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- Dec 5, 2013
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Part-10
लड़की का अनजाना एहसास
दिव्या, जो पूरी तरह से अपने काम में डूबी हुई थी, अचानक असहज महसूस करने लगी.
यह एक ऐसा एहसास होता है जिसे विज्ञान या तर्क से पूरी तरह समझाना मुश्किल है, लेकिन लड़कियों को अक्सर इसका एहसास हो जाता है की कोई उन्हें ताड़ रहा है (गर्ल्स ओफ्तें सेंस व्हेन समवन इस स्टेरिंग ात थम). यह एक आंतरिक, सूक्ष्म चेतावनी (सटल वार्निंग) होती है, जैसे त्वचा पर अचानक कोई अजीब दबाव महसूस होना या रीढ़ की हड्डी में ठंडक दौड़ जाना.
दिव्या ने किताबें dekhte-dekhte अचानक सर उठाया. उससे लगा जैसे उस पर किसी की आँखें गाड़ी हुई हैं. उसने चारों और देखा, लेकिन कोई भी सीधे उससे नहीं देख रहा था. उसके पास खड़ा सेल्समेन भी अपने काम में व्यस्त था.
उसने फिर से किताब उठायी, लेकिन वह असहजता बानी रही.
उसने धीमी गति से दरवाज़े की और देखा, जहां माणिक खड़ा था. माणिक ने जैसे hi दिव्या को अपनी और देखते हुए पाया, दिव्या को बहुत गुस्सा आया और उसने उसकी पीठ पर हाथ मारा तो माणिक सेहम गया बोली... क्या देख रहे थे.... माणिक घबरा कर बोलै... कक्कुक नहीं दीदी मन में सोचता है... ओह तेरी की, इसका मतलब मैंने सपने में दिव्या दीदी की छूट मार ली.
दिव्या (मन hi मन): 'क्या माणिक मुझे घूर रहा था? नहीं! यह तो पागलपन है. वह मेरा भाई है. शायद मैं ज़्यादा सोच रही हूँ क्यूंकि मैं असहज महसूस कर रही हूँ.'
उसने अपने कुर्ते को थोड़ा नीचे खींचा और अपने काम पर फिर से ध्यान केंद्रित करने की कोशिश की, लेकिन वह असहजता अब भी बानी हुई थी. वह जल्दी से अपना सामन ख़तम करना चाहती थी.
माणिक ने देखा तो दिव्या अब ज़्यादा सतर्क हो गयी है, और वह baar-baar अपने कपडे ठीक कर रही है. वह समझ गया था की दिव्या को उसके 'ताड़ने' का एहसास हो गया है. इस एहसास ने माणिक को शर्मिंदा करने के बजाय, उसके गुप्त खेल को और भी ज़्यादा रोमांचक बना दिया.
दिव्या भी उसके इस व्यवहार से असहज सी हो गयी थी और ढीली सी आवाज़ में बोली: "चलो, मेरा काम हो गया."
माणिक (मासूमियत से): "हाँ, चलो. जल्दी चलते हैं."
माणिक ने बाइक स्टार्ट की, लेकिन इस बार उसके मन में दोहरा दर tha—pehla, अपनी इस अनियंत्रित आदत का, और दूसरा, यह की अगर दिव्या को सच पता चल गया की वह उससे किस तरह से घूर रहा था और न सिर्फ घूर रहा था बल्कि घूरते हुए सपने में उसकी जमकर चुदाई की तो वह उससे न सिर्फ जमकर धोएगी बल्कि उनके बीच का रिश्ता हमेशा के लिए ख़तम हो जायेगा.
अंतिम पेशकश: तड़प, मजबूरी और अनीता का प्रस्ताव
आनंद मित्तल अपने केबिन में बैठे थे, माथे पर शिकन थी. सविता ग्रोवर के साथ उनका रिश्ता अब एक ऐसे भावनात्मक चक्रव्यूह में फँस चूका था जहां वह पूरी तरह से यौन तड़प (सेक्स के लिए तड़प) से चूर थे, लेकिन सविता की ज़िद और सीमाओं के कारण वह अपनी इच्छा पूरी नहीं कर प् रहे थे. सविता उन्हें हैंड जॉब तक सीमित रखती थी, जिसे वह एक 'सेवा' या 'भावनात्मक सहारा' मानती थी, न की एक पूर्ण शारीरिक सम्बन्ध.
सविता ने आज फिर आनंद जी को बुलाया था, लेकिन इस बार उसके चेहरे पर एक अलग तरह की गंभीरता थी, जो उनके सामान्य 'प्रोफेशनल' या 'सख्त' मूड से अलग थी.
सविता की मजबूरी
आनंद जी ने देखा की सविता आज थोड़ी परेशां है.
आनंद जी (थके हुए स्वर में): "सविता, अगर तुम फिर से वही बात दोहराने आयी हो की मैं अपनी इच्छाएं कण्ट्रोल करून, तो मैं सुन नहीं सकता. मुझे पता है की तुम मेरी ज़रूरतें जानती हो, पर तुम खुद नहीं चाहती... या कोई और मजबूरी है?"
सविता ने लम्बी सांस ली. इस बार वह अपनी मजबूरी को छिपा नहीं पायी.
सविता: "आनंद जी, मुझे समझने की कोशिश कीजिये. मेरे लिए आप सिर्फ एक बॉस नहीं हैं, आप श्वेता की बहिन के पति हैं. मेरा पति, रजत, एक मैनेजर है और हमारा एक सामान्य, स्थिर जीवन है. अगर मैं आपके साथ पूर्ण शारीरिक सम्बन्ध रखती हूँ, तो इसका मतलब है की मैं अपने वैवाहिक जीवन के saath-saath, अपने पेशेवर जीवन को भी खतरे में दाल रही हूँ. मैं इतनी बोल्ड और बेबाक दिखती हूँ, पर मैं अपने घर और अपने सम्मान को डाव पर नहीं लगा सकती."
उसने अपनी साड़ी का पल्लू कसकर पकड़ा. सविता: "मैं आपको शारीरिक राहत दे सकती हूँ ताकि आप काम पर ध्यान दे सकें, लेकिन मैं आपकी 'प्रेमिका' नहीं बन सकती. मैं आपको तड़पती हूँ, क्यूंकि मैं जानती हूँ की आप मेरे लिए महसूस करते हैं, लेकिन मैं वह सीमा नहीं लांघ सकती."
आनंद जी निराशा में सर झुका गए.
सविता का अप्रत्याशित ऑफर
सविता ने देखा की आनंद जी का निराशा का स्टार बहुत बढ़ गया है, और वह इस तड़प से बाहर नहीं निकल प् रहे हैं. तभी, उसने एक बहुत hi अप्रत्याशित और बोल्ड प्रस्ताव उनके सामने रखा.
सविता (झुककर, धीमी और अत्यंत गोपनीय आवाज़ में): "आनंद जी, मेरे पास एक रास्ता है जहां आप अपनी सेक्स की भूख भी मिटा सकते हैं और किसी की ज़िन्दगी में एक बहुत बड़ा पुण्य भी कर सकते हैं."
आनंद जी ने हैरानी से उसकी और देखा.
सविता: "मेरी कॉलेज के समय की एक बहुत अच्छी दोस्त है, अनीता. उसकी शादी को आठ साल हो गए हैं. उसका पति, जो एक अच्छा बिजनेसमैन है, बीटा पैदा करने में काबिल नहीं (इंफर्टिले) है. उन्होंने सारे इलाज करवा लिए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ."
सविता ने थोड़ा रूककर माहौल को और गंभीर बनाया.
सविता: "अनीता और उसके पति दोनों hi एक बच्चे की उम्मीद खो चुके हैं. उन्होंने मुझसे एक गोपनीय मदद मांगी थी. वह चाहते हैं की अनीता किसी 'विश्वसनीय' और 'स्वस्थ' पुरुष के साथ सम्बन्ध बनाये ताकि वह गर्भ धारण कर सके. यह सब पूरी तरह से गोपनीय रहेगा, और वह पुरुष उनकी ज़िन्दगी का हिस्सा नहीं बनेगा."
आनंद जी के चेहरे पर सदमा, जिज्ञ्यासा और उत्तेजना का मिश्रण था.
सविता (आगे झुककर, प्रस्ताव को स्पष्ट करते हुए): "आप उस बच्चे को जन्म देने में उनकी मदद कर सकते हैं. यह उनके लिए संतान का वरदान होगा, और आपके लिए अपनी यौन इच्छा (सेक्स की भूख) को एक ऐसे रिश्ते में पूरा करने का मौका, जो पूरी तरह से सहमति पर आधारित होगा और जिसे एक 'पुण्य' के आवरण में छिपाया जा सकता है."
सविता ने अपनी बात समाप्त की, उसकी आँखें आनंद जी के चेहरे पर तिकी थी.
सविता: "यह आपकी तड़प को भी शांत करेगा, और आपको किसी एस्कॉर्ट के पास जाने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी, जिससे आपका सम्मान भी बना रहेगा. यह एक गोपनीय समझौता होगा. आप अनीता को बच्चा दे दीजिये, और बदले में आप अपनी ज़रुरत पूरी कर लीजिये. मैं बीच में रहूंगी ताकि गोपनीयता बानी रहे."
आनंद मित्तल सन्न रह गए. यह एक ऐसा ऑफर tha—anaitik, जटिल, लेकिन उनकी पांच साल की तड़प का एकमात्र समाधान. उन्हें लगा की सविता ने उनकी मजबूरी का इस्तेमाल किया है, लेकिन साथ hi उन्हें यह भी लगा की यही उनकी सबसे बड़ी ज़रुरत को पूरा करने का एकमात्र रास्ता है. उनकी आँखों में अब तड़प के saath-saath एक नयी, अनजानी उम्मीद भी थी.
अनीता की छवि और अंतिम फैसला
सविता का प्रस्ताव – एक संतानहीन जोड़े को 'बच्चा देना' और बदले में अपनी शारीरिक तड़प मिटाना – आनंद मित्तल के लिए किसी लुभावने जाल से काम नहीं था. यह अनैतिक था, पर यह उनकी पांच साल की तड़प का एकमात्र सम्मानजनक समाधान लग रहा था.
शक और समझौता
आनंद जी ने कुछ पल के लिए अपनी बेचैनी को संभाला और उस प्रस्ताव के व्यवहारिक पहलुओं पर सोचने लगे. उनकी सबसे बड़ी चिंता थी भविष्य की जटिलताएं.
आनंद जी (गंभीर स्वर में): "सविता, यह प्रस्ताव... यह बहुत बड़ा है. मुझे इसमें सिर्फ एक दर है. क्या गारंटी है की वह औरत, अनीता, बाद में मुझे ब्लैकमेल नहीं करेगी? या कल को उसका पति पलट गया तो? अगर वह बच्चा पैदा होने के बाद मेरी chal-achal संपत्ति (प्रॉपर्टी) पर कोई हक़ मांगे तो?"
आनंद मित्तल, एक बड़े कॉर्पोरेट के मद थे, और संपत्ति का सवाल उनके लिए सर्वोपरि था, खासकर अपने बच्चों (माणिक, अनु, दिव्या, पारी) के भविष्य को देखकर.
सविता (आत्मविश्वास से मुस्कुराते हुए): "मैंने यह सब सोचा हुआ है, आनंद जी. हम कोई रिस्क नहीं लेंगे. हम अनीता और विनोद को कहेंगे की हम यह काम तभी करेंगे जब हम कोर्ट में एक कानूनी समझौता (लीगल एग्रीमेंट) तैयार करवा लें."
सविता ने मेज़ पर झुककर अपनी बात स्पष्ट की:
सविता: "उस समझौता में साफ़ लिखा होगा की 'इस सम्बन्ध से उत्पन्न होने वाले बच्चे या अनीता का आनंद मित्तल की किसी भी चल या अचल संपत्ति पर भविष्य में कोई हक़ (no राइट) नहीं होगा.' यह कानूनी रूप से बाध्यकारी होगा. यह एक शुद्ध जैविक दान (पुरेली बायोलॉजिकल डोनेशन) होगा, जिसका सारा खर्चा उनका पति उठाएगा."
आनंद जी को यह समाधान अच्छा लगा. यह उनकी तड़प को मिटाने का रास्ता भी था और उनके परिवार की सुरक्षा का भी.
आनंद जी (शांत होकर): "ठीक है, यह बात सही है. पर मुझे... मुझे इस पर सोचने का मौका चाहिए. यह मेरी ज़िन्दगी का बहुत बड़ा फैसला होगा."
अनीता की तस्वीर और इच्छा का आवेग
सविता ने मुस्करातेहुए हामी भरी. उसने अपनी पर्स से फ़ोन निकला और एक तस्वीर खोली.
सविता: "आप सोचिये. पर इससे पहले, आप मिलिए अनीता से."
उसने फ़ोन आनंद जी की और बढ़ा दिया. फ़ोन की स्क्रीन पर अनीता की तस्वीर थी. अनीता लगभग 32 साल की थी, उनका चेहरा आकर्षक था, और उनका पहनावा और अंदाज़ एक सशक्त, आत्मविश्वासी महिला का था. वह किसी 'काम की देवी' (अवतार ऑफ़ ा कमा गॉडेस) से काम नहीं लग रही थी, जिनकी आँखों में एक अनजानी सी उदासी और दृढ़ता झलक रही थी.
आनंद मित्तल ने उस तस्वीर को घूरकर देखा. उस महिला की सुंदरता और उसके पीछे छिपी कहानी ने आनंद जी के भीतर इच्छा के आवेग को तुरंत जगा दिया.
तस्वीर देखते hi, आनंद जी के लुंड में तनाव आ गया (उनका लुंड तन गया). वह अपनी भावनाओं को छुपा नहीं पाए.
सविता ने आनंद जी के चेहरे के haav-bhaav और उनकी पंत में आयी हलचल को तुरंत भांप लिया.
सविता (मुस्कुराते हुए, लेकिन प्रोफेशनल अंदाज़ में): "लगता है आपको अब ज़्यादा सोचने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी."
आनंद जी की नज़रों में अनियंत्रित इच्छा देखकर, सविता ने निर्णय लिया की उन्हें तुरंत राहत देना ज़रूरी है ताकि वह इस प्रस्ताव पर जल्दी सहमत हो सकें.
सविता ने बिना कोई और शब्द कहे, हाथ बढाकर धीरे से आनंद जी की पंत की जिपर खोली, और उनके लुंड को बाहर निकला.
सविता (हलकी फुसफुसाहट में): "यह लीजिये, सोचिये मत... बस महसूस कीजिये."
सविता ने उसी वक़्त आनंद जी को हैंड जॉब देना शुरू कर दिया.
आनंद जी की आँखें बंद नहीं थी. आज वह हैंड जॉब लेते हुए, सामने रखे फ़ोन पर अनीता की तस्वीर को एकटक देख रहे थे. उनके दिमाग में अब सिर्फ दो hi बातें थी: एक तरफ कानूनी समझौता, और दूसरी तरफ अनीता का आकर्षक चेहरा, जो उनकी सालों की तड़प को मिटाने का एकमात्र जरिया बनने वाला था.
इस अनैतिक और जटिल सौदे पर उनके मन में अब कोई शंका नहीं थी.
दिव्या, जो पूरी तरह से अपने काम में डूबी हुई थी, अचानक असहज महसूस करने लगी.
यह एक ऐसा एहसास होता है जिसे विज्ञान या तर्क से पूरी तरह समझाना मुश्किल है, लेकिन लड़कियों को अक्सर इसका एहसास हो जाता है की कोई उन्हें ताड़ रहा है (गर्ल्स ओफ्तें सेंस व्हेन समवन इस स्टेरिंग ात थम). यह एक आंतरिक, सूक्ष्म चेतावनी (सटल वार्निंग) होती है, जैसे त्वचा पर अचानक कोई अजीब दबाव महसूस होना या रीढ़ की हड्डी में ठंडक दौड़ जाना.
दिव्या ने किताबें dekhte-dekhte अचानक सर उठाया. उससे लगा जैसे उस पर किसी की आँखें गाड़ी हुई हैं. उसने चारों और देखा, लेकिन कोई भी सीधे उससे नहीं देख रहा था. उसके पास खड़ा सेल्समेन भी अपने काम में व्यस्त था.
उसने फिर से किताब उठायी, लेकिन वह असहजता बानी रही.
उसने धीमी गति से दरवाज़े की और देखा, जहां माणिक खड़ा था. माणिक ने जैसे hi दिव्या को अपनी और देखते हुए पाया, दिव्या को बहुत गुस्सा आया और उसने उसकी पीठ पर हाथ मारा तो माणिक सेहम गया बोली... क्या देख रहे थे.... माणिक घबरा कर बोलै... कक्कुक नहीं दीदी मन में सोचता है... ओह तेरी की, इसका मतलब मैंने सपने में दिव्या दीदी की छूट मार ली.
दिव्या (मन hi मन): 'क्या माणिक मुझे घूर रहा था? नहीं! यह तो पागलपन है. वह मेरा भाई है. शायद मैं ज़्यादा सोच रही हूँ क्यूंकि मैं असहज महसूस कर रही हूँ.'
उसने अपने कुर्ते को थोड़ा नीचे खींचा और अपने काम पर फिर से ध्यान केंद्रित करने की कोशिश की, लेकिन वह असहजता अब भी बानी हुई थी. वह जल्दी से अपना सामन ख़तम करना चाहती थी.
माणिक ने देखा तो दिव्या अब ज़्यादा सतर्क हो गयी है, और वह baar-baar अपने कपडे ठीक कर रही है. वह समझ गया था की दिव्या को उसके 'ताड़ने' का एहसास हो गया है. इस एहसास ने माणिक को शर्मिंदा करने के बजाय, उसके गुप्त खेल को और भी ज़्यादा रोमांचक बना दिया.
दिव्या भी उसके इस व्यवहार से असहज सी हो गयी थी और ढीली सी आवाज़ में बोली: "चलो, मेरा काम हो गया."
माणिक (मासूमियत से): "हाँ, चलो. जल्दी चलते हैं."
माणिक ने बाइक स्टार्ट की, लेकिन इस बार उसके मन में दोहरा दर tha—pehla, अपनी इस अनियंत्रित आदत का, और दूसरा, यह की अगर दिव्या को सच पता चल गया की वह उससे किस तरह से घूर रहा था और न सिर्फ घूर रहा था बल्कि घूरते हुए सपने में उसकी जमकर चुदाई की तो वह उससे न सिर्फ जमकर धोएगी बल्कि उनके बीच का रिश्ता हमेशा के लिए ख़तम हो जायेगा.
आनंद मित्तल अपने केबिन में बैठे थे, माथे पर शिकन थी. सविता ग्रोवर के साथ उनका रिश्ता अब एक ऐसे भावनात्मक चक्रव्यूह में फँस चूका था जहां वह पूरी तरह से यौन तड़प (सेक्स के लिए तड़प) से चूर थे, लेकिन सविता की ज़िद और सीमाओं के कारण वह अपनी इच्छा पूरी नहीं कर प् रहे थे. सविता उन्हें हैंड जॉब तक सीमित रखती थी, जिसे वह एक 'सेवा' या 'भावनात्मक सहारा' मानती थी, न की एक पूर्ण शारीरिक सम्बन्ध.
सविता ने आज फिर आनंद जी को बुलाया था, लेकिन इस बार उसके चेहरे पर एक अलग तरह की गंभीरता थी, जो उनके सामान्य 'प्रोफेशनल' या 'सख्त' मूड से अलग थी.
आनंद जी ने देखा की सविता आज थोड़ी परेशां है.
आनंद जी (थके हुए स्वर में): "सविता, अगर तुम फिर से वही बात दोहराने आयी हो की मैं अपनी इच्छाएं कण्ट्रोल करून, तो मैं सुन नहीं सकता. मुझे पता है की तुम मेरी ज़रूरतें जानती हो, पर तुम खुद नहीं चाहती... या कोई और मजबूरी है?"
सविता ने लम्बी सांस ली. इस बार वह अपनी मजबूरी को छिपा नहीं पायी.
सविता: "आनंद जी, मुझे समझने की कोशिश कीजिये. मेरे लिए आप सिर्फ एक बॉस नहीं हैं, आप श्वेता की बहिन के पति हैं. मेरा पति, रजत, एक मैनेजर है और हमारा एक सामान्य, स्थिर जीवन है. अगर मैं आपके साथ पूर्ण शारीरिक सम्बन्ध रखती हूँ, तो इसका मतलब है की मैं अपने वैवाहिक जीवन के saath-saath, अपने पेशेवर जीवन को भी खतरे में दाल रही हूँ. मैं इतनी बोल्ड और बेबाक दिखती हूँ, पर मैं अपने घर और अपने सम्मान को डाव पर नहीं लगा सकती."
उसने अपनी साड़ी का पल्लू कसकर पकड़ा. सविता: "मैं आपको शारीरिक राहत दे सकती हूँ ताकि आप काम पर ध्यान दे सकें, लेकिन मैं आपकी 'प्रेमिका' नहीं बन सकती. मैं आपको तड़पती हूँ, क्यूंकि मैं जानती हूँ की आप मेरे लिए महसूस करते हैं, लेकिन मैं वह सीमा नहीं लांघ सकती."
आनंद जी निराशा में सर झुका गए.
सविता ने देखा की आनंद जी का निराशा का स्टार बहुत बढ़ गया है, और वह इस तड़प से बाहर नहीं निकल प् रहे हैं. तभी, उसने एक बहुत hi अप्रत्याशित और बोल्ड प्रस्ताव उनके सामने रखा.
सविता (झुककर, धीमी और अत्यंत गोपनीय आवाज़ में): "आनंद जी, मेरे पास एक रास्ता है जहां आप अपनी सेक्स की भूख भी मिटा सकते हैं और किसी की ज़िन्दगी में एक बहुत बड़ा पुण्य भी कर सकते हैं."
आनंद जी ने हैरानी से उसकी और देखा.
सविता: "मेरी कॉलेज के समय की एक बहुत अच्छी दोस्त है, अनीता. उसकी शादी को आठ साल हो गए हैं. उसका पति, जो एक अच्छा बिजनेसमैन है, बीटा पैदा करने में काबिल नहीं (इंफर्टिले) है. उन्होंने सारे इलाज करवा लिए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ."
सविता ने थोड़ा रूककर माहौल को और गंभीर बनाया.
सविता: "अनीता और उसके पति दोनों hi एक बच्चे की उम्मीद खो चुके हैं. उन्होंने मुझसे एक गोपनीय मदद मांगी थी. वह चाहते हैं की अनीता किसी 'विश्वसनीय' और 'स्वस्थ' पुरुष के साथ सम्बन्ध बनाये ताकि वह गर्भ धारण कर सके. यह सब पूरी तरह से गोपनीय रहेगा, और वह पुरुष उनकी ज़िन्दगी का हिस्सा नहीं बनेगा."
आनंद जी के चेहरे पर सदमा, जिज्ञ्यासा और उत्तेजना का मिश्रण था.
सविता (आगे झुककर, प्रस्ताव को स्पष्ट करते हुए): "आप उस बच्चे को जन्म देने में उनकी मदद कर सकते हैं. यह उनके लिए संतान का वरदान होगा, और आपके लिए अपनी यौन इच्छा (सेक्स की भूख) को एक ऐसे रिश्ते में पूरा करने का मौका, जो पूरी तरह से सहमति पर आधारित होगा और जिसे एक 'पुण्य' के आवरण में छिपाया जा सकता है."
सविता ने अपनी बात समाप्त की, उसकी आँखें आनंद जी के चेहरे पर तिकी थी.
सविता: "यह आपकी तड़प को भी शांत करेगा, और आपको किसी एस्कॉर्ट के पास जाने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी, जिससे आपका सम्मान भी बना रहेगा. यह एक गोपनीय समझौता होगा. आप अनीता को बच्चा दे दीजिये, और बदले में आप अपनी ज़रुरत पूरी कर लीजिये. मैं बीच में रहूंगी ताकि गोपनीयता बानी रहे."
आनंद मित्तल सन्न रह गए. यह एक ऐसा ऑफर tha—anaitik, जटिल, लेकिन उनकी पांच साल की तड़प का एकमात्र समाधान. उन्हें लगा की सविता ने उनकी मजबूरी का इस्तेमाल किया है, लेकिन साथ hi उन्हें यह भी लगा की यही उनकी सबसे बड़ी ज़रुरत को पूरा करने का एकमात्र रास्ता है. उनकी आँखों में अब तड़प के saath-saath एक नयी, अनजानी उम्मीद भी थी.
सविता का प्रस्ताव – एक संतानहीन जोड़े को 'बच्चा देना' और बदले में अपनी शारीरिक तड़प मिटाना – आनंद मित्तल के लिए किसी लुभावने जाल से काम नहीं था. यह अनैतिक था, पर यह उनकी पांच साल की तड़प का एकमात्र सम्मानजनक समाधान लग रहा था.
आनंद जी ने कुछ पल के लिए अपनी बेचैनी को संभाला और उस प्रस्ताव के व्यवहारिक पहलुओं पर सोचने लगे. उनकी सबसे बड़ी चिंता थी भविष्य की जटिलताएं.
आनंद जी (गंभीर स्वर में): "सविता, यह प्रस्ताव... यह बहुत बड़ा है. मुझे इसमें सिर्फ एक दर है. क्या गारंटी है की वह औरत, अनीता, बाद में मुझे ब्लैकमेल नहीं करेगी? या कल को उसका पति पलट गया तो? अगर वह बच्चा पैदा होने के बाद मेरी chal-achal संपत्ति (प्रॉपर्टी) पर कोई हक़ मांगे तो?"
आनंद मित्तल, एक बड़े कॉर्पोरेट के मद थे, और संपत्ति का सवाल उनके लिए सर्वोपरि था, खासकर अपने बच्चों (माणिक, अनु, दिव्या, पारी) के भविष्य को देखकर.
सविता (आत्मविश्वास से मुस्कुराते हुए): "मैंने यह सब सोचा हुआ है, आनंद जी. हम कोई रिस्क नहीं लेंगे. हम अनीता और विनोद को कहेंगे की हम यह काम तभी करेंगे जब हम कोर्ट में एक कानूनी समझौता (लीगल एग्रीमेंट) तैयार करवा लें."
सविता ने मेज़ पर झुककर अपनी बात स्पष्ट की:
सविता: "उस समझौता में साफ़ लिखा होगा की 'इस सम्बन्ध से उत्पन्न होने वाले बच्चे या अनीता का आनंद मित्तल की किसी भी चल या अचल संपत्ति पर भविष्य में कोई हक़ (no राइट) नहीं होगा.' यह कानूनी रूप से बाध्यकारी होगा. यह एक शुद्ध जैविक दान (पुरेली बायोलॉजिकल डोनेशन) होगा, जिसका सारा खर्चा उनका पति उठाएगा."
आनंद जी को यह समाधान अच्छा लगा. यह उनकी तड़प को मिटाने का रास्ता भी था और उनके परिवार की सुरक्षा का भी.
आनंद जी (शांत होकर): "ठीक है, यह बात सही है. पर मुझे... मुझे इस पर सोचने का मौका चाहिए. यह मेरी ज़िन्दगी का बहुत बड़ा फैसला होगा."
सविता ने मुस्करातेहुए हामी भरी. उसने अपनी पर्स से फ़ोन निकला और एक तस्वीर खोली.
सविता: "आप सोचिये. पर इससे पहले, आप मिलिए अनीता से."
उसने फ़ोन आनंद जी की और बढ़ा दिया. फ़ोन की स्क्रीन पर अनीता की तस्वीर थी. अनीता लगभग 32 साल की थी, उनका चेहरा आकर्षक था, और उनका पहनावा और अंदाज़ एक सशक्त, आत्मविश्वासी महिला का था. वह किसी 'काम की देवी' (अवतार ऑफ़ ा कमा गॉडेस) से काम नहीं लग रही थी, जिनकी आँखों में एक अनजानी सी उदासी और दृढ़ता झलक रही थी.
आनंद मित्तल ने उस तस्वीर को घूरकर देखा. उस महिला की सुंदरता और उसके पीछे छिपी कहानी ने आनंद जी के भीतर इच्छा के आवेग को तुरंत जगा दिया.
तस्वीर देखते hi, आनंद जी के लुंड में तनाव आ गया (उनका लुंड तन गया). वह अपनी भावनाओं को छुपा नहीं पाए.
सविता ने आनंद जी के चेहरे के haav-bhaav और उनकी पंत में आयी हलचल को तुरंत भांप लिया.
सविता (मुस्कुराते हुए, लेकिन प्रोफेशनल अंदाज़ में): "लगता है आपको अब ज़्यादा सोचने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी."
आनंद जी की नज़रों में अनियंत्रित इच्छा देखकर, सविता ने निर्णय लिया की उन्हें तुरंत राहत देना ज़रूरी है ताकि वह इस प्रस्ताव पर जल्दी सहमत हो सकें.
सविता ने बिना कोई और शब्द कहे, हाथ बढाकर धीरे से आनंद जी की पंत की जिपर खोली, और उनके लुंड को बाहर निकला.
सविता (हलकी फुसफुसाहट में): "यह लीजिये, सोचिये मत... बस महसूस कीजिये."
सविता ने उसी वक़्त आनंद जी को हैंड जॉब देना शुरू कर दिया.
आनंद जी की आँखें बंद नहीं थी. आज वह हैंड जॉब लेते हुए, सामने रखे फ़ोन पर अनीता की तस्वीर को एकटक देख रहे थे. उनके दिमाग में अब सिर्फ दो hi बातें थी: एक तरफ कानूनी समझौता, और दूसरी तरफ अनीता का आकर्षक चेहरा, जो उनकी सालों की तड़प को मिटाने का एकमात्र जरिया बनने वाला था.
इस अनैतिक और जटिल सौदे पर उनके मन में अब कोई शंका नहीं थी.