Incest JANNAT TERI BAHON (TANGO) MEIN - Page 3 - SexBaba
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Incest JANNAT TERI BAHON (TANGO) MEIN

Part-10
🚨 लड़की का अनजाना एहसास

दिव्या, जो पूरी तरह से अपने काम में डूबी हुई थी, अचानक असहज महसूस करने लगी.

यह एक ऐसा एहसास होता है जिसे विज्ञान या तर्क से पूरी तरह समझाना मुश्किल है, लेकिन लड़कियों को अक्सर इसका एहसास हो जाता है की कोई उन्हें ताड़ रहा है (गर्ल्स ओफ्तें सेंस व्हेन समवन इस स्टेरिंग ात थम). यह एक आंतरिक, सूक्ष्म चेतावनी (सटल वार्निंग) होती है, जैसे त्वचा पर अचानक कोई अजीब दबाव महसूस होना या रीढ़ की हड्डी में ठंडक दौड़ जाना.

दिव्या ने किताबें dekhte-dekhte अचानक सर उठाया. उससे लगा जैसे उस पर किसी की आँखें गाड़ी हुई हैं. उसने चारों और देखा, लेकिन कोई भी सीधे उससे नहीं देख रहा था. उसके पास खड़ा सेल्समेन भी अपने काम में व्यस्त था.

उसने फिर से किताब उठायी, लेकिन वह असहजता बानी रही.

उसने धीमी गति से दरवाज़े की और देखा, जहां माणिक खड़ा था. माणिक ने जैसे hi दिव्या को अपनी और देखते हुए पाया, दिव्या को बहुत गुस्सा आया और उसने उसकी पीठ पर हाथ मारा तो माणिक सेहम गया बोली... क्या देख रहे थे.... माणिक घबरा कर बोलै... कक्कुक नहीं दीदी मन में सोचता है... ओह तेरी की, इसका मतलब मैंने सपने में दिव्या दीदी की छूट मार ली.

दिव्या (मन hi मन): 'क्या माणिक मुझे घूर रहा था? नहीं! यह तो पागलपन है. वह मेरा भाई है. शायद मैं ज़्यादा सोच रही हूँ क्यूंकि मैं असहज महसूस कर रही हूँ.'

उसने अपने कुर्ते को थोड़ा नीचे खींचा और अपने काम पर फिर से ध्यान केंद्रित करने की कोशिश की, लेकिन वह असहजता अब भी बानी हुई थी. वह जल्दी से अपना सामन ख़तम करना चाहती थी.

माणिक ने देखा तो दिव्या अब ज़्यादा सतर्क हो गयी है, और वह baar-baar अपने कपडे ठीक कर रही है. वह समझ गया था की दिव्या को उसके 'ताड़ने' का एहसास हो गया है. इस एहसास ने माणिक को शर्मिंदा करने के बजाय, उसके गुप्त खेल को और भी ज़्यादा रोमांचक बना दिया.

दिव्या भी उसके इस व्यवहार से असहज सी हो गयी थी और ढीली सी आवाज़ में बोली: "चलो, मेरा काम हो गया."

माणिक (मासूमियत से): "हाँ, चलो. जल्दी चलते हैं."

माणिक ने बाइक स्टार्ट की, लेकिन इस बार उसके मन में दोहरा दर tha—pehla, अपनी इस अनियंत्रित आदत का, और दूसरा, यह की अगर दिव्या को सच पता चल गया की वह उससे किस तरह से घूर रहा था और न सिर्फ घूर रहा था बल्कि घूरते हुए सपने में उसकी जमकर चुदाई की तो वह उससे न सिर्फ जमकर धोएगी बल्कि उनके बीच का रिश्ता हमेशा के लिए ख़तम हो जायेगा.

🤫 अंतिम पेशकश: तड़प, मजबूरी और अनीता का प्रस्ताव

आनंद मित्तल अपने केबिन में बैठे थे, माथे पर शिकन थी. सविता ग्रोवर के साथ उनका रिश्ता अब एक ऐसे भावनात्मक चक्रव्यूह में फँस चूका था जहां वह पूरी तरह से यौन तड़प (सेक्स के लिए तड़प) से चूर थे, लेकिन सविता की ज़िद और सीमाओं के कारण वह अपनी इच्छा पूरी नहीं कर प् रहे थे. सविता उन्हें हैंड जॉब तक सीमित रखती थी, जिसे वह एक 'सेवा' या 'भावनात्मक सहारा' मानती थी, न की एक पूर्ण शारीरिक सम्बन्ध.

सविता ने आज फिर आनंद जी को बुलाया था, लेकिन इस बार उसके चेहरे पर एक अलग तरह की गंभीरता थी, जो उनके सामान्य 'प्रोफेशनल' या 'सख्त' मूड से अलग थी.

🚫 सविता की मजबूरी

आनंद जी ने देखा की सविता आज थोड़ी परेशां है.

आनंद जी (थके हुए स्वर में): "सविता, अगर तुम फिर से वही बात दोहराने आयी हो की मैं अपनी इच्छाएं कण्ट्रोल करून, तो मैं सुन नहीं सकता. मुझे पता है की तुम मेरी ज़रूरतें जानती हो, पर तुम खुद नहीं चाहती... या कोई और मजबूरी है?"

सविता ने लम्बी सांस ली. इस बार वह अपनी मजबूरी को छिपा नहीं पायी.

सविता: "आनंद जी, मुझे समझने की कोशिश कीजिये. मेरे लिए आप सिर्फ एक बॉस नहीं हैं, आप श्वेता की बहिन के पति हैं. मेरा पति, रजत, एक मैनेजर है और हमारा एक सामान्य, स्थिर जीवन है. अगर मैं आपके साथ पूर्ण शारीरिक सम्बन्ध रखती हूँ, तो इसका मतलब है की मैं अपने वैवाहिक जीवन के saath-saath, अपने पेशेवर जीवन को भी खतरे में दाल रही हूँ. मैं इतनी बोल्ड और बेबाक दिखती हूँ, पर मैं अपने घर और अपने सम्मान को डाव पर नहीं लगा सकती."

उसने अपनी साड़ी का पल्लू कसकर पकड़ा. सविता: "मैं आपको शारीरिक राहत दे सकती हूँ ताकि आप काम पर ध्यान दे सकें, लेकिन मैं आपकी 'प्रेमिका' नहीं बन सकती. मैं आपको तड़पती हूँ, क्यूंकि मैं जानती हूँ की आप मेरे लिए महसूस करते हैं, लेकिन मैं वह सीमा नहीं लांघ सकती."

आनंद जी निराशा में सर झुका गए.

🎁 सविता का अप्रत्याशित ऑफर

सविता ने देखा की आनंद जी का निराशा का स्टार बहुत बढ़ गया है, और वह इस तड़प से बाहर नहीं निकल प् रहे हैं. तभी, उसने एक बहुत hi अप्रत्याशित और बोल्ड प्रस्ताव उनके सामने रखा.

सविता (झुककर, धीमी और अत्यंत गोपनीय आवाज़ में): "आनंद जी, मेरे पास एक रास्ता है जहां आप अपनी सेक्स की भूख भी मिटा सकते हैं और किसी की ज़िन्दगी में एक बहुत बड़ा पुण्य भी कर सकते हैं."

आनंद जी ने हैरानी से उसकी और देखा.

सविता: "मेरी कॉलेज के समय की एक बहुत अच्छी दोस्त है, अनीता. उसकी शादी को आठ साल हो गए हैं. उसका पति, जो एक अच्छा बिजनेसमैन है, बीटा पैदा करने में काबिल नहीं (इंफर्टिले) है. उन्होंने सारे इलाज करवा लिए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ."

सविता ने थोड़ा रूककर माहौल को और गंभीर बनाया.

सविता: "अनीता और उसके पति दोनों hi एक बच्चे की उम्मीद खो चुके हैं. उन्होंने मुझसे एक गोपनीय मदद मांगी थी. वह चाहते हैं की अनीता किसी 'विश्वसनीय' और 'स्वस्थ' पुरुष के साथ सम्बन्ध बनाये ताकि वह गर्भ धारण कर सके. यह सब पूरी तरह से गोपनीय रहेगा, और वह पुरुष उनकी ज़िन्दगी का हिस्सा नहीं बनेगा."

आनंद जी के चेहरे पर सदमा, जिज्ञ्यासा और उत्तेजना का मिश्रण था.

सविता (आगे झुककर, प्रस्ताव को स्पष्ट करते हुए): "आप उस बच्चे को जन्म देने में उनकी मदद कर सकते हैं. यह उनके लिए संतान का वरदान होगा, और आपके लिए अपनी यौन इच्छा (सेक्स की भूख) को एक ऐसे रिश्ते में पूरा करने का मौका, जो पूरी तरह से सहमति पर आधारित होगा और जिसे एक 'पुण्य' के आवरण में छिपाया जा सकता है."

सविता ने अपनी बात समाप्त की, उसकी आँखें आनंद जी के चेहरे पर तिकी थी.

सविता: "यह आपकी तड़प को भी शांत करेगा, और आपको किसी एस्कॉर्ट के पास जाने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी, जिससे आपका सम्मान भी बना रहेगा. यह एक गोपनीय समझौता होगा. आप अनीता को बच्चा दे दीजिये, और बदले में आप अपनी ज़रुरत पूरी कर लीजिये. मैं बीच में रहूंगी ताकि गोपनीयता बानी रहे."

आनंद मित्तल सन्न रह गए. यह एक ऐसा ऑफर tha—anaitik, जटिल, लेकिन उनकी पांच साल की तड़प का एकमात्र समाधान. उन्हें लगा की सविता ने उनकी मजबूरी का इस्तेमाल किया है, लेकिन साथ hi उन्हें यह भी लगा की यही उनकी सबसे बड़ी ज़रुरत को पूरा करने का एकमात्र रास्ता है. उनकी आँखों में अब तड़प के saath-saath एक नयी, अनजानी उम्मीद भी थी.

🖼️ अनीता की छवि और अंतिम फैसला

सविता का प्रस्ताव – एक संतानहीन जोड़े को 'बच्चा देना' और बदले में अपनी शारीरिक तड़प मिटाना – आनंद मित्तल के लिए किसी लुभावने जाल से काम नहीं था. यह अनैतिक था, पर यह उनकी पांच साल की तड़प का एकमात्र सम्मानजनक समाधान लग रहा था.

⚖️ शक और समझौता

आनंद जी ने कुछ पल के लिए अपनी बेचैनी को संभाला और उस प्रस्ताव के व्यवहारिक पहलुओं पर सोचने लगे. उनकी सबसे बड़ी चिंता थी भविष्य की जटिलताएं.

आनंद जी (गंभीर स्वर में): "सविता, यह प्रस्ताव... यह बहुत बड़ा है. मुझे इसमें सिर्फ एक दर है. क्या गारंटी है की वह औरत, अनीता, बाद में मुझे ब्लैकमेल नहीं करेगी? या कल को उसका पति पलट गया तो? अगर वह बच्चा पैदा होने के बाद मेरी chal-achal संपत्ति (प्रॉपर्टी) पर कोई हक़ मांगे तो?"

आनंद मित्तल, एक बड़े कॉर्पोरेट के मद थे, और संपत्ति का सवाल उनके लिए सर्वोपरि था, खासकर अपने बच्चों (माणिक, अनु, दिव्या, पारी) के भविष्य को देखकर.

सविता (आत्मविश्वास से मुस्कुराते हुए): "मैंने यह सब सोचा हुआ है, आनंद जी. हम कोई रिस्क नहीं लेंगे. हम अनीता और विनोद को कहेंगे की हम यह काम तभी करेंगे जब हम कोर्ट में एक कानूनी समझौता (लीगल एग्रीमेंट) तैयार करवा लें."

सविता ने मेज़ पर झुककर अपनी बात स्पष्ट की:

सविता: "उस समझौता में साफ़ लिखा होगा की 'इस सम्बन्ध से उत्पन्न होने वाले बच्चे या अनीता का आनंद मित्तल की किसी भी चल या अचल संपत्ति पर भविष्य में कोई हक़ (no राइट) नहीं होगा.' यह कानूनी रूप से बाध्यकारी होगा. यह एक शुद्ध जैविक दान (पुरेली बायोलॉजिकल डोनेशन) होगा, जिसका सारा खर्चा उनका पति उठाएगा."

आनंद जी को यह समाधान अच्छा लगा. यह उनकी तड़प को मिटाने का रास्ता भी था और उनके परिवार की सुरक्षा का भी.

आनंद जी (शांत होकर): "ठीक है, यह बात सही है. पर मुझे... मुझे इस पर सोचने का मौका चाहिए. यह मेरी ज़िन्दगी का बहुत बड़ा फैसला होगा."

📸 अनीता की तस्वीर और इच्छा का आवेग

सविता ने मुस्करातेहुए हामी भरी. उसने अपनी पर्स से फ़ोन निकला और एक तस्वीर खोली.

सविता: "आप सोचिये. पर इससे पहले, आप मिलिए अनीता से."

उसने फ़ोन आनंद जी की और बढ़ा दिया. फ़ोन की स्क्रीन पर अनीता की तस्वीर थी. अनीता लगभग 32 साल की थी, उनका चेहरा आकर्षक था, और उनका पहनावा और अंदाज़ एक सशक्त, आत्मविश्वासी महिला का था. वह किसी 'काम की देवी' (अवतार ऑफ़ ा कमा गॉडेस) से काम नहीं लग रही थी, जिनकी आँखों में एक अनजानी सी उदासी और दृढ़ता झलक रही थी.

आनंद मित्तल ने उस तस्वीर को घूरकर देखा. उस महिला की सुंदरता और उसके पीछे छिपी कहानी ने आनंद जी के भीतर इच्छा के आवेग को तुरंत जगा दिया.

तस्वीर देखते hi, आनंद जी के लुंड में तनाव आ गया (उनका लुंड तन गया). वह अपनी भावनाओं को छुपा नहीं पाए.

सविता ने आनंद जी के चेहरे के haav-bhaav और उनकी पंत में आयी हलचल को तुरंत भांप लिया.

सविता (मुस्कुराते हुए, लेकिन प्रोफेशनल अंदाज़ में): "लगता है आपको अब ज़्यादा सोचने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी."

आनंद जी की नज़रों में अनियंत्रित इच्छा देखकर, सविता ने निर्णय लिया की उन्हें तुरंत राहत देना ज़रूरी है ताकि वह इस प्रस्ताव पर जल्दी सहमत हो सकें.

सविता ने बिना कोई और शब्द कहे, हाथ बढाकर धीरे से आनंद जी की पंत की जिपर खोली, और उनके लुंड को बाहर निकला.

सविता (हलकी फुसफुसाहट में): "यह लीजिये, सोचिये मत... बस महसूस कीजिये."

सविता ने उसी वक़्त आनंद जी को हैंड जॉब देना शुरू कर दिया.

आनंद जी की आँखें बंद नहीं थी. आज वह हैंड जॉब लेते हुए, सामने रखे फ़ोन पर अनीता की तस्वीर को एकटक देख रहे थे. उनके दिमाग में अब सिर्फ दो hi बातें थी: एक तरफ कानूनी समझौता, और दूसरी तरफ अनीता का आकर्षक चेहरा, जो उनकी सालों की तड़प को मिटाने का एकमात्र जरिया बनने वाला था.



इस अनैतिक और जटिल सौदे पर उनके मन में अब कोई शंका नहीं थी.
 
### Part-11

💥 ध्रुव और जाज: अनैतिकता की दुनिया और माणिक का नया सबक

माणिक, अपनी अंदरूनी कश्मकश (पारी और दिव्या को ताड़ने की नयी आदत और नीरू बुआ की बोल्डनेस) से बुरी तरह परेशां था. उससे समझ नहीं आ रहा था की वह इन वर्जित विचारों को कैसे संभाले. अपनी उलझन को बांटने और शायद कोई सलाह लेने के लिए, उसने अपने कॉलेज के पुराने दोस्त ध्रुव राठी से मिलने का फैसला किया.

ध्रुव शहर के एक पॉश इलाके में रहता था और हमेशा से अपनी बोल्ड और खुली सोच के लिए जाना जाता था. माणिक को लगा की ध्रुव hi शायद उससे इन अनैतिक विचारों से बाहर निकलने में मदद कर सकता है.

🤫 ध्रुव का राज़ और माणिक की स्थिति

माणिक ने अपने दोस्त के कमरे में ध्रुव को अपनी पूरी स्थिति batayi—Neeru बुआ की बातों से लेकर, पारी को देखने और दिव्या को jaan-boojhkar ब्रेक लगा कर छूने तक.

ध्रुव (ध्यान से सुनकर, मुस्कुराते हुए):

"यार माणिक, इसमें इतना परेशां होने वाली क्या बात है? तुम एकदम नार्मल हो. जवानी है, ये सब तो होता hi है."

माणिक (परेशां होकर):

"नार्मल नहीं है, ध्रुव! वह मेरी बहिन है, यार! और मेरी आँखों पर कण्ट्रोल नहीं है. मैं इस गिल्ट (गिलानी) में मर रहा हूँ."

ध्रुव:

"गिल्ट क्यों? तुम तो अपने शरीर की स्वाभाविक ज़रुरत महसूस कर रहे हो. वैसे भी, मैं तुम्हे एक बहुत hi मज़ेदार बात बताता हूँ... जिससे शायद तुम्हे थोड़ा 'नार्मल' महसूस हो."

ध्रुव ने अपना फ़ोन निकला और किसी को कॉल किया.

"जाज, कहाँ है? जल्दी आ, थोड़ा मज़ा करते हैं."

कुछ hi देर में, ध्रुव की बहिन, जाज राठी, कमरे में दाखिल हुई. उसकी उम्र लगभग 20-21 साल थी, और उसका पहनावा सचमुच बहुत बोल्ड tha—ek छोटी, टाइट स्कर्ट और deep-cut टॉप, जिसमें उसका आत्मविश्वास झलक रहा था.

🚫 Bhai-behan नहीं, 'लवर्स'

जाज को देखकर माणिक थोड़ा असहज हुआ. ध्रुव ने जाज को अपने पास सोफे पर बिठा लिया, उनके बीच कोई जगह नहीं थी.

ध्रुव (माणिक से, मुस्कुराते हुए):

"यह मेरी बहिन है, जाज. पर हम दोनों लवर्स की तरह रहते हैं."

माणिक चौंक गया. "क्या... क्या कह रहा है तू?"

ध्रुव (जाज की और देखकर, उसके बाल सहलाते हुए):

"हाँ, हम दोनों एक दुसरे से बहुत प्यार करते हैं. मैं तुम्हे सच बताता hoon—raat को मैं इसकी चुदाई करता हूँ. और यह मेरा पूरा ख्याल रखती है."

जाज ने माणिक की और देखा और एक रहस्यमय तरीके से मुस्कुरायी. उससे इस बात को सार्वजनिक करने में ज़रा भी शर्म नहीं थी.

माणिक को लगा जैसे ज़मीन खिसक गयी हो. उसके अनैतिक विचार एक पल में वास्तविकता के इस भयंकर रूप के सामने छोटे पद गए.

🥵 उत्तेजना की चरम सीमा

माणिक की हैरानी को देखकर ध्रुव और जाज दोनों और ज़्यादा उत्साहित हो गए.

ध्रुव ने जाज के वक्षस्थल (बूब्स) पर हाथ रखा और उससे सहलाने लगा. जाज ने आँखें बंद कर ली और तुरंत hi उसने अपना हाथ बढ़ाया और ध्रुव के ट्रॉउज़र में से उसके लुंड पर हाथ फेरने लगी.

यह नज़ारा माणिक के लिए अविश्वसनीय था. एक दोस्त के सामने, दोनों bhai-behan एक दुसरे के साथ इस तरह की अंतरंग हरकतें कर रहे थे.

माणिक की नज़रें उन दोनों पर तिकी थी. यह सब इतना खुला और सहज था की माणिक की दबी हुई इच्छाएं और पुरुषत्व पूरी तरह से जागृत हो उठा. वह पसीने से भीग गया.

ध्रुव और जाज, दोनों hi इन हरकतों से एकदम उत्तेजित हो गए थे.

ध्रुव (हस्ते हुए, माणिक की और देखकर):

"देखा माणिक? क्या कहा था मैंने? लड़की चाहे तुम्हारी बहिन hi क्यों न हो, अगर वह खूबसूरत है, तो उस पर आकर्षण कुदरती होता है! इसमें कोई गिल्ट नहीं होना चाहिए. यह प्रकृति का नियम है."

जाज ने इस बात पर हामी भरते हुए ध्रुव को एक तेज़ चुम्बन दिया.

ध्रुव ने माणिक को हिलाया,

"तुम जिस बात से इतना दर रहे हो, उससे तो हम दोनों रोज़ जीते हैं. अपनी इच्छाओं को दबाओ मत, उन्हें समझो. तुम सिर्फ एक इंसान हो."

माणिक सदमे में था. ध्रुव की इस खुली अनैतिकता ने उसके मन की दीवारों को तोड़ दिया था. जो विचार उसके लिए वर्जित थे, वह इस दुनिया में जिए जा रहे थे. माणिक को एहसास हुआ की वह अब इस अनैतिकता की दुनिया के किनारे पर खड़ा था, और ध्रुव ने उससे अंदर आने का खुला न्योता दे दिया था.

🔥 उत्तेजना की चरम सीमा: जाज का खेल और माणिक का पहला अनुभव

माणिक, ध्रुव और जाज की खुली और उत्तेजक हरकतों से पूरी तरह सन्न और सदमे में था. ध्रुव के शब्दों ने — "आकर्षण कुदरती होता है" — माणिक के मन में उठ रहे वर्जित विचारों को एक भयंकर मंज़ूरी दे दी थी.

माणिक अभी भी सोफे के सामने वाली कुर्सी पर बैठा था, पसीने से भीगा हुआ. तभी, जाज ने, जो अभी भी ध्रुव के साथ अंतरंग थी, मुस्कुराकर और पूरी ऐडा के साथ माणिक को अपनी और बुलाया.

जाज (मुस्कुराते हुए, अपनी ऊँगली से इशारा करते हुए):

"अरे माणिक, आओ! तुम वहाँ क्यों बैठे हो? शर्माओ मत, हम सब दोस्त हैं. यहां आओ, हमारे बीच बैठो."

माणिक का विवेक उससे zor-zor से मन कर रहा था, पर नीरू बुआ की सलाह, पारी और दिव्या को ताड़ने की हाला की आदत, और Dhruv-Jazz की खुली उत्तेजना ने उसके संयम को तोड़ दिया. वह अपनी पूरी ज़िन्दगी में पहली बार ऐसे अनुभव के मुहाने पर खड़ा था.

माणिक हिचकते हुए उठा और ध्रुव के बगल में सोफे पर दूसरी साइड बैठ गया.

👐 दो हाथों का खेल

माणिक के बैठते hi, जाज ने ज़रा भी देर नहीं लगायी. उसने अपनी प्रोफेशनल मुस्कान बनाये राखी और अपना एक हाथ धीरे से ध्रुव के लुंड से हटाया. उसी क्षण, उसने माणिक की और देखा, उसकी पतलून की ज़िप खोली, और माणिक के लुंड को बाहर निकला.

माणिक को लगा जैसे बिजली का एक तेज़ झटका लगा हो. यह इतना अचानक और इतना सहज था की वह विरोध नहीं कर पाया. उसकी आँखें फटी रह गयी, पर उसके शरीर में एक अनियंत्रित, तीव्र उत्तेजना दौड़ गयी.

अब जाज का एक हाथ उसके भाई ध्रुव राठी के लुंड पर था, जहां वह अपनी गति बनाये हुए थी, और दूसरा हाथ माणिक के लुंड पर था, जिससे वह पूरे आत्मविश्वास और कौशल से हैंड जॉब दे रही थी.

माणिक को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था. कॉफ़ी शॉप के कोने में, उसकी दोस्त की बहिन, जो रिश्ते में उसकी भी बहिन hi लगती थी, उससे उत्तेजित कर रही थी, और वह भी अपने भाई के बगल में.

🍈 स्पर्श और पूर्ण समर्पण

जैसे hi माणिक की उत्तेजना बढ़ी, जाज ने एक और कदम उठाया. उसने अपनी अंतरंगता को और भी ज़्यादा बढ़ा दिया.

जाज ने अपना एक हाथ माणिक के लुंड से हटाया, और उसका हाथ पकड़कर उससे अपने दुसरे स्तन (बूब) पर रख दिया, जो deep-cut टॉप के कारण लगभग खुला hi था.

जाज (माणिक के कान में फुसफुसाते हुए):

"पकड़ो इसे. यह तुम्हारी पहली क्लास है. आराम से."

माणिक की उँगलियाँ जाज के नरम और गरम स्तन को छू रही थी. यह किसी महिला के वक्षस्थल का पहला वास्तविक स्पर्श था, और उसकी आँखों के सामने उत्तेजना hi उत्तेजना थी.

माणिक अब पूरी तरह से इस अनैतिक और वर्जित खेल में डूब चूका था. उसका विवेक पूरी तरह से डैम तोड़ चूका था. उसके अंदर एक हिंसक और अनैतिक आनंद की लहार उठ रही थी.



माणिक की आँखें बंद हो गयी, और उसके मुँह से दबी हुई आह निकली.
 
Part-12

🙏 बुआ को धन्यवाद

जब उत्तेजना अपने चरम पर थी, माणिक ने इस पूरे अनुभव को मन hi मन आत्मसात कर लिया.

वह सोचने लगा – यह सब किसकी वजह से हुआ? अगर नीरू बुआ ने उससे “जवानी का लुत्फ़ उठाने” और “अकेलेपन में न रहने” की सलाह न दी होती, तोह शायद वह अपने अनैतिक विचारों से इतना डरता की कभी यहां तक नहीं पहुँच पाटा.

माणिक मन hi मन नीरू बुआ को “धन्यवाद” बोल रहा था. बुआ की बोल्डनेस ने उससे यह साहस दिया की वह अपने अंदर की वर्जित इच्छाओं को स्वीकार कर सके, और आज ध्रुव और जाज ने उससे वह मंच प्रदान किया जहां उसकी यह इच्छाएं पूरी हो रही थी.

कुछ hi पलों में माणिक ने जाज के हाथ में अपनी साड़ी उत्तेजना छोड़ दी. ध्रुव भी उसी क्षण चरम पर पहुँच गया.

जाज ने दोनों को साफ़ किया और मुस्कुराते हुए, बेहद संतुष्टि के भाव से वापस सोफे पर बैठ गयी.

ध्रुव (खुश होकर माणिक को थपथपाते हुए): “तोह कैसा लगा, मेरे भाई? मैंने कहा था न, यह नार्मल है. अब बताओ, क्या तुम अब भी गिल्ट में हो?”

माणिक ने गहरी सांस ली. वह अब भी स्तब्ध था, पर उसके शरीर में एक नयी तरह की शान्ति थी जो पांच सालों की यौन तड़प के बाद आयी थी. उस पल वह अब गिल्ट में नहीं था, बल्कि अनैतिकता के एक नए और रोमांचक रास्ते पर चल पड़ा था.

🌟 वर्जित अनुभव: जाज की बेबाकी और माणिक की पहली चुदाई

माणिक अभी भी जाज के हैंडजॉब के अचानक और तीव्र अनुभव से उबार रहा था, जब माहौल ने एक और नाटकीय मोड़ ले लिया. ध्रुव ने संतुष्टि से माणिक को देखा और माणिक अपने शरीर में महसूस हो रही शान्ति और उत्तेजना के मिश्रण में खोया हुआ था.

👚 कपडे और सीमाएं दोनों ख़तम

तभी जाज मुस्कुराते हुए कड़ी हुई. उसकी आँखों में एक नयी, खुली चुनौती थी. माणिक कुछ समझ पाटा, इससे पहले hi जाज ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने कपडे उतार कर फ़ेंक दिए. Deep-cut टॉप और छोटी स्कर्ट, सब ज़मीन पर गिर गए. जाज अब पूरी तरह नग्न थी.

कॉफ़ी शॉप के उस कोने में बैठी जाज ने इस अंतरंगता को सार्वजनिक करने में ज़रा भी संकोच नहीं किया. उसकी इस बेबाकी ने माणिक और ध्रुव दोनों के दिलों की धड़कनें तेज़्ज़ कर दी.

जाज ने नग्न अवस्था में hi सोफे की तरफ देखा जहां माणिक बैठा था. उसकी आँखें माणिक के चेहरे पर टिक्की थी, मानो वह उससे न केवल बुला रही हो, बल्कि उससे चुनौती दे रही हो की वह इस अनैतिक खेल में और आगे बढे.

🍑 गॉड में समाया आनंद

जाज धीरे से माणिक की तरफ बढ़ी. माणिक, जो अभी भी कपडे पहने हुए था, सदमे में अपनी आँखें बंद करने की हिम्मत नहीं जूता पाया.

जाज ने बिना किसी भूमिका के सीधे आकर माणिक की गॉड में बैठना शुरू कर दिया. माणिक का लुंड अभी भी उत्तेजित अवस्था में था और पंत से बाहर निकला हुआ था.

जाज ने बड़ी कुशलता और सहजता से खुद को माणिक पर इस तरह समायोजित किया की माणिक का उत्तेजित लुंड सीधे जाज की योनि (छूट) में प्रवेश कर गया और पूरी तरह समां गया.

माणिक को लगा जैसे उसके शरीर में एक तेज़्ज़, सुखद बिजली का झटका लगा हो. यह माणिक की ज़िन्दगी का पहला सम्भोग (फर्स्ट चुदाई) था, और यह अनुभव इतना अनोखा, इतना वर्जित और इतना तीव्र था की वह अपनी sudh-budh खो बैठा.

माणिक (दबी हुई आवाज़ में आह भरते हुए): “उह्ह्ह…”

जाज ने अपने हाथ माणिक की गर्दन पर रखे और अपना शरीर dheere-dheere माणिक की गॉड में oopar-neeche करने लगी.

🤩 ध्रुव की ख़ुशी और माणिक का अनोखा अनुभव

ध्रुव राठी, जो सोफे पर जाज के बगल में बैठा था, इस पूरे नज़ारे को देखकर खुश हो रहा था.

ध्रुव (गर्व से मुस्कुराते हुए): “यह है ज़िन्दगी, माणिक. देखो, इसे कहते हैं ‘जलवा’! तुम आज़ाद हो! अपनी इच्छाओं को जियो!”

ध्रुव ने मज़ाकिया अंदाज़ में जाज की पीठ थपथपाई, जैसे वह उसकी इस ‘सेवा’ के लिए शाबाशी दे रहा हो.

माणिक को अब बाहरी दुनिया, नियम, अनु की सख्ती या दिव्या की नफरत की कोई परवाह नहीं थी. वह पूरी तरह जाज के वश में था. वह अपने जीवन के पहले सम्भोग का आनंद ले रहा था – एक ऐसा अनैतिक और वर्जित आनंद जो उससे नीरू बुआ की बातों और ध्रुव की दोस्ती के कारण नसीब हुआ था.

जाज तेज़्ज़ी से और ज़्यादा जोश के साथ माणिक की गॉड में हिलने लगी. माणिक ने अपनी आँखें बंद कर ली, उसके होठों पर एक ऐसी मुस्कान थी जो उसकी सालों की यौन तड़प ख़तम होने का संकेत दे रही थी.

आज माणिक मित्तल को पहली बार चुदाई का मज़ा मिल रहा था, और यह एक ऐसा अनोखा और वर्जित अनुभव था जिसे वह जीवन भर नहीं भूल पायेगा.

उस क्षण माणिक और जाज के बीच कोई bhai-behen का रिश्ता नहीं था, बल्कि सिर्फ दो शरीर थे जो अनियंटित इच्छाओं के वश में थे, और ध्रुव राठी उन्हें देखकर अपनी खुली और अनैतिक दुनिया का जश्न मन रहा था.

💦 चरम सीमा और विसर्जन: चीखें, आहें और शान्ति

माणिक की गॉड में बैठी जाज पूरी रफ़्तार और बेबाकी से उस अंतरंग पल को जी रही थी. कॉफ़ी शॉप के कोने में अब उत्साह और उत्तेजना का चरम व्याप्त था.

🔊 चीखें और सिसकारियां

जाज ने अपनी आँखें बंद कर राखी थी और उसका चेहरा पूरी तरह आनंद से भरा हुआ था. हर ताल पर उसकी आवाज़ कमरे की शान्ति को भांग कर रही थी.

जाज (ज़ोर से): “आह! हाँ माणिक! ऐसे hi! और तेज़्ज़! उन्हह! आह… फास्टर… फास्टर!”

उसकी यह oonchi-oonchi आहें उस अनैतिकता के माहौल को और भी ज़्यादा उत्तेजक बना रही थी.

माणिक अपनी पहली चुदाई के अनुभव से पूरी तरह पागल हो चूका था. जाज का स्पर्श, उसका शरीर, और उसकी तेज़्ज़ आवाज़ें माणिक को एक अनियंटित धरातल पर ले जा रही थी.

माणिक (दबी हुई सिसकारियों में): “उह्ह्ह! जाज… मैं… मैं और नहीं…”

ध्रुव (हस्ते हुए): “चलो! मज़ा आ रहा है न? अब छोड़ना मत माणिक! आज साड़ी तड़प निकाल दो!”

🌊 एक साथ विसर्जन

Jaise-jaise उनके बीच का तालमेल चरम पर पहुंचा, जाज ने अपनी गति और भी बढ़ा दी.

जाज (अंतिम लम्बी चीख): “आह! माणिक! मैं… आह!”

ठीक उसी क्षण माणिक का शरीर भी एक तीव्र लहार से हिल गया. दोनों एक साथ अपनी चरम सीमा पर पहुँच गए.

कमर जाज की अंतिम लम्बी चीख और माणिक की गहरी सिसकारियों से भर गया.

🧘 शान्ति और निढालपन

विसर्जन के बाद जाज का शरीर पूरी तरह ढीला पद गया. वह निढाल होकर माणिक पर गिर गयी. दोनों के पसीने मिल गए.

माणिक की बाहें जाज के नग्न शरीर के चारों तरफ कास गयी. उसके दिमाग में अब कोई विचार नहीं था – न दिव्या, न पारी, न अनु के नियम. बस एक गहरी शान्ति थी.

ध्रुव ने धीरे से ताली बजायी.

ध्रुव: “वह! माणिक! तू तोह बहुत कुछ दबाकर बैठा था. देखा, यह सब कितना आसान और अच्छा है.”

माणिक ने जाज को गॉड से हटाया और सोफे पर टिकाया. जाज ने आँखें खोली और माणिक को एक गहरी, संतुष्ट मुस्कान दी.

माणिक को लगा उसने एक भयानक लेकिन ज़रूरी कदम उठा लिया है जिससे उसकी सालों की तड़प हमेशा के लिए ख़तम हो गयी.

नीरू बुआ की सलाह और ध्रुव की बेबाकी ने उससे अनैतिकता की उस दुनिया में दाखिल कर दिया था जहां गिल्ट से ज़्यादा आनंद का महत्व था.

Part-12 ख़तम.

बोलो, Part-13 में कॉफ़ी शॉप से घर ले जॉन इनको? या और वाइल्ड कर दूँ यहीं? 😈
 
लो जी आप सबकी फरमाइश पर दाल दिया है एक भाग. एन्जॉय कीजिये. मेस्सगेस के रिप्लाई रात को करूँगा
 
Part -13

💦 Baar-baar का चरम: जाज की भूख और माणिक का नशा

जाज अभी माणिक की गॉड से उठी भी नहीं थी की उसकी सांसें फिर तेज़ होने लगीं. उसका नग्न शरीर अब भी माणिक से सत्ता हुआ था, पसीने से चिपचिपा और गर्म. उसने माणिक के कानों में फुसफुसाया—

जाज (हाँफते हुए, कामुक लहजे में): “एक बार काफी नहीं है, भाई… अभी तो पूरी रात बाकी है.”

माणिक की आँखें चौड़ी हो गयीं. उसका लुंड, जो abhi-abhi शांत हुआ था, फिर से सख्त होने लगा. जाज ने मुस्कुराते हुए अपनी उँगलियों से उसे सहलाया और बोली—

जाज: “देखो, कितना भूखा है ये भी… चलो, अबकी बार मैं ऊपर से नहीं, तुम मुझे लिटाओ.”

ध्रुव हंस पड़ा. उसने अपना फ़ोन निकाला और रिकॉर्डिंग ों कर दी.

ध्रुव (मज़ाकिया अंदाज़ में): “ये मोमेंट तो सेव करना पड़ेगा, भाई. तेरी पहली बार की पूरी फिल्म बनेगी!”

🔥 सोफे पर लिटाकर, बिना रुके

जाज ने खुद को सोफे पर लिटा लिया. उसकी टांगें चौड़ी खुली हुई थीं, और उसकी छूट अभी भी गीली और लाल थी. उसने माणिक को इशारा किया.

जाज: “आओ ना… अब तुम चलाओ. ज़ोर से. मुझे दर्द तक पहुंचाओ.”

माणिक बिना सोचे आगे बढ़ा. उसने जाज की दोनों टांगें अपने कन्धों पर रखीं और एक hi झटके में पूरा लुंड अंदर घुसेड़ दिया.

जाज (चीखते हुए): “आह्हः! हाँ! ऐसे hi! पहाड़ दो मुझे!”

माणिक ने अब कोई शर्म नहीं राखी. पांच साल की भूख एक साथ बाहर निकल रही थी. वो zor-zor के धक्के, हर धक्के के साथ जाज का शरीर उछाल रहा था. उसकी चूचियां हिल रही थीं, और उसकी आवाज़ें पूरी कॉफ़ी शॉप में गूँज रही थीं.

जाज: “और ज़ोर से! हाँ! मारो! मुझे अपनी रंडी बना लो आज!”

ध्रुव पास बैठकर तालियां बजा रहा था.

ध्रुव: “वाह माणिक! आज तो तू राक्षस बन गया रे! चल, अब पीछे से भी तरय कर!”

🌪️ पीछे से, और भी गहरा

जाज ने खुद पोजीशन बदली. वो घुटनों के बल सोफे पर झुक गयी, अपनी गांड ऊंची करके.

जाज (पागलपन भरी आवाज़ में): “पीछे से डालो… पूरी ताक़त से… मैं तैयार हूँ.”

माणिक ने जाज की कमर पकड़ी और एक hi झटके में पीछे से घुस गया. जाज की चीख इतनी तेज़ थी की शीशे हिल गए.

जाज: “आआह्ह्ह! हाँ! पहाड़ दो! और अंदर! पूरा अंदर!”

माणिक अब पूरी तरह पागल हो चूका था. उसकी हर धक्का इतना ज़ोर का था की जाज का शरीर आगे सरक रहा था. उसकी गांड पर लाल निशाँ पद गए थे.

दूसरी बार चरम बहुत जल्दी आया. जाज ने अपनी उंगलियां अपनी छूट पर रगड़नी शुरू कर दीं और चीखी—

जाज: “आ रहा है! मैं झड़ने वाली हूँ! साथ में झाड़ो!”

माणिक ने आखिरी teen-chaar ज़ोर के धक्के मारे और दोनों एक साथ फिर झाड़ गए. इस बार माणिक ने सब कुछ जाज के अंदर hi छोड़ दिया. गर्म वीर्य उसकी छूट से बाहर बहने लगा.

🫠 थकान, पसीना और नया नशा

जाज सोफे पर औंधे मुंह गिर गयी. उसका शरीर काँप रहा था. माणिक भी उसके ऊपर ढेर हो गया. दोनों की सांसें पहात रही थीं.

ध्रुव ने फ़ोन बंद किया और हँसते हुए बोलै—

ध्रुव: “अब तो माणिक भाई पूरी तरह आज़ाद हो गया. अब बताओ, गिल्ट बचा है कुछ?”

माणिक ने कमज़ोर मुस्कान दी. उसकी आँखों में अब कोई डर नहीं था. सिर्फ एक गहरा, नया नशा था.

माणिक (धीमी आवाज़ में): “नहीं… अब तो बस और चाहिए.”

जाज ने करवट लेकर माणिक के होंठ चूम लिए.

जाज: “तो फिर रुक क्यों रहे हो? रात अभी बहुत लम्बी है… और मैं अभी ख़तम नहीं हुई हूँ.”

कॉफ़ी शॉप की लाइट्स अब धीमी हो चुकी थीं. बाहर बारिश शुरू हो गयी थी.

और अंदर, तीन लोग एक नयी, अनैतिक, बेलगाम दुनिया में पूरी तरह डूब चुके थे.


Part -14

🔥 रात का असली खेल अब शुरू

बारिश तेज़ हो गयी थी, कॉफ़ी शॉप की badi-badi कांच की दीवारों पर पानी की लकीरें बन रही थीं. अंदर लाइट्स और भी डिम कर दी गयी थीं. सिर्फ एक नीली लेद जल रही थी जो तीनों नंगे बदनों पर अजीब सा नीला ग्लो दाल रही थी.

जाज अभी भी सोफे पर औंधे मुंह पड़ी थी, उसकी गांड पर माणिक के हाथों के laal-laal निशाँ साफ़ दिख रहे थे. वो धीरे से मुड़ी और माणिक को देखकर जीभ निकालकर चाटने लगी.

जाज (हँसते हुए): “अबे ोये, अभी तो तेरा लुंड खड़ा hi है… थक गया क्या?”

माणिक ने सांस रोका और बोलै, “थकूंगा नहीं… बस तुझे देखकर फिर से जोश आ रहा है.”

ध्रुव ने अपनी shirt-pant उतार दी. उसका लुंड भी पूरा तना हुआ था. वो पास आया और जाज के बाल पकड़कर उसका मुंह अपनी तरफ खींच लिया.

ध्रुव: “अबकी बार तू दोनों को एक साथ लेगी, रंडी.”

जाज की आँखें चमक उठीं. उसने तुरंत घुटनों पर बैठकर ध्रुव का लुंड मुंह में ले लिया. एक हाथ से माणिक का सहला रही थी.

जाज (मुंह भरा हुआ): “म्मम्मा… दोनों भाइयों का स्वाद एक साथ… मज़ा आ गया.”

🌀 डबल पेनेट्रेशन – बिना किसी शर्म के

ध्रुव ने जाज को फिर से डोगग्य बनाया. इस बार उसने अपना लुंड जाज की गांड में दाल दिया. जाज की चीख निकल गयी.

जाज: “आआह्ह्ह भैया! धीरे… बहुत मोटा है तेरा!”

ध्रुव ने हंसकर एक और ज़ोर का धक्का मारा, “धीरे क्या? आज तेरी दोनों होल्स भर देंगे.”

माणिक सामने आया. जाज ने उसका लुंड मुंह में ले लिया. अब जाज बीच में थी – पीछे ध्रुव उसकी गांड मार रहा था, सामने माणिक उसका मुंह.

कुछ देर बाद पोजीशन बदली. जाज को सोफे पर लिटाया. माणिक नीचे से छूट में डालकर upar-neeche कर रहा था, ध्रुव ऊपर से उसकी गांड में.

जाज की हालत खराब हो चुकी थी. उसकी आँखें लाल, मुंह से लार टपक रही थी.

जाज (रट हुए भी मज़े लेते हुए): “बस करो… पहात जायेगी… आह्हः… नहीं… और ज़ोर से करो… मैं मर जाऊंगी… हाँ ऐसे hi!”

दोनों भाई एक साथ tez-tez धक्के मार रहे थे. जाज का पूरा शरीर हिल रहा था. उसकी चूचियां लाल हो गयी थीं.

तीसरी बार झड़ते वक़्त जाज ने इतनी ज़ोर से चीखा की बाहर गार्ड ने भी दरवाज़ा खटखटाया. ध्रुव ने चिल्लाकर बोलै, “सब ठीक है भाई, मूवी देख रहे हैं!”

💦 अंतहीन वीर्य, अंतहीन भूख

रात के 3 बज चुके थे. तीनों अभी भी नहीं रुके थे.

जाज की छूट और गांड से वीर्य बह रहा था. माणिक ने पांच बार, ध्रुव ने चार बार झाड़ चूका था. फिर भी लुंड खड़े थे.

जाज अब पूरी तरह टूट चुकी थी. वो बस बड़बड़ा रही थी –

जाज: “बस… और नहीं… पर हाँ… मत रुको… मुझे रंडी बनाकर रखो… दोनों भाइयों की रखेल…”

माणिक ने आखिरी बार जाज को गॉड में उठाया, दीवार से सटाकर khada-khada छोड़ा. जाज की टांगें हवा में लटक रही थीं.

ध्रुव पीछे से आया और फिर से गांड में घुसेड़ दिया.

अब जाज सैंडविच बन चुकी थी – आगे माणिक, पीछे ध्रुव.

जाज की आखिरी लम्बी चीख के साथ तीनों एक साथ झड़े.

सुबह के 5 बज रहे थे.

तीनों फर्श पर नंगे पड़े थे. जाज बीच में, दोनों तरफ भाई.

जाज (कमज़ोर मुस्कान के साथ): “अब तो माणिक भाई… गिल्ट विल्ट सब ख़तम ना?”

माणिक ने जाज के होंठ चूमे और बोलै,

“गिल्ट क्या होता है, मुझे अब याद भी नहीं.

बस एक hi चीज़ याद है… तू मेरी है… और मैं तेरा… जब तक जीना है, तब तक छोड़ना है.”

ध्रुव हंसा, “अब तो घर भी चलेंगे. Mummy-Papa सो रहे होंगे… हम तीनों एक hi बीएड पर सोयेंगे आज.”

जाज ने आँख मारी, “और सुबह फिर शुरू…”

बारिश रुक चुकी थी.


पर तीनों के अंदर का तूफ़ान अभी बहुत दिन नहीं रुकने वाला था.
 
सॉरी दोस्तों कुछ दिनों के लिए पत्नी जी के साथ घूमने गया था. औरों के साथ तो मेरा खूब चलता रहता है पर उसके साथ टाइम नहीं लग पता. अब अच्छा टाइम स्पेंड किया आप लोग बेसब्री से अगले PART का इंतज़ार कर रहे होंगे खासकर मेरी प्यारी छोटी बहिन आसिफा जो मुझसे नाराज़ है. आज अगला भाग दाल रहा हूँ. कमेंट किया कीजिये दोस्तों. आने वाले टाइम में आपको इतना मज़ा दूंगा के छूट और लुंड पर से आपका हाथ HI परे नहीं होगा. धन्यवाद
 
Part -14

😴 वर्जित सपना और बुआ की पैनी निगाह

माणिक, ध्रुव और जाज के साथ अपने पहले अनैतिक अनुभव के बाद जब घर लौटा, तो उसके शरीर पर ajeeb-si थकान और मन पर तीव्र शांति छायी हुई थी. यह पहली बार था जब उसकी सालों की शारीरिक तड़प पूरी हुई थी, और इस विसर्जन के कारण उससे बहुत तेज़ी से नींद आने लगी थी.

वह सीधा अपने कमरे में गया और बिना कपडे बदले, बस बिस्तर पर लेट गया.

💭 वर्जित सपना

गहरी नींद में, माणिक का अवचेतन मन (सबकसकीयस मंद) आज के अनुभव और पिछले कुछ दिनों की वर्जित इच्छाओं को मिलाकर एक अजीब और भयंकर सपना बुनने लगा.

सपने में, वह खुद को अपने hi बिस्तर पर पूरी तरह नग्न देखता है. उसके aas-paas उसकी तीनो behenein—Anu, दिव्या, और Pari—bhi नग्न अवस्था में थी. कमरे में एक ajeeb-sa तनाव और गर्मी थी. माणिक सपने में भी उत्तेजित था और वह तीनो के साथ यौन सम्बन्ध (सेक्स) बनाने की तयारी में था. उसके मन में कोई गिल्ट नहीं था, केवल ज़ोरदार, अनियंत्रित इच्छा थी.

सपने का माहौल अपने चरम पर पहुँच रहा था, और माणिक के होश उड़ने hi वाले थे की तभी...

💥 बुआ की दस्तक और गाली

माणिक के शरीर पर एक स्पर्श हुआ और उससे लगा की कोई उससे ज़ोर से हिला रहा है.

नीरू बुआ कमरे में दाखिल हुईं.

नीरू बुआ (तेज़ आवाज़ में, प्यार से): "उठ जा, मेरे लाड़ली! दिन के तीन बज रहे हैं और तू घोड़े बेचकर सो रहा है! कहीं चला गया था क्या जो इतना थक गया है?"

माणिक सपने की तीव्रता से तुरंत बहार नहीं निकल पाया. उत्तेजना और झटके में उठने के कारण, उसके मुँह से अनजाने में hi एक ज़ोरदार गाली निकल गयी.

माणिक (नींद और उत्तेजना के मिश्रण में): "ओह! बहनचोद!"

नीरू बुआ, जो माणिक को जगा रही थी, उसकी यह गाली सुन कर ज़रा भी नाराज़ नहीं हुईं, बल्कि उनके होठों पर एक बड़ी ऐडा भरी मुस्कान आ गयी. उन्हें तुरंत अंदाजा हो गया की माणिक abhi-abhi किस तरह के सपने से उठा है.

नीरू बुआ (मुस्कुराते हुए, आँखें मटकते हुए): "अरे वाह! गाली भी इतनी जोश वाली. लगता है मेरा माणिक सपने में किसी के साथ नंगा पड़ा था! कौन थी वह खुशकिस्मत?"

माणिक, बुआ की बातें सुन कर एकदम से उठ बैठा. उसका सारा नशा उतर गया. उससे दर लगा की बुआ को कहीं सच न पता चल जाए.

👃 'कुछ करके आया है क्या?'

माणिक (हकलाते हुए): "बुआ! क्या... क्या कह रही हैं आप? मैं तो बस... नींद में था."

नीरू बुआ ने कमरे का निरिक्षण किया, और उनके चेहरे पर एक रहस्यमय मुस्कान थी.

नीरू बुआ: "क्या बात है, माणिक? आज दिन में इतना ज़्यादा कैसे सो गया? मुझे याद है, तुम्हारी तो का की पढाई चल रही थी. क्या आज काम पर जाने के बजाय कहीं कुछ करके आया है क्या? जो इस तरह थकावट में डूबा हुआ है?"

माणिक को लगा की बुआ को हर बात बिना बताये कैसे पता चल जाती है. यह उनकी बोल्ड और पैनी निगाहों का कमाल था.

माणिक (सफाई देते हुए): "नहीं बुआ, ऐसा कुछ नहीं है. बस कल रात देर तक पढ़ा था."

🍆 'ठंडा हो आ'

जैसे hi माणिक बिस्तर से उठा, उसने महसूस किया की उसका पजामा ढीला है, और वह सपने की उत्तेजना के कारण पूरी तरह से तनाव में (तने हुए लुंड) था. नीरू बुआ की आँखें हमेशा की तरह तेज़ थी. उनकी नज़र तुरंत माणिक के तने हुए लुंड पर पड़ी, जो पाजामे के कपडे में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था.

नीरू बुआ (हँसते हुए, लेकिन एक माँ जैसी सलाह के लहजे में): "हाँ, मुझे दिख रहा है की तुम देर रात तक क्या पढ़ रहे थे. अब उठो, और जाओ बाथरूम में जाकर ठंडा हो आ."

उन्होंने अपनी बात स्पष्ट की:

नीरू बुआ: "जाओ, जाकर अपने हाथों से hi शांति दे दो. बहुत देर हो गयी है. यह सब दबाकर रखना सेहत के लिए अच्छा नहीं है."

माणिक को साफ़ समझ आ गया की बुआ ने उससे हस्तमैथुन (मस्टरबैशन) करने के लिए कहा है. वह शर्म से लाल हो गया, लेकिन इस बात से हैरान भी था की बुआ कितनी सहजता से यह साड़ी बातें कह सकती हैं.

माणिक ने तुरंत हामी भरी और तेज़ी से बाथरूम की ओर भगा. वह जानता था की नीरू बुआ के सामने अब कोई राज़ छुपाना नामुमकिन था, और आज का सपना उसके आने वाले खतरनाक भविष्य का साफ़ संकेत था.

💔 विश्वासघात और अनैतिकता: इवेंट में अनु का दोहरा सदमा

अनु मित्तल, जो अपने सख्त सिद्धांतों और अनुशासन के लिए जानी जाती थी, आज एक और बड़ी इवेंट प्लानिंग में लगी हुई थी. यह एक भव्य सगाई समारोह था, और इवेंट की सफलता उसके ब्रांड के लिए बहुत ज़रूरी थी.

🚫 मल्लिका का इंकार

इस बड़े इवेंट में भी उससे अपनी दोस्त और बिज़नेस पार्टनर मल्लिका का साथ नहीं मिला. पिछली बार के कॉमन रूम वाले ड्रामे के बाद, अनु को उम्मीद थी की मल्लिका थोड़ी ज़िम्मेदार होगी, लेकिन मल्लिका ने उससे सीधे मन कर दिया.

मल्लिका (फ़ोन पर, बेपरवाही से): "यार अनु, प्लीज, मैं आज नहीं आ सकती. तू तो जानती है, रोमित कितना ड्रामा करता है. अगर आज मैं उससे नहीं मिली, तो वह मुझसे ब्रेकअप कर लेगा."

अनु (गुस्से में): "यह क्या बचकानापन है, मल्लिका? यह हमारा सबसे बड़ा इवेंट है. और क्या यह तेरा कोई नया बॉयफ्रेंड नहीं है? इतनी जल्दी ब्रेकअप क्यों?"

मल्लिका: "हाँ, नया है, पर वह थोड़ा इम्पॉटेंट है. और तुझे पता है, मुझे उससे मिले हुए दो हफ्ते हो गए हैं! वह किसी भी हालत में और रुकने वाला नहीं है."

अनु को मल्लिका की इस खुली स्वीकृति पर खीज आ गयी. मल्लिका अपनी शारीरिक ज़रूरतों को इतनी सहजता से क्यों स्वीकार करती है, यह अनु की संकीर्ण सोच से परे था. लेकिन इवेंट की गंभीरता को देखकर, अनु मजबूरी में हाँ कर देती है और इवेंट संभालने के लिए खुद hi चल पड़ती है.

👂 रिश्तों में अनैतिकता का शोर

इवेंट वेन्यू पर सारा काम संभालते हुए, अनु एक हॉलवे से गुज़र रही थी जहाँ बहुत काम लोग थे. तभी, उससे पास के लाउन्ज एरिया से कुछ दबी हुई बातें सुनाई दीं, जो एक मां और उनकी भांजी के बीच हो रही थी.

मां (धीमी, फुसलाने वाली आवाज़ में): "सुन, दीप्ति! तुझे पता है न की मां तुझसे कितना प्यार करता है? आज की रात... तुझे मेरे साथ अकेले में मिलना पड़ेगा."

भांजी (दबी हुई, शर्माती हुई आवाज़): "मां... यहाँ...?"

मां: "अरे, दर मत! मैं तुझे जो चाहेगी, वह दूंगा. तू बस हाँ कर दे. मैं तुझे स्कूटी दिलवाऊंगा. और तू जब रात को मुझे खुश कर देगी, तो कौन से कलर की चाहिए, बस बता दे."

अनु के कान खड़े हो गए. उसने गुस्से से अपनी मुट्ठियां भींच ली. Mama-bhanji का रिश्ता? और वहां पर स्कूटी के बदले यौन सम्बन्ध की बात हो रही थी?

अनु को लगा की उसने गलत सुना है. यह किस तरह का रिश्ता है? उससे अपने bhai-behen के झगड़ों और आनंद जी की तड़प याद आयी, और अब यह mama-bhanji की बात. अनु बहुत हैरान हो गयी और सोचने लगी की आज के रिश्तों को क्या हो गया है? कहाँ गए वह सम्मान और नैतिक मूल्य जिन के डैम पर उसका परिवार टिका हुआ था?

🤫 सिसकारियों की गूँज और भयानक सच्चाई

लघबघ दो घंटे बाद, जब समारोह अपने चरम पर था, अनु कुछ ज़रूरी कागज़ात लेने के लिए वेन्यू के पीछे के एक अप्रयुक्त कमरे (उनुसेड रूम) की ओर गयी.

जैसे hi वह उस कमरे के पास पहुंची, उससे दरवाज़े के नीचे से एक दबी हुई सिसकारियों की आवाज़ सुनाई दी. आवाज़ बहुत तेज़ नहीं थी, लेकिन इतनी स्पष्ट थी की अनु को तुरंत पता चल गया की अंदर क्या हो रहा है.

अनु ने रुक कर, अपने कानों को दरवाज़े से लगा कर सुना.

अंदर से किसी आदमी की आवाज़ आयी, जो हांफ रहा था और आनंद में डूबा हुआ था.

आदमी (उत्तेजित स्वर में): "वाह! दीप्ति! तू... तू तो सचमुच कुंवारी निकली! आह... तेरी आवाज़ बहुत प्यारी है... बोल... बोल कौन से कलर की स्कूटी चाहिए तुझे? लाल या काली? बोल! वाह!"

यह सुन कर अनु काँप उठी. यह आवाज़ उसी मां की थी, जिसने कुछ देर पहले स्कूटी के बदले भांजी से रात को मिलने की बात की थी. अंदर मां और भांजी, दीप्ति, के बीच अनैतिक सम्बन्ध चल रहा था, और स्कूटी उनके अनैतिक सौदे का प्रतीक थी.

अनु को ulti-si महसूस हुई. मल्लिका की लापरवाही, आनंद जी की तड़प, माणिक की अनैतिकता, और अब यह mama-bhanji का कुकर्म. अनु को लगा की उसकी दुनिया, जो हमेशा नियमों और नैतिकता पर तिकी थी, अब पूरी तरह से बिखर रही है.



वह चुपचाप वहां से हैट गयी. अनु अपने परिवार और बहार की दुनिया के बीच के नैतिक पतन को देख कर टूट चुकी थी. उससे अपने सख्त स्वाभाव पर अब गर्व नहीं, बल्कि दर महसूस हो रहा था की कहीं यह सब उसके अपने घर में भी न आ जाए.
 
**Part -15**

😠 सार्वजनिक शर्मिंदगी और मां का धमकी

अनहोनी को देखे जाने के सदमे से अनु अभी भी उबार नहीं पायी थी. वह जल्दी से उस क्षेत्र से दूर हटना चाहती थी, जहाँ से उससे मां और भांजी की सिसकारियां सुनाई दी थी. उसने कुछ फाइल्स उठायी और दूसरी दिशा में जाने लगी.

तभी, कमरे का दरवाज़ा खुला और मां और भांजी बहार निकले.

मां, जो सगाई के घर में एक सम्मानित सदस्य (लड़के का तय) थे, अपनी संतुष्टि छुपाने की कोशिश कर रहे थे.

लेकिन भांजी, दीप्ति की हालत स्पष्ट रूप से बता रही थी की अंदर क्या हुआ था. शर्म और दर्द के कारण उसकी गर्दन झुकी हुई थी. वह सम्भोग के कारण असहज थी और थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थी, क्यूंकि आज उसका पहला यौन अनुभव (पहला सेक्स) हुआ था, और यह शारीरिक रूप से स्वाभाविक था. उसके चेहरे पर शर्म और अंदरूनी दर्द का मिश्रण था.

अनु की नज़रें अनायास hi उन पर पद गयी. अनु, जो पहले से hi mama-bhanji के इस अनैतिक सौदे से घृणा कर रही थी, इस दृश्य को देखकर और भी ज़्यादा bura-sa मुँह बनाकर तुरंत अपनी राह बदलकर दूसरी और चली गयी.

उससे लगा की उसका इवेंट प्लानिंग का करियर उससे न जाने kis-kis तरह की अनैतिकता के दर्शन कराएगा. उसके अंदर एक सख्त नफरत भर गयी thi—sirf उनके अनैतिक कृत्या के लिए नहीं, बल्कि उस लड़की के शोषण के लिए जिसे स्कूटी के बदले अपनी पवित्रता बेचनी पड़ी.

मां ने देखा की अनु, इवेंट प्लानर, ने उन्हें और भांजी को बहार निकलते हुए देख लिया है. मां को अपनी सामाजिक स्थिति और सम्मान खोने का दर सताने लगा. भांजी को वहीँ छोड़कर, वह तेज़ी से अनु के पास आया.

मां (आवाज़ धीमी, लेकिन धमकी भरी): "ऐ, सुनो! तुम... तुम इवेंट वाली लड़की हो न? इधर आओ."

अनु (रूककर, कठोर और स्थिर): "जी, मैं hi हूँ. क्या काम है?"

मां: "देखो, तुम बहुत समझदार लड़की लगती हो. तुम अभी जो कुछ भी देखकर आयी हो, और जो तुमने suna—tumhe यह बात किसी को नहीं बतानी है."

मां की आँखों में घबराहट और अधिकार का मिश्रण था. मां: "अगर तुमने ज़रा भी मुँह खोला, तो मैं तुम्हारी पेमेंट में टांग ऐडा दूंगा. मैं यहाँ लड़के का तय हूँ, और मेरा यहाँ बहुत प्रभाव है. तुम्हारी कंपनी को आगे यहाँ कोई काम नहीं मिलेगा."

अनु ने उस आदमी की आँखों में घूरकर देखा. उसकी सख्त, अनुशासित प्रकृति तुरंत जाग उठी. उससे इस धमकी पर और इस आदमी की नीचता पर बेहद गुस्सा आया.

अनु (ठन्डे, कठोर स्वर में): "मुझे क्या लेना है की आप क्या करते हैं और किसके साथ करते हैं. यह आपकी निजी गन्दगी है."

उसने अपनी छाती चौड़ी की, अपनी फाइल्स मज़बूती से पकड़ी. अनु: "मुझे आपकी पेमेंट की कोई परवाह नहीं है, और न hi मुझे यह गन्दा किस्सा किसी से कहना है. मैं प्रोफेशनल हूँ, और मैं अपनी सीमा जानती हूँ. लेकिन अगर आपने मेरी कंपनी के काम में टांग अदने की कोशिश की, तो आप जानते हैं, मेरा बिज़नेस पार्टनर मल्लिका जैसी बोल्ड लड़की hai—main यह सब बातें sare-aam कर दूंगी. अब आप जाइये."

अनु की निर्भीकता और सख्त लहजा मां के लिए अप्रत्याशित था. वह समझ गया की यह लड़की पैसे की लालची नहीं है, बल्कि सिद्धांतों की पक्की है. मां, बिना और कोई बात कहे, शर्मिंदा और भयभीत होकर वहां से हैट गया.

अनु अपने रस्ते पर चल दी, लेकिन उसके मन में घृणा और दुःख का भाव भर गया था. बहार की दुनिया में रिश्तों का यह patan—chahe वह मल्लिका का बॉयफ्रेंड हो या यह mama-bhanji का sauda—usse डरा रहा था. उससे लगा की वह जितनी कोशिश करती है, दुनिया उतनी hi अनैतिक होती जाती है.

********

आनंद मित्तल ने सविता ग्रोवर के जटिल प्रस्ताव पर सहमति दे दी thi—Anita को बच्चा देना और बदले में अपनी तड़प मिटाना, वह भी एक क़ानूनी समझौता के साथ. आज वह दिन था जब उन्हें पहले अनीता से मिलना था, और फिर वकील के पास जाकर गुप्त समझौता (एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर करने थे.

आनंद जी ने अपनी कार में सविता ग्रोवर के साथ सफर शुरू किया. रास्ते में, सविता ने अपनी पर्स खोली और आनंद जी की और एक च्युइंग गम का पत्ता बढ़ाया.

आनंद जी (हैरानी से): "च्युइंग गम? क्यों?"

सविता ने रहस्यमय तरीके से मुस्कुराया. सविता: "बस, देखते जाइये. आज के दिन इसकी ज़रुरत पड़ेगी. ताज़गी के लिए."

आनंद जी ने सविता की बात पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया और च्युइंग गम लेकर चबाने लगे, लेकिन उनके मन में यह सवाल था की सविता ने ऐसा क्यों किया. उन्हें लगा, शायद किसी तनाव को काम करने के लिए होगा.

वे थोड़ी देर में अनीता के शानदार घर पहुंचे. दरवाज़ा खुलते hi, आनंद मित्तल की आँखें खुली रह गयी.

अनीता, जिसकी तस्वीर उन्होंने देखि थी, वह वास्तव में उससे भी ज़्यादा खूबसूरत थी. 32 साल की उम्र में भी उसकी त्वचा में गज़ब का निखार था, और उसके आत्मविश्वास भरे अंदाज़ ने आनंद जी को तुरंत प्रभावित किया. वह आज गहरे नीले रंग की साडी में थी, जो उसकी सुंदरता को और बढ़ा रही थी.

अनीता (अत्यधिक खुश होकर): "आइये, आनंद जी! सविता ने आपके बारे में सब बताया. मैं कितनी शुक्रगुज़ार हूँ, मैं बता नहीं सकती."

अनीता ने बिना किसी औपचारिकता के, सीधे आगे बढ़कर आनंद जी को गले लगा लिया (जफ्फी दाल ली). वह उन्हें पूरी गर्मजोशी से गले लगा रही थी, जैसे कोई बहुत पुराण दोस्त मिल रहा हो.

आनंद जी को अपनी वर्षों की तन्हाई के बाद किसी महिला के शरीर का यह सीधा, हार्दिक स्पर्श महसूस हुआ, और उन्हें बहुत मज़ा आ रहा था. अनीता की 'काम की देवी' वाली छवि, उसके परफ्यूम की महक, और उसके भरे हुए शरीर की नज़दीकी ने आनंद जी की उत्तेजना को एकदम से बढ़ा दिया.

अनीता, अभी भी उन्हें गले लगाए हुए थी, उसने थोड़ी दूरी बनायीं और तुरंत अपने होंठ आनंद जी के होंठों पर रख दिए. अनीता ने आनंद जी के होंठों को चूसना शुरू कर दिया (किश करने लगी).

यह एक लम्बा, गहरा और भावुक चुम्बन था. आनंद जी को लगा की वह सपना देख रहे हैं. सविता के साथ सीमित स्पर्श के बाद, अनीता का यह खुलापन और चुम्बन उनके लिए स्वर्ग जैसा था.

आनंद जी, चुम्बन के बीच में अपनी आँखें खोली और सविता की और देखा.

सविता किनारे कड़ी थी, लेकिन उसके चेहरे पर कोई ईर्ष्या या नाराज़गी नहीं थी. बल्कि, वह उन्हें मुस्कुराते हुए आँख मार रही थी.

उसी पल, आनंद मित्तल को सविता का च्युइंग गम देना समझ आ गया. च्युइंग गम केवल ताज़गी के लिए नहीं था; यह चुम्बन के लिए एक संकेत था, एक तयारी थी!

मानसिक और शारीरिक रूप से आज़ाद महसूस करते हुए, आनंद जी ने उस चुम्बन का पूरा लुत्फ़ उठाया. उन्हें अनीता के होंठों की मिठास और जोश महसूस हुआ. उनकी सैलून की तड़प अब वास्तविक, सहमति वाले स्पर्श में बदल रही थी.

चुम्बन ख़तम होने के बाद, अनीता ने प्यार से आनंद जी का हाथ पकड़ा.

अनीता: "चलिए! मेरे पति, विनोद, कोर्ट में इंतज़ार कर रहे होंगे. हमे पहले ज़रूरी समझौता ख़तम करना चाहिए."

आनंद जी, उत्तेजित और संतुष्ट महसूस करते हुए, हाँ में सर हिलाया. तीनो वहां से कोर्ट की और चल दिए समझौता पर हस्ताक्षर करने के लिए, जिसके बाद आनंद मित्तल को अनीता के साथ अपनी तड़प मिटने का मौका मिलने वाला था.

कोर्ट में क़ानूनी औपचारिकताएं तेज़ी से पूरी हुई. अनीता के पति, विनोद, जो एक अमीर बिजनेसमैन थे, खुद आगे बढ़कर सारे कागज़ात संभाल रहे थे. उनका शांत, लेकिन दृढ व्यव्हार दर्शाता था की वह बच्चे की चाहत में किसी भी हद तक जाने को तैयार थे.

वकील के चैम्बर में, समझौता (एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर किये गए. यह वही दस्तावेज़ था जिसमें साफ़ तौर पर लिखा था की आनंद मित्तल की किसी भी संपत्ति पर अनीता या उनके बच्चे का कोई हक़ नहीं होगा, और यह सम्बन्ध केवल जैविक दान (बायोलॉजिकल डोनेशन) के उद्देश्य से था.

आनंद जी ने कुछ हफ्ते पहले hi सविता के कहने पर चुपचाप अपना मेडिकल टेस्ट करवा लिया था, जिससे यह साबित हुआ की वह बच्चा पैदा करने में पूरी तरह से सक्षम (फर्टाइल) थे. इस बात की संतुष्टि आनंद जी और विनोद दोनों को थी.



सभी हस्ताक्षर और ज़रूरी स्टम्पिंग के बाद, क़ानूनी रूप से यह तय हो गया था की अनीता और आनंद मित्तल के बीच का सम्बन्ध एक गोपनीय समझौता के तहत, सिर्फ संतानोत्पत्ति के उद्देश्य से था.
 
Part - 16

समझौता पूरा करने के बाद, आनंद जी ने सविता को ड्राप किया और सीधे घर गए. उन्हें अपने बच्चों – अनु, माणिक, दिव्या और पारी – को अपनी अचानक ghair-haaziri के बारे में बताना था.

आनंद जी (गंभीरता से): “बच्चों, मुझे अचानक एक ज़रूरी बिज़नेस टूर पर जाना पद रहा है. यह एक हफ्ते का कांफ्रेंस है, बहुत ज़रूरी. अनु, तुम घर संभालना और माणिक, तुम भी दिव्या का ध्यान रखना.”

अनु, जो हमेशा सख्त और ज़िम्मेदार थी, ने तुरंत व्यवस्था संभाल ली.

अनु: “ठीक है, पापा. आप चिंता मत कीजिये. हम सब संभाल लेंगे.”

बच्चों को इस टूर पर कोई शक नहीं हुआ, क्यूंकि आनंद जी की छवि हमेशा एक व्यस्त मद की थी.

***

कोर्ट से निकलते hi, विनोद ने अपने ड्राइवर से एक बड़ा सूटकेस लाने को कहा.

विनोद (शांत स्वर में, आनंद से हाथ मिलते हुए): “आनंद जी, मुझे उम्मीद है, आप मेरी पत्नी को निराश नहीं करेंगे. यह सब हमारे लिए कितना मायने रखता है, आप नहीं जानते. मैंने अनीता का सूटकेस पहले hi तैयार करवा दिया था. मेरी तरफ से सफर की शुभकामनायें.”

आनंद जी ने मुस्कुराते हुए सूटकेस लिया. उन्होंने सविता को पहले hi बता दिया था की वह जल्दबाज़ी नहीं करना चाहते, बल्कि अनीता के साथ एक हफ्ते के लिए किसी शांत हिल स्टेशन पर जाना चाहते हैं, ताकि वे दोनों tanav-mukt होकर अपने ‘लक्ष्य’ पर ध्यान केंद्रित कर सकें.

विनोद और सविता के सामने से, सविता और विनोद ने अनीता को आनंद के साथ भेज दिया.

अनीता (कार में बैठते हुए, ख़ुशी से): “आनंद जी, मैं बहुत खुश हूँ. मुझे विश्वास है, आप मुझे माँ बनने का यह सपना ज़रूर पूरा करने में मदद करेंगे.” अनीता खुश थी की वह अब माँ बन जाएगी.

आनंद जी ने कार स्टार्ट की. उनके होठों पर एक ऐसी मुस्कान थी जो उनकी वर्षों की तड़प को दर्शा रही थी.

आनंद (मन hi मन): और मैं भी खुश हूँ, अनीता. मुझे आखिरकार ‘छूट’ मिल जाएगी. वह भी पूरी तरह से कानूनी और सहमति के साथ.

आनंद जी और अनीता, apne-apne लक्ष्यों के साथ, चुपचाप हिल स्टेशन की तरफ निकल पड़े. एक अपनी सूनी गॉड भरने के लिए, और दूसरा अपनी सालों की शारीरिक तड़प मिटने के लिए. यह गुप्त यात्रा उनके जीवन में एक नया अध्याय शुरू करने वाली थी.

ध्रुव और जाज के साथ हुए अनैतिक अनुभव ने माणिक के मन में एक नया दरवाज़ा खोल दिया था. अब वह सिर्फ यौन संतुष्टि के लिए hi नहीं, बल्कि उस अनैतिकता और वर्जित स्पर्श के रोमांच के लिए भी भूखा हो चूका था. जाज की छूट मिलने के बाद, माणिक की इच्छाएं बहुत ज़्यादा बढ़ गयी थी.

****************************

माणिक के घर लौटने के बाद, नीरू बुआ की मौजूदगी उसके लिए किसी और बड़े कैटेलिस्ट से काम नहीं थी. बुआ को पता चल चूका था की माणिक अब सिर्फ पढाई तक सीमित नहीं है, और वह jaan-bujhkar उसे time-time पर उत्तेजक बातें कहकर तड़पाती रहती थी.

एक शाम, माणिक ड्राइंग रूम में बैठा अखबार पढ़ रहा था, जब नीरू बुआ चाय लेकर आयी.

नीरू बुआ (आँख मारते हुए): “अरे माणिक! आज तो तुम बहुत शांत लग रहे हो. मुझे लगा, आजकल कुछ ‘रोमांचक’ चीज़ें हो रही हैं तुम्हारी ज़िन्दगी में? तुम्हारे चेहरे पर एक नयी चमक है, जो सिर्फ बैलेंस शीट मिलाने से नहीं आती.”

माणिक (शरमाते हुए): “बुआ! ऐसी कोई बात नहीं है.”

नीरू बुआ: “अरे, मुझे सब पता है. और सुनो, यह जो nayi-nayi गर्मी शरीर में आ रही है न… इसे ज़्यादा मत दबाना. दबाने से तकलीफ होती है. बहार का रास्ता हमेशा खुला रखो.” उन्होंने चाय का कप माणिक की तरफ बढ़ाया, और jaan-bujhkar अपनी उंगलियां उसकी उँगलियों से छू दी.

माणिक को बुआ का यह दोहरा व्यवहार – कभी सलाह, कभी उत्तेजना – समझ नहीं आ रहा था, पर वह इस तड़प को महसूस कर रहा था. बुआ की यह ‘मस्तियाँ’ उसके भीतर की आग को हवा दे रही थी.

*******************************************

रात में, माणिक हमेशा की तरह डाइनिंग टेबल पर पारी को पढ़ा रहा था. पारी, जो अभी भी +2 में थी, पढाई में एकाग्र थी, लेकिन माणिक का ध्यान अब पूरी तरह से भटक चूका था.

माणिक के दिल में पारी के लिए एक नया और वर्जित आकर्षण पैदा हो चूका था. जाज के साथ अनुभव के बाद, उसकी निगाहें पारी के भरे हुए शरीर पर baar-baar जा रही थी.

आज, माणिक ने बहाने से पारी को छूना शुरू कर दिया.

1. माणिक (सवाल समझाते हुए): “देखो, तुम्हारा यह य फंक्शन यहाँ गलत है. इसे इस तरह से लिखो.” यह कहकर, माणिक ने jaan-bujhkar पारी का हाथ पकड़ा, और ज़्यादा देर तक पकडे रखा, जबकि वह सिर्फ एक पेंसिल उठा सकती थी.

2. जब पारी कोई मुश्किल सवाल हल करने की कोशिश कर रही थी, माणिक उसके और करीब झुक जाता था, ताकि उसके शरीर की गर्मी पारी को महसूस हो.

3. एक पल, माणिक ने पारी की पीठ पर अपना हाथ रखा, यह कहते हुए की वह उसे ‘सहारा’ दे रहा है ताकि वह एकाग्र हो सके.

पारी, स्वभाव से बहुत सीढ़ी और भोली थी. उसे थोड़ा अजीब लग रहा था की भाई आज इतना ज़्यादा छू क्यों रहा है, लेकिन वह अपने प्यारे भाई से बहुत प्यार करती थी और उस पर आँख बंद करके भरोसा करती थी. उसने इसे सिर्फ ‘भाई का सहारा’ मानकर नज़रअंदाज़ कर दिया.

पारी (मासूमियत से): “भैया, तुम इतना ज़्यादा क्यों हिल रहे हो आज? सवाल पर ध्यान दो न.”

माणिक (तुरंत हाथ हटाते हुए, घबराकर): “हाँ, हाँ! बस, ज़रा थकान हो रही थी. तुम सवाल हल करो.”

माणिक शर्मिंदा था, पर उसके अंदर एक वर्जित आनंद की लहार दौड़ रही थी. जाज के साथ उसका पहला अनुभव सिर्फ शारीरिक था, लेकिन पारी के साथ इस तरह छूना एक भावनात्मक और अनैतिक रोमांच था.

माणिक का आकर्षण अब पूरी तरह से पारी पर केंद्रित हो चूका था. नीरू बुआ की बातों ने उसे साहस दिया था, और जाज ने उसे अनैतिकता का रास्ता दिखा दिया था, लेकिन अब उसकी अगली शिकार उसकी अपनी hi बहिन बनने की कगार पर थी. वह जानता था की वह एक खतरनाक खेल खेल रहा है, लेकिन उसकी बढ़ी हुई इच्छाएं अब उसे रोक नहीं प् रही थी.

माणिक का मन आज पूरे दिन अशांत रहा था. पारी के साथ हुआ वह sparsh—vah हल्का सा छूना, जब उनकी उँगलियाँ अनायास ek-doosre से टकराई thin—usne उसके अंदर एक आग सी लगा दी थी. पारी की मुलायम त्वचा की याद, उसकी आँखों में छिपी वह शरारत, उसके होठों की मुस्कान... सब कुछ उसके दिमाग में घूम रहा था. घर पहुँचते hi वह सीधा अपने कमरे में गया, दरवाज़ा बंद किया, और बिस्तर पर बैठते hi उसके हाथ अपने कपड़ों की और बढ़ गए.

उसने जल्दी से अपनी शर्ट उतरी, फिर पंत. अंडरवियर भी फाटक से नीचे खींचकर फ़ेंक दिया. अब वह पूरी तरह नंगा था. उसकी निगाह अपने तने हुए लुंड पर padi—vah पूरी तरह खड़ा था, नसें उभरी हुई, सिरा लाल और चमकदार. जैसे hi उसने उसे देखा, उसके मुँह से अनायास निकला, "ओह पारी... काश तेरी छूट मिल जाये."

ये शब्द सुनते hi उसके लुंड ने ज़ोर का झटका मारा, जैसे उसकी इच्छा ने उसे और सख्त कर दिया हो. माणिक चौंक गया. उसका चेहरा लज्जा से लाल हो गया. वह खुद से hi बोलै, "क्या कर रहे हो यार? अपनी बहिन को याद करके लुंड से झटके मरवा रहे हो? यह गलत है... बहुत गलत."

लेकिन उसकी इच्छा उसके बस में नहीं थी. पारी का चेहरा उसके सामने घूमने laga—uski लम्बी गर्दन, उसके उभर वाले सीने, उसकी कमर की वो पतली लचक. वह सोचने लगा की अगर पारी यहाँ होती, तो वह उसे कैसे छूटा. उसके हाथ अनायास अपने लुंड पर चले गए. उसने उसे हलके से पकड़ा, oopar-neeche करना शुरू किया.

Dheere-dheere उसकी गति बढ़ने लगी. वह आँखें बंद करके कल्पना करने laga—Pari उसके सामने नंगी कड़ी है, उसकी छूट गीली और तैयार. वह उसे बिस्तर पर लिटाता, उसके पेअर फैलता, और अपना लुंड उसकी छूट के द्वार पर रगड़ता. "पारी... तेरी छूट कितनी टाइट होगी," वह बड़बड़ाया. उसका हाथ अब तेज़ी से चल रहा था. लुंड से पूर्व वीर्य की बूँदें निकल रही थीं, जो उसके हाथ को चिकना बना रही थीं.

वह कल्पना में और आगे badha—Pari के होठों को चूमते हुए, उसके स्तनों को मसलते हुए, और फिर ज़ोर से धक्का मरकर अंदर घुसता. पारी की कराहट की आवाज़ उसके कानों में गूँज रही थी. "आह... भैया... और ज़ोर से..." वह खुद hi वो शब्द बोल रहा था. उसका शरीर कंपनी लगा. साँसें तेज़ हो गयी. लुंड अब पूरी तरह फूल चूका था, जैसे फटने को तैयार.

"पारी... मैं आ रहा हूँ... तेरी छूट में..." उसने चीखते हुए कहा, और फिर ज़ोर का झटका लगा. वीर्य की तेज़ धरें nikli—ek, दो, तीन... उसके पेट पर, छाती पर गिरती गयी. उसका शरीर थरथरा रहा था. कुछ पल तक वह ऐसे hi पड़ा रहा, साँसें लेते हुए.



फिर dheere-dheere उसकी आँखें खुली. वीर्य की गर्माहट उसके शरीर पर फैली हुई थी. लज्जा फिर से लौट आयी. "यह क्या कर डाला मैंने?" वह सोचने लगा. लेकिन दिल के किसी कोने में एक संतुष्टि थी, और एक dar—ki कहीं यह कल्पना हकीकत न बन जाये. वह उठा, टिश्यू से खुद को साफ़ किया, और बिस्तर पर लेट गया, पारी की याद अभी भी उसके मन में घूम रही थी.
 
Part -17

पारी सुबह से hi परेशां थी.

माणिक का हर बात पर चिढ जाना… कभी ज़रुरत से ज़्यादा देखभाल करना… और कभी अचानक चुप हो जाना—

सब कुछ उसे खटक रहा था.

Kabhi-kabhi वह सोच बैठती—

“क्या माणिक को कोई बड़ी चिंता है?”

फिर अचानक दिमाग में दूसरा ख्याल आता—

“या… कहीं मैं hi ज़्यादा सोच रही हूँ?”

पर पिछले हफ्ते मोहल्ले में एक लड़की thi—Riya.

जब भी वह माणिक के पास आती, माणिक उसे कंधे से पकड़कर साइड कर देता, कभी माथे पर हाथ रखकर हालचाल पूछता, तो कभी उसकी पीठ पर हलकी थपकी deta—aaur यह सब इतना नेचुरल, इतना खुला हुआ था की कोई अजनबी देखे तो कहे—

“ये दोनों तो बहुत क्लोज हैं.”

और पारी को यह सब देख कर अजीब लगा था.

उसे लगा जैसे उसके भाई का “halka-sa बेपरवाह लगने वाला” स्पर्श ज़्यादा बढ़ गया हो.

वह sochte-sochte और उलझ गयी—

“क्या माणिक…? नहीं, नहीं! वो ऐसा सोच भी नहीं सकता. मैं hi गलत समझ रही हूँ.”

अगले hi दिन पारी अपनी करीबी दोस्त कैंडी से मिलने पार्क चली गयी. दोनों एक झूले के पास घास पर बैठ गयीं, कैंडी आइसक्रीम खा रही थी और पारी की बेचैनी साफ़ दिख रही थी.

कैंडी ने पूछा,

“क्या हुआ? चेहरा ऐसा क्यों है जैसे कोई हॉरर मूवी रियल में देख ली हो?”

पारी ने हिचकते हुए कहा,

“कैंडी… मुझे अपने भाई की हरकतें अजीब लग रही हैं.”

कैंडी की आँखें चौड़ी हो गयीं.

“किस तरह अजीब?”

पारी ने गहरी सांस ली.

“वो मोहल्ले की रिया को बहुत कम्फर्टेबले तरीके से छूटा है. मतलब… कंधे, हाथ, कभी सर पर. और वो भी baar-baar. मैं समझ नहीं प् रही की यह क्या है…”

कैंडी तुरंत मुस्कुरायी, आँख मारी और बोली—

“तो तुझे शक हो रहा है की तेरा भाई कहीं किसी लड़की में इंटरेस्टेड न हो जाए?”

पारी ने झुंझलाकर उसके हाथ पर हल्का मुक्का मारा.

“अरे पागल! ऐसा नहीं है. मेरा मतलब… वो उसके आसपास बहुत नेचुरल है… बहुत ज़्यादा.”

कैंडी हंसकर बोली,

“अरे! और क्या चाहिए एक लड़की को? नेचुरल लड़का hi तो चाहिए. ज़्यादा दूर रहने वाले झूठे शरीफ तो हर कोने पर मिलते हैं.”

पारी ने गुस्से से कहा,

“तू समझ नहीं रही. माणिक पहले ऐसा नहीं था. उसके टच में एक… ajeeb-si जल्दी होती है. जैसे कोई बेचैनी छुपाने की कोशिश कर रहा हो.”

कैंडी ने आइसक्रीम रोककर गंभीरता से देखा.

“तू बता क्या दर लग रहा है?”

पारी ने धीमे से, लगभग फुसफुसाते हुए कहा—

“कहीं माणिक… भावनाओं में बहकर गलत दिशा में न जा रहा हो.”

कैंडी तुरंत ज़ोर से हंस पड़ी—

“मतलब तू सोच रही है की तेरा भाई अब ‘touch-friendly’ हो गया है? और तुझे उससे दर लग रहा है?”

पारी ने झुंझलाकर कहा,

“हाँ! और मुझे लग रहा है कहीं उसके मन में कोई… कोई अजीब बात न चल रही हो!”

कैंडी ने अपने बाल झटकते हुए कहा—

“देख पारी, सुनने में तेरा शक बड़ा अजीब लगता है, लेकिन वजह बिलकुल समझ आती है. जब इंसान हमें बहुत प्यार करता है, तो उसके हर नए बदलते जेस्चर हमें ज़रुरत से ज़्यादा बड़ा लगने लगता है.”

पारी ने हैरान होकर पूछा—

“मतलब?”

कैंडी ने गहरी आवाज़ में कहा—

“Matlab—agar कोई स्ट्रेंजर रिया को कंधे पर हाथ रखे तो तुझे फर्क नहीं पड़ेगा. पर अगर माणिक करे, तो तू सोचने लगेगी की उसके हाथ अचानक ज़्यादा क्यों तहे…”

पारी चुप हो गयी.

यह बात उसे झकझोर गयी.

कैंडी ने आगे कहा—

“और रही बात ‘लड़के शरीफ होते हैं या नहीं’ — तो सुन, हर लड़का और हर लड़की शरीफ पैदा होते हैं. पर जवानी का जोश, गुस्सा, तनाव, अकेलापन — यह सब उन्हें kabhi-kabhi कंफ्यूज कर देते हैं.”

फिर कैंडी ने आँख मारते हुए शरारत से कहा—

“वैसे… मुझे तो लगता है तेरा भाई किसी और वजह से बेचैन है. शायद करियर, या किसी परेशानी की वजह से. और तू बस अपनी इमेजिनेशन में सब badha-chadha रही है.”

पारी ने धीरे से कहा—

“सच में?”

कैंडी ने उसका हाथ पकड़कर कहा—

“पारी, रिलेशनशिप चाहे परिवार का हो या प्यार का—

दर और शक उसे तोड़ते हैं, पर बातचीत उसे जोड़ती है.

आज hi माणिक से आराम से बात करना. हो सकता है वो किसी स्ट्रेस में हो और तुझसे छुपा रहा हो.”

पारी ने लम्बे शांत सांस के साथ सर हिलाया.

“हाँ… मैं आज उससे बात करूंगी. शायद मैं hi ज़रुरत से ज़्यादा सोच रही हूँ.”

कैंडी मुस्कुरा दी.

“हाँ पगली. तू वर्थिंकिंग की ब्रांड एम्बेसडर है.”

दोनों हंस पड़ीं—

और पारी का मन थोड़ा हल्का हो गया.

********************************

कानूनी समझौता पूरा करने के बाद, आनंद मित्तल और अनीता ग्रोवर ने सफर शुरू किया और जल्दी hi एक शांत, छोटे से हिल स्टेशन पर पहुँच गए. आनंद ने वहां के सबसे आलिशान होटल में एक खूबसूरत और निजी सुईठे बुक किया. कमरे की खिड़कियों से बर्फीली चोटियों का नज़ारा दिखाई दे रहा था, लेकिन कमरे के अंदर का माहौल बाहरी ठण्ड के ठीक विपरीत, गर्म और उत्तेजक था.

कमरे में दाखिल होते hi, आनंद मित्तल अपनी पांच साल की तड़प को और नियंत्रित नहीं कर पाए. अनीता के साथ हुए चुम्बन और समझौता की ख़ुशी ने उन्हें उन्मादी (फ्रेन्ज़िएद) बना दिया था.

आनंद जी ने दरवाज़ा बंद किया और तुरंत अनीता की और बढे.

आनंद जी (बेचैनी से): "अनीता! अब और इंतज़ार नहीं होता. इतने सालों से मैं... मेरी तड़प. प्लीज, अब यह सब ख़तम करते हैं."

उन्होंने लगभग ज़बरदस्ती अनीता के कपडे उतारने पर ज़ोर देना शुरू कर दिया. उनके हाथ अनीता की साड़ी पर पड़े.

अनीता (हँसते हुए, प्यार से उन्हें रोकते हुए): "अरे, आनंद जी! ज़रा सब्र रखिये! मैं कहीं भाग नहीं रही हूँ. आपको तो अब मैं एक हफ्ते के लिए मिली हूँ."

आनंद जी की बेचैनी देखकर अनीता को मज़ा आ रहा था, और वह उनकी इस वर्षों की तड़प को समझ रही थी.

अनीता ने आनंद जी के हाथ पड़े और उन्हें शांत किया.

अनीता: "एक बात बताइये. क्यों न हम दोनों कुछ करने से पहले एक शावर ले लें? हम दोनों सफर करके आये हैं और आप इतने बेताब हैं, मुझे लगता है की थोड़ी ताज़गी हमारे इस पहले अनुभव को और भी ज़्यादा खूबसूरत बना देगी."

आनंद जी को यह प्रस्ताव तर्कसंगत लगा, लेकिन वह इस मौके को जाया नहीं करना चाहते थे.

आनंद जी (उत्सुकता से): "एक साथ ले लें क्या? मैं अब आपसे एक पल भी दूर नहीं रह सकता."

अनीता ने उनकी बेताबी देखि और अपनी आँखें मटकाते हुए मुस्कुरायी.

अनीता: "ठीक है! यह और भी मज़ेदार रहेगा."

अनीता ने सबसे पहले अपने कपडे उतारे. उनके कपडे ज़मीन पर गिरे और आनंद जी ने पहली बार अनीता के नग्न शरीर को देखा. उनकी सुंदरता और आत्मविश्वास से भरी नग्नता ने ने आनंद जी की उत्तेजना को चरम पर पहुंचा दिया. आनंद जी ने भी जल्दी से अपने कपडे उतार दिए.

दोनों नग्न अवस्था में बाथरूम की और बढे.

बाथरूम में घुसते hi, आनंद जी ने शावर चला दिया. गर्म पानी की बौछारें उन दोनों के शरीर पर पड़ने लगी. आनंद जी ने तुरंत अनीता को अपनी बाहों में कास लिया.

बाथरूम की गर्मी और पानी के नीचे, आनंद जी और अनीता एक साथ शावर लेने लगे. पानी की बौछारों के बीच, उन्होंने एक बार फिर ek-doosre को होंठों पर चूमा. यह चुम्बन अब और भी ज़्यादा भावुक और गहरा था.

आनंद जी ने अनीता के नग्न शरीर को chhua—unhein महसूस हुआ की यह सिर्फ शारीरिक तड़प नहीं थी, बल्कि वर्षों बाद किसी महिला के स्पर्श का आनंद था. अनीता ने भी उन्हें उतना hi कसकर पकड़ा, मानो वह उन्हें अपनी सूनी गॉड भरने के लिए धन्यवाद दे रही हो.

पहाड़ों के उस आलिशान सुईठे में, गर्म पानी की बौछारों के नीचे, आनंद मित्तल की सालों की तड़प पूरी होने की और पहला अंतरंग कदम बढ़ चुकी थी.

आलिशान होटल के सुईठे के बाथरूम में, गर्म पानी की बौछारों के नीचे, आनंद मित्तल और अनीता ग्रोवर नग्न अवस्था में ek-doosre के आलिंगन में थे. आनंद जी की वर्षों की तड़प अब इतनी नज़दीकी में थी की वह हर पल को महसूस कर रहे थे.

शुरुआत में, अनीता अपने समझौता और भावनात्मक मंशा (बच्चा पैदा करने) के बावजूद, थोड़ी शर्मा रही थी. यह आनंद मित्तल जैसे प्रतिष्ठित और विवाहित व्यक्ति के साथ उसकी पहली इतनी नज़दीकी थी.

आनंद जी ने उसकी शर्म को महसूस किया और प्यार से उसके गाल पर है क्विल फेर.

आनंद जी (धीमे, उत्तेजक स्वर में): "अनीता, अब क्यों शर्मा रही हो? हम दोनों यहाँ एक hi मक़सद से हैं. तुम मेरी तड़प समझो, और मुझे अपनी मजबूरी. अब कोई दूरी मत रखो."

आनंद जी की पहल से अनीता को थोड़ा साहस मिला.

अनीता (मुस्कुराते हुए): "ठीक है, आनंद जी. अगर आप इतने बेताब हैं, तो मैं hi शुरुआत करती हूँ."

उसने अपनी बाहों को आनंद जी के शरीर से हटाया और एक लूफाह उठाया. वह आनंद जी की पीठ और कन्धों पर साबुन मलने लगी. गर्म पानी और अनीता के हाथ का स्पर्श आनंद जी को उन्मादी बना रहा था.

Dheere-dheere, अनीता की उंगलियां नीचे की और गयीं. आनंद जी का लुंड पूरी तरह से उत्तेजित और तनाव में था. जब अनीता के हाथ में साबुन था, तो उनका सामना आनंद जी के तने हुए लुंड से हुआ.

पहले तो अनीता को एक पल के लिए फिर से शर्म आयी. एक प्रतिष्ठित और सम्मानित पुरुष का वह अंग, जिसे उसने अपने पति के अलावा आज तक नहीं छुआ था. उसका हाथ एक पल के लिए रुक गया.

लेकिन फिर, उसने अपनी शर्म को किनारे रखा, और उसे लगा की अब वह पीछे नहीं हैट सकती. अनीता ने अपने हाथ में थोड़ा और साबुन लिया और धीरे से आनंद जी के उत्तेजित अंग पर साबुन लगाने लगी.

यह क्षण आनंद जी के लिए अत्यंत उत्तेजक था. किसी खूबसूरत महिला के हाथों का स्पर्श, और वह भी उनकी वर्षों की तड़प के अंतिम बिंदु पर.

जैसे hi अनीता ने अपने हाथ से उसे पूरी तरह से साबुन से ढंका, उसकी आँखें विस्मय से खुली रह गयीं.

अनीता (अत्यंत धीमी, उत्तेजित आवाज़ में, जो अनजाने में उसके मुँह से निकल गयी): "यह वाक़ई बहुत बड़ा है..."

आनंद मित्तल की आँखें बंद थी, लेकिन अनीता की यह सीढ़ी टिपण्णी सुनकर उनके मुँह से एक दबी हुई आह निकली.

आनंद जी (हलके फुसफुसाहट में): "धन्यवाद, अनीता. यह सब तुम्हारे लिए है."

अनीता की टिपण्णी ने आनंद जी के पुरुषत्व को एक नया आयाम दिया. उन्हें लगा की उनका इंतज़ार सार्थक हुआ. अब अनीता ने शर्म को पूरी तरह से त्याग दिया था, और वह पूरी एकाग्रता के साथ साबुन मलने के काम में जुट गयी.

पानी की बौछारों के बीच, साबुन की चिकनाहट और अनीता के स्पर्श ने कमरे के माहौल को महा उत्तेजक बना दिया था. दोनों hi अब बिना किसी सीमा या पछतावे के, अपने अगले कदम के लिए पूरी तरह से तैयार थे.


अनीता ने आनंद जी को गले लगाया और उस उत्तेजना में, उनका गर्म पानी का शावर एक और अंतरंग खेल में बदल गया था.
 
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