Incest RAKSHASH - Page 5 - SexBaba
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Incest RAKSHASH

अपडेट-23



भवर सिंह और राजगुरु दोनों महल के एक तहखाने में थे जहा बहुत सी किताबे और बहुत सा इतहास लिखा रखा था, भवर सिंह ने सुबह होने का इंतजार भी नहीं किया था, वो खुद राजगुरु के साथ लग गया था,

राजगुरु- महाराज आप आराम कीजिये मैं खोजता हु उसके बारे में अधिक जानकारी,

भवर सिंह- नहीं राजगुरु अब मुझसे सबर नहीं हो रहा, मैं खुद उसके बारे में जानना चाहता हु, हमारे दादा जी को इतहास में बहुत रूचि थी, वो हमेशा बोलते थे की हमारा इतिहास हमारा अतीत ह और अतीत से hi भविष्य की चाबी मिलती ह, इसलिए वो हमेशा अलग अलग राज्यों का इतिहास भी लिखवाया करते थे, उन्होंने उस समय का इतहास भी लिखवाया था जब युगो का परिवर्तन हो रहा था,

राजगुरु- मैं जनता हु महाराज मेरे पिता जी hi उनके सहायक रहे थे, उसी इतहास की कुछ किताबे मेरे पास थी जहा से मुझे ये जानकारी मिली थी, हो न हो उसके बारे में और भी अधिक लिखा गया होगा,

भवर सिंह- लेकिन मेरे दादा जी ऐसे नहीं थे जो किसी से दर कर उसका इतहास hi न लिखे,

राजगुरु- इसीलिए बोल रहा हु वो ताकत सब कुछ बर्बाद कर सकती ह क्योकि जिससे आपके दादा जी घबरा गए तो सोचिये वो कैसी ताकत होगी,

भवर सिंह- वो चाहे जो भी हो लेकिन मुझे वो चाहिए, किसी भी कीमत पैर,

राजगुरु और भवर सिंह राजा भैरव के बारे में खोज रहे थे, वही देव अपने शरीर पैर बस एक कपडा पहन क्र अपने कमरे से निकल क्र बहार चल दिया अमरावती के कमरे की तरफ, वो कमरे के बहार पंहुचा तो वह बस एक दासी कड़ी थी, कोई पहरेदार नहीं था,

देव समझ गया ये अमरावती ने जानबूझ क्र किया ह,

देव के वह पहुंचते hi दासी ने उसके सामने सर झुकाया और जाने का रास्ता दे दिया, देव कमरे के अंदर चला गया, कमरे में से बहुत hi भेतरीन खुशबु आ रही थी, पूरा कमरा महक रहा था, चारो तरफ फूल hi फूल थे, देव आज पहेली बार अमरावती के कमरे में आया था, उसे नहीं पता था की ये सिर्फ आज के लिए ह या हमेशा hi ऐसा रहता ह, चारो तरफ दिए जल रहे थे, पूरा कमरा रौशनी में जगमगा रहा था, देव ने चारो तरफ देखा लेकिन अमरावती नजर नहीं आ रही थी,

देव चलता हुआ बिस्टेर के पास पहुंच गया, वो आवाज लगाने hi वाला था की उसे हलकी आहात की आवाज हुई, देव ने पलटना चाहा टी अमरावती की आवाज आई- रुको पलटना नहीं, देव रुक गया,

अमरावती- मैं सिर्फ हमारी दोस्ती के लिए ऐसा कर रही हु, क्योकि दोस्त hi सबसे खास होते हैं, तुम ये बात किसी को बताओगे तो नहीं,

देव- दोस्तों के राज नहीं खोले जाते, क्या मैं पालतू,

अमरावती ने बस हम्म्म्म कहा, देव ने धीरे से पलट क्र देखा तो सामने अमरावती कड़ी थी एक कला झीना सा कपडा ओढ़े हुए, जिसमे से उसका खूबसूरत शरीर दिख रहा था, उसकी बड़ी बड़ी चूचिया उस कपडे में से बहार आने को तैयार थी, अमरावती की भरी जंघे पैर कपडा चिपका हुआ था, देव एक तक उसे देखे जा रहा था देव का लुंड पहले hi खड़ा था लेकिन अब तो वो उफान पैर था,






अमरावती- ऐसे क्यों देख रहे हो,

देव- आप बहुत खूबसूरत हैं,

अमरावती- मुझे शर्म आ रही ह,

देव- दोस्तों में कैसी शर्म

अमरावती ने देव को देखा और बड़ी ऐडा से घूम गई, जिससे अमरावती की भरी और उभरी हुई गांड देव के सामने आ गई थी, देव चलता हुआ अमरावती के पास पंहुचा और उसके कंधे पैर हाथ रख दिया, अमरावती ने तुरंत अपना शरीर देव से सत्ता दिया,

देव- बस इतना hi दिखाओगी,

अमरावती- इससे ज्यादा मुझमे हिम्मत नहीं ह,

देव ने नीरस होकर सर झुका लिया,

अमरावती- मैंने कहा मुझमे हिम्मत नहीं ह, तुम चाहे तो देख सकते हो,

देव ने थोड़ा सा चौंकते हुए अमरावती को देखा फिर उसका मतलब समझ क्र मुस्कुरा दिया, और उसने अमरावती का कपडा पकड़ा और हलके से खींचना शुरू क्र दिया, अमरावती ने कपडा ढीला छोड़ दिया था जो उसके शरीर से फिसलता हुआ निचे जा गिरा, और कपडे के गिरते hi अमरावती का खूबसूरत शरीर देव के सामने था, अमरावती की भरी चूचिया एक दम गोल आकर लिए थी, देव अमरावती के चारो तरफ घूमने लगा, अमरावती शर्मा क्र सर निचे किये कड़ी थी,






देव अमरावती के सामने आया और उसके चेरे को उप्पेर उठाया,

देव- इतना खूबसूरत शरीर ह आपका पूरी दुनिया आपके सामने झुक सकती ह,

अमरावती- तुम्हे पसंद आया

देव- बहुत

इतना बोलते hi अमरावती देव से लिपट गई, और उसकी भरी चूचिया देव की छाती में डाब गई, अमरावती ऐसा व्यव्हार कर रही थी जैसे सच में वो देव के प्रेम में पागल हो गई हो, एक नौजवान लड़की जब पहेली बार अपने प्रेमी के सामने ये सब करती ह तो वो जितनी उत्साहित होती ह वैसा hi अमरावती कर रही थी, देव भी कोई कसार नहीं छोड़ रहा था, दोनों के मन में कुछ और hi था लेकिन दिखावा और नाटक बहुत hi भेतरीन कर रहे थे,

देव- आपने मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल दे दिया मुझे आज,

अमरावती- क्या मैं अब कपडे पहन लू

देव- मेरा मन नहीं भरा

अमरावती- तो तुमने क्यों पहने हुए हैं,

देव ने तुरंत अमरावती को अलग किया और जो कपडा उसने पहना हुआ था तुरंत उतर क्र अलग क्र दिया, देव का खड़ा लुंड एक दम मीनार की तरह सामने आ गया, जिसे देख अमरावती की सांसे फूलने लगी,






देव- अब ठीक ह,

अमरावती- अब ये मेरे लिए मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल ह,

देव- कुछ hi समय में हमारी दोस्ती कितनी खास हो गई ह, ये हमने पहले क्यों नहीं सोचा,

अमरावती- पहले हम गलत सोच के साथ चल रहे थे न,

देव- अब हमारी दोस्ती मिशाल बनेगी,

अमरावती देव के करीब आई और उसके गले लग गई, उसके मुँह से एक आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह निकल गई, नंगे शरीर आपस में रगड़े और देव का खड़ा नानग लुंड अमरावती की जांघो के बिच में रगड़ गया,

देव- ये ज्यादा तो न हो जाये,

अमरावती- होने दो ज्यादा, अब हमारे बिच कुछ पर्दा नहीं ह, अब मैं इस पल को जी भर क्र जीना चाहती हु,

देव ने भी अपनी बहे अमरावती की कमर में दाल दी और उसे कास क्र खुद से चिपका लिया, अमरावती की बड़ी बड़ी चूचिया देव की छाती में डाब गई जिससे उसके उभर और उप्पेर को उठ गए, और देव का लुंड अमरावती की जांघो में ाड़ने लगा, तो अमरावती ने हलकी सी जांघ खोल दी जिससे देव का लुंड अमरावती की जांघो के बिच में घुस गया, अमरावती की लम्बाई देव से काम नहीं थी वो इस महल में सबसे लम्बी थी, कुछ अमरावती हलकी सी अपने पंजो पैर आ गाइट hi,

लुंड की रगड़ जब अमरावती की छूट पैर हुई तो उसकी आँखे बंद हो गई, देव के हाथ तुरंत अमरावती की गांड पैर चले गए, और उसने कास क्र उसकी गांड को पकड़ लिया, अब अमरावती का वजन देव के हाथो और शरीर पैर था, अमरावती को ऐसा लग रहा था जैसे वो देव के लुंड पैर बैठी हुई ह, अमरावती ने देव को देखा,

देव- ये गलत तो नहीं हो रहा न महारानी,

अमरावती- जो हो रहा ह होने दो, आज मत रोको, मैं बहुत प्यासी हु मेरे दोस्त अपनी इस दोस्त की प्यास बुझा दो,

इतना बोल क्र अमरावती ने देव के होतो पैर अपने हॉट रख दिए, देव सब कुछ अमरावती से hi करवा रहा था, बस देव उसका साथ दे रहा था,

देव ने भी तुरंत उसके होतो को चूमना शुरू क्र दिया, दोनों एक दूसरे के होतो को चबाये जार हे थे, देव ने अमरावती की गांड को कास क्र पकड़ा और हवा में उठा लिया अमरावती ने भी तुरंत अपनी पेअर देव की कमर पैर लप्पेट दिए और उसकी गॉड में आ गई, देव का खड़ा लुंड मीचे से अमरावती की छूट और गांड पैर रगड़ रहा था, उप्पेर अमरावती की चूचिया देव की छाती में रगड़ रही थी, और दोनों के हॉट एक दूसरे का रास पान कर रहे थे,

दोनों पागलो की तरह एक दूसरे को चुम रहे थे, कुछ देर बाद देव ने अमरावती को बिस्टेर पैर लिटाया और उसके उप्पेर आ गया,

देव- क्या इरादा ह,

अमरावती- मैंने अपने इरादे बता दिए हैं, अब तुम बताओ क्या इरादा ह,

देव- बहुत तकलीफ होगी,

अमरावती- मुझे वो तकलीफ चाहिए, मैंने पूरी जवानी उस तकलीफ का इंतजार किया ह लेकिन कोई मुझे वो तकलीफ नहीं दे पाया,

देव- कोई मतलब

अमरावती के मुँह से जोश जोश में कुछ ज्यादा hi निकल गया था उसने तुरंत बात को सम्हाला,

अमरावती- महाराज और कोण,

देव- आपकी चीखे बहार कोई सुन न ले,

अमरावती- उसकी चिंता तुम मत करो, इस कमरे से बहार कोई आवाज नहीं जाती, और बहार मेरी खास दासी कड़ी ह, वो सब सम्हाल लेगी

देव- मतलब आपने पूरी तैयारी की हुई ह,

अमरावती- अब और मत तड़पो मुझे, मैं इस खूबसूरत प्यारे से लिंग को अपने अंदर महसूस करना चाहती हु,

देव- मैं आपको वो सुख दूंगा इसके बाद आपको किसी सुख की जरुरत hi नहीं होगी,

देव ने अमरावती के होतो पैर फिर से अपने हॉट रख दिए और एक हाथ उसकी चूचियों पैर ले गया और मसलने लगा, निचे से देव का खड़ा लुंड अमरावती की छूट पैर रगड़ रहा था, अमरावती अपनी छूट को निचे से उछलने लगी और देव के खड़े लुंड पैर रगड़ने लगी, और देव के होतो को चूसने लगी,

कुछ देर हॉट चूसने के बाद देव ने अमरावती की गरदन चुनी शुरू क्र दी, और फिर निचे आने लगा और अपने हॉट अमरावती की चूचियों पैर रख दिए, अमरावती के चूचक बफी बड़े थे, देव ने एक चुकी को मुँह में भर लिया और दूसरी को अपने हाथ से मसलने लगा,






जब देव अमरावती की चूचियों को चूस रहा था तो उसके दिमाग में निहारिका की चूचिया आ गई, वैसे तो अमरावती की चूचिया बहुत बड़ी थी लेकिन जो आकर और कड़क पैन निहारिका की चूचियों का था वो बात अमरावती की चूचियों में नहीं थी,

देव को चूचिया चूसने का बहुत अनुभव था, बचपन से आज तक उसने सबसे ज्यादा चूचिया hi तो चूसी थी, लेकिन अमरावती ने शायद बहुत समय से अपनी चूचिया नहीं चूसै थी, और देव की चुकी चूसने की कला से अमरावती कामुकता में भर्ती जार hi थी, वो अपनी उंगलिया देव के सर पैर घुमा रही थी और अपना एक हाथ अपनी जांघो के बिच रगड़ रही थी जिससे देव का खड़ा लुंड अमरावती के हाथ पैर रगड़ रहा था, अमरावती ने देव का लुंड पकड़ लिया,

लुंड हाथ में आते hi अमरावती का शरीर कैंप उठा, इतना बड़ा और मोटा लुंड जिसके साडी नसे उसकी उंगलियों को महसूस हो रही थी, अमरावती ने लुंड को मुट्ठी में पकड़ा और अपनी छूट पैर रगड़ने लगी और दबाने लगी,






लेकिन देव का इरादा अभी ऐसा करने का नहीं था, देव थोड़ा उप्पेर हो गया, अमरावती ने चौंकते हुए देव को देखा,

देव मुस्कुराया- आज आप जीवन का असली सुख का अनुभव करेंगी अमरावती जी,

देव ने अमरावती को नाम से बुलाया तो उसका शरीर में और जोश भर गया, देव उसकी चूचियों को चुस्त हुआ उसके सपाट पेट पैर पंहुचा और फिर उसकी छूट के उप्पेर आ गया जो बिलकुल चिकनी थी, ऐसा लग रहा था जैसे अमरावती ने आज hi वह की सफाई की ह, वैसे भी अमरावै की दासी रोज उसकी छूट को साफ़ करती थी, देव ने छूट के उप्पेर के हिस्से को अपनी उंगलियों से शलया जिससे अमरावती का पेट में कपकपाहट होने लगी,

देव ने अपने हॉट अमरावती की जांघो पैर रख दिए, जांघो पैर हॉट लगते hi अमरावती एक दम उठ क्र बैठ गई लेकिन देव ने उसे पीछे धकेल दिया, अमरावती अपना सर बिस्टेर पैर इधर उधर करने लगी, देव जांघो को चूमता हुआ अमरावती की जंघे फ़ैलाने लगा जो अमरावती ने खुद पैर काबू करने के लिए आपस में भींच राखी थी, देव ने अपनी उंगलिया अमरावती की जांघो पैर फिरै और उप्पेर उसकी जांघो के बिच घुसता चला गया, अमरावती की जंघे खुलती चली और अमरावती को वो चिकनी छूट देव की आँखों के सामने आ गई थी,

अमरावती सर उठा क्र देव को देख रही थी की वो क्या करने वाला ह, देव ने अमरावती की आँखों में झाँका और अपना मुँह उसकी छूट पैर लगा दिया, अमरावती के मुँह से अह्ह्ह्हह्हह निकल गई और वो बिस्टेर पैर लुढ़क गई, उसके हाथ खुद देव के सर पैर चले गए, देव ने भी अमरावती की छूट के होतो को अपने होतो से अच्छे से चूमा और फिर अपनी जीभ निकल क्र छूट को चाट लिया, अमरावती अपनी कमर हिलने लगी, छूट पहले से hi पूरी तरह गीली हुई पड़ी थी, वो तो देव के लुंड की सिर्फ रगड़ से hi झड़ने की कगार पैर पहुंच गई थी,






अमरावती- ahhhhhhhhhhh देव क्या कर रहे हो, तुम मुझे पागल कर दे रहे हो, uuuffffffffffffffffff बहुत मजा आ रहा ा, बहुत सालो से किसी मर्द ने मेरी छूट को नहीं चूसा ह,

देव बिना कुछ बोले बस अमरावती की छूट को चूस रहा था अपनी जीभ को उसकी छूट की घेरे तक दाल रहा था, अमरावती पहले से पागल हुई पड़ी थी वो देव का हुम्ला बर्दास्त नहीं कर पाई, उसके हाथ देव के सर पैर चले गए और उसने देव के सर को अपनी छूट पैर दबा लिया और निचे से अपनी छूट को उछलने लगिए ुर देव के मुँह पैर छूट को रगड़ क्र झड़ने लगी,

अमरावती- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह देव खा जाओ मेरी छूट निचोड़ दो इसे, ahhhhhhhhhhhhh बहुत मजा आ रहा ह, तुम कमल के हो देव, बहुत सालो बाद किसी मर्द ने चूसा ह ahhhhhhhhhhh

अमरावती की सिसकारियां बहदति जा रही थी, कुछ देर में वो झाड़ क्र शांत हो गई तो देव उठा और अमरावती छूट में भीगे अपने हॉट सीधे अमरावती के होतो से जोड़ दिए, अमरावती भी पगली की तरह उसके होतो को चूसने लगी और उन पैर लगा अपनी छूट का नमकीन पानी का सवाद लेने लगी,

देव अमरावती के पैरो के बिच में था उसने अपना लुंड अमरावती की छूट पैर लगाया और धकेलने hi वाला था लेकिन अमरावती ने उसे रोक दिया,

अमरावती- रुक जाओ, तुमने मुझे बहुत मजा दिया ह मैं तुम्हे भी वो मजा देना चाहती हु,

अमरावती ने देव को बिस्टेर पैर लिटाया और देव का लुंड सीधा खड़ा हो गया था, अमरावती देव के उप्पेर आ गई और अपने हाथो में देव के लुंड को पकड़ क्र उससे खेलने लगी, देव का लुंड अमरावती के दोनों हाथो में था, वो उसकी लम्बाई अउ रमते का अनुमान लगा रही थी, फिर अमरावती ने देव की आँखों में देखते हुए लुंड के टोपे पैर अपनी जीभ फिरै, देव ने मुस्कुराते हुए आँखे बंद क्र ली, अमरावती को अहसास हो रहा था की वो देव पैर काबू पति जा रही ह,






अमरावती ने अपना मुँह खोला और लुंड को अपने मुँह में भरने की कोशिश की लेकिन लुंड इतना मोटा था की अमरावती के गाल चीरने लगे,





अमरावती कुछ देर लुंड को ऐसे hi मुँह में लेकर बैठी रही, जब उसका मुँह दुखने लगा तो उसने लुंड को बहार निकला और चाटने लगी, वो लुंड को उप्पेर से निचे तक चाट रही थी,





फिर उसने देव के ांडो को अपने मुँह में भर लिया और एक एक ाँद को रसगुल्ले की तरह चूस रही थी,





काफी देर लुंड को चूसने के बाद जब उसका मुँह दुखने लगा तो उसने लुंड को अपनी चूचियों बिच रखा और अपनी चूचियों से लुंड को रगड़ने लगी ,





देव को बहुत मजा आ रहा था, ये वही अमरावती थी जिसने देव और उसकी माँ निहारिका को हमेषा जलील किया था, आज वो उसके लुंड के साथ खेल रही थी,

अमरावती को काफी देर हो चुकी थी लुंड के साथ खेलते हुए लेकिन देव का लुंड ऐसे hi खड़ा था, अमरावती को उम्मीद थी की वो देव को अपनी अदाओ से hi झाड़ देगी लेकिन लुंड और भी खूंखार होता जार है था, अब अमरावती ने हर मान लिट् hi, उसने एक तेल की शीशी उठाई और उसमे से बहुत सात ेल लुंड पैर डाला और मालिश करने लगी,

देव- ये कैसा तेल ह

अमरावती- इससे तुम्हारा लुंड और मजबूत हो जायेगा,

देव- क्या आपको लगता ह इससे ज्यादा मजबूत लुंड होना चाहिए,

अमरावती- इससे ज्यादा मजबूत कुछ नहीं हो सकता ह, ये एक अजूबा ह, असल में मैं इसे चिकना कर रही हु ताकि मैं इसे अपनी छूट में झेल सकू,

अमरावती ने बहुत सा तेल अपनी छूट पैर भी डाला और देव के बराबर में लेट गई,

अमरावती- अब आ जाओ मेरे उप्पेर और चढ़ जाओ मुझपे, अब बर्दास्त नहीं हो रहा ये घोड़े जैसा लुंड मेरी छूट में घुसा दो,

देव उसके पैरो के बिच में आ गया और पहले अपनी उंगली छूट में दाल क्र थोड़ी अंदर बहार की ताकि छूट पूरी तरह चिकनी हो जाये, फिर उसने अपना लुंड छूट पैर रकह और रगड़ने लगा,






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अमरावती- मत तड़पाओ अब घुसा दो अपना लोढ़ा मेरी छूट में, फाड़ दो इस छूट को,

देव ने लुंड का दबाव बनाया और लुंड का टोपा छूट में घुस गया, लुंड के घुसते hi अमरावती की आँखे फैट गई, उसने अपना मुँह तकिये के निचे दबा लिया, देव ने रुक्न ेकी कोशिश नहीं की वो दबाव बनता hi रहा और तेल की चिकनाहट की वजह से काफी लुंड छूट में घुसता चला गया, अमरावती काफी चूड़ी हुई औरत थी, और उसने अपनी छूट से दो दो बच्चे निकल रखे थे, छूट काफी खुली हुई थी लेकिन देव का लुंड फटी हुई छूट को फाड़ने की भी ताकत रखता था,

अमरावती के मुँह से अह्ह्ह अह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह बस बस बस रुक जाओ रुक जाओ निकलने लगा, देव एक पल के लिए रुका,

देव- क्या हुआ

अमरावती- बहुत मोटा ह, इतना मोटा लुंड झेलना आसान नहीं ह, मेरी फैट रही ह,

देव- बहार निकलू क्या

अमरावती- नहीं नहीं बहार मत निकलना, वर्ण दुबारा नहीं डलवा पाऊँगी, कुछ पल रुको फिर धीरे धीरे डालना,

देव कुछ पल रुका उसने अमरावती की चूचियों के साथ खेलना शुरू क्र दिया, जैसे hi अमरावती की हालत ठीक सी लगी देव ने फिर से लुंड का दबाव बना दिया, न न करते हुए भी देव का आधे से ज्यादा लुंड अमरावती की छूट में घुस गया था, आज तक यहाँ तक अमरावती की छूट में किसी का पूरा लुंड भी नहीं गया था जहा तक देव का आधे से कुछ ज्यादा लुंड घुस गया था, अमरावती के मुँह से दर्द बहरी चिक निकल गाइट hi, जो बहार कड़ी दासी ने भी सुनी थी, दासी को भी हैरत हुई की अमरावती की चीख निकल सके ऐसा भी कोई ह क्या दुनिया में,

देव ने हलकी हलकी कमर हिलाई जिसे अमरावती दर्द से बिलबिला ुति थी, वो अपना सर इधर ुधा रपातक रही थी, देव बिना परवाह किये कमर हिलता रहा, और जिसका परिणाम ये हुआ की अमरावती की छूट ने हल्का हल्का पानी छोड़ना शुरू क्र दिया जिससे लुंड को आसानी होने लगी, कुछ देर में अमरावती का दर्द कुछ काम हुआ, उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे, छूट लुंड पैर फांसी हुई थी,

तभी देव ने हल्का सा लुंड बहार खींचा और फिर से घुसा दिया अमरावती का मुँह खुला रह गया, ahhhhhhhhhhhhhhhhh माँ मर गई फैट गई मेरी छूट ahhhhhhhhhhhhhhhhh

ये आवाज जब दासी के कानो में गई तो वो दौड़ क्र अंदर आई, और जब उसने देखा की देव का मुसल जैसा लुंड अमरावती की छूट में फसा हुआ ह, उसकी आँखे फटी रह गई,

वो कंपकंपाती हुई आवाज में बोली- महारानी जरा धीरे आपकी आवाज बहार आ रही ह,

दासी की आवाज से देव और अमरावती दोनों चौंक गए,

अमरावती- क्या करू इसका लुंड मेरी छूट फाड़ता hi जार है ह,

देव- महारानी आपकी आवाज किसी ने सुन ली तो अनर्थ हो जायेगा,

अमरावती- मैं खुद पैर काबू पाने की कोशिश करती हु, तू जा और नजर रख,

दासी बहार चली गई,

अमरावती- इतना दर्द तो फेल बार भी नहीं हुआ था, अगर तुम किसी कुँअरि लड़की किछूट छोड़ोगे तो कसम से उसे मर hi डोज,

देव- कोई तो ऐसी बानी होगी जो इस लुंड को आराम से अपनी छूट में ले लेगी,

देव ने अपनी कमर चली शुरू क्र दी और अमरावती लूँ ढकी मर झेल नहीं पाई और झड़ने लगी, झड़ने का ये फायदा हुआ की छूट और चिकनी हो गई और लुंड को आसानी हो गई और लुंड और अंदर घुस गया, अमरावती झड़ते हुए अपनी छूट उछाल रही थी और देव भी ढके लगा रहा था,

अमरावती झाड़ का शांत हुई लेकिन देव नहीं रुका वो लगातार छोड़ता रहा, अमरावती जीवन में पहेली बार झड़ने के बाद भी चुद रही थी, अमरावती ने देव को अपने उप्पेर लिटा लिया और देव धक्के लगाने लगा, कुछ hi देर में अमरावती फिर से झड़ने लगी, लेकिन देव अभी भी नहीं झाड़ रहा था, अमरावती को बड़ी हैरत हुई, लेकिन जो मजा उसे आ रहा था उसके लिए जीवन का असली सुख वही था, वो न जाने किस किस से चूड़ी थी लेकिन देव जस्या मर्द उसे पहेली बार मिला था,

अमरावती- मेरा दो बार हो गया ह तुम भी कर लो न

देव- मेरा इतनी जल्दी नहीं होता महारानी,

देव ने अमरावती को घोड़ी बना दिया और उसकी बड़ी सी गांड देव के सामने आ गई, देव का मन तो किया इसकी गांड में अपना ये मुसल घुसा दे लेकिन जल्दबाजी ठीक नहीं थी, उसने छूट में लुंड घुसाया और अमरावती के बाल पकड़ क्र उसकी सवारी करने लगा,






अमरावती की हालत ख़राब हो चुकी थी, वो अब चौथी बार झाड़ रही थी, अब लुंड और अंदर तक जार है था जिसे वो आराम से झेल रही थी,

अमरावती- ahhhhhhhhhh देव तुमने तो मुझे अपनी घोड़ी बना लिया अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह करो अपनी घोड़ी की सवारी, कैसी ह तुम्हारी घोड़ी, तुम्हे पसंद आई

देव- बहुत गदराई हुई घोड़ी ह

अमरावती- तुमने मेरा जीवन सफल क्र दिया, ऐसा सुख जीवन में कभी नहीं मिला था, तू लाजवाब हो aahhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhh मैं तो तुम्हारी गुलाम हो गई, काश तुम मुझे पहले मिले होते, ahhhhhhhhhhhh काश तुम मेरे बेटे होते मैं तो दिन रात तुमसे hi चुदती,

अमरावती की ये बात देव के दिमाग में तकर मार गई, मैं बीटा होता तो मुझसे चुदती, क्या कोई बीटा अपनी माँ को छोड़ सकता ह, और नजाने क्यों देव की आँखों के समाने निहारिका आ गई नंगी देव की आँखे बंद हो चुकी थी और बंद आँखों में उसे निहारिका दिख रही थी, और उसका जोश इतना बेहद गया की उसने पूरा रफ़्तार से अमरावती को छोड़ना शुरू क्र दिया, अमरावती मुँह के बल बिस्टेर पैर गिर गई लेकिन देव रुका नहीं वो पूरी ताकत से अमरावती को छोड़ रहा था, अमरावती ने अपना यह बिस्टेर में दबा लिया था उसकी चीखे बिस्टेर में डाब गाइट hi, और देव ने पुरे जोश में एक हुंकार भरी और अपना पूरा लावा अमरावती की छूट में बाहरणा शुरू क्र दिया, अमरावती में इतनी ताकत hi नहीं बची थी की वो देव को रोक सके, और देव इस जोश में था की उसे अहसास hi नहीं हुआ की उसने लावा कहा निकल दिया ह,






लुंड का वीर्य निकलते hi देव अमरावती के उप्पेर hi लेट गया और लुंड और अंदर तक घुस गया, अमरावती की साँस hi रुक गई थी, वो बेसुध सी बिस्टेर पैर उलटी पड़ी थी, और देव उसके उप्पेर लेता था लुंड छूट में घुसाए हुए, काफी देर तक दोनों शांत लेते रहे, दोनों की सांसो की आवाज कमरे आ रही थी,

कुछ देर बाद जब देव शांत हुआ तो उसे अहसास हुआ की वो क्या सोच रहा था, उसे खुद पैर बहुत गुस्सा आया, उसने आँखे खोली और अमरावती के उप्पेर उठा, उसका लुंड अभी भी खड़ा था जब लुंड छूट में से बहार निकला तो उसके साथ अमरावती की छूट भी बहार को खींचती हुई चली आई जिससे अमरावती को दर्द हुआ और उसकी फिर से चीख निकल गई,

देव ने उसकी गांड को शलया, अमरावती ने बस सर घुमा क्र देव को देखा उसका लुंड छूट के रास में भीगा हुआ अब तक खड़ा था अमरावती को हैरत हुई, लेकिन बोलने की हिम्मत नहीं थी, देव उसके बराबर में hi लेट गया,

अमरावती ने एक बरतें निचे गिराया जिससे उसकी दासी डोडी हुई अंदर आई और दोनों की हालत देख क्र शर्मा गई लेकिन जब उसकी नजर देव के खड़े लुंड पैर गई तो वो घबरा गई,

देव- क्या डुबारकरने की हिम्मत ह आप्मने अमरावती


अमरावती- नहीं दुबारा किया तो मैं मर जाउंगी, मुझे ठीक होने में हफ्तों लग जायेंगे,
 
अपडेट-24




देव ने कपडे पहने और अपने कमरे में आ गया और दासी अमरावती की सेवा में लग गई, जब उसने अमरावती की छूट देखि तो घबरा गई थी,

दासी- ये आपने क्या बाला ले ली महारानी ये तो किसी हवन का लुंड लगता ह,

अमरावती- आज इसने मुझे स्वर्ग की सेर करवा दी, ऐसा सुख दिया ह की जीवन भर इस सुख को नहीं भूल पाऊँगी, मैं तो इसकी कर्जदार हो गई, मैं क्यों इससे इतनी नफरत करती थी इससे ज्यादा प्यार करने लायक तो दुनिया में कुछ ह hi नहीं,

इधर देव अपने कमरे में आया और नहाया, फिर वो कपडे पहन क्र एक जगह बैठ गया उसके दिमाग में बड़ी हलचल हो रही थी, वो खुद पैर बहुत गुस्सा हो रहा था, वो अपने आप से नाराज था क्योकि अमरावती को छोड़ते समय उसके दिमाग में निहारिका का ख्याल कैसे आया, उसकी माँ का ख्याल क्यों आया, वो अपने आप की अपराधी मान रहा था, वो बहुत देर तक ऐसे hi बैठा रहा उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी अपनी माँ के पास जाने की, वही निहारिका अकेली लेती हुई थी उसके दिमाग में बस यही चल रहा था की देव अभी तक अमरावती के hi पास ह, वो खुश होना चाहती थी लेकिन उसका दिल खुश नहीं था, वो बस देव के बारे में hi सोच रही थी की वो अब तक आया क्यों नहीं, उसे बेचैनी हो रही थी,

जब काफी समय बीत गया तो निहारिका उठी और एक कपडा अपने उप्पेर डाला और देव के कमरे में चल दी इस उम्मीद में की देव वापस आ गया होगा, जब निहारिका ने कमरे में प्रवेश किया तो देखा देव अपना सर अपने हाथो पैर रखे बैठा ह, निहारिका घबरा गई वो दौड़ क्र देव के पास पहुंची,

निहारिका- देव क्या हुआ देव तू ठीक ह न, तू ऐसे क्यों बैठा ह,

निहारिका को वह देख क्र देव चौंक गया, उसके दिमाग में फिर से वही सब घूम गया, उसकी आँखे नाम हो गई,

देव की आँखों में नाम देख क्र निहारिका और घबरा गई, उसने देव को अपने सीने से लगा लिया, निहारिका का कपडा उसके शरीर से खिसक गया था, निहारिका की चूचिया फिर देव के चेहरे पैर रगड़ गई, जिस चीज से देव बच रहा था वही सब और अधिक हो रहा था,

निहारिका- क्या हुआ बेटे सब ठीक ह न, तू ठीक ह न, बता मुझे क्या हुआ किसी ने कुछ कहा क्यात एरा दिल दुखाया किसी ने, तू बता मुझे इस बार मैं किसी को नहीं बख्शूंगी, बिच में से चिर दूंगी, तू बता मुझे,

देव- नहीं माँ किसी ने कुछ नहीं कहा, लेकिन

निहारिका- लेकिन क्या बोल मेरा दिल बैठा जा रहा ह,

देव- मैंने अपराध किया ह माँ, बहुत बड़ा अपराध किया ह,

निहारिका- तू और कोई अपराध क्र दे ये हो hi नहीं सकता, मैं मान hi नहीं सकती, तू बता मुझे क्या हुआ ह, मुझे फैसला करने दे सही और गलत का,

देव- मैं नहीं बता पाउँगा माँ

निहारिका- तू अपनी माँ से नहीं बता पायेगा, हमारे बिच ऐसा क्या छुपा हुआ ह जिसकी वजह से तू मुझे बता नहीं सकता, क्या कुछ कमी रह गई मेरे से जिससे तू मुझे बात बताने से मन कर रहा ह

देव- नहीं माँ ऐसी बात नहीं ह, कमी मुझमे रह गई ह

निहिरका- ऐसा मत बोल बीटा तुझे मेरी कसम बता क्या हुआ ह,

देव ने सर निचे झुका लिया लेकिन अब माँ की कसम थी तो बताना hi था,

देव- माँ जब मैं अमरावती के साथ और हमारे बिच सम्भोग चल रहा था उस समय

निहारिका धयान से सुन रही थी, देव चुप हो गया,

निहिरका- बोल बोल शर्मा मत,

देव- उस समय मेरे दिल में न जाने क्यों आपका hi ख्याल आ रहा था, मैं अमरावती के शरीर से खेल रहा था और मेरा दिमाग उसके शरीर की तुलना आप से कर रहा था, जब मेरा लिंग उसके अंदर था तब भी मुझे आपके शरीर का ख्याल आ रहा था, और मैं अपना आप खोता जा रहा था, मुझे माफ़ कार्डो माँ मुझसे अपराध हुआ ह, सम्भोग के समय आपका ख्याल ाँ hi अपराध ह माँ

निहारिका कुछ पल चुप रही उसे समझ नहीं आया की वो क्या कहे, लेकिन न जाने क्यों उसके दिल में एक सकूं सा था उसे इस बात का बिलकुल बुरा या गलत नहीं लग रहा था, उल्टा उसका मन खुश हो रहा था, देव किसी और औरत के साथ होते हुए भी बस मेरे बारे में सोच रहा था ये hi बात निहारिका के लिए सबसे ज्यादा मायने रख रही थी,

निहारिका- तू शांत हो जा तूने कुछ गलत नहीं किया, तुझसे कोई अपराध नहीं हुआ ह,

देव- माँ लेकिन

निहारिका- मेरी बात धयान से सुन,

देव चुप हो गया

निहारिका- जब बच्चा पैदा होता ह तो औरत को दूध उसके जनम के 2 या ज्यादा से ज्यादा 3 साल तक आ पता ह, लेकिन मुझे आज तक आ रहा ह, कोई माँ अपने जवान बेटे के सामने अपनी चूचिया नहीं दिखती लेकिन मैं तुझे आज तक दूध पीला रही हु, क्योकि मेरा दूध रुक नहीं रहा और मुझे तकलीफ होती ह, क्या मैंने गलत किया,

देव ने न में सर हिलाया,

निहारिका- जब हमे महल से निकला गया तो पुरे राजय ने मुझे नंगा देखा और न जाने कैसे कैसे विचार अपने मन में लाये और मैं तेरे सामने भी नंगी थी, उस गुफा में जब जगे तब हम नंगे थे और उस दिन से हम नंगे hi हैं, क्या एक माँ अपने जवान बेटे के समाने नंगी रह सकती ह, क्या बीटा अपनी माँ के सामने ऐसे नंगा रह सकता ह, लेकिन हमने किया क्योकि हमारे हालत बदल चुके थे, हमारी दुन्या बदल चुकी थी, हमारे लिए ये दुनिया ये समाज ये परिवार सब रिश्ते ख़तम हो चुके थे, हम हर रिश्ते से उप्पेर उठ चुके थे,

देव- लेकिन हमारे विचार सुध थे,

निहारिका- तेरा ये खड़ा लुंड हमेशा मेरे सामने खड़ा रहता ह, जब हम एक दूसरे से चिपक क्र सोते हैं तो तेरे ये लुंड मेरे गुप्तांगो पैर रगता ह कहा कहा लगता ह क्या वो गलत नहीं ह, लेकिन हमारे लिए अब कोई फरक नहीं पड़ता, जब तुझे तकलीफ हो रही थी तो मैंने अपने हाथो से तेरे इस बड़े लुंड को हिला कर तेरी तकलीफ काम की थी क्या वो गलत नहीं था, लेकिन हमारे लिए गलत नहीं था,

तेरे पास मैं रहती हु वो भी हमेषा नंगी इसलिए तेरा दिमाग दुनिया की हर औरत की तुलना मुझसे hi करेगा, इसमें कुछ गलत नहीं ह, तूने कोई अपराध नहीं किया ह, समाज हमारे रिश्ते को क्या कहता ह मैं नहीं सोचती मैं इतना जानती हु की तू मेरा ह और मैं तेरी, हम दोनों एक दूसरे का सहारा हैं और एक दूसरे के पूरक हैं, और दिमाग में ऐसे विचार आ जाना कोई गलत नहीं हैं, और अगर तुझे फिर भी झिजक ह तो मैं तुझे अपनी तरफ से पूरी आजादी दे रही हु तू जो चाहे सोच सकता ह, तुझ पैर कोई अपराध नहीं होगा, सोच में बस एक औरत हु और तू एक मर्द ह, और इस दुनिया में हम दोनों से ज्यादा खूबसूरत जोड़ी कोई नहीं ह, मैं तेरे लिए कुछ भी कर सकती हु, और ये hi उम्मीद मैं तुझसे करती हु,

देव- माँ आप कितनी सुलझी हुई हैं, आप कितना आराम से सब कर देती हैं,

निहारिका- हालत सब सीखा देते हैं, लेकिन तू हमेषा ख्याल रखना कोई भी चीज तुझे कमजोर नहीं कर सकती, तुझे ऐसा बनना ह जिसे कोई झुका न सके, तेरे रस्ते में कुछ भी आये तुझे कुछ भी करना पड़े मुझे फरक नहीं पड़ता, और रही बात औरत की तो तेरे सामने हर औरत झुकनी चाहिए, चाहे वो कोई भी हो, मेरे अपमान का यही बदला ह,

देव निहारिका से लिपट गया,

निहारिका- पहले से कपडे उतर और मेरे कमरे आ जा, यहाँ कोई आ सकता ह वह कोई नहीं आएगा,

कुछ देर में दोनों माँ बीटा फिर से नंगे लेते हुए थे और देव का लुंड अभी भी खड़ा था,

निहारिका- ये अब तक खड़ा क्यों ह क्या अमरावती तुझे शांत नहीं क्र पाई,

देव- वो तो मुझे कभी शांत नहीं क्र पति अगर आपके ख्याल मेरे दिमाग में नहीं आते तो, आपका ख्याल आते hi मैं बेकाबू हो गया और मैं झाड़ गया,

निहारिका मुस्कुरा दी,

निहारिका- कोई बात नहीं, बता मुझे वह क्या हुआ,

देव ने सब बताना शुरू किया, जिसे सुनकर निहारिका के शरीर में बेचैनी सी हो रही थी, लेकिन वो खुद पैर काबू किये सब सुन रही थी, दोनों बात करते करते एक दूसरे से लिपट क्र सो गए,

अगली सुबह सूरज ज्वाला अभिजीत के साथ अमिता सोमिया और अक्षरा चल दिए घूमने फिरने के लिए, सूरज और अभिजीत ने पूरा इंतजाम किया हुआ था, उनके साथ कुछ सैनिक और दसिया भी गए थे, सभी सैनिक तीनो भाइयो के खास आदमी थे, अक्सर ने रीवा को मानाने की कोशिश की लेकिन अब रीवा ने उनके साथ रहने का दिखावा बंद क्र दिया था, अब उसे उनके साथ अच्छा नहीं लगता था, इसलिए वो नहीं गई, जब वो निकल रहे थे तो तीनो भाइयो के चेहरे पैर जो ख़ुशी थी और उन्होंने देव को देख क्र एक अजीब का मुँह बनाया, देव को लगने लगा की कुछ गड़बड़ ह,

लेकिन फ़िलहाल देव ने ज्यादा नहीं सोचा, उन सबको विदा करने अमरावती नहीं आ पाई थी क्योकि वो अपने बिस्टेर पैर से उठ hi नहीं प् रही थी, उसे बुखार चढ़ा हुआ था, उन सबके जाते hi देव भी निकल गया, देव अभेंद्र के पास पंहुचा,

अभेंद्र ने अब तक 10 लड़को को जोड़ लिया था, सभी देव के लिए जीने मरने के लिए तैयार थे, सभी में अपने राजय के लिए कुछ करने का जज्बा था, देव ने सभी को उनका काम समझा दिया, सभी अलग अलग दिशा में निकल गए,

देव- अभेंद्र वो लोग कब आ रहे हैं,

अभेंद्र- आज पहुंच जायेंगे, हमारे दो आदमी उन्ही के साथ हैं,

देव- किसी को पता न चले वो कोण हैं,

अभेंद्र- मुझे बस एक दर ह इतनी सूंदर लड़किया इस गाओं में रहेंगी तो लोग उनसे जरूर मिलने आएंगे, अगर किसी को पता चल गया तो गड़बड़ न हो जाये,

देव- तुम उन्हें अपने रिश्तेदार बताओगे, वो सब इस गाओं से काफी दूर के हैं, बस आचार्य जी का दर ह मुझे क्योकि उन्हें दूर दूर के गाओं के लोग जानते हैं,

अभेंद्र- वो काफी बीमार लग रहे थे क्यों न उन्हें उपचार के लिए कही भेज दिया जाये,

देव- अच्छा विचार ह लेकिन कहा भेजू,

अभेंदेरा- मैं इंतजाम करता हु,

शाम तक सुगंधा और रेवती गाओं में पहुंचने वाले थे, रेवती अब तक तो खुश थी लेकिन अब उससे देव के बिना रहा नहीं जा रहा था, वही कस्तूरी और उसकी माँ को अभेंद्र के आदमियों ने उठवा लिया था,

अभेंद्र- उन दोनों का क्या करना ह

देव- पहले सुगंधा से मिलूंगा मैं फिर उन माँ बेटी से,

शाम को सुगंधा और रेवती आ गई देव पहले से उनके इंतजार में वही खड़ा था, देव को देख क्र रेवती दौड़ क्र उससे लिपट गई,

सुगंधा बेचारी दुखी सी होकर रह गई,

रेवती- कहा चले जाते हो तुम, इतने समय बाद मिलते हो, मैं अपने परिवा रको छोड़ क्र सिर्फ तुम्हरे लिए आई थीऔर तुम hi मुझे नहीं मिलते, अब मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती,

देव- जल्दी hi हम साथ रहेंगे

रेवती- मुझे कोई बहाना नहीं सुन्ना अब, मैं अब तुम्हे कही नहीं जाने दूंगी,

देव- बस कुछ दिनों की बात ह

सुगंधा- देव क्या तुम्हारी कस्तूरी से बात हुई

देव- नहीं अभी नहीं पहले मैं तुमसे बात करना चाहता था, क्या बताया उन्होंने,

सुगंधा- वो कुछ बताने के लिए तैयार नहीं हैं, कस्तूरी तो बस अपना मुँह निचे किये रहती ह, जबकि माँ के तेवर हमेशा विरोधी हैं, मैं जब उनसे मिली तो उसके बादउन्होंने वह से भागने का विचार बना लिया था ये तो तुम्हारे आदमी सही समय पैर आ गए, और उन्हें पकड़ लिया, अब तुम hi उनसे पुछु उन्होंने ऐसा क्यों किया,

रेवती- किसने क्या किया मुझे भी कुछ बता दो

देव- सही समय आने पैर बता दूंगा, मैं तुम्हे सब बताऊंगा, फिर तुम्हे hi फैसला करना होगा,

रेवती- मेरा फैसला तो तुम्हारे लिए hi रहेगा,

देव मुस्कुराया

देव के मन में बस यही था की ये लड़की बहुत भोली ह, मैं इसके साथ गलत कर रहा हु, इसकी तो कोई गलती भी नहीं ह फिर ये क्यों सजा भुगत रही ह,

देव- मैं उनसे कल मिलूंगा, बहुत सवाल हैं उनके लिए,

देव अपने कार्य में लगा हुआ था जबकि राजगुरु और भवर सिंह राजा भैरव के बारे में जानकरी निकलने में लगे हुए थे लेकिन कोई सफलता नहीं मिल रही थी, अब कोई और तरीका नहीं बचा था,

राजगुरु- महाराज अब एक hi रास्ता ह इस बारे में पता करने का,

भवर सिंह- वो क्या

राजगुरु- भौमिक और सात्विक, सात्विक उस अमर शक्ति को खोजने hi गया हुआ था हो न हो उसे जरूर जानकारी मिली होगी,

भवर सिंह- तो बुलवाओ सात्विक को, और पता करवाओ,

राजगुरु- लेकिन उसकी कोई जानकरी नहीं ह वॉक अहा गया ह,

भवर सिंह- अपने आदमी भेजो और तुरंत सात्विक को खोजने कर यहाँ लाओ,

राजगुरु ने एक सेना की टुकड़ी तुरंत सात्विक की खोज में निकल दी,

वही सात्विक अपनी खोज में निकला हुआ था, वो एक जगह रुक क्र आराम कर रहा था, उसे अपने भाइयो की याद आ रही थी, उसके साथ घूम रहे आदमी भी सात्विक के पास आ गए, उनमे से एक आदमी बोलै

आदमी- महाराज आप किस सोच में दुबे हुए हैं, बहुत देर से देख रहे हैं हम,

सात्विक- कुछ नहीं अपने परिवार और भाइयो की याद कर रहा था,

आदमी- बहुत प्रेम ह आपको अपने भाइयो से

सात्विक- है मेरे बही ऐसे hi हैं, और भौमिक तो बहुत भोला ह,

आदमी- कुछ बताइये अपने भाई के बारे में हमारा कुछ समय व्यतीत हो जायेगा,

सात्विक ने भौमिक और राजगुरु के बारे में बताना शुरू किया, और बात करते करते जब सात्विक देवदूत की घटना पैर पंहुचा तो उसे अचानक याद आया की भौमिक जब उसके पास देवदूत को खोजने के लिए आय था तो एक तेज रौशनी उसे दिखाई दी थी, उस रौशनी को याद करते hi सात्विक खड़ा हो गया,

आदमी- क्या हुआ महाराज

सात्विक- वो शक्ति मिल गई, मुझे पहले क्यों नहीं याद आया उस शक्ति के बारे में, चलो जल्दी हमे कही पहुंचना ह,

आदमी- अभी तो हम आराम करने के लिए रुके थे,

सात्विक- तुम्हे वो शक्ति ढूंढनी ह या आराम करना ह,

इतना सुनते hi सरे आदमी खड़े हो गए, सात्विक और आदमी तुरंत चल दिए भवनपुरा की तरफ, क्योकि सात्विक ने वो गुफा वही देखि थी,

अब ये वह कोनसी आफत लेकर जा रहे थे ये देखना था,

रात को देव अमरावती के पास गया और उसके हाल चल पूछे, देव को अपने पास देख क्र अमरावती ख़ुशी से गड गड हो गई,

देव- कैसी हो आप

अमरावती- तुम्हे मेरी चिंता हुई ये देख क्र मुझे ख़ुशी हुई, लेकिन तुमने मेरी ऐसी हालत क्र दी ह की मैं हिल भी नहीं प् रही हु, मेरी छूट पूरी तरह फैट गई ह और सूज गई है, ऐसा कोण छोड़ता ह,

देव- माफ़ करना मैं अधिक जोश में आ गया था

अमरावती- अरे माफ़ी क्यों मांग रहे हो, तुमने तो मुझे जीवन का असली सुख दिया ह, ये दर्द मुझे इतना सकूं दे रहा ह की मैं बयां नहीं क्र सकती, एक औरत के लिए सबसे बड़ा उपहार ह ये दर्द,

देव- मेरे लिए कोई सेवा हो तो बताइये

अमरावती- मैं तो ये जानना चाहती थी तुम्हारे अंदर इतना बड़ा बदलाव आया कहा से, तुम कमल के हो गए हो, मैं एक दोस्त के नाते पूछ रही हु,

देव- किसी दिन फुर्सत में बताऊंगा, जब हम साथ होंगे अगल बार तब,

अमरावती खुश हो गई, देव वह से निकल क्र अपने कर्म में जा रहा था की उसे सौमित्र मिल गई,

सौमित्र- क्यों पहलवान कहा घूम रहे हो,

देव- कही नहीं बस ऐसे hi टहल रहा हु, लेकिन आप यहाँ इस वक़्त

सौमित्र- है बस मन नहीं लग रहा था, बच्चे सभी घूमने गए हैं, तो अकेले उदास सी हो रही थी तो सोचा अपने दोस्त से मिल औ,

देव- मुझे बुलवा लेती मैं आ जाता,

सौमित्र- तुम कहा आते हो, मैं खुद औ तो मिल लेते हो वर्ण कभी आते hi नहीं मिलने, की दोस्त की खबर भी ले लू, दिन्हार न जाने कहा घूमते रहते हो,

देव- आपके साथ भी घूम लूंगा आप कहो तो,

सौमित्र- मेरे साथ घूमने में तुम्हारा बहुत फायदा ह,

देव- मैं फायदा उठाना नहीं जनता

सौमित्र- इसलिए अब तक इतना दूर हो वानर सवर्ग की सेर कर चुके होते,

देव- सवर्ग की सेर वो कैसे,

सौमित्र- तुमने कभी पहाड़ियों पैर चढ़ क्र गुफा में परिवेश किया ह, किया तो होगा लेकिन बड़ी पहाड़ी और घेरि गुफा नहीं मिली होगी,

देव- मेरा आकर कुछ बड़ा ह मैं गुफा में ठीक से घुस नहीं पता,

सौमित्र- गुफा अपना आकर बदल लेती ह, तुम्हे कोई ढंग की गुफा नहीं मिली होगी,

देव- आप जानती हैं ऐसी गुफा

सौमित्र- मौका दो कभी मैं दिखा दूंगी,

देव- कही महाराज नाराज न हो जाये,

सौमित्र- महाराज अब गुफा में नहीं घुसते, और मेरे पास जो गुफा ह वो खली रहना पसंद नहीं करती,

देव- गुफा खली रही भी नहीं चाहिए वर्ण गुफा बंद हो जाती ह,

सौमित्र- तुम्हे बहुत पता ह गुफा के बारे में,

देव- बस अब तक पता hi ह गुफा ठीक से देखि नहीं ह,

सौमित्र- मेरे पास आ जाना, मैं दिखा दूंगी,

देव- आप आना मेरे कमरे में वह कोई देख नहीं सकेगा मुझे गुफा में घुसते हुए,

दोनों खुल क्र चुदाई की बात कर रहे थे और वो भी बड़ी शालीनता से,

तभी वह काम्य आ गई,

काम्य- क्या बात हो रही दोनों माँ बीटा में,

माँ बीटा सुनकर दोनों एक दम झेप गए,

सौमित्र- देव मेरा बीटा नहीं ह,

काम्य- अरे तुम्हारे पति का बीटा तुम्हारा भी तो बीटा हुआ न, वैसे क्या बात हो रही थी,

सौमित्र- कुछ नहीं मैं देव को गुफा में घुसने के तरीका समझा रही थी,

काम्य- अरे गुफा में घुसना तो सबको आता ह, इसमें क्या सीखना,

देव- नहीं बुआ मैं अभी सिख रहा हु, आपको आता ह तो आप सीखा देना,

देव की बात पैर कमाया थोड़ी झेप गई जबकि सौमित्र की हसी निकल गई,

देव वह से निकल गया,

काम्य- क्या चल रहा ह तुम्हे कुछ सफलता मिली या नहीं

सौमित्र- दोस्ती करके देख लिया सब तरह से बात निकलवाने की कोशिश क्र ली लेकिन ये हर बार ताल जाता ह, लेकिन अब मुझे औरत का सबसे बड़ा हतियार इस्तेमाल करना होगा, उसके बाद तो ये मेर सामने तोते की तरह सब बोलेगा,

काम्य- तो जल्दी करो समय बीत रहा ह,

सौमित्र- कोशिश तो ये hi ह,

इधर देव निहारिका के पास पंहुचा तो वह रीवा बैठी हुई थी,

देव- तुम उन्सबके साथ घूमने क्यों नहीं गई,

रीवा- अब मेरा मन नहीं करता उनके साथ रहने का,

देव- क्यों अब तुम्हे उनसे सम्मान नहीं छाइये,

रीवा- सम्मान तो मैंने कभी पाया hi नहीं, उनके साथ रहने से हमेशा अपमान hi मिल यह, माँ का प्यार ठीक से मिल पाया, पिता तो कभी प्यार देते hi नहीं थे, भाई को प्यार कभी दे नहीं पाई, और उन्होंने लोगो ने तो कभी अपना समझा hi नहीं, मेरे साथ जो हुआ वो होना hi चाहिए था, मैं इसी लायक हु,

निहारिका- जो बीत गया उसे भूल जा, और आगे के बारे में सोच,

रीवा- माँ ऐसा लगता ह जिंदगी थम सी गई ह, आप दोनों वापस आ गए मेरे लिए सबसे बड़ी ख़ुशी ये hi ह, लेकिन ऐसा लगता ह जैसे सब कुछ अधूरा ह, ऐसा लगता ह जैसे मैं अब मैं नहीं हु, मेरे अंदर सब कुछ बदल गया ह,

निहारिका- तेरी शादी करवा देते हैं,

रीवा- हुम्म्म शादी, मेरी तो किस्मत भी ऐसी ह की मैं न खुश हो सकती हु न दुखी, दो बार मेरी शादी होने वाली थी और दोनों बार उस प्रताप सिंह से, दोनों बार मैं बच गई तो मन करता ह ख़ुशी मनौ, लेकिन दो बार शादी टूट गई ह अब शायद hi कभी कोई मुझसे शादी करेगा इस बात का दुःख मनौ,

निहारिका- संसार में हर लड़की के लिए कोई न कोई बना होता ह,

रीवा- लेकिन क्या कभी लड़की की पसंद का पति नहीं मिल सकता,

निहारिका- मिलता ह जरूर मिलता ह,

रीवा- लेकिन जैसा लड़का मुझे पसंद ह इस संसार में मुझे नहीं मिल सकता,

रीवा ने ये बात देव को देख क्र बोली, निहारिका ने भी इस बात पैर गोर किया,

निहारिका- जब सच्चे मन से कुछ पाने की इच्छा की जाती ह तो वो जरूर मिलता ह, बस मन साफ़ होना छाइये और उसे पाने की इच्छा मजबूत होनी चाहिए,

रीवा- उसे पाने के लिए मैं कुछ भी कर सकती हु,

इधर सात्विक ने भवनपुरा की सीमा में प्रवेश क्र लिया था, रात काफी हो चुकी थी और बाकि आदमी थक गए थे वो सब आराम करने के लिए रुक गए,

सात्विक वही डेरा जमा कर अपने धयान में बैठ गया, और उसके आदमी निकल गए गाओं में अपना शिकार ढूंढने, और जल्दी hi वो गाओं की कुछ औरतो को उठा लाये, और उनके पालतू जानवर भी उठा लाये, और उन सबने उन औरतो का बलात्कार किया, वो औरते चीखती रही लेकिन उनकी पुकार सुनने वाला वह कोई नहीं था, उन आदमियों ने औरतो का बलात्कार करके ऐसे hi छोड़ दिया और उनके जानवरो को भून क्र खा गए, सात्विक को इस सब से कोई फरक नहीं पद रहा था,

वही रात में सौमित्र चुपके से देव के कमरे की तरफ चल दी, आज उसके इरादे देव को अपने जाल में पूरी तरह फ़साने के थे, अब वो खुद वह फसने जा रही थी या देव को फ़साने ये तो सुबह hi पता चलने वाला था,

वही अमिता सोमिया और अक्षरा अपने भाइयो या यु कहु अपने शैतान भाइयो के साथ पहुंच चुकी थी अपनी मंजिल पैर,

रात हो चुकी थी तो उन्हें पता hi नहीं चला वॉक अहा आ चुके हैं, वो महल से तो निकले थे पहाड़ो पैर बर्फ में घूमने के लिए, वो बर्फ में तो पहुंचे लेकिन कही और, ये जगह भवन पूरा से काफी दूर थी, यहाँ कभी कोई नहीं आता था क्योकि यहाँ ठण्ड बहुत रहती थी, यहाँ भवर सिंह का एक छोटा सा महल बना हुआ था, जो कोई खतरा होने पैर राजा को छिपाने के लिए बनाया गया था, इसकी जानकरी बस अभिजीत को थी, जो उसे काम्य ने बताई थी, ताकि अगर महल में कोई खतरा हो तो वो यहाँ आकर चुप सके, लेकिन अभिजीत ने ये जानकरी सूरज को भी दे दी थी, और दोनों ने इसे अपनी आयाशी का अड्डा बना लिया था, और न जाने कितनी hi लड़कियों को यहाँ लेकर उन्होंने बलात्कार किया और यही बर्फ में दबा दिया, उन बेचारियो की कोई खोज तक नहीं मिली थी,

आज इस जगह पैर तीनो बहन आ गई थी, और बेचारी ये नहीं जानती थी जिन भाइयो को वो अपनरक्षक समझ क्र यहाँ आई थी वो hi उनके भक्षक बने बैठे थे,

रात में…

अभिजीत- चले क्या रात की थकन दूर कृते हैं, मुझसे सबर नहीं हो रहा,

सूरज- अभी नहीं बहुत रात हो चुकी ह, और यहाँ अँधेरा भी बहुत ह, अगर कुछ बात बिगड़ी तो हम सम्हाल नहीं पाएंगे,

ज्वाला- पूरी तैयारी के साथ करते हैं, दिन में उन्हें पटाने की कोशिश करेंगे अगर नहीं मणि तो कल रात में उद्घाटन कर देंगे,

अभिजीत- इन दसियो का क्या करेंगे,

सूरज- हमारे साथ 30 सैनिक हैं, जो हमारे खास आदमी हैं, और यहाँ खाना बनाना वाली और अलग अलग काम के हिसाब से 10 दसिया हैं, क्यों न सभी दसियो को अपने सेनिको को दे दे वो भी मजे कर लेंगे, और हमारा राज हमेषा छुपा कर रखेंगे,

ज्वाला- लेकिन अगर लड़किया नहीं मणि तो हमे जबरदस्ती करनी होगी और हमारे किसी सैनिक ने कही बहार बता दिया तो क्या होगा,

अभिजीत- तो इन सभी सेनिको को यही मार देंगे और बोल देंगे की उस राक्षश ने मर दिया, कोई शक भी नहीं करेगा,

ज्वाला- अगर लड़किया छोड़ने के बाद भी नहीं मणि तो क्या करेंगे, उन्होंने खर जाकर सब बता दिया तो क्या होगा,

अभिजीत- अगर ये लड़किया भी नहीं मणि तो इनके साथ यहाँ खूब मजे कर्नेगे फिर इन्हे भी यही मार क्र दबा देंगे, और सब इल्जाम उस राक्षश पैर दाल देंगे,



अभिजीत की बात से दोनों भाई उसका मुँह देखते रह गए, लेकिन उसके चेरे पैर कोई झिजक या रहम नहीं था, बस एक क्रूरता थी,
 
अपडेट- 25




रात ने धीमी रौशनी में सौमित्र देव के कमरे में कड़ी थी और देव बस एक कपडा अपनी कमर पैर लपेटे हुए उसके सामने खड़ा था, देव का मजबूत शरीर सौमित्र को अपनी तरफ आकर्षित क्र रहा था,

देव- माफ़ करना संयत्र जी, रात में मैं कपडे नहीं पहनता,

सौमित्र- रात में तो मूरख लोग कपडे फेंटे हैं, रात कपडे पहनने के लिए नहीं होती उतरने के लिए होती ह,

देव- अब मेरे पास कोई ह hi नहीं जिसके कपडे उतर सकू, आपके पास तो ह कपडे उतरवाने वाले भी और उतरने वाले भी,

सौमित्र- तुम राजकुमार हो और इतने खूबसूरत और ताकतवर नौजवान हो तुम्हारे सामने तो पुरे राजय की लड़किया अपने आप को बिछा देंगी, तुम्हे किसकी चिंता,

देव- उनमे वो बात नहीं ह, इस राजय में कोई आप जैसी खूबसूरत और इतने भरे हुए शरीर की मालकिन हो तो किसी के बारे में सोचु,

सौमित्र- तुम्हे मेरा शरीर पसंद आया,

देव- ऐसा कोई ह जो आपको और आपके शरीर को पसंद न करे,

सौमित्र- क्या पसंद आया तुम्हे मेरे शरीर में,

देव- क्या क्या तारीफ करू, ये नशीली आँखे और ये खूबसूरत हॉट और पतली गार्डन और आपके उभरे हुए बड़े और गोल शता..

सौमित्र- है है बोलो न खुल क्र बोलो दोस्तों में कुछ भी बोलने की आजादी ह,

देव- बोल दू,

सौमित्र- बेझिझक

देव- आपकी ये उभरे हुए भरी बहरी चूचिया, जो आपकी चोली फाड़ने को तैयार रहते हैं, हमेशा बहार झांकते रहते हैं, आपका पतला पेट और आपके उभरे हुए नितम्ब, जिन पैर आपका घागरा कैसा हुआ रहता ह, शायद आप अपने कपडे खुद कैसे हुए सिलवाती हैं, जिनमे से आपके उभर दूर से hi दीखते हैं,

सौमित्र- आज जाकर किसी ने असली सुंदरता की पहचान की ह मेरी, मैं जब से जवान हुई थी मेरा शरीर पैर सबकी नजर रहती थी, और औरत के उस शरीर का फायदा hi क्या जो मर्दो की नजरो में वासना न भर दे, इसलिए मुझे ये कैसे हुए कपडे पहनना पसंद ह,

देव- आपके अंदर की कामुकता साफ़ दिखती ह आपके शरीर से,

सौमित्र- मेरे अंदर कितनी कामुकता ह इसका तो तुम अंदाजा hi नहीं लगा सकते, 2—2 मर्द मिलकर भी मेरी कामुकता को शांत नहीं क्र सकते,

देव- शायद आपको कोई असली मर्द मिला hi नहीं,

सौमित्र- उस असली मर्द की hi तो तलाश ह, ये राजा लोग इतनी इतनी शादिया कर लेते हैं और और नै नै रानियों के घगरो में घुसे रहते हैं, वो ये भूल जाते हैं उनकी और भी रनिया हैं, जिनकी वासना को शांत करना भी उन्ही राजाओ की जिम्मेदारी ह, और जब उम्र बढ़ती ह तो कामुकता भी बढ़ती जाती ह, दुनिया जवान होती लड़की को रोकने में लगी रहती ह लेकिन ये दुनिया भूल जाती ह की असली वासना की आग उस औरत में होती ह जिसने इस वासना के खेल का मजा लिया हुआ होता ह और फिर वो मजा मिलना बंद हो जाता ह, वो अपनी आग को बुझाने के लिए कुछ भी कर सकती ह, और कोई साधारण मर्द उस आग को बुझा नहीं पता, ऐसी hi मेरी आग ह

देव- शादी के बाद तो औरत को अपनी वासना को काबू में रखना होता ह,

सौमित्र- तुम जानते हो एक औरत के अंदर किसी भी मर्द से 10 गुना ज्यादा गर्मी होती ह, और एक मर्द कुछ दिन भी बिना अपनी प्यास बुझाये नहीं रह सकता, फिर औरत कैसे रहती होगी, वो सालो तक तड़पती रह जाती ह, हम औरते बस समाज और इज्जत के दर में अपनी वासना को दबा कर रखती हैं, जब हम अपना सब कुछ अपने पति के लिए न्योछावर कर देती हैं तो क्या उनकी जिम्मेदारी नहीं होती की हमारी जरुरत को पूरा करे,

देव- है ये तो सही बात ह

सौमित्र- तुम जानते हो शादिया क्यों की जाती ह,

देव- शादी तो उप्पेर वाला जोड़ी बना क्र भेजता ह,

सौमित्र- उप्पेर वाला किसी एक के साथ hi जोड़ी बनाएगा न, फिर ये राजा इतनी शादिया क्यों करते हैं,

देव सोच में पद गया,

सौमित्र- जब लड़की जवान होती ह तो उसके अंदर वासना का सैलाब उठने लगता ह, और कोई मर्द उसका फायदा न उठा ले, और कितने मर्द उसका फायदा उठा सकते हैं इस दर से शादी की पार्था समाज में आई, एक मर्द चुनने लगे जिसके साथ शादी करने लगे ताकि उस औरत की वासना को शांत रखा जा सके, और वो उस मर्द के बच्चे पैदा करे और उसके घर को सम्हाल ले, इससे औरत की सहारा मिलना शुरू हुआ और उसकी वासना की आग को शांत रखने का तरीका मिल गया, धीरे धीरे ये पार्था बन गई, लेकिन मर्दो पैर रोक नहीं थी वो कितनी भी शादी करते रहे, धीरे धीरे बात एक शादी पैर आ गई लेकिन ये राजा कभी खुद पैर कोई नियम नहीं लगते,

इन्होने अयाशी के लिए कई कई शादिया की, किसी ने राजाओ से दोस्ती करने के लिए शादिया की, एक मर्द एक hi औरत को संतुष्ट कर सकता ह, लेकिन इन्होने कई कई रनिया राखी फिर ये किसी को संतुष्ट नहीं क्र पाए, और ये नै नै लड़कियों दसियो के पीछे घूमते और इनकी रनिया ताकतवर सेनिको के साथ गुलछर्रे उड़ाती आ रही है,

देव- औरतो को भी मर्दो जैसी आजादी मिलनी चाहिए अपनी वासना को शांत करने की,

सौमित्र- अगर ऐसा होता तो तुम्हारे माँ को 20 साल से तड़पना नहीं पड़ता, मुझे हैरत होती ह निहारिका को देख क्र वो 20 साल से इस आग को कैसे सम्हालती आ रही ह, मैं 20 दिन खुद को नहीं रोक सकती, वो कितनी प्यासी होगी, मैं तो इसका अंदाजा भी नहीं लगा सकती, वो अंदर से जल रही होगी, जीवन का इतना बड़ा सुख उसे नहीं मिला, और जब औरत को सम्भोग नहीं मिलता तो उसके अंदर की साडी खुशिया मर जाती हैं,

सौमित्र की बात देव के दिमाग में घंटियों की तरह बजने लगी, उसने कभी अपनी माँ की इस तकलीफ को तो समझा hi नहीं, अब तक देव ये तो समझ चुक्का था की हर सम्भोग हर इंसान की एक बहुत बड़ी जरुरत ह, और पूरी दुनिया इसी सम्भोग के पीछे पागल हो राखी ह, लेकिन आज तक उसने अपनी माँ के बारे में इस तरह से नहीं सोचा था, आज सौमित्र की बातो ने उसके दिमाग में तूफ़ान सा ला दिया था,

सौमित्र- ऊऊफफफफफफ माफ़ करना मैं कहा का ज्ञान लेकर बैठ गई, ये ज्ञान का समय नहीं ह,

देव- जी जी है

सौमित्र- क्या हुआ क्या सोचने लगे,

देव- कुछ नहीं बस ऐसे hi,

सौमित्र- ज्यादा मत सोचो, तो हम कहा थे है असली मर्द पैर, क्या तुम असली मर्द हो,

देव- वो तो आप hi बता पाओगी की मैं कैसा मर्द हु,

सौमित्र- तुम्हारे सरे गन एक सम्पूर्ण मर्द जैसे hi हैं, लेकिन बिस्टेर में कैसे हो वो तो बिस्टेर पैर hi पता चल सकता ह,

देव- आप क्या चाहती हैं,

सौमित्र- एक औरत जो पूरी तरह कामुक ह, और इतनी रात में किसी गैर मर्द के कमरे में जो आधी नंगी हालत में खड़ा ह, उसके सामने कड़ी ह और वासना और सम्भोग पैर ज्ञान दे रही ह, तुम hi सोच लो वो क्या छाती ह, अगर इतना नहीं सोच सकते तो तुम कुछ नहीं कर पाओगे,

देव हल्का सा मुस्कुराया और तुरंत सौमित्र की कमर में हाथ दाल क्र खुद से चिपका लिया, सौमित्र अह्ह्ह करती हुई देव से चिपक गई, सौमित्र जैसे hi देव से चिपकी देव को अहसास हो गया की सौमित्र ने जो कपडा पहना हुआ ह उसके निचे उसने कोई दूसरा कपडा नहीं पहना ह, सौमित्र की चूचिया उस सिल्क के कपडे में से सीधे देव की नंगी छाती से रगड़ खा रही थी, देव को सौमित्र के उभरे हुए चुचकों का अहसास हो रहा था,

सौमित्र- बहुत ताकत ह तुम्हारे अंदर, कमल की ताकत पाई ह तुमने, कहा से मिली ये ताकत,

देव- बस आप उप्पेर वाले की किरपा से मिल गई,

सौमित्र ने अपनी कमर देव से चिपका दी और उसकी जांघो के बिच उसे देव के खड़े लुंड का अहसास हुआ, सौमित्र और देव दोनों के hi कपडे एक दम चिकने थे, और दोनों ने hi निचे कुछ नहीं पहन रखा था,

लुंड की लम्भे और मोटाई का अहसास होते hi सुमिरता के शरीर में सिरहन सी दौड़ गई, सौमित्र ने देव की कमर पैर हाथ फिराए,

सौमित्र- ऐसी ताकत इतनी आसानी से नहीं मिलती, क्या कोई तपश्या करके भगवान् को पर्सन किया था या किसी ने वरदान दिया ह,

देव- आपको इस पल को जीना ह या ताकत का परिक्षण करना ह,

सौमित्र- मैं जिस मर्द की होने जा रही हु क्या उसके बारे में जानने का अधिकार नहीं ह मुझे,

देव- सवाल में दम ह, अच्छा आपके हर सवाल का जवाब दूंगा अगर आपने मुझे पूरी तरह संतुष्ट क्र दिया तो,

सौमित्र- हहहहहए अच्छा जी, ये तो हुई तुम्हारी शरत अब मेरी शरत, अगर तुम मुझे पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाए तो क्या करोगे,

देव- है ये बात सही ह, आप hi बताओ क्या सजा होगी,

सौमित्र- कोई सजा नहीं बस एक वचन देना होगा, अगर तुम मुझे संतुष्ट नहीं क्र पाए तो तुम हमेशा मेरे होकर रहोगे ये ताकत सिर्फ मेरे लिए उठेगी

देव- मतलब आप मुझे अपना गुलाम बनाना चाहती हैं,

सौमित्र- नहीं नहीं गुलाम नहीं बस अपना बनाना छाती हु,

देव- ठीक ह दे दिया वचन, लेकिन इन दोनों hi शर्तो में आपका फायदा हुआ, इसमें मेरा क्या फायदा हुआ,

सौमित्र- ूउम्मम्मम्म अच्छा ये शरत मुझ पैर भी लागु होती ह, अगर मैं तुम्हे संतुष्ट नहीं कर पाई तो हमेशा के लिए तुम्हारी गुलाम बन जाउंगी, जो तुम बोलोगे जैसा तुम बोलोगे वही करुँगी, इस संसार में मेरे लिए तुमसे ज्यादा खास कोई नहीं होगा ये मेरा वचन ह,

देव- वचन निभा पाओगी

सौमित्र- मैं चाहे जैसी भी हु, कितना भी बुरा करती हु लेकिन अगर वचन दे दिया तो कभी पीछे नहीं हठती,

सौमित्र को अपने आप पैर बहुत विश्वास था, क्योकि वो जानती थी की उसके अंदर इतनी गर्मी ह की वो 3 बार सम्भोग करने के बाद भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होती, उसने इतनी कामोत्तेजक औषधीय खाई थी की उसके अंदर की गर्मी शांत hi नहीं होती थी, भवर सिंह को लगातार कामोत्तेजक औषदीय खिला क्र भी वो सौमित्र को कभी संतुष्ट नहीं कर पाया, सौमित्र को लगता था की शायद दुनिया का कोई मर्द उसे संतुष्ट नहीं कर पायेगा, वो जानती थी की अगर एक जबरदस्त चुदाई हुई तो मर्द एक बार झड़ने के बाद काफी समय तक दुबारा अपना लुंड खड़ा नहीं कर पता, इसी विश्वास में उसने शरत लगा ली थी,

देव ने अपने हाथ और कास दिए और सौमित्र को खुद से चिपका लिया, और एक हाथ सौमित्र की गांड पैर ले गया, चिकने कपडे के निचे नंगी गांड पैर हाथ रखते hi देव को आनंद की अनुभूति हो गई थी, उसने मजबूत हाथो से सौमित्र की गांड पैर एक थपड मारा और कास क्र भींच लिया, सौमित्र के मुँह से दर्द भरी आह्ह्ह्हह निकल गई थी,

सौमित्र ने तुरंत देव के बालो कोपकड़ा और कास कर खींच क्र सर पीछे किया, देव उसे देख क्र मुस्कुरा रहा था, सौमित्र मुस्कुराई और अपने हॉट देव के होतो से मिला दिए, सौमित्र का हॉट चूमने का तरीका बड़ा खतरनाक था, वो होतो को चबा रही थी, देव सौमित्र को अच्छे से समझ चुक्का था ो जान गया था की सौमित्र को धुधर चुदाई पसंद ह, देव ने भी उसके होतो को चूसना शुरू क्र दिया और उसकी गांड को मसलता रहा, सौमित्र का एक हाथ देव की जांघो के बिच पहुंच चुक्का था, और जैसे hi सौमित्र के हाथ में देव का वो अंग आया जिसके लिए ये शर्ते लग रही थी सौमित्र का मुँह खुला रह गया, उसने देव के होतो को चूसना बंद क्र दिया और सर ीचे करके देव को देखा, फिर झटके वो अलग हुई और देव के सामने कड़ी हो गई, उसने हाथ बढ़ा क्र देव का बंधा हुआ कपडा खोल दिया, और कपडा खुलते hi देव का लुंड उछाल क्र सामने आ गया, सौमित्र का गाला सुख गया, उसने घेरि साँस भरते हुए देव के लुंड को देखा फिर देव को देखा,






देव- क्या हुआ सौमित्र जी,

सौमित्र- ये ये ये क्या ह,

देव- वही जिसकी आपको जरुरत ह,

सौमित्र- ये इतना बड़ा कैसे ह, उस दिन मैंने देखा था तब तो इतना बड़ा नहीं था,

देव- आपने इसे सोया हुआ देखा होगा,

अब सोमिता की फैट रही थी, देव के लुंड का आकर देख क्र hi उसकी हालत ख़राब हो रही थी,

देव- आपको दर लग रहा ह क्या, क्या शरत से दर गई आप, कही हार न जाओ,

सौमित्र ने एक दम देव को देखा, बात तो सच थी की सौमित्र दर गई थी एक तो लुंड का आकर और हर का दर,

सौमित्र- मैं किसी से नहीं डर्टी और ये कितना भी बड़ा क्यों न हो अंदर जाकर खली तो होगा hi, बस आकर का दर ह थोड़ा दर्द देगा,

देव- अब ये आपके उप्पेर ह आप कितना प्यार देती हैं इसे ताकि ये दर्द न दे,

सौमित्र के दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था, वो हारना नहीं चाहती थी, लेकिन अब कोई तरीका सूझ नहीं रहा था, और सामने जो लुंड था वो सौमित्र को डरा तो रहा था लेकिन अपनी तरफ किसी चुम्बक की तरह खींच भी रहा था, सौमित्र की आँखों नशा उतरने लगा था छूट गीली होने लगी थी,

सौमित्र देव के सामने अपने घुटनो पैर बैठ गई, और लुंड को अपने हाथो में पकड़ लिया, सौमित्र दोनों हाथो से लुंड की लम्बाई को नापने की कोशिश कर रही थी, फिर वो लुंड को आगे पीछे करने लगी, और लुंड को उठा क्र पलट क्र देखने लगी, सौमित्र ने अपना मुँह खोला और लुंड को मुँह में भरने की कोशिश की,






उसने लुंड को मुँह में भर तो लिया लेकिन ऐसा लगा जैसे लुंड मुँह में फास गया हो, सौमित्र ने बड़ी मुश्किल से लुंड को बहार निकला, उसके मुँह से थूक टपक रहा था, सौमित्र ने लुंड को निचे तक छठा,

सौमित्र कर तो रही थी लेकिन दर भी रही थी, उसने देव एक ाँद अपनी मुठी में पकडे और दबा दिए, लेकिन देव के चेरे पैर कोई दर्द नहीं था, ये देख सौमित्र और चिंता में आ गई, सौमित्र कुछ कहना चाहती थी की तभी महल का घंटा बजने लगा,

ये घंटा तभी बजता था जब कोई खतरा होता था, घंटा बजते hi सौमित्र को मौका मिल गया वो कड़ी हो गई,

सौमित्र- लगता ह महल पैर हुम्ला हुआ ह, मुझे जल्दी से कमरे में जाना होगा,

उसने अपने कपडे उठाये और जल्दी से दौड़ती हुई चली गई, देव ने भी कपडे पहने और बहार आ गया,

बहार बहुत से सैनिक कुछ लोगो को घेरे हुए खड़े थे, भवर सिंह और राजगुरु महल की चाट पैर खड़े थे, देव भी वह पहुंच गया,

भवर सिंह - क्या हुआ ह, कोनसा खतरा आ गया अब

सैनिक- महाराज ये लोग महल के अंदर चोरी से घुस आये हैं,

भवर सिंह- कोण हैं ये

उस भीड़ में से एक आदमी- महाराज हम आपके hi राजय के एक गाओं से हैं और आपके पास फर्याद लेकर आये हैं, हमे बचा लीजिये, हमारे परिवारों को बचा लीजिये,

राजगुरु- क्या हुआ ह, और ये कोनसा समय ह फर्याद करने का, और अगर बड़ी शंश्य थी तो अपने गाओं के पास के सेनिको को बताना चाहिए था,

आदमी- हमने बताया लेकिन कोई हमारी सहायता नहीं कर सका,

सैनिक- ये बकवास कर रहा ह,

देव- तुम चुप रहो और उन्हें बोलने दो, और इन पैर तलवारे क्यों तान राखी हैं, हटाओ इन्हे

देव निचे पहुंच गया और उन गाओं वालो को आराम से बैठाया,

देव के वह पहकहने से भवर सिंह और राजगुरु भी वही आ गए,

भवर सिंह- ये लोग दुश्मन भी हो सकते हैं,

देव- आप अपने hi राजय के लोगो को नहीं पहचान सकते फिर कैसे राज करेंगे,

भराव सिंह गुस्से में- देव

देव ने भवर सिंह पैर कोई धयान नहीं दिया,

देव- है आप लोग बताइये क्या हुआ,

आदमी- राजकुमार हमारे गाओं में कुछ लोग आ गए और उन्होंने हमारी बहु बेटियों को उठा लिया और हमारे जानवर भी ले गए, हमने बचने की कोशिश की तो उन्होंने गाओं के कई लोग मार दिए,

देव- आपको गाओं के मुखिया के पास जाना छाइये था, उसके पास सैनिक होते हैं

आदमी- मैं गाओं का मुखिया hi हु राजकुमार, उन लोगो ने सेनिको को मर दिया, और मेरी बेटी को ले गए, वो बहुत ताकतवर हैं, हमने दूसरे गाओं वालो से मदद मांगी लेकिन कोई मदद के लिए नहीं आया सब दर गए, इसलिए हम फर्याद लेकर यहाँ आ गए, रात हो जाने की वजहसे हमे कोई मिलने नहीं दे रहा था इसलिए हम चुपके से घुसे,

राजगुरु- कितने लोग थे वो, क्या कोई सेना थी

आदमी- नहीं राजगुरु सेना नहीं थी लेकिन 10-12 लोग होंगे हम ठीक से गईं नहीं पाए, वो हमारी लड़कियों और जानवरो को लेकर जंगल में चले गए थे,

भवर सिंह- राजगुरु एक सेना की टुकड़ी सुबह होते hi वह भेजिए,

आदमी- महाराज सुबह तक तो वो उन्हें न जाने क्या करंगे,

देव- आप चिंता मत कीजिये मैं चलता हु आपके साथ,

राजगुरु- रात में अकेले

देव- राजपरिवार का पहला कर्तव्य ह अपनी परजा की सुरक्षा करना,

इतना बोल क्र देव उन गाओं वालो के साथ चल दिया,

राजगुरु- कुछ सैनिक उन सबके साथ जाओ, और साडी जानकरी लेकर दो हमे,

गाओं महल से काफी दुरी पैर था, कुछ घंटो का सराफ था, गाओं के लोग बैल गाड़ी से वह आये थे, देव ने जल्दी से घोड़ो का इंतजाम किया और कुछ लोगो को साथ लेकर उस तरफ दौड़ पड़ा,

फिर भी वह पहुंचने में समय लग गया था, उसके बाद देव कुछ गाओं वालो के साथ उस जंगल में घुस गया, जहा वो आदमी सबको लेकर गए थे, जंगल एक दम सुमसान था, काफी समय ढूंढने के बाद किसी के रोने की आवाज उन्हें आई, देव उस तरफ दौड़ पड़ा, और जैसे hi देव वह पूछा तो देव की आँखे भर आई,

देव के पीछे सैनिक और गाओं वाले भी थे, सामने का नजारा बहुत डरावना था, गाओं की जितनी भी लड़किया थी सब वह नंगी पड़ी थी, किसी को पेड से नंगा करके बंधा हुआ था तो किसी के दोनों पेअर खोल क्र अलग अलग डिश में बंधे हुए थे, और साफ़ दिख रहा था की उन्हें बांध क्र उनके साथ दुराचार किया गया ह, सभी लड़किया मरने जैसी हालत में थी, उनके गुपतनगो से खून निकल रहा था,

गाओं वालो ने दौड़ क्र सभी पैर कपडे ढके और उन्हें खोला, वह चारो तरफ खून hi खून था, जानवर कटे हुए पड़े थे, उनके अलावा और कोई नहीं था, मतलब वो लोग जा चुके थे,

देव सबको लेकर गाओं में पंहुचा, लड़कियों के उपचार के लिए वेद आ गए, उन सभी लड़कियों में से बस एक लड़की कुछ होश में थी बहुत दरी हुई थी और बस रोये जा रही थी, गाओं वालो ने उसे थोड़ी हिम्मत बंधे,

वही देव का गुस्सा बढ़ता जा रहा था, देव उस लड़की के सामने बैठा,

देव- तुम अब सुरक्षित हो, बस एक बार ये बता दो की वो लोग कोण थे और कहा गए,

लड़की जोर जोर से रोने लगी, तो गाओं वालो ने हिम्मत दिखा क्र उन्हें शांत किया,

लड़की- हमे मर दो, हमे मर दो हम जीना नहीं चाहते, हम बर्बाद हो चुके हैं,

लड़की का पिता रोने लगा- नहीं बेटी ऐसा मत बोल तेरे सिवा मेरा ह hi कोण

तभी एक औरत बोली- अब ये जीकर भी क्या करेंगी, समाज में क्या मुँह दिखाएंगी, अब इन्हे जिन्दा रह क्र क्या मिलेगा समाज के तने, इन्हे तो मर hi जाना चाहिए,

औरत की बात से तभी पीछे से ऐसी hi कुछ और भी आवाजे आने लगी,

देव का गुस्सा बहुत बेहद चुक्का था और वो चिल्ला क्र खड़ा हुआ- बससससससस, बस करो तुम सब, तुम लोगो में कुछ इंसानियत ह या नहीं, ये लड़किया मोत से लड़ क्र जिन्दा वापस आई हैं, इनके साथ इतना बुरा हुआ ह और तुम इन्हे समाज के नियम सीखा क्र मरना चाहते हो,

औरत- राजकुमार महलो में ऐसा होता होगा की दुराचार करके उसे माफ़ कर दे लेकिन हम सामाजिक लोग हैं,

देव- ये कैसे सामाजिक लोग हो तुम, जो अपराध किसी और ने किया उसकी सजा अपनी hi बच्चियों को दे रहे हो, इनकी क्या गलती थी,

औरत- गलती किसी की भी रही हो लेकिन अब ये अपवित्र हो चुकी हैं,

देव – क्या ह पवित्रता, किसी ने इनके साथ दुराचार किया तो अपवित्र हो गई, अगर से चुप क्र किसी मर्द के साथ जाती और तुम सबको पता न चलता तो ये पवित्र रहती, इनके साथ जो हुआ उसके जिम्मेदार आप सब हैं, आप सब इनकी रक्षा नहीं कर सके, और उन हैवानो के हाथो जाने दिया इसलिए इनके साथ ये सब हुआ ह, तो क्या आप सबको सजा दी जाये, आपकी वजह से इन लड़कियों की जिंदगी बर्बाद हुई ह, तो आपको सजा में मोत दे दी जाये,

मोत का नाम सुनते hi सब दर गए,

देव- तुम एक औरत होकर दूसरी औरत के दर्द को नहीं समझ प् रही, धिक्कार ह तुम्हारे औरत होने पर, औरत की योनि नित्य करम करने और एक नै जिंदगी को इस दुनिया में लेन के लिए बानी ह, किसी जानवर के छू लेने से वो अपवातिरा कैसे हो सकती ह, जब किसी का मन भटक जाये तो वो अपवित्र होता ह, शरीर नहीं होता,

एक आदमी- अब इनसे कोण शादी करेगा, कोई इन्हे नहीं अपनाएगा,

देव- वो सब बाद में देखंगे, और अगर ऐसे मर्द इन्हे अपनाएंगे जो इनकी रक्षा नहीं कर सकते, तो अच्छा hi ह ये शादी hi न करे,

मुखिया- राजकुमार ये समय इन बातो का नहीं ह, वो लोग भाग जायेंगे,

देव तुरंत उस लकड़ी के पास बैठ गया, देव की बातो से उस लड़की में काफी हिम्मत आ गई थी,

देव- मुझे बताओ क्या हुआ था,

लड़की- वो 11 लोग थे, जिनमे 10 ने हमारे साथ ये सब किया और एक बूढ़ा बस एक तरफ बैठा हुआ था, उन्होंने हमारे जानवरो को मार दिया और कच्चा hi खाने लगे फिर आग में भून क्र खाने लगे, और उन्होंने एक सैनिक को भी पकड़ा हुआ था जिसे मार क्र भून क्र खा लिए, और हमारे साथ, वो फिर रोने लगी,

देव- हमे ये जेकरि महल तक पहुचानी होगी, और सब जगह बताना होगा की राजय में 11 नरभक्षी घूम रहे हैं, जो इंसानो को मार क्र कहते हैं, और तुम सब मेरे साथ महल चलो वह साडी जानकारी महाराज को देनी होगी,

गाओं वाले मन करने लगे, लेकिन मुखिया के समझने के कुछ लोग मान गए, और बैल गाड़िया तैयार की, इस सब में अब तक सवेरा हो चुक्का था, बाकि लड़कियों को होश तो आ चुक्का था लेकिन उनकी हालत ख़राब थी, देव ने विश्वास दिलाया की महल में अच्छे वैद से उनका इलाज करवाया जायेगा,

सभी लड़किया और गाओं के लोग महल में चल दिए, वह तक पहुंचने में उन्हें काफी समय लग गया, दोपहर का समय हो गया था, सेनिको ने आगे पहुंच क्र महल में सब जानकरी दे दी थी, पुरे महल में खबर फ़ैल गई की राजय में नरभक्षी मानव घूम रहे हैं,

भवर सिंह और राजगुरु एक सभा में बैठे हुए थे, उस सभा में बहुत घेरे मुद्दे पैर चर्चा हो रही थी, वह सिर्फ भवर सिंह राजगुरु और काम्य और एक और इंसान बैठा हुआ था, वही देव राजधानी में प्रवेश कर चुक्का था सभी को लेकर, सभी लोग जब महल के अंदर पहुंचे तो उन लड़कियों को देखने के लिए काफी आदमी औरत खड़े थे, वो सब ऐसे देख रहे थे जैसे कोई मनोरजन के लिए प्रदर्शनी निकल रही हो, सभी लड़किया शर्म और दर से अपना मुँह छिपा रही थी, वही देव का अंदर एक तूफान सा उमड़ रहा था, देव को वो पल याद आ रहा था जब उसे और निहारिका को महल से निकला गया था और ये सब लोग ऐसे hi खड़े तमाशा देख रहे थे, देव के अंदर इतना गुस्सा था की वो सब को उसी पल भसम कर देना चाहता था,

जैसे hi देव सभी लोगो को लेकर महल के सामने पंहुचा तो सेनिको ने उसे रोक दिया की महाराज किसी के साथ सभा में बैठे हुए हैं, देव गुस्से में था

देव- इससे जरुरी मुद्दा और क्या हो सकता ह,

देव गुस्से में सेनिको को दूर करने लगा तभी पीछे से लड़किया चीखने लगी, उनकी चीख सुनकर देव तुरंत उनके पास पंहुचा तो देखा लड़किया दरी हुई थी और भाग क्र देव के पीछे चिप गई,

देव- क्या हुआ तुम दर क्यों रही हो, तुम सुरक्षित हो,

लड़किया- वो वो लोग यही आ गए हैं, वो हमे मर देंगे,



लड़कियों ने जिस तरफ इशारा किया सभी लोगो के साथ देव ने उधर देखा तो वह 10 बड़े hi भयानक लोग खड़े हुए थे,
 
अपडेट-26






देव- तुम यकीन से बोल सकती हो ये वही लोग हैं,

लड़किया- जी है ये वही लोग हैं,

लड़कियों के साथ साथ गाओं के लोग भी बोलने लगे- है है राजकुमार ये वही लोग हैं, इन्होने hi सब किया ह,

गाओं का मुखिया- ये लोग तो हमसे पहले hi महाराज के पास आ गए, लगता ह ये राजमहल के hi आदमी हैं, चलो वापस अब हमारी क्या सुनवाई होगी, जब राजा के खास लोग hi अतयाचार कर्नेगे तो हम लोग कहा सुरक्षित रहेंगे,

देव को किसी की बाते सुनाई नहीं दे रही थी, उन्हें देख क्र देव को बस उन लड़कियों की हालत याद आ रही थी कैसे वो उन पैदा से बंधी हुई थी, उनके साथ हुआ अत्याचार याद आ रहा था, उन माओ का रोना और लड़कियों का दर्द से तड़पना याद आ रहा था, इधर गाओं वाले वापस मुद गए, देव उन्हें रोकने की जगह उन आदमियों की तरफ चल दिया,

देव को उधर जाता देख वो लड़किया रुक गई और देव को देखने लगी, देव उन आदमियों के सामने पहुंच गया, वो आदमी एक दूसरे के साथ हसी मजाक क्र रहे थे, देव को अपने पास आया देख उसे देखने लगे, देव की आँखों में जो गुस्सा था वो सभी को दिख रहा था, उन लोगो ने भी देव को देखा और उसकी तरफ वैसे hi अकड़ क्र खड़े हो गए, तभी उनमे से एक की नजर उन लड़कियों पैर पड़ी,

वो बोलै – अरे वो देखो रात वाली लड़किया, अरे ये तो दुबारा आ गई,

दूसरा बोलै- अरे लगता ह रात इन्हे कुछ ज्यादा hi मजा मिल गया था, फिर से अपनी मरवाने आई हैं, लेकिन हम एक बार किसी को छोड़ दे तो दुबारा नहीं छोड़ते,

अब और किसी साबुत की जरुरत नहीं थी देव को, किसी और के कुछ बोलने से पहले hi एक जोर दर मुक्का उस आदमी के मुँह पैर आया और मुक्का लगते hi वो हवा में उड़ता हुआ काफी दूर जाकर गिरा उसके मुँह से एक दर्द बहरी चीख निकल गई,

ये इतना तेजी से हुआ की किसी को कुछ समझ नहीं आया, बस वो उड़ता हुआ दिखाई दिया और गिरता हुआ, और देव का मुक्का जिस पैर खून लगा हुआ था, बाकि आदमी अपने साथी की तरफ दौड़े, उसे खड़ा किया, तो उसके मुँह से खून की धार निकल पड़ी और उसके साथ उसके आगे के सरे दन्त बहार आ गए, उसका पूरा मुँह खून से लेथ पथ हो गया,






उसकी हालत देख क्र गाओं के सभी लोग रुक गए और लड़कियों के चेरे पैर एक मुस्कान थी उस मुस्कान में बहुत गुस्सा था,

बाकि आदमी देव की तरफ दौड़ पड़े, जो सबसे आगे था देव ने उसे हवा में उठा लिया और जमीन में इतनी जोर से देकर मारा की उसकी कमर की साडी हड़िया टूट गई, उसके गिरते hi पीछे वाले एक दम रुक गए, उनके चेरे पैर एक दर सा उभर आया था, आज उन्होंने असली दर का अनुभव किया था, देव ने उस गिरे हुए आदमी की छाती पैर पेअर रखा और आगे बढ़ गया, वो लोग थोड़ेपीछे हटने लगे, लेकिन फिर उनमे से दो देव पैर कूद पड़े, देव ने एक लात उस एकाडमी के पैरो के बिच में मरी और लात इतनी जोर की थी की वो अपने ांडो कोपकाड क्र जमीन में गिर पड़ा, और दर्द से चीखने लगा और कुछ hi पल में बेहोश हो गया,






देव ने दूसरे आदमी की गार्डन में एक हाथ मारा और वो लड़खड़ाता हुआ दूर जाकर गिरा, बाकि 6 लोगो ने हथियार निकल लिए, तभी दूर खड़े सैनिक दौड़ क्र आये और देव को रोकने लगे,

सैनिक- राजकुमार ये लोग महाराज से मिलने आये हैं, आप इनपर ऐसे हुम्ला नहीं कर सकते,

देव ने गुस्से में उन सेनिको को देखा और गुस्से में चिल्ला कर बोलै

देव- इन लोगो ने इन लड़कियों के साथ जो हैवानियत की ह उसके बाद इन्हे जीने का कोई अधिकार नहीं ह, और अगर जिन्दा रहना चाहते हो तो बिच में से हाथ जाओ और दूर रहो, वर्ण कसम महादेव की सभी यही चिर क्र रख दूंगा,

देव का ये रूप देख क्र सेनिको की रूह तक कैंप उठी, वो डार्क र पीछे हाथ गए, उनमे से दो सैनिक महल के अंदर भागे महाराज को सब बताने के लिए,

इधर वो 6 लोग देव के पास पहुंच चुके थे हाथो हथियार लेकर, देव निहथा hi उनकी तरफ बढ़ गया, उन्होंने देव पैर हुम्ला कर दिया वो भी एक साथ, देव उनके हथियारों से बचने लगा, तभी उन लड़कियों में से एक लड़खड़ाती हुई आगे बढ़ी और वह पड़ी हुई एक ढल देव की तरफ उछाल दी,

लड़की- खुद को बचाओ भैया,

देव ने वो ढल पकड़ ली और उन आदमियों के वॉर रोकने लगा और बिच में मौका मिलते hi अपने मुक्को से उन पैर वॉर करने लगा, देव ने उस ढल से hi ऐसा घातक हुम्ला किया की उन सभी आदमियों की हालत ख़राब हो गई थी, सभी घायल हो चुके थे, वो सभी आदमी बहुत ताकतवर थे, लेकिन आज वो जिससे लाडे थे वो उनका बाप था, आज उन्हें अहसास हुआ की असली ताकत क्या होती ह,

कुछ hi देर में सभी आदमी जमीन पैर पड़े हुए थे, देव ने सभी को एक जगह इकठा किया, जो लोग उन लड़कियों को देखने आये थे उन्होंने देव का वो भयंकर रूप देख लिया था, उनकी आँखों ने आज वो देख लिया जिसे देख क्र शायद उन्हें नींद तक नहीं आने वाली थी,






वो बेचारी लड़किया एक साथ कड़ी रो रही थी, उनके परिवार वाले आँखों में आंसू लिए हाथ जोड़े खड़े थे,

देव ने लड़कियों को अपने पास बुलाया

देव- ये तुम्हारे अपराधी हैं, जो सजा देना चाहो तुम hi फैसला करो,

वो लड़किया घबरा कर देव को देखने लगी,

देव- नारी का अपमान करने वाले को भगवान् भी माफ़ नहीं करते, और तुम्हारे साथ मैं खड़ा हु, करो अपना फैसला,

लड़किया- मर दो इन्हे भैया मर दो इन्हे,

देव मुस्कुराया और उसने एक तलवार उठा ली और उनकी तरफ बढ़ गया, तभी पीछे से आवाज आई रुक जाओ

देव ने पलट क्र देखा तो भवर सिंह राजगुरु काम्य और उनके साथ सात्विक खड़ा हुआ था, अपने आदमियों की ऐसी हालत देख सात्विक क्रोध से भर उठा,

देव- इन्होने अपराध किया ह

भवर सिंह- उसका फैसला हम करेंगे तुहे ये अधिक रकिस्ने दिया किट ुम फैसला करो, और बिना सबूत के इनकी ये हालत क्र दी तुमने,

देव- ये खड़ी लड़किया जोअपने साथ हुसे अत्याचार की गवाही दे रही हैं, इससे बड़ा क्या सबूत चाहिए, और इन्होने खुद मन ह की इन्होने इनके साथ दुराचार किया ह,

भवर सिंह- फिर भी तुम्हे सजा देने का अधिकार नहीं ह, इनकी सजा हम तय करेंगे, इनकी सजा ये ह की इन्हे राजय से बहार क्र दिया जाये,

भवर सिंह की बात सुनकर वह खड़े गाओं वाले और लड़किया चौंक गए, देव ने गुस्से में भवर सिंह को देखा,

भवर सिंह- सेनिको इन लोगो को उठा क्र ले जाओ

सैनिक जैसे hi आगे बढे देव ने गुस्से में उन्हें देखा, वो दर कर पीछे हो गए,

देव- ये लड़किया अगर आपकी बेतिया होती तब भी इन्हे ये hi सजा मिल रही होती,

देव की बात पैर भवर सिंह गुस्से से भर गया,

भवर सिंह- तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इन मामूली लड़कियों की तुलना हमारी बेटिओ से करने की,

देव बहुत hi गुस्से में चिल्लाकर बोलै- ये मामूली नहीं हैं, इंसान हैं ये और इस धरती पैर जो पैदा होता ह सब बराबर का अधिकार लेकर आते हैं,

देव की आवाज इतनी जोरदार थी की भवर सिंह भी कैंप उठा,

देव- इनकी सजा इन लड़कियों ने तय कर दी ह और वो सजा मैं दूंगा इन हैवानो को, जिसमे दम हो रोक लो,

देव ने तलवार उठाई और उन आदमियों की तरफ घुमा वो आदमी दर से कंपनी लगे, देव ने जैसे hi तलवार चलाई तभी पीछे से एक रंगीन रौशनी का गोला देव से टकराया जिससे देव दूर जाकर गिरा और तलवार उसके हाथ से गिर गई, देव से टकराते hi गोला गायब हो गई,

ये नजारा देख क्र वह खड़े सभी चौंक गए, ये क्या चमत्कार हुआ, सबने उस रंगीन गोले को छोड़ने वाले को देखा तो वो था सात्विक, जिसके हाथो में एक रौशनी का गोला बना हुआ था,

सात्विक- एक तुमने एक भी कदम आगे बढ़ाया तो अपनी जान से जाओगे,

अब ये लड़ाई कुछ अलग रूप में आ चुकी थी,

राजगुरु- सात्विक ये क्या कर रहे हो, वो राजकुमार हैं और राजकुमार पैर हुम्ला करना राज द्रोह ह,

सात्विक- इसने hi कहा न इस धरती पैर पैदा होने वाले सभी लोग बराबर हैं, और इसने जिन लोगो पैर हुम्ला किया ह वो मेरे साथ हैं,

राजगुरु- सात्विक मैं कहता हु रुक जाओ

लेकिन सात्विक कहा सुनने वाला था,

तभी देव खड़ा हुआ और सात्विक की तरफ पलटा, उसके चेरे पैर जो क्रोध था वो बयां करना नामुमकिन था, उसके आँखे लाल हो चुकी थी, वो सात्विक की तरफ बढ़ा तो सात्विक ने फिर से वो रौशनी का गोला देव पैर फेंका लेकिन इस बार वो गोला देव से टकराया पैर देव को कोई नुकसान नहीं पंहुचा सका, बस देव दो कदम पीछे हुआ, देव फिर आगे बढ़ा, ये देख क्र सभी चकित थे लेकिन सबसे ज्यादा चकित था सात्विक उसे यकीन hi नहीं हुआ की सामने खड़ा साधारण सा लड़का उसकी शक्ति को कैसे सेह गया,

सात्विक ने कुछ मंत्र पढ़े और एक नै शक्ति को उत्पन किया और देव की तरफ फेंका लेकिन वो शक्ति देव तक पहुंचने से पहले hi किसी दूसरी शक्ति से टकराई और नष्ट हो गई, सबने उधर देखा तो सामने से भौमिक जी चले आ रहे थे, और उन्होंने उस शक्ति को रोका था,

भौमिक जी चलते हुए सीधे देव के सामने खड़े हो गए और उनकी आँखों में आंसू और प्रेम था, निस्वार्थ प्रेम, ऐसा प्रेम जो एक माँ अपने बच्चे से करती ह एक पिता अपना संतान से करता ह, भौमिक जी देव को जिन्दा देख क्र ख़ुशी से अपने आप को काबू में नहीं रख प् रहे थे, तभी पीछे सात्विक बोल पड़ा,

सात्विक- भौमिक तुम बिच में से हैट जाओ, इस लड़के ने हमारे आदमियों पैर हुम्ला किया ह

भौमिक जी- सात्विक ये तुम क्या कर रहे हो, ये देव ह हमारा देव, ये जिन्दा ह, हमे तुम्हे इस एही तो ढूंढने के लिए कहा था,

सात्विक- इसने अपराध किया ह

भौमिक जी- देव कभी कोई अपराध नहीं कर सकता, फिर भी अगर इस ेगलति हुई ह तो हम माफ़ी मांगते हैं,

देव- नहीं गुरु जी, माफ़ी मत मांगिये, अपराधी ये सब हैं, और इसकी सजा में इन्हे देकर रहूँगा,

देव ने फिर तलवार उठा ली और उन आदमियों की तरफ बढ़ा, सात्विक ने फिर देव पैर हुम्ला किया इस बार भौमिक जी ने बिच में हो रोक लिया, दोनों भाइयो में शक्ति का परदार्धन होने लगा, और वह खड़े लोग आश्चर्य और दर से कैंप रहे थे, उन्होंने इससे पहले ऐसी कोई शक्ति या चमत्कार नहीं देखा था,

इधर सब दोनों भाइयो की शक्ति देख रहे थे वही देव ने ताकवर से उन आदमियों के सर धड़ से अलग कर दिए, वह खड़ी सभी लड़किया ख़ुशी से उछलने लगी, वो जोर जोर से हसने लगी, उन्हें हस्ता देख सब उन्हें देखने लगे, फिर वो हस्ते हस्ते रोने लगी और जोर जोर से चीखने लगी, उनकी चीख में इतना दर्द था की पत्थर भी रो पड़े,

सबका धयान उधर गया, सात्विक और भौमिक ने भी उधर देखा, तो उन्हें पता चला की देव ने सबको मर दिया ह, भवर सिंह की जबान को तो लखवा मार चुक्का था, उसके मुँह से कोई शब्द नहीं निकला, वही काम्य एक तरफ कड़ी थी, राजगुरु अपने भाइयो को आपस में लड़ता देख और उनकी शक्ति देख क्र hi सदमे में थे, सौमित्र और अमरावती अपने छज्जे पैर कड़ी सब नजारा देख रही थी, वही निहारिका अपने चीता के साथ वही आ गई थी,

सात्विक- ये तूने क्या कर दिया, तू जनता नहीं ह तूने किसके आदमियों को मारा ह, इस राजय का सर्वनाश हो जायेगा, इस राजय को अब कोई नहीं बचा पायेगा,

देव- अगर ये किसी शैतान के भी आदमी होते तब भी इन्होने जो कार्य किया ह उसके लिए मैं ये hi सजा देता,

सात्विक- इसका परिणाम सब भुगतेंगे

भौमिक जी- कैसा परिणाम सात्विक, तुम्हे हुआ क्या ह, तुम अपने राजय में खड़े हो और अपने लोगो की रक्षा करने की जगह तुम उन्हें hi डरा रहे हो,

सात्विक- महाराज मैंने जो आपको बताया ह, उसमे आपका hi फायदा ह, अब आप सोच लीजिये आपको क्या करना ह, और भौमिक ये लड़का इस राजय के लिए दुर्भाग्य लाएगा, तुम सोच लो तुम्हे किस तरफ रहना ह,

भौमिक जी- अगर धरती फैट जाये और आस्मां टूट पड़े तब भी कोई चीज मुझे देव के खिलाफ नहीं कड़ी कर सकती,

दोनों भाइयो की बात सुनकर राजगुरु बोखला से गए थे,

सात्विक एक पल के लिए ठिठक गया, उसके दिमाग में हलचल हुई की उसने अपनी शक्ति का इस्तेमाल किया था लेकिन सामने खड़े लड़के को कुछ नहीं हुआ, कोई साधारण इंसान इस शक्ति को नहीं शी सकता, इसका मतलब ये कोई साधारण इंसान नहीं ह, कही ये वही तो नहीं जिसके पास वो शक्ति ह, ओह्ह ये मुझसे क्या हो गया मुझे तो इसके साथ मित्रता करनी थी, इसे अपनी तरफ करना था,

राजगुरु- शांत हो जाओ तुम दोनों, भाई होकर आपस में लड़ रहे हो,

भौमिक- मैं लड़ नहीं रहा, बस सात्विक को रोक रहा हु, ताकि वो गलत जगह अपनी शक्ति का गलत जगह इस्तेमाल न करे,

सात्विक- माफ़ क्र देना भाई, मैं क्रोध में अँधा हो गया था, महाराज मुझे माफ़ कर देना मैंने आपके बेटे पैर हुम्ला किया, लेकिन ये मेरे आदमी थे, और ये

देव – आपके आदमियों ने इस राजय की शांति भांग की ह, इन लड़कियों की जिंदगी बर्बाद की ह,

भवर सिंह- ये माफी मांग रहे हैं न, और इन लोगो को सजा तुम दे चुके हो, वो भी हमारी मर्जी के खिलाफ, अब शांति रखो,

देव कुछ बोलने वाला था तभी एक लड़का दौड़ता हुआ देव के पास आ रहा था उसे देख क्र देव चौंक गया, देव जल्दी से उसके पास पंहुचा,

देव- क्या हुआ तुम ऐसे दोड़तेहुए यहाँ सबके सामने क्यों आ गए,

लड़का- माफ़ करना राजकुमार लेकिन मैं खुद को रोक नहीं सकता था बात इतनी जरुरी ह,

देव- क्या हुआ

लड़के ने कुछ बताना शुरू किया, जिसे सुनकर देव के दन्त गुस्से में भींच गए,

देव- मैं उन्हें जान से मार दूंगा, तुम जल्दी से घोडा तैयार रखो में अभी आया,

देव तुरंत वापस मुदा और भौमिक जी से बोलै

देव- गुरु जी इन लड़कियों को मैं आपके हवाले क्र रहा हु, इनका उपचार कीजिये, जब तक मैं वापस नहीं आता ये आपके पास रहेंगी, और मुखिया आप लोग जाना चाहते हैं तो जा सकते हैं, ये लड़किया अगर आपके लिए बोझ हैं तो आज के बाद ये सब यही रहेंगी मेरी सुरक्षा में, जिनके भीतर भविष्य के लिए जो मैं कर सकता हु वो करूँगा, अभी मुझे कही जाना ह,

भौमिक जी- देव अभी मिले हो और फिर जा रहे हो,

देव- गुरु जी जाना बहुत जरुरी ह, आकर आपसे मिलूंगा, तब तक आप यहाँ सम्हाल लीजिये, फिर देव ने निहारिका को देखा, जैसे उससे आज्ञा मांग रहा हो, निहिरका ने मुस्कुरा कर आदेश दे दिया,

देव जोर से चिल्लाया- दत्ततत्टटटट

तभी चीता दहाड़ता हुआ उसके पास आ गया, चीता को देख क्र सब दर गए, देव ने उसके सर पैर हाथ फिर्या और बोलै- जब तक मैं न औ माँ के पास से दूर मत जाना समझे,

चीता ने एक दम सर झुका दिया, ये देख क्र सभी आश्चर्य से बाहर गए, देव ने तुरंत बहार के लिए दौड़ लगा दी, बहार एक लड़का घोडा लिए खड़ा, देव घोड़े पैर बैठा और पूरी रफ़्तार से दौड़ पड़ा,

जब यहाँ ये सब चल रहा था उस समय सूरज ज्वाला और अभिजीत अपनी योजना बना रहे थे, सुबह होते hi वो लोग अपनी बहेनो के कमरे में गए, सूरज अक्षरा के कमरे में गया, ज्वाला अमिता के कमरे में और अभिजीत सोमिया के कमरे में पंहुचा, तीनो भेने मजे से सोइ हुई थी, तो उनके सोने का फायदा उठा क्र वो लोग उनक ेबिस्तर में घुस गए, और उनसे चिपक क्र लेट गए, किसी को अपने पास पाकर उनकी आँख खुली और सामने अपने भियो को देख वो तीनो चौंक गई, और तीनो का एक hi सवाल था- तुम यहाँ क्या कर रहे हो,

तीनो भाई- बहेनो को प्यार देने आये हैं,

तीनो लड़कियों ने उन्हें धकेल क्र अपने अपने कमरे से बहार क्र दिया, फिर वोन अहा धोकर क्र तैयार होकर बहार आ गई और तीनो एक साथ बैठी हुई थी,

अक्षरा- आज बहुत अजीब बात हुई, सूरज भाई मेरे कमरे में मेरे बिस्टेर में घुस आये थे,

सोमिया- क्या सच में, अभिजीत भी मेरे बिस्टेर में घुस गया था,

अमिता- और ज्वाला मेरे बिस्टेर में

तीनो चौंक गई

अक्षरा- ये कोई इत्तेफाक नहीं हो सकता,

अमिता- कुछ गड़बड़ लग रही ह,

तभी तीनो भाई वह आ गए,

सूरज- कैसी हो तीनो, नींद ाची आई न, यहाँ मजा आ रहा ह न,

सोमिया- हम लोग हैं कहा, ये जगह कुछ नै सी लग रही ह,

अमिता- है ये वो जगह तो नहीं ह जहा हम पहले गए थे,

अभिजीत- ये नै जगह ह, यहाँ बहुत शांति ह, को परेशां नहीं करने वाला,

अक्षरा- हम राजकुमारिया हैं, हमे वैसे भी कोई परेशां नहीं कर सकता,

सूरज- अच्छा तुम लोग कुछ समय से दुखी रहती होगी न,

सोमिया- क्यों हम क्यों दुखी रहेंगी

ज्वाला- तुम लोगो की शादी टूट गई ह, और बी उम्मीद भी काम ह शादी होने की

तीनो बहन एक दूसरे को देखने लगी,

अभिजीत- अब हम सब जवान हो चुके हैं, एक दूसरे से अपने दिल की बाते करने में कोई ऐतराज नहीं ह, तुम हमे बता सकती हो अपने दिल की बात

अमिता- कैसी बात,

अभिजीत- हम जानते हैं तुम लोग जवान हो और जवानी में बहुत सी िछाये होती होंगी, जरुरत होगी एक साथी की, एक प्रेमी की, हमे अपना भाई मत समझो अपना दोस्त समझो,

सोमिया- ये क्या बकवास कर रहे हो

ज्वाला- अरे इसमें बकवास की क्या बात ह,

तभी वह दासी आ गई और शरबत ले आई,

सभी ने शरबत ले लिया, और पिने लगे, तीनो बहन शरबत पि रही थी और तीनो भाई खुश हो रहे थे, क्योकि उन्होंने पहले उस शरबत में नशीली और कम्यूटजक दवाई मिला दी थी, कुछ देर वह शांति रही और जब शरबत खता हो गया तो कुछ देर इंतजार करने के बाद जब शरबत का असर तीनो बहेनो की आँखों में दिखने लगा तो तीनो भाइयो में अपना देव फिर से चलना शुरू किया,

सूरज- देखो अब इस संसार में तुम्हे कोई नहीं अपनाएगा, लेकिन हम तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़ेंगे, और घर की बात घर में रहेगी,

ज्वाला- है और तुम्हे सरे सुख भी मिलेंगे,

अभिजीत- हमे बहुत अनुभव ह, हम बहुत मजा देंगे

अक्षरा नशे से की हालत में- कैसा मजा क्या बोल रहे हो,

सूरज- वही मजा जो तुम्हे चाहिए, तुम्हारे शरीर को छाइये, तुम्हारे अंदर की आग को शांत हम hi कर सकते हैं,

सोमिया- ये क्या क्या बोले जा रहे हो,

ज्वाला- अरे हम सब सेज भाई बहन तोडना हैं, डरने की जरुरत नहीं ह, किसी को कुछ पता नहीं चलेगा

अभिजीत- इसी लिए तो हम यहाँ आये हैं, ताकि किसी को कुछ पता न चले,

अमिता गुस्से में उठी और लड़खड़ा गई, और जैसे hi वो लड़खड़ाई तो ज्वाला ने तुरंत उसे पकड़ लिया और उसकी गांड को कास कर पकड़ लिया,

अमिता को झटका लगा उसने ज्वाला को देखा, तब तक अभिजीत ने सोमिया को खड़ा किया और उसकी चूचियों की तरफ हाथ बढ़ाया, इधर सूरज ने अक्षरा की चेरे की तरफ अपना चेरा बढ़ाया और उसके हॉट चूमने hi वाला तह ाकि एक जोर दर थपड की आवाज वहगंज गई, थपड लगते hi जैसे सब होश में आये हो,

अमिता ने ज्वाला को दूर धकेला और सोमिया ने अभिजीत को एक थपड जड़ दिया,

थपड लगते hi तीनो भाई गुस्से में भर गए, उन्होंने तीनो बहेनो को एक एक थपड मर िद्या जिससे वो जमीन पैर गिर पड़ी, वो तीनो भेने पहले hi नशे की हालत में थी, उनके गिरते hi उनके मुँह से दर्द भरी चीख निकल गई, चीखने की आवाज से दसिया डोडी हुई आई, और वह के हालत देख क्र चौंक गई, उन्हें कुछ समझ नहीं आया की यहाँ क्या हुआ,

सूरज ने सेनिको को आवाज लगाई, तो वह कुछ सैनिक आ गए,

सूरज- इन दसियो को ले जाओ और मजे करो, और जब तक हम न बोल इधर मत आना, चाहे कुछ भी हो जाये, सैनिक एक दूसरे को देख क्र मुस्कुरा दिए, और दसियो की तरफ बढ़ गए,

दासी उनसे डार्क र भागने लगी, लेकिन जाती भी कहा बेचारी पकड़ी गई,

वही तीनो भाइयो ने अपनी बहेनो को उठाया और एक कमरे में ले आये और बिस्टेर पैर गिरा दिया,

ज्वाला- अलग अलग कमरे में ला जाये क्या,

अभिजीत- नहीं यार यही करते हैं न एक दूसरे के सामने इससे ये जल्दी hi खुल जाएँगी,

तीनो भाई लड़कियों के पास पहचुहे और उनके उप्पेर टूट पड़े, तीनो लकडिया नशे की हालत में थी लेकिन वो पूरा विरोध क्र रही थी, तो लड़को ने उन्हें एक एक थपड और मारा,

अभिजीत- क्यों नाटक कर रही हो, उस देव से छोड़ने को तो बड़ी पागल हुई जार hi हो तुम सब, वो भी तो भाई ह, जब उससे चुद सकती हो तो हममे क्या बुराई ह, उससे ज्यादा मजा देंगे हम,

अपने भाइयो के मुँह से ऐसी बाते सुनकर तीनो बहेनो की आँखों से आंसू बह रहे थे, वो अंदर से टूट गई थी,

सूरज- तुम मान क्यों नहीं रही हो,

ज्वाला- नहीं मान रही तो जबरदस्ती छोड़ देते हैं, जब चुदाई में मजा आने लगेगा तो खुद हमारा साथ देंगी,

सूरज- बांध दो इन्हे और नंगा करो इनके शरीर को देखे तो सही कैसा,

उन्होंने तीनो लकड़ियों को बांध दिया वो नशे में पूरा विरोध नहीं क्र प् रही थी, फिर उनहेवनो ने तीनो के कपडे फाड़ने शुरू क्र दिए थे, तीनो भेने विरोध करती रही और मार कहती रही, और कुछ hi देर में बेहोश हो गई,

उनके उप्पेर पानी गिरने से उन्हें होश आया, और उन्होंने खुद को देखा तो वो बिलकुल नंगी बंधी हुई कड़ी थी, और उनके सामने उनके भाई बिलकुल नंगे होकर बैठे अपने लुंड को सेहला रहे थे, उनके सामने शराब राखी हुई थी, वो जैम छलका रहे थे और अपने लुंड हिला रहे थे, अगर वो सिर्फ सौतेले भाई होते तो शायद लड़कियों को इतना दुःख न होता, उन तीनो में उनके सेज भाई भी थे जो उन्हें देख क्र अपने लुंड को हिला रहे थे और उनके शरीर के बारे में मजे ले ले कर बाते कर रहे थे,

तीनो बहेनो का रो रो क्र बुरा हाल था, उनका नशा काफी हद तक उतर चुक्का था, रह गया था तो सिर्फ दर्द और तकलीफ,

अभिजीत- जल्दी शुरू करो न यार मुझसे सबर नहीं हो रहा, देखो इस सोमिया की चूचिया देखो कितनी बड़ी हैं, हे बिना चूड़े इतनी बड़ी हैं तो छोड़ने के बाद तो हाहाकार मचा देंगी,

ज्वाला- और इस अमिता को देखो, इसकी लम्बाई और भरी हुई जंघे, और उभरी हुई छुई आह्ह्ह्हह्ह

सूरज- और ये अक्षरा तो उप्पेर से निचे तक पूरी क़यामत ह,

अभिजीत- सबका सवाद लेंगे यार

अक्षरा- ये धरती अभी फैट जाये और तुम तीनो उसमे समां जाओ, तुम किसी के भाई नहीं हो सकते,

अमिता- तुम इंसान hi नहीं हो,

सोमिया- भगवान् तुम्हे कभी माफ़ नहीं करेगा,

अभिजीत- जब तुम लोगो को मजा आने लगेगा तो तुम खुद भगवान् से हमारी शिफारिश करोगी,

सूरज- तुम तीनो उस देव से बहुत चिपकती थीं ा, आज के बाद तुम सिर्फ हमसे चिपकेगी, और फिर हम उस देव की बहन रीवा और उसकी माँ निहारिका को अपनी रखैल बांयेंगे,

अभिजीत- मैं उस रीवा को छोडूंगा,

ज्वाला- मुझे वो निहारिका चाहिए,

सूरज- तीनो मिकर छोडनेगे, खूब रगड़ रगड़ क्र हहहहहहह,

तीनो भाई उठे और लड़कियों की तरफ बढ़ गए, तभी बहार से किसी के चीखने की आवाज आई, तीनो भाई चौंक गए, तभी एक सैनिक दौड़ता हुआ अंदर आया,

सूरज- तेरी हिम्मत कैसे हुई अंदर आने की,

वो सैनिक कुछ बोल पता उससे पहले hi एक तलवार उसके पीछे से घुसी और सीना चिर गई,



वो नजारा देख क्र तीनो भाई घबरा गए, और जैसे hi वो सैनिक गिरा और सामने जो आया उसे देख क्र वह सभी की हालत ख़राब हो गई, क्योकि सामने जो खड़ा था वो था,
 
अपडेट-27




हहहहहहह अरे वह क्या भेतरीन नजारा ह आओ रे अंदर आओ देखो यहाँ क्या चल रहा ह, देखो भवर सिंह के परिवार में क्या हो रहा ह,

सूरज- सेनिको

आदमी- सब मर चुके हैं,

सूरज- कोण हो तुम

आदमी- प्रताप सिंह का बीटा रविंद्र, तुम सबकी मोत,

सूरज और ज्वाला जल्दी से अपनी तलवार उठाने दौड़े लेकिन तभी कुछ और लोग और आ गए, उन्होंने अपनी तलवारो से सभी को घेर लिया, ये थे प्रताप सिंह के बेटे सुरेंद्र सोमेंद्र भानु और संभु,

प्रताप सिंह के जासूस लगातार भवर सिंह के राजय में नजर रखे हुए थे, और जब उन्होंने सूरज ज्वाला और अभिजीत को अपनी बहेनो के साथ और कुछ hi सेनिको के साथ जाते देखा तो तुरंत प्रताप सिंह को खबर भिजवा दी, प्रताप सिंह के बेटे तुरंत एक सेना की टुकड़ी लेकर निकल गए, और इधर जासूस लगातार पीछे लगे हुए थे, और जासूसों की वजह से वो सब वह पहुंच गए, और जब इन तीनो भाइयो ने सेनिको के हवाले दसियो को किया तो सरे सैनिक लापरवाह हो गए, और अपने हथियार छोड़ क्र दसियो के साथ दुराचार करने के लिए उत्साहित हो गए और तभी रविंद्र और उसके भाइयो ने सेना सहित उन पैर हुम्ला कर दिया और सभी सेनिको को मर दिया और दसिया को पकड़ लिया,

सूरज- रविंद्र अब हमारी क्या दुश्मनी ह, तुम्हे कुछ करना ह तो देव के साथ करो उसी ने तो तुम्हारे भाइयो को मारा ह,

रविंद्र- हैट भेनचोद, तुम सब मरोगे और आज असली मजा आएगा, तुम सबके सामने तुम्हारी भेने छोड़ेंगी,

सुरेंद्र- ये सेल तो अपनी hi बहेनो को छोड़ने के चक्कर में हैं, लगता ह सेल बलात्कार करने वाले हैं,

भानु- सालो में भवर सिंह का गन्दा खून ह न,

तीनो बहेनो का रो रो क्र बुरा हाल था, अभी तक उनके hi भाई उनकी इज्जत लूटने को उतारू थे लेकिन अब जो सामने खड़े थे वो तो पुरे हवन थे, उन्हें अपनी मोत साफ़ साफ़ दिख रही थी, उन्होंने अपनी जिंदगी की डोर को टूट ते हुए महसूस क्र लिया था,

अभिजीत- हमने तो तुम्हारे पिता की मदद की थी उस निहारिका को पाने में, हम तुम्हारे साथी हैं, तुम्हे हमारी भेने चाहिए तो ले जाओ हम कुछ नहीं करेंगे, तुम जो चाहे करो, सूरज और ज्वाला ने भी है में है मिले,

तीनो बहेनो ने नफरत भरी नजरो से उन्हें देखा,

रविंद्र- इन तीनो को तो हम तुम्हारे सामने hi छोड़ेंगे और फिर हमारे सरे सैनिक इन्हे छोड़ेंगे, उसके बाद पूरी सेना इनकी इज्जत की धजिया उड़ाएंगी, लेकिन तुम तीनो का अलग hi इंतजाम किया जायेगा, तुम तीनो की गांड मरी जाएगी, हमारी सेना में बहुत सरे सैनिक तुम जैसे नामर्दो की गांड मरने के लिए उतावले रहते हैं,

फिर उन्होंने तीनो भाइयो को वही बांध दिया और वो लड़कियों के पास पहुंचे,

रविंद्र- तुम्हे दर तो नहीं लग रहा मेरी जान, तुम तीनो को ये उतना मजा नहीं दे पते जितना हम देंगे और हमारे सैनिक देंगे,

अक्षरा- हमने तो अपनी जिंदगी तभी ख़तम मान ली थी जब इन हैवानो ने हमे नंगा किया और छुआ था, अब तुम सब हमारे साथ कुछ भी कर लो कोई फरक नहीं पड़ता, हम अब जिन्दा hi नहीं हैं, लेकिन ये बात अच्छे से याद रख लेना जब वो आएगा और वो जरूर आएगा, तब तुम्हे अहसास होगा असली दर का,

रविंद्र- इस बार जब वो आएगा तो उसकी मोत मेरे हाथो होगी, वो मेरा तांडव देखेगा,

अक्षरा- हहहहहह मोत उसकी मोत हहहहहहहहहह , तांडव क्या होता ह वो उसने दिखाया था उस युद्ध में, तेरा बाप और तेरा ये भाई तो वह था न, इसने अपनी आँखों से देखा था न वो क्या कर सकता ह, जब उसने वो युद्ध लड़ा था तब तो वो लड़ना भी नहीं चाहता था, लेकिन अब तुमने उसकी बहेनो के साथ बलात्कार करने का विचार बना रहे हो, सिर्फ इसी विचार के लिए वो तुम सबको ऐसी मोत देगा की तुम अगली बार जनम भी नहीं लेना चाहोगे,

भानु- बहुत बोलती ह, सबसे पहले इसे hi छोड़ेंगे, इतना छोड़ेंगे की ये मर जाये,

भानु आगे बढ़ा तभी बहार से किसी के चीखने की आवाज आई,

रविंद्र- संबु देख क्या हुआ कही उन दसियो के चक्कर में सैनिक आपस में न लड़ पड़े, सैनिक ज्यादा हैं और दासी काम,

संभु बहार गया, बहार से आवाजे और तेज आने लगी, तो सुरेंद्र बहार को गया और तभी संबु दौड़ता हुआ आया और सुरेंद्र से टकरा गया,

रविंद्र- क्या हुआ ऐसे पागलो की तरह क्यों डोडा आ रहा ह,

संभु दर से कांपते हुए- वो आ गया ह, वो आ गया ह,

रविंद्र- कोण आ गया ह, तू दर क्यों रहा ह, क्या हुआ

अक्षरा- तुम सबका बाप आ गया ह,

रविंद्र गुस्से में अक्षरा के पास आया और उसके बाल पकडे तभी एक सैनिक दरवाजे से उड़ता हुआ अंदर आया और रविंद्र के उप्पेर गिरा, और दरवाजे पैर खड़ा था देव खून से लतपथ, वो खून में नहाया हुआ था,

फ़्लैश बैक….

जब घूमने जाने की बात पैर तीनो भाई खुश हुए तो देव को शक हो चुक्का था इसलिए उसने अपना एक आदमी तीनो भाइयो के पीछे जासूसी के लिए लगा दिया था, और जब वो लोग बताये हुई मंजिल की जगह दूसरी जगह चले गए तो वो आदमी उनके पीछे वही पाउच गया और महल के अंदर hi घुस गया, और जब रात में तीनो भाई अपनी बहेनो को छोड़ने की योजना बना रहे थे तो उसने सुन ली और वो मौका देख क्र वह से निकल गया, वो पैदल आया था इसलिए वापस आने में समय लग गया, और रात में देव महल में था नहीं, जैसे देव वापस आया तो उसने तुरंत देव को जानकारी दी, देव तुरंत वह से घोडा लेकर यहाँ के लिए निकल गया लेकिन जब वो इस महल तक पूछा तो प्रताप सिंह की सेना के घोड़े उसे दिख गए, इसलिए उसने अपने घोड़े को दूर रोका और चुप क्र वह पंहुचा, जब वो नजदीक आया तो देखा, प्रताप सिंह के सेनिको ने यहाँ के सेनिको मो मर दिया और दसियो के साथ दुराचार करने की कोशिश कर रहे थे,

जो नजारा देव रात देख क्र आया था उससे देव का दिमाग गुस्से से आग बबूला हुआ पड़ा था और यहाँ भी सामने वैसा hi नजारा होने जा रहा था, देव गुस्से में आप खो बैठा और उसने सेनिको के हथियारों में से एक गदा उठा ली, और उन के बिच में कूद पड़ा, वो बस गदा को घुमाये जा रहा था, देव को फरक नहीं पद रहा था गदा किसको कहा लग रही ह, लेकिन जिसको भी एक बार गदा लग जाती वो सीधा नरख को सिधार जाता, दसियो को छोड़ क्र सैनिक देव पैर टूट पड़े, जिससे दसिया एक तरफ चुप गई, कुछ hi देर में देव ने आधे से ज्यादा सैनिक मार गिराए, कुछ सैनिक भागने लगे लेकिन देव ने किसी को भागने नहीं दिया, देव के हाथ में जो हथियार आ रहा था वो बिना किसी जानकरी के बस घुमाये जा रहा था, देव की ताकत और फुर्ती इतनी ज्यादा थी की कोई उसके करीब भी नहीं आ प् रहा था,

अब कुछ hi सैनिक बचे तो देव ने हथियार फेंक दिया और हाथो से सबको मरने लगा, सेनिका का खून उसके शरीर पैर गिर रहा था, तभी उसने एक सैनिक का हाथ उखड लिया और तभी वह संभु आया, देव को इस हालत में देख वो दर से कंपनी लगा और उलटे पाव भाग लिया,

अंदर आते hi देव ने जब तीनो बहेनो को नंगे बंधे देखा तो उसका गुस्सा और बढ़ गया, उसने क्रोध में जलती हुई आँखों से सबको देखा और उसके सामने आ गया सोमेंद्र, और शायद उसके जीवन की ये सबसे बड़ी गलती थी, जिसका पास्चतवा प्रताप सिंह को होने वाला थे, देव ने एक जोर दर घुसा सोमेंद्र की छाती में मारा, घुसा लगते hi ऐसा लगा जैसे देव का हाथ सोमेंद्र की छाती को फाड़ क्र बहार निकल गया हो, सोमेंद्र के मुँह से खून की फुहार छूट गई,

देव इतने पैर भी शांत नहीं हुआ उसने सोमेंद्र को हवा में उठाया और अपने घुटने पैर पटक दिया जिससे उसकी कमर की हड्डी भी टूट गई, सोमेंद्र ने वही अपने प्राण त्याग दिए, भानु देव की तरफ आया तो एक मुक्का उसके मुँह पैर पड़ा और मुक्का लगते hi वो दीवार से जा लगा और बेहोश हो गया, देव का ये खूंखार रूप देख क्र संभु ने भानु को कंधे पैर उठाया और बहार को दौड़ लगा दी, सुरेंद्र की समझ में कुछ नहीं आ रहा था,

इधर देव रविंद्र की तरफ बढ़ा, रविंद्र ने देव पैर वॉर किया लेकिन देव ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे जमीन में पटक दिया और उसकी छाती पैर अपना पेअर रख क्र उसके हाथ को खींचने लगा, रविंद्र दर्द से चिकने लगा, उसकी चीख इतनी दर्द भरी थी की सुनने वाले की आत्मा तक कैंप जाये, लेकिन देव के कानो तक उसकी चीख नहीं पहुंच रही थी वो अपने क्रोध में पागल हुआ जा रहा था, और उसी क्रोध में उसने रविंद्र का हाथ उखड लिया,

ये देख क्र सुरेंद्र ने भी बहार को दौड़ लगा दी, इनके सरे सैनिक मरे जा चुके थे, सुरेंद्र संभु और भानु बचे थे, भानु बेहोश था, इसलिए संभु उसे घोड़े पैर लड़ क्र भाग लिया, पीछे पीछे सुरेंद्र भी भाग गया,

जब दसियो ने उन्हें भागते देखा तो वो अंदर की तरफ भागी, अंदर का नजारा देख वो और दर गई, उन्होंने दौड़ क्र तीनो लड़कियों को खोला, दसिया खुद बेचारी नंगी हालत में थी, लेकिन वो राजकुमारियों की सच्ची सेवक थी, जो अपनी इज्जत की परवाह किये बिना भी राजकुमारियों की इज्जत को ढकने के लिए चादर उठा क्र उन पैर ढकने लगी,

वही देव रविंद्र की छाती चढ़ क्र बैठा हुआ था और उसके मुँह पैर मुक्के बरसाए जा रहा था, रविंद्र का जबड़ा टूट चुक्का था वो लहू लुहान पड़ा हुआ था, उसमे कोई जान नहीं थी,

अक्षरा दौड़ क्र देव के पास पहुंची

अक्षरा- देव रुक जा भाई रुक जा वो मर गया ह,

देव- इन्हे नारी का सम्मान करना नहीं आता मैं इन्हे आज सिखाऊंगा नारी का सम्मान कैसे किया जाता ह,

अमिता- रुक जा देव रुक जा, अब वो अगले जनम में सिख क्र hi पैदा होगा,

देव की नजर तीनो भाइयो पैर पड़ी, जो बंधे हुए थे नंगे, लेकिन सामने का नजारा देख क्र उनका पिशाब निकल गया था, सामने उन्हें अपनी मोत दिख रही थी वो भी इतनी भयानक की उसके बारे में सुनकर hi आदमी मर जाये,

देव उठा और तीनो की तरफ चल दिया, जब तीनो बहेनो ने देखा की देव सूरज ज्वाला और अभिजीत की तरफ जा रहा ह तो वो समझ गई की इनकी भी मोत पक्की ह,

अक्षरा ने तुरंत अपनी पकड़ी हुई चादर छोड़ दी और देव से लिपट गई,

अक्षरा- रुक जा देव रुक जा

देव- नहीं इन्हे जीने का कोई हक़ नहीं ह,

सोमिया भी पीछे से देव के लिपट गई,

अमिता- रुक जाओ देव हमारे लिए रुक जाओ, मोत इनकी सजा नहीं ह,

देव रुक गया,

अमिता दसिया से- तुम सब बहार जाओ,

साडी दासी बहार चली गई,

अमिता आगे बढ़ी,

अक्षरा और सोमिया की समझ में कुछ नहीं आया अमिता क्या करने वाली ह,

अमिता- इन सभी ने आज हमारी आत्मा को मर दिया ह, इन्हे बहन छोड़ने का शोक ह न, इनके दिमाग में शक था की हम देव के साथ चुद जाएँगी, इन्होने हमारे शरीर को छूकर हमारे अंदर से किसी भी रिश्ते को मर दिया ह, अब ये देख्नेगे की जब औरत के अंदर की आत्मा मरती ह, जब औरत के सभी रिश्ते मरते हैं तो वो क्या कर जाती हैं,

अमिता ने अपने उप्पेर ोधी हुई चादर उतर क्र फेंक दी,

अमिता- देखो ये खूबसूरत जंघे और ये उभरी हुई छूट, देखो अपनी बहन को

इतना बोल क्र अमिता देव के नजदीक गई और अपने शरीर को उसके खून में भीगे शरीर से चिपका दिया और अपने हॉट देव के होतो पैर रख दिए, ये देख क्र अक्षरा और सोमिया चौंक गई, वही तीनो भाई दर की वजह से सहमे हुए थे,

देव ने अमिता को अलग किया,

देव- ये क्या कर रही हो आप,

अमिता- माफ़ करना देव मैंने तुमसे तुम्हारी मर्जी नहीं पूछी, लेकिन ये hi मेरी मर्जी ह, देखो कमीनो आज से ये खूबसूरत जंघे और छूट देव की हो गई, इस पैर सिर्फ देव का अधिकार हो गया ह, तुम लोग बहन को भाई से छुड़वाना चाहते थे न तो ये बहन अपने भाई से छुड़ेगी, देव से छुड़ेगी,

देव आश्चर्चकित सा देख रहा था तभी सोमिया भी आगे बढ़ी और नंगी हो गई और देव के सामने पहुंच गई,

सोमिया- सही कहा अमिता, ये लोग जो करना चाहते थे अब वो होगा लेकिन हमारी मर्जी से होगा, देखो नामर्दो देखो ये खूबसूरत बड़ी बड़ी चूचिया आज से देव की हो गई अब तुम hi इनका नाप लेकर बताना की देव से छोड़ने के बाद ये कितनी बड़ी हुई हैं,

सोमिया ने भी देव के होतो से हॉट मिला दिए,

अक्षरा जो पहले से hi नंगी कड़ी थी,

अक्षरा- तुम्हे मैं उप्पेर से निचे तक क़यामत लगती हु न तो देखो ये क़यामत आज से देव के लुंड के निचे रहेगी और देव अब से रोज तुम्हारी बहेनो को छोड़ेगा, और तुम्हारी भेने उछाल उछाल क्र देव उसके लुंड से छोड़ेंगी, और तुम तीनो देखोगे जैसे अब देखोगे,

अक्षरा ने तो कमल hi कर दिया था उसने अपनी गांड देव के लुंड पैर रागादि और तीनो बहियो की तरफ देख क्र मुस्कुराई, फिर पलट क्र देव के होतो पैर अपने हॉट रख दिए और उन्हें चूसने लगी,

देव- लेकिन ये सब गलत ह

अमिता- गलत तो वो था जब इन सबने साजिश करके निहारिका माँ को उस जल्लाद प्रताप सिंह के हवाले क्र दिया था, गलत वो था जब इन सबने साजिश करके तुम पैर इल्जाम लगवा क्र महल से बहार निकलवा दिया,

सोमिया- गलत वो था जब इन सबने मिलर तुम दोनों को मरने की कोशिश की, गलत वो था जब इन्होने अपनी बेटियों का सोडा उस प्रताप सिंह के साथ कर दिया,

अक्षरा- गलत वो था जो ये करने जा रहे थे, और वो प्रताप सिंह के बेटे हमारे साथ करते, आज इन्होने हमारी आत्मा को hi मर दिया, और जब आत्मा hi मर जाती ह तो उसका कोई रिश्ता नहीं रहता, ऐसे hi हमारा कोई रिश्ता नहीं बचा ह, इन्होने कहा था की अब हमारी शादी नहीं होगी और ये हमारी जरुरत पूरी कर्नेगे, अब हमे किसी की जरुरत नहीं ह,

अमिता- क्या तुम हमे अपनाओगे, क्या तुम हमारे साथी बनोगे,

देव- वो बाद की बात ह लेकिन अगर ये सब किसी को पता चला तो

सोमिया- ये किसी को नहीं बताएँगे, अगर ये बताएँगे तो इन्हे जवाब देना होगा इन्होने हमारे साथ क्या किया,

देव ने तीनो बहेनो को अपने गले से लगा लिया, तीनो नंगी hi देव से लिपटी हुई थी, देव का एक हाथ अमिता की गांड पैर था और दूसरा हाथ सोमिया की गांड पैर, देव ने तीनो भाइयो की तरफ देखा और उसकी आँखों में एक चमक थी, जैसे उसने अपनी मंजिल प् ली हो,

अक्षरा- देव तुम यहाँ पहुंचे कैसे, तुम्हे कैसे पता हम यहाँ हैं और हमारे साथ कुछ गलत हो रहा ह,

देव- बाद में बताऊंगा फ़िलहाल तुम कपडे फेनो और यहाँ से निकलो,

अमिता ने दसियो को बुलाया, दसियो ने उनके लिए नहाने और कपड़ो का इंतजाम कर दिया था, वो लोग नाहा धो क्र बैठ गए, अब तक अँधेरा हो चुक्का था,

देव- हमे महल जाना चाहिए,

सोमिया- रात में जाना ठीक नहीं ह, हम सुबह निकलनेगे,

फिर सबने मिलकर वह मरे गए सभी सेनिको की लाशो को और सोमेंद्र और रविंद्र की लाश को उनके घोड़ो पैर बांध क्र घोड़े भागे दिए, घोड़ो की आदत होती ह अपने घर वापस जाने की,

इन्होने तीनो भाइयो को खोला नहीं ऐसे hi बंधे रहने दिया नंगे hi,

रात में तीनो भेने एक दूसरे से लिपटी हुई बैठी थी, और रोये जा रही थी, देव आस पास का सुरक्षा का जायजा लेने गया था, दसिया खुद परेशां और दुखी थी लेकिन फिर भी वो काम कर रही थी,

अमिता- ये क्या हो गया, ऐसा लगता ह जैसे हमारी पूरी दुनिया hi उजाड़ गई हो, अचानक hi ये सब कैसे हो गया,

सोमिया- सही कहा मुझे नफरत हो रही ह ज्वाला से, वो दोनों फिर भी सौतेले थे लेकिन वो तो सागा भाई था, उसने ये सब की

अक्षरा- ये सब अचानक नहीं हुआ ह, हम तीनो जानते हैं उनकी नजर हमेशा से हमारे लिए गन्दी थी, वो कभी हिम्मत नहीं कर पाए थे, देव के लिए उनकी नफरत इतनी ज्यादा थी की वो उसके बदले हमे शिकार बनाने चल दिए,

अमिता- मैं उन्हें कभी माफ़ नहीं करुँगी, मैं महाराज से इसकी शिकायत करुँगी,

सोमिया- है मैं माँ को बताउंगी,

अक्षरा- कोई फायदा नहीं होगा, वो अपने बेटो को बचने के लिए हमारी बलि चढ़ा देंगे, और अगर हम कुछ बताने जायेंगे तो ये लोग हमारे बारे में भी बता देंगे की हमने देव के साथ क्या किया,

अमिता- अगर हमने घर नहीं बताया तो ये फिर से कुछ कर सकते हैं,

सोमिया- वो तो घर जाकर सोचेंगे लेकिन जो हमने देव के साथ किया क्या वो सही था, देव भी हमारा भाई ह, अपने hi भाई के साथ ये सब गलत नहीं ह क्या,

अक्षरा- क्या तुमने कभी देव को अपना भाई मन था,

दोनों ने न में सर हिलाया

अक्षरा- जब तुमने दिल से कोई रिश्ता नहीं मन तो उस सामजिक रिश्ते की दुहाई देकर खुद की जिंदगी क्यों बर्बाद क्यों करनी, वो रिश्ता बनाओ जो हमारा दिल चाहता ह,

ये सब तो अपने साथ हुए व्यव्हार का शोक मन रहे थे वही राजमहल में भी कुछ हो रहा था,

जब देव वह से निकला था तो उसके निकलते hi.

भवर सिंह- ये सब क्या हो रहा ह मेरे महल में, क्या यहाँ के राजा का दर ख़तम हो गया ह, जो कोई भी आकर अपनी मर्जी से फैसला कर देता ह,

राजगुरु- महाराज पहले यहाँ से चलते हैं, और एक सभा बुलाते हैं और आराम से बैठ क्र उस पैर चर्चा करते हैं,

भवर सिंह ने सबको देखा, वो बहुत कुछ करना चाहता था लेकिन सात्विक और भौमिक की शक्तियों ने उसे इतना प्रभावित किया की उसके दिमाग में वो शक्ति पाने कीइच्छा जग उठी,

राजगुरु- सात्विक और भौमिक तुम भी सभा में आओ, हमे बहुत कुछ बाते करनी ह,

भौमिक जी- नहीं भैया, पहले मुझे इन लड़किया का उपचार करना ह, मैं इन्हे लेकर अपने घर जार है हु वह इनका उपचार करूँगा,

भवर सिंह- क्या ये राजा के आदेश से भी ज्यादा जरुरी ह,

भौमिक जी- है जरुरी ह, इनका जीवन सबसे ज्यादा जरुरी ह,

निहारिका- महात्मा भौमिक जी इन लड़कियों को मेरे कमरे में भिजवाइए और इनका क्या उपचार होना ह वो यहाँ के वैद को बताइये, इनका उपचार मेरे सामने होगा,

निहारिका की बात सुनकर सब शांत हो गए और लड़कियों को निहारिका ले जाने लगी, गाओं वाले अभी भी वही खड़े थे,

निहारिका- आप सब चाहे तो यही रुक सकते हैं, या वापस जा सकते हैं, देव के वापस आने के बाद आपका जो नुक्सान हुआ ह उसकी भरपाई करवा दी जाएगी, और ये लड़किया अब वह वापस नहीं जाएँगी जब तक ये खुद न बोल दे, अब से ये यही रहेंगी,

निहारिका ने ये बात आदेश की तरह बोली थी, आज पहेली बार वो अपने अधिकार का इस्तेमाल किया था, जिसके सामने भवर सिंह कुछ नहीं बोल सका,

गाओं वाले वापस चले गए, उन्हें संतोष था की उनके अपराधी मरे गए, कुछ देर बाद सभा बैठी हुई थी, जिसमे भवर सिंह राजगुरु स्तविक भौमिक काम्य सौमित्र और सेनापति और राजय के कुछ बड़े लोग बैठे हुए थे,

भवर सिंह- राजगुरु देव ने हमारी आज्ञा का उलंघन किया ह, उसे सजा तो मिलनी छाइये,

भौमिक- सजा फिर से सजा, आप लोग कभी नहीं बदलेंगे, लेकिन इस बार मैं खड़ा हु देखता हु देव को कोई कैसे आँख भी उठा कर देखता ह,

राजगुरु- शांत हो जाओ भौमिक कुछ नहीं किया जार है

सात्विक- महाराज माफ़ करना गलती मेरिट hi, मेरे साथियो ने अपराध किया था, उन्हें सजा मिलनी hi चाहिए थी, मैंने क्रोध में आ क्र देव पैर हुम्ला कर दिया, भौमिक मेरे भाई मुझे माफ़ कर दे मैंने तुझ पैर भी हुम्ला किया,

राजगुरु- अब सही ह, ये सिद्ध हो गया की वो अपराधी थे और उन्हें सजा मिल गई, महाराज अगर आप इस मुद्दे पैर देव का विरोध कर्नेगे तो परजा आपके खिलाफ हो जाएगी, ये देव का साथ देने का समय ह,

काम्य- राजगुरु ठीक बोल रहे हैं महाराज, देव ने कुछ गलत नहीं किया ह, वो अपराधी थे उन्हें सजा मिल hi गई ह,

भवर सिंह- ठीक ह मैं इस बार मान जाता हु,

राजगुरु- सात्विक तुम यहाँ जिस मुद्दे पैर बात करने आये थे वो बताओ,

सात्विक- भैया मुझे ऐसी शक्ति के बारे में पता चला ह जो इस संसार का अस्तित्व hi बदल सकती ह,

भवर सिंह- कैसी शक्ति

सात्विक- एक समय पैर एक राजा हुए थे राजा भैरव

भैरव का नाम सुनते hi राजगुरु और भवर सिंह के कान खड़े हो गए,

भवर सिंह- तुम भैरव के बारे में क्या जानते हो,

सात्विक- सब कुछ

भवर सिंह- ये सभा यही ख़तम की जाती ह, राजगुरु आप सात्विक और भौमिक को लेकर हमारे सभा कमरे में आओ,

भवर सिंह उठ कर चला गया और सभा ख़तम हो गई, उसके ीचे राजगुरु सात्विक और भौमिक भी थे, भवर सिंह के कमरे में काम्य और भवर सिंह बैठे हुए थे,

भवर सिंह- अब बताओ सात्विक क्या जानते हो, मुझे सब बताओ

सात्विक- राजा भैरव वो इंसान जिसने अमरता प्रपात की थी,

भवर सिंह- लेकिन कैसे की थी,

सात्विक- अब से हजारो वर्षो पहले भैरव ने बहुत कड़ी तपश्या किट hi और भगवान् को प्रसन्न किया था, और उसने ये तीन बार किया था, और जब भगवान् धरती पैर आये तो हर बार उनकी शक्ति का एक अंश यहाँ इस धरती पैर रह गया, भगवान् की ऊर्जा का एक मात्रा रत्ती भर का अंश भी महा शक्ति शैली था, तो इस हिसाब से तीन अंश धरती पैर रह गए,

भवर सिंह- कहा ह वो अंश कहा ह वो शक्ति,

सात्विक- उन तीन शक्तियों में से एक का आधा आधा भाग मुझमे और भौमिक में ह, हम जिस रौशनी की तलाश में गए थे वही रौशनी hi वो शक्ति थी, और हम अनजाने में hi उस शक्ति तक पहुंच गए थे,

सात्विक की बात सुनकर भवर सिंह काम्य और राजगुरु तीनो hi चौंक गए,

भवर सिंह तो ख़ुशी से फुला नहीं समां रहा था, उसे अहसास हो गया की जल्दी hi वो शक्ति उसे मिल सकती ह,

भवर सिंह- और बाकि शक्तिया,

सात्विक – दूसरी शक्ति आपके राजय में

सात्विक इतना hi बोल पाया था की उसके दिमाग में आवाज आने लगी जैसे भौमिक उसके दिमाग में घुस क्र उससे कुछ बोल रहा हो,

सात्विक ने भौमिक को देखा और भौमिक ने बिना मुँह खोके hi सात्विक से बात करनी शुरू क्र दी उसके दिमाग में hi,

भौमिक- बस सात्विक आगे मत बताना, उसका नाम मत लेना, अगर उसका नाम लिया तो सब अनर्थ हो जायेगा, ये सब उसके शत्रु बन जायेंगे, उसके पास से शक्ति पाने के लिए ये कुछ भी कर सकते हैं,

सात्विक ने भौमिक की बात समझ ली, और वो ये hi चाहता था भौमिक उस पैर भरोसा करे ताकि देव उसके साथ आ सके, तो उसने भौमिक का भरोसा जीतने के लिए इस बात को रोक दिया,

भवर सिंह- हमारे राजय में क्या सात्विक

सात्विक- आपके राजय में कही ह,

भवर सिंह- हहहहहह मैं जनता था, मैं जनता था, दादा जी ने बताया था की,

इतना बोल क्र भवर सिंह चुप हो गया, फिर उसने बात को पलटा,

भवर सिंह- कह अहो सकती ह वो शक्ति,

सात्विक- वही ढूंढने मैं आया हु महाराज,

राजगुरु- और वो तीसरी शक्ति वॉक अहा ह

सात्विक- कोई नहीं जनता ह, मुझे उसे भी तलाश करना ह, वो शक्ति तब तक किसी काम किन hi जबतक वो किसी इंसान के अंदर न जाये,

काम्य- क्या होता ह उस शक्ति से, कैसे काम करती ह वो

सात्विक- क्या क्या करती ह मैं नहीं जनता, लेकिन ितं ापता ह उस शक्ति ने मेरे अंदर ज्ञान का भंडार भर दिया ह, एक अलग hi ऊर्जा ह, जिसका नमूना आप देख चुके हो, और लगता ह भौमिक को भी वैसी hi ऊर्जा मिली ह,



भौमिक- सही बोल रहे हो, उस शक्ति में ज्ञान का भंडार ह, वो हमारी साडी कुंडलियों को जागृत क्र देती ह, बस ये हम पैर निर्भर करता ह की हम उस इस्तेमाल कैसे करते हैं,
 
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