो ऊऊफफफफफफफफफ मुझे और कुछ देखने की जरूरत नहीं है ऊऊफफफफफफफफफ aaaaahhhhhhhhhh ससससीईई मैंनं गयीईइ आआह्ह्ह्हह हयईईई

समिति हयईईई बोलते हुए झाड़ जाती hai..magar मई अपने लुंड का प्रहार समिति की छूट में बराबर कर रहा thaa..aur अपने लुंड को जड़ तक समिति की छूट में घुसेड़ रहा thaa..jisse मेरा लुंड बार बार समिति की बच्चेदानी में thòkar मार रहा था..






समिति - आआह्ह्ह्हह ममार्र्र्रर गयी टाइगर जी लुंड बच्चेदानी में घुस रहा है uuuuuuuffffffffffff

मई - समिति जब लुंड बच्चेदानी में घुसेगा तभी तो बच्चा पैदा होगा ऊऊफफफफफफफफफ समिति तुम कमाल हो ..

मई .कमाल मम्माआआ तो मेरा पति है ऊऊफफफफफफफफफ जो अपनी पत्नी को छोड़ रहा hai...uufff टाइगर जी बच्चा पैदा कर दो ऊऊफफफफफफफफफ और तेज़ छोड़ो मुझे ऊऊफफफफ्फ्फ्फ्फ़ और पहाड़ दो इस छूट को ऊऊफफफफफफफफफ टाइगर जी देखो इन आँखों में अपने पति से छोड़ने की कितनी प्यास है uuuuuuuffffffffffff aaaahhhhhhhhhh






मई अपने लुंड के देखों की स्पीड बढ़ा देता हु ..स्पीड बढ़ते hi समिति मेरे के सर को नीचे झुकाते हुए उसके होंठों को पीने लगती hai..aur दर्द भरी आवाज़ में बोलती है...

समिति - हआ मम्माआमीीी उउउउइइइइइइइइइ टाइगर जी आप मेरी छूट की रेल बना दो ऊऊफफफफफफफफफ बहोत प्यासी हूँ ऊऊफफफफफफफफफ मेरी साड़ी प्यास मिटा दो uuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii माआआआ आआह्ह्ह्हह


समिति की बात सुनकर मई समिति की आँखों में देखने लगता हब और समिति मेरा चेहरा पकड़ कर उसकी आँखों में आँखें दाल देती है..

समिति - टाइगर जी उउउउइइइइइइइइइ मम्माआआ क्या लुंड पाया है तुमने ऊऊफफफफफफफफफ अब देखो मेरी आखो में क्या कहती hain..main तुमसे चुद रही हूँ फिर भी बेशरम बानी हुई हूँ और तुम शायद शर्मा रहे हो uuuuuuuffffffffffff

समिति के चेहरे पर मेरे से छोड़ने की प्यास साफ़ नज़र आ रही थी...

मई - ... समिति मैं शर्मा नहीं रहा उफ्फ्फ मैं तो आपकी चुदाई कर रहा हूँ ..मैं कितना बड़ा बेशरम हूँ ये तुम नहीं जानती..

समिति- ...मम्माआआ ऊऊफफफफफफफफफ टाइगर जी दिखो अपनी बेशरमी और रात भर मुझे छोड़ो ऊऊफफफफफफफफफ बोलो टाइगर जी छोड़ोगे अपनी बीवी को रात भर ऊऊफफफफफफफफफ बीवी हूँ मुझे सिर्फ तुम छोड़ सकते हो ऊऊफफफफफफफफफ aaaaahhhhhhhhhh ससससीईई मैंनं गयीईइ आआह्ह्ह्हह

समिति दूसरी बार झाड़ चुकी थी और मई भी अपने आखिरी मुकाम पर पहुँच गया था.. मैंने कुछ और धक्के समिति की छूट में mare.aur फिर अपने लुंड का गर्म लावा समिति की छूट में भर देता है..
 
अपडेट 187

अगली सुबह काव्य और कविता की नींद सबसे पहले खुली फिर दोनों फ्रेश हुवे तब उनको याद आया की टाइगर तो सबसे पहले उठ जाता है तो कही वो मॉर्निंग वाक पे तो नहीं निकल गया होगा ये सोच क्र कविता काव्य से कहती है...

कविता: काव्य टाइगर तो मॉर्निंग वाक पे निकल गया होगा तो तू जेक बुआ को देख वो उठी की नहीं

काव्य: ok दी .

फिर काव्य समिति के रूम के पास जाकर समिति को दो तीन बार आवाज़ देती है मगर समिति उठती नहीं तब काव्य दूर को चेक करती है तो दूर खुला हुआ पति है अंदर से लुक नहीं लगा हुआ था फिर जा काव्य दूर खोल कर अंदर देखती है तो एक बार के लिए तो उसका मुँह खुला का खुला hi रह गया क्योंकि अंदर टाइगर और समिति एक दूसरे को अपने आगोश में ले क्र सोये हुवे थे.

थोड़ी देर तक तो वो देखि रही फिर काव्य ने अचानक से से से अपने बुआ को पुकारा .

काव्य के तेज आवाज़ के कारन दोनों की नींद खुल गयी , पहले तो समिति और टाइगर ने एक दूसरे को देखा फिर उसके बाद आवाज़ किधर से आयी उस दिशा में देखा .

दोनों ने काव्य को दूर के पास काढ़े देखा तो पहले तो कुछ समय तक उनलोग को समझा hi नहीं आया की इस सिचुएशन में वो लोग क्या करे थोड़ी देर बाद टाइगर की दिमाग की बत्ती जाली तब उसने बीएड के चादर से अपने और समिति के सरीर को ढाका क्योंकि वो लोग नंगे hi रात की चुदाई के बाद सो गए थे.

काव्य: ओह हो बुआ काम से काम दूर को तो लॉक क्र देती ,चलो कोई बात नहीं उठो और जल्दी से फ्रेश हो जाओ दीदी चाय बना रही है.

फिर काव्य वह और नहीं रुकी, काव्य के जाने के बाद..

टाइगर: मई दूर बंद करना कैसे भूल गया कोई बात नहीं देख भी लिया तो क्या हुआ सभी तो मेरी hi पत्निया है.

समिति: अभी वो पत्नी नहीं बानी है ऐसे hi अगर वो देखती रही तो उसका भी मान करेगा की मई भी तो होने वाली पत्नी हु मई भी सेक्स क्र सकती हु .तब आप क्या करोगे.

टाइगर: जायदा कुछ नहीं करूँगा छोड़ दूंगा उसको भी इसमें क्या है.

समिति: छी आप न बहुत गन्दा बोलते हो.

टाइगर: अच्छा मई गन्दा बोलता हु और वो जो तुम रात में बोल रही थी वो गन्दा नहीं था.

समिति : वो वो तो.... हटो आपसे तो बातो में कोई जीत भी नहीं सकता मुझे बाथरूम जाना है देर होगी तो फिर कोई आ जाएगी.

ऐसे hi दिन निकट गए टाइगर उसके दोस्त और चाहने वालो के एग्जाम भी करीब आ गए थे तो उधर टाइगर के घर पर स्नेहा को शादी के लिए दबाव बनाया जा रहा था तब उसने एक दिन टाइगर को कॉल लगाया.

स्नेहा : (फ़ोन पर ) टाइगर था मम्मी पापा मेरी शादी के पीछे हाथ धो कर पढ़ गए है मई क्या करू अब तुम hi बताओ , अगर तुम ने कुछ नहीं किया तो मई अपनी जान दे dungi.mai बता दे रही हु.

टाइगर : स्नेहा दी ऐसे नहीं बोलते रुकिए आज साम तक मई कुछ न कुछ क्र लूंगा मई इवनिंग में आपको कॉल करता हु.

स्नेहा से बात होने के बाद मई टेंशन में आ गया क्यों की स्नेहा दी से मेरी सधी हो चुकी थी इस हिसाब से अब मेरी पत्नी थी मई बहुत देर तक ईद बार में सोचता था लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल प् रहा था
 
अपडेट 187

अगली सुबह काव्य और कविता की नींद सबसे पहले खुली फिर दोनों फ्रेश हुवे तब उनको याद आया की टाइगर तो सबसे पहले उठ जाता है तो कही वो मॉर्निंग वाक पे तो नहीं निकल गया होगा ये सोच क्र कविता काव्य से कहती है...

कविता: काव्य टाइगर तो मॉर्निंग वाक पे निकल गया होगा तो तू जेक बुआ को देख वो उठी की नहीं

काव्य: ok दी .

फिर काव्य समिति के रूम के पास जाकर समिति को दो तीन बार आवाज़ देती है मगर समिति उठती नहीं तब काव्य दूर को चेक करती है तो दूर खुला हुआ पति है अंदर से लुक नहीं लगा हुआ था फिर जा काव्य दूर खोल कर अंदर देखती है तो एक बार के लिए तो उसका मुँह खुला का खुला hi रह गया क्योंकि अंदर टाइगर और समिति एक दूसरे को अपने आगोश में ले क्र सोये हुवे थे.

थोड़ी देर तक तो वो देखि रही फिर काव्य ने अचानक से से से अपने बुआ को पुकारा .

काव्य के तेज आवाज़ के कारन दोनों की नींद खुल गयी , पहले तो समिति और टाइगर ने एक दूसरे को देखा फिर उसके बाद आवाज़ किधर से आयी उस दिशा में देखा .

दोनों ने काव्य को दूर के पास काढ़े देखा तो पहले तो कुछ समय तक उनलोग को समझा hi नहीं आया की इस सिचुएशन में वो लोग क्या करे थोड़ी देर बाद टाइगर की दिमाग की बत्ती जाली तब उसने बीएड के चादर से अपने और समिति के सरीर को ढाका क्योंकि वो लोग नंगे hi रात की चुदाई के बाद सो गए थे.

काव्य: ओह हो बुआ काम से काम दूर को तो लॉक क्र देती ,चलो कोई बात नहीं उठो और जल्दी से फ्रेश हो जाओ दीदी चाय बना रही है.

फिर काव्य वह और नहीं रुकी, काव्य के जाने के बाद..

टाइगर: मई दूर बंद करना कैसे भूल गया कोई बात नहीं देख भी लिया तो क्या हुआ सभी तो मेरी hi पत्निया है.

समिति: अभी वो पत्नी नहीं बानी है ऐसे hi अगर वो देखती रही तो उसका भी मान करेगा की मई भी तो होने वाली पत्नी हु मई भी सेक्स क्र सकती हु .तब आप क्या करोगे.

टाइगर: जायदा कुछ नहीं करूँगा छोड़ दूंगा उसको भी इसमें क्या है.

समिति: छी आप न बहुत गन्दा बोलते हो.

टाइगर: अच्छा मई गन्दा बोलता हु और वो जो तुम रात में बोल रही थी वो गन्दा नहीं था.

समिति : वो वो तो.... हटो आपसे तो बातो में कोई जीत भी नहीं सकता मुझे बाथरूम जाना है देर होगी तो फिर कोई आ जाएगी.

ऐसे hi दिन निकट गए टाइगर उसके दोस्त और चाहने वालो के एग्जाम भी करीब आ गए थे तो उधर टाइगर के घर पर स्नेहा को शादी के लिए दबाव बनाया जा रहा था.

स्नेहा ने ये बात टाइगर को बताई तो टाइगर ने अलका के घर जाकर ये बात वह पर रह रहे सभी लोगो को बताई.

तब सभी लोग मिल क्र इसका हल ढूढ़ने में लग गए तभी स्टेबेला ने बोलना सुरु किया

स्टेबेला : टाइगर तुम स्नेहा को फ़ोन लगा क्र बोलो की वो घर पर ये बोले की वो किसी से प्यार करती है .

टाइगर: इस से क्या होगा.

स्टेबेला: पहले मेरी पूरी बात तो सुन लो हमारे पास है जिन्नो की ताकत हम सभी रूप बदल क्र लड़के वाले बनकर तुम्हारे घर जायेंगे और फिर तुम्हारे घर वालो से बात कर के फिर से तुम्हारी शादी स्नेहा से करवा देंगे.

अलका: प्लान में तो दम है मगर ये इतना आसान भी नहीं है हमे पूरी प्लानिंग करनी होगी कब क्या और कैसे करना है.
 
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