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भवर सिंह और राजगुरु दोनों महल के एक तहखाने में थे जहा बहुत सी किताबे और बहुत सा इतहास लिखा रखा था, भवर सिंह ने सुबह होने का इंतजार भी नहीं किया था, वो खुद राजगुरु के साथ लग गया था,
राजगुरु- महाराज आप आराम कीजिये मैं खोजता हु उसके बारे में अधिक जानकारी,
भवर सिंह- नहीं राजगुरु अब मुझसे सबर नहीं हो रहा, मैं खुद उसके बारे में जानना चाहता हु, हमारे दादा जी को इतहास में बहुत रूचि थी, वो हमेशा बोलते थे की हमारा इतिहास हमारा अतीत ह और अतीत से hi भविष्य की चाबी मिलती ह, इसलिए वो हमेशा अलग अलग राज्यों का इतिहास भी लिखवाया करते थे, उन्होंने उस समय का इतहास भी लिखवाया था जब युगो का परिवर्तन हो रहा था,
राजगुरु- मैं जनता हु महाराज मेरे पिता जी hi उनके सहायक रहे थे, उसी इतहास की कुछ किताबे मेरे पास थी जहा से मुझे ये जानकारी मिली थी, हो न हो उसके बारे में और भी अधिक लिखा गया होगा,
भवर सिंह- लेकिन मेरे दादा जी ऐसे नहीं थे जो किसी से दर कर उसका इतहास hi न लिखे,
राजगुरु- इसीलिए बोल रहा हु वो ताकत सब कुछ बर्बाद कर सकती ह क्योकि जिससे आपके दादा जी घबरा गए तो सोचिये वो कैसी ताकत होगी,
भवर सिंह- वो चाहे जो भी हो लेकिन मुझे वो चाहिए, किसी भी कीमत पैर,
राजगुरु और भवर सिंह राजा भैरव के बारे में खोज रहे थे, वही देव अपने शरीर पैर बस एक कपडा पहन क्र अपने कमरे से निकल क्र बहार चल दिया अमरावती के कमरे की तरफ, वो कमरे के बहार पंहुचा तो वह बस एक दासी कड़ी थी, कोई पहरेदार नहीं था,
देव समझ गया ये अमरावती ने जानबूझ क्र किया ह,
देव के वह पहुंचते hi दासी ने उसके सामने सर झुकाया और जाने का रास्ता दे दिया, देव कमरे के अंदर चला गया, कमरे में से बहुत hi भेतरीन खुशबु आ रही थी, पूरा कमरा महक रहा था, चारो तरफ फूल hi फूल थे, देव आज पहेली बार अमरावती के कमरे में आया था, उसे नहीं पता था की ये सिर्फ आज के लिए ह या हमेशा hi ऐसा रहता ह, चारो तरफ दिए जल रहे थे, पूरा कमरा रौशनी में जगमगा रहा था, देव ने चारो तरफ देखा लेकिन अमरावती नजर नहीं आ रही थी,
देव चलता हुआ बिस्टेर के पास पहुंच गया, वो आवाज लगाने hi वाला था की उसे हलकी आहात की आवाज हुई, देव ने पलटना चाहा टी अमरावती की आवाज आई- रुको पलटना नहीं, देव रुक गया,
अमरावती- मैं सिर्फ हमारी दोस्ती के लिए ऐसा कर रही हु, क्योकि दोस्त hi सबसे खास होते हैं, तुम ये बात किसी को बताओगे तो नहीं,
देव- दोस्तों के राज नहीं खोले जाते, क्या मैं पालतू,
अमरावती ने बस हम्म्म्म कहा, देव ने धीरे से पलट क्र देखा तो सामने अमरावती कड़ी थी एक कला झीना सा कपडा ओढ़े हुए, जिसमे से उसका खूबसूरत शरीर दिख रहा था, उसकी बड़ी बड़ी चूचिया उस कपडे में से बहार आने को तैयार थी, अमरावती की भरी जंघे पैर कपडा चिपका हुआ था, देव एक तक उसे देखे जा रहा था देव का लुंड पहले hi खड़ा था लेकिन अब तो वो उफान पैर था,

अमरावती- ऐसे क्यों देख रहे हो,
देव- आप बहुत खूबसूरत हैं,
अमरावती- मुझे शर्म आ रही ह,
देव- दोस्तों में कैसी शर्म
अमरावती ने देव को देखा और बड़ी ऐडा से घूम गई, जिससे अमरावती की भरी और उभरी हुई गांड देव के सामने आ गई थी, देव चलता हुआ अमरावती के पास पंहुचा और उसके कंधे पैर हाथ रख दिया, अमरावती ने तुरंत अपना शरीर देव से सत्ता दिया,
देव- बस इतना hi दिखाओगी,
अमरावती- इससे ज्यादा मुझमे हिम्मत नहीं ह,
देव ने नीरस होकर सर झुका लिया,
अमरावती- मैंने कहा मुझमे हिम्मत नहीं ह, तुम चाहे तो देख सकते हो,
देव ने थोड़ा सा चौंकते हुए अमरावती को देखा फिर उसका मतलब समझ क्र मुस्कुरा दिया, और उसने अमरावती का कपडा पकड़ा और हलके से खींचना शुरू क्र दिया, अमरावती ने कपडा ढीला छोड़ दिया था जो उसके शरीर से फिसलता हुआ निचे जा गिरा, और कपडे के गिरते hi अमरावती का खूबसूरत शरीर देव के सामने था, अमरावती की भरी चूचिया एक दम गोल आकर लिए थी, देव अमरावती के चारो तरफ घूमने लगा, अमरावती शर्मा क्र सर निचे किये कड़ी थी,

देव अमरावती के सामने आया और उसके चेरे को उप्पेर उठाया,
देव- इतना खूबसूरत शरीर ह आपका पूरी दुनिया आपके सामने झुक सकती ह,
अमरावती- तुम्हे पसंद आया
देव- बहुत
इतना बोलते hi अमरावती देव से लिपट गई, और उसकी भरी चूचिया देव की छाती में डाब गई, अमरावती ऐसा व्यव्हार कर रही थी जैसे सच में वो देव के प्रेम में पागल हो गई हो, एक नौजवान लड़की जब पहेली बार अपने प्रेमी के सामने ये सब करती ह तो वो जितनी उत्साहित होती ह वैसा hi अमरावती कर रही थी, देव भी कोई कसार नहीं छोड़ रहा था, दोनों के मन में कुछ और hi था लेकिन दिखावा और नाटक बहुत hi भेतरीन कर रहे थे,
देव- आपने मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल दे दिया मुझे आज,
अमरावती- क्या मैं अब कपडे पहन लू
देव- मेरा मन नहीं भरा
अमरावती- तो तुमने क्यों पहने हुए हैं,
देव ने तुरंत अमरावती को अलग किया और जो कपडा उसने पहना हुआ था तुरंत उतर क्र अलग क्र दिया, देव का खड़ा लुंड एक दम मीनार की तरह सामने आ गया, जिसे देख अमरावती की सांसे फूलने लगी,

देव- अब ठीक ह,
अमरावती- अब ये मेरे लिए मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल ह,
देव- कुछ hi समय में हमारी दोस्ती कितनी खास हो गई ह, ये हमने पहले क्यों नहीं सोचा,
अमरावती- पहले हम गलत सोच के साथ चल रहे थे न,
देव- अब हमारी दोस्ती मिशाल बनेगी,
अमरावती देव के करीब आई और उसके गले लग गई, उसके मुँह से एक आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह निकल गई, नंगे शरीर आपस में रगड़े और देव का खड़ा नानग लुंड अमरावती की जांघो के बिच में रगड़ गया,
देव- ये ज्यादा तो न हो जाये,
अमरावती- होने दो ज्यादा, अब हमारे बिच कुछ पर्दा नहीं ह, अब मैं इस पल को जी भर क्र जीना चाहती हु,
देव ने भी अपनी बहे अमरावती की कमर में दाल दी और उसे कास क्र खुद से चिपका लिया, अमरावती की बड़ी बड़ी चूचिया देव की छाती में डाब गई जिससे उसके उभर और उप्पेर को उठ गए, और देव का लुंड अमरावती की जांघो में ाड़ने लगा, तो अमरावती ने हलकी सी जांघ खोल दी जिससे देव का लुंड अमरावती की जांघो के बिच में घुस गया, अमरावती की लम्बाई देव से काम नहीं थी वो इस महल में सबसे लम्बी थी, कुछ अमरावती हलकी सी अपने पंजो पैर आ गाइट hi,
लुंड की रगड़ जब अमरावती की छूट पैर हुई तो उसकी आँखे बंद हो गई, देव के हाथ तुरंत अमरावती की गांड पैर चले गए, और उसने कास क्र उसकी गांड को पकड़ लिया, अब अमरावती का वजन देव के हाथो और शरीर पैर था, अमरावती को ऐसा लग रहा था जैसे वो देव के लुंड पैर बैठी हुई ह, अमरावती ने देव को देखा,
देव- ये गलत तो नहीं हो रहा न महारानी,
अमरावती- जो हो रहा ह होने दो, आज मत रोको, मैं बहुत प्यासी हु मेरे दोस्त अपनी इस दोस्त की प्यास बुझा दो,
इतना बोल क्र अमरावती ने देव के होतो पैर अपने हॉट रख दिए, देव सब कुछ अमरावती से hi करवा रहा था, बस देव उसका साथ दे रहा था,
देव ने भी तुरंत उसके होतो को चूमना शुरू क्र दिया, दोनों एक दूसरे के होतो को चबाये जार हे थे, देव ने अमरावती की गांड को कास क्र पकड़ा और हवा में उठा लिया अमरावती ने भी तुरंत अपनी पेअर देव की कमर पैर लप्पेट दिए और उसकी गॉड में आ गई, देव का खड़ा लुंड मीचे से अमरावती की छूट और गांड पैर रगड़ रहा था, उप्पेर अमरावती की चूचिया देव की छाती में रगड़ रही थी, और दोनों के हॉट एक दूसरे का रास पान कर रहे थे,
दोनों पागलो की तरह एक दूसरे को चुम रहे थे, कुछ देर बाद देव ने अमरावती को बिस्टेर पैर लिटाया और उसके उप्पेर आ गया,
देव- क्या इरादा ह,
अमरावती- मैंने अपने इरादे बता दिए हैं, अब तुम बताओ क्या इरादा ह,
देव- बहुत तकलीफ होगी,
अमरावती- मुझे वो तकलीफ चाहिए, मैंने पूरी जवानी उस तकलीफ का इंतजार किया ह लेकिन कोई मुझे वो तकलीफ नहीं दे पाया,
देव- कोई मतलब
अमरावती के मुँह से जोश जोश में कुछ ज्यादा hi निकल गया था उसने तुरंत बात को सम्हाला,
अमरावती- महाराज और कोण,
देव- आपकी चीखे बहार कोई सुन न ले,
अमरावती- उसकी चिंता तुम मत करो, इस कमरे से बहार कोई आवाज नहीं जाती, और बहार मेरी खास दासी कड़ी ह, वो सब सम्हाल लेगी
देव- मतलब आपने पूरी तैयारी की हुई ह,
अमरावती- अब और मत तड़पो मुझे, मैं इस खूबसूरत प्यारे से लिंग को अपने अंदर महसूस करना चाहती हु,
देव- मैं आपको वो सुख दूंगा इसके बाद आपको किसी सुख की जरुरत hi नहीं होगी,
देव ने अमरावती के होतो पैर फिर से अपने हॉट रख दिए और एक हाथ उसकी चूचियों पैर ले गया और मसलने लगा, निचे से देव का खड़ा लुंड अमरावती की छूट पैर रगड़ रहा था, अमरावती अपनी छूट को निचे से उछलने लगी और देव के खड़े लुंड पैर रगड़ने लगी, और देव के होतो को चूसने लगी,
कुछ देर हॉट चूसने के बाद देव ने अमरावती की गरदन चुनी शुरू क्र दी, और फिर निचे आने लगा और अपने हॉट अमरावती की चूचियों पैर रख दिए, अमरावती के चूचक बफी बड़े थे, देव ने एक चुकी को मुँह में भर लिया और दूसरी को अपने हाथ से मसलने लगा,

जब देव अमरावती की चूचियों को चूस रहा था तो उसके दिमाग में निहारिका की चूचिया आ गई, वैसे तो अमरावती की चूचिया बहुत बड़ी थी लेकिन जो आकर और कड़क पैन निहारिका की चूचियों का था वो बात अमरावती की चूचियों में नहीं थी,
देव को चूचिया चूसने का बहुत अनुभव था, बचपन से आज तक उसने सबसे ज्यादा चूचिया hi तो चूसी थी, लेकिन अमरावती ने शायद बहुत समय से अपनी चूचिया नहीं चूसै थी, और देव की चुकी चूसने की कला से अमरावती कामुकता में भर्ती जार hi थी, वो अपनी उंगलिया देव के सर पैर घुमा रही थी और अपना एक हाथ अपनी जांघो के बिच रगड़ रही थी जिससे देव का खड़ा लुंड अमरावती के हाथ पैर रगड़ रहा था, अमरावती ने देव का लुंड पकड़ लिया,
लुंड हाथ में आते hi अमरावती का शरीर कैंप उठा, इतना बड़ा और मोटा लुंड जिसके साडी नसे उसकी उंगलियों को महसूस हो रही थी, अमरावती ने लुंड को मुट्ठी में पकड़ा और अपनी छूट पैर रगड़ने लगी और दबाने लगी,

लेकिन देव का इरादा अभी ऐसा करने का नहीं था, देव थोड़ा उप्पेर हो गया, अमरावती ने चौंकते हुए देव को देखा,
देव मुस्कुराया- आज आप जीवन का असली सुख का अनुभव करेंगी अमरावती जी,
देव ने अमरावती को नाम से बुलाया तो उसका शरीर में और जोश भर गया, देव उसकी चूचियों को चुस्त हुआ उसके सपाट पेट पैर पंहुचा और फिर उसकी छूट के उप्पेर आ गया जो बिलकुल चिकनी थी, ऐसा लग रहा था जैसे अमरावती ने आज hi वह की सफाई की ह, वैसे भी अमरावै की दासी रोज उसकी छूट को साफ़ करती थी, देव ने छूट के उप्पेर के हिस्से को अपनी उंगलियों से शलया जिससे अमरावती का पेट में कपकपाहट होने लगी,
देव ने अपने हॉट अमरावती की जांघो पैर रख दिए, जांघो पैर हॉट लगते hi अमरावती एक दम उठ क्र बैठ गई लेकिन देव ने उसे पीछे धकेल दिया, अमरावती अपना सर बिस्टेर पैर इधर उधर करने लगी, देव जांघो को चूमता हुआ अमरावती की जंघे फ़ैलाने लगा जो अमरावती ने खुद पैर काबू करने के लिए आपस में भींच राखी थी, देव ने अपनी उंगलिया अमरावती की जांघो पैर फिरै और उप्पेर उसकी जांघो के बिच घुसता चला गया, अमरावती की जंघे खुलती चली और अमरावती को वो चिकनी छूट देव की आँखों के सामने आ गई थी,
अमरावती सर उठा क्र देव को देख रही थी की वो क्या करने वाला ह, देव ने अमरावती की आँखों में झाँका और अपना मुँह उसकी छूट पैर लगा दिया, अमरावती के मुँह से अह्ह्ह्हह्हह निकल गई और वो बिस्टेर पैर लुढ़क गई, उसके हाथ खुद देव के सर पैर चले गए, देव ने भी अमरावती की छूट के होतो को अपने होतो से अच्छे से चूमा और फिर अपनी जीभ निकल क्र छूट को चाट लिया, अमरावती अपनी कमर हिलने लगी, छूट पहले से hi पूरी तरह गीली हुई पड़ी थी, वो तो देव के लुंड की सिर्फ रगड़ से hi झड़ने की कगार पैर पहुंच गई थी,

अमरावती- ahhhhhhhhhhh देव क्या कर रहे हो, तुम मुझे पागल कर दे रहे हो, uuuffffffffffffffffff बहुत मजा आ रहा ा, बहुत सालो से किसी मर्द ने मेरी छूट को नहीं चूसा ह,
देव बिना कुछ बोले बस अमरावती की छूट को चूस रहा था अपनी जीभ को उसकी छूट की घेरे तक दाल रहा था, अमरावती पहले से पागल हुई पड़ी थी वो देव का हुम्ला बर्दास्त नहीं कर पाई, उसके हाथ देव के सर पैर चले गए और उसने देव के सर को अपनी छूट पैर दबा लिया और निचे से अपनी छूट को उछलने लगिए ुर देव के मुँह पैर छूट को रगड़ क्र झड़ने लगी,
अमरावती- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह देव खा जाओ मेरी छूट निचोड़ दो इसे, ahhhhhhhhhhhhh बहुत मजा आ रहा ह, तुम कमल के हो देव, बहुत सालो बाद किसी मर्द ने चूसा ह ahhhhhhhhhhh
अमरावती की सिसकारियां बहदति जा रही थी, कुछ देर में वो झाड़ क्र शांत हो गई तो देव उठा और अमरावती छूट में भीगे अपने हॉट सीधे अमरावती के होतो से जोड़ दिए, अमरावती भी पगली की तरह उसके होतो को चूसने लगी और उन पैर लगा अपनी छूट का नमकीन पानी का सवाद लेने लगी,
देव अमरावती के पैरो के बिच में था उसने अपना लुंड अमरावती की छूट पैर लगाया और धकेलने hi वाला था लेकिन अमरावती ने उसे रोक दिया,
अमरावती- रुक जाओ, तुमने मुझे बहुत मजा दिया ह मैं तुम्हे भी वो मजा देना चाहती हु,
अमरावती ने देव को बिस्टेर पैर लिटाया और देव का लुंड सीधा खड़ा हो गया था, अमरावती देव के उप्पेर आ गई और अपने हाथो में देव के लुंड को पकड़ क्र उससे खेलने लगी, देव का लुंड अमरावती के दोनों हाथो में था, वो उसकी लम्बाई अउ रमते का अनुमान लगा रही थी, फिर अमरावती ने देव की आँखों में देखते हुए लुंड के टोपे पैर अपनी जीभ फिरै, देव ने मुस्कुराते हुए आँखे बंद क्र ली, अमरावती को अहसास हो रहा था की वो देव पैर काबू पति जा रही ह,

अमरावती ने अपना मुँह खोला और लुंड को अपने मुँह में भरने की कोशिश की लेकिन लुंड इतना मोटा था की अमरावती के गाल चीरने लगे,

अमरावती कुछ देर लुंड को ऐसे hi मुँह में लेकर बैठी रही, जब उसका मुँह दुखने लगा तो उसने लुंड को बहार निकला और चाटने लगी, वो लुंड को उप्पेर से निचे तक चाट रही थी,

फिर उसने देव के ांडो को अपने मुँह में भर लिया और एक एक ाँद को रसगुल्ले की तरह चूस रही थी,

काफी देर लुंड को चूसने के बाद जब उसका मुँह दुखने लगा तो उसने लुंड को अपनी चूचियों बिच रखा और अपनी चूचियों से लुंड को रगड़ने लगी ,

देव को बहुत मजा आ रहा था, ये वही अमरावती थी जिसने देव और उसकी माँ निहारिका को हमेषा जलील किया था, आज वो उसके लुंड के साथ खेल रही थी,
अमरावती को काफी देर हो चुकी थी लुंड के साथ खेलते हुए लेकिन देव का लुंड ऐसे hi खड़ा था, अमरावती को उम्मीद थी की वो देव को अपनी अदाओ से hi झाड़ देगी लेकिन लुंड और भी खूंखार होता जार है था, अब अमरावती ने हर मान लिट् hi, उसने एक तेल की शीशी उठाई और उसमे से बहुत सात ेल लुंड पैर डाला और मालिश करने लगी,
देव- ये कैसा तेल ह
अमरावती- इससे तुम्हारा लुंड और मजबूत हो जायेगा,
देव- क्या आपको लगता ह इससे ज्यादा मजबूत लुंड होना चाहिए,
अमरावती- इससे ज्यादा मजबूत कुछ नहीं हो सकता ह, ये एक अजूबा ह, असल में मैं इसे चिकना कर रही हु ताकि मैं इसे अपनी छूट में झेल सकू,
अमरावती ने बहुत सा तेल अपनी छूट पैर भी डाला और देव के बराबर में लेट गई,
अमरावती- अब आ जाओ मेरे उप्पेर और चढ़ जाओ मुझपे, अब बर्दास्त नहीं हो रहा ये घोड़े जैसा लुंड मेरी छूट में घुसा दो,
देव उसके पैरो के बिच में आ गया और पहले अपनी उंगली छूट में दाल क्र थोड़ी अंदर बहार की ताकि छूट पूरी तरह चिकनी हो जाये, फिर उसने अपना लुंड छूट पैर रकह और रगड़ने लगा,

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अमरावती- मत तड़पाओ अब घुसा दो अपना लोढ़ा मेरी छूट में, फाड़ दो इस छूट को,
देव ने लुंड का दबाव बनाया और लुंड का टोपा छूट में घुस गया, लुंड के घुसते hi अमरावती की आँखे फैट गई, उसने अपना मुँह तकिये के निचे दबा लिया, देव ने रुक्न ेकी कोशिश नहीं की वो दबाव बनता hi रहा और तेल की चिकनाहट की वजह से काफी लुंड छूट में घुसता चला गया, अमरावती काफी चूड़ी हुई औरत थी, और उसने अपनी छूट से दो दो बच्चे निकल रखे थे, छूट काफी खुली हुई थी लेकिन देव का लुंड फटी हुई छूट को फाड़ने की भी ताकत रखता था,
अमरावती के मुँह से अह्ह्ह अह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह बस बस बस रुक जाओ रुक जाओ निकलने लगा, देव एक पल के लिए रुका,
देव- क्या हुआ
अमरावती- बहुत मोटा ह, इतना मोटा लुंड झेलना आसान नहीं ह, मेरी फैट रही ह,
देव- बहार निकलू क्या
अमरावती- नहीं नहीं बहार मत निकलना, वर्ण दुबारा नहीं डलवा पाऊँगी, कुछ पल रुको फिर धीरे धीरे डालना,
देव कुछ पल रुका उसने अमरावती की चूचियों के साथ खेलना शुरू क्र दिया, जैसे hi अमरावती की हालत ठीक सी लगी देव ने फिर से लुंड का दबाव बना दिया, न न करते हुए भी देव का आधे से ज्यादा लुंड अमरावती की छूट में घुस गया था, आज तक यहाँ तक अमरावती की छूट में किसी का पूरा लुंड भी नहीं गया था जहा तक देव का आधे से कुछ ज्यादा लुंड घुस गया था, अमरावती के मुँह से दर्द बहरी चिक निकल गाइट hi, जो बहार कड़ी दासी ने भी सुनी थी, दासी को भी हैरत हुई की अमरावती की चीख निकल सके ऐसा भी कोई ह क्या दुनिया में,
देव ने हलकी हलकी कमर हिलाई जिसे अमरावती दर्द से बिलबिला ुति थी, वो अपना सर इधर ुधा रपातक रही थी, देव बिना परवाह किये कमर हिलता रहा, और जिसका परिणाम ये हुआ की अमरावती की छूट ने हल्का हल्का पानी छोड़ना शुरू क्र दिया जिससे लुंड को आसानी होने लगी, कुछ देर में अमरावती का दर्द कुछ काम हुआ, उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे, छूट लुंड पैर फांसी हुई थी,
तभी देव ने हल्का सा लुंड बहार खींचा और फिर से घुसा दिया अमरावती का मुँह खुला रह गया, ahhhhhhhhhhhhhhhhh माँ मर गई फैट गई मेरी छूट ahhhhhhhhhhhhhhhhh
ये आवाज जब दासी के कानो में गई तो वो दौड़ क्र अंदर आई, और जब उसने देखा की देव का मुसल जैसा लुंड अमरावती की छूट में फसा हुआ ह, उसकी आँखे फटी रह गई,
वो कंपकंपाती हुई आवाज में बोली- महारानी जरा धीरे आपकी आवाज बहार आ रही ह,
दासी की आवाज से देव और अमरावती दोनों चौंक गए,
अमरावती- क्या करू इसका लुंड मेरी छूट फाड़ता hi जार है ह,
देव- महारानी आपकी आवाज किसी ने सुन ली तो अनर्थ हो जायेगा,
अमरावती- मैं खुद पैर काबू पाने की कोशिश करती हु, तू जा और नजर रख,
दासी बहार चली गई,
अमरावती- इतना दर्द तो फेल बार भी नहीं हुआ था, अगर तुम किसी कुँअरि लड़की किछूट छोड़ोगे तो कसम से उसे मर hi डोज,
देव- कोई तो ऐसी बानी होगी जो इस लुंड को आराम से अपनी छूट में ले लेगी,
देव ने अपनी कमर चली शुरू क्र दी और अमरावती लूँ ढकी मर झेल नहीं पाई और झड़ने लगी, झड़ने का ये फायदा हुआ की छूट और चिकनी हो गई और लुंड को आसानी हो गई और लुंड और अंदर घुस गया, अमरावती झड़ते हुए अपनी छूट उछाल रही थी और देव भी ढके लगा रहा था,
अमरावती झाड़ का शांत हुई लेकिन देव नहीं रुका वो लगातार छोड़ता रहा, अमरावती जीवन में पहेली बार झड़ने के बाद भी चुद रही थी, अमरावती ने देव को अपने उप्पेर लिटा लिया और देव धक्के लगाने लगा, कुछ hi देर में अमरावती फिर से झड़ने लगी, लेकिन देव अभी भी नहीं झाड़ रहा था, अमरावती को बड़ी हैरत हुई, लेकिन जो मजा उसे आ रहा था उसके लिए जीवन का असली सुख वही था, वो न जाने किस किस से चूड़ी थी लेकिन देव जस्या मर्द उसे पहेली बार मिला था,
अमरावती- मेरा दो बार हो गया ह तुम भी कर लो न
देव- मेरा इतनी जल्दी नहीं होता महारानी,
देव ने अमरावती को घोड़ी बना दिया और उसकी बड़ी सी गांड देव के सामने आ गई, देव का मन तो किया इसकी गांड में अपना ये मुसल घुसा दे लेकिन जल्दबाजी ठीक नहीं थी, उसने छूट में लुंड घुसाया और अमरावती के बाल पकड़ क्र उसकी सवारी करने लगा,

अमरावती की हालत ख़राब हो चुकी थी, वो अब चौथी बार झाड़ रही थी, अब लुंड और अंदर तक जार है था जिसे वो आराम से झेल रही थी,
अमरावती- ahhhhhhhhhh देव तुमने तो मुझे अपनी घोड़ी बना लिया अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह करो अपनी घोड़ी की सवारी, कैसी ह तुम्हारी घोड़ी, तुम्हे पसंद आई
देव- बहुत गदराई हुई घोड़ी ह
अमरावती- तुमने मेरा जीवन सफल क्र दिया, ऐसा सुख जीवन में कभी नहीं मिला था, तू लाजवाब हो aahhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhh मैं तो तुम्हारी गुलाम हो गई, काश तुम मुझे पहले मिले होते, ahhhhhhhhhhhh काश तुम मेरे बेटे होते मैं तो दिन रात तुमसे hi चुदती,
अमरावती की ये बात देव के दिमाग में तकर मार गई, मैं बीटा होता तो मुझसे चुदती, क्या कोई बीटा अपनी माँ को छोड़ सकता ह, और नजाने क्यों देव की आँखों के समाने निहारिका आ गई नंगी देव की आँखे बंद हो चुकी थी और बंद आँखों में उसे निहारिका दिख रही थी, और उसका जोश इतना बेहद गया की उसने पूरा रफ़्तार से अमरावती को छोड़ना शुरू क्र दिया, अमरावती मुँह के बल बिस्टेर पैर गिर गई लेकिन देव रुका नहीं वो पूरी ताकत से अमरावती को छोड़ रहा था, अमरावती ने अपना यह बिस्टेर में दबा लिया था उसकी चीखे बिस्टेर में डाब गाइट hi, और देव ने पुरे जोश में एक हुंकार भरी और अपना पूरा लावा अमरावती की छूट में बाहरणा शुरू क्र दिया, अमरावती में इतनी ताकत hi नहीं बची थी की वो देव को रोक सके, और देव इस जोश में था की उसे अहसास hi नहीं हुआ की उसने लावा कहा निकल दिया ह,

लुंड का वीर्य निकलते hi देव अमरावती के उप्पेर hi लेट गया और लुंड और अंदर तक घुस गया, अमरावती की साँस hi रुक गई थी, वो बेसुध सी बिस्टेर पैर उलटी पड़ी थी, और देव उसके उप्पेर लेता था लुंड छूट में घुसाए हुए, काफी देर तक दोनों शांत लेते रहे, दोनों की सांसो की आवाज कमरे आ रही थी,
कुछ देर बाद जब देव शांत हुआ तो उसे अहसास हुआ की वो क्या सोच रहा था, उसे खुद पैर बहुत गुस्सा आया, उसने आँखे खोली और अमरावती के उप्पेर उठा, उसका लुंड अभी भी खड़ा था जब लुंड छूट में से बहार निकला तो उसके साथ अमरावती की छूट भी बहार को खींचती हुई चली आई जिससे अमरावती को दर्द हुआ और उसकी फिर से चीख निकल गई,
देव ने उसकी गांड को शलया, अमरावती ने बस सर घुमा क्र देव को देखा उसका लुंड छूट के रास में भीगा हुआ अब तक खड़ा था अमरावती को हैरत हुई, लेकिन बोलने की हिम्मत नहीं थी, देव उसके बराबर में hi लेट गया,
अमरावती ने एक बरतें निचे गिराया जिससे उसकी दासी डोडी हुई अंदर आई और दोनों की हालत देख क्र शर्मा गई लेकिन जब उसकी नजर देव के खड़े लुंड पैर गई तो वो घबरा गई,
देव- क्या डुबारकरने की हिम्मत ह आप्मने अमरावती
अमरावती- नहीं दुबारा किया तो मैं मर जाउंगी, मुझे ठीक होने में हफ्तों लग जायेंगे,
भवर सिंह और राजगुरु दोनों महल के एक तहखाने में थे जहा बहुत सी किताबे और बहुत सा इतहास लिखा रखा था, भवर सिंह ने सुबह होने का इंतजार भी नहीं किया था, वो खुद राजगुरु के साथ लग गया था,
राजगुरु- महाराज आप आराम कीजिये मैं खोजता हु उसके बारे में अधिक जानकारी,
भवर सिंह- नहीं राजगुरु अब मुझसे सबर नहीं हो रहा, मैं खुद उसके बारे में जानना चाहता हु, हमारे दादा जी को इतहास में बहुत रूचि थी, वो हमेशा बोलते थे की हमारा इतिहास हमारा अतीत ह और अतीत से hi भविष्य की चाबी मिलती ह, इसलिए वो हमेशा अलग अलग राज्यों का इतिहास भी लिखवाया करते थे, उन्होंने उस समय का इतहास भी लिखवाया था जब युगो का परिवर्तन हो रहा था,
राजगुरु- मैं जनता हु महाराज मेरे पिता जी hi उनके सहायक रहे थे, उसी इतहास की कुछ किताबे मेरे पास थी जहा से मुझे ये जानकारी मिली थी, हो न हो उसके बारे में और भी अधिक लिखा गया होगा,
भवर सिंह- लेकिन मेरे दादा जी ऐसे नहीं थे जो किसी से दर कर उसका इतहास hi न लिखे,
राजगुरु- इसीलिए बोल रहा हु वो ताकत सब कुछ बर्बाद कर सकती ह क्योकि जिससे आपके दादा जी घबरा गए तो सोचिये वो कैसी ताकत होगी,
भवर सिंह- वो चाहे जो भी हो लेकिन मुझे वो चाहिए, किसी भी कीमत पैर,
राजगुरु और भवर सिंह राजा भैरव के बारे में खोज रहे थे, वही देव अपने शरीर पैर बस एक कपडा पहन क्र अपने कमरे से निकल क्र बहार चल दिया अमरावती के कमरे की तरफ, वो कमरे के बहार पंहुचा तो वह बस एक दासी कड़ी थी, कोई पहरेदार नहीं था,
देव समझ गया ये अमरावती ने जानबूझ क्र किया ह,
देव के वह पहुंचते hi दासी ने उसके सामने सर झुकाया और जाने का रास्ता दे दिया, देव कमरे के अंदर चला गया, कमरे में से बहुत hi भेतरीन खुशबु आ रही थी, पूरा कमरा महक रहा था, चारो तरफ फूल hi फूल थे, देव आज पहेली बार अमरावती के कमरे में आया था, उसे नहीं पता था की ये सिर्फ आज के लिए ह या हमेशा hi ऐसा रहता ह, चारो तरफ दिए जल रहे थे, पूरा कमरा रौशनी में जगमगा रहा था, देव ने चारो तरफ देखा लेकिन अमरावती नजर नहीं आ रही थी,
देव चलता हुआ बिस्टेर के पास पहुंच गया, वो आवाज लगाने hi वाला था की उसे हलकी आहात की आवाज हुई, देव ने पलटना चाहा टी अमरावती की आवाज आई- रुको पलटना नहीं, देव रुक गया,
अमरावती- मैं सिर्फ हमारी दोस्ती के लिए ऐसा कर रही हु, क्योकि दोस्त hi सबसे खास होते हैं, तुम ये बात किसी को बताओगे तो नहीं,
देव- दोस्तों के राज नहीं खोले जाते, क्या मैं पालतू,
अमरावती ने बस हम्म्म्म कहा, देव ने धीरे से पलट क्र देखा तो सामने अमरावती कड़ी थी एक कला झीना सा कपडा ओढ़े हुए, जिसमे से उसका खूबसूरत शरीर दिख रहा था, उसकी बड़ी बड़ी चूचिया उस कपडे में से बहार आने को तैयार थी, अमरावती की भरी जंघे पैर कपडा चिपका हुआ था, देव एक तक उसे देखे जा रहा था देव का लुंड पहले hi खड़ा था लेकिन अब तो वो उफान पैर था,

अमरावती- ऐसे क्यों देख रहे हो,
देव- आप बहुत खूबसूरत हैं,
अमरावती- मुझे शर्म आ रही ह,
देव- दोस्तों में कैसी शर्म
अमरावती ने देव को देखा और बड़ी ऐडा से घूम गई, जिससे अमरावती की भरी और उभरी हुई गांड देव के सामने आ गई थी, देव चलता हुआ अमरावती के पास पंहुचा और उसके कंधे पैर हाथ रख दिया, अमरावती ने तुरंत अपना शरीर देव से सत्ता दिया,
देव- बस इतना hi दिखाओगी,
अमरावती- इससे ज्यादा मुझमे हिम्मत नहीं ह,
देव ने नीरस होकर सर झुका लिया,
अमरावती- मैंने कहा मुझमे हिम्मत नहीं ह, तुम चाहे तो देख सकते हो,
देव ने थोड़ा सा चौंकते हुए अमरावती को देखा फिर उसका मतलब समझ क्र मुस्कुरा दिया, और उसने अमरावती का कपडा पकड़ा और हलके से खींचना शुरू क्र दिया, अमरावती ने कपडा ढीला छोड़ दिया था जो उसके शरीर से फिसलता हुआ निचे जा गिरा, और कपडे के गिरते hi अमरावती का खूबसूरत शरीर देव के सामने था, अमरावती की भरी चूचिया एक दम गोल आकर लिए थी, देव अमरावती के चारो तरफ घूमने लगा, अमरावती शर्मा क्र सर निचे किये कड़ी थी,

देव अमरावती के सामने आया और उसके चेरे को उप्पेर उठाया,
देव- इतना खूबसूरत शरीर ह आपका पूरी दुनिया आपके सामने झुक सकती ह,
अमरावती- तुम्हे पसंद आया
देव- बहुत
इतना बोलते hi अमरावती देव से लिपट गई, और उसकी भरी चूचिया देव की छाती में डाब गई, अमरावती ऐसा व्यव्हार कर रही थी जैसे सच में वो देव के प्रेम में पागल हो गई हो, एक नौजवान लड़की जब पहेली बार अपने प्रेमी के सामने ये सब करती ह तो वो जितनी उत्साहित होती ह वैसा hi अमरावती कर रही थी, देव भी कोई कसार नहीं छोड़ रहा था, दोनों के मन में कुछ और hi था लेकिन दिखावा और नाटक बहुत hi भेतरीन कर रहे थे,
देव- आपने मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल दे दिया मुझे आज,
अमरावती- क्या मैं अब कपडे पहन लू
देव- मेरा मन नहीं भरा
अमरावती- तो तुमने क्यों पहने हुए हैं,
देव ने तुरंत अमरावती को अलग किया और जो कपडा उसने पहना हुआ था तुरंत उतर क्र अलग क्र दिया, देव का खड़ा लुंड एक दम मीनार की तरह सामने आ गया, जिसे देख अमरावती की सांसे फूलने लगी,

देव- अब ठीक ह,
अमरावती- अब ये मेरे लिए मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल ह,
देव- कुछ hi समय में हमारी दोस्ती कितनी खास हो गई ह, ये हमने पहले क्यों नहीं सोचा,
अमरावती- पहले हम गलत सोच के साथ चल रहे थे न,
देव- अब हमारी दोस्ती मिशाल बनेगी,
अमरावती देव के करीब आई और उसके गले लग गई, उसके मुँह से एक आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह निकल गई, नंगे शरीर आपस में रगड़े और देव का खड़ा नानग लुंड अमरावती की जांघो के बिच में रगड़ गया,
देव- ये ज्यादा तो न हो जाये,
अमरावती- होने दो ज्यादा, अब हमारे बिच कुछ पर्दा नहीं ह, अब मैं इस पल को जी भर क्र जीना चाहती हु,
देव ने भी अपनी बहे अमरावती की कमर में दाल दी और उसे कास क्र खुद से चिपका लिया, अमरावती की बड़ी बड़ी चूचिया देव की छाती में डाब गई जिससे उसके उभर और उप्पेर को उठ गए, और देव का लुंड अमरावती की जांघो में ाड़ने लगा, तो अमरावती ने हलकी सी जांघ खोल दी जिससे देव का लुंड अमरावती की जांघो के बिच में घुस गया, अमरावती की लम्बाई देव से काम नहीं थी वो इस महल में सबसे लम्बी थी, कुछ अमरावती हलकी सी अपने पंजो पैर आ गाइट hi,
लुंड की रगड़ जब अमरावती की छूट पैर हुई तो उसकी आँखे बंद हो गई, देव के हाथ तुरंत अमरावती की गांड पैर चले गए, और उसने कास क्र उसकी गांड को पकड़ लिया, अब अमरावती का वजन देव के हाथो और शरीर पैर था, अमरावती को ऐसा लग रहा था जैसे वो देव के लुंड पैर बैठी हुई ह, अमरावती ने देव को देखा,
देव- ये गलत तो नहीं हो रहा न महारानी,
अमरावती- जो हो रहा ह होने दो, आज मत रोको, मैं बहुत प्यासी हु मेरे दोस्त अपनी इस दोस्त की प्यास बुझा दो,
इतना बोल क्र अमरावती ने देव के होतो पैर अपने हॉट रख दिए, देव सब कुछ अमरावती से hi करवा रहा था, बस देव उसका साथ दे रहा था,
देव ने भी तुरंत उसके होतो को चूमना शुरू क्र दिया, दोनों एक दूसरे के होतो को चबाये जार हे थे, देव ने अमरावती की गांड को कास क्र पकड़ा और हवा में उठा लिया अमरावती ने भी तुरंत अपनी पेअर देव की कमर पैर लप्पेट दिए और उसकी गॉड में आ गई, देव का खड़ा लुंड मीचे से अमरावती की छूट और गांड पैर रगड़ रहा था, उप्पेर अमरावती की चूचिया देव की छाती में रगड़ रही थी, और दोनों के हॉट एक दूसरे का रास पान कर रहे थे,
दोनों पागलो की तरह एक दूसरे को चुम रहे थे, कुछ देर बाद देव ने अमरावती को बिस्टेर पैर लिटाया और उसके उप्पेर आ गया,
देव- क्या इरादा ह,
अमरावती- मैंने अपने इरादे बता दिए हैं, अब तुम बताओ क्या इरादा ह,
देव- बहुत तकलीफ होगी,
अमरावती- मुझे वो तकलीफ चाहिए, मैंने पूरी जवानी उस तकलीफ का इंतजार किया ह लेकिन कोई मुझे वो तकलीफ नहीं दे पाया,
देव- कोई मतलब
अमरावती के मुँह से जोश जोश में कुछ ज्यादा hi निकल गया था उसने तुरंत बात को सम्हाला,
अमरावती- महाराज और कोण,
देव- आपकी चीखे बहार कोई सुन न ले,
अमरावती- उसकी चिंता तुम मत करो, इस कमरे से बहार कोई आवाज नहीं जाती, और बहार मेरी खास दासी कड़ी ह, वो सब सम्हाल लेगी
देव- मतलब आपने पूरी तैयारी की हुई ह,
अमरावती- अब और मत तड़पो मुझे, मैं इस खूबसूरत प्यारे से लिंग को अपने अंदर महसूस करना चाहती हु,
देव- मैं आपको वो सुख दूंगा इसके बाद आपको किसी सुख की जरुरत hi नहीं होगी,
देव ने अमरावती के होतो पैर फिर से अपने हॉट रख दिए और एक हाथ उसकी चूचियों पैर ले गया और मसलने लगा, निचे से देव का खड़ा लुंड अमरावती की छूट पैर रगड़ रहा था, अमरावती अपनी छूट को निचे से उछलने लगी और देव के खड़े लुंड पैर रगड़ने लगी, और देव के होतो को चूसने लगी,
कुछ देर हॉट चूसने के बाद देव ने अमरावती की गरदन चुनी शुरू क्र दी, और फिर निचे आने लगा और अपने हॉट अमरावती की चूचियों पैर रख दिए, अमरावती के चूचक बफी बड़े थे, देव ने एक चुकी को मुँह में भर लिया और दूसरी को अपने हाथ से मसलने लगा,

जब देव अमरावती की चूचियों को चूस रहा था तो उसके दिमाग में निहारिका की चूचिया आ गई, वैसे तो अमरावती की चूचिया बहुत बड़ी थी लेकिन जो आकर और कड़क पैन निहारिका की चूचियों का था वो बात अमरावती की चूचियों में नहीं थी,
देव को चूचिया चूसने का बहुत अनुभव था, बचपन से आज तक उसने सबसे ज्यादा चूचिया hi तो चूसी थी, लेकिन अमरावती ने शायद बहुत समय से अपनी चूचिया नहीं चूसै थी, और देव की चुकी चूसने की कला से अमरावती कामुकता में भर्ती जार hi थी, वो अपनी उंगलिया देव के सर पैर घुमा रही थी और अपना एक हाथ अपनी जांघो के बिच रगड़ रही थी जिससे देव का खड़ा लुंड अमरावती के हाथ पैर रगड़ रहा था, अमरावती ने देव का लुंड पकड़ लिया,
लुंड हाथ में आते hi अमरावती का शरीर कैंप उठा, इतना बड़ा और मोटा लुंड जिसके साडी नसे उसकी उंगलियों को महसूस हो रही थी, अमरावती ने लुंड को मुट्ठी में पकड़ा और अपनी छूट पैर रगड़ने लगी और दबाने लगी,

लेकिन देव का इरादा अभी ऐसा करने का नहीं था, देव थोड़ा उप्पेर हो गया, अमरावती ने चौंकते हुए देव को देखा,
देव मुस्कुराया- आज आप जीवन का असली सुख का अनुभव करेंगी अमरावती जी,
देव ने अमरावती को नाम से बुलाया तो उसका शरीर में और जोश भर गया, देव उसकी चूचियों को चुस्त हुआ उसके सपाट पेट पैर पंहुचा और फिर उसकी छूट के उप्पेर आ गया जो बिलकुल चिकनी थी, ऐसा लग रहा था जैसे अमरावती ने आज hi वह की सफाई की ह, वैसे भी अमरावै की दासी रोज उसकी छूट को साफ़ करती थी, देव ने छूट के उप्पेर के हिस्से को अपनी उंगलियों से शलया जिससे अमरावती का पेट में कपकपाहट होने लगी,
देव ने अपने हॉट अमरावती की जांघो पैर रख दिए, जांघो पैर हॉट लगते hi अमरावती एक दम उठ क्र बैठ गई लेकिन देव ने उसे पीछे धकेल दिया, अमरावती अपना सर बिस्टेर पैर इधर उधर करने लगी, देव जांघो को चूमता हुआ अमरावती की जंघे फ़ैलाने लगा जो अमरावती ने खुद पैर काबू करने के लिए आपस में भींच राखी थी, देव ने अपनी उंगलिया अमरावती की जांघो पैर फिरै और उप्पेर उसकी जांघो के बिच घुसता चला गया, अमरावती की जंघे खुलती चली और अमरावती को वो चिकनी छूट देव की आँखों के सामने आ गई थी,
अमरावती सर उठा क्र देव को देख रही थी की वो क्या करने वाला ह, देव ने अमरावती की आँखों में झाँका और अपना मुँह उसकी छूट पैर लगा दिया, अमरावती के मुँह से अह्ह्ह्हह्हह निकल गई और वो बिस्टेर पैर लुढ़क गई, उसके हाथ खुद देव के सर पैर चले गए, देव ने भी अमरावती की छूट के होतो को अपने होतो से अच्छे से चूमा और फिर अपनी जीभ निकल क्र छूट को चाट लिया, अमरावती अपनी कमर हिलने लगी, छूट पहले से hi पूरी तरह गीली हुई पड़ी थी, वो तो देव के लुंड की सिर्फ रगड़ से hi झड़ने की कगार पैर पहुंच गई थी,

अमरावती- ahhhhhhhhhhh देव क्या कर रहे हो, तुम मुझे पागल कर दे रहे हो, uuuffffffffffffffffff बहुत मजा आ रहा ा, बहुत सालो से किसी मर्द ने मेरी छूट को नहीं चूसा ह,
देव बिना कुछ बोले बस अमरावती की छूट को चूस रहा था अपनी जीभ को उसकी छूट की घेरे तक दाल रहा था, अमरावती पहले से पागल हुई पड़ी थी वो देव का हुम्ला बर्दास्त नहीं कर पाई, उसके हाथ देव के सर पैर चले गए और उसने देव के सर को अपनी छूट पैर दबा लिया और निचे से अपनी छूट को उछलने लगिए ुर देव के मुँह पैर छूट को रगड़ क्र झड़ने लगी,
अमरावती- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह देव खा जाओ मेरी छूट निचोड़ दो इसे, ahhhhhhhhhhhhh बहुत मजा आ रहा ह, तुम कमल के हो देव, बहुत सालो बाद किसी मर्द ने चूसा ह ahhhhhhhhhhh
अमरावती की सिसकारियां बहदति जा रही थी, कुछ देर में वो झाड़ क्र शांत हो गई तो देव उठा और अमरावती छूट में भीगे अपने हॉट सीधे अमरावती के होतो से जोड़ दिए, अमरावती भी पगली की तरह उसके होतो को चूसने लगी और उन पैर लगा अपनी छूट का नमकीन पानी का सवाद लेने लगी,
देव अमरावती के पैरो के बिच में था उसने अपना लुंड अमरावती की छूट पैर लगाया और धकेलने hi वाला था लेकिन अमरावती ने उसे रोक दिया,
अमरावती- रुक जाओ, तुमने मुझे बहुत मजा दिया ह मैं तुम्हे भी वो मजा देना चाहती हु,
अमरावती ने देव को बिस्टेर पैर लिटाया और देव का लुंड सीधा खड़ा हो गया था, अमरावती देव के उप्पेर आ गई और अपने हाथो में देव के लुंड को पकड़ क्र उससे खेलने लगी, देव का लुंड अमरावती के दोनों हाथो में था, वो उसकी लम्बाई अउ रमते का अनुमान लगा रही थी, फिर अमरावती ने देव की आँखों में देखते हुए लुंड के टोपे पैर अपनी जीभ फिरै, देव ने मुस्कुराते हुए आँखे बंद क्र ली, अमरावती को अहसास हो रहा था की वो देव पैर काबू पति जा रही ह,

अमरावती ने अपना मुँह खोला और लुंड को अपने मुँह में भरने की कोशिश की लेकिन लुंड इतना मोटा था की अमरावती के गाल चीरने लगे,

अमरावती कुछ देर लुंड को ऐसे hi मुँह में लेकर बैठी रही, जब उसका मुँह दुखने लगा तो उसने लुंड को बहार निकला और चाटने लगी, वो लुंड को उप्पेर से निचे तक चाट रही थी,

फिर उसने देव के ांडो को अपने मुँह में भर लिया और एक एक ाँद को रसगुल्ले की तरह चूस रही थी,

काफी देर लुंड को चूसने के बाद जब उसका मुँह दुखने लगा तो उसने लुंड को अपनी चूचियों बिच रखा और अपनी चूचियों से लुंड को रगड़ने लगी ,

देव को बहुत मजा आ रहा था, ये वही अमरावती थी जिसने देव और उसकी माँ निहारिका को हमेषा जलील किया था, आज वो उसके लुंड के साथ खेल रही थी,
अमरावती को काफी देर हो चुकी थी लुंड के साथ खेलते हुए लेकिन देव का लुंड ऐसे hi खड़ा था, अमरावती को उम्मीद थी की वो देव को अपनी अदाओ से hi झाड़ देगी लेकिन लुंड और भी खूंखार होता जार है था, अब अमरावती ने हर मान लिट् hi, उसने एक तेल की शीशी उठाई और उसमे से बहुत सात ेल लुंड पैर डाला और मालिश करने लगी,
देव- ये कैसा तेल ह
अमरावती- इससे तुम्हारा लुंड और मजबूत हो जायेगा,
देव- क्या आपको लगता ह इससे ज्यादा मजबूत लुंड होना चाहिए,
अमरावती- इससे ज्यादा मजबूत कुछ नहीं हो सकता ह, ये एक अजूबा ह, असल में मैं इसे चिकना कर रही हु ताकि मैं इसे अपनी छूट में झेल सकू,
अमरावती ने बहुत सा तेल अपनी छूट पैर भी डाला और देव के बराबर में लेट गई,
अमरावती- अब आ जाओ मेरे उप्पेर और चढ़ जाओ मुझपे, अब बर्दास्त नहीं हो रहा ये घोड़े जैसा लुंड मेरी छूट में घुसा दो,
देव उसके पैरो के बिच में आ गया और पहले अपनी उंगली छूट में दाल क्र थोड़ी अंदर बहार की ताकि छूट पूरी तरह चिकनी हो जाये, फिर उसने अपना लुंड छूट पैर रकह और रगड़ने लगा,

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अमरावती- मत तड़पाओ अब घुसा दो अपना लोढ़ा मेरी छूट में, फाड़ दो इस छूट को,
देव ने लुंड का दबाव बनाया और लुंड का टोपा छूट में घुस गया, लुंड के घुसते hi अमरावती की आँखे फैट गई, उसने अपना मुँह तकिये के निचे दबा लिया, देव ने रुक्न ेकी कोशिश नहीं की वो दबाव बनता hi रहा और तेल की चिकनाहट की वजह से काफी लुंड छूट में घुसता चला गया, अमरावती काफी चूड़ी हुई औरत थी, और उसने अपनी छूट से दो दो बच्चे निकल रखे थे, छूट काफी खुली हुई थी लेकिन देव का लुंड फटी हुई छूट को फाड़ने की भी ताकत रखता था,
अमरावती के मुँह से अह्ह्ह अह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह बस बस बस रुक जाओ रुक जाओ निकलने लगा, देव एक पल के लिए रुका,
देव- क्या हुआ
अमरावती- बहुत मोटा ह, इतना मोटा लुंड झेलना आसान नहीं ह, मेरी फैट रही ह,
देव- बहार निकलू क्या
अमरावती- नहीं नहीं बहार मत निकलना, वर्ण दुबारा नहीं डलवा पाऊँगी, कुछ पल रुको फिर धीरे धीरे डालना,
देव कुछ पल रुका उसने अमरावती की चूचियों के साथ खेलना शुरू क्र दिया, जैसे hi अमरावती की हालत ठीक सी लगी देव ने फिर से लुंड का दबाव बना दिया, न न करते हुए भी देव का आधे से ज्यादा लुंड अमरावती की छूट में घुस गया था, आज तक यहाँ तक अमरावती की छूट में किसी का पूरा लुंड भी नहीं गया था जहा तक देव का आधे से कुछ ज्यादा लुंड घुस गया था, अमरावती के मुँह से दर्द बहरी चिक निकल गाइट hi, जो बहार कड़ी दासी ने भी सुनी थी, दासी को भी हैरत हुई की अमरावती की चीख निकल सके ऐसा भी कोई ह क्या दुनिया में,
देव ने हलकी हलकी कमर हिलाई जिसे अमरावती दर्द से बिलबिला ुति थी, वो अपना सर इधर ुधा रपातक रही थी, देव बिना परवाह किये कमर हिलता रहा, और जिसका परिणाम ये हुआ की अमरावती की छूट ने हल्का हल्का पानी छोड़ना शुरू क्र दिया जिससे लुंड को आसानी होने लगी, कुछ देर में अमरावती का दर्द कुछ काम हुआ, उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे, छूट लुंड पैर फांसी हुई थी,
तभी देव ने हल्का सा लुंड बहार खींचा और फिर से घुसा दिया अमरावती का मुँह खुला रह गया, ahhhhhhhhhhhhhhhhh माँ मर गई फैट गई मेरी छूट ahhhhhhhhhhhhhhhhh
ये आवाज जब दासी के कानो में गई तो वो दौड़ क्र अंदर आई, और जब उसने देखा की देव का मुसल जैसा लुंड अमरावती की छूट में फसा हुआ ह, उसकी आँखे फटी रह गई,
वो कंपकंपाती हुई आवाज में बोली- महारानी जरा धीरे आपकी आवाज बहार आ रही ह,
दासी की आवाज से देव और अमरावती दोनों चौंक गए,
अमरावती- क्या करू इसका लुंड मेरी छूट फाड़ता hi जार है ह,
देव- महारानी आपकी आवाज किसी ने सुन ली तो अनर्थ हो जायेगा,
अमरावती- मैं खुद पैर काबू पाने की कोशिश करती हु, तू जा और नजर रख,
दासी बहार चली गई,
अमरावती- इतना दर्द तो फेल बार भी नहीं हुआ था, अगर तुम किसी कुँअरि लड़की किछूट छोड़ोगे तो कसम से उसे मर hi डोज,
देव- कोई तो ऐसी बानी होगी जो इस लुंड को आराम से अपनी छूट में ले लेगी,
देव ने अपनी कमर चली शुरू क्र दी और अमरावती लूँ ढकी मर झेल नहीं पाई और झड़ने लगी, झड़ने का ये फायदा हुआ की छूट और चिकनी हो गई और लुंड को आसानी हो गई और लुंड और अंदर घुस गया, अमरावती झड़ते हुए अपनी छूट उछाल रही थी और देव भी ढके लगा रहा था,
अमरावती झाड़ का शांत हुई लेकिन देव नहीं रुका वो लगातार छोड़ता रहा, अमरावती जीवन में पहेली बार झड़ने के बाद भी चुद रही थी, अमरावती ने देव को अपने उप्पेर लिटा लिया और देव धक्के लगाने लगा, कुछ hi देर में अमरावती फिर से झड़ने लगी, लेकिन देव अभी भी नहीं झाड़ रहा था, अमरावती को बड़ी हैरत हुई, लेकिन जो मजा उसे आ रहा था उसके लिए जीवन का असली सुख वही था, वो न जाने किस किस से चूड़ी थी लेकिन देव जस्या मर्द उसे पहेली बार मिला था,
अमरावती- मेरा दो बार हो गया ह तुम भी कर लो न
देव- मेरा इतनी जल्दी नहीं होता महारानी,
देव ने अमरावती को घोड़ी बना दिया और उसकी बड़ी सी गांड देव के सामने आ गई, देव का मन तो किया इसकी गांड में अपना ये मुसल घुसा दे लेकिन जल्दबाजी ठीक नहीं थी, उसने छूट में लुंड घुसाया और अमरावती के बाल पकड़ क्र उसकी सवारी करने लगा,

अमरावती की हालत ख़राब हो चुकी थी, वो अब चौथी बार झाड़ रही थी, अब लुंड और अंदर तक जार है था जिसे वो आराम से झेल रही थी,
अमरावती- ahhhhhhhhhh देव तुमने तो मुझे अपनी घोड़ी बना लिया अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह करो अपनी घोड़ी की सवारी, कैसी ह तुम्हारी घोड़ी, तुम्हे पसंद आई
देव- बहुत गदराई हुई घोड़ी ह
अमरावती- तुमने मेरा जीवन सफल क्र दिया, ऐसा सुख जीवन में कभी नहीं मिला था, तू लाजवाब हो aahhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhh मैं तो तुम्हारी गुलाम हो गई, काश तुम मुझे पहले मिले होते, ahhhhhhhhhhhh काश तुम मेरे बेटे होते मैं तो दिन रात तुमसे hi चुदती,
अमरावती की ये बात देव के दिमाग में तकर मार गई, मैं बीटा होता तो मुझसे चुदती, क्या कोई बीटा अपनी माँ को छोड़ सकता ह, और नजाने क्यों देव की आँखों के समाने निहारिका आ गई नंगी देव की आँखे बंद हो चुकी थी और बंद आँखों में उसे निहारिका दिख रही थी, और उसका जोश इतना बेहद गया की उसने पूरा रफ़्तार से अमरावती को छोड़ना शुरू क्र दिया, अमरावती मुँह के बल बिस्टेर पैर गिर गई लेकिन देव रुका नहीं वो पूरी ताकत से अमरावती को छोड़ रहा था, अमरावती ने अपना यह बिस्टेर में दबा लिया था उसकी चीखे बिस्टेर में डाब गाइट hi, और देव ने पुरे जोश में एक हुंकार भरी और अपना पूरा लावा अमरावती की छूट में बाहरणा शुरू क्र दिया, अमरावती में इतनी ताकत hi नहीं बची थी की वो देव को रोक सके, और देव इस जोश में था की उसे अहसास hi नहीं हुआ की उसने लावा कहा निकल दिया ह,

लुंड का वीर्य निकलते hi देव अमरावती के उप्पेर hi लेट गया और लुंड और अंदर तक घुस गया, अमरावती की साँस hi रुक गई थी, वो बेसुध सी बिस्टेर पैर उलटी पड़ी थी, और देव उसके उप्पेर लेता था लुंड छूट में घुसाए हुए, काफी देर तक दोनों शांत लेते रहे, दोनों की सांसो की आवाज कमरे आ रही थी,
कुछ देर बाद जब देव शांत हुआ तो उसे अहसास हुआ की वो क्या सोच रहा था, उसे खुद पैर बहुत गुस्सा आया, उसने आँखे खोली और अमरावती के उप्पेर उठा, उसका लुंड अभी भी खड़ा था जब लुंड छूट में से बहार निकला तो उसके साथ अमरावती की छूट भी बहार को खींचती हुई चली आई जिससे अमरावती को दर्द हुआ और उसकी फिर से चीख निकल गई,
देव ने उसकी गांड को शलया, अमरावती ने बस सर घुमा क्र देव को देखा उसका लुंड छूट के रास में भीगा हुआ अब तक खड़ा था अमरावती को हैरत हुई, लेकिन बोलने की हिम्मत नहीं थी, देव उसके बराबर में hi लेट गया,
अमरावती ने एक बरतें निचे गिराया जिससे उसकी दासी डोडी हुई अंदर आई और दोनों की हालत देख क्र शर्मा गई लेकिन जब उसकी नजर देव के खड़े लुंड पैर गई तो वो घबरा गई,
देव- क्या डुबारकरने की हिम्मत ह आप्मने अमरावती
अमरावती- नहीं दुबारा किया तो मैं मर जाउंगी, मुझे ठीक होने में हफ्तों लग जायेंगे,




